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Monday, December 8, 2014

FUN-MAZA-MASTI छिनाल की औलाद-6

FUN-MAZA-MASTI

छिनाल की औलाद-6

 मुझे भी बड़े लौड़ों से चुदवाने की चाह थी और पापा की चुदाई से मुझे लगने लगा था कि कम उम्र के लौंडों से ज्यादा अच्छी चुदाई उम्रदराज अनुभवी लौड़ों से मिलती है और मुझे इस नजर से ये चारों बहुत ठीक लग रहे थे।
वो सभी कुत्ते मुझ पर टूट पड़े, सबसे पहले विश्रान्त ने मुझे घोड़ी बना कर अपना लंबा लौड़ा मेरी चूत में एक बार में ही घुसा दिया, मैं ज़ोर से चीखी।
राजन- वाहह.. भाई मान गए विश्रान्त साहब.. क्या शॉट मारा है आपने.. एक ही झटके में पूरा लौड़ा अन्दर कर दिया।
दयाल- चीख साली.. इसी बात के तो तुझे पैसे मिलेंगे.. तू जितना चिल्लाएगी हमें उतना ही मज़ा आएगा.. विश्रान्त साहब.. जरा एक और शॉट मारो ना.. साली की गाण्ड बड़ी मस्त है.. इसका भी उद्घाटन आप ही कर दो।
मैं भी समझ चुकी थी कि भले मुझे मजा आए पर मुझे ज्यादा चिल्लाना है ताकि इनको अधिक मजा आए।
विश्रान्त ने झटके के साथ लौड़ा चूत से निकाल लिया और गाण्ड के छेद पर रख कर ज़ोर से धक्का मारा.. साला हरामी बड़ा ही एक्सपर्ट था..
एक ही बार में पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया।
मैं तो चूत के दर्द से अभी उबरी भी नहीं थी कि मेरी गाण्ड में भी दर्द हो गया। मेरी चीखें बदस्तूर जारी रहीं और विश्रान्त गाण्ड मारता रहा।
राजन- बस भी करो.. पहले सब को मुहूर्त करने दो.. उसके बाद इसकी चुदाई शुरू करेंगे.. रानी घबराओ मत.. यह तो बस हम टेस्ट ले रहे हैं.. उसके बाद आराम से चारों एक साथ तुझे चोदेंगे.. तू सोच भी नहीं सकती कि चार लौड़े एक साथ तू कैसे लेगी हा हा हा हा हा…
सब के सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे और बारी-बारी से जैसा विश्रान्त ने किया था सबने पांच मिनट तक मेरी चूत और गाण्ड का टेस्ट-ड्राइव लिया।
मैं अब भी यही सोच रही थी कि तीन तो समझ में आ रहे थे पर चौथा लौड़ा कहाँ डाला जाएगा.. बस इसी सोच में घोड़ी बनी हुई अपना इम्तिहान दे रही थी और इस टेस्ट के दौरान ही मैं झड़ गई।
विश्रान्त- बस अब टेस्ट पूरा हो गया.. साली रंडी तुझे बड़ा मज़ा आ रहा था.. टेस्ट में कैसे कूल्हे हिला-हिला कर झड़ रही थी.. आजा.. आज पहले तेरी चूत को मैं ही चोदूँगा.. आ जा मेरे लौड़े पर बैठ जा.. राजन तू पीछे से गाण्ड मार ले.. बाकी ये दोनों मुँह को संभाल लेंगे।
दोस्तो, अब वो लम्हा मेरी जिंदगी में कैसा था.. आपको शब्दों में नहीं बता सकती हूँ।
विश्रान्त का लौड़ा मेरी चूत की दीवारों को सरकाने की कोशिश कर रहा था, राजन मेरी गाण्ड को ठोक रहा था। मैं दर्द के मारे चिल्ला भी नहीं पा रही थी..
वो दोनों कुत्ते एक साथ मेरे मुँह में अपने लौड़े घुसा रहे थे।
अब तो मैं हिल भी नहीं पा रही थी, बस चुदी जा रही थी।
कमीने थे भी बड़े तगड़े.. झपा- झप चोदे जा रहे थे.. बहुत तक दोनों मेरी चूत और गाण्ड मारते रहे.. मेरा दो बार पानी निकल गया, तब जाकर वो दोनों रुके।
अभी भी उनका पानी नहीं निकला था मेरी आँखें बन्द होने लगी थीं।
राजन- आह मज़ा आ गया.. अब पानी निकलने वाला है.. आ जाओ अब तुम दोनों लग जाओ.. हम इसके मुँह में पानी निकालेंगे…
वो दोनों मुँह से हट गए और उसी पोज़ में अब वो आ गए।
राजन का लौड़ा मेरे मुँह में गले तक घुसा हुआ था, मैं बड़ी मुश्किल से उसको चूस पा रही थी।
कोई 5 मिनट बाद वो मेरे मुँह में झड़ गया, सारा पानी मुझे मजबूर होकर पीना पड़ा।
उसके बाद विश्रान्त ने भी वैसे ही मेरे मुँह को चोदा और सारा पानी मुझे पिला दिया।
दयाल- वाहह.. क्या मस्त चूत है तेरी रानी.. मज़ा आ गया.. उह्ह उह्ह ले आह उफ़फ्फ़ आह… उधर गुप्ता मेरी गाण्ड को ऐसे मार रहा था जैसे ये दुनिया की आखरी गाण्ड हो, उसके बाद उसे कभी चोदने का मौका ही नहीं मिलेगा… साला लौड़े को पूरा बाहर निकालता उसके बाद सर्रररर से फिर घुसा देता।
अब मैं एकदम टूट गई थी.. मेरी चूत में अब पानी भी नहीं बचा था.. जो मैं झड़ जाती।
ये दोनों भी 30 मिनट तक मुझे चोदने के बाद मेरे मुँह में ही झड़े थे।
विश्रान्त- वाहह.. रानी तू वाकयी बहुत मस्त चुदवाती है.. अब आ जा मेरे लौड़े को चूस.. अबकी बार मैं तेरी गाण्ड मारूँगा और पानी भी गाण्ड में ही निकालूँगा।
रानी- आआ आह आप पागल हो.. सीसी क्या थोड़ा सांस तो लेने दो.. चार-चार लौड़े मैंने लिए हैं अब क्या मेरी जान लेने का इरादा है?
राजन- साली दो कौड़ी की छोकरी.. विश्रान्त साहब से ज़ुबान लड़ाती है.. अब देख तेरा क्या हाल करता हूँ.. अब तक तो हम प्यार से पेश आ रहे थे.. साली छिनाल इधर आ…
राजन ने मुझे अपनी ओर खींच कर अपना लौड़ा मेरे मुँह में घुसा दिया और ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगा, मैं पेट के बल लेटी थी और पीछे से विश्रान्त ने अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया और वो भी ज़ोर-ज़ोर से मुझे चोदने लगा।
दोस्तो, माना कि घर में मुझे चुदाई में मज़ा आने लगा था, मगर आज तो मेरी जान पर बन आई थी, वो तो घर के लौड़े थे, उनको मैं सहन कर लेती थी, मगर ये इंसान नहीं जानवर थे, जो बस चोदे ही जा रहे थे।
मेरा जरा भी इनको ख्याल नहीं आ रहा था।
उनसे चुदवाते-चुदवाते ना जाने मैं कब बेहोश हो गई और वो कुत्ते तब भी मुझे चोदने में लगे हुए थे।
शाम को जब मेरी बेहोशी टूटी, मेरी नज़र दीवार घड़ी की ओर गई, अब 6 बज रहे थे और वो चारों अब भी मेरे पास नंगे ही लेटे हुए थे।
राजन- क्यों रानी उठ गई क्या.. साली बड़ी कुत्ती चीज है.. तू बेहोशी में भी गाण्ड हिला-हिला कर मज़े लूट रही थी।
उसकी बात सुनकर मेरा ध्यान मेरी गाण्ड और चूत पर गया.. जो बहुत दर्द कर रही थी। लगता है कुत्तों ने बहुत बुरी तरह से मेरी ठुकाई की होगी।
रानी- आहह.. कमीनों उफ्फ.. मुझसे उठा भी नहीं जा रहा है.. क्या कर दिया तुम लोगों ने.. उहह.. मेरी चूत और गाण्ड बुरी तरह से दुख रही है.. उफ़फ्फ़ कमर भी अकड़ गई.. मेरी तो…
दयाल- हा हा हा.. साली चार-चार बार तुझे चोद कर भी मन नहीं भरा हमारा.. तू बड़ी मजेदार है.. उफ़फ्फ़ मैंने तो दे दनादन तेरी गाण्ड के ही मज़े लिए हैं और विश्रान्त साहब तेरी चूत के दीवाने हो गए.. साली बड़ा मज़ा दिया तूने आज…
उनकी बात सुनकर मेरे होश उड़ गए यानि 16 बार उन्होंने मुझे चोदा..
उफ्फ तभी मेरा यह हाल हो गया..
बड़ी मुश्किल से मैं उठी, अपने कपड़े लिए और बाथरूम में जाकर टब में गर्म पानी में बैठ कर चूत और गाण्ड को सेंकने लगी।
मेरी अब वहाँ से उठने की हिम्मत नहीं थी।
लगभग 7 बजे के आस-पास पापा वहाँ आ गए, मुझे उनकी आवाज़ सुनाई दी।
पापा- नमस्ते राजन सर, क्या बात है.. बड़े खुश दिखाई दे रहे हो.. लड़की ने कुछ गड़बड़ तो नहीं की ना.. आप लोगों को मज़ा आया या नहीं?
राजन- अरे आओ.. आओ.. किशोरी लाल.. कसम से मज़ा आ गया.. ऐसा माल पहले कभी नहीं मिला हमको यार.. क्या बताऊँ साली बड़ी गजब की लौंडिया है यार.. एक दो दिन बाद दोबारा लाना इसको.. आज तो हमने बस इसको चखा है.. अबकी बार ठीक से मज़ा लेंगे इसका…
मुझे उनकी बातें साफ सुनाई दे रही थीं.. कुत्तों ने चोद-चोद कर मेरी तो हालत खराब कर दी और कहते हैं कि आज बस ‘चखा’ है.. अबकी बार ठीक से चोदेंगे..
मैं जल्दी से उठी और अपने बदन को साफ किया.. अपने कपड़े पहने और बाहर आ गई।
पापा- अरे वाहह.. रानी.. तुम तो नहा कर तैयार हो गईं.. आ जाओ.. सब तुम्हारी बहुत तारीफ कर रहे हैं।
मैं कुछ नहीं बोली बस चुपके से पापा के पास आकर खड़ी हो गई।
राजन- ले भाई किशोरी.. 50 तो तुझे पहले दे दिए थे हमने.. बाकी के डेढ़ ये ले… कसम से पैसे वसूल हो गए.. और ये दस हजार मेरी तरफ़ से एक्सट्रा रानी के लिए… अबकी बार और मज़ा देना मेरी जान…
पापा ने खुश होकर उनसे पैसे ले लिए। हमारे निकलते हुए भी उस कुत्ते ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरा एक मम्मा पकड़ कर दबाते हुए मुझे चूम लिया और मेरी गाण्ड को ज़ोर से मसक दिया।
हम लोग उधर से बापस आने लगे, रास्ते में पापा बोलते रहे.. मैं गुस्से की वजह से चुप बैठी रही।
पापा ने होटल से खाना ले लिया आज उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था।
हम जब घर पहुँचे तब मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
पापा- अरे रानी क्या हुआ तू कुछ बोल क्यों नहीं रही.. पूरे रास्ते भी चुप थी.. देख आज तूने क्या कमाल कर दिया.. एक ही दिन में 2 लाख कमा लिए.. वाहह.. अब तो बहुत जल्दी हम अमीर हो जाएँगे।
रानी- बन्द करो अपनी गंदी ज़ुबान साले.. तू इतना बड़ा हरामी निकलेगा.. मैंने सोचा भी नहीं था.. तूने मुझे रंडी बना दिया और उन कुत्तों के सामने फेंक दिया.. तुम्हें शर्म नहीं आई.. मुझ नन्ही सी जान को चार हरामियों को सौंपते हुए.. मेरी हालत खराब कर दी उन लोगों ने… वे हैवान से कम नहीं थे.. कितना बेरहमी से चोदा मुझे.. मेरी हालत खराब कर दी।
पापा- चुप साली छिनाल की औलाद.. तुझे ही बड़ा शौक चढ़ा था… तीन-तीन से चुदने का.. साली फ्री में चुदवाने से तो अच्छा है ना.. घर में चार पैसे आयें… अब ज़्यादा बात मत कर.. अपनी औकात में रह!
मैंने पापा को खूब सुनाया.. मगर वो कहाँ मानने वाले थे.. उनको तो पैसों से मतलब था और मुझे भी अब समझ आ गया था कि मेरी जिंदगी बर्बाद हो गई है, अब जो भी होगा मुझे ही सहना पड़ेगा.. बस वक़्त और हालत से मैंने समझौता कर लिया..
अजय और विजय को भी सब मालूम हो गया।
वो भी उस हरामी बाप के हरामी बेटे निकले…
अब वो भी अपने दोस्तों से पैसे लेकर मुझे उनसे चुदवाने लगे।
दोस्तो, उन सब के मज़े हो गए.. बड़े लोगों की पार्टी में मुझे अच्छे पैसे मिल जाते और इन टुच्चे लोगों से भी 2-4 हजार मिल ही जाते हैं।
अब तो लंड ही मेरी ज़िंदगी में कमाई का जरिया बन गया है।
मुझे चुदते हुए आज 4 साल हो गए हैं। मेरी चूत का तो भोसड़ा बन गया है, मेरी गाण्ड सबको बेहद पसंद आती है, साले कुत्ते सब मेरी गाण्ड ही मारते हैं।
बस दोस्तो, यही है मेरी बर्बादी की कहानी.. आपसे एक विनती करती हूँ.. कभी किसी की मजबूरी का फायदा मत उठाना और पिंकी जी का बहुत शुक्रिया अदा करती हूँ जो उन्होंने आप तक मेरी बात को पहुँचाया..
अच्छा अब नमस्ते.. जिंदा रही तो दोबारा मुलाकात होगी।








