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महिला छात्रावास --7
(गतांक से आगे)
मोना अपनी गोरी संगमरमरी बाहें उसके गले में डाल कर लण्ड पर चूत को रगड़ते हुए बोली - हाय सचमुच घोड़े जैसा लण्ड है विकी ठीक ही कहता था। उनके लण्ड और चूत बुरी तरह पनिया रहे थे। मोना ने चूतड़ उठा कर लण्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा चूत के मुहाने पर लगाया और बोली - अब डाल भी दो न राजा कब तक तड़पाओगे।
असलम ने लण्ड उचकाया तो वो अन्दर न जाकर फिसल गया। अब असलम से रूका नहीं गया उसने वहीं सोफे पर मोना को पटक दिया। एक ही झटके में साड़ी और पेटीकोट नोच डाले और अब बिलकुल नंगी दिख रही मोना ने अपनी संगमरमरी टॉगों को फैला कर ऊपर उठा दिया और अपनी पावरोटी सी चूत दिखाते हुए कहा - अब तू ही डाल मेरे से तो गया नहीं ।
असलम ने मोना की मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों के बीच में गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत के मुहाने पर पर हथौड़े जैसा सुपाड़ा लगाया और धकेला। जैसे ही सुपाड़ा अन्दर घुसा।
मोना - औोाोेाोोोोोह।
असलम -क्या हुआ।
मोना - बिलकुल वैसा जैसा 16 साल की उम्र में पहली बार मेरी कुँवारी बुर में लण्ड घुसने पर लगा था।
असलम धक्के पे धक्का मारते हुए – वो भी तो मैं ही था, ले और ले।
मोना - औोाोेाोोोोोह औोाोेाोोोोोह उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्ह हाय राजा आज तो चूत ने मुँह भर के लण्ड पा लिया।
मोना और असलम ने उस रात उस सोफे पर उलट पलटकर लेटे खड़े तरह तरह से घमासान चुदाई की। दोनों कब सो गये पता ही नहीं चला सुबह जब असलम कमरे से बाहर आया तो देखा मोना नंगी ही किचन की तरफ जा रही थी। आगे जाती नंगी मोना के पीछे से अपना लन्ड उसके थिरकते बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ों की दरार में दबाते हुए उसकी दोनों बगलों में हाथ डालकर दोनों बड़े बड़े उरोज थाम अपनी बांहों में जकड लिया और कस कर गालों को चूसने लगा। मोना ने अपने मुंह को हटाते हुए कहा गाल पर नहीं। निशान पड़ जाएगा । दुसरे दिन लखनऊ की ट्रेन शाम को होने के कारण सुबह से उनके पास कोई काम नहीं था, सो असलम सारे दिन मोना को घर भर में जहॉ कहीं पाता कभी उसकी खरबूजे जितनी बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी चूचियाँ को हार्न की तरह दबाता कभी उनपर मुँह मारता और सारे जिस्म पर मुँह मारते हुए घर भर में चोदता फिरता रहा। मोना ने भी खुलकर चुदवाया सुबह नहाते पे जब असलम बाथरूम में घुस आया तो नहलाते नहाते चुदवाया। फिर तो मोना ने पूरे कपडे़ पहनना भी जरूरी नहीं समझा। लगभग सारे दिन पेटीकोट ब्लाउज में ही नंगी या अधनंगी सी घर भर में घूमती चुदती रही। जैसेकि किचन में काम करते समय अमर ने पीछे से बड़ी बड़ी चूचियाँ थाम पेटीकोट उठाकर बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ों के बीच लण्ड लगाया तो वहीं किचन में चुदवाया। खाने की टेबिल पर असलम की गोद में बैठकर चुदवाया वगैरह वगैरह। फिर शाम को ट्रेन पकड़कर दोनों लखनऊ आ गये। उन्हें देख विकी और नाज़नीन दोनों बहुत खुश हुए। दिन भर की थकान उतारने के लिए असलम और मोना दोनों नहाये और विकी और नाज़नीन ने झटपट खाने का इन्तजाम किया। रात के खाने के साथ साथ व्हिस्की का दौर भी चला। एक बार जब पीना पिलाना शुरू हुआ तो फिर तबतक नहीं रूका जबतक सब पी के धुत्त नहीं हो गये। असलम और विकी बुरी तरह बहक रहे थे। विकी बताने लगा कि उसकी असलम से दोस्ती इतनी पक्की है कि एक बार गुन्डों से घिर जाने पर असलम ने किस तरह जान पर खेलकर उसे बचाया था कहते कहते विकी शराब के नशे में भावुक हो कर असलम से बोला - असलम तू मुझे सजा दे मैं तेरी दोस्ती के लायक नहीं हूँ।
असलम नाज़नीन और मोना चौंक कर विकी की ओर देखने लगे।
असलम -वो कैसे।
क्रमश:…………………
दोस्तों आप इस कहानी को पूरा पढ़े तभी कहानी का आनंद ले पायेंगे
महिला छात्रावास --1
महिला छात्रावास --2
महिला छात्रावास --3
महिला छात्रावास --4
महिला छात्रावास --5
महिला छात्रावास --6
आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
(¨`·.·´¨) Always
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Thursday, June 10, 2010
महिला छात्रावास --6
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(गतांक से आगे)
असलम- हलो क्या दौड़ रही हो। सांस उखड़ रही है सब ठीक ठाक।
नाज़नीन- हॉ ऊपर से अभी नीचे आयी इसीलिए। तुम अपनी सुनाओ तुम्हें टेन्डर मिला या नहीं।
असलम- लगभग मिल ही गया है दस्तखत बाकी है। अपनी सुनाओ विकी को भूल भुलइया दिखाई या नहीं।
नाज़नीन ने अपनी चुत मे उतना लम्बा लण्ड पहले कभी भी नही डलवाया था। चूतड़ हिलाकर विकी का बचा लण्ड अपनी चुत में लेने की कोशिश करते हुए - हॉ पर विकी के लिए ये भूल भुलइया कौन सी नई चीज है अभी वही बात चली थी कि तुम्हारा फोन आ गया। लो बात करो। कहकर फोन विकी को दे दिया।
विकी धक्का लगाते हुए- नाज़नीन ने तो पूरी राजधानी दिखा दी असलम, पर यार तेरे बगैर ज्यादा मजा नहीं आ रहा और मेरे यहां तुझे कोई परेशानी तो नहीं हुई।
असलम- नहीं नहीं ले मोना से बात कर। कहकर फोन मोना को दे दिया।
विकी कमर चला कर धीरे धीरे चोदते हुए - हलो मोना कैसा लगा अपना दोस्त।
मोना - वैसा ही जैसा पहले लगता था।
विकी - उसका ठीक से ख्याल रखना रात काफी हो गयी है नीद भी आ रही है बाकी बाते परसों जब तुम लोग यहां आजाओगे तब होगीं बाय बाय।
मोना - ठीक है बाय बाय।
कहकर दोनों ने फोन काट दिया।
विकी नाज़नीन के बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ों को दोनो हाथों से पकड़कर धक्का लगाते हुए बोला- क्या बे मोके से फोन आया था। पर तूने ऊपर छत से अभी नीचे ड्राइगं रूम में दौड़कर आने का अच्छा बहाना किया।
अपने भारी चूतड़ो को उछाल उछालकर चुदाते हुए पराये लण्ड से चुदवाने को लिए हाजिर जवाब होना बहुत जरूरी होता है। हाय आज तो मैं विश्व की सबसे बड़ी चुदक्कड़ हो गयी आज तक सबसे मोटे लण्ड से चुदवाती थी आज सबसे लम्बे से चुदवाकर विश्व विजेता बन गयी। अगर जैसे तूने मुझे आज बातों में फॅसाकर चोद लिया वैसे ही असलम तेरी बीबी मोना को फाँस चोद ले तो।
विकी नाज़नीन की बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी चूचियां दोनों हाथों से पकड़कर दबाते हुए और धक्का लगाते हुए बोला -अरे तब तो मजा ही आ जाये। मेरी बीबी मोना भी विश्व विजेता चुदक्कड़ बन जाये। साथ ही हमारी यारी और भी पक्की हो जाये।
यह सुनकर नाज़नीन रहस्यभरी मुस्कराहट के साथ चूतड़ों को उछालने लगी। विकी के लम्बे लण्ड से चुदाने में अब उसे और भी मजा आ रहा था।
अब सुनिए नाज़नीन की रहस्यभरी मुस्कराहट का राज।
हुआ यों कि उधर कानपुर में दिनभर का काम निपटा कर असलम विकी के घर पहुंचा। विकी की बीबी मोना ने दरवाजा खोला। असलम ने देखा मोना इतने सालों में अब भरी पूरी औरत बन चुकी थी। थोड़ी ठिगनी भरे बदन की गोरी चिट्टी बड़े बड़े भारी चूतड़ों और स्तनों वाली कुछ कुछ गोलमटोल सी। उसका एक एक स्तन एक एक खरबूजे के बराबर लग रहा था। मोना असलम को देख चहक उठी उसका स्वागत किया चाय पानी के बाद असलम ने नहाने की इच्छा जाहिर की मोना ने बाथरूम बताया। नहाते धोते रात के खाने का वख्त हो गया रात के खाने के साथ व्हिस्की का दौर चला मोना असलम और नाज़नीन की भी बचपन की दोस्त थी और पीने का शौक भी रखती थी सो असलम के बढ़ावा देने से उसके साथ पैग पर पैग चढ़ाये जा रही थी। थोड़ी ही देर में उनपर शराब का नशा बुरी तरह से छा गया और अच्छे बुरे का भेद मिट गया। मोना ने ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी सो उसके निपल ब्लाउज में से उभर कर दिख रहे थे और लो कट ब्लाउज में से बड़े बड़े उरोज फटे पड़ रहे थे । असलम का मन उनपर टूट पड़ने को कर रहा था। देखने से लग भी रहा था कि चुदवाना चाहती है ।
असलम- मोना कल इसी समय मैं मेरी बीबी नाज़नीन और विकी मेरे घर पर पी रहे थे और फिर नशा ज्यादा होने पर हमने अपने सारे भेद एक दूसरे पर खोल दिये। एक के बाद एक पुरानी बातें खुलती गयी। यहॉ तक कि जब बात पुराने दिनो की मस्ती की आयी तो हमने ये भेद भी खोल दिया कि हमारे सभी दोस्तो मे विकी का लण्ड सबसे बड़ा है और मेरा सबसे मोटा।
मोना -अरे ये तो तूने अच्छा नहीं किया अब तेरा वो हरामखोर दोस्त जरूर तेरी बीबी को चोदने की कोशिश करेगा।
असलम -अरे नहीं।
मोना- अरे नहीं क्या ऐसे ही उसने मेरी बुआ पद्मा चौहान को चोदा था। अभी रात के 10 बजे हैं तू तुरन्त अपने घर फोन कर तेरी बीबी या तो चुद रही होगी या अगर किस्मत अच्छी हुयी और अभी न चुदी हुई तो चुदने वाली ही होगी जल्दी से फोन घुमा।
अब असलम कैसे बताये कि यही तो वो चाहता है। इतना तो आप जानते हैं कि असलम और उसकी बीबी नाज़नीन दोनों ही बहुत खुले विचारों के हैं दरअसल बात ये हुई कि जिस दिन विकी लखनऊ आया था और रात में जब दारू पीकर वे सब ऊलजलूल बातें कर रहे थे तो विकी ने अपनी बीबी मोना की फोटो भी दिखाई थी। फिर असलम और नाज़नीन सोने के लिए अपने कमरे में चले गये। गहरे नशे और वासनात्मक ऊलजलूल बातों के कारण वे बेहद उत्तेजित थे। लेटते ही असलम नाज़नीन के ब्लाउज में हाथ डाल उसके स्तनों को टटोलते हुए बोला - यार मोना की फोटो देख कर लगता है कि पहले से भी ज्यादा जोरदार हो गई है, चोदने का मन कर रहा है वैसे विकी का लण्ड भी शान्दार है तेरा भी फायदा है।
नाज़नीन असलम का फौलादी लण्ड थाम सुपाड़ा अपनी चूतपर रगड़ते हुए हाय राजा हॉ लगता भी है विकी अभी भी हमारी तरह बहुत खुले विचारों का हैं विकी मोना से तुम्हारे लण्ड की तारीफ भी कर चुका है। टेन्डर के बहाने तुम कल कानपुर जाओ और उसको चोद लो इसे मै यहीं लखनऊ दिखाने के बहाने रोक के अपनी चूत के मजे देती हूँ जब मेरी चोद लेगा तो अपनी बीबी की चूत चुद जाने पर भी खुश रहेगा। लौटते पर इसकी बीबी मोना को भी लखनऊ दिखाने के बहाने यही लेते आना।
सो सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा था।
फिर भी मोना के कहने पर असलम ने ड्राइंग रूम में आकर अपने घर फोन मिलाया। असलम के घर फोन की घंटी बजी वहॉं विकी तभी तभी दोनों हाथों से नाज़नीन की चूत का मुँह खोलकर अपने 8 इन्ची लण्ड का फौलादी सुपाड़ा धर धीरे धीरे उसकी चुत में डाल रहा था सो नाज़नीन ने लेटे लेटे ही फोन उठाया।
नाज़नीन अपनी बहकी सॉसो को काबू मे करने की कोशिश करते हुए- हलो।
असलम- हलो क्या दौड़ रही हो। सांस उखड़ रही है सब ठीक ठाक।
असलम के कहने का मतलब था क्या चुदवा रही हो जो सांसे तेज हैं।
नाज़नीन समझ गयी और बोली - हॉ ऊपर से अभी नीचे आयी इसीलिए। तुम अपनी सुनाओ तुम्हें टेन्डर मिला या नहीं।
नाज़नीन के कहने का मतलब था कि हॉ पहले विकी के ऊपर चढ़ी थी अभी ऊपर से उतर कर उसके लण्ड के नीचे आ चुदवाने जा रही हूँ इसीलिए सांसे तेज हैं।तुम अपनी बताओ तुम्हें मोना की चूत मिली या नहीं।
असलम -लगभग मिला ही समझो सिर्फ दस्तखत बाकी हैं। मतलब वो चुदाने को तैयार सिर्फ चोदना बाकी है, अपनी सुनाओ विकी को भूल भुलइया दिखाई या नही मतलब था चूत दिखाई या नहीं।
नाज़नीन ने अपनी चुत में उतना लम्बा लण्ड पहले कभी भी नही डलवाया था। चूतड़ हिलाकर विकी का बचा लण्ड अपनी चुत में लेने की कोशिश करते हुए हॉ अभी वही बात चली थी कि तुम्हारा फोन आ गया। मतलब चुदाई शुरू ही हुई थी कि तुम्हारा फोन आ गया। लो बात करो। कहकर फोन विकी को दे दिया।
विकी धक्का लगाते हुए- नाज़नीन ने तो पूरी राजधानी दिखा दी असलम, पर यार तेरे बगैर ज्यादा मजा नहीं आ रहा और मेरे यहां तुझे कोई परेशानी तो नहीं हुई।
असलम- नहीं नहीं ले मोना से बात कर। कहकर फोन मोना को दे दिया।
विकी कमर चला कर धीरे धीरे चोदते हुए - हलो मोना कैसा लगा अपना दोस्त।
मोना - वैसा ही जैसा पहले लगता था।
विकी - उसका ठीक से ख्याल रखना रात काफी हो गयी है नीद भी आ रही है बाकी बाते परसों जब तुम लोग यहां आजाओगे तब होगीं बाय बाय।
मोना - ठीक है बाय बाय।
कहकर दोनों ने फोन काट दिया।
मोना – देखा, मैं कह न रही थी कि चुदाई हो रही थी इसीलिए सांसें उखड़ रही थी।
असलम - किया भी क्या जा सकता है गलती मेरी है जो मैने विकी के लण्ड की तारीफ की।
मोना - ये गलती तो विकी ने भी की थी। उसने मुझे बताया था कि तेरा लण्ड घोडे़ के जैसा हो गया है।
असलम -तो तू ही बता मुझे क्या करना चाहिये।
मोना- करना क्या उसने तुम्हारी बीबी चोद ली तुम उसकी बीबी चोद लो हिसाब बराबर।
असलम -मगर ये तो बदला लेना हुआ दोस्त से बदला कैसा ।
मोना- तो दोस्ती की मिल बॉट समझ लो भूल गये अपनी सुहागरात। फिर विकी ने बताया था कि जो चीज तेरी उसे या उसकी तुम्हें पसन्द आजाय वो तुम आपस में मिल बॉट लिया करते थे उसे तुम्हारी बीबी पसन्द आयी क्या तुम्हें उसकी पसन्द नहीं आयी। क्या मैं तुम्हें पसन्द नहीं जो बहाने कर रहे हो।
असलम - नहीं नहीं पसन्द तो तू इतनी है कि मैं तुझपर टूट पडूँ।
मोना - तो मना किसने किया है।
असलम- मगर।
मोना - फिर मगर। अच्छा चलो कम से कम अपना वो घोड़े जैसा मोटा लण्ड तो दिखा तो दो जिसकी इतनी तारीफ सुनी है मैंने आज तक इतना मोटा लण्ड नहीं देखा।
इतना कहकर मोना ने आगे झुक कर असलम की पैंन्ट की जिप खोल दी। असलम
ने नहाने के बाद जान बूझकर अन्दर कच्छा नहीं पहना था सो उसका घोड़े जैसा मोटा लण्ड फनफनता हुआ उछलकर बाहर आ गया। जिसे मोना ने लपककर थाम लिया और बोली- ये तो चोदने के लिए बिलकुल तैयार है यूँ ही झूठमूठ नखरे कर रहे थे। आगे झुकी मोना के ब्लाउज में से उसके बड़े बड़े उरोज फटे पड़ रहे थे।
असलम ने उसके ब्लाउज पर झपट्टा मारा। ब्लाउज के चुटपुटिया वाले बटन सारे एकसाथ खुल गये बड़े बड़े दूध से सफेद कपोत उछल कर बाहर आ गये असलम उन पर टूट पड़ा दोनों हाथों में उन्हें थामकर उनपर जहॉतहॉ मुॅह मारते हुए बोला - अब तू यही चाहती है तो यही सही। ले चुदवा ले मेरे लण्ड से जितना चाहे नहीं तो बाद में तू विकी से शिकायत करे कि तेरे दोस्त ने खुश नहीं किया।
मोना उछलकर असलम के ऊपर चढ़ आयी और दोनों हाथों से साड़ी और पेटीकोट एकसाथ उठाकर अपनी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों के बीच में गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत दिखाते हुए बोली हाय ये तो चुदने के लिए कब से तैयार है राजा।
फिर वैसे ही साड़ी और पेटीकोट उठाये उठाये मोना असलम के घोड़े जैसे मोटे फनफनाते हुए लण्ड को अपने बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ों और चूत की फॉकों के बीच मे दबाकर बैठ गयी असलम उसकी बड़ी बड़ी हलव्वी चूचियॉ थाम उसके टमाटर जैसे गालों पर मुँह मारने लगा
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(गतांक से आगे)
असलम- हलो क्या दौड़ रही हो। सांस उखड़ रही है सब ठीक ठाक।
नाज़नीन- हॉ ऊपर से अभी नीचे आयी इसीलिए। तुम अपनी सुनाओ तुम्हें टेन्डर मिला या नहीं।
असलम- लगभग मिल ही गया है दस्तखत बाकी है। अपनी सुनाओ विकी को भूल भुलइया दिखाई या नहीं।
नाज़नीन ने अपनी चुत मे उतना लम्बा लण्ड पहले कभी भी नही डलवाया था। चूतड़ हिलाकर विकी का बचा लण्ड अपनी चुत में लेने की कोशिश करते हुए - हॉ पर विकी के लिए ये भूल भुलइया कौन सी नई चीज है अभी वही बात चली थी कि तुम्हारा फोन आ गया। लो बात करो। कहकर फोन विकी को दे दिया।
विकी धक्का लगाते हुए- नाज़नीन ने तो पूरी राजधानी दिखा दी असलम, पर यार तेरे बगैर ज्यादा मजा नहीं आ रहा और मेरे यहां तुझे कोई परेशानी तो नहीं हुई।
असलम- नहीं नहीं ले मोना से बात कर। कहकर फोन मोना को दे दिया।
विकी कमर चला कर धीरे धीरे चोदते हुए - हलो मोना कैसा लगा अपना दोस्त।
मोना - वैसा ही जैसा पहले लगता था।
विकी - उसका ठीक से ख्याल रखना रात काफी हो गयी है नीद भी आ रही है बाकी बाते परसों जब तुम लोग यहां आजाओगे तब होगीं बाय बाय।
मोना - ठीक है बाय बाय।
कहकर दोनों ने फोन काट दिया।
विकी नाज़नीन के बड़े बड़े गद्देदार गुलाबी चूतड़ों को दोनो हाथों से पकड़कर धक्का लगाते हुए बोला- क्या बे मोके से फोन आया था। पर तूने ऊपर छत से अभी नीचे ड्राइगं रूम में दौड़कर आने का अच्छा बहाना किया।
अपने भारी चूतड़ो को उछाल उछालकर चुदाते हुए पराये लण्ड से चुदवाने को लिए हाजिर जवाब होना बहुत जरूरी होता है। हाय आज तो मैं विश्व की सबसे बड़ी चुदक्कड़ हो गयी आज तक सबसे मोटे लण्ड से चुदवाती थी आज सबसे लम्बे से चुदवाकर विश्व विजेता बन गयी। अगर जैसे तूने मुझे आज बातों में फॅसाकर चोद लिया वैसे ही असलम तेरी बीबी मोना को फाँस चोद ले तो।
विकी नाज़नीन की बड़ी बड़ी दूध सी सफेद गुलाबी चूचियां दोनों हाथों से पकड़कर दबाते हुए और धक्का लगाते हुए बोला -अरे तब तो मजा ही आ जाये। मेरी बीबी मोना भी विश्व विजेता चुदक्कड़ बन जाये। साथ ही हमारी यारी और भी पक्की हो जाये।
यह सुनकर नाज़नीन रहस्यभरी मुस्कराहट के साथ चूतड़ों को उछालने लगी। विकी के लम्बे लण्ड से चुदाने में अब उसे और भी मजा आ रहा था।
अब सुनिए नाज़नीन की रहस्यभरी मुस्कराहट का राज।
हुआ यों कि उधर कानपुर में दिनभर का काम निपटा कर असलम विकी के घर पहुंचा। विकी की बीबी मोना ने दरवाजा खोला। असलम ने देखा मोना इतने सालों में अब भरी पूरी औरत बन चुकी थी। थोड़ी ठिगनी भरे बदन की गोरी चिट्टी बड़े बड़े भारी चूतड़ों और स्तनों वाली कुछ कुछ गोलमटोल सी। उसका एक एक स्तन एक एक खरबूजे के बराबर लग रहा था। मोना असलम को देख चहक उठी उसका स्वागत किया चाय पानी के बाद असलम ने नहाने की इच्छा जाहिर की मोना ने बाथरूम बताया। नहाते धोते रात के खाने का वख्त हो गया रात के खाने के साथ व्हिस्की का दौर चला मोना असलम और नाज़नीन की भी बचपन की दोस्त थी और पीने का शौक भी रखती थी सो असलम के बढ़ावा देने से उसके साथ पैग पर पैग चढ़ाये जा रही थी। थोड़ी ही देर में उनपर शराब का नशा बुरी तरह से छा गया और अच्छे बुरे का भेद मिट गया। मोना ने ब्लाउज के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी सो उसके निपल ब्लाउज में से उभर कर दिख रहे थे और लो कट ब्लाउज में से बड़े बड़े उरोज फटे पड़ रहे थे । असलम का मन उनपर टूट पड़ने को कर रहा था। देखने से लग भी रहा था कि चुदवाना चाहती है ।
असलम- मोना कल इसी समय मैं मेरी बीबी नाज़नीन और विकी मेरे घर पर पी रहे थे और फिर नशा ज्यादा होने पर हमने अपने सारे भेद एक दूसरे पर खोल दिये। एक के बाद एक पुरानी बातें खुलती गयी। यहॉ तक कि जब बात पुराने दिनो की मस्ती की आयी तो हमने ये भेद भी खोल दिया कि हमारे सभी दोस्तो मे विकी का लण्ड सबसे बड़ा है और मेरा सबसे मोटा।
मोना -अरे ये तो तूने अच्छा नहीं किया अब तेरा वो हरामखोर दोस्त जरूर तेरी बीबी को चोदने की कोशिश करेगा।
असलम -अरे नहीं।
मोना- अरे नहीं क्या ऐसे ही उसने मेरी बुआ पद्मा चौहान को चोदा था। अभी रात के 10 बजे हैं तू तुरन्त अपने घर फोन कर तेरी बीबी या तो चुद रही होगी या अगर किस्मत अच्छी हुयी और अभी न चुदी हुई तो चुदने वाली ही होगी जल्दी से फोन घुमा।
अब असलम कैसे बताये कि यही तो वो चाहता है। इतना तो आप जानते हैं कि असलम और उसकी बीबी नाज़नीन दोनों ही बहुत खुले विचारों के हैं दरअसल बात ये हुई कि जिस दिन विकी लखनऊ आया था और रात में जब दारू पीकर वे सब ऊलजलूल बातें कर रहे थे तो विकी ने अपनी बीबी मोना की फोटो भी दिखाई थी। फिर असलम और नाज़नीन सोने के लिए अपने कमरे में चले गये। गहरे नशे और वासनात्मक ऊलजलूल बातों के कारण वे बेहद उत्तेजित थे। लेटते ही असलम नाज़नीन के ब्लाउज में हाथ डाल उसके स्तनों को टटोलते हुए बोला - यार मोना की फोटो देख कर लगता है कि पहले से भी ज्यादा जोरदार हो गई है, चोदने का मन कर रहा है वैसे विकी का लण्ड भी शान्दार है तेरा भी फायदा है।
नाज़नीन असलम का फौलादी लण्ड थाम सुपाड़ा अपनी चूतपर रगड़ते हुए हाय राजा हॉ लगता भी है विकी अभी भी हमारी तरह बहुत खुले विचारों का हैं विकी मोना से तुम्हारे लण्ड की तारीफ भी कर चुका है। टेन्डर के बहाने तुम कल कानपुर जाओ और उसको चोद लो इसे मै यहीं लखनऊ दिखाने के बहाने रोक के अपनी चूत के मजे देती हूँ जब मेरी चोद लेगा तो अपनी बीबी की चूत चुद जाने पर भी खुश रहेगा। लौटते पर इसकी बीबी मोना को भी लखनऊ दिखाने के बहाने यही लेते आना।
सो सब कुछ प्लान के मुताबिक हो रहा था।
फिर भी मोना के कहने पर असलम ने ड्राइंग रूम में आकर अपने घर फोन मिलाया। असलम के घर फोन की घंटी बजी वहॉं विकी तभी तभी दोनों हाथों से नाज़नीन की चूत का मुँह खोलकर अपने 8 इन्ची लण्ड का फौलादी सुपाड़ा धर धीरे धीरे उसकी चुत में डाल रहा था सो नाज़नीन ने लेटे लेटे ही फोन उठाया।
नाज़नीन अपनी बहकी सॉसो को काबू मे करने की कोशिश करते हुए- हलो।
असलम- हलो क्या दौड़ रही हो। सांस उखड़ रही है सब ठीक ठाक।
असलम के कहने का मतलब था क्या चुदवा रही हो जो सांसे तेज हैं।
नाज़नीन समझ गयी और बोली - हॉ ऊपर से अभी नीचे आयी इसीलिए। तुम अपनी सुनाओ तुम्हें टेन्डर मिला या नहीं।
नाज़नीन के कहने का मतलब था कि हॉ पहले विकी के ऊपर चढ़ी थी अभी ऊपर से उतर कर उसके लण्ड के नीचे आ चुदवाने जा रही हूँ इसीलिए सांसे तेज हैं।तुम अपनी बताओ तुम्हें मोना की चूत मिली या नहीं।
असलम -लगभग मिला ही समझो सिर्फ दस्तखत बाकी हैं। मतलब वो चुदाने को तैयार सिर्फ चोदना बाकी है, अपनी सुनाओ विकी को भूल भुलइया दिखाई या नही मतलब था चूत दिखाई या नहीं।
नाज़नीन ने अपनी चुत में उतना लम्बा लण्ड पहले कभी भी नही डलवाया था। चूतड़ हिलाकर विकी का बचा लण्ड अपनी चुत में लेने की कोशिश करते हुए हॉ अभी वही बात चली थी कि तुम्हारा फोन आ गया। मतलब चुदाई शुरू ही हुई थी कि तुम्हारा फोन आ गया। लो बात करो। कहकर फोन विकी को दे दिया।
विकी धक्का लगाते हुए- नाज़नीन ने तो पूरी राजधानी दिखा दी असलम, पर यार तेरे बगैर ज्यादा मजा नहीं आ रहा और मेरे यहां तुझे कोई परेशानी तो नहीं हुई।
असलम- नहीं नहीं ले मोना से बात कर। कहकर फोन मोना को दे दिया।
विकी कमर चला कर धीरे धीरे चोदते हुए - हलो मोना कैसा लगा अपना दोस्त।
मोना - वैसा ही जैसा पहले लगता था।
विकी - उसका ठीक से ख्याल रखना रात काफी हो गयी है नीद भी आ रही है बाकी बाते परसों जब तुम लोग यहां आजाओगे तब होगीं बाय बाय।
मोना - ठीक है बाय बाय।
कहकर दोनों ने फोन काट दिया।
मोना – देखा, मैं कह न रही थी कि चुदाई हो रही थी इसीलिए सांसें उखड़ रही थी।
असलम - किया भी क्या जा सकता है गलती मेरी है जो मैने विकी के लण्ड की तारीफ की।
मोना - ये गलती तो विकी ने भी की थी। उसने मुझे बताया था कि तेरा लण्ड घोडे़ के जैसा हो गया है।
असलम -तो तू ही बता मुझे क्या करना चाहिये।
मोना- करना क्या उसने तुम्हारी बीबी चोद ली तुम उसकी बीबी चोद लो हिसाब बराबर।
असलम -मगर ये तो बदला लेना हुआ दोस्त से बदला कैसा ।
मोना- तो दोस्ती की मिल बॉट समझ लो भूल गये अपनी सुहागरात। फिर विकी ने बताया था कि जो चीज तेरी उसे या उसकी तुम्हें पसन्द आजाय वो तुम आपस में मिल बॉट लिया करते थे उसे तुम्हारी बीबी पसन्द आयी क्या तुम्हें उसकी पसन्द नहीं आयी। क्या मैं तुम्हें पसन्द नहीं जो बहाने कर रहे हो।
असलम - नहीं नहीं पसन्द तो तू इतनी है कि मैं तुझपर टूट पडूँ।
मोना - तो मना किसने किया है।
असलम- मगर।
मोना - फिर मगर। अच्छा चलो कम से कम अपना वो घोड़े जैसा मोटा लण्ड तो दिखा तो दो जिसकी इतनी तारीफ सुनी है मैंने आज तक इतना मोटा लण्ड नहीं देखा।
इतना कहकर मोना ने आगे झुक कर असलम की पैंन्ट की जिप खोल दी। असलम
ने नहाने के बाद जान बूझकर अन्दर कच्छा नहीं पहना था सो उसका घोड़े जैसा मोटा लण्ड फनफनता हुआ उछलकर बाहर आ गया। जिसे मोना ने लपककर थाम लिया और बोली- ये तो चोदने के लिए बिलकुल तैयार है यूँ ही झूठमूठ नखरे कर रहे थे। आगे झुकी मोना के ब्लाउज में से उसके बड़े बड़े उरोज फटे पड़ रहे थे।
असलम ने उसके ब्लाउज पर झपट्टा मारा। ब्लाउज के चुटपुटिया वाले बटन सारे एकसाथ खुल गये बड़े बड़े दूध से सफेद कपोत उछल कर बाहर आ गये असलम उन पर टूट पड़ा दोनों हाथों में उन्हें थामकर उनपर जहॉतहॉ मुॅह मारते हुए बोला - अब तू यही चाहती है तो यही सही। ले चुदवा ले मेरे लण्ड से जितना चाहे नहीं तो बाद में तू विकी से शिकायत करे कि तेरे दोस्त ने खुश नहीं किया।
मोना उछलकर असलम के ऊपर चढ़ आयी और दोनों हाथों से साड़ी और पेटीकोट एकसाथ उठाकर अपनी मोटी मोटी नर्म चिकनी गोरी गुलाबी जांघों के बीच में गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत दिखाते हुए बोली हाय ये तो चुदने के लिए कब से तैयार है राजा।
फिर वैसे ही साड़ी और पेटीकोट उठाये उठाये मोना असलम के घोड़े जैसे मोटे फनफनाते हुए लण्ड को अपने बड़े बड़े गुलाबी गद्देदार चूतड़ों और चूत की फॉकों के बीच मे दबाकर बैठ गयी असलम उसकी बड़ी बड़ी हलव्वी चूचियॉ थाम उसके टमाटर जैसे गालों पर मुँह मारने लगा
क्रमश:…………………
दोस्तों आप इस कहानी को पूरा पढ़े तभी कहानी का आनंद ले पायेंगे
महिला छात्रावास --1
महिला छात्रावास --2
महिला छात्रावास --3
महिला छात्रावास --4
महिला छात्रावास --5
आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
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महिला छात्रावास --5
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गतांक से आगे ............................
