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Tuesday, July 7, 2015

FUN-MAZA-MASTI शुभारम्भ-38

FUN-MAZA-MASTI

शुभारम्भ-38



मेरी निगाहें उनके लोशन लगी टाँगों पर इस कदर चिपकी थी जैसे गुड पर मखकी.

कोमल भाभी ने दूसरा पैर उठाया, उनके बदन के आड़ से मुझे यह पैर पूरा नही पूरा नही दिख रहा था मगर अब मेरे मन की आखें खुल चुकी थी…..

धीरे धीरे उनके हाथ चल रहे थे और धीरे धीरे बाबूराव अपने सर उठा रहा था

कोमल भाभी ने बड़े इतमीनान से अपने दोनो हाथों पर लोशन लगाया और थोड़ा लोशन हथेलियो पर लगाया और

अपने दोनो हाथ पीछे किए और अपनी मस्त गदराई गांड पर लोशन लगाने लगी….मुझे गाउन मे से सिर्फ़ एक झलक दिखी उनके नितंबो की……भेन चोद मैं तो बौरा गया.

गाउन का परदा सिर्फ़ एक पल के लिए हटा था और मुझे उनके गदराई गांड और जांघों का पिछला हिस्सा ही दिखा मगर……

अगर मगर गया भाड़ मे….बाई गोड मज़ा आ गया.

कोमल भाभी बड़े ही प्यार से धीरे धीरे अपने दोनो गोलों पर लोशन लगा रही थी…..

उनके हिलते हाथ ही दिख रहे थे गाउन मे से मगर मेरे फायर एंजिन की घंटी फुल टन टना रही थी.

कोमल भाभी की पीठ मेरी तरफ थी इस लिए मे सामने का कुछ नही देख पा रहा था….

भाभी ने ड्रेसिंग टेबल पर रही दूसरी क्रीम उठाई और शीशे के सामने खड़ी हो गयी.

अब दिखा…..गाउन तो आगे से खुला था मगर मम्मे छुपे थे….

मगर उनकी गोल गोल गहरी नाभि फुल फोकस मे दिख रही थी..

कितना सितम करोगे से इतने से बाबूराव पर.

भाभी ने थोड़ी क्रीम ली दोनो हथेलियो पर रगड़ी और…..


और धीरे से खुले गाउन मे हाथ डाल कर अपने मम्मो पर लगाने लगी…..

भईय्ये…..कोमल भाभी जैसा आइटम……सिर्फ़ एक गाउन मे …….वो भी जो आगे से खुला हो….अभी अभी नहाई हुई……अपने ही हाथों से…….अपने ही मम्मो को…..अगर रगड़ रही हो……वो भी आपके सामने……..तो क्या करोगे……

मेरा तो गला ही सुख गया था……इतनी देर से रोशनदान के बाहर बैठा था…..मादरचोद मच्छरो ने पूरे साल का खून दस मिनिट मे ही पी लिया था मगर मुझे लॅंड परवाह नही थी…

मैं तो देख रहा था….कोमल भाभी अपने स्तनो की मालिश कर रही थी…..

तभी शायद उनसे अपने निप्पलों पर रगड़ लग गयी और वो एक दम चिहुंकी, एक आह निकली उनके मुँह से…….एक आँख बंद करके…….अबे यार………..मान….जा…….प्लीज़

मेरे कानों मे मुझे मेरी ही धड़कन सुनाई दे रही थी…..भक …..भक….

इत्ती ठरक तो कोमल भाभी को आध नंगा देख कर ही…..आ गयी

अभी तो भय्या जी आने वाले थे..

आज तो जाने क्या क्या फटेगा……
 
किसी भी चीज़ की हद होती है यार…..

साला 10 वॉट के लट्टू पर 100 वॉट का लोड डालोगे तो कैसे झेलेगा.

मेरी तो साँसें ….रही थी और जा…..रही थी जैसे की मैं दमे का मरीज़ हूँ.

भाभी ने तो मम्मो पर क्रीम लगा ली थी मगर मेरी क्रीम उबाल मार रही थी.

दूध को बहुत गरम किया जाए तो उफन जाता है और उसे गरम करते ही जाए और उफनने ना दे तो क्या होता है……

रबड़ी बन जाती है.

मेरी तो आज रबड़ी बन गयी थी, मेरे अंदर अरमान ऐसी उफान रहे थे की बस….

साली चुतियाई यह भी थी की काँच मे से थोड़ा बहुत तो दिख भी रहा था मगर आब--ज़मज़म नही दिख रहा था

कोमल भाभी का रनवे सॉफ था ....कि .....हरा भरा समझ नही रहा था….

एक तो यूँ भी रोशनदान पर कुछ पुराने अख़बार लगे थे…..ताकि मेरे जैसे हीरसु ताक झाँक ना कर सके मगर अखबार भी बेचारा कब तक मौसम झेलता…..जगह जगह से फटा था….इस लिए नज़ारे देखे जा रहे थे.

मगर कोमल भाभी की मुनिया का दीदार नही हो पा रहा था……भाभी पलटी और बेडरूम से बाहर निकल गयी….मैं तुरंत दूसरे रोशनदान की और भगा

यहाँ थोड़ा मामला ठीक था, रोशनदान पर अख़बार तो यहा भी लगा था मगर झिर्रिया बड़ी थी….मज़ेदार 20 मेगा पिक्सेल की क्लॅरिटी रही थी.

कोमल भाभी का घर कुछ ऐसा बना था की….एक पोर्च था जिसकी छत पर मैं कूदा था….उसके नीचे एक गॅरेज और कार खड़ी करने की जगह थी…..और घर का मेन गेट ड्रॉयिंग रूम मे खुलता था….फिर उस से जुड़ा हुआ डाइनिंग रूम और एक खुला किचन ….

