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Tuesday, January 29, 2013

सेक्सी कहानियाँ मैं, लीना और चाचा-चाची--6

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

मैं, लीना और चाचा-चाची--6

gataank se aage............

मैंने पक्क से अपना खड़ा लंड बाहर खींच लिया. चाचाजी ने मुझको नीचे लिटाया
और लंड को चाटने लगे. "वाह देख कैसा रसीला लग रहा है, ला अब दे दे अपनी
मलाई मुझको"

चाचाजी ने सुपाड़ा मुंह में ले लिया और चूसने लगे. "अह चाचाजी .... चूसिये
चाचाजी .... ओह ओह " अब चाचाजी लंड को मुठ्ठी में पकड़कर मेरी मुठ्ठ मार
रहे थे, साथ ही सुपाड़ा चूसते जाते.

मैं झड़ गया. चाचाजी ने मेरा पूरा वार्य जीभ पर भर लिया और फ़िर मुंह बंद
करके चख चख कर निगल गये. उनका लंड अब तक फिर से खड़ा हो गया था.

चाचाजी के साथ मेरी चुदाई घंटा भर और चली. इस बार वे घंटे भर तक मेरी
मारते रहे. मन भर के हर आसन में उन्होंने मेरी मारी. आधे घंटे तो मुझे
दीवाल से सटा कर खड़े खड़े मारते रहे, बहुत मूड में थे. मुझसे गांड फ़िर से
नहीं मरायी उन्होंने, मेरा लंड चूस डाला, मेरे वीर्य के लट्टू हो गये थे.

उसके बाद हम जो सोये वो सीधे रात को उठे. रात को लीनाने सब के लिये बदाम
का हलुआ बनाया. खास कर चाचाजी के लिये "चाचाजी, खाओ और लंड खड़ा करो फ़िर
से. आज रात भर आप से चुदवाऊंगी"

चाचाजी बोले "लीना रानी, आज रात बस मैं और तुम. ऐसा चोदूंगा कि कल उठ नहीं पाओगी"

"चाचाजी, वो शर्त याद है ना? मैं कहूंगी वो करना पड़ेगा, आखिर आज आप को
कोरी कोरी गांड दिलवायी मैंने आप के भतीजे की"

"हां हां बहू रानी, तेरे जैसे सुंदर छिनाल चुदैल रंडी की बात नहीं
मानूंगा तो किसे की मानूंगा"

हम सब नहाने गये. लीना ने नहाते वक्त उसने मेरी गांड में बर्फ़ भर दिया और
क्रीम लगा दी "इससे राहत मिलेगी, गांड भी फ़िर से टाइट हो जायेगी. अनिल
राजा, बहुत मजा आया मुझको, तुम्हारी गांड इतनी अच्छी है कि मैं कब से सोच
रही थी कि इसको चोदने लायक लंड मिलना चाहिये वो मिल गया. तुमको मजा आया?"

"हां रानी, बहुत मजा आया, सब तुम्हारी वजह से, तुम न कहतीं तो शायद मैं
खुद नहीं मरवाता. चाचाजी का लंड वाकई मतवाला है, मैं भी आशिक हो गया
उनका. चाची के साथ कैसी रही तुम्हारी चुदाई?"

"एकदम मस्त, सच में बुर है या शहद का घड़ा, घंटे भर में कटोरी भर रस
पिलाया मुझको चाची ने. और सुनो, मेरी चूंची से चुदवाया उहोंने" लीना शोखी
से नोली.

"क्या बात करती हो?"

"हां, मेरी चूंची को अपने भोसड़े में ले लिया, इतना बड़ा छेद है उनका, आधी
चूंची अंदर ले ली, बड़ी रसिया हैं चाची. आज रात को तुम मजा ले लेना, कल तो
वे जा रहे हैं"

"तुम रात भर सच में चुदवाओगी चाचाजी से?" मैंने पूछा तो बोली "और क्या,
और तरसा तरसा कर चुदवाऊंगी, झड़ जाते हैं तो फिर आधा घंटा लगता है लंड
उठने में. मुझे तो हर पल चुदना है, देखो आज रात क्या दुर्गत करती हूं,
झड़ने नहीं दूंगी उस चोदू आदमी को, तरसा तरसा कर चुदवाऊंगी. तुम्हारे साथ
काफ़ी झड़ चुके दोपहर को, अब रात में हिसाब लूंगी"

उस रात मैंने चाची के साथ काफ़ी मजे किये. अधिकतर उनकी चूत चूसी, क्योंकि
वाकई उनकी बुर के पाने का स्वाद लाजवाब है. गांड भी मारी पर सिर्फ़ एक
बार. दोपहर को चाचाजी के साथ की चुदाई में लंड दो बार झड़ चुका था.

लीना ने शायद चाचा जी को इतना निचोड़ा कि सुबह उनसे उठा भी नहीं जा रहा
था. बड़ी मुश्किल से उठकर तयार हुए. ट्रेन से जाते वक्त लीना को खूब
आशिर्वाद दे कर गये. लीना ने जाते वक्त उनकी चेन लौटा कर कहा "चाचाजी, ये
लीजिये, मैंने तो मजाक में रख ली थी"

चाचाजी ने वापस लीना को दे दी "पर मैंने सच में दी थी बहू. अब रख ले और
तुम दोनों अब हमारे यहां आना, अब हम साल भर को बेटी के यहां जा रहे हैं
अमेरिका, वापस आयेंगे तब बेटे, तुम दोनों आना हमारे यहां. मजा करेंगे, अब
तो तुम दोनों के बिना हमको नहीं सुहायेगा. और बेटी तेरा वो अमरित जो तूने
कल पिलाया, एकदम मजा आ गया"

चाची भी बोलीं "ये बहू तो एकदम रति देवी है बेटे, तुझे भी बहुत सुख देगी
और हम को भी"

ट्रेन जाने के बाद मैंने पूछा "चाचाजी से चुदवाया रात भर या उनको बुर
चुसवायी जो अमरित की बात कर रहे थे. मैं तो सोच रहा था कि तू उनसे
चुदवायेगी"

"और क्या? पहले एक घंटा चुसवायी, वो ही जिद कर रहे थे कि चखने दे बेटी
तेरी गोरी गोरी बुर का स्वाद, फ़िर चुदवाया. पर वो उस अमरित की बात नहीं
कर रहे थे"

"तो?" मैंने पूछा.

"मैंने उनको अपना मूत पिलाया" लीना मेरे कान में बोली. मैं उसकी ओर देखने लगा.

"पहले खूब चूत चुसवायी और उनके लंड से खेलती रही, पर चोदने नहीं दिया. जब
रिरियाने लगे तो बोली कि मेरा मूत पियो तो चुदवाऊंगी." कहकर लीना बड़ी
शोखी से मेरी ओर देखने लगी.

मैं बोला "कैसी चालू चीज है तू लीना! चाचाजी को ऐसा बोली? तुम क्या करोगी
चुदाई की हवस में, कुछ नहीं कहा जाता. क्या बोले वो?"

"वो एकदम से राजी हो गये. मैंने तो मस्ती में कहा था कि देखें कितने फ़िदा
हैं मुझपे पर जब उन्होंने तुरंत हां कह दी तो मैं बाथरूम में ले गयी. दो
घूंट पिला कर मैं तो रुक गयी, पर उनको इतना अच्छा लगा कि पूरा पी गये.
उसके बाद रात भर में चार बार पिया, तड़के तो वहीं बिस्तर में मुंह खोल कर
लेट गये और मुझे बोले कि मूत दे मेरे मुंह में, फ़िर चोद डाला. पर अनिल,
मेरा मूत पीकर उनका ऐसा खड़ा होता था कि फ़िर घोड़े जैसे चोदते थे. बहुत मजा
आया मेरे राजा, चूत की प्यास एकदम कम हो गयी"

फ़िर लीना बोली "पर जो मजा दिया चाचाजी ने, लगता है जल्दी ही ये आग फ़िर से
जाग उठेगी. हा ऽ य राजा, बहुत मजा आता है ऐसे गरम मर्दों से चुदवाने में"

"चाचाजी तो अब नहीं हैं साल भर, चल मैं अपने यार दोस्तों को बुलवा लेता
हूं अगले हफ़्ते, तब तक तू आराम कर ले"

"अनिल, वो तुम्हारे मौसाजी हैं ना, दीपक मौसाजी नाम है शायद"

"हां. उनका क्या?"

"मेरे खयाल से अगले महने उनके यहां गांव में चलें तो?" लीना मेरी ओर देखकर बोली.

"अरे पर तूने उनको कब देखा? वो तो शादी में भी नहीं आये थे."

"चाचीजी कुछ बोल रही थीं. ठीक से कुछ बताया नहीं पर जाते जाते मुझे कहके
गयीं कि बेटी अब मैं और तेरे चाचाजी तो नहीं हैं साल भर, नहीं तो तुझे
पूरा ठंडा कर देते तू हमारे गांव आती तो. फिर दो मिनिट के बाद बोलीं कि
अनिल से कहो कि दीपक मौसा के यहां ले चलो. बस और कुछ नहीं बोलीं, हंस
दीं." लीना बोली.

"ठीक है मेरी जान, अगले महने वहां चलेंगे"

----समाप्त----










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सेक्सी कहानियाँ मैं, लीना और चाचा-चाची--5

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मैं, लीना और चाचा-चाची--5

gataank se aage............
चाचाजी अपने लंड पर मख्खन रगड़कर तैयार हुए तो लीना ने मुझे ओंधा पलंग पर
पटक दिया. मेरा सिर उठाकर चाची की छाती पर रख दिया. "चाची, आप इसको अपनी
चूंची चुसवा दो, याने मुंह बंद रहेगा इसका. चलो चाचाजी, डाल दो मेरे
सैंया की गांड में अपना ये मूसल"

चाचाजी मेरे पीछे बैठकर अपना सुपाड़ा मेरे गुदा में पेलने लगे. मैंने गुदा
ढीला छोड़ा तो जरा सा अंदर ढंस गया. "ऐसे ही बेटे, ढीला छोड़ तो अभी डालता
हूं"

सुपाड़े से मुझको दर्द हो रहा था तो मैंने थोड़ा 'आह' 'उफ़' किया. चाची ने
अपनी चूंची मेरे मुंह में ठूंस दी और बोली "डालो जी, अब ये चुप रहेगा"

चाचाजी ने जोर लगाकर सुपाड़ा मेरे छल्ले के पार कर दिया, मैं गों गों करने
लगा. लीना चहक उठी "ये हुई ना बात, अब देखो कैसे तड़प रहा है, जब इसके उस
दोस्त ने मेरी मारी थी तो मुझे भी दुखा था, तब ये हंस रहा था."

चाचाजी ने लंड पेल कर तीन चार इंच अंदर कर दिया. मैं सिर उठाने की कोशिश
करने लगा, पर चाचीजी ने कस के उसे दबाये रखा.

"तेरी कसम बहू, बड़ी टाइट गांड है लौंडे की. अच्छा लग रहा है बेटे?"

लीना तुनक कर बोली "चाचाजी, उससे ने पूछो, मैं कह रही हूं कि बहुत मस्ती
में है अनिल. आप तो पूरा डाल दो"

चाचाजी ने जोर लगाकर पूरा लंड मेरी गांड में उतार दिया. मैं हाथ पैर
मारने लगा तो लीना मेरे हाथों पर बैठ गयी और चाचीने मेरी कमर कस के पकड़
ली. "मारो जी मारो, अभी मस्ती से गुटर गुटर करने लगेगा कबूतर जैसे"

चाचाजी लंड अंदर बाहर करने लगे. मुझे अब मजा आ रहा था. दर्द के साथ गांड
में मस्त गुदगुदी हो रही थी. मैं कमर हिलाने लगा तो चाची बोलीं "बस बेटी,
छोड़ दे, अब तो खुद मरवायेगा ये रंडी जैसा" मेरे मुंह से चूंची भी निकाल
ली.

मैं 'आह' 'ओह' 'हां चाचाजी' करने लगा. चाचाजी धीरे धीरे लंड पेलते हुए
बोले "मजा आया बेटे"

"हां चाचाजी .... बहुत मस्त है आप का .... मारिये ना ... दर्द भी हो रहा
है ... ये मार डालेगा मुझ को .... पर अच्छा लग रहा है चाचाजी ... हां ...
आह ... और चाचाजी ... और ..." मैं बोला.

"ये बात हुई ना, ये लो बेटे" कहकर चाचाजी जोर से लंड पेलने लगे. लीना से
बोले "वाकई मस्त टाइट गांड है तेरे पति की, बहुत शुक्रिया बेटी, तेरी वजह
से मुझे ये गांड मिली"

"बदले में भी कुछ लूंगी चाचाजी" लीना बोली.

चाचाजी मस्ती में थे, झट से गले से चार तोले की सोने की चेन निकाली और दे
दी. लीना ने लेकर रख ली और बोली "ये तो ठीक है चाचाजी, पर अब आज रात मुझे
पूरा चोदना पड़ेगा, बस आप और मैं, एक मिनिट को नहीं छोड़ूंगी मैं आप को, और
जो कहूंगी करना पड़ेगा"

चाचाजी हचक हचक कर मेरी गांड चोदते हुए बोली "तू जो कहेगी बेटी वो करूंगा"

"अब आप ऐसा करो को अनिल पर लेट जाओ और उसको बाहों में ले लो, ऐसे दूर से
बैठे बैठे क्या मार रहे हो, आखिर आप का सगा भतीजा है, प्यार से बदन सटाकर
मारो, चुम्मे ले लेकर मारो" लीना बोली.

चाचाजी को बात जच गयी, वे मेरे ऊपर लेट गये और अपने हाथों और पैरों से
मेरे बदन को लपेट कर मेरी गर्दन चूमते हुए मेरी मारने लगे. फ़िर मेरा सिर
घुमाकर मेरे होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगे. मैंने भी अपनी जीभ
उनको दे दी चूसने को.

उधर चाची और लीना गरम होकर एक दूसरे की बुर चूसने लगीं. बुर चूसते हुए वे
हमें देखती जातीं.

"बेटी देख ... वो अनिल की गांड कैसी चौड़ी होती है जब ये लंड बाहर खींचते
हैं ... देखा ... ऐसा लगता जैसे अब फ़टी अब फ़टी"

"हां चाची ... पर मजबूत गांड है मेरे अनिल की, चाचाजी के लंड को आराम से
खा लेगी. अनिल राजा .... मजा आ रहा है?"

