Monday, March 15, 2010

कामुक-कहानियाँ होली ने मेरी खोली पार्ट--2

होली ने मेरी खोली पार्ट--2
कामुक-कहानियाँ
गतान्क से आगे...................

"पहले तो हमको ही चोदेगा. कहो तू तुमको भी…." मैं शरमाती सी होली की मस्ती मैं राज़ी हुई तो वह बाहर रमेश के पास गयी. कुच्छ देर बाद वह रमेश के साथ वापस आई तो उसका भाई रमेश मेरे उठानो को देखता अपनी छ्होटी बहन मीना की बगल मैं हाथ डाल उसकी चूचियों को मीस्था बोला,

"ठीक है मीना हम तुम्हारी सहेली को भी मज़ा देंगे पर इसकी चूचियाँ तो अभी छ्होटी लग रही हैं."

"कभी दबवाती नही है ना भाय्या इसीलिए." मीना प्यार से अपने भाई से चूचियों को मीसवाते बोली.

"ठीक है हम सुनीता को भी खुश कर देंगे पर पहले तुम प्यार से मेरे साथ होली मनाओ. अब ज़रा दिखाओ तो." रमेश मस्ती से मीना की चूत पर आगे से हाथ लगा मस्त नज़रो से मेरी ओर देखते बोला तो मैने कुंवारेपन की गर्मी से बैचैन हो मीना को कहते सुना,

"यार कितनी बार देखोगे. जैसी सबकी होती है वैसी मेरी है. अब सहेली राज़ी है तो आराम से खेलो होली."

"हाए मीना क्या मस्त चूचियाँ हैं तुम्हारी. ऐसी चूची पा जाए तो बस दिन भर दबाते रहे." और कसकर अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा. मीना और उसके भाई की इन हरकतों से मेरे बहके मंन पर अजीब सा असर हो रहा था. अब तो मंन कर रहा था कि रमेश से कहें आओ मेरी भी दबाओ. मेरी मीना से ज़्यादा मज़ा देंगी इतना ताव कुंवारे बदन मैं आज से पहले कभी नही आया था. चूत की फन फनाकर चड्डी मैं उभर आई थी. जैसे जैसे वह मीना की जवानियों को सहलाता जा रहा था वैसे वैसे मेरी तड़प बढ़ती जा रही थी.

"ऊहह भाय्या अब आराम से करो ना. सहेली तैय्यार है. मनाओ हम्दोनो से होली. अब जल्दी नही रमेश भाय्या. सहेली ने दरवाज़ा बंद कर दिया है. जितना चोद सको चोदो." मीना मस्त निगाहो से अपनी दबाई जा रही चूचियों को देखती सीना उभारती बोली तू रमेश ने उसको चूमते हुवे कहा,

"तुम्हारी सहेली ने कभी नही डबवाया है?"

"नही भयया."

"पहले बताया होता तो इसकी भी तुम्हारी तरह दबा दबाकर मज़ा देकर बड़ा कर देते. लड़कियों की यही उमर होती है मज़ा लेने की. एक बार चुद जाए तो बार बार इसको खोलकर कहतीं हैं फिर चोदो मेरे राजा." रमेश मीना की चूत को कपड़े के ऊपर से टटोलता बोला.

"ठीक है भाय्या मैं तो चुद-वाउन्गि ही पर साथ ही इस बेचारी को भी आज ही…"

"ठीक है पहले तुमको फिर इसको. अपने लंड मैं इतनी ताक़त है कि तुम्हारे जैसी 4 को चोद्कर खुश कर दूँ. पर यह तो शर्मा रही है. मीना अपनी सहेली को समझाओ कि अगर मज़ा लेना है तो तुम्हारे साथ आए. एक साथ दो मैं हमको भी ज़्यादा मज़ा आएगा और तुम लोगो को भी."

"ठीक है भयया आज मेरे साथ सुनीता को भी. अगर इसे मज़ा आया तो फिर बुलाएगी. आजकल इसका घर खाली है."

"तू फिर आज पूरी नंगी होकर मज़ा लो. कसम मीना जितना मज़ा हमसे पओगि किसी और से नही मिलेगा."

