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Thursday, August 14, 2014

FUN-MAZA-MASTI मालती एक कुतिया --14

FUN-MAZA-MASTI

 मालती एक कुतिया --14

 नीचे मालती चतुर्वेदी जी को बेडरूम तक लेकर गई... मालती ने चतुर्वेदी जी को पकड़ा और बिस्तर पर धकेल दिया, और सीधे उनके तनतनाते हुए लौड़े को अपने मुह में लेकर चूसने लगी... उफ्फ्फ... मालती की इस हरकत से चतुर्वेदी जी की हालत खराब हो गई... लौड़े की गर्मी मालती अपने जिस्म की गर्मी से बढ़ा रही थी... चतुर्वेदी जी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और अपना सारा प्रेमरस मालती के मुह में ही छोड़ दिया!
“हरामजादी ये क्या किया तूने... साली...”
“मैंने? मैंने क्या किया? किया तो आपने है... इतनी जल्दी भी कोई झड़ता है क्या?”
“साली पलट तेरी गांड मारूंगा अब!”
“न न... चतुर्वेदी जी... एक बार आउट तो आउट... लल्लन जी को पता चला तो प्रॉब्लम हो जाएगी...”
“बेहेन की लौड़ी पलट... बिना गांड मारे तो जाने नहीं दूंगा तुझे..”
मालती इस पर मुस्कुराई और फिर नंगी ही ऊपर महफ़िल की ओर भाग ली...
और खिलखिलाती हुई सबके बीच पहुची...
बेचारे चतुर्वेदी जी भी उसके पीछे पीछे भागते हुए वहां पहुचे...
सब चतुर्वेदी जी की हालत देख कर उन पर हंसने लगे...
“लगता है चतुर्वेदी जी लौड़ा अन्दर फिट करने के पहले ही झाड़ गए” लल्लन बोला!
सबने इस पर ठहाके मारे... और फिर मालती ने बिना देर किये बोतल एक बार फिर से घुमा दी... अबकी बार बोतल का मुह रुका फैज़ल की तरफ...
मालती ने मुस्कुराते हुए फैज़ल की ओर देखा... फैज़ल बिना देर लगाये मालती के पास आये और उसके चुत्तड पे स्पैंक किया... और मालती को आँख मारी और फिर उसे अपनी बाहों में लेकर नीचे बेडरूम की ओर निकल लिया!
फैज़ल खान... पर्सनालिटी में लल्लन जी से भी आगे... और चुदाई में पूछिये नहीं... बेडरूम तक पहुचते पहुचते ही फैज़ल ने अपनी मर्दानगी के रंग दिखाने शुरू कर दिए, अब तक मालती के निप्पल तन चुके थे...! 6 फुट के हट्टे-कट्टे मर्द की बाहों में किसी भी औरत का यही हाल होगा, मालती का हाल और भी गीला हो रहा था...बेडरूम पहुचते ही फैज़ल ने अपना सफ़ेद कुरता उतार फेंका... मालती के सामने अब फैज़ल का गठीला जिस्म था... मालती कुछ करती या कहती इससे पहले ही फैज़ल ने उसके चेहरे को दोनों हाथो से पकड़ कर उसके होंटों का रस पीना शुरू कर दिया... उफ्फ्फ... म्वाह..उम्म्म्ह.... स्ल्र्रर्र्र्र... 10 मिनट तक दोनों एक दूसरे की दुनिया में खोये रहे...फैज़ल को भी आज बहोत दिनों बाद ऐसा माल मिला था... हरा भरा माल...! मालती अगले ही पल फैज़ल खान के फौलादी जिस्म के नीचे थी... फैज़ल उसके हुस्न के कोने कोने का स्वाद ले रहा था... और वो बेचारी फैज़ल के नीचे लेती कभी बेडशीट भींचती तो कभी फैज़ल की पीठ और सर पर अपने हाथों को फिर कर अपनी बेसब्री जाहिर करती! फैज़ल ने अपने पैजामे का नारा ढीला किया... और फिर मालती को इशारा किया! मालती तो कब से फैज़ल के हथियार के लिए तड़प रही थी...
“उफ्फ्फ.... इतना बड़ा??... आज तो आप मेरी ढंग से लेके जाओगे फिर” मालती ने फैज़ल के लौड़े को हाथ में लेते हुए कहा! फैज़ल का लंड था ही इतना बड़ा... ऐसे तो फैज़ल का लंड कला भुजंग थालगभग 5-6 इंच का शिथिल मूत्रमार्ग..पर जब किसी लौंडिया के लुए खड़ा होता था तो उफ्फ्फ... नसों में खून दौड़ता दिखाई देता था... लगभग 8-9 इंच का कला मोटा लोहे का डंडा.... अच्छी अच्छी रंडियों की चूत फाड़ी थी इस लंड ने...और आज ये औजार मालती के सामने था!
“साली अन्दर जाएगा तो सारे लंड भूल जाएगी...” फैज़ल ने मुस्कुराते हुए कहा और मालती के मुह पर अपने लंड से थप्पड़ मारा...
“उई माँ....जान लीजियेगा क्या मेरी”
“जान नहीं जानेमन गांड लेंगे तुम्हारी हम... वो क्या है कि चूत तो लल्लन जी ने चोद चोद के भोसड़ा बना दी होगी,,,” फैज़ल बोला!
“छी... शर्म नहीं आती आपको ऐसी बाते करते हुए..” मालती बोली!
“चुप कर बेहेन की लौड़ी...” और फैज़ल ने उसकी गांड पे चपेट मारी... उसकी साड़ी उंगलिया छप गई मालती के चुत्तड पे! अगले ही पल फैज़ल का लंड मालती की चूत में था.... उफ्फ्फ.... फैज़ल ने एक झटके में बच्चेदानी तक ठांस दिया..... अगले 15 मिनट तक कमरे में केवल मालती की आहें और चीखें सुनाई दे रही थी...आह... फैज़ल ने मालती की चूत से लंड निकाला और उसे घोड़ी बना दिया... मालती समझ गई कि अब फैज़ल उसकी गांड मारेगा! “आह... फैज़ल जी.... इतनी जल्दी क्या है...” मालती ये कहते हुए उठी और अपनी ड्रेसिंग टेबल से ल्यूब ले आई... उसे पता था कि बिना ल्यूब के अगर फैज़ल ने लौड़ा अन्दर डाला तो वो अगले दो तीन दिन तक ठीक से चल भी नहीं पाएगी... फैज़ल ने ल्यूब लिया और सीधे मालती की गांड में भर दिया... और अगले ही पल लंड मालती की गांड में था! स्पून पोजीशन में मालती को फैज़ल ने अपने फौलादी बदन की गिरफ्त में लिया हुआ था और वो इसी पोजीशन में उसकी गांड मार रहा था... दोनों हाथों में मालती के बूब्स... और नीचे गांड में लंड... आह... बिस्तर भी आवाज कर रहा था दोनों की कामक्रीड़ा के फलस्वरूप!
उधर ऊपर बाकी लोगों की बेचैनी बढती जा रही थी... उन्हें पता था कि फैज़ल अच्छे से टाइम लगाएगा मालती को चोदने में... और वो लगा भी रहा था! पिछले पौन घंटे से मालती चुद रही थी फैज़ल से.. पहले उसने मालती की चूत मारी और फिर उसकी गांड...!
दोनों जन्नत में थे... फैज़ल मालती को चोदते हुए जन्नत महसूस कर रहा था और मालती फैज़ल से चुद्वाते हुए.... चतुर्वेदी जी की कमी भी फैज़ल ने पूरी कर दी थी! लंड मालती की गांड से निकाला और एक बार फिर मालती की चूत में डाल दिया और उसे पूरे जोश में चोदने लगा! वो अब झड़ने वाला था...आह... ऊह... दोनों की आहें और आवाजें और भी तेज़ हो गई... और फिर फैज़ल के लंड ने फलफला के मालती की चूत में पिचकारी छोड़ दी... और फिर अगले 5 मिनट तक कमरे में सिर्फ दोनों की सासें ही सुनाई दे रही थी! मालती उठी और उसने फैज़ल को किस किया और फिर फैज़ल के शिथिल पड़ चुके लंड को अपनी जीभ से चाट कर साफ़ किया! मालती के जीभ के स्पर्श से फैज़ल के लंड में एक बार फिर से रक्त संचार होने लगा.. पर उसे पता था कि दुबारा बैटिंग का मौका नहीं मिलेगा!
“मालती तू गजब की माल निकली साली... जी कर रहा है बस चोदता रहूँ... साली लल्लन की रांड न होती तो अभी तुझे उठा ले जाता अपने घर...”फैज़ल बोला!
“उम्म्म्ह फैज़ल जी... रांड किसी की नहीं होती...” मालती ने मुस्कुराते हुए कहा और फैज़ल के सीने पर हाथ फेरा!
इशारा साफ़ था... फैज़ल के लंड की दीवानी हो गई थी वो...
“दुबारा सेवा का मौका दीजियेगा फैज़ल जी” मालती फैज़ल के लंड पे हाथ फेरती हुई बोली!
फैज़ल मुस्कुराया... और फिर कपडे पहनने लगा... कुरते से बटुवा निकाला और अपना कार्ड और एक हज़ार का नोट मालती को पकडाया... और फिर ऊपर महफ़िल में अपने दोस्तों के पास चला गया!



चुदाई का कार्यक्रम सारी रात चला, मालती पर बारी बारी सबने चढ़ाई की... सबने उसकी जवानी का भोग लगाया, सिर्फ लल्लन जी को छोड़कर! मालती की हालत किसी बाजारू रंडी से कम नहीं थी आज.... पिछली रात वो एक दो नहीं छः मर्दों से चुदी थी... सुबह वो उठी, तो उसके लिए नया सरप्राइज़ था... वो अफरोज़ की बाहों में सोई हुई थी.. बिलकुल नंगी...! ओह... फिर उसे याद आया कि सब से चुदने के बाद लल्लन जी ने अफरोज़ को उसे घर भेजने को बोला था... पर ये क्या हुआ.... मालती ने उठने की कोशिश की... पर अफरोज़ ने उसे बाहों में ले रखा था... मालती को समझ नहीं आ रहा था कि वो करे तो क्या करे...उसने कभी सोचा भी नहीं था की अफरोज के साथ वो कभी ये सब... उफ्फ्फ शर्म से लाल हुई जा रही थी वो... अफरोज़ का प्राइवेट पार्ट उसकी जांघ पर महसूस हो रहा था! अफरोज़ नींद में था... पर फिर भी मालती उसकी गिरफ्त में थी...
मालती की हरकत से अफरोज़ की नींद खुली... उसने मलती को और कस के अपने जिस्म से लगा लिया... मालती ने अलग होने की कोशिश की...
“कहाँ जा रही है?? थोड़ी देर और गरमी लेने दे न”
“उह... छोड़ो मुझे... तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?”
“ओहोहो... मेरी हिम्मत... साली कल रात तू खुद मेरा बिस्तर गरम करने आई... भूल गई?”
(मालती को सच में कुछ भी याद नहीं था... हैंगोवर अभी भी उतरा नहीं था...)
अफरोज़ का लंड अब तक तन चुका था...
“चल लग जा काम पे..”
“शट अप... तुमने सोचा भी कैसे?”
“साली कल रात जब टाँगे फैला फैला के चुद रही थी तब क्या हुआ था?”
“जो हुआ लल्लन जी की मर्जी से हुआ था...छोड़ो मुझे... और जाने दो... प्लीज्..”
“हाहाहा.... और तू मेरी बाहों में है... वो भी लल्लन जी की मर्जी से ही है... साली तुझे क्या लगता है छै-छै मर्दों से चुदवाने के बाद भी तू लल्लन जी से चुदवायेगी? भूल जा... तेरी औकात अब यही है...”
“हरामजादे छोड़ मुझे... जाने दे...”
“हाहाहा.... क्यों मर्द नहीं हैं क्या हम? लल्लन जी से बड़ा है हमारा हथियार”
“गांड में डाल ले अपने हथियार को...” और मालती चिल्लाती हुई एक झटके में अफरोज़ से अलग हो जाती है!
अफरोज़ उठा और मालती को पकड़ कर उसके गाल पर दो चपेट मारी... “साली कुतिया... जा... माँ चुदा तू अपनी... लौट के तू मेरे पास ही आयेगी” और उसने मालती को घर से बाहर धकेल दिया... मालती नंगी थी!
“अफरोज़... अफरोज़.... खोलो न... दरवाजा खोलो.... प्लीज़.... अफरोज़” मालती गेट थपथपाती है...
अफरोज़ ने हँसते हुए दरवाजा खोला... “बोला था न... मेरे पास ही आएगी लौट के”
मालती अपने कपड़े उठाती है और पहनने लगती है...
“रमीज भाई की रांड थी न तू?” अफरोज़ ने कड़क आवाज में पूछा!
“रमीज? रमीज? कौन रमीज?” मालती सक्बका गई!
“साली इतनी भोली मत बन... सब जानता हूँ तेरे बारे में...”
“वो...वो... ऐसा कुछ भी नहीं है!”
“हाहाहा... ऐसा नहीं है फिर कैसा है? सोच ले... लल्लन जी को बता दिया तो कोठे भिजवा देंगे वो तुझे”
“नहीं... प्लीज़... प्लीज़... उन्हें मत बताना.... और रमीज को भी नहीं...वरना वो मुझे जान से मार डालेगा”
“हाहाहा... साली... अब आई औकात में... अब सुन... पार्टी ऑफिस में लल्लन जी ने नई सेक्रेटरी रख ली है... तुझे मेरे डिपार्टमेंट में डाल रहे हैं... जानती है न मेरा डिपार्टमेंट क्या है?”
“क्या???? नई सेक्रेटरी रख ली? पर?”
“पर वर छोड़... शाम को चार बजे ऑफिस जाएगी तो लल्लन जी सब बता देंगे तुझे...”
ये सब सुन के मालती का चेहरा उतर गया... अब तक उसने कपडे पहन लिए थे...
अफरोज़ के चेहरे पर अलग ही मुस्कान थी...
मालती को इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि जब तक लल्लन जी चाहेंगे तब तक ही वो उनकी सेक्रेटरी है... जिस दिन उनका मन भर गया... उसकी जगह कोई और आ जाएगी!
____________________
शाम चार बजे मालती लल्लन जी के ऑफिस में उनके सामने खाड़ी थी...
ऑफिस में केवल वो दोनों ही थे...
“लल्लन जी... कोई गलती हुई हो तो मैं माफ़ी मांगती हूँ... पर इस तरह... मेरी जगह.. किसी और को...”
“हाहा... साली कल रात तेरी फेयरवेल पार्टी थी इस जॉब से... केक कट के सब में बंट चुका है मेरी जान...”
“लल्लन जी प्लीज़... ऐसा मत कीजिये... कहीं की नहीं रहूंगी मैं...”
“अरे रहेगी... तो मेरे ऑफिस में ही रहेगी... तेरे जैसी वफादार कुतिया को ऐसे कैसे जाने दे सकते हैं हम!”- लल्लन मुस्कुराते हुए बोला- “सुन... आज से तू अफरोज़ के डिपार्टमेंट का काम संभालेगी... आगे के पांच साल के लिए तू अकाउन्ट्स एंड लीगल डिपार्टमेंट की हेड है... धोके में मत रहना.. तेरे ऊपर अफरोज़ रहेगा.. उसके साथ कुछ कानूनी परेशानियाँ हैं... इसलिए तुझे हेड बना रहा हूँ.. अफरोज़ सारा काम अच्छे से जानता है... वो तुझे सब समझा देगा! और हाँ... एक और खुश खबरी है... अगले हफ्ते सरकार बन रही है.. और शायद हमको मंत्री पद मिल रहा है!”
लल्लन जी बोल रहे थे... मालती सुन रही थी... लल्लन जी ने पिछले कुछ समय में मालती का मुह बंद सा कर दिया था, मालती की एक कमजोरी थी- “पॉवर”.. और एकाउंट्स एंड लीगल डिपार्टमेंट के हेड की पोस्ट कुछ कम नहीं थी... वो कुछ भी शिकायत करने के मूड में नहीं थी... लल्लन जी की यही खासियत थी... वो जानते थे कि किसे कैसे काबू में रखना है.. मालती जैसी टैलेंटेड औरत को, जिसने पिछले चुनाव में इतना बढ़ चढ़कर साथ दिया, खोना नहीं चाहते थे वो..
“खुश है न?” लल्लन जी ने पूछा
मालती मुस्कुरा दी... वो कुछ भी बोल नहीं पाई...
लल्लन जी ने अफरोज़ को फोन करके ऑफिस बुलाया...
“अफरोज़ आज से मालती मैडम तुम्हारे डिपार्टमेंट की हेड हैं... इन्हें सारा काम अच्छे से समझा देना..”
“ओह.. मुबारक हो मिस मालती मिश्रा...” अफरोज़ मुस्कुराते हुए बोला!
“थैंक यू” मालती फोर्मली बोली!
और फिर लल्लन जी ने इशारा किया... अफरोज़ और मालती दोनो कमरे से बाहर आ गए!
“आइये मोहतरमा... आपको आपका नया ऑफिस दिखा दूं...” अफरोज़ शरारती अंदाज में मालती के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला
“जी बिलकुल...” मालती अफरोज का हाथ अपने कंधे से हटाती है!
लिफ्ट से दोनों एक फ्लोर ऊपर पहुचे... और मालती अब अपने ऑफिस के बाहर खड़ी थी... गेट पर उसके नाम की चमचमाती नेम-प्लेट लगी हुई थी..
“Mrs. Malti Mishra
[accounts and legal department]
अपने नाम की नेमप्लेट देखते ही वो जैसे सारी चीजें भूल गई... अफरोज की तरफ देखा और मुस्कुरा दी...
“अब अन्दर भी चलेंगी मोहतरमा या फिर बाहर नेमप्लेट ही देखती रहेंगी?” अफरोज मालती की नंगी पीठ पर हाथ रखते हुए बोला!
मालती मुस्कुराई और फिर दोनों अन्दर घुसे..
-एक बड़ी सी टेबल... उसके पीछे एक किंग साइज़ ऑफिस चेयर... टेबल पर एक एप्पल लैपटॉप.. और कुछ फाइलें...
टेबल के दूसरी ओर आगंतुकों के लिए चार कुर्सियाँ,
सामने दूसरे कोने में सोफा पड़ा हुआ है... और उसके सामने एक बड़ा टीवी!
“wowww....” मालती तो बस देखती रह गई... ये उसके लिए किसी सपने से कम नहीं था...
“कैसा लगा मोहतरमा?”
“अफरोज मैं कोई सपना तो नहीं देख रही?”
अफरोज़ ने मालती की कमर में हाथ डाला और चुटकी काट ली.. “मोहतरमा...ये एक सपना ही है जो लल्लन जी की कृपा से सच में बदल गया है”
“आउच... अफरोज़... देखो ये सब नहीं चलेगा..”
“हाहाहा... मैडम... हमें वो लोग बिलकुल भी पसंद नहीं जो अपनी औकात में न रहें” अफरोज़ मुस्कुराते हुए बोला!
मालती मुस्कुरा दी.. शायद औकात याद आ गई थी उसे अपनी!

