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Tuesday, December 10, 2013

FUN-MAZA-MASTI जाने अनजाने - (भाग-2)

FUN-MAZA-MASTI

जाने अनजाने - (भाग-2)

 
उसके दो दिन बाद फिर नीताजी की फोन आया, कहने लगी-
"राज, कब आ रहे हो ?"

मैंने कहा-
"नीता जी, जब आप बुलाओ, मैं हाजिर हो जाऊंगा, बोलिए कब जाना है ।"

"राज, ऐसा नहीँ हो सकता ! तुम दोनोँ यहां आ जाओ, साथ मेँ मजे लेँगे ।"

सॉरी दस्तोँ, मैँने आप लगोँ को बताना भुल गया कि मैँ एक शादीशुदा आदमी हुं और एक सुन्दर सी सेक्सी पत्नी है मेरी । उसकी उम्र 32 साल होगी और मेरा 35 । मैँ दो बच्चोँ का बाप भी हुं ।

मेरी पत्नी का नाम सीमा है । बहुत गठीला और भरा हुआ बदन है उसका । उसकी सबसे सेक्सी अंग थी उसकी चौडी गांड जिसकी थिरक देख कर किसी भी मर्द के लंड खडा हो जाएंगे ।

खैर जब नीताजी की बात मैँने उसे बताई तो व एकदम से आश्चर्य-चकित रह गई और उससे मिलने का मन बना लिया ।

और हमने अगले दिन रात को ठीक आठ बजे नीता की घर पहुंच कर बैल बजाई । नीता ने दरवाज़ा खोला और मेरे गले लग कर कहने लगी-
"राज, इतना इन्तज़ार मत करवाया करो ! कहां हैँ तुम्हारे पत्नी कबसे बेताब हुं मिलने के लिए ।"

मैंने कहा-
"सीमा भी आपसे मिलने के लिए बैचेन है । आपको देखने के लिए बडी उत्सुक हुई जा रही है ।"

और फिर मैँने दोनोँ को मिला दिया । नीता ने सीमा को गले लगा कर चुम लिया और हमेँ अंदर ले गयी । अपनी दोनोँ बच्चोँ से हमेँ मिलाते हुए नीता बोली-
"बेटा, ये हैँ राज अंकल और ये हैँ सीमा आंटी । ये मेरे ही ऑफिस मेँ काम करते हैँ और आज रात यहीँ रहेंगे ।"

बच्चे हमसे मिल कर बहुत खुश हुए । एक घंटे मैँने बच्चोँ के साथ गप्पे लडाता रहा, इसी बिच नीता और सीमा ने मिल कर खाना तैयार कर लिया । फिर सबने एक साथ खाना खाया । खाना खत्म करके बच्चे अपने कमरे मेँ सोने चले गए । नीता ने नीचे गेस्ट रुम मेँ हमारा बिस्तर लगा दी । मुझे और बर्दास्त नहीँ हो रहा था । सीमा नीता के साथ काम निबटा रही थी । मैँने अकेले दोनोँ का इंतजार करने लगा । आधे घंटे बाद दोनोँ कमरे मेँ आ गए तो मैँने नीता से पुछा-
"नीताजी, बच्चे सो गए क्या ?"

नीता ने थोडी सी मुस्कराई और अलमारी से एक विस्की का बोतल निकालती हुई बोली-
"वे तो कब के से चुके हैँ, अब हम अपना काम आराम से कर सकते हैँ ।"

फिर नीता ने तीन पैग विस्की के बनाये, हम सबने आपस में चियर्स किया, अपने-अपने पैग खत्म किये, एक दूसरे के गले लगे । उसके बाद नीता ने तीन और पैग बनाये और पैग खत्म करने के बाद हम तीनों ने अपना चुदाई का कार्यक्रम शुरु किया । एक गहरी सांस लेकर हमने अपने-अपने मुंह ऐसे घुमाये कि सबके होंठ सट गए । हम एक दूसरे के होंठों को चुमने लगे । फिर नीता ने सीमा को अपनी बाहों मे कस लिया और उसकी होंठों को बेतहाशा चुसने में लग गई ।

मैँने खुद को दोनोँ से अलग कर दिया । मेरे बदन में सेक्स का नशा छाने लगा था । मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत भी दुसरी औरत को इस तरह मज़ा दे सकती है ।

अब नीता का हाथ सीमा की ब्लाउज़ पर पहुंच चुका था और उसने एक सैकेंड में सारे हुक खोल डाले और चुचियोँ को सहलाने लगी । सीमा की स्तन काफी बड़े और दूध की तरह गोरे थे । फिर नीता अपनी जीभ से सीमा की चुचेँ चाटना शुरू कर दिया । साथ ही दुसरे स्तन को हाथ से मसलती जा रही थी ।

ये देख कर मेरी उत्तेजना लंड तक पहुंचने लगा था । फिर नीता ने अपना साडी और ब्रा उतार फैंके । उसके स्तन भी भरे पुरे थे और चुचियां तनी हुईं थीं । नीता ने अपनी चुचियां सीमा की छातियों से सटा दी और फिर अपने होंठ उसकी होंठों से सटा दिये । दोनोँ की चुचियां आपस मेँ टकरा रही थी और दोनोँ एक दूसरे से चिपक कर बेतहाशा किस करने लगे ।

दोनोँ औरतोँ की मस्ती देख कर मेरा सारा बदन मस्ती में डुबता जा रहा था । फिर नीता ने मेरी पत्नी का हाथ अपनी स्तन पर रख लिया और बोली-
"प्लीज़, दबाओ न इन्हेँ ।

सीमा उसके स्तनोँ को मसलने और दबाने लगी । नीता भी आंखे बंद करके मिंजवाने का मज़ा लेने लगी । फिर सीमा ने उसकी निप्पल अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी ।

सच बताऊं, दोनोँ की चुमा-चाटी देख कर मुझे बहुत मज़ा आने लगा था और अपना लंड निकाल कर सहलाने लगा ।

