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Tuesday, April 15, 2014

FUN-MAZA-MASTI लुच्चा मेरा मूँह बोला भाई--3

FUN-MAZA-MASTI

  लुच्चा मेरा मूँह बोला भाई--3

 गतान्क से आगे ............... 
अब मैं मेरी बेहन की तरह ही गोरी चिटी और सुंदर लड़की हूँ. जब भी बन ठन कर किसी शादी मे जाती हूँ तो मेरी उमर से छोटे लड़कों से लेकर मैने बूढ़े बूढ़े लोगों को नज़रों नज़रों में मेरे कपड़े उतारते महसूस किया है. हमारे सब रिश्तेदार तो यह भी कहते हैं के बड़ी छोटी से ज़्यादा सुशील ही नहीं बल्कि सुंदर भी है. अपनी सुंदरता छुपाने के लिए मैं जान बूझ कर चश्मा लगाती हूँ ता के लड़के मुझे तंग ना करे. पर फिर भी बहुत सारे लड़के मेरे साथ बात करने को उतावले रहते हैं. अरे एक दो बार तो कॉलेज जाते समय मुझे स्कूल के कुछ लड़कों ने भी बस में छेड़ा है. ऐसी पिटाई की थी मैने उन लड़कों की अबतक उस बस में सफ़र नहीं करते जिसमे मैं बैठी होती हूँ.खैर कपड़े बदलने के लिए मैने अपनी जीन्स का बटन और जीप खोली और उसे ज़ोर से खिच कर अपनी टाँगों से अलग किया तो शीशे मे देखा के टॉप और पॅंटी में मैं किसी हेरोइन से कम नहीं लग रही थी. मैने अपने बाल खोल कर कंधों पर छोड़ दिए. आए हाए! क्या मस्त लग रही थी मैं उस धीमे बल्ब की लाइट में. मैने अपना टॉप उतार कर फरश पर फेंक दिया और शीशे मैं अपने आप को देखते हुए अपनी ब्रा में क़ैद छातियों को अपने हाथों से उठा कर देखा और अपने हाथों से पता नहीं क्यों ज़रा सा सहलाया. मुझे थोड़ा अछा लग रहा था. मेरे दिमाग़ में पता नहीं क्या आया और मैं अपने बूब्स को नंगा देखने के लिए मैने अपनी ब्रा उतार दी. अपनी छाती के उमरडते उभारों को और उन पर लगे तने हुए निपल्स को देख कर मैं गर्व से भर गयी. फिर मैने अपनी पॅंटी उतारी और अपनी योनि को देखा. मैं अपने शरीर के सारे फालतू बाल वॅक्स करती हूँ, क्योंकि वो मुझे आछे नहीं लगते. सिर्फ़ मेरी योनि के बाल मैने कभी शेव या वॅक्स नहीं किए. मैं कुछ देर अपने शरीर को सहलाती रही, फिर अचानक याद आया के हमारा हरामी भाई भी मेरी बेहन से मिलने को बेताब हो रहा होगा, उसकी भी तो खबर 

लेनी बाकी थी. यह सोच कर मैने अपनी ब्रा और पॅंटी को पहना और अपना एलास्टिक वाला पिजामा और ज़िप वाला नाइट टॉप उठा कर पहनने लगी. फिर सोचा के क्यों ना यह देखा जाए के वो बुढ़ू मेरे शरीर को छू कर क्या पहचान पाएगा के मैं मेरी बेहन नहीं बलके मैं हूँ. पता नहीं कहाँ से यह ख़याल आया और मैने अपनी ब्रा और पॅंटी उतार दी और सिर्फ़ पिजामा और टॉप पहन लिया. फिर मैं अपने कमरे मे आई ता के लाइट बंद कर के मेरी बेहन के कमरे में जा सकूँ. फिर सोचा के कहीं मेरी योनि पर बाल पा कर वो समझ ना जाए के मैं मेरी बेहन नहीं हूँ. अब अंधेरे में मैने यह नहीं देखा था के मेरी बेहन नीचे से चिकनी है के नहीं. अगर शेव कर दूं तो भी कह सकती हूँ के आज ही की है पर अगर नहीं की तो वो बोलेगा के कल तो बाल नहीं थे आज ये घना जंगल कहाँ से आ गया. यह सोच कर मैने अपने कपड़े उतार कर बेड पर फेंके. पूरी नंगी हो कर, उस्तरा उठा कर बाथरूम मे योनि शेव करने गयी तो शेव करके मैने सोचा के मेरे तन से खुश्बू नहीं आ रही. क्यों ना नहा लिया जाए. तो मैं फटा फॅट नहा कर नंगी और गीली कमरे में वापिस आई और टवल से अपना बदन पोंछ कर मैने अपनी बॉडी पर अच्छा पर्फ्यूम लगाया और फिर से पाजामा और टॉप पहन लिया. पर यह सब मैं आख़िर क्यों कर रही थी? आख़िर मैं उसे कहाँ तक जाने देना चाहती थी? मुझे अब कुछ समझ नही आ रहा था. बस दिमाग़ में एक ही बात चल रही थी के वो कमरे में घुसते ही क्या करेगा? क्या मुझे किस करेगा? क्या वो मेरे कपड़े उतारेगा भी या उसे पहले ही पता चल जाएगा के मैं छोटी नहीं हूँ? नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता वो मेरे कपड़े ज़रूर उतारेगा, वो मेरी योनि ज़रूर चतेगा, और उससे बिल्कुल भी शक नहीं होगा. मेरा बदन बनावट में मेरी बेहन के जैसा ही है और हमारी आवाज़ भी काफ़ी मिलती है. बाकी मैं दबी आवाज़ में बात करूँगी ताकि उसे शक ना हो. मैं उसे पता भी नहीं चलने दूँगी के मैं मेरी बेहन नहीं हूँ. मैं आज उसे सबक सीखा कर ही रहूंगी. उफफफ्फ़! यह मुझे क्या हो रहा था. मेरा दिमाग़ अब साफ काम नहीं कर रहा था मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं सही ग़लत की पहचान भूल रही थी. मुझे घबराहट होने लगी. 

मैने फटा फॅट अपने कमरे की लाइट बंद की और मेरी बेहन के कमरे में चली गयी और उसका इंतेज़ार करने लगी. वो अब आया वो अब आया! यह सोच कर मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. मेरी घबराहट बढ़ती जा रही थी. मेरा गला सुख रहा था. पर वो था के आने का नाम ही नहीं ले रहा था. जब एक घंटे तक वो नहीं आया तो मैं बेचैन होने लगी, मेरी घबराहट चली गयी और मुझे गुस्सा आने लगा. कमीना इंसान बचपन से हमे बेहन बुलाता और मानता रहा है. अब जवान क्या हुआ, हमारी ही जवानी लूटने लगा है. आने दो उसको मैं उसके आते ही उसको पहले ज़ोर से थप्पड़ मारूँगी और फिर चिल्ला कर अपने घरवालों को बुला लूँगी और उसे रंगे हाथों पकड़वाउन्गि और अपने घरवालों को सारी कहानी सुना दूँगी. मेरा गुस्सा वापिस आ गया था और हर पल के साथ बढ़ रहा था. जब वो फिर भी नहीं आया तो तंग आकर मैं अपनी बेहन का मोबाइल उठा लाई और उससे मेसेज किया, “कहाँ रह गये! आज आओगे भी या नहीं!”जवाब तुरंत आया. “मेरी जान बस तुम्हारे घर के बाहर ही हूँ. अभी दीवार फाँद कर आ रहा हूँ.” मेरी साँसें फिर से तेज़ हो गयी और दिल फिर से ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. जैसे ही दरवाजे पर हल्की सी दस्तक हुई मैं बेड से उछल कर खड़ी हो गयी और भाग कर दरवाजा खोला. आज चाँद नहीं निकला था तो इस वजह से पूरा अंधेरा था. वो मुझे एकदम दरवाजा खुलने पर पहचान भी नहीं पाया और जल्दी से अंदर आ गया. उसके कमरे मैं घुसते ही मैं तपाक से उछल कर उसके गले से लिपट गयी और अपने होंठ सीधे उसके होंठों पर जमा दिए. उसने भी मुझे बाहों में कस कर भर लिया और मुझे गहरा किस करने लगा. उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में लपलप चल रही थी और मेरी छाती उसकी मज़बूत पकड़ की वजह से उसकी छाती के साथ पीस गयी थी. एक पल के लिए मेरे होश उड़ 