मैं बोला "हां रानी ... बहुत मजा आ ... रहा है ... पेट तक जाता है लंड
.... चाचाजी का .... जवाब नहीं ... और पेलिये चाचाजी .... कस के ... हां
चाचाजी .... हां .... बहुत मस्त चाचाजी .... ओह ... ओह ... अब समझा लीना
.... क्यों दीवानी है ... आपके लंड की .... चोद डालिये चाचाजी .... चोद
डालिये मुझे .... आप का ही भतीजा हूं ... आप क्या प्यारा हूं चाचाजी ....
मारिये चाचाजी .... चोदिये और ... आह ... ओह..."

"हां बेटे ... साले मादरचोद गांडू ... बहुत प्यारा है तू ... मुझे लगा था
कि ... बस तेरी बहू ऐसी .... छिनाल है .... तू भी कम चोदू .... नहीं है
... साली क्या गांड पायी है .... लंड को ऐसे पकड़ रही है .... आह ... आह
.... मजा आ गया मेरे बच्चे ... साले फ़ाड़ दूंगा आज तेरी चोद चोद के ...
चौड़ा भोसड़ा बना दूंगा .... एकदम फ़ुकला कर दूंगा ... तेरी गांड की बुर बना
दूंगा ... रंडी की बुर जैसी चौड़ी कर दूंगा ....आह ... ओह ..." और चाचाजी
झड़ गये. जब वे हांफ़ते हांफ़ते मेरी पीठ पर लस्त पड़े थे तो मैं सिर घुमाकर
उनके होंठ चूसने लगा. बड़ा मजा आ रहा था, अच्छा लग रहा था कि चाचाजी को
मैंने इतना सुख दिया.

चुम्मा तोड़ के मैंने पूछा "कैसी लगी मेरी गांड चाचाजी? आप को सुख दिया कि
नहीं इसने"

"तू तो मेरा जानेमन है, अनिल, मेरा प्यारा है .... मां कसम .... क्या
लुत्फ़ आया तेरी गांड मारने में .... मैं निहाल हो गया मेरे बच्चे" चाचाजी
जोर जोर से सांस लेते हुए बोले. मेरा लंड भी कस कर तन्ना गया था.

"अब इसका क्या करें" लीना ने मेरा मचलता लंड पकड़कर कहा.

चाची बोलीं "मैं तो अभी चूस लूं पर ये काम इनका है, क्योंजी, आप के भतीजे
ने आप को इतना सुख दिया, उसका लंड नहीं चूसोगे.

"अभी चूस देता हूं मेरी जान, मैं तो खुद कहने वाला था." चाचाजी बोले.

"बाद में चूस लेना चाचाजी, अब आप की और आप के भतीजे की प्यार मुहब्बत
शुरू हो ही गयी है तो ऐसा करते हैं कि अब मैं चाची को अपने कमरे में ले
जाती हूं, देखती हूं कि आखिर इनकी बुर कितना पानी छोड़ती है दो घंटे में.
और आप और अनिल मिल कर घंटे दो घंटे भर मस्ती कर लो" लीना बोली.

चाची को बात जच गयी. वे उठकर लीना के साथ चल दीं. मुड़ कर बोलीं "जरा
अच्छे से प्यार करना मेरे बच्चे से, नहीं तो बस खुद चढ़े रहोगे और उसको
कुछ नहीं करने दोगे"

"नहीं नहीं भाग्यवान, मैं अनिल का पूरा ध्यान रखूंगा" मेरे लंड को चूमते
हुए चाचाजी बोले.
चाची और लीना जाने के बाद चाचाजी मुझसे चिपट कर मेरे चुम्मे लेने लगे.
"यार अनिल, तू तो छुपा रुस्तम निकला, क्या गांड पायी है तूने, मां कसम,
मैंने कई गांडें मारी हैं पर तेरे जैसी नहीं थी"

मैंने भी चाचाजी का लंड पकड़कर कहा "चाचाजी, आप को सच बताऊं, मैंने भी
गांड मराई है, ज्यादा नहीं, दो तीन बार, जब मैं अपने दोस्तों के साथ होता
हूं तो लीना बहक जाती है, जब वो दोस्त की बीवी के साथ इश्क करती है, तो
मुझे बोलती है कि तुम लोग भी ऐसे ही मस्ती करके दिखाओ. अधिकतर हम लंड चूस
कर काम चला लते हैं पर कभी कभी लीना मचल जाती है, बोलती है कि चलो एक
दूसरे की गांड मारो, तब करना पड़ता है. बाद में मुझे मजा आने लगा पर फ़िर
भी मैं नहीं मरवाता था, लीना हठ करे तो ही मरवाता था. पर आपला लंड देखा
तब से गांड बहुत मचल रही थी, आज सुकून मिला"

"फ़िकर मत कर राजा, आज इतनी मारूंगा तेरी कि तेरी गांड को पूरा खुश कर
दूंगा" कहकर चाचाजी मेरी जीभ चूसने लगे. चूमाचाटी से उनका फ़िर से खड़ा
होने लगा. मेरे लंड को पकड़कर बोले "यार बहुत रसीला लगता है, चूसने का मन
होता है"

"चूस लीजिये चाचाजी, आप का ही है पर ... आप ... याने बुरा मत मानें तो
... मैं आपकी गांड मारूं? बहुत जम के खड़ा है, आप अगली बार चूस लेना"

"मार ले मेरे बच्चे मार ले पर तुझे मजा आयेगा? तू लीना जैसी मस्त मुलायम
गांडें मारता है तो मेरी तो जरा कड़क लगेगी तुझे"

"तभी तो मारनी है चाचाजी, आप के चूतड़ क्या कसे हुए हैं, कसरत से एकदम
सख्त हो गये हैं, बहुत मन होता है मेरा"

"तो मार ले मेरी जान, पर झड़ना नहीं, मुझे स्वाद लेना है तेरी मलाई का"
कहकर चाचाजी लेट गये. मैंने उनकी गांड को सहलाया, वाकई सख्त और मांस
पेशियों से भरी हुई थी. मैंने मसला और दबाया और फ़िर जीभ से चाटा. चाचाजी
कमर हिलाने लगे "अरे मेरे राजा .... मजा आ गया रे ... तेरी जीभ तो जादू
करती है जादू ... चाट ना"

मैं जीभ रगड़ रगड़कर चाचाजी की गांड चाटने लगा. फ़िर जीभ की नोक लगा कर उनके
छेद को गुदगुदाया. चाचाजी मस्ती से ऊपर नीचे होने लगा. मैंने मख्खन उंगली
में लिया और चाचाजी की गांड में घुसेड़ दी. गांद एकदम टाइट थी.

"चाचाजी, ये तो टाइट है बहुत ... एक बात पूछूं चाचाजी .... आप ने मरायी
है क्या कभी?" मैंने पूछा.

"नहीं बेटे, आज पहली बार है, वैसे गांड मारी है एक दो लौंडों की ....
तेरी चाची जब मैके गयी थी तब गांव के एक लौंडे को पकड़ लिया था ... किसी
औरत को पकड़ता तो तमाशा हो जाता ... बड़े प्यार से मरवाता था वो छोकरा ....
पर साला बाद में गांव छोड़ के शहर चला गया पढ़ने ... उसके बाद नहीं मारी,
तेरी चाची ही मरवाने को मान गयी.....मैके जाना भी बंद कर दिया .....तू
मार ना ... तेरी जीभ ने बहुत मस्त किया है मेरी गांड को .... अब चोद डाल"

मैंने चाचाजी की गांड में और मख्खन लगाया और फ़िर अपना लंड डाल दिया. लंड
का सुपाड़ा जाते ही चाचाजी "हां अनिल .... डाल बेटे .... पूरा डाल दे"
करने लगे.

चाचाजी का गांड मस्त टाइट थी, शायद सच में पहली बार मरा रहे थे. पर मूड
में थे इसलिये अपनी गांड ढीली कर कर के उन्होंने पूरा ले लिया.

"आ जा बेटे, चढ़ जा मुझ पे, ... आ और पास आ" चाचाजी बोले. मैं चाचाजी पर
सो गया और अपने पैर और हाथ उनके बदन के इर्द गिर्द लपेट कर उनकी गांड
मारने लगा.

"आहा .... बहुत अच्छे मेरे बेटे ... मजा आ रहा है रे ... साले गांडू
छोकरे क्यों मराते हैं ... अब समझ में आ रहा है ... झड़ तो नहीं रहा है
ना?"

"अभी नहीं चाचाजी .... अभी तो मस्त खड़ा है ... आप की गांड बहुत टाइट है
चाचाजी ... कस के प्यार से पकड़े हुए है मेरा लौड़ा ... अरे ये क्या ... कर
रहे हैं .... चाचाजी ... मैं ... मैं झड़ जाऊंगा ...." मैं मस्ती से
चिल्लाया. अब चाचाजी अपनी गांड सिकोड़ सिकोड़ कर मेरे लंड को गाय के थन
जैसे दुह रहे थे.

चाचाजी हंस कर बोले "हो गया काम तमाम? बेटे, चल निकाल ले जल्दी दे, झड़ मत अंदर"

kramashah...............
















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सेक्सी कहानियाँ मैं, लीना और चाचा-चाची--4

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

मैं, लीना और चाचा-चाची--4

gataank se aage............
मैं उठा और थोड़ी देर चाचाजी की ओर पीठ करके खड़ा रहा कि उनको मेरे गोरे
कसे चूतड़ ठीक से दिखें. कनखियों से पीछे देखा तो चाचाजी मेरे चूतड़ों पर
नजर गड़ाकर देख रहे थे.

मैं फ़िर लीना के पास बैठ गया और हम दोनों मिलकर चाचाजी के लंड से खेलने लगे.

"बहुत बड़ा है लीना, नौ दस इंच का होगा, तेरी चूत को तो चीर दिया होगा कल
इसने" मैंने लीना से कहा.

"हां राजा, जान निकाल दी पर तेरी कसम क्या लुत्फ़ आ रहा था इससे चुदने
में" लीना बोली.

"ये सुपाड़ा तो देख, टमाटर है टमाटर"

"तो चूस लो ना, कल से तो रिरिया रहे हो" लीना बोली. मैंने झट मुंह खोल के
सुपाड़ा मुंह में भर लिया और चूसने लगा.

"आह .... चूस मेरे बेटे .... मस्त चूसता है तू" चाचाजी मेरा सिर पकड़कर बोले.

"छोड़ो जी अब, अब मैं चूसूंगी" लीना बोली.

"अरी ठहर, जरा ठीक से पूरा चखने तो दे, देख कैसा मस्त डंडा है, एकदम
गन्ना है गन्ना" कहकर मैंने चाचाजी का लंड उनके पेट से सटाया और उसका
निचला भाग चाटने लगा. चाचाजी की सांस जोर से चलने लगी. "क्या जादू है
अनिल तेरी जीभ में ... बहू .... तेरा ये घरवाला भी बड़ा रसिया लगता है
.... आह ... और चाट बेटे ... ऊपर वहां थोड़ा और .... हां .... बस इधर ही
..... आह .... साला मस्त लौंडा है, लंड चूसने की कला जानता है ... पहले
पता होता तो इसको कब का चोद दिया होता मैंने" चाचाजी मस्त हो कर ऊपर नीचे
होने लगे.

लीना ने लंड मुझसे छीन कर अपने हाथ में लिया और बाजू से चाटने लगी. फ़िर
पूरा मुंह में ले लिया और मुंह ऊपर नीचे करके लंड चूसने लगी.

"ओह ... ओह ... क्या चूसती है ये हरामजादी रंडी .... अरे तेरी चाची को भी
सीखने में महना लग गया था, दम घुट कर गों गों करने लगती थी ... आह ..."

लीना ने लंड मुंह से निकाला तो मैंने उसे मुंह में ले लिया. फ़िर मुंह खोल
कर पूरा लंड निगलने की कोशिश करने लगा.

"ये आप का भतीजा भी कम नहीं है चाचाजी, देखिये कैसे लंड निगलने की कोशिश
कर रहा है. अनिल मेरे सैंया, इतना बड़ा लंड चूसना तेरे बस की बात नहीं है"
लीना ने ताना मारा.

चाचाजी कमर उचका रहे थे, मेरे मुंह में लंड पेलने की कोशिश कर रहे थे
"अरे चूसने दे बहू, बहुत अच्छा चूसता है ये छोकरा ... सीख जायेगा जल्दी
.... क्या साले बदमाश हरामी हो तुम दोनों ... आज तुम दोनों को चोद दूंगा
... साले हरामियो ... बिस्तर पर पास पास लिटा कर आज दोनों को चोदूंगा"

"हां चाचाजी, चोद देना आज फ़िर से ... मेरी तो चूत फ़िर कुलबुला रही है ...
पहले आप के गन्ने का रस पियेंगे ....फ़िर चुदवायेंगे" लीना बोली और मुझ से
लंड छीन कर चूसने लगी.

हमने बारी बारी चाचाजी का लंड चूसा और उनको बहुत देर तरसाया. लीना इसमें
माहिर थी, मैं भी सीख रहा था, चाचाजी झड़ने को आते तो हम रुक जाते थे.

"साले मादरचोद भोसड़ीवाले .... चूसो ना ....अबे हरामियो .... जान बूझ कर
तड़पा रहे हो अपने चाचा को .... आज गाढ़ी मलाई चखाऊंगा तुम दोनों को ....
ये जो माल है वो सबके .... नसीब में नहीं .... है ... अनिल मेरी जान ....
चूस ले ना बेटे ... तू ही चूस ले .... तेरी ये रंडी बीवी तो साली हरामन
है .... आह .... ओह"

लीना ने मेरे कान में धीरे से कहा "झड़ा दूं या रुक जाऊं? बहुत मस्त खड़ा
है, घोड़े के लंड जैसा, अब मरवा लो, बहुत मजा आयेगा"

मैंने मना कर दिया "मर जाऊंगा, एक बार झड़ जाने दो चाचाजी को, फ़िर सह
लूंगा" धीरे से बोला.