"ओह्ह भाय्या मुझे क्या बता रहे हो मैं तो जानती हूँ. राजा कितनी बार तो तुम चोद चुके हो अपनी इस बहन को. पर भाय्या आजकल घर मैं मेहमान आने की वजह से जगह नही. वो तो भला हो मेरी प्यारी सहेली का जिसकी वजह से तुम आज अपनी बहन के साथ ही उसकी कुँवारी सहेली की भी चोद सकोगे. भाय्या इस बेचारी को भी…"

"कह तो दिया. पर इसे समझा दो कि शरमाये नही. एक साथ नंगी होकर आओ तो तुम दोनो को एक साथ मज़ा दे. दो एक सहेलियों को और बुला लो तो चारो को चोद्कर मस्त ना कर दूँ तू मेरा नाम रमेश नही." सहेली के भाई की बात से मेरा पारा चढ़ता जा रहा था.

"ओह्ह मीना तुम कपड़े उतारो देर मत करो. तुम्हारी सहेली शर्मा रही है तो इसे कहो कि कमरे से बाहर चली जाए तो तुमसे होली का मज़ा लूँ." इतना कह रमेश ने मीना की चूचियों से हाथ हटा अपनी पॅंट उतारनी शुरू की तो मैने सनसनकर मीना की ओर देखा तो वह मेरे पास आ बोली,

"इतना शर्मा क्यों रही हो? बड़ा मज़ा आएगा आओ मेरे साथ." अब मीना की बात से इनकार करना मेरे बस मैं नही था. चूत चड्डी मैं गीली हो गयी थी. चूचियों के निपल मीना के निपल की तरह खड़े हो गये थे. रमेश ने जिस तरह से मुझे बाहर जाने को कहा था उससे मैं घबरा गयी थी. तभी मीना मेरा हाथ पकड़ मुझे रमेश के पास ले जाकर बोली,

"मैं बिस्तर लगाती हूँ भाय्या जब तक तुम सुनीता को अपना दिखा दो." मैं सहेली के भाई के पास आ शरमाने लगी. तभी रमेश बेताबी के साथ अपनी पॅंट उतार खड़े लाल रंग के लंबे लंड को सामने कर मेरे गाल पर हाथ लगा मुझे जन्नत का मज़ा देता बोला,

"देखो कितना मस्त लंड है. इसी लंड से अपनी बहन को चोद्ता हूँ. तुम्हारी चूत इस'से चुद्वकर मस्त हो जाएगी." मैं पहली बार इतनी पास से किसी मस्ताये खड़े लंड को देख रही थी. नंगे लंड को देखने के साथ मुझे अपने आप अजीब सी मस्ती का अनुभव हुवा. उसका लंड एकदम खड़ा था. मीना ने जैसा बताया था, उसके भाई का वैसा ही था. लंबा मोटा और गोरा. पहली बार जवान फँफनाए लंड को देख रही थी. रमेश पॅंट खिसका प्यार से लंड दिखा रहा था. मीना चुदवाने के लिए नीचे ज़मीन पर बिस्तर लगा रही थी. गुलाबी रंग के सूपदे वाले गोरे लंड को करीब से देख मेरी कुँवारी चूत मैं चुदाई का कीड़ा बिलबिलाने लगा और शर्ट के अंदर दोनो अनार ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगे.

लंड को मेरे सामने नंगा कर रमेश ने फ़ौरन शर्ट के उपर से ही दोनो चूचियों को पकड़कर मसला. मसलवाते ही मैं मज़े से भर गयी. सच बड़ा ही मज़ा था. चूचियों को उसके हाथ मैं दे मैं उसकी ओर देखा तो रमेश सिसकारी ले बोला,

"बड़ा मज़ा आएगा. जवान हो गयी हो. मीना के साथ आज इस पिचकारी से रंग खेलो. अगर मज़ा ना आता तो मेरी बहन इतना बेचैन क्यों होती चुदवाने के लिए." एक हाथ को लपलपते नंगे लंड पर लगा दूसरे हाथ की चूची को कसकर दबाते कहा तो मैं होली की रंगिनी मैं डूबने की उतावली हो फिर उसके लंड को देखने लगी. उसके नंगे लंड को देखते हुवे चूचियाँ दबवाने मैं ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. चूचियाँ टटोलवाने मैं चड्डी की गदराई चूत के मुँह मैं अपना फैलाव हो रहा था. पहले केवल सुना था पर करवाने मैं तो बड़ा मज़ा था. तभी चूची को और ज़ोर ज़ोर से दबा हाथ के लंड को उभारते बोला,

