Tuesday, January 12, 2016

FUN-MAZA-MASTI ठरकी की लाइफ में ..44

FUN-MAZA-MASTI

 ठरकी की लाइफ में ..44

उसने जल्दी से अपनी पेंट उपर खींची और दरवाजा खोल दिया....और बाहर खड़ी रिया और पूजा को वहां से भागने का मौका भी नही मिल सका...तीनो की नज़रे मिली और सभी के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गयी..

पूजा : "जीजू....आप मॉम को समझाओ...हम दीदी को रोक कर रखते है...''

इतना कहकर वो दोनो अंदर घुस गयी और अजय बाहर आ गया....जहाँ किचन मे उसकी सास खड़ी होकर सभी के लिए नाश्ता बना रही थी..

आज उसकी इम्तेहान की घड़ी थी...पूजा और रिया को समझाकर उसने आधी परीक्षा तो पास कर ली थी...अब अपनी सास को भी समझाकर उसे अव्वल आना था...

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अब आगे
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रोज सुबह की तरह आज भी उसके ससुर अपने दोस्तो के साथ पार्क में बैठकर ताश खेल रहे थे...इसलिए अपनी सास को 'खुल' कर समझाने का इससे अच्छा मौका नही मिल सकता था अजय को.

रजनी की पीठ थी अजय की तरफ लेकिन उसके आने का आभास हो चुका था उसे...इस घड़ी का कैसे सामना करे,उनकी भी समझ मे नही आ रहा था...लेकिन अपने और अजय के उपर उसे बेइंतहा गुस्सा आ रहा था...जिसके परिणामस्वरूप वो सही से नाश्ता भी नही बना पा रही थी..

जब से वो वापिस आई थी उसके मन में बस यही चल रहा था की वो वहां गयी ही क्यो...ना वो वहां
जाती और ना ही उसे अपनी बेटी और भांजी के सामने शर्मिंदा होना पड़ता...




लेकिन फिर कुछ और विचार भी आ जाते की अगर वो वहां जाती ही नही तो उसे ये कैसे पता चलता की अजय और उसकी बेटी पूजा के बीच भी नाजायज़ संबंध चल रहे है...और क्या पता रिया की भी मार ली हो अजय ने...आख़िर है तो ठरकी ही ना...

अजय धीरे-2 चलकर उसके पीछे आकर खड़ा हो गया...रजनी ने साडी पहनी हुई थी और उसके ब्लाउस का गला पीछे से काफ़ी गहरा था, जिसकी वजह से उसकी मांसल पीठ का काफ़ी बड़ा हिस्सा नंगा था, जिसपर हल्की-2 पसीने की बूंदे चमक रही थी...अजय का मन तो हुआ की अपनी जीभ से उसके शरीर का नमक चाट ले...लेकिन अभी के लिए तो उसे अपनी सासू माँ को मनाना था पहले..

उसने हिम्मत करते हुए अपनी बाहों का घेरा उसके पेट पर डाल कर अपना सिर उनके कंधे पर रख दिया..

रजनी एकदम से काँप सी गयी...और छिटककर दूर होने लगी पर अजय ने उसे कस कर पकड़े रखा, क्योंकि छोड़ने के बाद वो सही से समझा नहीं सकता था ...

अजय : "बस....बस.....शांत हो जाओ....कोई नही आएगा....पूजा और रिया प्राची के पास है, वो उसे संभाल लेंगी....कोई भी यहाँ नही आएगा...''

इतना कहकर अजय ने अपनी सास को अपनी तरफ खींचा और अच्छी तरह से उनसे सट कर खड़ा हो गया..

और फिर उसने बोलना शुरू किया : "मुझे पता है की आप मुझसे नाराज़ है....मुझसे ही नही पूजा से भी....लेकिन इन सभी में किसी की भी कोई ग़लती नही है...ये सब अपने आप होता चला गया....आपसे भी तो अपने आप पर सब्र नही हुआ...हम तो फिर भी जवान लोग है....जब आपके अंदर इतनी आग है तो उसके बारे में सोचो....वो भी तो आपकी ही बेटी है...''

