raj sharma stories राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँहिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया rajsharma ki kahaniya ,रेप कहानिया ,सेक्सी कहानिया , कलयुग की सेक्सी कहानियाँ , मराठी सेक्स स्टोरीज , चूत की कहानिया , सेक्स स्लेव्स ,
धोबन और उसका बेटा--21
मैने धक्का लगाते हुए कहा "है मा बहुत मज़ा आ रहा है, बहुत कसी हुई है तुम्हारी बुर तो, मेरा लंड तो एक दम फस फस के जा रहा है तेरी बुर में, ऐसा लग रहा है जैसे किसी बॉटल में लकारी का ढक्कन फसा रहा हू, है क्या सच में मेरा बापू तुझे चोद्ता ऩही था क्या, या फिर तुम उस को चोदने ऩही देती थी, तुम्हारी चूत इतनी कसी हुई कैसे है मा, जबकि मेरे दोस्त कहते थे की उमर के साथ औरतो की चूत ढीली हो जाती है, है तुम्हारी तो एक डम कसी हुई है". इस पर मा ने अपने पैरो का शिकंजा और कसते हुए दाँत पीसते हुए कहा "साला तेरा बाप तो गान्डू है, वो क्या खा के चोदेगा मुझे, उस गान्डू ने तो मुझे ना जाने कब से चोदना छ्होरा हुआ है, पर मैं किसी तरह से अपने चूत की खुजली को अंदर ही दबा लेती थी, क्या करती किस से चुड़वति, फिर जिसके पास चुड़वाने जाती वो कही मुझे संतुष्ट ऩही कर पाता तो क्या होता, बदनामी अलग से होती और मज़ा भी ऩही आता, तेरा हथियार जब देखा तो लग गया की तू ना केवल मुझे संतूश कर पाएगा बल्कि, तेरे से चुड़वाने से बदनामी भी ऩही होगी, और तू भी मेरी चूत का पायसा है फिर अपने बेटे से चुड़वाने का मज़ा ही कुच्छ और है, जॉब सोच के इतना मज़ा आ रहा था तो मैने सोचा की क्यों ना चोदवा के देख लिया जाए"
"है मा तो फिर कैसा लग रहा है अपने बेटे से चुड़वाने में, मज़ा आ रहा है ना, मेरा लॉरा अपने चूत में ले के, बोलो ना बुर मारनी, साली मेरा लॉरा तुझे मज़ा दे रहा है या ऩही"
"है गजब का मज़ा आ रहा है राजा, तेरा लॉरा तो मेरी चूत के जर तक टकरा रहा है और मेरी चूत के दीवारो को मसल रहा है और मेरी नाभि तक पहुच जा रहा है, तू बहुत सुख दे रहा है अपनी मा को मार कस के मार धक्का बेटीचोड़, चोदु राम हलवाई, चोद ले अपनी मैया के चूत को और इसको दो फाँक कर दे मधर्चोड़"
"है जब चुड़वाने में इतना मज़ा आ रहा है और छोड़वाने का इतना मन था तो फिर सोते वाक़ूत इतना नाटक क्यों कर रही थी, जब मैं तुझे नंगा हो कर दिखाने को बोल रहा था"
"है रे मेरे भोलू राम, इतना भी ऩही समझता क्या, इसको कहते है नखरा, औरते दो तरह का छिनाल पं दिखा सकती है या तो सीधा तेरा लंड पकर के कहती की चोद मुझे या फिर धीरे धीरे तुझे तरपा तरपा के एक एक चीज़ दिखती और तब तरपा तरपा के चुदवाति, मुझे सीधे चुदाई में मज़ा ऩही आता, मैं तो खूब खेल खेल के चुदवाना चाहती थी, चक्की जितनी धीरे चलती है उतना ही महीन पीसती है साले, इसलिए मैने थोरा सा च्चिनाल पं दिखया था, समझा अब बाते चोदना बंद कर और लगा ज़ोर ज़ोर से धक्का और चोद मेरी बुर को मधर्चूऊऊऊद्दद ड्ड, तेरी मा की छूततततत्त में डंडा डालु बहन्चोद माररर्ररर ज़ोर से और बक्चोदि बंद कर"
"ठीक मेरी च्चिनाल मा अब तो मैं भी पूरा सिख गया हू, देख अब मैं कैसे चोदता हू तेरी इस मसतनी चूत को और कितना मज़ा देता हू तुझे, देख साली बुरचोदि फिर ना बोलना की बेटे ने ठीक से चोदा ऩही, रंडी जितना तूने मुझे सिखाया है मैं उस से कही ज़यादा मज़ा दूँगा तुझे,,,,,,, ,,साली मधर्चोड़"
मैं अब पूरे जोश के साथ धक्का मरने लगा था और मेरा पूरा लंड सुपरे तक निकल कर बाहर आ जा रहा था, फिर सीधा सरसरते हुए गचक से अंदर मा की चूत की गहराइयों में समा जा रहा था. लंड की चमरी तो अब सयद पूरी तरह से उलट चुकी थी, और चुदाई में अब कोई दिक्कत ऩही आ रही थी. मा की चूत एक डम से गरम भट्टी की तरह ताप रही थी और मेरे लंड को सता सात लील रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत की सैर कर रहा हू. मेरी गांद पर मा का हाथ था और वो उपर से दबाते हुए मुझे अपनी चूत पर दबा रही थी और साथ में नीचे गांद उच्छल कर मेरे लौरे को अपनी चूत में ले रही थी. बर के होंठो को मसलते हुए मेरा लंड सीधा बुर की जर से टकराता था और फिर उतनी ही तेज गति से बाहर आ कर फिर घुस जाता था. कमरे का माहौल फिर से गरम हो गया था और वातावरण में चुदाई की महक फैल गई थी. पूरे कमरे में गछ गछ फ़च फ़च की आवाज़ गूँज रही थी. हम दोनो की साँसे धोकनि की तरह से चल रही थी. दोनो के बदन से निकलता पसीना एक दूसरे को भिगो रहा था मगर, इसकी फिकर किसे थी.
मा नि अपने तेज चलती सांसो के बीच से बर्बरते हुए मेरा उस्टस बढ़ाया "ओह ओहस्सस्स्स्स्स्स्स्सिईईईई, चोदो और ज़ोर से पेलो अपना डंडा, घुमा घुमा के डालो राजा, सस्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईई अब तो बस अपने रस से बुझा दे मेरी चूत के पायस को, चोद दे मुझे मधर्चोड़, साले मेरे सैया, ऐसे ही धक्का मारे जा, ऐसे ही चोद कर मुझे ठंडा कर दे, तेरे डंडे से ही ठंडी होगी तेरी मा, पँखे से ठंडे होनी वाली ऩही हू मैं, तेरी मा को तो तेरा मोटा मुसलांड चाहिए जो की उसकी बुर को दो फाँक कर के उसकी चूत के अंदर की ज्वाला को ठंडा कर दे, मार साले बहँचोड़, तेरी बहन के गांद में लंड डालु, ज़ोर से मार ना, बेटीचोड़, गन्दू, है रे आज से तू ही मेरा भरतार है तू ही मेरा सैय्या और तू ही मेरा चोदु है"
"है, ले साली बुरछोड़ी और ले, और ले मेरे लंड को अपनी मस्तानी चूत में, ले ना च्चिनाल खा जा मेरे लौरे को अपनी बुर से, पूरा लंड खा जा साली बेताचोड़ी मा, है रे मेरी चुड़दकर मैया, कहा से सिकहा है तूने इँटना मज़ा देना, ओह मेरा तो जानम सफल हो गया रीईईई हाईईईईईईई साली और ले मधर्चोद्द्द्द्द्द्दद्ड"
"दे और कस कस के दे बेटा, इसी लंड के लिए तो मैं इतनी पयासी थी, ऐसे ही लंड से चुड़वाने की चाहत को पाले हुए थी मैं मन में ना जाने कब से, आज मेरी तम्माना पूरी हो गई, आने दे तेरे उस भारुए बाप को अगर कभी हाथ भी लगाया मेरे इस बदन को तो साले के गांद पर च्चर लात मार कर घर से निकल दूँगी, सला मधर्चोड़ वो क्या जानेगा चॉड्ना, अभी यहा होता तो दिखती की चॉड्ना किसको कहते है, तू लगा रह बेटा चोद के मेरी **** को मत दे और इसमे से अपने लिए मक्खन निकल ले, मेरे चुड़दकर बलम"
अब तो बस आँधी आए या तूफान कोई भी ह्यूम ऩही रोक सकता था हम दोनो अब अपने चरम पर पहुच चुके थे और चुदाई की रफ़्तार में कोई कमी ऩही चाहते थे. चाहते थे तो बस इतना की कैसे भी एक दूसरे के बदन में समा जाए और मार मार के चोद चोद के एक दूसरे के लंड और चूत का भुर्ता बना दे. मा की सिसकारिया तेज हो गई थी और अब दोनो में से कोई भी एक दूसरे को छ्होर्ने वाला ऩही था दोनो, जी जान से एक दूसरे से चिपके हुए धक्के धक्के पर धक्का लगाए जा रहे थे मैं ुअपर से और मा नीचे से.
मा सिसकते हुए बोली "है राजा ऐसे ही मेरा निकलने वाला है, मरता रह धक्का धीरे मत करियो, ऐसे ही मधर्चोड़ अब निकल जाएगा मेरा, सस्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईई ऊऊऊऊउगगगगगगगगगग ग बेटीचोड़ मारे जा माआ सस्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईई मधर्चूऊऊऊऊओ ऊओद्दद्ड, निकल जाएगाआआआआआअ, सलीईईई, मेरा निकल रहा हाईईईईईईईईई मधर्चोड़,, ,,,,,,,, चोद कस के और ज़ोर ज़ोर से माआआआआअरर्र्र्ररर र्र, गंद्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्डुऊऊउ अयू, छोद्द्द्द्द्द्द्दद्ड डाआाआल मिटा दे खुज्जज्ज्ज्ज्ज्ज्जलीइीईई ईई, चोद, चोद ज़ोर ज़ोर सीईईईईई, तेरी मा के बुर में गढ़े का लॉरा डालुउउुुुुुुुुउउ चोद ना साले और मारीईईई जा, निकलाआआआआआअ रे मेरा तो निकलाआाआ, झारी रीईईई मैं तो झरीईईईईईईई कह कर मेरे मेरे कंधो पर अपने दाँत गर्अ दिए.
मेरा भी अब निकलने वाला था और मैं भी ज़ोर ज़ोर से धकका लगते हुए छोड़ने लगा और गालिया बकते हुए झरने लगा "ओह साली मेरा भी निकल रहा है रीईईई, मधर्चोद्द्द्द्द्द्द्दद्ड द, निकल रहा है मेरााआआआआअ, ओह रंडी, छीनाल साली, तूने तो आज जन्नत की सैर कार्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रररा आआआआआअ डीईईईईईई रे, ओह माआआआअ, गया मैं तो, ओह चुड़ैल सलिइीईईईई तेरी बुर में मेरा पानी निकल रहा है रीईईईईई लीईईई पे ले अपनी चूत से मेरे लौरे के पानी को पे ले और निगल ज़ाआाआआआआ मेरे लौरे को पूरा का पूरा बुर मारनी बुरछोड़ी"''' ''....... ......... ... है रे रंडी निकल गया रे मेरा तो पूरााआआआआआ" कह कर मैं मा के उपर लेट गया. हम दोनो की आँखे बंद थी और दोनो एक दूसरे बदन से चिपके हुए थे. थकान के मारे दोनो में से किसी को होश ऩही था की कया हो गया है.
एक दूसरे से चिपके हुए कब आँख लगी कब मेरा लंड उसकी चूत से बाहर निकल गया कब हम दोनो सो गये इसका पाता हमे ऩही लगा.
सुबह जब सूरज की तेज रोशनी आँखो पर परी तो.......... ......... ......... .........
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Sunday, June 13, 2010
धोबन और उसका बेटा--20
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धोबन और उसका बेटा--20
"बेटा ये तेरी मा की चूत है, ये ढीली होने वाली चूत ऩही है" कह कर मा ने लंड को पूरे सुपरे तक खींच कर बाहर निकाला और फिर उपर से गांद का ज़ोर लगा के एक ज़ोर दार शॉट मार का पूरा लंड एक ही बार में गपक से अपनी बुर के अंदर लील लिया. मा अब तेज तेज शॉट लगा के पूरा का पूरा लंड अपनी बुर में एक ही बार में गपक से लील लेती थी. उसने मेरा उत्साह बढ़ते हुए कहा " आबे साले नीचे क्या औरतो की तरह से परे रह कर चुड़वा रहा है अपना गांद उच्छल उच्छल के तू भी धक्का मार साले मदारचोड, चोद अपनी मा को, ऐसे परे रहने से थोरे ही मज़ा आएगा, देख मेरी चूत कैसे तेरे सारे लौरे को एक ही बार में निगल रही है, तेरा लंड मेरी बुर के दीवारो को कुचालता हुआ कैसे मेरी बुर के जर तक ठोकर मार रहा है, बहिँचोड़ तू भी नीचे से धक्का मार मेरे राजा और बता की कैसा लग रहा है मा की चुदाई करने में, मज़ा आ रहा है या ऩही मा की बुर छोड़ने में"
मैने भी नीचे से गांद उच्छल कर धक्का मारना शुरू कर दिया. और मा के ****अरो को अपने हथेलियों के बीच दबोच कर बोला "है मा, बहुत मज़ा आ रहा है, सच में इतना मज़ा तो जिंदगी में कभी ऩही आया, ओह तुम्हारी बुर में मेरा लॉरा एक डम कसा कसा जा रहा है और ऐसा लगता है जैसे की मैने किसी गरम भट्टी में अपने लौरे को डाल दिया है, ओह सस्स्स्स्स्स्स्सीईईई इओउुुऊउगगगगगगगगग ह कितना गरम है तेरी बुर मा,,,,,,,और ज़ोर से मारो धक्का और ले लो अपने बेटे का लंड अपनी बुर में ऊऊओह साली मज़ा आ गया" कह कर मैने अपनी एक उंगली को मा के गांद के दरार पर लगा कर उसको हल्का सा उसके गांद में डाल दिया.
मा कॅया जोश मेरी इस हरकत पर दुगुना हो गया और वो अपनी ****अरो को और तेज़ी के साथ उच्छलने लगी और बर्बाराने लगी "है मधर्चोड़, गांद में उंगली डालता है, बेटीचोड़ तेरी मा को चोदु, साले गन्दू ले, और ले मेरी बुर का धक्का अपने लौरे पर, टॉर दूँगी साले तेरा लॉरा गन्दू, बहँचोड़, ले सलीईईई, मुँह क्या देख रहा है, चुचि दबा साले मुँह में लेकर चूस और चुदाई का मज़ा ले, है कितने वर्षो के बाद ऐसी चुदाई का आनंद मिल रहा हाईईईईईईईईई ओह ऊऊऊऊऊओह ह,"
मैने मा के आदेश पर उसकी चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उसकी एक चुचि को खींच कर उसके निपल से अपने मुँह को सता कर चूस्ते हुए दूसरी चुचि को खूब ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा. मा अब अपने गांद को पूरा उच्छल उच्छल कर मेरे लंड को अपनी गरम बुर में पेल्वा रही थी. उसकी चूत एक डम अंगीठी की तरह से गरम हो चुकी थी और खूब पानी चूर रही थी मेरा लंड उसकी चूत के पानी से भीग कर सता सात उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था. मा के मुँह से गलियों की बौच्हर हो रही थी वो बोल रही थी "इसस्स्स्स्स्स्स्सीईए मधर्चोड़ चोद मेरी बुर को डम लगा के, है कितना मज़ा आ रहा है, तेरे बाप से अब कुच्छ ऩही होता रीई, अब तो तू ही मेरी चूत की आग को ठंडी करना,,,,,,, मैं तुझे चुदाई का शानशाह बना दूँगी,,,,,,, ,,तेरे उस भारुए मधचोड़ बाप को छुने भी ऩही दूँगी अपनी बुर, तू छोड़ियो मेरी बुर को और मेरी आग ठंडी करियो, कहा था रीईईई बहँचोड़ अब तक तू अब तक तो मैं तेरे लूआरे का कितना पानी पी चुकी होती चोद रे लौंदे चोद, अपनी गांद तक का ज़ोर लगा दे छोड़ने में आज, आज अगर तूने मुझे कुश कर दिया तो फिर मैं तेरी गुलाम हो जौंगी"
मैं मा की चुचियों को मसलते हुए अपनी गांद को नीचे से उच्छलता जा रहा था मेरा लंड उसकी कसी बुर में गॅप गप...फच फ़च की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. हम दोनो की साँसे तेज हो गई थी और कमरे में चुदाई की मादक आवाज़ गूँज रही थी. दोनो के बदन से पसीना छू रहा था और सांसो की गर्मी एक दूसरे के बदन को महका रही थी. मा अब सयद थक चुकी थी. उसके धक्के मरने की रफ़्तार अब थोरी धीमी हो गई थी और अब वो हफने भी लगी थी. थोरी देर तक हफ्ते हुए वो धक्का लगाती रही फिर अचानक से पस्त हो कर मेरे बदन के ुआप्र गिर गई और बोली "ओह मैं तो थक गई रीईई, इतने में आम तौर पर मेरा पानी तो निकल जाता है पर आज नये लंड के जोश में मेरा पानी भी ऩही निकल रहा, ओह मज़ा आ गया, आज से पहले ऐसी चुदाई कभी ऩही की, पर थक गई रीईई मैं तो, अब तो तुझे मेरे उपर चाड कर धक्का मारना होगा तभी चुदाई हो पाएगी साले" कह कर वो अपने पूरे शरीर का भर मेरे बदन पर दे कर लेट गई.
मेरी साँसे भी तेज चल रही थी मगर लंड अब भी खरा था. दिल में चुदाई की ललक बरकरार थी और अब तो मैने चुदाई भी सीख ली थी. मैने धीरे से मा के छुअतोर को पकर का नीचे से ही धक्का लगाने का प्रयास किया और दो तीन छ्होटे छ्होटे धक्के मारे मगर क्यों की मा थोरा थक गई थी इसलिए वो उसी तरह से लेती रही. मा के भारी शरीर के कारण मैं उतने ज़ोर के धक्के ऩही लगा पाया जितना लगा सकता था. मैने मा को बाँहो में भर लिया और उसके कान के पास अपने मुँह को ले जा कर फुसफुसते हुए बोला "ओह मा जल्दी कर नाआ, और धक्का मार ना, अब ऩही रहा जा रहा है,,,,,जल्दी से मारो ना मा". मा ने मेरे चेहरे को गौर से देखते हुए मेरे होंठो को चूम लिया और बोली "थोरा डम तो लेने दे साले, कितनी देर से तो चुदाई हो रही है, थकान तो होगी ही"
"पर मा मेरा तो लंड लगता है फट जाएगा, मेरा जी कर रहा है की खूब ज़ोर ज़ोर से धक्के लगौ"
"तो मार ना, मैने कब माना किया है, आजा मेरे उपर चाड के खूब ज़ोर ज़ोर से चुदाई कर दे अपनी मा की, बजा दे बजा उसकी बुर का" कह कर मा धीरे से मेरे उपर से उतार गई. उसके उतरने पर मेरा लंड भी फिसल के उसकी चूत से बाहर निकल गया था मगा मा ने कुच्छ ऩही कहा और बगल में लेट कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया. मेरा लंड एक डम रस से भीगा हुआ था और उसका सुपरा लाल रंग का किसी पाहरी आलू के जैसे लग रहा था. मैने अपने लंड को पकरा और सीधा अपनी मा के जाँघो के बीच चला गया. उसकी जाँघो के बीच बैठ कर मैं उसकी चूत को गौर से देखने लगा. उसकी चूत फूल पिचाक रही थी और चूत का मुँह अभी थोरा सा खुला हुआ लग रहा था, बुर का गुलाबी छेद अंदर से झाँक रहा था और पानी से भीगा हुआ महसूस हो रहा था. मैं कुच्छ देर तक अपलक उसके चूत की सुंदरता को निहारता रहा.
मा ने मुझे जब कुच्छ करने की बजाए केवल घूरते हुए देखा तो वो सिसकते हुए बोली "क्या कर रहा है, जल्दी से डाल ना चूत में लौरे को ऐसे खरे खरे खाली घूरता रहेगा क्या, कितना देखेगा बुर को, आबे उल्लूए देखने से ज़यादा मज़ा छोड़ने में है, जल्दी से अपना मूसल डाल दे मेरे चोदु भरतार, अब नाटक मत चोद" मा ने इतना कह कर मेरे लंड को अपने हाथो में पकर लिया और बोली "ठहर मैं लगाती हू साले" और मेरे लंड के सुपरे को बुर के खुले छेद पर घिसने लगी और बोली "बुर का पानी लग जाएगा और चिकना हो जाएगा स्मझा, फिर आराम से चला जाएगा" मैं मा के उपर झुक गया और अपने आप को पूरी तरह से तैय्यर कर लिया अपने जीवन की पहली चुदाई के लिए. मा ने मेरे लंड को चूत को छेद पर लगा कर स्थिर कर दिया और बोली "हा अब मारो धक्का और पेल दो चूत में" मैने अपनी ताक़त को समेटा और कस के एक ज़ोर डर धक्का लगा दिये मेरे लंड का सुपरा तो पहले से भीगा हुआ था इसलिए वो सतक से अंदर चला गया उसके साथ साथ मेरे लंड का आधा से अधिक भाग चूत की दीवारो को रगारता हुआ अंदर घुस गया. ये सब अचानक तो ऩही था मगर फिर भी मा ने सोचा ऩही था की मैं इतनी ज़ोर से धक्का लगा दूँगा इसलिए वो चौंक गई और उसके मुँह से एक घुटि घुटि सी चीख निकल गई. मगर मैने तभी दो तीन और ज़ोर के झटके लगा दिए और मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर घुस गया. पूरा लॉरा घुसा कर जैसे ही मैं इस्तिर हुआ मा के मुँह से गलियों की बौरच्छार निकल परी "सला, हरामी क्या स्मझ रखा है रे, कामीने, ऐसे कही धक्का मारा जाता है, सांड की तरह से घुसा दिया सीधा एक ही बार में मधर्चोड़, धीरे धीरे करना ऩही आता है तुझे, साले कामीने पूरी चूत च्चिल गई मेरी, बाप है की घुसना ही ऩही जनता और बेटा है की घुसता है तो ऐसे घुसता है जैसे की मेरी चूत फर ने के लिए घुसा रहा हो, हरामी कही का"
"माफ़ कर देना मा मगर मुझे ऩही पाता था की तुम्हे चोट लग जायआ, तू तो जानती है ना की ये मेरी पहली चुदाई है" कह कर मैने मा की दोनो चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उन्हे दबाते हुए एक चुचि के निपल को चोसने लगा. कुच्छ देर तक ऐसे ही रहने के बाद सयद मा का दर्द कुच्छ कूम हो गया और वो भी अब नीचे से अपनी गंद उचकाने लगी और मेरे बालो में हाथ फेरते हुए मेरे सिर को चूमने लगी. मैने पूरी तरह से स्थिर था और चुचि को चोसने और दबाने में लगा हुआ था, मा ने कहा "है बेटा, अब धक्का लगाओ और चॉड्ना शुरू करो अब देर मत करो तेरी मा की पयासी बुर अब तेरे लौरे का पानी पीना चाहती है".
मैने दोनो चुचियों को थाम लिया और धीरे धीरे अपनी गांद उच्छलने लगा. मेरा लॉरा मा के पनियाए हुए चूत के अंदर से बाहर निकालता और फिर घुस जाता था. मा ने अब नीचे से अपने ****आर उच्छालना शुरू कर दिया था. डूस बारह झटके मरने के बाद ही बुर से गछ गछ,,,,फ़च फ़च की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी. ये इस बात को बतला रहा था की उसकी चूत अब पानी छ्होर्ने लगी है और अब उसे भी मज़ा आना शुरू हो गया है. मा ने अपने पैरो को घुटनो के पास से मोर लिया था और अपनी टॅंगो की कैंची बना के मेरे कमर पर बाँध दिया था. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरते हुए उसके होंठो और गालो को चूमते हुए उसके चुचियों को दबा रहा था. मा की मुँह से सिसकारियों का दौर फिर से शुरू हो गया था और वो हफ्ते हुए बर्बाराने लगी "है मारो, और ज़ोर से मारो राजा, छोड़ो मेरी चूत को, चोद चोद के भोसरा बना दो बेटा, कैसा लग रहा है बेटा छोड़ने में मज़ा आ रहा है या ऩही, मेरी बुर कैसी लगा रही है तुझे बता ना राजा, अपनी मा की बुर चोदने में मज़ा आ रहा है या ऩही, पूरा जर तक लॉरा पेल के छोड़ो राजा और कस कस के धक्के मार के पक्के मादर्चोद बन जाओ, बता ना राजा बेटा कैसा लग रहा है मा की चूत में लॉरा डालने में"
Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्यस्कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,
धोबन और उसका बेटा--20
"बेटा ये तेरी मा की चूत है, ये ढीली होने वाली चूत ऩही है" कह कर मा ने लंड को पूरे सुपरे तक खींच कर बाहर निकाला और फिर उपर से गांद का ज़ोर लगा के एक ज़ोर दार शॉट मार का पूरा लंड एक ही बार में गपक से अपनी बुर के अंदर लील लिया. मा अब तेज तेज शॉट लगा के पूरा का पूरा लंड अपनी बुर में एक ही बार में गपक से लील लेती थी. उसने मेरा उत्साह बढ़ते हुए कहा " आबे साले नीचे क्या औरतो की तरह से परे रह कर चुड़वा रहा है अपना गांद उच्छल उच्छल के तू भी धक्का मार साले मदारचोड, चोद अपनी मा को, ऐसे परे रहने से थोरे ही मज़ा आएगा, देख मेरी चूत कैसे तेरे सारे लौरे को एक ही बार में निगल रही है, तेरा लंड मेरी बुर के दीवारो को कुचालता हुआ कैसे मेरी बुर के जर तक ठोकर मार रहा है, बहिँचोड़ तू भी नीचे से धक्का मार मेरे राजा और बता की कैसा लग रहा है मा की चुदाई करने में, मज़ा आ रहा है या ऩही मा की बुर छोड़ने में"
मैने भी नीचे से गांद उच्छल कर धक्का मारना शुरू कर दिया. और मा के ****अरो को अपने हथेलियों के बीच दबोच कर बोला "है मा, बहुत मज़ा आ रहा है, सच में इतना मज़ा तो जिंदगी में कभी ऩही आया, ओह तुम्हारी बुर में मेरा लॉरा एक डम कसा कसा जा रहा है और ऐसा लगता है जैसे की मैने किसी गरम भट्टी में अपने लौरे को डाल दिया है, ओह सस्स्स्स्स्स्स्सीईईई इओउुुऊउगगगगगगगगग ह कितना गरम है तेरी बुर मा,,,,,,,और ज़ोर से मारो धक्का और ले लो अपने बेटे का लंड अपनी बुर में ऊऊओह साली मज़ा आ गया" कह कर मैने अपनी एक उंगली को मा के गांद के दरार पर लगा कर उसको हल्का सा उसके गांद में डाल दिया.
