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Monday, April 6, 2015

FUN-MAZA-MASTI चाची का इलाज-5

FUN-MAZA-MASTI

चाची का इलाज-5



मेरे लवड़े से चुचाते रस को चाची ने देख लिया था.. लेकिन उन्होंने अनजान बनते हुए फिर से कहा- ला.. मैं इसकी खुजली का इलाज करती हूँ।
मैंने लौड़ा आगे किया और उन्होंने मौका पाते ही मेरा लंड पकड़ कर अपने मुँह में रख लिया और मस्त चूसने लगीं… मैं भी समझने लगा था कि चाची चुदना ज़रूर चाहती हैं.. पर नादान बनकर…
इसलिए मैंने चाची की चूत पर ऊँगली रखते हुए कहा- चाची यहाँ पर लगता है.. चींटी अन्दर घुस गई है.. इसलिए तो पानी निकल रहा है.. क्या मैं इसे निकाल दूँ?
चाची ने कहा- अरे जल्दी निकालो.. यह भी कोई पूछने वाली बात है क्या?
मैंने भी चाची की चूत में अपनी ऊँगली डाल दी और आराम से उसे अन्दर-बाहर करने लगा। चाची भी मेरा लंड चूस चूसकर बरसों की प्यास बुझा रही थीं।
फिर मैंने चाची की चूत में अपनी जीभ डाल कर चूसने लगा.. मेरी जीभ की नर्माहट से चाची की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी। लेकिन वो खुल कर मुझसे चोदने के लिए नहीं बोल रही थीं। मैं यह सोच रहा था कि इतने बहाने कैसे बनाऊँगा?
लेकिन मैंने एक आइडिया निकाला और चाची के मुँह को ही चोदने लगा.. वो भी इसे बुरा नहीं मान रही थीं… शायद चाचा ने कभी चाची के मुख-मैथुन किया ही नहीं होगा.. यह उनके लिए पहली बार था। मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ाई और चाची के गले में और अन्दर.. और अन्दर.. लंड डालने लगा… चाची तो मानो पागल हो रही थीं।
फिर मुझे जब लगा कि मैं अब झड़ने वाला हूँ.. तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और चाची के पूरे बदन पर अपना सारा माल निकाल दिया… मेरे लंड में से पहली बार इतना सारा माल निकला था, चाची का ब्लाउज पूरा चिकना हो गया था.. फिर उन्होंने अनजान बनते हुए गुस्से में कहा- सन्नी.. यह क्या किया तूने.. पूरे कपड़े गंदे कर दिए?
मैंने तुरंत चाची के कहने पर कहा- लाओ चाची में इसे उतार देता हूँ.. आपके हाथ गंदे हो जाएँगे…
इस बात पर उन्होंने बनते हुए कहा- अच्छा ठीक है.. पर आगे से ऐसा मत करना…
फिर वो बैठ गईं और मैंने अपने हाथ चाची के कंधे पर रख दिए और चाची के कंधे को सहलाते हुए उनके हाथों के बगलों से होते हुए मैंने दोनों तरफ से चाची के मम्मों पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा। चाची बस आँखें बंद करके मजा ले रही थीं। फिर मैंने चाची के ब्लाउज का हुक खोलना शुरू किया और फिर एक.. दो.. तीन और चार करके सारे हुक खोल दिए और चाची का ब्लाउज आराम से उतार दिया।
अब चाची काले रंग की ब्रा में रह गई थीं। सच में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और वो चाची की कमर को छू रहा था.. चाची को इस बात का पता चल रहा था।
फिर उन्होंने मेरी ओर देखते हुए कहा- रुक क्यूँ गए.. इसे भी उतार न.. कितनी गंदी हो गई है?
मैंने तुरंत आज्ञाकारी बच्चे की तरह चाची की ब्रा के हुक को पीछे से खोला और निकाल दिया।
अब चाची कुछ और ही रंग में थीं- बेटा.. अब इनको भी मसाज कर दे।
और ऐसा कहकर उन्होंने मेरे हाथ अपने हाथों में ले कर अपने मम्मों पर रख दिए और अपने मम्मे सहलवाने लगीं। वो अब कामुक हो रही थीं.. मैं भी अब चाची से एकदम सट कर बैठ गया और मम्मों को मस्ती से दबाने लगा।
उनके दोनों मम्मों को मेरे हाथों में मैंने पकड़ कर गोल-गोल घुमाया और फिर दोनों हाथों में उनके निपल्स को ऊँगलियों में लेकर उसे मींजा तो चाची के मुँह से एक ‘आआआहह..’ निकला.. पर उनको मज़ा आया।
फिर मैंने उन्हें लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया और मम्मों को दबाने लगा। अब मैंने बिने पूछे एक मम्मे की चौंच को अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। चाची के चेहरे पर शिकन की लकीरें देख कर मैं रुक गया तो चाची ने आँखें खोलकर कहा- अरे रुक क्यूँ गया.. और करो.. अच्छा लगता है…
मैं फिर से चाची के मम्मों को मसलने में लग गया.. फिर मैंने चाची की नाभि में अपनी ऊँगली डाली और उसे घुमाया और अन्दर घुसेड़ने भी करने लगा। थोड़ा ज़्यादा ज़ोर से डालते ही चाची अपने आपको रोक नहीं पाईं..और बोल पड़ीं- आह्ह.. सन्नी बेटा.. ज़रा धीरे करो.. न…
फिर मैंने चाची की चूत में हाथ डाला और चाची की क्लिट को मसलने लगा और थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने चाची की चूत में ऊँगली डाल दी और उसे अन्दर-बाहर करने लगा।
चाची को मस्त लग रहा था.. अब उनसे रहा नहीं गया और बोल पड़ीं- यस.. सन्नी बेटा.. और करो.. अच्छा लग रहा है.. प्लीज़ फक मी…
चाची के मुँह से ‘फक मी’ सुनने का ही इन्तजार था.. फिर मैंने चाची की चूत में दो ऊँगलियाँ डाल दीं और चाची मचल उठीं और अंगड़ाई लेने लगीं…
मैं चाची की नाभि को चुम्बन कर रहा था और दो ऊँगलियों से चूत मसल रहा था… फिर मैंने फिर से उठ कर चाची के ऊपर 69 की अवस्था में आ गया और चाची की चाची की चूत को मुँह में ले कर चूसने लगा।
चाची भी बिना कुछ सोचे मेरे लंड को चूसने लगीं और अपने मुँह में जी भर के लंड को उतारने लगीं। फिर उन्होंने मेरे दोनों अण्डकोषों को पकड़ा और दबाया.. आह्ह.. मैं भी उत्तेजित हो गया और चाची की चूत में और गहरे जीभ डालने लगा। चाची अब ज़ोर से सीत्कार कर रही थीं…
फिर मैंने अपनी दो ऊँगलियाँ फिर से चाची की चूत में डालीं और जोरों से अन्दर-बाहर करने लगा। अपनी जीभ से चाची की चूत को चाटने लगा… अब मेरे बस में मैं खुद ही नहीं था इसीलिए मैंने सीधे होकर चाची के दोनों पाँव फैला दिए और चाची की चूत पर अपना लंड रखा और लौड़े को अन्दर घुसेड़ने के लिए धक्का मारने लगा.. पर लंड अन्दर नहीं गया।
चाची हंस कर बोलीं- बेटा चाहे जितना ब्लू-फिल्म देख लो.. पहली बार तो औरत से पूछना ही पड़ता है…
फिर उन्होंने मेरे लौड़े को पकड़ा और अपने छेद पर रखा और अब ज़ोर लगाने को कहा… मैंने ज़ोर लगाया और इस बार चाची की चूत में मेरा लंड चला गया.. पूरा नहीं गया था.. पर दूसरी बार में पूरा चला गया।
अब चाची ने कहा- ओह्ह.. धीरे-धीरे शुरू कर ना.. फिर अपने आप रफ़्तार आ जाएगी…
मैंने फिर अपना लंड चूत में ही रहने दिया और चाची के ऊपर लेट गया और चाची के होंठों को चूसने लगा। चाची भी मेरे होंठों को चूस रही थीं। फिर उन्होंने मेरी जीभ को पकड़ लिया और उसे चूसने लगीं।
मेरे लिए यह पहली बार था.. लेकिन मज़ा आया और मैं भी उनकी जीभ को चूसने लगा… वो इस चुम्बन में मस्त थीं और मैंने उनकी चूत को चोदना शुरू कर दिया।
तकरीबन 5 मिनट तक चूसने के बाद मैंने चाची की जीभ को छोड़ा और अब सीधा बैठ गया और ज़ोर-ज़ोर से चाची को धक्के लगाना शुरू कर दिया। चाची की चूत में से मस्त रस निकल रहा था.. जिसके साथ मेरे लौड़े के टकराने से “च्चपक.. चप्पक..” की आवाज़ आ रही थी।
मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं और चाची भी ज़ोर-ज़ोर से सीत्कार कर रही थीं। मैंने चाची को बगल से लिटा कर चोदना शुरू किया और साथ में ही उनके मम्मों को भी दबाने लगा।
मेरी चुदाई और भी तेज़ हो रही थी.. पूरा बिस्तर हिल रहा था.. पता नहीं चाची को चाचा ने ऐसे कभी चोदा भी था या नहीं… बगल से होते हुए ही मैंने चाची को पलटा दिया और चोदना तो चालू ही था। अब मैं चाची को ओर ज़ोर से धक्के लगाने लगा.. वो भी जानबूझ कर ज़ोर से वापस आती थीं.. तकरीबन आधे घंटे तक मैंने चाची को बिना रुके चोदा।
आखिरी दौर में मैं जब उन्हें कुतिया बना कर चोद रहा था.. तब मुझे कुछ झटका सा लग रहा था।
मैंने चाची से कहा तो उन्होंने कहा- पहली बार कर रहे हो.. इसलिए तुम्हें पता नहीं.. इसे स्खलन कहते हैं.. तुम अब झड़ने वाले हो.. प्लीज़ और भी ज़ोर से चोदो.. मैं भी फिर से झड़ने वाली हूँ।
मैंने तो जैसे चाची जो कुतिया बनी हुई थीं.. मैंने उन्हें उनके पेट से पकड़ कर उठा लिया और दम लगा कर झटके मारने लगा। चाची भी चरम के लिए ज़ोर लगाने लगीं और फिर एकदम से उनकी चूत में से रज छूटा और वो शांत हो गईं। उनके झड़ने के दो ही मिनट बाद ही मैंने भी चाची के अन्दर ही अपना सारा वीर्य झटके से उढ़ेल दिया और चाची के ऊपर ही लेट गया।
चाची पेट के बल लेटी थीं। मैंने चाची के ऊपर अपना चेहरा रखा और उनके गाल को चुम्बन करने लगा, उनके कान में कहा- थैंक्स चाची.. यू आर सो नाइस।
चाची- सन्नी, आई एम थैंकफुल टू यू.. आज बहुत दिनों के बाद अपने औरत होने का एहसास हुआ है।
वो मेरी ओर पलटीं और मैंने उनकी आँखों में प्यार से देखा, अब उसमें एक संतुष्टि का भाव था.. जो कि चुदाई के लिए मुझे कब से उकसा रहा था, फिर मैं उनके होंठों पर चुम्बन करने लगा। फिर मेरी और चाची के समागम निरंतर होने लगे.. और वो अब पहले से भी अधिक निखर गई थीं।
 










