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Tuesday, May 6, 2014

FUN-MAZA-MASTI शालिनी का बलात्कार-4

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शालिनी का बलात्कार-4

   अगले दिन सुबह ५ बजे के लगभग शालिनी की नीद खुली। गर्मियो के दिन थे सो उजाला हो चुका था। उसे अपने बदन पे काफी भार महसूस हुआ। उसने देखा कि भोला और कलुआ जोंक से उसके बदन से लिपटे सो रहे थे। शालिनी नही रोई। जो कुछ उसके साथ हो रहा था उसने अब उसे स्वीकार कर लिया था। उसकी चूत और गाँड मे अभी भी दर्द हो रहा था। अचानक उसके पेट मे एक टीस सी उठी और वो कराह उठी "आआआआआहहह"। उसकी कराह सुनते ही भोला और कलुआ जग गये और जगते ही उसके बूब्स मसलने लगे और अपने-अपने लंड उसकी जाँघो से रगडने लगे। शालिनी चुपचाप लेटी रही। ५ मिनट तक यहीसब चला फिर भोला उठा और बाथरूम मे घुस गया। कलुआ मौके का फायदा उठा के शालिनी पे फिर चढ गया और उसके चेहरे को चूमते हुए अपना लंड उसकी चूत मे डाल दिया और धक्के मारने लगा "आआह आआह आआह आआह"। सुबह-सुबह का एकदम ताजा कडक लंड था उसका। शालिनी भी हल्का-हल्का कराहने लगी। कलुआ ने उसपे चुम्बनो की बौछार कर दी। अभी वो उसे बडे प्यार से चोद रहा था। ज्यादा जोश मे होने के कारण कलुआ १५ मिनट मे ही झड गया और अपना रस शालिनी की चूत मे डाल दिया "आआआआआआआआआआआहहहहहहहहह" कलुआ को बडी शांति मिली जैसे। उसने शालिनी के माथे को चूमा और उसपे लेट उसे प्यार करता रहा। तबतक भोला बाथरुम से बाहर आ गया। अब कलुआ बाथरुम मे घुसा। जब भोला ने शालिनी की चूत से वीर्य बहता देखा तो वो समझ गया की कलुआ ने उसे अभी फिर चोदा है। वो भी जोश मे आया और शालिनी पे चढ गया। उसने भी एक झटके मे शालिनी मे अपना लंड घुसाया और उसे ठोकने लगा "आआह आआह आआह आआह" वो भी शालिनी को बिल्कुल प्यार से चोद रहा था। शालिनी बिलकुल चुप सिर्फ अपना मुँह खोले और आँखे बंद किये लेटी थी। उसकी साँसे फिर तेज चलने लगी। १५ मिनट मे भोला भी आआआआआआआआआआआहहहहहह की आवाज के साथ शालिनी के अंदर खाली हो गया और शालिनी पे ढेर हो के उसके गालो को प्यार से चूमने लगा। अब कलुआ भी बाथरुम से बाहर आ गया। उसने शालिनी को सहारा दे के उठाया और बाथरुम ले गया। शालिनी ठीक से चल नही पा रही थी। उसकी चूत और गाँड मे भारी दर्द था। कलुआ ने उसे सहारा दे के कमोड पे बिठा दिया और बाहर चला आया। शालिनी जैसे-तैसे आधे घंटे मे फ्रेश हुई और बाहर आने के लिए उठी लेकिन उसने जैसे ही चलने की कोशिश की वो लडखडा के वही गिर पडी। उसके गिरने की आवाज सुन कलुआ अंदर आया और उसे सहारा दे के वापस राजीव के कमरे मे ले आया। इसबीच भोला किचेन मे नाश्ता तैयार कर रहा था। कलुआ शालिनी को वॉश बेसिन तक ले गया और सहारा दे के अपने हाथ से उसे ब्रश कराया। ठंढे पानी से शालिनी का चेहरा धो के वो उसे फिर राजीव के बेडरुम मे ले आया और बेड पे लिटा दिया। शालिनी का कलतक दमकता बदन आज निस्तेज सा हो गया था। पूरे बदन पे खरोच के निशान थे और जहाँतहाँ सूखे वीर्य की पपडी बनी थी और उसके अपने खून के धब्बे लगे थे। तबतक ७ बज चुके थे। भोला ने नाश्ते के लिए दूध गरम कर लिया था और फल काट लिये थे। वो प्लेट मे सबकुछ ले के कमरे मे आया। कलुआ ने शालिनी को उठा के अपनी गोद मे बिठाया और उसकी चूत मे अपनी दो उँगलियाँ डाल दी और दूध का गिलास ले के शालिनी की चूत मे उँगली करते हुए उसे पिलाने लगा। शालिनी की भूख से जान जा रही थी सो वो चुपचाप घूँट-घूँट कर सारा दूध पी गयी। अब भोला ने उसकी जाँघो को सहलाते हुए उसे केले खिलाना शुरु कर दिया। शालिनी ने दो केले खाये। उसके बाद कलुआ ने उसे फिर बेड पे लिटा दिया। भोला ने कपडे पहने और बाजार जाकर पेनकिलर ले आया और एक टेबलेट शालिनी को पानी के साथ दिया। इसके बाद तुरंत भोला ने फिर अपने कपडे उतार दिए और पूरा नंगा हो गया। उसके बाद दोनो ने शालिनी के बदन की फिर सरसो तेल से मालिश शुरु दी। आधे घंटेतक खूब अच्छी तरह से दोनो ने शालिनी के पूरे बदन की मालिश की। शालिनी भी चुपचाप लेटी अपनी नंगी देह की मालिश करवाती रही। उसके दर्द से जूझते बदन को सचमुच बडा आराम मिल रहा था। आधे घंटे उसकी मालिश के बाद भोला और कलुआ उसे फिर बाथरुम मे ले के आये और झरना चला के उसे उसके नीचे बैठा दिया। दोनो ने मिलके शालिनी के बालो मे पहले शैम्पू किया फिर पूरे बदन मे साबुन मल-मल के उसे खूब अच्छी तरह से नहलाया। फिर तौलिए से उसका सारा बदन पोछ के दोनो उस बाहर लाए। भोला बोला "यार, इसके लौडे राजीव का बेड तो इसके खून, पसीने और अपने माल से सन के पूरा गंदा है, चल इसे गेस्ट रुम मे ले चलते है"। कलुआ भी तैयार हो गया। दोनो उसे गेस्ट रुम मे ले आये और बेड पे लिटा दिया। शालिनी का बदन नहा के फिर चमक उठा था। वो अब काफी राहत भी महसूस कर रही थी। इसके बाद बारी-बारी से भोला और कलुआ भी नहाधो के फ्रेश हो गये और नाश्ता किया। अब भोला, कलुआ और शालिनी के पास गेस्टरूम मे पहुँचे। शालिनी वैसे ही नंगी, बेड पे टाँगे फैलाए लेटी थी। कल सारा दिन रोने से सूजी उसकी आँखो मे अब कोई भाव नही थे। वो भावशून्य सी छत को एकटक निहार रही थी। कलुआ और भोला पूरे नंगे तो थे ही, वो शालिनी के पास बिस्तर पे बैठ गये। अब सुबह के ९ बज रहे थे। 

कलुआ ने शालिनी को बिस्तर पे बैठने को कहा। शालिनी बैठ गई। कलुआ बिस्तर पे खडा हुआ और अपना लंड शालिनी के होठो पे रगडने लगा। उसने शालिनी के भीगबालो को पकडा और कहा "मुँह खोल"। शालिनी ने चुपचाप मुँह खोल दिया। कलुआ ने अपना लंड शालिनी के मुँह मे घुसाया और अंदर-बाहर करते हुए उसके साथ मुखमैथुन करने लगा। शालिनी को बहुत घिन आ रही थी। उसने कभी गौतम का लंड भी मुँह मे नही लिया था। उसकी आँखो मे पानी भर आया। उसे फिर उल्टी आ रही थी लेकिन हरबार वो कलुआ के लंड से टकरा के वापस पेट मे चली जा रही थी।

भोला बोला "यार, मैडम का मुँह अभीतक कुँवारा है। मैने इसे रात मे कईबार अपने पति से कहते सुना है कि मुँह मे मत देना। मै नही कर सकती"