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FUN-MAZA-MASTI छिनाल की औलाद-5

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छिनाल की औलाद-5

 हम दोनों बिस्तर पर लेट गए.. चुंबन करते-करते मैंने अजय का पजामा निकाल दिया टी-शर्ट उसने पहले ही निकाल दी थी।
अब हम दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे जैसे कोई साँप चंदन के पेड़ से लिपटता है।
हम दोनों का चुसाई का प्रोग्राम चालू था, तभी विजय कमरे में आ गया।
हम वैसे के वैसे पड़े रहे।
विजय- वाह.. क्या बात है छोटे.. तू तो बहुत बड़ा हो गया.. बड़े मज़े से रानी के चूचे चूस रहा है।
अजय- बड़े भाई आप भी आ जाओ.. आज तक अकेले-अकेले में मज़ा लेते थे.. आज दोनों मिलकर इस राण्ड को चोदेंगे.. बड़े मज़े देने लगी है आजकल…
विजय हंसता हुआ अन्दर आ गया और अपने कपड़े निकालने लगा।
रानी- उफ़फ्फ़ क्या करते हो अजय.. ऐसे कोई चूचे दबाता है क्या..? आऊच भाई.. आप इसको कुछ सिख़ाओ ना.. आआइई..
विजय- साली छिनाल तेरे को ही दो का मज़ा लेना था.. अब दर्द से क्या डरती है.. ले पहले मेरा लौड़ा चूस.. तीन दिन से अकड़ा बैठा है.. अजय तब तक तू साली राण्ड की चूत चाट कर इसको गर्म कर!
विजय ने अपना लौड़ा मेरे मुँह में घुसा दिया और अजय मेरी टांगों के बीच आ गया और अपनी जीभ से मेरी चूत चाटने लगा।
बड़ा मज़ा आ रहा था।
विजय- आहह.. चूस उफ्फ साली.. क्या चूसती है तू.. मज़ा आ गया आअहह.. और..चूस…
अजय- भाई, ये साली तो पहले से ही गर्म है.. देखो कैसे आज चूत को चिकना किया है और इसकी चूत कैसे पानी छोड़ रही है। आप तो बस आ जाओ… घुसा दो लौड़ा इसकी चूत में और मुझे भी गाण्ड मारने दो.. मुझसे अब ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं होगा।
अजय की बात सुनकर मैंने लौड़ा मुँह से निकाला और अजय के बाल पकड़ कर उसको भी विजय के पास खड़ा कर दिया।
रानी- साला हरामी 5 मिनट हुआ नहीं कि अपनी औकात पर आ गया.. इतनी जल्दी थोड़े ही तुम दोनों से चुदवाऊँगी.. पहले मुझे ठीक से मज़ा तो लेने दो…
अजय- साली.. अब तू क्या करने वाली है.. कितनी ज़ोर से मेरे बाल खींचे.. दर्द हुआ ना मेरे को…
रानी- चुप साले.. इतने से दर्द से घबरा गया.. तूने मेरी गाण्ड में ये मोटा लौड़ा घुसाया था, तब नहीं सोचा कि मुझे कितना दर्द हुआ होगा…
विजय- तुम दोनों लड़ना बन्द करो.. साली राण्ड मेरे लौड़े को क्यों बाहर निकाल दिया.. चूस ना… मज़ा आ रहा था।
रानी- लौड़ा भी चूसूंगी.. मगर दोनों का एक साथ और उसके बाद तुम दोनों मेरी चूत और चूचे एक साथ चूसना.. उसके बाद एक साथ चूत और गाण्ड में लौड़े डालना.. तब आएगा असली मज़ा…
मेरी बात दोनों को पसन्द आई और मैं शुरू हो गई। कभी अजय का लौड़ा चूसती तो कभी विजय का कभी दोनों लौड़ों को एक साथ नज़दीक करके जीभ से चाटती.. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
दस मिनट की चुसाई के बाद अजय के बर्दाश्त के बाहर हो गया। उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और खुद मेरे चूचे दबाने लगा.. मेरे चूचुकों को चूसने लगा।
विजय- अरे वाहह.. छोटे तू तो बड़ा फुर्तीला निकला.. चल साली अब तेरी चूत को मैं चूस कर मज़ा देता हूँ।
दोस्तो, वो पल ऐसा था आपको क्या बताऊँ बड़ा ही मज़ा आ रहा था। मेरी चूत रिसने लगी थी.. विजय अपनी जीभ चूत के अन्दर तक घुसा कर चाट रहा था और अजय भी मेरे चूचुकों को बड़े मज़े से चूस रहा था।
यह सिलसिला ज़्यादा देर तक नहीं चला क्योंकि अजय बड़ा उतावला हो रहा था इसलिए अब विजय सीधा लेट गया और मैं उसके लौड़े पर बैठ गई.. सर्रररर करता हुआ लौड़ा चूत में समा गया।
अब अजय पीछे आ गया और उसने अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया। अब दोनों ‘दे..दना-दन’ मुझे चोदने लगे।
रानी- आहह उहह चोदो बहनचोदो.. आह अपनी बहन को चोदो.. आआइई.. आज फाड़ दो मेरी चूत और गाण्ड आआईइ उउउइई.. आह.. मज़ा आ रहा है.. आह ज़ोर से उफ्फ आहह..
मेरी सिसकारियों से दोनों जोश में आ गए और तेज़ी से लौड़े आगे-पीछे करने लगे।
अजय तो पहले से ही किनारे पर था ज़्यादा देर तक मेरी गाण्ड की गर्मी ना सह पाया और मेरी गाण्ड में ही झड़ गया।
अजय- अईयाया मैं ग्ग्ग..गया.. उफफफ्फ़ सस्स्सस्स.. क्या मस्त.. अइई.. गाण्ड है तेरी…
रानी- चल हट हरामी.. साला थोड़ी देर भी नहीं टिक सकता.. नामर्द कहीं का.. अईउई.. चोदो विजय.. अईउई तुम बहुत अच्छे हो.. अईउई मेरी चूत में कुछ हो रहा है.. आआहह ज़ोर से… और ज़ोर से उफफफ्फ़ आआआ मैं गई आआहह…
विजय- मेरी रानी.. वो अभी छोटा है उह्ह उह्ह उह्ह ले.. उह्ह ले.. उसको क्या बोलती हो.. ले उह्ह उह्ह आ आ.. रुक रानी आहह.. मैं भी झड़ने के करीब हूँ.. आहह.. दोनों एक साथ झडेंगे.. आह… ले उह्ह उह्ह उह्ह उह्ह उफ़फ्फ़…
अजय तो एक तरफ़ हो गया था.. अब विजय और तेज़ी से झटके मारने लगा। मैं भी गाण्ड उछाल-उछाल कर लौड़े पर कूदने लगी..
सिर्फ 5 मिनट बाद ही दो नदियों का संगम हो गया.. हम दोनों झटके खा-खा कर झड़ने लगे। थोड़ी देर बाद ये तूफ़ान शान्त हुआ और हम निढाल से होकर लेट गए।
रानी- उफ़फ्फ़ कितनी गर्मी लग रही है.. कितना मज़ा आया आज.. कसम से चुदाई इसे कहते हैं एक साथ दो लौड़े लेने का मज़ा ही कुछ और है।
अजय- हाँ रानी.. मुझे भी बड़ा मज़ा आया थैंक्स भाई.. आपने ऐसा प्लान बनाया…
विजय- अरे मैंने कहाँ बनाया.. ये तो तूने बनाया ना…
उन दोनों की बात सुनकर मैं ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी.. विजय सब समझ गया कि ये सब कुछ मेरा प्लान था।
विजय- साली रंडी मेरे साथ सोती है और मुझसे ही झूट बोला तूने.. ये सब प्लान तेरा था और हम दोनों भाइयों को चूतिया बना कर मज़े ले लिए तूने…
अजय- ओह माय गॉड.. भाई ये साली बहुत बड़ी राण्ड बन गई है.. देखो कैसे हम दोनों को एक-दूसरे का नाम लेकर तैयार कर लिया।
रानी- बस भी करो कुत्तों.. माना कि प्लान मेरा था.. मगर राज़ी तो तुम दोनों ही थे ऐसी चुदाई के लिए और मज़ा मैंने अकेले नहीं.. तुम दोनों ने भी लिया है.. शुक्र करो मेरा.. कि अब अलग-अलग चुदाई के बजाए एक साथ मज़े करेंगे।
मेरी बात सुनकर दोनों समझ गए कि मैं ठीक बोल रही हूँ और अब ज़्यादा बहस की गुंजायश भी नहीं थी क्योंकि आजकल मैं गाली देना सीख गई थी.. ज़्यादा बोलते तो दोनों की हालत खराब कर देती।
दोस्तों उस रात हमने तीन बार ये खेल खेला.. मगर अजय थोड़ा जल्दी झड़ जा रहा था। विजय भी इतना खास नहीं.. उसके 5 मिनट बाद वो भी झड़ जाता, मुझे लंबा वक्त सिर्फ़ पापा ही देते हैं मैं दो बार झड़ जाती हूँ तब भी वो चोदते रहते हैं।
रात दो बजे तक मेरी चूत और गाण्ड की बैंड बजाने के बाद हम अपने-अपने कमरों में चले गए और सुकून की नींद सो गए।
दोस्तों सुबह मैं एकदम फ्रेश हो गई थी क्योंकि अब चुदाई की मुझे लत पड़ गई थी, जब तक दो-तीन बार गाण्ड और चूत ना मरवा लूँ.. मेरे जिस्म में सुस्ती रहती है। सब काम निपटा कर मैं तैयार होने लगी। ओह.. आपको बताना ही भूल गई कि पापा ने जाते समय मुझे कहा था कि वो जल्दी वापस आकर मुझे ले जाएँगे, बस इसी वजह से मैं तैयार हो रही हूँ।
करीब 9 बजे तक मैं एकदम तैयार होकर पापा का इंतजार करने लगी। आज मैंने पापा की लाया हुआ गुलाबी टॉप और काला स्कर्ट पहना था, जिसमें मैं एक छोटी बच्ची लग रही थी और वैसे भी अभी मेरी उमर भी क्या थी.. बच्ची ही तो थी मैं.. बस मेरे हरामी घर वालों ने मुझे औरत बना दिया था।
पापा- अरे वाहह.. मेरी रानी आज तो एकदम गुड़िया जैसी लग रही हो.. कसम से आज मज़ा आ जाएगा.. मगर मेरी एक बात गौर से सुन.. वहाँ किसी को पता ना चले कि तू मेरी बेटी है.. मुझे बस अंकल बोलना वहाँ.. ओके.. आज से तेरा नया जीवन शुरू होने जा रहा है। अब तू फ्री में नहीं चुदेगी.. हम पैसे कमाएँगे तेरी चूत से.. बस तू उनकी हर बात मान लेना.. थोड़े पागल किस्म के लोग हैं वो लोग चुदाई की हर हद पार कर चुके हैं मगर पैसे भी खूब देंगे…
पापा की बात सुनकर मैं एकदम सन्न रह गई क्योंकि चुदाई के चक्कर में अब ना जाने मेरे साथ क्या-क्या होने वाला था। पापा ने तो मुझे सचमुच की रंडी बना दिया था।

