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Sunday, August 31, 2014

FUN-MAZA-MASTI पुजारी हवस का --14

FUN-MAZA-MASTI

 पुजारी हवस का --14

 सर रचना के संभलने का इंतजार करने लगे. साथ ही झुक कर होंठों से रचना की आंखें चूमने लगे. मेरा लंड अब सिर उठाने लगा था. सर ने उसे पकड़ा और दबाने लगे , मजा आ रहा है दीदी की चुदाई देखकर?"

"हां सर, रचना की चूत कितनी खुल गयी है, ये फ़ट तो नहीं जायेगी सर?" मैंने उत्सुकता से पूछा.

"अरे नहीं, तेरी बहन जैसी खूबसूरत मतवाली लड़कियों की चूत ऐसे नहीं फ़टती, ये तो बनी हैं हरदम चुदवाने को. बस दो मिनिट बाद ये कैसे मचलने लगेगी, तू ही देखना" सर मुझे पास खींच कर मेरा चुम्मा लेते हुए बोले.

धीरे धीरे रचना का कपकपाता बदन शांत हुआ. सर ने एक उंगली से रचना का दाना रगड़ना शुरू कर दिया. दो मिनिट में रचना कमर हिलाने लगी. सर ने मुस्कराकर . मुझे तो पता था कि ये बहादुर बच्ची ऐसे घबराने वाली नहीं है. अब देखिये मैं इसे कैसा मस्त करता हूं"

सर ने रचना का मुंह छोड़ा "रचना , ठीक है ना तू? अब तो नहीं दुखता?"

रचना सिसक कर बोली "सर ... अभी भी बहुत दुखता है ... पर अच्छा भी लग रहा है ... आप ने जब .... डाला तब ऐसा लग रहा था कि मैं ... मर जाऊंगी"

"तेरी गलती नहीं है, मेरा हथियार है ही ऐसा मूसल जैसा, पर अब देख,में तुझे ऐसा मजा दूंगा कि तू स्वर्ग का सुख लेगी"सर ने कहा

सर ने अब धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था. साथ ही उनकी उंगली रचना के दाने पर चल रही थी.

मैंने देखा कि सर का लंड अब आराम से अंदर बाहर हो रहा था. जब बाहर होता तो थोड़ा पानी निकलता. रचना हौले हौले सांसें ले रही थी और सर की आंखों में आंखें डाले हुए थी. "सर ... मजा आ रहा है सर .... कीजिये ना और ..."

"दर्द तो नहीं हो रहा है रचना ? चोदूं तुझे अब कायदे जैसे तेरी जैसी छोकरी को चोदना चाहिये?" सर ने रचना का चुम्मा लेकर पूछा. रचना ने बस पलक झपका दी. सर उसे अब हौले हौले चोदने लगे. रचना ने एक सिसकारी भरी और सर से लिपट गयी "हा ऽ य सर .... उई ऽ मां ऽ .... सर .... दर्द होता है सर पर बहुत अच्छा लग रहा है सर ... और ... और ...कीजिये ना .... प्लीज़"

"और क्या रचना ? ठीक से बोल, और क्या करूं?" सर ने मुस्कराकर पूछा. वे बड़े सधे अंदाज में चोद रहे थे. बस तीन चार इंच लंड अंदर बाहर करते, बिना एक पल भी रुके हुए.

रचना ने शरमा कर कहा "सर ... चोदिये ना प्लीज़"

"ये हुई ना बात! अब लेसन सीखी है कि कैसे बोला जाता है. अब देख तुझे कैसे चोदता हूं" कहकर सर ने रफ़्तार बढ़ा दी. पूरा लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मुझे लगा कि रचना को दर्द होगा पर वो अब मजे से चुदवा रही थी. उसकी जरा सी बुर में सर का इतना बड़ा लंड अंदर बाहर होता देख कर मैं आंखें फ़ाड़ फ़ाड़ कर यह नजारा देख रहा था. मेरा लंड फ़िर से कसके खड़ा हो गया था.



. वे रचना को कस के चोद रहे थे. सात आठ धक्के लगाने के बाद रुक जाते, फ़िर एक मिनिट रुक कर हौले हौले चोदते और फ़िर घचाघच लंड पेलने लगते.रचना सिसक सिसक कर कह रही थी "सर ... बहुत मजा .... आ रहा है सर ... रहा नहीं जाता ....आह ... ओह ... प्लीज़ .... प्लीज़ ... और जोर से कीजिये ... चोदिये ना .. ... देखिये ना ... प्लीज़ "

मेने सर से कहा "सर, झड़ा दीजिये बेचारी को, ऐसे न तड़पाइये उसे"

सर ने धक्के लगाते हुए कहा "अरे जरा मजा करने दो, बेचारी ने इतना दर्द सहा है मेरा लंड लेने में, रचना , तू क्यों बिचकती है, मजा ले, चुदने का पूरा मजा नहीं लेगी क्या?" फ़िर पाल सर रचना को बाहों में भर के पूरे उसपर लेट गये

मुझे रोमांच हो आया.



" सर ने रचना के होंठ अपने मुंह में लिये और उसका मुंह चूसते हुए हचक हचक कर चोदने लगे.

अब कमरे में बस ’फ़चा फ़च’ ’फ़चा फ़च’ ’पॉक पॉक पुक पुक’ ऐसी चुदाई की आवाजें आ रही थीं. दीदी ने अपनी टांगें और हाथ सर के बदन के इर्द गिर्द भींच लिये थे और कमररचना उछाल उछाल कर उनका मुंह चूसते हुए चुदवा रही थी.

सर ने रचना को बहुत देर चोदा. वे दो बार झड़ीं. वे सर को चूमती जातीं और शाबासी देती जातीं "बहुत अच्छे मेरे सर , .....बहुत प्यारे है आप .... बहुत मस्त चोदते है .... अब जरा और जोर से .... लगा ना कस कस के .... आज खाना नहीं खाया क्या? .... हाय सर देख कैसे कचूमर निकाल रहे हैं मेरी चूत का...."

बात सच थी. सर ने रचना को ऐसा चोदा था कि वो बस अपने सर के मुंह में दबे मुंह से ’अं ऽ अं ऽ अं ऽ’ कर रही थी. शायद अब वो झड़ गयी थी इसलिये छूटने की कोशिश कर रही थी. पर सर उसे छोड नहीं रहे थे. जब सर ने अपना मुंह अलग किया तो रचना सिसक कर बोली "आह ऽ ... बस सर ... प्लीज़ सर ... अब छोड़िये ना ... कैसा .. तो ... भी होता .... है ... सर .... प्लीज़ सर .."

सर मुझसे बोले "तेरी रचना झड़ .... गयी है इसलिये अब ..... हालत खराब है उसकी .....पर तेरे सर नहीं मानेंगे .... अब तो मुझे खास मजा आ रहा हें ..... आखिर बुर ....ऐसे ... रोज रोज ... थोड़े मिलती है चोदने को ...."
सर ने एक मिनिट के लिये चुदाई रोक दी. "इत्ते में खलास हो गयी तू रचना ? "रचना लंबी लंबी सांसें लेती हुई संभलने की कोशिश करने लगी. हंसते हुए सर उसके गाल चूमते रहे, फ़िर अचानक फ़िर से रचना के होंठों को अपने मुंह में पकड़ा और शुरू हो गये. अब वे पूरी ताकत से चोद रहे थे. उनका पूरा लंड रचना की बुर में अंदर बाहर हो रहा था.
रचना छटपटाने लगी. बहुत छूटने की कोशिश की पर सर के आगे उसकी क्या चलने वाली थी. सर अब कस के धक्के लगा रहे थे, बिना किसी परवाह के कि उनके नीचे कोई चुदैल रंडी नहीं बल्कि मेरी नाजुक बहना थी.
सर अब ऐसे कसके रचना की धुनाई कर रहे थे कि देख देख कर मुझे ही डर लग रहा था कि रचना को कुछ हो न जाये. अचानक रचना ने आंखें बंद कर लीं और लस्त हो गयी, छटपटाना भी बंद हो गया.

"बेहोश हो गयी शायद, बेचारी की पहली बार है, बुर ने जवाब दे ही दिया आखिर बेचारी की, आखिर ऐसे सोंटे के आगे उसकी क्या चलती, इसने तो बड़ों बड़ों को खलास कर दिया है, ये बच्ची किस खेत की मूली है" सर ने बड़े गर्व से कहा.

सर हांफ़ते हुए बोले "अभी नहीं ... अब .. आयेगा मजा .... लगता है कि किसी .... रबड़ की .... गुड़िया को .... चोद रहा हूं ... ... ऐसे किसी बेहोश बदन को .... कचरने में .... क्या आनंद .... आता .... है ... इसे भी मजा .... आ रहा होगा ....बेहोशी में भी .... नंबर एक की .... चुदैल कन्या .... है ये ..."

दो मिनिट बाद सर भी कस के चिल्लाये और झड़ गये. फ़िर रचना के बदन पर पड़े पड़े जोर जोर की सांसें भरते हुए लस्त पड़कर आराम करने लगे.

पांच मिनिट बाद मैं और सर दोनों उठ बैठे. सर ने उठकर मेरा लंड चाटा और फ़िर रचना की बुर में मुंह डाल दिया. लपालप उनकी बुर से बहते वीर्य और पानी का भोग लगाने लगे. बीच में मेरी ओर मुड़कर बोले "बैठा क्यों है रे मूरख? भोग नहीं लगाना है? अरे इस प्रसाद से स्वादिष्ट और कुछ नहीं है इस दुनिया में. चल, घुस जा अपनी बहन की टांगों में"

. मैंने सर का झड़ा लंड मुंह में लिया और चूस डाला. रचना की बुर के पानी और उनके वीर्य का मिला जुला स्वाद था. फ़िर रचना की बुर अपनी जीभ से साफ़ करने में लग गया.अब पाल सर ने मेरी और देखा

मुझे बिस्तर पर सुला कर मेरा झड़ा लंड सर ने प्यार से मुंह में लिया और चूसने लगे. एक हाथ बढ़ाकर उन्होंने थोड़ा नारियल तेल अपनी उंगली पर लिया और मेरे गुदा पर चुपड़ा. फ़िर मेरा लंड चूसते हुए धीरे से अपनी उंगली मेरी गांड में आधी डाल दी.

"ओह ... ओह .." मेरे मुंह से निकला.

"क्या हुआ, दुखता है?" सर ने पूछा.

"हां सर ... कैसा तो भी होता है"

"इसका मतलब है कि दुखने के साथ मजा भी आता है, है ना? यही तो मैं सिखाना चाहता हूं अब तुझे. गांड का मजा लेना हो तो थोड़ा दर्द भी सहना सीख ले" कहकर सर ने पूरी उंगली मेरी गांड में उतार दी और हौले हौले घुमाने लगे. पहले दर्द हुआ पर फ़िर मजा आने लगा. लंड को भी अजीब सा जोश आ गया और वो खड़ा हो गया. सर उसे फ़िर से बड़े प्यार से चूमने और चूसने लगे "देखा? तू कुछ भी कहे या नखरे करे, तेरे लंड ने तो कह दिया कि उसे क्या लुत्फ़ आ रहा है"

पांच मिनिट सर मेरी गांड में उंगली करते रहे और मैं मस्त होकर आखिर उनके सिर को अपने पेट पर दबा कर उनका मुंह चोदने की कोशिश करने लगा.

सर मेरे बाजू में लेट गये, उनकी उंगली बराबर मेरी गांड में चल रही थी. मेरे बाल चूम कर बोले "अब बता बेटे, जब औरत को प्यार करना हो तो उसकी चूत में लंड डालते हैं या उसे चूसते हैं. है ना? अब ये बता कि अगर एक पुरुष को दूसरे पुरुष से प्यार करना हो तो क्या करते हैं?"

"सर ... लंड चूसकर प्यार करते हैं?" मैंने कहा.

"और अगर और कस कर प्यार करना हो तो? याने चोदने वाला प्यार?" सर ने मेरे कान को दांत से पकड़कर पूछा. मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था.

"सर, गांड में उंगली डालते हैं, जैसा मैंने किया था और आप कर रहे हैं"

"अरे वो आधा प्यार हुआ, करवाने वाले को मजा आता है. पर लंड में होती गुदगुदी को कैसे शांत करेंगे?"

मैं समझ गया. हिचकता हुआ बोला "सर ... गांड में .... लंड डाल कर सर?"

"बहुत अच्छे मेरी जान. तू समझदार है. अब देख, तू मुझे इतना प्यारा लगता है कि मैं तुझे चोदना चाहता हूं. तू भी मुझे चोदने को लंड मुठिया रहा है. अब अपने पास चूत तो है नहीं, पर ये जो गांड है वो चूत से ज्यादा सुख देती है. और चोदने वाले को भी जो आनद आता है वो .... बयान करना मुश्किल है बेटे. अब बोल, अगला लेसन क्या है? तेरे सर अपने प्यारे स्टूडेंट को कैसे प्यार करेंगे?"

"सर ... मेरी गांड में अपना लंड डाल कर .... ओह सर ..." मेरा लंड मस्ती में उछला क्योंकि सर ने अपनी उंगली सहसा मेरी गांड में गहराई तक उतार दी.

"सर दर्द होगा सर .... प्लीज़ सर " मैं मिन्नत करते हुए बोला. मेरी आंखों में देख कर सर मेरे मन की बात समझ गये "तुझे करवाना भी है ऐसा प्यार और डर भी लगता है, है ना?"

"हां सर, आपका बहुत बड़ा है" मैंने झिझकते हुए कहा.

"अरे उसकी फ़िकर मत कर, ये तेल किस लिये है, आधी शीशी डाल दूंगा अंदर, फ़िर देखना ऐसे जायेगा जैसे मख्खन में छुरी. और तुझे मालूम नहीं है, ये गांड लचीली होती है, आराम से ले लेती है. और देख, मैंने पहले एक बार अपना झड़ा लिया था, नहीं तो और सख्त और बड़ा होता. अभी तो बस प्यार से खड़ा है, है ना? और चाहे तो तू भी पहले मेरी मार सकता है."

मेरा मन ललचा गया. सर हंस कर बोले "मारना है मेरी? वैसे मैं तो इसलिये पहले तेरी मारने की कह रहा था कि तेरा लंड इतना मस्त खड़ा है, इस समय तुझे असली मजा आयेगा इस लेसन का. गांड को प्यार करना हो तो अपने साथी को मस्त करना जरूरी होता है, वैसे ही जैसे चूत चोदने के पहले चूत को मस्त करते हैं. लंड खड़ा है तेरा तो मरवाने में बड़ा मजा आयेगा तेरे को"

"हां सर." सर मुझे इतने प्यार से देख रहे थि कि मेरा मन डोलने लगा " सर ... आप ... डाल दीजिये सर अंदर, मैं संभाल लूंगा"

"अभी ले मेरे राजा. वैसे तुम्हें कायदे से कहना चाहिये कि सर, मार लीजिये मेरी गांड!"

"हां सर .... मेरी गांड मारिये सर .... मुझे .... मुझे चोदिये सर जैसे आपने दीदी को चोदा था."

सर मुस्कराये "अब हुई ना बात. चल पलट जा, पहले तेल डाल दूं अंदर. तुझे मालूम है ना कि कार के एंजिन में तेल से पिस्टन सटासट चलता है? बस वैसे ही तेरे सिलिंडर में मेरा पिस्टन ठीक से चले इसलिये तेल जरूरी है. अच्छा पलटने के पहले मेरे पिस्टन में तो तेल लगा"

मैंने हथेली में नारियल का तेल लिया और सर के लंड को चुपड़ने लगा. उनका खड़ा लंड मेरे हाथ में नाग जैसा मचल रहा था. तेल चुपड़ कर मैं पलट कर सो गया. डर भी लग रहा था. तेल लगाते समय मुझे अंदाजा हो गया था कि सर का लंड फ़िर से कितना बड़ा हो गया है. सर ने भले ही दिलासा देने को यह कहा था कि एक बार झड़कर उनका जरा नरम खड़ा रहेगा पर असल में वो लोहे की सलाख जैसा ही टनटना गया था.

सर ने तेल में उंगली डुबो के मेरे गुदा को चिकना किया और एक उंगली अंदर बाहर की. फ़िर एक हाथ से मेरे चूतड फ़ैलाये और कुप्पी उठाकर उसकी नली धीरे से मेरी गांड में अंदर डाल दी. मैं सर की ओर देखने लगा.

वे मुस्कराकर बोले "बेटे, अंदर तक तेल जाना जरूरी है. मैं तो भर देता हूं आधी शीशी अंदर जिससे तुझे कम से कम तकलीफ़ हो." वे शीशी से तेल कुप्पी के अंदर डालने लगे.

मुझे गांड में तेल उतरता हुआ महसूस हुआ. बड़ा अजीब सा पर मजेदार अनुभव था. सर ने मेरी कमर पकड़कर मेरे बदन को हिलाया "बड़ी टाइट गांड है रे तेरी, तेल धीरे धीरे अंदर जा रहा है"
मेरी गांड से कुप्पी निकालकर सर ने फ़िर एक उंगली डाली और घुमा घुमाकर गहरे तक अंदर बाहर करने लगे. मैंने दांतों तले होंठ दबा लिये कि सिसकारी न निकल जाये. फ़िर सर ने दो उंगलियां डाली. इतना दर्द हुआ कि मैं चिहुक पड़ा.
"अब पलट कर लेट जा, आराम से. वैसे तो बहुत से आसन हैं और आज तुझे सब आसनों की प्रैक्टिस कराऊंगा. पर पहली बार डालने को ये सबसे अच्छा है" मेरे पीछे बैठते हुए सर बोले.

सर ने मेरे चेहरे के नीचे एक तकिया दिया और अपने घुटने मेरे बदन के दोनों ओर टेक कर बैठ गये. "अब अपने चूतड़ पकड़ और खोल, तुझे भी आसानी होगी और मुझे भी. और एक बात है बेटे, गुदा ढीला छोड़ना नहीं तो तुझे ही दर्द होगा. समझ ले कि तू लड़की है और अपने सैंया के लिये चूत खोल रही है, ठीक है ना?"

मैंने अपने हाथ से अपने चूतड़ पकड़कर फ़ैलाये. सर ने मेरे गुदा पर लंड जमाया और पेलने लगे "ढीला छोड़ अनिल, जल्दी!"

मैंने अपनी गांड का छेद ढीला किया और अगले ही पल सर का सुपाड़ा पक्क से अंदर हो गया. मेरी चीख निकलते निकलते रह गयी. मैंने मुंह में भरी चप्पल दांतों तले दबा ली और किसी तरह चीख निकलने नहीं दी. बहुत दर्द हो रहा था.

सर ने मुझे शाबासी दी "बस बेटे बस, अब दर्द नहीं होगा. बस पड़ा रह चुपचाप" और एक हाथ से मेरे चूतड़ सहलाने लगे. दूसरा हाथ उन्होंने मेरे बदन के नीचे डाल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे आगे पीछे करने लगे.

दो मिनिट में जब दर्द कम हुआ तो मेरा कसा हुआ बदन कुछ ढीला पड़ा और मैंने जोर से सांस ली. सर समझ गये. झुक कर मेरे बाल चूमे और बोले "बस , अब धीरे धीरे अंदर डालता हूं. एक बार तू पूरा ले ले, फ़िर तुझे समझ में आयेगा कि इस लेसन में कितना आनंद आता है" फ़िर वे हौले हौले लंड मेरे चूतड़ों के बीच पेलने लगे. दो तीन इंच बाद जब मैं फ़िर से थोड़ा तड़पा तो वे रुक गये. मैं जब संभला तो फ़िर शुरू हो गये.

पांच मिनिट बाद उनका पूरा लंड मेरी गांड में था. गांड ऐसे दुख रही थी जैसे किसीने हथौड़े से अंदर से ठोकी हो. सर की झांटें मेरे चूतड़ों से भिड़ गयी थीं. सर अब मुझ पर लेट कर मुझे चूमने लगे. उनके हाथ मेरे बदन के इर्द गिर्द बंधे थे और मेरे निपलों को हौले हौले मसल रहे थे.
सर बोले "दर्द कम हुआ बेटे?"

