Showing posts with label गाँव का राजा. Show all posts
Showing posts with label गाँव का राजा. Show all posts

Saturday, April 3, 2010

गाँव का राजा पार्ट--15

राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
उत्तेजक कहानिया
गाँव का राजा पार्ट--15

गतान्क से आगे..........................

“क..क्या मतलब बगीचे पर नही जाना क्या…”

“तू जा…मैं वाहा जा कर क्या करूँगी…” आँखे नचाती बोली.

“ आमो की रखवाली कौन करेगा….” मुन्ना समझ गया कि ये फिर नाटक कर रही है.

“क्यों तू तो कर ही लेता है…जा और अपनी सहेलियों को भी बुला ले…”

“अब…चल ना…देख कैसे तड़प रहा है मेरा…लौरा..एयेए” चिरोरी करते हुए मुन्ना लंड को लूँगी के उपर से सहलाते हुए बोला.
“तड़प रहा तो….खुद ही शांत कर…मैं नही आती….” मुन्ना एक पल उसे देखता रहा फिर चिढ़ कर बोला. “ठीक है मत चल…मैं जा रहा हू…कोई ना कोई तो मिल ही जाएगी…” और फिर तेज़ी के साथ बाहर निकल गया. उसे पहले पता होता तो बसंती को बुला लेता, मगर आज तो कोई जुगाड़ नही था. फिर भी गुस्से में बाहर निकल सीधा बगीचे पर पहुँचा और दरवाज़ा बंद कर बिस्तर पर लेट गया. नींद तो आ नही रही थी. चुप-चाप वही लेटा करवटें बदलने लगा.

मुन्ना के बाहर निकल जाने के थोरी देर तक शीला देवी कुच्छ सोचती रही, फिर धीरे से उठी और बाहर निकल गई. उसके कदम अपने आप बगीचे की तरफ बढ़ते चले गये. कुच्छ समय बाद वो खलिहान के दरवाजे पर थी. दरवाजे पर खाट-खाट की आवाज़ सुन मुन्ना बिस्तर से उच्छल कर नीचे उतरा. कौन हो सकता है सोचते हुए उसने दरवाजा खोल दिया. सामने शीला देवी खड़ी थी पसीने से लत-पथ, लगता है जैसे दौरती हुई आई थी. उसकी साँसे तेज चल रही थी और सांसो के साथ उसकी छातियाँ उपर नीचे हो रही थी. नज़रे नीचे की ओर झुकी हुई थी. मुन्ना ने एक पल को उपर से नीचे शीला देवी को निहारा फिर चेहरे पर मुस्कान लाते हुए बोला “बाहर ही खरी रहोगी या अंदर आओगी”

एक पल रुक कर धीरे से वो अंदर आ गई और धीरे धीरे चलते हुए बिस्तर पर पैर लटका कर बैठ गई. फिर मासूम सा चेहरा बना मायूस आवाज़ में बोली “बेटा ये ठीक नही है… मैं नही चाहती की तू रंडियों के चक्कर में पड़े…ये सब बंद कर दे….” .

“मुझे कौन सा उनके साथ मज़ा आता है…पर तू तो…जब कि कल…”

“मैं तेरी मा हू…मुझे कल रात से खुद पर शरम आ रही है….इसलिए तुझे दुबारा करने से रोका…अंधी हो गई थी…ये ठीक नही है…..फिर तू उन रंडियों के साथ करता था मुझे बहुत बुरा लगता था…”

“तुझे मज़ा नही आया..था…सच बता…. तुझे मेरी कसम…”

“हा…आया था…बहुत मज़ा आया….पर…” शरम से लाल होती शीला देवी बोली. शीला देवी को थोरा सा खिसका कर उसके पास बिस्तर बैठ उसकी जाँघो पर हाथ रख कर मुन्ना उसे समझाने वाले अंदाज में बोला “तू गाओं में रह कर कुएँ की मेंढक बन गई है….दुनिया में सब कितना मज़ा करते है…फिर गाओं भर की जासूस वो बुढ़िया तो तेरे पास आती है, क्या वो तुझे नही बताती कि लोगो के घरो में क्या-क्या होता है.”

“आती है…और बताती भी है मगर…फिर भी हम औरो के जैसा क्यों…”

“तो फिर क्यों आई है भागती हुई”

“मैं तुझे रोकने आई हूँ....मैं नही चाहती तू औरो के जैसे बन जाए”

“बात उनके जैसा बन ने की नही. बात मज़े करने की है. कोई और हमारे बदले मज़ा नही कर सकता ना ही हम किसी को बताने जा रहे है कि हम कितने मज़े करते है. लोगो को अपना मज़ा करने दो हम अपना करते है. घर के अंदर कोई देखने आता है?…खुल कर मज़ा लेगी तभी सुखी रहेगी….शहर में तो….. ”

“तू मुझे ग़लत बाते सीखा रहा है…गंदी औरत बना रहा है…”

“…जिंदगी का असली मज़ा इसी में है…”

“पर तू मेरा…बेटा है…तेरे साथ…ये ग़लत है.

“मतलब मेरे साथ नही करवाएगी…बाहर के किसी से…”

“तू बात को पता नही कहाँ से कहाँ ले जाता है…देख बेटा ऐसा मत…कर…मुझे किसी से नही करवाना और उन रंडियों का चक्कर…ठीक नही…तू भी छ्चोड़ दे”

“तू अपनी सारी उठा कर रखेगी तो मैं बाहर क्यों मुँह मारूँगा…”

“बहुत बरी ….कीमत माँग रहा है….”

“तेरी छेद घिस जाएगी क्या…फिर तुझे भी तो मज़ा आएगा…बाहर करवाएगी तो बदनामी होगी…घर में…खुल कर मज़ा लूट…नही तो…जाम हो जाएगा…छेद…फिर उंगली भी डालेगी तो नही घुसेगी…” मुन्ना का ये भाषण सुन कर शीला देवी हस्ने लगी अब पर उसको ये बात भी समझ आ गई वो मुन्ना को नही रोक सकती. वो बाहर जाएगा ही. कुच्छ पल सोचती रही फिर समझ में आ गया कि अच्छा होगा वो अपनी छेद की सेवा उस से करवाती रहे. उसके दोनो हाथ में लड्डू रहेगा बेटा भी कब्ज़े में रहेगा और उसकी खुजली भी शांत रहेगी. इतना सोच मुस्कुराते हुए बोली “घिसेगी तो नही पर ढीली ज़रूर हो जाएगी…”

दोनो की हसी निकल गई. मुन्ना समझ गया कि सन्सय के बदल छट गये. कल रात से शीला देवी के मन में जो उथल-पुथल चल रहा था वो सब अब शायद ख़तम हो गया था. कल रात जो मज़ा आया था उसकी याद ने शीला देवी के बदन को एक बार फिर से सिहरा दिया. दोनो चुप थे और शीला देवी सिर नीचे किए अपनी चूत में उठ रहे झन-झनाहट और मचल रहे कीड़ो को महसूस कर रही थी. डुप्दुपति चूत को जाँघो के बीच कसती हुई धीरे से बोली “अब किसी रंडी के पास मुँह मारने तो नही जाएगा…”

“नही जौंगा बाबा…लेकिन तू पहले बोल खुल के मज़ा लेगी….”

“हा लूँगी…अब खुल के लूँगी…पर तू…”

“अरी….बोल तो दिया नही जाउन्गा…”

“चल झूठे….तेरा कोई भरोसा नही कसम ले पहले…”

“ठीक चल…तेरी कसम…”

“ना मेरी कसम क्यों खा…रहा है…” मुँह बिचकाती बोली. शीला देवी की आवाज़ से लग रहा था कि अब वो पूरे मज़े के लिए तैय्यार है. चेहरे पर और बोलने के अंदाज में चंचलता आ चुकी थी. मुन्ना कुच्छ पल सोचता रहा फिर बोला “ तब किसकी…”

“….अपने लूँ…ड्ड की कसम खा ना…” मुस्कुराती हुई बोली. ये बोलते हुए चौधरैयन का चेहरा शरम से लाल हो गया और गालो में गड्ढे पर गये. मुन्ना उपर से नीचे तक सन सना गया. शीला देवी ने लंड बोला और मुन्ना की रीढ़ की हड्डी का खून दौरता हुआ सीधा उसके लौरे में उतरता चला गया. शीला देवी की आँखो में झाँकते हुए तपाक से अपनी लूँगी को उठा खरे लंड को हाथ में पकड़ उसकी चमरी उलट कर चमचमाते सुपरे को दिखाता शीला देवी के पास खरा हो बोला “ हाई….इस लनन्ड की कसम जो तेरी चूत छ्चोड़ किसी और की….” कहते हुए आगे झुक कर उसकी गाल पर दाँत काट ते हुए दूसरे हाथ से उसकी एक चुचि को ज़ोर से दबा दिया. शीला देवी “उई मा…” खहते हुए उच्छल कर बैठ गई और मुन्ना को पिछे धकेला.

“इससस्स कितनी ज़ोर से काट लिया मुए…”

“हाई…यही पटक कर ले लूँगा…अफ….ऐसे ही खुल कर मज़ा लेगी तो….”.

कहते हुए मुन्ना ने शीला देवी के चूतर पर चिकोटी काटी. शीला देवी ने एक घूँसा उसकी छाती पर मारा और बोली “हट कुत्ते…भाग यहाँ से…”

लंड लूँगी में फरफारा रहा था. आज मुन्ना ने इरादा कर लिया था कि आराम से मज़ा लूँगा. एक-एक अंग को चाट-चाट कर, काट कर पहले खाउन्गा फिर रात भर गद्देदार चूत में लंड पेल कर चोदुन्गा. साली को आज सोने नही दूँगा.

शीला देवी की कमर में हाथ डाल उस से लिपट कर उसके कान की लौ को मुँह से पकड़ फुसफुसते हुए बोला “हाई बहुत तडपाया है…सुबह से…किसी काम में मन नही लग रहा था….” मुन्ना का हाथ लगते ही शीला देवी का पूरा बदन सिहर गया. मुन्ना कान को चूमने के बाद धीरे से उसकी गर्दन और उसके पिछले भाग पर अपने होंठो को चलाते हुए चूम रहा था. आज शीला देवी ने पीठ पर बटन लगने वाला ब्लाउस पहन रखा था हाथ को धीरे धीरे उसकी पीठ पर सरकाते हुए आहिस्ता आहिस्ता मुन्ना एक-एक बटन खोलने लगा. ब्लाउस के बटन खुलते ही शीला देवी को जैसे होश आया मुन्ना को थोरा परे धकेल्ति हुई बोली “हाई रुक तो ज़रा… हाथ हटा….”

“हाई तो और क्या करू....अब नही रुका जाता… “.

इस पर शीला देवी मुँह बनाती हुई बोली “अर्रे…दरवाजा तो बंद कर ले कुत्ते.....”

“ओह…अभी बंद कर के आता हू…एक चुम्मा दे…”

“नही तू बंद कर के आ…और फिर पहले मेरा पायल दे….फिर माँगना चुम्मा….” शीला देवी ने अपने सारी के पल्लू को ठीक करते हुए मुँह बनाते हुए कहा जैसे गुस्से में हो.

“तो ये बोल ना…कि तुझे पायल चाहिए…”

“वो तो चाहिए ही….रंडियों को देगा और मा…को देने में….तुम सब बाप बेटे …एक जैसे…” कहते हुए उसने मुन्ना को धकेल कर बिस्तर से उतार दिया. मुन्ना दरवाज़ा बंद करने की जगह खोल कर बाहर निकल चारो तरफ देखने लगा. पूरे बगीचे में घनघोर अंधकार फैला हुआ था. आसमान में बदल छाए हुए थे और इसलिए चाँद भी उनके पिछे च्छूपा हुआ था. बारिश के आसार थे. दूर दूर तक एक कुत्ता भी नज़र नही आ रहा था. लूँगी के उपर से अपने लंड को पकड़ ज़ोर से हिलाते हुए अपने हाथ से ही लंड को मरोड़ कर धीरे से बोला साली….कल से तरप रहा हू…मा की चूत…हाई चौधरैयन आज तो तेरी फार दूँगा…. अचानक उसके होंठो पर एक मुस्कान फैल गई और और अपनी जेब में रखे पायल को उसने बाहर निकाल लिया और वही खुले में एक पेड़ के नीचे खड़े हो पेशाब करने के बाद तेज़ी से अंदर घुसा और दरवाजा बंद कर पिछे मुड़ा तो देखा कि शीला देवी कही नज़र नही आई अलबत्ता बाथरूम से तेज सिटी के जैसी आवाज़ आ रही थी. बाथरूम का दरवाज़ा पूरी तरह से बंद नही था. मुन्ना दबे पाव बाथरूम में घुस गया. शीला देवी कमोड के उपर बैठी मूतने में व्यस्त थी, पेटिकोट पिछे से पूरा उठा हुआ था और उसके मस्ताने गद्देदार गोरे गोरे चुट्टर सॉफ दिख रहे थे. चुटटर थोरा उठा हुआ था इसलिए पिछे से उसकी चूत की झांते भी थोरी दिख रही थी, गांद का छेद दोनो भारी चुटटरो के बीच दबा हुआ था. मुन्ना के लंड को झंझणा देने के लिए इतना काफ़ी था. दिल में आया कि पिछे जा कर गांद में लंड सटा दे. दबे पाव शीला देवी के पिछे पहुच उसकी पेशाब करती हुई चूत को देखने की इच्छा से अपने सिर को आगे झुकाया ही था कि शीला देवी उठ कर खड़ी हो गई. मुन्ना को देखते ही चौंक गई शरम और गुस्से से मुन्ना को धकेला “उईईइ….मा..यहा क्या कर रहा है …डरा दिया…मैने सोचा पता नही कौन आ गया….कमीना..”

“देखने आया था तू कैसे मूत….ती है…” हस्ते हुए मुन्ना बोला.

“शरम नही आती…” फ्लस चलाती शीला देवी बोली.

“कल ही देखी थी तेरी…. जिस से तू मूत ती है…”

“उफफफ्फ़….मुए…बेशरम गंदी बाते करता है….सुअर कही का…”

“अब यही खरा रहेगा क्या....” मुन्ना को धकेल्ति बाथरूम से बाहर निकलती और खुद भी निकलती हुई बोली.

“खरा तो ना जाने कब से है….” अपनी लूँगी के उपर से लंड पकड़ के दिखाता हुआ बोला.

“हट मुए…बाहर निकलने के लिए बोल रही हू …चल…” बोलती हुई वो बाथरूम से बाहर निकल गई.

शीला देवी ने इस समय केवल पेटिकोट और ब्रा पहन रखा था. मुन्ना जब दरवाजा बंद करने गया था तभी उसने सारी और ब्लाउस उतार दिया था. ब्रा काले रंग का नॉर्मल सा था बहुत ज़यादा स्टाइलिश नही था. इसलिए चुचे पूरे ढके हुए थे. खाली बीच वाली गोरी घाटी नज़र आ रही थी. काले रंग की एकदम फिट पेटिकोट नाभि से नीचे बँधी हुई थी और चुटटरो से चिपकी हुई उसके मस्ताने गथिले चुटटरो का आकार बता रही थी. शीला देवी भुन-भुनाते हुए बिस्तर पर पैर लटका कर बैठ गई. मुन्ना कुत्ते की तरह जीभ लपलपता उसके पिछे पिछे गया और बिस्तर पर बैठ गया और उसकी कमर में हाथ डाल कर कहा “…चल गुस्सा छ्चोड़…”

“नही तू…बहुत गंदा लड़का है…”

“अरे मा ग़लती हो गई….बरी इच्छा हो रही थी….. कि देखे कैसे करती हो..”

