Friday, February 27, 2015

FUN-MAZA-MASTI सौतेला बाप--58

FUN-MAZA-MASTI

 सौतेला बाप--58

अब आगे
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 समीर भी अपनी आँखे बंद किए अपने लंड और बाल्स चुसवाने का मज़ा लेता रहा...पर एक बार जब चूत मारने की इच्छा हो जाए तो ऐसे लंड चुसवाने से कुछ नही मिलता....और तभी उसके कानों में नीचे से उसकी बीबी रश्मि की मदमस्त चीखों की आवाज़ आने लगी...और वो समझ गया की लोकेश उसे किस तरीके से चोद रहा होगा और वो भी काफ़ी मज़े ले रही होगी...

और अगले ही पल उसके मन में एक विचार आ गया...क्यों ना वो नीचे जाकर अपने दोस्त के साथ मिलकर रश्मि की बजाए...जैसा की दोनो दोस्त अक्सर किया करते थे...एक आगे से और दूसरा पीछे से....ऐसा करने में दोनों को काफ़ी मज़ा भी आता था..और उनसे मज़े लेने वाली भी खुश हो जाया करती थी..

और आज वो मजा वो रश्मि चाहता था, जब इतना कुछ हो रहा है तो ये भी सही

और वैसे भी समीर को इस वक़्त नीचे वाला छेद ही चाहिए था , उपर वाला नही...जो उसे इस वक़्त रश्मि ही दे सकती थी...उसकी बेटी काव्या नही...

और उसने काव्या को उपर उठाते हुए कहा : "सुनो काव्या....तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो...मैं नीचे जाकर तुम्हारी माँ के साथ ही कर लूँगा...''

अपने पापा की केयरिंग देखकर काव्या गदगद हो उठी और बोली : "ओहो...थॅंकयु पापा....मैं तो सोच रही थी की आपको कैसे मना करू...बट आप सच में काफ़ी केयरिंग हो...थॅंक्स अ लॉट...मैं टेबलेट लेकर अपने रूम में सो जाउंगी ..आप सब लोग नीचे एंजाय करो...''

और वो ऐसे ही नंगी भागती हुई अपने रूम में चली गयी..

और समीर अपने लंड को लहराता हुआ नीचे की तरफ़..






सीडियों से नीचे उतरते हुए समीर उन दोनो के जंगली प्यार को देखने लगा...रश्मि तो सोफे पर ओंधा लिटाकर वो उसकी चूत की कुटाई अपने मूसल जैसे लंड से कर रहा था..अपनी बीबी को अपने ही दोस्त से चुदते हुए देखकर समीर का लंड हुंकारने लगा..ऐसी दरियादिली हर पति में नही होती.

समीर ने देखा की रश्मि की चूत में आ-जा रहा लोकेश का लंड उसकी चूत के रस में डूबकर कितनी बुरी तरह से चमक रहा है...उसकी चूत से लगातार बह रहा पानी उसकी जांघों से होता हुआ नीचे गिर रहा था और चूत में ज़्यादा कीचड़ हो जाने की वजह से फच-2 की आवाज़ों से पूरा ड्रॉयिंग रूम गूँज रहा था..

और उन फच्च-2 की आवाज़ों को संगीत से सज़ा रही थी सुरो की मल्लिका रश्मि...जो अपनी उहह-आह के संगीत को लोकेश की तालों से मिलाकर एक अलग ही नगमा पेश कर रही थी..

''आआअहह उम्म्म्मम आआआआहह सस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स... ओह माय गॉड ...... उम्म्म्ममममम अहह ऐसे ही .......आआआआहह मर गयी रे...''

और तभी लोकेश की नज़रें समीर की तरफ चली गयी...और कुछ देर तक दोनो ने एक दूसरे को देखा और दोनों के चेहरे पर ही वही कुटिल मुस्कान आ गयी जो अक्सर किसी रंडी की एक साथ चुदाई करते हुए आया करती थी...और समीर ने उसे चुप रहने का इशारा करते हुए अपनी बीबी की चूत मारते रहने को कहा..

और खुद वो अपने लंड को मसलता हुआ उन दोनो के करीब जाकर खड़ा हो गया.

और समीर के कहने पर एकदम से लोकेश ने आगे की तरफ झुककर रश्मि के बाल उपर की तरफ खींचे और समीर ने भी बिना कोई देरी किए उसके खुले हुए गीले मुँह में अपना लंड पेल दिया..

रश्मि तो समझ रही थी की लोकेश उसके साथ रफ़ सेक्स करने की चाह में उसके बाल खींच रहा है...पर जैसे ही उपर मुँह करते हुए उसके होंठों के बीच समीर का लंड फँसा, उसने चौंकते हुए अपनी आँखे खोल दी...

