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Monday, May 5, 2014

FUN-MAZA-MASTI नौकरी हो तो ऐसी--24

FUN-MAZA-MASTI

  नौकरी हो तो ऐसी--24

गतान्क से आगे…………………………………….

मैने अभी खुद को नही रोका और धीरे धीरे आगे बढ़ता चला गया और लंड को अंदर तक डालता गया .....
मैं अभी रीना से पूरा चिपक गया और अपनी गांद को नीचे करके मस्त जोरदार झटका मारा "उईईईई माआ मर गयी..." कहके वो चिल्लाने लगी और आसू भी निकल गये पर मैं रुका नही क्यू कि ये रुकने का वक़्त नही था मैने अपनी गति बढ़ा दी
और जोरदार धक्को से चढ़ाई करने लगा ...रीना का दर्द अभी थोड़ा थोड़ा कम होने लगा था ..... और वो मेरी कमर पर हाथ रख के मुझे अपनी तरफ खिचने लगी थी....

मेरे लंड और उसकी बुर के बीच मे पूरा खून लगा था और हम दोनो की सगम की जगह पे पूरा लाल लाल रंग दिख रहा था....
10 मिनिट हो चुके थे.....मैने खचाखच 10 -12 झटके मारे और अब मैं खुद को रोक नही पाया और मैने अपना रस उसकी बुर मे अंदर तक छोड़ दिया...मेरा पूरा पानी चूत मे निकलते ही... मैने लंड बाहर निकाला ....मेरा लंड पूरा सफेद पानी और लाल रंग से भरा हुआ था.....

सब मुझे बस देखे जा रहे थे ... नीचे रीना मेरी ही तरफ देखे जा रही थी ...उतने मे प्रिन्सिपल बोला "अरे तुम तो लंबे रेस के घोड़े लगते हो"
"रीना तो एक मिनिट मे हमारा पानी बस लंड चुस्के निकाल देती है... तुम उसके सामने बहुत देर तक टिके थे .... मानना पड़ेगा तुम्हे बाबूजी"

मैं चार पाई पे सर उपर करके लेट गया और उतने मे रचना आई और उसने मेरा लंड चूसना शुरू किया ...मा कसम क्या होठ थे उसके ... जैसे संतरे की फाक हो..... एकदम कोमल और नरम .......चूस चुस्के उसने मेरा लंड पूरा सॉफ कर दिया ...... इस क्रिया मे मैं इतना उत्तेजित हो गया कि मेरा लंड  फिर खड़ा हो गया और वो पूरी तरह सीधे सीधे होते हुए फिर चुदाई के लिए तैय्यर होगया

मैने रचना की गांद को अपने तरफ खिचा वो मेरे उपर गिर पड़ी, उसके होटो को मैने अपने होटो के बीच मे दिया और मस्त चूसा...


प्रिन्सिपल की बेटी मतलब पृथ्वी पे रहनेवाली इंद्रासभा की अप्सराए थी... और उनको भोगनेका सुख मुझे बस सेठ जी के कारण सेठ जी के नाम पे मिल रहा था ...वाह क्या बात है सेठ जी मान गये.....

मैने हल्के हल्के उसके होटो को मस्त चूसा, उसके मूह के अंदर जीब डाल के उसकी थूक मे अपनी थूक मिला दी.. उसके मूह से शराब की पूरी सुगंध आ रही थी.... अभी लड़की के मूह शराब की सुगंध आए... या गुलाब की... वो तो मस्त ही लगेगी ..... नीचे मैं उसके मस्त दूध को दबाते जा रहा था.....

रचना उतने मे बोली "बाबूजी आपका हथियार तो नंबर एक के रेस का घोड़ा है ...थोड़ा मुझे भी इसका मज़ा चखाओ ना...."

मैं - "अरे ज़रूर क्यो नही ...पर पहले ये बताओ कि आजतक कितनो के ले चुकी हो तुम ..."

रचना - "अभी तक...लगभग 30-35 तो ले ही चुकी हू..... मज़ा आता है....."

बाते करते करते मैने रचना को थोड़ा उपर उठाया और अपने लंड को उसकी बुर के छेद मे घुसेड दिया...आधा ....आआधा देखते देखते ..पूरा
लंड बुर के अंदर कब गायब हो गया पता ही नही चला ....साला उसकी चूत मे तीनो को पहले से पानी गिरा हुआ था...
इसलिए उसकी चूत ज़रा ज़्यादा ही चिकनी हो गयी थी .... मैने उसकी कमर को पकड़ के अपनी कमर को उपर नीचे करना शुरू किया

हमारे चुदाई के दरम्यान उसकी बुर से वीरयरस टपक रहा था जो प्रिन्सिपल और दो अन्य शिक्षको ने उसकी बुर मे भरा था....


मेरा लंड पूरा सफेद और चिकना बन गया और पाचक पाचक करके अंदर बाहर हो रहा था......


मैं बोला और बोलो - "और प्रिन्सिपल साब का कितनी बार लिया है ...कितनी बार पेला है तुम्हारे पापा ने तुम्हे..."

रचना - "अरे पापा तो मुझे हर रोज पेलते है.... स्कूल जाते वक़्त भी पेलते है कभी कभी ....कभी कभी तो स्कूल मे ही बुला लेते है..."

मैने अब जोरदार धक्के मारना शुरू किया.....

मैं - "इन तीनो के अलावा किन किन से चुदी हो तुम...."

रचना - "इस गली मे जीतने भी मर्द रहते है सबसे.....जब चाहे बुला लेते है मुझे.... मस्त थूक लगा लगा के चोद्ते है...."

मैं उसके निपल को मूह मे लेके मस्त चूस रहा था उधर प्रिन्सिपल ने अपनी छोटी बेटी रीना के मूह मे अपना लंड घुसेड के उसकी मस्त मुख चुदाई
चालू कर दी थी.. .. बाकी के दो शिक्षक रीना के दूध को अपने दोनो हाथो से पकड़ के मस्ती मे दबाए जा रहे थे....

मैं : "और तुम्हे क्या मिलता है ...."

