Saturday, June 7, 2014

FUN-MAZA-MASTI हर रात सुहाग रात पार्ट---1

FUN-MAZA-MASTI

 हर रात सुहाग रात पार्ट---1 

मेरा नाम सलमा है. मैं कराची पाकिस्तान की रहने वाली हूँ. मेरी उमर 23 साल की है और मेरी फिगर 34-26-36 है. (निकाह के समय मेरी छातियाँ 30 की थी). मेरा निकाह 2 साल पहले हुआ है. मेरा शौहर एक मल्टी-नॅशनल कंपनी में असिस्टेंट मार्केटिंग मॅनेजर का काम करता है. उसको अक्सर टूर पे रहना पड़ता है. मेरे शौहर का नाम साजिद है. वो दो भाई हैं. एक उनसे 2 साल छ्होटा है और उसका नाम माजिद है. माजिद भी एक अच्छि कंपनी में इंजिनियर है और उसका निकाह 6 महीने पहले ही मेरी छोटी बहेन सायरा के साथ हुआ है. सायरा की उमर 20 साल की है और उसकी फिगर 36-26-34 है. हम लोग एक ही घर में रहते हैं जो कि 2 बेडरूम का है. 

मैं आज आपको अपने उस तज़ुर्बे का बयान करना चाहती हूँ जो मुझे पिच्छले कुच्छ समय में हुआ है और जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी और मुझे ज़न्नत का मज़ा दे दिया है. मैं निकाह से पहले सेक्स के बारे में ज़्यादा कुच्छ नहीं जानती थी. मेरी सहेलियाँ सेक्स के बारे में अक्सर बहुत बातें करती थी और खूब हँसती थी. मैं कई बार उनकी बात का मतलब नही समझ पाती थी पर बेवकूफ़ ना समझी जाऊं इसलिए उनके साथ हंस देती थी. जब मेरा निकाह पक्का हुआ था तो वे लोग मेरे साथ बहुत मसखरी करती थी. मुझे याद है मेरे होने वाले शौहर को देख कर एक सहेली ने कहा कि सलमा का शौहर तो 6 फुट लंबा है और काफ़ी तगड़ा है. दूसरी बोली की सलमा को 6 फुट से क्या करना है, उसको तो 6 इंच से मतलब है वो तगड़ा होना चाहिए. और सब लोग ज़ोर से हंस पड़ी. मैं तब इस बात का मतलब समझ नही पाई थी. असल में मैने अपने निकाह से पहले कभी लंड देखा नही था – ना हक़ीक़त में और ना ही किसी फोटो में. जब मैं 14 साल की थी तब मेरे छ्होटे भाई को जिसकी उमर 8 साल थी मैने कई बार पेशाब करते देखा था. वो नाली पे तिरच्छा खड़ा हो कर पेशाब करता था जिससे उसका लंड मुझे दिखाई देता था. उसकी लंबाई 2-3 इंच की होगी और एकदम पतला दिखता था. 

मुझे निकाह के समय ये तो मालूम था कि मर्द अपना लंड औरतों की चूत में डालते हैं जिसको सेक्स करना कहते हैं. मैं सोते समय अपनी चूत के उपर उंगली रख कर गोल गोल घुमाती थी और गरम होने पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ती थी जिससे मुझे बहुत मज़ा आता था. मेरी चूत से बहुत सारा पानी छ्छूट जाता था. उस समय मेरे मन में 2-3 इंच के पतले से लंड की तस्वीर होती थी. 

