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Monday, May 12, 2014

FUN-MAZA-MASTI वासना का नंगा नाच--4

FUN-MAZA-MASTI

 वासना का नंगा नाच--4

 अब आगे

‘ जो हो चुका है, वो हो चुका है, काश मुझे पता होता वो कहाँ गई है , और वापस आएगी या नही’
सोनी का दिल उछल पड़ा ये जान कर की ये मोनी का दोस्त था, शायद उसका प्रेमी भी. मोनी की दोस्ती हमेशा इंटिमेट हुआ करती थी. खैर जो भी इनका आपस में रिश्ता था , ये तो सॉफ था की सेमुअल, कितना भी चार्मिंग हो, उसका कोई हाथ नही था मोनी के गायब होने में.

‘मिस……..?’

‘ मुझे सोनी कह कर बुलाओ, मुझे लगता है जैसे मैं तुम्हें जानती हूँ – अपनी बहन के द्वारा’

‘ बिल्कुल सोनी, मैं सोच रहा था … क्या तुम रात को यहीं रुक रही हो?’

‘हां’

‘ अगर तुम रात को मेरे साथ मेरे विला में डिन्नर करो तो मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत समझूंगा’

सोनी के जिस्म में एक ठंडी सिहरन फैलती चली गई, जिसका खुले दरवाजे से आती हुई ठंडी हवा से कोई लेना नही था. सेमुअल, वाक्य में एक आकर्षक आदमी था, चोडी छाती, उभरी हुई सकत मास्सपेशियाँ, भारी सेक्सी आवाज़, उसके कामुक होंठ सामने वाले के होंठों को अपनी और खींचते हैं चुंबन के लिए.

उसकी आँखों में जो चमक थी वो सॉफ सॉफ उसका रुझाव सोनी की तरफ दिखा रही थी.

अगर वो उसके साथ डिन्नर के लिए उसके विला गई, कौन कह सकता है क्या दोनो के बीच हो जाएगा?
लेकिन रूको……ये आदमी मोनी का दोस्त है, नही उसका प्रेमी. ये ठीक नही होगा. उसे नही जाना चाहिए, बिल्कुल नही.

‘वेल……’वो मुस्कुराइ , उत्तेजना की सिहरन ने उसे हिला दिया और वो खुद को बोलते हुए सुनी ‘ शुक्रिया सेमुअल, मुझे बहुत खुशी होगी’

सेमुअल का विला वलाज़ूर के एक दम कोने में था ऑलिव और नीम्बो के पेड़ों से घिरा हुआ चारों और द्रखतों से भरे हुए पहाड़.

सोनी ने ऐसा विला आज तक नही देखा था, किसी मॅगज़ीन के कवर पे भी नही. वो किसी ल्ग्ज़ुरी होटेल की तरहा फैला हुआ लग रहा था न की किसी एक आदमी का घर. एक लंबी ड्राइववे पे घूमते हुए वो पहुँचे और उसने कार विला के सामने रोक दी.

‘मेरे पास और भी कार हैं पर इसमे कुछ रोमॅन्स का मज़ा जिंदगी में जुड़ जाता है, तुम क्या सोचती हो?’

‘मैं……हाँ’ सोनी को लगा जैसे उसकी ज़ुबान पे ताला लग गया हो, वो इस हालत में नही थी की मोनी के बारे में कुछ सवाल पूछ सके. बार में उसने उसे खूब शेम्पेन पिलाई थी, जो सोनी के लिए ल्ग्ज़ुरी थी, पर सेमुअल के लिए जिंदगी की ज़रूरत.

सेमुअल ने जब उसका दरवाजा खोला तो उसे अपना सर हल्का लग रहा था ऐसा नही के नशा चॅड गया हो, वो कार से बाहर निकली और हल्के सरूर में थी, सारे संकोच वो भुला चुकी थी ………और विशाल.

एक काले सूट में बट्लर इंतज़ार कर रहा था उनके कोट लेने के लिए और उन्हें सिट्टिंग रूम में ले जाने के लिए.सिट्टिंग रूम में दुनिया की नायाब आर्ट कलेक्षन थी. कोई डाइनिंग टेबल नही थी.. दीवार के साथ एक छोटी साइड टेबल थी सफेद कपड़े से ढकी हुई और चाँदी की चमकती हुई कट्लरी.

‘प्लीज़ सोनी, आराम से बी कंफर्टेब्ल. क्या तुम ड्रिंक लेना चाहोगी जब तक जोसेफ डिन्नर ले के आता है.?’
‘नही मुझे नही लगता मुझे और लेनी चाहिए, इतनी पहले लेने……..’

‘नॉनसेन्स, शेम्पेन कोई मना करता है, इससे कोई नशा नही होता’ वो टेबल के पास गया और बरफ में लगी हुई बॉटल उठा कर उसका कॉर्क खोलने लगा ---- कोई शक़ नही – जोसेफ को तेलिपेथि द्वारा मेसेज मिल चुका होगा बॉटल को बरफ में लगाने के लिए.

‘ओह सेमुअल, नही सच मुझे नही लेनी चाहिए, ज़यादा शेम्पेन. मेरे ख़याल से मैं पहले ही बहुत ले चुकी हूँ.

उसने उसकी आँखों में देखा और उसे अचानक ऐसा लगा की वो खो चुकी है, तैरती जा रही वासना के समुद्र में’

‘शेम्पेन से कभी किसी का दिल नही भरता, और ना ही प्यार भारी रातों से एक खूबसूरत लड़की के साथ’

उसके शब्द एक तेज़ सर्जिकल छुरी की तरहा उसके दिल को चीर कर , बेरहमी से देख रहे थे, ढूंड रहे उसके अंदर छुपी वासना को और उसे नंगा कर बाहर निकाल रहे थे.

वो महसूस कर रही थी की जो भी थोड़ी बहुत प्रतिरोधिक क्षमता उसके अंदर बची थी वो हर पल कमजोर पड़ती जा रही थी.
उसने अपने आप को समेटने की कोशिश करी और अपनी आवाज़ धीमी और शांत कर ली.

‘क्या ये तुम्हारी जिंदगी का सिधान्त है सेमुअल?’

वो हस पड़ा, लेकिन उसके पीछे एक गहराई थी संजीदगी की, आनंद की पर, उसकी ब्लू-ग्रे आँखें शनील की तरहा नर्म , और बहुत, बहुत अपनी तरफ खींचती हुई.

‘जिंदगी के लिए, प्यार के लिए …………सबके लिए, हर चीज़ के लिए., मैं जिंदगी को खुल के पूरा जीना चाहता हूँ और मज़े लेने चाहता हूँ हर अच्छी चीज़ के और जैसे ये शॅंपेन उधारण के लिए सबसे बाड़िया है जो पैसा खरीद सकता है.और तुम, मेरी प्यारी सोनी, अत्यधिक सुंदर औरत हो.’

इस बार सोनी ने उसकी आँखों में गौर से देखा, उसे लगा उसके अंदर उत्तेजना फूट के बाहर आ रही है जैसे पानी किसी डॅम से फूट कर निकलता है, उसका प्रतिरोध टूट रहा था, मजबूर हो रही थी वो मानने के लिए, उसका जिस्म जवाब दे रहा था पूरे ज़ोर से खुशी के साथ सेमुअल को.


कॉर्क के निकलते ही ज़ोर की आवाज़ हुई और शॅंपेन बॉटल में से उठने लगी एक झाग की तरहा, जिससे सेमुअल ने कारीगरी की तरहा ग्लास में डालना शुरू कर दिया और उपर तक भर कर सोनी को पकड़ा दिया.
सोनी ने अब कोई इनकार नही किया सेमुअल ठीक था- शॅंपेन बहुत ही बाड़िया थी और सेमुअल का साथ उस से भी ज़यादा अच्छा था. कोई फ़ायदा नही था, अपनी उत्तेजना को रोकने का, उसकी झांघों के अंदर खुजली मच चुकी थी,उसकी चूत में गीलापन आ चुका था, वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी और अपनी झांघें आपस में भींच रही थी.
सेमुअल ने शॅंपेन का एक सीप लिया , सोनी की तरफ कुछ सोचते हुए देखने लगा.

‘कितनी अजीब बात है. तुम बिल्कुल अपनी बहन जैसी दिखती हो………….पर कितनी अलग हो उस से’
सोनी मुस्कुरा उठी.

मनप्रीत बहुत ही तेज़ है, मैं तो बिल्कुल सीधी सॉदी हूँ. एक आम लड़की की तरहा’

‘सच में ?’ सेमुएल ने संशय करते हुए बोहेन उठाई. ‘ये सच है, शायद उपर से तुम बहुत शांत दिखती हो…..खामोशी का जमा पहने हुए अपनी बहन के मुक़ाबले में. बहुत परिपक्व (मेच्यूर) भी हो.
लेकिन मैं तुम्हारे अंदर एक बहुत बड़े जनूंन को महसूस कर सकता हूँ. तुम एक बहुत ही कामुक लड़की हो सोनलप्रीत कौर’

वो उसे घूर्ने लगी,स्तब्ध और उत्तेजित उसके शब्दों से. किसी आदमी ने आज तक उसके साथ ऐसे बात नही करी थी और वो सेमुएल से अभी मिली थी. वो बिल्कुल अजनबी थे – और वो ये भी नही जानती थी की वो उसे पसंद भी करती है या नही.लेकिन सोनी ने जो उसे कहा था वो भी सच था – उसे लगता था जैसे वो उसे जानती है, सिर्फ़ उस दोस्ती के कारण जो उसकी मोनी के साथ थी.

‘तुम बहुत नरम दिल हो’ कहते हुए उसकी आवाज़ काँपने लगी क्यूंकी सेमुएल ने अपना हाथ उसके हाथ पे रख दिया था.

‘मैं कभी नरम दिल नही होता हूँ. नरम दिल होने का मतलब है की तुम दगाबाज़ हो. मैं सिर्फ़ वो कह रहा हूँ जो मैं देख सकता हूँ’ कहते हुए वो बाहर हरे भरे बाग पे नज़रें घुमाने लगा, नर्म गहरा हरा जो ढलते हुए सूरज की रोशनी में चमक सा रहा था. ‘ क्या तुम डिन्नर से पहले मेरे साथ बाग में चलना पसंद करोगी?’

उसके जवाब का इंतेज़ार किए बिना, उसने एक छुपा हुआ बटन दबाया, और शीशे के दरवाजे बिना आवाज़ किए एक रोलर पे खुलते चले गये, भीनी महक वाली हवा अंदर आने लगी. वो आगे बड़ा और उसका हाथ थाम कर उसे बाहर ले चला, जैसे वो कोई छोटी बच्ची हो. उसने कभी इतना अजीब सा महसूस नही किया था एक आदमी के साथ, क्यूंकी वो अपनी टीनेज में वर्जिन ही रही. जब वो ** साल की थी तो उसके राइडिंग सिखाने वाले ने उसे उत्तेजित किया था पर अंत में मोनी थी जिसने अपना कोमरया भंग करवा लिया था. मोनी के लिए कुँवारापन एक रुकावट थी मज़े लेने के लिए.

सेमुएल में कुछ खास बात थी जो उसे अपनी यादों में ले गई और वो मोनी के पहले प्रेमी के बारे में सोचने लगी. शायद इसमे भी वोही गुण हैं जो मोनी इसकी तरफ खीची चली गई और अब वो खुद भी उसके लिए उत्तेजित होती जा रही है. या शायद वो इन हालात को लेकर कुछ ज़यादा ही सोच रही थी.

शायद सेमुएल उसे इसलिए मस्का मार रहा था, क्यूंकी वो मोनी के गायब होने में खुद को कसूरवार समझता था. या फिर वो वाक्य में उसे चाहता था. और जैसे ही उसने सेमुएल की आँखों में देखा, कितनी चमक के साथ वो उसकी चाहत और इच्छा को बता रही थी.
उसकी आँखों में झलकती हुई अपने लिए तड़प,उसका हल्के से उसके बूब्स की स्तेह पर हाथ फिरना, सोनी के जिस्म में नशे को बड़ाने लगा जो शराब से भी ज़यादा था. सोनी बातों को दूसरी तरफ मोड़ने के लिए सोचने लगी क्यूंकी सोनी भी चाहने लगी थी की वो उसे छूले.

‘तुम्हारा घर बहुत अच्छा है सेमुएल’

‘माई डियर, मैं कभी 100% से कम नही देता’ उसने सोनी की आँखों में देखते हुए कहा ‘ किसी भी काम में’
विला के गार्डन बहुत ही अच्छी तरहा रखे हुए थे, एक नज़ाकत की पहचान करा रहे थे.

‘चलो में तुम्हें अपने बाग की सबसे खूबसूरत जगह दिखाता हूँ’

एक कमान की तरहा बने हुए रास्ते पे चलते हुए वो एक जगह पहुँचे जो पत्तों और फूलों से ढका हुआ था और बाहर से नज़र नही आता अगर किसी को उस जगह के बारे में पता ना होता. वो अंदर चले गये और वहाँ बीच में एक तलाब बना हुआ था, जिसमे चमकीली चाँदी के रंग वाली मछलियाँ तेर रही थी. जब वो अपने पर फैलती तो सतरंगी इंद्रधनुष का आभास होता. एक छोटा फव्वारा और झरना तलाब के पानी को ताज़ा करता रहता. रोमन और ग्रीक की मूर्तियाँ वहाँ की शोभा बड़ा रही थी. उनकी मुद्राएँ संभोग की मुद्राएँ दिखा रही थी.  


