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Sunday, July 13, 2014

FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--7

FUN-MAZA-MASTI
 जरुरत मन्द--7

 थोड़ी देर में अनिल को फ़िर ड्रिंक की जरूरत महसूस हुयी, तो वह बोला रानी मैं १० मिनट में आया। हम दोनो समझ
गये थे कि वह कहां जा रहा है। दोनो ही उसकी आदत जानते थे। अनिल के जाने के बाद रानी और मैं अपना काम करते रहे
और मै बीच बीच में रानी के पूरे बदन पर नज़र मार लेता तो रानी भी मुझे देखकर मुस्करा देती। फ़िर जब पेपर पूरा हो गया
तो मैने एक प्रिंट आउट चेकिंग के लिये रानी को दे दिया।

रानी ने कुछ कोर्रेक्शन के बाद मुझे प्रिंट आउट दिया तो मैं कोररेक्शन करके दुबारा फ़ेयर प्रिंट आउट निकालकर रानी को दे दिया।
इस तरह हमारा टाइपिंग का काम पूरा हो गया तो मैने रानी को बोला कि काम तो पूरा हो गया पर अनिल नहीं आया।
मैं ऐसा करता हूं थोड़ी चाय बनाता हूं तब तक शायद अनिल आ जाये फ़िर तीनो चाय पीयेंगे। रानी बोली नहीं चाय में बनाउंगी, मुझे
कल भी तुमको तकलीफ़ देनी है।

यह तो एक ही पेपर हुआ है अभी तीन पेपर और हैं, प्रिंटर और यु पी एस शायद दो-तीन दिन में ठीक होंगे और मुझे पेपर परसों
तक जमा करना है। मैं कुछ कहता इससे पहले ही रानी किचन में चली गयी मैं मना नही कर पाया। उसे किचन में कोई परेशानी
नहीं हुई और उसने चाय बनाने को भी रख दी।

५ मिनट के बाद रानी दो कप में चाय लेकर आ गयी तो मैने कहा कि अनिल को भी आने दो तो वह बोली राज तुम क्या बात कर
रहे हो इस टाइम वह चाय पीने की हालत में होंगे कहां। उनके लिये चाय मैने नहीं बनायी है उनको जो चाहिये वो उसके लिये ही
गये हैं। मैं तो अनिल के ड्रिंक के बारे में जानता था पर किसी की बुराई और वह भी उसकी बीवी से करना बड़ी बेवकूफ़ी होती है
आखिर पति परमेश्वर जो होता है।

फ़िर अचानक वह मुझसे बोली राज तुम भी अब शादी कर ही लो, ऐसे कब तक चलेगा तो मैने कहा हां अनिल को देखकर मेरा भी
मन करता है और उसके मज़े देखकर कभी जलन भी होती है।

रानी बोली क्यों जलन किस बात की, अरे वह तो तुम्हारी बचोलर लाइफ को अच्छा बताते हैं और कहते है कि वह गलत फ़ंस गये।
मैने कहा मैं सच कहूं तो एक बात की जलन बड़ी होती है कि उसकी (अनिल) की बीवी बड़ी खूबसूरत है। मेरा ऐसा कहने पर रानी
पहले तो शरमा सा गयी फ़िर बोली अच्छा जी तो तुम मुंह में जबान भी रखते हो।

मैं तो तुमको बड़ा सीधा साधा समझती थी, पर तुम भी कम नहीं हो बातें बनाने में। दूसरे की हरी हरी दिखती है, मेरी भी कुछ
परेशानियां हैं, मैने कहा क्यों आपका एक अच्छा परिवार है बच्चा है। ऐसी कोई प्रोब्लम तो नहीं लगती आप दोनो ठीक ठाक कमाते हो।



 रानी बोली हां वह सब तो है पर बहुत कुछ मिस करती हूं, फ़िर भी ठीक ही है। अनिल अभी तक भी नहीं आया तो मैने कहा
पता नहीं क्या बात है, तो रानी बोली यही तो बात है अगर ड्रिंक कर लिया तो इन्हे किसी बात का कोई ध्यान नहीं रहता। अब
घर जाकर न ढंग से खायेंगे न कुछ करेंगे और सो जायेंगे, कभी कभी तो रोज़ ही ऐसा होता है। मुझे ऐसे पियक्कड़ से नफ़रत
होती है और फ़िर हम दोनो कई दिनो तक एक कमरे में भी अलग अलग रहते हैं।

बच्चा तो बस इस बात का सबूत है कि हम पति पत्नि हैं पर शायद एक पति पत्नि की तरह प्यार किये हमें सालों गुजर गये।
रानी एकदम इमोशनल हो गयी थी, मैने उसके हाथ पर हाथ रखकर कहा सब ठीक हो जायेगा तुम उसे प्यार से समझाओ वह
समझेगा। वह तुमसे डरता तो है पर शायद अपनी आदत भी नहीं छोड़ पाता और इसका कारण भी शायद उसकी कम आमदनी
है, तुम उससे ज्यादा मांगें ना किया करो

रानी ने अपना कंधा मेरी गोद में रख दिया और बोली जय तुम्हारी भी तो प्रोब्लम्स होंगी तो क्या ड्रिंक में ही सब प्रोब्लम का हल
है? वह मेरी गोद में आ गयी थी मैं उसकी बाहों पर हाथ फ़ेरने लगा वैसे मैं ये कन्सोल करने के लिये कर रहा था पर मेरा सेक्सी
मन पूरा मज़ा ले रहा था। रानी को भी मेरा टच पसंद आया था और वह कुछ नहीं बोली तो मैने उसे और ऊपर खींच कर अपनी
बाहों में ले लिया। रानी ने कुछ नहीं कहा और अपना सर मेरे कंधों पर रख दिया।

मैं उसे कमर से पकड़ कर सोफ़े की तरफ़ ले गया तो वह मेरे साथ चल दी। रानी दिखने में एकदम पटाखा है, गोरा रंग और चमकदार
चिकनी त्वचा, पतली कमर, कद ५’३ ”/४ ” उसका फ़िगर ३४-२६-३६ होगा। रानी शायद चाहती थी कि मैं उससे खूब बातें करूं और
उसकी तारीफ़ करूं पर में ऐसा नहीं कर पाया। मैं अब तक रानी के बदन को देखकर मस्त हो चुका था औरमैने सोचा बेटा इस से
बढ़िया मौका किसी औरत के बदन से खेलने का मिलना मुश्किल है इसलिये मैं भी मौके का फ़ायदा उठाना चाहता था।

रानी को क्या फ़र्क पड़ता अगर मैं वहां नहीं होता तो अनिल तो उसके साथ रोज़ ही ऐसा करता। मैं उमर में बड़ा और उसको अपनी
बाहों में लेकर बोला सब ठीक हो जायेगा तुम चिंता मत करो बस मस्त रहो, अभी तो मैं तुमको निराश नहीं करुंगा, अनिल से ज्यादा
मज़ा दूंगा और इतना कहकर मैने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रखकर उसके लिप्स को बंद कर दिया।

रानी सकपका गयी और कुछ बोल नहीं पायी, मैने उसके लिप्स जो बंद कर दिये थे। जैसे ही मैं अपने लिप्स हटाये वह बोली जय
आप बहुत गंदे हो, आपने ऐसी गंदी बात कैसे सोची। मैने कहा जो अनिल नहीं करता वह मैं करता हूं तो तुम क्यों परेशान हो, मैं कौन
हूं भूल जाओ थोड़ी देर के लिये। मैं भी तुम्हारा नज़दीक का हूं और सोचो मैंवह सब तुम को दे रहा हूं जो तुम अनिल से इस समय चाहती
हो, फ़िर मैं ड्रिंक भी नही करता।


 http://www.xossip.com/showthread.php?t=1220149&page=20


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FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--6

FUN-MAZA-MASTI
 जरुरत मन्द--6

 थोड़ी देर बाद वो मेरी तरफ़ मुड़ गयी। अब उसका चेहरा भी मेरे पैरों की ओर था। उसने मेरे पैरों को ज़ोर से पकड़ का
अपने बूब्स से रब करना शुरु कर दिया। फिर मैने भी उसके पैरों को सहलाते हुए जांघ तक जा पहुंचा और जब मैं उसकी
चूत पर हाथ रखा तो ऐसा लगा मेरा हाथ जल गया।

उसकी चूत भट्टी की तरह गरम हो रही थी और गरम गरम चूत बिल्कुल गीली हो रही थी। मैने उसकी चूत में अपनी उंगलियां
डालनी शुरु कर दी, उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे जिनको मैं अपनी उंगलियों से सहला रहा था। फिर धीरे धीरे कम्बल के
अन्दर ही मैं अपना मुंह उसके चूत तक लेकर गया और उसकी चूत को पीने की कोशिश करने लगा। उसने अपने एक पैर को
उठा कर मेरे कंधे पर रख दिया।

अब उसकी बुर बिल्कुल मेरे मुंह में थी मैं अपनी जीभ को उसके बुर के चारों तरफ़ घुमाना शुरु कर दिया वो भी अपनी कमर धीरे
धीरे हिलाना शुरु कर दी। मैने भी अपने पैर को उठा कर अपना लंड उसकी तरफ़ बढ़ा दिया। वो बड़े प्यार से लंड को चूसने लगी।
हम अब बिल्कुल ६९ की पोजिशन में थे लेकिन ऊपर नीचे नहीं थे बल्कि साइड बाइ साइड थे और हम जो भी कर रहे थे धीरे धीरे
कर रहे थे क्यों कि ट्रेन में किसी को पता न चले।

वो अब कुछ ज्यादा ही ज़ोर से अपने कमर को उठा का अपने बुर को मेरे मुंह में रगड़वा रही थी। अचानक उसने मेरे सर को अपने हाथ
से अपनी बुर में ज़ोर से दबा दिया और कमर को मेरे मुंह में दबा दिया और ढीली पर गयी। मैं उसके बुर की गरमी धीरे धीरे अपने
मुंह से चाट चाट कर साफ़ किया। वो अब भी मेरे लंड को चूस रही थी। मैं भी अब जोर जोर से अपने लंड को उसके मुंह में घुसा रहा।
मेरे लंड का पानी भी अब बाहर निकलने वाला था मैं ने ज़ोर से उसके बुर में अपना मुंह घुसा दिया और मेरे लंड से पानी निकलना शुरु
हुआ तो ८-१० झटके तक निकलता ही रहा। उसने मेरे लंड के पानी को पूरा अपनी मुंह में लेकर पी गयी।

थोड़ी देर के बाद मैं उठा और टोइलेट गया। मैने अपनी पैंट उतार दी फिर अपनी चड्ढी भी उतार दी। अपने लंड को अच्छी तरह से साफ़
किया और पैंट पहन ली। वापस आकर मैने अपनी चड्ढी बैग में डाल दी। फिर वो भी टोइलेट जाकर आयी। और मेरी तरफ़ मुंह करके
सो गयी और कम्बल ढक ली। अब उसके बूब्स मेरी छाती से लग रहे थे। मैने उसके ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। वो ब्रा नहीं पहनी थी।
ब्रा को शायद टोइलेट में ही उतार कर आयी थी।

मैं उसके गोल गोल बूब्स को अपने हाथ से दबाने लगा और उसके निप्पल को मुंह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। उसने अपने एक हाथ
से अपनी साड़ी को उठा कर कमर के ऊपर रख लिया। अब उसकी कमर के नीचे कुछ भी नहीं था मेरा हाथ उसके मक्खन जैसी जांघों को तो
कभी उसके बुर को प्यार से सहला रहा था और हेमा अपने हाथों से मेरे लंड को सहला रही थी। ऐसा काफ़ी देर तक चलता रहा।

मेरा लंड एक बार फिर से उसकी बुर की गहराई को नापने के लिये मचलने लगा था। मैने धीरे से हेमा से पलट कर सोने को कहा। हेमा
धीरे से पलट गयी। अब उसकी नंगी गांड की दरार मेरे लंड से चिपकी हुई थी। मैने धीरे से अपने लंड को हाथ से पकड़ कर पीछे से उसकी
गांड के छेद में रखा और एक हल्का सा धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड में आधा घुस गया लेकिन वो दर्द से कराह उठी। लेकिन वो चीखी
नहीं। वो जानती थी कि ट्रेन में सब सो रहे लोगों को शक न हो जाये।

