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Thursday, November 6, 2014

FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -24

FUN-MAZA-MASTI                

 घर का बिजनिस -24

उस वक़्त मेरे लण्ड को ऋतु की फुद्दी ने पूरी तरह से भींचा हुआ था जिससे मुझे भी हल्का सा दर्द हो रहा था। तभी बाजी थोड़ा आगे बढ़ी और ऋतु की फुद्दी की तरफ देखने लगी और फिर मेरे कान में कहा- “आलोक थोड़ा सा बाहर निकालकर पूरा घुसा दो। इस तरह इसे ज्यादा दर्द हो रही है…”

मैंने बाजी की तरफ देखा तो बाजी ने हाँ में सर हिला दिया। तो मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा बाहर निकालकर फिर से ऋतु को थोड़ा मजबूती से जकड़ लिया और पूरी ताकत का एक तेज झटका लगा दिया। मेरे इस तूफानी झटके से लण्ड ऋतु की फुद्दी को पूरी तरह से खोलते हुये जड़ तक घुस गया। लण्ड के पूरा घुसते ही ऋतु के मुँह से- “अम्मी जीए आअह्ह… भाई निकालो बाहर… ऊओ मेरी फट गई भाई… मुझे नहीं करना है भाई… प्लीज़्ज़ बाहर निकालो… ऊओ बाजी… भाई को रोको प्लीज़्ज़…”

ऋतु उस वक़्त बुरी तरह से चिल्लाने के साथ रो भी रही थी कि तभी बाजी आगे बढ़ी और ऋतु की चूचियों को अपने मुँह में भर के चूसने लगी और दबाने लगी। जिससे ऋतु कुछ ही देर में शांत हो गई। लेकिन उसकी आँखों से अभी भी पानी निकल रहा था।

अब मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा बाहर खींचा और फिर से अंदर घुसा दिया जिससे ऋतु के मुँह से सस्सीए की आवाज निकल गई लेकिन वो और कुछ नहीं बोली। अभी मेरा लण्ड ऋतु की फुद्दी में पूरी तरह से फँस के जा रहा था।

कोई दो मिनट तक आराम-आराम से चुदाई करने के बाद ऋतु ने भी अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड की तरफ दबाना शुरू कर दिया। ऋतु के इस तरह गाण्ड हिला के मेरा साथ देते ही मैं समझ गया कि अब ऋतु को दर्द नहीं हो रहा, बलकि वो भी अब मजा ले रही है। तो मैंने अपनी स्पीड को थोड़ा सा बढ़ा दिया।

जिससे ऋतु के मुँह से- “आअह्ह… भाई जोर से नहीं… उंनमह… हाँ भाई बस इसी तरह प्यार से करो… उन्म्मह… ऊओ… भाई अब अच्छा लग रहा है… उन्म्मह… भाई ऊओ… मुझे कुछ हो रहा है आअह्ह…” की आवाज के साथ ही मेरे साथ लिपट गई और अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड की तरफ जोर से दबाने लगी और कुछ ही देर में- “ऊओ भाई आअह्ह… मेरा हो गया…” की आवाज के साथ ही ऋतु का जिश्म अकड़ने लगा और फिर मुझे ऋतु की फुद्दी में अपने लण्ड पे गरम लावा सा गिरता महसूस हुआ और इसके साथ ही ऋतु बेड पे गिर गई और अपनी आँखें बंद करके लंबी-लंबी सांसें लेनी लगी।

ऋतु के फारिग़ होते ही मेरे लण्ड को भी ऋतु की फुद्दी ने आसानी से जगह देना शुरू कर दिया जिससे मैंने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और कुछ ही देर में मैं भी अपनी छोटी बहन की फुद्दी में ही फारिग़ हो गया और ऋतु ने मुझे बड़ी जोर से अपने साथ भींच लिया और हम दोनों कुछ देर तक इसी तरह एक दूसरे के साथ लिपट के लेटे रहे।

कुछ देर के बाद बाजी ने मुझे हिलाया और कहा- “भाई चलो, अब उठो काफी देर हो रही है…”

मैं ऋतु के ऊपर से उठा और जैसे ही मेरा लण्ड मेरी प्यारी छोटी बहन की फुद्दी से पुच्चहक की आवाज के साथ बाहर निकला और मैं खड़ा हुआ तो मेरी नजर ऋतु की लाल और खून और मेरी मनी से सनी हुई फुद्दी पे पड़ी तो मैं काफी परेशान हो गया।

जब बाजी ने मुझे ऋतु की फुद्दी की तरफ परेशानी से देखते हुये पाया तो तो बाजी ने कहा- “आलोक, परेशानी की कोई बात नहीं है। ये सब नार्मल है। तुम चलो अपने कपड़े पहनो मैं देखती हूँ…”

मैं बाजी की बात सुनकर अपने कपड़े पहनकर खड़ा हो गया और बोला- बाजी, अब क्या करना है?

पायल- “कमीने, अभी जो तुमने अपनी मासूम बहन के साथ जुल्म किया है उसकी सफाई करनी है…” और हेहेहेहे करके हँसने लगी।

बाजी- “पायल, क्यों आलोक को परेशान कर रही हो? आलोक तुम जाओ घर, मैं अभी इसे नहला के अपने साथ लाती हूँ…?

मैं बाजी की बात सुनकर बोला- “जी बाजी, जैसे आप कहो…” और रूम से निकलकर घर आ गया जहाँ अम्मी और बुआ बैठी हमारा इंतजार कर रही थीं।

अम्मी- आलोक, क्या बात है? तुम अकेले आए हो? सब ठीक तो है ना? तुम्हारी बहनें कहाँ हैं?

मैं- “अम्मी, वो भी आ रही हैं और बाकी सब ठीक है…”

बुआ- आलोक, क्या बात है जानू? तुम कुछ परेशान लग रहे हो? कोई मसला है क्या?

मैं- “अरे नहीं बुआ, ऐसी कोई बात नहीं है बस जरा थक गया हूँ…”

बुआ- “क्यों? क्या आज उस एम॰पी॰ की जगह तू ने अपनी बहन की सील तोड़ी है जो थक गया है…” और हेहेहेहे करके हँसने लगी।


 अम्मी- “चल चुप कर कमीनी, हर वक़्त मेरे बेटे को तंग करती रहती है। मेरी तीनो बेटियां मेरे इस शेर के लिए ही तो हैं जब चाहे, जिसे चाहे, अपने पास सुला ले। इसे कोई भी मना नहीं करेगा…”

बुआ- “भाभी, मना तो मैंने भी कभी नहीं किया… लेकिन अब हमारा शेर हमारी तरफ देखता ही कहाँ हैं? जवान लौंडियों के पीछे पड़ा रहता है…”

मैं- “नहीं बुआ, ऐसी कोई बात नहीं है जैसा आप समझ रही हो…”

अम्मी- अच्छा, तो फिर कैसी बात है बता तो जरा?

मैं- “अम्मी, बस आपको तो पता ही है कि मैं खुद थक जाता हूँ इसीलिए आप लोगों को ज्यादा टाइम नहीं दे सका…?

बुआ- अच्छा जी, तो फिर कोई बात नहीं… वैसे बात क्या है? अभी तक तेरी बहनें नहीं आईं?

बाजी- “बुआ, आप कहीं और देखो तो हम नजर आयें ना…” बाजी और पायल ने जो कि ऋतु को सहारा देकर अभी रूम में दाखिल ही हुई थीं, बुआ को जवाब दिया।

अम्मी फौरन अपनी जगह से उठी और ऋतु को सहारा देकर अपने साथ ही बिठा लिया और बोली- “क्या हुआ? मेरी बच्ची ठीक तो हो ना?

पायल- “हाँ अम्मी, वैसे जिसकी सील आपका बेटा तोड़ेगा उसका हाल ये ही होना था ना…”

अम्मी हैरानी से मेरी और ऋतु की तरफ देखते हुये बोली- आलोक, पायल क्या बोल रही है? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही?

बाजी- “अम्मी, उस एम॰पी॰ हरामी से तो कुछ हुआ नहीं और ऋतु की हालत खराब कर दी थी उसने तो हमने ऋतु को ठंडा करने के लिए भाई को बोल दिया…”

बुआ- लो भाई आलोक, तुम बड़े लकी निकले पैसे किसी ने दिए और सील तुमने खोली। हाँ और हमें बताया भी नहीं कमीने…”

अम्मी- “चलो कोई बात नहीं… लेकिन अपने बापू को नहीं बताना, समझ गये तुम लोग…”

मैं- “जी अम्मी, जैसे आप बोलो…” फिर हम वहाँ से उठे और अपने-अपने रूम में आ गये।
ये कहानी यहाँ खतम होती है।



*****समाप्त *****विराम *****THE END*****





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FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -22

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 घर का बिजनिस -22

 अब मैंने ऋतु को उल्टा लिटा दिया और उसके पेट के नीचे एक तकिया रख दिया और बगल से तेल उठाकर अपने लण्ड और ऋतु की गाण्ड पे अच्छी तरह से लगा दिया और अपने लण्ड को ऋतु की गाण्ड पे रगड़ने लगा। फिर मैंने अपने लण्ड और ऋतु की गाण्ड पे थूक भी लगा दिया कि आसानी रहे और लण्ड को अपनी सबसे छोटी बहन की गाण्ड के सुराख पे सेट कर दिया और जोर लगाने लगा। जिससे मेरे लण्ड का सुपाड़ा मेरी बहन की गाण्ड में उतर गया। सुपाड़े के घुसते ही मैं रुक गया और ऋतु के कान के पास कहा- जान, आज अपने भाई का पूरा लण्ड लोगी ना?

ऋतु ने हल्की सी हूंन की आवाज निकाली और फिर से चुप हो गई तो मैंने ऋतु की गाण्ड को अपने दोनों हाथों से खोल दिया और कहा- “जान, जितना अपनी गाण्ड को खुला रखोगी, उतना ही दर्द कम होगा। ठीक है ना…”

ऋतु ने मेरी बात सुनते ही हाँ में सर हिला दिया तो मैंने अपने लण्ड को गाण्ड में दबाना शुरू कर दिया जिससे मेरा लण्ड आहिस्ता से मेरी बहन की गाण्ड में घुसने लगा और जैसे ही मेरा लण्ड कोई 4” के करीब ऋतु की गाण्ड में गया था कि ऋतु ने- “ऊओ… भाई, प्लीज़्ज़… रुक जाओ…” कहा।

तो मैं रुक गया और कहा- “जान करने दो, जो भी दर्द होना है एक बार ही हो जाने दो…”

ऋतु ने कुछ देर के बाद कहा- “भाई, जो भी करना है एक बार ही कर डालो प्लीज़्ज़… इस तरह बार-बार दर्द होता है…”

मैंने ऋतु की बात पूरी होते ही उसकी कमर को जोर से पकड़ लिया और पूरी ताकत से झटका लगाया जिससे मेरा लण्ड ऋतु की गाण्ड को खोलता हुआ पूरा घुस गया और ऋतु के मुँह से एक जोरदार चीख निकल गई- “आऐ अम्मीईई… प्लीज़्ज़… भाई बाहर निकालो… मेरी फट गई है… मुझे नहीं करना है कुछ भी… ऊओ… प्लीज़्ज़… भाई बाहर निकालो… नहीं तो मैं मर जाऊँगी…”

ऋतु की चीखों को सुनकर अम्मी और दीदी फौरन ऋतु के रूम में आ गई और हमें इस हालत में देखकर अम्मी और दीदी जल्दी से ऋतु के दोनों तरफ बैठ गई और उसके बालों को सहलाने लगी और अम्मी ने कहा- “बस मेरी बच्ची, अब हो गया है जो होना था बस थोड़ा सा सबर करो…”

ऋतु को क्योंकि काफी ज्यादा दर्द हो रहा था और उसकी आँखों से आँसू भी निकल रहे थे तो वो रोते हुये बोली- “अम्मी, प्लीज़्ज़… भाई को बोलो कि बाहर निकाल ले, मेरी फट गई है…”

अम्मी ने मुझे आँख से इशारा किया और कहा- “चलो आलोक, निकालो बाहर, कुछ ख्याल करो बहन है ये तुम्हारी…”

मैं अम्मी के इशारे को समझ गया और कहा- “ओके अम्मी, लेकिन आप इसे भी तो बोलो ना कि अपनी गाण्ड को ढीला करे ताकि मैं अपने लण्ड को बाहर निकालूं…”

मेरी बात सुनते ही ऋतु ने अपना जिश्म ढीला कर दिया तो मैंने अपने लण्ड को हल्का सा बाहर खींचा और फिर आराम से घुसा दिया। मेरे इस तरह करने से अम्मी ने कहा- “हाँ, इसे ज्यादा जोर से नहीं करो… वरना मेरी बेटी को दर्द होगा… बस इसी तरह आराम-आराम से कर लो तुम और फिर जाओ यहाँ से…”


मेरी बात सुनते ही ऋतु ने अपना जिश्म ढीला कर दिया तो मैंने अपने लण्ड को हल्का सा बाहर खींचा और फिर आराम से घुसा दिया। मेरे इस तरह करने से अम्मी ने कहा- “हाँ, इसे ज्यादा जोर से नहीं करो… वरना मेरी बेटी को दर्द होगा… बस इसी तरह आराम-आराम से कर लो तुम और फिर जाओ यहाँ से…”