"ऐसा जल्दी पओगि नही. देखना आज तुम्हारी सहेली मीना को कैसे चोद्ता हूँ. कभी मज़ा नही लिया तुमने इसीलिए शर्मा रही हो. तुमको भी बड़ा मज़ा आएगा हमसे चुदवाने मैं." रमेश चूची पर हाथ लगाते अपने मस्त लंड को दिखाता जो होली की बहार की बाते कर रहा था उससे हमें ग़ज़ब का मज़ा मिल रहा था. मस्ती के साथ अपने आप शरम ख़तम हो रही थी. अब इनकार करना मेरे बस मैं नही था. अब खुद शर्ट के बटन खोल दोनो गदराई चूचियों को उसके हाथ मैं दे देने को बेचैन थी. बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरी नज़रे हिनहिनाते लंड पर जमी थी. तभी मीना ज़मीन पर बिस्तर लगा पास आई और रमेश के लंड को हाथ मैं पकड़ मेरी मसली जा रही चूचियों को देखती बोली,

"भयया हमसे छ्होटी हैं ना?"

"हां मीना पर चुदवाएगी तो तुम्हारी तरह इसको भी प्यार से दूँगा पर अभी तो तुम्हारी सहेली शर्मा रही है. तुम तो जानती हो कि शरमाने वाली को मज़ा नही आता." और रमेश ने मेरी चूचियों को मसलना बंद कर मीना की चूचियों को पकड़ा. हाथ हटा ते ही मज़ा किरकिरा हुवा. मीना अपने भाई के लंड को प्यार से पकड़े थी. मैं बेताबी के साथ बोली,

"हाए कहाँ शर्मा रही हूँ."

"नही शरमाएगी भयया इसको भी चोद्कर मज़ा देना." मीना ने कहा तो रमेश बोला,

"चोदने को हम तुम दोनो तैय्यर हैं. घर खाली है जब कहोगी यहाँ आकर चोद देंगे पर आज तुम दोनो को आपस मैं मज़ा लेना भी सिखाएँगे." और एक हाथ मेरी चूची पर लगा दूसरे हाथ से मीना की चूची को पकड़ लंड को मीना के हाथ मैं दे एक साथ हम दोनो की दबाने लगा. मेरा खोया मज़ा चूचियों पर हाथ आते ही वापस मिल गया. तभी मीना उसके खड़े लंड पर हाथ फेर हमको दिखाती बोली,

"शरमाओ नही सुनीता मैं तो आज भाय्या से खूब चुदवँगी."

"नही शर्मौन्गि."

"तो लो पाकड़ो भाय्या का और मज़ा लो." और मीना अपने भाई के लंड को मेरे हाथ मैं पकड़ा खुद बगल हटकर दबवाने लगी. रमेश के लंड को हाथ मैं लिया तो बदन का रोम रोम खड़ा हो गया. सचमुच लंड पकड़ने मैं ग़ज़ब का मज़ा था. तभी रमेश बोला,

"हाए मीना बड़ा मज़ा आ रहा है तुम्हारी सहेली के साथ."

"हां भाय्या नया माल है ना."

"कहो तू इसका एक बारपानी निकाल दे." और मीना के चूचियों को छ्चोड़कर एक साथ मेरी दोनो चूचियाँ दबाता लंड को मेरे हाथ मैं पक'डा कर खड़ा हुवा. तभी मीना मुझसे बोली,

"सुनीता रानी इसका पानी निकाल दो तब चुदवाने मैं मज़ा आएगा. अब हमलोग रमेश भाय्या की जवानी चूस्कर रहेंगे. हाए तुम्हारे अनार मीस कर भाय्या मस्त हो गये हैं." रमेश आँखे बंदकर तमतमाए चेहरे के साथ मेरी चूचियों को शर्ट के ऊपर से इतनी ज़ोर ज़ोर से मीस रहा था कि जैसे शर्ट फाड़ देगा. मेरी चूत सनसना रही थी और लंड पकड़कर मीसवाने मैं ग़ज़ब का मज़ा मिल रहा था. अब तो मीना से पहले उसकी पिचकारी से रंग खेलने का मंन कर रहा था. रमेश ने लंड मेरी चड्डी से चिपका दिया था. अब रमेश धीरे धीरे दबा रहा था. चड्डी से लगा मोटा गरम लंड जन्नत का मज़ा दे रहा था. उसने एक तरह से मुझे अपने ऊपर लाद लिया था. मीना धीरे से अपनी चड्डी खिसकाकर नंगी हो रही थी. मीना ने अपनी चूत नंगी कर मस्ती मैं चार चाँद लगा दिया था. अब मैं रमेश की गोद मैं थी और ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. मीना की चूत साँवली और फाँक बड़े से थे पर मेरी फाँक से उसकी फाँक बड़े थे. मैं सोच रही थी कि मीना चूत नंगी करके क्या करेगी. मैं सहेली की नंगी चूत को प्यार से देखती अपने दोनो अमरूद को मीस्वा रही थी. तभी मीना आगे आई और चूत को उचकाती बोली,

"देखो सुनीता इसी तरह से तुमको भी चटाना होगा."