मा कॅया जोश मेरी इस हरकत पर दुगुना हो गया और वो अपनी ****अरो को और तेज़ी के साथ उच्छलने लगी और बर्बाराने लगी "है मधर्चोड़, गांद में उंगली डालता है, बेटीचोड़ तेरी मा को चोदु, साले गन्दू ले, और ले मेरी बुर का धक्का अपने लौरे पर, टॉर दूँगी साले तेरा लॉरा गन्दू, बहँचोड़, ले सलीईईई, मुँह क्या देख रहा है, चुचि दबा साले मुँह में लेकर चूस और चुदाई का मज़ा ले, है कितने वर्षो के बाद ऐसी चुदाई का आनंद मिल रहा हाईईईईईईईईई ओह ऊऊऊऊऊओह ह,"
मैने मा के आदेश पर उसकी चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उसकी एक चुचि को खींच कर उसके निपल से अपने मुँह को सता कर चूस्ते हुए दूसरी चुचि को खूब ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा. मा अब अपने गांद को पूरा उच्छल उच्छल कर मेरे लंड को अपनी गरम बुर में पेल्वा रही थी. उसकी चूत एक डम अंगीठी की तरह से गरम हो चुकी थी और खूब पानी चूर रही थी मेरा लंड उसकी चूत के पानी से भीग कर सता सात उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था. मा के मुँह से गलियों की बौच्हर हो रही थी वो बोल रही थी "इसस्स्स्स्स्स्स्सीईए मधर्चोड़ चोद मेरी बुर को डम लगा के, है कितना मज़ा आ रहा है, तेरे बाप से अब कुच्छ ऩही होता रीई, अब तो तू ही मेरी चूत की आग को ठंडी करना,,,,,,, मैं तुझे चुदाई का शानशाह बना दूँगी,,,,,,, ,,तेरे उस भारुए मधचोड़ बाप को छुने भी ऩही दूँगी अपनी बुर, तू छोड़ियो मेरी बुर को और मेरी आग ठंडी करियो, कहा था रीईईई बहँचोड़ अब तक तू अब तक तो मैं तेरे लूआरे का कितना पानी पी चुकी होती चोद रे लौंदे चोद, अपनी गांद तक का ज़ोर लगा दे छोड़ने में आज, आज अगर तूने मुझे कुश कर दिया तो फिर मैं तेरी गुलाम हो जौंगी"
मैं मा की चुचियों को मसलते हुए अपनी गांद को नीचे से उच्छलता जा रहा था मेरा लंड उसकी कसी बुर में गॅप गप...फच फ़च की आवाज़ करता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. हम दोनो की साँसे तेज हो गई थी और कमरे में चुदाई की मादक आवाज़ गूँज रही थी. दोनो के बदन से पसीना छू रहा था और सांसो की गर्मी एक दूसरे के बदन को महका रही थी. मा अब सयद थक चुकी थी. उसके धक्के मरने की रफ़्तार अब थोरी धीमी हो गई थी और अब वो हफने भी लगी थी. थोरी देर तक हफ्ते हुए वो धक्का लगाती रही फिर अचानक से पस्त हो कर मेरे बदन के ुआप्र गिर गई और बोली "ओह मैं तो थक गई रीईई, इतने में आम तौर पर मेरा पानी तो निकल जाता है पर आज नये लंड के जोश में मेरा पानी भी ऩही निकल रहा, ओह मज़ा आ गया, आज से पहले ऐसी चुदाई कभी ऩही की, पर थक गई रीईई मैं तो, अब तो तुझे मेरे उपर चाड कर धक्का मारना होगा तभी चुदाई हो पाएगी साले" कह कर वो अपने पूरे शरीर का भर मेरे बदन पर दे कर लेट गई.
मेरी साँसे भी तेज चल रही थी मगर लंड अब भी खरा था. दिल में चुदाई की ललक बरकरार थी और अब तो मैने चुदाई भी सीख ली थी. मैने धीरे से मा के छुअतोर को पकर का नीचे से ही धक्का लगाने का प्रयास किया और दो तीन छ्होटे छ्होटे धक्के मारे मगर क्यों की मा थोरा थक गई थी इसलिए वो उसी तरह से लेती रही. मा के भारी शरीर के कारण मैं उतने ज़ोर के धक्के ऩही लगा पाया जितना लगा सकता था. मैने मा को बाँहो में भर लिया और उसके कान के पास अपने मुँह को ले जा कर फुसफुसते हुए बोला "ओह मा जल्दी कर नाआ, और धक्का मार ना, अब ऩही रहा जा रहा है,,,,,जल्दी से मारो ना मा". मा ने मेरे चेहरे को गौर से देखते हुए मेरे होंठो को चूम लिया और बोली "थोरा डम तो लेने दे साले, कितनी देर से तो चुदाई हो रही है, थकान तो होगी ही"
"पर मा मेरा तो लंड लगता है फट जाएगा, मेरा जी कर रहा है की खूब ज़ोर ज़ोर से धक्के लगौ"
"तो मार ना, मैने कब माना किया है, आजा मेरे उपर चाड के खूब ज़ोर ज़ोर से चुदाई कर दे अपनी मा की, बजा दे बजा उसकी बुर का" कह कर मा धीरे से मेरे उपर से उतार गई. उसके उतरने पर मेरा लंड भी फिसल के उसकी चूत से बाहर निकल गया था मगा मा ने कुच्छ ऩही कहा और बगल में लेट कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया. मेरा लंड एक डम रस से भीगा हुआ था और उसका सुपरा लाल रंग का किसी पाहरी आलू के जैसे लग रहा था. मैने अपने लंड को पकरा और सीधा अपनी मा के जाँघो के बीच चला गया. उसकी जाँघो के बीच बैठ कर मैं उसकी चूत को गौर से देखने लगा. उसकी चूत फूल पिचाक रही थी और चूत का मुँह अभी थोरा सा खुला हुआ लग रहा था, बुर का गुलाबी छेद अंदर से झाँक रहा था और पानी से भीगा हुआ महसूस हो रहा था. मैं कुच्छ देर तक अपलक उसके चूत की सुंदरता को निहारता रहा.
मा ने मुझे जब कुच्छ करने की बजाए केवल घूरते हुए देखा तो वो सिसकते हुए बोली "क्या कर रहा है, जल्दी से डाल ना चूत में लौरे को ऐसे खरे खरे खाली घूरता रहेगा क्या, कितना देखेगा बुर को, आबे उल्लूए देखने से ज़यादा मज़ा छोड़ने में है, जल्दी से अपना मूसल डाल दे मेरे चोदु भरतार, अब नाटक मत चोद" मा ने इतना कह कर मेरे लंड को अपने हाथो में पकर लिया और बोली "ठहर मैं लगाती हू साले" और मेरे लंड के सुपरे को बुर के खुले छेद पर घिसने लगी और बोली "बुर का पानी लग जाएगा और चिकना हो जाएगा स्मझा, फिर आराम से चला जाएगा" मैं मा के उपर झुक गया और अपने आप को पूरी तरह से तैय्यर कर लिया अपने जीवन की पहली चुदाई के लिए. मा ने मेरे लंड को चूत को छेद पर लगा कर स्थिर कर दिया और बोली "हा अब मारो धक्का और पेल दो चूत में" मैने अपनी ताक़त को समेटा और कस के एक ज़ोर डर धक्का लगा दिये मेरे लंड का सुपरा तो पहले से भीगा हुआ था इसलिए वो सतक से अंदर चला गया उसके साथ साथ मेरे लंड का आधा से अधिक भाग चूत की दीवारो को रगारता हुआ अंदर घुस गया. ये सब अचानक तो ऩही था मगर फिर भी मा ने सोचा ऩही था की मैं इतनी ज़ोर से धक्का लगा दूँगा इसलिए वो चौंक गई और उसके मुँह से एक घुटि घुटि सी चीख निकल गई. मगर मैने तभी दो तीन और ज़ोर के झटके लगा दिए और मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर घुस गया. पूरा लॉरा घुसा कर जैसे ही मैं इस्तिर हुआ मा के मुँह से गलियों की बौरच्छार निकल परी "सला, हरामी क्या स्मझ रखा है रे, कामीने, ऐसे कही धक्का मारा जाता है, सांड की तरह से घुसा दिया सीधा एक ही बार में मधर्चोड़, धीरे धीरे करना ऩही आता है तुझे, साले कामीने पूरी चूत च्चिल गई मेरी, बाप है की घुसना ही ऩही जनता और बेटा है की घुसता है तो ऐसे घुसता है जैसे की मेरी चूत फर ने के लिए घुसा रहा हो, हरामी कही का"
"माफ़ कर देना मा मगर मुझे ऩही पाता था की तुम्हे चोट लग जायआ, तू तो जानती है ना की ये मेरी पहली चुदाई है" कह कर मैने मा की दोनो चुचियों को अपने हाथो में थाम लिया और उन्हे दबाते हुए एक चुचि के निपल को चोसने लगा. कुच्छ देर तक ऐसे ही रहने के बाद सयद मा का दर्द कुच्छ कूम हो गया और वो भी अब नीचे से अपनी गंद उचकाने लगी और मेरे बालो में हाथ फेरते हुए मेरे सिर को चूमने लगी. मैने पूरी तरह से स्थिर था और चुचि को चोसने और दबाने में लगा हुआ था, मा ने कहा "है बेटा, अब धक्का लगाओ और चॉड्ना शुरू करो अब देर मत करो तेरी मा की पयासी बुर अब तेरे लौरे का पानी पीना चाहती है".
मैने दोनो चुचियों को थाम लिया और धीरे धीरे अपनी गांद उच्छलने लगा. मेरा लॉरा मा के पनियाए हुए चूत के अंदर से बाहर निकालता और फिर घुस जाता था. मा ने अब नीचे से अपने ****आर उच्छालना शुरू कर दिया था. डूस बारह झटके मरने के बाद ही बुर से गछ गछ,,,,फ़च फ़च की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी. ये इस बात को बतला रहा था की उसकी चूत अब पानी छ्होर्ने लगी है और अब उसे भी मज़ा आना शुरू हो गया है. मा ने अपने पैरो को घुटनो के पास से मोर लिया था और अपनी टॅंगो की कैंची बना के मेरे कमर पर बाँध दिया था. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्का मरते हुए उसके होंठो और गालो को चूमते हुए उसके चुचियों को दबा रहा था. मा की मुँह से सिसकारियों का दौर फिर से शुरू हो गया था और वो हफ्ते हुए बर्बाराने लगी "है मारो, और ज़ोर से मारो राजा, छोड़ो मेरी चूत को, चोद चोद के भोसरा बना दो बेटा, कैसा लग रहा है बेटा छोड़ने में मज़ा आ रहा है या ऩही, मेरी बुर कैसी लगा रही है तुझे बता ना राजा, अपनी मा की बुर चोदने में मज़ा आ रहा है या ऩही, पूरा जर तक लॉरा पेल के छोड़ो राजा और कस कस के धक्के मार के पक्के मादर्चोद बन जाओ, बता ना राजा बेटा कैसा लग रहा है मा की चूत में लॉरा डालने में"
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धोबन और उसका बेटा--19
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धोबन और उसका बेटा--19
मसलते मसलते मेरी नज़र मा के सिकुर्ते फैलते हुए गांद के छेद पर परी. मेरे मन मैं आया की क्यों ना इसका स्वाद भी चखा जाए देखने से तो मा की गांद वैसे भी काफ़ी खूबसूरत लग रही थी जैसे गुलाब का फूल हो. मैने अपनी लपलपाति हुई जीभ को उसके गांद की छेद पर लगा दिया और धीरे धीरे उपर ही उपर लपलपते हुए चाटने लगा. गांद पर मेरी जीभ का स्पर्श पा कर मा पूरी तरह से हिल उठी.
"ओह ये क्या कर रहा है, ओह बरा अक्चा लग रहा है रीईए, कहा से सीखा ये, तू तो बरा कलाकार है रीईई बेटीचोड़, है राम देखो कैसे मेरी बुर को चाटने के बाद मेरी गांद को छत रहा है, तुझे मेरी गांद इतनी अच्छी लग रही है की इसको भी छत रहा है, ओह बेटा सच में गजब का मज़ा आ रहा है, छत छत ले पूरे गांद को छत ले ओह ओह उूुुुुुऊउगगगगगगगग" .
मैने पूरे लगान के साथ गांद के छेद पर अपने जीभ को लगा के, दोनो हाथो से दोनो ****अरो को पकर कर छेद को फैलया और अपनी नुकीली जीभ को उसमे ठेलने की कोशिश करने लगा. मा को मेरे इस काम में बरी मस्ती आ रही थी और उसने खुद अपने हाथो को अपने ****अरो पर ले जा कर गांद के छेद को फैला दिया और मुझ जीभ पेलने के लिए उत्साहित करने लगी. "है रे सस्स्स्स्सिईईईईई पेल दे जीभ को जैसे मेरी बुर में पेला था वैसे ही गांद के छेद में भी पेल दे और पेल के खूब छत मेरी गांद को है दियायया मार गई रीईईई, ओह इतना मज़ा तो कभी ऩही आया था, ओह देखो कैसे गांद छत रहा है,,,,,,,,सस्स्स्स्ससे ईईई चतो बेटा चतो और ज़ोर से चतो, मधर्चोड़, सला गन्दू"
मैं पूरी लगान से गांद छत रहा था. मैने देखा की चूत का गुलाबी छेद अपने नासिले रस को टपका रहा है तो मैने अपने होंठो को फिर से बुर के गुलाबी छेद पर लगा दिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा जैसे की पीपे लगा के कोकोकॉला पे रहा हू, सारे रस को छत के खाने के बाद मैने बुर के छेद में जीभ को पेल कर अपने होंठो के बीच में बुर के भज्नसे को क़ैद कर लिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसा शुरू कर दी. मा के लिए अब बर्दाश्त करना श्यद मुश्किल हो रहा था उसने मेरे सिर को अपनी बुर से अलग करते हुए कहा "अब छ्होर बहिँचोड़, फिर से चूस के ही झार देगा क्या, अब तो असली मज़ा लूटने का टाइम आ गया है, है बेटा राजा अब चल मैं तुझे जन्नत की सैर कराती हू अब अपनी मा की चुदाई करने का मज़ा लूट मेरे राजा, चल मुझे नीचे उतरने दे साले"
मैने मा की बुर पर से मुँह हटा लिया. वो जल्दी से नीचे उतार कर लेट गई और अपने पैरो को घुटनो के पास से मोर कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया और अपने दोनो हाथो को अपनी बुर के पास ले जा कर बोली "आ जा राजा जल्दी कर अब ऩही रहा जाता, जल्दी से अपने मूसल को मेरी ओखली में डाल के कूट दे, जल्दी कर बेटा दल दे अपना लॉरा मा की पयासी चूत में" मैं उसके दोनो जाँघो के बीच में आ गया पर मुझे कुच्छ समझ में ऩही आ रहा था की क्या करू, फिर भी मैने अपने खरे लंड को पकरा और मा के उपर झुकते हुए उसकी बुर से अपने लंड को सता दिया. मा ने लंड के बुर से सात ते ही कहा "हा अब मार धक्का और घुसा दे अपने घोरे जैसे लंड को मा की बिल में" मैने धक्का मार दिया पर ये क्या लंड तो फिसल कर बुर के बाहर ही रगर खा रहा था, मैने दुबारा कोशिश की फिर वही नतीज़ा ढक के तीन पट फिर लंड फिसल के बाहर, इस पर मा ने कहा "रुक जा मेरे अनारी सैय्या, मुझे ध्यान रखना चाहिए था तू तो पहली बार चुदाई कर रहा है ना, अभी तुझे मैं बेटाटी हू" फिर अपने दोनो हाथो को बुर पर ले जा कर चूत के दोनो फांको को फैला दिया, बुर के अंदर का गुलाबी छेद नज़र आने लगा था, बुर एक डम पानी से भीगी हुई लग रही थी, बुर चिदोर का मा बोली "ले मैने तेरे लिए अपने चूत को फैला दिया है अब आराम से अपने लंड को ठीक निशाने पर लगा के पेल दे". मैने अपने लंड को ठीक चूत के खुले हुए मुँह पर लगाया और धकका मारा, लंड थोरा सा अंदर को घुसा, पानी लगे होने के कारण लंड का सुपरा अंदर चला गया था, मा ने कहा "शाबाश ऐसे ही सुपरा चला गया अब पूरा घुसा दे मार धक्का कस के और चोद डाल मेरी बुर को बहुत खुजली मची हुई है" मैने अपनी गांद तक का ज़ोर लगा के धक्का मार दिया पर मेरा लंड में ज़ोर की दर्द की लहर उठी और मैने चीखते हुए झट से लंड को बाहर निकल लिया. मा ने पुचछा "क्या हुआ, चिल्लाता क्यों है"
"ओह मा, लंड में दर्द हो रहा है". मा उठ कर बैठ गई और मेरी तरफ देखते हुई बोली "देखु तो कहा दर्द है" मैने लंड दिखाते हुए कहा "देखो ना जैसे ही चूत में घुशाया था वैसे ही दर्द करने लगा" मा खुच्छ देर तक देखती रही फिर हस्ने लगी और बोली "साले अनारी चुड़दकर, चला है मा को छोड़ने, आबे अभी तक तो तेरे सुपरे की चमरी ढंग से उलटी ही ऩही है तो दर्द ऩही होगा तो और क्या होगा, चला है मा को छोड़ने, चल कोई बात ऩही मुझे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था, मेरी ग़लती है, मैने सोच तूने खूब मूठ मारी होगी तो चमरी अपने आप उलटने लगी होगी मगर तेरे इस गुलाबी सुपरे की शकल देख के ही मुझे समझ जाना चाहिए था की तूने तो अभी तक ढंग से मूठ भी ऩही मारी, चल नीचे लेट अब मुझे ही कुच्छ करना परेगा लगता है". मैने तो अब तक यही सुना था की लरका लर्की के उपर चाड के छोड़ता है मगर जब मा ने मुझे नीचे लेटने के लिए कहा तो मैं सोच में पर गया और मा से पुच्छ "नीचे क्यों लेटना है मा, क्या अब चुदाई ऩही होगी". मुझे लग रहा था की मा फिर से मेरा मूठ मार देगी. मा ने हस्ते हुए कहा "ऩही बे ****इए चुदाई तो होगी ही, जितनी तुझे छोड़ने की आग लगी है मुझे भी चुड़वाने की उतनी ही आग लगी है, चुदाई तो होगी ही, तुझे तो अभी रात भर मेरी बुर का बजा बजाना है मेरे राजा, तू नीचे लेट अब उल्टी तरफ से चुदाई होगी.
"उल्टी तरफ से चुदाई होगी, इसका क्या मतलब है मा"
"इसका मतलब है मैं तेरे उपर चाड के खुद से चड़वौनगी, कैसे चड़वौनगी? ये तो तू खुद ही थोरी देर के बाद देख लियो मगर, फिलहाल तू नीचे लेट और अपना लंड खरा कर के रख फिर देख मैं कैसे तुझे मज़ा देती हू"
मैं नीचे लेट तो गया पर अब भी मैं सोच रहा था की मा कैसे करेगी. मा ने जब मेरे चेहरे पर हिचकिचाहट के भाव देखे तो वो मेरे गाल पर एक प्यार भरा तमाचा लगते हुए बोली "सोच क्या रहा है मधर्चोड़ अभी चुप चाप तमाशा देख फिर बताना की कैसा मज़ा आता है" कह कर मा ने मेरे कमर के दोनो तरफ अपनी दोनो टाँगे कर दी और अपनी बुर को ठीक मेरे लौरे के सामने ला कर मेरे लंड को एक हाथ से पकरा और सुपरे को सीधा अपनी चूत के गुलाबी मुँह पर लगा दिया. सुपरे को बुर के गुलाबी मुँह पर लगा कर वो मेरे लंड को अपने हाथो से आगे पिच्चे कर के अपनी बुर के दरार पर रगर्ने लगी. उसकी चूत से निकला हुआ पानी मेरे सुपरे पर लग रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी साँसे उस अगले पल के इंतेज़ार में रुकी हुई थी जब मेरा लंड उसके चूत में घुसता. मैं डम साढ़े इंतेज़ार कर रहा था तभी मा ने अपने चूत के फाँक को एक हाथ से फैलाया और मेरे लंड के सुपरे को सीधा बुर के गुलाबी मुँह पर लगा कर उपर से हल्का सा ज़ोर लगाया. मेरे लंड का सुपरा उसके चूत के फांको बीच समा गया. फिर मा ने मेरे च्चती पर अपने हाथो को जमाया और उपर से एक हल्का सा धक्का दिया मेरे लंड का थोरा सा और भाग उसकी चूत में समा गया. उसके बाद मा स्थिर हो गई और इतने से ही लंड को अपनी बुर में घुसा कर आगे पिच्चे करने लगी. थोरी देर तक ऐसा करने के बाद उसने फिर से एक धक्का मारा, इस बार धक्का थोरा ज़यादा ही जोरदार था और मेरे लंड का लग भाग आधा से अधिक भाग उसकी चूत में समा गया. मेरे मुँह से एक ज़ोर डर चीख निकल गई. क्यों की मेरे लंड के सुपरे की चमरी एक डम से पिच्चे उलट गई थी. पर मा ने इस र कोई ध्यान ऩही दिया और उतने ही लंड पर आगे पिच्चे करते हुए धक्का मरते हुए बोली "बेटा चुदाई कोई आसान काम ऩही है, लर्की भी जब पहली बार चुड्ती है तो उसको भी दर्द होता है, और उसका दर्द तो तेरे दर्द के सामने कुच्छ भी ऩही है, जैसे उसके बुर की सील टूटती है वैसे ही तेरे लंड की भी आज सील टूटी है, थोरी देर तक आराम से लेता रह फिर देख तुझे कैसा मज़ा आता है". मा अब उतने लंड को ही बुर में ले कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी. वो अपने गांद को उच्छल उच्छल के धक्के पर धक्का मारे जा रही थी. थोरी देर में ही मेरा दर्द कम हो गया और मुझे गीले पं का अहसास होने लगा. मा की चूत ने पानी छ्होरना शुरू कर दिया था और उसकी बुर से निकलते पानी के कारण मेरे लंड का घुसना और निकलना भी आसान हो गया था. मा अब और ज़ोर ज़ोर से अपनी गांद उच्छल उच्छल के धक्के लगा रही थी और मेरे लौरे का ज़यादा से ज़यादा भाग उसके चूत के अंदर घुसता जा रहा था. मा ने इस बार एक ज़ोर दार धक्का मारा और मेरे लंड का जायदातर भाग अपनी चूत में च्छूपा लिया और सिसकरते हुए बोली "सस्स्स्स्स्सिईईईईई है दैयया, कितना टगरा लॉरा है जैसे की गरम लोहे का रोड हो, एक डम सीधा बुर के दीवारो को रगर मार रहा है, मेरे जैसी चूड़ी हुई औरत के बुर में जब ये इतना कसा हुआ है तो जवान लौंदीयों की चूत फर के रख देगा, मज़ा आ गया, ले साले और घुसा लॉरा और घुसा" कह कर तेज़ी से तीन चार धक्के मार दिए. मा के द्वारा तेज़ी से लगाए गये इन धक्को से मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. मा ने सिसकरते हुए धक्के लगाना जारी रखा और अपने एक हाथ को लौरे के जर के पास ले जाकर देखने लगी की पूरा लंड अंदर गया है की ऩही. जब उसने देखा की पूरा का पूरा लॉरा उसकी बुर में घुस चुका है तब उसने अपनी ****अरो को उच्छलते हुए एक तेज धक्का मारा और मेरे होंठो का चुम्मा ले कर बोली "कैसा लग रहा है बेटा, अब तो दर्द ऩही हो रहा है ना"
"ऩही मा अब दर्द ऩही हो रहा है, देखो ना मेरा पूरा लॉरा तुम्हारे बुर के अंदर चला गया है"
"हा बेटा अब दर्द ऩही होगा अब तो बस मज़ा ही मज़ा है, मेरे बुर के पानी के गीले पं से तेरी चमरी उलटने में आब आसानी हो रही है इसलिए तुझे अब दर्द ऩही हो रहा होगा, बल्कि मज़ा आ रहा होगा, क्यों बेटा बोल ना मज़ा आ रहा है या ऩही अपनी मा के बुर में लॉरा पेल के, अब तो तुझे पाता चल रहा होगा की चुदाई क्या होती है बएटााआआआ, ले मज़े चुदाई का और बता की तुझे कैसा लग रहा है मा की चूत में लॉरा धसने में"
"है मा, सच में गजब का मज़ा आ रहा है, ओह मा तुम्हारी चूत कितनी कसी हुई है मेरा लॉरा तो इसमे बरी मुस्किल से घुसा है जबकि मैने सुना था की शादी शुदा औरतो की चूत ढीली हो जाती है"
Tags = राज शर्मा की कामुक कहानिया हिंदी कहानियाँ Raj sharma stories , kaamuk kahaaniya , rajsharma हिंदी सेक्सी कहानिया चुदाई की कहानियाँ उत्तेजक कहानिया Future | Money | Finance | Loans | Banking | Stocks | Bullion | Gold | HiTech | Style | Fashion | WebHosting | Video | Movie | Reviews | Jokes | Bollywood | Tollywood | Kollywood | Health | Insurance | India | Games | College | News | Book | Career | Gossip | Camera | Baby | Politics | History | Music | Recipes | Colors | Yoga | Medical | Doctor | Software | Digital | Electronics | Mobile | Parenting | Pregnancy | Radio | Forex | Cinema | Science | Physics | Chemistry | HelpDesk | Tunes| Actress | Books | Glamour | Live | Cricket | Tennis | Sports | Campus | Mumbai | Pune | Kolkata | Chennai | Hyderabad | New Delhi | पेलने लगा | कामुकता | kamuk kahaniya | उत्तेजक | सेक्सी कहानी | कामुक कथा | सुपाड़ा |उत्तेजना | कामसुत्रा | मराठी जोक्स | सेक्सी कथा | गान्ड | ट्रैनिंग | हिन्दी सेक्स कहानियाँ | मराठी सेक्स | vasna ki kamuk kahaniyan | kamuk-kahaniyan.blogspot.com | सेक्स कथा | सेक्सी जोक्स | सेक्सी चुटकले | kali | rani ki | kali | boor | हिन्दी सेक्सी कहानी | पेलता | सेक्सी कहानियाँ | सच | सेक्स कहानी | हिन्दी सेक्स स्टोरी | bhikaran ki chudai | sexi haveli | sexi haveli ka such | सेक्सी हवेली का सच | मराठी सेक्स स्टोरी | हिंदी | bhut | gandi | कहानियाँ | चूत की कहानियाँ | मराठी सेक्स कथा | बकरी की चुदाई | adult kahaniya | bhikaran ko choda | छातियाँ | sexi kutiya | आँटी की चुदाई | एक सेक्सी कहानी | चुदाई जोक्स | मस्त राम | चुदाई की कहानियाँ | chehre ki dekhbhal | chudai | pehli bar chut merane ke khaniya hindi mein | चुटकले चुदाई के | चुटकले व्यस्कों के लिए | pajami kese banate hain | चूत मारो | मराठी रसभरी कथा | कहानियाँ sex ki | ढीली पड़ गयी | सेक्सी चुची | सेक्सी स्टोरीज | सेक्सीकहानी | गंदी कहानी | मराठी सेक्सी कथा | सेक्सी शायरी | हिंदी sexi कहानिया | चुदाइ की कहानी | lagwana hai | payal ne apni choot | haweli | ritu ki cudai hindhi me | संभोग कहानियाँ | haveli ki gand | apni chuchiyon ka size batao | kamuk | vasna | raj sharma | sexi haveli ka sach | sexyhaveli ka such | vasana ki kaumuk | www. भिगा बदन सेक्स.com | अडल्ट | story | अनोखी कहानियाँ | कहानियाँ | chudai | कामरस कहानी | कामसुत्रा ki kahiniya | चुदाइ का तरीका | चुदाई मराठी | देशी लण्ड | निशा की बूब्स | पूजा की चुदाइ | हिंदी chudai कहानियाँ | हिंदी सेक्स स्टोरी | हिंदी सेक्स स्टोरी | हवेली का सच | कामसुत्रा kahaniya | मराठी | मादक | कथा | सेक्सी नाईट | chachi | chachiyan | bhabhi | bhabhiyan | bahu | mami | mamiyan | tai | sexi | bua | bahan | maa | bhabhi ki chudai | chachi ki chudai | mami ki chudai | bahan ki chudai | bharat | india | japan |यौन, यौन-शोषण, यौनजीवन, यौन-शिक्षा, यौनाचार, यौनाकर्षण, यौनशिक्षा, यौनांग, यौनरोगों, यौनरोग, यौनिक, यौनोत्तेजना,
धोबन और उसका बेटा--19
मसलते मसलते मेरी नज़र मा के सिकुर्ते फैलते हुए गांद के छेद पर परी. मेरे मन मैं आया की क्यों ना इसका स्वाद भी चखा जाए देखने से तो मा की गांद वैसे भी काफ़ी खूबसूरत लग रही थी जैसे गुलाब का फूल हो. मैने अपनी लपलपाति हुई जीभ को उसके गांद की छेद पर लगा दिया और धीरे धीरे उपर ही उपर लपलपते हुए चाटने लगा. गांद पर मेरी जीभ का स्पर्श पा कर मा पूरी तरह से हिल उठी.