FUN-MAZA-MASTI चाची का इलाज-4

FUN-MAZA-MASTI

चाची का इलाज-4



मैं अब अपने आपे से बाहर होता जा रहा था। एकदम सेक्सी चाची और मैं इस स्थिति में.. मैंने फिर बड़े आराम से अपने हाथ चाची की पैन्टी में सरकाने की कोशिश की.. पर चाची की पैन्टी बहुत ही चुस्त थी.. इसीलिए हो नहीं पाया।
मैंने चाची से पूछा- चाची.. आराम मिल रहा है?
चाची ने आँखें बन्द किए हुए ही कहा- हाँ बेटा.. आराम तो मिल रहा है… लेकिन अब तुम रहने दो.. अब मैं ठीक हूँ..
मैं- नहीं चाची.. मैं और मालिश कर देता हूँ।
चाची- नहीं सन्नी.. मैंने कहा ना.. कि अब हो गया.. मैं ठीक हूँ..
फिर मुझे अपने आप पर गुस्सा आया कि क्यूँ मैंने खुद ही बात छेड़ी। सब कुछ ठीक चल रहा था.. लेकिन मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि चाची को भी मज़ा आ रहा था फिर क्यूँ उन्होंने मुझे जाने को कहा?
लेकिन मुझे अभी और मेहनत करनी पड़ेगी.. ऐसा सोच कर मैं अपने कमरे में जा कर बैठ गया।
फिर शाम तक कुछ नहीं हुआ। अब रात के आठ बज रहे थे और हम डिनर पर बैठे.. लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आ रही थी कि मैंने इतना खुल कर कहा था कि चाची मैं आपको फैंटेसी में लेकर मुठ्ठ मारता हूँ.. पर चाची ने अब तक कुछ नहीं कहा.. मैं इस बात पर बहुत हैरान था।
इसीलिए अब मैंने ही बात शुरू करना ठीक समझा।
मैं- चाची…
चाची- हाँ..
मैं- चाची एक बात पूछनी है?
चाची- किस बारे में? मैंने अब तक तुमसे फैंटेसी के बारे में पूछा नहीं.. इस बारे में..!
मैं तो यह सुनकर एकदम से शॉक्ड ही हो गया।
चाची यह देख कर हंस पड़ीं।
चाची- अरे बेटा.. इस उम्र में ऐसा बच्चे करते हैं.. लेकिन मुझे तुम्हारी स्वीकारोक्ति पसंद आई।
मैं- थैंक्स चाची.. लेकिन मैं एक बात कहूँगा.. आप मुझे अच्छी तरह से समझने लगी हैं।
चाची- अच्छा बाबा.. चलो अब खाना खत्म करो..
ऐसा कह कर चाची ने अपना खाना खत्म किया और तभी उनके मुँह से ‘आह..’ निकली।
मैं- क्या चाची.. अब भी दर्द है?
चाची- हाँ बेटा.. अभी डिनर करके एक और बार मालिश कर देना..
मैं- ठीक है चाची..
कहकर मैंने फटाफट खाना ख़त्म किया। इतने में चाची ने भी अपना काम खत्म किया और मेरी ओर देख कर मुस्कराईं.. मैं भी रसोई में बर्फ लेने चला गया और बर्फ लेकर चाची के बेडरूम में दाखिल हुआ और देखा तो चाची अपने आप ही पेट के बल लेटी हुई थीं।
मेरे अन्दर आते ही उन्होंने कहा- सन्नी.. बेटा अब तक दर्द नहीं गया है.. थोड़ी हार्ड मालिश करो और दर्द और जगह भी है.. तो वहाँ भी मालिश कर दो।
मैंने- ठीक है चाची..
मैं चाची के पाँव के पास बैठ गया और बिना पूछे चाची की साड़ी उनकी जाँघों तक उठाई और चाची ने मेरे कहने से पहले ही अपने पाँव फैला लिए।