‘ये सब मूर्तियाँ पॉंपीयियी से लाई गई हैं’ सेमुएल ने समझाया ‘तुम्हें मेरी कामुक आर्ट में रूचि से कोई आपत्ति तो नही?’
‘मैं….’
‘नही, माइ डियर सोनी, यक़ीनन तुम्हें कोई आपत्ति नही है. क्यूंकी तुम शेर करती हो बहन का प्यार अच्छी और कामुक चीज़ों में’ उसने सोनी का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचा. वो सोच रही थी की क्या वो उसके जिस्म में उठती हुई प्यास जो उसके दिल से निकल रही थी को महसूस कर रहा है.
‘ आओ मेरे साथ बैठो सोनी’
दोनो पत्थर के एक तराशे हुए बेंच पर बैठ गये, जो काफ़ी ठंडा था और समय के साथ उसपे कहीं कहीं काई जम गई थी.
सोनी का हाथ अभी भी उसके हाथ में था और सोनी की कोई इच्छा नही हो रही थी अपना हाथ वापस खींचने की.
वो यहाँ मोनी के बारे में सवाल करने आई थी, ना की उसके जाल में फस के चुदने के लिए.
लेकिन सेमुएल कोई आम आदमी नही था, था क्या?
वो बहुत ही सुंदर था, कोई भी लड़की उसकी तरफ खीची चली जाए, खास कर सोनी जैसे लड़की . लेकिन वो आगे नही बड़ना चाहती थी. नही .उसे आगे नही बड़ना था…………
‘मुझे मोनी के लिए दुख है और मैं तुम्हारी हर संभव मदद करूँगा उसे ढूँडने के लिए’
अचानक उसने सोनी के चेहरे को अपने हाथों में थामा और बड़े प्यार से उसके होंठों को चूम लिया. सोनी का जिस्म कांप उठा और वो पीछे हट गई जब की वो नही चाहती थी की ये किस टूटे, वो बड़ी शिदत से इस चुंबन को महसूस करना चाहती थी.
‘क्या तुम्हें मुझ से डर लग रहा है?’
सोनी ने ना में गर्दन हिलाई, जब की दिल ही दिल में उसे सेमुएल से थोड़ा डर लग रहा था.
‘डर नही, में खुद को मोनी की कसूरवार नही बनाना चाहती’
‘मैं समझा नही’
‘मेरी बहन. तुम और वो ……..’ वो सेमुएल के चेहरे पे जवाब ढूंड रही थी. ‘ थे ना?’
सेमुएल ने अपने हाथ उपर उठा कर अपनी झंघों पे गिरा दिए.
‘ये सच है हम दोनो ने एक बार चुदाई करी थी’ उसने जवाब दिया.
‘एक रात, बस एक रात लेकिन वो एक ग़लती थी सोनी. मोनी और मैं सिर्फ़ दोस्त थे, हमने इस बारे में बात भी करी, उसने मुझे बताया की वो समझती है. हम कभी प्रेमी नही थे, सोनी, जिस तरहा मैं और तुम हो सकते हैं’
उसने फिर सोनी को छुआ. उसका जिस्म बस छूने भर से काँपने लगा, हल्की सी छुअन भी उसके जिस्म में उत्तेजना का संचार कर देती.

‘सेमुएल…… प्लीज़ नही…….तुम्हें नही …..’
‘लेकिन सोनी , मेरी जान, तुम जानती हो तुम मुझे पाना चाहती हो, उतना ही जितना मैं तुम्हें. जब मैने पहली बार तुम्हें देखा था, मुझे पता चल गया था,हम दोनो को नियती एक करेगी, एक खूबसूरत प्यार को आपस में बाँटने के लिए’
‘सेमुएल……ओह……’
सेमुएल ने उसे अपनी बाँहों में भर लिया और ज़ोर से अपने होंठ उसके होंठों से चिपका दिए, उसकी ज़ुबान सोनी के होंठों के बीच रास्ता ढूँडने लगी, जैसे कोई छोटा लंड अपनी ताक़त से अंदर घुस रहा हो. सोनी को ऐसे दमदार चुंबन का अहसास पहले कभी नही हुआ था – विशाल के साथ भी नही. उसने भी सेमुएल की तरहा उसे कभी नही चूमा था ना ही उसके चुंबनो में वो बात थी जो सेमुएल की है.
दोनो की ज़ुबाने आपस में मिली और एक दूसरे पे फिसलती चली गई, उनकी थूक आपस में घुलने लगी और शॅंपेन का स्वाद उस गीलेपन के अंदर दोनो को महसूस होने लगा. सेमुएल की भूख उसके लिए आश्चर्यजनक, डरावनी और मजेदार सब एक साथ थी और सोनी ने उसी वक़्त जवाब देना शुरू कर दिया, उसकी ज़ुबान सेमुएल के मुँह के अंदर घूमने लगी, उसके होंठ गीले हो चुके थे उनकी चाहत के असर से.
ये चुंबन चलता ही गया, चलता ही गया, ना जाने कितनी देर तक, जब दोनो के होंठ अलग हुए ना चाहते हुए भी बहुत ही धीमी गति से. सोनी की लाल लिपस्टिक ने अपना रास्ता सेमुएल के गाल तक बना लिया और एक छोटा सा धबभा उसके गाल पे चमक रहा था. सोनी ने अपनी ज़ुबान बाहर निकली और उसे चाट कर सॉफ करने लगी, सेमुएल के खुरदरे गाल का अहसास अपनी ज़ुबान पर पा कर एक अजीब सी सनसनी उसके जिस्म में ढोड गई. वो हाँफ रही थी, कभी तेज़ साँस लेती कभी धीमे.
सेमुएल ने उसकी उंगलियों को पकड़ लिया और अपने होंठों से लगा लिया, पहले हल्के हल्के चुंबन उंगलियों के टिप पर किए, फिर अपना मुँह खोल कर उन्हें अंदर फिसलने दिया, जीने वो चूसने, चाटने और हल्के हल्के काटने लगा. सोनी काँपने लगी एक अंजानी सी उत्तेजना का अहसास लेते हुए, पहली बार उसे पता चल रहा था की उसकी उंगलियाँ भी इतनी संवेदनशील हैं जो उसके जिस्म में उत्तेजना का संचार कर देती है.
आख़िर उसने उंगलियों को छोड़ा और उसके हाथ के तलवे पे चुंबन बरसाने लगा, उसकी उंगलियों से शुरू हो कर उसकी रिस्ट तक और बदते हुए उसकी बाजू तक.
सोनी कुछ नही बोल पा रही थी. सेमुएल ने जैसे उसके शब्द ही छीन लिए थे, अपने इस अहसास को बताने के लिए. सिर्फ़ उंगलियों के टिप पर एक चुंबन से ही उसने सोनी को काफ़ी उत्तेजित कर दिया था. अब वो जानती थी, की वो कुछ भी करेगी, कुछ भी, उस अहसास को पाने के लिए जब सेमुएल का लंड उसकी चूत की गहराइयों में उतरेगा, जिसने अपने होंठ खोलने शुरू कर दिए थे और बहुत ज़ोर से कुलबुला रही थी.
वो उसके कंधों पे पहुँचा और चुंबन बरसाने लगा साथ ही साथ उसके टॉप को नीचे सरकने लगा जो स्ट्रॅप के हटते ही उसकी बाजू पर दलक गया, और उसके गुलाबी उरोज़ झलकने लगे.



‘कितनी मोहक मासूमियत है तुम मे मेरी जान,’ सेमुएल फुसफुसाया. ‘मोनी एक फ्लर्ट है,जो आदमियों को अपने बस में करना चाहती है. लेकिन तुम सोनी, एक संवेदनशील बच्ची की तरहा हो जो औरत के जिस्म में है, भूखी है प्यार के लिए और फिर भी कितनी अछूती’
सोनी के जिस्म में खुशी की तरंगे उठ रही थी जब उसने उसे छुआ और उसकी ड्रेस का दूसरा स्ट्रॅप भी नीचे खिसका दिया,और उसके दाएँ कंधे को चूमने और चाटने लगा.
‘सेमुएल……ओह सेमुएल…..’ वो सिसक उठी, सेमुएल के बालों में अपनी उंगलियाँ फेरते हुए, उसके उदर में वासना हिलोरे लेने लगी. और सेमुएल ने उसका दया हाथ पकड़ा और नीचे लेता गया जब तक वो उसकी झंघों के बीच नही आ गया.
‘महसूस करो, तुमने मेरा क्या हाल कर दिया है. ये तुम्हारे लिए ही है. और ये तुम्हारे अंदर जाना चाहता है’
सोनी अपनी उंगलियाँ उसके पेंट के उपर से उसके लंड पर फिरने लगी. वो बहुत मोटा था और उसके हाथ में नही समा सकता था. मास की एक रोड जो किसी भी चूत को फैला के रख दे, चाहे वो कितनी भी गीली क्यूँ ना हो.
‘तुम्हारा लंड बहुत खूबसूरत है’ उसने खुद को फुसफुसते हुए सुना. शराब और वासना के दोहरे नशे से उसका सर घूम रहा था और उसे अपनी आवाज़ ही किसी और औरत की आवाज़ लग रही थी.
‘नही इतना खूबसूरत नही जीतने तुम्हारे उरोज़ हैं’ सेमुएल ने जवाब दिया. ‘ये बहुत ही सकत और भरे हुए हैं. क्या तुम मुझे इन्हें देखने दोगि?’
‘हन, ऑश हन प्लीज़……..’
उसने बहुत धीरे धीरे उसके टॉप को उतारा, जैसे संतरे के छिलके को बहुत आराम से अलग कर रहा हो और उसके जिस्म पे कहीं हाथ नही लगाया. सोनी ने अंदर ब्रा नही पहनी, उत्तेजना के कारण उसके निपल्स तन के खड़े हो चुके थे और चीख चीख कर चूमने का आग्रह कर रहे थे. पर कोई चुंबन नही आया. सेमुएल उन्हें देखता रहा , बस देखता रहा और अपनी आँखों की प्यास भुजाता रहा. सोनी के लिए इंतेज़ार असहनीय हो गया.
‘क्या मैं तुम्हारे उरोज़ छू सकता हूँ, सोनी?’ इस बार जवाब का इंतेज़ार किए बिना, उसने दोनो उरोज़ अपने हाथों में थाम लिए और उनका वजन लेने लगा जैसे किसी भारी फल का वजन जाँच रहा हो,उसके अंदर भरे रस को महसूस कर रहा हो.
‘तुम्हारे उरोज़ आश्चर्यजनक रूप से बहुत ही सुंदर हैं. कितने भरे हुए, कितने सख़्त, कितने गुलाबी,प्यार करने लायक. मैं इन्हें चूमना चाहता हूँ’
‘ले लो अपने मुँह में, मेरे निपल्स को चूसो, जल्दी करो , मैं और इंतेज़ार नही कर सकती.
जैसे सेमुएल के होंठों ने उसके निपल को छुआ सोनी की चूत अपना रस छोड़ने लगी और उसकी पेंटी गीली होने लगी.

सोनी ने थोड़ा खुद को हिल्लाया पत्थर के बेंच की ठंडक अपनी नंगी पीठ पर महसूस करने लगी, पर वो ठंडक इतनी नही थी की उसके अंदर फैलती हुई गर्मी को शांत कर दे और उसकी बहती हुई चूत को राहत पहुँचा दे.
सेमुएल के हाथ नीचे बॅड गये और उसकी जीन को ढीला करने लगे वो इतने आराम से कर रहा था की सोनी की तड़प बदती ही जा रही थी. जब सेमुएल ने उसकी जीन को नीचे सरका दिया और उसकी झंगों पे हाथ फेरने लगा. सोनी की सारी शर्म-ओ-हया कभ की उसका साथ छोड़ चुकी थी. सोनी के हाथ सेमुएल के लंड को सहलाते हुए उसकी जीप तक पहुँच गये और उसने जीप नीचे सरका दी. फिर अंदर हाथ डाल कर उसके लंबे मोटे लंड को उसकी क़ैद से आज़ाद कर दिया. सोनी तड़प रही थी उसे अपने अंदर लेने के लिए. सेमुएल के जिस्म में तरंगे उठ गई जब सोनी ने उसके लंड को अपनी कोमल उंगलियों से पकड़ा.
सोनी को उसका लंड अपने हाथ में बहुत गरम और नरम महसूस हो रहा था, एक जीते जागते पत्थर की तरहा सकत माफ़ ना करनेवाला.
कितनी तड़प उठ रही थी सोनी के अंदर उसको अपनी चूत में सामने के लिए, अपनी बदती हुई भूख को मिटाने के लिए, जिसकी वजह से वो अपनी गंद बेंच पर रगड़ने लगी और उसकी पीठ सेमुएल की छुअन से ही कमान की तरहा उठ गई.
सेमुएल ने उसके निपल को छोड़ दिया अपने दाँतों की पकड़ से और उसके पूरे उरोज़ को चाटने लगा, फिर वो दोनो उरोज़ के बीच की घाटी को चाटने लगा और काफ़ी थूक बीच में छोड़ दिया जो सोनी को ठंडा सा लग रहा था और चारों और बहती गरम हवा के बीच.
‘तुम्हारी उंगलियों में दानव है’ आहह भर कर सेमुएल बोला क्यूंकी सोनी आहिस्ता आहिस्ता उसके लंड पे हाथ फेरते हुए उसकी मुठ मार रही थी., उसके सहलाने और मुठ मारने की वजह से उसका लंड और भी मोटा और सकत हो गया.सॉफ चमकता हुआ जूस उसके लंड से निकल रहा था जिसे सोनी उसके लंड पे मलती जा रही थी उसे और चिकना बनाती जा रही थी और सेमुएल मज़े से आ भर उठता.
“अब मैं तुम्हें चोद ना चाहता हूँ, तुम्हारे अंदर अपना लंड डाल ना चाहता हूँ.”
“आह डाल दो, मैं कब से तड़प रही हूँ तुम्हारे लंड को अंदर लेने के लिए.”
‘क्या तुम मुझे अपना माल तुम्हारी चूत के अंदर छोड़ने डोगी?’
‘हन हन, जल्दी करो , मैं अब और नही रुक सकती’

वो पीछे बेंच के उपर पसर गई. सेमुएल उसके उपर था और उसकी ढीली जीन को अपने पैरों से नीचे खींच रहा था. सोनी ने जीन उतरने में उसकी मदद की और अब सोनी सिर्फ़ एक पेंटी में रह गई थी जो काफ़ी गीली हो चुकी थी. सोनी को विश्वास नही हो रहा था की वो कितनी शिदत से चुदना चाहती थी. अब ये सिर्फ़ इच्छा की बात नही रह गई थी, एक भयंकर भूख थी, और उसने अगर अभी इसी वक़्त उसे चोदा नही तो वो मर जाएगी निराश होकर.

