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Friday, January 28, 2022

घरेलू चुदाई समारोह -8

FUN-MAZA-MASTI

घरेलू चुदाई समारोह -8


“सजल…” कोमल की आवाज़ से घर गूंज उठा। वो बिना सोचे अपने लड़के के स्नानघर में घुस गई। वो नहाकर बाहर निकल रहा था। उसके मस्त लण्ड पर एक हसरत भरी नज़र डलते हुए कोमल ने कहा- “कुछ कपड़े पहन लो, तुम मेरे साथ उस औरत के घर चल रहे हो। मैं जान गई हूँ कि तुम वहाँ पर क्या कर रहे थे और मैं उससे इस बारे में बात करना चाहती हूँ…”

“पर मम्मी, मैंने तुम्हें बताया न कि मैं वहाँ सिर्फ एक बोतल खोलने गया था…”

“बकवास… तुम्हारे चेहरे पर अभी तक चुदाई की चमक है…” कोमल गुस्से से कांप रही थी। उस कुतिया के साथ वह अपने बेटे के लौड़े को बांटने के लिये हरगिज़ तैयार नहीं थी। “मैं तुम्हें दोषी नहीं ठहरा रही हूँ, पर उस रंडी को तो मैं छोड़ूंगी नहीं। जल्दी तैयार हो जाओ…”

सजल जब कपड़े पहनकर अपनी मां के पास नीचे आया तो उसने बात संभालने की फिर कोशिश की। पर कोमल ने उसकी एक न सुनी।

“कुछ बोलने की कोशिश मत करो। मैं सीधे उसके घर जा रही हूँ। और अगर तुम चाहते हो कि मैं उसकी गर्दन न मरोड़ूँ तो बेहतर होगा कि तुम मेरे साथ ही चलो…” कोमल ने जाकर मनीषा का दरवाज़ा जोर-जोर से पीटना शुरू कर दिया। जब मनीषा ने दरवाज़ा खोला तो यह ज़ाहिर था कि उसने जल्दी में ऐसे ही नहाने का गाऊन पहन लिया था। इससे कोमल को लगा जैसे वो अभी नहाकर निकली है।

“अच्छा… मनीषा, क्या तुम्हें इस वक्त नहाने की ज़रूरत इसीलिये पड़ गई क्योंकी तुम मेरे बेटे सजल को चोदकर गर्मी और पसीने से नहा गई थी… सजल अंदर आओ और दरवाज़ा बंद कर दो…”

मनीषा को बहुत जोर का झटका लगा। उसने कहा- “तुम अपने आपको क्या समझती हो जो मेरे घर में इस तरह से घुसी आ रही हो…”

कोमल उसकी बात को नज़रंदाज़ करते हुए उसके ड्राइंग रूम में प्रवेश कर गई। उसने अपनी कमर पर हाथ रखकर तैश में अपनी पडोसन से कहा- “तुम भली-भांति जानती हो कि मैं यहाँ क्यों आई हूँ। तुमने मेरे भोले-भाले बेटे को यहाँ बुलाया और उसे बहलाकर अपनी वासना का शिकार बनाया। क्या तुम इससे इंकार करती हो…” कोमल को उम्मीद थी कि मनीषा इससे मुकरने की कोशिश करेगी। पर उसने मनीषा की बेशर्मी को कम आँका था।

“इसमें क्या गलत है कि तुम्हारे बेटे को मेरे साथ सही तरह का अभ्यास हो गया… अगर वो किसी ऐसी अनजान लड़की के साथ कार की पिछली सीट पर यह सब करता जिसे इतनी भी समझ नहीं होती कि ऐसे शानदार लौड़े के साथ क्या करना है, तो क्या तुम्हें खुशी होती…”

इस जवाब से कोमल निरुत्तर हो गई। उसने कहा- “इससे तुम्हारे कुकर्म को सही नहीं ठहराया जा सकता। तुमने उसका फायदा उठाया है, और तुम यह बात जानती हो। इसके लिये तो कोई कानून होना चाहिये जिससे कि बड़ी उम्र की औरतें छोटे लड़कों को बहका न सकें…”

सजल अपनी मम्मी के इस ढोंग से अब काफी क्रोधित हो चला था। उससे रहा नहीं गया और वह बोल पड़ा- “तुम यह सब बातें मनीषा आंटी को कैसे कह सकती हो मम्मी। जबकि तुम भी मुझसे चुदवाती हो…” कहने को तो वह कह गया पर उसे उसी वक्त यह समझ में आ गया कि उससे एक भीषण गलती हो गई है।

“सजल…” कोमल सकते में आ गई। पर वह जान गई थी कि अब गोली बहुत दूर जा चुकी है। उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि वह सजल का हाथ पकड़े और भाग जाए।

कुछ सन्नाटे के बाद मनीषा बेहताशा हँसने लगी- “तो ये बात है… तुम जल रही हो… तुम्हारी इतनी हिम्मत कि यहाँ आकर मुझे शिक्षा दो जबकि तुम खुद अपने बेटे को चोद रही हो… लोगों को क्या ज्यादा बुरा लगेगा… मेरा सजल को चोदना या तुम्हारा…”

“हम घर जा रहे हैं…” कोमल बोली।

“नहीं, तुम कहीं नहीं जा रही हो… जब तुम यहाँ आई हो तो मेरी भी सुनती जाओ… तुमने सालों से मुझे कचरे की तरह समझा है, जबसे मेरा पति मुझे छोड़कर चला गया। तुम्हें हमेशा यह डर रहा कि मैं तुम्हारे पति को न चोदूं। मैं तुम्हें एक अच्छी खबर देना चाहती हूँ… न सिर्फ मैंने सजल को चोदा है बल्कि मैं सुनील को भी चोद चुकी हूँ… क्या तुम्हें इस बारे में कुछ कहना है…”

“हरामजादी…” कोमल ने गुस्से से हाथ घुमाया, पर सजल ने अपनी फुर्ती दिखाई और उसे बीच में ही पकड़ लिया।

“अब इतनी भोली न बनो, कोमल…” मनीषा ने व्यंग्य किया- “तुम जो सजल को चोदती हो, और उस दिन तुम्हारे घर से सजल के कालेज का प्रिन्सिपल जो जा रहा था…”

“वो तो सजल से मिलने आया था, हमारे बीच में कुछ नहीं हुआ…”

पर सजल की शक भरी निगाहें उसे भेद रही थीं- “तुमने मुझे बताया नहीं कि कर्नल मान आए थे…” सजल ने पूछा।

“इसीलिये नहीं बताया क्योंकी इसने उसे चोदा था, सजल…” मनीषा ने मुश्कुराते हुए कहा- “मुझे पता है क्योंकी उस दिन ये परदे डालना भूल गई थी और मैंने पूरी चुदाई इन आंखों से देखी थी…”

