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Monday, September 5, 2011

पीहर से ससुराल तक--5

FUN-MAZA-MASTI

पीहर से ससुराल तक--5

अब रमण ने रश्मि को नीचे उतरा और उसको सीधा लेता दिया और खुद रश्मि के ऊपर आ गया अपनी लंड का एक जोरदार झटका देते ही रश्मि की स्वांस जहा थी वही अटक गई । उसके मुह से एक जोर की चीख निकली शायद रमण का लंड रश्मि के गर्भस्य तक चला गया था रमण उसकी चीख को अनसुना कर लगातार धक्के दे रहा था । har धक्के पे रश्मि की चीख पुरे घर में सुनी जा सकती थी । दोनों के दोनों पसीनेसे लतपथ हो चुके थे । पर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे । ४५ मिनट तक रमण रश्मि को चोदता रहा । इस बीच रश्मि कई बार झड चुकी थी उसकी चूत एक दम गीली हो गई थी आज रश्मि की चुदाई से रसोई में एक अजीब सा संगीत आ रारहा था चूत से फचफच की आवाज़े निकलने लगी । ant में वो घडी आ गई जब रमण भी झड़ने वाला था अब रमण और जोरसे झटके देने लगा तो रश्मि की चिक्खे भी तेज हो गई उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे । chehra लाल तो गया था आखिर रमण रश्मि की चूत में ही शान्त हो गया । वो रश्मि के ऊपर ही कई देर तक पड़ा रहा । रश्मि के बदन पे पसीने की बुँदे मोतियों की तरह चमक रही थी । उसकी चूत खिले हुए गुलाब की तरह लाल सुर्ख हो गई थी स्तन में थोडा ढीलापन आ गया था ऐसा लग रहा था की रश्मि परम संतोस को प्राप्त कर चुकी थी । रमण और रश्मि की तम्मना कई दिनों बाद आज पूरी हो गई थी ।