“क्या कैसे….करते हू…”

“पेशाब….और….क्या…”

“छि…गंदे…पता नही कहा से सीख कर आ गया है” मुँह बनाती हाथ चमकती हुई शीला देवी बोली.
अरे मा तू क्या जाने जब मे मामी के यहा था तो मैं अक्सर राज शर्मा के ब्लॉग कामुक-कहानियाँ ब्लॉगस्पॉटडॉट कॉम और
हिन्दीसेक्सीकहानियाडॉटब्लॉगस्
पॉटडॉटकॉम से सेक्सीकहानिया पढ़ता था वास्तव मे मा राज शर्मा की कहानिया बहुत मस्त होती है “हाई…तू जिसको…गंदा बोलती है…हाई पेशाब करते समय ना जब सिटी जैसी आवाज़…”

“धात…बेशरम वो तो औरते जब भी पेशाब करती है तब…आवाज़…”

“हा..वही…ये आवाज़ सुनते ही ना मेरा तो एकदम खड़ा हो जाता…”

“क्या…मतलब…. पेशाब करने की आवाज़ सुन के…छि…कितना कमीना हो गया है तू…”

“हाई..अब जो भी कह ले…देख ना…कैसे खड़ा है…” कहते हुए अपने लूँगी के उपर हाथ लगा लंड दिखाया और अपने हाथ को उसकी ब्रा मे कसी चुचियों पर ले गया. शीला देवी ने बुरा सा मुँह बनाते हुए उसका हाथ हटा दिया. मुन्ना फिर से अपने हाथ को उसकी ब्रा पर ले गया और उसकी बाई चुचि को मुट्ठी में पकड़ ज़ोर से दबाया. शीला देवी को ज़ोर से दर्द हुआ “उई…मा…”करते हुए चौंक गई और मुन्ना को परे धकेला. अपने हाथ से अपनी छाती सहलाती हुई बोली “नोच लेगा क्या…अफ…जुंगली कही का…”

“मा….खोल ना, अब नही खोलेगी तो फाड़ दूँगा तेरा ब्लाउस…” मुन्ना फिर से चिरोरी करते बोला. पर शीला देवी ने उसका हाथ झटक दिया और बोली “ना पहले…पायल दे…उसके बिना हाथ नही लगाने दूँगी…”

“कमाल करती है…पायल के पिछे पड़ी है…”

“रंडी तो तूने बना दिया है….अब तो बिना…पायल के…”

“तो फिर वैसे ही पटक कर लूँगा….”

“ले लेना हरामी….पर पहले पायल दे…..”

“तो ले….” कहते हुए मुन्ना उसके सामने खड़ा हो गया और अपनी लूँगी को खोल कर नीचे गिरा दिया. चौधरायण ने जब देखा तो उसके मुँह से एक तेज किलकरी निकल गई….”उईईइ….मा……मुए कितना कमीना है तू……” मुन्ना का दस इंच का लंड एक दम सीधा खड़ा था अपने लाल चमचमते सुपरे से लार टपका रहा था. पर खास बात ये थी मुन्ना ने पायल को लंड के चारो तरफ लपेट रखा था. उसकी इसी बदमासी ने शीला देवी के मुँह से किलकरी निकाल दी थी. लंड के चारो तरफ पायल लपेटे मुन्ना कमर पर हाथ रखे शान से खड़ा था.

“ले..ले अपना पायल….” कहते हुए उसने एक हाथ से शीला देवी का हाथ पकड़ा और उसको अपने लंड पर रख दिया. मुन्ना की ये अदा शीला देवी को पूरी तरह से मदहोश कर गई. लंड के सुपरे को पकड़ आहिस्ता-आहिस्ता उसने उसके चारो तरफ लपेटा हुआ पायल उतारा और मुन्ना को अपनी बड़ी बड़ी कजरारी आँखो से घूरते अपने एक पैर को घुटने के पास से हल्का सा मोड़ कर बिस्तर पर रखा और फिर अदा के साथ धीरे से अपने अपने पेटिकोट को घुटनो तक उपर उठा कर अपनी गोरी पिंदलियों में पतली सी सोने की पायल पहन ने लगी. उसकी एक चुचि उसके घुटनो से दबी हुई ब्रा के बाहर आने को उतावली हुई थी. शीला देवी की इस अदा ने मुन्ना को ऐसा घायल किया कि उसका दिल कर रहा था इसकी तस्वीर निकाल कर हमेशा के लिए सन्जो ले. अपने काँपते हाथो से उसके तलवे को पकड़ पैर की उंगलियों पर हाथो को फेरा. शीला देवी ने पायल पहन लिया था
क्रमशः........................

gaanv ka raja paart--15

gataank se aage..........................

“k..kya matlab bagiche par nahi jana kya…”

“tu ja…main waha ja kar kya karungi…” ankhe nachati boli.

“ aamo ki rakhwali kaun karega….” Munna samajh gaya ki ye fir natak kar rahi hai.

“kyon tu to kar hi leta hai…ja aur apni saheliyon ko bhi bula le…”

“ab…chal na…dekh kaise tarap raha hai mera…laur..aaa” chirori karte hue munna lund ko lungi ke upar se sahlate hue bola.
“tarap raha to….khud hi shant kar…main nahi aati….” Munna ek pal use dekhta raha fir chidh kar bola. “thik hai mat chal…main ja raha hu…koi na koi to mil hi jayegi…” aur fir teji ke saath bahar nikal gaya. Use pahle pata hota to Basanti ko bula leta, magar aaj to koi jugar nahi tha. Fir bhi gusse mein bahar nikal sidha bagiche par pahuncha aur darwaza band kar bistar par let gaya. Neend to aa nahi rahi thi. Chup-chap wahi leta karwate badalne laga.

Munna ke bahar nikal jane ke thori der tak Sheela Devi kuchh sochti rahi, fir dhire se uthi aur bahar nikal gai. Uske kadam apne aap bagiche ki taraf badhte chale gaye. Kuchh samay baad wo khalihan ke darwaje par thi. Darwaje par khat-khat ki aawaz sun Munna bistar se uchhal kar niche utara. Kaun ho sakta hai sochte hue usne darwaja khol diya. Samne Sheela Devi khari thi pasine se lath-path, lagta hai jaise daurti hui aai thi. Uski sanse tej chal rahi thi aur sanso ke saath uski chhatiyan upar niche ho rahi thi. Nazre niche ki orr jhuki hui thi. Munna ne ek pal ko upar se niche Sheela Devi ko nihara fir chehre par muskan late hue bola “bahar hi khari rahogi ya andar aaogi”

Ek pal ruk kar dhire se wo andar aa gai aur dheere dheere chalet hue bistar par pair latka kar baith gai. Fir masum sa chehra bana mayus aawaz mein boli “beta ye thik nahi hai… main nahi chahti ki tu randiyon ke chakkar mein pare…ye sab band kar de….” .

“mujhe kaun sa unke saath maja aata hai…par tu to…jab ki kal…”

“main teri maa hu…mujhe kal raat se khud par sharam aa rahi hai….isliye tujhe dubara karne se roka…andhi ho gai thi…ye thik nahi hai…..fir tu un randiyon ke sath karta tha mujhe bahut bura lagta tha…”

“tujhe maja nahi aaya..tha…sach bata…. tujhe meri kasam…”

“ha…aaya tha…bahut maja aaya….par…” sharam se laal hoti Sheela Devi boli. Sheela Devi ko thora sa khiska kar uske pass bistar baith uski jangho par hath rakh kar Munna use samjhane wale andaj mein bola “tu gaon mein rah kar kuen ki mendhak ban gai hai….duniya mein sab kitna maja karte hai…fir gaon bhar ki jasus wo budhiya to tere pass aati hai, kya wo tujhe nahi batati ki logo ke gharo mein kya-kya hota hai.”

“aati hai…aur batati bhi hai magar…fir bhi ham auro ke jaisa kyon…”

“to fir kyon aai hai bhagti hui”

“main tujhe rokne aai hun....main nahi chahti tu auro ke jaise ban jaye”

“baat unke jaisa ban ne ki nahi. Baat maje karne ki hai. Koi aur hamare badle maja nahi kar sakta na hi ham kisi ko batane ja rahe hai ki ham kitne maje karte hai. Logo ko apna maja karne do ham apna karte hai. Ghar ke andar koi dekhne aata hai?…khul kar maja legi tabhi sukhi rahegi….shahar mein to….. ”

“tu mujhe galat bate sikha raha hai…gandi aurat bana raha hai…”

“…jindgi ka asli maja isi mein hai…”

“par tu mera…beta hai…tere sath…ye galat hai.

“matlab mere sath nahi karwayegi…bahar ke kisi se…”

“tu baat ko pata nahi kahan se kahan le jata hai…dekh beta aisa mat…kar…mujhe kisi se nahi karwana aur un randiyon ka chakkar…thik nahi…tu bhi chhor de”

“tu apni sari utha kar rakhegi to main bahar kyon munh marunga…”

“bahut bari ….keemat maang raha hai….”

“teri chhed ghis jayegi kya…fir tujhe bhi to maja aayega…bahar karwayegi to badnami hogi…ghar mein…khul kar maja loot…nahi to…jaam ho jayega…chhed…fir ungli bhi daalegi to nahi ghusegi…” Munna ka ye bhashan sun kar Sheela Devi hasne lagi ab par usko ye baat bhi samajh aa gai wo Munna ko nahi rok sakti. Wo bahar jayega hi. Kuchh pal sochti rahi fir samajh mein aa gaya ki achha hoga wo apni chhed ki sewa us se karwati rahe. Uske dono hath mein laddu rahega beta bhi kabje mein rahega aur uski khujli bhi shant rahegi. Itna soch muskurate hue boli “ghisegi to nahi par dhili jarur ho jayegi…”

Dono ki hasi nikal gai. Munna samajh gaya ki sansay ke badal chaat gaye. Kal raat se Sheela Devi ke man mein jo uthal-puthal chal raha tha wo sab ab sayad khatam ho gaya tha. Kal raat jo maja aaya tha uski yaad ne Sheela Devi ke badan ko ek baar fir se sihra diya. Dono chup the aur Sheela Devi sir niche kiye apni Choot mein uth rahe jhan-jhanahat aur machal rahe kiro ko mahsus kar rahi thi. Dupdupati choot ko jangho ke beech kasti hui dhire se boli “ab kisi randi ke pass munh marne to nahi jayega…”

“nahi jaunga baba…lekin tu pahle bol khul ke maja legi….”

“ha lungi…ab khul ke lungi…par tu…”

“aree….bol to diya nahi jaunga…”

“chal jhoothe….tera koi bharosa nahi kasam le pahle…”

“thik chal…teri kasa…”

“na meri kasam kyon kha…raha hai…” Munh bichkati boli. Sheela Devi ki aawaz se lag raha tha ki ab wo pure maje ke liye taiyyar hai. Chehre par aur bolne ke andaj mein chanchalta aa chuki thi. Munna kuchh pal sochta raha fir bola “ tab kiski…”

“….apne lun…dddd ki kasam kha naaa…” muskurati hui boli. Ye bolte hue Chaudhrain ka chehra sharam se laal ho gaya aur gaalo mein gaddhe par gaye. Munna upar se niche tak san sana gaya. Sheela Devi ne lund bola aur Munna ki reedh ki haddi ka khoon daurta hua sidha uske laure mein utarta chala gaya. Sheela Devi ki ankho mein jhankte hue tapak se apni lungi ko utha khare lund ko hath mein pakar uski chamri ulat kar chamchamte supare ko dikhata Sheela devi ke pass khara ho bola “ hi….iss lunnnd ki kasam jo teri cho.oot chhor kisi aur ki….” Kahte hue aage jhuk kar uski gaal par daant kaat te hue dusre hath se uski ek chuchi ko jor se daba diya. Sheela Devi “ui maa…” khahte hue uchhal kar baith gai aur Munna ko pichhe dhakela.

“issss kitni jor se kaat liya mue…”

“hi…yahi patak kar le lunga…uff….aise hi khul kar maja legi to….”.

kahte hue Munna ne Sheela Devi ke chootar par chikoti kati. Sheela Devi ne ek ghunsa uski chhati par mara aur boli “hat kutte…bhag yahan se…”

Lund lungi mein farfara raha tha. Aaj Munna ne irada kar liya tha ki aaram se maja lunga. Ek-ek ang ko chaat-chaat kar, kaat kar pahle khaunga fir raat bhar gaddedar choot mein lund pel kar chodunga. Shali ko aaj sone nahi dunga.

Sheela Devi ki kamar mein hath daal us se lipat kar uske kaan ki lau ko munh se pakar fusfusate hue bola “hi bahut tarapaya hai…subah se…kisi kaam mein man nahi lag raha tha….” Munna ka haath lagte hi Sheela Devi ka pura badan sihar gaya. Munna kaan ko chumne ke baad dhire se uski gardan aur uske pichle bhaag par apne hontho ko chalate hue chum raha tha. Aaj Sheela Devi ne peeth par button lagne wala blouse pahan rakha tha haath ko dhire dhire uski peeth par sarkate hue ahista ashita Munna ek-ek button chatkane laga. Blouse ke button khulte hi Sheela Devi ko jaise hosh aaya Munna ko thora pare dhakelti hui boli “hi ruk to jara… haath hata….”

“hi to aur kya karu....ab nahi ruka jata… “.

Is par Sheela Devi munh banati hui boli “arre…darwaja to band kar le kutte.....”

“oh…abhi band kar ke aata hu…ek chumma de…”

“nahi tu band kar ke aa…aur fir pahle mera payal de….fir mangna chumma….” Sheela Devi ne apne sari ke pallu ko thik karte hue munh banate hue kaha jaise gusse mein ho.

“to ye bol na…ki tujhe payal chahiye…”

“wo to chahiye hi….randiyon ko dega aur maa…ko dene mein….tum sab baap bête …ek jaise…” kahte hue usne Munna ko dhakel kar bistar se utar diya. Munna darwaza band karne ki jagah khol kar bahar nikal charo taraf dekhne laga. Pure bagiche mein ghanghor andhkar faila hua tha. Aasman mein badal chhaye hue the aur isliye chand bhi unke pichhe chhupa hua tha. Barish ke aasar the. Dur dur tak ek kutta bhi nazar nahi aa raha tha. Lungi ke upar se apne lund ko pakar jor se hilata hue apne haath se hi lund ko maror kar dhire se bola saali….kal se tarap raha hu…maa ki choot…hi chaudhrain aaj to teri faar dunga…. achanak uske hontho par ek muskan fail gai aur aur apni jeb mein rakhe payal ko usne bahar nikal liya aur wahi khule mein ek per ke niche khare ho peshab karne ke baad teji se andar ghusa aur darwaja band kar pichhe mura to dekha ki Sheela Devi kahi nazar nahi aai albatta bathroom se tej siti ke jaisi aawaz aa rahi thi. Bathroom ka darwaza puri tarah se band nahi tha. Munna dabe paw bathroom mein ghus gaya. Sheela Devi commode ke upar baithi mootne mein vyast thi, petticoat pichhe se pura utha hua tha aur uske mastane gaddhedar gore gore chuttar saaf dikh rahe the. Chuttar thora utha hua tha isliye pichhe se uski choot ki jhante bhi thori dikh rahi thi, gaand ka chhed dono bhari chuttaro ke beech daba hua tha. Munna ke lund ko jhanjhana dene ke liye itna kafi tha. Dil mein aaya ki pichhe ja kar gaand mein lund sata de. Dabe paw Sheela Devi ke pichhe pahuch uski peshab karti hui choot ko dekhne ki ichha se apne sir ko agge jhukaya hi tha ki Sheela Devi uth kar khari ho gai. Munna ko dekhte hi chaunk gai sharam aur gusse se Munna ko dhakela “uiiii….maa..yaha kya kar raha hai …dara diya…maine socha pata nahi kaun aa gaya….kamina..”

“dekhne aaya tha tu kaise moot….ti hai…” haste hue Munna bola.

“sharam nahi aati…” flus chalati Sheela Devi boli.

“kal hi dekhi thi teri…. jis se tu moot ti i hai…”

“uffff….mue…besharam gandi bate karta hai….suar kahi ka…”

“ab yahi khara rahega kya....” Munna ko dhakelti bathroom se bahar nikalti aur khud bhi nikalti hui boli.

“khara to na jane kab se hai….” Apne lungi ke upar se lund pakar ke dikhata hua bola.

“hat mue…bahar nikalne ke liye bol rahi hu …chal…” bolti hui wo bathroom se bahar nikal gai.

Sheela Devi ne is samay kewal petticoat aur bra pahan rakha tha. Munna jab darwaja band karne gaya tha tabhi usne sari aur blouse utar diya tha. Bra kale rang ka normal sa tha bahut jayada stylish nahi tha. Isliye chuche pure dhake hue the. Khali beech wali gori ghati nazar aa rahi thi. Kale rang ki ekdum fit petticoat nabhi se niche bandhi hui thi aur chuttaro se chipki hui uske mastane gathile chuttaro ka aakar bata rahi thi. Sheela Devi bhun-bhunate hue bistar par pair latka kar baith gai. Munna kutte ki tarah jeebh laplapata uske pichhe pichhe gaya aur bistar par baith gaya aur uski kamar mein hath daal kar kya “hi…chal gussa chhor…”

“nahi tu…bara ganda larka hai…”

“hi galti ho gai….bari ichha ho rahi thi….. ki dekhe kaise karti ho..”

