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Monday, October 12, 2015

FUN-MAZA-MASTI चचेरी बहन की जवानी

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चचेरी बहन की जवानी 

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम हर्ष है और में आज अपना एकदम सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ वैसे में जयपुर का रहने वाला हूँ और में पुणे में अपना बिजनेस चला रहा हूँ। दोस्तों मेरी उम्र 26 है और मेरा लंड 8 इंच लंबा है और मुझे भाभी, आंटी के साथ सेक्स करना बहुत पसंद है। गर्ल्स जिनके बूब्स 35 के ऊपर हो वो मुझे ज़्यादा आकर्षित करती है। दोस्तों में आज आप सभी को अपनी पहली सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ.. यह कहानी मेरे और मेरी चचेरी बहन के बीच हुई एक घटना है।
दोस्तों मुझे सेक्स का बहुत शौक है और में एक दिन में 5-6 बार लड़कियों को और बड़ी बड़ी गांड वाली औरतों को सोचकर मुठ मार लिया करता हूँ। चलो तो अब में अपनी स्टोरी पर आता हूँ। शायद आप सभी पाठकों को यह स्टोरी बहुत अजीब लगे.. लेकिन यह स्टोरी झूटी नहीं है। में बचपन से ही ग़लत दोस्तों की संगत में रहा हूँ तो तभी से मुझे भी सेक्स के बारे में ज्यादा दिलचस्पी रहने लगी थी और मुझे हर टाईम बस सेक्स, सेक्स, सेक्स और चारों तरफ सेक्स ही दिखता था और में स्कूल टाईम में अपनी टीचर्स को देखकर मुठ मारा करता था। फिर जैसे जैसे टाईम निकला मेरी सेक्स करने की इच्छा और बढ़ती गई और मेरी कज़िन जिसकी उम्र उस समय 19 थी.. वो कुछ दिनों के लिए छुट्टियाँ बिताने घर पर जयपुर आई थी और वो बचपन से ही थोड़ी मोटी थी। में हमेशा से ही उसके साथ घूमता था और उसको इधर उधर छूने की कोशिश करता रहता था।
सॉरी फ्रेंड्स में आपको उसके बारे में तो बताना ही भूल गया। उसका नाम श्वेता है और उसके बूब्स का साईज़ 40 है और गांड का साईज़ 39, उसकी हाईट 5 फीट 2 इंच है। दोस्तों एक दिन उसका मेरे मोबाईल पर कॉल आया कि भैया में जयपुर आ रही हूँ और उसने कहा कि में एक महीने आपके साथ ही रहूंगी। यह बात सुनकर में बहुत खुश हुआ और उसने मुझे टाईम बताया कि वो किस दिन आने वाली है और में उस दिन उसे लेने रेलवे स्टेशन पहुंच गया था और वहाँ पर खड़ा खड़ा उसकी ट्रेन के आने का इंतजार कर रहा था। फिर ट्रेन जैसे ही रुकी तो थोड़ी देर के बाद वो अपने सामान के साथ बाहर आई और आकर मुझसे गले लगकर कहा कि भैया में आपको बहुत याद करती थी। मैंने भी उसको हग करके कहा कि हाँ में भी तुम्हे बहुत याद करता था और फिर में उसको घर पर लेकर आ गया और घर आते ही वो सबसे मिलने में लग गई और में भी अपने काम में व्यस्त हो गया और वो कुछ देर बाद मेरे पास आकर मुझसे मस्ती करने लगी और वो दिन पूरा ऐसे ही निकल गया और जब रात को सोने का टाईम आया तो मम्मी ने उसके सोने के लिए दूसरे रूम में बिस्तर लगा दिये थे.. लेकिन उसकी ज़िद करने की वजह से फिर वो मेरे साथ मेरे रूम में ही सोने के लिए बोल रही थी और फिर आखिरकार मम्मी भी मान गई और उसको मेरे साथ सोने की इजाजत दे दी। में भी अंदर ही अंदर बहुत खुश हुआ क्योंकि मेरी इच्छा पूरी हो गई थी कि वो मेरे साथ ही सोए.. वो 5 साल के बाद मेरे घर पर आई थी और इन 5 सालों