Monday, June 14, 2010

सेक्सी कहानिया ननद ने खेली होली--2

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ननद ने खेली होली--2


अरोडा आंटी के यहाँ आज किटी थी....तो साध्हे छ तक लेकिन वहाँ से सेल में जा रही हैं साढे सात आठ तक....

मेरी निगाह सामने रखी घड़ी पे पढी....साढे चार...इसका मतलब....कम से कम तीन घंटे पूरे ....आल लाइन क्लियर....और जिस तरह से वो फोन पे मम्मी के लेट आने की बात जोर से दुहरा रही थी और फ़िर अब ख़ुद....और अचानक मैंने बाहर के दरवाजे की और देखा...सिटकनी भी बंद...अब इससे ज्यादा वो क्या सिगनल दे सकती थी और इसका मतलब वो सिर्फ़ शरीर से ही नहीं मन से भी बढ़ी...

और राजीव भी ये सब इशारे अच्छी तरह समझ रहे थे. वो एक दम सट के बैठ गये थे और एक हाथ कंधे के ऊपर....

जाइये जीजू मैं आपसे नहीं बोलती, इतरा के वो बोल रही थी. आपने कहा था ना की होली में जरुर आयेंगें...जब से फागुन लगा.....और जब से अल्पी दीदी के बोर्ड के इम्तहान खत्म हुए...हर रोज हम दोनों गिनते थे होली अब कितने दिन है....

आ तो गया ना अपनी प्यारी साली से होली खेलने....उसके किशोर गुलाबी गाल पे दो उंगलिया रगड़ते वो बड़े प्यार से बोले।

पता है जीजू, मेरी क्लास की लडकियां सब किस्से सुनाती थीं, उन्होंने जीजू के साथ कैसे होली खेली, कैसे जीजू को बुध्दू बना के अच्छी तरह रंगा और उनके जीजू ने भी....खूब कस कस के उनके साथ....मेरा तो कोई जीजा था नहीं...पर अबकी ....मैंने खूब उन सबों से बोला....मेरे जीजू इत्ते हैंडसम हैं स्मार्ट हैं....

अरे तू अपने जीजू की इत्ती तारीफ कर रही है ज़रा इनसे पूछ की होली के लिए कोई गिफ्ट विफ्त लाए हैं की नहीं....या इत्ती मेरी सुंदर सी बहन से वैसे ही मुफ्त में होली खेल लेंगें, मैंने कम्मो को चढाया।

बढ़ी उत्सुकता से उसने राजीव की और देखा।

एकदम लाये हैं....मेरी हिम्मत...और अब उनका एक हाथ खुल के उस किशोर साली के गुलाबी गाल छू रहा था सहला रहा था और दूसरा....उसकी बस खिलने वाली कलियों के उपरी और....एक दम चिपक के वो बैठे थे...लेकिन पहले मेरी एक पहेली बूझो....

इट इज लांग, हार्ड एंड ....लिक्स....बताओ क्या...और इगलिश में ना आए तो.....

धत जीजू....मैं इंग्लिश मीधियम कान्वेंट में पढ़ती हूँ और दो साल में कालेज में पहुँच जाउंगी...मुझे सोचने दीजिये...लांग....लंबा है कडा है....और क्म्मों की निगाहें जाने अनजाने राजीव के बल्ज की और चली गयी।

टाईट लीवैस की जींस में साफ दिख रहा था...और ऊपर से राजीव का एक हाथ अब सीधे वहीं पे....दो उंगलियाँ उस उत्तेजित शिष्ण के किनारे....

अब फंस गयी लौन्डीया ....मैंने सोचा और भुस में और आग लगाई....

देखो....तुम्हारे जीजा के पास है और मेरे पास नहीं,

हाँ और लडकियां जब हाथ में काढा काढा पकड़ती हैं तो उन्हें अच्छा लगता है, कुछ तो होंठों से भी लगा लेती हैं, वो बोले।

धत जीजू आप भी...जाइये मैं नहीं बोलती आप ऐसी वैसी बातें करते हैं....कम्मो बोली, लेकिन निगाह अभी भी टेंट पोल से चिपकी।

अरे इसमें शरमाने की क्या बात है.....जीजा साली में क्या शरम और वो भी होली में....आख़िरी क्लू .....वो होली में तुम्हारा गिफ्ट भी है....वो बेचारी और शरमा गयी.

लो पकडो ये पे....देखो है ना लांग और हार्ड ...और जब तुम अपने हाथ से ले के दबाओगी तो लीक भी करेगा....है ना.....इम्पोर्टेड है....वैसे तुम क्या सोच रही थी लांग और हार्ड....उन्होंने उसे और छेडा।

अरे लिख के देख ले कहीं तुम्हारे जीजा ने नुमाइश का माल न पकड़ा दिया हो. मैंने उसे चढाया।

ठीक कहती हो दीदी....क्या भरोसा...और लिखने के लिए उसने एक कागज़ निकालते हुए उन्हें चिढाया, इम्पोर्टेड ...चीन का बना है क्या....बारह आने वाला...क्यों जीजू।

अरे वाटरमैन है नामी देखो उस पे नाम लिखा भी है, चलो अच्छा लिखो।

क्या....पेन कागज़ पे लगा के वो बैठी...
आई उन्होंने बोला.

