Saturday, June 7, 2014

FUN-MAZA-MASTI हर रात सुहाग रात पार्ट---2

FUN-MAZA-MASTI

 हर रात सुहाग रात पार्ट---2

 गतान्क से आगे...... 
हम अगले दिन सुबह 7 बजे उठे. साजिद ने बहुत देर तक मेरी चून्चिया चूसी. मेरी छातियो पे जगह जगह उसके चूसने से लाल लाल निशान पड़ गये थे. मेरी चून्चियो पर वो जिस जगह पे भी एक बार चूस लेता था वहाँ पर लाल निशान पड़ जाता था. उसने फिर से मुझे अपना लंड चूसने के लिए कहा पर मेरी हिम्मत नही पड़ी. मैने एक दो बार धीरे से उसके लंड की टोपी का चुम्मा ले लिया और एक बार उसपे जीभ फिरा दी. मुझे अच्च्छा नही लगा तो मैने अपना मूँह हटा लिया. उसने फिर तेल की शीशी उठाई और तेल अपने लंड और मेरी चूत पे लगाने लगा. मैं समझ गयी कि अब वापस चुदाई होगी. हालाँकि मुझे रात में मज़ा तो आया था पर अभी भी मुझे थोड़ा थोड़ा डर लग रहा था. मैने अपनी आँख बंद कर ली और अपने बदन को ढीला करने की कोशिश करने लगी. जैसे ही उसने अपने लंड का टोपा मेरी चूत से च्छुअया मेरे सारे जिस्म में बिजली दौड़ने लगी. वो थोड़ी देर तक ऐसे ही रुका रहा. मैं आँखें मून्दे अपनी चूत की तबाही का इंतेज़ार कर रही थी. पर साजिद अपने लंड को सिर्फ़ मेरे चूत के मूँह पे रख के लेटा था. वो उसे अंदर घुसा नही रहा था. अपनी जीभ से वो मेरे निपल्स को चाट रहा था जिससे मेरे निपल्स कड़े होते जा रहे थे, और मेरी चूत भी थोड़ी थोड़ी गीली होने लग गयी थी. थोड़ी देर में मेरी चूत में खुजली मचनी शुरू हो गयी. मैं अपना चूतड़ उचकाने लगी जिससे चूत पे लॉड की रगड़ लगने लगी. मुझे मज़ा आने लगा. साजिद ने एक तकिया मेरी चूतड़ के नीचे लगा दी और मेरी झांगें फैला दी. फिर उसने अपने लंड को मेरी चूत के उपर रखा और एक जोरदार झटका मारा. इस हमले के लिए मैं तैयार नही थी. मेरी चीख निकल गयी और थोडा सा दर्द भी हुआ. पर इस बार आधे से ज़्यादा लंड मेरी चूत में चला गया था. उसने धीरे धीरे ज़ोर लगाना जारी रखा. उसका लंड मेरी चूत के दरवाजे को फैलाता हुआ अंदर घुसता चला जा रहा था. मैं अपने होटो को ज़ोर से भींचें हुए थी. उसका लंड मेरी चूत के लिए बहुत बड़ा था. मुझसे संभाल नही रहा था. मैं जानती थी कि अभी साजिद एक दूसरा जोरदार धक्का मरेगा जिससे उसका लंड पूरा मेरी चूत के अंदर समा जाएगा. मैं आँखें बंद कर के उसी का इंतेज़ार कर रही थी. तभी साजिद ने धीरे से लंड बाहर निकालना शुरू कर दिया. मैने नीचे हाथ लगा कर समझा की सिर्फ़ लंड की टोपी मेरी चूत के अंदर थी. तभी साजिद ने अपना लंड गोलाई में घुमाना शुरू कर दिया. वो अपने लंड को ऐसे घुमा रहा था जैसे कोई चक्की चला रहा हो. उसके गोल गोल घूमने की वजह से उसका लॉडा अपनी टोपी से मेरी चूत की दीवारों की मालिश कर रहा था जिससे उनमे पानी आना शुरू हो गया. मुझपे मस्ती छानी शुरू हो गयी. तभी साजिद ने अपने लंड घुमाने की दिशा बदली और उल्टी तरफ लंड घुमाना शुरू कर दिया. वो 4 चक्कर एक तरफ लगता था फिर दिशा बदल कर 2 चक्कर दूसरी तरफ लगता था. फिर 4 एक तरफ और फिर 2 चक्कर दूसरी तरफ. मेरी चूत से तो जैसे मानो आग निकलनी शुरू हो गयी. मेरा पूरा मूँह खुल गया था और मैं ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी. साजिद मेरी चूत में आग लगा कर मुझे तडपा कर मज़ा ले रहा था. मेरी चूत का दर्द एकदम गायब हो चुका था. मैं थोड़ी देर तक तो यूँ ही तड़पति रही फिर मैने उसकी दोनो चूतादो को पकड़ कर ज़ोर से अपनी ओर खींच लिया. उसका लंड कील की माफ़िक़ मेरे छेद में घुसता चला गया. मैने हाथ लगा कर देखा. पूरा लंड अंदर था. मैने अपनी दोनो टाँगें उठा कर उसकी चूतादो के उपर से कैंची बना ली ताकि वो अपना लंड बाहर निकाल ना सके. फिर उसने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए. मैं भी अपनी चूतड़ उच्छालने लगी. अचानक उसने अपने धक्को की स्पीड बढ़ा दी. वो पूरा लंड बाहर निकालता और तीर की तरह पूरा अंदर डाल देता. मेरा दम निकलने लगा. मैं अपने आप से बोली ‘है, ये क्या मुसीबत मोल ले ली मैने अपने ही हाथ से’. उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी. तभी मैने महसूस किया की मेरी चूत झड़ने लगी है. मैने अपनी दोनो टाँगो और दोनो हाथो से उसे दबोच लिया की वो भी एकदम तन गया और मेरे अंदर झड़ने लगा. बहुत देर तक वो अपना लंड मुझमे समाए हुए पड़ा रहा. फिर उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया. मेरी चूत से उसका माल बाहर निकलना शुरू हो गया. थोड़ी देर में उसकी ढेर सारी मलाई नीचे चादर में जमा हो गयी. मैं थोड़ी देर तो निढाल पड़ी रही, फिर मैं धीरे से उठी. चादर का हाल देखा तो दंग रह गयी. आधी चादर में खून और उसके लंड के माल के निशान दिखाई दे रहे थे. मैने सोचा कि चादर बदल दूँगी पर मुझसे चला भी नही जा रहा था. मैं किसी तरह बाथरूम में घुस गयी. 