काफी देर तक वे दोनों एक दुसरे के चुचियां चुसते रहे । कुछ देर बाद नीता ने सीमा को पलंग पर लिटा दिया और उसकी साडी, पेटिकोट खोल डाली और पैंटी भी खोल कर उसे पुरा नंगा कर दिया । मेरी पत्नी थोड़ी शरमा रही थी और अपने हाथ अपनी टांगों के बीच चूत पर रख लिये ।
नीता बोली-
"मत शर्माओ सीमा, मैं भी अपनी सारी कपड़े उतार देती हुं ।"

कहने के साथ उसने भी अपनी पेटीकोट, पैंटी नीचे करके उतार दी और बिल्कुल नंगी हो गई । पैँटी के निचे सरकाते ही नीता की 8 इंच का आधा तना लंड बाहर आ गया । सीमा बडी देर से इसी पल के इंतजार मेँ थी, कितना बडा लंड ! उसने लंड को मुठ्ठी मेँ भर ली और मेरी तरफ देख कर दोनोँ लंडोँ की तुलना करने लगी । महिलाओँ की भी लंड उगती है ? ये आज मेरी पत्नी पहली बार देख रही थी । मेरा लंड नीता की लंड से 3 इंच छोटा था । नीता की लंड लम्बा तो था ही साथ मेँ मोटा भी उतना ही था । सीमा नीता की लंड के साथ पुरे अंडकोष पर हाथ फिराते हुए उसकी तरफ देखी तो नीता मुस्करा दी और बोली-"कैसी लगी मेरी लंड ! अब चाटो इसे ।"

तभी मैँने भी अपना सारा कपडा उतार दिया और नीता की बगल मेँ लेट गया । उसकी एक तरफ मेरी पत्नी थी और दुसरी तरफ मैँ । सीमा ने नीता की लंड को मुठ्ठी मेँ लेकर उपर-निचे करने लगी और एक स्तन को चुमने लगी । मैँने भी नीता की बड-बडे अंडोँ को सहलाने लगा और दुसरी स्तन को मुंह मेँ लेकर चाटने लगा ।

नीता अब मस्ती मेँ आंखेँ बंद कर के हम दोनोँ के सर को चुचियोँ पर दबाते हुए अपनी भारी गांड उचकाने लगी । फिर सीमा ने स्तन छोडी और नीचे जाकर नीता की मोटी जांघोँ को फैला कर तनी हुई लंड को मुंह मेँ भर कर चुसने लगी । पुरी लंड को जड तक चाटते हुए चुसने लगी । फिर कुछ देर नीता की लंड चाटने के बाद सीमा ने लंड को मुठियाते हुए उसकी विशाल अंडकोष मुंह मेँ भर कर चुसने लगी तो उससे रहा नहीँ गया और उसने सीमा की बालोँ को पकड के सर को अपनी लंड पर दबाने लगी और गांड हवा मेँ उछालने लगी ।

मस्ती मेँ नीता की मुंह से सिसकारीयां निकलने लगी । तभी मैँने नीता की उरोजोँ को छोड कर उसकी होँठोँ को चुसने लगा । सीमा अब नीता की गांड के छेद पर जीभ चलाने लगी और लंड को जोर-जोर से मुठियाने लगी । तभी मैंने नीता की लाल सुपाडी पर जीभ चलाना शुरु कर दिया । अब नीता की हालत और खराब हो गई और व उत्तेजना के मारे कांपने लगी ।

कुछ देर तक ये चटाई का सिलसिला चलता रहा और फिर नीता ने उठ कर मेरी पत्नी के जांघोँ को फैला कर बुर के सामने बैठ गई । सीमा की गोरेपन के कारण उसकी बुर बहुत सुंदर थी, हल्के-हल्के झांट उगे थे । उसकी बुर की दोनों फांकें उभरी पर सटी हुई थीं । नीता हल्के-हल्के मेरी पत्नी की चुत को सहलाने लगी और फिर उसने बुर की दोनों फांकों को हल्के से फैला दिया । अंदर से सीमा की चुत बिल्कुल गुलाबी थी ।
ऊपर बुर का दाना और नीचे टाइट छेद देख कर नीता बोली-
"हाय, क्या मस्त माल है तुम्हारी सीमा ! चोदने मेँ मजा आ जाएगा ।"

नीता ने मेरी पत्नी की बुर को चुम लिया फिर धीरे से अपनी जीभ से बुर के दाने को चाटने लगी । सीमा को तो करेंट जैसा लगा और आंखें बंद करके बुर में हो रही सिहरनों का आनन्द लेने लगी ।
कुछ देर तक नीता सीमा की बुर के छेद को चाटने के बाद जीभ को बुर मेँ थोड़ा अंदर घुसा दिया और अंदर-बाहर करने लगी । साथ ही साथ नीता अपनी लंड भी मुठिया रही थी और मैँ उसकी चुचियों को सहला रहा था ।

कुछ देर बाद नीता ने सीमा की गांड में उंगली डाल दी और धीरे धीरे अंदर-बाहर करते हुए उसकी बुर के गुलाबी छेद को चाटने लगी । सीमा ने भी अपनी गांड और बुर में हो रही फीलिंग का मज़ा लेने लगी ।

अब मैँने नीचे जाकर नीता की लंड को होठों मेँ भर के चुसने लगा और साथ ही अपनी दो उंगलियां उसकी गांड के छेद में घुसेड़ कर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा । नीता अब अपने भारी चुतड़ उठा-उठा कर धक्का मारना शुरू कर दिया । नीता की लंड झनझनाने लगी और उसकी मुंह से आहें निकलने लगी । मेरी पत्नी के मुंह से सिसकियां निकल रही थी । सीमा बिल्कुल गरम हो चुकी थी और बोली-"अब बस नीताजी! इस बुर की आग बुझा दो ।

फिर नीता अपनी लंड को मेरे मुंह से निकाल कर मुझे अपने से अलग किया ओर सीमा की जांघोँ के बिच लंड पकड कर बैठ गई । मेरी पत्नी की बुर के लाल दरार पर लंड रगडते हुए नीता बोली-
"ले रंडी, चुदवा ले मुझसे ! आज तो मैँ तुम्हारी बुर फाड दुंगी ।"

नीता की मुंह से ऐसी गंदी बातेँ सुन कर मैँ वासना के रस मेँ डुब गया । अब हम तीनोँ पर शराब का नशा चढने लगा था ।