“kya kaise….karte hu…”

“peshab….aur….kya…”

“chhi…gande…pata nahi kaha se sikh kar aa gaya hai” munh banati hath chamkati hui Sheela Devi boli.
are maa jab me maami ke yaha tha to main raj sharma ke kamuk-kahaaniyan.blogspot.com or hindi sexi kahaaniya se sexi kahaani padhta tha vaastav me maa raj sharma ki kahaaniya bahut mast hoti hai “hi…tu jisko…ganda bolti hai…hi peshab karte samay na jab siti jaisi aawaz…”

“dhat…besharam wo to aurte jab bhi peshab karti hai tab…aawaz…”

“ha..wahi…ye aawaz sunte hi na mera to ekdum khara ho jata…”

“kya…matlab…. peshab karne ki aawaz sun ke…chhi…kitna kamina ho gaya hai tu…”

“hi..ab jo bhi kah le…dekh na…kaise khara…” kahte hue apne lungi ke upar hath laga lund dikhaya aur apne hath ko uski bra mei kasi chuchiyon par le gaya. Sheela Devi ne bura sa munh banate hue uska hath hata diya. Munna fir se apne hath ko uski bra par le gaya aur uski bai chuchi ko mutthi mein pakar jor se dabaya. Sheela Devi ko jor se dard hua “uii…maa…”karte hue chaunk gai aur Munna ko pare dhakela. Apne haath se apni chhati sahlati hui boli “noch lega kya…uff…jungli kahi ka…”

“hi….khol na, ab nahi kholegi to faar dung tera blouse…” Munna fir se chirori karte bola. Par Sheela Devi ne uska hath jhatak diya aur boli “na pahle…payal de…uske bina hath nahi lagane dungi…”

“kamal karti hai…payal ke pichhe pari hai…”

“randi to tune bana diya hai….ab to bina…payal ke…”

“to fir waise hi patak kar lunga….”

“le lena harami….par pahle payal de…..”

“to le….” kahte hue Munna uske samne khara ho gaya aur apni lungi ko khol kar niche gira diya. Chaudharain ne jab dekha to uske munh se ek tej kilkari nikal gai….”uiiii….maa……mue kitna kamina hai tu……” Munna ka dus inch ka lund ek dum sidha khara tha apne laal chamchamate supare se laar tapka raha tha. Par khas baat ye thi Munna ne payal ko lund ke charo taraf lapet rakha tha. Uski isi badmasi ne Sheela Devi ke munh se kilkari nikal di thi. Lund ke charo taraf payal lapete Munna kamar par hath rakhe shaan se khara tha.

“le..le apna payal….” Kahte hue usne ek hath se Sheela Devi ka hath pakra aur usko apne lund par rakh diya. Munna ke ye ada Sheela Devi ko puri tarah se madhosh kar gai. Lund ke supare ko pakar ahista-ahista usne uske charo taraf lapeta hua payal utara aur Munna ko apni bari bari kajrari ankho se ghoorte apne ek pair ko ghutne ke pass se halka sa mor kar bistar par rakha aur fir ada ke saath dhire se apne apne petticoat ko ghutno tak upar utha kar apni gori pindliyon mein patli si sone ki payal pahan ne lagi. Uski ek chuchi uske ghutno se dabi hui bra ke bahar aane ko utawali hui thi. Sheela Devi ki is ada ne Munna ko aisa ghayal kiya ki uska dil kar raha tha iski tasvir nikal kar hamesha ke liye sanjo le. Apne kanpte hatho se uske talwe ko pakar pair ki ungliyon par hatho ko fera. Sheela Devi ne payal pahan liya tha




























































































































































Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma
हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया
Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

गाँव का राजा पार्ट--14

राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
उत्तेजक कहानिया
गाँव का राजा पार्ट--14
गतान्क से आगे...............

आधे घंटे बाद जब शीला देवी को होश आया तो खुद को नंगी लेटी देख हर्बरा कर उठ गई. चुदाई का नशा उतरने के बाद होश आया तो अपने पर बड़ी शरम आई. बगल में बेटा भी नंगा लेटा हुआ था. उसका लटका हुआ लॉरा और उसका लाल सुपाड़ा उसके मन में फिर से गुद-गुड़ी पैदा कर गया. आहिस्ते से बिस्तर से उतर अपने पेटिकोट और ब्लाउस को फिर से पहन लिया और मुन्ना की लूँगी उसके उपर डाल जैसे ही फिर से लेटने को हुई कि मुन्ना की आँखे खुल गई. अपने उपर रखे लूँगी का अहसास उसे हुआ तो मुस्कुराते हुए लूँगी को ठीक से पहन लिया. शीला देवी भी शरमाते सकुचाते उस से थोरी दूर पर लेट गई. दोनो मा-बेटे एक दूसरे से आँख मिलाने की हिम्मत जुटा रहे थे. चुदाई का नशा उतरने के बाद जब दिल और दिमाग़ दोनो सही तरह से काम करने लगा तो अपने किए का अहसास हो रहा था. थोरी देर तक तो दोनो में से कोई नही बोला पर फिर मुन्ना धीरे से सरक कर शीला देवी की ओर घूम गया और उसके पेट पर हाथ रख दिया और धीरे धीरे हाथ चला कर सहलाने लगा. फिर धीरे से बोला “मा….क्या हुआ…” शीला देवी कुच्छ नही बोली तब फिर बोला “इधर देख ना….” शीला देवी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ घूम गई. मुन्ना उसके पेट को हल्के-हल्के सहलाते हुए धीरे से उसके पेटिकोट के लटके हुए नारे के साथ खेलने लगा. नारा जहा पर बाँधा जाता वाहा पर पेटिकोट आम तौर पर थोरा सा फटा हुआ होता है या यू समझिए कि गॅप सा बना होता है. नारे से खेलते-खेलते मुन्ना ने अपनी उंगलियाँ धीरे से उसमे सरका कर चलाई तो गुद-गुडी होने पर उसके हाथ को हटाती बोली “क्या करता है…हाथ हटा…” मुन्ना ने हाथ वाहा से हटा कमर पर रख दिया और थोरा और आगे सरक शीला देवी की आँखो में झाँकते हुए बोला “…मज़ा आया…” शरम से शीला देवी का चेहरा लाल हो गया उसकी छाती पर के मुक्का मारती हुई बोली “...चुप…गधा कही का…” मुन्ना समझ गया कि अभी पहली बार है थोरा तो सरमाएगी ही उसकी नाभि में उंगली चलाता हुआ बोला “मुझे तो बहुत मज़ा...आया…बता ना तुझे कैसा लगा…”
“हाई, नही छोरे…तू पहले हाथ हटा…”

“क्यों…अभी तो…बता ना…मा..”

“..धात…छोड़…वैसे आज कोई आम चुराने वाली नही आई..” शीला देवी ने बात बदलने के इरादे से कहा.

“तूने इतनी मोटी-मोटी गलियाँ दी…कि वो सब…”

“चल…मेरी गालियो का…असर…उनपे कहा से….होने वाला…”

“क्यों इतनी मोटी गलियाँ सुन कर कोई भी भाग जाएगा…मैने तो तुझे पहले कभी ऐसी गलियाँ देते नही सुना”

“वो तो…वो तो ऐसे ही…बस…पता नही…शायद गुस्सा…बहुत ज़यादा…”

“अच्छा गुस्से में कोई ऐसी गलियाँ देता है….वैसे बरी…मजेदार गलियाँ दे रही थी…मुझे तो पता ही नही था…”

“….चल हट बेशरम…”

“….. उन बेचारियों को तो तूने….”

“अच्छा…वो सब बेचारियाँ हो गई…सच -सच बता….लाजवंती थी ना…” आँखे नचती शीला देवी ने पुचछा. हस्ते हुए मुन्ना बोला “तुझे कैसे पता…तूने तो उसका बॅंड बजा…” कहते हुए उसके होंठो को हल्के से चूम लिया. शीला देवी उसको पिछे धकेलते हुए बोली “हट….बदमाश…तूने अब तक गाओं में कितनो के साथ…” मुन्ना एक पल खामोश रहा फिर बोला “क्या..मा…किसी के साथ नही..”

“चल झूठे….मुझे सब पता…है सच सच बता” कहते हुए फिर उसके हाथ को अपने पेट पर से हटाया. मुन्ना ने फिर से हाथ को पेट पर रख उसकी कमर पकड़ अपनी तरफ खींचते हुए कहा “साची साची बताउ…”

“हा साची…कितनो के साथ…” कहती हुई उसकी छाती पर हाथ फेरा. मुन्ना उसको और अपनी तरफ खींचता हुआ अपनी कमर को उसके कमर से सटा धीरे से फुसफुसता हुआ बोला “याद नही पर..बारह तेरह होंगी…”.

“हाई…दैयया…इतनी सारी…कैसे करता था मुए…मुझे तो केवल लाजवंती और बसंती का पता था…”कहते हुए उसके गाल पर चिकोटी काटी.

“वो तो तुझे इसलिए पता है ना क्योंकि तेरी जासूस आया ने बताया होगा…बाकियों को तो मैने इधर उधर कही खेत में कभी पास वाले जंगल में कभी नदी किनारे निपटा दिया था….”

“कमीना कही का…तुझे शरम नही आती…बेशरम…” उसकी छाती पर मुक्का मारती बोली.

“अब तो मा को…. ही निपटा…..” कहते हुए उसने शीला देवी को कमर से पकड़ कस कर भींचा. उसका खरा हो चुका लंड सीधा शीला देवी की जाँघो के बीच दस्तक देने लगा. शीला देवी उसकी बाँहो से छूटने का असफल प्रयास करती मुँह फुलाते हुए बोली “छ्चोड़…बेशरम…मुझे फसा कर…बदमास…” पर ये सब बोलते हुए उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी तेर रही थी. मुन्ना ने अपनी एक टांग उठा उसके जाँघो पर रखते हुए उसके पैरो को अपने दोनो पैरों के बीच करते हुए लंड को पेटिकोट के उपर से चूत पर सताते हुए उसके होंठो से अपने होंठो को सटा उसका मुँह बंद कर दिया. रसीले होंठो को अपने होंठो के बीच दबोच चूस्ते हुए अपनी जीभ को उसके मुँह में थेल उसके मुँह में चारो तरफ घूमते हुए चुम्मा लेने लगा. कुच्छ पल तो शीला देवी के मुँह से गो गो करके गोगियाने की आवाज़ आती रही मगर फिर वो भी अपनी जीभ को थेल थेल कर पूरा सहयोग करने लगी. दोनो आपस में लिपटे हुए अपने पैरों से एक दूसरे को रगर्ते हुए चुम्मा-चाती कर रहे थे. मुन्ना ने अपने हाथ कमर से हटा उसकी चुचियों पर रख दिया था और ब्लाउस के उपर से उन्हे दबाने लगा. शीला देवी ने जल्दी से अपने होंठो को उसके चुंबन से छुड़ाया, दोनो हाँफ रहे थे और दोनो का चेहरा लाल हो गया था. मुन्ना के हाथों को अपनी चुचियों पर से हटाती हुई बोली “इश्स…क्या करता है…”. मुन्ना ने शीला देवी के हाथ को पकड़ अपनी लूँगी के भीतर घुसा अपना लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया. शीला देवी ने अपना हाथ पिछे खींचने की कोशिश की मगर उसने ज़बरदस्ती उसकी मुत्हियाँ खोल अपना गरम तप्ता हुआ खरा लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया. लौरे की गर्मी पा कर उसका हाथ अपने आप लंड पर कसता चला गया.

“….तेरा मन नही भरा क्या…” लंड को पूरी ताक़त से मरोर्ति दाँत पीसती बोली.

“हाई…..नही भरा…एक बार और करने दे…ना…” कहते हुए मुन्ना ने उसके घुटनो तक उठे हुए पेटिकोट के भीतर झटके से हाथ घुसा दिया. शीला देवी ने चिहुन्क कर लंड को छ्चोड़ पेटिकोट के भीतर घुसते उसके हाथो को रोकने की कोशिश करते हुए बोली “इससस्स…..क्या करता है…कहा हाथ घुसा रहा…” मुन्ना ज़बरदस्ती हाथ को उसकी जाँघो के बीच ठेलता हुआ बोला “हाई….एक बार और…देख ना कैसे खड़ा है…”

“उफफफ्फ़…हाथ हटा….बहुत बिगड़ गया है तू…” तब तक मुन्ना का हाथ उसके जाँघो के बीच चूत तक पहुच चुका था. चूत की झांतो के बीच से रास्ता खोजते हुए चूत की छेद में बीच वाली उंगली को धकेला. शीला देवी की चूत पनिया गई थी. थोरा सा ठेलने पर ही उंगली कच से बूर में घुस गई. दो तीन बार कच कच उंगली चलाता हुआ मुन्ना बोला “हाई…पनिया गई है…तेरी चू…” शीला देवी उसकी कलाई पकड़ रोकने की कोशिश करती बोली “अफ…छ्चोड़..ना..क्या करता है…वो पानी तो पहले का है…”. एक हाथ से लूँगी को लंड पर हटाता हुआ बोला “पहले का कहा से आएगा…देख इस पर लगा पानी तो कब का सुख गया…”. नंगा खड़ा लंड देखते ही शीला देवी शरमाई आँखे चुराती कनिखियों से देखती हुई बोली “तेरी लूँगी से पुच्छ गया होगा…मेरा अंदर गिरा था कैसे सूखेगा…” कहते हुए मुन्ना के हाथ को पेटिकोट के अंदर से खींच दिया. पेटिकोट जाँघो तक उठा चुका था. लंड को अपने हाथ से पकड़ दिखाता हुआ मुन्ना बोला “….दुबारा…गिराने का दिल कर रहा है…आराम से जाएगा…इस..बार चिकनी हो गई है…तेरी चू…”

“चुप…बेशरम…बहुत देर हो चुकी है…”

“हाई…मया…एक बार में मन नही भरा…एक बार और…”

“रात भर तू यही करता रहता था क्या…”

“…तीन…चार…बार तो करता ही...”

“….मुआ…तभी दिन भर सोता था…रंडियों के चक्कर में”

“….अब उनका चक्कर छ्चोड़ दिया…अब केवल तेरे साथ…ही…एक बार और…” कहते हुए फिर से उसके पेटिकोट के भीतर हाथ घुसाने की कोशिश की.

“हट…नही करवाना….पायल कहा दिया…बिना पायल दिए ले चुका है…एक बार…पहले पायल…दे” कहते हुए उसके हाथ को झटके से हटाती हस दी. मुन्ना भी हस पड़ा और उसकी चुचि को पकड़ कस कर दबा दाँत पीसते बोला “कल ला दूँगा फिर…कम से कम पाँच बार लूँगा…”

“अफ…सीईई….कमिने छ्चोड़….घड़ी देख….क्या टाइम हुआ…” मुन्ना ने घड़ी देखी. सुबह के 4:30 बज रहे थे टाइम का पता ही नही चला था. पहले तो दोनो मा-बेटा पर पर चढ़ने उतरने का नाटक करते रहे फिर कौन पहल करे, इसी लूका-छिपि और एक बार की चुदाई में सुबह के साढ़े चार बज गये. शीला देवी हर्बरा कर उठ गई क्यों कि वो जानती थी कि गाओं में लोग जल्दी सोते है तो जल्दी उठ भी जाते थोरी देर में सड़को पर लोग चलने लगेंगे और थोरा बहुत उजाला भी हो जाएगा ऐसे में पकड़े जाने की संभावना ज़यादा है. मुन्ना को बोली “चल जल्दी बाकी जो करना होगा कल करेंगे….अंधेरा रहते घर….” मुन्ना का मन तो नही था मगर मजबूरी थी चुप-चाप उठ कर अपनी लूँगी ठीक कर खड़ा हो गया. शीला देवी सारी पहन रही थी उसके पास जा कर उसकी कमर पकर पेट सहलाता हुआ बोला “…है बड़ा दिल कर रहा था दुबारा लेने…का….बरी खूबसूरत….”
“छ्चोड़…पकड़े गये तो…फिर कभी मौका भी नही मिलने वाला…चल जल्दी…” और उसका हाथ हटा जल्दी से बाहर की ओर चल दी. मुन्ना भी पिछे पिछे चल पड़ा. तेज कदमो से चलते हुए दोनो घर पहुच चुप-चाप बिना आवाज़ किए अपने-अपने कमरे में चले गये. थोरी देर तक तो दोनो को नींद नही आई, रात की मीठी यादों ने सोने नही दिया मगर फिर दोनो सो गये. सुबह मुन्ना को तो कोई उठाने नही आया मगर शीला देवी को मजबूरन उठना पड़ा. करीब दस बजे दिन में मुन्ना उठा जल्दी से नहा धो कर खाना खाया और फिर बाहर निकल गया. शीला देवी वापस अपने कमरे में घुस गई और जा कर सो गई. शाम में खाना खाने के समय मुन्ना और शीला देवी मिले. चुप चाप खाना खाया फिर अपने अपने कमरो में चले गये. कमरे में घुसने से पहले शीला देवी और मुन्ना की आँखे एक दूसरे से मिली तो मुन्ना ने इशारा करने की कोशिश की मगर शीला देवी ने होंठ बिचका कर के दूसरी तरफ मुँह घुमा लिया. शाम का आठ बज चुके इसलिए लूँगी पहन बैठ गया. बगीचे पर पहुचने के लिए बेताब था मगर शीला देवी तो कमरे में घुसी पड़ी थी. मुन्ना अपने कमरे से निकल कर शीला देवी के कमरे के पास पहुच गया. दरवाज़ा धीरे से खोलते हुए अंदर झाँक कर देखा तो पाया की शीला देवी बिस्तर पर आँखो पर हाथ रख लेटी हुई थी. उसके पास जा कर हिला कर उठाया. शीला देवी ने ओह आह..करते हुए आँखे खोली और पुचछा क्या बात है. मुन्ना मुँह बनाते हुए बोला “क्या…मा…मैं वाहा इंतेज़ार कर रहा था और तुम यहा…”. थोड़ा मुस्कुराती थोड़ा मुँह बनाती बोली “क्यों…इंतेज़ार कर रहा है…”

क्रमशः........................ .........
आपका दोस्त
राज शर्मा

gaanv ka raja paart--14

gataank se aage...............

