Sunday, June 13, 2010

गहरी चाल पार्ट--10

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गहरी चाल पार्ट--10

करण अब उसकी गर्दन & ड्रेस के उपर के खुले हिस्से को चूम रहा था.बेचैन करण के हाथ कामिनी की कमर से फिसल कर उसकी गंद पे पहुँच गये.भारी,मांसल गांद हाथ मे आते ही उसने उसकी फांको को ज़ोर से दबा दिया,"..ऊऊहह..!"

कामिनी सिहर के शोख मुस्कान होंठो पे लिए उसकी बाहो से छितक के निकल गयी.करण ने आगे बढ़ 1 बार फिर उसे अपनी बाहो मे कस लिया.इस बार उसने उसे खुद से ऐसे सताया हुआ था जैसे की वो हवा को भी बीचे मे नही आने देना चाहता हो.उसके हाथ उसे बाँहो मे कसे हुए उसकी बगल मे फिसल रहे थे की तभी उसके दाये हाथ को कामिनी के बदन के दाई तरफ बगल मे छुपि ड्रेस की ज़िप मिल गयी.

"सर्र्र्र्र्र्ररर....",1 ही झटके मे उसने ज़िप खोल दिया.कामिनी ने शर्मा के उस से अलग होना चाहे पर करण इस बार उसे काफ़ी मज़बूती से पकड़े था.उसने उसकी गर्दन के नीचे चूमते हुए दोनो हाथो से पकड़ कर ड्रेस को इतनी ज़ोर से नीचे खींचा की वो उतर कर सीधा कामिनी के पाँवो मे जा फाँसी.कामिनी उसे धकेल उस से अलग हुई & अपने पैरो को ड्रेस से निकल कर दो कदम पीछे हट गयी.

करण का मुँह खुला का खुला रह गया.काले सॅटिन के चमकते स्ट्रेप्लेस्स ब्रा & मॅचिंग छ्होटी सी पॅंटी जोकि बस उसकी छूट को ढँके भर थी,मे कामिनी का मादक बदन और भी नशीला लग रहा था.ब्रा मे से उसकी च्चातियो का उपरी भाग दिख रहा था जो उसकी तेज़ सांसो के साथ उपर नीचे हो रही थी.नीचे सपाट,चिकने पेट के बीच गोल,गहरी नाभि नज़र आ रही थी & पतली कमर के नीचे काली पनटी जोकि जन्नत को च्चिपाए हुए थी.उसकी भारी जंघे & सुडोल,गोरी टाँगे जैसे कारण को अपने बीच आने का बुलावा दे रही थी.

कारण की आँखो मे अब उसके बदन की तारीफ & चाहत,दोनो सॉफ दिख रहे थे.उसकी नज़रो की गर्मी से शर्मा के कामिनी मुस्कुराते हुए घूम गयी & ये नज़ारा देख कर कारण बस बेकाबू हो गया.कामिनी ने अभी भी अपनी सॅंडल्ज़ पहनी हुई थी & उनकी वजह से उसकी भारी गंद और उठी नज़र आ रही थी & गोरी पीठ के बीच बस 1 काला ब्रा स्ट्रॅप दिख रहा था.

करण पीछे से उस से जा सटा & उसे बाहो मे भर उसके दाए गाल & फिर उसकी गर्दन & दाए कंधे को चूमने लगा.उसके हाथ कभी कामिनी की कमर के बगल मे सहलाते तो कभी उसके सपाट,गोल पेट को,"ओह्ह..कामिनी,मैने जितना सोचा था तुम उस से भी कही ज़्यादा खूबसूरत हो!",उसकी नाभि कुरेदते हुए वो अब उसके बाए गाल को चूम रहा था.कामिनी ने भी अपनी बाहे पीछे ले जाके उसके गले मे डाल दी थी & उसकी हर किस का जवाब उसके चेहरे को चूम कर दे रही थी.

"..मुझे यकीन नही होता की तुम मेरी बाहो मे हो,कामिनी.",उसने उसके कान को काट लिया.