नहा कर जब मैं बाहर निकली तो देखा की साजिद कमरे में नही थे. मेरी सास कमरे को समेट रही थी. उन्होने बिस्तर की चादर भी बदल दी थी. मुझे देख कर मेरे पास आईं और पूछने लगी “रात को ठीक से सो सकी या नहीं?” मैने कहा “हां.”. वो बोली “चादर देख कर तो ये लगता है की साजिद ने रात को सोने नही दिया होगा तुम्हे. तू चीखी भी थी कई बार रात में”. मेरा तो चेहरा शरम से लाल हो गया. फिर उन्होने हमारी सुहाग रात की चादर मेरे हाथों पे रख दी और बोली “इसको संभाल के रख लेना अपने पास यादगार के तौर पे”. फिर मेरे होटो और गालों पे निशान दिखाती हुई बोली “साजिद बहुत शैतान हो गया है लगता है”. मैने अपने मन में सोचा कि “यह तो सिर्फ़ 2 निशान दिखाई दे रहे हैं, मेरी चून्चियो पे तो ऐसे 20 निशान लगा दिए हैं आपके बेटे ने”. 




उस दिन सारा दिन मैं ठीक से चल नही पा रही थी. मेरी कमर भी बहुत दुख रही थी. मेरी चूत की तो धज्जियाँ उड़ चुकी थी. मैं यह सोच कर घबरा रही थी कि एक रात की चुदाई में यह हाल हुआ है मेरा तो आज रात को क्या होगा. साजिद नहा धो कर अपने काम से बाहर चले गये. मैं अल्लाह से दुआ करने लगी की मेरी मदद करे. अल्लाह-ताला ने मेरी सुन ली. शाम को मेरा छ्होटा भाई आ गया. बोला कि घर में इस्लामाबाद से मेरी खाला आई हुईं है और मुझे देखना चाहती है क्योंकि वो निकाह में नही आ सकी थी. मेरी सास ने मुझे दो दिन के लिए भेजना क़ुबूल कर लिया. मैने भी अल्लाह का शुक्रिया अदा किया कि उसने मेरी दुआ क़ुबूल कर ली. साजिद का तो मूँह ही उतर गया था पर वो बोला कुच्छ नही. 