“ऑफिस देख लिया हो तो अब कुछ काम की बातें कर लें?” अफरोज़ टेबल के पीछे वाली किंग साइज़ चेयर पे बैठता हुआ बोला!
“मैंने कब मना किया है?” मालती बोली! [वो अभी भी ऑफिस ही देख रही थी...]
“तो सुन... पहली बात तो ये कि डिपार्टमेंट का बॉस मैं हूँ...सिर्फ मैं.. तू बस उतना करेगी जितना मैं बोलूँगा!, वैसे तो सारे कानूनी मसले हमारे आदमी अपने लेवल पे सुलझा लेते हैं, पर फिर भी जो एक दो मैटर रह जाते हैं उनके लिए वकील रखे हुए हैं हमने.. तो बस तेरा काम उन वकीलों से रिपोर्ट लेना और मुझे ओरल रिपोर्ट देना है! समझ रही है न...”
“ओके जी... समझ रही हूँ..” अफरोज का ये रूप उसने पहले नहीं देखा था... वो अफरोज को एक गुंडा ही समझती थी...पर आज उसे अफरोज़ की असली औकात पता चली थी!
“अकाउन्ट्स का काम अकाउन्ट्स वाले ही संभालेंगे... हमारा काम फण्ड जुटाना है... इलाके के जितने भी दो नम्बरी लोग हैं... वो हमें मंथली चंदा देते हैं.. वो चंदे को टाइम से लेना और मैनेज करना, और हाँ जितना जादा चंदा पार्टी को जायेगा , उसी हिसाब से हमें भी फायदा होगा... समझ रही है न? तू कॉलेज टाइम से इस काम में है तो इसलिए जादा समझाने की जरूरत नहीं है मुझे” अफरोज मालती को सारी चीजे समझा रहा है!

“और सुन... आज से तेरा घर पार्टी गेस्ट हाउस में है... वहीँ रहेगी तू... पार्टी के बहार के लोगों से मिलना जुलना कम रखेगी तो फायदे में रहेगी... ये तेरा नया फ़ोन... इसमें लल्लन जी, मेरा और पार्टी के मेन लोगों के नंबर हैं... बाकियों की जरूरत तुझे पड़ेगी नहीं! पुराना वाला फोन बंद कर दे अब”
मालती ने पुराना फोन बंद कर दिया!
“कोई दिक्कत?” अफरोज ने मर्दाने अंदाज में पूछा
“नहीं नहीं... कोई प्रॉब्लम नहीं... आई एम ओके..” मालती बोली
“आह... अंग्रेजी बोलती है तो बड़ी मस्त लगती है तू...”
मालती शर्मा गई!
“इतना दूर क्या खड़ी है? लल्लन जी से तो बड़ा चिपकी रहती थी.... हमरे जिसम में कांटे लगे हैं क्या?”
“अफरोज़... देखो.. कल जो हुआ... वो एक गलती थी... और मैं तुमसे उमर में बड़ी भी हूँ... तो उसका तो लिहाज रखो कम से कम”
“अरे तो क्या अपनी बिटिया का बियाह करवओगी हमसे?”
“देखो मानसी को इस सब से दूर रखो...”
“हाहाहा... बड़ा प्यार है बच्चों से...अच्छा लगा देख के”
मालती मुस्कुरा दी... पर अफरोज का इशारा उसे समझ आ गया था... वो अब अफरोज के सामने टेबल पर बैठी थी... उसके दोनों हाथ अफरोज के हाथों में थे..
“देख अब हमसे क्या छुपाना... तेरे बचपन से लेकर जवानी तक... एक एक चीज़ जनता हूँ मैं...कसम से कब से चोदना चाहता था मैं तुझे, पर कल जाके तमन्ना पूरी हुई!”अफरोज उसके हाथ सहलाता हुआ बोला!
“अफरोज़.. औरत की मजबूरी नहीं समझोगे तुम..”
“हाहाहा... समझता हूँ जानेमन... सब समझता हूँ... पर एक बात माननी पड़ेगी... रमीज भाई ने अच्छा चूतिया बनाया तेरा, मौज कर रहे हैं वो दुबई में”
“प्लीज़... नाम मत लो उसका... नहीं सुनना चाहती मैं उस जालिम के बारे में”
अफरोज मुस्कुराया... और मालती की कमर में हाथ डाल दिए... और उसे टेबल से नीचे उतार लिया.. और घुमा कर अपनी गोद में बैठा लिया!
“प्यार से रहेगी... तो खुश रहेगी...वरना इस ऑफिस से चमेलीबाई के कोठे तक पहुचाने में टाइम नहीं लगेगा...” अपना हाथ मालती के ब्लाउज के अन्दर डालते हुए बोला!
मालती मुस्कुराई... और अफरोज के होंटो पर अपने होठ रख दिये...
अफरोज ने बिना देर किये मालती के होंटों को अपने होंटो से जकड़ लिया... “आह...साली समझदार है तू...”
मालती का जादू अफरोज पर चढ़ता जा रहा था... उसके नशे में कब से पागल था वो... पर अब जाके किस्मत खुली थी उसकी!
दोनों के जिस्म एक दूसरे के लिए बेताब हो रहे थे कि तभी अफरोज का फोन बज गया....
“इसकी मा की...” .... जेब से फोन निकला.. देखा लल्लन जी का फोन है...
“जी...जी... लल्लन जी... बताइये कैसे याद किया?”
“अरे जरा ऑफिस में आओ... अर्जेंट काम है..”
“जी आता हूँ”
मालती को देख कर मुस्कुराया... “याद कर रहे हैं लल्लन जी... कोई अर्जेंट काम है...”
“जाइए जाइए... अब हमसे भी जादा अर्जेंट काम है तो जाइए”
“आहा... साली... आई लाइक इट... जन्नत दिखाऊंगा तुझे तो...”
और फिर बेमन से वो मालती को छोड़ कर चला गया!












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Thursday, June 5, 2014

FUN-MAZA-MASTI मालती एक कुतिया --13

FUN-MAZA-MASTI

 मालती एक कुतिया --13

 आज के दिन का इंतज़ार पिछले 15 दिन से सब कर रहे थे... आज चुनाव का परिणाम आना था! सुबह से ही पार्टी ऑफिस में भीड़ थी! सबको बस इंतज़ार था तो फाइनल रिज़ल्ट का!
लल्लन जी की जीत में किसी को शक नहीं था... और जब परिणाम आया तो हुआ भी यही! लल्लन जी एक बार फिर जीत चुके थे... लल्लन के साथ साथ लल्लन के वो सारे साथी भी जीत गए थे जो कि उसके बाहुबली कुनबे में थे! होली-दिवाली जैसा माहौल था पूरे खेमे में! मालती अपने हाथों से सबको मिठाई बाँट रही थी... शहर में भी जगह जगह मिठाई बंट रही थी.... समर्थक ढोल-नगाड़े बजा रहे थे... पटाखे फोड़ रहे थे! लल्लन के पास बधाइयो के लिए फोन पे फोन आ रहे थे!
लल्लन की ख़ुशी का भी ठिकाना नहीं था... उसे अपनी जीत का विश्वास तो पहले से था... पर उसके साथीयों के जीत जाने से उसकी ताकत और भी बढ गई थी!
सेलिब्रेशन के बाद की सियासत अब शुरू हो चुकी थी!ये तो पक्का था कि अगली सरकार लल्लन जी के समर्थन के बिना नहीं बन सकती, इसलिए लल्लन का गुरूर भी सातवें आसमान पर था... वो किसी कीमत पर समझौता करने को तैयार नहीं था! मालती सुबह से फोन रिसीव कर कर के थक चुकी थी! लल्लन ने मालती को बुलाया और अपने साथियों के साथ एक मीटिंग फिक्स करने को कहा!
मालती ने सबको खुद फोन करके बुलाया!
मीटिंग कम सक्सेस पार्टी जादा थी ये.... अगले दिन शाम को सारे बाहुबली इकट्ठे हुए! फार्महाउस के टैरेस पर बैठका लगा! और फिर सियासत के पत्ते खुले! लल्लन अपने 6 साथी विधायकों के साथ आगे की रणनीति बना रहा था!
( विधायकों के नाम- जनार्दन चौधरी, चन्दन चतुर्वेदी, अब्दुल खलीफा, अब्बास सुल्तान, रॉकी और फैज़ल खान)
सबने अपनी अपनी बात रखी... और फिर करीब दो घंटे बाद आम सहमति भी बन गई!
“लल्लन जी इजाज़त हो तो शैम्पेन खुलवाई जाए....” चौधरी बोला!
“हाँ हाँ क्यों नहीं...” लल्लन बोला और फिर अपने पास खड़ी मालती को इशारा किया! मालती मुस्कुराई और नज़ाकत के साथ शैम्पेन निकाल कर ले आई... और लल्लन जी को पकड़ा दी!
एक चाँद ऊपर आसमान में निकला हुआ था और एक चाँद इस महफ़िल को भी रौशन कर रहा था... मालती की मौजूदगी से सबका हृदय मचल रहा था... पर लल्लन जी की वजह से किसी में हिम्मत नहीं थी कि वो एक शब्द बोल सके मालती के बारे में!
लल्लन जी ने शैम्पेन ली और टक्क से खोल दी...सबने ख़ुशी का इज़हार किया... और फिर बोतल मालती को पकड़ा दी... मालती ने सबको शैम्पेन दी!
“लल्लन जी आपका सिक्का एक बार फिर चल गया!” फैज़ल बोला!
“अरे लल्लन जी का सिक्का नहीं चलेगा तो किसका चलेगा... जनता मानती है लल्लन जी को” चतुर्वेदी ने मलाई लगाते हुए कहा!
सब शैम्पेन का आनंद ले रहे थे.... पर अब्दुल खलीफा की नजरें रह रह कर मालती पर जा कर टिक रही थी.... संयम हो नहीं रहा था अब्दुल खलीफा से!
“लल्लन जी... इस ख़ुशी के मौके पर कुछ नाच गाना तो बनता है...” रॉकी बोला!
“बात तो जबरजस्त बोली है तुमने... वो साला इतना व्यस्त हो गए कि इसका इंतजाम करवाना ही भूल गए” लल्लन बोला!
“क्या लल्लन जी... आपके लिए कुछ नामुमकिन है क्या? आप चाहो तो अभी रंडी प्रकट हो जाए हमारे मनोरंजन खातिर” अब्बास बोला!
इस पर सब ठहाके मार के हंसे....
“हाहाहा... अब तो साला इंतजाम करना ही पड़ेगा....” लल्लन बोला...
लल्लन ने फोन उठाया और अफ़रोज को मिलाया....
“अबे वो एमबीए वाली लौंडिया जो उस दिन लाये थे... इंतजाम हो सकता है क्या अभी उसका?””
“सरकार अचानक.... सरकार थोड़ा टाइम लगेगा... कम से कम तीन चार घंटा तो लग ही जायेगा उसे रेडी करने में”
“अरे उठा लाओ साली को... रेडी क्या करना है”
“हाहा... सरकार फिर भी कम से कम 3 घंटा तो लग ही न जायेगा...”
“माँ चुदाओ भोसड़ी के फिर तुम अपनी...”
और लल्लन ने फोन काट दिया!
“साला कह रहा है कि दू-तीन घंटा लगेगा” लल्लन ने फ्रस्ट्रेट होते हुए कहा...
“अरे लल्लन जी... आपके होते हुए....लौंडिया का कमी पड़ जाए... ऐसा कैसे...” चौधरी बोला!
अब तो नाच गाना हो के रहेगा... लल्लन की इज्ज़त पर आ गई थी अब!
आज किसी की आबरू लुटने वाली थी... वो भी खुले आसमान के नीचे....!
लल्लन ने मालती का हाथ पकड़ा और उसे अपनी जांघ पर बिठा लिया...
“उस दिन क्या बता रही थी तुम— कालिज में लीड डांसर हुआ करती थी...?”
“लल्लन जी... कैसी बातें कर रहे हैं... सेक्रेटरी हूँ आपकी...”
“अरे तो हम कौन सा कह रहे हैं की नौकरानी हो हमारी... अब देखो कठिन घड़ी है हमारे लिए... इतना तो कर ही सकती हो... अरे भंड हैं सब, सुबह किसी को याद नहीं रहेगा कि मालती नाची थी या कलावती.... जरा जलवा बिखेरो इनके सामने भी..” लल्लन ने थोड़ा समझाया!
“पर लल्लन जी...” मालती बोली!
“बेहेन की लौड़ी... पर वर छोड़ और चेंज कर के आ 10 मिनट के अन्दर...” लल्लन ने गुस्से में कहा!
मालती के पास अब और कोई रास्ता था भी नहीं... मरती क्या न करती... थोड़ी शर्म-लाज जो बचाई हुई थी अब तक उसने आज वो भी लल्लन जी पर न्योछावर कर दी उसने... वो उठी और किसी रांड की तरह मटकती हुई नीचे चेंज करने चली गई!
नीचे उसने अल्मिरा खोली... और सबसे सेक्सी घाघरा चोली निकाली!
मैरून-हरे और नीले रंग का घाघरा जो उसके घुटनों के नीचे तक आता था, जिसे उसने कुछ ज्यादा ही नीचे से पहन रखा था... और चोली ऐसी कि देखने वालों की आँखों से लार टपक जाए.... अपनी उमर से 15 साल जवान लग रही थी वो आज!
आँखों में सुरमा- और होंटों पर लाली लगा कर वो तैयार थी... खुद को आईने में देख कर वो सब कुछ भूल गई... उसे याद था तो बस ये कि लल्लन जी ऊपर उसका इंतज़ार कर रहे है! खुद को आखिरी बार आईने में देखा और फिर वो टैरेस की ओर चल दी....
मालती को सामने देख कर सबकी आँखे खुली की खुली रह गई...
किसी के मुह से सुभानअल्ला निकला तो किसी के मुह से हवस भरे दो शब्द, तो किसी का मुह खुला का खुला रह गया...!
“आजा मेरी रानी....” लल्लन ने मालती को इशारा किया!
मालती मटकती हुई लल्लन जी के पास पहुची और फिर लल्लन जी को झुक कर चूम लिया!
“आप लोगों के लिए थोड़ी और शराब लाऊं...” मालती ने बाकी लोगों से पूछा!
“अरे मोहतरमा आप किसी शराब से कम हैं क्या... आपके हुस्न का नशा ही काफी है” अब्दुल खलीफा बोला!
“अरे अब्दुल भाई आप तो आशिकाना हो गए.... जरा भावनाओं को काबू में रखिये...” रॉकी हँसते हुए बोला.... –“अभी पी ही कितनी है... ख़ुशी का मौका है आज.... एक और खम्बा खुलेगा...”
मालती मुस्कुराई... और मिनीबार से एक बोतल निकाल लाइ...
“मेरे लिए नीट...” लल्लन धीरे से बोला!
मालती मुस्कुराई और फिर सबको मदिरा परोसी!
लल्लन जी उठे और म्यूजिक सिस्टम ऑन कर दिया...
“नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा.... हाहाहा...” लल्लन ने मालती को बीच में धकेलते हुए कहा.... शराब का नशा सर चढ़ कर बोल रहा था लल्लन के सर पर!
मालती के बीच में आते ही सबने अपनी नज़रें उस पर जमा लीं...
...मैं आई हूँ यूपी बिहार लूटने.... मालती ने ठुमके लगाने शुरू किये! उफ्फ्फ... लल्लन जी तो उसका नाच देख कर होश हो बैठे... लौड़ा हाथ में ले लिया... बाकी सबका भी लगभग यही हाल था... मालती के मुजरे ने सोये हुए शेरों को जगा दिया था... सब उसे बस एक बार चोदना चाहते थे...
फैज़ल उठा और मालती के साथ नाचने लगा और उसके ऊपर पैसे उड़ाने लगा... फैज़ल को ऐसा करते देख बाकी से भी रहा नहीं गया, बाकी भी आधे नशे में नाचने लगे और पैसे उड़ाने लगे...
लल्लन का शैतानी दिमाग आज कुछ ज्यादा ही शैतान हो रहा था आज... मालती को उन सबके साथ नाचता देख उसे एक अलग ही मजा आ रहा था! वो उठा और मालती के पास नाचते हुए गया और उसके घाघरे का नारा खींच दिया....
मालती का घाघरा नीचे सरक चुका था अब... उसने लल्लन जी की ओर देखा...मानो शिकायत कर रही हो...
लल्लन जी मुस्कुराए... “हमारी महफ़िल में लौंडियाँ नंगी ही नाचती हैं...”
लल्लन जी की इस बात पर बाकी सब हंसे.... और फिर थोड़ा हौसला दिखाते हुए अब्बास ने पीछे से उसकी चोली की डोरी खींच दी...
मालती ने नाचते हुए ही अपनी चोली उतारी और फैज़ल के ऊपर फेंक दी...
अब सब वापस अपनी अपनी जगह पर बैठ चुके थे... मालती केवल ब्रा-पैन्टी में हौले हौले ठुमके लगा रही थी...
“हाय क्या माल है....साली...” चतुर्वेदी बोला!
“गांड तो देखो साली की... लल्लन जी खूब मेहनत की है आपने...” रॉकी अपना लंड मसलते हुए बोला!
“अरे रांड है हमारी... रोज दो बार चुद्वाती है हमसे” लल्लन अपनी जांघ पर हाथ फेरते हुए बोला!
“लल्लन जी... लल्लन जी.... लौड़ा खड़ा कर दिया इसने हमारा..” चौधरी ने अपना लंड ये कहते हुए पकड़ लिया!
“माँ कसम अगर लल्लन जी इजाज़त दे दें तो अभी गांड मार लूं इस छिनार की” फैज़ल हवस भरी आवाज में बोला!
मालती की चूचियां ये सब सुन के तन चुकी थी... वो नाच रही थी... लल्लन और उसके दोस्तों की आँखों से चुदते हुए नाच रही थी!
“रुक...” लल्लन ने जोर से बोला.... मालती सहम कर रुक गई...
“सुन रही है क्या कह रहे हैं ये सब?”
“जी...”
“बोल... दे दूं इजाज़त?”
मालती मासूमियत भरी निगाहों से लल्लन को देख रही थी.. मनो गुजारिश कर रही हो कि “नहीं”...!
“हाहाहा... वैसे इस ख़ुशी के मौके पर अपने दोस्तों को दुखी तो नहीं करूंगा...” लल्लन जी बोले!
“बोल चुद्वायेगी न?”
“आप कहो तो जान दे दूं अपनी...”
“जान नहीं जानेमन... गांड देदे... गांड... हाहाहा...” लल्लन हँसते हुए बोला... बाकी सब भी लल्लन की इस बात पर हंसे....
“थीक है जी ले लो मेरी गांड.. पर शर्त है मेरी भी... आप में से केवल 4 से चुदवाउंगी... अब डिसाइड कर लो कौन कौन चोदेगा मुझे...” मालती नखरे के साथ बोली...
“सिर्फ चार? हाहाहा.... देखो देखो... रण्डी के नखरे देखो.... सब चोदेंगे तुझे... समझी....” रॉकी बोला!
आलम यह था मानो किसी पामेरियन कुतिया को लैब्राडोर कुत्तों के बेड़े में छोड़ दिया गया हो!
आज की रात रंगीनियाँ परवान चढ़ने वाली थीं... मालती की जवानी!
“देख... तू चुदेगी तो हम सबसे... पर एक और एक साथ तो हम चोदेंगे नहीं... अब तू ही बता कि किससे चुदेगी पहले” लल्लन शराब के नशे में बहकते हुए बोला... और मालती की गांड पर चपेट मारी...
“क्या लल्लन जी... अब रांड बताएगी कौन किससे चुदेगी पहले? हम ही डिसाइड करेंगे... क्यों दोस्तों...” रॉकी बोला... सबने रॉकी की बात पर सहमति जताई...!
“देखो भाई पहला हक तो हमारा ही है इस छिनार पर... लेकिन आप लोग मेहमान हो तो इसलिए कोई अच्छा तरीका बताओ किसका नंबर पहले आये?




