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Wednesday, April 16, 2014

FUN-MAZA-MASTI मालती एक कुतिया --5

FUN-MAZA-MASTI

 मालती एक कुतिया --5
 शाम को मालती रंगदारी लेके खुद विधायक जी के ऑफिस पहुची...
हमेशा की तरह आज भी मालती पलंगतोड़ लग रही थी, काली साड़ी, ऊपर हमेशा की तरह आज भी स्लीवलेस ब्लाउज ही पहना हुआ था... बला की खूबसूरत लग रही थी... बगल में काला पर्स... दो इंच हील सैंडल!
विधायक लल्लन सिंह अन्दर अपने ऑफिस में कुछ अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे थे... ओह आपको लल्लन सिंह के बारे में बताना भूल गई...
लल्लन सिंह पिछले 20 साल से इलाके के बाहुबली विधायक हैं... आस पास के 5-6 विधायकों का समर्थन रहता है उनके साथ! स्वाभाव से अक्खड़ बकैत और दबंग! शहर में उनकी परमीशन के बिना एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता है! शहर के हर धंधे से रंगदारी आती है उनके पास! जिस समय मालती लल्लन सिंह के ऑफिस पहुची उस समय, डीएम और एसपी हाजिरी लगाने आये हुए थे लल्लन जी के पास!
मालती के ऑफिस पहुचते ही सब उसे आँखे फाड़ फाड़ के घूरने लगे... विधायक जी के ऑफिस में एक औरत, वो भी शाम को सात बजे... पक्का आज कोई नई आइटम बुलाई है लल्लन ने... वहां मौजूद लोगों की आँखों से हवस टपक रही थी!
“हाँ मैडम , क्या चाहिए? किससे मिलना है?” एक आदमी ने पूछा...
मालती उसके पास पहुची और बोली... “जी मुझे विधायक जी से मिलना है... जरूरी काम है मुझे उनसे”
उस आदमी ने मालती को ऊपर से नीचे तक देखा... और मुस्कुराया...
“ओह... जरूरी काम है... वैसे विधायक जी ने तो हमें नहीं बताया कि उन्होंने आज के लिए किसी को ऑफिस बुलाया है... और तुम्हे नहीं पता, विधायक जी “जरूरी काम” ऑफिस में नहीं करते... फार्महाउस में करते हैं!
“जी?? उन्होंने मुझे नहीं बुलाया है, मैं मिलने आई हूँ उनसे... आप प्लीज बताएँगे मुझे कहाँ है वो” मालती ने अपनी झल्लाहट को काबू में रखते हुए कहा!
“अच्छा अच्छा ठीक है... वो अभी मीटिंग में हैं.... तुम वेट करो यही बाहर...” आदमी ने मालती के क्लीवेज को घूरते हुए कहा!
मालती कुछ नहीं बोली... और सामने पड़े सोफे पर बैठ कर इंतज़ार करने लगी!
अफरोज़ अन्दर आता है और मालती को देखके खुश होता है....
“ओह... तो आ गई तू...देख लिया न अपनी एक गलती का अंजाम” अफरोज़ ने मालती को देखते हुए कहा...
“जी मुझे विधायक जी से मिलना है...” मालती खुद को संभालते हुए बोली!
“अरे मिल लीजियेगा... विधायक जी से भी मिल लीजियेगा... पहले हमसे तो मिल लीजिये” अफरोज़ ने शरारती मुस्कान के साथ कहा और मालती के साथ पड़े सोफे पे बैठ गया...
मालती: “जी सुबह के लिए मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ... वो मैं भावनाओं में कुछ जादा ही बोल गई थी”
अफरोज़: “लेन-देन के मामले में हमें कोई गुस्ताखी बर्दास्त नहीं है”
मालती: “जी इस बार हुई गुस्ताखी को माफ़ कर दीजिये.. आगे से मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ... शिकायत का कोई मौका नहीं दूँगी” (मालती मुस्कुरा के बोली)
अफरोज: “देखो माफ़ी और सजा का डिपार्टमेंट तो विधायक जी का है... अब वो ही देखेंगे”
मालती: “जी कब तक चलेगी मीटिंग” थोड़ी थकी हुई आवाज में मालती ने पुछा...
अफरोज़: “रुको मैं देखता हूँ...”
अफरोज़ उठ के विधायक जी के केबिन में गया...
और लल्लन सिंह के कान में जाके बोला- “सरकार वो होटल की मैनेजर आई है... माफ़ी मांगने... क्या करना है उसका”
लल्लन: “अरे वो तो पता था हमें आयेगी वो... अब उसके पापों का प्रायश्चित तो उसे ही करना पड़ेगा न... डीएम साहब आप निकलिए फिर, और एसपी साहब आप रुकिए जरा... और हाँ अफरोज़ .. तू भेज उसे अन्दर”