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पीहर से ससुराल तक--4

FUN-MAZA-MASTI

पीहर से ससुराल तक--4

अब तो ऐसा लगने लगा जैसे सुदेश रश्मि पे haavi हो रहा हो । उसने रश्मि की तानो को फैला दिया और खुद उसकी टांगो के बीच आ गया उसने रश्मि की चूत को थोडा सा फैला दिया और अपनी जीभ उसमे डालने लगा । अंदर तो मानो कोई ज्वालामुखी फुट रहा हो रश्मि की चूत एक दम लाल सुर्ख और गरम थी सुदेश इस गर्मी को अपने में समाहित कर लेना चाहता था और चाहता था की अपनी शर्मिंदगी का बदला लिया जाए और रश्मि को शांत कर दिया जाए । उसने अपनी जीभ को रश्मि की चूत में फिराना शुरू किया रश्मि की चूत की garmaahat की सुदेश अपनी जीभ पे महसूस कर रहा था थोड़ी देर की चटाई के बाद सुदेश ने देखा उसका लंड एक दम कठोर हो गया हे । वो अपनी गर्मी को ज्यादा सहन नहीं कर सकता था इसलिए उसने अपने लंड का सुपाडा रश्मि की चूत के मुहाने पे लगाया और एक जोर का झटका दिया । इस काम को करने में सुदेश को ज्यादा म्हणत नहीं karni पड़ी क्यू की रश्मि तो पहले से ही इस काम में माहिर हो चुकी थी सो सुदेश का लंड अपनी चूत में लेने में उसको कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आई । उसके मुह से सिर्फ एक आह निकली ये आह दर्द की नहीं थी बल्कि मजे की थी ।
सुदेश तो अपना होश रश्मि की चूत देखते ही खो चूका था इसलिए उसको पता भी नहीं था की नई नवेली दुल्हन की चूत में लंड एक दम से नहीं जाता । वो अपने काम में लगा रहा अब सुदेश धीरे धीरे रश्मि की चूत मार रहा था । थोड़ी देर के बाद उसका लंड पूरा पानी से भीग गया सायद रश्मि की चूत ने पानी chod दिया था इस लिए सुदेश का लंड भी गिला हो गया था । सुदेश को लगा मानो वो अपने शारीर की गर्मी को ज्यादा सहन नहीं कर पायेगा इस लिए उसने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए हर धक्के पे रश्मि के मुह से आह निकलती तो सुदेश और ज्यादा जोश में आ के जोर का धक्का देता उधर रश्मि भी हर धक्के पे पूरी हिल जाती और जोर की आहे भरती । थोड़ी देर तकजोर के धक्के देने के बाद सुदेश रश्मि की चूत में झड गया उसका अमृत रस रश्मि की चूत से बाहर आ रहा था ऐसा लग रहा था मानो किसी ने mahadev का दही सेअभिषेक किया हो ।
और सुदेश रश्मि के वक्ष स्थलों पे अपना सर रख कर सो गया रश्मि का शारीर भी लाल सुर्ख हो गया था वो भी एक dam nidhaal हो गई थी । इसी अवस्था में उन दोनों को naa jaane kab neend आ गई पता ही नहीं चला ।
अगले दिन सुबह जब सुदेश उठा तो रश्मि के नंगे जिस्म को सूरज की रौशनी में देख कर फिर जोश में आ गया । or वो सुबह सुबह ही रश्मि को एक बार फिर से अपने आगोश में ले लिया ।
दोपहर को सुदेश का दोस्त रमण उससे मिलने आया । वो मिलने तो क्या आया वास्तव में तो वो सुदेश से yeh पूछने आया था ki उसकी सुहागरात कैसी रही । खेर घर में पाँव रखते ही उसकी नज़र रश्मि पे पड़ी उसको देखते ही रमण उस पे फ़िदा हो गया । वो उसको एक तक देखे जा रहा था की इसी बीच सुदेश आ गया । रमण ने सुदेश को कहा यार तुम बहुत किस्मत वाले हो जो तुमको इतनी सुन्दर पत्नी मिली । अपनी पत्नी की तारीफ़ सुन कर सुदेश मन ही मन खुस हुआ परन्तु उसके चेहरे पे एक सिकन थी वो कुछ बाते जानना चाहता था ।
इसके बाद सुदेश और रमण एक कमरे में चले गए । रमण ने सुदेश से पुछा यार सुदेश बता तेरे सुहागरात कैसी रही । raat को किला फतेह कर लिया या नहीं । सुदेश को शर्म आ गई और उसने अपना सर हां में हिला दिया । मन में khusi भी थी और एक उलझन ही थी । मन ही मन सोच रहा था की रमण को बात पूछ लू । वो कुछ कहने ही वाला था की रमण ने उसको पूछ लिया क्या बात हे सुदेश कुछ परेसान से देखाए दे रहे हो कोई परेसानी हो तो में बाद में आ जाता हु । सुदेश ने कहा कुछ नहीं यार बस एक बात समझ में नहीं आ रही हे तुम मुझे बता सकते हो क्या । रमण बोला हा पुचो क्या बात हे । सुदेश ने कहा क्या किसी नै नवेली दुल्हन के साथ जब पहली बार करते हे तो क्या उसकी योनी से खून आता हे क्या ।
रमण कुछ सोच vichaar रहा था । उसको लगा सायद सुहागरात को रश्मि के खून नहीं आया होगा इसलिए सुदेश परेसान हो गया हे शायद उसको वहम होगा की रश्मि पहले सेही किसी के साथ अनुभव ले चुकी हे । रमण तो चाहता था की यदि वो उसको ये बता दे की रश्मि पहले से किसी के साथ सारा काम कर चुकी हे तो में रश्मि को kabhi नहीं पा सकूँगा इसलिए उसने अपने किताबी ज्ञान का उपयोग में लिया और सुदेश को कहा । देखो सुदेश ऐसा कुछ नहीं हे की खून निकले । उसने कहा औरतों के योनी में एक झिल्ली होती हे यदि वो फट जाती हे तो खून निकल आता हे और कोई जरुरी नहीं हे की वो झिल्ली सम्भोग के समय ही फटे वो तो खेल खेल भी फट सकती हे तुम परेसान मत होवो ये सब तो एक दम साधारण si बात हे ।
रमण की बात सुन कर सुदेश का सारा वहम निकल गया उसके चहरे पे एक सुकून आ गया । अब तो खुस था । वो दोनों बातें कर ही रहे थे की इसी बीच रश्मि वह चाय ले के आ गई । उसने एक कप सुदेश को दिया और जैसे ही वो दूसरा कप रमण को देने के लिए झुकी उसकी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया । साड़ी का पल्लू सरकते ही रमण रश्मि की चिकनी गोलाइयो की दरार के बेच फंस गया । वो उसके उसको एक टक देखे जा रहा था । कुछ संभल कर रश्मि ने अपना पल्लू ठेक किया तो रमण की भी तन्द्रा टूट गई । रश्मि वही पे सोफे पे बेथ गई और उन दोनों की बातो में साथ देने लगी । जब जब रमण की नज़र रश्मि पे पड़ती रश्मि के गुलाबी ओठो पे एक मुस्कान आ जाती और आँखे शर्म सेjhuk जाती । शायद रमण रश्मि के वर्ताव को पहचान गया था । कुछ देर बाते करने के बाद रमण वह से चला गया ।दिन पर दिन बित्ते चले गए । रमण का सुदेश के घर आना जाना जारी रहा । रश्मि भी अब रमण से काफी खुल गई थी । वो कई बार रमण के साथ एक ही सोफे पे बेथ कर चाय की चुस्कियो का आनंद लेती रही । बातो बातो में वो कभी कभी रमण की जांघो पे भी हाथ मार देती थी । जिस से रमण का भी मन मचल उठता ।
