FUN-MAZA-MASTI
मैं ओर मेरी बहन -4
ऋतू :” मैं कल पूजा को अपने साथ लेकर ४ बजे घर आउंगी, तुम ३:३० पर ही आ जाते हो, तुम ठीक ४:०० बजे मुठ मारनी चालू कर देना, मैं उसको बोलूंगी की मेरा भाई रोज ४:०० बजे अपने रूम में मुठ मारता है, और मैं इस छेद से रोज उसको देखती हूँ, मुझे विश्वास है की वो भी तुम्हे देखने की जिद करेगी तब मैं उससे पैसो के बारे में बात करके तुम्हे मुठ मारते हुए दिखा दूँगी….क्यों कैसी रही??”
मैं :” वाह मैं तो तुम्हारी अक्ल का कायल हो गया…तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे हो”
ऋतू : “आखिर बहन किसकी हूँ हा हा …”
मैं : “और तुम उससे कितना चार्ज करोगी?”
ऋतू : “वोही…एक हजार रूपए, ठीक है ना ..”
मैं : “ठीक है…”
ऋतू : “और फिर रात को सन्नी और विकास भी आ सकते हैं और वो दोनों, हम दोनों को देखने के ३००० हजार रूपए अलग से तुम्हे देंगे…तो हम एक दिन में चार हजार रूपए कमा सकते हैं”
मैं तो अपने दिमाग में calculate करना शरू किया की ४००० एक दिन के, हफ्ते में ३ बार, अगर लड़के या लडकियां बढती हैं तो ज्यादा भी हो सकते है, और इस तरह से १ महीने में कितना हुआ….शायद calculator की मदद लेनी होगी..”
ऋतू : “अरे क्या सोचने लगे”
मैं :”कुछ नहीं…कुछ नहीं”
ऋतू :”वैसे एक बात बताऊँ, मुझे काफी exitement हो रही थी की तुम मुझे छेद से वो सब करते हुए देख रहे हो, काफी मजा आ रहा था “
मैं : “मुझे भी काफी मजा आ रहा था, मेरा लंड तो अभी भी कल की बातें सोचकर खड़ा हुआ है”
ऋतू : “अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ”
मैं : “अभी….मम्मी पापा आने वाले हैं, तुम मरवाओगी “
ऋतू : “अरे इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा…please …अपना लंड निकालो न..जल्दी”
मैंने जल्दी से अपनी पैंट नीचे उतारी और ऋतू झट से मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गयी, मेरा underwear एक झटके में नीचे करके मेरे फड़कते हुए लंड को अपने नरम हाथों में लेकर ऊपर नीचे किया और फिर उसे चूसने लग गई, उसकी बेकरारी और मेरी उत्तेजना लायी और सिर्फ एक मिनट में ही मैंने एक के बाद एक कई पिचकारी उसके मुंह में उतार डाली.
वो उठी और अपना मुंह साफ़ करी हुई बोली “मुझे तो तुम्हारा वीर्य ने अपना दीवाना ही बना दिया है..और फिर मेरे लंड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर अपनी गरम साँसे छोडती हुई बोली “आगे से तुम इसे कभी व्यर्थ नहीं करोगी…समझे न.”
मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.
मैं : “अगर तुम चाहो तो बाद मैं मैं भी तुम्हारी चूत चूस सकता हूँ ” मैंने धीरे से कहा.
ऋतू : “तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली…मैं रात होने का इन्तजार करुँगी.”
मैं : “मैं भी रात होने का इन्तजार करूँगा …बाय”
ऋतू : “बाई”
रात को खाना खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए, मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था की पिछले कुछ दिनों में, मैं और ऋतू एक दुसरे से कितना खुल गए हैं, लंड-चूत की बातें करते हैं,मुठ मारना एक दुसरे को नंगा देखना और छुना कितना आसान हो गया है. मैं अपनी इस लाइफ से बड़ा खुश था.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मसलना शुरू कर दिया, मुझे ऋतू का इन्तजार था, मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा, करीब पंद्रह मिनट में ही वो धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गयी और मुझे अपना लंड हिलाते हुए देखकर चहक कर बोली.
“वाह, तुम तो पहले से ही तैयार हो, लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ”
मैं : “पर मैंने कहा था की मैं तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ..!”
ऋतू :”कोई बात नहीं, तुम मेरी चूत चुसो और मैं तुम्हारा लंड, हम 69 की position ले लेते हैं.”
मुझे ये आईडिया पसंद आया.
ऋतू ने जल्दी से अपना gown खोला, हमेशा की तरह आज भी वो अन्दर से पूरी तरह से नंगी थी, उसके भरे हुए मुम्मे और तने हुए निप्पल्स देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे, और मैंने नोट किया की आज उसकी चूत एकदम साफ़ थी, चिकनी.
शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे… मेरे तो मुंह में पानी आ गया.
वो झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगे उठा कर घुमाते हुए, जैसे कोई घोड़े पर चढ़ रहा हो, बेड पर फैलाई और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गयी, उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी, उसकी चूत जल रही थी, एकदम गरम, लाल, गीली, रस छोडती हुई…मैं तो अपने काम में लग गया, उसकी चूत के लिप्स को अपनी उँगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखि, उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई, और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल…मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियां साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता…मैं लगा रहा…लगा रहा..साथ ही साथ मैं अपनी एक ऊँगली से उसकी clit भी रगड़ रहा था.
मेरे लंड का भी बुरा हाल था वो उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो..अन्दर तक ले जाती जीभ से चारों तरफ circle बनाती और फिर बाहर निकालते हुए हलके से दांतों का भी इस्तेमाल करती..वो लंड चूसने में परफेक्ट हो चुकी थी.
मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए, और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चुसना शुरू कर दिया, किसी vaccum cleaner की तरह suck करने लगा, वो तो बिफर ही गयी मेरे इस हमले से और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी…मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और पूजा ने जैसे ही मेरी बाल्स को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया, मैं झड गया और वो मेरा पूरा माल हड़प कर गयी..
फिर हम दोनों उठे और एक दुसरे की तरफ देखा, दो के चेहरे गीले थे हम ये देखकर हंसने लगे.
ऋतू :”तुमने तो मुझे अपने juice की लत्त लगा दी है..कितना मजा आता है तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में.”
मैं : “मैं भी तुम्हारे मीठे रस का आदि हो चूका हूँ, जी करता है सारा दिन तुम्हारी चूत चूसता रहूँ.”
मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था, वो मेरे साथ लेट गयी, उसके मोटे-२ चुचे मेरे सीने से लगकर दब गए, उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी, मैंने अपनी आँखे बंद करली और मजे लेने लगा.
उसकी गरम साँसे मेरे कानो पर पड़ रही थी.
उसकी एक टांग मेरे ऊपर थी और वो उसको रगड़ रही थी जिससे ऋतू की गीली चूत मेरी जांघ से रगड़ खा रही थी.
ऋतू : “wow , तुम्हारा तो अभी भी खड़ा हुआ है…मेरी चूत के अन्दर भी कुछ कुछ हो रहा है…
ऋतू : “अगर ऐसी बात है तो मैं अभी जाकर पूछती हूँ ” और वो दरवाजे की तरफ चल पड़ी ” अगर तुम भी आना चाहो तो आ सकती हो या फिर छेद में से देख सकती हो”
पूजा : “ना बाबा ना..मुझे तो बड़ी शर्म आएगी इस सबमे…तुम ही जाओ”
ऋतू ने आकर मेरे रूम का दरवाजा खडकाया और अन्दर आ गयी, मैंने बड़ी हैरानी से उसे देखा…वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे मुंह पर ऊँगली रख कर मुझे चुप रहने के लिए कहा और फुसफुसाकर बात करने लगी, दुसरे रूम से पूजा बड़ी बेसब्री से ये सब देख रही थी, उसने देखा की ऋतू ने मुझसे कुछ कहा और १-२ मिनट बात करने के बाद ऋतू का भाई झटके से अलग हुआ और अपने हाथ हवा में उठाकर मना करने के स्टाइल में कुछ बोलने लगा…पूजा सांस रोके ये सब देख रही थी, फिर ऋतू दुबारा अपने भाई के पास गयी और उसे कुछ और बोला, फिर भाई ने भी आगे से कुछ कहा और ऋतू सोचने के अंदाज में सर खुजाने लगी, और फिर कुछ और बातें करने के बाद दोनों एक दुसरे के गले लग गए और ऋतू बाहर निकल गयी.
अन्दर आते ही पूजा ने ऋतू से बड़ी अधीरता से पूछा “तुमने उससे क्या कहा..कैसे पूछा ??”
ऋतू : “वोही जो हमने तय किया था..मैंने पूछा की क्या वो हमारे सामने masturbate कर सकता है क्योंकि हमने कभी भी असली में ऐसा नहीं देखा..”
पूजा : “और उसने क्या कहा?”
ऋतू : “वो तो यह सुनकर काफी भड़क गया था”
पूजा : “देखा…मैंने कहा था न”
ऋतू : “पर जब मैंने उससे कहा की हम इसके लिए उसे कुछ पैसे देंगे या फिर कुछ और भी जो वो चाहे तो बात आगे बड़ी”
पूजा : “तो उसने क्या कहा ” उसने excitement में आगे पूछा
ऋतू : “बोटम लाइन इस , वो तैयार है और वो इसके लिए २००० रूपए मांग रहा है.”
पूजा ने आश्चर्य के भाव दिए और बोली “क्या सच में…वो सब हमारे सामने करने को तैयार है और उसे सिर्फ २००० रूपए चाहियें”
ऋतू : “हाँ…और साथ ही साथ वो चाहता है की हमें भी उसके सामने नंगा होना पड़ेगा” उसने धीरे से कहा.
पूजा : “वाह बहुत बढ़िया…वो हमें नंगा देखना चाहता है तभी वो masturbate करेगा ” उसने कट्टाक्ष भरे स्वर में कहा.
ऋतू : “पर जरा सोचो…उसका लम्बा और खुबसूरत लंड तुम्हारी नाक से सिर्फ कुछ ही दुरी पर होगा” ऋतू ने उसे उकसाया
पूजा कुछ सोचते हुए “चलो वो तो ठीक है पर क्या तुम अपने भाई के सामने नंगी हो सकती हो ?”
