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Wednesday, March 19, 2014

FUN-MAZA-MASTI कामुक हसीनाएं पार्ट--2

FUN-MAZA-MASTI

 कामुक हसीनाएं पार्ट--2

पिच्छले भाग में आप ने पढ़ा कैसे नाज़ और नामिता की चुदाई के साथ मेरी चुदाई की शुरू आत हुई. उस दिन मैने सच में सेक्स का मज़ा लिया और जाना कि इस्को स्वर्ग का सुख किओं कहते हैं. मेरे सामने चुदाई का रास्ता खुल चुका था और एक नहीं दो दो लड़कियो से मैं चुदाई का खेल खेलने लगा. 

अगले दिन से मुझे नाज़ और नामिता को दीदी पुकारने की आदत डालनी थी. वैसे भी प्रभा देवी मुझे बहुत प्यार करती थी. लेकिन मैं ये ज़ाहिर नहीं कर सकता था कि जिस घर ने मुझे रहने का असरा दिया है मैं उसी घर की बेटी से चुदाई का गंदा खेल खेल रहा हूँ. नामिता मेरी मुझ पर जान च्चिडकती थी और नाज़ मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी. रोज़ मैं नाज़ और नामिता की चुदाई करता और क़िस्सी को पता ना चलता. मेरी तो बस चाँदी ही थी. 

फिर एक दिन मेरा और नाज़ के कमरे वाला हिस्सा प्रभा देवी की पार्टी के वर्कर्स के लिए खाली करवा लिया. पार्टी को एलेक्षन की तैयारी के लिए कुच्छ दिन वहीं रहना था. प्रभा देवी को भी पार्टी के सीनियर लीडर्स से मीटिंग्स करनी होती थी और वो अब सारा दिन सारी रात लीडर्स के साथ ही रहती. पार्टी के नेता मोहन लाल भी वहीं थे जिनको प्रभा देवी इज़्ज़त से पिता जी कहती थी. मुझे अब सुनील के कमरे में शिफ्ट कर दिया गया और नाज़ अब नामिता के कमरे में रहने लगी. चुदाई में रुकावट होने के चान्स थे. खैर रात को मैं अपनी किताब पढ़ कर बाहर सैर करने को निकला तो एक कमरे की बत्ती जल रही थी. रात के 2 बजे थे. मैं घूमता हुआ उधर ही निकला गया और उत्सुकतावश मैं कमरे के पास चला गया. मुझे कुच्छ आवाज़ें सुनाई पड़ी तो मैने खिड़की से झाँक लिया. अंदर का नज़ारा चौंका देने वाला था. मेरे पैरों से ज़मीन खिसक गयी. 

मेरी मा समान औरत प्रभा देवी मदरजात नंगी थी. प्रभा देवी का रूप देवी का नहीं बल्कि रंडी का दिखाई दे रहा था. प्रभा देवी, पलंग के सामने झुकी हुई थी और मोहल लाल नंगा हो कर टाँगों को पसार कर लेटा हुआ था. चाहे मोहल लाल की उमर 60 साल से कम ना होगी, लेकिन उसस्का लंड सखत हो कर तना हुआ था और प्रभा उसस्के लंड को चूस रही थी. मेरी मूहबोली मा की गांद मेरी तरफ उठी हुई थी जिससे मुझे उसस्की गांद का छेद कभी खुलता और कभी बंद होता दिखाई देता. प्रभा की चुचि नीचे झूल रही थी. 

मोहन लाल कभी प्रभा की चुचि को दबा देता और कभी उसस्के चूतड़ को स्पर्श कर लेता,” प्रभा बेटी, तुम बहुत कामुक औरत हो. मेरी पत्नी ने कभी मेरा लंड नहीं चूसा. साली बोलती है की लंड गंदी चीज़ है. बहनचोड़ अगर गंदी है तो चूत में किओं लेती है साली. प्रभा धीरे धीरे चूस वरना मैं चोदने से पहले ही झाड़ जायूंगा, मेरी रानी बेटी, और मैं अपनी प्यारी बेटी को चोदे बिना नहीं सो सकता. कितने दीनो के बाद ये मौका मिला है. साले अख़बार वाले हम नेता लोगों को अकेले कहाँ छ्चोड़ते हैं. कई बार सोचा है कि अपनी बीवी को तलाक़ दे कर तुझ से शादी कर लूँ, पर नेता लोगों की इज़्ज़त भी तो बहुत नाज़ुक होती है. एलेक्षन भी सिर पर हैं. पार्टी वाले तो पहले ही अफवाहें फैला रहे है कि मैं तुझे एमएलए का टिकेट इस लिए देता हूँ किओं के तुम मेरी रखैल हो. किस किस बेह्न्चोद का मूह बंद करूँ मैं? कोई सेफ रास्ता नही है हम दोनो के लिए?” 

प्रभा देवी सीधी खड़ी हो गयी और अपनी चुचि को मोहन लाल के मूह में डालते हुए बोली,” पिताजी, सब के सामने आपको पिता कहती हूँ फिर भी लोग साले हमारी असलियत पहचान लेते हैं. जब से मेरे पति की मौत हुई है आप के लंड का ही तो असरा है मुझे. आपकी पत्नी भी मुझे सौतेन समझती है. वो भी अपनी जगह ठीक है किओं के मैने क़ब्ज़ा तो उसस्के अधिकार वाले लंड पर ही किया हुआ है. लेकिन, पिताजी, मैं आपके बिना नहीं रह सकती. आप ने जो मुझे एमएलए का टिकेट दिया है उस एहसान का बदला भी तो चुकाना है मुझे. आप मुझ से जो चाहें कर लो लेकिन मुझे अपने आप से अलग कभी मत करें. एक ख़याल आया है मेरे मन में. किओं ना नामिता की शादी आपके बेटे रमेश से कर दी जाए. हमारी राजनीतिक ताक़त भी बढ़ जाए गी और समाज में एक रिश्ता भी बन जाए गा. कल हमारे बच्चे ही तो नेता बनेंगे. मा के लिए समधी और बेटी के लिए पति उपलब्ध हो जाएगा और कोई कुच्छ बोलेगा भी नहीं.” 

मोहन लाल प्रभा की चुचि को चूमते रहे जैसे बच्चा दूध पी रहा हो. प्रभा की चुचि उनके थूक से गीली हो कर चमक उठी. प्रभा प्यार से उनके बालों में उंगलियाँ चलती रही.’हां बेटी, रमेश की शादी तेरी बेटी से करना एक मास्टर स्ट्रोक होगा. इस से हमारी ताक़त भी बढ़ेगी और हमारा प्यार भी च्छूपा रहे गा. मैं अपनी पत्नी से बात करता हूँ. लेकिन अब जल्दी से पलंग के उप्पेर चढ़ जयो. आज मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे लंड की सवारी करो और मैं तेरा दूध पीता रहूं और चोद्ता रहूं. मैं तेरे चूतादो को थाम कर नीचे से चोदना चाहता हूँ.चल प्रभा रानी जल्दी कर, मेरा लंड बेताब हो रहा है.” प्रभा गांद मटकाती हुई मोहल लाल के उप्पेर चढ़ गयी. इस उमर में भी प्रभा के जिस्म में क्या बात थी. उससने अपनी जांघों को फैला लिया और मोहल लाल की कमर के दोनो तरह अपनी टाँगों को फैलाते हुए अपनी चूत को उसस्के लंड पर गिराना शुरू कर दिया. मोहल लाल के हाथों ने मेरी मूहबोली मा की गांद को जाकड़ कर अपने लंड पर गिरा लिया. 

“उईईए….मोहन……धीरे से…..बहुत मोटा है आपका…..अहह…मोहनजी आप का लंड मेरे गर्भाष्या से टकरा रहा है… ऐसे ही मसलो मेरी चुचियो को….आअहह….ह्म्‍म्म्ममम…..ओह…हा
ई” प्रभा देवी बोल रही थी और उसस्की गांद अब मोहन लाल के लंड पर उप्पेर नीचे हो कर मस्ती से लंड की सवारी कर रही थी. प्रभा देवी के चूतड़ बहुत प्यारे लग रहे थे. मेरा लंड तो अपनी मूह बोली मा की गांद चोदने को ललचा रहा था. मोहन लाल नीचे से अपने चूतड़ उठा उठा कर प्रभा को निहाल कर रहा था. वो अपने मूह में ले कर प्रभा के निपल्स चूसने लगा. प्रभा ने अपनी गांद तेज़ी से उप्पेर नीचे करनी शुरू कर दी. चुदाई ज़ोर पकड़ रही थी. मोहन लाल ने प्रभा के चूतड़ अपने हाथों में थाम लिए और तेज़ी से चोदने लगा. 