अब मैं ऋतु की गाण्ड में इतने आराम और प्यार से अंदर-बाहर कर रहा था कि ऋतु कुछ ही देर में रोना और चिल्लाना खतम करके आराम से लेट गई और अपना जिश्म भी पूरी तरह से ढीला कर दिया। जिश्म को ढीला छोड़ते ही मेरा लण्ड कुछ आसानी से अंदर-बाहर होने लगा जिससे मेरा मजा भी बढ़ गया था और अब तो ऋतु भी कभी-कभी अपनी गाण्ड को मेरे लण्ड की तरफ दबा देती थी जिससे मैं और भी मजे से पागल होने लगा।
अम्मी और दीदी ऋतु के दोनों तरफ से बैठी उसके बालों और चूचियों को सहला रही थी जिससे ऋतु को भी अब मजा आ रहा था लेकिन क्योंकि ऋतु का पहली बार था और वो भी इतने बड़े लौड़े से तो दर्द तो होना ही था।

अब मैं भी फारिग़ होने ही वाला था कि मैंने अपने लण्ड को तेजी के साथ अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया जिससे ऋतु फिर दर्द की वजह से- “आअह्ह… भाई प्लीज़्ज़… आहिस्ता करो… इस तरह दर्द हो रहा है… अम्मी प्लीज़्ज़ भाई को मना करो ना… उन्म्मह…” की आवाज करने लगी।

लेकिन क्योंकि मैं अब अंत पे था इसलिए रुका नहीं और धक्के मारता रहा और कुछ ही झटकों में फारिग़ होकर ऋतु की गाण्ड के ऊपर ही गिर गया।

कुछ देर तक मैं इसी तरह अपनी बहन की गाण्ड में लण्ड घुसाये लेटा रहा कि तभी अम्मी ने कहा- “चलो आलोक, अब उठो भी… देखो तो सही ऋतु की क्या हालत हो गई है…”

मैं जैसे ही उठा और अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और देखा तो मुझे अपने लण्ड के ऊपर हल्की सी लाली नजर आई और जब मेरी नजर अपनी छोटी बहन ऋतु की गाण्ड पे पड़ी तो मैं थोड़ा परेशान हो गया।

लेकिन तभी अम्मी ने कहा- “कुछ नहीं हुआ बस थोड़ा सूज गई है और बस अभी थोड़ा गरम पानी से टिकोर करूंगी तो ठीक होना शुरू हो जाएगी…”

अम्मी की बात सुनकर मैं वहाँ से उठा और वाश-रूम की तरफ चल पड़ा और साफ सफाई के बाद वापिस आया तो, तब तक अम्मी ने ऋतु को बेड पे बिठा दिया था।

जैसे ही ऋतु की नजर मेरे लण्ड पे पड़ी तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं जैसे उसे यकीन नहीं आ रहा हो मेरे लण्ड पे।

अम्मी ने कहा- बेटी, क्या देख रही हो? इस तरह मेरे बेटे को नजर लगाओगी क्या?

ऋतु अम्मी की बात सुनकर बुरी तरह शर्मा गई और सर झुकाकर बैठ गई।

तो दीदी ने हँसते हुये कहा- “अरे मेरी जान बहना, ये हमारा भाई नहीं बलकि हमारा शौहर भी है तो फिर इससे क्या शरमाना…”

दीदी की बात सुनकर मैं हँस पड़ा और बोला- “हाँ ऋतु, दीदी सही बोल रही हैं लेकिन मैं ऐसा शौहर हूँ कि जिसे अपनी इन गश्तियों की खुली फुद्दी ही मिलती है, सील-पैक नहीं…”

दीदी- अच्छा भाई, तो अभी जो तुमने मेरी इस मासूम बहन की गाण्ड को खोला है इसका क्या?

अम्मी- “अरे बेटा, अगर तुम इनकी फुद्दी की सील खोलोगे तो हम क्या करेंगे? कोई इतने पैसे नहीं देगा, जितने अभी हम लेते हैं…”

दीदी- “हाँ भाई, लेकिन तुम्हें मना भी कोई नहीं करता है। जब दिल करे जिसके साथ दिल करे, करो…”
मैं- “अच्छा बाबा, मैं कब बोल रहा हूँ कि तुम लोग मुझसे अपनी सील खुलवाओ…”

अम्मी- अच्छा ऋतु, चलो उठो बेटी। अब मैं तुम्हें बाथरूम ले चलूं…” और इसके साथ ही ऋतु को अपने साथ उठाकर बाथरूम की तरफ चली गई।

अम्मी के जाते ही दीदी मेरे करीब हो गई और मेरे लण्ड को अपने हाथ में पकड़कर बोली- भाई सच बताना, ऋतु के साथ मजा आया है क्या आपको?

मैं- “हाँ दीदी, सच तो ये है कि ऋतु की गाण्ड बहुत टाइट थी और उसने मुझे मजा भी दिया है…”

दीदी- “अच्छा तो फिर कहीं अब उसकी सील-पैक फुद्दी खोलने का दिल तो नहीं कर रहा मेरे भाई का…”

दीदी की बात सुनते ही मेरे लण्ड में फिर से जान आना शुरू हो गई जिसे महसूस करते ही दीदी हँस पड़ी और बोली- “नहीं भाई, समझाओ इसे। अभी नहीं कल की रात सबर करो उसके बाद जितना दिल चाहे चोद लेना ऋतु को कोई भी तुम्हें ऋतु की चुदाई से मना नहीं करेगा…”

अगले दिन रात के 8:00 बजे ही बापू ने मुझसे कहा- “आलोक, आज रात तुमने सारा टाइम गेस्ट-रूम के दरवाजे के बाहर ही बैठना है क्योंकि अगर रूम में किसी भी चीज की जरूरत हुई तो तुम उन्हें दे सको…”

मैं- ठीक है बापू, लेकिन आज आ कौन रहा है?

बापू- बेटा एक एम॰पी॰ है। गुजरानवाला से आ रहा है। अभी दो घंटे तक आ जाएगा, बूढ़ा आदमी है (नाम नहीं लिखूंगा उस एम॰पी॰ का)

मैं- “ठीक है बापू, उसे किसी भी चीज की कमी नहीं होगी आप टेंशन नहीं लो…”

बापू- “अच्छा आलोक, मैं अभी चलता हूँ और हाँ मैंने वहाँ गेस्ट-रूम में शराब की नयी बोतल भी रख दी है…”
मैं- “ठीक है बापू, मैं ले लूँगा आप परेशान नहीं हों…”

बापू- “बेटा, तुम समझ नहीं रहे हो? ये ही एम॰पी॰ है हमारे पास कि हम अब इस पैसे वालों की दुनियां में घुस कर पैसा कमा सकें और इस काम में ये एम॰पी॰ हमारे बहुत काम आएगा…” बापू की बात भी सही थी क्योंकि इन लोगों के पास ही तो सारा पैसा होता है जो कि हम गरीबों की खून की कमाई का पैसा ही होता है।

मैंने सर हिला दिया तो बापू वहाँ से उठे और बाहर निकल गये। और उनके जाने के बाद मैं उठा और ऋतु के रूम की तरफ चल पड़ा, जहाँ ऋतु के साथ अम्मी और बुआ भी थीं।

मुझे देखते ही अम्मी ने कहा- आओ आलोक बैठो, क्या बात है? क्या आ गये हैं वो लोग?

मैं- “नहीं अम्मी, अभी नहीं। अभी कुछ टाइम है। मैं तो बस वैसे ही आ गया था यहाँ…”

बुआ- “हाँ, तो आओ ना यहाँ बैठो हमारे पास और देखो कि किस तरह हम ऋतु को तैयार करती हैं…”

मैं- “नहीं बुआ, आप लोग ही बैठो मैं दीदी की तरफ जा रहा हूँ…”

अम्मी- “आलोक, तुम ऐसा करो कि अभी जब तक वो लोग आ नहीं जाते गेस्ट-रूम को देख लो कि किसी चीज की कमी ना हो…”

मैं- “ठीक है अम्मी, मैं दीदी और पायल को ले जाता हूँ अपने साथ…”

अम्मी- “नहीं आलोक, उनको भी तैयार होने दो। ये काम तुम खुद ही देख लो अभी…”

मैं- क्यों अम्मी? दीदी और पायल ने कहाँ जाना है?

अम्मी- “बेटा, आज जो एम॰पी॰ आ रहा है उसके दोस्तों को तुम्हारी दीदी और पायल ही संभालेंगी…”

मैंने हाँ में सर हिला दिया और वहाँ से उठकर गेस्ट-रूम की तरफ चल पड़ा और सोचने लगा कि आज मेरी तीनों बहनों की जम के चुदाई होने वाली है और वो भी कमाल की होगी। क्योंकि ऋतु के साथ तो एक ही आदमी करेगा लेकिन पता नहीं दीदी और पायल के साथ कितने लोग चुदाई करेंगे?

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FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -21

FUN-MAZA-MASTI 

 घर का बिजनिस -21

 अगले दिन जब में सोकर उठा और अपने रूम से बाहर आया तो अम्मी ने मुझे देखते ही ऋतु को आवाज दी और कहा- चलो बेटी, तुम्हारा भाई उठ गया है नाश्ता दे दो भाई को…”

कुछ ही देर के बाद जब ऋतु मेरे लिए नाश्ता लेकर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया क्योंकि उस वक़्त ऋतु ने हल्का सा काटन का पाजामा पहन रखा था और उसके ऊपर एक ढीली सी शर्ट थी जिसमें मेरी छोटी बहन का जिश्म गजब ढा रहा था। क्योंकि ऋतु को इस ड्रेस में देखते ही मेरा लण्ड पूरा हार्ड हो गया था और दिल कर रहा था कि अभी पकड़ लूँ और यहाँ सबके सामने ही साली की फुद्दी को खोलकर रख दूँ।


अम्मी- बेटा, क्या देख रहे हो अपनी बहन को? नजर लगानी है क्या इसे?
मैं- “अरे अम्मी, मेरी नजर का तो पता नहीं पर लगता है किसी और की नजर लग जाएगी इसे…”

अम्मी- “चल कमीना कहीं का, कुछ तो ख्याल रख। अभी मेरी बच्ची बहुत छोटी है उसकी नजर बर्दाश्त नहीं कर सकती…”

मैं- “नहीं अम्मी, अब इतनी छोटी भी नहीं है हमारी बहना, जितना आप इसे बना रही हैं…”

ऋतु हमारी इन बातों से लाल हो रही थी बोली- “भाई नाश्ता तो कर लो…”

मैं- “मेरी जान, अपने हाथों से करवा दो ना आज अपने भाई को…”

अम्मी- “चल ऋतु, तू जा अभी यहाँ से। नहीं तो ये कमीना तो अभी नाश्ते के साथ तुझे भी खा जाएगा…”

ऋतु अम्मी की बात सुनते ही वहाँ से चली गई और मैं उसे जाते हुये उसकी गाण्ड को घूरने लगा जो कि बारीक पाजामे की वजह से साफ नजर आ रही थी और मेरे लण्ड को तड़पा रही थी।

अम्मी- “चल आलोक, नाश्ता कर ले फिर बाजार से कुछ सामान ले आना और वापिस आकर ऋतु की मालिश आज पूरी कर देना…”

मैं अम्मी की बात समझ गया और बोला- “अम्मी, क्यों ना मैं पहले ऋतु की मालिश कर दूँ। सामान तो आप भी ले ही आओगी…”

अम्मी हँसते हुये बोली- “अच्छा ठीक है, मैं चली जाती हूँ लेकिन याद रखना सिर्फ़ पीछे से ही करना जितना भी करना है क्योंकि ऋतु की जवानी को देखकर काफी लोग तैयार हो चुके हैं पैसे देने को। लगता है कि अब इसकी बोली ही लगेगी…”

मैंने नाश्ता किया और उठकर ऋतु के रूम की तरफ चला गया, जहाँ दीदी और बुआ भी बैठी हुई थीं। मुझे देखते ही दीदी ने कहा- हाँ भाई, क्या बात है? कोई काम था क्या?

मैं- “नहीं दीदी, काम तो कोई नहीं था। बस अम्मी ने कहा है कि ऋतु की मालिश कर दूँ अभी…”

बुआ- ओहोहो, तो मेरा भतीजा अपनी बहन की मालिश करने आया है। चलो भाई, हम जाते हैं फिर यहाँ से…”

दीदी- बैठो ना बुआ, हमसे क्या शरमाना है भाई को। क्यों भाई? हमारे सामने ही कर सकोगे ना आप ऋतु की… चू… ओह सारी मालिश

ऋतु दीदी की बात से बुरी तरह शर्मा गई और उठकर वाश-रूम में घुस गई। ऋतु के इस तरह शरमाने से दीदी और बुआ भी हेहेहेहेहे करके हँसने लगी और फिर वहाँ से उठकर बाहर की तरफ चल पड़ी।

तो बाजी ने मेरी तरफ मुड़ के कहा- देखो आलोक, आज इसे तैयार करो क्योंकि कल इसे काम पे लगना है समझ गये…”

मैंने हाँ में सर हिला दिया और कहा- “जी दीदी, मैं कोशिश करूंगा, अगर मान गई तो ठीक है…”

दीदी ने कहा- मैंने और बुआ ने उसे अच्छी तरह समझा दिया है। वो तुम्हें परेशान नहीं करेगी और जो कहोगे करेगी…” दीदी इतना बोलकर रूम से निकल गई।

तो मैंने ऋतु को आवाज दी और कहा- चलो ऋतु, दीदी और बुआ चली गई हैं। आ जाओ रूम में, मालिश नहीं करनी क्या?

जब ऋतु वाश-रूम में से बाहर आई तो उसने सिर्फ़ एक चादर लपेट रखी थी अपने ऊपर और आकर बेड के पास खड़ी हो गई और आहिस्ता सी आवाज में बोली- भाई, लाइट बंद कर दें?