मेरा लंड तो फनफनाने लगा।
मैंने बिना बर्फ के ही चाची की जाँघों पर हाथ फिराया और फिर बर्फ हाथ में ले ली।
मैं दोनों हाथों मे बर्फ लेकर चाची की जाँघों पर बर्फ रगड़ने लगा।
चाची को मज़ा तो आ रहा था.. लेकिन चाची ने कहा।
चाची- बेटा सन्नी.. एक और बात है कि चोट मुझे कहीं और लगी है.. पता नहीं कैसे कहूँ.. पर जो है.. वो है।
मैं- चाची.. बिना कोई झिझक मुझे बताइए..
चाची- मैं बता नहीं पाऊँगी..
मैं- अच्छा तो मेरे हाथ वहाँ रख दीजिए जहाँ दर्द हो रहा है..
फिर उन्होंने अपने दोनों हाथों में मेरे हाथ लिए और अपनी पैन्टी पर रख दिए.. मेरा तो मन ही नाच उठा।
मैंने अपने हाथों से बर्फ छोड़ कर चाची की गाण्ड को पहले तो देखा फिर चाची की साड़ी को उठा कर चाची की कमर पर रख दिए।
अब उनकी पैन्टी से ढकी हुई पिछाड़ी मेरे सामने थी। मैंने पहली बार किसी औरत की गाण्ड को छुआ था।
मैंने अपने दोनों हाथ उनकी गाण्ड पर रखे और गोल-गोल घुमाए..
मैं- चाची.. अगर यहाँ पर बर्फ लगाऊँगा, तो आपकी पैन्टी भी गीली हो जाएगी और सही से सिकाई भी नहीं हो पाएगी.. तो क्या आप?
चाची- नहीं.. नहीं… सन्नी मैं तेरे सामने, इसे कैसे उतार सकती हूँ?
मैं- अगर आपको शर्म आ रही हो तो मैं इसे उतार देता हूँ..
चाची- ओह.. सन्नी.. तुम तो बड़े बेशर्म हो रहे हो।
मैं- चाची.. मैं आपके भले के बारे में ही कह रहा हूँ।
चाची- नहीं..नहीं..
मैं- क्या नहीं.. नहीं.. चाची.. मैं ज़रूर लगाऊँगा.. आपको सुबह से दर्द है और आप बताती भी नहीं हैं।
फिर चाची कुछ नहीं बोलीं.. मैंने इसे चाची की इजाज़त मान ली और चाची की पैन्टी पर फिर से हाथ रखकर दोनों हाथों में दबा लिया।
चाची अब बस आँखें बंद करके लेटी रहीं.. कुछ बोल नहीं रही थीं। फिर मैंने पैन्टी के अन्दर अपने हाथ डाल लिया और चाची की गाण्ड को सहलाने लगा। चाची भी मज़े ले रही थीं। फिर मैं दोनों हाथों से चाची के चूतड़ों को दबाने लगा.. चाची के मुँह से ‘आह… ऊह..’ की आवाज़ निकलने लगी।
मैं जानता था कि यह उनकी सिसयाहट है पर मैंने जानबूझ कर कहा- देखा चाची.. दर्द ज़्यादा हो रहा है ना.. आप बस अब मुझे अपने तरीके से इलाज करने दीजिए।
चाची- अच्छा बाबा.. तू ही अपने तरीके से कर दे.. वैसे भी तू अच्छा इलाज कर रहा है..
फिर मैंने चाची की पैन्टी को छोड़ा और चाची की कमर के बगल से दोनों हाथ पैन्टी में डाल कर पैन्टी नीचे करने लगा..
चाची ने भी हल्का सा उठ कर मेरा काम आसान कर दिया, फिर मैंने बड़े आराम से चाची की पैन्टी उतारी और उसे सूंघने लगा।
सच में पैन्टी से मुझे पसन्द आने वाली खुश्बू थी.. मैंने थोड़ी देर नाक से लगाई रखी.. तो चाची ने मुझे सूंघते हुए देख लिया और कहा।
चाची- अरे सन्नी.. यह क्या कर रहा है?
मैं- चाची.. इसमें से बड़ी अच्छी खुश्बू आ रही है.. इसलिए इसे सूंघ रहा हूँ.. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है।
चाची- सन्नी.. मेरे दर्द के बारे में भी सोच..
मैं- अच्छा चाची.. क्या मैं यहाँ सूंघ सकता हूँ? मैंने चाची की गाण्ड की ओर ऊँगली दिखाते हुए कहा।
चाची ने कहा- ठीक है.. पर इलाज भी साथ में करता चल।
फिर मैं चाची की गाण्ड के पास बैठ गया और चाची की गाण्ड को देखने लगा और दबाने लगा.. चाची की फिर से ‘ऊँ..आँ.’ चालू हो गई। फिर मैं चाची की गाण्ड को सूंघने के बहाने चाची के ऊपर आ गया और उल्टा लेट गया.. जिससे अब मैं चाची के ऊपर था.. पर चाची पेट के बल लेटी हुई थीं। इसीलिए वो मेरा तना हुआ लंड महसूस कर सकती थीं.. पर कुछ कर नहीं सकती थीं।
चाची की इस हालत पर मुझे मज़ा आ रहा था और मैं चाची की गाण्ड को सूंघने के बहाने.. गाण्ड को खोलकर चुम्बन करने लगा और मेरा नाक चाची की बुर पर था। इसीलिए चाची और भी मदहोश हो रही थीं.. चाची की चूत से रस निकलना चालू हो गया था।
मेरा लंड भी काबू में नहीं था.. इसीलिए मैंने चाची को इशारा देने के लिए वहाँ खुज़ाया और दो-तीन बार किया तो चाची ने भी आख़िर पूछ ही लिया।
चाची- क्या हो रहा है बेटा?
मैं- कुछ नहीं चाची.. बस खुजली हो रही है।
चाची- ला.. मैं देखूँ.. तो?
मैंने बिना वक्त जाया किए.. नादान बनते हुए अपना लंड चाची के सामने खुला कर दिया।
अब चाची पीठ के बल घूम गईं और मेरी आँखों के सामने चाची की खुली चूत थी। चूत पर हल्के से बाल भी थे.. पहली बार चूत देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मेरा प्री-कम निकलने लगा..।
मेरे लवड़े से चुचाते रस को चाची ने देख लिया था.. लेकिन उन्होंने अनजान बनते हुए फिर से कहा- ला.. मैं इसकी खुजली का इलाज करती हूँ।
मैंने लौड़ा आगे किया और उन्होंने मौका पाते ही मेरा लंड पकड़ कर अपने मुँह में रख लिया और मस्त चूसने लगीं..
मैं भी समझने लगा था कि चाची चुदना ज़रूर चाहती हैं.. पर नादान बनकर.. इसलिए मैंने चाची की चूत पर ऊँगली रखते हुए कहा- चाची यहाँ पर लगता है.. चींटी अन्दर घुस गई है.. इसलिए तो पानी निकल रहा है.. क्या मैं इसे निकाल दूँ?
चाची ने कहा- अरे जल्दी निकालो.. यह भी कोई पूछने वाली बात है क्या?
मैंने भी चाची की चूत में अपनी ऊँगली डाल दी और आराम से उसे अन्दर-बाहर करने लगा।
चाची भी मेरा लंड चूस चूसकर बरसों की प्यास बुझा रही थीं।
फिर मैंने चाची की चूत में अपनी जीभ डाल कर चूसने लगा.. मेरी जीभ की नर्माहट से चाची की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी। लेकिन वो खुल कर मुझसे चोदने के लिए नहीं बोल रही थीं।









FUN-MAZA-MASTI चाची का इलाज-3

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चाची का इलाज-3 

 