विकी और असलम एक ही इन्जीनियरिंग कालेज में गये थे वहॉ हास्टल में भी दोनो के कमरे पास ही पास थे साथ ही पढ़ाई करते और खेलते थे। वहॉ हास्टल में जवानी की बदमाशियॉ भी सीखी जैसे कि सब अपने लण्ड की लम्बाई और मोटाई नापते। विकी का लण्ड सबसे लम्बा था सो लड़के उसे राजा मीनारेलण्ड और असलम का सबसे मोटा था सो उसे राजा तोपलण्ड का खिताब दिया था। असलम के लण्ड की लम्बाई साढ़े 7 इन्च और विकी की 8 इन्च थी। पर असलम का लण्ड करीब आधा इन्च मोटा होने के कारण गधे के लण्ड जैसा जबरदस्त लगता था। इन्जीनियरिंग की पढाई के बाद दोनो को अलग अलग कम्पनियो मे नौकरी लग गयी। फिर असलम ने लखनऊ में अपना खुद का बिजनेस शुरू किया। उसे खूब सफलता मिली और वह अब लाखो मे खेलने लगा उसने एक आलीशान फ्लैट खरीदा। उसके पास मॅहगी कार नौकर सब कुछ हो गया। उसकी देखा देखी विकी ने भी कानपुर मे अपना बिजनेस शुरू किया और उसका भी बिजनेस जोरो से चल पडा। धीमे धीमे विकी के पास भी आधुनिक जीवन की आवश्यक हर चीज हो गयी। अपने अपने काम मे काफी मशगूल होते हुए भी फोन और पत्रो के जरिये उनका सम्बन्ध हमेशा बना रहा।
दिन गुजरते गये काम मे मशगूल होने से एक दूसरे के पास जाने का मौका नहीं मिला। लेकिन एक दूसरे के सम्पर्क मे बने रहे।
एक दिन असलम का फोन आया और वह शिकायत करने लगा कि उसके बार बार बुलाने पर भी वो क्यूँ नही आ रहा है सौभाग्य से विकी एक हफ्ते के बाद कुछ दिनो के लिये फ्री रहने वाला था। उसने हॉ कर दी। विकी लखनऊ पहुंचा असलम और उसकी बीबी नाज़नीन लेने के लिये आये थे। विकी ने देखा नाज़नीन अब पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लम्बी तगड़ी हो गयी थी। विकी ने तारीफ की अपनी तारीफ सुनकर वो मन ही मन खुशी से गदगद हो गयी । दूसरे दिन फिर लखनऊ घूमने निकले इधर उधर दो चार जगहो पर द्यूमे डिनर किया और घर वापस आ गये। उस दिन असलम ने व्हिस्की की बोतल खोली और कहने लगा कि आज हम बहुत दिनो के बाद एक साथ पीयेंगे। असलम ने नाज़नीन को ग्लास सोडा और कुछ खाने के लिये भी लाने को कहा। नाज़नीन तीन ग्लास सोडा और स्नैक्स मे भुने हुये काजू ले आयी।
तीनो के पीने का दौर शुरू हुआ। धीरे धीरे सब के ऊपर शराब का नशा बुरी तरह से छाने लगा अच्छे बुरे का भेद मिटने लगा। कुछ पुरानी बातें खुलने लगी और फिर एक के बाद एक पुरानी बाते खुलती गयी। बात पुराने दिनो की मस्ती की आयी तो असलम ने कहा नाज़ो तुम्हे हम एक बात बताये हमारे सभी दोस्तो मे विकी का लण्ड सबसे बडा है और मेरा सबसे मोटा। सुनकर नाज़नीन ने अर्थभरी नजर से विकी की ओर देखा और हॅसने लगी। विकी ने नाज़नीन से बताया कि उसने जब अपनी बीबी मोना को ये सारी बातें बतायी थी तो वो भी बहुत हॅसी थी। फिर तीनो उन शरारतों की बाते करने लगे पहले किया करते थे। फिर विकी नाज़नीन से उनकी हॉस्टल लाइफ के बारे मे पूछने लगा। काफी बातचीत के बाद हम सोने को चले गये।
अगले दिन असलम और नाज़नीन विकी को कई पुराने दोस्तों से मिले और फिर लन्च के लिये द्यर वापस आ गये। करीब 2 बजे कानपुर की एक फर्म से फोन आया कि असलम का वहॉ पहुँचना बहुत जरूरी था उसका कोई टेण्डर पास हो रहा था जहॉ पर उसकी उपस्थिती जरूरी थी। वह विकी के कारण थोड़ा सोच मे पड़ गया कि उसने विकी को इतनी जिद्द के बाद यहॉ बुलाया और उसे खुद ही जाना पड़ रहा था। विकी ने उसे समझाया कि वो दोनों उसके साथ चलें इसी बहाने उसकी बीबी जो असलम और नाज़नीन की भी बचपन की दोस्त है, से भी मिल लेगें काफी बात चीत के बाद तय हुआ कि क्योंकि असलम तो वहां काम मे मशगूल रहेगा इसलिये सब साथ घूमफिर नहीं पायेंगे सो वो अकेला ही जायेगा और लौटते पर विकी की बीबी को भी साथ लेता आये फिर सब साथ साथ लखनऊ में घूमेंगे विकी ने फोन पर अपनी बीबी को सब समझा दिया। रात के 8 बजे असलम कानपुर के लिये निकल गया। विकी और नाज़नीन असलम को छोड़ने के लिये गये और लौटते वक्त एक बहुत अच्छे से रेस्टॉरेन्ट मे डिनर किया। घर लौटने पर विकी अपने आपको काफी अकेला पा रहा था वो नाज़नीन से बोला काफी बोरियत हो रही है थोड़ी पी जाय।
फिर दोनो काफी देर तक बैठकर पीते रहे। जब दोनों काफी ज्यादा पी चुके तो नाज़नीन पुराने दिनों की याद कर बहकी बहकी बाते करने लगी। थोडी देर के बाद उन्होंने कपड़े बदलने का निर्णय किया और अपने बेडरूम में चली गयी। वह जब बैठक में वापस आयी तो उसको देखकर विकी का लण्ड खड़ा हो गया। उसने गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी। नीचे उन्होने कुछ भी नहीं पहन रखा था जिससे उनके दूध से सफेद बड़े बड़े गोल उरोज चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी लम्बी जांघें पिण्डलियां उनकी गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत यहाँ तक उनकी काली काली झॉट की हल्की झल्की झलक दिखाई पड़ रही थी।
विकी ने उससे नशे में बहकते हुए कहा- तू मेरे सामने ऐसे कपड़ों में न आया कर क्योंकि मुझे अपने आप पर काबू पाना मुश्किल हो गया है मेरा लण्ड खड़ा हो गया है।
नाज़नीन बुरी तरह नशे में थी हॅस पड़ी और विकी के पास आकर खड़ी हो नशे में बहकते हुए बोली- क्यों ऐसा क्या है।
विकी ने उनके बड़े बड़े उरोजों की तरफ देखते हुये कहा- जब तेरी चूचियॉ पहले से इतनी खूबसूरत हो गयी हैं तो चुत तो और भी खूबसूरत हो गयी होगी।
इसपर वो हॅसकर बोली- तू अपना लण्ड मुझे दिखा दे मै तुझे अपनी चुत दिखा दूँगी । और फिर हॅसकर बोली- आखिर मैं कैसे जानूँ कि तेरा लण्ड सचमुच मुझे देखकर खड़ा होता है या तू यूँ ही मेरी तारीफ कर रहा है देखूँ तो जानूँ और हॉ असलम कह रहा था कि तुम्हारा लण्ड सबसे बड़ा है। आखिर मैं कैसे और क्यों मानूँ।
विकी ने भी ताव में आकर एक झटके मे अपना पैजामा नीचे खीच दिया। 8 इन्च का लण्ड फनफनाकर बाहर आ गया जिसे देख नाज़नीन बोली- अरे सचमुच पहले से कितना बड़ा हो गया है । कहीं प्लास्टिक का तो नहीं।
फिर हाथ में थामकर देखती हुई बोली- है तो असली। सचमुच तुम्हारा लण्ड बड़ा हो गया है और मोटा भी।
इस पर विकी बोला- अब तू भी अपना वादा पूरा कर।
इसपर उसने अपनी गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी आगे से खोलकर चिकनी गोरी गुलाबी जांघें फैलाया और अपनी गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत दिखाते हुए बोली- ले देख ले।
विकी ने दोनों हाथों से चूत का मुँह खोलकर देखते हुए कहा- तेरी चूत का छेद तो अभी तक इतना छोटा है असलम का उतना मोटा लण्ड अन्दर कैसे जाता है।
वो बोली- जैसे सुहागरात में गया था तेरे सामने।
विकी- हह् सिर्फ सुपाड़ा।
नाज़नीन- वो तो पहली बार की वजह से, वैसे औरत की चूत में कितना ही मोटा या लम्बा जा सकता है।
विकी- असम्भव मेरे ख्याल से तो मेरे इतना मोटा भी नहीं जायेगा लम्बाई झेल पाना तो और भी मुश्किल है़।
इसपर वो समझाते हुए बोली- सम्भव है अगर असलम होता तो उसकी इजाजत से अभी तुमसे चुदवा कर मैं ये साबित कर देती । पर असलम है नहीं अगर उसको बाद में पता चलेगा तो अच्छा नहीं होगा।
विकी ने कहा- अरे मैं असलम को मना लूँगा अपना यार है़ और फिर हमारे बीच ये कौन सी नई बात है । लगता है तुझे मेरा लण्ड पसन्द नहीं आया। यूँ ही तारीफ कर रही थी।
नाज़नीन- नहीं नहीं यूँ ही तारीफ नहीं कर रही थी तुमसे चुदवाने में हर उस लड़की को बहुत मजा आता होगा जो तुमसे चुदवाती होगी। एक दिन ठहर जा, असलम के आते ही उसकी इजाजत ले तुमसे चुदवाकर मैं ये साबित कर दूँगी कि औरत की चूत में कितना ही मोटा या लम्बा लण्ड जा सकता है।
विकी- तो अभी चुदवाकर देख ले न कि पिछली बार से ज्यादा मजा आता है या नहीं । क्या लम्बाई देख कर डर रही है।
नाज़नीन ने ताव में भरकर कहा- लम्बाई से डरे मेरी जूती।
फिर विकी का लण्ड पकड़ा और कुर्सी से उठाकर अपने बेडरूम में खींचते हुये ले गयीं जैसे कोई कुत्ते का पट्टा पकड़कर खींचते हुये ले जा रहा हो विकी भी पालतू कुत्ते की तरह खिचते हुये चला गया। कमरे में पहुंचकर उसे बिस्तर पर ढकेल दिया और उसके ऊपर चढ़कर विकी के जिस्म के दोनों तरफ अपना एक एक घुटना रखकर घुटनों के बल खड़ी हो गयी फिर विकी के लण्ड को हाथों में पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली- ठीक है अब नहीं मानता है तो ले मेरी चोद कर देख ले पर जब ये कहानी मोना को पता चलेगी तो फिर कहीं तुझे बिना लण्ड का न होना पड़े। मोना से तुझे कोई नहीं बचा सकेगा।
विकी ने हाथों को बढ़ाकर नाज़नीन के बड़े बड़े उरोजों को थाम लिया और सहलाने लगा और बोला- तू फिक्र न कर, बदले में मैं उसे उसका मनपसन्द असलम का मोटा लण्ड पेशकर दूँगा। पहले तो ऐसा कुछ होगा नहीं दूसरे अगर हुआ तो एक बार तेरी चूत चोदने के बदले में मैं बिना लण्ड का होने को तैयार हूँ।
विकी ने उसकी नाइटी उतार दी और निपलों को मुँह मे लेकर चूसने लगा। विकी का लण्ड और नाज़नीन की चूत उत्तेजना से गीले हो रहे थे। नाज़नीन उत्तेजना से बेकाबू हो विकी के ऊपर से नीचे उतर आयी और अपनी चिकनी गोरी गुलाबी जांघें फैलाकर अपनी रेशमी गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत दिखाते हुए बोली- हाय रे अब डाल भी दे न।
विकी ने दोनों हाथों से चूत का मुँह खोलकर अपना 8 इन्ची लन्ड के फौलादी लण्ड का सुपाड़ा धरा और धीरे धीरे उनकी चुत मे डालने लगा।
तभी फोन की घंटी बजी। नाज़नीन ने लेटे लेटे फोन उठाया। विकी के घर से असलम का फोन था।
नाज़नीन अपनी बहकी सॉसो को काबू मे करने की कोशिश करते हुए- हलो।
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आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
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महिला छात्रावास --5
गतांक से आगे ............................
विकी और असलम एक ही इन्जीनियरिंग कालेज में गये थे वहॉ हास्टल में भी दोनो के कमरे पास ही पास थे साथ ही पढ़ाई करते और खेलते थे। वहॉ हास्टल में जवानी की बदमाशियॉ भी सीखी जैसे कि सब अपने लण्ड की लम्बाई और मोटाई नापते। विकी का लण्ड सबसे लम्बा था सो लड़के उसे राजा मीनारेलण्ड और असलम का सबसे मोटा था सो उसे राजा तोपलण्ड का खिताब दिया था। असलम के लण्ड की लम्बाई साढ़े 7 इन्च और विकी की 8 इन्च थी। पर असलम का लण्ड करीब आधा इन्च मोटा होने के कारण गधे के लण्ड जैसा जबरदस्त लगता था। इन्जीनियरिंग की पढाई के बाद दोनो को अलग अलग कम्पनियो मे नौकरी लग गयी। फिर असलम ने लखनऊ में अपना खुद का बिजनेस शुरू किया। उसे खूब सफलता मिली और वह अब लाखो मे खेलने लगा उसने एक आलीशान फ्लैट खरीदा। उसके पास मॅहगी कार नौकर सब कुछ हो गया। उसकी देखा देखी विकी ने भी कानपुर मे अपना बिजनेस शुरू किया और उसका भी बिजनेस जोरो से चल पडा। धीमे धीमे विकी के पास भी आधुनिक जीवन की आवश्यक हर चीज हो गयी। अपने अपने काम मे काफी मशगूल होते हुए भी फोन और पत्रो के जरिये उनका सम्बन्ध हमेशा बना रहा।
दिन गुजरते गये काम मे मशगूल होने से एक दूसरे के पास जाने का मौका नहीं मिला। लेकिन एक दूसरे के सम्पर्क मे बने रहे।
एक दिन असलम का फोन आया और वह शिकायत करने लगा कि उसके बार बार बुलाने पर भी वो क्यूँ नही आ रहा है सौभाग्य से विकी एक हफ्ते के बाद कुछ दिनो के लिये फ्री रहने वाला था। उसने हॉ कर दी। विकी लखनऊ पहुंचा असलम और उसकी बीबी नाज़नीन लेने के लिये आये थे। विकी ने देखा नाज़नीन अब पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लम्बी तगड़ी हो गयी थी। विकी ने तारीफ की अपनी तारीफ सुनकर वो मन ही मन खुशी से गदगद हो गयी । दूसरे दिन फिर लखनऊ घूमने निकले इधर उधर दो चार जगहो पर द्यूमे डिनर किया और घर वापस आ गये। उस दिन असलम ने व्हिस्की की बोतल खोली और कहने लगा कि आज हम बहुत दिनो के बाद एक साथ पीयेंगे। असलम ने नाज़नीन को ग्लास सोडा और कुछ खाने के लिये भी लाने को कहा। नाज़नीन तीन ग्लास सोडा और स्नैक्स मे भुने हुये काजू ले आयी।
तीनो के पीने का दौर शुरू हुआ। धीरे धीरे सब के ऊपर शराब का नशा बुरी तरह से छाने लगा अच्छे बुरे का भेद मिटने लगा। कुछ पुरानी बातें खुलने लगी और फिर एक के बाद एक पुरानी बाते खुलती गयी। बात पुराने दिनो की मस्ती की आयी तो असलम ने कहा नाज़ो तुम्हे हम एक बात बताये हमारे सभी दोस्तो मे विकी का लण्ड सबसे बडा है और मेरा सबसे मोटा। सुनकर नाज़नीन ने अर्थभरी नजर से विकी की ओर देखा और हॅसने लगी। विकी ने नाज़नीन से बताया कि उसने जब अपनी बीबी मोना को ये सारी बातें बतायी थी तो वो भी बहुत हॅसी थी। फिर तीनो उन शरारतों की बाते करने लगे पहले किया करते थे। फिर विकी नाज़नीन से उनकी हॉस्टल लाइफ के बारे मे पूछने लगा। काफी बातचीत के बाद हम सोने को चले गये।
अगले दिन असलम और नाज़नीन विकी को कई पुराने दोस्तों से मिले और फिर लन्च के लिये द्यर वापस आ गये। करीब 2 बजे कानपुर की एक फर्म से फोन आया कि असलम का वहॉ पहुँचना बहुत जरूरी था उसका कोई टेण्डर पास हो रहा था जहॉ पर उसकी उपस्थिती जरूरी थी। वह विकी के कारण थोड़ा सोच मे पड़ गया कि उसने विकी को इतनी जिद्द के बाद यहॉ बुलाया और उसे खुद ही जाना पड़ रहा था। विकी ने उसे समझाया कि वो दोनों उसके साथ चलें इसी बहाने उसकी बीबी जो असलम और नाज़नीन की भी बचपन की दोस्त है, से भी मिल लेगें काफी बात चीत के बाद तय हुआ कि क्योंकि असलम तो वहां काम मे मशगूल रहेगा इसलिये सब साथ घूमफिर नहीं पायेंगे सो वो अकेला ही जायेगा और लौटते पर विकी की बीबी को भी साथ लेता आये फिर सब साथ साथ लखनऊ में घूमेंगे विकी ने फोन पर अपनी बीबी को सब समझा दिया। रात के 8 बजे असलम कानपुर के लिये निकल गया। विकी और नाज़नीन असलम को छोड़ने के लिये गये और लौटते वक्त एक बहुत अच्छे से रेस्टॉरेन्ट मे डिनर किया। घर लौटने पर विकी अपने आपको काफी अकेला पा रहा था वो नाज़नीन से बोला काफी बोरियत हो रही है थोड़ी पी जाय।
फिर दोनो काफी देर तक बैठकर पीते रहे। जब दोनों काफी ज्यादा पी चुके तो नाज़नीन पुराने दिनों की याद कर बहकी बहकी बाते करने लगी। थोडी देर के बाद उन्होंने कपड़े बदलने का निर्णय किया और अपने बेडरूम में चली गयी। वह जब बैठक में वापस आयी तो उसको देखकर विकी का लण्ड खड़ा हो गया। उसने गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी। नीचे उन्होने कुछ भी नहीं पहन रखा था जिससे उनके दूध से सफेद बड़े बड़े गोल उरोज चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी लम्बी जांघें पिण्डलियां उनकी गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत यहाँ तक उनकी काली काली झॉट की हल्की झल्की झलक दिखाई पड़ रही थी।
विकी ने उससे नशे में बहकते हुए कहा- तू मेरे सामने ऐसे कपड़ों में न आया कर क्योंकि मुझे अपने आप पर काबू पाना मुश्किल हो गया है मेरा लण्ड खड़ा हो गया है।
नाज़नीन बुरी तरह नशे में थी हॅस पड़ी और विकी के पास आकर खड़ी हो नशे में बहकते हुए बोली- क्यों ऐसा क्या है।
विकी ने उनके बड़े बड़े उरोजों की तरफ देखते हुये कहा- जब तेरी चूचियॉ पहले से इतनी खूबसूरत हो गयी हैं तो चुत तो और भी खूबसूरत हो गयी होगी।
इसपर वो हॅसकर बोली- तू अपना लण्ड मुझे दिखा दे मै तुझे अपनी चुत दिखा दूँगी । और फिर हॅसकर बोली- आखिर मैं कैसे जानूँ कि तेरा लण्ड सचमुच मुझे देखकर खड़ा होता है या तू यूँ ही मेरी तारीफ कर रहा है देखूँ तो जानूँ और हॉ असलम कह रहा था कि तुम्हारा लण्ड सबसे बड़ा है। आखिर मैं कैसे और क्यों मानूँ।
विकी ने भी ताव में आकर एक झटके मे अपना पैजामा नीचे खीच दिया। 8 इन्च का लण्ड फनफनाकर बाहर आ गया जिसे देख नाज़नीन बोली- अरे सचमुच पहले से कितना बड़ा हो गया है । कहीं प्लास्टिक का तो नहीं।
फिर हाथ में थामकर देखती हुई बोली- है तो असली। सचमुच तुम्हारा लण्ड बड़ा हो गया है और मोटा भी।
इस पर विकी बोला- अब तू भी अपना वादा पूरा कर।
इसपर उसने अपनी गुलाबी रंग की पारदर्शी नाइटी आगे से खोलकर चिकनी गोरी गुलाबी जांघें फैलाया और अपनी गोरी गुलाबी रेशमी पावरोटी सी फूली चूत दिखाते हुए बोली- ले देख ले।
विकी ने दोनों हाथों से चूत का मुँह खोलकर देखते हुए कहा- तेरी चूत का छेद तो अभी तक इतना छोटा है असलम का उतना मोटा लण्ड अन्दर कैसे जाता है।
वो बोली- जैसे सुहागरात में गया था तेरे सामने।
विकी- हह् सिर्फ सुपाड़ा।
नाज़नीन- वो तो पहली बार की वजह से, वैसे औरत की चूत में कितना ही मोटा या लम्बा जा सकता है।
विकी- असम्भव मेरे ख्याल से तो मेरे इतना मोटा भी नहीं जायेगा लम्बाई झेल पाना तो और भी मुश्किल है़।
इसपर वो समझाते हुए बोली- सम्भव है अगर असलम होता तो उसकी इजाजत से अभी तुमसे चुदवा कर मैं ये साबित कर देती । पर असलम है नहीं अगर उसको बाद में पता चलेगा तो अच्छा नहीं होगा।
विकी ने कहा- अरे मैं असलम को मना लूँगा अपना यार है़ और फिर हमारे बीच ये कौन सी नई बात है । लगता है तुझे मेरा लण्ड पसन्द नहीं आया। यूँ ही तारीफ कर रही थी।
नाज़नीन- नहीं नहीं यूँ ही तारीफ नहीं कर रही थी तुमसे चुदवाने में हर उस लड़की को बहुत मजा आता होगा जो तुमसे चुदवाती होगी। एक दिन ठहर जा, असलम के आते ही उसकी इजाजत ले तुमसे चुदवाकर मैं ये साबित कर दूँगी कि औरत की चूत में कितना ही मोटा या लम्बा लण्ड जा सकता है।
विकी- तो अभी चुदवाकर देख ले न कि पिछली बार से ज्यादा मजा आता है या नहीं । क्या लम्बाई देख कर डर रही है।
नाज़नीन ने ताव में भरकर कहा- लम्बाई से डरे मेरी जूती।
फिर विकी का लण्ड पकड़ा और कुर्सी से उठाकर अपने बेडरूम में खींचते हुये ले गयीं जैसे कोई कुत्ते का पट्टा पकड़कर खींचते हुये ले जा रहा हो विकी भी पालतू कुत्ते की तरह खिचते हुये चला गया। कमरे में पहुंचकर उसे बिस्तर पर ढकेल दिया और उसके ऊपर चढ़कर विकी के जिस्म के दोनों तरफ अपना एक एक घुटना रखकर घुटनों के बल खड़ी हो गयी फिर विकी के लण्ड को हाथों में पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली- ठीक है अब नहीं मानता है तो ले मेरी चोद कर देख ले पर जब ये कहानी मोना को पता चलेगी तो फिर कहीं तुझे बिना लण्ड का न होना पड़े। मोना से तुझे कोई नहीं बचा सकेगा।
विकी ने हाथों को बढ़ाकर नाज़नीन के बड़े बड़े उरोजों को थाम लिया और सहलाने लगा और बोला- तू फिक्र न कर, बदले में मैं उसे उसका मनपसन्द असलम का मोटा लण्ड पेशकर दूँगा। पहले तो ऐसा कुछ होगा नहीं दूसरे अगर हुआ तो एक बार तेरी चूत चोदने के बदले में मैं बिना लण्ड का होने को तैयार हूँ।
विकी ने उसकी नाइटी उतार दी और निपलों को मुँह मे लेकर चूसने लगा। विकी का लण्ड और नाज़नीन की चूत उत्तेजना से गीले हो रहे थे। नाज़नीन उत्तेजना से बेकाबू हो विकी के ऊपर से नीचे उतर आयी और अपनी चिकनी गोरी गुलाबी जांघें फैलाकर अपनी रेशमी गोरी गुलाबी पावरोटी सी फूली चूत दिखाते हुए बोली- हाय रे अब डाल भी दे न।
विकी ने दोनों हाथों से चूत का मुँह खोलकर अपना 8 इन्ची लन्ड के फौलादी लण्ड का सुपाड़ा धरा और धीरे धीरे उनकी चुत मे डालने लगा।
तभी फोन की घंटी बजी। नाज़नीन ने लेटे लेटे फोन उठाया। विकी के घर से असलम का फोन था।
नाज़नीन अपनी बहकी सॉसो को काबू मे करने की कोशिश करते हुए- हलो।
इन यारों की यारी की आगे की दास्तान जानने के लि्ए पढ़े महिला छात्रावास --6
आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
(¨`·.·´¨) Always
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`·.¸.·´ -- raj
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गतांक से आगे ......................