अपुन का स्पॉट इतना शानदार था की लग भग पूरा घर का एक एक कोना दिख रहा था….

बॉस आज तो लाइव शो देखूँगा….मगर एक चोद थी.

मैं जिस जगह बैठा था वो सेफ नही थी….सामने वाले घरों से कोई भी मुझे देख सकता था….

मगर मैं तो परवाह नाम के गाँव से बहुत आगे निकल आया था ......बाबुराव माने ना….

मैने रोशनदान से झाँका……कोमल भाभी ने गाउन आगे से बाँध लिया था और सोफे पर से कागज और दूसरी चीज़े उठा रही थी…..वो सोफे के पीछे खड़ी थी और झुक कर चीज़े उठा रही थी

कोमल भाभी ने सिर्फ़ वो गाउन पहना हुआ था…..हालाँकि गाउन आगे से बँधा था मगर टाइट बँधा होने से गाउन उनके बदन से चिपक गया था…

गाउन सॅटिन के कपड़े का था शायद……हल्का भूरा….गुलाबी…..हाँ पीच कलर का…

अब कोमल भाभी ने गाउन के अंदर तो कुछ पहना था नही….उस नरम सॅटिन कपड़े को उनके एक एक अंग अंग से और एक एक उभार से चिपकना ही था….सो चिपक गया.

पता नही कोमल भाभी को बिना गाउन मे देख के मेरी ढेबरी ज़्यादा टाइट होती या ऐसी हालत मे देख कर…

वो चीज़े उठा रही थी और सोफे के साइड मे बनी टेबल पर रख रही थी और उनके हिलने से हिल रहे थे उनके मम्मे ……

कोमल भाभी मोटी तो नही थी….बस भरी पूरी थी…..शादी को ज़्यादा समय नही हुआ था शायद 2-3 साल….बदन भर गया था उनका.

दोनो मम्मे गाउन के अंदर सावन के झूले झूल रहे थे…..रोशनदान 8-9 फुट उँचा था और भाभी मुझसे 8-9 फुट की दूरी पर थी थी…..मेरे देखते ही देखते उनके निप्पल गाउन मे उभर आए…..गाउन का चिकना कपड़ा उनके हिलते मम्मो और निप्पल को रग़ड रहा था और रग़ड का उत्तर निप्पलों से अपने सर उठा कर दिया था…

कसम गंगा मैय्या की……मुँह सुख गया था ठरक के मारे……

भाभी के चेहरे पर एक बाल की लट गिर आई….मेरा ध्यान उस पर गया….भाभी ने झुके झुके ही अपने हाथ के पिछले हिस्से से उसे उपर किया ….मगर लट भी मेरी जैसी थी…..ज़िद्दी….फिर से लटक गयी….अब भाभी ने थोड़ी चिड से साथ उसे उठाकर अपने कान के पीछे बिठा दिया.

भाभी के मम्मे ऐसे हिल रहे थे की मुझे दया आ गयी….आओ बेचारो….तुम्हे सहारा दें दे…..भाभी सीधी हुई तो गाउन उनके बदन पर कस गया……

हाय…..कितना सितम झेलेगा यह कमज़ोर दिल….

बाबूराव तो सितम झेलने को तैय्यर था….मगर भाभी सेवा का मौका दे तब ना.

भाभी सोफे के पीछे से घूम कर आई और सोफे के कुशन ठीक करने लगी….अब मेरे सामने कोमल भाभी की कोमल गदराई गांड थी…..

भाभी की हिलने डुलने से उनकी गांड भी हिल रही थी…..ऐसे लग रहा था मानो कोई सेक्सी गाना बज रहा हो….और कोमल भाभी अपने आशिक़ को उकसाने के लिए अपनी गदराई गांड को थिरका रही थी…...

मेरी आँखें भाभी के बदन पर ऐसे दौड़ रही थी की बस…मैं एक नज़ारे को पूरा पी लेना चाहता थी…..पेंट के अंदर बाबूराव ने तो गदर मचा रखा था…बार बार सेट करना पढ़ रहा था…

भाभी सीधी खड़ी हुई और अपने दोनो हाथों से चेहरे पर आए बाल पीछे कर दिए….

भाभी की एक एक हरकत मुझे अदा लग रही थी.

तभी डोर बेल बजी……. भैय्या आ गये थे.

मैं तुरंत दूसरे रोशनदान की और भागा….शो छूटना नही चाहिए बॉस.

यहाँ थोड़ा पंगा था…..नया अख़बार लगा था पुराने के उपर…..दरवाजा तो नही दिख रहा मगर उसके आस पास की जगह दिख रही थी. कोमल भाभी मुझे दरवाजे की और जाती दिखी….

भाभी ने पहले दरवाजे के छेद मे से बाहर झाँका….ज़रूरी था बॉस अगर बगैर देखे खोल दे और सामने भाभी के पतिदेव की जगह पर सुबह का अख़बार माँगते हुए शर्मा अंकल हुए तो..?

भाभी के ऐसे जलवे देख कर बेचारे बुढ्ढे को तो अटेक ही आ जाए..

भाभी ने शायद दरवाजा खोल दिया, कुछ आवाज़ भी आई पर समझ नही नही आई….तभी मुझे भाभी फिर से दिखी…दो हाथ उनको बाहों मे जकड़े थे..

भैय्या तो फुल मूड मे दिख रहे है….

मादरचोद अख़बार की वजह से कुछ दिख ही नही रहा था……की क्या चल रहा है…..भाभी उन बाहों मे कसमसा रही थी……मैं तो भेन्चोद एक दम सतर्क हो गया…..भेन्चोद भैय्या जी तो भाभी की दहलीज़ पर ही ठोक देंगे लगता है.