मैंने मुंडी हिलाकर हां कहा. सर बोले "अब तुझे प्यार करूंगा, मर्दों वाला प्यार. थोड़ा दर्द भले हो पर सह लेना, देख मजा आयेगा" और वे धीरे धीरे मेरी गांड मारने लगे. मेरे चूतड़ों के बीच उनका लंड अंदर बाहर होना शुरू हुआ और एक अजीब सी मस्ती मेरी नस नस में भर गयी. दर्द हो रहा था पर गांड में अंदर तक बड़ी मीठी कसक हो रही थी.

एक दो मिनिट धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने के बाद मेरी गांड में से ’सप’ ’सप’ ’सप’ की आवाज निकलने लगी. तेल पूरा मेरे छेद को चिकना कर चुका था. मैं कसमसा कर अपनी कमर हिलाने लगा. चौधरी सर हंसने लगे "देखा, आ गया रास्ते पर. मजा आ रहा है ना? अब देख आगे मजा" फ़िर वे कस के लंड पेलने लगे. सटा सट सटा सट लंड अंदर बाहर होने लगा. दर्द हुआ तो मैंने फ़िर से मैडम की चप्पल चबा ली पर फ़िर अपने चूतड़ उछाल कर सर का साथ देने लगा.
. बता .... आनंद आया या नहीं?"

"हां ....सर ... आप का ... लेकर बहुत .... मजा .... आ .... रहा .... है ...." सर के धक्के झेलता हुआ मैं बोला " सर .... आप ... को .... कैसा .... लगा .... सर?"

"अरे राजा तेरी मखमली गांड के आगे तो गुलाब भी नहीं टिकेगा. ये तो जन्नत है जन्नत मेरे लिये ... ले ... ले ... और जोर .... से करूं ...." वे बोले.

"हां .... सर ... जोर से .... मारिये .... सर .... बहुत .... अच्छा लग ... रहा है .... सर"

सर मेरी पांच मिनिट मारते रहे और मुझे बेतहाशा चूमते रहे. कभी मेरे बाल चूमते, कभी गर्दन और कभी मेरा चेहरा मोड कर अपनी ओर करते और मेरे होंठ चूमने लगते. फ़िर वे रुक गये.

मैंने अपने चूतड़ उछालते हुए शिकायत की "मारिये ना सर ... प्लीज़"

"अब दूसरा आसन. भूल गया कि ये लेसन है? ये तो था गांड मारने का सबसे सीदा सादा और मजेदार आसन. अब दूसरा दिखाता हूं. चल उठ और ये सोफ़े को पकड़कर झुक कर खड़ा हो जा" सर ने मुझे बड़ी सावधानी से उठाया कि लंड मेरी गांड से बाहर न निकल जाये और मुझे सोफ़े को पकड़कर खड़ा कर दिया. "झुक , ऐसे सीधे नहीं, अब समझ कि तू कुतिया है .... या घोड़ी है ... और मैं पीछे से तेरी मारूंगा"

मैं झुक कर सोफ़े के सहारे खड़ा हो गया. सर मेरे पीछे खड़े होकर मेरी कमर पकड़कर फ़िर पेलने लगे. आगे पीछे आगे पीछे. सामने आइने में दिख रहा था कि कैसे उनका लंड मेरी गांड में अंदर बाहर हो रहा था. देख कर मेरा और जोर से खड़ा हो गया. मस्ती में आकर मैंने एक हाथ सोफ़े से उठाया और लंड पकड़ लिया. सर पीछे से पेल रहे थे, धक्के से मैं गिरते गिरते बचा.

"चल.. जल्दी हाथ हटा और सोफ़ा पकड़ नहीं तो तमाचा मारूंगा" सर चिल्लाये.

"सर ... प्लीज़... रहा नहीं जाता ..... मुठ्ठ मारने का मन .... होता है" मैं बोला.

"अरे मेरे राजा मुन्ना, यही तो मजा है, ऐसी जल्दबाजी न कर, पूरा लुत्फ़ उठा. ये भी इस लेसन का एक भाग है" सर प्यार से बोले. "और अपने लंड को कह कि सब्र कर, बाद में बहुत मजा आयेगा उसे"

सर ने खड़े खड़े मेरी दस मिनिट तक मारी. उनका लंड एकदम सख्त था. मुझे अचरज हो रहा था कि कैसे वे झड़े नहीं. बीच में वे रुक जाते और फ़िर कस के लंड पेलते. मेरी गांड में से ’फ़च’ ’फ़च’ ’फ़च’ की आवाज आ रही थी.

फ़िर सर रुक गये. बोले "थक गया बेटे? चल थोड़ा सुस्ता ले, आ मेरी गोद में बैठ जा. ये है तीसरा आसन ,आराम से प्यार से चूमाचाटी करते हुए करने वाला" कहकर वे मुझे गोद में लेकर सोफ़े पर बैठ गये. लंड अब भी मेरी गांड में धंसा था.

मुझे बांहों में लेकर सर चूमा चाटी करने लगे. मैं भी मस्ती में था, उनके गले में बांहें डाल कर उनका मुंह चूमने लगा और जीभ चूसने लगा. सर धीरे धीरे ऊपर नीचे होकर अपना लंड नीचे से मेरी गांड में अंदर बाहर करने लगे.
पांच मिनिट आराम करके सर बोले "चल अनिल, अब मुझसे भी नहीं रहा जाता, क्या करूं, तेरी गांड है ही इतनी लाजवाब, देख कैसे प्यार से मेरे लंड को कस के जकड़े हुए है, आ जा, इसे अब खुश कर दूं, बेचारी मरवाने को बेताब हो रहा है, है ना?"

मैं बोला "हां सर" मेरी गांड अपने आप बार बार सिकुड़ कर सर के लंड को गाय के थन जैसा दुह रही थी.

"चलो, उस दीवार से सट कर खड़े हो जाओ" सर मुझे चला कर दीवार तक ले गये. चलते समय उनका लंड मेरी गांड में रोल हो रहा था. मुझे दीवार से सटा कर सर ने खड़े खड़े मेरी मारना शुरू कर दी. अब वे अच्छे लंबे स्ट्रोक लगा रहे थे, दे दनादन दे दनादन उनका लंड मेरे चूतड़ों के बीच अंदर बाहर हो रहा था.

थोड़ी देर में उनकी सांस जोर से चलने लगी. उन्होंने अपने हाथ मेरे कंधे पर जमा दिये और मुझे दीवार पर दबा कर कस कस के मेरी गांड चोदने लगे. मेरी गांड अब ’पचाक’ पचाक’ ’पचाक’ की आवाज कर रही थी. दीवार पर बदन दबने से मुझे दर्द हो रहा था पर सर को इतना मजा आ रहा था कि मैंने मुंह बंद रखा और चुपचाप मरवाता रहा. चौधरी सर एकाएक झड़ गये और ’ओह ... ओह ... अं ... आह ...." करते हुए मुझसे चिपट गये. उनका लंड किसी जानवर जैसा मेरी गांड में उछल रहा था. सर हांफ़ते हांफ़ते खड़े रहे और मुझपर टिक कर मेरे बाल चूमने लगे.

पूरा झड़ कर जब लंड सिकुड़ गया तो सर ने लंड बाहर निकाला. फ़िर मुझे खींच कर बिस्तर तक लाये और मुझे बांहों में लेकर लेट गये और चूमने लगे " बेटे, बहुत सुख दिया तूने आज मुझे, बहुत दिनों में मुझे इतनी मतवाली कुवारी गांड मारने मिली है, आज तो दावत हो गयी मेरे लिये. मेरा आशिर्वाद है तुझे कि तू हमेशा सुख पायेगा, इस क्रिया में मेरे से ज्यादा आगे जायेगा. तुझे मजा आया? दर्द तो नहीं हुआ ज्यादा?"

सर के लाड़ से मेरा मन गदगद हो गया. मैं उनसे चिपट कर बोला "सर .... बहुत मजा आया सर .... दर्द हुआ .... आप का बहुत बड़ा है सर ... लग रहा था कि गांड फ़ट जायेगी ... फ़िर भी बहुत मजा आ रहा था सर"
सर उठ कर रचना को पलंग पर लेते हुए बोले "क्यों नहीं, आ जा रचना बेटी, अभी चोद देता हूं, तेरे भाई को चोदा, अब तुझे चोद कर तेरी प्यास बुझा देता हूं. पर झड़ूंगा नहीं रचना "
रचना सी सी करती रही, कुछ बोली नहीं. उसका चेहरा तमतमा गया था, आंखें चमक रही थीं. सर ने उसकी टांगें फ़ैला कर उसकी बुर में लंड डाला और शुरू हो गये. रचना ऐसे सर को चिपकी जैसे बंदर का बच्चा अपनी मां को जकड़ लेता है, अपने हाथों और पैरों से सर के बदन को बांध कर कमर हिलाने लगी "सर ... चोदिये सर .... प्लीज़ सर ... जोर से सर ... आह .... ओह"

सर कस के रचना को चोद रहे थे, अंदर तक लंड पेल रहे थे. रचना अपने हाथों से उनके पीठ को नोंच रही थी. फ़िर रचना चीखी और लस्त हो गयी. पर सर ने उसे नहीं छोड़ा. मेरी ओर मुड़कर बोले " यहां ध्यान दो, ये आसन ध्यान से देखो" उन्होंने रचना के पैर मोड़कर उसकी टांगें रचना के सिर के इर्द गिर्द कर दीं और फ़िर उसे चोदने लगे.

"देखा? ऐसे मोड़ कर मस्त चोदा जा सकता है, फ़िर छेद कोई भी हो, समझे ना? चाहे चूत में डाल दो या गांड में, आसन यही रहता है. और आगे से मस्त चुम्मे ले लेकर प्यार करते हुए गांड भी चोद सकते हैं."

मैं बोला "हां सर"

रचना कसमसा रही थी "बस सर ... हो गया .... अब नहीं ... प्लीज़ .... छोड़िये ना .... मत कीजिये सर ...... प्लीज़ ...... मैं झड गयी सर.... बस...." पर सर चोदते रहे. "अरे रचना रानी, ऐसे हथियार नहीं डालते. अब चुदा रही हो तो पूरा चुदाओ" रचना हल्के हल्के चीखने लगी तो सर ने उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया.

पांच मिनिट में रचना निश्चल होकर लुढ़क गयी. सर ने लंड बाहर निकाला "लो, ये तो गयी काम से. वैसे बड़ी प्यारी बच्ची है, काफ़ी रसिक है, इसकी चूत क्या गीली थी

मैं रचना के बाजू में पेट के बल लेटने लगा तो सर बोले "अरे वो आसन तो हो गया, अब सामने वाला, बिलकुल जैसे तेरी रचना को चोदा ना, वैसे. इसलिये तो तुझे देखने को कहा था मूरख, भूल गया? सीधा लेटो. तू भूल जायेगा कि तेरी गांड मार रहा हूं, तुझे भी यही लगेगा कि तेरी चूत चोद रहा हूं. ये अपने पैर मोड़ो बेटे, और ऊपर ... उठा लो ऊपर ... और ऊपर .... अपने सिर तक .... हां अब ठीक है"

मैंने टांगें उठाईं. सर ने उन्हें मोड कर मेरे टखने मेरे कानों के इर्द गिर्द जमा दिये. कमर दुख रही थी. "अब इन्हें पकड़ो और मुझे अपना काम करने दो" कहकर सर मेरे सामने बैठ गये और लंड मेरी पूरी खुली गांड पर रखकर पेलने लगे. पक्क से लंड आधा अंदर गया. मैंने सिर्फ़ जरा सा सी सी किया, और कुछ नहीं बोला.

"शाबास बेटे, अब तू पूरा तैयार हो गया है, देखा जरा सा भी नहीं चिल्लाया मेरा लंड लेने में. कमर दुखती है क्या ऐसे टांगें मोड़ कर?"

"हां सर" मैंने कबूल किया.

"पहली बार है ना! आदत हो जायेगी. ये आसन बड़ा अच्छा है कमर के लिये, योगासन जैसा ही है. तेरी कमर लड़कियों से ज्यादा लचीली हो जायेगी देखना. अब ये ले पूरा ...." कहकर उन्होंने सधा हुआ जोर लगाया और लंड जड़ तक मेरे चूतड़ों के बीच उतार दिया. एक दो बार वैसे ही उन्होंने लंड अंदर बाहर किया और फ़िर सामने से मेरे ऊपर लेट गये.



मैंने थोड़ा ऊपर उठकर सर की पीठ को बांहों में भींच लिया और अपने पैर उनकी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिये. बहुत अच्छा लग रहा था सर के सुडौल बदन से ऐसे आगे से चिपटकर. मेरा लंड उनके पेट और मेरे पेट के बीच दब गया था.

सर ने प्यार से मुझे चूमा और चोदने लगे. "अच्छा लग रहा है ? या तुझे थोड़ी देर को समझ ले कि तू लड़की है और चूत चुदा रही है" फ़िर मेरे गाल और आंखें चूमने लगे. वे मुझे हौले हौले चोद रहे थे, बस दो तीन इंच लंड बाहर निकालते और फ़िर अंदर पेलते.

कुछ देर मैं पड़ा पड़ा चुपचाप गांड चुदवाता रहा. फ़िर कमर का दर्द कम हुआ और मेरी गांड ऐसी खिल उठी जैसे मस्ती में पागल कोई चूत. गांड के अंदर मुझे बड़ी मीठी मीठी कसक हो रही थी. जब सर का सुपाड़ा मेरी गांड की नली को घिसता तो मेरी नस नस में सिहरन दौड़ उठती. मेरा लंड भी मस्ती में था, बहुत मीठी मीठी चुभन हो रही थी. मुझे लगा कि लड़कियों के क्लिट में कुछ ऐसा ही लगता होगा.

सर पर मुझे खूब प्यार आने लगा वैसा ही जैसे किसी लड़की को अपने आशिक से चुदवाने में आता होगा. मैंने उन्हें जम के अपनी बांहों में भींचा और बेतहाशा उन्हें चूमने लगा "सर .... मेरे अच्छे सर .... बहुत अच्छा लग रहा है सर..... चोदिये ना .... कस के चोदिये ना .... फ़ाड दीजिये मेरी गां .... चूत .... मेरी चूत को ढीला कर दीजिये सर ..... ओह सर ... आप अब जो कहेंगे मैं ... करूंगा सर .... आप .... आप मेरे भगवान हैं सर ....सर मैं आप को बहुत प्यार करता हूं सर .... सर .... आप को मैं अच्छा लगता हूं ना सर" और कमर उछाल उछाल कर मैं अपनी गांड में सर के लंड को जितना हो सकता है उतना लेने की कोशिश करने लगा.


सर ने मुझे खूब देर चोदा. हचक हचक कर धक्के लगाये और मेरी कमर करीब करीब तोड़ दी.









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FUN-MAZA-MASTI पुजारी हवस का --13

FUN-MAZA-MASTI

 पुजारी हवस का --13

 अब वो मेरे ऊपर आ गया और अब तो बस भरतपुर लुटने ही वाला था. उसने एक चुम्बन मेरे होंठों पर लिया. मेरी तो आँखें बंद सी हुयी जा रही थी. फिर उसने दोनों उरोजों को चूमा और नाभि को चुमते हुए चूत का एक चुम्मा ले लिया. उसने एक हाथ बढा कर क्रीम की डब्बी उठाई और ढेर साड़ी क्रीम मेरी चूत पर लगा दी बड़े प्यार से. हौले हौले क्रीम लगाते हुए उसने एक अंगुली मेरीचूत के छेद में घुसा ही दी. “उईई... माँ….. मा … ” मेरी तो हलकी सी सित्कार ही निक़ल गई. हालंकि मेरी चूत पूरी तरह गीली थी फिर भी कई दिनों से सिवा मेरी अँगुलियों के कोई चीज अन्दर नहीं गयी थी. मने उसका हाथ पकड़ने की कोशिस कि लेकिन इस बीच उसने अपनी अंगुली दो तीन बार जल्दी जल्दी अन्दर बाहर कर ही दी. फिर उसने अपनी अंगुली को अपने मुंह में डाल कर एक जोर का चटखारा लिया. “वाऊ …”

अब उसने अपने लोडे पर थूक लगाया और मे चूत के होंठों पर रख दिया. मेरा दिल धड़कता जा रहा था. हे भगवान् 7 इंच लम्बा और 1 ½ इंच मोटा ये लंड तो आज मेरीचूत की दुर्गति ही कर डालेगा. आज तो 2-3 टाँके तो जरूर टूट ही जायेंगे. पर इस तरसते तन मन और आत्मा के हाथों मैं मजबूर हूँ क्या करुँ. मैंने उस से कहा “प्लीज जरा धीरे धीरे करना ?”

“क्यों डर रही हो क्या ?”

ये तो मेरे लिए चुनौती थी जैसे. मैंने कहा “ओह.. नहीं मैं तो वो.. वो … ओह … तुम भी..” मैंने 2-3 मुक्के उसकी छाती पर लगा दिए.

मेरी हालत पर वो हंसने लगा. “ओ.के. ठीक है मेरी मॉम ..”

फिर उसने मेरे नितम्बों के नीचे 2 तकिये लगाये और अपना लंड मेरी चूत के होंठों के ऊपर दुबारा रख दिया. लोहे की सलाख की तरह अकडे उसकेलंड का दबाव तो मैं अच्छी तरह महसूस कर रही थी. मेरे दिल की धड़कन तेज हो गयी. उसने एक हाथ से अपना लंड पकडा और दूसरे हाथ से मेरीचूत की फांकों को चोडा किया और फिर दो तीन बार अपने लंड को ऊपर से नीचे तक घिसने के बाद छेद पर टिका दिया. उसके बाद उसने एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे ले जाकर मेरे सिर को थोडा सा ऊपर उठा दिया और दूसरे हाथ से मेरी कमर पकड़ ली. उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगा. मुझे बड़ी हैरत हो रही थी ये लंड अन्दर डालने में इतनी देर क्यों कर रहा है. होंठों को पूरा अपने मुंह में लेकर चूसने के कारण मैं तो रोमांच से भर गयी. मेरा जी कर रहा था कि मैं ही नीचे से धक्का लगा दूं. इतने में उसने एक जोर का धक्का लगाया और फनफनाता हुआ आधा लंड मेरी चूत के टाँके तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया और मेरी एक घुटी घुटी चींख निकल गई. मुझे लगा जैसे किसी ने जलती हुई सलाख मेरी चूत के छेद में दाल दी है. कुछ गरम गरम सी तरल चीज मेरी चूत के मुंह से निकलती हुयी मेरी जाँघों और गांड के छेद पर महसूस होने लगी. मुझे तो बाद में पता चला कि मेरीचूत के 3 टाँके टूट गए हैं और ये उसी का निकला खून है. मैं दर्द के मारे छटपटाने लगी और उसकी गिरफ्त से निकलने की कोशिस करने लगी. मेरी आँखों में आंसू थे. उसने मुझे जोरों से अपनी बाहों में जकड रखा था जैसे किसी बाज़ के पंजों में कोई कबूतरी फंसी हो. उसका 5 इंच लंड मेरी चूत में फंसा था. आज फिर से उसका इतना बड़ा और मोटा लंड मेरी चूत में गया था. उसने मेरे होंठ छोड़ दिए और आँखों में आये आंसू चाटने लगा.