गये. मेरे पावं हल्के हो गये मानो फर्श पर रखे ही ना हों. मेरी जिंदगी का यह पहला चुंबन था और इस चुंबन ने ही मेरे होश उड़ा दिए. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. वो बोला, ” अरे जान! क्या बात है आज बहुत मूड मे हो.”मैने अपनी आवाज़ दबा कर फुसफुसाते हुए कहा, ” बस अब कुछ ना कहो, और आज मेरी जवानी मसल के रख दो.” उफफफ्फ़! ये मुझे क्या हो गया था, मैं क्या बोल रही थी. मैं अपना सारा गुस्सा और अपनी शर्मो हया सब भूल चुकी थी. भूल चुकी थी के आज उसको घर बुलाने का मकसद क्या था.”क्या बात है इतनी दबी दबी आवाज़ में क्यों बात कर रही हो?” उसने पूछा.”वो इसलिए के कोई जाग ना जाए और मेरा गला वैसे भी खराब है,” मैने दबी सी आवाज़ में जवाब दिया और फिर पागलों की तरह उसे चूमने लगी. अब वो भी मस्त हो चुका था उसने भी मुझे ज़ोर से किस करना शुरू किया मेरे होंठ चूसने लगा, काटने लगा. मुझे उसने धकेल कर दीवार के साथ लगा दिया और मेरे हाथों की उंगलियों में उंगलियाँ डाल कर उन्हे दीवार के साथ चिपका दिया और मुझे पागलों की तरहा किस करने लगा, कभी होठों पर, कभी गले पर. मुझे आछे से चूस रहा था और बीच बीच में काट रहा था. उसने अपनी एक टाँग मेरी टाँगों के बीच धकेल दी और अपनी जांघों से मेरी योनि को रगड़ने लगा. मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हुआ और मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी. उसने अब मेरे हाथों को छोड़ा तो मैं उससे लिपट गयी. पर उसने मुझे दीवार के साथ ही लगाए रखा. फिर उसने अपने एक हाथ से मेरे बूब्स को मसलना शुरू किया और दूसरे हाथ से मेरे पतले प्यज़ामे के कपड़े के उप्पर से ही मेरी योनि मसलनी शुरू कर दी. मैं मज़े के सातवें आसमान पर उड़ रही थी और मेरे मुँह से आहें निकल रही थी और वो मेरी गर्दन काट खा रहा था. फिर अचानक वो हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ था. मेरा पेट एकदम से अकड़ने लगा और फिर एक दम कांप सा गया और मुझे लगा जैसे मेरे अंदर पानी बहने लगा हो. और साथ में मुझे पहले कभी ना महसूस हुए मज़े का एहसास हुआ. फिर उसने मेरे टॉप की ज़िप खोली और उससे कॉलर से पकड़ कर मेरी पीढ़ पर सरकाता हुआ उतारने लगा, और साथ में मेरी गर्दन और कंधों को चूमने और काटने लगा. मेरा टॉप उत्तर कर ज़मीन पर गिर गया. 

उसने झट से अपनी टी-शर्ट उतारी और मुझसे लिपट गया. पहली बार मेरी नंगी छाती ने क़िस्सी मर्द की नंगी छाती को छुआ था. मैं एक दम सातवें आसमान पर उड़ने लगी, मेरा दिल ज़ोर से धड़कने लगा. उसने मुझे फिर ठंडी दीवार के साथ चिपका दिया और मेरे बूब्स को एक एक कर चूसने लगा. एक बूब चूस्ता तो दूसरे के निपल को मुट्ठी में पकड़ कर मरोदता. मुझे दर्द और मज़े का एक साथ एह सास हो रहा था. बूब्स को चूस कर, फिर उन्हे काट कर, उसकी ज़ुबान मेरी नाभि तक पहुँची. उसने अपनी ज़ुबान को मेरी नाभि में घुमाया फिर मेरे पेट को किस किया. उसके दोनो हाथ मेरे बूब्स मसल रहे थे. उसके दोनो हाथ मेरे बूब्स को छोड़ मेरे शरीर के साइड्स को सहलाते हुए मेरी कमर पर मेरे प्यज़ामे के एलास्टिक पर जा टीके. उसके होठों ने मेरे पेट को चूमना बंद किया तो उसकी नाक मेरे पेट को रगड़ती हुई मेरे प्यज़ामे के एलास्टिक तक पहुँची. इस पर उसने अपने दोनो हाथों से मेरी कमर के साइड्स से मेरे प्यज़ामे को पकड़ा और उसे नीचे तक खींच दिया. अब मैं उसके सामने अंधेरे में पूरी नंगी हो गयी थी. मेरी बाईं टांग अपने आप ही घूम कर मेरी दाई टांग के आगे आ गयी, मानो शरमा के. उसने बड़े प्यार से अपने एक हाथ से मेरी टांग को साइड पे किया और अपनी ज़ुबान से मेरी योनि को चाटने लगा.”अरे जान आज तेरे बदन से बड़ी अच्छी खुश्बू आ रही है और तेरी चूत का स्वाद भी बड़ा अछा आ रहा है. क्या बात है?” उसने लुच्चे से शब्दों में पूछा. `चूत’, योनि के लिए ये शब्द मेरे लिए नया था. पर अब मेरा दिमाग़ इन बातों पे कहाँ ध्यान दे रहा था. उसकी ज़ुबान तो मानो मेरी योनि, मतलब चूत मे आग लगा रही थी. मैं मज़े से पागल हुए जा रही थी और मेरे मुँह से ठंडी आहें निकल रहीं थी.एक बार फिर मेरा पेट आकड़ा और फिर मेरे पेट में पानी की एक नदी बह निकली. “अरे 