में उसके बूब्स बहुत बड़े बड़े गोल हो गये थे और गांड भी बाहर आ गई थी। फिर वो फ्रेश होकर आई और मेरे पास में आकर लेट गई और डबल बेड पर वो ज्यादातर सूट ही पहनती है क्योंकि वो थोड़ी मोटी है.. लेकिन वो उस दिन मेरे पास एक ढीला पयज़ामा और टॉप पहनकर आई थी। दोस्तों मेरी भी आदत है कि में सोते समय एक बरमूडा पहनकर सोता हूँ.. लेकिन जब मैंने उसे पयज़ामे और टॉप में देखा तो मेरा 8 इंच का लंड तो एकदम खड़ा हो गया था और फिर में जैसे तैसे कंट्रोल करके उससे इधर उधर की बातें करने लगा और थोड़ी ही देर में उसको झपकी आने लगी थी। तो मैंने उससे कहा कि तुम सो जाओ.. तुम दिन भर की थकी हुई हो.. तो वो बोली ठीक है और वो मुझसे शुभ रात्रि बोलकर सो गयी। फिर में भी अपने लॅपटॉप पर कुछ काम कर रहा था.. लेकिन मेरा मन तो उसको देख देखकर डोल रहा था और मेरे अंदर सेक्स का अहसास आने लगा और में ना चाहते हुए भी उसके साथ कुछ ना करना चाहता था.. लेकिन सोते समय उसका टॉप थोड़ा ऊपर हो गया और उसकी गोरी गोरी जांघे मुझे साफ दिख रही थी और यह देखकर तो मेरे होश उड़ गये थे और अब मुझसे कंट्रोल भी नहीं हो पा रहा था।
तभी मैंने अपना लेपटॉप बंद किया और उसके पास जाकर लेट गया। फिर धीरे धीरे में उसके और भी पास होता गया और मैंने धीरे से उसकी तरफ करवट ली और अपने एक पैर को उठाकर उसकी गोरी, मुलायम, गरम जांघ पर रख दिया और फिर अपना एक हाथ उसके बूब्स के ऊपर रखकर लेट गया.. उसकी गरम गरम सांसे मुझे महसूस हो रही थी और मैंने उसकी छाती पर अपना हाथ रखा हुआ था और जैसे जैसे वो सांसे लेती मेरा हाथ भी ऊपर नीचे होता। यह सब मुझे बहुत ही गरम कर रहा था और आखिरकार मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अब धीरे धीरे मैंने उसके बूब्स को हल्के हल्के दबाना, सहलाना शुरू किया। फिर जब उसने कोई भी हलचल नहीं की तो में उसके बूब्स को थोड़ा ज़ोर से दबाने लगा और 15-20 मिनट के बाद ऐसा करने से उसकी नींद खुली तो वो एक झटके से उठी और बहुत गुस्से में मुझसे कहने लगी कि भैया आप यह क्या कर रहे थे? में सभी घर वालों को उठाने जा रही हूँ।
मेरी तो फटकर हाथ में आ गई और मैंने उसे सॉरी बोला.. लेकिन वो बहुत ही गुस्से में थी फिर से बहुत मनाने के बाद वो थोड़ा शांत हुई और मुझसे दूर होकर सो गयी.. लेकिन मुझे बहुत बुरा लगा और गुस्सा भी बहुत आया कि मैंने ऐसा कैसे कर दिया अपनी छोटी बहन के साथ। फिर जब अगले दिन में उठा तो देखा वो जल्दी ही उठकर मम्मी के साथ बाहर चली गई। में भी उठकर तैयार हुआ और लंच लेकर रूम में आया तो मम्मी और मेरी बहन दोनों बाहर से वापस आ गई थी और अब में अपनी कज़िन से नज़रे भी नहीं मिला पा रहा था.. लेकिन फिर भी मैंने उससे बात करने की कोशिश की.. लेकिन वो गुस्से में होने की वजह से बात नहीं कर रही थी और अब उसने गेस्ट रूम में सोना शुरू कर दिया था.. यह सब एक सप्ताह तक चला।  

