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Monday, July 14, 2014

FUN-MAZA-MASTI बेदर्द बालमा-3

FUN-MAZA-MASTI


बेदर्द बालमा-3

 अब वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चली थी क्योंकि उसकी शरारतें, हंसी मज़ाक सब गायब हो चुका था, उसकी आँखों में लाल लाल डोरे से तैर आये थे,
उसकी चूत भी अब पानी छोड़ने लगी थी।
इधर मेरा लंड भी कच्छे के अंदर फंसा घुटने लगा था, वो भी इस नज़ारे का दीदार करना चाहता था।
मेरी खुद की चड्डी की रगड़ से ही कहीं फव्वारा न छूट जाए, इस डर से मैंने अपने भी कपड़े उतारने का निर्णय किया और उससे अलग होकर अपना पायजामा, टी शर्ट और फिर बनियान और अंत में चड्डी भी उतार कर अपने आप को भी पूर्णतया नग्न कर लिया।
इसके बाद के अपने सनसनी खेज और उत्तेजक काम को अंजाम देने के लिए उसकी और बढ़ चला !
इस समय पलंग का दृश्य देखने लायक था, वो लाचार असहाय स्थिति में पूर्ण निर्वस्त्र मेरे सामने थी उसके नंगे जिस्म में एक उत्तेजक कसावट सी आ गई थी।
अब मैं उसके नज़दीक आया और उसके रस्सी से बंधे और चिमटी लगे उरोज को सहलाया, उसकी सिसकारी निकल गई।
फिर अपने हाथ से उसके निप्पल वाली चिमटी पर कैरम के स्ट्राइकर को जैसे हिट करते है, ऐसे किया, वो पूरी सिहर उठी।
और फ़िर ऐसी ही स्ट्राइक उसके चूत के होंठों में फसी चिमटियों के साथ भी किया।
मैंने पहले ही खूब सारी रस्सियों को बराबर काट कर उन्हें एक डंडे में बाँध के झाड़ू या झाड़न जैसी बना लिया था, उससे उसके नंगे जिस्म पर उत्तेजक प्रहार करने शुरू किये, पहले धीरे धीरे फिर जब उसकी सहने की क्षमता पता चल गई तो थोड़े ज़ोर ज़ोर से !
ऊऊह… हह… अह्ह… ह्ह्ह्ह… हाआय्य्य…य्य्यईईईई… जैसी उसकी सीत्कारों से माहौल और कामुक और उत्तेजक होता गया।
फ़िर उसके कसे बंधे वक्ष स्थल पर सब तरफ से पिटाई जैसी करने लगा, उसके बाद उसके बांह के नीचे कांख में वार किये !
दोस्तो, यहाँ एक बार फिर में आप लोगों को बता दूँ कि मेरा मकसद उसे प्रताड़ित करना या पीटने का बिल्कुल नहीं था, यह केवल मेरी उन बहुत सी उत्तेजक फैन्टसी में से ही एक थी जो मैंने सोच के रखीं हुई थी क्योंकि ये सब करते हुए भी मुझे उस पर खूब प्यार आ रहा था और मैं उसे बीच बीच में चूम भी लेता था।
आह्ह… ह्ह… ओह्ह… की उसकी सिसकारियों के बीच अब वो अपने जाँघों को भी ऊपर नीचे करने लगी थी और हल्की सी नशीली आवाज में वो बोली-
अरुण ओह्ह… ह्ह… अरुण मेरी पूपू में तो नहीं मारोगे ना?
(वो चूत को हमेशा पूपू ही बोलती है)
मुझे उसका इशारा मिल गया था, समझदार सेक्स पार्टनर वो ही होता है जो अपनी फीमेल पार्टनर के इशारों को समझ जाए !
मैंने कहा- सॉरी रानी… इसे भी पीटना तो पड़ेगा… यह भी बहुत भाव खाती है, और मेरे लंड को बहुत तरसाती है।
और अब मैंने उसकी पूपू पर भी मारना शुरू किया, जांघों पर और बीच में सब जगह, कभी धीरे धीरे, कभी अचानक तेज़।
उसकी चिल्लाहट और ज्यादा तेज़ और कामुक होती चली गई अब उसकी पूपू भी और ज्यादा गीली हो चली थी क्योंकि मेरे रस्सियों के छोर भी अब गीले होने लगे थे उसकी चूत के रस से !
