Showing posts with label ठाकुर की हवेली. Show all posts
Showing posts with label ठाकुर की हवेली. Show all posts

Saturday, March 20, 2010

Raj sharma stories-ठाकुर की हवेली --4 लास्ट पार्ट

राज शर्मा की कामुक कहानिया
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
ठाकुर की हवेली --लास्ट पार्ट

फिर तीनो बाथरूम मे आ गये. एक बड़े कमरे जितना बड़ा होगा वह बाथरूम. दो बड़े लंबे टब थे, काई नल लगे थे. उपर दो शवर थे और दो ही हॅंड शवर थे.

एक ओर दीवार पर बड़ा आईना लगा हुआ था. दोनो बाथ टब के बीच एक आलीशान छोटी आल्मिराह बनी हुई थी जो तरह तरह के बॉटल से भरी हुई थी.

बाथरूम मे स्टील और पीतल के कई रोड लगी हुई थी. कपड़े टाँगने के लिए. वहीं कई हॅंगर भी झूल रहे थे, काई तोलिये टँगे थे उन पर. तभी रजनी ने मालती की सारी के पल्लू का एक छोर थाम लिया और उसे खींचने लगी. जैसे जैसे रजनी खींचती चली जा रही थी वैसे वैसे ही मालती घूमने लगी और रजनी ने सारी एक रोड पर टाँग दी.

रणबीर पास ही खड़ा मौन हुए सब कुछ देख रहा था. पेटिकोट मे मालती के बड़े छूतदों का वह जयका ले रहा था. फिर रजनी मालती का ब्लाउस के हुक खोल उसे भी उसके शरीर से अलग कर दिया. मालती के पिंजरे मे क़ैद कबूतर फाड़ फाड़ने लगे.

रजनी कुछ देर मालती की ब्रा मे कसी चुचियों ब्रा पर से ही दबाती रही.

"आओ तुम भी अपनी चाची के इन पर हाथ लगा के देखो." ठाकुरानी मालती की चुचियों को दबाते हुए बोली.

रणबीर मंतरा मुग्ध सा मालती की छातियों पर हल्के हल्के हाथ फेरने लगा. तभी रजनी ने नीचे अपना एक हाथ रणबीर की लंगोट के उभार पर रख दिया और जैसे वह मालती की चुचियों पर हाथ चला रही थी वैसे ही लंगोट के आगे के उस उभार पर हाथ चलाने लगी.

"है रजनिज़ी वहाँ हाथ मत लगाइए, कैसा कैसा लग रहा है." रणबीर ने मालती की दोनो चूंचियों को ब्रा के उपर से जाकड़ पीछे हटते कहा.

फिर रजनी की पहुँच से उस हिस्से को दूर करते हुए वह मालती के पीछे सॅट गया और मालती की गांद पर उत्तेजना से दबाव देने लगा.

"हूँ तो तुम अपनी चाची की गांद के दीवाने हो गये हो, साली मालती तेरी गांद ने इस पर क्या जादू कर दिया है रे?" ये कह के रजनी ने मालती का पेटिकोट का नाडा खींच दिया और वह मालती के पैरों मे गीर पड़ा. मालती ने रोज़ की तरह कोई पॅंटी नही पहनी थी और वो कमर के नीचे नंगी हो गयी.

रजनी ने मालती की चूत पर हथेली जमा दी और वो ज़ोर से उसकी झाँते घिसने लगी.

तभी रणबीर ने भी थोड़ा पीछे हटते हुए मालती की ब्रा का हुक खोल दिया और उसे मदजात नंगा कर दिया. मालती भी अब कहाँ पीछे रहने वाली थी उसने भी रणबीर की बनियान उत्तर दी और फिर देखते देखते लंगोट की भी गाँठ खोल उसे हवा मे झूलते रोड पर टाँग दी.

अब रणबीर भी मालती की तरह पूरा नंगा था. फिर मालती ने रजनी की नाइटी की डोर खोल पहले उसकी नाइटी उतारी और वह भी रजनी की गांद पर अपनी चूत रगड़ते हुए ठकुराइन के दोनो माममे ब्रा पर से सहलाने लगी.

"ले साली अब में तेरी गांद अपनी चूत के दाने से मारूँगी, ले मेरा धक्का." ये कह कर मालती रजनी की चुचियों दोनो हाथों मे भर मसालने लगी.

"अरे भोसड़ी वाली पहले इन कपड़ों को तो उतार मेरे, चुभ रहे हैं. तब मालती ने रजनी को भी ब्रा और पॅंटी से छुटकारा दिला नंगी कर दिया. रणबीर अभी भी ठकुराइन की कुछ शरम कर रहा था और चुप चाप खड़ा उन्हे देखता रहा.

तभी रजनी ने दोनो शवर चालू कर दिए. उपर लगे दोनो फुवरों से बड़ी वेग से पानी निकला और ऐसा लगा की एका एक मूसला धार बारिश शुरू हो गयी हो. रजनी ने मालती और रणबीर दोनो को शवर के नीचे खींच लिया और तीनों एक दूसरे के गले मे बाहें डाले काफ़ी देर तक वैसे ही उछल उछल कर शवर के पानी का आनंद लेते रहे. एक दूसरे के अंगों को छूते रहे सहलाते रहे पकड़ कर खींचते रहे.

फिर रजनी ने शवर बंद कर दिया. अब रजनी और मालती रणबीर के नंगे जिस्म पर टूट पड़ी और उसके पानी छूटे जिस्म को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. पीठ, पेट, नाभि चूतड़ पाँव जंघे सब जगह वो दोनो रगड़ रही थी और इस प्रकार रगड़ रगड़ कर ही रणबीर के बदन को सूखा दिया

रणबीर का लंड उत्तेजना के मारे रोड की तरह तन गया था. रजनी ने रणबीर का लंड मुती मे जाकड़ लिया और पास ही खड़ी मालती की गांद मे एक उंगल देते हुए कहा, "दे दूं इसे?"

"नही रजनी नही.. देख ना कैसे भाले की तरह तन गया है फिर फॅडवायानी है क्या मेरी." मालती ने रजनी से दूर हटते हुए कहा.

तभी रणबीर बाथरूम के बीच मे एक पारटिशन दीवार की तरफ जाने के लिए मुड़ा, रजनी ने फ़ौरन उसका हाथ पकड़ के खींचा तो रणबीर ने एक उंगल उपर उठा दी.

"अभी नही अभी नही, हुकुम का गुलाम है ना तू तो बिना इजाज़त कुछ भी नही."

रणबीर असचर्या से खड़ा रहा, तभी रजनी रणबीर के सामने घुटनो के बल बैठ गयी और उसके लंड को सहलाने लगी. वो गोटियों को नीचे की और खींचती तो लंड और अकड़ जाता. तभी उसने मालती को इशारा किया और मालती भी रजनी के पास बैठ धीरे धीरे लंड को मुँह मे भरने लगी.

मालती की मुँह मे लंड का सूपड़ा था और रजनी बे भी लंड के जड़ पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी. रजनी उसके आंडों से भी खेल रही थी. जब मालती लंड को बाहर निकालती तब झट रजनी उसे मुँह मे ले चूसने लगती और जब रजनी मुँह से बाहर निकालती तब मालती उसे मुँह ले लेती. दोनो लंड के भूकी औरतें एक दूसरे से छीना झपटी करते हुए लंड चूस रही थी.

रणबीर भी पूरी तरह उत्तेजित था पर उसे बहोत ज़ोर से पेशाब की हज़्जत भी हो रही थी. उसका बस चलता तो दोनो रंडियों के मुँह मे पेशाब कर देता.

"ठकुराइन एक बार छोड़ दो," रणबीर ने फिर एक अंगुल उपर कर गिड़गिदते हुए कहा.

"अब डूबरा कहा तो इसे काट कर फैंक दूँगी. रजनी ने रणबीर के लंड को हिलाते हुए कुछ उँचे स्वर मे कहा.

"रजनी बेचारे को जाने दो ना, देखो कितना फूल गया है." मालती ने रणबीर के लंड को पकड़ कर कहा.

"हूँ तो ये बात है, देख साली को दो दिन के भतीजे पर कितना रहम आया है. रणबीर दे इसके मुँह मे, भले ही इसके मुँह मे कर दें पर याद रहे लंड बाहर नही निकलना चाहिए." रजनी ने रणबीर का लंड मालती के मुँह मे ठूनसते हुए कहा.

रजनी की बात सुनकर और उस कलपाना मात्रा से रनबेर काफ़ी उत्तेजित हो गया और वह मालती के मुँह मे लंड अंदर बाहर करते हुए चूसने लगा. एक तो उसे पेशाब बहोत ज़ोर की लगी हुई थी, साथ ही पूरा जोश भी भरा हुआ था, पर जब तक वह पेशाब करके हल्का ना हो लेता तब तक वह कुछ कर पाने मे अपने आपको असमर्थ पा रहा था. उसने
मन बनाया की वह अब और नही रूकेगा और इस साली मालती चाची की मुँह मे ही कर देगा.

उसका यह मन बनना था की वह धार जड़ से आगे बढ़ी, पर लंड पूरा तना हुआ था इसलिए मुत्रा का एक क़तरा पीचकारी के रूप मे मल्टी के मुँह छूटा. फ़ौरन मल्टी के मुँह का स्वाद नमकीन हुआ और उसने एक झटके से सर पीछे खींचा पर रणबीर को ठकुराइन की चेतावनी याद थी और उसने मालती के बॉल पकड़ उसके मुँह को अपने लंड पर दबा दिया. मालती की मुँहसे गों गों की आवाज़ीएँ निकालने लगी और वो रजनी की तरफ देखने लगी.

मालती के मुँह के कोर से मुत्रा बहने लगा और रजनी समझ गयी की क्या हुआ है. उसने फ़ौरन मालती को एक तरफ धक्का देकर रणबीर का लंड अपने मुँह मे ले लिया.

तभी रणबीर के लंड ने मुत्रा का दूसरा कतरा छोड़ा आरू रजनी लंड चूस्ते हुए गटक गयी.

अब रजनी ने लंड मुँह से निकाल दिया पर अपने खुले मुँह से सिर्फ़ आधे इंच ही दूर रखा और रणबीर को इशारा केया. इशारा मिलने की देर थी की रणबीर के लंड से बड़े वेग से मुत्रा धार निकली.

रजनी उस मुत्रा धार को अपने मुँह मे ले गटाकने लगी. तभी उसने मालती को पकड़ अपने पास खींचा और उस मुत्रा धार का रुख़ मल्टी के चेहरे की तरफ कर दिया. मुत्रा की धार बड़े वेग से मालती के गालों और फिर होठों से टकराई.

साली मुँह खोल, एक बूँद भी नीचे नही गिरनी चाहिए." रजनी
चिल्लाई.

मालती ने मुँह खोल दिया. रणबीर पूरा उत्तेजित हो गया. उसने मालती का चेहरा अपने लंड पर दबा दिया और उसके हलाक मे मुत्रा धार उंड़ेलने लगा. फिर उसके क्या मन मे आया की उसने एक झटके से लंड मालती के मुँह से निकाल उसका रुख़ रजनी के चेहरे की तरफ कर दिया और उस मालकिन ठकुराइन के गालों पर , सर पर, चुचियों पर मुत्रा की धार छोड़ने लगा.

रजनी को इसमे मज़ा आने आ रहा था, उसने अब लंड खुद पकड़ लिया और जहाँ चाहती उधर रुख़ कर देती. कभी अपनी तरफ तो कभी मल्टी की तरफ. ढेरे धीरे मुत्रा कुछ रुक रुक के आया और फिर बंद हो गया.

रजनी और मालती दोनो फर्श पर बैठी हुई थी. रजनी ने एक हॅंड शवर उठाया और उसे चालू कर दिया. अब थोड़ी देर पहले वह जिस तरह मूत्र स्नान कर रही थी अब उसी तरह स्नान करने लगी. कभी शवर का रुख़ अपनी तरफ करती तो कभी मालती की तरफ. तभी उसने रणबीर को खींच कर नीचे बिठा लिया और तीनो उस हॅंड शवर का फुआराओं का मज़ा लेने लगे.

रणबीर ने मालती को गोद मे खींच के उसका सर अपनी छाती पर रख लिया और अपनी दोनो पैर उसकी जांघों के उपर से ले मालती की टाँगे पूरी फैला दी. अब वह शवर का घोल मुँह ठीक मालती की चूत पर टीका दिया. पानी के फुवरे बड़ी वेग से मालती की चूत के अंदर छूटे.

यह सीन देख रजनी पूरी गरम हो गयी और वह उठी और अपनी दोनो टाँगे छोड़ी कर मल्टी के मुँह मे अपनी झांतो भारी चूत तूसने लगी. मालती ने भी अपनी जीभ प्यारी सहेली ठकुराइन की चूत मे दे दी.

तभी रजनी ने दोनो हाथ की उंगलियाँ अपनी चूत के उपरी भाग यानी मूट छेद के बाजू बाजू रखी और चुर्र्रर छुउर्र्र कर के मालती के मुँह मे मूतने लगी. मालती ने मुँह वैसे ही खुला रखा और ठकुराइन के मूत को गटाकने लगी. फिर रजनी वैसे ही मूतते मूतते आगे बढ़ी और उसकी चूत रणबीर के मुँह पर मुत्रा धार छोड़ रही थी. रंजनी ने रणबीर के मुँह को अपनी चूत पर दबाया और ठकुराइन की इक्चा समझ रणबीर ने मुँह खोल दिया और अब वह ऱाज्नि का मुत्रा पान कर रहा था.

दो दो जवान नंगी औरतें, एक गोद मे पड़ी हुई और दूसरी चूत चौड़ी कर के उसके मुँह मे चुर्र चुर्र करके मूत रही थी. रणबीर का लंड लोहे के जैसे सख़्त हो गया. रजनी की धार अब बंद हो गयी. उसकी चूत से आखरी के कुछ वेग से मूत्र के छींटे निकले और वह चूत को रणबीर के मुँह पर बेतहाशा रगड़ने लगी. उसने वहीं से बैठना चालू किया और मालती रणबीर की गोद से उठ गयी.

अब रजनी रणबीर की तरफ मुँह कर अपना होडा उसकी गोद की तरफ बढ़ा रही थी, रजनी का विशाल होडा सीधा रणबीर की गोद मे इस तरह आया की ठकुराइन की चूत सीधे खड़े लंड पर आ गयी.

ठकुराइन जैसे ही पूरी बैठी, उसकी चूत मे रणबीर का लंड खच से अंदर घुस गया. लंड को वैसे ही चूत मे रखे रजनी ने रणबीर की कमर बाहों मे जाकड़ ली और थोड़ा आगे बढ़ते वह घुटने मोड़ लंड पर उपर नीचे होने लगी. रजनी ने रणबीर के होंठ अपने मुँह मे ले लिए और उन्हे खूब ज़ोर से चूसने लगी, काटने लगी.

रणबीर की बालों भारी छाती पर वह अपनी चुचियों रगड़ रही ती.बीच बीच मे वह थोड़ी उपर उठ पानी चुचि रणबीर के मुँह मे भी दे देती थी. नीचे एक दम खड़े लंड से उसकी चूत चुद रही थी.

"मालती मेरी जान आ रे!! मेरे मुँह मे अपनी चूत दे ना, हे जब तक तेरी चूत का स्वाद ना लूँ मज़ा ही नही आता. "

मालित उठी और टाँगे फैला दोनो के बीच इस तरह खड़ी हो गयी की उसकी गांद का छेद रणबीर के मुँह के सामने था और चूत का छेद रजनी के मुँह के सामने था. नीचे चूत की चुदाई बदस्तूर जारी थी. मालती के दोनो छेदों पर दो जीभों ने लगभग एक ही समय मे धावा बोल दिया. रजनी की जीब चूत को चाटते हुए चूत मे घुस रही थी जबकि रणबीर की जीभ पहले उसकी गंद का गोला चाटा फिर गंद के अंदर घुसने लगी.

"चल री तू भी शुरू हो जा, देखें तेरी चुरर्र चुरर्र की आवाज़ कैसीए लगती है. एक बार मालती का शरीर ज़ोर से आकड़ा और दूसरे ही पल उसकी चूत से बड़े वेग से मुत्रा धार रजनी के खुले मुँह मे गिरने लगी. मालती की चूत सिटी बजाने की आवाज़ के साथ मुत्रा धार छूटते रही.

रजनी ने अपना मुँह मालती की चूत पर कस के दबा दिया और अपनी उस काम करने वाली का मूत बिना उँछ नीच का विचार किए वह कामतूर ठकुराइन गटक गटक के पीने लगी.

तभी रजनी ने मालती को फुर्ती दीखाते हुए घूमा दिया जिससे की मालती की गांद रजनी के स्सामने आ गई और चूत ठीक रणबीर के मुँह के सामने. मालती की चूत से पेशाब की धारा वैसे ही निकल रही थी. रणबीर ने भी पूरा मुँह खोल के मालती चाची की चूत पर रख दिया और वह मुत्रा धार रणबीर के तालू से टकराते हुए गले के नीचे गिरने लगी.

उधर रजनी मालती की गांद कस कर चाट रही थी. चूत को मूत छेद को चित्राते हुए अपनी सहेली को रणबीर के मुँह मे मुता रही थी.

"है है में जा रही हूँ ..... रणबीर मेरे राजा........" रजनी अब बहोत ज़ोर से हाँप रही थी. उसने मालती की गंद कस के अपने मुँह मे दबा ली थी. वह थोड़ी उपर होकर शरीर को झटके से ढीला छोड़ रही थी जिसके फल स्वरूप रणबीर का लंड उसकी चूत मे जड़ तक धँस जाता.

श ठकुराइन ज़रा धीरे... ऑश रजनिज़ी... रजनी ज़रा धीरे... ओह मैं . भी झाड़ रहा हूँ..... ओह रजनी मेरी रानी.. मेरी जान.. " रणबीर ने एकि झटके से मालती चाची को अपने और ठकुराइन के बीच से हटा दिया. अब उसने रजनी को ज़ोर से अपनी छाती से चिपका लिया, उसके चूतड़ अपने हाथों मे कस लिए और उसके छूतदों को अपने लंड पर ज़ोर ज़ोर से पटाकने लगा और धीरे धीरे रफ़्तार कम पड़ती गयी और दोनो बिल्कुल शांत हो एक दूसरे को जाकड़ फर्श पर कई देर तक वैसे ही बैठे रहे.