मैने धीरे से एक और धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अन्दर घुस गया। फिर मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को मसलने लगा। हेमा की
चिकनी चिकनी गांड मेरे पेट से रगड़ खा रही थी। और मैं उसे चोदे जा रहा था। फिर चार पांच मिनट के बाद मैने अपनी चुदाई की स्पीड
बढ़ा दी। और जोर जोर से हेमा को चोदने लगा। हेमा भी अपनी गांड हिला हिला कर चुदवा रही थी।

अचानक हेमा अपनी गांड को मेरे लंड पे जोर से दबा कर रुक गयी। मेरा लंड भी पिचकारी की तरह पानी छोड़ना शुरु कर दिया। लंड और
बुर दोनो का पानी गिर जाने के बाद दोनो शान्त हो गये। लेकिन हमारी चुदाई सुबह तक चलती रही। हमने रात भर में सात बार चुदाई
की। और किसी को पता भी नहीं चला।

फिर सुबह मेरा स्टेशन आ गया। और मैं उतर गया। उसे आगे जाना था तो वो चली गयी और जाते जाते अपना फोन नम्बर भी दे गयी।



 मैं भी आटो पकड कर अपने रूम पर आ गया । और आते ही बिस्तर पर गिरकर सो गया । सुबह 11 बजे का सोया सोया
मैं शाम को 7 बजे उठा जब मेरे साथ में ही काम करने वाले एक दोस्त अनिल का फ़ोन आया तो मेरी आंख खुली और उससे
बात करके मै होटल पर खाना खाने के लिये चल दिया ।

तभी मेरे मकान से जिसमे कि मैं किराये पर रहता हूं उसके 2 मकान आगे वाली एक आन्टी ने मुझे आवाज लगायी जय बेटा जरा
इधर आओ । मैं उनके पास गया और उनको नमस्ते किया। और फ़िर उनसे औपचारिक सी बात की फ़िर उनसे पुछा बतओ आन्टी
जी आपने मुझे क्यूं बुलाया है तो उन्होने कहा बेटा तुम्हारी हिंदी तो काफी अच्छी होगी, मैने कहा जी मेरी हिन्दी ठीक ठाक ही है मैने
अपनी ग्रेजुएशन हिन्दी से ही की है इतना सुनते ही उनकी आखो में चमक आ गयी और बोली तुम मेरी बेटी नेहा को हिंदी पढ़ा दिया
करो। तुम तो जानते ही हो कि वो हिंदी माध्यम की छात्रा है। गणित, विज्ञान तो कोचिंग में पढ़ लेती है हिंदी पढ़ाने वाला कोई नहीं
मिलता। हिंदी में उसके नंबर भी बहुत कम आते हैं।

मैंने कहा- आन्टी, मेरे पास खुद ही इतने सारे काम है करने के लिये कि समय कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता। मैं कैसे उसे
समय दे सकूँगा। और वेसे भी दिल्ली में हिन्दी कोई कठिन विषय नही है तो वो बोली बेटा मेरी बेटी पढने में थोडी सी कमजोर है तो
उसे अपनी मौसी के यहा से फ़ार्म भरवाया हुआ है उत्तर प्रदेश से।

आन्टी फ़िर से बोली- बेटा, रोज मत पढ़ाना, कभी सप्ताह में एक दिन रख लो। वैसे भी हिंदी ऐसा विषय है कि सप्ताह में एक दिन भी
किसी से मार्गदर्शन मिल जाए तो विद्यार्थी स्वयं ही तैयारी कर लेता है। मैं बोला- ठीक है आन्टी, रविवार को मैं उसे एक घण्टा पढ़ा दिया
करूँगा।

आन्टी खुश हो गई, उन्होंने मुझे आशीर्वाद दिया कि बेटा खूब तरक्की पाओ अपनी जिन्दगी में।
उसके बाद मैं खाना खाकर घर वापस आया और फ़िर से सो गया



 और सुबह उठ्कर जल्दी से तैयार होकर आफ़िस पहुंच गया। जाते ही मुझे बाँस ने अपने केबिन में बुलाया और बोले
की तुम्हे आज से ही मार्केट का काम छोड कर आफ़िस का काम सम्भालना है तो मैने कहा ठीक है सर तो वो बोले काम
काफ़ी ज्यादा है तो तुम रात को रूककर भी काम करना तो मैने कहा सर रात को तो मुझे घर जाने के लिये कोई सवारी
नही मिलेगी तो मै घर कैसे जा पाउंगा तो वो बोले ठीक है अभी जाकर काम करो शाम का शाम को बताउगा तो मै भी ठीक है
सर कहकर अपनी सीट पर आ गया और काम करना सुरु कर दिया।

शाम को करीब 5 बजे सर ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और कहा कि जय रात को तुम आफ़िस मे तो रुक नही
सकते लेकिन क्या घर पर भी कुछ नही कर सकते हो तो मैने कहा सर मेरे पास घर पर कोई कम्प्यूटर नही है तो वो
बोले मुझे पता है अगर में तुम्हे एक लैपटाप दे दू तो तुम्हे काम करने से कोई दिक्कत तो नही होगी मैने कहा सर
कोई दिक्कत नही होगी तो फ़िर सर ने कहा की ये लैपटाप साईड में रखे एक लैपटाप की तरफ़ इशारा करते हुए
कहा कि आज से तुम्हारा है और एक प्रिन्टर स्टोर से निकलवा लो और अपने घर ले जाओ मै बहुत खुश हुआ .

मैने कहा सर लेकिन मै अकेला इन्हे लेकर कैसे जाउन्गा तब उन्होने अनिल को बुलवाया और उससे ये सामान मेरे घर तक
छुडवाने को कहा तो अनिल ने कहा ठीक है सर। और मै और अनिल सामान लेकर घर आ गये मुझे घर छोड कर अनिल
अपने घर चला गया। ऐसे ही बिना चूत के दिन कटते रहे ट्रेन में चुदाई के बाद रविवार तक मुझे कोई भी चूत नसीब नही हुई तो

रविवार को मैं "मुक्तिबोध" की लंबी कविता "अँधेरे में" पढ़कर समझने की कोशिश कर रहा था जब दरवाजे पर दस्तक हुई।
'यहाँ कौन आ गया?' सोचते हुए मैंने दरवाजा खोला। सामने स्कर्ट और टॉप पहने नेहा खड़ी थी। इसके पहले मेरी दो तीन बार उससे
औपचारिक बातचीत भर हुई थी।

वो बोली- भैय्या, मैं हिंदी पढ़ने के लिए आई हूँ। मम्मी ने कहा है रविवार को मैं आपसे हिंदी पढ़ लिया करूँ।

मैं बोला- आओ बैठो, किताब लाई हो क्या?

उसने अपने हाथ में थमी किताब मुझे थमा दी। किताब पर उसने अखबार चढ़ाया हुआ था, किताब थी काव्यांजलि, जो उन दिनों
उत्तर प्रदेश में विज्ञान संकाय के छात्रों को सामान्य हिंदी विषय में पढ़ाई जाने वाली किताबों में से एक थी।

परीक्षा में इसका एक पूरा पैंतीस अंकों का पर्चा होता था। मैंने उसे हिंदी में ज्यादा नंबर पाने के कुछ तरीके बताए, सुनकर वो खुश
हो गई। फिर मैंने कबीर के कुछ दोहों की व्याख्या की और उसके बाद मैं बोला- आज के लिए इतना ही काफी है।

बाकी अगले सप्ताह।




रविवार की शाम को अनिल का मेरे पास फोन आया कि यार तुझे तो पता है की मेरी वाइफ़ रानी टीचर है। उस दिन
अनिल ने बताया की उसका प्रिंटर और यु पी एस खराब हो गया है और रानी को स्कूल के कुछ पेपर सेट करके स्कूल
में जमा करने हैं।

इसलिये वो मेरी मदद चाहता था, मेरे पास प्रिंटर और लैपटाप दोनो हैं। और वो मेरे रूम पर आ रहा है वह जब शाम को करीब
८:०० बजे आया तो मैं थोड़ा घबरा गया था कि दोनो कैसे आ गये मैने तो सोचा था कि अनिल अकेला ही आयेगा । अनिल को
थोड़ा ड्रिंक लेने की आदत है और उस दिन रविवार था तो उस समय वह थोड़ा ड्रिंक किये हुये था।

उससे मैने कहा कोई बात नहीं मैं टाइप कर देता हूं और तुम बोलो, तो रानी ने कहा कोई बात नहीं मैं बोल देती हूं, ये मैने ही बनाया
है तो गलतियां नही होंगी, क्योंकि उसको अच्छी टाइपिंग नही आती तो वह टाइप नहीं कर पायेगी। रानी मेरे बगल में कुरसी लगाकर बैठ गयी
वह इतना नज़दीक थी कि मैं उसकी सांसें महसूस कर सकता था।

कई बार उसके बाँडी से मेरी बाँडी छू रही थी और उसके लिप्स बिल्कुल मेरे करीब थे उसके गोरा रंग और स्लिम फिगर मुझे डिस्टर्ब कर
रहा था। अनिल भी पीछे बैठा था और मैं अपने पर किसी तरह कंट्रोल किये हुये था। पर रानी एकदम नोर्मल थी, उसे शायद ही मेरे बुरे
इरादों का अहसास हो रहा हो।

मैं थोड़ा नर्वस सा भी हो रहा था। मन तो कर रहा था कि उसकी एक पप्पी ले लूं और उसकी थाईस पर हाथ फ़ेरूं। उसके मीडियम साइज़
के टाइट बूब्स पर अपने लिप्स से चूमूं। पर ये सब उस समय सम्भव नहीं था, इस चक्कर में, मैं एक दो बार टाइपिंग करना ही भूल
गया। कभी कभी मैं उसके पूरे बदन को ही देखते रह जाता।





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FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--5

FUN-MAZA-MASTI
 जरुरत मन्द--5

 कमली ने मेरी बात अनसुनी कर दी और मेरे सुपाड़े का बलात्कार करना जारी रखा........मुझे कुछ समझ नहीं आया तो
मैंने कमली के बाल पकडे और अपना लंड उनके खुले मुंह पर दबा दिया..........घप्प करके मेरा लंड कमली में मुंह में
घुस गया...........

मेरी गांड भी फटी, की साली भेन्चोद नाराज़ हो गयी या नाटक चोदने लगी तो बॉस अपनी तो पक्की KLPD हो जाएगी......

कमली ने पहले तो कोई रिएक्शन नहीं दिया और अचानक उनके होंट मेरे लंड पर कस गए और उन्होंने मेरे लंड को जोर जोर से
कुल्फी की तरह चुसना शुरू कर दिया.......अब सर पीछे फ़ेंक कर आँहें भरने की बारी मेरी थी. साली के बाल पकड़ कर थोडा सा
कड़कपन दिखाया तो भेन्चोद और गरमा गयी...........

और बिलकुल ठरकी पने से लंड को पूरा मुंह लेकर चूसते हुए बाहर लाती और फिर से गप्प से पूरा अन्दर डाल लेती .....
उनका एक हाथ मेरे लंड को जड़ से पकडे था मानो लंड कोई कबूतर है......की छोड़ा तो उड़ जायेगा और उनका दूसरा हाथ मेरे गोटों
को सहला और मस्का रहा था. कभी कभी वो मेरे गोटों को नाखुनो से रगड़ देती और मेरी आह और सिसकियाँ निकल जाती.

मेरी सिसकियाँ मुझे ही अजनबी लग रही थी मेरे होंट सुख चुके थे और मेरी ऑंखें खुल नहीं पा रही थी........मेरे गोटों में सुरसुरी
शुरू हो गयी थी. मैं समझ गया की गुरु अब नहीं रुके तो फिर घंटा नहीं रुक पाएंगे......मैंने फिर से कमली के बाल पकड़ के उनका
सर पीछे खिंचा और मेरा lucky लोडा पक्क की आवाज़ के साथ कमली के भूखे मुंह से बाहर आ गया..........