"ओह ये क्या कर रहा है, ओह बरा अक्चा लग रहा है रीईए, कहा से सीखा ये, तू तो बरा कलाकार है रीईई बेटीचोड़, है राम देखो कैसे मेरी बुर को चाटने के बाद मेरी गांद को छत रहा है, तुझे मेरी गांद इतनी अच्छी लग रही है की इसको भी छत रहा है, ओह बेटा सच में गजब का मज़ा आ रहा है, छत छत ले पूरे गांद को छत ले ओह ओह उूुुुुुऊउगगगगगगगग" .
मैने पूरे लगान के साथ गांद के छेद पर अपने जीभ को लगा के, दोनो हाथो से दोनो ****अरो को पकर कर छेद को फैलया और अपनी नुकीली जीभ को उसमे ठेलने की कोशिश करने लगा. मा को मेरे इस काम में बरी मस्ती आ रही थी और उसने खुद अपने हाथो को अपने ****अरो पर ले जा कर गांद के छेद को फैला दिया और मुझ जीभ पेलने के लिए उत्साहित करने लगी. "है रे सस्स्स्स्सिईईईईई पेल दे जीभ को जैसे मेरी बुर में पेला था वैसे ही गांद के छेद में भी पेल दे और पेल के खूब छत मेरी गांद को है दियायया मार गई रीईईई, ओह इतना मज़ा तो कभी ऩही आया था, ओह देखो कैसे गांद छत रहा है,,,,,,,,सस्स्स्स्ससे ईईई चतो बेटा चतो और ज़ोर से चतो, मधर्चोड़, सला गन्दू"
मैं पूरी लगान से गांद छत रहा था. मैने देखा की चूत का गुलाबी छेद अपने नासिले रस को टपका रहा है तो मैने अपने होंठो को फिर से बुर के गुलाबी छेद पर लगा दिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा जैसे की पीपे लगा के कोकोकॉला पे रहा हू, सारे रस को छत के खाने के बाद मैने बुर के छेद में जीभ को पेल कर अपने होंठो के बीच में बुर के भज्नसे को क़ैद कर लिया और खूब ज़ोर ज़ोर से चूसा शुरू कर दी. मा के लिए अब बर्दाश्त करना श्यद मुश्किल हो रहा था उसने मेरे सिर को अपनी बुर से अलग करते हुए कहा "अब छ्होर बहिँचोड़, फिर से चूस के ही झार देगा क्या, अब तो असली मज़ा लूटने का टाइम आ गया है, है बेटा राजा अब चल मैं तुझे जन्नत की सैर कराती हू अब अपनी मा की चुदाई करने का मज़ा लूट मेरे राजा, चल मुझे नीचे उतरने दे साले"
मैने मा की बुर पर से मुँह हटा लिया. वो जल्दी से नीचे उतार कर लेट गई और अपने पैरो को घुटनो के पास से मोर कर अपनी दोनो जाँघो को फैला दिया और अपने दोनो हाथो को अपनी बुर के पास ले जा कर बोली "आ जा राजा जल्दी कर अब ऩही रहा जाता, जल्दी से अपने मूसल को मेरी ओखली में डाल के कूट दे, जल्दी कर बेटा दल दे अपना लॉरा मा की पयासी चूत में" मैं उसके दोनो जाँघो के बीच में आ गया पर मुझे कुच्छ समझ में ऩही आ रहा था की क्या करू, फिर भी मैने अपने खरे लंड को पकरा और मा के उपर झुकते हुए उसकी बुर से अपने लंड को सता दिया. मा ने लंड के बुर से सात ते ही कहा "हा अब मार धक्का और घुसा दे अपने घोरे जैसे लंड को मा की बिल में" मैने धक्का मार दिया पर ये क्या लंड तो फिसल कर बुर के बाहर ही रगर खा रहा था, मैने दुबारा कोशिश की फिर वही नतीज़ा ढक के तीन पट फिर लंड फिसल के बाहर, इस पर मा ने कहा "रुक जा मेरे अनारी सैय्या, मुझे ध्यान रखना चाहिए था तू तो पहली बार चुदाई कर रहा है ना, अभी तुझे मैं बेटाटी हू" फिर अपने दोनो हाथो को बुर पर ले जा कर चूत के दोनो फांको को फैला दिया, बुर के अंदर का गुलाबी छेद नज़र आने लगा था, बुर एक डम पानी से भीगी हुई लग रही थी, बुर चिदोर का मा बोली "ले मैने तेरे लिए अपने चूत को फैला दिया है अब आराम से अपने लंड को ठीक निशाने पर लगा के पेल दे". मैने अपने लंड को ठीक चूत के खुले हुए मुँह पर लगाया और धकका मारा, लंड थोरा सा अंदर को घुसा, पानी लगे होने के कारण लंड का सुपरा अंदर चला गया था, मा ने कहा "शाबाश ऐसे ही सुपरा चला गया अब पूरा घुसा दे मार धक्का कस के और चोद डाल मेरी बुर को बहुत खुजली मची हुई है" मैने अपनी गांद तक का ज़ोर लगा के धक्का मार दिया पर मेरा लंड में ज़ोर की दर्द की लहर उठी और मैने चीखते हुए झट से लंड को बाहर निकल लिया. मा ने पुचछा "क्या हुआ, चिल्लाता क्यों है"
"ओह मा, लंड में दर्द हो रहा है". मा उठ कर बैठ गई और मेरी तरफ देखते हुई बोली "देखु तो कहा दर्द है" मैने लंड दिखाते हुए कहा "देखो ना जैसे ही चूत में घुशाया था वैसे ही दर्द करने लगा" मा खुच्छ देर तक देखती रही फिर हस्ने लगी और बोली "साले अनारी चुड़दकर, चला है मा को छोड़ने, आबे अभी तक तो तेरे सुपरे की चमरी ढंग से उलटी ही ऩही है तो दर्द ऩही होगा तो और क्या होगा, चला है मा को छोड़ने, चल कोई बात ऩही मुझे इस बात का ध्यान रखना चाहिए था, मेरी ग़लती है, मैने सोच तूने खूब मूठ मारी होगी तो चमरी अपने आप उलटने लगी होगी मगर तेरे इस गुलाबी सुपरे की शकल देख के ही मुझे समझ जाना चाहिए था की तूने तो अभी तक ढंग से मूठ भी ऩही मारी, चल नीचे लेट अब मुझे ही कुच्छ करना परेगा लगता है". मैने तो अब तक यही सुना था की लरका लर्की के उपर चाड के छोड़ता है मगर जब मा ने मुझे नीचे लेटने के लिए कहा तो मैं सोच में पर गया और मा से पुच्छ "नीचे क्यों लेटना है मा, क्या अब चुदाई ऩही होगी". मुझे लग रहा था की मा फिर से मेरा मूठ मार देगी. मा ने हस्ते हुए कहा "ऩही बे ****इए चुदाई तो होगी ही, जितनी तुझे छोड़ने की आग लगी है मुझे भी चुड़वाने की उतनी ही आग लगी है, चुदाई तो होगी ही, तुझे तो अभी रात भर मेरी बुर का बजा बजाना है मेरे राजा, तू नीचे लेट अब उल्टी तरफ से चुदाई होगी.
"उल्टी तरफ से चुदाई होगी, इसका क्या मतलब है मा"
"इसका मतलब है मैं तेरे उपर चाड के खुद से चड़वौनगी, कैसे चड़वौनगी? ये तो तू खुद ही थोरी देर के बाद देख लियो मगर, फिलहाल तू नीचे लेट और अपना लंड खरा कर के रख फिर देख मैं कैसे तुझे मज़ा देती हू"
मैं नीचे लेट तो गया पर अब भी मैं सोच रहा था की मा कैसे करेगी. मा ने जब मेरे चेहरे पर हिचकिचाहट के भाव देखे तो वो मेरे गाल पर एक प्यार भरा तमाचा लगते हुए बोली "सोच क्या रहा है मधर्चोड़ अभी चुप चाप तमाशा देख फिर बताना की कैसा मज़ा आता है" कह कर मा ने मेरे कमर के दोनो तरफ अपनी दोनो टाँगे कर दी और अपनी बुर को ठीक मेरे लौरे के सामने ला कर मेरे लंड को एक हाथ से पकरा और सुपरे को सीधा अपनी चूत के गुलाबी मुँह पर लगा दिया. सुपरे को बुर के गुलाबी मुँह पर लगा कर वो मेरे लंड को अपने हाथो से आगे पिच्चे कर के अपनी बुर के दरार पर रगर्ने लगी. उसकी चूत से निकला हुआ पानी मेरे सुपरे पर लग रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरी साँसे उस अगले पल के इंतेज़ार में रुकी हुई थी जब मेरा लंड उसके चूत में घुसता. मैं डम साढ़े इंतेज़ार कर रहा था तभी मा ने अपने चूत के फाँक को एक हाथ से फैलाया और मेरे लंड के सुपरे को सीधा बुर के गुलाबी मुँह पर लगा कर उपर से हल्का सा ज़ोर लगाया. मेरे लंड का सुपरा उसके चूत के फांको बीच समा गया. फिर मा ने मेरे च्चती पर अपने हाथो को जमाया और उपर से एक हल्का सा धक्का दिया मेरे लंड का थोरा सा और भाग उसकी चूत में समा गया. उसके बाद मा स्थिर हो गई और इतने से ही लंड को अपनी बुर में घुसा कर आगे पिच्चे करने लगी. थोरी देर तक ऐसा करने के बाद उसने फिर से एक धक्का मारा, इस बार धक्का थोरा ज़यादा ही जोरदार था और मेरे लंड का लग भाग आधा से अधिक भाग उसकी चूत में समा गया. मेरे मुँह से एक ज़ोर डर चीख निकल गई. क्यों की मेरे लंड के सुपरे की चमरी एक डम से पिच्चे उलट गई थी. पर मा ने इस र कोई ध्यान ऩही दिया और उतने ही लंड पर आगे पिच्चे करते हुए धक्का मरते हुए बोली "बेटा चुदाई कोई आसान काम ऩही है, लर्की भी जब पहली बार चुड्ती है तो उसको भी दर्द होता है, और उसका दर्द तो तेरे दर्द के सामने कुच्छ भी ऩही है, जैसे उसके बुर की सील टूटती है वैसे ही तेरे लंड की भी आज सील टूटी है, थोरी देर तक आराम से लेता रह फिर देख तुझे कैसा मज़ा आता है". मा अब उतने लंड को ही बुर में ले कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी. वो अपने गांद को उच्छल उच्छल के धक्के पर धक्का मारे जा रही थी. थोरी देर में ही मेरा दर्द कम हो गया और मुझे गीले पं का अहसास होने लगा. मा की चूत ने पानी छ्होरना शुरू कर दिया था और उसकी बुर से निकलते पानी के कारण मेरे लंड का घुसना और निकलना भी आसान हो गया था. मा अब और ज़ोर ज़ोर से अपनी गांद उच्छल उच्छल के धक्के लगा रही थी और मेरे लौरे का ज़यादा से ज़यादा भाग उसके चूत के अंदर घुसता जा रहा था. मा ने इस बार एक ज़ोर दार धक्का मारा और मेरे लंड का जायदातर भाग अपनी चूत में च्छूपा लिया और सिसकरते हुए बोली "सस्स्स्स्स्सिईईईईई है दैयया, कितना टगरा लॉरा है जैसे की गरम लोहे का रोड हो, एक डम सीधा बुर के दीवारो को रगर मार रहा है, मेरे जैसी चूड़ी हुई औरत के बुर में जब ये इतना कसा हुआ है तो जवान लौंदीयों की चूत फर के रख देगा, मज़ा आ गया, ले साले और घुसा लॉरा और घुसा" कह कर तेज़ी से तीन चार धक्के मार दिए. मा के द्वारा तेज़ी से लगाए गये इन धक्को से मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत के अंदर चला गया. मा ने सिसकरते हुए धक्के लगाना जारी रखा और अपने एक हाथ को लौरे के जर के पास ले जाकर देखने लगी की पूरा लंड अंदर गया है की ऩही. जब उसने देखा की पूरा का पूरा लॉरा उसकी बुर में घुस चुका है तब उसने अपनी ****अरो को उच्छलते हुए एक तेज धक्का मारा और मेरे होंठो का चुम्मा ले कर बोली "कैसा लग रहा है बेटा, अब तो दर्द ऩही हो रहा है ना"
"ऩही मा अब दर्द ऩही हो रहा है, देखो ना मेरा पूरा लॉरा तुम्हारे बुर के अंदर चला गया है"
"हा बेटा अब दर्द ऩही होगा अब तो बस मज़ा ही मज़ा है, मेरे बुर के पानी के गीले पं से तेरी चमरी उलटने में आब आसानी हो रही है इसलिए तुझे अब दर्द ऩही हो रहा होगा, बल्कि मज़ा आ रहा होगा, क्यों बेटा बोल ना मज़ा आ रहा है या ऩही अपनी मा के बुर में लॉरा पेल के, अब तो तुझे पाता चल रहा होगा की चुदाई क्या होती है बएटााआआआ, ले मज़े चुदाई का और बता की तुझे कैसा लग रहा है मा की चूत में लॉरा धसने में"
"है मा, सच में गजब का मज़ा आ रहा है, ओह मा तुम्हारी चूत कितनी कसी हुई है मेरा लॉरा तो इसमे बरी मुस्किल से घुसा है जबकि मैने सुना था की शादी शुदा औरतो की चूत ढीली हो जाती है"
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धोबन और उसका बेटा--16
मा ने सिसकते हुए कहा " है बेटा, मत पुच्छ, बहुत अच्छा लग रहा है, मेरे लाल, इसी मज़े के लिए तो तेरी मा तरस रही थी. चूस ले मेरे बुर कूऊऊओ और ज़ोर से चुस्स्स्स्सस्स.. . सारा रस पी लीई मेरे सैय्या, तू तो जादूगर है रीईईई, तुझे तो कुच्छ बताने की भी ज़रूरत ऩही, है मेरे बुर के फांको के बीच में अपनी जीभ डाल के चूस बेटा, और उसमे अपने जीभ को लिबलिबते हुए अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक घुमा दे, है घुमा दे राजा बेटा घुमा दे...." मा के बताए हुए रास्ते पर चलना तो बेटे फ़र्ज़ बनता है और उस फ़र्ज़ को निभाते हुए मैने बुर के दोनो फांको को फैला दिया और अपनी जीभ को उसके चूत में पेल दिया. बर के अंदर जीभ घुसा कर पहले तो मैने अपनी जीभ और उपरी होंठ के सहारे बुर के एक फाँक को पार्कर के खूब चूसा फिर दूसरी फाँक के साथ भी ऐसा ही किया फिर चूत को जितना चिदोर सकता था उतना चिदोर कर अपने जीभ को बुर के बीच में दाल कर उसके रस को चटकारे ले कर चाटने लगा. छूट का रस भूत नासिला था और मा की चूत कामो-उत्तेजना के कारण खूब रस छ्होर रही थी रुँघहीन, हल्का चिप-छिपा रस छत कर खाने में मुझे बहुत आनंद आ रहा था, मा घुटि घुटि आवाज़ में चीखते हुए बोल परी "ओह चतो ऐसे ही चतो मेरे राजा, छत छत के मेरे सारे रस को खा जाओ, है रे मेरा बेटा, देखो कैसे कुत्ते की तरह से अपनी मा की बुर को छत रहा है ओह छत ना ऐसे ही छत मेरे कुत्ते बेटे अपनी कुटिया मा की बुर को छत और उसके बुर के अंदर अपने जीभ को हिलाते हुए मुझे अपने जीभ से छोड़ दाल". मुझे बरा असचर्या हुआ की एक तो मा मुझे कुत्ता कह रही है फिर खुद को भी कुट्टिया कह रही है. पर मेरे दिलो-दिमाग़ में तो अभी केवल मा की रसीलिी बुर की चटाई घुसी हुई थी इसलिए मैने इस तरफ से ध्यान ऩही दिया. मा की आगया का पालन किया और जैसा उसने बताया था उसी तरह से अपने जीभ से ही उसकी चूत को चॉड्ना शुरू कर दिया. मैं अपनी जीभ को तेज़ी के साथ बुर में से अंदर बाहर कर रहा था और साथ ही साथ चूत में जीभ को घूमते हुए चूत के गुलाबी च्छेद से अपने होंठो को मिला के अपने मुँह को चूत पर रगर भी रहा था. मेरी नाक बार बार चूत के भज्नसे से टकरा रही थी और सयद वो भी मा के आनंद का एक कारण बन रही थी. मेरे दोनो हाथ मा के मोटे गुदज जाँघो से खेल रहे थे. तभी मा ने तेज़ी के साथ अपने ****अरो को हिलना शुरू कर और ज़ोर ज़ोर से हफ्ते हुए बोलने लगी "ओह निकल जाएगा ऐसे ही बुर में जीभ चलते रहना बेटा ओह, सी सी सीईई, साली बहुत खुजली करती थी आज निकल दे इसका सारा पानी" और अब मा दाँत पीस कर लग भर चीकते हुए बोलने लगी ओह हूऊओ सीईईईईईई साले कुत्ते, मेरे पायारे बेटे मेरे लाल है रे चूस और ज़ोर से चूस अपनी मा के बुर को जीभ से छोड़ डीईई अभी,,,,,,,सीईईईईई ईईइ छोड़नाअ कुत्ते हरमजड़े और ज़ोर से छोड़ सलीईई, ,,,,,,,, छोड़ दाल अपनी मा को है निकाला रे मेरा तो निकल गया ओह मेरे चुड़ककर बेटे निकल दिया रे तूने तो.... अपनी मा को अपने जीभ से छोड़ डाला" कहते हुए मा ने अपने ****अरो पहले तो खूब ज़ोर ज़ोर से उपर की तरफ उछाला फिर अपनी आँखो को बंद कर के ****अरो को धीरे धीरे फुदकते हुए झरने लगी "ओह गई मैं मेरे राजा, मेरा निकल गया मेरे सैय्या है तूने मुझे जन्नत की सैर करवा दी रे, है मेरे बेटे ओह ओह मैं गई……." मा की बुर मेरे मुँह पर खुल बंद हो रही थी. बर के दोनो फांको से रस अब भी रिस रहा था पर मा अब थोरी ठंडी पर चुकी थी और उसकी आँखे बंद थी उसने दोनो पैर फैला दिए थे और सुस्त सी होकर लंबी लंबी साँसे छ्होर्थी हुई लेट गई. मैने अपने जीभ से छोड़ छोड़ कर अपनी मा को झार दिया था. मैने बुर पर से अपने मुँह को हटा दिया और अपने सिर को मा की जाँघो पर रख कर लेट गया. कुच्छ देर तक ऐसे ही लेते रहने के बाद मैने जब सिर उठा के देखा तो पाया की मा अब भी अपने आँखो को बंद किए बेशुध होकर लेती हुई है. मैं चुप चाप उसके पैरो के बीच से उठा और उसकी बगल में जा कर लेट गया. मेरा लंड फिर से खरा हो चुका था पर मैने चुप चाप लेटना ही बेहतर समझा और मा की र करवट लेट कर मैने अपने सिर को उसके चुचियों से सता दिया और एक हाथ पेट पर रख कर लेट गया. मैं भी थोरी बहुत थकावट महसूस कर रहा था, हालाँकि लंड पूरा खरा था और छोड़ने की इच्छा बाकी थी. मैं अपने हाथो से मा के पेट नाभि और जाँघो को सहला रहा था. मैं धीरे धीरे ये सारा काम कर रहा था और कोशिश कर रहा था की मा ना जागे. मुझे लग रहा था की अब तो मा सो गई और मुझे सयद मूठ मार कर ही संतोष करना परेगा. इसलिए मैं चाह रहा था की सोते हुए थोरा सा मा के बदन से खेल लू और फिर मूठ मार लूँगा. मुझे मा के जाँघ बरे अच्छे लगे और मेरे दिल कर रहा था की मैं उन्हे चुमू और चतु. इसलिए मैं चुप चाप धीरे से उठा और फिर मा के पैरो के पास बैठ गया. मा ने अपना एक पैर फैला रखा था और दूसरे पैर को घुटनो के पास से मोर कर रखा हुआ था. इस अवस्था में वो बरी खूबसूरत लग रही थी, उसके बॉल थोरे बिखरे हुए थे एक हाथ आँखो पर और दूसरा बगल में. पैरो के इस तरह से फैले होने से उसकी बुर और गांद दोनो का च्छेद स्पस्त रूप से दिख रहा था. धीरे धीरे मैने अपने होंठो को उसके जाँघो पर फेरने लगा और हल्की हल्की चुम्मिया उसके रनो से शुरू कर के उसके घुटनो तक देने लगा. एक डम मक्खन जैसी गोरी चिकनी जाँघो को अपने हाथो से पकर कर हल्के हल्के मसल भी रहा मेरा ये काम थोरी देर तक चलता रहा, तभी मा ने अपनी आँखे खोली और मुझे अपने जाँघो के पास देख कर वो एक डम से चौंक कर उठ गई और पायर से मुझे अपने जाँघो के पास से उठाते हुए बोली "क्या कर रहा है बेटे....... ज़रा आँख लग गई थी, देख ना इतने दीनो के बाद इतने अcचे से पहली बार मैने वासना का आनंद उठाया है, इस तरह पिच्छली बार कब झारी थी मुझे तो ये भी याद ऩही, इसीलिए सयद संतुष्टि और थकान के कारण आँख लग गई"
"कोई बात ऩही मा तुम सो जाओ". तभी मा की नज़र मेरे 8.5 इंच के लौरे की तरफ गई और वो चौंक के बोली "अरे ऐसे कैसे सो जौ, (और मेरा लॉरा अपने हाथ में पकर लिया) मेरे लाल का लंड खरा हो के बार बार मुझे पुकार रहा है और मैं सो जौ"
"ओह मा, इसको तो मैं हाथ से ढीला कर लूँगा तुम सो जाओ"
"ऩही मेरे लाल आजा ज़रा सा मा के पास लेट जा, थोरा डम ले लू फिर तुझे असली चीज़ का मज़ा दूँगी"
मैं उठ कर मा के बगल में लेट गया. अब हम दोनो मा बेटे एक दूसरे की ओर करवट लेते हुए एक दूसरे से बाते करने लगे. मा ने अपना एक पैर उठाया और अपनी मोटी जाँघो को मेरे कमर पर दाल दिया. फिर एक हाथ से मेरे खरे लौरे को पकर के उसके सुपरे के साथ धीरे धीरे खेलने लगी. मैं भी मा की एक चुचि को अपने हाथो में पकर कर धीरे धीरे सहलाने लगा और अपने होंठो को मा के होंठो के पास ले जा कर एक चुंबन लिया. मा ने अपने होंठो को खोल दिया. चूमा छाति ख़तम होने के बाद मा ने पुचछा "और बेटे, कैसा लगा मा की बुर का स्वाद, अक्चा लगा या ऩही"
"है मा बहुत स्वादिष्ट था, सच में मज़ा आ गया"
"अक्चा, चलो मेरे बेटे को अच्छा लगा इस से बढ़ कर मेरे लिए कोई बात ऩही"
"मा तुम सच में बहुत सुंदर हो, तुम्हारी चुचिया कितनी खूबसूरत है, मैं.... मैं क्या बोलू मा, तुम्हारा तो पूरा बदन खूबसूरत है."