फिर रजनी उठी और आदम कद बाथ टब मे जा लेट गयी. उसने गरम पानी और ठंडे पानी का नाल चालू कर दिया. फिर एक हाथ बढ़ा उस आल्मिराह से दो बॉटल निकली और बारी बारी से दोनो बोतलों से कुछ द्रव उस पानी मे डाला. धीरे धीरे पानी का लेवल बाथ टब मे उँचा उठ रहा था. रजनी पानी को दोनो हाथों से छपका रही थी और देखते देखते झाग उमड़ने लगे और रजनी गले तक झागों से धक गयी.

रजनी ने मालती को इशारा किया और वह भी एक फोम लेके बाथ टब मे घुस गयी और वह फोम ठकुराइन के शरीर पर रगड़ने लगी. बीच बीच मे रजनी वह फोम ले लेती और वह भी मालती के शरीर के हर भाग पर वह फोम रगड़ती. रणबीर भी बात टब के साइड मे आके बैठ गया और ठकुराइन की चुचियों हाथों से रगड़ने लगा. तभी
रजनी बात टब मे पलट गयी और मालती ने ठकुराइन की गंद पर ज़ोर ज़ोर से फोम रगाड़ना चालू कर दिया.

रजनी काई देर फोम रगद्वति रही. फिर उसने मालती को बाहर कर रणबीर को अंदर खींच लिया.

अब फोम रजनी ने ले लिया और उसने रणबीर की पीठ, हाथ, पाँव गांद लंड सब उस फोम से आक्ची तरह रगड़ रगड़ सॉफ किया. फिर रणबीर भी काई देर कभी हाथों से कभी उस फोम से अपनी प्यारी ठकुराइन को नहलाता रहा.

फिर दोनो फर्श पर आ गये. तीनों का शरीर झगों से धड़ा हुआ था, बाहर भी काफ़ी देर तक तीनो एक दूसरे के शरीर के हर भाग को कभी हथेलियों से तो कभी झाग से रगड़ रहे थे.

फिर रजनी ने दोनो उपर के फवारे भी चालू भी कर दिया और दोनो हॅंड शवर भी चालू कर दिए. तीनों एक दूसरे पर हॅंड शवर के धार छोड़ते हुए काफ़ी देर नहाते रहे.

फिर शवर बंद कर तीनो उठे और फुर के मुलायम टवल से एक दूसरे के बदन पौंचने कर सुखाने लगे. तब रजनी ने आल्मिराह से एक खास बॉट्टेल निकली और ढेर सारा तेल पहले रणबीर के सिर पर फिर मालती के सिर पर और खुद अपने सिर पर अंडर वह बॉटल वापस रख दी. वह बहोट ही सुगंधित और चिकना तेल था. फिर तीनो एक दूसरे के शरीर मल मल के शरीर का हर भाग पर उस तेल की मालिश करने लगे. वह तेल बहोत ही चिकना और मालिस करते वक्त शरीर पर एक जगह हाथ टिक नही रहे थे.

"साली तेरी गांद का तो तेरे भतीजे ने कबाड़ा कर दिया है," रजनी ने तेल से मालती के चूतड़ के मालिश कर हुए खच से एक उंगल गांद के अंदर धकेलते हुए कहा.

"और तहकुराइन आप तो कहते है की ठाकुर साहेब का ठीक से खड़ा भी नही होता, फिर या क्या है?" इस बार रणबीर ने ठकुराइन की गांद मे उंगल देते हुए पूछा.

ये उस चिकने तेल का कमाल था की गंद के पर उंगल रख थोड़ा दबाते ही उंगल खच से अंदर चली जाती थी.

तीनो इस तरह के देर खुल के मज़ाक करते रहे और मज़ा लेते रहे.

फिर पाउडर के दो डिब्बे निकाले और एक दूसरे के शरीर पर इतना पाउडर छिड़का की तीनो सफेद नंगे उछलते कूदते भूत नज़र आ रहे थे. फिर पाउडर की मालिश कर के शरीरों पर ठीक से फैलाया गया. इन सब से रणबीर का लंड एक बार फिर तन गया था. रजनी ने देखा की मालती उसे मुट्ठी मे ले रही है. वह तो अभी अभी रणबीर से अछी तरह चुद चुकी थी पर मालती अभी भी प्यासी थी.

"अरे साली मुट्ठी मे क्या लेती है, अपने भोस्डे मे ले ना" ये कहते हुए रजनी ने रणबीर का लंड मालती की चूत से लगा दिया.

खड़े लंड को तो खुली चूत मिलनी चाहिए, वह अपने रंग मे आगया और नतीजा यह हुआ की मालती चुदने लगी.

रजनी उनके घुटनो मे बैठ गयी, जब चाची भतीजा खड़े खड़े चुदाई कर रह थे. रजनी भी मालती की चूत पर जीभ फिरा रही थी तो कभी रणबीर की गोतियाँ पर. काफ़ी देर चुदाई चलती रही और मालती और रणबीर ओह्ह्ह हहाई करते हुए एक साथ झाड़ गये.

इसके बाद सब उस बड़े कमरे मे आ गये. रणबीर अपनी ड्यूटी की ड्रेस पहन रहा था.

"तकुराइन कल तो ठाकुर साहेब शिकार से वापास आ जाएँगे"

"हां वह तो है. पर अपना रास्ता भी बीच बीच मे निकलता रहेगा."

मालती ने सारी पहन ली थी और वह रणबीर को ले कमरे से बाहर निकल गयी.

दूसरे दिन ठाकुर अपने लाव लश्कर के साथ वापास आ गया और सब कुछ पहले जैसा ही चलने लगा. उधर मधुलिका के आने के बाद उल्टी गिनती शुरू हो गयी. रणबीर को हवेली मे दूसरे काम करने वालों से पता चला की मधुलिका ठाकुर की पहली बीवी से थी. वह शुरू से ही बाहर रह के पढ़ रही थी

पहली इंग्लीश मीडियम स्कूल से हाइयर सेकेंडरी हॉस्टिल मे रह के पास की और बाद मे डॉक्टोरी पढ़ रही थी. अब पढ़ाई ख़तम करके आ रही थी.

ठाकुर ने पहले ही लड़का देख रखा है और एक बार मधुलिका की रज़ामंदी मिल जाए तो शादी होते कोई देर नही लगेगी. मधुलिका 33 साल की हो चुकी है.

रणबीर उसी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रहा था मालती चाची को हवेली मे आते जाते वह देखता था पर जब ठाकुर हवेली मे होता तो उसका काम करने वालों पर ऐसा खोफ़ छाया रहता की कोई किसी से बेमतलब बात नई करता. और औरतों से तो हवेली मे तो क्या बल्कि हवेली के आस पास भी कोई मुँह लगाने की नही सोच सकता था.

एक दो बार भानु ने उसे अपने साथ चलने की जीद की थी पर रणबीर टाल गया. उसे भानु को लंड चूसने मैं और उसकी गंद मारने मे कोई दिलचस्पी नही थी. वह भानु से दूर ही रहना चाहता था और नतीजा ये हुआ की वह चाह कर भी भानु के घर नही गया. शायद जाता तो सूमी के साथ कुछ मौका मिल सकता था.

आख़िर वो निसचीत दिन आ ही गया. मधुलिका करीब दोपहर को एक कार मे पटना से आई थी कार से पटना का यहाँ से चार घंटे का रास्ता था. ठाकुर ने पहली रात ही हवेली से ख़ास कार ख़ास ड्राइवर के साथ भेज दी थी.

रणबीर मे मधुलिका को कार से उतरते हुए देखा की मधुलिका आम लड़कियों जैसे लड़की थी. हल्के रंग की सलवार करते मे वह थी. बॉल खुले और छोटे रख रखे थे, जिनसे देहातों जैसे छोटी नही बाँध सकती थी. बदन उसका भरा था, पर उसे मोटा नही कह सकते थे. बस एक झलक वह देख पाया .

जब तक मधुलिका हवेली मे आई नही थी, तब जितनी उसकी चर्चा थी, आने के बाद उसके मुक़ाबले कुछ भी नही. जैसे ठकुराइन हवेली मे मौजूद थी और कोई उसके बारे मे बात नही करता वैसे ही आने के बाद मधुलिका भी हवेली मे खो के रह गयी थी.

2 - 3 दिन तो मधुलिका के आव भगत मे ही बीत गये. तीसरे दिन ठाकुर ने उसे बताया की पास के गाँव का एक ठाकुर का लड़का है, हमारी ही तरह खानदानी है और वह चाहता है की मधुलिका का उसे घर मे रिश्ता हो जाए. पर मधुलिका बात को ये कहते हुए टाल गयी की इतने वर्ष बाहर रहने एक बाद तो वह गाँव आई है, हवेली मे आ गयी है और वह कुछ दिन वो देहात की जिंदगी को करीब से देखेगी. ठाकुर भी उसकी जीद देख चुप हो गया.


दो दिन बाद ही मधुलिका ने घुड़ सवारी सीखने के इक्षा जाहिर की. हवेली के सबसे पुराने और मशहूर घुड़सवार को बुलाया गया पर मधुलिका उस 50 वर्ष एक अधेड़ को और उसकी एक बित्ते की मूँछ देख कर ही बिदक गयी और उसने कह दिया की नही सीखनी उसे घुड़सवारी यहाँ से तो पटना ही अछा था. ठाकुर को ये बात चुभ गयी.

उसी रात ठाकुर ने ठकुराइन रजनी से भी उसकी चुचि मसालते हुए इस बात का ज़िकरा किया तो रजनी ने कहा की बेबी सहर मे रह कर पढ़ी लीखी है. उसे यहाँ खुलापन महसूस होना चाहिए. बातों ही बातों मे रजनी ने कहा की ठाकुर का वह ख़ास हवेली का पहरेदार इसके लिए ठीक रहेगा. ठाकुर को भी बात जाँच गयी.

दूसरे दिन ही ठाकुर ने रणबीर को बुलाया और समझाते हुए कहा की वह हमारे पोलो वाले मैदान मे मधुलिका को घुड़सवारी सिखाए. रणबीर खुशी खुशी तय्यार हो गया और ठाकुर को विश्वास दिलाया की बेबी का बॉल भी बांका नही होने देगा और उसे महीने भर मे और उसे महीने भर मे पक्की घुड़सवार बना देगा. ठाकुर भी निसचिंत हो गया.

घुड़सवारी सीखने के लिए शाम का वक्त तय किया गया. पोलो का मैदान हवेली के पीछे ही थोड़ी दूर पर दूर दूर तक फैला हुआ था. जगह जगह पर हरी घास भी मैदान मे थे और चारों तरफ से उँचे दरखतों से वह मैदान घिरा हुआ था.

जब बड़े ठाकुर यानी की ठाकुर का बाप जिंदा था तब देश को आज़ादी नही मिली थी और यहाँ अँग्रेज़ पोलो खेलने आए करते थे. खुद बड़ा ठाकुर भी पोलो का अक्चा खिलाड़ी था. तभी से ये मैदान पोलो मैदान के नाम से प्रसिद्ध हो गया था. हालाँकि इस ठाकुर को पोलो मे कोई दिलचस्पी नही थी.

मैदान मे एक तरफ डाक बुंगलोव भी बना हुआ था. जब अँग्रेज़ यहाँ आते थे तब डाक बुंगलोव किपुरी देख भाल होती थी और अँग्रेज़ों को इसी मे ठहराया जाता था. अब वह वीरान पड़ा था और कुछ कबाड़ के अलावा उसमे कुछ नही था. यहाँ तक की उसकी देखभाल की लिए किसी आदमी को भी रखने की ज़रूरत नही थी.

आज शाम से ही रणबीर को घुड़सवारी सिखानी थी. रणबीर सुबह से ही तय्यारियों मे जुट गया था. तभी 10.00 बजे के करीब ठाकुर ने रणबीर को बुला भेजा. रणबीर हवेली मे पहुँचा तो देखा की ठाकुर ठकुराइन और मधुलिका कुरईसियों पर बैठे थे.

सामने मेज पर झूँटे बरतन पड़े थे जो बता रहे थे की नाश्ता अभी अभी ख़तम हुआ है. रणबीर ने तीनो के सामने झुक कर आभिवादन किया.

ठाकुर ने कहा, "यह नौजवान है जो तुम्हे घुड़सवारी सिखाएगा. इतना हौसलेमंद है की चाकू लेकर शेर से भीड़ जाए. "

मधुलिका ने रणबीर को गौर से देखा और पूछा, "कब से हो यहाँ?"

"जी हवेली मे तो अभी सिर्फ़ एक महीने से ही हूँ पर ठाकुर साहेब की सेवा मे दो साल से हूँ." रणबीर ने नज़रें नीची किए जवाब दिया.

"हूँ तो तुम बाबा के साथ शिकार पर भी जाते हो?"

"जी हां "

"तब तो निशाने बाज़ भी हो." फिर मधुलिका ठाकुर की तरफ घूम के बोली, बाबा! मैं यहाँ बंदूक, पिस्टल चलाना भी सीखूँगी.

"ये भी तुम्हे यही सीखा देगा."

मधुलिका खुश हो गयी. तब ठाकुर ने रणबीर से कहा.

"अस्तबल से दो चुने हुए घोड़े ले जाना, सारे साजो समान की ज़िम्मेदारी तुम्हारी है.. देखो बेबी भी इस मे नयी है, इसके अकेले घोड़े पर मत छोड़ना. राइफल कारतूस भी ले लेना और निशानेबाज़ी जंगल की तरफ रुख़ कर के सीखाना. तुम डाक बंग्लॉ के पास सब तय्यारी करके इंतेज़ार करना बेबी शाम को 4.00 बजे तक वहाँ पहुँच
जाएगी."

"जी ठाकुर साहेब, अब इजाज़त दें, सारी तय्यारी में खुद करूँगा."

ये कह कर रणबीर ने सिर झुकाया और वाहा से चला गया.

फिर रजनी और मधुलिका को वहीं छोड़ ठाकुर भी हवेली मे चला गया.

"तुम्हारे बाबा का ये ख़ास है, ये तुम्हेसब कुछ सिखा देगा." रजनी ने हंसते हुए मधुलिका से कहा.

"ठकुराइन मा आप कैसे जानती है की ये क्या क्या सीखा सकता है?"

"अरे ठाकुर साहेब इसकी तारीफों के पूल बाँधते थकते नही. बाप का तो मन ये मोह चुका अब देखिएं की बेटी का ये कितना मन मोहता है?" रजनी होटन्ठ काटते हुए मुस्कुराने लगी.

"तब तो मज़ा आ जाएगा मेरी ठकुराइन मा... " मधुलिका ने भी हंसते हुए कहा और मा शब्द पर अधिक ही ज़ोर दिया.

"मेने तुम्हे कितनी बार कहा है की मुझे मा मत कहा करो. अपना अपना भाग्या होता है"

"भाग्या ही तो होता है की आप आज इस हवेली की ठकुराइन है. और ठकुराइन है इसलिए मा भी है."

रजनी ने पास पड़ी एक मॅगज़ीन उठा ली और पढ़ने लगी. उसने जब से मधुलिका यहाँ आई थी तब से कोशिश करनी शुरू कर दी थी की मधुलिका उससे एक सहेली जैसा व्यवहार करे.. उसने काफ़ी खुलने की भी कोशिश की. वह मधुलिका को ठीक उसी साँचे मे ढालना चाहती थी जिस साँचे मे उसने अधेड़ मालती को ढाल रखा था.

पर मधुलिका शांत स्वाभाव की और कम बोलने वाली लड़की थी. उसे अभी तक रजनी ठीक से समझ ही नही पाई थी.

शाम 4 बजे जीन कसे दो घोड़ों के साथ रणबीर डाक बंग्लॉ के पास मुस्तैद था. दो राइफल और कारतूस भरी दो पट्टियाँ भी मौजूद थी. तभी एक जीप वहाँ आके रुकी और टाइट जीन्स और चमड़े की जकेट मे मधुलिका जीप से नीचे उतरी. उसने ड्रेइवेर को यह कहते हुए जीप के साथ भेज दिया की दो घंटे बाद वे यहाँ वापस आ जाए.

उस लिबास मे आज मधुलिका शिकार पर जाती एक राजकुमारी लग रही थी. सर पर हॅट नुमा कॅप थी. कमर मे जीन्स की बेल्ट मे एक पिस्टल खोंसि हुई थी. रणबीर के पास आ मधुलिका ने उसे मुस्कुराते हुए देखा और पूछा,

"तो तुम और तुम्हारे घोड़े तय्यार है? चलो अब कैसे शुरू करना है करो."

"जी मधु.. उ.. जी. आज आप घोड़े पर सवार हों और में घोड़े की रास पकड़ पैदल च्लते हुए इस पोलो मैदान के दो चक्कर लग वाउन्गा. इससे आपको घोड़े की चाल का एहसास होगा और उस चाल के अनुसार आपको अपने शरीर को कैसे काबू मे रखना है पता चलेगा." ये कह कर एक सज़ा हुआ घोड़ा रणबीर ने मधुलिका के आगे कर दिया.

मधुलिका ने रकाबी मे पैर डाला तो रणबीर ने नीचे झुक कर मधुलिका का पैर रकाबी मे ठीक से फँसा दिया. वह मधुलिका के फूले फूले चूतड़ को सहारा दे उसकी घोड़े पर चढ़ने मे मदद करना चाह ही रहा था की मधुलिका उछल कर घोड़े की पीठ पर सवार हो गयी.

रणबीर ने घोड़े की रास थाम ली और पैदल चलने लगा. मधुलिका कुछ देर तो घोड़े की चल के साथ ताल मेल बैठाती रही वह घोड़े की पीठ पर अकड़ कर बैठ गयी और रणबीर से कहा.

"अब रास मुझे थमा दो. नहीं तो लग ही नही रहा है की में घुड़सवारी कर रही हूँ. रणबीर ने मधुलिका को रास थमाते हुए कहा, "देखिएगा रास ज़ोर से मत खींचयएगा, नही तो घोड़ा दौड़ने लगेगा."

रणबीर भी घोड़े की पीठ पर हाथ रख साथ साथ चलने लगा.

"रणबीर पढ़ाई लीखाई भी की है या और कुछ?" मधुलिका ने पूछा.

"जी गाँव के स्कूल मे आठवीं तक पढ़ा हूँ."

"तो तुमने तो बहोत जल्दी घुड़सवारी और निशानेबाज़ी सिख ली और बाबा ने मुझे सिखाने के लिए तुमको चुना है?"

"जी इसमे ऐसी कोई बात नही है, देखिएगा आप भी बहोत जल्दी सब कुछ सीख जाएँगी."