सेमुएल उसकी झंघो को सहलाते हुए उसकी पेंटी की तरफ बड़ा, उसकी पेंटी गीली होने की वजह से पारदर्शी हो चुकी थी और उसकी कुलबुलाती चूत सेमुएल को सॉफ दिख रही थी, उसके चूत के होंठ खुल और बंद हो रहे थे, उसका क्लाइटॉरिस बाहर निकलता और वापस अंदर जाता, टॅप टॅप उसकी चूत लगातार आँसू बहाए जा रही थी.
सेमुएल उसकी पेंटी की लाइनिंग पे हाथ फेरते हुए उसकी चूत पे पहुँच गया और उसके गीलेपन को सॉफ महसूस कर रहा था.

‘कितना प्यारा नज़ारा है सोनी’ वो फुसफुसाया. उसकी आवाज़ कहीं दूर से आती हुई लग रही थी, जैसे दोनो किसी कामुक सपने को जी रहे हों, जहाँ उसकी हर इच्छा हर सोच पूरी हो रही थी. ‘ कितना सुंदर लगता है एक औरत की चूत को उसकी गीली पेंटी में से देखना, उसकी कामीच्छा को सुंगना, उसकी चूत को गीली पेंटी के साथ ही रगड़ना ताकि वो और गीली हो जाए’

उसकी उंगलियाँ उसके चूत पे हल्के हल्के हलचल मचा रही थी, वो बिल्कुल भी ज़ोर से नही कर रहा था ताकि सोनी झड़ ना जाए, अपने सहलाने से उसे वो और तडपा रहा था और उत्तेजित कर रहा था इतना की कोई सोच भी नही सकता.

‘छुओ मुझे ज़ोर से छुओ मुझे’ सोनी इल्तीज़ा कर रही थी, उसे मजबूर कर रही थी की वो उसकी चूत को ज़ोर ज़ोर से रगड़े.

‘क्या ऐसे मेरी जान’ वो उसकी छूट के चारों तरफ गोल गोल अपने हाथ को फिरने लगा पर उसके क्लाइटॉरिस को नही छू रहा था और आसपास्स के सारे हिस्से को रग़ाद रहा था जो बहुत ही संवेदनशील हो चक्का था.

‘अहह हन ऐसे ही, और और और हन हन ‘ सोनी अपनी गंद उछाल रही थी ताकि उसकी उंगलियाँ किसी तरहा उसकी चूत में घुस्स जाए और उसका रुका हुआ बाँध टूट जाए.

‘मैं तुम्हें चोद्नना चाहता हूँ’ वो बहुत ही प्यार से बुदबुडाया, झुकते हुए अपने चेहरे को उसके चेहरे के बिल्कुल पास ला कर. उसने सोनी के गले पे चुंबन करने शुरू कर दिए. ‘ मैं तुम्हें अभी इसी वक़्त चोदना चाहता हूँ सोनलप्रीत कौर’

अपनी उंगलियों को उसकी पेंटी के अंदर डाल कर वो सीधा अब उसकी गीली चूत पे हाथ रख बैठा.
‘मेरे ख़याल से अब तुम भी चुदना चाहती हो’ वो मुस्कुराया.

कैसे वो मना कर सकती थी? उसका बेचारा क्लाइटॉरिस तरस रहा था रगड़ा जाने के लिए, उसकी चूत कुलबुला रही थी भरे जाने के लिए, उसका रस इतना बह चुका था की पेंटी से बाहर निकलने लगा था. हां वो चुदना चाहती थी. वो इतनी तड़प रही थी लंड के लिए की उस से साँस भी नही लिया जा रहा था.

‘आजाओ मेरे अंदर’ वो फुस्फुसाई.

उसने सोनी की पेंटी को साइड में किया, उसकी उभरी हुई चूत की साइड में, अब वो सिर्फ़ एक गीला रूई का कपड़ा रह गई ही, जिसे उत्तारने की कोई ज़रूरत नही थी. सोनी की चूत खुल के सेमुएल के सामने आ गई. उसने अपनी चूत बिल्कुल सॉफ रखी हुई थी, एक भी बॉल नही था, शायद आज सुबह ही उसने सारे बॉल सॉफ किए थे.

उसकी चूत अंदर से गहरा गुलाबी रंग लिए हुए थी, क्यूंकी खून सारी नसों में इकट्ठा हो चुक्का था, उसके क्लाइटॉरिस एक नोक की तरहा खड़ा था और तड़प रहा था. ओर्गसम, उसे अब ओर्गसम चाहिए था किसी भी कीमत पर, अब और अभी, ये उसकी ज़रूरत बन चुकी थी, वो अभी लंड अंदर चाहती थी, बस अभी.
सॅम्यूल के लंड ने जब उसकी चूत के अंदर आराम से घुसना शुरू किया , बिल्कुल आराम से कोई जल्दी नही , उसकी चूत के रस से लंड के सुपादे को चिकना करते हुए……

‘ अहह ओह ,सेमुएल नही मैं नही……..’

सोनी ने हटना चाहा, पर सेमुएल की पकड़ अब सकत हो चुकी थी. सोनी ने सोचा नही था की उसका मोटा लंड इतना मोटा साबित होगा की उसकी चूत फटने के कगार पे पहुँच जाएगी. वो महसूस कर रही थी उसके मोटे लंड को चूत की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर जाते हुए. बस मेरी जान हो गया सेमुएल उसे चूमता रहा और अपना लंड अंदर घुसाता रहा. जब उसका लंड पूरा अंदर घुस गया तो उसे ऐसा लगा जैसे एक टाइट चमड़े के ग्लव के अंदर डाल दिया गया हो.

अब जब वो अंदर घुस्स चक्का था, तो सोनी का डर थोड़ा कम हुआ. वो धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा, उसे कोई जल्दी नही थी.

जब उसका लंड अंदर बाहर होता तो सोनी की चूत में संवेदना की नसों को छेड़ता रहता और सोनी की उत्तेजना में आग लगती रहती. सोनी भी उसका साथ दे रही थी उसी लेय में अपनी गांद उछाल कर. जब उसका लंड पूरा अंदर घुसता तो उसके भारी टटटे सोनी की चूत के बिल्कुल नीचे टकराते.

आह आह उम उम उम आह आह उफफफ्फ़ एस एस फास्टर फास्टर , और और तेज़तेज़ , सोनी के मुँह में जो आ रहा था वो बोल रही थी. सिसक रही थी. उसके मोटे लंड से चुद्ते हुए महसूस कर रही थी. अब वो तेर रही थी, गरम और मीठी लहरों के उप्पर. क्यूँ लड़े वो ?

मोनी और सेमुएल दोस्त थे और कुछ नही. और अब सोनी और सेमुएल प्रेमी बन चुके थे………कम से कम एक रात के लिए. वो इतनी बेवकूफ़ नही थी की सेमुएल को अपने सपनो का शहज़ादा समझ ले – सेमुएल जैसा आदमी उसके लिए नही था – लेकिन आज की रात – उसका सपना सच हो रहा था – वो किसी और दुनिया में पहुँच चुकी थी. चुदाई का ऐसा आनंद उसने पहले कभी महसूस नही किया था. उसे कोई परवाह नही थी अगर वो नही जागती . बस ऐसे ही चुदती रहे और सपनो की दुनिया में खोई रहे.
 










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FUN-MAZA-MASTI वासना का नंगा नाच--3

FUN-MAZA-MASTI

 वासना का नंगा नाच--3


 पता नही कितने घंटे वो यूँही लेटे रहते एक दूसरे के जिस्म को सहलाते हुए,अगर रात में अचानक बाधा ना आती एक ज़ोर की आवाज़ जो कमरे के बाहर से आई, कोई चिल्ला चिल्ला कर उसे पुकार रहा था.
मिस सोनी ? मिस सोनलप्रीत कौर?
सोनी एक आह भर उठी, अपना गाउन पहना, जो एक लाग्ज़ूरी इस ट्रिप पे उसने अपने पास रखी थी, वहाँ से उठा कर जहाँ रात को बेखायाली में फर्श पर उत्तार फेंका था.
‘ओह नो’ हमने ज़रूर पड़ोसियों को जगा दिया होगा, मुझे यकीन है साथ वाली बुढ्डी ने शिकायत करी होगी हमारे शोर की……’
विशाल उठा और फटाफट अपनी जीन पहनी.
‘मिस कौर ! पुलिस’
‘अच्छा, अच्छा, आ रही हूँ’
सोनी ने दरवाजा खोला सामने दो टर्किश पुलिस वाले खड़े थे, अपने सामने खूबसूरत सीखनी को देख उनका बुरा हाल होने लगा, उसके उभार, उसके जिस्म का हर मोड़ उसके गाउन से झलक रहा था.
‘येस? वॉट इस इट? इफ़ इट’स अबाउट दा नाय्स……..’
उनमे से जो लंबा पुलिसे वाला था अपना सर ना में हिल्लाया और हाथ खड़ा कर बोला
‘नो, नो,इट इस नोट डेट’ सोनी खुश थी की वो अच्छी इंग्लीश बोल रहा था, क्यूंकी अरबी लोग जिस तरहा इंग्लीश बोलते हैं आधी बात तो समझ में ही नही आती.
‘यू विल पर्मिट अस टू एंटर?’
सोनी ने एक ठंडी साँस भरी.
‘हेल्प युवरसेल्फ’
वो मूडी और उन्हें अंदर आने का इशारा किया.
‘वॉट’स दा मॅटर?’ विशाल ने अपने जूते पहनते हुए पूछा. वो कुछ परेशान सा हो गया था. डिग्गिंग साइट से कुछ आर्टिफाक्ट गायब थे. और विशाल उसके बारे में बहुत कुछ जानता था पर ये नही चाहता था की पुलिस को पता चले.
सोनी ने कंधे झटकाए.
‘नो आइडिया. समथिंग एंड नथिंग, आई एक्सपेक्ट. इट यूष्यूयली इस मे बी सम कार इस स्टोलन’
‘ई आम अफ्रेड वी हॅव सम वरिन्ग न्यूज़ फॉर यू मिस कौर’ पुलिस वाला बोल पड़ा. Fरेन्चPओलिcए थ्रू फ्रेंच गूव्ट इनफॉर्म्ड इंडियन गूव्ट. आंड इंडियन एंबसी हास टोल्ड उस तो कॉंटॅक्ट योउ’
सोनी के गर्दन के बॉल खड़े हो गये.
‘फ्रेंच पोलीस? इंडियन गूव्ट ? वॉट इस तीस ऑल अबौट?’
‘इट’स अबौट युवर सिस्टर’
‘मोनी!!!’ सोनी के चेहरे का खून सूख गया. वाइ? वॉट हॅपंड? हेज़ देअर बिन सम सॉर्ट ऑफ आक्सिडेंट?’ सोनी को वो सारे परेशान करने वाले सपने याद आने लगे. उसे अभी पता चला की कुछ बुरा होने वाला है.
‘आइ एम अफ्रेड, वी डॉन’त, नो, एस पर दा मेसेज वी रिसीव्ड , इट वुड अपीयर देट शी हेज़….डिसपीयर्ड’
सोनी धम से कुर्सी पे गिर सी पड़ी.
‘डिसपीयर्ड? बट…. शोर्लि यू मस्ट नो समथिंग’
‘वेरी लिट्ल, मेडम , दा फ्रेंड शी वाज़ स्टेयिंग विद इन वलाज़ूर, रिपोर्टेड हर टू बी मिस्सिंग ए फ्यू वीक्स अगो, नथिंग हेज़ बिन हर्ड सिन्स’
‘परहेप्स शी मूव्ड आउट’ सोनी ने कुछ कारण सोचा ‘ शी नेवेर स्टेज़ लोंग एट वन प्लेस’
‘वेरी अनलाइक्ली मेडम डेट हर डिपार्चर वाज़ प्लॅंड. ऑल हर क्लोद्स एंड पोज़ेशन्स वर लेफ्ट बिहाइंड. शी जस्ट वॅनिश्ड विदाउट ट्रेस’
‘नो!’ सोनी ने विशाल के हाथ अपने कंधों पे महसूस किए, पर उसने विशाल की तरफ कोई धयान नही दिया. ‘डेट कॅन’त बी ट्रउ’
‘आई एम शूयर् फ्रेंच पोलीस विल डू एवेरितिंग तो फाइंड हर एंड इफ़ एनितिंग न्यू इस डिसकवर्ड…..’
सोनी ने विशाल के हाथ अपने कंधों से हटाए और खड़ी हो गई.
उसने बड़ी मजबूती और विश्वास के साथ कहा ‘ नो ! डेट रियली इस्न’त गुड एनफ. देअर हेज़ टू बी सम्तिंग आई कॅन डू’
‘लेकिन क्या?’ विशाल ने पूछा झलते हुए. वो मोनी के बारे मे काफ़ी कुछ सुन चक्का था सोनी से. उसे लग रहा था की ये मोनी का कोई नया खेल है, लापरवाह और गैरजिम्मेदार तो वो है ही, कहीं भी चली जाती है बिना किसी को कुछ बताए. ‘तुमने मुझे अपनी बहन के बारे में बताया था, सोनी. वो सेफ होगी. मुझे यकीन है. तुम्हें कोई चिंता नही……….’
सोनी की नज़रें विशाल से मिली.
‘इस बार सच में कुछ बुरा हुआ है.’ वो बोली ‘ मैं महसूस कर सकती हूँ. मुझे कई दिनो से पता था….तुम जानते हो जुड़वे कैसे होते हैं. कई बार हमारे बीच में टेलीपेठी होती है. कुछ हुआ है मोनी को और मैं पता कर के रहूंगी क्या.’
‘लेकिन कैसे?’
‘तुम कैसे सोचते हो? मैं वलाज़ूर जा रही हूँ.