अफरोज और डीएम बाहर गए और अफरोज़ ने मालती को अंदर भेज दिया!
कमरे में विधायक लल्लन सिंह और एसपी बैठे हुए थे...
मालती अन्दर घुसी....
मालती: “जी नमस्ते.....”(दोनों हाथ जोड़ के)
विधायक: “अरे नमस्ते नमस्ते.... आइये मैडम.... तशरीफ़ रखिये”
विधायक और एसपी दोनों की आँखे खुली की खुली रह गई मालती को देख के...
मालती हलके से मुस्कुराती हुई एसपी के बगल वाली कुर्सी में बैठ गई...
एसपी ने अपनी कुर्सी मालती की ओर घुमा ली...
विधायक: “आप जानती है न कौन हैं हम”
मालती: “जी आपको कौन नहीं जानता...”
विधायक: “नहीं जानती तो जान ले...वरना अच्छा नहीं होगा...”
“अब एसपी साहब क्या बताएं, इन औरतों को समझना मुश्किल है.... मोहतरमा ने सुबह जितने पैसे देने से मन कर दिए थे, अब उसके दोगुने पैसे होटल के रेनोवेशन में खर्च होंगे...”
एसपी: “हाहा... ये बात तो सही कही आपने.... औरतों को समझना मुश्किल ही है, पर सरकार आपको समझाना अच्छी तरह आता है”
विधायक: “अरे तभी तो गई ये मोहतरमा दौड़ते हुए” हाहा “तो क्या डिसाइड किया? (मालती की ओर देख कर)
मालती: “जी वो... डिसाइड क्या करना है... ये आपके पैसे.... और प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिये... वो मैं भावनाओं में बह के कुछ जादा ही बोल गई थी अफरोज़ से!”
विधायक: “हाहा... अब आप जैसी खूबसूरत औरत से पैसे...”
एसपी: “अरे इनके जैसियों को तो पैसे देने की आदत होगी आपको”
विधायक: “हाहा.... क्या बात कहे एसपी साहब” “अरे अफरोज़....(जोर से चिल्लाते हुए)”
अफरोज भागता हुआ आया: “जी सरकार”
विधायक: “अरे मुद्रा ले जाओ.... मैनेजर साहिबा खुद देने आई हैं”
मालती: “जी अगले महीने का भी है”
विधायक: “अरे अगले महीने का काहे.... अगले महीने का अगले महीने देने आना... इसी बहाने आपसे मुलाक़ात तो हो जाएगी”
मालती: “जी मुलाकात के लिए बहाने की क्या जरूरत है, वो तो ऐसे भी हो सकती है”
विधायक: “अफरोज लेजा पैसे....”
“हाँ तो मोहतरमा.... ठाकुर का फोन आया था हमारे पास, हमने तो उसे बता दिया है कि गलती किसकी है”
मालती: “जी मेरी उनसे बात हुई... मैं अपनी गलती मान रही हूँ... मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था....”
विधायक: “एसपी साहब आप निकलिए अब...”
विधायक के इशारा करते ही एसपी उठा और विधायक के पैर छूए.... “जब सरकार सेवा चाहिए हो तो याद कर लीजियेगा” और वो चला गया!
अब कमरे में मालती थी और उसके सामने दबंग विधायक लल्लन सिंह जी!
विधायक: “अब बताइये मोहतरमा ... क्या किया जाय आपका...”
मालती: “जी मैं अपनी करनी की हाथ जोड़कर माफ़ी मांगती हूँ आपसे... आगे से आपको कोई शिकायत का मौका नहीं दूँगी”
विधायक ने मालती के दोनों जुड़े हुए हाथों को अपने हाथो के बीच पकड़ लिया....
विधायक: “अरे नहीं नहीं.. ये क्या कर रही हैं आप..... अब देखिये हम माफ़ी देना तो जानते नहीं.... पर हम आपको एक मौका जरूर देंगे...”
मालती: “मुस्कुराते हुए...जी मैं आपकी शुक्रगुजार हूँ...”
विधायक: “अरे... आप बातें बड़ी मीठी मीठी करती हैं....” (ठाकुर मालती के हाथो को अपने हाथो के बीच दबाये मसल रहा था...)
मालती थोड़ा शर्मा गई....
विधायक: “शादी नहीं हुई तुम्हारी अभी....” (मालती की मांग में सिन्दूर और गले में मंगलसूत्र न देख विधायक के मन में काफी देर से ये सवाल था...)
मालती: “जी.. वो नहीं रहे...”
विधायक: “अरे.... ओह... सॉरी ...सॉरी....पर तू ठाकुर से कैसे मिली”
मालती: “जी ठाकुर जी मेरे पति के दोस्त थे... तो उनकी डेथ के बाद.... ठाकुर जी ने ही सहारा दिया हमें”