मैंने कहा- क्यों? लाइट चलने दो ना प्लीज़्ज़… आओ ऐसे अच्छी तरह तेल लगा सकूंगा मैं…”

ऋतु ने नजर उठाकर मेरी तरफ देखा और कुछ बोले बिना ही बेड पे लेट गई तो मैं आगे बढ़ा और अपनी कमीज उतार के बगल में रख दी और तेल की बोतल पकड़कर बेड पे बैठ गया। फिर मैंने ऋतु की बगल से चादर का किनारा पकड़ा और ऋतु के ऊपर से चादर को खींच लिया।

चादर के हटते ही मेरी आँखों के सामने मेरी बहन की कमर और गाण्ड जो कि बिल्कुल नंगी थी सामने आ गई और मैं कुछ देर तक इस नजारे को देखता ही रह गया। फिर अचानक मैं थोड़ा सा नीचे झुका और ऋतु की गाण्ड पे हल्की सी किस कर दी।



 जिससे ऋतु तड़प गई और- “आअह्ह… भाई, ये आप क्या कर रहे हो? प्लीज़्ज़ ये नहीं करो…”

मैंने ऋतु को कहा- “ऋतु कुछ नहीं होता मेरी जान, मैं भाई हूँ तुम्हारा, तुम्हारे साथ जो भी करूंगा तुम्हें मजा और सकून देने के लिए ही करूंगा…”

अबकी बार ऋतु चुप रही और कुछ नहीं बोली। तो मैंने ऋतु की बाडी पे तेल लगाने की बजाये उसकी कमर पे हाथ फेरना और गाण्ड को सहलाना शुरू कर दिया। मेरे इस तरह करने से ऋतु के मुँह से हल्की आवाज में सिसकियां निकलने लगी थीं जिससे साफ पता चल रहा था कि ऋतु को इससे मजा आ रहा है और वो काफी गरम भी हो गई है।

फिर अचानक मैंने ऋतु को एक झटके से सीधा कर दिया और उसकी छोटी-छोटी चूचियों को अपने हाथों में भर लिया। लेकिन ऋतु ने अपनी आँखों को बंद कर लिया और अपने होंठों को काटने लगी और साथ ही मुँह से उन्म्मह की हल्की आवाज में सिसकियां भरने लगी लेकिन मुझे मना नहीं किया।

अब मैं थोड़ा आगे हुआ और ऋतु के होंठ, जो कि मजे की वजह से लरज़ रहे थे, से अपने होंठ लगा दिए जिसे ऋतु ने अपने होंठों में भर लिया और किस करने लगी और साथ ही मुझे अपनी तरफ खींच लिया। ऋतु की किस में बड़ी शिद्दत थी, कभी वो अपनी जुबान को मेरे मुँह में घुसाकर किस करती, और कभी मेरी जुबान को अपने मुँह में भर के चूसने लगती। जिससे मैं भी मजे से पागल होने लगा। कुछ देर तक हम दोनों बहन भाई इसी तरह किस करते रहे और फिर मैंने अपने होंठ अपनी बहन के होंठों से अलग किए और उसकी चूचियों पे रख दिए और चूसने लगा।

जिससे ऋतु को और भी मजा आने लगा और वो- “ऊओ भाई… उन्म्मह… पी लो भाई आज अपनी बहन की चूचियों को हूंणमम…”

अब मैं ऋतु की चूचियों को चूसने के साथ हल्का-हल्का दबा भी रहा था और कुछ देर के बाद मैं ऋतु की चूचियों से नीचे की तरफ हुआ और उसके पेट और फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी फुद्दी के ऊपर की तरफ भूरे बालों के पास अपनी जुबान घुमाने लगा तो ऋतु पागल ही हो उठी और मेरे सर को अपनी फुद्दी की तरफ दबाने लगी और आअह्ह… भाई नहीं प्लीज़्ज़… ये क्या कर दिया आपने… उन्म्मह… की आवाज से मेरे सर को भी अपनी फुद्दी की तरफ दबाने लगी। अब मैंने जैसे ही ऋतु की फुद्दी के ऊपर अपनी जुबान को घुमाया तो ऋतु के जिश्म को एक झटका सा लगा और इसके साथ ही ऋतु ने अपने हाथों के साथ मेरे सर को अपनी फुद्दी के साथ दबा लिया और- “हाँ भाई… यहाँ से चाटो प्लीज़्ज़… यहाँ ज्यादा मजा आ रहा है… उन्म्मह…”

ऋतु की फुद्दी काफी ज्यादा गरम और गीली हो चुकी थी और उसमें से निकलने वाला गाढ़ा सा नमकीन पानी मुझे बड़ा मजा दे रहा था और मैं अपनी जुबान को ऊपर से नीचे की तरफ चलाने लगा जिससे ऋतु और भी तड़पने लगी और- “आअह्ह… भाई, खा जाओ अपनी बहन की फुद्दी को… ऊओ… भाई मुझे कुछ हो रहा है… ऊओ… भाई…” की आवाज के साथ ही ऋतु का जिश्म अकड़ने लगा और फिर उसे 3-4 झटके लगे और उसकी फुद्दी से पानी का सैलाब सा निकलकर मेरे मुँह में जाने लगा जिसे मैं मजे से पी गया।

ऋतु फारिग़ होने के बाद कुछ निढाल सी हो गई और अपनी आँखों को बंद किए लंबी सांसें भरने लगी तो मैं उसकी टाँगों में से उठकर बगल में बैठ गया और अपना मुँह उसके करीब करके बोला- ऋतु मेरी जान मजा आया तुम्हें?

मेरी बात सुनते ही ऋतु ने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुरा उठी और फिर मुझे अपनी तरफ खींच लिया और किस करने लगी।

हम दोनों ने कुछ देर किस की और फिर मैं उठा और अपने लण्ड को उसके मुँह के पास कर दिया और बोला- “चलो अब इसे भी अपने मुँह में लेकर प्यार करो…”

ऋतु ने कहा- “भाई इसे प्यार करना जरूरी है क्या?

तो मैंने हाँ में सर हिला दिया और कहा- “हाँ मेरी जान, असल मजा तो इसे प्यार करने से ही आता है…”

ऋतु कुछ देर तक मेरी तरफ देखती रही और फिर आहिस्ता से अपना मुँह खोल दिया और मेरे लण्ड का सुपाड़ा को अपने मुँह में भर लिया और चाटने लगी जिससे मुझे भी मजा आने लगा। लेकिन क्योंकि ऋतु ने कभी किसी का लण्ड अपने मुँह में नहीं लिया था और ऊपर से मेरे इतना बड़ा और मोटा लण्ड वो अपने मुँह में लेने की कोशिश में अपने दाँत मेरे लण्ड के साथ रगड़ रही थी जिससे मुझे हल्की तकलीफ भी हो रही थी। जिसकी वजह से मैंने ऋतु के मुँह से अपना लण्ड निकाल लिया।












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Thursday, October 30, 2014

FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -20

FUN-MAZA-MASTI

 घर का बिजनिस -20

 वो रात मैंने दीदी की चुदाई में गुजारी। सुबह जब मैं उठा तो 10:00 बज चुके थे और मैं इसी तरह बेड पे नंगा ही पड़ा हुआ था। मैं उठा और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। मैंने नहाकर कपड़े पहन लिए और नाश्ते के लिए बाहर निकला तो देखा कि अरविंद साहब भी आए बैठे थे और दीदी को सोफे पे ही किस कर रहे थे और ऋतु रूम से उन दोनों के लिए शराब लेकर आ रही थी। जो कि उसने टेबल पे रख दी और मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुरा दी और सर झुकाकर वहाँ से चली गई।

ऋतु के जाते ही मैंने किचेन में अम्मी को आवाज दी- “अम्मी प्लीज़्ज़ बहुत भूख लगी है नाश्ता दे दो…”

मेरी आवाज सुनकर अरविंद साहब ने अपना सर उठाया और मेरी तरफ देखकर हँसते हुये बोले- अरे यार, क्या इतनी देर तक सोते रहते हो?

मैंने भी हँसते हुये कहा- “क्या करूं अरविंद साहब? काम ही ऐसा है हमें रात-रात भर जागना पड़ता है…”

अरविंद साहब भी हँस पड़े और बोले- हाँ यार, ये तो है। अच्छा एक बात पूछूं गुस्सा तो नहीं करोगे?

मैं- अरे नहीं सर, आप बोलो क्या बोलना है, मैं भला गुस्सा क्यों करूंगा?

अरविंद- अच्छा, जब तुम अपनी बहनों को इस तरह चुदवाते हुये देखते हो तो क्या तुम्हारा दिल नहीं करता कि तुम भी इनकी चुदाई करो?

मैं- “अरविंद साहब, बात ये है कि अगर दिल करता भी है तो क्या हुआ? हमें पैसे खुद चोदने के लिए नहीं मिलते बलकि आप जैसों से चुदवाने के मिलते हैं…”

अरविंद शराब का पेग दीदी के हाथ से लेकर एक ही सांस में पीते हुये बोला- और अगर मैं कहूं कि तुम मेरे साथ मिल के अपनी बड़ी बहन की चुदाई करो तो?

मैं- नहीं सर, ऐसा किस तरह हो सकता है भला?

अरविंद- यार, तुम सिर्फ़ इतना बताओ, जितना मैं पूछ रहा हूँ बाकी मेरा काम है?

मैं- “ठीक है सर, भला मैं आपको नाराज तो नहीं कर सकता। लेकिन आप ऐसा क्यों चाहते हैं ये समझ में नहीं आ रहा…”

अरविंद- सच तो ये है कि मैं देखना चाहता हूँ कि बहन भाई या खूनी रिश्तों में चुदाई से कितना मजा आता है?
मैं- “ओके सर, आप जब चाहो मैं मना नहीं करूंगा आपको…”

अरविंद मेरी बात सुनकर कुछ सोच में पड़ गये और बोले- “तो ऐसा है कि जब मैं कहूं और जहाँ कहूं तुम अंजली को अपने साथ ले आना और फिर वहाँ इसकी चुदाई करोगे…”

मैं- “ठीक है, मैं तैयार हूँ…” और तब तक मेरा नाश्ता भी आ चुका था और मैं नाश्ता करने में लग गया।

और अरविंद दीदी की चूचियां को मसलने में लग गया। नाश्ता करने के बाद मैं वहाँ से उठ गया और ऋतु के रूम की तरफ चल पड़ा। जैसे ही मैं रूम में दाखिल हुआ तो मुझे अपने रूम में आता देखकर ऋतु थोड़ा घबरा गई और खड़ी हो गई।

मैं- क्या हुआ ऋतु? तुम मुझे देखकर खड़ी क्यों हो गई?

ऋतु- “न…नहीं तो भाई, बस ऐसे ही आओ बैठो…”

मैं ऋतु के पास जाकर बेड पे बैठ गया और ऋतु का हाथ पकड़कर नीचे की तरफ खींचा और बोला- तुम भी बैठो ना खड़ी क्यों हो? ऋतु सर झुकाकर बैठ गई और अपने होंठ काटने लगी। उस वक़्त ऋतु का जिश्म हल्का सा कांप भी रहा था।

मैं- ऋतु मेरी जान, क्या बात है? मेरा यहाँ आना तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या?

ऋतु- नहीं तो भाई, आपने ऐसा क्यों सोचा है?

मैं- “यार, मेरे रूम में आने से तुम घबरा रही हो ना इसलिए पूछ लिया…”

ऋतु- नहीं भाई, ऐसी कोई बात नहीं है। भला मैं क्यों घबराऊँगी आपसे?

मैं- “अच्छा, ऐसा है कि जब तुम्हारा डर खतम हो जाए तो मेरे रूम में आ जाना ओके…” मैं इतना बोलकर वहाँ से उठा और अपने रूम की तरफ चल पड़ा।

जैसे ही मैं ऋतु के रूम से बाहर आया तो पायल ने मुझे देख लिया और मेरा हाथ पकड़कर अपने रूम में ले गई और बोली- हाँ भाई, क्या बात हुई ऋतु से?

मैंने कहा- पहले तुम बताओ, कल वो तुम्हें क्या बोल रही थी?

पायल ने मेरी तरफ देखा और नाराज होते हुये बोली- “भाई जब तक आप नहीं बताओगे मैं भी नहीं बताऊँगी…”

मैंने पायल को अपनी तरफ खींच लिया और अपने सीने से लगाकर बोला- “जान, क्यों नाराज हो रही हो अपने भाई से? चल बताता हूँ…” और जो दीदी और ऋतु के साथ बातें हुई थी सब बता दिया।

पायल मेरी बातें सुनकर सोच में पड़ गई और कुछ देर के बाद बोली- भाई, अगर मैं आपको एक काम कहूं तो आप करोगे क्या?

मैं- हाँ पायल, क्यों नहीं? तुम बताओ तो सही क्या काम है?

पायल- “भाई, आप कसम खाओ… जिससे आप सबसे ज्यादा प्यार करते हो उसकी कसम खाओ कि आप मेरी बात मानोगे…”

मैं- अरे यार, जब मैंने बोल दिया है कि मैं तुम्हारी बात मानूंगा तो फिर कसम कहाँ से आ गई?

पायल- “भाई, आप मेरे इतमीनान के लिए ही कसम खा लो प्लीज़्ज़…”

मैं- “ओके बाबा, और पायल के सर पे ही हाथ रखकर कसम खा ली…” जिससे पायल भी खुश हो गई।

पायल- “थैंक्स भाई, आपने आज ये तो बता दिया कि आप सबसे ज्यादा मेरे साथ प्यार करते हो…” और मेरे साथ और भी ज्यादा लिपट गई और मुझे किस करने लगी।

कुछ देर के बाद मैंने पायल को खुद से अलहदा किया और उसे बेड पे बिठा दिया और कहा- “हाँ, अब बताओ क्या बात थी? जिसके लिए तुमने मुझसे कसम ली है…”

पायल- “भाई, मैं चाहती हूँ कि आप पहली बार खुद करो ऋतु के साथ…”


 मैं हैरानी से पायल की तरफ देखते हुये बोला- पायल, ये क्या बोल रही हो तुम? तुम्हें पता है कि इस काम के लिए घर में कोई भी नहीं मानेगा?