"..ऊव्वव..!",अपनी तारीफ सुन कामिनी का दिल खुशी से भर उठा था,"..हां,अमीन तुम्हारी बाहो मे हू कारण..ऊहह...मुझे जैसे मर्ज़ी प्यार करो...जितना मर्ज़ी प्यार करो..!"

उसकी बातो को सुन करण और जोश मे आ गया.उसने उसे घुमाया & फिर उसकी मखमली पीठ & कमर को अपने हाथो से रगड़ते हुए उसे चूमने लगा.कामिनी के होंठो,गालो,माथे-पूरे चेहरे पे & उसकी लंबी गर्दन पे उसने किस्सस की बौच्हार कर दी.

करण ने बेसब्री से आगे झुकते उसके क्लीवेज को चूमा तो कामिनी पीछे झुकते हुए लड़खड़ाई & उसकी गांद पीछे रखे शेल्फ से टकराई.करण ने उसकी कमर से पकड़ उसे उठाया & शेल्फ पे बिठा दिया.फिर आगे बढ़ वैसे ही खड़े हुए उसने कामिनी को बाहों मे भर फिर से चूमना शुरू कर दिया.कामिनी भी अब बेचैनी से उसके सीने & पीठ पे हाथ फिरा रही थी.

उसने 1-1 करके करण की शर्ट के सारे बटन खोल उसे उतार दिया.करण की बालो से भरी छाती नंगी होते ही वो उसे बेताबी से सहलाने लगी.वो दोनो हाथो से उसके निपल्स पे हाथ फेरने लगी,फिर झुकी & सीने को चूमने लगी.करण उसके सर & पीठ पे हाथ फिराए जा रहा था.

करण ने उसका हाथ पकड़ा & अपनी बेल्ट पे रख दिया.कामिनी उसका इशारा समझ गयी,उसने शोखी से मुस्कुराते हुए उसकी बेल्ट खोल दी.करण ने आँखो से उसे पॅंट भी खोलने का इशारा किया तो कामिनी ने उसकी पॅंट खोलना शुरू किया.ज़िप खुलते ही पॅंट सरक कर करण की आएडियो पे गिर गयी.करण ने पैर निकला कर पॅंट को परे कर दिया.

अब वो केवल अंडरवेर मे कामिनी के सामने खड़ा था.कामिनी ने नज़र भर कर उसे देखा,अंडरवेर काफ़ी फूला हुआ था....अफ!...थोड़ी ही देर मे इसमे क़ैद लंड उसके अंदर होगा!...उसकी चूत अब तक पूरी गीली हो चुकी थी,ये ख़याल आते ही उसमे 1 मीठी सी कसक उठी.

करण ने फिर से उसे बाहो मे भर चूमना शुरू कर दिया.अब उसका लंड बैठी हुई कामिनी की पॅंटी से ढाकी चूत से पूरा सटा हुआ था & वो हल्के-2 अपनी कमर हिला रहा था.इन हल्के धक्को से मस्त हो कामिनी अपने प्रेमी से और चिपक गयी.दोनो के बीच बस अब उनके अनडरवेर्ज़ की दीवार थी.

दोनो मस्ती मे पागलो की तरह 1 दूसरे को चूम रहे थे& 1 दूसरे के पूरे बदन पे हाथ फिरा रहे थे.करण के हाथ उसकी पीठ पे ब्रा स्ट्रॅप से टकराए तो उसने उसे झट से खोल ब्रा को कामिनी के खूबसूरत जिस्म से अलग कर दिया.करण उसके हाथो को छ्चोड़ सीधा खड़ा हुआ & पहली बार कमरे मे जल रहे लॅंप की मद्धम रोशनी मे कामिनी की 38द साइज़ की बड़ी कसी हुई गुलाबी निपल्स से सजी छातिया को देखा.