भैय्या का एक हाथ हटा और शायद कोमल भाभी के कोमल कोमल जोबनों को मिसने लगा…

अरे लंड…..यह रोशनदान की तो मैं……साला पिक्चर पूरी नही दिख रही थी…

भैय्या जी एक दूसरा हाथ कोमल भाभी की गदराई गांड का नाप लेने लगा….मेरी तो हालत ही खराब….

बाबूराव एक कदर कड़क हो गया था की अब तो साला बैठने मे दिक्कत होने लगा….

मैने सोचा की शो तो स्टार्ट हो ही गया है….बाबूराव को भी बाहर निकल कर सीन दिखा दूं…. थोड़ा सर पर हाथ फेर दूं…..शांत हो जाएगा…

तभी कोमल भाभी भैय्या से छिटक कर दूर हो गयी और पीछे हटी….भैय्या जी ने हाथ बदाए तो उन्होने अंदर की और इशारा किया और किचन की और बढ़ चली….

भैय्या जी आगे बढ़े इसके पहले मैं डाइनिंग रूम से रोशनदान पर पहुँच गया…

मैने तुरंत अपने स्थान संभाला और आखें रोशनदान से भिड़ा दी…

भैय्या जी सोफे पर बैठे थे….

मगर एक मिनट ….

ओ मादर चोद ……यह भेन का लंड….बेटीचोद कौन हैं…?
 



FUN-MAZA-MASTI शुभारम्भ-37

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शुभारम्भ-37




 ….….कल….कल….दिन मे…..आकर पढ़ा दूँगा……”

ठीक है……2 बजे आइयो…….”, पम्मी आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा.

यार…..पिया तो 2 बजे घर पहुँच ही नही पाएगी तो फिर…..

और अपुन को सीन क्लियर हो गया….आंटी जान बूझकर जल्दी बुला रही है…..ताकि….

मैं तुरंत सरदार जी के घर ने निकला और सड़क पर आ गया.
रास्ते तो सुनसान हो चुके थे पर अपने भेजे की वाट लगी हुई थी….
बाबूराव को देखो तो अपना सर उठाए अभी तक पम्मी आंटी को ही ढूँढ रहा था, पर कम से कम फटफटी तो नॉर्मल हो गयी थी
साली….पम्मी आंटी भी क्या ठरकी औरत है यार, इतना महा मादरचोद पति होने के बाद भी मुझ पर ऐसे ही हाथ डाल दिया ?

तभी मेरी ट्यूब लाइट जली ……

आंटी को जो चाहिए…..वो मुझे से मिल भी जाएगा और किसी को शक भी नही….

अच्छा…..

कीड़ा कुलबुलाने लगा.

पम्मी आंटी की हरकटो ने भेजे को हिला डाला था…..बाबूराव इस कदर टन टना टन खड़ा था मानो पेंट ही फाड़ देगा…..मैं पेंट के उपर से ही बाबूराव को थोड़ा अड्जस्ट किया, साला मुंडी अंडरवियर की एलास्टिक से निकल के तैयार बैठा था ..

आज तो नीलू चाची की फाड़ के रख दूँगा….

सही मे यार….

इतना गरम तो मैं आज तक नही हुआ था.

जैसे जैसे मेरे कदम घर की और बढ़ रहे थे वैसे वैसे मेरी ठरक का मीटर बढ़ रहा था.

आज तो चाची को पकड़ के सीधा साड़ी उपर करूँगा और पेल दूँगा….

मैं अपनी ही धुन मे चला जा रहा था. मन ही मन प्लान करते करते कब सड़क के बीच आ गया पता ही नही चला.

पो... पो....

मेरी तो गांड ही फट गयी, भेन्चोद बस वाले ने ठीक पीछे आकर् ही हॉर्न मारा.

मैं हड़बड़ा कर फुटपाथ पर आया. बस क्रॉस हुई तो दरवाजे से लटका लोण्डा चिल्लाया....

अबे ओ अंधे की औलाद, मरेगा क्या मादरचोद ....? “

अबे जा...भेंन के लौड़े.....”, मैं चिल्लाया.

अचानक मैं रुक गया....आज पहली बार मैने किसी को गाली दी थी वो भी बिना हकलाये.

पम्मी आंटी ने तो बाबूराव पर हाथ फेर कर ही मुझे बदल दिया, अब जाने क्या क्या होगा.

चाची को पेलने के मंसूबे बनाता बनाता मैं घर पहुँचा....

ना चाचा का स्कूटर था ना पपाजी का....मा तो यूँ भी लेट आने वाली थी.

मतलब की मैदान साफ़...

मेरे पूरे बदन मे सुरसुरी ही होने लगी....मैने बेल बजाई.

दो बार और बजाने पर दरवाजा खुला और हाथ मे थाली लिए चाची दिखी.

ये थाली का क्या लोचा है भेन्चोद ?

चाची बोली, “राम....अच्छा हुआ तू आ गया.....जा ये थाली सामने शर्मा जी के यहाँ लेजा.....इसमे बाबाजी का खाना है"

बाबाजी....?

अच्छा वो बाबाजी.....चाची ने कहा था.

मैं शर्मा जी के यहा गया. दरवाजा खुला था.....
पहले कमरे मे 7-8 औरते बैठी थी....मैने आवाज़ लगाई..

लता आंटी.....? “ ( शर्मा आंटी का नाम लता था.

आंटी एक कमरे से बाहर निकली और मेरे हाथ मे थाली देख कर बोली, “अरे वाह....ले आया खाना....वाह...वाह.....ला....दे.....अब तो अनिता (नीलू चाची) की मुराद ज़रूर पूरी होगी....ला बेटा ला.....अच्छा सुन.....अनिता को याद दिला देना....उपवास का......और परहेज का.....