Adhe ghante baad jab Sheela Devi ko hosh aaya to khud ko nangi leti dekh harbara kar uth gai. Chudai ka nasha utarne ke baad hosh aaya to apne par bari sharam aai. Bagal mein beta bhi nanga leta hua tha. Uska latka hua laura aur uska laal supara uske man mein fir se gud-gudi paida kar gaya. Ahiste se bistar se utar apne petticoat aur blouse ko fir se pahan liya aur Munna ki lungi uske upar daal jaise hi fir se letne ko hui ki Munna ki ankhe khul gai. Apne upar rakhe lungi ka ahsas use hua to muskurate hue lungi ko thik se pahan liya. Sheela Devi bhi sharmate sakuchate us se thori door par let gai. Dono maa-bete ek dusre se ankh milane ki himmat juta rahe the. Chudai ka nasha utarne ke baad jab dil aur dimag dono sahi tarah se kaam karne laga to apne kiye ka ahsas ho raha tha. Thori der tak to dono mein se koi nahi bola par fir Munna dhire se sarak kar Sheela Devi ki orr ghum gaya aur uske pet par haath rakh diya aur dhire dhire haath chala kar sahlane laga. Fir dhire se bola “maa….kya hua…” Sheela Devi kuchh nahi boli tab fir bola “idhar dekh na….” Sheela Devi muskurate hue uski taraf ghum gai. Munna uske pet ko halke-halke sahlate hue dhire se uske petticoat ke latke hue nare ke sath khelne laga. Nara jaha par bandha jata waha par petticoat aam taur par thora sa fata hua hota hai ya yu samajhiye ki gap sa bana hota hai. Nare se khelte-khelte Munna ne apni ungliyan dhire se usme sarka kar chalai to gud-gudi hone par uske hath ko hatati boli “kya karta hai…hath hata…” Munna ne hath waha se hata kamar par rakh diya aur thora aur aage sarak Sheela Devi ki ankho mein jhankte hue bola “…maja aaya…” Sharam se Sheela Devi ka chehra laal ho gaya uski chhati par ke mukka marti hui boli “...chup…gadha kahi ka…” Munna samajh gaya ki abhi pahli baar hai thora to sarmayegi hi uski nabhi mein ungli chalata hua bola “mujhe to bahut maja...aaya…bata na tujhe kaisa laga…”
“hi, nahi chhor…tu pahle haath hata…”

“kyon…abhi to…bata na…maa..”

“..Dhat…chhor…waise aaj koi aam churane wali nahi aai..” Sheela Devi ne baat badalne ke irade se kaha.

“tune itni moti-moti galiyan di…ki wo sab…”

“chal…meri galiyon ka…asar…unpe kaha se….hone wala…”

“kyon itni moti galiyan sun kar koi bhi bhag jayega…maine to tujhe pahle kabhi aisi galiyan dete nahi suna”

“wo to…wo to aise hi…bas…pata nahi…sayad gussa…bahut jayada…”

“accha gusse mein koi aisi galiyan deta hai….waise bari…majedar galiyan de rahi thi…mujhe to pata hi nahi tha…”

“….chal hat besharam…”

“….. un bechariyon ko to tune….”

“Achha…wo sab bechariyan ho gai…sach -sach bata….Lajwanti thi na…” ankhe nachati Sheela Devi ne puchha. Haste hue Munna bola “tujhe kaise pata…tune to uska band baja…” kahte hue uske hontho ko halke se choom liya. Sheela Devi usko pichhe dhakelte hue boli “hat….badmash…tune ab tak gaon mein kitno ke saath…” Munna ek pal khamosh raha fir bola “kya..maa…kisi ke saath nahi..”

“chal jhoothe….mujhe sab pata…hai sach sach bata” kahte hue fir uske hath ko apne pet par se hataya. Munna ne fir se haath ko pet par rakh uski kamar pakar apni taraf khinchte hue kaha “sachi sachi batau…”

“ha sachi…kitno ke sath…” kahati hui uski chhati par haath fera. Munna usko aur apni taraf khinchta hua apni kamar ko uske kamar se sata dhire se fusfusata hua bola “yaad nahi par..barah terah hongi…”.

“hi…daiyya…itni sari…kaise karta tha mue…mujhe to kewal Lajwanti aur Basanti ka pata tha…”kahte hue uske gaal par chikoti kati.

“wo to tujhe isliye pata hai na kyonki teri jasus aaya ne bataya hoga…bakiyon ko to maine idhar udhar kahi khet mein kabhi pass wale jangal mein kabhi nadi kinare nipta diya tha….”

“kamina kahi ka…tujhe sharam nahi aati…besharam…” uski chhati par mukka marti boli.

“ab to maa ko…. hi nipta…..” kahte hue usne Sheela Devi ko kamar se pakar kas kar bheencha. Uska khara ho chuka lund sidha Sheela Devi ki jangho ke beech dastak dene laga. Sheela Devi uski banho se chhutne ka asfal prayas karti munh fulate hue boli “chhor…besharam…mujhe fasa kar…badmas…” par ye sab bolte hue uske chehre par halki muskan bhi tair rahi thi. Munna ne apni ek tang utha uske jangho par rakhte hue uske pairo ko apne dono pairon ke beech karte hue lund ko petticoat ke upar se choot par satate hue uske hontho se apne hontho ko sata uska munh band kar diya. Rasile hontho ko apne hontho ke beech daboch chuste hue apni jeebh ko uske munh mein thel uske munh mein charo taraf ghumate hue chumma lene laga. Kuchh pal to Sheela Devi ke munh se go go karke gogiyane ki aawaz aati rahi magar fir wo bhi apni jeebh ko thel thel kar pura sahyog karne lagi. Dono apas mein lipte hue apne pairon se ek dusre ko ragarte hue chumma-chati kar rahe the. Munna ne apne haath kamar se hata uski chuchiyon par rakh diya tha aur blouse ke upar se unhe dabane laga. Sheela Devi ne jaldi se apne hontho ko uske chumban se chhuraya, dono hanf rahe the aur dono ka chehra laal ho gaya tha. Munna ke hathon ko apni chuchiyon par se hatati hui boli “iss…kya karta hai…”. Munna ne Sheela Devi ke hath ko pakar apni lungi ke bheetar ghusa apna lund uske haath mein pakra diya. Sheela Devi ne apna hath pichhe khinchne ki koshish ki magar usne jabardasti uski muthhiyan khol apna garam tapta hua khara lund uske haath mein pakra diya. Laure ki garmi paa kar uska haath apne aap lund par kasta chala gaya.

“….tera man nahi bhara kya…” lund ko puri takat se marorti daant pisti boli.

“hi…..nahi bhara…ek baar aur karne de…na…” kahte hue Munna ne uske ghutno tak uthe hue petticoat ke bheetar jhatke se hath ghusa diya. Sheela Devi ne chihunk kar lund ko chhor petticoat ke bheetar ghusti uske haatho ko rokne ki koshish karte hue boli “issss…..kya karta hai…kaha haath ghusa raha…” Munna jabardasti haath ko uski jangho ke beech thelta hua bola “hi….ek baar aur…dekh na kaise khara…”

“uffff…haath hata….bahut bigar gaya hai tu…” tab tak Munna ka haath uske jangho ke beech choot tak pahuch chuka tha. Choot ki jhanto ke beech se rasta khojte hue choot ki chhed mein beech wali ungli ko dhakela. Sheela Devi ki choot paniya gai thi. Thora sa thelne par hi ungli kach se boor mein ghus gai. Do teen baar kach kach ungli chalata hua Munna bola “hi…paniya gai hai…teri choo…” Sheela Devi uski kalai pakar rokne ki koshish karti boli “uff…chhor..na..kya karta hai…wo pani to pahle ka hai…”. Ek haath se lungi ko lund par hatata hua bola “pahle ka kaha se aayega…dekh is par laga pani to kab ka sukh gaya…”. Nanga khara lund dekhte hi Sheela Devi sharmai ankhe churati kanikhiyon se dekhti hui boli “teri lungi se puchh gaya hoga…mera andar gira tha kaise sukhega…” kahte hue Munna ke haath ko petticoat ke andar se kheench diya. Petticoat jangho tak utha chuka tha. Lund ko apne hath se pakar dikhata hua Munna bola “….dubara…girane ka dil kar raha hai…aaram se jayega…is..baar chikni ho gai hai…teri choo…”

“chup…besharam…bahut der ho chuki hai…”

“hi…maa…ek baar mein man nahi bhara…ek baar aur…”

“raat bhar tu yahi karta rahta tha kya…”

“…teen…char…baar to karta hi...”

“….mua…tabhi din bhar sota tha…randiyon ke chakkar mein”

“….ab unka chakkar chhor diya…ab kewal tere sath…hi…ek baar aur…” kahte hue fir se uske petticoat ke bheetar hath ghusane ki koshish ki.

“hat…nahi karwana….payal kaha diya…bina payal diye le chuka hai…ek baar…pahle payal…de” kahte hue uske haath ko jhatke se hatati has di. Munna bhi has para aur uski chuchi ko pakar kas kar daba daant piste bola “kal la dunga fir…kam se kam paanch baar lunga…”

“uff…seeeeee….kamine chhor….ghari dekh….kya time hua…” Munna ne ghari dekhi. Subah ke 4:30 baj rahe the time ka pata hi nahi chala tha. Pahle to dono maa-beta per par chadhne utarne ka natak karte rahe fir kaun pahal kare, isi luka-chhipi aur ek baar ki chudai mein subah ke sadhe chaar baj gaye. Sheela Devi harbara kar uth gai kyon ki wo janti thi ki gaon mein log jaldi sote hai to jaldi uth bhi jate thori der mein sarko par log chalne lagenge aur thora bahut ujala bhi ho jayega aise mein pakre jane ki sambhavna jayada hai. Munna ko boli “chal jaldi baki jo karna hoga kal karenge….andhera rahte ghar….” Munna ka man to nahi tha magar majboori thi chup-chap uth kar apni lungi thik kar khara ho gaya. Sheela Devi saree pahan rahi thi uske pass ja kar uski kamar pakar pet sahlata hua bola “…hi bara dil kar raha tha dubara lene…ka….bari khoobsurat….”
“Chhor…pakre gaye to…fir kabhi mauka bhi nahi milne wala…chal jaldi…” aur uska haath hata jaldi se bahar ki orr chal di. Munna bhi pichhe pichhe chal para. Tej kadmo se chalte hue dono ghar pahuch chup-chap bina aawaz kiya apne-apne kamre mein chale gaye. Thori der tak to dono ko neend nahi aai, raat ki mithi yaadon ne sone nahi diya magar fir dono so gaye. Subah Munna ko to koi uthane nahi aaya magar Sheela Devi ko majbooran uthna para. Karib das baje din mein Munna utha jaldi se naha dho kar khana khaya aur fir bahar nikal gaya. Sheela Devi wapas apne kamre mein ghus gai aur ja kar so gai. Sham mein khana khane ke samay Munna aur Sheela Devi mile. Chup chap khana khaya fir apne apne kamro mein chale gaye. Kamre mein ghusne se pahle Sheela Devi aur Munna ki ankhe ek dusre se mili to Munna ne ishara karne ki koshish ki magar Sheela Devi ne honth bichka kar ke dusri taraf munh ghuma liya. Sham ka aath baj chuke isliye lungi pahan baith gaya. Bagiche par pahuchne ke liye betab tha magar Sheela Devi to kamre mein ghusi pari thi. Munna apne kamre se nikal kar Sheela Devi ke kamre ke pass pahuch gaya. Darwaza dhire se kholte hue andar jhank kar dekha to paya ki Sheela Devi bistar par ankho par hath rakh leti hui thi. Uske paas ja kar hila kar uthaya. Sheela Devi ne oh aah..karte hue ankhe kholi aur puchha kya baat hai. Munna munh banate hue bola “kya…maa…main waha intezar kar raha tha aur tum yaha…”. Thora muskurati thora munh banati boli “kyon…intezar kar raha hai…”

kramshah......................
..........














आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj

































































































































































Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma
हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया
Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

गाँव का राजा पार्ट -13

राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
उत्तेजक कहानिया
Hindi Sex Stories हिंदी सेक्स कहानियाँ
गाँव का राजा पार्ट -13

हेलो दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी गाँव का राजा पार्ट -13 लेकर हाजिर हूँ दोस्तो कहानी कैसी है ये तो आप ही बताएँगे

उसने सपने में भी नही सोचा था कि उसकी मा की चुचियाँ इतनी सख़्त और गुदाज होंगी. रंडी और घर के माल का अंतर उसे पता चल गया. शीला देवी की आँखे नशे में डूबी लग रही थी. उसके बगल में लेट ते हुए अपनी तरफ घुमा लिया और उसके रस भरे होंठो को अपने होंठो में भर नंगी पीठ पर हाथ फेरते हुए अपने बाहों के घेरे में कस ज़ोर से चिपका लिया. करीब पाच मिनिट तक दोनो मा-बेटे एक दूसरे से चिपके हुए एक दूसरे के मुँह में जीभ ठेल-ठेल कर चुम्मा-चाटि करते रहे. जब दोनो अलग हुए तो हाँफ रहे थे और दोनो के आँखो की शरम अब धीरे-धीरे घुलने लगी थी. मुन्ना ने शीला देवी की चुचियों को फिर से दोनो हाथो में थाम लिया और उसके निपल को चुटकी में पकड़ मसल्ते हुए एक चुचि के निपल से अपनी जीभ से सहलाने लगा. शीला देवी भी अपने एक हाथ से चुचि को पकड़ मुन्ना के मुँह में ठेलने की कोशिश करते हुए सीस्यते हुए चुस्वा रही थी. बारी-बारी से दोनो चुचियों को मसालते चुस्ते हुए उसने दोनो चुचियों को चूस-चूस कर लाल कर दिया. चुचियों पर दाँत गढ़ाते हुए चूस्ते हुए बोला "मा…तू ..ठीक कहती… है…अपने पेड़ के…आम…अफ..पहले क्यों…अभी तक तो पूरा चूस चूस कर…सारा आम-रस पी.." मुन्ना का जोश और चूसने का तरीका शीला देवी को पागल बना रहा था. अपनी छिनाल मामी की दी हुई ट्रैनिंग का पूरा फ़ायदा उठा ते हुए वो शीला देवी की चुचि चूस्ते हुए उसे गरम कर रहा था. वो कभी उसके सिर के बालो को सहलाती कभी उसकी पीठ को कभी उसके चूतरों तक हाथ फेरती बोली "अभी…चूसने को मिला…अच्छे से चूस…बेटा….सारा रस तेरे लिए ही…संभाल…" तभी मुन्ना ने अपने दन्तो को उसकी चुचियों पर गढ़ाते हुए निपल को खींचा तो दर्द से करहती बोली "कु..त्ती…चूसने वाला…आम है,....खाने वाला…उन रंडियों…का होगा..जिनको…उफ़फ्फ़….धीरे से चूस…चूस कर…अफ ..बेटा…निपल को…होंठो के बीच दबा…के…बचपन…में…धीरे से…नही तो छोड़…दे…" इस बात पर मुन्ना ने हस्ते हुए शीला देवी की चूचियों पर से मुँह हटा उसके होंठो को चूम धीरे से कान में बोला "इतने जबर्दर्स्त...आम पहले नही चखाए उसी की सज़ा…" शीला देवी भी मुस्कुराती हुई धीरे से बोली "कमीना…गंदा लरका..."