रानी- म..म..मगर पापा आपने तो कहा था कि आपके दोस्त हैं और मैंने बस मज़ा लेने ले लिए ‘हाँ’ की थी.. ये पैसे किस बात के लिए?
पापा- अरे रानी वो दोस्त ही हैं और मज़े तो हम करेंगे ही.. अब पैसे तो वो लोग अपनी ख़ुशी से दे रहे हैं समझी.. चल अब ज़्यादा सवाल मत कर.. वहाँ जाकर सब समझ जाएगी।
पापा मुझे टैक्सी में बिठा कर घर से ले गए। हम करीब 25 मिनट तक चलते रहे उसके बाद हम एक फार्म-हाउस पर पहुँचे, जो दिखने में काफ़ी आलीशान लग रहा था।
दरवाजे के अन्दर जाते ही दरबान ने हमें सलाम किया और हम अन्दर चले गए।
दोस्तो, अन्दर एक बहुत ही बड़ा घर था मैं तो बस देखते ही रह गई।
पापा- देखो रानी कोई गड़बड़ मत करना.. बस चुपचाप मज़े लेना.. समझी, ये बड़े लोग हैं इनको ‘ना’ सुनना पसन्द नहीं है। चलो अब ऊपर वो लोग इंतजार कर रहे होंगे।
मैं बोल भी क्या सकती थी.. चुपचाप पापा के पीछे हो गई।
पापा ने कमरे का दरवाजा खोला तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं.. अन्दर काफ़ी आलीशान सजावट थी और चार आदमी जो 50 या 60 साल से कम के नहीं थे.. मुझे घूरने लगे।
उनमें से एक खड़ा हो गया जिसका नाम राजन था।
राजन- आओ आओ.. किशोरी लाल.. बड़ी देर कर दी आने में और ये कौन है.. तेरे साथ?
दोस्तो, मैंने शायद आपको बताया नहीं मेरे पापा का नाम किशोरी लाल है।
चलो अब आगे का हाल सुनाती हूँ।
पापा- सर जी.. मैंने बताया था ना आपको.. यह वही है…
राजन- दिमाग़ तो ठीक है.. ना तुम्हारा.. ये छोटी सी लड़की के बारे में बता रहे थे तुम.. विश्रान्त भाई.. सब सुना आपने?
विश्रान्त- हाँ सुन रहा हूँ.. किशोरी लाल तूने कहा था.. लड़की छोटी है खूब मज़ा देगी.. मगर इतनी छोटी है ये नहीं बताया था.. इसके साथ चुदाई करेंगे.. साली कहीं मर-वर गई तो.. ना बाबा हम ये रिस्क नहीं लेंगे.. तू इसको वापस ले जा.. हमारे पैसे वापस कर दे।
पापा- अरे विश्रान्त साब.. आप मेरी बात तो सुनो.. मैंने साफ-साफ कहा था लड़की छोटी है.. खूब मज़ा देगी और गुप्ता जी और दयाल साब भी तो वहीं थे.. आप भरोसा करो इसको कुछ नहीं होगा…
गुप्ता जी- भाई एक बात तो है.. साला किशोरी माल तो तगड़ा लाया है.. इतनी कमसिन कली को ऐसे ही मत जाने दो यार कुछ तो मज़ा करो…
दयाल साब- अरे राजन.. इसकी पूरी बात तो सुन लो.. क्या पता लड़की पहले से खेली-खाई हो.. तभी किशोरी यहाँ लाया है.. वरना इतना भी पागल नहीं है ये.. कि सील पैक लड़की हम शैतानों के हाथ सौंप दे…
पापा- हाँ राजन साब, यही बात है.. आप सुन ही नहीं रहे हो.. लड़की के तीनों छेद अच्छे से खुले हुए हैं.. हाँ बस फ़र्क इतना है कि थोड़ी जल्दी ही ये लड़की चुद गई वरना इस उमर में तो इसके खेलने के दिन हैं.. जवान लौंडों से चुदी है.. जिनको कुछ समझ ही नहीं.. अब आप लोगों के पास आ गई है तो सब सीख जाएगी।
दोस्तों पापा ऐसे बात कर रहे थे जैसे मैं कोई चीज हूँ और बाजार में मुझे बेचने गए हों और वो सब भी मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूर रहे थे।
गुप्ता जी- नाम क्या है तेरा?
रानी- ज्ज..जी रानी।
गुप्ता जी- वाहह.. क्या नाम है तेरा.. रानी.. मज़ा आएगा, यहाँ आओ रानी.. तेरे चूचे तो देखूँ.. देखने में तो छोटे-छोटे अमरूद से लग रहे हैं।
विश्रान्त- छोटे हैं तो क्या हुआ.. हम हैं ना.. बड़े कर देंगे.. आजा रानी डर मत आ जा…
मैं एकदम सहम गई थी और पापा की तरफ़ देखने लगी.. मगर पापा तो हरामी थे, मुझे ऐसे घूर कर देखा कि मैं डर गई।
पापा- जाओ रानी ये बड़े सेठ हैं तेरी जिंदगी बना देंगे.. मैं अब चलता हूँ.. हाँ शाम तक तू इनको खुश कर दे.. मैं आकर तुझे ले जाउंगा.. ठीक है ना…
रानी- पा…. अंकल आपने तो कहा था आप साथ में रहोगे.. मगर आप तो जा रहे हो।
पापा- अरे मैं क्या करूँगा.. चार तो हैं अब मेरा यहाँ क्या काम, अब चुपचाप जा.. बाकी की बात शाम को करेंगे..
मेरी पीठ को सहला कर पापा मुझे उन भूखे भेड़ियों के सामने खड़ा करके वहाँ से चले गए।
गुप्ता जी- अब आ भी जा रानी.. क्यों तड़पा रही है.. आ देख सब कैसे तेरा इंतजार कर रहे हैं।
मैं धीरे-धीरे चलते हुए उनके पास गई।
एक बड़े से बिस्तर पर चारों बैठे बस मेरे करीब आने का इंतजार कर रहे थे।
जैसे ही मैं उनके नज़दीक गई, विश्रान्त ने मुझे खींच कर बिस्तर पर ले लिया।
यह एक रबड़ के गद्दे वाला पलँग था जिसके गद्दे में पानी भरा हुआ था। बड़ा ही लचीला बिस्तर था। मैं ऊपर गिरते ही उछल गई।
चारों मुझे वासना की नज़रों से घूरने लगे, कोई मेरे चूचे दबा रहा था तो कोई मेरी जाँघों को चूसने लगा।
मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि अचानक ये क्या हो गया। बस बिना कुछ बोले सब के सब मुझ पर टूट पड़े।
गुप्ता जी- यारों कुछ भी कहो किशोरी लड़की बहुत मस्त लाया है.. साली के चूचे छोटे से हैं.. मगर हैं बड़े रसीले.. उफ्फ.. क्या मज़ा आ रहा है।
दोस्तों उन चारों को मुझे नंगा करने में एक मिनट भी नहीं लगा।
अब मैं नग्न उनके सामने पड़ी थी और वो मेरे चूचुकों को चूस रहे थे।
विश्रान्त मेरी चूत को चाट रहा था, पहले उसने अपनी उंगली से मेरी चूत का मुआयना किया था कि कहीं सील पैक तो नहीं हूँ ना.. पहले एक उंगली डाली.. उसके बाद दो और फिर तीन उंगलियाँ ठूंस कर मेरी चूत की सील चैक की और मेरी चूत के रस से सनी अपनी उंगलियों को अपने मुँह में डाल कर चूसा।
राजन- क्यों विश्रान्त चूत चैक कर ली है क्या हुआ कैसी है.. और चूत का स्वाद कैसा है?
विश्रान्त- अरे क्या बताऊँ यार.. चूत तो एकदम मस्त कसी हुई है.. हाँ साली चुदी-चुदाई है.. मगर अभी ज़्यादा नहीं चुदी.. इसका पानी तो बड़ा स्वादिष्ट है।
सब एक से बढ़कर एक मादरचोद और हरामी थे, आधे घंटे तक मुझे ऐसे चूसते और चाटते रहे कि मेरी हालत खराब कर दी और हाँ एक बार तो मैं झड़ भी गई थी।
राजन- बस भाई इसको तो बहुत चूस लिया.. अब इसको अपने लौड़े चुसवाओ.. इसकी चूत और गाण्ड के मज़े लो.. अब बर्दाश्त नहीं होता।
चारों ने अपने कपड़े निकाल दिए.. मेरी नज़र उनके लौड़े पर गई जो तन कर एकदम फुंफकार रहे थे।
दोस्तों उनकी उमर के हिसाब से मुझे लगा.. सालों के लौड़ों में इतनी कहाँ जान होगी.. मगर उनको देख कर मेरी हालत पतली हो गई।
दयाल का लौड़ा कोई 8 इन्च का होगा पापा के लंड से मिलता-जुलता, गुप्ता जी का लंड एकदम काला.. किसी घोड़े जैसा वो कोई 9 इन्च का होगा और मोटा भी काफ़ी था।
अजय और विजय दोनों के लंड को जोड़ लो.. उतना अकेला तो उसका था। राजन का लौड़ा भी कोई 8 इन्च से ज़्यादा ही बड़ा था.. वो भी मोटा था।
आखिर में विश्रान्त के लंड पर नज़र गई तो वो भी करीब 9 इन्च का थोड़ा टेढ़ा लौड़ा था बिल्कुल केला जैसा घुमावदार लौड़ा था।
मेरे तो पसीने छूटने लगे, मगर मैं चुपचाप पड़ी रही।
दयाल- अबे गुड़िया.. अभी भी यूँ ही पड़ी रहेगी क्या.. चल आ जा.. अब लौड़े चूस.. उसके बाद देखते हैं तुझमें कितना दम है, आज तू शाम तक हम लोगों की है, कसम से आज तुझे इतना चोदेंगे कि सारी जिंदगी तुझे सपने में भी लौड़े ही दिखेंगे।
सारे कुत्ते मेरे आजू-बाजू खड़े हो गए, मैं उनके बीच बैठ गई और विश्रान्त का लौड़ा चूसने लगी, कभी राजन मेरे बाल खींच कर मुझे अपना लौड़ा चुसवाता तो कभी दयाल.. बस मैं तो उनके बीच कठपुतली बनकर रह गई थी।
रानी- आहह.. ऑऊच ये आप क्या कर रहे हो.. दुखता है ना…
राजन- चुप साली रंडी.. अगर इतना ही दर्द होता है, तो यहाँ क्या अपनी माँ चुदवाने आई है.. साली पैसे दिए है तेरे दलाल को.. शाम को तुझे तेरा हिस्सा भी मिल जाएगा.. वैसे एक बात तो बता, किशोरी को तू कहाँ से मिल गई.. साला कल तक तो हमसे कर्जे लेता था मगर आज सेठ बन गया.. पता है उसने तेरी एडवाँस बुकिंग कर दी है.. ये महीना पूरा तू बस चुदती ही रहेगी.. साला बड़ा हरामी है, एक ही दिन में लाखों कमा गया है वो।
उनकी यह बात सुनकर सोचने लगी.. जिस बाप के प्यार के लिए मैंने उसे अपना जिस्म सौंपा था वो ही कमीना मेरा दलाल बन गया।
उसे मुझसे कोई प्यार नहीं था, बस अपना काम निकाल कर अब मुझे बेच दिया उसने, पर मुझे भी बड़े लौड़ों से चुदवाने की चाह थी और पापा की चुदाई से मुझे लगने लगा था कि कम उम्र के लौंडों से ज्यादा अच्छी चुदाई उम्रदराज अनुभवी लौड़ों से मिलती है और मुझे इस नजर से ये चारों बहुत ठीक लग रहे थे।
वो सभी कुत्ते मुझ पर टूट पड़े, सबसे पहले विश्रान्त ने मुझे घोड़ी बना कर अपना लंबा लौड़ा मेरी चूत में एक बार में ही घुसा दिया, मैं ज़ोर से चीखी।





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FUN-MAZA-MASTI छिनाल की औलाद-4