जान आज तो तू बड़ी जल्दी ही दो बार झाड़ गयी. लगता है मेरी पर्फॉर्मेन्स आज कुछ ज़्यादा ही अछी है, या फिर तू ज़्यादा ही गरम?” मुझे चूमते हुए उसने कहा और झट से अपनी पॅंट उतार दी, और मेरे से लिपट गया. उसकी पाइप ने मेरे पेट को छुआ तो मुझे करेंट सा लगा. मैं कांप गयी और मैने अपने दोनो हाथों से उसकी पाइप को पकड़ लिया. रे बाबा रे बाबा! उसकी पाइप तो चूल्‍हे के जैसे गरम, लोहे के जैसे सखत और मोटे केले जैसे मोटी हो रखी थी. और तो और मेरे दोनों हाथों में भी मुश्किल से ही आ पा रही थी.”क्यों जान! मेरा लंड पकड़ कर क्या मिन्नते कर रही हो के तुम्हे जल्दी से बेड पर लेटा कर, तेरी चूत में इससे डाल कर, तुम्हे जल्दी से चोद दूं?” वो बोला.” हा.. हां!” मैने दबी से आवाज़ से कहा. इस पर उसने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लिटाया, और खुद अपने भारी भरकम तकड़े शरीर को ले कर मेरे उपर लेट गया. पर मैं हैरान थी के मुझे उसके शरीर का तनिक भी भार महसूस नहीं हो रहा था. एक औरत क्या क्या उठा सकती है! उसने मुझे फिरसे चूमना और चूसना शुरू किया. मेरे होठों को, मेरे गले को, मेरे कंधों को, मेरे बूब्स को चूमा और चूसा. अपने हाथों से वो मेरे पूरे बदन को सहला रहा था. मेरी कमर की साइड्स से हाथों से मेरे शरीर को मसलता हुए, मेरी बाहों को सहलाता हुए, मेरे हाथों को पकड़ लिया और मुझे चूमने लगा. फिर अपने होठों को मेरे शरीर पर दौड़ते हुए एक बार फिर मेरी चूत चाटने लगा. उसके दोनों हाथ मेरी जांघों को सहला रहे थे. मैं एक बार फिर झड़ी तो उसने कहा, लंड के लिए तैयार हो मेरी जान!”. “हां हां जानू! प्लीज़ जल्दी करो!” मैने आवाज़ दबा कर कहा.तो यह लो!” कह कर उसने अपना लंड अपने हाथ में लिया और मेरी चूत के उपर रख दिया. फिर वो मेरे उपर लेटा मुझे किस किया और फिर उसने हल्का सा ज़ोर लगा कर अपना लॉरा मेरी चूत के अंदर घुस्साने की कोशिस की. पर कुँवारी चूत में लॉरा इतनी आसानी से कहाँ घुसने वाला था. जैसे ही लॉरा अंदर घुसने लगा मेरी चूत जैसे फटने लगी और एकदम से एक तीखा और बहुत तेज़ दर्द मुझे महसूस हुआ. उसने हल्का ज़ोर लगाया तो मेरा दर्द असहनीय हो गया. मैने अपनी आँखें बंद कर ली. मेरे मुँह से हल्की सी दर्द भरी चीख निकली पर मैने अपने होठों को कस कर दाँतों से दबा कर उसे कंट्रोल किया.”घबरा मत दीदी! सिर्फ़ कुछ देर ही दर्द होगा फिर आप को भी छोटी की तरहा मज़ा आने लगेगा,” 

उसके मुँह से यह बात सुनते ही मेरी आँखें खुल गयी, मेरे रोंगटे खड़े हो गये, मेरा शरीर ठंडा पड़ गया और मेरा दिल एक बार फिर ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा, जैसे फिरसे किसी ने मेरी चोरी पकड़ ली हो. मेरे मुँह से केवल एक ही आवाज़ निकली, “हां?” इस पर उसने अपने होठों से मेरे होठों पर किस किया और बोला, ” हां दीदी, बस थोड़ा सा ही दर्द होगा फिर आपको खूब मज़ा आएगा. पर चिलाएगा मत वरना हम दोनों फस जाएँगे.” “ओके!” मैं बोली. फिर उसने अपने होठों से मेरे होठों को कस कर सी लिया और पूरा ज़ोर लगा के अपना लॉरा मेरी चूत में धकेल दिया. मेरी चूत तो मानो फॅट ही गयी हो. दर्द के मारे मेरा मुँह लाल हो गया. मेरी आँखें बाहर निकल आई. मैं ज़ोर से चिल्लाना चाहती थी पर उस कम्बख़त के होठों की मजबूत पकड़ ने और घरवालों के डर ने एक हल्की सी सिसकी ही बाहर आने दी. फिर वो कुछ पल रुका, मेरा दर्द कम हुआ तो उसने अपना लॉरा बाहर निकालना शुरू किया. मेरा दर्द कम होने लगा, पर कम्बख़त ने लॉरा पूरा बाहर निकालने की बजाय फिर से अंदर धकेल दिया, और दर्द के मारे मेरी आँखों से नदियाँ बहने लगी. फिर वो ऐस्से ही बार बार अपना लॉरा मेरी चूत के अंदर बाहर करने लगा. उसकी बात सच थी. दो तीन मिनिट के बाद मेरा दर्द कम हो गया और मुझे भी मज़ा आने लगा. अब कमरे में छाप छाप की आवाज़ें गूँज रही थी, जैसे उसका लॉरा मेरी चूत से माखन निकाल रहा हो. ऐसे ही अंदर बाहर का सिलसिला पता नहीं कब तक चला पर मैं उस बीच नज़ाने कितनी बार झड़ी थी. फिर काफ़ी देर बाद वो थोड़ा स्लो हुआ फिर अचानक उसने कुछ ज़ोर के झटके दिए और फिर उसके लंड से मेरे 

पेट के अंदर मानो गरम पानी का फव्वारा छोड़ दिया. वो थक कर पसीने से लठ पथ मेरे पसीने से भरे शरीर पर निढाल हो गया. मेरी भी साँस फूल चुकी थी. कुछ देर दोनों ने साँस ली फिर उसने मुझे मेरे सर के पीछे से पकड़ कर मेरे होठों पर एक गहरा चुंबन दिया. फिर बोला, ” वाह दीदी! आज आपकी कुँवारी चूत को चोद कर बहुत मज़ा आया. वैसे एक बात कहूँ. आप अपनी बेहन से ज़्यादा खूबसूरत ही नहीं बलके ज़्यादा मज़ेदार भी हो.” यह कह कर उसने मुझे फिर किस किया और मेरे बूब्स को सहलाया. कुछ हिम्मत जुटा कर मैने उससे पूछा, ” पर भैया! आपको कैसे पता चला के ये मैं हूँ और छोटी नहीं?”"दर असल दीदी! मुझे शुरू से ही पता था के आप हो. आप की बेहन जब आप की मौसीजी के साथ जा रही थी तो मुझे रास्ते में मिली थी और उसने मुझे बता दिया था के वो आज रात आपकी नानी के घर सोने वाली है और उसका मोबाइल घर पर ही रह गया है. मैने तो ऐसे ही शरारत में मेसेज किया था. पर जब आपने जवाब भेजा तो मैने सोचा के आपको चोदने का इससे अच्छा मौका फिर कब मिलेगा. और अपनी प्यारी बड़ी दीदी को चोदने के लिए उनका यह भाई प्यार की डोरी से बँधा चला आया.”"पर ये सब अच्छा नहीं है!” मैं बोली.”किसे पता चलता है दीदी,” वो बोला. “बस आप जवानी के मज़े लो और हमें भी दो,” कह कर उसने मुझे फिर किस किया. 

सुबा होने वाली थी इसलिए वो फटा फॅट उठकर तैयार हो कर चला गया और में थॅकी मारी ऐसे ही नंगी ही सो गयी. अगले दिन जब दोपहर मैं उठी तो यह देख कर घबरा गयी के सारी चादर मेरे खून से लठ पथ पड़ी है. मैने बड़ी मुश्किल से मेरी बेहन के वापिस आने से पहले, अपनी मा से छुप कर चादर रगड़ रगड़ कर अपने बाथरूम में धोइ और बेहन के कमरे की चादर चेंज की. उसके कमरे से जली हुई तार जैसी जो स्मेल आ रही थी उसे दूर करने के लिए डीयोडरेंट छिड़का. खुद दो बार नहाई फिर भी मुझे अपने आप में से उसकी स्मेल आ रही थी. सारा दिन में बड़ी मुश्किल से हल्का हल्का लंगड़ा कर चल रही थी. पर इस सब चक्कर में मैं सबसे ज़रूरी चीज़ तो भूल ही गयी. वो गोली लेना जिसकी बात मेरी बहेन कर रही थी. कुछ दिनों बाद मेरी काली करतूतों का भंडा फूट गया. मजबूरी में घरवालों को सब सच बताना पड़ा. तो बदनामी से बचने के लिए मेरे घरवालों ने मुझसे उमर में छोटे मेरे ही धरम भाई के साथ सब नियतियाँ भुला कर शादी कर दी. अब वो मेरे और मेरी बेहन के भाई के बजाए मेरा घरवाला और मेरी बेहन का जीजा बन गया. वैसे सच बोलूं तो मेरी बेहन उसकी रंडी बन गयी. और सब रिश्ते बदल गये. दोस्तो इस इंसानी जीवन मे पता नही कब हालात बदल जाए पता नही अक्सर जो हम सोचते हैं उसके विपरीत हालात हो जाते है इसी लिए तो कहते की जवानी दीवानी होती है पता नही कितनी बार इंसान खेल जाता है कामुक खेल जवानी का 
दोस्तो ये कहानी यही ख़तम होती है फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ आपका दोस्त राज शर्मा 
समाप्त



