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Sunday, September 7, 2014

FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--34 end

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--34 end

काफी देर तक यूं ही नंगी मैं पांडे को अपने सीने से चिपकाए पड़ी थी...फिर पांडे कसमसाते हुए हिले और आहिस्ते से उठ गए...मैं उन्हें उठने के लिए अपनी पकड़ ढ़ीली कर दी...

मैं अभी भी पड़ी थी...आँखें खोली तो मैं सीधी दूसरी तरफ की बेंच पर नजर दौड़ाई जहाँ अभी कुछ देर पहले कोई लेडिज चुद रही थी...वहाँ देखी तो अचानक से झटके खा गई...

वहाँ पर अब एक नहीं बल्कि तीन मर्द थे और तीनों उस लेडिज की एक साथ हर छेदों में अपना लंड डाल पेले जा रहा था और वो भी मस्ती में किसी कुतिया की तरह कूं-कूं करती चुद रही थी...

मैं झट से उठ के बैठ गई और इस नजारे को फटी आँखों से निहारने लगी...एक चूत तीन लंड...शुक्र है कि ऊपर वाले ने और जगह छेद बना दिए वरना यहाँ हर औरत की चूत चूत नहीं रह जाती, गुफा बन जाती...

मेरी कैप्री अभी भी घुटने तक थी और टीशर्ट गले तक...बूर नीचे खुली हवा ले रही थी और चुची ऊपर सुबह की ताजी हवा से खुद को तरोताजा कर रही थी..मैंने बगल में खड़े पांडे जी की तरफ देखी तो वे अभी भी नंगे मुझे निहारे जा रहे थे...

मेरी नजर उनसे मिलते ही मुस्कुरा दी और फिर टीशर्ट नीचे करने के ख्याल से हाथ रखी ही थी टीशर्ट पर कि तभी किसी ने पीछे से मेरे हाथ पकड़ लिए...

मैं चौंक उठी और तेजी से पीछे की तरफ पलटी...ओफ्फ्फ्फ...पीछे मुड़ते ही मेरी नाक एक तगड़े लंड से जा टकराई...मैं आँखें बंद कर सिसकारी भर ली और फिर नजर ऊपर की तो....

यहाँ तो एक नहीं चार मर्द बिल्कुल नंगे खड़े थे..मैं हौरान रह गई...तभी उनमें से एक बोला,"क्यों पांडे जी, आपने इन्हें बताया नहीं कि यहाँ पहली बार आने पर स्वागत समारोह भी आयोजित की जाती है..." और वो सब एक साथ हल्के से मुस्कुरा पड़े...

पांडे: " अरे यार, इन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं होगी...आप लोग बस अपने काम में लग जाओ...काफी गरम माल है..." कहते हुए पांडे मेरे निकट आए और मेरी टीशर्ट को पकड़ ऊपर गर्दन से हो बाहर कर दिया....

मैं अब बस यही सोच रही थी कि क्या करेंगे सब...कौन सा काम करेंगे मेरे साथ ये...कहीं सब मिल के चुदाई तो नहीं करेंगे...ओहहहहह...मैं ग्रुप चुदाई की अभी सोच ही रही थी और मेरी मनोकामना इतनी जल्द पूरी होती नजर आने लगी...

मैं अंदर ही अंदर काफी रोमांचित सी हो गई...तभी किसी ने मेरी कैप्री को घुटने से अलग करने लगा..मैं नीचे झुके व्यक्ति की तरफ देखी तो ये मर्द नहीं कोई लेडिज थी...मैं चुपचाप अपने पैर बारी-2 से उठा दी और वो कैप्री बाहर कर खड़ी हुई...

उनसे नजर मिलते ही मैं शॉक हो गई...ये तो कोमल आंटी की सहेली थी जो उनके साथ पार्लर में काम करती थी...मैं उन्हें हैरानी से देखने लगी...वो मुझे ऐसे देख मुस्कुराती हुई बोली,"वेलकम सीता, हैरानी की कोई बात नहीं है यहाँ...मैं यहीं पास में रहती हूँ और यहाँ रोज आती हूँ...और ये बात तो जानती ही हो कि यहाँ की बात सिर्फ यहाँ तक ही रहती है..."

मैं उन्हें अब भी लगातार घूरे जा रही थी...फिर वो मेरी कैप्री के साथ पांडे से ले चुकी टीशर्ट दिखाते हुए बोली,"जाते वक्त पहन लेना..." और फिर वो दूर एक कोने में मेरे कपड़े फेंक दिए...मैं अपने ड्रेस हवा में लहराती दूर जाती देखती रही...

वैसे भी यहाँ पर सिर्फ मैं ही नंगी नहीं थी जो कुछ बोलती...अब जो होना है वो तो होगी ही सो बस मैं सोच ली कि बेवजह क्यों परेशान होऊं...मजे करती हूँ...यही सोच मैं उनकी तरफ देख हौले से मुस्कुरा पड़ी...

तभी सब मर्द आगे आए और मुझे चारों तरफ से घेर लिए और सब अपने-2 लंड हिलाने लगे...मैं उन सबको देखने लगी...

"बैठ जाओ सीता.."कभी कोमल की दोस्त बोली जिसे सुन मैं आहिस्ते से बैठ गई...अब मेरी आँखों के चारों तरफ सिर्फ लंड ही लंड थे...

आउच्च्च्च्च...पीछे वाले मेरे बाल पकड़ के पीछे की तरफ जोर से खींच डाले...मैं तड़प कर पीछे की तरफ सिर कर ली और दर्द से आहहह भरने लगी...

तभी सामने वाले ने मेरे गालों को जोर से दबाते हुए मेरे मुँह को खोल रखा और नीचे झुकते हुए ढ़ेर सारा थूक मेरे मुँह में भर दिया...मैं घिन्न सी होती आँखें बंद कर ली...

फिर बारी-2 से सबने थूकते हुए मेरे मुँह को ही भर दिया....मैं सीधी हो उन्हे बाहर करना चाहती थी पर उन लोगों ने होने नहीं दिया...कुछ देर तक यूँ ही रहने के बाद मैं विवश हो सारा थूक गटक ली...

थूक गटकते ही उसने मुझे छोड़ा और अगले ही पल लंड ठूस दिया...लंड की आदी तो हो ही चुकी थी..सो लंड पड़ते ही मैं चूसने लग गई...कुछ ही देर तक चूसी कि बगल वाले ने जबरदस्ती मुझे उस लंड को छुड़ा अपना लंड ठूस दिया....

फिर तीसरी, चौथी.....इसी तरह मैं सब एक-2 कर लंड डालने लगे...मैं अब समझ गई कि सभी को एक साथ चूसना है....

बस मैं अपने आगे दो लंड को नजदीक की और बगल में दो लंड को हाथों से हिलाती हुई चूसने लगी...1-2-3-4 सब की...दो बिना पकड़े ही चूसती तो दो पकड़ के चूसती...

कुछ ही पलो में मैं पूरी मग्न हो गई लंड चुसाई में...एक साथ चार-चार लंड चूस के खुद को जन्नत के द्वार पर खड़ी महसूस कर रही थी...काफी गरम हो गई थी तो बीच बीच मैं एक हाथ से अपनी चूत भी रगड़ लेती...

पर जिसे लंड की जरूरत हो वो भला हाथ की सुनती थोड़ी...जबकि वे चारों मस्ती में झूम रहे थे...काफी देर तक लंड से खेली...जब बर्दाश्त नहीं हुई तो लंड को छोड़ ऊपर की तरफ मुँह कर उन सभी से आँखों से ही कह दी कि ,"प्लीज, अब तो चोद दो..."

तभी उन सब के बीच में कोमल आंटी की दोस्त आई और बोली,"शाली, बहुत गरमी हो रही है चूत में...तो ये डाल ले क्योंकि ये सब आज तुझे चोदेने वाले नहीं है...बस आज तो वेलकम करेंगे सब...समझी.." और फिर उन्होंने लकड़ी की मोटी और चिकनी बिल्कुल लंड की माफिक नीच झुकते हुए एक ही झटके में मेरी बुर में उतार दिए...

मैं चिहुंक कर चिल्ला उठी पर अगले ही पल एक लंड ने मेरी चीख को दबा दी...

कुछ देर तक बूर में लकड़ी का टुकड़ा डाले लंड चूसती रही कुतिया की तरह...बीच बीच में मुझे क्लिक की आवाज आ रही थी जैसे कोई मेरी पिक्स ले रही हो पर मैं अब इन सब की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही थी...

जब ओखल में सर डाल ही दी तो मूसल से डर कैसी...तभी एक ने अपने लंड को जोर में मेरे मुँह में दबाते हुए चीखने लगा और फिर उसके गरम पानी मेरे गले में उतरने लगी...मैं भी पानी की गरमी पाते ही जीभ और दांत से उसके लंड को कुरेद कर और पानी निकालने लगी...

जैसे ही वो शांत हुआ दूसरे ने भी पानी की बौछार कर दी...वो बाहर ही था जिसे मैं तेजी से मुरझाए लंड को बाहर कर उस लंड के सामने मुँह खोल दी और प्रसाद ग्रहण करने लगी...

वो अभी पूरा झड़ा भी नहीं था कि तीसरी नल भी खुल गई...और फिर चौथी भी...मैं सबके अमृत को अंदर करने की भरकस प्रयास की पर नाकामयाब रही...फलस्वरूप जितनी वीर्य लेनी की क्षमता थी वो तो ले ही पर बाकी वीर्य ने मेरे चांदरूपी चेहरे को पूरी तरह ढ़क दी...

गोरी चमडी पर बर्फरूपी लंडरस बिछ गई थी और मैं बिल्कुल किसी कुतिया की तरह बूर से पानी बहा रही थी...तभी एक आवाज मेरे कानों में गूँजी जिसे सुन मैं स्तब्ध रह गई...

"जरा रूकिए तो एक मिनट...सीता की ऐसी पिक्स मेरे लिए काफी फायदेमंद रहेगी.." मैं नजरें ऊठा कर देखी तो सामने कोमल आंटी कैमरा लिए मुस्काते हुअ लगातार पिक्स खींची जा रही थी...

मेरे चेहरे की काफी क्लोज पिक्स ली..फिर बोली,"डोंट वरी सीता, मैं यहाँ की लीडर हूँ...और ये पिक्स मैं अपने एलबम के लिए ली हूँ...जो एलबम तुम देखी थी उसमें सिर्फ फेस की तस्वीरें थी पर ये पिक्स जिस एलबम में डालूँगी उसमें सबकी चुदाई के ही पिक्स होते हैं...अब तो आएगी ही तो देख लेना...और बधाई भी नई जॉब के लिए..."

मैं बस उन्हें देखती रही...कुछ जवाब नहीं दे पा रही थी...बस झटके पे झटके खा रही थी कि कौन कहाँ होता है,पता नहीं...खैर अब तो कोमल आंटी की सेक्स वर्कर बनने के सिवा कोई चारा नहीं थी....

इसमें मेरी विवशता या मजबूरी नहीं थी...ये तो मैं भी चाहती थी कि रोज मैं चुदूँ पर कोई कभी खुल के सामने नहीं आ रही थी...पर आज पांडे जी की वजह से सब दिक्कतें दूर हो गई...

तभी मेरी चुची पर एक जोर की पैरों से किक पड़ी और मैं धम्म से पीछे की तरफ जमीन पर गिर पड़ी...थोड़ी सर में चोट भी लग गई जिससे मैं आहह कर कराह पड़ी...पर ये चोट ऐसी हालत में मायने नहीं रखती थी...

कोमल आंटी एक तरफ हो नेक्सट पिक्स लेने लगी...तभी चारों ने एक साथ अपने मुरझाए लंड से दूसरी टोंटी खोल दी...पेशाब की सीधी धार मेरे चेहरे को भिंगोने लगी...

मैं आँखें बंद करती सर को दूसरी तरफ मोड़ ली कि तभी कोमल आंटी की दोस्त ने आगे बढ़ अपने पैरों से मेरे चेहरे को पुनः सीधी कर दी...मैं समझ गई कि ये सब यही चाहती है तो दूसरी बार हटाने की कोशिश नहीं की...

फिर पेशाब की धार मेरे चेहरे से हट नीचे की तरफ बढ़ने लगी...और कुछ ही पल में मैं पूरी नहा गई थी...उनके पेशाब की धार जब खत्म हुई तो सबने एक साथ मिल के ताली बजा दी...

मैं मन ही मन मुस्कुराने लगी...सच पुरूषों को सेक्स में जितनी गंदी करने दो वो उतने ही खुश होते हैं...कुछ देर तक पड़ी रहने के मैं आँख खोली और उठ कर बैठ गई....

सब वहाँ पर खड़े हो मेरी तरफ ही घूरे जा रहे थे और मुस्कुरा रहे थे...मैं उन सभी को को देख हल्की मुस्कान दे दी...मतलब मैं खुश हूँ,उनको बता दी...

मेरे शरीर से पेशाब और वीर्य की बू आ रही थी, पर अब ये हमें तनिक भी बुरी नहीं लग रही थी...एक अलग ही कामुकता पैदा कर रही थी...तभी मेरी नजरें मेरी बूर पर पड़ी जहाँ अभी भी लकड़ी घुसी थी...

मैं आहिस्ते से हाथ बढ़ा लकड़ी को पकड़ी और नचाती हुई बाहर कर दी...फिर मैं लकड़ी फेंकने के लिए हाथ ऊपर की ही कि फिर मैं रूक गई और कोमल आंटी की तरफ कामुकता से देखती हुई उस लकड़ी पर लगी मेरी बुर के रस को चाटने लगी...

जिसे देख सभी वहां पर हँस पड़े...मैं भी चेहरे पर हंसी लाते हुए नॉनस्टॉप चाटती रही...जब पूरी तरह चाट ली तो फिर साइड में रख दी...तभी कोमल आंटी ने अपने कैमरे को पांडे की तरफ बढ़ा दी...

और फिर कंधे में टंगी बैग से कुथ पेपर निकाले और बेंच पर रखती हुई बोली,"लो सीता, पढ़ के साइन कर दो..आज से तुम मेरे लिए काम करोगी और साथ ही यहाँ की मेंबरशिप भी...यहाँ आने वाले सभी मर्द से तुम अब चुद सकती हो..."