ये सुनते ही कलुआ और जोश मे आ गया। वो बोला "मतलब मै ही इसके मुँह की सील तोड रहा हूँ आज, आआआहहाहाहा, ले साली और ले आआअ आआआहहह आआआहहह"। कहता हुआ कलुआ और हैवानिययत से धक्के मारने लगा। कलुआ का लंड शालिनी के गले मे घुस के बाहर आ रहा था। शालिनी का पूरा जबडा और गला दुखने लगा। उसकी आँखो से फिर आँसू आने लगे। उसने अपने हाथो से कलुआ की जाँघे पकडी ताकि वो कुछ धीमा हो लेकिन शालिनी के कोमल हाथो का स्पर्श अपनी काली जाँघो पे पाकर कलुआ और हैवान बन गया। उसके धक्के और तेज हो गये। "आआआह आआआह आआआआह आआआआह" कलुआ बडे मजे मे था। शालिनी के मुँह से आवाजे निकल रही थी "उउउमममओओममममममओओओओममममम"। कलुआ धक्के मारता गया, मारता गया। पूरे २५ मिनट बाद आआआआआआआआआआआआआआआहहहहहहहह की आवाज के साथ कलुआ ने अपना लंड शालिनी के गले मे घुसा के अपना पानी छोड दिया जो सीधे शालिनी के पेट मे जाने लगा। "आआअ आआआअह आआह आआअहहह" कलुआ धक्के मारे जा रहा था। हर धक्का पिछली बार से ज्यादा पानी शालिनी के गले मे फेक रहा था। शालिनी को ऐसा लग रहा था मानो कोई गरम लोहे का रॉड उसके मुँह मे घुसा है जो पानी दे रहा है। सारा पानी शालिनी के मुँह मे निचोड के कलुआ ने लंड बाहर निकाला और अपने बदसूरत काले चेहरे पे परमआनंद का भाव लिए बिस्तर पे बैठ गया। उसका लंड शालिनी की थूक मे पूरा भीग के चमक रहा था। अब शालिनी से रहा न गया। उसे बडी तेज उल्टी आ रही थी। जैसे ही उसने उल्टी करने के लिए मुँह "औऔऔ" करते हुए खोला, कलुआ ने झपट के उसका मुँह दबा दिया और बोला "साली, रख अंदर ही। एक बूँद भी बाहर निकाली तो आँखे फोड दूँगा"। शालिनी ने बडी मुश्किल से उल्टी रोकी और कलुआ का सारा वीर्य उसके पेट मे पचने लगा। उसकी आँखो से आँसू बहे जा रहे थे। अब भोला बिस्तर पे खडा हुआ और अपना लंड शालिनी के गालो और होठो पे रगडने लगा। "मुँह खोल कुतिया" भोला चिल्लाया। शालिनी ने जैसे मुँह खोला भोला ने लंड उसके मुँह मे ठूँसा और उसके मुँह को जोर-जोर से चोदने लगा। उसने शालिनी के सिर को बडी जोर से पकडा हुआ था और अपने लंड से भयानक धक्के मारे जा रहा था।

"चल साली, मेरी गाँड मे उँगली डाल" भोला बोला। बेचारी शालिनी ने चुपचाप अपने सुंदर हाथो से भोला के चूतडो को फैलाया और उसकी गाँड मे अपनी उँगली डाल दी। "आआआआआहहहहहह" भोला का मजा दूना हो गया। "अंदर-बाहर कर साली" वो फिर बोला। शालिनी अपनी उँगली भोला की गाँड मे अंदर-बाहर करने लगी। भोला तो जैसे पागल हो गया। वो राक्षसो की तरह अपना लंड बिना शालिनी के मुँह मे ठोकने लगा। उसकी झाँटे शालिनी की नाक मे घुस रही थी। २० मिनट बाद आआआआअहहहहहहह की आवाज के साथ भोला भी शालिनी के गले मे पानी छोडने लगा और उसे सारा पिला के ही बाहर आया। भोला ने जैसे ही लंड शालिनी के मुँह से खीचा शालिनी जोर-जोर से खाँसने लगी। थोडा वीर्य उसकी साँसनली मे भी चला गया था। ५ मिनट शालिनी खाँसती रही। उसके बाद निढाल सी बिस्तर पे ढेर हो गई। भोला और कलुआ तो मजे के सातवे आसमान मे थे। वो शालिनी के थूक को अपने पूरे लंड पे मल रहे थे। 

अब कलुआ बिस्तर पे लेट गया और अपनी टाँगे घुटनो से मोड के अपने सीने से सटाई और शालिनी से बोला "इधर आ साली और मेरी गाँड के छेद को चाट"। जब शालिनी नही उठी तो भोला ने शालिनी को पकड के उठाया और उसका मुँह कलुआ की गाँड से सटा दिया। "चाट साली" भोला भी गुर्राया। बेचारी शालिनी ने जीभ निकाली और कलुआ के काले चूतड चाटने लगी। "चूतड नही साली, मेरे चूतडो को फैला के मेरे छेद को चाट" कलुआ चीखा। शालिनी रो पडी "नही मुझसे ये नही होगा, मुझे माफ कर दो। तुमलोगो को जो करना था वो सब तो कर चुके, अब छोड दो। अब प्लीज यहाँ से चले जाओ। मै किसी से कुछ नही कहूँगी"। "साली" भोला गुस्से मे आ गया। उसने कमरे मे रखा पेचकस उठाया और बोला "चाट साली नही तो तेरी आँखे फोड दूँगा"। शालिनी बेबस थी। उसने रोते-रोते कलुआ के चूतडो को फैलाया और उसके छेद को अपनी जीभ से चाटने लगी। "आआआआआआआआआआआआहहहहह क्या मजा देती है साली" कलुआ को मजा आने लगा। पूरे १५ मिनट कलुआ ने शालिनी से अपना छेद चटवाया। फिर वो उठ और बोला "चल साली, पैर दबा मेरे। कल से तेरी देह दबा रहा हूँ (अब ये अलग बात है कि उसने इसी बहाने शालिनी के हर अंग को मनमाने तरीके से छुआ और मसला था)" कह के वो बिस्तर पे लेट गया। शालिनी रोती हुई उसके पैर दबाने लगी। १५ मिनट बाद भोला ने भी अपने पैर शालिनी से दबवाये। इसके बाद भोला उठा और वार्डरोब से शालिनी का एक मँहगा सलवार-सूट उठा लाया। "ले साली, पहन इसे" वो बोला। शालिनी अब फट के रो पडी "अरे ये क्या लगा रखा है तुमलोगो ने। इतना तो भोग लिया मुझे। अब और चाहत बाकी है तो भोगो ना। नंगी बैठी हूँ तुमसब के सामने, भंभोडो मुझे। टुकडे-टुकडे करके खा जाओ। ये क्या नाटक है" कहके उसका रोना तेज हो गया। कलुआ उठा और उसने शालिनी को बिस्तर पे लिटा के सलवार उसकी टाँगो पे चढाई और कमर तक ले जा के नाडा बाँध दिया। फिर उसे उठाया और कुरता जबरन उसे पहनाया। शालिनी रोए जा रही थी। भोला ने उपर से दुपट्टा भी शालिनी को ओढा दिया। पीले रंग का कुरता और लाल रंग का दुपट्टा-सलवार शालिनी पे खूब फब रहा था। भोला ने सीडी प्लेयर पे दुपट्टे वाला एक गाना चलाया और बोला "चल साली, अपना दुपट्टा लहरा-लहरा के नाच इस धुन पे"। शालिनी रोते हुए उठी और धीरे-धीरे गाने पे ठुमकने लगी, वो लगातार रो रही थी। उसने अपना दुपट्टा हाथो मे लिया और उसे लहरा के नाचने लगी, वो एक अच्छी डांसर भी थी। उसे नाचता देख भोला और कलुआ भी उसके साथ नाचने लगे। जब गाना खत्म हुआ तो कलुआ ने शालिनी को गोद मे उठाया और फिर पलंग पे पटका। उसने शालिनी का दुपट्टा उसके शरीर से नोच के फेका और उसकी लाल सलवार का नाडा खोल के उसे भी उतार दिया। फिर उसने शालिनी के पीले कुरते को कमर से उपर उठाया और उसकी चूत को चाटना शुरु किया। २-३ मिनट चटने के बाद उसने अपना लंड शालिनी की चूत मे घुसा दिया और उसे चोदने लगा। उसने उसे २० मिनट चोदा और पानी उसकी चूत मे छोड के उसपे ढेर हो गया। शालिनी से अब सहा नही जा रहा था। उसने उनदोनो से विनती शुरु कर दी "मार दे भोला। अब मार दे मुझे। क्यो इतना जलील कर रहा है" कह के वो फूट-फूट के रोने लगी। भोला हँसा और बोला "ठीक है मालकिन, जब आप कहती है तो आपकी मार ही लेता हूँ हा हा हा हा" कह के वो भी शालिनी पे झपटा और उसकी चूत मे लंड पेल दिया और चोदने लगा। शालिनी लगातार रोती जा रही थी। २० मिनट बाद भोला भी झड गया और शालिनी की बगल मे लेट के हाँफने लगा। अब कलुआ ने शालिनी को अपनी गोद मे बिठाया और उसका कुरता भी उतार के फेक दिया। शालिनी एकबार फिर पूरी नंगी थी। वो शालिनी के पूरे बदन को सहलाने लगा। उसे चूमने लगा। शालिनी अभी मेनोपॉज की स्थिति मे नहीं पहुँची थी। उसको नियमित मासिक धर्म आता था। वो कल से ही चिंतित थी कि कही वो इन आवारा लडको के कारण गर्भवती न हो जाए क्योकि दोनो कल से लगातार उसकी बच्चेदानी मे अपना पानी फेक रहे थे। वो जानती थी कि उन लडको से पानी बाहर गिराने के लिए कहने का कोई फायदा नही था बल्कि वो ये सुनके और मजे से पानी अंदर छोडेगे, इसलिए उसने कभी उन्हे पानी बाहर छोडने के लिए नही कहा।