अब और कोई मौका होता तो वो डर के मारे नंगी ही घर से बाहर भाग जाती, क्योंकि वो अपने पति के दोस्त से चुदवा रही थी..पर यहाँ सब कुछ उसके पति का ही रचाया हुआ था..और ऐसे में वो खुद आकर उनके साथ जाय्न करना चाहे तो वो भला कैसे मना कर सकती थी..पर अंदर ही अंदर ये सब करते हुए वो खुद को किसी रंडी से कम नही समझ रही थी..जो इस वक़्त 2-2 लंड से मज़े ले रही थी और उन्हे मज़े दे भी रही थी...

रश्मि ने भी खुद को उनके हवाले छोड़ दिया, वो समझ गयी थी की उसका पति यही चाहता है की वो और उसका दोस्त मिलकर उसकी चुदाई करे, और आप तो जानते ही है की रश्मि कितनी पतिव्रता स्त्री है, वो अपने पति को किसी भी बात के लिए मना कर ही नही सकती...

उसने समीर के लंड को अपने मुँह में रखा और उसकी आँखो में देखते-2 उसकी सेवा करनी शुरू कर दी...वो आज जिस तरीके से अपने पति का लंड चूस रही थी उससे साफ़ पता चल रहा था की वो उसे इसके माध्यम से थेंक यू बोल रही है...



दोनो दोस्तों के चेहरे एक दूसरे की तरफ थे, लोकेश रश्मि को घोड़ी बनाकर उसकी चूत मार रहा था तो समीर उसके मुँह में अपना लंड डालकर उसका मुँह चोद रहा था..


और आदत के अनुसार दोनो दोस्तों ने अपना हाथ एक दूसरे के हाथ पर मारते हुए एक दूसरे को हाइ फाइव किया..जिसका मतलब था की वो जो भी कर रहे हैं, उसमे मज़ा आ रहा है..यही उनका हमेशा का स्टाइल था..जब भी वो मिलकर किसी को चोदते थे.

पर आज कोई बाहर वाली रंडी नही बल्कि घर वाली रश्मि चुद रही थी, किसी रंडी की तरह...और उसे ऐसे चुदाई करवाने में मज़ा भी आ रहा था.

रश्मि अब घोड़ी बने हुए थक सी चुकी थी, उसने एंगल चेंज करते हुए अपने आप को पीठ के बल लिटा लिया..और समीर के लंड को चूसना चालू रखा...

लोकेश का लंड फिसल कर बाहर निकल आया था, जिसे वो उसकी चूत की दरारों पर ज़ोर-2 से रगड़ने लगा...ये रगड़ाहट उसे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रही थी, क्योंकि उसे अंदर लेने की लालसा उसे और भी ज़्यादा तडपा रही थी.

लोकेश ने उसकी चूत के उपर की तरफ उंगली और अंगूठे का दबाव बनाकर उसकी चूत को भींच दिया और उसके होंठों के बीच अपने लंड को उपर नीचे करने लगा..



रश्मि चीख पड़ी अपने देवर पर..

''आआआआआआआअहह लोकेश ................ मत तरसाओ ना............... डालो अंदर.............. पहले की तरह ..............प्लीज़..........''

पर वो कमीना नही माना, वो उसी तरह से अपने लंड के ज़रिए उसकी रसीली चूत से खेलता रहा.

रश्मि ने अपने पति से शिकायत की ...: "देखिए ना.... समझाइये अपने दोस्त को...... कैसे तडपा रहा है मुझे .......प्लीज़ उसको बोलिए की अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाले...ऐसे बाहर से ही रगदाई ना करे....प्लीज़ बोलिए ना....''

पर समीर भी कुछ नही बोला, वो अपनी बीबी की बात सुनकर मुस्कुराने लगा..

तभी नीचे की तरफ मज़े लेता हुआ लोकेश बोला : "अरे भाभी ....आप चिंता मत करिए....बस हमारा खेल देखते रहिए..''

इतना कहते-2 लोकेश ने रश्मि को खड़ा किया और खुद सोफे पर लेट गया और रश्मि को अपने उपर खींचते हुए अपना लंड उसकी चूत पर टीका दिया, वो तो पहले से ही कुलबुला रही थी उसे अंदर लेने के लिए इसलिए जैसे ही उसे अपने दरवाजे पर उसके लंड का एहसास हुआ, वो झटका मारकर एक ही बार में उसे अंदर निगल गयी...