वो चिल्लाई- क्या सब कुछ आगे ही आगे करते रहोगे यार? बहुत दर्द दे दिया यार !
अब मुझे उसकी यह बात तो माननी ही थी क्योंकि यह सब मैं उसे यौन-सुख देने के लिए ही तो कर रहा था।
अब मैंने उसके दोनों पैर खोल दिए, उसके पैरों, भारी भरकम कूल्हो को उठाया, और पैर के पंजों में अभी भी फंसी हुई रस्सी को उसके सिरहाने वाले हिस्सों में दोनों तरफ खूब खींच कर बाँध दिया।
यह एक ऐसी स्थिति थी जिसका उसने पुरज़ोर विरोध किया क्योंकि अब वो निहायत ही अश्लील और भद्दी स्थिति में आ गई थी।
पाठको, कृपया इस स्थिति को अपने मन में सोचते हुए आगे पढ़ना, मैं भी अब गंदे शब्दों का प्रयोग करते हुए ही लिखूंगा।
मेरी बीवी के चूतड़ यानि गाण्ड पूरे ऊंचे और हवा में हो गए थे और चूंकि मैंने उसके पैरों के पंजों को पलंग के दोनों सिरों पर बाँधा था, उसकी चूत भी चौड़ी होकर खुल गई थी, साथ ही साथ उसकी गांड का छेद और उसकी सलवटें भी अब साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी। 
उसकी गांड के छेद पर मैंने अपनी उंगलियाँ फिराई, वो बिफर पड़ी, वो बोली- वहाँ मुंह मत लगाना प्लीज़… वो गन्दी जगह है।
मैंने उसे कहा- मेरी रानी, औरत के शरीर का कोई भी हिस्सा गंदा या खराब नहीं होता है… सब कुछ बहुत प्यारा प्यारा और सुंदर होता है।
और यह कहते हुए मैं उसके गोल गोल गोरे गोरे और बंधे होने से कैसे हुए चूतड़ों को सहलाने प्यार करने और चूमने लग गया।
मैंने चुम्बनों की बौछार सी कर दी लेकिन उस बदमाश ने जो डायलॉग मारा उसने मुझे चिढ़ा दिया, वो बोली- क्यूँ जी, आज तो तुम पिटाई करने वाले थे !!! क्या हुआ?? थक गए क्या?
मुझे सही में गुस्सा आ गया और मैंने तड़ातड़, तड़ातड़, तड़ातड़ उसकी गांड पर चांटों और थप्पड़ों की बारिश कर दी, साथ ही उसे अब कुछ अपशब्द भी बोलने लगा- साली, कुत्ती ये ले, ये ले, और ले !
और जिन लोगों ने चूतड़ों पर चांटे मारने का मज़ा लिया है जिसे पोर्न की भाषा में स्पैंकिंग कहते है, उन्हें पता होगा की गांड की त्वचा बहुत ही संवेदनशील होती है, बहुत ही जल्दी से लाल पड़ जाती है, लेकिन अब बहुत सी लड़कियाँ इसे पसंद भी करती हैं, इसलिए ये सब बर्दाश्त भी कर लेती हैं।
मेरी बीवी के नंगे चूतड़ों पर भी मैं उसके सहने जैसे ही चांटे मार रहा था, फिर भी कुछ ही देर में उसके चूतड़ लाल गुलाबी हो गए !
और दोस्तो, मेरे और मेरी पत्नी के इस खेल में दो लोग बेचारे परेशान हो रहे थे, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है।
ये दो लोग थे, एक तो मेरा लण्ड जो तनतना के हथोड़ा बना हुआ था और उसमें दर्द भी होने लगा था। और दूसरी थी मेरी बीवी की चूत जो मेरे लंड के इंतज़ार में पानी बहाये जा रही थी।
आखिर मेरी बीवी बोली- अरुण प्लीज़… अब जल्दी से खोलो यार, मुझ से रहा नहीं जा रहा, अब तो बस जल्दी से करते हैं, मैं पागल हो जाऊँगी वरना !