“मोहन जी, पता है की औरत कैसी चुदाई की ख्वाइश रखती है? कि मर्द उस पर चढ़ कर चोदे, मर्द हमेश औरत के उप्पेर का स्थान रखता है. मैं आपके लंड की सवारी कर रही हूँ, मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा है. मैं उसी तरह से चुदाई करवाती रहूंगी जैसे आप कहेंगे, जैसा आप कहेंगे. लेकिन मुझे चुदाई के असली मज़े का एहसास तभी होता है जब आप अपनी प्रभा बेटी को उप्पेर चढ़ कर चोदते हैं, पिताजी, है अब ज़ोर से चोदो मुझे, प्लीज़ पिता जी” मोहन लाल ने अपनी एक उंगली प्रभा की गांद में पेल डाली और प्रभा चिहुनक उठी” ओह! ओह! मदरचोड़, अब मेरी गांद भी नहीं बक्षोगे…..चूत से मन नहीं भरा? आह पेल डालो गांद भी मोहन….दर्द होता है लेकिन आपके लिए दर्द भी झेल लूँगी मोहनजी….मुझे प्यार करो मोहन!” 

मोहन लाल ने प्रभा के कंधे पर काट खाया और ज़ोर से चूमने लगा और तेज़ी से उंगली भी गांद में पेलने लगा. वो हानफते हुए बोला,” मेरी प्यारी बिटिया रानी, तुझे नीचे डाल कर भी चोदुन्गा….छ्चोड़ूँगा नहीं….पहले तुम तो मुझे चोद लो….फिर तुझे अपनी बीवी की तरह उप्पेर चढ़ कर भी चोदुन्गा…..तेरी गांद भी चोदना चाहता हूँ बेटी. कितनी सेक्सी है तेरी गांद? ओह रब्बा कितना मज़ा दे रही हो तुम मुझे.” दोनो पागलों की तरह चुदाई में मस्त थे. मेरा लंड खड़ा हो चुका था. मैने अपनी पॅंट खोल कर अपना लंड हाथ में ले लिया और अपनी मूह बोली मा की चुदाई देखते हुए मूठ मारने लगा. प्रभा देवी के चूतड़ उप्पेर नीचे होते हुए बहुत सेक्सी लग रहे थे और वो चिल्ला रही थी” चोदो ज़ोर से राजा…फाड़ डालो मेरी चूत….पेलो राजा…पेलो अपनी रंडी बेटी को” 

अचानक मोहन लाल रुक गये और प्रभा के कान को चूमते हुए बोले,” प्रभा बेटी, अब तुझ पर सवारी करने का वक्त आ गया है. मोहन के नीचे पड़ कर चुदोगि क्या?” प्रभा नटखट अंदाज़ में बोली,” जल्दी से चोद राजा, पहले ही चूत जल रही है, लंड खा कर और भी भूख बढ़ चुकी है इससकी, राजा, अब उप्पेर चढ़ कर भी चोद डालो मुझे.” मोहन लाल ने प्रभा को घोड़ी बनाने को कहा,” क्या? घोड़ी बनूँ? ” मोहन हंस पड़ा” बेटी, औरत और घोड़ी में क्या फरक है? दोनो ही सवारी के काम आती हैं. औरत की छोटी घोड़ी की लगाम के बराबर होती है. मैं तुझे पीछे से चोदना चाहता हूँ, तुझे कोई एतराज है क्या?” प्रभा उसी वक्त पलंग पर झुकती हुई बोली,” नहीं मेरे सरकार, चुदना है तो नखरा कैसा? लंड पेल डालो मेरी प्यासी बुर में जल्दी से. मैं आपके लिए घोड़ी तो क्या कुतिया बन सकती हूँ” 

जैसे ही प्रभा आगे झुकी, मोहन ने पीछे से लंड का प्रहार किया और प्रभा के चूतड़ की दरार से होता हुआ लंड उसस्की चूत में परवेश कर गया. मोहन ने अपनी रखैल की छोटी को कस के पकड़ लिया और ऐसे चोदने लगा जैसे वो घोड़ी हांक रहा हो. मोहन के अंडकोष ज़ोर ज़ोर से प्रभा की गांद से टकराने लगे. दोनो पसीने से भीग चुके थे. कमरा फ़चा फ़च की आवाज़ों से गूंजने लगा. मेरा हाथ भी तेज़ी से मेरे लंड के उप्पेर नीचे चलने लगा किओं की प्रभा देवी का नंगा जिस्म मुझे बहुत उतेज़ित कर रहा था. प्रभा अपने चूतड़ मोहन के लोड्‍े पर ज़ोर ज़ोर से मार रही थी. मेरा लंड भी झड़ने के करीब था. मोहन लाल प्रभा के चूतड़ नोच रहा था और हन्फ्ते हुए चुदाई में मस्त था. 

“प्रभा बेटी, मैं झार रहा हूँ, बेटी ऐसी मस्त औरत मैने कभी नहीं देखी. तू बहुत मस्ती से चुदवाती हो रानी. ओह्ह्ह्ह मैं गया…..हाई बेटी…..” प्रभा भी मस्ती से भरी हुई थी जब मेरे लंड ने पिचकारी छ्चोड़ डी. मेरे लंड रस की धारा बहुत दूर तक गयी और अपने हाथों पर मुझे अपने लंड का रस महसूस हुआ. आख़िरी बारी अपनी मूह बोली मा के नंगे जिस्म को देखते हुए मैं सुनील के कमरे की तरफ लौट पड़ा. सारी रात प्रभा का नंगा बदन मेरी आँखों में छाया रहा और मेरा लंड सारी रात प्रभा को चोदने के लिए मचलता रहा. 

अगले दिन से सारा काम रुटीन में चलने लगा लेकिन मेरी नज़र में अब प्रभा के लिए वासना जाग चुकी थी. मैं हर वक्त प्रभा को नंगे देखने की ताक में रहता, उस्स्को गले लगाने का बहाना ढूनडता रहता, उसस्कीे ब्लाउस से उसस्की चुचि की घाटी में झँकता. 

एक महीने के बाद नामिता के नानाजी नामिता की शादी के सिलसिले में हमारे घर आने वाले थे. मैं उस वक्त प्रभा देवी के बाथ रूम के पास मंडरा रहा था के शायद मेरी मूह बोली मा के नंगे जिस्म की झलक मिल पड़े. तभी जब फोन बज उठा. फोन प्रभा ने बाथरूम से ही ले लिया.. “हेलो पापा, कैसे हो, कब आ रहे हो. मैं नहा रही हूँ, ओह पापा आप से क्या परदा, बिल्कुल नंगी हूँ…..बस आपके लिए……मैने अभी अभी झांते सॉफ की हैं पापा….मैं जानती हूँ मेरे पापा को अपनी बेटी की चूत पर बाल बिल्कुल अच्छे नहीं लगते….सच पापा आपकी आवाज़ सुनते ही मेरी चुचि कड़ी हो उठी है….अब मुझ से आपका इंतज़ार भी नहीं होगा….जल्दी आइए पापा, मैं आपकी बाहों में मचलना चाहती हूँ….आपका लंड चूसना चाहती हूँ, पापा, आप तो जानते ही हैं कि विधवा होने के बाद मुझे अगर क़िस्सी ने चोदा है तो आप ने…क्या आप भी नंगे हो चुके हैं? सच? आपका लंड भी खड़ा हो गया है? सच? नहीं पापा, इस्सको मूठ ना मारें, मैं मूह में ले कर चूसना चाहती हूँ, बिल्कुल वैसे जैसे मम्मी चुस्ती थी. आअप जल्दी आ जाएँ, पापा, प्लीज़” 

मैं चौंक पड़ा. तो साली प्रभा देवी साली सभी बाज़ुर्ग मर्दों से चुदवाती है? अब अपने बाप से चुदाई के बातें कर रही है. मेरी बारी कब आएगी. साली का चक्कर अपने ही बाप से भी चल रहा है. बाथरूम का दरवाज़ख़्ुला और प्रभा देवी टवल लपेटे बाहर निकली. पानी से भीगा बदन कयामत ढा रहा था. उसस्के ठुमक ठुमक करते हुए कूल्हे मेरा लंड खड़ा कर रहे थे. प्रभा की जंघें अधिक दिखाई दे रही थी किओं की उसस्का टवल बहुत छ्होटा था. मैं जान बुझ कर दूसरी तरफ से तेज़ी से कमरे में आया और प्रभा से टकरा गया. टक्कर इतनी ज़ोर से मारी के प्रभा का टवल खुल गया और नीचे गिर पड़ा.” आइ आम सॉरी मा, मुझे दिखाई ही नहीं दिया कि आप आ रही हैं.” लेकिन मेरी ज़ुबान बंद हो गयी जब मेरी नज़र ने प्रभा को नगन हालत में देखा. उसस्की मस्त चुचि नज़दीक से क़िस्सी का हार्ट फैल करने के लिए काफ़ी थी. पेट एक दम सपाट और कमर पतली. मांसल जांघों के बीच फूली हुई चूत देख कर मेरे होश उड़ गये. 