अब कलुआ ने शालिनी को बिस्तर पे लिटाया और उसके सीने पे बै गया। "भोला तू इसकी चूत मे जा, मै मुँह मे जा रहा हूँ" वो भोला से बोला। शालिनी सिहर उठी। भोला दौड के आया और शालिनी की टाँगो को फैला के अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया। "आआआआआहहहह" शालिनी की चीख फिर निकली। अब कलुआ ने शालिनी का मुँह अपने हाथ से खुलवाया और उसमे लंड डाल दिया। अब दोनो ने एक साथ शालिनी की चूत और मुँह को मारना शुरु कर दिया। शालिनी के लिए ये अनुभव एकदम पहला था। वो दर्द, अपमान और शर्म से छटपटाने लगी। दोनो लडको के धक्के तेज हो गये। कलुआ शालिनी की बंद होती आँखो को बार-बार अपनी उँगलियों से खोल दे रहा था। "देख साली मुझे देख आहहह आआआहहह" कह-कहके वो धक्के मार रहा था। नीचे भोला भी इस नये ढंग से चुदाई कर पागल हुआ जा रहा था। उसने शालिनी की झाँटे अपनी उँगलियों से पकड-पकड के उखाचनी शुरु कर दी। शालिनी दर्द से बिलबिलाने लगी। वो चीख रही थी लेकिन कलुआ का लंड मुँह मे होने के कारण चीख सिर्फ "ऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊं
ओंओंओंओंओं ऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंऊंओंओंओंओंओं" के रूप मे बाहर आ रही थी। इस चीख से कलुआ अपने लंड मे एक वाइब्रेशन महसूस करने लगा। उसका मजा चौगुना हो गया। वो बोला "करते रह भोला, ये साली मेरे लंड पे चीख रही है तो बडा मजा आ रहा है आआह आआहहहह आआआह"। भोला भी और जोश मे आ के शालिनी की एक-एक कर झाँे उखाडता गया। शालिनी को फिर दर्द से बेहोशी आने लगी। अचानक उपर कलुआ और नीचे भोला एकसाथ चीखे "आआआआआआआआआआआआहहहहहहहहहहह" और दोनो ने एकसाथ शालिनी के अंदर पानी छोडना शुरु कर दिया, कलुआ ने मुँह मे और भोला ने चूत मे। दो मिनट तक दोनो शालिनी के उपर-नीचे के छेदो को भरते रहे, फिर निढाल हो के उसपे गिर पडे। शालिनी फिर आधी बेहोशी की हालत मे पहुँच गई थी। उसने सुबह से पानी भी नही पिया था। उसने बडी मुश्किल से कहा "प...अँह...अँह.....पानी.....आँहहहह"। कलुआ ने पानी निकाला और गिलास मे डाल के अपने वीर्य टपकते और शालिनी की थूक से सने लंड को उसमे डाल के धोया और भोला को दिया, भोला ने भी अपना वीर्य टपकता और शालिनी की चूत के रस से भीगा लंड उस गिलास मे डाल के धोया और कलुआ को वापस दिया। कलुआ ने शालिनी को सहारा दे के बैठाया और उसे वो पानी पिलाने लगा। शालिनी को पानी का स्वाद बदला लगा लेकिन वो कुछ करने-कहने की हालत मे नही थी। उसने घूँट-घूट कर वो सारा पानी पी लिया। तबतक दोपहर हो चुकी थी। थके भोला और कलुआ फिर बिस्तर पे चढे और शालिनी से लिपट के सो गये। शालिनी भी दर्द और थकान से परेशान थी। उसकी भी आँख लग गयी। जब कलुआ की आँख खुली तो शाम के सात बज रहे थे। वो उठा और भोला को जगाया। कलुआ ने शालिनी के बूब्स पे हाथ रखा तो देखा कि शालिनी का जिस्म तप रहा था। दो भेडियो के जुल्म सहते-सहते उसे तेज बुखार हो गया था। उसकी साँसे तेज चल रही थी। "अरे इसे तो बुखार आ गया" वो भोला से बोला। "तो क्या हुआ, आने दो" भोला ने लापरवाही से कहा। "अरे मर गई साली तो झमेला हो जाएगा, जा कोई दवा ले आ" कलुआ बोला। भोला ने शालिनी की अलमारी खोली। उसे पता था कि उसमे दवाएँ भी होती है। वहाँ उसे बुखार की दवा मिल गई। उसने कलुआ को दिया। कलुआ ने शालिनी को जगाया और उसे दवा खिलाई। शालिनी फिर कराहने लगी। भोला और कलुआ उसे वही छोड खाना बनाने चले गये। रात आठ बजेतक उन्होने खाना बना के खा लिया। दवा ने भी असर दिखाया और शालिनी का बुखार उतर गया। कलुआ अपना बचा जूठन ले के आया और शालिनी को गोद मे बिठा के अपने हाथो से खिलाने लगा। शालिनी भी भूखी थी सो धीरे-धीरे खाने लगी। खाना खिला के उसने शालिनी को बिस्तर पे लिटाया और भोला के साथ बैठ के टीवी देखने लगा।

एक घंटे बाद दोनो का लंड फिर खडा हो गया। दोनो शालिनी के बिस्तर पे चढे और उसके दोनो तरफ लेट गये। कलुआ ने शालिनी को अपनी ओर घुमा के सीने से लगाया और उसकी चूत मे लंड भोंक दिया। पीछे से भोला ने शालिनी की गाँड मे अपना लंड ठूँसा और दोनो एकसाथ उसे जकड के उसकी लेने लगे "आआह आआह आआह आआआह"। शालिनी भी कराहने लगी "अँह अँह अँह अँह अँह अँह अँह अँह अँह अँह"। जाने कितनी देरतक वो दोनो पागलो की तरह धक्के मार-मार के शालिनी की लेते रहे फिर अचानक दोनो का पानी थोडे समय के अंतर मे "हाहाआआआआआआहहह हाहाआआआआआआहहह" की आवाजों के साथ निकल के शालिनी के आगे-पीछे के छेदो को भरने लगा। पानी गिरते ही जैसे जादू हुआ और भोला तथा कलुआ दोनो नीद के आगोश मे चले गये। शालिनी भी "आआआआहहहह" की कराह के साथ बेहोश हो गई। (क्रमशः)-






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FUN-MAZA-MASTI शालिनी का बलात्कार-3

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शालिनी का बलात्कार-3

  अब बारी कलुआ की थी। लेकिन उसने जब शालिनी को बेहोशी मे जाते देखा तो वो रुक गया। वो नही चाहता था कि वो शालिनी को बेहोशी की हालत मे लूटे। उसकी इच्छा थी कि शालिनी को पता चले कि वो उसे साथ क्या-क्या कर रहा है। सो वो बिस्तर पे चढा और शालिनी के पास बैठ के भोला से बोला "भोला, जा जरा किचेन से सरसो का तेल ले आ कटोरी मे"। भोला गया और एक कटोरी सरसो का तेल ले के आया। कलुआ ने शालिनी के टूटे पूरे बदन की सरसो तेल से मालिश शुरु कर दी। उसने शालिनी के हाथों, पैरो, सीने, पीठ, गाँड, चूत, कंधे, पेड़ू, पेट, सब की खूब अच्छे से मालिश करते हुए भोला से कहा "भोला, एक गिलास दूध गरम कर"। भोला दूध गरम करने चला गया। २५ मिनट तक कलुआ शालिनी के जिस्म की सरसो तेल से खूब मन लगा के मालिश करता रहा। शालिनी के थके, टूटे बदन को सचमुच काफी राहत मिली। उसकी भागती धडकने लौटने लगी। तभी भोला गरम दूध ले के आया। कलुआ ने शालिनी को अपनी गोद मे सहारा दे के बिठाया और उसे दूध पिलाने लगा। शालिनी धीरे-धीरे घूँट-घूँट करके दूध पीने लगी। पूरा गिलास उसे पिला के कलुआ ने उसे फिर से बिस्तर पे लिटा दिया और कहा "चल भोला, हमलोग भी कुछ खा-पी ले अब। शाम हो चुकी है। इस साली को आधे घंटे आराम करने दे, फिर और मजा देगी ये"। इसके बाद दोनो किचेन मे गये और खिचडी बनाकर खाई और चाय पी। इससब मे घंटाभर बीत गया। दोनो फिर राजीव के कमरे मे आये जहाँ शालिनी बिस्तर पे पडी थी। उन्होने देखा कि शालिनी गहरी नीद मे थी। उसकी साँसे भी अब सामान्य हो चुकी थी और नब्ज भी। उसकी गाँड और चूत से बहता खून भी अब रुक चुका था। कलुआ ने शालिनी को उठाया और बाथरूम मे ले आया। शालिनी अभी भी सो रही थी।

"भोला गरम पानी का झरना चालू कर" कलुआ बोला। भोला ने गीजर चला के गरम पानी चालू किया। कलुआ ने शालिनी को गरम पानी के झरने के नीचे रखा और उसे भिगोने लगा। "आआहहहह अहहहहह अअअअहहहह" बदन पे पानी गिरने से शालिनी की नीद खुलने लगी। कलुआ ने शालिनी के पूरे शरीर पे साबुन लगा के उसे अच्छी तरह नहलाने लगा। "आआआहहहह आआआहहह" शालिनी जागते ही कराहने लगी। उसके पूरे शरीर का दर्द अभी भी पूरा ठीक नही हुआ था। कराहती शालिनी को भोला और कलुआ ने साबुन मल-मल के खूब नहलाया गरम पानी से और बाहर ला के तौलिये से उसके पूरे बदन को पोछा। इसके बाद वो उसे सहारा दे के फिर राजीव के रूम मे ले आये जहाँ थोडी देर पहले दोनो से उसके साथ बलात्कार किया था। कलुआ बिस्तर पे बैठा और शालिनी को अपनी गोद मे बिठा के हेयर ड्रायर से उसकी जुल्फो को सुखाने लगा। शालिनी अब पूरे होश मे थी। वो फिर सुबकने लगी। बेचारी के पास अब बचा भी क्या था जिसे बचाने वो भागती-चिल्लाती। १५ मिनट मे शालिनी के कमर तक लंबे बाल पूरी तरह से सूख के अपने मस्त अंदाज मे लहराने लगे। उनमे गजब की चमक थी। वो नेचुरली काले और बेहद घने थे। कलुआ ने शालिनी के गालोपर चूमा और उसे बिस्तर पे लिटा दिया। फिर कलुआ ने भोला से कुछ कान मे कहा और भोला कमरे से बाहर चला गया। २ मिनट मे वो लौटा तो उसकी हाथ मे वो लाल जोडा था जिसे पहन के शालिनी ने गौतम से शादी की थी। शालिनी ने उस जोडे को बडे अरमान से अलमारी मे सहेज रखा था यहाँतक कि उस जोडे के नीचे पहनी लाल ब्रा-पैंटी भी शालिनी ने वैसे ही उसके साथ सहेज के रखी थी। । चूँकि भोला उसी घर मे लंबे समय से नौकर था सो उसे पूरा मालूम था कि कौन चीज कहाँ रहती है इसलिए उसे शालिनी का वो लाल जोडा ढूँढने मे कोई परेशानी नही हुई।