एक दिन सुदेश ने रमण को बताया की वो शहर जा के काम करना चाहता हे । रमण ने देखा अब उसका रास्ता साफ़ हे । उसने सुदेश को और प्रोत्साहित किया और कहा शहर में बहुत अछि कमाई हे तुमको जरुर जाना चाहिए । और एक दिन रमण ने सुदेश को शहर का रास्ता दिखा दिया । वो सुदेश को छोड़ने के लिए स्टेशन तक आया । सुदेश का ध्यान तो रश्मि की और था पर मन को भारी कर के वो शहर की और चल पड़ा ।
अब दोनों पंछियों के लिए आसमान खुला था । रश्मि का मन भी थोडा उदास था पर रमण को देख कर वो खुस भी थी । दो चार दिन के बाद ही रमण ने अपना जाल फैलाना सुरु कर दिया ।
एक दिन जब रश्मि के सास ससुर खेत पे चले गए रमण रश्मि से मिलने उसके घर गया । रश्मि रशोई में खाना बनाने की तयारी कर रही थी । उसका मुह दिवार की और था रमण कब रसोई में आया उसको पता ही नहीं चला । वो अपने काम में व्यस्त थी । घाघरे के पेचे उसके उभारदार नितम्बो को देख कर रमण का लंड एक दम से खड़ा हो गया । वो रश्मि के नजदीक गया । और पेचे से उसकी कमर को पकड़ लिया । रश्मि एक दम से हुए इस हमले से दर गई उसने अपने आप को रमण से छुड़ाया और एक और हट गई और कहा ये आप क्या कर रहे हो रमणजी अगर कोई देख लेगा तो बहुत बदनामी होगी । रमण ने भी उसके शब्दों का अर्थ लगा लिया की किसी के घर में होने से डर रही थी न की उसके रसोई में होने से । रमण ने मोर्चा संभाला और कहा रश्मि घर पे कोई नहीं हे तेरे सास ससुर खेत में गए हे । इस पर रश्मि मुस्कुरा दी और कहा मुझे पता हे में तो बस उ ही कह रही थी । अब रमण से और नहीं रहा जा रहा था उसने रश्मि को पकड़ लिया और अपनी बाहों में झुला झुलाने लगा और उसके गोरे गोरे चिकने गालो पे chumban की झाडिया लगा दी । रश्मि भी और बर्दास्त नहीं कर सकती ही उसने भी रमण को प्रतिउत्तर देना सुरु कर दिया । दोनों पंछी उड़ान के लिए तयार थे । रमण ने रश्मि की चूत को खड़े खड़े ही घाघरे के ऊपर से ही सहलाना सुरु कर दिया रश्मि भी रमण के लंड को पेंट के ऊपर से रगड़ने लगी । अब रमण ने रश्मि की अंगिया के हुक खोल दिए जैसे ही उसने उसके हुक को खोला रश्मि के दुधिया रंग में रंगे गोल गोल और चिकने गुलाबी चुचियो वाले स्तन झट से बाहर आ गए जिस को देख कर रमण के होश फाख्ता हो गए वो अपने पे काबू नहीं रख सका और उन पर टूट पड़ा रश्मि भी एक दम लाल हो गई उसने कहा रमण ये सब आपका ही तो हा जरा आहिस्ता कीजिये ना इतनी जल्दी क्या हे । रमण तो अपनी धुन में उनको अपने मुह में लगातार चुस्त जा रहा था शायद रश्मि की बात उसके कानो तक पहुची ही नहीं । रश्मि की चुचियो को चूसने के बाद रमण धीरे धीरे रश्मि के नाभि कमल तक आ गया और रश्मि की मधोस कर देने वाली खुसबू पागल सी कर रही थी वो तो जन्नत के द्वारतक पहुँचने वाला था बस एक रुकावट आ रही थी । उसने उस द्वार को खोला नहीं परन्तु उसको ऊपर कर दिया जी हाँ उसने रश्मि के घाघरे को उसके कामत तक ऊपर उठा दिया उसको जन्नत का दरवाजा दिखाई दे रहा था । उसको देखते ही रमण के लंड की एक एक नस फुल गई थी उसको लगने लगा कई उसके लंड की नसे फट न जाए उससे पहले ही रश्मि ने रमण की पेंट खोल कर उसका लंड अपने हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी । इस से रमण का जोश दुगुना हो गया । रश्मि ने रमण का लंड देखा तो उसकी आँखे फट गई उसका लंड नो इंच का था इनता मोटा लंड उसने आज तक नहीं देखा । वो अपनी किस्मत को बार बार दुहाई दे रही थी । रश्मि नीचे झुकी मानो वो रमण के लंड को साष्टांग प्रणाम करना चाहती हो परन्तु नीचे झुक कर उसने रमण के लंड को अपने मुह में के लिया जैसे ही रमण का लंड रश्मि के मुह में गया उसके लंड ले रस की बुँदे टपकने लगी रश्मि उसको प्रशाद मान कर अपने कंठों में उतार लिया । वो उसके सारे रस को पि गई । और रमण के लंड की चमड़ी को पीछे कर कर के अपने मुह में ले के जोर जोर से झटके देने लगी कई देर तक करने बाद रमण से रहा न गया उसने रश्मि को ऊपर उठाया और उसको दिवार के सहारे खड़ा कर दिया । रमण ने रश्मि की एक जांघ को अपने हाथ से ऊपर उठाया और और अपना लंड रश्मि की गुलाबी चूत पे टिका दिया पूरा सहारा देख कर रमण ने रश्मि को जोर का झटका दिया जैसे ही रमण का लंड रश्मि की चूत को चीरता हुआ अन्दर गया रश्मि के गले से मधुर नाद निकलने लगा दिवार का सहारा दिए हुए रमण ने रश्मि की चुदाई करनी सुरु कर दी रश्मि के लिए ये एक नया अनुभव था आज वो एक असीम आनंद में खो गई । कुछ देर ऐसी ही चूड़ी करने के बाद रमण रसोई में लगी पट्टी पे बैठ गया और रश्मि और अपने ऊपर ले लिया अब रश्मि रमण ले लंड पे बैठी ऊपर नीचे हो रही थी मानो किसी अरबी घोड़े की सवारी कर रही हो नीचे रश्मि और रमण का रस टपक रहा था जैसी मधुमख्ही के छाते से शहद टपकता हो । दोनों के दोनों दिन दुनिया से बेखबर परम आनंद की गहराई में खो गए थे