“ठरकी साला” विधायक ने मन में सोचा....
विधायक: “बच्चे? बच्चे नहीं हैं तेरे?” (इतना जानने के बाद ‘आप और मोहतरमा’ से ‘तू’ पर आने में विधायक को देर नहीं लगी)
मालती: “जी हैं... दो बच्चे हैं मेरे.... एक बेटी है 19 साल की.... और एक छोटा बेटा है, वो 12वी में पढता है”
विधायक: “वैसे तुझे देख के लगता नहीं कि तेरे इतने बड़े बड़े बच्चे होंगे...”

मालती विधायक की बात सुन कर मुस्कुराई....

वो मालती के हाथो को मसल रहा था....
विधायक: “वैसे तुझे यहाँ कोई परेशानी तो नहीं है न.... कोई भी परेशानी हो... तो इस नाचीज़ को बस याद कर लीजियेगा””

मालती: “अरे नहीं नहीं... वो तो बस आज ही थोड़ा....”
विधायक मालती की खूबसूरती में आज की बात भूल ही गया था....

विधायक: “अरे आज जो हुआ... उसकी जिम्मेदार तो तू खुद है....यहाँ रहना है तो देनी तो पड़ेगी ही.... और अगर ख़ुशी खुशी नहीं देगी, तो लेना हमें अच्छी तरह आता है... अब देखो आ गई न तू खुद देने...” (मालती का हाथ दबाते हुए बोला)
(वो मालती के जिस्म का पूरा मुआइना कर रहा था.... उसकी नज़रें बार बार मालती की क्लीवेज पर टिक जातीं)
मालती: “जी वो उसके लिए मैं आपसे एक बार फिर से माफ़ी मांगती हूँ... और आगे से ऐसा नहीं होगा... ये भी वादा करती हू आपको” (मालती ने मुस्कुराते हुए कहा...)
मालती की मुस्कान पर विधायक जी फिर से लट्टू हो गए....
विधायक: “अरे माफ़ किया.... माफ़ किया.... पर हमारी भी कुछ शर्तें हैं...” (मालती के जिस्म पर नजर ऊपर नीचे की)

मालती: “जी क्या शर्तें?”
विधायक: “बड़ी जल्दी है शर्तें जानने की” हँसते हुए ठाकुर ने कहा....

मालती ठाकुर की इस बात पर शर्मा गई.... और लल्लन विधायक ने एक बार फिर उसके दोनों कोमल हाथों को अपने हाथो से दबा दिया....
नजारा ऐसा था मानो दोनों के हाथ सम्भोग कर रहे हों....
या विधायक बार बार मालती को इशारा कर रहा था... कि जो हाल अभी उसके हाथों का है, भविष्य में वाही हाल उसके पूरे जिस्म का होने वाला है...
और मालती भी मुस्कुरा कर और अपनी मनमोहनी अदाओं से मानो इस इशारे को समझने का इशारा कर रही हो!
विधायक: “वैसे ठाकुर कितना देता है तुम्हे? महीने का?”
मालती: “जी???” मालती ने सवालिया नजरों से विधायक को देखा...
विधायक: “अरे मैं भी क्या पूछ रहा हू.... देती तो तू होगी ठाकुर को...” “हाहाहा” “क्यों कुछ गलत कहा मैंने?”
मालती: “जी आप भी न.... कुछ भी बोलते हैं.... मैं क्या दूँगी उन्हें.... काश कुछ दे सकती... वो तो ठाकुर जी ही हैं, उन्होंने सहारा दिया इनकी डेथ के बाद.... वरना मैं तो अकेली ही पड़ गई थी”