"ठीक है." फिर वह अपनी चूत को अपने भाई के मुँह के पास ला तिर्छि होकर बोली,

"ले बहन्चोद चाट अपनी बहन की चूत." रमेश एक साथ हम दोनो सहेलियों का मज़ा लेने लगा. मुझे सहेली की अपने ही भाई को बहन्चोद कहना बड़ा अच्छा लगा. मीना बड़े प्यार से उंगली से अपनी साँवली सलोनी चूत के दरार फैला फैलाकर चटवा रही थी. सहेली का चेहरा बता रहा था कि चूत चटवाने मैं उसे बड़ा मज़ा मिल रहा था.
कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त ...................................क्रमशः..................









HOLI NE MEREE KHOLI paart--2


gataank se naage...................

"pahle tu hamko hi chodega. Kaho tu tumko bhi…." Main sharmati si holi ki masti main razi huyi tu wah bahar Ramesh ke paas gayi. Kuchh der baad wah Ramesh ke saath wapas aayi tu uska bhai Ramesh mere uthano ko dekhta apni chhoti bahan Mina ki bagal main haath dal uski choochiyon ko meesta bola,

"theek hai Mina ham tumhari saheli ko bhi maza denge par iski choochiyan tu abhi chhoti lag rahi hain."

"kabhi dabwati nahi hai na bhaiyya isiliye." Mina pyaar se apne bhai se choochiyon ko miswate boli.

"theek hai ham Sunita ko bhi khush kar denge par pahle tum pyar se mere saath holi manao. Ab zara dikhao tu." Ramesh masti se Mina ki choot par aage se haath laga mast nazro se meri oor dekhte bola tu maine kunwarepan ki garmi se baichain ho Mina ko kahte suna,

"yaar kitni baar dekhoge. Jaisi sabki hoti hai waisee meri hai. Ab saheli razi hai tu aaram se khelo holi."

"haye Mina kya mast choochiyan hain tumhari. Aisi choochi pa jaye tu bas din bhar dabate rahe." Aur kaskar apni bahan ki choochiyon ko dabane laga. Mina aur uske bhai ki in harkaton se mere bahke mann par ajeeb sa asar ho raha tha. Ab tu mann kar raha tha ki Ramesh se kahen aao meri bhi dabao. Meri Mina se zyada maza dengi itna taaw kunware badan main aaj se pahle kabhi nahi aaya tha. Choot ki phaan phanphanakar chaddi main ubhar ayi thi. Jaise jaise wah Mina ki jawaniyon ko sahlata ja raha tha waise waise meri tadap barhti ja rahi thi.

"oohh bhaiyya ab aram se karo na. Saheli taiyyar hai. Manao hamdono se holi. Ab jaldi nahi Ramesh bhaiyya. Saheli ne darwaza band kar diya hai. Jitna chod sako chodo." Mina mast nigaho se apni dabayi ja rahi choochiyon ko dekhti sina ubharti boli tu Ramesh ne usko chumte huwe kaha,

"tumhari saheli ne kabhi nahi dabwaya hai?"

"nahi bhayya."

"pahle bataya hota tu iski bhi tumhari tarah daba dabakar maza dekar bada kar dete. Ladkiyon ki yahi umar hoti hai maza lene ki. Ek baar chud jaye tu baar baar isko kholkar kahtin hain fir chodo mere raja." Ramesh Mina ki choot ko kapde ke oopar se tatolta bola.

"theek hai bhaiyya main tu chudwaongi hi par saath hi is bechari ko bhi aaj hi…"

"theek hai pahle tumko fir isko. Apne lund main itni takat hai ki tumhare jaisi 4 ko chodkar khush kar doon. Par yah tu Sharma rahi hai. Mina apni saheli ko samjhao ki agar maza lena hai tu tumhare saath aye. Ek saath do main hamko bhi zyada maza ayega aur tum logo ko bhi."

"theek hai bhayya aaj mere saath Sunita ko bhi. Agar ise maza aaya tu fir bulayegi. Aajkal iska ghar khali hai."