ऋतू : “उसे अपने सामने मुठ मारता हुए देखने के लिए तो मैं ये सब कर ही सकती हूँ, ये कोई बड़ी बात नहीं है, और जब हम दोनों करेंगे तो मुझे इसमें ज्यादा शर्म भी नहीं आएगी”
पूजा : “हम दोनों से तुम्हारा क्या मतलब है…मैं तो अभी तक इसके लिए तैयार ही नहीं हुई”
ऋतू ने अपनी आवाज में थोड़ी कठोरता लाते हुए कहा “तुम मुझे ये बताओ तुम तैयार हो या नहीं…ये तुम्हारा लास्ट चांस है”
पूजा : ” ठीक है, जब तुम्हे अपने भाई के सामने नंगा होने में कोई परेशानी नहीं है तो मुझे क्या…वो ये सब कर करेगा”
ऋतू : “शायद आज रात को सबके सोने के बाद”
पूजा : “मुझे तो बड़ी घबराहट हो रही है…क्या सच में तुम ये सब करना चाहती हो”
ऋतू : “अरे हाँ …ये एक नया adventure होगा…मजा आएगा…और फिर हम बाद में……समझ गयी न”
पूजा : “ठीक है…पर सच में तुम बड़ी पागल हो”
ऋतू : “पागलपन करने में भी कभी -२ बड़ा मजा आता है…चलो अब अपना होमेवोर्क कर लेते है…फिर रात को तो कुछ और नहीं कर पायेंगे”
जब रात को सभी डिन्नर कर रहे थे तो ऋतू ने सारी बातें मेरे कान में बता दी, बीच – २ में जब मैं पूजा की तरफ देखता था तो वो शरमा कर अपना चेहरा नीचे कर लेती थी.जब खाना ख़त्म हुआ तो ऋतू और पूजा अपने रूम में चले गए बाकी का बचा हुआ homework करने के लिए.
और आखिरकार सारे घर में शांति छा गयी, ऋतू और पूजा अपने रूम में nightgown पहेनकर मेरा वेट कर रहे थे. पूजा ने सोचा की शायद आशु नहीं आएगा और कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला ही था के उसे दरवाजे पर हलकी सी knok सुनाई दी,आवाज सुनते ही ऋतू उछल कर दरवाजे के पास गयी और मुझे अन्दर खींच लिया. मुझे खींचकर वो बेड के पास तक ले गयी और वहां बैठी पूजा के पास बैठ गयी, मैं उन दोनों के सामने नर्वस सा खड़ा हुआ था.
“अरे किस बात का वेट कर रहे हो…तुम ये करना भी चाहते हो या नहीं…” ऋतू ने पूछा.
मैं : “मुझे लगा तुम मुझे पहले पैसे दोगी..”
ऋतू : “बिलकुल देंगें, (पूजा की तरफ देखकर), हमने बोला है तो जरुर देंगे”
मैं : “तुमने बोला था की तुम मुझे २००० रूपए दोगे और नंगे भी होगे “
ऋतू : “क्या तब तुम masturbate करना शुरू करोगे ??”
मैं : (सकुचाते हुए…) ” ह्म्म्म हाँ sss “
ऋतू : “ok then …और पूजा की तरफ देखकर उसे कुछ इशारा करती है, पूजा झट से अपने purse में से २००० रूपए निकाल कर मुझे दे देती है”
पर मुझे कुछ न करते देखकर वो समझ जाती है की आगे क्या करना है.
ऋतू : “come on पूजा..चलो एक साथ करते हैं”
फिर धीरे-२ पूजा उठती है और दूसरी तरफ मुंह करके अपना gown खोल कर नीचे गिरा देती है..ऋतू भी उसके साथ – २ वही करती है, दोनों की गांड मेरी तरफ थी, मैं तो वो दृश्य देखकर पागल ही हो गया, एक गोरी और दूसरी सांवली,एकदम ताजा माल, भरी हुई जांघें और सुदोल पिंडलियाँ, फिर दोनों घूम कर वापिस मेरी तरफ मुंह करके बेड के किनारे पर बैठ गयी, पूजा के चुचे देखकर मेरे मुंह से आह निकल गयी और मैं अपने लंड को अपने पायजामे के ऊपर से ही मसलने लगा..ये देखकर ऋतू ने मुझे घूरकर गुस्से के लहजे में देखा और अगले ही पल हंसकर मुझे आँख मार दी, पूजा ये सब नहीं देख पायी, वो तो अपनी नजरें भी नहीं उठा रही थी.
मैंने देखा की उसके चुचे ऋतू से काफी बड़े हैं, थोड़े लटके हुए , शायद ज्यादा भार की वजह से, और उसके काले-२ निप्पलस इतने बड़े थे की शायद मेरे पैर की ऊँगली के बराबर…पेट बिलकुल गोल मटोल और सुदोल, मैं खड़ा हुआ उसकी चूत भी देख पा रहा था, वो बिलकुल काली थी, बालों से ढकी हुई, और बीच में जो चीरा था, उसमें से गुलाबी पंखुडियां अपनी बाहें फैला कर जैसे मुझे ही बुला रही थी. मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया. ऋतू की तरफ देखा, उसके चूचो का तो मैं वैसे ही दीवाना था, मुझे अपनी तरफ देखते पाकर उसकी ऑंखें बंद सी होने लगी और अपनी एक ऊँगली अपने मुंह में डालकर वो बोली.
“चलो अब तुम्हारी बारी है” ऋतू ने मुझसे कहा.
मैंने एक गहरी सांस लेकर अपना पायजामा और jocky नीचे गिरा दिया, और अपनी टी-शर्ट भी उतार दी, फिर मैंने अपना तना हुआ लंड हाथ में लिया और उसे आगे पीछे करने लगा.
“इतना दूर नहीं, यहाँ हमारे पास आकर खड़े हो जाओ और फिर हिलाओ” ऋतू ने आर्डर सा दिया.
मैं खिसककर आगे आ गया और अब मेरे पैर बेड से टकरा रहे थे, दोनों के नंगे जिस्म आपस में रगड़ खा रहे थे और उन दोनों का चहरा मेरे लंड से सिर्फ 4 -5 इंच की दुरी पर ही था, मैं उसे हिलाने लगा, पूजा ने ऋतू की तरफ देखा, वो मुस्कुरा दी, जवाब में पूजा भी मुस्कुरा दी और उसकी थोड़ी tention कम हुई, और वो अब अपने सामने के नज़ारे के मजे लेने लगी.