फिर एक दिन में बहुत थका हुआ था और थोड़ा देर से घर पर आया तो तब तक घर के सब लोग सो गये थे और में सुबह अपने साथ घर की एक चाबी ले जाना भूल गया था। तो मैंने उसे कॉल करके दरवाजा खोलने को बोला और फिर वो उठकर आई और उसने दरवाजा खोला तो में अंदर गया, फ्रेश हुआ। उसने पूछा कि क्या में खाना लगा दूँ? तो मैंने मना कर दिया और सीधा अपने रूम में सोने चला गया। उस टाईम रात के एक बज रहे थे और में बहुत थका हुआ था तो मुझे बेड पर लेटते ही नींद आ गई और थोड़ी देर के बाद मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कोई मेरे पास लेटा हुआ है और कोई मुझको सहला रहा था। में डर के मारे उठ गया और मैंने देखा कि मेरी बहन मेरे पास लेटी हुई थी और वो मुझे सहला रही थी। मैंने उससे पूछा कि तुम यहाँ पर कैसे आई? तो उसने कहा कि आप बहुत थके हुए थे और मुझे नींद भी नहीं आ रही थी तो में आपके पास आपसे बात करने आ गई.. लेकिन मैंने देखा कि आप तो सो गये थे और मैंने सोचा कि आपको उठाकर परेशान नहीं करूँ। मैंने कहा कि तुम मुझे उठा देती ऐसी कोई बात नहीं है। फिर उसने मुझे कहा कि आप लेट जाओ फिर हम बात करते है और हम दोनों एक साथ बेड पर लेट गये। तो उसने मुझसे कहा कि आप उस दिन मेरे साथ वो सब क्यों कर रहे थे? तो मैंने उसे सॉरी कहा और कहा कि मुझे पता नहीं उस दिन क्या हुआ और मुझे तुम्हारी बॉडी अपनी और आकर्षित कर रही थी और मुझसे रहा नहीं गया और एकदम सच कह रहा हूँ.. श्वेता में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और मेरा कोई इरादा नहीं था कि में तुम्हारे साथ ऐसा कुछ करूं। फिर वो मेरे पास आ गई और मुझे अचानक मुझे हग कर लिया और कहा कि भैया में भी आपसे बहुत प्यार करती हूँ.. लेकिन यह सब करना सुरक्षित भी नहीं है और अगर में प्रेग्नेंट हो गई तो?
यह सब सुनकर तो मेरे भी होश उड़ गये कि श्वेता यह क्या बोल रही है? मैंने उसे कहा कि प्रेग्नेंट.. तुम यह सब क्या सोचने लगी हो? तो उसने कहा कि भैया मुझे भी यह सब करने का बहुत मन करता है.. लेकिन मेरे फ्रेंड में कोई भी लड़का नहीं है और आप मेरे बहुत करीब हो तो में चाहती हूँ कि आप मेरे साथ यह सब करो.. लेकिन मुझे डर सिर्फ इस बात का है कि घर पर किसी को पता ना लगे और में सेक्स के चक्कर में प्रेग्नेंट नहीं होना चाहती हूँ। तो मैंने उसे समझाया कि ऐसे कोई प्रेग्नेंट नहीं होता तो उसने कहा कि में आपको मेरे साथ वो सब करने दूँगी.. लेकिन चुदाई नहीं करने दूँगी क्योंकि में चाहती हूँ कि मेरी शादी के बाद मेरा पतिं ही मेरी सील तोड़े। तो मैंने उसे और ज़ोर से हग किया और उसके होंठ पर आने होंठ रख दिए और 30 मिनट तक जबर्दस्त स्मूच किया। फिर उसने मुझे खुद से अलग किया और अपना टॉप और ब्रा उतार फेंकी और मुझे वापस अपनी तरफ खींचा और मेरा मुहं अपने एक बूब्स पर रखकर ज़ोर से दबा दिया। में भी मज़े से उसके बूब्स चूस रहा था और उसके निप्पल को काट रहा था.. मेरे निप्पल काटने की वजह से वो बोली।
श्वेता : अहह भैया प्लीज़ धीरे करो.. में कहीं भागी थोड़ी ना जा रही हूँ अह्ह्हह्ह्ह प्लीज़ आईईईईई प्लीज धीरे भैया।
में : काटने में ही तो मज़ा है मेरी प्यारी बहन.. कुछ देर बाद तुम्हे भी मज़ा आएगा।
फिर में एक हाथ से उसके दूसरे निप्पल को खींच रहा था और मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी गांड में ऊँगली कर रहा था।