मेरा लंड पॅंट से सलामी देने लगा. मैं हड़बड़ा गया और दूसरी तरफ देखने लगा. प्रभा ने मेरी हालत देख ली और मुस्कुरा पड़ी.” क्या बात है बेटा, तुम तो पसीने पसीने हो रहे हो, इतनी गर्मी तो नहीं है….बेटा मेरे बदन पर मेरा टवल लपेटने में मदद कर दो ना…तुम तो घबरा ही गये हो….क्या बात है? क्या कभी क़िस्सी नंगन औरत को नहीं देखा? और मैं तो तेरी मा हूँ…मा से कैसा शरमाना? चल हेल्प कर मेरी” मैं सकपका गया और टवल उठा कर प्रभा को लपेटने लगा. इश्स वक्त मैं उसस्के पीच्छे खड़ा था और मेरा लंड सिर उठाए प्रभा की गांद से रगड़ रहा था. उससने ज़रूर मेरा खड़ा लंड अपनी गांद पर चुभता हुआ महसूस किया होगा. लेकिन वो बिना शरमाये टवल ले कर बाहर चली गयी. मैं क्या करता? बाथरूम में जा कर प्रभा को याद कर के मूठ मारने लगा. मेरी पॅंट मेरे गुटनो पर गिरी हुई थी और मेरा लंड मेरे हाथ में था जब बाथरूम का दरवाज़ा एक दम खुला और प्रभा देवी मुझे मूठ मारते देख कर बोली,” बेटे, मुझे तो पहले ही शक था कि तू यही कुच्छ कर रहा होगा. मैं तो तेरी पॅंट मेनबना हुआ तंबू देख कर समझ गयी थी के अब अपना हाथ जगन नाथ होने वाला है. लेकिन इतना बढ़िया रस हाथों पर किओं वेस्ट कर रहे हो? क्या इस पर मा का हक नहीं है? मेरा बेटा हो कर मेरी चुचि और चूतड़ को घूरते रहते हो लेकिन जब मा की चूत और चुचि पर लंड रगड़ने का टाइम आया तो अपने हाथ इस्तेमाल कर रहे हो…क्या प्रभा देवी तुझे पसंद नहीं आई?” 

प्रभा बोलते हुए मेरी तरफ बढ़ी और मेरे लंड को देखते हुए आगे झुकी. मैं अब फ़ैसला कर चुका था. जो भी हो जाए आज प्रभा मुझ से चुदेगि ज़रूर. आज मेरा मदेर्चोद बनने का दिन आ चुका है. मैने हाथ बढ़ा कर प्रभा को अपनी तरफ खींच लिया और उसस्का टवल उतार फेंकते हुए मैने नंगा कर दिया और उस्स्को बाहों में भर कर होंठों पर किस करने लगा. 

प्रभा का मांसल बदन बहुत मस्त था और उसस्के रसीले होंठ बहुत नमकीन. मैने उस्स्को उसस्की मस्तानी गांद के नीचे से पकड़ कर अपने साथ सटा लिया और आख बंद कर के चूमने लगा.” आप मा हैं, इसी लिए इतनी देर लग गयी वरना आप जैसी मस्त औरत को कब का चोद चुका होता. सच कहता हूँ मैने आप जैसी सेक्स औरत नहीं देखी. आप मोहन लाल जैसे बूढ़े से क्या चुदवा रही हैं, मेरे लंड का स्वाद ले कर तो देखो, मस्त कर दूँगा.” प्रभा कुच्छ समझती हुई बोली,” तो तुमने मोहन जी के साथ मुझे देख लिया है? क्या करूँ बेटा, मुझे बड़ी उमर के मर्दों से चुदवाने का शौक बचपन से ही है. और फिर एमएलए का टिकेट भी तो लेना है, खैर अब मेरे पास एक जवान लंड भी आ गया है अपने बेटे के रूप में जो पहले अपनी मा की चुदाई देखता है और फिर मदेर्चोद बन जाने को तैयार हो जाता है” 

“ना केवल मोहनजी के साथ देखा, आप को अपने पापा के साथ चुदाई की बात करते भी सुना. क्या आप अपने सगे बाप के साथ भी….मेरा मन नहीं मानता कि बाप बेटी भी…..सच बतायो, मेरा लंड बेकाबू हो रहा है ये सब की कल्पना से ही.” मेरे दिल में कई किस्म के सवाल उठ रहे थे. प्रभा बे-झिझक बोली,” मेरी मा की मौत जब हुई तो मैं 17 साल की थी और मेरी चूत में आग लगी हुई थी. उधर मेरे पापा नयी नयी लड़कियो से इश्क लड़ा रहे थे. एक दिन तो हद हो गयी. मेरे पापा ने मेरी ही सहेली पर हाथ डाल दिया. जब मैं बाज़ार से वापिस आई तो मेरे पापा मेरी सहेली अनु की चुदाई उस बिस्तर पर कर रहे थे जिस पर मेरी मा की चुदाई होती थी. मैने सोच लिए की मर्द नाम का जानवर चूत के बिना नहीं रह सकता तो औरत भी तो जानवर ही है. और वैसे भी अनु की जगह लेने के लिए मेरा मन तड़प रहा था. पापा से अपनी सील तुड़वाने का फ़ैसला कर ही लिया और उस रात पापा को मैं खूबशराब पिलाई. नशे की हालत में पापा बेटी और पत्नी का फरक भूल कर मेरे साथ सुहागरात मनाने लगे. वो मेरी पहली चुदाई थी, तब से दुनिया से छुप कर ना जाने कितने मर्दों से हर तरह चुदवा चुकी हूँ. और हां, आज तुझ से भी तो चूड़ने जा रही हूँ. तुम भी तो मेरे बेटे ही हो. जब बेटा मा को चोद सकता है तो बाप किओं नहीं?” 

“लेकिन आप तो मेरिमूह बोली मा हैं?” मेरा स्वाल था.” बात रिश्ते की है और उसस्की असलियत की है. मेरा बाप मेरा ख़सम तब बना जब उसने मुझे चोद लिया. जब तुम मुझे चोद लोगे तुम भी मेरे पति के बराबर हो जयोगे, बेशक दुनिया हुमको मा बेटा ही समझेंगे. जब मुझे नंगी देख कर तेरा लंड खड़ा हो जाता है तो मा बेटे के रिश्ते की वॅल्यू रह जाती है. दुनिया में बस औरत मर्द का ही रिश्ता रह जाता है, बाकी सब बेकार हैं, बेटे.” प्रभा देवी सच में एक कामुक औरत थी जिसने सभी तरह से सोच रखा था और मैं तो अब चुदाई के खेल में एक अनुभवी औरत से कयि सबक सीखने वाला था. 