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FUN-MAZA-MASTI लुच्चा मेरा मूँह बोला भाई--2

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गतान्क से आगे ............... 
उसने अपने हाथ में पकड़ी वो मोटी सी पाइप जो शायद उसके पिशाब वाली पाइप ही थी उसे मेरी बेहन की योनि के उपर टीकाया और मेरी बेहन ने अपनी कमर के बल से अपने चुटटर थोड़े हवा में उठाए और उसकी पाइप मेरी बेहन की योनि में समा गयी और वो मेरी बेहन के उपर लेट गया. फिर उसने अपने चुटटर उपर उठा उठा कर नीचे करना शुरू कर दिए जैसे वो अपनी पाइप मेरी बेहन की योनिके बार बार अंदर बाहर कर रहा हो. मेरी बेहन हल्की सिसकियाँ भरने लगी और कमरे में से अजीब सी आवाज़ आने लगी, जैसे कोई दूध से माखन निकाल रहा हो और साथ में हल्के पटाखे जैसे आवाज़ें आ रही थी जो शायद दोनो की जांघें आपस में भिड़ने की वजह से आ रही थी. मेरी लिए ये सब कुछ नया था. मैं बी.एससी. के फाइनल एअर मैं पोहुन्च चुकी हूँ पर आज तक किसी लड़के ने मुझे छुआ तक नही है और ना ही अभी तक मेरा कोई बाय्फ्रेंड हुआ है. मैने सेक्स के बारे में थोड़ा बहुत जो सुना वो ना चाहते हुए मेरी सहेलियों के मुँह से ही सुना है, क्यॉंके मैं बहुत ही शर्मिल्ली किस्म की लड़की हूँ और सेक्स का नाम आते ही मुझे शरम आ जाती है. और एक मेरी बेशरम बेहन है जो धड़ल्ले से बिना क़िस्सी ख़ौफ़ के अपने ही मुँह बोले भाई से, जिसे हर साल वो बड़े चाव से उसके घर जा कर रखी बाँध कर आती है, उससे आधी रात में चुद रही है. और नज़ाने ऐसा कब से हो रहा है. खेर कुछ देर बाद उनकी छाप छाप धीमी हो गयी और मेरी बेहन के मुँह से एक ठंडी आह निकली और मेरा प्यारा भाई भी जैसे थक कर उस पर गिर पड़ा. पता नहीं इतना भारी भरकम शरीर मेरी पतली से बेहन अपने उपर कैसे टिकाए पड़ी थी.कुछ पल के बाद उन्होने ने एक दूसरे को हल्का फूलका सा फिर से किस किया और फिर वो उठा और उसने फटा फॅट अपने कपड़े पहने और बोला, “अछा जान, मैं चलता हूँ! तेरे बाप के उठने का टाइम हो रहा है. पर तू वो गोली लेना तो याद रखती है ना जो मैं तेरे लिए केमिस्ट से लाया था. देखना कहीं तेरी एक भूल की वजह से मैं कुँवारा बाप बन जाउ.”" 

अरे हां बाबा! तुम घबराव मत! मैं गोली हर रोज टाइम से ले रही हूँ,” मेरी बेहन बोली.”और उन्हे छुपा के कहाँ रखा है जान?” उसने पूछा.”मुझे उन्हे छुपा कर रखने की एक अच्छी जगह मिल गयी है. हमारे स्टोर में एक पुरानी अलमारी है जिसके निचले हिस्से में पावं में एक छेद है, जिसमे मैं वाहा छुपा के रखती हूँ.” मेरी बेहन बोली.”ओके! बाइ डार्लिंग. कल फिर आउन्गा. म्‍मम्मूनः!” फ्लाइयिंग किस फेंकता हुआ वो लुचा मेरा मूँह बोला भाई मेरी बेहन से बोला.उसके जाने के बाद भी बहुत देर तक ड्रेसिंग रूम मे ही बैठी रही और सोचती रही के ये सब क्या हो गया है. हमारा भाई ऐसा कब से हो गया और मेरी बेहन इतना कब और क्यों बिगड़ गयी. सोचते सोचते पता नहीं कितनी बार मेरी आँखों से आँसू बहे.जबके मेरी बेहन मज़े से अपने कमरे में अब नंगी सो रही थी. उसके कमरे से एक अजीब सी स्मेल आ रही थी जैसे कोई पुरानी बिजली की तार जली हो. ऐसे स्मेल कभी कभी मैने मम्मी पापा के कमरे में से भी आती सूँघी थी. मैं उठ कर धीरे से अपने कमरे में चली गयी पर मुझे नींद नहीं आई. अगले कई दिन तक में उस रात के बारे में ही सोचती रही. पहले तो मुझे बहुत गुस्सा था और जब भी हमारा वो कुत्ता मुँह बोला भाई हमारे घर आता था तो उसकी शकल देख कर मेरा दिल करता था के मैं उसका चेहरा नोच डालू, पर एक अंजाने सी डर की वजह से ना तो मैं उसे कुछ बोल पाई, नही अपनी बेहन से कुछ पूछ पाई. बरसों के रिश्ते एक पल में इन दोनो बेवकूफो की ग़लती की वजह से टूट जाए और किसी की बदनामी ना हो इस बात के डर से ये बात मैं अपने घर वालों से भी ना कर पाई. मैने उससे बात करनी ही बंद करदी और अपनी बेहन से भी अब में कम की ही बात करती थी और वो भी बड़े रूखे स्वाभाव से. सभी मेरी इन हरकतों से हैरान थे पर सबको लगा के शायद में पेपर्स की वजह से 