श्वेता : भैया अहह उह्ह्ह प्लीज बाहर निकालो अपनी ऊँगली मेरी गांड से.. अह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने उसका पयज़ामा भी उतार फेंका और उसकी एकदम रसभरी चूत के दर्शन किये.. लेकिन उसकी चूत पर झांटो का जंगल था.. मैंने उसे बेड पर सीधा लेटाया और उसके दोनों पैरों को फैलाया और उसकी चूत को अपने मुहं में भर लिया। चूत मुहं में लेते ही शेवता ने मेरे सर को पकड़कर और भी आगे किया और एकदम उसकी चूत से चिपका दिया। तो मैंने भी अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया और श्वेता ने ज़ोर जोर से मोन करना शुरू कर दिया और वो सिसकियाँ लेने लगी और मेरे चूत पर जीभ घुमाने से एकदम मचल रही थी।
श्वेता : आअहह भैया यह क्या कर रहे हो आप? आईईइ उफ्फ्फ्फ़ बहुत ही अच्छा लगा रहा है।
फिर में उसे 69 पोज़िशन में लाया और अपना लंड उसको चूसने को कहा और वो मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करके चूसने लगी और में उसकी चूत में ऊँगली करने के साथ उसने बूब्स भी चूस रहा था और 20 मिनट चूसने के बाद जब में झड़ने वाला था तो मैंने उसके बालों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और अपने लंड को उसके मुहं के अंदर तक ज़ोर ज़ोर से धक्के देते हुए अपना वीर्य उसको पिला दिया।
श्वेता : आहह भैया आपका वीर्य तो बहुत स्वादिष्ट है।
तो मैंने कहा कि अब तो तुम्हे रोज़ ही मेरा वीर्य पीना है और उसे फिर से स्मूच कने लगा और मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा और उसकी चूत को अपने मुहं पर रगड़ने को कहा और उसने भी वैसा ही किया फिर मैंने 15 मिनट उसकी चूत चाटी और दो बार उसकी चूत का पानी पिया। फिर हम उठे और एक दूसरे को साफ करके वापस एक ही कम्बल में नंगे सो गये।
दोस्तों यह सब दो सप्ताह तक लगातार और चला फिर एक दिन वो वापस अपने घर चली गई.. लेकिन जब भी मुझे टाईम मिलता तो में किसी काम से उदयपुर उसके घर पर जाता हूँ और उसके साथ एक रात गुजारकर आता हूँ ।।
















राज शर्मा स्टॉरीज पर पढ़ें हजारों नई कहानियाँ

FUN-MAZA-MASTI तीन लडकों से चुदाई – 2

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तीन लडकों से चुदाई – 2





आगे की कहानी
दोस्तों फिर तभी दरवाजे पर घंटी बजी और मैंने दरवाजा खोला.. देखा तो अमित बाहर खड़ा हुआ था और में मुस्कुराकर दरवाजा खुला ही छोड़कर अंदर चली आई और सोफे पर बैठ गई। तो अमित भी मुस्कुराता हुआ आया और मेरे पास बैठ गया.. उसने मुझे बड़े प्यार से देखा और मैंने भी उसे मुस्कुराकर देखा। दोस्तों में उस समय सिर्फ़ टी-शर्ट और स्कर्ट पहने हुए थी और मैंने उसके अंदर पेंटी और ब्रा नहीं पहनी थी.. क्योंकि मुझे मालूम था कि यह लोग ज़रूर आएँगे तो ब्रा और पेंटी का क्या काम? फिर में वैसे ही बैठी रही और मैंने अमित से कहा.. यार वो कल वाली फिल्म मुझे दोगे.. मुझे उसे पूरी देखना है। तो वो बोला कि देखने की क्या ज़रूरत है हम बना लेते है.. तुम हिरोइन बनना और हम सब लोग हीरो बन जाएगे.. अरे यार मज़ाक मत करो मुझे वो देखना है कि वो किस किस तरीके से चुदवाती है। हाँ ठीक है राय दे दूंगा और यह कहते ही उसने अपना उल्टा हाथ मेरी गर्दन के पीछे से मेरे कंधे पर रखा और सोफे पर मुझसे चिपककर बैठ गया। मुझे अब अमित से बिल्कुल भी शरम नहीं आ रही थी और फिर मैंने टीवी चालू कर दिया और फिल्म देखने लगी।