कोमल को यह पता नहीं था कि मनीषा ने कुछ देखा नहीं था, पर अंधेरे में तीर मार रही थी। पर मनीषा ने बात कुछ इस अंदाज़ में कही थी जैसे कि वह सच ही बोल रही हो। मनीषा ने अब अपने वार को और तीखा करने की ठानी। उसने अपने नहाने वाले गाऊन का नाड़ा खोलकर उसे उतार फेंका और अब वो सिर्फ सैंडल पहने उसी अवस्था में आ गयी जिस अवस्था में थोड़ी देर पहले सजल ने उसे चोदा था। उसका नंगा तन चमकने लगा।

“मुझे आश्चर्य है कि सजल मुझे चोदने के लिये क्यों आया… क्या वो तुम्हें चोदने से ऊब गया है…” उसने अपने शरीर को सजल के जिश्म से रगड़ते हुए कहा।

वो दोनों मम्मी बेटे कुछ कहने की हालत में नहीं थे।

मनीषा ने कोमल को और छेड़ते हुए इठलाते हुए कहा- “अब तुम समझ सकती हो कि सजल और सुनील दोनों को मेरे पास आने की ज़रूरत क्यों पड़ी। मेरे पास वो सब कुछ है जिसकी उन्हें आस है। बड़े मम्मे और एक तंग गाण्ड… अब जब तुम यहीं हो सजल तो क्यों न हम उस काम को अंजाम दें जो हमने शुरू कर दिया है… मेरे ख्याल से तुम्हारी मम्मी यह जानने को उत्सुक होगी कि मैं कैसे चुदवाती हूँ…”


सजल अपनी मम्मी से नाराज़ अवश्य था पर वह उसके अपमान में मनीषा का साथ देने को तैयार नहीं था। उसने मनीषा को दूर धकेलने की कोशिश की पर इतने में ही उसकी मम्मी की एक हरकत पर वह ठगा सा रह गया।

“तुम अपने आपको बड़ा गर्म और सेक्सी समझती हो न मनीषा… मैंने तुम्हें अपने शरीर की नुमाइश करते हुए कई बार देखा है। पर अब मैं तुम्हें बताती हूँ कि सजल और सुनील क्यों हमेशा मेरे पास ही वापस आएंगे…”
मनीषा को भी गहरा आश्चर्य हुआ जब उसकी पडोसन ने अपने कपड़े उतारने आरंभ किये। उसने भी यह माना कि कोमल के पास अत्यंत ही लुभावना और आकर्षक जिश्म था। कोमल ने नंगे होने में अधिक देर नहीं लगाई। वो सिर्फ अपनी बात सिद्ध करना चाहती, किसी पर विजय नहीं।

“किसका शरीर ज्यादा सुंदर है, सजल…” उसने मनीषा की तारीफ भरी नज़रों में नज़रें डालकर सजल से पूछा।

सजल को अपनी यह स्थिति पसंद नहीं आ रही थी। अपनी कम उम्र के बावजूद वह समझ गया था कि इन दोनों औरतों की लड़ाई बंद करानी होगी- “आप दोनों रुकिये। आप पर जो पागलपन सवार हो रहा है उसे रोकिये। आप लोग इतने सालों से पडोसी हैं पर एक दूसरे के बारे में आपके खयालात कितने गलत हैं…”

वो दोनों सजल की बात सुन रही थीं। उन्हें इस बात से थोड़ी संतुष्टि हुई कि सजल ने स्थिति पर काबू कर लिया था।

सजल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा- “मैं इस बात पे कोई वोट नहीं डालूंगा कि आप दोनों में से किसका जिश्म ज्यादा सुंदर है। जहाँ तक मेरा ताल्लुक है, मुझे इससे कोई सरोकार नहीं है। आप दोनों बेहद सेक्सी औरतें हैं। बस…” यह कहते-कहते सजल ने अपने लण्ड को खड़ा होते महसूस किया। उसकी दोनों विजय-पताकाओं के बीच में रहने से उसका झंडा बिना खड़ा हुए न रह सका। सजल ने अपनी बांह अपनी मम्मी की कमर में डाली, उसने मनीषा के साथ भी ऐसा ही किया।

“मैं हमेशा सोचा करता था कि दो औरतों को एक साथ चोदने में कैसा लगेगा। क्या आप दोनों अपनी लड़ाई छोड़कर मुझे यह बात समझायेंगी…” बिना उनके उत्तर का इंतज़ार किये, उसने अपने वस्त्र उतारने शुरू कर दिये। उसका हौसला इस बात से भी बढ़ा कि उन दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया। उनकी चुप्पी ने उसे यह समझा दिया कि वो उससे सहमत हैं।

“तुम्हें मनीषा आंटी से जलन नहीं होनी चाहिये मम्मी… अगर मैं इन्हें चोदता हूँ तो इसका यह अर्थ नहीं कि मैं आपको चोदना बंद कर दूँगा…” सजल एक हाथ से अपनी मम्मी और दूसरे हाथ से मनीषा के मम्मों को दबाते हुए बोला।

कोमल ने सजल को मनीषा के मोटे मम्मों से खेलते हुए देखा। उसे ईर्ष्या की जगह एक अभूतपूर्व रोमांच का एहसास हुआ।

सजल ने अपनी मम्मी से कहा- “मम्मी मैं आप दोनों को चोदना चाहता हूँ…” यह कहकर उसने अपनी मम्मी का एक प्रगाढ़ चुम्बन लिया। उसका दूसरा हाथ कोमल की गाण्ड दबाने लगा।

मनीषा जान गई कि आज की दोपहर निराली होगी। उसने अपने स्तन सजल की पीठ पर लगा दिये। उसने अपना हाथ मम्मी-बेटे के बीच से सजल के लण्ड पर पहुंचा दिया और उसे दबाने लगी।

कोमल उसके हाथ को हटाने की कोशिश करने लगी। पर फिर उसने अपने बेटे के शानदार लण्ड को इस औरत के साथ बांटने का निर्णय लिया।

सजल ने अपने आपको वहीं कारपेट पर लिटा लिया और अपनी मम्मी को अपने ऊपर इस तरह खींचा कि उसकी चूत उसके मुँह पर आ लगी। उसने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसेड़ दी। अब वह इस बात का इंतज़ार कर रहा था कि मनीषा उसका लण्ड चूसने लगेगी।

मनीषा के चेहरे पर मुश्कुराहट फैल गई। उसने झुककर उस झुलते हुए लण्ड को अपने हाथ में लिया और झट से मुँह में भर लिया। और बोली- “इसका लण्ड बहुत स्वादिष्ट है, कोमल…” उसने कोमल को हिम्मत देते हुए कहा।