कहकर उसने अपने हाथ उपर करके रजनी के मुम्मे पकड़ने चाहे पर उसने अजय के हाथ को पकड़कर झटक दिया और गुस्से मे फुफ्कारी : "तुम्हारे लिए तो ये सब कहना और करना काफ़ी आसान है, पर मेरे नज़रिए से भी सोचो...मैं उसकी माँ हूँ ...और अपनी बेटी से मैं अब पूरी जिंदगी नज़रें नही मिला सकूँगी...एक बेटी के सुहाग पर डाका मारकर मैं दूसरी बेटी के सामने रंगे हाथो पकड़ी गयी हूँ ...ये ज़िल्लत मुझे चैन से जीने नही देगी...मैं कभी भी पूजा से नज़रें नही मिला सकूँगी...''

अजय ने भी उसे बोलने से नही रोका, वो यही चाहता था की एक बार उनके अंदर का गुबार निकल जाएगा तभी वो उसकी बात समझ सकेंगी..
 
वो आगे बोली : "तुमने मेरे साथ जो किया सो किया, पूजा के साथ वो सब करने की क्या ज़रूरत थी...वो तो अभी कुँवारी है...प्राची की हालत तो ऐसी है की उसे इस बात की भनक भी लग गयी तो उसका क्या हाल होगा, ये तुम भी अच्छी तरह समझते हो...वो प्रेगञेन्ट ना होती तो मैं तुम्हारा सारा भंडा आज ही फोड़ डालती...''

वो अजय को धमकी दे रही थी...लेकिन अजय के पास भी इस धमकी का जवाब था..

वो बोला : "ये सब तो मैने आपसे ही सीखा है मेरी प्यारी सासू माँ ..आप भी तो अपने जीजे के साथ ये सब कर चुकी है....अब वही काम अगर पूजा ने मेरे साथ कर लिया तो आपको क्यो बुरा लग रहा है...''

अपने जीजाजी के साथ समंध वाली बात का खुलासा होते देखकर वो चोंक गयी...और पलटकर अजय की तरफ हैरानी से देखने लगी

अजय : "जी हाँ ...मुझे सब पता है....ये भी पता है की मौसा जी ने कैसे अपनी बीबी को नशे की गोली खिलाकर सुला दिया था और आपने उनके साथ पूरी रात कैसे रंगीन की थी...और ये काम आज से नही, ना जाने कब से चल रहा है...''

रजनी तो सकपका कर रह गयी जब अजय ने सबूत के तौर पर वो नशे वाली शीशी निकाल कर उनकी आँखो के सामने लहरा दी...बेचारी की बोलती ही बंद हो गयी.

अजय : "ये है आपकी असलियत , इसलिए मुझे इस तरह की धमकी देने की कोशिश आगे से कभी नही करना...और रही बात पूजा की तो हम ऐसा कोई काम ही नहीं करेंगे जिससे प्राची या किसी को भी हमारे रीलेशन के बारे में पता चले...ये काम तो वो बाहर रहकर भी कर सकती थी...सोचिए ज़रा, अगर उसका कोई बाय्फ्रेंड होता,जो उसे भगाकर ले जाता और उसकी चुदाई करके छोड़ देता तो क्या करती आप...या फिर उसे बाहर किसी लड़के से प्यार हो जाए और वो रोज उससे चुदवा कर घर आए, आपको तो कुछ पता ही नही चलेगा ना...ये भी ना चलता, अगर आप बिना बताए घर ना आई होती...लेकिन अब इस बात को हम सभी को संभालना होगा...पूजा को मैने समझा दिया है...आपसे ना तो वो नाराज़ है और ना ही किसी तरह की नफ़रत करती है...वो और रिया आज के बाद ऐसे बिहेव करेंगी जैसे कुछ हुआ ही ना हो..''