"अब चूस डालो मेरे बच्चो ... बहू .... अब नहीं चूसा तो पटक के तेरी गांड
मार लूंगा मां कसम" चाचाजी मचल कर बोले. लीना ने इशारा किया और मैंने
चाचाजी का लंड जितना हो सकता था उतना मुंह में भर लिया. फ़िर जीभ उनके
सुपाड़े पर रगड़ रगड़कर चूसने लगा

लीना बोली "मेरी गांड मारेंगे? राह देखिये चाचाजी, मैं क्यों गांड
मरवाऊं? नहीं बाबा, मैं तो बस चुदवाऊंगी. गांड का बहुत शौक है चाचाजी?"

चाचाजी मेरे सिर को पकड़कर ऊपर नीचे होने लगे "हां ... मजा आता है ...
गांड जिस ताकत से ... लंड को पकड़ती है .... मजा आ जाता है .... तेरी चाची
की बहुत मारी है मैंने ... अब साली ढीली हो गयी है ... मां कसम कोई नयी
कुंवारी गांड मिल जाये तो .... आह .... आह .. चूस अनिल ... ऐसे ही चूस
मेरे राजा"

"तो अनिल की मार लो चाचाजी, मेरे से कम नहीं है, एकदम गोरी गोरी और कसी
हुई है, मजा आयेगा आप को, सोचो अगर आप अपने भतीजे पर चढ़ कर उसकी मार रहे
हो तो कैसा लगेगा" लीना ने उनको उकसाया.

"हां ... अनिल की भी लाजवाब है .... अभी देखी तो सोचा कि क्या गोरी गोरी
गांड है इस लड़के की ..... साला गांडू लौंडा .... पहले पता चलता तो ....
बचपन में ही चोद डालता साले को .... मेरे यहां आकर रहता था छुट्टियों में
.... आह ... ओह ... ओह ... ओह ..." करके कसमसा कर चाचाजी झड़ गये. उनके घी
जैसे वीर्य से मेरा मुंह भर गया. मैं चख चख कर खाने लगा और साथ ही उनका
सुपाड़ा जीभ से रगड़ता रहा.

"बस बेटे .... बस ... अब मत कर .. अरे कैसा तो भी होता है ... बहू ...
बहू देख ना इसको ... जीभ रगड़ रहा है नालायक ...अरे सहन नहीं होता मेरे
बेटे .... छोड़ ना ...." चाचाजी अपने लंड को मेरे मुंह से निकालने कोई
कोशिश करने लगे, उनके झड़े लंड को मेरी जीभ की मालिश सहन नहीं हो रही थी.

"चूसने दो चाचाजी, कब से बेचारा आस लगाये था, अभी मस्ती में है, अभी मत
टोको, मचल जायेगा तो काट खायेगा ... एक बार ऐसे ही मेरी बुर चूसते हुए
मेरे दाने को रगड़ रहा था ... मैंने मना किया तो चूत को ही काट लिया, दो
दिन दर्द रहा" लीना उनको डराते हुए बोली. असल में बात झूटी थी, मैं ऐसा
कभी नहीं करता लीना के साथ!

पर चाचाजी पर उसका असर हुआ, वे चुपचाप 'सी' 'सी' करते हुए बैठ गये, मैंने
मन भर के उनका वीर्य पिया और बूंद बूंद निचोड़ ली.

"वाह ... भतीजे के लाड़ दुलार चल रहे हैं, उसे मलाई खिलायी जा रही है, चलो
अच्छा हुआ, मैं भी कहूं कि ये कहां का न्याय है कि बहू पे इतनी मुहब्बत
जता रहे हो और बेचारे भतीजे को सूखा सूखा छोड़ दिया कल रात" चाची की आवाज
आयी. वे नहा कर सीधे हमारे कमरे में चली आयी थीं.

चाची भी लीना की तरह ही अधनंगी आयी थीं. एक ब्रा और पैंटी पहन ली थी. पर
क्या ब्रा था, एकदम तंग और कसी हुई. उनके नारियल जैसे बड़े बड़े मम्मे ब्रा
के कपों में समा नहीं रहे थे, जब कि ब्रा काफ़ी बड़े साइज़ की थी. पैंटी बस
उनकी बुर की लकीर को और दोनों चूतड़ों के बीच की खायी को ढके थी, उनके बड़े
बड़े पहाड़ जैसे चूतड़ों का बाकी भाग साफ़ दिख रहा था. और क्या बदन था चाची
का, चिकना, मखमले, मांसल, कुंदन जैसा दमकता हुआ.

"आज बहुत दिनों में ऐसी सजी हो भाग्यवान, क्या बात है? ये ब्रा और पैंटी
नयी लगती हैं, पहले कभी देखे नहीं" चाचाजी बोले.

"अब तुम को तो फ़रक पड़ता नहीं, तुम तो सीधे चढ़ जाते हो, पर मैंने सोचा कि
बच्चों को जरा ठीक से अपना जोबन दिखाऊं, नहीं तो वे समझते होंगे कि ये
कहां की मुटल्ली सिठानी है. कल रात को अनिल भी मुझे पूरा देखने की जिद कर
रहा था, मैंने कहा अब दिन में ही दिखाऊंगी ठीक से. पिछले महने खरीदे थे
मैंने ये कपड़े, कैसी लगती हूं मैं अनिल बेटे? तुझे चाची को देखना था ना?
ले अपनी आंखें ठंडी कर ले" चाची बोलीं

"चाची .... आप तो .... अब क्या कहूं ...." मैं बोला और उनसे लिपट गया.

"हां चाची, बहुत मस्त दिख रही हैं आप, मैं तो कब से कह रही हूं अनिल से
कि असली माल चाहते हो तो चाची के पास जाओ" लीना चाची के पास आकर बोली.

मैं चाची के बदन का जो हिस्सा सामने आये, वो चूमने लगा. ब्रा में भरे
उनके मम्मे दबाये और उनके बड़े बड़े चूतड़ों को दबाने लगा.

लीना ने चाची की दोनों चूचियों को हथेली में लेकर उठाया जैसे वजन नाप रही
हो. "चाची, ये तो दो दो किलो के पपीते जैसे लगते हैं, क्या नाप है आप का?
इतनी बड़ी ब्रा मिलती हैं मार्केट में?

"ये बयालीस साइज़ की हैं बेटी, कप डी डी. एक दुकान में दिख गयी थीं तो उठा
लायी. तेरा तो अड़तीस नाप होगा, है ना, मस्त कसी चूंचियां है तेरी. आखिर
गरम जवानी है"

"चाची, असल में छत्तीस हैं, टाइट है इसलिये आप को लग रहा होगा. आप ही खुद
देख लो" लीना ने उठाकर चाची का हाथ अपनी ब्रा पर रख लिया. चाची दबाने
लगीं, फ़िर लीना को चूमने लगीं. "बड़ी प्यारी है तू लीना, इसीलिये तो तेरे
चाचाजी दो दिनों से अजीब सी हरकत कर रहे हैं. आ इधर आ, मेरे पास बैठ,
तुझे ठीक से देखूं तो" कहकर चाची लीना को लेकर पलं पर बैठ गयीं, लीना को
गोद में बिठा लिया. फ़िर दोनों में मस्ती की चूमाचाटी होने लगी. कभी चाची
लीना की चूंचियां दबाती कभी पैंटी में हाथ डालकर बुर को खोदतीं. लीना तो
बस उनके मम्मों पर टूट पड़ी थी, ब्रा के ऊपर से ही चाची के निपल चूस रही
थी.

मैं तना लंड लेकर उनके पास बैठा था. मन हो रहा था कि लीना को बाजू में
करके चाची पर चढ़ जाऊं. चाची मेरी हालत जान कर मुझे और तरसाने पर जुट
गयीं. नीचे लेटकर उन्होंने अपनी टांगें फ़ैला दीं और बोली "लीना बिटिया,
देख कैसी हालत हो गयी है तुझे देख के, कल तेरे मर्द ने मुझे बहुत सुख
दिया पर तू कोई कम नहीं है" और उन्होंने पैंटी की पट्टी बुर पर से
खिसकाकर उंगली से अपनी चूत खोली और लीना को दिखायी.

"ह ऽ य चाची, कितनी प्यारी है और कितनी बड़ी .... बहुत मीठी दिख रही है
चाची ... तभी कल अनिल कह रहा था कि रात भर चासनी पी कर आया है"

"तो तू भी पी ले, तेरा भी हक है, आ जा बेटी ... ये ले" कहकर चाची ने
पैंटी उतार दी. लीनाने मुंह डाल दिया और चूसने लगी.

'आह ... अरे अनिल ... मेरी कब से तमन्ना थी .... जब से बहू को देख है
लगता था कि कब इसे अंग से लगाऊं ... तू यहां आ ना, इनको देख ... ले मैं
ब्रा उतार देती हूं"

चाची ने ब्रा उतारी तो उनके नारियल जैसे मम्मे लटकने लगे. खजूर से निपल
थे और आजू बाजू के भूरे गोले चाय की तश्तरी जैसे बड़े थे. मैंने मुंह में
ले लिया और चूंची दबा दबा कर चूसने लगा.

चाचाजी लंड मुठ्ठी में लेकर ऊपर नीचे कर रहे थे, अब वो फिर से खड़ा होने
लगा था. वो सरक कर लीना के पास आये और उसकी पैंटी खिसकाने की कोशिश करने
लगे. लीना ने उनका हाथ झटक दिया.

"बड़ी हरामन है, साली गांड देखने भी नहीं देती, मारने क्या देगी" पैंटी के
ऊपर से ही लीना के चूतड़ दबा कर चाचाजी बोले.

लीना चाची की बुर से मुंह उठा कर बोली "चाचाजी मेरी गांड तो आप को नहीं
मिलेगी, कम से कम आज तो नहीं, आप तो चाची की रोज मारते होंगे ना, फिर
क्यों मस्ती चढ़ रही है आप को"

"अरे बेटी, मेरी तो मार मार के चौड़ी कर दी है इन्होंने, अब कोई जवान कोरी
गांड चाहिये इनको" चाची लीना के सिर को जांघीं में दबा कर हचकती हुई
बोलीं.

"नहीं चाची, आप की गांड सच में मस्त है, स्पंज के पहाड़ हैं पहाड़. कल रात
बहुत मजा आया था मारने में, जरा दिखाइये ना ठीक से"

चाची ने लीना से कहा "बेटी उठ जरा, इस लड़के के मन की भी कर दूं" उन्होंने
लीना को नीचे सुलाया और उसके ऊपर उलटी लेट गयीं. लीना के मुंह में अपनी
चूत दी और चूतड़ हिला कर बोलीं "ले, देख ले, मुंह मारना है तो वो भी कर
ले"

चाची के दो चूतड़ याने बड़े बड़े रसीले तरबूज थे. मैं उनको चाटने और चूमने
लगा. फ़िर गांड खोल कर उनका छेद चाटने लगा, जीभ भी अंदर डाली.

लीना नीचे से बोली "चाचाजी, आज आप को न चाची की गांड मिलेगी न मेरी, आप
तो और कोई ढूंढ लो."

चाची झल्ला कर अपने पति से बोलीं "अजीब आदमी हो, वो अनिल की गांड नहीं
दिख रही है? अरे इतनी गोरी गोरी और चिकनी तो औरतों की भी नहीं होती.
तुमको तो गांड चाहिये ना, फ़िर ये तो है तुम्हारे सामने."

चाचाजी मेरे चूतड़ों पर हाथ फ़िराने लगे. "हां भाग्यवान, मैंने देखा, बड़ी
मस्त है, मैं तो कल से देख रहा हूं, बहू भी अभी थोड़ी देर पहले बोल रही थी
कि मार लो, मैंने सोचा साली चुदैल मजाक कर रही है"

"तो ले लो ना, अनिल मना थोड़े करेगा अपने चाचाजी को, आखिर बचपन में गोदी
में खिलाया है उसको, और तुम्हारा लंड नहीं चूसा उसने अभी, तुम्हारा लंड
भा गया है उसको"
चाचाजी झुक कर मेरे चूतड चूमने लगे. कभी चाटते, कभी नाक लगाकर सूंघते.
फ़िर अपने लंड को मेरे चूतड़ों पर रगड़ने लगे. "आह ... बड़ी मस्त है रे अनिल
... मेरा लौड़ा देख ... साला एक मिनिट में कैसे तन गया फ़िर से .... बेटे
.... मारने देगा?"

मैं कुछ बोलता इसके पहले लीना बोल पड़ी "मार लो ना चाचाजी, आप के हक की
है, सगे भतीजे की, आप को नहीं देगा तो किसको देगा? ... वैसे सब को नहीं
देता मेरा सैंया, बड़ी संभाल कर रखता है चाचाजी"

चाचाजी ने मुंह में उंगली ले कर गीली की और मेरी गांड में उंगली करने
लगे. मैंने गांड सिकोड़ ली. "वाह ... बड़ी मस्त टाइट गांड है अनिल तेरी ...
मार लूं क्या बेटे .... अब नहीं रहा जाता रे .... बहू नहीं मारने दे रही
है ... तू ही मरवा ले... अरे क्या छेद है तेरा .... मुलायम और गुलाबी"
कहकर फिर मेरे छेद को चूसने लगे, उनकी जीभ अब अंदर जाने को बेताब थी.

"अरे क्यों बार बार पूछ रहे हो, उसने मना किया एक बार भी? मार लो ना,
नहीं मरवायेगा तो मैं देख लूंगी उसको" चाची बोलीं.

चाचाजी तैश में आकर मेरे ऊपर चढ़ कर मेरी गांड में लंड डालने की कोशिश
करने लगे. उनका बड़ा सुपाड़ा मेरे गुदा के छेद को खोलने की कोशिश कर रहा
था. मुझे दर्द हुआ तो मैं 'सी' 'सी' करने लगा.

"अरे कैसे बेरहम हो जी, कुछ लगा तो लो, ये क्या चूत है जो ऐसे ही डाल
दोगे? तुम्हारे भतीजे की कोरी गांड है" चाची बोलीं.

चाचाजी जा कर तेल की शीशी ले आये. लीना बोली "चाचाजी, तेल से काम नहीं
चलेगा, आप का बहुत बड़ा है, मेरी मानो तो जाकर फ़्रिज में से मख्खन का
डिब्बा ले आओ, मस्त सटकेगा आप का लंड"

चाचाजी उठकर चल दिये. लीना बोली "वो ऊपर रखा है, स्टील का डिब्बा है, घर
का मख्खन है" चाचाजी झट से उठ कर चल दिये.