इससे कोमल का यह डर कि वह उसके लड़के को काबू में ले लेगी शांत हो गया। कोमल ने भी देखा कि मनीषा सजल के लण्ड से जलपान कर रही थी। हालांकि वो इस दृश्य को देखना चाहती थी पर उसकी चूत में छाए तूफान पर उसका बस नहीं था।

“मुझे ज़रा मुड़ने दो सजल…” कहकर कोमल तेजी से घूम गई जिससे उसका मुँह मनीषा की ओर हो गया- “अब मेरी चूत चाटो सजल…”

उसने अपना चेहरा नीचे झुकाया जिससे उसका सिर मनीषा के सिर से जा टकराया। कोमल भी उस लण्ड का स्वाद लेना चाहती थी। मनीषा ने भी दरियादिली दिखाई और अपने मुँह से उस चिपचिपाते लण्ड को निकालकर कोमल के मुँह की ओर कर दिया।

मनीषा- “इसका स्वाद लो कोमल, तब तक मैं इन टट्टों का स्वाद लेती हूँ…”

कोमल ने अपनी जीभ सजल के लण्ड के सुपाड़े पर फिराई और फिर धीरे से उसे अपने मुँह में भर लिया। इस समय उसे खाने और खिलाने का दोहरा मज़ा आ रहा था।

सजल उन दोनों सुंदरियों की जिह्वाओं के आघात से तड़प रहा था। उसकी तमन्ना पूरी हो गई थी। पर उसका अपने ऊपर काबू खत्म हो गया था। कुछ ही मिनटों की चुसाई और चटाई से उसके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी। कोमल ने अपने मुँह में छूटते हुए रस को पीना शुरू कर दिया। मनीषा ने कोमल को हटाने के उद्देश्य से उसके मम्मों को पकड़कर धक्का सा दिया। पर कोमल इसका कुछ और ही अर्थ समझी।

“और जोर से भींचो इन्हें मनीषा… और तुम मुझे खाओ सजल…” यह कहते समय उसे भी शिखर प्राप्ति हो गई।

मनीषा उन दोनों को झड़ते हुए बस देखती ही रह गई। पर उसे यकीन था कि इंतज़ार का फल मीठा होगा। पर उसको मम्मी-बेटे के प्यार की गहराई का अनुभव जरूर हो गया था।

जब कोमल झड़कर शांत हुई तो मनीषा उसकी ओर देखकर बोली- “मैं तुम्हारे मम्मों को तुमसे पूछे बिना नहीं दबाना चाहती थी। शायद तुम्हें ये पसंद न आया हो…”

“कोई बात नहीं, मनीषा, मुझे वाकई अच्छा लगा था। मैं हमेशा अचरज करती थी कि दूसरी औरत के साथ यह सब करना कैसा लगेगा…” उसने मनीषा के तने हुए मम्मों पर आंखें जमाते हुए जवाब दिया।

“हम दोनों भी नमूने हैं, कोमल… कुछ देर पहले हम एक दूसरे की जान लेने पर आमादा थे और अब प्रेमी बनने की बात कर रहे हैं…” दोनों औरतें साथ-साथ हँसने लगीं।

“शायद मैं तुमसे इसीलिये दूर रहना चाहती थी। मुझे डर था कि मैं कहीं तुम्हारे साथ सम्बंध ना बना लूँ…” कोमल बोली।

सजल का लण्ड सामने के दृश्य को देखकर फिर से तनतना गया था। उसने अपने सामने नाचती हुई अपनी मम्मी की गाण्ड देखी तो वो उसके पीछे झुका और अपना दुखता हुआ लौड़ा अपनी मम्मी की चूत में पेलने लगा।

“नहीं सजल…” कोमल ने अपनी चूत से उसका लण्ड बाहर निकालते हुए कहा- “मैं तुम्हें मनीषा को चोदते हुए देखना चाहती हूँ। उसके पीछे जाओ और उसे चोदो… जाओ…”

सजल का लण्ड इस समय इतना अधिक दुख रहा था कि उसे इस बात से कतई मतलब नहीं था कि उन दोनों में से किसे उसके मोटे लण्ड का आनंद मिलेगा। उसने मनीषा के चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा और अपना लम्बा लण्ड जड़ तक, एक ही धक्के में ठोंक दिया।

मनीषा की पनियाई हुई चूत ने भी आसानी से पूरे मूसल को अपने अंदर समा लिया। हालांकि मनीषा अभी ही झड़ के निपटी थी, पर वो एक बार फिर तैयार थी। बोली- “धन्यवाद, कोमल, जो तुमने मुझे इसे चोदने दिया। मुझे खुशी है कि अब तुम सारी बात को समझती हो। मैं इतनी अकेली थी, इतनी चुदासी… मुझे इसके लण्ड की सख्त जरूरत थी…”

कोमल की चूत में भी आग बदस्तूर लगी हुई थी। उसने अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य तो निभा दिया था पर वो इंतज़ार कर रही थी कि सजल मनीषा को निपटाकर उसकी चूत की प्यास बुझाए। कुछ ही देर की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद सजल के झड़ने की बारी आखिर आ ही गई।

“मैं झड़ रहा हूँ, मम्मी…” सजल चीखा और अपना रस मनीषा की चूत में भरना शुरू कर दिया।
कोमल अपने सामने का दृश्य देखकर ही झड़ गई। मनीषा आखिर में झड़ी। मम्मी-बेटे के बीच में सैंडविच की तरह चुदने का आनंद अपरंपार था।

“मेरे साथ झड़ो, तुम दोनों… दोनों… सजल… कोमल… मैं तुम्हारी चूत के स्वाद से प्यार करती हूँ। मैं तुम्हारी घनघोर चुदाई से भी प्यार करती हूँ। सजल, चोदो मुझे… चो…दो… मैं झड़ी रे… हाय रे… मैं मरी…”

जब सब शांत हुए तो मनीषा को ऐसा महसूस हुआ जैसे कि वो भी सिंह परिवार का हिस्सा हो गई हो। 

सजल ने अपने आपको वहीं कारपेट पर लिटा लिया और अपनी मम्मी को अपने ऊपर इस तरह खींचा कि उसकी चूत उसके मुँह पर आ लगी। उसने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसेड़ दी। अब वह इस बात का इंतज़ार कर रहा था कि मनीषा उसका लण्ड चूसने लगेगी।

मनीषा के चेहरे पर मुश्कुराहट फैल गई। उसने झुककर उस झुलते हुए लण्ड को अपने हाथ में लिया और झट से मुँह में भर लिया। और बोली- “इसका लण्ड बहुत स्वादिष्ट है, कोमल…” उसने कोमल को हिम्मत देते हुए कहा।