"चल साली, ये जोडा पहन हमारे लिए" कलुआ शालिनी को जोडा थमाते हुए बोला। शालिनी जानती थी कि ना-नुकुर करने का कोई फायदा नही और वो मानसिक रूप से भी पूरा टूट चुकी थी सो उसने कुछ नही कहा और पहनने के लिए बिस्तर से नीचे उतरी। उसका रोना फिर तेज हो गया। उसेन पहले पैटी चढाई, फिर ब्रा पहनी, फिर पेटीकोट पहन के ब्लाउज भी पहन लिया, फिर उसने साडी पहनी और अंत मे अपनी दुल्हनवाली चुनरी ओढ ली। भोला और कलुआ आँखे फाडे हैवानियत से सब देख रहे थे। कलुआ से रहा नही गया। उसे शालिनी को उठा के फिर पलंग पे फेका और उसपे टूट पडा। वो उसे बाँहो मे भरके बेतहाशा चूमने, मसलने लगा। ५ मिनट चुम्माचाटी के बाद उसने शालिनी को पेट के बल लिटाया और उसकी साडी और पेटीकोट कमर तक उठा दी। अब शालिनी की लाल कच्छी दिखने लगी। कलुआ ने कच्छी के उपर से ही शालिनी की गाँड को खूब चूमा, चाटा और मसला फिर वो कच्छी नीचे सरका दी घुटनो तक। वो चाहता तो उसे पूरा भी उतार सकता था लेकिन वो शालिनी की शादी की पूरी ड्रेस के साथ उसे चोदना चाहता था। शालिनी लगातार सिसक रही थी। उसकी आँखे रोते-रोते सूज गई थी। कलुआ ने अब एक हाथ आगे ले जा के शालिनी के ब्लाउज के सारे बटन एक-एक कर खोल दिये और दूसरे हाथ से शालिनी की लाल ब्रा का हुक खोल दिया लेकिन कुछ भी उसने शालिनी कि जिस्म से उतार के अलग नही किया। उसने अपने दोनो हाथ शालिनी के ब्रा-ब्लाउज मे घुसा के उसके बूब्स, पीठ, काँख, कंधो सबको मसलना शुरु किया और उसके बदन पे लेट गया। कलुआ ने अब अपना लंड शालिनी के चूतडो के बीच मलना शुरु कर दिया और अपने पैरो से वो उसके पैरो को भी लगातार रगड रहा था। १५ मिनट तक ऐसा करने के बाद कलुआ उठा और अपने दोनो हाथो से शालिनी के चूतडो को जितना फैला सकता था फेलाया और उसके बाद अपना लंड शालिनी के गाँड की छेद से सटा दिया। शालिनी फिर सिहर उठी। उसे भोला ला दिया भयानक दर्द या था। उसका रोना और तेज हो गया "आँआँआँआँआँआआआ आँआँआँआँआँआआआ"। सब से बेपरवाह कलुआ ने अब लंड का एक जोरदार धक्का मारा आआआआआआहहहहहहहह और उसका लंड आधा शालिनी की गाँड मे घुस गया। "आआआआआआआआआआह" शालिनी फिर पूरी जान से चीखी और तडपने लगी। कलुआ को तो यही चाहिए था। वो जोश मे आ के एक और धक्का मारा आआआआआआआहहहहहहहहहहहहहहहह और इसबार उसका पूरा लंड शालिनी की गाँड मे घुस गया। "आआआआआआआआहहहहह माँ आआआहहह" शालिनी दर्द मे डूब के अपना सिर पागलो की तरह इधर-उधर हिलाने लगी। कलुआ शालिनी पे लेट गया और अपने दोनो हाथ उसके ब्रा-ब्लाउज मे ले जा के बूब्स, पेट, काँख, नाभि सबकुछ को पागलो की तरह सहलाने, मसलने लगा और शालिनी की गाँड मे धक्के मारने लगा आआह आआह आआह आआह आआह आआह आआह आआह आआह"। शालिनी भी दर्द से दोहरी होने लगी आआआआह आआआआह आआआआह आआआआह। शालिनी ने भयंकर दर्द के कारण बिस्तर पे बिछी चादर को अपनी दोनो मुठ्टियों से कसके भीच रखा था और उसकी आँखे असहनीय पीडा से बाहर आने को उतारु थी। उसकी चुनरी उसके सिर से हट के बदन पे बेतरतीब लिपटी थी। कलुआ नीचे धक्के मारे जा रहा था, मारे जा रहा था। कलुआ लंबाई मे शालिनी से चार इंच छोटा था सो शालिनी पे लेटने से उसका सिर शालिनी की गरदन तक ही आ पा रहा था इसलिए वो बार-बार अपना बाँया हाथ आगे ले जा के शालिनी के सलोने चेहरे को जोर-जोर से रगड, मसल रहा था। वो मजे के सातवे आसमान मे था। शालिनी की गाँड से फिर खून आने लगा। कलुआ का लंड भोला से भी मोटा और लंबा था सो इसबार तेज खून आ रहा था। कलुआ का लंड शालिनी को अपनी आँतो तक पहुँचता महसूस हो रहा था। वो रोए जा रही थी, कलुआ धक्के मारता जा रहा था। कलुआ ने अब अपने नाखूनो से शालिनी के बूब्स, पेट और पीठ को जोर-जोर से खरोचना शुरु कर दिया था "आआहहह आआआहहहह ये ले रंडी आआआहह आआआहहह"। शालिनी और चीखने लगी "आआ माँ आआअहह माँ आआआहहहहहह आआ माँ आआअहह माँ आआआहहहहहह"। नीचे भयंकर धक्के मारते-मारते कलुआ ने २५ मिनट निकाल दिए। शालिनी की गाँड से खून अब काफी तेज बहने लगा। कलुआ का लंड, अंडकोष, झाँटे, काली जाँघे सब शालिनी के खून से सन गई। शालिनी की जान दर्द से निकलने को बेताब थी। उसकी गोरी जाँघे, चूत,लाल कच्छी, पेटीकोट, साडी सब अपने ही खून से सनी थी। अचानक कलुआ ने एक भयानक जोरदार धक्का शालिनी की गाँड मे मारा और चीखा आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ रंडीडीडीडी साली आआहह और उसका लंड झटके मारते हुए शालिनी की गाँड की जाने कितना अंदर घुस के पानी फेकने लगा। "आआह आआह आआह आआह आआह" कलुआ धक्के मारे जा रहा था। शालिनी अब फिर दर्द से अपने होश मे नही थी। वो पागल जानवरो की तरह चीख रही थी "आआआआआरर्रर्रर्रर्रर्र आआआआहहहहहहहह आआह माँ आआआआहहहहहहहहह"। दो मिनट पानी फेकने के बाद कलुआ का लंड खाली हुआ और वो आआहहह बोल के शालिनी के तडपते बदन पे गिर गया और हाँफने लगा "हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ"। थोडी देर मे कलुआ का लंड सिकुड के शालिनी की गाँड से बाहर आया तो शालिनी की गाँड से खून बलबला के फेंकने लगा। कलुआ ने राक्षसो की तरह शालिनी को देखा और बिस्तर से उतर गया। भोला ने राजीव के तकिये से कवर निकाला और शालिनी की गाँड से बहता खून पोछने लगा। थोडी देर मे शालिनी की गाँड से खून आना रुका तो भोला ने तकिए का कवर बिस्तर पे एक तरफ रख दिया और शालिनी की टाँगो को सहलाने लगा। शालिनी फिर आधी बेहोशी की हालत मे थी। उसका चीखना बंद हो चुका था। वो शिथिल पडी थी