सांसो के साथ उपर-नीचे होते उसके उरोज़ मस्ती मे शायद थोड़े और बड़े हो गये थे.करण झुका & उसकी बाई चुचि को अपने दाए हाथ मे भर कर हल्के से दबाया & फिर निपल & उसके आस-पास के हिस्से को अपने मुँह मे भर उनपे ज़ुबान फेरने लगा,"..उउउन्न्ञनह......!",

मस्ती मे आ भर कामिनी ने आँखे बंद कर अपना सर पीछे कर लिया & अपने दोनो हाथो से करण के सर को अपनी चूची पे और भींच दिया.उसकी टांगे खुद बा खुद उसकी कमर पे कस गयी.केयी लम्हो तक करण उसकी छाती का लुत्फ़ उठता रहा.कामिनी ने उसके बॉल पकड़ कर हल्के से उसके सर को उठाया,फिर अपने दाई चूची पकड़ी & करण का सर झुका कर उसे उसके मुँह मे दे दिया.

उसकी इस अदा ने करण की मस्ती को और बढ़ा दिया & वो इस बार और जोश के साथ उसकी छाती को चूसने लगा.उसका 1 हाथ उसकी बाई चुचि को मसलने लगा.कामिनी मज़े मे पागल हो आँखे बंद किए बड़ी मस्त आहे भरने लगी.कभी उसके हाथ उसके सर पे चले जाते & उसके बालो से खेलने लगते तो कभी वो पीछे की दीवार पे बेचैनी से फिसलने लगते & कभी उसके प्रेमी के बदन से.

उसकी चूचियो से जम कर खेलने के बाद करण नीचे झुका & उसकी पॅंटी निकालने लगा.धड़कते दिल से गंद उठा के कामिनी ने इसमे उसकी मदद की.उसकी प्यासी चूत कब से इस पल का इंतेज़ार कर रही थी,"..वाउ..!"

कामिनी ने कल ही चूत के बाल सॉफ किए थे & मद्धम रोशनी मे उसकी कसी,गुलाबी चूत अपने ही रस से भीगी हुई बड़ी प्यारी लग रही थी.विकास के बाद करण दूसरा मर्द था जिसके सामने कामिनी ऐसे नंगी हुई थी.उसकी आँखो मे अपने जिस्म के सबसे खूबसूरत अंग के लिए तारीफ देख उसे शर्म आ गयी.

करण बैठ कर उसके नर्म घुटनो को चूमने लगा.उसने उसकी जंघे उठा कर अपने कंधो पे रखी तो कामिनी मस्ती मे उसके सर को पकड़ कर बालो मे उंगलिया फिरने लगी.उसकी अन्द्रुनि जंघे चाटता हुआ करण उसकी चूत तक पहुँच गया.अपने हाथो से उसकी जाँघो को पकड़ कर सहलाते हुए जब उसने पहली बार अपनी जीभ उसने कामिनी की छूट की डरा पे फिराई तो कामिनी ने मज़े मे अपना बदन मोड़ कर सर पीछे की ओर झुका दिया.अपनी जाँघो से करण को भींचते हुए उसने अपने हाथो से उसके सर को अपनी चूत पे और भींच दिया,"ऊहह....हा..अन्न्न्न..!"

करण की जीभ लपलपाति हुई उसके दाने को छेड़ रही थी.महीनो की प्यासी कामिनी थोड़ी ही देर मे झाड़ गयी.वो लंबी साँसे भर अपने को संभाल रही थी पर करण वैसे ही बैठा हुआ उसकी चूत से बह रहे पानी को चाटता रहा.पूरा पानी चाट लेने के बाद वो खड़ा हुआ & कामिनी के चेहरे को अपने हाथो मे भर चूमने लगा.कामिनी ने भी उसे बाहो मे भर लिया & उसकी किस्सस का जवाब देने लगी.

करण अब पूरे जोश मे आ चुका था,उसने कामिनी का हाथ पकड़ अकर अपने अंडरवेर के वेयैस्टबंड पे रख दिया,फिर उसके चेहरे को हाथो मे भरा,"इसे उतार दो,कामिनी."

