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Tuesday, February 3, 2015

FUN-MAZA-MASTI मस्ती भरी चुदाई --5

FUN-MAZA-MASTI

 मस्ती भरी चुदाई --5


 
मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसकी लुल्ली पकड़ ली और बोला- चल तू बार-बार मुझे यहाँ-वहाँ छूता रहता है.. तो मैं भी छुऊँगी.. हिसाब बराबर।
जैसे ही मैंने उसका आइटम पकड़ा तो वो शर्म से पानी-पानी होने लगा था, पर मुझे क्या मुझे तो हथियार का नाप लेना था.. जो मैंने ले लिया।
वो तो डर के मारे उठा और उधर से भाग गया।
फिर क्या था.. अब शुरू हुआ था असली खेल, पर बेचारा प्रीतेश थोड़ा डर रहा था.. क्योंकि वो नया था ना इस खेल में..
मैं आपको बता दूँ कि उसकी लुल्ली औसत सी थी जो कि मुझे खास सन्तुष्ट करने वाली नहीं लगी थी, पर हो सकता कि खड़ा होने के बाद उसका लौड़ा मेरी चूत को कुछ मज़ा तो देगा ही ना.. यही सोच कर मैंने अपनी चूत में ऊँगली डाल ली और उसकी याद में पानी निकाल लिया।
अब ये मज़ा लेने का दिन भी आ ही गया।
एक दिन मामा और मामी दोनों शहर गए और मुझसे कहते गए कि तू अपना और प्रीतेश का ख्याल रखना और मैं तो बहुत ही खुश थी क्योंकि मेरा काम जो होने वाला था।
हुआ यूँ कि हम घर पर अकेले थे, बस मुझे किसी भी तरह प्रीतेश को बोतल में उतारना था।
मैं जब टीवी देख रही थी तो चैनल बदलते-बदलते एक मूवी दिखी, जिसने मेरा काम आसान कर दिया।
वो मूवी थी मर्डर.. और जब मैंने प्रीतेश को बुलाया तो वो आया।
मैंने कहा- बैठ.. मूवी देखते हैं।
तो वो बोला- मुझे नहीं देखनी तेरे साथ मूवी..
तो मैंने कहा- क्यूँ?
तो वो बोला- तू बस किसी ना किसी बहाने से डांटती रहती है.. चाहे मेरा कुसूर हो या ना हो।
मैंने हंस कर कहा- अरे मेरे राजा इधर तो आ और बैठ.. अब मैं ऐसा नहीं करूँगी।
वो बोला- पक्का?
तो मैंने कहा- पक्का.. तू बैठ तो सही।
और वो बेचारा बैठ गया।
करीब 15 मिनट ही हुए होंगे कि वही गाना आ गया.. भीगे होंठ तेरे.. तो अब मेरी तो हालत और भी चुदासी हो चली थी यार.. पर क्या करूँ ये साला उल्लू का पठ्ठा.. कुछ समझ नहीं रहा था।
तो अब क्या करूँ.. पर तभी मुझे याद आया कि तमाचे के वक़्त वो बोला था कि जो मैं बोलूँगी.. वो करेगा।
तो मैंने कहा- प्रीतेश तुझे कुछ याद है?
तो वो बोला- क्या?
मैंने- तूने मुझे कहा था कि जो मैं बोलूँगी.. वो तू करेगा।
तो वो बोला- हाँ.. अच्छी तरह से.. बोल क्या करना है?
तो मैंने कहा- पहले तू जा और बाहर मेरे कपड़े सूख रहे हैं वो लेकर आ..।
तो वो दौड़ता हुआ गया, पर उसे नहीं मालूम था कि मेरे कुर्ते के नीचे मेरी ब्रा पैन्टी दोनों हैं। बस अब तो देखना था कि वो करता क्या है।
वो कपड़े लेने लगा और जैसे ही उसने कुर्ता खींचा कि मेरी ब्रा और पैन्टी उसने देखे। में खिड़की से उसे देख रही थी कि यह लड़का करता क्या है।
पर यह क्या उसने सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी को देखा और चुपचाप कपड़ों के बीच में रख दिया और आने लगा।
मैं तुरन्त अपनी जगह पर आ गई। उसने मेरे आगे कपड़े रखे तो मैंने कहा- सारे लाया है?