भोला ने शालिनी को पकड के सीधा लिटाया और उसकी चूत मे बिना देरी अपना लंड पेल दिया। "आआआआहहहहहहहहहहहह" शालिनी फिर कराह उठी। भोला ने शालिनी के बूब्स, पेट, बाँहे सबको सहलाते-मसलते हुए शालिनी की चूत मारनी शुरु कर दी। "आआह आआह आआह आआह आआह आआह आआह आआह आआह" भोला तेज-तेज धक्के मारने लगा। "आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ" शालिनी बची-खुची ताकत से कराहने लगी। भोला शालिनी के होठो, गालो, गरदन सबको चूमता-चाटता धक्के मारे जा रहा था, मारे जा रहा था। शालिनी अपनी शादी के लाल जोडे मे लिपटी बेबस रो रही थी, कराह रही थी। वो अपने शरीर को बेबसी से रौदा जाता देख रही थी। भोला शालिनी को उसके लाल जोडे मे चोद के बहुत जोश मे था सो १५ मिनट मे ही उसका छूट गया "आआआआआआआआआआआआआहहहह मै आ गया रे आआह आआह आआआह आआआहह" कहता हुआ भोला शालिनी की चूत मे धक्के मारते हुए पानी छोडने लगा। "आ आ आ आ आ आ आ आ" शालिनी लगातार दर्द से कराहती रही। सारा पानी निचोड के भोला शालिनी पे लेट गया और हाँफने लगा "हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ हम्फ"। थोडी देर मे उसका लंड भी सिकुड के शालिनी की चूत से बाहर आ गया। शालिनी की चूत से इसबार खून नही बहा। उसकी चूत अब उस लडको का लंड लेने से फैलने लगी थी। वो बेसुध सी बिस्तर पे पडी तेज-तेज साँसे ले रही थी। उसके कपडे पूरे बेतरतीब हो चुके थे। साडी, पेटीकोट कमर तक उठे थे। लाल कच्छी घुटनो तक सरकी थी। ब्लाउज के सारे बटन खुले थे और वो भी सामने से पूरा खुला था। ब्रा की हुक खुली थी और वो उसके उपर उसके गले तक खिसकी थी। उसका आँचल भी उसके सीने से हटा बिस्तर पे बिखरा था। उसकी चुनरी उसके बदन के नीचे बेतरतीब सी पडी थी। शालिनी के बूब्स, पेट, गरदन, चेहरे, हाथो, जाँघो, चूतड सभी जगह खरोच के निशान थे जो लाल हो गये थे और उनसे हल्का-हल्का खून बह रहा था। रात के आठ बज चुके थे। थके भोला और कलुआ सोफे पे बैठ साँसे संभाल रहे थे। दोनो सुबह से नंगे ही थे। उनका नाटा, काला भद्दा शरीर शालिनी के खून से सना और गंदा लग रहा था। उनके लंड से अभी भी थोडा-थोडा वीर्य रिस रहा था। बैठे-बैठ कब उनकी आँख लग गई उन्हे पता ही नही चला। जब उनकी आँख खुली तो रात के ११ बज रहे थे। उन्होने देखा की शालिनी बेसुध सी पलंग पे उसी स्थिति मे सोई थी जैसा उन्होने उसे छोडा था। कलुआ शालिनी के पस गया और देखते-देखते उसके लाल जोडे को चिथडे-चिथडे कर उसके बदन से अलग कर दिया। शालिनी अब फिर से पूरी नंगी थी। हाथो के चूडी-कंगन, कानो मे टॉप्स, नाक मे नथ, पैरो मे पायल-बिछिया, और गले मे मंगलसूत्र के अलावा उसके बदन पे और कुछ नही था। भोला और कलुआ बिस्तर पे चढे और शालिनी से लिपट के सो गये। (क्रमशः) 

 








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FUN-MAZA-MASTI शालिनी का बलात्कार-2

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शालिनी का बलात्कार-2



थोडी देर मे भोला और कलुआ दोनो मूत के बाथरुम से बाहर आये। शालिनी दुख मे डूबी रोती जा रही थी, रोती जा रही थी। तभी शालिनी का मोबाइल बजा। कलुआ ने उठा के देखा और बोला " इसी चूतवाली के मरद का फोन है, साला जानता भी नही कि उसका माल लुट गया हा हा हा हा हा" कहके वो हँसने लगा। भोला ने दौड के तेजाबवाली शीशी उठाई और शालिनी के पास बैठ गया और बोला "देख रंडिया, अपने मर्द से बात कर लेकिन कुछ बोली तो ये तेजाब सीधे तेरी खुली चू मे डाल दूँगा"। शालिनी फिर सिहर उठी। कलुआ ने फोन स्पीकर पे डाल के शालिनी के कानो से सटाया।

"हैलो जान, कहाँ हो" गौतम ने पूछा।

"घर मे हूँ जानू" शालिनी किसी तरह खुद पे काबू रह के बोली।

"देखो जान, अचानक मुझे अभी मुम्बई के लिए निकलना पडेगा, तीन दिन बाद आऊँगा। सो रात को मेरा इंतजार मत करना, ओके"

"लेकिन ज...जान य...ये अचानक" शालिनी का कलेजा मुँह को आ गया।

"अरे डार्लिंग, नया बॉस आया है। सनकी है। कभी भी कुछ भी कह देता है। मै तीन दिन होते तुम्हारे पास आ जाऊँगा। तबतक अपना ख्याल रखना, बाय। मुझे अभी तुरंत निकलना है। उउउउममममआआहहहह" कह के गौतम ने फोन काट दिया। शालिनी की आँखो मे भय की आँधियाँ चलने लगी। उसे बचने का आखिरी रास्ता भी बद होता दिखा। कलुआ और भोला इधर ये बात सुनते खुशी से पगला गये। भोला बोला "अरे कलुआ, अब तो अपन के पास तीन दिन है रे, चल अब आराम से लगते है काम मे हा हा हा हा"। कलुआ भी बबहुत खुश था, वो भी बोला "हाँ चल, उस साले राजीव की माँ का अब देख मै क्या हाल करता हूँ हा हा हा हा"। शालिनी का दिल जोरो से धडकने लगा। ये हैवान तीन दिनो मे उसका क्या हाल करेगे सोच के उसे चक्कर आने लगे।

तभी भोला ने कमरे मे रखा प्रिज खोला और पानी की बॉटल और एक गिलास निकाला। उसने पानी गिलास मे डाल के अपना लंड उसमे डुबो के निकाला और शालिनी से बोला "ले साली पी ले और अगर इसबार उल्टी की तो देखना, चल ये ले" कह के उसने बिस्तर पे बंधी शालिनी के सिर को थोडा उठाया और गिलास उसके सलोने होठो से लगा दिया। मजबूर शालिनी, मुँह बिचकाते हुए घट-घट पानी पीने लगी। सारा पानी पीते ही घिन के मारे उसे तेज उल्टी आई लेकिन उसने बडी मुश्किल से उसे रोक लिया। उसकी आँखो से आँसू लगातार बहे जा रहे थे। फिर कलुआ ने भी पानी गिलास मे डाला और अपना लंड उसमे डुबा के खूब धोया और शालिनी को वैसे ही पिला दिया। इसी तरह से लंड धोया पानी पिलाते-पिलाते उन्होने शालिनी को सारी बॉटल पिला दी। एक लीटर पानी एक बार मे पी के शालिनी का पेट पानी से पूरा भर गया। उसे घिन भी बडी आ रही थी। कलुआ बिस्तर पे खडा हुआ और शालिनी के सुंदर, भरे-भरे प्यारे चेहरे, गर्दन और बूब्स को अपनी लात से मसलने लगा। शालिनी उउउमममममउउउमममममआआआ जैसी आवाजे निकालने लगी, नीचे भोला शालिनी की मस्त टाँगो को सहला रहा था और उसकी चूत मे उँगली कर रहा था। शालिनी बेबस, सदमे से रो रही थी बस। एक लीटर पानी एकबार मे पीने के कारण शालिनी को पेशाब लग गया। वो रोते हुए बोली "बाथरूम जाना है, पेशाब लगी है"। कलुआ ये सुनते ही मुस्काया और एक लात कसके शालिनी के पेड़ू पर मार दी। "आआआआआआआआआआआआआआआआआहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहआआआआआआआआआआआआआ" शालिनी की हृदयविदारक चीख निकली और उसे बिस्तर पे ही पेशाब होने लगा। भोला ने जल्दी से उसकी चूत में मुँह लगा के होते पेशाब को पीने लगा। "हट रे मुझे भी पीने दे" कह के कलुआ ने भी शालिनी की चूत मे मुँह लगा के उसका पेशाब पिया। "आआआआहहहहहहहहहह साली का पेशाब भी कितना स्वादिष्ट है रे भोलवा" कलुआ बडी बेशर्मी से बोला। "अरे हाँ यार, एकदम बीयर का स्वाद है" भोला ने भी मुँह पोंछते हुए कहा। शालिनी अब भयंकर तकलीफ मे थी। उसकी पेड़ू मे बहुत दर्द हो रहा था। वो लगातार कराह रही थी आआहह आआहह आआहह आआहह आआहह आआहह। उसके आँसू अब सूख चुके थे।

"चल भोला, यहाँ तो इसकी ले ही ली, अब इसे इसके लौंडे राजीव के बिस्तर पे पेलेंगे, चल, साला इसका लौंडा बडे घमंड मे रहता है कि बडा इज्जतवाले घर से है, साले की माँ को आज पूरा बेइज्जत करना है" कलुआ बोला।