कामिनी उस के सामने नंगी पड़ी हुई थी,1 बार उसकी ज़ुबान से झाड़ चुकी थी-फिर भी इस हाल मे भी उसे शर्म आ गयी.मगर उसका दिल भी तो उसके लंड के दीदार के लिए तड़प रहा था.उसने अपना चेहरा उसके बालो भरे सीने मे च्छूपा लिया & धीरे से उसके अंडरवेर को नीचे सरका दिया.पॅंट की तरह करण ने इसे भी पाँव निकल कर अपने जिस्म से अलग कर दिया.

कामिनी ने सर झुका कर पहली बार करण के लंड का दीदार किया.काली,चमकती झांतो से घिरे 2 बड़े अंदो के उपर उसके जिस्म की तरह ही उसका 7 1/2 इंच लंबा लंड हल्के-2 ठुमके लगा रहा था.प्रेकुं की वजह से उसका गुलाबी सूपड़ा चमक रहा था.विकास के लंड के बाद ये दूसरा लंड था जिसे कामिनी ऐसे देख रहे थी.उसे ये देख के खुशी हुई की लंड उसके पूर्वपति के लंड से कुच्छ बड़ा ही था.बस कुच्छ ही देर मे उसकी चूत की प्यास बुझने वाली थी.

करण ने बाए हाथ से उसके प्यारे चेहरे को पकड़ कर चूमा & दाए हाथ से लंड को थाम कर उसकी चूत पे लगा दिया & फिर 1 ज़ोर का धक्का दिया,"..आनन्नह...!",1 ही झटके मे आधा लंड उसकी गीली चूत मे सरर से घुस गया.कामिनी ने फ़ौरन अपनी मरमरी बाहे उसकी गर्दन मे डाल दी.

हाइ हील्स से सजे पाँवो को उसने आएडियो पे क्रॉस करते हुए कारण की गंद के नीचे लगा उसे अपनी गिरफ़्त मे कस लिया.शेल्फ पे सहारे के लिए हाथो को रख करण उसके रसीले होंठो को चूमते हुए धक्के लगा लंड को जड़ तक उसकी चूत मे धसने लगा,"आँह...आँह...आअंह...
आआअननह..."

कामिनी को विकास के लंड की आदत थी & करण का लंड उस से 1 1/2 इंच बड़ा था सो जब लंड पूरा अंदर गया तो उसे थोडा दर्द हुआ पर उस से भी कही ज़्यादा उसे वो मज़ा आया जिसे वो भूल ही चुकी थी.वो बेचैनी से अपनी कमर उचकाने लगी तो करण ने अपने हाथ उसकी गंद की फांको के नीचे लगा उन्हे थाम लिया & ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.

कामिनी की आहे बहुत तेज़ हो गयी & वो मस्ती मे पागल हो करण से चिपक गयी & उसे चूमते हुए अपनी कमर हिलाने लगी.उसकी प्यासी चूत ने अरसे बाद लंड की रगड़ाहट महसूस की थी & वो बस पानी पे पानी छ्चोड़ रही थी,"ओह्ह्ह...!",करण करहा,मस्ती मे कामिनी ने अपनी सॅंडल्ज़ की हील्स की नोक उसकी गंद मे धंसा दी थी & दर्द से उसके धक्के और तेज़ हो गये & कामिनी दुबारा झाड़ गयी.

करण उसे वैसे ही गंद से उठाए हुए बिस्तर पे ले आया & वैसे ही उसे लिएट उसके उपर लेट गया.उसकी गंद की फांको को मसलते हुए वो उसके प्यारे चेहरे को चूम रहा था.थोड़ी देर मे कामिनी फिर से मस्त होने लगी तो वो उसके होंठो को चूमने लगी.करण काफ़ी देर से अपने उपर काबू रखे हुए थे-अब उसकी बारी थी.अपनी प्रेमिका की गंद मसलते हुए उसने फिर से धक्के लगाना धुरू किया.