दोस्तो, सही बताऊँ, मरा तो मैं भी जा रहा था उसे चोदने के लिए क्योंकि चुदाई में खतरा मर्द को ही ज्यादा होता है, कि कहीं घुसाने से पहले ही डिस्चार्ज हो गया तो लड़की के आगे बहुत शर्मिन्दा होना पड़ता है और डिस्चार्ज के साथ ही एक बार तो सेक्स का पूरा खुमार भी उतर जाता है।
लेकिन आज मैं उसकी पहल का इंतज़ार कर रहा था, फिर भी मैंने उसके आगे नाटक करते हुए कहा- क्या यार, अभी से?
वो बोली- हाँ यार… अब मुझ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा, प्लीज़ जल्दी खोलो यार… अब दर्द भी हो रहा है और तुमने मेरे कूल्हे भी गर्म कर दिए हैं।
और मैं भी यही चाहता था, मैंने उसके बंधन खोलने शुरू कर दिए, एक एक कर के वो खुलती गई लेकिन मैंने उसे कहा- यार, मेरे तो अभी आधे औज़ार भी काम नहीं आये जो मैंने तुम्हारे लिए सहेज के रखे थे।
मैंने उसे अपना वो सेक्स टॉर्चर वाला बॉक्स दिखाया, उसने भी उस बॉक्स में देखते हुए मुझे अपने जवाब से लाजवाब कर दिया, बोली- यार अरुण, फिर कभी… आज मेरी टॉर्चर क्लास का पहला ही दिन तो है !
यह सुन कर मुझे मज़ा आ गया।
और फिर उसने मेरे लंड को सहलाते हुए चूमते हुए कहा- इस बेचारे की भी तो सोचो !
वह बेड पर पैर पसार कर चूत फैला कर लेट गई और मेरे लंड को सम्बोधित करते हुए बोली- आजा मेरे राजा, तेरी रानी तेरा ही इंतज़ार कर रही है !
और फिर जैसा कि मज़ाक करने की उसकी नेचर है, बोली- और देख संभल के जाइयो, आज वहाँ बहुत फिसलन है।
और मैं अपनी हंसी रोक नहीं सका, जल्दी ही मेरा लंड उसकी चूत में और मैं उसके ऊपर !
वो मुझे अपनी बाहों में कसते हुए बोली- अरुण, यू आर जीनियस, तुम्हें मज़ा आया?
मैंने कहा- हाँ बहुत ! और तुम्हें?
वो बोली- बहुत ज्यादा !
और हमारे सम्भोग के हिचकोले शुरू हो गये।
सम्भोग का समय बढ़ाने के लिए मैं अपनी पत्नी को सेक्सी बातों में व्यस्त रखता हूँ, मैंने कहा- जानू, विदेशों में तो ऐसे सेक्सुअल टॉर्चर सेंटर होते हैं जहाँ लड़कियाँ, औरतें बाकायदा पैसे देकर इस फेंटेसी के मज़े लेने जाती हैं।
वो आहें भरती हुई बोली- ऐसा करो… इंडिया में तुम खोल लो ऐसा एक सेंटर, तुम्हें आइडिया भी कुछ ज्यादा ही आते हैं।
और हमारी रफ़्तार, आहें और आवाजें दोनों ही तेज़ हो गई  और हमारा सेक्स और दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा उत्तेजक रहा।
तो दोस्तो, केसा रहा यह किस्सा !?!