.................................................
वलाज़ूर उस वक़्त दोपहर की गर्मी से तप रहा था, सोनी ने ड्राइवर का शुक्रिया अदा किया जिसने उसे यहाँ तक छोड़ा.
अब सोनी के पास इतने पैसे तो नही थे की कार हायर करके आती, किसी भी तरहा, कहीं लिफ्ट, कहीं पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करते करते आख़िर वलाज़ूर पहुँच ही गई. कोई और समय होता तो वो इस तरहा कभी ना ट्रॅवेल करती, पर अब तो उसके लिए एमर्जेन्सी थी.
फ्रेंच रिवीयेरा के आलीशान रिज़ॉर्ट्स से कुछ मील अंदर वलाज़ूर गाँव एकदम अकेला सा पड़ता था. चारों तरफ पेड़ों से लदे पहाड़ और वॅली के बीच में बसा, लाल क्ले से बनी छतेन सूरज की सीधी किरणों से तप रही थी.
वलाज़ूर उसके लिए एक आश्चर्य साबित हुआ, दोपहर को सड़के एक दम सुन सान,किसी भी प्रकार की कोई गतिविधि नही. लंच समय के दोरान यहाँ सब आराम करते हैं, कोई भी हो, कोई काम नही करता है और इससे ये सीएसटा कहते हैं.
ताज़ूब की बात थी की रिवीयेरा, नाइस और आंटिब्स के इतने पास होते हुए भी, वलज़ूर दोपहर में सोता हुआ दिख रहा था. सोनी को जल्दी ही समझ में आ गया क्यूँ ऐसा हो रहा था. थोड़ी ही देर में उसके पैर तपने लगे, और उसकी गर्दन जैसे जलने ही लगी थी सड़क पे खड़ा होना भी मुहाल हो रहा था. ये जगह काम करने के लिए नही थी – ये तो अर्ध नग्न हो कर सुसताने और मस्ती मारने के लिए थी. कोई आश्चर्य नही लग रहा था की मोनी को ये जगह बहुत पसंद आई थी.
मनप्रीत कौर. सोचते ही उसका दिमाग़ उसे यथार्थ में ले आया, वो यहाँ छुट्टियाँ मानने नही आई थी, जैसा की उसका सीनियर ऑफीसर सोच रहा था. वो आई थी पता करने की उसकी जुड़वा बहन मोनी के साथ क्या हुआ.
सड़क पे धीरे धीरे चलते हुए वो दुकानों पे नज़र डाल रही थी . भूख और प्यास के मारे उसका बुरा हाल था, लेकिन दोपहर में सब दुकाने बंद थी, कुछ की ब्लाइंड्स नीचे गिरी हुई थी तो कुछ ने तो शटर ही नीचे गिरा रखे थे.
कुछ भी नही खुलने वाला कम से कम दो-ढाई बजे तक. और शायद इतनी देर तक भूखा प्यासा रहना उसके बस में नही था. और उसे रात में रुकने के लिए ठिकाना भी ढूंडना था.
एक दुकान उसे खुली नज़र आई, जहाँ से कुछ आवाज़ें आ रही थी, और अच्छी सुगंध आ रही थी पेटिस और सॉसेजस की. हान लंच!!!
जैसे ही उसने अंदर कदम रखा,आह क्या ठंडक थी, सब कुछ जैसे जम गया. सब की आँखें मूड के उसपे जम गई., मुँह खुले रह गये. एक के हाथ से वाइन ग्लास छूट कर तड़क ज़मीन पे गिरा और टुकड़े टुकड़े हो गया.
‘पोर ल’अमौर डू बॉन ड्यू….!’ ( मतलब फॉर गोद’स सेक!!!)
बार के पीछे से विस्मय से भरी आवाज़ आई, एक पतला, स्लेटी रंग वाले बॉल लिए आदमी एक ग्लास में किसी तरहा की शराब डाल रहा था. उसके चेहरे पे हैरानी थी, कुछ भयभीत सा दिख रहा था.
सोनी को समझने में कुछ पल लगे की क्यूँ सभी एक दम हैरान हो गये. वो बार के काउंटर पे गई और एक 50 फ्रॅंक का नोट रखते हुए कुछ खाने का ऑर्डर दिया. ( अपने पर्स से एक इंग्लीश टू फ्रेंच की डिक्षनरी निकाली कुछ पल देखा और बोली “बोनसिउर जे म'अप्पेल्ले मॅडमज़ेल कौर . मॅडमज़ेल सोनलप्रीत कौर. “ ( गुड दे . मेरा नाम है मिस कौर. सोनलप्रीत कौर)
एक राहत भरी साँस सब ने ली और बार में फिर पहले जैसी हलचल शुरू हो गई, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.
बार मेन ने एक वाइन का ग्लास और हेम और चीज़ बर्गर सोनी के सामने रख दिया. चेंज उसके हाथ में पकड़ाते हुए बोला
‘तो मिस कौर, आप शायद बहन हैं मनप्रीत कौर की?’
सोनी ने वाइन का सिप लिया.
‘बिल्कुल ठीक. मैं यहाँ आई हूँ जानने के लिए की क्या हुआ उसके साथ. क्या आपको कुछ पता है?’
उसने सीधा बार मेन की तरफ देखा पर वो नज़रें बचाने लगा.
‘नही. यहाँ कोई नही जानता. बहुत दुख की बात है. हम सोच भी नही सकते वो कहाँ गायब हो गई. हमने पुलिस को इनफॉर्म कर दिया था…पर….’
‘ह्म्म’ सोनी हैरान थी की सबके कान उनकी बातों पे लगे हुए थे पर हर कोई उसे अवाय्ड कर रहा था.
सोनी अपने चारों तरफ के वातावरण को ले कर बहुत ही सेन्सिटिव थी. और यहाँ उसे एक अजीब सा महॉल मिल रहा था. दुश्मनी तो नही पर दोस्ती जैसा भी नही , बस अनोखा….जैसे …..शायद ….एक षड्यंत्र हो खामोशी का.
उसने सोचा की बातों का सिलसिला कुछ बदल लेना चाहिए इसी में इस वक़्त अकल्मंदी है.
‘मैं कुछ रहने का ठिकाना ढूंड रही हूँ वलाज़ूर में, क्या आसपास कुछ है यहाँ …. महँगा नही ?’
बार मेन ने कंधे उचकाय.
‘हमारे पास कुछ कमरे हैं. ल्ग्ज़ुरी नही, पर कॉम्फर्टेब्ल हैं’
‘मैं यहाँ रह सकती हूँ, कुछ रातों के लिए?’
बर्मन ग्लासस सॉफ करता रहा और सोनी की तरफ धयान ना देते हुए बोला
‘काम वू वोलेज़’ - (जैसी आपकी मर्ज़ी)
सोनी को बार मेन की ये बेरूख़ी कुछ अखरी. वो बात ही नही करना चाहता था. वो अपनी प्लेट उठा कर एक टेबल की तरफ बड़ी. सबकी नज़रें उसी पर टिकी हुई थी. वो अचानक मूडी , सब कहीं और देख रहे थे – उसमे कोई भी कोई इंटेरस्ट नही दिखा रहा था.
सोनी बिल्कुल कोने की टेबल पे चली गई, अपने बॅक पे लटका हुआ बॅग उतारा और बैठ गई. उसने अपनी नज़रें वहाँ बैठे लोगो पे डाली. ज़यादा तर सब आदमी 30-40 की उम्र के बीच के थे, एक के साथ एक औरत थी जिसने एक सफेद शॉर्ट और एक टाइट टॉप पहना हुआ था जो उसके छोटे पर उन्नत उरोज़ दर्शा रहा था. उस औरत के साथ अधेड़ उम्र का आदमी था जो उसकी झांगें सहला रहा था पर उसकी नज़रें सोनी पे ही टिक्की हुई थी.
सोनी इस अजीब से महॉल को समझने की कोशिश कर रही थी और उसे पता ही नही चला की कोई उसके पास आ के बैठ गया है, जब तक उसने एक हाथ अपने कंधे पे महसूस ना किया और उसकी आवाज़ अपने कानो में ना सुनी.
‘मिस कौर? सोनलप्रीत?’ वो इंग्लीश में बोला
‘क्या?’ सोनी एक दम मूडी और सामने एक जवान 25-26 साल का लड़का था, चेहरे पे मुस्कान , बिखरे भूरे बॉल,दोस्ती सा अपनत्व. उसने डेनिम्स और चेक शर्ट पहनी हुई थी. कमीज़ के बाजू कोहनी तक रोल किए हुए थे और शर्ट के उप्पर वाले दो बटन खुले थे.
‘सॉरी, मैने शायद आपको डरा दिया’


‘वेल-----‘
‘देखो ये बहुत अजीब लग रहा होगा, इतनी दूर से यहाँ तक आना, और एक बार में एक क्रेज़ी अँग्रेज़ से टकरा जाना. जैसे ही मुझे पता चला तुम कौन हो. मैं रुक नही सका, मुझे तुमसे बात करनी है’
‘किस बारे में?’
‘ह्म…….. देखो, कुछ मुश्किल है यहाँ बात करना. ये जगह सेफ नही है’
सोनी उसकी तरफ देखने लगी कुछ उत्सुकता और कुछ संशय के साथ. वो हैरान हो रही थी की वलाज़ूर में क्या हो रहा है.
‘क्या मतलब है आपका की ये जगह सेफ नही है?’

‘कुछ बातें हैं जो तुम्हें जानी चाहिए. सच में अच्छा यही होता की तुम यहाँ ना आती. पर अब जब तुम आ ही गई हो तो ……’
‘क्या आप मुझे डरना चाहते हैं?’
‘नही, कम से कम, ऐसा तो नही जैसा तुम सोच रही हो.मुझे सिर्फ़ तुम्हारी सेफ्टी की चिंता है’
‘मैं बड़ी औरत हूँ, अपना ख़याल खुद रख सकती हूँ. थॅंकयू वेरी मच’
‘हन, मुझे यकीन है मनप्रीत ने भी यही कहा था’ उसने अपने ग्लास की तरफ देखते हुए कहा.
‘क्या जानते हो आप मनप्रीत के बारे में? क्या आप जानते हो क्या हुआ उसके साथ?’
‘मैं……नही,मुझे नही मालूम. लेकिन ये कह सकते हैं मुझे कुछ शक़ है. मैं तुम्हें बता सकता हूँ जितना मैं जानता हूँ……लेकिन मैं यहाँ कोई बात नही कर सकता. मैने कॅप कार्लोट्ते में कमरा लिया हुआ है, यहाँ से कुछ मील दूर समुद्र के किनारे के पास. अगर तुम मेरे साथ चलो…….’
सोनी ने अपना सर हिल्लाया.’ एक .मिंट एक मिंट. आप जो भी हो, जो भी आपका नाम है. मैं किसी अजनबी के साथ बिल्कुल नही जानेवाली. और तब तक तो बिल्कुल नही जब तक आप मुझे कुछ और ना बताओ. और मुझे क्या पता की कहीं आप ही तो नही मोनी के गायब होने के पीछे?’
उस अजनबी ने एक लंबी साँस छोड़ी ‘ देखो मैं समझता हूँ तुम्हारे दिमाग़ में क्या चल रहा है. लेकिन जैसा मैने पहले कहा यहाँ बात करना ख़तरनाक है. मेरा नाम इवान पीटरसन है और मैं एक फ्रीलॅन्स पत्रकार हूँ.इतना ही तुम्हें बता सकता हूँ’ वो टेबल पी आगे झुका और हल्की आवाज़ में बोला ‘ इस जगह से निकल जाओ सोनलप्रीत, यहाँ मत रूको. अगर तुम रुकी, तो बाद में तुम्हें पछताना पड़ेगा’
सोनी खड़ी हो गई . उसे बातों का रुख़ अच्छा नही लग रहा था. ‘क्या आप मुझे धमकी दे रहे हो मिस्टर. इवान पीटरसन?’
इवान ने हताश होते हुए गहरी साँस ली. ‘ ये बकवास मत करो, मैं कोई धमकी नही दे रहा ना डरा रहा. मैं सिर्फ़ तुम्हें बचाने की कोशिश कर रहा हूँ. बस और कुछ नही’
‘ मैं अपना धयान रख सकती हूँ’ सोनी जाने के लिए मूडी.’ अगर तुम्हारे पास इतनी जानकारी है तो तुम पुलिस को क्यूँ नही बताते?’
इवान अपनी कुर्सी पे पीछे सरक गया और बालों में हाथ फेरते हुए बोला’ जाओ, जा के बात करो उनसे अपने आप सोनलप्रीत. जा के इनस्पेक्टर डेफ़रगे से मिलना. शायद तब तुम्हें कुछ समझ में मेरी बातें आए’

एक लंबी हतोत्साहित (फ्रस्ट्रेटिंग) दोपहर के बाद, शाम को सोनी फिर बार में वापस आइी.
उसे अहसास होने लगा था की उसे इवान के साथ इतना रूखा नही पेश आना चाहिए था. अब उसे समझ में आ गया था की वो लोकल पुलिस पे क्यूँ विश्वास नही कर रहा था.
उप्पर से तो वो काफ़ी मिलनसार थे – शायद मदद करने वाले भी. हाँ, वो सब कुछ कर रहे हैं मोनी को ढूँडने के लिए. नही, उनके पास कोई सुराग नही. नही, कुछ भी नही, फिर भी वो पूरी कोशिश कर रहे हैं , अगर कोई खबर मिली तो…..
लेकिन वो इनस्पेक्टर डेफ़्रागे कुछ बाधक था. कुछ ऐसा था जो वो छुपा रहा था, लगभग ऐसा संशय था जैसे मोनी के साथ कुछ बहुत बुरा हो चुका है, पर वो बता नही रहा था.
उसने सोनी पे लाइन मारने की कोशिश करी, ये कहते हुए की वो बहुत खूबसूरत है, और उसके उरोज़ को छेड़ने की कोशिश करी. ऐसा लग रहा था जैसे वलाज़ूर का हर इंसान सिर्फ़ वासना का पुजारी था.