प्रभा ने मेरा लंड पकड़ लिया और मुठियाने लगी. मेरी साँस मुश्किल से चल रही थी. मैने उसस्के बालों को सहलाया और उसस्के नंगे जिस्म पर हाथ फिराने लगा. प्रभा का जिस्म बिल्कुल रेशम था, मुलायम और कोमल. मेरे लंड से रस की एक बूँद बह निकली जिस्सको प्रभा ने जीभ से चाट लिया. “प्रभा, क्या बाथरूम में ही सब कुच्छ करोगी या फिर बेड पर चलना होगा?” मैने उसस्की ठुड्डी से मुखड़ा उप्पेर उठाते हुए पुचछा. अब मुझे प्रभा को मा कहते हुए शरम आ रही थी. इसी लिए मैने उस्स्को नाम से संबोधित किया. लेकिन वो पुराने अंदाज़ में ही बोली,” बेटे, मुझे मा कहते हुए शरमाते हो? माद्रचोड़, शरम किस बात की? जब तेरे पास नंगी खड़ी हूँ तो मा या बीवी कहने से कोई फरक नहीं पड़ेगा. जब चुदाई ही करनी है तो रिश्तों से क्या घबराना. आज तुझे तेरी मा ही चुदवाने को कह रही है. जब मेरे पापा ने मुझे चोद लिया तो बेटे को क्या प्राब्लम है. जो चोदे वो ही ख़सम, बेटे. चल तुझे बिस्तर पर ही ले चलती हूँ. चल बेटे” 

प्रभा का पलंग बहुत बड़ा था जिसस पर रेशमी चादर बिछि हुई थी. प्रभा मेरे आगे आगे चल रही थी और मैं उसस्की गांद को घूर रहा था. ना जाने किओं मेरा मन उसस्की गांद मारने को कर रहा था. पलंग पर जब वो लेट गयी तो मैने उस्स्को पेट के बल लेटने को कहा. वो मान गयी. मैने उस्स्को पैरों से चूमते हुए टख़नो से होते हुए उसस्की जांघों को चूमा और फिर उसस्की गर्दन पर चूमा. प्रभा की साँस धौंकनी की तरह चलने लगी. मैने अपना सूपड़ा उसस्के चुतताड की दरार में फिट कर के उसस्की पीठ को किस करना शुरू कर दिया,” ओह बेटे मा की गांद मारोगे क्या? मेरी गांद चुदी ज़रूर है लेकिन जब भी गांद में लंड जाता है, मुझे दर्द होता है. मेरे बेटे, मैं गांद भी चुड़ववँगी तुझ से लेकिन आज नहीं, आज मुझे अपने लंड से चूत में ही पेलो बेटे” 

मैं उसस्की गांद से लंड को हटाते हुए अपने होंठों को उसस्के चूतड़ पर ले गया और किस करने लगा. जब मेने उसस्के चूतड़ को काट खाया तो वो चिल्ला उठी,” आरीए बेह्न्चोद आराम से. अब मेरी गांद ही खा जयोगे क्या? एसा करो, तुम मुझे अपना लंड चूसने दो और मेरी चूत को तुम खा लो. देखो मा की चूत का स्वाद कैसा लगता है तुझे और मा को अपना केला खाने दो ज़रा” मैं तुरंत मान गया और हम 69 बन गये. प्रभा की चूत के फुल्ले हुए होंठ और नमकीन रस मुझे नशा चढ़ा रहा था. उधर प्रभा मेरे लंड को हाथ में ले कर उप्पेर नीचे करते हुए चूमने और चाटने लगी. उससने मेरे अंडकोषों को भी अपने हाथ से सहलाया और मुझे पागल बना दिया. मुझे पता चल चुका था की वासना एक दम आँधी होती है. मेरी ज़ुबान जब प्रभा के क्लाइटॉरिस पर रगड़ी तो वो चिल्ला उठी,” बस मदेर्चोद, अब और नहीं सहा जाता, बस चोद डालो मुझे बेटा. मैं बूढ़े मर्दों से बहुत चुदवा चुकी हूँ, तेरे जैसा जवान मर्द आज मिला है मुझे, चल चढ़ जाओ अपनी मा पर, बेटा” 

मैं जानता था की वो मुझे जान बुझ कर बेटा बेटा कह रही थी. मैने उस्स्को नीचे रख कर उसस्की जांघों को खोल दिया और उसस्स्की चूत के मुख को खोल कर सूपदे को चूत पर रख दिया. वो बुरी तरह हाँफ रही थी,” किओं मा, चोद डालूं अब तुझे? तेरी चूत तो कुतिया की चूत की तरह फुदाक रही है. मर्द की तरह चोदु या फिर मोहन की तरह कुतिया बना कर? “मैने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरा लंड प्रभा की चूत में दनदनाता हुआ घुसता चला गया.” ह..तेरी माआ को मदेर्चोद….धीरे चोद….रंडी की औलाद प्यार से चोद, कितना बड़ा है तेरा लंड, बेटा…मेरी तो बुर फाड़ डाली तुमने…आराम से बेटा…” 

नामिता और नाज़ ठीक थी लेकिन प्रभा की चूत का कोई जवाब ना था. साली की बुर ने मेरे लंड कस के जकड़ा हुआ था. प्रभा ने अपने जांघों का घेरा मेरी कमर पर इस तरह कसा हुआ था के उसस्की चूत बहुत टाइट लग रही थी,” बेटा, मेरी चुचि चूस…अपनी मा की चुचि चूस और चोद उस्स्को बेटा” मेरा लंड तेज़ी से बड़ी उमर की अनुभवी चूत को चोदने लगा. प्रभा ने मेरा सिर पकड़ कर अपने निपल पर झुका लिया और मैं उस्स्को अपनी मा की चुचि समझ कर चूसने लगा. एक हाथ से मैने उसस्का क्लिट छेड़ना शुरू कर दिया जिसस से वो भड़क उठी,”चोद मदरचोड़चोद….बेह्न्चोद चोद प्रभा को….चोद प्रभा गश्ती को…ओह्ह्ह्ह हरामी चोद मुझे” 

मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी. प्रभा का जिस्म एंथने लगा. मेरी रंडी मूह बोली मा मेरे नीचे मचल मचल कर चुदवा रही थी और मुझे ज़ोर से चोदने को बिनति कर रही थी.” ओह्ह्ह्ह प्रभााअ…..तेरी मा को लंड….साली रंडी है तू….बहुत मज़ेदार चुदवाति हो रंडी….प्रभा मेरी मा….चोद अपने बेटे को साली….मैं झाड़ रहा हूँ….बोलो मा अपना लंड अंदर ही खाली करूँ या बाहर निकाल लूँ?” प्रभा अपनी गांद को उठा उठा कर मेरी थाप का जवाब देते हुए बोली,”मदरचोड़, अंदर डाल दे अपना रस…..मेरा ऑपरेशन हो चुका है….चोद डाल मुझे अंदर ही…मदेर्चोद मेरी बच्चेदानि पर ठोकर मार रहा है तेरा लोड्‍ा बेह्न्चोद” प्रभा की नीचे से स्पीड भी तूफ़ानी हो चुकी थी. वो भी झार रही थी. इधर मेरा लंड झड़ने लगा तो उधर उसस्की चूत खलास होने लगी. पागलों की तरह हानफते हुए हम दोनो एक साथ झाड़ गये. फिर तो मेरी मौज हो गई कभी प्रभा कभी नामिता कभी नौकरानी
तो दोस्तो कैसी लगी ये मस्त कहानी बता ना मत भूलना आपका दोस्त राज शर्मा 

समाप्त

 










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FUN-MAZA-MASTI कामुक हसीनाएं पार्ट--1

FUN-MAZA-MASTI

 कामुक हसीनाएं पार्ट--1

हेलो दोस्तो, मेरी ये कहानी एक कहानी नहीं, एक वास्तविक घटना है, एक आत्म कथा है, एक उपन्यास के रूप में पेश कर रही हूँ. इस कहानी में एक पात्र ने मुझे ये सचाई बताई है जिसको मैने लिखने की कोशिश की है. उम्मीद है आप पसंद करेंगे. मुझे अपने विचार ज़रूर लिखना. 

मुझे अपनी ज़िंदगी की पहली याद है जब मैं पढ़ता भी था और काम भी करता था. मेरा नाम गणेश है और मैं जनम से ही अनाथ हूँ. मेरी उमर तब 15 साल की थी जब से मैं सरकारी स्कूल में पढ़ता था और रात को एक रेस्टोरेंट में सफाई करता था. मेरी वाकफियत शहर के बदमाश लोगों से थी और मैं एक नंबर का हरामी था. रेस्टोरेंट का मालिक रोशन नाम का एक बदमाश था और मुझे अक्सर उसके घर काम करने जाना पड़ता था. 