मैं अब क्या सोचती? बस मुस्कुरा पड़ी और बेंच की तरफ खिसक कर आई और कोमल आंटी से पेन ली...फिर उनकी तरफ हंसती हुई साइन करने लगी...

"अरे, पढ़ तो लो एक बार..."कोमल आंटी ने मुझे एक बारगी से बिना पढ़े साइन करते देख बोल पड़ी...

"अब इसे पढ़ के क्या करनी...जब करनी ही है तो करनी है..."मैं साइन करती हुई बोली..

"हम्म्म...ओके पर ये मत सोचना कि ब्लैकमेल कर रही हूँ...पर हाँ एक बात याद रखना और इसमें लिखी भी है कि जब तक तुम इस शहर में हो और जब तक मैं चाहूँ तुम कभी मना नहीं करोगी आने से...किसी वजह से बाहर चली गई या शहर छोड़ दी तो उस स्थिति में तुम्हें वजह बतानी होगी..."कोमल आंटी समझाते हुए बोली..

"मतलब अगर पति का ट्रांसफर हो गया तो तुम पर कोई प्रेशर नहीं...बस बिना वजह तुम मना नहीं कर पाओगी और हाँ सप्ताह में कम से कम 2 दिन तो आना ही होगा...उससे आगे तुम्हारी मर्जी और तुम्हारा कमीशन हैंड टू हैंड...ठीक है..."कोमल आंटी शार्ट कट में पूरी कंडीशन बतला दी...

मैं उनकी बात सुन हामी भर दी "मुझे मंजूर है..." कहती हुई पेपर उनकी तरफ बढ़ा दी...वो हंसती हुई पेपर बैग में डाल ली...

समाप्त 



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Sunday, August 31, 2014

FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--33

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--33

 "सबकी नजरों में तो बॉय फ्रेंड पर मेरी नजरों में नहीं.."मैं लम्बी साँसों को छोड़ती हुई बोली.. जिसे सुन वे मेरी तरफ देखते निगाहों से ही पूछ बैठे कि वो क्यों?

मैं कुछ रूक गई और फिर उनकी नजरों से नजरें मिलाती हुई बोली,"मैं प्यार सिर्फ अपने पति से करती हूँ..वे मेरी जिंदगी के पहले और आखिरी प्यार हैं..."

वो मेरे इस जवाब को सुन चेहरे पर सिकन लाते हुए बोले,"तो फिर ये सब..." मैं उन्हें भी एक दोस्त...नहीं, अच्छे दोस्त की तरह सारी बात कहने लगी...

"बस शरीर की भूख की वजह से...खुद को रोक नहीं पा रही...ऐसा नहीं है कि मेरे पति सेक्स में कमजोर हैं...पर मेरे अंदर पता नहीं क्या है..हर वक्त नए व्यक्ति,नई जगह,नई तरीके खोजती रहती..." मैं एकदम साफ लहजों में ये सब कह डाली...

जिसे सुन वे थोड़े चौंके और मुझे हैरानी भरी निगाहों से देखते हुए नेक्सट सवाल कर दिए,"..तो तुम्हारे पति को कोई प्रॉब्लम नहीं है तुम्हारी इस बेहूदा शौक से..."

"जिन्हें खुद लत लगी हो उन्हें भला क्या प्रॉब्लम..."मैं हंसती हुई एक ही वाक्य में पति के बारे में भी कह डाली...जिसे सुन वे अपने सर पर हाथ रख सोचने लग गए...

रूम मालिक: "राम मिलाए जोड़ी,एक काना एक कोढ़ी...धन्य हो साहिबा....एक शेर सुनिएगा...पानी से प्यास न बुझी, तो मैखाने की तरफ चल निकला,
सोचा शिकायत करूँ तेरी खुदा से, पर खुदा भी तेरा आशिक़ निकला।....
तो अब कुछ कहने से क्या फायदा..." वो कुछ देर बाद अपने चेहरे पर हल्की खुशी और आश्चर्य लाते हुए बोले...जिससे मैं हंस दी...

"अच्छा आपको कभी जरूरत नहीं पड़ती कि कुछ नई होनी चाहिए..नए पार्टनर होने चाहिए..आई मीन..." मैं उनके चेहरे पर हल्की हंसी देख कुछ और मूड बदलने उनसे पूछी..

वो मेरे सवाल से मेरी तरफ घूरने लगे, फिर मेरी तरफ खिसकते हुए बिल्कुल सट गए और बोले,"होती है..और करता भी हूँ पर जितना मजा तुमलोग लेते हो वो तो मेरी किस्मत में नहीं..काश मेरी बीवी भी तुम्हारी तरह होती..."

"..तो बना दो उन्हें भी मेरी तरह..."मैं थोड़ी मजाकिया बनती हुई हंसते हुए बोल दी जिसे सुन वे अपनी हंसी नहीं रोक पाए..क्योंकि उन्हें पता था ये बात इस जनम में तो संभव नहीं है...

"चलो जाने दो उसे...रात में काफी मस्ती की तो पार्टी बनती है..."वो अब थोड़े रिलेक्स होते हुए बोले जिसे सुन मैं काफी खुश हो गई..

"हम्म्म...गुस्सा शांत हो गया...?"मैं रिस्क लेती हुई पूछी कि देखूं इनका क्या कहते हैं..तब से तो घर से बाहर निकालने की कह रहे थे...वो मेरी सवाल सुन चुप हो गए और एकटक निहारने लगे मुझे...

मैं भी बिना पलक झपकाए उनसे नजरें मिलाए जवाब का इंतजार कर रही थी...अब हम दोनों की साँसे थम चुकी थी जो वाक् के दरम्यान उखड़ गई थी...नजदीक होने के कारण सांसे सीधे एक दूसरे के सीने से टकरा रही थी...

तभी उसने अपना हाथ आगे बढ़ा सीधे मेरी गर्दन पर रख दवाब बना दिए, जिससे मैं अगले ही पल औंधें मुँह उनके गोद में गिर पड़ी..जहाँ पहले से तैनात सिपाही से मैं टकरा गई...

मैं चूं भी नहीं कर पाई..शायद करना भी नहीं चाहती थी...क्यों करती जब एक और लंड मेरी खातिरदारी को मिल रही थी...तभी उनके हाथ मेरे बाल को कस के पकड़ लिए और मुझे सीधी करने एक तरफ खींचने लगे...

बालों खिंचे जाने से हल्की दर्द हुई जिससे मेरी आहहह निकल गई...और मैं अनमने ढ़ंग से किसी तरह उनके गोद में उनकी तरफ मुँह किए पड़ी थी...दर्द भरी नजरों से उनके आँखों में झाँकी तो वहाँ वासना की लाल डोरे साफ नजर आई जिससे मैं दर्द में भी मुस्कुरा पड़ी...

तभी वो नीचे झुके और अपने होंठ मेरी खामोश लबों पर रख दिए...और लगे चूसने...मैं पल भर भी नहीं रूक पाई और बिना किस तोड़े खुद को ठीक से बेंच पर व्यवस्थित करती आराम से लेट गई...

तभी उन्होंने अपना एक हाथ सीधे मेरी चुची पर रख दिए...मैं उनके हाथ को टी-शर्ट पर से ही चुची पर महसूस कर सिहर गई...तभी उन्होंने मसलना शुरू कर दिया...

मेरी हल्की चीख अंदर ही अंदर घुट कर रह गई...कुछ ही पलों में मैं मस्ती में सरोबार हो गई और किसी भूखी कुतिया की तरह उनके होंठो पर वार करने लगी...

पार्क में चिड़ियां जोरों से चहचहा रही थी...कोयल अपनी सुरें वातावरण में फैलाए जा रही थी...रंग बिरंगे फूल अपनी सुगंधे फैलाए जा रही थी..मैं इन प्राकृत्क वातावरण में किस करने में मग्न थी...

उन्होंने किस करते हुए मेरे दोनों अपने गर्दन पर रख दिए..मैं तुरंत ही उनके गर्दन को अपने बांहों से जकड़ ली...फिर वो हल्के ऊपर उठ गए...पर मैं किस टूटने की डर से कस के जकड़ ली तो मैं भी उनके साथ ऊपर उठ गई...

कुछ देर बाद वो फिर वापस नीचे हो गए जिससे मैं उनके गोद में फिर से सर रख ली...पर अब मुझे कुछ भीनी-2 सी सुगंध आने लगी...पर इस सुगंध से अच्छी तरह वाकिफ थी...

मैं इस सुगंध से किस पर पकड़ थोड़ी कम कर दी और उस सुगंध का आनंद लेती किस कर रही थी...तभी उन्होंने अपने होंठ को ऊपर की तरफ हटाने लगे और वे सफल भी हो गए...

वे ऊपर हटने के साथ ही अपने हाथ से मेरे चेहरे को उस सुगंध की तरफ मोड़ दिए...मैं भी चुंबक की माफिक मुड़ती चली गई और मेरे मुँह स्वतः खुल गए...अगले ही पल मेरे मुंह में उनका मोटा और नाटा लंड गप्प से समा गया...

मेरी आँखें बंद हो गई मदहोशी में और चभर-2 चूसने लग गई...वे एक मीठी आहहह भरते हुए उत्तेजना में सर को कभी पीछे तो कभी नीचे करते और अपने हाथ से मेरू टीशर्ट ऊपर कर नंगी चुची को मसलने लगे...


 जैसे-2 सुबह की लाली छंटती जाती मैं और जोर से चूसती जाती...और वो मेरी नंगी को लाल किए जा रहे थे...साथ ही अपना दूसरा हाथ नीचे कर मेरी केप्री में घुसा दिए...

उनके हाथ तुरंत ही अपनी मंजिल हासिल कर ली..जैसे ही उनकी उंगलिया मेरी बूर पर पहुँची, मैं तड़प उठी और पूरे लंड को जड़ तक मुंह में घुसेड़ ली...वो सीत्कार मारते हुए बिलबिला उठे और मेरी बूर में दो अंगुली घुसा कस के जकड़ लिए...

अब हम दोनों कंट्रोल से बाहर हुए जा रहे थे...मैं चुदने के लिए तड़पने लगी और अपने एक हाथ नीचे कर उनके हाथ को और अंदर बूर में धकेलने लगी...उनके लिए बस इतनी ही काफी थी...

वो मेरे बालों को पकड़ झटके दे अपने लंड को आजाद किए और मुझे उठाते हुए खुद निकल गए..उनके निकलते ही मैंने बेंच पर ठीक से एडजस्ट हुई और अपनी कैप्री नीचे सरका दी...

कैप्री हटते ही मेरी पनियाई बूर उनके नजरों के सामने आ गई...वे मेरी रसीली पर नजर गड़ाए नीचे की तरफ गए और मेरी एक टांग पकड़ नीचे जमीन पर कर दिए जिससे मेरी बुर खुल के सामने आ गई और उन्हें मुझे बजाने सी जगह भी....

मेरे हाथ खुद की चुची पर हरकत करने लगी और नशीली नजरें उनके लंड पर...कब ये नाटा पहलवान मेरी बूर में दस्तक देगा...कद में छोटा था पर हेल्दी में नॉर्मल लंड की दुगूनी...

वे अपने बंदूक ताने ठीक मेरी बूर के सामने ला मुझ पर लेट से गए...मैं उनके वजन से एक बार दब सी गई पर तुरंत ही एडजस्ट हो गई...लेटने से उनका लंड मेरी बूर में घुसने के व्याकुल होने लगा पर घुसा नहीं...

उन्होने अपने हाथ से लंड को सही दिशा देते हुए टमाटर की भांति सुपाड़े को मेरी बूर में फंसा दिए...सुपाड़े के फंसते ही मैं चिहुंक उठी...और अगली वार की प्रतीक्षा करने लगी...

"पांडे नाम है मेरा...C.P. पांडे... मैं बूर चोदने का दिवाना हूँ, बूर का नहीं...तू सोचती होगी कि अपनी जवानी से मुझे अपने फैसले बदलने पर विवश कर देगी,ऐसा नहीं हूँ मैं...ऐसी सोच ले कर आने वाली हर औरत को मैं सिर्फ एक ही चीज देता हूँ...और वो है....लण्डडडडडड..." वे मेरे कानों में मेरे सवालों का जवाब देते हुए अपना लंड मेरी बूर में धकेल दिए....

मैं इतने मोटे लंड खाकर तड़प कर अपने सर को पीछे धकेल कर बचने की कोशिश की कि लंड कम घुसे और दर्द कम हो...पर नाकाम रही...उन्होने अपने शरीर का पूरा वजन रख दिया जिससे मैं गर्दन से नीचे हिल भी नहीं पाई...

"तू औरों से अलग है इसलिए पहली बार ही सब कुछ दिया..अब अगर तेरी मर्जी हुई मेरे से दोस्ती रखने की तो रखना वर्ना नहीं रखना पर मैं घर अवश्य खाली करवाऊंगा...तेरी गरम जवानी पत नहीं कहाँ-2 गुल खिलाएगी तो मैं ये किसी के मुँह से सुनना नहीं चाहता कि ये तो फलाने बाबू की रेन्टर है..."वो अपने लंड को पीछे कर एक और धक्का मारते हुए बोले...

मैं इस वक्त सिर्फ उनकी बात सुन रही थी और कुछ कहने के बजाय उनके मोटे लंड को एडजस्ट करने में जुटी थी...आउच्च्च्च्चऽ आहहहह...अचानक उन्होंने अपने नुकीले दांत मेरी चुची पर गड़ा दिए...

मैं दर्द से चीख पड़ी जो कि मेरी चीख पूरे पार्क में गूँजने लगी...पर वो इन सब से बेखबर लगातार धक्के मारने लगे...मैं हर धक्के पर हिचकोले खा रही थी...

अभी 10 धक्के ही खाई थी कि तभी मेरे कानों में किसी की हलचल गूँजी...मेरे कान खड़े हो गए और अपनी गर्दन उस आवाज की तरफ कर देखने की कोशिश करने लगी...

"डर मत, इस पार्क में सिर्फ दो ही तरह के लोग आते हैं..." मुझे ऐसे डर से उधर देखते वे बोले जिससे मैं आश्चर्य से मुड़ कर उनकी तरफ हिचकोले खाती देखने लगी...

