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Sunday, November 16, 2014

FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--28end

FUN-MAZA-MASTI

 होली का असली मजा--28




एक भी कदम उसका सीधे नहीं पड़ रहा था।

एक ओर से रीतू भाभी और दूसरे ओर से ये उसे कस कर पकड़े हुए थे।

हर कदम पर कहर रही थी।

उसके गालों पे दाँतों के निशान साफ दिख रहे थे।

टॉप के ऊपर के दो बटन दिख रहे थे , और किशोर जस्ट उभरती उठती गोलाइयाँ न सिर्फ झाँक रही थीं , बल्कि खुल कर दिख रहे थीं और उन पर लगे दांत और नाख़ून के निशान भी.
लेकिन यहाँ तो मिश्रायिन भौजी ऐसी खेली खायी , घाट घाट का पानी पी हुयी , अनुभवी महिला थीं।

उन्होंने ऊपर से नीचे तक अपनी छुटकी ननद को देखा , जो अब क्लास ९ में ही उनकी बिरादरी में आ गयी थी।

जिसकी सोन चिरैया फुर्र फुर्र कर उड़ चुकी थी ,

बुलबुल ने चारा गटक लिया था।

और उनकी निगाह ने जैसे सहला दुलरा दिया हो , अपनी प्यारी दुलारी कुँवारी छोटी ननद को।

छुटकी शर्मा गयी।

उसके गुलाबी लाजवन्ती गाल पे मिश्रायिन भाभी ने जोर से चिकोटी काटी , और पुछा ,

" क्यों जा रही हो आज , अपने जीजा के साथ। '

वो और शरमा गयी , जैसे वो समझ गयी हो उसकी दी की ससुराल में क्या होना है , लेकिन जवाब भौजी के नंदोई ने दिया , वो भीउदास स्वर में,

" अरे क्या भाभी , जा रही है लेकिन १५ -२० दिन के बाद वापस आ जाएगी। "

" जबकि उसके दो हफ्ते बाद , गर्मी की दो महीने की छुट्टियां शुरू हो जाएँगी। "छुटकी ने भी अपना दुःख जाहिर किया।

" अरे गरमी छुट्टी का मजा तो गाँव में ही , हमारी अपनी इतनी बड़ी आम की बाग़ है , खूब गझिन , जहाँ दिन में रात हो जाय , लंगड़ा , दसहरी , सब कुछ , लेकिन अब इसको तो लौटना ही है। " भौजी के नंदोई का उदास स्वर चालू था।


'लेकिन काहें को लौटोगी , नंदोई जी सही तो कह रहे हैं अबकी गर्मी छुट्टी का मजा दीदी ससुराल में ही लो न , दी का भी तुम्हारे मन लगा रहेगा "

मिश्रायिन भाभी ने पुछा।

" मन तो मेरा भी यही कर रहा है , लेकिन , " छुटकी उदास मन से बोली।

और बात पूरी की , मम्मी ने।

" अरे आना तो पड़ेगा ही बिचारी को , आखिर सालाना इम्तहान है। '


मिश्रायिन भाभी मुस्कराईं और फिर , प्यार से छुटकी का गाल सहला के पूछीं ,

" तेरा क्या मन कर रहा है , जीजू के साथ गर्मी छुट्टी बिताने का , या फिर लौट के आने का। "

छुटकी को तो अभी इतना मस्त जो नया नया मजा मिला था , वो यहाँ लौट कर आने पर कहाँ मिलने वाला था , उसके मुंह से दिल कीबात निकल ही गयी।

" वहीँ गर्मी की छूटी बिताने का। "

" तो रहो न , क्यों लौट रही है १० दिन के लिए। " मुस्कराहट रोकती हुयी , मिश्रायिन भाभी बोलीं।

" अरे तो इम्तहान कौन देगा मेरा , " झुंझलाते हुए छुटकी बोली।

" तो मत देना ना , " मिश्रायिन भाभी बोलीं। फिर हंस कर उसे गले लगाते बोली ,

" अरे बुद्धू , मैं किस दिन काम आउंगी। तेरे छमाही में बहुत अच्छे नंबर थे , मुझे मालूम हैं , बस उसी के बेसिस पर , सप्लीमेंट्री आ जायेगी। और वैसे भी नौवें के नंबर कहाँ जुड़ते हैं। मेरी गारंटी। "

मिश्रायिन भाभी छुटकी के स्कूल की वाइस प्रिंसिपल थी और उन के 'वो ' मैनेजिंग कमेटी के सेक्रेटरी भी थे , किस की हिम्मत थी उन की बात टालती।

मारे ख़ुशी छुटकी उनसे चिपक गयी।

और उससे भी ज्यादा खुश हो रहे थे , 'वो ' , उसके जीजू।

और साथ में मैं , जिसमें उनकी ख़ुशी , उसमें मेरी ख़ुशी। 



और तभी मंझली भी आगयी।

उसका हाईस्कूल के बोर्ड का इम्तहान कल ही था।

तय ये हुआ की बोर्ड का इम्तहान खत्म हो कर के , वो भी मेरे पास आ जायेगी , और फिर पूरी गर्मी की छुट्टी , दोनों बहने वहीँ गाँव में बिताएंगी , मेरे साथ।

मैं मम्मी के साथ किचेन में लग गयी। बस दो घंटे बचे थे , हमें निकलने में।


आधे पौन घंटे में हम लोगों ने खाने का काम आलमोस्ट कर लिया।


मिश्रायिन भाभी और रीतू भाभी , नयी बछेड़ी , छुटकी को कबड्डी के दांव पेंच सीखा रही थीं। आखिर भाभियाँ थीं।

" नाम डुबोना हमारा " रीतू भाभी उसके टिकोरे मसलते बोलीं।

" अरे भाभी निचोड़ के रख दूंगी , "हँसते हुए छुटकी बोली।

और फिर मिश्रायिन भाभी पिछवाड़े के दरवाजे के गुर सिखाने में जुट गयीं।

मम्मी मुझसे बोलीं , जरा मैं छुटकी के कपडे सामान चेक कर लूँ।

और मैं ऊपर छुटकी के कमरे की ओर चल दी।

उसके कपड़ों में से मैंने उसकी ब्रा और पैंटी निकाल के वापस बाहर कर दी। सिवाय एक सेट के।


ये उन्ही का इंस्ट्रकशन था की , मैं उसकी ब्रा पैंटी निकाल दूँ। बात सही थी , गाँव में ये सब कौन पहनता है।

फिर उनका और ननदोई जी का फायदा , जब चाहा , पकड़ा , निहुराया , सटाया और चोद दिया।


कुछ शरारत और की मैंने , उसके टॉप की ऊपर की दो बटने मैंने तोड़ दी , अरे जब तक बहन के खुले खुले जोबन , पूरे गाँव में आग न लगाएं , तो मजा क्या।

बहुत देर से वो और मंझली नहीं दिख रहे थे।
दुछत्ती से कुछ बहुत हलकी हलकी आवाजें आ रही थी , वही जगह , जहाँ कल उन्होंने होली के मौके पे अपनी साली का भरतपुर लूट कर ससुराल में होली की शुरूआत की थी।

और मैंने ध्यान लगा कर देखा ,

वही दोनों थे , मंझली निहुरी हुयी , उसकी फ्राक उन्होंने कमर तक मोड़ रखी थी , और उसके छोटे छोटे लौंडा मार्क चूतड़ , हवा में उठे हुए थे।

" जीजू , इधर नहीं , प्लीज इधर बहुत दर्द करेगा। ' वो रिरिया रही थी।

लेकिन हाईस्कूल वाली साली की गांड मारनी हो तो कौन सुनता है। उन्होंने कमर पकड़ी और जोर का धक्का मार दिया।

दो चार धक्को में गांड का छल्ला पार था।

मंझली भी थोड़ा रोई धोई लेकिन , ८-१० धक्को के बाद ही , मजे से पीछे चूतड़ मटका मटका कर गांड मरवाने का मजा लेने लगी।


कोई मुझे ढूंढते हुए उपर न आ जाय , इसलिए दबे पाँव छुटकी का सामान लेकर मैं नीचे उत्तर गयी।

मिश्रायिन भाभी चली गयी थीं और रीतू भाभी , मम्मी के साथ मिलकर टेबल लगा रही थीं। 




छुटकी तैयार हो रही थी , ट्रेन के टाइम में एक घण्टा बचा था।

मंझली और रीतू भाभी हम लोगो स्टेशन तक छोड़ने आये।

और हम सब जब ट्रेन में बैठ गए , उन दोनों ने आँख नचाकर , मुस्कराकर पुछा
" क्यों जीजू , मजा आया ससुराल में पहली होली का ".

गाडी चलने के पहले टीटी आया , वही जो परसों रात में ट्रेन में था , और उसने वही बात बोली ,

" फर्स्ट क्लास में आज कोई और पैसेंजर नहीं है , आप लोगों के सिवाय। आप डिब्बे का ही दरवाजा अंदर से बंद कर लीजिये , मुझे और डिब्बे भी चेक करने हैं। "

मुस्कराते हुए उन्होंने हामी भरी। कनखियों से मैंने देखा , १०० के दो नोट इनके हाथ से उनके हाथ पास हुए , आते हुए दुगुने ,…

और क्यों नहीं माल भी तो दुगुने थे।

कच्चे टिकोरों वाली साली , रात भर रेल गाडी में सटासट सटासट , गपागप गपागप।


 बस , यह थी 'इनके ' ससुराल में पहली होली के दो दिनों की कहानी।

साथ के लिए धन्यवाद देकर आपके साथ बिताये गए पलों की मधुरिमा को कम नहीं करुँगी








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FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--27

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 होली का असली मजा--27

 बांस ऐसे लंड वाले जीजा का क्या फायदा अगर साल्ली , आधे तीहे लंड से चुदे।

जब तक बच्चेदानी पे धक्के पे धक्का न लगे , और दिन में तारे न नजर आएं तो चुदाई क्या।


रीतू भाभी ने पीछे से उन्हें पकड़ा और उनके टिट्स को स्क्रैच करती हुयी , इयर लोब्स काटती बोलीं ,

" अरे नंदोई भडुवे , ये बाकी का आधा लंड क्या मेरी ननद की ननदों के लिए बचा रखा है। "
" नहीं भौजी , आपकी ननद के सास के लिए " जवाब मैंने दिया।

और साथ ही रीतू भाभी की मंझली ऊँगली जो उनके पिछवाड़े को सहला रही थी , एक धक्के में हचक के पूरी तरह उनकी गांड में।