पायल- हाँ भाई पता है, लेकिन आपको उसकी गाण्ड मारने की इजाजत तो मिल ही चुकी है ना उसके बाद अगर मोका मिले तो चोद डालो साली को, बाद में कोई क्या कर सकता है?

मैं पायल की बात सुनकर अंदर से खुश हो गया। क्योंकि बात तो पायल ने ठीक ही कही थी कि जब फुद्दी खुल ही गई हो तो कोई क्या कर सकता है? लेकिन पायल से बोला- लेकिन पायल, तुम ऐसा क्यों चाहती हो?

पायल- “भाई, मैं आपसे कुछ भी नहीं छुपाऊँगी। लेकिन अभी आप मुझसे कुछ नहीं पूछो प्लीज़्ज़…”

मैं- ठीक है पायल, मैं कोशिश करूंगा कि ये काम कर सकूं…” और वहाँ से उठकर सीधा अपने रूम में आ गया।

रूम में आया तो अम्मी ऋतु के साथ मेरे बेड पे बैठी हुई थी। मुझे देखते ही अम्मी ने कहा- “आलोक बेटा, मैं चाहती हूँ कि आज से तुम अपनी छोटी बहन की रोजाना मालिश कर दिया करो ताकि इसका जिश्म भी थोड़ा सेट हो जाए…”

मैंने ऋतु की तरफ देखा जो कि सर को झुकाकर अपनी उंगलियों को मरोड़ रही थी और कहा- “जी अम्मी, जैसे आप कहो। मैं ऋतु की रोजाना मालिश कर दिया करूंगा…”

मेरी बात सुनकर अम्मी मेरे रूम से निकल गई और जाते वक़्त आँख भी मार गई जिससे मैं समझ गया कि अम्मी क्या चाहती हैं। अम्मी के जाने के बाद मैंने ऋतु से कहा- “चलो अलमारी से कोई चादर निकालो और बेड पे बिछा दो ताकि तेल से बेडशीट खराब ना हो जाये…”

ऋतु फौरन उठी और अलमारी से एक चादर निकालकर बेड पे बिछाने लगी और मैं वहाँ खड़ा उसे ये सब करता देखता रहा।

चादर बिछाने के बाद ऋतु अपना सर झुकाकर बेड के पास ही खड़ी हो गई। लेकिन अब मुझे समझ में नहीं आ रहा थी कि मैं क्या करूं? और ऋतु को क्या कहूं? खैर मैंने अपनी हिम्मत बढ़ाई और वापिस मुड़ा और दरवाजा लाक कर दिया और फिर अलमारी से एक चादर निकालकर अपने कपड़े उतार के चादर बाँध ली और ऋतु की तरफ देखे बिना ही लाइट आफ कर दी जिससे रूम में काफी अंधेरा हो गया था। लेकिन खिड़की से आने वाली रोशनी भी इतनी थी कि हम एक दूसरे को देख सकते थे।

मैंने ऋतु से कहा- “चलो अपने कपड़े उतारो और बेड पे लेट जाओ ताकि मैं तुम्हारी मालिश कर दूँ…”

ऋतु ने मेरी बात सुनी लेकिन कुछ नहीं बोली और सर झुकाकर चुपचाप खड़ी रही तो मैं आगे बढ़ा और जाकर ऋतु के कंधों पे अपने हाथ रख दिए और कहा- “देखो ऋतु, तुम बहन हो मेरी और मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूँ। मुझसे इतना क्यों शर्मा रही हो? चलो शाबाश जल्दी से कपड़े उतारो अपने…”

जब ऋतु फिर भी नहीं हिली तो मैंने कहा- “चलो ऐसा करो कि तुम यहाँ अपने कपड़े उतार के अपने ऊपर एक चादर ले लो मैं तब तक बाथरूम से होकर आता हूँ…”

जब मैं बाथरूम से वापिस आया तो देखा कि ऋतु बेड पे उल्टी लेटी हुई थी और उसके ऊपर एक चादर थी जो कि उसने मुझसे शरम की वजह से ओढ़ रखी थी और उसके कपड़े बेड के साथ ही रखी चेयर पे पड़े हुये थे। मैंने बगल से तेल की बोतल उठा ली और ऋतु के पास बेड पे बैठ गया और अपने काँपते हाथों से ऋतु के ऊपर पड़ी चादर को हटाने लगा लेकिन ऋतु ने ऊपर के दोनों किनारे अपने हाथों में पकड़ रखे थे जिससे चादर नीचे नहीं हुई तो मैंने बगल से पकड़कर चादर उसके ऊपर से हटा दी जिससे ऋतु का नंगा और सफेद जिश्म और उसकी सेक्सी गाण्ड मेरी आँखों के सामने बिल्कुल नंगी हालत में आ गई जो कि मुझे पागल कर देने के लिए काफी थी।

अब मैंने अपना हाथ बढ़ा के ऋतु की गाण्ड पे रखा तो मेरी छोटी और मासूम बहन जिसको हम सब घर वाले इस गंदगी में घसीट रहे थे एकदम से काँप गई।

अब मैंने अपना हाथ अपनी बहन की गाण्ड से हटा लिया और तेल की बोतल से तेल उसकी कमर और गाण्ड पे गिराने लगा। क्योंकि तेल हल्का सा ठंडा था जिससे ऋतु के जिश्म में झुरझुरी सी हुई लेकिन फिर से ऋतु आराम से लेट गई।

अब मैं ऋतु की बगल में बैठा अपने हाथों को आजादी से अपनी छोटी बहन की कमर और गाण्ड पे घुमाने लगा और तेल मलने लगा। मेरे इस तरह मालिश करने से ऋतु को अब सकून के साथ मजा भी आ रहा था, जिसका अंदाजा मुझे उसकी हल्की आवाज में निकलने वाली सिसकियों से हो रहा था।

कुछ देर तक इसी तरह तेल मलने के बाद मैं उठा और ऋतु की टाँगों के ऊपर घुटनों के करीब बैठ गया और अपने हाथों से उसकी गाण्ड को अच्छे से मसलने लगा जिससे कभी मेरे हाथ अपनी छोटी बहन की गाण्ड के सुराख को भी छू जाते लेकिन ऋतु अब किसी भी किश्म का ऐतराज नहीं कर रही थी लेकिन हाँ मजा जरूर ले रही थी अपने बड़े भाई के हाथों अपनी गाण्ड की मालिश करवाकर। फिर मैंने अपने हाथ ऋतु की गाण्ड से हटा लिए और उसके कंधों की तरफ बढ़ा दिए, जिसके लिए मुझे भी घुटनों से ऊपर होना पड़ा जिससे मेरा खड़ा और पूरा टाइट लौड़ा अपनी बहन की गाण्ड को छूने लगा तो मैंने अपने लण्ड के ऊपर पड़े कपड़े को हटा दिया। जिससे मेरा लण्ड ऋतु की गाण्ड को सही से छुआ तो हम दोनों बहन भाई के मुँह से एक साथ आअह्ह… की हल्की सी आवाज निकल गई। अब मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा अपनी बहन की गाण्ड के सुराख पे सेट किया और उसकी कमर और कंधों की मालिश करने लगा जिससे ऋतु के साथ मेरा भी मजे से बुरा हाल हो रहा था।


 मैंने अचानक ऋतु से कहा- ऋतु मजा आ रहा है ना मालिश में?

ऋतु ने भी बस- “हाँ भाई, बहुत अच्छा लग रहा है… बस इसी तरह करो, रुको नहीं प्लीज़्ज़…”

ऋतु की बात सुनकर मैं समझ गया कि लौंडिया तैयार है तो मैं थोड़ा पीछे हटा और ऋतु की गाण्ड को अपने दोनों हाथों से थोड़ा खोल दिया और ठीक उसकी गाण्ड के सुराख पे अच्छा खासा थूक फेंक दिया। एक तो तेल और दूसरा थूक लगाकर मैंने फिर से अपने लण्ड को ऋतु की गाण्ड के सुराख पे रख दिया और हल्का सा दबाने लगा।

लण्ड को ऋतु की गाण्ड पे दबाते ही मेरे लण्ड का आधा सुपाड़ा ऋतु की गाण्ड को खोलकर अंदर घुस गया तो ऋतु के मुँह से सस्सीई… की हल्की सी आवाज निकली। लेकिन उसने कुछ बोला नहीं तो मैंने फिर से दबाव बढ़ा दिया। जिससे मेरे लण्ड का सुपाड़ा अपनी छोटी बहन की गाण्ड को खोलकर घुस गया। सुपाड़े के घुसने के बाद मैं वहीं रुक गया। क्योंकि मैं जानता था कि ऋतु इस वक़्त काफी तकलीफ में होगी। कुछ देर के बाद मैं फिर से अपने लण्ड को जोर देने लगा जिससे मेरा लण्ड फिर से आगे जाने लगा।

और करीब एक इंच और घुसा होगा कि ऋतु के मुँह से- “सस्स्सीई… भाई प्लीज़्ज़… रुको…” की आवाज निकल गई।

जिसे सुनते ही मैं वहीं रुक गया और ऋतु का दर्द खतम होने का इंतेजार करने लगा। कोई एक मिनट के बाद ही ऋतु ने अपने जिश्म को ढीला छोड़ दिया तो मैंने एक हल्का सा झटका दिया जिससे मेरा कोई 3” के करीब लण्ड अपनी बहन की गाण्ड में चला गया। इतना लण्ड घुसते ही ऋतु ने- “आऐ माँ… बस करो भाई… और नहीं करना… प्लीज़्ज़… मैं मर गई… ऊओ बस भाई… अभी निकालो बाहर दर्द हो रहा है…”

मैं अब वहीं रुका रहा और ऋतु के कंधों और कमर पे हाथ घुमाने लगा और कहा- “बस मेरी जान, आज इससे ज्यादा नहीं करूंगा। डरो नहीं बस आज के लिए इतना ही बर्दाश्त कर लो। ठीक है…”

मेरी बात सुनकर ऋतु ने हाँ में सर हिला दिया तो मैंने अपने लण्ड को वहीं जितना अंदर जा चुका था अंदर-बाहर करने लगा जिससे मैं कोई 3 मिनट में ही ऋतु की गाण्ड में ही फारिग़ हो गया, क्योंकि ऋतु की गाण्ड बड़ी टाइट थी और ऐसे लग रहा था कि जैसे वो मेरे लण्ड को भींच रही हो।

फारिग़ होने के बाद ऋतु ने उठकर अपनी गाण्ड को अच्छी तरह साफ किया और अपने कपड़े पहनकर मेरे रूम में से निकल गई।



 कहानी जारी है.

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FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -19

FUN-MAZA-MASTI

 घर का बिजनिस -19

 मैं पायल की बात मान गया और वहाँ रखी एक चेयर पे बैठ गया और उन दोनों के लिए शराब बनाने लगा। शराब का एक और पेग लगाने के बाद समीर फिर से पायल के साथ लिपट गया और किस करने लगा और उसकी फुद्दी में उंगली घुसाने लगा।

ये नजारा देखकर मेरा लण्ड जो कि पहले से ही खड़ा था मेरी शलवार को फाड़कर बाहर निकलने के लिए बेचैन होने लगा। कुछ देर की चूमा चाटी के बाद समीर बेड पे लेट गया और पायल को बोला- “चल साली चूस मेरे लौड़े को…” और पायल को पकड़कर उसका सर अपने लण्ड की तरफ दबा दिया।

मेरी बहन ने एक बार आँखें उठाकर मेरी तरफ देखा और हल्का सा मुश्कुरा उठी और समीर के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी और साथ ही उसकी गोलियों को अपने हाथों से सहलाने लगी। कुछ देर तक समीर पायल के सर के बालों में हाथ फेरता रहा और- “आअह्ह… हाँ… साली उन्म्मह… मजा आ गया…” की आवाज करता रहा।

फिर उसने पायल के मुँह से अपना लण्ड निकाल लिया और पायल को झटके से बेड पे गिरा दिया और मेरी बहन की टाँगों को उठा लिया और उसकी फुद्दी के साथ अपना लण्ड लगाते हुये झटका दिया और पूरा लण्ड मेरे सामने मेरी बहन की फुद्दी में घुसा दिया। समीर का लण्ड भी मेरे लण्ड जितना ही बड़ा और मोटा था जिससे पायल पूरी तरह मजा ले रही थी और- आऐ… उन्म्मह… भाई ऊओ देखो कितना मजा आ रहा है?