मेरा अनुरोध है कि कृपया इसे तकलीफ पहुचाने के लिए कभी मत करना, नारी इस दुनिया में सबसे नायाब होती है, उसका सम्मान करना चाहिए, उसे वस्तु नहीं अपना सौभाग्य समझना चाहिए।








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FUN-MAZA-MASTI बेदर्द बालमा-2

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बेदर्द बालमा-2

 बहरहाल मैंने उसके पैर को V के शेप में चौड़ा करके पलंग के किनारे वाले पायों से बांध दिया।
अब वो असहाय थी, मैं यहीं नहीं रुका, मैंने उन सब रस्सियों को खींच कर थोड़ा कस भी दिया।
मैंने उसके सर और कमर के नीचे पहले ही दो तकिये रख दिए थे, जिससे उसका सीना ऊपर हो गया था, रस्सी नीचे बाँधी थी और जैसे ही उस रस्सी को और टाइट किया उसके वक्ष और ज्यादा उभर कर तन गए।
मेरे बोंडेज गेम का पहला चरण पूरा हो चुका था, अब वो पूरी तरह से मेरे कब्जे और काबू में थी।
अगला और मुख्य चरण बहुत उत्तेजक और सेक्सी होने वाला था, जिसे सोच कर मेरे लंड में अभी से ही हलचल शुरू हो गई थी।
इस समय वो पलंग पर अच्छे से बंधी और पसरी हुई थी, और मैं क्या करने वाला हूँ, यह सोच रही थी।
मैं उसकी बगल में आकर लेट गया और उसके चेहरे पर अपना हाथ मसलते हुए बोला- अपनी खूबसूरती का बड़ा घमंड है न तुझे, आज मैं बताऊँगा तुझे साली !
और ऐसा कहते हुए उसके दोनों गाल पकड़ कर खींचे और बारी बारी से गालों पर चपत लगाई, उसकी आकर्षक नाक पकड़ कर हिलाई और फिर उसके होंठ मसलते हुए कुचलने लगा, यहाँ तक कि उत्तेजनावश उसके मुँह में अपनी उंगलियाँ डाल दी !
और !!!!
यहाँ मुझसे चूक हो गई !
उस बदमाश ने ज़ोर से अपने दाँतों से मेरी उंगलियाँ दबा ली।
मैं दर्द से बिलबिला उठा, मैंने उससे कहा- छोड़ मेरा हाथ !
उसने ना में सर हिला दिया।
मैंने उसके बोबे पकड़ कर दबा डाले पर उसको कोई फर्क ही नहीं पड़ा।
जो पाठक मेरी कहानियाँ नियमित पढ़ते हैं, उन्हें यह मालूम है कि उसे अपने वक्ष उभारों पर बल प्रयोग बहुत पसंद है।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था, आखिर मैंने उसकी चिकनी बगलों पर ज़ोर से गुदगुदी की, तब उसने मेरा हाथ छोड़ा।
मुझे भी गुस्सा आ गया था, मैंने उसके बगल में अंदर तक हाथ डाल के उसका स्लीव लेस कुर्ता खींच कर फाड़ दिया, उसके दो टुकड़े हो गए।
मैंने दोनों फटे हुए पल्ले अलग कर के पटक दिए, फिर मैंने उसके कंधे के दोनों स्ट्रेप भी काट दिए और उसकी चीथड़ा हो चुकी कमीज को उसकी कमर से खींच कर उतार कर फेंक दिया।
कंधे के नीचे तकिया लगे होने और हाथ कस के ऊपर बंधे होने की वजह आज वक्ष कुछ ज्यादा ही उन्नत और उठे हुए थे, चुचूक भी पूरे सेंटर में तने हुए लग रहे थे, मन तो किया कि इन गोरे गोरे कबूतरों को प्यार कर लूँ, दुलार लूँ, चूम लूँ लेकिन आज का फोरप्ले कुछ और था तो मैंने उन्हें दबाया, चांटे मारे और निप्पल को ब्रा के ऊपर से ही हल्के से काट लिया, उसके मुख से जब तक सी…सी… नहीं निकल गई, मैंने अपने दांत गड़ाए रखे।
अब वो एक पुरानी टाइट ब्रा में थी जो उसके बहुत भिंच रही थी, उसमें उसके बोबे बमुश्किल ठुंसे हुए थे।
उसे लगा कि अब मैं ब्रा खोलूँगा पर मैंने उसे वैसे ही रहने दिया, मैं आज उसे तरसाना चाहता था !
अब मैंने उसके पेट पर अपने नाखूनों से खरोंचते हुए उंगलियाँ फिराई और नाभि में भी घुसाई !
वो कसमसा रही थी, तंग ब्रा से भी उसे तकलीफ ही हो रही थी।
अब मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू किया। 
दोस्तो, यहाँ भी उसकी शैतानी सामने आ गई, मेरी बदमाश बीवी ने मुझे परेशान करने के लिए ऐसी गाँठ लगा दी कि मैं पक गया खोलते खोलते पर वो नहीं खुली।
और वो साली, मेरी बीवी पड़ी हंस रही थी।
मैं खिसिया गया और सलवार का नाड़ा तोड़ने की कोशिश करने लगा पर वो भी नहीं टूटा मुझसे !