FUN-MAZA-MASTI

छिनाल की औलाद-4

 रानी- बस ज़्यादा तेवर मत दिखाओ… मैं जानती हूँ तू यहाँ क्यों आया है। अब चुपचाप अपना काम कर और चलता बन मुझे नींद आ रही है।
विजय- क.. कौन सा काम?
रानी- इतना भी पागल मत बन.. आधी रात को तू मेरे कमरे में क्या माँ चुदाने आया है… साला बहनचोद.. मुझे चोदने आया है ना.. तो क्यों बेकार में वक्त खराब कर रहा है.. चल निकल अपने कपड़े.. आज तुझे असली मज़ा देती हूँ। तेरे हरामी बाप ने कल से लेकर आज
तक मुझे इतना बेशर्म बना दिया है कि एक रंडी भी अपने ग्राहक को इतना मज़ा नहीं देती होगी जितना मैं तुझे आज दूँगी।
अब विजय के पास बोलने को कुछ नहीं था वो चुपचाप बिस्तर पर बैठ गया। मैं उसके पास गई और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
दो मिनट के चुम्बन के बाद विजय मेरे मम्मों को दबाने लगा, मेरी चूत को सहलाने लगा।
मैं भी कहाँ पीछे रहने वाली थी, मैंने उसके लौड़े को पजामे के ऊपर से दबाने लगी।
विजय- उफ साली वाकयी में तू बड़ी गजब की चीज है… चल अब नंगी हो जा अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
हम दोनों नंगे होकर बिस्तर पर लेट गए और एक-दूसरे को चूमने, चूसने लगे। विजय का लंड फुंफकारने लगा, तब मैंने झट से उसको
मुँह में ले लिया और बड़ी अदा के साथ उसको चूसने लगी।
विजय- उफ़फ्फ़ आह कक साली.. आहह.. मज़ा आ गया ओए.. काट मत अईए.. हरामजादी क्या हो गया तुझे.. आहह.. ला मुझे भी तेरी चूत का स्वाद चखने दे उई..
मैं लौड़े को मुँह से निकाले बिना ही घूम गई और विजय के ऊपर आ गई। अब मेरी चूत विजय के मुँह पर थी, जिसे वो बड़ी बेदर्दी से चूसने लगा था।
करीब 15 मिनट तक ये चूत और लंड चुसाई का प्रोग्राम चलता रहा। अब तो विजय का लौड़ा लोहे की रॉड जैसा सख़्त हो गया था और मेरी चूत आग की भट्टी की तरह जल रही थी।
मैंने लौड़े को मुँह से निकाला और घूमकर लौड़े पर बैठ गई.. ‘फच’ की आवाज़ के साथ पूरा लौड़ा मेरी चूत में समा गया।
एक हल्की सिसकी के साथ मैं आसमानों में पहुँच गई।
लगातार दस मिनट तक मैं लौड़े पर कूदती रही.. विजय अपना आपा खो बैठा और मेरी चूत में झड़ गया। उसके साथ ही मेरा भी फव्वारा निकल गया। हम दोनों एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे।
रानी- क्यों भाई.. मज़ा आया ना?
विजय- उफ़फ्फ़ तू मज़े की बात कर रही है… मुझे समझ नहीं आ रहा मैंने कौन से अच्छे काम किए थे… जो घर बैठे तुझ जैसी कमसिन कली मुझे चोदने को मिल गई। अब तो रोज रात तेरी चूत और गाण्ड के मज़े लूँगा… साली क्या गाण्ड है तेरी… सच कहूँ तेरी चूत से ज़्यादा गाण्ड मस्त है।
रानी- ओ मेरे प्यारे भाई.. तो रोका किसने है.. अब मैं पूरी आप की ही हूँ जब चाहे चोद लेना… आ जाओ अब गाण्ड भी मार लो… मन की मन में मत रखो।
विजय- अरे साली रुक तो अभी लौड़ा ठंडा हुआ है.. इतनी जल्दी कहाँ इसमें रस आएगा थोड़ा सबर कर…
रानी- अरे भाई क्या बात करते हो.. मेरे होते हुए ये कैसे ठंडा पड़ सकता है.. अभी तुमने अपनी बहन का कमाल कहाँ देखा है… पापा ने मुझे सब सिखा दिया है कि सोए लंड को कैसे जगाया जाता है।
विजय- अच्छा दिखाओ तो अपना कमाल.. एक बात तो है पापा हैं बड़े ठरकी… एक ही दिन में तुझे पक्की रंडी बना दिया। मैं तो शाम को ही समझ गया था जब पापा ने तेरी तारीफ की थी।
रानी- हाँ ये बात तो है.. पापा बड़े हरामी हैं.. लेकिन चुदाई का उनका तरीका ऐसा है कि कोई भी लड़की उनको ना नहीं बोल सकती… क्या आराम से चोदते हैं, कसम से मज़ा आ जाता है।
विजय- चल अब तू पापा के गीत गाना बन्द कर और अपना कमाल दिखा… मैं भी तो देखूँ ऐसा कौन सा जादू करेगी तू… कि इतनी जल्दी मेरा सोया लंड खड़ा हो जाएगा।
मैंने एक हल्की सी मुस्कान दी और विजय के लौड़े के सुपारे पर अपनी जीभ घुमाने लगी.. साथ ही मैं उसकी गोटियों को सहलाने लगी। कभी लंड को मुँह में लेकर चूसती तो कभी उसके गोटियों को मुँह में लेकर चूसती..
विजय की हालत खराब हो गई। कुल 5 ही मिनट में उसका लौड़ा पिलपिले आम से कड़क केला बन गया।
विजय- अरे वाहह.. मेरी रानी तूने तो कमाल कर दिया.. चल अब घोड़ी बन जा। तेरी गाण्ड आज बड़े प्यार से मारूँगा।
मैं घोड़ी बन गई और विजय ने अपना लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया।
उफ़फ्फ़.. कितना मज़ा आया मुझे.. आपको क्या बताऊँ।
दोस्तों गाण्ड मारने के बाद विजय ने दो बार और मेरी चूत और गाण्ड मारी। मेरे जिस्म में अब ज़रा भी ताक़त नहीं बची थी.. मैं थक कर चूर हो गई। विजय भी निढाल सा होकर वहीं ढेर हो गया था।
हम दोनों की कब आँख लग गई पता भी नहीं चला। सुबह 6 बजे मेरी आँख खुली तो मैंने जल्दी से विजय को उठाया और खुद गुसलखाने में घुस गई।
करीब आधा घंटा बाद जब मैं बाहर आई तो मैंने देखा कि विजय जा चुका था। मैं भी अपने काम में लग गई।
सुबह का दिन तो सामान्य गुजरा फिर वही शाम आई और आज अजय सबसे पहले आ गया। मैंने उसको खुश कर दिया। उससे दो बार चूत और गाण्ड मरवाई, फिर रात को पापा और विजय ने मज़े लिए।
दोस्तों अब रोज-रोज की चुदाई का क्या हाल बताऊँ आप को.. बस यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा।
अब तो मैं लंड की आदी हो गई थी।
उफ़फ्फ़ सॉरी.. लंड की नहीं लंडों की.. अब ये घर के लौड़े मेरी जिंदगी बन गए थे।
करीब दो महीने तक यह सिलसिला चलता रहा तीनों ने मिलकर मेरी चूत का भोसड़ा और गाण्ड को गड्डा बना दिया था मगर एक बात है अब तक तीनों एक-दूसरे से छुपे हुए थे।
ख़ासकर अजय को पापा के बारे में कुछ पता नहीं था। अब तो मेरे मज़े ही मज़े थे, घर का काम तो आज भी मैं ही कर रही हूँ।
हाँ.. मगर अब कोई ना कोई मेरी मदद कर देता है.. जैसे कि अजय आया और उसका मन है चोदने का तो मैंने कह देती हूँ कि कपड़े धोने में मेरी मदद करो.. ताकि मैं जल्दी फ्री हो जाऊँ और हम मज़े से चुदाई कर सकें और हाँ.. अब तो कोई ना कोई मेरे लिए तोहफा भी ले आता.. अच्छे कपड़े और ब्रा पैन्टी सब कुछ जो मैं चाहती हूँ।
विजय ने मुझे ब्लू-फिल्म भी दिखाई उसमें एक साथ दो आदमी एक लड़की को चोद रहे थे। मेरा बहुत मन हुआ और मैंने एक प्लान बनाया।
जब 28 नवम्बर की शाम, मैं घर में अकेली थी, तभी अजय वहाँ आ गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया।
रानी- अरे रूको ना… क्या कर रहे हो.. हटो अभी नहीं…
अजय- मेरी जान.. कसम से बाहर एक मस्त कंटीला माल देख कर लौड़ा फुंफकार मारने लगा.. अब वो तो मेरे कहाँ हाथ आने वाली है..
इसलिए तेरे पास आ गया.. चल आजा.. अब ठंडा कर दे मुझे.. उसके बाद जो तेरी मर्ज़ी वो करना…
रानी- अच्छा साले यह बात है बाहर से गर्म होकर यहाँ ठंडा होने आया है.. चल हट.. नहीं चुदवाती मैं.. पहले मेरा एक काम करो..
अजय- तू जो बोलेगी मैं कर दूँगा लेकिन प्लीज़ पहले चुदवा ले ना यार…
रानी- नहीं.. बोला ना.. पहले मेरा काम उसके बाद चुदाई…
अजय- अच्छा बोल.. साली तू नाटक बहुत करती है आजकल…
रानी- देख तू तो जानता ही है कि तुम दोनों भाई मुझे चोदते हो.. शाम को तुम, रात को वो.. मैंने एक ब्लू-फिल्म देखी है, उसमें दो आदमी एक साथ लौड़ा डालते हैं.. मुझे वैसे ही चुदना है। अब तू बोल क्या बोलता है?
अजय- साली.. तू पागल हो गई क्या? मैं भाई के साथ तुझे कैसे चोद सकता हूँ नहीं.. नहीं.. ये ठीक नहीं होगा…
रानी- अरे डरता क्यों है? मैंने विजय से बात कर ली है.. उसी ने कहा है कि मैं तेरे को राज़ी कर लूँ और तू सोच कर देख कितना मज़ा आएगा…
अजय- क्या भाई ने ऐसा कहा.. तब तो ठीक है और हाँ मज़ा तो बहुत आएगा यार.. मगर कब और कैसे हम चुदाई करेंगे?
रानी- वो सब तू मेरे पर छोड़ दे.. बस मैं जब कहूँ तू तैयार रहना और हाँ विजय से इस बारे में अभी कोई बात मत करना.. पहले मैं कोई अच्छा सा दिन देखूँगी उसके बाद हम ये सब करेंगे ओके..
अजय- ओके.. मेरी रानी.. अब तो आजा.. मेरे लौड़े में तनाव बढ़ता जा रहा है।
रानी- अरे मेरे राजा भाई.. फिकर क्यों करता है.. मैं हूँ ना.. आज तू मेरे मुँह को चोद कर पानी निकाल ले… मेरी चूत ने लाल झंडी दिखा रखी है हा हा हा हा…
अजय- हट साली.. ये क्या हर महीने का तेरा नाटक है.. चल एक काम कर चूत नहीं तो गाण्ड ही सही.. निकाल कपड़े।
रानी- नहीं भाई… समझो आज चूत पूरी खून फेंक रही है.. कपड़े निकाले तो गड़बड़ हो ज़ाएगी।
अजय- ओह्ह.. ले देख मेरा लंड कैसे तरस रहा है.. अब मुँह से ही सही.. ले चूस.. मेरी जान.. आज तो तेरे मुँह को चोद कर ही काम चला लूँगा।
मैंने बड़े प्यार से अजय के लंड को चूसना शुरू कर दिया। अजय को मज़ा आने लगा, तब मैंने होंठ कस कर बंद कर लिए और उसको इशारा किया कि अब झटके मार..। वो कहाँ पीछे रहने वाला था.. लग गया मेरे मुँह को दे दनादन चोदने और दस मिनट में मेरे मुँह में झड़ गया।
अजय- आहह उईईइ उफ़फ्फ़.. साली तेरी इसी अदा पर तो मैं फिदा हूँ.. क्या मज़ा दिया है.. लगा ही नहीं कि मुँह को चोदा है… साली चूत से ज़्यादा मज़ा दे दिया तूने.. तो वाहह.. मेरी राण्ड बहना.. क्या मज़ा आया मुझे.. चल आज तेरे को आइस्क्रीम लाकर देता हूँ.. बस अभी गया और मेरी प्यारी रानी के लिए आइस्क्रीम लाया।
अजय के जाने के बाद मैं रात के खाने की तैयारी में लग गई।
लगभग 15 मिनट बाद अजय चॉकलेट की आइस्क्रीम ले आया, हमने मज़े से वो खाई।