इससे कोमल का यह डर कि वह उसके लड़के को काबू में ले लेगी शांत हो गया। कोमल ने भी देखा कि मनीषा सजल के लण्ड से जलपान कर रही थी। हालांकि वो इस दृश्य को देखना चाहती थी पर उसकी चूत में छाए तूफान पर उसका बस नहीं था।

“मुझे ज़रा मुड़ने दो सजल…” कहकर कोमल तेजी से घूम गई जिससे उसका मुँह मनीषा की ओर हो गया- “अब मेरी चूत चाटो सजल…”

उसने अपना चेहरा नीचे झुकाया जिससे उसका सिर मनीषा के सिर से जा टकराया। कोमल भी उस लण्ड का स्वाद लेना चाहती थी। मनीषा ने भी दरियादिली दिखाई और अपने मुँह से उस चिपचिपाते लण्ड को निकालकर कोमल के मुँह की ओर कर दिया।

मनीषा- “इसका स्वाद लो कोमल, तब तक मैं इन टट्टों का स्वाद लेती हूँ…”

कोमल ने अपनी जीभ सजल के लण्ड के सुपाड़े पर फिराई और फिर धीरे से उसे अपने मुँह में भर लिया। इस समय उसे खाने और खिलाने का दोहरा मज़ा आ रहा था।

सजल उन दोनों सुंदरियों की जिह्वाओं के आघात से तड़प रहा था। उसकी तमन्ना पूरी हो गई थी। पर उसका अपने ऊपर काबू खत्म हो गया था। कुछ ही मिनटों की चुसाई और चटाई से उसके लण्ड ने पिचकारी छोड़ दी। कोमल ने अपने मुँह में छूटते हुए रस को पीना शुरू कर दिया। मनीषा ने कोमल को हटाने के उद्देश्य से उसके मम्मों को पकड़कर धक्का सा दिया। पर कोमल इसका कुछ और ही अर्थ समझी।

“और जोर से भींचो इन्हें मनीषा… और तुम मुझे खाओ सजल…” यह कहते समय उसे भी शिखर प्राप्ति हो गई।

मनीषा उन दोनों को झड़ते हुए बस देखती ही रह गई। पर उसे यकीन था कि इंतज़ार का फल मीठा होगा। पर उसको मम्मी-बेटे के प्यार की गहराई का अनुभव जरूर हो गया था।

जब कोमल झड़कर शांत हुई तो मनीषा उसकी ओर देखकर बोली- “मैं तुम्हारे मम्मों को तुमसे पूछे बिना नहीं दबाना चाहती थी। शायद तुम्हें ये पसंद न आया हो…”

“कोई बात नहीं, मनीषा, मुझे वाकई अच्छा लगा था। मैं हमेशा अचरज करती थी कि दूसरी औरत के साथ यह सब करना कैसा लगेगा…” उसने मनीषा के तने हुए मम्मों पर आंखें जमाते हुए जवाब दिया।

“हम दोनों भी नमूने हैं, कोमल… कुछ देर पहले हम एक दूसरे की जान लेने पर आमादा थे और अब प्रेमी बनने की बात कर रहे हैं…” दोनों औरतें साथ-साथ हँसने लगीं।

“शायद मैं तुमसे इसीलिये दूर रहना चाहती थी। मुझे डर था कि मैं कहीं तुम्हारे साथ सम्बंध ना बना लूँ…” कोमल बोली।

सजल का लण्ड सामने के दृश्य को देखकर फिर से तनतना गया था। उसने अपने सामने नाचती हुई अपनी मम्मी की गाण्ड देखी तो वो उसके पीछे झुका और अपना दुखता हुआ लौड़ा अपनी मम्मी की चूत में पेलने लगा।

“नहीं सजल…” कोमल ने अपनी चूत से उसका लण्ड बाहर निकालते हुए कहा- “मैं तुम्हें मनीषा को चोदते हुए देखना चाहती हूँ। उसके पीछे जाओ और उसे चोदो… जाओ…”

सजल का लण्ड इस समय इतना अधिक दुख रहा था कि उसे इस बात से कतई मतलब नहीं था कि उन दोनों में से किसे उसके मोटे लण्ड का आनंद मिलेगा। उसने मनीषा के चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा और अपना लम्बा लण्ड जड़ तक, एक ही धक्के में ठोंक दिया।

मनीषा की पनियाई हुई चूत ने भी आसानी से पूरे मूसल को अपने अंदर समा लिया। हालांकि मनीषा अभी ही झड़ के निपटी थी, पर वो एक बार फिर तैयार थी। बोली- “धन्यवाद, कोमल, जो तुमने मुझे इसे चोदने दिया। मुझे खुशी है कि अब तुम सारी बात को समझती हो। मैं इतनी अकेली थी, इतनी चुदासी… मुझे इसके लण्ड की सख्त जरूरत थी…”

कोमल की चूत में भी आग बदस्तूर लगी हुई थी। उसने अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य तो निभा दिया था पर वो इंतज़ार कर रही थी कि सजल मनीषा को निपटाकर उसकी चूत की प्यास बुझाए। कुछ ही देर की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद सजल के झड़ने की बारी आखिर आ ही गई।

“मैं झड़ रहा हूँ, मम्मी…” सजल चीखा और अपना रस मनीषा की चूत में भरना शुरू कर दिया।
कोमल अपने सामने का दृश्य देखकर ही झड़ गई। मनीषा आखिर में झड़ी। मम्मी-बेटे के बीच में सैंडविच की तरह चुदने का आनंद अपरंपार था।

“मेरे साथ झड़ो, तुम दोनों… दोनों… सजल… कोमल… मैं तुम्हारी चूत के स्वाद से प्यार करती हूँ। मैं तुम्हारी घनघोर चुदाई से भी प्यार करती हूँ। सजल, चोदो मुझे… चो…दो… मैं झड़ी रे… हाय रे… मैं मरी…”

जब सब शांत हुए तो मनीषा को ऐसा महसूस हुआ जैसे कि वो भी सिंह परिवार का हिस्सा हो गई हो। 

क्रमशः.....................................