"हाँ हाँ चल यार, तू तो सदा सही बात करता है हा हा हा" भोला ने शालिनी के हाथ-पैर खोले और उसे सहारा दे के खडा किया और ले जाने लगा। "अबे क्या कर रहा है" कलुआ बोला और उसने शालिनी को धक्का दे के जमीन पे गिरा दिया और उसकी दायी टाँग को पकड के बोला "इसे घसीट के ले चलेगे, चल"। भोला भी मुस्काया और तैयार हो गया। दर्द से कराहती शालिनी को कलुआ घसीटता हुआ राजीव के कमरे मे लाया और उठा के राजीव के पलंग पे फेक दिया। शालिनी निढाल सी वहाँ पलंग पे पड गई। कलुआ शालिनी पे झपटा और उसे अपनी बाँहो मे भर लिया। वो अपने काले पैरो से शालिनी के गोरे-गोरे पैरो को रगडने लगा। उसका काले हाथ शालिनी के गोरे, सलोने जिस्मपर आजादी से घूम रहे थे। उसे मसल रहे थे। उसके भद्दे होठ शालिनी के मुलायम सुंदर गुलाबी होठो और चेहरे को बेतहाशा चूम-चाट रहे थे। शालिनी अब पूरे सदमे में थी। उसका रोना बंद था। वो सूनी, अधखुली आँखो से शून्य मे देख रही थी। शालिनी के चूडियों-कंगनों से सजे हाथ, पायल-बिछिया से सजे पैर कलुआ के लंड मे आग लगा रहे थे। उसका पागलपन बढता ही जा रहा था। उसने फिर अपना १२ इंच लंबा और साढे तीन इंच मोटा लंड शालिनी के चूत मे पेल दिया "ये ले रंडिया, तेरे बेटे के बिस्तर पे तेरी लेने लगा मै आआआआहहहहहहहहहहहहह"। शालिनी भी कराह उठी "आआआआआआआआआआआआआआहहहहहहहहहहह" उसमें अब चीखने की शक्ति नही बची थी। वो अब सिर्फ कलुआ के हर भयानक धक्के पे "अह अह अह अह " ही कर पा रही थी। इसबार कलुआ ज्यादा जोश मे था। राजीव के बिस्तर पे उसकी माँ की लेने का अहसास उसके लंड को बहुत मोटा कर चुका था। उसने वहाँ रखे राजीव के तकिये उठाये और उन्हे शालिनी की कमर के नीचे लगा दिया। अब शालिनी की चूत उसके सामने पूरी तरह से फैल चुकी थी जो उसके लंड को और अंदर लेने को तैयार थी। उसने शालिनी को बाँहो मे भरा और पूरौ जोर से एक धक्का मारा "आआआआआआआआआआआहहहहहहहहहहहहहहहहह"। शालिनी भी इसबार जोर से चीख पडी "आआआआआआआआआआआआआमाहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह"। कलुआ को लगा कि अंदर कोई चीज उसके लंड को पकडे है। दरअसल उसका लंड शालिनी की बच्चेदानी के अंदर धँस गया था। जल्द ही कलुआ और शालिनी दोनो को इसबात का एहसास हो गया। शालिनी अब फिर दुख और दर्द से रोने लगी वही कलुआ शालिनी के बदन के नये हिस्से मे जा के मजे के सातवे आसमान पे था। "अरे आ रे मादरचोदवाले राजीव, देख तेरे ही बिस्तर पे तेरी माँ की देह के नये-नये हिस्से चख रहा हूँ, जहाँ तू रहता था जनम से पहले मै भी घुस गया वहाँ रे आआआहहहह, भोसरीवाले आआहहह आआआहहहहह, ले रंडी और ले, और ले आआआहहह आआआआहहहह" कह-कहके कलुआ शालिनी को और जोर से चोदने लगा। शालिनी के गले मे लिपटा मंगलसूत्र कलुआ के मजे को दोगुना कर रहा था। शालिनी के रोने-कराहने की आवाजे उसके लंड को मोटा करती जा रही थी। शालिनी जितना दर्द मे डूब रही थी, कलुआ उतने ही मजे मे तैर रहा था। उसके धक्के अब और वहशियाना होने लगे। वो फिर से झडनेवाला था। अचानक वो जोर से चीखा "आआआआआआआआआआआआआआआआआ" और उसका लंड शालिनी की बच्चेदानी मे काफी अंदर धँस गया और पानी छिडने लगा। शालिनी भी पूरी जान से चीखी "आआआआआआआआहहहहहहह नहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीहीही" और रोने लगी "आँआँहाहाहाहाहा आँआँहाहाहाहाहा"। कलुआ का लंड हर झटके मे शालिनी की बच्चेदानी मे और अंदर घुस के पानी फेक रहा था। अब शालिनी की चूत से खून भी आन लगा। पूरे दो मिनट तक पानी फेकने के बाद कलुआ का लंड खाली हुआ और वो शालिनी पर ढेर हो गया "आआआहहहह रंडी"। थोडी देर बाद कलुआ का लंड सिकुड के अपनेआप शालिनी की चूत से बाहर आ गया। कलुआ ने अपने लंड पे शालिनी का खून लगा देखा तो बहुत खुश हुआ और बोला "देख रे भोला, इस साली की नयी सील मैने तो दी हा हा हा" ये देख भोला भी बेशर्मी से हँसने लगा। शालिनी सदमे से बिलकुल खामोश थी। आँसू उसके प्यारे गालो पे ढलके हुए थे और उसकी सुंदर आँखे सूनापन लिए छत को एकटक से देख रहे थे। अब बारी भोला की थी। वो उछल के बिस्तर पे चढा और शालिनी पे लेट के अपने शरीर से उसका जिस्म रगडने-मसलने लगा। उसने शालिनी के स्तनो को बारी-बारी से चूसना-चाटना शुरु कर दिया। शालिनी की छाती एकबार फिर उस आवारा लडके के थूक से सन गई। भोला ने अचानक शालिनी को पलटा और उसकी पीठ को चूमने, चाटने, दाँतो से काटने लगा। अपना दाहिना हाथ नीचे ले जा के वो शालिनी की सुडौल गाँड़ को जोर-जोरसे मसल रहा था। शालिनी अब सिर्फ गूँगी सी लेटी थी। धीमी कराहो "अह अह अह अह" के अलावा उसके मुँह से कोई आवाज नही आ रही थी। अचानक भोला ने शालिनी के चूतड़ो को फैलाते हुए अपने दाये हाथ की एक उँगली उसकी गाँड के कसे, छोटे से छेद मे भोंक दी। "उउउउउहहह" शालिनी चिहुँक उठी। भोला जितनी अंदर ले जा सकता था अपनी उँगली शालिनी की गाँड मे ले गया और उसे हिलाने लगा। "अहहहआआआआअअहहह अहहहआआआआअअहहह" शालिनी को नये किस्म का दर्द होने लगा। गौतम उसकी बहुत इज्जत करता था। उसने कभी शालिनी के साथ इस तरह की गंदी हरकते नही की थी। आज पहलीबार शालिनी की गाँड मे किसी की उँगली गई थी। उसे फिर बडा दर्द होने लगा। "आआआआहहहह आआआहहहह" देर से चुप शालिनी फिर तेज-तेज कराहने लगी। सब से बेपरवाह भोला शालिनी पर लेटा मनमानी करता जा रहा था। उसे अचानक शालिनी के दाये कंधे पे एक तिल दिखाई दिया। जोश मे आ के उसने उस तिल पर इतनी जोर से काटा कि वहाँ से खून आने लगा। "आआआआआआआहहहहहहहहहहह" शालिनी जोर से चीख पडी। भोला अब उठा और अपने दोनो हाथो से शालिनी के चूतडो को फैलाने लगा। शालिनी समझ गई कि भोला उसकी गाँड लेने की तैयारी कर रहा है। वो अंदर तक काँप गई लेकिन उसमे विरोध की शक्ति नही बची थी। वो सिर्फ धीमी आवाजो मे इतना ही कहती रही "नहीही नहीही नहीही, भोला, हाथ जोडती हूँ तेरे, वहाँ नही। मर जाऊँगी मै भोला आँह आँह आँह"। लेकिन उसकी सुननेवाला कौन था। भोला ने अपने हाथो से शालिनी की गाँड़ के छेद को जितना फैला सकता था फैलाया और वहाँ अपना लंड सटाके जोर से धक्का मारा। "आआआआआआआआहहहहहहहह" शालिनी और भोला दोनो एकसाथ चीख पडे। लंड एक इंच भीतर चला गया। शालिनी की गाँड़ का छेद बहुत छोटा था सो दोनो को बहुत दर्द होने लगा। लेकिन ये दर्द तो मानो भोला के लिए इनाम था। उसे पता चल गया कि शालिनी की गाँड अभीतक अनछुई है। वो और जोश मे आ गया और शालिनी के कंधो को पकड के इसबार और तेज धक्का मारा। लंड लगभग आधा अंदर धँस गया। "आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ" शालिनी दर्द से बिलबिला उठी। दर्द उसकी आँखो से आँसू बनके धाराप्रवाह बह निकला। दर्द तो भोला को भी हुआ लेकिन उसका मजा फिर साथ-साथ दूना हो गया। वो शालिनी पे लेटा उसपे पूरा कब्जा किये हुए था। भोला ने इसबार शालिनी के जिस्म को बाँहों मे भरा और उसके बूब्स मसलते हुए पूरी ताकत से एक फाइनल शॉट मारा आआआआआआआआआहह और उसका लंड पूरा शालिनी की गाँड मे घुस गया। "आआआआआआआआआआआआआआआआआआ" की चीख के साथ शालिनी बेहोश हो गई। कलुआ ने जब ये देखा तो तुरंत पानी शालिनी के चेहरे पे फेका। वो होश मे आने लगी। कलुआ उसे पूरा दर्द मे बिलबिलाते लुटते देखना चाहता था। शालिनी के होश मे आते ही भोला ने उसके बूब्स मसलते-मसलते अपने लंड से उसकी गाँड लेनी शुरु कर दी। "आआह आआह आआह आआह आआह आआह" भोला धक्के मारने लगा। "अह अह अह अह अह अह अह अह अह अह" शालिनी आधी बेहोशी सी स्थिति मे इतना ही बोल पा रही थी। भोला पूरे मजे से शालिनी के बदन को भोग रहा था। वो उसकी गरदन, पीठ, कंधे, गालों, सिर सबको चूमते-चाटते हुए उसके बडे-बडे रसीले बूब्स को बेदर्दी से मसलता हुआ उसकी गाँड ले रहा था। शालिनी के बूब्स पूरे कडे हो चुके थे। इसी "आआह आआह आआह आआह आआह" और "अह अह अह अह अह अह अह अह अह" का क्रम लगभग २५ मिनट तक चलता रहा अचानक भोला चीख पडा "आआआआआआआआआआआआआआ" और उसने शालिनी की गाँड मे जाने कितनी भीतर तक अपना लंड ले जाकर वीर्य गिराना शुरु कर दिया। "आआआआआआहहहहहहहहहहहहमामामाममामामामामम" शालिनी की हृदयविदारक चीखे कलुआ को आनंद के सातवे आसमान पे ले जा रही थी। इधर भोला भी "आआह आआह आआह आआह" की आवाजो के साथ शालिनी की गाँड मे अपना पानी भरता जा रहा था। पूरे दो मिनट भोला ने भी अपना पानी शालिनी की गाँड मे भरा और थक के शालिनी के दर्द के कराहते बदन पे ढेर हो गया और हाँफने लगा "हहम्फ हहम्फ हहम्फ हहम्फ हहम्फ हहम्फ"। शालिनी की गाँड से भी खून आने लगा। जो बिस्तर पे फैलने लगा। ३-४ मिनट बाद भोला का लंड सिकुड के शालिनी की गाँड से बाहर आया। भोला की साँसे भी तबतक सँभल चुकी थी। उसने भी अपनी लंड पे लगा खून बडे शान से कलुआ को दिखाया और दोनो फिर हँसने लगे। शालिनी अब कराहने के नाम पे सिर्फ "अअअअ अअअअ अअअअ अअअअ" ही कर पा रही थी। उसका बदन शिथिल पडा था। वो धीमे-धीमे साँसे भर रही थी। (क्रमशः)