“देखो भाई पहला हक तो हमारा ही है इस छिनार पर... लेकिन आप लोग मेहमान हो तो इसलिए कोई अच्छा तरीका बताओ किसका नंबर पहले आये?” लल्लन जी ने अपनी मूछें उमेठते हुए कहा...
चौधरी जी टपाक से बोल- “देखो भाइयो, अब सबर नहीं हो रहा... जल्दी बताओ कोई तरीका!”
अब्दुल ख़लीफा: “माशाअल्लाह लंड फटा जा रहा है मोहतरमा के लिए”
अब्बास: “अब तुम सब सपने ही देखते रहोगे या कोई कुछ बताएगा भी? इस छिनार को कौन चोदेगा पहले?”
मालती ये सब सुन रही थी... अपने ऊपर पड़ रही उन प्यासी नज़रों की हवस को समझ रही थी वो... इस सब में उसे मजा आ रहा था, खुश तो वो भी बहोत थी सबकी जीत से... और फिर उस जीत के लिए, लल्लन जी की ख़ुशी के लिए... एक रात तो वो भी कुर्बान कर सकती है... और फिर इसमें हर्ज ही क्या है? आस पास के इलाके के सबसे ताकतवर- रुतबेवाले- दबंग मर्दों को मजे देने में उसे भी तो मजे आयेंगे न!
उनमे से किसी को भी कोई तरकीब नहीं सूझी... सूझेगी भी कैसे... सब दो-दो पेग डाउन जो थे... और सबके सर में सवार था मालती की चूत का नशा!
मालती ने बची हुई शर्मोहया को अपनी गांड में डाला और मटकती हुई सबके बीच में पहुची- “आप लोगों की इजाज़त हो तो मैं एक तरीका बताऊँ?” मालती ने सेक्सी अंदाज में रिक्वेस्ट की!
“बता मेरी रानी... इंतज़ार किसका कर रही है...” लल्लन जी बोले!
“उम्म्म... आप लोग कार्ड्स क्यों नहीं खेलते? जो जीता वो चोदेगा मुझे... और बाकी टाइम में बाकी बचे लोग कार्ड्स खेलेंगे!” मालती बोली!
“अरे नहीं नहीं... ऐसे तो फिर फैज़ल ही चोदता रहेगा तुझे स्सारी रात” चतुर्वेदी थोड़ा परेशान होते हुए बोला!
सब हंस पड़े... सबको पता था कि ताश की बाजी में फैज़ल को हराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था!
“हाहाहा... चतुर्वेदी जी... वो तो वैसे भी हम ही चोदेंगे इन्हें रात भर... वो क्या है न की हमें आपकी तरह डायबटीज की बीमारी नहीं है” फैज़ल चतुर्वेदी के मजे लेते हुए बोला!
फैज़ल की इस बात पर सबने फिर से ठहाके लगाए!
“ओहो चतुर्वेदी जी... ये नम्बरिंग का तरीका है... एक बार जिसका नंबर आ गया, फिर दोबारा वो नहीं खेलेगा” मालती चतुर्वेदी को समझाते हुए बोली!
“मानना पड़ेगा लल्लन जी... कमाल की रखैल है आपकी... हुस्न का हुस्न और साथ में इतना गजब का दिमाग” चतुर्वेदी बोला!
चौधरी- “हाँ तो ठीक है फिर ये फाइनल... लाओ भाई ताश की गड्डी लाओ”
फैज़ल मुस्कुराया और अपने काले रेशमी कुरते की बाईं जेब से धीरे से ताश की गड्डी निकाली और मालती की ओर बढ़ा दी!
“क्या बात है फैज़ल जी... आप तो सच में उस्ताद निकले” मालती गड्डी लेते हुए बोली...
“वो तो बिस्तर पे पता चलेगा..” फैज़ल ठरक के साथ बोला!
मालती गड्डी हाथ में लेकर उसे फेंट रही है और सबके पास जा कर अपने हुस्न के जलवे भी बिखेर रही है!
“सोच क्या रही है जानेमन... बता कौन सा खेल खेलना है?” चौधरी बोला!
“उम्म्म... मैं ये सोच रही थी की जब मैं आपमें से किसी एक से चुद रही हूंगी... तो आप लोग क्या करोगे?” मालती छेड़ते हुए बोली!
“साली ब्लू फिल्म बनायेंगे तेरी.... बेहेन की लौड़ी कितना तडपाएगी?” लल्लन जी थोड़ा क्रोध में बोले!
मालती मुस्कुराई... वो मजे ले रही थी... सिचुएशन को वो समझ रही थी... वो ये अच्छी तरह जान चुकी थी कि सब एक साथ तो नहीं चोदेंगे उसे... और वो ये भी अच्छी तरह से जानती थी कि लाइन में लगे लोगों में से कुछ तो दो मिनट भी नहीं टिकेंगे उसके हुस्न के आगे...!

उसने म्यूजिक फिर से स्टार्ट कर दिया... और फिर ताश की गड्डी फैज़ल को दे दी... “फैज़ल जी आप ही डिसाइड करिए कौन सा गेम खेलना है..”
“तीन पत्ती... तीन पत्ती खेलेंगे...” अब्दुल खलीफा पीछे से बोला!
अब्दुल खलीफा, जैसा कि आप लोग जानते हैं कि उस दिन के रोडशो से ही मालती के हुस्न का दीवाना हो गया था...वो मालती को अकेले भोगना चाहता था... पर किस्मत.. लल्लन जी ने अपनी सेक्रेटरी की जवानी सबके हवाले कर दी..!
“इतना समय नहीं है हमारे पास...” लल्लन जी बोले!
रॉकी इतने में उठा और मेज पर रखी शैम्पेन की खाली बोतल उठाई... और मालती को पकड़ा दी- “इसे घुमा... और बोतल का मुह जिसकी तरफ रुका... उसकी बारी पहली”
मालती ने धीरे से बोतल पकड़ी... और लल्लन जी की तरफ इजाज़त मांगती नज़रों से देखा!
लल्लन जी- “वाह क्या तरीका निकाला है... और मालती को इशारा करके अपने पास बुलाया...”
मालती लल्लन जी की गोद में बैठ गई!
“साली मेरी रांड है तू... समझी... इन सबकी इज्ज़त लेके छोड़ियो... और हाँ एक बार कोई आउट हो तो दोबारा बैटिंग का मौका नहीं मिलना चाहिए किसी को... समझी... सिर्फ एक बार! आउट मतलब आउट! समझी..” लल्लन जी मालती की जांघ पर हाथ फिराते हुए बोले!
मालती ने हाँ में सर हिलाया... और लल्लन जी के गाल पर एक चुम्मी रख दी!
“चल अब बता इन सबको.. और खेला शुरू कर!” लल्लन बोला और मालती को महफ़िल के बीच में धकेल दिया!
मालती ने सबको प्यार भरी नज़रों से देखा और फिर बोतल को जमीन पर रखा...
“हाँ तो मेरे हुस्न के दीवानों... तैयार हैं आप लोग मेरे हुस्न की नीलामी के लिए?” मालती थोड़े शायराना अंदाज में बोली!
“हाँ मेरी रानी”...” “बोतल घुमा छाम्म्मकछल्लो” सबने हामी भरी!
“उम्म्म... घुमाती हूँ... घुमाती हूँ... पर पहले खेल के नियम तो सुन लीजिये?” मालती बोली!
“चुदाई में कोई नियम नहीं होते मेरी रानी... जिसका घोड़ा जितनी देर तक चला वो ही असली मर्द” चौधरी ने ठसक के साथ कहा!
“हाँ चौधरी जी... मैं भी वही कह रही थी... की अगर कोई एक बार आउट होता है तो उसे दुबारा बैटिंग का मौका नहीं मिलेगा... ये हुस्न आपके हवाले सिर्फ एक बार!” मालती बोली...
“मंजूर है मेरी अनारकली... चल अब तू बोतल घुमा!” फैज़ल बोला

मालती मुस्कुराई... और फिर बोतल को पकड़कर जोर से गोल गोल घुमा दिया!
सबकी आँखे बोतल पर टिकी हुई थी... मालती ऊपर वाले से दुआ कर रही थी...
और फिर बोतल रुकी...
और बोतल का मुह था- चन्दन चतुर्वेदी की तरफ!
मालती की नज़रें चन्दन चतुर्वेदी की ओर थीं... चन्दन चतुर्वेदी तो जैसे अपनी किस्मत पर उचल ही पड़ा!
“किस्मत के धनी है चतुर्वेदी जी....” लल्लन बोला!
“सिर्फ किस्मत के...” फैज़ल ने पीछे से टांट मारा!
फैज़ल की बात पर सब दबे मुह हंसे...
(ओह चतुर्वेदी जी के बारे में बताना तो मैं भूल ही गई... चन्दन चतुर्वेदी... पुश्तैनी हलवाई का इकलौता बेटा... दबंग नेता, लड़कियों का शौक़ीन...छोटे कद का, थोड़ा सा पेट निकला हुआ, और ऊपर से डायबटीज़, तो अब स्ट्राइक रेट थोड़ा कम हो गया है चतुर्वेदी जी का..!)
मालती मटकती हुई चतुर्वेदी जी के पास गई... और फिर चतुर्वेदी जी के गाल को सबके सामने चूम लिया... और फिर चतुर्वेदी जी को देखते हुए धीरे धीरे सीढियां उतरने लगी! चतुर्वेदी जी अभी भी वहीँ बैठे हुए थे!
“अरे जाओ चतुर्वेदी.... अब सोच क्या रहे हो...” लल्लन बोला!
चतुर्वेदी जी ख्वाबों से बाहर आये और फिर मुस्कुराकर खड़े हुए और वो भी मालती के पीछे पीछे सीढ़ियों से नीचे उतर गए!