कमली ने साडी चोकलेट चूस चूस कर साफ़ कर दी थी और पूरा लंड कमली की लार से सराबोर था. लंड इस कदर लाल सुर्ख हो गया
था की ऐसा लग रहा था की कमली के चुसना बंद कर देने से नाराज़ हो गया है. साला....बार बार ऐसे ठुनकी मार रहा था मानो
अभी मारने दोड़ेगा.

कमली ने मुझे आधी खुली नशीली आँखों से देखा और अपनी भंवे उठा कर इशारों में पूछने लगी की क्या हुआ........मैंने कुछ नहीं
कहा और धीरे से झुक कर कमली के भीगे होटों पर किस कर दिया...........

मर्डर मूवी में तो सिर्फ इमरान हाश्मी ने गाया था की " भीगे होंट तेरे........." मगर उस भीगे होंट का मतलब
और स्वाद मुझे आज आया.

बेचारे इमरान को कहाँ मल्लिका के ऐसे भीगे होंट नसीब हुए होंगे.



 मैं कमली के नरम मगर गरम होटों को पागलों की तरह चुसे जा रहा था और वो ठरकी औरत गरम पे गरम हुए ही जा
रही थी. मेरे हाथ उनको मम्मो तक पहुँच गए और फिर से उनकी बेदर्दी से रगड़ने लगे, कमली किस करते करते ही मम्म
मम्म आवाज़ निकल रही थी.

वो बिस्तर पर बैठी थी और मैं बेड के किनारे पर नीचे खड़ा था, मैंने किस करते करते ही धीरे से कमली को बिस्तर की
ओर दबाया और उनको बिना किस तोड़े बिस्तर पर लेटा दिया और उनके ऊपर आ गया.

अब हम 69 की अवस्था में आ गए और उसने मेरा लंड चूसना शुरू किया और मैं उसकी चूत चाट रहा था।

करीब 10 मिनट के बाद वो बोली- अब लंड डाल दो।

जिस का मुझे था इंतज़ार......जिसके लिए दिल था बेकरार........वो घडी आ गयी.......आ गयी....

मैं कमली की जांघों के बीच में आया और उसकी टांगों को फैला दिया। नीचे से चददर पूरी तरह गीली हो गई थी।
मैंने अपने लिंग को उसकी योनि पर सैट किया और हलका सा धक्का लगाया। मेरा सुपाडा उसकी योनि में घुस गया।
मेरे लिंग में दर्द की एक लहर दौड़ गई और मेरे मुंह से दर्द भरी कराह निकली।

कमली के मुंह से दर्द और मजे की मिली जुली सिसकारी निकली

ओहहहहहहहह----- आहहहह----
उसके चेहरे पर दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
मैंने अपने लिंग को वापिस थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से एक हल्का सा धक्का लगाया।
लिंग के 1 इंच अंदर जाते मेरी दर्द भरी कराह निकली और बहुत ज्यादा दर्द लिंग में होने लगा। मैंने लिंग को वहीं पर रोक लिया
और कुछ देर ऐसे ही रखा। कमली ने आंखें खोलकर मेरी तरफ देखा। मैंने फिर से लिंग को बाहर निकाला और एक जोरदार धक्का
मार दिया। मुझे लगा कि मेरा लिंग कट गया है। बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। अभी भी मेरा लिंग आधा बाहर ही था।

दर्द के कारण मैं ज्यादा अंदर नहीं कर पाया। दर्द इतना ज्यादा हो रहा था कि मैं वैसे ही बैठा रहा। फिर दर्द जब कुछ कम हुआ
तो मैंने धीरे से लिंग को बाहर निकाला और फिर से एक धक्का मार दिया। जैसे ही मैंने धक्का मारा, कमली ने भी नीचे से अपने
कुल्हे उठाकर मेरा साथ दिया, जिस कारण मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया। मेरा लिंग अंदर जाकर उसके गर्भाश्य से
टकराया और इसके साथ ही कमली के मुंह से जोर की सिसकारी निकली।

ओहहहहहहहहहहहह--- मैं ------ तो ----गईईर्ठईईईईईईईइ------ ससीइठइइइइइइइइईईर्ठईई

और दोबारा से उसका शरीर अकड गया।

मैंने लिंग को फिर से बाहर निकाला और उसके साथ ही कमली का जूस भी बाहर की तरफ बहने लगा।
अब मुझे दर्द का अहसास कम हो गया था क्योंकि मजा ज्यादा आ रहा था। तो मैंने एक और जोर का धक्का मारा। इस बार मेरा
पूरा लिंग कमली की योनि में समा गया था और मुझे ज्यादा दर्द भी नहीं हुआ था। अब मैंने अपने लिंग को फिर से बाहर निकाला
और अंदर घुसा दिया। मैंने तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये।

कमली: आहहहहह=------- ऐसे ही ------ बहुत ---- मजा आ ----रहा है----- जोर ---- से------- और ----अंदर----

हों----- ऐसे---- ही और अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट लिया।

मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। मेरे हर धक्के के साथ कमली अपने कुल्हों को उपर की तरफ उछाल देती।


 थोडी देर बाद वो बोली- मैं ऊपर से आकर खुद लंड चूत में लूँगी।
मैं नीचे लेट गया और एक हाथ से अपना लंड सीधा खड़ा कर दिया और वो ऊपर से आकर धीरे धीरे अपने चूत में लंड लेने लगी,
वो धीरे धीरे लंड पर बैठ रही थी और मेरा लंड उसकी चूत में घुसता जा रहा था। जब मेरा लंड पूरी तरह उसकी चूत में चला गया
तो वो फिर झटके मारने लगी।

मैं कभी उसकी चूचियाँ मसल रहा था तो कभी उसकी गांड सहला रहा था। काफी देर तक वो ऐसे ही चुदाई करते रही और फिर वो झड़
गई और मेरे ऊपर लेट गई। कुछ देर तक वो ऐसे ही लेटी रही, मैं अब उसकी चूचियों को धीरे धीरे मसल रहा था, कुछ देर मसलने के
बाद वो गर्म होने लगी और जब वो पूरी तरह गर्म हो गई तो हम फिर से चुदाई के लिए तैयार थे क्योंकि मेरा तो कुछ हुआ ही नहीं था।
मैं अब उसे बेड से नीचे लाया और उसके एक पैर को कुर्सी पर रखा और दूसरा जमीन पर और अब लंड उसकी चूत में डालने लगा।

जब मेरा लंड पूरी तरह अंदर चला गया तो मैं धीरे लंड को अंदर-बाहर करने लगा। जब भी मैं झटके मारता वो अपना गांड पीछे करती,
इससे और भी मजा आ रहा था। दस मिनट तक मैंने उसे वैसे ही चोदा और फिर उसे बेड पर लाकर किनारे लिटा कर घोड़ी बनाया और
नीचे खड़े होकर उसकी चूत में लंड डाल दिया और उसके चूतड़ पकड़ कर उसकी चूत-चुदाई के मजे लेने लगा। वो भी साथ दे रही थी,
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई और उसकी चूत चोदने लगा।

काफी देर तक मैं ऐसे ही उसकी चूत चोदता रहा फिर मैंने आसन बदला, उसे सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख
लिया। अब उसकी चूत ऊपर उठ गई थी और मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। मैं उसकी चूत चोद रहा था और वो बोल रही थी-
और तेज और तेज ! जोर जोर से चोद दो !

फिर थोड़ी देर में वो झड़ गई। फिर मैं जोर जोर से उसकी चूत में लण्ड अंदर-बाहर करने लगा और करीब 5 मिनट के बाद ही मैं चरम पर
पहुंचने को हो गया और मेरी आंखें मजे के मारे बंद होने लगी और मेरे लिंग ने पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। मेरा गरम जूस अपने अंदर
महसूस करके कमली का शरीर फिर से अकड़ गया और उसने फिर मेरे जूस के साथ अपना जूस मिला दिया।

मैं कमली के उपर लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा। हम दोनों ही की सांसे काफी तेज चल रही थी। कमली ने मेरे माथे को चूम
लिया और मेरी कमर में हाथ फेरने लगी। मेरा लिंग सिकुड कर उसकी योनि से बाहर आ गया। और उसके साथ ही हम दोनों का मिला हुआ
जूस भी उसकी योनि से बाहर बहने लगा।

फिर हम लेट गए और हमें कब नींद आई पता ही नहीं चला।
सुबह जब आंख खुली तों---------------------------------




 मैने देखा कि मै अकेला ही सो रहा था कमली तो कब कि उठ कर अपने घर जा चुकी थी उसके बाद मैं फ़्रैश होने गया तथा
अपने दोस्तो के साथ शहर घुमने चला गया जब दोपहर को मैं शहर से वापस आया तो देखा कि कमली और मेरी बहन जया
दोनो बैठ कर बाते कर रही थी ।

इसके बाद मैं दो दिन और रुका अपने गांव फ़िर वापस अपनी जोब के लिये चल पडा जब मै घर से निकल रहा था तो मैने
देखा कि मेरे माता-पिता मेरी बहन के साथ साथ कमली भी रो रही थी और मेरे दिल मै भी एक अजनबी सा दर्द हो रहा था
गाव छोडते टाईम जैसे पहले कभी नही हुआ था।

फ़िर मै स्टेशन पर पहुचा तो मैने अपना रिजर्वेशन पहले ही गाव आने के टाईम ही करा लिया था तो मुझे कोई दिक्कत नही
हुई अपनी सीट पर पहुचने में। जैसे ही मै अपनी सीट पर पहुंचा तो देखा कि मेरे सामने वाली सीट पर एक सुंदर महिला बैठी थी.
उसने नीली साडी पहनी हुई थी.

वो पतली दुबली थी मगर उसके दूध बड़े बड़े थे, ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज़ फाड़ कर बाहर आने को बेताब हैं। उसका रंग
भी बिल्कुल दूध की तरह सफ़ेद था। उसकी उमर कोई २८ साल की होगी । मैने ध्यान दिया कि वो मुझे बहुत देर से देख रही है तो
मैने भी उसकी तरफ़ देख कर थोड़ा मुस्करा दिया।

फिर वो मुझे अपनी टिकट दिखाते हुए बोली कि ज़रा देखो मेरा रिज़र्वेशन है कि नहीं? मैने देखा उनका वेटिंग टिकेट था। मैने कहा
कोई बात नहीं आप मेरे सीट पर सो जाना। फिर मैने उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम हेमा है। हेमा की खूबसूरती
देख कर मेरे मुंह और लंड दोनो ही जगह से पानी निकल रहा था।

मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान बनाने लगा। ये सरदी की रात थी इसलिये सभी लोग कम्बल ढक कर सो रहे थे।
रात को हम खाना खाने के बाद मैने हेमा से कहा के आप सो जाओ मैं बैठता हूं। उसने कहा नहीं तुम भी कम्बल ओढ कर सो जाओ।
और फिर वो ट्रेन की उस छोटी सी सीट पर इस तरह से लेट गये कि उसकी गांड मेरी तरफ़ थी और चेहरा दूसरी तरफ़। फिर मैं उसके सर
की तरफ़ पैर को रख कर लेट गया और मैं उसकी गांड की तरफ़ मुंह घुमा कर सो गया।

अब लंड बिल्कुल उसकी गांड की दरार में था उसकी गोल गोल गांड और मेरा लंड एक दूसरे से चिपके हुए थे। हेमा के गोरे गोरे पैर भी बिल्कुल
मेरे चेहरे के सामने थे। मेरे लंड को समझाना अब मुश्किल हो रहा था। मैने अपने हाथ उसके पैरों पर रख कर थोड़ा सहलाना शुरु किया और गरम
गरम सांसो के साथ उसके पैरों को चूमने लगा।





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FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--4

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 जरुरत मन्द--4


 कमली ने मुझे इस कदर चूस चूस कर किस करना शुरू किया जैसे मुझे सांप ने होटों पर काट लिया हो और कमली
को मेरी जान बचाने के लिए मेरे होटों से जहर चूस कर निकलना हो. कमली के इस कदर चूसने से मेरे दिमाग में ...........
कीड़ा कुलबुलाने लगा.......मैंने किस करते करते ही कमली को थोडा घुमाया और जब उसका जलता बदन बिस्तर की किनारे पर
आ गया तो उसको धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया.