मैंने कहा “तुम तो पूरे कसाई हो ?”
“कैसे ?”
“भला ऐसे भी कोई चोदता है ?”
“ओह.. मेरी मॉम तुम भी तो यही चाहती थी ना ?”
“वो कहने की और बात होती है. भला ऐसे भी कोई करता है ? तुमने तो मुझे मार ही डाला था ?”
“ओह.. सॉरी … पर अब तो अन्दर चला ही गया है. जो होना था हो गया है अब चिंता की कोई बात नहीं. अब मैं बाकी का बचा लंड धीरे धीरे अन्दर डालूँगा ?”
“क्या ? अभी पूरा अन्दर नहीं गया ?” मैंने हैरानी से पुछा
“नहीं अभी 2-3 इंच बाकी है ?”
“हे भगवान् तुम मुझे मार ही डालोगे क्या आज ?”
“अरे नहीं मेरी बुलबुल ऐसा कुछ नहीं होगा तुम देखती जाओ ”

अब उसने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया. उसने पूरा अन्दर डालने की कोशिस नहीं की. मैंने उसके आने से पहले ही दो पैन किलर ले ली थी जिनकी वजह से मुझे इतना दर्द मससूस नहीं हो रहा था वरना तो मैं तो बेहोश ही हो जाती. पर इस मीठे दर्द का अहसास भला मुझसे बेहतर कौन जान सकता है. मैंने उसे कस कर अपनी बाहों में भर लिया. उसने भी अब धक्के लगाने शुरू कर दिए थे. और ये तो कमाल ही हो गया. मेरी चूत ने इतना रस बहाया की अब तो उसका लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था लेकिन कुछ फसा हुआ सा तो अब भी लग रहा था. हर धक्के के साथ मेरे पैरों की पायल और हाथों की चूड़ियाँ बज उठती तो उसका रोमांच तो और भी बढ़ता चला गया. मैंने जब उसके गालों को फिर चूमा तो उसके धक्के और तेज हो गए. उसने थोडा सा नीचे झुक कर मेरे एक उरोज की घुंडी को अपने मुंह में भर लिया. दूसरे हाथ से मेरे दूसरे उरोज को मसलने लगा. मेरे हाथ उसकी पीठ पर रेंग रहे थे. मैं तो सित्कार पर सित्कार किये जा रही थी. काश ये लम्हे ये रात कभी ख़तम ही ना हों और मैं मेरा बेटा क़यामत तक इसी तरह एक दूसरे की बाहों में लिपटे चुदाई करते रहें.

हमें कोई २० मिनिट तो जरूर हो गए होंगे. . अब तो फिच्च … खच्च … के मधुर संगीत से पूरा कमरा ही गूँज रहा था. मेरी चूत से निकलते कामरस से तकिया पूरा भीग गया था. मैं तो अपनी जाँघों और गांड पर उस पानी को महसूस कर रही थी. अब आसान बदलने की जरुरत थी.

अब अमित बेड के पास फर्श पर खडा हो गया और उसने मुझे बेड के एक किनारे पर सुला दिया. नितम्बों के नीचे दो नए तकिये लगा दिए और मेरे दोनों पैर हाथों में पकड़ कर ऊपर हवा में उठा दिए. हे भगवान् खून और मेरे कामरस और क्रीम से सना उसका लंड तो अब पूरा खूंखार लग रहा था. पर अब डरने की कोई बात नहीं थी. उसने मेरी ओर देखा. मैं जानती थी वो क्या चाहता था. ये तो मेरा पसंदीदा आसन था. मैंने उसके लंड को अपने एक हाथ में पकडा और अपनी चूत के मुहाने पर लगा दिया. उसके साथ ही उसने एक धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड गच्च से अन्दर बिना किसी रुकावट के बच्चेदानी से जा टकराया. आह.. मैं तो जैसे निहाल ही हो गयी. मुझे आज लम्बे और मोटे लंड के स्वाद का मज़ा आया था वरना तो बस किस्से कहानियों या ब्लू फिल्मो में ही देखा था. उसका लंड कभी बाहर निकलता और कभी पिस्टन की तरह अन्दर चला जाता. वो आँखें बंद किये धक्के लगा रहा था. इस बार उसने कोई जल्दी नहीं की और ना ही तेज धक्के लगाए. जब भी उसका लंड अन्दर जाता तो मेरी दोनों फांके भी उसके साथ चिपकी अन्दर चली जाती और मेरी पायल झनक उठती. मैं तो जैसे किसी आनंद की नयी दुनिया में ही पहुँच गयी थी.

कोई 7-8 मिनिट तो ये सिलसिला जरूर चला होगा पर समय का किसे ध्यान और परवाह थी. पैर ऊपर किये मैं भी थोडी थक गयी थी और मुझे लगाने लगा कि अब अमित भी अब चु बोलने वाला ही होगा मैंने अपने पैर नीचे कर लिए. मेरे पैर अब जमीन की ओर हो गए और अमित मेरी जाँघों बे बीच में था. मुझे लगा जैसे उसका लंड मेरी चूत में फंस ही गया है. अब वो मेरे ऊपर झुक गया और अपने पैर मेरे कुल्हों के पास लगाकर उकडू सा बैठ गया. आह.. इस नए आसन में तो और भी ज्यादा मजा था. वो जैसे चौपाया सा बना था. उसके धक्के तो कमाल के थे. 15-20 धक्कों के बाद उसकी रफ़्तार अचानक बढ़ गयी और उसके मुंह से गूं … गूं … आआह्ह.. की आवाजें आने लगी तब मुझे लगा कि अब तो पिछले आधे घंटे से उबलता लावा फूटने ही वाला है तो मैंने अपने पैर और जांघें चौडी करके ऊपर उठा ली ताकि उसे धक्के लगाने में किसी तरह की कोई परेशानी ना हो. मैंने अपने आप को ढीला छोड़ दिया. वैसे भी अब मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी. मैंने अपनी बाहों से उसकी कमर पकड़ ली और नीचे से मैं भी धक्के लगाने लगी. “बस मेरी रानी अब तो …. आआईईईइ ………………..”

“ओह … मेरेबेटे और जोर से और जोर से उईई … मैं भी गयीईईई ………”

और फिर गरम गाढे वीर्य की पहली पिचकारी उसने मेरी चूत में छोड़ दी और मेरी चूत तो कब की इस अमृत की राह देख रही थी वो भला पीछे क्यों रहती उसने भी कामरस छोड़ दिया और झड़ गयी.अमित ने भी कोई 8-10 पिचकारियाँ अन्दर ही छोड़ दी. मेरीचूत तो उस गाढ़ी और गरम मलाई से लबालब भर गई. मैंने उसे अपनी बाहों में ही जकडे रखा. उसका और मेरा शरीर हलके हलके झटके खाते हुए शांत पड़ने लगा. कितनी ही देर हम एक दूसरे की बाहों में लिपटे इसी तरह पड़े रहे.

“ओह.. थैंक्यू मॉम
“थैंक्यूअ मित मेरे प्रेम देव ” मैंने उसकी ओर आँख मार दी. वो तो शर्मा ही गया और फिर उसने मेरे होंठ अपने मुंह में लेकर इस कदर दांतों से काटे की उनसे हल्का सा खून ही निकल आया पर उस खून और दर्द का जो मीठा अहसास था वो मेरे अलावा भला कोई और कैसे जान सकता था. उसका लंड फिसल कर बाहर आ गया और उसके साथ गरम गाढ़ी मलाई भी बहार आने लगी. अब मैं उठकर बैठ गयी. पूरा तकिया फिर गीला हो गया था. चूत से बहता जूस मेरी जाँघों तक फ़ैल गया. मुझे गुदगुदी सी होने लगी तो मरे मुंह से “आ... ई इ इ ” निकल गया.
“क्या हुआ ?”
“ओहो.. देखो तुमने मेरी क्या हालात कर दी है अब मुझे उठा कर बाथरूम तक तो ले चलो ”
“ओह हाँ..”

और उसने मुझे गोद में उठा लिया और गोद में उठाये हुए ही बाथरूम में ले आया. मुझे नीचे खडा कर दिया. मुझे जोरों की पेशाब आ रही थी. पर इससे पहले कि मैं सीट पर बैठती वो खडा होकर पेशाब करने लगा. मैं शावर के नीचे चली गयी और अपनी चूत को धोने लगी. उसे धोते हुए मैंने देखा की वो बुरी तरह सूज गयी और लाल हो गयी है. मैंने अमित को उलाहना देते हुए कहा “देखो मेरी चूत की क्या हालत कर दी है तुमने ?”

“कितनी प्यारी लग रही है मोटी मोटी और बिलकुल लाल ?” और वो मेरी आ गया. अब वो घुटनों के बल मेरे पास ही बैठ गया और मेरे नितम्बों को पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया. मेरीचूत के दोनों होंठ उसने गप्प से अपने मुंह में भर लिए.

“ओह … छोडो … ओह.. क्या कर रहे हो. ओह … आ ई इ ” मैं तो मना करती ही रह गयी पर वो नहीं रुका और जोर जोर से मेरीचूत को चूसने लगा. मेरी तो हालत पहले से ही खराब थी और जोरों से पेशाब लगी थी. मैं अपने आप को कैसे रोक पाती और फिर मेरीचूत ने पेशाब की एक तेज धार कल कल करते ही उसके मुंह में ही छोड़नी चालू कर दी. वो तो जैसे इसी का इन्तजार कर रहा था. वो तो चपड़ चपड़ करता दो तीन घूँट पी ही गया. मूत की धार उसके मुंह, नाक, होंठो और गले पर पड़ती चली गयी. छुर्रर.. चुर्र… पिस्स्स्स्स… का सिस्कारा तो उसे जैसे निहाल ही करता जा रहा था. वो तो जैसे नहा ही गया उस गरम पानी से. जब धार कुछ बंद होने लगी तो फिर उसने एक बार मेरी चूत को मुंह में भर लिया और अंतिम बूंदे भी चूस ली. जब वो खडा हो गया तो मैंने नीचे झुक कर उसके होंठो को चूम लिया.

आह … उसके होंठों से लगा मेरे मुत्र का नमकीन सा स्वाद मुझे भी मिल ही गया.
हल्का सा नहाने के बाद मैंने उसे बाहर भेज दिया. वो मुझे साथ ही ले जाना चाहता था पर मैंने कहा तुम चल कर दूध पीओ मैं आती हूँ.अमित जब बाथरूमसे बाहर चला गया तो मैंने दरवाजे की चिटकनी लगा ली. मैंने वार्डरोब से बोरोलिनक्रीम की ट्यूब निकली और उसका ढक्कन खोल कर उसकी टिप अपनी गांड के छेद पर लगायी और लगभग आधी ट्यूब अन्दर ही खाली कर दी. फिर मैंने उसपर अंगुली फिरा कर उसकी चिकनाई साफ़ कर ली. अब ठीक है.

और फिर मैं कैटवाक् करती हुई बेडकी ओरआई. मेरी पायल की रुनझुन और दोनों उरोजों की घाटियों के बीच लटकता मंगलसूत्र उसे मदहोश बना देने के लिए काफी था. मैंने बड़ी अदा से नीचे पड़ी नाइटी उठायी और उसे पहनने की कोशिस करने लगी. पर अमित कहाँ मानने वाला था. उसने दौड़ कर मुझे नंगा ही गोद में उठा लिया और बेड पर ले आया और मेरी गोद में सर रख कर सो गया जैसे कोई बच्चा सो जाता है. उसकी आँखें बंद थी. मुझे उसका मासूम सा चेहरा बहुत प्यारा लग रहा था. काश ये लम्हे कभी ख़तम ही न हों और मेरा ये अमित इसी तरह मेरे आगोश में पड़ा रहे. मेरे उरोज ठीक उसके मुंह के ऊपर थे. अब भला वो कैसे रुकता. मैं भी तो यही चाहती थी. उसने अपना सिर थोडा सा ऊपर उठाया और एक निप्पल मुंह में ले कर चूसने लगा. बारी बारी से वो दोनों उरोजों को चूसता रहा. आह … इन उरोजों को चुसवानेमें भी कितना मज़ा है मैं ही जानती हूँ.मेरा पति भी इतनी अच्छी तरह से नहीं चूसता है. ये तो कमाल ही करता है. .मेरी चूत वो फिर से गीली होने लगी थी. तभी मेरा ध्यान उसके लंड की ओर गया. वो निद्रा से जाग चुका था और फिर से अंगडाई लेने लगा था. मैंने हाथ बढा कर उसे पकड़ लिया. वो तो फुफ्कारे ही मारने लगा. आह … यही तो कमाल है जवान लौंडों का. अगर झड़तेजल्दी हैं तो तैयार भी कितनी जल्दी हो जाते हैं. मैं उसे हाथ में लेकर मसलने लगी तो अनिल ने मेरी निप्पल को दांतों से काट लिया. “आईई …..” मेरे मुंह से हलकी सी किलकारी निकल गयी.

“हटो परे..” मैंने उसे परे धकेलते हुए कहा तो वो हंसने लगा. जैसे ही मैं उठने लगी तो वो मेरे पीछे आ गया और मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया. अब मैं बेड पर लगभग ओंधी सी हो गयी थी. वो झट से मेरे ऊपर आ गया. मैं उसकी नीयत अच्छी तरह जानती थी. ये सब मर्द एक जैसे होते हैं. . फिर भला येअमित तो एक नंबर का शैतान है. उसके खड़े लंड को मैं अपने नितम्बों के बीच अच्छी तरह महसूस कर रही थी. मैंने अपने नितम्ब थोड़े से ऊपर कर दिए. वो तो इसी ताक में था. मुझे तो पता ही नहीं चला कि कब उसने अपने लंड पर ढेर सारी क्रीम लगा ली है. और गच्च से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. और मेरी कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा. कोई 8-10 धक्कों के बाद वो बोला

“मॉम
“क्या है ?”
“वो कुत्ते बिल्ली वाला आसन करें ?”
“तुम बड़े बदमाश हो ?”
“प्लीज … एक बार …मान जाओ ना ?” उसने मेरी ओर जिस तरीके से ललचाई नज़रों से देखा था मुझे हंसी आ गयी. मैंने उसका नाक पकड़ते हुए कहा “ठीक है पर कोई शैतानी नहीं ?”
“ओ.के. मैम ”

अब मैं बेडके किनारे पर अपने घुटनों के बल बैठगयी. मैंने अपने पैरों के पंजे बेडसे थोडा बाहर निकाल लिए थे और अपनी कोहनियों के बल मुंह नीचा करके ओंधी सी हो गयी. मेरे नितम्ब ऊपर उठ गएअ मित बेड से नीचे उतर कर फर्श पर खडा होकर ठीक मेरे पीछे आ गया. उसका लंड मेरे नितम्बों के बीच में था. मुझे तो लगाकि वो अगले ही पल मेरी गांड केछेद में अपना लंड डाल देगा. पर मेरा अंदाजा गलत निकला. उसने मेरी चूत की फांकों पर हाथ फिराया. खिले हुए गुलाब के फूल जैसी मेरीचूत को देख कर वो भला अपने आप को कैसे रोक पाता. उसने एक हाथ से मेरीचूत की फांकों को चौडा किया और उसे चूम लिया. और फिर गच्च से अपना लंड मेरी चूत में ठोक दिया. एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर समा गया. अब वो कमर पकड़ कर धक्के लगाने लगा. उसने मेरे नितम्बों पर हलकी सी चपत लगानी चालू कर दी. आह … मैं तो मस्त ही हो गयी. जैसे ही वो मेरे नितम्बों पर चपत (स्लेपिंग) लगता तो मेरी गांड का छेद खुलने और बंद होने लगता. मैं आह उन्ह्ह … करने लगी और अपना एक हाथ पीछे ले जाकर अपनी गांड के छेद पर फेरने लगी. मेरा मकसद तो उसका ध्यान उस छेद की ओर ले जाने का था. मैं जानती थी अगर एक बार उसने मेरे इस छेद को खुलता बंद होता देख लिया तो फिर उस से कहाँ रुका जाएगा. आपको तो पता ही होगा मेरा ये छेद बाहर से थोडा सा कालाजरूर दिखता है पर अन्दर से तो गुलाबी है. भले ही मेरे पति ने कई बार इस का मज़ा लूटा है पर उस पतले लंड से भला इसका क्या बिगड़ता. मैंने अपनी चूत और गांड दोनों को जोर से अन्दर सिकोड़ लिया और फिर बाहर की ओर जोर लगा दिया. अब तो अमित की नज़र उस पर पड़नी ही थी. आह उसकी अँगुलियों का पहला स्पर्श मुझे अन्दर तक रोमांचित कर गया. उसने अपना अंगूठा मुंह में लिया और ढेर सा थूक उसपर लगा कर मेरी गांड के छेद पर रगड़ने लगा. मैं यही तो चाहती थी. मैंने एक बार फिर संकोचन किया तो अमित की हलकि सी सीत्कार निकल गयी और उसने अपने अंगूठे का एक पोर अन्दर घुसा दिया. उसने एक हाथसे मेरे नितम्बों पर फिर थप्पड़ लगाया. आह.. मैं तो इस हलकी चपत से जैसे निहाल ही हो गयी. . मैं तो चाहती हूँ कि कोई जोर जोर से मेरे नितम्बों पर थप्पड़ लगाए और मेरे बूब्स, मेरी चूत मेरे गाल, मेरे होंठ काट ले. एक थप्पी उसने और लगाई और फिर एक झटके से उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया.

मैंने हैरानी से अपनी गर्दन घुमा कर उसकी ओर देखा. तो वो बोला “मॉम बुरा न मानो तो एक बात पूछू ?”
“ओह अबक्या हुआ ?”
“प्लीज एक बार गधापचीसी खेलें ?” उसकी आँखों में गज़ब की चमक थी और चहरे पर मासूमियत. वो तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई बच्चा टाफ़ी की मांग कर रहा हो. अन्दर से तो मैं भी यही चाहती थी पर मैं उसके सामने कमजोर नहीं बनाना चाहती थी. मैंने कहा “बड़े बदमाशहो तुम ?”
“ओह प्लीजमामी एक बार … तुम ही तो कहती थी की जिन औरतों के नितम्ब खूबसूरत होते हैं उन्हें पीछे से भी ठोकना चाहिए ?”
“
“प्लीज एक बार ….?” वो मेरे सामने गिडगिडा रहा था. यही तो मैं चाहती थी कि वो मेरी मिन्नतें करे और हाथ जोड़े.
“ठीक है पर धीरे धीरे कोई जल्दबाजी और शैतानी नहीं ? समझे ?”
“ओह.. हाँ … हाँ.. मैं धीरे धीरे ही करूँगा ”

ओह … तुम लोल ही रहोगे.. मैंने अपने मन में कहा. मैं तो कब से चाह रही थी कि कोई मेरे इस छेद का भी बाजा बजाये. अब उसने अपने लंड पर ढेर सारी क्रीम लगाई और थोडी सी क्रीम मेरी गांड के छेद पर भी लगाई और अपना लंड मेरी गांड के छेद पर टिका दिया. ये तो निरा बुद्धू ही है भला ऐसे कोई गांड मारी जाती है. गांड मारने से पहले अंगुली पर क्रीम लगाकर 4-5बार अन्दर बाहर करके उसे रवां बनाकर गांड मारी जाती है.चलो कोई बात नहीं ये तो मैंने पहले से ही तैयारी कर ली थी नहीं तो ये ऊपर नीचे ही फिसलता रह जाता और एक दो मिनिट में ही घीया हो जाता. उसका सुपाडा आगे से थोडा सा पतला था. मैंने अपनी गांड का छेद थोडा सा ढीला छोड़ कर खोल सा दिया. अब उसने मेरी कमर पकड़ ली और धीरे से जोर लगाने लगा. इतना तो वो भी जानता था कि गांड मारते समय धक्का नहीं मारा जाता केवल जोर लगाया जाता है. अगर औरत अपनी गांड को थोडा सा ढीला छोड़ दे तो सुपाडा अन्दर चला जाता है. और अगर एक बार सुपाडा अन्दर चला गया तो समझो लंका फतह हो गयी. अब तक बोरोलीन पिंघल कर मेरी गांड को अन्दर से नरम कर चुकी थी और उसके पूरे लंड पर क्रीम लगी होने से सुपाडा धीरे धीरे अन्दर सरकने लगा. ओईई मा … मुझे तो अब अहसास हुआ कि मैं जिस को इतना हलके में ले रही थी हकीकत में इतना आसान नहीं है. मेरी गांड का छेद खुलता गया और सुपाडा अन्दर जाता चला गया. मुझे तो ऐसे लगा कि मेरी गांड फट ही जायेगी. डेढ़ इंच मोटा सुपाडा कोई कम नहीं होता. मेरे मुंह से चींख ही निकल जाती पर मैंने पास रखे तौलिए को अपने मुंह में ठूंस लिया. अब अमित ने एक हल्का सा धक्का लगाया और लंड एक ही बार में मेरी गांड के छेदको चौडा करता हुआ अन्दर चला गया. मेरे ना चाहते हुए भी मेरी एक चींख निकल गई. “ओ ईई …माँ मा मर गयी ……”

आज पहली बार मुझे लगा कि गांड मरवाना इतना आसान नहीं है. अगर कोईअनाड़ीहो तो समझो उसकी गांड फटने से कोई नहीं बचा सकता. मैंने हाथ पीछे ले जाकर देखा था उसका 5इंच तक लंड अन्दर चला गया था. कोई 1-2इंच ही बाहर रहा होगा. मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी. दर्द के मारे मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे थे. मैंने तकिये में अपना मुंह छुपा लिया. मैंने जानबूझकरअमित से कोई शिकायत नहीं की. मैं तो उसे खुश कर देना चाहती थी ताकि वो मेरा गुलाम बन कर रहे और मैं जब चाहूँ जैसे चाहूँ उसका इस्तेमाल करुँ. .