रचना : "मुझे हाहाहा..... मुझे बहुत सारा मज़ा और कभी कभी सज़ा... कभी कभी तो 5-6 आ जाते है और मुझे कही खेत मे ले जाते है...
और इतना चोदते है साले कि मेरी जान निकलने को होती है....पर तब भी मैं नही रुकती चोदे जाती हू.... फिर सब ठंडे पड़ जाते है..."

अब मेरे धक्को की गति इतनी तेज हो गयी कि मुझे पता ही नही चला कि कब मैं चरम सीमा तक पहुचा और अपने रस की फुवारो को
रचना की चूत मे भर दिया.....

इतनी मस्त चुदाई के बाद दिल और दिमाग़ एकदम फुर्तीला नौजवान महसूस कर रहा था पर मेरा पूरा शरीर अब अकड़ने लगा था....

मेरी तरफ देखते हुए प्रिन्सिपल बोला "और मज़ा आया ..."

मैं "मज़ा तो बहुत आया और अब तो आता ही रहेगा... आप चिंता मत करना अभी.... आपका कर्तव्य करने मे मुझे अभी कोई भी बाधा नही आएगी..."

और मैने कपड़े पहेन लिए, रचना और रीना को गाल पे मस्त चूम लिया..... "और चलता हू फिर मिलते है " कहके पूरे दिन के बारे मे सोचते हुए हवेली की तरफ निकल पड़ा.
क्रमशः........................











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Sunday, May 4, 2014

FUN-MAZA-MASTI नौकरी हो तो ऐसी--22

FUN-MAZA-MASTI

  नौकरी हो तो ऐसी--22
 गतान्क से आगे…………………………………….

मैं उठ के दिवानखाने मे गया. सेठ जी उधर नही थे लगता है वह सो गये होंगे.

मैं उधर से निकला और सीडिया चढ़के पहली मज़िल पे आ गया.


जैसे ही मैं दूसरी मंज़िल की सीडिया चढ़ने जा रहा था मुझे कुछ हल्की सी आवाज़ सुनाई दी..

मैं नीचे उतर गया और एक कमरा जहाँ अक्सर कबाड़ रखा जाता है वहाँ देखा आवाज़ उधर से ही आ रही थी.. कबाड़ का कमरा और उसके बाजुवाला कमरा इन दोनो मे बहुत सारी जगह थी क्यू कि उधरसे हवेली की बाल्कनी मे जा सके….
मैं चुपकेसे कबाड़ के रूम की तरफ गया और जहाँ वो खाली जगह थी वहाँ खड़ा होगया…. आवाज़ अभी थोड़ी स्पस्ट आ रही थी पर कुछ समझ नही आ रहा था


मैने इधर उधर देखा कि अंदर कैसे देखा जाए… आवाज़ की गर्मी ने मेरे लंड को फिरसे खड़ा कर दिया… मैने उपर देखा …एक छोटिसी खिड़की बनी थी…पर वो बहुत ज़्यादा उपर थी… मैने आगे देखा ….मुझे उधर कुछ समान के बक्से दिखाई दिए….

मैं धीरे कदम डाल बक्से को उठा लाया और तीन चार बड़े बक्से एक के उपर एक रख दिए…

आरामसे हलकसे थोड़ी भी आवाज़ ना करते हुए मैं उपर चढ़ा और अंदर देखा…. अंदर अंधेरा बहुत था और समान भी भरा पड़ा था तो कुछ ठीक से दिखाई नही दे रहा था.. थोड़ी देर बाद मैने वहाँ रखी बॅटरी की लाइट का पीछा किया और देखा तो अंदर कॉंट्रॅक्टर बाबू और नलिनी थे…

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने नलिनी को पीछे से पकड़ा था उसे पीछे से घिस रहे थे…
इसका मतलब आज कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपना इरादा आज साधने का पूरा इन्तेजाम किया था… नलिनी की राव साब, वकील बाबू जो खुद उसके पिता है, पंडितजी ने पहली ठुकाई करी थी पर कॉंट्रॅक्टर बाबू को मौका नही मिला था….

कॉंट्रॅक्टर बाबू: “उस दिन तू गाड़ी मे बच गयी मेरी ठुकाई से… आज तो मैं तुझे कस के चोदुन्गा वो भी बार बार “

नलिनी कुछ नही बोल रही थी… और अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी… कॉंट्रॅक्टर बाबू उसे दबोच के उसकी गान्ड पे अपना लॉडा घिसे जा रहे थे…

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने उसकी सलवार का नाडा खोल दीया और सलवार नीचे गिर गयी…. और अब उसकी चड्डी भी निकाल दी…


नलिनी सामने देख ही नही पा रही थी… और कॉंट्रॅक्टर बाबू उसके सामने आके उसे कस के पकड़े और मस्ती मे अपनी जीब उसके मूह मे घुसा का मस्त चुम्मि लेने लगे…

नलिनी के गोल मटोल चुचे दब रहे थे और और ज़्यादा घुमावदार दिख रहे थे…

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने नलिनी की हरी भरी काले बालो वाली चूत मे उंगली डाल दी और ज़ोर्से अंदर बाहर करने लगे …. नलिनी के मूह से आहह आहह निकलने लगी…..

अब कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपनी पॅंट फटाक से नीचे कर दिया उसका लॉडा देख के नलिनी बोली


नलिनी: नही चाचा जी ये बहुत बड़ा है ….. बहुत बड़ा है इतना बड़ा अंदर जाएगा तो मुझे कल चलने को नही होगा चाचा

कॉंट्रॅक्टर बाबू: अरे मेरी प्यारी गुड़िया रानी ये तो कुछ नही है तेरे लिए…… तुझे मस्त रंडी बनाना है मुझे …..इसी तरह तुझे आदत लगेगी ना मेरी प्यारी खूबसूरत रंडी

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपने काले बड़े नाग के सूपदे की चमड़ी को पीछे खिचा ….. नलिनी को उसपे थूकने को कहा…

लंड अब मस्त चिकने और खूटे की तरह  और मोटा बनके फूल गया…
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने नलिनी को अपने तरफ खिचा और खड़े खड़े ही उसकी बुर के छेद को ढूँढ लिया

गुलाबी बुर के छेद पे लंड सटा कर कॉंट्रॅक्टर बाबू ने एक बड़ा झटका मारा… लंड आधे से अधिक अंदर चला गया…. नलिनी की उूुुुउउइईईईईई माआआआआआआअ……. करके आवाज़ निकल गयी … अब कॉंट्रॅक्टर बाबू ने ज़ोर ज़ोर से झटके मारना शुरू किया.