विकी और असलम जान गये कि ये दोनो अभी सुपाड़े से ज्यादा नहीं झेल पायेंगी सो उन्होंने उनके जिस्मों से खेलते हुए धीरे धीरे सुपाड़ा अन्दर बाहर कर सुपाडे़ से ही धीरे धीरे चोदना शुरू किया। जहॉ विकी नाजनीन के लम्बे गठीले बदन पर छाया हुआ उसके दूध से सफेद बड़े बड़े लगंड़ा आमों जैसे उरोजों का स्वाद लेते हुए उभरे हुए संगमरमरी चूतड़ों चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी लम्बी जांघों और पिण्डलियों को दबोचते सहलाते हुए सुपाड़े से चोद रहा था। वहीं असलम मोना के गोलमटोल मांसल पर गठीले गुलाबी बदन और की बड़े बड़े भारी चूतड़ों को दोनों हाथों में दबोच उसके गोरी गुलाबी बड़े बड़े खरबूजे जैसे उरोजों पर मुँह मारते हुए धीरे धीरे सुपाड़ा अन्दर बाहर कर रहा था। इसे किस्मत का नजारा ही कहेंगे कि इधर असलम और मोना लगे थे उधर असलम की अम्मा नज्मा खान की चूत को मोना के बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान अपने चौहानी लण्ड से बजा रहे थे वे उछल उछल के चुदवा रही थी। इसी तरह विकी के पिता नाजनीन की अम्मा जाहिरा सुलेमान की चूत की धुनाई कर रहे थे।
दरअसल रमन ने अपने अपने होटल में ही दुल्हे और दुल्हनों के घरवालों के ठहरने का भी इन्तजाम किया था ताकि सुबह बिदाई की रस्म के बाद सबलोग इकट्ठे जा सकें और रात में वापस जा कर सुबह तुरन्त बिदाई की रस्म के लिए वापस आने की परेशानी से बच जायें। सो हुआ यो कि शादी की रस्मों के दौरान नवाब सुलेमान ने एक चिकना मुस्टण्डा लौंडा ढूंूढ लिया था जब शादी की रस्मों के बाद मेहमान जाने लगे तो नवाब सुलेमान भी अपनी बेगम जाहिरा से सर दर्द का बहाना कर और सुबहा जल्दी आने का वादाकर खिसक लिये। जाहिरा सुलेमान ने नजर दौड़ाई तो चिकना भी कहीं नजर नहीं आया तो वे समझ गई और मारे गुस्से के उन्होंने पान्डेयजी से बताया कि आज के दिन भी नवाब सुलेमान अपने नवाबी शौक से बाज नहीं आये। पान्डेयजी उन्हें सहानुभूतिपूर्वक (हमदर्दी से) समझाने लगे तो वे फफक फफक के रोने लगीं।
पान्डेयजी - आप अपने कमरे में जाके आराम करें मैं यहॉ सब सम्भाल लूँगा।
पान्डेयजी उन्हें उनके कमरे में ले गये। बाहों में भर के प्यार किया समझाया कि उनके (पान्डेयजी के) रहते उन्हें चिन्ता करने की जरूरत नहीं। फिर सबके जाने के बाद आने का वादा कर चले आये। कमरा बन्द कर चाभी खुद ले आना नहीं भूले। लोगों के पूछने पर बता दिया कि बेटी के बिदा होने का सोच के बेगम सुलेमान दुखी हैं। शादी ब्याह की रस्मो के बाद जैसे ही दूल्हे और दुल्हनें अपने कमरों में गये। मेहमान भी धीरे धीरे खिसक लिये। दुल्हों और दुल्हनों के घरवालों ने भी अपने कमरों का रास्ता लिया। रास्ता साफ देख पान्डेयजी जाहिरा बेगम का कमरा खोल अन्दर घुस गये। उसी तरह मौका देख ठाकुर वीरेन्द्र चौहान ने असलम की अम्मा नज्मा खान के कमरे का दरवाजा धकेला तो उम्मीद के मुताबिक खुला मिला वे भी चुपके से अन्दर घुस गये और दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया। चौहान साहब ने धीरे से रजाई में घुस के नज्मा खान के मखमली बदन की तरफ हाथ बढाया तो पाया कि वे चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार सिर्फ* नाइटी में थी। बस फिर क्या था नज्मा खान ने अपने गुलाबी बदन और पावरोटी सी चूत को चौहानी लण्ड से जम के सिकवाया। जाहिरा बेगम इससे भी एक कदम आगे निकलीं। वो पाण्डेय जी का इन्तजार रजाई में पूरी नंगी हो कर कर रही थीं। जाहिरा सुलेमान ने पान्डेय जी के घोडे़ जैसे लन्ड की सवारी गॉठ खूब उछल उछल के अपना गुस्सा उतारा। चुदचुदा के थक के जब दोनो औरतें सो गयी तो पान्डेय जी और चौहान साहब अपने कमरों मे जाने के खयाल से चुपके से बाहर निकले पर हाय री किस्मत कि दोनों ने इसके लिए एक ही वक्त चुना सो दोनों एक दूसरे को उनकी माशुकाओं के कमरों से निकलते देख सकपकाये।
पान्डेय – यार चौहान देख बात अपने तक ही रखना मैं भी तेरी बात अपने तक ही रखूँगा।
चौहान –तू फिक्र नाकर पर यार तेरा माल बहुत जोरदार है।
पान्डेय –आ गया ना साले अपनी ठाकुरी औकात पे साले खूबसूरत औरत देखी और लगे लार टपकाने। वैसे दिल तो मेरा भी तेरी नज्मा खान के गुदाज गुलाबी बदन की आहें भरता है पर मैं ने कभी कहा तुझसे।
चौहान – अबे तो बहाने से क्यों कह रहा है तेरी दोस्ती पर ऐसी हजार नज्मा कुरबान। फिर अब तो तेरा दुगना हक है भूल गया अब तो हम दोस्त के साथ साथ रिश्तेदार भी हैं।
पान्डेय –ये बात है तो अपनी तरफ से भी हरी झन्डी। तू भी क्या याद करेगा कि क्या रिश्तेदार मिला है ।
बस फिर क्या था। पान्डेयजी नज्मा के कमरे में दबे पॉव गये। बिस्तर पर गहरी नींद में सोती नज़्मा के दाहिनी तरफ की जगह खाली देख सारे कपडे़ उतार के उसकी रजाई में हौले से समा गये और फिर धीरे से अपने बाई तरफ करवट ले गहरी नींद में सोती नज्मा खान के गुदाज गुलाबी बदन से सट गये उसकी नींद में खलल डाले बगैर। पान्डेयजी का लण्ड नज्मा खान के गुदाज गुलाबी बदन के स्पर्श से टन्ना रहा था। नज्मा बेगम ने सोते सोते उनकी तरफ करवट लेकर अपनी केले के तने जैसी जांघ उनकी जांघों के ऊपर चौहान समझकर चढा दी। नज्मा बेगम की जांघों के बीच में फासला बढ़ाने के लिए पान्डेयजी ने अपनी दायीं जॉघ उनकी दोनो जॉघों के बीच डाल दी अब उनका टन्नाया लन्ड काफी आसानी से नज्मा बेगम की केले के तने जैसी जांघों के बीच में उनकी पावरोटी सी चूत से आसानी से टकराने लगा।
पान्डेयजी धीरे धीरे अपने फौलादी लन्ड के सुपाडे से चूत के मुँह पर सहलाने लगे। खेली खाई चुदक्कड़ औरत का बदन सोते सोते भी यार की मर्जी समझता है सो चूत धीरे धीरे गीली होकर मुँह खोलने लगी। गहरी नींद में सोई नज्मा बेगम का जिस्म पान्डेयजी को चौहान समझकर अपनी सगंमरमरी बाहों मे कसने लगा । उनकी चूँचियॉं पान्डेयजी के मुँह के करीब आती जा रही थीं और निपल तो ठीक होठों के सामने होने से होठों से टकरा भी रहे थे। पान्डेयजी होले होले बारी बारी से दोनों निपलों को होठों में दबा सहलाने फिर चुभलाने लगे। ऐसे ही चूत के मुँह पर लन्ड का सुपाड़ा रगड़ते और निपलों को होठों में चुभलाते पुराने एक्सपर्ट पान्डेयजी ने थोड़ी ही देर में नज्मा बेगम का जिस्म चुदाई को लिए तैयार कर लिया। आदतन चुदक्कड़ नज्मा बेगम अब गहरी नीद से अधसोई हालत में आचुकी थीं और पान्डेयजी को चौहान समझकर मजे ले रही थी। जब पान्डेयजी ने महसूस किया कि चूत अपना मुँुह पूरा खोल कर बुरी तरह पनिया रही है तो उनसे रहा नहीं गया और कमर के धक्के से सुपाड़ा अन्दर डाल ही दिया। सुपाड़ा अन्दर जाते ही नज्मा की नींद एक झटके से खुल गयी मारे चुदास को उन्होंने एक धक्का भी पाण्डेयजी के लण्ड पर जड़ दिया पर दूसरे ही पल उन्हें ये महसूस हो गया कि उन्हें चोद रहा व्यक्ति चौहान नहीं है। उनके मुँह से उत्तेजना और घबराहट की मिली जुली आवाज निकली– कक्कौन है ?
पाण्डेयजी– जी मैं पाण्डेय।
नज्मा बेगम – आप कैसे चौ हा––––?
पाण्डेयजी– जी वो ऐसे कि हमने अपनी महबूबाओं की अदला बदली करली सो आपके चौहान साहब जाहिरा बेगम के कमरे में और मैं यहॉ।
नज्मा बेगम(हॉफ़ते हुए)– पर आप ये क्या––––कैसे ? बगैर हमारी इजाजत के।
पाण्डेयजी(बेहयाई से)– जी चोद रहा हूँ आप का बदन देखके रहा न गया। गल्ती हो गई आप को एतराज हो तो कहे तो निकाल लूँू ?
नज्मा बेगम(हॉफ़ते हुए)– मेरा पूरा जिस्म तो चूस चाट और मुँह मार मार के जूठा कर दिया। लण्ड भी तो डाल ही दिया न । अब बचा ही क्या है।
पाण्डेयजी–जी आधा बचा है वैसे वो चौहान अब तक मेरी जाहिरा बेगम को पूरा निगल गया होगा। ये तो मैं हूँ जो अभी तक आधा बचा रखा है।
नज्मा बेगम(धक्का मारते हुए)– अबे तो पूरा करता क्यों नहीं आधी चुदी और पूरी चुदी मे फर्क ही क्या है कहलाऊँगी तो मैं चुदी हुई ही न। मैं जानती हूँ चौहान और तुम साले दोनों पक्के हरामी हो।
पाण्डेयजी(धक्का मारते हुए)– ये बात भी ठीक है।
उधर चौहान साहब जब जाहिरा बेगम के कमरे में पहुँचे तो वो शायद कोई चुदाई का सपना देख रहीं थीं। उनकी रजाई उनके नंगे रेशमी सुर्ख हो रहे बदन से हट चुकी थी। वे दोनों केले के तने जैसी जॉघें फैलाये पावरोटी सी फूली चूत ऊपर को उठा बिस्तर पर कसमसाते हुए पैर रगड़ रही थी।साथ ही बडबड़ा भी रही थीं।
जाहिरा बेगम – आह विकी तेरा अंगारे जैसा सुपाड़ा ओह रगड़ और जोर जोर से मेरी चूत पर।
अपने नये नवेले दामाद का नाम सुनकर चौहान साहब सन्नाटे में आ गये फिर सिर झटककर उन्होंने अपना मौका ताड़ा झटपट कपड़े उतार चुपके से बिस्तर पर चढ़ जाहिरा बेगम की पावरोटी सी चूत के खुले मुँह पर धीरे से अपने फौलदी लन्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा धरा जब वो नहीं जगीं तो धीरे धीरे रगड़ने लगे। जाहिरा बेगम के सपने में हकीकत का रंग आने लगा।
जाहिरा बेगम –आह विकी जल्दी से आजा मेरे जिस्म को तेरे होठों और जीभ की आदत सी पड़ती जा रही है।
चौहान का काम आसान होता जा रहा था।उन्होंने जाहिरा बेगम के बड़े बेल से भी बडे़ दूध से सफेद स्तन के ऊपर लगे काले जामुन से निपल पर डरते डरते होठ रखे। जब वो फिर नहीं जगीं तो बारी बारी से दोनों निपलों को होठों में दबा सहलाने फिर चुभलाने लगे। थोड़ी ही देर में जाहिरा बेगम ने चुदास से अपनी टॉगे पूरी तरह फैलादीं और चूत अपना मुँुह पूरा खोल कर नींद मे बड़बड़ाईं– अब डाल भी दे न।
चौहान ने महसूस किया कि चूत बुरी तरह पनिया रही है तो उन्होंने चुदासी औरत को और तड़पाना ठीक नहीं समझा और कमर के धक्के से एक ही झटके में पूरा फौलदी लन्ड अन्दर धॉस दिया। जाहिरा बेगम चीख पड़ी–उईइइइइइइ मॉ।
जाहिरा बेगम –अरे पाण्डेय ये क्या कौन ।
चौहान साहब – पाण्डेय नहीं चौहान।
जाहिरा बेगम – ये कैसे।
चौहान साहब –पाण्डेय ने कहा स्वाद बदलते है मैं दोस्ती मे इन्कार न कर सका।
जाहिरा बेगम – अच्छा तो हरामी हरामी मौसेरे भाई। वो हरामी नज्मा के पास और तू यहॉ तेरी लार तो मुझे देखकर टपकती ही रहती थी।
चौहान साहब –अजी आप को देख कर जब हमारे दामाद विकी की लार टपकती है मैं तो मैं क्या चीज हूँ । सपने में उसी से चुदवा रही थी ना, जब हुकुम करेंगी भेज दिया करूँगा।
जाहिरा बेगम – क्या बक रहे हो ।
चौहान साहब –जी आप सपने में विकी विकी बड़बडा़ रही थी। कमाल है बाप बेटे दोनो का ख्याल रखती है कुछ मेरा भी ख्याल कर लें।
जाहिरा बेगम(धक्का मारते हुए)– अबे तो हाथ पैर तो हिला या वो भी मुझसे ही करवायेगा।
चौहान साहब((धक्के से धक्के का जवाब देते हुए)– –अजी अभी लो।
उस रात असलम की अम्मा नज्मा खान ने अपनी चूत को मोना के बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान के चौहानी लण्ड के अलावा विकी के पिता गजेन्द पान्डेय के गदह लन्ड से भी जम के चुदवाया और दूसरी तरफ नाजनीन की अम्मा जाहिरा सुलेमान ने अपनी चूत पान्डेयजी के के गदह लन्ड से फड़वाने के साथ साथ चौहान के चौहानी लण्ड से भी जम के सिकवाई।
अगले दिन सब अपनी अपनी चुदाई की यादें अपने दिल में लिए अपने अपने घर चले गये। कुछ ही दिनों बाद विकी और असलम इन्जिनियरिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर चले गये । इन यारों की यारी की आगे की दास्तान जानने के लि्ए पढ़े महिला छात्रावास --5
आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
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महिला छात्रावास --4
गतांक से आगे ......................
विकी और असलम जान गये कि ये दोनो अभी सुपाड़े से ज्यादा नहीं झेल पायेंगी सो उन्होंने उनके जिस्मों से खेलते हुए धीरे धीरे सुपाड़ा अन्दर बाहर कर सुपाडे़ से ही धीरे धीरे चोदना शुरू किया। जहॉ विकी नाजनीन के लम्बे गठीले बदन पर छाया हुआ उसके दूध से सफेद बड़े बड़े लगंड़ा आमों जैसे उरोजों का स्वाद लेते हुए उभरे हुए संगमरमरी चूतड़ों चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी लम्बी जांघों और पिण्डलियों को दबोचते सहलाते हुए सुपाड़े से चोद रहा था। वहीं असलम मोना के गोलमटोल मांसल पर गठीले गुलाबी बदन और की बड़े बड़े भारी चूतड़ों को दोनों हाथों में दबोच उसके गोरी गुलाबी बड़े बड़े खरबूजे जैसे उरोजों पर मुँह मारते हुए धीरे धीरे सुपाड़ा अन्दर बाहर कर रहा था। इसे किस्मत का नजारा ही कहेंगे कि इधर असलम और मोना लगे थे उधर असलम की अम्मा नज्मा खान की चूत को मोना के बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान अपने चौहानी लण्ड से बजा रहे थे वे उछल उछल के चुदवा रही थी। इसी तरह विकी के पिता नाजनीन की अम्मा जाहिरा सुलेमान की चूत की धुनाई कर रहे थे।
दरअसल रमन ने अपने अपने होटल में ही दुल्हे और दुल्हनों के घरवालों के ठहरने का भी इन्तजाम किया था ताकि सुबह बिदाई की रस्म के बाद सबलोग इकट्ठे जा सकें और रात में वापस जा कर सुबह तुरन्त बिदाई की रस्म के लिए वापस आने की परेशानी से बच जायें। सो हुआ यो कि शादी की रस्मों के दौरान नवाब सुलेमान ने एक चिकना मुस्टण्डा लौंडा ढूंूढ लिया था जब शादी की रस्मों के बाद मेहमान जाने लगे तो नवाब सुलेमान भी अपनी बेगम जाहिरा से सर दर्द का बहाना कर और सुबहा जल्दी आने का वादाकर खिसक लिये। जाहिरा सुलेमान ने नजर दौड़ाई तो चिकना भी कहीं नजर नहीं आया तो वे समझ गई और मारे गुस्से के उन्होंने पान्डेयजी से बताया कि आज के दिन भी नवाब सुलेमान अपने नवाबी शौक से बाज नहीं आये। पान्डेयजी उन्हें सहानुभूतिपूर्वक (हमदर्दी से) समझाने लगे तो वे फफक फफक के रोने लगीं।
पान्डेयजी - आप अपने कमरे में जाके आराम करें मैं यहॉ सब सम्भाल लूँगा।
पान्डेयजी उन्हें उनके कमरे में ले गये। बाहों में भर के प्यार किया समझाया कि उनके (पान्डेयजी के) रहते उन्हें चिन्ता करने की जरूरत नहीं। फिर सबके जाने के बाद आने का वादा कर चले आये। कमरा बन्द कर चाभी खुद ले आना नहीं भूले। लोगों के पूछने पर बता दिया कि बेटी के बिदा होने का सोच के बेगम सुलेमान दुखी हैं। शादी ब्याह की रस्मो के बाद जैसे ही दूल्हे और दुल्हनें अपने कमरों में गये। मेहमान भी धीरे धीरे खिसक लिये। दुल्हों और दुल्हनों के घरवालों ने भी अपने कमरों का रास्ता लिया। रास्ता साफ देख पान्डेयजी जाहिरा बेगम का कमरा खोल अन्दर घुस गये। उसी तरह मौका देख ठाकुर वीरेन्द्र चौहान ने असलम की अम्मा नज्मा खान के कमरे का दरवाजा धकेला तो उम्मीद के मुताबिक खुला मिला वे भी चुपके से अन्दर घुस गये और दरवाजा अन्दर से बन्द कर लिया। चौहान साहब ने धीरे से रजाई में घुस के नज्मा खान के मखमली बदन की तरफ हाथ बढाया तो पाया कि वे चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार सिर्फ* नाइटी में थी। बस फिर क्या था नज्मा खान ने अपने गुलाबी बदन और पावरोटी सी चूत को चौहानी लण्ड से जम के सिकवाया। जाहिरा बेगम इससे भी एक कदम आगे निकलीं। वो पाण्डेय जी का इन्तजार रजाई में पूरी नंगी हो कर कर रही थीं। जाहिरा सुलेमान ने पान्डेय जी के घोडे़ जैसे लन्ड की सवारी गॉठ खूब उछल उछल के अपना गुस्सा उतारा। चुदचुदा के थक के जब दोनो औरतें सो गयी तो पान्डेय जी और चौहान साहब अपने कमरों मे जाने के खयाल से चुपके से बाहर निकले पर हाय री किस्मत कि दोनों ने इसके लिए एक ही वक्त चुना सो दोनों एक दूसरे को उनकी माशुकाओं के कमरों से निकलते देख सकपकाये।
पान्डेय – यार चौहान देख बात अपने तक ही रखना मैं भी तेरी बात अपने तक ही रखूँगा।
चौहान –तू फिक्र नाकर पर यार तेरा माल बहुत जोरदार है।
पान्डेय –आ गया ना साले अपनी ठाकुरी औकात पे साले खूबसूरत औरत देखी और लगे लार टपकाने। वैसे दिल तो मेरा भी तेरी नज्मा खान के गुदाज गुलाबी बदन की आहें भरता है पर मैं ने कभी कहा तुझसे।
चौहान – अबे तो बहाने से क्यों कह रहा है तेरी दोस्ती पर ऐसी हजार नज्मा कुरबान। फिर अब तो तेरा दुगना हक है भूल गया अब तो हम दोस्त के साथ साथ रिश्तेदार भी हैं।
पान्डेय –ये बात है तो अपनी तरफ से भी हरी झन्डी। तू भी क्या याद करेगा कि क्या रिश्तेदार मिला है ।
बस फिर क्या था। पान्डेयजी नज्मा के कमरे में दबे पॉव गये। बिस्तर पर गहरी नींद में सोती नज़्मा के दाहिनी तरफ की जगह खाली देख सारे कपडे़ उतार के उसकी रजाई में हौले से समा गये और फिर धीरे से अपने बाई तरफ करवट ले गहरी नींद में सोती नज्मा खान के गुदाज गुलाबी बदन से सट गये उसकी नींद में खलल डाले बगैर। पान्डेयजी का लण्ड नज्मा खान के गुदाज गुलाबी बदन के स्पर्श से टन्ना रहा था। नज्मा बेगम ने सोते सोते उनकी तरफ करवट लेकर अपनी केले के तने जैसी जांघ उनकी जांघों के ऊपर चौहान समझकर चढा दी। नज्मा बेगम की जांघों के बीच में फासला बढ़ाने के लिए पान्डेयजी ने अपनी दायीं जॉघ उनकी दोनो जॉघों के बीच डाल दी अब उनका टन्नाया लन्ड काफी आसानी से नज्मा बेगम की केले के तने जैसी जांघों के बीच में उनकी पावरोटी सी चूत से आसानी से टकराने लगा।
पान्डेयजी धीरे धीरे अपने फौलादी लन्ड के सुपाडे से चूत के मुँह पर सहलाने लगे। खेली खाई चुदक्कड़ औरत का बदन सोते सोते भी यार की मर्जी समझता है सो चूत धीरे धीरे गीली होकर मुँह खोलने लगी। गहरी नींद में सोई नज्मा बेगम का जिस्म पान्डेयजी को चौहान समझकर अपनी सगंमरमरी बाहों मे कसने लगा । उनकी चूँचियॉं पान्डेयजी के मुँह के करीब आती जा रही थीं और निपल तो ठीक होठों के सामने होने से होठों से टकरा भी रहे थे। पान्डेयजी होले होले बारी बारी से दोनों निपलों को होठों में दबा सहलाने फिर चुभलाने लगे। ऐसे ही चूत के मुँह पर लन्ड का सुपाड़ा रगड़ते और निपलों को होठों में चुभलाते पुराने एक्सपर्ट पान्डेयजी ने थोड़ी ही देर में नज्मा बेगम का जिस्म चुदाई को लिए तैयार कर लिया। आदतन चुदक्कड़ नज्मा बेगम अब गहरी नीद से अधसोई हालत में आचुकी थीं और पान्डेयजी को चौहान समझकर मजे ले रही थी। जब पान्डेयजी ने महसूस किया कि चूत अपना मुँुह पूरा खोल कर बुरी तरह पनिया रही है तो उनसे रहा नहीं गया और कमर के धक्के से सुपाड़ा अन्दर डाल ही दिया। सुपाड़ा अन्दर जाते ही नज्मा की नींद एक झटके से खुल गयी मारे चुदास को उन्होंने एक धक्का भी पाण्डेयजी के लण्ड पर जड़ दिया पर दूसरे ही पल उन्हें ये महसूस हो गया कि उन्हें चोद रहा व्यक्ति चौहान नहीं है। उनके मुँह से उत्तेजना और घबराहट की मिली जुली आवाज निकली– कक्कौन है ?
पाण्डेयजी– जी मैं पाण्डेय।
नज्मा बेगम – आप कैसे चौ हा––––?