अमित ने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया था. ओह … मैं तो खयालों में खोयी अपने दर्द को भूल ही गयी थी. आह … अब तो मेरी गांड भी रवां हो चुकी थी. अमित तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रहा था. “हाई..मेरीमॉम मेरी रानी,मेरी बुलबुल आज तुमनेमुझे स्वर्ग का मज़ा दे दिया है. हाई ….. मेरी जान मैं तो जिंदगी भर तुम्हारा गुलाम ही बन जाऊँगा. हाई .. मेरी रानी ” और पता नहीं क्या क्या बडबडाताजा रहा था. मैं उसके लंड को अन्दर बाहर होते देख तो नहीं सकती थी पर उसकी लज्जत को महसूस तो कर ही रही थी. वो बिना रुके धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर किये जा रहा था. जब लंड अन्दर जाता तो उसके टट्टे मेरी चूत की फांकों से टकराते तो मुझे तो स्वर्ग का सा आनंद मिलाता. मैंने अपनी गांड का एक बार फिर संकोचन किया तो उसके मुंह से एक जोर कीसीत्कार ही निकल गयी. मैं जानती हूँ वो मेरी गांड में अन्दर बाहर होते अपने लंड को देख कर निहाल ही हुआ जा रहा होगा. आखिर उसने एक जोर का धक्का लगा दिया. उसके लंड के साथ मेरी गांड की कोमल और लाल रंग की त्वचा को देख कर वो भला अपने आप को कैसे रोक पाता. अब मुझे दर्द की क्या परवाह थी. मैंने भी अपने नितम्बों को उसके धक्कों के साथ आगेपीछे करना चालू कर दिया. अब वो सुपाडे तक अपना लंड बाहर निकालता और फिर जड़ तक अन्दर ठोकदेता. कोई 15मिनिट तो हमें जरूर हो ही गए होंगे. मेरी आह ओईई … याआ … की मीठी सीत्कार सुनकर वो औरभी जोश में आ जाता था. मैं तो यही चाहती थी कि ये सिलसिला इसी तरह चलता रहे पर आखिर उसके लंड को तो हार माननी ही थी ना?

“मेरी .. रानी …मेरी प्यारी मॉम अब बस मैं तो जाने वाला हूँ ”
“ओह … एक मिनिटठहरो ?”
“क्यों क्या हुआ ?”
“ओह ऐसे नहीं तुम मेरे ऊपर आ जाओ मैं अपने पैर एकतरफ करके सीधे करती हूँ ”
“ठीक है ”
“बाहर मत निकालना ?”
“क्यों ?”
“ओह बुद्धू कहीं के फिर तुम न घर के रहोगे न घाट के ?”

पता नहीं उसे समझ आया या नहीं. गांड बाज़ी के इस अंतिम पड़ाव पर अगर लंड को एक बार बाहर निकाल लिया जाए तो फिर अन्दर डालने से पहले ही वो दम तोड़ देता है और मैं ये नहीं चाहती थी. मैंने अपने घुटने थोड़े से टेढ़े किये और बेड के ऊपर ही सीधे कर दिए. वो भी सावधानी से मेरे ऊपर आ गया बिना लंड को बाहर निकाले. बड़े लंड का यही तो मज़ा है.अब मैंने अपनी जांघें चौडी कर दीं और नितम्ब ऊपर उठा दिए.अनिल ने अपने घुटने मोड़कर मेरे कूल्हों के दोनों तरफ कर लिए और मेरे दोनों बूब्स पकड़ कर मसलने लगा. आह.. उसके अंतिम धक्कों से तो मैं निहाल ही हो गयी. मैंने अपनी चूत में भी अंगुली करनी चालु कर दी. अब तो मज़ा दुगना हो गया था. और दुगना ही नहीं अब तो मज़ा तिगुना था. मैंने अपने दूसरे हाथ का अंगूठा जो चूसने लगी थी जैसे कि ये अंगूठा नहीं लंड ही हो. उसके धक्के तेज होने लगे और वो तो हांफने ही लगा था. मैं जानती हूँ उसकी मंजिल आ गयी है. मैं जानती थी कि अब किसी भी वक़्त उसकी पिचकारी निकल सकती है. मैंने चूत में अंगुली की रफ़्तार बढा दी. जब उसे पता चला तो उसने मेरे कानकीलोब अपने मुंह में ले ली और एक जोर का धक्का लगाया. मेरे नितम्ब कुछ ऊपर उठे थे धडाम से नीचे गिर गए और उसके साथ ही उसकी न जाने कितनी पिचकारियाँ छूटनेलगी. मेरीचूत ने भी पानी छोड़ दिया.

पता नहीं कितनी देर हम एक दूसरे से इसी तरह गुंथे पड़े रहे. मैं तो यही चाहती थी हम इसी तरह पड़े रहें पर उसका लंड अब सिकुड़ने लगा था और ये क्या एक फिच्च..कीआवाज़ के साथ वो तो फिसल कर बाहर आ गया. मेरी गांड के छेद से सफ़ेद मलाई निकालने लगी जिसे उसने अपनी अँगुलियों से लगा कर मेरे नितम्बों पर चुपड़दिया. ओह … गरम और गाढ़ीमलाई से मेरे नितम्ब लिपडही गए.

मैं उठ कर बैठ गयी और फिर उसके गले से लिपट गयी. मैंने उसके गालों पर एक चुम्मा लिया. उसने भी मुझे बाहों में कस लिया और मुझे चूम लिया. “थैंक्यू मेरी जान … आज तो मुझे स्वर्गका ही आनंद मिल गया जिससे मैं वंचित और अनजान था. ओह थैंक्यू मॉम …”

मैंने उसकी ओर आँखें तरेरी तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और बोला “ओह सॉरी.. मेरी रानी ” और उसने मेरी ओर आँख मार दी. मैं भला अपनी हंसी कैसे रोक पाती “ओह.. तुम पक्के हरामी हो ”

मैंने जल्दी से नाइटी उठायी और बाथरूम में घुस गयी. मैंने अन्दर सीट पर बैठ गयी. हे भगवान् कितनी मलाई अन्दर अभी भी बची थी. फिर पेशाबकरने के बाद अपनी चूत और गांड को साबुन और डेटोल लगा कर धोया और क्रीम लगायी. नाइटी पहन कर जब मैं बाहर आई तो अमित कपडे पहनने की तैयारी कर रहा था. मैंने भाग कर उसके हाथों से कुरता और पाजामा छीन लिया. “अरे नहीं मेरे भोले राजा अब सारी रात तुम्हे कपडे पहनने की कोई जरुरत नहीं है तुम ऐसे ही बहुत सुन्दर लग रहे हो ?”

“आप ने भी तो नाइटी पहन ली है ?”
“मेरी और बात है ?”
“वो क्या ?”
“तुम अभी नहीं समझोगे ?” मैंने बेड पर बैठते हुए आँखें बंद कर ली. अरे ये क्या.. उसने मुझे फिर बाहों में भर लिया और मेरे ऊपर आ गया. मुझे हैरानी थी कि वो तो फिर तैयार हो गया था. “ओह.. रुको …”
“क्या हुआ.. ?”
“नो..”
“प्लीज एक बार और ?”
“ठीक हैपर इस बार मैं ऊपर आउंगी ?” और मैंने उसकी ओर आँख मार दी. पहले तो वो कुछ समझा ही नहीं बाद में जब उसे मेरी बात समझ आई तो उसने मुझे इतनी जोर से अपनी बाहों में जकडा कि मेरी तो हड्डियां ही चरमरा उठी …….मॉम ने उस दिन की आप बीती अपने शब्दों में लिखी पर में कहना चाहूंगा की

और फिर चुदाई का ये सिलसिला सारी रात चला और आज की रात ही क्यों अगली तीन रातों में मेने माँ को कम से कम 18बार चोदा और कोई 10बार गांड मारी. मेने उनकी चूत को कितनी बार चूसा और मैंने कितनी बार अपना लंड चुसवाते हुए उसकी मलाई खिलवायी मुझे गिनती ही याद नहीं. हमने बाथरूम में, किचनमें, शोफे पर, बेडपर, फर्शपरऔर घर के हर कोने में हर आसन में मज़े किये. मेरी तो जवानी की कसर पूरी हो गयी. ये चार दिन तो मेरे जीवन के अनमोल दिन थे जिसकी मीठी यादों की कसक मैं ताउम्र अपने सीने में दबायेरखूँगा

 रचना और डैड कोटा से आये तो रचना को पता चला की इन दिनों पढ़ाई से ज्यादा चुदाई में धयान के कारन उसके कई सब्जेक्ट काफी काम नंबर आये हे उसके एक अध्यापक थे पाल सर ,उनके लिए मशहूर था की वो जन करके अपने स्टूडेंट को फ़ैल कर दिया करते थे ताकि वो उनके पास जाये और वो फिर उसका फायदा उठा सके\इसे स्कूल में कई किस्से थे जिसमे पहले फ़ैल हुए छात्र ,छात्रा पाल सर से मिलने के बाद पास हो गए\
इस बार रचना को भी पता चला की वो फ़ैल हो गयी हे और उसे अगर पास होना ही हे तो पाल सर से मिलना पड़ेगा।।\मेने रचना से कहा की हम दोनों को शाम को पाल सर के पास चलना पड़ेगा ताकि तू पास हो सके।लेकिन पाल सर पास करनी की क्या कीमत लेंगे ये हमें पता नही था।शाम को हम दोनों पाल सर के घर गए तो वो कमरे में लुंगी पहने अकेले ही बेठे हुए थे।उन्होंने हम दोनों को आने का कारन पूंचा तो हमने बताया।मेने देखा की बातचीत के दोरान पाल सर की निगाहे रचना पर ही लगी रही।उन्होंने पूरी बात सुन ने का नाटक किया और कहा की पास तो में करवा दूंगा पर इसके लिए तुम्हे कीमत देनी होगी।हमने कहा की हमारे पास देने को कोई पैसा नही हे तो उन्होंने कहा की उन्हें पेसे नही बल्कि जो चाहिए वो हमारे पास हे।
हम दोनों भाई बहन ने एक दुसरे की और देखा फिर सहमती में गर्दन हिला दी।पाल सर ने रचना को अपने पास आने को कहा और उन्हें अपनी जांघ पर बेठा लिया। वो रचना की चूंची को फ़्रॉक के ऊपर से मसलते हुए बोले "ब्रा नहीं पहनती रचना तू अभी? उमर तो हो गयी है तेरी."

"पहनती हूं सर" रचना सहम कर बोली "ट्रेनिंग ब्रा पहनती हूं पर हमेशा नहीं"

"कोई बात नहीं, अभी तो जरा जरा सी हैं, अच्छी कड़ी हैं इसलिये बिना ब्रा के भी चल जाता है. अब बता किसी ने मसली हे तेरी चूंची? या निपल।" कहकर वे रचना का निपल जो अब कड़ा हो गया था और उसका आकार रचना के टाइट फ़्रॉक में से दिख रहा था, अंगूठे और उंगली में लेकर मसलने लगे. रचना ’सी’ ’सी’ करने लगी. वह अब बेहद गरम हो गयी थी. अपनी जांघें एक पर एक रगड़ रही थी.

सर मजे ले लेकर रचना की ये अवस्था देख रहे थे. उन्होंने प्यार से मुस्करा कर दूर से ही होंठ मिला कर चुंबन का नाटक किया. रचना एकदम मस्ता गई, मचलकर उसने खुद ही अपनी बांहें फ़िर से सर के गले में डाल दी और उनसे लिपट कर उनके होंठ चूसने लगी.
मैंने देखा कि अब पाल सर का दूसरा हाथ रचना की चूंची से हट कर उसकी जांघों पर पहुंच गया था. रचना की जांघें सहला कर पाल सर ने उसका फ़्रॉक धीरे धीरे ऊपर खिसकाया और रचना की बुर पर पैंटी के ऊपर से ही फ़ेरने लगे. रचना ने उनका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो सर ने चुम्मा लेते लेते ही उसे आंखें दिखा कर सावधान किया. बेचारी चुपचाप सर को चूमते हुए बैठी रही. सर चड्डी के कपड़े पर से ही उसकी बुर को सहलाते रहे.
रचना ने जब सांस लेने को पाल सर के मुंह से अपना मुंह अलग किया तो पाल सर बोले "रचना , तेरी चड्डी तो गीली लग रही है!"

रचना नजरें झुका कर लाल चेहरे से बोली "नहीं सर ... ऐसा कैसे करूंगी, वो आप जो .... याने .... " फ़िर चुप हो गयी.

"अरे मैं तो मजाक कर रहा था, मुझे मालूम है तू बच्ची नहीं रही. और इस गीलेपन का मतलब है कि मजा आ रहा है तुझे! क्या बदमाश भाई बहन हो तुम दोनों! पर मजा क्यों आ रहा है ये तो बताओ? क्यों रे अमित ? अभी रो रहे थे, अब मजा आने लगा?" पाल सर ने पूछा. उनकी आवाज में अब कुछ शैतानी से भरी थी.

मैं क्या कहता, चुप रहा. "क्यों री रचना ? मेरे करने से मजा आ रहा है? पहले तो मुझे चूमने से भी मना कर रही थीं. अब क्या सर अच्छे लगने लगे? बोलो.. बोलो" सर ने पूछा.

रचना ने आखिर लाल हुए चेहरे को उठा कर उनकी ओर देखते हुए कहा. "हां सर आप बहुत अच्छे लगते हैं, जब ऐसा करते हैं, कैसा तो भी लगता है" मैंने भी हां में हां मिलाई. "हां सर, बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा कभी नहीं लगा, अकेले में भी"

"अच्छा, अब ये बताओ कि मैं सिर्फ़ अच्छा करता हूं इसलिये मजा आ रहा है या अच्छा भी लगता हूं तुम दोनों को?" पाल सर अब मूड में आ गये थे. मैंने देखा कि उनकी पैंट में तंबू सा तन गया था. अपना हाथ उन्होंने अब रचना की पैंटी के अंदर डाल दिया था. शायद उंगली से वे अब रचना की चूत की लकीर को रगड़ रहे थे क्योंकि अचानक रचना सिसक कर उनसे लिपट गयी और फ़िर से उन्हें चूमने लगी "ओह सर बहुत अच्छा लगता है, आप बहुत अच्छे हैं सर"

"अच्छा हूं याने? अच्छे दिल का हूं कि दिखने में भी अच्छा लगता हूं तुम दोनों को" पाल सर ने फ़िर पूछा. रचना का चुम्मा खतम होते ही उन्होंने मेरी ओर सिर किया और मेरा गाल चूम लिया. "क्यों रे अमित ? तू बता, वैसे तुम और तेरी बहन भी देखने में अच्छे खासे चिकने हो"

मैं अब बहुत मस्त हो गया था. सर से चिपट कर बैठने में अब अटपटा नहीं लग रहा था. मेरा ध्यान बार बार उनके तंबू की ओर जा रहा था. अनजाने में मैं धीरे धीरे अपने चूतड़ ऊपर नीचे करके सर की हथेली में मेरे लंड को पेलने लगा था. अपने लंड को ऊपर करते हुए मैं बोला "आप बहुत हैंडसम हैं सर, सच में, हमें बहुत अच्छे लगते हैं. रचना अभी शरमा रही है पर मुझसे कितनी बार बोली है कि भैया ,पाल सर कितने हैंडसम हैं..

"तेरी रचना भी बड़ी प्यारी है." सर ने दो तीन मिनिट और रचना की पैंटी में हाथ डालकर उंगली की और फ़िर हाथ निकालकर देखा. उंगली गीली हो गयी थी. सर ने उसे चाट लिया. "अच्छा स्वाद है रचना , शहद जैसा" रचना आंखें बड़ी करके देख रही थी, शर्म से उसने सिर झुका लिया. "अरे शरमा क्यों रही है, सच कह रहा हूं. एकदम मीठी छुरी है तू रचना , रस से भरी गुड़िया है"

पाल सर उठ कर खड़े हो गये. और कहने लगे की तुम्हारी कॉपी में देखू .... पर उसके पहले ... रचना ... तुम अपनी पैंटी उतारो और सोफ़े पर टिक कर बैठो"

रचना घबराकर शर्माती हुई बोली "पर सर ... आप क्या करेंगे?"

"डरो नहीं, जरा ठीक से चाटूंगा तुम्हारी बुर. और फ़िर तेरी चूत का स्वाद इतना रसीला है कि चाटे बिना मन नहीं मानेगा मेरा. अब गलती की है तुमने तो भुगतना तो पड़ेगा ही. चलो, जल्दी करो नहीं तो कहीं फ़िर मेरा इरादा बदल गया तो भारी पड़ेगा तुम लोगों को ...." टेबल पर पड़े बेंत को हाथ लगाकर वे थोड़े कड़ाई से बोले.

"नहीं सर, अभी निकालती हूं. भैया आप उधर देख ना! मुझे शर्म आती है" मेरी ओर देखकर रचना बोली, उसके गाल गुलाबी हो गये थे.

"अरे उससे अब क्या शरमाती हो. इतना नाटक सब रोज करती हो उसके साथ, .... और अब शरमा रही हो! चलो जल्दी करो"

रचना ने धीरे से अपनी पैंटी उतार दी. उसकी गोरी चिकनी बुर एकदम लाजवाब लग रही थी. बस थोड़े से जरा जरा से रेशमी बाल थे. मेरी भी सांस चलने लगी.

"अब टांगें फ़ैलाओ और ऊपर सोफ़े पर रखो. ऐसे ... शाब्बास" पाल सर उसके सामने बैठते हुए बोले. रचना टांगें उठाकर ऐसे सोफ़े पर बैठी हुई बड़ी चुदैल सी लग रही थी, उसकी बुर अब पूरी खुली हुई थी और लकीर में से अंदर का गुलाबी हिस्सा दिख रहा था. पाल सर ने उसकी गोरी दुबली पतली जांघों को पहले चूमा और फ़िर जीभ से रचना की बुर चाटने लगे.

"ओह ... ओह ... ओह ... सर ... प्लीज़" रचना शरमा कर चिल्लाई. "ये क्या कर रहे हैं?"

"क्या हुआ? दर्द होता है?" सर ने पूछा?