टेन्षन में हूँ इसलिए ऐसा कर रही हूँ. पर आज तो पेपर भी ख़तम हो गये थे और में आखरी पेपर भी अच्छे से दे कर हल्के मन के साथ घर की तरफ जा रही थी.”अरे दीदी! आपका पेपर कैसा हुआ?” मेरा लुचा मुँह बोला भाई फिर जाने कहाँ से रास्ते में टकरा गया. और आज उसके साथ एक दोस्त भी था.”तुमसे मतलब!” मैने गुस्से से कहा और गुस्से से भरी साँसें छोड़ते हुए आगे बढ़ गयी.”लगता है आपका पेपर अच्छा नहीं हुआ! पर उसका गुस्सा आप मुझ पर तो ना उतारो दीदी. वैसे आप कुछ दिनों से मुझसे उखरी उखरी है, अच्छे से बात नहीं कर रहीं. क्या बात है? मुझसे कोई ग़लती हो गयी क्या?”वो बोला.”नहीं! और प्लीज़ मुझे अकेला छोड़ दो!” मैने फिरे थोड़े उखरे से मूड में कहा.”लगता है आप क़िस्सी बात से मुझ से नाराज़ हैं. प्लीज़ दीदी मुझे बताओ तो सही आख़िर बात क्या है?,” उसने पूछा पर मैं चुप रही. ” अच्छा चलिए मैं आपको घर तक तो छोड़ दूं!” वो बोला.”नो थॅंक्स! मैं अपने आप चली जाउन्गि,” मैने कहा और मैं आगे चल पड़ी.”क्या बात क्या है?” उसके दोस्त ने उससे पूछा. ” क्या तुम लोगों में कोई प्राब्लम हो गयी है? तुम तो कहते थे के तुम्हारी फॅमिली के इनकी फॅमिली के साथ अच्छे रिलेशन्स हैं. फिर बात क्या है,” उसका दोस्त आगे बोला. पर वो थोड़ा ला जवाब सा हो गया था और मुझे लगा के कहीं बात बिगड़ ना जाए और कहीं हमारी फॅमिली के या मेरी बेहन की कोई बदनामी ना हो जाए. यह सोच कर मैं बोली, ” सॉरी भैया! मेरा मूड थोड़ा ऑफ है. मेरे पिछले कुछ पेपर पहले जैसे अच्छे नहीं हुए. मेरी बातों का आप बुरा मत मानना. आप प्लीज़ मुझे मेरे घर तक छोड़ दो.” मैं ये झूठ बोल कर उसके बाइक पर बैठ गयी.”मैं दीदी को 2 मिनिट में घर छोड़ कर आया. तू तब तक यहीं रुक,” मेरा लुच्चा भाई अपने दोस्त से बोला और उसने मोटरसाइकल मेरे घर की तरफ सरपट दबा दी. रास्ते में जहाँ जहाँ वो ब्रेक लगाता मेरी छातियाँ उसकी पीठ में धस जाती. ऐसा पहले भी होता था लेकिन तब मैने कभी ध्यान नहीं दिया था. मुझे लगता था के ये आज कल के छोकरे इतनी तेज़ बाइक चलाते हैं के पीछे वाला ब्रेक लगने पर आगे ही तो गिरेगा. 

पर आज जब जब उसने ब्रेक लगाए और मेरी छातियाँ उसकी पीठ में धस्सी मेरे तब तब गुस्से से शरीर के रोएँ खड़े हो गये. दिल करता था के अभी बाइक रुकवा के नीचे उतारू और इसे जम कर झप्पड़ लगाउ. पर मैने कुछ ना कहा. सारे रास्ते चुप रही और अब उसने भी कुछ नहीं पूछा. घर पहुँचते ही मैं चुप चाप उसकी बाइक से उतरी और घर के अंदर चली गयी और वो अपनी बाइक दौड़ाता अपने रास्ते चला गया. पेपर अछा होने की सारी बात मैं अब भूल चुकी थी और मेरी आँखों के सामने बार बार सिर्फ़ उसका और मेरी बेहन का उस रात का भद्दा, नंगा और घटिया कामुक दृश घूम रहा था. मुझे इस बात पर रह रह कर गुस्सा आ रहा था के एक छोटा सा प्यारा सा लड़का जिसे मैं और मेरी बेहन अपने सगे भाई से भी बढ़ कर मानते थे, वो कैसे इतना लुच्चा, कमीना और गिरा हुआ इंसान बन गया जिसे अपनी मुँह बोली बेहन के जिस्म का मज़ा उठाते हुए ज़रा भी शरम नहीं आई. कैसे उसने मेरी भोली भली बेहन को बहका कर उसे इतनी नीच और गिरी हुई बना दिया. और तो और मुझे घर छोड़ने के बहाने नज़ाने कितनी बार उसने मेरी छातियों को अपनी पीठ पर रगड़ा है. मैं गुस्से से तिलमिला उठी और मन ही मन उसे कोस्ती हुई घर में दाखिल हुई.”आ गयी बेटा पेपर ख़तम कर के,” यह मेरी मौसीजी की आवाज़ थी.”अरे मौसीजी, नमस्ते! आप कब आई?” मैं एक पल में सारा गुस्सा भूल गयी और मेरी मौसीजी के गले से लिपट गयी. बचपन से ही हम दोनो बहनों का हमारी मौसीजी से खूब गहरा प्यार रहा है.”बस आज ही मैके आई हूँ बेटी. तेरी नानी की तबीयत ठीक नहीं रहती तो सोचा उनके खबर ले आउ. अब तुम लोगों के शहर आई हूँ तो अपनी प्यारी भाँजियों से मिल बिना कैसे रह सकती हूँ?” वो बोली. फिर अगले एक घंटे तक हम बहने अपनी मा और मौसी के साथ खूब बातें करते रहे. अब शाम हो रही थी तो मौसीजी मेरी नानी के घर जाने के लिए उठी तो उन्होने कहा, “अरे तुम दोनों भी मेरे साथ तुम्हारी 

नानी के घर क्यों नहीं चलती. कल सुबह जब मैं वापिस जाने के लिए बस लूँगी तो तुम दोनो भी अपने घर वापिस आ जाना.”"नहीं मौसीजी, आज मैं बहुत थक चुकी हूँ. आज ही मेरे पेपर ख़तम हुए हैं. मैं कुछ दिन आराम करके खुद ही आपके शहर कुछ दिन के लिए आ जाउन्गि,” मैं बोली.”अरे छोटी तू तो मेरे साथ वहाँ आज की रात रुक सकती है. वैसे भी तो तू मुझे अपनी स्कूटी पे वहाँ छोड़ने जा ही रही है,” मौसीजी ने मेरी छोटी बेहन से कहा.”आआ! ठीक है मौसीजी मैं आज आपके साथ वहीं रह जाउन्गि क्यॉंके मेरी ट्यूशन शुरू होने वाली हैं, जिस वजह से मैं आपके पास आपके शहर नहीं आ पाउन्गि,” छोटी ने थोड़ा सोच कर कहा. ट्यूशन का तो सारा उसका बहाना था. असली बात तो मैं जानती थी, के अभी तो वो सिर्फ़ एक रात के लिए अपने यार, हमारे हरामी मुँह बोले भाई से बिछड़े गी पर अगर कहीं उसे मौसीजी के शहर जाना पड़ गया तो कई रातों की जुदाई बन जाएगी. मैं एक बार फिर गुस्से से भर गयी. और इस बार मुझे अपनी बेहन पर गुस्सा आ रहा था. उस रात की घटना के बाद मैने यह स्पेशल नोट किया था के पेपर्स के दोरान जैसे ही मैं रात को पढ़ने के बाद अपने कमरे की लाइट बंद करती थी उसके एक आध घंटे बाद वो लुच्चा लफंगा दीवार और छत फाँद कर मेरी बेहन का बिस्तर गरम करने उसके कमरे में पहुँच जाता था. हलाकी उस रात के बाद कभी मैं उन्हे दुबारा सब करते देख नहीं पाई क्यों के फिर कभी ड्रेसिंग रूम का दरवाजा खुला नहीं मिला, पर दरवाजे पर कान लगा कर मैं सब सुन लेती थी. उनकी गरम सरद आहें, सिसकियाँ और वो छाप छाप की आवाज़, और में समझ जाती थी के वो क्या कर रहें हैं. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था के मेरी बेहन जो इतनी भोली बनती है वो इतनी गिरी हुई हरकत कर सकती है. उसे अपने मा बाप की इज़्ज़त का ज़रा भी ख़याल नहीं आया. यह सब सोच कर मेरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया पर मैने अपने आप को संभाला.”अछा बेटा, अभी मैं चलती हूँ पर तुम कुछ दिन बाद ज़रूर हमारे वहाँ आना,” मेरी मौसीजी जाते जाते बोली.”जी मौसीजी ज़रूर,” मैं मुस्कुरा के बोली. और वो दोनो मेरी नानी के घर के लिए रवाना हो गये. 