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Friday, May 23, 2014

FUN-MAZA-MASTI मालती एक कुतिया --12

FUN-MAZA-MASTI

 मालती एक कुतिया --12

 मालती भागती हुई सीधे लल्लन जी के कमरे में घुस गई...अन्दर लल्लन जी मिनी बार के पास खड़े होकर पेग बना रहे थे, मालती की आहट सुन वो मुड़े... उसे नंगी देखकर मुस्कुराए... और फिर पेग बनाने लगे... मालती ने अल्मिरा खोली और उसमे से बाथरोब निकाल कर पहन लिया.. और फिर लल्लन जी के करीब जाकर उन्हें पीछे से अपनी बाहों में ले लिया... अपनी चूचियां लल्लन जी की पीठ पर दबा दी! “इतनी नाराजगी किस लिए लल्लन जी... कोई गुस्ताखी हो गई मुझसे?” मालती ने प्यार से पूछा...
“अरे नहीं मालती... वो तो बस कुछ पुरानी यादें ताज़ा हो गईं...” शराब का घूँट लेते हुए लल्लन बोला!
“कैसी यादें लल्लन जी...? मुझे भी बताइये न... मन हल्का हो जाएगा आपका...” मालती अपने हाथ लल्लन जी के सीने पर फिराती हुई बोली!
“पहले तू वो अब्दुल को फोन कर दे... कि कल-परसों में जो कार्यक्रम करवाना है करवा ले... उसके बाद हम फ्री नहीं हैं...” लल्लन ने मालती को याद दिलाया कि वो उसकी बीवी नहीं सेकेटरी है...!
मालती ने अपने फोन से अब्दुल को फोन किया...
“हेलो... अस्सलाम वालेकुम अब्दुल जी...” प्यारी सी आवाज में मालती बोली!
“वालेकुम अस्सलाम... जी आपकी तारीफ़?” अब्दुल ने पूछा!
“जी मैं लल्लन जी की सेकेटरी.... मालती मिश्रा... वो आपने उन्हें फोन किया था सुबह.. उसी सिलसिले में मैंने काल की आपको”
“ओह हाँ हाँ... तो क्या बोले लल्लन जी...”
“लल्लन जी कल और परसों के लिए तैयार हैं... उसके बाद वो फ्री नहीं हैं... तो आपको जो भी रोड शो या जनसभा करवानी है वो इन दो दिनों में ही करवा लीजिये...”
“कल और परसों... पर इतनी जल्दी...” अब्दुल थोड़ा परेशानी भरी आवाज में बोला!
“अरे अब्दुल जी... लल्लन जी बिजी आदमी हैं... शुकर मनाइए उन्होंने आपके लिए इतना टाइम भी निकाल लिया... खैर.. ये सब छोडिये... तो फिर हम लोग कल सुबह मिलते हैं....” मालती ने बात थोड़ा जल्दी में निपटाई...
“हां जी क्यों नहीं... और लल्लन जी को हमारी तरफ से शुक्रिया कह दीजियेगा...
और मोहतरमा आपकी आवाज में नशा है.. शाम बन गई हमारी...”
“हाहा... जी अब इजाज़त दीजिये”
“जी बिलकुल...” और फिर अब्दुल ने फोन काट दिया!

“लल्लन जी और कोई काम बचा है मेरे लिए? या फिर मैं जाऊं?” मालती ने थोड़े प्रोफेशनल अंदाज में पूछा...
“काम तो बहुत बाकी है अभी... पर अगर तुम्हारी रुकने की इच्छा नहीं है तो तुम जा सकती हो” लल्लन भी अकड़ू अंदाज में बोला....
“बुरा मत मानियेगा... पर आज आप कुछ अलग लग रहे हैं...” मालती बोली..
“तुम जाओ अभी यहाँ से और मुझे अकेला छोड़ दो... वरना हमारे हाथों आज अनहोनी हो जायेगी” लल्लन बोला!
मालती ने फिर वहां से जाना ही ठीक समझा... उसने अल्मिरा से कपडे निकाल कर पहने और फिर फार्महाउस से सीधे अपने घर निकल गई...!
शाम हो चली थी.... वो थक भी गई थी... घर जाकर वो यूं ही सो गई....!


 लल्लन जी आज फिर से वही पुराने वाले लल्लन जी थे... एकदम मस्त- बकैत-ठरकी!
मालती उनके साथ वाली सीट पर बैठी थी... कल के लिए लल्लन जी ने मालती से माफ़ी भी मांग ली थी...पर मालती तो कभी उनसे नाराज़ हुई ही नहीं थी! ड्राइवर आगे गाड़ी चला रहा था और दोनों पीछे बैठे हुए थे...रास्ते में फिर जादा बातचीत नहीं हुई दोनों में! करीब डेढ़ घंटे के बाद लल्लन जी का काफिला अब्दुल खलीफा के बंगले में प्रवेश किया! अब्दुल खलीफा पिछली दो बार से चुनाव जीत रहा है... और अबकी बार उसकी हैट्रिक लगने की पूरी उम्मीद है! गोरी चमड़ी, तराशी हुई दाढ़ी, और छोटे बाल! लल्लन सिंह जी लम्बाई में दो इंच पीछे थे अब्दुल से! उसकी नीली आँखें किसी के भी खून को जमा सकती थीं!
पर भौकाल और पावर के मामले में अब्दुल को लल्लन जी की शरण में ही आना पड़ता था! पिछली बार भी लल्लन जी की वजह से ही जीता था वो... और अबकी बार भी अब्दुल इसी आस में लल्लन जी की शरण में गया था!
गाड़ी से उतरते ही अब्दुल ने लल्लन जी का अपने हाथो से स्वागत किया, और फिर दोनों अन्दर चले गए! मालती भी पीछे-पीछे उनके साथ ही अन्दर चली गई!
“मोहतरमा .... आप!... मालती मिश्रा... आपही से बात हुई थी शायद मेरी?” अब्दुल ने मालती की आँखों में देखते हुए पूछा!
उफ्फ्फ... मालती की तो हालत ही खराब हो गई.... अब्दुल की नीली आँखों ने उसके दिल की धड़कने बढ़ा दी!
“जी...जी... मैंने ही फोन किया था आपको...” अपने आप को सम्भालते हुए बोली!
“लल्लन जी मान गए आपको... हमें भी दिलवा दीजिये एक आध सेक्रेट्री...” लल्लन जी की तारीफ़ करते हुए अब्दुल ने कहा!
“क्या अब्दुल मियां चार-चार शादिया करके रखी हुई हैं और फिर भी....” हँसते हुए लल्लन जी बोले!
“अरे भाईजान आप तो जानते है... जो मजा बाहरवाली में है वो घर वाली में कहाँ” हाहाहा... दोनों ठहाके मार कर हंसे...मालती चुपचाप लल्लन जी के बगल में खड़ी दोनों का मजाक बन रही थी, और कोई चारा भी नहीं था उसके पास!
थोड़े बहुत हंसी मजाक के बाद सब रोड शो के लिए निकल गए! और फिर सारा दिन ऐसे ही बीत गया!
सारा दिन अब्दुल मियां की नज़रें मालती के जिस्म में जन्नत तलाशती रहीं! मालती भी उनके इरादे से वाकिफ हो चुकी थी जब अब्दुल मियां ने बहाने से उसकी गांड पर अपना हाथ फिराया! नजरो ही नजरों में इशारे हो रहे थे... मालती की मुस्कान ये बयान कर रही थी कि उसे अब्दुल का छेड़ना अच्छा लग रहा है..!
और इस मुस्कान ने अब्दुल मियां के इरादों को ठोस बना दिया...! वैसे भी बेवफाई तो मालती के खून में थी! लल्लन जी इस सब से अनजान अपने कार्य में व्यस्त थे... इलाके के लोगों की दिलचस्पी देख कर लल्लन जी का सीना चौड़ा हो रहा था, और पूरे जोश से अब्दुल खलीफा के लिए वोट मांग रहे थे वो! उधर अब्दुल खलीफा एक अलग मिशन पर निकल चुके थे!
मिशन था मालती मिश्रा! बस एक रात गुजारना चाहता था वो इस बला के साथ बस एक रात! लल्लन जी न होते तो वो भरी महफ़िल में चोद देता मालती को! पर लल्लन जी के होते हुए ये नामुमकिन सा था!
और फिर हुआ भी ऐसा ही... ख्वाब-ख्वाब ही रह गए अब्दुल मियां के! शाम हुई... प्रचार का कार्यक्रम समाप्त हुआ... और लल्लन जी वापस अपने घर हो लिए!
मालती को लल्लन जी का सिड्यूल पहले से ही पता था, और इसी लिए वो अब्दुल के इरादों को हवा दे रही थी और मजे ले रही थी! लल्लन जी ने रास्ते में ही मालती को उसके घर ड्राप किया और फिर अपने घर चले गए!
और फिर मालती को भी बिन चुदवाये सोना पड़ा!
ठाकुर को बिज़नेस की वजह से 6 महीनो के लिए यूरोप जाना पड़ गया जिसकी वजह से मालती को काफी स्पेस मिल गया, लल्लन जी के लिए! वरना बेचारी द्वंद्व में फंसी हुई थी... पर अब डिसीजन ले लिया था उसने... लल्लन जी ही सब कुछ हैं उसके! ये बात उसने अपने दिलो दिमाग में बसा ली थी!
पर मालती अभी भी लल्लन जी के लिए एक चूत के सिवा और कुछ नहीं थी! लल्लन जी को इंतज़ार था अफरोज का... अफरोज जब तक मालती की सारी हिस्ट्री पता नहीं लगा लेता तब तक मालती पर विश्वास नहीं कर सकता था लल्लन!
उधर अफरोज ने इन 10-15 दिनों में लगभग सब कुछ पता लगा लिया था मालती मिश्रा के बारे में! कॉलेज लाइफ से लेकर उसकी सेक्स लाइफ तक! कॉलेज के किस्से, और फिर शादी के बाद के किस्से... सब कुछ!
रमीज से लेकर ठाकुर तक! सब कुछ! कॉलेज से ही मालती सोशली काफी एक्टिव थी... काफी लोग जानते थे उसे... तो इसलिए देर नहीं लगी अफरोज को! मालती का सारा महल ताश के पत्तों की तरह खुल गया परत दर परत... एक एक करके सारी बातें अफरोज के सामने थीं!
पूरी फ़ाइल बनाई अफरोज ने मालती की!



“सरकार.. सारी कुंडली निकाल ली हमने इस मालती की... और ये रही उसकी जनम पत्री!” मालती के किस्सों की फ़ाइल अफरोज ने लल्लन को पकडाते हुए कहा!
“शाबाश मेरे शेर... तो मैडम पास हुई या नहीं?”
“अरे अब आप ही देख लीजिए... हमें तो कुछ समझ नहीं आ रहा है!” अफरोज नज़रें चुराते हुए बोला!
लल्लन जी ने सरसरी निगाह में फ़ाइल पलती... मालती की कुंडली बिलकुल वैसी ही थी जैसी लल्लन जी ने एक्स्पेक्ट की थी...वो पहली नजर में ही पहचान गए थे कि कितनी बड़ी वाली है ये औरत!

“ अब तो अग्नि परीक्षा देनी पड़ेगी साली को... पास हुई तो ठीक वरना शोभा बढ़ाएगी किसी रण्डीखाने की” लल्लन ने हँसते हुए कहा!
“हाँ सरकार” अफरोज बोला!
“लगाओ फोन साली को... बुलाओ फार्महाउस” लल्लन बोला!

अफरोज ने मालती को फोन किया और उसे बोला की जरा सज संवर के फार्महाउस पहुचे... लल्लन जी का आदेश है!
मालती तैयार हुई और फार्महाउस के लिए अपनी मर्सडीज़ में निकल ली...!
फार्महाउस के नौकर ने बताया कि ऊपर टेरेस पे हैं लल्लन जी!
शाम का समय था... हलकी हलकी हवा चल रही थी... ऊपर टेरेस पर लल्लन और अफरोज मालती का इंतज़ार कर रहे थे!
लल्लन नारंगी लंगोट में था... अभी अभी मालिश करके गया था मालिश वाला.... तेल से चमक रहा था उसका बदन!
मालती की चूड़ियों की खनखनाहट सुनकर दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा और मुस्कुराए! मालती जब ऊपर तेरे पहुची तो दोनों एक साथ बोल पड़े- “आइये मोहतरमा आइये... आपही का इंतज़ार हो रहा था”
मालती मुस्कुराई... और लल्लन जी को केवल लंगोट में देखकर शर्मा गई!
“हाहा... देखो तो शर्मा तो आइसे रहीं हैं जैसे अभी अभी शादी हुआ हो” लल्लन जी बोले... और फिर दोनों ठहाके मार कर हंसे...
“देखो आज हमको कहानी सुनने का दिल हो रहा है... सुनाओगी न?” लल्लन ने चुटकी लेके कहा..
“जी कहानी... आपको कहानियों का शौक कब से लग गया” मालती बोली!
“अरे हमारे शौक तुम क्या जानो... शौक बड़ी चीज है...” लल्लन जी बोले!
मालती मुस्कुराई...
“तुम्हारी कहानी सुननी है आज हमको...” लल्लन बोला!
“मेरी कहानी... समझी नहीं मैं कुछ...” मालती बोली!
“समझ जायेगी.. समझ जाएगी...गांड में डंडा घुसेगा तो सब समझ जायेगी” लल्लन की इस बात पर फिर से अफरोज ने हंस कर साथ दिया!
“देख हमने तेरी सारी कुंडली बनवा ली है... सारा किस्सा साफ़ है हमरे सामने अब.... ये फ़ाइल देख रही है अफरोज के हाथ में? तेरे काले कारनामों की फ़ाइल है... अब देख सब तेरे हाथ में है आज.... अगर तू सब सच सच बता देती है तो ये फ़ाइल यही जला दूंगा मैं... और अगर तूने होशियारी दिखाई तो तू जानती है अफरोज को... साली कसाई खाने में नुचवाऊंगा तेरा जिस्म” लल्लन पूरे रुतबे के साथ बोला!
ये सुन कर मालती लल्लन के घुटनों पे आ गई...”क्या जानना चाहते है आप... आपसे कुछ छुपाया है मैंने आजतक?”
“छुपाया नहीं तो बताया भी तो नहीं! चल अब ढोंग बंद कर और जो सवाल पूछू उसका सही सही जवाब दे... समझी...!”“तो अफरोज मियां कहाँ से शुरू किया जाए...?” लल्लन मुस्कुराते हुए बोला!
“सरकार आप को जहाँ से सही लगे” अफरोज बोला!
“चल ये खुद ही बताएगी...चल शुरू हो जा...” लल्लन बोला!
“जी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है..”
“साली तू है कौन... कहा पैदा हुई थी... बाप कौन है... माँ कौन है...”
मालती सहम गई... उसे अभी तक लग रहा था कि लल्लन जी उसके साथ कोई खेल खेल रहे हैं... पर लल्लन जी के तेवर देख कर अब उसे डर सा लगने लगा था...
“जी... किशोरीनंदन... किशोरीनंदन नाम है मेरे पिता जी का... गाँव के ही स्कूल में प्रिंसिपल थे पिता जी...” मालती इतना बोल ही पाई थी कि लल्लन बोल पड़ा.... “अफरोज भाई... सही जानकारी लाये हो... ये प्रीतमपुरा वाले मास्टर की ही बेटी है...” अफरोज हंसा...- “हाहा... ओफिशियाली तो उसी की बेटी है...”!
“हाँ.. पता नहीं किसके लौड़े के स्पर्म से पैदा हुई हो साली...” लल्लन और अफरोज दोनों हंसे!
“चल ये सब छोड़ ये बता कि ये रमीज कौन था?” लल्लन थोड़ा गर्माते हुए बोला!
रमीज का नाम सुनते ही सकपका गई मालती... पर वो माहिर थी.... उसने कहानी शुरू की... कहानी लगभग सच थी... पर कुछ चीजें उसने अपने अनुसार बदल दी... मालती का साथ उसके खूबसूरत चेहरे पर बह रहे आंसू दे रहे थे... उसकी बताई कहानी ने अफरोज और लल्लन दोनों को लगभग पिघला दिया...
“जी मेरे पति की सारी मेहनत की कमाई हड़प ली उस कमीने ने...अब मैं ठाकुर जी के पास नौकरी के लिए नहीं जाती तो मर जाती क्या? या फिर किसी फुटपाथ पर भीख मांगती? दो बच्चे हैं मेरे... उनका पेट कौन पालता” मालती ने अपनी कहानी ख़तम की!
लल्लन और अफरोज के लिए अब वो एक अबला नारी थी... जो समाज से लडती हुई अब अपने पैरों पर खड़ी थी! लल्लन अब उससे अकेले में बात करना चाहता था... उसने अफरोज को नीचे भेज दिया! अब लल्लन और मालती अकेले थे टेरिस पर... खुले आसमान के नीचे...!
लल्लन ने मालती को अपने पास बुलाया और अपने बगल में बैठा लिया... और उसका हाथ अपने हाथो में लिया और चूम लिया- “देखो करना पड़ता है ये सब राजनीति में... इसलिए हमने भी हिस्ट्री निकलवाई तुम्हारी... काहेकी ऐसे पूछते तुमसे तो तुम बताती नहीं... और सब्र हमसे होता नहीं है...” मालती के हाथ को सहलाते हुए वो बोला!
“कोई बात नहीं लल्लन जी हक है आपको जानने का...” मालती बोली!
“ये हुई न बात...”- लल्लन बोला....
“चलो अब बहुत हुआ... अब तुम हमरी हो... मौका दे रहे हैं तुमको ये जानते हुए भी कि तुम कितनी बड़ी रांड हो.. गुस्ताखी माफ़ करेंगे नहीं अबकी बार... ध्यान रखना”
“जी और गुस्ताखियाँ करने की हिम्मत अब मुझमे नहीं... और आपके साथ? सोच भी नहीं सकती...” मालती बोली!
लल्लन मुस्कुराया.... उसके दिमाग में कुछ चल रहा था...कुछ नहीं बहुत कुछ चल रहा था...!
मालती कुछ और बोलती इसके पहले ही लल्लन ने उसे निर्वस्त्र होने का इशारा कर दिया! निर्वस्त्र होती मालती को अफरोज आड़ से देख रहा था... जिस औरत की हिस्ट्री जानने के लिए उसने इतनी मशक्कत की थी, उसे देखने का हक तो बनता था उसका! चाहता तो वो चोदना था पर लल्लन जी के होते हुए वो ऐसा करने की सोच भी नहीं सकता था! निर्वस्त्र होते ही लल्लन ने मालती को अपने मर्दाने जिस्म से लगा लिया... और फिर मालती की जवानी को एक बार फिर निचोड़ लिया! प्यार इंसान को कमजोर बना देता है... मालती भी लल्लन के प्यार में इमोशनली थोड़ी कमजोर हो गई थी... आज की रात भी लल्लन के बिस्तर पर ही गुजारी उसने!