"एक वो जिसे चूत मरवानी होती है और दूसरा इस कॉलोनी के बुड्ढे-बुढ़िया जो आधे पार्क से उधर ही रहते हैं...इस कॉलनी की हर घर में एक ना एक रंडी है...सब अपने यार संग मॉरनिंग वॉक के बहाने आती है और चुद के जाती है...मैं भी यहाँ से रोज कोई ना कोई बूर पेल के ही जाता हूँ...और खास बात ये कि ये बातें सिर्फ पार्क तक ही रहती है, बाहल सब अनजाने..."मेरी डर को दूर करने के लिए उन्होंने इस पार्क के अंदर की असलियत बता दी...

मैं सुन के दंग रह गई..अब तक मेरी बूर उनके लंड को पूरी तरह एडजस्ट कर ली थी और अब आराम में अंदर बाहर हो रही थी...पर मेरी आवाजें निकलनी नहीं बंद हो पाई थी...हर धक्के पर आहहह कर बैठती...

मैं यूँ ही धक्के खाती ऊपर की ओर देखी तो खुला आसमान पर पार्क के बाउंड्री समीप काफी ऊंचे और घने वृक्ष लगे थे...और यहाँ से मोहल्ले की एक भी इमारत नजर नहीं आ रही थी....

तभी से अचानक वो काफी तेज धक्के मारने लगे..वे चरमसीमा की ओर बढ़ने लगे..मैं भी अपनी आवाजें तेज करती हुई उन्हें सपोर्ट करने लगी...तभी मेरे कानों में हल्की सुरीली हंसी पड़ी...

मैं यूँ ही कस के जकड़ी नजर घुमाई तो मेरी ही उम्र की एक गोरी चिट्टी लेडिज एक अधेड़ मर्द के साथ बगल से क्रॉस करती हम दोनों को देख हंस रही थी...मैं उन दोनों को देख बिना किसी हिचक डर के वापस पांडे संग लग गई...

तभी वो चीखते हुए चिल्ला पड़े,"आई...एएएएम...कमिंईंईईंईंईंगगगगगग..."और अपना ढ़ेर सारा लावा मेरी बूर में बहा दिए...मैं भी इस गरमी को सह नहीं पाई और उसी पल मैं भी अपनी नदी बहा दी...

पूरा झड़ने के बाद वे धम्म से मुझ पर लद गए और झड़ने के पश्चात मैं भी सुकून से आँखें बंद कर उन्हें बाँहों मे, भर ली...






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FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--32

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--32

 "आहहह...शाबास मेरी रण्डियों....इसी तरह आहहह...काफी मजा आ रहा है...हम दोनों की ये सदियों की तमन्ना आज तुम दोनों ने पूरी कर दी...आहहहहह.." बंटी मेरे सर पर हाथ रख सहलाता हुआ बोला...

मैं बिना कुछ सुने बस अपने काम में लगी रही...कुछ देर तक इसी तरह चुदती रही...तब अचानक ही मेरे मुंह और बुर दोनों जगह से लंड गायब हो गई...मैं थोड़ी तड़पी पर सामने रस बहाती पूजा की बूर ने इस कमी को खलने नहीं दी...मेरे और पूजा के मुँह एक दूसरे की बूर में घुस गई...

तभी बंटी और सन्नी ने इसी अवस्था में हम दोनों को एक तरफ पलट दिया...जिससे मैं नीचे और पूजा ऊपर आ गई...पर हम दोनों के मुख अब भी नहीं हटी...बस चुदाई की जलन में बूर खाती रही...

फिर सन्नी ने मेरे दोनों पैर उठी के अपने कमर से ऊपर खुद से लपेट लिया...और आगे चेहरे के पास बंटी का लंड दिखा जो ठीक मेरे माथे के ऊपर था और उससे लार टपक के मेरे चेहरे पर पड़ रही थी...

नीचे सन्नी के हाथ एक बार मेरी बूर पर पड़ी और वही हाथ सरक के मेरी गांड़ के छेद पर रेंगने लगी...ओह...गांड़ मारने के लिए छेद गीली कर रहा है...बंटी ने तो ढ़ेर सारा थूक पूजा की गांड़ पर उड़ेल दिया जिसका कुछ अंश बह के मेरे चेहरे पर भी पड़ी...

गांड़ मरवाने की सोच मैं खुद को तैयार कर ली थी और पूजा भी...फिर दोनों के लंड हम दोनों के गांड़ पर रगड़ खाने लगी और कुछ ही देर की रगड़ के बाद एक तड़के से सीधा रांग गली में प्रवेश करा दिया...

एक काँटें की माफिक तेज दर्द हुई जिसका असर सीधा हम दोनों की बूर पर हुआ...जोरों से बूर को मुह से जकड़ती दर्द को सहने की कोशिश करने लगी...और वो दोनों इस दर्द से बेखबर दनादन शॉट मारने लगे...

10-12 शॉट में गांड़ एडजस्ट हो गई...पूजा मेरे शरीर पर लदी थी पर फूल की भांति लग रही थी..कहते हैं ना औरत चुदाई के वक्त अपने से चार गुना ज्यादा वजन सह लेती है...पहले ये बात नहीं मानती थी पर आज देख भी ली और मान ली भी ..

फिर काफी देर तक मुझे नीचे कर गांड़ का चिथड़ा उड़ाया दोनों ने, फिर पूजा को नीचे कर गरदा मचाया सुनसान सड़कों पर...अब हम दोनों थकने लगी थी तभी तो बूर चूसाई बंद हो गई हमारी...

कुछ देर तक इसी तरह बजाने के बाद दोनों की चीख हल्की-2 आने लगी...मतलब अब ये भी चरम सीमा को पहुँच रहे थे...जबकि हम दोनों तो इतनी देर में ना जाने कितनी दफा चरम सुख प्राप्त की....

तभी दोनों ने तेजी से अपना लंड बाहर किए और हम दोनों को पहले की भांति अलग कर दिया...हम थक तो गए ही थे तो तुरंत ही अलग हो गई...और फिर दोनों सटाक से अपना-2 लंड दोनों बुर में घुसेड़ दिया...

पर इस बार कोई दर्द नहीं हुई..बस मस्ती में आह निकल गई...चार-पाँच तेज शॉट दोनों ने चीखते हुए मारे और फिर अपना लंड खींचते हुए दोनों हम दोनों के चेहरे पर लंड रख दिया...

और तभी बंटी के लंड से तेज पानी की धार निकली और मेरे चेहरे को भिगोने लगी...और दूसरी तरफ सन्नी मेरी बूर से अपना लंड निकाल पूजा के गुलाबी होंठों को लंड के पानी से सिंचने लगा..

हम दोनों लंड के गरम वीर्य से तृप्त हो रही थी...फर्क थी तो चोदा एक लंड ने जबकि पानी दूसरा लंड दे रहा था...झड़ने के बाद वो दोनों ने उसी मुंह में लंड साफ करने घुसेड़ दिया,जिस पर पानी गिराया था...

कुछ ही देर में मैं बंटी के लंड को साफ कर दी और पूजा ने सन्नी की...साफ होने के बाद दोनों हट गए हँसते हुए., जबकि हम दोनों अभी भी धमाके की हुई चुदाई में पस्त पड़ी थी...

करीब पाँच मिनट बाद दोनों ने अपने कपड़े पहन हाथों में मेरे कपड़े लिए हम दोनों के पास खड़े हो गए और बांह पकड़ उठा दिया...हम दोनों में इतनी हिम्मत नहीं थी कि बाइक से हट जमीन पर खड़ी होती...

फिर दोनों सहारे दे जमीन पर खड़ा कर दिए...फिर सन्नी ने मुझे आगे बढ़ा दूसरी तरफ खड़े बंटी व पूजा के पास ले गए और बोले,"बंटी, इसे भी पकड़ो मैं गाड़ी निकाल कर अलग करता हूँ..."

मैं और पूजा नंगी बेहोशी की हालत में बंटी के बांहों में पड़ी थी...तब तक सन्नी बाइक को मेन रोड की तरफ कर अलग कर दिया...फिर हम दोनों को किसी तरह बाइक पर नंगी ही बिठाया और मेरी साड़ी ले अपने पीठ से बाँध लिया...

हम दोनों उसके पीठ पर लद गए...

सन्नी: "यार ऐसे बेहोश में इसे घर कैसे ले जाएंगे...चलो अपने ही रूम पर लिए चलते हैं..सुबह पहुंचा देंगे..."

सन्नी की बात सुन बंटी हंसता हुआ बोला,"अरे कुछ नहीं हुआ इसे. .बस गरमी से बेहोश हो गई...बाइक पर हवा लगेगी तो दोनों होश में आ जाएगी..."

फिर दोनों चल पड़े...जब मेन रोड से चल बाइक मेरी गली की तरफ मुड़ी तो सच में मुझे होश आ गई...जबकि पूजा भी आँखें खोली थी पर अभी भी बंटी पर लदी थी...

रात की वजह से मैं नंगी होने के बावजूद तनिक भी शर्म नहीं आ रही थी...कुछ ही पलों में हम अपने घर के गेट के पास थी...बाइक से उतर हम दोनों वहीं पर बैठ गई...बंटी ने बाइक के डिक्की से पूजा की पर्स निकाला और गेट की चाभी सन्नी को थमा दिया..

सन्नी गेट खोला और बंटी बस हम दोनों को कंधे का सहारा दे रखा था जिससे हम दोनों चल कर अपने फ्लैट तक गए...और फिर हम दोनों धम्म से बेड पर पड़ गए...शुक्र है कि श्याम अभी तक नहीं आए थे...और फिर वो दोनों बॉय कह निकल गए........


सुबह ४ बजे मेरी नींद अचानक खुल गई..रात में इतनी थकान के बावजूद कैसे जग गई, मालूम नहीं...एक बात तो थी कि रात की दमदार चुदाई से एकदम तरोताजा महसूस कर रही थी...

बगल में श्याम पूजा से लिपटे सो रहे थे...पूजा भी सांप की तरह श्याम से लिपटी थी...अभी अगर कोई देख ले तो वो इन दोनों को मियां-बीवी कहेंगे और मुझे बहन...रात में श्याम कब आए,मुझे नहीं पता...

गेट सब तो सिर्फ सटी हुई थी क्योंकि हम दोनों तो आते ही पसर गई थी...श्याम आए तो लगाएं होंगे...खैर मैं उन दोनों को बिना डिस्टर्ब किए बेड से उतर गई और बाथरूम में चली गई...

फिर बाहर निकल सड़क पर नजर दौड़ाई तो अभी अंधेरा ही था...पर सड़कों पर लगी लाइट से काफी हद तक अँधेरापन जा रहा था...

मैं वहीं बालकनी में खड़ी हो ताकने लगी सड़कों पर और रूममालिक का इंतजार करने लगी...सच ही बोले थे कि नींद खुद-ब-खुद खुल जाएगी...

फिर मेले की बात जेहन में आते ही मैं सिहर गई...क्या जवाब दूंगी...एक बारगी तो मन हुई कि वापस जा कर सो जाऊँ..पर कब तक भागती..आज नहीं तो कल, उनके सामने तो पड़नी ही थी...

तभी दूर अँधेरे में कोई आती हुआ दिखाई दिया..मैं गौर से देखने लगी कि कौन हैं...अंदर ही अंदर रूम मालिक के डर से कांप भी रही थी...पर जैसे ही लाइट उन पर पड़ी तो स्पष्ट दिख गए...

कुछ ही देर में वे मेन गेट के पास रूक गए और मेरे फ्लैट की ओर निगाहें कर दिए...उनसे नजर मिलते ही मैं वेट करने बोल अंदर चली आई...

जल्दी से एक कॉटन टीशर्ट और कैप्री पहनी...फिर गेट खोल बाहर की तरफ निकल गई...गेट खुलते ही मेरी नजर उनके नजरें से जा टकराई...हम्म्म्म...नाराजगी साफ झलक रही थी...

मैं बाहर निकल गेट को सिर्फ सटा दी..मैंने गेट जैसे ही लगाई वो चल दिए बिना कुछ कहे..मैं तेजी से गेट को छोड़ी और उनके बगल में जाकर चलने लगी...

कुछ देर तक तो यूँ ही चुपचाप बस बढ़ती गई..उस ऑटो वाले केतन के मोहल्ले से गुजरती मेरी नजर उसके घर को ढूँढ़ने लगी.. पर इतनी सुबह कितने लोग जगते हैं समझ ही सकती हूँ...

अपनी इस नादानी हरकत पर हल्की मुस्कुरा कर रह गई...कुछ ही देर में हम इस मोहल्ले को क्रॉस कर दूसरे मोहल्ले में पहुँच गई थी...हम्म्म्म..दिखने से ही काफी रईस लगता था ये मोहल्ला...कोई भी बिल्डिंग की ऊपरी छत तो बिना सर ऊपर किए तो देख नहीं सकते थे...

खैर, अब काफी देर हो गई थी...ना मैं कुछ बोल रही थी और ना वो..बस चली जा रही थी..मैंने ही बातचीत की पहल शुरू करने की हिम्मत जुटाई और बोली,"सॉरी...." और उनकी तरफ देखने लगी ...

वो मेरे मुख से आवाज सुनते ही एकदम रूखे नजरों से मेरी तरफ घूरे...उन्हें अपनी तरफ देख मैं अपने चेहरे पर हल्की मुस्कान लाती हुई एक बार फिर सॉरी बोली पर इस बार आवाज नहीं, सिर्फ मुँह की पटपटाहट थी...

"क्यों....?" वो अपने सख्त लब्जों को अपने चेहरे पर हैरानी दिखाते हुए बोले...

मैं अब क्या जवाब दूँ इस क्यों का..उधेड़बुन में पड़ गई कि आगे की बात कहाँ से शुरू करूँ...आपत्तिजनक हालत में मैं पकड़ी गई थी तो हर बात को स्पष्ट करना काफी मुश्किल हो रही थी..किसी तरह आधी-अधूरी बात शुरू की,"वो...कल रात मेले में..."

"हाँ तो क्या मेले में...तुम्हें पसंद है वो सब करना तो करो...मुझे क्या..नेक्सट मंथ वैसे भी घर खाली करना है तुमलोगों को...आज शाम तक आपके पति को इन्फॉर्म कर दूँगा..."उसने एक ही लब्ज में अपने अंदर का गुस्सा बाहर कर दिया...तभी वे एक दूसरी सड़क की तरफ मुड़ गए..