मेरा पूरा ध्यान अब पूजा की तरफ था, वो अपनी आँखें फाड़े मेरे लंड को देख रही थी, उसका मुंह खुला हुआ था, चुचे तन कर खड़े हो गए थे, लगता था वो अपनी सुध बुध खो चुकी है, मैंने ऋतू की तरफ देखा तो वो बड़े ही कामुक स्टाइल से मेरी ही तरफ देख रही थी, उसका एक हाथ अपनी चूत की मालिश कर रहा था, और वो अपने होंठो पर अपनी लाल जीभ फिर रही थी, जैसे वो मेरा लंड चुसना चाहती हो…पर क्या वो पूजा के सामने मेरा लंड चूस लेगी..शायद हाँ.
ये सोच-सोचकर मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और मैं छुटने के बिलकुल करीब पहुँच गया.
ऋतू को शायद इस बात का अंदाजा हो गया था, वो थोड़ी और आगे खिसक आई…साली मेरे रस की भूखी..और मेरे लंड ने अपना रस उबालकर बाहर उडेलना शुरू कर दिया..मेरी पहली धार सीधे ऋतू के चेहरे से टकराई वो थोडा पीछे हटी तो दूसरी धार सीधे पूजा के खुले हुए मुंह के अन्दर और तीसरी और चोथी उसके गालों और माथे पर जा लगी, फिर मैंने थोडा लेफ्ट turn किया और बाकी की बची हुई पिचकारी अपनी बहन के चेहरे पर खाली कर दी.
पूजा तो अवाक रह गयी जब मैंने अपना वीर्य उसके मुंह में डाला पर जब उसने अपना मुंह बंद करके स्वाद चखा तो उसे साल्टी सा लगा और वो उसे निगल गयी, उसने सोचा,इसका स्वाद ऋतू के रस से थोडा अलग है पर tasty है, फिर उसने अपने चेहरे से बहते हुए रस को अपनी उँगलियों से समेटा और निगल गयी, उसने देखा की ऋतू बड़े मजे से अपना मुंह खोलकर मेरी धारें अपने चेहरे और मुंह पर मरवा रही है और बड़े मजे से पी भी रही है.
मेरा लंड धीरे से मुरझाने लगा और ऋतू ने पूजा की तरफ देखा और उसे गले से लगा लिया, और बोली “देखा..कितना मजा आया…कितना exciting था “और उसके चेहरे पर बचा हुआ रस चाटने लगी.
पूजा : “हाँ बड़ा ही exciting था, मुझे भी देखने में काफी अच्छा लगा”
ऋतू : “क्या तुम्हे इसके रस का स्वाद पसंद आया”
पूजा : (शर्माते हुए) “हाँ….ठीक था.”
ऋतू : “चलो फिर मेरे चेहरे से सारा रस चाट कर इसे साफ़ करदो…जल्दी”
‘ठीक है” और पूजा ने सकुचाते हुए अपनी लम्बी जीभ निकालकर ऋतू का चेहरा चाटना शुरू कर दिया, थोड़ी ही देर में वो बिलकुल साफ़ हो गया और पूजा चटखारे लेते हुए पीछे हो गयी.
“और इसका क्या होगा”, मैंने अपने मुरझाये हुए लंड को निचोड़ कर आगे किया और उसके सिरे पर बड़ी सी वीर्य की बूंद चमकने लगी
ऋतू : “पूजा तुम चाट लो इसे..”
पूजा : “मैं…..नहीं मैं कैसे..” वो घबरा रही थी.
मैं : “जल्दी करो..नहीं तो मैं जा रहा हूँ”
ऋतू : “अरे चलो भी पूजा, अब क्यों शरमा रही हो…चूस लो”
पूजा : “नहीं मैं नहीं कर सकती”
ऋतू : “बिलकुल कर सकती हो..” और पूजा का चेहरा पकड़ कर आगे किया और दुसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ कर उसके मुंह में दाल दिया.
मैंने महसूस किया की उसके होंठ मेरा लंड मुंह में लेते ही बंद हो गए और उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे को कुरेदने लगी, एक दो चूपे लेने के बाद उसने मेरे लंड को बाहर निकाल दिया.
“कैसा लगा ” ऋतू ने पूछा
“मजेदार…काफी नरम और गरम है ये तो..मुझे नहीं लगता ये जल्दी पहले जैसा कड़ा हो सकेगा.” पूजा बोली.
“थोडा और चुसो तब बोलना..” मैंने कहा.
“हाँ हाँ चलो थोडा और चुसो पूजा, देखते हैं क्या होता है ” ऋतू ने उसे उकसाया .
उसने अपना मुंह जल्दी से खोला और मैंने आगे बढकर उसका मुंह अपने लंड से भर दिया, वो उसे अब पहले से ज्यादा तेजी से चूसने लगी, अपनी जीभ का use भी कर रही थी अपने दुसरे हाथ से मेरे लंड को पकड़कर हलके से दबा भी रही थी, मेरे लंड ने विशाल रूप लेना शुरू कर दिया. मैंने पूजा को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया, मेरा लंड अभी भी उसके मुंह में था, और मैं उसके सख्त और गद्देदार चूचो पर हलके भार से बैठ गया, पीछे से ऋतू ने बिना कोई वक़्त गवाएं झुक कर अपना चेहरा उसकी काली चूत पर टिका दिया और चूसने लगी.मैं अपने लंड से पूजा का मुंह चोद रहा था और ऋतू अपनी जीभ से उसकी चूत
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मैं ओर मेरी बहन -4
ऋतू :” मैं कल पूजा को अपने साथ लेकर ४ बजे घर आउंगी, तुम ३:३० पर ही आ जाते हो, तुम ठीक ४:०० बजे मुठ मारनी चालू कर देना, मैं उसको बोलूंगी की मेरा भाई रोज ४:०० बजे अपने रूम में मुठ मारता है, और मैं इस छेद से रोज उसको देखती हूँ, मुझे विश्वास है की वो भी तुम्हे देखने की जिद करेगी तब मैं उससे पैसो के बारे में बात करके तुम्हे मुठ मारते हुए दिखा दूँगी….क्यों कैसी रही??”