सुबह लल्लन जी उठे और फिर क्लब चले गए! वीकेंड पर क्लब जाना और अपने ख़ास दोस्तों के साथ बैडमिन्टन खेलना, और फिर थोड़ी तैराकी- ये नियम रहता था लल्लन का! शहर के नामी गिरामी लोग यहीं मिलते थे लल्लन से!
मालती उठी, और लल्लन को अपने साथ लेटा न पाकर उसने भी कपडे पहने और सीधे अपने घर चली गई! घर जाकर उसने अपने दोनों बच्चों से फोन पर बात की और उनसे जल्दी ही मिलने आने का बोला! आज उसे मानसी और वरून दोनों की बहुत याद आ रही थी! कल लल्लन और अफरोज ने उससे जो कुछ कहा था... वो सब भी याद आ रहा था उसे! अपने बाबूजी... अपनी माँ और वो सब कुछ जिसे वो लगभग भुला चुकी थी! वो पहली चुदाई... वो पहला प्यार.... सब कुछ! वो होली जब पहली दफा चोली फटी थी उफ्फ... आज भी मचल जाती है वो उस दिन को याद करके! यादों के झरोखों में खो चुकी थी वो... तभी फोन की घंटी बजी...
वो वापस होश में आई और फोन उठाया.... हेलो....
“हेल्लो....” दूसरी तरफ से आवाज आई...
“जी आप कौन?” मालती ने पूछा!
“जी हम तो बस आपके दीवाने हैं” मर्दानी आवाज में किसी ने अर्ज किया!
मालती पहचान नहीं पा रही थी...
“जी पहचाना नहीं आपको...” मालती बोली!
“हमारी आवाज़ इतनी जल्दी भूल गई? ”
“ओह अब्दुल जी... आप! माफ़ कीजियेगा पहचान नहीं पाई आपकी आवाज, सो सॉरी!”
“अरे माफ़ी वाफी छोड़ो... ये बताओ लल्लन जी से मुलाकात हो सकती है?”
“उम्म्म... ये तो लल्लन जी ही बता सकते हैं”
“और तुमसे...?”
“मुझसे? मुझसे क्यों मिलना है आपको?”
“बस तुम्हारी खूबसूरती का दीदार चाहिए था इन आँखों को...”
“तस्वीर लगा लीजिये हमारी.... हीही...” मालती हँसते हुए बोली!
“अच्छा अच्छा ठीक है मैं लल्लन जी से पूछ कर आपका अपॉइंटमेंट सेट करती हूँ”
“शुक्रिया जानेमन” अब्दुल खलीफा ने अपनी वजनदार आवाज में आशिकाने अंदाज में कहा!
और फिर फोन काट दिया!
“....जानेमन... हुह... जान न पहचान... मैं तेरा मेहमान” मालती बडबडाई!
और फिर मुस्कुराई... शायद उसे उस दिन वाली शरारतें याद आ गई जो उसने अब्दुल के साथ इशारों में की थी!
उधर लल्लन जी क्लब से वापस लौट कर सीधे पार्टी ऑफिस पहुचे, ऑफिस में अब कुछ काम वाम था नहीं तो सन्नाटा ही पसरा हुआ था! ऑफिस पहुच कर लल्लन जी ने कुछ इम्पोर्टेंट फोन काल्स कीं और फिर ऑफिस से निकल कर सीधे मालती के घर की ओर निकल लिए!
घर में कोई नहीं है ऐसा सोंच कर मालती बदन पर सिर्फ तौलिया लपेट कर बाथरूम से बाहर आ गई....
“ओह मैं तो डर ही गई...... आप कब आये?” मालती बोली!
“बस अभी अभी” मालती के भीगे बदन को निहारते हुए लल्लन ने कहा!
मालती मुस्कुराई और अपने बदन को उसी तौलिये से पोंछने लगी.... लल्लन उसे यूं ही देख रहा था! उसकी आँखों से लार टपक रही थी.... बिस्तर की कल रात की सलवटें अभी तक ठीक नहीं की थी मालती ने... और अब शायद फिर से वो चुदवाने के लिए लल्लन को अपने हुस्न के जलवे दिखा रही थी!
“क्या बात है बड़ी जवानी चढ़ रही है सुबह सुबह?” लल्लन बोला!
“जी ये तो आपका कमाल है... वरना ये जवानी किस काम की...” मुस्कुराते हुए मालती बोली!
“हाहाहा.... तेल लगाना तो कोई तुमसे सीखे...” लल्लन बोला!
“अभी कपड़े पहन ले...” लल्लन ने कहा!
मालती मुस्कुराई... और फिर कपड़े पहन लिए... सच ही कहते हैं लोग... लंड के गुरूर के आगे औरत को झुकना ही पड़ता है...!
मालती किचन में चली गई और लल्लन अखबार पढ़ने लगा!
खाना खाया और फिर से काम क्रीड़ा.... दिल खोल के चुदाई का कार्यक्रम चल रहा था! लल्लन जैसे मर्द को भी मालती ने अपने हुस्न का दीवाना बना ही लिया! दिन में दो-चार लोगों से मिलना... और फिर घर आकर मालती के जिस्म को रौंदना.... अगले कुछ दिन तक यही चला!


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Sunday, April 20, 2014

FUN-MAZA-MASTI मालती एक कुतिया --11

FUN-MAZA-MASTI

 मालती एक कुतिया --11

 उधर अफरोज़ अपने काम में बिजी था.... वो अकेले ही मालती की सारी हिस्ट्री पता लगा रहा था! पर मालती को इसकी भनक तक नहीं थी! और अब लल्लन से चुदने के बाद मालती ने ठाकुर को भी इग्नोर करना शुरू कर दिया था! उसे पता था कि ठाकुर उसे सजा देगा इसकी पर उसने ठाकुर और लल्लन के बीच लल्लन को ज्यादा प्रियोरिटी दी! इलेक्शन की भागा दौड़ी के बीच जब मौका मिलता लल्लन और मालती एक दूसरे के जिस्म के मजे लेते! मालती को जैसे नई जिंदगी मिल गई हो... लल्लन के मन करने के बाद उसने कभी सफ़ेद साड़ी नहीं पहनी!
उसे प्यार हो गया था लल्लन से...लल्लन के औजार से... और लल्लन के अन्दर के जानवर से!
और लल्लन भी उसके सारे मजे ले लेना चाहता था... कहाँ कहाँ किस किस पोज़ में चोदा था उसने मालती को बीते 10 दिनों में खुद मालती को भी याद नहीं था...
उसने जाने अनजाने में ही सही, पर खुद को लल्लन की रखैल कबूल कर लिया था! लल्लन ने कभी जिक्र नहीं किया... पर मालती दिल से उसे अपना जिस्म और जान सौप चुकी थी! वो खुद को भूल चुकी थी, अब वो एक नई कहानी का हिस्सा थी! लल्लन की कहानी का... जिसमे सारी स्टोरी लल्लन की लिखी होती थी! कलम लल्लन का लौड़ा था और पेज मालती का जिस्म!
लल्लन जी का मोटा हथियार उसे रोज जन्नत की सैर कराता था अब! एक बार फिर से वो सैर पर निकल चुकी थी... लल्लन जी के साथ, सब कुछ भुला कर !
ऑफिस में भी मालती की वाही जगह थी जो अफरोज की थी... लल्लन की क्या करते हैं, कहाँ जाते हैं, क्या खाते हैं, किससे मिलते हैं... मालती को सब पता होता था, ‘पर्सनल’ सेकेटरी जो थी लल्लन की!
बिस्तर तो बहुतों ने गरम किया था लल्लन जी का... पर मालती में जो बात थी वो औरों में नहीं थी... मालती आग लगा देती थी दिलो जिस्म में, और यही कारण था कि मालती ने इतनी जल्दी लल्लन जी के दिल में अपनी जगह बना ली थी!
ऐसा नहीं था कि मालती ठाकुर को भुला चुकी थी... ठाकुर भी 10-15 दिन में मालती की लेने आता था! और मालती ठाकुर से भी चुद्वाती थी...! ठाकुर और मालती के बीच क्या रिश्ता है ये लल्लन जी समझते थे, पर उन्हें इसी में मजा आ रहा था, किसी और की माल जब अपना बिस्तर गरम करे तो मजा बढ़ ही जाता है!
आज सन्डे था, मतदान कल हो चुका था, और अब बस जीत की घोषणा होने का इंतज़ार हो रहा था... 15-20 दिनों के बाद आज फुर्सत मिली थी लल्लन जी को फुर्सत से मजे लेने की! सुबह सुबह ही लल्लन जी ने गाड़ी उठाई और निकल लिए मालती के घर की ओर! मालती नहा रही थी...
लल्लन जी ने मालती के घर पहुच कर उसे फोन किया... पर मालती ने फोन नहीं उठाया... वो बाथरूम में थी... अभी अभी अपनी झांटे शेव की थी उसने... और अब बाथटब में लेटी यादों में खोई हुई थी!
“टिंग-टोंग... टिंग टोंग” लल्लन जी ने डोरबेल बजाई....
“उफ्फ्फ.... कौन होगा इस समय... सुबह सुबह आ जाते हैं लोग भी....” मालती बुदबुदाई.... और फिर टब से निकलकर बाथरोब लपेटा और दरवाजा खोलने चल दी... दरवाजा खोलते ही वो शर्मा गई....
“बड़ी लम्बी उमर है आपकी...आपको ही याद कर रही थी मैं”
“नहाते हुए?”लल्लन बोला!
मालती शर्मा गई,मालती ने अपनी नजरें नीचे झुकाई...और बाथरोब आगे से खोल दिया! उफ्फ्फ..... लल्लन ने मालती को अन्दर धकेला और जल्दी से दरवाजा बंद कर मालती पर झपट पड़ा.... मालती के भीगे बदन पर लल्लन ने चुम्बनों की बौछार लगा दी... अपने पैजामे का नारा भी खींच दिया और लंड निकाल कर सीधे मालती की चूत में पेल दिया! औह... ओह माय गॉड... हाई रामा... मालती को लल्लन ने अपने लंड पर उठा रखा था... और ऐसे ही हवा में उठाकर मालती को चोद रहा था! मालती चरम पर थी... उफ्फ्फ... आह... और... यस...लल्लन जी... आह.... यूं ही चोदते चोदते वो मालती को बिस्तर तक ले गया और फिर मालती को बेड पे पटक दिया, उसके ऊपर खुद भी कूद गया! “आउह.... लल्लन जी....कितने ज़ालिम हैं आप.... आराम से करिए न....” मालती आहें भरती हुई लल्लन के नीचे लेटी लल्लन के बदन को सहला रही थी... लल्लन ने सट्ट से अपना हथियार मालती की चूत में सरका दिया...”आऊउह....” मालती ने अपनी गाब्द ऊपर उचकाई और लल्लन का लौड़ा पूरा अपनी चूत में निगल गई... “उम्म्ह लल्लन जी... केला बड़ा सख्त है आपका...” “अरे मेरी अनारकली.... अब तुझ जैसी माल के लिए सख्त नहीं होगा तो क्या तेरी नानी के लिए सख्त होगा” और फिर लल्लन जी ने धक्के लगाने शुरू और फिर लल्लन जी ने धक्के लगाने शुरू किये...
आज लल्लन जी कुछ जादा ही जोश में थे...हर धक्के में मालती बिस्तर पे दो इंच ऊपर सरक जाती... लल्लन जी आज किसी भेडिये से कम नहीं थे...आज वो मालती को इस तरह छोड़ रहे थे मानो लैब्राडोर कुत्ता किसी पामेरियन कुतिया को चोद रहा हो! “आह लल्लन जी... हाँ और तेज़.... आह... औह...” एक्साईटमेंट में मालती लल्लन की पीठ पर नाखूनों को गडा रही थी... “आऔउह... लल्लन जी.... आह.... औह....मालती लल्लन के गले को चांट रही थी, वो शायद चरम पर पहुच चुकी थी, फिर अचानक उसने लल्लन जी के कन्धे में अपने दांतों से काटती हुई झड़ गई... आह लल्लन जी के जिस्म से लिपटी मालती अभी भी चुद रही थी... क्योंकि झड़ी वो थी लल्लन जी नहीं... लल्लन जे ने उसे पलटा और अब पीछे से ही उसकी चूत में अपना खूटा अन्दर बाहर कर रहे थे... लल्लन जी का लौड़ा अब उसकी चूत में फिसल रहा था.... ज्यादा देर तक लल्लन जी खुद को संभाल नहीं पाए और फिर मालती की चूत में उनका ज्वालामुखी फूट गया.. और इसके बाद मालती को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ कर रिलैक्स हो गए!
“उम्म्ह...” “म्म्म्ह...” दोनों मस्ती में आहें भर रहे थे...
“इतनी सुबह सुबह... वो भी यहाँ...” मालती ने धीरे से पूछा!
“हाँ मेरी गरम गोदाम... तू चीज़ ही ऐसी है... रहा नहीं गया हमसे...”
“हेहे... आप भी न...”
लल्लन पीछे से मालती के जिस्म को सहलाए जा रहा था... उसकी साँसे मालती अपने कानों में महसूस कर रही थी...!
“वैसे ठाकुर ने घर अच्छा दे रखा है तुझे... क्या कीमत देती है उसे इस घर की”
“ओह लल्लन जी... मैनेजर हूँ मैं उनके होटल की...”
“मैनेजर ही है या फिर....? शक होता है हमें तुम पर... कभी कभी...”
लल्लन की बात को सुन कर मालती सहम सी गई... उसे समझ नही आ रहा था क्या जवाब दे.....
“आपका तो दिमाग ही खराब हो गया है लल्लन जी.... कुछ भी बोलते हैं... ठाकुर दोस्त था मेरे पति का... छी छी मैं तो सोच भी नहीं सकती” मालती थोड़ी नाराज होती हुई बोली!
“अरे अरे नाराज काहे होती हो... हम तो मजाक कर रहे थे...” लल्लन बोला!
और फिर मालती ने मुस्कुराते हुए लल्लन के सीने पर अपना सर रख दिया!
“चिंता मत करो अब... अब तुम हमारी हो... कमी नहीं खलने देंगे किसी चीज़ की तुम्हे...” लल्लन ने मालती की नंगी पीठ को सहलाया!
“ब्रेकफास्ट किया आपने?”
“हाँ... अभी अभी तो किया...” लल्लन ने आँख मारी!
“ओहो... आपको तो हर समय शरारत सूझती है बस”
लल्लन मुस्कुराया- “चल एक पेग दारू लेकर आ...”
“जी दारु तो नहीं है घर पर”
“ये क्या बात हुई साला... रुको अभी मंगवाते हैं”
“उम्म्ह लल्लन जी... आज रहने दीजिये न...मेरे लिए”
“चल फिर रहने दिया”
मालती मुस्कुराई.... कितने अच्छे हो आप....
“पर तू कमीनी है साली...” मालती की गांड पर बने टैटू पर उंगलियाँ फिराते हुए लल्लन बोला...
मालती लल्लन जी के थोड़ा और करीब आ गई..और अपनी एक टांग लल्लन जी की दोनों टांगो के बीच में घुसेड़ दी.... अब उसकी जांघ लल्लन जी के अन्डुओं को छू रही थी... अन्डुओं में मालती जी जांघ छूते ही लल्लन जी के लंड ने हरकत की.. और अगले ही पल उनका हथियार एक बार फिर से लोड हो चूका था!
“ले फिर से खड़ा कर दिया तूने इस कमबख्त को..”
“हीही... मालती खिलखिलाते हुए हंसी”
“हंस मत साली... अबकी बार है तेरी गांड की बारी..”
“उई माँ...शेरो-शायरी??”
“पलटो रानी... वरना हम पलटाये तो पड़ जाएगा भारी”
मालती मुस्कुराते हुए पलट गई....
“कितने बेरहम हो आप... जान निकल जाती है जब पीछे से लेते हो”
“साली टैटू एक्सटेंड करवा ले अब... “शुक्रिया” के आगे हमरा नाम भी गुदवा ले...” इस बार लल्लन ने टैटू पर अपना लंड रगड़ा! मालती की कमर पकड़ कर उसे थोड़ा ऊपर उठा दिया... इशारा पाते ही मालती घोड़ी बन गई....
“जानती हो घुड़सवारी के चैम्पियन हैं हम...”
“उम्म्ह... सच्ची...”
“हां मेरी जान... वैसे अभी पता चल जाएगा तुझे...”
और लल्लन जी ने पास में पड़ा ल्यूब मालती की गांड में भर दिया...
“चट” .... “चट्ट” दोनों चुत्ताडों पर लल्लन की उंगलियाँ छप चुकी थीं...
“आउच.... धीरे से लल्लन जी...”
“चुप कर साली....” मालती के बाल अब लल्लन के हाथों में थे...
धीरे से लल्लन ने उसके बालों को खीचा.... आह निकल गई बेचारी के मुह से... मुह के साथ साथ गांड भी खुल गई, और मौका पाते ही लल्लन जी ने अपना हथियार अन्दर डाल दिया...
इतने घाटों का पानी पीने के बाद भी मालती की गांड एकदम कसी हुई थी...
अब लल्लन जी मालती के बाल पकड़ कर उसकी गांड मार रहे थे... वो बस आह-ऊह के साथ हर स्ट्रोक का मजा ले रही थी... मालती सातवें आसमान में थी... और लल्लन जी तो मानो स्वर्ग में ही थे... लल्लन का लंड भी मालती के आगे टिक नहीं पा रहा था... एक बार फिर से वो वीर्य उगलने के लिए उतावला हो रहा था... लल्लन जी ने मालती को कास के अपनी बाहों में भींच लिया और फिर थरथराते हुए मालती की गांड में अपना पानी छोड़ दिया!
मालती भी रिलैक्स हुई और लल्लन जी क लौड़े से अपनी गांड को अलग किया!
तभी मालती का फोन बजा-
फोन मालती की बेटी मानसी का था...
“हेल्लो...”
“हेल्लो मम्मा ... कैसी हो...”
“अच्छी हू बेटा... तू ठीक है?”
“हाँ मम्मा मैं भी एकदम मस्त हूँ...”
“और कोलेज में अच्छा लगता है अब?”
“अच्छा? बोहोत अच्छा लगता है मम्मा.... फ्रेंड्स भी अच्छे मिल गए हैं... मुझे यहाँ...”
“ये तो और भी अच्छी बात है...” लल्लन अभी भी मालती के बूब्स सहला रहा था!
“मम्मा... वो हमारे कॉलेज में फेस्ट होने वाला है... तो उसके लिए शौपिंग करनी थी मुझे...”
“ओह तो इसलिए याद आई मम्मा की...” मालती ने टान्ट मारा!
“ओहो मम्मा.... आई लव यू....”
“चल ठीक है... कल मैं पैसे पडवा दूँगी अकाउंट में... खुश??”
“थैंक यू सो मच मम्मा....”
“और तू घर कब आएगी?”
“छुट्टी तो होने दो मम्मा...”
“ओके बाबा.... ठीक है... मिस करती हूँ तुम्हे मैं..”
“मैं भी मम्मा.... लव यू... कभी वरुन को लेकर आओ न मिलने..”
“हाँ आती हूँ... जल्दी ही आउंगी बेटा...”
“ओके मम्मा... बाय.... टेक केयर..”
“यू टू बेटा” और फिर फोन डिसकनेक्ट हो गया
“तो मानसी बिटिया थी फोन पे....” लल्लन ने जांघ पर हाथ फिराते हुए पूछा..
“हाँ.... मानसी थी... 6 महीने हो गए मिले उसे...”
“6 महीना तो बड़ा समय है... मिल आओ जाके किसी दिन..”
“ह्म्म्म.... मैं भी वही सोच रही हूँ..... बोल रही थी फेस्ट होने वाला है ... शौपिंग करनी है”
“अच्छा तो पैसे चाहिए... अकाउंट नंबर बता दे हमें, हम अभी ट्रान्सफर किये देते हैं...”
“अरे मैं कल बैंक से कर दूँगी...”
“अरे एहसान नहीं कर रहे हैं... समझी... हम तो ये कह रहे थे कि आज सन्डे है... बिटिया शौपिंग कर लेगी जाके... नहीं तो फिर बंक करके जायेगी शौपिंग करने...”
“ह्म्म्म... सही कह रहे हैं आप लल्लन जी...”
मालती उठी और एक डायरी में से मानसी का बैंक अकाउंट नंबर देख कर लल्लन जी को बताया...लल्लन जी ने बीस हज़ार रुपये तुरंत मानसी के अकाउंट में ट्रान्सफर कर दिए! “लो जी पहुच गए पैसे”
थोड़ी देर में फिर से मानसी का फोन आया...
“मम्मा... यू आर ग्रेट... लव यू सो मच”
“लव यू टू बेटा..” लल्लन की ओर देखती हुई मालती बोली!
और फिर मानसी ने फोन काट दिया!
“खुश है न मानसी बिटिया...”
“हाँ बहोत खुश है.... आप सच में कितने अच्छे हो... आज मुझे मानसी के पापा की याद आ गई...” मालती थोड़ी भावुक होती हुई बोली!
“अरे मेरी जान... कमी खलने नहीं देंगे हम तुम्हे मिश्रा जी की...और फिर कम थोड़े हैं उनसे किसी मामले में..”
“कम... हेहे... वो उन्नीस थे तो आप बीस हैं...”
“हाँ तो कमर पे गुदवा ले..हमारे नाम का टैटू भी...”
मालती शर्मा गई... “आप भी न...कुछ भी बोलते हैं”
“कुछ भी नहीं मेरी पंडिताइन... चुनाव का पाणिनाम आने तक ये काम हो जाना चाहिए वरना... हम खुद बना देंगे टैटू...” सिगरेट की ओर निशाना करते हुए लल्लन ने कहा!
लल्लन जिद्दी था... मालती ये बात अछि तरह से जानती थी... जो ख्वाहिश लल्लन ने की थी अब मालती के पास उसे पूरा करने के अलावा कोई चारा नहीं था...
“अच्छा बाबा ठीक है...पर मेरी भी एक शर्त है...”
“क्या शर्त है मेरी जान...”
“चुनाव के बाद मुझे कोई बड़ी जिम्मेदारी दीजियेगा....देंगे न?”
“अरे तेरी गांड की खातिर कुछ भी देंगे तुझे... हाहाहा...”
“लल्लन जी.... प्लीज़....प्यार करने लगी हूँ आपसे मैं”
“हम भी तो वही कर रहे हैं तुमसे.... प्यार...” लल्लन चुटीले अंदाज में बोला!
और मालती फिर से लल्लन के जिस्म के नीचे थी...
“कितना चोदियेगा आज....?” मालती ने शिकायत भरे अंदाज में पूछा!
“तुम्हरी बुर का भोसड़ा बना के जायेंगे आज....बूझी...” और फिर लल्लन ने उसके बाएं चूचे को अपने मुह में भर लिया और अपना लोहा मालती की चूत में डाल दिया!
मालती एक बार फिर जंगली घोड़े के नीचे थी... चुदने को तैयार...
लल्लन जी ने इस बार भी कोई कसर नहीं छोड़ी... गहरे गहरे धक्के मालती की मादकता को मर्दानगी का चरम आनंद दे रहे थे....
कुछ देर के बाद लल्लन जी एक बार फिर से मालती के ऊपर निढाल होकर गिर गए.... मालती उनके नीचे उनके जिस्म से लिपटी पड़ी थी!
“ट्रिंग ट्रिंग... ट्रिंग ट्रिंग... ट्रिंग ट्रिंग...”
किसकी अम्म्मा मर गई... साला फुर्सत से दो पल भी नहीं जीने देते... लल्लन फोन पर बडबडाया... और मालती को अपने नीचे से थोड़ा ढीला छोड़ा... मालती ने थोड़ा खिसक कर लल्लन जी का मोबाइल उठाया और लल्लन को दिया....