मैं फिर रसोई में चला गया और देखा तो चाची गैस पर कुछ गरम कर रही थीं। अरे क्या मस्त.. उनकी अधनंगी पीठ और उभरी हुई गांड लग रही थी.. मैं बस उन्हें देखता रहा। लेकिन पता नहीं उन्हें कैसे पता चल गया.. वो फिर डबल मीनिंग में बोलीं- वहीं से क्या देख रहे हो.. पास आ कर देखो..
मैं हिम्मत करके ठीक चाची के पीछे चला गया और उनसे साथ कर उनके कंधे पर अपना मुँह रखा और पूछा- क्या कर रही हो चाची?
चाची ने इठला कर कहा- बस गर्म कर रही हूँ..
मैं तो बस वहाँ से चाची के मम्मों की क्लीवेज देख रहा था। चाची भी यह जानती थीं.. लेकिन कुछ बोली नहीं.. मैं खड़ा रहा था… थोड़ी देर बाद चाची ने कहा- कुछ काम नहीं है.. तो अपने चाचा के पास जाकर बैठ.. मैं आती हूँ..
मैं अब सोच में पड़ गया कि क्या बहाना बनाऊँ.. तो मैंने कहा- चाची.. मुझे आपसे कुछ कहना है।
चाची- हाँ बोलो..
मैं- चाची, आप पूछ रही थीं ना.. कि मैं किसे देख कर वो सब कर रहा था?
चाची- हाँ..
अब मेरा हाथ चाची के चूतड़ों पर रखा हुआ था।
मैं- वो…सी हहा..ची..
चाची- अरे बता ना?
मैं- चाची.. वो आप थीं..
मैंने हिम्मत करके बोल ही दिया और चाची के जबाव का इन्तजार करने लगा।
मुझे पता था कि वो दिखावे के लिए गुस्सा करेंगी.. पर उससे उल्टा हुआ।
चाची- सन्नी… ओह्ह.. बेटा.. यह तू क्या कह रहा है? तुझे पता भी है.. चल तू अब यहाँ से जा.. तेरे चाचा सुन लेंगे, तो क्या से क्या हो जाएगा? हे भगवान.. इसे तो यह भी नहीं पता कि कब क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं?
मैं- आई एम सॉरी.. चाची..
चाची- तू अभी जा ना..
मैं वहाँ से आ कर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया और चाची के आने का इन्तजार करने लगा।
चाची आईं और हम लोग खाना खाने लगे। लेकिन चाची मुझसे बात नहीं कर रही थीं। बाद में एक घंटे के बाद चाचा निकल गए और मैं उन्हें एयरपोर्ट तक छोड़ कर वापस आया। चाची अपने कमरे में नहीं थीं.. मैंने कॉल किया तो उन्होंने मेरा फोन कट कर दिया।
फिर एक घंटे के बाद चाची घर आईं। मैं उन्हें देखते ही उनसे ज़ोर से गले लग गया और कहा- फोन क्यूँ अटेंड नहीं कर रही थीं? आप को कह कर तो जाना चाहिए ना..
चाची ने मुझे समझाते हुए कहा- अरे बाबा.. मैं कार में थी और ट्रॅफिक पुलिस वाला मुझे ही देख रहा था कि मैं फोन हाथ में लूँ और वो चालान काटे।
मैं अब ठीक था।
चाची भी मुझे परेशानी में देखकर थोड़ी परेशान सी हुईं और थोड़ा मुस्कुरा भी रही थीं।
फिर मेरी जान में जान आई और मैंने अपने आप को सम्हाला। मुझे लगा कि चाची मेरी बात को भूल गई हैं इसीलिए मैं भी बाहर चला गया और एक-डेढ़ घंटे के बाद वापस लौटा।
तब शाम के सात बजे थे.. चाची सब्जी काट रही थीं और वो टीवी भी देख रही थीं। मैं अपने कमरे में गया और फ्रेश हो कर शॉर्ट्स और बनियान में अपने कमरे में पढ़ाई करने लगा।
तभी थोड़ी देर में चाची ने आवाज़ लगाई और कहा- सन्नी डिनर रेडी है.. आ जाओ..
मैं फ़ौरन बाहर आया और चाची की मदद करने लगा। चाची कुछ मानो सोच रही थीं.. मुझसे बात नहीं कर रही थीं। शायद वो मेरे उसी उत्तर की बात को फिर से चालू करना चाहती थीं.. पर कैसे करें.. वो यही सोच रही थीं।
हम खाना खाने बैठे और डिनर करने लगे.. चाची मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थीं। चाची ने फटाफट खाना निपटाया और उठने लगीं कि उनके मुँह से ‘आह..’ निकली.. तो मैंने झट से पूछा- क्या हुआ चाची?
चाची- कुछ नहीं..
मैं- नहीं चाची.. कुछ तो हुआ है..
चाची- नहीं बेटा.. कुछ नहीं..
यह कहकर वो रसोई में जा कर बर्तन धोने लगीं। मैंने भी अपना डिनर निपटाया और रसोई में जा कर फिर से पूछा.. लेकिन चाची ने नहीं बताया।
अब तकरीबन 8 बज रहे थे। चाची कुछ दर्द में लग रही थीं.. मैं ड्रॉयिंग-रूम में टीवी देखने लगा।
चाची भी बर्तन धो कर मेरे पास बैठी और फिर से उनके मुँह से दर्द की ‘आह..’ निकली.. तो मैंने टीवी बंद किया और कहा।
मैं- चाची.. आप कुछ परेशानी में हो.. शायद कुछ हो रहा है.. आपको?
चाची कुछ नहीं बोलीं.. मैं उन्हें ही देख रहा था.. वो समझ गईं कि बात जाने बिना मैं मानूँगा नहीं.. तो वो बोलीं- मैं जब बाहर गया था.. तब वो ग़लती से रसोई में गिर गई थीं और कुछ अन्दरूनी चोट आई है।
मैं- कहाँ?
चाची ने नीचे देखा और अपनी जाँघ पर हाथ रखा।
मैंने कहा- चलो चाची.. मैं तुम्हें दर्द वाला मलहम लगा देता हूँ।
चाची- नहीं बेटा.. मैं खुद लगा लेती हूँ।
मैं- अरे चाची.. आप तो डॉक्टर हैं और समझती हैं कि मरीज़ अपने आप कभी अच्छे से मालिश या दवाई नहीं लेता। चलिए.. आपके कमरे में चलते हैं।
मैं उन्हें उनके कमरे में हल्की सी ज़बरदस्ती के साथ ले गया, फिर मैंने पूछा- चाची.. आयंटमेंट कहाँ है?
चाची- अरे बाबा.. इस दर्द में मैं यह भूल ही गई कि घर में आयंटमेंट है ही नहीं..
मैंने तुरंत एक आईडिया निकाला और कहा- कोई बात नहीं चाची.. मैं फ्रिज में से बर्फ ला कर लगा देता हूँ।
मैं बिना चाची की सुने.. बर्फ लाने चला गया और दो ही मिनट में बर्फ ले कर वापस आया और देखा कि चाची को हल्की सी शर्म आ रही थी।
इसीलिए मैंने हल्का सा बनते हुए कहा- अरे चाची.. तुम सोचो मत और मुझसे क्या शरमाना? आपको दर्द हो रहा है और मैं आपका इलाज कर रहा हूँ।
चाची- अच्छा बाबा.. ठीक है..
वो अपने पेट के बल लेट गईं और आँखें बंद कर लीं।
ओह माय गॉड.. चाची की पिछाड़ी क्या मस्त लग रही थी… गोरी-गोरी गर्दन.. फिर लो कट काले ब्लाउज में छुपा हुई गोरी पीठ और फिर मस्त कमर.. ऊहह…. मस्त चूतड़ और फिर लम्बी टाँगें..
मैं तो ऐसे ही चाची का चक्षु-चोदन करने लगा..
तभी चाची ने मेरी ओर देखा और मैं उनके कुछ कहने से पहले ही होश में आ गया और एक बर्फ का टुकड़ा अपने हाथ में रूमाल में रख कर चाची की साड़ी ऊपर करने लगा तो चाची ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं खुद कर देती हूँ।
चाची ने अपनी काले रंग की साड़ी उतारनी शुरू की और उनके उठने के अंदाज़ से लग रहा था कि वो मुझे सिड्यूस करने के लिए ही यह सब कर रही हैं।
उन्होंने बड़े आराम से अपनी साड़ी उठाई और अपने घुटनों तक ले कर आईं और फिर मेरी ओर देखा। उनका इशारा पाते ही मैं समझ गया कि अब बर्फ लगाने की बारी आ गई है।
मैंने जानबूझ कर हल्के से बर्फ उनके घुटने के ऊपर रखी और बर्फ रखते ही वो ठंड से और उत्तेजना से कांप गईं। मैंने फिर बर्फ को गोल-गोल घुमाना शुरू किया और चाची की गाण्ड को ही देखने लगा।
अभी थोड़ा ही वक्त हुआ था कि मैंने चाची से कहा- चाची.. अरे..रे आपकी साड़ी थोड़ी गीली हो रही है.. अगर आप कहें तो मैं इसे थोड़ा ऊपर उठा दूँ?
मैंने चाची के जवाब की परवाह किए बिना मैंने साड़ी हाथ में ले ली और इतने में चाची ने मेरी ओर देखा और एक अजीब सी मुस्कराहट के साथ उन्होंने ‘हाँ’ में सर हिलाया और मैंने भी शैतानी सी मुस्कराहट के साथ उन्हें जबाव दिया और उनकी साड़ी को थोड़ा उठाने के बजाए मैंने उनकी पूरी जांघों तक को नंगा कर दिया और साड़ी बिल्कुल उनकी गाण्ड के पास रख दी।
अब उनकी नंगी जाँघ को देखने के बाद मैंने दूसरे हाथ में भी बर्फ का टुकड़ा ले लिया और दोनों जाँघों पर बर्फ से मसाज करने लगा।
मैंने बस एक-दो बार ही बर्फ के साथ अपना हाथ उनकी नरम जांघों पर फिराए और कहा।
मैं- चाची.. एक तरफ बैठने से दूसरी ओर की मसाज करना ठीक से नहीं हो रही.. मुझे आपकी टाँगों के बीच में बैठना पड़ेगा.. तो क्या आप…?
और मेरी बात ख़त्म करने से पहले ही उन्होंने मेरी ओर देखे बिना और आँखें खोले बिना.. अपने दोनों पैर फिर से बड़े ही कामुक अंदाज़ में बड़े आराम से फैला दिए.. जैसे कह रही हों.. लो चोद लो मुझे..
ओह.. क्या मस्त छटा थी.. उनकी काली साड़ी में गोरे-गोरे नंगे पाँव फैलाने के अंदाज़ सच में क़ातिलाना था।
मेरा तो लंड अब खड़ा हो चुका था और चाची को मुझे अब इस बात का अंदाज़ दिलवाना था.. इसीलिए मैं उनके पाँव के बीच में बैठ गया और अपने दोनों हाथों में बर्फ ले कर आराम से थोड़ा-थोड़ा दबाते हुए बर्फ घुमाने लगा और घुमाते-घुमाते बर्फ को उनकी गाण्ड तक ले जाने लगा।
जब-जब मेरे हाथ उनकी गाण्ड तक जाते तो उनकी पैन्टी की किनारियाँ मुझे महसूस हो रही थीं।
मैं अब अपने आपे से बाहर होता जा रहा था। एकदम सेक्सी चाची और मैं इस स्थिति में.. मैंने फिर बड़े आराम से अपने हाथ चाची की पैन्टी में सरकाने की कोशिश की.. पर चाची की पैन्टी बहुत ही चुस्त थी.. इसीलिए हो नहीं पाया।
मैंने चाची से पूछा- चाची.. आराम मिल रहा है?
चाची ने आँखें बन्द किए हुए ही कहा- हाँ बेटा.. आराम तो मिल रहा है… लेकिन अब तुम रहने दो.. अब मैं ठीक हूँ..
मैं- नहीं चाची.. मैं और मालिश कर देता हूँ।
चाची- नहीं सन्नी.. मैंने कहा ना.. कि अब हो गया.. मैं ठीक हूँ..
फिर मुझे अपने आप पर गुस्सा आया कि क्यूँ मैंने खुद ही बात छेड़ी। सब कुछ ठीक चल रहा था.. लेकिन मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि चाची को भी मज़ा आ रहा था फिर क्यूँ उन्होंने मुझे जाने को कहा?