अब अमित ने मेरी टी-शर्ट के ऊपर से ही मेरे बूब्स के निप्पल को छुआ और मेरे शरीर में आनंद भर गया। मैंने उसको मुड़कर देखा और उसने मुस्कुराते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और मैंने भी उसको किस कर लिया.. लेकिन वो मुझसे लंबा किस चाह रहा था.. तो मैंने उसके होंठो पर एक लंबा किस किया और उसने इतनी देर में अपना एक हाथ मेरी टीशर्ट के अंदर डाल दिया और मेरे बूब्स को छूने लगा, दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी आँखें बंद होने लगी और में भी उसको इधर उधर छूने लगी और उसके बालों में हाथ फिराने लगी। फिर उसने अपने एक हाथ को मेरी स्कर्ट में डाल दिया और मेरी जांघो को छूते ही मेरी चूत तक जा पहुँचा और वो मेरी चूत को छूते ही बोला। अरे यार तुमने पेंटी क्यों नहीं पहनी है? तो मैंने कहा कि मैंने अब पेंटी पहनना छोड़ दिया है। तो वो बोला कि बहुत अच्छा है.. अब तुम जब चाहो चुदवा सकती हो। तो मैंने कहा कि हाँ और क्या पेंटी में मुझे बहुत बुरा लगता है और अब वो मुझे फिर से चूमने लगा.. मेरी गर्दन पर, गालों पर, मेरे होंठो पर, मैंने अमित से कहा कि अमित प्लीज दरवाजा बंद कर लो.. वरना कोई आ जाएगा। तो अमित ने दरवाजा बंद किया और फिर से हम दोनों एक दूसरे की बाहों में समा गए.. उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और फिर मेरी स्कर्ट मैंने खुद ही उतार दी और अब में फिर से एकदम नंगी अमित के सामने थी.. वो मुझे प्यार किए जा रहा था और मेरे बूब्स को चूसकर मेरे बदन पर सिर्फ़ अपने चुंबन ही चुंबन कर रहा था और उसने मेरे एक पैर को उठाकर अपने कंधे पर रखा.. जिससे मेरी चूत के होंठ खुल गए और उसने अपने लंड को मेरी चूत पर टिकाकर फिर से धक्का मार दिया और उसका पूरा लंड मेरी गहरी चूत के अंदर समाता चला गया आह्ह्ह्हह्ह चोदो मुझे और चोदो मुझे अमित.. फिर उसने अपने लंड को अंदर डालते ही ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और उसका पूरा लंड मेरी चूत में अंदर बाहर आ जा रहा था। तो थोड़ी देर तक तो अमित मुझे नीचे बड़े आराम से चोद रहा था फ़िर अचानक उसके धक्के तेज़ होने लगे और फिर तेज़ होते ही चले गए। उसने अपना वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया और अब हम दोनों वहीं सोफे पर पड़े रहे और वो मेरे बूब्स पर सर रखकर लेटा हुआ था और मुझे उस पर बहुत प्यार आ रहा था.. में उसके बालों में उंगलियों से सहला रही थी। फिर उसने मुझे देखा और मैंने उसके चेहरे पर किस किया और थोड़ी देर में एक बार उसने मुझे और चोदा और फिर चला गया। फिर में उठी में नहाकर बाहर निकली और कुछ नाश्ता बनाकर ख़ाकर फिर बैठक रूम में आ गई और में दोबारा टीवी पर फिल्म देखने लगी। दोस्तों ये कहानी आप फन मजा मस्तीपर पढ़ रहे है।
अब मैंने एक सफेद कलर की कॉटन कमीज़ पहनी हुई थी और नीचे पेंटी पहन ली थी.. वो कमीज़ थोड़ी लंबी थी तो नीचे कुछ नहीं पहना था.. कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था क्योंकि कमीज़ मेरी जांघो के ऊपरी हिस्से तक की थी। में वापस सोफे पर बैठ गई और फिर से दरवाजे पर घंटी बजी और मेरी दिल की धड़कने तेज़ हो गई में उठी और दरवाजा खोलने गई। तो मैंने देखा सामने रशीद खड़ा हुआ था और में हैल्लो कहकर अंदर आ गई.. वो भी मेरे पीछे