इसके पहले की वो कुछ बोल पाती मैंने उसके ऊपर लेट कर अपने होटों से उसके होटों को सील कर दिया. कमली इतने मज़े से किस
कर रही थी की मल्लिका शेरावत भी शरमा जाती और अपना इमरान हाश्मी तो कमली के चुम्मे के लिया अपनी तीसरी टांग पे खड़ा हो
जाता. कमली ने मम मम मम्म.…...आवाज़े निकलना शुरू कर दिया था. वो लगातार गरम पे गरम हो रही थी और मैं सोच रहा था
की बस लोहा थोडा और गरम हो जाये फिर बस ..............

कमली ने मेरे मुंह में अपनी जुबां डाली और मेरी जीभ से अपनी जीभ को लड़ाने लगी. हाय......क्या मज़ा आ रहा था.
मैंने अपने होटों को कमली के होटों से अलग किया और लडकियो की सबसे कामुक जगहों में से एक उनकी गर्दन पर कान के नीचे
की ओर चूमने लगा......
कमली के होटों से फिर से आह निकल पड़ी........
मैं किस करते करते नीचे की ओर जाता जा रहा था........
कमली के मम्मो ने मुझे और नीचे जाने से रोकने की कोशिश की मगर मेरा इरादा पक्का था.
लंड खड़ा होने के बाद तो इंसान फरिश्तों की नहीं सुनता .......कमली के मम्मे क्या चीज़ थे......
मैंने अपनी जीभ से कमली की नाभि के चारो और गोला बनाया और धीरे धीरे जीभ से उसकी नाभि को सहलाने लगा.
उत्तेजना से कमली का पूरा पेट कांपने लगा.........मैंने कमली की कमर पर चूमा और उसकी कमर पर अपने दांत धीरे से गढा दिए,
कमली का पूरा बदन सिहर गया और उनके मुंह से फिर से हाय...निकल गयी.

मेरा निशाना तो कमली की कम्मों (चूत) थी.......भेन्चोद.......आज बच के कहा जाएगी.

मैं नीचे और नीचे सरकता हुआ कमली के पैरों के पास पहुँच गया. मैंने घुटनों के बल बैठ कर कमली की चिकनी जांघे पकड़ी और
कमली की जांघ पकड कर .....वहीँ पर एक ज़ोरदार चुम्मा दे डाला.......कमली की पूरी गांड और कमर बिस्तर से ऊपर उठ गई और
उसने वो मादक सिसकारी मारी की उसे सुनकर साधू सन्यासी भी फिर से मोह माया के भंवर में फंसने को आतुर हो जाते......


मैंने कमली की दोनों जांघे पकड़ी और जिस तरह लालची बनिया धीरे धीरे अपनी तिजोरी खोलता है वैसे ही मैंने
कमली की जवानी की तिजोरी खोल दी.

हाय.......मर.....जावा.........क्या नज़ारा था...........

कमली की चिकनी कम्मो इतनी देर से मेरे ध्यान नहीं देने के कारण मानो नाराज़ थी. बिलकुल गुस्से में लाल होकर
मुंह फुलाए बैठी थी. और कुछ आंसू भी टपका दिया थे. कमली के कामरस की कुछ बूंदें उसकी चूत की पंखुड़ियों पर सुबह
की ओस जैसी बैठी थी. कमली की चूत पर एक भी बाल नहीं था. इतनी चिकनी थी मानो करीना का गाल हो...........

मैंने एक सेकंड के लिए ये शानदार ठरकी नज़ारा देखा और असली कुत्ते की तरह अपनी जीभ से कमली की चिकनी चमेली पर
आई कामरस की बूंदों को चाट लिया. कमली ने इतनी जोर से झटका खाया और सिसकारी मारी की एक सेकंड के लिए मुझे
लगा की साली को कहीं जवानी में ही अटेक तो नहीं आ गया. मगर कमली के चूत से किया हुआ यह खिलवाड़ उसका सर घुमा
चूका था. उसने सर उठा कर मेरी आँखों में ऑंखें डाली और धीरे से सर हिलाने लगी.............

कमली बोली, " ज ज ज जय........म म म मत कर रे.......गन्दा है.........."

भेन्चोद........कोंन चुतिया कमली की शानदार चिकनी चूत को गन्दा बोलेगा.......वो तो गुलकंद का पीस लग रही थी.

मैंने कमली की आँखों में ऑंखें डाले डाले ही फिर से उसकी चूत की पंखुड़ियों पर अपनी जीभ चलाई.......कमली ने आह भरी
और अ्पना सर पीछे फेंक दिया और अपनी गांड ऊँची करके चिकनी चमेली मेरे भूखे होटों को समर्पित कर दी.

मैंने कमली के चूत के छेद पर अपनी जीभ टिकाई और अपनी जीभ को सिकोड़ कर बिलकुल नोकदार कर दिया, मैं अपनी जीभ
को ऊपर चलाता गया और कमली की मुनिया धीरे धीरे गुलाब के फुल की तरह खिलती गयी. कमली की मुनिया का चिकनापन
देखने लायक था.....

उसमे से नमकीन खुशबु आ रही थी और इतनी देर से जो नंगेपन का नाच चल रहा था उसके कारण इतनी पनियाई हुयी थी की
मुझे लग रहा था की मैं किसी शरबत के ग्लास में जीभ से कुत्ते की तरह चाट चाट के शरबत पी रहा हूँ.....

अनुभवी जानते होंगे की लडकी की चूत से ज्यादा कामुक उनकी क्लिटोरिस होती है जिसको चना या दाना भी बोलते है.....

मैं अनजाने में ही अपनी जीभ से कमली के दाने को छेड़ बैठा और बेचारी कमली का बचा खुचा कंट्रोल भी ख़तम हो गया और वो
ऐसे सिसियाने लगी जैसे उसकी चूत पर किसी ने मिर्च डाल दी हो.......

मैं पहले उसकी चूत को धीरे से अपनी जीभ से खोदता और फिर जीभ ऊपर ले जाकर उसके दाने से अपनी जीभ का दंगल करवाता.......
कमली ऐसे हाय हाय करके अपनी चूत मेरे मुंह पर दबा रही थी की मुझे सांस लेने में दिक्कत होने लगी.....मैंने उसकी मुनिया की
पंखुड़ियों को अपने होटों में दबाया और किस लेने के अंदाज में चूस मारा.....अब तो कमली की मुनिया ढेर हो गयी और जो कमली
ने मेरा सर अपनी जन्घो में दबा कर सिसकारी मारी मुझे लगा कहीं जोश जोश में मैंने कमली की चूत पर काट तो नहीं लिया.....
मगर कमली जोर जोर से साँसे ले कर जोर से फिर बोली, "उईईईई........माँ......आ आ ........"

और कमली का पूरा बदन अकड़ गया........साली ने मुझे अपनी टांगों के बीच दबा रखा था, मैं तो ढंग से सांस भी नहीं ले पा रहा
था,......बड़ी मुश्किल से मैंने अपना सर कमली की जाघों में से निकाला और देखा की उसकी ऑंखें बंद थी और वो जोर जोर से
सांस ले रही थी......वो पूरी तरह से झड चूकी थी।

फिर उसने अपनी ऑंखें धीरे से खोली, उसकी ऑंखें इस कदर नशीली थी मानो उसने 5 -6 पैग लगा रखे हो.

अब कमली का सिग्नल तो डाउन हो गया था.....मगर मेरा नहीं........

मेरा लंड गुस्से में अपना सर इधर उधर हिला रहा था........सुपाडा बिलकुल फ़ूल कर टमाटर की तरह लाल सुर्ख हो
गया था.......कमली ने पहले मुझे देखा और फिर मेरे सांप जैसे लहराते लंड को और मुस्कुरा दी. मैं थोडा आगे होके उसके
पास गया और उसका हाथ पकड़ कर अपने गुस्सैल बाबुराव पर रख दिया,

कमली ने मेरे लंड को जड़ से पकड़ा और बच्चो से बात करने वाली अदा में बोली, "अले अले......देखो तो......
कैसा नाराज़ हो गया है.........अभी खुश करती हूँ मेले पप्पु लाला को........." और जोर जोर से मेरी मुठ मारने लगी.....................

मस्ती से मेरी तो ऑंखें ही बंद हो गयी......कमली अपने हाथ से मेरे लंड को बेदर्दी से हिलाए जा रही थी मगर मेरा लंड भी
WWF के पहेलवान जैसे इतनी मार खा के भी डटा हुआ था. कमली ने अपना दूसरा हाथ बढा कर मेरे गोटें सहलाने शुरू कर
दिया......मैं समझ गया की यह कमीनी अब मेरा जल्दी से निकालने की फ़िराक में है. मेरे गोटों में सुरसुरी शुरू हो गयी मगर
मैं आज जल्दी हल्का होने के मूंड में नहीं था.........मैंने लम्बी लम्बी साँसे लेना शुरू कर दिया.......जो सुरसुरी मेरे गोटों में
शुरू हुयी थी वो बंद हो गयी और कमली के हाथ का कसाव मेरे लंड पर और बढ़ गया.

उसने अब मेरे गोटों को अपने नाखुनो से रगड़ना शुरू कर दिया.......भेन्चोद.....मुझे तो अँधेरे में भी हजारो वॉट की रोशनी
दिखने लगी......मैंने बड़ी मुश्किल से अपने गोटों में उबलते हुए लावे को रोका.........

मैने मन ही मन सोचा ये आज नहीं बचेगी......

और मैं अब कमली के चेहरे से १० इंच की दूरी पर बाबुराव को लाकर धीरे धीरे हिलाने लगा. मैंने फिर कहा, " कमली प्लीज़
इसे चूस लो ना.....देखो कैसा तड़प रहा है .......आह ह ह ह ........."

कमली पहले ने मुझे देखा फिर मेरे प्यारे लंड को.......और मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से मुंह खोल कर मेरा लाल लाल
फुला हुआ सुपाडा अपने होटों के बीच दबा लिया. मेरे मुंह से आह निकल गयी......

कमली के नरम नरम होटों के बीच मेरा सुपाडा फंसा था यह सोच सोच कर ही मेरे फ़रिश्ते भांगड़ा कर रहे थे मगर वो मुंह में
मेरा सुपाडा दबाये जिस कातिल अदा से मेरी आँखों से ऑंखें मिलाये हुयी थी, मेरे रोम रोम से पसीना छुट रहा था.

कमली ने मेरे सुपाड़े को धीरे से चूसना शुरू किया........मैंने आज तक ना जाने कितनी बार चूत मारी थी मगर कभी वो मज़ा
नहीं आया था जो आज कमली के सिर्फ मेरा सुपाड़े के चूसने में ही आ रहा था. साली ......एकटक मुझसे नज़रे मिलाये हुयी थी.
मेरे सुपाड़े को ऐसे चूस रही थी मानो दशहरी आम हो. मुझे तो जन्नत का मज़ा आ रहा था.

कमली ने मेरे सुपाड़े को छोड़ा और अपनी जीभ की नोक से सुपाड़े के छेद को खोदने लगी.......भेन्चोद.....मेरी तो सांस ही रुक
गयी......कमली की जीभ लपालप मेरे लंड के छेद को छेड़े जा रही थी और वो बेशरम लडकी मेरी आँखों में आये मस्ती के भाव
देखे जा रही थी. कमली ने छेद को खोदने के बाद जीभ से सुपाड़े पर सपाटा मारा और छेद से लंड की चमड़ी के जोड़ पर अपनी
शरारती जीभ ले आई.......ओह्ह.......स्वर्ग के सारे सितारे और नज़ारे दिख गए .......वहां पर जीभ लाकर कमली ने चमड़ी
और सुपाड़े के जोड़ पर जीभ से ठुनकी मरना शुरू कर दी.....