राज शर्मा स्टॉरीज पर पढ़ें हजारों नई कहानियाँ

घरेलू चुदाई समारोह -7

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घरेलू चुदाई समारोह -7


“ये सब बंद करो और मेरी क्लिट को जोर से काटो…”

प्रमोद के ऐसा करते ही कोमल ने एक बार फिर से पानी छोड़ दिया।

“बहुत अच्छा प्रमोद… मज़ा आ गया…” कोमल अब झड़ते-झड़ते थक चुकी थी। उन दोनों जवानों ने उसकी भूख मिटा दी थी। उसने पहले प्रमोद और फिर सजल का एक गहरा चुम्बन लिया, और टेक लगाकर लेट गई।

“मुझे उम्मीद है कि तुम्हारी मम्मी अगली छुट्टियों में भी तुम्हें यहाँ आने की इज़ाज़त देगी। है न प्रमोद…” कोमल ने पूछा।

प्रमोद- “क्यों नहीं, और मैं अगली बार ज्यादा दिनों के लिये आऊँगा…”

“मैं तुम्हारे आनंद के लिये पूरा इंतज़ाम रखूंगी…” कोमल ने कहा और उसी हालत में नंगी, सिर्फ सैंडल पहने हुए रसोई की ओर सबके लिये नाश्ता बनाने के लिये बढ़ गई।

“जल्दी करो और अपनी पैंट उतारो, सुनील…” मनीषा ने अपने पड़ोसी से कहा- “मैं तो समझी थी कि शायद कोमल घर से जाने वाली ही नहीं है…”

सुनील ने जल्दी करने की कोशिश की पर उसकी नज़रें मनीषा पर ही टिकी थीं जो अपने मम्मों को अपने हाथों में थामे चुदवाने के लिये पूरी तरह से तैयार खड़ी थी।

सुनील- “वो थोड़ी ही देर के लिये गई है। 45 मिनट में वापस आ जायेगी। मुझे उससे पहले घर पहुंचना होगा। वैसे भी मुझे गोल्फ खेलने जाना है…”

मनीषा- “क्या कहा तुमने… तुम्हारे लिये गोल्फ खेलना मुझे चोदने से ज्यादा ज़रूरी है…”

सुनील- “मैं विवश हूँ। वो मेरी कम्पनी का एक बहुत बड़ा ग्राहक है… जाना ही होगा…”

मनीषा- “हे भगवान, मैं यह तो समझ सकती हूँ कि कोमल एक जल्दबाजी की चुदाई के लिये तैयार हो सकती है क्योंकी वो तुम्हारी पत्नी है। पर मेरी चूत की प्यास मिटाने के लिये तो तुम्हें अधिक समय निकालना ही होगा। 45 मिनट में मेरा कुछ नहीं बनेगा…” मनीषा ने सुनील के मोटे तगड़े लौड़े पर एक नज़र डालते हुए कहा।

सुनील- “आज के लिये तो इतना ही हो पायेगा, मनीषा…” सुनील मनीषा को बिस्तर की ओर लेकर जाते हुए बोला।

“अगर ऐसा है तो मेरी खातिरदारी शुरू करो। पहले मेरे मम्मों को चूसो…” मनीषा ने हथियार डालते हुए कहा।

सुनील ने अपने कम समय देने का मुआवज़ा देने का फैसला किया। उसने एक हाथ से मनीषा की चूचियां मसलनी शुरू की और दूसरे हाथ से उसकी चूत की सेवा शुरू कर दी। उसने दो अँगुलियां मनीषा की चूत में घुसेड़ दीं। अपने दांतों से उसने मनीषा की दूसरी चूची का निप्पल काटना शुरू कर दिया।

“कचोट लो उन्हें प्यारे। और एक अँगुली और डालो मेरी चूत में…” मनीषा ने विनती की। उसने सुनील का लण्ड हाथ में लिया और उसे सहलाना शुरू कर दिया। वह सुबह से चुदवाने को बेचैन थी और उसका पूरा जिश्म वासना की आग में झुलस रहा था। उसने सुनील की मुठ मारनी शुरू कर दी। फिर बोली- “पहले मुझे ज़रा नाश्ता तो कराओ…” कहते हुए उसने लेटते हुए सुनील का लण्ड अपने मुँह में ले लिया। मनीषा ने पूरे जोर-शोर से अपनी भूख मिटानी शुरू कर दी। वो तो उसे कभी न छोड़ती अगर सुनील जल्दी में न होता। उसने बेमन से सुनील का लण्ड अपने मुँह से निकाला।

“अब तुम मुझे चोदो राजा… वही पुराने तरीके से, तेज़ और गहरे… पेल दो ये मूसल मेरी चूत में…” मनीषा ने सुनील के लण्ड को अपनी चूत के मुँह पर रखकर कांपते हुए स्वर में सुनील से मिन्नत की।

“अरे मादरचोद…” जैसे ही वह हलब्बी लौड़ा अंदर गया मनीषा के मुँह से चीख निकली। सुनील ने एक ही धक्के में अपना पूरा लण्ड अंदर जो पेल दिया था।

“दे दो मुझे ये पूरा लंड़ पर जल्दी झड़ना नहीं। मुझे कई बार झाड़े बिना मत झड़ना। मुझे कई बार झड़ना है। कई बार…”

सुनील के लिये ये कोई आसान काम नहीं था। वो जितनी ताकत और तेज़ी से मनीषा को चोद रहा था उसमें अपने आपको काबू में रखना मुश्किल था। उसने अपना ध्यान दूसरी ओर करने की कोशिश की जिससे वह जल्दी न झड़े। उसने गोल्फ, अपनी नौकरी और अपने दोस्तों के बारे में सोचने की कोशिश की।

जब पहला झटका आया तो मनीषा फिर चीखी- “वाह रे मेरे ठोंकू… चोद मुझे… मैं जली जा रही हूँ। मेरी चूत में आग लगी हुई है। झड़ना नहीं, मेरा इंतज़ार करना, सुनील…”

सुनील खुद आश्चयर्चकित था कि इस घनघोर चुदाई के बावज़ूद वो अभी तक टिका हुआ था। उसका हौसला बढ़ा और उसने पूरी चेष्टा की कि मनीषा झड़-झड़ कर बेहाल हो जाए।

“तुम नीचे आओ…” मनीषा बोली।

“पर हमारे पास ज्यादा समय नहीं है…”

पर मनीषा नहीं मानी और सुनील को पीठ के बल लिटाकर उसके लण्ड को अपनी बुर में ठुंसकर कलाबाजियां खाने लगी। बोली- “मैं फिर से झड़ रही हूँ…” पर वह रुकी नहीं। दो ही मिनट में वो फिर बोली- “फिर से झड़ी, वाह क्या ज़िंदगी है…”

सुनील मनीषा के पुट्ठे पकड़कर उसे अपने लण्ड पर कलाबाजी खाने में मदद कर रहा था। वो उस चुदासी औरत की उछलती छातियों को देखने में इतना मस्त था कि उसे अपनी संतुष्टि का ख्याल ही नहीं आया। मनीषा के जिश्म ने एक झटका लिया और वो सुनील के ऊपर ढह गई। उसने सुनील का एक दीर्घ चुम्बन लिया और वह बिस्तर पर कुतिया वाले आसन में आ गई। उसका लाल चेहरा तकिया में छुप गया।