वो और ज़ोर से हंसी।
अब मुझे अपनी तौहीन लगी, मैंने जगह जगह से उसकी सलवार भी फाड़नी शुरू कर दी। पुरानी थी तो चर्र चर्र फटती गई और उसकी मांसल दूधिया जांघें और पिंडलियाँ बाहर आती गई।
यहाँ भी मैंने उसकी कच्छी को छोड़ दिया।
पूरी सलवार फट गई पर साला वो नाड़ा अभी भी फंसा हुआ मुझे मुँह चिढ़ा रहा था।
लेकिन इस नाड़े को भी कोई न कोई काम जरूर में जरूर लूंगा, यह सोच कर छोड़ दिया वरना उसे भी कैंची से काट सकता था।
फिर मैंने फ़िल्मी खलनायकों की तरह उसके नंगे जिस्म पर कैंची की नोक हल्के से चुभाते हुए फिरानी शुरू की। उसे गुदगुदी और चुभन का मिलाजुला अहसास हो रहा था।
वो मेरी तरफ देखते हुए बोली- क्या आज तुम शक्ति कपूर का रोले करने वाले हो?
मैंने कहा- हाँ जी ! और तुम श्री देवी !
कैंची नाड़े तक आई तो वो बोली- इसे भी काट दो ना, बहुत चुभ रहा है।
‘इसीलिए तो नहीं काट रहा हूँ छमिया !’
अब मैंने पूरी तरह से शक्ति कपूर बनते हुए फ़िल्मी डायलॉग मारा।
उस अधनंगी को भी हंसी आ गई, बोली- ओये होए !
मैंने भी अब उस नाड़े में और चार पांच गांठें कस कस कर लगा दी कि वो बुरी तरह से उसकी खाल में गड़ गया।
अब उसके पूरे बदन में चड्डी और चोली के अलावा सलवार कुर्ते के चीथड़े उलझ रहे थे, अब वो महा कामुक लग रही थी।
अब मैं उसे ऐसे ही पड़ा छोड़ कर अपना यौन उत्पीड़न का वो सामान ले आया जो मैंने इकठ्ठा किया था, या तैयार किया था।
वो मस्त बंधी लेटी हुई थी और मेहनत मेरी हो रही थी !
सबसे पहले मैंने कैंची निकाली और उसके चेहरे पर और उभारों के ऊपर लगा कर फ़िल्मी खलनायकों की तरह से उसे डराया, मेरी घटिया एक्टिंग देख कर उसे फिर से हंसी आ गई।
मैंने चिढ़ कर कैंची उसके ब्रा के बीच में फ़ंसाई और ‘खचाक’ से उसे बीच में से काट दिया और वो उस दिन का सबसे दुर्लभ और उत्तेजक सीन था जब उसके दोनों दूधिया गोले उछल कर आज़ाद हुए।
वो इतनी टाइट ब्रा थी कि उसने उसके वक्ष के नीचे से पूरे घेरे में गहरा लाल निशान बना दिया था।
और अब मैंने कैंची को उसकी चड्डी के अंदर घुसा दिया, कैंची के स्टील के स्पर्श ने जब उसकी चूत को छुआ तो वो चिहुंक उठी।
फिर मैंने उसकी जांघों के बीच वाली जगह से चड्डी का नीचे का सिरा पकड़ के ऊपर उठाया और वहाँ कैंची फंसा कर ‘खचाक्क्क…’ और चड्डी भी दो पल्लों में कट गई।
और तब चड्डी के बाकी बचे हिस्से को काटने के बजाये फाड़ फाड़ कर अलग किया।
अब मेरी गदराई हुई पत्नी लगभग पूर्ण निर्वस्त्र हो चुकी थी, नंग धड़ंग अवस्था में अपने पैर फैलाये और हाथों को ऊपर किये हुए बंधी हुई थी, लगभग नग्न इस लिए लिखा कि उसके शरीर पर बस एक नाड़ा ही बचा था।
अब मैंने कुछ और नर्म सी रस्सी लेकर उसके उरोज बाँधने शुरू किये, लेकिन सही बताऊँ दोस्तो, इन्हें अकेले बांधना बहुत ही मुश्किल हो रहा था।
काश कोई एक और दोस्त होता मेरे साथ जो चूचे को पकड़ता और मैं वक्ष को उसकी जड़ से बांधता।
मैंने यह बात उसे बताई भी सही तो वो मुस्कुराते हुए मज़ाक में बोली- तो बुला लेते न किसी को ! वैसे भी अब तुम्हारे ‘उस’ में वो पहले वाली बात रही नहीं !