 “अब्दुल भाई...इसको आज हमरी याद कैसे आ गई”
“हलो....फरमाइए अब्दुल जी....”
“अल्ला हाफिज़ लल्लन सिंह जी.... नमस्कार आपको”
“नमस्कार भाई नमस्कार...”
अब्दुल: “और सब खैरियत?”
लल्लन: “हाँ ऊपर वाले की दया से सब खैरियत से निपट गया... अब तो बस फुर्सत में बिस्तर गरमा रहे हैं”
अब्दुल: “इंशा अल्ला जीत आपकी ही हो”
लल्लन: “अरे इसमें भी कोई शक है...पिछले पंद्रह सालों में हरा पाया है हमको कोई?”

अब्दुल: “जी ये बात तो सौ टका सच है आपकी... बस आपसे इसी सिलसिले में थोड़ी मदद चाहिए थी”
लल्लन: “हम कैसी मदद कर सकते हैं आपको... हो सकेगी तो जरूर करेंगे...”
अब्दुल: “भाईजान काप्म्पेनिंग का लास्ट फेज़ चल रहा है.... अगर आप हमारे इलाके में आके एक दिन हमारे साथ एक छोटी सी सभा कर देते तो... हमारी भी जीत बस पक्की ही हो जाती....”
लल्लन: “हाहाहा.... क्या भाई अब हमको आना पड़ेगा क्या...सुने थे भौकाल है तुम्हारा बहुत... क्या हुआ?”
अब्दुल: “जी भौकाल तो है पर आपके जितना कहाँ... और फिर बाहुबली हैं आप... चुनाव बाद जिसकी सरकार बनवाइएगा... आपके साथ ही रहेंगे हम...”
लल्लन मालती की जुल्फों से खेल रहा था...
लल्लन: “ठीक है बताते हैं हम शाम तक... हमारी सेकेटरी बात करेगी आपसे...” मालती की ओर मुस्कुराया!
अब्दुल: “धन्यवाद लल्लन जी....”
और फिर लल्लन ने फोन काट दिया!
“बड़ी डिमांड है आपकी...” मालती अपने अंदाज में बोली...
“अरे आज हम इनके काम आयेंगे तभी न कल को ये हमरे काम आयेंगे.... यही कुदरत का उसूल है”
“चल अब तैयार होजा... मुजरा देखना है हमको तुम्हरा...”
“मुजरा... हाय रामा... मैं कोई कोठे वाली नहीं हूँ...”
“तो बन जाओ.... आज के लिए... हमरे लिए...”
मालती मुस्कुराई....
“क्यों लंड की गर्मी शांत हो गई क्या?”
“हरामन... हमरे लौड़े में अभी भी इतनी गर्मी है की तेरा पूरा खानदान पेट से कर दें.... समझी....”
“ओये होए ... मर जावा....”
लल्लन ने धीरे से मालती की गांड पर चांटा मारा... “चल जा... पहन ले कपडे...”
“ओहो लल्लन जी... कपडे क्यों... नंगी भी तो कर सकती हूँ मुजरा...”
“बेहेन की लौड़ी... समझ नी आरी तेरे को....” एक और चटाक मारा!
मालती मुस्कुराई... और लल्लन के मुरझाये लौड़े को चूम कर बाथरूम में घुस गई.... जल्दी से शावर लिया और फिर टॉवल से अपना बदन पोंछती हुई बाहर आ गई.... लल्लन जी को बेचैन करने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती थी वो...
टॉवल लल्लन जी के पास फेंक दी...लल्लन जी उस टॉवल को अपने मुह से लगा कर मालती की खूबसूरती को निहार रहे थे... मालती उनकी ओर देखती और हल्की सी मुस्कान देती, तो लल्लन जी बस तड़प कर रह जाते... मालती ने फिर अल्मिरा खोली.... अल्मिरा से उसने एक घाघरा चोली बाहर निकाली... मालती ने घाघरा ऊपर से अपने जिस्म पर डाला और नारा बाँधा... और फिर लल्लन जी की आँखों में देखते हुए घाघरे को कमर से नीचे सरका दिया.... आये हाए क्या लग रही थी वो उस मैरून- सुनहरे घाघरे में.... फिर मालती ने चोली उठाई और उसे पहन लिया.... अब बारी थी चोली के पीछे की डोरी बाँधने की...
“हेल्प करेंगे थोड़ी...”
“जरूर करेंगे.... औरतों की हेल्प करने में हमें वैसे भी बहुत मजा आता है...”
“तो ये डोरी बाँध दीजिये न आके...”
“हाहा... डोरियाँ तो बस खोलना जानते हैं हम... ये नहीं होगा हमसे...”
“कितने कमीने हैं आप”
“वो तो हैं....” लंड पर तौलिया मसलते हुए लल्लन जी बोले!
फिर मालती के पास और कोई चारा बचा भी नहीं था.... थोड़ी कोशिश के बाद उसने डोरी बाँध ली...! ऊपर एक हलकी चुन्नी डाल कर मालती पूरी तरह तैयार थी...
“बोलिए जी... कैसे गाने पसंद करेंगे...”
“अरे मेरी अनारकली... बिन मदिरा मुजरा... कुछ जमेगा नहीं.... अब तुम पहली बार हमारे लिए नृत्य करोगी... शराब तो होनी ही चाहिए....” लल्लन अपने सीने के बालों में उंगलियाँ फिराते हुए बोला!
“ओहो लल्लन जी... क्या मुझमे इतना नशा नहीं? मेरे होते हुए आपको शराब की कमी... मर क्यों नहीं गई मैं ये सुनने से पहले...” मालती ड्रामाक्वीन की तरह बोली....
“अरे मेरी अनारकली... तेरे जिस्म की लत तो ऐसी लगी है कि पूछो मत...”
मालती मुस्कुराई.... लल्लन ने फिर से उसे देखते हुए अपना लौड़ा खुजाया...

“इतनी खुजली मच रही है तो मैं ही खुजा देती हूँ....” मालती ने चुटकी ली...

“आह मेरी जान तेरी इसी अदा का तो दीवाने हैं हम....” ये कहते हुए लल्लन जी बिस्तर से उठे, और अपने कपडे ढूँढने लगे...
मालती लल्लन जी को कपडे ढूँढ़ते देख घबरा गई.... उनके पास आई... और पैरों पर बैठ गई.... ”क्या कोई गलती हो गई मुझसे.... लल्लन जी.... क्या हुआ...”
“हाहा... अरे ऐसी कोई बात नहीं है.... वो तो हमने सोंचा कि तुम तैयार हो गयी हो तो हम भी तैयार हो जाते हैं... देखो हमारा कुरता कहाँ पड़ा है...”
मालती मुस्कुराई.. और उठकर लल्लन जी को उनका कुरता दिया... लल्लन ने कुरता पहना और बिस्तर पे पड़े चादर को लुंगी की तरह नीचे लपेट लिया!