मैं बोला "लीना, डर लगता है, चाचाजी फ़ाड़ न दें मेरी"

चाची ने मेरा लंड टटोला और हंसने लगीं. "तेरे को डर लगता है तो ये कैसे
मस्त उचक रहा है? अब नखरा मत कर, सच तेरे चाचाजी का लंड कमाल की चीज है,
जो एक बार लेता है, फ़िदा हो जाता है"

चाचाजी वापस आये और मेरी गांड में मख्खन चुपड़ने लगे. "अरे ये क्या जरा सा
चुपड रहे हो, दो चार लौंदे भर दो, जरा अंदर तक जाये तब तो काम होगा,
तुम्हारा इतना लंबा है, गहरा जायेगा अनिल की गांड में, बिना मख्खन के
मारोगे तो फ़ट जायेगी बेचारे की" चाची बोलीं.

चाचाजी ने तीन चार लौंदे भर दिये मेरी गांड में. लीना चाची के नीचे से
निकल आयी. "अरे बेटी, और चूस ना मेरी बुर, अभी तो पानी निकलना शुरू हुआ
है, बहुत पिलाना है तुझे अभी"

"चाची, बस अभी चूसती हूं, पहले जरा देखूं तो कि अनिल कैसे लेता है. मैं
तो ताली बजा कर हंसूंगी जब ये चिल्लायेगा. इसके दोस्त जब मुझे चोदते हैं
तो ये मजे लेता है, आज मैं लूंगी"

"अरी रानी, पर तुझे तो मजा आता है उनसे चुदने में" मैंने कहा तो लीना
बोली "और तुमको नहीं आ रहा है, बन रहे हो पर मन में लड्डू फ़ूट रहे हैं"
kramashah...............















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सेक्सी कहानियाँ मैं, लीना और चाचा-चाची--3

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

मैं, लीना और चाचा-चाची--3

gataank se aage............
मैं बिस्तर पर चित लेट गया. चाची मेरे ऊपर चढ़ गयीं. अंधेरे में मुझे
महसूस हुआ कि उनकी मोटी मोटी टांगें मेरे सिर के दोनों ओर आ गयी हैं. फ़िर
वे नीचे बैठ गयीं, गीले चिपचिपे मांस ने मेरा मुंह ढक लिया. उनकी चूत
इतनी बड़ी थी कि उसने मेरे चेहरे का पूरा निचला भाग अपने में समा लिया. वे
चूत रगड़कर बोलीं "अब फ़िर से चूस, बहुत अच्छा लगता है रे जब तू चूसता है,
तब तक मैं देखती हूं कि तेरा स्वाद कैसा है."

मैं उनके मोटे मोटे चूतड पकड़कर उनकी बुर पर पिल पड़ा. वहां मुझे महसूस हुआ
कि मेरा लंड किसी गरम गीली गुफ़ा में घुस गया हो. चाची उसे मुंह में ले कर
चूस रही थीं.

चाची का अस्सी किलो वजन मेरे ऊपर था पर मेरी मस्ती में मैं आराम से उसे
सह रहा था. बीच में चाची अपनी बुर थोड़ी उठा लेतीं और मैं गर्दन लंबी करके
जीभ से लपालप चाटता. फ़िर वे पूरा वजन देकर मेरे मुंह पर बैठ जातीं और
मेरी मुंह उनकी बुर में समा जाता.

थोड़ी देर में मैं झड़ गया. चाची ने मेरा वीर्य पूरा निगल लिया. झड़ने के
बाद मैं थोड़ा लस्त हो गया, चाची की बुर चूसना बंद कर दिया. चाची बोलीं
"वा मेरे राजा, अपना काम हो गया तो चूसना बंद कर दिया? अरे ये बुर आज
तेरी खातिर रस छोड़ रही है, पूरा पी जा. चल जीभ चला जल्दी जल्दी"

मैं फ़िर चूसने लगा. चाची मेरे मुंह पर कस के बुर रगड़ रही थीं. उनका क्लिट
मेरे होंठों पर किसी चिकने पत्थर जैसा लग रहा था. उन्होंने मेरे लंड को
चूसना जारी रखा. मैंने कुलबुला कर लंड मुंह से निकालने की कोशिश की तो
चाची ने उसे हौले हौले चबाना शुरू कर दिया. फ़िर बोलीं "अब नखरे करेगा तो
चबा कर खा जाऊंगी, सच कहती हूं, चुपचाप मुंह चलाता रह और मुझे अपने मन की
करने दे"

थोड़ी देर में मुझे फ़िर अच्छा लगने लगा और मैं कमर उचका कर चाची का मुंह
चोदने की कोशिश करते हुए चाची के भगोष्ठ मुंह में लेकर चूसने लगा. चाची
फ़िर भलभला कर मेरे मुंह में झड़ गयीं.

थोड़ी देर के बाद वे लुढ़क कर अलग हो गयीं "हां ... अब कुछ तसल्ली मिली ...
मैं तो परेशान हो गयी थी .... बड़े प्यार से चूसता है तू अनिल, बहू तो खुश
होगी तुझपर? अब मेरे ऊपर आ जा और अपनी प्यास बुझा ले"

मैं अंधेरे में चाची के ऊपर फ़िर चढ़ा तो समझ में आया कि वे पट लेटी हुई
थीं. मेरा सुपाड़ा उनके गुदाज चूतड़ों के बीच घिस रहा था.

"चाची .... गांड मार लूं?"

"तो मैं क्या फ़ालतू पट लेटी हूं नालायक? चल मार जल्दी. तू भी तो अपने
चाचाजी का ही भतीजा है, गांड के चक्कर में रहता होगा, है ना? इसलिये सोचा
कि आज बिन मांगे तेरी मुराद पूरी कर दूं"

मैंने लंड पेल दिया. पक्क से पूरा लंड चाची की गांड में समा गया, एकदम
ढीली और नरम गांड थी.

"चाची ये तो ऐसे घुस गया हो कि जैसे गांड नहीं चूत हो" मैंने कहा और लंड
अंदर बाहर करने लगा.

"अरे तेरे चाचा हैं ना गांड के पुजारी. पहले चोद चोद के मेरी चूत का
भोसड़ा बना दिया, फ़िर गांड की पूजा कर कर के मेरी गांड भी चूत जैसे खोल
दी. चल मार, आज कल मुझे भी चस्का लग गया है गांड मराने का" कहकर चाची
चूतड़ हिलाने लगीं. मेरे हाथ उठाकर उन्होंने अपने बदन के नीचे कर लिय
"मम्मे दबा ना. मम्मे दबा दबा कर मारी जाती है गांड"

चाची के मोटे मोटे मम्मे दबाता हुआ मैं उनकी गांड चोदने लगा.
"तूने बताया नहीं कि बहू के साथ क्या करता है, तू जिस तरह से चूसता है,
वो तो बेहद खुश होगी तेरे पर?"

"हां चाची, बड़ा प्यारा रस है उसकी बुर का, एकदम शहद है, आप जैसा ही. पर
चाची, महा चुदैल है, चुदाने की प्यास ही नहीं बुझती, इसलिये तो चाचाजी के
लंड से चुदाने को मरी जा रही थी. आज जब मेरे सामने चुदी तो थोड़ी शांत
हुई. वैसे आज शायद चाचाजी से रात भर चुदवायेगी वो"

"अरे तेरे चाचाजी पूरा ठंडा कर देंगे उसको, बड़ा जानदार लंड है उनका, तूने
देखा ही है. पर ये बता, चुदा चुदा कर उसकी चूत फ़ुकला नहीं हुई अब तक?
नहीं हुई तो अब हो जायेगी, तेरे चाचाजी तो भोसड़ा बना देंगे उसका मेरी
तरह"

"बड़ा खयाल भी रखती है चाची अपनी बुर का. योगासन करती है, रोज बर्फ़ से
सेकती है अंदर से कि टाइट रहे"

"तू गांड भी मारता है क्या बहू की?" चाचीजी ने कमर हिलाते हुए पूछा.

"हां चाची, कभी कभी मारता हूं ... जब वो मारने दे ... पर वो तो चुदाती
ज्यादा है ....ओह चाची ... आप की गांड बहुत मीठी है ... कैसे मेरे लंड को
पुचकार रही है"

"अरे तूने इतना सुख दिया है, उसका बदला चुका रही है. वैसे तेरे चाचाजी
उसकी गांड मारने के लिये मरे जा रहे होंगे"

"वो घास नहीं डालेगी चाची, मराती वो सिर्फ़ मुझसे है, हां चुदवा लेती है
किसी से भी. मालूम है चाची, मेरे कई दोस्तों से चुदवा चुकी है. पिछले साल
हम घूमने गये थे तब होटल का वेटर पसंद आ गया था, उसी से चुदवा लिया. उसके
पहले जब हम हनीमून पर गये थे तो हमारे बाजू के कमरे में एक दूसरा जोड़ा
था, उस मर्द से चुदवा लिया सुहागरात के दिन"

"और तूने भी तो चोदा होगा उसकी औरत को. और जब वो चुदवाती है तेरे दोस्तों
से, तो तू भी चोदता होगा उनकी बीवियों को?"

"हां चाची, मेरा बड़ा खयाल रखती है. जब वो वेटर से चुदवा रही थी तो वेटर
से कह कर उसकी बहन को बुला लिया था लीना ने, वहीं होटल में नौकरानी थी.
एक पलंग पर वो वेटर मेरी बीवी को चोद रहा था और दूसरे पलंग पर मैं उस
वेटर की बहन की बुर खोल रहा था. बहुत प्यार करते हैं हम एक दूसरे से
चाची, और खूब चुदाई करते हैं"

"लीना की बुर कैसी है रे? उसकी चुदाई के किस्से सुन सुन कर मेरे मुंह में
भी पानी आ रहा है." चाची एक गहरी सांस लेकर बोलीं.

"चाची, आप खुद देख लेना, वो काफ़ी शौकीन है, औरतों से भी इश्क कर लेती है,
आप को भी पसंद करती है, कह रही थी कि चाची का बदन कैसा मस्त है, खोवे का
गोला है गोला"

"अरे उसे कह कि चख के देख ये खोवा, खुश हो जायेगी. तेरे चाचाजी के लंड से
कम नहीं है मेरी चूत"

"चाची, चाचाजी का लंड वाकई बड़ा मस्त है, जब लीना की बुर में जा रहा था,
मेरा मन हुआ कि अरे मैं लड़की होती और लीना की जगह होता तो क्या मजा आता"
मैंने कह डाला, सोचा देखें चाची क्या कहती हैं.

"अरे उनका है ही ऐसा, कोई भी दीवाना हो जाये, वैसे क्या फ़रक पड़ता है कि
तू लड़की नहीं है, तू भी मजा ले ले, चाचाजी तेरे को मना नहीं करेंगे, अरे
तू तो घर का है और तेरी भी तारीफ़ कर रहे थे, बोले बहुत प्यारा जोड़ी है
अनिल और लीना की, लीना सुंदर है तो अनिल भी कम नहीं है, लड़की होता तो
बहुत सुंदर दिखता अपना अनिल भी. ऐसा कर, कल ही कह के तो देख चाचाजी से,
मैं भी साथ दूंगी तेरा, मुझे भी तो बहू चाहिये, जब तक मैं बहू के लाड़
करूं, तू चाचाजी से अपने लाड़ करवा ले, बल्कि मैं तो कहूंगी कि कहने सुनने
के चक्कर में न पड़, सीधे जाकर उनका लंड पकड़ ले"

"सच चाची? आप ने तो मेरे दिल की बात कह दी .... चाची .... ओह चाची .....
"कहकर मैं झड़ गया.

"मजा आया ना बेटे? अब सो जा. आज ही सब जोश ठंडा न कर, कल के लिये बचा के
रख" चाची ने मुझे सीने से लगा लिया और थपथपा कर छोटे बच्चे जैसे सुला
दिया.

सुबह सब देर से उठे. मैं चाची के कमरे के बाहर आया तो लीना भी जाग गयी
थी, चाय बना रही थी. जब चाय लेकर मेरे पास आयी तो पैर फ़ुतरा कर चल रही
थी.

"क्यों रानी, बना दिया भुरता चाचाजी ने तेरी चूत का? हो गयी तसल्ली?"
मैंने उसे चूम के कहा.

"हां डार्लिंग, बहुत दिनों में मेरी चूत को किसीने ऐसे धुना है. लाजवाब
चीज है चाचाजी का लंड, मैंने तो रात भर नहीं छोड़ा उनको, अभी उठने के पहले
एक बार और चुदवा कर आयी हूं. ये देखो" लीना ने गाउन उठाकर चूत दिखायी.
चुद चुद कर लीना की बुर लाल हो गयी थी और पपोटे सूज कर गुलाबे की कली से
लग रहे थे. चूत में से सफ़ेद सफ़ेद वीर्य टपक रहा था.

मैं तुरंत उठा और लीना के सामने बैठ कर उसकी बुर चाट डाली. लीना बोली.
"मेरा शुक्रिया अदा करो, तुम्हारे लिये ले कर आयी हूं ये मलाई. अब तुम
कहो, तुम मुंह मार आये चाची के बदन में? मजा आया?"

"अरे चाची याने मैदे का गोला है, खोवा है खोवा. और तेरी भी आशिक है, कह
रही थीं कि बहू को कह कि इस खोवे को चख के देख जरा"

"हां, मेरा भी मन हो रहा है. आज क्या प्रोग्राम है?"

"चाचा चाची आज जा रहे हैं दिन भर के लिये चाची के मायके. रात में वापस
आयेंगे, दोपहर को हम भी आराम कर लेते हैं, फ़िर ऐसा करेंगे कि आज रात
दोनों मिलकर चाचा चाची की सेवा करेंगे, ठीक है ना?

"हां ठीक है, मैं जानती हूं कि तुम भी मरे जा रहे हो चाचाजी के गन्ने का
रस चखने को. ऐसा करो, आज मरवा भी लो" लीना शैतानी से बोली.

"अरे नहीं, मैं तो चूसूंगा भर, गांड फ़ड़वानी है क्या" मैंने लहा.

"पर देखो, तुम्हारा तंबू बन गया फ़िर से लंड की बात सुन कर. आज तो मरवा ही
लो. नहीं मरवाओगे तो मैं झगड़ा कर लूंगी. मेरी कसम" लीना बोली.