मैं :” वाह मैं तो तुम्हारी अक्ल का कायल हो गया…तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे हो”
ऋतू : “आखिर बहन किसकी हूँ हा हा …”
मैं : “और तुम उससे कितना चार्ज करोगी?”
ऋतू : “वोही…एक हजार रूपए, ठीक है ना ..”
मैं : “ठीक है…”
ऋतू : “और फिर रात को सन्नी और विकास भी आ सकते हैं और वो दोनों, हम दोनों को देखने के ३००० हजार रूपए अलग से तुम्हे देंगे…तो हम एक दिन में चार हजार रूपए कमा सकते हैं”
मैं तो अपने दिमाग में calculate करना शरू किया की ४००० एक दिन के, हफ्ते में ३ बार, अगर लड़के या लडकियां बढती हैं तो ज्यादा भी हो सकते है, और इस तरह से १ महीने में कितना हुआ….शायद calculator की मदद लेनी होगी..”
ऋतू : “अरे क्या सोचने लगे”
मैं :”कुछ नहीं…कुछ नहीं”
ऋतू :”वैसे एक बात बताऊँ, मुझे काफी exitement हो रही थी की तुम मुझे छेद से वो सब करते हुए देख रहे हो, काफी मजा आ रहा था “
मैं : “मुझे भी काफी मजा आ रहा था, मेरा लंड तो अभी भी कल की बातें सोचकर खड़ा हुआ है”
ऋतू : “अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ”
मैं : “अभी….मम्मी पापा आने वाले हैं, तुम मरवाओगी “
ऋतू : “अरे इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा…please …अपना लंड निकालो न..जल्दी”
मैंने जल्दी से अपनी पैंट नीचे उतारी और ऋतू झट से मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गयी, मेरा underwear एक झटके में नीचे करके मेरे फड़कते हुए लंड को अपने नरम हाथों में लेकर ऊपर नीचे किया और फिर उसे चूसने लग गई, उसकी बेकरारी और मेरी उत्तेजना लायी और सिर्फ एक मिनट में ही मैंने एक के बाद एक कई पिचकारी उसके मुंह में उतार डाली.
वो उठी और अपना मुंह साफ़ करी हुई बोली “मुझे तो तुम्हारा वीर्य ने अपना दीवाना ही बना दिया है..और फिर मेरे लंड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर अपनी गरम साँसे छोडती हुई बोली “आगे से तुम इसे कभी व्यर्थ नहीं करोगी…समझे न.”
मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.
मैं : “अगर तुम चाहो तो बाद मैं मैं भी तुम्हारी चूत चूस सकता हूँ ” मैंने धीरे से कहा.
ऋतू : “तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली…मैं रात होने का इन्तजार करुँगी.”
मैं : “मैं भी रात होने का इन्तजार करूँगा …बाय”
ऋतू : “बाई”
रात को खाना खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए, मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था की पिछले कुछ दिनों में, मैं और ऋतू एक दुसरे से कितना खुल गए हैं, लंड-चूत की बातें करते हैं,मुठ मारना एक दुसरे को नंगा देखना और छुना कितना आसान हो गया है. मैं अपनी इस लाइफ से बड़ा खुश था.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मसलना शुरू कर दिया, मुझे ऋतू का इन्तजार था, मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा, करीब पंद्रह मिनट में ही वो धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गयी और मुझे अपना लंड हिलाते हुए देखकर चहक कर बोली.
“वाह, तुम तो पहले से ही तैयार हो, लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ”
मैं : “पर मैंने कहा था की मैं तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ..!”
ऋतू :”कोई बात नहीं, तुम मेरी चूत चुसो और मैं तुम्हारा लंड, हम 69 की position ले लेते हैं.”
मुझे ये आईडिया पसंद आया.
ऋतू ने जल्दी से अपना gown खोला, हमेशा की तरह आज भी वो अन्दर से पूरी तरह से नंगी थी, उसके भरे हुए मुम्मे और तने हुए निप्पल्स देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे, और मैंने नोट किया की आज उसकी चूत एकदम साफ़ थी, चिकनी.
शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे… मेरे तो मुंह में पानी आ गया.
वो झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगे उठा कर घुमाते हुए, जैसे कोई घोड़े पर चढ़ रहा हो, बेड पर फैलाई और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गयी, उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी, उसकी चूत जल रही थी, एकदम गरम, लाल, गीली, रस छोडती हुई…मैं तो अपने काम में लग गया, उसकी चूत के लिप्स को अपनी उँगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखि, उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई, और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल…मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियां साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता…मैं लगा रहा…लगा रहा..साथ ही साथ मैं अपनी एक ऊँगली से उसकी clit भी रगड़ रहा था.
मेरे लंड का भी बुरा हाल था वो उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो..अन्दर तक ले जाती जीभ से चारों तरफ circle बनाती और फिर बाहर निकालते हुए हलके से दांतों का भी इस्तेमाल करती..वो लंड चूसने में परफेक्ट हो चुकी थी.
मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए, और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चुसना शुरू कर दिया, किसी vaccum cleaner की तरह suck करने लगा, वो तो बिफर ही गयी मेरे इस हमले से और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी…मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और पूजा ने जैसे ही मेरी बाल्स को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया, मैं झड गया और वो मेरा पूरा माल हड़प कर गयी..
फिर हम दोनों उठे और एक दुसरे की तरफ देखा, दो के चेहरे गीले थे हम ये देखकर हंसने लगे.
ऋतू :”तुमने तो मुझे अपने juice की लत्त लगा दी है..कितना मजा आता है तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में.”
मैं : “मैं भी तुम्हारे मीठे रस का आदि हो चूका हूँ, जी करता है सारा दिन तुम्हारी चूत चूसता रहूँ.”
मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था, वो मेरे साथ लेट गयी, उसके मोटे-२ चुचे मेरे सीने से लगकर दब गए, उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी, मैंने अपनी आँखे बंद करली और मजे लेने लगा.
उसकी गरम साँसे मेरे कानो पर पड़ रही थी.
उसकी एक टांग मेरे ऊपर थी और वो उसको रगड़ रही थी जिससे ऋतू की गीली चूत मेरी जांघ से रगड़ खा रही थी.
ऋतू : “wow , तुम्हारा तो अभी भी खड़ा हुआ है…मेरी चूत के अन्दर भी कुछ कुछ हो रहा है…
ऋतू : “अगर ऐसी बात है तो मैं अभी जाकर पूछती हूँ ” और वो दरवाजे की तरफ चल पड़ी ” अगर तुम भी आना चाहो तो आ सकती हो या फिर छेद में से देख सकती हो”
पूजा : “ना बाबा ना..मुझे तो बड़ी शर्म आएगी इस सबमे…तुम ही जाओ”
ऋतू ने आकर मेरे रूम का दरवाजा खडकाया और अन्दर आ गयी, मैंने बड़ी हैरानी से उसे देखा…वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे मुंह पर ऊँगली रख कर मुझे चुप रहने के लिए कहा और फुसफुसाकर बात करने लगी, दुसरे रूम से पूजा बड़ी बेसब्री से ये सब देख रही थी, उसने देखा की ऋतू ने मुझसे कुछ कहा और १-२ मिनट बात करने के बाद ऋतू का भाई झटके से अलग हुआ और अपने हाथ हवा में उठाकर मना करने के स्टाइल में कुछ बोलने लगा…पूजा सांस रोके ये सब देख रही थी, फिर ऋतू दुबारा अपने भाई के पास गयी और उसे कुछ और बोला, फिर भाई ने भी आगे से कुछ कहा और ऋतू सोचने के अंदाज में सर खुजाने लगी, और फिर कुछ और बातें करने के बाद दोनों एक दुसरे के गले लग गए और ऋतू बाहर निकल गयी.
अन्दर आते ही पूजा ने ऋतू से बड़ी अधीरता से पूछा “तुमने उससे क्या कहा..कैसे पूछा ??”
ऋतू : “वोही जो हमने तय किया था..मैंने पूछा की क्या वो हमारे सामने masturbate कर सकता है क्योंकि हमने कभी भी असली में ऐसा नहीं देखा..”
पूजा : “और उसने क्या कहा?”
ऋतू : “वो तो यह सुनकर काफी भड़क गया था”
पूजा : “देखा…मैंने कहा था न”
ऋतू : “पर जब मैंने उससे कहा की हम इसके लिए उसे कुछ पैसे देंगे या फिर कुछ और भी जो वो चाहे तो बात आगे बड़ी”
पूजा : “तो उसने क्या कहा ” उसने excitement में आगे पूछा
ऋतू : “बोटम लाइन इस , वो तैयार है और वो इसके लिए २००० रूपए मांग रहा है.”
पूजा ने आश्चर्य के भाव दिए और बोली “क्या सच में…वो सब हमारे सामने करने को तैयार है और उसे सिर्फ २००० रूपए चाहियें”
ऋतू : “हाँ…और साथ ही साथ वो चाहता है की हमें भी उसके सामने नंगा होना पड़ेगा” उसने धीरे से कहा.
पूजा : “वाह बहुत बढ़िया…वो हमें नंगा देखना चाहता है तभी वो masturbate करेगा ” उसने कट्टाक्ष भरे स्वर में कहा.
ऋतू : “पर जरा सोचो…उसका लम्बा और खुबसूरत लंड तुम्हारी नाक से सिर्फ कुछ ही दुरी पर होगा” ऋतू ने उसे उकसाया
पूजा कुछ सोचते हुए “चलो वो तो ठीक है पर क्या तुम अपने भाई के सामने नंगी हो सकती हो ?”