सीमा की बुर गीली हो चुकी थी, मैँने पिछे से जा कर नीता की भारी गांड के दरार पर हाथ फेरते हुए उसकी विशाल लंड को मेरी पत्नी की बुर के छेद मेँ भिडा दिया । नीता ने सर घुमा कर मुझे चुम लिया और गांड उछाल कर एक ऐसा धक्का मारी की एक ही बार मेँ उसकी 9 इंच की लंड पुरी अंदर पहुंच गई । सीमा दर्द से चीख पडी । फिर निता सीमा के उपर झुक गई और उसकी होँठोँ को चुमते हुए धीरे-धीरे उसकी बुर मेँ लंड पेलने लगी । सीमा दोनोँ पैर नीता की कमर मेँ लपेट ली । नीता अपनी गांड जोर-जोर से हिला कर आगे-पिछे होने लगी और सीमा को चोदने मेँ लग गई ।

मैँने नीता की उछलती हुई मस्त गांड को एक हाथ से सहला कर मेरी पत्नी की बुर चोदने मेँ उसकी उत्साह बढा रहा था । बडा मजा आ रहा था मुझे, अपनी पत्नी को एक दुसरी औरत की मूषल लंड से चुदवाते हुए देख कर ।

सीमा की मुंह के सामने नीता की दुध लटक रही थी जिनको व मुंह मेँ भर कर चुसने मेँ लग गई । नीता मस्ती मेँ तडप उठी और बहुत जोर-जोर धक्के लगाते हुए मेरी पत्नी को चोदने लगी ।

नीता एक माहिर खिलाड़ी लग रही थी । उसकी चोदाई देखते हुए मैँने अपना लंड मुठिया रहा था । वैसे तो नीता एक औरत ही थी, पर बिल्कुल मर्द की तरह मेरी पत्नी की बुर चोद रही थी । सीमा भी नीचे से अपनी गांड उछालती हुई नीता का पुरा साथ दे रही थी ।

काफी देर तक चुदाई के बाद मेरी पत्नी अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई और उसकी मुंह से सिसकारीयां निकलने लगी । नीता भी एक हाथ से सीमा की सर को अपने दुध पर दबाते हुए पागलोँ की तरह उसे चोदे जा रही थी । पुरा कमरा दोनोँ के चुडियां और पायल से निकले आवाजोँ से गुंज रहा था ।

नीता गच-गच अपनी लंड सीमा की बुर मेँ अंदर-बाहर करते हुए चोद रही थी । अब तो नीता की मस्ती आसमान तक पहुंच चुकी थी ।
अचानक नीता ने अपनी रफ्तार बढा दी, उसने मस्ती मेँ बडबडाने लगी और जोर से-
"आआआ....ईईई.....इअआ आआई.... करते हुए अपनी भारी गांड हवा मेँ उपर किए और हिचकोले मारते हुए लंड को बुर मेँ जड तक पेल कर झडने लगी । सीमा भी कराहते के साथ झड गई ।

थकान के कारण दोनोँ एक दुसरे से लिपट कर पडे रहे । अभी तक नीता की लंड सीमा की बुर के अंदर ही था । मैँने नीता की गांड की तरफ आया, अभी भी सीमा ने दोनोँ पैर नीता के कमर पर लपेटे रखा था ।

मैँने नीता की उभरी चुतड को फैला कर भुरे रंग के छेद को चाटना चाहा तो उसने बुर से अपनी लंड निकाल ली । पुरा लंड वीर्य और बुर रस से तर गया था । फिर मैँने गांड को चुसते हुए नीता की लंड को पिछे से मुंह मेँ भर कर चाटने लगा । जब नीता ने देखा की सीमा की बुर से उसकी लंड से निकले गाढा वीर्य टपक रहा है, झट से उसने सीमा बुर को अपने मुंह के पास खींच लाई और बुर से टपक रहे रस को चाट-चाट कर खाने लगी । चटाई खत्म करके नीता एक और लेट गई ।

फिर मैँने अपना लंड सीमा की मुंह में डाल दिया, व उसे चुसने लगी । अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया । मैँने सीमा को लिटाया और उसकी बुर पे अपना लंड रख दिया, सीमा की मुंह से आवाज़ आ रही थी-
"ओह्ह.. राज तुम भी चोद दो अभी!"

मैँने अपना लंड पुरा का पुरा उसकी बुर में डाल दिया और जोर से चोदने लगा । अब नीता ने भी उठ कर अपना लंड मेरी पत्नी के मुंह में डाल दिया । अब सीमा दो-दो लंड खा रही थी । कुछ देर बाद नीता की लंड फिर से चोदाई के लिए तैयार हो गया । अब नीता ने मेरी पत्नी को ऊपर आने को बोली । अब सीमा मेरे ऊपर आ गई । उसने मेरी लंड पर अपनी बुर रखा और ऊपर से पुरा लंड अपनी बुर मेँ अंदर ले गई । मैँने उसके दूध को दबाने लगा । सीमा अपनी मांसल गांड हिला-हिला कर उपर से चुद रही थी ।

नीता अपनी लंड मेरे पत्नी की गांड में रगड़ने लगी । सीमा की गांड बड़ी टाईट थी इसलिए नीता की लंड अन्दर नहीं जा रहा था । फिर नीता ने उठ कर टेबल से एक कंडोम और ऑलीव तेल ले आई । फिर नीता ने अपनी लंड पर कंडोम चढा कर तेल लगा ली । अब नीता अपनी लंड को गांड के छेद मेँ रगडने लगी, सीमा अपनी मस्त गांड को हिला-हिला कर उसका साथ दे रही थी और नीचे से मैँ उसे चोद रहा था । अब नीता ने फिर से अपनी लंड डालने की कोशिश की । अब उसकी आधी लंड मेरी पत्नी की गांड के अंदर चला गया । मेरी पत्नी सिसकियां ले रही थी । अब नीता अपनी लंड से उसकी गांड मार रही थी, उसे भी मज़ा आ रही थी, मस्त गांड जो मिली थी उसे !