"तुम अच्छी पीछे पड गयी मेरी गांड के, तुमको क्या मजा आयेगा चाचाजी मेरी
गांड चौड़ी करेंगे तो?"

"तुम नहीं जानते, मेरे सामने कोई मेरे मर्द को चोदे तो मुझे बहुत मजा
आयेगा. और झूट मत बोलो, वहां उस दिन रोहित और मीनल के साथ हम थे और रोहित
ने तुम्हारी गांड मारी थी तो कैसे गुनगुना रहे थे"

"अरे वो तुम और मीनल पीछे पड़ गयी थीं कि जब हम दोनों औरतें आपस में कर
सकती हैं तो तुम मर्द क्यों नहीं करके दिखाते. इसलिये मरवा ली थी मैंने.
और अजीब बात करती हो, मैं क्या खुद चाचाजी से कहूं कि मेरी गांड मार
लीजिये चाचाजी, वो रोहित से तो शर्त शर्त में मरवा ली थी मैंने"

"पर कैसे चहक रहे थे जब रोहित तुम्हारी गांड में लंड पेल रहा था. आह आह
कर रहे थे और कमर हिला हिला कर मरवा रहे थे. और रोहित का तो तुमसे भी
छोटा है. उससे इतना मजा आया तुमको तो चाचाजी का लंड तो तुमको जन्नत की
सैर करवा देगा. आज ले ही लो चाचाजी का, मेरी कसम. मैं चक्कर चला दूंगी आज
चाचाजी से तुम्हारे बारे में कह के, तुम्हें शरमाने की जरूरत नहीं है. कल
मेरी गांड मारने को मरे जा रहे थे पर मैंने घास नहीं डाली, उनको कहा कि
गांड के लिये कल का इंतजार करो. ये नहीं बताया कि किसकी गांड."

मैंने आखिर हां कर दी. लीना मेरे मन की बात ताड़ गयी थी, उससे कुछ नहीं छुपता.

रात को चाचा चाची वापस आये और नहाने को चले गये. खाना वे खाकर आये थे.

मौसी ने नहाने जाने के पहले लीना से कुछ बातें कीं. लीना मुस्कराने लगी.

चाचाजी नहाने जाते वक्त लीना से बोले. "क्यों बहू, आज भी कुछ सेवा करेगी
अपने चाचाजी की? कल रात तो तूने मुझे एकदम खुश कर दिया."

"खुश तो आप ने मुझे किया चाचाजी. आप नहाइये, मैं आती हूं आप के कमरे में"
लीना बोली.

लीना हमारे बेडरूम में गयी तो मैं भी पीछे पीछे हो लिया. अंदर लीना कपड़े
उतार रही थी. जब ब्रा और पैंटी बची तो वो अपने बाल संवारने लगी.

"नंगी नहीं होगी क्या आज रानी?"

"नहीं, ऐसे ही जाऊंगी, जरा चाचाजी को तरसाऊंगी. तुम कपड़े निकालो और
दरवाजे पे खड़े रहो, जब मैं बुलाऊं तो आना. आज चाचाजी से अपने भतीजे के
लाड़ मैं करवा के रहूंगी"

"और चाची?"

"अरे तुम तो चलो, चाची आ जायेंगीं. उन्होंने ही कहा मुझे कि अनिल को जरा
मिलवा दे चाचाजी से, नहीं तो शरमाता रहेगा"

लीना चाचाजी के कमरे में गयी, मैं बाहर खड़ा होकर कीहोल में से देखने लगा.

चाचाजी नहा कर ताजे तवाने होकर आराम कुरसी में नंगे बैठे थे और लंड से
खेल रहे थे. लंड पूरा खड़ा था, देख कर मेरे मुंह में पानी भर आया, गांड
में अजीब से गुदगुदी होने लगी.

"आओ बहू, तुम्हारी ही राह देख रहा था. क्या दिख रही हो ब्रा और पैंटी
में, लगता है पकड़ के यहीं पटक दूं और चोद डालूं" चाचाजी मस्ती से बोले.

"वो तो करना ही है चाचाजी पर आप बहुत जल्दी करते हैं, आप आराम से बैठो और
मुझे जरा आप के लंड की ठीक से पूजा करने दो, कल जल्दी जल्दी में ठीक से
इससे खेल भी नहीं पायी"

"अजीब लड़की हो, रात भर चुदवाया और कहती हो कि ..."

"पर खेला कहां चाचाजी? मेरा मतलब है कि ऐसे" लीना चाचाजी के सामने बैठ कर
उनके लंड को चूमने लगी. उससे तरह तरह के खेल करने लगी. कभी जीभ से चाटती,
कभी चूसती, कभी अपनी ब्रा के कपों के बाच पकड़कर अपने चूचियों से चोदने
लगती.

"आह ... क्या मजा आ रहा है बहू ... देख ये और खड़ा हो जायेगा ... फ़िर आज
तेरी चूत जरूर चीर देगा .... कल तो तू बच गयी .... आह ... कितने प्यार से
चूसती है बहू ... बड़ी दीवानी हो गयी है मेरे लंड की"

"चाचाजी, सिर्फ़ मैं ही दीवानी नहीं हूं आप के इस मूसल की. कोई और भी है.
आप का लंड तो ऐसा है कि कोई भी पागल हो जाये इसपे" लीना अपने गालों पर
उनके सुपाड़े को रगड़ते हुए बोली.

"कौन है बेटी, चाहिये तो उसे भी बुला ला. अरे मेरा लंड तो बना ही है तेरे
जैसी छिनाल चुदैलों के लिये" चाचाजी लीना की पीठ पर हाथ फ़िराते हुए बोले.
फ़िर उसकी ब्रा की डोरी से खेलने लगे. "ले आ उसे भी, खुश कर दूंगा उसको
भी, तेरी सहेली है क्या कोई? या पड़ोस वाली? पर उसने कहां देखा मेरा लंड?"

"नहीं चाचाजी, यहीं घर में है. मैंने उससे कहा भी कि शरमाने की क्या बात
है, पर वो झिझक रहा था, बोल रहा था आप न जाने क्या सोचें. कल इसीलिये तो
रुका था कि आप के लंड को देख ले, आप मुझको चोद रहे थे और मजा उसको आ रहा
था." लीना बोली.

"अरे ... तू अनिल बेटे की बात कर रही है क्या?" चाचाजी बोले. फ़िर मुस्करा
कर बोले "अरे बुला ले ना उसको, अजीब लड़का है, अरे घर की बात है, मैं उसको
ना थोड़े ही करूंगा. अच्छा खासा लौंडा है, चिकना भी है. कल हमारी चुदाई
देख देख कर सड़का लगा रहा था. याने मेरे लंड को देखकर मस्त हो रहा था वो
बदमाश. लंडों का शौकीन है क्या? "

"सब लंडों का नहीं चाचाजी, बस आप जैसे खास लंडों का. बोल रहा था कि लीना
रानी, चाचाजी तुझे चोद रहे थे तब ऐसा लग रहा था कि काश मैं भी लड़की होता.
आप ने देखा नहीं कैसे लपालप मेरी बुर में से आपकी मलाई चाट रहा था" लीना
बोली और अपने ब्रा के कपों में लंड पकड़कर घिसने लगी.

"अरी बुला ना उसको, उसे भी मजा कर लेने दे. इस लंड से तुम दोनों मिया
बीवी को सुख मिले इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है मेरे लिये"
चाचाजी बोले.

"अनिल राजा, आ जाओ, मत शरमाओ, मैं कह रही थी ना कि चाचाजी तुमको भी उतना
ही प्यार करते हैं" लीना चिल्लाई. मैंने चेहरे पर झूट मूट का शर्मिंदगी
का भाव लाया और अंदर आ कर लीना के पास बैठ गया. नीचे देखते हुए मैंने
चाचाजी का लंड पकड़ा और सहलाने लगा.

"अनिल, पहले आ और मेरे पास बैठ. ये क्या बात हुई, तू मुझे पराया समझता है
क्या? अरे कल ही कह देता, मैं तुझे भी खुश कर देता, बदमाश कहीं का. शरमा
क्यों रहा है? तेरे चाचाजी की हर चीज तेरी है" चाचाजी मेरा कान पकड़कर
उठाते हुए बोले. उनकी बांछें खिल गयी थीं.

मैं उठकर नीचे देखता हुआ उनके पास बैठ गया. चाचाजी ने मुझे पास खींच लिया
"वैसे लौंडा तू बड़ा चिकना है. मैं भी तेरी चाची से कह रहा था कि अनिल
लड़की होता तो बहुत मस्त दिखता" उन्होंने एक हाथ में मेरा लंड पकड़ लिया
था. "लंड तेरा भी मस्त है, एकदम कड़क है"

"आप का लंड तो पूजा करने लायक है रजत चाचा. क्या मस्त सोंटा है, रसीला
गन्ना है गन्ना, चूस लेने को जी करता है" मैं उनसे लिपट कर बोला.

"तो चूस ले मेरी जान, मैं कहां मना करता हूं. पर पहले एक चुम्मा दे" कहकर
उन्होंने मेरे होंठों पर होंठ रख दिये और चूमने लगे. एक हाथ से वे मेरी
पीठ सहला रहे थे. मैंने कुछ देर उनको अपने होंठ चूमने दिये, फ़िर उनके गले
में बाहें डाल कर उनको जोर जोर से चूमने लगा. धीरे धीरे उनका हाथ मेरी
पीठ पर से नीचे खिसककर मेरे चूतड़ सहलाने लगा. लीना नीचे बैठ कर देख रही
थी, मुझे आंख मार दी, इशारा कर रही थी कि लो, चाचाजी भी रीझ गये हैं तेरे
पर.

"चाचाजी .... अब चूसने दीजिये ना ... मुंह में लेकर गन्ने जैसा चूसूंगा
मैं" मैंने चुंबन तोड़ कर चाचाजी से लिपट कर कहा.

"मजा आ रहा है अनिल, तेरा चुम्मा बहू जैसा ही मीठा है पर ठीक है, बाद में
फ़ुरसत से तुझसे प्यार मुहब्बत की बातें करूंगा, ले, लंड चूस ले मेरा,
लीना देखो कैसे पिली पड़ रही है, खा ही जायेगी जैसे" चाचाजी बोले.
kramashah...............















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सेक्सी कहानियाँ मैं, लीना और चाचा-चाची--2

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

मैं, लीना और चाचा-चाची--2

gataank se aage............
चाचाजी लंड पेलने लगे. आधा लंड अंदर गया तो लीना छटपटाने लगी. "ओह ...
नहीं सहा जाता चाचाजी ... मर गयी मैं ... बहुत बड़ा है ... उई मां ऽ अनिल
राजा .... तेरे चाचाजी तो सांड हैं सांड .... हाय रे ...." चाचाजी ने
मेरी ओर देखा कि रुकूं या डाल दूं?

मैंने कहा "डाल दो चाचाजी, चिल्लाने दो, फ़ट जाये तो भी परवा नहीं. वैसे
आप जानते नहीं इस हरामन को, चिल्लाती भी है तो मस्ती से, साली जरा नहीं
डरती. आप तो डालो और चोदो मजे से"

चाचाजी ने पूरा लंड गप्प से उतार दिया. लीना का बदन ऐंठ गया. वो चिल्लाये
इसके पहले चाचाजी ने उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया और चोदने लगे.

लीना 'गों' 'गों' करके छटपटाते हुए हाथ पैर फ़ेकने लगी. पर चाचाजी का लंड
बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रहा था, इसका मतलब था कि लीना की बुर इतनी चू
रही थी कि एकदम चिकनी हो गयी थी, मैं समझ गया कि दुख वुख कुछ नहीं रहा
है, नाटक कर रही है. चाचाजी लीना का मुंह ऐसे चूस रहे थे जैसे रसीला फ़ल
चूस रहे हों, साथ ही सधी रफ़्तार से बिना रुके चोदते जाते. लीना अपने बंद
मुंह से बस 'अं' 'अं' 'अं' करती रही. फ़िर चुप हो गयी.

चाचाजी ने लीना का मुंह छोड़ा और झुक कर उसकी चूंची चूसने लगे. लीना फ़िर
से हाथ पैर मारने लगी, सिसकती हुई कमर हिला हिला कर चाचाजी के लंड को और
अंदर लेने की कोशिश करने लगी. फ़िर चाचाजी के इर्द गिर्द अपने हाथ पैर
लपेट लिये और बोली "ओह ... ओह ... चाचाजी ... बहुत जानदार है चाचाजी आप
का .... मैं जानती थी .... यही एक लंड है जो मेरी चूत की अगन ठंडी कर
सकता है .... चोद डालिये चाचाजी .... चोदिये आप की बहू को ... अपनी बेटी
की चूत को ..... पेल पेल के फ़ाड़ दीजिये चाचाजी .... चोद डालिये चाचाजी
...."

"बिलकुल चोद डालूंगा बहू, हमारे घर आयी है बहू बनके, तेरी हर इच्छा पूरी
करना हमारा फ़र्ज़ है, ले ... ले ... और जोर से पेलूं? ... ये ले ..."
चाचाजी बोले और फ़िर हचक हचक कर लीना को चोदने लगे. लीना अब नीचे से ऐसे
चूतड़ उचका रही थी कि जैसे उनके लंड को पेट में लेने की कोशिश कर रही हो.

"अनिल देख तेरी बीवी को तेरे सामने चोद रहा हूं. क्या छिनाल रंडी है
साली, देखो कैसे चूतड़ उचका कर मेरा लंड पिलवा रही है अपनी चूत में. मुझे
लगा था कि टें बोल जायेगी, तेरी चाची भी बेहोश हो गयी थी सुहागरात में
... पर ये तो रंडियों से भी बढ़ कर है चुदवाने में" चाचाजी लीना की बुर
में अपना लंड पेलते हुए बोले.

"हां चाचाजी, बड़ी गरम है, मुझसे संभलती नहीं है साली हरामन. आज आप इतना
चोद दो कि साली खाट से उठ न पाये" मैं लंड को हाथ से मस्ती से सहलाते हुए
बोला. लीना की गोरी चूत एकदम चौड़ी हो गयी थी, चाचाजी का मूसल उसे चौड़ा
करके अंदर बाहर हो रहा था.