घोड़ा मंद गति से चल रहा था. रणबीर घुड़ सवारी के बीच बीच मे गुण भी बताता जा रहा था जिसे मधुलिका ध्यान से सुन रही थी. घोड़ा दौड़ने लगे तो उसकी पीठ पर हल्के ठप देकर उसे रोकना है, कैसे चढ़ना है, कैसे उतरना है वैगैरह वैगैरह.

लगभग एक घंटे मे पोलो मैदान के दो चक्कर पूरे हो गये. इस बीच मधुलिका घोड़े को हल्के हल्के दौड़ाया भी और रणबीर के बताए तरीके से उसे थप़ थपा के रोका भी. मधुलिका बहोत खुश थी.

घोड़े से उत्तरते समय रणबीर ने उसके चूतड़ को हल्का सा सहारा देकर उसकी उत्तरने मैं मदद की. फिर मधुलिका ने कुछ निशाने बाज़ी की इक्षा प्रगट की.

शाम के 5.00 बज चुके थे. सूरज कुछ नीचे चला गया था, जिससे पेडो की छाया लंबी हो गयी थी. रणबीर ने एक बड़े पेड़ की छाँव मे एक चादर बीछा दी. टारगेट एक तख़्ती जिस पर काई गोल लाइन्स बनी हुई थी, जंगल की तरफ था जो की अभी धूप मे नहा रहा था.

"अब आप पेट के बल लेट जाएँ और राइफल का बट छाती से दबा के राइफल को मजबौती से पकड़ें. मधुलिका फ़ौरन लेट गयी.

और समय होता तो रणबीर उसके चूतडो का उभार देख कहीं खो जाता पर इस समय उसका पूरा ध्यान राइफ़ल चलाना सिखाने मे था. रणबीर ने हिदायत दे दी थी की ट्रिजर को भी बिल्कुल भी ना छुवें. फिर रणबीर राइफल को कैसे सीधा रखा जाए, निशाना कैसे लगाना है तथा और भी बहुत सी बातें समझाता रहा. मधुलिका ट्रिजर दबाने को उतावली थी पर रणबीर उसे धीरे से समझाता रहा.

"अब समझाते ही रहोगे या दो चार गोली मारने के लिए भी कहोगे?"

"देखिएगा बट छाती से कस के दबा ले. गोली छूटते ही एक झटका लगेगा. रणबीर भी उसकी बगल मे लेट गया और जब सब तरफ से संतुष्ट हो गया तो उसने फिरे कहा. ध्यान से गोली छूटी पर वह उस तख़्ती के भी आस पास नही थी.

मधुलिका उठ कर बैठ गयी. उसकी छाती ज़ोर ज़ोर से धड़क रही थी, जिससे उसकी बड़ी बड़ी चुचियों उपर नीचे हो रही थी. रणबीर ने थर्मस मैं से एक ग्लास पानी निकाल कर उसे दिया.

फिर रणबीर राइफल लेकर लेट गया. बट कैसे रखना है उसने अपनी छाती से लगाकर समझाया. फिर उसने टारगेट पर कयी फाइयर किए और सारी निशाने बीच मे बने गोल पर ही लगे. इससे मधुलिका बहोत प्रभावित हुई. उस दिन रणबीर ने मधुलिका को और राइफल नही दी बल्कि काई बातें समझाता रहा.

ड्राइवर जीप लेकर साढ़े पाँच बजे आ चुका था, उसे इंतेज़ार करते हुए लगभग 10 मिनिट हो चुके थे. तभी रणबीर ने सारा समान समेटना शुरू किया और सारा समान एक घोड़े की पीठ रख दोनों जीप की तरफ चल पड़े. एक घोड़े की रास रणबीर ने थाम रखी थी और दूरे घोड़े की रास मधुलिका ने. मधुलिका दूसरे दिन चार बजे आने को कह जीप मे सवार हो निकल गयी.

यह सिलसिला 10 दिन तक यूँ ही चलता रहा. अब मधुलिका अकेले घोड़े पर सवार हो मैदान का चक्कर लगाने लगी थी. पर अभी तक वह घोड़े को दौड़ाती नही थी. नीशानेबाज़ी भी कुछ कुछ सीख गयी थी. राइफल के अलावा वह पिस्टल चलाना भी सीख रही थी. जब वह दोनो टाँगे चौड़ी कर और कुछ झुककर पिस्टल चलाती तो रणबीर का लंड उसकी गांद का उभार देख मचल उठता. पर वह बिना कुछ प्रगट किए उसे बड़ी तन्मयता से सब सीखाता रहता. उसे पता था की ये शहज़ादी एक दिन खुद उससे लिपट जाएगी.

अब घोड़े पर चढ़ते और उतरते समय प्राय्यः रणबीर उसके चूतडो को सहारा दे देता. राइफल चलाते वक़्त रणबीर भी उसकी बगल मे लेट जाता और राइफल के पोज़िशन ठीक करने के बहाने उसकी कोहनी उसकी चुचियों से रगड़ खा जाती. मधुलिका इन सब बातों की तरफ कोई ध्यान नही देती. अब वह ड्रेस भी ऐसी पहन के आती, की किसी की भी नियत डोल जाए. रणबीर भी मधुलिका से खुलने लग गया था.

फिर एक दिन बरसात का सा मौसम था पर मधुलिका अपने समय ठीक 4 बजे पोलो मैदान पहुँच गयी. रणबीर भी रोज की तरह तैयार था.

"मेने तो सोचा था की आज मेमसाहेब हवेली मे ही आराम करेंगी, लेकिन आप तो वक़्त पर हाजिर हैं."

"तुम भी तो यहाँ पर हो और सुनो में वक़्त की बहोत पाबंद हूँ. चाहे आँधी आए या तूफान में यहाँ ज़रूर पहुँचती हूँ. "

तभी हल्की बूँदा बंदी शुरू हो गयी और देखते देखते बारिस नेज़ोर पकड़ लिया. वहाँ और ओ कुछ था नही और दोनो राइफल संभाले जल्दी से डाक बंग्लॉ की तरफ भागे. डाक बंग्लॉ के पीछे आकर मधुलिका बुरी तरह से हाँफने लगी.

वह काफ़ी भीग चुकी ती और हाँफते हाँफते उसकी छाती उपर नीचे हो रही थी. रणबीर उसकी चुचियों पर आँख गड़ाए देख रहा था.

"रणबीर इस डाक बंग्लॉ मे क्या है? मेरी देखने की इक्चा है."

"भीतर से तो इसे मेने भी नही देखा है, पर सुना है कुछ पुराना समान भरा पड़ा है. चलिए देखते है."

और दोनों डाक बुंगलोव के लकड़ी की बनी सीढ़ियों से होते हुए डाक बंग्लॉ पर आ गये. बंग्लॉ के अंदर जाने के मैन गेट पर एक लोहे की बड़ी सी कुण्डी जड़ी थी जिसे रणबीर ने खोल दिया.'

दरवाज़ा चरमरा कर खुल गया और दोनो अंदर दाखिल हो गये. फर्श पर धूल की परत जमी हुई थी लगता था की बहूत दिनों से कोई भी अंदर नही आया था. डाक बंग्लॉ अंदर से काफ़ी बड़ा था. बीचों बीच बड़ा सा चौक था और उसके चारों तरफ काई कमरों के बंद दरवाजे दीख रहे थे. कई बरामदे भी थे जिनमे कुर्सियाँ, मेजें और टेंट का समान पड़ा था.

बाहर बरसात और तेज हो गयी थी जिसकी टीन की छत पर पड़ने की आवाज़ तेज हो गयी थी. एक कमरे का दरवाज़ा और कमरो से बड़ा था और उस पर सजावट भी थी. रणबीर और मधुलिका ने अंदाज़ लगा लिया की ये डाक बंग्लॉ का मेन हॉल है क्यों की इसके बाहर बड़ी बाल्कनी थी जिसपर कुर्सियाँ लगा के बैठ के पूरा पोलो मैदान का नज़ारा सॉफ तौर पर देखा जा सकता था.

कमरे मे कोई ताला नही था, और उसकी कोई ज़रूरत भी नही समझी गयी क्यों की ठाकुर का रुआब ही ऐसा था की उधर झाँकने की भी कोई हिम्मत नही कर सकता था.

रणबीर ने जैसे ही वो कमरा खोला एक सीलन भरा भभूका अंदर से बाहर आया. कमरे मे अंधेरा था और मधुलिका रणबीर से बिल्कुल सॅट गयी. तभी कोई एक चूहा मधुलिका के पैरों पर से होता हुआ तेज़ी से गुजरा और मधुलिका रणबीर से कस के चिपक गयी. उसका शरीर कांप रहा था. कमरे के खुले दरवाज़े से हल्की रोशनी आ रही थी और रणबीर ने कहा.

"मेमसाहब ये तो चूहा था." फिर दोनो हँसने लगे.

रणबीर ने मधुलिका की पीठ पर हाथ रख रखा था और रणबीर उसे उसी तरह चिपकाए हुए आगे बढ़ा और कमरे की बाल्कनी की तरफ खुलने वाला दरवाज़ा खोल दिया. दरवाज़ा खुलते ही कमरे मे रोशनी भी हो गयी और बाहर बारिश का बड़ा ही मनोरम दृश्या था.

दोनो घोड़े भी डाक बुंगलोव के नीचे आ गये थे. कमरे मे कार्पेट बीछा हुआ था. दीवारों पर बड़ी बड़ी तस्वीरें तंगी हुई थी, कई अलमारियाँ बनी हुई थी, दो बड़े बेड थे जिनके सर के तरफ गोल गोल करके रखे हुए बिस्तर थे. एक तरफ सोफा सेट और कुछ मेजें पड़ी हुई थी.

"वाह कितने ठाट बाट से भरा हुआ कमरा है ये. मेरा बस चले तो हवेली छोड़ इससे मे आ जाउ. जहाँ तुम हो, घुड़सवारी सीखना, निशाने बाज़ी सीखना और अकेले रहना." मधुलिका ने कहा.

"अभी तक जीप नही आई." रणबीर ने बाहर देखते हुए कहा.

"वह अपने टाइम पर आज्एगी और अभी तो डेढ़ घंटे से ज़्यादा पड़ा है. मेने ड्राइवर से कह दिया था की चाहे बरसात आए या कुछ और आए.. रणबीर में थक गयी हूँ , यह बिस्तर खोल कर बिछा दो."रणबीर ने झट बिस्तर खोल कर बिछा दिया और मधुलिका पट लेट कर पसर गयी.

"मधुलीकाजी आप इस समय बहोत ही सुन्दर लग रही है.,"

"वो तो है तभी तो तुम मुझे घूर घूर कर देख रहे हो." तभी मधुलिका ने एक झटके से रणबीर को खेंच लिया और उसके होठों पर अपने होंठ रख एक तगड़ा चुंबन ले लिया.
मधुलिका हाँप रही थी और उसने रणबीर को जाकड़ लिया. उसकी बड़ी बड़ी चुचियाँ रणबीर की छाती से रगड़ खा रही थी.

"रणबीर मुझे प्यार करो ना. तुम मुझे अच्छे लगते हो. में तुम्हे चाहने लगी हूँ."

"पर बेबी,...... मधुलीकाजी .... यहाँ यदि किसी को मालूम पड़ गया तो ठाकुर साब मेरी खाल उतरवा लेंगे."

"उस खुल दरवाजे से किसी के भी आने का हमे मालूम पड़ जाएगा पर इस अंधेरे मे हमें कोई नही देख पाएगा." ये कहकर मधुलिका ने रणबीर को और जाकड़ लिया और उसके गालों का, होठों का चुंबन लेने लगी.

इधर रणबीर का भी बुरा हाल था, कयि दिन का प्यासा लंड पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था. उसने मधुलिका के होंठ अपने होठों मे ले लिए और उन्हे चूसने लगा. उसके हाथ कठोर चुचियों पर कस गये. उसने उसके खुले गले के जॅकेट को खोलना शुरू किया और अब ब्रा मे क़ैद मधुलिका के मस्त माममे उसके सामने तने हुए थे.

उधर मधुलिका भी कहाँ पीछे रहने वाली थी. उसने रणबीर को पॅंट और शर्ट से आज़ाद कर दिया. रणबीर ने मधुलिका के ब्रा के हुक भी खोल दिए और उसकी एक मस्त चूची को मुँह मे ले चूसने लगा.

"ओह मेरे बाबा....मेरे प्यारे बच्चे ... चूसो... ओह्ह्ह्ह्ह हाआँ चूसूऊऊऊऊओ." मधुलिका सिसकियाँ भरने लगी और रणबीर के मुँह मे एक हाथ से अपनी चुचि पकड़ उसके मुँहमे ठेलते हुए चूसाने लगी.

रणबीर मधुलिका की पॅंट के बटन खोल चुका था और एक हाथ पॅंटी के उपर से अंदर डाल दिया. उसका हाथ मधुलिका के झाटों से भरी चूत से टकराया. वह गीली हो चुकी थी. रणबीर उसे मुट्ठी मे कस दबाने लगा. बीच बीच मे वह झाँटो पर हाथ भी घिस रहा था.

उधर मधुलिका ने भी रणबीर का लंड जंघीए से निकाल लिया था और उसे धीरे धीरे मुठियाने लगी.

"वाह मेरे बेबी का ये बेबा तो बड़ा लगता है. इतना बड़ा लटकाए फिरते हो और 10 दीनो से खाली घोड़ा चलाना सीखा रहे हो. अब में इसे भी चलौंगी." ये कह कर मधुलिका ने रणबीर का लंड मुँह मे लेना शुरू कर दिया.

पहले वह सूपाडे पर जीब फिराती रही फिर मुँह को गोल कर लंड को अंदर बाहर करते हुए उसे धीरे धीरे मुँह मे अंदर तक लेने लग गयी.

"क्या करता ठाकुर साहब का हुकुम ही ऐसा था. सोचा तो कयि बार पर हिम्मत नही हुई. अब इस बेबी से में भी जी भर के खेलूँगा." रणबीर ने मधुलिका की चूत मे एक अंगुल पेलते हुए कहा.

उधर मधुलिका अब उसके पूरे लंड को बड़ी मस्ती से चूस रही थी. वह उसकी बड़ी बड़ी गोटियों को हाथों से धीरे धीरे भीच रही थी.

"तो बेबी को बाहर कर लो ना, देखो रस से भीग गई है." मधुलिका ने अपने चूतड़ उचे उठा दिए जिससे रणबीर को पॅंट नीचे खिसकाने मे आसानी हो जाए.

रणबीर ने पॅंट और पॅंटी एक साथ ही उसकी टाँगो से निकाल दी.

वह उसकी टाँगे चौड़ी कर उसकी चूत पर झुक गया और जीभ के अग्र भाग से चूत को छेड़ने लगा. मधुलिका ने रणबीर के सर पकड़ के चूत पर दबा दिया.

"खा जाओ इसे... ऑश.. बहोट सताती है ये... ऑश चूवसू.... रणबीर इसे....."


रणबीर भूके शेर की तरह चूत पर पिल पड़ा. उसने पूरी चूत मुँह मे भर ली और माल पूवे की तरह उसे खाते हुए चूसने लगा. वा चूत के दाने पर हल्के दाँत भी लगा रहा था. मधुलिका पागल हो कहने लगी.

"तुम तो पक्के खिलाड़ी हो. ओह.. यह तरीका कहाँ से सीखा है तुमने.. कितनो को अपनी टाँग के नीचे से गुज़ारा है... ओह बेबी चूसो इसे और ज़ोर से.. पूरी मुँह मे ले लो... श" मधुलिका छट पटाने लगी.

अब वह रणबीर का लंड को हाथ मे पकड़ हिला रही थी. चुचियाँ उसकी छाती से रगड़ रही थी और जहाँ तहाँ चूमने लगी थी.

रणबीर चूत को पूरी तन्मयता से चूस रहा था, बीच बीच मे वह मधुलिका की गांद मे उंगल भी पेल देता था और वह चिहुनक पड़ती थी.

"रणबीर अब और कितना तड़पावगे.... इसको अंदर क्यों नही डालते..."
मधुलिका ने रणबीर का लंड पकड़ कर कहा.

"में तो इसी का इंतेज़ार कर रहा था की कब आपका हुकुम हो देखिए ना यह मेरा कितना बैचाईन हो रहा है." रणबीर मधुलिका की दोनो टाँगे फैला उनके बीच मे जगह बनाते हुए बोला.

"देखो धीरे धीरे डालना, आज से पहले मेने इसे कभी भी अपनी चूत मे लिया नही है. तुम्हारा वैसे भी जो मेने पढ़ा है उससे बड़ा है."

"आप बिल्कुल फ़िकरा ना करें मालकिन वाह ये तो मेरा नसीब है की मुझे एकदम कुँवारी चूत मिल रही है." रणबीर मधुलिका की रस से भरी चूत पर अपना लंड का सुपाड़ा टीका चुका था. वह कुछ देर चूत पर अपने एक दम खड़े हो गये लंड को रगड़ता रहा.

मधुलिका नीचे छट पटा रही थी और इंतेज़ार कर रही थी की कब लंड भीतर घुसेगा. वह मेडिकल की स्टूडेंट थी और सब बातों का पता था हालाँकि वह अब तक चुदी नही थी.

"हां मेरे बेबी ये अभी तक कोरी है.. यह तेरी गुरु दक्षिणा है.. देख आज तक में इसमे केवल मेरी उंगल ही घुसाती आई हूँ... तुम अपने मोटे भाले से कहीं इसे फाड़ ना देना... अब डालो इसे अंदर..."

रणबीर ने धीरे से लंड का सूपड़ा अंदर ठेला. मधुलिका की चूत कसी हुई थी. वह भली भाँति जानता था की यह मालती या सूमी जैसियों की चूत नही है जिसमे एक ही बार मे पेल दिया फिर चाहे सामने वाली कितना ही रोती चिल्लाति रहे इसलिए रणबीर पूरी सावधानी बरत रहा था.

वह काफ़ी देर लंड का सूपड़ा उसकी चूत के उपर या थोड़ा सा भीतर रगड़ते रहा. जब उसने देखा की मधुलिका की चूत रस छोड़ने लग गयी है और छट छट की आवाज़ आने लग गयी है तो उसने धीरे धीरे लंड अंदर ठेलना शुरू किया.

रणबीर कुछ लंड को भीतर घुसाता और फिर रुक जाता और लंड को भीतर ही हिलाके कुछ जगह बनाता और तब अंदर करता. मधुलिका रणबीर के होंठ चूस रही थी और आनंद के मस्ती मे सिसकारियाँ भर रही थी.

"ओह रणबीर तुम तो इसके भी गुरु हो. इतनी छोटी उमर मे ही तुमने तो सब कुछ सीख लिया. घुड़सवारी, बंदूक और अब चदाई. मुझे तुमसे इसकी कला भी सीखनी है. बोलो सिख़ाओगे ना."