मालती की बात सुनकर विधायक इम्प्रेस हो गया... वो अभी तक उसने अभी तक केवल उसके जिस्म की खूबसूरती देखि थी,,,, मालती का दिमाग भी इतनी तेज़ चलता होगा .. ये नहीं सोचा था उसने...
विधायक: “हाहा.... वैसे तू पॉलिटिक्स में क्यों नहीं ट्राई करती... पूरे हुनर हैं तुझमे...”

मालती: “जी हम जैसों के लिए पॉलिटिक्स में जगह कहाँ... और अब फिर से मैं पॉलिटिक्स में नहीं जाना चाहती..”
विधायक: “फिर से? तू पहले कब पॉलिटिक्स में थी?”
मालती: “जी.... वो... मैं युनिवर्सिटी पॉलिटिक्स में काफी एक्टिव थी.... दो बार प्रेसिडेंट चुनी गई थी मैं”
मालती की कॉलेज की यादें आज फिर से ताजा हो गइ...वो रंगीन पल... वो पॉवर की भूख... जिसके लिए किसी के साथ सोने से भी परहेज नहीं होता था उसे...
विधायक: ”ओह.... प्रेसिडेंट साहिबा... हेहे... फिर छोड़ क्यों दी....पॉलिटिक्स? घर वालों ने शादी करवा दी? हाहा....”
मालती: “जी... वो कॉलेज ख़तम होते ही... शादी हो गई मेरी...”
विधायक: “अरे तो अब आजा... अभी देर कहाँ हुई है... और फिर कब तक किसी के एहसानों पे गुजर करेगी? पॉलिटिक्स में आके जनता की सेवा कर... स्वर्गीय मिश्रा जी को भी अच्छा लगेगा, कि उसके मरने के बाद उसकी बीवी जनता की सेवा कर रही है... और फिर तेरे बच्चे भी अब बड़े ही हो गए हैं...”
मालती: “हाहा... सपने दिखाना तो कोई आप लोगों से सीखे...”
विधायक: “अरे ये लल्लन सिंह फिजूल सपने नहीं दिखाता...” मालती के हाथो को दबाते हुए बोला- “परख है हमें...”
मालती: “अच्छा जी...”
विधायक: “जी हाँ...” और मालती के हाथों को अपने चंगुल से आजाद कर दिया और कुर्सी पे पीछे सहारा लेके आराम से बैठ गया...
मालती: “जी शुक्रिया... पर मैं अभी जहां हूँ वहाँ खुश हूँ....” अपने हाथ पीछे लेती हुई बोली....
“अरे कोई जल्दबाजी नहीं... पर हाँ सोचना जरूर इस बारे में...”
“अच्छा जी अब इजाजत दीजिये मुझे...अच्छा लगा आपसे मिल कर...” मालती कुर्सी ने उठते हुए बोली....
“हाँ हाँ....काफी समय हो गया है...निकलो अब तुम और उस बारे में जरा सोचना...अपने लिए नहीं तो स्वर्गीय मिश्रा जी की आत्मा के लिए...” लल्लन ने कहा
“जी जी.... सोचूंगी...” मालती मुस्कुराते हुए बोली...
“ये... मेरा पर्सनल नंबर रख लो... बेझिझक याद कर लेना” विधायक ने अपना कार्ड मालती की ओर बढ़ाया...
“ओह.... शुक्रिया....” और मालती ने कार्ड को अपनी पर्स में रखा... और अपना कार्ड निकाल कर विधायक को दिया.... “ये मेरा कार्ड... होटल में कभी किसी चीज की जरूरत हो... रूम, सूट,हाल,कैटरर्स,लॉन बुक कराना हो... पर्सनली मुझे फोन कीजियेगा...” मुस्कुराती हुई बोली....
“हाहा.... जरूर....सेवा का मौका तो जरुर देंगे हम” हँसते हुए विधायक ने कहा
और फिर मालती वहां से निकल ली.... विधायक दूर तक मालती की मटकती गांड को निहारता रहा... और फिर वो सीधे अपने अय्याश के अड्डे की ओर निकल लिया...अय्याश का अड्डा.... यानी उसका फार्म हॉउस...!