पीछे अंदर आ गया। मैंने झुककर सेंटर टेबल पर रखे रिमोटे को उठाया ही था कि एक घटना हो गई.. रशीद ने मेरे घर के दरवाजे को तो बंद कर दिया था और वो मेरे बिल्कुल पीछे पीछे चल रहा था और जैसे ही में थोड़ा झुकी उसने मेरी कमीज़ को ऊपर उठाकर मेरी चूतड़ो पर किस कर दिया और में शरमा गई। तो उसने मौका देखते ही मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे अपनी और खींच लिया और में ना चाहते हुए भी उससे सट गई.. उसके पास से एक खुश्बू आ रही थी। तो मैंने उसकी आँखों में देखा कि वो मुझे प्यार करने के मूड से आया था और में भी उसे प्यार करना चाह रही थी। फिर उसने मुझे दोनों हाथों से कमर से पकड़ लिया। में पीछे मुड़ी और अपनी दोनों बाहें उसके गले में डालकर उससे प्यार करने लगी और में उसको किस करने लगी।
फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुहं के अंदर डाल दी और में उसको चूसने लगी और हम दोनों एक दूसरे में समाने लगे.. फिर उसने मेरी कमीज़ उतार फेंकी और मेरी पेंटी भी एक तरफ डाल दी। में उसकी बाहों में नंगी मचल रही थी और मैंने रूम में लगे कांच में देखा तो मुझे खुद से शरम आ गई। में कैसे एक मर्द की बाहों में इस तरीके से मचल सकती थी.. लेकिन वो कहते है ना कि जब किसी लड़की पर जवानी का जोश चड़ता है तो वो किसी भी हद तक जा सकती है। फिर उसने मुझे सोफे पर लेटा दिया और मेरे पूरे शरीर को अपने चुम्बनों से साराबोर करने लगा। उसके किस मुझे मदहोश कर रहे थे.. उसके होंठ जब मुझे छूते तो मेरे पूरे शरीर में नई उमंग दौड़ जाती थी। मेरी कमर पर उसने जब जीभ से छुआ तो मेरी जान सी निकल गई। फिर धीरे धीरे वो मेरी चूत के आस पास जीभ से छूने लगा और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और फिर मैंने अपनी दोनों जाँघो को रशीद के लिए पूरा खोल दिया.. जिससे मेरी चूत को वो अच्छी तरह से चूस सके और चोद सके। फिर उसने अपनी जीभ मेरी चूत के चारों और चलाई और फिर मेरी जाँघो को होंठो से चूमते ही मेरी चूत के होंठो को अपनी जीभ से छुआ उफफफ्फ़ आहहहह माँ क्या एहसास था? में आपको शब्दों में बता नहीं सकती और फिर मेरी चूत तो जैसे गीली होकर बाहर निकल जाना चाह रही थी और उसके इस जादू का यह प्रभाव था कि मेरी कमर अपने आप ही मटकने लगी थी और मेरा पूरा शरीर अकड़ रहा था और में बेसुध होकर मचल रही थी और सोफे पर एक नागिन की तरह बल खा रही थी.. लेकिन रशीद इन सब बातों से बिंदास होकर मेरी चूत को चूसने में हुआ लगा था। फिर उसने मेरी चूत के होंठो से अपने होंठो को मिला दिया था और किस पर किस कर रहा था। मैंने उसके सर के बालों में अपने हाथों की उंगलियाँ डालकर बालों को पकड़ लिया और उसे अपनी चूत पर दबाने लगी थी। वो भी पूरे जोश से मेरी चूत का रस पी रहा था और फिर उसने मुझे सोफे पर लेटाया और मैंने अपनी बाहों और चूत को उसके लिए खोल दिया और खुला निमंत्रण देने लगी कि आओ और मुझे चोद दो.. तो उसने एक एक करके अपने सारे कपड़े उतारे और मेरे ऊपर आ गया। तो मैंने देखा कि उसने अपने लंड को मेरी चूत के मुहं से सटाया हुआ था.. मैंने अपनी दो उंगलियों से अपनी चूत के मुहं की फांकों को खोल दिया.. जिससे मेरी चूत के मुहं से उसका लंड बिल्कुल छू गया और फिर उसने अपनी कमर को हल्का सा हिलाया।