मैं किसी गहरे चोट से आहत दर्द को सहने की कोशिश करने लगी...अपनी खोई इज्जत को पाने के बाद दुबारा खो दी...वैसे एक बात तो थी ये अलग किस्म के इंसान थे...

एक दम नेकदिल और खुले विचारों से परिपूर्ण व्यक्तित्व वाले...ना कोई डर ना कोई झिझक...और सबसे बड़ी बात उनका आदर्श...अगर कोई और रूम मालिक होता तो अब तक वो मुझे अपने लंड के नीचे सुलाए रहता...

खैर गलती मेरी थी तो क्या कह सकती थी...इतने अच्छे लोगों के साथ कितना गलत कर दी...इनके विश्वास को जख्मी कर दी...खुद को कोसने लगी...अब इस बात को ना छेड़ने की सोच ली थी...

तभी सामने एक पार्क दिखाई दी...पार्क उतनी बड़ी नहीं थी, पर काफी सुंदर और साफ सुथरी थी...हम दोनों अंदर घुसे और हरी भरी घासों पर तेज कदम,छोटे कदम की भांति टहलने लगे...

"तुम्हारे पति के साथ कौन थी...?" अचानक से वे मेरी तरफ मुड़े बिना पूछे..जिससे मैं हल्की चौंकती हुई उनकी तरफ देखने लगी..पर वो सीधी नजरें किए बस बढ़े जा रहे थे...

"..वो दोस्त थी उनकी...मेले में ही मिल गई थी..फिर हमारे दोस्त भी मिल गए तो हम सब साथ हो ली..."मैं अब सच्चाई से पेश आना चाहती थी...

"..फिर अलग-2 घूमने का आइडिया किसका था..." वो अबकी बार मेरी तरफ घूरे पर नजरें काफी भयानक थी मेरे प्रति...मैं डर से अपनी नजरें आगे की और बोली,"..उनका ही था...क्योंकि वो उनकी सिर्फ दोस्त ही नहीं, गर्लफ्रेंड भी थी..."

"...और तुम्हारी. .?"उन्होने जवाब खत्म होते ही एक और सवाल दाग दिया...मैं सोचने पर मजबूर हो गई कि हाँ कहूँ या नहीं...कुछ निष्कर्ष नहीं निकाल पा रही थी...पर वो मेरे जवाब का इंतजार कर रहे थे...

कई चक्कर लगाने के बाद वे पार्क के अंतिम छोर पर पहुँचते ही वहाँ लगी बेंच पर बैठ गए और सुस्ताने लगे...थक गए थे शायद...उनसे ज्यादा तो मैं हांफ रही थी...मैं भी आगे बढ़ उनके बगल में बैठ गई....








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Sunday, August 24, 2014

FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--31

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--31

 हम सब पूरे मेले में पहले तो सिर्फ चक्कर ही काटते रहे...कभी कभी किसी मेले में लगी दुकान पर खड़ी टाइम पास करती...पूजा कुछ अपने लिए सामान भी खरीदी तो मैं भी कुछ-2 ले ली...

फिर हम सब मनोरंजन क्षेत्र की तरफ घुसी जहाँ तरह-2 के मनोरंजन के साधन थे...हम चारों फिर इनमें खूब सारी मस्ती की...बड़ी वाली झूला पर जब चढ़ी तो मैं तो डर से पानी-2 हो गई थी और सन्नी से चिपक गई थी...

बस सन्नी को पूरा मौका मिल गया...जैसे ही झूला ऊपर की तरफ बढ़ती वो मेरे होंठों को अपने दांतों से दबा लेता और मेरी साड़ी के अंदर हाथ डाल चुची मसलने लगता...बिना ब्रॉ में ब्लॉउज पर से महसूस होती कि सन्नी मेरी नंगी चुची मसल रहा है...

फिर जब नीचे की तरफ आती तो छोड़ देता क्योंकि इस तरफ से देखने वाले और झूला पर चढ़ने वाले की काफी भीड़ थी...मैं इस तरह की चुसाई में भी गर्म हो गई और फिर सन्नी का साथ भी देनी लगी...

जब झूले कई चक्कर लगाने के बाद रूकी तो मैं सन्नी से अलग हुई...उफ्फ्फ..मेरी साड़ी सीने से सरक कर हम दोनों के बीच फंसी थी...और सामने ढ़ेर सारे मर्द की निगाहें मेरी खड़ी निप्पल को घूर रही थी जो ब्रॉ की अनुपस्थिति में ब्लॉउज से साफ झलक रही थी...

और ऊपर से तेज लाइट में मेरी चुची भी कुछ-2 दिख रही थी...मैं तेजी से साड़ी खींची और बदन पर रख ली...पर इस दौरान ना जाने कितने लोग अपनी आँखें सेंक चुके थे...

मैं उठी और तेजी से सन्नी के पीछे हो ली...तभी पीछे से किसी ने कंधे पर हाथ रख दी...पलटकर देखी तो पूजा थी जिसे देख मेरी हँसी निकल पड़ी...

"अपने लिपिस्टिक साफ कर लो, ओंठ से बहकर नीचे पूरी फैली हुई है...ही..ही..ही..."मैं पूजा धीमे से हँसती हुई बोली जिसे सुन पूजा बंटी से हैंकी मांगी और चारों तरफ नजर दौड़ाती लिपिस्टिक साफ करने लगी...

पर कुछ लोग तो गुलाबी पूजा की चोरी पकड़ ही ली थी और देख कर मंद-2 मुस्कुरा रहे थे...तब तक हम बाहर निकल गए...तभी मेरी नजर सामने पड़ी..ओह गॉड..मर गई...

झूले पर चढ़ने वाले की लाइन में रूम मालिक भी अपने फैमिली के साथ लगे थे...क्या मुसीबत थी..आज सुबह ही वो मुझे दोस्त माने थे और अभी मुझे किस हालत में देख लिए...

बीवी के डर से तो इस वक्त टोकेंगे नहीं पर जब अगले दिन मुलाकात होगी तो क्या जवाब दूँगी...सोचने से ही मेरी फट रही थी...और ऊपर से उनकी बड़ी होती आँखें...मैं सबको चलने बोल तेजी से खिसक ली...

अब तो मैं ज्यादा देर तक रूकना नहीं चाहती थी...पूजा से फोन ली जो कि वो पर्स में डाल रखी थी और श्याम को फोन करने लगी...ऐसे परेशान देख वो तीनों आश्चर्य से मेरी तरफ देखे जा रहे थे आखिर हुआ क्या...

"हाँ हैल्लो, कहाँ हैं अभी...पूरी रात घूमना ही है क्या...घर नहीं जाना.."श्याम के फोन उठाते ही मैं बोल पड़ी...

"हाँ बस आ ही रहा हूँ...बस 10 मिनट और..तुम लोग को हो गया क्या..?"उधर से श्याम की आवाज आई..

"हाँ.."मैं एक ही शब्दों में अपनी बात कह दी और असलियत बात दबा दी..

"अच्छा ठीक है, तुम लोग स्टैंड के पास रूको, मैं वहीं पहुँच रहा हूँ...और हाँ अपने दोस्त को मेरे आने तक जाने मत देना...तुम दोनों अकेली मत रहना..ठीक है.."श्याम ने पूरी बात एक ही सुर में कह दिए...जिसे सुन मैं ओके कह फोन काट दी...

कुछ ही पलों में हम सब स्टैंड के पास थे...यहां रूकते ही पूजा पूछ बैठी,"क्या हुआ जो ऐसे अचानक चली आई.."

मैं पूजा की तरफ मुस्कुराती हुई बोली,"हुआ कुछ नहीं,..बस अब घूमने की इच्छा नहीं हो रही है इसलिए चली आई...तुम्हे और घुमनी थी क्या..?"

पूजा: "नहीं पर ये बात नहीं है...जरूर कोई बात है जो हमसे छिपा रही हो...नहीं बतानी हो तो कह दो, मैं नहीं पूछती..."

मैं पूजा की नाराजगी उसकी आवाजों में साफ सुन ली थी..सो मैं बोली,"वो वहाँ झूले से उतरते रूममालिक देख लिए थे..और हम दोनों को ऐसी हालत में देख लिए तो शायद कहीं उन्हें बुरा लगे और गुस्से में हो हल्ला करेंगे तो अच्छा नहीं ना होगा...वैसे भी काफी मस्ती कर ही ली तो सोची अब घर ही चली जाए..."

मेरी बात सुन पूजा कुछ बोल नहीं पाई..शायद वो भी स्थिति को समझ गई थी...तभी सामने से श्याम और सुमन एक दूसरे का हाथ थामे हंसते हुए चले आ रहे थे...उन्हें देख पूजा और मैं नजरों में ही मुस्कुरा पड़ी...

"तुम दोनों अभी घूमोगे या चलोगे..?" मैं बंटी और श्याम से एक ही साथ पूछी...

"अब यहाँ रह के घंटा बजाएंगे क्या...मैं भी बाइक निकाल रहा हूँ.." कहते हुए दोनों बाइक लेने चले गए...तब तक श्याम और सुमन भी आ गए और मुस्कुराते हुए बाइक लेने चले गए...

हम तीनों अपने-2 यार का इंतजार करने लगी...कुछ ही पलों में तीनों अपनी-2 बाइक हम तीनों के पास खड़ी कर दिए...तभी श्याम बंटी और श्याम से बोले,"बात ऐसा है कि सुमन की दोस्त मिली थी तो हमारे साथ देख बोली कि आप सुमन को घर तक ड्रॉप कर देना और वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ चली गई...तो अगर आप दोनों अगर फ्री हो तो इन दोनों को ले कर चलिए और सुमन को पहले छोड़ देंगे फिर इन्हें ले जाएंगे..."

"कैसी बात करते हैं आप, इतनी रात को भला क्या काम रहेगा..चलिए...साथ ही चलेंगे और इनको ड्रॉप करने के बाद ही हम निकलेंगे..."बंटी बोला जिसके साथ सन्नी भी हाँ में हाँ मिला दिया...

और फिर इतना सुनते ही मैं सन्नी की बाइक पर बैठ गई...और पूजा बंटी के साथ जबकि सुमन श्याम के साथ बैठ के चिपक कर बैठ गई...और फिर हम सब एक साथ निकल पड़े..


 करीब आधे रास्ते चलने के बाद श्याम एक जगह रूके जहाँ से एक सड़क दूसरी तरफ निकल रही थी..पीछे से बंटी और सन्नी भी बाइक को श्याम के बगल में रोक दिए...

"इधर ही जाना है क्या..?"सन्नी उस दूसरी तरफ निकली सड़क की ओर इशारा करते हुए बोले...

"हाँ और आप लोग को किधर जाना है..."श्याम सन्नी की बात का जवाब देते हुए बोले...

"हम दोनों का घर आपके इलाके से 3-4 किमी और आगे है पर हमारी छोड़िए, पर अब ये कहिए यहाँ रूक कर आपका वेट करूँ या आहिस्ते-2 आगे बढूं.."बंटी बीच में अपनी बात रखते हुए बोला...

"फिर तो अच्छा ही है...आप लोग इन दोनों को लेकर निकलिए...मैं सुमन को ड्रॉप कर के आता हूँ..ठीक है..?" श्याम गंभीरता से मुस्कुराते हुए बोले...

"ओके, ठीक है...मैं इन्हें घर तक ड्रॉप कर निकल जाऊंगा..."सन्नी कहते हुए अपनी बाइक स्टॉर्ट कर दी...श्याम भी ओके कह निकल गए सुमन को छोड़ने...और इधर हम दोनों की बाइक भी चल पड़ी...

फिर मैं और पूजा अपनी-2 बाइक सवार से कस के चिपक गई...साड़ी पहनी थी तो उतनी ढ़ंग से नहीं चिपक पा रही थी पर ऊपर से दोनों चुची उनकी पीठ में तो धाँस ही चुकी थी...

तभी मैं अपने हाथ सरकाते हुए लंड के समीप ले गई और हल्के-2 दबाने लगी...सन्नी अपने लंड पर हाथ महसूस करते ही कराह पड़ा...सन्नी को भी बड़ा मजा आ रह था ऐसे बाइक चलाते....

उधर पूजा की तरफ नजर की तो वो भी बंटी के लंड को जिप से बाहर करने में लगी थी...पर निकल नहीं रही थी जींस से...मैं भी उसकी देखा-देखी सन्नी की जिप खोल दी और हाथ अंदर कर लंड को अंडर वियर से बाहर करने लगी...

तभी बंटी अपनी बाइक काफी स्लो कर ली...मैं और सन्नी एक साथ उसकी तरफ नजर की तो बंटी लंड निकालने के लिए बाइक स्लो की थी और अगले ही पल उसका लंड पूजा के हाथों में थी...

सन्नी भी तेजी से बाइक स्लो किया और झटपट में अपना लंड मेरे हाथों में भर दिया और फिर दोनों लंड मसलवाते बाइक चलाने लगा...अभी 5 मिनट ही हुए थे कि बंटी ने अपनी बाइक अचानक से एक सिंगल सड़क में घुमा दी और कुछ दूर आगे चल कर एक बड़ी सी बिल्डिंग के पास रूक गया...

दिखने से ये कोई कॉलेज लग रही थी...सन्नी तब तक कुछ आगे बढ़ गया था...शायद सन्नी आगे बढ़ना चाहता था और बंटी भी रूकने के लिए बोला नहीं था...आगे से मुड़ कर जब पूजा के पास आई तो ये क्या...दोनों शुरू हो गए थे यहीं सड़क पर...

आसपास नजर दौड़ाई तो कहीं कोई नहीं था...वैसे भी कॉलेज में कौन रात को रहता...
गेट के पास स्ट्रीट लाइट जल रही थी पर उसकी रोशनी पूरी तरह हमारे निकट नहीं पहुँच रही थी ..बस परछाई लग रहे थे हम सब..

पूजा तेजी से बंटी के लंड को मुँह में भर आगे पीछे कर रही थी, जबकि बंटी बाइक पर दोनों पैर एक तरफ किए खड़ा मस्ती से आहें भर रहा था...सन्नी अगले ही पल मेरी कलाई पकड़ अपनी तरफ खींचा और मेरी गर्दन पर हाथ रख हल्के दबाव दे डाला नीचे झुकाने के लिए...