असर ये हुआ की उन्होंने भी पूरी ताकत से धक्का मारा और बचा हुआ लंड , छुटकी की चूत में।

पूरा ९ इंच।

वो बहुत जोर से चीखी , जैसे किसी ने चाक़ू मार दिया हो।



लेकिन मैंने तारीफ से उसकी ओर देखा , सुहागरात की पहली चुदाई में , जब इन्होने मेरी झिल्ली फाड़ी थी , मैं सिर्फ आठ इंच अंदर ले पायी थी।

उस रात की तीसरी चुदाई में जाकर , जड़ तक इनका एक बालिश्त का घोंटा था मैंने , और आज मेंरी बहन ने पहली बार में ही।

उसकी आँखों से फिर आंसू निकल रहे थे , वो दर्द से कराह रही थी

लेकिन मैं और रीतू भाभी मुस्करा रहे थे , उसकी हिम्मत बढ़ा रहे थे।

ये भी बजाय लंड अंदर बाहर करने के , जड़ तक घुसे बित्ते भर के लंड को दबा के , उसके बेस को उसकी चूत के पपोटों पे रगड़ रगड़ के मजा दे रहे थे।

साथ में उनकी उंगलियां भी कभी क्लिट को छेड़तीं तो कभी टिकोरों को मसलतीं।


और जब उसके आंसू सूख गए , कराहें कम हो गयी तो फिर हलके हलके धक्के मारने उन्होंने शुरू कर दिए।

झूले के पेंग की तरह और और अब छुटकी भी उनको बाहों में भींच रही थी , उनके चुम्बन का जवाब दे रही थी और बार बार मजे से सिसक रही थी।

धक्कों की रफ्तार धीरे धीरे तेज हो गयी।

और ऊपर से थी न रीतू भाभी , उकसाने वाली।

का हो नंदोई अरे हचक के पेला सबसे लहुरी साली हौ।


दर्द उसे अभी भी हो रहा था , लेकिन साथ में एक नया नया मजा भी आ रहा था।

जब वो उसे दुहरी कर पूरी ताकत से धक्का मारते , सुपाड़ा सीधे बच्चेदानी से टकराता।

वो दर्द से कहर उठती , लेकिन साथ में मजे से सिहर भी उठती।

और अब उनके होंठों , उँगलियों का लंड के साथ मिलकर तिहरा हमला हो रहा था।

मस्त कच्चे टिकोरों पर , जोश में आके फूली क्लिट पर , और चूत की हचक कर चुदाई तो हो ही रही थी।


छुटकी दो बार झड़ी।

पहली बार लंड के मजे से वो झड़ रही थी , तूफान में पत्ते की तरह वो काँप रही थी।

और जैसे ही तूफान रुकता उसकी ओखली में मूसल फिर पूरी तेजी से चलने लगता।

२०-२५ मिनट फूल स्पीड चुदाई के बाद वो झड़े ,

छुटकी के पैर उनके कंधे पे थे , और लंड एक दम बच्चेदानी पर सटा ,

जैसे लहर पर लहर आ रही , सफेद गाढ़ी थक्केदार मलाई ,

छुटकी मजे में बेहोश शिथिल पड़ी थी ,


गाढ़ा , सफेद , चिपचिपा वीर्य निकल कर उसकी गोरी गोरी जाँघों पर बह रहा था।


और कुछ देर में वह भी , छुटकी के ऊपर निढाल , गिरे हुए , उसको अपनी देह दबाये , बाँहों में भींचे ,

वीर्य सरिता अभी भी अनवरत बह रही थी।



पहले सम्भोग रस , फिर वीर्य रस और उसके बाद शांत रस।


तूफान के बाद की शान्ति छायी थी।

मैंने और रीतू भाभी एक दूसरे को देख के मुस्करा रहे थे , काम हो गया था।

कली अब फूल बन चुकी थी। उसके जीवन में बसंत आ गया था , और अभी तो ये बस शुरुआत थी।



आज रात में ट्रेन में , फिर उसके कोरे पिछवाड़े के पीछे मेरे नंदोई पड़े थे , और ये भी तो ब्वायिश चूतड़ों के शौक़ीन। तो एक बार मेरी ससुराल जहाँ वह पहुंची , फिर तो ये भी पिछवाड़े का तबला जरूर बजायेंगे। और उसके बाद मेरे ससुराल के लडके , नयकी भौजी क छुटकी बहिनिया , कोई भी छोड़ने वाला नहीं है। फिर ऊपर से मेरी कन्या प्रेमी सास , ननदें , कच्ची कली का भोजन किये बिना ,…


छुटकी ने हलके से आँखे खोलीं और बोली , " जीजू ,… " और फिर जोर से उन्हें बाहों में भींच लिया।

आधे जागे आधे सोये , उन्होंने भी अपनी सबसे छोटी साली को कस के दबोच लिया।

दोनों गुथमगुथा , एक दूसरे के ऊपर चढ़े हुए थे।

और इनका मोटा लंड अभी भी जड़ तक छुटकी की चूत में घुसा था। आधा सोया आधा जागा।


रीतू भाभी ने अपना भौजाई का धर्म अदा किया।

पहले तो उंहोने , उनके गाल पे हलकी सी चुम्मी ली , और एक प्यारी सी बाइट भी।

बस , वो रीतू भाभी की और मुड़े और ,…


प्लाप , मोटा कड़ियल , आधा सोया आधा जाग लंड , छुटकी की चूत से बाहर निकल आया।

छुटकी की किशोर थकी थकी , खुली जांघे अभी भी पूरी तरह फैली थीं।

और वहां हुए हमले के पूरे निशान मौजूद थे।


रीतू भाभी ने उन्ही के रुमाल से , थक्के थक्के , जमे खून के दाग , और वीर्य में मिले खून को साफ किया , एक एक दाग।

अगर छुटकी वो खून देख लेती तो हदस जाती।

हाँ उस की चूत में भरे वीर्य , गाढ़ी बनारसी रबड़ी लच्छेदार रबड़ी की तरह उन्होंने छोड़ दिया , और कुछ ब्लड स्पॉट भी नहीं साफ होपाये।


लेकिन कच्ची कली चुदी थी , कुछ निशान तो रहने ही चाहिए थे।

तब तक वो फिर मुड़े और आधी नींद में , उन्होंने छुटकी को अपनी बाँहों में भींच लिया , और एकदम अपनी स्टाइल में , एक हाथ चूंची पे चूतड़ पे और लंड सीधे सेंटर पर।

और छुटकी भी आखिर मेरी ही बहन थी।

उसने उन्हें कस कर भींच लिया , और यही नहीं उसका एक कोमल कोमल हाथ , उनके लंड सीधे ,

मैंने और रीतू , भाभी ने दूसरे को देखा , मुस्कराईं और अपने कपडे ठीक किये।

वैसे कपडे ज्यादा ठीक करने के लिए तो थे नहीं , बस पेटीकोट पहन लिया , ब्लाउज के ज्यादातर बटन तो हम लोगों ने एकदूसरे ब्लाउज के तोड़ ही दिए थे , जो एक आध बचे थे बस उसी से जस का तस अपनी बड़ी बड़ी, मोटी मोटी चूंचियों पर टांग लिए।

साढ़े पांच बज गए थे।

मम्मी कभी भी सकती थीं।

चार बजे से ये जीजा साली लीला चालू हुयी थी।

रीतू भाभी ने किसी तरह दोनों को अलग किया।

सो वैसे भी वो नहीं रहे थे। छुटकी बस थक कर निढाल थी।


और छुटकी जब उठी , तो अपने जाँघों बीच खून के दाग देख कर देख चौंक उठी और घबड़ा गयी।

( गनीमत थी रीतू भाभी ने खून खच्चर साफ कर दिया था , और वो अगर पूरा हाल देख लेती तो शायद हदस जाती , और दुबारा चुदवाने का नाम नहीं लेती )

रीतू भाभी फिर मैदान में आयीं और उसे समझाने लगीं ,

" अरे मेरी प्यारी बिन्नो , ये तो तेरे जीजू के लिए ख़ुशी मनाने की बात है , की उन्होंने एक कच्ची कली को फूल बना दिया। यही खून तो इस बात की गवाही है , की आज से मेरी ननद अब मेरी और तुम्हारी दी की बिरादरी में गयी। "

तब तक नीचे से मम्मी की दस्तक सुनाई दी और मैं दरवाजा खोलने के लिए भागी।


किसीतरह डारे पर लटकी एक साडी उतार कर जल्दी से मैंने लपेटा और सिटकनी खोल दी।

मम्मी मेरी हालत देख कर मुस्कराई और जब तक मैं दरवाजा बंद करूँ , उन्होंने सवाल दाग दिया,

" दामाद जी , कहाँ है "

" ऊपर " मैंने बोला, उन की ओर मुड कर देखते हुए।

मेरी मुस्कराहट ही उन के अनपूछे सवाल का जवाब थी , लेकिन उन्होंने पूछ ही लिया ,

" खुश हैं ? "
'हाँ , बहोत मम्मी " मैंने मनभर उन्हें बाहों में भींच लिया।

और उन्होंने भी।


कल शाम को जब वो मुंह फुला कर बैठे थे , जब छुटकी ने पहले तो उन्हें ग्रीन सिग्नल दिया और जब गाडी स्टेशन में घुसने वाली थी , तभी दरवाजा बंद कर दिया, तो मम्मी भी एकदम परेशान होगयी थीं। और न उन्हें कुछ समझ में आ रहा था न मुझे , वो तो भला हो रीतू भाभी का उन्होंने मामला सलटा दिया। और छुटकी का भी , जिसने अपने जीजू को मना लिया।


मेरा इतना जवाब काफी था , मम्मी को समझाने के लिए की जो भरतपुर स्टेशन कल बच गया था गया था , आज अच्छी तरह लूट गया है।

और लूटने वाला और लुटवाने वाला दोनों खुश है।

दिल की बस्ती भी अजीब बस्ती है।

लूटने वाले को तरसती है।


' कितने बजे ट्रेन है तुम लोगों की ' मम्मी नेमुझसे अलग होते पुछा।


"साढ़े नौ बजे " .