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FUN-MAZA-MASTI शालिनी का बलात्कार-1

FUN-MAZA-MASTI

शालिनी का बलात्कार-1


 रोज की तरह सुबह-सुबह आज भी शालिनी जल्दी मे थी। साढे आठ बज चुके थे। उसके पति गौतम के ऑफिस जाने का टाइम हो चुका था। शलिनी ने जल्दी-जल्दी टिफिन पैक कर गौतम को थमाया। गौतम ने टिफिन ले के शालिनी को किस कर लिया। "हटो जी, बीस साल हो गये शादी के अभीतक बदमाशी नही गई" शालिनी शरमा गई। "ओके डार्लिंग, बाय" कह गौतम ऑफिस चला गया। शालिनी ने मुस्कुरा के दरवाजा बंद किया और बाकी कामों मे लग गई।

शालिनी, ४६ साल की एक खूबसूरत दूधिया गोरे, ५ फीट ३ इंच लंबे, कसे और सुडौल बदन की स्वामिनी। उसकी शादी २६ साल की उम्र मे गौतम से हुई थी। उनका १९ साल का बेटा राजीव बंगलोर मे इमजिनियरिंग की पढाई करता था और अभी वही था। शालिनी ने खुद के फिगर को कभी बिगडने नही दिया। वो रोज जिम जाती थी।उसके बाल इस उम्र मे भी बेहद घने और काले थे। उसके बूब्स बड़े-बड़े और तने थे। उसकी गाँड़ भी बड़ी और मस्त थी। उसके चलते समय उसकी गाँड़ बड़ी मस्ती से झूमती थी।

आज गौतम के ऑफिस जाने के बाद शालिनी ने बचा काम निपटाया और नहाने की तैयारी करने लगी।

"भोला, मै नहाने जा रही हूँ। तुम घर मे पोछा लगा देना" उसने अपने घरेलू नौकर भोला से कहा। भोला, शालिनी के यहाँ दो साल से काम कर रहा था। उसकी उम्र १८ साल थी। वो दूर किसी गाँव का रहनेवाला था। उसका कद ५ फीट और रंग काला था। लेकिन शरीर से बेहद तगडा और मजबूत था।

"जी मेमसाब" भोला तुरंत काम मे लग गया।

शालिनी बाथरूम मे गई और नहाने की तैयारी करने लगी। बाथरूम के दरवाजे की कुंडी कुछ दिनो से खराब थी। दरवाजा बंद नही हो पा रहा था। सो उसने दरवाजे को सिर्फ चौखट से सटा दिया और अपना काम करने लगी। उसने पहले रखे हुए कपडो को धोया फिर अपने भी सारे कपडे उतार के उन्हे धोया, फिर झरना चला के नहाने लगी। पहले उसने बालो मे शैम्पू किया, फिर अपने सारे शरीर पे मँहगा खुशबूदार साबुन लगाया। फिर जब वो झरने के नीचे खडी अपने बदन को धो चुकी तो उसने जैसे ही तौलिया लेने के लिए हाथ बढाया तो उसकी नजर अचानक दरवाजे पे गई। वहाँ का नजारा देख वो काँप उठी। दरवाजा खुला था और भोला वहाँ अपने एक हमउम्र दोस्त के साथ खडा उसके नंगे, भीगे बदन को भूखे कुत्ते की तरह निहार रहा था। शालिनी अपने कपडो की ओर लपकी लेकिन उनदोनो ने अंदर आ के उसे पकड लिया और उसी स्थिति में बाहर खीचने लगे।

शालिनी चिल्लाई "भोला, तुम्हारी ये हिम्मत, छोडो मुझे। मै अभी पुलिस को फोन करती हूँ"

भोला शलिनी के भीगे बूब्स मसलता हुआ गुर्राया " साली, रोज तुझे देख के लंड खडा होता है, बडी गाँड़ मटकाती चलती है, आज सारी गरमी निकाल देगे मादरचोद"

शालिनी सन्न रह गई। उसके बेटे से भी उम्र मे छोटा भोला उससे ऐसे बात कर रहा था। वो छूटने के लिए छटपटाने लगी। लेकिन दोनो लडके नौजवान और मजबूत थे। उनकी पकड टाइट थी। वो खीचते हुए शालिनी को उसके बेडरूम मे ले आये।

"साली, अपने मर्द से इसी बिस्तर पे गाँड़ खोलके चुदाती है ना, रोज खिडकी से देखता हूँ साली के नंगे बदन को। खूब मजे से चुदती है रंडिया। आज इसी बिस्तर पे अपनी रसीली गाँड हमे भी चटा दे" भोला बडी बेशर्मी से बोला।

शालिनी की आँखो से आँसू बह निकले। वो चिल्लाने लगी "बचाओ, बचाओ"

"हाँ हाँ चिल्ला बेटीचोदवाली, देखते है तेरी चूत बचाने कौन आता है साली गरम रंडी। कलुआ, पकड साली को, मै अपने कपडे उतारता हूँ" भोला पागल हो चुका था। कलुआ ने शालिनी को अपनी मजबूत बाँहो मे जकडा और देखते-देखते भोला नंगा हो गया। फिर भोला ने शालिनि को दबोचा और कलुआ नंगा हो गया। शालिनी तो पहले से ही नंगी और पूरी गीली थी। उनदोनो ने शालिनी को बिस्तर पे पटका और उसे भंभोडने लगे।

"आआआअहहहहहहहअअअअअहहहहहहहहहह" शालिनी चीखने लगी। उसकी चीखो को सुनके दोनो और मस्ती मे आ गये। कलुआ जो कि १७ साल का आवारा लडका था, उठा और कमरे मे पडी नाइलॉन की रस्सी उठा लाया। दोनो ने शालिनी के दोनो हाथो और पैरो को फैला के पलंग के चारो कोनो से बाँध दिया। अब शालिनी का नंगा, भीगा बदन अंग्रेजी के X आकार मे पलंग से बँधा था। वो लगातार रोये जा रही थी और छोड देने की विनती किये जा रही थी।

"भोला, तुम मेरे बेटे से भी छोटे हो, देखो मुझे छोड दो, मै तुम्हे माफ कर दूँगी भोला। मुझे गंदा मत करो। ये पाप है। मै बर्बाद हो जाऊँगी" शालिनी रोते हुए गिडगिडा रही थी।

"चुप मस्त गाँड़वाली, पूरा लंड खड़ा करा के कहती है कि छोड दो। फट जाएगा मेरा लंड कि नही और हाँ मुझे अपने बेटे से मत मिला। मै मादरचोद भी हूँ, साली चूतवाली गुंडी" भोला आज पूरा बेशर्म हो चुका था।

दोनो ने शलिनी के सुंदर जिस्म को चूमना, चाटना, सहलाना, नोचना शुरु कर दिया। शलिनी "नही नही" चिल्लाए जा रही थी लेकिन वो नही रुके। भोला ने अपना तना बडा लंड शालिनी की चूत पे रखा और उसके बुब्स पकड के एक जोर का धक्का मारा। "आआआआआहहहहहहहहहह" शालिनी चीखी।

"साली रंडी, पूरा लौंडा जन्म गया चूत से, अभी आह उह बाकी ही है बेटीचोदवाली, और ले" कहके भोला ने और जोर से धक्का मारा और उसका लंड आधा अंदर चला गया। भोला का लंड सचमुच काफी बडा था, लगभग १० इंच लंबा और ३ इंच मोटा। शालिनी के पति का लंड ६ इंच ही लंबा और डेढ-दो इंच ही मोटा था। इसलिए शालिनी को काफी तकलीफ हो रही थी। भोला जोश मे धक्के मारे जा रहा था, मारे जा रहा था। शालिनी दर्द से तडप रही थी। उधर कलुआ उसके चेहरे को मसले जा रहा था। वो कभी उसके बाल खीचता, कभी गाल नोचता, कभी नाक दबा देता, कभी आँखो को मलता। शालिनी को बहुत तकलीफ हो रही थी। नीचे भोला के धक्के और उपर कलुआ की मनमानी, शालिनी बेबसी और दर्द से रोए जा रही थी। तभी भोला ने शालिनी की चूत लेते-लेते अपने दोनो हाथ शालिनी के गोरे, सुंदर पेटपर रखे और अपना सारा वजन दे-दे के उसके पेट को दबाने लगा।