तो वो बोला- हाँ।
मैंने उन में से अपनी पैन्टी निकाली और कहा- जा ये गीली है इसको फिर सुखा कर ला..
तो वो सूखने डाल आया और आके बोला- और कुछ मैडम?
मैंने- कुछ नहीं.. चल बैठ।
वो मुझसे थोड़ा दूर बैठ गया, तो मैंने- थोड़ा पास बैठ ना..
तो वो बोला- ना बाबा ना.. तेरा क्या भरोसा.. तू कब चाँटा लगा दे।
मैंने हँस कर कहा- अब ऐसा नहीं होगा यार..
ऐसा कह कर मैं उसके थोड़ा करीब हो गई।
वो तो उल्लू की तरह बैठा रहा और मुझे तो इतना गुस्सा आ रहा था कि पूछो ही मत और मैंने तय कर लिया कि ये तो कुछ करने वाला है नहीं.. जो कुछ करना है मुझे ही करना पड़ेगा।
फिर क्या था, पहले मैंने अपना सर उसकी गोदी में रखा और उसकी जांघें सहलाने लगी।
तो वो बोला- अरे ये क्या कर रही हो?
मैंने कहा- चुप.. तू सिर्फ़ देख.. कुछ बोलना नहीं ओके..
ऐसा कह कर मैंने उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख दिया और मैंने देखा कि वो जरा डर रहा था।
मैंने कहा- देख राजा.. आज तुमको मुझे खुश करना है और मैं तुझे छोटी सी बात के लिए भी नहीं डांटूगी ओके..
तो अब वो थोड़ा सामान्य हुआ, पर अभी भी हाथ तो उसके ऐसे ही पड़ा था, वो कुछ कर नहीं रहा था।
मैंने कहा- क्या यार.. पहले कुछ किया नहीं क्या?
तो वो बोला- नहीं दीदी..
तो इस बार फिर से मैंने उसके गालों पर एक तमाचा धर दिया और बोला- देख बे.. मुझे अब कभी भी दीदी मत बोलना समझा..
तो उसने कहा- ओके!
मैंने कहा- तू कुछ कर.. वरना..
इस बार वो भी थोड़ा समझ गया था.. तो वो लगा मेरी चूचियों को मसलने.. बस फिर क्या था.. मैं तो मदहोश हो चुकी थी।
अब मुझे पहले उसे भी तो तैयार करना था.. तो मैंने सीधे ही उसकी ज़िप खोली, केला बाहर निकाला और लगी चूसने।
फिर क्या था… वो भी मस्त होने लगा और ज़ोर-ज़ोर से कहने लगा- ऊहह पूजा..!!
तो मैंने- अब बोल दीदी…
तो वो बोला- दीदी.. लौड़ा नहीं चूसती.. वो तो सीधी लड़की होती है.. तुम्हारी तरह नहीं…
वो पूरी तरह पटरी पर आ चुका था।
फिर क्या था मैंने उससे 69 की स्थिति में होने को कहा.. पर वैसा होते ही उस चूतिए ने पूछा- मैं क्या करूँ?
तो मैंने कहा- अबे साले.. मेरी चूत को चाट…
वो शुरू हो गया.. फिर क्या था।
अब समय हो चुका था कुछ तूफ़ानी करने का और मैं भी अब रह नहीं सकती थी, मैंने कहा- अबे साले.. बस बहुत हुआ.. अब वो सब छोड़ और शुरू हो जा..
तो वो बोला- मैं शुरू हो तो जाऊँ.. पर क्या शुरू कर दूँ.. आता किसको है?