पाण्डेयजी– जी वो ऐसे कि हमने अपनी महबूबाओं की अदला बदली करली सो आपके चौहान साहब जाहिरा बेगम के कमरे में और मैं यहॉ।
नज्मा बेगम(हॉफ़ते हुए)– पर आप ये क्या––––कैसे ? बगैर हमारी इजाजत के।
पाण्डेयजी(बेहयाई से)– जी चोद रहा हूँ आप का बदन देखके रहा न गया। गल्ती हो गई आप को एतराज हो तो कहे तो निकाल लूँू ?
नज्मा बेगम(हॉफ़ते हुए)– मेरा पूरा जिस्म तो चूस चाट और मुँह मार मार के जूठा कर दिया। लण्ड भी तो डाल ही दिया न । अब बचा ही क्या है।
पाण्डेयजी–जी आधा बचा है वैसे वो चौहान अब तक मेरी जाहिरा बेगम को पूरा निगल गया होगा। ये तो मैं हूँ जो अभी तक आधा बचा रखा है।
नज्मा बेगम(धक्का मारते हुए)– अबे तो पूरा करता क्यों नहीं आधी चुदी और पूरी चुदी मे फर्क ही क्या है कहलाऊँगी तो मैं चुदी हुई ही न। मैं जानती हूँ चौहान और तुम साले दोनों पक्के हरामी हो।
पाण्डेयजी(धक्का मारते हुए)– ये बात भी ठीक है।
उधर चौहान साहब जब जाहिरा बेगम के कमरे में पहुँचे तो वो शायद कोई चुदाई का सपना देख रहीं थीं। उनकी रजाई उनके नंगे रेशमी सुर्ख हो रहे बदन से हट चुकी थी। वे दोनों केले के तने जैसी जॉघें फैलाये पावरोटी सी फूली चूत ऊपर को उठा बिस्तर पर कसमसाते हुए पैर रगड़ रही थी।साथ ही बडबड़ा भी रही थीं।
जाहिरा बेगम – आह विकी तेरा अंगारे जैसा सुपाड़ा ओह रगड़ और जोर जोर से मेरी चूत पर।
अपने नये नवेले दामाद का नाम सुनकर चौहान साहब सन्नाटे में आ गये फिर सिर झटककर उन्होंने अपना मौका ताड़ा झटपट कपड़े उतार चुपके से बिस्तर पर चढ़ जाहिरा बेगम की पावरोटी सी चूत के खुले मुँह पर धीरे से अपने फौलदी लन्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा धरा जब वो नहीं जगीं तो धीरे धीरे रगड़ने लगे। जाहिरा बेगम के सपने में हकीकत का रंग आने लगा।
जाहिरा बेगम –आह विकी जल्दी से आजा मेरे जिस्म को तेरे होठों और जीभ की आदत सी पड़ती जा रही है।
चौहान का काम आसान होता जा रहा था।उन्होंने जाहिरा बेगम के बड़े बेल से भी बडे़ दूध से सफेद स्तन के ऊपर लगे काले जामुन से निपल पर डरते डरते होठ रखे। जब वो फिर नहीं जगीं तो बारी बारी से दोनों निपलों को होठों में दबा सहलाने फिर चुभलाने लगे। थोड़ी ही देर में जाहिरा बेगम ने चुदास से अपनी टॉगे पूरी तरह फैलादीं और चूत अपना मुँुह पूरा खोल कर नींद मे बड़बड़ाईं– अब डाल भी दे न।
चौहान ने महसूस किया कि चूत बुरी तरह पनिया रही है तो उन्होंने चुदासी औरत को और तड़पाना ठीक नहीं समझा और कमर के धक्के से एक ही झटके में पूरा फौलदी लन्ड अन्दर धॉस दिया। जाहिरा बेगम चीख पड़ी–उईइइइइइइ मॉ।
जाहिरा बेगम –अरे पाण्डेय ये क्या कौन ।
चौहान साहब – पाण्डेय नहीं चौहान।
जाहिरा बेगम – ये कैसे।
चौहान साहब –पाण्डेय ने कहा स्वाद बदलते है मैं दोस्ती मे इन्कार न कर सका।
जाहिरा बेगम – अच्छा तो हरामी हरामी मौसेरे भाई। वो हरामी नज्मा के पास और तू यहॉ तेरी लार तो मुझे देखकर टपकती ही रहती थी।
चौहान साहब –अजी आप को देख कर जब हमारे दामाद विकी की लार टपकती है मैं तो मैं क्या चीज हूँ । सपने में उसी से चुदवा रही थी ना, जब हुकुम करेंगी भेज दिया करूँगा।
जाहिरा बेगम – क्या बक रहे हो ।
चौहान साहब –जी आप सपने में विकी विकी बड़बडा़ रही थी। कमाल है बाप बेटे दोनो का ख्याल रखती है कुछ मेरा भी ख्याल कर लें।
जाहिरा बेगम(धक्का मारते हुए)– अबे तो हाथ पैर तो हिला या वो भी मुझसे ही करवायेगा।
चौहान साहब((धक्के से धक्के का जवाब देते हुए)– –अजी अभी लो।
उस रात असलम की अम्मा नज्मा खान ने अपनी चूत को मोना के बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान के चौहानी लण्ड के अलावा विकी के पिता गजेन्द पान्डेय के गदह लन्ड से भी जम के चुदवाया और दूसरी तरफ नाजनीन की अम्मा जाहिरा सुलेमान ने अपनी चूत पान्डेयजी के के गदह लन्ड से फड़वाने के साथ साथ चौहान के चौहानी लण्ड से भी जम के सिकवाई।
अगले दिन सब अपनी अपनी चुदाई की यादें अपने दिल में लिए अपने अपने घर चले गये। कुछ ही दिनों बाद विकी और असलम इन्जिनियरिंग की पढ़ाई के लिए दूसरे शहर चले गये । इन यारों की यारी की आगे की दास्तान जानने के लि्ए पढ़े महिला छात्रावास --5
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विकी और असलम बचपन के दोस्त थे । दोनों पास ही पास रहते एक साथ ही खेलते और पढ़ाई करते थे। दोनों हमेशा बदमाशी में अव्वल और पढ़ाई में अव्वल नहीं तो कम भी नहीं थे। दोनों दोस्त साथ साथ खेलते खाते बड़े हुए थे और अब बी एस सी करने के बाद उनकी बदमाशियों को मद्देनजर रखते हुए उनके मॉं बाप ने उन्हें बाहर इन्जिनियरिंग पढ़ने भेजने से पहले उनकी शादी करदेने का फैसला कर दिया था उनकी शादियॉ भी उनकी पसन्द की साथ में ही पड़ने वाली दो लड़कियों नाज़नीन और मोना से हो रही थीं।
विकी असलम के पास पहुँचा। विकी ने सारा किस्सा नाज़नीन की शर्त सहित सुना दिया। सुनकर एक पल को असलम जरा सा चौंका पर दूसरे ही पल अपनी आदत के मुताबिक ठहाका मार के बोला- अबे ये तो तू बड़ी अच्छी खबर लाया है। जरा सोच मुझे मेरी ससुराल में चुदाई की कितनी सहुलियत रहेगी मेरे तो मजे ही मजे हैं। तू भी जब जी चाहे स्वाद बदलने आजाया करना। इसमें तू इतना घबराया हुआ क्यों है और ये क्या मातमी सूरत बना रखी है।
यार मजाक छोड़ मैं नाज़नीन की शर्त की वजह से परेशान हूँ - विकी झल्लाया ।
क्या मोना को ये सब मालुम है - असलम ने पूछा ।
हॉ - विकी ने बताया।
तू इतना घबरा मत मैं कुछ सोचता हूँ - असलम ने उसे दिलासा दी।
थोड़ी देर दोनों खुसुर फुसुर करते रहे फिर कुछ तय करके अपने एक दोस्त रमन को फोन किया और सारी योजना बना लेने के बाद दोनों ने विकी के पिताजी से मिलने का निश्चय किया। विकी के पिताजी प्रो गजेन्द्र पाण्डेय के दफ्तर में मोना के पिताजी बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान भी बैठे गप्पें मार रहे थे। दोनों वहीं जा धमके। विकी के पिताजी पाण्डेयजी ने जैसे ही दोनों को देखा तो बोल पडे़ - कहॉं से आ रही है तशरीफ इस जुगल जोड़ी की।
जी कुछ नहीं बस ऐसे ही - असलम ने सर झुका के जवाब दिया।
ठाकुर वीरेन्द्र चौहान ने छेड़ा- अब चार रोज में शादी होने को है और तुम लोग हो कि बस ऐसे ही यानि कि कमाल है।
जी उसी सिलसिले में कुछ अर्ज करना चाहते थे - विकी ने मुँह खोला।
पाण्डेयजी - बोलो
जी हम चाहते हैं कि हम दोनों की शादी एक ही दिन एक ही छत के नीचे हो - असलम ने सर झुकाये झुकाये ही जवाब दिया।
मियां बावले हुए हो कहॉं से लाओगे इतनी बड़ी छत कि तुम्हारे निकाह का इतना टीम झाम फिर विकी की शादी का मण्डप फिर कितने सारे लोग - ठाकुर वीरेन्द्र चौहान बड़बड़ाये।
जी उसकी आप फिक्र ना करें।वो हमारा दोस्त है न रमन ओबेरॉय उसने अपने होटल में सब इन्तजाम कर देने का वादा किया है - विकी ने जवाब दिया।
थोड़ी नानुकुर के बाद पाण्डेय जी और ठाकुर वीरेन्द्र चौहान मान गये।
रमन ने अपने वादे के मुताबिक अपने होटल मे सारा इन्तजाम बहुत शान्दार तरीके से करवाया था। न सिर्फ दोनों की शादी का इन्तजाम अगल बगल था बल्कि यहॉ तक कि शादी के बाद दोनों की सुहागरात के कमरे भी अगल बगल थे। शादी के बाद विकी और असलम ने एकदूसरे को मुबारकबाद दी और धड़कते दिल से अपने अपने सुहागरात के कमरे में पहुँचे। जैसे ही विकी कमरे में पहुँचा मोना ने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा और बोली - अपना नाज़नीन से किया वादा याद है ।
विकी - हॉ ।
मोना - तो पूरा करो अपना वादा।
विकी ने दोनों कमरों के बीच का दरवाजा खटखटाया । असलम ने दरवाजा खोला असलम और नाज़नीन दोनों दरवाजे पर ही खड़े थे ।
असलम - आओ विकी ।
विकी - मैं एक बार फिर दोनो लड़कियों से कहना चाहूँगा कि आप दोनो एक बार और सोचले ऐसा न हो कि बाद में अपने दिल में आप दोनों शर्मिन्दगी महसूस करें वैसे मुझे और असलम को कोई फर्क नहीं पड़ता।
नाज़नीन ने विकी का हाथ पकड़ के अपनी तरफ खीचा - अब ये लम्बे लम्बे डायलाग मारने के बजाय कुछ करके दिखा।
लगभग साथ ही मोना असलम को धकियाते अपने कमरे में ले जाते हुए बोली - तू ठीक कहती है नाज़ो ये दोनो हॉकते बड़ी लम्बी-लम्बी हैं। चल उल्लू (मोना असलम को उल्लू कह के ही बुलाती थी) आज मैं देखूँगी कि तू क्या कुछ कर पाता है।
मोना ने असलम को अपने कमरे में धकेल कर पीछे दरवाजा बन्द कर दिया।
इधर नाज़नीन के अचानक खीचने से विकी लड़खड़ाया तो नाज़नीन ने उसे धक्का दे बिस्तर पर गिरा दिया। फिर अपनी साड़ी पेटीकोट समेटते हुए विकी के ऊपर चड़कर बैठ गई। तबतक विकी संभल चुका था। उसकी नजर नाज़नीन की ऊपर को सिमटी साड़ी पेटीकोट के अन्दर से झॉकती गुलाबी गोरी मांसल रेशमी पिंडलियों और जांघों पर पड़ी। एक हाथ से उन्हें सहलाते हुए दूसरे हाथ से साड़ी खीचकर उतार दी। फिर पेटीकोट का नारा खीचकर खोल दिया। नाज़नीन ने स्वयं दोनो हाथों से पकड़ पेटीकोट सिर की तरफ से उतारने में विकी की सहायता की। विकी ने देखा नाज़नीन ने पेटीकोट के नीचे कच्छी नहीं पहनी थी।
विकी के मुँह से निकला -अरे तूने तो कच्छी ही नहीं पहनी है।
नाज़नीन - जब तुझसे सील तुड़वानी ही है कच्छी का झंझट क्यों रखना।
ये सुनकर विकी ने खीचकर उसे अपने ऊपर गिरा लिया और उसके रसभर होठों पर अपने होंठ जमा दिये । नाज़नीन कमर से नीचे बिलकुल नंगी थी। विकी का बायॉ हाथ नाज़नीन के नंगे गदराये संगमरमरी चूतड़ों के उभारों पर मचल रहा था और दायॉं हाथ उसके ब्लाउज के अन्दर गदराये आमों को टटोल रहा था। ब्लाउज के चुटपुटिया वाले बटन ये ज्यादती बरदास्त न कर सके और चटपट खुल गये। विकी ने ब्लाउज उतार फेंका अब नाजनीन के बदन पर सिर्फ* ब्रा बची थी विकी ने देखा गहरे गले की ब्रा में से बड़े बड़े लंगडा आमों जैसे स्तन उछल मचल रहे थे । उसने ब्रा का हुकखोल कर उन्हें आजाद कर दिया और लंगडा आमों को हाथों से और उनपर लगे अंगूरों को दॉतों से पकड़ने की कोशिश करने लगा। नाजनीन के मुँह से सिसकारियॉं छूटने लगीं । इस बीच नाज़नीन ने विकी की शर्ट के बटन और पैंट की बेल्ट खोल डाले थे। जब वो पैंट की जिप खोलकर कर उसका साढ़े सात इंची लण्ड थाम बाहर निकालने लगी तो विकी ने अपने बायें हाथ से पैंट खिसकाकर उतारने में उसकी मदद की। नाजनीन ने उसका लण्ड अपनी जॉघो के बीच में दबाकर मसलते हुए सिसकी ली - हाय विकी आज तू मुझे वही जलवा दिखा दे जिसने मेरी मॉ को तेरा दीवाना बना दिया है मैंने आज ही के दिन के लिए अपनी बुर कोरी बचाके रखी थी।
अब विकी के लिए भी रूकना मुश्किल हो रहा था। उसने नाजनीन को पलट दिया और खुद उसके ऊपर आ गया । वो नाजनीन के गदराये कोमल गुलाबी गदराये बदन को देख देख के पागल हो रहा था और जहॉ तहॉ मुँह मार रहा था। बुरी तरह हाथों से दबोच और मसल रहा था। जब उससे नहीं रहा गया तो वो नाजनीन की दोनों दूध सी सफेद संगमरमरी मांसल टॉगों के बीच में बैठ गया। बारी बारी से दोनो टॉंगे उठा के कन्धों पर रख लीं। नाजनीन की बिना बालों वाली गोरी गुलाबी कुँवारी अनचुदी बुर ऊपर की तरफ उभर आई। विकी उसपर अपना मस्ताना सुपाड़ा रगडते हुए बोला - हाय नाजो तेरी तरह तेरी मॉ की चूत पर भी बाल नही हैं।
हॉ विकी हाय अब और न तड़पा - नाजनीन ने सिसकारी लेते हुए अपने दोनों हॉथों से अपनी बुर की फॉके फैलायी।
विकी ने देखा नाजनीन की बुर बुरी तरह पनिया रही है। उसने अपने लण्ड का सुपाड़ा बुर के मुहाने पर रखा और धीरे धीरे अन्दर की तरफ ठेलने लगा। कुँवारी अनचुदी बुर की सील तोड़ने का उसे अनुभव था नहीं और जोर जबरदस्ती करने का न तो कोई मकसद था न मतलब। लण्ड बार बार फिसल जाता था।
लगभग यही किस्सा बल्कि इससे भी बुरा बगल के कमरे में असलम और मोना का हो रहा था। क्योंकि एक तो असलम का लण्ड लम्बाई में विकी से उन्नीस तो मोटाई में बीस था । ऊपर से असलम की लखनऊआ शराफत आडे़ आ जा रही थी। उसकी लखनऊआ शराफत का बस इसी से अन्दाजा लगाये कि जब मोना उसे धकियाते हुए कमरे में ले गयी थी तो उसने एक बार फिर मोना को ऊँचनीच समझाने की कोशिश की। मोना झुंझला के बोली - ये ऊँचनीच तूने अपनी अम्मा को क्यों नहीं समझाई जब वो मेरे बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान से उछल उछल के चुदवा रही थी मैंने तुझे दिखाया था न। मैं शर्त लगा सकती हूँ कि आज भी इस शादी ब्याह की गहमा गहमी में वो मेरे बाप के कमरे में ही होगी।
असलम दरअसल छोटी उमर में ही बेवा हो जाने…………
तभी मोना ने अपना बडे़ खरबूजे जैसे बायें स्तन का ढक्कन उसके मुँह पर लगा दिया और बोली - चुप उल्लू फिर बकबक शुरू कर दी। उधर तेरी बीबी अबतक तो अपने यार के गधे जैसे लण्ड से फड़वा भी चुकी होगी …………वगैरह…………वगैरह
हॉ तो मैं बता रहा था इधर विकी के लण्ड का सुपाड़ा नाजनीन की बुर में नही घुस रहा था उधर असलम भी परेशान था उसका मोटा हथौड़े सा सुपाड़ा मोना की मालपुए सी बुर में नहीं जा रहा था। मोना झुंझलाई - जाने कैसे उल्लू से पाला पड़ा है बड़ा चुदक्कड बना फिरता था जाने मेरी किस्मत में तेरे लण्ड से सील तुड़वाना बदा भी है या नहीं।
मोना ने उसे अपने ऊपर से हटाया और बिस्तर से उठ खड़ी हुई। फिर असलम का लण्ड पकड़ के लगभग खीचते हुए दोनों कमरों के बीच के दरवाजे की तरफ ऐसे गई जैसे कोई कुत्ते के पे को खीचते ले जा रहा हो। उसने बीच का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खुला तो सामने हैरान परेशान विकी व नाजनीन नगधड़ंग खड़े थे। चारो एकदूसरे की शकल देखकर सारा माजरा समझ गये और अपनी हालत पर ठहाका मार के हॅंस पड़े।
मोना नाजनीन से बोली - लगता है इन दोनो ने अबतक बड़े बड़े भोसड़े ही चोदे हैं नई कोरी बुर की सील तोड़ना इनके बस की बात नहीं। बड़े चुदक्कड़ बने फिरते थे दोनो।
ये बात नहीं सील तो हम अभी तोड़ दें पर तुम्हें दर्द बहुत होगा। सिर्फ इस बात से डरते हैं - असलम ने जवाब दिया।
हमारे दर्द की फिक्र छोड़ अगर आप कुछ करके दिखायें नवाब साहब तो बड़ी मेहरबानी होगी - मोना ने उसी अन्दाज़ में जवाब दिया।
विकी और असलम ने एकदूसरे की तरफ देखा फिर सामने खड़ी दोनों लड़कियों की तरफ देखा। जहॉ नाजनीन का बदन लम्बा गठीला दूध से सफेद बड़े बड़े लगंाड़ा आमों जैसे उरोज उभरे हुए संगमरमरी चूतड़ चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी लम्बी जांघें पिण्डलियां वहीं मोना छोटे कद की गोरी गुलाबी बड़े बड़े खरबूजे जैसे उरोजों और की बड़े बड़े भारी चूतड़ों वाली मांसल गठीले बदन की पर कुछ कुछ गोलमटोल सी लड़की थी।
दोनों लड़कियों ने जब विकी और असलम को अपनी तरफ घूरते देखा तो बोल पड़ी - क्या देख रहे हो।
विकी ने असलम की तरफ देखा और जवाब दिया - हम देख रहे हैं कि रसगुल्ला और रसमलाई साथ साथ खड़े हैं।
असलम मोना पर झपटते हुए बोला - ठीक कहा विकी ने और अब हम उन्हें खाने जा रहे हैं।
विकी ने नाजनीन को और असलम ने मोना को उठाकर उसी कमरे के बिस्तर पर अगल बगल पटक दिया।
नाजनीन और मोना ने खुशी खुशी अपनी बुर की फॉके फैलाईं विकी ने अपना सुपाड़ा नाजनीन की और असलम ने मोना की बुर पर रखा और दोनों ने जोर से धक्का मारा। पर ये क्या लण्ड फिर फिसल गये । ये देख लडकियॉ फिर हॅस पड़ी। मोना बोली ठहरो लड़कों लगता है जोश से नहीं होश से काम लेना होगा।
मोना ने असलम को अपने ऊपर से हटाया और उठकर नाजनीन से बोली - चल बारी बारी से निपटाते हैं।
नाजनीन - क्या मतलब।
मोना - पहले तेरी सील तुड़वाने में मैं तेरी मदद करूँगी हूँ फिर तू मेरी करना।
नाजनीन - वो कैसे
मोना - तू अपनी बूर फैला।
नाजनीन ने अपने दोनो हाथों से अपनी बुर की फॉके फैलाईं। मोना ने विकी का लण्ड थामा और पहली बार नजदीक से देखा गधे जैसा लम्बा लग रहा था। अचानक मोना और विकी की नजर मिली मोना मुस्कराई और बोली - ले नाजो पूरी करले अपने मन की मुराद।
मोना ने नाजनीन की बुर की फैली फॉकों के बीच एक हाथ की उगंलियों से छेद टटोला फिर दूसरे हाथ से विकी के लण्ड का सुपाड़ा छेद के ठिकाने पर रखा। लण्ड पकड़े पकड़े ही विकी को धक्का मारने का इशारा किया। विकी ने धक्का मारा। इसबार सुपाड़ा नहीं फिसला और पकसे सील तोड़ते हुए घुस गया।
नाजनीन चिल्लाई - उई इइइइ मॉअअआााा मर गईइइइ।
मोना - घबरा मत मरेगी नहीं न ही मरी है पर तेरी फट जरूर गयी है पर तू ही तो मेरे मर्द से फड़वाना चाहती थी चल अब तू अपने मर्द से से मेरी फड़वा।
ये कहकर मोना ने विकी का लण्ड जोकि उसने छोड़ा नहीं था अपने हाथ से खीच कर नाजनीन की बुर से बाहर निकाल लिया।
फिर मोना ने लेट कर अपने दोनो हाथों से अपनी बुर की फॉके फैला दीं और बोली - अब चीखना बन्द कर और आ कर मदद कर मेरी, जैसे अभी मैने तेरी की थी।
नाजनीन कराहते हुए उठी । विकी ने उसकी बुर से खुन निकलते देखा तो एक छोटा तौलिया उसकी तरफ बढ़ा दिया। नाजनीन ने बायें हाथ से तौलिया ले कर बुर पर लगा लिया फिर बुर से खुन पोछ कर तौलिया असलम को दिखाते हुए बोली ये देख रहा है न। फिर दाहिने हाथ से पहली बार असलम का लण्ड थामा और खीरे या यों कहें नाइसिल पाउडर के डिब्बे के इतना मोटा सुपाड़ा देख मुस्कराई और बोली - अब तू भी दिखा इसका कमाल इस मोना की बच्ची को। नाजनीन ने मोना की गुदाज बुर की फॉकों के बीच में बड़ी मुश्किल से छेद ढूंढकर सुपाड़ा निशाने पर रखा। मोना ने सिसकी ली - हाय नाजो कितना मोटा है तेरी तो सिर्फ* फटी है मेरी तो चिर भी जायेगी। असलम ने धक्का मारा और नाजनीन ने भी इसबार लण्ड फिसलने नहीं दिया और मोना के मुँह से निकला - अरे मेरी गई रे उई इइइइ मॉअअआााा मर गईइइइ। असलम झुककर उसका निपल चूसने लगा
सुपाड़ा मोना की बुर की सील तोड़कर अन्दर घुस के ऐसे फॅस गया जैसे बोतल मे कार्क का ढक्कन लग गया हो।
नाजनीन बोली अब बोल पहले तो मेरा मजाक उड़ा रही थी।
विकी ने उसे खीचकर बगल में गिरा लिया और उसे सम्भलने का मौका दिए बगैर दोनों टॉगे उठा के कन्धों पे रखते हुए कहा - चल उसे अब तेरी मदद की जरूरत नहीं अब हम दोनों अपना अधूरा खेल पूरा करते हैं उसने बिना देर किये अपने लण्ड का सुपाड़ा नाजनीन की बुर के मुहाने पर रखा एक जोरदार धक्का और पक से सुपाड़ा अन्दर डाल दिया।
नाजनीन - उई धीरे से यार।
क्रमशः ............................................
आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
(¨`·.·´¨) Always
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(¨`·.·´¨)¸.·´ Keep Smiling !