मैंने कमली का सर पकड़ा और उसको अपने लंड पर दबाने लगा ताकि वो मेरे सुपाड़े पर रहम खा ले... क्योकि ये सब चलता रहा
तो मैं क्या सल्लू बाबा भी अपने कमिटमेंट भूल जाते और पिचकारी छोड़ देते.......कमली ने सुपाडे पर हरकत करना बंद नहीं किया......
बल्कि उसने सुपाड़े के छेद पर फिर से जीभ घुमाई और लंड की लार पर से जुबान इस तरह उठाई की एक तार सा बन गया.......हाय
ये साली तो आज मेरा लंड फोड़ कर ही मानेगी..........लंड की लार और कमली की लार से पूरा सुपाडा तर हो चूका था और मोमबत्ती
(लाईट चली गयी थी) की रोशनी में चमक रहा था.

मैंने सिसियाते हुए कहा, "आह................प प पूरा ले लो.....अ अ अन्दर.......ऊह......आह........" 








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FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--3

FUN-MAZA-MASTI
 जरुरत मन्द--3

 उसने जल्दी से जया को अपने से दूर किया और बोला कैसे है मेरी छोटी बहन जया ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा जाओ
में आपसे बात नही करती ऐसे भी क्या कोई अपनी बहन या मां बाप के साथ करता है जैसा आपने किया है जय ने पुछा
की क्या किया मैने तो जया बोली की ज्यादा बनकर मत दिखाओ 6 महीने बाद बहन की याद आयी है जाओ मेरी आपसे
कटटी……
मैं नही बोलती आपसे तो जय ने अपने कान पकड कर कहा सौरी बाबा सौरी……

चल जल्दी से ये देख मैं तेरे लिये क्या लाया हूं तो जया ने पुछा की क्या लाये हो तो जय ने उसे टेलीविजन दिखाया तो जया
ने मारे खुशी के जय के माथे को चूम लिया । इसके बाद जय मम्मी पापा से मिला हाल चाल पूछा और अपना हाल सुनाया
उसने बस इतना ही बताया की वो इक अच्छी कम्पनी में जोब करता है उसके बाद उसने माँ के हाथ का बना हुआ खाना खाया
और खाना खाकर शाम के समय बाहर घूमने के लिये जैसे ही वो घर से बाहर निकलने वाला था तभी कमली ने उनके घर में
प्रवेश किया और जैसे ही उसने जय को देखा तो वो जय से चिपक गयी और लगी उस पर मुक्के बरसाने की मुझे ऐसे कैसे छोड
कर चले गये तुम और उसने जय के गाल पर चुम्मियों कि झडी लगा दी

अब कोई लडकी किसी लडके से गले लग कर खडी हो और उपर से उसकी चुचिंया लडके के शरीर में चुभ रही और ऊपर से वो
किस पर किस करे जा रही हो तो लडके का लंड कैसे ना खडा होगा तो हो गया जय का लंड भी खडा और वो भी लगा कमली को
किस करने लेकिन इस से पहले की दोनो कुछ और कर पाते आ गयी कबाब में हडडी जया और कलमी को देखते ही बोली अरे
कमली तू आ गयी में तुझे ही बुलाने जा रही थी। अब जय दोनो लडकियों को बतलाता हुआ छोड्कर बाहर निकल गया और अपने
गांव के पुराने दोस्तो से मिलने चला गया।

रात को जब वो वापस आया तो देखा तो घर में पडोसियों और मुहल्ले के बच्चों की भीड जमा थी जय डर गया की कही फ़िर से
पापा को तो कही कुछ ना हो गया जय भागता हुआ घर में घुसा तो देखा घर में सब कुछ एक दम ठीक था अन्दर टेलीविजन चल
रहा था जिस वजह से उसके घर में इतनी भीड थी। और रात के समय टेलीविजन पर चन्द्रकान्ता नामक नाटक आ रहा था जिसमें
कि एक प्रेम-मय सीन चल रहा था सीन क्या था तो देखिये……

लौंडी की सूरत बनाए हुए तेजसिंह भी एक किनारे जाकर बैठ गए।
तेजसिंह को देख चपला बोली - ‘क्यों केतकी, जिस काम के लिए मैंने तुझको भेजा था क्या वह काम तू कर आई जो चुपचाप
आ कर बैठ गई है?
चपला की बात सुन तेजसिंह को मालूम हो गया कि जिस लौंडी को मैंने बेहोश किया है और जिसकी सूरत बना कर आया हूँ
उसका नाम केतकी है।
नकली केतकी – ‘हाँ काम तो करने गई थी मगर रास्ते में एक नया तमाशा देख तुमसे कुछ कहने के लिए लौट आई हूँ।’
चपला – ‘ऐसा। अच्छा तूने क्या देखा कह?’
नकली केतकी – ‘सभी को हटा दो तो तुम्हारे और राजकुमारी के सामने बात कह सुनाऊँ।’
सब लौंडियाँ हटा दी गईं और केवल चंद्रकांता, चपला और चंपारह गई। अब केतकी ने हँस कर कहा - ‘कुछ इनाम तो दो
खुश-खबरी सुनाऊँ।’
चंद्रकांता ने समझा कि शायद वह कुछ वीरेंद्र सिंह की खबर लाई है, मगर फिर यह भी सोचा कि मैंने तो आज तक कभी वीरेंद्र
सिंह का नाम भी इसके सामने नहीं लिया तब यह क्या मामला है? कौन-सी खुशखबरी है जिसके सुनाने के लिए यह पहले
ही से इनाम माँगती है? आखिर चंद्रकांता ने केतकी से कहा - ‘हाँ, हाँ, इनाम दूँगी, तू कह तो सही, क्या खुशखबरी लाई है?’
केतकी ने कहा - ‘पहले दे दो तो कहूँ, नहीं तो जाती हूँ।’ यह कह उठ कर खड़ी हो गई।

केतकी के ये नखरे देख चपला से न रहा गया और वह बोल उठी - ‘क्यों री केतकी, आज तुझको क्या हो गया है कि ऐसी बढ़-बढ़
कर बातें कर रही है। लगाऊँ दो लात उठ के।

केतकी ने जवाब दिया - ‘क्या मैं तुझसे कमजोर हूँ जो तू लात लगावेगी और मैं छोड़ दूँगी।’
अब चपला से न रहा गया और केतकी का झोंटा पकड़ने के लिए दौड़ी, यहाँ तक कि दोनों आपस में गूँथ गईं। इत्तिफाक से चपला
का हाथ नकली केतकी की छाती पर पड़ा जहाँ की सफाई देख वह घबरा उठी और झट से अलग हो गई।

नकली केतकी - (हँस कर) क्यों, भाग क्यों गई? आओ लड़ो।
चपला अपनी कमर से कटार निकाल सामने हुई और बोली - ‘ओ ऐयार, सच बता तू कौन है, नहीं तो अभी जान
ले डालती हूँ।’
इसका जवाब नकली केतकी ने चपला को कुछ न दिया और वीरेंद्र सिंह की चिट्ठी निकाल कर सामने रख दी। चपला की
नजर भी इस चिट्ठी पर पड़ी और गौर से देखने लगी। वीरेंद्र सिंह के हाथ की लिखावट देख समझ गई कि यह तेजसिंह हैं,
क्योंकि सिवाय तेजसिंह के और किसी के हाथ वीरेंद्र सिंह कभी चिट्ठी नहीं भेजेंगे। यह सोच-समझ कर चपला शरमा गई
और गरदन नीची कर चुप हो रही, मगर जी में तेजसिंह की सफाई और चालाकी की तारीफ करने लगी, बल्कि सच तो यह है
कि तेजसिंह की मुहब्बत ने उसके दिल में जगह बना ली।

चंद्रकांता ने बड़ी मुहब्बत से वीरें द्रसिंह का खत पढ़ा और तब तेजसिंह से बातचीत करने लगी -
चंद्रकांता – ‘क्यों तेजसिंह, उनका मिजाज तो अच्छा है?’
तेजसिंह – ‘मिजाज क्या खाक अच्छा होगा? खाना-पीना सब छूट गया, रोते-रोते आँखें सूज आईं, दिन-रात तुम्हारा ध्यान है,
बिना तुम्हारे मिले उनको कब आराम है। हजार समझाता हूँ मगर कौन सुनता है। अभी उसी दिन तुम्हारी चिट्ठी ले कर मैं गया
था, आज उनकी हालत देख फिर यहाँ आना पड़ा। कहते थे कि मैं खुद चलूँगा, किसी तरह समझा-बुझा कर यहाँ आने से रोका
और कहा कि आज मुझको जाने दो, मैं जा कर वहाँ बंदोबस्त कर आऊँ तब तुमको ले चलूँगा जिससे किसी तरह का
नुकसान न हो।’

चंद्रकांता – ‘अफसोस। तुम उनको अपने साथ न लाए, कम-से-कम मैं उनका दर्शन तो कर लेती? देखो यहाँ क्रूर सिंह के
दोनों ऐयारों ने इतना ऊधम मचा रखा है कि कुछ कहा नहीं जाता। पिताजी को मैं कितना रोकती और समझाती हूँ कि क्रूरसिंह
के दोनों ऐयार मेरे दुश्मन हैं मगर महाराज कुछ नहीं सुनते, क्योंकि क्रूरसिंह ने उनको अपने वश में कर रखा है।

मेरी और कुमार की मुलाकात का हाल बहुत कुछ बढ़ा-चढ़ा कर महाराज को न मालूम किस तरह समझा दिया है कि महाराज
उसे सच्चों का बादशाह समझ गए हैं, वह हरदम महाराज के कान भरा करता है। अब वे मेरी कुछ भी नहीं सुनते, हाँ आज बहुत
कुछ कहने का मौका मिला है क्योंकि आज मेरी प्यारी सखी चपला ने नाजिम को इस पिछवाड़े वाले बाग में गिरफ्तार कर लिया
है, कल महाराज के सामने उसको ले जा कर तब कहूँगी कि आप अपने क्रूरसिंह की सच्चाई को देखिए, अगर मेरे पहरे पर मुकर्रर
किया ही था तो बाग के अंदर जाने की इजाजात किसने दी थी?’

यह कह कर चंद्रकांता ने नाजिम के गिरफ्तार होने और बाग के तहखाने में कैद करने का सारा हाल तेजसिंह से कह सुनाया।

नाटक देखते देखते जय ने देखा की कमली भी जया के साथ बैठकर नाटक देख रही है तो जय ने कमली को इशारे से अन्दर आने
को कहा तो कमली ने कहा कि नही अभी सभी है और वो अभी नाटक देख रही है उसकी ये सभी बाते उसने भी इशारे के माध्यम
से जय से कही जय को उस टाईम कमली पर गुस्सा तो बहुत आया पर कुछ कर नही सकता था तो वो अन्दर जाकर सो गया  


पर जय को यकीन था कि कमली जरूर आयेगी खाट पर लेटकर उसका वेट करने लगा १५-२० मिनट के बाद वो
आ गयी लेकिन जब उसने मुझेसोते हुए देखा तो वापस जाने लगी तभी जय ने उसका हाथ पकड लिया जिससे उसे
शोक लगा लेकिन फिर वो नॉर्मल हो गयी .

मैने उससे कहा कि यही सो जाओ वैसे भी वो बाहर के कमरे में और वो भी अकेली ही सोती थी ओर हमारे घर मे वो
पहले भी कई बार जया के साथ सो चुकी है पहले तो वो मना करने लगी लेकिन जय ने जब उससे ज्यादा कहा तो वो
मान गयी ओर बोली तुम कुछ भी गलत नही करोगे.

फ़िर में टायलेट चला गया वापस आकर हम लोग बातें करने लगे मैने थोडी देर बाद कुछ शोर सुना हमारे घर से सब
लोग टेलीविजन देखने के बाद सोने जा रहे थे फ़िर कुछ देर बाद सब नॉर्मल हो गया अब मुझे भी कोई डर नही था सारा
गांव सो रह था अब मैने उसका हाथ पकड़ लिया उसने कुछ नही कहा मैने उसको बोला की मैं तुम्हें चूमना चाहता हूं तो
उसने गुस्से से मुझे देखा ओर बोली मैं जानती थे तुम यही सब करोगे मेरे साथ ये बोल कर वो जाने के लिये उठी तो जय
ने तेजी दिखाते हुए उसे अपने गले लगा लिया.