मनीषा- “एक बार मुझे इस आसन में और चोदो फिर मैं तुम्हें छोड़ दूंगी…”

सुनील ले अपने सामने फैली हुई गाण्ड को देखा तो उसके मुँह में पानी आ गया। उसने अपने हाथों से अपने भारी लण्ड को सम्भाला और मनीषा के पीछे जाकर अपना लण्ड उसकी गीली चूत में जड़ तक समा दिया। इस बार उसने इस बात का ध्यान नहीं दिया कि मनीषा झड़ेगी या नहीं। आखिर यह उसका भी आज का अंतिम पराक्रम था।

“इतना गहरे तो पहले तुम कभी नहीं गये, सुनील…” मनीषा बोली- “चोदो इस चूत को और तुम भी झड़ो और मुझे भी तारे दिखा दो…”

सुनील को हमेशा इस बात से और उन्माद आता था, जब उससे चुदा रही औरत इस तरह की अश्लील भाषा का प्रयोग करती थी। उसने अपनी रफ्तार तेज़ कर दी। उसके लण्ड से निकली वीर्य की धार मनीषा की धार के साथ ही छूटी। दोनों जैसे स्वर्ग में थे।

मनीषा- “हे मेरे रब्बा… इतना आनंद… यही स्वर्ग है… और तुम फरिश्ते हो, सुनील…”

सुनील ने अपना सिकुड़ा हुआ लण्ड एक पाप की अवाज़ के साथ बाहर निकाला। उसने घड़ी देखी तो जल्दी से कपड़े पहनने लगा। उसका ग्राहक आने ही वाला था।

सुनील- “मैं चलता हूँ…” उसने जल्दी से विदा माँगी।

मनीषा- “तुम बड़े रूखे इन्सान हो…”

सुनील- “मैं तुम्हें बाद में मिलूंगाा अभी मुझे वाकई जल्दी है…”

मनीषा भी उठकर नहाने चली गई। हालांकि उनकी चुदाई तेज़ और तीखी रही थी पर उसे याद नहीं पड़ता था कि वह इतनी बार कभी झड़ी हो। उसने दो जबरदस्त पैग बनाकर पिये और एक लम्बा स्नान लिया। फिर वोह बाहर जाने के लिए तैयार हुई और हमेशा की तरह भड़कीले कपड़े पहने। अभी उसने अपने ऊँची एंड़ी के सैंडल पहने ही थे कि इतने में ही उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई। यह सोचकर कि शायद सुनील का गोल्फ का साथी नहीं आया, उसने तत्काल ही दरवाज़ा खोला। पर उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि सजल आया था।

सजल बोला- “मनीषा आंटी, मैं अपने पापा को ढूढ़ रहा था, कुछ देर पहले मैंने उन्हें यहीं देखा था। मैंने सोचा शायद वो अभी यहीं हैं…”

“हाँ वो यहाँ थे तो सही… मेरी वाशिंग मशीन को ठीक कर रहे थे। पर वो कुछ मिनट पहले ही निकले हैं। किसी के साथ गोल्फ खेलने जाना था उन्हें… क्या तुमने उन्हें नहीं देखा…”

“फिर तो मैं उन्हें बाद में ही देख पाऊँगा। माफ करना आंटी मैनें आपको बेवजह परेशान किया… धन्यवाद…”

जब सजल वापस जाने के लिये मुड़ा तो मनीषा के दिमाग में एक शैतानी ख्याल आया। वो बोली- “रुको, सजल… तुम अंदर आकर क्यों नहीं मेरे साथ एक पेप्सी लेते…” कहकर उसने सजल को उसकी बांह से पकड़कर अंदर खींचा। उसके मन में आया कि कोमल से इससे अच्छा बदला क्या होगा कि उसका पति और बेटा दोनों उसकी गिरफ्त में हों…

सजल ने अपनी पडोसन की मधुरिम काया पर एक भरपूर नज़र दौड़ाते हुए पूछा- “क्या आप सही कह रही हैं…”

“और नहीं तो क्या… आओ अंदर…” मनीषा ने सजल को अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर बोलि “तुम काफी बड़े हो गये हो, सजल… देखो तो क्या मसल निकल आई हैं। अब तुम वह छोटे बच्चे नहीं रहे जो मेरे घर के सामने साइकल चलाया करते थे…”

सजल के चेहरे पर लाली छा गई- “हाँ अब मैं छोटा बच्चा नहीं रहा आंटी…”

मनीषा ने खिलखिलाते हुए फ्रिज़ से दो पेप्सी निकाली और एक ग्लास में डालकर सजल को दी और अपने लिए दूसरे ग्लास में लेकर उसमें थोड़ी व्हिस्की मिला ली, बोली- “एक दो साल में तुम अपने पापा के जितने हो जाओगे… तुम उनके जैसे आकर्षक तो हो ही गए हो…”

सजल फिर से शर्मा गया। उसकी आंखें मनीषा के जिश्म पर से अब हट नहीं रही थीं। अपनी मम्मी को चोदने के बाद उसे बड़ी उम्र की औरत की सुंदरता का अहसास हो गया था। और उसकी ये आंटी सुंदरता में उसकी मम्मी से कहीं भी उन्नीस नहीं थी।

मनीषा- “आओ सोफे पर आराम से बैठते हैं। तुम्हें कहीं जाना तो नहीं है न…”

जब सजल उसके पास आकर बैठ गया तो मनीषा ने उसे वहीं अपने पति के मनचाहे कमरे में चोदने का निश्चय कर लिया।

“तो मुझे बताओ, आजकल तुम क्या कर रहे हो…” मनीषा ने अपने व्हिस्की मिले पेप्सी का घूँट लेते हुए पूछा।

“कुछ ज्यादा नहीं…” सजल ने कंधे उचकाकर कहा। उसका लण्ड खड़ा हो रहा था और वह उसे छिपाने का रास्ता ढूढ़ रहा था- “वही कालेज की कहानी…”

“तुम अगले साल कहाँ पढ़ने जा रहे हो…” मनीषा ने बात बढ़ाने के लिये पूछा।

“अगले साल से तो मैं यही रहकर पढ़ूँगा। मम्मी को मेरा वह कालेज पसंद नहीं है…”

“मुझे खुशी है कि तुम अपने घर में रहोगे। इससे हमें एक दूसरे को बेहतर जानने का मौका मिलेगा…” मनीषा ने अपने हाथ से सजल की जांघ को सहलाते हुए कहा।