`·.¸.·´ -- raj
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महिला छात्रावास --3
विकी और असलम बचपन के दोस्त थे । दोनों पास ही पास रहते एक साथ ही खेलते और पढ़ाई करते थे। दोनों हमेशा बदमाशी में अव्वल और पढ़ाई में अव्वल नहीं तो कम भी नहीं थे। दोनों दोस्त साथ साथ खेलते खाते बड़े हुए थे और अब बी एस सी करने के बाद उनकी बदमाशियों को मद्देनजर रखते हुए उनके मॉं बाप ने उन्हें बाहर इन्जिनियरिंग पढ़ने भेजने से पहले उनकी शादी करदेने का फैसला कर दिया था उनकी शादियॉ भी उनकी पसन्द की साथ में ही पड़ने वाली दो लड़कियों नाज़नीन और मोना से हो रही थीं।
विकी असलम के पास पहुँचा। विकी ने सारा किस्सा नाज़नीन की शर्त सहित सुना दिया। सुनकर एक पल को असलम जरा सा चौंका पर दूसरे ही पल अपनी आदत के मुताबिक ठहाका मार के बोला- अबे ये तो तू बड़ी अच्छी खबर लाया है। जरा सोच मुझे मेरी ससुराल में चुदाई की कितनी सहुलियत रहेगी मेरे तो मजे ही मजे हैं। तू भी जब जी चाहे स्वाद बदलने आजाया करना। इसमें तू इतना घबराया हुआ क्यों है और ये क्या मातमी सूरत बना रखी है।
यार मजाक छोड़ मैं नाज़नीन की शर्त की वजह से परेशान हूँ - विकी झल्लाया ।
क्या मोना को ये सब मालुम है - असलम ने पूछा ।
हॉ - विकी ने बताया।
तू इतना घबरा मत मैं कुछ सोचता हूँ - असलम ने उसे दिलासा दी।
थोड़ी देर दोनों खुसुर फुसुर करते रहे फिर कुछ तय करके अपने एक दोस्त रमन को फोन किया और सारी योजना बना लेने के बाद दोनों ने विकी के पिताजी से मिलने का निश्चय किया। विकी के पिताजी प्रो गजेन्द्र पाण्डेय के दफ्तर में मोना के पिताजी बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान भी बैठे गप्पें मार रहे थे। दोनों वहीं जा धमके। विकी के पिताजी पाण्डेयजी ने जैसे ही दोनों को देखा तो बोल पडे़ - कहॉं से आ रही है तशरीफ इस जुगल जोड़ी की।
जी कुछ नहीं बस ऐसे ही - असलम ने सर झुका के जवाब दिया।
ठाकुर वीरेन्द्र चौहान ने छेड़ा- अब चार रोज में शादी होने को है और तुम लोग हो कि बस ऐसे ही यानि कि कमाल है।
जी उसी सिलसिले में कुछ अर्ज करना चाहते थे - विकी ने मुँह खोला।
पाण्डेयजी - बोलो
जी हम चाहते हैं कि हम दोनों की शादी एक ही दिन एक ही छत के नीचे हो - असलम ने सर झुकाये झुकाये ही जवाब दिया।
मियां बावले हुए हो कहॉं से लाओगे इतनी बड़ी छत कि तुम्हारे निकाह का इतना टीम झाम फिर विकी की शादी का मण्डप फिर कितने सारे लोग - ठाकुर वीरेन्द्र चौहान बड़बड़ाये।
जी उसकी आप फिक्र ना करें।वो हमारा दोस्त है न रमन ओबेरॉय उसने अपने होटल में सब इन्तजाम कर देने का वादा किया है - विकी ने जवाब दिया।
थोड़ी नानुकुर के बाद पाण्डेय जी और ठाकुर वीरेन्द्र चौहान मान गये।
रमन ने अपने वादे के मुताबिक अपने होटल मे सारा इन्तजाम बहुत शान्दार तरीके से करवाया था। न सिर्फ दोनों की शादी का इन्तजाम अगल बगल था बल्कि यहॉ तक कि शादी के बाद दोनों की सुहागरात के कमरे भी अगल बगल थे। शादी के बाद विकी और असलम ने एकदूसरे को मुबारकबाद दी और धड़कते दिल से अपने अपने सुहागरात के कमरे में पहुँचे। जैसे ही विकी कमरे में पहुँचा मोना ने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा और बोली - अपना नाज़नीन से किया वादा याद है ।
विकी - हॉ ।
मोना - तो पूरा करो अपना वादा।
विकी ने दोनों कमरों के बीच का दरवाजा खटखटाया । असलम ने दरवाजा खोला असलम और नाज़नीन दोनों दरवाजे पर ही खड़े थे ।
असलम - आओ विकी ।
विकी - मैं एक बार फिर दोनो लड़कियों से कहना चाहूँगा कि आप दोनो एक बार और सोचले ऐसा न हो कि बाद में अपने दिल में आप दोनों शर्मिन्दगी महसूस करें वैसे मुझे और असलम को कोई फर्क नहीं पड़ता।
नाज़नीन ने विकी का हाथ पकड़ के अपनी तरफ खीचा - अब ये लम्बे लम्बे डायलाग मारने के बजाय कुछ करके दिखा।
लगभग साथ ही मोना असलम को धकियाते अपने कमरे में ले जाते हुए बोली - तू ठीक कहती है नाज़ो ये दोनो हॉकते बड़ी लम्बी-लम्बी हैं। चल उल्लू (मोना असलम को उल्लू कह के ही बुलाती थी) आज मैं देखूँगी कि तू क्या कुछ कर पाता है।
मोना ने असलम को अपने कमरे में धकेल कर पीछे दरवाजा बन्द कर दिया।
इधर नाज़नीन के अचानक खीचने से विकी लड़खड़ाया तो नाज़नीन ने उसे धक्का दे बिस्तर पर गिरा दिया। फिर अपनी साड़ी पेटीकोट समेटते हुए विकी के ऊपर चड़कर बैठ गई। तबतक विकी संभल चुका था। उसकी नजर नाज़नीन की ऊपर को सिमटी साड़ी पेटीकोट के अन्दर से झॉकती गुलाबी गोरी मांसल रेशमी पिंडलियों और जांघों पर पड़ी। एक हाथ से उन्हें सहलाते हुए दूसरे हाथ से साड़ी खीचकर उतार दी। फिर पेटीकोट का नारा खीचकर खोल दिया। नाज़नीन ने स्वयं दोनो हाथों से पकड़ पेटीकोट सिर की तरफ से उतारने में विकी की सहायता की। विकी ने देखा नाज़नीन ने पेटीकोट के नीचे कच्छी नहीं पहनी थी।
विकी के मुँह से निकला -अरे तूने तो कच्छी ही नहीं पहनी है।
नाज़नीन - जब तुझसे सील तुड़वानी ही है कच्छी का झंझट क्यों रखना।
ये सुनकर विकी ने खीचकर उसे अपने ऊपर गिरा लिया और उसके रसभर होठों पर अपने होंठ जमा दिये । नाज़नीन कमर से नीचे बिलकुल नंगी थी। विकी का बायॉ हाथ नाज़नीन के नंगे गदराये संगमरमरी चूतड़ों के उभारों पर मचल रहा था और दायॉं हाथ उसके ब्लाउज के अन्दर गदराये आमों को टटोल रहा था। ब्लाउज के चुटपुटिया वाले बटन ये ज्यादती बरदास्त न कर सके और चटपट खुल गये। विकी ने ब्लाउज उतार फेंका अब नाजनीन के बदन पर सिर्फ* ब्रा बची थी विकी ने देखा गहरे गले की ब्रा में से बड़े बड़े लंगडा आमों जैसे स्तन उछल मचल रहे थे । उसने ब्रा का हुकखोल कर उन्हें आजाद कर दिया और लंगडा आमों को हाथों से और उनपर लगे अंगूरों को दॉतों से पकड़ने की कोशिश करने लगा। नाजनीन के मुँह से सिसकारियॉं छूटने लगीं । इस बीच नाज़नीन ने विकी की शर्ट के बटन और पैंट की बेल्ट खोल डाले थे। जब वो पैंट की जिप खोलकर कर उसका साढ़े सात इंची लण्ड थाम बाहर निकालने लगी तो विकी ने अपने बायें हाथ से पैंट खिसकाकर उतारने में उसकी मदद की। नाजनीन ने उसका लण्ड अपनी जॉघो के बीच में दबाकर मसलते हुए सिसकी ली - हाय विकी आज तू मुझे वही जलवा दिखा दे जिसने मेरी मॉ को तेरा दीवाना बना दिया है मैंने आज ही के दिन के लिए अपनी बुर कोरी बचाके रखी थी।
अब विकी के लिए भी रूकना मुश्किल हो रहा था। उसने नाजनीन को पलट दिया और खुद उसके ऊपर आ गया । वो नाजनीन के गदराये कोमल गुलाबी गदराये बदन को देख देख के पागल हो रहा था और जहॉ तहॉ मुँह मार रहा था। बुरी तरह हाथों से दबोच और मसल रहा था। जब उससे नहीं रहा गया तो वो नाजनीन की दोनों दूध सी सफेद संगमरमरी मांसल टॉगों के बीच में बैठ गया। बारी बारी से दोनो टॉंगे उठा के कन्धों पर रख लीं। नाजनीन की बिना बालों वाली गोरी गुलाबी कुँवारी अनचुदी बुर ऊपर की तरफ उभर आई। विकी उसपर अपना मस्ताना सुपाड़ा रगडते हुए बोला - हाय नाजो तेरी तरह तेरी मॉ की चूत पर भी बाल नही हैं।
हॉ विकी हाय अब और न तड़पा - नाजनीन ने सिसकारी लेते हुए अपने दोनों हॉथों से अपनी बुर की फॉके फैलायी।
विकी ने देखा नाजनीन की बुर बुरी तरह पनिया रही है। उसने अपने लण्ड का सुपाड़ा बुर के मुहाने पर रखा और धीरे धीरे अन्दर की तरफ ठेलने लगा। कुँवारी अनचुदी बुर की सील तोड़ने का उसे अनुभव था नहीं और जोर जबरदस्ती करने का न तो कोई मकसद था न मतलब। लण्ड बार बार फिसल जाता था।
लगभग यही किस्सा बल्कि इससे भी बुरा बगल के कमरे में असलम और मोना का हो रहा था। क्योंकि एक तो असलम का लण्ड लम्बाई में विकी से उन्नीस तो मोटाई में बीस था । ऊपर से असलम की लखनऊआ शराफत आडे़ आ जा रही थी। उसकी लखनऊआ शराफत का बस इसी से अन्दाजा लगाये कि जब मोना उसे धकियाते हुए कमरे में ले गयी थी तो उसने एक बार फिर मोना को ऊँचनीच समझाने की कोशिश की। मोना झुंझला के बोली - ये ऊँचनीच तूने अपनी अम्मा को क्यों नहीं समझाई जब वो मेरे बापू ठाकुर वीरेन्द्र चौहान से उछल उछल के चुदवा रही थी मैंने तुझे दिखाया था न। मैं शर्त लगा सकती हूँ कि आज भी इस शादी ब्याह की गहमा गहमी में वो मेरे बाप के कमरे में ही होगी।
असलम दरअसल छोटी उमर में ही बेवा हो जाने…………
तभी मोना ने अपना बडे़ खरबूजे जैसे बायें स्तन का ढक्कन उसके मुँह पर लगा दिया और बोली - चुप उल्लू फिर बकबक शुरू कर दी। उधर तेरी बीबी अबतक तो अपने यार के गधे जैसे लण्ड से फड़वा भी चुकी होगी …………वगैरह…………वगैरह
हॉ तो मैं बता रहा था इधर विकी के लण्ड का सुपाड़ा नाजनीन की बुर में नही घुस रहा था उधर असलम भी परेशान था उसका मोटा हथौड़े सा सुपाड़ा मोना की मालपुए सी बुर में नहीं जा रहा था। मोना झुंझलाई - जाने कैसे उल्लू से पाला पड़ा है बड़ा चुदक्कड बना फिरता था जाने मेरी किस्मत में तेरे लण्ड से सील तुड़वाना बदा भी है या नहीं।
मोना ने उसे अपने ऊपर से हटाया और बिस्तर से उठ खड़ी हुई। फिर असलम का लण्ड पकड़ के लगभग खीचते हुए दोनों कमरों के बीच के दरवाजे की तरफ ऐसे गई जैसे कोई कुत्ते के पे को खीचते ले जा रहा हो। उसने बीच का दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खुला तो सामने हैरान परेशान विकी व नाजनीन नगधड़ंग खड़े थे। चारो एकदूसरे की शकल देखकर सारा माजरा समझ गये और अपनी हालत पर ठहाका मार के हॅंस पड़े।
मोना नाजनीन से बोली - लगता है इन दोनो ने अबतक बड़े बड़े भोसड़े ही चोदे हैं नई कोरी बुर की सील तोड़ना इनके बस की बात नहीं। बड़े चुदक्कड़ बने फिरते थे दोनो।
ये बात नहीं सील तो हम अभी तोड़ दें पर तुम्हें दर्द बहुत होगा। सिर्फ इस बात से डरते हैं - असलम ने जवाब दिया।
हमारे दर्द की फिक्र छोड़ अगर आप कुछ करके दिखायें नवाब साहब तो बड़ी मेहरबानी होगी - मोना ने उसी अन्दाज़ में जवाब दिया।
विकी और असलम ने एकदूसरे की तरफ देखा फिर सामने खड़ी दोनों लड़कियों की तरफ देखा। जहॉ नाजनीन का बदन लम्बा गठीला दूध से सफेद बड़े बड़े लगंाड़ा आमों जैसे उरोज उभरे हुए संगमरमरी चूतड़ चिकनी मोटी मोटी गोरी गुलाबी संगमरमरी लम्बी जांघें पिण्डलियां वहीं मोना छोटे कद की गोरी गुलाबी बड़े बड़े खरबूजे जैसे उरोजों और की बड़े बड़े भारी चूतड़ों वाली मांसल गठीले बदन की पर कुछ कुछ गोलमटोल सी लड़की थी।
दोनों लड़कियों ने जब विकी और असलम को अपनी तरफ घूरते देखा तो बोल पड़ी - क्या देख रहे हो।
विकी ने असलम की तरफ देखा और जवाब दिया - हम देख रहे हैं कि रसगुल्ला और रसमलाई साथ साथ खड़े हैं।
असलम मोना पर झपटते हुए बोला - ठीक कहा विकी ने और अब हम उन्हें खाने जा रहे हैं।
विकी ने नाजनीन को और असलम ने मोना को उठाकर उसी कमरे के बिस्तर पर अगल बगल पटक दिया।
नाजनीन और मोना ने खुशी खुशी अपनी बुर की फॉके फैलाईं विकी ने अपना सुपाड़ा नाजनीन की और असलम ने मोना की बुर पर रखा और दोनों ने जोर से धक्का मारा। पर ये क्या लण्ड फिर फिसल गये । ये देख लडकियॉ फिर हॅस पड़ी। मोना बोली ठहरो लड़कों लगता है जोश से नहीं होश से काम लेना होगा।
मोना ने असलम को अपने ऊपर से हटाया और उठकर नाजनीन से बोली - चल बारी बारी से निपटाते हैं।
नाजनीन - क्या मतलब।
मोना - पहले तेरी सील तुड़वाने में मैं तेरी मदद करूँगी हूँ फिर तू मेरी करना।
नाजनीन - वो कैसे
मोना - तू अपनी बूर फैला।
नाजनीन ने अपने दोनो हाथों से अपनी बुर की फॉके फैलाईं। मोना ने विकी का लण्ड थामा और पहली बार नजदीक से देखा गधे जैसा लम्बा लग रहा था। अचानक मोना और विकी की नजर मिली मोना मुस्कराई और बोली - ले नाजो पूरी करले अपने मन की मुराद।
मोना ने नाजनीन की बुर की फैली फॉकों के बीच एक हाथ की उगंलियों से छेद टटोला फिर दूसरे हाथ से विकी के लण्ड का सुपाड़ा छेद के ठिकाने पर रखा। लण्ड पकड़े पकड़े ही विकी को धक्का मारने का इशारा किया। विकी ने धक्का मारा। इसबार सुपाड़ा नहीं फिसला और पकसे सील तोड़ते हुए घुस गया।
नाजनीन चिल्लाई - उई इइइइ मॉअअआााा मर गईइइइ।
मोना - घबरा मत मरेगी नहीं न ही मरी है पर तेरी फट जरूर गयी है पर तू ही तो मेरे मर्द से फड़वाना चाहती थी चल अब तू अपने मर्द से से मेरी फड़वा।
ये कहकर मोना ने विकी का लण्ड जोकि उसने छोड़ा नहीं था अपने हाथ से खीच कर नाजनीन की बुर से बाहर निकाल लिया।
फिर मोना ने लेट कर अपने दोनो हाथों से अपनी बुर की फॉके फैला दीं और बोली - अब चीखना बन्द कर और आ कर मदद कर मेरी, जैसे अभी मैने तेरी की थी।
नाजनीन कराहते हुए उठी । विकी ने उसकी बुर से खुन निकलते देखा तो एक छोटा तौलिया उसकी तरफ बढ़ा दिया। नाजनीन ने बायें हाथ से तौलिया ले कर बुर पर लगा लिया फिर बुर से खुन पोछ कर तौलिया असलम को दिखाते हुए बोली ये देख रहा है न। फिर दाहिने हाथ से पहली बार असलम का लण्ड थामा और खीरे या यों कहें नाइसिल पाउडर के डिब्बे के इतना मोटा सुपाड़ा देख मुस्कराई और बोली - अब तू भी दिखा इसका कमाल इस मोना की बच्ची को। नाजनीन ने मोना की गुदाज बुर की फॉकों के बीच में बड़ी मुश्किल से छेद ढूंढकर सुपाड़ा निशाने पर रखा। मोना ने सिसकी ली - हाय नाजो कितना मोटा है तेरी तो सिर्फ* फटी है मेरी तो चिर भी जायेगी। असलम ने धक्का मारा और नाजनीन ने भी इसबार लण्ड फिसलने नहीं दिया और मोना के मुँह से निकला - अरे मेरी गई रे उई इइइइ मॉअअआााा मर गईइइइ। असलम झुककर उसका निपल चूसने लगा
सुपाड़ा मोना की बुर की सील तोड़कर अन्दर घुस के ऐसे फॅस गया जैसे बोतल मे कार्क का ढक्कन लग गया हो।
नाजनीन बोली अब बोल पहले तो मेरा मजाक उड़ा रही थी।
विकी ने उसे खीचकर बगल में गिरा लिया और उसे सम्भलने का मौका दिए बगैर दोनों टॉगे उठा के कन्धों पे रखते हुए कहा - चल उसे अब तेरी मदद की जरूरत नहीं अब हम दोनों अपना अधूरा खेल पूरा करते हैं उसने बिना देर किये अपने लण्ड का सुपाड़ा नाजनीन की बुर के मुहाने पर रखा एक जोरदार धक्का और पक से सुपाड़ा अन्दर डाल दिया।
नाजनीन - उई धीरे से यार।
क्रमशः ............................................
आपका दोस्त राज शर्मा
साधू सा आलाप कर लेता हूँ ,
मंदिर जाकर जाप भी कर लेता हूँ ..
मानव से देव ना बन जाऊं कहीं,,,,
बस यही सोचकर थोडा सा पाप भी कर लेता हूँ
आपका दोस्त
राज शर्मा
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(गतांक से आगे)
विकी धड़कते दिल से कमरे से निकला बैठक की बत्ती जल रही थी वो समझ गया कि नवाब चचा वहीं होंगे। बैठक का बाहर जानेवाले गलियारे की तरफ खुलने वाला दरवाजा भी खुला था फिर भी विकी ने गलियारे से कतरा के निकल जाना चाहा। लेकिन नवाब चचा ने देख ही लिया।
नवाब सुलेमान- अमा कमाल है बिना चचा से दुआ सलाम किये कहॉ निकले जा रहे हो भतीजे।
विकी- हलो अंकल सॉरी अस्सलामोआलेकुम चचाजान। ये बात नहीं है अंकल दरअसल आंटी से गणित का एक सवाल समझने में बड़ी देर हो गयी इसीलिए जल्दी में था पिताजी फिक्र कर रहे होंगे।
नवाब सुलेमान- अमा तेरे बाप को तो हम समझा लेंगे खाना वाना खाया या नहीं।
विकी ने इन्कार में सिर हिलाया।
नवाब सुलेमान- अरे बेगम आपभी कमाल करतीं हैं बिना कुछ खिलाये पिलाये बच्चे से मेहनत करवाये जा रही हैं गणित क्या खाक समझ आयेगी जल्दी से बैठक में इसके लिए खाना भिजवाइये इतनी रात में कहॉ अपनी मॉ को परेशान करेगा।
अन्दर से बेगम सुलेमान की आवाज आयी-जी बहुत अच्छा।
नवाब सुलेमान- तुम खाना खाओ तबतक मैं तुम्हारे बाप को फोन मिलाता हूँ।
आनन फानन में बैठक में नवाब साहब निजी नौकर चुन्नन खाना लगा गया। विकी खाने लगा तो नवाब सुलेमान अथ्ययनकक्ष में लगे फोन पर पान्डेयजी को विकी के बारे में इत्तला करने चले गये। जब लौटे तो विकी खाने से निबट चुका था।
नवाब सुलेमान- अमा बड़ी जल्दी निबट लिए। क्या कही की गाड़ी छूट रही है मैं ने तुम्हारे बाप को बोल दिया है रात बहुत हो गई है लड़का आज यहीं सो जायेगा। अब तू बाप की फिक्र छोड़ दे आराम से बैठ चचा के पास और आंटी से सीखी गणित की थकान उतार आ बैठ।
विकी को बैठना ही पड़ा।
नवाब सुलेमान- और सुनाओ हमने सुना है आजकल कालेज की लड़कियों बड़े गुलफाम बने हुए हो।
विकी- नहीं अंकल लोग बस ऐसे ही अफवाह फैलाते हैं।
नवाब सुलेमान- अब रहने भी दो मियॉ हमने ये बाल धूप में नहीं सफेद किये चचा से क्या छिपाना चचा से मिल के रहोगे तो खुब मजे करोगे।
फिर नवाब सुलेमान ने ऐसे ऐसे सेक्सी किस्से सुनाए और विकी उनमें ऐसा खोया कि उसे पता ही नहीं चला कि कब उसका लण्ड उत्तेजना से फिर से टन्नाने लगा।वो तो तब चौंका जब उसने किसी का हाथ अपने लण्ड पर महसूस किया। उसने चौंक कर नीचे देखा तो पायाकि न जाने कब नवाब सुलेमान बातें करते करते उसके एकदम करीब आगये थे और अचानक नेकर के ढीले पायचे मे हाथ डाल के उसका लण्ड पकड़ लिया।
नवाब सुलेमान भई कमाल का जबरदस्त हथियार रखते हो बरखुरदार जिस औरत या लौन्डिया पर इस्तेमाल कर लोगे वो तो सारी जिन्दगी गुलामी करेगी। नवाब चचा के होते भतीजे को औरतों और लौन्डियों के पीछे भागना पड़े तो लानत है हमारी नवाबी पर। चचा से यारी करोगे तो औरतों और लौन्डियों की तो मैं लाइन लगा दूँंगा।
विकी की आँॅखों मे चमक आती देख वे आगे बोले- ठीक है तो अपनी दोस्ती पक्की। पर भतीजे तुम्हें भी चचा की मदद करनी होगी।
विकी- हुकुम करें चचाजान।
नवाब सुलेमान- भई हमारे नवाबी शौक का तुम्हें ख्याल रखना होगा।
विकी अब समझा कि चचा लौंडेबाज हैं इसीलिए चची जान मेरे बाप से फॅसी हैं।
विकी- फिक्र ना करें चचाजान जो लौंडा पसन्द हो बतायें साले को आपके कदमों में न डाल दूँ तो विकी मेरा नाम नहीं।
नवाब सुलेमान- शाबाश भतीजे हमें तुमसे यही उम्मीद थी। भई इस वख्त तुम्हारी जवानी की तरह हमारा भी नवाबी खून जोश मार रहा है चलो इसी खुशी में एक दफा हो जाय क्योंकि माहौल भी है मौका और दस्तूर भी।
यह कहकर नवाब सुलेमान अपने पजामे का नारा खोलने लगे। अब विकी घबराया उसे लगा कि नवाब सुलेमान उसीकी गांड़ मारने के चक्कर में हैं। वो घबराकर कुछ कहना ही चाहता था कि फिर चौंका नवाब चचा अपना पजामा उतारकर अपने लाल लाल घड़े जैसे चूतड़ उसके सामने कर सोफे पर झुके हुए थे ।अब विकी की समा में आया कि नवाब सुलेमान दरअसल उससे गांड़ मराना चाहते हैं।
विकी- चचा मुझे इसका शौक नहीं है।
नवाब सुलेमान- अमा नखरे मत करो, शौक नहीं है तो दोस्ती में की कुर्बानी समझ लो। हमने भी तो दोस्ती में कुर्बानी की है , क्या हम इतने बेवकूफ हैं कि ये नहीं समझते कि रातके साढ़े दस बजे तुम आन्टी से कौन सी गणित पढ़ के आरहे हो। पर हम यारों के यार हैं , यारी में अपना सब कुछ लुटा सकते हैं एक बेगम क्या चीज है। अब जल्दी कर जबसे तेरा हथियार देखा है तभी से चुलबुलाहट मची है हमारी चीज तुम्हारी आन्टी की टक्कर की न सही पर ऐसी बुरी भी नहीं है आजमा के देख ले।
विकी ने देखा नवाब सुलेमान के लाल लाल घड़े जैसे चूतड़ों पर एक भी बाल नहीं था गॉड़ का छेद भी मराते मराते काफी फैल गया लगरहा था। विकी जान गया कि नवाब सुलेमान को सब पता चल गया है। उसने सोचा कि आज मैं अगर इनकी गॉड़ मार दूँ तो गॉड़ मराके ये गॉड़ू फिर क्या बोलेगा और आन्टी की चूत तक का रास्ता तो मेरे लिए निष्कंटक हो ही जायेगा। फिर ये तो वैसे भी अपने खानदान और जान पहचान की सारी चूते दिलवाने का वादा कर रहा है , उम्मीद है आन्टी भी चुदने के बाद अब हास्टल के मामलों मे नरम रहेंगी , सो सौदा बुरा नहीं लगता आखिरकार विकी ने इस प्रकार मन को समझााकर नवाब सुलेमान की गॉड़ बजाही दी । एक तो थोड़ी देर पहले ही आन्टी की मखमली चूत में झड़ा था उसपर लौंडेबाजी का कोई शौक भी नही था , नवाब सुलेमान जबरदस्ती उससे अपनी बजवा रहे थे इसी झल्लाहट में नवाब सुलेमान की गॉड़ अपने फौलादी हथियार से दुश्मनों की तरह बजायी। गॉड़ू नवाब सुलेमान मस्त हो बोले भई एक जमाने के बाद इतना मजा आया कि आज तो मेरे छोटे नवाब भी जोश में आगये। ये देखो।
विकी की पहली बार नजर पड़ी नवाब सुलेमान का छोटे बच्चों जैसा लण्ड(छुनिया) टन्ना रहा था।
नवाब सुलेमान अपने चिकने नौकर चुन्नन को आवाज दी- अबे चुन्नन आजा आज तुझे जन्नत की सैर करा दूँ। विकी बेटा तू अब थक गया होगा तू अन्दर जा तेरी आन्टी ने तेरे सोने का इन्तजाम कर दिया होगा। जा आराम कर। हम तो आज दीवानखाने मे ही रहेंगे। जा मस्त रह।
विकी को ऐसा लगा जैसे नवाब साहब इशारे में कह रहे हों कि जा अन्दर आन्टी के साथ मजे कर मैं तो यहीं दीवानखाने में रहूँगा और चुन्नन की मारूँगा। विकी की खुशी का ठिकाना न था।वो अन्दर गया आन्टी अपने कमरे के सामने मिली। उनका हमेशा खिला रहने वाला चेहरा उतरा हुआ था।
उनके उतरे चेहरे को देख विकी जल्दी से बोला- आन्टी मेरी कोई गलती नहीं है न ही मुझे इस तरह का कोई शौक है वो अंकल जबरदस्ती
मिसेस सुलेमान(बीच में बात काटते हुए)- मुझे मालूम है अगर ये ऐसे न होते तो मुझे ऐसी बेगैरती करने की क्या जरूरत थी।
विकी- नहीं आन्टी आप बेगैरत नहीं बेगैरत तो वो है जिन्होंने आज मुझसे भी लौन्डेबाजी करवा ली।मुझे बड़ा अजीब लग रहा है क्या मैं नहा सकता हूँ।
मिसेस सुलेमान- हॉ हॉ मैं तो पूछने ही वाली थी।
बाथरूम की तरफ जाते हुए विकी लगातार उनके उतरे चेहरे की तरफ देख रहा था। वहॉ पहुँचकर मिसेस सुलेमान के हाथ से तौलिया लेते समय जब नजर मिली तो बोला- आन्टी आप बिलकुल जी छोटा न करें मेरी नजर में आपकी इज्जत कम न होकर बढ़ गई है।
मिसेस सुलेमान को हॅसी आ गई चुहल भरी आवाज में बोली- मेरी या मेरी चूत की? आन्टी की इज्जत के बच्चे आन्टी का पेटीकोट उठाके चोदते समय आन्टी की इज्जत का ख्याल नहीं आया ?
मिसेस सुलेमान को हॅसता देख विकी भी हॅंसते हुए बोला चूत पेश होने पर न चोदना चूत की बेज्जती है।
मिसेस सुलेमान ने एक हाथ में फव्वारे(शावर) का ट्यूब पकड़ा और दूसरे हाथ से पानी खोलते हुए बोली बस बस अब जल्दी से नहा ले रात बहुत हो चुकी है सोना नहीं है क्या?
विकी हॅंसते हुए फिर बोला पानी के शोर में आपके वाक्य का आखरी हिस्सा ठीक से सुनाई नहीं दिया मैडम मुझे लगा जैसे आपने पूछा कि रात बहुत हो चुकी है चोदना नहीं है क्या?