मेरा कद 6 फीट का हो चुका था और शरीर भी ताकतवर था. एक दिन मैं मालिक के घर खाना देने गया तो ऐसा लगा कि घर में कोई नहीं है. मैं अभी पलटने ही लगा था कि मालकिन के कमरे से आवाज़ सुनाई पढ़ी तो मैं चौंक पढ़ा,” उफफफफफ्फ़ साले हरामी आराम से चोद….मैं कोई रंडी हूँ क्या? रोशन के सामने तो मुझे भाबीजी कहता है और अब देखो कैसे चोद रहे हो अपनी भाबी को? मादरचोद कितना बड़ा है तेरा लंड? तेरी बीवी खूब मज़े लेती होगी…मुझे तो थका दिया तुमने राज, काश मेरे पति का भी लंड तेरे जैसा विशाल होता. बहनचोड़ फाड़ कर रख डाली है अपनी भाबी की चूत…..अब जल्दी से चोद डाल मुझे, गणेश खाना ले कर आता ही होगा….मैं क्या करूँ मूह से अधिक भूखी तो मेरी चूत है….चोद मुझे राज….ज़ोर से पेल….मैं झड़ी” मेरी ना चाहते हुए भी नज़र दरवाज़े के छेद से अंदर चली गयी. मालकिन का गोरा जिस्म पसीने से नाहया हुआ था. उसका दूधिया बदन मालिक के दोस्त के सामने कुतिया की तरह झुका हुआ था. कितनी प्यारी लग रही थी मालकिन! पीछे से मालिक का दोस्त उस्स्को छोड़ रहा था और बगलों से हाथ डाल कर मालिकन की गोरी चुचि को बे-रहमी से मसल रहा था. 

मैं चुप चाप बाहर हॉल में बैठ कर वेट करने लगा और थोड़ी देर में मैने बेल बजा दी. मालकिन एक गाउन पहन कर आई और मैने उस्स्को खाना पकड़ा दिया. मेरी नज़रें झुक गयी लेकिन मालकिन का जिस्म गाउन से बाहर निकलने को आतुर हो रहा था. खाना लेते हुए मालकिन का हाथ मुझ से स्पर्श कर गया और मुझे एक करेंट सा लगा. मालकिन की आँखें मेरे बदल को टटोल रही थी. वो मुझे वासनात्मक नज़रों से देख रही थी जैसे बिल्ली दूध के कटोरे को देखती है. मेरे सीने पर हाथ रख कर वो बोली,” गणेश, तुम तो जवान हो गये हो और सुंदर भी. कभी क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझ से माग लेना. मैं जानती हूँ की जवानी में मर्द को बहुत मुश्किल आती है.” मैं जानता था कि वो मुझ से चुदवाने के लिए तड़प रही है, लेकिन मैं अपनी नौकरी को रिस्क में नहीं डाल सकता था. 

वापिस आते हुए मेरे बदन में एक अजीब हुलचूल हो रही थी और मेरा लंड ना चाह कर भी अकड़ रहा था. मालकिन का नंगा जिस्म बार बार मेरी नज़र के सामने आ जाता. उस रात मैने मालकिन की याद में मूठ मारी. 

स्कूल में एक लड़का और एक लड़की नये दाखिल हुए. सुनील और नामिता दोनो भाई बेहन थे. वो हमारी एमएलए प्रभा देवी के बच्चे थे. प्रभा देवी को सब जानते थे. वो प्रेम और ममता की तस्वीर मानी जाती थी. प्रभा देवी कोई 45 साल की थी. हमेशा सफेद सारी में रहती किओं की उसस्का पति मर चुका था. सभी उस्स्को मा कह कर बुलाते थे. सुनील, मेरी क्लास में था. वो बिल्कुल लड़कीो जैसा दिखता था, गोरा चिटा, और कोमल. सभी लड़के उस्स्को प्यारा लोंदा कहते और प्यार से या ज़ोर से उसस्की गांद को चिकोटी काटने की कोशिस करते. सुनील की छाती भी औरतों जैसी सॉफ्ट थी. वो लड़का कम और लड़की अधिक लगता था. उसस्की बहन नामिता मुझ से दो क्लास आगे थी. लंबी, सुंदर और सेक्सी. उसस्की छाती का उठान देखते ही बनता. पॅंट में उसस्के चूतड़ बहुत उभरे हुए दिखते. काले कटे हुए बाल और तेज़ आँखें देख कर मैं पहली नज़र में नामिता से प्यार कर बैठा. उस रात से मैं नामिता को नंगी कल्पना करके मूठ मारने लगा. कल्पना में मैं अपने आप को राज और नामिता को मालकिन के रूप में देखने लगा. 

कुच्छ दिन बाद रघु(स्कूल का एक बदमाश लड़का) ने सुनील को ग्राउंड में दबोच लिया और उसस्की पॅंट उतारने लगा. बेचारा सुनील रोने लगा.” चल साले लोंडे, मैं तुझे चोद कर अपना पर्सनल लोंदा बना कर रखूँगा. बहनचोड़, वेर्ना सारा स्कूल तुझे चोदने को तैयार बैठा है. अगर मेरे साथ दे गा तो तेरी बेहन को भी प्रोटेक्षन दूँगा. साली माल तो बहुत बढ़िया है तेरी बेहन. अगर मेरे बिस्तर में आ जाए तो तेरी चाँदी लगवा दूँगा, मेरे साले” मैं सब कुच्छ देख कर वहाँ चला गया. सुनील की पॅंट उत्तर चुकी थी और उसस्के गोरे चूतड़ एक काले अंडरवेर में झाँक रही थी. साली उसस्की गांद भी बहुत सेक्सी दिख रही थी. लेकिन उसस्का रोना देख कर मैं अपने आप को रोक ना सका और रघु से बोला,” रघु, सुनील को छ्चोड़ दे, वेर्ना अच्छा ना होगा.” रघु भी भड़क उठा और बोला” बहनचोड़, ये लोंदा मेरा माल है और उसस्की बेहन भी मेरा माल है. चल फुट यहाँ से वेर्ना तेरी भी गांद मार लूँगा.” 

मेरा गुस्सा भड़क उठा. रघु मदेर्चोद मेरी नामिता के बारे ग़लत बोल रहा था. मैं दिल से नामिता को प्यार करता था. मैने रखू को गले से पकड़ कर खूब मारा. मैने चाकू निकाल लिया जब उसस्के दोस्त वहाँ पहुँच गये. चाकू मैने रघु की गांद पर मारा जहाँ से खून निकलने लगा. सभी लड़के भाग गये. सुनील मुझे थॅंक्स कहने लगा. तभी नामिता वहाँ आई और अपने भाई से सारी बात पुच्छने लगी. सुनील उस्स्को बताने लगा. तभी नामिता की नज़र मेरे चाकू पर गयी और वो मुझे नफ़रत से देखती हुई बोली,” चलो भैया, यहाँ तो लोग चाकू लिए घूमते हैं.” मेरा दिल टूट गया. 

अगले दिन सुनील मुझ से हंस कर बात करने लगा और मुझे अपने घर भी बुलाया. मैं शाम को उसस्के घर गया तो प्रभा देवी ने मुझे शाबाशी दी की मैं बहादुरी से उसस्के बेटे की रक्षा करता हूँ. प्रभा देवी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया और उसस्का गुदाज़ सीना मेरी कठोरे छाती से चिपक गया. आख़िर औरत का नरम सीना मर्द के दिल में आग लगा ही देता है. बेशक प्रभा देवी का रूप एक मा की याद दिलाता है फिर भी उसस्की नरम चुचि अपने सीने में महसूस कर के मेरे दिल में आग लग गयी.” गणेश बेटा, तुम रहते कहाँ हो?” मैने जवाब दिया,” माजी, मैं एक रेस्टोरेंट में काम करता हूँ और वहीं रहता हूँ.” “खैर अब तुझे काम करने की ज़रूरत नहीं है. तुम हमारे घर में रह सकते हो. मेरे ऑफीस वाले हिस्से में एक कमरा खाली है जहाँ तुम रह सकते हो और पूरी आज़ादी भी मिल सकती है, ठीक है, बेटा? तुझे सॅलरी भी मिलेगी.” 