उपवास ....? परहेज.....?

क्या चुतियाई है ?

मैं घर पहुँचा...चाची बाहर ही खड़ी थी.....

दे आया.....वाह....लल्ला......ला दे....यह थाली मुझे दे दे....

मुझे याद आया की शर्मा आंटी ने कुछ कहा था....

चाची.....वो शर्मा आंटी ने कहा था.....की...उपवास और.....वो....हा....परहेज पूरा रखना

चाची मुस्कुरई और बोली, “हन....रे.....रखूँगी रे.......गोद भर जाए बस...

अच्छा तो यह लोचा है.....बाबाजी ने नया नुस्ख़ा दिया है. चलो बढ़िया है..

मगर मुझे तो चाची से कुछ काम था ना....

चाची किचन मे गयी और सींक मे थाली धोने लगी, मैं धीरे से उनके पीछे गया और अपने बाबूराव उनकी गांड पर चिपका कर आगे झुक कर पानी का ग्लास उठाने लगा. चाची एक दम से चिहुकि और अलग हट गयी, मैने पानी पिया और ग्लास रखने के लिए आगे बढ़ते हुए फिर से बाबूराव को चाची की गांड पर चिपका दिया...

लल्ला......”, चाची चिल्लई.

मैने अपने हाथ चाची की कमर मे डालने की कोशिश की.

चाची फिर ज़ोर से चिल्लई, “अरे हट परे.......

इसकी मा की चूत....

चाची हमको ही छका रही थी....

वही पुराना चूहे बिल्ली का खेल

मगर आज तो हम बिल्ली मारिबे

सालीयूँ इतनी गरम है की हाथ लगाओ तो कसमसने लगती है .....

सीन क्या है ?

चाची पीछे मूडी, उनका चेहरा बिल्कुल तमतमाया हुआ था....

मैने हाथ आगे बढ़ाया.,

चाची फिर बोली, “न..न...न.....नही.....मत कर हरामी.......

फटफटी ......धीरे....धीरे.....चली.....रे.......

क....क.....क.....क्या हुआ चाची......

मैने मना किया ना....अरे तेरी मोटी बुदधि मे कुछ आता नही है क्या रे.....अरे बाबाजी ने परहेज रखने को कहा है......नासपीटे ...उपवास तुडा देगा तू.......

हैं..... क…..क्या….?”

चाची ने मेरा लटका हुआ चेहरा देखा तो समझने के अंदाज़ मे बोली, “बाबाजी.....ने दवाई दी है.....और कहा हे की 1 महीने तक दवाई लेना है और परहेज से रहना है......,मतलब समझा ना तू....


खड़े लॅंड को ऐसा धोका ???

भेजे की माँ, भेन, भाभी, आंटी सब हो गयी यार.....

एक बार तो मन किया की माँ की आँख.....चाची को पकड़ के पेल ही देता हूँ.....पर जब उनका चेहरा देखा तो ये आईडिया खिड़की से बाहर निकल गया.

चाची अभी तक मेरा मुंह ही तक रही थी....

"खाना लगा दूँ........."

"हाँ....?......क्या.....?"

"खाना लगा दूँ.......देख पूरी और भाजी बनायीं है.....बाबाजी ने कह कर बनवाई है........."

बाबाजी का घंटा......

"नहीं भूख नहीं मुझे........"

"हाय हाय......राम घी की पूरी और तरकारी है........खा....ले.....प्रसाद समझ कर....."

अरे यहाँ मेरे भेजे की टे पु हो रही थी और यह चाची की चबर चबर बंद नही हो रही....

""अरे.....मैंने......खाना......खा......लिया......है........नहीं......खाना......मुझे........"

चाची के चेहरे पर एक्सप्रेशन चेंज हो गए......बेचारी हर्ट हो गयी.

"...हैं लल्ला......नाराज़ हो गया......?"

मैंने न में सर हिलाया...मगर मेरे माथे पर बल अभी तक पड़े हुए थे.

अब यार.....इंसान का बाबुराव खड़ा हो.....उसका मूड बना हो.......उसके सामने चाची हो......घर में कोई नहीं हो.........

और ऐसी चुतियाई सुनने को मिले तो और क्या करे....?

लौड़ा चाची को कौन समझाए की बच्चा उपवास करने से नहीं.......सहवास करने से होता है.

बहुत बड़ी चोद हो गयी यार.......

चाची ठंडी साँस भरकर बोली, "...राम.....तो मैं क्या करू......तेरे चाचा न तो इलाज़ कराते है न कुछ और.......वो डॉक्टर मेडम ने कहा था की महीना आने के बाद दसवे दिन से बीसवे दिन तक रोज़..........कोशिश करना.......तो क्या मैं अकेले कर लूँ कोशिश......तेरे चाचा तो घर आते है.....खाना खाते हैं.....और जब तक मैं सब काम निबटा कर कमरे में जाती हूँ तब तक तो.....सो जाते है.......
राम इसमें मेरी क्या गलती है.........सब मुझे दोष देते है.......कल ही बड़ी बुआ का फ़ोन आया था.....मुझसे बोलती है की यह सब पिछले जनम का किया धरा है......तेरी दादी जी बोलती हैं की मेरे माँ बाप..........."

इतना बोलते बोलते चाची की आँख ही भर आई.

अब यार......यह कोनसा रायता फ़ैल गया.

मैंने चाची को बोला, "अरे ....अरे......चाची ऐसे मत करो......रोइयो मती......सब हो जायेगा......आपने उपवास किया है न.....बस.."

चाची तो आँख नाक पोछती हुयी चली गयी.