और मम्मी किचन में घुस गयीं।

दामाद के फेवरिट पकवान बनाने। और मैं भी उन के साथ लग गयी।

" छुटकी का सामान एक बार चेक कर लेना , कहीं कुछ छूट न जाय। ' वो साथ में इंस्ट्रक्शन भी दिए जा रही थीं।

' चाय चढ़ा दू मम्मी " मैंने पुछा , तो बोलीं आने दो न दामाद जी को नीचे , अभी थोड़ा आराम कर लेने दो उसको , वो बोलीं।


कुछ देर हम लोग और काम में लगे रहे , तब तक मिश्रायिन भाभी आ गयीं।

मिश्रायिन भाभी , सब भौजाइयों की लीडर थीं।

मम्मी से दो चार साल ही छोटी , ३२ -३३ के आस पास और मम्मी की तरह की फिगर वाली , दीर्घ नितम्बा , भरे भरे चोली फाड़ उरोजों वाली , थीं मिश्रायिन भाभी।

रिश्ते में भले ही बहू लगें , लेकिन थीं वो मम्मी की पक्की सहेली।

किचेन के काम में उन्होंने हम लोगों का हाथ बटाना शुरू कर दिया , और छुटकी के बारे में पूछा।

जवाब उन्हें सामने से मिल गया , जहाँ सीढ़ी से छुटकी उतर रही थी।

और उसे देख के कोई नौसखिया भी समझ लेती , की हचक के चुदी है बिचारी।




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Thursday, October 30, 2014

FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--26

FUN-MAZA-MASTI

 होली का असली मजा--26

नहीं , नहीं , उईइइइइइइइइइइइइइइ ,.... लगता है




छुटकी के होंठों पर वो साथ साथ , अपनी मजे लूटी बुर रगड़ रही थीं।

 किसी तरह वो बोली , : भौजी , झड़ने दो न ,,,,बस , बस करो ना।

लेकिन ननदों को तड़पाने में रीतू भाभी का जवाब नहीं था। उन्होंने पूरी ताकत से दोनों हाथो से उसकी कसी चूत को फैलाया , और लगीं , हचक हचक कर जीभ से चूत चोदने।

छुटकी तड़प रही थी , चूतड़ पटक रही थी।


लेकिन रीतू भाभी , सिर्फ ननद को नहीं नंदोई को भीतड़पा रही थीं।

एक हाथ से उन्होंने उनके शार्ट को कबका उतार के दूर फ़ेंक दिया था।


और जोर जोर से लंड मुठिया रही थीं , खुला सुपाड़ा पागल हो रहा था।


 मैं भी छुटकी के मुंह के पास बैठी थीं।

और अब जब छुटकी रिरयाने लगी , भाभी प्लीज कुछ करो न


तो रीतू भाभी हंस के बोली , " अरे जीजू का इतना मोटा मुस्टंडा लंड है और साली झड़ने के लिए तड़प रही है। ले लो न जीजू का लंड। "



उन्होंने मुझे कुछ इशारा किया , और छुटकी की फैली चूत में इनका सुपाड़ा सटा दिया।

मैं भी भाभी का इशारा समझ गयी थी , छुटकी का प्यार से सर सहलाते हुए उसका मुंह खुलवाया और अपनी मोटी , बड़ी बड़ी चूंची अंदर ठेल दी।



 वो गों गों करती रही। लेकिन मैं उसका पूरा मुंह भर कर के ही मानी , और साथ में उसकी दोनों कलाइयों को भी पकड़ लिया।


रीतू भाभी , छुटकी की गीली पनियाई चूत को एक हाथ से फैला रही थीं और दूसरे हाथ से नंदोई के मस्त मोटे लंड को अंदर घुसेड़ रही थी साथ में ललकार रहीथी ,

" पेल दो साले , साल्ली की फुद्दी में , फाड़ दो रज्जा इसकी चूत "

और वो भी दोनों हाथ से उसकी पतली कमर पकडे हुए थे और उन्होंने करारा धक्का मारा , आधा सुपाड़ा अंदर।




हाथ मेरे कब्जे में थे और उसकी मुंह में मेरी मोटी चूंची घुसी हुयी थी।

बिचारी गों गों करती रही , दर्द से बिलबिलाती रही।
लेकिन ऐसे मौके पे वो दया माया दिखाने वालो में से नहीं थे।



और दिखानी चाहिए भी नहीं

(ये बात मुझसे बढ़कर कौन जानता था )



बल्कि उससे उनका जोश और बढ़ जाता था।

और यहाँ आग में घी डालने वाली , उनका जोश बढ़ाने वाली , रीतू भाभी भी थीं।

अगला धक्का उन्होंने दूने जोर से मारा।

मेरे लाख जोर से पकड़ने के बावजूद उसकी एक कलाई छूट ही गयी , इतनी जोर से छटपटा रही थी वो।

पानी के बाहर मछली की तरह तड़प रही थी, बिचारी छुटकी।

मैंने पूरी ताकत से अपनी चूची उस के मुंह में पेल रखी थी।

तब भी उस के होंठों से चीखें , गों गों की आवाज आ रही थी , वो जोर जोर से अपने चूतड़ पटक रही थी।

उनका मोटा पहाड़ी आलू ऐसा सुपाड़ा अभी भी पूरा अंदर नहीं घुसा था। आलमोस्ट ३/४ अंदर पैबस्त होगया था , बाकी बाहर था।

रीतू भाभी ने ललकारा उन्हें , "अरे नंदोई जी जरा जोर से धक्का मारो , कमर की सारी ताकत , क्या अपने बहनो के साथ पूरी खर्च कर के आये हो। कच्ची कली की चूत है कोई ,मेरी नंनद की ,.... "

रीतू भाभी की अधूरी रह गयी।

उन्होंने छुटकी की कमर एक बार फिर जोर से पकड़ी और , हल्का सा लंड पीछे खींच के पूरे जोर से धक्का मारा।


छुटकी की गों गों की आवाज गूँज रही थी। उस के आँखों से शबनम उतर कर उसके गोरे गुलाबी गालों को गीला कर रही थी। दर्द से उसका पूरा चेहरा डूबा था।





और अब उनका मोटा सुपाड़ा पूरी तरह अंदर पैबस्त हो चूका था।

छुटकी की कच्ची कसी चूत ने उसे कस के दबोच रखा था , जैसे कब के बिछुड़े बालम मिले हों।

लेकिन पिक्चर अभी काफी बाकी थी।

रीतू भाभी ने मुझे इशारा किया की मैं उसके हाथ छोड़ दूँ और चूंची उसके मुंह से निकाल लूँ।

और मैंने वैसा ही किया।

मैं उनका प्लान पूरी तरह समझ रही थी , अब छुटकी लाख चूतड़ पटके , ये मोटा सुपाड़ा टस्स से मस्स नहीं होने वाला था।


अब बिचारी बिना चुदे नहीं बच सकती थी।

छुटकी हलकी हलकी कराह रही थी , लेकिन अब उसकी कुँवारी किशोर चूत को मोटे सुपाड़े की आदत सी पड़ गयी थी।

और ये भी उसकी चूत छोड़ के उसके कच्चे टिकोरों के पीछे पड़ गए थे।


थोड़ी देर तक उसे सहलाते रहे , दबाते रहे मसलते रहे ,फिर होंठों के बीच ले कर हलके हलके उन खटमिठवा कच्ची अमियों का स्वाद लेने लगे। कभी निपल को फ्लिक करते और अचानक उन्होंने उसके बस आते उभरते , निपल्स को काट लिया।
 

चीख निकल गयी छुटकी की।

रीतू भाभी कुछ उनके कान में फुसफुसा रही थीं , और उन्होंने छुटकी की टांगो को दुहरा कर दिया। उनका एक हाथ अब उसके नितम्ब पे था और एक कमर पे। छुटकी की टाँगे , उनके कंधे पे फँसी थी।


उन्होंने थोड़ा लंड बाहर खींचा , छुटकी ने राहत की सांस ली , लेकिन उस बिचारी को क्या मालूम था असली हमला अभी बाकी था।

और फिर पूरी ताकत से खूब हचक के , जोर से पेल दिया।

खूब जोर से चीख निकली , ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जान गईइइइइइइइइइइइइइइइ।

झिल्ली फट चुकी थी।

खून की दोचार बूंदे बाहर चुहचुहा उठी थीं।


 
लेकिन अभी रुकने का समय नहीं था , दूसरा , तीसरा , चौथा , एक के बाद एक धक्का , वो मारते गए।

वो तड़पती रही , चीखती रही , चिल्लाती रही।

ओह्ह्ह्ह्ह नहीं जीजू रुक जाओ.

आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह जान गईइइइइइइइइइइइइ , दीदीइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ ओह्ह्ह्ह्ह छोडो आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

लेकिन उनका बीयर कैन ऐसा मोटा लंड आधे से भी ज्यादा अब धंसा था।




जैसे कोई घुड़सवार , किसी बाँकी भागती , हिरणी का पीछा करे और उसे अपने भाले से बींध दे ,और हिरणी लथपथ गिर पड़े , बार बार अपनी गर्दन मोड़ कर अपने शिकारी की ओर देखे , बस वही हालत छुटकी की थी।

थकी , निढाल, दर्द से डूबी और पूरी तरह फैली जांघो के बीच , खून खच्चर ,…

एक बार तो मैं सहम गयी , लेकिन रीतू भाभी ने मुझे आँख मार के इशारा किया , अरे कच्ची कली की चूत फटी है , वो भी मूसल ऐसे लंड से। ये तो होना ही था। अब नदी पार हो गयी है , घबड़ाना मत।

और सच में , उन्होंने भी अब और चोदना छोड़ कर , छुटकी के प्यारे प्यारे गालों को चूमना शुरू किया , उसके होंठों को अपने होंठो के बीच ले कर चूसने लगे , एक हाथ छुटकी की छोटी छोटी चूंची , दबा सहला रहा था तो दूसरा हाथ उसका सर हलके सहला रहा था।

५-७ मिनट के बाद , उसने आँख खोल दी और टुकुर टुकुर अपने जीजा की ओर देख के हलके से मुस्कराया।

फिर उसने मुझे और रीतू भाभी को देखा और , हलके से उसकी आँखों में ख़ुशी नाच रही थी।


मेरी और रीतू भाभी की आँखों ने हाई फाइव किया।


उन्होंने प्यार से उसके होंठों के बीच अपनी जीभ पेल दी , और लगे उसका मुंह चोदने।

वो भी जैसे लंड चूस रही हो , उनकी जीभ चूस रही थी।

अब बारी थी गीयर बदलने की ,

लेकिन वो भी , हम से ज्यादा उन्हें अपनी साली की चिंता थी।

वो सिर्फ आधे लंड से छुटकी की चूत चोदने लगे , वो भी बहुत हलके।

दर्द उसे अभी भी हो रहा था , लेकिन मजा भी आ रहा था ,

कभी दर्द से कराहती तो कभी मजे से सिसकती।





लेकिन ये आधे लंड की चुदायी , न तो रीतू भौजी को कबूल थी न मुझे।

बांस ऐसे लंड वाले जीजा का क्या फायदा अगर साल्ली , आधे तीहे लंड से चुदे।

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Monday, October 13, 2014

FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--25

FUN-MAZA-MASTI

 होली का असली मजा--25

अब तक

हम दोनों ने अपने ब्लाउज को ठीक कर लिया ( बटन तो दोनों की टूट चुकी थीं , हाँ बस चूंची के ऊपर कर लिया ).