रजनी को जैसे विश्वास ही नही हो रहा था की अजय जो कह रहा है वो सच है या नही...

अजय ने उसकी मांसल कमर पर दबाव डालते हुए उसे अपनी तरफ खींच लिया और तब रजनी को ये एहसास हुआ की अजय का लंड इस वक़्त पूरी तरह से खड़ा हुआ है और वो उसकी चूत के उपर बुरी तरह से चुभ रहा था...

कोई और मौका होता तो वो उसके लंड को निचोड़ ही डालती...पर ऐसी सिचुएशन में भी अजय को ये सब सूझ रहा है, ऐसा ठरकीपन उसने आज तक किसी में नही देखा था.

पर ना चाहते हुए उसके अंदर भी कुछ -2 होने लगा...अभी कुछ देर पहले तक जिस अजय को वो जी भरकर कोस रही थी,अब उसी की बाहों मे कसमसा रही थी वो...शायद अजय के कहने का उसपर असर हो चुका था...वो भी तो यही चाहती थी की अपनी बेटी के सामने शर्मिंदगी भरा चेहरा लेकर ना घूमे वो..लेकिन अजय के आश्वासन के बाद उसका वो डर अब दूर हो चुका था...उसके अंदर की नारी ने उसे एक बार फिर से उकसाना शुरू कर दिया था...वही नारी जो उससे आज सुबह -2 चुदवाकर आई थी..

पूजा वाले वाकये की वजह से वो अजय की चुदाई की तारीफ भी नही कर पाई थी....सच में , ऐसी चुदाई तो उसने सिर्फ़ ब्लू फ़िल्मो में होती देखी थी...जिसमे एक कसरती जवान आदमी उसकी उम्र की औरत को शावर के नीचे बुरी तरह से चोदता है...अगर वो पूजा वाला किस्सा ना हुआ होता तो वो एक बार और चुदवा चुकी होती अजय से वही पर...और अब उसे आगे होने वाली चुदाई फिर से नज़र आने लगी थी...लेकिन इस वक़्त घर पर ये सब करना सही नही था...भले ही पूजा और रिया ने प्राची को संभाल कर रखा हुआ था अंदर, लेकिन कोई भी ,किसी भी वक़्त बाहर आ सकता था..

वो कुनकुंनाती हुई बोली : "अच्छा ठीक है...समझ गयी मैं ...अब तो छोड़ो ...कोई आ जाएगा...''

अजय ने जवाब मे उसे और कसकर पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचते हुए अपने लंड को उनकी चूत पर जोरदार तरीके से रगड़ा और बोला : "कोई नही आएगा....अभी तो सिर्फ़ 5 मिनट ही हुए है...''

इतना कहते हुए अजय ने अपने होंठ अपनी सास के होंठों पर रख दिए और उन्हे चूस डाला...



रजनी का सुलग उठी...ऐसा लगा की उसके पेट्रोल से भीगे जिस्म पर किसी ने माचिस की तिल्ली फेंक दी हो...

''आआआअहह .... नही अजय....... अभी नही....''

अजय भी मस्ती के मूड में आ गया....और उनकी गर्दन और मुम्मो के उपर वाले हिस्से को चूमता हुआ बोला : "उम्म्म्मममम.....पहले बोलो....आप अब गुस्सा नही हो....''

''आआआआआआआअहह,.......... ऐसे करोगे....तो ....तो.....बोलना ही पड़ेगा......अहह.....नही हू गुस्सा.......ठीक है......अब तो........ छोड़ो......अहह''
 

वो बोलती भी जा रही थी छोड़ने के लिए और अजय के सिर को पकड़कर अपनी छाती पर ज़ोर से दबा भी रही थी....और साथ ही साथ अपनी कमर मटका कर अपनी चूत पर उसके लंड से खुजली भी करवा रही थी...

अजय : "ऐसे नही.........अपने इन होंठों से....... उसे चूमकर बोलो..... की..... अब नाराज़ नही हो.....''