 

FUN-MAZA-MASTI चाची का इलाज-2

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चाची का इलाज-2





अब मेरी समझ में आ गया था कि चाची को आराम से चोदा जा सकता है। अब तक मैं incest की सत्यता में विश्वास नहीं करता था.. लेकिन इस घटना के बाद मैं मानने लगा था।
चाची के जाने के बाद मैंने अपना लैपटॉप निकाला और इन्सेस्ट में चुदाई करने वाली फन मजा मस्ती पर  कहानियों को पढ़ना शुरू कर दिया।
अब मुझे कुछ-कुछ तरीके समझ में आ रहे थे। मैं जानने लगा था कि उम्र के साथ मर्द को सेक्स में कम रूचि होती है लेकिन औरतों को तब भी चुदाई की प्यास होती है इसीलिए अधिक उम्र वाली औरतें किशोर और युवाओं को कामोत्तेजित भी करती हैं।
अब मैंने सोचा कि चाची को कहानियों के माध्यम से और कुछ अपने आइडिया भी लगा कर उनको पटाना होगा।
 
दूसरे दिन मैंने अपने बाथरूम में टब के पाइप में एक कपड़ा फंसा दिया और फिर चाची के पास गया।
मैंने देखा कि वो रसोई में नाश्ता बना रही थीं। अभी वो नहाई नहीं थीं.. तो मैंने चाची से कहा- मेरे बाथरूम में पानी नहीं आ रहा है.. तो क्या मैं आपका बाथरूम यूज़ कर लूँ?
तो उन्होंने मुझसे कहा- ठीक है.. जाओ लेकिन जल्दी करना.. मुझे भी नहाना है।
मैं उनके बाथरूम में गया और देखा तो चाचा ने नहा लिया था और वो मंदिर के पास भगवान की पूजा कर रहे थे।
मैं बाथरूम में घुस गया और चाची के कपड़े खोजने लगा और मुझे उनकी ब्रा और पैन्टी मिल गए.. मैंने उन्हें हाथ में लिया और चाची को सोचते हुए मुठ्ठ मारना शुरू कर दिया।
थोड़ी ही देर में मैंने अपना वीर्य उनके ब्रा-पैन्टी पर उड़ेल दिया और फिर आराम से नहा कर बाहर आ गया। अब मैं चाची के नहाने की इन्तजार करने लगा।
मैं चाचा के साथ डाइनिंग टेबल पर था और चाची की इन्तजार कर रहा था। वो जब नहा कर बाहर आईं तो उन्होंने सबसे पहले मुझे देखा और बस एक हल्की सी नज़र मिला कर शरम से नज़रें नीचे झुका लीं।
मैंने भी पूरे नाश्ते के दौरान थोड़ी शर्म और थोड़े डर के मारे नज़रें नहीं मिलाईं। फिर मैं चाचा के साथ ही उनकी कार में कॉलेज चला गया ताकि चाची मुझे डांट ना सकें।
शाम को लौटते वक़्त मेरे मन में थोड़ा डर था.. क्योंकि मैंने ऐसा पहली बार किया था।
मैं घर आया तो चाची घर पर नहीं थीं.. वो कोई सामाजिक काम से बाहर गई थीं।
मुझे कुछ राहत मिली और मैं तुरंत चाची के बाथरूम में गया और देखा तो चाची के वो ब्रा और पैन्टी नहीं थे। मुझे बहुत खुशी हुई और मैंने फिर से मुठ्ठ मारी। मुठ्ठ मारने में मुझे थोड़ी देर हो गई और मैं जैसे ही बाहर निकला तो चाची बाथरूम में ही जा रही थीं।
वो मुझे देखकर शॉक तो हो गईं.. पर उन्होंने मुझसे ज़रा सी भी बात नहीं की और बाथरूम में चली गईं।
अब मुझे पता था कि वो मुझसे चुदाना तो चाहती हैं पर थोड़ा नाटक कर रही हैं।
मैंने भी उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया और अपने कमरे में जाकर पढ़ने लगा। पढ़ाई भी ज़रूरी है भाई…
थोड़ी देर में किसी ने मेरे दरवाजे पर दस्तक दी।
मैं- कौन?
चाची- अरे मैं हूँ..
मैं- चाची आप.. तो अन्दर आइए ना…
फिर चाची अन्दर आईं.. तो उन्हें देखकर मैं उन्हें ही घूर कर देखने लगा।
उन्होंने काले रंग साड़ी के साथ काला ही बिना आस्तीन का ब्लाउज पहना हुआ था।
चाची- ऐसे क्या देख रहे हो?
मैं अब होश में आ गया और गर्दन झटकते हुए मैंने कहा।
मैं- अरे चाची.. आपको दस्तक करने की क्या जरूरत थी?
चाची- अरे बेटा.. दस्तक करना अब ज़रूरी लगता है.. क्या पता तुम क्या ‘काम’ कर रहे हो?
उन्होंने ‘काम’ शब्द पर जरा जोर दिया और अर्थ पूर्ण तरीके से मुझे देखने लगीं। मैं थोड़ा सा सकपका सा गया.. चाची ने मुझे ताना मारा था।
मैं- क्या चाची.. आप भी.. मुझे शर्मिन्दा कर रही हो.. इसी कारण अब तक मैं सामने वाली चाची के सामने नहीं गया हूँ।
चाची- तो फिर ऐसे काम ही क्यों करते हो कि किसी से नज़रें भी मिला ना सको।
अब मैं निरुत्तर था.. मैं बस मुँह लटका कर बैठा रहा।
फिर उन्हें भी समझ में आया.. तो वो मेरे बालों में अपने हाथ फेरने लगीं और कहा- तुम अच्छे बच्चे हो.. पर थोड़े से शैतान हो रहे हो..
फिर मैंने मौका देख कर कह दिया- लेकिन चाची मेरी शैतानी अच्छी लगती है ना..
तो वो मुस्कुराईं और चली गईं।
अब मुझे ग्रीन सिग्नल मिल रहा था.. मैंने चाची को सेक्स के भूखे जानवर की तरह घूरना शुरू कर दिया.. मैं अब उनके मम्मों को.. दूध के बीच की दरार को.. और उनकी उभरी हुई गाण्ड को देखता रहता था।
चाची को भी इस बात का पता था.. लेकिन वो कुछ बोलती नहीं थीं.. क्योंकि मैं कोई हल्की हरकत नहीं करता था और वो भी सेक्स के टॉपिक के बारे में बात नहीं करना चाहती थीं।
तो मैंने ऐसे 10-15 दिन उन्हें देखना शुरू किया और साथ-साथ रात में उनके कमरे के बाहर से यह भी देखना चालू किया कि चाचा और चाची चुदाई करते भी हैं कि नहीं…