मिसेस सुलेमान(शावर से उसे नहलाते हुए)- तुझे तो सिर्फ वही सुनाई देगा जो तू सुनना चाहेगा शैतान।
मिसेस सुलेमान विकी के सीने पर जल्दी जल्दी साबुन मलने लगी।फव्वारे के पानी के छीटों से भीग उनकी पारदर्शी नाइटी उनके बदन से चिपककर और भी पारदर्शी हो गई थी जल्दी जल्दी साबुन मलने से उनके दोनों लक्का कबूतर अन्दर ब्रा की कैद न होने के कारण जोर जोर से फड़फड़ा के पारदर्शी नाइटी के जाल से छूटने की कोशिश कर रहे थे। जिसे देखकर विकी का हथियार फिर से ठुनकने लगा मिसेस सुलेमान ने जब ये देखा तो एक हाथ में लण्ड थाम दूसरे से उसपर साबुन लगाती हुइ बोलीं देखो तो शैतान का शैतानी हथियार शिकार के लिए फिर से तैयार है।
विकी हॅंसते हुए (एक हाथ से फव्वारा पकड़ दूसरे हाथ से उनकी नाइटी खोलते हुए) हाय आन्टी शिकार देख शिकारी की बन्दूक तन जाना स्वाभाविक ही है। आप भीग तो गई ही हैं तो लगे हाथों आप भी नहा ही लीजिये मन हल्का हो जायेगा।
ये कह कर वो उन्हें भी एक हाथ में फव्वारा ले दुसरे हाथ से उनका संगमरमरी गदराया बदन मलमलकर नहलाने लगा। विकी के हाथ बड़े बड़े उरोजों पर फिसल रहे थे। मर्दाने हाथों के स्पर्श से जाहिरा सुलेमान को हल्की मालिश का मजा आ रहा था और वो फिर से उत्तेजित होने लगी थी। थोड़ी देर में विकी ने देखा कि मिसेस सुलेमान के उभरे हुए बड़े बड़े खरबूजों जैसे गुलाबी स्तन और भी उभारदार व गोल हो गये। उनके निप्पल कठोर और बड़े बडे़ हो गये थे वो समा गया कि आन्टी फिर से चुदासी हो रही हैं। उसने देखा कि पानी की बूंदे उनके नंगे गदराये गोरे गुलाबी जिस्म संगमरमरी बाहों बड़े बड़े उरोजों पर मोती के समान चमक रही हैं। ये मोती उनक़ी बड़ी बड़ी चूचियों के जामुन जैसे निप्पलो से भी टपक रहे थे।विकी उन्हें होंठों से पकड़कर चूसने लगा निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगा उसके हाथ जाहिरा सुलेमान की मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों उनके बीच में उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत से होते हुए भारी नितंबों सुन्दर टांगों पर फिसलने लगे। विकी के होंठ उनके बड़े बड़े उरोजों गदराये पेट गोल नाभी से फिसलकर पावरोेटी सी फूली दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली चूत जोकि धुलकर और भी कमसिन लगरही थी पर पहुंचे। मारे उत्तेजना के विकी ने चूत होंठों में दबाली और चूसने लगा ।
जाहिरा सुलेमान ने विकी के होंठों में दबी चूत चुसवाते हुए सिसकी ली- स्स्स्स्स्स्स्सी हाय विकी ये तू क्या कर रहा है शैतान।
यह कहकर जाहिरा सुलेमान ने विकी का मुँह अपनी चूत से हटा कर उसे खड़ा किया फिर उसका साढ़े सात इंच का फौलादी लण्ड थाम लिया और लण्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा अपनी फूली चूत पर रगड़ने लगी। विकी ने मिसेस सुलेमान की दाहिनी संगमरमरी टांग उठाकर अपनी कमर पर लपेटी और झुककर अपने लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर सटा दिया मिसेस सुलेमान ने हाथ से पकड़ कर लण्ड और चूत का निशाना ठीक किया विकी ने अपने दोनो हाथों की उंगलियां उनके भारी चूतड़ों पर जमा लण्ड उचकाया तो सट से पूरा लण्ड अन्दर चला गया। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी जाहिरा सुलेमान ने सिसकारी भरी उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मह ।
विकी- उचक उचक के धक्के लगाने लगा।
थोड़ी देर में मिसेस सुलेमान हॉफने लगी और बोल़ी- उफ़ विकी अगर अब और नहीं नहाना तो कमरे में चल , मैं एक पैर पे खड़े खड़े थक गयी।
विकी ने अच्छे बच्चे की तरह अपना लन्ड चूत से निकाल कर आज्ञा का पालन किया। मिसेस सुलेमान ने उसे एक तौलिये से बना गाउन(बाथरोब) दिया और दूसरा स्वयं पहना और तौलिये से बदन पोछते हुए सोने के कमरे की तरफ चल दीं। आज्ञाकारी बच्चे विकी ने भी उनका अनुसरण किया। कमरे मे पहुँचते ही जाहिरा सुलेमान विकी पर टूट पड़ी उन्होने अपना बाथरोब निकाल फेका और विकी पर झपटीं उसका बाथरोब लगभग नोचकर निकाल फेकते हुए बोली अब तू देख आन्टी का दम।
विकी को बिस्तर पर धकेल उसपर कूद कर चढ़ गईं। अपनी पहले से पनियायी बुरी तरह चुदासी चूत को विकी के कुतुबमीनार की तरह खड़े लन्ड पर रख जोर का धक्का मारा। इस अकस्मात हमले से जाहिरा सुलेमान के साथ साथ विकी के मुँह से (उसके लण्ड के सुपाड़े की खाल अचानक पीछे खिच जाने से) उफ़ निकल गई।
विकी- उई आन्टी सम्हाल के…………
जाहिरा सुलेमान(कराहते हुए)- आह कितना बड़ा है शैतान कभी घुसेड़ते समय हम औरतौ के दर्द को समझा है । आज जरा सी खाल खिच गई तो उई उई कर रहा है। ले और ले सम्हाल।
ऐसा कहकर मिसेस सुलेमान ने अपनी चूत के दर्द को बदरस्त करते हुए एक और धक्का मारा। इस बीच विकी के लण्ड के सुपाड़े की खाल पीछे हटकर अपनी जगह बना चुकी थी , पर उसने देखा कि उसकी एक सिसकी से आन्टी का जोश इतना बढ़ गया तो झूठमूठ उई उई करना शुरू कर दिया।
विकी- अरे रहम करो आन्टी उई लगता है धीरे से प्लीज।
मिसेस सुलेमान(जोर जोर से उछल उछल कर धक्के लगाते हुए) तूने कौन सा रहम किया था मुझपर जो मै करूँ।
जब विकी ने ज्यादा शोर मचाया तो मिसेस सुलेमान ने झुुककर अपने बॉये स्तन का निपल उसके खुले मुँह में ठेल दिया जैसे खुले डिब्बे पर ढक्कन लग गया हो विकी चिल्लाना बन्द कर अच्छे बच्चे की तरह जोर जोर से निपल चूसने लगा। उसने झुकी हुई मिसेस सुलेमान की पीठ पर बाहें लपेटकर अपनी तरफ खीच रखा था जिससे कि यदि वो चाहे तो भी अपना स्तन उसके मुँह से न छुड़ा सकें । विकी अपना पुरा मुँह खोल कर निपल के साथ स्तन जितना ज्यादा से ज्यादा हिस्सा मुँह में आ रहा था को मुँह में भर कर चूस रहा था जिससे मिसेस सुलेमान और भी उत्तजित हो जोर जोर से आगे पीछे हिलकर और उछल उछल कर मर्दों की तरह धक्के लगा रही थीं जब मिसेस सुलेमान का बायॉं निपल चुसवाते चुसवाते दर्द करने लगा तो से निपल छुड़ाने के लिए कसमसायीं। विकी समझ गया और स्तन बदल बदल के चूसने और मुँह मारने लगा। उनकी घमासान चुदाई से कमरा पलंग की चरमराहट और उनकी सिसकियों से गूँूजने लगा।
विकी(कमर उचका कर मिसेस सुलेमान की चूत में लन्ड धॉसते हुए)- आ आआन्टी जरा आवाज दबाओ अंकल सुन लेंगे।
मिसेस सुलेमान- आह आह फिक्र न कर इसी वजह से कमरा साउण्डप्रूफ करवाया है। नखरे छोड़ थोड़ा जोर लगा मैं झड़ने ही वाली हूँ।
इतना सुनते ही विकी ने रोल कर अपने ऊपर औंधी मिसेस सुलेमान को नीचेकर दिया और हुमच हुमचकर उनकी चूतपर रगड़ा मारते हुए चोदने लगा। चार पॉच धक्के ही मारे होंगे कि
मिसेस सुलेमान- उम्म्म्म्उम्म्म्म्ह मैं गईईईईईई।
विकी- आााााान्टी म्म्म्म्मैं भी ईईईईईई
झड़ने के बाद विकी और मिसेस सुलेमान अगल बगल लेट कर अपनी सॉसे काबू में करने लगे। सामान्य होने के बाद विकी अपने बायीं तरफ चारो खाने चित्त पड़ी नंग धड़ंग मिसेस सुलेमान के मखमली बदन की तरफ घूमा, अपनी दाहिनी जॉघ उनकी संगमरमरी जॉघ पर चढ़ा दाहिने हाथ से उनके बड़े बडे आसमान की तरफ उठे उरोजों को सहलाने लगा।
मिसेस सुलेमान- क्या रे मन नहीं भरा क्या।
-आन्टी आप से भी क्कभी किसी का मन भर सकता है।
ऐसा कहते हुए विकी उनके बॉए निपल को होठों मे दबा जीभ से सहलाने लगा और दॉयें उरोज के निपल पर हाथ की गदेली से गोलियाने लगा पर ये क्या कुछ ही क्षणों में दोनों गहरी नींद में सो गये। वैसे आज दोनों ने मेहनत भी बहुत की थी सो नीद आजाना स्वाभाविक भी था।
अचानक किचन की खटर पटर की आवाजे सुनकर विकी की आँख खुली । वो इतनी गहरी नींद में सोया था कि अभी भी उसका एक हाथ मिसेज सुलेमान के एक उरोज पर और होठ दूसरे पर थे। उसने रात भर करवट तक नहीं बदली थी। सामने दीवार घड़ी पर नजर पड़ी सुबह के 9.30 बज रहे थे ।वो हड़बड़ा के उठा। गहरी नींद में चित्त पड़ी नंग धड़ंग मिसेस सुलेमान के बदन पर चादर डाली। तौलिया लपेट कमरे का दरवाजा खोल बाहर झाँॉका घर का नौकर चुन्नन किचन में नाश्ता बना रहा था। कोई नजर नहीं आया तो वो जल्दी से स्नानघर में घुस गया वहॉं विकी का नेकर बुश्शर्ट धो ड्रायर में सुखा प्रेस कर हेंगर में टॉगा हुआ था। विकी ने सोचा सुलेमान चचा ने चुन्नन से करवाया होगा। दैनिक क्रियाओं से निबट नहाधोकर विकी ने वो नेकर बुश्शर्ट पहना और ये सोच शान से स्नानघर से निकला कि अब रात का कोई सबूत नहीं बचा। सामने दोनों हाथ कमर पे रखे मिसेस सुलेमान की बेटी नाज़नीन खड़ी थी जैसे उसके निकलने का इन्तजार कर रही हो।
विकी- तू हास्टल से कब आई।
नाज़नीन आज सुबह साढ़े 6 बजे।
विकी को काटो तो खून नहीं, घबराया अगर इसने अपनी मॉ का कमरा झाँका होगा तो आज मेरी शामत का दिन है।
फिर भी झॉसा दिया विकी ने- माफ करना कल रात देर ज्यादा हो जाने की वजह से चचा ने रोक लिया तू थी नहीं थी सो मैंने तेरा सोने का कमरा इस्तेमाल कर लिया।
नाज़नीन- तो तू मेरे कमरे में सोया था।
विकी- हॉं।
-तो ये क्या है। कहते हुए नाज़नीन ने एक कम्प्यूटर से प्रिन्ट किया फोटो दिखाया जो विकी और मिसेस सुलेमान की गई रात की कहानी कह रहा था। फोटो में विकी का एक हाथ मिसेस सुलेमान के एक उरोज पर और होठ दूसरे पर व दाहिनी जॉघ मिसेस सुलेमान की संगमरमरी जॉघ पर चढ़ी थी। विकी समझ गया कि सुबह जब ये आयी तो अपनी मॉ के कमरे में गई होगी हमें उस हाल में देख डिजिटल कैमरे से ये फोटो खींचकर प्रिन्ट की होगी।
विकी- तू जो समझ रही है ये……।
नाज़नीन(बीच में बात काटते हुए)- अगर खैरियत चाहते हो तो सफाई देने के बजाये मेरी बात सुनो और मैं जो बोलूँं वो करो।
विकी (घबराती आवाज में)- ठठीक है।
नाज़नीन(मुस्कुराकर माहौल को हल्का करते हुए)- घबरा मत मैं तुझसे किसी का कत्ल नहीं करवाऊँगी।सुना है तेरा दाखिला इंजिनियरिगं कालेज में हो गया है और तेरे बापू तेरे जाने से पहले तेरी शादी मेरी सहेली मोना चौहान से कर रहे हैं, मुबारक हो।
विकी (बुरा सा मुँह बनाते हुए)- जी शुक्रिया तेरी शादी भी तो मेरे दोस्त असलम से हो रही है। तुझे भी मुबारक हो। तुझे असलम का वास्ता मेरे पर रहम कर।
नाज़नीन की मुस्कुराहट गहरी हुई रहम ही तो कर रही हूँं वरना अबतक तो तू चर्चा का विषय बन गया होता। अब ध्यान से सुन।
अचानक घर का नौकर चुन्नन आ गया इसलिए नाज़नीन ने बात बीच में छोड़ दी। चुन्नन नाश्ता लगाने के लिए पूछने लगा।
नाज़नीन दस मिनट बाद नाश्ता लगाना।
चुन्नन के जाने के बाद नाज़नीन विकी के कान में फुसफुसाके कुछ समझाने लगी सारी बात सुन के विकी बोला- ये कैसे हो सकता है ये तो ऐसे है जैसे आ बैल मुझे मार।
जो रात तुमने किया उसे पचाना मेरे लिए भी आसान नहीं। नाज़नीन ने धमकाया।
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महिला छात्रावास --2
(गतांक से आगे)
विकी धड़कते दिल से कमरे से निकला बैठक की बत्ती जल रही थी वो समझ गया कि नवाब चचा वहीं होंगे। बैठक का बाहर जानेवाले गलियारे की तरफ खुलने वाला दरवाजा भी खुला था फिर भी विकी ने गलियारे से कतरा के निकल जाना चाहा। लेकिन नवाब चचा ने देख ही लिया।
नवाब सुलेमान- अमा कमाल है बिना चचा से दुआ सलाम किये कहॉ निकले जा रहे हो भतीजे।
विकी- हलो अंकल सॉरी अस्सलामोआलेकुम चचाजान। ये बात नहीं है अंकल दरअसल आंटी से गणित का एक सवाल समझने में बड़ी देर हो गयी इसीलिए जल्दी में था पिताजी फिक्र कर रहे होंगे।
नवाब सुलेमान- अमा तेरे बाप को तो हम समझा लेंगे खाना वाना खाया या नहीं।
विकी ने इन्कार में सिर हिलाया।
नवाब सुलेमान- अरे बेगम आपभी कमाल करतीं हैं बिना कुछ खिलाये पिलाये बच्चे से मेहनत करवाये जा रही हैं गणित क्या खाक समझ आयेगी जल्दी से बैठक में इसके लिए खाना भिजवाइये इतनी रात में कहॉ अपनी मॉ को परेशान करेगा।
अन्दर से बेगम सुलेमान की आवाज आयी-जी बहुत अच्छा।
नवाब सुलेमान- तुम खाना खाओ तबतक मैं तुम्हारे बाप को फोन मिलाता हूँ।
आनन फानन में बैठक में नवाब साहब निजी नौकर चुन्नन खाना लगा गया। विकी खाने लगा तो नवाब सुलेमान अथ्ययनकक्ष में लगे फोन पर पान्डेयजी को विकी के बारे में इत्तला करने चले गये। जब लौटे तो विकी खाने से निबट चुका था।
नवाब सुलेमान- अमा बड़ी जल्दी निबट लिए। क्या कही की गाड़ी छूट रही है मैं ने तुम्हारे बाप को बोल दिया है रात बहुत हो गई है लड़का आज यहीं सो जायेगा। अब तू बाप की फिक्र छोड़ दे आराम से बैठ चचा के पास और आंटी से सीखी गणित की थकान उतार आ बैठ।
विकी को बैठना ही पड़ा।
नवाब सुलेमान- और सुनाओ हमने सुना है आजकल कालेज की लड़कियों बड़े गुलफाम बने हुए हो।
विकी- नहीं अंकल लोग बस ऐसे ही अफवाह फैलाते हैं।
नवाब सुलेमान- अब रहने भी दो मियॉ हमने ये बाल धूप में नहीं सफेद किये चचा से क्या छिपाना चचा से मिल के रहोगे तो खुब मजे करोगे।
फिर नवाब सुलेमान ने ऐसे ऐसे सेक्सी किस्से सुनाए और विकी उनमें ऐसा खोया कि उसे पता ही नहीं चला कि कब उसका लण्ड उत्तेजना से फिर से टन्नाने लगा।वो तो तब चौंका जब उसने किसी का हाथ अपने लण्ड पर महसूस किया। उसने चौंक कर नीचे देखा तो पायाकि न जाने कब नवाब सुलेमान बातें करते करते उसके एकदम करीब आगये थे और अचानक नेकर के ढीले पायचे मे हाथ डाल के उसका लण्ड पकड़ लिया।
नवाब सुलेमान भई कमाल का जबरदस्त हथियार रखते हो बरखुरदार जिस औरत या लौन्डिया पर इस्तेमाल कर लोगे वो तो सारी जिन्दगी गुलामी करेगी। नवाब चचा के होते भतीजे को औरतों और लौन्डियों के पीछे भागना पड़े तो लानत है हमारी नवाबी पर। चचा से यारी करोगे तो औरतों और लौन्डियों की तो मैं लाइन लगा दूँंगा।
विकी की आँॅखों मे चमक आती देख वे आगे बोले- ठीक है तो अपनी दोस्ती पक्की। पर भतीजे तुम्हें भी चचा की मदद करनी होगी।
विकी- हुकुम करें चचाजान।
नवाब सुलेमान- भई हमारे नवाबी शौक का तुम्हें ख्याल रखना होगा।
विकी अब समझा कि चचा लौंडेबाज हैं इसीलिए चची जान मेरे बाप से फॅसी हैं।
विकी- फिक्र ना करें चचाजान जो लौंडा पसन्द हो बतायें साले को आपके कदमों में न डाल दूँ तो विकी मेरा नाम नहीं।
नवाब सुलेमान- शाबाश भतीजे हमें तुमसे यही उम्मीद थी। भई इस वख्त तुम्हारी जवानी की तरह हमारा भी नवाबी खून जोश मार रहा है चलो इसी खुशी में एक दफा हो जाय क्योंकि माहौल भी है मौका और दस्तूर भी।
यह कहकर नवाब सुलेमान अपने पजामे का नारा खोलने लगे। अब विकी घबराया उसे लगा कि नवाब सुलेमान उसीकी गांड़ मारने के चक्कर में हैं। वो घबराकर कुछ कहना ही चाहता था कि फिर चौंका नवाब चचा अपना पजामा उतारकर अपने लाल लाल घड़े जैसे चूतड़ उसके सामने कर सोफे पर झुके हुए थे ।अब विकी की समा में आया कि नवाब सुलेमान दरअसल उससे गांड़ मराना चाहते हैं।
विकी- चचा मुझे इसका शौक नहीं है।
नवाब सुलेमान- अमा नखरे मत करो, शौक नहीं है तो दोस्ती में की कुर्बानी समझ लो। हमने भी तो दोस्ती में कुर्बानी की है , क्या हम इतने बेवकूफ हैं कि ये नहीं समझते कि रातके साढ़े दस बजे तुम आन्टी से कौन सी गणित पढ़ के आरहे हो। पर हम यारों के यार हैं , यारी में अपना सब कुछ लुटा सकते हैं एक बेगम क्या चीज है। अब जल्दी कर जबसे तेरा हथियार देखा है तभी से चुलबुलाहट मची है हमारी चीज तुम्हारी आन्टी की टक्कर की न सही पर ऐसी बुरी भी नहीं है आजमा के देख ले।
विकी ने देखा नवाब सुलेमान के लाल लाल घड़े जैसे चूतड़ों पर एक भी बाल नहीं था गॉड़ का छेद भी मराते मराते काफी फैल गया लगरहा था। विकी जान गया कि नवाब सुलेमान को सब पता चल गया है। उसने सोचा कि आज मैं अगर इनकी गॉड़ मार दूँ तो गॉड़ मराके ये गॉड़ू फिर क्या बोलेगा और आन्टी की चूत तक का रास्ता तो मेरे लिए निष्कंटक हो ही जायेगा। फिर ये तो वैसे भी अपने खानदान और जान पहचान की सारी चूते दिलवाने का वादा कर रहा है , उम्मीद है आन्टी भी चुदने के बाद अब हास्टल के मामलों मे नरम रहेंगी , सो सौदा बुरा नहीं लगता आखिरकार विकी ने इस प्रकार मन को समझााकर नवाब सुलेमान की गॉड़ बजाही दी । एक तो थोड़ी देर पहले ही आन्टी की मखमली चूत में झड़ा था उसपर लौंडेबाजी का कोई शौक भी नही था , नवाब सुलेमान जबरदस्ती उससे अपनी बजवा रहे थे इसी झल्लाहट में नवाब सुलेमान की गॉड़ अपने फौलादी हथियार से दुश्मनों की तरह बजायी। गॉड़ू नवाब सुलेमान मस्त हो बोले भई एक जमाने के बाद इतना मजा आया कि आज तो मेरे छोटे नवाब भी जोश में आगये। ये देखो।
विकी की पहली बार नजर पड़ी नवाब सुलेमान का छोटे बच्चों जैसा लण्ड(छुनिया) टन्ना रहा था।
नवाब सुलेमान अपने चिकने नौकर चुन्नन को आवाज दी- अबे चुन्नन आजा आज तुझे जन्नत की सैर करा दूँ। विकी बेटा तू अब थक गया होगा तू अन्दर जा तेरी आन्टी ने तेरे सोने का इन्तजाम कर दिया होगा। जा आराम कर। हम तो आज दीवानखाने मे ही रहेंगे। जा मस्त रह।
विकी को ऐसा लगा जैसे नवाब साहब इशारे में कह रहे हों कि जा अन्दर आन्टी के साथ मजे कर मैं तो यहीं दीवानखाने में रहूँगा और चुन्नन की मारूँगा। विकी की खुशी का ठिकाना न था।वो अन्दर गया आन्टी अपने कमरे के सामने मिली। उनका हमेशा खिला रहने वाला चेहरा उतरा हुआ था।
उनके उतरे चेहरे को देख विकी जल्दी से बोला- आन्टी मेरी कोई गलती नहीं है न ही मुझे इस तरह का कोई शौक है वो अंकल जबरदस्ती
मिसेस सुलेमान(बीच में बात काटते हुए)- मुझे मालूम है अगर ये ऐसे न होते तो मुझे ऐसी बेगैरती करने की क्या जरूरत थी।
विकी- नहीं आन्टी आप बेगैरत नहीं बेगैरत तो वो है जिन्होंने आज मुझसे भी लौन्डेबाजी करवा ली।मुझे बड़ा अजीब लग रहा है क्या मैं नहा सकता हूँ।
मिसेस सुलेमान- हॉ हॉ मैं तो पूछने ही वाली थी।
बाथरूम की तरफ जाते हुए विकी लगातार उनके उतरे चेहरे की तरफ देख रहा था। वहॉ पहुँचकर मिसेस सुलेमान के हाथ से तौलिया लेते समय जब नजर मिली तो बोला- आन्टी आप बिलकुल जी छोटा न करें मेरी नजर में आपकी इज्जत कम न होकर बढ़ गई है।
मिसेस सुलेमान को हॅसी आ गई चुहल भरी आवाज में बोली- मेरी या मेरी चूत की? आन्टी की इज्जत के बच्चे आन्टी का पेटीकोट उठाके चोदते समय आन्टी की इज्जत का ख्याल नहीं आया ?
मिसेस सुलेमान को हॅसता देख विकी भी हॅंसते हुए बोला चूत पेश होने पर न चोदना चूत की बेज्जती है।
मिसेस सुलेमान ने एक हाथ में फव्वारे(शावर) का ट्यूब पकड़ा और दूसरे हाथ से पानी खोलते हुए बोली बस बस अब जल्दी से नहा ले रात बहुत हो चुकी है सोना नहीं है क्या?
विकी हॅंसते हुए फिर बोला पानी के शोर में आपके वाक्य का आखरी हिस्सा ठीक से सुनाई नहीं दिया मैडम मुझे लगा जैसे आपने पूछा कि रात बहुत हो चुकी है चोदना नहीं है क्या?