इतने देर से लंड की गर्मी पा कर गर्म तो हो ही गई थी...तो बिना कोई विरोध किए अपने होंठ सन्नी के लंड से छुआते मुंह में भर ली...मेरे होठों की गरमी पाते ही सन्नी की आह निकल गई और वो सिससकारी लेने लगा...

मैं उसे और मजे देने की सोच तेज-2 चुप्पे लगाने लगी और उसके अण्डो को निचोरने लगी...सच में काफी एक्साइटेड हो रही थी मैं...खुली सड़को पर बेफिक्र हो कर लंड चूस रही थी....

करीब 5 मिनट की ननस्टॉप चुसाई में ही सन्नी बदहवाश हो गया और तेजी से मुझे अपने लंड से जुदा कर दिया...अलग होते ही मेरी नजर पूजा की तरफ गई तो वो भी हाँफ रही थी और बंटी अपना जींस खोल रहा था...

बंटी को नंगा होते देख सन्नी भी अपना जींस खोलने गया...मतलब चुदाई होने वाली थी हम दोनों की...पर किसी के आ जाने की डर मेरे अंदर जग गई...

"सन्नी, कोई आ जाएगा...यहाँ सड़क पर ठीक नहीं होगा..."मैं अपनी डर को बाहर करती बोल पड़ी...जिसे सुन बंटी और सन्नी एक साथ मेरी तरफ देखने लगे...

"...मतलब लंड अभी खड़ा है और चूत चोदेंगे कल..." बंटी सेक्स की आग में जलता खिसियाते हुए बोल पड़ा और अपना जींस बाइक की हैंडल में फंसा दिया...

"नहीं, मैं वो नहीं कह रही..आज ही करना पर यहाँ खुले में ठीक नहीं...." मैं अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाई कि बीच में बंटी बोल पड़ा,"चुपचाप रह समझी...आज तो हम दोनों ही चोद रहे अगर ज्यादा चपड़-2 की तो 10 लौंडे को बुलवा लूंगा अभी और बीच सड़क पर चोदूँगा दोनों को..शुक्र मना कि साइड में चोद रहा हूँ..."

कहते हुए बंटी अपनी बाइक को बड़ी स्टैंड पर खड़ी करने लगा...मैं बंटी के इस स्वभाव से थोड़ी डर गई और चुप रहने में ही भलाई समझी...तभी सन्नी अपना जींस बाइक पर रखने आगे बढ़ा और मेरी तरफ देखते हुए बोला,"कुछ नहीं होगा..रात के 12:30 बज रहे हैं और उधर मेन रोड छोड़कर कोई इधर सुनसान कॉलेज गली में नहीं आएगा...इधर किसी का घर भी नहीं है...बस कॉलेज है.."

पूजा: "यस दीदी, कॉलेज बंद हो तो दिन में इधर कोई नहीं फटकता..अभी तो रात है...लेट्स इंज्वाय...वैसे भी जीजू सुमन जी की लिए बिना तो आएंगे नहीं..." पूजा के कहने से थोड़ी राहत हुई डर से...पर अंदर ही अंदर एक अलग रोमांच भर गई तन बदन में शहर के बीच सड़कों पर चुदने की सोच से...

फिर सन्नी ने भी अपनी बाइक बड़ी स्टैंड पर कर बंटी के बाइक से बिल्कुल सटा के खड़ा कर दिया...फिर दोनों बाइक के दोनों तरफ खड़ा हो हम दोनों को एक साथ आने का इशारा किया...

"आजा रण्डियों, आज खुले सड़क पर कुतिया की तरह चोदता हूँ...तेरा भड़वा दूसरी औरत को चोदता फिरता है तो तू भी दूसरे लंड को लेती रहा कर..." हम दोनों बंटी और सन्नी की गाली को मजे से सुनती उनकी तरफ बढ़ने लगी...


 जैसे ही हम दोनों उसके निकट पहुँचे हम दोनों की साड़ी पलक झपकते ही जमीन पर थी...इतनी तेजी से उसने साड़ी पकड़ के हमें नचा दिया कि पूरी की पूरी साड़ी खुल गई...अब हम दोनों केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी...

उन दोनों के जंगलीपन हम दोनों को और मस्ती की गहराई में डुबो रही थी...मैं और पूजा के बीच दो बाइक की दूरी थी जहां हम दोनों की एक साथ अलग-2 मर्दो की प्यास बुझाने खड़ी थी...तभी सन्नी आगे हाथ बढ़ा मेरी ब्लॉउज पकड़ अपनी तरफ खींचा...

कपड़े तो मजबूत थे पर ब्लॉउज के हुक इस हमले को नहीं सह सकी और पट-2 करती टूट गई...यही आवाज पूजा की तरफ से आई और आज की पिंक पूजा बीच सड़क पर नंगी हो गई...

और अब मैं सन्नी के कैद में जकड़ी हुई थी जहाँ उसका अंडरवियर से बाहर निकल चुका लंड सीधा पेटीकोट को धँसाती मेरी बुर में घुसने को आतुर थी...तभी सन्नी ने पेटीकोट के नाड़े खींच दिए और हल्के लंड को पीछे खींच लिया...जिससे पेटीकोट सरकती हुई नीचे चली गई...

तभी दूसरी तरफ बंटी पूजा को लिए दोनों सट के लगी बाइक की सीट पर पीठ के बल लिटा दिया...जिससे पूजा की चूतड़ बंटी की बाइक पर थी जबकि चेहरा सन्नी की बाइक पर पड़ गई...

"आज दिखाता हूँ कि असली चुदाई क्या होती है शाली.."कहते हुए सन्नी मेरी छाती पर हाथ रख पीछे की तरफ ढ़केल दिया..जिससे मैं पूजा के ठीक बगल में पीछे की तरफ गिर गई और गिरने से हल्की दर्द में आह निकल पड़ी...

अब हम दोनों बाइक पर लेटे हुए थे बस बूर से नीचे का हिस्सा जमीन पर था...अपना चेहरा पूजा की तरफ की तो उसकी बूर पर बंटी लंड रगड़ रहा था...और तभी सन्नी का लंड भी मेरी बुर पर महसूस हुई जिसे पूजा आसानी से देख रही थी...

तभी सन्नी और बंटी ने आगे झुक हम दोनों की चुची को कस के पकड़ा और वन-टू-थ्री कहता पावर गियर में जड़ तक लंड पेल दिया...हम दोनों की चीख इस वीरान सड़कों पर गूँज उठी जो कॉलेज की दीवारों से टकरा के देर तक सुनाई देती रही....

पर इस चीख से उन दोनों को कोई असर नहीं हुआ और बेफिक्र हो लगा दनादन पेलने...हम दोनों की चुदी चुदाई बुर रहने के बावजूद उसने चीख निकलवा दी, सोचनीय थी...वो ऐसे चोदता रहा मानों कि कोई मशीन अपनी गति से चल रही हो..सटासट-सटासट-सटासट....

कुछ देर तक दर्द से बिलबिलाने के बाद जब कुछ शांत हुई तो मेरी चीख सिसकारी में बदल गई..."ईसससस...आहह..आहहहह...ओहहहह..यससस..सन्न्न्न्नी...और जोर सेऐऐऐऐऐ....आउच्च्च्च्च...यससस..."

साथ में पूजा भी सेक्स की आग में तड़पती गंदी गंदी गालियां भी बकने लगी,"हाँ ऐसे ही कमीने...जोर से पेल आहहहहह नाआआआआ बहनचोददददद....आउउउउउउउ..साले मैं तेरी बहन नहीं जो आराम से चोद रहाआआआआआआआआआ...."

पूजा की आवाज अचानक आआआआ में बदल गई...बंटी गाली सुनते ही उसकी चुची इतनी जोर से उमेठ जो दिया था और वैसे ही उमेठे तेज धक्के लगाता हुआ बोला,"मादरचोद, बहनचोद बोलती है रण्डी...कुतिया ना बनाया तुझे अपना तो बंटी मेरा नाम नहीं...ले राण्ड की पैदाइश...तेरी तो पूरी खानदान चोदूँगा...बुला ला अपने गाँव से सबको...आहहहह...याहह..याहह..."

फिर इस कड़क चुदाई से मेरे मन में भी जिज्ञासा जग कि मैं भी और दर्दनाक चुदाई करवाऊँ...बस ये सोची और पटापट 10 रंग बिरंगी गालियाँ बक दी...फिर क्या..सन्नी भी गुस्से में मेरी चुची को इतनी जोर से उमेठा कि मेरी आँखों से अश्रु बह निकली और आवाज गुम...

पर वो दोनों तो पूरे दरिंदे बन गए थे...बिना किसी परवाह के तड़ातड़ पेलने लगा...काफी देर तक यूँ ही पेलता रहा दो जानवर हम दोनों को...ऐसा लगता था कि पावर कैप्सूल खा कर आया हो...

तभी उसने हम दोनों की चुचियाँ छोड़ दिया...चुची के आजाद होते ही हम दोनों की आवाजें भी आजाद हो गई और लगी गर्मी से परेशान कुतिया की तरह किकियाने...पर इसमें हम दोनों की संतुष्टि साफ सुनाई पड़ रही थी...सच में,आज की चुदाई जिंदगी भर नहीं भूलूँगी...

तभी सन्नी मेरे एक पांव जमीन से उठा अपने सीने तक कर लिया, जिससे मैं पूजा की बूर की तरफ आधी करवट में आ गई...पूजा तो पहले ही आधी करवट में थी...अब हालत ये थी कि पूजा के बूर ठीक मेरी नाक के सामने थी...और नीचे पूजा की नाक मेरी बूर के सामने...जिसमें लंड जड़ तक धँसे थे...

बूर-लंड की मिली जुली पानी की खुशबू अब हम दोनों के अंदर तक जा रही थी..फर्क थी तो बस ये कि ना बूर मेरी थी और ना मुझे पेलने वाला लंड...दोनों अलग...और इसकी रोमांच तो आग में घी डालने का काम कर रही थी...

तभी एक जोर की ठोकरें बूर में पड़ी जिससे मैं अपनी आहह निकालती मस्ती में डूबने लगी...और यही ठोकर पूजा की भी पड़ी...हम दोनों सेक्सी आवाजें करती आँखों के सामने एक दूसरे की बुर चुदते देख रही थी...

धक्के की तेज गति से मेरे हाथ पूजा की चूतड़ से पीछे की तरफ जा उसके जमीं पर वाले पांव की जांघ थाम ली और पूजा मेरी...अब तो हम दोनों के नाक से कभी-2 लंड टकरा जाता...और फिर लंड की खुशबू से खुद को ज्यादा देर तक नहीं रोक पाई...अपनी जीभ निकाल पूजा की बुर में घुसता निकलता बंटी के लंड पर रख दी...

नीचे पूजा भी सन्नी के लंड पर अपनी जुबान लगा दी और लंड का स्वाद चखने लगी जो कि मेरी बुर की पानी से सनी थी..इधर मैं भी अपनी लपलपाती जीभ बंटी के लंड पर रख पानी सोख रही थी जो पूजा अपनी बूर से निकाले जा रही थी...

हम दोनों की चुचियाँ आपस में दब रही थी...इस अनोखे ढ़ंग हो रही चुदाई से मजे और दुगने बढ़ गए थे...अंदर से एक आवाज निकल रही थी और...और...और...साथ हीमैं भी मना रही थी कि काश ये रात खत्म ना हो...











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FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--30

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--30

 फिर हमने वापस बेडरूम में गई तो पूजा नहीं थी..शायद बाथरूम गई थी..श्याम अभी भी बेड पर पड़े हुए थे..मैं उनके पास बैठती हुई उनके सीने पर किस करती हुई बोली,"उठिए ना...ऑफिस नहीं जाना..."

श्याम: "उम्म्म्म...मूड नहीं है डियर..आज सोने दो...हुअंअअअ्म्म..."श्याम करवट बदलते हुए सोने की कोशिश करने लगी...मैं भी मुस्कुराते हुए छोड़ दी और उठ गई..फिर पूजा बाथरूम से फ्रेश हो कर निकली तो मैं फ्रेश होने घुस गई...

फ्रेश होने के खाना खाई और आराम करने चली गई..श्याम करीब 12 बजे उठे और फ्रेश होने के बाद बाहर निकल गए...मैं फिर वापस पूजा के बदन से चिपक के सो गई...शाम में करीब 5 बजे नींद खुली...

पूजा और मैं कुछ टहलने छत पर चली गई...कुछ घूमने के बाद बोली,"पूजा,वो सामने वाला नजर नहीं आता.."

पूजा: "हाँ दीदी, अब शायद उसे शर्म आती होगी कि उसका भी बाप है सेक्स में..खुद को मॉडर्न समझता था छत पर चुदाई कर के..शाले की हेकड़ी निकल गई हम दोनों को एक मर्द के साथ देखकर...ही..ही..ही.."

"हाँ...हम दोनो जितने कमीनी हैं,उतनी तो वो सोच भी नहीं सकती..."मैं हंसती हुई पूजा की बात में हाँ मिलाई...फिर इसी तरह की कुछ इधर उधर की बातें होती रही...अचानक तभी सीढ़ी से ऊपर किसी के चढ़ने की पदचाप सुनाई दी...

हम दोनों आपस में गुपचुप ही इशारे से पूछ रही थी कि कौन हो सकता है...तभी पूजा आगे बढ़ नीचे कैम्पस में झाँकी तो तेजी से अपने पास बुलाई...मैं झटपट पुजा के बगल में खड़ी हो गई...

नीचे एक बाइक लगी थी...इस घर में तो बाइक थी पर ऐसी नई नहीं थी...बिल्कुल चमकती हुई...शायद खरीदे हुए कुछ दिन ही हुए हों...मैं हौले से पूजा से बोली,"शायद नीचे किसी के गेस्ट होंगे और वो घूमनेछत पर आ रहे है..."

पूजा: "आने दो, अकेला आया और मस्त लगा तो खा ही जाऊंगी...ही..ही..ही..." और पूजा खिलखिला पड़ी जिससे मैं भी खुद को रोक नहीं पाई...फिर हम दोनों वापस सीढ़ी की तरफ देखने लगी भूखी लोमड़ी की तरह कि शिकार आ रहा है...