"नहीं सर ... अजीब सा ... कैसा तो भी होता है" हिलडुलकर अपनी बुर को सर की जीभ से दूर करने की कोशिश करते हुए रचना बोली "ऐसे कोई ... वहां ... याने जीभ ... मुंह लगाने से ... ओह ... ओह"

"रचना , बस एक बार कहूंगा, बार बार नहीं कहूंगा. मुझे अपने तरीके से ये करने दो" सर ने कड़े लहजे में कहा और एक दो बार और चाटा. फ़िर दो उंगलियों से बुर के पपोटे अलग कर के वहां चूमा और जीभ की नोक लगाकर रगड़ने लगे. रचना ’अं’ ’अं’ अं’ करने लगी.

"अब भी कैसा तो भी हो रहा है? या मजा आ रहा है रचना ?" सर ने मुस्कराकर पूछा.

"बहुत अच्छा लग रहा है सर .... ऐसा कभी नहीं .... उई ऽ ... मां ....नहीं रहा जाता सर .... ऐसा मत कीजिये ना ...अं ...अं.." कहकर रचना फ़िर पीछे सरकने की कोशिश करने लगी, फ़िर अचानक पाल सर के बाल पकड़ लिये और उनके चेहरे को अपनी बुर पर दबा कर सीत्कारने लगी. सर अब कस के चाट रहे थे, बीच में बुर का लाल लाल छेद चूम लेते या उसके पपोटों को होंठों जैसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगते.

रचना अब आंखें बंद करके हांफ़ते हुए अपनी कमर हिलाकर सर के मूंह पर अपनी चूत रगड़ने लगी. फ़िर एक दो मिनिट में ’उई... मां ... मर गयी ऽ ...’ कहते हुए ढेर हो गयी, उसका बदन ढीला पड़ गया और वो सोफ़े में पीछे लुढ़क गयी.
सर अब फ़िर से जीभ से ऊपर से नीचे तक रचना की बुर चाटने लगे, जैसे कुत्ते चाटते हैं. एक दो मिनिट चाटने के बाद वे उठ कर खड़े हो गये. उनके पैंट का तंबू अब बहुत बड़ा हो गया था.

"अच्छा लगा रचना ? मजा आया?" सर ने पूछा. रचना कुछ बोली नहीं, बस शरमा कर अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया और मुंडी हिलाकर हां बोली.

"अच्छी है रचना तेरी बुर, बहुत मीठी है।पाल सर थोड़ी देर तक रचना के बूब्स को सहलाते रहे,


मैंने देखा तो अब पाल सर ने रचना को एक कुरसी में बिठा दिया था और सामने बैठ कर उसकी चूत चाट रहे थे. बड़े प्यार से उसपर नीचे से ऊपर तक जीभ रगड़ रहे थे जैसे कैंडी चाट रहे हों. रचना मेरी और तरफ़ देख रही थी, उसका चेहरा लाल हो गया था पर एकदम खुश नजर आ रही थी. सर ने अब उसकी बुर की लकीर में एक उंगली डाली और घिसने लगे. रचना ’सी’ ’सी’ करने लगी. थोड़ी देर से सर ने उंगली मोड़ी और धीरे से रचना की बुर में घुसेड़ दी. ली"क्या हुआ रचना ? दुख रहा है क्या, दुखना नहीं चाहिये, सिर्फ़ उंगली ही तो डाली है, तू तो मोमबत्ती डालती है ना" कहकर सर उसकी चूत को उंगली से चोदते हुए चूसने लगे. फ़िर उंगली निकालकर चाटी और रचना की बुर उंगलियों से फ़ैलायी और मुंह लगा दिया जैसे आम चूस रहे हों. "हा ऽ य ... आ ऽ ह ... सर ... बहुत अच्छा लगता है सर ... प्लीज़ सर ऽ ... उई ऽ मां ऽ ..." कहकर रचना अपनी कमर हिलाने लगी. उसने सर का सिर पकड़ लिया था और उनके मुंह पर अपनी चूत रगड़ रही थीना थोड़ी कसमसा सी गयी.

. देखा तो रचना सर के सामने नीचे बैठ कर उनका लंड मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी. बस सुपाड़ा ही ले पायी थी, उसके गाल फ़ूल गये थे. सर अपना लंड उसके मुंह में पेलने की कोशिश कर रहे थे और कह रहे थे "रचना , ऐसे तो तूने अभी भी चूसा था, अब नया कुछ सीखना है कि नहीं? और मुंह में ले, जाने दे गले में, रोक नहीं, पूरा ले आज ..."

रचना गों गों करने लगी. सर ने लंड उसके मुंह से खींचा और उठ खड़े हुए "कोई बात नहीं, तेरे लिये ये नया है, नयी नयी जवानी जो है. घबरा मत, आज तेरा ये लेसन मैं पूरा कर ही दूंगा. रुक, मैं अभी आया"

वे कमरे के बाहर गये और एक मिनिट में एक मोटा लंबा केला ले कर वापस आये. केला छीलते हुए बोले "इससे प्रैक्टिस करवाता हूं, देख रचना , पहली बात यह ध्यान में रख कि गले को ढीला छोड़, एकदम ढीला. दूसरे यह कि ऐसे समझ कि तू जो निगल रही है उसमें से तुझे बहुत सी मलाई मिलने वाली है, ठीक है ना? अब मुंह खोल"

रचना ने मुंडी हिलाई और पूरा मुंह बा दिया. पाल सर ने उसके मुंह में केला डाला और धीरे धीरे अंदर घुसेड़ने लगे. चार पांच इंच के बाद रचना कसमसाई तो वे रुक गये "तू गला नहीं ढीला कर रही है रचना , बिलकुल ढीला कर" रचना ने पलकें झपकाईं और सर फ़िर से केला अंदर डालने लगे. इस बार रचना पूरा निगल गयी.

"शाबास रचना , ये हुई ना बात! ये केला बड़ा वाला मद्रासी केला है, दस इंच का, मेरे लंड से दो इंच बड़ा, अब तो तू आराम से ले लेगी, बस अंदर बाहर करने की प्रैक्टिस कर. लंड चूसते समय जितना जरूरी पूरा मुंह में लेना है, उतना ही बार बार अंदर बाहर करना है, इससे जो मजा मिलता है उससे कोई भी मर्द तेरा गुलाम हो जायेगा. और देख, दांत नहीं लगाना, इस केले पर देख ये निशान बन गये हैं, अब बिना दांत लगाये अंदर बाहर कर, दांतों को अपने होंठों से ढक ले"

सर केले को रचना के मुंह से पूरा खींच कर फ़िर अंदर पेलने लगे. रचना अब आसानी से कर रही थी. उसे मजा भी आ रहा था, वह सर का लंड अब हाथ में पकड़ कर बैठी थी.


सर ने केला एक प्लेट पर रख दिया था और रचना को सामने फ़र्श पर बिठाकर उसके मुंह में लंड पेल रहे थे. आधा तो रचना ने ले भी लिया था. सर प्यार से रचना के बाल सहला रहे थे "देख गया ना गले के नीचे? बस हो गया, अब पूरा ले ले" रचना ने सिर नीचे किया और सर की झांटें उसके होंठों पर आ टिकीं. रचना के गाल ऐसे फ़ूल गये थे जैसे बड़ा सेब मुंह में ले लिया हो.

"ये तो कमाल हो गया रचना . अब मजा ले लकर चूस. मुंह में अंदर बाहर कर ... और सुन .. जीभ से लंड के नीचे रगड़, प्यार से ... आह ऽ आह ? बहुत अच्छी बच्ची है रचना तू .... बहुत प्यारी है ... बस ऐसे ही कर ... आराम से ... मजा ले ... कोई जल्दी नहीं है" और उन्होंने रचना का सर पकड़ लिया और कमर हिला हिला कर लंड हौले हौले रचना के मुंह में पेलने लगे.

रचना अब बार बार सर का लंड पूरा मुंह से निकालती और फ़िर निगल लेती. उसे मजा आ रहा था जैसे बच्चों को आता है कोई नया काम सीख कर.

सर रचना से लंड चुसवाते हुए वो वाला केला खा रहे थे, जो रचना के मुंह में अंदर बाहर हुआ था.

"तेरे मुंह के स्वाद का जवाब नहीं रचना , अमरित है अमरित, अब जब किस करूं तो मेरे को ढेर सी चासनी पिलाना अपने मुंह की. ठीक है ना!" सर केला खतम करके बोले. रचना ने पलक झपकाकर कहा कि समझ गयी.

सर अब आराम से पीछे टिक कर बैठ गये और रचना का सिर पकड़कर उसके बालों में उंगलियां चलाते हुए रचना के सिर को आगे पीछे गाइड करने लगे. "हां रचना ... बस ऐसे ही ... हां ... हां मेरी रानी .... मेरी लाड़ली बच्ची ... चूस रानी चूस .... अपने सर का लौड़ा चूस ... उनका प्रसाद पा ले .... चल चूस"

थोड़ी ही देर में सर ने रचना के सर को कस कर अपने पेट पर भींच लिया और झड़ गये "ओह .... हां .... रचना .... तू तो कमाल करती है री ... आह .... मजा आ गया"

तीन चार सांसों के बाद सर ने लंड करीब करीब पूरा रचना के मुंह के बाहर खींचा और सिर्फ़ सुपाड़ा उसके मुंह में दे कर बोले "रचना , अब जीभ पर ले और चख ... मजे ले लेकर खा ... ये है सच्ची मलाई ... इतनी मेहनत की है तो अब उसका इनाम ले" उनका वीर्य उबल उबल कर रचना की जीभ पर इकठ्ठा हो रहा था. जब लंड शांत हुआ तो रचना ने मुंह बंद किया और आंखें बंद करके उसका स्वाद लेने लगी.

वीर्य निगलने के बाद रचना ने फ़िर से लंड को मुंह में लेकर साफ़ किया और उठ कर खड़ी हो गयी. थोड़ा शरमा रही थी पर बड़े गर्व के साथ सर की ओर देख रही थी. सर ने उसे खींच कर वहां के सोफ़े पर लिटाया और उसका बदन जगह जगह चूमने लगे. "बहुत प्यारी है तू रचना अब जरा आराम कर, मुझे अपने इस खूबसूरत बदन का स्वाद लेने दे"

वे रचना को हर जगह चूम रहे थे, छाती, पेट, पीठ, कंधे, जांघें, पैर ... थोड़ी देर फ़िर से उन्होंने रचना की बुर चूसी और दीदी रचना जब गरमा कर सी सी करने लगी तो उसे पलट कर सोफ़े पर पेट के बल लिटा दिया और उसके चूतड़ों में मुंह गाड़ दिया. रचना शरमा कर "सर ... सर ... वहां क्यों चूस रहे हैं सर? .... ओह ... ओह ...उई ऽ.. छी सर ... वहां गंदा है ...मत डालिये ना जीभ .... ओह ... आह" करने लगी पर सर ने उसके चूतड़ों को नहीं छोड़ा.मेने सर से कहा की सर अब कीमत बहुत ज्यादा हो गयी हे तो वे भड़क गए बोले तुम्हे पास होना हे या नही।हमने सहमती में गर्दन हिलाई ,तो उन्होंने कहा अब में


चोदूंगा, इस फ़ूल सी नरम बुर में घुसने को के खयाल से ही देखो मेरा लंड कैसा फ़िर से मचलने लगा है. पर इसपर ज्यादती हो जायेगी. इसलिए पहले तुम इसे चोद दो और इसकी चूत खोल दो, फ़िर मेरा जाने में इसको तकलीफ़ नहीं होगी"

कहकर सर ने रचना को नीचे पलंग पर लिटा दिया. "रचना , ठीक से लेट और टांगें फ़ैला, अब जरा अपने भाई का लंड हाथ में लेकर देख, इसे लेगी ना अब अपनी चूत में?"

रचना तो अब मछली जैसी तड़प रही थी. उसने झट से टांगें फ़ैलायीं और मेरा लंड पकड़कर बोली "भैया , जल्दी कर ना ... हा ऽ य .. रहा नहीं जाता .... " उसकी नजर सर के फ़िर से खड़े लंड पर टिकी थी.

पाल सर बोले "अमित बेटे, पहले रचना की चूत की पूजा करो, आखिर तुम्हारी बहन है"

"कैसे सर? " मैं पूछ बैठा.

"अरे मूरख, चूत पूजा कैसे करते हैं? उसे प्यार करके, उसे चाट के, उसके रस को उसके प्रसाद को ग्रहण करके. सर मुझे डांट कर बोले.

मैं जुट गया. रचना की चूत में मुंह डाल दिया. वह मेरे सिर को भींच कर तड़पने लगी "सर .... सर ... रहा नहीं जाता सर ... बहुत अच्छा लगता है सर" मैं लपालप रचना की बुर चाटने में जुटा था.



मैंने झट से रचना की बुर पर लंड रखा और पेलने लगा "अरे धीरे बेटे, हौले हौले, रचना ने कभी लंड लिया नहीं है ना, ऐसे धसड़ पसड़ ना कर" सर ने समझाया.
"पर सर , रोज ये और में तो पर में कहते कहते रुक गया ..." मैंने कहा तो सर हंसने लगे " और तेरा ये लंड कितना मोटा है, कुछ तो खयाल कर"

मैंने धीरे से लंड पेला और वो सट से आधा रचना की चूत में घुस गया. रचना थोड़ी कसमसाई. सर बोले "रचना , घबरा मत, समझ बड़ी मोमबत्ती है. बहुत मजा आयेगा तुझे देखना. चल , आगे चल पर जरा प्यार से"

मैंने फ़िर लंड पेला और वो पूरा रचना की बुर में समा गया. रचना जरा सी चिहुकी और मुझे कस के पकड़ लिया. पाल सर खुश होकर बोले "बहुत अच्छे बेटे. ये अच्छा हुआ, बहन ने कैसे प्यार से भाई का ले लिया. भाई का हो तो दर्द भी कम होता है. अब चोद धीरे धीरे. जगह बना मेरे मूसल के लिये. प्यार से चोदना, और जरा मस्ती से दस मिनिट तक चोद, जल्दी मत कर"

मैं चोदने लगा. पहले धीरे चोदा कि रचना को दर्द न हो. पर रचना की चूत ऐसी गीली थी कि आराम से लंड अंदर बाहर होने लगा. रचना कमर उचकाने लगी और बोली "भैया ... बहुत अच्छा लग रहा है रे ...... बहुत मजा आ रहा है"

सर ने कहा "चलो चोद अपनी बहन को. कब से इसका मौका देख रहा था ना तू? चल अब रचना को दिखा दे कि कितना प्यार करता है"
रचना को
मैं कस के चोदने लगा. फ़चाफ़च फ़चाफ़च की आवाज आने लगी. रचना की बुर से पानी बह रहा था
सर मेरे पास आकर बैठ गये और मेरी कमर और चूतड़ों पर हाथ फ़िराने लगे "बस ऐसे ही , कस कर चोदो हचक हचक कर, तेरी रचना की चूत अब खुल गयी है, मस्ती से चोदो, झड़ना नहीं बेटे" कहकर उन्होंने मेरे मुंह को चूमना शुरू कर दिया. अपने हाथ से वे अब मेरे चूतड़ ऐसे दबा रहे थे जैसे चूतड़ न होकर किसी औरत के मम्मे हों. इधर उनकी जीभ मेरी जीभ से लगी और उधर मुझे ऐसा मजा आया कि मैंने दो चार धक्के कस कर लगाये और झड़ गया.

मेरी हिचकी सर के मुंह में निकली तो वे चुम्मा तोड़ कर बोले "अरे बदमाश, झड़ गया अभी से " और एक हल्का सा घूंसा मेरी पीठ पर लगा दिया.
सर ने अपने लंड को मस्ती से मुठ्ठी में पकड़ा और बोले "अभी करता हूं. रचना तो बहुत प्यारी लड़की है, इसे पूरा मजा देता हूं अभी, चल बाजू में हो और खबरदार, आज माफ़ कर दिया पर फ़िर ऐसे जल्दी में झड़ा तो मार खायेगा"

मेरा लंड निकालकर मैं बाजू में बैठ गया. रचना को चोद कर बहुत अच्छा लग रहा था.

उधर सर भी झुक कर रचना की बुर चाट रहे थे. रचना ने उनका सिर पकड़ लिया और कमर हिलाने लगी.

उन्होंने रचना की बुर पूरी चाटी और फ़िर उसकी टांगों के बीच बैठ गये. "चल रचना , टांगें फ़ैला. इस लड़की की चूत ऐसी चिकनी और गीली कर दी है कि अब ये आराम से मेरा ले लेगी"


सर ने रचना की चूत के पपोटे फ़ैलाये और सुपाड़ा रखकर अंदर पेल दिया. रचना की चूत इतनी गीली थी कि वो आराम से फ़च्च से अंदर चला गया. रचना एकदम से तड़पी. सर ने तुरंत अपने मुंह से उसका मुंह बंद कर दिया. सर ने और लंड पेला और आधा अंदर कर दिया. रचना हाथ पैर मारने लगी. सर ने उसके हाथ पकड़ लिये. सर ने मेरी ओर देख कर कहा " अपनीरचना के पैर पकड़ लो, इसे दर्द हो रहा है पर मैं पूरा अंदर डाल देता हूं, फ़िर झंझट ही खतम हो जायेगी"

सर का मूसल रचना की चूत को चौड़ा कर रहा था, रचना की बुर का छेद ऐसे फैला था जैसे फट जायेग, तने रबर बैंड सा लग रहा था. देख कर मुझे भी मजा आ गया. मैंने रचना के पैर पकड़े और सर ने कस के सटाक से अपनी पूरा लंड रचना की बुर में डाल दिया.रचना का बदन एकदम कड़ा हो गया और वो कांपने लगी, अब वो पुरी तरह से तड़पती हुई हाथ पैर फ़टकारने की कोशिश कर रही थी पर मैंने उन्हें कस के पकड़े रखा, हिलने तक नहीं दिया. उधर रचना की आंखों में दर्द से आंसू आ गये थे और वो बड़ी कातर आंखों से हमारी ओर देख रही थी.

सर मस्ती में आकर बोले "ओह ... ओह ... क्या कसी चूत है इस लौंडी की ... , मजा आ गया, बहुत दिन हो गये ऐसी चूत मिली है"








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FUN-MAZA-MASTI पुजारी हवस का --12

FUN-MAZA-MASTI

 पुजारी हवस का --12

 मॉम की चुदाई की कहानी सुन कर में तो सन्न रह गया,में मॉम के बूब्स जोर से मसलता हुआ बोला,मुझे भी आप ऎसे ही सुख दीजिये न,में भी आपकी ऐसी ही मस्त चुदाई करना चाहता हु। मॉम ने मेरा लौड़ा जोर से पकड़ा और उसे हिलाते हुए कहा चिंता मत कर बेटे जब मौका मिलेगा में तुझे तेरी बीबी बनकर चुदाई का सुख दूंगी। और वो मौका मुझे जल्दी ही मिल गया डैड रचना को लेकर मेडिकल की कोचिंग करवाने के लिए कोटा ३-४ दिन के लिए चले गए अब घर पर मॉम और अकेले रह गए,मेने मॉम से कहा की क्या रात वो मेरी बीबी बनकर चुदना पसंद करेंगी मॉम ने सहमति में अपना सर हिलाया और कहा की में कंही घूम कर आ जाऊ तब तक वो अपनी चुदाई की तैयारी करती हे वो मेरे से लिपट ग यी मेरी आग और भड़क गयी ,मेने तो अब सोच लिया की किसी भी तरह मॉम की मुझको चुदाई करनी हे|
आज तो दिन भर मॉम रात कि तैयारी में ही लगी रही. सबसे पहले अपनी चूत को चका चक बनाया और फिर पूरे शरीर पर उबटन लगवाकर, गुलाबजल मिले गर्म पानी से स्नान किया. आजउ न्होंने अपनी शादी वाला जोड़ा पहना था. गले में मंगलसूत्र, हाथों में लाल रंग कि चूड़ियाँ, बालों में गज़रा और आँखों में कज़रा. पांवों में पायल और कानो में सोने की छोटी छोटी बालियाँ . उन्होंने हाथों में मेंहंदी लगाई और पावों में महावर.वो तो आज पूरी दुल्हन की तरह सजी थी जैसे कि मेरी सुहागरात हो. पूरे कमरे में गुलाब कि भीनी भीनी खुशबू और पलंग पर नयी चद्दर, गुलाब की पंखुडियां पूरे बेड पर बिछी हुई और 4-5 तकिये. साइड टेबल पर एक कटोरी में शहद और गुलाबजल, 5-6 तरह की क्रीम, तेल, वैसलीन, पाउडर आदि सब संभाल कर रख दिया था. एक थर्मोस में केशर, बादाम और शिलाजीत मिला गर्म दूध रख लिया था. आज तो पूरी रात हमें मस्ती करनी थी. और आज ही क्यों अब तो अगले 4 दिनों तक . |




और फिर वो लम्हा आ ही गया जिसके लिए मैं पिछले 2 महीनो से बेकरार था . मेने चूडीदार पायजामा और सिल्क का कुरता पहना . मॉम तो मेरे से इस कदर लिपट गयी जैसे कोई सदियों की प्यासी कोई विरहन अपने बिछुडे प्रेमी से मिलती है. मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और अपने जलते हुए होंठ उसके थरथराते हुए होंठों पर रख दिए. मैं तो उन्हें बेतहासा चूमते ही चली गया . वो तो बस ऊँ…उन्नन.. आआं.. ही करता रह गयी . अचानक मैंने उसके गालों पर अपने दांत गडा दिए तो उनकी चींख निकलते निकलते बची. उन्होंने भी मुझे जोर से अपनी बाहों में कस लिया. यही तो मैं चाहता था . कि वो आज की रात मेरे साथ किसी तरह की कोई नरमी ना बरते. बस वो मेरे जलते बदन को पीस ही डाले और मेरा पोर पोर इस कदर रगडे कि मैं अगले दो दिन बिस्तर से उठ ही ना पाऊं.