तो मैंने कहा- शुरू तो कर.. अपने आप आ जाएगा।
तो वो बेचारा.. मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया और तकरीबन 5 से 7 मिनट उसने मेहनत की.. पर उससे केला अन्दर नहीं गया।
तो मैंने सोचा कि चलो मैं ही कर डालती हूँ.. इसमें क्या…
तो मैं उसके ऊपर आई उसके लण्ड को मुँह में लिया थोड़ा चिकना किया और फिर उसके ऊपर चढ़ गई, अपने हाथ से पकड़ कर धीरे से उसके लण्ड अपनी चूत में अन्दर डालने लगी।
तभी वो बोला- अरे बाप रे.. ये तो साला बहुत मज़ा आ रहा रे..
तो मैंने कहा- बोल मत.. साले.. सिर्फ़ मज़े कर.. और जब भी तेरे को लगे कि तेरा कुछ निकलने को है.. तो बोल देना।
फिर मैं तो शुरू हो गई और सिर्फ़ दो-टीन मिनट ही हुए होंगे कि वो बोला- आ गया..
तो मैंने कहा- क्या?
तो वो बोला- जो तूने बोला था।
तो मैंने झट से बाहर उसके हथियार को निकाला कि उसका छूट गया.. पर यह क्या इसका तो जल्दी हो गया और मेरा क्या हो?
अब इतनी देर हो चुकी थी कि मामा-मामी कभी भी आ सकते थे तो मैंने फिर से उससे कहा- देख अभी सिर्फ़ तेरा हुआ है.. मेरा नहीं तो शाम को मेरा भी होना चाहिए ओके?
वो बोला- अरे मेरी जान.. तू फिकर मत कर.. अब तो जब भी मौका मिलेगा तेरा भी काम कर दूँगा.. डोंट वरी ओके..
फिर हम दोनों ने अपने-अपने कपड़े ठीक किए और टीवी देखने लगे।
कुछ ही देर बाद मामा-मामी आ गए तो मैंने धीरे से प्रीतेश को बोला- शाम को पक्का?
तो वो बोला- हाँ बाबा.. हाँ..
फिर रात को जब हम सोने के लिए छत पर गए तो मैं बता दूँ कि छत पर हम सब लोग सोते थे।
मैं, प्रीतेश और मामा-मामी.. पर आज जब मामी बाहर से आईं तभी उनकी तबीयत ठीक नहीं थी।
तो मामा ऊपर आए और बोले- देखो बच्चों आज तुम दोनों को ही यहाँ सोना पड़ेगा.. क्योंकि तुम्हारी मामी की तबियत कुछ ठीक नहीं और वो अकेले थोड़ा डरती हैं.. इसलिए मुझे भी नीचे सोना पड़ रहा है।
फिर क्या था.. मेरी तो खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा और जैसे ही मामा गए मैं सीधे प्रीतेश के ऊपर चढ़ गई और एक 3-4 मिनट वाला जोरदार चुम्बन किया।
उस पर प्रीतेश बोला- ज़रा सब्र कर मेरी रानी.. नीचे वालों को तो सो जाने दे.. हमारे पास पूरी रात पड़ी है साली..
अभी आधा घंटा ही हुआ होगा कि मैंने प्रीतेश से कहा- देख यार अब मुझसे तो रहा नहीं जाता..
तो मैंने हाथ उसके पैन्ट में घुसा दिया और खेलने लगी।
उसे तो अब मस्ती में आना ही था फिर क्या था.. मैंने कहा- एक चादर हम दोनों के ऊपर डाल दे ताकि कोई आए भी तो उसे एकदम से पता ना चले।
वो बोला- रुक मैं जीने की कुण्डी लगा कर आता हूँ..