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पीहर से ससुराल तक--3

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पीहर से ससुराल तक--3

सुखराम का सीना रश्मि की कमर से और लंड उसकी गांड सेचिपका हुआ था । अपनी गांड से सुखराम के लंड का आकर का अनुमान लगा के रश्मि का दिल जोर जोर से धधकने लगा ।उसको लगा सायद आज उसकी खेर नहीं । सुखराम अपने लंड का दबाव रश्मि की गांड पे दे रहा था । सहर में इतनी रंडिय चोद चोद चूका सुखराम को आज तक ऐसी गांड मारने को नहीं मिली । सुखराम ने अपना कुरता उतार दिया अब उसका नंगा सीना रश्मि की नंगी कमर सेसे चिपक गया मानो किसी लोहे से चुम्बक चिपक गई हो । सुखराम ने एक हाथ रश्मि की गांड की गोलाइयो पे फैर कर देखा इतनी सख्त और चिकनी गांड आज उसने पहली बार देखि थी । सुखराम ने अपने पायजामे का नाडा खोल दिया और उसका ८ इंच का लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया इन्द्र की बजाय उसके लंड की मोटाई ज्यादा थी । सुखराम अभी भी रश्मि के स्तनों को daba रहा था साथ हे उसकी गर्दन और गालों पे चुम्बन जड़ता जा रहा था निचे से उसका लंड रश्मि की गांड में घुसने का प्रयास कर रहा था उसका लंड बार बार रश्मि की गांड के छेद से रगड़ खा रहा rha लगातार रगड़न से सुखराम के लंड से रस की बुँदे टपकने लगी । अब उससे और नहीं रहा जा रहा था उसने रश्मि को उसी दशा में पलग पे सुला दिया और उसकी कमर को बीच से ऊपर उठा दिया रश्मि को कुतिया की पोजिसन में लेने के बाद सुखराम ने देखा की उसकी गांड का छेद एक दम गुलाबी था उसने अपनी एक ऊँगली उसकी गांड के छेद पे फेरी रश्मि को मानो करंट लग गया हो वो आगे की और खिसकने लगी परन्तु सुखराम ने उसको कास कर पकड़ लिया और एक हाथ से अपने लंड का सुपाडा रश्मि की गांड के छेद पे टिका दिया । रश्मि मिन्नत करने लगी की सुखराम पेचे से मत कर में मर जाउंगी फिर कभी कर लेना आज तो आगे से ही कर ले । पर सुखराम के सर पे तो मानो भुत सवार था उसको रश्मि की कोई बात सुने नहीं दे रही थी या सायद वो उसको उन्सुना कर रहा था ।
अपने एक हाथ से मुसल जैसे लंड को पकड़ कर उसने अपना लंड रश्मि की गांड में सरकाना सुरु किया । सुपाडा थोडा हे अन्दर गया होगा की रश्मि जोर से चिल्लाने लगी उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे वो रोने लग गई पर सुखराम ने इसकी कोई परवाह नहीं की वो तो आज रश्मि के बदन का पूरा रस लेना चाहता था । अब उसने एक धक्का और लगाया उसका लंड आधा अन्दर चला गया रश्मि एक दम बदहवास हो गई उसका सर चक्कर खाने लगा कुछ देर रुक कर सुखराम ने अपने लंड को अन्दर बहार करना सुरु किया । धीरे धीरे रश्मि का दर्द कुछ कम होने लगा अब उसको भी थोडा मजा आने लगा था परन्तु सुखराम का लंड तो अभी आधा हे अंदर गया था आधा तो बाहर ही था थोड़ी देर की चुदाई करने के बाद सुखराम ने एक जोरदार झटका दिया और उसका लंड ७ इंच तक रश्मि की गांड में चला गया । सुखराम के लंड पे थोडा खून लग गया । रश्मि की गांड इतनी टाईट थी की सुखराम के लंड की चमड़ी भी छील गई थी । उसको भी दर्द होने लगा था परन्तु सुखराम ने इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया और अपने काम में लगा रहा जब दर्द थोडा कम हुआ तो सुखराम ने अपने झटको को बढ़ाना सुरु किया थोड़ी ही देर में दर्द की जगह मजे ने ले ली । अब तो रश्मि को भी इसका भरपूर मजा आने लगा । वो भी अपनी गांड उछाल उछाल कर सुखराम का साथ देने लगी । २० २५ मिनट की चुदाई के बाद सुखराम रश्मि की गांड में ही ढेर हो गया । आज रश्मि को लगा जैसे वो स्वर्ग की सैर कर आई हो । सान्त हो के रश्मि पलग पे उलटी हे लेट गई और सुखराम उसके ऊपर ही पड़ा रहा उसका लंड अभी भी रश्मि की गांड में ही था वो अब सिकुड़ गया था । और अपने आप रश्मि की गांड से बाहर आ गया था ।