मगर मेरा क्या.....?

चाची की आदत ही गांड मटका कर चलने की है....अंदर जाते जाते भी गांड को ऐसे मटका रही थी की.......

कीड़ा कुलबुलाने लगा.

मगर अबे कछु नाइ होत.....

चाची तो निकल ली...मेरी साली खोपड़िआ काम नहीं कर रही थी की क्या करू.....?

चूत का स्वाद मिलने के बाद मुठ्ठी मारने में मजा ही नहीं आ रहा था......और न ही मन था.

मुझे तो ....चूत ......ही चाहिए थी.

कसम गंगा मैया की............. ऐसा खोपड़ा खोपरा हो गया था, अब का बताई….

अपुन तो मन मसोस भी लेते मगर बाबूराव तो माने नही मान रहा था. साला वैसा का वैसा ही खड़ा था.

उसके उपर से यह गर्मी….चिप चिपी ….

पंखे के नीचे खड़े होकर भी लग रहा था की जैसे भट्टी के मुहाने पर खड़ा हूँ, भोसड़ी का पंखा भी चु चु करके जितनी गरम हवा इक्कठी हो रही थी, समेट कर मेरे सर पर डाल रहा था.

बाई गोड … .खोपडिया खराब हो गयी थी.

कुछ समझ मे नही आया तो मैं बाहर आकर खड़ा हो गया…….रात की दस बज चुके थे….शर्मा अंकल के यहा से रह रह कर आवाज़ें जाती थी….बाबाजी जो आए हुए थे.

थोड़ी ठंडी हवा चली…..दिल को तो नही मगर बदन को थोड़ा सुकून मिला.

मैने सोचा चलो छत पर ही चलते है…..कमसकम अच्छी हवा तो मिलेगी.

हमारी छत दो मंज़िल की हैबाकी सब की एक मंज़िल कीतो हवा तो अच्छी मिल ही जाती.

मैं छत पर गया और कसम से यहा तो माहोल ही चेंज था.

मेरा शहर थोड़ा पहाड़ी ज़मीन पर है….थोड़ी उँची थोड़ी नीची…..हमारे घर की छत से आधा शहर दिखता था……रात की रोशनी मे नहाया….

बड़े तालाब के पानी पर पड़ती रोशनी……किसी के भी मन को शांत कर सकती थी.

मगर खड़े बाबूराव को तो एक ही चीज़ शांत कर सकती थी…..

मैं बेचैन सा छत पर चक्कर लगाने लगा.

मैं मुंडेर पर खड़ा था कोमल भाभी के घर की और मुँह किए….ठंडी हवा चेहरे पर टकरा रही थी…..सहला भी रही थी और उकसा भी रही थी. कोमल भाभी की छत हमारी छत से लगी थी मगर एक मंज़िल नीचे थी. हमारा घर मंज़िला था और उनका एक मंज़िला.

तभी कोमल भाभी की छत पर बना रोशनदान….एक दम से रोशन हो गया.

उनके बेडरूम का रोशनदान छत पर था….झिर्रिया बनी थी.

उधर रोशन दान रोशन हुआ और इधर….

कीड़ा कुलबुलाने लगा.

उड़ी मरने मे तो अपुन ऐसे ही एक्सपर्ट थे…….मेरी छत और कोमल भाभी की छत मे करीब दस फीट की छलाँग थी……मैने आव देखा ना ताव मुंडेर पर हाथ से लटक कर पैर दिवार पर निकली ईंटों पर जमाए और यह नीचे….

कसम से बिल्ली भी इतनी धीरे से नही कूद सकती….

मैं दबे पाँव रोशनदन की और बड़ा…..

अगले ही पल मैं रोशनदान के पास उकड़ू बैठा था और अंदर झाँक रहा था.

मगर बेडरूम खाली था.

किस्मत से रोशनदान बेडरूम की दीवार के उपर बीच मे बना था, पूरे रूम का नज़ारा ऐसा दिख रहा था मानो मैं स्टेडियम मे बैठा हूँ….

पवेलियन सीट पर….

अब तो मॅच शुरू होने का इंतेज़ार था.

भाभी की पतिदेव आने वाले थे ना आज.

मैं तो नही मगर बाबूराव आने वाले सीन की उम्मीद मे हथेलिया मसल रहा था.

तभी भाभी के बेडरूम के बाथरूम का दरवाजा खुला और……

दीदारयार हो गया.

सूरज की गर्मी से तपी हुई ज़मीन पर पानी की बूँदें गिरने लगी थी बाबू…..

कलेजे को ठंडक और आँखों को नज़ारा.

भाभी नहा कर आई थी……ऐसी गर्मी मे तो रात मे नहाना ही पढ़ता है ना, मगर आज तो प्रयोजन ही दूसरा था….भैया जी टूर से आने वाले थे.

कोमल भाभी के बाल गीले थे….और उन्होने एक गाउन पहना हुआ था…..वो आगे से खुला होता है ना ….वो वाला.

मगर उनकी पीठ थी मेरी तरफ……इस लिए आगे का सीन नही दिख रहा था

एक तो यह रोशनदान की झिर्रिया भी…..भें चोद …..कभी मुंडी निचे कभी उपर करनी पढ़ रही थी.

कोमल भाभी जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हो गयी और टेबल पर से एक बॉटल उठा ली.

भाभी ने अपने पैर ड्रेसिंग टेबल पर रखा……ओये….

भाभी का आगे से खुला गाउन उनके चिकने पैर से सरकता हुआ बगल मे लटक गया और उनका दूधिया पैर जाँघ तक लाइट की रोशनी से नहा गया.

गडप…..गडप….कसम से दो बार थूक निगलना पड़ा.