आई बोल के उसने लिखा और उनकी और सिर उठा के देखा. किशोर होंठों पे पेन लगाए वो बढ़ी सुंदर लग रही थी।

एल ओ वी ई वाई.....वो बोल रहे थे...

और वो ध्यान से लिख रही थी... एल ओ वी ई वाई

अचानक वो समझ गयी ...ये क्या लिखवा रहे हैं...और अचानक पेन के पिछले हिस्से से ढेर सारा गुलाबी रंग सीधे उसके चहरे......

हंसते हुए वो बोले अरे बुरा ना मानना साली जी होली है....होली की आपके लिए ख़ास गिफ्ट...मैंने सोचा होली की शुरुआत सबसे पहले सबसे छोटी साली के साथ करते हैं....

उसके गाल गुलाब हो हाय थे. और रंग सिर्फ़ उसके गुलाबी गालों पे नहीं पढा था बल्की सफ़ेद ब्लाउज पे भी, और उसके अधखिले उरोज भी लाल छीन्टो से.....बस लग रहा था अचानक जैसे कोई गुलाब खिल उठा हो. कुछ तो वो शरमाई, सकुचाई पर अगले ही पल, कातिल निगाहों से उन्हें देख के बोली,

मुझे क्या मालुम था की....जीजू का इतनी जल्दी, हाथ में पकड़ते ही गिर पढेगा।

उस का ये द्वि अर्थी दाय्लोग सुन के मुझे लगा की सच में ये मेरी छोटी बहन होने के काबिल है. मुस्कराके मैंने उसे और चढाया,

अरी कम्मो, सुन अरे ज़रा अपने जीजा को भी रंग लगा दे सीधे अपने गाल से उनके गाल पे, वो भी क्या याद करेंगें किस साली से पाला पढा है।

एक दम दीदी और आगे बढ़ के उसने अपने गोरे गुलाबी रंग से सने गाल ....सीधे उनके गालों पे, ....राजीव की तो चांदी हो गयी. इस चक्कर में अब वह कैसे उनके सीधे गोद में आ गयी उस बिचारी को पता भी नहीं चला.और गालों से गाल रगड़ते अचानक दोनों के होंठ एक पल के लिए ....कम्मो को तो जैसे करेंट लग गया ....वो वहीं ठिठुर गयी ....पर राजीव कौन रुकने वाले थे. उसके उरोजों की और साफ साफ इशारा कर के बोले,

अरी साली जी रंग तो यहाँ भी लगा है ....ज़रा इससे भी लगा दीजिये ना

वो बिचारी क्या बोलती, मैं बोली उस की और से।

अरे सब काम साली ही करेगी आख़िर तुम जीजा किस बात के हो और फ़िर तो सीधे उनके हाथ उस नव किशोरी के उभरते जोबन पे
चालाक वो बहुत थी. तुरंत बात पलटते हुए बोली ।

अरे जीजू आप इत्ती देर से आए हैं आप को अभी तक पानी भी पिलाया ....आप क्या सोचेंगें की अल्पना दीदी नहीं है तो कोई पूछने वाला नहीं है और उन की गोद से उठ के वो हिरनी ये जा ....वो जा।

और पीछे से उसके कड़े कड़े छोटे मटकते गोल नितम्बो को देख के तो राजीव की हालत ही ख़राब हो गयी. उनका बालिष्ट भर का खूंटा अब जींस के काबू में नहीं आ र्रहा था।

उसके पीछे पीछे मैं भी किचेन में पहुँची, आ चल थोड़ी तेरी हल्प करा दूँ और पास में आ के उस के कान में हल्के से कहा, अरे तू भी तो अपने जीजू का जवाब दे दे। होली का मौका है कया ऐसे ही सूखे सूखे जाने देगी उनको।

वही तो कर रही हूँ दीदी। और उसने ग्लास की और इशारा किया। जब मैंने ग्लास में झांका तो मुस्कराये बिना नहीं रह सकी।
अच्छा ये बता की कुछ कोल्ध ध्रिंक विंक है क्या। ... मैं नाश्ते का इतजाम करती हूँ और तू कर अपने जीजा का।

मेरी अच्छी दीदी. ...कोल्ध ध्रिंक फ्रिज में है और फ्रिज . वो बोली।

अरे मालुम है मुझे पहली बात नहीं आ रही हूँ, और मैं बगल के कमरे में गयी जहा फ्रिज रखा था।







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