तभी सामने देख हम दोनों के सारे अरमान शीशे की तरह बिखर गई...सामने श्याम थे...हम दोनों अपने मंसूबे की नाकामयाबी पर एक दूसरे की तरफ ताक हंस पड़े...जिसे देख श्याम हंसते हुए बोले,"क्यों गर्ल्स, हमें देख के हंसी क्यों निकल पड़ी..."

"नहीं दरअसल हम दोनों नीचे नई बाइक देखी तो सोची नीचे किसी के यहाँ गेस्ट आए हैं जो ऊपर आ रहे हैं तो सोची कुछ लाइनबाजी कर लूँ..पर....वैसे ये किसकी बाइक है..." मैं मुस्कुराती हुई बोली..

"ओहहह...फिर तो बहुत बुरा हुआ तुम दोनों के साथ...खैर इस बुरेपन को दूर करने ही आया हूँ...चलो तैयार हो जाओ और घूमने चलते हैं नई बाइक से..."श्याम हमदरदी जताते हुए बोले...

पूजा: "वॉव जीजू, बाइक लिए हैं क्या...थैंक्स जीजू..." और पूजा श्याम से लिपटती हुई किस करने लगी खुशी से...मैं भी खुश थी कि श्याम को अब ऑफिस ऑटो से नहीं जानी पड़ेगी और साथ में हम लोग भी बाहर घूम लेंगे...

"आज कहाँ ले जाएँगे घुमाने...?" मैं भी आगे बढ़ श्याम के शरीर से चिपक उनके गाल चूमती हुई पूछी...जिसे सुन श्याम और पूजा किस तोड़ दिए...

श्याम: "मेला...शहर के बाहर एक जगह कृष्णाष्टमी का मेला लगा है...वहीं चलेंगे..अब चलो नीचे और तैयार हो जाओ मेरी रानी..." कहते हुए श्याम अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए ...

कुछ देर किस करने के बाद हम अलग हुए और नीचे चले आए...फिर हम एक साथ कपड़े चेंज करने लगी...कुछ ही पलों में हम दोनों लड़की सिर्फ पेंटी और ब्रॉ में थी...

श्याम इस पल का बखूबी से मस्ती लेते हुए बेड पर बैठे देख रहे थे...मैं ब्लैक कलर की एक ट्रांसपैरेंट साड़ी निकाली और साथ की मैच्युवल ब्लॉउज,पेटीकोट बेड पर रख दी...तभी श्याम बीच में बोले..

श्याम: "जान, आज बिना ब्रॉ की ब्लॉउज पहनो...मस्त लगोगी...और पूजा तुम भी ब्रॉ निकाल दो.. " श्याम कह कर मजे से उड़ते हुए आनंदमय हो गए...मैं भी मुस्कुराते हुए ब्रॉ की हुक खोल दी...

पूजा: "दीदी, मुझे भी साड़ी पहननी है आज..."और फिर पूजा अपनी आँखें नचाती हुई मुस्कुराने लगी..मैं और श्याम उसकी बात पर हंस पड़े,जिससे पूजा भी हँसे बिना रह नहीं पाई...

अगले ही पल एक गुलाबी पारदर्शी साड़ी उसके सामने रख दी...पूजा काफी खुश होती हुई अपनी ब्रॉ की हुक खोलने लगी...

श्याम: "पूजा, अगर साड़ी बाँधने में मदद की जरूरत हो मैं पास ही बैठा हूँ..." कहते हुए चुटकी बजाते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दिए...जिस पर पूजा आँखें ऊपर कर हँसती हुई बोली,"सॉरी...मैं साड़ी पहनना अच्छी तरह जानती हूँ..."

कुछ ही देर में हम दोनों तैयार हो गए, जिसे श्याम आँखें फाड़ फाड़ कर देखे जा रहे थे...जब मैं उन्हें ऐसे एकटक निहारती देख इशारे में पूछी क्या हुआ...

श्याम: "माशाल्लाह....लोग उस मेले को छोड़ इस मेले को देखने टूट पड़ेंगे...कसम से, सेक्स की देवी दिखती हो तुम दोनों जो 80 साल के बुड्ढ़े का भी खड़ा कर दे..."

"अच्छा,अच्छा...मैं आज पहली दफा मेले घूमने नहीं जा रही हूँ...वहाँ ढ़ेर सारी खूबसूरत लेडिज बन-ठन के आती हूँ..अच्छी लगती हूँ या नहीं ये बताइए बस..." मैं मुस्कुराहट में बोल पड़ी...

श्याम: "सुपर...बिल्कुल परी लग रही हो...गोरे बदन पर ब्लैक साड़ी...अल्लाह बचाए नजर लगने से...चलें अब.."

मैं खुश होती हुई हाँ कह दी और उनके साथ रूम लॉक कर निकल गई गुलाबी पूजा के साथ...वो तो और खूबसूरत लग रही थी गुलाबी साड़ी,गुलाबी लिपस्टिक,गुलाबी सैंडल,गुलाबी हेयरबैंड,गुलाबी नेलपॉलिश...सुपर...


 मैं और पूजा श्याम के संग बाइक से करीब एक घंटे तक चलने के बाद मेला पहुँचे...श्याम ने बाइक स्टैंड में बाइक लगा दी..इस दौरान अकेली लड़की देख ना जाने कितने कमेंट सुनने को मिल गए...

पर हम दोनों कोई जवाब दिए बिना बस बातों में मशगूल मजे लेती रही कमेंट्स के...कुछ पल में श्याम के साथ मंदिर की तरफ गई जहाँ भक्तों की काफी भीड़ थी...हम दोनों लेडिज लाइन में लग गई मंदिर में जाने के लिए..

जबकि कुछेक दूरी पर मर्दों की लाइन थी, जिसमें से कुछ तो चुपचाप थे और कुछ सभी लेडिज को देख हल्के से कमेंट्स कर रहे थे...अजीब इंसान है...भगवान के सामने भी नहीं चुप रहते...

खैर कुछ ही पलों में हम दोनों भगवान के सामने शीश नमन किए...तभी मेरे सर पर हाथ पड़ी और सरकती हुई नंगी पीठ पर रगड़ गई..मैं चौंक सी गई और उठी तो सामने पंडा थे जो मंदिरों में रहते हैं...

ऐसी रगड़ तो सिर्फ वासना की होती है, जिसे हम लेडिज लोग अच्छी तरह पहचान लेते हैं..वो मेरी तरफ वहशी निगाहों से देख आशीर्वाद में कुछ बुदबुदाते हुए प्रसाद बढ़ा दिया..जिसे मैं ली और चुपचाप वापस हो ली...

पूजा: "दीदी, ये तो पाखण्डी लगता था...देखी कैसे पीठ सहला रहा था कमीना..." पूजा चुप ना रह पाई और अपनी व्यथा कह डाली...

"छोड़ ना...आदत होगी उसकी...सभी को शायद ऐसे ही आशीर्वाद देते होंगे...चल अब घूमते हैं कुछ..."मैं बातों को टालती हुई बोली..पर पूजा बोल तो सच ही रही थी...वो भी कुछ समझ चुप रह गई...

पर श्याम अभी भी अंदर ही थे...हम दोनों बाहर खड़ी हो उनके आने का इंतजार करने लगी...कुछ ही देर में वो आते हुए दिखे पर वो अकेले नहीं थे...उनके साथ एक लेडिज थी जो साथ में हंसती हुई बातें करती आ रही थी...

हम दोनों कुछ समझ नहीं पा रही थी कौन है ये..तू तक श्याम मेरे निकट पहुँचते हुए बोले,"सीता, ये मेरी दोस्त है. सुमन..और सुमन से मेरी पत्नी सीता और ये पूजा.."

फिर ना चाहते हुए भी हम ने सुमन को हैलो बोली और फिर हम सब चल दिए...रास्ते में चुपके से श्याम कह दिए कि गर्लफ्रेंड है...जिसे सुन हम दोनों के होंठों पर मुस्कान तैर गई और थोड़ी जलन भी...

जलन इसलिए कि श्याम की प्रार्थना भगवान ने सुन ली और इनकी गर्लफ्रेंड से मिला दिए और हम दोनों....हम दोनों को ठेंगा दे दिए..खैर अब इन्हीं के साथ घूमती हूँ...

"आप अकेली आई है क्या..?"मैं अचानक सुमन से सवाल कर गई...मैं तो सोची कि ये मेरी सवाल से नर्वस हो जाएगी पर वो बोल्ड होती हुई हंसती हुई बोली,"नहीं...मैं अपने दोस्त के साथ आई थी पर यहाँ उसका बॉयफ्रेंड मिल गया तो थोड़ी देर में आती हूँ कह निकल गई और फिर मैं यहाँ एक घंटे से उसके इंतजार में खड़ी थी..."

उसकी बात सुन हम सब हँस पड़े...मन ही मन बोली कि हाँ अब तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड मिल गया तो तुम भी उड़ जाओ कहीं...तभी मेरी नजर बगल में पूजा की तरफ मुड़ी तो वो नदारद थी...मैं डरती हुई श्याम से बोली,"पूजा कहाँ गई..."

श्याम भी चौंकते हुए रूकते हुए चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोले,"तुम्हारे साथ ही तो आ रही थी...हम दोनों तो आगे चल रहे थे..."

"हाँ पर जैसे ही मैं अभी इनसे बात करने थोड़ी आगे हुई इसी बीच कहाँ गायब हुई देख नहीं पाई..."मैं थोड़ी परेशानसी होती हुई बोली...श्याम के चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी और वो चारों तरफ नजर घुमा ढ़ूँढ़ रहे थे...

अचानक सुमन बोल पड़ी,"श्याम, वो वहाँ गोलगप्पे के पास कौन खड़ी है.." सुमन की आवाज से हम दोनों उस तरफ देखे...जो कि मेले के सबसे एकांत सी जगह थी...मेरी नजर तुरंत ही पूजा को पहचान ली...वो पूजा ही थी...

तभी मेरी नजर उसके साथ बंटी और सन्नी पर पड़ी जो पूजा के साथ गोलगप्पे खा रहे थे...सारा माजरा समझ में आ गई...श्याम भी देख चुके थे और वो मेरी तऱफ घूरने लगे कि ये क्या चक्कर है...

"वो दोनों पूजा के दोस्त हैं कॉलेज के...वही ले गया होगा..."मैं श्याम के सवालिया नजरों का जवाब देती हुई बोली..श्याम को थोड़ा गुस्सा आ गया कि कम से कम बता कर तो जाती...और श्याम भी तुरंत समझ गए कि किस टाइप का दोस्त है और उसे मैं भी अच्छी तरह जानती हूँ...

श्याम: "ठीक है, जाओ पूजा के पास..जब उसका पेट भर जाए लेती आना..तब तक हम इधर घूमते हैं...फोन कर लेना...ओह सिट..तब से ध्यान ही नहीं आया कि पूजा के पास भी तो फोन है...मैं भी ना. "

श्याम की बात से हमें थोड़ी हंसी भी आ गई...फिर ओके कह मैं वहाँ से निकल गई पूजा की तरफ..कुछ दूर जाकर जब वापस मुड़ी तो हमें हंसी आ गई...श्याम सुमन के हाथ में हाथ डालकर चल दिए थे...

मैं जैसे ही सीधी हुई कि एक जोरदार टक्कर हो गई...ओहहह गॉड....आउच्च्च्चचच...मर गईईईईईईई...एक लड़का फिल्मी स्टाइल में पीछे मुड़ने का फायदा उठा ठीक सामने से मेरी एक चुची पर हाथ रख टक्कर मार दिया और हटते वक्त बड़ी सफाई से कस के मसल भी दिया..

"मैडम, भीड़ में आगे देख कर चला करो..कहीं आपका बम फट जाता तो मैं तो गया काम से..."उस लड़के को मैं कुछ कहती इससे पहले ही वो बोल पड़ा और चल दिया...उसके साथ दो और लड़के थे जो उसके पीछे बारी-2 से मेरी चुची पर ही नजर गड़ाए आगे निकल गया...

कुछ देर तक वहीं मूक बनी खड़ी उसे जाते देखती रही कि कितना कमीना था...एक तो मजे भी लूट लिया और गलती हमही को बोल आसानी से निकल गया...उसकी शरारत पर अचानक मेरी हंसी निकल पड़ी...और ठीक उसी वक्त वो तीनों लड़का भी आगे बढ़ मेरी तरफ पलट गया...

और मुझे हँसते देख वो आश्चर्य से भर गया और अचानक मेरी तरफ बढ़ने लगा...मैं उसे अपनी तरफ आते देख चौंकी और तेजी से मुड़ पूजा की तरफ चल दी...पूजा तक आने के चक्कर में मैं खुद कई बार कई औरतें,लड़के,अंकल से टकरा गई...काफी हंसी आ रही थी खुद पर...


 पूजा के समीप पहुँचते ही पूजा पर बरस पड़ी, पर पूजा मेरी बातों को दरकिनार कर बस गोलगप्पे खाने में मशगूल रही...अंत में पूजा के शरीर अपनी तरफ करते हुए लगभग डाँटती हुई बोली,"ऐ...मैं तुमहे ही कह रही हूँ..कुछ सुन भी रही है या बहरी हो गई..."

जिस पर वह मेरी तरफ गोलगप्पे दिखाती हुई बोली,"खाओगी...?"

उफ्फ्फ...अजीब किस्म की लड़की है ये...इस पर कोई असर ना देख बंटी को बुरा भला सुनाने लगी...जिस पर वह दूसरी तरफ हो गया और सन्नी को मेरे सामने कर दिया...सन्नी गोलगप्पे की प्लेट रखता हुआ मेरी बाँह पकड़ा और चलने लगा..

"भैया जी, मेमसाब को साइड में ले जाओ तभी शांत होगी...बहुत गरमी है इनमें..." पीछे से गोलगप्पे वाले ने आवाज दी जिसे सुन पूजा और बंटी की हंसी साफ सुनाई दी...मैं गुस्से में उसकी तरफ लपकनी चाही पर सन्नी कस के दबोचता हुआ दूसरी तरफ खींचता चला गया...