करीब 10-15 दिन पता लगाने के बाद मैंने देखा कि दोनों की ‘सेक्स-लाइफ’ शून्य थी।
तो मैंने अब थोड़ा सा हरकत करना चालू किया और अब आते-जाते मेरा हाथ चाची के चूतड़ों से और बगलों से मम्मों पर टकराने लगा।
फिर मैंने एक दिन फेक आईडी से अपनी चाची के ईमेल पर एक ईमेल किया.. जिसमें ‘अपने बेटे को कैसे सिड्यूस किया जाए..’ उसकी सब तरकीबें भेजीं।
तकरीबन दो घंटे बाद उनका जबाव आया था।
उन्होंने पूछा था- हू आर यू?
तो मैंने जबाव में एक अच्छी सी इन्सेस्ट कहानी उन्हें भेज दी।
इस बात को एक हफ़्ता ही बीता होगा.. लेकिन मुझे चाची में कोई ख़ास बदलाव नहीं पाया। फिर थोड़े ही दिनों में दीवाली आने वाली थी और मेरी छुट्टियाँ हो गई थीं।
तो आंटी ने एक दिन कहा- सुन बेटा.. आज घर की सफाई करनी है.. क्या तुम मेरा हाथ बंटा दोगे?
तो मैंने हामी भर दी।
उन्होंने कहा- ठीक है तो फिर अपने पुराने कपड़े या फिर बनियान और छोटे शॉर्ट पहन कर स्टोर-रूम में आ जाओ.. क्योंकि सब कमरे तो ठीक हैं.. सिर्फ़ स्टोर-रूम में से ही कचरा निकालना है।
मैंने इस मौके का फायदा उठाना ठीक समझा और मैं सिर्फ़ शॉर्ट्स पहन कर स्टोर-रूम में आ गया।
चाची मुझे दो सेकेंड के लिए देखती रहीं.. फिर उन्होंने मुझसे कहा- ठीक किया.. वरना बनियान भी खराब हो जाती।
फिर हम सफाई करने लगे। तकरीबन दो घंटे सफाई का काम चला और मैंने गौर किया कि आंटी मेरे अंडरवियर को बार-बार देखतीं और फिर आँखें चुरा लेती थीं। फिर जब सफाई ख़त्म करके हम ड्रॉइंग-रूम में आए.. तो मैं सोफे पर पैर फैला कर बैठ गया.. जिससे मेरे अंडरवियर में से कुछ बाल और शायद मेरा लंड भी दिख रहा था।
चाची भी मेरे पीछे-पीछे आईं और मेरे अंडरवियर को देखने लगीं।
फिर 3-4 सेकेंड्स के बाद उन्होंने कहा- सन्नी जाओ.. तुमने अपना शॉर्ट्स क्यूँ उतार दिया? .. और ऐसे अपनी चाची के सामने बैठने से शर्म नहीं आती?
तो मैंने कहा- अरे हाँ चाची.. मुझे बाद में याद आया कि यह शॉर्ट्स तो मैंने पिछले हफ्ते ही खरीदा है और ज़्यादा खराब हो गया तो पैसा खराब हो जाएगा.. इसीलिए मैंने इसे भी उतार दिया और दूसरी बात.. आपके सामने कैसी शर्म? बचपन में मुझे आपने मुझे बहुत बार नंगा देखा होगा ना..
तो इस पर चाची ने कहा- तब की बात और थी.. तब तुम अच्छे बच्चे थे.. लेकिन अब ऐसी हरकतें करने लगे हो कि पड़ोसी के सामने जाने से भी डर लगता है।
मैं फिर थोड़ा सा सकपका गया और चाची के सामने से नज़रें हटाकर दूसरी तरफ देखने लगा।
चाची मेरी फीलिंग्स को समझ गई थीं.. इसीलिए बाद में हंस पड़ीं और कहा- अरे बाबा.. मैं तो मज़ाक कर रही थी।
फिर उन्होंने कहा- अरे सन्नी.. एक बात बताओगे?
मैं- हाँ.. चाची..
चाची- तुमने उस दिन के बाद से फिर वो किया है क्या?
मैं थोड़ा सा चौंक गया.. पर मैंने कहा- नहीं..
तो वो बोलीं- नहीं.. मुझे नहीं लगता.. तुम सच बताओ..
मैं- हाँ.. चाची दो-तीन बार किया है।
चाची- अच्छा.. इसका मतलब तुमने कम से कम 10-15 बार किया होगा… अच्छा एक और बात बताओ? उस दिन तुम किसे फैंटेसी से याद करके ये कर रहे थे.. कि तुम खिड़की बंद करना भी भूल गए थे। सच बताना.. मैं सच सुनना चाहती हूँ।
मुझे पता चल रहा था कि चाची अब अपने बारे में सुनना चाहती हैं।
तो मैंने कहा- मैं नहीं बताऊँगा..
तो उन्होंने कहा- मैं तुम्हें नहीं डाटूंगी… तुम खुल कर अपनी चाची से बात तो करो..
मैं- नहीं चाची.. आप नाराज़ हो जाओगी।
चाची- नहीं.. मैं बिल्कुल गुस्सा नहीं करूँगी!
मैं- चाची.. मैं इस बात को यहीं तक रखना चाहता हूँ.. मुझे पता है आप इसे सुन नहीं पाएँगीं.. इसलिए मैं आपसे नहीं कह पाऊँगा।
इतने में दरवाजे की घन्टी बजी और मैंने चाची से कहा- मैं शॉर्ट्स पहन कर आता हूँ..
मैं उठकर अपने कमरे में चला गया और चाची दरवाजा खोलने लगीं.. देखा तो चाचाजी आए हुए थे।
उन्होंने आते ही कहा- मुझे ज़रा आज मुंबई जाना पड़ेगा.. अपना खुद का हॉस्पिटल खोलने के लिए मेरे दोस्त ने एक कंपनी से बात करके रखी है.. मैं अब शायद कल ही आ पाऊँगा।
तभी मैं शॉर्ट्स पहन कर आया तो चाचा ने कहा- अरे वाह भाई.. आज तो तुमने काफ़ी अच्छी मदद की अपनी चाची की.. अच्छा आज मैं रात को नहीं आऊँगा.. तो घर पर ही रहना..
मैंने कहा- ठीक है..
मैंने उनसे चाची के बारे में पूछा.. तो उन्होंने कहा- वो रसोई में खाना गरम कर रही हैं।
मैं फिर रसोई में चला गया और देखा तो चाची गैस पर कुछ गरम कर रही थीं।
अरे क्या मस्त.. उनकी अधनंगी पीठ और उभरी हुई गांड लग रही थी.. मैं बस उन्हें देखता रहा।
लेकिन पता नहीं उन्हें कैसे पता चल गया.. वो फिर डबल मीनिंग में बोलीं- वहीं से क्या देख रहे हो.. पास आ कर देखो..
मैं हिम्मत करके ठीक चाची के पीछे चला गया और उनसे साथ कर उनके कंधे पर अपना मुँह रखा और पूछा।
मैं- क्या कर रही हो.. चाची?
चाची ने इठला कर कहा- बस गर्म कर रही हूँ..