जब मैने सुहाग रात में अपने शौहर का लंड पहली बार देखा तो मेरे होश फाख्ता हो गये. कम से कम 7-8 इंच का बहुत मोटा सा हथियार था उसका. मुझे तो देख कर ही चक्कर आ गया था कि यह मेरी चूत मे जाएगा कैसे. मुझे लगा था कि मैं मर जाऊंगी. जब उसने मुझे अपना लंड पकड़ने को बोला तो मैं हाथ रखते ही थरथरा उठी थी. बहुत वजन था उसमे और मेरी हथेली में ठीक से समा नही रहा था. उसने अपने हाथ को मेरे हाथ के उपर रख दिया और लंड को आगे पीछे कर के सहलाने के लिए कहा. पर मुझे बड़ी घबराहट हो रही थी. जैसे ही उसने अपना हाथ हटाया मैने भी अपना हाथ हटा लिया. मेरा पूरा बदन काँप रहा था. मुझे बहुत पसीना आ रहा था और मेरा दिल ये माँग रहा था कि किसी तरह यह मुसीबत की घड़ी आज टल जाए. साजिद बड़ा समझदार था. उसने मेरे साथ ज़बरदस्ती नही की. वो मेरी छातियो को कपड़ो के उपर से सहलाता रहा और उनको चूमता रहा. थोड़ी देर में मुझे अच्छा लगने लगा. फिर उसने धीरे से अपना हाथ मेरे लहंगे में डाल दिया. मेरी सहेलियों ने मुझे कहा था कि सुहाग रात के समय ल़हेंगे के अंदर कुच्छ मत पहेनना इसलिए जैसे ही उसने हाथ अंदर डाला उसका हाथ सीधा मेरी चूत से टकराया. वो खुश हो गया और मेरी चूत के बाल सहलाने लगा. पहले तो मैं शर्मा कर अपने पैर सिकोड़ने लगी पर बाद में मुझे भी अच्च्छा लगने लगा तो मैने उसे सहलाने दिया. साजिद बिल्कुल वैसे ही कर रहा था जैसे मैं सोते समय करती थी पर मुझे साजिद की उंगलियों से नशा सा छ्छा रहा था. मेरी आँखें मूंदी जा रही थीं. थोड़ी देर में मैं सिसकारियाँ भरने लगी और मेरी चूत एकदम गीली हो गयी. उसने अपनी उंगली मेरी चूत के अंदर करने की कोशिश करी पर वो अंदर गयी नही. मुझे दर्द भी बहुत ज़ोर से हुआ और मैं चीख पड़ी. उसने फ़ौरन अपनी उंगली हटा ली और वापस मेरी चूत के उपर उंगलियाँ फेरने लगा. फिर उसने अपनी 2 उंगली मेरी चूत के उपर दबा कर रख दी और दायें बायें ज़ोर ज़ोर से उंगलियाँ हिलाने लगा. मुझे बहुत मज़ा आने लगा. अचानक उसने मेरी चून्चि कपड़ो के साथ ही अपने मूँह मे ले ली और उनको धीरे धीरे चूसने लगा. उनमे बहुत ज़ोर से एक ल़हेर दौड़ रही थी जो मुझे पागल करे दे रही थी. इसके बाद साजिद ने एक बार फिर मेरा हाथ अपने लंड पे रख दिया और उसे पकड़ने के लिया कहा. इस बार मुझे डर नही लगा और मैने उसे पकड़ लिया. साजिद खुशी से सिसकार उठा और बोला “वाह मेरी सलमा जान, मज़ा आ गया.”. मुझे बहुत अच्च्छा लगा कि मैने भी उसको मज़ा दिया. तभी साजिद ने अपनी लूँगी उतार के फेंक दी. मैने देखा कि उसके ख़ूँख़ार लंड के पीछे बहुत सारे बाल थे. उस जंगल में से उसका लंड शेर की तरह सिर उठा कर झाँक रहा था. मैं एकटक उसके लंड को देखे जा रही थी. मैने सोचा ही नही था कि उस जगह पर इतने सारे बाल होंगे. बाल मेरी चूत पे भी उगते थे, पर मैं समय समय पर उनको काट देती थी. पर उसका जंगल तो बहुत घना था. जिस समय मैं उसके लंड के बालो को निहार रही थी, उसी दरमियाँ उसने अपना कुर्ता और बनियान भी उतार फेंकी. अब वो बिल्कुल नंगा हो गया था. उसका लंड एकदम सख़्त और बहुत बड़ा हो चुका था. 