शुरू मे धक्के काफ़ी हल्के थे,फिर उसने पूरा लंड बाहर निकाल कर गहरे धक्के लगाना शुरू किया तो कामिनी फिर से पागल हो गयी...वो अपने हाथो से उसकी पीठ & गंद को सहलाने लगी & अपनी टांगे उसेन फिर से उसकी कमर पे कस दी.कारण उसकी छातियो को चूस्ता हुआ बस उस चोदे जा रहा था.उसे तो बस अब इस कसी,गुलाबी चूत को अपने पानी से भर देना था.

कामिनी फिर से मस्ती की खुमारी मे आ गयी थी,उसकी आँखे बंद हो गयी थी & वो बस अपने प्रेमी की चुदाई का मज़ा लेते हुए ज़ोर-2 से आहे भर रही थी.कारण का लंड उसकी चूत की गहराईयो मे तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था.मज़ा बढ़ा तो उसने अपने नाख़ून उसकी पीठ मे गाड़ा दिए.उसका दिल किया की वो बस उसके लंड को अपनी चूत मे भींच दे...उसने अपनी टांगे उसकी कमर पे और कस दी & ऐसा करते ही उसकी हील्स करण की गंद की दोनो फांको मे धँस गई.

"..आहह...",करण करहा & उसकी चूचियो से मुँह हटा उसने अपना सर उपर उठा लिया & उसके धक्के और तेज़ हो गये.

"हन...हान्ं....हान्न्न...हा...आअन्न्‍नणणन्....!",कामिनी ने उसकी पीठ मे अपने नाख़ून धंसा दिए & अपना जिस्म बिस्तर से उठती हुई झाड़ गयी.उसकी हर्कतो,उसके चेहरे के भाव & उसकी चूत की सिकुड़न ने करण का भी सब्र तोड़ दिया & वो भी आहे भरता हुआ,तेज़ धक्के लगाता उसकी चूत को अपने पानी से भरने लगा.

झड़ते ही वो हांफता हुआ कामिनी के सीने पे गिर गया...कितने दीनो बाद कामिनी की चूत की प्यास बुझी थी...उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान खिल गयी & दिल मे करण के लिए बहुत प्यार उमड़ पड़ा.उसने उसके सर को बाहो मे भर लिया & उसके सर को हल्के-2 चूमने लगी.
क्रमशः...........................


GEHRI CHAAL paart--10

Karan ab uski gardan & dress ke upar ke khule hisse ko chum raha tha.bechain karan ke hath Kamini ki kamar se phisal kar uski gand pe pahunch gaye.bhari,maansal gaand hath me aate hi usne uski phaanko ko zor se daba diya,"..oooohhhhh..!"

kamini sihar ke shokh muskan hotho pe liye uski baaho se chhitak ke nikal gayi.karan ne aage badh 1 baar fir use apni baaho me kas liya.is bar usne use khud se aise sataya hua tha jaise ki vo hawa ko bhi beeche me nahi aane dena chahta ho.uske hath use baho me kase hue uski bagal me phisal rahe the ki tabhi uske daaye hath ko kamini ke badan ke dayi taraf bagal me chhupi dress ki zip mil gayi.

"sarrrrrrrrr....",1 hi jhatke me usne zip khol diya.kamini ne sharma ke us se alag hona chahe par karan is bar use kafi mazbuti se pakde tha.usne uski gardan ke neeche chumte hue dono hatho se pakad kar dress ko itni zor se neeche kheencha ki vo utar kar seedha kamini ke paanvo me ja phansi.kamini use dhakel us se alag hui & apne pairo ko dress se nikal kar do kadam peechhe hat gayi.

karan ka munh khula ka khula rah gaya.kale satin ke chamakte strapless bra & matching chhoti si panty joki bas uski chut ko dhanke bhar thi,me kamini ka maadak badan aur bhi nasheela lag raha tha.bra me se uski chhatiyo ka upari bhag dikh raha tha jo uski tez saanso ke sath upar neeche ho rahi thi.neeche sapat,chikne pet ke beech gol,gehri nabhi nazar aa rahi thi & patli kamar ke neeche kali panty joki jannat ko chhipaye hue thi.uski bhari janghe & sudol,gori tange jaise karan ko apne beech aane ka bulawa de rahi thi.