''आआआआआआआअहह ...... उम्म्म्ममममममममममममम .......... बस अब कोई शरारत मत करना.... और चोदो मुझे....जैसे पहले चोद रहे थे....''

लोकेश ने भी अपनी भाभी को ज़्यादा नाराज़ करना उचित नही समझा और नीचे से उसकी चूत के अंदर अपना रॉकेट दागने लगा...लगातार...बार-बार...


और तभी उसे पीछे की तरफ से अपनी गांड के छेद पर एक दस्तक सुनाई दी...जो समीर के लंड ने दी थी...और वो कुछ समझ पाती उससे पहले ही समीर ने अपना पूरा दम लगाकर अपने पहलवान को उसकी गांड के अखाड़े में उतार दिया...




''आआआआआआआआआआहह................... ओहsssssssssssssssss माय गॉड ...................... नोओओओओओओओऊऊऊ ...... उम्म्म्मममममममममममम ......... नूऊऊऊऊऊऊऊऊओ समीरsssssssssssssssssss .....................''

पर समीर उसकी कहा सुनने वाला था, वो अपने लंड को उसकी गांड के अंदर पहुचाकर लोकेश के झटकों के साथ लय मिलाने लगा..

आज रश्मि के जीवन का ये पहला मौका था जब वो पूरी तरह से भर गयी थी...आगे से भी और पीछे से भी...

एक अजीब से रोमांच का एहसास हो रहा था उसे...वैसे भी आज से पहले जितनी बार भी समीर ने उसकी गांड मारी थी वो उसे उतना ही एंजाय करती थी जितना चूत मरवाते हुए...पर आज एक साथ दोनो के अंदर लेने के बाद उसे पता चला की जब दुगने मज़े का एहसास होता है तो कैसा फील होता है...

वो शायद अपने शब्दों मे इस मज़े को कभी बयान नही कर पाएगी पर जो भी हो रहा था उसके साथ इस वक़्त, वो उसे उत्तेजना के एक नये शिखर पर ले जा रहा था...

और अपनी आदत के अनुसार उसने चीखना चिल्लाना शुरू कर दिया फिर से...और इस बार दर्द या शिकायत से नही, बल्कि खुशी के मारे..

''आआआआआहह ओह समईईईर .... आई एम लविंग इट ............... येसस्स्स्स्स्स्स्सस्स...फक्क माय एस होल ...... ओ माय गॉड .............ऐसा मज़ा तो कभी नही मिला.............. अहह .....ओह लोकेश ............योउ आर फकिंग मी रियली गुड ...............फक्क मी ..........विद युअर कॉक ............अहहsssssssssssssssssssss .....चोदो मुझे ..............मारो मेरी गांड ..............अहह... ऊऊऊओह ''



दोनो ने लय ऐसे बना रखी थी की जब लोकेश का लंड अंदर जाता तो समीर का बाहर आता और जब समीर का अंदर जाता तो लोकेश का बाहर आता...

और अंदर - बाहर के इस एहसास को रश्मि अपने उत्तेजक शब्दों मे पिरोकार उन्हे सुना रही थी...जिसकी वजह से वो और तेज़ी से उसकी गांड और चूत बजा रहे थे...


अचानक समीर ने अपना लंड उसकी गांड से निकाल लिया और थोड़ा सा नीचे करते हुए उसे उसकी चूत के दरवाजे पर लगा दिया, जहाँ पहले से ही लोकेश का लंड फँसा हुआ था...रश्मि समझ गयी की वो क्या करने वाला है, वो एक ही म्यान में दो तलवारें डालने की कोशिश कर रहा था...

वो चीख पड़ी : "नूऊऊऊऊओ...समीईर.... ऐसा मत करना....मेरी फट जाएगी.......प्लीज़ समीर.....एक साथ मत डालो दोनो....''

पर समीर कहाँ मानने वाला था, उसने थोड़ा सा ज़ोर लगाया और लोकेश के लंड के साथ-2 अपने लंड को भी उसकी चूत में डाल दिया...और रश्मि बेचारी अपना मुँह फाड़े हुए दूसरे लंड को भी अपनी चूत में दाखिल होते हुए महसूस करने लगी...उसे तो लगा था की वो फट ही जाएगी पर उसकी चूत बड़े आशचर्यजनक रूप से रबड़ की तरह लचीली निकली और उसने धीरे- 2 करते हुए समीर को भी अंदर निगल लिया...

और अब दोनो एक साथ , एक ही छेद के अंदर अपना लंड पेल रहे थे..



इन दोनो की कलाकारी देखकर वो हैरान रह गयी..

बस अपना मुँह खोले वो उनसे चुदवाती रही..
 
 



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