गोलगप्पे वाले के पीछे कुछ दूर हट के एक पुराना खंडहरनुमा घर था...आगे एक बड़ी सी वृक्ष जो पूरी तरह उस घर को ढ़ँक रही थी...एकदम गुप्प अंधेरा...शाले मेला संचालक को इस पर ध्यान देनी चाहिए..कम से कम एक लाईट तो दे देते...पर वो मेला से इतनी दूर थी कि शायद जरूरत नहीं समझा होगा...

फिर ये गोलगप्पे वाला इतना एकांत में क्यों है...जबकि इसे मालूम है कि गोलगप्पे ज्यादातर लड़की ही खाती है...यही सब सोच ही रही थी कि तभी सन्नी एक दीवाल से हमें चिपकाता हुआ मेरे होंठों पर टूट पड़ा...

मैं गुस्से के कारण खुद को अलग करना चाह रही थी पर वो अगले ही पल मेरी चुची पर कब्जा करता हुआ रगड़ने लगा...जिससे मैं ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाई...और लगी मैं भी चूसने...हम दोनों की किस तब टूटी जब बगल में हरकत हुई कुछ...

मैं रूकती हुई अंधेरे में हाथ बढ़ाई तो मेरे हाथ सीधी किसी लड़की के चुची पर पड़ गई...उसने बिना कुछ कहे मेरे हाथ पकड़ के हटा दी..मैं कुछ कहना चाहती थी पर तब तक सन्नी दुबारा किस करने लगा...मैं भी उस तरफ से ध्यान हटा किस करने लगी...

जब मेरे होंठ दर्द करने लगी तो सन्नी से हल्की अलग हो गई...सन्नी भी समझ गया...वो अलग हो मेरे हाथ थामा और बाहर की तरफ रूख कर लिया...मैं बाहर निकलते वक्त एक बार फिर गौर की उस लड़की की तरफ कि कौन है और लड़का कौन है...पर अंधेरे की वजह से नहीं पहचान पाई...

बाहर निकल जब हल्की रोशनी पड़ने लगी तो सन्नी रूक गया और बोला,"हाँ तो मैडम जी क्या कह रही थी आप...?" सन्नी की बात सुन मेरी हंसी निकल गई...कमीना पहले तो जबरदस्ती किस कर बात को बदल देता है, फिर पूछता है क्या बात है...

मुझे हंसता देख बोला,"दरअसल मुझे नहीं पता था पूजा मेरे इशारों से ही चली आएगी...साथ में आपके पति थे तो हिम्मत नहीं हुई निकट जाने की तो जब पूजा हमलोगों को देखी तो बंटी ने आने का इशारा कर दिया...हम दोनों देखते रह गए कि ये पागल हो गई है क्या...फिर निकट आते ही बोली डरते क्यों हो...भैया पूछेंगे तो कह दूंगी दोस्त हैं...उनकी भी तो दोस्त मिल गई है यहाँ तो मेरे दोस्त से प्रॉब्लम क्यों होगी...फिर हमें क्या दिक्कत होती भला...और इतनी परेशान क्यों हो रही जब फोन था ही तो एक कॉल कर लेती..."

"अचानक से गायब हो गई ना तो ध्यान ही नहीं रहा कि फोन कर लूँ..चलो अब.."मैं भी शांत होती हुई बोली...तो वो मुस्कुराते हुए बोला,"चलो गोलगप्पे खाते हैं..."

"नहीं, मुझे नहीं खानी उसके पास...शाला कैसे बेशर्मो की तरह चिल्ला के बोल रहा था...सुना नहीं.."अचानक से मुझे गोलगप्पे वाले की बात याद आ गई...मैं सन्नी के साथ आगे बढ़ती हुई बोल पड़ी..

सन्नी: "अरे वो वैसा नहीं है..बस बोलने की बीमारी है...दरअसल ये वीमेंस कॉलेज के पास रोजाना बेचता है तो लड़कियों से सीख लिया ज्यादा बोलना..और लड़कियों से हॉट बातें करना ये अच्छी तरह जानता है...एक खास बात ये भी कि अब तक ये सैकड़ों प्रेमी युगल को मिलवा चुका है, पर गद्दारी या गलत फायदा कभी नहीं उठाया किसी का...पर मजाक सबसे करता रहता है एकदम ओपेन...अब चलो और तुम भी कुछ मजे ले लो..मस्त कर देगा..."

मैं उसकी कहनी सुनते-2 गोलगप्पे वाले के पास पहुँच गई...मेरी नजर उन तीन लड़कों को ढ़ूँढ़ने लगी जिनसे टकराई थी...पर वो कहीं नहीं दिखे..तभी मेरी तरफ देख गोलगप्पे वाला दाँत दिखाता बोला,"गुस्सा शांत हुआ कि, और चाहिए कुछ.." उसकी बात सुन सब के साथ मैं भी हँस पड़ी...

"देखा मेमसाब,इनके साथ कुछ देर खड़ी रही तो इतनी खुश हो गई...जब ये साथ में सोएगी तो किता खुश होगी..." अपने आदत से मजबूर उसने मजाकिया लहजे में बोल पड़ा जिसे सुन मैं शर्म से मुँह दूसरी तरफ कर ली जबकि वो तीनों जोर से हँस पड़ा...

"लो मैडम, मेरा वाला भी मुँह में ले को देखो कि कैसा टेस्ट है..."एक बार फिर उसने एक और द्विअर्थी शब्द बोल दिया..इस बार मैं खुद की हंसी रोक नहीं पाई और हंसती हुई वापस मुड़ प्लेट पकड़ गोलगप्पे खाने लगी...

जब तक खाती रही वो कुछ ना कुछ बकड़-2 करता रहा...तभी मेरी नजर उसी अंधेरे से निकलती लड़के-लड़की पर पड़ी...पर पहचान नहीं सकी...फिर हम सब वहाँ से निकल लिए..फिर कुछ देर तक मस्ती में इधर उधर अपने-2 साथी के हाथों में हाथ डाल घूमती रही...

बाहर तो ज्यादा भीड़ नहीं थी पर अंदर मुख्य मेले की जगह भीड़ काफी थी..इस भीड़ में सन्नी के हाथ तो मेरे हाथ पकड़े थे पर औरों बगल से गुजरने वाले के हाथ सीधा मेरी चुची के साइड पर पड़ती या फिर पीछे चूतड़ पर...इन सब के बीच हम दोनों मस्ती में डूबी घूमती रही अपने यार के संग...फिर अचानक से पूजा बोली...

पूजा: "दीदीजी, अभी तक आपके पति महोदय नजर नहीं आए हैं..."

"इतनी भीड़ में वो बगल से भी गुजर जाते होंगे तो मालूम थोड़े ही पड़ेगी.."मैं अपनी बात से पूजा को संतुष्ट करती हुई श्याम पर ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहती थी हम और पूजा श्याम के साथ किस तरह रहते हैं...

_____[.....क्रमशः]_____











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FUN-MAZA-MASTI सीता --एक गाँव की लड़की--29

FUN-MAZA-MASTI

 सीता --एक गाँव की लड़की--29

हम चारों अस्त-व्यस्त खुद को ठीक करते हुए आंटी के पास पहुँच गए...आंटी हम सब की तरफ देख मुस्कुरा रही थी...उसने उस काले की तरफ देख बोली,"कैसी थी टेस्ट? दिल खुश हुआ कि नहीं..."

"पूछो मत आंटी, सीधा स्वर्ग में पहुंच गया था...एक ही बार में पस्त हो गया..."काले आदमी ने अपनी व्यथा कहते हुए कुर्सी पर बैठ गया...मैं और पूजा कपड़े चेंज करने चेंजिगरूम की तरफ जाने से पहले इनाम के पैसे आंटी की कर दी...

आंटी: "अरे वाह..तोहफा भी मिल गई..बहुत ज्यादा खुश कर दी क्या रे छोरी.." आंटी की बात का कोई जवाब सिर्फ मुस्कुरा कर दी और वापस चेंजिग रूम की तरफ बढ़ गई...कुछ ही पलों में हम दोनों अपने कपड़े पहन चलने के लिए आंटी के पास खड़ी थी...

आंटी: "ऐ, तू मेरे यहाँ काम करेगी...तेरे बंगाल से ज्यादा पैसे दिलवाउंगी दोनों को...यहां सब गोरी चमड़ी के दिवाने होते हैं..." मेरी तरफ देख आंटी पूछी...मैं उनकी बात सुन पूजा की तरफ देखने लगी...

"नहीं आंटी, मैं यहां नहीं रह सकती...काफी दिनों से इनके दोस्त कह रहे थे तो बड़ी मुश्किल से शादी का बहाना बना आई हूँ...सुबह तक यहाँ से निकल लूंगी नहीं तो मेरे शकमिजाजी पति हम दोनों की खैर नहीं छोड़ेंगे..."श्याम की तरफ देख मुस्काती हुई मैंने सरासर इस नाटक में भागीदरी कर ली...जिससे श्याम मंद मंद कुटिल हंसी हंस रहे थे...

आंटी:" ओह...मतलब पति प्यास नहीं बुझाता तो चोरी से करती है...अच्छा है...प्यास भी बुझ जाती और पैसे भी..." आंटी कहते हुए पैसे की बंडल मेरी तरफ बढ़ा दी जो काले आदमी ने दिए थे...मैंने पैसे लिए और उनमें से इनाम की राशि निकाल बेंच पर बैठी दोनों लड़की की तरफ बढ़ा दी...

सब अचानक मेरी इस हरकत से भौचक्के हो देख रहे थे..उन दोनों को भी विश्वास नहीं हो रही थी..वे बस मेरी तरफ टकटकी लगाए घूरे जा रही थी...वो लेने के हाथ ही नहीं खोल रही थी तो मैंने खुद आगे बढ़ वो रूपए उसकी चोली में घुसेड़ती हुई बोली...

"जब काम नहीं मिली तो भूखी थोड़े ही रहेगी..., मदद के तौर पर रह ही रख लो...अपनी बिरादरी की है तो ऐसे नहीं देख पाई...चलती हूँ अब..अपना ख्याल रखना..."कहती हुई मैं वापस मुड़ी और श्याम से चलने बोली...

पर सब तो बस घूरे ही जा रहे थे...बिना कोई जवाब दिए श्याम उठ गए...और वो काला आदमी सबसे पहले ही निकल गया...आंटी भी पता नहीं क्यों पहली बार बेड से उतरी और बोली,"रूको,गाड़ी मंगवाए देती हूँ...स्टेशन तक छोड़ देगा..."

मैं मना की पर वो नहीं मानी...कुछ ही देर में गाड़ी में बैठ हम तीनों आंटी से विदा ले स्टेशन पर आ गए...गाड़ी के वापस जाते ही श्याम ने एक गाड़ी की और एक घंटे में हम घर पहुंच गए...घर पहुँचते ही हम सब ने खूब हंसी आज की यादगार मूवी को याद कर....फिर हम तीनों एक ही बेडरूम में घुस पसर गए...

सुबह में घंटी की तेज आवाजों ने मेरी नींद तोड़ ती..मैं उठी तो ये क्या...श्याम पूजा पर चढ़े अपना लंड उसकी बुर में पेले जा रहे थे और पूजा भी मस्ती में चिल्लाए जा रही थी...मैं तो गुस्से से भर गई कि बेल कब से बज रही है और ये दोनों चुदाई में लगे हैं...

मैंने श्याम की पीठ पर एक मुक्का जमाती हुई बोली,"बेल सुनाई नहीं दे रहा क्या? दूध लेने चले जाते तो ये भाग जाती क्या..?" श्याम मुक्के की चोट से आह भर हंसते हुए बोले,"भाग तो नहीं जाती पर अगर लंड शांत हो जाता तो...."

मैं उनकी बातों से हल्की मुस्काती हुई बेड से उतरती हुई बोली,"हाँ तो कोई बात नहीं...वो दूधवाला देखेगा कि रोज सुबह मैं ही आती हूँ और तुम दोनों सोते ही रहते हो तो किसी दिन मौका पा कर आपकी बीवी चोद देगा तो बाद में दोष दूधवाले का मत देना.."

श्याम मेरी बात सुन पूजा को जोरदार धक्के लगाते हुए बोला,"कोई बात नहीं...हम दोनों तो फायदे में ही रहूंगा...मेरे दूध के भी पैसे बचेंगे और तुम्हें नए लंड मिल जाएंगे...जाओ जल्दी चुदवा के ही आना..."

श्याम अपनी बात कह हंस पड़े जिससे पूजा भी आहहहह कहती हुई हंस पड़ी...मैं उन दोनों के कान एक साथ पकड़ती हुई बोली,"तुम दोनों को हंसी आ रही है..अब तो सच में चुदवा के ही आऊंगी..." और फिर उनके कान मरोड़ कर छोड़ दी जिससे दोनों की एक साथ ईससससऽ निकल पड़ी...

मैं फिर बाहर निकल किचन से बर्तन लेती चाभी ली और चल दी बाहर...मेन गेट खुलते ही दूधवाले से नजर मिली तो हम दोनों की अनायास मुस्कान निकल गई...फिर दूधवाले ने दूध माप के दे दिया...मैं दूध ले उसकी तरफ देखी और अंदर ही अंदर मुस्काती हुई वापस मुड़ गई बिना कुछ कहे...

दूधवाला: "आज क्रीम नहीं लोगी मैडम..? आज भी एकदम ताजा है..सोचा आपको दे दूँ फिर किसी और को दूँगा..." दूध वाले मुझे जाते देख बोला...जिससे मैं हल्की रूकी और सड़क पर दोनों तरफ देखी...रूम मालिक को देख रही थी वरना फिर कहीं वो बात करते भी देख लेता बेवजह तो परेशानी में डाल देता...

पर वो कहीं नहीं दिखा तो उसके धोती में फड़फड़ा रहे लंड को देखती बोली,"अब नहीं लेनी, कल रूम मालिक को शक हो गया था...अब कहीं दुबारा शक हुआ तो मुसीबत हो जाएगी...वैसे आपकी क्रीम बेस्ट थी...लेकिन क्या कर सकती...सो अब बस काम से काम रखिएगा..." और मैं वापस मुड़ गई...