FUN-MAZA-MASTI चाची का इलाज-1

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चाची का इलाज-1




मैं गौरव गुप्ता.. सूरत से हूँ और अभी दिल्ली में रहता हूँ.. मेरी उम्र 26 वर्ष है..
मेरे घर में मेरे माता-पिता हैं.. पापा डॉक्टर अशोक हैं.. जो एक कैंसर-सर्जन हैं और मॉम भी एक जनरल फिजिशियन डॉक्टर हैं.. उनका नाम शीतल है।
मेरे घर में मेरे एक चाचा हैं.. मेरे चाचा का नाम प्रदीप है.. वो 50 साल के हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं। वो दिल्ली में ही डॉक्टर हैं और मेरी चाची भी डॉक्टर हैं.. पर वो डॉक्टरी छोड़ कर समाज-सेवा में ज़्यादा हिस्सा लेती हैं। वो स्वभाव से बहुत ही अच्छी हैं। मेरी चाची का नाम शीला गुप्ता है.. वो 42 साल की हैं लेकिन दिखने में सिर्फ 32 की लगती हैं। उन्होंने बहुत अच्छे से अपने आप को संवार कर रखा है। उनकी यह फेयरनेस.. आजकल की विभिन्न क्रीमों और खुद को संवार कर रखने की लगातार कोशिश का भी नतीजा था।
अब हर अच्छे घर में उम्रदराज औरतें भी अपने आप को बना-ठना रखने में व्यस्त रहती हैं।
मैं पेशे से एक डॉक्टर हूँ इसीलिए आप सभी से कह रहा हूँ कि अपने साथी के सम्भोग करते समय अपने स्वास्थ्य का ख़याल रखें।
लड़कियों के लिए मेरी सलाह है कि दिन में 10 गिलास पानी पिएं.. यह आपके चेहरे को खिला देगा और वजन भी कम कर देगा। अपने चेहरे पर से पसीना जरूर पोंछते रहें.. क्योंकि मेरे जैसे लड़के पसीने से भरे चेहरे पर चुम्बन लेना पसन्द नहीं करते हैं।
आपने अक्सर देखा होगा कि डॉक्टर हमेशा साफ़-सुथरे और गुड-लुकिंग मिलेंगे.. क्योंकि वो अपनी केयर करते हैं।
अब मेरी चाची की चुदाई की कहानी पेश कर रहा हूँ।
बात तब की है.. जब मैं 20 साल का था और मेडिकल कॉलेज में पढ़ता था।
शायद आप जानते होंगे कि हर डॉक्टर अपने बच्चे को डॉक्टर ही बनाना चाहता है.. इसीलिए मैं भी मेडिकल कॉलेज में सिलेक्ट हो गया। मेरे 12वीं में थोड़े नंबर कम आए थे.. इसीलिए मुझे अपनी मेडिकल की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाना पड़ा।
मैं सूरत से नॉएडा शिफ्ट हो गया, वैसे तो मैं नॉएडा में चाचा-चाची के यहाँ रह चुका हूँ.. इसीलिए मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। मैं मेडिकल कॉलेज में पहले दिन गया और देखा तो बहुत सी अच्छी लड़कियाँ थीं। उनके पहनावे को देख कर तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं कोई फैशन ले कॉलेज में आ गया हूँ।
खैर.. मुझे बहुत अच्छा लगा.. फिर मैं शाम को घर आया तो चाची कहीं बाहर गई थीं। मैं अपने कमरे में गया और अपने लैपटॉप पर ब्लू-फिल्म देखने लगा।
थोड़ी देर के बाद जब दरवाजे की घन्टी बजी.. तो मैंने दरवाजा खोला। चाची आ गई थीं.. आते ही उन्होंने मेरे पहले दिन के बारे में पूछा।
यहाँ मैं यह बता दूँ कि मेरी चाची का कोई बेटा नहीं है.. एक बेटी है.. वो भी विवाहित, जिन्हें मैं पूनम दीदी कहता हूँ। अब घर में मैं और चाचा-चाची ही रहते हैं।
चाची को मैं कई बार अपने सपनों में चोद चुका हूँ.. लेकिन कभी सपनों में चुदाई से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि वो मुझे अपने बेटे जैसा मानती थीं और हमेशा ‘सन्नी बेटा’ ही कह कर पुकरती थीं।
जहाँ तक मुझे पता है.. उनके मन में भी मेरे बारे में शायद कोई गंदा ख़याल नहीं होगा।
तकरीबन एक महीना बीत गया था कि एक दिन मैं अपने कमरे में एकदम नंगा हो कर मुठ्ठ मार रहा था और ब्लू-फिल्म देख रहा था कि मुझे तभी ख़याल आया कि मैं तो खिड़की के सामने खड़ा हूँ और मैंने नोटिस किया कि सामने वाली आंटी मुझे देख रही हैं।
मेरे तो पसीने छूट गए.. क्योंकि मैं पहली बार ऐसा काम करते हुए पकड़ा गया था। ऐसे वक्त पर सभी को डर लगता है। मैंने फटाक से खिड़की बंद की और अपने कमरे में छुप कर बैठ गया।
शाम को वो आंटी घर आईं.. उन्होंने मुझे पुकारा पर मैंने उनके सामने जाना ठीक नहीं समझा.. क्योंकि वो आंटी मेरी चाची को अच्छे से जानती थीं।
देर रात जब 9 बजे चाचा घर लौटे तो मैं अपने कमरे से बाहर निकला और फटाफट उनके साथ डिनर निपटा कर वापस अपने कमरे में चला गया और जा कर सोचने लगा कि उस आंटी ने चाची को कुछ बताया भी होगा या नहीं.. पर मैं कुछ नहीं समझ पाया।
दूसरे दिन भी मैं देर से उठा.. बाहर देखा तो कोई नहीं था। मैं नहा-धो कर कॉलेज के लिए निकल गया। जैसे ही मैंने घर लॉक किया तो देखा कि वो आंटी मेरे सामने थीं और अपना बरामदा साफ़ कर रही थीं.. लेकिन मुझे देख कर वो अपने घर में अन्दर चली गईं और तेजी से अपना दरवाजा बंद कर दिया।
शाम को मैं घर लौटा तो भी सब सामान्य था.. मुझे यकीन हो गया कि इन आंटी को बस गुस्सा आया है.. उन्होंने मेरी चाची को कुछ नहीं बताया।
उधर घर में चाची भी सामान्य थीं और चाचा भी.. मैं अब बिंदास था..
ऐसे ही दो दिन निकल गए.. मैं अपने काम में मस्त था.. लेकिन अब ध्यान रखने लगा था कि कोई मुझे पकड़ ना ले।
फिर उस दिन शाम को चाचा का कॉल आया कि वो सर्जरी में व्यस्त हैं उन्हें इसी वजह से देर हो जाएगी.. तो चाची ने मुझे डिनर के लिए बुलाया और मैं डिनर टेबल पर आ गया। मैं रसोई में उनकी मदद करने लगा और मैंने सारा खाना टेबल पर सज़ा दिया।
आंटी आज खुश लग रही थीं और मैं भी कि मैं बच गया हूँ।
फिर हम खाना खाने लगे और बातें करने लगे।
चाची- खाना कैसा बना है.. सन्नी?
मैं- बहुत अच्छा.. आपके हाथ से कभी खाना बुरा बनता ही नहीं…
चाची- अच्छा.. तो फिर एक रोटी और लो..
मैं- नहीं आंटी.. अभी पेट भर चुका है।
चाची- अच्छा सन्नी.. एक बात तो बताओ..
मैं- हाँ आंटी..?
चाची- तुममें अकल है कि नहीं?
मैं- क्यूँ आंटी.. मैंने क्या किया है?
चाची- तुम पड़ोस वाली आंटी के सामने क्या कर रहे थे?
मैं तो चौंक ही गया.. मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था.. कि क्या बोलूँ और क्या करूँ..
फिर मैंने इतने में सोच लिया कि आंटी से बहाने करने में कोई फायदा नहीं.. वो मुझसे ज़्यादा होशियार हैं। मेरी बहानेबाजी को तो पकड़ ही लेंगी..
तो मैंने अपनी गर्दन शर्म से नीचे झुका ली.. मुझे पता था कि अब वो कुछ नहीं कहेगीं.. क्योंकि मैं परिवार में एक ही लड़का था और वो भी मुझे बेटे जैसे मानती थीं।
मैं शर्म से नीचे देख रहा था और कोई जवाब देने की कोशिश नहीं की।
चाची- अरे बोलते क्यूँ नहीं.. तुम नहीं जानते कि तुमने क्या किया या फिर मैं बताऊँ कि तुमने क्या किया?
मैं- सॉरी चाची.. अब आगे से ऐसा नहीं करूँगा..
चाची- देखो सन्नी.. मुझे पता है कि तुम जवान हो गए हो और यह सब लड़के करते ही हैं.. लेकिन हमारी आज सोसाइटी में कुछ इज़्ज़त है.. तुम ऐसे करोगे तो फिर हम सबको जवाब कैसे दे पाएँगे।
मैं- आई एम सॉरी चाची.. लेकिन मैं वो…
चाची- अच्छा.. ठीक है.. सामने वाली आंटी मेरी अच्छी दोस्त हैं.. इसीलिए उसने सिर्फ़ मुझसे बात की.. सोचो अगर तुम्हारे अंकल को इस बात का पता चल गया होता तो?
मैं- चाची.. अब आगे से नहीं करूँगा..
चाची- फिर से झूठ.. ऐसे कहो कि आगे से खिड़की और दरवाजा बंद कर के करोगे.. क्योंकि मुझे पता है कि तुम आख़िर मर्द हो.. समझे…!
मैं- जी चाची..
फिर वो खाना निपटा कर उठीं और सब प्लेट्स वगैरह टेबल से उठा कर रसोई में रखने लगीं। मैं भी उनका हाथ बटाने लगा और जब सब ख़त्म हो गया.. तब मैंने आंटी से कहा।
मैं- चाची.. एक बात पूछूँ?
चाची- हाँ पूछ सन्नी..
मैं- चाची आप मुझसे नाराज़ तो नहीं है ना..
चाची- हम्म.. थोड़ी सी डिस्टर्ब तो हुई थी, लेकिन नाराज़ नहीं हूँ।
मैं- थैंक्स, आंटी कैन आई हैव ए टाइट हग फ्रॉम यू?
चाची- ओके कम..
फिर मैं चाची से ज़ोर से गले लग गया और उन्हें कस कर अपने में समेट ही लिया। यह मेरा पहली बार था जब मैं किसी औरत के गले लगा था। मैंने अपने हाथ आंटी के पीछे कन्धों से लेकर चाची के चूतड़ों तक फेरने लगा।
 