नीता ने उपर से इतनी जोरोँ से धक्के लगाए जा रही थी कि मुझे लगने लगा, नीता औरत नहीं बल्कि कोई मर्द है जो अपनी लंड से मेरी पत्नी की गांड चोद रही है ।

हम तीनोँ पर अजीब सा जुनुन सवार था । नीता और मेँ एक ही साथ सीमा की बुर और गांड मेँ चोदाई कर रहे थे । सीमा भी मस्ती मेँ कराहने लगी थी । हम सीमा की दोनोँ छेद का आनन्द ले रहे थ ।

काफी देर इस तरह चोदाई के बाद नीता चरम सीमा पर पहुंच गई, उसकी मुंह से सिसकारीयां निकलने लगीं और व सीमा की गांड मेँ ही झड गाई । फिर नीता ने गांड से अपनी लंड निकाली और कंडोम निकाल कर लंड को मेरी पत्नी के मुंह में डाल दिया । कुछ ही देर में मैँने भी अपना सार वीर्य सीमा के बुर में डाल दिया और झड गया ।

रात के दो बज चुके थे । थकान के कारण हम नंगे ही साथ सो गए । सुबह को मैँ जल्दी उठ गया, देखा नीता और सीमा अभी तक सो रहीँ थी । मैँने दोनोँ औरतोँ के नंगे जिस्म को निहारने लगा । कितनी सेक्सी और भरी हुई थी दोनों की शरीर, किसी भी मर्द को पागल बना सकती हैं दोनों । पर एक औरत की बुर थी और दूसरी की एक विशाल लंड । बिल्कुल मर्द जैसा लंड । पुरी तरह से मर्द के लंड जैसा ही चोदने में सक्ष्यम ।

कितनी अजीब जिँदगी थी नीता की, स्त्री के शरीर पर लंड लिए जी रही है । मर्द के बराबर उसकी लंड चोदने मेँ माहिर था । मैँने अपने लंड पर नजर गडाया । कितना फर्क था, मेरा लंड अब 4 इंच का हो चुका था जबकी नीता की लंड नॉर्मल मेँ ही 7 इंच का था लम्बा और मोटा । मैँने धीरे से उसकी लंड को मुठ्ठी मेँ भरा, लाल सुपाडा अभी तक बाहर था । और मैँने लंड को थोडा निचोड कर सुपाडा अंदर करने लगा तो व जाग गई और बोली-
"क्या कर रहे हो राज ! अभी सुबह हो चुकी है ।"

फिर उसने घडी देखा तो उछरती हुई बिस्तर से उठ खडी हुई और बोली-
"अभी मुझे जाना चाहिए, नहीँ तो बच्चे उठ कर मुझे ढुंडते हुए यहां आ जाएंगे ।"

फिर उसने मुस्कराती हुई मेरी पत्नी की गांड को सहलायी और कपडे समेट कर नंगे ही अपने कमरे चली गई । जाती हुई नीता की लंड और चौडी गांड की थिरक देख कर मेरा लंड फिर से तनने लगा । उसके जाते ही सीमा ने दरवाज़ा बंद करके अपनी बुर सहलाई । व बड़ी खुश लग रही थी और हो भी क्यों नहीं, उसे दो-दो लंड से मजा जो मिले थे ।

सुबह के छे बजे हम लोग नीता और उसके बच्चोँ से विदा ली और घर के लिए रवाना हुए ।

समाप्त ।
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FUN-MAZA-MASTI जाने अनजाने - (भाग-1)

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जाने अनजाने - (भाग-1)

 
मेरा नाम राजपाल है, मैं पटना से हुं और दिल्ली में काम करता हुं । आपको अपनी असली कहानी सुनाना चाहता हुं जो एक हकीकत है ।
ये घटना दरअसल दो साल पहले की है । मैं एक बार ऑफिस के काम से ईलाहाबाद ट्रेन से जा रहा था । खराब मौसम के कारण ट्रेन दो घंटे लेट थी। तो मेरा बर्थ साइड लोवर था । और मेरे ऊपर वाली बर्थ एक औरत ने ली थी । दे घंटे बाद ट्रेन चल पडी । दिन में उस औरत के साथ मेरा बर्थ में बैठ के बात करते-करते चल रहा था । मैंने उनके बारे में पूछा तो बोली व एक विधवा है और 8 साल पहले उसकी पति का स्वर्गवास हुआ था । व अपनी मायके आयी थी अभी घर जा रही है । उनकी पति सरकारी जॉब में थे और अब उन्हें उनकी जगह नौकरी मिल गयी है । उनके दो बच्चे हैँ, एक बेटा और एक बेटी, बेटा 16 साल का और बेटी 12 साल की, दोनों स्कूल जाते है ।

उनको देखके लगा उनकी एज 43/44 होगी, सीधी सादी सभ्य महिला । उनकी शरीर बहुत सेक्सी लग रही थी । ब्लाउज में से झांकती उनकी मोटी-मोटी चुचियां बहुत मस्त लग रही थी । बार-बार उनकी चुचियोँ की झलक देखके मुझे बहुत अच्छा लगा रहा था । पुरे रास्ते दोनों एक ही बर्थ में बैठ के बात करते-करते टाइम पास कर रहे थे । उन्होंने अपना नाम नीता चौधरी बताया तो मैँने भी उन्हेँ अपना नाम बता दिया । उन्होँने अपना फ़ोन नंबर मुझे दिया और मैंने भी अपना नंबर उनको
दिया ।

ईलाहाबाद पहुंच कर व बोली-
"मैं आप को फ़ोन करूंगी तो आप बात कर लेना । मेरा घर स्टेशन से लोकल ही दो स्टेशन बाद में ही है । आप आजाना एक दिन ।" बोलके व ईलाहाबाद में दुसरी लोकल ट्रेन में बैठ गयी । दो दिन बाद उनका फ़ोन आया और मुझे उनके घर आने के लिए रिक्वेस्ट कर रही थी । मैं भी घर में फ्री था तो मैं जाने के लिए हां कर दिया और नेक्स्ट डे शाम को चल दिया । उनके घर करीब 6 बजे पंहुचा और देखा की घर में कोई नहीँ तो मैंने पूछा-
"आप के बच्चे दिखाई नहीँ दे रहे, कहां हैँ ?"