मैं अब पूरे मजे से अपनी छोटी बहन को समीर से चुदवाते हुये देख रहा था जो कि समीर के हर झटके के साथ ही आअह्ह… उन्म्मह… और तेज़्ज़ करो… ऊओ… हाँ… अब ठीक है…” की आवाजें कर रही थी और अपनी गाण्ड को समीर के लण्ड की तरफ उछाल रही थी।

अब पायल बुरी तरह समीर से लिपट गई थी और अपनी आँखें बंद किए मजे से चुदवा रही थी और मेरा गला सूख चुका था। अपनी बहन को इस तरह चुदवाते हुये देखकर अचानक मेरे दिल में आया कि क्यों ना एक पेग शराब का ही और लगा लूँ और वहाँ से शराब की तरफ मुड़ा तो मेरी नजर ऋतु पे पड़ी जो कि दरवाजा में खड़ी आँखें फाड़े पायल को इस तरह चुदवाते हुये देख रही थी।

जैसे ही मेरी नजर ऋतु की तरफ गई तो उसने भी इस तरह मुझे अपनी तरफ देखते हुये देख लिया और वो सटपटा गई और वहाँ से भाग गई।

एक बार तो दिल में आया कि मुझे ऋतु के पास जाना चाहिए लेकिन फिर ये सोचकर कि चलो आखिर उसने भी तो एक दिन इसी तरह चुदवाना ही है ना… कोई बात नहीं और वहाँ ही बैठा रहा और पायल की चुदाई देखने लगा। कुछ देर के बाद पायल और समीर फारिग़ हो गये।

तो पायल उठी और बाथरूम में घुस गई तो समीर ने मेरी तरफ देखा और बोला- “यार तेरी बहन है बड़ी गरम माल, साली की फुद्दी में बड़ी गर्मी है…”

उसकी बात सुनकर मैं बस हल्का सा मुश्कुरा दिया और कुछ नहीं बोला। फिर पायल के बाद समीर बाथरूम में गया और पायल अपनी ड्रेस पहनकर घर की तरफ चली गई और मैं समीर को रवाना करने के लिए वहीं रुक गया।

समीर को रवाना करने के बाद जब मैं घर आया तो देखा कि अम्मी और बुआ सोफे पे बैठी हुई मेरा ही इंतेजार कर रही थी। मैंने अम्मी के पास जाकर कहा- ऋतु कहाँ गई है?

अम्मी- अपने रूम में घुस गई है… क्यों कुछ हुआ है क्या?

मैं- अम्मी, वो ऋतु ने वहाँ गेस्टरूम में पायल को करवाते हुये देख लिया है।

अम्मी- ओह्ह्ह… तो इसीलिए भागती हुई आई है। मैं भी कहूं कि इसे हुआ क्या है?

बुआ- भाभी, आओ पता तो करें कि ऋतु ने इस तरह रूम में क्यों बंद होकर बैठ गई है?

अम्मी- नहीं तुम बैठो यहाँ, आलोक को ही उसके पास जाने दो। वो खुद ही बात करेगा। हम इसकी किसी बात में नहीं बोलेंगी।

मैं- लेकिन अम्मी, मैं क्या बात करूंगा ऋतु के साथ और किस तरह?

अम्मी- देखो आलोक हम यहाँ जितनी भी ओरतें हैं, तुम्हारी जिम्मेदारी हैं कि तुम किससे और क्या करवाते हो? ये हमारा काम नहीं है जाओ और देखो कि ऋतु क्या चाहती है?

मैं- ठीक है अम्मी, फिर बाद में मुझे नहीं बोलना कि ये मैंने क्या कर दिया?

अम्मी- हम कुछ नहीं बोलेंगे तुम्हें।

मैं अम्मी और बुआ के पास से उठा और ऋतु के रूम की तरफ चल पड़ा लेकिन सच तो ये था कि मैं खुद भी काफी परेशान था कि आखिर अपनी सबसे छोटी बहन के साथ क्या बात करूंगा? और किस तरह? जब मैं ऋतु के रूम में घुसा तो देखा की रूम में कोई भी नहीं है। तो मैं रूम में बने हुये वाश-रूम की तरफ गया और खटखटाने लगा तो मुझे अंदर से उन्म्मह… की हल्की सी आवाज सुनाई दी। जिसे सुनकर मैं चौंक गया और साथ ही हल्का से जोर दिया जिससे वाश-रूम का दरवाजा खुल गया तो जो नजारा मैंने अपनी आँखों के सामने देखा उससे मेरे होश ही उड़ गये।


 वाश-रूम में उस वक़्त ऋतु बिल्कुल नंगी फर्श पे लेटी अपनी टाँगों को खोलकर अपनी दो उंगलियों को अपनी फुद्दी में अंदर-बाहर कर रही थी और दरवाजा खुलने की वजह से चौंक गई थी।

जैसे ही ऋतु की नजर मुझ पे पड़ी तो उसके मुँह से बस “भाई आप” की आवाज ही निकल सकी। ऋतु की आवाज से मुझे कुछ होश आया लेकिन मैंने अपनी आँखों को उसकी फुद्दी जो कि उसने अपनी रानों में दबा ली थी से नहीं हटाया और वहीं देखता रहा और थोड़ा मुश्कुरा दिया और बोला- “सारी बेटा मुझे नहीं पता था कि तुम यहाँ जरा व्यस्त हो…” और उसकी तरफ एक मुश्कान देता हुआ वापिस हो गया।

ऋतु के रूम से मैं सीधा अपने रूम में आया और आकर बेड पे लेट गया और ऋतु की छोटी और कम उम्र फुद्दी जिसपे हल्के भूरे बाल भी थे, के बारे में सोचने लगा कि क्या वो चुदाई के लिए तैयार है?

मुझे अपने रूम में आए हुये अभी कोई 10 मिनट ही हुये थे कि अम्मी भी मेरे पास ही आ गई और आते ही बोली- आलोक, क्या बात है? बेटा किन सोचों में गुम हो?

मैंने अम्मी को ऋतु के रूम में जो कुछ भी देखा था सब बता दिया तो अम्मी ने एक हूंन की आवाज निकाली और कहा- “लगता है कि ऋतु भी तैयार हो चुकी है… अब उसके लिए भी कोई इंतजाम करना ही पड़ेगा…”

मैंने अम्मी को कोई जवाब नहीं दिया और उठकर पायल के रूम की तरफ चला गया क्योंकि मेरा लण्ड फटने के करीब था और इसे अब मैं अपनी बहन को चोदकर ही ठंडा करना चाहता था। जैसे ही मैं पायल के रूम में आया तो वहाँ पायल के साथ ऋतु भी थी और वो कुछ बातों में लगी हुई थी और मुझे देखते ही चुप हो गई।

पायल ने मेरी तरफ देखा और कहा- हाँ भाई, कहो क्या बात है? कोई काम था क्या?

मैंने हाँ में सर हिला दिया और कहा- “ऐसा करो मेरे रूम में आ जाओ काम है तुम्हारे साथ…”

पायल समझ गई कि मुझे अभी उसके साथ क्या काम हो सकता है इसीलिए फौरन बोल पड़ी- “भाई, आप अभी दीदी से अपना काम करवा लो, मैं थक गई हूँ। मेरे साथ बाद में कर लेना प्लीज़्ज़…”

मैं वहाँ से फिर अपने रूम में आ गया क्योंकि मेरा मूड खराब हो गया था। बाकी का सारा दिन भी गुजर गया और दिन में बुआ और पायल के साथ अम्मी ने भी एक बार चुदवा लिया था।

रात का खाना खाने के बाद दीदी मेरे रूम में आ गई और बोली- “आलोक, कुछ बात करनी है तुमसे…”

मैंने कहा- हाँ दीदी, आओ यहाँ बैठो मेरे पास, बोलो क्या बात है?

दीदी- “भाई, आज पायल ने मुझे बताया है कि ऋतु भी करवाना चाहती है…”

मैं- “अच्छा… तो फिर अच्छी बात है, बापू को बता दूँगा… वो उसका भी कोई इंतजाम कर देंगे…”

दीदी- “नहीं भाई, हम सबने ये सोचा है कि उसे पूरी तरह ट्रैनिंग दें क्योंकि अभी उसकी उम्र काफी कम है और वो जब भी किसी के साथ सोएगी तो उसे पागल कर देगी…”

मैं- ठीक है, जैसे आप लोगों की मर्ज़ी। लेकिन ट्रैनिंग देगा कौन? क्या आप या बुआ?

दीदी- “नहीं भाई, उसे आप ट्रैनिंग दोगे…”

मैं- क्या दीदी? मैं ऋतु को भला कैसे ट्रैनिंग दे सकता हूँ? मुझे क्या पता है कि किस तरह ट्रैनिंग होनी है?

दीदी- “भाई, तुम उसे लण्ड चुसाई का एक्सपर्ट बनाओगे और जरा उसकी मालिश भी कर दिया करोगे…”

मैं- लेकिन दीदी, इस तरह तो अगर मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने ही कुछ कर डाला तो क्या होगा?

दीदी- तुम उसकी गाण्ड मार सकते हो, लेकिन फुद्दी नहीं समझे?

मैं- “ठीक है बाजी, जैसे आप कहो…” और इसके साथ ही दीदी को अपनी तरफ खींच लिया और बोला- “पहले आप तो मुझे ट्रंड करो ना…”

वो रात मैंने दीदी की चुदाई में गुजारी। सुबह जब मैं उठा तो 10:00 बज चुके थे और मैं इसी तरह बेड पे नंगा ही पड़ा हुआ था। मैं उठा और नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। मैंने नहाकर कपड़े पहन लिए और नाश्ते के लिए बाहर निकला तो देखा कि अरविंद साहब भी आए बैठे थे और दीदी को सोफे पे ही किस कर रहे थे और ऋतु रूम से उन दोनों के लिए शराब लेकर आ रही थी। जो कि उसने टेबल पे रख दी और मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुश्कुरा दी और सर झुकाकर वहाँ से चली गई।
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कहानी जारी है







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FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -18

FUN-MAZA-MASTI

 घर का बिजनिस -18

 अम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- देखो बेटा, ऐसा है कि तुम अभी जाओ अपने रूम में इस पे हम बात करेंगे। लेकिन अभी नहीं ठीक है।

अम्मी की बात सुनकर मैंने हाँ में सर हिला दिया और वहाँ से उठकर अपने रूम में आ गया और एक लूज निक्कर पहन ली और आराम करने के लिए लेट गया। कोई एक घंटे के बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला और अम्मी अंदर आ गई और अपने पीछे दरवाजे को भी बंद कर दिया। और मेरे पास आकर बेड पे मेरे साथ ही लेट गईं और मुझे अपनी तरफ खींच लिया और मेरे बालों में उंगलियां घुमाने लगी।

मैंने कहा- क्यों अम्मी, क्या बात है? आज आप इतने दिनों के बाद मेरे रूम में? खैर तो है ना?

अम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- आलोक बेटा, वो मैंने ऋतु के बारे में तुम्हारे साथ बात करनी थी।

इसीलिए सोचा कि आज मैं यहाँ तुम्हारे पास ही सो जाती हूँ और बात भी कर लूँगी।

मैंने कहा- “जी अम्मी, बोलो आप क्या बताना चाहती हो? जब कि मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ कि आप जिसके साथ जो करना चाहती हो या करवाना चाहती हो मुझे कोई ऐतराज नहीं है बस मैं ये चाहता हूँ कि किसी के साथ जोर-जबरदस्ती वाला काम ना हो कि हमें कल को जलील होना पड़े…”

अम्मी ने मेरी पूरी बात सुनी और बोली- आलोक, हम भी ऋतु को ये सब इसीलिए दिखा रहे हैं कि वो जितना इस माहौल को देखेगी, अपने अंदर की गर्मी से मजबूर होकर खुद ही बोल देगी कि वो भी हमारे साथ इस काम में आना चाहती है।

मैंने कहा- अम्मी, अगर ऋतु ने नहीं कहा और वो आपके कहने से भी इस काम के लिए नहीं मानी तो आप क्या करोगी?

अम्मी ने कहा- आलोक, अगर वो नहीं मानी तो फिर हम उसकी शादी करके उसे खुद से दूर कर देंगे, जहाँ उस पे हमारा साया भी ना पड़े।

अम्मी की बात सुनकर मैं शांत हो गया और अम्मी को लिपट गया।

तो अम्मी ने भी मुझे अपने साथ भींच लिया और किस करने लगी और साथ ही मुझे दबाने लगी। मैं भी अम्मी की किस के जवाब में अम्मी की जुबान को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और एक हाथ से अम्मी की गाण्ड को दबाने लगा और सहलाने लगा। कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को किस करते रहे और फिर मैंने अम्मी को पीछे हटा दिया और खुद अम्मी की कमीज को निकाल दिया और साथ ही शलवार को भी तो अम्मी मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा में ही रह गई क्योंकि अम्मी पैंटी नहीं पहनती थी।

और इस वक़्त मेरी माँ जिसने मुझे पैदा किया था मेरे सामने सिर्फ़ एक ब्रा में लेटी मेरी तरफ बड़ी प्यार भरी नजरों से देख रही थी। अम्मी को इस तरह देखता पाकर मैं अम्मी की ब्रा पे झपट पड़ा और एक ही झटके से अम्मी की चूचियों को ब्रा से निकाल दिया और अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा। मेरे इस तरह झपटने से अम्मी के मुँह से से की हल्की आवाज निकली और इसके साथ ही अम्मी ने मुझे अपने चूचियों के साथ दबा लिया और बोली- “आअह्ह… बेटा पी लो अपनी माँ का दूध उंनमह…”

अब मैं अम्मी की चूचियों को चूसने के साथ दबा भी रहा था जिससे अम्मी काफी गरम हो रही थी और सिसकियां भर रही थी और मेरे सर को अपनी चूचियां के साथ दबा रही थीं। कुछ देर के बाद मैंने अपना हाथ अम्मी के चूची से हटा लिया और अम्मी की फुद्दी की तरफ बढ़ने लगा और फिर अम्मी की गरम और तपती हुई फुद्दी के ऊपर रख दिया जो कि हल्की से गीली भी हो रही थी। मेरे हाथ लगाते ही अम्मी के मुँह से ऊओ आलोक, उन्म्मह… की आवाज निकल गई।

अम्मी के मुँह से निकालने वाली आवाजें आहिस्ता-आहिस्ता तेज हो रही थीं। मैं अम्मी की चूचियों को छोड़कर सीधा फुद्दी की तरफ आया और अपना मुँह अम्मी की फुद्दी के साथ लगा दिया और अपनी जुबान को बाहर निकालकर अम्मी की फुद्दी में घुमाने लगा जिससे अम्मी मचल उठी। मेरे इस तरह अम्मी की फुद्दी में जुबान घुमाने से अम्मी की हालत और भी बुरी हो गई और वो तड़प के थोड़ा उठी और अपने हाथों से मेरा सर अपनी फुद्दी पे दबा लिया और बोली- “आअह्ह… आलोक, चाट अपनी माँ की फुद्दी को मादरचोद… उन्म्मह… हाँ… बेटा खा जाओ मेरी फुद्दी को ऊओ… आलोक ये क्या कर दिया है तूने हरामी?”