आज तो बाबूराव की अग्निपरीक्षा ही हो रही थी……साला कितना सितम झेले कोई.

कोमल भाभी ने बॉटल मे से लोशन निकाला, अपनी दोनो हथेलियो पर रगड़ा और धीरे धीरे अपने पैरों पर लगाने लगी.

जाँघ से शुरू होकर पैरों तक….

काश यह हाथ मेरे होते….…..कोमल भाभी धीरे धीरे हाथ से लोशन लगा रही थी और मेरा तापमान

धीरे.......... धीरे……धीरे….धीरे…..बड़े जा रहा था.

Sunday, May 10, 2015

FUN-MAZA-MASTI शुभारम्भ-36

FUN-MAZA-MASTI

शुभारम्भ-36



 मेरी गांड भी फट रही थी और बाबुराओ उकसा भी रहा था की नज़ारे का आनंद पूरा ले लूँ….

पम्मी आंटी ने अपना दुपट्टा फिर से अपने कंधे पर डाल लिया मगर इस तरह से की उनके विशाल मम्मो के बीच की खाई अभी भी दर्शन के लिए उपलब्ध थी….

उन्होने दुपट्टा ठीक करके इस अदा से मेरी और देखा मानो पूछ रही की शो पसंद आया की नही….

मेरी गांड की फटफटी तो यूँही गियर मे रहती ही है….मैने तुरंत हड़बड़ते हुए रिमोट उठा लिया और आंटी के सीरियल लगाने लगा…..तो और क्या करता भी….बाबूराव खड़ा हो गया था….किधर चुपाता….

टीवी भले ही बड़ा था मगर कुछ गड़बड़ थी लाख कोशिश के बाद भी नही सेट हो पा रहा था

मैं उठा, “लगता है कोई तार निकल गया है…..मैं देखता हूँ….”

पम्मी आंटी भी तेज़ी से उठी और मेरे साथ टीवी के सामने आकेर खड़ी हो गयी

पम्मी आंटी ठीक मेरे पीछे खड़ी थी और मैं झुक कर टीवी की गांड मे लगे 1760 तरह के वायर देखने लगा. आंटी भी मेरे पीछे खड़ी खड़ी झुक गयी

तभी मेरी नाक पर एक मदमस्त करने वाली खुश्बू टकराई….

दोस्तों, कहते है महक का मूड से बड़ा रिश्ता है….

खाने का मज़ा उसकी खुश्बू से बढ़ जाता है वैसे ही मेरे भूखे प्यासे बाबूराव पर पम्मी आंटी के बदन से आती परफ्यूम और पसीने के मिलीजुली महक ने जादू सा कर दिया….भाई ऐसा भभक के खड़ा हुआ की क्या बताऊ ..........

आंटी ने कुछ कहा….मेरा लंड सुने….यहाँ इतनी सारी चुतियाइ चल रही थी

मैने पूछा ….जीक्या ..?”

पम्मी आंटी थोड़ा और झुकी और उनके विशाल माममे मेरी पीठ से जा लगे….

यहाँ पहली ही मामला बिगड़ा हुआ था….अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गयी….

मैं पलटा तो उनके चेहरे को अपने से कुछ इंच के फ़ासले पर पाया….

वो बड़ी बड़ी आँखे किए मुझे ही देख रही थी….

जे……क्या…?”

पम्मी आंटी बोली, “ अरे…..कुछ दिखा क्या……”

अब क्या बताता आंटी को की क्या क्या दिख रहा था….

मैने ना मे सर हिलाया तो आंटी बोली, “ परे हट…..मेनू वेख लें दे……वो नवजोत करता है यहाँ कुछ….

नवजोत का नाम सुनते ही मेरा खड़ा बाबूराव स्टॅंड्बाइ मोड मे आ गया

मैं तुरंत हटा और आंटी मेरी जगह आ कर खड़ी हो गयी

टीवी रूम के कोने मे था……उसके पीछे उंगली करने की जगह बहुत ही कम थी पम्मी आंटी को झुकना पड़ा

और गुरु
…..

झुकते ही उनकी मस्त गांड मेरे सामने पूरी शान के साथ आ गयी

औरत की चौड़ी गांड हमेशा से मर्द को आकर्षित करती है…..यहाँ तो चौड़ी नही विशाल महाकाय गांड थीऐसा लग रहा था मानो 1500 स्क्वेर फीट का पूरा प्लॉट है…..

पम्मी आंटी बिल्कुल झुक चुकी थी…….

अगर मैं उनकी ठुकाई घोड़ी बनाकर करता तो उनकी यही पोज़िशन होती

बाबूराव ने सारे बंधन तोड़ दिए थे और उस कुत्ते की तरह मचल रहा था जिसे गरमी मे आई कुतिया की चूत की खुश्बू मिल गयी हो..

मैं पम्मी आंटी के पीछे खड़ा खड़ा इस नज़ारे का आनंद ही ले रहा था की आंटी झुके झुके ही चिल्लाई

ओये….शील….कहाँ मर गया….ओये…..एथ्थे आ….”

मैं जैसे नींद से जगा, “….हांजी…..”

ओ इधर देख तो ज़रा यह क्या है….”

मैं थोड़ा सा झुका…..लॅंड कुछ नही दिख रहा था…..

ओये जल्दी देख…..की….है….”

मैं थोड़ा आगे बड़ा ….भेन्चोद दिक्कत ये थी की अगर थोड़ा और आगे बढ़ता तो अपने खड़ा बाबूराव सीधा पम्मी आंटी की गदराई गांड से टकरा जाता और आंटी समझ जाती की अपनी बोफोर्स तोप तैयार है

मैं थोड़ी सी गर्दन आगे की और फिर देखा….घंटा कुछ नही दिख रहा था

ओयेदेख ….यह कोनसी तार है……”, पम्मी आंटी चिल्लाई

मैं थोड़ा और आगे बड़ा तभी अचानक पम्मी आंटी पीछे सरक गयी और बाबूराव उनकी गांड से जा चिपका

ओये मैं बोल रही थी की...…………….हाय…..”