"tu fir aaj poori nangi hokar maza lo. Kasam Mina jitna maza hamse paogi kisi aur se nahi milega."

"ohh bhaiyya mujhe kya bata rahe ho main tu janti hoon. Raja kitni baar tu tum chod chuke ho apni is bahan ko. Par bhaiyya aajkal ghar main mehmaan aane ki wajah se jagah nahi. Wo tu bhala ho meri pyari saheli ka jiski wajah se tum aaj apni bahan ke saath hi uski kunwari saheli ki bhi chod sakoge. Bhaiyya is bechari ko bhi…"

"kah tu diya. Par ise samjha do ki sharmaye nahi. Ek saath nangi hokar aao tu tum dono ko ek saath maza de. Do ek saheliyon ko aur bula lo tu charo ko chodkar mast na kar doon tu mera naam Ramesh nahi." Saheli ke bhai ki baat se mera para charhta ja raha tha.

"ohh Mina tum kapde utaaro der mat karo. Tumhari saheli Sharma rahi hai tu ise kaho ki kamre se bahar chali jaye tu tumse holi ka maza loon." Itna kah Ramesh ne Mina ki choochiyon se haath hata apni pant utarni shuru ki tu maine sansanakar Mina ki oor dekha tu wah mere paas aa boli,

"itna Sharma kyon rahi ho? Bada maza ayega aao mere saath." Ab Mina ki baat se inkar karna mere bas main nahi tha. Choot chaddi main gili ho gayi thi. Choochiyon ke nipple Mina ke nipple ki tarah khade ho gaye the. Ramesh ne jis tarah se mujhe bahar jane ko kaha tha usse main ghabra gayi thi. Tabhi Mina mera haath pakad mujhe Ramesh ke paas le jakar boli,

"main bistar lagati hoon bhaiyya jab tak tum Sunita ko apna dikha do." Main saheli ke bhai ke paas aa sharmane lagi. Tabhi Ramesh betabi ke saath apni pant utar khade laal rang ke lambe lund ko saamne kar mere gaal par haath laga mujhe jannat ka maza deta bola,

"dekho kitna mast lund hai. Isi lund se apni bahan ko chodta hoon. Tumhari choot is'se chudwakar mast ho jayegi." Main pahli baar itni paas se kisi mastaye khade lund ko dekh rahi thi. Nange lund ko dekhne ke saath mujhe apne aap ajib si masti ka anubhaw huwa. Uska lund ekdam khada tha. Mina ne jaisa bataya tha, uske bhai ka waisa hi tha. Lamba mota aur gora. Pahli baar jawan phanphanaye lund ko dekh rahi thi. Ramesh pant khiska pyaar se lund dikha raha tha. Mina chudwane ke liye niche zameen par bistar laga rahi thi. Gulabi rang ke supade wale gore lund ko karib se dekh meri kunwari choot main chudasi ka kida bilbilane laga aur shirt ke dono anaar zor zor se dhadakne lage.

Lund ko mere samne nanga kar Ramesh ne fauran shirt ki dono choochiyon ko pakadkar masla. Masalwate main maze se bhar gayi. Sach bada hi maza tha. Choochiyon ko uske haath main de main uski oor dekha tu Ramesh sitkari le bola,

"bada maza ayega. Jawan ho gayi ho. Mina ke saath aaj is pichkari se rang khelo. Agar maza na aata tu meri bahan itna bechain kyon hoti chudwane ke liye." Ek haath ko laplapate nange lund par laga dusre haath ki choochi ko kaskar dabate kaha tu main holi ki rangini main dubne ki utawli ho fir uske lund ko dekhne lagi. Uske nange lund ko dekhte huwe choochiyan dabwane main gazab ka maza aa raha tha. Choochiyan tatolwane main chaddi ki gadrayi choot ke munh main apna phailaw ho raha tha. Pahle kewal suna tha par karwane main tu bada maza tha. Tabhi choochi ko aur zor zor se daba haath ke lund ko ubharte bola,

"aisa jaldi paogi nahi. Dekhna aaj tumhari saheli Mina ko kaise chodta hoon. Kabhi maza nahi liya tumne isiliye Sharma rahi ho. Tumko bhi bada maza aayega hamse chudwane main." Ramesh choochi par haath lagate apne mast lund ko dikhata jo holi ki bahar ki baate kar raha tha usse hamen gazab ka maza mil raha tha. Masti ke saath apne app sharam khatam ho rahi thi. Ab inkar karna mere bas main nahi tha. Ab khud shirt ke button khol dono gadrayi choochiyon ko uske haath main de dene ko bechain thi. Bada maza aa raha tha. Meri nazre hinhinate lund par jami thi. Tabhi Mina zamin par bistar laga paas ayi aur Ramesh ke lund ko haath main pakad meri masli ja rahi choochiyon ko dekhti boli,

"bhayya hamse chhoti hain na?"