और छुटकी आई तो ,

उसकी कसी कसी छोटी स्कूल की टॉप के नीचे दोनों छोटे छोटे चूजे चोंच मार रहे थे।

वो कच्चे कच्चे टिकोरे , जिसके न सिर्फ वो , बल्कि मेरे नंदोई भी दीवाने थे , टॉप के नीचे से साफ झलक रहे थे।





और उसे देख के , न सिर्फ मुंह सूख गया उनका , बल्कि खड़ा खूंटा और तन के शार्ट के बाहर से झांकने लगा।


और अब मुँह सूखने की बारी छुटकी की थी।

जान सूख गयी थी , उसकी।

उसे मालूम पड़ गया था , अब थोड़ी देर में यहाँ क्या होने वाला था।


और ऊपर से रीतू भाभी , उन्होंने शार्ट नीचे सरका दिया और रामपुरी ९ इंच के स्प्रिंग वाले चाक़ू की तरह , मोटा कड़ियल पगलाया लंड बाहर।





"क्यों लेगी इसे , " मुट्ठी में उसे सहलाते , दबाते रीतू भाभी ने पुछा।


कितने अहसास एक साथ छुटकी के चेहरे पर से उत्तर गए।


लालच , मन कर रहा था बस गप्प से अंदर ले ले।

डर ,और दहशत , क्या हालत होगी उस बिचारी की छोटी सी बिल की , जब ये कलाई ऐसा मोटा बालिश्त भर लम्बा ,फाड़ता हुआ घुसेगा अंदर।

चाहत , कितना मजा आएगा , सुबह वो अपनी दो सहेलियों को देख चुकी थी , इसे घोंटते दोनों चीख चिल्ला रही थी लेकिन बाद में कितना मजा आया। और ,… और मंझली ने भी तो लिया था , इसे। एक ही साल तो बड़ी है वो।



घबड़ाहट , बहुत दर्द होगा , और खून भी निकलेगा। खून से बहुत डरती थी वो।


वो हिरणी की तरह डर के मेरी ओर मुड़ी , पर रीतू भाभी की कोई ननद बच सके तो रीतू भाभी कैसी।




उन्होंने उचक कर उसे पकड़ कर पलंग पर खीच लिया।

"अरे छुटकी इससे डर लगता है , मुझसे तो नहीं। " और प्यार से उसे अपने बाँहों में भींच लिया।

वो भी सिमटते हुए बोली , " अरे भाभी , आपसे क्यों डरूँगी '

" तो चल मेरे साथ मजा ले न " हसंते हुए वो बोली।




बिचारी छुटकी को क्या मालूम , वो खुद फँस के बड़े शिकारी के चंगुल में जा रही है।

फटनी तो उसकी है ही वो भी आज और अभी।


मैंने इशारे से उनको अपने पास बुलालिया।

पलंग पर रीतू भाभी और छुटकी थीं , अब।
और रीतू भाभी की मांसल जांघो की सँडसी सी गिरफत में छुटकी की टाँगे थी।




उन्होंने एक पल में छुटकी की टाँगे फैला दी , और अब वो बिचारी लाख कोशिश करे , उसकी टाँगे सिकुड़ नहीं सकती थी।



रीतू भाभी के हाथों ने साथ , साथ , छुटकी के टॉप को हटा फेंका और उसके बाद नंबर टीन ब्रा का था।

बिचारे वो ललच रहे थे , अपनी किशोर साली की उठती हुयी चूंचियां देखने को , लेकिन वो अब रीतू भाभी की गिरफ्त में थीं।





कभी वो दिखातीं , कभी छिपाती और कुछ देर अपने ननदोई को तड़पाने के बाद , उन्होंने नीचे से दोनों टिकोरों को पकड़ के और उभारा , और उन्हें ललचाते तड़पाते बोलीं ,

" क्यों नंदोई जी , मस्त हैं न मेरी छुटकी के टिकोरे। बस अभी अभी उठना शुरू हुए हैं , दबाने में मस्त , चूसने में मस्त। बोलिए चाहिए। '




और सिर्फ यही नहीं साथ साथ में उसके छोटे छोटे उरोजों को वो हलके हलके दबा रही थीं , मसल रहीं। ललछौहें निपल्स को मसल दे रही थीं कभी चिकोटी काट लेती।

  
" हाँ हाँ भाभी हाँ चाहिए , बहुत मस्त चूंचियां उठान है। "
तड़पते हुए वो बोले।


और उन्हें दिखाते हए , रीतू भाभी ने छुटकी के छोटे छोटे निपल्स चूसने शुरू कर दिए। छुटकी भी मजे सिसकियाँ भर रही थी।




वो सिर्फ एक कॉटन की छोटी सी चड्ढी में थीं। भाभी का एक हाथ उसकी चुन्मुनिया सहला रहा था , रगड़ रहा था। कुछ ही देर में वहां पानी का एक हलका सा धब्बा दिखाई देने लगा।

छुटकी की कच्ची चूत पानी फ़ेंक रही थी।




रीतू भाभी ने उसकी चड्ढी भी खोल कर फ़ेंक दी और एक बार फिर छुटकी की टाँगे, भाभी की कड़ी कठोर मस्लस वाली पिंडलियों में फँसी फैली थी।

भाभी ने उसकी गुलाबी गीली परी को ढक रखा था , और हथेली के बेस से उसके क्लिट को हलके हलके रगड़ रहे थीं।

फिर हाथ हटाकर दोनों हाथ के अंगूठों से उसके चूत के पपोटों को पूरी ताकत से खोलते हुए उन्होंने एक बार फिर अपने नंदोई को ललचाया।




भाभी की पूरी ताकत के बाद भी , बुलबुल की चोंच जरा सी खुली और अंदर की गुलाबी मखमली गली के थोड़े थोड़े दर्शन हुए।

मैं सोच के सिहर उठी।

अभी थोड़ी देर में इनका बियर कैन से भी मोटा लंड इसमें घुसेगा , कैसी लेगी बिचारी मेरी बहन।

लेकिन रीतू भाभी का इरादा पक्का था ,

' हे लेना है इस कच्ची कली का , "


" हाँ भाभी हाँ " वो मस्ती में पागल हो रहे थे।

" मेरी शर्त याद रखना , " भाभी ने याद दिलाया।

"एकदम पक्का " वो बोले। छुटकी की कसी कच्ची सील तोड़ने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हो जाते।

( मुझे बाद में पता चला की भाभी की शर्त ये थी , कि वो छुटकी को पूरे लंड से चोदेंगे और खूब हचक हचक कर। छुटकी चाहे जितना रोये चिल्लाएगी , न तो वो चोदने की रफ्तार कम करेंगे और न , उसे रोने चिल्लाने से रोकने की कोई कोशिश करेंगे ) .

रीतू भाभी ने अपनी सबसे छोटी उंगली की टिप अपनी ननद की चूत में पेल दी और गोल गोल घुमाने लगीं।

साथ में उनका दूसरा हाथ , छुटकी के टिकोरों को दबा मसल रहा था।

मस्ती में छुटकी ने आँखे बंद कर ली थी और बस सिसक रही थी , छोटे छोटे चूतड़ पटक रही थी।

और रीतू भाभी ने इशारा करके इन्हे बुला के अपने पास बैठा लिया और छुटकी की गीली चूत से निकली ऊँगली सीधे इनके मुंह में.


वो सपड़ सपड़ चूस रहे थे।

और रीतू भाभी उस कच्ची कली पर चढ़ बैठीं।

उनकी शैतान उंगलियां , दुष्ट जीभ सब उस की गुलाबी परी को चिढ़ाने , छेड़ने में लग गए।





पहले तो रीतू भाभी के प्यासे होंठों ने अपनी छोटी ननद की गुलाबी कसी चूत की पुत्तियों को कस कस के चूसा , और फिर उसे दो फांक कर अपनी लम्बी , मोती रसीली जीभ एक लंड की तरह पेल दी , और लगीं गोल गोल घुमाने।

साथ में ही उनकी उंगलियां कभी भगोष्ठों को रगड़ देती , कभी मसल देतीं तो कभी अंगूठा जोर जोर से क्लिट के ऊपर घूमता , रगड़ता , मसलता।

बिचारी छुटकी , भौजी के इस हमले को तो कितनी खेली खायी , ब्याहता ननदें नहीं झेल पातीं थी , वो तो बिचारी ९ वि में पढ़ने वाली कमसिन ,सेक्स के खेल से अनजान कली थी।

छुटकी की चूत पानी फ़ेंक रही थी , लेकिन जब वो झड़ने कगार पर होती , रीतू भाभी रुक जातीं और छुटकी मन मसोस कर रह जाती।






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FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--24

FUN-MAZA-MASTI

 होली का असली मजा--24

अब तक






थोड़ी देर में हम तीनो ऊपर छुटकी के कमरे में पहुँच गए।

वो लगता है बस इंतज़ार ही कर रही थी।

एक झीनी झीनी कम से कम दो साल पुराने टॉप और स्कर्ट में ,

उसके टिकोरे टॉप फाड़ रहे थे , और स्कर्ट भी छोटी छोटी किशोर गोरी गोरी जांघो को दिखाती ज्यादा , छुपाती कम।

उसकी और उसके जीजा की आँखे चार हुयी और दोनों मुस्कराये।

उसके जीजा भी बस बनयान शॉर्ट्स में

और , खूंटा पूरा तना , शॉर्ट्स को फाड़ता।

छुटकी को देख के बल्कि छुटकी के कच्चे टिकोरों को देख के वो और बौरा गया।

वो छुटकी के बगलमें ही बैठ गए , उससे सट कर।
और रीतू भाभी मेरे बगल में बैठ गयीं।

वो छुटकी को प्यासी नज़रों से देख रहे थे ,बल्कि उनकी नजरें छुटकी के टीकोरों पे टिकी थीं।

और छुटकी कुछ सहमी , कुछ डरी और कुछ हो जाय तो हो जाने दो के अंदाज में निगाहें झुकाये थी , लेकिन बीच बीच में जब उसकी निगाह इनसे चार होती , तो मुस्करा जाती।