तो मैंने महसूस किया कि उसका लंड अब मेरी चूत में धीरे धीरे उतरने लगा था और में हल्की सी अकड़ गई थी और उसका लंड मेरी चूत में बहुत रगड़ खाता हुआ जा रहा था और जबकि में कल रात ही उससे चुदी थी.. लेकिन इस समय भी वो बहुत घिसता हुआ अंदर घुस रहा था और उसके लंड की रगड़ मेरी चूत की दीवारों पर एक अजीब सी चुभन पैदा कर रही थी। फिर वो मेरी शरीर के ऊपर आकर मेरी बाहों में समा गया। मैंने अपने दोनों पैर उसकी कमर के आसपास लपेट दिये और उससे लिपटकर उसको प्यार करने लगी। वो मेरे होंठो को चूसने लगा और अपनी कमर को हिला हिलाकर मुझे चोदने लगा और जैसे जैसे वो अपनी कमर को आगे पीछे करता तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर आता जाता और लगभग आधे घंटे तक उसने मुझे जमकर चोदा और में चुदती रही। फिर उसने भी अपना वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया। मैंने उसे किस किया वो थोड़ी देर तक मेरे ऊपर ही लेटा रहा और फिर उठकर सोफे की एक साईड पर टेका लगाकर बैठ गया। तो मैंने उसे देखा और में बिल्कुल नंगी उसके सामने पड़ी हुई थी और मेरी चूत पर उसका वीर्य सना हुआ था।
फिर वो मेरे पैरों के पास अपना लंड लिए बैठा हुआ था और उस पर भी बहुत सारा वीर्य लगा हुआ था.. में उठी और बाथरूम से सब कुछ साफ करके वापस आकर उसके ही पास बैठ गई और मैंने दोबारा कपड़े नहीं पहने थे.. क्योंकि में जान गई थी कि अभी रशीद का मन नहीं भरा है और वो मुझे दोबारा भी चोदेगा और में ऐसे ही नंगी उसके पास आकर बैठ गई। फिर मैंने अपनी एक बाह उसकी गर्दन के पीछे से घुमाकर उसके गले में लपेट दी और उसके मुहं के पास अपने होंठो को ले गई। तो उसने मेरे गले पर एक हाथ लगाकर मेरे होंठो पर एक किस किया और मेरे बूब्स उसके सामने एकदम नंगे उछल रहे थे.. उसने एक हाथ मेरे बूब्स पर रखा और में उसको अपने बूब्स से खेलता हुआ देख रही थी। मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी मुरझाया हुआ ही था। में नीचे झुकी और उसके लंड के पास बैठकर एक हाथ में उसके लंड को लेकर सहलाने लगी.. फिर मैंने अपनी जीभ उसके लंड से लगाई.. उसमे अजीब सी गंध थी और बहुत अजीब सा स्वाद था। मेरे स्पर्श से शायद उसे अच्छा लगा था.. तभी तो उसका लंड अब खड़ा हो गया और में उसको चूसने लगी और चूसते चूसते मेरी लार से उसका लंड मोटा और तगड़ा हो गया। उसने मुझे मेरे बालों से पकड़कर थोड़ा उठाया और झुककर मेरे होंठो को अपने होंठो पर ले लिया और मुझे चुसवाने लगा। मेरे मुहं में उसकी जीभ थी और में उसे प्यार करने लगी, छूने लगी और हम दोनों लगभग दस मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे। मेरा रूम चुम्मो की चटखारो से गूंजने लगा था। फिर उसने मुझे अपनी बाहों में लिया और में बहुत आसानी से उसकी बाहों में चली गई और उसने मुझे मेरी पीठ पर हाथ लगाकर पीछे की और झुकाया जिससे में पीछे की और हल्की सी गिर गई और जिसकी वजह से मेरे बूब्स उभरकर मेरे शरीर को दर्शाने लगे थे और वो अपना दूसरा हाथ मेरी कमर से सरकाते हुए मेरे बूब्स तक लाया और मेरे बूब्स को दबाने लगा। फिर उसने अपने मुहं में मेरे बूब्स को भर लिया और चूसने लगा और काटने लगा.. लेकिन पता नहीं मेरे बूब्स से कुछ निकल रहा था या नहीं.. लेकिन वो शायद कुछ पीने की कोशिश कर रहा था और में आनंद में खोने लगी थी। मेरी पूरी चूत गीली हो रही थी। तब उसने मुझे सोफे पर झुकाकर घोड़ी बनने को कहा और में खड़ी होकर झुक गई और मैंने अपने चूतड़ो को पीछे निकाल दिया। वो अब मेरी गांड के पास खड़ा हो गया और मेरी कमर को हाथों से पकड़कर देखने लगा और उसने अपने लंड को मेरी चूत के मुहं पर रखा।