खैर दिन ढला, शाम बीती और रात आई तो मैं टीवी देखने के लिए सोफे पर बैठी तो मुझे अपने नीचे कुछ पड़ा महसूस हुआ. मैने उठ कर देखा तो पाया के मेरी बेहन अपना मोबाइल घर में ही भूल गयी है. मैने मोबाइल उठाया और उसे टेबल पर रख दिया और टीवी देखने लगी. फिर अचानक मेरे दिमाग़ के विचार आया के क्यों ना मेरी बेहन के मोबाइल की तलाशी ली जाए. पता नहीं मैं क्या देखना चाहती थी पर मैने मोबाइल उठाया, टीवी बंद किया और अपने कमरे में चली गयी. रात के तकरीबन दस बज रहे थे और मेरे घरवाले सो रहे थे. मैं अपने कमरे में गयी और अपने बेड पर लेट कर मोबाइल का लॉक खोलने की कोशिश करने लगी. पर मैं ये पहले भी कयि बार ऐसे ही मज़ाक में मेरी बेहन के सामने कर चुकी हूँ पर मुझसे कभी लॉक खुल्ला नहीं था और उसने कभी मुझे अनलॉक कोड बताया नहीं था. मैं कुछ देर ट्राइ करती रही पर फिर मैं हार कर रुक गयी. यह आज मुझसे खुलने वाला नहीं था. फिर अचानक मेरे दिमाग़ में आइडिया आया और मैने अपने मुँह बोले भाई के नाम के अक्षरों वाले नंबर दबाए और तपाक से फोन खुल गया.येस्स्स! ” मेरे मुँह से जीत की खुशी की आवाज़ निकली. लॉक खुलते ही सबसे पहले मैं मोबाइल के इनबॉक्स में पहुँची और मेरी बेहन को आए मेसेज पढ़ने लगी. सबसे ज़्यादा मेसेज उस हरामी के ही थे, और मेसेज थे इतने लुच्चे के कुछ को पढ़ कर तो मैं भी शर्म से पानी पानी हो गयी. एक मेसेज जो बार बार आया था वो था, “सब सो गये क्या मेरी जान. मैं आजाउ क्या?” मैं मन ही मन उस आवारा, घटिया इंसान को कोसने से ना रह सकी. उसके बाद मैने मोबाइल का आउटबॉक्स देखा तो मेरी प्यारी भोली भली बेहन के लिखे हुए बद से भी बदतर घटिया चीप और लुच्चे मेसेज पढ़ कर मैं भी शरम से पानी पानी हो गयी. एक मेसेज था, “जल्दी से आजओ मेरी जान, मैं मारे प्यार के मरी जा रही हूँ. मैने ब्रा और पॅंटी भी नहीं पहनी है ता के तुम्हे ज़्यादा 

कपड़े ना उतारने पड़े. जल्दी आजओ अब अपनी . के पास. और कहो तो जो बाकी कपड़े पहने हैं वो भी उतार दू क्या. जल्दी आजओ वरना मैं दीवार फाँद कर मोहल्ले के चौकीदार से चुदवाने चली जाउन्गि………”. छी! इतना गंदा मेसेज. इससे आगे तो मैं भी ना पढ़ पाई. खैर, अभी मैं मेसेज पढ़ ही रही थी के अचानक उसके मोबाइल पर एक दम से एक मेसेज आया और मैं डर के मारे कांप गयी और मोबाइल मेरे हाथ से छूट कर नीचे गिर गया. मेरी साँस फूल गयी, मानो मुझे क़िस्सी ने चोरी करते पकड़ लिया हो. मेरे चेहरे का रंग उड़ गया. फिर कुछ पल बाद मैने अपने आप को संभाला और स्टडी टेबल पर पड़ा पानी पिया. थोड़ी साँस ठीक हुई तो कुछ हिमत कर के मैने वो मेसेज पढ़ा. “सब सो गये क्या जान? बोलो तो अभी आ जाउ!”, ये हमारे उस लफंगे मुँह बोले भाई का मेसेज था. शायद मेरी बेहन ने उसे बताया नहीं था के वो आज घर पर नहीं है. बताती भी कैसे, उसका मोबाइल घर पर है, मौसीजी के पास मोबाइल नहीं है और हमारी नानी के घर का फोन कल से डेड पड़ा था जो आज भी चालू नहीं हुआ था.मेरे दिमाग़ में एकदम से पता नहीं क्या आया और मैने तपाक से उसके आउटबॉक्स मे से एक मेसेज, ” अभी थोड़ा रुकना जान. दीदी अभी जाग रही हैं. थोड़ी देर में आना,” उस लफंगे को सेंड कर दिया. यह मैने क्या किया? मेसेज सेंड करते ही मैं घबरा गयी. मेरे होश उड़ गये. मैने ऐसा क्यों किया? पता नहीं कहाँ से मेरे मन में ये ख़याल आ गया था के आज इसे मैं घर में बुलाती हूँ और जैसे ही वो मेरी बेहन के कमरे मैं घुस्से गा मैं उसे तपाक से एक तमाचा मारूँगी और लाइट जला कर उसे बताउन्गि के ये मेरी बेहन नहीं मैं हूँ. और उसे खबरदार करूँगी के आइन्दा अगर उसने ऐसी कोई घटिया हरकत की तो मैं उसकी करतूतों की खबर हमारे और उसके घरवालों को दे दूँगी. यह सोच कर मैं कुछ संभली और मोबाइल साइड मे रखा और अपने आप को संभालने के लिए और कपड़े चेंज करने के लिए ड्रेसिंग रूम मे गयी. ड्रेसिंग रूम की लाइट ऑन कर के मैने अपने आप को शीसे मे देखा. 
क्रमशः............






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FUN-MAZA-MASTI लुच्चा मेरा मूँह बोला भाई--1

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 दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हू लीजिए पेश है कहानी ...... 
“अरे दीदी, इतना समान उठा कर कहाँ जा रहीं हैं आप,” कोई पीछे से बोला तो मैने पलट कर देखा. यह मेरे पापा के बचपन के दोस्त का एक लौता बेटा था. “लाइए मैं आपको अपने बाइक पर घर छोड़ देता हूँ,” उसने आगे कहा.अरे भैया, आप यहाँ क्या कर रहे हो?” मैने पूछा. “कुछ नहीं दीदी, थोड़ा दोस्त की दुकान पे आया था. लेकिन आप बाज़ार से क्या खरीद ले जा रही हो?” 