रीतू भाभी सोच रहीं थी कब खेल तमासा शुरू हो। और इस बीच भाभी की शरारती उँगलियों ने मेरे ब्लाउज की बची खुची बटनों को भी खोल दिया और उरोज मचल कर बाहर।

लेकिन जहाँ असली कबड्डी होनी थी वहां डेडलॉक मचा था।


लेकिन छुटकी की चुदाई का रास्ता खोला , और किसने मम्मी ने।








आगे





लेकिन छुटकी की चुदाई का रास्ता खोला , और किसने मम्मी ने। और उसे पक्का किया रीतू भौजी ने।
नीचे से मम्मी ने आवाज दी " मैं जरा पड़ोस में जा रही हूँ , एक - डेढ़ घंटे में आउंगी। दरवाजा बंद कर ले, छुटकी। "
…..
छुटकी उत्तर कर नीचे जाती की उसके पहले मैनेउसे दस पांच काम बता दिए।




सारे दरवाजे चेक कर लेना। मेरा कमरा भी अच्छी तरह बंद कर देना। अादि अादि।

यानी अब ६=७ मिनट की छुट्टी।

और सबसे बड़ी बात , मम्मी हैं नहीं। दरवाजे सारे बंद। तो अब छुटकी चाहे रोये चाहे चिल्लाये , चाहे ये उसे दौड़ा दौड़ा के , चाहे ऊपर उस के कमरे में , चाहे नीचे खुले आँगन में चोदें , कोई उसकी चीख पुकार सुनने वाला नहीं था।


हैं रीतू भाभी तो वो तो खुद भौजाई का हक़ अदा करेंगी , उसकी टाँगे पकड़ के फैलाएंगी।

और मैं , … मैं बहुत हुआ तो न्यूट्रल रहूंगी। और आखिर मेरा पति मेरा है। जो उन्हें पसंद वो मुझे पसंद।
और रीतू भाभी ने पहला शिकार मुझे ही बनाया।

मुझे से बोलीं , हे तेरे आँचल पे डिजाइन बड़ी अच्छी है , जरा खड़ी हो के दिखा।
और जैसे ही मैं खड़ी हुयी उन्होंने आँचल पकड़ के खींचा


और दूसरे हाथ से उन्होंने पेटीकोट में फँसी साडी निकाल दी।

साडी मैंने वैसे ही बस लपेटी सी , थी।


और अगले पल सररर सररर , पूरी की पूरी साडी उनके हाथ में और मैं सिर्फ ब्लाउज साये में , और ब्लाउज के भी सारे बटन खुले।


रीतू भाभी ने जोरदार आवाज लगायी , बाहर छत पे जा के , नीचे आँगन में खड़ी छुटकी को।

" अरे छुटकी , सुन ये तेरी दीदी की साडी है , ले जरा ठीक से तहिया के रख देना। "


और जब वो नीचे , हंसती खिलखिलाती , छुटकी को साडी फ़ेंक रही थीं, मौका मेरा था।

मैंने पहले तो साडी खींची और फिर दोनों हाथोसे रीतू भाभी के जोबन दबाते , चोली के बन्ध खोल दिए।


और अब हम दोनों खुले ब्लाउज में बिना साडी के थे।

नीचे छुटकी हम लोगों का खेल तमाशा देख कर हंस रही थी।

और रीतू भाभी की साडी नीचे फेंकते हुए मैंने उन्ही का डायलाग दुहराया ,

" अरे छुटकी , सुन ये तेरी भौजी की साडी है , ले जरा ठीक से तहिया के रख देना।“
' हंसती , खिलखिलाती , छुटकी ने बोला , " एकदम दी " और उसे कैच करलिया।

रीतू भाभी के ब्लाउज के कुछ बटन उनके ननदोई के हाथ खेत रहे और कुछ मैंने तोड़ दिए।

हम दोनों वापस कमरे में थे , इनके सामने।

मैंने पीछे से , रीतू भाभी के गदराये , गब्बर जोबन दबोच लिए , ( ब्लाउज की आड़ भी अब नहीं थी ) और कस के रगड़ते मसलते चिढ़ाया ,

" क्यों भाभी , भैया ऐसे ही दबाते हैं न , '
हंस के रीतू भाभी बोली ,

" अरे साफ साफ क्यों नहीं बोलती , अपने भैया से दबवाने का मन कर रहा है , दबवा लो , चुदवा लो न खुद पता चल जाएगा। अरे सैयां से सैयां बदल लोय ननदी , तुम मेरे सैयां से मजा ले लो ननद रानी और मैं तुम्हारे सैयां से। "
,
" नहीं भाभी , मेरे सैयां भी आपको मुबारक और मेरे भैया भी। एक आगे से एक पीछे से , एक साथ डबल मजा। " उनके निपल जोर से पुल करते मैंने छेड़ा।

लेकिन रीतू भाभी से पार पाना इतना आसान नहीं था।



लेकिन रीतू भाभी से पार पाना इतना आसान नहीं था।

उन्होंने पलटा खाया , और अब हम दोनों अखाड़े के पहलवान के समान आमने सामने थे और वो अपनी बड़ी बड़ी चूंचियों से मेरी चूंचियां जोर से रगड़ मसल रही थीं , और मैं भी उसी तरह से जवाब दे रही थी।
वो एक नदीदे बच्चे की तरह हम दोनों को देख रहे थे।

रीतू भाभी , जोर जोर से मेरी चूंची पकड़ के मसल रही थी , रगड़ रही थी और अचानक उन्होंने मेरा साया भी उठा दिया।

मैं क्यों पीछे रहती , और अगले पल हम दोनों की चूत भी घिस्से पे घिस्से लगाने लगी।

वो गांड के शैदाई , मैं रीतू भाभी की बड़ी बड़ी गोल गोल गांड पकड़ कर उन्हें दिखा दिखा कर ललचा रही थी।

बस उनके मुंह से लार नहीं टपक रही थी
,
 
खूंटा एकदम जबरदस्त तन्नाया खड़ा था , शार्ट से बाहर झांकता।

और तब तक गालियों की बारिश भी शुरू हो गयी।

रीतू भाभी ने उन्हें जोर से आँख मारी और घचाक से मेरी गांड में उंगली पेलते हुयी ,

" छिनार , सातभतरि , तेरी सारी ननदो की गांड मारू , बुर चोदू , क्या कचकचौवा गांड है साल्ली " गाली शुरू कर दी।

" तेरे ननदोई बहनचोद की बहन चोदूँ , भौजी तोहरो गांड में खूब माल भरल हौ। " एक के जवाब में दो ऊँगली मैंने पेल दी , रीतू भाभी की कसी कसी गांड में।

" तेरी सास का भोंसड़ा मारू , ससुराल में अपने ननदों के साथ खूब कब्बडी खेल के आई है , छिनाल। " रीतू भाभी ने जवाब दिया।

" अरे भौजी मेरी साली ननदे हैं , भाईचोद। एक के ऊपर दस दस चढ़ते हैं , तेरे मादरचोद नंदोई की माँ का भोंसड़ा , जिसमे गदहे घोड़े सब घुसते हैं। ' उनकी गांड में गोल गोल ऊँगली घुमाते मैं बोली।

इस लेस्बियन रेस्लिंग के साथ गालियों ने उनकी हालत और ख़राब कर दी।

गालियां हम दोनों दे रही थी लेकिन टारगेट उन्ही की माँ बहने थी।

रीतू भाभी ने जोर से मुझे आलिंगन में दबोच लिया था। मैंने उनके कान में फुसफुसाया ,

" अरे भौजी , हम दोनों टॉपलेस हो गए हैं और आपके नंदोई अभी भी , … "

बस कहने की देर थी।

रीतू भाभी , अगले पल पलंग पे उनके पीछे बैठी थी और उनके भाले के नोक की तरह चूंचियों के निपल, उनकी पीठ में छेद कर रहे थे।

और उनकी टी शर्ट पहले रीतू भाभी के हाथ में और फिर मिड आन पे मेरे हाथ में ,


वो भी हम दोनों की तरह टॉपलेस हो गए सिर्फ शार्ट में.


रीतू भाभी ने अपनी मस्त चूचियाँ उनके पीठ पे रगड़ते हुए , हलके से उनका गाल काटा और जैसे कोई मर्द किसी कच्ची कली के टिकोरों को पकड़ के दबोच ले , उनके दोनों टिट्स को पकड़ के मसल दिया।

उनके मुंह से चीख और सिसकारी दोनों निकल गयी।

" क्या नंदोई जी , लौडिँया की तरह सिसक रहे हो अभी दिलवाती हूँ , तुझे टिकोरों का मजा। "

और साथ ही शार्ट सरका के उन्होंने उनके मस्त खूंटे को बाहर निकाल लिया।

एकदम मस्त कड़ियल , फुँफकारता ,

' हे आज कोई रहमदिली मत दिखाना , कर देना खून खच्चर , चीखने चिल्लाने देना साली को , एक बार में हचक के पूरा ९ इंच ठेल देना। ' भौजी उनके लंड को सहलाते और उकसा रही थीं। और फिर एक झटके में उन्होंने चमड़ा खोल दिया।

मोटा छोटे टमाटर ऐसा लाल , गुस्साया खूब कड़ा सुपाड़ा बाहर।

 
और मैं भौजी को याद दिलाती , उसके पहले उन्हें खुद याद आ गया।

( रीतू भाभी पीछे पड़ी थीं की सूखे लंड से छुटकी की कच्ची चूत फाड़ी जाय , लेकिन मेरे बहुत समझाने पे ये तय हुआ था की चलिए आज , तो ये वैसलीन लगा लेंगे , लेकिन रात में ट्रेन में सिर्फ थूक लगा के और , उनके गाँव में जब उस की गांड फटेगी तो एकदम सूखी )


"अरे नौवीं में पढ़नी वाली मेरी कच्ची ननद कैसे घोंट पाएगी ये मुट्ठी ऐसा सुपाड़ा , जरा वैसलीन तो लगा दूँ " रीतू भाभी बोलीं ,

और वैसलीन की शीशी उठा के ले आई।

और फिर सिर्फ ऊँगली की टिप वैसलीन से छुला के , उन्होंने मुझे चिढ़ाते हुए दिखा के , सिर्फ उनके सुपाड़े पे पी होल पे , जैसे कोई बच्चे को नजर से बचाने केलिए टीका लगा दे , बस वैसे ही , वहां लगा दिया। "

" भाभी ये फाउल है " मैंने चीखी लेकिन उन्होंने किसी दलबदलू नेता को भी मात देते हुए , पाला बदल लिया था और रीतू भौजी का साथ दे रहे थे।