"कितनी बार बोलेगा ये बात तू मेरे से, मैं तेरी आनहके ऩही पढ़ सकती क्या, जिनमे मेरे लिए इतना पायर च्चालकता है". मैं मा से फिर पूरा चिपक गया. उसकी चुचिया मेरी च्चती में चुभ रही थी और मेरा लॉरा अब सीधा उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था. हम दोनो एक दूसरे की आगोश में कुच्छ देर तक ऐसे ही खोए रहे फिर मैने अपने आप को अलग किया और बोला "मा एक सवाल करू"
"हा पुच्छ क्या पुच्छना है"
"मा, जब मैं तुम्हारी चूत छत रहा था तब तुमने गालिया क्यों निकाली"
"गालिया, और मैं, मैं भला क्यों कर गालिया निकलने लगी"
"ऩही मा तुम गालिया निकल रही थी, तुमने मुझे कुत्ता कहा और और खुद को कुट्टिया कहा, फिर तुमने मुझे हरामी भी कहा"
"मुझे तो याद ऩही बेटा की ऐसा कुच्छ मैने तुम्हे कहा था, मैं तो केवल थोरा सा जोश में आ गई थी और तुम्हे बता रही थी कैसे क्या करना है, मुझे तो एक डम याद ऩही की मैने ये साबद कहे है"
"ऩही मा तुम ठीक से याद करने की कोशिश करो तुमने मुझे हरामी या हरमज़दा कहा था और खूब ज़ोर से झार गई थी"
"बेटा, मुझे तो ऐसा कुच्छ भी याद ऩही है, फिर भी अगर मैने कुच्छ कहा भी था तो मैं अपनी र से माफी मांगती हू, आगे से इन बतो का ख्याल रखूँगी"
"ऩही मा इसमे माफी माँगने जैसी कोई बात ऩही है, मैने तो जो तुम्हारे मुँह से सुना उसे ही तुम्हे बता दिया, खैर जाने दो तुम्हारा बेटा हू अगर तुम मुझे डूस बीश गालिया दे भी दोगि तो क्या हो जाएगा"
"ऩही बेटा ऐसी बात ऩही है, अगर मैं तुझे गालिया दूँगी तो हो सकता है तू भी कल को मेरे लिए गालिया निकले और मेरे प्रति तेरा नज़रिया बदल जाए और तू मुझे वो सम्मान ना दे जो आजतक मुझे दे रहा है"
"नही मा ऐसा कभी ऩही होगा, मैं तुम्हे हमेशा पायर करता रहूँगा और वही सम्मान दूँगा जो आजतक दिया है, मेरी नॅज़ारो में तुम्हारा स्थान हमेशा उँछ रहेगा"
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धोबन और उसका बेटा--16
मा ने सिसकते हुए कहा " है बेटा, मत पुच्छ, बहुत अच्छा लग रहा है, मेरे लाल, इसी मज़े के लिए तो तेरी मा तरस रही थी. चूस ले मेरे बुर कूऊऊओ और ज़ोर से चुस्स्स्स्सस्स.. . सारा रस पी लीई मेरे सैय्या, तू तो जादूगर है रीईईई, तुझे तो कुच्छ बताने की भी ज़रूरत ऩही, है मेरे बुर के फांको के बीच में अपनी जीभ डाल के चूस बेटा, और उसमे अपने जीभ को लिबलिबते हुए अपनी जीभ को मेरी चूत के अंदर तक घुमा दे, है घुमा दे राजा बेटा घुमा दे...." मा के बताए हुए रास्ते पर चलना तो बेटे फ़र्ज़ बनता है और उस फ़र्ज़ को निभाते हुए मैने बुर के दोनो फांको को फैला दिया और अपनी जीभ को उसके चूत में पेल दिया. बर के अंदर जीभ घुसा कर पहले तो मैने अपनी जीभ और उपरी होंठ के सहारे बुर के एक फाँक को पार्कर के खूब चूसा फिर दूसरी फाँक के साथ भी ऐसा ही किया फिर चूत को जितना चिदोर सकता था उतना चिदोर कर अपने जीभ को बुर के बीच में दाल कर उसके रस को चटकारे ले कर चाटने लगा. छूट का रस भूत नासिला था और मा की चूत कामो-उत्तेजना के कारण खूब रस छ्होर रही थी रुँघहीन, हल्का चिप-छिपा रस छत कर खाने में मुझे बहुत आनंद आ रहा था, मा घुटि घुटि आवाज़ में चीखते हुए बोल परी "ओह चतो ऐसे ही चतो मेरे राजा, छत छत के मेरे सारे रस को खा जाओ, है रे मेरा बेटा, देखो कैसे कुत्ते की तरह से अपनी मा की बुर को छत रहा है ओह छत ना ऐसे ही छत मेरे कुत्ते बेटे अपनी कुटिया मा की बुर को छत और उसके बुर के अंदर अपने जीभ को हिलाते हुए मुझे अपने जीभ से छोड़ दाल". मुझे बरा असचर्या हुआ की एक तो मा मुझे कुत्ता कह रही है फिर खुद को भी कुट्टिया कह रही है. पर मेरे दिलो-दिमाग़ में तो अभी केवल मा की रसीलिी बुर की चटाई घुसी हुई थी इसलिए मैने इस तरफ से ध्यान ऩही दिया. मा की आगया का पालन किया और जैसा उसने बताया था उसी तरह से अपने जीभ से ही उसकी चूत को चॉड्ना शुरू कर दिया. मैं अपनी जीभ को तेज़ी के साथ बुर में से अंदर बाहर कर रहा था और साथ ही साथ चूत में जीभ को घूमते हुए चूत के गुलाबी च्छेद से अपने होंठो को मिला के अपने मुँह को चूत पर रगर भी रहा था. मेरी नाक बार बार चूत के भज्नसे से टकरा रही थी और सयद वो भी मा के आनंद का एक कारण बन रही थी. मेरे दोनो हाथ मा के मोटे गुदज जाँघो से खेल रहे थे. तभी मा ने तेज़ी के साथ अपने ****अरो को हिलना शुरू कर और ज़ोर ज़ोर से हफ्ते हुए बोलने लगी "ओह निकल जाएगा ऐसे ही बुर में जीभ चलते रहना बेटा ओह, सी सी सीईई, साली बहुत खुजली करती थी आज निकल दे इसका सारा पानी" और अब मा दाँत पीस कर लग भर चीकते हुए बोलने लगी ओह हूऊओ सीईईईईईई साले कुत्ते, मेरे पायारे बेटे मेरे लाल है रे चूस और ज़ोर से चूस अपनी मा के बुर को जीभ से छोड़ डीईई अभी,,,,,,,सीईईईईई ईईइ छोड़नाअ कुत्ते हरमजड़े और ज़ोर से छोड़ सलीईई, ,,,,,,,, छोड़ दाल अपनी मा को है निकाला रे मेरा तो निकल गया ओह मेरे चुड़ककर बेटे निकल दिया रे तूने तो.... अपनी मा को अपने जीभ से छोड़ डाला" कहते हुए मा ने अपने ****अरो पहले तो खूब ज़ोर ज़ोर से उपर की तरफ उछाला फिर अपनी आँखो को बंद कर के ****अरो को धीरे धीरे फुदकते हुए झरने लगी "ओह गई मैं मेरे राजा, मेरा निकल गया मेरे सैय्या है तूने मुझे जन्नत की सैर करवा दी रे, है मेरे बेटे ओह ओह मैं गई……." मा की बुर मेरे मुँह पर खुल बंद हो रही थी. बर के दोनो फांको से रस अब भी रिस रहा था पर मा अब थोरी ठंडी पर चुकी थी और उसकी आँखे बंद थी उसने दोनो पैर फैला दिए थे और सुस्त सी होकर लंबी लंबी साँसे छ्होर्थी हुई लेट गई. मैने अपने जीभ से छोड़ छोड़ कर अपनी मा को झार दिया था. मैने बुर पर से अपने मुँह को हटा दिया और अपने सिर को मा की जाँघो पर रख कर लेट गया. कुच्छ देर तक ऐसे ही लेते रहने के बाद मैने जब सिर उठा के देखा तो पाया की मा अब भी अपने आँखो को बंद किए बेशुध होकर लेती हुई है. मैं चुप चाप उसके पैरो के बीच से उठा और उसकी बगल में जा कर लेट गया. मेरा लंड फिर से खरा हो चुका था पर मैने चुप चाप लेटना ही बेहतर समझा और मा की र करवट लेट कर मैने अपने सिर को उसके चुचियों से सता दिया और एक हाथ पेट पर रख कर लेट गया. मैं भी थोरी बहुत थकावट महसूस कर रहा था, हालाँकि लंड पूरा खरा था और छोड़ने की इच्छा बाकी थी. मैं अपने हाथो से मा के पेट नाभि और जाँघो को सहला रहा था. मैं धीरे धीरे ये सारा काम कर रहा था और कोशिश कर रहा था की मा ना जागे. मुझे लग रहा था की अब तो मा सो गई और मुझे सयद मूठ मार कर ही संतोष करना परेगा. इसलिए मैं चाह रहा था की सोते हुए थोरा सा मा के बदन से खेल लू और फिर मूठ मार लूँगा. मुझे मा के जाँघ बरे अच्छे लगे और मेरे दिल कर रहा था की मैं उन्हे चुमू और चतु. इसलिए मैं चुप चाप धीरे से उठा और फिर मा के पैरो के पास बैठ गया. मा ने अपना एक पैर फैला रखा था और दूसरे पैर को घुटनो के पास से मोर कर रखा हुआ था. इस अवस्था में वो बरी खूबसूरत लग रही थी, उसके बॉल थोरे बिखरे हुए थे एक हाथ आँखो पर और दूसरा बगल में. पैरो के इस तरह से फैले होने से उसकी बुर और गांद दोनो का च्छेद स्पस्त रूप से दिख रहा था. धीरे धीरे मैने अपने होंठो को उसके जाँघो पर फेरने लगा और हल्की हल्की चुम्मिया उसके रनो से शुरू कर के उसके घुटनो तक देने लगा. एक डम मक्खन जैसी गोरी चिकनी जाँघो को अपने हाथो से पकर कर हल्के हल्के मसल भी रहा मेरा ये काम थोरी देर तक चलता रहा, तभी मा ने अपनी आँखे खोली और मुझे अपने जाँघो के पास देख कर वो एक डम से चौंक कर उठ गई और पायर से मुझे अपने जाँघो के पास से उठाते हुए बोली "क्या कर रहा है बेटे....... ज़रा आँख लग गई थी, देख ना इतने दीनो के बाद इतने अcचे से पहली बार मैने वासना का आनंद उठाया है, इस तरह पिच्छली बार कब झारी थी मुझे तो ये भी याद ऩही, इसीलिए सयद संतुष्टि और थकान के कारण आँख लग गई"
"कोई बात ऩही मा तुम सो जाओ". तभी मा की नज़र मेरे 8.5 इंच के लौरे की तरफ गई और वो चौंक के बोली "अरे ऐसे कैसे सो जौ, (और मेरा लॉरा अपने हाथ में पकर लिया) मेरे लाल का लंड खरा हो के बार बार मुझे पुकार रहा है और मैं सो जौ"
"ओह मा, इसको तो मैं हाथ से ढीला कर लूँगा तुम सो जाओ"
"ऩही मेरे लाल आजा ज़रा सा मा के पास लेट जा, थोरा डम ले लू फिर तुझे असली चीज़ का मज़ा दूँगी"
मैं उठ कर मा के बगल में लेट गया. अब हम दोनो मा बेटे एक दूसरे की ओर करवट लेते हुए एक दूसरे से बाते करने लगे. मा ने अपना एक पैर उठाया और अपनी मोटी जाँघो को मेरे कमर पर दाल दिया. फिर एक हाथ से मेरे खरे लौरे को पकर के उसके सुपरे के साथ धीरे धीरे खेलने लगी. मैं भी मा की एक चुचि को अपने हाथो में पकर कर धीरे धीरे सहलाने लगा और अपने होंठो को मा के होंठो के पास ले जा कर एक चुंबन लिया. मा ने अपने होंठो को खोल दिया. चूमा छाति ख़तम होने के बाद मा ने पुचछा "और बेटे, कैसा लगा मा की बुर का स्वाद, अक्चा लगा या ऩही"
"है मा बहुत स्वादिष्ट था, सच में मज़ा आ गया"
"अक्चा, चलो मेरे बेटे को अच्छा लगा इस से बढ़ कर मेरे लिए कोई बात ऩही"
"मा तुम सच में बहुत सुंदर हो, तुम्हारी चुचिया कितनी खूबसूरत है, मैं.... मैं क्या बोलू मा, तुम्हारा तो पूरा बदन खूबसूरत है."
"कितनी बार बोलेगा ये बात तू मेरे से, मैं तेरी आनहके ऩही पढ़ सकती क्या, जिनमे मेरे लिए इतना पायर च्चालकता है". मैं मा से फिर पूरा चिपक गया. उसकी चुचिया मेरी च्चती में चुभ रही थी और मेरा लॉरा अब सीधा उसकी चूत पर ठोकर मार रहा था. हम दोनो एक दूसरे की आगोश में कुच्छ देर तक ऐसे ही खोए रहे फिर मैने अपने आप को अलग किया और बोला "मा एक सवाल करू"
"हा पुच्छ क्या पुच्छना है"
"मा, जब मैं तुम्हारी चूत छत रहा था तब तुमने गालिया क्यों निकाली"
"गालिया, और मैं, मैं भला क्यों कर गालिया निकलने लगी"
"ऩही मा तुम गालिया निकल रही थी, तुमने मुझे कुत्ता कहा और और खुद को कुट्टिया कहा, फिर तुमने मुझे हरामी भी कहा"
"मुझे तो याद ऩही बेटा की ऐसा कुच्छ मैने तुम्हे कहा था, मैं तो केवल थोरा सा जोश में आ गई थी और तुम्हे बता रही थी कैसे क्या करना है, मुझे तो एक डम याद ऩही की मैने ये साबद कहे है"
"ऩही मा तुम ठीक से याद करने की कोशिश करो तुमने मुझे हरामी या हरमज़दा कहा था और खूब ज़ोर से झार गई थी"
"बेटा, मुझे तो ऐसा कुच्छ भी याद ऩही है, फिर भी अगर मैने कुच्छ कहा भी था तो मैं अपनी र से माफी मांगती हू, आगे से इन बतो का ख्याल रखूँगी"
"ऩही मा इसमे माफी माँगने जैसी कोई बात ऩही है, मैने तो जो तुम्हारे मुँह से सुना उसे ही तुम्हे बता दिया, खैर जाने दो तुम्हारा बेटा हू अगर तुम मुझे डूस बीश गालिया दे भी दोगि तो क्या हो जाएगा"
"ऩही बेटा ऐसी बात ऩही है, अगर मैं तुझे गालिया दूँगी तो हो सकता है तू भी कल को मेरे लिए गालिया निकले और मेरे प्रति तेरा नज़रिया बदल जाए और तू मुझे वो सम्मान ना दे जो आजतक मुझे दे रहा है"
"नही मा ऐसा कभी ऩही होगा, मैं तुम्हे हमेशा पायर करता रहूँगा और वही सम्मान दूँगा जो आजतक दिया है, मेरी नॅज़ारो में तुम्हारा स्थान हमेशा उँछ रहेगा"
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धोबन और उसका बेटा--17
"ठीक है बेटा, अब तो हुमारे बीच एक दूसरे तरह का संबंध स्थापित हो गया है इसके बाद जो कुच्छ होता है वो हम दोनो की आपसी समझदारी पर निर्भर करता है"
"हा मा तुमने ठीक कहा, पर मा अब इन बातो को छोर कर क्यों ना असली काम किया जाए, मेरी बहुत इच्छा हो रही है की मैं तुम्हे चोदु, देखो ना मा मेरा डंडा कैसा खरा हो गया है"
"हा बेटा वो तो मैं देख ही रही हू, की मेरे लाल का हथियार कैसा तरप रहा मा का मालपुआ खाने को, पर उसके लिए तो पहले मा को एक बार फिर से थोरा गरम करना परेगा बेटा,"
"है मा तो क्या अभी तुम्हारा मन चुड़वाने का ऩही है"
"ऐसी बात ऩही है बेटे, चुड़वाने का मन तो है पर, किसी भी औरत को छोड़ने से पहले थोरा गरम करना परता है, इसलिए बुर चाटना, चुचि चूसना, चूमा चाती करना और दूसरे तरह के काम किए जाते है"
"इसका मतलब है की तुम अभी गरम ऩही हो और तुम्हे गरमा करना परेगा ये सब कर के"
"हा इसका यही मतलब है"
"पर मा तुम तो कहती थी तुम बहुत गरम हो और अभी कह रही हो की गरम करना परेगा"
"आबे उल्लूए गरम तो मैं बहुत हू पर इतने दीनो के बाद इतनी जबरदस्त चूत चटाई के बाद तूने मेरा पानी निकल दिया, तो मेरी गर्मी थोरी देर के लिए शांत हो गई है अब, तुरंत चुड़वाने के लिए तो गरम तो करना ही परेगा ना, ऩही तो अभी छ्होर दे कल तक मेरी गर्मी फिर चाड जाएगी और तब तू मुझे चोद लेना"
"ओह ऩही मा मुझे तो अभी करना है, इसी वाक़ूत"
"तो अपनी मा को ज़रा गरम कर दे और फिर मज़े ले चुदाई का"
मैने फिर से मा की दोनो चुचियाँ पकर ली और उन्हे दबाते हुए उसके होंठो से अपने होंठ भीरा दिया और. मा ने भी अपने गुलाबी होंठो को खोल कर मेरा स्वागत किया और अपनी जीभ को मेरे मुँह में पेल दिया. मा के मुँह के रस में गजब का स्वाद था. हम दोनो एक दूसरे के होंठो को मुँह में भर कर चूस्ते हू आपस में जीभ से जीभ लारा रहे थे. मा की चुचियों को अब मैं ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा था और अपने हाथो से उसके मांसल पेट को भी सहला रहा था. उसने भी अपने हाथो के बीच में मेरे लंड को दबोच लिया था और कस कस के मारोर्ते हुए उसे दबा रही थी. मा ने अपना एक पैर मेरी कमर के उपर रख दिया था और अपने जाँघो के बीच मुझे बार बार दबूच रही थी. अब हम दोनो की साँसे तेज चलने लगी थी. मेरा हाथ अब मा की पेत पर चल रहा था और वाहा से फिसलते हुए सीधा उसके ****अरो पर चला गया. अभी तक तो मैने मा के मक्खन जैसे गुदज ****अरो पर उतना ध्यान ऩही दिया था परंतु अब मेरे हाथ वही पर जा के चिपक गये थे. ओह ****अरो को हाथो से मसलने का आनंद ही कुच्छ और है. मोटे मोटे ****अरो के माँस को अपने हाथो में पकर कर कभी धीरे कभी ज़ोर से मसल्ने का अलग ही मज़ा है. ****अरो को दबाते हुए मैने अपनी उंगलियों को ****अरो के बीच की दरार में डाल दिया और अपनी उंगलियों से उसके ****अरो के बीच की खाई को धीरे धीरे सहलाने लगा. मेरी उंगलिया मा की गांद के च्छेद पर धीरे धीरे तैर रही थी. मा की गांद का छेद एक डम गरम लग रहा था. मा जो की मेरे गालो को चूस रही थी अपना मुँह हटा के बोल उठी, "ये क्या कर रहा है रे., गांद को क्यों सहला रहा है".
"है मा, तुम्हारा ये देखने में बहुत सुंदर लगता है, सहलाने दो ना,,,,,,,"
"चूत का मज़ा लिया ऩही, और चला है गांद का मज़ा लूटने", कह कर मा हासणे लगी. मेरी समझ में तो कुच्छ आया ऩही पर, जब मा ने मेरी हाथो को ऩही हटाया तो मैने मा की गांद के पकप्कप्ते च्छेद में अपनी उंगलियाँ चलाने की अपनी दिल की हसरत पूरी कर ली. और बरे आराम से धीरे धीरे कर के अपनी एक उंगली को हल्के हल्के उसकी गांद के गोल सिकुरे हुए च्छेद पर धीरे धीरे चला रहा था. मेरी उंगली का थोरा सा हिस्सा भी सयद गांद में चला गया था पर मा ने इस पर कोई ध्यान ऩही दिया था. कुच्छ देर तक ऐसे ही गांद के छेद को सहलाता और ****अरो को मसलता रहा. मेरा मन ही ऩही भर रहा था. तभी मा ने मुझे अपने जाँघो के बीच और कस के दबोच कर मेरे गालो पर एक पायर भारी थपकी लगाई और मुँह बिचकते हुए बोली, "****इए कितनी देर तक ****आर और गांद से ही खेलता रहेगा, कुच्छ आगे भी करेगा या ऩही, चल आ जा और ज़रा फिर से चुचि को चूस तो". मैं मा की इस पायर भारी झिरकी को सुन कर अपने हाथो को मा के ****अरो पर से हटा लिया और मुस्कुराते हुए मा के चेहरे को देखा और पायर से उसके गालो पर चुंबन डाल कर बोला "जैसी मेरी मा की इच्छा". और उसकी एक चुचि को अपने हाथो से पकर कर दूसरी चुचि से अपना मुँह सता दिया और निपपलो को मुँह में भर के चूसने का काम शुरू कर दिया. मा की मस्तानी चुचियो के निपल फिर से खरे हो गये और उसके मुँह से सिसकारिया निकलने लगी. मैं अपने हाथो को उसकी एक चुचि पर से हटा के नीचे उसकी जाँघो के बीच ले गया और उसकी बुर को अपने मुति में भर के ज़ोर से दबाने लगा, बर से पानी निकलना शुरू हो गया था. मेरी उंगलिओ में बुर का चिपचिपा रस लग गया. मैने अपनी बीच वाली उंगली को हल्के से चूत के च्छेद पर धकेला, मेरी उंगली सरसरती हुई बुर के अंदर घुस गई. आधी उंगली को चूत में पेल कर मैने अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मा की आँखे एक डम से नशीली होती जा रही थी और उसकी सिसकारिया भी तेज हो गई थी. मैं उसकी एक चुचि को चूस्ते हुए चूत के अंदर अपनी आधी उंगली को गाचा गछ पेले जा रहा था. मा ने मेरे सिर को दोनो हाथो से पकर कर अपने चुचियों पर दबा दिया और खूब ज़ोर ज़ोर से सिसकते हुए बोलने लगी "ओह सी सस्स्स्स्स्स्सीए चूस ज़ोर से निपल को काट ले, हरामी, ज़ोर से काट ले मेरी इन चुचियों को है,,,,," और मेरी उंगली को अपने बुर में लेने के लिए अपने ****अरो को उच्छलने लगी थी. मा के मुँह से फिर से हरामी साबद सुन कर मुझे थोरा बुरा लगा. मैने अपने मुँह को उसके चुचियो पर से हटा दिया और और उसके पेट को चूमते हुए उसकी बुर की तरफ बढ़ गया. छूट से उंगलिया निकल कर मैने चूत के दोनो फांको को पकर के फैलाया और जहा कुच्छ सेकेंड पहले तक मेरी उंगलिया थी उसी जगह पर अपने जीभ को नुकीला कर के डाल दिया. जीभ को बुर के अंदर लिबलिबते हुए मैं भग्नासे को अपने नाक से रगार्ने लगा. मा की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. अब उसने अपने पैरो को पूरा खोल दिया था और मेरे सिर को अपने बुर पर दाहाती हुई चिल्लई "छत साले मेरी बुर को छत, ऐसे ही छत कर खा जा, एक बार फिर से मेरा पानी निकल दे हरामी, बुर चाटने में तो तू पूरा उस्ताद निकला रे, छत ना अपनी मा के बुर को मैं तुझे चुदाई का बादशाह बना दूँगी मेरे चूत चातु राजाआ साले,". मा की बाकी बाते तो मेरा उतास बढ़ा रही थी पर उसके मुँह से अपने लिए गली सुन ने की आदत तो मुझे थी ऩही. पहली बार मा के मुँह से इस तरह से गली सुन रहा था. तोरा अजीब सा लग रहा था पर, बदन में एक तरह की सिहरन भी हो रही थी. मैने अपने मुँह को मा के बुर पर से हटा दिया और मा की ऊवार देखने लगा. मा के मज़े में बढ़ा होने पर अपनी अधखुली आँखे पूरी खोल दी और मेरी र देखते हुए बोली, "रुक क्यों गया ****इए जल्दी जल्दी छत ना अपने माल पुए को". मैने मुस्कुराते हुए मा की र देखा और बोला "क्या मा तुम तो भी ना, तुम्हे ध्यान है तुमने अभी अभी मुझे कितनी गालिया दी है, मैं जब याद दिलाता हू तो तुम कहती हो दी ही ऩही अभी पाता ऩही कितनी गालिया दे दी". इस पर मेरी मा हासणे लगी और मुझे अपनी तरफ खीचा तो मैं उठ कर फिर से उसके बगल में जा के लेट गया. मा ने मेरे गाल पर अपने हाथो से एक पायर भारी थपकी दे कर पुचछा, "चल मान लिया मैने गली दी, तुझे बुरा लगा क्या". मैने मुँह बना लिया था. मा मुझे बाँहो में भरते हुए बोली, "आरे मेरे छोड़ू बेटे, मा की गालिया क्या तुझे इतनी बुरी लगती है की तू बुरा मान के रुत गया"
"ऩही मा बुरी लगने की बात तो ऩही लेकिन तुम्हारे मुँह से गालिया सुन के बरा अजीब सा लगा"
"क्यों अजीब लग रहा है क्या मैं गालिया ऩही दे सकती"
"दे सकती हो, उसका उदाहरण तो तुमने मुझे दिखा ही दिया मगर अजीब इस लिए लग रहा है क्यों की आज के पहले तुमको कभी गली देते हुए ऩही सुना"
"आज के पहले तुमने कभी मुझे नंगा भी तो ऩही देखा था ना, ना ही आज के पहले कभी मेरी बुर और चुचि चूस के मेरा पानी निकाला था, सब कुछ तो आज पहली बार हो रहा है, इसलिए गालिया भी आज पहली बार सुन रहा है" कह कर मा हस्ने लगी और मेरे लंड को अपने हाथो से मारोर्ने लगी.