तभी उसने मुझे अपने हाथों से पकड़ा और ज़ोर से अपनी बाहों में भींच लिया. मैं उसके सीने से लिपट गयी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली. वो मेरी पीठ सहलाने लगा. मुझे बहुत अच्च्छा लग रहा था. बहुत रोमांच भी हो रहा था कि ना जाने अब आगे वो क्या करेगा. मेरी पीठ पर हाथ फेरते फेरते उसने धीरे से अपना हाथ मेरे कुर्ते के अंदर डाल दिया और मेरे बदन पे उसके हाथ थिरकने लगे. वो मेरी पीठ सहलाता रहा. बार बार उसकी उंगलियाँ मेरी ब्रा के स्ट्रॅप से टकरा रही थीं. तभी उसने थोड़ा पीछे हट कर मेरी कुरती उतार दी. मैने कोई ऐतराज़ नही किया बल्कि चुप चाप अपने हाथ उपर उठा कर कुरती उतारने दिया. कुरती उतार कर उसने एक नज़र मेरी चून्चियो पर डाली जो ब्रा में क़ैद थी. मुझे शरम आ गयी. मुझे शरमाते देख कर उसने फिर मुझे अपनी बाहों में भींच लिया और मेरी पीठ फिर से सहलाने लगा. सहलाते सहलाते पता नही कब धीरे से उसने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए. मेरी ब्रा ढीली हो गयी. मेरी चूचियो को आज़ादी मिल गयी. मुझे अच्च्छा लग रहा था इसलिए मैने कोई विरोध नही किया. उसने मेरी ब्रा उतार दी और धीरे से मुझे लिटा दिया. मैने अपनी आँखें बंद कर रखी थी. वो एक हाथ से मेरी एक चून्चि सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उसने मेरी दूसरी चून्चि पकड़ कर अपने मूँह में डाल ली. वो मेरे निपल्स पर जीभ फेरने लगा. मेरे निपल्स सख़्त होने लग गये और बाहर को निकल आए. मैं बहुत मस्त हो उठी थी. मुझे महसूस होने लगा कि मेरी चूत बहुत ज़ोर से गीली होने लगी थी. वो मेरे एक निपल को अपनी उंगलियों से और दूसरे को अपनी जीभ से सहलाए जा रहा था. तभी अचानक उसने अपना हाथ जो मेरी चून्चि पर था, फिर से मेरे ल़हेंगे में डाल दिया और मेरी चूत पे हाथ फेरने लगा. मेरे पूरे जिस्म में आग सी लग गयी थी. ऐसा लग रहा था जैसे बहुत से कीड़े मेरे बदन पे रेंग रहे हों. वो अपनी उंगलियों की रगड़ मेरी चूत पे बढ़ाता जा रहा था. अचानक मैं झड़ने लगी. मेरी टांगे एकदम अपने आप सिकुड गयी और आपस में चिपक गयी. मेरा बदन अकड़ने लगा मेरी चूत का रस जोरों से निकल रहा था जो मेरे पूरे तन बदन में लगी आग को बुझा रहा था. मेरी चूत में 440 वॉल्ट का करेंट दौड़ रहा था. अचानक मेरा बदन ढीला पड़ गया और में ज़ोर से उससे लिपट गयी. हम काफ़ी देर तक ऐसे ही पड़े रहे. फिर उसने धीरे से मेरा ल़हेंगा उतार दिया. अब मैं भी पूरी तरह नंगी हो चुकी थी. बत्ती जल रही थी इसलिए मुझे बड़ी शरम सी आ रही थी. 