नलिनी के बड़े बड़े मस्त दूध दबाते दबाते उसे बोला रंडी तेरी मैं हर दिन लूँगा. गाली पे गाली देने लगा… नलिनी आगे पीछे हो रही थी फटाफट ….. कॉंट्रॅक्टर बाबू के धक्को की गति बहुत तेज़ थी…. लंड पूरा अंदर चला गया और अब नलिनी की ज़ोर्से आवाज़ निकलने लगी…. अगर कोई पहली मज़िल पे आ जाए तो उसे आराम से पता चले पर वक़्त बहुत ज़्यादा हुआ था इसलिए सब सोए थे…. जहाँ तक मुझे लग रहा था...

धक्को की गति तेज़ होने से कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपनी पिचकारी 10 मिनिट मे नलिनी की बुर के काफ़ी अंदर तक छोड़ दी… लंड बाहर निकाला तो वो सफेद पानी से चमक रहा था....

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने नलिनी को घुटनो के बैठने को खिचा और उसके मूह मे वीर्य से भरा लंड घुसा दिया….


थोड़ी ही देर मे लंड फिर से अपनी पुरानी हालत मे आ गया


अब कॉंट्रॅक्टर बाबू बोले अब मैं तेरी गांद मारूँगा हाहहहः

नैलिनी: नही नही चाचा ….. नही उधर नही …. मुझ कल चलनेको नही होगा चाचा जी … बहुत दर्द होगा….

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने कुछ नही सुना…. उन्होने नलिनी को घुमा के कुत्ति बन दिया…. और पीछेसे उसपे चढ़ गये….. उसकी गांद का छेद तो बहुत ही छोटा लग रहा था…. जाहिर है उसकी इसके पहले उधर किसीने नही ली होगी
कॉंट्रॅक्टर बाबू ने बहुत सारी थूक निकाली और नलिनी की गांद पे रगड़ दी… और अपना काला सूपड़ा उसकी गांद के छेद पे रख दिया…

और उसे अच्छे दबोच के लंड को अंदर घुसाया पर वो जा नही पाया … इतना बड़ा सुपाड़ा …. कॉंट्रॅक्टर बाबू ने और थूक लगाई और इस बार लंड को हाथ मे लेके छेद पे लगाया और पूरा दबाब डाल के अंदर घुसा दिया …..पचक ..पच….पुक करके आवाज़ आई….नलिने तो अपने हाथ पाव और पूरा बदन हिलाने लगी…




सुपाड़ा गांद के अंदर घुस गया… नलिनी बहुत ज़्यादा हिलने और अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करने लगी पर कॉंट्रॅक्टर बाबू ने कुछ सोचे बिना फटाक से एक ज़ोर का झटका मारा और आधा लंड अंदर…. नलिनी नीचे गिर गयी उसने आपने आप को फर्श पर लिटा दिया…. ये उसकी सहन के बाहर था ….. इधर कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अभी गति बढ़ा दी और ज़ोर्से झटके मारने लगे…. थोड़ी ही देर मे पूरा लंड नलिनी की कोमल गोरी गांद के अंदर समा गया और पचाककक पकच आवाज़ो से पूरा कमरा भर गया…. नलिनी के होश ही ठिकाने नही थे….. उसे कुछ भी समज़ नही रहा था कैसे करके भी  वो अपने मूह से आवाज़ नही निकलने दे रही थी….. जाहिर सी बात थी कि उसे बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था….

इस बार धक्के रुक नही रहे थे…..

कॉंट्रॅक्टर बाबू: वाह मेरी रंडी क्या गांद है तेरी…. खुदा कसम ऐसा लग रहा है इसे रात दिन मारता रहू

15 मिनिट बाद कॉंट्रॅक्टर बाबू ने नलिनी की गांद मे अपना वीर्य छोड़ दिया
थोड़ी ही देर मे कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपनी पॅंट पहेन ली और दरवाजा खोल के अपने कमरे की तरफ चल पड़े…

नलिनी अभी भी वहीं पड़ी थी…. गांद से अभी भी खून निकल रहा था…गांद के छेद मे पूरा सफेद वीर्य रस और खून लगा था ….. उठने को भी नही हो रहा था…. कॉंट्रॅक्टर बाबू के लंड ने उसकी बहुत बुरी हालत कर दी थी….

जैसे तैसे वो बाजू मे पड़े समान को पकड़ के खड़ी हुई उसने फिर धीरे धीरे अपनी चड्डी और पॅंट पहेन ली और लंगड़ाते हुए अपने कमरे मे चली गयी…

दोनो के चले जाने के बाद मे धीरे से नीचे उतरा और जाके सो गया.

सबेरे उठ के तैय्यार होके नाश्ता पानी किया.

दीवानखाने मे सेठ जी बैठे थे मुझे देखकर बोले.


मुझे बोले तुम्हे आज गाव के स्कूल मे जाना होगा. दो तीन शिक्षक है जिन्होने मेरे पास से कुछ उधारी ली है… जाके देखो और उनको कहो कि आज के आज पैसा चाहिए नही तो हमे कुछ नया तरीका अपनाना पड़ेगा….

जिन शिक्षको को सेठ जी ने पैसे दिए थे वो असल मे सेठ जी के छोटे बेटे मास्टर जी के ही जान पहचान के थे…. इलाक़े मे इतना आमीर कोई  था नही जो जब चाहे पैसे दे तो उन लोगो ने सेठ जी से पैसे लिए थे….. जिसका बोझ अभी बहुत भारी हो गया


मैने कहा : ठीक है सेठ जी मैं जाता हू….