"गंदी औरत…कम…" बोलते बोलते मुन्ना रुक गया. शीला देवी की मुस्कान और चौड़ी हो गई. दोनो हाथो में बेटे के चेहरे को भरती हुई उसके होंठो और गालो को बेतहाशा चूमती हुई उसके गाल पर अपने दाँत गढ़ा दिए, मुन्ना सीस्या कर कराह उठा. हस्ती हुई बोली "कैसा लगा…गंदी औरत बोलता है…खुद अपनी मा के साथ गंदा काम…". मुन्ना ने भी अपना गाल छुड़ा कर उसके गाल पर दाँत सेकाट लिया और बोला "तू भी तो अपने बेटे के साथ…". दोनो अब बेशरम हो चुके थे. झिझक दूर हो चुकी थी. मुन्ना अपने हाथ को चुचियों पर से हटा नीचे जाँघो पर ले गया और टटोलते हुए अपने हाथ को जाँघो के बीच डाल दिया. चूत पर पेटिकोट के उपर से हाथ लगते ही शीला देवी ने अपनी जाँघो को भींचा तो मुन्ना ने ज़बरदस्ती अपनी पूरी हथेली जाँघो के बीच घुसा दी और चूत को मुठ्ठी में भर, पकड़ कर मसल्ते हुए बोला "अपना बिल दिखा ना…" पूरी चूत को मसले जाने पर कसमसा गई शीला देवी, फुसफुसती हुई बोली

"तू…आम…चूस…मेरी ..छेद…देखेगा तो मादर…चोद…बन…" मुन्ना समझ गया की गंदी बाते करने में मा को मज़ा आ रहा है.

"डंडा डालूँगा…. तभी….मादर..चोद बनूंगा…अभी खाली दिखा…." कहते हुए चूत को पेटिकोट के उपर से और ज़ोर से मसलते उसकी पुट्तियों को चुटकी में पकड़ ज़ोर से मसला.

"हाई…हरामी मेरी…बिल… में डंडा…घुसा…एगा." जोश में आ उसके गालो को अपने दन्तो में भर लिया और अपने हाथ को सरका कमर के पास ले जाती लूँगी के भीतर हाथ घुसाने की कोशिश की.
हाथ नही घुसा मगर मुन्ना की दोनो अंडकोष उसकी हथेली में आ गये. ज़ोर से उसी को दबा दिया, मुन्ना दर्द से कराह उठा. कराहते हुए बोला "उखडीगी,…क्या…चाहिए…"

शीला देवी ने जल्दी से अंडकोष पर पकड़ ढीली की "हथियार…दिखा.."

"थोड़ा उपर नही पकड़ सकती थी….पेड़ पर तो सब देख लिया था…"

"पेड़ पर… तो तूने भी….देखा…"

"तुझे पता…था…जान-बूझ कर दिखा…" कहते हुए शीला देवी का हाथ पकड़ अपनी लूँगी के भीतर घुसा दिया. खड़े लंड पर हाथ पड़ते ही उसका बदन सिहर गया. गरम लोहे की छड़ की तरह तपते हुए लंड को मुठ्ठी में कसते ही लगा जैसे चूत ने एक बूँद पानी टपका दिया. लंड को हथेली में कस कर जाकड़ मरोर्ति हुई बोली "गधे का…उखाड़ कर लगा लिया…"

"है तो…तेरे बेटे का…मगर…गधे के…जैसा.." बोलते हुए चूत की दरार में पेटिकोट के उपर से उंगली चलाते हुए बोला "पानी…फेंक रही है…"

"मादर..चोद बने..एगा...क्या.."

"तू…रंडी…बन..ना"

"हा….अब रहा नही जा रहा…"

"नंगी कर…दू…"

"हा….और तू भी…" झट से बैठ ते हुए अपनी लूँगी खोल एक तरफ फेंका तो उसका दस इंच का तम्तमता हुआ लंड कमरे की रोशनी में शीला देवी की आँखों को चौंधिया गया. उठ कर बैठ ते हुए हाथ बढ़ा उसके लंड को फिर से पकड़ लिया और चमड़ी खींच उसके पहाड़ी आलू जैसे लाल सुपरे को देखती बोली "हाई…आया ठीक बोलती…तू बहुत बड़ा….हो गया है…तेरा…केला तो….च्छेद…फाड़"


पेटिकोट के नारे को हाथ में पकड़ झटके के साथ खोलते हुए बोला "फर..वाएगी…."

"हाई…मेरा….छेद…फार…"

कहती हुई शीला देवी ने अपनी गांद उठा पेटिकोट को गांद के नीचे से सरकाते हुए निकाल दिया. इस काम में मुन्ना ने भी उसकी मदद की और सरसरते हुए पेटिकोट को उसके पैरों से खींच दिया. शीला देवी लेट गई और अपनी दोनो टांगो को घुटनों के पास से मोड़ कर फैला दिया. दोनो मा बेटे अब असीम उत्तेजना का शिकार हो चुके थे दोनो में से कोई भी अब रुकना नही चाहता था. शीला देवी की चमचमाती जाँघो को अपने हाथ से पकड़ थोड़ा और फैलाता हुआ उनके उपर अपना मुँह लगा चूमते हुए दाँत से काट ते उसकी झांतदार चूत के उपर एक जोरदार चुम्मा लिया और बित्ते भर की बूर की दरार में जीभ चलाते हुए बूर की टीट को झांतो सहित मुँह में भर कर खींचा तो शीला देवी लहरा गई. चूत की दोनो पुट्तियों ने दूप-दुपते हुए अपने मुँह खोल दिए. सीस्यति हुई बोली "इसस्स…..क्या कर रहा है…" कभी चूत चटवाया नही था. दरार में जीभ चलाने पर मज़ा तो आया था मगर लंड, बूर में लेने की जल्दी थी. जल्दी से मुन्ना के सिर को पिछे धकेल्ति बोली "….क्या…करता…है…जल्दी से चढ़….".

पनियाई चूत की दरार पर उंगली चला उसका पानी लेकर, लंड की चमरी खींच, सुपरे की मंडी पर लगा कर चमचमते सुपरे को शीला देवी को दिखता बोला "मा...देख मेरा…डंडा…तेरी छेद…में…"

"हा…जल्दी से….मेरी छेद में…. " . लंड के सुपरे को चूत के छेद पर लगा पूरी दरार पर उपर से नीचे तक चला बूर के होंठो पर लंड रगड़ते हुए बोला "हां पेल दू…पूरा…"

"हा….मादर…चोद बन जा…"

"हाई…छेद…फाड़ दूँगा…रंडी…"

"बक्चोदि छोड़…फड़वाने के….लिए तो….खोल के…नीचे लेटी….जल्दी कर…" वासना के अतिरेक से काँपति आवाज़ में शीला देवी बोली. लंड के लाल सुपरे को चूत के गुलाबी झांतदार छेद पर लगा मुन्ना ने कच से धक्का मारा. सुपरा सहित चार इंच लंड चूत की कसमसाती छेद की दीवारों को कुचालता हुआ घुस गया. हाथ आगे बढ़ा मुन्ना के सिर को बालो में हाथ फेरती हुई उसको अपने से चिपका भर्रई आवाज़ में बोली " पूरा…डाल दे…बेटा…चढ़ जा". मुन्ना ने अपनी कमर को थोड़ा उपर खींचते हुए फिर से अपने लंड को सुपरे तक बाहर निकाल धक्का मारा. इस बार का धक्का ज़ोर दार था. शीला देवी की गांद फट गई. इतने दीनो से उसने लंड नही खाया था उसके कारण उसकी चूत का छेद सिकुर कर टाइट हो गया था. चूत के अंदर जब तीन इंच मोटा और दस इंच लंबा लंड जड़ तक घुसाने की कोशिश कर रहा था तो चूत छिलगई और दर्द की एक तेज लहर ने उसको कंपा दिया. "आआ….धीरे….फट….उई..माआआआआआ…
." करते हुए अपने होंठो को भींच दर्द को पीने की कोशिश करते हुए अपने हाथो के नाख़ून मुन्ना की पीठ में गढ़ा दिए.

"बहुत….टाइट…है…तेरा…छेद…" चूत के पानी में फिसलता हुआ पूरा लंड उसकी चूत के जड़ तक उतार ता चला गया.

"बहुत बड़ा…है..तेरा…केला…उफ़फ्फ़….मेरे…आम चूस्ते हुए….डाल" मुन्ना ने एक चूची को अपनी मुट्ठी में जाकड़ मसालते हुए दूसरी चुचि पर मुँह लगा कर चूस्ते हुए धीरे धीरे एक चौथाई लंड खींच कर धक्के लगाते पुचछा

"पेलवाती… नही… थी…"

"नही….किस से पेलवाती…"

"क्यों…चौधरी…."


"उसका अब…खड़ा…नही…"

"दूसरा…कोई…"

"हरामी….कुत्ते….तुझे अच्छा…लगेगा…मैं दूसरे से….यही चाहता है…तेरी मा…" गुस्से से चूतर पर मुक्का मारती हुई बोली.

"बात तो सुन लिया कर पूरी…सीधा गाली…देने…" झल्लाते हुए मुन्ना चार पाँच तगड़े धक्के लगाता हुआ बोला. तगड़े धक्को ने शीला देवी को पूरा हिला दिया. चुचियाँ थल-थॅला गई. मोटी जाँघो में दल्कन पैदा हो गई. थोड़ा दर्द हुआ मगर मज़ा भी आया क्योंकि चूत पूरी तरह से पनिया गई थी और लंड गछ गछ फिसलता हुआ अंदर-बाहर हुआ था. अपने पैरों को मुन्ना के कमर से लपेट उसको भींचती सीस्यति हुई "उफ़फ्फ़…सी…हरामी…दुखा…दिया…आराम..से..भी बोल सकता…था…" मुन्ना कुच्छ नही बोला, लंड अब चुकी आराम से फिसलता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था इसलिए वो अपनी मा की टाइट गद्देदार रसीली चूत का रस अपने लंड के पीपे से चूस्ते हुए गाचा-गछ धक्के लगा रहा था. शीला देवी को भी अब पूरा मज़ा आ रहा था, लंड सीधा उसकी चूत के आख़िरी किनारे तक पहुच कर ठोकर मार रहा था. धीरे धीरे गांद उचकाते हुए सीस्यति हुई बोली "बोल ना…तो जो बोल…रहा…"

"मैं तो…बोल रहा था…कि अच्छा हुआ…जो किसी और से…नही…करवाया…नही तो….मुझे…तेरी टाइट…छेद की जगह…ढीली…छेद…"

"हाई…हरामी…तुझे..छेद की…पड़ी है…इस बात की नही की मैं दूसरे आदमी…"

"मैं तो…बस एक..बात बोल रहा…था की…वैसे…"

"चुप कर…कामीने…दूसरे से करवा कर मैं बदनाम होती…साले…घर की बात…"

"हा…घर की बात…घर में…रहे तो, …फिर दस इंच के हथियार वाला बेटा किस दिन…काम आएगा…ठीक किया तूने…बचा कर रखा…मज़ा आ रहा….अब तुझे खूब मज़े…"

"हाई…बहुत मज़ा…आ…पेलता रह…मेरा जवान लौंडा….गाओं भर की हरमज़ड़िया मज़े लूटे और मैं…"

"हाई अब…गाओंवालियों को छ्चोड़…अब तो बस तेरा बेटा…तेरे को….ही…सीईईईईई उफ़फ्फ़…बहुत मजेदार छेद है…" गपा-गॅप लंड पेलता हुआ मुन्ना सीस्यते हुए बोला. लंड बूर की दीवारों को बुरी तरह से कुचालता हुआ अंदर घुसते समय चूत के
दूप-दुपते छेद को पूरा चौड़ा कर देता था और फिर जब बाहर निकलता था तो चूत की पत्तियाँ अपने आप सिकुड कर छेद को फिर से छ्होटा बना देती थी. बड़े होंठो वाली गुदाज चूत होने का यही फ़ायडा था. हमेशा गद्देदार और टाइट रहती थी. उपर के रसीले होंठो को चूस्ते हुए नीचे के होंठो में लंड धँसाते हुए मुन्ना तेज़ी से अपनी गांद उच्छाल उच्छाल कर शीला देवी के उपर कूद रहा था.

"हाई तेरा केला भी….बहुत मजेदार…है, मैने आजतक इतना लंबा…डंडा…सस्सीईईई…ही डालता रह….ऐसे ही…अफ…पहले दर्द किया…मगर…अब….आराम से….ही….अब फाड़ दे…डाल….सीईए…पूरा डाल…कर….हाँ मादर..चोद…बहुत पानी फेंक रही…है मेरी…चू…." नीचे से गांद उच्छलती मुन्ना के चूतरों को दोनो हाथो से पकड़ अपनी चूत के उपर दबाती गॅप गॅप लंड खा रही थी शीला देवी. कमरे में बारिश की आवाज़ के साथ शीला देवी की चूत के पानी में फॅक-फॅक करते हुए लंड के अंदर-बाहर होने की आवाज़ भी गूँज रही थी. इस सुहाने मौसम में खलिहान के वीरान में दोनो मा-बेटे जवानी का मज़ा लूट रहे थे. कहा तो मुन्ना अपनी चोरी पकड़े जाने पर अफ़सोस मना रहा था वही अभी खुशी से गांद कूदते हुए अपनी मा की टाइट पवरोटी जैसी फूली चूत में लंड पेल कर वाडा-पाव खा रहा था. उधर शीला देवी जो सोच रही थी कि उसका बेटा बिगड़ गया है, नंगी अपने बेटे के नीचे लेट कर उसके तीन इंच मोटे और दस इंच लंब लंड को कच-कच खाते हुए अपने बेटे के बिगड़ने की खुशियाँ मना रही थी. आख़िर हो भी क्यों ना, जिस लंड के पिछे गाओं भर की औरतो की नज़र थी अब उसके कब्ज़े में था, घर के अंदर, जितनी मर्ज़ी उतना चुदवा सकती थी.

"हाइईईईईई बहुत….मजेदार है तेरे आम…तेरा छेद…उफफफफफफफफ्फ़…शियीयीयियीयियी अब तो…हाइईईईई मा मज़ा आ रहा अपने बेटे डंडा बिल में घुस्वा के….सीईईईईईई….हाइईईईईईईईईईईई पहले बता दिया होता तो…अब तक…कितनी बार तेरा आम-रस पी लेता….तेरी छेद पेल देता…सीईईईईई तेरी सिकुदीईईईईईईइ हुई छेद खोल देता…रंडी…खा अपने बेटे का….लंड…द्द्दद्ड….हीईईईईईइ…बहुत मज़ा हीईईई…तूने तो खेल खेल कर इतना…तडपा दिया है…अब बर्दाश्त नही हो रहा…मेरा तो निकल जाएगा……सीईई…पानी फेंक दू तेरीईईईईईईईईईइ….चूऊऊऊऊऊऊऊऊओ…त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त्त..में. सीस्यते हुए मुन्ना बोला. नीचे से धक्का मारती और उपर से ढाका-धक लंड खाती शीला देवी भी अब चरम सीमा पर पहुच चुकी थी. गांद उच्छलती हुई अपनी टाँगो को मुन्ना की कमर पर कास्ती चिल्लई…
"मार..मार ना भोसड़ीवाले…मेरे छ्होटे चौधरी…मार…अपनी चौधरैयन….की चूत…फाड़ दे….हाइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई….बेटा मेरिइईईईईईईईईईईईईईईईई भी अब पानी फेंक देगीईईईईईईईइ…..पुराआआआआआआ लंड…डाल के चोद दीईईईईईई…अपनी मा…की बूर….हाइईईईईईईई…सीईई अपने घोड़े जैसे….लंड का पानी…डाल दे…पेल दीईईईईईईईई….माआआआआआ के लालल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल….बेहन्चोद्द्द्द……मेरी चूऊत में…." यही सब बकते हुए उसने मुन्ना को अपनी बाहों में कस लिया. उसकी चूत ने पानी
फेंकना शुरू कर दिया था. मुन्ना के लंड से भी तेज फ़ौवार्रे के साथ पानी निकलना शुरू हो गया था. मुन्ना के होंठ चौधरैयन के होंठो से चिपक हुए थे, दोनो का पूरा बदन अकड़ गया था.
दोनो आपस में ऐसे चिपक गये थे कि तिल रखने की जगह भी नही थी. पसीने से लत-पथ गहरी सांस लेते हुए. जब मुन्ना के लंड का पानी चौधरैयन की बूर में गिरा तो उसे ऐसा लगा जैसे उसकी बर्शो की प्यास भुज गई हो. तपते रेगिस्तान पर मुन्ना का लंड बारिश कर रहा था और बहुत ज़यादा कर रहा था आख़िर उसने अपनी मामी के बाद अपनी मा को चोद दिया था. उसके लंड के नीचे उसके ख्वाबो की दोनो पारियाँ आ चुकी थी बस एक तीसरी बाकी थी…किस्मत ने साथ दिया तो…

करीब आधे घंटे तक दोनो एक दूसरे से चिपके बेशुध हो कर वैसे ही नंगे लेट रहे मुन्ना अब उसके बगल में लेटा हुआ था. शीला देवी आँखे बंद किए टांग फैलाए बेशुध लेटी हुई थी और बाहर बारिश अपने पूरे शबाब पर छ्होटे चौधरी और बड़ी चौधरैयन की चुदाई की खुशी मना रही थी.