फिर वो धीरे से नीचे की तरफ खिसकने लगा और उसका चेहरा मेरी टाँगो के बीच में पहुँच गया. वो मेरी चूत को निहारने लगा. बीच बीच में वो उसका चुम्मा भी ले लेता था. जब उसके होंठ मेरी चूत को छ्छूते थे तो मेरी चूत में बिजली दौड़ जाती थी. वो अपनी जीभ से मेरी चूत के रस को चाटता भी जा रहा था. थोड़ी देर में उसने अपनी जीभ मेरी चूत के बीच घुसा दी और ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे दाए बाए घुमाने लगा. मेरी चूत ज्वालामुखी बन गयी. पहली बार ऐसा तजुर्बा हो रहा था. जी कर रहा था कि यह रात कभी भी ख़त्म ना हो. मुझे लगा की मेरी चूत से नदी की तरह रस बहने लगा था. उसने बहुत देर तक मेरी चूत को चॅटा. फिर वो उपर सरक गया और मेरी चून्चि फिर से अपने मूँह में ले ली. उसने अपने दाँत मेरे निपल्स पे गढ़ा दिए. मेरी हल्की सी चीख निकल गयी. उसका भूखा लंड मेरी जाँघो से रगड़ खा रहा था जिसकी वजह से वो और सख़्त होता जा रहा था. उसने फिर मेरा हाथ अपने लंड पे रख दिया. इस बार मैने भी उसका लंड अपनी मुट्ठी में दबा लिया और अपना हाथ आगे पीछे करने लगी. उसके मूँह से सिसकारियाँ निकालने लगी. यह देख के मैने अपने हाथ की रफ़्तार बढ़ा दी. तभी वो उठा और मेरे उपर बैठ गया. उसने अपनी टाँगें मेरे बदन के दोनो ओर रख ली और अपने घुटनो पर इस तरह बैठ गया की उसका वजन मेरे उपर ना पड़े. अब उसका लंड मेरी चूचियो के बीच में था. वो उसे मेरी चून्चियो के बीच में रगड़ने लगा. फिर वो अपना लंड मेरे मूँह के पास ले आया और उसे मेरे होटो पे रख दिया. मैने ज़ोर से मूँह बंद कर लिया. एक तेज़ गंध मेरी नाक में घुसी जा रही थी. वो गंध मैं बर्दाश्त नही कर पा रही थी. उसने मुझे लंड चूसने के लिए कहा पर मेरी हिम्मत नही पड़ी. मैने मेरा मूँह घुमा लिया. उसने ज़बरदस्ती नही की और अपना लंड थोड़ा पीछे ले लिया और मुझे अपने हाथो से उनको आगे पीछे करने को कहने लगा. मैने मुश्किल से आठ दस सपाते ही मारे होंगे की अचानक उसके लंड से उसकी मलाई निकलने लगी. यह मैं पहली बार देख रही थी. मैं एकदम से चौंक पड़ी. उसकी मलाई मेरी चून्चि और गले पे गिर रही थी. उसने मुझसे कहा कि मैं रुकु नही और पूरा का पूरा रस एक साथ निकाल दूँ. मैं अपना हाथ चलाती रही जब तक की उसका रस निकलना बंद नही हुआ. उसने बहुत सारा रस निकाला था जो मेरे पूरे बदन पे फैला हुआ था. उसने अपने दोनो हाथों से मेरी दोनो चून्चियो पर अपने रस की मालिश कर दी. थोड़ी देर में मेरे हाथ में ही उसका लंड ढीला होने लगा और वो धीरे से मेरे बगल में लेट गया. मैने उसका लंड पकड़े रखा. थोड़ी देर में हम दोनो गहरी नींद में सो गये. 