" क्यों " मुस्करा के वो बोले। " अरे तुमने ही तो कहा था , की आज वैसलीन लगा के , तो मेरी सलहज ने अपनी छोटी ननद का ख्याल करते हुए वैसलीन लगा तो दी है। ये थोड़ी ही तय हुआ था की , कितने ग्राम लगाएंगे या कितना इंच लगाएंगे। "

" अच्छा चल तू कह रही है तो , तू भी याद करेगी किस दिलदार से पाला पड़ा है। " रीतू भाभी हंस के बोली और सुपाड़े के पी होल पर लगे वैसलीन को फैला कर के , उन्होंने सुपाड़े के ऊपरी एक तिहाई भाग पे फैला दिया।

मैं उनकी बदमाशी अच्छी तरह समझ रही थी। वो अपने नंदोई को खुल के फेवर कर रही थीं।


किसी चिकने तेज धार वाले चाक़ू की तरह , अब उनका सुपाड़ा छुटकी की कसी चूत में घुस जाएगा , कम से कम उसका एक तिहाई हिस्सा , जहाँ तक वैसलीन लगा है , और फिर वो लाख अपने चूतड़ पटके , इनका सुपाड़ा निकल नहीं सकता और उसके बाद तो जैसे कोई भोंथरे चाक़ू से किसी मेमने को हलाल करे , बस एकदम उसी तरह से।

मैं कुछ बोलती , उसके पहले छुटकी के पैरों की आहट सुनाई पड़ी और रीतू भाभी ने शेर को फिर से पिंजड़े में बंद कर दिया।





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Friday, October 3, 2014

FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--23

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 होली का असली मजा--23

 मैं भी उनके बगल में खड़ी , रीतू भाभी से सटी कभी गांड मराई का मजा देखती तो कभी उनकी मस्त गदराई सलहज की शरारतें।

रीतू भाभी अपने ब्रा विहीन , होली में गीली जोबन से चिपकी चोली का मजा अपने ननदोई को पीठ पे रगड़ थीं , और मैं ने भी , आखिर मेरी भाभी थी , उनके बचे हुए दो हुक खोल दिए।




अब सलहज की बड़ी गदराई चूंचियां ,सीधे ननदोई के पीठ पे रगड़ घिस कर रही थी।


साथ साथ उनके दोनों हाथ , एक झुकी हुयी ननद की कच्ची अमिया पे दूसरा , अपने ननदोई के चूतड़ के बीच की दरार पे ,और कभी वो मीठी गालियां सीधे देतीं , तो कभी उनके इयर लोब्स की किस्सी ले लेतीं , या हलके से काट लेतीं ,







तभी , भाभी की निगाह , अपने ननदोई के लंड पे पड़ गयी।

वो जोर जोर से हचक के धक्के मार रहे थे लेकिन , करीब ७ इंच अंदर रहा होगा और दो इंच अभी भी बाहर था।

बस ,वो उबल पड़ीं।

सीधे ,नंदोई के पिछवाड़े के छेद पे उंगली दबाते हुए जोर से बोलीं ,

" साल्ले , अपनी बहन के भँड़वे , बहनचोद , ये बाकी लंड किसके लिए बचा रखा है , अपनी रंडी बहनो के लिए। डाल पूरा। "

अब मैं मैदान में आ गयी.

" नहीं भौजी , अरे इनकी छिनार बहनो को चोदने केलिए इनके साले और हमारे भाई हैं ना। "

" अरे नहीं दी , ये इन्होने आपकी सास के लिए बचा रखा है , उनके ,… " लीला मुड़ के बोली और उसकी बात हम सब की जोरदार हंसी में दब गयी।

" तो तू क्या कहती है की तेरे जीजू मादरचोद हैं , " रीतू भाभी ने लीला से आँख नचा के पुछा , लेकिन जवाब आया बाकी दोनों सालियों की ओर से।

" एकदम भाभी , वो भी पैदायशी , खानदानी। " छुटकी और रीमा दोनों एक साथ बोली ,


इतना पलीता लगाने के लिए काफी था।

और अबकी उन्होंने जब लंड बाहर निकाला तो पूरा बालिश्त भर का अंदर ठूंस दिया।

एक सूत भी बाहर नहीं था।

लीला की गांड अच्छी तरह फैली थी।

रीतू भाभी ने छुटकी को पुश किया सीधे रिंग साइड सीट पे , एकदम आगे और चिढ़ाया ,

" देख तेरी सहेली कितनी मस्त होके गांड मरवा रही है। "

" अरे भाभी ,सहेली किसकी है। " छोटे छोटे जोबन उभार के छुटकी बोली लेकिन उसकी निगाहें अपने जीजू के , गांड से निकलते घुसते लंड चिपकी थी।

और मैं चाहती भी यही थी।


मेरी सबसे छोटी बहन , छुटकी की हालत तो लीला से भी ज्यादा ,…

मैंने जो इनकी और नंदोई जी की बात सुनी थी तो आगे का मजा भले ये ले लें लेकिन उसके पिछवाड़े का उद्घाटन का काम नंदोई जी से ही होना था और उनका तो कम से कम मुटाई के मामले में , इनसे २० ही था। फिर इन्होने और इनकी सलहज ने शर्त रखी थी की छुटकी की गांड मारी जायेगी , तो एकदम सूखी। एक बूँद थूक की भी नहीं , चाहे जितना परपराये , छरछराये। और गाँव में , उसकी , बंद कमरे में तो ली नहीं जायेगी , आम के बाग़ में , गन्ने खेत में , मिटटी ढेलों चूंचियां , चूतड़ रगड़ खाएंगे ,

तो एक बार छुटकी गांड मरौव्वल देख लेगी , तो कुछ उसकी हदस दूर जायेगी , कुछ उसके दिल से डर निकल जाएगा , और वो मजा भी लेने लगेगी और उसका करेगा।


लीला भी अब मजे ले रही थी , धक्के के साथ गांड पीछे की ओर मटका रही थी। तो कभी गांड सिकोड़ के , अपने जीजू का लंड निचोड़ लेती।

वो और इनकी सलहज भी कभी चूत में उंगली करते , तो कभी क्लिट दबोच लेते।

लीला की बुर पानी पानी हो रही थी।

दो बार पानी फ़ेंक चुकी थी।

दस -पंद्रह मिनट तक धकापेल चुदाई उसकी गांड की करते रहे। पूरे बित्ते भर हलब्बी लंड से।

और जब झड़े , तो लीला भी देर तक उनके साथ झड़ती रही।
लेकिन उनकी सलहज ने लंड निकालने नहीं दिया।

उनकी साली तरह निहुरी थी , कुतिया वाले पोज में , जिस तरह हचक हचक के उसकी गांड मारी थी. उन्होने।

सलहज ने बोला , जड़ तक लंड घुसेड़े घुसेड़े , मथानी की तरह उसे मिनट तक गोल घुमाएं।
लेकिन उनकी सलहज ने लंड निकालने नहीं दिया।
उनकी नयी नवेली कमसिन सालियां भले ही न समझ पायी हों , लेकिन मैं तो अपनी ससुराल में होली का पूरा मजा ले आई थी , समझ गयी , की रीतू भाभी इरादे क्या हैं।

और उन्होंने अपनी छोटी ननद रीमा को पे लगा दिया की वो अपने जीजू का मस्त मोटा लंड पकड़ के , गोल गोल , लीला की गांड में घुमाए।


जबरदस्त गांड मराई और तीन बार झड़ने के बाद लीला की हालत एकदम पस्त थी।

इसलिए जब उन्होंने लंड निकाला और रीतू भाभी और रीमा ने मिल के लिटा दिया , चुपचाप लस्त पस्त लेट गयी।

रीतू भाभी ने कुछ उनके कान में कहा और फिर ,


अबकी उनकी साली रीमा और सलहज दोनों थी , लीला का मुंह खुलवाने के लिए , एक ने नाक बंद की और दूसरे ने जबड़ा दबाया , सर सीधा किया , बिचारी नेमुंह खोल दिया ,

लेकिन जब उस की गांड निकला लंड , गांड के रस में लिथड़ा , उसकी मक्खन मलाई से चुपड़ा , सुपाड़े से लेकर जड़ तक ( इसी लिए उन सलहज ने मथानी चलवाई थी ,जिससे लंड की मलाई और गांड का ,… )

लीला लाख छटपटाती रही लेकिन रीतू भाभी , छोड़ने वाली नहीं थी। ऊपर से गालियां ,

" साली , छिनार , मेरे नंदोई का लंड सटासट , बुर में घोंट गयी , गांड में लील गयी , वो भी जड़ तक , तो मुंह में लेने में क्यों छिनालपना कर रही है ,चूत मरानो , भाईचोदी। ले चुपचाप , चाट चूस। "


वो लाख सर पटकती रही , लेकिन रीतू भाभी की पकड़ सँड़सी से भी मजबूत।

और वो भी , सुपाड़े पे ' जो कुछ भी था ' पहले उन्होंने लीला के होंठो पे आराम से , बिना किसी जल्दी के, धीरे धीरे लिपस्टिक की तरह लगाया।

वो बिचारी छटपटा रही थी , और कुछ नहीं हुआ तो उसने अपनी हिरनी बड़ी बड़ी कजरारी आँखे बंद कर ली।



 तब तक वो सुपाड़ा अंदर ठेल चुके थे , लेकिन बाकी का ६ इंच , लिथड़ा चुपड़ा बाहर ही था।

उनकी सलहज इतनी आसानी से अपनी ननद को थोड़े ही छोड़ देतीं।


उन्होंने उसकी कच्ची अमिया की घुंडियों को जोर से मरोड़ा और डांटा ,

" आँख खोल छिनार , जरा मेरे नंदोई के लंड का रंग तो देख। अगर आँख झपकी तो मुझे बहुत तरीके आते हैं। चूस ठीक से मजे ले के। '

बिचारी ने झट से आँख खोल दी , अपने जीजू के मक्खन मलाई लगे लंड देखा और चूसना शुरू कर दिया।
थोड़े देर में पूरा लंड लीला के मुंह में था और वो रस ले ले चूस रही थी , चाट रही थी।

और उसकी भौजी उसे प्यार से समझा रही थीं ,

" अरे यार तेरे गांड का ही तो है , पहला जमाना होता न तो इसके साथ मैं भी तुझे अपना रस चखाती , चाट ले प्यार से। '