वो गया और जीने की कुण्डी लगा आया।
फिर क्या था वो मेरे मम्मे मसलने लगा और मैं ज़ोर से उसका लौड़ा हिलाने लगी।
हम दोनों चुदाई की मस्ती में आ गए और अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.. क्योंकि दोपहर से मेरी चूत प्यासी थी।
तो मैंने कहा- चल मेरे राजा.. अब तुझे सिखा दिया है.. चल शुरू हो जा।
उसने मेरा गाउन पूरा उतार दिया और अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगा हो गया। उसका लौड़ा खड़ा होकर बड़ा हो गया था मुझे राहत की सांस मिली कि चलो चूत का काम ठीक ढंग से हो ही जाएगा।
उसने मेरे दूध मसके और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गया मैंने उसका लौड़ा पकड़ कर चूत के छेद पर टिका दिया।
उसने लौड़ा मेरी चूत में एकदम से घुसा दिया और धक्का लगाने लगा।
मेरी एक बार तो ‘आह’ निकल गई।
कुछ ही पलों में हम दोनों को चुदाई का मज़ा आने लगा और करीब 5 मिनट ही हुए होंगे कि मेरा काम हो गया।
अब मैं तो एकदम बेहाल हो कर नीचे पड़ी थी और वो तो धपाधप किए जा रहा था.. पर ये क्या.. मेरा दूसरी बार भी हो गया और उसका अभी भी नहीं हुआ।
तभी उसका भी होने को आया तो मैंने कहा- साले.. जल्दी बाहर निकल वरना कुछ हो ना जाए..
उस पूरी रात हमने तीन बारी ठुकाई की और करीब दस दिनों तक मैं वहाँ रुकी और जहाँ भी मौका मिला.. हमने अपना काम-तमाम किया और आज भी जब भी जहाँ भी मौका मिलता.. मैं और प्रीतेश एक हो जाते हैं।








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FUN-MAZA-MASTI मस्ती भरी चुदाई --4

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 मस्ती भरी चुदाई --4

 
तो पिछले कुछ दिन अनिल ने मेरे साथ जो-जो किया, उससे मेरा तो कुछ अधिक नुकसान तो नहीं हुआ… पर अब, जब वो चला गया तो आप तो जानते ही हैं कि यह फ़ुद्दी चुदाई वाली लत तो बहुत बुरी है रे बाबा..
एक बार चूत ने लौड़ा चख लिया तो घड़ी-घड़ी भूख लगती है यार..
पर करूँ तो क्या करूँ.. कुछ सूझ ही नहीं रहा था।
ऐसे ही कुछ एक साल गुजर गया और मेरी स्थिति की तो बात ही मत करो यार एक अजीब सी भूखी.. मन में जानवरों जैसी विचार धाराएं उठ रही थीं।
जब भी कोई लड़का दिखता, तो मन करता था कि अभी इसे यहीं पटक कर चुदाई करवा लूँ, पर नहीं कर सकती… लड़की हूँ ना.. क्या करूँ?
अब इस वाकिये को सुना रही हूँ.. हुआ यह कि मैं अपने मामा जी के घर गई उधर उनके लड़के की जवानी को देख कर मेरी चूत में चुनचुनी होने लगी।
मेरी चूत की आग इतनी भड़क रही थी कि मैं उसके साथ मेरे ममेरे भाई-बहन का रिश्ता भी भूल गई और उसको अपनी वासना का शिकार बनाने की जुगत बनाने लगी।
मैं उसके बारे में आपको बता दूँ।
उसका नाम प्रीतेश है और वो मुझसे छोटा है, उसकी उम्र अभी-अभी 18 की हुई है एकदम चिकना लौंडा है।
अगले ही दिन मामा अपने काम से बाजार गए थे और मामी जी कहीं पड़ोस में सत्संग में गई थीं।
मैंने देखा किप्रीतेश बाथरूम में नहा रहा था।
बस मैंने उससे छेड़खानी शुरू कर दी। मैंने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया।
‘प्रीतेश जल्दी खोल…मुझे बहुत जोर से सूसू लगी है..’
‘थोड़ा रुक जा मैं नहा तो लूँ..’
तो मैंने कहा- देख दरवाजा खोल.. वरना..