तो व बोली-
"आज सुबह मेरे पति का भतीजा आया था, व बच्चोँ को अपने घर घुमाने ले गया ।"

बात करते करते 7 बज गए । मैं सोफे पर बैठा था व एकदम से मेरे पास आयी और मेरा हाथ पकड़ कर मुझसे उठने को कहा, मैं उठ गया तो उन्होंने एक रूम की तरफ इशारा करके बोली-
"आप वहां रूम में बैठो, में अभी आती हुं ।"

मैं उस रूम की तरफ बढ़ने लगा और तभी उन्होंने ने पहले रूम की लाइट ऑफ कर दी । मैं जिस रूम में पहुंचा व बेडरूम था, व भी 5 मिनट के बाद आ गयी । बेड पर दिवार से पीठ टिका कर आराम से बैठ गयी । मैं भी उसके साथ पैर फेलाकर बैठ गया ।
अब व मेरी तरफ देखके बोली-
"आप मुझे अच्छे लगे हैँ, मैं बहुत परेशान हुं । न जाने आप क्या सोचेंगे मेरे बारे मेँ जानकर, मुझे अकेलापन बर्दास्त नहीं हो रहा है । इसलिए मैँने आप को आने के लिए रिक्वेस्ट करके बच्चोँ को भेज दिया ।"

फिर मैँने उनका हाथ आपने हाथ में लेकर उसे चूमा तो उसकी आंख बंद हो गयी, सांसेँ तेज चलने लगी । मैँने बोला-
"नीताजी, आप एक विधवा हो, पर ईससे मुझे कोई ऐतराज नहीँ !"

"पर आपको मेरी असलियत के बारे मेँ मालुम........।"

"क्या बके जा रहीँ हैँ आप! भला मुझे और क्या मतलब आपके बारे मेँ जानकर ।" मैँने उनकी मुंह से बात छिनते हुए बोला ।

फिर मैँने उन्हेँ गौर से देखा, उनका बदन इतना सेक्सी था की में बता नहीं सकता । चुचियां बड़े थे और पेट की चमड़ी मुड़ी हुई थी, जिसे देखकर मैँने उनकी बुर की गहराई का अंदाज लगा लिया । मांस से भरी हुयी जांघें साडी में से दिख रही थी । व सफ़ेद ब्लाउज पहनी हुई थी, उसमेँ से दूध का आकार साफ़ दिख रहा था । मैं हाथ चुमते हुए आगे बढ़ा और उनकी गर्दन से होते हुए उनकी होंठो पर आपने होंठ रख दिए । व सिहर उठी और अपनी आंख खोल कर मुझे देखा और झट से मुझसे लिपट गयी । व लम्बी-लम्बी सांसेँ ले रही थी ।

उन्होँने मुझे इतनी ताकत के साथ अपनी बांहों में लिया कि एक समय मेरी भी सांसेँ रुकने लगी । करीब 10 मिनट तक हम दोनों एक दुसरे के होंठ चूस रहे थे । फिर मैँने अपने होंठ उनके होंठो से अलग किये तो व जोर से हांफने लगी, मैँने अपने होंठ उनके गालोँ से रगड़ते हुए उनकी गर्दन पर उनकी कान पर चूमना शुरु कर दिया । व मचल उठी, फिर मैँने एक हाथ से उनके दूध को सहलाना शुरु किया तो उन्होँने एक हाथ मेरी गर्दन के पीछे डाल कर मेरा सर अपने सीने की तरफ खिंच लिया और बिस्तर पर लेट गयी । मैँने ब्लाउज के ऊपर से ही उनकी दोनों दूध पर आपने होंठ फिराना चालू किया और एक हाथ से उनकी साडी पकड़ कर जांघो तक ऊपर कर दी ।

अब मैँ दूध से होते हुए पेट पर और उनकी नावेल को चूमने लगा, व आंख बंद किये हुए लेटी थी और अपने होंठ चबा रही थी । जोर-जोर से सांसेँ ले रही थी, फिर मैँने अपने होंठ साडी के ऊपर से ही उनकी चिकनी मोटी-मोटी जांघोँ पर लगा दिए और जोर-जोर से रगड़ने लगा । फिर मैँने उनकी जांघो को देखा तो देखता ही रह गया । व सबसे जयादा सेक्सी जांघों के कारण ही लग रही थी । क्या गदराई हुई जांघेँ थी उनकी । मैं तो देख कर मस्त हो गया । मैंने साडी को और ऊपर उठाई तो और हैरान रह गया, ऐसा लगा की उनकी शरीर से सेक्स फट कर बाहर आने को बेताब हो रहा था । उन्होँने ब्लू रंग की पेंटी पहनी हुई थी, मैंने उनकी जांघों को खूब चूसा फिर मैँने उनकी पैँटी के उपर से ही बुर पर जीभ चलाया तो मेरे होश ही उड गए । पैँटी के अंदर क्या है ? बुर है या फिर कुछ और ! फिर जैसे ही मैँने पैँटी के ईलास्टिक को एक और सरका दिया....एक लम्बा-मोटा लंड लहराते हुए बाहर आ गया ! मेरी तो धडकनेँ मानो बंद से हो गए । ये मैँ क्या देख रहा हुं । मैँने उनकी तरफ नजर घुमाई, व मुस्करा रही थी । क्या अजीब नजारा था । महिलाओँ के लंड ! एक बार मैँने इंटरनेट पर देखा था । पर नीता जैसे शादीशुदा औरत व भी दो-दो बच्चोँ की मां भी..... । मेरा पुरा बदन उत्तेजना के मारे कांप रहा था । मेरा लंड एकदम खडा हो गया ।

तभी मैँने पैँटी को उनकी बदन से निकाल दिया, उन्होँने भी गांड उठा कर पैँटी निकालने मेँ साथ दिया । अब दो बडे-बडे अंडकोष भी बाहर आ गया, पुरे लंड और अंडे हल्के झांटोँ से भरे थे । मैं धीरे-धीरे नीताजी की लंड के ऊपर हाथ फिराने लगा और उनकी लंड पर बार-बार हाथ फेर कर उसे सहलाने लगा । मेरा लंड भी उत्तेजना मेँ ऑप-डाउन होने लगा था, बहुत अच्छा लग रहा था मोटे और लम्बे गरम लंड पर हाथ फिराने में । अपनी एक निप्पल को मुंह मेँ लेकर व बोली-
"कैसा लग रहा है राज, मेरी लंड पर हाथ फेरने में?"
मैं उनकी सवाल को सुनकर लंड से हाथ हटाना चाहा तो उन्होँने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी लंड पर दबा दी और बोली-
"तुम हाथ फेरते हो तो बहुत अच्छा लगता है, देखो न, तुम्हारे द्वारा हाथ फेरने से कितनी तन गयी है मेरी लंड । तुम्हेँ हैरानी बहुत हुई होगी न मेरी लंड देख कर ! पर क्या करुं पति के मरने से दो साल पहले ही अचानक मेरी शरीर इस तरह से बदल गयी ।"

"पर आप लोग कुछ किया क्युं नहीँ ?"