karan ki aankho me ab uske badan ki tareef & chahat,dono saaf dikh rahe the.uski nazro ki garmi se sharma ke kamini muskurate hue ghum gayi & ye nazara dekh kar karan bas bekabu ho gaya.kamini ne abhi bhi apni sandals pehni hui thi & unki vajah se uski bhari gand aur uthi nazar aa rahi thi & gori pith ke beech bas 1 kala bra strap dikh raha tha.

karan peechhe se us se ja sata & use baaho me bhar uske daaye gaal & fir uski gardan & daaye kandhe ko chumne laga.uske hath kabhi kamini ki kamar ke bagal me sehlate to kabhi uske sapat,gol pet ko,"ohh..kamini,maine jitna socha tha tum us se bhi kahi zyada khubsurat ho!",uski nabhi kuredte hue vo ab uske baaye gaal ko chum raha tha.kamini ne bhi apni baahe peechhe le jake uske gale me daal di thi & uski har kiss ka jawab uske chehre ko chum kar de rahi thi.

"..mujhe yakeen nahi hota ki tum meri baaho me ho,kamini.",usne uske kaan ko kaat liya.

"..oowww..!",apni tareef sun kamini ka dil khushi se bhar utha tha,"..haan,amin tumhari baaho me hu karan..oohhh...mujhe jaise marzi pyar karo...jitna marzi pyar karo..!"

uski baato ko sun karan aur josh me aa gaya.usne use ghumaya & fir uski makhmali pith & kamar ko apne haatho se ragadte hue use chumne laga.kamini ke hotho,gaalo,mathe-pure chehre pe & uski lambi gardan pe usne kisses ki bauchhar kar di.

karan ne besabri se aage jhukte uske cleavage ko chuma to kamini peechhe jhukte hue ladkhadayi & uski gaand peechhe rakhe shelf se takrayi.karan ne uski kamar se pakad use uthaya & shelf pe bitha diya.fir aage badh vaise hi khade hue usne kamini ko baahon me bhar fir se chumna shuru kar diya.kamini bhi ab bechaini se uske seene & pith pe hath fira rahi thi.

usne 1-1 karke karan ki shirt ke sare button khol use utar diya.karan ki baalo se bhari chhati nangi hote hi vo use betabi se sehlane lagi.vo dono hatho se uske nipples pe hath pherne lagi,fir jhuki & seene ko chumne lagi.karan uske sar & pith pe hath firaye ja raha tha.

karan ne uska hath pakda & apni belt pe rakh diya.kamini uska ishara samajh gayi,usne shokhi se muskurate hue uski belt khol di.karan ne aankho se use pant bhi kholne ka ishara kiya to kamini ne uski pant kholna shuru kiya.zip khulte hi pant sarak kar karan ki aediyo pe gir gayi.karan ne pair nikla kar pant ko pare kar diya.

ab vo kewal underwear me kamini ke samne khaad tha.kamini ne nazar bhar kar use dekha,underwear kafi phoola hua tha....uff!...thodi hi der me isme qaid lund uske andar hoga!...uski chut ab tak puri gili ho chuki thi,ye khayal aate hi usme 1 mithi si kasak uthi.

karan ne fir se use baaho me bhar chumna shuru kar diya.ab uska lund baithi hui kamini ki panty se dhaki chut se pura sata hua tha & vo halke-2 apni kamar hila raha tha.in halke dhakko se mast ho kamini apne premi se aur chipak gayi.dono ke beech bas ab unke underwears ki deewar thi.

dono masti me paagalo ki tarah 1 dusre ko chum rahe the& 1 dusre ke pure badan pe hath fira rahe the.karan ke hath uski pith pe bra strap se takraye to usne use jhat se khol bra ko kamini ke khubsurat jism se alag kar diya.karan uske hatho ko chhod seedha khada hua & pehli baar kamre me jal rahe lamp ki maddham roshni me kamini ki 38D size ki badi kasi hui gulabi nipples se saji chhatiyo ko dekha.