-- शाम को रश्मि की माँ काम पर से लौटी तो रश्मि की देखते ही उसको लगा रश्मि के व्यवहार में थोडा बदलाव था । रश्मि की चाल में भी एक लडखडात थी । उसकी माँ को सारा मामला समझते देर न लगी पर वो बोली कुछ नहीं । रात को जब रश्मि और उसकी माँ छत पे सो रहे थे तो रश्मि को अपनी पुरे दिन की घटनाएं याद आने लगी दिन भर का वाकया उसकी आँखों के सामने एक फिल्म की तरह चल रहा था रह रह कर उसको अपने काम क्रीडा के याद आ रही थी ।
दिन पर दिन बीत रहे थे ये सिलसिला यू ही चलता रहा । रोज इन्द्र आता और रश्मि के साथ इस खेल को खेलता और जबतक सुखराम गाव में रहा वो भी रश्मि के साथ अपनी आग को शांत कर लेता । अब तो रश्मि का जिस्म एक कली की जगह फूल बन गया था । उसकी चोली दिन दिन छोटी होती जा रही थी और अंगिया भी उसके स्तनों को पूरी तरह ढकने में असफल हो रही थी । उसके तन में गदराई और ज्यादा बढ़ गई थी । रश्मि की माँ ने सोचा क्यू न अब इस लड़की का विवाह कर देना चाहिए इस से पहले की और देर हो किसी भी परिवार में इसको ब्याह दे तो theek होगा वर्ना एक तो गरीबी और ऊपर से इस छोरी की जवानी हमको इस गाव में रहने न देगी ।
५ साल बाद रश्मि का बाप वापस गाव लौटा अब तक रश्मि २१ साल की हो चुकी थी । रश्मि की माँ ने उसके बाप को साड़ी बात बता दी उसने कहा रश्मि अब बड़ी हो गई हे गाव में कही अपनी बदनामी न हो जाए इस से पहले इस छोरी का ब्याह कर देना चाहिए । रश्मि के बाप ने भी बात मान ली उसे भी लगा की अब ज्यादा देर करना ठीक ना होगा इसलिए उसने तुरंत ही पास ही के कस्बे में रहने वाले एक परिवार में रश्मि के रिश्ते की बात चलाइ । लड़का उम्र में रश्मि से ७ साल बड़ा था पर अपने परिवार का इकलोता वारिस । किसी आचे दिन उन दोनों का विवाह कर दिया गया । पर रश्मि के दिमाग सेइन्द्र अभी भी निकल नहीं पा रहा था अपने से बड़ी उम्र के लड़के से ब्याह कर उसका मन बेचैन हो गया था वो तो अपने हम उम्र के साथ ही विवाह करना चाहती थी पर गरीबी जब घर के रास्ते हे आती हे तो साड़ी इछाये खिड़की से बाहर चली जाती हे । मजबूर हो के उसको ये विवाह करना पड़ा । वो इस चीज का विरोध भी नहीं कर सकी अपने सपनो को अपने मन में दफना के वो अपने ससुराल चली गई ।
आज रश्मि की सुहागरात है । कमरा फूलो से सजा है । सेज पे बैठी रश्मि अपने पति का इन्तजार कर रही है । उसके मन में किसी तरह का कोई डर नहीं है जैसा की एक नई नवेली दुल्हन को अपनी सुहागरात को होता है । क्यू की उसको पता है की सुहागरात को क्या क्या होता है वो तो बस चुप चाप सेज पे बैठी हुई है और आने वाले पलों की प्रतीक्षा कर रही है की कब उसके साजन आये और उसकी भावनाओं को दबा दे । काफी समय बाद करीब आधी रात को उसके पति ने कमरे में प्रवेश किया । उसका पारी अपनी उम्र के हिसाब से काफी छोटा देखता था और वो था भी खुबसूरत । रश्मि उसको देखते ही उसकी उम्र को भूल गई और उसकी खूबसूरती में खो गई । उसने सोचा की वो कितनी भग्य साली है जो उसको इतना अच्छा और खुबसूरत पति मिला अब उसके मन से इन्द्र के ख्याल बहार निकल गए थे वो अपने साजन के रूप में खो गई थी ।

और अंत में वही hua सुदेश एक बार तो रश्मि को बिना चोदे हे झड गया । उसका अन्डरवेअर उसके अपने ही रससे भीग गया । यह देख कर रश्मि खिलखिला कर हंस पड़ी परन्तु सुदेश की हालत देखने laayak थी । वो अपने आप में बहुत शर्मिंदा महसूस कर रहा था । खेर थोड़ी ही देर के बाद वो फिर से तैयार हो गया । इस बार वो अपना संतुलन बना के चल रहा था । उसने रश्मि को गोद में उठाया और उसको पलंग पे पटक दिया । अब वो अपने खेल में जल्दबाजी नहीं करना चाहता था । वो धीरे धीरे रश्मि के स्तनों को मसलने लगा और चूसने लगा । कभी कभी उसका मुह रश्मि की नाभि पे आ जाता तो रश्मि भी सिहर उठती । ये देख कर सुदेश को भी जोश आ जाता । सुदेश रश्मि के ओठों का रसपान करता तो रश्मि उसके हथियार को खिंच कर लम्बा करने का प्रयास करती । थोड़ी देर के खेल के बाद सुदेश अपना मुह रश्मि की चिकनी चूत पे ले गया उसकी चूत गरम हो चुकी थी वो अब चुदने को एक दम तैयार थी पर सुदेश तो चाहता था की जल्दबाजी में एक बार फिर से काम बिगड़ सकता हे इसलिए उसने धैर्य रखा और अपना काम करता रहा । उसने अपनी नाक को रश्मि की चूत के पास ले जा क सुंघा एक मादक सी महक उसके दिमाग पे छा गई उसे लगा जैसे किसी ने उसको बिना पानी या सोडे के ही सराब पिला दी हो वो मदहोस सा हो गया उसकी आँखे अधखुली थी अपनी अधखुली आँखों से वो रश्मि की चूत को भी निहार रहा था । धीरे से उसने अपनी जीब बाहर निकली और बड़े इत्मीनान से उसको रश्मि की चूत की चीर पे फेरा रश्मि को मानो करंट सा लग गया हो तो फडफडा उठी उसने अपनी टांगो को आपस में चिपका लिया ।