"ओह मा क्या कर रही हो दुख़्ता है ना,,,,,,,,,, फिर भी तुम मुझे एक बात बताओ की तुमने गालिया क्यों दी"
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"ठीक है बेटा, अब तो हुमारे बीच एक दूसरे तरह का संबंध स्थापित हो गया है इसके बाद जो कुच्छ होता है वो हम दोनो की आपसी समझदारी पर निर्भर करता है"
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"हा बेटा वो तो मैं देख ही रही हू, की मेरे लाल का हथियार कैसा तरप रहा मा का मालपुआ खाने को, पर उसके लिए तो पहले मा को एक बार फिर से थोरा गरम करना परेगा बेटा,"
"है मा तो क्या अभी तुम्हारा मन चुड़वाने का ऩही है"
"ऐसी बात ऩही है बेटे, चुड़वाने का मन तो है पर, किसी भी औरत को छोड़ने से पहले थोरा गरम करना परता है, इसलिए बुर चाटना, चुचि चूसना, चूमा चाती करना और दूसरे तरह के काम किए जाते है"
"इसका मतलब है की तुम अभी गरम ऩही हो और तुम्हे गरमा करना परेगा ये सब कर के"
"हा इसका यही मतलब है"
"पर मा तुम तो कहती थी तुम बहुत गरम हो और अभी कह रही हो की गरम करना परेगा"
"आबे उल्लूए गरम तो मैं बहुत हू पर इतने दीनो के बाद इतनी जबरदस्त चूत चटाई के बाद तूने मेरा पानी निकल दिया, तो मेरी गर्मी थोरी देर के लिए शांत हो गई है अब, तुरंत चुड़वाने के लिए तो गरम तो करना ही परेगा ना, ऩही तो अभी छ्होर दे कल तक मेरी गर्मी फिर चाड जाएगी और तब तू मुझे चोद लेना"
"ओह ऩही मा मुझे तो अभी करना है, इसी वाक़ूत"
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"है मा, तुम्हारा ये देखने में बहुत सुंदर लगता है, सहलाने दो ना,,,,,,,"
"चूत का मज़ा लिया ऩही, और चला है गांद का मज़ा लूटने", कह कर मा हासणे लगी. मेरी समझ में तो कुच्छ आया ऩही पर, जब मा ने मेरी हाथो को ऩही हटाया तो मैने मा की गांद के पकप्कप्ते च्छेद में अपनी उंगलियाँ चलाने की अपनी दिल की हसरत पूरी कर ली. और बरे आराम से धीरे धीरे कर के अपनी एक उंगली को हल्के हल्के उसकी गांद के गोल सिकुरे हुए च्छेद पर धीरे धीरे चला रहा था. मेरी उंगली का थोरा सा हिस्सा भी सयद गांद में चला गया था पर मा ने इस पर कोई ध्यान ऩही दिया था. कुच्छ देर तक ऐसे ही गांद के छेद को सहलाता और ****अरो को मसलता रहा. मेरा मन ही ऩही भर रहा था. तभी मा ने मुझे अपने जाँघो के बीच और कस के दबोच कर मेरे गालो पर एक पायर भारी थपकी लगाई और मुँह बिचकते हुए बोली, "****इए कितनी देर तक ****आर और गांद से ही खेलता रहेगा, कुच्छ आगे भी करेगा या ऩही, चल आ जा और ज़रा फिर से चुचि को चूस तो". मैं मा की इस पायर भारी झिरकी को सुन कर अपने हाथो को मा के ****अरो पर से हटा लिया और मुस्कुराते हुए मा के चेहरे को देखा और पायर से उसके गालो पर चुंबन डाल कर बोला "जैसी मेरी मा की इच्छा". और उसकी एक चुचि को अपने हाथो से पकर कर दूसरी चुचि से अपना मुँह सता दिया और निपपलो को मुँह में भर के चूसने का काम शुरू कर दिया. मा की मस्तानी चुचियो के निपल फिर से खरे हो गये और उसके मुँह से सिसकारिया निकलने लगी. मैं अपने हाथो को उसकी एक चुचि पर से हटा के नीचे उसकी जाँघो के बीच ले गया और उसकी बुर को अपने मुति में भर के ज़ोर से दबाने लगा, बर से पानी निकलना शुरू हो गया था. मेरी उंगलिओ में बुर का चिपचिपा रस लग गया. मैने अपनी बीच वाली उंगली को हल्के से चूत के च्छेद पर धकेला, मेरी उंगली सरसरती हुई बुर के अंदर घुस गई. आधी उंगली को चूत में पेल कर मैने अंदर बाहर करना शुरू कर दिया. मा की आँखे एक डम से नशीली होती जा रही थी और उसकी सिसकारिया भी तेज हो गई थी. मैं उसकी एक चुचि को चूस्ते हुए चूत के अंदर अपनी आधी उंगली को गाचा गछ पेले जा रहा था. मा ने मेरे सिर को दोनो हाथो से पकर कर अपने चुचियों पर दबा दिया और खूब ज़ोर ज़ोर से सिसकते हुए बोलने लगी "ओह सी सस्स्स्स्स्स्सीए चूस ज़ोर से निपल को काट ले, हरामी, ज़ोर से काट ले मेरी इन चुचियों को है,,,,," और मेरी उंगली को अपने बुर में लेने के लिए अपने ****अरो को उच्छलने लगी थी. मा के मुँह से फिर से हरामी साबद सुन कर मुझे थोरा बुरा लगा. मैने अपने मुँह को उसके चुचियो पर से हटा दिया और और उसके पेट को चूमते हुए उसकी बुर की तरफ बढ़ गया. छूट से उंगलिया निकल कर मैने चूत के दोनो फांको को पकर के फैलाया और जहा कुच्छ सेकेंड पहले तक मेरी उंगलिया थी उसी जगह पर अपने जीभ को नुकीला कर के डाल दिया. जीभ को बुर के अंदर लिबलिबते हुए मैं भग्नासे को अपने नाक से रगार्ने लगा. मा की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. अब उसने अपने पैरो को पूरा खोल दिया था और मेरे सिर को अपने बुर पर दाहाती हुई चिल्लई "छत साले मेरी बुर को छत, ऐसे ही छत कर खा जा, एक बार फिर से मेरा पानी निकल दे हरामी, बुर चाटने में तो तू पूरा उस्ताद निकला रे, छत ना अपनी मा के बुर को मैं तुझे चुदाई का बादशाह बना दूँगी मेरे चूत चातु राजाआ साले,". मा की बाकी बाते तो मेरा उतास बढ़ा रही थी पर उसके मुँह से अपने लिए गली सुन ने की आदत तो मुझे थी ऩही. पहली बार मा के मुँह से इस तरह से गली सुन रहा था. तोरा अजीब सा लग रहा था पर, बदन में एक तरह की सिहरन भी हो रही थी. मैने अपने मुँह को मा के बुर पर से हटा दिया और मा की ऊवार देखने लगा. मा के मज़े में बढ़ा होने पर अपनी अधखुली आँखे पूरी खोल दी और मेरी र देखते हुए बोली, "रुक क्यों गया ****इए जल्दी जल्दी छत ना अपने माल पुए को". मैने मुस्कुराते हुए मा की र देखा और बोला "क्या मा तुम तो भी ना, तुम्हे ध्यान है तुमने अभी अभी मुझे कितनी गालिया दी है, मैं जब याद दिलाता हू तो तुम कहती हो दी ही ऩही अभी पाता ऩही कितनी गालिया दे दी". इस पर मेरी मा हासणे लगी और मुझे अपनी तरफ खीचा तो मैं उठ कर फिर से उसके बगल में जा के लेट गया. मा ने मेरे गाल पर अपने हाथो से एक पायर भारी थपकी दे कर पुचछा, "चल मान लिया मैने गली दी, तुझे बुरा लगा क्या". मैने मुँह बना लिया था. मा मुझे बाँहो में भरते हुए बोली, "आरे मेरे छोड़ू बेटे, मा की गालिया क्या तुझे इतनी बुरी लगती है की तू बुरा मान के रुत गया"
"ऩही मा बुरी लगने की बात तो ऩही लेकिन तुम्हारे मुँह से गालिया सुन के बरा अजीब सा लगा"
"क्यों अजीब लग रहा है क्या मैं गालिया ऩही दे सकती"
"दे सकती हो, उसका उदाहरण तो तुमने मुझे दिखा ही दिया मगर अजीब इस लिए लग रहा है क्यों की आज के पहले तुमको कभी गली देते हुए ऩही सुना"
"आज के पहले तुमने कभी मुझे नंगा भी तो ऩही देखा था ना, ना ही आज के पहले कभी मेरी बुर और चुचि चूस के मेरा पानी निकाला था, सब कुछ तो आज पहली बार हो रहा है, इसलिए गालिया भी आज पहली बार सुन रहा है" कह कर मा हस्ने लगी और मेरे लंड को अपने हाथो से मारोर्ने लगी.
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मा ने मेरे चेहरे को अपने होंठो के पास खीच कर मेरे होंठो पर एक गहरा चुंबन लिया और अपनी कातिल मुस्कुराहट फेकटे हुए मेरे कान के पास धीरे से बोली "खाली दूध ही पिएगा या मालपुआ भी खाएगा, देख तेरा मालपुआ तेरा इंतेज़ार कर रहा है राजा" मैने भी मा के होंठो का चुंबन लिया और फिर उसके भरे भरे गालो को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और फिर उसके नाक को चूमा और फिर धीरे से बोला "ओह मा तुम सच में बहुत सुंदर हो" इस पर मा ने पुचछा
"क्यों मज़ा आया ना चूसने में"
"हा मा, गजब का मज़ा आया, मुझे आज तक ऐसा मज़ा कभी ऩही आया था". तब मा ने अपने पैरो के बीच इशारा करते हुए कहा " नीचे और भी मज़ा आएगा, यहा तो केवल तिजोरी का दरवाजा था, असली खजाना तो नीचे है, आजा बेटे आज तुझे असली मालपुआ खिलती हू" मैं धीरे से खिसक कर मा के पैरो पास आ गया. मा ने अपने पैरो को घुटने के पास से मोर कर फैला दिया और बोली "यहा, बीच में, दोनो पैर के बीच में आ के बैठ तब ठीक से देख पाएगा अपनी मा का खजाना" मैं उठ कर मा के दोनो पैरो के बीच घुटनो के बाल बैठ गया और आगे की र झुका, सामने मेरे वो चीज़ थी जिसको देखने के लिए मैं मारा जा रहा था. मा ने अपनी दोनो जंघे फैला दी और अपने हाथो को अपने बुर के उपर रख कर बोली "ले देख ले अपना मालपुआ, अब आज के बाद से तुझे यही मालपुआ खाने को मिलेगा" मेरी खुशी का तो ठिकाना ऩही था. सामने मा की खुली जाँघो के बीच झांतो का एक तिकोना सा बना हुआ था. इस तिकोने झांतो के जंगल के बीच में से मा की फूली हुए गुलाबी बुर का चीड़ झाँक रहा था जैसे बदलो के झुर्मुट में से चाँद झकता है. मैने अपने कपते हाथो को मा के चिकने जाँघो पर रख दिया और थोरा सा झुक गया. उसके बुर के बॉल बहुत बरे बरे ऩही थे छ्होटे छ्होटे घुंघराले बॉल और उनके बीच एक गहरी लकीर से चीरी हुई थी. मैने अपने दाहिने हाथ को जाँघ पर से उठा कर हकलाते हुए पुचछा "मा मैं इसे च्छू लू......."
"च्छू ले, तेरे छुने के लिए ही तो खोल के बैठी हू"
मैने अपने हाथो को मा की चूत को उपर रख दिया. झांट के बॉल एक डम रेशम जैसे मुलायम लग रहे थे और ऐसा लग रहा थे, हालाँकि आम तौर पर झांट के बॉल थोरे मोटे होते है और उसके झांट के बॉल भी मोटे ही थे पर मुलायम भी थे. हल्के हल्के मैं उन बालो पर हाथ फिरते हुए उनको एक तरफ करने की कोशिश कर रहा था. अब चूत की दरार और उसकी मोटी मोटी फांके स्पस्त रूप से दिख रही थी. मा का बुर एक फूला हुआ और गद्देदार लगता था. छूट की मोटी मोटी फांके बहुत आकर्षक लग रही थी. मेरे से रहा ऩही गया और मैं बोल परा "ओह मा ये तो सच मुच में मालपुए के जैसा फूला हुआ है".
"हा बेटा यही तो तेरा असली मालपुआ है आज के बाद जब भी मालपुआ खाने का मन करे यही खाना"
"हा मा मैं तो हमेशा यही मालपुआ ख़ौँगा, ओह मा देखो ना इस से तो रस भी निकल रहा है" (छूट से रिस्ते हुए पानी को देख कर मैने कहा).
"बेटा यही तो असली माल है हम औरतो का, ये रस मैं तुझे अपनी बुर की थाली में सज़ा कर खिलौंगी, दोनो फाँक को खोल के देख कैसा दिखता है, हाथ से दोनो फाँक पकर कर खीच कर बुर को चिदोर कर देख"
सच बताता हू दोनो फांको को चियर कर मैने जब चूत के गुलाबी रस से भीगे च्छेद को देखा तो मुझे यही लगा की मेरा तो जानम सफल हो गया है. छूट के अंदर का भाग एक डम गुलाबी था और रस भीगा हुआ था जब मैने उस चीड़ को च्छुआ तो मेरे हाथो में चिप छिपा सा रस लग गया. मैने उस रस को वही बिस्तर के चादर पर पोच्च दिया और अपने सिर को आगे बढ़ा कर मा के बुर को चूम लिया. मा ने इस पर मेरे सिर को अपने चूत पर दबाते हुए हल्के से सिसकते हुए कहा "बिस्तर पर क्यों पोच्च दिया, उल्लू, यही मा का असली पायर जो की तेरे लंड को देख के चूत के रास्ते छलक कर बाहर आ रहा है, इसको चक के देख, चूस ले इसके"
"है मा चुसू मैं तेरे बुर को, है मा चतु इसको"
"हा बेटा छत ना चूस ले अपनी मा के चूत के सारे रस को, दोनो फांको को खोल के उसमे अपनी जीभ दाल दे और चूस, और ध्यान से देख तू तो बुर के केवल फांको को देख रहा है, देख मैं तुझे दिखती हू" और मा ने अपने चूत को पूरा चिदोर दिया और अंगुली रख कर बताने लगी "देख ये जो छ्होटा वाला च्छेद है ना वो मेरे पेशाब करने वाला च्छेद है, बुर में दो दो च्छेद होते है, उपर वाला पेशाब करने के काम आता है और नीचे वाला जो ये बरा च्छेद है वो छुड़वाने के काम आता है इसी च्छेद में से रस निकालता है ताकि मोटे से मोटा लंड आसानी से चूत को छोड़ सके, और बेटा ये जो पेशाब वाले च्छेद के ठीक उपर जो ये नुकीला सा निकला हुआ है वो क्लिट कहलाता है और ये औरत को गर्म करने का अंतिम हथियार है. इसको च्छुटे ही औरत एक डम गरम हो जाती है, समझ में आया"
"हा मा, आ गया साँझ में है कितनी सुंदर है ये तुम्हारी बुर, मैं चतु इसे मा.." "हा बेटा, अब तू चाटना शुरू कर दे, पहले पूरी बुर के उपर अपनी जीभ को फिरा के चाट फिर मैं आगे बेटाटी जाती हू कैसे करना है"
मैने अपनी जीभ निकल ली और मा की बुर पर अपने ज़ुबान को फिरना शुरू कर दिया, पूरी चूत के उपर मेरी जीभ चल रही थी और मैं फूली हुई गद्देदार बुर को अपनी खुरदरी ज़बान से उपर से नीचे तक छत रहा था. अपनी जीभ को दोनो फांको के उपर फेरते हुए मैं ठीक बुर के दरार पर अपनी जीभ रखी और धीरे धीरे उपर से नीचे तक पूरे चूत की दरार पर जीभ को फिरने लगा, बुर से रिस रिस कर निकालता हुआ रस जो बाहर आ रहा था उसका नमकीन स्वाद मेरे मुझे मिल रहा था. जीभ जब चूत के उपरी भाग में पहुच कर क्लिट से टकराती थी तो मा की सिसकिया और भी तीज हो जाती थी. मा ने अपने दोनो हाथो को शुरू में तो कुच्छ देर तक अपनी चुचियों पर रखा था और अपनी चुचियों को अपने हाथ से ही दबाती रही मगर बाद में उसने अपने हाथो को मेरे सिर के पिच्चे लगा दिया और मेरे बालो को सहलाते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबने लगी. मेरी चूत चूसा बदस्तूर जारी थी और अब मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया था की मा को सबसे ज़यादा मज़ा अपनी क्लिट की चूसा में आ रहा है इसलिए मैने इस बार अपने जीभ को नुकीला कर के क्लिट से भीरा दिया और केवल क्लिट पर अपनी जीभ को तेज़ी से चलाने लगा. मैं बहुत तेज़ी के साथ क्लिट के उपर जीभ चला रहा था और फिर पूरे क्लिट को अपने होंठो के बीच दबा कर ज़ोर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, मा ने उत्तेजना में अपने ****अरो को उपर उच्छल दिया और ज़ोर से सिसकिया लेते हुए बोली "है दैया, उईईइ मा सी सी..... चूस ले ओह चूस ले मेरे भज्नसे को ओह, सी क्या खूब चूस रहा है रे तू, ओह मैने तो सोचा भी ऩही थऽआअ की तेरी जीभ ऐसा कमाल करेगी, है रे बेटा तू तो कमाल का निकला ओह ऐसे ही चूस अपने होंठो के बीच में भज्नसे को भर के इसी तरह से चूस ले, ओह बेटा चूसो, चूसो बेटा......"
मा के उत्साह बढ़ने पर मेरी उत्तेजना अब दुगुनी हो चुकी थी और मैं दुगुने जोश के साथ एक कुत्ते की तरह से लॅप लॅप करते हुए पूरे बुर को छाते जा रहा था. अब मैं चूत के भज्नसे के साथ साथ पूरे चूत के माँस (गुड्डे) को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था और, मा की मोटी फूली हुई चूत अपने झांतो समेत मेरे मुँह में थी. पूरी बुर को एक बार रसगुल्ले की तरह से मुँह में भर कर चूसने के बाद मैने अपने होंठो को खूल कर चूत के छोड़ने वाले च्छेद के सामने टिका दिया और बुर के होंठो से अपने होंठो को मिला कर मैने खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना सुरू कर दिया. बर का नशीला रस रिस रिस कर निकल रहा था और सीधा मेरे मुँह में जा रहा था. मैने कभी सोचा भी ऩही था की मैं चूत को ऐसे चुसूंगा या फिर चूत की चूसा ऐसे की जाती है, पर सयद चूत सामने देख कर चूसने की कला अपने आप आ जाती है. फुददी और जीभ की लरआई अपने आप में ही इतनी मजेदार होती है की इसे सीखने और सीखने की ज़रूरत ऩही पार्टी, बस जीभ को फुददी दिखा दो बाकी का काम जीभ अपने आप कर लेती है. मा की सिसकिया और शाबाशी और तेज हो चुकी थी, मैने अपने सिर को हल्का सा उठा के मा को देखते हुए अपने बुर के रस से भीगे होंठो से मा से पुचछा, "कैसा लग रहा है मा, तुझे अक्चा लग रहा है"
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धोबन और उसका बेटा--15
मा ने मेरे चेहरे को अपने होंठो के पास खीच कर मेरे होंठो पर एक गहरा चुंबन लिया और अपनी कातिल मुस्कुराहट फेकटे हुए मेरे कान के पास धीरे से बोली "खाली दूध ही पिएगा या मालपुआ भी खाएगा, देख तेरा मालपुआ तेरा इंतेज़ार कर रहा है राजा" मैने भी मा के होंठो का चुंबन लिया और फिर उसके भरे भरे गालो को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और फिर उसके नाक को चूमा और फिर धीरे से बोला "ओह मा तुम सच में बहुत सुंदर हो" इस पर मा ने पुचछा
"क्यों मज़ा आया ना चूसने में"
"हा मा, गजब का मज़ा आया, मुझे आज तक ऐसा मज़ा कभी ऩही आया था". तब मा ने अपने पैरो के बीच इशारा करते हुए कहा " नीचे और भी मज़ा आएगा, यहा तो केवल तिजोरी का दरवाजा था, असली खजाना तो नीचे है, आजा बेटे आज तुझे असली मालपुआ खिलती हू" मैं धीरे से खिसक कर मा के पैरो पास आ गया. मा ने अपने पैरो को घुटने के पास से मोर कर फैला दिया और बोली "यहा, बीच में, दोनो पैर के बीच में आ के बैठ तब ठीक से देख पाएगा अपनी मा का खजाना" मैं उठ कर मा के दोनो पैरो के बीच घुटनो के बाल बैठ गया और आगे की र झुका, सामने मेरे वो चीज़ थी जिसको देखने के लिए मैं मारा जा रहा था. मा ने अपनी दोनो जंघे फैला दी और अपने हाथो को अपने बुर के उपर रख कर बोली "ले देख ले अपना मालपुआ, अब आज के बाद से तुझे यही मालपुआ खाने को मिलेगा" मेरी खुशी का तो ठिकाना ऩही था. सामने मा की खुली जाँघो के बीच झांतो का एक तिकोना सा बना हुआ था. इस तिकोने झांतो के जंगल के बीच में से मा की फूली हुए गुलाबी बुर का चीड़ झाँक रहा था जैसे बदलो के झुर्मुट में से चाँद झकता है. मैने अपने कपते हाथो को मा के चिकने जाँघो पर रख दिया और थोरा सा झुक गया. उसके बुर के बॉल बहुत बरे बरे ऩही थे छ्होटे छ्होटे घुंघराले बॉल और उनके बीच एक गहरी लकीर से चीरी हुई थी. मैने अपने दाहिने हाथ को जाँघ पर से उठा कर हकलाते हुए पुचछा "मा मैं इसे च्छू लू......."
"च्छू ले, तेरे छुने के लिए ही तो खोल के बैठी हू"
मैने अपने हाथो को मा की चूत को उपर रख दिया. झांट के बॉल एक डम रेशम जैसे मुलायम लग रहे थे और ऐसा लग रहा थे, हालाँकि आम तौर पर झांट के बॉल थोरे मोटे होते है और उसके झांट के बॉल भी मोटे ही थे पर मुलायम भी थे. हल्के हल्के मैं उन बालो पर हाथ फिरते हुए उनको एक तरफ करने की कोशिश कर रहा था. अब चूत की दरार और उसकी मोटी मोटी फांके स्पस्त रूप से दिख रही थी. मा का बुर एक फूला हुआ और गद्देदार लगता था. छूट की मोटी मोटी फांके बहुत आकर्षक लग रही थी. मेरे से रहा ऩही गया और मैं बोल परा "ओह मा ये तो सच मुच में मालपुए के जैसा फूला हुआ है".
"हा बेटा यही तो तेरा असली मालपुआ है आज के बाद जब भी मालपुआ खाने का मन करे यही खाना"
"हा मा मैं तो हमेशा यही मालपुआ ख़ौँगा, ओह मा देखो ना इस से तो रस भी निकल रहा है" (छूट से रिस्ते हुए पानी को देख कर मैने कहा).
"बेटा यही तो असली माल है हम औरतो का, ये रस मैं तुझे अपनी बुर की थाली में सज़ा कर खिलौंगी, दोनो फाँक को खोल के देख कैसा दिखता है, हाथ से दोनो फाँक पकर कर खीच कर बुर को चिदोर कर देख"
सच बताता हू दोनो फांको को चियर कर मैने जब चूत के गुलाबी रस से भीगे च्छेद को देखा तो मुझे यही लगा की मेरा तो जानम सफल हो गया है. छूट के अंदर का भाग एक डम गुलाबी था और रस भीगा हुआ था जब मैने उस चीड़ को च्छुआ तो मेरे हाथो में चिप छिपा सा रस लग गया. मैने उस रस को वही बिस्तर के चादर पर पोच्च दिया और अपने सिर को आगे बढ़ा कर मा के बुर को चूम लिया. मा ने इस पर मेरे सिर को अपने चूत पर दबाते हुए हल्के से सिसकते हुए कहा "बिस्तर पर क्यों पोच्च दिया, उल्लू, यही मा का असली पायर जो की तेरे लंड को देख के चूत के रास्ते छलक कर बाहर आ रहा है, इसको चक के देख, चूस ले इसके"
"है मा चुसू मैं तेरे बुर को, है मा चतु इसको"
"हा बेटा छत ना चूस ले अपनी मा के चूत के सारे रस को, दोनो फांको को खोल के उसमे अपनी जीभ दाल दे और चूस, और ध्यान से देख तू तो बुर के केवल फांको को देख रहा है, देख मैं तुझे दिखती हू" और मा ने अपने चूत को पूरा चिदोर दिया और अंगुली रख कर बताने लगी "देख ये जो छ्होटा वाला च्छेद है ना वो मेरे पेशाब करने वाला च्छेद है, बुर में दो दो च्छेद होते है, उपर वाला पेशाब करने के काम आता है और नीचे वाला जो ये बरा च्छेद है वो छुड़वाने के काम आता है इसी च्छेद में से रस निकालता है ताकि मोटे से मोटा लंड आसानी से चूत को छोड़ सके, और बेटा ये जो पेशाब वाले च्छेद के ठीक उपर जो ये नुकीला सा निकला हुआ है वो क्लिट कहलाता है और ये औरत को गर्म करने का अंतिम हथियार है. इसको च्छुटे ही औरत एक डम गरम हो जाती है, समझ में आया"
"हा मा, आ गया साँझ में है कितनी सुंदर है ये तुम्हारी बुर, मैं चतु इसे मा.." "हा बेटा, अब तू चाटना शुरू कर दे, पहले पूरी बुर के उपर अपनी जीभ को फिरा के चाट फिर मैं आगे बेटाटी जाती हू कैसे करना है"
मैने अपनी जीभ निकल ली और मा की बुर पर अपने ज़ुबान को फिरना शुरू कर दिया, पूरी चूत के उपर मेरी जीभ चल रही थी और मैं फूली हुई गद्देदार बुर को अपनी खुरदरी ज़बान से उपर से नीचे तक छत रहा था. अपनी जीभ को दोनो फांको के उपर फेरते हुए मैं ठीक बुर के दरार पर अपनी जीभ रखी और धीरे धीरे उपर से नीचे तक पूरे चूत की दरार पर जीभ को फिरने लगा, बुर से रिस रिस कर निकालता हुआ रस जो बाहर आ रहा था उसका नमकीन स्वाद मेरे मुझे मिल रहा था. जीभ जब चूत के उपरी भाग में पहुच कर क्लिट से टकराती थी तो मा की सिसकिया और भी तीज हो जाती थी. मा ने अपने दोनो हाथो को शुरू में तो कुच्छ देर तक अपनी चुचियों पर रखा था और अपनी चुचियों को अपने हाथ से ही दबाती रही मगर बाद में उसने अपने हाथो को मेरे सिर के पिच्चे लगा दिया और मेरे बालो को सहलाते हुए मेरे सिर को अपनी चूत पर दबने लगी. मेरी चूत चूसा बदस्तूर जारी थी और अब मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया था की मा को सबसे ज़यादा मज़ा अपनी क्लिट की चूसा में आ रहा है इसलिए मैने इस बार अपने जीभ को नुकीला कर के क्लिट से भीरा दिया और केवल क्लिट पर अपनी जीभ को तेज़ी से चलाने लगा. मैं बहुत तेज़ी के साथ क्लिट के उपर जीभ चला रहा था और फिर पूरे क्लिट को अपने होंठो के बीच दबा कर ज़ोर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा, मा ने उत्तेजना में अपने ****अरो को उपर उच्छल दिया और ज़ोर से सिसकिया लेते हुए बोली "है दैया, उईईइ मा सी सी..... चूस ले ओह चूस ले मेरे भज्नसे को ओह, सी क्या खूब चूस रहा है रे तू, ओह मैने तो सोचा भी ऩही थऽआअ की तेरी जीभ ऐसा कमाल करेगी, है रे बेटा तू तो कमाल का निकला ओह ऐसे ही चूस अपने होंठो के बीच में भज्नसे को भर के इसी तरह से चूस ले, ओह बेटा चूसो, चूसो बेटा......"