उसने पूछा.”कुछ खास नहीं भैया. आज कॉलेज में जल्दी छुट्टी हो गयी थी तो मैने सोचा घर जाते समय बाज़ार से कुछ किताबें खरीद लूँ. और मम्मी का फोन आया था के कुछ और समान भी लेती आना. वैसे मैं रिक्क्षा करने की सोच ही रही थी के आप आ गये,” मैं बोली. और हम उसके बाइक पर सॉवॅर हो कर हमारे घर की तरफ चल पड़े.दरअसल, मेरे पापा और उसके पापा बचपन के दोस्त थे. एक साथ पाले बढ़े और पढ़े लिखे थे. हमारी फॅमिलीस में बहुत अच्छे संबंध थे. हमारे घर भी पास पास ही थे. मैं और मेरी छोटी बहन बचपन में अक्सर उनके घर खेलने जाया करते थे. हमारा कोई सागा भाई तो नहीं था पर इसे हम अपने सगे भाई से भी बढ़ कर मानते थे. उमर में मेरी छोटी बहन और ये, दोनो ही बराबर थे और में इनसे चार साडे चार साल बड़ी थी. तो इस वजह से ये हमेशा मुझे दीदी कह कर ही सुम्बोधित करता था. हम दोनो बहनों की तो मानो ये जान ही था. मेरी बहेन और ये दोनो एक ही स्कूल में पढ़ते थे, जबके मैं कॉलेज में बी. एससी कर रही थी. अब पेपर्स के दिन थे और कॉलेज में छुट्टियाँ शुरू हो रही थी. ये दोनों भी 12थ के बोर्ड के एग्ज़ॅम्स ख़तम कर के छुट्टियाँ ही मना रहे थे.अरे भैया ये तो बताओ, के आगे कौन्से कॉलेज में अड्मिशन लेनी है इसके बारे में सोचा है,” मैं रास्ते में उससे बातें करती जा रही थी.”अरे नहीं दीदी. अभी इतनी जल्दी क्या है. और आप तो वैसे भी जानती हैं के जिस गली में हमारा घर है, उसके कोसों दूर तक भी कहीं विद्या नहीं बसती,” वो हस्ते हुए बोला. “ली जिए आप का घर भी आ गया. आप को छोड़ कर मैं निकलता हूँ. आज शाम को हमारी क्रिकेट टीम का पड़ोस के मोहल्ले की टीम के साथ मॅच है, तो थोड़ा अरेंज्मेंट करना है और सभी लड़कों को इकट्ठा भी करना है,” मुझे छोड़ते वक़्त वो बोला.”क्या भाईया, इतने दिनों के बाद आज दिखाई दिए हो और आज भी अपनी दीदी के साथ चाइ पीने का टाइम नहीं,” मैं रूठने का नाटक करते हुए बोली.”सॉरी दीदी, पर आज नहीं, फिर कभी. 

अच्छा चलता हूँ,” कह कर उसने अपनी मोटरसाइकल दौड़ा दी.”कौन था दीदी,” मेरी बहेन नें घर में घुसते ही पहला सवाल किया.”था अपना एकलौता भाई, जो मुझे बाज़ार से घर तक छोड़ कर गया है, पर जिसके पास अपनी बहनों के साथ बिताने के लिए दस मिनिट का टाइम भी नहीं है,” मैं मानो शिकायत सी करते हुए बोली.”अरे अब वो बड़ा हो गया है. अब वो अपने दोस्तों में रहकर ज़्यादा खुश तो होगा ही ना. अब तुम दोनो लड़कियों के बीच उसका क्या काम?” पीछे से मेरी मा बोली.खेर उसके बाद हम सब अपने अपने कमरे में चले गये. हमारे घर में चार बेडरूम हैं. नीचे वाला एक मम्मी पापा के लिए और एक मेहमानों के लिए. मेरा बेडरूम मम्मी पापा के कमरे के उपर है और मेरी बहेन का दूसरे बेडरूम के उपर. हम दोनो बहने एक दूसरे को जान से भी ज़्यादा चाहती हैं पर कभी एक साथ नहीं सोए. घर में फालतू कमरे होने की वजा से हम सभी के अपने प्राइवेट रूम्स थे. लेकिन मेरी बेहन के कमरे और मेरे कमरे के बीच में एक कामन ड्रेसिंग रूम था जिसका एक दरवाजा मेरे कमरे में और दूसरा दरवाजा मेरी बेहन के कमरे में खुलता था. अब जैसे के मैने आपको बताया, कुछ दिन में पेपर शुरू हो रहे थे और अगले दिन से कॉलेज में भी छुट्टियाँ थी, तो मैं दिन में थोड़ा सो गयी ता के रात में थोड़ा देर तक पढ़ सकूँ, जैसा के मेरी आदत थी.अब रात को दो-तीन बजे तक मैं पढ़ती रही और फिर मैं लाइट बंद करके सोने के लिए लेट गयी. मुझे लेटे हुए तकरीबन आधा घंटा हो गया होगा पर मुझे पेपर्स के बारे में सोच कर अब थोड़ी टेन्षन हो रही थी तो इस वजह से में सो नहीं पा रही थी. मैं शुरू से ही पढ़ाकू किस्म की लड़की थी. हमेशा स्कूल में 

अवव्वल आने वाली. कॉलेज में भी मैं पहले दोनो साल की टॉप पर थी. पर इस बार हमारे कॉलेज में एक नयी लड़की आई थी जिसके साथ मेरा जम कर मुकाबला था यूनिवर्सिटी मेडल के लिए. इस लिए मुझे टेन्षन के मारे नींद नहीं आ रही थी. लेटे लेटे मैं पेपर्स के बारे मे ही कुछ सोच रही थी के मुझे लगा जैसे कोई बातें कर रहा हो.”लो अब टेन्षन के मारे मेरे कान भी बजना शुरू हो गये,” मैने मन ही मन सोचा और मुस्कुरा पड़ी और सोने की बेकार कोशिश करने लगी. अभी लेटे हुए कुछ पल ही और हुए होंगे के मुझे फिरसे ऐसा लगा के जैसे कोई बातें कर रहा हो. मैं बेड से उठी और खिड़की के पास जा कर मेने गली में देखा तो वहाँ कोई नहीं था. पर आवाज़ें आ रही थी. मैने सोचा के पापा को उठाती हूँ, कहीं कोई चोर ना हों. यह सोच कर जैसे ही मैं अपने कमरे के दरवाज़े के तरफ चली तो ड्रेसिंग रूम के दरवाज़े के पास से गुज़रते वक़त मुझे लगा जैसे यह आवाज़ें मेरी बेहन के कमरे से आ रही हो. मेरा माथा ठनका, के ये माजरा क्या है. मेरी बेहन किसके साथ बात कर रही है, और इतनी रात में उसके कमरे में कौन है. मैने बड़े हल्के से अपने कमरे वाला ड्रेसिंग रूम का दरवाजा खोला और दबे पाव ड्रेसिंग रूम में घुसी गयी. मेरी बहेन के कमरे वाला ड्रेसिंग रूम का दरवाजा थोड़ा खुला था. शायद उससे भूले से खुला रह गया होगा. दरवाजा ड्रेसिंग रूम में अंदर की तरफ खुलता था. तो मैं दीवार के साथ सॅट कर खड़ी हो गयी और मैने हल्के से खुले दरवाजे में से मेरी बेहन के कमरे के अंदर देखा. और अंदर जो देखा वो देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी और मेरी साँसे गले में ही अटक गयी, मानो एक पल के लिए मैं साँस लेना ही भूल गयी.कमरे में मेरी बेहन के साथ कोई लड़का खिड़की के पास लिपटा खड़ा था और उसके होंठ मेरी बेहन के होठों के साथ एकदम सटे हुए थे. कमरे की सब लाइट्स बंद थी पर चाँदनी रात की रोशनी कमरे को रोशन करने में काफ़ी थी.उनका लंबा किस टूटा तो लड़का दबी हुई आवाज़ में बोला, “अरे डरती क्यों हो जान, मेने तेरी दीदी को एक घंटा पहले अपने कमरे की लाइट बंद करते देखा था. अरे अब तक तो वो सो गयी होगी और पेपर्स में टॉप करने के आछे आछे ख्वाब देख रही हो गी या फिर फैल होने के भयानक सपने. अभी रात को 3 बजे वो कमरे में अंधेरा कर के तो वो पढ़ नही सकती. या फिर वो उल्लू है?” 