मिसेस सुलेमान(शावर से उसे नहलाते हुए)- तुझे तो सिर्फ वही सुनाई देगा जो तू सुनना चाहेगा शैतान।
मिसेस सुलेमान विकी के सीने पर जल्दी जल्दी साबुन मलने लगी।फव्वारे के पानी के छीटों से भीग उनकी पारदर्शी नाइटी उनके बदन से चिपककर और भी पारदर्शी हो गई थी जल्दी जल्दी साबुन मलने से उनके दोनों लक्का कबूतर अन्दर ब्रा की कैद न होने के कारण जोर जोर से फड़फड़ा के पारदर्शी नाइटी के जाल से छूटने की कोशिश कर रहे थे। जिसे देखकर विकी का हथियार फिर से ठुनकने लगा मिसेस सुलेमान ने जब ये देखा तो एक हाथ में लण्ड थाम दूसरे से उसपर साबुन लगाती हुइ बोलीं देखो तो शैतान का शैतानी हथियार शिकार के लिए फिर से तैयार है।
विकी हॅंसते हुए (एक हाथ से फव्वारा पकड़ दूसरे हाथ से उनकी नाइटी खोलते हुए) हाय आन्टी शिकार देख शिकारी की बन्दूक तन जाना स्वाभाविक ही है। आप भीग तो गई ही हैं तो लगे हाथों आप भी नहा ही लीजिये मन हल्का हो जायेगा।
ये कह कर वो उन्हें भी एक हाथ में फव्वारा ले दुसरे हाथ से उनका संगमरमरी गदराया बदन मलमलकर नहलाने लगा। विकी के हाथ बड़े बड़े उरोजों पर फिसल रहे थे। मर्दाने हाथों के स्पर्श से जाहिरा सुलेमान को हल्की मालिश का मजा आ रहा था और वो फिर से उत्तेजित होने लगी थी। थोड़ी देर में विकी ने देखा कि मिसेस सुलेमान के उभरे हुए बड़े बड़े खरबूजों जैसे गुलाबी स्तन और भी उभारदार व गोल हो गये। उनके निप्पल कठोर और बड़े बडे़ हो गये थे वो समा गया कि आन्टी फिर से चुदासी हो रही हैं। उसने देखा कि पानी की बूंदे उनके नंगे गदराये गोरे गुलाबी जिस्म संगमरमरी बाहों बड़े बड़े उरोजों पर मोती के समान चमक रही हैं। ये मोती उनक़ी बड़ी बड़ी चूचियों के जामुन जैसे निप्पलो से भी टपक रहे थे।विकी उन्हें होंठों से पकड़कर चूसने लगा निप्पलो को बारी बारी से होंठों में ले कर चुभलाने चूसने लगा उसके हाथ जाहिरा सुलेमान की मोटी मोटी चिकनी गुलाबी जांघों उनके बीच में उनकी गोरी पावरोटी सी फूली चूत से होते हुए भारी नितंबों सुन्दर टांगों पर फिसलने लगे। विकी के होंठ उनके बड़े बड़े उरोजों गदराये पेट गोल नाभी से फिसलकर पावरोेटी सी फूली दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली चूत जोकि धुलकर और भी कमसिन लगरही थी पर पहुंचे। मारे उत्तेजना के विकी ने चूत होंठों में दबाली और चूसने लगा ।
जाहिरा सुलेमान ने विकी के होंठों में दबी चूत चुसवाते हुए सिसकी ली- स्स्स्स्स्स्स्सी हाय विकी ये तू क्या कर रहा है शैतान।
यह कहकर जाहिरा सुलेमान ने विकी का मुँह अपनी चूत से हटा कर उसे खड़ा किया फिर उसका साढ़े सात इंच का फौलादी लण्ड थाम लिया और लण्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा अपनी फूली चूत पर रगड़ने लगी। विकी ने मिसेस सुलेमान की दाहिनी संगमरमरी टांग उठाकर अपनी कमर पर लपेटी और झुककर अपने लण्ड का सुपाड़ा चूत के मुंह पर सटा दिया मिसेस सुलेमान ने हाथ से पकड़ कर लण्ड और चूत का निशाना ठीक किया विकी ने अपने दोनो हाथों की उंगलियां उनके भारी चूतड़ों पर जमा लण्ड उचकाया तो सट से पूरा लण्ड अन्दर चला गया। पूरा लण्ड अन्दर जाते ह़ी जाहिरा सुलेमान ने सिसकारी भरी उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्मह ।
विकी- उचक उचक के धक्के लगाने लगा।
थोड़ी देर में मिसेस सुलेमान हॉफने लगी और बोल़ी- उफ़ विकी अगर अब और नहीं नहाना तो कमरे में चल , मैं एक पैर पे खड़े खड़े थक गयी।
विकी ने अच्छे बच्चे की तरह अपना लन्ड चूत से निकाल कर आज्ञा का पालन किया। मिसेस सुलेमान ने उसे एक तौलिये से बना गाउन(बाथरोब) दिया और दूसरा स्वयं पहना और तौलिये से बदन पोछते हुए सोने के कमरे की तरफ चल दीं। आज्ञाकारी बच्चे विकी ने भी उनका अनुसरण किया। कमरे मे पहुँचते ही जाहिरा सुलेमान विकी पर टूट पड़ी उन्होने अपना बाथरोब निकाल फेका और विकी पर झपटीं उसका बाथरोब लगभग नोचकर निकाल फेकते हुए बोली अब तू देख आन्टी का दम।
विकी को बिस्तर पर धकेल उसपर कूद कर चढ़ गईं। अपनी पहले से पनियायी बुरी तरह चुदासी चूत को विकी के कुतुबमीनार की तरह खड़े लन्ड पर रख जोर का धक्का मारा। इस अकस्मात हमले से जाहिरा सुलेमान के साथ साथ विकी के मुँह से (उसके लण्ड के सुपाड़े की खाल अचानक पीछे खिच जाने से) उफ़ निकल गई।
विकी- उई आन्टी सम्हाल के…………
जाहिरा सुलेमान(कराहते हुए)- आह कितना बड़ा है शैतान कभी घुसेड़ते समय हम औरतौ के दर्द को समझा है । आज जरा सी खाल खिच गई तो उई उई कर रहा है। ले और ले सम्हाल।
ऐसा कहकर मिसेस सुलेमान ने अपनी चूत के दर्द को बदरस्त करते हुए एक और धक्का मारा। इस बीच विकी के लण्ड के सुपाड़े की खाल पीछे हटकर अपनी जगह बना चुकी थी , पर उसने देखा कि उसकी एक सिसकी से आन्टी का जोश इतना बढ़ गया तो झूठमूठ उई उई करना शुरू कर दिया।
विकी- अरे रहम करो आन्टी उई लगता है धीरे से प्लीज।
मिसेस सुलेमान(जोर जोर से उछल उछल कर धक्के लगाते हुए) तूने कौन सा रहम किया था मुझपर जो मै करूँ।
जब विकी ने ज्यादा शोर मचाया तो मिसेस सुलेमान ने झुुककर अपने बॉये स्तन का निपल उसके खुले मुँह में ठेल दिया जैसे खुले डिब्बे पर ढक्कन लग गया हो विकी चिल्लाना बन्द कर अच्छे बच्चे की तरह जोर जोर से निपल चूसने लगा। उसने झुकी हुई मिसेस सुलेमान की पीठ पर बाहें लपेटकर अपनी तरफ खीच रखा था जिससे कि यदि वो चाहे तो भी अपना स्तन उसके मुँह से न छुड़ा सकें । विकी अपना पुरा मुँह खोल कर निपल के साथ स्तन जितना ज्यादा से ज्यादा हिस्सा मुँह में आ रहा था को मुँह में भर कर चूस रहा था जिससे मिसेस सुलेमान और भी उत्तजित हो जोर जोर से आगे पीछे हिलकर और उछल उछल कर मर्दों की तरह धक्के लगा रही थीं जब मिसेस सुलेमान का बायॉं निपल चुसवाते चुसवाते दर्द करने लगा तो से निपल छुड़ाने के लिए कसमसायीं। विकी समझ गया और स्तन बदल बदल के चूसने और मुँह मारने लगा। उनकी घमासान चुदाई से कमरा पलंग की चरमराहट और उनकी सिसकियों से गूँूजने लगा।
विकी(कमर उचका कर मिसेस सुलेमान की चूत में लन्ड धॉसते हुए)- आ आआन्टी जरा आवाज दबाओ अंकल सुन लेंगे।
मिसेस सुलेमान- आह आह फिक्र न कर इसी वजह से कमरा साउण्डप्रूफ करवाया है। नखरे छोड़ थोड़ा जोर लगा मैं झड़ने ही वाली हूँ।
इतना सुनते ही विकी ने रोल कर अपने ऊपर औंधी मिसेस सुलेमान को नीचेकर दिया और हुमच हुमचकर उनकी चूतपर रगड़ा मारते हुए चोदने लगा। चार पॉच धक्के ही मारे होंगे कि
मिसेस सुलेमान- उम्म्म्म्उम्म्म्म्ह मैं गईईईईईई।
विकी- आााााान्टी म्म्म्म्मैं भी ईईईईईई
झड़ने के बाद विकी और मिसेस सुलेमान अगल बगल लेट कर अपनी सॉसे काबू में करने लगे। सामान्य होने के बाद विकी अपने बायीं तरफ चारो खाने चित्त पड़ी नंग धड़ंग मिसेस सुलेमान के मखमली बदन की तरफ घूमा, अपनी दाहिनी जॉघ उनकी संगमरमरी जॉघ पर चढ़ा दाहिने हाथ से उनके बड़े बडे आसमान की तरफ उठे उरोजों को सहलाने लगा।
मिसेस सुलेमान- क्या रे मन नहीं भरा क्या।
-आन्टी आप से भी क्कभी किसी का मन भर सकता है।
ऐसा कहते हुए विकी उनके बॉए निपल को होठों मे दबा जीभ से सहलाने लगा और दॉयें उरोज के निपल पर हाथ की गदेली से गोलियाने लगा पर ये क्या कुछ ही क्षणों में दोनों गहरी नींद में सो गये। वैसे आज दोनों ने मेहनत भी बहुत की थी सो नीद आजाना स्वाभाविक भी था।
अचानक किचन की खटर पटर की आवाजे सुनकर विकी की आँख खुली । वो इतनी गहरी नींद में सोया था कि अभी भी उसका एक हाथ मिसेज सुलेमान के एक उरोज पर और होठ दूसरे पर थे। उसने रात भर करवट तक नहीं बदली थी। सामने दीवार घड़ी पर नजर पड़ी सुबह के 9.30 बज रहे थे ।वो हड़बड़ा के उठा। गहरी नींद में चित्त पड़ी नंग धड़ंग मिसेस सुलेमान के बदन पर चादर डाली। तौलिया लपेट कमरे का दरवाजा खोल बाहर झाँॉका घर का नौकर चुन्नन किचन में नाश्ता बना रहा था। कोई नजर नहीं आया तो वो जल्दी से स्नानघर में घुस गया वहॉं विकी का नेकर बुश्शर्ट धो ड्रायर में सुखा प्रेस कर हेंगर में टॉगा हुआ था। विकी ने सोचा सुलेमान चचा ने चुन्नन से करवाया होगा। दैनिक क्रियाओं से निबट नहाधोकर विकी ने वो नेकर बुश्शर्ट पहना और ये सोच शान से स्नानघर से निकला कि अब रात का कोई सबूत नहीं बचा। सामने दोनों हाथ कमर पे रखे मिसेस सुलेमान की बेटी नाज़नीन खड़ी थी जैसे उसके निकलने का इन्तजार कर रही हो।
विकी- तू हास्टल से कब आई।
नाज़नीन आज सुबह साढ़े 6 बजे।
विकी को काटो तो खून नहीं, घबराया अगर इसने अपनी मॉ का कमरा झाँका होगा तो आज मेरी शामत का दिन है।
फिर भी झॉसा दिया विकी ने- माफ करना कल रात देर ज्यादा हो जाने की वजह से चचा ने रोक लिया तू थी नहीं थी सो मैंने तेरा सोने का कमरा इस्तेमाल कर लिया।
नाज़नीन- तो तू मेरे कमरे में सोया था।
विकी- हॉं।
-तो ये क्या है। कहते हुए नाज़नीन ने एक कम्प्यूटर से प्रिन्ट किया फोटो दिखाया जो विकी और मिसेस सुलेमान की गई रात की कहानी कह रहा था। फोटो में विकी का एक हाथ मिसेस सुलेमान के एक उरोज पर और होठ दूसरे पर व दाहिनी जॉघ मिसेस सुलेमान की संगमरमरी जॉघ पर चढ़ी थी। विकी समझ गया कि सुबह जब ये आयी तो अपनी मॉ के कमरे में गई होगी हमें उस हाल में देख डिजिटल कैमरे से ये फोटो खींचकर प्रिन्ट की होगी।
विकी- तू जो समझ रही है ये……।
नाज़नीन(बीच में बात काटते हुए)- अगर खैरियत चाहते हो तो सफाई देने के बजाये मेरी बात सुनो और मैं जो बोलूँं वो करो।
विकी (घबराती आवाज में)- ठठीक है।
नाज़नीन(मुस्कुराकर माहौल को हल्का करते हुए)- घबरा मत मैं तुझसे किसी का कत्ल नहीं करवाऊँगी।सुना है तेरा दाखिला इंजिनियरिगं कालेज में हो गया है और तेरे बापू तेरे जाने से पहले तेरी शादी मेरी सहेली मोना चौहान से कर रहे हैं, मुबारक हो।
विकी (बुरा सा मुँह बनाते हुए)- जी शुक्रिया तेरी शादी भी तो मेरे दोस्त असलम से हो रही है। तुझे भी मुबारक हो। तुझे असलम का वास्ता मेरे पर रहम कर।
नाज़नीन की मुस्कुराहट गहरी हुई रहम ही तो कर रही हूँं वरना अबतक तो तू चर्चा का विषय बन गया होता। अब ध्यान से सुन।
अचानक घर का नौकर चुन्नन आ गया इसलिए नाज़नीन ने बात बीच में छोड़ दी। चुन्नन नाश्ता लगाने के लिए पूछने लगा।
नाज़नीन दस मिनट बाद नाश्ता लगाना।
चुन्नन के जाने के बाद नाज़नीन विकी के कान में फुसफुसाके कुछ समझाने लगी सारी बात सुन के विकी बोला- ये कैसे हो सकता है ये तो ऐसे है जैसे आ बैल मुझे मार।
जो रात तुमने किया उसे पचाना मेरे लिए भी आसान नहीं। नाज़नीन ने धमकाया।
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महिला छात्रावास--1
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महिला छात्रावास--1
नवाब जमील सुलेमान के वालिद बड़ी दूर की नजर रखते थे उन्होंने आजादी आने के वख्त या यों कहें नवाबी जाने से पहले सुलेमान महल के पास में पड़ी तमाम खाली जमीन पर नवाब डिग्री कालेज बनवाया था।ताकि नवाबी जाने के बाद भी खाना खर्चा और नवाबी शौक पूरे हो सकें। सो नवाब जमील को पढ़ाई के अलावा करने के नामपर नवाबी शौक थे जो उन्हें विरासत में मिले थे। पढ़ाई में होशियार थे पी एच डी तक की थी लेकिन आलस में पूरे नवाब थे काम करना उनकी नवाबी शान के बिलकुल खिलाफ था। उनकी बेगम भी उतनी ही पढ़ी लिखी महिला थी पर घर पर बैठकर बोर होने के बजाय अपने ससुर के डिग्री कालेज में पढ़ाती थी। सुलेमान महल बहुत बड़ा था जिसके रखरखाव में तमाम नौकर चाकर लगते थे सो नवाब जमील ने उसे भी नवाब डिग्री कालेज को दान कर दिया था और खुद महल से लगे खाली पड़े बंगले में रहने लगे थे जिसमें कि नवाबी के समय सिपहसालार रहता था। सुलेमान महल अब लड़कियों का छात्रावास था जिसकी वार्डेन नवाब सुलेमान की बेगम प्रोफेसर जाहिरा सुलेमान थीं।क्योकि वे अपने बंगले से आसानी से लड़कियों पर नजर रख सकती थीं। प्रोफेसर जाहिरा सुलेमान करीब 5 फुट 6 लम्बी मजबूत कद काठी की गोरीचिट्टी बेहद खूबसूरत महिला थी। उनकी गर्वीली तनी हुई चाल भी भारी सीने नित्तम्बों की थिरकन को छिपा नहीं पाते थे। कालेज के प्रिन्सिपल प्रो गजेन्द्र पान्डेय नवाब जमील के अच्छे दोस्त थे सो लाजमी तौर पर प्रोफेसर जाहिरा सुलेमान भाभी पर उनकी विशेष कृपा दृष्ट्रि थी।
प्रिन्सिपल पान्डेय के एक ही औलाद थी उनका लड़का विक्रम जिसे लोग विकी कहते थे उसी कालेज में पढ़ता था।कालेज की बदमाश लड़कियों खास तौर से हास्टल की लड़कियों में काफी फेमस था जिसकी उड़ती हुई खबर मिसेस सुलेमान को लगी तो वो विकी पर नजर रखने लगीं।एक दिन मिसेस सुलेमान ने अपने कार्यालय की खिड़की से देखा हास्टल की एक लड़की जुबेदा विकी को एक बड़ा पैकेट दे रही है उन्हें कुछ अजीब सा लगा फिर वो अपने काम में व्यस्त हो ये वाकिया भूल गइंर्।शाम को घर पहॅंुची तो नवाब साहब यार दोस्तों की महफिल जमाये बैठे थे।जब रात सवा आठ बजे तक महफिल न उठी तो जलभुन कर हास्टल के अध्ययन समय(स्टडी आवर) जोकि 8 से 9 होता है का मोआयना करने चल दी । हास्टल पहुॅची तो दरबान ने बताया कि अध्ययन समय में सब लड़कियॉं पढ़ रही हैं सिवा जुबेदा के क्यौंकि उसकी मॉ मिलने आयी हैं। तभी उन्हें सबेरे का वाकिया याद आया सोचा क्यों न लगे हाथों जुबेदा की मॉ के कान में भी बात डाल दें कि जुबेदा विकी से मिलती है तााकि वे भी नजर रख सकें।वे सीधे जुबेदा के कमरे की तरफ गई।कमरे का दरवाजा बन्द था और अन्दर से अजीब तरह की जोर जोर से सॉस लेने और कराहने की जैसी आवाजें आ रही थी। उन्होंने चाभी के छेद से झॉका तो दंग रह गई विकी ने बुर्का पहना हुआ था और जुबेदा उसकी गोद में अधनंगी सी बैठी थी उसकी अपनी स्कर्ट कमर से ऊपर थी अन्दर कच्छा न था सो उसके दोनों गोरे गुलाबी मांसल चूतड़ विकी की नंगी गोद में धरे थे क्योंकि उसका बुर्का आगे से खुला था और बुर्के के अन्दर उसने नेकर(हाफपैन्ट) बुशर्ट पहना था। नेकर की जिप खुली थी और उसमे से उसका साढ़े 7 का फौलादी हथियार बाहर निकला हुआ था जिसे जुबेदा अपनी दोनो टॉगों के बीच से निकालकर अपनी गुदाज मांसल जॉघों के बीच में मसल रही थी। जुबेदा का ब्लाउज आगे से खुला था और विकी जुबेदा की दोनों बगलों से हाथ डालकर उसके बड़े बेलों के आकार के उरोज सहला दबा रहा था। जुबेदा के मुँह से अजीब अजीब आवाजें और सिसकियॉ निकल रही थी। अचानक जुबेदा विकी का हथियार अपने बायें हाथ में पकड़कर अपनी दूध सी सफेद बिना बालों वाली चूत पर रगड़ने लगी और अपने बदन का ऊपर वाला हिस्सा जरा सा पीछे मोड़कर अपना दाहिना हाथ विकी के गले में डाल दिया अब उसका दायां उरोज ठीक विकी के मुँह के सामने था विकी उसपर मुँह मारने और निपल चूभलाने लगा। जुबेदा की सिसकियां तेज होने लगी। अचानक वो विकी की गोद में थोड़ा सा उचक कर खड़ी जैसी हो गई और अपनी चूत के मुहाने पर उसके फौलादी लन्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा हाथ से पकड़कर धरा और विकी को धक्का मारने का इशारा किया विकी ने कमर उचकाई और सुपाड़ा पक्क से जुबेदा की नन्ही सी दिख रही चूत में आसानी से चला गया। अब मिसेस सुलेमान चौंकी और उन्हें होश साथ ही गुस्सा भी आया कि वे कहॉ खड़ी हैं और क्या देख रही हैं। गुस्से से तिलमिलाते हुए उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजे की दस्तक से घबराकर विकी ने सुपाड़ा वापस बाहर खीच लिया दोनों ने जल्दी जल्दी कपड़े ठीक कर दरवाजा खोला। मिसेस सुलेमान ने देखा कि विकी ने दोबारा बुर्का ओढ़ लिया था और उन्हें देख जुबेदा का चेहरा फक्क पड़ गया था।
जुबेदा- ग्ग्गुड इवनिगं मैडम मेरी अम्मी मिसेस रशीदा खान से मिलिये।
मिसेस सुलेमान गुड इवनिगं मिसेस रशीदा आपने जनाना होस्टल में बुर्का क्यों डाला हुआ है ? यह कहते हुए उन्होंने बुर्का उलट दिया।विकी कॉपने लगा। उसके मुँह से आवाज नहीं निकली।
मिसेस सुलेमान- जुबेदा तुझसे तो मैं बाद में निपटूँगी पहले इस निकम्में से निबट लूँ बोल तेरी हिम्मत कैसे हुई लड़कियों का हास्टल में घुसने की ? आज अगर तेरी खाल न खिचवा ली तो मेरा नाम जाहिरा नहीं।
विकी- आंटी प्लीज मुझे पुलिस में मत देना मैं मर जाऊँगा।
मिसेस सुलेमान- तुझे पुलिसमें देकर क्या मुझे छात्रावास की बदनामी करवानी है तुझसे तो पान्डेयजी ही समझेंगे। मैंने पान्डेयजी को तेरी व दूसरे छात्रों की धुनाई करते देखा है पुलिस उनके मुकाबले में क्या खाक धुनाई करेगी। तू मेरे साथ चल और बुर्का ओढ़ ले ताकि हास्टल की बदनामी न हो और तेरे जैसे किसी और हरामी को पता न चले कि बुर्का ओढ़ के लडकियों के हास्टल में घुसा जा सकता है।
मिसेस सुलेमान कमरे से निकलते हुए आस पास के कमरों की लड़कियों को सुनाते हुए जरा जोर से बोलीं- आइये मिसेस खान अब आप मेरे साथ चाय पीकर ही जाइयेागा।
मरता क्या न करता बुर्का ओढ़ के विकी उनके पीछे चलने लगा। मन ही मन अपने ऊपर बुरी तरह झल्ला भी रहा था कि स्टडी के वख्त आने की मूर्खता क्यों की एक तो के एल पी डी (खड़े लण्ड पे धोखा) हुआ ऊपर से जान पे बन आई क्योंकि पकड़े गये। आज तो पिताजी जान ही ले लेंगे। उसका खुराफाती दिमाग बचने का रास्ता खोज रहा था। तबतक मिसेस सुलेमान का बॅगला आ गया। नवाब सुलेमान शायद दोस्तों के साथ रात के खाने पर निकल गये थे और नौकर चाकर भी बंगले से जा चुके थे। घर में किसी और के होने का सवाल ही नहीं था क्योंकि मिसेस सुलेमान के एक ही औलाद थी उनकी लड़की नाज़नीन जो हास्टल में रहती थी। बैठक मे पहुँचकर मिसेस सुलेमान ने एक प्लास्टिक का लिफाफा देकर कहा अब इससे पहले कि कोई देखे बुर्का इसमें डाल के आदमी बन जा। विकी ने ऐसा ही किया फिर मिसेस सुलेमान उसे अन्दर अपने कमरे में ले गई और वहॉं पहुँचते ही कड़ी आवाज में पूछा अगर जान की खैर चाहता है तो सब कुछ सच सच बता कब से चल रहा है ये सब और तुझे बुर्का कहॉ से मिला ?
विकी ने कोई और चारा न देख सोचा शायद सच बोलने से जान बच जाय बोला- आटीं जिस किसी लड़की को ये करवाना होता है वो स्कूल में प्लास्टिक के थैले में बुर्का दे देती है।
मिसेस सुलेमान- अच्छा तो जुबेदा ने जो प्लास्टिक का थैला दिया था उसमें बुर्का था। कालेज के प्रिन्सिपल का लड़का होकर कालेज की लड़कियों को खराब करते हुए तुझे शर्म नहीं आती अगर बात खुल जाय तो कालेज की कितनी बदनामी होगी।
विकी बोला- आटीं मैं किसी लड़की को खराब नहीं कर रहा वे ही मुझे बुलाती पकड़ती हैं।
मिसेस सुलेमान- एक ही बात है पर ये भी तो सोच तेरा ये इतना मोटा तगड़ा और लम्बा है अगर किसी दिन किसी लड़की की फट गई और बेहोश हो गई तो लेने के देने पड़ जायेंगे।
विकी आटीं अब मैं आप से क्या बताऊँ पिताजी ने लड़कियों में खबर भेजी है जो बिना चूँ किये उनका सुपाड़ा डलवा लेगी उसे छात्रावास का प्रेसीडेन्ट बना देंगे सो ये सब अपनी चूत मुझासे चुदवाकर उनके सुपाड़े के लायक करवा रही हैं।
मिसेस सुलेमान झूठ मत बोल तेरा कोई उनसे कम मोटा है क्या।
मिसेस सुलेमान झोंक में बोल तो गईं फिर हड़बड़ा के बोली- म्मेरा मतलब है ऐसा मेरा ख्याल है कि……।
अब मुस्कुराने की बारी विकी की थी- घबरायें नहीं आटीं मैं आपका राज राज ही रखूंगा।
मिसेस सुलेमान अन्जान बन नकली गुस्से से कैसा राज क्या बक रहा है ?
विकी बक नहीं रहा हूँ कह रहा हूँ क्योंकि जैसे आज आपने मुँे रंगे हाथों पकड़ा है वैसे ही पिछले इतवार को सुबह जब कालेज में काम ज्यादा होने के बहाने से आप और पिताजी आये थे तो मॉ ने करीब 10 बजे अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाने पर पिताजी के पास भेजा था। आप लोगों को तो सपने में भी ख्याल नहीं था कि कोई आ भी सकता है सो दरवाजा ठीक से बन्द नहीं था।मैंने जब अजीब आवाजें सुनी तो दरवाजे की दराज से झाांक कर देखा।
मिसेस सुलेमान झाॉसा दे रहा है तूने कुछ नहीं देखा।
विकी सबूत के तौर पर मैं आपको विस्तार से बताता हूँ। 10 से सवा 10 के बीच का वख्त था। आप प्रधानाचार्यजी(पिताजी) की गोद में बैठी उनकी खुली पैन्ट से निकालकर उनका सहला रही थीं। आपकी सलवार जमीन पर पड़ी थी और प्रधानाचार्यजी का बायॉ हाथ आपकी गरदन के पीछे से निकलकर आपके कुर्ते में घुसा आपकी गोलाइयॉ टटोल रहा था और दूसरा आपकी बाई संगमरमरी जॉघ जिसपे काला तिल है सहला रहा था।
मिसेस सुलेमान ने जान लिया कि उनका भेद खुल गया है सो मुस्कुराते हुए पैतरा बदला- तो मेरी जॉघें संगमरमरी हैं।
विकी पहले सकपकाया फिर उन्हें मुस्कुराते देख हिम्मत बॉध के बोला- आप नाराज न होना पर उस दिन आपको उस रूप में देख मैने जाना कि आपका सारा जिस्म कितना सुन्दर और संगमरमरी हैं और सच कहूँ तो आप जैसी सुन्दर औरत मैंने तो नहीं देखी।
मिसेस सुलेमान हाय तो क्या तू वहीं रूककर सब देखता रहा।
विकी ऐसा दृश्य कौन छोड़ता है़।
मिसेस सुलेमान फिर मुस्कराई- देखने से तुझे क्या लग रहा था।
विकी- काश प्रधानाचार्यजी के स्थान पर मैं होता।
मिसेस सुलेमान चहकी- शैतान आंटी कहता है और ऐसी नजर से देखता है।
विकी यही तो समस्या है आंटी मैं अब जवान हो गया हूँ पर आसपड़ोस की सभी सुन्दर औरतें मुझे बच्चा ही समझती हैं। इसीलिए मैं छात्रावास की छोकरियों में मुँह मारता फिरता हुँं।
मिसेस सुलेमान ताना मारा- लौडियों को हराकर बड़ा जवान शेर बना फिरता है जब किसी जवान औरत से पाला पड़ेगा सारी जवानी धरी रह जायेगी।
विकी- मैं ऐसे नही मानता कोई हरा के दिखाये ।
मिसेस सुलेमान ने लपककर उसके नेकर में हाथ डाल लण्ड थाम लिया और अपनी तरफ खीचा चल दिखा देखूँॅ कितना जवान है तू । इतनी देर से लम्बी लम्बी हॉके जा रहा है।
विकी इस हमले के लिए तैयार नहीं था सो मिसेस सुलेमान पर गिरते गिरते बचा।
गिरने से बचने के लिए उसने दोनो हाथ आगे किए तो वे मिसेस सुलेमान के बड़े बड़े खरबूजों जैसे स्तनों से टकराये। उस धक्के से मिसेस सुलेमान जो कि पलंग के पास ही खड़ी थीं पलंग पे बैठ सी गई। विकी तो वैसे भी हास्टल की घटना और उनके मादक मांसल जिस्म को देख देख टन्ना रहा था उसके लिए ये अच्छा मौका था उसने हाथ में आये खरबूजे दबाते हुए धक्का दे लिटा दिया और खुद उनपर छा गया। मिसेस सुलेमान का ऊपर का धड़ बिस्तर पर और पैर नीचे लटक रहे थे।छीनापट में ब्लाउज के चुटपुटिया वाले ऊपर के दो बटन खुल गये। अन्दर से दो चॉंद झाँकने लगे जैसे ब्लाउज फाड़ के बाहर निकल आना चाहते हों।
मिसेस सुलेमान- अरे क्या मेरा ब्लाउज फ़ाड़ेगा।
उत्तेजित विकी मै इसे खोल देता हूँ।
यह कहकर मारे उत्तेजना के ब्लाउज के दोनों पल्ले पकड़कर खींचे तो चुटपुटिया वाले बचे हुए बटन सारे एकसाथ खुल गये उसने ब्रा ऊपर की तो दोनों चॉद आजाद होते ही लक्का कबूतरों में बदलकर जोर से फड़फड़ाये। उनपर विकी ने दोनों हाथों से झपट्टा और मुँह एकसाथ मारा।
मिसेस सुलेमान- ओह जंगली लड़के।
विकी ने उनके नीचे लटकते पैर ऊपर को उठाये तो साड़ी पेटीकोट ऊपर सरक गये। विकी ने उनके गुलाबी पॉव अपने कन्धों पर रख लिये।मिसेस सुलेमान ने चूतड़ उचकाकर साड़ी पेटीकोट कमर के ऊपर करने में उसकी मदद की। विकी ने देखा कि उनकी कच्छी चूत रस से बुरी तरह भीगी है। उसने कच्छी नीचे सरकाई तो नीचे से गोरी गोरी पावरोटी सी फूली हुई दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली बुरी तरह चूतरस से भीगी चूत दिखी।
विकी(सगंमरमरी जॉंघों को सहलाते और उनपर मुंह मारते हुए) हाय आटीं आपकी ये तो पहले से ही चुदास से रसीली हो गयी है और इस पे एक भी बाल नहीं है ताज्जुब है कौन सा हेयररिमूवर इस्तेमाल करती हैं ?