saanso ke sath upar-neeche hote uske uroz masti me shayad thode aur bade ho gaye the.karan jhuka & uski baayi chhati ko apne daaye hath me bhar kae halke se dabaya & fir nipple & uske aas-paas ke hisse ko apne munh me bhar unpe zuban ferne laga,"..uuunnnnhhhhhhhh......!",

masti me aah bhar kamini ne aankhe band kar apna sar peechhe kar liya & apne dono hatho se karan ke sar ko apni choochi pe aur bheench diya.uski taange khud ba khud uski kamar pe kas gayi.kayi lamho tak karan uski chhati ka lutf uthata raha.kamini ne uske baal pakad kar halke se uske sar ko uthaya,fir apne daayi choochi pakdi & karan ka sar jhuka kar use uske munh me de diya.

uski is ada ne karan ki masti ko aur badha diya & vo is bar aur josh ke sath uski chhati ko chusne laga.uska 1 hath uski baayi chhati ko masalane laga.kamini maze me pagal ho aankhe band kiye badi mast aahe bharne lagi.kabhi uske hath uske sar pe chale jate & uske baalo se khelne lagte to kabhi vo peechhe ki deewar pe bechaini se fisalne lagte & kabhi uske premi ke badan se.

uski chhatiyo se jam kar khelne ke baad karan neeche jhuka & uski panty nikalne laga.dhadakte dil se gand utha ke kamini ne isme uski madad ki.uski pyasi chut kab se is pal ka intezar kar rahi thi,"..wow..!"

kamini ne kal hi chut ke baal saaf kiye the & maddham roshni me uski kasi,gulabi chut apne hi ras se bhigi hui badi pyari lag rahi thi.Vikas ke baad karan doosra mard tha jiske samne kamini aise nangi hui thi.uski aankho me apne jism ke sabse khoobsurat ang ke liye tareef dekh use sharm aa gayi.

karan baith kar uske narm ghutno ko chumne laga.usne uski janghe utha kar apne kandho pe rakhi to kamini masti me uske sar ko pakad kar baalo me ungliya firane lagi.uski andruni janghe chaatata hua karan uski chut tak pahunch gaya.apne hatho se uski jangho ko pakad kar sehlate hue jab usne pehli baar apni jibh usne kamini ki chut ki dara pe firayi to kamini ne maze me apna badna mod kar sar peechhe ki or jhuka diya.apni jangho se karan ko bheenchte hue usne apne hatho se uske sar ko apni chut pe aur bheench diya,"oohhhhh....haa..annnn..!"

karan ki jibh laplapati hui uske dane ko chhed rahi thi.mahino ki pyasi kamini thodi hi der me jhad gayi.vo lambi saanse bhar apne ko sambhal rahi thi par karan vaise hi baitha hua uski chut se beh rahe pani ko chaatata raha.pura pani chat lene ke baad vo khada hua & kamini ke chehre ko apne hatho me bhar chumne laga.kamini ne bhi use baaho me bhar liya & uski kisses ka jawab dene lagi.

karan ab pure josh me aa chuka tha,usne kamini ka hath pakad akr apne underwear ke waistband pe rakh diya,fir uske chehre ko hatho me bhara,"ise utar do,kamini."

kamini us ke samne nangi padi hui thi,1 bar uski zuban se jhad chukithi-fir bhi is haal me bhi use sharm aa gayi.magar uska dil bhi to uske lund ke deedar ke liye tadap raha tha.usne apna chehra uske baalo bhare seene me chhupa liya & dheere se uske underwear ko neeche sarka diya.pant ki tarah karan ne ise bhi paanv nikal kar apne jism se alag kar diya.

kamini ne sar jhuka kar pehli baar karan ke lund ka deedar kiya.kali,chamakti jhanto se ghire 2 bade ando ke upar uske jism ki tarah hi gors uska 7 1/2 inch lamba lund halke-2 thumke laga rahah tha.precum ki vajah se uska gulabi supada chamak raha tha.vikas ke lund ke baad ye dusra lund tha jise kamini aise dekh rahe thi.use ye dekh ke khushi hui ki lund uske purvapati ke lund se kuchh bada hi tha.bas kuchh hi der me uski chut ki pyas bujhne wali thi.