3-4 मिनिट तक तो हम इसी तरह चिपके खड़े रहे. हमें तो बाद में ख़याल आया कि हमने कितनी बड़ी बेवकूफी की है ? जोश जोश में दरवाजा ही बंद करना भूल गए. हे भगवान् तेरा लाख लाख शुक्र है किसी ने देखा नहीं.

मैंने झट से दरवाजा बंद कर लिया और फिर दौड़ कर मॉम से लिपट गया . मेने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया. उन्होंने मेरे गले में अपनी दोनों बाहें डाल दीं और मेरे सीने से अपना सिर लगा दिया. उनके उरोज उसके सीने से लग गए थे. उनके दिल की धड़कन तो किसी रेल के इंजन की तरह धक् धक् कर रही थी. उनके होंठ काँप रहे थे और उनकी तेज और गर्म साँसे तो मैं अपने सिर और चहरे पर आसानी से महसूस कर रही था . पर उस समय इन साँसों की किसे परवाह थी. में उन्हें गोद में उठाये ही चोबारे में ले आया. हलकी दूधिया रोशनी, गुलाब और इत्र की मादक और भीनी भीनी महक और मॉम के गुदाज़ बदन की खुश्बूमुझे मदहोश करने के लिए काफी थी. जब में ये सब लिख रहा था तब मॉम साथ बैठी थी उन्होंने कहा की आगे की कहानी में मेरे शब्दों में बया करती हु /
जैसे ही हम लोग चोबारे में पहुंचे उसने मुझे धीरे से नीचे खडा कर दिया . उसने मेरा सिर अपने दोनों हाथों के बीच में पकड़ लिया और थोडा झुक कर मेरे दोनों होंठों को अपने मुंह में भर लिया. आह … उसके गर्म होंठो का रसीला अहसास तो मुझे जैसे अन्दर तक भिगो गया. मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुंह में दाल दी. वो तो उसे किसी रसीली कुल्फी की तरह चूसने लगा. मेरी आँखें बंद थी. उसने फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी. मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद ही मेल गयी. कोई 10 मिनिट तक तो मैं और वो आपस में गुंथे इसी तरह एक दूजे को चूसते चूमते रहे. मेरीचूत तो पानी छोड़ छोड़ कर बावली ही हुए जा रही थी. मैं जानती हूँ उसका लंड भी उसके पाजामे में अपना सिर धुन रहा होगा पर मैंने अभी उसे छुआ नहीं था. उसके हाथ जरूर मेरी पीठ और नितम्बों पर रेंग रहे थे. कभी कभी वो मेरे उरोजों को भी दबा देता था. मैं उस से इस तरह चिपकी थी कि वो चाह कर भी मेरी चूत को तो छू भी नहीं सकता था. ऐसा नहीं था कि हम केवल मुंह और होंठ ही चूस रहे थे वो तो मेरे गाल, माथा, नासिका, गला, पलकों और कानो की लोब भी चूमता जा रहा था. मुझे तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं कोई सदियों की तड़फती विरहन हूँ और बस आज का ये लम्हा ही मुझे मिला है अपनी प्यास बुझाने को. मैं भी उसके होंठ गाल और नाक को चूमती जा रही थी. आप शायद सोच रही होंगी ये नाक भला कोई चूमने की चीज है ? ओह.. आप की जानकारी के लिए बता दूं जब कोई मर्द किसी लड़की या औरत को देखता है तो सबसे पहले उसकी नज़र उसके बूब्स पर पड़ती है और वो उन्हें चूसना और दबाना चाहता है. उसके बाद उसकी नज़र उसके होंठो पर पड़ती है. उसके होंठो को देखकर वो यही अंदाजा लगाता है कि उसके नीचे के होंठ भी ऐसे ही होंगे. इसी तरह जब भी कोई लड़की या औरत किसी लडके या आदमी को प्रेम की नज़र से देखती है तो सबसे पहले उसकी नाक पर ही नज़र पड़ती है. एक और बात बताऊँ आदमी की नाक उसके अंगूठे के बराबर होती है और शायद आप मुश्किल से यकीन करें लगभग हर आदमी के लंड की लम्बाई उसके अंगूठे की लम्बाई की 3 गुना होती है. नाक और अंगूठा चूसने और चूमने का यही मतलब है कि उसके अचतेन या अंतर्मन में कहीं ना कहीं ये इच्छा है कि वो उसके लंड को चूमना और चूसना चाहती है. नहीं तो भला लडकियां बचपन में अंगूठा इतने प्यार से क्यों चूसती हैं ?

ओह.. मैं भी क्या उलूल जुलूल बातें ले बैठी. कोई 10 मिनिट की चूमा चाटी के बाद हम अपने होंठ पोंछते हुए अलग हुए तो मैंने देखा कि उसकालंड तो ऐसे खड़ा था जैसे पाजामे को फाड़ कर बाहर निकल आएगा. मैं तो उसे देखने के लिए कब से तरस रही थी. और देखना ही क्या मैं तो सबसे पहले उसकी मलाई पीना चाहती थी. वो मेरे सामने खड़ा था. मैं झट से नीचे बैठ गयी और उसके पाजामे का नाडा एक ही झटके में खोल दिया. उसने अंडरवियर तो पहना ही नहीं था. हे भगवान् लगभग 7 इंच लम्बा और 1½ इंच मोटा गोरे रंग का लंड मेरी नीम आँखों के सामने था. मैंने आज तक इतना बड़ा और गोरा लंड तस्सली से नहीं देखा था. सुपाडा तो लाल टमाटर की तरह था बिलकुल सुर्ख आगे से थोडा पतला और उस पर एक छोटा सा काला तिल. मैं जानती हूँ ऐसे लंड और सुपाडे गांड मारने के लिए बहुत ही अच्छे होते हैं. पर गांडबाज़ी की बात अभी नहीं. मैं तो हैरान हुए उसे देखती ही रह गई. इतने में उसके लंड ने एक जोर का ठुमका लगाया तब मैं अपने खयालों से लौटी. मैंने झट से उसकी गर्दन पकड़ ली जैसे कोई बिल्ली किसी मुर्गे की गर्दन पकड़ लेती है. लोहे की सलाख की तरह एक दम सक़्त 120 डिग्री पर खड़ा लंड किसी भी औरत को अपना सब कुछ न्योछावर कर देने को मजबूर कर दे. मेरी मुट्ठी के बीच में फसे उसके लंड ने 2-3 ठुमके लगाए पर मैं उसे कहाँ छोड़ने वाली थी. मैंने तड़ से उसका एक चुम्मा ले लिया. उस पर आया प्री कम मेरे होंठों से लग गया. आह.. क्या खट्टा, नमकीन और लेसदार सा स्वाद था. मैं तो निहाल ही हो गयी. उसने मेरा सिर पकड़ लिया और अपनी ओर खींचने लगा. मैं उसकी मनसा अच्छी तरह जानती थी. मैंने साइड टेबल पर पड़ी कटोरी से शहद और गुलाबजल का मिश्रण अपनी अंगुली से लगाकर उसके सुपाडे पर लगा दिया और फिर उसे अपने होंठों में दबा लिया. उसने इतने जोर का ठुमका लगाया की एक बार तो वो मेरे मुंह से ही फिसल गया. मैंने झट से उसे फिर दबोचा और लगभग आधे लंड को एक ही झटके में अपने मुंह में ले लिया. जैसे ही मैंने उसकी पहली चुस्की ली अमित के मुंह से एक हलकी सी सीत्कार निकल गयी. ओईई….मॉम …. आं…. मेरी बुलबुल…. हाय………

मेरी मुंह की लार, शहद और उसके प्री कम का मिलाजुला स्वाद तो मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती. मुझे तो बरसों के बाद जैसे ये तोहफा मिला था. वैसे तो मेरे पति का लंड 3 इंच का है पर शुरू शुरू में उसकी भी खूब मलाई निकलती थी. पर अब तो उसके पल्ले कुछ नहीं रह गया है. पिछले 2-3 सालों से तो मैं इस मलाई के लिए तरस ही गई थी. ऐसा नहीं है कि मैं केवल लंड ही चूसे जा रही थी. मैंने उसकी दोनों गोलियों को एक हाथ से पकड़ रखा था. थी भी कितनी बड़ी जैसे कोई दो लिच्चियाँ हों. दूसरे हाथ से मैंने उसके लंड को जड़ से पकड़ रखा था. अमित ने मेरा सिर पकड़ कर एक धक्का मेरे मुंह में लगा दिया तो उसका लंड 5 इंच तक मेरे मुंह के अन्दर चला गया और मुझे खांसी आ गई. मैंने लंड बाहर निकाल दिया. मेरे थूक से लिपडा उसका लंड दूधिया रोशनी में ऐसे चमक रहा था जैसे कोई मोटा और लम्बा खीरा चाँद की रोशनी में चमक रहा हो. मैंने अपने हाथ उसके लंड पर ऊपर नीचे करने चालु रखे. कुछ दम लेने के बाद मैंने उस पर फिर अपनी जीभ फिराई तो उसके लंड ने ठुमके लगाते हुए प्री कम के कई तुपके फिर छोड़ दिए. मुझे लंड चूसते हुए कोई 10 मिनिट तो जरूर हो गए थे. अमित मेरा सिर पकडे था. वो धक्के लगाना चाहता था पर डर रहा था कि कहीं मुझे फिर खांसी ना आ जाए और मैं बुरा ना मान जाऊं. मेरी चूत का तो बुरा हाल था. कोई और समय होता तो मैं एक हाथ की अंगुली उसमें जरूर करती रहती पर इस समय तो लंड चूसने की लज्जत के सिवा मुझे किसी चीज का होश ही नहीं था. मैंने उसकी गोलियों को फिर पकड़ लिया और अपने मुंह में भर लिया. एक हाथ से मैंने उसका लंड पकडे हुए ऊपर नीचे करना जारी रखा. लंड इतनी जोर से अकडा की एक बार तो मुझे लगा कि मेरे हाथ से ही छूट जाएगा. उसका तो बुरा हाल था. उसकी साँसे तेज चल रही थी और और वो पता नहीं सित्कार के साथ साथ क्या क्या बडबडाता जा रहा था. मैं जानती थी वो अब झड़ने के करीब पहुँच गया है. मैंने उसकी गोलियों को छोड़ कर फिर लंड मुंह में ले लिया. अबकी बार मैंने उसे चूसा नहीं बस उस पर अपने जीभ ही फिराती रही. पूरी गोलाई में कभी अपने होंठों को सिकोड़ कर ऊपर से नीचे और कभी नीचे से ऊपर. उसने मेरा सिर जोर से दबा लिया और थोडा सा धक्का लगाने लगा. मैं जानती थी उसकी मंजिल आ गयी है. मैंने उसके लंड को जड़ से पकड़ लिया और कोई 3-4 इंच मुंह में लेकर दूसरे हाथ से उसकी गोलियों को कस कर पकड़ लिया और एक लम्बी चुस्की लगाईं तो उसकी एक जोर की चींख सी निकल गई. मैंने उसका सुपाडा अपने दांतों से हौले से दबाया तो वो थोडा सा पीछे हुआ और उसके साथ ही पिछले 15-20 मिनिट से कुबुलाते लावे की पहली पिचकारी मेरे मुंह और ब्लाउज पर गिर गयी. मैंने झट से उसका लंड अपने मुंह में भर लिया और फिर उसकी पता नहीं कितनी पिचकारियाँ मेरे मुंह में निकलती ही चली गयी. आह.. इस गाढ़ी मलाई के लिए तो मैं कब की तरस रही थी. मैं तो उसे गटागट पीती चली गई.

अमित बडबडा रहा था “आह.. मेरी मॉम मेरी रानी मेरी बुलबुल मेरी मैना …. आः तुमने तो मुझे … आह … निहाल ही कर दिया … ओईईई …..” और उसके साथ ही उसने बची हुयी 2-3 पिचकारियाँ और छोड़ दी. मैं तो उसकी अंतिम बूँद तक निचोड़ लेना चाहती थी. अब तो मैंने इस अमृत की एक भी बूँद इधर उधर नहीं जाने दी. कोई 4-5 चम्मच गाढ़ी मलाई पीकर मैं तो जैसे निहाल ही हो गयी. जब उसकालंड कुछ सिकुड़ने लगा तो मैंने उसे आजाद कर दिया और अपने होंठों पर जीभ फिरते हुए उठ खड़ी हुयी.

अमित ने मेरे होंठ चूम लिए. मैंने भी अपने होंठों से लगी उस मलाई की बूंदे उसके मुंह में दाल दी. उसे भी इस गाढ़ी मलाई का कुछ स्वाद तो मिल ही गया. फिर मैंने उसे परे कर दिया. मैंने उसकी आँखों में झाँका. अब वो इतना भी लोल नहीं रह गया था की मेरी चमकती आँखों की भाषा न पढ़ पाता. मैं तो उस से पूछना चाहती थी क्यों ? कैसा लगा ?

शायद उसे मेरी मनसा का अंदाजा हो गया था. उसने कहा “मेरी रानी मज़ा आ गया ”
“ओह.. मुझेअपनी रानी कहो ना ?”
“ओह.. मेरी रानी थैंक्यू ” और एक बार उसने मुझे फिर अपनी बाहों में भर कर चूम लिया.
“ओह.. ठहरो..”
“क्या हुआ ?”
मैंने उसकी ओर अपनी आँखें तरेरी “ओह.. देखो तुमने ये क्या किया ?”
“क क्... क्या ?”
“अपनी मलाई मेरे कपडो में भी डाल दी. तुम भी एक नंबर के लोल हो. कभी किसी को ऐसे नहीं चुसवाया ?”
“ओह … सॉरी ”
मैंने साइड टेबल पर पड़ा थर्मोस उठाया और उसमे रखा गर्म दूध एक गिलास में डाल कर अनिल की ओर बढा दिया “चलो अब ये गरमा गरम दूध पी लो ”
“इससे क्या होगा ?” उसने मेरी ओर हैरत से देखा
“इससे तुम्हारा लोडा फिर से गंगाराम बोलने लगेगा ”
“ओह..” उसकी हंसी निकल गयी “क्या तुम नहीं लोगी ?”
“मेरी चूत तो पहले से ही पीहू पीहू कर रही है मुझे इसकी जरुरत नहीं है ?” और मैंने उसकी नाक पकड़ कर दबाते हुए उसकी ओर आँख मार दी. वो तो बेचारा शर्मा ही गया.

“चलो तुम फटा फट दूध पीओ मैं अभी आती हूँ ” मैंने शहद वाली कटोरी और तौलिया उठाया और बाथरूम में घुस गयी. सबसे पहले मैंने शीशे में अपनी शक्ल देखी. मेरी आँखे कुछ लाल सी लग रही थी. होंठ कुछ सूजे हुए और गाल एक दम लाल. आज पहली बार मुझे अपनी सुहागरात याद आ गयी. मैं अपने आप को शीशे में देख कर शर्मा गयी. मैंने बड़ी अदा से अपने कपडे उतारे . अब मैं शीशे के सामने केवल काली पैंटी और ब्रा में खड़ी थी. काली ब्रा और पैंटी में मेरा बदन ऐसे लग रहा था जैसे खजुराहो की मूर्ती हो. शायद आप यकीन नहीं करंगी मेरी संगेमरमर सी मखमली जांघें और काली पैंटी में फसी पाँव रोटी की तरह फूली हुयी चूत के निकलते शैलाब से पूरी पैंटी ही गीली हो गयी थी. मैंने पैंटी उतार दी. आईइला ……… शीशे में अपनी चूत… अरे नहीं बुर … अरे ना बाबा मेरी चूत तो इस समय अपने पूरे शबाब पर थी. जैसे कोई छोटी सी चिडिया अपने पंख सिकोड़ गर्दन अन्दर दबाये चुप चाप बैठी हो. दोनों बाहरी होंठ तो किसी संतरे की फांकों की मानिंद लग रहे थे.? मैंने दोनों हाथों से उनको चोडा किया. आईईला … एक दम गुलाब की सी पंखुडियां तितली के पंखों की मानिंद खुल गयी. मदन मणि तो किसमिस के दाने जीतनी बड़ी एक दम सुर्ख. मैंने अपनी तर्जनी अंगुली हौले से चूत के छेद में डाल दी जो कि कामरस से सराबोर उस छेद में बिना किसी रुकावट के जड़ तक अन्दर चली गयी. मैंने उसे बाहर निकाला और अपने मुंह में डाल लिया. हाईई.. क्या खट्टा, मीठा, नमकीन, नारियल पानी जैसा लेसदार स्वाद था. मैंने एक चटखारा लिया. या अल्लाह ……

मैंने अब अपनी ब्रा भी उतार दी. दोनों परिंदे जैसे कब से आज़ादी की राह देख रहे थे. 1½ इंच का गहरे कत्थई रंग का एरोला और उनके निप्पल्स तो एक दम गुलाबी थे बिलकुल तने हुए. मैंने एक निप्पल को थोडा सा ऊपर उठाया और उस पर अपनी जीभ लगा दी. इन मोटे मोटे और गोल उरोजों को देख कर तो कोई जन्नत में जाने का रास्ता ही भूल जाए.

अब मैंने अपनी चूत को पानी से धोया. मुझे थोडा पेशाब आ रहा था पर मैंने जानकर अभी नहीं किया.




अब मैंने अपनी चूत की फांकों और पंखुडियों पर गुलाबजल और शहद लगाया. थोडा सा शहद अपने उरोजों के निप्पल्स पर और अपने होंठों पर भी लगाया. और फिर रेशमी टी शेप वाली पैडेड पैंटी और डोरी वाली ब्रा पहन ली. आप तो शायद जानती होंगी ये जो ब्रा और पैंटी होती हैं इनमे हुक्स की जगह डोरी होती है. पैंटी को दोनों तरफ डोरी से बाँधा जाता है. बस आगे कोई 2 इंच की पट्टी सी होती है जिसमे चूत की फांके ही ढकी जा सकती है. अक्सर ऐसी ब्रा पैंटी फ़िल्मी हीरोइने पहनती हैं. एक ही झटके में डोरी खींचो और ब्रा पैंटी किसी मरी हुई चिडिया की तरह फर्श पर. कोई झंझट परशानी नहीं.