बेचारे ने डर कर दरवाजा खोल दिया और वो अन्दर तौलिया लपेटे खड़ा था, तो मैंने तो अपनी पूरी तैयारी करके रखी थी।
मैं तो पहले से ही मामाजी का कैमरा ले कर खड़ी थी।
जैसे उसने दरवाजा खोला, मैं सीधे उस पर टूट पड़ी… सीधे बाथरूम में अन्दर जा कर उसका तौलिया खींच लिया और जल्दी-जल्दी उसकी दो-तीन फोटो क्लिक कर लीं।
अब मैंने हँसते हुए उसको बोला- चल अब चलती हूँ.. क्योंकि मेरा काम तो हो गया।
उस वक़्त उस बेचारे की शक्ल देखने लायक थी.. क्योंकि उसे तो समझ ही नहीं आया था कि यह हुआ क्या और मैं उसके साथ क्या करने वाली हूँ।
पर मैं बहुत खुश थी क्योंकि मेरा काम तो बनता नज़र आ रहा था, लेकिन अभी भी मैं पक्का नहीं थी कि ये लौंडा मेरी चुदास के बारे में कितना समझ पाया होगा।
यार अभी तो सिर्फ़ फोटो खींची थी ना.. अभी और कुछ तो हुआ ही नहीं था, तो अभी इस बात के लिए पक्का कैसे हो जाऊँ…. पर फिर भी मुझे यकीन था कि मेरा काम हो तो जाएगा।
अब दोपहर का खाना हुआ और वो मेरे पास आया और बोला- दीदी, आज सुबह जो हुआ वो क्या था.. कृपया बता दीजिए?
तो मैंने कहा- पहले अपने मन की बात तो बता?
तो वो बोला- मतलब?
मैंने कहा- बेटा, थोड़ा सब्र कर.. सब्र का फल मीठा होता है और रात में जब हम छत पर सोने जाएँगे.. तब बात करेंगे.. ओके!
तो प्रीतेश भी ‘ओके’ कह कर चला गया।
अब रात हो गई, करीब 9:30 हुए होंगे कि प्रीतेश मेरे पास आया, मैं अभी खटिया पर लेटी ही थी और मैंने देखा कि प्रीतेश आ रहा है तो मैंने सोने का नाटक किया।
उसने आते ही दीदी-दीदी चालू कर दिया।
मन तो कर रहा था कि साले को अभी दो रख के दूँ.. पर कुछ नहीं कहा क्योंकि मुझे अपना काम भी तो निकलवाना था बाबा..
तो उसने मुझे उठाने के लिए कंधा पकड़ा और हिलाया, पर मैं कहाँ उठने वाली थी।
उसने ज़ोर से हिलाया, पर मेरा इरादा तो कुछ और ही था और जब वो थक गया और हार मान कर जाने ही वाला था कि तभी मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख कर उठीं और ज़ोर से एक तमाचा मारा और कहा- ये क्या कर रहा है बे?
तो वो रोने लगा और कहने लगा- मैंने कुछ नहीं किया.. दीदी.. वो तो ग़लती से हो गया।
तो मैंने कहा- ग़लती के बच्चे.. बोलूँ क्या मामाजी को… ठहर तू।
मैं धीरे से चिल्लाई- मामा..
तो वो मेरे पैरों पर गिर गया- देखो दीदी.. मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था.. फिर भी मुझसे ग़लती तो हुई है और मैं तुझे वादा करता हूँ कि जो तू बोलेगी वो मैं करूँगा..
बस और क्या मेरा काम हो गया.. मुझे तो बस यही काम था.. मिशन पूरा हुआ… ढेंन..टणं..
उसे मैंने जैसे ही छोड़ा वो नीचे भाग गया।
दूसरे दिन दोपहर में मैं अकेली थोड़ी बोर हो रही थी और तभी प्रीतेश आया और मुझे फिर थोड़ी शरारत सूझी।
तो मैंने कहा- आओ बेटा.. चल मेरे पैर दबा.. जरा दुख रहे हैं यार..
वो बेचारा शुरू हो गया।
और मुझे फिर उसे डांटने का मौका मिल गया।
वो तो बड़ी लगन से अपना काम कर रहा था, लेकिन हम औरतों के पास कुछ भी उल्टा-पुल्टा मतलब निकालने के हजारों तरीके होते हैं यार..
