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Sunday, July 20, 2014

FUN-MAZA-MASTI दीदी की ब्लू फिल्म

FUN-MAZA-MASTI

 दीदी की ब्लू फिल्म

रात को अचानक मेरी नींद खुल गई।
सन्नाटे में किसी के पग चापों की हल्की-हल्की आवाज आ रही थी।
जैसे छत पर कोई दबे पाँव चल रहा हो।
इस बारे में सोच कर ही मेरे शरीर के सारे रोएं खड़े होते चले गये।
मैंने धीरे से अपनी हाँकी उठाई और दबे पाँव सीढ़ियों के पास खड़ा होकर किसी के उतरने का इंतजार करने लगा।
ठीक तभी मेरा दिल जोरों से धड़का,
'ये दीदी इधर क्यों आ रहीं हैं?'
मैंने खुद को अंधेरे में छुपाते हुए देखा कि मेरी बड़ी दीदी, इधर ही दबे पाँव चली आ रहीं थीं।
उनके हाथ में एक टार्च भी थी।
सीढ़ियो के पास आकर उन्होंने टार्च को दो बार ऊपर की तरफ करके चमकाया।
फिर मैंने किसी को सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए देखा,
'अरे ये तो हमारे पड़ोसी अंकल हैं!!'
नीचे आते ही दीदी ने उनका हाथ पकड़ा और दबे पाँव अपने कमरे में लेकर चली गई।
मेरी हालत ऐसी हो गई थी मानों मुझे किसी साँप ने सूँघ लिया हो।
'मेरी नाक के नीचे चक्कर चलता रहा और मुझे पता ही नहीं चला।'
इस वक्त मेरा दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे रेलगाड़ी का इंजन।
'अब क्या करूं?'
ये वो सवाल था जो मेरे दिमाग में फन काढ़े फुफकार रहा था।
'मैं साला इतने दिनों से मूठ मार कर काम चला रहा था और यहाँ मेरी सगी बहन की बुर से कोई और मजा ले रहा है।'
इतना सोचते ही मेरी सुलग गई।
'साली छिनार......मुझसे कहा होता तो बाहर का आदमी घर के अंदर आकर तो अपनी गंदगी नहीं फैलाता....साला मैं ही चूतिया हूँ, किसी दिन खुद ही मुझे दीदी को सोने के बहाने चोद देना चाहिए था। कम से कम बाहर मुँह तो न मारती।.....वैसे भी सेक्स बाँड ने कामोंनियाँ में लिखा है कि चूत की पहरेदारी कभी भी न तो कोई कर सका है ना ही कोई कर पायेगा। सिर्फ एक ही तरीका है चूत को काबू में करने का....कस कर चोद कर सुजा दो...गर्म पानी से सेकती बैठी रहेंगी।'
जब मेरा उद्गार शान्त हुआ तब मेरे भीतर अंदर का नजारा देखने की लालसा जागी।
'पता नहीं अंदर क्या चल रहा होगा?'
अंदर झाँकने के लिए मेरे पास एक बढ़िया साधन था।
दरवाजे के ऊपर शीशे का रोशनदान लगा हुआ था।
क्योंकि रात में दो-तीन बार मैं अपने लैपटॉप पर ब्लू फिल्म देखकर सड़का मारता था।
लेकिन आज तो सच्ची ब्लू फिल्म देखने को मिलने वाली थी।
मेरा सारा गुस्सा अब उत्तेजना में बदल चुका था।
मैं जल्दी से अपने कमरे में गया और एक स्टूल ले आया।
फिर धीरे से स्टूल पर खड़े होकर भीतर की ओर देखा।
साला दिल तो ऐसे उछल रहा था मानों मुँह से बाहर ही निकल जायेगा।
लेकिन ये क्या?
'साले दोनों गये कहाँ? क्या बाथरूम में चोदाई कर रहे हैं?'
मैं साँस रोके इंतजार करता रहा।
अंदर ही अंदर मैं दोनों को गालियाँ बके जा रहा था।
'अरे मादरचोदों कहाँ गये?'
ठीक तभी मैंने अंकल को देखा।
'साला ये तो शक्ल से ही बेटी चोद लग रहा है....जरूर अपनी बेटी को भी चोदता होगा। साला कितना लकचोद है इस उमर में भी मेरी हिरोइन जैसी दीदी के साथ रंगरलियाँ मना रहा है?...साला भड़वा'
मैंने गौर से कमरे में अपनी दीदी को देखने की कोशिश की।
कमरे में बहुत सारे शीशे लगे हुए थे।
लेकिन मुझे किसी भी शीशे में दीदी नजर नहीं आई।
'साली रंडी जरूर बाथरूम में अपनी चूत को चोदवाने के लिए चिकना कर रही होगी।....हरामजादी।...बंदूक होती तो साला अभी दोनों को गोली मार देता।'
तभी मैंने अंकल को कुछ हरकत करते हुए देखा।
उन्होंने अपने जेब से कोई डियो जैसी चीज निकाली और जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर अपने खड़े लंड पर उसका स्प्रे किया और तेजी से उसे अपने कपड़े की जेब में छिपा दिया-
'मादर चोद स्प्रे करके मेरी दीदी को चोदेगा ताकि इसला जल्दी झड़े ना.....हरामी साला....'
तभी मैंने अंकल को कुछ कहते सुना-
"कितनी देर लगाओगी......"
"बस आ रही हूँ.....रुको न प्लीज..."-बाथरूम के अंदर से मेरी दीदी की इठलाती हुई आवाज आई।
तभी मैंने अंकल के हाथ में एक कैमरा देखा।
"साला हरामी मेरी दीदी की ब्लू फिल्म बनायेगा......बना ले बेटा लेकिन देख नहीं पायेगा।"
लेकिन जब दीदी बाथरूम से बाहर निकली तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया-
"साली रंडी....चूत की भोषड़ी.....रांड़ की गाँड़.....ये तो बहन चोद एकदम कालगर्ल बनी हुई है...."
इसके बाद मैंने जो कुछ भी देखा उसे देखने के लिए आप लोग नीचे दिए गये लिंक से जुड़े वीडियो पर देख सकते हैं-