अंधे को क्या चाहिए? दो आँखें? फ्री में कमरा, रोटी, और घर जैसा माहौल. उस दिन से मैं उनके घर में रहने लगा. रहने क्या लगा, मेरी तो लॉटरी निकल पड़ी. स्कूल में सुनील की तरफ कोई आँख ना उठाता और नामिता भी मुझे अब नफ़रत नहीं करती थी. लेकिन अभी प्यार भी नहीं करती थी. खैर सब कुच्छ एक दम नहीं हो जाता. देखा जाए गा. 

घर में सभी मुझे बहुत प्यार करने लगे और प्रभा देवी को अपने बच्चो की सेफ्टी का कोई डर ना था. सब से पहले मुझे खाना पकाने वालों से मिलवाया गया. रसोई में दो लोग काम करते थे. गंगू, एक बुजुर्ग आदमी और नाज़, एक 25 साल की औरत जो कि घर में ही रहती थी. नाज़ का कमरा मेरे कमरे से साथ ही था. बस बीच में एक बाथरूम था जो हम दोनो का सांझा था. नाज़ का रंग सांवला था, नैन नक्श तीखे, जिस्म भरा हुआ, आँखें चमकीली. उसस्की चुचि का साइज़ ज़रूर 36 ड्ड रहा होगा और चूतड़ काफ़ी गद्दे दार. उस्स्को देख कर मुझे अपनी मालकिन की याद आ गयी. नाज़ जब चलती तो कूल्हे मटकाती और मेरा लंड खड़ा कर देती. नाज़ देख सकती थी कि उसस्का जवान जिस्म मुझ पर क्या असर कर रहा है. जब भी मौका मिलता तो वो मेरे सामने झुक कर मुझे अपनी मस्त चुचि की झलक दिखा ही देती. एक दिन मैने हौसला कर के उसस्की चुचि को टच कर लिया जब वो मुझे ग्लास पकड़ा रही थी, वो मुझे बोली,” बच्चू, अभी छ्होटे हो, ऐसी हरकत तब करना जब मर्द बन जाओ. बेटे, मुझे बच्चो में कोई दिलचस्पी नहीं है. मर्दों का काम बच्चा नहीं कर सकता.” उसस्की बात सुन कर मैं जल भुन गया. 

उस रात मैं नाज़ को अपनी पहली औरत बनाने की स्कीम बनाने लगा. अब मैं जवान था, लंड बैचैन था. मुझे भी चोदने के लिए औरत चाहिए थी. नाज़ बुरी नहीं थी बस मुझ से उमर में बड़ी थी. दूसरा कारण नाज़ को फसाने का ये था कि नामिता के दिल में ईर्षा पैदा हो जाए गी और वो मेरी तरफ आकर्षित हो जाए गी. यानी एक चूत से दूसरी का शिकार. 

रात को मैं बिस्तर में लेटा हुआ था जब नाज़ की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी. वो गा रही थी. नहाते हुए गाना आम बात है. लेकिन मेरी कल्पना अब नाज़ का नहाता हुआ नंगा जिस्म देखने लगी. मैने अपने कान दीवार से लगा दिए. दीवार में मुझे अचानक एक छेद दिखाई पड़ा. मैने छेद में झाँका. छेद छ्होटा सा था लेकिन नाज़ की नंगी जवानी की झलक दिखाई पड़ ही गयी. उसस्का भीगा बदन पानी से चमक रहा था और वो मल मल कर नहा रही थी. मेरा लंड तन गया और मैने मूठ मारनी शुरू कर दी. काश नाज़ मेरे सामने आ कर चुदवा लेती. तभी उससने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया. उसस्की मखमल जैसी चूत फाड़ फाडा रही थी. उसस्की उगली चूत में घुस गयी और वो भी उंगली से अपनी चूत चोदने लगी. नाज़ बाथरूम में अपनी उंगली से चूत चोद रही थी और मैं कमरे में मूठ मार रहा था.” ओह….अहह…..” मेरे मूह से निकल गयी एक हल्की सी चीख जब मेरे लंड ने रस छ्चोड़ दिया. नाज़ ने शायद मेरी चीख सुन ली. इसी लिए वो घबरा उठी और उससने अपने हाथ को रोक दिया और टवल लपेट कर बाहर चली गयी. 

मैं घबरा गया और डर रहा था कि नाज़ को पता चल गया है की मैं उस्स्को नहाते हुए देख रहा था और वो मेरी शिकायत प्रभा देवी को लगाएगी. मेरी घर से च्छुटी हो जाएगी. खैर दूसरे दिन नाज़ मुझ से आँख नहीं मिला रही थी और ना ही मुझ से बात कर रही थी. एक अजीब बात ये थी कि नाज़ और नामिता च्छूप च्छूप कर धीमी आवाज़ में आपस में बातें कर रही थी. उस दिन सारा दिन मुझे स्कूल में उदासी लगी रही, लेकिन रह रह कर नाज़ का नंगा जिस्म मेरी नज़रों के सामने आ जाता. 

स्कूल से वापिस आते हुए नामिता मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी. दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में लेटा हुया था जब क़िस्सी ने दरवाज़ा खाट खाटाया. बाहर नाज़ खड़ी थी. वो लाल रंग की सलवार कमीज़ पहने हुए थी और बहुत सीरीयस लग रही थी.” गणेश, मेरे कमरे में आयो, ज़रूरी बात करनी है.” मेरी गांद फटी जा रही थी. उसस्के कमरे में नामिता पहले से ही बैठी थी. “तो जनाब, नाज़ को छुप कर नहाते हुए देख रहे थे? मैं अगर मा को बता दूँ तो अभी च्छुटी हो जाए तेरी.” नामिता ने मुझे धमकाया.”नही….मैने कुच्छ नहीं ……मेरा कोई कसूर नही….सच मुझे कुच्छ नहीं पता….” मैं कुच्छ बोल ना पा रहा था. 

नामिता ने मुझे गुस्से से देखा,” नाज़ ने तेरी आवाज़ सुनी थी. तुम क्या कर रहे थे? नाज़ तो अपनी चूत में उंगली कर रही थी, बेह्न्चोद तुम क्या कर रहे थे? इस तरह एक चुदासी लड़की को देखना अच्छा है? मैं और नाज़ कब से एक लंड की तलाश में थी और तू अपना लंड दिखाने की बजाए इसकी चूत देख रहे थे कामीने. तेरी सज़ा ये है कि या तो तू घर से जाएगा और या हमारे सामने अपने लंड का पारदर्शन करेगा. बोल क्या इरादा है?” कहते हुए नामिता हंस पड़ी और नाज़ भी मुस्कुराने लगी. मैं समझ गया कि दोनो लड़कियाँ मुझ से चुदवाना चाहती हैं. मेरी लॉटरी निकल पड़ी थी. 

मैं अपनी पॅंट खोलने लगा. तुम जैसी मस्त लड़कियो से प्यार करने के लिए मैं जनम से तड़प रहा हूँ और तुम मुझ से चुदवाना चाहती हो. तो देखो नामिता, कैसा लगा गणेश का लोड्‍ा? नाज़ तुम भी देखो रानी, आपकी सेवा में हाज़िर है मेरा कुँवारा लंड. सच में तुम मेरे लिए सुंदरता की देवी हो!” नामिता हंस पड़ी,” बहन्चोद, पहली बात ध्यान से सुन. सब के सामने तुम हुमको दीदी कह कर पुकारो गे और हम तुझे भैया. इस तरह क़िस्सी को शक नहीं होगा और हमारा खेल सेफ्ली चलता रहे गा. चुदाई के खेल को रिश्तों के पर्दे में ढक लिया जाएगा और हम तीनो मज़े करते रहेंगे, ठीक है?” 