रात को 4 बजे मेरी आँख खुल गयी. साजिद अपना मूँह मेरी टाँगो के बीच में डाल कर मेरी चूत को चाट रहा था. उसका लंड एकदम टाइट हो कर मेरे बदन से रगड़ खा रहा था. उसकी जीभ मेरी चूत में चमत्कार दिखा रही थी और मैं गरम होती जा रही थी. अचानक वो उठा और मेरी टाँगें फैला कर अपना लंड वहाँ रखने लगा. मुझे जोरो का दर्द हुआ. मैने उसे रोका. उसने बहुत सारा थूक अपने लंड में लगा लिया और फिर एक बार उसने लंड मेरी चूत में डालने की कोशिश की. मेरी चूत बहुत टाइट थी. लंड अंदर नही जा रहा था. मैने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी. वो काफ़ी तगड़ा हो चुका था. तभी साजिद उठा और उसने पास की टेबल से तेल की शीशी उठा ली. उसने बहुत सारा तेल मेरी चूत के दरवाजे पे डाल दिया. फिर उसने बहुत सारा तेल अपने लंड पे भी लगाया और उसके बाद लंड मेरी छूट के मूँह पर रख कर उसने ज़ोर का धक्का मारा. मेरी ज़ोर से चीख निकल गयी. उसने अपना हाथ मेरे मूँह पे रख दिया. मैं दर्द से बिलबिला उठी थी और उसके नीचे तड़प रही थी. उसका लंड कम से कम 2 इंच तक मेरी चूत में घुस चुका था. मैं अपने आपको पीछे सिकोड कर उसे निकालने की कोशिश कर रही थी कि उसने ज़ोर का दूसरा धक्का मारा और लंड कम से कम तीन चौथाई मेरी चूत में घुस गया. ऐसा लग रहा था कि कोई नश्तर मेरे अंदर उतार दिया जा रहा था. मुझसे दर्द बर्दाश्त नही हो रहा था. उसने मेरा मूँह बंद किया हुआ था. मैं अपने आपको उसकी पकड़ से छुड़ाने के लिए तड़प रही थी. तभी उसने एक झटका और मारा और उसका पूरा का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर समा गया. मुझे लगा की मैं बेहोश हो जाउन्गि. मुझसे बर्दाश्त बिल्कुल नही हो रहा था. मैं रोना चाह रही थी. मैं पूरी कोशिश कर रही थी कि उसको अपने उपर से हटा दूँ पर मेरी ताक़त उसकी ताक़त के आगे कमज़ोर पड़ रही थी. मैं खुदा को याद करने लगी और उससे दरख़्वाष्ट करने लगी की मुझे इस जहन्नुम से निकाल दे. मैं पूरे यकीन के साथ कह सकती थी की अगर वो अपने लंड से एक झटका और मार देता तो मैं वहीं मर जाती. मुझे महसूस हो रहा था की मेरी चूत एकदम फॅट चुकी थी और उसकी दुर्गति के बारे में सोच कर मुझे बहुत अफ़सोस हो रहा था. अगर साजिद मेरे मूँह पर से हाथ हटा देता तो मैं इतनी ज़ोर से चीखती की सारा मोहल्ला जाग जाता. पर उसने मेरा मूँह दबाया हुआ था. लेकिन एक बात जो अच्छि हुई थी वो यह कि अब साजिद ने हिलना बंद कर दिया था. वो ऐसे ही चुप चाप मेरी चूत में अपना लंड घुसाए हुए लेटा रहा. जब उसने धक्के मारने बंद कर दिए तो मेरा दर्द भी थोड़ा कम हुआ. मैने धीरे से अपना हाथ नीचे लगा कर चेक किया तो पाया की लंड पूरा मेरी चूत के अंदर था. मुझे हैरानी हो रही थी की इतना बड़ा लंड मेरी इतनी छ्होटी सी चूत में आख़िर समाया कैसे. हाथ उपर लिया तो देखा कि मेरी उंगलियों पर खून लगा हुआ था. मैं बहुत ज़ोर से घबरा गयी. मुझे यकीन हो गया कि मेरी चूत फॅट गयी थी और मैं बिलबिलाने लगी अलग होने के लिए. पर मैं उसे धकेल नही पा रही थी. उसने तभी मेरे मूँह से अपना हाथ हटाया. मैं चीखने ही वाली थी कि उसने मेरा मूँह अपने होटो से बंद कर दिया और मेरे होटो को चूसने लगा. साथ ही वो दोनो हाथों से मेरी चून्चियो को भी सहलाने लगा. थोड़ी देर में मुझे अच्च्छा लगने लगा और दर्द भी कम हो गया. जब मैं थोड़ी शांत हो गयी तो उसने अपना मूँह हटा लिया और बताया कि इस खून से डरने वाली कोई बात नही है. यह तो पहली चुदाई की निशानी होती है. दूसरी बार चुदाई करने पे यह खून नही आएगा. थोड़ी देर में वो अपनी चूतड़ हिलाने लगा. पर अब मुझे दर्द नही हो रहा था. उसकी चूतड़ हिलने की वजह से उसका लंड मेरी चूत के अंदर आ जा रहा था. उसका लंड मेरी चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर में उसने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. मेरी चूत में एक अजीब तरह की खुजली मचने लगी. जब उसका लंड अंदर जाता था तो खुजली कम हो जाती थी. जैसे ही वो लंड बाहर निकालता था की खुजली फिर से शुरू हो जाती थी. मैने खुजली मिटाने के लिए अपनी चूतड़ भी उच्छालनी शुरू कर दी. अब हम दोनो ही अपनी चूतड़ से धक्के मार रहे थे. मेरे मूँह से बहुत ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ निकल रही थी. अचानक वो मुझसे ज़ोर से चिपक गया और उसने अपना लंड जड़ तक मेरी चूत के अंदर घुसेड दिया. मैं समझ गयी कि वो झाड़ रहा है. जैसे उसने मेरी चून्चि पे मलाई गिराई थी, वही मलाई अब वो मेरी चूत के अंदर गिरा रहा था. मैं यह भी समझ गयी की अब इसके बाद उसका लंड ढीला पड़ना शुरू हो जाएगा. मुझे थोड़ी सी मायूसी हो गयी क्योंकि मुझे उसके टाइट लंड से अंदर बाहर करवाना बहुत अच्च्छा लग रहा था. अचानक वो फिर से धक्के लगाने लगा. 