--

साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj

































































































































































Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma
हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया
Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

गाँव का राजा पार्ट -12

राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
उत्तेजक कहानिया




Hindi Sex Stories हिंदी सेक्स कहानियाँ

गाँव का राजा पार्ट -12

हेलो दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी गाँव का राजा पार्ट -12 लेकर हाजिर हूँ दोस्तो कहानी कैसी है ये तो आप ही बताएँगे

मुन्ना का दिल किया कि ब्लाउस में कसे दोनो आमो को अपनी मुट्ठी में भर कर मसल दे पर मन मार कर टॉर्च अपनी मा के हाथ में पकड़ा नीचे गिरे आमो को उठा लिया और अपनी मुट्ही में भर दबाता हुआ उसकी पठार जैसी सख़्त नुकीली चुचियों को घूरता हुआ बोला "पक गये है…चूस चूस…खाने में…". शीला देवी मुस्कुराती हुई शरमाई सी बोली "हा..चूस के खाने लायक…इसस्स…ज़यादा ज़ोर से मत दबा….सारा रस निकल जाएगा….आराम से खाना".

चलते-चलते शीला देवी ने एक दूसरे पेड़ की डाल पर टॉर्च की रोशनी को फोकस किया और बोली "इधर देख मुन्ना…ये तो एक ड्म पका आम है…. इसको भी तोड़…थोड़ा उपर है…तू लंबा है…ज़रा इस बार तू चढ़ के…" मुन्ना भी उधर देखते हुए बोला "हा है तो एकदम पका हुआ और काफ़ी बड़ा भी…है…तुम चढ़ो ना…चढ़ने में एक्सपर्ट बता रही थी उस समय"

"ना रे गिरते-गिरते बची हू…फिर तू ठीक से टॉर्च भी नही दिखाता…कहती हू हाथ पर तो दिखाता है पैर पर"

"हाथ हिल जाता है…."

धीरे से बोली मगर मुन्ना ने सुन लिया "तेरा तो सब कुच्छ हिलता है…तू चढ़ ना…उपर…"

मुन्ना ने लूँगी को दोहरा करके लपेटा लिया. इस से लूँगी उसके घुटनो के उपर तक आ गई. लंड अभी भी खड़ा था मगर अंधेरा होने के कारण पता नही चल रहा था. शीला देवी उसको पैरों पर टॉर्च दिखा रही थी. थोड़ी देर में ही मुन्ना काफ़ी उँचा चढ़ गया था. अभी भी वो उस जगह से दूर था जहा आम लटका हुआ था. दो डालो के उपर पैर रख जब मुन्ना खड़ा हुआ तब शीला देवी ने नीचे से टॉर्च की रोशनी सीधा उसके लूँगी के बीच डाली. चौड़ी चकली जाँघो के बीच मुन्ना का ढाई इंच मोटा लंड आराम से दिखने लगा. लंड अभी पूरा खड़ा नही था पेर पर चढ़ने की मेहनत ने उसके लंड को ढीला कर दिया था मगर अभी भी काफ़ी लंबा और मोटा दिख रहा था. शीला देवी का हाथ अपने आप अपनी जाँघो के बीच चला गया. नीचे से लंड लाल लग रहा था शायद सुपरे पर से चमड़ी हटी हुई थी. जाँघो को भीचती होंठो पर जीभ फेरती अपनी नज़रो को जमाए भूखी आँखो से देख रही थी.

"अर्रे...रोशनी तो दिखाओ हाथो पर…."

"आ..हा..हा.. तू चढ़ रहा था….इसलिए पैरों पर दिखा…." कहते हुए उसके हाथो पर दिखाने लगी. मुन्ना ने हाथ बढ़ा कर आम तोड़ लिया. "लो पाकड़ो…".
शीला देवी ने जल्दी से टॉर्च को अपनी कनखो में दबा कर अपने दोनो हाथ जोड़ लिए मुन्ना ने आम फेंका और शीला देवी ने उसको अपनी चुचियों के उपर उनकी सहयता लेते हुए कॅच कर लिया. फिर मुन्ना नीचे उतर गया और शीला देवी ने उसके नीचे उतर ते समय भी अपने आँखो की उसके लटकते लंड और अंडकोषो को देख कर अच्छी तरह से सिकाई की. मुन्ना के लंड ने चूत को पनिया दिया. मुन्ना के नीचे उतर ते ही बारिश की मोटी बूंदे गिरने लगी. मुन्ना हर्बराता हुआ बोला "चलो जल्दी…भीग जाएँगे...." दोनो तेज कदमो से खलिहान की तरफ चल पड़े. अंदर पहुचते पहुचते थोड़ा बहुत तो भीग ही गये. शीला देवी का ब्लाउस और मुन्ना की बनियान दोनो पतले कपड़े के थे, भीग कर बदन से ऐसे चिपक गये थे जैसे दोनो उसी में पैदा हुए हो. बाल भी गीले हो चुके थे. मुन्ना ने जल्दी से अपनी बनियान उतार दी और पलट कर मा की तरफ देखा पाया की वो अपने बालो को तौलिए से रगड़ रही थी. भींगे ब्लाउस में कसी चुचियाँ अब और जालिम लग रही थी. चुचियों की चोंच स्पस्ट दिख रही थी. उपर का एक बटन खुला था जिस के कारण चुचियो के बीच की गहरी घाटी भी अपनी चमक बिखेर रही थी. तौलिए से बाल रगड़ के सुखाने के कारण उसका बदन हिल रहा था और साथ में उसकी मोटे मोटे मुममे भी. उसकी आँखे हिलती चुचियों ओर उनकी घाटी से हटाए नही हट रही थी. तभी शीला देवी धीरे से बोली "तौलिया ले…और जा कर मुँह हाथ अच्छी तरह से धो कर आ…". मुन्ना चुप चाप बाथरूम में घुस गया और दरवाजा उसने खुला छोड़ दिया था. कमोड पर खड़ा हो मूतने के बाद हाथ पैर धो कर वापस कमरे में आया तो देखा कि शीला देवी बिस्तर पर बैठ अपने घुटनो को मोड़ कर बैठी थी और एक पैर की पायल निकाल कर देख रही थी. मुन्ना ने हाथ पैर पोछे और बिस्तर पर बैठते हुए पुचछा….

"क्या हुआ…."

"पता नही कैसे पायल का हुक खुल गया…"

"लाओ मैं देखता हू…" कहते हुए मुन्ना ने पायल अपने हाथ में ले लिया.

"इसका तो हुक सीधा हो गया है लगता है टूट…" कहते हुए मुन्ना हुक मोड़ के पायल को शीला देवी के पैर में पहनाने की कोशिश करने लगा पर वो फिट नही हो पा रहा था. शीला देवी पेटिकोट को घुटनो तक चढ़ाए एक पैर मोड़ कर, दूसरे पैर को मुन्ना की तरफ आगे बढ़ाए हुए बैठी थी. मुन्ना ने पायल पहना ने के बहाने शीला देवी के कोमल पैरों को एक दो बार हल्के से सहला दिया.

शीला देवी उसके हाथो को पैरों पर से हटा ते हुए रुआंसी होकर बोली "रहने दे…ये पायल ठीक नही होगी…शायद टूट गयी है…"

"हा…शायद टूट गयी…दूसरी मंगवा लेना…"

एकदम उदास होकर मुँह बनाती हुई शीला देवी बोली "कौन ला के देगा पायल…तेरे बाप से तो आशा है नही और ….तू तो…" कहते हुए एक ठंडी साँस भरी. शीला देवी की बात सुन एक बार मुन्ना के चेहरे का रंग उड़ गया. फिर हकलाते हुए बोला "ऐसा क्यों मा…मैं ला दूँगा…इस बार जब शहर जाउन्गा…इस शनिवार को शहर से…"

"रहने दे…तू क्यों मेरे लिए पायल लाएगा…" कहती हुई पेटिकोट के कपड़े को ठीक करती हुई बगल में रखे तकिये पर लेट गई. मुन्ना पैर के तलवे को सहलाता और हल्के हल्के दबाता हुआ बोला "ओह हो छोड़ो ना…मा…तुम भी इतनी मामूली सी बात…."

पर शीला देवी ने कोई जवाब नही दिया. खिड़की खुली थी कमरे में बिजली का बल्ब जल रहा था, बाहर जोरो की बारिशा शुरू हो चुकी थी. मौसम एक दम सुहाना हो गया था और ठंडी हवाओं के साथ पानी की एक दो बूंदे भी अंदर आ जाती थी. मुन्ना कुच्छ पल तक उसके तलवे को सहलाता रहा फिर बोला "मा…ब्लाउस तो बदल लो….गीला ब्लाउस पहन…"

"उ…रहने दे थोरी देर में सुख जाएगा..दूसरा ब्लाउस कहा लाई..जो…"

"तौलिया लपेट लेना…" शीला देवी ने कोई जवाब नही दिया.

मुन्ना हल्के हल्के पैर दबाते हुए बोला "आम नही खाओगि…"

"ना रहने दे मन नही है…"

"क्या मा… क्यों उदास हो रही हो…"

"ना मुझे सोने दे…तू आम. खा.."

"ओह हो…तुम भी खाओ ना…. कहते हुए मुन्ना ने आम के उपरी सिरे को नोच कर शीला देवी के हाथ में एक आम थमा दिया और उसके पैर फिर से दबाने लगा. शीला देवी अनमने भाव से आम को हाथ में रखे रही. ये देख मुन्ना ने कहा "क्या हुआ…आम अच्छे नही लगते क्या…चूस ना…पेर पर चढ़ के तोड़ा और इतनी मेहनत की…चूसो ना"

मुन्ना की नज़रे तो शीला देवी की नारियल की तरह खड़ी चुचियों से हट ही नही रही थी. दोनो चुचियों को एकटक घूरते हुए वो अपनी मा को देख रहा था. शीला देवी ने बड़ी अदा के साथ अनमने भाव से अपने रस भरे होंठो को खोला और आम को एक बार चूसा फिर बोली "तू नही खाएगा…"


"खाउन्गा ना…." खाते हुए मुन्ना ने दूसरा आम उठाया और उसको चूसा तो फिर बुरा सा मुँह बनाता हुआ बोला "ये तो एक दम खट्टा है…" .

"ये ले मेरे आम चूस…बहुत मीठा है…" धीमी आवाज़ में शीला देवी अपनी एक चुचि को ब्लाउस के उपर से खुजलाती हुई बोली और अपना आम मुन्ना को पकड़ा दिया. "मुझे तो पहले ही पता था…तेरा वाला मीठा होगा…" धीरे से बोलते हुए मुन्ना ने शीला देवी के हाथ से आम ले लिया और मुँह में ले कर ऐसे चूसने लगा जैसे चुचि चूस रहा हो. शीला देवी के अब चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लिए बोली "हाई…बड़े मज़े से चूस रहा है... मीठा है ना….". शीला देवी और मुन्ना के दोनो के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट खेल रही थी.

मुन्ना प्यार से आम चूस्ता हुआ बोला "हा मा…बहुत मीठा है…तेरा आम…ले ना तू भी चूस…"

"ना तू चूस… मुझे नही खाना…" फिर मुस्कुराती हुई धीरे से बोली "बेटा अपने..पेड़ के आम..खाया कर…"

"मिलते…नही…" मुन्ना उसकी चुचियों को घूरते हुए बोला.

"कोशिश…कर के देख…" उसकी आँखो में झकति शीला देवी बोली. दोनो को अब दोहरे अर्थो वाली बातो में मज़ा आ रहा था. मुन्ना अपने हाथ को लूँगी के उपर से लंड पर लगा
हल्के से सहलाता हुआ उसकी चुचियों को घूरता हुआ बोला "तू मेरा वाला…चूस… खट्टा है…..औरतो को तो खट्टा…."

"हा..ला मैं तेरा…चूस्ति हू…खट्टे आम भी अच्छे होते…" कहते हुए शीला देवी ने खट्टा वाला आम ले लिया और चूसने लगी. अब शीला देवी के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट आ गई थी, अपने रसीले होंठो से धीरे-धीरे आम को चूस रही थी. उसके चूसने की इस अदा और दोहरे अर्थो वाली बात चीत ने अब तक मुन्ना और शीला देवी दोनो की अंदर आग लगा दी थी. दोनो अब उत्तेजित होकर वासना की आग में धीरे धीरे सुलग रहे थे. पेड़ के उपर चढ़ने पर दोनो ने एक दूसरे के पेटिकोट और लूँगी के अंदर छुपे माल को देखा था ये दोनो को पता था. दोनो के मन में बस यही था की कैसे भी करके पेटिकोट के माल का मिलन लूँगी के हथियार के साथ हो जाए. मुन्ना अब उसके कोमल पैरो को सहलाते हुए उसके एक पैर में पड़ी पायल से खेल रहा था शीला देवी आम चूस्ते हुए उसको देख रही थी. बार-बार मुन्ना का हाथ उसकी कोमल, चिकनी पिंदलियों तक फिसलता हुआ चला जाता. पेटिकोट घुटनो तक उठा हुआ था. एक पैर पसारे एक पैर घुटने के पास से मोड हुए शीला देवी बैठी हुई थी. कमरे में

पूरा सन्नाटा पसरा हुआ था, दोनो चुपचाप नज़रो को नीचे किए बैठे थे. बाहर से तेज बारिश की आवाज़ आ रही थी. आगे कैसे बढ़े ये सोचते हुए मुन्ना बोला

"…तेरा पायल मैं कल ला दूँगा सुबह जाउन्गा और…."

"रहने दे मुझे नही चाहिए तेरी पायल…."

"…मैं अच्छी वाली पायल…ला…"

"ना रहने दे, तू….पायल देगा…फिर मेरे से…उसके बदले…" धीरे से मुँह बनाते हुए शीला देवी ने कहा जैसे नाराज़ हो
मुन्ना के चेहरे के रंग उड़ गया. धीरे से हकलाता हुआ बोला "बदले में…क्या…मतलब…"


आँखो को नचाती मुँह फुलाए हुए धीरे से बोली "....लाजवंती को भी….पायल...." इस से ज़्यादा मुन्ना सुन नही पाया, लाजवंती का नाम ही काफ़ी था. उसका चेहरा कानो तक लाल हो गया और दिमाग़ हवा में तैरने लगा, तभी शीला देवी के होंठो के किनारों पर लगा आम का रस छलक कर उसकी चुचियों पर गिर पड़ा. शीला देवी उसको जल्दी से छाती पर से पोच्छने लगी तो मुन्ना ने गीला तौलिया उठा अपने हाथ को आगे बढ़ाया तो उसके हाथ को रोकती हुई बोली
"…ना ना रहने दे…अभी तो मैने तेरे से पायल लिया भी नही है जो…"

ये शीला देवी की तरफ से ये दूसरा खुल्लम खुल्ला सिग्नल था कि आगे बढ़. शीला देवी के पैर की पिंदलियों पर से काँपते हाथो को सरका कर उसके घुटनो तक ले जाते हुए धीरे से बोला "प...पायल दूँगा तो….तो दे...गी…"
धीरे से शीला देवी बोली "…प..आयल देगा..तो…? "

".आम…सा…आफ…करने…देगी…" धीरे से मुन्ना बोला. आम के रस की जगह आम सॉफ करने की बात शायद मुन्ना ने जानभूझ कर कही थी.

"तू…सबको…पायल..देता है क्या…" सरसरती आवाज़ में शीला देवी ने पुचछा

"नही…"

"लाजवंत को तो दी …" मुन्ना चुपचाप बैठा रहा.