नाज़ अपने कपड़े उतारने लगी और नामिता भी नंगी होने लगी. मुझ जैसे लड़के की किस्मत खुल रही थी. मेरी नज़र नामिता के नंगे शरीर से हट नहीं रही थी. जब उससने अपनी ब्लॅक कलर की पॅंटी उतारी तो मेरा दिल धक धक करने लगा. उसस्की चुचि एक दम कड़ी हो चुकी थी. नामिता की चूत पर छ्होटी छ्होटी झांट थी. शायद कुच्छ दिन पहले शेव की थी उससने अपनी चूत. उसस्की आँख में लाल डोरे तेर रहे थे. मैने काँपते हाथ से उसस्की चुचि को स्पर्श किया तो उसस्की आह निकल गयी. मैं भी पूरा नंगा हो चुका था, नाज़ मेरी पीठ से चिपकने लगी. नाज़ की भरपूर चुचि मेरी पीठ में गढ़ रही थी और उसस्के होंठ मेरी गर्दन को चूमने लगे. मैने नामिता को अपने आलिंगन में ले लिया एर उसस्की चूत पर हाथ फेरने लगा. उसस्की चूत एक आग की तरह दहक रही थी. मैने अपने तपते होंठ उसस्की होंठों पर रख कर किस करने लगा. कमरे में वासना की आँधी उमड़ चुकी थी. नाज़ की बिन बालों वाली चूत मेरी चूतड़ से टकरा रही थी और उससने झुक कर मेरे लंड को पकड़ लिया और आगे पीच्छे करने लगी. 

“दिल तो चाहता है कि मैं पहले चुदाई करवाउ पर डर लगता है. नाज़, तुम तो तज़ुर्बेकार हो, तुम ही पहली बार इस लंड का मज़ा ले लो और मुझे चुदाई की तड़प में जलने दो कुच्छ देर और. फिर तुम मुझे इस मूसल लंड से निपटने में मदद करना. गणेश भैया, तुम पहले अपनी बड़ी दीदी की चूत को ठंडा कर दो और बाद में मुझ को मज़े से चोदना. किओं नाज़ तैयार हो अपने भैया के लंड से अपनी चूत चुदवाने के लिए?” नाज़ बिना बोले मेरे लंड पर अपना मूह झुकाती चली गयी और उससने मेरे लंड को मुख में भर लिया. अपने एक हाथ से उससने मेरे अंडकोष उप्पेर उठा लिए और मेरे लंड को चूसने लगी. मुझे लगा जैसे मेरा लंड झाड़ जाए गा जल्दी ही. लेकिन मैने अपना ध्यान अपने सामने खड़ी वासना से भरी सेक्सी लड़कियो से दूर हटाया क्योंकि मैं अभी झड़ना नहीं चाहता था. 

नाज़ मेरा लंड चूस रही थी और फिर मैने नामिता की चूत को सहलाना शुरू कर दिया. मैने एक उंगली उसस्की चूत में डाल दी और आगे पीच्छे करने लगा. वो गरम हो कर अपनी चूत मेरी उंगली की तरफ बढ़ाने लगी, जैसे वो सारी उंगली ले लेना चाहती हो,” गणेश बेह्न्चोद, साले और डाल मेरी चूत में. अपनी बेहन को उंगली से चोद बेह्न्चोद, ज़ोर से पेल. मेरी चूत में आग लगी हुई है.” मैं भी बहुत गरमा चुका था,” दीदी, अभी तो चोदा भी नहीं है तुमको, तुमने तो मुझे पहले से ही बेहन्चोद कहना शुरू कर दिया. अगर मुझे बेह्न्चोद बनाने की इतनी जल्दी है तो पहले तुझे चोद लेता हूँ. जब छ्होटी बेहन से बिना चुदाई किए नहीं रहा जाता तो पहले उसस्की चूत ठंडी कर देता हूँ. नाज़ दीदी तो पहले काफ़ी लंड का स्वाद ले चुकी होगी. पहले तुझे ही किओं ना चोद लूँ, नामिता दीदी?” 

नामिता इतनी गरम हो चुकी थी कि उससने नाज़ को मेरे लंड से अलग किया और खुद चूसने लगी. नाज़ मुझ से लिपटने लगी और मैने अपने होंठ उसस्की चुचि पर रख दिए और उसस्का दूध चूसने लगा,” ओह भैया किओं तडपा रहे हो अपनी बेहन को, पी लो मेरा दूध. मेरे निपल चूस लो भैया, मेरी चूत से रस की बरसात हो रही है. अपनी बहनो को चोद डालो भैया, हम को चोदो मेरे भाई. एस्सा करो, तुम पहले नामिता की सील तोड़ लो. मैं तो पहले ही चुद चुकी हूँ, तुम नामिता को औरत बना डालो, भैया” मैने नामिता को अपने लंड से अलग किया और उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया. कामुकता से भरी नामिता मुझे गौर से देख रही थी और उसस्की नज़र मेरे लंड से नहीं हट रही थी. नाज़ ने नामिता को होंठों पर किस किया और फिर उस्स्को पीठ के बल लिटा कर नामिता की चूत चाटने लगी. मैं नाज़ के चूतड़ सहलाने लगा,” अहह…..ओह….नाआआज़….चोद दे मेरी चूत…….भैया अब नहीं रहा जाता…….गणेश….पेल दो अब तो…..मेरी चूत जल रही है…..और मत जलायो मुझे…..हाआँ नाज़….अब जीभ से नहीं चैन मिलता, मेरे अंदर लंड डलवायो मेरी बहना…” 

नाज़ मुस्कुराते हुए उठी और बोली,” गणेश भाई, तेरी बेहन अब भत्ती की तरह दहक रही है. अपना लंड एक हथोदे की तरह मारो इसकी जलती हुई चूत में. निकाल दो इस छिनाल की गर्मी. इसकी चूत को अपने लंड से भर दो. मैं इस्को चुदते देखना चाहती हूँ.” मैने नामिता की टाँगों को फैला दिया और उसकी चूत के होंठ अपने आप खुल गये. चूत के उप्पेर उसका छ्होला फुदक रहा था. मैने उसकी चूत को थपकी मारी तो वो कराह उठी,” जल्दी करो भैया, प्लीज़….और मत तडपयो, चोद डालो अब तो मेरे भाई” 

मैने लंड का सूपड़ा चूत के मूह पर टीकाया. एस्सा लगा कि सूपड़ा क़िस्सी आग के शोले पर रख दिया हो. धक्का मारा तो लंड आसानी से चूत में घुस गया. शायद नामिता की चूत का रस इतना बह रहा था कि उसस्की चूत कुँवारी होने के बावजूद आसानी से लंड निगल गयी. और या फिर उसने पहले ही बैंगन या खीरा इस्तेमाल कर की चूत को खोल लिया था. कट की ग्रिफ्त लंड पर कितना मज़ा देती है मैं नहीं जानता था. लेकिन अब मुझे महसूस हुआ की चुदाई का मज़ा क्या होता है. मेरे चूतड़ अपने आप आगे पीच्छे हो कर चुदाई करने लगे. असल में मैं जितनी तेज़ी से धक्के मारता, मुझे उतना ही मज़ा आता. उधर नामिता भी अपनी गांद उछाल्ने लगी मेरे धक्कों का जवाब चूतड़ उच्छल कर देने लगी. 

मैने नाज़ को कहा कि वो नामिता की चुचि को चूसना शुरू कर दे. नाज़ बिना बोले नामिता की चुचि पर झुक कर उसस्के निपल्स चूसने लगी. मेरे हाथों ने नामिता को चूतड़ के नीचे से जाकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा,” अर्र्र्रररगज्गघह……मैं मर गइईई….ज़ोर से भाई….चोद बेह्न्चोद….चोद मुझे…..मैं गइईई…..गणेश…….ज़ोर सी” च्चपक च्चपक की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था जब मेरा लंड नामिता की चूत के अंदर बाहर होता.” बहुत मज़ेदार हो तुम बहना….मैने एस्सा मज़ा कभी नहीं लिया…अगर पता होता इतना मज़ा आता है तो बेहन तो क्या मा को भी चोद देता को….ओह्ह्ह मेरी प्यारी बहना, बहुत मज़ेदार हो तुम…तुम ने मुझे धान्या कर दिया दीदी” 

तभी नामिता की चूत मेरे लंड पर और ज़ोर से कस गयी और उसस्का बदन एंथने लगा. उसस्की साँस मुश्किल से चलने लगी. उसस्की जंघें मेरी कमर पर कस गयी. इधर मेरा लंड भी छूटने को था. मेरा लंड राजधानी एक्सप्रेस के पिस्टन की तरण चुदाई करने लगा,” ओह…दीदी….बस…..तेरा भाई झाड़ रहा है…..मेरा लंड झाड़ रहा है……क्या मैं पिचकारी चूत में डाल दूं या बाहर निकाल लूँ…भगवान कसम नहीं रहा जाता दीदी” नामिता की चूत पानी छ्चोड़ चुकी थी और वो अपने आप को संभाल कर बोली,” बाहर निकाल लो लंड, को भैया, मुझे गर्भवती नहीं होना है, बाहर निकालो जल्दी से.” 