“चलो” लल्लन जी ने झटके में कहा!
“कहाँ?” मालती थोड़ी सरप्राइज़ होती है!
“अरे अब आपका नृत्य तो फार्महाउस में ही न देखेंगे....यहाँ तुम्हारे बेडरूम में तो नहीं न देखेंगे...और फिर मदिरा भी तो नहीं है यहाँ”
“आप नहीं मानेगे...मुझे पता होता तो मैं पहले ही शराब मंगाकर रख लेती ” मालती शिकायत भरे अंदाज में बोली!
लल्लन ने मालती की कमर को अपने बाएं हाथ से पकड़ा और उसे अपने करीब ले लिया और उसे लेकर बाहर निकल गया... मालती को गाड़ी में बैठाया और गाड़ी सीधा फार्महाउस की ओर मोड दी!
पर ये क्या... ये रास्ता तो नया है... “कहाँ चल रहे हैं हम लल्लन जी? आपका कोई और भी फार्महाउस है क्या?”
“अरे मेरी अनारकली... एक सरप्राइज है तुम्हारे लिए...”
“सरप्राइज़.... वाओ...”
“हाहा... तुम छोरियों को सरप्राइज़ बड़े पसंद होते हैं” लल्लन बोला!
मालती को किसी ने बड़े दिनों के बाद छोरी बोला था...वो शर्मा गई... कॉलेज में एक जाट-बॉयफ्रेंड था उसका जो उसे चोदते समय छोरी ही बोलता था!
“क्या सरप्राइज़ है लल्लन जी... बताइये न... प्लीज़..”
“अरे सरप्राइज़ बता दिया तो सरप्राइज़-सरप्राइज़ कहाँ रह जाएगा!” मालती की जांघ पर हाथ मरते हुए लल्लन जी बोले!
गाड़ी वापस रस्ते पर आ चुकी थी... ये शोर्टकट था जो मालती ने कभी नहीं देखा था... थोड़ी देर बाद फार्हाउस आ गया!
“क्या सरप्राइज़ है लल्लन जी....?”
लल्लन जी मालती को लेकर अपने गैराज पहुचे... “वो लाल रंग की मर्सडीज़ देख रही हो? तुम्हारी है आज से... नौकर के हाथ से चाबी लेकर मालती के हाथ में थमा दी....”
“ओह माय गॉड.... लल्लन जी.... you are so great.... मुझे समझ नहीं आ रहा कि कैसे थैंक्स बोलूं आपको... लॉन्ग ड्राइव पे चलें?”
“हाहा... शुक्रिया की कोई जरूरत नहीं है मेरी जान... ये ईनाम है तुम्हारा... इतना मेहनत जो की हो इलेक्शन में”
मालती मुस्कुराई... और लल्लन जी का हाथ पकड़ कर उन्हें कार के अन्दर बैठाया... और फिर खुद ड्राइविंग सीट पर आ कर बैठ गई...
गाड़ी अगले ही पल हाईवे पर थी... लल्लन जी मालती को निहार रहे थे... मालती गाड़ी चला रही थी... मुस्कुरा रही थी... खुश थी वो इस तोहफे से... ये सच में एक सरप्राइज़ था उसके लिए!
“तो फिर आज का मुजरा कैसल..?” लल्लन ने मालती के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा!
“अरे ऐसे कैसे कैंसल लल्लन जी... आज तो आपके लिए स्पेशल मुजरा होगा,,,” मालती चहकती हुई बोली!
“तू चुदेगी... बहोत बुरा चुदेगी मुझसे....हाहाहा....” लल्लन ने हवसी अंदाज में अपने इरादे बयाँ किये!
हेहे... मालती तो थी ही चुदने को बेकरार....
“अरे इधर- इधर बस यहीं से मोड़ना था...”
“ओहो... पहले बताना चाहिए था आपको....” मालती ने गाड़ी बैक की और फिर लल्लन के बताये रास्ते पर गाड़ी बढ़ा दी....
“हा... आगे से लेफ्ट....”
मालती ने आगे से लेफ्ट लिया...
थोड़ी देर के बाद सामने एक खँडहर सा दिखा.... “बस यहीं किनारे लगा ले...”
लल्लन जी पूरे हक से बोले!
“ये कहाँ ले आये आप मुझे?”
“अरे अन्दर चल- जन्नत दिखाते हैं तुमको आज...” मालती की चुन्नी हटाते हुए लल्लन जी बोले!
मालती मुस्कुराई.... “आप भी न लल्लन जी...”
दोनों गाड़ी से बाहर निकले.... लल्लन ने मालती से चाबी ली और पीछे डिग्गी खोली... और उसमे रखी शराब की पेटी को बाहर निकाला...
“ले मेरी जान... इसे उठा और लेकर चल अन्दर...”
मालती को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि लल्लन के दिमाग में आखिर चल क्या रहा है... वो था ही सनकी... पर मालती को मजा आ रहा था इस खेल में... उसने शराब की पेटी उठाई... पेटी काफी वजन थी... और उसे उठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी मालती को... और फिर आखिर उसने किसी तरह पेटी को उठाया और खँडहर के अन्दर चल दी... लल्लन ने गाड़ी स्टार्ट की और गाड़ी को सीधे खँडहर के अन्दर तक ले गया....
और फिर अन्दर ले जाकर गाड़ी खड़ी की और गाड़ी से बाहर निकला... मालती भी बेचारी शराब की पेटी लेकर धीरे धीरे अन्दर पहुच ही गई....
“ये कौन सी जगह है लल्लन जी... कहाँ ले आये मुझे...”
“अरे मेरी जान... आज तो तुम्हारा मुजरा हम यहीं देखेंगे...” लल्लन जी लुंगी ऊपर उठाते हुए बोले...
लल्लन की हवस आज सातवें आसमान पर थी... और इस हवस की जिम्मेदार और कोई नहीं मालती खुद थी...
इस खँडहर से लल्लन की पुरानी यादें जुडी हैं...
(बात आज से करीब 18 साल पहले की है... आज जो दबदबा लल्लन का है पहले वो दबदबा पुरोहित जी का हुआ करता था...पुरोहित जी अच्छे आदमी थे... हर कोई मानता था उन्हें.. पर लल्लन के परिवार और पुरोहित जी के परिवार में कभी नहीं बनी थी.. रेत का काला घंधा करते थे पुरोहित जी... और अवैध रेत यहीं इसी खँडहर में रखते थे! सबमे मिलीभगत रहती थी इसलिए कोई कुछ बोलता भी नहीं था...ये खँडहर लल्लन के पुरखों की हवेली हुआ करती थी... पुरोहित जी ने धोके से कब्ज़ा कर लिया था...और अपने काले धंधों का अड्डा बना कर रखा था!
लल्लन बचपन से ही खुराफाती था... अपने परिवार की ये बेज्जती उसे कतई रास नहीं आती थी.... कॉलेज से जब वो ग्रेजुएशन करके वापस आया तो पहला काम उसने अपने परिवार को उसकी खोई शान वापस दिलाने का किया! उसने गहरी चाल चली! पुरोहित की बेटी कामिनी लल्लन के साथ ही कॉलेज में पढ़ती थी.... वो भी बेचारी लल्लन के पौरुष की दीवानी हो ही गई... और लल्लन ने मौका न गवाते हुए उसे अपने प्रेमजाल में फँसा लिया! वहाँ कोल्लेज में उसने पुरोहित की बेटी के खूब मजे लिए... और फिर जब कॉलेज ख़तम हुआ तो वापस आकर पुरोहित की बेटी के काले कारनामों को फैला दिया,,, फिर आप तो जानते हैं ऐसी बातें छुपती नहीं... कामिनी को बदनाम होते देर नहीं लगी... लल्लन चटकारे लगा लगा के कामिनी के किस्से अपने चेलों को सुनाता था... होली की छुट्टी में जब कामिनी घर आई तो मौका देखकर लल्लन ने बहाने से उसे उसी खँडहर में बुला लिया... और फिर अपने दोस्तों के साथ मिलकर उसका बलात्कार किया... दूसरी तरफ कुछ मजदूरों को पैसे देकर पुरोहित के खानदान के सारे मर्दों का क़त्ल करवा दिया! पुरोहित जी का पूरा खानदान ख़तम हो चूका था... कामिनी को भी जिन्दा नहीं छोड़ा था! सबका जड़ थी ये हवेली... जो खँडहर बन चुकी थी...! उस घटना के बाद से ही लल्लन का दबदबा लोगों के बीच बना था...और ये हवेली... टैब से अब तक ऐसे ही खँडहर बनी पड़ी है... कभी कभार चोदम-चुदाई के लिए लोग लौंडिया लेकर आ जाते है वरना यहाँ मूतने भी नहीं आता कोई... अभी भी पुरोहित जी की वो रेत यहीं पड़ी हुई है जो वो अवैध रूप से जमा करते थे यहाँ)

अट्ठारह साल पहले जो हुआ था आज फिर से यादें ताजा हो चुकी थी... लल्लन के अन्दर का खून गरम था... “अरे राण्ड... साली.... खड़ी क्या है? शो चालू कर....”
गुस्से में लल्लन बोला!
मालती को लल्लन के गुस्से का कारण समझ नहीं आ रहा था... पर उसकी आवाज की मर्दानगी ऐसी थी कि अगर थोड़ा और हड़क देता तो मालती का मूत निकल जाता...
मालती सहमी हुई ठुमकना चालू की... वो नाचती हुई गाड़ी के पास गई और म्यूजिक लाउड किया.... “राणा जी माफ़ करना... गलती म्हारे से हो गई...”
म्यूजिक की बीट पर मालती अपने चुत्तड हिला हिला कर नाच रही थी....
लल्लन ने शराब की एक बोतल खोली और मालती के ऊपर उड़ेल दी...
मालती नाच रही थी.... लल्लन को खुश करने की कोशिश में हर कोशिश कर रही थी पर लल्लन के चेहरे की गंभीरता कम नहीं हो रही थी! एक और बोतल खोली और मालती के जिस्म पर उड़ेल दी...लल्लन जी थोड़ी सी पीते और फिर मालती के जिस्म पे उड़ेल देते!
एक एक करके पूरी पेटी मालती के जिस्म पर उड़ेल दी... मालती नाचे जा रही थी... हवा में शराब की महक घुल चुकी थी... और लल्लन जी भी नशे के सुरूर में हवस को काबू करने में खुद को नाकाम पा रहे थे.... अबकी बार मालती नाचते हुए लल्लन जी के करीब आई तो लल्लन जी ने उसे फिर दूर नहीं जाने दिया... उसके जिस्म को चांटने लगे... मालती की बेचैनी बढती जा रही थी... लल्लन जी के स्पर्श से उसके घुटने कमजोर पड़ चुके थे... लल्लन जी ने कब उसके कपडे उतार दिए उसे पता भी नहीं चला...
“आऊउच..... आह.....” गाड़ी की पिछली सीट पर मालती झुकी ही थी कि.. पीछे से लल्लन जी ने अपना लौड़ा उसकी गांड में घुसेड़ दिया!
और फिर गाड़ी का उदघाटन हो ही गया... मालती की आहें पूरे खँडहर में गूँज गई... लल्लन जी का सारा क्रोध- सारी यादें... उनके लंड को और भी ताकतवर बना रही थी.... लल्लन जी ने अपना लौड़ा जब गांड से निकाला तो मालती ने थोड़ी राहत की सांस ली... वो सांस ले ही पाई थी की लौड़ा उसकी चूत में घुस चूका था.. लल्लन जी आज पूरे सुरूर में थे... फच्च.. फच्च.... आह उई... पूरे 40 मिनट घंटे तक लल्लन जी के लौड़े ने उनका साथ दिया और फिर वो निढाल हो कर बैक सीट पर ही मालती के ऊपर गिर गए!
लौड़ा अभी भी मालती की चूत में ही था... वो भी एकदम तना हुआ... लोड डिस्चार्ज करने के बाद भी...
“लल्लन जी....आपने तो जान ले ली थी अभी मेरी”
मालती की आवाज सुनते ही एक बार फिर से लल्लन जी शुरू हो गए... “हाय रामा... मर गई.... ऊह...आह... फक मी... आह...” मालती लल्लन जी को उकसा रही थी... लल्लन जी ने फिर स्पीड पकड़ी और इस बार अपनी मर्दानगी से मालती मिश्रा की मानो जान ही ले ली... मालती बार बार झड रही थी... पर लल्लन जी... उनका लौड़ा तो किसी फौलाद की तरह चोदे जा रहा था..
आह... ऊओह... बस... मर गई... मालती एक बार फिर झड़ी... फिर लल्लन जी भी संतुष्टि तक पहुच ही गए... और अपना वीर्य मालती की योनि में दाग दिया!
कपडे वही बाहर पड़े रहे... लल्लन जी ने गाड़ी स्टार्ट की.. और सीधे फार्महाउस पहुचे.... मालती साइड सीट में नंगी ही बैठी थी... रास्ते में दोनों ने एक शब्द भी नहीं बोला...मालती की हिम्मत नहीं हो रही थी... और लल्लन ख्यालों में डूबा हुआ था...
फार्महाउस पहुच कर गाड़ी पार्क की... और मालती को छोड़कर लल्लन अन्दर चला गया! फिर मालती भी नंगी ही भागती हुई अन्दर गई... फार्महाउस के सारे नौकर और एक दो छोटे-मोटे नेताओं- चेलों ने इस नज़ारे से नयन-सुख प्राप्त किया! सबकी आँखे चमक उठी मालती मैडम को नंगा देखकर... वो भी भागती हुई... हाय उसकी हिलती गांड तो मानो सबको बेडरूम का इनविटेशन दे गई थी.... पर सब अपनी औकात जानते थे... और फिर लल्लन जी के माल के बारे में सोचना... न बाबा न...!





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FUN-MAZA-MASTI मालती एक कुतिया --10