रात के खाने तक सब वैसा ही रहा.. जैसा रोज होता है।
मैं 9 बजे पापा के कमरे में चली गई।
वैसे तो आज मेरी चूत के दरवाजे लौड़े के लिए बन्द थे, मगर पापा को बताना तो था ही क्योंकि वो बड़े ठरकी इंसान थे.. मुझे रोज चोदे बिना उनको सुकून कहाँ था और क्या पता आज वो भी मेरे मुँह से ही खुश हो जाएँ।
पापा- अरे क्या बात है.. मेरी जान आज बिना आवाज़ के ही आ गई.. चल आजा बैठ।
रानी- नहीं पापा आज चूत हड़ताल पर है.. आप कहो तो मुँह से पानी निकाल दूँगी। हाँ.. आज तो गाण्ड को भी भूल जाओ.. आज पहला दिन है.. कपड़े नहीं निकाल सकती।
पापा- कोई बात नहीं रानी.. आज वैसे भी मेरा मन नहीं था… पूरा बदन दुख रहा है लगता है बुखार हो गया लेकिन तेरा इस महीने का कुछ करना पड़ेगा। सोच रहा हूँ तुझसे एक बच्चा पैदा कर लूँ ताकि 9 महीने तक इस खून से पीछा छूटे।
रानी- कर लो.. किसने रोका है आप ही तो गोली लाकर देते हो ताकि बच्चा ना हो.. वरना अब तक तो पता नहीं कब का बच्चा ठहर जाता और किसका होता वो भी नहीं पता चलता।
पापा- हाँ मेरी जान.. गोली इसीलिए देता हूँ कि अगर बच्चा हो गया तो ज़्यादा मुसीबत हो जाएगी। आस-पड़ोस को क्या जबाव दूँगा। उसके बाद तू बच्चे में लग जाएगी.. हम बाप-बेटों का क्या होगा?
रानी- हाँ ये बात तो है.. अच्छा अब मैं जाती हूँ आज तो जल्दी सोने को मिल जाएगा.. काफ़ी दिनों से ठीक से सोई नहीं हूँ.. विजय को भी बता आती हूँ।
पापा से इजाज़त लेकर मैं विजय के कमरे में गई।
वो मुझे देख कर हैरान हो गया।
विजय- अरे वाहह.. क्या बात है आज इतनी जल्दी कैसे आ गई.. पापा के पास जाने का इरादा नहीं है क्या? या मेरा लौड़ा तुझे ज़्यादा मज़ा देता है हा हा हा हा…
रानी- बस बस… अपने मुँह मियां-मिठ्ठू ना बनो.. बाप.. बाप होता है और बेटा.. बेटा.. जो मज़ा पापा देते हैं.. तुम नहीं दे सकते.. उनका चोदने का समय भी तुमसे बहुत ज़्यादा होता है.. वो तो आज चूत टपक रही है… इसलिए चूत आज आराम पर है। अभी पापा को भी यही बता कर ही आई हूँ। खैर.. तुमसे एक बात करनी है।
विजय- साली कितनी अजीब बात है ना.. तुम हम तीनों से चुदवाती हो और हम तीनों को सब पता होकर भी हम अंजान बने हुए हैं.. अच्छा बता तुझे क्या बात करनी है और मेरे लौड़े का आज क्या होगा?
रानी- हाँ… अजीब बात तो है.. तेरे लौड़े को आज तू आराम दे.. और मेरी बात सुन जो ब्लू-फिल्म हमने देखी थी ना.. वो सीन हमें करना है.. साथ में अजय होगा.. बड़ा मज़ा आएगा…
विजय- नहीं यार.. ये परदा ठीक है.. इसे मत उतार और अजय इस बात के लिए कभी नहीं मानेगा।
रानी- अरे क्या बात करते हो? मैंने जब अजय को इस तरह की चुदाई के लिए बताया तो खुद उसने मुझे यह बात कही। वो तैयार है.. बस तुम ‘हाँ’ कर दो ना.. प्लीज़ बड़ा मज़ा आएगा..
विजय- चल मान ली तेरी बात… वैसे मज़ा तो बहुत आएगा। अच्छा आज तू ऐसा कर… जा सो जा। अब तो 3 दिन बाद ही हम दोनों भाई तेरी चूत और गाण्ड का मज़ा लेंगे, तब तक तरसने दे मेरे लौड़े को… उस दिन ज़्यादा जोश में आएगा हा हा हा…
विजय के साथ मैं भी हँसने लगी और उसको चुम्मी करके अपने कमरे में जाकर सो गई।
आज काफ़ी दिनों बाद सुकून की नींद मिली, वरना तो रात बस चुदाई में ही निकल जाती थी।
सुबह उठकर घर का काम किया और जैसे-तैसे करके दिन निकल गया।
शाम को अजय आया और बस कपड़े बदल कर चला गया। उसने जाते वक्त कहा कि अपने दोस्त के साथ कहीं घूमने जा रहा है तो दो दिन बाद ही लौटेगा।
रात को पापा और विजय को मैंने खाने की टेबल पर ये बता दिया। मैं सब काम निबटा कर सोने चली गई क्योंकि विजय ने पक्का कर लिया था कि अब वो अजय के साथ ही मेरे साथ चुदाई करेगा और पापा को आज भी बुखार था, सो आज भी कुछ नहीं हुआ।
दोस्तो, ये तीन दिन बड़े सुकून में गुज़रे.. हाँ.. बस एक बार मैंने पापा का लौड़ा मुँह से ठंडा जरूर किया।
आज मैं नहा कर एकदम फ्रेश हुई। वीट की पूरी ट्यूब का इस्तेमाल किया.. आज मुझे दो लौड़े एक साथ मिलने वाले थे।
शाम को मैंने अजय को सब कुछ समझा दिया था कि उसको क्या करना है।
खाने के बाद मैंने विजय को भी बता दिया कि आज हम सब कैसे मज़े लेंगे और मैं पापा के कमरे में चली गई।
पापा- आ जाओ मेरी प्यारी बेटी.. आज तो बड़ी मस्त नाइटी पहन कर आई है.. क्या बात है?
मैंने काले रंग की एक जालीदार नाइटी पहनी थी, जिसमें मेरा बदन साफ दिख रहा था। मैंने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था।
रानी- वो पापा विजय ने लाकर दी है.. आज के खास मौके के लिए।
पापा- आज ऐसा क्या खास है.. जो तू इतनी सेक्सी बन कर घूम रही है?
रानी- है बस.. कुछ खास.. आप अपना काम करो।
पापा- अरे साली छिनाल.. मैंने तुझे इस लायक बनाया कि तू चुदाई के मज़े ले सके और मुझसे ही परदा.. ये क्या बात हुई…?
रानी- ओह्ह..पापा आप भी ना.. आज आपके दोनों बेटों को एक साथ खुश करूँगी। एक लंड गाण्ड में और दूसरे का चूत में लूँगी.. बड़ा मज़ा आएगा…
पापा- ओये..होये.. क्या बात है मेरी रानी तो अब पक्की रंडी बन गई.. मेरे दोनों बेटों को एक साथ खुश करेगी.. साली तू भी कमाल की चुदक्कड़ है, पहले मुझसे चुदवाएगी उसके बाद उन दोनों से.. लेकिन मेरी जान गाण्ड और चूत में तो वो दोनों लौड़े डाल देंगे.. मुँह का क्या करोगी? इसके लिए भी इंतजाम किया होता.. तब असली मज़ा आता…
रानी- ओह… पापा आप कितने अच्छे हो.. ये तो मैंने सोचा ही नहीं था.. प्लीज़ आप भी हमारे साथ आ जाओ ना.. मज़ा आएगा…
पापा- नहीं रानी.. ये ग़लत होगा.. वो दोनों मेरे सगे बेटे हैं, मैं उनके सामने ऐसा नहीं कर सकता… मगर हाँ.. वादा करता हूँ कि कल तुझे एक साथ तीन लंड जरूर दिलवा दूँगा.. मेरे कुछ खास दोस्तों के साथ तुझे चोदूँगा।
रानी- सच्ची पापा.. कल तीन लौड़े दिलवाओगे… वाऊ.. मज़ा आएगा.. तो ऐसा करो आज मुझे जाने दो… उन दोनों के साथ मस्ती करने दो.. कल आप अपने दोस्तों के साथ मस्ती कर लेना।
पापा- अच्छा जा.. अगर वो दोनों थक जाएँ तो मेरे पास आ जाना, मेरा लंड तेरे लिए तैयार है.. अब जा मुझे आराम से पीने दे…
पापा के कमरे से निकल कर मैं विजय के पास गई।
विजय- सुंदर अति सुंदर.. रानी आज तू किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही.. साली मुझे अपना यौवन दिखाने आई है और अब पापा के पास जाएगी.. तब तक मेरा क्या होगा और पापा तो आज तुझे कच्चा खा जाएँगे।
रानी- मेरे भोले भाई.. ऐसा कुछ नहीं होगा.. मैं पापा के कमरे से ही आ रही हूँ। आज मैंने उनसे छुट्टी ले ली है.. ताकि अपने दोनों भाइयों से आराम से चुद सकूँ। अब देर मत करो मैं अजय के कमरे में जा रही हूँ। जैसा मैंने बताया 5 मिनट बाद तुम आ जाना… ठीक है ना..!
विजय- अरे वाहह.. क्या बात है.. पापा ने तुझे आज कैसे जाने दिया साली.. तूने उन पर क्या जादू कर दिया, जो तेरी हर बात मान जाते हैं वो… अच्छा तू जा.. मैं आ रहा हूँ।
वहाँ से मैं सीधी अजय के पास गई, जो मुझे देख कर हैरान हो गया और उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया।
रानी- अजय ऐसे क्या देख रहे हो? पहले मुझे नहीं देखा क्या.. जो आज मुँह खोल दिया.. क्या मैं अच्छी नहीं दिख रही हूँ?
अजय- अच्छी..! साली तू सेक्स की देवी लग रही है.. क्या मस्त चूचे हैं तेरे.. इस नाइटी में से झाँक रहे हैं आ मेरी जान.. मेरे पास आ जा.. उफ्फ आज तो तू मार ही डालेगी।
मैंने नाइटी निकाल कर फेंक दी और अजय को चुंबन देने लगी।
अजय भी मेरा साथ देने लगा।
हम दोनों बिस्तर पर लेट गए.. चुंबन करते-करते मैंने अजय का पजामा निकाल दिया टी-शर्ट उसने पहले ही निकाल दी थी।
अब हम दोनों नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे जैसे कोई साँप चंदन के पेड़ से लिपटता है।
हम दोनों का चुसाई का प्रोग्राम चालू था, तभी विजय कमरे में आ गया।






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FUN-MAZA-MASTI छिनाल की औलाद-2

FUN-MAZA-MASTI

छिनाल की औलाद-2

 रानी- पापा आपका तो अजय और विजय से भी बड़ा है, उन्होंने ही इतना दर्द दिया और आप तो मेरी जान ही निकाल दोगे।
पापा- अरे रानी… बड़ा कैसे नहीं होगा.. मैं उनका बाप हूँ और तू डर मत.. वो तो नए खिलाड़ी थे, उनको क्या पता चुदाई क्या होती है.. तू बस देखती जा.. मैं तुझे कैसे सात आसमानों की सैर करवाता हूँ। वो दोनों गधे थे जो तेरी जैसी कच्ची कली की चूत का स्वाद चखने की बजाए गाण्ड से खुश हो गए। अब तुझे ऐसा चूसूंगा कि तू खुद मुझसे कहेगी कि मेरे राजा जल्दी से लौड़ा चूत में पेल दो..
रानी- हा हा हा हा.. पापा मैं आपको राजा बोलूँगी.. हा हा हा.. मैं रानी.. आप राजा.. मज़ा आएगा…
मेरी बात सुनकर पापा हँसने लगे और मेरे ऊपर आ गए, मेरे होंठ चूसने लगे।
मैं भी उनका साथ देने लगी.. बड़ा मज़ा आ रहा था।
पापा अपनी जीभ मेरे मुँह में दे रहे थे मैं उसको चूस रही थी। पापा मेरे छोटे-छोटे अमरूदों जैसे मम्मों को भी हल्के-हल्के दबा रहे थे, मुझे पता नहीं क्या हो रहा था।
लेकिन ‘हाँ’ इतना जरूर कहूँगी कि मज़ा बहुत आ रहा था।
पापा अब मेरे चूचुकों को चूस रहे थे और अपना हाथ मेरी चूत पर घुमा रहे थे। मेरे जिस्म में न जाने कहाँ से इतनी गर्मी आ गई थी कि मेरी चूत आग की भट्टी की तरह जलने लगी थी।
रानी- आह उईईइ.. उफ़ ककक.. सस्स आह.. पापा आहह.. मज़ा आह रहा है.. आराम से पापा आह.. काटो मत दु:खता है आहह…
पापा- अरे मेरी रानी.. अब पापा नहीं.. राजा बोलो और जितने गंदे शब्द आते हैं.. सब बोलो.. उससे चुदाई का मज़ा दुगुना हो जाएगा।
रानी- आहह उईईइ मुझे नहीं समझ आहआह आह रहा है.. क्या बोल रहे हो?
पापा- सीधी सी तो बात है.. तुम मुझे गाली दो.. चूत और लंड की बात करो.. बस जो भी तुम्हें समझ आए.. आह्ह.. जैसे उहह साली रंडी आह्ह.. क्या मस्त दूध हैं तेरे.. आह आज तो तेरी चूत को भोसड़ा बना दूँगा.. आहह…
इतना बोलकर पापा मेरी चूत चाटने लगे.. अब तो मेरा मज़ा दुगुना हो गया था.. मेरी आँखें अपने आप बन्द होने लगी थीं।
रानी- आहह ससस्स उफ़फ्फ़.. मेरे राजा आह.. मज़ा आह रहा है.. आह चाटो मेरी चूत को आह.. और ज़ोर से चाटो उफ़ आह…
पापा- ये लो मेरी रानी बिटिया.. क्यों मज़ा आया ना.. गाली निकाल साली.. और मज़ा आएगा…
रानी- आहह.. अब मज़ा आया तू एक नम्बर का कुत्ता है आह.. हरामी अपनी ही बेटी की चूत चाट रहा है.. आहह पापा आह.. मेरी चूत में कुछ हो रहा है आहह…
पापा- हा हा हा.. ये हुई ना बात.. अब तू झड़ने के करीब है.. झड़ जा बेटी आज तेरा झड़ने का पहला मौका है, भर दे मेरा मुँह अपने रस से.. आह.. क्या मजेदार माल है.. बरसों बाद मेरी जीभ को चूत रस चखने को मिलेगा।
पापा ने अपनी जीभ मेरी चूत में घुसा दी थी और जीभ से मुझे चोद रहे थे।
दोस्तो, क्या बताऊँ वो पल ऐसा था जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती। मेरी चूत का फव्वारा फूट पड़ा।
मैं गाण्ड उठा-उठा कर झड़ने लगी और पापा ने मेरा सारा रस पी लिया।
मेरी आँखें बन्द थीं मैं दो मिनट तक झड़ती रही और फिर शान्त पड़ गई.. मेरा बदन ठंडा पड़ गया।
पापा- उफ़ कितना गर्म और स्वादिस्ट रस था.. मज़ा आ.. गया.. क्यों मेरी जान तुमको मज़ा आया ना?
रानी- आहह पापा उफ़फ्फ़.. क्या बताऊँ.. आह.. पता नहीं क्या हुआ.. मेरा बदन एकदम हल्का हो गया.. बहुत मज़ा आया आहह…
पापा- यह तो शुरूआत है.. रानी अब देख आगे क्या होता है.. ले मेरे लौड़े को चूस.. इसमें भी बहुत मज़ा आएगा।
पहले तो मैं थोड़ी झिझकी मगर जैसे ही पापा का सुपारा जीभ से चाटा.. उस पर पानी की बूँदें थीं जो अजीब से स्वाद की थीं, मगर उसको चूसने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था.. अब मैं खुल कर पापा का लौड़ा चूसने लगी थी।
अब तो पापा पूरा लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस कर झटके मार रहे थे।
दस मिनट तक उनका लौड़ा चूसने के बाद मेरी चूत में दोबारा खुजली होने लगी और मैं अपने हाथ से चूत मसलने लगी।
पापा- अच्छा.. तो मेरी रानी बिटिया दोबारा गर्म हो गई.. क्यों लौड़े का स्वाद कैसा लगा?
रानी- उफ़.. पापा बहुत मज़ा आ रहा है.. आपका लंड चूसने में.. पर क्या करूँ मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है।
पापा- अच्छा ये बात है.. चल घूम कर मेरे ऊपर आजा, इस तरह तू मेरा लौड़ा चूसना.. मैं तेरी चूत चाटूँगा ताकि दोनों को बराबर मज़ा मिले।
रानी- ओह्ह वाह.. मज़ा आएगा.. ये आइडिया अच्छा है.. पापा आप तो बहुत दिमाग़ वाले हो.. अच्छा एक बात तो बताओ.. आप ये लौड़ा मेरी चूत में कब डालोगे.. विजय ने तो इतना वक्त लिया ही नहीं था.. बस सीधा लौड़ा मेरी गाण्ड में घुसा दिया था।
पापा- हा हा हा.. अरे इसमें दिमाग़ की क्या बात है.. तू अभी बच्ची है.. तुझे नहीं पता इसे 69 का आसन कहते हैं और लौड़ा भी डालूँगा.. तेरे जैसी कच्ची कली को पहले पूरा गर्म करना जरूरी है ताकि तू लौड़े को सहन कर सके समझी.. विजय तो खुद बच्चा है उसे क्या पता लौड़ा कब और कैसे डालते हैं?
हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए.. अब मैं पापा के ऊपर लेट कर उनका लौड़ा चूस रही थी और पापा कभी जीभ से तो कभी ऊँगली से मेरी चूत को चोद रहे थे या यूँ कहो कि मेरी कसी चूत को पापा ऊँगली से खोल रहे थे।
करीब दस मिनट तक ये खेल चलता रहा। अब मैंने पापा के लौड़े को बेदर्दी से चूसना शुरू कर दिया था। मेरा बदन एकदम अंगार उगलने लगा था, मेरी चूत रिसने लगी थी और चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी थी।
तभी पापा ने मेरी चूत को चाटना बन्द कर दिया और मुझे ऊपर से नीचे उतार दिया।
रानी- उफ़फ्फ़ पापा प्लीज़ आह.. बीच में क्यों छोड़ दिया.. आह.. अभी तो मज़ा आ रहा था।
पापा- मेरी जान.. अब सही वक्त है लौड़ा तेरी चूत में घुसेड़ने का.. अब तू इसको लेने के लायक हो गई है.. तेरी चूत एकदम रसीली है… और मेरा लौड़ा भी तेरे थूक से सना हुआ है.. चल अब पैरों को मोड़ ले और ले ये तकिया कमर के नीचे रख ले ताकि तेरी चूत का उभार ऊपर आ जाए.. आज तुझे कली से फूल बनाने का वक्त आ गया है।
पापा ने एक हाथ से मेरी चूत को खोला और लौड़ा मेरी चूत पर सैट किया।
पापा- रानी.. अब मैं लौड़ा पेल रहा हूँ.. बस तू अपने दांत भींच लेना.. शुरू में दर्द होगा, उसके बाद हम रोज चुदाई करेंगे.. बड़ा मज़ा आएगा…
रानी- आहह आहह आहह.. उफ़फ्फ़ पापा डाल दो.. अब जो होगा, देखा जाएगा.. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा आहअहह…
पापा ने अपने लौड़े की टोपी चूत में फँसाई और धीरे से आगे को धक्का मारा, कोई 2 इन्च लौड़ा मेरी चूत में फँस गया।
मुझे बहुत दर्द हुआ मगर मेरे ऊपर मस्ती सवार थी, मैंने दाँत भींच लिए।
पापा ने कमर को पीछे किया और एक जोरदार झटका मारा, अबकी बार आधा लौड़ा मेरी सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।
अबकी बार दर्द की इंतहा हो गई और मेरे मुँह से एक जोरदार चीख निकली, जो शायद बाहर तक किसी ना किसी ने जरूर सुनी होगी। पापा ने जल्दी से अपने होंठ मेरे मुँह पर रख दिए और मेरी दूसरी चीख उनके मुँह से दब कर रह गई।
करीब 5 मिनट तक पापा बिना हिले वैसे ही पड़े रहे। अब मुझे भी दर्द कम हो गया था और मेरा शरीर ढीला पड़ गया था, तब पापा ने अपना मुँह हटाया।
रानी- आहह पापा ऊउउहह बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ बस अब निकाल लो… आह मैं मर जाऊँगी ऊउउहह…
पापा- अरे कुछ नहीं होगा.. मेरा जान ये तो आज तेरा कौमार्य भंग हुआ है.. इसलिए इतना दर्द हुआ.. बस आज बर्दाश्त कर ले.. फिर तू खुद मेरे लौड़े पर बैठ कर उछल-उछल कर चुदेगी.. अब जितना लौड़ा अन्दर गया है उसी को आगे-पीछे करूँगा.. थोड़ा दर्द होगा और कुछ नहीं.. जब दर्द कम हो जाए तो बता देना, एक ही बार में पूरा हथियार घुसेड़ दूँगा.. उसके बाद मज़ा ही मज़ा है।
मैं मुँह से कुछ नहीं बोली बस ‘हाँ’ में सर हिला दिया। अब पापा अपने लौड़े को आगे-पीछे करने लगे मुझे दर्द हो रहा था, पर मैं दाँत भींचे पड़ी रही।