बेचारा उस दूधवाले के सपने तो चूरचूर हो गए...रोज सपने देखता होगा कि मेरी बूर में अपना लंड डाल रहा है...वह कुछ कह भी नहीं सका...बस मुझे जाते हुए देखता रह गया...मैं बिना मुड़े अंदर चली गई...

अंदर किचन में दूध रखी और बेडरूम में गई दोनों को देखने...हम्म्म..चुदाई खत्म हो चुकी थी...अब पूजा बेड पर पसरे श्याम के मुरझाए लंड को जीभ से साफ करने में लगी थी...मेरी आहट पाते ही पूजा एक नजर मेरी तरफ देखी, फिर मुस्काती हुई अपने काम में लग गई....

"छोड़ने का मन नहीं है क्या...चलो हटो,अब मैं करूंगी..."कहती हुई मैं पूजा के बगल में बैठ गई...श्याम मेरी बात सुन मुस्काते हुए बोले,"अभी कहाँ रानी...अब एक राउंड और करूंगा अपनी कमसिन शाली की...फिर छोड़ेंगे...वैसे तुम तो दूधवाले से चुदने गई थी ना..."

"उफ्फ्फ, घर की गेट खुली ही छोड़ दी..आती हूँ बंद कर..."मैं दूधवाले के बारे में सोचते-2 गेट बंद भी नहीं की...मैं गेट के पहुंच आधी गेट ही लगाई थी कि सीढ़ी पर किसी की आहट सुनाई दी...

थोड़ी गौर से सुनी तो आहट ऊपर छत की तरफ जाती लग रही थी...इस वक्त सुबह-2 कौन छत पर जा रहा है...नीचे की फ्लैट से तो कोई कभी सुबह जल्दी उठता तक नहीं तो फिर कौन है...और नीचे से अभी आई ही हूँ, रूममालिक भी तो कहीं नहीं दिखे थे...

कौन हो सकता है? यही जानने मेरे कदम बाहर निकल छत की तरफ बढ़ गई...अंतिम सीढ़ी से छत पर देखी तो सामने कोई नजर नहीं आया...अब हल्की डर भी होने लगी कि पता नहीं कौन है जो छत पर आया और गायब हो गया...

एक बार मन हुई वापस हो जाऊं...फिर सोची सुबह हो ही गई तो दूसरी अप्राकृतिक चीजें तो हो ही नहीं सकती...छत पर घूम कर ही देखती हूँ शायद पानी टंकी के दूसरी तरफ हो....और मैं आगे बढ़ छत पर चारों तरफ देखती मुआयना करने लगी...

पानी टंकी के उस तरफ जैसे ही पहुँची सामने रूम मालिक पर नजर पड़ी...मैं राहत की सांस ली पर अब इस मुसीबत से पीछा छुटकारा पाने की सोच में पड़ गई...अगर वो नहीं देखते तो चुपके से रिटर्न हो जाती पर....

रूम मालिक: "आइए..आइए...मैडम...सुबह की ताजी हवा काफी फायदेमंद होती है...ऱोज लेनी चाहिए सबको..." मैं उसकी बात से बेवजह मुस्कुरा पड़ी और ना चाहते हुए भी उनकी तरफ बढ़ गई...

मैं आगे जा रेलिंग के सहारे उनसे काफी हट कर खड़ी हो गई और सामने उगती हुई सूरज की तरफ मुंह कर दी...वो हम दोनों के फासले को कम करने मेरी तरफ खिसक गए और लगभग एक फीट की दूरी पर खड़े हो गए...

मैं उनके करीब आने की आहट महसूस कर सनसना गई...शरीर के रोंगटे खड़े हो गए...वो मेरे बगल में आ मुझे गौर से निहारने लगे जिससे मैं काफी असहज महसूस करने लगी...मेरे हाथ छत की रेलिंग पर कस गई...

"आती हूँ कुछ देर में...गेट खुला ही है कोई आ गया तो..."मैं अब यहां से हटने की सोच बहाने बनाई और जाने के लिए पीछे मुड़ी कि तभी उनके हाथ रेलिंग पर पड़े मेरे हाथों को जकड़ के दबा दिया...मैं अचानक से हुई उनकी हरकत से एकटक आश्चर्य से उनकी आँखों में देखने लगी...

"अरी मैडम, इतनी जल्दी क्यों भागने की कोशिश कर रही हो..मैं कोई बाघ थोड़े ही हूँ जो गिल जाऊंगा..."रूम मालिक ने मुझे अपनी तरफ देख बोला...जिससे मैं अब और मुश्किल में पड़ गई...कल की वारदात से तो हाथ छुड़ाने की भी हिम्मत नहीं पड़ रही थी...

रूम मालिक: "पता है आज मैं आपसे काफी खुश हूँ...कल मैं आप पर जितना गुस्सा था आपने आज सब खत्म कर दिया...मैं वहीं सामने वाले कैम्पस में छुप के बैठा सुन रहा था...आज अगर कोई हरकत करती तो सच बहुत बुरा होता..."

मैं बिना कोई हरकत किए बस उनका चेहरा हैरानी से निहारने लगी...मैं खुद को आज लकी समझ रही थी...अपनी तरफ यूँ ऐसे घूरते पा उसने मुस्कुराते हुए अपनी एक आँख दबा दी,जिससे मैं झेंप सी गई और नजरें घुमा ली...

रूम मालिक: "एक बात तो है आप दिल की बुरी नहीं है...कोई कुछ कहे तो आप उस पर गलत सही सोचने के बाद कोई फैसले लेती हो...यही आप में अच्छी बात है...हाँ कुछ गलत भी करते हैं पर इसमें आपकी गलती नहीं है..."

मैं एक बार दुविधा में पड़ गई कि अब क्या कहेंगे ये..मैं पुनः उनकी तरफ मुंह घुमा दी...सूरज की लालिमा फट चुकी थी जिससे उसकी किरण सीधी हमारी गाल पर पड़ कर और सुर्ख बना रही थी...तभी वो मेरे चेहरे के बिल्कुल निकट आते हुए बोले...

रूम मालिक: "अब आप हो ही इतनी हॉट और सेक्सी कि आप लाख चाहो,खुद को रोक नहीं पाओगी ज्यादा देर...इसी वजह से आप कभी कभार बहक जाती हो..." वो इतना कह चुप हो गए...

पर उनका चेहरा अभी भी ज्यों के त्यों थी..मेरी तेज हो चुकी साँसें उनकी साँसों से टकरा रही थी...और मेरी वासना में बदल चुकी नजरें सीधी उनकी आँखों में झाँक रही थी...

कुछ देर तक यूँ ही खड़े रहे हम दोनों बिना कोई सवाल जवाब के...उनका एक हाथ तो रेलिंग पर मेरी एक हाथ दबाए ही था...अब उन्होंने अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा मेरी दूसरी हाथ पकड़ अपनी अंगलियां मेरी अँगुली में फंसा पकड़ लिए...

मैं चाह कर भी उन्हें नहीं रोक पा रही थी...अगर रोकती तो वे कहीं सवाल कर देते कि दूधवाले से भी बुरा हूँ क्या..? तो मैं क्या जवाब देती...या फिर चाहते तो मेरी इज्जत सरेआम लुटा देते तो क्या करती..आखिर मेरी दुखती नस जो उनकी पकड़ में आ गई थी...

तभी उन्होंने रेलिंग पर से अपना हाथ पीछे खींच मेरी कमर के पास रख दिए और दबाब बनाने लगे अपनी तरफ...मैं होशोहवाश खोती उनके शरीर में सटती चली गई और रेलिंग पर से हाथ उठ के अपने आप उनके कंधों पर पड़ गई...बिल्कुल प्रेमी जोड़ो की तरह चिपक गए थे..


मैं पसीने से तरबतर हो गई थी...और सुबह की उगती सूर्य की किरण से मेरी शरीर दमक रही थी...मेरी साँसें सीधी उनके सीने में घुस रही थी...और तेज साँसों में मेरी चुची उफ्फ्फ...उनके सीने से टच करती हुई एक बार पीछे हटती तो एक बार पूरी धंस जाती....

"दोस्ती करोगी हमसे...अच्छी वाली दोस्ती..." फिर वो हौले स्वर के साथ गर्म साँसे मेरी गालों पर डिम्पल की तरह धँसाते हुए बोले...साँसों की तेजी ने मेरे अंदर गुदगुदी सी कर दी...मैं ईससससऽ की आवाजें करती हुई मुंह फेर ली...

रूम मालिक: "अरे, ऐसे क्यों मुंह फेर रही हो...जो बात तुम सोच रही हो वैसा मैं अब कुछ नहीं करने वाला...कल वाली बात बिल्कुल भूल जाओ...ब्लैकमेल,झाँसा में फँसाना आदि सब चीजों का मैं सख्त विरोधी हूँ...दोस्ती की कह रहा हूँ तो सिर्फ दोस्ती..."

थैंक्स गॉड...जिस बात से डर रही थी इनसे वैसी बात नहीं थी...गलत देखे तो शायद ज्यादा गुस्सा कर गए कल जिससे धमकी दे रहे थे...पर अब जो ये कर रहे हैं ऐसे मुझे चिपका कर वो क्या है...ये फायदा ही तो उठा रहे हैं मेरी बेबसी का...

"मैं समझ सकता हूँ कि आपके मन में क्या चल रहा है इस वक्त...तो मैं बता दूँ कि आप ही के जैसी सुंदर मेरी भी बीवी है, पर वो कुछ अलग किस्म की है...मतलब बीवी तो है मेरी पर बीवी बनना नहीं जानती..."उन्होंने अपनी बात से मेरी अंदर चल रही सवालों का जवाब देते हुए बोले...

काफी तेज दिमाग है इनका तो..बिना सवाल पूछे ही जवाब देने लग गए...

"मैं अपनी बीवी में हर रोज एक दोस्त खोजता रहता हूँ...पर कभी मिली नहीं..वो तो बस बीवी का मतलब सिर्फ सेक्स ही जानती है...सेक्स के बाद कभी मेरे दिल की आवाज सुनने की कोशिश नहीं की और ना ही कभी सुनाई...इसलिए मैं तुम्हारी जैसी हसीन बला से दोस्ती करना चाहता हूँ ताकि हम अपनी दिल की बात कह-सुन सकें..." वो अपने दिल की बयान अपने साफ लफ्जों से सुनाने लगे...

मैं उनके इस दर्द को सुन पिघलने लग गई...अब उनसे हटने की बजाय आराम से खड़ी उनकी बाते सुनने लगी...

"...मेरे और भी कई लेडिज फ्रेंड हैं पर सब सिर्फ फ्रेंड ही हैं...कोई ऐसी नहीं मिली जिससे अपना हाल-ए-दिल सुना सकूँ...पर आज अगर तुम दोस्त बन जाओगी तो मेरी जिंदगी में ये कमी शायद पूरी हो सकती है..क्योंकि तुम सबसे अलग हो...हर रिश्ते को निभाना जानती हो..अब ये मत कहना कि सोचूँगी...दोस्ती लोग सोच कर नहीं करते...वो तो प्यार से भी तेज होता है और इसमें कोई रिस्क भी नहीं..." वे अपनी बात खत्म कर मेरी जवाब का इंतजार करने लगे...

मैं उनकी आखिरी बात पर थोड़ी सी शर्मा के हंस पड़ी..जिससे वे भी हंस पड़े...अब तो मेरे अंदर की सारी डर इनके प्रति जो थी ऱफ्फूचक्कर हो चली थी...इनके अकेलेपन पर तरस आ गई थी...शायद इसी वजह से ये कभी-कभार ज्यादा गुस्से में आ जाते हैं...

"...तो ये कौन सा तरीका है दोस्ती प्रपोज करने की." मैंने अपनी झिझक समाप्त करते हुए उनसे बोली...जिससे वो खिखिलाकर हंस पड़े...फिर वो बोले,"अपना तरीका है...मैं ऐसे ही सब के साथ रहता हूँ...बोरिंग वाली दोस्ती मुझे नहीं पसंद...दोस्ती में रोमांस,प्यार,शरारत,गुस्सा सब होना चाहिए पर लिमिट तक ही...ऐसा नहीं कि तुम अगर ऐसे मेरे बांहों में हो मैं गलत हरकत कर दूँ..."

"अगर कभी आपको दोस्तों के संग ऐसी हालत में आपकी बीवी देख ले तो..."मैं भी कुछ नॉर्मल हो कुछ अंदर की बात जाननी चाही इनसे...जिसे सुन वो नाक-भौं सिकुड़ाते हुए बोले...

"मोहतर्मा,मुझे इस बात की कोई डर नहीं..बीवी के डर से मैं अपने दोस्तों से मिल रही जिंदगी को कैसे छोड़ सकता भला...वैसे कल सुबह मेरे साथ वॉक पे चलना पसंद करेंगी...4 बजे..."उन्होंने बस शार्ट कट में ही अपनी हिम्मत-ए-दिल बयां कर दी...

"इतनी सुबह तो जगती भी नहीं..5 बजे के बाद नींद...."मैं अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई कि वो पड़े,"अं.हं....जगने की चिंता छोड़ दो...नींद ठीक 4 बजे खुद खुल जाएगी...मैं इंतजार करूँगा...अब चलता हूँ..बॉय.."

और फिर अलग होने से पहले मेरे माथे को हल्के से चूम लिए...फिर हम दोनों एक साथ मुस्कुराते हुए नीचे चल दिए...मैं नीचे अपने घर के दरवाजे से अंदर हुई और अंदर देखी तो अभी भी दोनों बाहर नहीं निकले थे...

अचानक मैं मुड़ी और और नीचे की तरफ बढ़ रहे रूम मालिक को सीसी की आवाज से बुलाई...वो आश्चर्य से मुड़ते हुए वापस ऊपर की तरफ आया...पास आते ही इशारे से पूछा क्या बात है..

मैं उनके गर्दन पकड़ उनके शरीर पर लद सी गई और कान के समीप अपने लब ले जाती बोली,"थैंक्स फॉर फ्रेंडशिप...." और पीछे हटने से पहले उनके गाल पर एक गहरी चुंबन जड़ दी दोस्ती वाला...फिर मुस्कुराते हुए तेजी से अंदर आ गेट लॉक कर ली...वो भी मेरी इस शरारत पर मुस्कुराते हुए नीचे चले गए....
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हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !
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