आप सोच रही होंगी ओफो … क्या फजूल बातें कर रही हूँ. बाहर अमित बेचारा मेरा इंतज़ार कर रहा होगा. हाँ आप ठीक सोच रही हैं पर मेरे देरी करने का एक कारण है ? आशिक़ को थोडा तरसाना भी चाहिए ना ? और आशिक अगर आपका बेटा हो तो कहना ही क्या अरे मैं तो मज़ाक कर रही थी. असल में मैं उसे चुदाई के लिए तैयार होने के लिए कुछ समय देना चाहती थी.


कोई 10 मिनिट के बाद मैं जब बाथरूम से निकली तो वो बेड पर अपनेलोडे को हाथ में लिए बैठा था. वाह.. देखा केसर, बादाम और शिलाजीत मिले दूध का कमाल. मैं अपने कुल्हे मटकाते हुए बड़े नाज़-ओ-अंदाज़ से धीरे धीरे चलती हुई आ रही थी. वो तो बस मुंह बाए मेरी ओर देखता ही रह गया. फिर एक झटके में उसने मुझे बाहों में दबोच लिया और तडातड कई चुम्बन मेरे गालों और मुंह पर ले लिए. इस आपाधापी में मैं बेड पर गिर पड़ी और वो मेरे ऊपर आ गया. ओह … उसके बदन के भार से मेरी छाती और मेरे उरोज तो जैसे दब ही गए. मैं भी तो यही चाहती थी कि कोई मुझे कस कर दबोच ले. उसकी बेशब्री (अधीरता) तो देखने लायक थी. वो तो कपडो के ऊपर से ही धक्के लगाने लगा. कोई और होता तो मेरे इस गदराये बदन का स्पर्श पाते ही उसका पानी निकल जाता. पर मैंने तो पूरी तैयारी और योजना से सारा काम किया था ना ?
“ओह क्या करते हो पहले कपडे तो निकालो ?” मैंने उसे परे हटाते हुए कहा.

“ओह … हाँ ” और उसने अपना कुरता और पाजामा निकाल फैंका. अब वो मेरे सामने बिलकुल मादरजात नंगा खडा था. उसने मेरी भी नाइटी की डोरी खोल दी. अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने शर्म के मारे अपनीचूत वाली जगह पर हाथ रख लिया. आप शायद हैरान हो रही होंगी. भला अबचूत पर हाथ रखने की क्या जरुरत रह गई थी ? . मैं भी तो यही चाहती थी कि आज की रात ये मेरा गुलाम बन कर जैसा मैं चाहूँ वैसा ही करे. मेरी मिन्नतें करे और फिर जब मैं उसे मौका दूं तो वो बिना रहम किये मेरे सारे कस बल निकाल दे.

उसने फिर मुझे बाहों में भर लिया. मेरी आँखें रोमांच और उत्तेजना से अपने आप बंद हो गयी. पता नहीं कितनी देर वो मुझे चूमता ही रहा. कभी गालों पर कभी होंठों पर कभी ब्रा के ऊपर से उरोजों पर और कभी कानों की लोब को. मैं तो बस मस्त हुयी उसकी बाहों में समाई आँखें बंद किये सपनीली और रोमांच की जादुई दुनियां में डूबी हुयी पड़ी ही रह गयी. मुझे तो पता ही नहीं चला कब उसने मेरी ब्रा और पैंटी की डोरी खींच दी. मुझे तो होश तब आया जब उसने मेरे एक उरोज की घुंडी को अपने मुंह में लेकर जोर से चूसा और फिर थोडा सा दांतों से दबाया.

“ऊईई ….. माआ……” मेरी तो एक सित्कार ही निकल गयी. अब उसने दूसरे उरोज को मुंह में ले लिया और चूसने लगा. उसका एक हाथ अब मेरीचूत को टटोल रहा था. मैंने अपनी जांघें जोर से कस ली ताकि वो अपनी अंगुली मेरी चूत में न डाल पाए.

. मैं चाहती थी कि वो पहले मुझे चूमे चाटे और मेरे शरीर के सारे अंगों को सहलाए और उन्हें प्यार करे. उसे भी तो पता चलना चाहिए कि औरत के पास लुटाने के लिए केवल चूत ही नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है. उसने भी मेरीचूत को ऊपर ही ऊपर से सहलाया. वो मेरे उरोजों की घाटियों को चूमता हुआ मेरी गहरी नाभि चूमने लगा. उसके छेद में अपनी जुबान ही डाल दी. उईई … मा …. ये अमित तो मुझे पागल ही कर देगा. धीरे धीरे उसकी जीभ नीचे सरकने लगी. जब उसने मेरे पेडू (चूत और नाभि के बीच का थोडा सा उभरा हिस्सा) पर जीभ फिराई तो मेरे ना चाहते हुए भी मेरी दोनों जांघें अपने आप चौडी होती चली गयी. मेरी चूत पर जब उसकी गर्म साँसें और जीभ ने पहला स्पर्श किया तो रोमांच और उत्तेजना के कारण मेरी तो किलकारी ही निकल गयी. मैंने उसका सिर जोर से अपने हाथों में पकड़ कर अपनी चूत की ओर दबाना चाहा . उसने कोई जल्दी नहीं दिखाई.

“ओह मेरेबेटे जल्दी करो ना मेरीचूत को चूसो जल्दी ” मैंने अपने नितम्ब ऊँचे करके उसके सिर को जोर से अपनी चूत पर लगा ही दिया. उसने एक चुम्बन उस पर ले लिया. मैं जानती हूँ मेरी चूत से निकलती मादक महक ने उसको भी एक अनोखी ठंडक से सराबोर कर दिया होगा. उसने मेरीचूत की मोटी मोटी फांकोंचौडा कर दिया. मैं जानती हूँ वो जरूर मेरीचूत और उस हरामजादी रचना की चूत की तुलना कर रहा होगा. मेरी चूत के अंदरूनी गुलाबी और चट्ट लाल रंगत को देख कर तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी होंगी. उसके मुंह से एक एक निकला “वाह … क़यामत है …” और झट से उसने अपने होंठ मेरी बरसों की तरसती चूत पर रख दिए. उसके होंठों का गर्म अहसास मुझे अन्दर शीतल करता चला गया. अभी तो उसने मेरी मदनमणि के दाने को अपनी जीभ की नोक से छुआ ही था की मेरी चूत ने काम रस की 2-3 बूंदे छोड़ ही दी. इतनी जल्दी तो मैं आज से पहले कभी नहीं झडी थी. ये तो पूरा कामदेव है.

अब उसने अपनी जीभ धीरे से मदनमणि के नीचे मुत्र छेद पर फिराई और फिर नीचे स्वर्ग गुफा के द्वार पर. ओह.. मैं तो जैसे निहाल ही हो गयी. उत्तेजना में मैंने अपने दोनों पैर ऊपर उठा लिए और उसकी गर्दन के गिर्द कस लिए. मैं तो चाहती थी कि मेरीचूत को पूरा का पूरा मुंह में लेकर एक जोर की चुस्की ले पर ये साला अनिल तो मुझे पागल ही कर देगा. उसने फिर अपनी जीभ एक बार नीचे से ऊपर और फिर ऊपर से नीचे तक फिराई. मैं जानती हूँ मेरीचूत की फांकों पर लगे शहद और कामरस का मिलाजुला मिश्रण वो मजे से चाट रहा है पर मेरीचूत में तो जैसे आग ही लगी थी. मैं हैरान थी कि वो उसे पूरा मुंह में क्यों नहीं ले रहा है. ये तो मुझे उसने बाद में बताया था कि वो मुझे पूरी तरह उत्तेजित करके आगे बढ़ाना चाहता था.

मेरी कसमसाहट और बेकरारी बढ़ती जा रही थी. अब मेरे लिए बर्दास्त करना मुश्किल था. मैंने एक झटके से उसका सिर पकडा और एक तरफ धकेलते हुए उसे चित लेटा दिया. उसे बड़ी हैरानी हुई होगी. अब मैं झट से उसके ऊपर आ गयी और उसके मुंह पर उकडू होकर बैठ गयी. अब मेरी चूत ठीक उसके मुंह के ऊपर थी. मैं कोई मौका नहीं गवाना चाहती थी. मैंने अपनीचूत को जोर से उसके मुंह पर रगड़ना चालु कर दिया. उसकी नाक मेरे मदनमणि के दाने से लगी हुई थी औरचूत के होंठ उसके होंठों पर. अब भला उसके पास सिवाय उसे पूरा मुंह में लेने के क्या रास्ता बचा था. उसने मेरी चूत को पूरा अपने मुंह में भर लिया और एक जोर कि चुस्की ली. “आईईइ ….” मेरी तो हलकी सी चींख ही निकल गयी और इसके साथ ही मैं दूसरी बार झड़ गयी.

अब वो कहाँ रुकने वाला था. उसे तो जैसे रसभरी कुल्फी ही मिल गयी थी. मेरीचूत को पूरा मुंह में लेकर चूसता ही चला गया. मैं भला कंजूसी क्यों दिखाती. मेरीचूत तो बरसों के बाद अपना रस बहा रही थी. वो चटखारे लेता उस कामरस को पीता चला गया. कोई 8-10 मिनट तक तो उसने मेरी चूत को जरूर चूसा होगा. इस दौरान मैं 2 बार झड़ गई. अब जाकर उसे मेरे गोल मटोल नितम्बों का ख़याल आया तो उसने अपने हाथ उनपर फिराने चालू कर दिए. ये तो पूरा गुरु निकला. वो तो नितम्बों को सहलाते सहलाते मेरीचूत की सहेली के पास भी पहुँच गया. जैसे ही उसने एक अंगुली मेरी गांड के छेद में डालने की कोशिस की मैं झट से उछल कर एक ओर लुढ़क गई. मैं इतनी जल्दी इस दूसरे छेद का उदघाटन करवाने के मूड में कतई नहीं थी.[मॉम शब्दों में ही कहानी का अगला हिस्सा जल्दी ही]









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FUN-MAZA-MASTI पुजारी हवस का --11

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 पुजारी हवस का --11

 मॉम की बात सुनकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया ,मेने सोचा भी नही था की मेरी मॉम इतनी बड़ी हरामजदी और रंडी निकलेगी .मेने मॉम से कहा ये तो अपने डैड के बाहर जाने के बाद चुदवाया ,लेलेकिन क्या असा भी हुआ की अपने डैड का फायदा उठाया हो और फिर चुदवाया हो। मॉम ने कहा हाँ बाद में असा भी हुआ शादी के २ साल बाद तक एसा ही चला\ ,मेरी तक़दीर से अनिल को नेतागिरी का शोक हो गया और उन्होंने पार्षद का चुनाव लड़ने की ठानली,नेतागिरी में आते ही उन्हें पिने का चस्का भी लग गया,अब वो रोजाना ही शराब पीकर घर आने लगे,मेने सुना था की शराबी आदमी की सेक्स पावर bad जाती हें और उसे नशे में जो कहो वो उस बात को मान लेता हें \मेने भी अनिल के शराब पिने की आदत का फायदा उठाने की सोची\अनिल
अब जब भी वो शराब पीकर आते मुझे गलिया भी बकने लगते मुझे बड़ा ही अच्छा लगता की ये भाडू कुछ तो सीखा\अपनी लोड़ी को खड़ा कर वो मेरे उप्पर आते तो गालियों से शुरू हो जाते में तो गुस्से में होती थी सो में भी उन्हें जमकर गलिया देती\एक बार वो मेरी चुदाई करते समय गलिया देने लगे "ले खा भोसड़ी की, मेरा लौड़ा खा जा, साली कुतिया तुझे तो एक दिन अपनेदोस्तों
के साथ मिल कर चोदूंगा, भेन की लौड़ी, तुझे तो तेरी माँ के सामने चोद चोद कर तेरी चूत का भोंसड़ा बना दूँगा, तेरी मां दी फ़ुद्दी... हाय क्या गाण्ड है तेरी तो साली, तुझे तो कॉल गर्ल होना चाहिये था छिनाल !"
मेने भी उनका जोश बड़ाने के लिए कहाहाय और मारो राजा, मेरे चोदू छैला, जोर से मारो मेरी गाण्ड, हाय रे तेरा मस्त लौड़ा, मैं तो हारामजादे रण्डी बन गई, हाय अनिल मुझे गालियाँ दे ! भेनचोद, रण्डी, चुदैल, छिनाल बुला मुझे साले ! तेरी मां की चूत !"
मेरे गलिया बकते हीअनिल को जोश आ गया और वो तेजी से धक्के लगाने लगा मेने उसका जोश बड़ाने के लिए कहा "गाण्डू, साले मुझे मेरी मां के सामने चोदेगा तो मम्मी भी नंगी हो कर तेरे नीचे लेट जायेगी, तेरे लण्ड को देख कर वो भी रण्डी बन कर तेरा लौड़ा खायेगी, मादरचोद साले चोद मुझे पटक पटक कर, रन्डी बना कर चोद सजना, आज हलाल कर दे मुझे, जैसे कसाई बकरे को हलाल करता है, तड़पने दे मुझे, तेरी तो भेन की चूत ! तेरी बहन चुदवा दूंगी तेरे लौड़े से\
अनिल को पहली बार सेक्स में और वो भी नशे में ये सुन कर जोश आ गया और वो अपना लोडा मेरी गांड में डालने की कोशिश करने लगा में उत्तेजना में कहने लगी
मेरे सरताज़, बस अब लगा दो पूरा जोर, मुझे कुतिया बना कर चोद दो और कुत्ते की तरह लण्ड गाण्ड में फ़ंसा दो, बरबाद कर दो मुझे, रण्डी से भी गई गुजरी कर दो हाय रे, मेरे चोदू रण्डवे, ऐसा चोदना कि गाण्ड और चूत में कोई फ़रक करना मुश्किल हो जाये !"
असल में ये मेरे दिल की भड़ास थी जो में अनिल के सामने निकलती,मेने मोका देखकर कहा भोसड़ी वाले बारबारअपने दोस्तों की धमकी देता हें किसी को लाकर तो मेरी चूत फ़दवा मेरी गांड का बाजा बजवा ,अनिल कहने लगा बोलमादर चोदनी बोल किसका लोडा खाएगी उसी को बुला कर तेरी चूत का पानी निकलवा दू\
मेने कहा मुझे क्या पता की तेरा कोनसा दोस्त मर्द हें तू ही किसी को कह दे पर धयान रखना वो तेरी तरह जनखा नहीं हो \
में अपनी बाते सुन कर ही बहुत गरम हो चली थी में अपने चूतड जोर जोर से हिला रही थी और अपने पति की लोड़ी को अपनी चूत में टिकने की कोशिश कर रही थी ,लेकिन थोड़ी देर में ही अनिल ढेर हो गया और में प्यासी की प्यासी रह गयी\
अब मेरी नजर अनिल के दोस्तों पर टिक गयी की में किसको अपनी चूत फाड़ने का मोका दू ,असल में नशे में तो अनिल सब बाते कर लेता लेकिन होश में तो वो मेरे मुंह से सेक्स की बात सुनकर ही बोखला जाता\मेने अब नशे में ही अनिल का फायदा उठाने की सोची\अनिल अब जब भी पीकर आता में उसे मेरे शरीर से खेलने का पूरा मोका देती,वो भोसड़ी का मुझे चोद तो नहीं पाता
था लेकिन गरम जरुर कर देता था\
एक दिन जब वो नशे में ता मेने कहा तुम्हारा कोई दोस्त तो होगा जो मेरे पर मरता होगा जो कहता होगा की तेरी बीबी को चोदुंगा ,अनिल ने नशे में कहा कोई दोस्त तो नहीं कहता लेकिन कालोनी का एक गुंडा मुन्ना रोजाना मुझसे कहता हें तेरी बीबी की चूत मर्वाले,में मुन्ना का नाम सुनकर सन्न रह गयी,मेने कोलोनी की कई औरतो से सुना था की इस हरामी ने मोहल्ले की कई औरतो को निबटाया हें इसका लोडा घोड़े जेसा हें जो औरत इसका लोडा खा लेती ही वो इसके गुण गाती रहती हें\मेने मुन्ना को आज से पाहिले इस नजर से नहीं देखा था लेकिन अनिल ने जब उसका नाम लिया तो मेने ठान ली की में इस मुन्ना को टेस्ट जरुर करुँगी\
अब अनिल जब भी नशे में मेरी चुदाई करते में मुन्ना का नाम जरुर लेती उसका नाम सुनते ही अनिल को जोश चढ़ जाता और वो मेरे बोबो को मसलते हुए कहता मादर चोदनी मुन्ना की याद आ रही हें ,बुलवाऊ उसको फद्वाएगी अपनी चूत मरवाएगी अपनी गांड खाएगी उसका लोडा\में भी कहती बुला तो सही भाडू फिर देखना तेरी बीबी कितनी बड़ी चुदाऊ हें\
अब मेने रस्ते में आते जाते मुन्ना को देखना शुरू किया ,था तो वो लम्बा पूरा ,मेने मन ही मन उसके लोडे की कल्पना भी कर ली ,पर एक मन ये भी कहता की ये हरामी अगर चुदाई करने पर आया तो फाड़ के रख देगा ,लेकिन दूसरा मन ये भी कहता तू २ साल से लोड़ी खा रही हें अब लोडा खाने का दिन आया हें तो तेरी फट क्यों रही हें \
अब मुझे मुन्ना से प्लानिंग से चुदवाना था,चूत भी चुद जाये और अनिल को पाता भी नहीं चले,अब मुझे उस मोके का इंतजार था जब अनिल नशे में हो में उसी से मुन्ना को बुल्वों चुदाई करू और इस भाडू को अंदाजा भी नहीं हो\रविवार के दिन मेने अनिल से कहा तुम हमेशा बहार से पीकर आते हो आज तुम घर पर ही पियो में तुम्हारे सलाद का इंतजाम करती हु \अनिल को तो मोका चाहिए था वो शुरू हो गया जब वो हाफ सेज्यादा रम पि चूका और नशा उसके सर चड़कर बोलने लगा ,तो मेने कहा राजा एसे तो रोज कहते हो की तुझे लोडा खिलाऊंगा आज खिलाओ तो मानू,अनिल नशे में तो था ही उसने कहा में अभी मुन्ना को बुलाता हूँ और उसने तुरंत मुन्ना को फोने लगा दिया और उसे घर पर बुला लिया\
मेरी चूत ने तो मुन्ना का नाम सुनते ही पानी छोड दिया में तुरंत कमरे में चली गयी मेने नयी ब्रा पहनी नयी पेंटी पहनी और नया सलवार सूट पहन लिया में आज मुन्ना को एसा रिझाना चाहती थी की हमेशा मेरी चूत का दीवाना हो जाये \
थोड़ी देर में काल्ल्बेल्ल बजी में समझ गयी की मुन्ना आ गया ,में कमरे में रही में साँस रोक कर इंतजार करती रही की अनिल कब मुझे बुलाते हें और मुन्ना को केसे मुझे चोदने के लिया कहते हें \थोड़ी देर में अनिल ने आवाज लगाई,में बहार निकली मुन्ना अनिल के सामने बेठा था ,अनिल ने मुझे आँख मारतेहुए कहा तुम कमर में दर्द बता रही थी न,ये मालिश कर सारा दर्द दूर कर देते हें \
मेने मुन्ना को देखा उसकी आँखों में वासना के लाल लाल डोरे साफ दिख रहे थे,असल में अनिल ने उसे ये कहा था की वो अपनी बीबी को उस से चुदवाना चाहता हें लेकिन उसकी बीबी तेयार नहीं होगी इसलिए वो कमर दर्द दूर करने के बहाने उसे भेजेगा\यानि हम तीनो जानते थे की होगा क्या लेकिन तीनो अपना नाटक कर रहे थे \
मुन्ने ने मुझे दीवान पर लेटने को कहा में पेट के बक लेट गयी, मुन्ना ने मेरी कमर पर हाथ रख दिया और होले होले उसे दबाने लगा मेरी तो जान ही निकल गयी में तो चाहती थी ये भाडू कमर क्या दबा रहा हें ये तो मेरी गांड सहलाये जेसे मुन्ना ने मेरे दिल की बात भाप ली उसके हाथ अब मेरी कमर से हट गए और वो मेरे चुत्डो को दबाने लगा ,हाय पहली बार कोई मर्द मेरे चुत्डो को दबा रहा था में तो उतेजना में मरी जा रही थी \
मेने सोचा इसे तो काफी समय ख़राब हो जायेगा ,मेने अनिल से कहा मुझे तुम्हारा सामने शर्म आ रही हें में अंदर बेडरूम में जाकर अपनी कमर दबवा लेती हूँ अनिल तो नशे में था उसने हाँ भर दी में मुन्ना को लेकर बेडरूम में चली गयी और अंदर जाकर कुण्डी लगा ली \में अंदर जाते ही मुन्ना से चिपट गयी मुन्ना मेरी भावना समझ गया उसने मुझे बांहों में भर लिया और मुझे चूमने लगा उसके होठ मेरे होठो पर थे उसके हाथ मेरी गांड सहला रहे थे उसका लंड कपड़ो में ही खड़ा होकर मेरी चूत का दरवाजा खटखटा रहा था\
कुछ देर हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे, फिर मैंने अपने होंट उसके होंटों से मिला दिए और चूसने लगी । करीब दस मिनट तक उसने भी मेरा साथ दिया। चूसते-चूसते उसका एक हाथमेरी चूचियों को और दूसरा हाथमेरी गांड को सहलाने लगा।उसका लंड पैंट के अंदर तूफान मचा रहा था, ऐसा लग रहा था कि पैंट फाड़ कर बाहर निकल आएगा।

मैं कुछ देर उसके बदन की खुशबू लेती हुआ वहीं पड़ी रही ....