 विधायक लल्लन सिंह ने मालती की दबी हुई आकान्च्छाओ को आज फिर से जगा दिया था... बचपन से वो पॉलिटिक्स में कुछ करना चाहती थी... कुछ बनना चाहती थी! बचपन से ही क्लास की मॉनिटर.. फिर स्कूल की हेड गर्ल और फिर कॉलेज की पॉलिटिक्स! सत्ता का नशा उसने चख रखा था... कॉलेज में अपने इसी नशे की वजह से न जाने कितनी बार चुदी थी वो... और हासिल ब्बहोत कुछ किया था उसने, सब अपने दिमाग और हुस्न से... कब दिमाग का प्रयोग करना है और कब अपने हुस्न का... ये मालती अच्छी तरह जानती थी!
अभी अभी संभली हुई जिन्दगी में वो अभी कोई रिस्क लेना नहीं चाहती थी... कोई भी डिसीजन लेने से पहले उसने ठाकुर की सलाह लेना ठीक समझा... इसी लिए उसने रात में 11.30 बजे ठाकुर को फोन मिलाया...
ठाकुर ने फोन उठाया....
“हाँ बोल मेरी जान....”
“उम्म्म.... कैसे हैं आप....” मालती ने सेक्सी आवाज में रिप्लाई किया
“इतनी रात में फोन करके पूछ रही है कैसा हूँ...जान लंड तड़प रहा है तेरे होंठो की नरम मसाज के लिए...”
“ओहो... आपको तो हमेशा बस.....” मालती ने शिकायती अंदाज में कहा
“और वहां मामला शांत हुआ या नहीं? विधायक जी जादा नाराज तो नहीं हो रहे थे?” ठाकुर ने प्यार से पूछा...
“अरे नहीं नहीं.... वो तो उनका वो आदमी जो आया था क्या नाम था उसका... हाँ अफरोज़.. वो अकडू था... विधायक जी तो आराम से बात कर रहे थे... और फिर मैंने माफ़ी भी तो मांग ली उनसे....”
“फिर ठीक है... वरना साली आज तो तूने फालतू का नुक्सान करा दिया... सजा तो मिलेगी तुझे... मिल तू अगली बार..”
“ओह ठाकुर जी.... मैं भी कब से तड़प रही हू मिलने को...बिस्तर पे बहोत मिस करती हूँ आपको”
“अच्छा......”
“जी हाँ ...”
“वैसे तू साली बिना लंड के ज़िंदा कैसे रहती होगी... कहीं.... मेरी पीठ पीछे....??”
“छी-छी... मर जावां मै.... आप ऐसा सोच भी कैसे सकते हैं...आपकी हूँ मैं सिर्फ... और मेरी फुद्दी पे भी सिर्फ आपका हक है...”
“हाँ मेरी रांड.... सोचना भी मत ऐसा करने का... वरना साली भरे बाजार में चुद्वाऊंगा जंगली सांड से...”
“हीही.... सजा देने की बात कर रहे हैं या मजा....”
“हाहा... रांड साली.... कित्ती बड़ी वाली है तू...”
“चलिए न... बड़ा तो आपका है... मैं तो बस...”
“हाहाहा.... साली..... वैसे कोई दिक्कत तो नहीं है न तुझे वहाँ?”
“नहीं नहीं.... और फिर आप हैं न दिक्कत से बचाने के लिए...”
“हा..जानेमन... मैं तो हूँ ही... वैसे तू होटल के काम में अपना फिजूल का दिमाग मत लगाया कर... वहां स्टाफ सब संभाल लेगा... ख़ास ट्रेंड लोग हैं काम के लिए...तू बस ओफ्फिस में बैठा कर और आराम करा कर.”
“जी समझ गई... वो अकाउंटेंट ने मुझे बोला था आज सुबह पैसो के लिए... वो तो मैं भी बेवजह उलझ गई..”
“हाँ हाँ... अब ठीक है... वैसे दुबारा ऐसी गलती मत करना...”
“जी नहीं होगी... पिंकी प्रोमिस”