अम्मी के मुँह से इन सिसकियों और गालियों की आवाज़ों ने तो जैसे मुझे दीवाना कर दिया था कि मैं अब अपनी जुबान से अम्मी की फुद्दी को चाटने के साथ अम्मी की फुद्दी में घुसा भी रहा था और साथ ही हल्का सा काट भी लेता जिससे अम्मी और भी ज्यादा तड़प जाती।

अब अम्मी के मुँह से- आअह्ह… आलोक बेटा ऊओ… मैं गई… कमीने खा जा अपनी माँ की फुद्दी को… ऊओाअ… आलोक मैं गई…” और इसके साथ ही अम्मी के जिश्म को जोर का झटका लगा और अम्मी ने मेरे सर को अपनी रानो में दबा लिया और अम्मी की फुद्दी से पानी का सैलाब सा निकला और मेरे मुँह में गया जिसे मैं चाट गया और फिर उठा और अपने लण्ड को अम्मी की फुद्दी के साथ लगा दिया और रगड़ने लगा। अब मैं अपने लण्ड को अम्मी की फुद्दी के ऊपर रगड़ता और हल्का सा दबा के अम्मी की फुद्दी में घुसा देता और फिर बाहर निकाल लेता और रगड़ने लगता।


 अम्मी ने जब देखा कि मैं अंदर नहीं घुसा रहा और बस ड्रामा कर रहा हूँ तो अम्मी ने कहा- “बेटा, क्यों तंग कर रहा है अपनी माँ को? अब घुसा भी दे ना…”

अम्मी की बात सुनते ही मैंने अपनी पूरी ताकत से झटका दिया जिससे मेरा लण्ड अम्मी की फुद्दी को खोलता हुआ जड़ तक घुस गया और तभी मैंने अम्मी के घुटनों को अम्मी की कंधों की तरफ मोड़ के पूरी तरह दबा दिया जिससे मेरा लण्ड अम्मी की फुद्दी में जड़ तक घुस गया।

लण्ड के इस तरह घुसने से अम्मी के मुँह से- “आऐ आलोक, आराम से करो ये क्या कर रहे हो? मारना है क्या मुझे? बेटा दर्द होता है इस तरह, एक तो तेरा बहुत बड़ा है प्लीज़्ज़… आराम से करो…”

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और अम्मी की टाँगों को उसी पोजीशन में रखा और एक बार फिर से अपने लण्ड को सुपाड़े तक बाहर निकाला और फिर से अपने जिश्म का सारा वजन अपने लण्ड पे डाल दिया जिससे मेरा लण्ड अम्मी की बच्चेदानी तक टकराया तो अम्मी दर्द की वजह से तड़प उठी।

मेरे इस झटके से अम्मी के मुँह से- “ऊओई आलोक, क्या कर रहा है? फाड़नी है क्या? कमीने, मैं माँ हूँ तेरी… रंडी नहीं जो इस तरह चोद रहा है आअह्ह… प्लीज़्ज़… बेटा आराम से करो…”

मुझे भी अम्मी को इस तरह चोदने में मजा आ रहा था तो मैं भी इस तरह अम्मी की फुद्दी में अपने लण्ड को झटके देता रहा और बोला- “हाँ पता है तू मेरी माँ है, रंडी नहीं है… पर साली तू किसी रंडी से क्या कम है… हाँ…” और बार-बार झटके देता रहा।

अब अम्मी को भी इतना दर्द नहीं हो रहा था बलकि इसकी जगह वो मुझे अपने साथ लिपटा के चुदाई का मजा ले रही थी और साथ ही- “हाँ आलोक, अभी अच्छा लग रहा है बेटा… फाड़ दे अपनी माँ की फुद्दी को… उन्म्मह… ऊओ… आलोक मेरा बच्चा, तू कितना अच्छा है बेटा अपनी माँ का कितना ख्याल रखता है…”

अब मैं अपने अंत पे आ चुका था और अम्मी के ऊपर से थोड़ा ऊपर उठा और तेज झटके लगाने लगा जिससे अम्मी भी जरा ज्यादा सिसकने लगी और- “हाँ आलोक, बस हो गया मेरा… आअह्ह… मैं गई बेटा…” की आवाज के साथ ही अम्मी की फुद्दी में पानी की वजह और मेरे धक्कों की वजह से पिकचाक्क-पीकचाक्क की आवाज आने लगी और इसके साथ ही मैं भी अम्मी की फुद्दी में ही फारिग़ हो गया और वहीं गिर के लंबी-लंबी सांसें लेने लगा।

मैं उस रात अम्मी को एक बार ही चोद के इतना थक गया था िहोश ही नहीं रहा कि मैं कब सो गया। सुबह के 9:00 बजे मेरी आँख खुली तो देखा कि मैं अभी तक नंगा ही पड़ा हुआ सो रहा था और अम्मी अब मेरे रूम में नहीं थी। मैं उठा और अपने रूम में ही बने हुये बाथरूम में घुस गया और नहाकर ड्रेस पहनकर बाहर आया तो बापू और बुआ बैठे बातें कर रहे थे।

मुझे देखते ही बुआ ने कहा- लो भाई जान, आपका बेटा भी उठ गया है।

बापू भी मुझे आता हुआ देख चुके थे और जैसे ही मैं उन लोगों के पास जाकर बैठा बापू ने मुझसे कहा- हाँ भाई आलोक, कैसी गुजर रही है?

मैं बापू की बात से थोड़ा शर्मा गया और बोला- अच्छी गुजर रही है।

बुआ हँसते हुये- अच्छा, तो फिर क्या सोचा है तुमने ऋतु के बारे में?

मैं- बुआ बात ये है कि अगर ऋतु की अपनी मर्ज़ी हो तो अच्छी बात है लेकिन उससे जबरदस्ती नहीं करे कोई।

बापू- हाँ क्यों नहीं, हम भी तो ये ही चाहते हैं कि वो अपनी मर्ज़ी से करे।

बुआ- हाँ आलोक, इसीलिए तो हमने सोचा है कि ऋतु के सामने ज्यादा से ज्यादा फ्री हुआ जाए ताकि वो भी घर के नये माहौल को अच्छी तरह समझ के फैसला करे।

मैं- ठीक है बुआ, जो आप लोगों की मर्ज़ी… लेकिन अभी नाश्ता तो करवा दें बड़ी भूख लगी है।

बुआ- थोड़ा सबर करो, अंजली नाश्ता बना रही है फिर करते हैं।

मैं- क्यों बुआ? आप लोगों ने भी नहीं किया नाश्ता अभी तक?

बुआ- हेहेहेहे क्यों तुम ही रात को देर से सोए थे, क्या हम नहीं सो सकते देर से?

मैं बुआ की बात समझ गया और हँसते हुये बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं? आपका तो हक है देर से सोना। और वो अम्मी और ऋतु कहाँ हैं नजर नहीं आ रहे…”

बापू- वो… तुम्हारी माँ ऋतु को अपने साथ लेकर अभी निकली है। बोल रही थी कि बाजार जाना है लड़कियों के लिए अच्छे कपड़े नहीं हैं।

मैं- लेकिन बापू, अभी तो बाजार पूरी तरह से खुले भी नहीं होंगे?

बुआ- अरे यार, भाभी के जाते तक खुल जायेंगे और वो जो कुछ लाना है लेकर जल्दी वापिस आ जायेंगी।
तभी दीदी भी नाश्ता तैयार होने का बताने के लिए हमारे पास आ गई और बोली- चलो सब लोग पहले नाश्ता कर लो।

फिर हम सब वहाँ से उठे और नाश्ता करने के लिए टेबल पे बैठ गये और खामोशी से नाश्ता करने लगे। नाश्ता करने के बाद बापू को कहीं से काल आई तो वो घर से निकल गये। तो मैं भी उठकर घर से निकल आया और घूमने लगा।

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 क्योंकि इस इलाके में मेरा कोई दोस्त नहीं था और ना ही कोई जानने वाला तो मैं ज्यादा देर बाहर नहीं रहा और घर आ गया। तब तक अम्मी और ऋतु भी आ चुकी थीं। जैसे ही मैं घर में दाखिल हुआ पायल ने मुझे देखकर कहा- “भाई, वो बापू का फोन आया था। बोल रहे थे कि दो बजे तक उनका कोई दोस्त आएगा उसे गेस्टरूम में बिठा देना और जो माँगे मना नहीं करना…”

मैं समझ गया कि कौन सा दोस्त होगा। मैंने हाँ में सर हिला दिया और अपने रूम में चला गया। दो बजे से पहले ही मैं गेस्टरूम में चला गया और उस आदमी का इंतेजार करने लगा। वो आदमी आया तो तब तक 2:15 हो चुके थे और उसने आते ही मेरे साथ हाथ मिलाया और बोला- “जी मुझे किसी ने यहाँ का पता देकर भेजा था और बोला था कि यहाँ मेरा काम हो जाएगा…”

मैंने कहा- जी अगर आपको किसी ने भेजा है तो उसने मुझे भी बता दिया है। क्या आप अपना नाम बतायेंगे मुझे?

उसने मुझे अपना नाम समीर बताया। उसकी उम्र कुछ ज्यादा तो नहीं थी लेकिन 27 साल के करीब तो थी ही। मैंने उसे बिठाया और पूछा- जी अब बतायें कि आप क्या पियोगे?

समीर ने कहा- “जो भी मिल जाए… जिससे जरा मूड बन जाए…”

मैंने उसकी बात को समझा और उसे बैठने का बोलकर घर आ गया और पायल को जो कि पहले से ही तैयार बैठी हुई थी बोला- “तुम जाकर उसके पास बैठो…” और ऋतु की तरफ देखकर कहा- “तुम कुछ देर के बाद अम्मी से एक बोतल और 3 गिलास लेकर आना…”

ऋतु जो कि पहले ही कुछ परेशान नजर आ रही थी मेरी बात सुनकर हकला गई और बोली- “भाई… वा… वो… मैं क…क्या करूंगी वहाँ?

मैंने कहा- “कुछ नहीं, बस जो बोला है लाकर दे जाना…” और बस इतना बोलकर मैं पायल के पीछे ही गेस्टरूम में आ गया जहाँ पायल समीर के साथ लिपट के बैठी हुई थी और समीर उसकी चूचियों को मसल रहा था।

समीर ने जब मुझे देखा तो अपना हाथ पायल की चूचियों से हटा लिया और खामोश होकर बैठ गया। मैं उसकी ये हालत देखकर हँस पड़ा और बोला- “यार लगे रहो, डरो नहीं। अभी तुम्हारे मूड को बनाने के लिए भी सामान आ जाएगा…”

समीर मेरी बात सुनकर फिर से मेरी बहन की चूचियों को दबाने लगा और साथ ही उसे किस भी करने लगा।
तभी ऋतु भी शराब की बोतल और ग्लास लेकर आ गई और पायल को इस हालत में देखकर, और वो भी मेरे सामने, घबरा गई और उसके हाथ काँपने लगे।

मैंने ऋतु को देख लिया और बोला- हाँ ले आओ, शाबाश… यहाँ टेबल पे रख दो और अगर बैठना है तो यहाँ बैठ जाओ मेरे पास आकर।

समीर ने जब ऋतु की कमसिन जवानी को देखा तो बोला- “यार आलोक भाई, अगर नाराज नहीं हो तो क्या मैं इस लड़की के साथ नहीं कर सकता?