मैंने फिर उसे कस के दो तीन चांटें उसके चूतड़ और छाती पर लगाए- जान तो निकल जाती है तुम्हारी चिल्ला चिल्ला के चुदाई में !
फिर मुझे एक आइडिया सूझा, मैंने उसके निप्पल को अपने दाँतों से पकड़ कर ऊपर उठाया और फिर आराम से उसके दोनों स्तन एक एक करके एकदम जड़ से कस के बांध दिए।
लेकिन वो बोली- यार, थोड़ा और टाइट बांधो, अभी मज़ा नहीं आया !
तो मैंने और कस दिए, इतने कि उनका खून ऊपर ही रुक गया और वो सफ़ेद से गहरे गुलाबी हो गए अब वो एक गुब्बारे की तरह से लग रहे थे।
इसके बाद मैंने उसके बंधे हुए नाड़े के पेट और पीठ की तरफ वाले हिस्से में फंदा सा बना कर एक रस्सी इस तरह से बाँधी कि वो उसकी चूत और गांड की लाइन में जाकर फंस गई और जब उसे मैंने खींच कर टाइट किया तो वो चूत को चीरते हुए अंदर तक धंस गई।
यहाँ उसे दर्द हुआ !
अब मैंने उस नंगी को अपनी रस्सी से बनी हुयी ब्रा और पेंटी पहना दी थी जो उसके बोबे और चूत को और ज्यादा दिखा रही थी और तकलीफ भी पहुंचा रही थी।
मेरा बंधन का काम पूरा हो चुका था।
अब मैंने कपड़े सुखाने वाली चिमटियाँ ली और सबसे पहले उसके कानो के टॉप्स निकाल कर वहाँ लगाई, एक उसके नीचे वाले होंठ में लगा दी।
और फिर दो चिमटियाँ मैंने उसकी तनी हुई चूचियों में लगा दी।
और फिर नीचे आते हुए उसकी चूत के दोनों होंठ जो रस्सी धंसी होने की वजह से और ज्यादा बाहर निकल रहे थे, उन पर दो दो चिमटियाँ लगा दिये
हर चिमटी के साथ उसकी सिसकारी निकल जाती थी।
अब वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चली थी क्योंकि उसकी शरारतें, हंसी मज़ाक सब गायब हो चुका था, उसकी आँखों में लाल लाल डोरे से तैर आये थे,
उसकी चूत भी अब पानी छोड़ने लगी थी।
इधर मेरा लंड भी कच्छे के अंदर फंसा घुटने लगा था, वो भी इस नज़ारे का दीदार करना चाहता था।
मेरी खुद की चड्डी की रगड़ से ही कहीं फव्वारा न छूट जाए, इस डर से मैंने अपने भी कपड़े उतारने का निर्णय किया और उससे अलग होकर अपना पायजामा, टी शर्ट और फिर बनियान और अंत में चड्डी भी उतार कर अपने आप को भी पूर्णतया नग्न कर लिया।
इसके बाद के अपने सनसनी खेज और उत्तेजक काम को अंजाम देने के लिए उसकी और बढ़ चला !
इसे आप इस घटना के अंतिम भाग में विस्तार से पढ़ेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा !






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FUN-MAZA-MASTI बेदर्द बालमा-1

FUN-MAZA-MASTI


बेदर्द बालमा-1

 मेरा आज का यह किस्सा जो मैंने अपनी बिंदास बेबाक बीवी पर आजमाया और अब इसे आपके लिए लिख रहा हूँ।
लेकिन मेरा एक निवेदन है कि यह आपसी सहमति से किया जाने वाला यौन पूर्व क्रीड़ा (फॉर-प्ले) है, अपने साथी को दर्द, तकलीफ या सज़ा देने के लिए बिल्कुल भी नहीं है तो कृपया इस बात का जरूर ध्यान रखें।
मुझे सेक्स में फॉर-प्ले बहुत पसंद है और इसमें में नए नए प्रयोग करता रहता हूँ, इसमें कुछ अजीब और हास्यास्पद भी है इसलिए उनका जिक्र यहाँ नहीं कर रहा, उन्हें मैं अपने कुछ ख़ास दोस्तों से शेयर कर भी चुका हूँ।
एक दिन मैं नेट पर बंधन और कामुक शारीरिक प्रताड़णा में कामसुख वाली एक ब्लू फिल्म देख रहा था, मेरी पत्नी दूसरे कमरे में टीवी देख रही थी, वो न जाने कब मेरे पीछे आ कर खड़ी हो गई मुझे पता ही नहीं चला, और वो भी एकटक देखने लगी।
मैं अचकचा गया और नेट बंद करने का उपक्रम किया तो उसने मुझे रोक दिया।
मैंने उसे समझाया कि प्लीज़ तुम मत देखो ! इसे तो मैं भी बस ऐसे ही देखने लगा, इस लड़की की तकलीफ देख कर तुम्हें डर लगेगा।
वो शरारत से मेरी तरफ देखते हुए बोली- लगता तो नहीं कि इसे कोई तकलीफ हो रही है?
मैंने कहा- क्यूँ? किस बुरी तरह बंधी हुई है, चिमटियाँ लगी हुई हैं, कूल्हे पर, वक्ष पर चपत पड़ रही है। यह सब तुम्हारे साथ हो तो तुम्हें तकलीफ नहीं होगी?
वो मेरी गोदी में बैठती हुई और मेरे चेहरे पर उंगली फिराते हुए बोली- अब यदि मेरे साथ ऐसा ही सब कुछ हो, मैं तो तब ही बता पाऊँगी मेरे राजा… अभी से कैसे बताऊँ?
और वो कूल्हे मटकाती हुई अपने बैडरूम में चली गई।
 
और मैं हक्का बक्का रह गया।
उसका इशारा मैं समझ गया और मेरे दिमाग में ऐसा ही कुछ अपनी बीवी के साथ करने का ख़याल आया।
और उस दृश्य की कल्पना मात्र से ही मेरा लिंग अकड़ गया।
उस रात, मैंने सहवास के दौरान फिर उससे उस बारे में पूछा- क्या तुम उस बंधन वाले सेक्स के लिए सही में संजीदा हो?
उसने मेरे दोनों हाथ खुद के उभारों पर रख दिए और कहा- इनके साथ तुम क्या करते हो, पता है न तुम्हें?
मैंने कहा- हाँ !
और उसके उरोजों को दबाते हुए उमेठते हुए बोला- बहुत बेदर्दी से पेश आता हूँ कभी कभी !
और वो बोली- उसमें मुझे मज़ा आता है इसीलिए तुम्हें करने देती हूँ।
बंधन और कामुक शारीरिक प्रताड़णा वाले फॉरप्ले की तरफ उसका यह दूसरा इशारा था।
अब मैं उसके बाद 2-3 दिन तक इसे कैसे और कब अंजाम दूँ, यही सोचता रहा।
ब्लू फिल्म वालों के पास तो सब तरह के साधन होते हैं, और इस तरह का सामान हमारे भारत में क्या मिलता होगा? मुझे तो डिल्डो, वाइब्रेटर कहाँ मिलते हैं, यह भी नहीं पता, लेकिन अपना भारत देसी जुगाड़ के लिए जाना जाता है, तो मैंने भी धीरे धीरे चोरी छुपे तैयारी शुरू कर दी।
और अब बस सही वक़्त इंतज़ार था।
वो भी मिल गया।
दोनों बच्चे स्कूल पिकनिक के लिए किसी रिसोर्ट में जा रहे थे और शाम तक आने वाले थे, मैंने ऑफिस से छुट्टी ले ली, कारण लिखा ‘आवश्यक घरेलू कार्य’
और जब मैंने बीवी को अपने छुट्टी के असली कारण के बारे में बताया तो वो मुझे मारने को दौड़ी- साले बदमाश, हर समय सेक्स के खेल ही सूझते हैं तुम्हें।
मैंने कहा- मैं क्या करूँ, तुम हो ही ऐसी !