"haan Mina par chudwayegi tu tumhari tarah isko bhi pyar se doonga par abhi tu tumhari saheli Sharma rahi hai. Tum tu janti ho ki sharmane wali ko maza nahi aata." Aur Ramesh ne meri choochiyon ko masalna band kar Mina ki choochiyon ko pakda. Haath hat te hi maza kirkira huwa. Mina apne bhai ke lund ko pyar se pakde thi. Main betabi ke saath boli,

"haye kahan Sharma rahi hoon."

"nahi sharmayegi bhayya isko bhi chodkar maza dena." Mina ne kaha tu Ramesh bola,

"chodne ko ham tum dono taiyyar hain. Ghar khali hai jab kahogi yahan aakar chod denge par aaj tum dono ko aapas main maza lena bhi sikhayenge." Aur ek haath meri choochi par laga dusre haath se Mina ki choochi ko pakad lund ko Mina ke haath main de ek saath ham dono ki dabane laga. Mera khoya maza choochiyon par haath aate hi wapas mil gaya. Tabhi Mina uske khade lund par haath pher hamko dikhati boli,

"sharmao nahi Sunita main tu aaj bhaiyya se khoob chudwaongi."

"Nahi sharmaungi."

"to lo pakdo bhaiyya ka aur maza lo." Aur Mina apne bhai ke lund ko mere haath main pakda khud bagal hatkar dabwane lagi. Ramesh ke lund ko haath main liya tu badan ka roam roam khada ho gaya. Sachmuch lund pakadne main gazab ka maza tha. Tabhi Ramesh bola,

"haye Mina bada maza aa raha hai tumhari saheli ke saath."

"haan bhaiyya naya maal hai na."

"kaho tu iska ek pani nikal de." Aur Mina ke choochiyon ko chhodkar ek saath meri dono choochiyan dabata lund ko mere haath main pak'da kar khada huwa. Tabhi Mina mujhse boli,

"Sunita rani iska pani nikal do tab chudwane main maza aayega. Ab hamlog Ramesh bhaiyya ki jawani chooskar rahenge. Haye tumhare anaar mees kar bhaiyya mast ho gaye hain." Ramesh aankhe bandkar tamtamaye chehre ke saath meri choochiyon ko shirt ke oopar se itni zor zor se mees raha tha ki jaise shirt phad dega. Meri choot sansana rahi thi aur lund pakadkar miswane main gazab ka maza mil raha tha. Ab tu Mina se pahle uski pichkari se rang khelne ka mann kar raha tha. Ramesh ne lund meri chaddi se chipka diya tha. Ab Ramesh dhire dhire daba raha tha. Chaddi se laga mota garam lund jannat ka maza de raha tha. Usne ek tarah se mujhe apne oopar laad liya tha. Mina dhire se apni chaddi khiskakar nangi ho rahi thi. Mina ne apni choot nangi kar masti main char chand laga diya tha. Ab main Ramesh ki god main thi aur gazab ka maza aa raha tha. Mina ki choot sanwali aur phaank bade se the par meri phaank se uski phaank bade the. Main soch rahi thi ki Mina choot nangi karke kya karegi. Main saheli ki nangi choot ko pyar se dekhti apne dono amroodu ko miswa rahi thi. Tabhi Mina aage aayi aur choot ko uchkati boli,

"dekho Sunita isi tarah se tumko bhi chatana hoga."

"theek hai." Fir wah apni choot ko apne bhai ke munh ke paas laa tirchhi hokar boli,

"le bahanchod chaat apni bahan ki choot." Ramesh ek saath ham dono saheliyon ka maza lene laga. Mujhe saheli ki apne hi bhai ko bahanchod kahna bada achha laga. Mina bade pyar se ungli se apni sanwali saloni choot ke daraar phaila phailakar chatwa rahi thi. Saheli ka chehra bata raha tha ki choot chatwane main use bada maza mil raha tha.

Contd.













आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा

(¨`·.·´¨) Always
`·.¸(¨`·.·´¨) Keep Loving &
(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj

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