वो जय से छुटने कि नाकाम कोशिश का दिखावा करने लगी थोडी देर बाद उसने विरोध करना बन्द कर दिया और वो जोर से
मेरे से चिपक गयी. उससे गले लगकर मुझे मजा बहुत आ रहा था। उसका बायां बूब मेरे दायें हाथ से दबा हुआ था। मैंने उसका
हाथ छोड़ दिया और उसने भी मेरा हाथ छोड़कर दूसरे हाथ को भी मेरी गर्दन में लपेट दिया। मेरे शरीर में हलकी हलकी चिंटिंया
रेंग रही थी। सच में बहुत मजा आ रहा था। मैंने अपना दायां हाथ जो अभी भी उसके मेरे बीच में था को धीरे-धीरे उपर किया और
उसके बूब्स को टच करते हुए बाहर निकालकर उसके कंधे को पकड़ा।

कमली अभी भी ऐसे ही मुझसे लिपटी हुई थी। उसकी सांसे काफी तेजी से चल रही थी। मैंने अपने दोनों हाथों को उसके कंधे पर
रख दिया। मैं उसे अपनी बांहों में लेने में थोड़ा घबरा रहा था कि कहीं फिर से गुस्सा ना हो जाए। जब काफी देर तक भी कमली
मेरे गले लगी रही तो मैंने अपने हाथों को उसकी कमर में डाल दिया और उसे थोड़ा टाइट पकड़ कर अपने साथ चिपका कर उसकी
बॉडी को फिल करने लगा।

कमली ने मेरे कंधे पर अपने चेहरे को थोड़ा रगड़ा और वापिस कंधे पर सिर रख दिया। मैंने अपने हाथों से धीरे धीरे कमली की कमर
को सहलाना चालू कर दिया। मैं अपने हाथ उसकी कमर में बहुत ही धीरे से चला रहा था, ताकि अगर उसके मन में ऐसा कुछ ना हो
तो वो ये ना समझे कि मैं उसके साथ मजे कर रहा हूं।


धीरे धीरे कमली का शरीर गरम होने लगा। मुझे मेरे कंधे पर उसका गरम चेहरा महसूस हो रहा था। कमली को गरम
होते देख मेरे पप्पू ने भी शॉर्ट के अंदर हलचल मचानी शुरू कर दी। और कुछ ही सेकंड में एकदम तन कर खड़ा हो गया।
कमली की जांघें और मेरी जांधे एकदम एक दूसरे से सटी हुई थी, तो शायद मेरे पप्पू के हलचल करने से उसे वो अपनी
जांघों पर महसूस हो रहा होगा।

कमली ने अपने हाथों को थोड़ा ढीला किया और अपना चेहरा मेरे सामने करते हुए मेरी आंखों में देखने लगी। मैंने भी अपने
हाथों को वापिस उसके कंधे पर रख दिया। कमली की आंखें एकदम लाल हो गई थी, वो पूरी तरह से वासना में डूब चुकी थी।
उसके हाथ अब भी मेरी गर्दन पर हल्के हल्के सहला रहे थे। उसने अपने एक हाथ को मेरे बालों में लाते हुए मेरे बालों को सहलाने
लगी और ऐसे ही मेरी आंखों में आंखें डालकर देखती रही।

मैंने धीरे से अपना चेहरा उसके चेहरे के करीब किया और थोड़ा रूककर उसका एक्सप्रेशन देखने लगा। उसने अपनी आंखें नीचे कर
ली और उसके गुलाबी होंठ फडकने लगे। उसकी सांसे बहुत ही तेज चल रही थी। मैंने अपनी नजरों को थोड़ा झुकाया, उसके बूब्त
तेजी से उपर नीचे हो रहे थे और उसके पैर थोड़े थोड़े कांप रहे थे।

मैंने वापिस उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो अभी भी नीचे ही देख रही थी। कमली का चेहरा एकदम गुलाबी हो गया था। मैंने अपने
चेहरे को थोड़ा और आगे करके उसके गालों पर अपने होंठ रख दिए। कमली के मुंह से एक सिसकारी निकली और वो वापिस मुझसे
चिपक गई। उसके चिपकने से मेरा लंड फिर से उसकी जांघों पर टक्कर मारने लगा।

मैने अब कमली को अपने से थोडा सा अलग किया और अपने तथा कमली के पूरे कपडे उतार दिये अब में और कमली बिल्कुल नग्न
खडे एक दूसरे को निहार रहे थे कमली ने मुझे देखते हुए फ़िर से मेरे गले लग गयी और जोर जोर से मेरे होठों को चुमने लगी।
 
 











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FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--2

FUN-MAZA-MASTI
 जरुरत मन्द--2

 जय के साथ जो आज हुआ उसे जय जिंदगी भर नहीं भूल सकता था

जय सोचता हुआ जा रहा था कि आज कोई बुकिंग हो जाये तो कुछ एडवान्स मिल जायेगा फ़िर लंच करूंगा ,इसी उम्मीद मॆं जय मन लगाकर दुबारा काम करने लगा काफी देर बाद एक घर के बाहर जाकर उसने बैल बजाई तो इक खूबसूरत सी महिला ने दरवाजा खोला.

महिला के बारे में कहा जाये तो एकदम मस्त माल थी । जय ने कहा मॆं aqua sales कर्ता हूँ आप देखना चाहेंगी, उसने कहा हमारे पास पहले से ही है,ओर वो वापस जाने लगी जय की ये उम्मीद भी जाती हुई लगी ।

जय ने उसके घर से जाते जाते हुए उससे पूछ लिया मैम पहले वाला ठीक चल रह है, उसने कहा रुको मॆं देख कर आती हूँ ,वो लेडी करीब ३० साल की होगी ओर शादीशुदा भी थी. थोड़ी देर के बाद वो वापस आयी ओर बोली नहीं ठीक नहीं चल रहा है.

तुम चेक कर लो ,ओर जय अन्दर चला गया अन्दर जाकर जय ने मशीन को चेक किया तो वेसे तो वो ठीक थी. बस थोड़ी से सफ़ाई करनी थी। जय ने कहा मैम इसमे प्रॉब्लम है ठीक करने के ३०० Rs. लंगेगे.उसने मुझसे कहा पैसे ज्यादा है

मैंने कहा ठीक है आप २०० दे देना लेकिन मैं आपको बिल नहीं दूंगा { जबकी जय को मशीन ठीक करने के इजाजत नहीं थी} उसने कहा ठीक करो और जय उसको ठीक करने लग गया थोडी देर बाद मशीन ठीक होने पर जय ने उनसे रुपए मांगे ,तो वो अन्दर से आयी ओर कहा मशीन चेक करा दो तो जय ने कहा आप चला कर देख लिजीयेऔर वो जय के आगे खडी होकर चेक करने लगी जय ठीक उसके पीछे खड़ा था।

जय ने पहली बार उस महिला पर ध्यान दिया उसने ब्लाउज के के नीचे कुछ नहीं पहन रखा था. क्योकि उसके झीनें से ब्लाउज से उसकी गोरी सी कमर दिख रही थीउसकी फ़िगर भी ३४ २४ ३६ के आस पास थी अचानक वो पल्टी ओर कहा ठीक है अब बताओ कितने पैसे देने है.

जय ने कहा मैम २०० Rs. तो उसने कहा तुमने इसमे क्या सामान डाला है, और कहने लगी अपने आफ़िस में मेरी बात कराओ, अब जय कि गाड की फ़ट्फ़टी 100 की स्पीड से भी ज्यादा तेज चलने लगी। जय बुरी तरह डर गया कि आज तो उसकी नौकरी गयी।


 जय ने कहा ठीक है आप १०० ही दे दीजिये लेकिन वो फ़िर कहने लगी नहीं मेरी बात अपने ऑफ़िस मॆं करवाओ, ये कहने के
साथ वो धीरे धीरे मुस्करा रही थी पर इधर डर के मारे जय की गांड हवा लेकर फ़ूल रही थी , हार कर जय ने उनसे कहा मैम
मुझे मशीन ठीक करने की इजाजत नहीं है इस लिये मॆं आपकी बात अपने आफ़िस मॆं नहीं करा सकता।

तो उसने कहा फ़िर तुमने मशीन को क्यों हाथ लगाया, जय ने कहा जेब में एक रूपया भी नही है और भूख भी जोर कि लगी है
इसलिये कि कुछ पैसे मिल जायेंगे तो खाना खा लुगां उसने कहा क्यो salry नहीं मिलती, जय ने कहा मैम अभी मॆं नया हूँ तो
वो बोली इसके लिये तुम गलत काम करोगे तो जय ने कहा मैम वेसे तो मैंने कोई गलत कम नहीं किया लेकिन आपको लगता है
कि गलत किया है ये जानने के बाद भी कि half day हो चुका है ओर मेरे पास पैसे नहीं है जिससे मॆं लंच कर सकू इस लिये
मैंने आप की मशीन ठीक की इससे पहले जय आगे कुछ और बोलता वो बोली ठीक ठीक है बैठो .

और वो जय मेरे बारे सब कुछ पूछने लगी, मेरे शादी के बारे मॆं पूछा मैंने मना कर दिया , फ़िर मेरे गर्लफ़्रैन्ड के बारे पूछा मैंने कहा
नही है तो फ़िर वो बोली पहले कभी तुमने सेक्स किया है। उसके इस सीधे जवाल से जय की तो बोलती ही बन्द हो गयी पहले तो
जय शरमा गया.

फ़िर उसके जोर देने पर जय ने कहा नहीं तो वो बोली तुम झूठ बोले रहे हो मैंने कहा नही कभी नही किया. तो वो बोली सच बोलो मॆं
जब ही तुम्हारे पैसे दूंगी। अब जय बेचारा क्या करे और क्या ना करे आखिर में जय ने झूठ बोला दिया और उससे कहा हाँ किया है
इतना सुनते ही उसकी आखों में चमक आ गयी । वो बोली तुम एक्स्ट्रा पैसे कमाना चाहते हो साथ मे गिफ़्ट भी मिलंगे।

जय ने कहा बिल्कुल में वो काम जरुर करुंगा तो वो बोली उसके लिये तुम्हे पहले एक टेस्ट पास करना पड़ेगा अगर तुम टेस्ट मॆं पास हो
गए तो तुम्हें 1000 रुपये तो आज ही मिल जायेंगे और हर महीने १०,000 रुपये मिला करेगें । तुम्हें बस इसके लिये महीने मॆं १५ दिन
२ घंटे देने होंगे, जय ने कहा ठीक है जय बड़ा खुश हुआ। जय ने काम के बारे मॆं पूछा तो वो बोली केवल तुमको थोड़ी सी
मसाज करनी है।


जय ने कहा मुझे तो मसाज करनी आती ही नहीं है। तो वो बोली मै सिखा दूगीं जय ने कहा ठीक है। तो वो बोली चलो तुम्हे
मसाज सिखाती हूँ और तुम्हारा टेस्ट भी हो जायेगा जय ने कहा ठीक है.

फ़िर वो जय को लेकर अपने बेडरूम मे गई, वहाँ जाकर बोली पहले अपने कपडे उतारो जय अब सब कुछ समझ रहा था
एक तरफ़ तो बहुत खुश हो रहा था तो दूसरी तरफ़ उसकी डरके मारे गांड फ़टी जा रही थी कि कही कुच गड्बड ना हो जाये
नही तो वो कही का भी नही रहेगा और गाव में मा बाप की इज्जत का भी फ़लूदा बन जायेगा। फ़िर भी डरते हुए जय ने
अपने कपडे उतारे बस अंडरवियर पहने रखा.

फ़िर वो अपने कपडे उतार कर बेड पर बैठ गई ओर बोली अपना लंड दिख़ाओ तो जय हिचकिचाया तो वो आगे आयी और
उसने अपने हाथ से जय का अंडरवियर नीचे किया औरर मेरे लंड को हाथ मॆं लेकर आगे पीछे करने लगी फ़िर अंडरवियर
की ओर इशारा करके कहा इसे भी उतार दो मैंने वैसा ही किया.