"हां बेबी ये कला तो काम करके ही सीखाई जाती है. बोलो तुम तय्यार हो." ये कह कर रणबीर ने चूत के भीतर तीन चार हल्के धक्के मारे और लंड मधुलिका की चूत मे पूरा समा गया.

"ऑश रणबीर लगता है तुमने पूरा भीतर घुसा दिया है. तुमने तो अपना इतना बड़ा बड़े ही तरीके से अंदर डाला. मेरी कई सहेलियों ने मुझे बताया था की पहले बहोट दर्द होता है. में पीछले एक साप्ताह से तुमसे चुदवाने के लिए बेकरार थी और रातों को में दो दो उंगलियाँ इसके भीतर पेल पेल के इसको तुम्हारा लंड लेने के लिए बड़ा कर लिया है. हां रणबीर मुझे सीखाना और मेरी चूत मे कर कर के सीखाना मस्टेरज़ी तुम जब भी सिख़ाओगे में तुम्हारे आगे मेरी चूत खोल दूँगी. अब तो खुश हो ना."

"हां बेबी अब में तुम्हे इस तुम्हारे बड़े बाबा के डाक बंग्लॉ मे रोज़ सिखाउँगा." ये कह कर रणबीर मधुलिका को दना दान चोदने लगा.

मधुलिका जैसी कई कुँवारी चूत चोद के रणबीर पूरा मस्त था. उसने अपनी मुठियाँ मधुलिका के फूले चूतड़ पर कस ली थी और वह उन चूतडो को घूथ रहा था. मधुलिका गांद उछाल उछाल कर चुदवा रही थी.

"ओह मेरे बेबी तुम कितने अच्छे हो. में भी अब तुमसे रोज़ चुदवाउन्गि. ओह रणबीर अब मुझे कस कस के चोदो..ओह बहोत मज़ा आ रहा है. आज तो चाहे तुम इसको फाड़ ही दो.. तुमसे फदवाने भी मज़ा है.. ऑश बेबी मेरे मम्मे भी चूसो." मधुलिका ने रणबीर को बाहों मे भर लिया था और वह बड़बड़ाती जा रही थी और गंद उछाल रही थी. लंड पच पच करता हुआ उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था.

बाहर तेज बारसत हो रही थी और बिजली भी चमक रही थी, जिसकी चमक से कमरा रह रह के रोशनी से नहा उठता. इधर मधुलिका की चूत पर रणबीर का लंड की बिजली गिर रही थी.

अचानक दोनो की भावनाओं के बादल उमड़ने लगे. आलिंगान कस गये, होंठों से चूँबनो की बरसात शुरू हो गयी, रफ़्तार बढ़ गयी, और मधुलिका की प्यासी धरती आग मे तपती धरती पहली बरसात के पानी के लिए तरस रही थी. अचानक बादल फॅट पड़े और प्यासी धरती की तेज धार से प्यास बुझाने लगा.

"श रणबीर सी ह दो मुझे तुम बिल्कुल चिंता मत करो... में टॅबलेट ले लूँगी... ओह इस प्यासी चूत को भर दो." मधुलिका ने रणबीर को कस कर भींच लिया और दोनो सुस्त पड़ गये.

फिर दोनो उठे अपने कपड़े पहने, कमरे मे वापस सब पहले जैसा ही कर दिया और कमरे के दरवाजे वापस बंद करने लगे. तभी रणबीर ने देखा की दूर से जीप इधर ही पोलो मैदान के तरफ आ रही है दोनो दरवाजे बंद कर के जल्दी से डाक बंग्लॉ के नीचे आ गये जहाँ घोड़े बारिस से बचने के लिए खड़े थे.

तभी जीप उनके सामने आके रुकी और मधुलिका जीप मे सवार हो रणबीर के आँखों से धीरे धीरे ओझल हो गयी. जब एक बार यह चुदाई का खेल शुरू हो गया तो इसके चलने मे आगे कोई बाधा नही थी.

मधुलिका अब कुछ समय पहले ही आने लगी. कुछ देर वह घुड़सवारी और राइफल चलाना सीखती और फिर रणवीर को अपनी सवारी करवाती और रणबीर के लंड को अपनी चूत और गंद मे चल्वाति.

रणबीर मधुलिका जैसीफूली गांद वाली लड़की की गांद मारे बिना कहाँ छोड़ने वाला था. दूसरे ही दिन एक चुदाई के बाद उसने उसकी गंद भी मार दी.

इधर मधुलिका रणबीर की पक्की दीवानी हो चुकी थी. वह उसे अपने सपनो का राजकुमार के रूप मे देखने लगी. ( दोस्तो ये मधुलिका का राज कुमार रणवीर था आपका राज शर्मा नही ) इसी तरह एक महीना बीत गया. अब मधुलका घुड़सवारी और राइफल पिस्टल चलाने मे निपूर्ण हो चुकी थी. साथ ही एक नंबर की चुड़क्कड़ और गंदू भी बन चुकी थी. जब तक रणबीर से कस के चुदवा या गंद नही मरवा लेती थी
वह बात बात मे बिगड़ उठती.

फिर एक दिन ठाकुर ने उससे कहा की दूसरे दिन ही वह ठाकुर और उसका लड़का हवेली मे आने वाले है. लड़का लड़की के मिलने के रस्म हवेली मे ही पूरी कर दी जाएगी और साथ ही मँगनी की रस्म भी.

मधुलिका को एक धक्का सा लगा, तो लड़का लड़की दीखाना महज एक दीखावा ही होना था होना वही था जो उसके बाप ने पहले से सोच रखा है. उसे अपना संसार बसने से पहले ही उजड़ता नज़र आया.

खैर दूसरे दिन ठाकुर और मधुलिका का होने वाला पति हवेली मे पहुँच गये. सारी हवेली उनके आदर सत्कार मे जुट गयी. फिर मधुलिका और उसके होने वाले पति को कुछ समय के लिए एकांत मे छोड़ दिया गया. देखने और एक दूसरे को समझने की रस्म मात्र दस मिनिट मे ही पूरी हो गयी. कहाँ मधुलिका एमबीबीएस की परीक्षा देकर
आई हुई लड़की और कहाँ वह ठाकुरों की झूटी आन बान मे जीने वाला वह ठाकुर का लड़का.

मधुलिका एक दम गोरी चिटी विलायेति मेम सी और एक अप्सरा सी सुन्दर और वह ठाकुर का लड़का सांवला सा और कुछ मोटा और भद्दा सा. हूर के बगल मे लंगूर वाली कहावत ऐसी ही जोड़ी को ध्यान मे रख कर मनाई गई थी.

खैर मधुलिका की ज़िद की वजह से माँगनी वाली रस्म पूरी नही हो सकी. उनके चले जाने के बाद मधुलिका ने शादी से साफ इनकार कर दिया. एक बार तो ठाकुर के रजपूती खून ने उबाल खाया पर एक लौटी बेटी के सामने वह ज़्यादा कुछ नही बोल पाया. पर ठाकुर को दाल मे कुछ काला नज़र आया और भानु को रणबीर और मधुलिका पर नज़र
रखने के काम पर लगा दिया.

मधुलिका और रणबीर पहले जैसे ही पोलो मैदान मे फिर से जाने लगे. मधुलिका फिर चुदने लगी. रणबीर उसे कुछ ही दिन की मेहमान बता रहा था, जिसे सुनकर मधुलिका चीढ़ उठती और कह देती की उस ठाकुर के लंड का उसके सामने नाम ना ले.

बातों ही बातों मे मधुलिका ने रणबीर को साफ कह दिया की वो विवाह करेगी तो सिर्फ़ रणबीर से या फिर कुँवारी रहेगी या आत्मा हत्या कर लेगी. रणबीर यह सुनकर ही भाव विहल हो गया और उस उसने मधुलिका को बहोत जम के चोदा.

उसके दूसरे दिन ही भानु के द्वारा ठाकुर के पास रणबीर और उसकी बेटी की कारगुजारियों की दास्तान का काला चिट्ठा पहुँच गया.

ठाकुर ने जब ये सुना तो रह रह कर फदक उठा. उसका बस चलता तो दोनो के सर कलम कर देता. पर किसी तरह उसने अपने आप पर काबू किया. भानु को तगड़ा इनाम दिया और हिदायत दी की किसी के सामने इस बात का ज़िकरा ना कारे.

दूसरे ही दिन ठाकुर ने शाम 4 बजे रणबीर को किसी दूसरे काम मे फँसा दिया और उस दिन मधुलिका मी मसोस के रह गयी.

उधर भानु गाँव से रणबीर के बाप और मा को लेके हवेली मे आ गया. उनका आना बिल्कुल गुप्त रखा गया और किसी को भनक नही लगे दी गयी. ठाकुर ने रणबीर के बाप को 50,000/- दिए और कहा की वह अपने गाँव वाईगरह सब को भूल रणबीर को ले रातों रात कहीं दूर चला जाए. यह जो रकम उसे ठाकुर दे रहा है वह उसकी गाँव की
संपाति से कहीं ज़्यादा है. इस रकम से वो कहीं दूर खेत खरीद सकता है, छोटा मोटा कारोबार कर सकता है.


ठाकुर ने उसके बाप को यह भी समझा दिया की वह जो कुछ कर रहा है केवल इसलिए की उसके बेटे रणबीर ने एक बार उसकी जान बचाई थी. नही तो रणबीर ने जो हवेली की इज़्ज़त पर हाथ डाला था उस अपराध मे उसकी बोटी बोटी काट दी जाती.

ये मौका ठाकुर उन्हे जो दे रहा है जिसका पूरा फयडा वे लोग उठाए और रातों रात कहीं दूर चले जाए और आइन्दा कभी उनका साया भी हवेली पर नही पड़ना चाहिए.

बुड्ढे बाप ने रोते हुए ठाकुर के पावं छुए और वचन दिया की वे कभी भी जिंदगी मे इधर का रुख़ नही करेंगे.

अपने वचन के अनुसार रणबीर, का बाप और उसकी मा रात के अंधेरे मे ना जाने कहाँ चले गए. उनके बारे मे किसी को कुछ पता नही चला.

सुबह उठते ही ठाकुर ने हवेली मे चोरी की खबर उड़ा दी. फ़ौरन पहरेदार रणबीर की तलाश हुई और नुमैइदों ने खबर दी की रणबीर गायब है. फ़ौरन रनबेर के गॅव मे आदमी दौड़ाए गये, वहाँ भी कुछ नही था. सारे रणबीर को कोसते हुए यह सोचते रहे की रणबीर हवेली का माल लेकर कहीं चंपत हो गया है.

मधुलिका को इस पर विस्वास तो नहीं हुवा पर वह अकेली इस प्रत्यक्ष प्रमाण के आगे क्या कर सक'ती थी.बेचारि मन मसोस कर रह गई
दोस्तो इस तरह ये कहानी यहीं ख़तम होती है फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ
दोस्तो कहानी कैसी लगी बताना मत भूलना

समाप्त































































































































































Tags = Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

Raj sharma stories-ठाकुर की हवेली --3

राज शर्मा की कामुक कहानिया
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ
ठाकुर की हवेली --3


हवेली मे नौकरों के रहने के लिए कमरे बने हुए है, तुम्हे एक कमरा मिल जाएगा पर हां रात मे बड़ी मुस्तैदी से तुम्हे हवेली का पहरा देना होगा. ध्यान रहे एक परिंदा भी पर ना मार सके."

फिर ठाकुर ने भानु से कहा की वह मुंशी से मिल के रणबीर का सारा इंतेज़ाम कर दे. रणबीर ठाकुर से इजाज़त ले घर को चला गया की वह शाम को कपड़े लत्ते ले हवेली पहुँच जाएगा.

रणबीर कुछ उदास कदमों से घर की और जा रहा था. वो सोच रहा था की सूमी जैसी नौजवान औरत उसे मिली पर अब उससे दूर रहना पड़ेगा. तभी उसका मन ठकुराइन और ठाकुर की जवान बेटी के बारे मे सोचने लगा. यह सोचते वह घर पहुँच गया. रामननंद उस समय घर पर ही था, रणबीर उसकी के पास बैठ गया.

रामानंद ने उसे समझाया की यह बहोत ही ज़िम्मेदारी का काम है और यह काम ठाकुर हर किसी को नही सौंपता, उसका भाग्या अक्च्छा है की ठाकुर इतनी ज़िमेदारी का काम उसे दे दिया. फिर कहा की वह इसे अपना ही घर समझे और जब मन हो यहाँ बेरोक टोक चला आया करे.

फिर रणबीर वहाँ से उठ कर भानु के कमरे की और चल पड़ा की अभी तो कमरा खाली होगा और वो कुछ देर आराम कर लेगा. तभी उसे मालती मिल गयी और उसने हंसते हुए कहा, "तो तुम्हे हवेली की पहरेदारी पर लगा दिया गया है, पेरेदारी तो तुम्हे कई करनी
पड़ेगी."

"चाची और पहेरेदारी से तुम्हारा क्या मतलब है?" रणबीर ने चाची के चूतडो पर चींटी काटते हुए पूछा.

"सब समझ जाओगे, अभी मुझे जाने दो मुझे हवेली जल्दी जाना है." ये कहकर मालती चूतड़ मटकाती रसोई मे चली गयी.

रणबीर भी भानु के कमरे मे बिस्तर पर लेट गया. करीब 3 बजे उसकी आँख खुली तभी सूमी कमरे मे आ गयी. वह बहोत ही उदास लग रही थी.

तभी सूमी रणबीर के बिल्कुल पास पलंग पर बैठ गयी और उसकी छाती मे मुँह छुपा लिया. रणबीर भी काफ़ी देर उसके बालों मे हाथ फेरता रहा और पूछा, "मालती चाची हवेली चली गयी क्या?"

"हां और बाबूजी भी सोए हुए हैं और 5 बजे से पहले उठने वाले नही है. ये रणबीर के लिए खुला निमंत्रण था की दो घंटे जितनी मस्ती लूटनि है लूट लो फिर शायद कब मिलना हो.

"पर भाभी इतनी उदास क्यों हो रही हो, तुम्हारा गाओं छोड़ कर थोड़े ही जा रहा हूँ. तुम जब कहोगी तुम्हारे खेत मे चला आया करूँगा." रणबीर ने ये बात सूमी की आँख मे झाँककर और उसके खेत यानी उसकी चूत को सहलाते हुए कही थी.

सूमी के लिए इतना ही काफ़ी था और वो रणबीर से कस के लिपट गयी.

"पता नही जब से तुम्हारे हवेली मे रहने की बात सुनी है कुछ भी अक्चा नही लग रहा. कुछ ही दीनो में ऐसा लगने लगा जिस तुम मेरे बरसों की ......."

"क्या बरसों की भाभी? रणबीर ने अब सूमी की चुचियों दबानी शुरू कर दी थी. वा जैसे ही उसके ब्लाउस के हुक खोलने लगा सूमी बोल पड़ी, "मेरे बरसों के साथी, मेरे बरसो के प्रेमी..... पर ये सब अभी दिन मे मत खोलो, जो करना है बिना खोले ही करो. ये गाओं है याहान कोई भी आकर द्वार खटका सकता है. ये कह कर सूमी रणबीर की गोद मे बैठ गयी और दोनो टाँगे चौड़ी करती हुई रणबीर की छाती पर अपने शरीर का सारा बोझ डाल दिया.

इससे सूमी का बदन पीछे को झुक आया और उसकी चूचियों के दो शिखर हवा मे अपना मस्तक उठाए हुए थे. रणबीर ने दोनो उन्नत शिखरों को अपने हाथों मे ले लिया और उन्हे मसालने लगा.

"क्या भाभी उस दिन झोपडे मे भी अंधेरे मे कुछ नही देख सका और आज भी मना कर रही हो. ऐसा कह रणबीर ने सूमी के होठों को अपने होठों मे ले लिया और उन्हे चूसने लगा

"हाय ऐसे ही चूसो ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह खूब दबाऊओ तुम्हारे हाथों मे तो जादू है आज खेत भी देख लो और उसकी सिंचाई भी कर दो....." सूमी अब पलट चुकी थी और रणबीर के मुँह मे अपनी जीब डाल रही थी.

तभी रणबीर ने सूमी की दोनो टाँगे हवा मे उँची उठा दी और उसका घाघरा अपने आप कमर के चारों और सिमट गया और झाड़ियों से हरा भरा खेत रणबीर के चरने के लिए सामने खुला पड़ा था.

रणबीर सूमी की चूत को एक टक देखता रहा. क्या उभरी हुई मांसल चूत थी. चूत के होठों मे जैसे हवा भरी हुई हो, बीच की लाल रेखा स्पष्ट नज़र आ रही थी, पर्रो पर झांतो का झुर्मुट था और चूत के साइड के काले लंबे बाल इधर उधर बिखरे हुए थे.

रणबीर ने सूमी को थोडा अपनी और खींच उसके चूतड़ अपनी जाँघो पर रख लिए और सूमी के घूटने उसकी छाती से लगा दिए. अब मतवाली चूत पूरी तरह खुल के मलाई माल पुए खाने की दावत दे रही थी.

रणबीर ने कोई देर नही की और सूमी की चूत के इर्द गिर्द जीभ फिरने लगा. बीच बीच मे जीब की नोक से चूत की दरार मे एक लकीर खींच देता और सीमी सिहर के सिसकारियाँ लेने लगती.

रणबीर ने चूतड़ के दोनो तरबूज अपने हाथ मे ले लिए और जीब जड़ तक पेल उसकी चूत के अंदर के हर हिस्से को जीब से छूने लगा, ये थी उसकी कला , जो एक बार इसका स्वाद चख लेता जिंदगी भर के लिए उसी का होके रह जाता.

सूमी ज़ोर ज़ोर से हाँपने लगी, साँसों की गति तेज हो गयी, आँखों मे लाल डोरे उभर आए और रणबीर के लंड को पॅंट के उपर से ही बुरी तरह से मसल्ने लगी.

"ऑश रनबीईएर अब कब तक तड़पाओगे. कुछ करो ना.... क्यों मेरी जान ले रही हो.... खेत सामने खुला पड़ा है जी भर के देख तो लिया.....जालिम अब नही सहा जाता हे मेरे राजा रणबीर अब .... आआओ... ना." सूमी बदहवास हो बड़बड़ा रही थी.

वह रणबीर के पॅंट के बटन खोल कcछि सहित उसे उतार चुकी थी और रणबीर अब केवल बनियान मे था. उसका लंड को पकड़ कर अपनी और खींच रही थी उसका बस चलता तो वा उसके लंड को उखाड़ कर अपनी तड़पति चूत मे खुद ही घुसेड लेती.