और मुझे अपने ससुराल की होली याद आ रही थी। पहला जमाना क्या , अभी बीते परसों ही तो ,… पहले तो ननदोई जी ने मेरी गांड हचक के मार के , सीधे मेरेमुँह में , ननद के पिछवाड़े का ,अंत में ननद खुद चूतड़ फैला के मेरे मुंह पे ,

और ऊपर से ये वार्निंग भी , भाभी अभी तो ट्रेलर है , असली रगड़ाई रंगपंचमी में। और छुटकी भी अब मेरे साथ चल रही थी। उसकी तो मुझसे भी दूनी दुर्गत, ननदें , ननदोई और गाँव के सारे लड़के , आखिर नयकी भौजी की छुटकी बहन है।


मेरा ध्यान वापस लीला की आवाज ने खिंचा।

वो अपने कपडे ठीक कर रहे थे और लीला को भाभी और रीमा ने मिल खड़ा कर दिया था। छुटकी उसके कपडे दे रही थी।

" दी अगली बार आप आइयेगा , जीजू को जरूर लाइयेगा और दो दिन के लाइए नहीं कम से कम एक हफते के लिए ,हाँ एक बात और आप को हम लोग जीजू के फटकने भी नहीं देंगे। "लीला हँसते हुए बोल रही थी।

" अरी पगली तेरे जैसी साली होगी तो खुद दौड़ते आएंगे। और हाँ रही मेरी बात तो ससुरालमें ये पूरी तरह साली ,सलहज के हवाले रहेंगे। मैं पूरी तरह छुट्टी मनाऊँगी , आखिर मुझे भी तो आराम चाहिए। " उसके गाल पे चुटकी काटते हुए मैंने प्यार से कहा।

वो और रीमा अपने जीजा से चलने के पहले गले मिलीं। लीला से चला नहीं जा रहा था।

रीमा सहारा दे के उसे ले गयी।

रीतू भाभी अब छुटकी की ओर देख रही थीं और मुस्करा रही थीं।

छुटकी भी समझ रही थी , वो अभी भी बची थी।

दो बज गए थे। चलते समय , रीतू भाभी ने उन्हें बाहों में भर के बोला , " चलती हूँ ननदोई जी , मिलते ब्रेक के बाद , चार बजे शाम को ". 

जिस तरह वो दोनों छुटकी की और देख रहे थे , नंदोई सलहज के मन में तो साफ था ही , छुटकी को भी साफ अंदाज हो गया था की चार बजे क्या होने वाला है।

मैं और वो अपने कमरे में चले गए और छुटकी छत पे अपने कमरे पे।


हम दोनों अपने कमरे में चले गए।

मुझे बिस्तर पर उन्होंने खींच के , बाँहो में भींच लिया और कचकचा के गाल काट लिया।

उन्हें अपनी बाँहो लपेटती मैं जोर से चूम के , बोली , ' आया , ससुराल में पहली होली का मजा। '

जिसमें पिया का सुख , उसमे मेरा सुख।

मायके से मेरी मम्मी ने यही सीखा के भेजा था।

जवाब में एक झटके में मेरे ब्लाउज के सारे बटन खोलते , तोड़ते वो बोले,

" एकदम रात में सासु के साथ और दिन में सालियों के साथ।" और जोर से मेरी बड़ी गदराई चूंचियां उन्होंने मीज दी और फिर गाल काटते बोले ,
 
" रात में भोंसड़े का मजा और दिन में टिकोरों का "
 
मैं भी जोश में शार्ट उनका सरका के उनके मूसल चन्द को अपनी मुट्ठी में दबाती रगड़ती बोली ,
 
" अरे अभी असली टिकोरे वाली तो बची ही है , उसका भी तो ,… ' और मेरी बात काट के मेरे साये को कमर तक सरका के , मेरी बुर अपनी मुट्ठी में दबोचते बोले ,

" उसकी तो ऐसी रगड़ रगड़ के लूंगा की , साल्ली जिंदगी भर याद करेगी अपनी पहली चुदाई। फाड़ के रख दूंगा तेरी बहन की , "


और हम दोनों वैसे ही सो गए। पिछली रात भी मम्मी के साथ मस्ती में जागते बीती थी.

और जैसे ही हम सोते थे , इनके हाथ मेरे चूंचियों पे , और मेरा इनके लंड पे , बस वैसे ही , …



हम लोग सोते ही रहते अगर रीतू भाभी आके नहीं जगातीं ,

 जागो सोनेवालों जागो ,…

और इनके कान में जीभ से सुरसुरी करती बोलीं , " अरे ननदोई जी एक कच्ची कली , मस्त टिकोरों वाली , अपनी गुलाबी परी सम्हाले आपका इन्तजार कर रही है। "

और जब हम दोनों उठे , तो रीतू भाभी ने न उन्हें अपना शार्ट ठीक करने दिया और न मुझे ब्लाउज।

नंदोई सलहज में थोड़ी देर छेड़छाड़ चलती रही।

रीतू भाभी उनके माँ बहनो का हाल लेती रही और वो रीतूभाभी कोगोद में खींच कर चोली के ऊपर से ही जोबन का रस कभी हाथों से कभी होंठों से।





और मौका पाकर मैंने ब्लाउज की बची खुची बटन बंद कर ली ( चार में से दो तो उन्होंने तोड़ ही दी थीं ) , साये का नाड़ा बाँध लिया और साडी बस लपेट ली।


(मुझे मालूम था , रीतू भाभी हों तो ननद के देह पे कपडे कितने देर टिकते थे , जैसे ये , उनके ननदोई कपडे के दुश्मन ,वैसे ही उनकी सलहज )

तब तक रीतू भाभी को उस मिशन की याद आई , जिसके लिए वो आई थीं , मिशन छुटकी।

 
और उन्होंने अपने ननदोई को ललकारा।


शार्ट के ऊपर से ही उन्होंने नंदोई के हथियार को जोर से दबाते मसलते कहा ,

" अरे ननदोई जी , अपनी नहीं तो इसकी फिकर करो , बिचारा कितना भूखा है। "

और भाभी के दबाने मसलने से वो आधा सोया आधा जागा , पूरी तरह जग के फुफकारने लगा।

लेकिन इतने पर अगर वो छोड़ दें तो रीतू भाभी कैसी ,




शार्ट में अंदर हाथ डाल के एक झटके में रीतू भाभी ने सुपाड़ा खोल दिया और उनके पी होल पे अंगूठा लगा के , रगड़ने मसलने लगी। और साथ में उनकी बातें ,



" बोल चाहिये छोटी साल्ली की कच्ची चूत। बहुत चिल्लाएगी ,चीखेगी वो लेकिन छोड़ना मत। रगड़ रगड़ के फाड़ना , चीखने चिल्लाने देना साल्ली को। "

अब तो बिचारे उन का लंड एकदम पागल हो गया।

रीतू भाभी मुठियाती रही ,कभी पेल्हड़ भी सहला देती तो कभी उनके गाल पे हलके से चुम्मी ले के काट लेती।

सलहज हो तो रीतू भाभी ऐसी।

थोड़ी देर में हम तीनो ऊपर छुटकी के कमरे में पहुँच गए।

वो लगता है बस इंतज़ार ही कर रही थी।

एक झीनी झीनी कम से कम दो साल पुराने टॉप और स्कर्ट में ,

उसके टिकोरे टॉप फाड़ रहे थे , और स्कर्ट भी छोटी छोटी किशोर गोरी गोरी जांघो को दिखाती ज्यादा , छुपाती कम।





उसकी और उसके जीजा की आँखे चार हुयी और दोनों मुस्कराये।

उसके जीजा भी बस बनयान शॉर्ट्स में

और , खूंटा पूरा तना , शॉर्ट्स को फाड़ता।

छुटकी को देख के बल्कि छुटकी के कच्चे टिकोरों को देख के वो और बौरा गया।

वो छुटकी के बगलमें ही बैठ गए , उससे सट कर।
और रीतू भाभी मेरे बगल में बैठ गयीं।

वो छुटकी को प्यासी नज़रों से देख रहे थे ,बल्कि उनकी नजरें छुटकी के टीकोरों पे टिकी थीं।

और छुटकी कुछ सहमी , कुछ डरी और कुछ हो जाय तो हो जाने दो के अंदाज में निगाहें झुकाये थी , लेकिन बीच बीच में जब उसकी निगाह इनसे चार होती , तो मुस्करा जाती।

रीतू भाभी सोच रहीं थी कब खेल तमासा शुरू हो। और इस बीच भाभी की शरारती उँगलियों ने मेरे ब्लाउज की बची खुची बटनों को भी खोल दिया और उरोज मचल कर बाहर।

लेकिन जहाँ असली कबड्डी होनी थी वहां डेडलॉक मचा था।

 
लेकिन छुटकी की चुदाई का रास्ता खोला , और किसने, मम्मी ने।


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FUN-MAZA-MASTI होली का असली मजा--22

FUN-MAZA-MASTI                        

 होली का असली मजा--22

 " चाट साल्ली , छिनार , भाई चोदी चाट। साफ कर ,जल्दी चूस के , जैसे अपने भाई का लंड चूसती है , चूतमरानो।
हम सब ने किसी तरह मुस्कराहट दबाई।

कुछ गांड पर चांटे का असर और कुछ रीतू भाभी की गालियों का, थोड़ी ही देर में लीला , सपड़ सपड़ गांड रस से लिथड़ी , उंगली चाट रही थी।

और जब ऊँगली , बाहर निकली , तो एकदम चिक्कन और रीतू भाभी ने जब दुबारा अपनी छुटकी ननदी की गांड में ठेला तो साथ में सूखी ऊँगली भी थी एक।

और अब दो उंगलियां गांड मंथन कर रही थीं ,कभी गोल गोल तो कभी सटासट आगे पीछे। वो दो पोर तक दोनों उंगलियां निकालती और फिर घचाक से , हचक के पेल देतीं। अंदर की मक्खन मलाई से दोनों उंगलियां अब सटासट जा थीं।




प्यार से अपनी किशोर ,कच्ची कली ननद के चूतड़ पर हाथ माारते हुए , उन्होंने चिढ़ाते हुए पुछा ,

" बोल रानी , लेगी मजा ना पिछवाड़े का "
" हाँ , भौजी एकदम , ले लुंगी पिछवाड़े में "


तुरंत जोरका दुहत्थड़ पड़ा लीला के चूतड़ पे और साथ में रस भरी गालियों की बौछार ,

"साल्ली , छिनार , साफ साफ बोल , किससे मरवाएगी , क्या मरवाएगी , सारे खानदान की गांड मारूं , तेरे उमर के तेरे भाई , निकर सरका के बिना लजाये शरमाये , कहीं बाँध के नीचे तो कहीं गन्ने , अरहर के खेत में गांड मरवा रहे होंगे और सारी लाज शरम तेरे बुर में घुसिहै रंडी की जनी। "