पड़ोसी वाले अंकल ने बनाई मेरी दीदी की ब्लू फिल्म
ये वीडियो अंकल ने अपने कैमरे से रिकार्ड किया था। लेकिन ये वीडियो मेरे हाथ में कैसे लगा उसे मैं नीचे बता रहा हूँ,
जब अंकल ने अपना वीर्य मेरी दीदी की बुर में डाल उस वक्त मैं भी अपना लौड़ा साट रहा था और तब तक मेरा भी निकल चुका था।
मैंने ठीक उसी वक्त अपने पैर से दरवाजे पर लात मारी।
'भड़ाकSSSS'
"कौन है?"-दीदी की डरी हुई आवाज सुनाई पड़ी।
मैं रोशनदान से लगातार भीतर का नजारा देख रहा था।
"दीदी जल्दी से दरवाजा खोलो.....मुझे लगता है घर में कोई चोर घुस आया है.."
तब मैंने अंकल की गाँड़ फटते हुए देखी।
आनन-फानन उसने अपने कपड़े पहने कैमरा इस हड़बड़ी में उसके हाथ से छूट कर कहीं गिर गया था।
लेकिन मेरी नजरें लगातार कैमरे पर हीं थी।
कैमरा उसके हाथों से छूटकर बेड के नीचे चला गया था।
अंकल ने पीछे की तरफ खुलने वाली खिड़की से बाहर की तरफ छलांग लगा दी।
इधर मैं दुबारा दरवाजे पर लात मारी-
"दीदी जल्दी खोलो...मुझे डर लग रहा है"
"रुको खोल रही हूँ..."
दीदी ने भी जल्दी से एक नाइटी पहन ली।
मैंने फुर्ती से स्टूल को उठाया और उसे वापस अपने कमरे में रख आया।
तब तक दीदी दरवाजा खोल चुकी थी।
"क्या हुआ?....कयों शोर मचा रहा है?"
मैंने घबराने की एक्टिंग करते हुए कहा-
"दीदी मैंने एक सपना देखा जैसे हमारे घर में कोई चोर घुस आया है।"
"तो इसमें चिल्लाने की क्या जरूरत थी..."-दीदी चिढ़ते हुए बोली।
मन तो कर रहा था कि चिल्लाकर बोल दूँ साली कमरे में बूढ़े से बुर चुदवा रहीं थी। लेकिन मेरा लक्ष्य था कैमरे को हासिल करना।
फिर किसी तरह मैंने दीदी की नजरों से बचाकर उस कैमरे को अपने कब्जे में कर लिया।
तो ये थी वो कहानी जो अंकल के साथ हुई थी उसके बाद मैंने दीदी को कैसे ब्लैकमेल किया? और कैसे उसका फायदा उठाया? ये अगले भाग में।
तब तक के लिए अलविदा।

















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