फिर मैंने भी अपने हाथों से उसके लंड को दिशा दिखा दी और उसने हल्का सा धक्का मार दिया और मेरी चूत में आआआहह उह्ह्ह उसका लंड दोबारा से सरकता चला गया और वो बहुत आआहह उह्ह मदमस्त एहसास था और अहह उफ़फ्फ़ उसने धक्के देना शुरू कर दिया। मैंने अपनी गर्दन नीचे कर ली.. मुझे अब अपनी चूत साफ साफ दिख रही थी और उसमे रशीद का लंड अंदर बाहर जाता हुआ दिखाई दे रहा था। फिर धीरे धीरे उसकी स्पीड बड़ने लगी और मुझे चुदाई का पूरा मज़ा आने लगा.. अहह चोदो मुझे प्लीज अह्ह्ह और ज़ोर से उह्ह्ह और ज़ोर से.. लगभग 15 मिनट के बाद रशीद दोबारा से झड़ गया और उसने दोबारा भी अपना पूरा वीर्य मेरी चूत में ही जाने दिया.. लेकिन अब में बहुत खुश हो रही थी.. क्योंकि रशीद ने जिस तरह मेरी चुदाई की थी.. में तो कहती हूँ कि हर लड़की शायद ऐसी ही चुदाई चाहती होगी, बहुत मज़ा आ गया था.. क्योंकि उसने मुझे जमकर चोदा था। फिर में सीधी खड़ी हुई और उसको होंठो पर एक किस करके बाथरूम में चली गई और में दोबारा नहाकर वापस आई तो रशीद सोफे पर ही बैठा मेरा इंतजार कर रहा था। फिर मैंने कहा अब क्या.. तुम जाओगे नहीं? और उसने ना में सर हिला दिया। तो मैंने कहा कि अब क्या है? दो बार तो चोद लिया है और अब क्या सारा दिन चोदते ही रहोगे? तो वो बोला की अभी तो गांड मारना बाकी रह गया है। तो मैंने कहा तो पहले बता देते तो में तुमसे गांड भी मरवा लेती।
फिर उसने मुझे दोबारा सोफे पर झुकने को कहा और में झुक गई और फिर से उसने मेरी कमर पकड़कर अपने लंड को मेरी गांड पर लगाया और मेरे दोनों चूतड़ो को थोड़ा सा फैलाया और धक्का मार दिया। उसका लंड अंदर चला गया.. मुझे हल्का सा दर्द हुआ और उसने लगातार धक्के मारना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में उसने मेरी गांड मार ली और फिर जाने लगा। मैंने उससे कहा कि अब कब आओगे? तो वो बोला कि तुम कहो तो में ना जाऊँ। दोस्तों मेरा दिल तो बहुत कर रहा था कि यह सब लोग मेरे पास ही रहे.. जब में चाहूँ यह मुझे चोद दें। फिर रात को आने का आश्वासन देकर वो वहाँ से चला गया.. लेकिन सच में रशीद से चुदकर मुझे बहुत ही मज़ा आया और रशीद के जाने के बाद में फिर अकेली हो गई। उस दिन के बाद से यह सिलसिला लगातार जारी है। में उन तीन दिनों में लगभग 20-25 बार चुदी और 10-15 बार गांड मरवा चुकी थी। राहुल और रशीद ने मुझे चुदाई के वो मज़े दिए थे.. जिसकी में कल्पना भी नहीं कर सकती थी। इन तीन दिनों में मेरी पूरी ज़िंदगी बदल गई थी और तब से लेकर आज तक में ना जाने कितने मर्दों के लंड के नीचे आ चुकी हूँ.. लेकिन हाँ एक बात तो है में इन तीन दिनों की चुदाई कभी भुला नहीं सकती ।।















राज शर्मा स्टॉरीज पर पढ़ें हजारों नई कहानियाँ

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