मनीषा इस नौजवान को जल्द से जल्द राह पर लाने का तरीका सोच रही थी। उसे इसका कोई अभ्यास नहीं था। उसे तो चट-पटाओ, बिस्तर पर जाओ, चोदो और निकल जाओ का तरीका ही आता था। उसने कुछ देर और ऐसी ही बेमानी बातों का सिलसिला ज़ारी रखा। पर कुछ ही देर में उसका धैर्य जवाब दे गया, और उसने अपनी चाल चलने का फैसला किया। उसने बातें करते-करते सजल के होठों का एक लम्बा चुम्बन ले डाला। उसकी जीभ सजल के मुँह में घुस गई। जब सजल ने कोई प्रतिरोध नहीं किया तो मनीषा ने अपनी बाहें उसके गिर्द करीं और उसे लेकर वह सोफे पर ढह गई।

“तुम बड़े सजीले लड़के हो, सजल…” उसने अपने जिश्म को सजल के जिश्म से रगड़ते हुए कहा- “मेरे पुट्ठों को पकड़ो और दबाओ…”

सजल को अपनी मम्मी की चुदाई करने से यह तो पता चल गया था कि इस उम्र की औरतें क्या चाहती हैं। उसने फ़ौरन मनीषा की इच्छा पूरी की।


“मुझे तुम्हारी ज़रूरत है, सजल… मुझे तुम्हारे साथ ऐसा करते हुए लग रहा है जैसे मैं फिर से जवान हो गई हूँ। मुझे चोदोगे… मैं तुम्हारे मोटे लण्ड को अपनी चूत में लेना चाहती हूँ…”

सजल ने अपने पुट्ठों को उठाया और मनीषा ने उसकी पैंट और फिर चड्ढी उतार फेंकी। उसकी शर्ट उसने अपने आप ही निकाल दी। मनीषा ने तो खुद नंगी होने में रिकार्ड बना दिया। जब सजल अपनी शर्ट उतार रहा था उतने में मनीषा ने अपने सैंडल छोड़कर बाकी सारे वस्त्र उतार फेंके थे।

“वाह, सजल…” मनीषा ने उसका मूसल जैसा लौड़ा देखकर तारीफ की- “यह तो बहुत बड़ा और मोटा है। लगभग…” उसके मुँह से सुनील का नाम निकलते-निकलते रह गया- “और ये मेरे हाथ में कितना सख्त लग रहा है…” कहते हुए मनीषा ने ईश्वर की उस सुंदर रचना को अपने मुँह में ले लिया।

“आआआह मनीषा आंटी…” सजल ने सिंहनाद की। मनीषा ने मुँह में लेते ही लण्ड की जबरदस्त चुसाई शुरू कर दी थी। सजल इसके लिये बिलकुल तैयार नहीं था।

“उम्म्म…” मनीषा ने चुसाई ज़ारी रखते हुए जवाब दिया। वह मन ही मन में सजल के लण्ड की तुलना उसके बाप के लण्ड से कर रही थी। यह बताना मुश्किल था कि उसे किसका स्वाद अधिक स्वादिष्ट लगा था। इसके लिये रस पीना ज़रूरी था।

“मुझे अपने झरने का थोड़ा रस पिलाओ न सजल…” मनीषा ने चुसाई करते हुए सजल के लण्ड की मुट्ठी मारनी चालू कर दी- “मुझे बताना जब तुम रस छोड़ने वाले हो। मैं तुम्हारा रस पीना चाहती हूँ। क्या तुम मेरा ऐसा करना पसंद करोगे…”

सजल के मुँह से बड़ी मुश्किल से आवाज़ निकली- “हाँ आंटी, ज़रूर… निकाल लो रस मेरे लण्ड से। चूस लो…” कुछ ही देर में वो फिर बोला- “मेरे ख्याल से निकलने ही वाला है… क्या आप तैयार हैं…”

मनीषा ने अपने मुँह की जकड़ उस पाइप पर तेज़ कर दी। कितनी लालची थी वो कि एक बूंद भी बेकार करने को राज़ी नहीं थी। सजल के गाढ़े वीर्य का पहला स्वाद उसे मुँह लगाते ही मिल गया। उसके बाद जो सजल ने रस की बरसात की तो मनीषा से पीना मुश्किल पड़ गया। आज तक उसने इतने जवान मर्द का पानी पिया नहीं था, न उसे पता था कि सजल के लौड़े में रस का झरना नहीं समंदर था। पर उसने हार नहीं मानी और किसी तरह पूरा पानी पी ही डाला।

“क्या तुम मेरे मम्मे, चूत और गाण्ड को छूना चाहोगे…” मनीषा ने जैसे इनाम की घोषणा की।

हालांकि सजल अभी-अभी झड़ा था पर उसे अपने अनुभव से पता था कि वो चुटकी में ही फिर से तैयार हो जायेगा। ऐसे में इस तरह का प्रस्ताव ठुकराने का कोई मतलब ही नहीं था- “ज़रूर, मनीषा आंटी, यह भी कोई पूछने की बात है…”

मनीषा ने अपनी गाण्ड सजल की ओर करते हुए कहा- “छूकर देखो इसे…” उसकी कांपती आवाज़ ने इस बात की गवाही दी कि उसका अपनी भावनाओं पर काबू खत्म होता जा रहा था। उसे चुदाई की भीषण आवश्यकता महसूस हो रही थी। जब मनीषा सामने की ओर मुड़ी तो उसकी खिली हुई चूत देखकर सजल से रहा नहीं गया। उसने उस उजली चूत में अपनी दो उंगलियां पेल दीं। मनीषा की आंखें इस अपर्त्याशित आक्रमण से पलट गईं और वह बिना कुछ सोचे हुए बोल पड़ी- “चोदो इसे… चोद मेरी चूत को, आंटीचोद…”

पर सजल पहले उस कुंए की गहराई नापना चाहता था और अपनी उंगलियों को बाहर निकालने को राज़ी नहीं था।

“बहुत हो गया यह सब सजल…” मनीषा ने डांट लगाई- “पहले मेरे मम्मों को चूसो और फिर मुझे चोदना चालू करो…” मनीषा ने अपना ध्यान सजल के लण्ड को सख्त करने में लगाते हुए हिदायत दी- “मेरे निप्पलों को काटना ज़रूर… चबा जाओ उन्हें… हां ऐसे ही… अरे बड़ा सीखा हुआ लगता है रे तू तो… किसने सिखाया तुझे ये सब…”