आंटी अब मुझे शायद समझ रही थीं.. वो भी मुझसे मानो एकदम टाइट सटी हुई थीं। फिर जैसे ही उन्हें कुछ समझ आया.. वो तुरन्त मुझसे दूर हो गईं।
उन्होंने मुझे देखा और आँखें मुझसे ना मिलाकर वो अपने काम में लग गईं और मुझसे कहा- जाओ तुम जा कर सो जाओ..
मैं वहाँ से अपने कमरे में चला गया। लेकिन मैं अपनी चाची को अपनी फैंटेसी से फिर चोद रहा था और मुझे लगा कि वो बाहर जा रही है.. तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल निकला और दरवाजे की आड़ में से मैंने देखा कि वो उस आंटी से बात कर रही हैं।
मैं उनकी बातें सुनने लगा।
वो आंटी पूछ रही थीं- क्या.. तूने अपने भतीजे से बात की या नहीं?
तो आंटी ने जवाब दिया- वो तो बेचारा डर ही गया.. फिर मैंने उसे समझाया कि यह सब सामान्य बात है पर आगे से ध्यान रखा करो.. फिर वो कुछ ठीक लगा..
फिर सामने वाली आंटी ने कहा- जो भी हो पर तेरे भतीजे का हथियार बहुत बड़ा है.. एक बार तो लगा कि बस उसे देखती ही रहूँ.. पर फिर अपनी इज़्ज़त का ख़याल आया और मैं रह गई..
इस पर मेरी आंटी ने कहा- क्या तुम सच कह रही हो?
यह सब बातें सुनकर मुझे लगा कि अब चाची भी मेरे लंड को देखने के लिए आतुर होगीं और अगर वो एक बार मेरा लंड देख लें.. तो शायद मेरा काम बन सकता है।
फिर मैं अपने कमरे में आ गया और चाची को पटाने का प्लान बनाने लगा।
इतने में चाची मेरे कमरे में आईं और कहा।
चाची- अरे सन्नी.. तुम अब तक सोए नहीं.. क्या सोच रहे हो? क्या तुम अब भी उस बात को लेकर परेशान हो? देखो मैंने सामने वाली आंटी से अभी बात की है और उन्हें समझा दिया है.. तुम चिंता मत करो और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो।
मैं- थैंक्स चाची..
फिर इस बार मैं चाची से बिना पूछे ही उनके गले लग गया और उनको पिछले बार से भी ज़ोर से गले लगा लिया। शायद इस बार आंटी अपनी पैरों की ऊँगलियों पर भी उठ कर ऊँची हो गई थीं।
मैं उन्हें सहलाने लगा था.. लेकिन वो भी अब मेरे इस व्यवहार पर शक कर रही थीं.. लेकिन इस बार वे कुछ बोली नहीं और चुपचाप मुझसे सटी रहीं। मैं अपने दोनों हाथों से उनके दोनों कंधे पकड़े और ज़ोर से दबाया और फिर दोनों हाथ चाची के ठीक ब्लाउज पर ले जाकर उनके ब्लाउज को दोनों हाथों से दबाया.. इसलिए उनके मम्मे मेरे सीने में और भी धँस गए।
अब वो मुझे गौर से देखने लगीं.. लेकिन अब भी उन्होंने कुछ कहा नहीं.. वो मुझे देख रही थीं। लेकिन मैंने उन्हें अनदेखा करके अपने दोनों हाथ नीचे ले जाते हुए उनकी कमर को सहलाते हुए अपने दोनों हाथ उनके चूतड़ों पर रख दिए और उतने में ही दरवाजे की घन्टी बजी।
अचानक आंटी को जैसे होश आया और वो खुद को मुझसे छुड़ा कर वहाँ से फटाफट निकल गईं।

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