सेठ जी: अच्छे डराना धमकाना…. तुम अभी इस घर के एक सदस्य हो…. वो काम होने के बाद सीधा गोदाम मे आ जाना ….कुछ नया माल आया है वो गाव की मार्केट मे व्यापारियोको बेचा है …और उसके हिसाब की लिखावट के लिए मुझे तुम्हारी ज़रूरत पड़ेगी

मैने हाँ बोल दिया और निकल पड़ा


मैं जीप मे बैठा और ड्राइवर ने जीप स्कूल की ओर बढ़ा दी

थोड़ी ही देर मे हम स्कूल पहुच गये… स्कूल 12थ कक्षा तक था
हम स्कूल के अंदर आए और मैने एक चपरासी से तीन शिक्षको के बारे मे पूछा तो उसने कहा अभी 5 मिनिट मे इंटर्वल हो जाएगा आप अंदर विशेष शिक्षक कक्षा मे बैठ जाइए… मैने उन्हे यही भेज देता हू.

मुझे मिलनेवाले आदर सत्कार ये पता चल रहा था कि सेठ जी को यहाँ  बहुत माना जाता है और उनसे डरते भी है.

शिक्षक कक्षमे मैं अंदर आके बैठ गया और जैसे ही बैठा मैने सामने देखा एक मस्त माल बैठी थी…. सारी और स्लीवेलेस्स ब्लौज मे एकदम फाडु लग रही थी….मस्त सुडौल उँचाई और भरा ताज़ा शरीर…लाल लाल होठ ….कमर तक लंबे खुले बाल… और वो बड़ी गांद का घेराव… मुझे देख के उसने नमस्ते किया और मैने भी नमस्ते किया और वो किताब मे घुस गयी..



मैं मेज पे पड़े पेपर को पढ़ने मे ध्यान देने की कोशिश करने लगा पर मेरा ध्यान उसके गतीले शरीर और गोरे मांसल हाथो पे जा रहा था…. मैने देखा कि उसके दूध बड़े बड़े नही है हाँ पर संतरे की तरह है एकदम कड़क…. जिसकी वजह से सारी भी उनका आकर जो गोल गोल और कड़क था छुपा नही पा रही थी….

मैने हिम्मत करके पूछा “आपका नाम ??”

वो बोली “मैं मालिनी…. यहाँ जो टीचर हैं ना मिस्टर वोहरा…आप जानते होंगे… उनकी पत्नी”

मैने कहा : मैं यहाँ अभी नया हू पर चलो कोई बात नही अभी आया हू तो मिल ही लूँगा

मालिनी  हसी और फिरसे किताब मे मूह डाल के पढ़ने लगी

मालिनी को देख के मेरा मन उसके पास जानेको करने लगा

मैं बोला "क्या आप ट्यूशन लेते हो "

मालिनी बोली "नही अभी तक तो नही...."

मालिनी पीठ को सीधे करते हुए पीछे पीठ लगा के चेर से टिक गयी, उसके उत्त्तेजक दूध और कड़क, बड़े एवं गोलाकार दिखने लगे.... लग रहा था जैसे दो ज़्यादा पके बड़े संतरे मेरे सामने रखे हो ...जिनके छिलके मैं निकाल के उनका रास्पान नही कर सकता…क्या मस्त दूध थे मंन कर रहा था कि जाके कस्के पकड़ लू और मूह से मस्त चूस लू...मेरे लंड राजा सलामी पे सलामी दे रहे थे....

मैने थोड़ा सोच के बोला "आप ट्यूशन लेना चाहोगी क्या ...."

मालिनी बोली "मेरे पति अगर हां कह दे तो ले सकती हू"

मैं बोला "सोचो उन्होने हां कह दिया ...."

अपने बालो को पीछे करते हुए, मालिनी ने बोला "ऐसे कैसे तुम्हे जानते नही, पहचानते नही वो हां कह देंगे...

और वैसे तुम्हे किस सब्जेक्ट का ट्यूशन चाहिए...."

मैं बोला "मुझे इंग्लीश का ट्यूशन चाहिए ...बचपन से मेरी इंग्लीश ठीक नही रही"

मालिनी बोली"वो अच्छा ये बात है... पर तुम रहते कहाँ हो..."

मैं "हवेली मे ....सेठ जी के यहाँ"

मलिने के आँखे बड़ी हो गयी वो बोली "क्या सेठ जी के मेहमान हो तुम..... अरे सेठ जी को नही कौन बोल सकता है ...


मैं तुम्हे ज़रूर इंग्लीश सिखाउंगी..... बोलो कब्से सीखनी है तुम्हे...."

मैं बोला "कल से ......"

मालिनी बोली "ठीक है पर ट्यूशन कहाँ लेंगे तुम्हारी हम लोग....."

मैं बोला "आपके घर....."

मालिनी बोली "ठीक है कल स्कूल के बाद याने 3 बजे के बाद कभी भी आ जाओ तुम मेरे घर ....मैं यहाँ पास मे ही रहती हू "

मैं बोला "अच्छा ठीक ठीक...."

मालिनी बोली "चलो मैं निकलती हू अभी…. मिलते है " और वो निकल गयी....जाते समय उसके घेरावदर मस्त सारी मे क़ैद चुतताड पीछेसे मटकने लगे, मैने तो  ठान लिया मालिनी तुझे मैं मस्त फ़ुर्सत से चोदुन्गा......

और उतने मे वो चपरासी वो तीन शिक्षक गन को लेके आया

वो लोग बोले "नमस्ते "

मैने चिल्लाके कहा "नमस्ते वमस्ते छोड़ो मादरचोदो, सेठ जी के पैसे कब लौटा रहे हो वो बोलो"

तीनो खड़क से नींद से जाग से गये. मेरी आवाज़ से वो दंग रह गये

उनमे से एक बोला "कुछ दिन और देदो बाबू जी.... फिर दे देते है "

मैने कहा "और कितने दिन"

दूसरा बोला "2 महीने..."