"आआआआहहहहहहहहहह क्या कर रहा है भोला" शालिनी तेज दर्द मे भी भोला को गाली नही दे रही थी क्योकि वो संभ्रांत घर से थी और उसे गालियो की आदत ही नही थी। लेकिन भोला नही रुका। वो उसी तरह शालिनी के पेट को मसलता गया, मसलता गया और अचानक ही शालिनी के मुँह से आवाज आई "औऔऔऔओओओओ" और वो उल्टी करने लगी। शालिनी ने घंटेभर पहले ही नाश्ता किया था जो कि उसके पेटपर पडनेवाले लगातार हमले सह न सका और उल्टी के रूप मे बाहर आ गया। उल्टी शालिनी के चेहरे और बिस्तर-तकिए सब पे फैल गयी। कलुआ ने देखा तो जल्दी से झुक के शालिनी के चेहरे पे फैली उल्टी को चाटने लगा और पलभर मे सारा चाट गया। शालिनी की हालत अब खराब हो रही थी। नीचे भोला अब झडनेवाला था। उसने अचानक अपनी दो उँगलियाँ शलिनी की नाभि मे डाली और पूरा वजन दे के दबाया। 

"आआआआआआहहहहहहहहहह" शालिनी दर्द से बिलबिला उठी।

"आआआहहहहहहहह मै आ गया रे रंडिया" कह के भोला भी शालिनी की चूत मे झडते हुए फच फच धक्के मारने लगा।

"नही नही नही आँआँहाहाहाहा हा हा आँआँहाहाहाहा हा हा" शालिनी अपना सिर हिलाते हुए फूट-फूट के रोने लगी। भोला हाँफते हुए शालिनी पे लेट गया और अपनी साँसे सँभालते हुए शालिनी के बालों मे लगी उल्टी को चाटने लगा। थोडी देर बाद वो उठा तो कलुआ ने उसकी जगह ले ली। उसने पहले शालिनी की चूत मे उँगली डाल के भोला का थोडा सा वीर्य लिया और शालिनी के रोते मुँह में चटाया।

"ले चाट साली, अपने जवान यार का रस हा हा हा हा" कलुआ बोला।

शालिनी का मन घिन से भर गया। उसने कभी सोचा भी नही था कि गंदे, काले भोला का वीर्य उसके मुँह मे जाएगा। उसे फिर उल्टी आ गई "औऔऔऔऔऔओओओओ"। भोला और कलुआ ने इसबार भी सब चाट लिया। कलुआ ने बेबस, बँधी शालिनी के भोला से बलत्कृत जिस्म से खेलना शुरु कर दिया।

"अब तो छोड दो। जो करना था वो तो कर चुके आहाहाहाहा हा हा" शालिनी फिर फूट-फूट के रोने लगी।

"लो, अभी से ये हाल है, रे भोला, तूने तो कहा था कि तेरी मालकिन बडी चुदासी है। ये साली तो अभी से ना ना के टमटम पे बैठ गई" कलुआ शालिनी की चूत मसलते हुए बोला।

"अरे साली बडी कंजूस है यार। इसे हम गरीबो को कुछ देने का मन ही नही करता हा हा हा हा। इससे छीनना पडेगा" भोला शालिनी की गोरी बाँहो को सहलाता हुआ बोला।

"छीनेगे तो ऐसा कि जिदगी भर के लिए कंगाल हो जाएगी गोरी चमडीवाली रंडी" कहके भोला ने शालिनी की जाँघो पे कस के चिकोटी काटी।

"आआआआआहहहहहहहहहह" शालिनी चीख पडी।

अब कलुआ से रहा नही गया। वो शालिनी पर लेटा और उसे प्यार करते हुए उसकी चूत मे अपना १२ इंच का लंड एक झटके मे पेल दिया।

"आआआआआहहहहहहहहह" शालिनी को कलुआ का लंड अपनी बच्चेदानी से टकराता प्रतीत हुआ।

"अरे भोला, साली की बच्चेदानी को ठोक दिया रे मैने" कलुआ को भी इस बात का एहसास हो गया। "इस साली के लौंडे के कमरे मे एक बार चला गया था तो साला कहता था कि गंदा कर दिया, ले मादरचोद तू जहाँ पैदा होने से पहले रहता था मै वहाँ भी पहुँच गया रे" कलुआ बोले जा रहा था। उसके बदसूरत काले चेहरे पे विजयी भाव थे। उसने शालिनी के पूरे बदन को अपने आगोश मे लिया और उसे ठोकने लगा। शालिनी को उसका हर धक्का अपनी बच्चेदानी पे महसूस हो रहा था। वो दर्द और अपमान से बिलख रही थी। कलुआ उसके रोने की आवाजो से और मजे मे आ रहा था। उसने शालिनी के गले को पागलो की तरह चूमना शुरु कर दिया। उसका शरीर शालिनी के पूरे शरीर को मसल रहा था। कलुआ लंबाई मे शालिनी से ४ इंच छोटा था सो उसका सिर शालिनी के गले तक ही आ पा रहा था। कलुआ ने शालिनी की काँखो से सारा पसीना चाटा, वहाँ से कई बाल भी तोडे जिससे शालिनी का दर्द दूना-चौगुना हो गया। उसकी चीखे और दर्दनाक हो गई। कलुआ ने शालिनी के सारे सीने और पेट को चाट-चाट के अपने थूक से गीला कर दिया। नीचे उसके धक्के अब वहशियाना होते जा रहे थे। उसकी शालिनी के बेटे से जो एकबार कहासुनी हो गई थी उसका सारा बदला वो आज उसकी माँ के जिस्म से ले रहा था। उसकी चुदाई भोला से भी ज्यादा तेज और बेशर्म थी। अचानक कलुआ ने हाथ नीचे किया और शालिनी की क्लाइटोरिस को मसलना शुरु कर दिया।

"आआआआआ सी सी सी सी सी सी सी सी सी" शालिनी सिहरने लगी।

"साली, तुझे आज मेरे लिए झडना पडेगा वरना तेरे चेहरे पे तेजाब डाल दूँगा अभी" कलुआ उस ठोकता हुआ बोला। शालिनी ये सुन के अंदर तक काँप गई। एक गली का आवारा लडका को उम्र मे उसके बेटे से भी छोटा था, उसे उसके लिए झडना पडेगा। वो और बिलखने लगी "देखो, तुमलोग मेरे साथ पूरी मनमानी कर रहे हो। मुझे और जलील मत करो"।

"साली आज तेरा चेहरा लगता है जलेगा तेजाब से, भोला निकाल वो शीशी" कलुआ भोला से बोला। भोला पूरी तैयारी से आया था। उसने अपनी जमीन पे पडी निकर उठाई और उसमे से तेजाब की शीशी निकाली। शालिनी का कलेजा मुँह को आ गया। वो चिल्लाई "रुक जाओ, रुक जाओ, मै वही करुँगी जो तुम कहोगे" कह के वो अपनी दोनो आँखे बंद करके रोने लगी।

"अब चल साली, मजे ले चुदाई के" कलुआ उसे चोदते हुए बोला। बेचारी मजबूर शालिनी ने अपना ध्यान अपने बलात्कार से हटा के अपनी चूत मे दौडते लंड पे लगाया। कलुआ के लंड ने शालिनी की चूत मे बवाम मचा रखा था। अचानक उसने फिर से शालिनी की क्लाइटोरिस को मसलना शुरु कर दिया। शालिनी को फिर सिहरन होने लगी और उसने अपना पूरा ध्यान उस सिहरन पे लगा लिया। अचानक २-३ मिनटो मे ही शालिनी को चूत मे थरथराहट महसूस हुई और उसकी चूत ने कलुआ के लंड को कई झटको मे अपने रस से नहला दिया।

"आआआआहहहहहहह नही नही नही" शालिनी अंदर से टूट चुकी थी। एक आवारा लडके के लंड पे उसका रस गिरेगा ये उसने सपने मे भी नही सोचा था। उसकी रुलाई मे अब दद कम दुख ज्यादा था। वही कलुआ ने तो जैसे जंग जीत ली। वो मजे से बौरा गया। झड गयी मादरचोदे राजीव की माँ मेरे लंड पे याहाहाहाहाहाहा" उसका वहशीपन और बढ गया। उसके धक्के बेतहाशा हो गये। शालिनी समझ गई कि अब कलुआ झडेगा। उसने आँखे बंद करली और उसके पानी का इंतजार करने लगी।

"आँखे खोल के हँसते हुए मेरा पानी ले रंडिया वरना मै बार-बार नही छोडूगा" कलुआ पागलो की तरह चिल्लाया। बेचारी शालिनी ने अपने दुख से भरे चेहरे पे बडी मुश्किल से नकली मुस्कान थोपी और कलुआ को देखने लगी।

"आआआआआहहहहहहहहहहहहहहहह ले रे राजीव तेरे जनम से पहले के कमरे मे मेरा पानी गया रे रंडीबाज आआआआआआआआआ" कहते हुए कलुआ का लंड भयानक धक्को से अपना पानी शालिनी की बच्चेदानी मे भरने लगा। हर बूँद अंदर ही निचोड के कलुआ शालिनी के थके जिस्म पे ढेर हो गया। शालिनी बिलख-बिलख के रोने लगी "गौतम आँआँहाहाहाहाहा मै बर्बाद हो गई आँआँहाहाहाहाहा, मै अब जीना नही चाहती, मै अब तुम्हारे लायक नही रही जान आआहाहाहाहाहा, बेटा राजीव तेरी माँ गईईईईईईईई अब आँआँहाहाहाहाहा"। वो मानसिक रूप से पूरा टूट चुकी थी। शालिनी के दुख से बेपरवाह कलुआ अपनी साँसे सँभाल के उसपे से उठा और बाथरूम मे मूतने चला गया। पीछे से भोला भी बाथरूम की ओर बढ गया। इधर शालिनी बिस्तर पे बँधी पडी अपने और उनदोनो आवारा लडको के पसीने और उनके वीर्य से लथपथ लगातार रो रही थी। (क्रमशः)


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