मिसेस सुलेमान हाय जबसे तेरा हरामखोर लण्ड उस बदजात जुबेदा की चूत में जाते देखा तभी से पनिया रही है। मैं कोई हेयर रिमूवर नहीं स्तेमाल करती मेरी ऐसी ही है।
विकी(उनकी पावरोटी सी चूत पर लण्ड का सुपाड़ा रगड़ते हुए) मेरा लण्ड सच में गाली खाने लायक हैॅ जो इस मखमल को छोड़ टाट के चक्कर में पड़ा था चलिए आपकी चूत में जाकर हरामखोर से मेहनतकश हो जायेगा।
मिसेस सुलेमान ( सिसकारियॉं भरते हुए)- उम्म्म्हअअय अब देर क्यों कर रहा है हरामखोर।
विकी ने खड़े खड़े ही गोरी गोरी पावरोटी सी फूली हुई रसीली चूत के मुहाने पर सुपाड़ा रखा मिसेस सुलेमान ने सिसकी ली और विकी ने आहिस्ते से धक्का मारा सुपाड़ा पक्क से अन्दर चला गया। मिसेस सुलेमान ने चूतड़ उचकाकर बाकी का लन्ड भी अन्दर कर लिया। विकी ने खड़े खड़े ही चुदाई शुरू की। पॉव विकी के कन्धों पर रखे होने से लण्ड अन्दर तक जा रहा था उनके गोरे गुलाबी गद्देदार चूतड़ विकी की जॉंघों से टकराकर उसे असीम आनन्द दे रहे थे साथ ही विकी को सगंमरमरी जॉंघों पिन्डलियों को सहलाने और उनपर मुॅंह मारने में भी सुविधा हो रही थी। उसके हाथ सफेद कबूतरों को भी सहला रहे थे बीच बीच में वो झुककर उनकी चोंचे जीभ से सहलाने और होठों में दबाके चूसने लगता। धीरे धीरे मिसेस सुलेमान के बडे़ बड़े स्तनों पर उसके हाथों और होठों की पकड़ मजबूत होती गई और कमरे में सिसकारियॉ गूँजने लगी। मिसेस सुलेमान टॉगें ऊपर उठाकर फैलाती गईं और विकी की रफ्तार बढ़ती गई अब उसका लण्ड धॉस के पूरा अन्दर तक जा रहा था।अब दोनोें घमासान चुदाई कर रहे थे।
मिसेस सुलेमान( सिसकारियॉं भरते हुए बड़बड़ा रही थीं)- शाबाश बेटा दिखा दे आन्टी को कि तू उस चोदू बाप की औलाद है जिसने अगल बगल से निकलने वाली हर खूबसूरत चुदासी की चुदास जीभर के बुझाई। ऐसी कि वो औरत जब मिले बिना चुदे न जाये।
विकी ( मिसेस सुलेमान के बडे़ बड़े स्तनों को दोनों हाथों में दबोचकर नीचे की तरफ खीचते और खुद चूत में ऊपर की तरफ धक्का मारते हुए)- उम्म्हये लो और लो आंटी तो इसीलिए आप रोज प्रिन्सिपल आफिस में इतनी देर मीटिंग करती हैं। आह इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। आह आंटी लगता है मेरा होने वाला है।
मिसेस सुलेमान( सिसकी भर आवाज दबा के चीखीं)- उम्म्म्ह उम्म्म हॉ उसके सामने जाते ही मेरी चूत पनिया के दुपदुपाने लगती है।
विकी- आंटी आह मुझसे रुका नहीं जायेगा।
मिसेस सुलेमान मैं तो गईईर्र्र्र्ईईई।
विकी- आंटी मेरा भी छुट गया आह।
विकी थक कर मिसेस सुलेमान के बदन पर बिछ सा गया। वो अपनी उखड़ी सॉसों को सम्हालने की कोशिश करते हुए उनका गुलाबी रेशमी बदन सहलाने लगा। थोड़ी देर वो दोनों वैसे ही पड़े रहे। घड़ी की तरफ नजर गयी करीब साढ़े 10 का वख्त था तभी बाहर कुछ खटर पटर सुन कर विकी चौंका और उठकर जल्दी जल्दी अपना नेकर पहनने लगा। मिसेस सुलेमान ने भी उठकर पेटीकोट और साड़ी नीचे की और थिरकते कबूतरों को ब्रा में कैद कर ब्लाउज के बटन बन्द करने लगी। विकी को घबराया देख बोलीं- घबरा मत नवाब साहब अभी इधर नहीं आयेंगे तू मुझे आंटी कहता है हमारे परिवारों मे घरेलू ताल्लुकात(सम्बन्ध) हैं और फिर तू मेरा छात्र भी है शान से घर जा।
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महिला छात्रावास--1
नवाब जमील सुलेमान के वालिद बड़ी दूर की नजर रखते थे उन्होंने आजादी आने के वख्त या यों कहें नवाबी जाने से पहले सुलेमान महल के पास में पड़ी तमाम खाली जमीन पर नवाब डिग्री कालेज बनवाया था।ताकि नवाबी जाने के बाद भी खाना खर्चा और नवाबी शौक पूरे हो सकें। सो नवाब जमील को पढ़ाई के अलावा करने के नामपर नवाबी शौक थे जो उन्हें विरासत में मिले थे। पढ़ाई में होशियार थे पी एच डी तक की थी लेकिन आलस में पूरे नवाब थे काम करना उनकी नवाबी शान के बिलकुल खिलाफ था। उनकी बेगम भी उतनी ही पढ़ी लिखी महिला थी पर घर पर बैठकर बोर होने के बजाय अपने ससुर के डिग्री कालेज में पढ़ाती थी। सुलेमान महल बहुत बड़ा था जिसके रखरखाव में तमाम नौकर चाकर लगते थे सो नवाब जमील ने उसे भी नवाब डिग्री कालेज को दान कर दिया था और खुद महल से लगे खाली पड़े बंगले में रहने लगे थे जिसमें कि नवाबी के समय सिपहसालार रहता था। सुलेमान महल अब लड़कियों का छात्रावास था जिसकी वार्डेन नवाब सुलेमान की बेगम प्रोफेसर जाहिरा सुलेमान थीं।क्योकि वे अपने बंगले से आसानी से लड़कियों पर नजर रख सकती थीं। प्रोफेसर जाहिरा सुलेमान करीब 5 फुट 6 लम्बी मजबूत कद काठी की गोरीचिट्टी बेहद खूबसूरत महिला थी। उनकी गर्वीली तनी हुई चाल भी भारी सीने नित्तम्बों की थिरकन को छिपा नहीं पाते थे। कालेज के प्रिन्सिपल प्रो गजेन्द्र पान्डेय नवाब जमील के अच्छे दोस्त थे सो लाजमी तौर पर प्रोफेसर जाहिरा सुलेमान भाभी पर उनकी विशेष कृपा दृष्ट्रि थी।
प्रिन्सिपल पान्डेय के एक ही औलाद थी उनका लड़का विक्रम जिसे लोग विकी कहते थे उसी कालेज में पढ़ता था।कालेज की बदमाश लड़कियों खास तौर से हास्टल की लड़कियों में काफी फेमस था जिसकी उड़ती हुई खबर मिसेस सुलेमान को लगी तो वो विकी पर नजर रखने लगीं।एक दिन मिसेस सुलेमान ने अपने कार्यालय की खिड़की से देखा हास्टल की एक लड़की जुबेदा विकी को एक बड़ा पैकेट दे रही है उन्हें कुछ अजीब सा लगा फिर वो अपने काम में व्यस्त हो ये वाकिया भूल गइंर्।शाम को घर पहॅंुची तो नवाब साहब यार दोस्तों की महफिल जमाये बैठे थे।जब रात सवा आठ बजे तक महफिल न उठी तो जलभुन कर हास्टल के अध्ययन समय(स्टडी आवर) जोकि 8 से 9 होता है का मोआयना करने चल दी । हास्टल पहुॅची तो दरबान ने बताया कि अध्ययन समय में सब लड़कियॉं पढ़ रही हैं सिवा जुबेदा के क्यौंकि उसकी मॉ मिलने आयी हैं। तभी उन्हें सबेरे का वाकिया याद आया सोचा क्यों न लगे हाथों जुबेदा की मॉ के कान में भी बात डाल दें कि जुबेदा विकी से मिलती है तााकि वे भी नजर रख सकें।वे सीधे जुबेदा के कमरे की तरफ गई।कमरे का दरवाजा बन्द था और अन्दर से अजीब तरह की जोर जोर से सॉस लेने और कराहने की जैसी आवाजें आ रही थी। उन्होंने चाभी के छेद से झॉका तो दंग रह गई विकी ने बुर्का पहना हुआ था और जुबेदा उसकी गोद में अधनंगी सी बैठी थी उसकी अपनी स्कर्ट कमर से ऊपर थी अन्दर कच्छा न था सो उसके दोनों गोरे गुलाबी मांसल चूतड़ विकी की नंगी गोद में धरे थे क्योंकि उसका बुर्का आगे से खुला था और बुर्के के अन्दर उसने नेकर(हाफपैन्ट) बुशर्ट पहना था। नेकर की जिप खुली थी और उसमे से उसका साढ़े 7 का फौलादी हथियार बाहर निकला हुआ था जिसे जुबेदा अपनी दोनो टॉगों के बीच से निकालकर अपनी गुदाज मांसल जॉघों के बीच में मसल रही थी। जुबेदा का ब्लाउज आगे से खुला था और विकी जुबेदा की दोनों बगलों से हाथ डालकर उसके बड़े बेलों के आकार के उरोज सहला दबा रहा था। जुबेदा के मुँह से अजीब अजीब आवाजें और सिसकियॉ निकल रही थी। अचानक जुबेदा विकी का हथियार अपने बायें हाथ में पकड़कर अपनी दूध सी सफेद बिना बालों वाली चूत पर रगड़ने लगी और अपने बदन का ऊपर वाला हिस्सा जरा सा पीछे मोड़कर अपना दाहिना हाथ विकी के गले में डाल दिया अब उसका दायां उरोज ठीक विकी के मुँह के सामने था विकी उसपर मुँह मारने और निपल चूभलाने लगा। जुबेदा की सिसकियां तेज होने लगी। अचानक वो विकी की गोद में थोड़ा सा उचक कर खड़ी जैसी हो गई और अपनी चूत के मुहाने पर उसके फौलादी लन्ड का हथौड़े जैसा सुपाड़ा हाथ से पकड़कर धरा और विकी को धक्का मारने का इशारा किया विकी ने कमर उचकाई और सुपाड़ा पक्क से जुबेदा की नन्ही सी दिख रही चूत में आसानी से चला गया। अब मिसेस सुलेमान चौंकी और उन्हें होश साथ ही गुस्सा भी आया कि वे कहॉ खड़ी हैं और क्या देख रही हैं। गुस्से से तिलमिलाते हुए उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजे की दस्तक से घबराकर विकी ने सुपाड़ा वापस बाहर खीच लिया दोनों ने जल्दी जल्दी कपड़े ठीक कर दरवाजा खोला। मिसेस सुलेमान ने देखा कि विकी ने दोबारा बुर्का ओढ़ लिया था और उन्हें देख जुबेदा का चेहरा फक्क पड़ गया था।
जुबेदा- ग्ग्गुड इवनिगं मैडम मेरी अम्मी मिसेस रशीदा खान से मिलिये।
मिसेस सुलेमान गुड इवनिगं मिसेस रशीदा आपने जनाना होस्टल में बुर्का क्यों डाला हुआ है ? यह कहते हुए उन्होंने बुर्का उलट दिया।विकी कॉपने लगा। उसके मुँह से आवाज नहीं निकली।
मिसेस सुलेमान- जुबेदा तुझसे तो मैं बाद में निपटूँगी पहले इस निकम्में से निबट लूँ बोल तेरी हिम्मत कैसे हुई लड़कियों का हास्टल में घुसने की ? आज अगर तेरी खाल न खिचवा ली तो मेरा नाम जाहिरा नहीं।
विकी- आंटी प्लीज मुझे पुलिस में मत देना मैं मर जाऊँगा।
मिसेस सुलेमान- तुझे पुलिसमें देकर क्या मुझे छात्रावास की बदनामी करवानी है तुझसे तो पान्डेयजी ही समझेंगे। मैंने पान्डेयजी को तेरी व दूसरे छात्रों की धुनाई करते देखा है पुलिस उनके मुकाबले में क्या खाक धुनाई करेगी। तू मेरे साथ चल और बुर्का ओढ़ ले ताकि हास्टल की बदनामी न हो और तेरे जैसे किसी और हरामी को पता न चले कि बुर्का ओढ़ के लडकियों के हास्टल में घुसा जा सकता है।
मिसेस सुलेमान कमरे से निकलते हुए आस पास के कमरों की लड़कियों को सुनाते हुए जरा जोर से बोलीं- आइये मिसेस खान अब आप मेरे साथ चाय पीकर ही जाइयेागा।
मरता क्या न करता बुर्का ओढ़ के विकी उनके पीछे चलने लगा। मन ही मन अपने ऊपर बुरी तरह झल्ला भी रहा था कि स्टडी के वख्त आने की मूर्खता क्यों की एक तो के एल पी डी (खड़े लण्ड पे धोखा) हुआ ऊपर से जान पे बन आई क्योंकि पकड़े गये। आज तो पिताजी जान ही ले लेंगे। उसका खुराफाती दिमाग बचने का रास्ता खोज रहा था। तबतक मिसेस सुलेमान का बॅगला आ गया। नवाब सुलेमान शायद दोस्तों के साथ रात के खाने पर निकल गये थे और नौकर चाकर भी बंगले से जा चुके थे। घर में किसी और के होने का सवाल ही नहीं था क्योंकि मिसेस सुलेमान के एक ही औलाद थी उनकी लड़की नाज़नीन जो हास्टल में रहती थी। बैठक मे पहुँचकर मिसेस सुलेमान ने एक प्लास्टिक का लिफाफा देकर कहा अब इससे पहले कि कोई देखे बुर्का इसमें डाल के आदमी बन जा। विकी ने ऐसा ही किया फिर मिसेस सुलेमान उसे अन्दर अपने कमरे में ले गई और वहॉं पहुँचते ही कड़ी आवाज में पूछा अगर जान की खैर चाहता है तो सब कुछ सच सच बता कब से चल रहा है ये सब और तुझे बुर्का कहॉ से मिला ?
विकी ने कोई और चारा न देख सोचा शायद सच बोलने से जान बच जाय बोला- आटीं जिस किसी लड़की को ये करवाना होता है वो स्कूल में प्लास्टिक के थैले में बुर्का दे देती है।
मिसेस सुलेमान- अच्छा तो जुबेदा ने जो प्लास्टिक का थैला दिया था उसमें बुर्का था। कालेज के प्रिन्सिपल का लड़का होकर कालेज की लड़कियों को खराब करते हुए तुझे शर्म नहीं आती अगर बात खुल जाय तो कालेज की कितनी बदनामी होगी।
विकी बोला- आटीं मैं किसी लड़की को खराब नहीं कर रहा वे ही मुझे बुलाती पकड़ती हैं।
मिसेस सुलेमान- एक ही बात है पर ये भी तो सोच तेरा ये इतना मोटा तगड़ा और लम्बा है अगर किसी दिन किसी लड़की की फट गई और बेहोश हो गई तो लेने के देने पड़ जायेंगे।
विकी आटीं अब मैं आप से क्या बताऊँ पिताजी ने लड़कियों में खबर भेजी है जो बिना चूँ किये उनका सुपाड़ा डलवा लेगी उसे छात्रावास का प्रेसीडेन्ट बना देंगे सो ये सब अपनी चूत मुझासे चुदवाकर उनके सुपाड़े के लायक करवा रही हैं।
मिसेस सुलेमान झूठ मत बोल तेरा कोई उनसे कम मोटा है क्या।
मिसेस सुलेमान झोंक में बोल तो गईं फिर हड़बड़ा के बोली- म्मेरा मतलब है ऐसा मेरा ख्याल है कि……।
अब मुस्कुराने की बारी विकी की थी- घबरायें नहीं आटीं मैं आपका राज राज ही रखूंगा।
मिसेस सुलेमान अन्जान बन नकली गुस्से से कैसा राज क्या बक रहा है ?
विकी बक नहीं रहा हूँ कह रहा हूँ क्योंकि जैसे आज आपने मुँे रंगे हाथों पकड़ा है वैसे ही पिछले इतवार को सुबह जब कालेज में काम ज्यादा होने के बहाने से आप और पिताजी आये थे तो मॉ ने करीब 10 बजे अचानक पैसे की जरूरत पड़ जाने पर पिताजी के पास भेजा था। आप लोगों को तो सपने में भी ख्याल नहीं था कि कोई आ भी सकता है सो दरवाजा ठीक से बन्द नहीं था।मैंने जब अजीब आवाजें सुनी तो दरवाजे की दराज से झाांक कर देखा।
मिसेस सुलेमान झाॉसा दे रहा है तूने कुछ नहीं देखा।
विकी सबूत के तौर पर मैं आपको विस्तार से बताता हूँ। 10 से सवा 10 के बीच का वख्त था। आप प्रधानाचार्यजी(पिताजी) की गोद में बैठी उनकी खुली पैन्ट से निकालकर उनका सहला रही थीं। आपकी सलवार जमीन पर पड़ी थी और प्रधानाचार्यजी का बायॉ हाथ आपकी गरदन के पीछे से निकलकर आपके कुर्ते में घुसा आपकी गोलाइयॉ टटोल रहा था और दूसरा आपकी बाई संगमरमरी जॉघ जिसपे काला तिल है सहला रहा था।
मिसेस सुलेमान ने जान लिया कि उनका भेद खुल गया है सो मुस्कुराते हुए पैतरा बदला- तो मेरी जॉघें संगमरमरी हैं।
विकी पहले सकपकाया फिर उन्हें मुस्कुराते देख हिम्मत बॉध के बोला- आप नाराज न होना पर उस दिन आपको उस रूप में देख मैने जाना कि आपका सारा जिस्म कितना सुन्दर और संगमरमरी हैं और सच कहूँ तो आप जैसी सुन्दर औरत मैंने तो नहीं देखी।
मिसेस सुलेमान हाय तो क्या तू वहीं रूककर सब देखता रहा।
विकी ऐसा दृश्य कौन छोड़ता है़।
मिसेस सुलेमान फिर मुस्कराई- देखने से तुझे क्या लग रहा था।
विकी- काश प्रधानाचार्यजी के स्थान पर मैं होता।
मिसेस सुलेमान चहकी- शैतान आंटी कहता है और ऐसी नजर से देखता है।
विकी यही तो समस्या है आंटी मैं अब जवान हो गया हूँ पर आसपड़ोस की सभी सुन्दर औरतें मुझे बच्चा ही समझती हैं। इसीलिए मैं छात्रावास की छोकरियों में मुँह मारता फिरता हुँं।
मिसेस सुलेमान ताना मारा- लौडियों को हराकर बड़ा जवान शेर बना फिरता है जब किसी जवान औरत से पाला पड़ेगा सारी जवानी धरी रह जायेगी।
विकी- मैं ऐसे नही मानता कोई हरा के दिखाये ।
मिसेस सुलेमान ने लपककर उसके नेकर में हाथ डाल लण्ड थाम लिया और अपनी तरफ खीचा चल दिखा देखूँॅ कितना जवान है तू । इतनी देर से लम्बी लम्बी हॉके जा रहा है।
विकी इस हमले के लिए तैयार नहीं था सो मिसेस सुलेमान पर गिरते गिरते बचा।
गिरने से बचने के लिए उसने दोनो हाथ आगे किए तो वे मिसेस सुलेमान के बड़े बड़े खरबूजों जैसे स्तनों से टकराये। उस धक्के से मिसेस सुलेमान जो कि पलंग के पास ही खड़ी थीं पलंग पे बैठ सी गई। विकी तो वैसे भी हास्टल की घटना और उनके मादक मांसल जिस्म को देख देख टन्ना रहा था उसके लिए ये अच्छा मौका था उसने हाथ में आये खरबूजे दबाते हुए धक्का दे लिटा दिया और खुद उनपर छा गया। मिसेस सुलेमान का ऊपर का धड़ बिस्तर पर और पैर नीचे लटक रहे थे।छीनापट में ब्लाउज के चुटपुटिया वाले ऊपर के दो बटन खुल गये। अन्दर से दो चॉंद झाँकने लगे जैसे ब्लाउज फाड़ के बाहर निकल आना चाहते हों।
मिसेस सुलेमान- अरे क्या मेरा ब्लाउज फ़ाड़ेगा।
उत्तेजित विकी मै इसे खोल देता हूँ।
यह कहकर मारे उत्तेजना के ब्लाउज के दोनों पल्ले पकड़कर खींचे तो चुटपुटिया वाले बचे हुए बटन सारे एकसाथ खुल गये उसने ब्रा ऊपर की तो दोनों चॉद आजाद होते ही लक्का कबूतरों में बदलकर जोर से फड़फड़ाये। उनपर विकी ने दोनों हाथों से झपट्टा और मुँह एकसाथ मारा।
मिसेस सुलेमान- ओह जंगली लड़के।
विकी ने उनके नीचे लटकते पैर ऊपर को उठाये तो साड़ी पेटीकोट ऊपर सरक गये। विकी ने उनके गुलाबी पॉव अपने कन्धों पर रख लिये।मिसेस सुलेमान ने चूतड़ उचकाकर साड़ी पेटीकोट कमर के ऊपर करने में उसकी मदद की। विकी ने देखा कि उनकी कच्छी चूत रस से बुरी तरह भीगी है। उसने कच्छी नीचे सरकाई तो नीचे से गोरी गोरी पावरोटी सी फूली हुई दूधिया मलाई सी सफेद बिना बालों वाली बुरी तरह चूतरस से भीगी चूत दिखी।
विकी(सगंमरमरी जॉंघों को सहलाते और उनपर मुंह मारते हुए) हाय आटीं आपकी ये तो पहले से ही चुदास से रसीली हो गयी है और इस पे एक भी बाल नहीं है ताज्जुब है कौन सा हेयररिमूवर इस्तेमाल करती हैं ?
मिसेस सुलेमान हाय जबसे तेरा हरामखोर लण्ड उस बदजात जुबेदा की चूत में जाते देखा तभी से पनिया रही है। मैं कोई हेयर रिमूवर नहीं स्तेमाल करती मेरी ऐसी ही है।
विकी(उनकी पावरोटी सी चूत पर लण्ड का सुपाड़ा रगड़ते हुए) मेरा लण्ड सच में गाली खाने लायक हैॅ जो इस मखमल को छोड़ टाट के चक्कर में पड़ा था चलिए आपकी चूत में जाकर हरामखोर से मेहनतकश हो जायेगा।
मिसेस सुलेमान ( सिसकारियॉं भरते हुए)- उम्म्म्हअअय अब देर क्यों कर रहा है हरामखोर।
विकी ने खड़े खड़े ही गोरी गोरी पावरोटी सी फूली हुई रसीली चूत के मुहाने पर सुपाड़ा रखा मिसेस सुलेमान ने सिसकी ली और विकी ने आहिस्ते से धक्का मारा सुपाड़ा पक्क से अन्दर चला गया। मिसेस सुलेमान ने चूतड़ उचकाकर बाकी का लन्ड भी अन्दर कर लिया। विकी ने खड़े खड़े ही चुदाई शुरू की। पॉव विकी के कन्धों पर रखे होने से लण्ड अन्दर तक जा रहा था उनके गोरे गुलाबी गद्देदार चूतड़ विकी की जॉंघों से टकराकर उसे असीम आनन्द दे रहे थे साथ ही विकी को सगंमरमरी जॉंघों पिन्डलियों को सहलाने और उनपर मुॅंह मारने में भी सुविधा हो रही थी। उसके हाथ सफेद कबूतरों को भी सहला रहे थे बीच बीच में वो झुककर उनकी चोंचे जीभ से सहलाने और होठों में दबाके चूसने लगता। धीरे धीरे मिसेस सुलेमान के बडे़ बड़े स्तनों पर उसके हाथों और होठों की पकड़ मजबूत होती गई और कमरे में सिसकारियॉ गूँजने लगी। मिसेस सुलेमान टॉगें ऊपर उठाकर फैलाती गईं और विकी की रफ्तार बढ़ती गई अब उसका लण्ड धॉस के पूरा अन्दर तक जा रहा था।अब दोनोें घमासान चुदाई कर रहे थे।
मिसेस सुलेमान( सिसकारियॉं भरते हुए बड़बड़ा रही थीं)- शाबाश बेटा दिखा दे आन्टी को कि तू उस चोदू बाप की औलाद है जिसने अगल बगल से निकलने वाली हर खूबसूरत चुदासी की चुदास जीभर के बुझाई। ऐसी कि वो औरत जब मिले बिना चुदे न जाये।
विकी ( मिसेस सुलेमान के बडे़ बड़े स्तनों को दोनों हाथों में दबोचकर नीचे की तरफ खीचते और खुद चूत में ऊपर की तरफ धक्का मारते हुए)- उम्म्हये लो और लो आंटी तो इसीलिए आप रोज प्रिन्सिपल आफिस में इतनी देर मीटिंग करती हैं। आह इतना मजा मुझे कभी नहीं आया। आह आंटी लगता है मेरा होने वाला है।
मिसेस सुलेमान( सिसकी भर आवाज दबा के चीखीं)- उम्म्म्ह उम्म्म हॉ उसके सामने जाते ही मेरी चूत पनिया के दुपदुपाने लगती है।
विकी- आंटी आह मुझसे रुका नहीं जायेगा।
मिसेस सुलेमान मैं तो गईईर्र्र्र्ईईई।
विकी- आंटी मेरा भी छुट गया आह।
विकी थक कर मिसेस सुलेमान के बदन पर बिछ सा गया। वो अपनी उखड़ी सॉसों को सम्हालने की कोशिश करते हुए उनका गुलाबी रेशमी बदन सहलाने लगा। थोड़ी देर वो दोनों वैसे ही पड़े रहे। घड़ी की तरफ नजर गयी करीब साढ़े 10 का वख्त था तभी बाहर कुछ खटर पटर सुन कर विकी चौंका और उठकर जल्दी जल्दी अपना नेकर पहनने लगा। मिसेस सुलेमान ने भी उठकर पेटीकोट और साड़ी नीचे की और थिरकते कबूतरों को ब्रा में कैद कर ब्लाउज के बटन बन्द करने लगी। विकी को घबराया देख बोलीं- घबरा मत नवाब साहब अभी इधर नहीं आयेंगे तू मुझे आंटी कहता है हमारे परिवारों मे घरेलू ताल्लुकात(सम्बन्ध) हैं और फिर तू मेरा छात्र भी है शान से घर जा।
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