"उसके आ..म सा…फ… किए…तूने…." मुन्ना की समझ में आ गया की शीला देवी क्या चाहती है.

"अपने पेड़ का…आम…खाना है मुझे…" इतना कहते हुए मुन्ना नेआगे बढ़ अपना एक हाथ शीला देवी के पेट पर रख दिया और उसकी वासना से जलती नासीली आँखो में झाँक कर देखा.

"तो खा…ना….मैं तो हमेशा…." चाहती थी और अनुरोध से भरे आँखो ने मुन्ना को हिम्मत दी और उसने छाती पर झुक कर अपनी लंबी गरम ज़ुबान बाहर निकाल कर चुचियों के उपर लगे आम के रस को चाट लिया. इतनी देर से गीला ब्लाउस पहन ने के कारण शीला देवी की चूचियाँ एक दम ठंडी हो चुकी थी. ठंडी चुचियों पर
ब्लाउस के उपर मुन्ना की गरम जीभ जब सरसरती हुई धीरे से चली तो उसके बदन में सिहरन दौड़ गई. कसमसाती हुई अपने रसीले होंठो को अपनी दांतो से काट ती हुई बोली "चा..अट कर ….सा…आफ करेगा…". मुन्ना ने कोई जवाब नही दिया.

"आम तो चूसा…मैं तो…चूस..वाने आई थी…". शीला देवी ने सीधी बात करने का फ़ैसला कर लिया था.

"हाई…चूस..वाएगी…?" चूची चूसने के इस खुल्लम खुल्ला आमंत्रण ने लंड को फनफना दिया, उत्तेजना अब सीमा पार कर रही थी.

पेट पर रखे हाथ को धीरे से पकड़ अपनी छाती पर रखती हुई शीला देवी मुस्कुराती हुई धीरे से बोली " मेरा आम चू..ओस…बहुत मीठा है…". मुन्ना ने अपने बाए हथेली में उसकी एक चुचि को कस लिया और ज़ोर से दबा दिया, शीला देवी के मुँह से सिसकारी निकल गई "चूसने के लिए..बोला…"

"दबा के देखने तो दे…चूसने लायक पके है…या…" शैतानी से मुस्कुराता धीरे से बोला.

"तो धीरे से दबा…ज़ोर से दबा के… तो..सारा रस..निकल.." मुन्ना की चालाकी पर धीरे से हस दी.

"तू सच में चूस…वाने आई थी…" मुन्ना ने वासना से जलती आँखो में झाँकते हुए पुचछा.

"और कैसे….बोलू…" उत्तेजना से काँपति, गुस्से से मुँह बिचकाती बोली.

मुन्ना को अब भी विस्वास नही हो रहा था कि ये सब इतनी आसानी से हो रहा है. कहा तो वो प्लान बना रहा था कि रात में साड़ी उठा कर अनदर का माल देखेगा…यहा तो पूरा सिर कड़ाही में घुसने जा रहा था. गर्दन नीचे झुकाते हुए मुन्ना ने अपना मुँह खोल भीगे ब्लाउस के उपर से चुचि को निपल सहित
अपने मुँह में भर लिया. हल्का सा दाँत चुभाते हुए इतनी ज़ोर से चूसा कि शीला देवी की मुँह से आह भरी सिसकारी निकल गई. मगर मुन्ना तो अब पागल हो चुका था. एक चुचि को अपने हाथ से दबाते हुए दूसरी चुचि में मुँह गाढ़ने चूसने, चूमने लगा. शीला देवी बरसो तक वासना की आग में जलती रही थी मगर आज इतने दीनो के बाद जब उसकी चूचियों को एक मर्द ने अपने हाथ और मुँह से मसलना शुरू किया तो उसके तन-बदन में आग लग गई. मुँह से सिसकारियाँ निकालने लगी, अपनी जाँघो को भीचती एडियों को रगड़ती हुई मुन्ना के सिर को अपनी चुचियों पर भींच लिया. गीले ब्लाउस के उपर से चुचियों को चूसने का बड़ा अनूठा मज़ा था. गरम चुचियों को गीले ब्लाउस में लपेट कर बारी-बारी से दोनो चुचियों को चूस्ते हुए वो निपल को अपने होंठो के बीच दबाते हुए चबाने लगा. निपल एक दम खड़े हो चुके थे और उनको अपने होंठो के बीच दबा कर खींचते हुए जब मुन्ना ने चूसा तो शीला देवी च्चटपटा गई. मुन्ना के सिर को और ज़ोर से अपने सिने पर भीचती सिस्ययई "इसस्सस्स…उफ़फ्फ़….धीरे…आराम से आम चू…ओस…" दोनो चुचियों के चोंच को बारी बारी से चूस्ते हुए जीभ निकाल कर छाती और उसके बीच वाली घाटी को ब्लाउस के खुले बटन से चाटने लगा. फिर अपनी जीभ आगे बढ़ाते हुए उसके गर्दन को चाट ते हुए अपने होंठो को उसके कानो तक ले गया और अपने दोनो हाथो में दोनो चुचियों को थाम फुसफुसते हुए बोला "बहुत मीठा है तेरा आम…छिल्का उतार के खाउ…". शीला देवी भी उसके गर्दन में बाँहे डाले अपने से चिपकाए फुसफुसती हुई बोली "हाई…छिल्का…उतार के…? "

"हा…शरम आ रही है…क्या ?

"शरमाती तो…आम हाथ में पकड़ाती…?"

"तो उतार दू…छिल्का…?"

"उतार दे…बहुत बक बक करता है…हरामी.." मुन्ना ने जल्दी से गीले ब्लाउस के बटन चटकते हुए खोल दिया, ब्लाउस के दोनो भागो को दो तरफ करते हुए उसकी काली रंग की ब्रा को खोलने के लिए अपने दोनो हाथो को शीला देवी की पीठ के नीचे घुसाया तो उसने अपने आप को अपनी चुटटरो और गर्दन के सहारे बिस्तर से थोड़ा सा उपर उठा लिया. शीला देवी की दोनो चुचिया मुन्ना की छाती में दब गई. चुचियों के कठोरे निपल मुन्ना की छाती में चुभने लगे तो मुन्ना ने पीठ पर हाथो का दबाब बढ़ा दिया कर शीला देवी को और ज़ोर से अपनी छाती से चिपका लिया और उसकी कठोरे चुचियों को अपने छाती से पिसते हुए धीरे से ब्रा के हुक को खोल दिए. कसमसाती हुई
शीला देवी ने उसे थोड़ा सा पिछे धकेला और ब्लाउस उतार दिया. फिर तकिये पर लेट मुन्ना की ओर देखने लगी. काँपते हाथो से ब्रा उतार कर दोनो गदराई, गथिलि चुचियों को अपने हाथ में भर धीरे से बोला "बड़े…मस्त आ..म है.." हल्के से दबाया तो गोरी चुचियों का रंग लाल हो गया.









साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj

































































































































































Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma
हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया
Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

गाँव का राजा पार्ट -11

राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
उत्तेजक कहानिया

Hindi Sex Stories हिंदी सेक्स कहानियाँ
गाँव का राजा पार्ट -11


हेलो दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी गाँव का राजा पार्ट -11 लेकर हाजिर हूँ दोस्तो कहानी कैसी है ये तो आप ही बताएँगे
"अरे मा उसकी कोई ज़रूरत नही है….मैं अभी निकलता हू…" कहते हुए मुन्ना उठ कर लूँगी पहन ने लगा. शीला देवी अपने बेटे के मजबूत बदन को घूरती हुई बोली "ना..ना अकेले तो जाना ही नही है….किसी नौकर को नही ले जाना तो मैं चलती हूँ…" इस धमाके ने मुन्ना के लूँगी की ओर बढ़ते हाथो को रोक दिया. कुच्छ देर तक तो वो शीला देवी का चेहरा असचर्या से देखता रह गया. फिर अपने आप को संभालते हुए बोला "ओह मा तुम वाहा क्या करने जाओगी…मैं अकेला ही…"

"नही मैं भी चलती हू…बहुत टाइम हो गया…बहुत पहले गर्मियों में कई बार चौधरी शहिब के साथ वाहा पर सोई हू….कई बार तो रात में ही हमने आम तोड़ के खाए है…चल मैं चलती हू...". मुन्ना विरोध नही कर पाया.

"ठहर जा ज़रा टॉर्च तो ले लू…."

फिर शीला देवी टॉर्च लेकर मुन्ना के साथ निकल पड़ी. शीला देवी ने अपनी साड़ी बदल ली थी और अपने आप को सवार लिया था. मुन्ना ने अपनी मा को नज़र भर कर देखा एक दम बनी ठनी, बहुत खूबसूरत लग रही थी. मुन्ना की नज़रो को भापते हुए वो हस्ते हुए बोली "क्या देख रहा है…" हस्ते समय शीला देवी की गालो में गड्ढे पड़ते थे.
" कुच्छ नही मैं सोच रहा था तुम्हे कही और तो नही जाना…" शीला देवी के होंठो पर मुस्कुराहट फैल गई. हस्ते हुए बोली "ऐसा क्यों…मैं तो तेरे साथ बगीचे पर चल..."

"नही तुमने साड़ी बदली हुई है तो…"

"वो तो ऐसे ही बदल लिया…क्यों अच्छा नही लग रहा…"

"नही बहुत अच्छा लग….तुम बहुत सुंदर…" बोलते हुए मुन्ना थोड़ासा सरमाया तो शीला देवी हल्के हँस दी. शीला देवी के गालो में पड़ते गड्ढे देख मुन्ना के बदन में सिहरन हो गई. मुन्ना थोड़ा धीरे चल रहा था. मा के पीछे चलते हुए उसके मस्ताने मटकते चूतरो पर नज़र पड़ी तो उसका मन किया की धीरे से पिछे से शीला देवी को पकड़ ले और लंड को गांद की दरार में लगा कर प्यार से उसके गालो को चूसे. उसके गालो के गड्ढे में अपनी जीभ डाल कर चाट ले. पीछे से साड़ी उठा कर उसके अंदर अपना सिर घुसा दे और दोनो चूतरों को मुट्ठी में भर कर मसल्ते हुए गांद की दरार में अपना मुँह घुसा दे. बहुत दिन हो गये थे किसी की गांद चाटे, पर इसके लिए उर्मिला देवी जैसी खूबसूरत गदराई जवानी भी तो चाहिए. मामी के साथ बिताए पल याद आ गये जब वो किचन में काम करती मुन्ना पिछे से गाउन उठा उसके अंदर घुस कर चूत और गांद चाट ता था. मा की तो मामी से भी दो कदम आगे होगी. कितनी गतीली और सुंदर लग रही है. लूँगी के अंदर लंड तो फरफदा रहा था मगर कुच्छ कर नही सकता था. आज तो लाजवंती का भी कोई चान्स नही था. तभी ध्यान आया कि लाजवंती को तो बताया ही नही. डर हुआ कि कही वो मा के सामने आ गई तो क्या करूँगा. और वही हुआ बगीचे पर पहुच कर खलिहान या मकान जो भी कहिए उसका दरवाजा ही खोला था कि बगीचे की बाउंड्री का गेट खोलती हुई लाजवंती और एक और औरत घुसी. अंधेरा तो बहुत ज़यादा था मगर फिर भी किसी बिजली के खंभे की रोशनी बगीचे में आ रही थी. शीला देवी ने देख लिया और बोली "कौन घुस रहा है बगीचे में…" मुन्ना ने भी पलट कर देखा, तुरंत समझ गया की लाजवंती होगी. इस से पहले की कुच्छ बोल पाता शीला देवी की कॅड्क आवाज़ पूरे बगीचे में गूँज गई "कौन है रे….ठहर अभी बताती हू.." इसके साथ ही शीला देवी ने दौड़ लगा दी " साली आम चोर कुतिया….ठहर वही पर…." भागते भागते एक डंडा भी हाथ में उठा लिया था. शीला देवी की कदकती आवाज़ जैसे ही लाजवंती के कानो में पड़ी उसकी तो गांद का पाखाना तक सुख गया. अपने साथ लाई औरत का हाथ पकड़ घसीटती हुई बोली "ये तो चौधरैयन…है….चल भाग…" दोनो औरते बेतहाशा भागी. पीछे शीला देवी हाथ में डंडा लिया गालियो की बौच्हर कर रही थी. दोनो जब बाउंड्री के गेट के बाहर भाग गई तो शीला देवी रुक गई. गेट को ठीक से बंद किया और वापस लौटी. मुन्ना खलिहान के बाहर ही खड़ा था. शीला देवी की साँसे फूल रही थी. डंडे को एक तरफ फेंक कर अंदर जा कर धम से बिस्तर पर बैठ गई और लंबी लंबी साँसे लेते हुए बोली "साली हरमज़ड़िया…देखो तो कितनी हिम्मत है शाम होते ही आ गई चोरी करने…अगर हाथ आ जाती तो सुअरनियों की गांद में डंडा पेल देती…हरम्खोर साली तभी तो इस बगीचे से उतनी कमाई नही होती जितनी पहले होती थी….मदर्चोदिया अपनी चूत में आम भर भर के ले जाती है…रंडियों का चेहरा नही देख पाई…" मुन्ना शीला देवी के मुँह से ऐसी मोटी मोटी भद्दी गालियों को सुन कर सन्न रह गया. हालाँकि वो जानता था की उसकी मा करक स्वाभाव की है और नौकर चाकरो को गालियाँ देती रहती है मगर ऐसी गंदी-गंदी गलियाँ उसके मुँह से पहली बार सुनी थी, हिम्मत करके बोला

"अरे मा छोड़ो ना तुम भी…भगा तो दिया…अब मैं यहा आ रहा हू ना देखना इस बार अच्छी कमाई…"

"ना ना…ऐसे इनकी आदत नही छूटने वाली…जब तक पकड़ के इनकी चूत में मिर्ची नही डालोगे ना बेटा तब तक ये सब भोशर्चोदिया ऐसे ही चोरी करने आती रहेंगी….माल किसी का खा कोई और रहा है…"

मुन्ना ने कभी मा को ऐसे गलियाँ देते नही सुना था. बोल तो कुच्छ सकता नही था मगर उसे उर्मिला देवी यानी अपनी प्यारी छिनाल, चुदक्कर मामी की याद आ गई, जो चुदवाते समय अपने सुंदर मुखरे से जब गंदी गंदी बाते करती थी तब उसका लंड लोहा हो जाता था. शीला देवी के खूबसूरत चेहरे को वो एकटक देखने लगा भरे हुए कमनिदार होंठो को बिचकती हुई जब शीला देवी ने दो चार और मोटी गलियाँ निकाली तो उसके इस छिनल्पन को देख मुन्ना का लंड खड़ा होने लगा.
मन में आया उसके उन भरे हुए होंठो को अपने होंठो में कस ले और ऐसा चुम्मा ले की होंठो का सारा रस चूस ले. खड़े होते लंड को छुपाने के लिए जल्दी से बिस्तर पर अपनी मा के सामने बैठ गया. शीला देवी की साँसे अभी काफ़ी तेज चल रही थी और उसका आँचल नीचे उसकी गोद में गिरा हुआ था. मोटी-मोटी चुचियाँ हर साँस के साथ उपर नीचे हो रही थी. गोरा चिकना मांसल पेट. मुन्ना का लंड पूरा खड़ा हो चुका था. तभी शीला देवी ने पैर पसारे और अपनी साड़ी को खींचते हुए घुटनो से थोड़ा उपर तक चढ़ा एक पैर मोड़ कर एक पैर पसार कर अपने आँचल से माथे का पसीना पोछती हुई बोली "हरम्खोरो के कारण दौड़ना पद गया…बड़ी गर्मी लग रही है खिड़की खोल दे बेटा". जल्दी से उठ कर खिड़की खोलने गया. लंड ने लूँगी के कपड़े को उपर उठा रखा था और मुन्ना के चलने के साथ हिल रहा था. शीला देवी की आँखो में अज़ीब सी चमक उभर आई थी वो एकदम खा जाने वाली निगाहों से लूँगी के अंदर के डोलते हुए हथियार को देख रही थी. मुन्ना जल्दी से खिड़की खोल कर बिस्तर पर बैठ गया, बाहर से सुहानी हवा आने लगी. उठी हुई साड़ी से शीला देवी गोरी मखमली टाँगे दीख रही थी. शीला देवी ने अपने गर्दन के पसीने को पोछ्ते हुए अपनी ब्लाउस के सबसे उपर वाले बटन को खोल दिया और साड़ी के पल्लू को ब्लाउस के भीतर घुसा पसीना पोच्छने लगी. पसीने के कारण ब्लाउस का उपरी भाग भीग चुका था. ब्लाउस के अंदर हाथ घुमाती बोली "बहुत गर्मी है..बहुत पसीना आ गया". मुन्ना मुँह फाडे ब्लाउस में घूमते हाथ को देखता हुआ भौचक्का सा बोल पड़ा "हा..आह पूरा ब्लाउस भीग..गया.."