मैं एक नाईटी पहने लेटी थी, उसने पैर दबाने शुरू किए और मैंने अपनी आँखें मूंद लीं।
प्रीतेश पैर दबाते-दबाते जब मेरी जाँघों तक आता तो बेचारा डर के मारे वहीं से मुड़ जाता।
मैंने कहा- ओए.. ज़रा ऊपर तक तो कर..
अब वो जाँघों तक तो पहुँच गया, पर मुझे तो उसे कहीं और ही पहुँचाना था। अब की बार जब उसका हाथ मेरी कमर तक पहुँचने को था, तभी मैंने उसका हाथ मेरी चूत को छू जाए.. कुछ इस तरह अपनी कमर ऊपर को की.. और उसका हाथ मेरी बस भट्टी पर लग गया।
मैंने फिर से गरम होने का नाटक किया और बोला- साले रुक.. तू अपनी हरकतों से ऐसे बाज़ नहीं आएगा..??
पर इस बार वो रोया नहीं और बोला- मैंने कुछ नहीं किया.. वो तो तुम ऊपर उठीं.. इसलिए ऐसा हुआ और इसमें मेरा कोई कुसूर नहीं है.. ओके..
अब मैं तो फंस गई.. अब क्या करूँ?
फिर मुझे एक आइडिया आया और मैंने उसकी लुल्ली पकड़ ली और बोला- चल तू बार-बार मुझे यहाँ-वहाँ छूता रहता है.. तो मैं भी छुऊँगी.. हिसाब बराबर।
जैसे ही मैंने उसका आइटम पकड़ा तो वो शर्म से पानी-पानी होने लगा था, पर मुझे क्या मुझे तो हथियार का नाप लेना था.. जो मैंने ले लिया।
वो तो डर के मारे उठा और उधर से भाग गया।
फिर क्या था.. अब शुरू हुआ था असली खेल, पर बेचारा प्रीतेश थोड़ा डर रहा था.. क्योंकि वो नया था ना इस खेल में..
मैं आपको बता दूँ कि उसकी लुल्ली औसत सी थी जो कि मुझे खास सन्तुष्ट करने वाली नहीं लगी थी, पर हो सकता कि खड़ा होने के बाद उसका लौड़ा मेरी चूत को कुछ मज़ा तो देगा ही ना.. यही सोच कर मैंने अपनी चूत में ऊँगली डाल ली और उसकी याद में पानी निकाल लिया।

















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FUN-MAZA-MASTI मस्ती भरी चुदाई --3

FUN-MAZA-MASTI

 मस्ती भरी चुदाई --3

 
मैं थोड़ा अंजान बन कर अनिल से बोली- देखो जब तुमने कल मेरे साथ जो किया उसके बाद मुझे बहुत सारा खून निकला और मैं इसीलिए डर रही हूँ।
तो उस पर अनिल बोला- मेरी पूजा डार्लिंग.. वो तो पहली बार था इसलिए.. और अब ऐसा कुछ नहीं अब तो सिर्फ़ मज़े करो और क्या।
तो मैंने कहा- क्या सच्ची?
तो उसने हाथ आगे बढ़ा कर ‘प्रोमिस’ किया।
‘अब अगर तुम्हें दर्द हुआ तो तुम जो चाहो वो सज़ा दे सकती हो।’
करीब एक घंटे की अनिल की मिन्नतों के बाद मैंने ‘हाँ’ कहा।
अब अनिल खुश था कि मैंने उसकी बात मान ली और मैं भी खुश थी कि चलो अनिल कह रहा है तो उसके पास कुछ तो ज्ञान होगा ही वरना वो ऐसा थोड़े ही कहता और मैंने यह सोच कर भी ‘हाँ’ बोला क्योंकि अनिल ने एक घंटे में गीता को पटा लिया तो बंदे में कुछ दम तो होगा ही।
अनिल चला गया, मैंने घड़ी में देखा तो अब 12 बज चुके थे पर मुझे अभी भी नींद नहीं आ रही थी, बस मन में अजीब-अजीब से ख्याल आ रहे थे कि कल मेरा क्या होगा? अनिल मेरे साथ क्या-क्या करेगा?