“हाहा... पिंकी प्रोमिस... साली.... तेरी पिंकी जब मेरा कालू चोदेगा न... तब पता चलेगा तुझे”
“आग मत लगाइए ....”
“हाहा....” ठाकुर हंसा
“वैसे कितना अच्छा होता अगर आप विधायक होते...”
“अरे मेरी जान... मैं क्या किसी विधायक से कम हूँ”...” ठाकुर ने धमक के साथ कहा!
“उम्म्म.... वैसे मैं सोच रही थी कि पॉलिटिक्स ज्वाइन कर लूं... थोड़ी सोशल सर्विस ही हो जायेगी इसी बहाने..”
“हाहा.. वैसे आइडिया बुरा नहीं है... पर साली... अगर तू पॉलिटिक्स ज्वाइन कर ली तो मेरा होटल कौन संभालेगा?”
“ओहो... ठाकुर जी... वैसे भी मैं दिन भर यहाँ बैठी बैठी बोर होती रहती हूँ... और फिर आपका होटल संभालने के लिए आपके वो.. ट्रेंड एम्प्लोयी हैं न...” मालती ने शिकायत करते हुए कहा...
“अरे तू सीरियस है क्या...?”
“और क्या मजाक कर रही हूँ ?”
“साली.... रांड... वैसे तू परफेक्ट है पॉलिटिक्स के लिए... बेबस विधवा नारी.... हाहा..”
“ओहो... आप भी न... आपको तो हर समय मजाक सूझता है..”
“साली मजाक नहीं... तेरी औकात बता रहा हूँ...औकात! दो टके की है नइ है... पॉलिटिक्स में जायेगी... साली तेरा काला चिट्ठा जनता को पता चलेगा तो पता है न... क्या होगा.... साली कहीं की नहीं रहेगी...” ठाकुर ने हनक के साथ एक सांस में मालती को हड़काते हुए कहा...
“उम्म्म.... किसे पता है मेरा काला चिठा? आपको... और वो क्या केवल मेरा काला चिट्ठा है? आपका नहीं? हाँ सारा दोष औरत का ही तो होता है... मैंने ही आपको नहीं रोका था... अपने पेटीकोट का नारा खीचते वक्त!”
“जवान लड़ा रही है साली.... दो टके की रांड.... भूल गई... तू... साली... भूल गई? अगर मैं न होता तो चुद रही होती अभी किसी रंडी खाने में.... रमीज के दोस्तों से...”
मालती को अपनी औकात और मजबूरियां याद आने में जादा देर नहीं लगी.... और उसने अपना बर्ताव थोड़ा नरम किया...
“उम्म्म... श......” मालती सुबकने लगी..... आँख से आंसू आ गए उसके....
“रो क्यों रही है.... मार खाएगी क्या? भेजूं अभी चोदने के लिए किसी को? साली रोना बंद कर.... रांड है तू मेरी... और मेरी रंडियां रोती नहीं..”
“उम्म्म.... अच्छा जी नहीं रो रही....”
“साली...”
“वो मैं तो ये बोल रही थी... कि अगर मैं पोलिटिक्स ज्वाइन करती हूँ तो उससे आपका ही फायदा होगा... और फिर विधायक जी ने खुद मुझे इनवाईट किया है पॉलिटिक्स ज्वाइन करने के लिए”
“ठरकी है वो एक नंबर का...”
“आप भी तो हो”
“हाहा... साली.... चल ठीक है... सोजा अब... कल बताता हूँ मैं तुझे!”
और फिर ठाकुर ने फोन काट दिया...
मालती के पॉलिटिक्स में जाने से ठाकुर को अपने फायदे साफ़ दिख रहे थे... बस उसे डर था कि कहीं चिड़िया पिंजड़े से निकल न जाए... पर वो भी पक्का खिलाड़ी था... मालती जैसी 2-4 और पाल रखीं थी उसने... और फिर ठाकुर जानता था कि चिड़िया भी पिंजड़े से निकलने के पहले 10 बार सोंचेगी!