मैं अपने घर आ कर बहुत खुश हुई. सब से खुशी खुशी मिली. खाला मुझसे मिल कर बहुत खुश हुईं. हम लोग रात को 12 बजे तक गप्पे मारते रहे. फिर मैं सायरा के साथ उसके कमरे में सोने चली गयी. जैसे ही मैं कमरे में घुसी सायरा बोली “आपा, क्या किया था जीजाजी ने जो तुम ठीक से चल भी नही पा रही हो?” मैने उसे ज़ोर से डाँट दिया “चुप रह शैतान. बहुत बोलने लग गयी है तू”. पर वो चुप नही हुई. उसने पलट कर पूचछा “आपा बताओ ना. क्या बहुत तगड़ा है जीजू का?” मैने कुच्छ जवाब नही दिया. मैं बोली “जब तेरा निकाह होगा, तब तुझे खुद ही पता चल जाएगा”. सायरा बड़ी मासूमियत से बोली “तुम्हारा मतलब है कि जब मेरा निकाह होगा तब मुझे पता चलेगा की जीजू का कितना तगड़ा है”. मैने खींच के तकिया उसकी ओर फेंका और कहा “बदतमीज़ लड़की. सारी शरम हया बेच खाई है लगता है”. 


सायरा ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी. मैने बत्ती बुझा दी और बिस्तेर पे लेट गयी. मैं करवटें बदलने लगी. मुझे नींद नही आ रही थी. बार बार साजिद का चेहरा मेरी आँखों के आगे आ जाता था. उसकी पिच्छली रात की हरकतें रह रह के मेरे जेहन में आ रही थी. मुझे एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी मन में. मेरा मन कर रहा था कि अभी साजिद यहाँ आ जाए और मुझे कल की तरह नंगी कर के ज़ोर ज़ोर से चोदे. मेरी चूत में बहुत ज़ोर से खुजली मच रही थी. मैने तकिये को ज़ोर से अपने टाँगो के बीच में दबा लिया और करवट बदल कर सोने की कोशिश करने लगी. तभी सायरा की आवाज़ सुनाई दी “जीजू की याद आ रही है क्या जो करवटें बदल रही हो?”. मैने कहा “धात्ट…. शैतान की खाला.” और फिर चुपचाप आँखें मूंद ली. थोड़ी देर में मुझे नींद आ गयी. 

अगले पुर दिन मुझे साजिद की याद आती रही. मेरी सारी सहेलियाँ दोपहर को आ गयीं और मुझसे तरह तरह के गंदे सवाल करने लगी. उनकी जो बातें मैं आज तक समझ नहीं पाती थी आज मुझे अच्छि तरह से समझ में आ रही थी. एक बोली “राइफल कैसी है जीजाजी की?”, दूसरी बोली “कितने राउंड फाइयर किए उन्होने?”, तीसरी बोलती थी “निशाना टारगेट में मारा या बाहर ही गोलियाँ बिखेर दी उन्होने?” चौथी बोली “टारगेट तो फाड़ दिया है. तभी तो ऐसे चल रही है यह”. मैं गुस्से में बोली “तुम्हे बहुत एक्सपीरियेन्स है क्या जो ऐसे बोल रही हो?”. वो बोली “एक साल से एक्सपीरियेन्स ले रही हूँ सलमा जान.” अब मैं चौंकी. उस दिन मुझ पे ये बहुत बड़ा राज़ ज़ाहिर हुआ कि मेरी चारो सहेलियाँ सेक्स का मज़ा ले चुकी थी. कोई अपने रिश्तेदार से, कोई पड़ोसी से तो कोई अपने दोस्त से. फिर तो सब अपने एक्सपीरियेन्स बताने लगी. उस दिन मुझे सेक्स के बारे में बहुत सारी बातें मालूम पड़ी. मुझे लंड चूसने और चूत चटवाने की स्टाइल्स के बारे में मालूम पड़ा. मुझे यह भी पता चला कि मेरी सारी सहेलियाँ अपनी चूत शेव कर के रखती थी जिससे उनको चूत चटवाने में ज़्यादा मज़ा आता था. जैसे ही मेरी सहेलियाँ गयीं, मैं झट से बाथरूम में घुस गयी और अपने भाई के रेज़र से अपनी चूत के बाल सॉफ करने लगी. थोड़ी देर में मैने चूत के सारे बाल एकदम सॉफ कर दिए. पर मुझे कई जगह पे जलन होने लगी थी. मैने बहुत सारा नारियल का तेल लगाया पर आराम नही मिला. बाद में थोड़ी बर्फ ले कर सिकाई करी तब जा कर थोड़ा आराम मिला. अब मैं वापस साजिद के पास जाने के लिए तड़प रही थी. 