उसने कहा- मेरे बदन में सिहरन दौड़ रही है ! प्लीज़ कुछ करो ...

फ़िर उसने मेरे टॉप को निकाल दिया। मैं बहुत ही प्यार से अपने कपड़े उतरवा रही थी और वो मुझे चूमे जा रहा था ..

अब मेरे बदन पर सिर्फ़ ब्रा-पैंटी ही थी ....
उसने मेरे बदन पर मेरी निगाह डाली तो देखता ही रह गया ..गुलाबी बदन चमक रहा था !में इतनी सेक्सी लग रही थी वो कि उसे ख़ुद पर कंट्रोल पाना मुश्किल था, लण्ड बेहद तन गया था और दर्द कर रहा था। मगर अभी कुछ करना, बना बनाया खेल बिगाड़ना सा लगता था ....

तो वो फ़िर सेमुझे चुम्बनों से नहलाने लगा। स्तनों से अब थोड़ा नीचे आया, मेरे समतल पेट को चूमा और अब मेरी नाभि की ओर बढ़ा।

अपनी जीभ को घुमाया मेरी नाभि में और चाटना शुरू किया ! हौले-हौले नाभि के आस पास जीभ को गोल गोल घुमाते हुए उसे चाट रहा था ...उसके बदन में गर्मी बढ़ रही थी ....वो दबे मुँह सिसकियाँ ले रही था और उसका काला सा बदन मचल रहा था। मगर अब भीमें चुपचाप मजे ले रही थी कोई हरकत नहीं कर रही थी ....

वो चूमते हुए धीरे धीरे नाभि के नीचे पहुँचा और अब उसका मुँह मेरी पैंटी के ऊपर था ...पैंटी से ही उसने चूत को चूमा और मुँह को दबाया मेरी चूत पर और तब मैंने देखा कि उसका बदन तेजी से मचल रहा है ....

उसने धीरे से मेरी पैंटी को नीचे सरकाया ...वाह क्या गुलाबी चूत थी मेरी ... बिल्कुल साफ़ सुथरी और थोड़ी सी नम ! ऐसा लगता था मानो गुलाब की पंखुड़ियों से बनी हुई है मेरी चूत जो उसकी काली सी चिकनी जांघों के बीच सोई पड़ी थी, आज जाग गई है ...

उसने चूत की ऊपर की किनारी से चूमना शुरू किया और गोल गोल मुँह को घुमाते हुए मेरी चूत को चूमने लगा ...बहुत ही मीठी खुशबू मेरी चूत से आ रही थी और वो पागल हुए जा रहा था ...मेरी चूत के बीच के हिस्से मेंवो चूम रहा था ...चूत गीली हो गई थी और फ़ूल गई थी ...बीच का रास्ता खुलता हुआ नजर आ रहा था और उसमें से चूत की गहराई झलक रही थी ....

मैंने अपना कंट्रोल खोते हुए दोनों हाथों से चूत को फैला दी और उसने चूत में जीभ घुसेड़ दी और चाटने लगा और चाटते हुए मेरी गांड को सहलाने लगा। उसी वक्त मैंने उसके लण्ड पर उसके हाथ को महसूस किया और वो जोर जोर से चूत चाटने लगा, जीभ को पूरा चूत में घुसेड़ दिया और हिलाने लगा।

उसका लण्ड पैन्ट से बाहर आ चुका था और अब उसके हाथों में खेल रहा था। अब मुझे कोई परेशानी नहीं थी,में पूरी तरह बेताब और तैयार थी चुदाने को !

मैं अब धीरे से ६९ की पोसिशन में आ गयी और उसके लण्ड को अपने मुँह के पास कर दिया ... लण्ड को इतना करीब देख के मुझसे भी रहा नहीं गया और चूत को चटाती रही और लण्ड को अपने मुँह में ले लिया ...ऐसे चाट रही थी मानों जन्मों की प्यासी हो और खा जाने वाली हो लण्ड को ! ....अब मैं अपनी पूरी रवानी में थी उसका लण्ड मेरे मुँह में चुदाई कर रहा था और वो मेरी चूत को जीभ से चाट रहा था ....उसने जीभ के साथ अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में घुसेड़ दी और चुदाई करता रहा। साथ साथ एक ऊँगली मेरी गांड में भी घुसेड़ दी।

वो मस्ती से गांड मार रहा था, चूत चोद रहा था और लण्ड चुसवा रहा था ...मानो वो जन्नत की सैर कर रहा था ....मेरेको चोदने की उसे कोई जल्दी नहीं थी . बहुत तेज रफ्तार से गांड और चूत की चुदाई हो रही थी और में भी लण्ड को टट्टों से टिप तक चाट रही थी। कभी एकदम से लण्ड को मुँह में ले के आगे पीछे कर देती थी ....ऐसे ही कुछ पल गुजरे और हम दोनों झड़ गए .....
अब मैं उसकी बगल में आगयी और उसके साथ ही लेट गयी । चँद मिनटों में मैंने उसके हाथ को अपने बदन को सहलाता पाया और मैं भी उसके बदन को सहलाने लगी ..मैं बहुत ही प्यार से उसके बदन को सहला रहा थी । अपने पाँव मैंने उसके पाँव पर जमा दिए थे .... हम प्यार में डूबे जा रहे थे !

तभी उसने कहा- अब मैं सिर्फ़तुम्हारा हूँ जान ! जी भर के मेरे साथ जितना प्यार करना है करो !! आई लव यू रानी ....!!!

उसने मेरे बदन को जोर से सहलाना शुरू किया और मेरी ब्रा को अब निकाल दिया मेरे मशरूम से बदन परमेरे स्तन क़यामत ढा रहे थे।वो धीरे धीरेउन्हें सहलाने लगा, गोल गोल मालिश करते हुए मेरे स्तनों को मसल रहा था।

अब उसके अनछुए होठों पर अपने गरम होठों को रख दिया और चूमने लगी ,वो मेरे स्तन मसल रहा था और होठों का रस पी रहा था,में भी मस्ती से साथ निभा रही थी !

हम दोनों अब होठों से होठों का रस पी रहे थे औरमेरे स्तनों को निचोड़ रहा था वो ! वोमेरी गाण्ड को सहला रही था । वो मेरे बूब्स और होठों पर टूट पड़ा था। धीरे धीरे बूब्स पर जोर बढ़ता गया उसका और अबउसने मेरे चूचुकों को भी चुसना शुरू किया- चूचुकों पर जीभ घुमा रहा थामेरे बूब्सउसके हाथो में मचल रहे थे और वो मेरे चूचुकों के आगे पीछे गोल गोल जीभ घुमाते हुए बूब्स चाट रहा था। ....उसी दौरान उसका लण्ड मेरी चूत पर रगड़ रहा था ...मेरी चूत का गीलापन उसके लौड़े पर महसूस हो रहा था, लौड़ा मस्त हुए जा रहा था ... बूब्स गोरे से लाल होने चले थे ....

उसका लंड बहुत सख्त होते जा रहा था. मैंने
ज़िन्दगी में पहली बार किसी मर्द का इतना सख्त लंड पकड़ा था.
क्या मर्द था ! कभी ऐसा आनंद नहीं लिया था मैंने ! वो मुझे 69 में करके मेरी चूत
चाटने लगा। मेरे दाने को चबाने लगा। मैं पागलों जैसे उसका लण्ड चूसने में मस्त थी।
वो जब अपनी ज़ुबान तेज़ करता तो मैं भी लण्ड उतनी तेज़ी से चुसती। थोड़ी देर में मुझे
लगा मेरी चूत से कुछ निकलने वाला है. मै मचलने लगी. उसका सर मेरी चूत पर दबाया.. वो शायद समझ गया. वो जल्दी से उठा और उसने मेरी कमर के नीचे तकिया लगाया और मेरी टांगों के बीच में बैठ अपना लण्ड मेरे दाने पे रगड़ने लगा। मुझसे जवानी की आग सही नहीं गई, मेरे मुंह से निकल गया- मुन्ना .. अब सहन नहीं हो रहा.. मै मर जाउंगी.. अंदर डालोगे या बाहर ही छुटने का इरादा है !
उसने कहा रानी.. पहली बार है.. फिर भी इतनी बेताबी.. ले.. और उसने झटका मारा, आधा लण्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया। मेरी चूत का पर्दा उस झटके से फट गया और मेरी चीखें निकल गई। उसने मेरी दोनों बाहें पकड़ कर अपने होंठों से मेरे होंठ दबा लिए। मेरी तो जैसे दर्द से जान ही निकल गयी..
मैं चीखती रही- मर गई !अहह !निकाल कमीने ! फट गई मां ! मैं चुद गई री ईईईईईईईई... बाहर निकालो.. बस.. अब नहीं..
लेकिन वो नहीं माना .. मेरी चुन्चियो को चूसने लगा मुझे चूमने लगा और हलके हलके धक्के लगाने लगा.. धीरे धीरे उसका लंड फिसलते हुए अन्दर जा रहा था.. उसने मेरे पैर और ऊपर उठा दिए. मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था... अब लंड आसानी से अन्दर बाहर होने लगा. वो पूरा लंड बाहर खिंच कर अन्दर करते हुए मुझे चोदने लगा.
फ़िर लण्ड अंदर-बाहर आसानी से होने लगा, मानो मैं स्वर्ग में पहुँच गई।
चोद मुन्ना ! चोद दे आज मुझे ! तेरी रखैल बन जाऊंगी ! कायल हो गई तेरी मर्दानगी पे ! कभी किस से चूत नहीं मरवाई मेरे दिलबर ! आशिक़ फाड़ दे ! अब करता ही जा ! ज़ोर ज़ोर से ! हाए दैया रे ! दैया मसल डाल मुझे ! फाड़ डाल मेरी ! अपना बीज आज मेरे अंदर बो दे !
उसने लण्ड निकाल लिया और मुझे कहा- कुतिया ! कमीनी ! हरामजादी ! चल हो जा घुटनो पे ! बन जा कुत्ती ! और वो पीछे से आकर मेरी चूत मारने लगा, घोड़ी बना के लेने लगा, साथ साथ में उसने अपनी उंगली मेरी पोली पोली गाण्ड के छेद में डाल दी। मुझे दोहरा मजा दिया उसने !
एकदम से चूत से उसने लण्ड खींचा और मेरी गाण्ड में पेल दिया।
हाए साले यह क्या किया? इसको तो बहुत चुदवाया है ! तू चूत मार मेरी, प्यास बुझा मेरी !
थोड़ी देर मारने दे कमीनी
फिर उसने निकाल लिया अपना लण्ड मेरी गाण्ड से। मुझे खड़ा करके कहा- अपने हाथ दीवार से लगा ले और उसने पीछे अपना लंड मेरी चूत में लगा कर जोर से दबाया.. कासी चूत ने उसका लंड फच्च के घुसा उसके बाद उसने बेदर्दी से पीछे से चूत मारी। मै चिल्ला रही थी.. ओह..आह.. हाई.. मर गयी.. बोहोत मोटा है..
हाए ! गई !गई !
वो बोला- आह ! मैं झड़ने वाला हूँ !
मैंने कहा- ले चल बिस्तर पे ! मेरे उपर लेट जा ! ताकि जब झड़ जायें तो तुझे अपनी बाहों में भींच लूँगी।
उसने मुझे सीधा लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा।
ओईईईईईईई माआआअ क्या नज़ारा है ! हाए सईयाँ दीवाने ! मैं झड़ने वाली हूँ ! आह !
वो बोला- हाँ ले साली ले !
मैं झड़ गई और आधे मिनट बाद उसके लण्ड ने शावर की तरह अपना सा माल मेरे पेट में डाल दिया, जब उसका पानी निकलने लगा तब इतना मजा आया चुदाई से भी ज्यादा !
मैंने आँखें बंद कर के उसको जकड़ लिया- निकाल दे सारा माल !
एक एक बूंद उसने निकाल लिया और मेरे मुंह में अपना लण्ड डाल कर बोला- साफ कर दे अपने होंठों से ! ज़ुबान से !मेने जी भर कर उसके वीर्य को पि लिया \मेने कहा मुन्ना अब इस चूत की प्यास तेरे लोडे बगेर नहीं बुझेगी \इतने में बहार से अनिल की आवाज आई क्या कर रहे हो तुम दोनों अब बहार निकलो मेने मुन्ना से कहा एसा नहीं ही की इस भाडू को होश आ गया हो ,उसने कहा इतनी जल्दी नहीं आएगा \मुन्ना ने कहा आओ एक बार फिर से चुदाई करते हें\



" उसके ये कहते ही मैंने भी उसके गले में बाहें डाल दी और बोली- आप भी असली मर्द हो। आपकी यह चौड़ी छाती, घने बाल, मर्दानगी की कायल तो मैं हो गई आपकी !मुझे भी असली मर्द से चुदवाने की चाह है. आज से मै आपकी हो गयी. .. उसका लंड मैंने जितने लंड लिए उनसे दुगुना लम्बा और मोटा था. करीब आठ इंच लम्बा और तीन इंच के करीब मोटा. .. काला सा था.. लेकिन लंड का सुपाड़ा बोहोत मोटा और गहरे लाल रंग का था. उसके छेद से कुछ लिसलिसा निकल रहा था. मेरी चूत भी काफी गीली होने लगी थी. उसने मेरे जिस्म के हर हिस्से को चूमा और जीभ से गीला किया... उसने मेरे चूतड फैलाकर अपनी जीभ मेरी गांड से चूत तक फेरा... मै तो जैसे जन्नत की सैर कर रही थी. सामने उसका हल्बी लंड.. मै बंद कमरे में उसके हाथो में मचल रही थी.. काफी देर तक ऐसे ही चाटने के बाद उसने मुझे बेड पर लेटने को कहा. मै नंगी थी. लेकिन बेशर्मी से चल कर बेड पर सीढ़ी लेट गयी..
मेरे दोनों टांगो को फैला कर वो मेरी दोनों टांगों के बीच बैठ कर अपनी ज़ुबान से मेरी चूत चाटने लगा। जब वो मेरे दाने को चबाता, कसम से आग मच जाती ! अहह उह !!! मेरी चूत गीली हुयी जा रही थी और वो चपर चपर जीभ से चाट रहा था. होंठो में मेरे चूत के दाने को लेकर चुस्त तो मै तड़प उठती.. और थोड़ी देर में.. मै खुद को रोक नहीं सकी.. और आ..आ..आह.. मुंह हटाओ... मेरा छुटने वाला है.. उफ़.. गयी..ई..ई...ई.. और मेरा पानी निकल गया..
मैंने उसको धकेलते हुए पीछे किया और जल्दी से उसका लंड पकड़ लिया और घुटनो के बल बैठ कर चूसने लगी।मेरे मुंह में उसका लंड नहीं आ रहा था.. उसने मेरे बाल पकड़ कर सर को दबाया और सुपाड़ा मेरे मुंह में घुसा दिया.. मै उसे ही चूसने लगी.. उसका हाथ मेरे कमर से मेरी गांड और फिर मेरी चूत पर पहुँच गया...
वो बोला- हाय जान ! रानी ! राण्ड ! माँ की लौड़ी ! चूस !
वो अपने पैर से नीचे मेरी गाण्ड के छेद में अंगूठा डालने की कोशिश करने लगा। मुझे भी फिर से मजा आने लगा था.. अंगूठा चूत के दाने पर रगड़ने से चूत फिर से गरम होने लगी थी... उसने मुझे अब सीधा लिटाया मेरे दोनों पैर ऊपर सर तक उठाये और फिर.. लंड का सुपाड़ा मेरे चूत पर ऊपर नीचे इस तरह रगड़ रहा था की मेरी चूत लंड खाने के लिए बेचैन होने लगी.. मै समझ रही थी की मेरी चूत के हिसाब से उसका लंड काफी मोटा है.. और मेरा छेद बहुत छोटा.. फिर भी ना जाने क्यों मै खुद को रोक नहीं पा रही थी.. मैंने कहा मुन्ना .जी.. बहोत धीरे से डालना.. आपका बहुत मोटा है.. मुझे दर्द होगा.. लेकिन शायद उसने सुना ही नहीं ..फिर दारू में टल्ली उसने मुझे सीधा लिटाते हुए अपना मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत में धकेल दिया। मै तो चिल्ला उठी.. मर गयी..ई..ई...ई...ई.. बहुत मो..टा.. है.. और उसे धकेल रही थी.. लेकिन उसने मुझे बहुत कस के पकड़ा हुआ था. उसने मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए.. और चूसने लगा.. हाथो से मेरी चून्चियों को मरोड़ रहा था.. मै दर्द से मरी जा रही थी.. और तभी उसने दूसरा धक्का लगा दिया और पूरा लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरी बच्चेदानी से टकराया.. मेरी आँखों से आंसू निकल पड़े.. मैंने कहा
आह.. धीरे ये क्या कर दिया..आ..आ.. मर गई मै.. छोड़ दो मुझे.. बहुत दर्द हो रहा है.. !
बोला- कमीनी ! चुप साली रंडी ! और फिर तो जैसे उस पर जूनून छा गया .. पूरा लंड बाहर तक खींच कर उसने अन्दर पेलना शुरू कर दिया.. थोड़ी देर में मेरा दर्द कम हुआ और मुझे भी मजा आने लगा.. मैंने भी अब अपनी गांड हिला कर उसका साथ देना शुरू कर दिया..
मैं ज़ोर ज़ोर से चुदने लगी। जब जब उसका लंड मेरी बच्चेदानी से रग़ड़ ख़ाता, मानो स्वर्ग बिस्तर पे आ गया लगता था।
अब मैं खुद नीचे से बोली- हाए मेरे ख़सम ! फाड़ डाल ! छोड़ना मत !
और मैं गाण्ड उठा उठा के चुदने लगी। उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पेलने लगा। मैं झड़ गई लेकिन वो थमा नहीं। करीब २५ मिनट यूँ ऐसे ही गैर मर्द की बाहों में झूलती हुई जो चुदी।
उसने अपना गरम गरम पानी जब मेरी बच्चेदानी के पास में छोड़ा, मैं पागल हो गई। कितना लावा निकालता था उसका लंड !










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