मैने अपना लंड बाहर खींचा तो नाज़ ने झट से झपट लिया और अपने मूह से लगा कर चूसने लगी और मेरा अंडकोष से खेलने लगी. मेरे हाथ नामिता दीदी की भीगी चूत को सहलाने लगे. अचानक मेरा लंड पिचकारी छ्चोड़ने लगा. मेरा लंड रस नाज़ के गालों पर, चुचि पर और कंधों पर जा गिरा. कुच्छ तो उससने पी लिया लेकिन रस की धारा इतनी तेज़ थी कि नाज़ के नंगे जिस्म पर फिर भी गिर पड़ा. नाज़ एक रंडी की तरह मेरा रस चाटने लगी. 

मेरा लंड अब सिकुड चुका था. अब मुझे चुदाई में कोई दिलचस्पी ना रही थी. मैं नामिता की बगल में लेट गया. नाज़ की बारी अभी बाकी थी. लेकिन मेरे में अब दम नहीं रहा. मेरे पैरों के पास नाज़ मुझे चूमने लगी. उसस्के होंठ मेरे पैरों के अंगूठे को लंड की तरह चूसने लगे. फिर उससने मेरे पैरों को किस किया, फिर टख़नो को. धीरे से उसस्की ज़ुबान उप्पेर उठने लगी. उसकी ज़ुबान मुझ में फिर से वासना भरने लगी और मेरा लंड फिर से सिर उठाने लगा. मैने नामिता की चुचि को मसलना शुरू कर दिया. वो हंस कर बोली,” अपनी बेहन को चोद कर अभी दिल नहीं भरा, भैया? फिर से लंड खड़ा हो रहा है. मेरी चूत की चटनी बना दी है तुमने.” कहते हुए नामिता ने मेरे लंड को पकड़ लिया और मुठियाने लगी. नीचे से नाज़ की जीभ और हाथ मुझे उतेज़ित कर रहे थे. मुझे होश तब आया जब नाज़ ने मेरे अंडकोष को मूह में भर लिया,”गणेश भैया, अब तुझे दूसरी बेहन को चोद कर शांत करना है, मेरे भाई. उस्स्को भी तो उसस्का हिस्सा मिलना चाहिए.” नामिता मेरे कान में बोली. 

नाज़ ने मुझे पेट के बल लेट जाने को कहा तो मैं लेट गया. मुझे नहीं पता था कि उसस्का इरादा क्या है. मुझे अपने दोनो चुतताड पर दोनो लड़कियो के होंठ महसूस हुए. वो साली गश्ती लड़कियाँ मेरे चूतड़ चाटने लगी. क़िस्सी का हाथ मेरे चूतड़ को फैला रहा था. तभी एक उंगली मेरी गांद में घुसाने की कोशिश करने लगी. मैने गांद को टाइट कर लिया. तभी मेरी गांद पर एक ज़ोरदार थप्पड़ लगा. मेरे होश ठिकाने आ गये दर्द के मारे.” साले कुतिया की औलाद, अपनी बहन को चोद रहा था तो मज़े ले रहा था, अब अपनी गांद में उंगली गयी तो भड़क रहा है. नामिता ने तेरा 9 इंच का लंड ले लिया तब तो मज़े लेते थे, अब एक उंगली से गांद फटने लगी? अपनी गांद को ढीला छ्चोड़ो अगर हमारे साथ मज़े लेने हैं तो,” नाज़ ने एक और ज़ोरदार थप्पड़ मेरी गांद पर मारते हुए कहा. अजीब बात थी कि दूसरे थप्पड़ से मुझे दर्द तो हुआ लेकिन मज़ा भी आया. मैं मूड कर बोला,” क्या बात है? अपने भाई की गांद मारने का इरादा है क्या? तुम्हारी खातिर तो मैं कुच्छ भी कर लूँगा, मेरी बहनो. लो चोद लो अपने भाई को अगर यही इरादा है” 

मैने अपनी गांद ढीली छ्चोड़ डी. तभी मुझे अपनी गांद में एक ज़ुबान घुसती महसूस हुई और मुझे बहुत मज़ा आया. नामिता या नाज़ मेरी गांद को ज़ुबान से चोद रही थी और दूसरी मेरे चूतड़ चाट रही थी. मेरा लंड काबू में नहीं था. अगर और कुच्छ देर यही खेल चलता रहा तो मैं झाड़ जाता. लेकिन तभी मुझे सीधा कर दिया गया. नाज़ ने अब अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. मुझे किस कर के बोली,” हरामी, अपनी गांद का स्वाद चख ले मेरे होंठों से. नामिता, हमारे भाई की गांद बड़ी मसालेदार है. अगर टेस्ट करना है तो कर लो. फिर इस्सको भी तो अपनी गांद का टेस्ट करवाना है हमने!” 

मेरा लंड आसमान की तरह उठा हुआ था. नाज़ मेरे उप्पेर चढ़ती हुई मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ने लगी. उसस्की चूत भी रस टपका रही थी,” किओं भैया, चढ़ु क्या तेरे लंड पर? करूँ सवारी अपने भैया के लंड की? तू भी क्या याद रखेगा की क़िस्सी लड़की ने चोदा था तुझे. गणेश भाई, नीचे लेट कर बहन चोदने का मज़ा लो मेरे भैया,’ कहते ही उससने मेरे लंड पर अपनी चूत को गिरा दिया. गुप की आवाज़ से मेरा लंड नाज़ की अनुभवी चूत में घुसता चला गया. मैने नाज़ के चूतड़ कस कर पकड़ लिए और नीचे से धक्के मारने लगा. नाज़ की मोटी चुचि मेरे होंठों के सामने झूल रही थी और मुझ से ना रहा गया तो मैने उसस्की चुचि को मूह में ले कर चूसना शुरू कर दिया. नामिता नीचे जा कर मेरे अंडकोष चूमने लगी. मेरी जंघें नामिता के चेहरे पर कस गयी. 

वाह गणेश बेटा, एस्सा सुख तुझे नसीब हुआ है, मैं अपने आप से बोला. नाज़ मुझे उप्पेर से चोद रही थी. माखन जैसी चूत मेरे लंड की मालिश करते हुए चोद रही थी.” नाआआआज़ मेरी बहना, क्या चीज़ हो तुम…..क्या मज़ेदार चूत है तेरी….साली गश्ती की तरह चुदति हो….ज़ोर से चोद अपने भाई को….ओह नामिता चूसो मेरे अंडकोष…..हााअ……..एयाया…..चोदो” नाज़ ने स्पीड तेज़ कर दी. मेरी मूह बोली बेहन चुदाई की कला में अनुभवी थी…नाज़ साली धक्के धीरे कर देती जब मैं झड़ने के करीब होता. मैं उसस्के निपलेस चूस्ता रहा. हम दोनो हाँफ रहे थे. मेरी नामिता बेहन ने अब मेरी गांद में ज़ुबान घुसा डाली और मेरी गांद चोदने लगी. 

” हाई भाई….चोद मुझे….चोद अपनी नाज़ को…अपनी बहना को….मेरी चूत पानी छ्चोड़ रही है….तू मेरे अंदर पिचकारी मार लेना…..मैं गोली खाती हूँ….पेलते रहो मुझे भाई….चोद डालो डाल दो रस मेरी प्यासी चूत में….चोद……चोद….चोदो…चोद चोद मदेर्चोद मैं झडियीई” नीचे से नामिता ने अपनी उंगली मेरी गांद में डाल कर चुदाई शुरू कर दी तो में भी झड़ने लगा. मेरा रस नाज़ की चूत में गिरने लगा. वो उप्पेर से थाप पर थाप मार रही थी. मुझे पता ही नहीं चला कि कब तक मेरा लंड झाड़ता रहा. शाम की 5 बजे तक हम तीनो नाज़ के बिस्तर में नंगे हो सोते रहे 
टू बी कंटिन्यूड................ 








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