 आज सुबह से ही मालती को ठाकुर के फोन का इंतज़ार था.... उसे इंतज़ार था ठाकुर के निर्णय का... ठाकुर को पता था कि हुनर और हुस्न.. दोनों मामलों में मालती का कोई जवाब नहीं... और अब मालती खुद को ठाकुर की रखैल मान ही चुकी थी तो उसे भी उसके पॉलिटिक्स के प्रति झुकाव से कोई दिक्कत नहीं थी... और फिर मालती के पॉलिटिक्स ज्वाइन करने से फायदा भी तो ठाकुर का ही था...
और फिर परमीशन मांग के मालती ने ठाकुर का दिल और विश्वास दोनों जीत लिए थे...
ठाकुर ने मालती को फोन किया और समझाते हुए उसे इजाज़त दे दी... और साथ में एक दो मर्दानगी भरे वादे भी! मालती बहोत खुश थी... मानो उसे उसकी जिन्दगी मिल गई हो... चेहरे की चमक देखते ही बन रही थी! उसे समझ नहीं आ रहा था कि ठाकुर का कैसे शुक्रिया करे!
उधर दूसरी ओर उसकी बेटी मानसी, उसकी जवानी का ताला भी राका ने तोड़ दिया था... वो राका की बाहों में कब सो गई उसे खुद पता नहीं चला.... सुबह उसने फुटबाल मैच में राका का स्टैमिना देखा था... और अब वो स्टेमिना उसने अपनी चूत में महसूस किया था... अपने मुह में महसूस किया था... उसके लंड की नसों को उसने अपने कोमल लिप्स से महसूस किया था.... राका तो मानो जन्नत में था... एक पैर उसने मानसी की जांघो के बीच डाल रखा था और उसकी एक बांह मानसी को अपने सीने से जकड़े हुए थी.... दोनों बेसुध एक दूसरे की गर्मी का आनंद लेते हुए सो रहे थे... बीच में मानसी की आँख खुली भी... पर खुद को राका के जिस्म से लिपटा पा कर फिर से उसी पोजीशन में कोज़ी हो गई... दोनों जब सांस लेते तो मानसी के बूब्स दब जाते.... और फिर दोनों एक दूसरे पे अपनी गरम साँसे छोड़ देते... मानसी पहली बार किसी मर्द के साथ सो रही थी...
रिषभ शाम को वापस आया... उसने अपनी चाबी से फ्लैट का लॉक खोला और अन्दर आ गया..... ड्राइंग रूम में लड़की के कपड़े बिखरे देख कर उसकी आँखे चमक उठीं... उसने वहां पड़ी मानसी की ड्रेस को उठाया और अपनी नाक के पास ले जा कर उसे सूंघा... जसप्रीत... ओह... तो आज जस्सो रानी के अकेले अकेले मजे ले रहा है साला...(मानसी ने भी वही परफ्यूम लगा रखा था जो जस्सो लगाती थी)! वो भी कम हरामी नहीं था... तुरंत बेडरूम में जा घुसा.. और बेड पर कूद गया... और राका को मानसी के ऊपर से हटाया.... मानसी तो पहले से जग रही थी.... वो रिषभ को बेड पे देख के चीख पड़ी...... “आआआआआआउ...... heeyyyyyyyyy......whoo are yoo...... ...” और चिल्लाते हुए राका के पीछे हो गई और चादर अपने ऊपर खींच ली!
“साले तू..... नॉक नहीं कर सकता था.... बाहर निकल अभी..... यार...” राका थोड़ा गुस्से में बोला...
“चिल्ल यार... मेरे को लगा कि....”
“साले रिषभ.... तू भी न....”
मानसी ने अपना चेहरा राका के पीछे छुपा रखा था.... रिषभ ने इशारों में राका से पूछा...”कौन है”... और राका ने भी उसे इशारों में ही समझा दिया.... और फिर रिषभ “सॉरी” बोलता हुआ रूम से निकल गया... और रूम का डोर भी लगा गया...!
रिषभ के जाते ही मानसी ने अपना सर राका के सीने में छुपा लिया.....
“इट्स ओके डार्लिंग... बेस्ट फ्रेंड है मेरा वो.... आई होप तुम्हे बुरा नहीं लगा होगा...” राका ने प्यार से मानसी की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए कहा...
“बुरा???..... अरे डर गई थी मैं तो.... डरा दिया था तुम्हारे इस ‘बेस्टफ्रेंड’ ने मुझे...” मानसी थोड़ा नाटक करती हुई बोली...