रबनीर ने भी देर नही की और उसकी टॅंगो के बीच आसन जमा चूत के मुँह पर लंड टीका दिया और एक ही धक्के मे अपना लंड जड़ तक पेल दिया एक बार तो सूमी की जान जैसे गले तक आ गयी हो. उसके शरीर ने एक झटका खाया फिर उसने दोनो बाहें आगे बढ़ा कर रणबीर की कमर जाकड़ ली और नीचे से गंद चला धक्के देने लगी.

पच पच की मधुर धुन के साथ चुदाई शुरू हो गयी. पहले कुछ हल्के और धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ती गे और बाद मे तो तूफान आ गया.

है मेरे राजा कब तक मुझे तुम्हारे उस गान्डू और बुद्धू दोस्त के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ेगी. तुम मिले भी तो दो दिन के लिए. है मेरे रणबीर मुझे अपने बच्चे की मा बना दो ना. ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऐसा सुख तो मेने आज तक नही पाया. क्या चुदाई करते हो..... अपने दोस्त को भी सीखा दो ना नही तो वो लड़कों का लंड चूस सकता है... गंद मरवा सकता है... " सूमी तूफ़ानी रफ़्तार से गंद उछालते हुए चुदाते चली जा रही थी और जो मन मे आए बोलते जा रही थी.

"है भाभी क्या चोट तुम्हारी जैसे किसी कुँवारी लड़की को चोद रहा हूँ..... ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाआँ मेरी सूमी रानी मेरी जान हायययी तुम्हे चोद के तो में तुम्हारी गंद मारूँगा....है में जा रहा हूँ..... " रणबीर ने सूमी के चूत मे कई धक्के कस के मारे और धीरे धीर दोनो पस्त पड़ते गये.

कुछ देर मे सूमी उठी और वहाँ से बाथरूम के तरफ चली गयी. रणबीर भी उठा और एक लूँगी लपेट वापस बिस्तर पर चित होके लेट गया. कुछ देर मे सूमी चाइ की दो प्यालियों के साथ वापस लौटी. सूमी भी रणबीर को एक प्याली दे बिस्तर पर बैठ गयी और दोनो चाइ की चुस्कियाँ लेने लगे.

"अब तो हवेली मे ही रहोगे, बड़े लोंगो के बीच हमारी याद आएगी ना?" सूमी ने पूछा.

"भाभी वो तो नौकरी है और हम लोगों को बड़े लोगों से उनकी बड़ी बातों से क्या लेना देना. दिल तो तुमने खेत मे रख लिया है, अब तो खेत की ठंडी हवा की सैर तो करते ही रहना पड़ेगा" रणबीर ने चाइ ख़तम की और खाली प्याली सूमी को दे दी.

"सुना ही की ठाकुर की एक बुल्कुल जवान ठकुराइन है, कहीं बगीछों की सैर करते करते खेतों को ना भूल जाना." सूमी ने रणबीर की बनियान उँची कर दी छाती के बालों मे हाथ फिराते हुए कहा."

"भाभी बागीचो मे पहेरे भी बहुत कड़े होते है, खेतों जैसा खुलापन कहाँ..." रणबीर ने कहा.

"पर पहेरेदार भी तो तुम्ही हो वहाँ के.. " कह सूमी सुबकने लगी.

"और भाभी तुम कह रही थी लंड का चूसना, मराना में उस समय कुछ समझा नही." रणबीर बे बिल्कुल बात पलटते हुए और अंजान बनते हुए पूछा.

"पता नही तुम अब तक कैसे बच गये नही तो ये बात ना पूछते. अब तुम्ही बताओ मेरे मे क्या कमी है पर... पर ये तो लड़कों के साथ वह सब कुछ करते है." सूमी रणबीर की छाती मे मुँह रगड़ते हुए उसकी छाती के घुंडी को मुँह मे ले चूसने लगी.

"बता ना मेरी सूमो रानी की वो क्या करता है?" रणबीर ने सूमी का घाघरा कमर तक उठा दिया उसकी फूली फूली गंद को सहलाने लगा. तभी उसकी एक उंगल सूमी की गंद के गोल छेद पर पहुँच गयी और वह उंगल से उसे दबाने लगा.

"यही वा इससे करता है और करवाता है जो तुम अंगुल से कर रहे हो." सूमी ने लूँगी के उपर से उसके लंड को मुथि मे लेकर कहा.

"तो ऐसे बोलों ने की लड़कों की गंद मारता है और उनसे अपनी गंद मरवाता है... तब तो वो तुम्हारी भी बिना मारे नही छोड़ता होगा." अब रणबीर ने अपनी नेक उंगल मे ढेर सारा थूक लगा उसे सूमी की गंद मे पूरा डाल दिया और अंगुल को गंद के भीतर हिलाने लगा.

"उईईई माआ दर्द कर रहा है ना... निकालो उसे वहाँ से.... तुम सब मर्द एक जैसे होते हो... खेत से मन नही भरा क्या जो सूखे कुएँ मे उतार रहे हो...." पर रणबीर ने एक नही सुनी और अब वह ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगल अंदर बाहर करने लगा.

"बोलो ना भाभी वो तुम्हारी गांद मारता है या नही."

"हां मारता है.... गंद मारके मुँह फेर कर सो जाता है और में रात भर जलती रहती हूँ. नसीब जो खराब है मेरा जो ऐसे गांडो के गले बँध गयी."

अब रणबीर ने सूमी को बलपूर्वक पलट दिया और उसकी गंद हवा मे उठा कर उसकी गंद के दरार मे मुँह दे दिया और गंद के छेद को जीब से खोदने लगा और बोला, "पर मेरी जान तुम्हारी गांद है बहोत मस्त, आज एक बार मेरे से मन करके मरवा लो फिर तुम कहोगी की गंद मरवाने मे भी एक अलग ही मज़ा है." रणबीर अब सूमी के गांद पर
थूक डाल रहा था और अपनी जीभ से उसे अंदर तक लसीला कर रहा था.

"तुम जीब चलाते हो तो ना जाने अजीब सी सुरसुरी होती है... ओह कैसा लग रहा है... उसने तो कभी भी ऐसे जीब से नही चाटा... ओह पर तुम्हारा उससे बहोत बड़ा और मोटा है... यह अंदर चला जाएगा?

"अरे भाभी तुम एक बार मन से कह दो और हां खुला मन करके मर्वानी है तो बोलो बाकी सब मुझ पर छोड़ दो. एक बार मेरे से मरवा लॉगी तो जब भी चुदवाओगि तो खुद गंद मराने के लिए कहोगी." रणबीर ने कहा.

"ऐसी बात हो तो मार लो मेरी गंद पर धीर धीरे और बिल्कुल हल्के हल्के मारना."

रणबीर ने लंड के सुपाडे पर ढेर सारा थूक लगाया और गंद के छेद पे लगा धीरे से अंदर घुसा दिया. सूपड़ा पूरा चला गया तो फिर बाहर निकाला और वापस थूक लगाया और फिर भीतर तेल दिया. पर इस बार कुछ देर अंदर बाहर करता रहा और बोला.

"देखा भाभी तुम्हारी गंद थूक लगा के कितने प्यार से मार रहा हूँ बोलो दर्द हुआ? अब तुम मन करके गंद मरवा रही तो तो में मन करके तुम्हारी मस्त गंद मार रहा हूँ."

अब रणबीर धीरे गंद मे लंड ठेलना शुरू किया, सूमी गंद ढीली छोड़ती तब रणबीर लंड का बहाव भीतर बढ़ता और कुछ इंच अंदर सरका देता. जब सूमी गंद को सिकोडत्ती तब रुक जाता.

"मेरे देवर राजा तुम जीतने चूतिए हो उतने ही तुम गान्डू भी हो. वह साला मेरे वाला भादुआ तो सुखी ही मार देता है, सामने वाली को मज़ा आ रहा है या नही उसे कोई मतलब नही.

"हां अब अछा लग रहा है, "अब सूमी भी समझ गयी थी की गंद मे लंड कैसे पिलवाया जाता है.

अब वा जब गंद ढीली छोड़ती तब खुद पीछे तेल गंद मे लंड लेने लगी और रणबीर का पूरा 9' का लंड उसकी गंद मे समा गया.

'अब देख साली मेरा गान्डू पना.....ले झेल... अरे साली ये सूखा कुँवा नही ये तो तो तेरी केशर क्यारी है. अरे भोसड़ी की आज तक तूने एक भद्वे से गंद मरवाई है. कभी उसने मारी तेरी इस तरह से. " अब रणबीर उसे गालियाँ देते हुए पूरा बाहर खींच फिर एक ही धक्के मे जड़ तक पेल सूमी की गंद मार रहा था.

हाय.. मेरे राजा मुझे अपनी बना लो... मुझे लेके भाग जाओ... फिर दिन मे खूब गंद मारना और रात मे खूब चुदाई करना ..... ओह बहुत मज़ा आ रहा है...... कस के धक्के लगाओ में तो वैसे ही डर रही थी..... " सूमी ने पहले एक उंगल चूत मे डाली और बाद मे दो उंगल चूत मे डाल अंदर बाहर करती जा रही थी. उंगलियाँ फ़च फ़च करती उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी.

तभी रणबीर के लंड ने सूमी की गंद के अंदर गरम गरम ढेर सारा वीर्य गिरा दिया. सूमी भी जोश मे आ अंगुल चूत मे और ज़ोर ज़ोर से पेलने लगी और उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया. सूमी की गंद से वीर्या चू रहा था. कुछ देर वो बिस्तर पर लेटी रही फिर घाघरे से गंद पौंचती हुई उठी और बोली.

"तुम भी नहा धो कर फ्रेश हो जाओ, तुम्हारा हवेली जाने का समय हो रहा है और हाआँ... अपनी इस भाभी... सूमी को भूल मत जाना."

शाम 5.00 बजे रणबीर नहा धो कर रामानंद से आशीर्वाद लेके अपने नये मुकाम पर चल पड़ा.

हवेली पहुँचने पर रणबीर को उसका नया आशियाना बता दिया गया. यह हवेली की चारदीवारी के भीतर ही बना हुआ एक कमरा और रसोई का मकान था. कमरे और रसोई के बीच एक बड़ा सा बरामदा था. बरामदे के बाहर कुछ पेड़ थे और एक तरफ एक कुँवा था पास ही एक बड़ा सा पठार की शीला थी जिस पर नाहया और कपड़ों की धुलाई की
जेया सकती थी. वहीं पास सर्विस टाय्लेट भी बना हुआ था.

फिर हवेली के मैं गेट के पास बना एक छोटा सा कमरा उसे समझा दिया गया. यही उसकी कर्म भूमि थी जहाँ रहते हुए उसे हवेली मे शाम 6.00 बजे से सुबह 6.00 बजे तक हर आने जाने वाले पर नज़र रखनी थी. हवेली की सुरक्षा की देख भाल करनी थी. उसे दो वर्दियाँ दी गयी थी, बंदूक, कारतूस भरा पड़ा था, एक टोपी एक सीटी और कुछ ज़रूरी सम्मान भी दिया गया. हवेली के नियम और क़ायदे उसे समझा दिए गये थे.

रणबीर ने बड़ी मुस्तैदी से अपना काम संभाल लिया. बहादुर चौकन्ना और आछा निःशाने बाज तो वह पहले से ही था.

फिर वर्दी का रुबाब और ख़ास चौकीदार के रुतबे ने देखते देखते उसे हवेली का ख़ास आदमी बना दिया. फिर ठाकुर साहब भी उस पर मेहर बन थे., जो जल्दी ही और नौकरों पर उसका हुमकुम भी चलने लगा था.

हालाँकि उसकी ड्यूटी रात की थी और दिन वो आराम कर सकता था पर रणबीर सुबह तक अपनी ड्यूटी बजा 11 बजे तक सोता था. फिर नहा धो कर वो अपने लिए खाना बनाता और खाना खाने के बाद फिर हवेली मे आ जाता.

हवेली के मुख्य द्वार पर उसकी ड्यूटी 6.00 बजे से शुरू होती इसलिए वो अस्तबल मे चला जाता, वहाँ उसने सभी से अछी दोस्ती कर ली थी. इन सब का नतीज़ा ये हुआ की वो बीस दिन मे ही एक अक्च्छा घुड़सवार भी बन गया हा. इन्ही दीनो मे उसने जीप चलना भी सीख लिया था.

ठाकुर को जब इन सब बातो का पता चला तो ठाकुर खुश हुआ और ये सब उसकी अलग से काबिलियत समझी गयी और उसी हिसाब से उसकी तरक्की भी हो गयी. जहाँ दूसरे नौकर हवेली के घोड़ों पर सवारी करने के ख्वाब भी नही देख सकते थे और ना ही जीप के आस पास फटक सकते थे.

फिर एक दिन ठाकुर ने शिकार का प्रोग्राम बनाया. इस बार एक ठाकुर की हवेली मे एक और ठाकुर हवेली का मेहमान बना हुआ था जिसके साथ मधुलिका की शादी की बात चल रही थी. मधुलिका अगले साप्ताह तक एमबीबीएस के इम्तिहान देकर हवेली मे आने वाली थी. फिर उसकी मर्ज़ी से शादी की बात करनी थी. उसके आने के स्वागत की तय्यारियाँ हवेली मे चल रही थी. दूसरा ठाकुर भी ठाकुर के साथ शिकार पर जा रहा था.

इसलिए इस बार की तय्यारियाँ कुछ अलग ही थी, ये एक दिन और दो रात का प्रोग्राम था. ठाकुर रणबीर जैसे बहादुर इंसान का इस शिकार पर ना रहने का बार बार अफ़सोस जता रहा था. पर इतनी जल्दी हवेली की सुरक्षा के लिए कोई दूसरा रखा भी तो नही जा सकता था. खैर ठीक दिन ठाकुर अपने लश्कर के साथ शिकार के लिए रवाना हो गया.

घोड़े, साईस, जीप ड्राइवर और कई मुलाज़िम ठाकुर के साथ शिकार पर चले गये, पीछे रह गये ठकुराइन, कुछ दासियाँ इकके दुके नौकर और रणबीर.

ठाकुर साहेब अपने लश्कर के साथ शाम 4 बजे निकल गये. मालती को ठकुराइन ने पहले ही बता दिया था की उसे दो दिन अब हवेली मे ही रहना पड़ेगा. इसके अलावा भी ठकुराइन ने मालती से बहोत कुछ कहा था. मालती जैसी ही दो तीन औरतें हवेली मे काम करने वाली थी पर वो सब रात मे अपने अपने घर चली जाती थी.

हवेली के नौकरों को हवेली के भीतर आने की आग्या नही थी इसलिए वो अपना काम ख़तम कर रणबीर को मिले जैसे कमरों मे रहना पड़ता था. इसलिए रजनी ने मालती को सहेली ज़्यादा और नौकरानी कम समझती थी और उसे हवेली मे अपने साथ रख लिया था. ठाकुर की अनुपस्थिति मे अब हवेली की कमान उसके हाथ मे थी.

रणबीर ने ठाकुर के जाते ही हवेली का मेन गेट बंद करवा दिया. मेन गेट मे एक छोटा दरवाजा था जिसमें से लोग हवेली मे आते जाते थे. वो अपनी ड्यूटी पर मुस्तैदी से गेट के पास बने कमरे मे मौजूद था. रात मे वो 4-5 बार पूरी हवेली का चक्कर लगाता था. नयी जगह नये लोग फिर नये शौक़ जैसे घुड़सवारी, जीप चलाना इन सब मे उसका इतना मन लग गया की उसे सूमी की याद भी नही आई.

मालती चाची को वो हवेली से आते जाते देखता था. लेकिन इस महॉल मे कोई बात करने का मौका उसे नही मिला था. रात के 10.00 बजे होंगे, रणबीर अपने कमरे मे बैठा था तभी उसे किसिके कदमों के चलने की आवाज़ सुनाई पड़ी.वो फ़ौरन चौकन्ना हो गया. तभी उसे कंबल मे लिपटा एक साया उसके कमरे की तरफ आता दीखाई दिया. उसकी बंदूक पर पकड़ मजबूत हो गयी, पास आते ही उस साए ने कंबल उतार दी और रणबीर ने देख की वो मालती चाची थी.

"चाची आप इस समय और यहाँ, किसी ने नेदेख लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा." रणबीर ने चौंकते हुए कहा.

मालती ने उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने पीछे आने के लिए कहा. मालती को इस रात के समय मे अकेले देखते ही रणबीर की कई दीनो की शांत नदी हुई भावनाए भड़क उठी.

सूमी ना सही पर मालती इन हालत मे क्या बुरी थी, ये सोच वा तुरंत मालती के पीछे हो लिया. मालती उसे हवेली के भीतर ले जाने लगी तो उसके कदम रुक गये और उसने पूछा, "चाची हवेली के भीतर तो किसी मर्द को इस समय जाने की इजाज़त नही है?"

तब मालती ने उससे कहा, "अब ठकुराइन ही इस हवेली की हेड है और उसे तुमसे कुछ बात करनी है."

रणबीर असमंजस मे मालती के साथ हवेली मे घुस गया. मालती उसे कयी चक्कर दार गालियों से घूमाते हुए एक बड़े कमरे मे ले गयी. दीवारों पर बड़े बड़े आईने, बीचों बीच एक बड़ा सा तखत पुर कमरे मे बीचे आलीशान गाळीचे और दूधिया प्रकाश मे नाहया आह विशाल कमरा था. रणबीर की तो एक बार आँखें चौंधियाँ गयी.

तभी बहोत ही आकर्षित सारी मे सजी धजी क्रीम सेंट से महकती ठकुराइन उसके सामने आई और आदेश भरे लहजे मे बोली, "ये बंदूक और कारतूस उतार एक तरफ रख दो. यहाँ इनकी कोई ज़रूरत नही है. रणबीर ने फ़ौरन उन्हे एक तरफ रख दिया. वो ठकुराइन के रूप को देख रहा था इतने पास से ठकुराइन को उसने पहले कभी नही देखा था. उसके जीवन मे कई लड़कियाँ और औरतें आई थी पर ठकुराइन रजनी के मुक़ाबले कोई भी नही थी.

"ठाकुर साहेब से हमने तुम्हारी बहादुरी के कई कारनामे सुने है. हां इसी मालती को भी तुमने बहोत बहादुरी दीखाई है. हम भी तुम्हारी बहादुरी देखना चाहते है. हमे भी पता तो चले की तुम हवेली को संभाल सकते हो और जो हवेली मे हैं उन्हे भी." ठाकुरानी ने कहा.