बिना रुके लीला बोली ,

" अरे भौजी , हमको गांड मरवानी है और किससे आपके नंदोई और अपने जीजा से " और ये कहते हुए , लीला ने इनको दिखाते हुए , जोर से अपने चूतड़ मटकाए औरकस के आँख मार दी `


बिचारे वो

और ऊपर से उनकी सलहज और सालियों को उकसा रही थीं।

मेरी सबसे छोटी बहन , छुटकी तो अपने जीजा की ओर थी ही।
और उसने अपने जीजू का पगलाया औजार , शॉर्ट्स से आजाद करा लिया था और कभी मुठियाती , तो कभी चुभलाने चूसने लगाती।

बस रीतू भाभी ने उसकी रगड़ाई शुरू की ,

" मारी जायेगी तेरी सहेली की गांड , मजा आएगा तेरे जीजू के लंड को , और मेहनत करूँ मैं। चल सटा जल्दी। "

बस छुटकी हँसते हुए अपने जीजा के मोटे बांस ऐसे लंड को पकड़ के ले आई।

और उधर रीमा भी अब पीछे आ गयी। साली और सलहज भी आ गयीं थीं उनकी सहायता के लिए।

रीमा और रीतू भाभी ने मिलकर , लीला की गांड जोर से फैला दिया थी।






पहले जहाँ , सिर्फ एक दरार दिख रही थी थी बहुत छोटा सा छेद दिख रहा था , और छुटकी ने अपने जीजा के लंड का मोटा पहाड़ी आलू ऐसा सुपाड़ा वहीँ सेट कर दिया।


मुझे अभी भी बहुत मुश्किल लग रहा था।

वो एकदम कच्ची कली थी , नौवें में पढ़ने वाली।

रीतू भाभी ने दो ऊँगली भले ही घुसेड़ दी हो , लेकिन उनकी पतली पतली उँगलियों और इनके हथियार का कोई मुकाबला नहीं था।

कहाँ ये बियर कैन ऐसा मोटा लंड और कहाँ पतली ऊँगली ,


और फिर न कोई चिकनाई ना क्रीम , जब मेरी गांड में पहली बार इनका लंड गया था , मैं एक तो इस बछेड़ी से कम से कम छ सात साल बड़ी रही होउंगी। दूसरे , इन्होने आधी बोतल क्रीम में पहले मेरी कुँवारी गांड में डाली , और बाकी अपने सुपाड़े पे लिथेड़ा। और तब भी मेरी जान निकल गयी थी। इतनी जोर चीखी की मेरी सास ननदों सब ने सूना। और कितनी दिन तक वो सब मुझें चिढ़ाती रही।

लेकिन इनकी सलहज और साली , जबरदस्त थीं।

एक ओर से रीमा ने , लीला की गांड में अंगूठा डाल के अपनी ओर खींचा तो दूसरी ओर , उनकी सलहज ने अंगूठा डाल छोटी ननद की गांड फैलाई।

और अब छेद इतना बड़ा था की उनका सुपाड़ा अच्छी तरह सेट हो सके , बल्कि थोड़ा अंदर भी घुस गया।

बस इतना काफी था इनके लिए।

अपनी साली की कमर पकड़ के जबरदस्त धक्का मारा उन्होंने और आधा सुपाड़ा अंदर घुस गया।

लीला को रीमा और रीतू भाभी ने कस के पकड़ रखा था।

वो गांड पटक रही थी , चीख रही थी , चिल्ला रही थी।


लेकिन ऐसे मौेके पे चीख पुकार चिल्लाहट , रोना कौन सुनता है।

अगर सुनने लगें तो ना किसी लड़की की गांड मारी जाय , न उसकी चूत फटे।


और यहाँ भी कोई नहीं सुन रहा था।

दो तीन जोरदार धक्को के बाद अब उनका सुपाड़ा अच्छी तरह गांड में धंस गया था।






रीतू भाभी ने हँसते हुए रीमा को बोला , " छोड़ दे , साल्ली छिनार को। अब लाख चूतड़ पटके , लंड गांड से नहीं निकल सकता। अब तो इसकी हचक हचक कर गांड मारी ही जानी है। "

और दोनों ने लीला को छोड़ दिया।

रीमा और रीतू भाभी ने तो उसे छोड़ दिया ही था।

अब उनका हाथ भी अपनी कुँवारी , किशोर साली की पतली कमर छोड़ कर , उसके कच्चे उरोजों की ओर बढ़ रहा था।

बात रीतू भाभी की एकदम सही थी।

तीर से बिंधी हिरनी की तरह , वो छटपटा रही थी , कराह रही थी , सिसक रही थी , लेकिन अब तो तीर धंस गया था।

 

थोड़ी देर तक तो उन्होंने कच्ची अमियों को प्यार सहलाया , पुचकारा और फिर कस दबोच लिया , जैसे बहेलिया आसमान में मुक्त उड़ने वाले कबूतर को झपाट से पकड़ ले।



जोर जोरसे कुछ देर उठती उभरती , उस क्लास नौ की साली की चूंची का मजा लेने के बाद जोर से उन्होंने , उन कबूतर के चोंचों को अंगूठे तरजनी के बीच में दबा के मसल दिया। और फिर नाख़ून से स्क्रैच भी कर दिया।


लीला की छोटी छोटी चूंचियों में जो दर्द उठा और मजा भी , पल भर के लिए वो गांड में घुसे सुपाड़े को भूल गयी।

वो तो थे पूरे खिलाड़ी , उन्होंने झुक कर साली के एक टिकोरे को मुंह में भर लिया और लगे खटमीठ स्वाद का मजा लेने।




उभरते टिकोरों का मजा ही कुछ और है , लेकिन कुछ छेड़ते , चिढ़ाते उन्होंने दांत लगा लिया।

और लीला जोर से चीख उठी।

यही तो वो चाहते थे। कच्ची कलियों चोदने का मजा ही क्या , जब तक कुछ चीख चिल्लाहट न हो कुछ आंसू न ढरकें।

रीतू भाभी ने भी तारीफ की निगाहों से।

देर टिकोरों का मजा लेने के बाद , अब फिर एक बार उनके दोनों हाथ लीला के किशोर नितम्बो पे थे।

लेकिन टिकोरे अब उनकी सलहज के कब्जे में थे और वो छुटकी ननद का मजा ले रही थीं।

लेकिन ननदों के साथ और ख़ास तौर पे ननदों की उभरती चूंचियों के साथ वो ज्यादा ही निष्ठुर थीं। 
उधर चूतड़ पकड़ के उनके नंदोई ने एकबार फिर लंड अंदर ठेलना शुरू किया और दूसरी ओर , उनकी प्यारी सलहज ने दोनों निपल , लीला के , एक साथ ट्विस्ट करते हुए जोर से पिंच किये और हड़काया ,

" साल्ली , छिनार , गांड ढीली कर। "


चूंचियों में जो दर्द की लहर उठी तो बिचारी की गांड अपने आप ढीली हो गयी।

यही तोउसके नंदोई चाहते थे।

दोनों चूतड़ पकड़ के उन्होंने वो जो जबरदस्त धक्का मारा , की लीला की चीख पूरे घर में ही नहीं आस पास के घरों में भी पहुंची होगी।

जैसे किसी को बिना धार वाले चाक़ू से हलाल किया जा रहा हो।


लेकिन उसकी चीख रोकने की कोशिश न उन्होंने की , न उनकी सलहज ने बल्कि ताबड़तोड़ , तीन चार धक्के और मार दिए।

अब उसे मोटे मूसल का २/३ करीब ६ इंच अंदर पैबस्त था।


छुटकी बड़ी ध्यान से अपनी समौरिया , अपने क्लास की सहेली की मारी जाती गांड देख रही थी।


लेकिन गांड मराई तो अभी शुरू हुयी थी।

उन्होने हलके हलके , अपना लंड आलमोस्ट सुपाड़े तक बाहर निकाला और , धक्का मारे अंदर पुश करते गए और जहाँ तक पहली बार गया था , वहां तक पहुंचा के रुक गए।



१०-१२ बार इन्होने यही किया तो लंड ने लीला की गांड में अपना रास्ता बना लिया।


लंड दरेरता, रगड़ता , घिसटता , फाड़ता , फैलता उस कच्ची कली की गांड में घुस रहा था।

दर्द तो उसे अभी भी बहुत हो रहा था लकेँ अब बजाय चीखने के वो रुक रुक के कराह रही थी।

रीतू भाभी ने अपनी ननद की चूंची और इनके पीछे आके खड़ी होगयी और इन्हे उकसाने लगी।

" अरे ननदोई जी , इत्ते हलके हलके धक्को से मेरी ननदों को मजा नहीं आता। नहीं मार पा रहे तो मैं तेरी गांड मार के बताऊँ। "

और रीतू भाभी का एक हाथ इनके नितम्बो को सहला रहा था और दूसरे से वो उनके निपल को स्क्रैच कर रही थीं।


असर तुरंत हुआ।

अबकी उन्होंने लंड आलमोस्ट सुपाड़े तक बाहर निकाल लिया , एक पल रुके और फिर पूरे कमर के जोर से क्या धक्का मारा।

आलमोस्ट ७ इंच अंदर था।


लीला फिर बड़े जोर चीखी, लेकिन उसकी परवाह किये बिना हचक हचक के वो धक्के मार रहे थे।

अक्खिर सलहज का हुकुम था।
अब गांड मराई अपनी चरम सीमा पर थी।

कच्ची कली , छोटे छोटे टिकोरे वाली , निहुरी हुयी थी।

चूतड़ हवा में उठे और टाँगे खूब फैली , और उसकी कच्ची गांड में पहली बार इनका बीयर कैन ऐसा मोटा हथियार ,सटासट जा रहा था। दोनों हाथों से वो उसकी गांड खूब जोर से चियारे हुए थे। लंड , गांड फाड़ते हुए रगड़ते हुए घुस रहा था , निकल रहा था।

और लीला की अभी खूब जोर से कभी चीख निकल जाती तो कभी कराह , जब जोर से दरेरते , रगड़ते मोटा लंड उनका गांड में अंदर बाहर होता।
.
मैं भी उनके बगल में खड़ी , रीतू भाभी से सटी कभी गांड मराई का मजा देखती तो कभी उनकी मस्त गदराई सलहज की शरारतें।









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