वो तो वैसे भी यही चाहती थी की अजय के लंड को चूस डाले...पर ऐसे मौके पर ये मुमकिन नही था...

''नही अजय.......प्लीज़......फिर कभी...... शाम को....... रात को..........पर अभी नही.....अहह....प्लीज़......''

पर अजय ना माना.....और उसने रजनी की साडी का पल्लू नीचे गिरा दिया...और उनके एक मुममे को पकड़ कर बाहर निकाल दिया....और उसे चूसने लगा..



''आआआआआआअहह..... मत करो ऐसा......अजय..............मत करो.................. अहह...... मार डालोगे तुम तो मुझे...... ये देखो.....''

उसने अजय के हाथ को पकड़कर अपनी चूत के उपर रख दिया, जिसमे से पानी ऐसे टपक रहा था जैसे कोई नलका खोल दिया हो....उसकी साड़ी भी भीग चुकी थी उस जगह से....अजय का मन तो किया की वहीँ उसकी साड़ी उठा कर गीली चूत में लंड पेल दे...पर इतना रिस्क लेना भी सही नही था....अभी के लिए उससे लंड ज़रूर चुसवाना चाहता था वो...

अपने अधखुले ब्लाउस को संभालती हुई रजनी आख़िर कार उसकी जिद्द के आगे झुक ही गयी...और उसके सामने बैठकर उसने एक झटके में उसके लंड को बाहर निकाला और मुँह में लेकर जोरदार तरीके से चुप्पा मारा...

और फिर उसे बाहर निकाल कर चूमा और बोली : "मुच्च्छ्ह ...... मैं अब नाराज़ नही हूँ ....समझे.... खुश ना....''

फिर वो उठ खड़ी हुई...और अपने मुम्मे को भी अंदर कर दिया...अजय ने भी लंड वापिस अंदर ठूसा और एक बार फिर से अपनी सासू माँ के करीब आया और उनके बालों को पकड़कर बड़े ही रफ़ तरीके से अपनी तरफ खींचा और बोला : "आज के बाद तुम वही करोगी जो मैं कहूँगा....कभी भी....कहीं भी....''

रजनी को भी उसने पूजा की तरह अपने मोह्पाश में बाँध लिया था...बेचारी हाँ के अलावा कुछ बोल ही नही सकी...वैसे भी ऐसे जवान और तगड़े लंड का गुलाम बनकर रहना किसे पसंद नही आएगा..

उसके बाद अजय वापिस बाहर आ गया...और सीधा प्राची के बेडरूम में गया...जहा तीनों बहने बैठकर बाते कर रही थी..

अजय को वापिस आया देखकर प्राची बोली : "आप नाश्ता करो...मैं बस नाहाकर आती हूँ ..आपको ऑफीस के लिए भी तो देर हो रही होगी ना...''

इतना कहकर वो टावल उठा कर अंदर चली गयी.

उसके जाते ही रिया ने चहककर पूछा : "मान गयी क्या मौसी....समझा दिया ना उन्हे सही से....''

वो कुछ बोल पता की पूजा बोल पड़ी : "हाँ ....समझा ही दिया होगा...देख नही रही....छोटे जीजाजी कितने खुश है...''

उसका इशारा अजय के लंड की तरफ था...जो उसकी पेंट में सॉफ चमक रहा था...

दोनो के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी...अजय ने उन्हे सारी बाते बता दी की वो अब समझ गयी है...कोई भी अब इन बातों को एक दूसरे के सामने नही करेगा...अब सब ठीक था...

उसके बाद सबने मिलकर नाश्ता किया....और अजय अपने ऑफीस के लिए निकल पड़ा.

आने वाले दिनों में वो सबको कैसे मैनेज करेगा, इसका हिसाब लगाता हुआ वो ऑफीस पहुँच गया...जहां एक और ठरक से भरा दिन उसका इंतजार कर रहा था.










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