तभी मालती ने रणबीर की तरफ एक आँख दबाई. खेला खाया रणबीर सब समझ गया. गाँव के ऐसी कई औरतों को तो वह रंडी और कुत्ते कह फ़ौरन काबू मे कर लेता था पर इस बार मामला ठकुराइन का था पर अंत तो एक जैसा ही होना था.

"ठकुराइन जी आपके के लिए तो में अपनी जान दे दूँगा, मेरे रहते आप पर कोई आँच ना आएगी, आअप जो भी हुकुम करें बंदा पीछे नही हटेगा." रणबीर ने झुक कर सलाम किया.

"मुझे ऐसे ही लोग पसंद है जो जो भी बात कही जाए उसे तुरंत मान ले. पर पहले मालती के साथ जाओ और यह जैसे कहे वैसे ही करते जाना. हां याद रहे उस दिन जिसा नहीं जब यह तीन दिन तक यहाँ आके रोई थी." ऐसा कह ठकुराइन कमरे से बाहर चली गयी.

तब मालती ने कहा, "पहले इस कमरे मे बने बाथरूम मे जाओ. वहाँ सब कुछ मौजूद है, इतरा, फुलेल, सेंट, क्रीम, साबुन शॅमपू और तुम्हारे लिए चोला. चूड़ीदार और दुपट्टा, सज धज कर बाहर आओ." यह कह कर मालती जिधर ठकुराइन गई थी उधर चल पड़ी.

रणबीर अपने भाग्य पर इठलाता हुआ स्नान घर मे गया और जो मालती ने बताया था वो सब वहाँ सलीके से रखा हुआ था. आज वह जी हर के नहाया. ऐसा साबुन उसने जिंदगी मे पहले कभी नही लगाया था. शरीर का रोम रोम फुलक उठा. फिर जब उसने वस्त्रा पहेने और अपने आप को आईने मे देखा तो देखता ही रह गया. उन वस्त्रों मे वह किसी राजकुमार से कम नही लग रहा था. वह बाहर आया तो उसने मालती को इंतेज़ार करते पाया.

मालती इस बार उसे दूसरे कमरे मे ले गयी, जो पहले कमरे से भी आलीशान था. सुंदरता और सजावट का क्या कहना. एक से एक बेश कीमती सामानों से सज़ा हुआ था वा कमरे. होता भी क्यों नही कमरा मधुलकिया के लिए तय्यार हुआ था जो अगले साप्ताह यहाँ आने वाली थी. कमरे के बीचों बीच रखी एक विशाल पलंग पर रजनी एक नाइटी पहने अढ़लेटी मुद्रा मे थी. वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

रणबीर बहोत देर तक उसकी तरफ नही देख सका और उसकी नज़रें झुकती चली गयी. तभी कोमल आवाज़ उसके कान मे पड़ी, "रणबीर आओ, यहाँ पलंग पर मेरे पास बैठो. रणबीर पलंग के कोने पर बैठ गया और ठकुराइन से परे देखने लगा.

"तो मालती यही है वो जिसने उस दिन तुम्हारी गांद की दुर्गति की थी, और तुम तीन दिन तक ठीक से चल भी नही पे थी. तो इतनी ताक़त है इसमे. मेरा मतलब इसके मे. हम नही मानते जब तक की हम खुद नही देख ले."

"ठकुराइन विश्वास कीजिए, मेरी गांद को तो आपने खुद देखी है, बल्कि खोद खोद के भी देखा है. मेरे मना करते रहने पर भी यह नही मना और मेरी गांद की दुर्गति कर के ही छोड़ी."

रणबीर जो सुन रहा था उसे अपने कानो पर विश्वास नही हो रहा था. ये दोनो औरतें किस तरह खुले शब्दों का इस्तामाल कर बात कर रहे थी और मालती चाची क्या ठकुराइन से इतनी खुली हुई हो सकती है.

उनकी बातें सुन कर रणबीर का भी लंड खड़ा होने लग गया था और सोचा जब ओखली मे सर दे ही दिया है तो मूसलों से क्या डरना. उसे वही करना है जैसे कहा जाता है. अपनी तरफ से कोई उत्तावलापन नही दीखाना है. बड़े लोगों का मामला है. बड़े बुड्ढे ठीक ही कहते है की बिना सोचे समझे बड़े लोगों की गंद मे नही बढ़ाना चाहिए. उनका क्या कब गंद भींच ले और बाहर निकलना मुश्किल हो जाए.

"ठीक है पहले हम अपनी आँखो से सब देखेंगे फिर फ़ैसला करेंगे. मालती उठो और तुम दोनो वह सब मेरी आँखों के सामने करो. इसे भी ठीक से समझा देना. जैसे उस दिन हुआ था वैसे ही होना चाहिए नही तो भोसड़ी की गंद मे भूस भरवा देंगे. मैं भी ठकुराइन हूँ कोई कोठे पर बैठी रंडी नही की कोई मा का लॉडा आए और चोद्के लंड समेटता हुआ चला जाए.

मालती ने एक एक करके अपने कपड़े उतारने शुरू किए और देखते ही देखते पूरी नंगी हो गयी. रणबीर भोंचका सा वैसे ही बैठा रहा.

"चल तू भी उतार और शुरू हो जा." ठकुराइन की आवाज़ गूँजी.

रणबीर भी मालती की तरह नंगा हो गया. उसका लंड खड़ा तो था पर पूरी तरह से तना नही था. तब रजनी ने मालती को पलंग पर चोपाया कर दिया और रणबीर को कहा की उसकी गंद पहले ठीक से चाट कर तय्यार करे.

रणबीर को इन दो औरतों की हरकतें कुछ अटपटी लग रही थी पर यह सारा खेल और महॉल उत्तेजना पैदा करने वाला था.

रणबीर ने अपना मुँह मालती की हवा मे उँची उठी हुई गांद पर झुकाया और गांद के छेद पर जीभ फिराने लगा. अभी उसका मुँह सूखा हुआ था. वह बीच मे रजनी के चेहरे की तरफ भी देख रहा था और रजनी एक उंगल उठा देती की लगे रहो अपने काम पर. रणबीर काफ़ी देर तक मालती की गांद चाटता रहा मालती ओह्ह्ह हाआँ करती उससे अपनी गांद चटवाती रही.

तभी रजनी ने कहा, "मालती तू तो कहती थी की इसका लंड लोहे की सलाख की तरह कड़ा है, पर मुझे तो ढीला ढाला सा ही लग रहा है."

मालती अब बैठ गयी और रणबीर के लंड को मुठियाने लगी और बोली, "ठकुराइन आपको देख कर शर्मा रहा है."

"अक्चा तो ये बात है, चल रे हां क्या कहते हैं इसको,, हां अपना लॉडा मेरे हाथ मे दे. तो ये मुझे देख कर मुरझाया हुआ है, तब तो मुझे ही पूरा खड़ा करना पड़ेगा. रणबीर ने रजनी के आगे अपना लंड कर दिया ज्सिका रजनी बहोत ही बारीकी से निरक्षण करने लगी.

वो लंड की चॅम्डी को उपर नीचे करने लगी. पूरी चमड़ी छील सूपदे पर अंगूठे का दबाव दे रही थी.

तभी रजनी ने रणबीर के लंड को अपने मुँह मे ले लिया. कई देर तक वो लंड पर अपनी जीब फेरती रही फिर मुँह मे पूरा लंड ले मुँह आगे पीछे करते हुए चूसने लगी.

कुछ देर तक लंड चूसने के बाद रजनी ने लंड को मुँह से निकाला और बोली, "हां अब पूरा तय्यार है, वाह क्या मस्ताना और सख़्त लंड है, चल मालती अब तू भी तय्यार हो जा अपने पीचवाड़े मे लंड लेने के लिए. हूँ अब मज़ा आएगा." रजनी ने एक भूकि बिल्ली जैसे चूहे से खेलती है वैसे ही रणबीर के लंड से खेल रही थी. उसकी आँखों मे चमक थी. वासना से उसका चेहरा सुर्ख लाल हो कमरे की दूधिया रोशनी मे चमक रहा था.

मालती फिर पलंग पर घोड़ी बन गयी. रजनी का इशारा पाते ही रणबीर उसके पीछे आ गया और अपना लंड मल्टी की गांद के छेद पर रख दिया. रजनी ने थूक से साना लंड थोड़ा सा दबाव देते ही अंदर जाने लगा. मालती के शरीर ने एक बार झटका खाया. पर अब रणबीर के बस की बात नही थी. फिर ठकुराइन ने उसकी गैरत को ललकार दिया था. तो उसने दाँत भींचते एक तगड़ा धक्का मालती की गांद मे दिया और मालती की चीख उस हवेली के सन्नाटे मे गूँज गयी.

"है रे मार डाला रे... में मर गयी रे... बाहर निकालो ये लोहा मेरी गाअंड से." मालती छटपटा रही थी

पर रणबीर ने एक ना सुनी और अपने लंड को थोड़ा बाहर निकालते हुए फिर एक धक्का मार पूरा लंड अंदर पेल दिया.

रजनी को मज़ा आ रहा था और वो रणबीर को उकसा रही थी.

"वा रे मेरे ठाकुर के शेर, हां मार साली की और ज़ोर से मार. देख साली की कितनी फूली गांद है. मार मार मार के हवेली का गेट बना दे साली की गंद को. इसका जेठ तो सला बुद्धा रंडुआ है और भोसड़ी का वह भतीजा साला लुंडों का लंड चूस्ता है और उनसे खुद गांद मरवाता है."

रजनी ने अपनी नाइटी मे हाथ डाल दिया था और हाथ से अपनी चूत को रगड़ते हुए रणबीर को उकसाए जा रही थी.

"ठकुराइन ये आपके सामने ही मेरी गांद का भुर्ता बनाए जा रहा है और आप मज़े ले रही है. है लंड है या मूसल गांद....छील्ल..... के रख....दी....मरी जा रही हूँ." मालती हाय तोबा मचाती रही और रणबीर तब तक उसकी गांद मरता रहा जब तक की उसके रस से मालती की गांद पूरी ना भर गयी हो और उसकी गांद से रणबीर का रस चुने ना लग गया हो.

रणबीर हांफता हुआ धीरे धीरे सुस्त पड़ गया.

"ला तेरी गांद इधर कर, मुझे देखने दे उस दिन जैसे मारी या नहीं." ये कहकर रजनी मालती की गांद पर झूक गयी और दोनो हाथो से जितना फैला सकती थी उतनी उसकी गांद फैला दी. मालती की गांद मे अंदर तक देखा जा सकता था. तभी रजनी ने आधी से अधिक जीब उसकी गांद मे दे दी और जीभ अंदर की गंद के अंदर की दीवारों पर चलाने लगी. वह कई बार मालती की अच्छी तरह से मारी हुई गांद चाटती रही.

फिर मालती उठी और सीधी बाथरूम की और भागी.कुछ देर बाद वापस बन संवर के निकली. तभी रजनी ने इशारा किया और मालती ने एक बादाम घुटे हुए दूध का ग्लास टेबल पर से उठा रणबीर क्को पकड़ा दिया. रणबीर ने एक घूँट मे ग्लास खाली कर फिर मालती को थमा दिया.

"जाओ तुम भी बाथरूम मे चले जाओ वहाँ सब कुछ मौजूद है." ठकुराइन ने कहा.

रणबीर उठा और बाथरूम मे चला गया. फुवरे के नीचे ठंडे पानी से स्नान कर, क्रीम सेंट लगाएक मखमली तौलिए को लपेट जब वो बाहर आया तो मालती और रजनी दोनो पलंग पर नंगी थी.

रजनी पीछे एक बड़े तकिये का सहारा लिए टाँगे चौड़ी कर के बैठी थी, उसकी झांते भरी चूत रणबीर को सॉफ दीख रही थी जिससे मालती चाची खेल रही थी, बीच बीच मे उसके अंदर जीब डाल रही थी, उसको चाट रही थी और रजनी मालती का सिर अपनी चूत पर दबा रही थी.

रणबीर पास पड़ी टेबल से अपने चूतड़ टीका कर ये लुभावना दृश्या देख रहा था. धीरे धीरे तौलिए मे लिपटा उसका लंड खड़ा होने लगा. कमरे की दूधिया रोशनी मे रजनी का गोरा बदन चमक रहा था. ठकुराइन रणबीर की कल्पना से कहीं ज़्यादा सुंदर थी. ठकुराइन की जगह और कोई होती तो ये सब देख रणबीर उस पर चढ़ बैठता पर यहाँ बिना ठकुराइन की आग्या के वो हिलने की भी नही सोच सकता था.

तभी रजनी पलंग से उठी और रणबीर के सामने आई और उसके तौलिए को एक झटके मे खींच पलंग पर फैंक दिया. रणबीर का लंड खड़ा था. तभी रजनी घुटनो के बल उसके सामने ज़मीन पर नीचे बैठ गयी और उसके लंड पर जीब फैरने लगी. फिर लंड को मुँह मे लेने लगी.

वह जीब थूक से तर कर लंड पर फेर रही थी. कुछ ही देर मे लंड लसीला हो चला और रजनी मुँह आगे कर उसे मज़े से चूसने लगी. वा उसकी गोलियों को खींच रही थी जिससे लंड पूरा उसके मुँह मे अंदर बाहर हो रहा था.

तभी वो लंड को मुँह से निकाल खड़ी हो गयी और बोली, तो तेरे कंधों मे बहोत ताक़त है, देखती हूँ ठकुराइन का बोझ संभाल पाते है की नही," रजनी रणबीर की बाहों को अपने हाथों मे लेते हुए बोली," फिर उसने रणबीर के गले मे बाहें डाल दी और उसके होठों को अपने होठों ले चूसने लगी.

रणबीर टेबल से अपने चूतड़ लगा वैसे ही खड़ा रहा. जो कुछ कर रही थी ठकुराइन ही कर रही थी. तभी रजनी ने उचक कर रणबीर के कमर मे अपनी टाँगे लपेट ली. गले के पीछे उसने उंगलियों के एक दूसरे मे फँसाया और ठकुराइन का सारा बोझ रणबीर पर आ गया.

रजनी की इस अचानक हुई हरकत से रणबीर कुछ चौंक पड़ा और उसने फुर्ती दीखाते हुए रजनी के भारी चूतड़ पर अपने दोनो हथेलियों जमा दी. अब रणबीर का लंड और ठकुराइन की चूत आमने सामने थी और दोनो मिलने के लिए उत्तावले हो रहे थे.

तभी रजनी मालती से कहा, "मालती तू चल मेरी गांद के पीछे बैठ जा और तीर निशाने पर लगा"

मालती रजनी की गांद के नीचे आके बैठ गयी. उसने अपने सर को सहारा भी ठकुराइन की गांद का दिया जिससे गांद कुछ और उपर उठ गयी. फिर उसने रणबीर के लंड पर थूक भरी जीब फेरी और लंड ठकुराइन के चूत के मुख पर लगा दिया.जैसे ही रणबीर के लंड ने ठकुराइन की चूत के खुले होठों को छुआ उसमे एक सनसनाहट की लहर दौड़ गयी और उसके हाथ अपने आप ठकुराइन की गंद लंड पर दबाने लगे.

अब रजनी ने अपने पैर टेबल पर आगे फैला दिया और मालती को पलंग पर बैठ देखने के लिए कह गंद रणबीर के लंड की तरफ चलाने लगी. अब रणबीर रजनी की इस अदा से पूरा मस्त हो चुका था. उसने ठकुराइन की पतली कमर मे बाजू कस लिए और ठकुराइन की गांद हाथो मे ले अपने खड़े लंड पर दबाने लगा. जब दबाता तो उसका लंड जड़ तक चूत मे चला जाता, फिर वह ढीला छोड़ देता तो लंड वापस कुछ बाहर निकल आता और इस तरह से वह चुदाई करने लगे.

"ओह... रणबीर तुम्हारा लंड वाकई में बहोत ताकतवर है... मेरी चूत को भाले की तरह चीर रहा है.. ओह हां...ओह और दबा दबा के चोदो.. तुम्हे इसी काम के लिए तो मेने ठाकुर साहेब से कह हवेली मे रखवाया है.. ओह हाआँ आज से तुम्हारा असली काम यही है... हां और ज़ोर से हां फाड़ डाल रे आज तेरे सारे खून माफ़.. " रजनी कई देर तक ऐसे ही बड़बड़ाते हुए चुदति रही. अब उसने एक चुचि रणबीर के मुँह मे दे दी.

रणबीर ने भी ठकुराइन की भारी चुचि अपने मुँह मे ले ली. जिस प्रकार ठकुराइन उसके गले से लटके हुए थी उसे उसकी चुचि के अलावा कुछ दीखाई भी नही दे रहा था.

ठकुराइन काफ़ी देर इसी अवस्था मे उससे चुदवाती रही, चूचियाँ मुँह मे बदलती रही. फिर वह खड़ी हो गयी और इस उसने एक पैर ज़मीन पर रखा और दूसरा पैर टेबल पर लंबा रखा और रणबीर के लंड से इस प्रकार पूरी तरह चोदि हुई चूत सटा दी और एक झटका दे फिर चूत मे ले ली. अब दोनो एक दूसरे की कमर मे हाथ डाल चुदाई कर रहे थे.

ओह... रणबीर खूब ज़ोर से मारो मेरी.... श... ऐसे ही ...रणबीर खूब ज़ोर से मारो मेरी... हाआँ ओह मे तो जाने वाली हूँ.. आज जी भर कर पानी छोड़ूँगी.....बहोत दिन से जमा हो रखा है.. वो सला जंगल मे शिकार का दीवाना है... घर का शिकार उसे कहाँ दिखता है... ये शिकार अब तेरा है रे...खूब मज़ा ले ले कर शिकार कर इसका... ओह मालती देख मेरा गिर रहा है.. " और ठकुराइन ख़ालास हो गयी.

ठीक उसकी समय रणबीर के भी लंड ने ठकुराइन की चूत को अपने वीर्या से भर दिया.

कुछ देर बाद मालती रणबीर को पहले वाले कमरे मे ले गयी, वहाँ रणबीर ने अपने कपड़े पहने और अपनी बदूक और गोलियों का पट्टा उठा अपने कमरे मे चला गया.

दूसरी रात रणबीर आधीर हो उठा. उसकी नज़रें बार बार हवेली की तरफ उठ जाती की कहीं मालती चाची आते हुए दीखाई दे जाए.

आख़िर वो करीब 10.30 के करीब आई. आज कोई बात नही हुई और रणबीर अपने आप उसके पीछे चल पड़ा.