मैं बोला "क्यू 2 महीने मे कोई चोरी करनेवाले हो क्या तुम लोग ...जो इतना सारा पैसे वापस करोगे...."

और एक बोला “अरे बाबूजी आप तो बड़े हो… हम 2 महीने मे पैसे दे देंगे … भरोसा रखिए… ये देखो प्रिन्सिपल सर भी हमारे ही साथ तो है…”

ओह तेरी….. मतलब स्कूल के प्रिन्सिपल पे भी सेठ जी का कर्ज़ा था… और इन तीनोमे एक प्रिन्सिपल भी था…

मैने तब भी डांटा  और बोला “डंडे पड़ेंगे तो काहे के प्रिन्सिपल और काहे के हेड मास्टर… मुझे बस पैसा चाहिए…”

उनमे से एक बोला “अरे तनिक ठंडक रखिए …. आप सेठ जी को मना लीजिए इस बार कैसे भी करके…सेठ जी के दिमाग़ को इस बार ठंडा कर दीजिए …बदले मे हम आपका दिमाग़ ठंडा कर देते है..”

उनमे से जो प्रिन्सिपल था वो बोला “आज श्याम 5 बजे मेरे घरपे आपके लिए हम लोग पार्टी आयोजित करने की सोच रहे है …कृपया आमंत्रण स्वीकार करे…”
मैं बोला “कैसी पार्टी…”
क्रमशः………………………..








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FUN-MAZA-MASTI नौकरी हो तो ऐसी--21

FUN-MAZA-MASTI

  नौकरी हो तो ऐसी--21

 गतान्क से आगे…………………………………….

मालंबंती ने अपनी पॅंट पहेनी और अपने बिना ब्रा वाले संतरो को हिलाते वो तेल लेने चली गयी मैने नसरीन को घोड़ी की तरह झुका दिया और अपना थूक उसकी गांद के उपर लगाके अपनी उंगली मे मस्त थूक लगा के उसकी गांद के छेद मे हल्के से अंदर डाला…. वो थोड़ी सी आगे सरक गयी…

नसरीन- अरे यहाँ तो दर्द हो रहा है


मैं – अरे अभी तेल नही लगाया ना इसलिए हो रहा है… अभी मैं थूक से थोड़ा तुम्हारे छेद को खोलने की कोशिश करता हू, सो जैसे ही तेल आएगा हम मेरा लंड उसमे डालके तुम्हे बहुत सारा मज़ा देंगे….

नसरीन – पर आपका लंड इसमे जाएगा कैसे …ये तो मेरे हाथ इतना बड़ा है….?

मैं – तुम बस मज़े लो … इसकी चिंता मत करो मेरी प्यारी जान …

और घोड़ी अवस्था मे उसकी गांद के पीछे बैठ के उसके संतरो को दबाने लगा… बेचारिकी तो आज बुरी हालत होनेवाली थी जिसका उसे बिल्कुल भी अंदाज नही था और मुझे एक अन्चुदी गांद ठोकने को मिलने वाली थी…


दरवाजे पे कुछ हलचल हुई नसरीन ने जाके दरवाजा खोला, मालंबंती तेल की सीशी लेके अंदर आ गयी… मैने नसरीन को घोड़ी ही रहने को कहा और तेल निकाल के उसकी गांद के च्छेद पे मलना शुरू किया अभी तो मालंबती ने भी तेल लेके मेरे लंड पे मलना शुरू किया मेरा लंड उसके कोमल हाथो मे पूरा तन के बैठा था और उसके कोमल हाथोसे चिकना हो रहा था…


मैने नसरीन की गांद के छेद के अंदर उंगली डाली और अंदर तक चिकनाई लाने के लिए शीशी से तेल छोड़ दिया नसरीन बोली

नसरीन - बहुत ठंडा है ये ……


मैं- हां इसलिए तो तुम्हे दर्द बिल्कुल नही होगा और बस मज़ा आएगा

नसरीन – पर मुझे गुदगुदी हो रही है इससे…

मैं – थोड़ा रुक जाओ मेरी जान बहुत माजा आएगा…

और मैने अपनी आधी उंगली उसके पूरी तरह चिपके हुए गांद के छेद मे डाल दी …वो थोड़ा आगे सरकने की कोशिश करती पर फिर शांत हो जाती…. नसरीन की गांद तेल से बहुत ज़्यादा चमक रही थी… और बहुत चिकनी हो गयी थी…

मैने मालंबती से कहा – तुम्हारे पास रुमाल है


मालंबति – हाँ है अभी लाती हू


नसरीन – रुमाल क्यू??

मैं – अरे ऐसे ही ..इस क्रिया मे ज़्यादा मज़ा आने के लिए रुमाल मुँह मे घुसाते है उससे बहुत ज़्यादा मज़ा आता है....

मालंबंती  रुमाल लाई मैने उस रुमाल को नसरीन के मुँह मे ऐसे तरह थुस दिया कि वो आसानी से उसे बाहर निकल ना सके…


मैने पीछे से जाके अपना सूपड़ा जिस पे बहुत ही ज़्यादा तेल लगा था उसके गांद के छेद पे रखा और मालंबंती को उसके दोनो हाथ पकड़ने को बोला और जब तक मैं ना कहु छोड़ना नही ऐसा आँखोसे इशारा किया…

मेरा लंड अभी बिल मे जाने के लिए तैय्यार था, उस कुँवारी गांद का उद्घाटन करनेका मौका जो उसे मिला था… मैने सूपदे का निशाना गांद के छेद पे लगाया नसरीन को पीछेसे अच्छे से जाकड़ लिया और एक ही झटके मे आधा लंड उसकी कोमल गांद मे घुसा दिया…. तेल के कारण आधा लंड एकसाथ अंदर चला गया था जो बहुत ही बड़ी घटना थी… उधर नसरीन एक दम से आगे की तरफ झुक गयी और उहह… और ओूऊऊऊऊऊऊऊऊओउुुुुुउउ उहह…हह.हमुऊऊवूऊओउुउुमुंम्मूऊ….
. मुउहह.. मुउहह………उूुुुुउउ हुउऊ.. …महूऊऊउउ…. मूऊऊऊओ उहह…… उसकी हालत बहुत ज्यदा पतली हो गयी थी… वो झपाते मार रही थी मेरे वार से उसे बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था, मालंबंती थोड़ी सी घबराई हुई लग रही थी… पर मैने उसे हाथ ना छोड़ने के लिए कहा उसने हाथ नही छोड़े और मैने और ज़ोर्से धाक्का लगाया पूरा का पूरा लंड जो सेठानी की चूत के अंदर भी जाता तो वो चिल्लाती थी, नसरीन की गांद के अंदर समा गया था …. वो दर्द से पागल हो रही थी बार बार हाथ मार रही थी पर मेरी पकड़ मजबूत होने की वजह से वो उस अवस्था से निकल नही पा रही थी….