बार में बैठी वो अकेली वाइन पी रही थी, और सोच रही थी की आगे क्या करे. ऐसा वो क्या कर सकती है जो अब तक पुलिस ने नही किया? या वाक्य में उन्होने ने कुछ किया भी है?

शायद उसे इवान के साथ उसके रूम में जाना चाहिए था? कोई बात नही वो दुबारा ज़रूर दिखेगा.

बार का मलिक बहुत रूखा बर्ताव कर रहा था और साथ साथ नींबू के छोटे छोटे स्लाइस काटता जा रहा था.

‘तो आज कोई कामयाबी नही मिली मिस कौर?’

‘ ना आज किस्मत अच्छी नही थी’

‘तो अब हिन्दुस्तान वापस जा रही हो?’

‘अभी नही’ सोनी थोड़ी खुश और थोड़ी हताश थी, हर कोई उस से पीछा छुड़ाना चाहता था. ‘ मैं हार मानने वाली नही. अभी तो सिर्फ़ एक दिन ही हुआ है’

बार मेन के चेहरे के भाव बदल गये, कोई कस्टमर आ गया था.

‘आह मोस्यूवर सॅम्यूल!’ वो ऐसे बोला जैसे कुत्ता अपने मालिक को खुश करना चाहता हो.

वो नया आदमी लंबा, शायद 30 के करीब होगा और बहुत ही हॅंडसम, घुँगराले ,गोलडेन ब्राउन बॉल, ग्रे-ब्लू चमकती हुई आँखें और बहुत ही शार्प चेहरे के फीचर्स थे.

केसुअल कपड़ों में भी बहुत परिष्कृत ( सोफिस्टीकेटेड) लग रहा था. उसकी शर्ट और ट्राउज़र के कट बता रहे थे की वो अथलेटिक जिस्म का मालिक है.
जब वो बार के पास आया तो उसने सोनी को एक तारीफ करती हुई स्माइल दी.

सोनी ने उसकी स्माइल का जवाब सर हिल्ला के दिया, उसने एक बियर ली ग्लास में डाली, सोनी की तरफ मुड़ा और बार के काउंटर पे अपनी कोहनी टीका कर उसकी तरफ थोड़ा झुक गया.

‘मोस्यूवर’ सोनी अपने दिमाग़ की नसों के अंदर अपनी यादश्त में कुछ पहचानने की कोशिश कर रही थी. सेमुअल? ये नाम उसे सुना हुआ लग रहा था. कहाँ सुना था?

‘ ये मिस सोनलप्रीत कौर हैं, मोन्सिीएउर सेमुअल’ बार मेन ने नये आदमी की कोहनी को थोड़ा हिलाया और सोनी की तरफ इशारा किया. ‘ मनप्रीत कौर की बहन…..’

‘इनडीड’ सेमुअल ने अपना ग्लास रखा और सोनी का हाथ थाम कर थोड़ा दबाया और अपने होंठों से लगा कर किस किया.

‘आह दोनो में कितनी समानता है. मुझे इज़ाज़त दो कुछ अपने बारे में बताने के लिए. मेरा नाम सेमुअल ले रोकक़ , हिन्दी में इसलिए बोल रहा हूँ क्यूंकी मेरी मा हिन्दुस्तानी थी. मेरा एक विला गोआ में है और एक यहाँ. मोनी मेरे साथ ही यहाँ आई थी.

मोनी और मैं अच्छे दोस्त थे इस से पहले की………’ वो कुछ झिहका ‘ शायद तुम जानती हो की मोनी मेरे विला में मेरी गेस्ट थी जब वो गायब हुई’


सोनी को याद आ गया मोनी ने अपनी चिठ्ठी में सेमुअल का ज़िक्र किया था. जिसकी वो मेहमान बन कर रह रही थी. तो ये है सेमुअल. सोनी को ये अहसास हो गया की कोई भी लड़की इस इंसान के लिए पागल तक हो सकती है इतना आकर्षण था इस इंसान में……………………..

‘ क्या तुम वहाँ थे जब वो गायब हुई?’

बदक़िस्मती से नही. जब मैं अपने बिज़्नेस टूर से वापस पहुँचा तो पूर गाँव में तहलका मचा हुआ था. ऐसा अनुमान है की वो रात में कहीं निकल गई वापस ना आने के लिए.

हम सब को बहुत शॉक लगा. खास कर मुझे क्यूंकी मैं खुद को ज़िम्मेदार समझता हूँ इस सब के लिए, ना मैं उसे यहाँ ले के आता ना ये हादसा होता. मुझे बहुत दुख है. ‘ वो कुछ देर रुका अपने ग्लास से एक लंबा घूँट भरा .
 
 






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FUN-MAZA-MASTI वासना का नंगा नाच--2

FUN-MAZA-MASTI

 वासना का नंगा नाच--2


 विशाल उसे चिड़ा रहा था, तडपा रहा था, वो अपनी झांग उसकी चूत के आसपास रगड़ रहा था और उसकी चूत से दूर रख रहा था जो फुदक रही थी अपना मुँह खोल और बंद कर रही थी उसके जिस्म का अहसास पाने के लिए.

सोनी ने खुद को उठाने की कोशिश करी ताकि उसकी झांग की रगड़ उसकी चूत तक पहुँचे पर विशाल के ज़ोर की आगे उसकी एक ना चली , वो उसकी गुलाम थी, उसके पॅशन की गुलाम, वो मनचाहे तरीके से उस से खेल रहा था और उसकी उत्तेजना को भड़काता ही चला जा रहा था.

उसके होंठों ने उसके निपल को ज़ोर से चूसना शुरू किया और खींचने लगे, उसकी ज़ुबान निपल के टिप को चूस्ते चाटते हुई निकल जाती और एक तेज़ उत्तेजना की लहर उसके जिस्म को हिला के रख देती. हर नये चुंबन के साथ एक नये किस्म की लहर उठ जाती उसके जिस्म में, हर बार जब भी उसकी ज़ुबान उसके निपल को छूती एक अलग ही अहसास होता.

और अब तो उसने उसके निपल्स को काटना शुरू कर दिया, पहले हल्के हल्के फिर तेज़ तेज़ पर धयान रखते हुए की उसे चोट ना लगे. पहले दर्द होता फिर दर्द के बाद एक ऐसे आनंद की अनुभूति होती जो ब्यान नही करी जा सकती.

‘आह और नही तद्पाओ ……….प्लीज़ अब दे दो …….अब डाल दो अहह’

सोनी ईस्वक़्त खुद को वो मामूली लड़की नही समझ रही थी,जिसका एक बार मोनी की वजह से स्कॅंडल बन गया था, क्यूंकी मोनी ने कॉलेज के किसी प्रोफेसर को अपने हुस्न के जाल में फसाने से नही छोड़ा था. जब सोनी ** साल की हुई थी तो वो गुडसवारी और जिम जाती थी, और मोनी ने राइडिंग सीखानेवाले के साथ ही अफएयर कर लिया था.

विश्वास नही हो रहा है की आज सोनी एक नयी दुनिया में खुद कदम रख चुकी है.

विशाल का बाँया हाथ उसके दाएँ उरोज़ को निचोड़, और दबोच रहा था और उसके होंठ दूसरे को प्रताड़ित कर रहे थे, उसके निपल को चूस,काट और चाट रहे थे और हाथ उसे दबा दबा के ईक सफेद ग्लोब की शक्ल दे रहा था.
उत्तेजना का तूफान सोनी के जिस्म में उठता ही जा रहा था जबकि उसने अभी तक उसके क्लिट को छुआ नही था.
जैसे ही उसने सोचा की आनंद की ये लहरें कभी ख़तम नही होंगी, विशाल ने उसके निपल को अपने मुँह से बाहर निकल लिया.

‘ आह नही ……रूको मत करते रहो’ उसकी आँखें जल रही थी, और याचना कर रही थी, जब उसने विशाल को घूरा तो उसकी आँखों में भी एक आग थी.

‘अब वक़्त आ गया है सोनी की तुम मुझे कुछ आनंद दो’

वो सोनी के जिस्म के उपर फिसलता गया जब तक वो उसके दोनो उरोज़ के पास घुटनो के बल नही आ गया, और उसका लंड एक साँप की तरहा लहराने लगा सोनी के होंठों के उपर, जो तयार थे उसे निगलने के लिए.
उसने उसके लंड को सहलाया फिर उसके टट्टों को सहलाने लगी दबाने लगी. विशाल का जिस्म अकड़ने लगा. वो उसके टट्टों को चाटने लगी.

‘ और पास आओ ताकि मैं अच्छी तरहा चूम सकूँ’ उसने विशाल से इल्तीज़ा करी.

विशाल को और कहने की ज़रूरत नही पड़ी वो और पास आ गया की उसकी गोलाइयाँ सोनी के मुँह के पास आ गई, सोनी ने अपने होंठ खोल दिए और उसकी एक गोलाई को मुँह में भर लिया. विशाल तड़प उठा और उसके मुँह से पता नही क्या क्या निकालने लगा. सोनी सिर्फ़ अंदाज़ा लगा सकती थी की विशाल को कितना आनंद आ रहा होगा अपने टट्टों को चुसवाने और चटवाने में.

आदमी के जिस्म का सबसे नाज़ुक हिस्सा एक औरत के मुँह के अंदर था और वो उसे निगलने की कोशिश कर रही थी, कितनी उत्तेजना उठ रही होगी इस वक़्त विशाल के जिस्म में.

‘ओह……..ओह सोनी……..ओह येस’

सोनी सोच रही थी की काश वो दोनो टट्टों को एक साथ अपने मुँह में भर सकती. ये सोच ही उसकी चूत में तूफान उठा बैठी जो सिकुड और फैल रही थी अपने चर्म तक पहुँचने के लिए. पर इतनी आसानी से उसका ओर्गसम कहाँ होना था.

सोनी ने उसके टट्टों को ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया इतना के उसे एक हसीन दर्द हो पर चोट ना लगे.
एक डर उठ जाए की उसके टटटे उखड़ जाएँगे और ये डर उसे अपनी पिचकारी छोड़ने पे मजबूर कर दे.

‘सोनी ……….ओह सोनी में तुम्हारे अंदर अपना माल निकालना चाहता हूँ. आह मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ अभी इसी वक़्त'


उसने अपनी टटटे उसके मुँह से निकालने की कोशिश करी पर सोनी ने सकती से होंठ बंद कर लिए. उसकी आँखों में एक मुस्कान थी.
नही. मैं तुम्हें नही छोड़ूँगी. मैं तुम्हें वो नही करने दूँगी जो तुम कह रहे हो की तुम चाहते हो. क्यूंकी असल में तो तुम चाहते हो की मैं और चुसून.

ये सब सोनी अपनी आँखों से कह रही थी.
मैं तुम्हारी टट्टों को तब तक चुसुन्गि जब तक तुम बर्दाश्त कर सकते हो, और उसके बाद भी और चुसुन्गि. और जब मेरा दिल भर जाएगा इन्हें चूसने में तब अगर तुम में दम बाकी रहा तो तुम्हारे लंड को चुसुन्गि.
सोनलप्रीत (सोनी) ठीक थी. वो जानती थी. उसने विशाल की आँखों में उभरते हुए भावों को पॅड लिया था. उसके सहलाने के तरीके से, उसकी भारी होती हुई साँसों से, उसके कड़क होते हुए लंड से जो उसके मुँह के चारों और डॅन्स कर अपनी इच्छा जाता रहा था मुँह में लेने के लिए , उसके निकलते हुए प्रेकुं से.
कितना खूबसूरत लग रहा था उसका लंड. सोनी को तो उसे टेस्ट करना ही था. अपने होंठों को थोड़ा खोलते हुए उसने आराम से विशाल के टटटे को बाहर निकालने दिया. वो पूरा गीला हो चुका था उसकी थूक से और अपनी थेलि में उसका वजन बड़ा हुआ था, एक सख़्त पत्थर की तरहा.
अहह विशाल के होंठों से ऐसी आवाज़ निकली जैसे उसका कुछ खो गया हो. पर तब उसे अहसास हुआ की सोनी क्या करने जा रही है.