आज मालती सीधे उसे उस कमरे मे ले गयी जो मधुलिका के लिए तय्यार हुआ था. रजनी पलंग पर एक नाइटी मे बैठी थी.

"आओ ठाकुर, मेरा मतलब ठाकुर के ख़ासमखास. क्यों हमारी याद ने कुछ बैचैन किया या नही?" ठकुराइन ने कहा.

"ठकुराइन में तो दो घंटे से हवेली की तरफ ही देख रहा था की कब मालती चाची आए और .....फिर इस जगह पर ले कर आए." रणबीर ने ठकुराइन के सामने झुकते हुए कहा.

"अगर ऐसी बात है तो हम तुम्हे ज़रूर इसका इनाम देंगे. पहले तुम यह सब वर्दी, बंदूक, उतार कर आराम से बैठो." ठकुराइन ने कहा.

रणबीर ने अपनी ड्यूटी का सब साजो सामान उतार कर एक खाली पड़ी कुर्सी पर रख दिया. अब वह बनियान और पॅंट मे था.

"अब इसे भी उतार दो. क्यों आज भी हमारी शरम आ रही है, अंदर कुछ तो पहना होगा? यदि नही पहना है तो भी चलेगा.' ठकुराइन हंसते हुए बोली.

"रजनिज़ी मेरा मतलब है ठकुराइन में लंगोट का साथ कभी नही छोड़ता." फिर रणबीर ने पॅंट भी उतार कर बाकी के कपड़ों के ढेर पर फेंक दिया. कमर मे लंगोट बहोत ही कस के बँधी हुई थी. उसके लंड का उभार लंगोट से सॉफ दीखाई पड़ रहा था.

ठाकुरानी ने एक हल्की सी सिसकी से होंठ काटे और कहा, "रजनिज़ी या फिर तुम चाहो तो केवल रजनी कह के भी बुला सकता हो, हम लंगोट का भी साथ छुड़वा देंगे. रजनी मल्टी की तरफ देख के हँसी और मालती ने भी मुस्कुरकर साथ दिया.

"रजनिज़ी आप मालिकिन हो. में तो आपका हुकुम का गुलाम हूँ."

"ऐसे ही हुकुम का गुलाम बने रहोगे तो इनाम भी पाओगे." रजनी ने इनाम शब्द पर ज़ोर देकर रणबीर की आँखों मे झँकते हुए कहा.

तभी रजनी पलंग से ये कहते हुए उठ खड़ी हुई की पहले हम स्नान करेंगे.

"चलो तुम दोनो भी मेरे साथ स्नान घर मे चलो."































































































































































Tags = Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

Raj sharma stories-ठाकुर की हवेली --2

राज शर्मा की कामुक कहानिया
हिंदी सेक्सी कहानिया
चुदाई की कहानियाँ

ठाकुर की हवेली--2

"तू पागल है जो ठाकुर साहेब से क्यों पूछता है? भानु ने फिर कहा.

तभी रणबीर और भानु को मालती चाची दीखाई पड़ी जो एक कमरे मे जा रही थी.

रणबीर ने पूछा, "ये मालती चाची यहाँ क्या कर रही है?"

"वो इस हवेली मे ठकुराइन की सेवा करती है." भानु ने जवाब दिया.

"तो ठाकुर ने ठकुराइन भी पाल रखी है?"

"हां... हमारे ठाकुर साहेब भी बड़े रंगीन मिज़ाज के हैं. एक बार शिकार पर गये थे और आए तो अपनी बेटी की उमर की एक लड़की साथ ले आए. कहने लगे की उन्हे इस हवेली का वारिस चाहिए... "

"और कौन कौन है ठाकुर साहब के खानदान मे?" रणबीर ने भानु से पूछा.

"बस एक बेटी है जो सहर मे डॉक्टोरी पढ़ रही है." भानु ने जवाब दिया. "कभी कभी आती है यहाँ पर, इस बार होली पर आएगी.... वो ठाकुर की पहली बीवी से है... मंज़ुलिका नाम है उसका."

"कितनी उमर की है ये ठकुराइन?" रणबीर जवान ठकुराइन के बारे मे जानने को उत्तावला हो रहा था.

"यही कोई 24-25 साल की बस."

"और कितने दिन पहले हुई थी इनकी शादी?"

"दो साल पहले." भानु ने रणबीर को बताया.

"दो साल हो गये शादी को लेकिन अभी तक ठाकुर साहेब को कोई औलाद नही हुई?" रणबीर के चेहरे पर एक शैतानी भरी मुस्कुराहट थी.

"तुम कहना क्या चाहते हो?" भानु रणबीर की आँखों मे झँकते हुए बोला.

"कुछ नही में तो यूँ ही पूछ रहा था... क्या नाम है इस ठकुराइन का?"

भानु रणबीर के बिल्कुल पास आ गया और उसके कान मे फुसफुसते हुए बोला, "रजनी नाम है इस ठकुराइन का."

"रजनी.... बड़ा प्यारा नाम है." रणबीर बदबूदा उठा.

"तू मरेगा किसी दिन... यहाँ हवेली मे ठकुराइन का नाम नही लिया जाता... कोई सुन लेगा तो जान के लाले पड़ जाएँगे." भानु ने उसे समझाते हुए कहा.

तभी मालती उस कमरे से बाहर आई और रणबीर और भानु को देखा तो झट कमरे मे वापस चली गयी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया.

"क्या हुआ तू वापस कैसे आ गयी?" ठकुराइन करवट के बल पलंग पर लेटी हुई थी पर जैसे ही उसने मालती को अंदर आते देखा तो पूछा.

"कुक्ककच... नाआहिन..... वो..ह़ बाहर खड़ा है." मालती ने काँपते हुए कहा.

"अरे कौन खड़ा है? कुछ नाम पता भी तो होगा उसका?" ठकुराइन ने पूछा.

"वही जिसने आज सुबह मेरी गांद फाड़ कर रख दी थी." मालती अभी तक रणबीर से डरी हुई थी.

"अक्च्छा. वो जो ठाकुर साहेब का नया वफ़ादार नौकर है..... क्या नाम है उसका?" ठकुराइन की दिलचस्पी रणबीर मे बढ़ने लगी.

"जीए.... रणबीर...." मालती ने जवाब दिया.

"ये रणबीर दीखने मे कैसा है?" ठकुराइन ने पूछा.

मालती वैसे तो हवेली की नौकरानी थी और ठकुराइन की सेवा करती ही थी लेकिन ठकुराइन उसे अपनी सहेली ज़्यादा मानती थी. रजनी को मालती के साथ सेक्सी और गंदी गंदी बातें करने मे बहोत मज़ा आता था.

शुरू मे तो ठकुराइन से 10 साल बड़ी मालती काफ़ी शरमाती थी पर रजनी ने उसे उकसा उकसा कर उसकी सारी झिझक ख़तम कर दी थी.

"मालकिन क्या बताउ, शकल से दीखने मे बहोत भोला लगता है, लेकिन साले ने अपने घोड़े जैसे लंड से मेरी गंद फाड़ कर रख दी.

रजनी ये बात इतनी दयनीए स्वर मे कहा की रजनी उसकी बात सुनकर गरम हो गयी.

"तेरी चूत भी तो चोदि थी उसने और क्या गंद भी मारता रहा?"

रजनी पेट के बल हो गयी थी और मालती से बातों का मज़ा लेना चाह
रही थी.

"मालकिन चोदने मे तो बहोत बड़ा उस्ताद है पर साले ने मेरी गंद चील कर रख दी. गंद मारने के पहले उसने एक बार चुदाई भी की थी." मालती ने अपनी गंद सहलाते हुए कहा.

फिर बात को बदलते हुए बोली, "आज ठाकुर साहब ने दावा खाई?" मालती ने टेबल पर पड़ी दवा की शीशी की तरफ इशारा करते हुए पूछा.

"दवा तो रोज़ ही खाते है पर फ़ायदा क्या, हर बार की तरह आज भी फिसल गये." रजनी ने नामार्द ठाकुर की हँसी उड़ाते हुए कहा.

"क्या लंड खड़ा हुआ था उनका?" मालती भी रंग मे आ गयी और खुले शब्दों मे पूछा.

"कहाँ साला खड़ा ही नही होता, हरदम सोया ही रहता है," दोनो इस बात पर हँसने लगी फिर रजनी ने पूछा, "रणबीर का लंड कैसा है दीखने मे?" इतना कहकर रजनी मालती के सामने पालती मार कर बैठ गयी.

"बहुत तगड़ा और मोटा लंड है साले का.... गोरा भी काफ़ी है पर साले ने बिना तेल के ही मेरी गंद मार दी.... अभी तक गंद मे दर्द हो रहा है."

"रणबीर का लंड चूसा था तूने?" रजनी ने पूछा.

"हां चूसा था... पहले तो जैसे ही मेने उसकी लंगोट उतारी उसने लंड को मुँह मे देकर ही चुदाई के खेल की शुरुआत की." मालती ने ऐसा कह रजनी का पल्लू नीचे गिरा दिया जिससे ठकुराइन की मस्त चुचियाँ ब्लाउस मे क़ैद उसके सामने आ गयी.

"कैसा लगता था उसका लंड चूसने मे?" रजनी ने आँखे बंद करली और मालती उसके ब्लाउस के हुक खोलने लगी.

"बहुत अक्च्छा लगा था मालकिन... क्या मोटा और लंबा लंड था... मेरे गले तक आ गया था... स्वाद भी अक्च्छा था थोडा नमकीन.... " मालती ने रजनी का ब्लाउस उत्तरते हुए कहा.

रजनी की मस्त और भारी भारी चुचियों सफेद ब्रा मे क़ैद थी. फिर दोनो एक दूसरे के आगोश मे समा गये. अब मालती ने ब्रा भी ठकुराइन के बदन से अलग कर दी और वा कमर से उपर तक नंगी हो गयी.

"ऑश मालती कितना रस है तेरी बातों मे.... कैसे चूसा था उसका लंड तूने..... देख ना लंड तो तूने चूसा था और गीली में हो रही हूँ.....बताओ ना?" रजनी ने मालती से पूछा और अपने खड़े हुए निपल को मालती के मुँह मे दे दिए.

"ऐसे... " ये कह कर मल्टी ने अपनी मालिकिन की चुचि को एक बच्ची की तरह चूसने लगी.

"ऑश ज़ोर से चूवसूऊ मालती बहुत हही अककचा लग रहा है.....जैसे तूने उसका लंड चूसा था वैसे ही अब मेरी चुचियों को भी चूस" फिर रजनी ने मालती को अपनी बाहों मे ले लिया और बोली, "चल अपनी गंद दीखा... देखने दे कैसे मारी है मेरी सहेली की फूली हुई गंद.." रजनी उसकी गंद पर हाथ रखते हुए बोली, "सच मालती अगर में मर्द होती तो तेरी गंद मारे बिना नही छोड़ती"

इतना कहकर रजनी ने मल्टी को झुका दिया और उसकी सारी और पेटिकोट सहित कमर तक उपर को उठा दी. मल्टी ने पॅंटी नही पहन रखी थी.

फिर रजनी ने मालती की गंद फैलाई और कहा, "लगता है रणबीर का लंड बहोत लंबा और मोटा है? देख तेरी गंद कैसे फैल गयी है," रजनी अब मल्टी की गंद मे अपनी उंगली डाल कर देख रही थी.

"नही अब और मत डालना बहोत दर्द हो रहा है... आज तो मुझसे चला भी नही जा रहा है.... तुमसे दुख बाँटने किसी तरह हवेली तक चल कर आ पाई हूँ."

"अरे देखने तो दे की किस तरह मारी है तेरी गंद उसने, " रजनी ने मालती को चारों हाथ पैर पर चोपाया बना दिया और पीछे हो उसकी गंद को जीभ की नोक से छेड़ने लगी और बोली, "अककचा लगा.. इससे तुम्हारा दर्द कम हो जाएगा."

"हां मेरी गंद पर बड़ी अजीब सुरसुरी हो रही है,"

रजनी अब उसकी गंद मे अपनी पूरी जीब डाल अंदर बाहर करते हुए पूछी, "अब बताओ कैसा लग रहा है?"

"बहुत अक्च्छा लग रहा है..." मालती को अब रजनी की जीब अपनी गंद पर किसी मलम की तरह लग रही थी. फिर रजनी अपनी जीब मालती की गंद से बाहर निकल पीछे से अपनी जीब उसकी चूत के अंदर घुसा दी, "कल यहीं पर रणबीर ने तुम्हे चोदा था ना... इसी के अंदर अपना बान ओह्ह्ह क्या कहते हैं लंड डाला था ना?"

"हाआँ यहीं पर.... नहीं इसके पूरी तरह भीतर... जहाँ तक जा सकता है वहाँ तक डाला कर मुझे चोदा था... हां आईसीए ही" मालती ऐसा कहते हुए रजनी के मुँह पर अपनी चूत दबाने लगी

रजनी अपनी प्यास ऐसे ही बुझाती थी. मालती से चूत चटवाती, गंद चटवाती, अपनी चुचियों को दबवाती और बदले मे मालती के साथ भी यही सब करती. जब किसी औरत का मर्द नमार्द होता है तो औरत अपना रास्ता खुद ढूंड लेती है और वही रास्ता रजनी को मालती मे मिल
गया था.

ठाकुर का कारवाँ अपने नियमित समय पर शिकार पर पहुँच गया था. एक बड़ा मंच सा बनाया गया था जिस पर ठाकुर अपनी बंदूक लिए बैठा था. कुछ छोटे मंच भी बनाए गये थे जिन पर ठाकुर के साथ आए उसके मुलाज़िम बैठे थे.

एक दम सन्नाटा छाया हुआ था, सभी को कड़ी हिदायत थी किसी के मच से हल्की भी आवाज़ ना निकले. नीचे पेड़ के साथ खूंती से एक बकरा बँधा था जिसकी बीच बीच मे मिमियने की आवाज़ आ रही थी

रणबीर और भानु एक ही मंच पर बैठे थे. तभी अंधेरे मे भानु ने रणबीर की जाँघ पर हाथ रख दिया.

"अरे ये क्या कर रहा है और अपना हाथ कहाँ घुसाए जा रहा है?"
रणबीर ने उँची आवाज़ मे भानु को डांटा.

तभी एक झाड़ी से एक हिरण निकल के भागा और ठाकुर ने रणबीर की तरफ गुस्से से देखा और बंदूक ले उसके पीछे भागा.

"क्या हुआ साले... क्यों हाथ लगा रहा था." रणबीर ने भी ठाकुर की क्रोध भारी नज़रें देख ली थी और सारा गुस्सा भानु पर उतारते हुए पूछा.

"कुछ नही .... बस मन कर रहा था इसलिए...." भानु ने खींसी निपोर्टे हुए कहा.

"मुझे ये सब बिल्कुल भी पसंद नही.. और आगे से ख़याल रहे ऐसा कुछ भी नही होना चाहिए?" रणबीर से कहा.

"तुम्हे पसंद नही तो क्या मुझे तो पसंद है.." भानु ने कहा.

"मेने कह दिया ना की मुझे पसंद नही है.. बस.." रणबीर थोड़ा क्रोधित होते हुए बोला.

"तो क्या पसंद है साले.... मालती चाची की गंद मारना?" भानु ने भी उसी तरह गुस्से से बिफर्ते हुए कहा.

यह बात सुनते ही रणबीर का चेहरा फक पड़ गया. इससे भानु की हिम्मत और बढ़ गयी और वो बोला, "साले औरत की गंद मारने मे मज़ा आता है और आदमी की गंद पसंद नही. आबे साले गंद गंद होती... क्या औरत की क्या मर्द की." भानु ने फिर कहा.

अगर ज़्यादा कुछ बोला तो ठाकुर साहेब से बता दूँगा की तूने सुबह
मालती चाची के साथ क्या किया था. तुम तो जानते ही हो की ठाकुर पहले तो तेरी चाँदी उधेड़ेगा और जब तुम्हारे बुड्ढे बाप को ठाकुर से ये सब पता चलेगा तो तुम्हारी क्या हालत होगी." भानु ने रणबीर को ब्लॅकमेल करते हुए कहा.

"आख़िर तुम चाहते क्या हो?" रणबीर भी उसकी धमकी से नरम पड़ते हुए बोला.

"कुछ नही बस थोडा सा मज़ा और वो भी बाद मे." भानु ने हंसते हुए कहा. तभी वहाँ एक 18 साल का लड़का वहाँ आ गया जिसका नाम रघु था. वो और भानु आपस मे समलैंगीक कामो का आनंद साथ मैं लेते थे.

तभी ठाकुर लौट कर आ गया. उसने दो हिरण मारे थे इसलिए वो काफ़ी खुश था. टेंट लगा दिए गये थे.

सभी मुलाज़िमो को टेंट बाँट दिए गये थे और जो खाने पीने का सामान वो साथ लाए थे वो भी बाँट कर टेंट मे रखवा दिया गया था.

रात मे तीनो भानु रणबीर और रघु एक ही टेंट मे सोने के लिए आ गये. टेंट मे पहुँचते हू भानु ने रणबीर से कहा, "चल जल्दी से नंगा हो जा."

रणबीर ने झिझकते हुए अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया. भानु ने रघु के लंड को उसकी पॅंट से बाहर निकल लिया था.

भानु कुछ देर तक तो रघु के लंड को सहलाता रहा फिर उसे अपने मुँह मे ले चूसने लगा. रणबीर ने घृणा से अपना मुँह दूसरी और फेर लिया.

तभी भानु रघु के लंड को छोड़ रणबीर के लंड पर झुक पड़ा और उसके लंड को अपने मुँह मे ले लॉली पोप की तरह चूसने लगा. आख़िर लूँ लंड ही होता है.. भानु के मुँह की गर्मी पा वो तन्न्ने लगा और लोहे की तरह सख़्त हो गया.

तब भानु वहीं चोपाया हो गया और अपनी गंद मे उठा रणबीर से बोला, "चल अंदर डाल, साले थोड़ा थूक लगा लेना आज सुबह तूने चाची की तो सुखी ही मार दी थी. में सब वहाँ चुप कर देख रहा था.

रणबीर का आज पहली बार बालों से भरी किसी मर्द की गंद से पाला पड़ा था. आज तक वो औरतों की सॉफ और चिकनी गांद ही मारते आया था. पहले तो उसने भानु की गंद पर ढेर सारा थुका और फिर वहाँ अपना लंड लगा धीरे धीरे अंदर ठेलने लगा.