कुछ देर बाद मेरी चूत का दर्द मज़े में बदल गया। अब मेरी चूत में वही खुजली फिर से होने लगी थी, ऐसा लग रहा था पापा का लौड़ा आगे तक क्यों नहीं जा रहा।
रानी- आहह.. हह उईईई उफफफ्फ़.. पापा आहह अब दर्द कम है.. आहह घुसा दो.. आह फाड़ दो.. मेरी चूत को उफ़फ्फ़ अब बर्दाश्त नहीं होता आह.. घुसाओ ना आहआह…
पापा के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई और पापा ने मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी कमर पर दबाव बनाया जिससे थोड़ा और लंड अन्दर सरक गया।
पापा ऐसे ही धीरे-धीरे आगे-पीछे करते रहे और थोड़ा-थोड़ा करके लौड़ा अन्दर करते रहे। दोस्तों सच बताऊँ मुझे पता ही नहीं चला कि उस हल्के दर्द में ही पापा ने अपना पूरा लौड़ा मेरी चूत में जड़ तक घुसा दिया था।
पापा बहुत ही मंजे हुए खिलाड़ी हैं, उनको हक़ था मेरी सील तोड़ने का.. वरना कोई नया होता तो दर्द के मारे मेरी जान निकल जाती।
रानी- आहह उफफ्फ़ ससस्स कक.. पापा आहह घुसा दो.. आहह मज़ा आह रहा है.. आह अब जल्दी से झटका मार कर पूरा डाल दो.. अब दर्द कम हो गया आहअहह…
पापा- हा हा हा.. साली रंडी कहीं की.. कौन सी दुनिया में खोई है.. लौड़ा कब का जड़ तक तेरी चूत की गहराइयों में खो गया.. साला किसी ने सच ही कहा है लौड़ा कितना भी बड़ा हो.. चूत में जाकर गुम ही होता है और चूत दिखने में छोटी लगती है, मगर साली बड़े से बड़े लौड़े को निगल जाती है। अब देख मैं कैसे तेरी सवारी करता हूँ.. अब आएगा असली मज़ा, जब तेरी चूत में रफ्तार से लौड़ा अन्दर-बाहर करूँगा।
इतना बोल कर पापा ने रफ्तार बढ़ा दी, और दे झटके पे झटके मुझे चोदने लगे। मुझे भी दर्द के साथ मज़ा आने लगा। एक मीठा सा दर्द होने लगा, अब मैं भी पापा का साथ देने लगी और नीचे से गाण्ड उठा-उठा कर चुदने लगी।
रानी- आहह चोदो.. मेरे हरामी पापा.. आह चोद दो.. अपनी बेटी को.. आहह फाड़ दो आज मेरी चूत.. आह बना लो अपनी बीवी.. आहआह…
पापा- उह उह उह.. ले साली छिनाल की औलाद.. मेरे झटके अब ले.. आहह.. क्या गर्मी है तेरी चूत में आहह मज़ा आह.. गया आहह..
दस मिनट तक पापा मेरी ताबड़तोड़ चुदाई करते रहे, मैं इस दौरान दो बार झड़ गई। अब पापा भी झड़ने के करीब आ गए।
उन्होंने रफ्तार और बढ़ा दी, पूरा बिस्तर हिलने लगा, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं ट्रेन में हूँ और आख़िर पापा के लौड़े ने लावा उगल दिया, मेरी प्यासी चूत पानी से भर गई।
काफ़ी देर तक पापा मेरे ऊपर पड़े रहे हाँफते रहे.. उसके बाद वे ऊपर से हटे…
रानी- उफ़फ्फ़ पापा.. यह क्या कर दिया.. आपने मेरी चूत को फाड़ दिया.. देखो पूरा बिस्तर खून से लाल हो गया, उफ़फ्फ़.. कितनी जलन हो रही है चूत में..
पापा ने मुझे समझाया- यह तो सील टूटी.. इसलिए खून आया, आज के बाद दोबारा कभी नहीं आएगा.. अब तू हर तरह से चुदने के लायक हो गई है।
उनकी बात सुनकर मेरा डर निकल गया, मैं जब उठी तो मेरे पैरों में दर्द हुआ और चूत में भी अंगार सी जलन हो रही थी।
मैंने हिम्मत करके खुद को उठाया और कमरे में थोड़ा चहलकदमी की, यह भी मुझे पापा ने ही बताया।
दस मिनट में मेरा दर्द कम हो गया और मैंने चादर हटा कर बाथरूम में धुलने में रख दी, पापा और मैं एक साथ नहाए।
पापा ने बड़े प्यार से मल कर मेरी चूत साफ की.. गर्म पानी से मुझे बड़ा आराम मिल रहा था।
मैंने भी पापा के लौड़े को साफ किया।
नहाते-नहाते पापा का लौड़ा दोबारा खड़ा हो गया और पापा ने कहा- चलो अब इसको दोबारा ठण्डा करो।
उस रात पापा ने मेरी 3 बार चूत और आखिर में एक बार गाण्ड मारी।
दोस्तों एक ही रात में पापा ने मुझे चुदाई के ऐसे-ऐसे नियम बताए और हर तरह के आसन में मुझे चोदा, मैं आपको कैसे बताऊँ…
चुदाई से थक कर हम नंगे ही सो गए।
सुबह 9 बजे मेरी आँख खुली तो मैं जल्दी से उठी, नहा कर पापा को उठाने गई, वो नंगे सोए हुए थे, उनका लंड भी सोया हुआ था, मुझे मस्ती सूझी, मैंने झट से उनका लौड़ा मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
पापा- आहह… उफ़ पूरा बदन दर्द कर रहा है.. अरे वाहह.. रानी तू तो नहा कर तैयार हो गई और साली लंड की भूखी सुबह-सुबह ही लौड़े को चूसने लगी.. रात को मन नहीं भरा क्या तेरा?
मैंने हँसते हुए पापा से कहा- वो बात नहीं है.. आपको उठाने आई तो पहले लौड़ा ही दिखा.. बस आपको छेड़ने के लिए इसको चूसने लगी।
पापा- ओह्ह ये बात है वक्त क्या हुआ है?
रानी- पापा 9.30 बज गए हैं।
पापा- अरे बाप रे.. आज तो बहुत लेट हो गया और बदन भी दु:ख रहा है.. चल अब तो तू लौड़े को चूस कर पानी निकाल दे.. उसके बाद नहा कर आराम से नाश्ता करके ही जाऊँगा.. सच में तूने मेरी जिंदगी बना दी, इतना मज़ा तो मुझे मेरी सुहागरात पर भी नहीं आया था। चल साली अब चूस…
मेरा भी मन था कि लौड़ा चूसूँ… तो मैं अपने काम पर लग गई।
दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि मैं कितनी बेशर्म हूँ जो अपने बाप के साथ ऐसा कर रही हूँ, पर दोस्तो, यकीन करो इतने सालों में मुझे कभी उनका प्यार नहीं मिला, आज चुदाई के बहाने ही सही, वो मेरे साथ ठीक से पेश आ रहे हैं.. बस मेरे लिए यही काफ़ी है।
मैंने पूरा लौड़ा मुँह में भर लिया और उसको चूसने लगी, मुझे बड़ा मज़ा आह रहा था…
पापा- आह उफ़फ्फ़ चूस साली.. आहह तू तो तेरी माँ से भी अच्छा चूसती है.. रंडी.. वो तो नखरे करती थी.. आह मज़ा आह गया उफ़…
पापा की बात सुनकर मैंने लंड मुँह से निकाल दिया और हाथ से सहलाने लगी।
रानी- सच पापा.. क्या मेरी माँ भी चूसती थी और क्या आपको उनको चोदने में मज़ा आता था।
पापा- अरे हाँ.. उसने शादी की रात तो.. साली ने नहीं चूसा.. नाटक किया.. मगर धीरे-धीरे लाइन पर आ गई, मगर उसको चोदने में मज़ा नहीं था.. साली की चूत नहीं भोसड़ा था.. लगता था तेरे बाप ने दिन-रात उसको चोद-चोद कर चूत का भोसड़ा बना दिया होगा..
तभी साला मर गया।
रानी- पापा प्लीज़ वो दोनों इस दुनिया में नहीं हैं.. उनके बारे में ऐसा तो ना कहो…
पापा- साली छिनाल.. तूने पूछा तभी मैंने बताया.. अब तू खुद अपनी माँ चुदवा रही है तो मैं क्या करूँ।
रानी- अच्छा जाने दो.. अपनी पहली बीवी के बारे में कुछ बताओ ना प्लीज़…
पापा- आह तू हाथ को छोड़.. मुँह से चूस.. मैं सब बताता हूँ.. मैं 23 साल का था जब मेरी शादी हुई थी और राधा 21 की.. बस सुहागरात को तेल लगा कर उसकी चूत में लौड़ा घुसाया था, मगर उसकी सील बचपन में खेल-कूद में टूट गई थी, तो खून तो नहीं आया.. हाँ दर्द उसको बहुत हुआ था। मैं भी नया खिलाड़ी था, तो उस वक़्त इतना मज़ा नहीं आया। असली सुहागरात तो मैंने रात तेरे साथ मनाई है.. आहह उफ़फ्फ़ साली.. आराम से चूस उफ़फ्फ़.. हा ऐसे ही.. मज़ा आह रहा है.. उफ़फ्फ़ ज़ोर से कर.. आह मेरा पानी आ रहा है साली बाहर मत निकालना.. पी जा पूरा.. आह…अहहा उफफ्फ़…
पापा के लौड़े ने मेरे मुँह को पानी से भर दिया, मैं पीना तो नहीं चाहती थी, मगर पापा को खुश करने के लिए पी गई और जीभ से चाट कर उनके लौड़े को साफ कर दिया।
पापा खुश होकर नहाने चले गए और मैं नाश्ते की तैयारी में लग गई।
लगभग 11 बजे तक हम नाश्ते से निपट गए।
पापा ने मुझे एक लंबा सा चुम्बन किया और जाने लगे, दरवाजे तक जाकर वो वापस आ गए।
पापा- रानी मेरी जान.. एक बहुत जरूरी बात बताना भूल गया, शाम को तेरे भाई आएँ.. तो उन्हें ज़रा भी शक ना हो कि हमने रात क्या किया है और तुमने मुझे उनके बारे में कुछ भी नहीं बताया ओके!
रानी- लेकिन पापा अगर उन्होंने दोबारा मेरे साथ करने की कोशिश की तो?
पापा- देख तू मना करेगी तो वो तुझे मारेंगे और मैं नहीं चाहता कि तेरे जिस्म पर ज़रा भी खरोंच आए और वो भी जवान हो गए हैं उनका भी लौड़ा फड़फड़ाता होगा, तुझे क्या है उनसे भी मरवा लेना.. कौन सी तू उनकी सग़ी बहन है.. अब तो तू एक्सपर्ट हो गई है दोनों को झेल लेगी…
पापा की बात सुन कर मुझे थोड़ा दु:ख हुआ कि वो खुद तो मुझे अपनी बीवी बना चुके और अब अपने बेटों की भी रखैल बना रहे हैं।
रानी- आप जो ठीक समझो.. मगर उन्होंने मेरी चूत में लौड़ा डाला तो उनको पता चल जाएगा कि मेरी सील टूट चुकी है, तब मैं उनको क्या जवाब दूँगी?
पापा- अरे पागल, वो दोनों एक साथ तो तुझे चोदेंगे नहीं, जो भी पहले चूत में लौड़ा डाले.. उसको दूसरे का नाम बता देना कि उसने सील तोड़ी है.. समझी…
पापा की बात मुझे अच्छे से समझ में आ गई थी।
अब मुझे किसी किस्म का डर नहीं था.. सच ही कहा है किसी ने.. छोटी सी चूत बड़े से बड़े आदमी को कुत्ता बना देती है, अब ये तीनों बाप बेटे मेरे गुलाम बनने वाले थे।