अल्लाह ने एक बार फिर मेरी सुन ली. शाम को माजिद घर में आया. मैं कमरे में थी. बाहर आ कर देखा कि माजिद और सायरा आपस में गुफ़्ट-गू कर रहे थे. मैने पूचछा कैसे आना हुआ. वो बोला बस ऐसे ही. उससे मालूम हुआ की साजिद अगले दिन किसी काम से दो दिन के लिए बाहर जा रहे थे. उन्ही के लिए कुच्छ खरीदारी करने निकला था तो उसने सोचा की मुझसे मिलता चले. बात वो मुझसे कर रहा था पर उसकी निगाहें बार बार सायरा के उपर जा कर ठहर जाती थी. मैने सोचा मौका अच्च्छा है. मैने अम्मी से कहा कि मैं माजिद के साथ घर चली जाती हूँ. अगले दिन साजिद के बाहर जाने के बाद माजिद मुझे वापस छ्चोड़ देगा. अम्मी मान गयी और मैं माजिद के साथ अपने घर आ गयी. 

साजिद ने जैसे ही मुझे देखा उसके चेहरे पे चमक आ गयी. मैने गुस्से से कहा कि आपकी तो एक हफ्ते की छुट्टी बाकी थी अभी. उसने कहा की ऑफीस से ज़रूरी मेसेज आया था और जाना बहुत ही अर्जेंट है. लेकिन वो अगले दिन रात तक वापस आ जाएगा. मैने उनके जाने की तैयारी करी. फिर हम सब लोगो ने खाना खाया और सब लोग सोने के लिए चले गये. मेरी सास ने जाते हुए मुझसे धीरे से कहा “अभी कैसा लग रहा है तुझे. तेरे बदन को थोड़ा आराम मिल जाए इसीलिए तुझे कल भेज दिया था. जा, साजिद तेरा इंतेज़ार कर रहा होगा”. मैने कहा की अब मुझे काफ़ी आराम महसूस हो रहा है. 

मैं किचन समेट कर जैसे ही कमरे में घुसी, साजिद ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पे ला कर लिटा दिया. मुझ पर मस्ती सवार होने लगी. जितना उतावला वो हो रहा था मुझे चोदने के लिए, उससे ज़्यादा उतावली मैं हो रही थी उससे चुदवाने के लिए. उसने मुझे ज़ोर से चिपका कर मेरे चेहरे और गालों पे चुंबनो की बौछार करनी शुरू कर दी. 