“अरे मेरी जान... मेरे होते हुए डरने की बात...? अरे जान ले लूँगा तुझे डराने वाले की..” राका ने मानसी को अपनी ओर खींचते हुए कहा...
इस समय राका का लंड मानसी की बाईं जांघ से दब रहा था... और अब उसमे फिर से जान आने लगी थी...मानसी को उसकी चुभन महसूस होते ही शरम आ गई और उसने अपनी नज़रे नीचे झुका ली...राका के तुरंत पोजीशन बदली... अब मानसी अब उसके नीचे थी... वो उसके कंधो को... गले को... कान... चेहरा..हर जजः चूम रहा था... और मानसी किसी कमसिन कलि की तरह बिस्तर पर लेटी अपने आशिक को सब करने दे रही थी...
“लोलीपॉप खाएगी....?” राका मानसी के कान में फुसफुसाया...
मानसी शर्मा गई... और हलके से मुस्कुराई.... और राका के गाल पर एक चुम्मी दे दी...
राका ने फिर पोजीशन बदली.... अब वो नीचे था और मानसी ऊपर... मानसी का मुह उसने दोनों हाथो से पकड़ कर अपने लंड के पास झुका दिया.... मानसी ने उसके लंड को अपनी जीभ बाहर निकाल कर चाटा... मानसी की इस हरकत ने राका के लंड की हालत खराब कर दी.... काला कोबरा अब फनफना रहा था... पूरे साढ़े सात इंच मानसी बार बार अपनी जीभ से नाप रही थी.... नीचे अन्डू तक जीभ फिराती हुई ले जाती और फिर ऊपर लंड के मुकुट तक आती... राका के लंड की फोरस्किन सरक चुकी थी... उसके लंड का अगला भाग छिली हुई लीची जैसे चमक रहा था... और बाकी लंड काला कठोर! राका की हालत खराब हो रही थी... और मानसी की जुल्फें.... जो राका के पेट और जांघ पर बार बार आ रही थीं... वो उसकी हालत और खराब कर रही थी... अबकी बार मानसी के कोमल होंटों ने राका की लीची को अपने चंगुल में लिया तो उसके मुह से आह निकल गई... राका की आह ने मानसी के चेहरे पे मुस्कान बिखेर दी... उसकी जीभ अब फिर से राका के अन्डुओं को टीज़ कर रही थी... राका की बेचैनी उसे जवाब दे रही थी...
राका ने फिर पोजीशन बदली... अब वो मानसी के पीछे था... दोनों बेड पे लेटे थे.... मानसी राका के आगे थी...राका के बदन की गिरफ्त में.... राका दोनों हाथो से उसके बूब्स दबा रहा था... और अपना लंड उसकी गांड की दरार में फंसा कर हौले हौले से धक्के लगा रहा था.... “उम्म्म.... प्लीज्ज़... पीछे नहीं....” मानसी ने विनती की... राका मुस्कुराया और थोड़ा नीचे सरकटे हुए पीछे से ही लंड मानसी की चूत पे सटा दिया.... “जानू... आगे कर लूं??” राका मानसी को टीज़ करते हुए बोला... मानसी ने जैसे ही कुछ बोलने के लिए अपना मुह खोला...राका ने अपना राजकुमार मानसी की राजकुमारी के अन्दर ठांस दिया.... मानसी का मुह खुला का खुला रह गया... जैसे ही मानसी ने सांस ली... राका ने दूसरा झटका लगाया... राका ने मानसी को दबा रखा था अपने जिस्म से.... पूरा लंड अब अन्दर था..राका हौले हौले... प्यार से स्ट्रोक मार रहा था... मानसी भी प्यार भरी आंहे भर रही थी... मानसी को मस्ती में देख कर राका ने अपने स्ट्रोक्स की रफ़्तार बढ़ा दी.... अब वो मानसी की डीपली घुसेड़ के ले रहा था... और मानसी भी अपनी कमर हिला हिला के उसका ले रही थी.... सारे कमरे में मानसी की सिसकियाँ गूँज रही थी... और हिलते बेड की आवाज माहौल को और भी रंगीन कर रही थी!
राका ने उसे इसी पोजीशन में 20 मिनट तक चोदा... और फिर मानसी के अन्दर ही अपना प्रेमरस छोड़ दिया... मानसी भी झड गई...!
दोनों एक बार फिर निढाल होकर एक दूसरे की बाहों में पड़े थे...





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