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FUN-MAZA-MASTI छिनाल की औलाद-1

FUN-MAZA-MASTI

छिनाल की औलाद-1

 हाय दोस्तो, आपकी दोस्त पिंकी दोबारा आप लोगों के मनोरंजन के लिए एक नई कहानी लेकर आ गई है।
दोस्तो, इतने दिन गायब रहने के लिए मैं आपसे माफी चाहती हूँ मगर क्या करूँ मेरे साथ एक दुर्घटना हो गई थी, इसलिए डॉक्टर की सलाह पर बिस्तर पर पड़ी पड़ी आराम कर रही थी।
इसी दौरान मेरे एक दोस्त ने मुझे ईमेल किया कि उसको मुझसे मिलना है।
मैंने कहा- मिलना तो मुश्किल है हाँ फ़ोन से बात हो सकती है।
मैंने उससे फ़ोन पर बात की, तब उसने कहा कि उसके साथ जो घटना घटी है, वो सबके साथ बांटना चाहती है।
इसलिए उसने मुझ से निवेदन किया- प्लीज़ मेरी आप मेरी घटना को कहानी के रूप में लिख दो।
तो आज मैं आपके सामने उसकी कहानी लेकर आई हूँ, मुझे उम्मीद है कि आपको मज़ा आएगा।
दोस्तो, हमेशा की तरह मैंने इसमें थोड़ा मसाला ही मिलाया है ताकि आप सबको सेक्स का भरपूर आनन्द मिले।
तो आइए रानी की कहानी उसी की ज़ुबानी आपको सुनाती हूँ।
हाय दोस्तो, मैं रानी हूँ, मेरी उम्र 20 साल है मेरा रंग गोरा है और लंबे बाल हैं। मेरे होंठ पतले हैं और ऊपर के होंठ के दाहिनी ओर एक तिल है।
मेरी सहेलियां कहती हैं कि उस तिल से मेरी सुंदरता में चार चाँद लग गए हैं।
मेरे चूचे अभी 36 इन्च के हो गए हैं। मेरी कमर 32 इन्च की है और मेरे चूतड़ बहुत ज़्यादा बाहर को आ गए हैं।
क्या करूँ सभी मेरी गाण्ड में ही लौड़ा डालने को मरते हैं, इसलिए मेरी गाण्ड उभर कर बाहर को आ गई है।
आज मेरी ये हालत है कि मेरी चूत और गाण्ड में गधे का लौड़ा भी घुस जाए क्योंकि वक़्त और हालत ने मुझे इतनी बड़ी चुदक्कड़ बना दिया है कि मैं आपको क्या बताऊँ।
मैं एक सीधी-सादी लड़की थी पर जब आप कहानी पढ़ेगे तो सब जान जाएंगे कि कैसे हवस के पुजारियों ने मेरी जिंदगी बर्बाद की है।
अब आपको ज़्यादा बोर नहीं करूँगी, चलो सीधे मेरी बर्बादी की दास्तान आपको सुनाती हूँ।
यह बात 14 जून 2006 की है, जब मैं कमसिन थी, मेरे पापा की बीमारी के कारण मौत हो गई थी तो माँ एकदम टूट सी गई थीं।
उनका बस मैं ही अकेली सहारा थी।
इस हादसे ने हमारी जिंदगी बदल थी, पैसों की तंगी रहने लगी थी, तब हमारे दूर के रिश्तेदारों ने माँ पर दबाव डाला कि वो दूसरी शादी कर लें। मगर माँ न मानी, मगर वक़्त के साथ माँ भी टूट गईं और आख़िर एक साल बाद माँ ने दूसरी शादी कर ली।
मेरे नए सौतेले पापा शराबी थे, उनके दो बेटे थे जो करीब मेरी ही उम्र के थे या शायद मुझसे थोड़े बड़े थे।
शुरू में तो सब ठीक तक चलता रहा मगर साल भर में ही पापा माँ को मारने लगे और वे मुझे भी पसन्द नहीं करते थे सो मेरी पढ़ाई भी बन्द हो गई थी।
मेरे दोनों भाई भी हमेशा मुझे मारते रहते थे, घर का सारा काम हम माँ-बेटी मिल कर करती थे और धीरे-धीरे माँ टूट सी गई और बीमार रहने लगी।
आख़िरकार 12 फरवरी 2010 को माँ भी मुझे छोड़ कर चली गईं। अब तो मुझ पर ज़ुल्म बढ़ने लगे। मैं भी धीरे-धीरे इनकी मार की आदी हो गई।
सॉरी दोस्तो, आप सोच रहे होंगे कि यह तो पका रही है, मगर क्या करूँ ये सब कुछ सत्य है और आपको इसके बारे में बताना जरूरी भी है।
अब आपको मेरी चुदाई की कहानी बताती हूँ।
8 सितम्बर 2010 को मेरा जन्मदिन था अब कौन मेरा जन्मदिन मनाता, कहाँ नए कपड़े थे, कहाँ पार्टी थी और कहाँ प्यार.. बस मैं काम में पिस रही थी।
उस दिन तक मैं पूरी जवान हो गई थी। मेरे सीने के उभार दिखने लगे थे। मेरा सौतेला भाई अजय जो 18 साल का था, अक्सर मुझे मारने के बहाने मेरे चूतड़ों को दबा देता तो कभी मेरे सीने पर हाथ रख देता था।
दोपहर को मैं छत से कपड़े उतारने गई तो अजय वहाँ आ गया और मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। उस वक़्त मैंने एक पुरानी सी सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी, दुपट्टा मैंने एक तरफ रख दिया था।
आपको बता दूँ मैं हमेशा दुपट्टा ही अपने सीने पर रखती हूँ।
अजय- अरे रानी, आज ये दुपट्टा तूने एक तरफ क्यों रखा है नहीं तो इसके बिना तू रहती ही नहीं है?
रानी- वो क्या है ना भाई, आज मुझे गर्मी लग रही है इसलिए मैंने सोचा छत पर हवा अच्छी आ रही है, थोड़ी हवा खा लूँ।
अजय- अरे मेरी रानी, बहना आज तो मस्त लग रही हो आओ आज तुम्हें एक चीज दिखाता हूँ।
अजय ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे घूरने लगा।
मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैं घूम गई। तभी वो मेरे पीछे चिपक गया।
रानी- भाई क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे प्लीज़…
मैंने उसको हटाने की लाख कोशिश की, मगर वो माना नहीं और छत पर बने कमरे में मुझे जबरदस्ती ले गया।
वहाँ वो मेरे होंठ चूसने लगा और एक हाथ से मेरी गाण्ड सहलाने लगा।
मैं छटपटा रही थी मगर वो मेरी एक ना सुन रहा था इतने में विजय जो मेरा बड़ा भाई है, वो आ गया, वो करीब 20 साल का था।
विजय- क्या हो रहा है यहाँ?
अजय- क.. क.. कुछ नहीं भाई.. देखो ये रानी है.. मुझसे चिपक रही है.. पता नहीं क्या चाहती है?
रानी- न.. न.. नहीं भाई.. अजय झूठ बोल रहा है।
अजय ने झट से मुझे एक थप्पड़ मारा।
अजय- चुप साली मुझे झूठा बोलती है.. भाई इसने खुद ही मुझे यहाँ बुलाया और मुझसे चिपक गई। मुझसे बोल रही है, मुझे गर्मी लग रही है।
विजय ने मुझसे पूछा- क्या अजय सही बोल रहा है?
रानी- वो तो दुपट्टे की बात पर मैंने कहा था, मगर मेरा मतलब ऐसा कुछ नहीं था।
विजय- अच्छा यह बात है साली छिनाल हमने सोचा तू जैसी भी है हमारी बहन है.. तुझे खाना देते हैं मगर तू तो पता नहीं किसका गंदा खून है.. रुक आज मैं तेरी सारी गर्मी निकाल दूँगा और तेरे सारे मतलब पूरे कर दूँगा।
रानी- भाई प्लीज़.. मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा.. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो…
पर असल में तो मैं सब समझ रही थी कि ये दोनों भाई मुझे चोदने के ख्याल से यह नौटंकी कर रहे हैं। जवान तो मैं भी हो चुकी थी, मेरे बदन में भी वासना की अग्नि तो उठती ही रहती थी, कहीं मेरे अन्तर्मन में भी कुछ तमन्ना थी नर-नारी के तन के मिलन का मज़ा लेने की, पर मैंने विरोध तो करना ही था ना अपने सौतेले भाइयों की हरकतों का।
अजय वहाँ खड़ा मुस्कुरा रहा था और विजय से नजरें चुरा कर मुझे चिढ़ा रहा था।
विजय- अजय तू नीचे जा और ऊपर मत आना.. आज मैं इसको बताता हूँ कि मैं क्या चीज हूँ।
अजय वहाँ से चला गया और विजय ने मुझे कपड़े निकालने को कहा।
मेरे मना करने पर विजय ने मेरे कपड़े फाड़ दिए। मैं एकदम नंगी हो गई क्योंकि उस वक़्त मुझे कौन ब्रा-पैन्टी लाकर देता.. बस पुराने कपड़े ही नसीब में थे।
अब मैं एकदम नंगी दीवार के पास खड़ी थी, मेरे बेदाग गोरे बदन को देख कर भाई की आँखों में चमक आ गई थी।
मेरे मम्मे उस वक्त कोई 28 इन्च के रहे होंगे।
भाई की पैन्ट में तंबू बन गया था, उनका लौड़ा मेरे जिस्म को देख कर फुंफकार मार रहा था।
विजय- वाह.. साली तू तो बड़ी ‘हॉट-आइटम’ है.. तभी तुझमें गर्मी ज़्यादा है.. आजा आज तेरी सारी गर्मी निकाल देता हूँ।
रानी- नहीं भाई.. प्लीज़ मुझे जाने दो.. मैं आपकी बहन हूँ प्लीज़…
विजय- चुप साली.. छिनाल की औलाद.. तू कहाँ से मेरी बहन हो गई.. हाँ.. आज तुझे अपनी बीवी जरूर बनाऊँगा।
इतना बोलकर भाई मुझ पर टूट पड़ा। मेरे होंठों को चूसने लगा, मेरे मम्मों को दबाने लगा। मुझे बहुत दर्द हो रहा था मगर उस पर भूत सवार था, वो कहाँ मानने वाला था। मैंने उससे छूटने की कोशिश की, उसको गुस्सा आ गया और वो मेरे गाल पर थप्पड़ मारने लगा।
विजय- क्या हुआ.. साली अब आया समझ में.. कुतिया बहुत नाटक कर रही थी।
इतना बोल कर भाई अपने कपड़े निकालने लगा। धीरे-धीरे वो पूरा नंगा हो गया, उसका 6 इन्च का लौड़ा एकदम तना हुआ मेरी आँखों के सामने लहरा रहा था।
मैं घबरा गई और जल्दी से पलट गई यानि पेट के बल लेट गई।
विजय- अरे वाह.. तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. साली आज इसी का मुहूर्त करूँगा।
इतना बोलकर वो बिस्तर पर चढ़ गया और मेरे मम्मे दबाने लगा, अपनी ऊँगली से मेरी गाण्ड के छेद को खोलने लगा।
मैं थोड़ी कसमसाई तो उसने ज़ोर से मेरी गाण्ड पर मार दिया, मैं दर्द के कारण सिहर गई।
अब मुझे समझ आ गया था कि यह हरामी मुझे पीछे से ही चोदने वाला है, इसकी मार खाने से अच्छा है अब चुपचाप पड़ी रहूँ।
भाई ने काफ़ी देर मेरे चूतड़ सहलाए अब मैं चुप पड़ी थी उसने अपने लौड़े पर ढेर सारा थूक लगाया और मेरे छेद पर भी थूक लगाया।
विजय- हाँ.. अब आई ना लाइन पर बस ऐसे ही चुपचाप पड़ी रह.. नहीं तो मार खाएगी.. आहह.. क्या मस्त गाण्ड है। अब अपना बदन ढीला छोड़ दे.. मैं लौड़ा डाल रहा हूँ अगर जरा भी हिली ना तो तेरी खैर नहीं…
भाई ने लंड की टोपी गाण्ड के छेद पर रखी और ज़ोर से एक धक्का मारा.. एक ही बार में आधा लौड़ा मेरी गाण्ड को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया।
रानी- आआ.. उईईई माआ..मर गई.. आआआ आह.. भाई आह.. मेरी जान निकल रही है.. आह निकाल.. लो..
विजय कहाँ मानने वाला था उसने एक और जोरदार झटका मारा अबकी बार पूरा लौड़ा मेरी गाण्ड की गहराइयों मैं खो गया और मेरा दर्द के मारे बुरा हाल हो गया।
मैं चीखती रही वो झटके मारता रहा.. मज़ा लेता रहा।
विजय- आ उह..साली तेरी गाण्ड तो बड़ी मस्त है.. आह मज़ा आ गया उह ले आह उह उह उफ़ क्या कसी गाण्ड है.. आह आह आह…
मैं चिल्लाती रही.. 20 मिनट तक वो मेरी गाण्ड मारता रहा और आख़िरकार उसके लौड़े ने लावा उगल दिया, जो मेरी गाण्ड के कोने-कोने में समा गया।