"चोदिये ना चाचाजी .... चोद दीजिये मुझ को .....और जोर से ..... कस के
पेलिये डैडी ... और जोर से चोदिये ना .... फ़ाड़िये ना मेरी चूत .....
मामाजी ..... मसल डालिये मेरे को ..... ओह ... हं ऽ .... आह ऽ ... ओह ऽ
.... आह ऽ ..." मस्ती में आंखें बंद करके लीना बड़बड़ा रही थी. अपने हाथों
और पैरों से उसने चाचाजी का बदन बांध कर रखा था और उनसे चिपटी हुई थी.

"मुझको कभी मामाजी कहती है कभी डैडी कहती है साली .... बाप से भी चुदवाती
थी क्या?" चाचाजी ने धक्के मारना बंद करके मुझसे पूछा.

"पता नहीं चाचाजी, शायद, वैसे उमर में बड़े और खास कर बड़े लंड वालों से
चुदवाने में बहुत मजा आता है इसे, मैं चोदता हूं तो कभी मस्ती में मुझे
मामाजी कहती है तो कभी जीजाजी .... बचपन से चुदैल है .... मैं तो देखते
ही पहचान गया था ... इसलिये तो मैंने शादी को हां कर दी रजत चाचा ....
सोचा कि ऐसी चुदैल चीज जितनी जल्दी घर में आये उतना अच्छा है ..... अब
सारे खानदान को चोद डालेगी ये हरामन" मैं कस के अपने लंड को मुठिया रहा
था.

चाचाजी ठीक से लीना पर चढ़ गये और फ़िर घचाघच चोदने लगे. "है बड़ी नमकीन
छोकरी ... माल है साली माल .... अब इस माल को मैं कैसे गपागप कर जाता हूं
देखना .... इतना चोदूंगा आज कि मेरे बिना किसी का नाम नहीं लेगी बाद में
.... और तू क्यों मुठ्ठ मार रहा है वहां नालायक .... आ जा ... साथ साथ
चोदेंगे .... साली के मुंह में डाल दे लंड और चोद डाल ..... तू कहे तो
मैं नीचे होता हूं .... गांड मार ले हरामन की .... बहुत गुदाज है .... तू
तो मारता ही होगा ..... मेरा मन हो रहा था असल में गांड मारने को .... पर
साली की बुर इतनी मीठी दिखती है कि ....." कहकर चाचाजी ने लीना के होंठों
को अपने होंठों में दबा लिया और चूसने लगे.

"मैंने तो बहुत बार चोदा है .... गांड भी मारी है .... आज आप मजा कर लो
रजत चाचा ... वैसे आप का लंड बड़ा शानदार है, चाचीजी तो मरती होंगी आप पर"
मैंने कहा. गीता चाची के मोटे मांसल बदन को याद करके मेरा और उछलने लगा.


"हां अनिल .... तेरी चाची भी माल है ..... पर तेरी ये बहू तो एकदम तीखी
कटारी है ... आह लीना बेटी .... साली छिनाल .... कैसे मेरे लंड को पकड़
रही है चूत से ... गाय के थन जैसा दुह रही है ... आज तेरी चूत की भोसड़ा न
बना दूं तो कहना" चाचाजी हांफ़ते हुए घचाघच धक्के लगाते हुए बोले.

"रजत चाचा .... आप मार डालो मुझे चोद चोद के ... आप के मुस्टंडे ने मार
डाला तो भी ... उसे दुआ दूंगी .... हाय ... हाय ... अरे साले चाचा के
बच्चे .... घुसेड़ ना और अंदर .... और चाची माल है तो मेरा ये सैंया अनिल
क्या कम है .... चाची का माल इसे ... दिलवा दो ... चोद ना साले .... चोद
ना और " लीना अब तैश में आकर बुरी तरह तड़प रही थी.

"दिलवा दूंगा ... मैंने तो पहले ही कहा था ... यही घर का ही माल है ...
अनिल को पसंद आयेगा ... खोवा है खोवा ... क्यों रे अनिल ... चाची को
चोदेगा ... साली अब पिलपिली हो गयी है .... चूत और गांड का भोसड़ा हो गया
है ... तेरे लंड समेत तुझे निगल लेगी ... पर है बड़ी जायकेदार साली
मुटल्ली .... रस चूता है तो बिस्तर गीला कर देती है ...तू जा ना अनिल ...
तेरी चाची चूत खोल कर .... तेरा इंतजार कर रही होगी ..." चाचाजी अब हचक
हचक कर ऐसे चोदने लगे जैसे लीना का कचूमर निकाल देंगे. लीना अचानक 'सी'
'सी' 'सी' करके हाथ पैर पटकने लगी. फ़िर लस्त हो गयी.

"खलास कर दिया सा ऽ ली ऽ हरा ऽ म ऽ जा ऽ दी ऽ रंडी ऽ को .... चली थी मेरे
लंड से लोहा लेने ... ओह ... ओह ... लीना बेटी ... आह" कहकर चाचाजी भी
ढेर हो गये. मैं कस के मुठ्ठ मार रहा था, इतनी मस्त चुदाई देख के मजा आ
गया था. खास कर लीना को बहुत मजा आया था ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा
था. आखिर मेरी प्यारी बीवी है, उसपर जान छिड़कता हूं मैं. आखरी मौके पर
आकर मैंने हाथ हटा लिया और लंड को झड़ने नहीं दिया. वहां चाची से मार थोड़ी
खानी थी मुझे!

चाचाजी थोड़ी देर से उठे और रुमाल से अपना लंड पोछने लगे. उनके लंड पर
गाढ़े सफ़ेद वीर्य के कतरे लगे थे. अनजाने में मैंने अपने होंठों पर अपनी
जीभ फ़िरा दी, इतना मस्त माल वेस्ट जा रहा है ये मुझसे देखा नहीं जा रहा
था! लीना ने मेरी ओर देखा, इशारा किया कि मौका मत जाने दो. पर मेरी
हिम्मत नहीं हुई. न जाने चाचाजी क्या सोचें अगर मेरे दिल की बात जान गये
तो.

मेरी प्यारी लीना मेरे दिल की बात समझ गयी, उसने गाली दे के मुझे बुलाया
"अनिल राजा, वहां क्यों बैठे हो मूरख जैसे, चलो साले, आओ और मेरी चूत साफ़
करो ...."

रजत चाचा बोले "अरी बहू, उसे क्यों तकलीफ़ देती है, मैं रुमाल से साफ़ कर देता हूं"

"नहीं चाचाजी, हमेशा अनिल ही साफ़ करता है, वो भी जीभ से. असल में उसे
अच्छा लगता है, है ना अनिल?"

"हां रानी, ये अमरित तो मैं कभी नहीं छोड़ता" कहकर मैं लीना के पास गया.
वो टांगें खोल कर बैठ गयी. मैं उसकी जांघें और चूत चाटने लगा.

चाचाजी बोले "अरे बेटे, देख मेरा वीर्य रिस रहा है बहू की चूत से, तेरे
मुंह में चला जायेगा देख !"

लीना बोली "तो क्या हुआ चाचाजी, आप क्या पराये हो, अब तो मेरे सैंया बन
गये हो. अनिल को मेरी बुर का पानी बहुत अच्छा लगता है, जरा भी नहीं
छोड़ता, उस चक्कर में जरा आप की मलाई चख लेगा तो क्या बुरा है!"

मैंने पूरी बुर साफ़ की. चाचाजी के गाढ़े गाढ़े खारे वीर्य से लीना की बुर
का पानी बड़ा मसालेदार हो गया था. मन ही मन मैंने लीना का शुक्रिया किया
कि मेरे मन की बात ताड़ कर बड़ी खूबी से उसने मुझे चाचाजी का वीर्य चखा
दिया था.

चाचाजी लीना को बाहों में लेकर लेट गये और उसके मम्मे मसलने लगे. "आज रात
भर चोदूंगा बहू तुझे, फ़िर कभी नहीं कहेगी कि मुझे प्यासा छोड़ दिया. बेटे
अनिल, अब जाओ, चाची का क्या हाल है देखो, जरा उसकी भी सेवा करो, दुआ
देगी"

"दुआ से काम नहीं चलेगा चाचाजी. अनिल को माल चाहिये माल चाची के बदन का"
लीना चाचाजी के लंड को मुठियाते हुए बोली "और आप जल्दी करो, इस मुस्टंडे
को फ़िर से जगाओ, आज की रात उसे सोने नहीं मिलेगा, इस बार घंटे भर नहीं
चोदा तो तलाक दे दूंगी अनिल को"

उनकी नोक झोक चलती रही, मैं उठ कर चाची के कमरे की तरफ़ चल दिया.


मैं चाची के कमरे में दाखिल हुआ तो अंधेरा था. पलंग पर लेटी हुई चाची का
आकार अंधेरे में धुंधला सा दिख रहा था. जोर से सांस लेने की आवाज आ रही
थी.

"कौन" चाची ने पूछा.

"चाची, मैं अनिल. चाचाजी बोले ...."

"अनिल बेटे? ... आ जा मेरे पास जल्दी. कब से राह देख रही हूं" चाची ने
खुश होकर कहा. मैं जाकर उनके पास बैठ गया. उनके माथे पर हाथ रखकर बोला
"चाची सिर में दर्द है क्या? दबा दूं?"

चाची बोलीं "अरे बेटे, पूरे बदन में दर्द है, जल रहा है, कहां कहां
दबायेगा?" और मेरा हाथ अपनी छाती पर रख लिया. मेरे हाथ में सीधे उनकी नरम
नरम बड़ी बड़ी चूंचियां आ गयीं. मैंने हाथ और नीच खिसकाया तो उनका नरम नरम
पेट और उसके नीचे पाव रोटी जैसी बुर का मांस हाथ में आ गया. चाची नंगी
थीं, नंगी ही मेरा इंतजार कर रही थीं. मैं हाथ चाची के बदन पर फ़ेरने लगा.
एकदम चिकना मखमली गद्दी जैसा बदन था चाची का.

"चाची, आप बस कहो कि मैं क्या सेवा करूं आप की. वहां लीना चाचाजी की मन
लगाकर सेवा कर रही है तो चाचाजी बोले कि अनिल, जा देख चाची को कुछ चाहिये
क्या.

चाची ने टटोल कर मेरा लंड पकड़ लिया. "तैयार होकर आया है अनिल बेटे, मैं
सोच रही थी कि तेरे चाचाजी मुझे भूल गये क्या. इतनी देर कहां लगा दी
बेटे? तेरे चाचाजी तो कह कर गये थे कि बस अभी अनिल को भेजता हूं. जरा पास
आ ना, ऐसे" और चाची ने आधा उठकर मेरे लंड को पकड़ा और चूमने लगीं. फ़िर
मुंह में ले लिया और चूसने लगीं.

मैं बोला "चाची, असल में मैं थोड़ा रुक कर देख रहा था कि लीना ठीक से
चाचाजी की देख रेख कर रही है या नहीं, इसीलिये टाइम लग गया. ओह चाची ...
कहां मैं आप की सेवा में आया था ....और कहां आप मुझे ... आह चाची ...
बहुत अच्छा लगता है चाची ... अरे चाची .... जीभ मत लगाइये ना .... मैं
अभी झड़ जाऊंगा" और टटोल कर मैंने फ़िर चाची की चूंचियां पकड़ लीं.

"अरे स्वाद चख रही थी. दबा ना और जोर से, बचपन में तुझे गोद में बिठा कर
खिलाती थी तब तो जोर से पकड़ लेता था बदमाश, अब बड़ा हो गया तो और जोर से
दबा. पसंद आयीं कि नहीं?"

"चाची .... बहुत मुलायम और बड़ी हैं ... कब से इनके बारे में सोच रहा था
चाची ... चाची अब छोड़िये ना मेरा लंड ... इससे आपकी कुछ सेवा करने दीजिये
पहले" मैंने चाची के मम्मे जोर जोर से दबाते हुए कहा.

"अच्छा कड़क है रे अनिल तेरा, लगता है जैसे वो रोटी बनाने का छोटा बेलन है
...हां ऐसे ही दबा ....मसल जोर से .... और जरा ऐसे खींच ना इनको ....
बहुत सनसना रही हैं ये" चाची ने कहा और मेरी उंगलियां अपने निपलों पर
लगाकर दबा कर खींचने लगीं"

मैं चाची के निपल मसलता हुआ बोला "चाची ... मेरा जरा छोटा है .... आप को
तो चाचाजी के मूसल की आदत हो गयी होगी"

"बहुत अच्छा है बेटे तेरा, बड़ा रसीला है. देख ना क्या हालत हो गयी है
मेरी इस सौत की" चाची ने मेरा दूसरा हाथ अपनी जांघों के बीच दे दिया.
चाची की बुर इतनी गीली थी कि पानी टपक रहा था. सौंधी सौंधी महक आ रही थी.

"चाची, लाइट लगा दूं क्या, जरा आप का ये रसीला बदन देखने तो दीजिये ना
मुझे. बुर कितनी मखमली है आप की, एकदम चिकनी है, आज ही शेव की है लगता
है, जरा देखने दीजिये ना" मैंने फ़रमाइश की.

"अरे कल दोपहर को दिन के उजाले में देख लेना मेरे लाल, अभी अंधेरा रहने
दे, अंधेरे का और ही मजा है, आ अब चुम्मा दे. आज शेव की है बेटे, वैसे दो
हफ़्ते में इतनी बढ़ जाती है कि झुरमुट हो जाता है. तुझे कैसी पसंद है
बेटे?"

"चाची, दोनों पसंद हैं, बदल बदल के मजा आता है. वैसे लीना की झांटें बड़ी
ही रहती हैं, वो तो बस दो तीन महने में एक बार कभी शेव कर लेती है. पर
मां कसम चाची, आप की बुर इतनी गद्देदार है कि ... जैसे अभी अभी बनी हुई
पाव रोटी हो."

"तो ये पाव रोटी भी खिला दूंगी तेरे को, अभी तो मेरे को चुम्मा दे"
मैं चाची के पास लेट कर उनको चूमने लगा. उन्होंने मुंह खोल कर मेरे होंठ
अपने मुंह में ले लिये और मैंने अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी. एक हाथ
से मैं उनके मम्मे मसल रहा था और एक से उनकी बुर में उंगली कर रहा था.
बुर इतनी गीली और चिपचिपी थी कि मुझसे रहा नहीं गया. उठ कर मैं अलग हुआ
तो चाची बोली "अरे भाग कहां रहा है?"