उसने मेरे हाथ मॆं एक बाँडी-लोशन दिया ओर कहा इसको मेरे शरीर पर लगाओ {उस समय उसने ब्रा पैंटी पहन रखी थी }
मैने सबसे पहले लोसन उसके पेट पर लगाया फ़िर उसके पैरों पर फ़िर मैंने उनसे ब्रा ओर पैंटी के लिये पूछा तो उसने उनको उतरने
के लिये कहा तो मैने उसके कपडे उतारने शुरू किये ब्रा उतारते ही मेरा मन उसकी चूचियो को चूसने के लिये करने लगा और मैंने
अपना मुहं उसके चूचो पर रख दिया ओर उनको चूसने लगा ओर वो मेरा लंड पकड़ कर दबाने लगी उसके चूचे काफ़ी टाईट थे.

काफी देर चूचिया चूसने के बाद लोसन दुबारा लगाना शुरु किया इस दौरान मेरा लंड उसके शरीर से रगड खा रहा था और उसके शरीर
पर लोशन लगा होने के कारण जैसे ही मेरा लंड उससे कभी आगे कभी पीछे रगडता उससे मेरा लंड अब गीला होने लगा था मेरा मन
अब उसको चोदने को कर रहा था.

उसने अपनी ब्रा ओर पैंटी उतारकर मेरा अंडरवियर भी उतार दिया ओर मेरा मुंह अपनी चूत पर रख कर कहा इसको चाटो, मैने भी
वैसा ही किया मॆं पहली बार किसी की चूत चाट रहा था बडा ही अजीब सा स्वाद था मन तो नही कर रहा था पर फ़िर भी मै पैसो की
खातिर उसकी चूत को खूब मन लगाकर चाट रहा था .फ़िर उसने मेरे लंड को पकड़ कर अपने मुह मॆं ले लिया ओर उसको चूसने लगी
अब तो जैसे मै पागल हो गया था  


इतना मजा आ रहा था मैने कभी सपने मै भी नही सोचा था की सेक्स में इतना मजा आयेगा और मुझे लगने लगा
की मेरा पानी निकल जायेगा तो मैं अपने लंड को उसके मुह्ह से हटाने लगा तो उसने पूछा क्या हुआ तो मैंने कहा पानी
निकलने वाला है तो उसने मेरा लंड अपने मुह्ह से निकाल दिया ओर कहा अब तुम सबसे पहले अपना लंड मेरी गांड मॆं
डालो तो मैंने कहा आगे से नहीं डलवाओगी।

तो वो बोली आगे से ज्यादा मजा पीछे से आता है। मैने उसकी बात मानते हुए अपना लंड उसकी गांड में उतार दिया उसने
भी बिना किसी परेशानी के पूरा का पूरा लौडा अपनी गांड में ले लिया और मै भी उसे पीछे से उसको चोदने लगा काफ़ी देर
बाद जब मेरे लंड से पानी निकलने वाला था तो मैने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसने तुरन्त मेरा मेरा लंड अपने
मुह्ह मे ले लिया ओर जोर जोर से चूसने लगी मेरा लंड अब पानी छोड रहा था लेकिन वो सारा पानी पी रही थे

जब मेरा लंड बैठ गया तब ही उसने लंड को छोड़ा. फ़िर उसने कहा अब मेरी चूत मॆं अपनी उगंली डाल कर आगे पीछे कर मैं वैसा
ही करने लगा. थोड़ी देर के बद मेरा लंड फ़िर से तन गया ओर उसने देख कर कहा चलो अब मेरी चूत मारो मैंने अब उसकी चुदाई शुरु
की ओर उसके बूब्स को अपने मुह्ह मे लेकर चूसता रहा थोडी देर बाद उसने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाल कर अपने दोनो
बूब्स के बीच में मेरा लंड दबा कर कहा अब यहीं पर रगड़ते रहों ओर अपना पानी यहीं पर निकाल दो.

मॆं भी वैसा ही करता रहा मेरा लंड उसके बूब्स के बीच मॆं रगड़ खाता रहा फिर मेरे लंड ने उसके बूब्स पर अपना माल छोड दिया .
उसने दोबारा मेरा लंड अपने मुह्ह से साफ किया . ओर मुझे कपडे पहने को कहा ओर वो खुद बाथरूम चली गई्।

थोड़ी देर बद फ्रेश होकर आयी ओर मुझे 1000Rs. देकर कर कहा ये तुम्हारा एडवान्स है ओर मुझे एक फ़ोन नं. देकर कहा कल यहाँ पर
फ़ोन करके चले जाना तो जय ने कहा कि ये नं. किसका है तो उसने कहा कि ज्यादा सवाल जवाब नही जो कहा है बस वो करो।


उसके बाद तो जैसे जय कि जिन्दगी में पैसो को बरसात सी होने लगी हर दूसरे तीसरे दिन जय कही न कही ऐसे ही काल्स
पर जाने लगा और अगले 6 महीनों में ही उसने प्रधान जी तथा अन्य गांव वालों का कर्जा चुकता कर दिया। लेकिन इस
दौरान जय वापस अपने गांव नही गया.

जो भी पैसे थे वो अपने गांव के दोस्त योगेश के हाथ हि भिजवा दिया करता था । जब जय का सारा कर्जा उतर गया तो
जय ने सोचा चलो कुछ दिन गांव में रहकर आया जाये । लेकिन उसने सोचा की अब तो उसे यहां शहर में रहकर शहर कि
आदत पड गयी है

गांव में उसका मन कैसे लगेगा यही सोच कर उसने जाने से पहले एक कलर टेलीविजन ले लिया क्योकि उसका गांव इतना
धनी नही था सिर्फ़ कुछ गिने चुने लोगो के यहा ही टेलीविजन था वो भी ब्लैक एण्ड व्हाईट जैसे कि गांव के प्रधान जी और एक
दो लोग और थे। जय ने गांव चलने कि तैयारी कर ली थी और अपने गांव के लिए निकल पडा।

जय ने सुबह की ट्रेन पकडी और रात तक अपने गांव पहुंच गया । इस बार का जय पहले वाले शर्मीले जय से बिल्कुल
बदला हुआ था उसकी पर्सनेलिटी, लड्कियों को देखने का नजरिया उनसे बोलचाल का तरीका सबकुछ बदल चुका था। जैसे ही
जय घर पहुचां घर में घुसते ही सबसे पहले उसकी छोटी बहन जया उसे मिली जया ने जैसे ही अपने भाई जय को देखा तो
खुशी के मारे वो जय से लिपट गयी उसके गले मिलते ही जय के शरीर में 440 वोल्ट का करंट लगा।
 
 








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FUN-MAZA-MASTI जरुरत मन्द--1

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 जरुरत मन्द--1


 जय ने ग्रेजुएशन की परीक्षा दी थी और वो परिणाम के आने का इन्तजार कर रहा था। 15 दिन बाद उसका परिणाम आया और उसने अपने कालेज को टाँप किया था । जय आज बहुत खुश था और हो भी क्युं ना आज तक उसके परिवार में 10वीं से आगे पढ्ने वाला लड्का सिर्फ़ जय था ये खबर सुनकर मम्मी पापा कितने खुश होगें यही सोच कर सोच उसकी खुशी और भी बढ्ती जा रही थी । उसने सोचा क्युं ना घर वालों के लिये कुछ मीठा ले चलू ये सोच कर वो एक हलवाई कि दुकान पर पहुचाँ और उससे 1 किलो कलाकन्द पैक करने को बोला और उसके पैसे उसे दिये और घर कि तरफ़ चल पडा।

उसका घर इस शहर से 8 किमी दूर एक छोटे से गावं में था और वो एक गरीब परिवार से था तो कोई वाहन ना होने के कारण पैदल हि ये सोचकर कि (रास्ते में कोई ताँगा या जुगाड मिल जायेगा) अपने गावं कि तरफ़ चल दिया। गरमी का समय था और जय ने कोई डेढ दो किलोमीटर का रास्ता पैदल ही तय कर लिया था लेकिन गरमी और तेज धूप की वजह से जय का चलते-2 पसीने के मारे बुरा हाल हो गया था। लेकिन अपने इरादों में अडिग रहने वाला जय ना तो थका ही और ना ही रुका और वो चलता ही जा रहा था।

जब करीब एक घन्टे बाद उसने 4 किलोमीटर पार कर लिया तो पीछे से साईकिल की घन्टी कि आवाज से उसने पीछे मुड्कर देखा तो गावं के मास्टर जी की लड्की कमली थी। कमली अपने नाम के अनुसार काली तो बिल्कुल भी नही थी हाँ पर थोडी सी सावली जरुर थी । कमली की उम्र कोई 23 साल के आस-पास थी, 30-36-30 के आकार का महकता हुआ बदन, 5.5" की हाईट, बड़ी-२ काली आँखे, हल्का सावलापन लिये मजबूत गठीला बदन, होंठ पिंक कलर के और गालो पर एक मोटा सा तिल..जब वो हंसती थी तो उसके दांये गाल में एक डिम्पल सा बन जाता था, जो सामने वालों का मन मोह लेता था.उसकी कमर नाममात्र की थी...और पीछे से उसके कुल्हे भी ज्यादा उन्नत नहीं थे...पर उसकी ब्रेस्ट जो थी, वो सबसे कमाल की थी..

कुल मिलाकर बदन के हर हिस्से से केवल सेक्स की ही फुहार छूटती रहती है.गावं के और लोगो के लिये उसका स्वभाव एकदम सीधा साधा एवं सरल था पर जय के लिये कमली गावं की सबसे ज्यादा चुलबुली और शरारती लड्की थी । और हो भी क्यूं ना बचपन से साथ ही खेलते कूदते हुए तो दोनो बडे हुए थे।


कमली ने जय के पास आकर अपनी साईकिल रोकी और बडी ही अदा के साथ अपने बडे-बडे और प्यारे प्यारे नयनों को मटकाते हुये बोली
क्यूं जनाब पैदल ही यात्रा पर निकले हो । वैसे कहां तक की यात्रा पर जा रहे हो चार धाम की यात्रा पर उसका मजाक उडाते हुये कमली ने
कहा और बहुत जोर से खिलखिलाकर हंस पडी । हसते हुए कमली किसी स्वर्ग कि अप्सरा सी सुन्दर लग रही थी।

जय ने उससे कहा कम्मो (जय प्यार से उसे कम्मो बुलाता था) यार गरमी के मारे पहले ही बुरा हाल है उपर से तू और मजाक कर रही है तो
जय से कमली ने कहा चल तो तू साईकिल चला तो जय ने कहा ठीक है चल अब जल्दी से साईकिल पर पीछे बैठ जा। तो कम्मो ने कहा
क्यू आगे ना बैठ सकती हूँ मैं तो जय ने कहा नही गावं से आते हुए किसी ने देख लिया तो लेने के देने पड जायेगें। जय कमली के पिता से
आज भी बहुत डरता था। फ़िर दोनो साईकिल से जल्दी जल्दी घर कि तरफ़ चल दिये।

जय ने साईकिल चलाते-चलाते हुए ही कमली से बोला “ कम्मो…… अरे कहा मर गयी…… तो कम्मो ने जवाब दिया कही ना यही हूं बस तेरे
साथ इस सफ़र के आनन्द को अपने दिल में समेट रही हूं तो जय ने कहा तुझे पता है आज मेरा परिणाम आया है ग्रेजुअशन का और मैने अपना
कालेज टाँप किया है इतना सुनते ही कलमी पीछे से ही जय से चिपक गयी कमली के चिपकते ही जय को मानो 440 वोल्ट का
झटका लगा हो वो एकदम से हड्बडा गया और इसी हडबडाहट में जय साईकिल को सभाल नही पाया ओर साईकिल सडक पर बने हुए एक
गढ्ढें में दे दी जिससे कमली जय से और भी ज्यादा चिपक गयी अब जय को अपनी कमर में कमली के बडे बडे चूचों के चुभने का अहसास
हुआ इस अहसास के साथ ही जय कि पेन्ट में हलचल होनी शूरु हो गयी पर जय जानता था कि अगर उसने अपने आप को इस स्थिति
में नही सभाला तो उसे काफ़ी दिक्कत हो जायेगी।

इसलिये जय ने अपना पूरा ध्यान साईकिल चलाने पर लगा दिया और इधर कमली को भी अपनी चूचिया दबने के कारण एक अजीब सा
अहसास हुआ था उसका पूरा शरीर एक अजीब सी मस्ती से भर गया था जिसके कारण उसके गाल एकदम लाल हो गये तो उसने शरमा
कर झट से अपना मुह जय की कमर म छिपा लिया जब दोनो नोर्मल हुए तो कमली ने कहा कि जय मेरा मुह तो मिठा कराओ तो जय
ने साईकिल रोक कर उसे डिब्बे से निकाल कर मिठाई खिलाई । मिठाई खाकर जय ने कमली से कहा कि अब चलें तो कमली ने कहा
नही अभी एक मिनट रुको जय ने उसकी तरफ़ असमंजस से देखा.