दो मिनट तक विजय मेरे ऊपर पड़ा रहा, उसके बाद एक तरफ लेट गया।
मैं वैसी की वैसी पड़ी रही, उसका वीर्य मेरी गाण्ड से बह कर बाहर आ रहा था।
मेरी गाण्ड में अब भी ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई मोटा डंडा घुसा हुआ हो, बड़ी जलन हो रही थी।
विजय उठा और मेरे कपड़ों से अपना लौड़ा साफ किया अपने कपड़े पहनने लगा।
विजय- साली बड़ी कमाल की गाण्ड है तेरी.. मुझे अभी कहीं जाना है.. नहीं तो तेरी और ठुकाई करता। अब ध्यान से सुन अगर किसी को ये बात बताई ना.. तो तेरा वो हाल करूँगा कि ज़िंदगी भर पछताएगी समझी।
विजय वहाँ से चला गया और मैं वैसे ही पड़ी रोती रही कोई 5 मिनट बाद अजय अन्दर आया।
अजय- हरामजादी.. अगर मेरी बात मान लेती तो तेरा ये हाल ना होता.. अब फट गई ना तेरी गाण्ड.. साली कुतिया भाई का लौड़ा लेकर मज़ा नहीं आया तो अब मेरा लेकर देख.. शायद तुझे मज़ा आ जाए।
इतना बोलकर वो भी नंगा हो गया, उसका भी लौड़ा 6 इन्च का ही था, पर विजय के लौड़े से ज़रा मोटा था। मेरी कहाँ हिम्मत बची थी उसको रोकने की, वो भी मुझ पर सवार हो गया और एक ही झटके में पूरा लौड़ा मेरी खुली हुई गाण्ड में घुसा दिया।
मैं फिर दर्द से कराहने लगी और वो मेरी गाण्ड मारता रहा, मज़े लेता रहा।
अजय- आहह.. आह.. मज़ा आ गया.. साली तेरी गाण्ड में तो बड़ी गर्मी है.. आहह.. साला लौड़ा बर्दाश्त ही नहीं कर पा रहा आहह.. जल्दी ही पानी छोड़ देगा.. आहह.. मन तो तेरी चूत की सील तोड़ने का है.. मगर डर है कहीं साली तू मर-वर गई तो हमें मुफ़्त की नौकरानी कहाँ से मिलेगी.. आह.. उहह.. मेरा निकलने वाला ही है.. आह उहह…
करीब 7-8 मिनट में वो ठंडा हो गया और मेरी गाण्ड को पानी से भर कर चला गया।
मैं काफ़ी देर तक उसी हालत में पड़ी रही और न जाने कब मेरी आँख लग गई।
शाम को 6.30 बजे मेरी आँख खुली.. गाण्ड में अब भी दर्द था।
मैं जल्दी से उठी और गुसलखाने में चली गई, वहाँ से नहा कर कपड़े पहने।
हाँ.. एक बात मैं आपको बता दूँ.. यहाँ पड़ोस के लोग जानते हैं कि इस घर में मेरी क्या हालत है, इसी लिए बेचारे अपने बच्चों के पुराने कपड़े मुझे दे देते हैं बस मेरा गुजारा चल जाता है।
उन्हीं कपड़ों में से एक गुलाबी टी-शर्ट और नीला पजामा मैंने पहना और खाना बनाने की तैयारी में लग गई।
पापा- रानी कहाँ हो.. यहाँ आओ।
दोस्तो, मैं आपको बताना भूल गई, पापा की खुद की दुकान है, तो वो सुबह 8 बजे जाते हैं तो सीधे शाम को 7 बजे ही आते हैं और आने के साथ ही उनको खाना चाहिए।
मैं भाग कर रसोई से बाहर आई और कहा- बस 15 मिनट में खाना बन जाएगा।
पापा- हरामखोर किसी काम की नहीं है तू.. अब तक खाना नहीं बना.. इतनी देर क्या कर रही थी?
रानी- वो वो.. पापा मेरी आँख लग गई थी, इसी लिए…जरा देर हो गई।
मैं आगे कुछ बोल पाती इससे पहले पापा ने एक जोरदार तमाचा मुझे जड़ दिया।
मैं रोने लगी और अपने आप को बचाने के लिए मैंने वो बोल दिया जो शायद मुझे नहीं बोलना चाहिए था।
रानी- उउउ उउउ पापा.. प्लीज़ मेरी बात तो सुनिए.. इसमें मेरी ग़लती नहीं है.. वो वो.. विजय भाई ने मेरे साथ दोपहर को उूउउ उउउ…
पापा- क्या किया विजय ने.. हाँ.. बताओ?
रानी- उउउ.. वो वो.. उन्होंने मेरे साथ गंदा किया उउउ मेरे कपड़े निकाल कर उूउउ.. उसके बाद अजय ने भी उूउउ…
मैंने पूरी दास्तान कह दी।
मेरी बात सुनकर पापा गुस्सा हो गए और मुझे प्यार से चुप करवाया और कहा- आज आने दो दोनों को, उनकी आज खैर नहीं..
आज पहली बार पापा ने मुझसे प्यार से बात की थी, मैं खाना बनाने चली गई।
पापा अपने कमरे में चले गए, उन्होंने कपड़े बदले.. तब तक खाना भी तैयार हो गया था।
आज पापा ने मेरे साथ बैठ कर खाना खाया और मुझे भी अपने हाथ से खाना खिलाया।
खाने के बाद मैं बर्तन धोकर अपने कमरे में चली गई और बिस्तर पर लेट कर रोने लगी। मुझे माँ की बहुत याद आ रही थी, तभी पापा मेरे कमरे में आ गए।
पापा- अरे रानी.. बेटी रो क्यों रही है? उन दोनों का फ़ोन आया था किसी दोस्त की शादी में गए हैं.. कल शाम तक वापस आएँगे, अब फ़ोन पर तो उनको क्या कहता, कल आने दो उनको अच्छा सबक सिखाऊँगा.. तू मेरे कमरे में आ.. कुछ बात पूछनी है।
इतना बोलकर पापा चले गए, मैंने आँसू पौंछे और उनके पीछे चली गई।
पापा- आओ.. यहाँ बैठो.. मेरी रानी बेटी तू रो रही है.. क्या बहुत दर्द हो रहा है? मुझे ठीक से बता हुआ क्या था?
रानी- पापा अब मैं कैसे बताऊँ मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा।
पापा ने बहुत ज़िद की, तब मैंने उनको बताना शुरू किया कि बात कैसे शुरू हुई और मेरी गाण्ड तक कैसे पहुँची। पापा मेरे एकदम करीब चिपक कर बैठे थे, उन्होंने शराब पी हुई थी, उसकी बदबू आ रही थी।
मेरी बात को सुनते-सुनते लुँगी के ऊपर से वो अपना लौड़ा मसल रहे थे और एक हाथ से मेरी पीठ सहला रहे थे।
‘अच्छा ये बात है… कितने कमीने हैं दोनों.. अच्छा ये बता.. यहाँ ज़ोर से दबाया क्या विजय ने?’ मेरे मम्मों को सहलाते हुए पापा ने पूछा।
मेरी तो हालत खराब हो गई.. उनका छूना मेरे लिए ऐसा था जैसे किसी ने जलते हुए अंगारे मेरे मम्मों पर रख दिए हों।
रानी- पापा ये आप क्या कर रहे हो?
पापा- अरे मैं तो पूछ रहा हूँ.. अब तू ठीक से बताएगी तब ही तो पता चलेगा ना.. अब जो पूछूँ.. चुपचाप बता समझी…
इस बार पापा के तेवर एकदम बदल गए थे, उनकी आँखों में गुस्सा आ गया था और पापा का गुस्सा मैं खूब जानती थी कि अगर वो मारने पर आ गए तो हालत खराब कर देंगे।
रानी- हाँ.. पापा यहाँ ज़ोर से दबाया था, अभी भी दर्द हो रहा है।
पापा ने उनको देखने के बहाने से टी-शर्ट ऊपर कर दी, ब्रा तो थी नहीं, उनको मेरे मम्मों के दीदार हो गए।
पापा- अरे अरे.. कुत्तों ने कैसे ज़ोर से दबाए हैं तेरे छोटे-छोटे चूचे.. देखो तो कैसे लाल निशान पड़ गए हैं।
मेरे सौतेला पिता अपनी औकात दिखा रहे थे, मेरे मम्मों को हल्के-हल्के सहला रहे थे। अब पापा का हाथ मेरी चूत पर आ गया था और उन्होंने अपनी ऊँगली चूत पर घुमा कर पूछा।
पापा- रानी.. उन दोनों ने पीछे से ही मारी.. या यहाँ भी कोई छेड़छाड़ की?
मैं एकदम कसमसा गई थी और मैंने ‘ना’ मैं सिर हिलाया।
पापा – चलो अच्छा है.. तेरी सील नहीं टूटी वरना मेरा बड़ा नुकसान हो जाता.. बेटी ये पजामा निकाल तो देखूँ तेरी गाण्ड का क्या हाल किया दोनों ने।
पापा की बात सुनकर मेरी अच्छी तरह समझ में आ गया कि ये कुत्ता मेरा बाप नहीं हवस का पुजारी है। उन दो हरामियों ने तो मेरी गाण्ड मारी थी.. ये मादरचोद मेरे चूत को फाड़ने वाला है।
रानी- नहीं पापा.. रहने दो अब दर्द कम है, मुझे जाने दो नींद आ रही है।
पापा- मैंने कहा ना.. दिखाओ कहीं कुछ उल्टा-सीधा हो गया तो..? चल खड़ी हो जा तुझे शर्म आ रही है तो मैं खुद देख लूँगा।
मैं कर भी क्या सकती थी सो चुपचाप खड़ी हो गई। पापा ने मेरा पजामा नीचे सरकाया और मेरी गोल गाण्ड पर हाथ फेरने लगे।
पापा- आह ह.. क्या कोमल गाण्ड है तेरी.. कमीनों ने कैसे मार कर लाल कर दी है.. देखो सूजन भी आ रही है.. तू पूरे कपड़े निकाल कर लेट जा.. तुझे मालिश की जरूरत है.. तभी तेरा दर्द जाएगा।
मैं ‘ना’ भी करती तो भी पापा नहीं मानते, तो मैंने सोचा अब जो होगा देखा जाएगा.. इसी बहाने पापा मुझे प्यार से तो पेश आएँगे।
मैं चुपचाप नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई।
पापा ने पास रखी तेल की बोतल ले ली और मेरी गाण्ड पर मालिश करने लगे।
अपने हाथ चलाते-चलाते वो मेरी चूत पर भी ऊँगली घुमा देते।
वहाँ हल्की-हल्की झांटें थीं जो एकदम रुई की तरह मुलायम थीं।
रानी- आहह.. ककककक पापा उह.. गुदगुदी सी हो रही है।
पापा- अरे रानी बेटी.. ये तो शुरूआत है.. आगे देखना तुझे कितना सुकून मिलेगा.. मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इस उम्र में आकर तेरी जैसी कच्ची कली की मालिश करने का मौका मिलेगा.. रानी अगर तू मेरी बात इसी तरह मानती रहेगी ना.. तो तेरे सारे दु:ख दूर हो जाएँगे.. तुझे मैं सच्ची की रानी बना कर रखूँगा.. मानेगी ना मेरी बात?
रानी- हाँ.. पापा आपका प्यार पाने के लिए मैं आपकी हर बात मानूँगी.. मगर पापा ये गलत है.. मैं आपकी बेटी हूँ।
पापा- अरे कहाँ की बेटी.. तेरी माँ तुझे साथ लाई थी यहाँ और ऐसी कमसिन कली सामने हो तो कौन रिश्ते देखता है.. अगर तू मेरी सग़ी बेटी भी होती ना.. तो भी मैं तुझे नहीं छोड़ता.. भला हो उन दोनों का जो उन्होंने तेरी गाण्ड मार कर मेरा रास्ता आसान कर दिया, वरना मैंने तो ये कभी सोचा ही नहीं था।
रानी- ठीक है.. पापा जैसा आपको अच्छा लगे.. अब मैं कुछ नहीं बोलूँगी।
पापा- ये हुई ना बात.. चल अब सीधी हो जा आज बरसों बाद दोबारा सुहागरात मनाऊँगा तेरे साथ.. अब तू मेरी बीवी बनकर इस घर में राज करेगी.. आज से तेरे दु:ख के दिन ख़त्म हो गए हैं।
अब मुझे किसी बात का डर नहीं था क्योंकि अगर मैं मना भी करती तो भी पापा मुझे छोड़ते नहीं, तो क्यों ना उनकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला कर कम से कम अपनी आगे की जिंदगी तो ठीक करूँ।
मैं सीधी होकर लेट गई, पापा भी एकदम नंगे हो गए, उनका लौड़ा किसी काले नाग की तरह फुंफकार मार रहा था वो करीब कोई 8 इन्च से ज़्यादा ही होगा और मोटा इतना कि मेरी हथेली में भी ना समा पाए।



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