मैने उसके कान मे हल्के से उसे शांत होने को कहा…. उसके हाथ पूरे गद्दे मे घुसे थे और वो अपनी सांसो को काबू मे लाने की कोशिश कर रही थी पर लड़की कमाल थी अभी भी एक बार भी नीचे नही झुकी थी…. अब मैने हल्के से लंड अंदर बाहर – अंदर बाहर कारण शुरू किया …. पर नसरीन को दर्द होये जा रहा था. उसके गांद का छेद मेरे लंड के चारो तरफ एलास्टिक की तरह जम गया था…. और उसे आगे पीछे करने मे भी तकलीफ़ हो रही थी….
मैने फिरसे उसे शांत रहने को कहा और वो और थोड़ी सी शांत हो गयी और बोला कि अभी तुम्हे मज़ा आएगा … और मालंबंती को उसके मुँह से कपड़ा निकाल ने को कहा …. कपड़ा निकलते ही वो रोने की हल्की आवाज़ करते हुए मेरी तरफ देख के बोली – तुम बहुत बड़े झूठे हो..

मैं – देखो पहले थोड़ा दर्द तो होता है पर अभी देखो तुम्हे बहुत मज़ा आएगा


नसरीन – ठीक है पर बहुत दर्द भी होता है ज़रा हल्लू हल्लू करो ….एक पल ऐसा लगा था कि मेरी जान निकल जाएगी…

अब वो थोड़ी सी आराम अवस्था मे आ गयी थी, और इस वजह से उसने अपने गांद के छेद को थोड़ा सा ढीला भी छोड़ दिया था जिसकी वजह से मुझे फटाफट लंड अंदर बाहर करने मे बिल्कुल भी परेशानी नही हुई… मैने धक्के मार रहा था… स्वरगसुख क्या होता है इसका आनंद पृथ्वी पे ही मुझे मिल रहा था और अभी कुछ पलो मे मैं इस कुँवारी गांद को अपने वीर्य से लबालब भरने वाला था

मुझसे अभी रहा नही गया और मैने अपना सब वीर्य नसरीन की गांद मे भर दिया…. और मालंबंती के मुँह मे मेरा लॉडा दिया वो पहले नही बोलने लगी पर जब मैने उसका सर पकड़ के लंड पे रख दिया तो वो चुपचाप उसे सॉफ करने लगी, उधर नसरीन की गांद से सफेद पानी की बूंदे नीचे टपक रही थी  वो अभी गद्दे पे गिर पड़ी थी

मैने उसे पूछा – मज़ा आया....???

नसरीन – मज़ा तो आया पर बहुत दर्द हो रहा है यहाँ……….

मैं – अरे कुछ नही ये दर्द अभी चला जाएगा पर तुम इस चीज़ का मज़ा जिंदगी भर लेती रहोगी....

नसरीन गाल ही गाल मे मुस्कुराइ और उसने आँखे बंद करके फुर्ती और संतुष्टि की साँस लेके आँख बंद कर दी थोड़ी ही देर मे उसी अवस्था मे उसकी आँख लग गयी इतने बड़े लंड ने उसे भी स्वरगसुख का एहसास दिया था, अभी मालंबंती ने मेरा लंड अपने मुँह मे लेके सॉफ कर दिया ऑर वो पूरी गरम हो गयी थी.उसके दूध पूरे तने अवस्था मे थे..... पर वो अपनी गांद चुदाई के लिए अभी भी राज़ी नही थी…. मैने उसे कहा आज तुमने देखा ना नसरीन को कितना मज़ा आया तुम्हे भी आएगा… तुम अपना वक़्त लो और जब भी तुम्हारा मन करे मुझे बोल देना….

मालंबती की आँखे चमक गयी और जब मैं उठने लगा और पॅंट पेहेनने लगा तो वो बोल पड़ी -आप फिर अगली कहानी कब सुनाओगे……..?????

मैने कहा – अभी तो मुझे जाना पड़ेगा नही तो सेठ जी को शक हो जाएगा कि मैं यहा पे इतनी देर क्या कर रहा हू….और हां जल्दी ही सुनाउन्गा मैं तुम्हे अगली कहानी….

  क्रमशः........................

...










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FUN-MAZA-MASTI नौकरी हो तो ऐसी--20

FUN-MAZA-MASTI

  नौकरी हो तो ऐसी--20

  गतान्क से आगे…………………………………….

मैने कहानी शुरू की तो दोनो भी मस्त ध्यान लगाके कहानी सुनने लगी… जैसे ही कहानी आगे बढ़ने लगी वैसे वो लोग और मशगूल हो गये…. अभी कहानी मे नाटकीय पड़ाव आया जिसमे लड़का लड़की को ढूँढ रहा है बीच घने जंगल मे और वो उसे मिल नही रही है… थोड़ा सा डरावना प्रसंग था...

इतने मे मालंबंती और नसरीन मेरे बाजू आई मैने कहा – क्या हुआ


दोनो – डर लग रहा है


मैं – अरे येतो सिर्फ़ कहानी है


नसरीन- नही पर ये डरावनी है


मालंबंती - हम दोनो आपके पास बैठे?