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पीहर से ससुराल तक--2

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पीहर से ससुराल तक--2


अगले दिन माँ के खेत चले जाने के बाद रश्मि ने अपना घर का सारा काम ख़तम किया । नहा धो कर वो तैयार हो गई । नहाते समय आज उसने पहली बार अपने सरीर को बड़े घोरसे देखा । उसकी इच्छा हो रही थी की कोई आके अभी मसल दे परन्तु अपने हाथों से थोडा सा सुकून पा के वो तैयार हो गई । रश्मि घर में अकेली थी इसी बीच इन्द्र वह आ गया । इन्द्र को देखते ही उसकी आँखों में चमक आ गई । आज वो उसको अलग हे नजरों से देख रही थी । इन्द्र ने हिम्मत की और जा क रश्मि का हाथ पकड़ लिया । रश्मि ने इसका कोई विरोध नहीं किया । अवसर पा के इन्द्र ने रश्मि को गले से लगा लिया । रश्मि ने भी इन्द्र को कस कर अपनी बाहों में ले लिया । उसके स्तन इन्द्र के सिने से टकरा गए । इन्द्र उसको बाहों में लिए हुए कमरे में ले गया । गले से नागपाश की तरह लिप्त इन्द्र रश्मि की गर्दन पे अपने होठों से चुम्बन ले रहा था । रश्मि हाथ भी कभी इन्द्र के बालों में तो कभी उसकी कमर पे रेंग रहा था । इन्द्र धेरे से अपना हाथ रश्मि के स्तन पे रखा और उसको हलके से दबाया सचमुच उसके अनछुए स्तन बहुत ही कठोर थे । जैसे ही इन्द्र ने स्तन दबाया रश्मि के मुहसे सिसकारी निकल गई । उसने और कस कर इन्द्र को जकड लिया । इन्द्र इसी अवसर की प्रतीक्षा में था उसने रश्मि की अंगिया में हाथ दाल कर उसके स्तन को दबाया । गोल और मांसल तथा चिकने स्तन पे हाथ जाते हे इन्द्र का लंड गैंडे के सींग की तरह खड़ा हो गया । उसने रश्मि की अंगिया की डोरी को खोल दिया और उतार के फेंक दिया । उसके गोल गोल और सुड़ोल स्तन को देख कर इन्द्र के सब्र का बाँध टूट गया और एक भूखे भेडिये की तरह उन पर हमला कर दिया । वो एक स्तन को मुह में चूस रहा था तो दुसरे को अपने हाथ सेमसल रहा था । पुरे कमरे में रश्मि की सिसकारी गूंज रही थी । काफी देर तक उन दोनों का ये खेल चलता रहा । अब इन्द्र का हाथ रश्मि के नितम्बों पे चला गया उसकी गोलाइयो को महसूस करते हे इन्द्र और जोश में आ गया । उसने आव देखा न ताव और तुरंत रश्मि के घाघरे का नाडा खोल दिया । रश्मि का घाघरा सरसराता हुआ जमीन पे गिर गया । उसके गदराये हुए जिस्म को देख कर इन्द्र पागल हुआ जा रहा था उधर रश्मि भी आज अपने योवन लुटाने के लिए तैयार थी । इन्द्र ने अब उसको पलंग पे लिटा दिया और अपने कपडे उतारने लगा । इन्द्र का लंड उसकी अंडरवियर से बाहर आने को तत्पर था । रश्मि से रहा नहीं गया और उसने इन्द्र की अंडरवियर को उतार दिया । जैसे ही उसने अंडरवियर को निचे खिंचा इन्द्र का लंड फनफनाता हुआ बहार आ गया इसेदेख कर रश्मि एक बार तो सहम गई । पर हिम्मत कर के उसने उसको हाथ में लिया रश्मि के कोमल हाथ लगते ही इन्द्र के लंड से पानी की बुँदे टपकने लगी । रश्मि अब इन्द्र के लंड को धीरे धीरे आगे पीछे कर रही थी इन्द्र के मुह सेसिस्कारिया निकल रही थी । थोड़ी देर के बाद ही इन्द्र रश्मि के ऊपर आ गया और उसको ताबड़तोड़ चूमने लगा पहले होठों को चुन्सा फिर उसके स्तन को । ऐसा करते करते वो रश्मि की चूत पे आ गया । रश्मि की चूत पे बहुत ही कम पर मुलायम बाल थे । इन्द्र ने उनकी जाँघों को फैला दिया और अपना मुह रश्मि की चूत के पास ले गया । रश्मि की चूत सेबहुत ही मादक खुसबू आ रही थी इन्द्र ने अपनी जीभ जैसे ही रश्मि की चूत पे लगाईं उसे लगा मानो उसकी जीभ जल जाएगी । रश्मि की चूत में अंगारे दाहक रहे थे । इन्द्र जैसे ही रश्मि की चूत को चाटने लगा रश्मि की चूत से पानी की एक धार छुट गई । इन्द्र फिर भी अपने काम में लगा हुआ था वो लगातार उसकी चूत को चाट रहा था अब तो रश्मि का बुरा हाल हो गया था । उसको समः नहीं आ रहा था की उसकी ये आग कैसे शांत होगी ।