"क्या करते, शर्म और बदनामी के डर से हम पति-पत्नी चुप रहे । लंड दिन व दिन बढने लगा । साल भर मेँ ही लंड इतना बडा हो गया फिर मैँने सारी गरमी अपनी लंड पर महसुस करने लगी ।"

"कमाल है ! फिर आपने क्या किया ।"

"एक दिन पति के कहने पर मैँने मुठ मारी तो इतना मजा आया कि पुछो मत और फिर यह मेरी आदत बन गई । उसके बाद मेरी बदन मेँ अजीब सा नशा छाने लगा और मैँ पति की गांड मारनी शुरु कर दी ।"

"क्या !" उनकी बात सुनकर मुझे बडा झटका लगा ।

"हां राज, उसके बाद मुझे लंड से अजीब सा मजा आने लगा था और मैँ किसी भी किमत पर उसे गवांना नहीँ चाहती थी । और अब मैँ इस लंड के साथ ही मरना पसंद करुंगी । अगर तुम नहीँ चाहते तो यहीँ रोक देते हैँ ।"

"नहीँ नीताजी, सच पुछो तो आपकी ये रुप देख कर मुझ पर भी अजीब सा नशा छाने लगा है । क्या आपकी बच्चोँ को ये मालुम है ?"

"नहीँ, उन्हेँ कुछ भी मालुम नहीँ । बहुत अच्छा लगा तुम्हारी बातेँ सुनकर ।" कहने के साथ उन्होँने थोडा सा और आगे बढ़ाया तो उनकी लंड मेरे होंठो के एकदम करीब आ गया । एक बार तो मेरे मन में आया की मैं उनकी लंड को चुम लूं मगर झीझक के कारण मैं उसे चुमने को पहल नहीं कर पा रहा था ।

व मुस्कुरा कर बोली-
"मैं तुम्हारा आंखो में देख रही हुं की तुम्हारे मन में जो है उसे तुम दबाने की कोशिश कर रहे हो । अपनी भावनाओं को मत दबाओ, जो मन में आ रहा है,उसे पूरा कर लो ।"

यह कहने के बाद उन्होँने लंड को थोडा और आगे मेरे होंठो से ही सटा दिया, मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और लंड के सुपाडे को जल्दी से चूम लिया । एक बार चूम लेने के बाद तो मेरे मन की झीझक काफी कम हो गया और मैं बार-बार उनकी लंड को दोनोँ हाथोँ से पकड़ कर सुपाडे को चूमने लगा । एकाएक उन्होँने सिस्कारी लेकर लंड को थोडा सा और आगे बढ़ायी तो मैंने उसे मुंह में लेने के लिये मुंह खोल दिया, और सुपाडा मुंह में लेकर चूसने लगा । इतना मोटा सुपाडा और लंड था की मुंह में लिये रखने में मुझे परेशानी का अनुभव हो रहा था ।

फिर मैं उनकी लंड से चूमते हुए फिर से जांघों पर आया और जांघों से होते हुए पुरे पैरोँ को चूमा । व मुझे अजीब सी निगाहों से देख रही थी । फिर मैं उन्हें आपनी बांहों में लेकर उठा कर खड़ा किया, अब हम बिस्तर पर दोनों खड़े हुए थे । मैँने उन्हें आपने सीने से लगाया और उनकी पीठ पर और गांड पर हाथ फिराने लगा । क्या उभरी हुई चुतड थी ! उनकी चूतड बड़ी-बड़ी और बहुत चौडी थी, उन्हें दबाने में मुझे भी
बहुत मजा आ रहा था । फिर मैंने उनकी साडी खोल दी अब व सफ़ेद ब्लाउज और पेटीकोट में थी । उनकी तो जो हाल थी सो थी, मेरा भी बुरा हाल था ।

मुझे मेरा पसंद का शरीर जो मिल गया था व खड़ी थी, में नीचे बिस्तर पर बैठ गया और पांव से चूमते हुए जांघों पर आ गया । व मेरे सर के बाल पकडे हुए थी , और मैं उनकी लंड के ऊपर तेज़ी से हाथ फिराने लगा । उन्हेँ भी बहुत मजा आ रहा था । व मचल रही थी, अब में उनकी लंड को मुंह मेँ लेकर चुसने लगा था । व बेकाबू हो रही थी और उन्होँने खड़े रहते हुए एक पैर ऊपर उठा कर मेरे कंधो पर रख दी, जिस से अब मैँ उनकी लंड के बिल्कुल नीचे था । मैं भी लगातार उनकी लंड चुसे जा रहा था । फिर उन्होँने पैर नीचे किया और मेरा सर अपनी लंड पर जोर से दबाते हुए आपने दोनों पैर फेलाकर मेरे ऊपर अपना पूरा वजन डाल कर जोर लगाकर मुझे बिस्तर पर लेटने के लिए मजबूर कर दिया । और मेरा मुंह मेँ अभी भी उसकी लंड भरा हुआ था और व ताकत से मेरा सर आपनी लंड पर दबाये हुई थी । अब में बिस्तर पर लेटा हुआ था और व मेरे मुंह के अंदर अपनी लंड रखे हुए बैठी थी ।
अब व जोर-जोर से मेरे मुंह मेँ अपनी लंड अंदर-बाहर करने लगी । व मेरे बाल पकडे हुई थी और जोर-जोर से अपनी भारी गांड हिला रही थी । करीब 6 मिनट तक वैसा करने के बाद व झड गई और मेरे मुंह मेँ ही सारा वीर्य उडेल दी । अब व हांफ रही थी, थोडी देर बाद व कुछ नीचे खिसकी और मेरे सारे कपडे उतार दिए ।