मैं – क्यू


नसरीन – आप के पास आपका हाथ पकड़ कर बैठेंगे तो हमे डर नही लगेगा… दादी जब हमे कहानी सुनाती है और हम डर जाते है तो हम उनका हाथ थाम के बैठ जाते है


मैं – ठीक है ….आओ बैठो मेरे पास

दोनो एक एक बाजू से मुझसे चिपक गयी… वैसे ही मेरे शरीर मे लहर दौड़ गयी… उन हसीन जवान स्पर्शा ने मेरे अन्ग अन्ग मे ज्वाला लगा डाली… मैं सोचने लगा इस अवस्था मे हवेली मे मुझे किसीने देख लिया तो मेरे तो लग जाएँगे.. मैं बोला – एक काम करो ये दरवाजा बंद कर लो


नसरीन – हाँ मुझे भी ऐसे ही लग रहा है क्यू कि ऐसा लगता है कि दरवाजे के बाहर से कुछ तो आवाज़े आ रही है


मालंबंती उठी और गांद हिलाते हुए जाके दरवाजा बंद कर दिया अब मैं निश्चिंत हो गया. अभी ये दोनो मुझसे कितनी भी चिपके मुझे कोई फ़र्क नही पड़नेवाला था.. मेरा लंड नीचे अभी सलामी देने लगा था…

हम तीनो साथ मे बैठ गये वैसे मैने आगे कहानी बताना शुरू किया, जैसे ही कहानी आगे बढ़ी मैने कहानी मे और थोड़े डरावने किस्से डाल दिए इस वजह से वो दोनो मुझसे और चिपक गयी…

नसरीन ने अपना सर मेरे बाए कंधे से पूरी तरह चिपका लिया मानो जैसे कंधे पे रख दिया हो… उसकी वो गरम साँसे मुझे उत्तेजित करने लगी. मेरी छाती पे उसकी हर एक गरम साँस मेरी शर्ट को भेदकर हलचल मचाने लगी…. उसके वो मुलायम गाल मुझसे कुछ इंच की दूरी पे थे… पर मैने अपने पे काबू रखा हुआ था….

उधर मालंबति बोली – मुझे आपकी गोद मे बैठना है


मैं – अरे क्या हुआ............अब?????????

मालंबति - दादीजी हमे जब भी कहानी सुनाती है तो और हमे बहुत ज़्यादा डर लगने लगता है तो अपने गोद मे बिठा के कहानी सुनाती है


मैं – क्या …. गोद मे


नसरीन – हां… और वो हमे कभी ना नही बोलती

मैं – पर मैं तुम्हे गोद मे नही बिठा सकता

मालंबंती – अरे आप हमे गोद मे नही बिठाएँगे तो मैं दादाजी को बोल दूँगी

मैं – ठीक है आओ बैठो

मैने अपनी टाँगे मोड़ ली… और पालती डालकर उसको अपने गोद मे बिठा दिया… बाजू मे नसरीन अपना सर पूरा मेरे कंधे पे टिकाए आँखे लगाकर मस्त हो रही थी… उसके शरीर मे मेरे स्पर्श से ज़रूर कुछ तो हलचल हो रही थी इसलिए उसने आँखे बंद कर रखी थी…. मालंबंती जैसे ही मेरी गोद मे बैठ गयी मेरी जाँघो मे एक दम से उर्जा दौड़ गयी…. उनमे अचानक से ताक़त आ गयी मानो…. मेरी जंघे उसकी वो मस्त गांद से मदमस्त होके चिपक रही थी…


मेरे लंड महाराजा का हाल बहुत ही ज़्यादा बुरा हो चुका था…. वो चुदाई से पहले वाला रस उगल रहा था और मेरी पॅंट मे तंबू बनाके बैठा था
मैं बहुत ही बड़ी कशमकश मे था कुछ करू तो दुविधा नही करू तो लंड दुविधा… कहानी से ध्यान काफ़ी भटक रहा था तब भी मैं सुना रहा था… तभी मैने देखा नसरीन का हाथ मेरी पॅंट पे है और वो मेरी पॅंट के उपर से हल्के हल्के हाथ घुमा रही है… मेरी उत्तेजना की सीमाए बढ़ रही थी उधर मैं कहानी बताए जा रहा था


तभी मैने पाया मालंबंती का हाथ भी मेरी पॅंट पे घूम रहा है वो मूड के थोड़ा चेहरा मेरी तरफ करके फिरसे मेरी एक टाँग पे गांद रख के बैठ गयी और दोनो मिलके मेरी पॅंट को सहलाने लगे…

मैं मदहोश हुए जा रहा था मैं तो यही चाहता था…. पर थोड़ा विरोध दर्शाना मैने ठीक समझा


मैने कहा –अरे कककक .. क्या ………????

नसरीन – कुछ नही आप बस कहानी सुनाइए….



मैं अपनी कहानी बड़बड़ाने लगा. दोनो ने नीचे मेरी पॅंट की चैन खोल दी… और मेरे लंड को बाहर निकाल के उससे खेलने लगी दोनो के निपल्स एक दम टाइट हो गये थे.. और चेहरे पूरे लाल… मैने भी थोडिसी हरकत करना ठीक समझा और मालंबंती की पीठ को पीछे से सहलाने लगा…. वो और गरम हो रही थी…. दोनो मिलके मेरे सूपदे की चमड़ी उपर नीचे खिच रही थी….

तभी मालंबंती उठी और उसने दीवान पर खड़े होके अपनी सलवार निकाल दी और बाद मे पॅंटी भी मैं देखते रह गया वो गोरी गोरी मांसल जंघे ओए वो कमसिन जवानी …वाह क्या माल थी वो सलवार निकाल के वो मेरे पास आई और मेरी पॅंट का हुक खोल दिया नसरीन थोड़ा बाजू सरक गयी और मालंबंती ने मेरी पॅंट के साथ मेरी अंडरवेर भी पाव से बाहर खिच ली मैं नीचे पूरा नंगा हो गया….