मैं गरम होने लगी और मैं भी उसे ज़ोर ज़ोर से चूमने लगी. उसने मेरा निचला होठ अपने होठों के बीच में ले लिया और उन्हे चूसने लगा. फिर वो मेरे उपर के होठ पीने लगा. जैसे ही मैने मूँह खोला उसने अपने होटो के बीच मेरी जीभ दबा ली और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. मुझ पर बहुत ज़ोर से नशा छाने लगा. मैने भी अपनी जीभ उसके मूँह के अंदर घुसा दी और हम दोनो की जीभें एक दूसरे से लिपट गयी. हम बहुत देर तक एक दूसरे को ऐसे ही चूस्ते रहे. इसी बीच उसके लंड की चुभन मैं अपनी जांघों में महसूस कर रही थी. मैने हाथ नीचे कर के उसकी लूँगी के अंदर से उसके लंड को पकड़ लिया और उसके साथ खेलने लगी. मैं कभी उसको अपनी मुट्ठी में दबाती थी तो कभी आगे पीछे करने लगती थी. आज मैं उसके लंड को चूसने की सोच चुकी थी. मेरी सहेलियों ने बताया था की लंड चूसने में बहुत मज़ा आता है. थोड़ी देर में ही उसका लंड मेरे हाथ में फौलाद जैसा सख़्त हो गया. उसने मेरे उपर के कपड़े उतार कर मेरी छातियो को नंगा कर दिया. मेरी चून्चियो पे उसके लगाए दाग हल्के हो गये थे. उसने फिर से उनको जगह जगह से चूसना शुरू कर दिया और अपनी निशानी मेरी चून्चियो पे छ्चोड़ने लगा. फिर उसने मेरी सलवार उतार दी. मैने अंदर अंडरवेर पहना हुआ था. उसने कहा “सलमा डियर, मेरी एक बात मान लो. आज के बाद चड्धि ना पहेनना”. मैने कहा “जी बहुत अच्च्छा”. उसने एक झटके से मेरी चड्धि नीचे खिसका दी. फिर जो मेरी चूत का नज़ारा उसने देखा तो देखता ही रह गया. मेरी चूत तो एकदम चिकनी थी. सिर्फ़ 4 घंटे पहले ही मैने सॉफ करी थी. वो तो पागल हो गया और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूत को चाटने लगा. मेरी चूत में आग लगी जा रही थी. मैने उसके लंड को ज़ोर से अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया. वो मेरा इशारा समझ गया और उल्टा हो कर ऐसे लेट गया की उसका लंड मेरे मूँह के पास आ गया और वो मेरी चूत को चाटने में लगा रहा. अब उसका लंड मेरे मूँह को छ्छू रहा था. मैने उसे पकड़ लिया और अपनी जीभ उसकी टोपी पे फिराने लगी. इसके बाद मैने उसके लॉड की टोपी अपने होटो के बीच में रख ली और उसे चूमने चाटने लगी. अचानक उसके लॉड से कुच्छ एकदम पानी जैसा निकला जिसे मैं गतक गयी. मुझे स्वाद अच्च्छा लगा. मुझे लगा उसने मलाई छ्चोड़ी है पर यह सफेद नही था. अचानक उसने एक झटका दिया और उसका लंड जड़ तक मेरे मूँह में घुस गया. मैने अपना मूँह बंद कर लिया और जोरो से उसके लंड को चूसने लगी. मुझे अच्च्छा लगने लगा था. जो गंध कल मुझे गंदी लग रही थी आज वही मेरे अंदर की आग को और भड़का रही थी. मैने उसके पूरे लंड को अपने मूँह के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. उसने भी अपनी जीभ मेरी चूत की फांको के बीच फँसा दी और ज़ोर ज़ोर से घुमाने लगा जिससे की मेरी चूत का पानी छ्छूटने लगा. वो एक एक बूँद बड़ी अच्छि तरह से चाट ता जा रहा था. मुझे बहुत अच्च्छा लग रहा था. तभी उसने मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली 1 इंच तक घुसा दी और उसको हिलाने लगा. वो अपनी उंगली से गोल गोल घुमाने लगा जिससे मेरी चूत और भी ज़्यादा गीली होने लगी. ऐसा लग रहा था की मेरी चूत से लावा बह रहा था. उसने अपनी उंगली और अंदर घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा. अब तो मैं फुदकने लग गयी. मैं समझ गयी थी कि अब मैं अपने आपको रोक नही पाउन्गि. मैने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और उसका लंड और तेज़ी से अपने मूँह के अंदर बाहर करने लगी. अचानक उसने अपने हाथ से मेरे बाल पकड़ लिए ताकि मैं मूँह ना घुमा सकूँ और ज़ोर से मेरा मूँह अपने लंड से चिपका लिया. तभी उसका लंड ऐंठने लगा और इससे पहले की मैं कुच्छ समझ पाती उसने मेरा मूँह अपने रस से भरना शुरू कर दिया. मेरे पास इतना भी वक़्त नही था की मैं अपना मूँह हटा पाती. मैं जल्दी से गतक गयी. गटकते ही दूसरी खुराक़ मेरे मूँह में आ गयी. 