जब मनीषा ने देखा कि सजल का लण्ड चुदाई के लिये बिल्कुल तैयार है तो उसने अपने मम्मों को सजल के मुँह से बाहर निकाल लिया। उसने सजल के खड़े लण्ड को अपने हाथ में लेकर उसके ऊपर अपनी चूत को रख दिया। और फिर एक झटके के साथ उसपर बैठकर उसे अपनी चूत में भर लिया। फिर मनीषा ने गुहार की- “भर दे, भर दे, ऐ महान लौड़े मेरी चूत को भर दे…”

“मेरी गाण्ड को सहारा दो, सजल…” कहकर मनीषा ने अपनी चूचियों को सजल के मुँह में भर दिया। आगे झुकने से लण्ड उसकी चूत में और टाइट हो गया और मनीषा को स्वर्ग के दर्शन धरती पर ही होने लगे।

सजल ने अब रुके बिना मनीषा की प्यासी चूत में अपना हलब्बी लौड़ा पेलना शुरू कर दिया।

मनीषा ने भी धक्कों में हाथ बंटाया और उसके लण्ड पर तेजी से सरकने लगी। कभी सजल नीचे से धक्का देता तो कभी मनीषा ऊपर से अपनी चूत को उसके लण्ड पर बैठाती।

सजल की तो जैसे चांदी थी। घर पर चुदासी मम्मी थी और पड़ोस में चुदक्कड़ आंटी। एक के न होने पर दूसरी चूत मिलने की अब गारंटी थी। यही सोचकर उसके समंदर का रस तेज़ी के साथ अपनी आंटी के कुंए की ओर अग्रसर हुआ- “आआआह, उंह उंह…” उसने अपने लण्ड की पिचकारी मनीषा की चूत में छोड़ते हुए आवाज़ निकाली। उसके शरीर की सारी माँस-पेशियां तनाव में आ गईं और उसे रात और दिन एक ही समय में दिखने लगे।

उधर मनीषा का भी ऐसा ही कुछ हाल था। सजल के लण्ड की पिचकारी को अपनी चूत में रस भरते हुए महसूस करते ही उसकी चूत ने भी अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया। वो इतनी तेजी से झड़ी कि उसे हर चीज़ की ओर से अनभिज्ञता हो गई। अगर कोई उससे इस समय उसका नाम भी पूछता तो शायद वो बता नहीं पाती।

“और सजल, और, भर दो मेरी चूत को… चोद मुझे हरामखोर, मादरचोद, फाड़ दे मेरी चूत रंडी की औलाद…” मनीषा को पता ही नहीं था कि वो क्या बके जा रही थी।

मनीषा तब तक सजल के मूसल जैसे लौड़े पर कथक्कली करती रही जब तक कि वो सिकुड़ नहीं गया। उसके बाद वो वहीं सजल के पास ढह गई। उसके चेहरे पर असीम सन्तुष्टि की झलक थी, और आंखों में एक वहशियाना चमक… वोह सोच रही थी की उस छिनाल कोमल से मेरा बदला अब पूरा हो गया। मैनें उसके पूरे खानदान को अपनी चूत में समा लिया है। अगर मैं अब चाहूँ तो दोनों बाप-बेटे मेरे सैडल के तलुवे भी खुशी-खुशी चाटने को तैयार हो जायेंगे।

सजल उस चुदी हुई औरत की ओर देखकर सोच रहा था कि मेरी अपनी उम्र से बड़ी औरतों पर यह दूसरी विजय थी। पर उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि मनीषा ने उसे मादरचोद क्यों बुलाया था… क्या वो जानती थी कि…

जब कोमल ने अपनी गाड़ी घर के सामने खड़ी की तो उसे यह देखकर अचरज हुआ कि सजल मनीषा के घर से निकल रहा था।

“सजल… तुम उस औरत के घर में क्या कर रहे थे…” कोमल ने गुस्से से पूछा।

“उनसे एक बोतल नहीं खुल रही थी इसीलिये मुझे बुलाया था…” सजल ने हकलाते हुए जवाब दिया।

एक बार तो कोमल ने इस जवाब को स्वीकार कर लिया- “आगे से मैं तुम्हें उस कुतिया के पास नहीं देखना चाहूंगी। उसे अपने लिये ऐसा मर्द ढूँढ़ लेना चाहिये जो उसकी बोतल को खोल सके। यह हमारी गलती नहीं है कि उसका पति उसे छोड़कर भाग गया है…”

“अरे मम्मी, वो कोई बुरी औरत नहीं है…” सजल ने अपने द्वारा चुदी औरत का पक्ष लेते हुए कहा।

इससे तो कोमल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया- “अब मुझसे यह मत कहना कि तुम उस कुतिया को पसंद करने लगे हो। तुम उसके हाथों बेवकूफ मत बनना। मुझे उसपर रत्ती भर का विश्वास नहीं है और मैं हम में से किसी को भी उसके नज़दीक नहीं जाने दूँगी…”

घर के अंदर जाते हुए सजल अपना पूरा बचाव कर रहा था- “आखिर तुम्हें मनीषा आंटी में क्या बुराई नज़र आती है… मुझे तो वो एक ठीक औरत लगी…”

इसका जवाब देने के लिये कोमल बगलें झाँकने लगी। उसके जवाब से सजल को इतना तो समझ में आ गया कि यह नारी-सुलभ-ईर्ष्या का ही नतीज़ा है। सजल के मुँह से निकल गया- “तुम सिर्फ़ जलती हो, मम्मी…”

कोमल के सनसनाते हुए चांटे ने सजल के होश गंवा दिये। पर कोमल को अपनी गलती का तुरंत ही एहसास हो गया। कोमल ने सजल को अपनी बाहों में लेकर प्यार करना चाहा। पर सजल ने उसे अलग कर दिया। न केवल सजल अपनी मम्मी से इस झापड़ के लिये नाराज़ था बल्कि वह इस बात से भी अनभिज्ञ नहीं था कि उसके जिश्म से मनीषा की चुदाई की खुशबू आ रही थी।

“छोड़ो मम्मी, मैं नहाने जा रहा हूँ…”

“सजल…” कोमल ने आवाज़ दी पर सजल उसे पीछे छोड़कर निकल गया। पर कोमल को इस बात से भी तकलीफ थी कि उसका परिवार जो मनीषा से अभी तक दूरी रखे था अचानक क्यों उसका खैरगार हो गया था। जब इसका सम्भावित उत्तर कोमल के जेहन में आया तो उसे पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। क्या वह मनीषा को भी चोद रहा था, जबकि उसे घर पर ही चूत उपलब्ध थी…

“वो कुतिया…” कोमल ने फुँफकार मारी। उसे विश्वास हो गया कि सजल ने मनीषा को चोद दिया था। अपनी मम्मी को चोदने से उसे अपने से बड़ी औरत का चस्का लग गया था।

मनीषा ने इसी का फायदा उठाया होगा।








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