"भाग नहीं रहा चाची, आप की बुर चूसने जा रहा हूं, इतना बेशकीमती शहद
फ़ालतू बह रहा है"

चाची ने हंस कर टांगें फ़ैला दीं और बोलीं "अरे ये बात है? तो आ जा, खुश
कर दूंगी तुझे"

मैंने अंधेरे में होंठों से टटोल कर उनकी बुर ढूंढी, उनके पेट को चूमते
हुए नीचे की ओर आया और मुंह लगा दिया. चाची मेरे सिर को पकड़कर बोलीं "चाट
ले बेटे, वहां टांगों पर भी बह आया है, अरे एक घंटे से इंतजार करते करते
दो बार उंगली से मुठ्ठ मार चुकी हूं"

खूब देर मैंने चाची की बुर चाटी और चूसी, दो बार उनको झड़ाया और आधा कटोरी
रस पिया. बुर में उंगली की तो पता चला कि कितनी गहरी और खुली हुई बुर थी
चाची की. मैंने तीन उंगली डालीं तो वो भी आराम से चली गयीं.

"चाची, क्या चूत है आप की, मेरे बस की बात नहीं है, लगता है सिर्फ़ चाचाजी
का लंड ही आप को चोद सकता है, मेरा तो इतना बड़ा नहीं है"

"दिल छोटा न कर बेटे, तू बहुत प्यार से चूसता है, वैसे आज कल मुझे
चुसवाने में ही ज्यादा मजा आता है. चिंता मत कर, तेरा लंड प्यासा नहीं
रहेगा. अब और चूस, आज घंटे भर तक चुसवाऊंगी. अब ठीक से बता, तेरे चाचाजी
ने चोदा बहू को? अरे तेरे चाचाजी दीवाने हैं बहू के, जब से देखा है, लंड
खड़ा कर के तनतनाते रहते हैं, कल से लंड पकड़कर घूम रहे हैं, बहू के नाम से
लंड हाथ में लेकर मुठियाते रहते हैं. आज बोले कि बहू आंखें मटकाकर इशारे
कर रही है तो मैंने ही कहा कि जाओ, हाथ साफ़ कर आओ. आज राहत मिली होगी
उनको"

मैंने पूरी कहानी सुनायी. सुन कर चाची गरमा गयीं "इनको तो मजा आ गया
होगा, नयी जवान बहू और उसकी चुस्त चूत, इनको तो जन्नत मिल गयी होगी. तूने
उनका लंड देखा?"

मैंने हां कहा. ये भी बताया कि लीना कैसी फ़िदा थी उसपर. "चाची, वहां
चाचाजी लीना के नाम पर लंड हाथ में लेते हैं, और यहां लीना उनके लंड के
बारे में सोच सोच कर दिन भर अपनी बुर में उंगली करती रहती है. आज तो मेरे
पीछे ही पड गयी कि चाचाजी से चुदवाऊंगी" यह नहीं बताया कि लीना के साथ
साथ मैं भी चाचाजी के उस महाकाय लंड का दीवाना हो गया था.

"बड़ी गरम बहू है तेरी, तेरे सामने तेरे चाचा से चुदवा लिया, अब ऐसा करना
कि कल तू उसे भी साथ ले आना, उसके सामने मैं उसके मर्द को चोदूंगी. अब
ऐसा कर कि पूरी जीभ अंदर डाल के चाट, अंदर बहुत रस है मेरे राजा, सब तेरे
लिये है"

"चाची अब चोद लूं?" मैंने आधे घंटे के बाद पूछा.

"हां आ जा मेरे बच्चे, आज कल मेरी बुर बड़ी प्यासी रहती है, तेरे चाचाजी
चोदते कम हैं, बस गांड ज्यादा मारते हैं मेरी"

मैं अंधेरे में ही चाची पर चढ़ा और चाची ने अपने हाथ से मेरा लंड अपनी चूत
में घुसेड़ लिया. मैं चोदने लगा. एकदम ढीली चूत थी चाची की पर बहुत गीली
थी, और एकदम मुलायम और गरम थी. मेरा लंड आराम से 'फ़च' 'फ़च' 'फ़च' करता हुआ
अंदर बाहर हो रहा था.

"मजा आया अनिल?"

"हां चाची, बहुत मखमली चूत है आपकी. पर आप को तो पता ही नहीं चल रहा होगा
मेरे लंड का" मैंने कस के धक्के लगाते हुए कहा.

"अरे नहीं बेटे, बहुत अच्छा लग रहा है, इतना कड़ा है तेरा लंड, और कैसे
थरथराता है मेरी बुर के अंदर, तू चोद मन लगाकर, और आराम से चोद, जल्दी
करने की जरूरत नहीं है, मुझे बहुत देर हौले हौले चुदवाना अच्छा लगता है
... और ले ... मेरा मम्मा तो चूस ... मुंह में ले ले" कहकर चाची ने अपना
मोटा मोटा नरम नरम मम्मा मेरे मुंह में ठूंस दिया.

कफ़ी देर के बाद मैंने कहा "चाची, अब नहीं रहा जाता .... अब झड़ जाऊं?"

"यहां नहीं बेटे, तेरे लिये दूसरी जगह है झड़ने ले लिये. पर वो बाद में,
इतनी जल्दी थोड़े छोड़ूंगी तुमको, पहले इधर आ, यहां नीचे लेट, तूने मेरे
बदन का इतना स्वाद लिया, अब मुझे भी लेने दे"
kramashah...............















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सेक्सी कहानियाँ मैं, लीना और चाचा-चाची--1

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

मैं, लीना और चाचा-चाची--1
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चाचाजी का खत आया कि वो तीन चार दिन के लिये हमारे यहां आ रहे हैं. जब
मैंने लीना को चाचा चाची के आने की बात बताई, तो वो बोली "रजत चाचा आ रहे
हैं? ये वो वाले चाचा हैं ना जो हमारी शादी में थे, अच्छा गठा बदन है,
ऊंचे पूरे हैं. और वो उनकी मोटी मोटी गोरी गोरी सिठानी सी घरवाली है?"

"हां हां वही, गीता चाची के साथ वो हमारी शादी में थे"

"अरे तो आने दो ना, बड़ा मजा आयेगा. काफ़ी रसिया किस्म के आदमी लगे मुझको"
मेरा लंड पकड़कर लीना बोली.

"अरे अब उनके पीछे पड़ोगी क्या? पिछले हफ़्ते मेरे दो दोस्तों से चुदवा कर
तुम्हारा मन नहीं भरा?" मैंने लीना की चूंची दबा कर कहा.

"और तुमने नहीं उनकी बीवियों को चोदा? उस स्मिता की तो गांड भी मारी"
लीना ने उलट कर कहा.

"हां डार्लिंग वो ठीक है पर मैं इसलिये कह रहा था कि ये घर की बात है,
चाचा चाची की बात और है"

"अरे अगर ये वही वाले चाचा हैं जो शादी में थे तो मजा आ जायेगा. तब भी
मुंह दिखाई के वक्त मुझे ऐसे देख रहे थे जैसे खा जायेंगे. वैसे हैं बड़े
प्यारे और सजीले, सच कहूं, उनको देख कर वहीं मेरी बुर में गुदगुदी होने
लगी थी"

"क्या चुदैल रंडी है तू लीना, अब देख, उनके सामने तमाशा नहीं करना"

"ठीक है देख तो लूं उनके रंग ढंग, और चाची भी हैं ना, उनको तुम देख लेना,
वैसे मुझे जैसा याद है, बड़ी चिकनी गोल मटोल थीं चाचीं, वहां शादी में जब
तुम्हारे परिवार की औरतों के साथ थी तब उनका पल्लू गिरा था, तब मैंने
चूंचियां देखी थीं, ये बड़ी बड़ी ..." लीना बोली और मुझे आंख मारकर हंसने
लगी.

मैंने समझ लिया कि इसको करना है वो करके रहेगी.

चाचा चाची आये. लीना ने अच्छी आवभगत की. दोपहर के खाने पर भी खूब सारी
चीजें बनायीं. चाचाजी ने तारीफ़ के पुल बांध दिये, मेरा माथा ठनका क्योंकि
लीना अब बड़े जोश से उनकी खातिर में जुट गयी थी. 'चाचाजी, और मिठाई लीजिये
ना .... चाची आप ने तो कुछ खाया ही नहीं' वगैरह वगैरह'

उनके दो दिन एक शादी अटेंड करने में चले गये. रात को देर से आते थे. एक
रात वे वहीं शादी के घर सोये. फ़िर दूसरे दिन दोपहर को आये. आकर नहाया
धोया क्योंकि शादी के घर में बड़ी भीड़ भाड़ थी.
जब दोपहर का खाना खाने के बाद वे दोनों आराम करने चले गये तो लीना मेरे
पास आयी. "अनिल राजा, अब चाचाजी को आज फ़ांस ही लेती हूं. उनके बड़े लंड को
लिये बिना चैन नहीं आयेगा" लीना मेरे लंड को सहलाती हुई बोली.

"तूने कब देखा उनका लंड?"

"अरे अभी जब वो नहाने के बाद कपड़े बदल रहे थे तब दरवाजे की चीर में से
देखा था. बैठा था फिर भी चड्डी में समा नहीं रहा था. मैं तो असल में
बाथरूम में झांक कर देखने वाली थी पर चाची रूम में थीं इसलिये लौट गयी"
लीना बोली.

"मेरी चुदैल रानी, इतने लंडों से पिलवा चुकी है तू, मेरे तीन चार दोस्तों
से चुदवाती है, जब भी मौका आता है, मैं तुझे तेरी पसंद के और मर्दों से
भी चुदवा देता हूं, फिर भी तेरा मन नहीं भरा. अब चाचाजी के पीछे पड़ गयीं?
वो क्या सोचेंगे कि उनके सगे भतीजे की बीवी कैसी चुदक्कड़ है!" मैंने लीना
की चूंची दबा कर पूछा.

"तो तुम भी तो अपने दोस्तों की बीवियों को चोदते हो, कैसे लपलपा कर पीछे
पड़ जाते हो. पिछले माह जब हम तुम्हारे दूसरे दोस्त के यहां गये थे तो
उसकी नौकरानी पर ही फ़िदा हो गये थे, तब मैंने नहीं मदद की थी तुम्हारी?
दो दिन तक हर दोपहर को तुमको उस छम्मक छल्लो के साथ छोड़कर तुम्हारे दोस्त
की बीवी को मार्केटिंग के लिये ले गयी थी."

"हां मेरी रानी, नाराज मत हो, मैं कहां तुमको ये सब बंद करने को कह रहा
हूं? तुम खूब चुदवाओ, मुझे तो बस तुम्ह्हरी खुशी चाहिये मेरी जान. पर रजत
चाचा ..." मैंने कहा तो लीना बोली "रजत चाचाजी के लंड की बात ही और है.
सगे चाचाजी हुए तो क्या हुआ, बड़े रसिया हैं, कैसे मेरी ओर देखते हैं,
जैसे बस चले तो अभी पटक कर चढ़ जायें मुझपे. और मैं सिर्फ़ अपने बारे में
ही थोड़े सोच रही हूं, वो मुटल्ली चाची भी तो माल है. मैं आज चाचाजी का
लंड खा ही लेती हूं, तुम चाची की बुर चख लो, सच पाव रोटी जैसी गुदाज
होगी" लीना अपनी बुर को प्यार से सहलाते हुए बोली.

"हां रानी, बात तो सच है, चाची का बदन तो खोवा है खोवा, मुंह मारने का मन
करता है. चलो ठीक है, करके देखते हैं. चाचाजी तो तेरे एक इशारे पर तुझ पर
टूट पड़ेंगे. कैसे घूर रहे थे तुझे खाने पे" मैं लीना की चूंचियां दबाकर
बोला "तू भी उस्ताद है अपना जोबन दिखा कर लोगों को रिझाने में, कैसे बार
बार आंचल गिरा कर झुक रही थी तू आज दोपहर के खाने के वक्त! जान बूझकर
दिखा रही थी चाचाजी को ये अपना माल"

"मैं तो उन्हें रिझा रही थी, पूरे फ़ंस गये हैं वे अब मेरे जाल में. तुम
भी चाचीजी के साथ मजे कर लो आज, उनकी भी बड़ी नजर रहती है तुम पर. तब तक
मैं चाचाजी से चुदवा लेती हूं" लीना मुझे बोली.

"ठीक है मेरी जान पर अकेले में नहीं. मैं भी देखूंगा चाचाजी से तुझे
चुदते वक्त. तेरी चूत को वो मूसल फ़ाड़ेगा तो कैसे रोयेगी मैं देखना चाहता
हूं, अभी तो बड़ी उचक रही हो, जब वो मूसल अंदर जायेगा तो चिल्ला चिल्ला कर
रो पड़ोगी! बोलोगी कि अनिल, बचाओ मुझे, तब मुझे ही आना पड़ेगा तेरे को
बचाने को" मैंने लीना को चिढ़ाया.

"रोये मेरी जूती. मैं तो चाचाजी को अंदर ले लूं, लंड की क्या बात है,
मेरी चूत की गहरायी को अब तक नहीं पहचाना तुमने. चलो, तुम देख लेना मेरी
चुदाई, और बातें मत बनाओ, बीवी को चुदते देख तुमको बड़ा मजा आता है, ये
कहो. और नये नये लंड देखने की फ़िराक में भी रहते हो, है ना?"

मैं बोला "कहां? वो तो मैं बस तुम्हारे लिये ..."

"अब गुस्सा मत दिलाओ मुझे. वो दोस्त है तुम्हारा हेमन्त, उसके लंड को
पिछली बार कैसे चूस रहे थे" लीना बोली.

"वो तो तुमने कहा था, जब तुम उसकी बीवी स्मिता की बुर चूस रही थी तब"

"हां पर बड़े मजे लेकर चूस रहे थे. मैं भी कहां मना कर रही हूं तुमको,
जैसे कभी कभी बुर का स्वाद अच्छा लगता है मेरे को, वैसे तुम भी लंड का
मजा लिया करो"

लीना से बहस में जीतना नामुमकिन है, मेरी सब कमजोरियों को अच्छे से
पहचानती है, प्यार भी बहुत करती है मुझसे.