अब इन्द्र अपने लोहे की राड जैसे लंड को और ज्यादा आजादी नहीं देना चाहता था वो चाहता था की जल्दी से उसका लंड रश्मि की चूत में कैद हो जाये । इन्द्र ने अपने लंड को सहलाया और उसको रश्मि की चूत के मुहाने पे टिका दिया ।
जैसे ही इन्द्र का लंड रश्मि की चूत के मुहाने पे लगा मानो उसका लंड उसकी चूतसे चिपक गया हो । इन्द्र को लगा जैसे वो उससे कभी अलग ही नहीं हो पायेगा । अपने को थोडा सा संभाल कर इन्द्र ने रश्मि की चूत पे थोडा सा दबाव डाला । इन्द्र के लंड का सुपाडा थोडा अन्दर चला गया की रश्मि के मुह से आह निकल गई उसका चेहरा लाल हो गया । एक मिट्ठा सा दर्द उसके जहन में दौड़ गया । उसका जिस्म बिना पानी की मछली की तरह तड़फ रहा था । अपनी टांगो की हवा में उछालते हुए वो इन्द्र के जाल से निकलने का प्रयास कर रही थी परन्तु अब सेमछली उस जाल से बाहर आने में नाकाम रही । इन्द्र ने थोड़ी और ताकत लगाईं और एक जोर का झटका दिया उसका लंड रश्मि की चूत की दिवार को फाड़ता हुआ आधा अन्दर चला गया । रश्मि की चूत से खून और आँखों से आंसू एक साथ बह गए । उसकी आँखों में ऐसी भावना थी मानो वो इन्द्र से कह रही हो की इन्द्र मुझसेगलती हो गई मुझे माफ़ कर दो परन्तु उसके मुह से एक शब्द भी नहीं निकल रहा था । इन्द्र अब धीरे धीरे धक्के लगा रहा था har धक्के पे रश्मि की सिसकारी बढती जा रही थी । रश्मि की सिस्कारियों से इन्द्र का जोश और दुगुना होता जा रहा था । वो और जोर से धक्के लगाने लगा । अब तो रश्मि की सिस्कारियों की जगह उसकी आहो ने ले ली थी । आधे घंटे की चुदाई के baad इन्द्र saant हो गया और निढाल हो के रश्मि पे ही गिर पड़ा । दोनों हे पसीने से तर बतर हो गए थे उन दोनों को होश भी नहीं था की उन दोनों के इस खेल को कमरे की खिड़की से भी कोई देख रहा हे । तभी रश्मि की निगाहें खुली खिड़की की तरफ गई बहार खड़े व्यक्ति को देख कर रश्मि सकपका गई । उसकी हालत काटो तो खून नहीं जैसी थी । इस सारी योजना का जो सूत्रधार था सुखराम वो बहार से इस सारे खेल को देख रहा था । खिड़की से इन्द्र और रश्मि की जवानी का खेल देखते देखते सुखराम भी अपने लंड को मसल रहा था । सुखराम रश्मि के गदराये जिस्म को देख कर अपनी सुध खो बैठा । रश्मि सहम गई थी की सायद सुखराम ये सारी बात गाँव वालो को बता देगा उसके मन में एक डर बैठ गया था उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे ।
परन्तु औरत आदमी को वश में करना खूब जानती हे । वो सुखराम के और देख कर मुस्कुरा दी । सुखराम ने सोचा अब उसके लिए भी रास्ता साफ़ हो गया हे उसने बिना देरी किये रश्मि के कमरे में आ गया और इन्द्र को कहा इन्द्र अब तू घर की चौखट पे जा यदि कोई आ जाए तो मुझको इशारा कर देना । इन्द्र वह से चला गया । रश्मि के बदन को देख कर सुखराम अपने आपे से बहार हो गया उसने रश्मि को पलंग सेउठाया और उसको बेतहासा चूमने लगा एक बार और रश्मि की आग भड़क उठी । वो भी सुखराम को चूमने लगी ।
सुखराम उसके लाल लाल टमाटर जैसे गालों को अपने दांतोंसे काट रहा था इन्टने में रश्मि की उतेजना और बढ़ गई वो अपने नाखुनो से सुखराम के सीने को खरोचें मार रही थी । सुखराम इस खेल का खिलाडी था वो सहर में कई बार रंडीखानो\ की सैर कर चूका था । अब सुखराम रहमी के पिछवाड़े खड़ा हो गया और रश्मि की बगल से अपने हाथ daal कर रश्मि के स्तनों को मसलने लगा । रश्मि की स्वांसों की रफ़्तार तेज होती चली गई । सुखराम अपने उँगलियों के पोरों से रश्मि की चुचियों को मसल रहा था उसने उनको इनती जोर से मसाला की रश्मि के स्तन लाल हो गए । उसके स्तनों में दर्द होने लग गया वो सुखराम से अपने आप को छुड़ाने की कोसिस करने लगी परन्तु वो तो उसके चंगुल में ऐसे फंसी की उसकी सारे कोसिसे नाकाम हो गई थी ।