मा के उत्साह बढ़ने पर मेरी उत्तेजना अब दुगुनी हो चुकी थी और मैं दुगुने जोश के साथ एक कुत्ते की तरह से लॅप लॅप करते हुए पूरे बुर को छाते जा रहा था. अब मैं चूत के भज्नसे के साथ साथ पूरे चूत के माँस (गुड्डे) को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था और, मा की मोटी फूली हुई चूत अपने झांतो समेत मेरे मुँह में थी. पूरी बुर को एक बार रसगुल्ले की तरह से मुँह में भर कर चूसने के बाद मैने अपने होंठो को खूल कर चूत के छोड़ने वाले च्छेद के सामने टिका दिया और बुर के होंठो से अपने होंठो को मिला कर मैने खूब ज़ोर ज़ोर से चूसना सुरू कर दिया. बर का नशीला रस रिस रिस कर निकल रहा था और सीधा मेरे मुँह में जा रहा था. मैने कभी सोचा भी ऩही था की मैं चूत को ऐसे चुसूंगा या फिर चूत की चूसा ऐसे की जाती है, पर सयद चूत सामने देख कर चूसने की कला अपने आप आ जाती है. फुददी और जीभ की लरआई अपने आप में ही इतनी मजेदार होती है की इसे सीखने और सीखने की ज़रूरत ऩही पार्टी, बस जीभ को फुददी दिखा दो बाकी का काम जीभ अपने आप कर लेती है. मा की सिसकिया और शाबाशी और तेज हो चुकी थी, मैने अपने सिर को हल्का सा उठा के मा को देखते हुए अपने बुर के रस से भीगे होंठो से मा से पुचछा, "कैसा लग रहा है मा, तुझे अक्चा लग रहा है"
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धोबन और उसका बेटा--14
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धोबन और उसका बेटा--14
"हा मा, सच में तुम बहुत सुंदर हो और मैं तुम्हे बहुत दीनो से चू...."
"हा, हा बोल ना क्या करना चाहता था, अब तो खुल के बात कर बेटे, शर्मा मत अपनी मा से अब तो हुमने शर्म की हर वो दीवार गिरा दी है जो जमाने ने हमारे लिए बनाई है"
"है मा मैं कब से तुम्हे चॉड्ना चाहता था पर कह ऩही पाता था"
"कोई बात ऩही बेटा अभी भी कुच्छ ऩही बिगरा है वो भला हुआ की आज मैने खुद ही पहल कर दी, चल आ देख अपनी मा को नंगा और आज से बन जा उसका सैययान"
कह कर मा बिस्तेर नीचे उतार गई और मेरे सामने आके खरी हो गई और धीरे धीरे करके अपने ब्लाउस के एक बटन को खोलने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे चाँद बदल में से निकल रहा है. धीरे धीरे उसकी गोरी गोरी चुचिया दिखने लगी. ओह गजब की चुचिया थी, देखने से लग रहा था जैसे की दो बरे नारियल दोनो तरफ लटक रहे हो. एक डम गोल और आगे से नुकीले तीर के जैसे. चुचियों पर नासो की नीली रेखाए स्पस्त दिख रही थी. निपल थोरे मोटे और एकद्ूम खरे थे और उनके चारो तरफ हल्का गुलबीपन लिए हुए गोल गोल घेरा था. निपल भूरे रंगे के थे. मा अपने हाथो से अपने चुचियों को नीचे से पकर कर मुझे दिखती हुई बोली "पसंद आई अपनी मा की चुचि, कैसी लगी बेटा बोल ना, फिर आगे का दिखौँगी"
"है मा तुम सच में बहुत सुंदर हो, ओह कितनी सुंदर चुउ..हिय है ओह"
मा ने अपने चुचियों पर हाथ फेरते हुए और अच्छे से मुझे दिखाते हुए हल्का सा हिलाया और बोली "खूब सेवा करनी होगी इसकी तुझे, देख कैसे शान से सिर उठाए खरी है इस उमर में भी, तेरे बाप के बस का तो है ऩही अब तू ही इन्हे संभालना" कह कर वो फिर अपने हाथो को अपने पेटिकोट के नारे पर ले गई और बोली "अब देख बेटा तेरा को जन्नत का दरवाजा दिखती हू, अपनी मा का स्पेशल मालपुआ देख, जिसके लिए तू इतना तरस रहा था". कह कर मा ने अपने पेटिकोट के नारे को खोल दिया. पेटिकोट उसके कमर से सरसरते हुए सीधा नीचे की गिर गया और मा ने एक पैर से पेटिकोट को एक तरफ उच्छल कर फेक दिया और बिस्तर के और नज़दीक आ गई फिर बोली "है बेटा तूने तो मुझे एक डम बेशरम बना दिया", फिर मेरे लंड को अपने मुति में भर के बोली "ओह तेरे इस सांड जैसे लंड ने तो मुझे पागल बना दिया है, देख ले अपनी मा को जी भर के" मेरी नज़रे मा के जेंघो के बीच में टिकी हुई थी. मा की गोरी गोरी चिकनी रनो के बीच में काले काले झतो का एक तिकोना बना हुआ था. झांट बहुत ज़यादा बरे ऩही थे. झांतो के बीच में से उसकी गुलाबी चूत की हल्की झलक मिल रही थी, मैने अपने हाथो को मा के जेंघो पर रखा और थोरा नीचे झुक कर ठीक चूत के पास अपने चेहरे को ले जा के देखने लगा. मा ने अपने दोनो हाथ को मेरे सिर पर रख दिया और मेरे बालो से खेलने लगी फिर बोली "रुक जा ऐसे ऩही दिखेगा तुझे आराम से बिस्तर पर लेट के दिखती हू"
"ठीक है, आ जाओ बिस्तेर पर, मा एक बार ज़रा पिच्चे घुमओ ना"
"ओह, मेरा राजा मेरा पिच्छवारा भी देखना चाहता है क्या, चल पिच्छवारा तो मैं तुझे खरे खरे ही दिखा देती हू ले देख अपनी मा के ****आर और गांद को". इतना कह कर मा पिच्चे घूम गई. ओह कितना सुंदर ड्रिस्या था वो. इसे मैं अपनी पूरी जिंदगी में कभी ऩही भूल सकता. मा के ****आर सच में बरे खूसूरत थे. एक डम मलाई जैसे, गोल-मटोल, गुदज, मांसल. और उस ****आर के बीच में एक गहरी लकीर सी बन रही थी. जो की उसके गांद की खाई थी. मैने मा को थोरा झुकने को कहा तो मा झुक गई और आराम से देवनो मक्खन जैसे ****अरो को पकर के अपने हाथो से मसालते हुए उनके बीच की खाई को देखने लगा. दोनो ****आर को बीच में गांद की भूरे रंग की च्छेद फुकफुका रही थी. एकद्ूम छ्होटी सी गोल च्छेद, मैने हल्के से अपने हाथ को उस च्छेद पर रख दिया और हल्के हल्के उसे सहलाने लगा, साथ में मैं ****अरो को भी मसल रहा था. पर तभी मा आगे घूम गई
"चल मैं थक गई खरे खरे अब जो करना है बिस्तर पर करेंगे". और वो बिस्तेर पर चाड गई. पलंग की पुष्ट से अपने सिर को टिका कर उसने अपने दोनो पैरो को मेरे सामने खोल कर फैला दिया और बोली "अब देख ले आराम से, पर एक बात तो बता तू देखने के बाद क्या करेगा कुच्छ मालूम भी है तुझे या ऩही" "है, मा चो....दुन्गाआअ"
"अक्चा छोड़ेगा, पर कैसे ज़रा बता तो सही कैसे छोड़ेगा"
"है मैं पहले तुम्हारी चु..हि चुस्स्स...ंअ चाहता हू"
"चल ठीक है चूस लेना, और क्या करेगा"
"ओह और और्र्ररर..... चूत देखूँगा और फिर्र......ंउझे पाता ऩही"
"पाता ऩही ये क्या जवाब हुआ पाता ऩही, जब कुच्छ पाता ऩही तो मा पर डोरे क्यों दाल रहा था"
"ओह मा मैने पहले किसी को किया ऩही है नाआअ इसलिए मुझे पाता ऩही है, मुझे बस थोरा बहुत पाता है, जो की मैने गाओं के लार्को के साथ सीखा था"
"तो गाओं के छ्होक्रो ने ये ऩही सिखाया की कैसे किया जाता है, खाली यही सिखाया की मा पर डोरे डालो"
"ओह मा तू तो समझती ही ऩही अर्रे वो लोग मुझे क्यों सीखने लगे की तुम पर डोरे डालो, वो तो... वो तो तुम मुझे बहुत सुंदर लगती हो इसलिए मैं तुम्हे देखता था"
"ठीक है चल तेरी बात स्मझ गई बेटा की मैं तुझे सुंदर लगती हू पर मेरी इस सुंदरता का तू फयडा कैसे उठाएगा उल्लू ये भी तो बता दे ना, की खाली देख के मूठ मार लेगा"
"है मा, ऩही मैं तुम्हे छोड़ना चाहता हू, मा तुम सीखा देना, सीखा दोगि नाअ" कह कर मैने बुरा सा मुँह बना लिया"
"है मेरा बेटा देख तो मा की लेने के लिए कैसे तरप रहा, आजा मेरे पायारे मैं तुझे सब सीखा दूँगी, तेरे जैसे लंड वाले बेटे को तो कोई भी मा सीखना चाहेगी, तुझे तो मैं सीखा पढ़ा के चुदाई का बादशाह बना दूँगी, आजा पहले अपनी मा की चुचियों से खेल ले जी भर के फिर तुझे चूत से खेलना सिखाती हू बेटा"
मैं मा के कमर के पास बैठ गया और मा तो पूरी नंगी पहले से ही थी मैने उसकी चुचियों पर अपना हाथ रख दिया और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा. मेरे हाथ में सयद दुनिया की सबसे खूबसूरत चुचिया थी. ऐसी चुचिया जिनको देख के किसी का भी दिल मचल जाए. मैं दोनो चुचियों की पूरी गोलाई पर हाथ फेर रहा था. चुचिया मेरी हथेली में ऩही समा रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में घूम रहा हू. मा की चुचियो का स्पर्श ग़ज़ब का था. मुलायम, गुदज, और सख़्त गतिलापन ये सब अहसास सयद आक्ची गोल मटोल चुचियों को दबा के ही पाया जा सकता है. मुझे इन सारी चीज़ो का एक साथ आनंद मिल रहा था. ऐसी चुचि दबाने का सौभाग्या नसीब वालो को ही मिलता है इस बात का पाता मुझे अपने जीवन में बहुत बाद में चला जब मैने दूसरी अनेक तरह की चुचियों का स्वाद लिया.
मा के मुँह से हल्की हल्की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी और उसने मेरे चेहरे को अपने पास खीच लिया और अपने तपते हुए गुलाबी होंठो का पहला अनूठा स्पर्श मेरे होंठो को दिया. हम दोनो के होंठ एक दूसरे से मिल गये और मैं मा की दोनो चुचियों को पाकरे हुए उसके होंठो का रस ले रहा था. कुच्छ ही सेकेंड्स में हमारे जीभ आपस में टकरा रहे थे. मेरे जीवन का ये पहला चुंबन करीब दो तीन मिनिट्स तक चला होगा. मा के पतले होंठो को अपने मुँह में भर कर मैने चूस चूस कर और लाल कर दिया. जब हम दोनो एक दूसरे से अलग हुए तो दोनो हाँफ रहे थे. मेरे हाथ अब भी उसकी दोनो चुचिया पर थे और मैं अब उनको ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. मा के मुँह से अब और ज़यादा तेज सिसकारिया निकलने लगी थी. मा ने सीस्यते हुए मुझसे कहा " ओह ओह स्स्सि......शबश ऐसे ही पायर करो मेरी चुचियो से, हल्के हल्के आराम से मस्लो बेटा, ज़यादा ज़ोर से ऩही, ऩही तो तेरी मा को मज़ा ऩही आएगा, धीरे धीरे मस्लो".मेरे हाथ अब मा की चुचियों के निपल से खेल रहे थे. उसके निपल अब एक डम सख़्त हो चुके थे. हल्का कालापन लिए हुए गुलबी रंग के निपल खरे होने के बाद ऐसे लग रहे थे जैसे दो गोरे गुलाबी पाहरियों पर बादाम की गिरी रख दी गई हो. निपल के चारो ओर उसी रंग का घेरा थे. ध्यान से देखने पर मैने पाया की उस घेरे पर छ्होटे छ्होटे दाने से उगे हुए थे. मैं निपपलो को अपनी दो उंगलियों के बीच में लेकर धीरे-धीरे मसल रहा था और पायर से उनको खींच रहा था. जब भी मैं ऐसा करता तो मा की सिसकिया और तेज हो जाती थी. मा की आँके एक डम नासीली हो चुकी थी और वो सिसकारिया लेते हुए बुदबुदाने लगी "ओह बेटा ऐसे ही, ऐसे ही, तुझे तो सीखने की भी ज़रूरत ऩही है रे, ओह क्या खूब मसल रहा है मेरे पयरे, ऐसे ही कितने दिन हो गये जब इन चुचियों को किसी मर्द के हाथ ने मसला है या पायर किया है, कैसे तरसती थी मैं की काज़ कोई मेरी इन चुचियों को मसल दे पायर से सहला दे, पर आख़िर में अपना बेटा ही काम आया, आजा मेरे लाल" कहते हुए उसने मेरे सिर को पकर कर अपनी चुचियों पर झुका लिया. मैं मा का इशारा साँझ गया और मैने अपने होंठ मा की चुचियों से भर लिए. मेरे एक हाथ में उसकी एक चुचि और दूसरी चुचि पर मेरे होंठ चिपके हुए थे. मैने धीरे धीरे उसके चुचियों को चूसना सुरू कर दिया था. मैं ज़यादा से ज़यादा चुचि को अपने मुँह में भर के चूस रहा था. मेरे अंदर का खून इतना उबाल मरने लगा था की एक दो बार मैने अपने दाँत भी चुचियों पर गर्अ दिए थे, जिस से मा के मुँह से अचानक से चीख निकल गई थी. पर फिर भी उसने मुझे रोका ऩही वो अपने हाथो को मेरे सिर के पिच्चे ले जा कर मुझे बालो से पकर के मेरे सिर को अपनी चुचियों पर और ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी और डाँट काटने पर एक डम से घुटि घुटि आवाज़ में चीकते हुए बोली "ओह धीरे बेटा, धीरे से चूसो चुचि को ऐसे ज़ोर से ऩही काट ते है", फिर उसने अपनी चुचि को अपने हाथ से पकरा और उसको मेरे मुँह में घुसने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी चुचि को पूरा का पूरा मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हो और सीस्यसी "ओह राजा मेरे निपल को चूसो ज़रा, पूरे निपल को मुँह में भर लो और कस कस के चूसो राजा जैसे बचपन में दूध पीने के लिए चूस्ते थे". मैने अब अपना ध्यान निपलेस पे कर दिया और निपल को मुँह में भर कर अपनी जीभ उसके चारो तरफ गोल गोल घूमते हुए चूसने लगा. मैं अपनी जीभ को निपल के चारो तरफ के घेरे पर भी फिरा रहा था. निपल के चारो तरफ के घेरे पर उगे हुए दानो को अपनी जीभ से कुरेदते हुए निपल को चूसने पर मा एक डम मस्त हो जा रही थी और उसके मुँह से निकलने वाली सिसकिया इसकी गवाही दे रही थी. मैं उसकी चीखे और सिसकिया सुन कर पहले पहल तो डर गया था पर मा के द्वारा ये समझाए जाने पर की ऐसी चीखे और सिसकिया इस बात को बतला रही है की उसे मज़ा आ रहा है तो फिर दुगुने जोश के साथ अपने काम में जुट गया था. जिस चुचि को मैं चूस रहा था वो अब पूरी तरह से मेरे लार और थूक से भीग चुकी थी और लाल हो चुकी फिर भी मैं उसे चूसे जा रहा था, ताभ मा ने मेरे सिर को अपनी वाहा से हटा के अपनी दूसरी चुचि की तरफ करते हुए कहा "है खाली इसी चुचि को चूस्ता रहेगा, दूसरी को भी चूस, उसमे भी वही स्वाद है", फिर अपनी दूसरी चुचि को मेरे मुँह में घुसते हुए बोली "इसको भी चूस चूस के लाल कर दे मेरे लाल, दूध निकल दे मेरे सैय्या, एक डम आम के जैसे चूस और सारा रस निकल दे अपनी मा की चुचियों का, किसी काम की ऩही है ये, कम से कम मेरे लाल के काम तो आएँगी" मैं फिर से अपने काम में जुट गया और पहली वाली चुचि दबाते हुए दूसरी को पूरे मनोयोग से चूसने लगा. मा सिसकिया ले रही थी और चुस्वा रही थी कभी कभी अपना हाथ मेरे कमर के पास ले जा के मेरे लोहे जैसे ताने हुए लंड को पकर के मारोर रही थी कभी अपने हाथो से मेरे सिर को अपनी चुचियों पर दबा रही थी. इस तरह काफ़ी देर तक मैं उसकी चुचियों को चूस्ता रहा, फिर मा ने खुद अपने हाथो से मेरा सिर पकर के अपनी चुचियों पर से हटाया और मुस्कुराते मेरे चेहरे की र देखने लगी. मेरे होंठ मेरे कुध के थूक से भीगे हुए थे. मा की बाए चुचि अभी भी मेरे लार से चमक रही थी जबकि दाहिनी चुचि पर लगा थूक सुख चुका था पर उसकी दोनो चुचिया लाल हो चुकी थी, और निपपलो का रंग हल्का कला से पूरा कला हो चुका था (ऐसा बहुत ज़यादा चूसने पर खून का दौरा भर जाने के कारण हुआ था).
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धोबन और उसका बेटा--14
"हा मा, सच में तुम बहुत सुंदर हो और मैं तुम्हे बहुत दीनो से चू...."
"हा, हा बोल ना क्या करना चाहता था, अब तो खुल के बात कर बेटे, शर्मा मत अपनी मा से अब तो हुमने शर्म की हर वो दीवार गिरा दी है जो जमाने ने हमारे लिए बनाई है"
"है मा मैं कब से तुम्हे चॉड्ना चाहता था पर कह ऩही पाता था"
"कोई बात ऩही बेटा अभी भी कुच्छ ऩही बिगरा है वो भला हुआ की आज मैने खुद ही पहल कर दी, चल आ देख अपनी मा को नंगा और आज से बन जा उसका सैययान"
कह कर मा बिस्तेर नीचे उतार गई और मेरे सामने आके खरी हो गई और धीरे धीरे करके अपने ब्लाउस के एक बटन को खोलने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे चाँद बदल में से निकल रहा है. धीरे धीरे उसकी गोरी गोरी चुचिया दिखने लगी. ओह गजब की चुचिया थी, देखने से लग रहा था जैसे की दो बरे नारियल दोनो तरफ लटक रहे हो. एक डम गोल और आगे से नुकीले तीर के जैसे. चुचियों पर नासो की नीली रेखाए स्पस्त दिख रही थी. निपल थोरे मोटे और एकद्ूम खरे थे और उनके चारो तरफ हल्का गुलबीपन लिए हुए गोल गोल घेरा था. निपल भूरे रंगे के थे. मा अपने हाथो से अपने चुचियों को नीचे से पकर कर मुझे दिखती हुई बोली "पसंद आई अपनी मा की चुचि, कैसी लगी बेटा बोल ना, फिर आगे का दिखौँगी"
"है मा तुम सच में बहुत सुंदर हो, ओह कितनी सुंदर चुउ..हिय है ओह"
मा ने अपने चुचियों पर हाथ फेरते हुए और अच्छे से मुझे दिखाते हुए हल्का सा हिलाया और बोली "खूब सेवा करनी होगी इसकी तुझे, देख कैसे शान से सिर उठाए खरी है इस उमर में भी, तेरे बाप के बस का तो है ऩही अब तू ही इन्हे संभालना" कह कर वो फिर अपने हाथो को अपने पेटिकोट के नारे पर ले गई और बोली "अब देख बेटा तेरा को जन्नत का दरवाजा दिखती हू, अपनी मा का स्पेशल मालपुआ देख, जिसके लिए तू इतना तरस रहा था". कह कर मा ने अपने पेटिकोट के नारे को खोल दिया. पेटिकोट उसके कमर से सरसरते हुए सीधा नीचे की गिर गया और मा ने एक पैर से पेटिकोट को एक तरफ उच्छल कर फेक दिया और बिस्तर के और नज़दीक आ गई फिर बोली "है बेटा तूने तो मुझे एक डम बेशरम बना दिया", फिर मेरे लंड को अपने मुति में भर के बोली "ओह तेरे इस सांड जैसे लंड ने तो मुझे पागल बना दिया है, देख ले अपनी मा को जी भर के" मेरी नज़रे मा के जेंघो के बीच में टिकी हुई थी. मा की गोरी गोरी चिकनी रनो के बीच में काले काले झतो का एक तिकोना बना हुआ था. झांट बहुत ज़यादा बरे ऩही थे. झांतो के बीच में से उसकी गुलाबी चूत की हल्की झलक मिल रही थी, मैने अपने हाथो को मा के जेंघो पर रखा और थोरा नीचे झुक कर ठीक चूत के पास अपने चेहरे को ले जा के देखने लगा. मा ने अपने दोनो हाथ को मेरे सिर पर रख दिया और मेरे बालो से खेलने लगी फिर बोली "रुक जा ऐसे ऩही दिखेगा तुझे आराम से बिस्तर पर लेट के दिखती हू"
"ठीक है, आ जाओ बिस्तेर पर, मा एक बार ज़रा पिच्चे घुमओ ना"
"ओह, मेरा राजा मेरा पिच्छवारा भी देखना चाहता है क्या, चल पिच्छवारा तो मैं तुझे खरे खरे ही दिखा देती हू ले देख अपनी मा के ****आर और गांद को". इतना कह कर मा पिच्चे घूम गई. ओह कितना सुंदर ड्रिस्या था वो. इसे मैं अपनी पूरी जिंदगी में कभी ऩही भूल सकता. मा के ****आर सच में बरे खूसूरत थे. एक डम मलाई जैसे, गोल-मटोल, गुदज, मांसल. और उस ****आर के बीच में एक गहरी लकीर सी बन रही थी. जो की उसके गांद की खाई थी. मैने मा को थोरा झुकने को कहा तो मा झुक गई और आराम से देवनो मक्खन जैसे ****अरो को पकर के अपने हाथो से मसालते हुए उनके बीच की खाई को देखने लगा. दोनो ****आर को बीच में गांद की भूरे रंग की च्छेद फुकफुका रही थी. एकद्ूम छ्होटी सी गोल च्छेद, मैने हल्के से अपने हाथ को उस च्छेद पर रख दिया और हल्के हल्के उसे सहलाने लगा, साथ में मैं ****अरो को भी मसल रहा था. पर तभी मा आगे घूम गई
"चल मैं थक गई खरे खरे अब जो करना है बिस्तर पर करेंगे". और वो बिस्तेर पर चाड गई. पलंग की पुष्ट से अपने सिर को टिका कर उसने अपने दोनो पैरो को मेरे सामने खोल कर फैला दिया और बोली "अब देख ले आराम से, पर एक बात तो बता तू देखने के बाद क्या करेगा कुच्छ मालूम भी है तुझे या ऩही" "है, मा चो....दुन्गाआअ"
"अक्चा छोड़ेगा, पर कैसे ज़रा बता तो सही कैसे छोड़ेगा"
"है मैं पहले तुम्हारी चु..हि चुस्स्स...ंअ चाहता हू"
"चल ठीक है चूस लेना, और क्या करेगा"
"ओह और और्र्ररर..... चूत देखूँगा और फिर्र......ंउझे पाता ऩही"
"पाता ऩही ये क्या जवाब हुआ पाता ऩही, जब कुच्छ पाता ऩही तो मा पर डोरे क्यों दाल रहा था"
"ओह मा मैने पहले किसी को किया ऩही है नाआअ इसलिए मुझे पाता ऩही है, मुझे बस थोरा बहुत पाता है, जो की मैने गाओं के लार्को के साथ सीखा था"
"तो गाओं के छ्होक्रो ने ये ऩही सिखाया की कैसे किया जाता है, खाली यही सिखाया की मा पर डोरे डालो"
"ओह मा तू तो समझती ही ऩही अर्रे वो लोग मुझे क्यों सीखने लगे की तुम पर डोरे डालो, वो तो... वो तो तुम मुझे बहुत सुंदर लगती हो इसलिए मैं तुम्हे देखता था"
"ठीक है चल तेरी बात स्मझ गई बेटा की मैं तुझे सुंदर लगती हू पर मेरी इस सुंदरता का तू फयडा कैसे उठाएगा उल्लू ये भी तो बता दे ना, की खाली देख के मूठ मार लेगा"
"है मा, ऩही मैं तुम्हे छोड़ना चाहता हू, मा तुम सीखा देना, सीखा दोगि नाअ" कह कर मैने बुरा सा मुँह बना लिया"
"है मेरा बेटा देख तो मा की लेने के लिए कैसे तरप रहा, आजा मेरे पायारे मैं तुझे सब सीखा दूँगी, तेरे जैसे लंड वाले बेटे को तो कोई भी मा सीखना चाहेगी, तुझे तो मैं सीखा पढ़ा के चुदाई का बादशाह बना दूँगी, आजा पहले अपनी मा की चुचियों से खेल ले जी भर के फिर तुझे चूत से खेलना सिखाती हू बेटा"
मैं मा के कमर के पास बैठ गया और मा तो पूरी नंगी पहले से ही थी मैने उसकी चुचियों पर अपना हाथ रख दिया और उनको धीरे धीरे सहलाने लगा. मेरे हाथ में सयद दुनिया की सबसे खूबसूरत चुचिया थी. ऐसी चुचिया जिनको देख के किसी का भी दिल मचल जाए. मैं दोनो चुचियों की पूरी गोलाई पर हाथ फेर रहा था. चुचिया मेरी हथेली में ऩही समा रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में घूम रहा हू. मा की चुचियो का स्पर्श ग़ज़ब का था. मुलायम, गुदज, और सख़्त गतिलापन ये सब अहसास सयद आक्ची गोल मटोल चुचियों को दबा के ही पाया जा सकता है. मुझे इन सारी चीज़ो का एक साथ आनंद मिल रहा था. ऐसी चुचि दबाने का सौभाग्या नसीब वालो को ही मिलता है इस बात का पाता मुझे अपने जीवन में बहुत बाद में चला जब मैने दूसरी अनेक तरह की चुचियों का स्वाद लिया.