लीना थोड़ी देर चुप रही, खोयी खोयी सी थी, शायद चाचाजी के लंड को याद कर
रही थी. फ़िर अचानक बोली "पर चाचाजी को कहोगे कैसे कि मेरे सामने चोद मेरी
बीवी को? तुमको भी अगर साथ रहना है तो तुमको ही कहना पड़ेगा. मैं तो अकेले
में ही फ़ांस कर चोद लूंगी उनको"

"वो मैं कर लूंगा. खाने के बाद बात छेड़ता हूं, तू दस मिनिट में आ जाना और
उनकी गोद में बैठ जाना, बाकी मैं संभाल लूंगा" मैंने कहा.


खाने के बाद मैं चाचाजी के साथ बैठा था. बोला "चाचाजी, एक बात कहूं, लीना
के बारे में?"

"हां कहो बेटा" चाचाजी संभल कर बैठ गये.

"आप को कैसी लगी लीना?" मैंने पूछा.

"अच्छी लड़की है, बहुत सुंदर है, तेरे भाग हैं कि तुझे ऐसी लड़की मिली"
चाचाजी मुझे देख कर बोले.

"आप भी बड़े लकी हैं चाचाजी, चाची भी क्या चीज हैं" मैंने कहा.

"हां वो तो है. पंधरा बरस पहले देखते तो फ़िदा हो जाते, बड़ी तीखी छुरी थी,
वैसे अब भी है पर मोटी हो गयी है" चाचाजी मेरी ओर देखकर बोले.

"चाचाजी, सच कहूं, मुझे चाची बहुत अच्छी लगती हैं. वैसे ही जैसे आप को
लीना अच्छी लगती है. वैसे बचपन से चाची मुझे बहुत भाती हैं पर अब जरा ...
याने बहुत मस्त लगती हैं" मैंने कहा.

चाचाजी मेरी बात में छुपा इशारा समझ गये. "अरे तो शरमाता क्यों है, चाची
से मेल जोल बढ़ा, उनसे गप्पें लड़ा, वो भी कह रही थी कि अनिल बड़ा प्यारा
लड़का है. वैसे लीना के बारे में कह रहा था ना तू?"

मैं चाचाजी के पास खिसका "बड़ी गरम चीज है चाचाजी. मुझसे नहीं संभलती."

"याने बाहर मुंह मारती है क्या? इतनी चालू है? तुमने कहा उससे कि ऐसा न
करे? आखिर बहू है घर की"

"अब चाचाजी आप से क्या छुपाऊं, मैं उससे बहुत प्यार करता हूं, बहुत सुख
देती है मुझे, इसलिये उसके सुख का भी खयाल मुझे रखना पड़ता है. अब आप पर
नजर है उसकी. कह रही थी कि रजत चाचा कितने अच्छे लगते हैं. उनके साथ मेल
जोल बढ़ाने का दिल करता है"

चाचाजी मस्त हो गये "अरे तो इसमें पूछने की क्या बात है, बहू के लिये तो
मेरी जान हाजिर है."

"जान तो ठीक है चाचाजी, आप उसे थोड़ी ठंडी कर दें तो ....."

"अरे बिलकुल ठंडी कर दूंगा. तू उसे मेरे पास छोड़ तो सही. बहुओं की तो हर
इच्छा पूरी करनी चाहिये बेटे कि उन्हें घर के बाहर जाने की जरूरत न पड़े.
और तू यहां क्यों बैठा है, जा ना चाची के पास, वो अकेली अपने कमरे में
पड़ी है, कह रही थी कि सिर दुख रहा है, मैंने कहा कि भेजता हूं किसी को
खाने के बाद मालिश के लिये. मैं तो खुद तुझसे कहने वाला था, तू जा. मैं
बहू का इंतजार करता हूं यहां, जम जाये तो आज ही उसे खुश कर दूंगा"

तभी लीना अंदर आई. बस एक नाइटी पहने थी. अंदर की ब्रा और पैंटी भी निकाल
दी थी. नाइटी के बारीक कपड़े में से उसका हर अंग दिख रहा था. आकर सीधी
चाचाजी की गोद में बैठ गयी. "क्या बातें हो रही थीं चाचा भतीजे में, मैं
भी तो सुनूं. मुझे खुश करने की बात कर रहे थे चाचाजी? कैसे खुश करेंगे
मुझे बताइये ना चाचाजी!"

चाचाजी थोड़े गड़बड़ा गये. "कुछ नहीं बहू, अनिल बता रहा था तेरे बारे में,
बड़ी सुंदर और प्यारी है तू. अनिल का बड़ा भाग है जो तेरे जैसी बहू घर में
आयी है. तुझे खुश रखने को मैं क्या, सब लोग जो तू चाहे वो करेंगे ऐसा मैं
कह रहा था"

मैंने झूट मूट लीना को डांटा "अरे तू क्या बच्ची है जो ऐसे जाकर चाचाजी
की गोद में बैठ गयी है. वो क्या सोचेंगे"

लीना बोली "चाचाजी तो बड़े हैं, उनकी गोद में बैठने से क्या शरमाना!
चाचाजी मुझे बहुत प्यार करते हैं, है ना चाचाजी? आप मुझे बहुत अच्छे लगते
हैं"

चाचाजी बोले "हां बहू, अनिल, उसे मत डांट, उसका हक है मेरी गोद में बैठने
का" और लीना की पीठ सहलाने लगे.

लीना बोली "हां चाचाजी, वैसे ही जैसे अनिल का हक है चाची से लाड़ पाने का,
है ना?" और फ़िर चाचाजी को चूमने लगी. पहले गाल चूमे, फ़िर सीधे होंठ चूमने
लगी.

चाचाजी भी मस्त हो गये. लीना को बाहों में भर लिया और चूमने लगे. मुझे
बोले "अनिल, तू जा चाहिये तो, चाची का सिर दबा दे. चिंता मत कर, मैं बहू
का पूरा खयाल रखूंगा. बड़ी प्यारी बच्ची है"

लीना ने उनका एक हाथ उठा कर अपने स्तन पर रख लिया. "चाचाजी देखिये ना,
छाती बड़ी कसमसाती है मेरी. न जाने ऐसा क्यों होता है"

अब तो चाचाजी एकदम मस्ती में आ गये. लीना की चूंची दबा दबा कर कस के उसके
चुंबन लेने लगे. चूमते चूमते बोले "अरे तेरी जवानी की गरमी है इसलिये ऐसा
होता है, तेरे इस भरे पूरे जोबन को ठीक से मालिश करनी चाहिये, तब ये काबू
में आयेगा. अनिल तू अब तक यहीं है? जा ना चाची के पास"

मैंने कहा "चाचाजी, थोड़ी देर के बाद चाची के पास चला जाऊंगा. अभी देखना
चाहता हूं कि ये क्या गुल खिलाती है. बड़ी शैतान है. लीना, चाचाजी तुमको
बहुत प्यार करते हैं, जरा ठीक से पेश आना, बद्तमीजी नहीं करना. इसीलिये
मैं तो रुकूंगा और कुछ देर, मुझे भरोसा नहीं है तुम्हारा"

"मेरे राजा, मैं जानती हूं कि वे बहुत प्यार करते हैं. ये देखो सबूत. मैं
कब से देख रही हूं कि जब चाचाजी मुझे देखते हैं तो प्यार से ऐसी हालत हो
जाती है इनकी, है ना चाचाजी?" कहकर लीना ने उनके पाजामे के तंबू पर हाथ
रख दिया. "चलिये ना चाचाजी, अंदर चलिये, मुझे ठीक से प्यार कीजिये, आप के
पास तो के खास खिलौना है मुझे प्यार करने के लिये"

"हां चाचाजी, अंदर ले चलिये लीना को उठाकर, फ़िर इसे ठंडी कीजिये. असल में
मैं बहुत प्यार करता हूं इसे, इसको और कोई भी प्यार करे तो मुझे मजा आ
जाता है. और अब आप इसे प्यार करेंगे ये तो बड़ी खुशी की बात है, लीना भी
कब से राह देख रही है, आप जैसे बड़ों से प्यार कराने में उसे बहुत आनंद
मिलता है, मैं जरा देख लूं कि ये कितनी खुश होगी आप से प्यार पा कर, फ़िर
चाची की सेवा करूंगा जा कर" मैंने कहा.

चाचाजी समझ गये. उठ कर लीना को बाहों में लिया और अंदर ले गये. "आ जा
अनिल, देख ले कि ऐसी जवान बहू को कैसे प्यार किया जाता है"


अंदर जाकर उन्होंने लीना को नीचे उतारा तो पहले तो लीना ने अपनी नाइटी
निकाल दी. जब तक चाचाजी आंखें फ़ाड़ फ़ाड़ कर उसका जोबन देख रहे थे, तब तक
उसने चाचाजी के कपड़े भी निकाल दिये. मैं भी नंगा हो गया था.

मैंने एक कुरसी में बैठ कर लंड हाथ में लिया और बोला "चाचाजी, साफ़ बात
कहूं, बड़ी चुदैल लड़की है, आप पर मरती है, कब से आपके लंड की ताक में है,
आज जरा इसे अपने लंड की ताकत दिखा ही दीजिये"

"बहू तो अप्सरा है अप्सरा. क्या माल लाया है तू अनिल बेटे, चबा चबा कर खा
जाने का मन करता है" चाचाजी लीना के बदन पर हर जगह हाथ फ़ेरते हुए बोले.

लीना अब नीचे बैठ कर चाचाजी के लंड को हाथ में लेकर चूम रही थी. "अनिल
राजा, मैंने कहा था ना कि कितना बड़ा है चाचाजी का. हाय चाचाजी, ये तो
घोड़े के लंड सा लगता है, चाची की तो आप ने आज तक पूरी खोल दी होगी"

चाचाजी बोले "अरे तेरी चाची क्या कम है? उसका तो कुआं है कुआं, वो तो
हाथी का ले ले उसका बस चले तो, घोड़ा क्या चीज है उसके सामने. बहू अब यहां
आ बेटी, अपनी बुर दिखा, मां कसम क्या महक रही है साली"

"पहले लंड चूसूंगी चाचाजी, फ़िर अपनी बुर चटवाऊंगी" लीना बोली और लंड का
सुपाड़ा मुंह में लेकर चूसने लगी. बोली "ये सुपाड़ा है या पाव भर का टमाटर?
मैं तो खा जाऊंगी इसको"

चाचाजी बोले "चूसेगी या चुदवायेगी? जल्दी बोल, डरती है शायद, डींगें मार
रही है, मेरे लंड की साइज़ देखकर डर गयी है, इसलिये चूस कर छोटा कर देना
चाहती है"

"डरे मेरी सास, लो चाचाजी, चोद दो, आज आप को दिखाती हूं कि चुदवाना किसे
कहते हैं" लीना अपने मम्मे दबाती हुए बोली.

लीना टांगें खोल के लेट गयी. चाचाजी टूट पड़े और लपालप उसकी बुर चाटने
लगे. "क्या चूत है बहू की, क्या रेशमी झांटें हैं, और ये लाल लाल होंठ और
ये बहता हुआ खालिस घी! अनिल, तेरी तो चांदी है बेटे, रोज इस जन्नत की सैर
करता है, इस अमरित को चखता है, बहू जरा टांगें और फ़ैला, जीभ डालने दे ठीक
से."

लीना ने टांगें पूरी फ़ैला दीं. चाचाजी ने उसकी बुर उंगली से खोली और जीभ
अंदर डाल डाल कर रस चाटने लगे. लीना कमर उचकाने लगी.

"चूसते ही रहोगे या चोदोगे भी? डालो ना चाचाजी, लंड तो डालो. अब क्यों
तड़पाते हो चाचाजी अपनी बहू को, पाप लगेगा आप को" लीना उनके सिर को पकड़कर
बुर पर उनका मुंह रगड़ती हुई बोली.

चाचाजी उठ कर बैठ गये "ये ऐसे नहीं मानेगी साली. इतना बढ़िया बुर का रस
है, ठीक से पीने भी नहीं देती. अनिल, मैं चोद देता हूं इसे, बुर बाद में
चूस लूंगा, अब तो ये घर का माल है. चल बहू, बुर पूरी खोल नहीं तो फ़ट
जायेगी, दरद से रिरियाने लगेगी"

लीना ने अपनी उंगलियों से अपनी चूत को चौड़ा किया. चाचाजी ने सुपाड़ा रखा
और पेलने लगे. वो सेब सा सुपाड़ा आधा अंदर गया तो लीना कराह उठी "हाय ...
अरे जालिम ... रुको ना थोड़ा ... कितना अच्छा लग रहा है अनिल ... बहुत बड़ा
है चाचाजी का .... ओह ... ओह ... ये तो सच में फ़ाड़ देगा मेरी लगता है ...
हा ऽ य ... चाचाजी ... डालो ना अंदर ....दुखता है ऐसे करते हो तो .... ओह
...ओह .."

"कभी रोती है और कभी लंड डालने को कहती है ये हरामन" चाचाजी मुस्कराकर बोले.

"डाल दो ना चाचाजी ... पूरा डाल दो .... मेरी परवा न करो" लीना मचल कर बोली.

"डाल दूंगा, डाल दूंगा, मेरे सुपाड़े का मजा तो ले, तेरी चूत को ये ठीक से
चौड़ा करेगा, तेरी चाची की बुर का भोसड़ा इसी सुपाड़े ने बनाया है" कहकर
चाचाजी थोड़ी देर सुपाड़ा अंदर बाहर करते रहे, फ़िर पक्क से अंदर कर दिया.
"उई ऽ मां ऽ ..." लीना चीख पड़ी.

"अब कैसे चिल्लाने लगी ये चुदैल लड़की. देखा अनिल. अरे मेरे लंड को झेलना
सब के बस की बात नहीं है" चाचाजी लीना की चूंचियां दबाते हुए बोले.

"अरे डालो नो ... रुक क्यों गये .... मजा आ रहा है ... ओह अनिल ... लगता
है कोई जैसे पूरा हाथ अंदर डाल रहा है ... सुपाड़ा ऐसा लग रहा है जैसे
किसी की मुठ्ठी हो .... आज मेरी चूत के लायक लंड मिला है ... आह ....
दुखता है चाचाजी ... मेरे अच्छे चाचाजी ... पर बड़ा मजा आ रहा है चाची की
कसम, करिये ना और ..."
kramashah...............

















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