यह सुन कर मेरी बहेन के मुँह से हँसी छूट पड़ी जिससे उसने उसी पल दबा लिया. पर मुझे लड़के की आवाज़ कुछ जानी पहचानी सी लगी.”इश्क़ में आदमी क्या क्या पापड बेल्ता है. अब पेपर तुम्हारी बेहन के हैं और नाइट शिफ्ट मेरी छोटी हो जाएगी. अब हर रोज रात को 3 बजे से पहले मैं तुम्हे मिल नहीं पाउन्गा और 4 बजे के बाद तुम मुझे घर में रुकने नहीं दोगि. तुम्हारा बाप जो सुभह सुभह उठ जाता है सैर पर जाने के लिए,” वो शिकायत सी करते हुए बोला.”कुछ दिन की ही तो बात है. उसके बाद तो मैं फिरसे हर रात पूरी रात के लिए तुम्हारी दुल्हन बन जाया करूँगी ना. तुम अब बातों में वक़्त जाया ना करो और जल्दी से मेरे जिस्म की गर्मी को अपने पाइप के गाढ़े पानी से बुझा दो,” मेरी बहेन बोली और उससे लिपट गयी. वो दोनों एक दूसरे को चूमने लगे. उसने मेरी बेहन की गर्दन पर किस किया और उसके नाइट सूट के टॉप की ज़िप को खोला और अपने हाथों से उसके कंधों से सरकने लगा और साथ साथ उसके नंगे कंधों को चूमने लगा. मेरी बेहन ने उसकी टी-शर्ट पकड़ कर उपर खीच दी.और उसने अपने दोनो हाथों से मेरी बेहन के बूब्स को मसल दिया और उसके होंठ चूसने लगा. मैं हक्की बक्की सी ड्रेसिंग रूम में खड़ी सब कुछ देख रही थी. ड्रेसिंग रूम में अंधेरा था इस वजह से वो मुझे नहीं देख सकते थे, पर चाँदनी रात की वजह से खिड़की के सामने खड़े में उनके साए देख आछे से देख सकती थी. सिर्फ़ पहचान में नहीं आ रहा था तो वो जाना पहचाना सा लड़का.अब वो लड़का और मेरी बेहन एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे. मेरी बेहन ने उस लड़के का चेहरा अपने हाथों में ले रखा था जबके उस लड़के का एक हाथ मेरी बेहन की पीठ पर मालिश कर रहा था जबके दूसरा हाथ 

उसके चूतरो का जाएजा ले रहा था. कुछ देर बाद उस लड़के ने मेरी बेहन के होठों को छोड़ा और उसके बूब्स को चूसने लगा और उसके दोनो हाथ मेरी बेहन की कमर पर आ टीके. फिर उसने बड़े प्यार से मेरी बेहन की स्कर्ट की हुक खोलदी और उसकी स्कर्ट नीचे उसके पैरों मे जा गिरी और वो लड़का मेरी बेहन के बूब्स को चूस्ता हुआ नीचे की तरफ बढ़ने लगा. उसने मेरी बेहन को पेट में किस किया और फिर उसकी टाँगों के बीच में उसने अपना मुँह घुसा दिया और मुझे लगा जैसे वो उसकी योनि को चाट रहा हो. मेरी बहेन के मुँह से हल्की सिसकियाँ छूटने लगी जिन्हे वो बड़ी मुश्किल से ही दबा पा रही थी.”आहह! मैं गयी,” उसके मुँह से दबी सी आवाज़ निकली. तो इस पर वो लड़का खड़ा हो गया और उसने फटा फॅट अपनी पतलून खोली और उतार फेंकी. मेरी नंगी बेहन को उसने गोद में उठाया और पलंग की एक तरफ घूम कर उसने उसे पलंग पर लिटा दिया. इस बार एक पल के लिए उसका चेहरा चाँदनी में आया और उस पर एक नज़र पड़ते ही मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी. ये तो हमारा मूँह बोला भाई था. मेरे पापा के फॅमिली फ्रेंड्स का बेटा. मेरी आँखों में उसी पल आँसू भर आए और मेरे मुँह से दर्द भरी चीख निकलते निकलते रह गयी. “नहीं यह सच नहीं हो सकता. मैं ज़रूर पागल हो गयी हूँ या फिर मैं ये कोई गंदा और निहायत ही घटिया सपना देख रही हूँ. यह नहीं हो सकता. यह तो मेरा प्यारा छोटा भैया है, यह तो मेरी प्यारी छोटी बेहन का चहेता भाई है. यह मेरी बेहन के साथ ऐसे…..नहीं नहीं!” एक ही पल में मेरे दिमाग़ में कयि विचार दौड़ गये. और मेरी आँखो से लगातार आँसू बहने लगे पर मेने अपने मुख से एक सिसकी भी निकलने नहीं दी और ये गंदा कांड देखती रही.वो भी बेड पर मेरी बेहन के उपर चढ़ गया और उसे फिर किस करने लगा. दोनो एक दूसरे को बड़े मज़े से अछी तरह चूस रहे थे.उसने एक हाथ से मेरी बेहन की छाती मसलनी शुरू कर दी और उसका दूरा हाथ मेरी बेहन की टाँगों के बीच उसकी योनि के पास कहीं अंधेरे में गुम हो गया. ऐसे लगा जैसे वो अपने हाथ को आगे पीछे कर रहा हो. 

क्या उसने अपना हाथ या फिर कोई उंगली मेरी बेहन की योनि में डाल रखी थी? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था पर मेरी बेहन के आहें अब थोड़ी ज़्यादा गरम और लंभी और थोड़े उँचे स्वर की हो गयी थी.”सस्स्शह! आहिस्ता,” वो मेरी बेहन से बोला.”उन्ह!” मेरी बेहन के मुँह से हल्की की आवाज़ में एक मज़े से भरी हां निकली. वो पलंग से उतरा और उसने मेरी बेहन को उसके पैरों से पकड़ कर पलंग के एक किनारे की तरफ खीच लिया. अब मेरी बेहन का शरीर तो पलंग पर था पर उसके पैर फरश पर थे. उसने मेरी बेहन के पैरों को अलग किया और उसकी टाँगों के बीच बैठ कर उसकी योनि को चाटने लगा. ये सब देखते देखते मेरे आँसू अपने आप ही बंद हो गये थे और मेरा हाथ जाने क्यों अपने आप ही मेरे पेट के नीचे दोनों टाँगों के बीच के हिस्से पर जा कर कस गया था. उधर मेरी बेहन अपनी सिसकियों को दबाने की नाकाम कोशिश कर रही थी. फिर अचानक चाँदनी रात के रोशनी में मैने देखा के मेरी बेहन की कमर एक पल के लिए थोड़ा हवा में उठी और फिर एक झटके के साथ फिर बेड पर गिर पड़ी.”औह! मैं तो झाड़ भी गयी. जानू अब तो मेरे उपर चढ़ जाओ और मुझे चोद्द दो!” मेरी बेहन जैसे उसके आगे गिड-गिडायी.”अरे जान आपका हूकम सर आँखों पर,” हमारा मुँह बोला बचपन का भाई बोला और उसने मेरी बहन को कमर से पकड़ कर थोड़ा उपर उठा कर बेड पर फिर हल्के से पीछे फेंक दिया. और उसके उपर चढ़ गया. उसने अपना हाथ नीचे किया और उसमें एक पाइप से पकड़ ली. “अरे बाप रे! क्या ये सच में वोही है जो मैं सोच रही हूँ? क्या ये वाकाई में इसकी पिशाब वाली नली है जो इसके हाथ में है? पर ये इतनी बड़ी और इतनी मोटी कैसे हो गयी? बचपन में तो मैने जब भी इसे पानी के टब में नंगे नहाते देखा था तब तो बहुत छोटी सी होती थी!” मेरे मन में बिजली के जैसे केयी विचार कौंधे. दोस्तो आगे क्या हुआ जानने के लिए इस कहानी का अगला भाग ज़रूर पढ़े आपका दोस्त राज शर्मा 
क्रमशः............ 












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