‘ ले ले मुँह में मेरी सीखनी, चूस इसे, हां ऐसे ही …..ओह सोनी …….ज़ोर से चूस’

विशाल का जिस्म गथा हुआ था, उसकी मास्सपेशियाँ स्टील की तरहा जानदार थी और उसके जिस्म की सुंदरता देखते ही बनती थी. पर सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके जिस्म का उसका लंड था. बड़ा स्मूद्ली कर्व्ड, उसकी नसें चमक रही थी जो हाथ लगते ही हिलने लगती और खाल गुलाबी थी.
उसका ख़तना किया हुआ लंड, और उसके टटटे चमक रहे थे, 7” लंबा मोटा लंड अपनी इक्लोटी आँख से कामरस निकल रहा था और सोनी के मुँह के अंदर जाने को बेकरार था.
सोनी ने उसे अपने होंठों में लिया और विशाल ने लंड अंदर सरका दिया, जो सीधा सोनी के गले तक पहुँच गया और उसके टटटे सोनी की थॉडी से चिपक गये. कुछ पल तो सोनी को लगा की उसका दम घुट जाएगा. लेकिन अगले ही पल विशाल ने अपना लंड पीछे सरका लिया और अराम से उसके मुँह को चोदने लगा. सोनी की थूक और उसके निकलते कामरस से उसका लंड बहुत चिकना हो गया और सोनी के होंठों की गिरिफ़्ट में मज़े से अंदर बाहर हो रहा था.
सोनी ने अपनी उंगलियों और अंगूठे से लंड की जड़ को पकड़ लिया और हल्के हल्के दबाने लगी , उसकी बाकी उंगलियों ने उसके टट्टों को लिया और उन्हें निचोड़ने लगी. विशाल अहह भर उठा, उसका अपने उपर काबू ख़तम होता जा रहा था, बड़ी कोशिश कर रहा था की जल्दी ना झड़े. उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और इस आनंदमयी मुखचुदाई में खोता चला

सोनी चाहती थी की वो अब झड़ जाए, और उसके उफ्फांते हुए कामरस को अपनी ज़ुबान पे महसूस करना चाहती थी. अपनी कामुकता का असर उसपे देखना चाहती थी. महसूस करना चाहती थी की कैसे वो अपना काबू खोता है और उसकी कामुकता के आगे दम तोड़ देता है.
विशाल से सोनी के मुँह की गर्माहट और उसकी उंगलियों का करतब अपने लंड और टट्टों पे सहा नही गया और उसका लावा फूट पड़ा सफेद पिचकारी सोनी के मुँह के अंदर छूटती रही और सोनी उसे निगलती रही . वो इतना वीर्य छोड़ रहा था की सोनी का मुँह फूल गया और सोनी ने जानभुझ कर कुछ कतरे अपने होंठों से बाहर निकालने दिए जो उसकी थोडी तक एक कतर बनाते हुए उसके गले तक पहुँच गये.

विशाल धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था,एक धीमी लेयबद गति, और अपने ओर्गसम के सुख को बड़ाता जा रहा था. सोनी महसूस कर रही थी की कितनी मुश्किल से उसने खुद को रोका हुआ था उसके गले को रोन्दने के लिए, और एक झटके में अपने ओर्गसम को ख़तम ना कर के धीरे धीरे उसकी अवधि बड़ा रहा था.
एसा पहली बार था की वो विशाल के साथ मुखमैथून कर रही थी, और वो हैरान थी की वो कितनी उत्तेजित होती जा रही थी. उसे कितनी संतुष्टि और खुशी मिली की विशाल उसके हाथों का खिलोना बन के रह गया. अपनी कामुकता का प्रभाव उसने आज पहचाना. विशाल ने खुद को रोकने की कितनी कोशिश करी पर सोनी की कामुकता की आगे सब बेकार गई, अगर सोनी चाहती तो सिर्फ़ एक बार अपनी ज़ुबान से चाटती तो भरभरा के डेह जाता.  


विशाल का आनंद खुद उसका अपना भी था, और हर पल के साथ उसका आनंद बढ़ता ही जा रहा था.
जब वो झडा तो ऐसा लगा की सारी दुनिया चक्कर खा के उल्टी हो गयी, जलती भुजती बिज़लियाँ आँखों के आगे तैरती रही, कुछ भी समझ नही आ रहा था सिवाय चरमानंद के जिसने दोनो को अपनी लप्पेट में ले लिया था.


सोनी को परमानंद की अनुभूति हुई अपनी कामुकता से विशाल पे विजय पा कर और विशाल के लिए जिस्मानी मज़े की इंतिहा थी.
जैसे ही उसके वीर्य ने सोनी के मुँह में निकलना आरंभ किया , उसे लगा की उसकी रूह सोनी के मुँह के रास्ते उसके अंदर समाती जा रही है किसी सतरंगी लहरों की तरहा.
सोनी उसका वीर्य निगलती रही, उसके अंदर विशाल केवीर्य के लिए जो प्यास जग चुकी थी, वो कभी भुजनेवाली नही थी. वो चाहती थी और, और, और . और जब आखरी बूँदें उसकी ज़ुबान पे रह गई, तो उसका दिल कर रहा था की ये दौर फिर शुरू हो जाए.
विशाल नीचे सरक कर उसके जिस्म के साथ चिपक गया और अपनी झांग उसकी झांगो के साथ रगड़ने लगा.
सोनी की उत्तेजना का बेरोमीटर टूटने की कगार पे पहुँच गया , वो इतनी गरम हो चुकी थी, की उसे लगा मार ही जाएगी.
विशाल उसके उरोज़ से खेलने लगा
अहह उूुुुुुुुुुउउइईईईईईईईईईईईईईईईई म्*म्म्मममममममाआआआआआआआआअ
सोनी अपनी बड़ी हुई प्यास और अपने उरोज़ से उठती हुई तरंगों की वजह से सिसक उठी. अब बाजी विशाल के हाथों में थी और सोनी ये बखूबी जानती थी इसलिए वो विशाल के हाथों का खिलोना बनती चली गई.
‘लोग कहते हैं जो सोनी ते सीखनी , वो ये नही जानते जितनी कामुक सीखनी होती है उतनी दुनिया की कोई लड़की नही , जितनी भूख वासना की सीखनी के जिस्म में होती और किसी में नही ‘ विशाल उसके निपल्स को अपनी उंगलियों में निचोड़ कर बोला.’मैं जानता हूँ सीखनी कितनी गरम होती है, क्यूँ मेरी जान?’
सोनी सिसकियाँ भरती जा रही थी, उसकी गंद इधर सेउदर हिल रही थी, जिसकी वजह से उसकी गंद के पाट खुल गये और कंबल बीच में घुस्स गया, कंबल के रेशे उसकी गंद में चुब कर उसे एक और ही मज़ा दे रहे थे.

‘आह विशाल मुझे ऐसे मत छोड़ो, मेरी प्यास भुझा दो, मुझे झड़ना है अब, और बर्दस्त नही हो रहा’

‘ इतनी जल्दबाज़ी अच्छी नही सोनी, तुम जानती हो मैं तुम्हें सातवें आसमान की सैर करा दूँगा. क्यूँ इतनी जल्दी मचा रही हो, सब जल्दी ख्तम हो जाएगा तो फिर हमे ऐसा मोका कब मिलिगा कल काम में जुट जाएँगे फिर 24 घंटे का इंतेज़ार जब मैं फिर तुम्हारे साथ बिस्तर पे हुंगा’

वो उसके नेवेल को सहलाने लगा और हल्के हल्के पिंच करने लगा, उसका जिस्म इस मज़े को पहले से ही पाने के लिए उत्सुक था , आनंद की लहरें सोनी के जिस्म में जवरभाते की तरहा उठती रही.

‘मैं सोच रहा हूँ अब मुझे तुम्हारे क्लिट के साथ खेलना चाहिए, सोनी, तुम्हें अच्छा लगे गा ना ?’

‘विशाल, मुझे टिज़ मत करो’ सोनी ने कंबल अपनी मुठियों में ज्क्ड लिया, कुछ राहत पाने के लिए, उसके जिस्म में उठती हुई तड़पाने वाली तरंगे उसके जिस्म के तापमान को बड़ाती जा रही थी.

सोनी ने विशाल के हाथ को नीचे सरकते हुए महसूस किया और वो उसकी चूत तक पहुँच गया.
अहह सोनी सिसक पड़ी और विशाल उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा. सोनी की झांगे फैलती चली गई और विशाल को अपना रास्ता खुलता हुआ मिला. सोनी की साफाचट चूत पे रेंगता हुआ विशाल का हाथ सोनी को और तड़पने पर मजबूर कर गया. सोनी की चूत मजबूर हो कर आँसू बहाने लगी और उसके लब खुलने और बंद होने लगे. उसकी चूत में एक साथ हज़ारों चिंटियाँ रेंगने लगी . सोनी का कामरस उसकी चूत से बहने लगा और बिस्तर पे सैलाब बनने लगा.
‘ मुझे तुम्हारी चूत से बहुत अच्छी खुश्बू आ रही है, दिल कर रहा है तुम्हारी चूत को खा जाउन
विशाल कभी उसकी झंघों के अन्द्रुनि हिस्से को सहलाता, कभी उसकी चूत के पास हाथ फेरता , अभित तक उसने उसकी चूत को सिर्फ़ सरसरी तौर पे एक बार छुआ था और सोनी की चूत इंतेज़ार में कुलबुला रही थी. विशाल उसकी चूत के पास निकले छोटे छोटे बालों को खींचने लगा आराम से पर मजबूती से और सोनी के जिस्म को नई नई भावनाओं का आभास कराने लगा.
फिर उसने अचाचानक अपनी एक उंगली सोनी की चूत में घुस्सा दी, सोनी की चूत ने तड़प कर उसकी उंगली को ज्क्ड लिया.
विशाल ने यहीं पर बस नही किया, पहले एक उंगली अंदर घुस्साई थी, फिर एक और डाल दी और थोड़ी देर में तीसरी भी अंदर डाल दी. उसकी टाइट चूत में उसे दर्द और मज़े का एक साथ अनुभव हुआ .
उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
सोनी सिसक पड़ी और विशाल अपनी उंगलियों से सोनी की चूत के अंदर खलबली मचाने लगा.
‘ ओह! नही , मत करो. प्लीज़ मत करो. मैं नही ले सकती अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्शच में मैं नही ले सकती ‘
विशाल का आनंद खुद उसका अपना भी था, और हर पल के साथ उसका आनंद बढ़ता ही जा रहा था.
जब वो झडा तो ऐसा लगा की सारी दुनिया चक्कर खा के उल्टी हो गयी, जलती भुजती बिज़लियाँ आँखों के आगे तैरती रही, कुछ भी समझ नही आ रहा था सिवाय चरमानंद के जिसने दोनो को अपनी लप्पेट में ले लिया था.


सोनी को परमानंद की अनुभूति हुई अपनी कामुकता से विशाल पे विजय पा कर और विशाल के लिए जिस्मानी मज़े की इंतिहा थी.
जैसे ही उसके वीर्य ने सोनी के मुँह में निकलना आरंभ किया , उसे लगा की उसकी रूह सोनी के मुँह के रास्ते उसके अंदर समाती जा रही है किसी सतरंगी लहरों की तरहा.
सोनी उसका वीर्य निगलती रही, उसके अंदर विशाल केवीर्य के लिए जो प्यास जग चुकी थी, वो कभी भुजनेवाली नही थी. वो चाहती थी और, और, और . और जब आखरी बूँदें उसकी ज़ुबान पे रह गई, तो उसका दिल कर रहा था की ये दौर फिर शुरू हो जाए.
विशाल नीचे सरक कर उसके जिस्म के साथ चिपक गया और अपनी झांग उसकी झांगो के साथ रगड़ने लगा.
सोनी की उत्तेजना का बेरोमीटर टूटने की कगार पे पहुँच गया , वो इतनी गरम हो चुकी थी, की उसे लगा मार ही जाएगी.
विशाल उसके उरोज़ से खेलने लगा
अहह उूुुुुुुुुुउउइईईईईईईईईईईईईईईईई म्*म्म्मममममममाआआआआआआआआअ
सोनी अपनी बड़ी हुई प्यास और अपने उरोज़ से उठती हुई तरंगों की वजह से सिसक उठी. अब बाजी विशाल के हाथों में थी और सोनी ये बखूबी जानती थी इसलिए वो विशाल के हाथों का खिलोना बनती चली गई.
‘लोग कहते हैं जो सोनी ते सीखनी , वो ये नही जानते जितनी कामुक सीखनी होती है उतनी दुनिया की कोई लड़की नही , जितनी भूख वासना की सीखनी के जिस्म में होती और किसी में नही ‘ विशाल उसके निपल्स को अपनी उंगलियों में निचोड़ कर बोला.’मैं जानता हूँ सीखनी कितनी गरम होती है, क्यूँ मेरी जान?’
सोनी सिसकियाँ भरती जा रही थी, उसकी गंद इधर सेउदर हिल रही थी, जिसकी वजह से उसकी गंद के पाट खुल गये और कंबल बीच में घुस्स गया, कंबल के रेशे उसकी गंद में चुब कर उसे एक और ही मज़ा दे रहे थे.
‘आह विशाल मुझे ऐसे मत छोड़ो, मेरी प्यास भुझा दो, मुझे झड़ना है अब, और बर्दस्त नही हो रहा’
‘ इतनी जल्दबाज़ी अच्छी नही सोनी, तुम जानती हो मैं तुम्हें सातवें आसमान की सैर करा दूँगा. क्यूँ इतनी जल्दी मचा रही हो, सब जल्दी ख्तम हो जाएगा तो फिर हमे ऐसा मोका कब मिलिगा कल काम में जुट जाएँगे फिर 24 घंटे का इंतेज़ार जब मैं फिर तुम्हारे साथ बिस्तर पे हुंगा’
वो उसके नेवेल को सहलाने लगा और हल्के हल्के पिंच करने लगा, उसका जिस्म इस मज़े को पहले से ही पाने के लिए उत्सुक था , आनंद की लहरें सोनी के जिस्म में जवरभाते की तरहा उठती रही.
‘मैं सोच रहा हूँ अब मुझे तुम्हारे क्लिट के साथ खेलना चाहिए, सोनी, तुम्हें अच्छा लगे गा ना ?’
‘विशाल, मुझे टिज़ मत करो’ सोनी ने कंबल अपनी मुठियों में ज्क्ड लिया, कुछ राहत पाने के लिए, उसके जिस्म में उठती हुई तड़पाने वाली तरंगे उसके जिस्म के तापमान को बड़ाती जा रही थी.