सबसे आखरी में उसने मेरा निक्कर उतारा और मेरा खड़ा लंड देख कर व मदहोश हो गयी । पहले तो उसने मेरे लंड को प्यार से सहलाया और फिर मेरे लंड के आजू बाजू चुमती हुई लम्बी सांस ली और एक दम से मेरा लंड अपनी मुंह में ले लिया । अब व मेरा लंड चुस रही थी, करीब 5 मिनट लंड चुसने के बाद मुझे लगा अब व और चुस ले तो मैं झड जाऊंगा । तब मैंने उसे ऊपर खींच लिया, लेकिन ऊपर आने के बाद भी उसने मेरा लंड नहीं छोड़ा, उनकी उभरी गांड मुझे बुला रहे थे । मैं पैर से फिर चूमते हुए असली जगह पर आ गया फिर अपने दोनों होंठोँ से उसकी चूतडोँ पर प्यार से किस किया और उनकी लंड को सहलाने लगा । मैंने एक गहरी सांस लेते हुए उनकी चुतडोँ को अपने दोनों हाथ में लेकर दबाया और आपने होंठ और गाल चुतडोँ से रगड़ने लगा । एक हाथ से उनकी लंड को मुठियाने लगा । करीब 10 मिनट तक जी भर कर उनकी चुतडोँ और लंड से खेलता रहा । फिर मैं बिल्कुल उनके उपर आ गया और उनके गांड के छेद पर अपना लंड रगड़ने लगा । फिर मैंने उनकी गांड के छेद में अंदर कर दिया । अब में उनके चुतडोँ पर दोनों हाथ रखते हुए धक्के मार रहा था । व भी हिल हिलकर मेरा साथ दे रही थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था ।

करीब 10 मिनट के बाद मैँने उनके पैर उठा कर अपने कंधे पर रख लिए और जोर-जोर से चुदाई करने लगा, मेरा चोदाई से उन्हेँ भी मजा आ रही थी । व अह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह सीईईए सिस्कार रही थी । मैंने उनकी लंड को मुठियाते हुए चोदने लगा और फिर हम दोनोँ एक साथ जबरजस्त पानी छोडा, मेरे मुंह से भी जोर से आवाज़ निकल गया । उन्होंने तुरंत मुझे अपनी सीने पर खींच लिया, हम बहुत हांफ रहे थे ।
हम ऐसे ही आधे घंटे तक एक दुसरे की बांहों में बाहें डाले और मेरा लंड उनकी गांड में, लेटे रहे फिर हम उठे और साथ मेँ बाथरूम हो कर आये । हम दोनों नंगे ही रूम में घूम रहे थे ।
व आ कर बेड पर लेट गयी और अपनी लंड को मसलती हुई बोली-
"शाबाश राज, आप चुदाई करने में तो माहिर हो ! मैं तो आज सन्तुष्ट
हो गई ! काफी दिनों के बाद इतनी सन्तुष्टि मुझे मिली है ।"

"अब क्या विचार है ?" मैंने कहा ।

"अब तुम्हारी बारी है । एक बार और हो जाये, फिर चले जाना, मेरी लंड की खुजली मिटा दो राज ।" अपनी लंड को सहलाते हुए उन्होँने कहा ।

"क्या !" मैँने एकदम झटके खाए । नीता की अगले कार्यक्रम के बारे में सोच कर सिहर उठा ।

और फिर उन्होँने मुझे पलंग पर चोपाया कर दिया और अपनी मुंह मेरी गांड पर झुकायी और गांड के छेद पर जीभ फिराने लगी ।
अब उन्होँने अपनी नेक उंगली मेँ ढेर सारा थूक लगा उसे मेरी गांड मेँ पूरा डाल दिया और अंगुल को गांड के छेद मेँ अंदर-बाहर करने लगी । फिर उन्होँने मुझे बलपूर्वक पलट दिया और मेरी गांड हवा मेँ उठा कर गांड के छेद को जीभ से खोदने लगी । व अब मेरी गांड पर थूक डाल रही थी और अपनी जीभ गांड की छेद पर लगा कर धीरे-धीरे चाटने लगी । गांड पर उनकी जीभ की स्पर्श पा कर मैँ पूरी तरह से हिल उठा ।

उन्होँने पूरी लगान के साथ दोनोँ हाथोँ से मेरी गांड के छेद को फैलयी और अपनी नुकीली जीभ को उसमेँ ठेलने की कोशिश करने लगी । मुझे उनकी इस काम में बडा मस्ती आ रहा था । कुछ देर तक मेरी गांड चाटने के बाद नीता उठ कर खड़ी हो गयी और अपनी लंड को हाथ से सहलाते हुए मुझे पलंग पर सीधा लिटा दी । मैं हैरान था, मेरी छोटी सी गांड के छेद मेँ उनकी विशाल लंड कैसे जाएगा ?

नीता ने ढेर सारे थूक अपनी लंड पर लगा दी और पुरे लंड की मालीश करने लगी और मुस्कुरा कर पलंग से उतरी और अपनी उभरी हुई भारी गांड को लहराती हुई ड्रेसिंग टेबल से वस्सेलीन की शीशी उठा लाई ।
ढक्कन खोल कर ढेर सारा वस्सलिन हाथोँ मेँ ले ली और अपनी लंड की मालीश करने लगी । अब उनकी लंड रोशनी मेँ चमकने लगी । फिर उन्होँने मुझे पलंग पर पेट के बल लिटा कर मेरी गांड हवा मेँ उचका दिए । फिर व झुक कर मेरी गांड को मुंह मेँ भर कर कस कर काट ली । मुझे इसमेँ बड़ा मज़ा आ रहा था । कुछ देर बाद नीताजी भी पलंग पर चढ कर मेरे उठी हुई गांड के उपर खडी हो गयी । फिर दोनों तरफ पैर डाले मेरे गांड पर अपनी लंड पकड कर झुक गयी और लंड को गांड के छेद से रगड़ने लगी ।