पम्मी आंटी तो अपनी गांड पर आ सटे इस नागराज का एहसास हो गया था.

मैं घबरा कर थोड़ा पीछे हुआ तो पम्मी आंटी ने भी अपनी गांड पीछे लेकर फिर से खड़े मूसल पर चिपका दी

कसम उड़ान छल्ले की….अगर हम दोनो के बदन पर कपड़े नही होते तो……..

पम्मी आंटी के सुर थोड़े बदल गये थे….

अरे….तू खड़ा क्या है….कुछ करता क्यू नही…….?”

क्या ?? क्या करू…??

अरे मादरचोद ….गांड भी फट रही और मज़ा भी आ रहा

ओये….यह देख…….”

देख ही तो रहा हूँ….

पम्मी आंटी ने धीरे से अपनी गांड को मेरे बाबूराव पर दबाया………मेरी तो गांड फट रही थी मैने कुछ भी नही किया……

आंटी ने फिर से अपनी गांड से मेरे बाबूराव पर हल्का दबाव बनाया.


जैसा की आप सब खिलाड़ी जानते है की ऐसे मौके पर दिमाग़ का सारा खून आपके लौड़े मे भर जाता है इसीलिए आप के दिमाग़ की सोचने समझने की शक्ति ख़तम हो जाती है….इसी लिए मैने भी अपनी बार गांड की फटफती बंद करके….अपना लंड तुरंत पम्मी आंटी की गांड पर दबा दिया..

आंटी ने धीरे से एक झटका और दिया…..मैने भी बदले मे झटका दे दिया

दोनो तरफ की लाइट ग्रीन थी….

पम्मी आंटी धीरे धीरे अपनी गांड आगे पीछे करने लगी…..और अब तो अपुन भी शेर

मैं चुदाई की तरह ही अपनी कमर धीरे धीरे हिलाकर उनकी गांड पर अपना लंड घिसने लगा….

अब मैने सारी परवाह छोड़ दी थी…..

मा चुदाये सरदार जी…..मा चुदाये नवजोत……अरे पर उसकी मा ही चोद रहा था मैं…..

तभी डोर बेल बजी...

 साला मुझे लगता है की मैने पूरे हिन्दुस्तान की KLPD का ठेका लिया हुआ है.

जब भी टॉवर मे सिग्नल आने लगते हैं किस्मत की बॅटरी डिसचार्ज हो जाती है.

पम्मी आंटी मुझसे छिटक कर दूर हो गयी और अपने दुपट्टे को संभालते हुए दरवाजे की और बड़ी. मेरी भूखी नज़रे अभी भी पम्मी आंटी की गदराई गांद से ही चिपकी थी पर अब ललचाए होत क्या.
आंटी ने दरवाजा खोला और गरजती हुई आवाज़ आई,

ओये कर्मा वालिए, बड़ी देर लगा दी…..”

सरदार प्रताप सिंग जी का आगमन हो चुका था.
सरदार जी घर मे दाखिल हुए, भेन चोद आदमी था की पहाड़. कम से कम 6 फीट की हाईट, और रोबीला चेहरा, मोटा इतना की उपर से लेकर नीचे एक जैसा दिख रहा था. मगर इतना मोटा होने के बाद भी उसकी चल मे एक छपलता थी, फुर्ती सी….


सरदार जी ने घर मे घुसते ही मुझे ताड़ लिया और तिरछी नज़र से मुझे देखते हुए अपनी बीवी से पूछा

ओ कोण हे ये……?”

पम्मी आंटी ने बेपरवाही से कहा,


अजी ये पिया नू पढ़ाने दे वास्ते आंदा है…..टीचर हे जी उसका

सरदार ही गुर्राए, “ हु….क्या करेगी पढ़ लिख कर…..करना तो उसने चूल्हा चौका ही है….”

पम्मी आंटी के चेहरे पर तो कोई चेंज नही आया मगर उनके नाक की कोने थोड़े से फूल गये….सरदारनी को गुस्सा आ गया था.

अजी तुस्सी फेर ओ ही गल करने लगे..

सरदार जी ने कंधे उचकाय और कहा, “मेनू की…..करो अपने मन दी…..”

मैं मन ही मन हंसा…..सरदार जी जैसे डॉन की भी अपनी बीवी से फटती है….सरदार ही खाने की मेज़ पर जा बैठे और बोले, “ला भाई……खाना लगा दे….”

आंटी बोली, “ अभी लाई……” और किचन मे चली गयी..

यह सरदार जी तो नॉर्मल इंसान निकला, लोग बिना बात ही इतना डरते है इनसे….

तभी सरदार जी ने मुँह बनाया और अपनी गांड टेडी की, मानो उनको कुछ चुभ रहा हो, उन्होने अपने शर्ट को उपर किया और अंदर हाथ डाल कर………..


पिस्टल निकाल ली

ओ भेनचोद ….गांड का बुलडोज़र ही हो गयाभक भक भक.

सरदार जी ने बड़े आराम से गन डाइनिंग टेबल पर रख दी….

मा की चूत........ बहुते ही ख़तरनाक आदमी है ये तो.

पम्मी आंटी खाना ले आई और सरदार जी के सामने रख दिया, तभी सरदार जी ने मुझे देखा और कहा,


ओ पुत्तर….आजा भाई….खाना शाना खा ले…..”