सोनी ने विशाल के हाथ को नीचे सरकते हुए महसूस किया और वो उसकी चूत तक पहुँच गया.
अहह सोनी सिसक पड़ी और विशाल उसकी चूत पे हाथ फेरने लगा. सोनी की झांगे फैलती चली गई और विशाल को अपना रास्ता खुलता हुआ मिला. सोनी की साफाचट चूत पे रेंगता हुआ विशाल का हाथ सोनी को और तड़पने पर मजबूर कर गया. सोनी की चूत मजबूर हो कर आँसू बहाने लगी और उसके लब खुलने और बंद होने लगे. उसकी चूत में एक साथ हज़ारों चिंटियाँ रेंगने लगी . सोनी का कामरस उसकी चूत से बहने लगा और बिस्तर पे सैलाब बनने लगा.
‘ मुझे तुम्हारी चूत से बहुत अच्छी खुश्बू आ रही है, दिल कर रहा है तुम्हारी चूत को खा जाउन
विशाल कभी उसकी झंघों के अन्द्रुनि हिस्से को सहलाता, कभी उसकी चूत के पास हाथ फेरता , अभित तक उसने उसकी चूत को सिर्फ़ सरसरी तौर पे एक बार छुआ था और सोनी की चूत इंतेज़ार में कुलबुला रही थी. विशाल उसकी चूत के पास निकले छोटे छोटे बालों को खींचने लगा आराम से पर मजबूती से और सोनी के जिस्म को नई नई भावनाओं का आभास कराने लगा.
फिर उसने अचाचानक अपनी एक उंगली सोनी की चूत में घुस्सा दी, सोनी की चूत ने तड़प कर उसकी उंगली को ज्क्ड लिया.
विशाल ने यहीं पर बस नही किया, पहले एक उंगली अंदर घुस्साई थी, फिर एक और डाल दी और थोड़ी देर में तीसरी भी अंदर डाल दी. उसकी टाइट चूत में उसे दर्द और मज़े का एक साथ अनुभव हुआ .
उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
सोनी सिसक पड़ी और विशाल अपनी उंगलियों से सोनी की चूत के अंदर खलबली मचाने लगा.
‘ ओह! नही , मत करो. प्लीज़ मत करो. मैं नही ले सकती अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्शच में मैं नही ले सकती ‘
विशाल की उंगलियाँ उसकी चूत के अंदर ही घूमने लगी और उसकी बच्चेदानी की गर्दन पे दबाव डालने लगी.
फिर अछा वोस्के उप्पर झुका उसकी टाँगों को और फैलाया और उसकी छूट पे अपना मुँह लगा दिया.
अहह
विशाल ने यहीं बस नही किया अपनी जीब उसकी छूट में घुस्सा दी, और उसकी जीब छूट की दीवारों को घर्षण देने लगी.
आाआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईई उूुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
अब सोनी गला फाड़ के सिसकियाँ लेने लगी , उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी की कमरे के बाहर जेया रही थी और उसे इस बात की कोई चिंता नही थी. उसे सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही बात का अहसास था विशाल की जीब जो उसकी क्लिट को छेड़ रही थी उसकी छूट में अपने करतब दिखा रही थी, उसका क्लिट छूट के अंदर वापस घुसता और बाहर आता. जिस्म में बिज़लियाँ कोंधने लगी. वो अपनी छूट का दबाव विशाल के मुँह पे बड़ाने लगी.
‘आ जाओ मेरी जान, झड़ जाओ’
‘आह नही, ये बहुत ज़्यादा हो रहा है, मैं झड़ नही पा रही हूँ आह आह ओह माआअ’
‘मेरे लिए झड़ जाओ जानेमन, क्या तुम महसूस नही कर रही? महसूस करो आनंद की अंतिम सीमा को सोनी. मेरी उंगलियाँ तुम्हारी चूत के अंदर हैं और तुम्हारा क्लिट मेरी जीब का खिलोना है. तुम्हें सिर्फ़ अपने जिस्म को ढीला छोड़ना है , और होने दो जो होता है, बॅडने दो अपनी उत्तेजना को मत रुक उसे , और बादने दो, हन ऐसे ही, बस रिलॅक्स करो, फील करो . मुझे तुमको प्रमआनंद पहुँचाने दो ……….’

उसकी उंगलियों और उसकी जीब ने उसपे कब्जा किया हुआ था, उसकी जिस्म में उठी हुई तरंगों में एक लेय पैदा कर दी……….और अचानक उसका जिस्म अक्डा और वो झड़ने पे मजबूर हो गई. उसकी चूत ने सारे बाँध तोड़ दिए. उसके जिस्म से परम आनंद को खींच कर बाहर निकल लिए बड़ी प्रफूलता से
.
आह आइी आइी आइी. वो महसूस करने लगी जिस्म में उठते हुए बवंडर को, साँसे जैसे रुक सी गई आनंदीकरेक के कारण, वो पल था असमंजस का, जब धरती ने घूमना बंद कर दिया, सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही चीज़ बाकी रह गई एक हताश ज़रूरत अपने प्रॅमॅनंड को समेटने की.

‘एस ! ओह एस!’

उसका ओर्गसम उसके जिस्म को चीरने लगा जैसे हवा रेगिस्तान को चीरती है, जिस्म एक पत्ते की तरहा फड़फाड़ने लगा, जिस्म की हर मसपेशी सकत होती चली गई, एक एक नस चिल्ला रही थी , एक नग्न खुशी उफ्फन्ति हुई नदियों के बाँध तोड़ने की.

जिस्म में उठी हुई तरंगो को शीतिल होने में बहुत ही समय लगा. उसे सातवें आसमान पे जहाँ सोनी घूम रही थी, अपने परम आनंद की लहरों के थपेड़े खाते हुए, वापस आने में उसे काफ़ी समय लगा. और जब वो वापस आइी तो जिस्म से जैसे जान निकल चुकी थी, एक नशा था, जो सर चॅड के बोल रहा था , ऐसा होता है परम आनंद जो ओर्गसम के बाद महसूस होता है.
 








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FUN-MAZA-MASTI वासना का नंगा नाच--1

FUN-MAZA-MASTI

 वासना का नंगा नाच--1

 ये कहानी है दो जुड़वा बहनो की सोनलप्रीत कौर और मनप्रीत कौर, दो बहुत ही खूबसूरत सीखनीयाँ.

जहाँ मनप्रीत ( उर्फ मोनी) कामुकता का प्रतिबिंब है तो वहाँ सोनलप्रीत (उर्फ सोनी) एक सीधी साधी लड़की है. मोनी नये नये अमीर लड़कों के पीछे रहती है और अपनी जिंदगी ऐश के साथ गुज़ार रही है.
सोनी को काम से टर्की भेजा जाता है जहाँ उसकी मुलाकात विशाल से होती है जो सोनी की कामुकता को हवा दिखा देता है.

जब मनप्रीत उसकी जुड़वा बहन एक दम गायब हो गई वलाज़ूर के दक्षिण हिस्से से, सोनलप्रीत उर्फ सोनी जानती थी की उसे हर संभव प्रयत्न करना होगा उसे ढूँडने के लिए.

लेकिन वलाज़ूर के उस गाँव में जहाँ मनप्रीत आखरी बार देखी गई, एक अजीब वातावरण था जो उसे जानते थे उनके बीच, अनियंत्रित कामुकता से भरा महॉल.

जब सोनी का डर मनप्रीत की सुरक्षा के लिए बॅड गया, तब वो एक शॅक्स के पास गई जो उसकी मदद कर सकता था : रहस्यमय राजेश, रहस्यमय कामुकता का भंडार जिसका प्रभावी जादू अंतिम त्याग की कामना करता था.

अब सोनी कैसे मोनी तक पहुँचती है, आए पड़ते हैं इस सफ़र को



मेरी प्यारी सोनी, तुम विश्वास नही करोगी, कितनी मस्ती और कितना मज़ा ले रही हूँ मैं यहाँ गोआ के दक्षिण में……
मनप्रीत आरामदेह कुर्सी पे पीछे को ढलक गई, अपने घुँगराले लंबे सुनहरी बालों में पेन के पिछले हिस्से को फेरते हुए. अपना चेहरा उठा कर उसने उप्पर झूलते हुए पंखे को देखा जो किसी आलसी मधुमखि की तरहा भीनभीना रहा था गोल गोल घूमता हुआ अपनी छाया दीवार पे फेंकता हुआ.

पंखे की ठंडी हवा भगवान से भेजी लग रही थी, इस शांत दमघोनटू रात में. फिर भी आप उमीद करोगे की एक आमिर और प्रगतिशील आदमी जैसे सॅम्यूल के अपने विला मैं अरकोंडीटिओनिंग तो होगी ही, और उसने मनप्रीत ( मोनी) को निराश नही किया.

विला ले राक इतरता था अपने स्विम्मिंग पूल, घोड़े के अस्तबल, लौंबे हेर बाग, लक्सरी से भरपूर बाथरूम्स, और एक मास्टर बेडरूम जिसके बीच में दिल के आकर जैसा बेड और छत पे शीशे, सच में मोनी की किस्मत अच्छी थी की उसकी मुलाकात सॅम्यूल से हो गई .

जब सॅम्यूल ने उसे कुछ दिन अपने विला में बिताने के लिए नयोता दिया,तो एक लड़की भला कैसे मना कर पाती, ख़ासकर जब एक चुंबकीया शक्ति , शानदार व्यक्तित्व और तंदुरुस्त जिस्म का मालिक साथ में समय गुजरने के लिए मिल रहा हो.

अपने आप पे हस्ते हुए मोनी उस पत्र पे गौर करने लगी जो वो सोनी अपनी जुड़वा बहन को लिख रही थी. मोनी कभी ज़यादा संपर्क नही रखती थी सोनी से, लेकिन सोनी उस से काफ़ी अलग थी, अपनी पड़ाई के बाद दोनो के रास्ते अलग हो गये और दोनो एक दूसरे से दूर होती गयी.

मोनी जहाँ इष्क़बाज़, चंचल और हमेशा भ्रमण लालसा में लिप्त रहती थी वहीं सोनी अपने करियर के प्रति बहुत सीरीयस थी. मोनी सोचती थी की एक दिन वो एक लेखिका बनेगी , जब वो कुछ समय अच्छी तरहा जीले, सोनी एक आरकेवलोजिस्ट बन चुकी थी, और मध्य प्रदेश के किसी खंडहर पे काम कर रही थी.

25 साल की उम्र में सोनी नौकरी में पॅड गई, कितने दुख की बात है, जबकि मोनी इस चक्कर में नही पड़नेवाली थी. सोनी ने उसे बहुत समझाया, अपनी जिंदगी को एक रास्ते पे ढालने के लिए और जिंदगी में सेट्ल होने के लिए. तभी मोनी ने सोच लिया की वो 6 महीने सिर्फ़ घूमेगी और फिर सोचेगी आगे क्या करना है … शायद कोई अमीर लड़का इस दौरान उसे मिल जाए….

इतना मज़ा आ रहा है बहन तुम्हें क्या बताउँ – तुम यहाँ आजाओ मेरे पास. मुझे एक बहुत ही बढ़िया लड़का मिला है, पता है मैं उसके विला में ही रह रही हूँ, मुझे यकीन है की अगर तुम भी आज़ाओगी तो वो मना नही करेगा……….
जब तक तुम उसके साथ रात उसके बिस्तर में गुजारने के लिए तयार हो, सोचते हुए मोनी हंस पड़ी.
तींन एक साथ एक बिस्तर में – थ्रीसम ……ये क्या ख़याल उसके दिमाग़ में आया. जहाँ तक नयी नयी संभोग मुद्राओं का प्रॅष्न है , मोनी ने काफ़ी कुछ किया है, पर सॅम्यूल ने उसे जो मुद्राएँ सिखाई वो उसके लिए एक दम नयी थी. शायद सोनी को भी अड्वेंचरस सेक्स की ज़रूरत थी, कुछ आराम पाने के लिए.


मोनी की चीठठी बीच में ही रह गई जब सॅम्यूल उसे अपने साथ फ्रॅन्स ले गया. मोनी की तो लॉटरी लग गई. सॅम्यूल उसे अपने दूसरे विला में ले गया जो फ्रॅन्स के दक्षिण में था और गोआ वाले विला से भी भव्य था. मोनी ने सोचा वहीं जेया कर अपनी चीठठी ख़तम करेगी और ऐसे ही उसे साथ ले गई.

इधर सोनी को सरकार ने एक टीम के साथ इस्तांबुल भेज दिया, खबर आई थी की एक खुदाई में एक पुराने किले का खंडहर मिला है जिसमे कुछ ऐसे चीज़ें निकली हैं जिनका संबंध पुरातन भारत से हो सकता है. उनकी पहचान के लिए इस टीम को वहाँ भेजा गया.

मोनी सॅम्यूल के साथ उसके विला पहुँची, जो की भव्य था. ये जगह फ्रॅन्स के दक्षिण में एक गाँव थी जिसका नाम वलाजूर था.

मोनी की चीठठी फिर शुरू हो जाती है .
ये गाँव बहुत ही प्यारा है, थोड़ा दूर ज़रूर है बिल्कुल अकेला पर नाइस और रिवीयेरा के पास है. यहाँ बहुत चोदु किस्म के लोग रहते हैं – तुम्हें यहाँ आना चाहिए, मुझे ज़ाइन कर लो. कुछ दिन की छुट्टियाँ लो और यहाँ आजाओ. मैं तुम्हें यहाँ खूब घुमाउंगी और तुम्हारी पहचान कुछ लड़कों से करवाउंगी. तुम्हें इस वक़्त मस्ती की बहुत ज़रूरत है.