मैं उसकी बात सुनकर हँस पड़ा और बोला- “नहीं भाई, ये रंडी नहीं है…” और ऋतु की तरफ देखा जिसका चेहरा पशीना-पशीना हो रहा था और सांस भी तेज चल रही थी।

ऋतु ने जल्दी से बर्तन और शराब को टेबल पे रखा और वहाँ से भाग गई।

तो पायल ने उठकर 3 गिलास शराब बनाई और एक मुझे पकड़ा दिया और एक समीर को पकड़ा के खुद भी शराब पीने लगी। शराब के दो पेग लगाते ही समीर ने पायल को पकड़ लिया और साथ ही बने हुये रूम में चला गया।

मैं बाहर सोफे पे बैठा रहा और रूम से आने वाली पायल और समीर की आवाज़ों को सुनता रहा और अपने लण्ड को मसलता रहा जो कि पायल की सेक्सी और मजे से भरपूर सिसकियों को सुनकर खड़ा हो गया था। समीर के फारिग़ होने के बाद पायल ने मुझे आवाज दी।

जैसे ही मैं रूम में गया पायल ने कहा- “भाई, वो बाहर से शराब तो ला देना जरा…”

मैं पायल की फुद्दी को देखता हुआ बाहर आ गया और शराब की बोतल और गिलास रूम में लाकर रख दिया।
तो पायल ने कहा- “भाई, यहाँ हमारे पास ही बैठ जाओ ना प्लीज़्ज़…”

मैं पायल की बात मान गया और वहाँ रखी एक चेयर पे बैठ गया और उन दोनों के लिए शराब बनाने लगा। शराब का एक और पेग लगाने के बाद समीर फिर से पायल के साथ लिपट गया और किस करने लगा और उसकी फुद्दी में उंगली घुसाने लगा।

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कहानी जारी है





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FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -17

FUN-MAZA-MASTI

 घर का बिजनिस -17

 अब मैं उठा और अपने लण्ड को पायल के मुँह में घुसा दिया जिसे वो चूसने लगी। तो बापू ने भी अपने लण्ड को पायल की गाण्ड में आहिस्ता से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया।
बापू का लण्ड जैसे ही पायल की गाण्ड में हिलाने लगा तो पायल ने मेरे लण्ड को अपने मुँह में से निकाल दिया और बोली- “बापू, आहिस्ता प्लीज़्ज़… आप ने बड़ा दर्द दिया है मुझे आअह्ह…”

तभी बापू ने कहा- बेटी, अब नहीं डरो। अब दर्द नहीं होगा। मैं अपनी बेटी को आराम से ही चोदूंगा और लण्ड को अंदर-बाहर करना जारी रखा। क्योंकि बापू का लण्ड पायल की गाण्ड में पूरा फँसा हुआ था जिसकी वजह से बापू को भी थोड़ा परेशानी हो रही थी। लेकिन बापू आराम-आराम से पायल की गाण्ड को खोलते रहे।

पायल अब मेरे लण्ड को नहीं चूस रही थी क्योंकि उसका सारा ध्यान बापू के लण्ड की तरफ ही लगा हुआ था जो कि अब पायल की गाण्ड में आराम से अंदर-बाहर हो रहा था। क्योंकि पायल की गाण्ड ने बापू के लण्ड को अपने अंदर जगह दे दी थी जिससे बापू को पायल की गाण्ड में आसानी हो गई थी।

अब पायल भी बापू का साथ अपनी गाण्ड को बापू के लण्ड की तरफ दबा के दे रही थी और साथ ही- “आअह्ह… बापू जी… अब अच्छा लग रहा है… उन्म्मह… बापू अभी थोड़ा से तेज करो प्लीज़्ज़… आह्ह… बस बापू… इससे ज्यादा नहीं… उन्म्मह… हाँ अब ठीक है…” की आवाज भी कर रही थी.

पायल की बापू के साथ ये गाण्ड चुदाई इतनी जबरदस्त थी कि मैं पायल के हाथ में लण्ड को पकड़कर हिलाने से ही फारिग़ हो गया और बगल में लेटकर बापू की चुदाई देखने लगा। मुझे लग रहा था कि अब बापू भी अपने अंत पे हैं क्योंकि उनके मुँह से भी अब- “आअह्ह… बेटी, क्या गाण्ड है तेरी… मजा आ गया बेटी… ऊओ… बेटी मैं तो दीवाना हो गया हूँ तेरी गाण्ड का…”

क्योंकि बापू अब झटके भी जरा जोर-जोर से लगा रहे थे जिसकी वजह से पायल के मुँह से- “आअह्ह… बापू जरा आराम से करो प्लीज़्ज़… बापू, आप बहुत अच्छे हो उन्म्मह…” की आवाज करने लगी और साथ ही अपना एक हाथ अपने नीचे घुसाकर अपनी फुद्दी को भी मसल रही थी जिससे पायल भी फारिग़ होने वाली थी।

तभी बापू ने- “आअह्ह… पायल बेटी, मैं गया ऊओ… बेटी, अपने बापू का पानी अपनी गाण्ड में ही ले लो बेटी…” की आवाज के साथ ही बापू पायल के ऊपर ही गिर पड़े और अपनी आँखों को बंद करके लंबी सांसें लेने लगे। बापू के पायल की गाण्ड मारने के बाद मैंने पायल के साथ कुछ भी नहीं किया क्योंकि अभी हमें जाना भी था। फिर पायल उठकर वहाँ से अजीब सी चाल चलते हुये बाथरूम में घुस गई तो बापू भी बाहर वाले वाश-रूम में चले गये और नहाकर वापिस आए।

तभी पायल भी आ गई थी नहाकर।

तो बापू ने कहा- “चलो भाई तैयार हो जाओ अभी हमने जाना है, नया घर में शिफ्ट भी करना है…” बापू की बात सुनकर पायल खुश हो गई और जल्दी से तैयार होकर आ गई।

फिर हम वहाँ से निकल पड़े और अपने पुराने घर आ गये। जहाँ अम्मी, दीदी, ऋतु और बुआ सामान को पैक करने के बाद हमारा इंतेजार कर रही थीं। फिर बापू ने किसी को फोन किया तो कुछ ही देर के बाद एक मिनी ट्रक आ गया और उसके साथ 3-4 मजदूर भी थे, जिन्होंने हमारा सामान ट्रक में लोड किया और हम वहाँ से नये घर की तरफ रवाना हो गये, जो कि एक पाश एरिया में था और वहाँ जरूरत की हर चीज पहले से ही मोजूद थी। इसलिए पुराने घर से लाया गया तकरीबन सारा सामान स्टोर में रखवा दिया गया और उसके बाद सबने अपने लिए रूम पसंद कर लिया और रूम में घुस गये।

फिर बापू ने हम सबको अपने पास बुला लिया और बोले- देखो भाई, अब बात ऐसी है कि हमें फ्लैट की जरूरत नहीं है। क्योंकि यहाँ हमारे पास एक एलहदा से गेस्टरूम हैं जो कि घर से अलहदा हैं और वहाँ हम अपना काम चला लिया करेंगे। क्या ख्याल है तुम लोगों का?

पायल- “लेकिन बापू, इस तरह ऋतु को भी पता चल जायेगा हमारे काम का…”

अम्मी- तो अच्छा है ना… वो भी इस काम में आ जाएगी और जितनी उम्र है उसकी, पैसे भी अच्छे कमा लिया करेगी।

बुआ- भाभी, बात तो आपने सही की है कि अब ऋतु को हमारे साथ आ ही जाना चाहिए। क्योंकि इस तरह कोई बात छुपानी नहीं पड़ेगी।

बापू- क्यों आलोक, तुम्हारा क्या ख्याल है?

मैं- मेरा क्या है बापू? जब आप लोग भी ये ही चाहते हो तो मुझसे क्यों पूछ रहे हो?

अम्मी- नहीं बेटा तुम्हारी बात भी जरूरी है, जो बात दिल में है वो बताओ।

मैं- देखो अम्मी, जब हम कंजर बन ही चुके हैं तो क्या फरक पड़ता है कि हम किसको चुदवा रहे हैं? और किससे? और खुद किसकी चुदाई कर रहे हैं?

मेरी बात सुनकर सब खामोश हो गये और कोई कुछ नहीं बोला। क्योंकि बात जो भी थी सच ही थी। फिर हम लोग वहाँ से उठे और अपने-अपने रूम में आ गये और आराम करने लगे। इसी भाग दौड़ में रात के खाने का टाइम हो गया और पता ही नहीं चला।

बुआ मेरे रूम में आ गई और बोली- अरे आलोक, अभी तक लेटे हुये हो? खाना नहीं खाओगे क्या?


 मैं बुआ की बात सुनकर चौंक गया और टाइम देखा तो रात के 8:00 बज चुके थे। मैं जल्दी से उठा और फ्रेश होकर खाना खाने की टेबल पे आ गया और अम्मी और बुआ किचेन से खाना लाकर रखने लगीं।

तभी अरविंद साहब भी आ गये और आते ही बोले- अहाआ… लगता है कि मैं सही टाइम पे आ गया हूँ क्योंकि बड़ी भूख लग रही है और एक कुर्सी खींचकर दीदी की बगल में ही बैठ गये और दीदी को अपनी तरफ खींचकर एक किस भी कर दी, जिसे ऋतु ने बड़ी अजीब नजरों से देखा और फिर हमारी तरफ देखा। लेकिन जब ऋतु ने देखा कि हम सब नार्मल हैं तो वो भी खामोश हो गई और खाना निकालकर खाने लगी लेकिन उसका ध्यान खाने में कम लेकिन दीदी और अरविंद के बीच होने वाली छेड़-छाड़ में ज्यादा लगा हुआ था।

खाना खाने के बाद हम सब टीवी देखने बैठ गये तो अरविंद साहब ने मेरी तरफ देखा और कहा- यार हमारी दिलवर जानी भी ले आओ इस तरह क्या खाक मजा आएगा?

मैं अरविंद की बात का मतलब समझ गया और पायल की तरफ देखकर बोला- “जाओ बापू के रूम में से एक बोतल निकाल लाओ और साथ में गिलास और बर्फ भी ले आना…”

पायल उठकर चली गई तो ऋतु बड़ी अजीब नजरों से मेरी तरफ देखने लगी, लेकिन बोली कुछ नहीं क्योंकि वो काफी देर से यहाँ घर में जो देख रही थी उसकी समझ में नहीं आ रहा था।

पायल बापू के रूम में से शराब की बोतल निकाल लाई और उसे अरविंद के सामने रखकर किचन की तरफ चल पड़ी तो बुआ जो कि किचेन से ही आ रही थी उसके हाथ में बाकी सामान देखकर फिर से बैठ गई और बुआ ने बाकी सामान भी उनके सामने रख दिया और अरविंद ने दो गिलास में पेग बना लिए और एक दीदी को पकड़ा दिया और दूसरा खुद उठा लिया और पीने लगा।

दीदी को इस तरह सब घर वालों के सामने एक गैर-मर्द के साथ इस तरह चिपक के बैठने और किस करने के बाद अब शराब पीता देखकर ऋतु की आँखें हैरत के मारे फटने के करीब थीं कि वो एक झटके से उठी और अपने रूम की तरफ भाग गई।

ऋतु के वहाँ से जाते ही अम्मी ने और बुआ ने हल्का सा मुश्कुराकर मेरी तरफ देखा और ऋतु की तरफ इशारा कर दिया और पुछा- सुनाओ कैसी रही?

ऋतु के जाने के कुछ ही देर के बाद अरविंद साहब भी दीदी को लेकर उसके रूम में चले गये। तो अम्मी ने कहा- क्यों आलोक, कुछ परेशान हो कोई बात है तो बताओ मुझे।

मैंने अम्मी की तरफ देखा और कहा- अम्मी आप लोग ऋतु को अपने साथ शामिल करने के लिए जो कुछ कर रहे हो, क्या वो सही है?

अम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली- देखो बेटा, ऐसा है कि तुम अभी जाओ अपने रूम में इस पे हम बात करेंगे। लेकिन अभी नहीं ठीक है।

.
कहानी जारी है.






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FUN-MAZA-MASTI घर का बिजनिस -16

FUN-MAZA-MASTI

 घर का बिजनिस -16

 पायल की बातों ने मुझे हैरान कर दिया था क्योंकि वो 2-3 दिन में ही इतना बोल्ड हो गई थी कि दीदी और बुआ भी नहीं हो सकी थी और परेशानी की बात ये थी कि आखिर पायल किससे अपनी गाण्ड मरवाना चाहती है? कौन है वो?
मैंने उस रात दो बार और भी पायल की चुदाई की और उससे पूछता भी रहा कि आखिर वो किससे चुदवाना चाहती है? लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं बताया।

सुबह मैं उठा और नहाने के बाद नाश्ता ले आया और पायल को भी उठा दिया जो कि वैसे ही नंगी सो रही थी। पायल ने उठकर हाथ मुँह धोया और आकर नाश्ता करने बैठ गई। पायल उस वक़्त भी नंगी ही थी फिर हमने नाश्ता खतम किया और मैंने बापू को काल की और पूछा- “कब आ रहे हो?

तो बापू ने कहा- यार बस 5 मिनट में हम तुम्हारे पास होंगे।

मैंने काल कट की और पायल की तरफ देख जो कि अभी भी नंगी ही बैठी हुई टीवी देख रही थी और कहा- पायल तुम अभी कपड़े पहन लो बापू आ रहे हैं।

पायल ने हैरानी से मेरी तरफ देखा और बोली- क्यों भाई? बापू आ रहे हैं तो क्या हुआ? मैं कपड़े क्यों पहनूं?

मैंने कहा- वो बात ये है कि हो सकता है कि बापू के साथ कुछ और लोग भी हों इसलिए तुम अपने कपड़े पहन लो।

पायल कुछ देर हैरानी से मेरी तरफ देखती रही और फिर उठकर अपने रूम में चली गई लेकिन उसने कपड़े नहीं पहने और बेड पे लेट गई और अपने ऊपर एक चादर ले ली। मुझे पायल की इन हरकतों से बड़ी उलझन हो रही थी लेकिन मैंने पायल को कुछ नहीं कहा। और खामोशी से बैठा टीवी देखने लगा कि तभी डोरबेल बज उठी और मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया। बापू अकेले ही आए थे और काफी खुश भी लग रहे थे।

मैं बापू को अंदर लाया तो बापू ने आते ही कहा- “पायल कहाँ है? नजर नहीं आ रही है।

मैंने कहा- वो रूम में है और आराम कर रही है।

बापू ने कहा- “आलोक बेटा, हमारे तो दिन ही फिर गये हैं। पता है अरविंद साहब ने हमें एक कीनल का मकान लेकर दिया है और शर्त सिर्फ़ इतनी है कि अंजली किसी और के साथ वक़्त नहीं गुजारेगी और ना ही हम उस घर में कोई ऐसा वैसा काम करेंगे…”
मैं भी बापू की बात सुनकर खुश हो गया और बोला- “सच में बापू, अब मजा आएगा…”

अभी मैंने इतना ही कहा था कि पायल जो कि रूम में नंगी ही थी, बाहर निकल आई और बापू के पास आकर खड़ी हो गई और बोली- बापू, हमारा नया घर कहाँ है?