फटती गांड मे मुँह से आवाज़ नही निकला करती

मैं गूंगे जैसा चुप चाप खड़ा खड़ा देख रहा था.

वो फिर बोले, “ आजा भाई आजा….बैठ …..”

मैने थोड़ी हिम्मत जुटाई और कहा, “….….……जी ..म….….मैं चलता हूँ…..”

सरदार जी माथे पर सल आ गये, “ क्यू भई …..?”

मैं फिर बोला, “नही जी…..बस…..मुझे जाना है…”

सरदार जी बिल्कुल सर्द आवाज़ मे बोले,


बैठ जाओ बेटे जी……बैठ जाओ

लो भाई…..लग गये काम ….और रगड़ो अपने लोड्*ा आंटी की गांड परमेरी तो लाश भी नही मिलनी अब मेरे परिवार को.

एक किलोमीटर लंबी डाइनिंग टेबल थी…..एक कोने पर सरदार जी बैठे थे….दूसरे पर मैं अपनी फटफती गांड को लेकर टिक गया.

पम्मी…..इसका खाना लगा…”

आंटी ने मेरे सामने प्लेट रख दी….मैं खाना तो खाकर आया था मगर मेरी गांड मे ज़ोर नही था की मैं मना कर सकुमैने चम्मच उठाया और चावल खाने लगा.


सरदार जी ने पूछा, “नाम क्या है तेरा पुत्तर…….”

जी….शील….” मैं टर्राया

हैं….शील…..ओये ये क्या नाम हुआ…..”, सरदार जी ने पूछा.

जी……?”,

मेरी गांड ऐसी फट रही थी की क्या बताऊ. मेरी नज़रे बार बार सामने पड़ी गन पर जाती और फटफती फिर से चल पढ़ती.

मैं चुपचाप सर झुका कर राजमा चावल खाने लगा….

तभी सरदार जी पूछा, “तू गुप्ता जी का बेटा है ना……? बड़े बज़ार मे जिनकी किराने की दुकान है ?”

मेरे हाथ से चम्मच छूट गया. इस गंडमरे को तो मेरी पूरी हिस्टरी पता है.

मैं चम्मच उठाने के लिए उठने लगा तो पम्मी आंटी बोली,


कोई बात नही दूसरा चम्मच ले ले

मैने दूसरा चम्मच लिया और सरदार जी से कहा, “….….जी…..”

सरदार जी बोले,

बहुत बड़िया आदमी है यार गुप्ता जी……तुम्हारी एक दुकान मैने किराए से ली थी कुछ साल पहले, इतने सज्जन है गुप्ता जी आजकल किराया ही लेने नही आए…..”

ये बोल कर सरदार जी हँसने लगे…..मैने सोचा भेन्चोद मेरे बाप की तो क्या पूरे शहर में किसी की गांड मे इतना ज़ोर नही है की वो सरदार जी से किराया माँग ले.


पम्मी आंटी मेरे पास आके खड़ी हो गयी और बोली, “ कहाँ गिरा वो चम्मच…..ला भाई उठा लूँनौकर तो जा मरा है गाँव मे….”

आंटी घुटनो के बल झुक कर चम्मच ढूँढने लगी और लाख कंट्रोल करने के बाद भी मेरी नज़ारे जाकर आंटी की उभरी हुई गांड पर जा चिपकी….

कसम उड़ान छल्ले की….आंटी की तो लेनी ही पड़ेगी….

आंटी डाइनिंग के नीचे ही घुसी इधर उधर देख रही थी….

तभी सरदार जी बोले, “ तो बेटे जी आप बिट्टो को पढ़ाते है…..?”

मैने जवाब देने के लिए मुँह खोला ही था की टेबल के नीचे घुसी पम्मी आंटी ने मेरी जाँघ पर चिकोटी काट दी….

और मेरे मुँह से निकला…” जी….ओ....आह…..”

मा की चूत ….भईये गया मैं तो .

सरदार जी ने आँखें सिकोडी और बोले, “ क्या हुआ ओये…..?”

मैने बड़ी मुश्किल से स्थिति नियंत्रण मे की और कहा,

जी….व.... .व.....वो…….बोलते बोलते जीभ कट गयी….”

मैं चेहरे पर चुतिया एक्सप्रेशन लिए सरदार जी को देख रहा था और वो अज़ीब से एक्सप्रेशन लिए मुझे देख रहे थे…..

तभी पम्मी आंटी ने एक चिकोटी और काट दी…..जहाँ पहले काटी थी उस से उपर की और

आंटी की मंज़िल बाबूराव था और मेरी गांड की फटफती की मंज़िल....बहुत दूर ….

अगर मैं यहाँ से नही निकला तो आंटी तो यहीं पर मेरा पोस्टमॉर्टम कर देगी…..मैं सोच ही रहा था इतने मे आंटी ने टेबल के नीचे घुसे घुसे ही बाबूराव पर ही हाथ फेर दिया.

बस यार…..अब अति हो गयी….फटफती फुल स्पीड मे आ गयी और मैं तुरंत खड़ा हुआ और टर्राया….

अंकल जी मैं चलता हूँ…….….….मुझे घर जाना है…..”

तभी पम्मी आंटी भी तुरंत टेबल के नीचे से निकल आई और बोली, “हाय हाय….अरे तू बड़ी जल्दी मे है……पिया को पढ़ाना नही है क्या….?”

….….कल….कल….दिन मे…..आकर पढ़ा दूँगा……”

ठीक है……2 बजे आइयो…….”, पम्मी आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा.

यार…..पिया तो 2 बजे घर पहुँच ही नही पाएगी तो फिर…..

और अपुन को सीन क्लियर हो गया….आंटी जान बूझकर जल्दी बुला रही है…..ताकि….

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