मस्ती. जब से वो वलाजूर आई उसकी मस्ती में इज़ाफ़ा हो गया. एक तरफ सॅम्यूल था, जवान, हसीन प्लेबाय, और जीन जो वाइनयार्ड का मालिक था . और था राजेश, लेकिन राजेश उसकी पसंद के टाइप का नही था. राजेश में कुछ था, वो बहुत ख़तरनाक लगता था. ना राजेश नही , बहुत से और भी लड़के थे चुदाई के लिए वलाजूर में.

सॅम्यूल उसके लिए बहुत पोज़ेसिव हो गया था और हमेशा राजेश से दूर रहने के लिए कहता था. पर राजेश की आँखों में ऐसा क्या था जो उसे अपनी और खींचता था, जिन्हें वो अपने दिमाग़ से नही निकल पाती थी.
उसने एक नज़र अपनी घड़ी पे डाली. रात के 12 बाज रहे थे. तेज़ तेज़ सायँ सायँ करती हुई हवा जो पेड़ों के बीच से गुजर रही थी उसकी आवाज़ उसे अपनी खिड़की से सुनाई दे रही थी.
स्प्रिंग का मौसम था और वातावरण कुछ ऐसा था जो उसमे उत्तेजना भर रहा था. उसके जिस्म का पोर पोर उत्तेजित हो रहा था.

‘मोनी’

उसने सर उठा के देखा किसी ने ने उसका नाम फुसफुसाया था. क्या वो हवा थी. या उसने वाकय में सुना था. बाहर चलती हुई हवा पत्तों के हिलने की आवाज़ और खिड़की के खड़खड़ाने की आवाज़.
खड़ी हो कर उसने खिड़की से बाहर बाग की तरफ देखा. खिड़की से निकलती हुई लाइट उसे सिर्फ़ एक छोटा सा हरा घास का टुकड़ा दिखा रही थी,. वहाँ कोई नहीं था.

‘मोनी’

इस बार आवाज़ काफ़ी सॉफ सुनाई दी., लेकिन फिर भी खिड़की से कोई नज़र नही आ रहा था. उसने खिड़की खोली और बाहर झाँक कर बोली – सॅम्यूल --- जीन --- कोई जवाब नही.

जैसे ही वो वापस कमरे में आई, उसे यकीन हुआ की कोई उसका चाहने वाला मज़ाक कर रहा है. उसने फिर अपना नाम सुना इस बार थरथरती हुई फुसफुसाहट थी. वो मजबूर हो गई, अपना गाउन पहना और नीचे चली गई.

नीचे बिल्कुल अंधेरा था, हल्की हल्की रोशनी थी. वो दरवाजा खोल के बाहर नंगे पैर ही चली गई.
समुद्र से आती हुई गरम हवा में कुछ अजीब सा नमकीन टेस्ट था. रात काफ़ी सुंदर लग रही थी.
पेड़ों की खुश्बू उसके चारों तरफ फैल रही थी, जो उसमे उत्तेजना भर रही थी और उसे सॅम्यूल का इंतेज़ार था जो कल आने वाला था फिर वो उसके साथ भरपूर रात भर चुदाई करेगी.

‘मोनी’

आवाज़ काफ़ी पास से आई थी, वो आवाज़ की तरफ मूडी पर उसे कुछ नज़र नही आया. अचानक उसकी आँखों पे एक पट्टी पॅड गई और किसी के हाथों ने उसके मुँह को बंद कर दिया. उसका दम घुटने लगा और उसकी चीखें उसके मुँह में ही रह गई.

उसके बाद कुछ नही था . बस अंधेरा ही अंधेरा.


‘मेरी जान सोनी, तुम्हारे बूब्स, कितने खूबसूरत हैं, मैने ऐसे आज तक नही देखे. क्या तुम जानती हो मेरी प्यारी’
सोनी के मुँह से सिसकी निकल पड़ी अहह जब विशाल ने उसके उपर झुक कर उसके गुलाबी निपल्स को चाटना शुरू किया.


‘तुम्हारी स्किन कितनी मुलायम है सीखनी जो ठहरी, और यहा की टर्किश औरतों ने टोन के चक्कर में अपना कबाड़ा कर रखा है. लेकिन तुम सोनी तुम तो किसी देवी का अवतार हो……’

सोनी के अधरों पे मुस्कान खेल उठी उसका जिस्म विशाल की हर हरकत के साथ उत्तेजित हो रहा था बल खा रहा था. उसे कोई गुमान नही था खुद पे वो खूबसूरत थी,उसके उरोज़ भरे हुए थे, पर देवी का अवतार कभी नही. विशाल बहुत ही बड़ा चड़ा के बोल रहा था. पर आज की रात कुछ फरक नही पड़ता.
उसकी बातों को वो सच मानने लगी और उसकी बाँहों में खोती चली गई. सारी रात दोनो एक दूसरे की जिस्म से खेलते रहे.

सोनी को जो कमरा मिला था बहुत छोटा था, कमरे में एक गॅस लॅंप जल रहा था जो बेड के पास एक लकड़ी के क्रेट को उल्टा करकेरखा गया था. दीवारों पर उनके टकराते हुए जिस्मों की परछाईयाँ आती जाती रही.
एक फोल्डिंग टेबल जिसपे टाइप राइटर था और कोने में खुला हुआ सूटकेस. बेड भी कोई खास नही था, एक पुराना मेट्रेस्स और दो कंबल.

भारत के आर्कियोलॉजिकल इन्स्टिट्यूट में एक जूनियर को और क्या मिलता. उसे कम से कम कमरे का एकांत तो मिला था, बाकी टीम के मेंबर्ज़ तो चार चार एक कमरे में थे.

उसे मोनी के पोस्टकार्ड की याद आई, जो उसे आज ही मिला था. कोई उसका कोलीग जो आज आया था ऑफीस से ये पोस्टकार्ड लेता आया था.
भव्या विलास, अमीर आशिकों के बारे में हिंट….. कितना फरक था दोनो बहनो में – एक वो जो यहाँ खंडारों से जुड़ी हुई है और एक वो जो सिर्फ़ मस्ती ही मस्ती में डूबी रहती थी.

उसे मोनी के सपने आने शुरू हो गये , जिनका कोई मतलब नही निकलता था, एक डर दिमाग़ में बैठता जा रहा था. शायद उसके दिमाग़ के किसी कोने में ये चाहत थी की वो मोनी जैसी बनना चाहती थी, या उसे के भी दो कदम आगे ………कामुकता की पूरी आज़ादी .

खुली चुदाई जो वो विशाल के साथ अनुभव करने लगी थी.
यहाँ इस छोटे कमरे की भी कुछ ख़ासियत थी, पता नही कैसे ये ख़याल सोनी के दिमाग़ में आए.
विशाल की उंगलियाँ उसके जिस्म में गुदगुदी मचा रही थी.

अहह बहुत अच्छा लग रहा है. वो सिसक के बोली.

‘मैं जानता हूँ तुम्हें कैसे खुश करना है मेरी जान’ विशाल उसके नेवल को चूमते हुए बोला.

उसकी बेल्ली को चूमते हुए विशाल नीचे की तरफ बॅडने लगा उसकी चूत से थोड़ा उपर, जो तड़प रही थी लंड के लिए.
उसने उसके हाथ को पकड़ने की कोशिश करी पर विशाल ने अपना हाथ छुड़ा लिया.

‘आराम से , आराम से मेरी जान, पहले तो मैं बहुत कुछ तुम्हारे साथ करना चाहता हूँ, क्या तुम्हें नही लग रहा तुम स्वर्ग में पहुँच गई हो?’


उसने हल्केसे उसकी बेल्ली को काट लिया. सोनी के जिस्म में एक आनंद की लहर ढोढ़ गई.
‘विशाल, क्या कर रहे हो……?’

उसने अचानक उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए और उसे चुप करा दिया. उसके चुंबन ने उसके सारे विरोध को ख़तम कर दिया. सोनी का जिस्म एक कमान की तरहा उपर उठ गया और उसके जिस्म ने उसका साथ छोड़ आनंद की तरफ अपना ध्यान मोड़ लिया. उसके उभरे हुए उरोज़ विशाल की छाती में धसने की कोशिश करने लगे. निपल्स लंबे और बादाम के नट जैसे सख़्त हो गये, और उसकी बदती हुई उत्तेजना को सॉफ सॉफ दिखाने लगे.
विशाल अब उसके उपर लेट चुका था और उसके बालों में लगे हुए पिन को खोल रहा था. जैसे ही उसके बॉल आज़ाद हो कर लहराने लगे

‘आह मेरी जान, देखो अब तुम और भी ज़यादा खूबसूरत लग रही हो’ उसने उसके आतमविश्वास को और बड़ाया की वो वाक्य में बहुत खूबसूरत है ‘ एक बार फिर तुम ही मेरी देवी हो. सिर्फ़ मैं ही तुम्हारी असलियत को पहचान सकता हूँ’

उसके सुनहरी बालों की लट्टों को खोलते हुए उसने तकिया पर उन्हें फैला दिया. विशाल ने अपना चेहरा उसके बालों में धसा लिया और उनकी खुश्बू से खुद को आनंदित करने लगा. उसका खड़ा लंड सोनी के पेट में चुब रहा था जो अपना प्रिकम निकाल रहा था और उसकी नमकीन सुगंध सोनी की उत्तेजना को भड़का रही थी.
सोनी ने उसकी पीठ पे हाथ फेरना शुरू कर दिया, उसके जिस्म में निकले हुए छोटे छोटे बालों को खींचने लगी और उसके नितंबों को सहलाने और दबाने लगी, विशाल के जिस्म में उत्तेजना की लहरें सर उठाने लगी.

‘आह आह आह आह’ विशाल भी सिसक उठा, और उसके होंठों को चूसने लग गया, जैसे भूखा बच्चा अपने मा के निपल्स को चूस्ता है.


सोनी तेज़ी से सीख रही थी. अगर यहाँ उसे 6 महीने रुकना पद गया तो विशाल से चुदाई के सारे तरीके सीख लेगी. विशाल टर्की में ही काम करता था और उसने सोनी को लप्पेट लिया था उसका आशिक़ बन गया था.
सोनी ने अपनी दाई टांग उसकी झांग से रगड़ते हुए उसकी पीठ को क़ब्ज़े में ले लिया. और अपने पैर से उसे सहलाती हुई सिड्यूस करने लगी. वो जानती थी की अब उससे और सहा नही जाएगा उसे बड़ी शिदत से लंड अपनी चूत में चाहिए था, विशाल भी ये समझ रहा था. लेकिन वो मज़े को और बदाना चाहता था.
‘प्लीज़ विशाल अब डाल दो’
‘बहुत जल्द मेरी जान’
‘प्लीज़ अब बर्दाश्त नही होता, अब चोद डालो मुझे’
वो हल्की गुर्राहट के साथ हसा.
‘मेरी बुद्धू लड़की, इतनी जल्दी, इतनी आधीरता तुम्हारे अंदर है. भरोसा रखो मुझ पे आज तुम्हें वो आनंद दूँगा जिसकी तुमने कभी कल्पना भी नही करी होगी…….’
सोनी हताश होते हुए आह भर उठी, उसने फिर उसे सहलाना शुरू कर दिया और इस बार उसका सारा धयान उसके उरोज़ पे था. कितनी देर से दो जिस्म नग्न एक दूसरे से लिपटे हुए इस कमरे में बंद थे?
समय जैसे रुक ही नही रहा था, ऐसा लग रहा था पता नही कब से वो उसके साथ खेलता जा रहा है और अभी तक उसने उसकी चूत को हाथ तक नही लगाया था. उसकी उत्तेजना को भड़काता ही जा रहा है अपनी उंगलियों और अपनी ज़ुबान से. आह कितनी देर और…..कितनी देर और लगेगी जब उसकी उंगलियाँ उसकी चूत तक पहुँचेंगी – उसकी दीवानगी का घर ?
विशाल ने जब उसके निपल को मुँह में डाल कर चूसना शुरू किया तो सोनी के मुँह से अहह निकल पड़ी, वो बिल्कुल एक बच्चे की तरहा उसका दूध पीने की कोशिश कर रहा था

आह कितना अच्छा लग रहा था. विशाल की उंगलियों ने उसके उरोज़ की जड़ को दबोच रखा था और उसे फूला रहा था, एक ग्लोब की तरहा, उसकी नीली नसें सॉफ सॉफ चमकने लगी और उसका निपल और भी सख़्त हो गया, हद से ज़यादा संवेदनशील. हर नया चुंबन और ज़ुबान की चॅट्काहेट उसके जिस्म में बिज़लियाँ दोढ़ा रही थी. उसके निपल से उसकी झांग तक, उसकी बाजून तक और……..उसके क्लाइटॉरिस तक.
उसकी चूत की पंखुड़ियों के बीच में छुपा बेचारा क्लाइटॉरिस फुदक रहा था, फेडक रहा था और चूत से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था आवाज़ उठाने के लिए की मेरी तरफ भी धयान दो, मुझे भी छुओ, मुझे भी चाटो. सोनी को उसके क्लाइटॉरिस की हालत महसूस हो रही थी, जो उसकी चूत की फांकों को अंदर से रगड़ रहा था उसके मज़े को बड़ा रहा था पर खुद उदास हो रहा था घर्षण के लिए.
‘ आह तुम बहुत जालिम लड़की हो’ विशाल फुसफुसाया और उसके निपल को छोड़ दिया जो उसकी थूक से सना हुआ चमक रहा था. विशाल ने अपनी झांग उसकी चूत से रगड़नी शुरू कर दी. वो उस तडपा रहा था.
’ आह ज़ोर से और ज़ोर से- अब नही बर्दाश्त होता’ सोनी सिसक पड़ी
 
 
 
 
 
 







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