ऋतू : “उसे अपने सामने मुठ मारता हुए देखने के लिए तो मैं ये सब कर ही सकती हूँ, ये कोई बड़ी बात नहीं है, और जब हम दोनों करेंगे तो मुझे इसमें ज्यादा शर्म भी नहीं आएगी”
पूजा : “हम दोनों से तुम्हारा क्या मतलब है…मैं तो अभी तक इसके लिए तैयार ही नहीं हुई”
ऋतू ने अपनी आवाज में थोड़ी कठोरता लाते हुए कहा “तुम मुझे ये बताओ तुम तैयार हो या नहीं…ये तुम्हारा लास्ट चांस है”
पूजा : ” ठीक है, जब तुम्हे अपने भाई के सामने नंगा होने में कोई परेशानी नहीं है तो मुझे क्या…वो ये सब कर करेगा”
ऋतू : “शायद आज रात को सबके सोने के बाद”
पूजा : “मुझे तो बड़ी घबराहट हो रही है…क्या सच में तुम ये सब करना चाहती हो”
ऋतू : “अरे हाँ …ये एक नया adventure होगा…मजा आएगा…और फिर हम बाद में……समझ गयी न”
पूजा : “ठीक है…पर सच में तुम बड़ी पागल हो”
ऋतू : “पागलपन करने में भी कभी -२ बड़ा मजा आता है…चलो अब अपना होमेवोर्क कर लेते है…फिर रात को तो कुछ और नहीं कर पायेंगे”
जब रात को सभी डिन्नर कर रहे थे तो ऋतू ने सारी बातें मेरे कान में बता दी, बीच – २ में जब मैं पूजा की तरफ देखता था तो वो शरमा कर अपना चेहरा नीचे कर लेती थी.जब खाना ख़त्म हुआ तो ऋतू और पूजा अपने रूम में चले गए बाकी का बचा हुआ homework करने के लिए.
और आखिरकार सारे घर में शांति छा गयी, ऋतू और पूजा अपने रूम में nightgown पहेनकर मेरा वेट कर रहे थे. पूजा ने सोचा की शायद आशु नहीं आएगा और कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला ही था के उसे दरवाजे पर हलकी सी knok सुनाई दी,आवाज सुनते ही ऋतू उछल कर दरवाजे के पास गयी और मुझे अन्दर खींच लिया. मुझे खींचकर वो बेड के पास तक ले गयी और वहां बैठी पूजा के पास बैठ गयी, मैं उन दोनों के सामने नर्वस सा खड़ा हुआ था.
“अरे किस बात का वेट कर रहे हो…तुम ये करना भी चाहते हो या नहीं…” ऋतू ने पूछा.
मैं : “मुझे लगा तुम मुझे पहले पैसे दोगी..”
ऋतू : “बिलकुल देंगें, (पूजा की तरफ देखकर), हमने बोला है तो जरुर देंगे”
मैं : “तुमने बोला था की तुम मुझे २००० रूपए दोगे और नंगे भी होगे “
ऋतू : “क्या तब तुम masturbate करना शुरू करोगे ??”
मैं : (सकुचाते हुए…) ” ह्म्म्म हाँ sss “
ऋतू : “ok then …और पूजा की तरफ देखकर उसे कुछ इशारा करती है, पूजा झट से अपने purse में से २००० रूपए निकाल कर मुझे दे देती है”
पर मुझे कुछ न करते देखकर वो समझ जाती है की आगे क्या करना है.
ऋतू : “come on पूजा..चलो एक साथ करते हैं”
फिर धीरे-२ पूजा उठती है और दूसरी तरफ मुंह करके अपना gown खोल कर नीचे गिरा देती है..ऋतू भी उसके साथ – २ वही करती है, दोनों की गांड मेरी तरफ थी, मैं तो वो दृश्य देखकर पागल ही हो गया, एक गोरी और दूसरी सांवली,एकदम ताजा माल, भरी हुई जांघें और सुदोल पिंडलियाँ, फिर दोनों घूम कर वापिस मेरी तरफ मुंह करके बेड के किनारे पर बैठ गयी, पूजा के चुचे देखकर मेरे मुंह से आह निकल गयी और मैं अपने लंड को अपने पायजामे के ऊपर से ही मसलने लगा..ये देखकर ऋतू ने मुझे घूरकर गुस्से के लहजे में देखा और अगले ही पल हंसकर मुझे आँख मार दी, पूजा ये सब नहीं देख पायी, वो तो अपनी नजरें भी नहीं उठा रही थी.
मैंने देखा की उसके चुचे ऋतू से काफी बड़े हैं, थोड़े लटके हुए , शायद ज्यादा भार की वजह से, और उसके काले-२ निप्पलस इतने बड़े थे की शायद मेरे पैर की ऊँगली के बराबर…पेट बिलकुल गोल मटोल और सुदोल, मैं खड़ा हुआ उसकी चूत भी देख पा रहा था, वो बिलकुल काली थी, बालों से ढकी हुई, और बीच में जो चीरा था, उसमें से गुलाबी पंखुडियां अपनी बाहें फैला कर जैसे मुझे ही बुला रही थी. मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया. ऋतू की तरफ देखा, उसके चूचो का तो मैं वैसे ही दीवाना था, मुझे अपनी तरफ देखते पाकर उसकी ऑंखें बंद सी होने लगी और अपनी एक ऊँगली अपने मुंह में डालकर वो बोली.
“चलो अब तुम्हारी बारी है” ऋतू ने मुझसे कहा.
मैंने एक गहरी सांस लेकर अपना पायजामा और jocky नीचे गिरा दिया, और अपनी टी-शर्ट भी उतार दी, फिर मैंने अपना तना हुआ लंड हाथ में लिया और उसे आगे पीछे करने लगा.
“इतना दूर नहीं, यहाँ हमारे पास आकर खड़े हो जाओ और फिर हिलाओ” ऋतू ने आर्डर सा दिया.
मैं खिसककर आगे आ गया और अब मेरे पैर बेड से टकरा रहे थे, दोनों के नंगे जिस्म आपस में रगड़ खा रहे थे और उन दोनों का चहरा मेरे लंड से सिर्फ 4 -5 इंच की दुरी पर ही था, मैं उसे हिलाने लगा, पूजा ने ऋतू की तरफ देखा, वो मुस्कुरा दी, जवाब में पूजा भी मुस्कुरा दी और उसकी थोड़ी tention कम हुई, और वो अब अपने सामने के नज़ारे के मजे लेने लगी.