उसका लंड अब उतना टाइट तो नही लग रहा था पर फिर भी मज़ा आ रहा था. तभी मुझे भी मेरी चूत के अंदर करेंट दौड़ते हुए महसूस हुआ और मेरा बदन भी अकड़ने लगा. मैं भी झड़ने लगी थी. मैने उसे जोरो से बाहों मे भर लिया और उससे एकदम बेल की तरह चिपेट गयी. थोड़ी देर में दोनो तरफ का तूफान शांत हो गया. मुझे जोरो से पेशाब लग रही थी. साजिद को अलग कर के मैं उठी तो मैने देखा कि बिस्तर पे बहुत सारे खून के धब्बे पड़ चुके थे. मेरी चूत से उसके लॉड का रस बाहर निकल रहा था. मैने साजिद की लूँगी उठा कर अपनी चूत को पोच्छा तो देखा की उसमे बहुत सारा खून भी लग गया जो मेरी चूत से निकला था. 
मैं उठ कर बाथरूम में गयी, (हमारे कमरे में बाथरूम अटॅच्ड था) और मैने अपनी चूत को अच्छि तरह से धो कर सॉफ किया. उसके बाद उसपे थोड़ा सा तेल लगाया तो थोड़ी सी ठंडक मिली. जब कमरे में आई तो देखा की साजिद गहरी नींद में सो चुका था. उसका लंड एक तरफ को लुढ़का पड़ा था बिल्कुल बेजान सा हो कर. वो 8 इंच का शेर अभी 3-4 इंच की बकरी जैसा लग रहा था. मैने एक कपड़े से उसके लंड को पोच्छा और फिर बत्ती बंद कर के उसके लंड को हाथ में लेकर उसके बगल में मैं भी सो गयी. आगे क्या हुआ ये अगले भाग मे पढ़े 

क्रमशः....... 






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