मालंबंती ने फिरसे मुझे गोद मे बिठा ने कहा और मैने पालती मार के उसे गोद मे बिठा लिया उधर नसरीन ने अपनी कमीज़ निकाल दी…. वाह क्या नज़ारा बन रहा था उसने कमीज़ निकाली और उसके वो मस्त संतरे जैसे दूध एक दम सख़्त अवस्था मे थे…. वो निपल्स अपने गुलाबी लाल रंग से मुझे मदहोश करने लगे…


मेरा कहानी सुनाना अभी भी जारी था… और कहानी मे एक से एक सुरीले पड़ाव लाके सुना रहा था….


   मालंबंती की गोरी गोरी जंघे मेरी जाँघो पे घिस रही थी और मेरे हाथोसे नसरीन के कोमल स्थान… मालंबति की गांद के बीच की दारर मे मेरा लंड फिट बैठ था और संभोग पूर्व पानी छोड़ रहा था…. नसरीन से रहा नही गया उसने मेरे गालो पे चूमना शुरू किया इसका असर ये हुवा कि मेरा बोलना बंद हो गया… कहानी रुक गयी और हक़ीकत रंग लाने लगी… नसरीन के कोमल होठ मेरे गालो पे फूल के अनुभव जैसा रोमांच पैदा कर रहे थे… मेरे गोद मे मालंबंती गरमा हो हो के लावा बन चुकी थी.. उसका पूरा चेहरा काम वासना से भर गया था…. और नसरीन अभी मेरी छाती को चूमे जा रही थी….

उतने मे मैने कहा – चलो अभी कुछ अलग करते है

नसरीन – अलग…. अलग क्या?

मैं – अलग मतलब कुछ …तुम्हे पता है जैसे…

मालंबंती – जैसे ??... जैसे तैसे क्या… ये मस्त है


मैं – ये तो है ही पर इससे भी कुछ अच्छा है… अगर तुम चाहो तो?

नसरीन – हाँ हाँ हमे चाहिए बताओ ना और क्या और क्या ….

मैं – वो जो तुम्हारी बुर है उसमे ….

मालंबंती – उसमे क्या…. उसमे तो मेरी उंगली भी नही जाती…. और उधर बहुत कुछ होता है

मैं – हाँ वो जो होता है… उससे भी ज़्यादा मज़ा आता है ….

नसरीन – नही पर उधर नही… उधर उंगली डालने पे बहुत दुखता है… इससे अच्छा आप हमे बस गोद मे बिठा के कहानी सूनाओ

मालंबंती – हाँ हमे आप की गोद मे ही मज़ा आता है….

मैं इन दोनो लड़कियो को कैसे समझाऊ कि जो तुम कर रहे हो वो तो बस काम क्रीड़ा की पहली सीढ़ी है… पर समझाना इतना आसान नही लग रहा था क्यू कि ये तो उधर उंगली डालने को भी नही दे रही थी… मैने कुछ सोचा और उनकी तरफ मूड के बोला

मैं – ठीक है…. पर उधर अगर तुम्हे दर्द होता है तो और …

मालंबति – और क्या…..???

मैं – और एक जगह है जहा तुम्हे उंगली डालने से कम दर्द होगा..

नसरीन – कहाँ कहाँ…..???

मैने मालंबंती को थोड़ा सा उपर उठाया और उसकी गांद के छेद पे उंगली रख के दोनो से कहा यहाँ

दोनो एक साथ बोली – यहाँ …. यहाँ कैसे…. यहा तो कुछ छेद दिखता भी नही


मैं – पर तुम लोगोने कभी यहा उंगली डाल के देखा है


दोनो – नही तो …

मैं – इसलिए तुम्हे पता नही ….

दोनो – क्या???

मैं – यही कि इधर उंगली डालने से बहुत कम दर्द होता है और मज़ा भी बहुत आता है …. और इससे तुम्हारा जो उपर वाला जो छेद है उसको भी खोलने की ज़रूरत नही ….मालंबती के छेद के उपर हाथ रखते हुए कहा


नसीन – पर ये कैसे होगा …इधर तो कुछ छेद है ही नही ???

मैं – मैं दिखाता हू ना तुम्हे ….

मैने मालंबंती को घोड़ी के जैसी अवस्था मे झुकाया.. नसरीन को उसके चूतरो को फैलाने को कहा और मालंबंती की नाज़ुक गोरी लाल लाल गांद के छेद पे नसरीन को बोला


मैं – ये देखो…. है ना छेद


नसरीन – पर ये तो बहुत छोटा है …इधर उंगली कैसे जाएगी


मैं – यहा उंगली नही मेरा लंड भी जाएगा

मालंबनती – क्या तुम इधर अपना लंड डालोगे?

मैं – हां… और तुम्हे सबसे ज़्यादा मज़ा आएगा

मालंबंती – नही नही नही बाबा मुझे नही इतना बड़ा लंड अपने इतने छोटे से छेद मे डलवाना है मेरा दिल बोल रहा है कि इसमे आप की कोई चाल है


नसरीन – अगर इसमे बहुत मज़ा है तो आप मेरी गाड़ के छेद मे ये लंड डाल दो… पर मज़ा आएगा ना बहुत …जैसे गोद मे बैठने से आया था (मालंबती नसरीन की हिम्मत और तंग शरीर की तरफ देखती रह गयी)


मैं – (नसरीन की चुचियाँ हाथ मे मसलते हुए)हाँ तुम्हे बहुत मज़ा आएगा पर उससे पहले हमे कुछ करना पड़ेगा…

मालंबती – क्या करना पड़ेगा…

मैं – तुम कपड़े पहेन कर जाओ … और किचन से तेल की शीशी लेके आओ

मालंबनती – क्यू तेल क्यू…

मैं – इसमे लगाने के लिए …तभी तो मेरा लंड इसमे जाएगा….. नहितो फिर दर्द होगा…


नसरीन – नही नही दर्द नही होना चाहिए… मालू तू जा गुपचुपसे किचन से तेल की सीशी लेके आजा

मैं – पर ख़याल रहे चुपके से लाना और किसिको नही बताना….. और कोई पूछ भी ले तो बोलना कि पाव मे मोच आई है इसलिए लगाने लेके जा रही हू

क्रमशः...................










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