मैं जितनी तेज गटक सकती थी उससे तेज वो अपना माल मेरे मूँह में छ्चोड़ रहा था. थोड़ी देर में उसका माल मेरे मूँह से बाहर निकल कर गिरने लगा. अब उसकी उंगली की रफ़्तार फिर तेज होने लगी और चूत चाटने की रफ़्तार भी. वो बुरी तरह से मेरी चूत को चाट रहा था. तभी मुझे अंदर कुछ जकड़न सी महसूस हुई और मैं एकदम से झड़ने लगी. मैने अपनी चूत उसके मूँह से चिपका दी और तब तक ऐसे ही चिपकी पड़ी रही जब तक की मेरे अंदर का ज़लज़ला शांत नही हो गया. उसका लंड मेरे मूँह के अंदर ही नरम हो चुका था. जब उसने अपना हाथ हटाया तो मैने अपने मूँह से उसका लंड बाहर निकाला. मेरी सहेलियाँ बिल्कुल ठीक कह रही थी. यक़ीनन मुझे लंड चूसने में बहुत मज़ा आया था. उसी वक़्त मुझे मेरी चूत के अंदर कुच्छ सुरसूराहट सी मालूम पड़ी. उसने अपनी उंगली अभी भी अंदर घुसा रखी थी और अब उसने उसे फिर से घुमाना शुरू कर दिया था. मेरी सिसकारी निकल पड़ी. साजिद बोला “सलमा मेरी जानेमन, इस चूत को इतनी चिकनी कहाँ से कर लाई”. मैने कहा “बस आप के लिए किया है”. वो खुश हो गया. फिर उसने अपनी उंगली बाहर निकाल ली और मुझे सीधा लिटा कर मेरी चून्चियो पे अपना लंड घिसने लगा. थोड़ी देर में उसका लंड टाइट होना शुरू हो गया. उसने तुरंत तेल लगाया और गछ से लॉडा मेरी चूत के अंदर पेल दिया. एक ही झटके में लंड पूरा अंदर तक चला गया. मैने अपनी टांगे फैला दी ताकि दर्द ना मालूम पड़े. उसने मेरी दोनो टॅंगो को पकड़ कर उपर कर दिया और दनादन धक्के मारने लगा. थोड़ी देर में ही मैं फिर से झड़ने लगी पर वो रुकने का नाम ही नही ले रहा था. उसने फिर एक नयी स्टाइल में सापाते मारने शुरू कर दिए. वो अपना लंड एकदम धीरे से बाहर निकालता और एकदम धीरे से अंदर तक ले जाता. फिर धीरे से बाहर निकालता और फिर धीरे से अंदर तक पेल देता. ऐसा 3 बार करने के बाद वो 3 बार बहुत तेज़ी से झटके मारता. पूरी ताक़त से वो एक झटके में बाहर निकालता और एक ही झटके में अंदर तक पेल देता. ऐसा 3 बार करने के बाद उसने फिर अपनी स्पीड एकदम धीरे कर दिया और 3 सापाते धीरे से मारे. मुझे उसकी इस स्टाइल में भी बहुत मज़ा आने लगा. मैं हैरान थी कि वो झाड़ क्यों नही रहा था और वो था कि धक्के पे धक्के मारता जा रहा था. मेरी चूत का बाजा बजा दिया था उसने. तभी उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया. मुझे थोड़ी तस्कीन हुई. पर तब तक वो मुझे पलट चुका था और मुझे कुतिया बना कर उसने अपना लंड पीछे से मेरी चूत में पेल दिया. इस बार मुझे बहुत दर्द हुआ पर मैं झेल गयी. थोड़ी देर में मेरी चूत से फ़चक फ़चक की आवाज़ें आने लगी. और तभी एकदम से वो मेरे उपर लेट गया और अपना माल मेरी चूत के अंदर छ्चोड़ने लगा. उसका माल अंदर गिरते ही मैं एक बार फिर से झाड़ गयी. उसके पवरफुल लंड ने मेरी चूत के परखच्चे उड़ा दिए थे. अपना लंड बाहर निकाल कर उसने दो तीन झटके दिए जिससे उसका बचा खुचा रस मेरी चूतड़ की गोलैईयों पे गिरा और फिर वो मुझे अपनी बाहों में लेकर लेट गया. उसकी बाहों में मुझे बहुत जल्दी नींद आ गयी. तो दोस्तो कैसी लगी ये सुहाग रात की मस्त कहानी फिर मिलेंगे एक और नई कहाई के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा 

समाप्त




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