karan ne baaye hath se uske pyare chehre ko pakad kar chuma & daaye hath se lund ko tham kar uski chut pe laga diya & fir 1 zor ka dhakka diya,"..AANNNHHH...!",1 hi jhatke me aadha lund uski gili chut me sarr se ghus gaya.kamini ne fauran apni marmari baahe uski gardan me daal di.

high heels se saje paanvo ko usne aediyo pe cross karte hue karan ki gand ke neeche laga use apni giraft me kas liya.shelf pe sahare ke liye hatho ko rakh karan uske raseele hotho ko chumte hue dhakke laga lund ko jad tak uski chut me dhasane laga,"aanh...aanh...aaanhh...aaaaannhhh..."

kamini ko vikas ke lund ki aadat thi & karan ka lund us se 1 1/2 inch bada tha so jab lund poora andar gaya to use thoda dard hua par us se bhi kahi zyada use vo maza aaya jise vo bhool hi chuki thi.vo bechaini se apni kamar uchkane lagi to karan ne apne hath uski gand ki phanko ke neeche laga unhe tham liya & zor-2 se dhakke lagane laga.

kamini ki aahe bahut tez ho gayi & vo masti me pagal ho karan se chipak gayi & use chumte hue apni kamar hilane lagi.uski pyasi chut ne arse baad lund ki ragdahat mehsus ki thi & vo bas pani pe pani chhod rahi thi,"ohhh...!",karan karaha,masti me kamini ne apni sandals ki heels ki nok uski gand me dhansa di thi & dard se uske dhakke aur tez ho gaye & kamini dubare jhad gayi.

karan use vaise hi gand se uthaye hue bistar pe le aaya & vaise hi use liet uske upar let gaya.uski gand ki phanko ko masalate hue vo uske pyare chehre ko chum raha tha.thodi der me kamini fir se mast hone lagi to vo uske hotho ko chumne lagi.karan kafi der se apne upar kabu rakhe hue the-ab uski bari thi.apni premika ki gand masalate hue usne fir se dhakke lagana dhuru kiya.

shuru me dhakke kafi halke the,fir usne pura lund bahar nikal kar gehre dhakke lagana shuru kiya to kamini fir se pagal ho gayi...vo apne hatho se uski pith & gand ko sehlane lagi & apni taange usen fir se uski kamar pe kas di.karan uski chhatiyo ko chusta hua bas us chode ja raha tha.use to bas ab is kasi,gulabi chut ko apne pani se bhar dena tha.

kamini fir se masti ki khumari me aa gayi thi,uski aankhe band ho gayi thi & vo bas apne premi ki chudai ka maza lete hue zor-2 se aahe bhar rahi thi.karan ka lund uski chut ki gehrayion me tezi se andar-bahar ho rahah tha.mzaa badha to sune apne nankhun se uski pith me gada diye.uska dil kiya ki vo bas uske lund ko apni chut me bheench de...usne apni taange uski kamar pe aur kas di & aisa karte hi uski heels karan ki gand ki dono phaanko me dhans gai.

"..aahhh...",karan karaha & uski choochiyo se munh hata usne apna sar upar utaha liya & uske dhakke aur tez ho gaye.

"haan...haann....haannn...ha...aaannnnnn....!",kamini ne uski pith me apne nakhun dhansa diye & apna jism bistar se uthati hui jhad gayi.uski harkato,uske chehre ke bhav & uski chut ki sikudan ne karan ka bhi sabra tod diya & vo bhi aahe bharta hua,tez dhakke lagata uski chut ko apne pani se bharne laga.

jhadte hi vo haanfta hua kamini ke seene pe gir gaya...kitne dino baad kamini ki chut ki pyas bujhi thi...uske hotho pe halki si muskan khil gayi & dil me karan ke liye bahut pyar umad pada.usne uske sar ko baaho me bhar liya & uske sar ko halke-2 chumne lagi.















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