मा के मुँह से हल्की हल्की आवाज़े आनी शुरू हो गई थी और उसने मेरे चेहरे को अपने पास खीच लिया और अपने तपते हुए गुलाबी होंठो का पहला अनूठा स्पर्श मेरे होंठो को दिया. हम दोनो के होंठ एक दूसरे से मिल गये और मैं मा की दोनो चुचियों को पाकरे हुए उसके होंठो का रस ले रहा था. कुच्छ ही सेकेंड्स में हमारे जीभ आपस में टकरा रहे थे. मेरे जीवन का ये पहला चुंबन करीब दो तीन मिनिट्स तक चला होगा. मा के पतले होंठो को अपने मुँह में भर कर मैने चूस चूस कर और लाल कर दिया. जब हम दोनो एक दूसरे से अलग हुए तो दोनो हाँफ रहे थे. मेरे हाथ अब भी उसकी दोनो चुचिया पर थे और मैं अब उनको ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. मा के मुँह से अब और ज़यादा तेज सिसकारिया निकलने लगी थी. मा ने सीस्यते हुए मुझसे कहा " ओह ओह स्स्सि......शबश ऐसे ही पायर करो मेरी चुचियो से, हल्के हल्के आराम से मस्लो बेटा, ज़यादा ज़ोर से ऩही, ऩही तो तेरी मा को मज़ा ऩही आएगा, धीरे धीरे मस्लो".मेरे हाथ अब मा की चुचियों के निपल से खेल रहे थे. उसके निपल अब एक डम सख़्त हो चुके थे. हल्का कालापन लिए हुए गुलबी रंग के निपल खरे होने के बाद ऐसे लग रहे थे जैसे दो गोरे गुलाबी पाहरियों पर बादाम की गिरी रख दी गई हो. निपल के चारो ओर उसी रंग का घेरा थे. ध्यान से देखने पर मैने पाया की उस घेरे पर छ्होटे छ्होटे दाने से उगे हुए थे. मैं निपपलो को अपनी दो उंगलियों के बीच में लेकर धीरे-धीरे मसल रहा था और पायर से उनको खींच रहा था. जब भी मैं ऐसा करता तो मा की सिसकिया और तेज हो जाती थी. मा की आँके एक डम नासीली हो चुकी थी और वो सिसकारिया लेते हुए बुदबुदाने लगी "ओह बेटा ऐसे ही, ऐसे ही, तुझे तो सीखने की भी ज़रूरत ऩही है रे, ओह क्या खूब मसल रहा है मेरे पयरे, ऐसे ही कितने दिन हो गये जब इन चुचियों को किसी मर्द के हाथ ने मसला है या पायर किया है, कैसे तरसती थी मैं की काज़ कोई मेरी इन चुचियों को मसल दे पायर से सहला दे, पर आख़िर में अपना बेटा ही काम आया, आजा मेरे लाल" कहते हुए उसने मेरे सिर को पकर कर अपनी चुचियों पर झुका लिया. मैं मा का इशारा साँझ गया और मैने अपने होंठ मा की चुचियों से भर लिए. मेरे एक हाथ में उसकी एक चुचि और दूसरी चुचि पर मेरे होंठ चिपके हुए थे. मैने धीरे धीरे उसके चुचियों को चूसना सुरू कर दिया था. मैं ज़यादा से ज़यादा चुचि को अपने मुँह में भर के चूस रहा था. मेरे अंदर का खून इतना उबाल मरने लगा था की एक दो बार मैने अपने दाँत भी चुचियों पर गर्अ दिए थे, जिस से मा के मुँह से अचानक से चीख निकल गई थी. पर फिर भी उसने मुझे रोका ऩही वो अपने हाथो को मेरे सिर के पिच्चे ले जा कर मुझे बालो से पकर के मेरे सिर को अपनी चुचियों पर और ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी और डाँट काटने पर एक डम से घुटि घुटि आवाज़ में चीकते हुए बोली "ओह धीरे बेटा, धीरे से चूसो चुचि को ऐसे ज़ोर से ऩही काट ते है", फिर उसने अपनी चुचि को अपने हाथ से पकरा और उसको मेरे मुँह में घुसने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे वो अपनी चुचि को पूरा का पूरा मेरे मुँह में घुसा देना चाहती हो और सीस्यसी "ओह राजा मेरे निपल को चूसो ज़रा, पूरे निपल को मुँह में भर लो और कस कस के चूसो राजा जैसे बचपन में दूध पीने के लिए चूस्ते थे". मैने अब अपना ध्यान निपलेस पे कर दिया और निपल को मुँह में भर कर अपनी जीभ उसके चारो तरफ गोल गोल घूमते हुए चूसने लगा. मैं अपनी जीभ को निपल के चारो तरफ के घेरे पर भी फिरा रहा था. निपल के चारो तरफ के घेरे पर उगे हुए दानो को अपनी जीभ से कुरेदते हुए निपल को चूसने पर मा एक डम मस्त हो जा रही थी और उसके मुँह से निकलने वाली सिसकिया इसकी गवाही दे रही थी. मैं उसकी चीखे और सिसकिया सुन कर पहले पहल तो डर गया था पर मा के द्वारा ये समझाए जाने पर की ऐसी चीखे और सिसकिया इस बात को बतला रही है की उसे मज़ा आ रहा है तो फिर दुगुने जोश के साथ अपने काम में जुट गया था. जिस चुचि को मैं चूस रहा था वो अब पूरी तरह से मेरे लार और थूक से भीग चुकी थी और लाल हो चुकी फिर भी मैं उसे चूसे जा रहा था, ताभ मा ने मेरे सिर को अपनी वाहा से हटा के अपनी दूसरी चुचि की तरफ करते हुए कहा "है खाली इसी चुचि को चूस्ता रहेगा, दूसरी को भी चूस, उसमे भी वही स्वाद है", फिर अपनी दूसरी चुचि को मेरे मुँह में घुसते हुए बोली "इसको भी चूस चूस के लाल कर दे मेरे लाल, दूध निकल दे मेरे सैय्या, एक डम आम के जैसे चूस और सारा रस निकल दे अपनी मा की चुचियों का, किसी काम की ऩही है ये, कम से कम मेरे लाल के काम तो आएँगी" मैं फिर से अपने काम में जुट गया और पहली वाली चुचि दबाते हुए दूसरी को पूरे मनोयोग से चूसने लगा. मा सिसकिया ले रही थी और चुस्वा रही थी कभी कभी अपना हाथ मेरे कमर के पास ले जा के मेरे लोहे जैसे ताने हुए लंड को पकर के मारोर रही थी कभी अपने हाथो से मेरे सिर को अपनी चुचियों पर दबा रही थी. इस तरह काफ़ी देर तक मैं उसकी चुचियों को चूस्ता रहा, फिर मा ने खुद अपने हाथो से मेरा सिर पकर के अपनी चुचियों पर से हटाया और मुस्कुराते मेरे चेहरे की र देखने लगी. मेरे होंठ मेरे कुध के थूक से भीगे हुए थे. मा की बाए चुचि अभी भी मेरे लार से चमक रही थी जबकि दाहिनी चुचि पर लगा थूक सुख चुका था पर उसकी दोनो चुचिया लाल हो चुकी थी, और निपपलो का रंग हल्का कला से पूरा कला हो चुका था (ऐसा बहुत ज़यादा चूसने पर खून का दौरा भर जाने के कारण हुआ था).
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धोबन और उसका बेटा--13
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धोबन और उसका बेटा--13
"क्यों दिन में मेरा तूने देखा ऩही था क्या और च्छुआ भी था तुमने तो"
"है, हा देखा था, पर पहली बार देखा था, इससे पहले किसी का ऩही देखा था, तुम पहली हो जिसका मैने देखा था".
"अक्चा इससे पहले तुझे कुच्छ पाता ऩही था क्या"
"ऩही मा, थोरा बहुत मालूम था"
"क्या मालूम था ज़रा मैं भी तो सुनू" कह कर मा ने मेरे लंड को फिर से अपने हाथो में पकर लिया और मुठियाने लगी. इस पर मैं बोला "ओह छ्होर दो मा, ज़यादा करोगी तो अभी निकल जाएगा"
"कोई बात ऩही अभी निकल ले अगर पूरा खोल के दिखा दूँगी तो फिर तो तेरा देखते ही निकल जाएगा, पूरा खोल के देखना है ना अभी", इतना सुनते ही मेरा दिल तो बल्लियों उच्छलने लगा. अभी तक तो मा नखरा कर रही थी और अभी उसने अचानक ही जो दिखाने की बात कर दी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे लंड से पानी निकल जाएगा.
"है मा, सच में दिखावगी ना"
"हा दिखौँगी मेरे राजा बेटा, ज़रूर दिखौँगी, अब तो तू पूरा जवान हो गया है और, काम करने लायक भी हो गया है, अब तो तुझे ही दिखना है सब कुच्छ और तेरे से अपना सारा काम करवाना है मुझे. मा और तेज़ी के साथ मेरे लंड को मुठिया रही थी और बार बार मेरे लंड के सुपरे को अपने अंगूठे से दबा भी रही थी. मा बोली "अभी जल्दी से तेरा निकल देती हू फिर देख तुझे कितना मज़ा आएगा, अभी तो तेरी ये हालत है की देखते ही झार जाएगा, एक पानी निकल दे फिर देख तुझे कितना मज़ा आता है"
"ठीक है मा निकल दो एक पानी, मैं तुम्हारा दबौउ?"
"पुचहता क्या है, दबा ना, पर क्या दबाएगा ये भी तो बता दे", ये बोलते वाक़ूत मा के चेहरे पर एक शैतानी भारी कातिल मुस्कुराहट खेल गई.
"है, मा, वो तुम्हारी च्चाटिया मा, है"
"च्चाटिया? ये क्या होती है ये तो मर्दो की होती है औरतो का तो कुच्छ और होता है बता तो सही, नाम तो जनता ही होगा ना"
"चु...हु. .है मा मेरे से ऩही बोला जाएगा, छ्होरो नाम को"
"बोल ना शरमाता क्यों है, मा को खोल के दिखाने के लिए बोलने में ऩही शरमाता है पर अंगो के नाम लेने में शरमाता है".
"है मा, तुम्हारी..... ."
"हा हा मेरी क्य......बोल"
"है मा तुम्हारी छुउूउची" ये साबद बोल के ही इतना मज़ा आ गया की लगा जैसे लॉरा पानी फेक देगा.
"हा अब आया ना लाइन पर, दबा मेरी चुचियों को इस से तेरा पानी जल्दी निकलेगा, है क्या भयनकार लॉरा है, पाता ऩही इस उमर में ये हाल है, जब इस छोकरे के लंड का, तो पूरा जवान होगा तो क्या होगा"
मैने अपने दोनो हथेलियो में मा की चुचिया भर ली और उन्हे खूब कस कस के दबाने लगा. ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे की मैं पागल हो जौंगा. दोनो चुचिया किसी अनार की तरह से सख़्त और गुदाज़ थी. उसके मोटे मोटे निपल भी ब्लाउस के उपर से पकर में आ रहे थे. मैं दोनो निपल के साथ साथ पूरी चुचि को ब्लाउस के उपर से पकर कर दबाए जा रहा था. मा के मुँह से अब सिसकारिया निकलने लगी थी और वो मेरा उत्साह बढ़ते जा रही थी.
"है बेटा शाबाश ऐसे ही दबा मेरी चुचियों को, है क्या लॉरा है, पाता ऩही घोरे का है या सांड का, ठहर जा अभी इसे चूस के तेरा पानी निकलती हू" कह कर वो नीचे की र झुक गई जल्दी से मेरा लंड अपने होंठो के बीच क़ैद कर लिया और सुपरे को होंठो के बीच दबा के खूब कस कस के चूसने लगी जैसे की पीपे लगा के कोई कोका-कोला पीटा है. मैं उसकी चुचियो को अब और ज़यादा ज़ोर से दबा रहा था, मेरी भी सिसकारिया निकलने लगी थी, मेरा पानी अब च्छुतने वाला ही था.
"है, रे मेरी मा निकला रे निकला मेरा निकल गया ओह मा सारा सारा का सारा पानी तेरे मुँह में ही निकल गया रे". मा का हाथ अब और टर गति से चलने लगा ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे पानी को गाता-गत पीते जा रही है. मेरे लंड के सुपरे से निकले एक-एक बूँद पानी चूस जाने के बाद मा ने अपने होंठो मेरे को मेरे लंड पर से हटा लिया और मुस्कुराती हुई मुझे देखने लगी और बोली कैसा लगा. मैने कहा "बहुत अक्चा और बिस्तेर पर एक तरफ लुढ़क गया. मेरे साथ साथ मा भी लुढ़क के मेरे बगल में लेट गई और मेरे होंठो और गालो को थोरी देर तक चूमती रही.
थोरी देर तक आँख बंद कर के परे रहने के बाद जब मैं उठा तो देखा की मा ने अपनी आँखे बंद कर रखी है और अपने हाथो से अपने चुचियों को हल्के हल्के सहला रही थी. मैं उठ कर बैठ गया और धीरे से मा के पैरो के पास चला गया. मा ने अपना एक पैर मोरे रखा था और एक पैर सीधा कर के रखा हुआ उसका पेटिकोट उसके जेंघो तक उठा हुआ था. पेटिकोट के उपर और नीचे के भागो के बीच में एक गॅप सा बन गया था. उस गॅप से उसकी झांग अंदर तक नज़र आ रही थी. उसकी गुदज जेंघो के उपर हाथ रख के मैं हल्का सा झुक गया और अंदर तक देखने के लिए हालाँकि अनादर रोस्नी बहुत कम थी परंतु फिर भी मुझे उसके काले काले झतो के दर्शन हो गये. झतो के कारण चूत तो ऩही दिखी परंतु चूत की खुसबु ज़रूर मिल गई. तभी मा ने अपनी आँखे खोल दी और मुझे अपने जेंघो के बीच झकते हुए देख कर बोली "है दैया उठ भी गया तू मैं तो सोच रही थी अभी कम से कम आधा घंटा शांत परा रहेगा, और मेरी जेंघो के बीच क्या कर रहा है, देखो इस लरके को बुर देखने के लिए दीवाना हुआ बैठा है," फिर मुझे अपने बाँहो में भर कर मेरे गाल पर चुम्मि काट कर बोली "मेरे लाल को अपनी मा का बुर देखना है ना, अभी दिखती हू मेरे छ्होरे, है मुझे ऩही पाता था की तेरे अंदर इतनी बेकरारी है बुर देखने की"
मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी "है मा जल्दी से खोलो और दिखा दो"
"अभी दिखती हू, कैसे देखेगा, बता ना"
"कैसे क्या मा, खोलो ना बस जल्दी से"
"तो ले ये है मेरे पेटिकोट का नारा खुद ही खोल के मा को नंगा कर दे और देख ले"
"है, मा मेरे से ऩही होगा, तुम खोलो ना"
"क्यों ऩही होगा, जब तू पेटिकोट ऩही खोल पाएगा तो आगे का काम कैसे करेगा"
"है मा आगे का भी काम करने दोगि क्या?"
मेरे इस सवाल पर मा ने मेरे गालो को मसालते हुए पुच्छ, "क्यों आगे का काम ऩही करेगा क्या, अपनी मा को ऐसे ही पायसा छ्होर देगा, तू तो कहता था की तुझे ठंडा कर दूँगा, पर तू तो मुझे गरम कर छ्होर्ने की बात कर रहा है"
"है मा, मेरा ये मतलब ऩही था, मुझे तो अपने कानो पर विस्वास ऩही हो रहा की तुम मुझे और आगे बढ़ने दोगि"
"गढ़े के जैसा लंड होने के साथ साथ तेरा तो दिमाग़ भी गढ़े के जैसा ही हो गया है, लगता है सीधा खोल के ही पुच्छना परेगा, बोल छोड़ेगा मुझे, छोड़ेगा अपनी मा को, मा की बुर चतेगा, और फिर उसमे अपना लॉरा डालेगा, बोल ना"
"है मा, सब करूँगा, सब करूँगा जो तू कहेगी वो सब करूँगा, है मुझे तो विस्वश ऩही हो रहा की मेरा सपना सच होने जा रहा है, ओह मेरे सपनो में आने वाली पारी के साथ सब कुच्छ करने जा रहा हू"
"क्यों सपनो में तुझे और कोई ऩही मैं ही दिखती थी क्या"
"हा मा, तुम्ही तो हो मेरे सपनो की परी, पूरे गाओं में तुमसे सुंदर कोई ऩही"
"है, मेरे 16 साल का जवान छ्होकरे को उसकी मा इतनी सुंदर लगती है क्या?"
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धोबन और उसका बेटा--13
"क्यों दिन में मेरा तूने देखा ऩही था क्या और च्छुआ भी था तुमने तो"
"है, हा देखा था, पर पहली बार देखा था, इससे पहले किसी का ऩही देखा था, तुम पहली हो जिसका मैने देखा था".
"अक्चा इससे पहले तुझे कुच्छ पाता ऩही था क्या"
"ऩही मा, थोरा बहुत मालूम था"
"क्या मालूम था ज़रा मैं भी तो सुनू" कह कर मा ने मेरे लंड को फिर से अपने हाथो में पकर लिया और मुठियाने लगी. इस पर मैं बोला "ओह छ्होर दो मा, ज़यादा करोगी तो अभी निकल जाएगा"
"कोई बात ऩही अभी निकल ले अगर पूरा खोल के दिखा दूँगी तो फिर तो तेरा देखते ही निकल जाएगा, पूरा खोल के देखना है ना अभी", इतना सुनते ही मेरा दिल तो बल्लियों उच्छलने लगा. अभी तक तो मा नखरा कर रही थी और अभी उसने अचानक ही जो दिखाने की बात कर दी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे लंड से पानी निकल जाएगा.
"है मा, सच में दिखावगी ना"
"हा दिखौँगी मेरे राजा बेटा, ज़रूर दिखौँगी, अब तो तू पूरा जवान हो गया है और, काम करने लायक भी हो गया है, अब तो तुझे ही दिखना है सब कुच्छ और तेरे से अपना सारा काम करवाना है मुझे. मा और तेज़ी के साथ मेरे लंड को मुठिया रही थी और बार बार मेरे लंड के सुपरे को अपने अंगूठे से दबा भी रही थी. मा बोली "अभी जल्दी से तेरा निकल देती हू फिर देख तुझे कितना मज़ा आएगा, अभी तो तेरी ये हालत है की देखते ही झार जाएगा, एक पानी निकल दे फिर देख तुझे कितना मज़ा आता है"
"ठीक है मा निकल दो एक पानी, मैं तुम्हारा दबौउ?"
"पुचहता क्या है, दबा ना, पर क्या दबाएगा ये भी तो बता दे", ये बोलते वाक़ूत मा के चेहरे पर एक शैतानी भारी कातिल मुस्कुराहट खेल गई.
"है, मा, वो तुम्हारी च्चाटिया मा, है"
"च्चाटिया? ये क्या होती है ये तो मर्दो की होती है औरतो का तो कुच्छ और होता है बता तो सही, नाम तो जनता ही होगा ना"
"चु...हु. .है मा मेरे से ऩही बोला जाएगा, छ्होरो नाम को"
"बोल ना शरमाता क्यों है, मा को खोल के दिखाने के लिए बोलने में ऩही शरमाता है पर अंगो के नाम लेने में शरमाता है".
"है मा, तुम्हारी..... ."
"हा हा मेरी क्य......बोल"
"है मा तुम्हारी छुउूउची" ये साबद बोल के ही इतना मज़ा आ गया की लगा जैसे लॉरा पानी फेक देगा.
"हा अब आया ना लाइन पर, दबा मेरी चुचियों को इस से तेरा पानी जल्दी निकलेगा, है क्या भयनकार लॉरा है, पाता ऩही इस उमर में ये हाल है, जब इस छोकरे के लंड का, तो पूरा जवान होगा तो क्या होगा"
मैने अपने दोनो हथेलियो में मा की चुचिया भर ली और उन्हे खूब कस कस के दबाने लगा. ग़ज़ब का मज़ा आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे की मैं पागल हो जौंगा. दोनो चुचिया किसी अनार की तरह से सख़्त और गुदाज़ थी. उसके मोटे मोटे निपल भी ब्लाउस के उपर से पकर में आ रहे थे. मैं दोनो निपल के साथ साथ पूरी चुचि को ब्लाउस के उपर से पकर कर दबाए जा रहा था. मा के मुँह से अब सिसकारिया निकलने लगी थी और वो मेरा उत्साह बढ़ते जा रही थी.
"है बेटा शाबाश ऐसे ही दबा मेरी चुचियों को, है क्या लॉरा है, पाता ऩही घोरे का है या सांड का, ठहर जा अभी इसे चूस के तेरा पानी निकलती हू" कह कर वो नीचे की र झुक गई जल्दी से मेरा लंड अपने होंठो के बीच क़ैद कर लिया और सुपरे को होंठो के बीच दबा के खूब कस कस के चूसने लगी जैसे की पीपे लगा के कोई कोका-कोला पीटा है. मैं उसकी चुचियो को अब और ज़यादा ज़ोर से दबा रहा था, मेरी भी सिसकारिया निकलने लगी थी, मेरा पानी अब च्छुतने वाला ही था.
"है, रे मेरी मा निकला रे निकला मेरा निकल गया ओह मा सारा सारा का सारा पानी तेरे मुँह में ही निकल गया रे". मा का हाथ अब और टर गति से चलने लगा ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे पानी को गाता-गत पीते जा रही है. मेरे लंड के सुपरे से निकले एक-एक बूँद पानी चूस जाने के बाद मा ने अपने होंठो मेरे को मेरे लंड पर से हटा लिया और मुस्कुराती हुई मुझे देखने लगी और बोली कैसा लगा. मैने कहा "बहुत अक्चा और बिस्तेर पर एक तरफ लुढ़क गया. मेरे साथ साथ मा भी लुढ़क के मेरे बगल में लेट गई और मेरे होंठो और गालो को थोरी देर तक चूमती रही.
थोरी देर तक आँख बंद कर के परे रहने के बाद जब मैं उठा तो देखा की मा ने अपनी आँखे बंद कर रखी है और अपने हाथो से अपने चुचियों को हल्के हल्के सहला रही थी. मैं उठ कर बैठ गया और धीरे से मा के पैरो के पास चला गया. मा ने अपना एक पैर मोरे रखा था और एक पैर सीधा कर के रखा हुआ उसका पेटिकोट उसके जेंघो तक उठा हुआ था. पेटिकोट के उपर और नीचे के भागो के बीच में एक गॅप सा बन गया था. उस गॅप से उसकी झांग अंदर तक नज़र आ रही थी. उसकी गुदज जेंघो के उपर हाथ रख के मैं हल्का सा झुक गया और अंदर तक देखने के लिए हालाँकि अनादर रोस्नी बहुत कम थी परंतु फिर भी मुझे उसके काले काले झतो के दर्शन हो गये. झतो के कारण चूत तो ऩही दिखी परंतु चूत की खुसबु ज़रूर मिल गई. तभी मा ने अपनी आँखे खोल दी और मुझे अपने जेंघो के बीच झकते हुए देख कर बोली "है दैया उठ भी गया तू मैं तो सोच रही थी अभी कम से कम आधा घंटा शांत परा रहेगा, और मेरी जेंघो के बीच क्या कर रहा है, देखो इस लरके को बुर देखने के लिए दीवाना हुआ बैठा है," फिर मुझे अपने बाँहो में भर कर मेरे गाल पर चुम्मि काट कर बोली "मेरे लाल को अपनी मा का बुर देखना है ना, अभी दिखती हू मेरे छ्होरे, है मुझे ऩही पाता था की तेरे अंदर इतनी बेकरारी है बुर देखने की"
मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी "है मा जल्दी से खोलो और दिखा दो"
"अभी दिखती हू, कैसे देखेगा, बता ना"
"कैसे क्या मा, खोलो ना बस जल्दी से"
"तो ले ये है मेरे पेटिकोट का नारा खुद ही खोल के मा को नंगा कर दे और देख ले"
"है, मा मेरे से ऩही होगा, तुम खोलो ना"
"क्यों ऩही होगा, जब तू पेटिकोट ऩही खोल पाएगा तो आगे का काम कैसे करेगा"
"है मा आगे का भी काम करने दोगि क्या?"