और फिर मैंने उसे एक शानदार चाय बना कर पिलाई और उसे घर के काम में हाथ बटाया, जिससे हमें ज्यादा से ज्यादा वक़्त अपने ‘उस काम’ के लिए मिल सके !
सब कामों से निपट कर मैंने उसे कहा- अब पानी वाणी पी लो और टॉयलेट हो आओ, मूत आओ, धो आओ अच्छे से ! फिर तुम कई घंटों के लिए बंधने वाली हो।
‘ओ के !’ बोल कर मेरी बेखौफ़ बीवी वाशरूम में चली गई।
मैंने उसे कहा- एक काम और करना !
वो बोली- क्या?
मैंने कहा- आज तुम ऐसा सलवार सूट, पेंटी और ब्रा पहनना जो तुमने रिजेक्ट कर दिए हों।
‘क्यूँ?’
मैंने कहा- आज बस तुम कोई सवाल मत पूछो ! समझी? आज मैं तुम्हारा मालिक (बोंडेज मास्टर) हूँ और तुम मेरी गुलाम(स्लेव) ! समझ गई? तभी तुम सब चीज असली में महसूस करोगी।
‘ओ के, मेरे मास्टर !’
और वो कपड़े बदल कर आ गई।
मैंने कहा- अब बेड पर चलो !
यहाँ मेरी बीवी ने मुझे हैरान कर दिया, वो बोली- गेम यहीं से शुरू है मास्टर, मैं अपने आप क्यूँ जाऊँगी?
यह सुन कर मुझे सही में मज़ा आ गया, मैंने कस कर उसके बाल पकड़े एक हाथ से, और दूसरे हाथ से उसकी चूतड़ पर थप्पड़ मारते हुए उसे बेड की तरफ घसीटने लगा- चल साली, बहुत रौब झाड़ लिया अपने पति पर, आज तेरी कस के मरम्मत और सज़ा का इंतज़ाम किया है।
और मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया, वो अपने आप को संभाल पाती, इससे पहले ही मैं उसके ऊपर सवार हो गया और मैंने उसका एक हाथ पकड़ कर पलंग के ऊपरी सिरे में पहले से ही फिट रस्सी में बाँध दिया, और फिर दूसरा भी, उसी जगह पर बाँध दिया !
अब मेरा काम काफी आसान हो गया था क्योंकि उसके हाथों की हरकतें शांत हो गई थी।
वो स्लीवलेस सूट पहन कर आई थी तो अब उसकी दोनों क्लीन शेव्ड बगल उजागर हो गई थी।
उसके बाद मैं नीचे की तरफ आया और उसके उछलते हुए पैरों को पकड़ा, मैंने महसूस किया वो यह मामूली सा विरोध हमारे आज के इस सेक्स गेम को वास्तविक बनाने के लिए ही कर रही थी।
वरना दोस्तो, अंदर की बात तो यह है कि वो आसानी से मेरे काबू में नहीं आती है।
बहरहाल मैंने उसके पैर को V के शेप में चौड़ा करके पलंग के किनारे वाले पायों से बांध दिया।
अब वो असहाय थी, मैं यहीं नहीं रुका, मैंने उन सब रस्सियों को खींच कर थोड़ा कस भी दिया।
मैंने उसके सर और कमर के नीचे पहले ही दो तकिये रख दिए थे, जिससे उसका सीना ऊपर हो गया था, रस्सी नीचे बाँधी थी और जैसे ही उस रस्सी को और टाइट किया उसके वक्ष और ज्यादा उभर कर तन गए।
मेरे बोंडेज गेम का पहला चरण पूरा हो चुका था, अब वो पूरी तरह से मेरे कब्जे और काबू में थी।
अगला और मुख्य चरण बहुत उत्तेजक और सेक्सी होने वाला था, जिसे सोच कर मेरे लंड में अभी से ही हलचल शुरू हो गई थी।
यह आप लोग इस महा उत्तेजक खेल के अगले भाग में पढ़ना !







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