उधर भानु ने रघु को फिर अपने सामने बुलाया और उसके लंड को अपने मुँह मे लिया. रणबीर का ध्यान बँट गया और वो भानु की गंद मारना भूल भानु को रघु का लंड चूस्ते हुए देखने लगा.

"साले अंदर बाहर कर ना... सुबह मालती चाची की तो ऐसा मार रहा था की बेचारी एक साप्ताह तक तो ठीक से चल भी नही पाएगी."

अब रणबीर जोरोंसे भानु की गंद मारने लगा और थोड़ी ही देर मे उसका लंड भानु की गंद मे झाड़ गया.

"क्यों मज़ा आया? क्यों मालती चाची से कुछ अलग थी या वैसे ही थी." भानु ने पूछा.

रणबीर कुछ नही बोला पर मन ही मन वो प्रतिगया कर रहा था की इसका पूरा हिसाब वो सूमी से चुका लेगा.

दूसरे दिन सुबह ही ठाकुर का कारवाँ हवेली के लिए वापस चल पड़ा. भानु और रणबीर घर पहुँचते ही बिस्तर मे घुस पड़े और काफ़ी देर तक सोते रहे.

फिर दोपहर मे दोनो ने साथ साथ खाना खाया. भानु हवेली जाने के लिए तय्यार था उसने रणबीर से पूछा भी की उसे भी चलना है क्या, तो रणबीर को लगा की वो उसे साथ ले जाने मे ज़्यादा इंट्रेस्टेड नही है. ये रणबीर के लिए अछी बात थी, उसने सिर भारी होने का बहाना कर दिया.

कहने को भानु कह कर गया की वो हवेली जा रहा है लेकिन रणबीर जनता था की भानु और रघु किसी एकांत जगह पर जा आपस मे मस्ती करेंगे.

मौका देख रणबीर ने सूमी से कह दिया था की वो शाम को खेत पर जा रहा है और मौका देख वो भी वहीं चली आए.

शाम हुई तो रणबीर नदी घूमने के बहाने घर से निकल पड़ा.

वो सीधा खेत पर पहुँच उस जगह आ गया जहाँ किसी का भी आना जाना नही था. खेत के कोने मे एक झोपड़ा बना हुआ था और अंदर एक चारपाई भी पड़ी थी जिसपर रुई का गद्दा पड़ा हुआ था. रणबीर वहीं झोपडे के बाहर बैठ कर सूमी का इंतेज़ार करने लगा. धीरे धीरे अंधेरा बढ़ने लगा था. कुछ देर बाद उसे एक छाया खेत की और आते दीखाई पड़ी. रणबीर उस छाया को देखता रहा और जब वो काफ़ी नज़दीक आई तो उसने पहचान लिया की वो सूमी ही थी. रणबीर उसका हाथ पकड़ उसे झोपडे मे ले गया.

"में तो समझा था की तुम आओगी ही नही," रणबीर सूमी को वहीं चारपाई पर बिठाते हुए बोला.

चारपाई के ठीक पीछे एक खिड़की बनी हुई थी जिसमे से ढलती शाम का हल्का हल्का प्रकाश झोपड़ी मे आ रहा था.

"रणबीर मुझे लगता है की मालती चाची जैसे मुझ पर नज़र रख रही हो... उनकी नज़र से छपते छुपाते आई हूँ... ज़्यादा देर नही रुक सकूँगी." सूमी ने कहा.

"भाभी ये क्या अभी अभी तो आई हो ठीक से बैठी भी नही और अभी से जाने की बात कर रही हो...." रणबीर ने सूमी को बाहों मे भरते हुए कहा.

"अपने इस देवर की बात रखने के लिए आना पड़ा." सूमी ने भी रणबीर के गले मे बाहें डाल दी.

"तो भाभी सारी रात रहोगी ना." इतना कहकर रणबीर ने अपने होठ सूमी के होठों पर रख उन्हे चूसने लगा. सूमी की बाहों का बंधन उसके इर्द गिर्द और कस गया.

अब तो घर पर ही दो बातें करने का मौका मिलता रहेगा." सूमी ने अपनी तनी हुई चुचियाँ को रणबीर के छाती पर रगड़ते हुए कहा.

"घर पर कहाँ बात करने का मौका मिलेगा भाभी, एक तो घर पर आपके वो होंगे और जब होंगे तो उनके साथ मुझे भी तो हवेली जाना होगा, " रणबीर ने सूमी के ब्लाउस के हुक खोलते हुए कहा.

"उसकी तो बात मत करो... उसे घर मे कौन दीखाई पड़ता है. उसे तो बस रघु और दो चार उस जैसे है सिर्फ़ वही दीखाई पड़ते है." सूमी ने घृणा से कहा.

रणबीर सूमी का ब्लाउस उतार चुका था. फिर उसने ब्रा के उपर से ही सूमी के कठोर चुचियों जो किसी कम्सीन लड़की जैसी कठोर थी मसल दिया.

फिर उसने अंजान बनते हुए कहा, "कौन रघु भाभी?"

अब रणबीर ने सूमी की ब्रा भी उतार दी और नीचे झुक कर एक चुचि को अपने मुँह मे ले चूसने लगा.

सूमी सिसकारी लेने लगी और उसका सिर अपनी चूची पर दबाते हुए बोली, "छोड़ो इन सब बातों का... तुम्हारा चुचि चूसना कितना अक्च्छा लग रहा है.... जिक्से लिए में बरसों से तड़प रही हूँ वो सुख तो वो कभी दे ना सका.

अब सूमी ने अपना हाथ रणबीर की पॅंट के उपर से उसके लंड पर रख दिया जो किसी लोहे की सलाख की तरह सख़्त हो गया था.

"भाभी भानु तो तकदीर वाला है की उसे तुम जैसी बीवी मिली."
रणबीर उसकी चुचियों को मसल्ते और चूस्ते हुए बोला.

सूमी अब रणबीर की पॅंट के बटन खोलने लग गयी थी...

तभी रणबीर ने सूमी के घाघरे मे हाथ डाल दिया, उसने देखा की सूमी ने कोई पॅंटी नही पहन रखी थी. उसकी उंगलियाँ चूत पर उगी झांतो से टकराई.

"पर उसे दीखे तब ना... उ दया कितना बड़ा और मोटा है तुमहरा जो तुम्हारे नीचे आ गयी वो तो....." सूमी उसके लंड को आज़ाद कर अपनी मुति मे जकड़ते हुए बोल पड़ी.

"क्यों भाभी पसंद आया?' रणबीर उसकी चूत को सहलाते हुए बोला, "तुम्हारी चूत भी तो कितनी प्यारी, मुलायम और चिकनी है."

"जो करना है आज जल्दी कर लो कहीं मालती चाची को सक ना हो जाए.

तभी सूमी झुक कर रणबीर के लंड को मुँह मे ले चोसने लगी. रणबीर ने सूमी को चारपाई पर लीटा दिया और उसके घग्रे को कमर तक उठा दिया और अपना मुँह सूमी की चूत से लगा उसे चूसने और चाटने लगा.

दोनो एक दूसरे के अंगों को इसी तरह चूस्ते और चाटते रहे. सूमी सिसकारियाँ भरते हुए रणबीर के चेहरे को अपनी जांघों से जाकड़ रही थी.

"तेरी मालती चाची की तो गांद मारु.... तुम्हे मालूम है सूमी जबसे तुम्हे देखा मुझे तो कुछ अक्च्छा ही नही लगता... जानती हो कल ठाकुर से कहा सुनी हो जाती अगर भानु बीच मे ना आता तो.

सूमी अब पीठ के बल लेट गयी और उसने अपनी टाँगे फैला दी. वो इंतजार करने लगी की कब रणबीर अपना लंड उसकी चूत मे डाल उसकी प्यास बुझाए कब उसकी पॅयाषी चूत को अपने रस से सीँचे.

"ठाकुर से कहा सुनी क्यों हो जाती?" सूमी ने पूछा.

"कल जब उसने शिकार पर चलने के लिए कहा तो मेरे तो तन बदन मे आग लग गयी. एक बार तो मन किया की उसे वहीं छोड़ सीधा तुम्हारे पास चला आयुं." रणबीर अब सूमी के उपर आते हुए बोला.

"तुम मेरे लिए ठाकुर की नौकरी भी छोड़ देते." सूमी ने खुश होते हुए पूछा.

रणबीर का लंड सूमी की चूत के दरवाज़े पर टीका हुआ था. रणबीर की बात सुनकर उसके मन मैंउसके लिए ढेर सारा प्यार उमड़ पड़ा, वो उसे बेतहसहा चूमेने लगी और अपनी कमर को थोडा उपर उठा एक ही झटके मे उसके लंड को अपनी चूत के अंदर ले लिया.

जोश मे वो ऐसा कर तो गयी लेकिन उसके मुँह से एक "उईईई मा मर गयी..." भी निकल पड़ी.

"तुम्हारे लिए तो में ऐसी दस नौकरियाँ छोड़ दूँ." रणबीर अब उसकी चूत मे धक्के मारने लग गया था. कमजोर चारपाई की ठप ठप की आवाज़ झोपडे मे गूँज रही थी. सूमी अब रणबीर के हर धक्के का जवाब अपनी गंद उछाल कर दे रही ही. उसे रणबीर बहोत ही अक्च्छा लगा था और अब वो जी जान से उससे चुदवा रही थी. दोनो पर उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी, दोनो एक दूसरे के अंगो को मसल रहे थे, काट रहे थे भींच रहे थे.

कुछ देर बाद रणबीर ने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी. दो दीवाने पूरे जोश के साथ अपनी मंज़िल पर पहुँचना चाह रहे थे.

"ओह रणबीर और ज़ोर से चोदूऊऊऊ ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाआँ और ज़ोर से.... ऑश हाआँ अंदर तक डाल दूऊऊऊ." सूमी की सिसकारियाँ गूँज रही थी.

थोड़ी ही देर मे दोनो थक कर चूर हो गये और दोनो झाड़ गये. दोनो कुछ देर तक एक दूसरे को बाहों मे भींचे ऐसे ही पड़े रहे. फिर सूमी रणबीर से अलग हुई और अपने घाहघरे से चूत से बहते रस को पौंचने लगी. फिर रणबीर के लंड को अक्च्ची तरह पौंचने लगी. फिर वो अपने कपड़े ठीक करने लगी.

बाहर रात का अंधेरा बढ़ने लगा था, उस अंधेरे मे सूमी जैसे कुछ देर पहले आई थी उसी तरह चुपके से वहाँ से चली गयी.

रणबीर भी खेत से बाहर आ गया और उसने तुरंत जाना उचित नही समझा और नदी की और चल पड़ा. कुछ देर चलने के बाद उसने देखा की सामने से भानु और रघु साथ साथ चले आ रहे थे.

"तो तुम हवेली से आ रहे हो?" रणबीर ने भानु से प्पुछा.

"हमारी छोड़ो तुम अपनी बताओ, तुम यहाँ क्या कर रहे हो? घर पर मालती चाची है ना?" भानु ने रणबीर से पूछा.

भानु की बात सुनकर रघु भी खिलखिला कर हंस पड़ा. फिर रघु वहाँ से अपने घर चला गया. रणबीर और भानु साथ साथ घर पहुँचे जहाँ पर रामानंद बरामदे मे बैठा हुक्का गडगडा रहा था. दोनो वहीं पर बैठ गये.

पीचली रात ही ठाकुर ने दो हिरण मारे थी इसलिए आज हवेली मैं उनका ही माँस पक रहा था. अपने हाथों से मारे हुए शिकार का माँस खाने का अलग ही मज़ा है. ठाकुर भी शराब के साथ उसी माँस का मज़ा ले रहा था. दो साल पहले ही ठाकुर ने अपनी बेटी की उमर की एक लड़की से शादी की थी.

रजनी एक ग़रीब घर की लड़की थी लेकिन इंटर तक पढ़ी थी. ठाकुर ने बहोत सारे जेवर अपार वस्त्रा यहाँ तक की हर खुशी दी थी रजनी को लेकिन जो एक जवान लड़की को अपने पति से चाहिए वो ठाकुर उसे देने मे असमर्थ था.

जहाँ चाह वहाँ राह और रजनी ने मालती के रूवप मे अपना रास्ता खोज लिया था. पर जब से मालती ने रणबीर के बारे मे बताया था तब से ठकुराइन ऐसा उपाय खोजने मे लगी थी की रणबीर हवेली मे रहने
लगे.

हिरण के माँस मे काम शक्ति बढ़ाने की ताक़त होती है और रजनी भी इससे बच नही सकी थी.

उधर ठाकुर भी आज पूरा मस्त था और रात मे साज धज कर अपनी नौजवान बीवी के कमरे मे पहुँचा. रोज की तरह ही ठाकुर ठकुराइन विशाल पलंग पर बैठ गये.

ठाकुर ने रजनी का सिर अपनी छाती पर टीका लिया और उसे अपने शिकार और अपनी बहादुरी की कहानियाँ सुनाने लगा, कैसे उसने हिरण आ पीछा किया और कैसे उसने उन्हे मार गिराया. बातों ही बातों मे शेर के शिकार वाली भी बात चल पड़ी और ठाकुर ने बताया की उस दिन कैसे रणबीर नाम के एक लौडे ने उसकी जान बचाई.

रणबीर का नाम सुनते ही रजनी के कान खड़े हो गये. वो झट से ठाकुर को अपना अससीम प्यार जताते हुए उसकी गोद मे बैठ गयी.ठाकुर का चेहरा अपने हाथ मे लेते हुए उसके गालों का एक चूँबन लेते हुए बोली,

"आप तो आजकल ज़्यादा तर शिकार पर ही रहते है और इतनी बड़ी हवेली मे रात को अकेले मुझे डर लगने लग जाता है. अभी पीछले महीने ही शेरा डाकू ने पास के गाओं से दो औरतों को उठा लिया था. अगले महीने तो मधुलिका भी छुट्टियों मे यहाँ आ जाएगी. आपको हमारी कुछ चिंता फिकर भी है की नही?

"शेरा डाकू की क्या मज़ाल की वो हमारी हवेली की तरफ आँख उठा कर भी देखे." ठाकुर ने रजनी की बड़ी बड़ी चुचयों को अपने हाथों मे ले चूमते हुए कहा.

तभी रजनी ठाकुर की गिरफ़्त से निकली और टेबल पर पड़ी एक दवा की शीशी से थोड़ी दवा ठाकुर को पीने के लिए दे दी. ठाकुर एक घूँट मे सारी दवा पी गया.

तभी रजनी फिर ठाकुर की गोद मे बैठ गयी और अपनी गंद ठाकुर के लंड पर रगड़ने लगी. उसे लगा की ठाकुर के लंड मे कुछ जान आ रही है. पर वो जानती थी की ठाकुर का लंड ज़्यादा देर तक टिकने वाला नही था.

"वैद्य जी की दवा बहोत ही असर दार है." रजनी ने ठाकुर का मुँह चूमते हुए कहा.

ठाकुर रजनी की बात सुनकर बहोत खुश हो गया और ठकुराइन की चुचियों नंगी कर दी और उन्हे चूसने लगा. इधर रजनी ने भी ठाकुर का लंड बाहर निकाल लिया और उसे मुँह मे ले चूसने लगी.

वो ठाकुर के झड़ने से पहले रणबीर के लिए हवेली मे कोई इंतज़ाम कर लेना चाहती थी.

"फिर भी इतनी बड़ी हवेली मे आपके उस नौजवान जैसा कोई पह्रादरी के लिए होना चाहिए."

"कम से कम एक नौजवान तो ऐसा होना चाहिए पह्रादरी के लिए जो शेरा डाकू से मुकाबला कर सके." रजनी ने ठाकुर के लंड से खेलते हुए कहा.

"आप मधुलिका के आने से पहले ही ये इंतज़ाम कर दीजिए.. कल कुछ हो गया तो जिंदगी भर के लिए पछतावा रह जाएगा."

अब ठाकुर रजनी मे समा जाना चाहता था, रजनी भी समझ गयी और पलंग पर चित होकर टाँगे चौड़ी कर लेट गयी. ठाकुर उसकी टॅंगो के बीच जगह बनाता हुआ बोला, "तुम्हारी जैसे तुम्हारी मर्ज़ी में कल ही उसे हवेली के पहरे का काम दे देता हूँ, लेकिन शिकार पर उसकी कमी मुझे बहोत खलेगी."

ठाकुर ने रजनी की चूत पर लंड टीका दिया और बहोत आसानी से उसका लंड अंदर चला गया. ठाकुर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा लेकिन रजनी वैसे ही लेटी रही. वो जानती थी जैसे ही वो नीचे से ठप लगाएगी ठाकुर का लंड झाड़ जाएगा.

"हां ये अक्चा रहेगा, शिकार के लिए तो आपको रणबीर जैसों की क्या दरकार है, आप अकेले किसी से कम हैं क्या? इस उमर में भी शेर का पीछा कर उसे मार गिराते हैं.

रजनी ठाकुर को उकसा रही थी की कम से कम ये ठाकुर उसे एक बार तो उसकी चूत से पानी छुड़ा दे.

"हम ठाकुर लोग उमर के मोहताज़ नही होते." ठाकुर अब जोश मे आ रजनी की चूत मे कस के धक्के लगाने लगा था. उनका रजपूती खून अब रंग दीखा रहा था.

ठाकुर अब कस कस के लंड पेल रहा था और रजनी भी अपनी गंद उछाल उछाल कर नीचे से धक्के मार रही थी. कुछ देर बाद दोनो एक साथ झाड़ गये.

ऐसा बहोत कम बार हुआ था की दोनो एक साथ झाडे हो. शायद शराब और हिरण के माँस और रजनी के उकसाने का मिला जुला असर था की आज रजनी की चूत की भी प्यास बुझी थी. ठाकुर तो चुदाई ख़तम करते ही बिस्तर पर निढाल हो कर पड़ गया था और सुबह ही उसकी नींद
खुली.

दूसरे दिन 11.00 बजे रणबीर और भानु साथ साथ हवेली पहुँचे और ठाकुर के सामने आकर झुक कर सलाम किया. तभी ठाकुर ने रणबीर से कहा, "भाई हम तो तुम्हे हवेली के लिए ही तेरे बाप से तुझे माँग कर लाए थे और तुम्हारी सही जगह हवेली मे ही है. तुम आज से ही हवेली मे रहना शुरू कर दो अब इस हवेली की रखवाली का जिम्मा तुम्हारा है."

रणबीर मुँह बाए ठाकुर की और देखता रहा.






























































































































































Tags = Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्‍यस्‍कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,

Raj-Sharma-Stories.com

Raj-Sharma-Stories.com

erotic_art_and_fentency Headline Animator