नीता ने थोड़ी पीछे होकर लंड को निशाने पर रखा । फिर उन्होँने दोनोँ हाथों से मेरे गांड का छेद को फैला कर धक्का लगायी तो उनकी सुपडा गांड के छेद मेँ चला गया । फिर नीता ने दोबारा धक्का लगाई तो मेरे गांड को चीरती हुई उनकी आधी लंड गांड मेँ दाखिल हो गयी । मैँ ज़ोर से चीख उठा । पर नीताजी ने मेरे चीख पर कोई ध्यान नहीँ दी और अपनी लंड थोड़ी पीछे खींच कर जोरदार शॉट लगायी । उनकी 9 इंच की लंड मेरे गांड को चीरती हुई पुरी की पुरी अंदर दाखिल हो गयी । नीताजी की आंखे बंद थी और मुह खुली थी, अंदर सांसेँ ले रही थी । फिर नीता ने आगे को झुक कर अपनी चुचीयोँ को मेरे पीठ पर दबा दी और उन्हेँ रगडने लगी । नीताजी की लंड अभी भी पुरा का पुरा मेरे गांड के अंदर था । कुछ देर तक मेरे गांड मे लंड डाले अपनी चूंचीयोँ को मेरी पीठ पर दबाती रही । जब नीता ने कुछ नॉर्मल हुई तो अपनी भारी गांड धीरे-धीरे हिला कर लंड मेरे गांड मेँ अंदर-बाहर करना शुरू कर दी ।

मेरी गांड बहुत ही टाईट था । गांड के कसावट के कारण उन्हेँ चोदने मेँ मजा आ रहा था और अपनी उभरी गांड को जोर-जोर से हिला कर आगे पीछे होने लगी । इसे चोदाई मेँ मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था । अब नीता सिसकारी भरती हुई धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ा दी, उनकी लंड अब पुरी तेज़ी से मेरे गांड मेँ अंदर-बाहर हो रही थी । नीताजी की लंड ऐसे अंदर-बाहर हो रही थी मानो एंजिन का पिस्टन हो । पूरे कमरे मेँ चुदाई का गच-गच की आवाज़ गुंज रही थी । नीता ने बहुत जोर-जोर से धक्के लगा रही थी, बहुत ताकत थी उसमेँ । पागलोँ की तरह मुझे चोद रही थी, मेरे पीठ पर नीताजी के दूध रगड खा रहे थे जिनको मैं लगातार एक हाथ उपर उठा कर मसल रहा था ।

उन्हेँ भी इस चोदाई मेँ बहुत मजा आने लगा था । नीताजी की थिरकती हुई बडे-बडे अंडे मेरे गांड से टकरा रहे थे । अब व पुरे जोश मेँ पुरी तेज़ी से मेरे गांड मेँ लंड अंदर-बाहर करती हुई सिसकारी भर रही थी । हम दोनोँ पसीने-पसीने हो गये थे पर नीताजी रुकने का नाम नहीँ ले रही थी । जब नीताजी पूरा का पूरा लंड बाहर खीँच कर झटके से मेरे गांड मेँ डालती तो मेरी चीख निकल जाती । उनकी लावा अब निकलने वाली थी तो नीताजी ने मेरे बदन को पूरी तरह अपनी बाहों मेँ समेट कर अपनी स्तन मेरे पीट पर रगडती हुई दनादन शॉट लगाने लगी । हम दोनोँ की सांस फुल रही थी ।

फिर आचानक नीता ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से अह्ह्ह्ह?? ..हूऊऊऊओ?? हहसी....... हम्मसीई?..म्म्म्माआआ... की आवाज़ निकालने लगी । अब व अपनी दोनोँ हाथ के सहारे थी और अपनी चुचियोँ को मेरे पीठ पर दबाये हुए थी । नीता अब बहुत स्पीड से पागलोँ की तरह आवाज़ निकालते हुए जोर-जोर से धक्का मार कर मुझे चोदे जा रही थी । आचानक नीता ने बहुत जोर से चीखी-अह्ह्हह्ह.?.. म्म्म्म्माआआ?? गूऊऊऊ??.. सीईउससेसेसे.. अह्ह्ह??.. हम्म? हम्म.अह्ह्ह्ह और मेरे पीठ से चिपक कर मेरे गांड मेँ पिचकारी छोड दी और झड गयी । मैँने अपनी गांड मेँ नीताजी की लंड से निकली गर्म वीर्य की तेज धार को महसुस कर रहा था । उसके बाद भी नीता ने अपनी लंड को अंदर तक पेल रखी थी और अपनी उभरी गांड को हवा मेँ उछाल रही थी । नीता ने उसी तरह से मेरे पीठ पर स्तनोँ को दबायी हुई चिपकी रही ।

नीताजी को जबरदस्त ख़ुशी हुयी थी, उन्हेँ पुरा आनद मिल गयी थी । व मेरे पीठ पर लेट गयी, नीता की लंड अभी भी मेरी गांड में थी । मैं प्यार से उनकी मांसल गांड पर हाथ फिराने लगा । करेब 10 मिनट बाद हम उठे नीता बहुत खुश थी, मुझे बहुत चुमे जा रही थी । बहुत प्यार किया, मुझे भी उनपर बहुत प्यार आया खेर फिर हम बाथरूम गए और अपने-अपने लंड साफ किए । बाथरुम से आकर मैंने कपडे पहनके निकलने को तैयार था, नीता अब साडी पहन चुकी थी व मेरे सीने चिपक गयी और मुझे चुमते हुए बोली-
"फिर कब आओगे राज ! मैँ तुम्हारा इंतजार हर पल करुंगी । तुमने तो मुझे जन्नत की सैर करा
दी ! और मुझे क्या चाहिए था ।"

तो मैँने कहा-
"नीताजी, मैं अब चलता हूँ ! आप सन्तुष्ट हैं, आप जब चाहे बुला लेना, मैँ हाजिर हो जाउंगा।" कहते के साथ मैंने नीताजी से जाने की इजाजत मांगी और बाहर आ गया ।

क्रमशः
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