मेरे इस सवाल पर मा ने मेरे गालो को मसालते हुए पुच्छ, "क्यों आगे का काम ऩही करेगा क्या, अपनी मा को ऐसे ही पायसा छ्होर देगा, तू तो कहता था की तुझे ठंडा कर दूँगा, पर तू तो मुझे गरम कर छ्होर्ने की बात कर रहा है"
"है मा, मेरा ये मतलब ऩही था, मुझे तो अपने कानो पर विस्वास ऩही हो रहा की तुम मुझे और आगे बढ़ने दोगि"
"गढ़े के जैसा लंड होने के साथ साथ तेरा तो दिमाग़ भी गढ़े के जैसा ही हो गया है, लगता है सीधा खोल के ही पुच्छना परेगा, बोल छोड़ेगा मुझे, छोड़ेगा अपनी मा को, मा की बुर चतेगा, और फिर उसमे अपना लॉरा डालेगा, बोल ना"
"है मा, सब करूँगा, सब करूँगा जो तू कहेगी वो सब करूँगा, है मुझे तो विस्वश ऩही हो रहा की मेरा सपना सच होने जा रहा है, ओह मेरे सपनो में आने वाली पारी के साथ सब कुच्छ करने जा रहा हू"
"क्यों सपनो में तुझे और कोई ऩही मैं ही दिखती थी क्या"
"हा मा, तुम्ही तो हो मेरे सपनो की परी, पूरे गाओं में तुमसे सुंदर कोई ऩही"
"है, मेरे 16 साल का जवान छ्होकरे को उसकी मा इतनी सुंदर लगती है क्या?"
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धोबन और उसका बेटा--12
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धोबन और उसका बेटा--12
"ही, जब इतना कुच्छ दिखा दिया है तो उसे भी दिखा दो ना ऐसा कौन सा कम हो जाएगा". मा ने अब तक अपना पेटिकोट समेत कर जाँघो बीच राक लिया था और सोने के लिए लेट गई थी. मैने इस बार अपना हाथ उसके जाँघो पर रख दिया, मोटी मोटी गुदाज़ जाँघो का स्पर्श जानलेवा था. जाँघो को हल्के हल्के सहलाते हुए मैं जैसे ही हाथ को उपर की तरफ ले जाने लगा, मा ने मेरा हाथ पकर लिया और बोली "ठहर अगर तुझसे बर्दस्त ऩही होता तो ला मैं फिर से तेरा लंड मुठिया देती हू" कह कर मेरे लंड को फिर से पकर कर मुठियाने लगी पर मैं ऩही माना और एक बार केवल एक बार बोल के ज़िद करता रहा. मा ने कहा "बरा जिद्दी हो गया रे तू तो, तुझे ज़रा भी शरम ऩही आती अपनी मा को चूत देखने को बोल रहा है, अब यहा छत पर कैसे दिखौ अगाल बगल के लोग कही देख लेंगे तो, कल देख लियो"
"ही, कल ऩही अभी दिखा दे, चारो तरफ तो सुन-सान है फिर अभी भला कौन हमारे छत पर झकेगा"
"छत पर ऩही, कल दिन में घर में दिखा दूँगी, आराम से"
तभी बारिस की बूंदे तेज़ी के साथ गिरने लगी, ऐसा लग रहा था मेरी तरह आसमान भी बर ऩही दिखाए जाने पर रो परा है. मा कहा "ओह बारिश शुरू हो गई, चल जल्दी से बिस्तरा समेत नीचे चल के सोएंगे" मैं भी झट पट बिस्तेर समेटने लगा और हम दोनो जल्दी से नीचे की भागे. नीचे पहुच कर मा अपने कमरे में घुस गई मैं भी उसके के पिच्चे पिच्चे उसके कमरे में पहुच गया. मा ने खीरकी खोल दी और लाइट जला दिया. खीरकी से बरी अच्छी ठंडी ठंडी हवा आ रही थी मा जैसे ही पलंग पर बैठी मैं भी बैठ गया. और मा से बोला "ही, अब दिखा दो ना, अब तो घर में आ गये हम लोग" इस पर मा मुस्कुराते हुए बोली "लगता है आज तेरी किस्मत बरी आक्ची है आज तुझे मालपुआ खाने को तो ऩही पर देखने को ज़रूर मिल जाएगी". फिर मा ने अपने अपना सिर पलंग पे टिका के अपने दोनो पैर सामने फैला दिए और अपने निचले होंठो को चबाते हुए बोली "इधर आ मेरे पैरो के बीच में अभी तुझे दिखती हू. पर एक बात जान ले तू पहली बार देख रहा है देखते ही तेरा पानी निकल जाएगा समझा" फिर मा ने अपने हाथो से पेटिकोट के निचले भाग को पाकारा और धीरे धीरे उपर उठाने लगी. मेरी हिम्मत तो बढ़ ही चुकी थी मैने धीरे से मा से कहा "ओह मा ऐसे ऩही" "तो फिर कैसे रे, कैसे देखेगा"
"ही मा, पूरा खोल के दिखाओ ना"
"पूरा खोल के से तेरा क्या मतलब है"
"ही पूरा कपरा खोल के, मेरी बरी तम्माना है की मैं तुम्हारे पूरे बदन को नंगा देखु, बस एक बार"
इतना सुनते ही मा ने आगे बढ़ के मेरे चेहरे को अपने हाथो में थाम लिया और हस्ते हुए बोली "वाह बेटा अंगुली पकर के पूरा हाथ पकरने की सोच रहे हो क्या"
"है मा, छ्होरो ना ये सब बात बस एक बार दिखा दो, दिन में तुम कितने अcचे से बाते कर रही थी और अभी पाता ऩही क्या हो गया है तुम्हे, सारे रास्ते सोचता आ रहा था मैं की आज कुछ करने को मिलेगा और तुम हो की......." "अच्छा बेटा, अब सारा शरमाना भूल गया, दिन में तो बरा भोला बन रहा था और ऐसे दिखा रहा था जैसे कुच्छ जनता ही ऩही, पहले कभी किसी को किया है क्या, या फिर दिन में झूट बोल रहा था"
"है कसम से मा, कभी किसी को ऩही किया, करना तो दूर की बात है कभी देखा या छुआ तक ऩही"
"चल झुटे, दिन में तो देखा ही था और छुआ भी था"
"ही कहा मा, कहा देखा था"
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जिस दिन नदी पर जाना होता है, उस दिन तो थकावट ज़यादा हो ही जाती है"
"हा, बरी थकावट लग रही है, जैसे पूरा बदन टूट रहा हो"
"मैं दबा दू, थोरी थकान दूर हो जाएगी"
"ऩही रे, रहने दे तू, तू भी तो थक गया होगा"
"ऩही मा उतना तो ऩही थका की तेरी सेवा ना कर सकु"
मा के चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई और वो हस्ते हुए बोली....."दिन में इतना कुच्छ हुआ था, उससे तो तेरी थकान और बढ़ गई होगी"
"ही, दिन में थकान बढ़ने वाला तो कुच्छ ऩही हुआ था". इस पर मा थोरा सा और मेरे पास सरक कर आई, मा के सरकने पर मैं भी थोरा सा उसकी र सरका हम दोनो की साँसे अब आपस में टकराने लगी थी. मा ने अपने हाथो को हल्के से मेरी कमर पर रखा और धीरे धीरे अपने हाथो से मेरी कमर और जाँघो को सहलाने लगी. मा की इस हरकत पर मेरे दिल की धरकन बढ़ गई और लंड अब फुफ्करने लगा था. मा ने हल्के से मेरी जाँघो को दबाया. मैने हिम्मत कर के हल्के से अपने कपते हुए हाथो को बढ़ा के मा की कमर पर रख दिया. मा कुछ ऩही बोली बस हल्का सा मुस्कुरा भर दी. मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं अपने हाथो से मा के नंगे कमर को सहलाने लगा. मा ने केवल पेटिकोट और ब्लाउस पहन रखा था. उसके ब्लाउस के उपर के दो बटन खुले हुए थे. इतने पास से उसकी चुचियों की गहरी घाटी नज़र आ रही थी और मन कर रहा था जल्दी से जल्दी उन चुचियों को पकर लू. पर किसी तरह से अपने आप को रोक रखा था. मा ने जब मुझे चुचियों को घूरते हुए देखा तो मुस्कुराते हुए बोली, "क्या इरादा है तेरा, शाम से ही घूरे जा रहा है, खा जाएगा क्या"
"ही, मा तुम भी क्या बात कर रही हो, मैं कहा घूर रहा था"
"चल झूते, मुझे क्या पाता ऩही चलता, रात में भी वही करेगा क्या"
"क्या मा"
"वही जब मैं सो जौंगी तो अपना भी मसलेगा और मेरी च्चातियों को भी दबाएगा"
"ही, मा"
"तुझे देख के तो यही लग रहा है की तू फिर से वही हरकत करने वाला है"
"ऩही, मा" मेरे हाथ अब मा की जाँघो को सहला रहे थे.
"वैसे दिन में मज़ा आया था" पुच्छ कर मा ने हल्के से अपने हाथो को मेरे लूँगी के उपर लंड पर रख दिया. मैने कहा "ही मा, बहुत अच्छा लगा था"
"फिर करने का मन कर रहा है क्या"
"है, मा"
इस पर मा ने अपने हाथो का दवाब ज़रा सा मेरे लंड पर बढ़ा दिया और हल्के हल्के दबाने लगी. मा के हाथो का स्पर्श पा के मेरी तो हालत खराब होने लगी थी. ऐसा लग रहा था की अभी के अभी पानी निकल जाएगा. तभी मा बोली, "जो काम तू मेरे सोने के बाद करने वाला है वो काम अभी कर ले, चोरी चोरी करने से तो अच्छा है की तू मेरे सामने ही कर ले" मैं कुच्छ ऩही बोला और अपने काँपते हाथो को हल्के से मा की चुचियों पर रख दिया. मा ने अपने हाथो से मेरे हाथो को पकर कर अपनी च्चातियों पर कस के दबाया और मेरी लूँगी को आगे से उठा दिया और अब मेरे लंड को सीधे अपने हाथो से पकर लिया. मैने भी अपने हाथो का दवाब उसकी चुचियों पर बढ़ा दिया. मेरे अंदर की आग एकद्ूम भारक उठी थी और अब तो ऐसा लग रहा था की जैसे इन चुचियों को मुँह में ले कर चूस लू. मैने हल्के से अपने गर्दन को और आगे की र बढ़ाया और अपने होतो को ठीक चुचियों के पास ले गया. मा सयद मेरे इरादे को समझ गई थी. उसने मेरे सिर के पिच्चे हाथ डाला और अपने चुचियों को मेरे चेहरे से सता दिया. हम दोनो अब एक दूसरे की तेज़ चलती हुई सांसो को महसूस कर रहे थे. मैने अपने होतो से ब्लाउस के उपर से ही मा की चुचियों को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा मेरा दूसरा हाथ कभी उसकी चुचियों को दबा रहा था कभी उसके मोटे मोटे ****अरो को. मा ने भी अपना हाथ तेज़ी के साथ चलना शुरू कर दिया था और मेरे मोटे लंड को अपने हाथ से मुठिया रही थी. मेरा मज़ा बढ़ता जा रहा था. तभी मैने सोचा ऐसे करते करते तो मा फिर मेरा निकल देगी और सयद फिर कुच्छ देखने भी ऩही दे जबकि मैं आज तो मा को पूरा नंगा करके जी भर के उसके बदन को देखना चाहता था. इसलिए मैने मा के हाथो को पकर लिया और कहा "ही मा रूको"
"क्यों मज़ा ऩही आ रहा है क्या, जो रोक रहा है"
"ही मा, मज़ा तो बहुत आ रहा है मगर"
"फिर क्या हुआ,"
"फिर मा, मैं कुच्छ और करना चाहता हू, ये तो दिन के जैसे ही हो जाएगा"
इस पर मा मुस्कुराते हुए पुछि " तो तू और क्या करना चाहता है, तेरा पानी तो ऐसे ही निकलेगा ना और कैसे निकलेगा"
"ही ऩही मा, पानी ऩही निकलना मुझे"
"तो फिर क्या करना है"
"ही मा, देखना है"
"ही, क्या देखना है रे"
"ही मा, ये देखना है" कह कर मैने एक हाथ सीधा मा के बुर पर रख दिया.
"ही, बदमाश, ये कैसी तमन्ना पल ली तूने"
"ही, मा बस एक बार दिखा दो ना"
"ऩही, ऐसा ऩही करते मैने तुम्हे थोरी च्छुत क्या दे दी तुम तो उसका फयडा उठाने लगे"
"ही, मा ऐसे क्यों कर रही हो तुम, दिन में तो कितना अcचे से बाते कर रही थी"
"ऩही, मैं तेरी मा हू, बेटा"
"ही, मा दिन में तो तुमने कितना अक्चा दिखाया भी था, थोरा बहुत"
"मैने कब दिखाया?, झूट क्यों बोल रहा है"
"ही, मा तुम जब पेशाब करने गई थी तब तो दिखा ही था"
"है, राम कितना बदमाश है रे तू, मुझे पाता भी ऩही लगा और तू देख रहा था, ही दैया आज कल के लौंदो का सच में कोई भरोसा ऩही, कब अपनी मा पर बुरी नज़र रखने लगे पाता ही ऩही चलता"
"ही मा ऐसा क्यों कह रही हो, मुझे ऐसा लगा जैसे तुम मुझे दिखा रही हो इसलिए मैने देखा"
"चल हट मैं क्यों दिखौँगी, कोई मा ऐसा करती है क्या"
"ही, मैने तो सोचा था की रात में पूरा देखूँगा"
"ऐसी उल्टी सीधी बाते मत सोचा कर, दिमाग़ खराब हो जाएगा"
"ही मा, ओह मा दिखा दो ना, बस एक बार, खाली देख कर सो जौंगा" पर मा ने मेरे हाथो को झटक दिया और उठकर खरी हो गई. अपने ब्लाउस को ठीक करने के बाद छत के कोने की तरफ चल दी. च्चत का वो कोना घर के पिच्छवारे की तरफ परता था और वाहा पर एक नाली (मोरी) जैसा बना हुआ था जिस से पानी बह कर सीधे नीचे बहने नाली में जा गिरता था. मा उसी नली पर जा के बैठ गई अपने पेटिकोट को उठा के पेशाब करने लगी. मेरी नज़रे तो मा का पिच्छा कर ही रही थी. ये नज़ारा देख के तो मेरा मन और बहक गया. दिल में आ रहा था की जल्दी से जाके मा के पास बैठ के आगे झनाक लू और उसके पेशाब करते हुए चूत को कम से कम देख भर लू. पर ऐसा ना हो सका. मा ने पेशाब कर लिया फिर वो वैसे ही पेतकोट को जाँघो तक एक हाथ से उठाए हुए मेरी तरफ घूम गई और अपने बुर पर हाथ चलाने लगी जैसे की पेशाब पोच्च रही हो और फिर मेरे पास आके बैठ गई. मैने मा के बैठने पर उसका हाथ पकर लिया और पायर से सहलाते हुए बोला "ही मा बस एक बार दिखा दो ना फिर कभी ऩही बोलूँगा दिखाने के लिए"
"एक बार ना कह दिया तो तेरे को समझ में ऩही आता है क्या"
"आता तो है मगर बस एक बार में क्या हो जाएगा"
"देख दिन में जो हो गया सो हो गया, मैने दिन में तेरा लंड भी मुठिया दिया था, कोई मा ऐसा ऩही करती, बस इससे आगे ऩही बढ़ने दूँगी"
मा ने पहली बार गंदे साबद का उपयोग किया था, उसके मुँह से लंड सुन के ऐसा लगा जैसे अभी झार के गिर जाएगा. मैने फिर धीरे से हिम्मत कर के कहा "ही मा क्या हो जाएगा अगर एक बार मुझे दिखा देगी तो, तुमने मेरा भी तो देखा है, अब अपना दिखा दो ना" "तेरा देखा है इसका क्या मतलब है, तेरा तो मैं बचपन से देखते आ रही हू, और रही बात चुचि दिखाने और पकरने की वो तो मैने तुझे करने ही दिया है ना क्यों की बचपन में तो तू इसे पाकर्ता चूस्ता ही था, पर चूत की बात और है, वो तो तूने होश में कभी ऩही देखा ना, फिर उसको क्यों दिखौ". मा अब खुलाम कुल्ला गंदे सबदो का उपयोग कर रही थी.
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धोबन और उसका बेटा--11
जिस दिन नदी पर जाना होता है, उस दिन तो थकावट ज़यादा हो ही जाती है"
"हा, बरी थकावट लग रही है, जैसे पूरा बदन टूट रहा हो"
"मैं दबा दू, थोरी थकान दूर हो जाएगी"
"ऩही रे, रहने दे तू, तू भी तो थक गया होगा"
"ऩही मा उतना तो ऩही थका की तेरी सेवा ना कर सकु"
मा के चेहरे पर एक मुस्कान फैल गई और वो हस्ते हुए बोली....."दिन में इतना कुच्छ हुआ था, उससे तो तेरी थकान और बढ़ गई होगी"
"ही, दिन में थकान बढ़ने वाला तो कुच्छ ऩही हुआ था". इस पर मा थोरा सा और मेरे पास सरक कर आई, मा के सरकने पर मैं भी थोरा सा उसकी र सरका हम दोनो की साँसे अब आपस में टकराने लगी थी. मा ने अपने हाथो को हल्के से मेरी कमर पर रखा और धीरे धीरे अपने हाथो से मेरी कमर और जाँघो को सहलाने लगी. मा की इस हरकत पर मेरे दिल की धरकन बढ़ गई और लंड अब फुफ्करने लगा था. मा ने हल्के से मेरी जाँघो को दबाया. मैने हिम्मत कर के हल्के से अपने कपते हुए हाथो को बढ़ा के मा की कमर पर रख दिया. मा कुछ ऩही बोली बस हल्का सा मुस्कुरा भर दी. मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं अपने हाथो से मा के नंगे कमर को सहलाने लगा. मा ने केवल पेटिकोट और ब्लाउस पहन रखा था. उसके ब्लाउस के उपर के दो बटन खुले हुए थे. इतने पास से उसकी चुचियों की गहरी घाटी नज़र आ रही थी और मन कर रहा था जल्दी से जल्दी उन चुचियों को पकर लू. पर किसी तरह से अपने आप को रोक रखा था. मा ने जब मुझे चुचियों को घूरते हुए देखा तो मुस्कुराते हुए बोली, "क्या इरादा है तेरा, शाम से ही घूरे जा रहा है, खा जाएगा क्या"
"ही, मा तुम भी क्या बात कर रही हो, मैं कहा घूर रहा था"
"चल झूते, मुझे क्या पाता ऩही चलता, रात में भी वही करेगा क्या"
"क्या मा"
"वही जब मैं सो जौंगी तो अपना भी मसलेगा और मेरी च्चातियों को भी दबाएगा"
"ही, मा"
"तुझे देख के तो यही लग रहा है की तू फिर से वही हरकत करने वाला है"
"ऩही, मा" मेरे हाथ अब मा की जाँघो को सहला रहे थे.
"वैसे दिन में मज़ा आया था" पुच्छ कर मा ने हल्के से अपने हाथो को मेरे लूँगी के उपर लंड पर रख दिया. मैने कहा "ही मा, बहुत अच्छा लगा था"
"फिर करने का मन कर रहा है क्या"
"है, मा"
इस पर मा ने अपने हाथो का दवाब ज़रा सा मेरे लंड पर बढ़ा दिया और हल्के हल्के दबाने लगी. मा के हाथो का स्पर्श पा के मेरी तो हालत खराब होने लगी थी. ऐसा लग रहा था की अभी के अभी पानी निकल जाएगा. तभी मा बोली, "जो काम तू मेरे सोने के बाद करने वाला है वो काम अभी कर ले, चोरी चोरी करने से तो अच्छा है की तू मेरे सामने ही कर ले" मैं कुच्छ ऩही बोला और अपने काँपते हाथो को हल्के से मा की चुचियों पर रख दिया. मा ने अपने हाथो से मेरे हाथो को पकर कर अपनी च्चातियों पर कस के दबाया और मेरी लूँगी को आगे से उठा दिया और अब मेरे लंड को सीधे अपने हाथो से पकर लिया. मैने भी अपने हाथो का दवाब उसकी चुचियों पर बढ़ा दिया. मेरे अंदर की आग एकद्ूम भारक उठी थी और अब तो ऐसा लग रहा था की जैसे इन चुचियों को मुँह में ले कर चूस लू. मैने हल्के से अपने गर्दन को और आगे की र बढ़ाया और अपने होतो को ठीक चुचियों के पास ले गया. मा सयद मेरे इरादे को समझ गई थी. उसने मेरे सिर के पिच्चे हाथ डाला और अपने चुचियों को मेरे चेहरे से सता दिया. हम दोनो अब एक दूसरे की तेज़ चलती हुई सांसो को महसूस कर रहे थे. मैने अपने होतो से ब्लाउस के उपर से ही मा की चुचियों को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा मेरा दूसरा हाथ कभी उसकी चुचियों को दबा रहा था कभी उसके मोटे मोटे ****अरो को. मा ने भी अपना हाथ तेज़ी के साथ चलना शुरू कर दिया था और मेरे मोटे लंड को अपने हाथ से मुठिया रही थी. मेरा मज़ा बढ़ता जा रहा था. तभी मैने सोचा ऐसे करते करते तो मा फिर मेरा निकल देगी और सयद फिर कुच्छ देखने भी ऩही दे जबकि मैं आज तो मा को पूरा नंगा करके जी भर के उसके बदन को देखना चाहता था. इसलिए मैने मा के हाथो को पकर लिया और कहा "ही मा रूको"
"क्यों मज़ा ऩही आ रहा है क्या, जो रोक रहा है"
"ही मा, मज़ा तो बहुत आ रहा है मगर"
"फिर क्या हुआ,"
"फिर मा, मैं कुच्छ और करना चाहता हू, ये तो दिन के जैसे ही हो जाएगा"
इस पर मा मुस्कुराते हुए पुछि " तो तू और क्या करना चाहता है, तेरा पानी तो ऐसे ही निकलेगा ना और कैसे निकलेगा"
"ही ऩही मा, पानी ऩही निकलना मुझे"
"तो फिर क्या करना है"
"ही मा, देखना है"
"ही, क्या देखना है रे"
"ही मा, ये देखना है" कह कर मैने एक हाथ सीधा मा के बुर पर रख दिया.
"ही, बदमाश, ये कैसी तमन्ना पल ली तूने"
"ही, मा बस एक बार दिखा दो ना"
"ऩही, ऐसा ऩही करते मैने तुम्हे थोरी च्छुत क्या दे दी तुम तो उसका फयडा उठाने लगे"
"ही, मा ऐसे क्यों कर रही हो तुम, दिन में तो कितना अcचे से बाते कर रही थी"
"ऩही, मैं तेरी मा हू, बेटा"
"ही, मा दिन में तो तुमने कितना अक्चा दिखाया भी था, थोरा बहुत"
"मैने कब दिखाया?, झूट क्यों बोल रहा है"
"ही, मा तुम जब पेशाब करने गई थी तब तो दिखा ही था"
"है, राम कितना बदमाश है रे तू, मुझे पाता भी ऩही लगा और तू देख रहा था, ही दैया आज कल के लौंदो का सच में कोई भरोसा ऩही, कब अपनी मा पर बुरी नज़र रखने लगे पाता ही ऩही चलता"
"ही मा ऐसा क्यों कह रही हो, मुझे ऐसा लगा जैसे तुम मुझे दिखा रही हो इसलिए मैने देखा"
"चल हट मैं क्यों दिखौँगी, कोई मा ऐसा करती है क्या"
"ही, मैने तो सोचा था की रात में पूरा देखूँगा"
"ऐसी उल्टी सीधी बाते मत सोचा कर, दिमाग़ खराब हो जाएगा"
"ही मा, ओह मा दिखा दो ना, बस एक बार, खाली देख कर सो जौंगा" पर मा ने मेरे हाथो को झटक दिया और उठकर खरी हो गई. अपने ब्लाउस को ठीक करने के बाद छत के कोने की तरफ चल दी. च्चत का वो कोना घर के पिच्छवारे की तरफ परता था और वाहा पर एक नाली (मोरी) जैसा बना हुआ था जिस से पानी बह कर सीधे नीचे बहने नाली में जा गिरता था. मा उसी नली पर जा के बैठ गई अपने पेटिकोट को उठा के पेशाब करने लगी. मेरी नज़रे तो मा का पिच्छा कर ही रही थी. ये नज़ारा देख के तो मेरा मन और बहक गया. दिल में आ रहा था की जल्दी से जाके मा के पास बैठ के आगे झनाक लू और उसके पेशाब करते हुए चूत को कम से कम देख भर लू. पर ऐसा ना हो सका. मा ने पेशाब कर लिया फिर वो वैसे ही पेतकोट को जाँघो तक एक हाथ से उठाए हुए मेरी तरफ घूम गई और अपने बुर पर हाथ चलाने लगी जैसे की पेशाब पोच्च रही हो और फिर मेरे पास आके बैठ गई. मैने मा के बैठने पर उसका हाथ पकर लिया और पायर से सहलाते हुए बोला "ही मा बस एक बार दिखा दो ना फिर कभी ऩही बोलूँगा दिखाने के लिए"
"एक बार ना कह दिया तो तेरे को समझ में ऩही आता है क्या"
"आता तो है मगर बस एक बार में क्या हो जाएगा"
"देख दिन में जो हो गया सो हो गया, मैने दिन में तेरा लंड भी मुठिया दिया था, कोई मा ऐसा ऩही करती, बस इससे आगे ऩही बढ़ने दूँगी"
मा ने पहली बार गंदे साबद का उपयोग किया था, उसके मुँह से लंड सुन के ऐसा लगा जैसे अभी झार के गिर जाएगा. मैने फिर धीरे से हिम्मत कर के कहा "ही मा क्या हो जाएगा अगर एक बार मुझे दिखा देगी तो, तुमने मेरा भी तो देखा है, अब अपना दिखा दो ना" "तेरा देखा है इसका क्या मतलब है, तेरा तो मैं बचपन से देखते आ रही हू, और रही बात चुचि दिखाने और पकरने की वो तो मैने तुझे करने ही दिया है ना क्यों की बचपन में तो तू इसे पाकर्ता चूस्ता ही था, पर चूत की बात और है, वो तो तूने होश में कभी ऩही देखा ना, फिर उसको क्यों दिखौ". मा अब खुलाम कुल्ला गंदे सबदो का उपयोग कर रही थी.
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