FUN-MAZA-MASTI

 मालती एक कुतिया --10

 मालती ने लल्लन का दिल तो जीत लिया था पर विश्वास... वो अभी जीतना बाकी था! लल्लन इतनी जल्दी किसी पर विस्वास नहीं करता था...! मालती ने अब तक उसे अपने बारे में जो कुछ बताया था उससे वो और भी कन्फ्यूज हो रहा था! वो समझ नहीं पा रहा था कि मालती को राजनीति में जगह दे या फिर केवल अपने बिस्तर में! खैर बिस्तर पर तो मालती पहले ही आया चुकी थी! और राजनीति बच्चों का खेल नहीं! ये चुनाव तो यूं ही निकल जाएगा... और फिर पूरे पांच साल थे मालती को जांचने परखने के... पर मालती अगर नागिन निकली तो? खुद के डसे जाने का भय सता रहा था लल्लन जी को! और फिर किसी ने कहा भी है कि औरत जब तक खूबसूरत है अब तक तो ठीक पर अगर ख़ूबसूरती के साथ अकलमंद भी है तो बच के रहना चाहिए! मालती के बारे में सोंचते सोंचते लल्लन जी का लंड खड़ा हो चूका था! पर अब उसे शान्त करने के लिए मालती मौजूद नहीं थी! एक बार को लल्लन जी का दिल किया कि वो अभी मालती के घर जाकर अपनी हवस शांत कर ले पर फिर कुछ सोंच कर खुद पर काबू किया... और फिर अपने घर को निकल लिए!
उधर अफरोज ने भी मालती की हिस्ट्री निकलवाने की ठान ली! इसी बहाने उसके पास करने के लिए थोड़ा काम भी होगा और वो थोड़ा बिजी भी रहेगा! क्योंकि अगर लल्लन जी के साथ वो एक्टिव रहा तो उसके साथ साथ लल्लन जी को भी प्रॉब्लम हो सकती है!
अगले दिन लल्लन जी को रोड शो पे जाना था!
5-6 गावों में रोड शो था आज!
मालती आज भी सफ़ेद साड़ी में एकदम कड़क माल लग रही थी! सुबह सुबह लल्लन जी को जब उसने गुड मोर्निंग बोला तो लल्लन जी की मोर्निंग सच में गुड हो गई!
““लल्लन जी मैं भी चलूंगी आज आपके साथ रोड शो में!” मालती ने अपनी अदाओं का जलवा बिखेरते हुए लल्लन जी को अपने दिल की बात बताई!
लल्लन जी मना नहीं कर पाए- “हाँ हाँ ठीक है पर देर हो जायेगी.... और हो सकता है की रात में हमें फार्म हाउस में ही रुकना पड़ जाए!”
मालती के मन में तो जैसे लड्डू फुट गए, वो चहकती हुई बोली- “कोई बात नहीं विधायक जी... पर्सनल सेकेटरी हूँ आपकी.. और इतने बिजी टाइम में इतना तो कोपरेट कर ही सकती हूँ!”
“हा हा... ये तो आपका फर्ज है मोहतरमा!” लल्लन अपना अंडरवियर एडजस्ट करता हुआ बोला!
और फिर सब रोड शो के लिए निकल लिए!
मालती दूसरी गाड़ी में महिला कार्यकर्ताओं के साथ थी.. जबकि लल्लन जी अपने रोड शो में बिजी थे! सारा दिन ऐसे ही निकल गया! कई जगह पर लल्लन जी ने अपना जलवा दिखाया... एक दो गावों में दारू भी बाँटी!
शाम हो चली थी... और अब सब वापस लौट रहे थे! लल्लन ने मालती को फोन किया...
“हेलो....”
“हाँ अभी आगे गाड़ी रोकेंगे... तो उस गाड़ी से उतर कर हामारी गाड़ी में आ जाना.. यहाँ से सीधा फार्महाउस निकल रहे हैं!”
“जी विधायक जी”
और फिर लल्लन ने फोन काट दिया!
मालती मुस्कुराई... और काफिला रुकने का इंतज़ार करने लगी!
आगे पान की दुकान पर काफिला रुका, मालती महिला मोर्चा की कार से उतर कर विधायक जी की कार में आ गई!
“पान खायेंगी?”
“नहीं.. आप ही खाइए पान...” मालती मुस्कुराई!
“अरे आइसे काईसे... खाना तो पड़ेगा!” लल्लन जी पान को एक गाल में दबाये हुए बोले मालती की ओर देखते हुए बोले!
“अच्छा ठीक है... पर मीठा पान खाऊँगी मैं” मालती बोली!
“हाहाहा... तनिक नजदीक आओ... “
मालती थोड़ा लल्लन जी की तरफ सरक गई...
(लल्लन जी की पजेरो काफिले को हाईवे आर छोड़ते हुए फार्महाउस की ओर मुड़ गई!)
“अरे थोड़ा आउर नजदीक आओ...” मालती के कंधे को सहलाते हुए लल्लन जी ने कहा!
मालती और पास सरक आई!
मालती के पास आए ही लल्लन जी ने अपने होंठ मालती के होंटों पर रख दिए, मालती भी लल्लन जी के होंट चूमने लगी... दोनों एक दूसरे के होंट चूम रहे थे!
लल्लन जी ने जो पान अपने मुह में दबा रखा था वो पान अब मालती के मुह में आ चूका था! उम्म्ह... पुच्च्च... म्वाह....उम्म्म्म....स्ल्र्रर्र्र...आह्ह... पान कभी मालती के मुह में तो कभी लल्लन जी के मुह में... उफ्फ्फ...
पान की लाली दोनों के मुह से निकल रही थी... और एक दो बूँदे मालती की सफ़ेद साड़ी पर भी चू गई थी.. और कुछ बूँदें लल्लन जी के कुरते पर भी!
करीब 5-10मिनट टल दोनों ने एक दूसरे के होंटों का रस पिया... और फिर अंत में लल्लन जी ने पान को अपने मुह में निचोड़ा.. और फिर पान मालती के मुह में छोड़ दिया! और खुद को मालती से अलग किया और मुस्कुरा कर पूछा- “पान मीठा था या नहीं?”
मालती ने भी पान के रस को आखिरी बार चूसा...सारी पीक अन्दर निगल गई और फिर पान थूक कर बोली- “बहोत मीठा था” और फिर शर्मा गई.. और फिर लल्लन जी से दूर खिड़की के पास सरक आई!
लल्लन जी भी बस फार्महाउस आने का ही इंतज़ार कर रहे थे अब!
खाने-पीने का इंतजाम फार्महाउस में हो चूका था! फार्महाउस पहुच कर लल्लन और मालती दोनों ने साथ ही डिनर किया! डिनर के बाद लल्लन जी ने एक गिलास हल्दी-केसर का दूध पिया!
“ओह तो ये है आपकी सेहत का राज?” मालती मुस्कुराती हुई बोली!
“देखो भाई खाने के बाद पीने को चाहिए हमें कुछ न कुछ... पानी नहीं पीते हम फिर खाने के बाद! ...यार दोस्त हुए तो मदिरा, नहीं तो ये दूध!” लल्लन जी ने एक सांस में पूरा गिलास गटक लिया! डिनर ख़तम होते ही डाइनिंग टेबल से उठ कर लल्लन जी अपने कमरे की ओर चल दिए!
मालतीको कुछ समझ नहीं आया तो वो भी उठ कर लल्लन जी के कमरे पे उनके पीछे पहुँच गई...! लल्लन जी बेड पर पीछे टेक लगाए बैठे थे! मालती को अपने कमरे में पाकर मुस्कुराए!
“लगता है नींद नहीं आ रही है तुम्हे...आओ थोड़ी देर हमारे साथ बैठो”
मालती मुस्कुराई और लल्लन जी के पैरों के पास आकर बैठ गई!
“तुम सफ़ेद साड़ी मत पहना करो... औरत जब सफ़ेद साड़ी पहनती है तो दुःख होता है हमें”
“ओह लल्लन जी... वो तो मैं...”
“अरे ये तो...वो तो छोडो... आज के बाद ये सफ़ेद साड़ी मत पहनना... जब तक कि’ हम खुद न कहें”
“उम्म्म... फिर आप ही बता दीजिये क्या पहनू मैं...”
“हाहा... पहले तो ये जो पहन रखा है उसे उतार दे तू..”
लल्लन जी के मुह से तू सुन कर मालती को आज रात होने वाली शामत का आभास हो गया...
वो मुस्कुराई, और शर्मा कर बोली...”ओहो लल्लन जी आप भी न..”
“मैं भी?? मतलब? किसी और ने भी बोला तुझे नंगी होने को?” लल्लन ने त्योरियां चढाते हुए कहा!
“नहीं नहीं लल्लन जी... आपके होते हुए किसी की हिम्मत हो सकती है ऐसा बोलने की मुझे..” मालती दोनों हाथों से हौले हौले लल्लन के पैर दबाने लगी!
“आह... कितना आराम मिलता है जब तू पैर दबाती है मेरे...”
मालती मुस्कुराती हुई पैर दबाती रही..
वो बेचारी सोच रही थी कि अब तो लल्लन जी उसके हो चुके है... पर हकीकत तो ये थी कि अभी उसे लल्लन की झांट भी नहीं मिली थी! उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि लल्लन ने अफरोज को उसकी हिस्ट्री निकलवाने के लिए लगा रखा है!
लल्लन जी उठे और बाथरूम में घुस गए... दो मिनट बाद जब लल्लन जी मूत कर बाहर निकले तो मालती को शीशे के सामने खड़ा पाया..
धीरे से वो भी मालती के पीछे आकर खड़े हो गए और अपना लंड मालती की गांड में सटा दिया- “सुना नहीं तुमने क्या कहा हमने? जो पहने हो उसे उतार दो...” और मालती का पल्लू नीचे गिरा दिया और पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया!
“कितना कोमल है तुम्हारा बदन...” मालती के बाएं कान को चबाते हुए लल्लन जी बोले, अब तक मालती के दोनों स्तन लल्लन जी के हाथों में थे!
लल्लन का एक हाथ अब नीचे पहुच चूका था... उसने साड़ी के ऊपर से ही मालती की चूत को रगड़ा, और फिर साड़ी की पट्टियों को अपनी मुट्ठी में लेकर उसकी कमर से निकाल दिया... और फिर अगले ही पल बाकी बची साड़ी भी लल्लन ने निकाल दी! पेटीकोट का नारा खींचने में लल्लन कभी देर नहीं करता था! मालती अब केवल ब्लाउज और पैंटी में लल्लन के सामने खड़ी थी... वो पीछे से अपना लंड मालती की गांड पर रगड़े जा रहा था! मालती ने मुस्कुराते हुए ब्लाउज के हुक खोले... और बाहें फैला दी... लल्लन ने मालती के बदन को ब्लाउज से भी आजाद कर दिया! अब वो सामने शीशे में उसके बदन को निहार रहा था... और पीछे से ही प्यार कर रहा था... कभी उसकी चूत रगड़ता तो कभी उसकी चूचियां मसलता! और कभी उसकी नवेल को छेड़ता! ऐसे ही वो उसे बिस्तर तक ले गया... और फिर मालती को लिटा दिया! मालती के लेटते ही उसने पैंटी पकड़ कर नीचे खींच दी.. और ब्रा के हुक भी खोल दिए!
पैंटी के नीचे जाते ही हो नजारा उसके सामने था उसने उसका लंड और भी खड़ा कर दिया!
“शुक्रिया...”
कमर के पास जहाँ चुत्ताडों को विभाजित करने वाली लाइन(ass-crack) ख़तम होती थी वहां डिजाइनर अक्षरों में दो फूलों के बीच लिखा हुआ था- “शुक्रिया”
“वाह मेरी जान... अभी तो हमने अच्छे से तुम्हारी मारी भी नहीं... पहले ही शुक्रिया लिखवा लिया...” लल्लन ने मालती की गांड में हाथ फिराते हुए कहा!
मालती की यादें ताजा हो गईं! ये टैटू रमीज के लिए बनवाया था उसने... गजब की गांड मारता था वो... ये टैटू अपने पति को मारने की साजिश के बाद बनवाया था! रमीज की याद से आज भी उसके बदन में सरसरी दौड़ जाती थी...
“उम्म्म्ह... लल्लन जी...”
....चपाट... हौले से लल्लन ने गांड पर ताली बजाई!
“अच्छा किसके लिए बनवाया था ये तो जानने का हक है हमें?” अपना कुरता उतारते हुए लल्लन जी ने पूछा!
“उम्म्म... वो.. वो...”
“वो..वो क्या कर रही है....”
“वो उनके लिए बनवाया था मैंने... हनीमून पर ही...”
“अच्छा... हाहाहा... जो भी हो... गांड की शोभा बढ़ा दी इस टैटू ने...” पैजामे का नारा खींचते हुए लल्लन जी ने कहा!
(यूं तो परसों भी लल्लन जी ने मालती की ली थी पर दारू के नशे में गौर नहीं किया था टैटू पर)
और फिर कच्छा उतार कर लल्लन जी मालती के ऊपर आगये!
लौड़े को पीछे से ही मालती की जाँघों के बीच चूत के पास सरका दिया और अपने बदन का भार मालती के जिस्म पर डाल दिया..
लौड़ा हौले हौले जाँघों के बीच और भी बड़ा हो रहा था और ऊपर लल्लन जी अपना जलवा बिखेरने में लगे हुए थे! इस खेल के उस्ताद जो थे लल्लन जी! मालती का सैंडबिच बना हुआ था इस समय-बेड और लल्लन जी के बीच!
उसकी आह...उम्म्ह की आवाजों से लल्लन जी का जोश और बढ़ रहा था! दोनों हाथों से पकड़ कर मालती की कमर को थोड़ा ऊपर उठाया और लौड़ा सीधा जी-स्पॉट तक अन्दर सरका दिया! “आउच...” अचानक हुई इस शरारत से मालती चिलक उठी...
अगला स्ट्रोक तो और भी अन्दर तक गया... “हाय रे लौड़ा है या लोहे का सरिया....उईइ माँ... मर गई... आह” लल्लन गहरे गहरे धक्के लगाये जा रहा था...
“आह ऊह... आईई... औहह...” मालती धक्कों के साथ आहें भर रही थी!
और लल्लन किसी इंजन की तरह पीछे से उसकी चूत में धक्के लगाए जा रहा था!
“ऊई आह ... उफ्फ्फ...”
“आह ये ले ... हौं... हौं... ले ....” लल्लन के धक्के और भी तेज़ और गहरे होते जा रहे थे!
परसों तो लल्लन जी नशे में थे... पर आज... आज पूरे होश में मालती मिश्रा को चोद रहे थे... अपनी नई कामायनी की योनि को पूरी लगन से भोग रहे थे!
लल्लन जी ने एक झटके में अपना लंड मालती की चूत से निकाला... और मालती को सीधा किया... मालती ने लल्लन का लंड पकड़ कर फिर से अपनी चूत पे सटा दिया... मालती की इतनी चिलक देख कर लल्लन जी ने एक बार फिर पूरा लौड़ा एक झटके में मालती की बच्चेदानी तक अन्दर ठांस दिया... मालती ने अपनी दोनों टाँगे लल्लन के जिस्म पे लपेट लीं... लल्लन ने अपने हाथ मालती के पीछे ले जाकर उसे थोड़ा ऊपर उठा लिया और अपने सीने में जकड़ लिया... और फिर मालती को इसी पोज़ में चोदने लगा! आह... जन्नत में थी मालती इस समय... उसकी आहें और सिसकियाँ... लल्लन जी के जोश को और भी बढ़ा रही थी! आह... ऊह... उईइ... लल्लन जी... आह... और फिर लल्लन जी भी खुद पर काबू नहीं रख पाए और मालती की चूत के अन्दर ही पिचकारी मार दी!
और फिर मालती को पीछे लिटा कर खुद भी मालती के ऊपर निढाल हो गए!
“कमाल की हो तुम... सच में... मजा आ जाता है तुमको चोदने में”
मालती शर्मा गई... “आप भी तो हैं... कमाल के”
“उसमे भी कोई शक है... हाहाहा...” मालती की गांड पे स्पैंक करके बोला...
मालती लल्लन के और करीब आ गई... और अपनी जांघ लल्लन के ऊपर चढ़ा ली!
“नहीं लल्लन जी... शक... और आप पर... न बाबा न”
“वादा करते हैं हम तुमसे... कमी खलने नहीं देंगे मिश्रा जी की तुम्हे...”
मालती लल्लन की पीठ पर हाथ फिराती है और अपना सर लल्लन के सीने में छुपा लेती है!
“मिश्रा जी के बाद किसी ने ली है तुम्हारी?” लल्लन ने मालती की गांड सहलाते हुए पूछा!
“छी... कैसी कैसी बातें करते हैं आप..” मालती मुस्कुराती हुई बोली!
“अरे इतने साल... बिना चुदे... ये तो दुनिया का सबसे बड़ा अत्याचार होगा न” लल्लन जी ने फिर छेड़ा!
“उम्म्म.... आप भी न कुछ भी बोलते हैं!”
“अच्छा चल शादी के बाद का छोड़... शादी के पहले का बता... कितनों ने चोदा था तुझे कॉलेज में?”
मालती शर्मा गई...
“अरे हमसे का शर्मा रही हो... अंदाजा है हमको तुम्हारे बारे में... काफी गुल खिलाये होंगे तुमने”
मालती से इस तरह किसी ने नहीं पूछा था ये सवाल... उसकी सहेलियों ने भी नहीं... और लल्लन के मुह से ऐसी बाते सुन कर तो वो लाल हुई जा रही थी...
लल्लन का लंड दुबारा लोहा बन चूका था, इरादे तो पहले से ही नेक नहीं थे!
मालती अपनी जाँघ लल्लन के लंड को दबा रही थी!
“चल मेरी जान... होजा तैयार....”
“कहाँ ले चल रहे हैं जो तैयार हो जाऊं”
“जन्नत.... जन्नत दिखाते हैं तुम्हे आज....” स्पैंक करते हुए लल्लन ने कहा और मालती को पलट दिया, अब लल्लन मालती के पीछे था... और पीछे आते ही अपना लंड मालती की गदराई गांड में फँसाकर हम्प करने लगा!
“हाय रे... अभी बुझी नहीं आपकी प्यास?”
“अरे तुझे देख के तो मेरी प्यास और भी बढ़ जाती है ....” और अपना लंड मालती की गांड में घुसेड़ दिया... मालती चीख उठी...
लंड अन्दर जाते ही लल्लन जी के अन्दर का जानवर बहार आ गया...
पूरा कमरा एक बार फिर से मालती और लल्लन की कामाग्नि से गरम हो चूका था... लल्लन के धक्के मालती की साँसों से भी तेज और गहरे हो चुके थे.... मालती की आहेँ लल्लन की हवस की आग में घी का काम कर रही थीं...आह...ऊह.... फक्क्क...फच्च.... लल्लन ने मालती की गांड तब तक मारी जब तक कि वो झड़ नहीं गया! और फिर मालती ने लल्लन के लंड को अपने मुह से साफ़ किया! दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए!
जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया है कि लल्लन जी को सुबह जल्दी उठने की आदत है.... तो आज भी लल्लन जी सुबह जल्दी उठ गए, अब लल्लन जी उठने के बाद मालती को कैसे सोने दे सकते थे! सुबह उठ कर मालती ने उन्हें मोर्निंग ब्लोजॉब दिया और फिर दोनों ने साथ में नहाया! नहाते वक्त भी लल्लन जी ने मालती को एक बार चोदा!
नशा सा हो गया था लल्लन को अब मालती के जिस्म का... और शायद मालती को भी! नहाने धोने के बाद दोनों बाहर लॉन में बैठ कर नाश्ता कर रहे थे!
“तुमको कौनो आपत्ति तो नहीं न है...? देखो हम इस मामले में थोड़े कच्चे हैं.... वो क्या है कि शास्त्रों में लिखा है कि औरत का काम होता है मर्दों की सेवा करना...और फिर ऊपर वाले ने सामान किस लिए दिया है? मजे लेने के लिए... तुम्हे भी तो आता है न मजा? नहीं आता?” लल्लन ब्रेड पे बटर लगाते हुए बोला!
लल्लन की बात सुन कर मालती शर्मा गई...उसके मुह से एक शब्द भी नहीं निकला!
“शर्माती हुई और भी खूबसूरत लगती हो तुम...”
मालती और भी शर्मा गई...
“अच्छा एक बात पूछें?”
“पूछिये”
“सामान पसंद आया न हमरा?”
“आप भी न....” मालती ने शर्माते हुए नज़रें नीचे झुका लीं!
“अरे बताओ न... चुद्वाते समय तो बड़ा उछल उछल के लेती हो... अब काहे शर्मा रही हो”
“लल्लन जी....प्लीज़...”
“क्या हुआ... याद आ गई क्या कल रात की?” लल्लन ने हँसते हुए पूछा!
“”जान ले लीजिये आप हमारी....”
“अरे मेरी जान... जान तो हमारा लौड़ा लेगा तुम्हारी...” मालती का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया... लौड़ा अभी भी खड़ा था!
“आपका खड़ा ही रहता है क्या हर समय?”
“24x7” मुस्कुराते हुए लल्लन ने जवाब दिया!
मालती ने हाथ हटा लिया!
“गोली तो ले लेती हो न... कही गर्भ न ठहर जाए...” लल्लन ने पूछा!
“जी वो बच्चों के बाद मैंने ओपरेशन करा लिया था...” मालती मुस्कुराती हुई बोली!
“ये तो आउर भी अच्छा है... बिन कंडोम के ही लेंगे अब तो हम”
इस पर दोनों खिलखिला कर हंसे... और फिर नाश्ता ख़तम करके चुनाव प्रचार पर निकल लिए!


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