"तू शर्ट खोल दे…बनियान तो पहन ही रखी होगी…".

साड़ी को और खींचती थोड़ा सा जाँघो के उपर उठाती शीला देवी ने अपने पैर पसारे "साड़ी भी खराब हो….यहा रात में तो कोई आएगा नही…"

"नही मा यहा…रात में कौन…"

"पता नही कही कोई आ जाए….किसी को बुलाया तो नही" मुन्ना ने मन ही मन सोचा जिसको बुलाया था उसको तो भगा दिया, पर बोला "नही..नही…किसी को नही बुलाया"

"तो मैं भी साड़ी उतार देती हू…"
कहती हुई उठ गई और साड़ी खोलने लगी. मुन्ना भी गर्दन हिलाता हुआ बोला "हा मा..फिर पेटिकोट और ब्लाउस…सोने में भी हल्का…"

"हा सही है….पर तू यहा सोने के लिए आता है…सो जाएगा तो फिर रखवाली कौन करेगा…"

"मैं अपने सोने की बात कहा कर रहा हू…तुम सो जाओ…मैं रखवाली करूँगा…"

"मैं भी तेरे साथ रखवाली करूँगी…"

"तब तो हो गया काम…तुम तो सब के पिछे डंडा ले कर दौरोगी…"

"क्यों तू नही दौड़ता डंडा ले कर….मैने तो सुना है गाओं की सारी छ्होरियों को अपने डंडे से धमकाया हुआ है तूने.."

मुन्ना एकदम से झेंप गया "धात मा…क्या बात कर रही हो…"

"इसमे शरमाने की क्या बात है…ठीक तो करता है अपना आम तुझे खुद खाना है….सब चूत्मरानियो को ऐसे ही धमका दिया कर…." मुन्ना की रीढ़ की हद्ढियों में सिहरन दौड़ गई. शीला देवी के मुँह से निकले इस चूत सब्द ने उसे पागल कर दिया. उत्तेजना में अपने लंड को जाँघो के बीच ज़ोर से दबा दिया. चौधरायण ने साड़ी खोल एक ओर फेंक दिया और फिर पेटिकोट को फिर से घुटने के थोड़ा उपर तक खींच कर बैठ गई और खिड़की के तरफ मुँह घुमा कर बोली
"लगता है आज बारिश होगी". मुन्ना कुच्छ नही बोला उसकी नज़रे तो शीला देवी की गोरी गथिलि पिंदलियों का मुआएना कर रही थी. घूमती नज़रे जाँघो तक पहुच गई और वो उसी में खोया रहता अगर अचानक शीला देवी ना बोल पड़ती "बेटे आम खाएगा…" मुन्ना ने चौंक कर नज़र उठा कर देखा तो उसे ब्लाउस के अंदर कसे हुए दो आम नज़र आए, इतने पास की दिल में आया मुँह आगेआ कर चुचियाँ को मुँह में भर ले दूसरे किसी आम के बारे में तो उसका दिमाग़ सोच भी नही पा रहा था हॅडबड़ाते हुए बोला "आम…कहा है आम….अभी कहा से…" शीला देवी उसके और पास आ अपने सांसो की गर्मी उसके चेहरे पर फेंकती हुई बोली "आम के बगीचे मैं बैठ कर…आम ढूँढ रहा है…" कह कर मुस्कुरई…".

"पर रात में…आम.." बोलते हुए मुन्ना के मन में आया की गड्ढे वाले गालो को अपने मुँह भर कर चूस लू.

धीरे से बोली "रात में ही खाने में मज़ा आता है…चल बाहर चलते है…" कहती हुई मुन्ना को एक तरफ धकेलते बिस्तर से उतारने लगी. इतने पास से बिस्तर से उतार रही थी की उसकी नुकीली चुचियों ने अपने चोंच से मुन्ना की बाहों को छु लिया. मुन्ना का बदन गन्गना गया. उठ ते हुए बोला "के मा…तुम भी क्या..क्या सोचती रहती हो…इतनी रात में आम कहा दिखेंगे"

"ये टॉर्च है ना…बारिश आने वाली है…जीतने भी पके हुए आम है गिर कर खराब हो जाएगे…." और टॉर्च उठा बाहर की ओर चल दी. आज उसकी चाल में एक खास बात थी, मुन्ना का ध्यान बरबस उसकी मटकती गुदाज कमर और मांसल हिलते चूतरों की ओर चला गया. गाओं की अनचुदी जवान लौंदीयों को छोड़ने के बाद भी उसको वो मज़ा नही आया था जो उसे उसकी मामी उर्मिला देवी ने दिया था. इतनी कम उम्र में ही मुन्ना को ये बात समझ में आ गई थी की बड़ी उम्र की मांसल गदराई हुई औरतो को चोदने में जो मज़ा है वो मज़ा दुबली पतली अछूती चूतो को चोदने में नही. खेली खाई औरते कुतेव करते हुए लंड डलवाती है और उस समय जब उनकी चूत से फॅक फॅक…गछ गछ आवाज़ निकलती है तो फिर घंटो चोद्ते रहो…उनके मांसल गदराए जिस्म को जितनी मर्ज़ी उतना रागडो. एक दम गदराए गथीले चूतर, पेटिकोट के उपर से देखने से लग रहा था कि हाथ लगा कर अगर पकड़े तो मोटी मांसल चुटटरों को रगड़ने का मज़ा आ जाएगा. ऐसे चूतर की उसके दोनो भागो को अलग करने के लिए भी मेहनत करनी पड़ेगी. फिर उसके बीच गांद का छोटा सा भूरे रंग का छेद बस मज़ा आ जाए. लूँगी के अंदर लंड फनफना रहा था. अगर शीला देवी उसकी मा नही होती तो अब तक तो वो उसे दबोच चुका होता. इतने पास से केवल पेटिकोट-ब्लाउस में पहली बार देखने का मौका मिला था. एक दम मस्त गदराई गथिलि जवानी थी.
हर अंग फेडॅफाडा रहा था. कसकती हुई जवानी थी जिसको रगड़ते हुए बदन के हर हिस्से को चूमते हुए दन्तो से काट ते हुए रस चूसने लायक था. रात में सो जाने पर साड़ी उठा के चूत देखने की कोशिश की जा सकती थी, ज़्यादा परेशानी शायद ना हो क्योंकि उसे पता था कि गाओं की औरते पॅंटी नही पहनती. इसी उधेरबुन में फसा हुआ अपनी मा की हिलती गांद और उसमे फासे हुए पेटिकोट के कपड़े को देखता हुआ पिछे चलते हुए आम के पेड़ो के बीच पहुच गया. वाहा शीला देवी फ्लश लाइट (टॉर्च) जला कर उपर की ओर देखते हुए बारी-बारी से सभी पेड़ो पर रोशनी डाल रही थी.

"इस पेड़ पर तो सारे कच्चे आम है…इस पर एक आध ही पके हुए दिख रहे…"

"इस तरफ टॉर्च दिखाओ तो मा…इस पेड़ पर …पके हुए आम दिख…."

"कहा है…इस पेड़ पर भी नही है पके हुए…तू क्या करता था यहा पर….तुझे तो ये भी नही पता किस पेड़ पर पके हुए आम है…" मुन्ना ने शीला देवी की ओर देखते हुए कहा "पता तो है मगर उस पेड़ से तुम तोड़ने नही दोगि…".
"क्यों नही तोड़ने दूँगी…तू बता तो सही मैं खुद तोड़ कर ख़िलाउंगी...." फिर एक पेड़ के पास रुक गई "हा….देख ये पेड़ तो एकदम लदा हुआ है पके आमो से….चल ले टॉर्च पकड़ के दिखा मैं ज़रा आम तोड़ती हू…." कहते हुए शीला देवी ने मुन्ना को टॉर्च पकड़ा दी. मुन्ना ने उसे रोकते हुए कहा "क्या करती हो…कही गिर गई तो …..तुम रहने दो मैं तोड़ देता हू…."

"चल बड़ा आया…आम तोड़ने वाला…बेटा मैं गाओं में ही बड़ी हुई हू…जब मैं छ्होटी थी तो अपने सहेलियों में मुझ से ज़यादा तेज कोई नही था पेर पर चढ़ने में…देख मैं कैसे चढ़ती हू…"

"अर्रे तब की बात और…" पर मुन्ना की बाते उसके मुँह में ही रह गई और शीला देवी ने अपने पेटिकोट को थोड़ा उपर कर अपनी कमर में खोस लिया और पेड़ पर चढ़ना
शुरू कर दिया. मुन्ना ने भी टॉर्च की रोशनी उसकी तरफ कर दी. थोड़ी ही देर में काफ़ी उपर चढ़ गई और पेड़ के दो डालो के उपर पैर जमा कर खड़ी हो गई और टॉर्च की रोशनी में हाथ बढ़ा कर आम तोड़ने लगी तभी टॉर्च फिसल कर मुन्ना की हाथो से नीचे गिर गयी.
"अर्रे…क्या करता है तू…ठीक से टॉर्च भी नही दिखा सकता क्या". मुन्ना ने जल्दी से नीचे झुक कर टॉर्च उठाया और फिर उपर किया…

"ठीक से दिखा….इधर की तरफ…" टॉर्च की रोशनी शीला देवी जहा आम तोड़ रही थी वाहा ले जाने के क्रम में ही रोशनी शीला देवी के पैरो के पास पड़ी तो मुन्ना के होश ही अर गये. शीला देवी ने अपने दोनो पैरो को दो डालो पर टीका के रखा हुआ था जिसके कारण उसका पेटिकोट दो भागो में बाट गया था और टॉर्च की रोशनी सीधा उसके दोनो पैरो के बीच के अंधेरे को चीरती हुई पेटिकोट अंदर के माल को रोशनी से जगमगा दिया. पेटिकोट के अंदर के नज़ारे ने मुन्ना की तो आँखो को चौंधिया दिया. टॉर्च की रोशनी में पेटिकोट के अंदर क़ैद चमचमाती मखमली टाँगे पूरी तरह से नुमाया हो गई, रोशनी पूरा उपर तक चूत के काले काले झांतो को भी दिखा रही थी. टॉर्च की रोशनी में कन्द्लि के खंभे जैसी चिकनी मोटी जाँघो और चूत की झांतो को देख मुन्ना को लगा कि उसका लंड पानी फेंक देगा, उसका गला सुख गया और हाथ-पैर काँपने लगे. तभी शीला देवी की आवाज़ सुनाई दी "अर्रे कहा दिखा रहा है यहा उपर दिखा ना…". हकलाते हुए बोला "हा..हा अभी दिखाता…वो टॉर्च गिर गया था…" फिर टॉर्च की रोशनी चौधरैयन के हाथो पर फोकस कर दिया. चौधरायण ने दो आम तोड़ लिए फिर बोली "ले कॅच कर तो ज़रा…" और नीचे की तरफ फेंका, मुन्ना ने जल्दी से टॉर्च

को कांख में दबा दोनो आम बारी बारी से कॅच कर लिए और एक तरफ रख कर फिर से टॉर्च उपर की तरफ दिखाने लगा…और इस बार सीधा दोनो टॅंगो बीच में रोशनी फेंकी..इतनी देर में शीला देवी की टाँगे कुच्छ और फैल गई थी पेटिकोट भी थोडा उपर उठ गया था और चूत की झांते और ज़यादा सॉफ दिख रही थी. मुन्ना का ये भ्रम था या सच्चाई पर शीला देवी के हिलने पर उसे ऐसा लगा जैसे चूत के लाल लपलपते होंठो ने हल्का सा अपना मुँह खोला था. लेंड तो लूँगी के अंदर ऐसे खड़ा था जैसे नीचे से ही चौधरायण की चूत में घुस जाएगा. नीचे अंधेरा होने का फ़ायदा उठाते हुए मुन्ना ने एक हाथ से अपना लंड
पकड़ कर हल्के से दबाया. तभी शीला देवी ने "कहा ज़रा इधर दिखा…." मुन्ना ने वैसा ही किया पर बार-बार वो मौका देख टॉर्च की रोशनी को उसके टॅंगो के बीच में फेंक देता था. कुच्छ समय बाद शीला देवी बोली "और तो कोई पका आम नही दिख रहा.…चल मैं नीचे आ जाती हू वैसे भी दो आम तो मिल ही गये….तू खाली इधर उधर लाइट दिखा रहा है ध्यान से मेरे पैरों के पास लाइट दिखना". कहते हुए नीचे उतरने लगी. मुन्ना को अब पूरा मौका मिल गया ठीक पेड़ की जड़ के पास नीचे खड़ा हो कर लाइट दिखाने लगा. नीचे उतरती चुधरायण के पेटिकोट के अंदर रोशनी फेंकते हुए उसकी मस्त मांसल चिकनी जाँघो को अब वो आराम से देख सकता था क्योंकि चौधरैयन का पूरा ध्यान तो नीचे उतरने पर था, हालाँकि चूत की झांतो का दिखना अब बंद हो गया था मगर चौधरैयन का मुँह पेड़ की तरफ होने के कारण पिछे से उसके मोटे मोटे चूतरो का निचला भाग पेटिकोट के अंदर दिख रहा था. मस्त गोरी गांद के निचले भाग को देख लंड अपने आप हिलने लगा था. एक हाथ से लंड पकड़ कस कर दबाते हुए मुन्ना मन ही मन बोला "हाई मा ऐसे ही पेड़ पर चढ़ि रह उफ़फ्फ़…क्या गांद है…किसी ने आज तक नही मारी होगी एक दम अछूती गांद होगी….हाई मा…लंड ले कर खड़ा हू जल्दी से नीचे उतर के इस पर बैठ जा ना…" ये सोचने भर से लंड ने दो चार बूँद पानी टपका दिया. तभी शीला देवी जब एकदम नीचे उतरने वाली थी कि उसका पैर फिसला और हाथ छूट गया. मुन्ना ने हर्बरा कर नीचे गिरती शीला देवी को कमर के पास से पकड़ कर लपक लिया. मुन्ना के दोनो हाथ अब उसकी कमर से लिपटे हुए थे और चौधरैयन के दोनो पैर हवा में और चूतर उसकी कमर के पास. मुन्ना का लंड सीधा चौधरैयन की मोटी गुदाज गांद को छु रहा था. गुदाज मांसल पेट के फोल्ड्स उसकी मुट्ही में आ गये थे. हर्बराहट में दोनो की समझ में कुच्छ नही आ रहा था, कुच्छ पल तक मुन्ना ने भी उसके भारी सरीर को ऐसे ही थामे रखा और शीला देवी भी उसके हाथो को पकड़े अपनी गांद उसके लंड पर टिकाए झूलती रही.

कुच्छ देर बाद धीरे से शरमाई आवाज़ में बोली "हाई…बच गई…अभी गिर जाती..अब छोड़ ऐसे ही उठाए रखेगा क्या…"
मुन्ना उसको ज़मीन पर खड़ा करता हुआ बोला "मैने तो पहले ही कहा था…" शीला देवी का चेहरा लाल पर गया था. हल्के से मुस्कुराती हुई कनखियों से लूँगी में मुन्ना के खड़े लंड को देखने की कोशिश कर रही थी. अंधेरे के कारण देख नही पाई मगर अपनी गांद पर अभी भी उसके लंड की चुभन का अहसास उसको हो रहा था. अपने पेट को सहलाते हुए धीरे से बोली "कितनी ज़ोर से पकड़ता है तू…लगता है निशान पड़ गया…" मुन्ना तुरंत टॉर्च जला कर उसके पेट को देखते हुए बुदबुदाते हुए बोला "…वो अचानक हो….". मुस्कुराती हुई शीला देवी धीरे कदमो से चलती मुन्ना के एकदम पास पहुच गई…इतने पास की उसकी दोनो चुचियों का अगला नुकीला भाग लगभग मुन्ना की छाती को टच कर रहा था और उसकी बनियान में कसी छाती पर हल्के से हाथ मारती बोली "पूरा सांड़ हो गया है…तू…मैं इतनी भारी हू…मुझे ऐसे टाँग लिया….चल आम उठा ले.













--
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj














































































































































































Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma
हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया
Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

Raj-Sharma-Stories.com

Raj-Sharma-Stories.com

erotic_art_and_fentency Headline Animator