बापू जो कि पायल के नंगे जिश्म का नजारा कर रहे थे पायल की बात सुनकर चौंक गये और बापू ने एक पाश एरिया का नाम बता दिया जहाँ कोई भी घर हमारे जैसा और गरीब नहीं था। बापू जिस तरह पायल को देख रहे थे, मुझे लग रहा था कि बापू की भी नियत पायल को इस तरह नंगा देखकर खराब हो रही है और पायल भी बापू से किसी किश्म की कोई शरम नहीं कर रही थी जिससे मुझे पायल की कल रात वाली बात भी समझ में आ गई कि वो कौन है जिससे पायल अपनी गाण्ड खोलवाना चाहती है।

मुझे बापू से जलन हो रही थी क्योंकि पायल ने मुझे छोड़ के बापू से अपनी गाण्ड मरवाने का सोचा था। लेकिन फिर ये सोचकर कि मेरा लौड़ा जितना बड़ा है अगर मैं अपनी इस छोटी बहन की गाण्ड में झटके से घुसा देता तो उसकी गाण्ड फट ही जाती इसलिए तो उसने पापा से गाण्ड मरवाने का सोचा था तो अच्छा ही किया था।

बापू ने अब पायल को अपने पास बिठा लिया था और अपना एक हाथ से पायल के कंधों को पकड़कर पायल को अपनी तरफ खींच लिया और बोले- हाँ तो मेरी रानी बेटी, तुम सुनाओ क्या हाल हैं? भाई ने तंग तो नहीं किया?

पायल- नहीं बापू, भाई तो बहुत अच्छे हैं मुझे बड़े प्यार और आराम से रखा है भाई ने।

बापू- अच्छा, लेकिन मुझे तो लगता है कि इसने तुम्हें काफी तंग किया होगा?

पायल- बापू, भाई तो मुझे तंग करना चाहते थे लेकिन मैंने मना कर दिया कि नहीं अभी तंग नहीं करो तो भाई मान गया कि पहले कोई और तंग कर ले फिर मुझे और भाई दोनों को कोई परेशानी नहीं होगी।

बापू- क्यों आलोक, ये मैं क्या सुन रहा हूँ कि तुम मेरी इस रानी बेटी को तंग करने की कोशिश करते रहे हो?

पायल- नहीं पापा, भाई ने तंग थोड़ा ही किया है, हाँ प्यार जरूर किया है।

मैं- बापू, लगता है कि पायल चाहती है कि आप उसे तंग करो क्योंकि मुझे तो इसने मना कर दिया था।

पायल मेरी बात सुनकर मुझे घूरने लगी और बोली- “भाई, मैं नहीं चाहती थी कि कोई ज्यादा मसला हो जाये इसलिए मना किया था लेकिन आप तो लगता है कि दिल पे लिए बैठे हो अभी तक…”

बापू- आलोक यार, मुझे भी तो बताओ कि बात क्या है? हो सकता है कि मैं ही कुछ फैसला कर दूँ, तुम लोगों का।

पायल- “बापू, करना तो आप ही ने है…” और मेरी तरफ देखने लगी।

तो मैं भी पायल की बात सुनकर मुश्कुरा दिया।

बापू- अरे बेटी, मैंने कब मना किया है? जो कहो, मैं करने के लिए तैयार हूँ क्योंकि तुम लोग ही तो मेरा सरमाया हो, तुम्हारी नहीं मानूंगा तो किसकी मानूंगा?

बापू की बात सुनकर पायल सोफे से उठी और नीचे गिरे हुये गिलास को उठाने के लिए झुक गई जिससे उसकी गाण्ड और फुद्दी खुलकर बापू के सामने आ गई जिसे देखकर बापू अपने लण्ड को शलवार के ऊपर से ही मसलने लगे।
पायल गिलास उठाकर सीधी हुई और टेबल पे रखकर बापू की तरफ घूम गई और बापू को अपना लण्ड मसलते हुये देखकर हँस पड़ी और बोली- बापू, लगता है कि आपका ये शहजादा कुछ माँग रहा है?

बापू भी थोड़ा खुल गये और बोले- “अरे बेटी, इसका क्या पूछती हो? ये तो माँगता ही रहता है लेकिन जरूरी तो नहीं कि इसे सब कुछ मिल ही जाये…”

पायल- “बापू, हो सकता है कि जो ये माँग रहा हो इसे मिल जाए? आप बता के तो देखो…”

बापू ने कहा- बेटी, अब तुम खुद समझदार हो, मैं क्या बताऊँ कि ये क्या माँगता है और क्यों?



 पायल बापू के पास बैठ गई और बापू के हाथ को पकड़कर लण्ड से हटा दिया और बोली- “तो लगता है कि मुझे इससे ही पूछना पड़ेगा कि इसे क्या चाहये है…” पायल ने इतना बोलते हुये बापू के लण्ड को पकड़ लिया और बोली- “हाँ शैतान शहजादे, क्यों मेरे बापू को तंग कर रहे हो? बोलो जरा…”

मैं पायल की इन हरकतों को देखकर हँस पड़ा और बोला- पायल, तुमसे ज्यादा कौन जानता होगा कि इसे क्या चाहिए? और ये बापू को क्यों तंग कर रहा है?

पायल ने बापू की तरफ देख तो बापू ने सर झुका लिया। तो पायल ने कहा- क्यों बापू क्या हुआ? क्या बेटी को दूसरे लोगों से चुदवाना ही आता है? क्या खुद कुछ करते हुये शरम आ रही है?

बापू ने पायल की तरफ बड़ी हैरानी से देखा और फिर मेरी तरफ देखा तो मैं बापू की आँखों में लिखा साफ पढ़ गया की बापू को पायल के इतना बोल्ड होने का यकीन ही नहीं हो रहा था। कुछ देर के बाद बापू इस कैफियत से बाहर निकल आए और एक झटके से पायल को अपनी तरफ खींच लिया और उसके तपते होंठों के साथ अपने होंठ भी लगा दिए और किस करने लगे और साथ ही अपना एक हाथ पायल की गाण्ड पे रख दिया और सहलाने लगे।

बापू अब पायल के होंठों को बुरी तरह चूस रहे थे और पायल की गाण्ड को भी मसल रहे थे जिससे कि पायल बुरी तरह से मचल रही थी और बापू के साथ और भी लिपटने की कोशिश कर रही थी। बापू और पायल के इस तरह किस करने से मैं भी गरम हो उठा और अपनी शलवार को खोल दिया और लण्ड को बाहर निकालकर हाथ में पकड़ लिया।

अब बापू ने पायल को सोफे पे गिरा दिया और खुद खड़े हो गये और अपने कपड़े उतारने लगे जिसे देखकर पायल का चेहरा लाल होने लगा और होंठ काँपने लगे थे। बापू ने अपने कपड़े उतार दिए और पायल की टाँगों को खोलकर बीच में बैठ गये और पायल की फुद्दी के साथ अपना मुँह लगा दिया और पायल की फुद्दी चाटने लगे।

बापू के फुद्दी पे मुँह लगाते ही पायल बुरी तरह तड़प उठी और सिसकी- “आअह्ह… बापूऊउ उंमन्ह… आज अपनी बेटी की फुद्दी को खा जाओ… कुतिया बना दो मुझे बापूऊउ…”

बापू ने अब अपनी जुबान बाहर निकाल ली और उसे पायल की फुद्दी में घुसाकर चाटने लगे और साथ ही अपने एक हाथ की बिचली-उंगली को पायल की गाण्ड के छेद पे रख दिया और दबाने लगे। जैसे-जैसे बापू की उंगली पायल की गाण्ड में घुस रही थी, पायल के चेहरा पे दर्द का एहसास साफ नजर आने लगा था और वो आऐ… बापू जी, थोड़ा और गीला करो… प्लीज़्ज़… दर्द हो रहा है।

पायल की बात को सुनते ही बापू ने अपनी उंगली निकाल ली और अपने मुँह में घुसाकर चाटने लगे और फिर पायल की गाण्ड के छेद पे भी हल्का सा थूक लगा दिया और फिर से अपनी उंगली पायल की गाण्ड के सुराख पे रखा और एक ही झटके में पूरी उंगली घुसा दी।

उंगली के घुसते ही पायल के मुँह से- “आऐ… बापूऊउ प्लीज़्ज़… रुको… आराम से आअह्ह… दर्द होता है बापूऊउ…”

बापू ने अबकी पायल की कोई बात नहीं सुनी और उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया और साथ ही पायल की फुद्दी को भी चाटने लगे जिससे पायल का दर्द खतम हो गया और वो मजा लेने लगी जो कि उसकी सिसकियों से भी पता चल रहा था।

पायल- “आअह्ह… बापू, आप कितने अच्छे हो… उन्म्मह… अब अच्छा लग रहा है…”

बापू और पायल की बातों सी मैं भी काफी उत्तेजित हो रहा था तो मैं भी उठा और अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया और पायल के पास जा के नीचे ही बैठ गया और पायल की चूचियां के साथ अपना मुँह लगाकर चूसने लगा।

पायल को मेरा इस तरह करना अच्छा लगा और वो मेरे बालों में अपनी ऊँगलियां घुमाने लगी और सिसकी- “हाँ भाई, चूसो इन्हें… उन्म्मह… भाई जरा जोर से चूसो… आअह्ह…”

मैंने अपना सर पायल की चूचियां से उठाया और बापू की तरफ देखकर बोला- “बापू रूम में चलते हैं, यहाँ ठीक नहीं…”



बापू ने सर उठाकर मेरी तरफ देखा और फिर अपनी उंगली भी पायल की गाण्ड में से निकाल ली और पायल का हाथ पकड़कर उठा लिया और हम रूम में आ गये। रूम में आते ही मैं बाथरूम में गया और तेल उठा लाया। मेरे हाथ में तेल देखते ही बापू मुश्कुरा दिए और बोले- आलोक बेटा, ये अच्छा किया जो तेल ले आए इससे पायल की गाण्ड मारने में मजा आ जाएगा…” और तेल मेरे हाथ से ले लिया और पायल को उल्टा लिटा के उसके नीचे एक तकिया रख दिया जिससे पायल की गाण्ड उभर के ऊपर को हो गई तो बापू ने पायल की गाण्ड को हाथ से सहलाया और तेल लगाने लगे।

पायल की गाण्ड पे तेल लगाने के बाद बापू ने अपने लण्ड को भी तेल से भर दिया और मेरी तरफ देखा तो मैं आगे बढ़कर पायल की गाण्ड को दोनों हाथों से पकड़कर खोल दिया, तो बापू ने अपना लण्ड पायल की गाण्ड के छेद पे रखकर हल्का सा दबा दिया। जिससे बापू के लण्ड का सुपाड़ा पायल की गाण्ड में घुस गया।

लण्ड का सुपाड़ा घुसते ही पायल की दर्द से भरी आवाज सुनाई दी- बापू अभी रोुको प्लीज़्ज़… अभी और आगे नहीं करना।

बापू पायल की बात सुनकर थोड़ा रुक गये और फिर कुछ देर रुकने के बाद अपने लण्ड को अपनी बेटी की गाण्ड में दबाने लगे जिससे बापू का लण्ड आहिस्ता-आहिस्ता पायल की गाण्ड में जाने लगा तो पायल ने अपनी गाण्ड को दबा के बापू के लण्ड को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की और बोली- “बापू प्लीज़्ज़… आराम से आऐ… बापू जी फट जायेगी…”

बापू ने अब अपने लण्ड को थोड़ी देर वहीं रोक लिया और बोले- हाँ मेरी जान… बेटी, ज्यादा दर्द हो रहा है क्या?

पायल की आँखों में अब आँसू नजर आ रहे थे तो वो बोली- जीए बापू, बड़ा दर्द हो रहा है… बस इससे ज्यादा नहीं करो, इतना ही ठीक है।

बापू ने मुझे इशारा किया कि मैं पायल को कस के पकड़ लूं, तो मैंने ऐसा ही किया।

जिससे पायल चौंक गई और बोली- “नहीं बापू, प्लीज़्ज़… ऐसा मत करना नहीं तो मेरी गाण्ड फट जायेगी…”

बापू ने कहा- “नहीं बेटी, मैं बाहर निकालने लगा हूँ…” और थोड़ा सा लण्ड को बाहर खींचा जिससे पायल रिलैक्स हो गई। तभी बापू ने अपनी पूरी ताकत से अपने लण्ड को पायल की गाण्ड में उतार दिया।

लण्ड के जड़ तक घुसते ही पायल चिल्ला उठी- “हाऐ… अम्मी जी, मुझे बचा लो… फट गई मेरी… नहीं बापू… बाहर निकालो प्लीज़्ज़… मुझे नहीं करना है… भाई, बापू को बोलो ना प्लीज़्ज़…”

अब बापू ने अपने लण्ड को पायल की गाण्ड में ऐसे ही रोक दिया और ऊपर लेट गये तो मैं पायल के पास लेट गया और उसके नीचे हाथ घुसाकर चूचियों को पकड़कर दबाने लगा कि पायल का दर्द जल्दी कम हो जाए।

पायल बुरी तरह मचल रही थी और अब गालियां भी दे रही थी- “आअह्ह… बापू, बहनचोद बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी… बापू प्लीज़्ज़ बाहर निकालो… आअह्ह… आलोक, बहनचोद रंडी के बच्चे… कुछ बोलता क्यों नहीं? बोल ना बापू को बाहर निकाल लें…”

बापू ऐसे ही पायल के ऊपर लेटे रहे और पायल के कानों की लौ को अपने मुँह में भर के चूसते और कभी गर्दन पे किस करते और इस तरह कुछ देर के बाद पायल के दर्द में कमी होना शुरू हो गया और कुछ देर के बाद पायल के मुँह से आवाज निकलना भी बंद हो गया।

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कहानी जारी है.


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