मेरा पूरा ध्यान अब पूजा की तरफ था, वो अपनी आँखें फाड़े मेरे लंड को देख रही थी, उसका मुंह खुला हुआ था, चुचे तन कर खड़े हो गए थे, लगता था वो अपनी सुध बुध खो चुकी है, मैंने ऋतू की तरफ देखा तो वो बड़े ही कामुक स्टाइल से मेरी ही तरफ देख रही थी, उसका एक हाथ अपनी चूत की मालिश कर रहा था, और वो अपने होंठो पर अपनी लाल जीभ फिर रही थी, जैसे वो मेरा लंड चुसना चाहती हो…पर क्या वो पूजा के सामने मेरा लंड चूस लेगी..शायद हाँ.
ये सोच-सोचकर मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और मैं छुटने के बिलकुल करीब पहुँच गया.
ऋतू को शायद इस बात का अंदाजा हो गया था, वो थोड़ी और आगे खिसक आई…साली मेरे रस की भूखी..और मेरे लंड ने अपना रस उबालकर बाहर उडेलना शुरू कर दिया..मेरी पहली धार सीधे ऋतू के चेहरे से टकराई वो थोडा पीछे हटी तो दूसरी धार सीधे पूजा के खुले हुए मुंह के अन्दर और तीसरी और चोथी उसके गालों और माथे पर जा लगी, फिर मैंने थोडा लेफ्ट turn किया और बाकी की बची हुई पिचकारी अपनी बहन के चेहरे पर खाली कर दी.
पूजा तो अवाक रह गयी जब मैंने अपना वीर्य उसके मुंह में डाला पर जब उसने अपना मुंह बंद करके स्वाद चखा तो उसे साल्टी सा लगा और वो उसे निगल गयी, उसने सोचा,इसका स्वाद ऋतू के रस से थोडा अलग है पर tasty है, फिर उसने अपने चेहरे से बहते हुए रस को अपनी उँगलियों से समेटा और निगल गयी, उसने देखा की ऋतू बड़े मजे से अपना मुंह खोलकर मेरी धारें अपने चेहरे और मुंह पर मरवा रही है और बड़े मजे से पी भी रही है.
मेरा लंड धीरे से मुरझाने लगा और ऋतू ने पूजा की तरफ देखा और उसे गले से लगा लिया, और बोली “देखा..कितना मजा आया…कितना exciting था “और उसके चेहरे पर बचा हुआ रस चाटने लगी.
पूजा : “हाँ बड़ा ही exciting था, मुझे भी देखने में काफी अच्छा लगा”
ऋतू : “क्या तुम्हे इसके रस का स्वाद पसंद आया”
पूजा : (शर्माते हुए) “हाँ….ठीक था.”
ऋतू : “चलो फिर मेरे चेहरे से सारा रस चाट कर इसे साफ़ करदो…जल्दी”
‘ठीक है” और पूजा ने सकुचाते हुए अपनी लम्बी जीभ निकालकर ऋतू का चेहरा चाटना शुरू कर दिया, थोड़ी ही देर में वो बिलकुल साफ़ हो गया और पूजा चटखारे लेते हुए पीछे हो गयी.
“और इसका क्या होगा”, मैंने अपने मुरझाये हुए लंड को निचोड़ कर आगे किया और उसके सिरे पर बड़ी सी वीर्य की बूंद चमकने लगी
ऋतू : “पूजा तुम चाट लो इसे..”
पूजा : “मैं…..नहीं मैं कैसे..” वो घबरा रही थी.
मैं : “जल्दी करो..नहीं तो मैं जा रहा हूँ”
ऋतू : “अरे चलो भी पूजा, अब क्यों शरमा रही हो…चूस लो”
पूजा : “नहीं मैं नहीं कर सकती”
ऋतू : “बिलकुल कर सकती हो..” और पूजा का चेहरा पकड़ कर आगे किया और दुसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ कर उसके मुंह में दाल दिया.
मैंने महसूस किया की उसके होंठ मेरा लंड मुंह में लेते ही बंद हो गए और उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे को कुरेदने लगी, एक दो चूपे लेने के बाद उसने मेरे लंड को बाहर निकाल दिया.
“कैसा लगा ” ऋतू ने पूछा
“मजेदार…काफी नरम और गरम है ये तो..मुझे नहीं लगता ये जल्दी पहले जैसा कड़ा हो सकेगा.” पूजा बोली.
“थोडा और चुसो तब बोलना..” मैंने कहा.
“हाँ हाँ चलो थोडा और चुसो पूजा, देखते हैं क्या होता है ” ऋतू ने उसे उकसाया .
उसने अपना मुंह जल्दी से खोला और मैंने आगे बढकर उसका मुंह अपने लंड से भर दिया, वो उसे अब पहले से ज्यादा तेजी से चूसने लगी, अपनी जीभ का use भी कर रही थी अपने दुसरे हाथ से मेरे लंड को पकड़कर हलके से दबा भी रही थी, मेरे लंड ने विशाल रूप लेना शुरू कर दिया. मैंने पूजा को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया, मेरा लंड अभी भी उसके मुंह में था, और मैं उसके सख्त और गद्देदार चूचो पर हलके भार से बैठ गया, पीछे से ऋतू ने बिना कोई वक़्त गवाएं झुक कर अपना चेहरा उसकी काली चूत पर टिका दिया और चूसने लगी.मैं अपने लंड से पूजा का मुंह चोद रहा था और ऋतू अपनी जीभ से उसकी चूत
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