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पीहर से ससुराल तक--1

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पीहर से ससुराल तक--1

उस गाँव की बगिया में एक गुलाब खिल गया था रश्मि नाम था । दिखने में कामदेव की पत्नी रत्ती के सामान थी ।
चार उंगल का ललाट , हिरनी के जैसे आँखे, तीखा नाक , लाल सुर्ख ओठ, सुराही जैसे गर्दन, सांचे में ढले उन्नत वक्ष , पतली कमर, गहरी नाभि, कमल दंड जैसी बाहे, गोल नितंभ, भरी हुई चिकनी जांघे । चलती थी तो गाँव के लोंडे तो क्या बूढ़े बूढों की भी साँसे एक बार तो रुक जाया करती थी । अपनी जवानी का दंभ था उसको क्यों की आस पास के गाँव में उसके जैसा सुन्दर , रूपवान, और कामुक कोई और न था ।
सुन्दर होना भी एक अभिशाप हो सकता हे । दिन पर दिन बीत रहे थे । रश्मि के माँ बाप को रश्मि की साडी की चिंता खाए जा रह थी । गाँव में कोई आमदनी न देख कर रश्मि के बाप ने सोचा क्यू न शहर जा के कोई काम धंधा किया जाये ताकि रश्मि की साडी किसी अच्छे घर में कर सकू । इन्ही ख्यालों के साथ रश्मि का बाप एक दिन शहर की और चला गया । अब घर में सिर्फ रश्मि और उसकी माँ ही रह गए थे तीसरा कोई सदस्य नहीं था ।
माँ दिन थके तक जमींदार के खेत पे काम करने के लिए चले जाया करती थी पीछे रश्मि अकेले ही घर पे रहा करती थी । मौका पा के इन्द्र रश्मि के घर आ जाता था । इन्द्र के मन में तो पहले से ही चोर बसा हुआ था । इन्द्र की नियत थी की वो रश्मि के साथ खेले पर वो एक अलग हे खेल खेलना चाहता था जो योवन में खेला जाता हे । बातों बातों में वो रश्मि को छु तो लेता था परन्तु कभी उसको दबोचने की हिम्मत नहीं कर पाया था ।
इन्द्र का दोस्त था सुखराम वो शहर में काम किया करता था जब भी वो गाँव आता तो वो और इन्द्र दोनों अपना समय साथ साथ हे बिताते थे । एक दिन इन्द्र में अपने मन की सारी बात सुखराम को बता दी ।सुखराम भी चाहता था की क्यू ना में भी इस रश्मि के मजे ले लू । उसने कहा इन्द्र मेरे पास एक तरकीब हे अगर काम कर गई तो समझ ले तेरा काम हो जायेगा । इन्द्र बोला बता ना क्या तरकीब हे । सुखराम अपने साथ शहर से सेक्स की एक किताब लाया था उसने वो किताब इन्द्र को दे और बोला अगर ये किताब एक बार तो रश्मि की देखा दे तो सायद तेरा काम हो जायेगा परन्तु एक शर्त हे । में भी एक बात रश्मि को चोदना चाहता हु । वो दोनों पक्के दोस्त थे इसलिए इन्द्र उसको ना नहीं कह सका और आगे की योगना सुरु की ।
अगले दिन इन्द्र उस किताब को ले के रश्मि के घर जा पहुंचा । रश्मि घर पे अकेली ही थी । उसने कहा रश्मि में तेरे लिए कुछ लेके आया हु देखेगी क्या । रश्मि बोली देखा ना क्या लाया हे । तो इन्द्र बोला पहले ये वादा कर किसी को कुछ नहीं कहेगी कुछ भी नहीं बताएगी । उसने कहा ठीक हा बा बा अब बता ना क्या लाया हे । इन्द्र ने अपनी बनियान में छिपी किताब बहार निकली और रश्मि के आगे कर दी । रश्मि ने जैसे ही उसका पन्ना पलता उसका हाथ कांपने लगा परन्तु उसके हाथ सेवो किताब नहीं छूटी । वो पन्ने पलट पलट कर किताब में नंगी तस्वीरों को देख रही थी । वो इन्हें देखने में इतनी मशगुल हो गई थी की उसको ध्यान ही नहीं रहा की इन्द्र भी उसके पास ही खड़ा हे । किताब देखते देखते अनजाने में उसका हाथ अपने स्तन पर चला गया और एक हल्का सा दबाव उसने दिया । उसके मुह सेएक सिसकारी निकल गई । अचानक उसको होश आया उसने देखा इन्द्र उसके पास हे खड़ा हे । उसने तुरंत अपना हाथ हटा लिया । रश्मि इन्द्र को किताब देते हुए बोली इन्द्र माँ आने वाली हे अभी तुम जाओ । आज रश्मि को कुछ अजीब सा परन्तु मन में एक उमंग से महसूस हो रही थी । शायद आज उसको अपने जवान हो जाने का एहसास हो रहा था । इन्द्र वह से चला गया ।इन्द्र के चले जाने के बाद रश्मि ना जाने किन ख्यालों में खो गई । उसको बैचैनी सी महसूस हो रही थी । अभी भी उसकी सांसें तेज थी । माँ के आ जाने के बाद रश्मि ने माँ को खाना खिलाया फिर दोनों छत पे जा के खाट पे लेट गई । रश्मि लेटे हुए थी पर आँखों सेनींद कोसों दूर थी । रह रह कर उसकी आँखों के सामने उस किताब की तस्वीरे आ रही थी । खाट पे वो नागिन की तरह अंगडाई ले रही थी । उसने महसूस किया उसका सरीर अकड़ रहा था । पर मन में एक अजीब सी कसमसाहट थी । अनजाने में उसका हाथ उसकी चूत पर चला गया । धीरे धीरे वो अपनी चूत को रगड़ रही थी । थोड़ी सी रगदन के बाद ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया । वो निढाल हो गई अपनी आँखों को बंद कर वो एक अजीब सा सुकून महसूस कर रही थी । आज रात उसको बहुत हे गहरी नीद आई ।










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