तो कमली ने बहुत जल्दी दिखाते हुए जय के गाल पर किस कर दिया जय हक्का बक्का सा बस कमली का चेहरा देखता रहा उसे कमली
से ऐसा करने की कभी उम्मीद ना थी अब कमली से जय को हिलते हुए कहा मेरे बुद्दुराम घर चलें अब जय से कुछ नही बोला गया और
वो चुपचाप साईकिल चलाने लगा । जय के दिल में कमली के लिये कभी भी कोई गलत भाव ना आये थे वो तो बस उसे एक अच्छे दोस्त
कि तरह मानता था। लेकिन जब कमली ने उसे किस किया तो उसे भी बहुत अच्छा लगा। तभी कमली कि आवाज ने उसे बुरी तरह से
चोंका दिया क्योकि कमली ने जय से कहा कि ........

जय मैं तुम्हें बहुत पसन्द करती हूँ तथा मैं तुम्हें प्यार करने लगी हु आई लव यू जय
जय कि तो जैसे सांस ही रुक गयी ये सुनकर...


 कमली को बिना कुछ जवाब दिये जय चुपचाप साईकिल चलाता रहा फ़िर कोई 15 मिनट बाद वो दोनो गावं में आ गये थे अब
जय ने कमली और उसकी साईकिल दोनो को कमली के घर पर छोडा और मुस्कराता हुआ अपने घर की तरफ़ चल दिया ।

जय का घर कमली के घर से ज्यादा दूर नही था बस 2 मिनट की दूरी पर ही जय का घर था। जैसे ही जय घर पर पहुचां तो देखा
की घर के बाहर पडोसियो की भीड लगी हुए है भीड को देखते ही जय के मन में किसी अनिष्ट कि शंका हुई अब जय तेज कदमों
से घर पहुचां तो औरतों के रोने की आवाज से उसका दिल और घबराने लगा कि पत नही क्या हो गया हैं .

जैसे ही वो अन्दर पहुचां तो देखा के उसके पापा जमीन पर पडे हुए है और उसकी मम्मी और बहन जोर जोर से रो रही है ये सब
देखते ही जय का दिल एक दम से घबरा गया कहा तो वो ये सोच कर खुश था कि मम्मी पापा कितने खुश होगें उसके टाँप होने
कि खबर सुनकर पर यहाँ तो सबकुछ उल्टा ही हो गया ।

उसने सबसे पहले तो स्थिति को समझने कि कोशिश की कि आखिर बात क्या है पापा को हुआ क्या है तो उसने सबसे पहले कमली
के पापा से जो कि उसके पापा के सबसे अच्छे दोस्त थे पूछा की चाचा जी पापा को क्या हुआ है इससे पहले कि कमली के पापा जय
को कोई जवाब दे पाते बीच में ही जय कि मम्मी जोर जोर से रोते हुए बोली जय तेरे पापा ह्म सब को छोड कर हमेशा के लिये चले
गये । इतना सुनते ही जय के हाथ से मिठाई का डिब्बा छूट कर नीचे गिर गया और धम्म की आवाज के साथ जय नीचे गिर गया।


 फ़िर कुछ देर बाद जैसे ही उसने अपने होश सभाला सबसे पहले उसने ये पूछा कि कैसे हुआ ये सब । तो गाव के ही एक
व्यक्ति ने बताया बेटा तेरे पापा खेतो में काम कर रहे थे तो अचानक से गिर गये बस । इतना सुनते ही जय फ़टाफ़ट खडा
हुआ और अपने पापा कि नब्ज चैक की तो पाया कि उनकी सासें अभी भी चल रही है इसका मतलब पापा जिन्दा है उसने
ये बात अपनी मम्मी को बतायी तो उन्हें विश्वास ही ना हुआ पर जब उन्होने खुद उनके दिल को धडकते हुए देखा तो चैन
की सांस ली अब घर में सभी का रोना बन्द हो गया तथा जल्दी से जल्दी उन्हें हस्पताल ले जाने की तैयारी करने लगे।

अब जल्दी से जल्दी शहर कैसे लेके जाये उन्हें सभी को इसी बात की चिन्ता होने लगी तभी गावं के प्रधान जी वहां आये
और बोले जय बेटा हमारा ट्रेक्टर घेर में खडा हैं जल्दी से जाओ और उसमें ट्राली को जोड के जल्दी लेकर आओ जय भागा
भागा प्रधान जी के घर पहुचां वहां प्रधान जी का लडका अशोक मिला उसने और जय ने मिलकर ट्रेक्टर ट्राली को जोडा और
जय उसे लेकर घर पहुचां और जल्दी से पापा को सभी ने मिलकर ट्राली में लिटाया और मम्मी तथा गावं के कुछ और लोग
भी उनके साथ जिनमें गावं के प्रधान जी भी सामिल थे शहर के लिये चल दिये।

शहर पहुंच कर सभी लोग हस्पताल पहुचें तथा जय के पापा को अस्पताल में भर्ती कराया। डाँक्टरो ने चेकअप किया और बताया
कि इनके दिमाग कि नस फ़टने के कारण ये बेहोश हुए है अगर जल्दी से जल्दी इनका आपरेशन ना किया गया तो इनका
बचना मुश्किल हो जायेगा। और आपरेशन में कम से कम 1 लाख रुपये लगेंगे और जिसमें से 30000/- अभी जमा करने होगें ।
इतना सुनते ही बेचारे जय की हिम्मत जवाब दे गयी गरीब आदमी के पास इतने पैसे कहा से आये वो बेचारा एक
कोने में जाकर रोने लगा।


 जब प्रधान जी ने जय को कोने में खडे रोते हुए देखा तो वो उसके पास गये और बोले बेटे क्या हुआ अब तो तुम्हारे पापा
जल्दी ठीक हो जायेंगे तो फ़िर तुम रो क्यूं रहे हो । जय ने कहा ताऊ जी (गांव के रिश्ते के अनुसार) मै इतने सारे पैसे कहा
से लाउन्गा तो प्रधान जी ने कहा बेटा परेशान क्यू हो रहे हो ह्म सब है ना तुम्हारे साथ और उन्होनें अपनी जेब से जय को 30000
रुपये देते हुए कहा जाओ जय बेटा ये पैसे रिशेप्शन पर जमा करा कर आओ तब तक ह्म डाक्टर को बोलते है कि वो आपरेशन
कि तैयारी करें।

डाक्टर्स ने आपरेशन कर दिया आपरेशन ठीक हो गया था और दो दिन बाद उन्हें आई सी यू से जनरल वार्ड में शिफ़्ट कर दिया गया ।
जय के पिता की हालत अब ठीक होने लगी जब वो बोलने के काबिल हो गये तो उन्होनें जय की माता जी से पुछा कि इलाज के लिये
पैसे कह से आये तब उन्होने कहा की मुझे नही पता सब इन्तजाम जय ने किया है।

तब उन्होनें जय से पूछा तो जय ने बता दिया कि कैसे कैसे प्रधान जी ने और बाकी के गावं वालों ने मिलकर 75000/- का इन्तजाम
किया था पर जय अब भी बहुत परेशान था क्युकि बाकी के 25000/- वो कहा से लायेगा जब उसने ये बात अपनी मम्मी को बतायी
तो उन्होने कहा बेटा परेशान ना हो तब उन्होनें अपने तथा जया (जय कि बहन) के कुछ गहने जय को दिये कि जा इन्हें बेचकर कुछ
पैसे मिल जायेगें ।

पहले तो जय ने साफ़ साफ़ उन्हें बेचने से मना कर दिया पर जब और कही से कोई इन्तजाम ना हुआ तो वो उन गहनों को लेकर बाजार
म गया तो सुनार ने उन गहनों की कीमत 30000/- रुपये लगायी तो जय ने 30000/- में गहने बेच दिये तथा अस्पताल आकर अपने
पापा कि छुटटी करा कर वापस अपने गावं ले आया


 जय अपने मम्मी पापा को दिखाने के लिये बस उपर से खुश दिख रहा था पर अन्दर हि अन्दर वो बहुत परेशान था कि कैसे वो प्रधान
जी ओर बाकी के गावं वालो का कर्जा चुकायेगा । तब उसने एक कठिन निर्णय ले लिया कि वो अब अपने गावं को छोड्कर शहर जायेगा
और वहां जाकर वो पैसे कमायेगा तथा सभी गावं वालों क कर्जा उतारेगा। जब ये बात उसने मम्मी पापा को बतायी तो उन्होनें पहले तो
सख्ती के साथ मना कर दिया पर जय कि जिद के सामने वो रुक नही पाये और उन्होनें उसे जाने कि इजाजत दे ही दी।

अब जय के सामने ये समस्या थी कि वो जाये तो जाये कहां तभी उसे याद आया कि 12वीं में योगेश नाम का एक लडका उसके साथ
पढ्ता था और जय को उसने बताया था कि वो किसी शहर में नौकरी करता है । तो वो अगले ही दिन उसके गावं गया लेकिन वहा पर
जय को उसका दोस्त योगेश नही मिला.

वहां उसके पापा मिले उन्होनें उसे घर में अन्दर बुलाया तथा पानी पिलाया उसके बाद उसके हाल चाल पूछे फ़िर उससे आने का कारण पूछा
तो उसने बता दिया कि वो भी शहर जाना चाहता है तब उन्होने अपनें लैड्लाईन फोन से जय की बात अपने बेटे योगेश से कराई तो उसने
भी जय को जल्दी से जल्दी दिल्ली आने के लिए बोल दिया


जय अगले दिन ही ट्रेन पकड्कर दिल्ली आ पहुचां तो उसका दोस्त योगेश स्टेशन के बाहर ही उसका इन्तजार करता हुआ मिल गया ।
जय को लेकर वो अपने रुम पर गया वहा जाकर जय नहाया धोया फ़िर पूरा दिन दोनो दोस्तो ने बातो में ही बिता दिया जय ने उसे
अपनी सारी आपबीती घटना बता दी तो योगेश ने कहा कि तू परेशान मत हो में जल्दी ही तुझे काम दिलवा दूंगा फ़िर दोनो ने खाना
खाया और सो गये।

अगले दिन दोनो जल्दी से तैयार होकर घर से निकल गये योगेश के दोस्त ने अपनी जान पह्चान के दम पर जय को यूरेका फ़ोर्बस में
सेल्स एक्जक्यूटिब के पद पर नौकरी दिलवा दी आज जय बहुत हि ज्यादा खुश था। और इसी खुशी खुशी में नौकरी जय ने कर ली थी
पर जैसे जैसे आफ़िस में उसके दिन बढते गये उसकी चिन्ताए भी बढती गयी क्योकि जय तो एक गावं से आया सीशा और शरीफ़ लडका
था उसे घर घर जाकर प्रोडक्ट कैसे बेचना है नही पता था जिससे उसका टारगेट पूरा नही हो पा रहा था पूरा तो क्या 15 दिन तक
उससे एक भी प्रोडक्ट नही बिका ।

जैसे ही एक दिन जय आफ़िस पहुचाँ तो उसके टीम लीडर ने जय में जबरदस्त तरीके से डाँट लगा दी ये तुमने क्या लगा रखा है क्या करते
हो पूरे दिन एक भी प्रोडक्ट नही बिका है तुमसे ऐसे तुम्हे तन्ख्बाह कैसे मिलेगी । जय बहुत परेशान हुआ और अपनी डेली किट उठाई और
निकल पडा अपने डेली के सफ़र पर लेकिन आज उसे एक प्रोड्क्ट बेचना उसकी जरुरत ही नही उसकी मजबूरी भी था क्योंकि आज उसकी
जेब में खाना खाने तक के लिए एक रुपया भी नही था

 

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