पर अन्दर से मैं थोड़ी खुश भी थी क्योंकि बाथरूम में भले ही अनिल ने मेरे साथ थोड़ी ज़बरदस्ती की थी, लेकिन मुझे अजीब सा आनन्द भी तो मिला था ना।
बस इसीलिए मेरे मन में अजीब से लड्डू भी फूट रहे थे।
यही सब सोचते हुए मुझे नींद आ गई और मैं सो गई।
सुबह जब मैं उठी अपना नित्य-कर्म किया और नहा धो कर सीधे 9:30 बजे गीता के घर पर पहुँची।
गीता मुझे देखकर एकदम से खुश हो गई और बोली- आख़िरकार मैडम मान ही गईं.. क्या बात है।
तो मैंने भी सिर हिला कर ‘हाँ’ बोला, परमुझे अब तक ना तो अनिल ने और ना ही गीता ने कोई पक्का समय दिया था कि मिलना कितने बजे है।
मैंने गीता से पूछा- जाना कब है?
तो वो फिर से जोरों से हँसने लगी।
‘क्यों बहुत जल्दी है तुझे चुदवाने की?’
तो मैंने कहा- देख तू मुझे वक्त बतातीहै कि मैं जाऊँ?
तो वो बोली- रुक मेरी अम्मा.. अनिल ने मुझे बोला था दस बजे पास वाले जनरल स्टोर पर आकर मुझे वक्त और पता दोनों देगा।
उसकी बात सुनकर मैं बैठ गई क्योंकि अभी तो सिर्फ़ 9.45 ही हुए थे।
मैं अभी यही सोच रही थी कि इस निगोड़ी ‘चुल्ल’ सबके लिए क्या-क्या करना पड़ रहा है।
दस बजे और गीता उठी तो साथ में मैं भी उठी पर उसने मुझे मना कर दिया, पर मैं उसकी कहाँ सुनने वाली थी, मैं भी उसके साथ चल दी।
हम दोनों स्टोर पर पहुँचे तो अनिल वहीं खड़ा था।
मैं थोड़ा दूर खड़ी रही और गीता कुछ खरीदने के लिए दुकान में अन्दर गई।
तभी अनिल ने जेब में से एक पर्ची निकाल कर गीता को पकड़ा दी और चला गया।
गीता और मैं वापस आने लगे, पर रास्ते में ही गीता वो पर्ची पढ़ने लगी तो उस पर मैंने भी गीता पट से तंज कस दिया- अय हाय गीता रानी.. मुझसे ज़्यादा तो तुझे जल्दी लग रही है।
तो गीता बोली- नहीं यार, मैं तो ऐसे ही पढ़ रही थी।
अब मुझे लगा कि चलो उसे बता ही दूँ कि कल मैंने सब कुछ होते हुए देख लिया था।
पर फिर मुझे लगा कि अभी नहीं.. बाद में कहूँगी। सो मैंने कुछ नहीं कहा और हम गीता के घर पहुँच गए।
घर पहुँचते ही सोचा कि एक कार्यक्रम के लिए कुछ तैयार-शैयार भी होना चाहिए। तो मैंने गीता के कमरे में जाकर थोड़ा तैयार हो गई।
तब तक 11 बज चुके थे तो मैंने गीता को आवाज़ लगाई। पता नहीं.. कहाँ चली गई थी। तभी वो बाहर से आई।
आह्ह..क्या मस्त लग रही थी।
वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी क्योंकि वो मेरे मुक़ाबले कुछ खास ही तैयार हुई थी।
मैं समझ गई कि मैडम आज भी भोग लगाने वाली हैं।
ठीक 11.10 पर हम घर से निकले, रिक्शा किया और हम दोनों गेस्ट-हाउस पहुँच गए।
मैंने गीता से कमरा नम्बर पूछा।
तो गीता बोली- तू बस देखती जा।
हम अन्दर गए, दूसरी मंज़िल पर 201 नम्बर का कमरा था। गीता ने दरवाजे की घन्टी बजाई।
अनिल ने दरवाजा खोला, खोलते ही अनिल चहका- वाह.. यार तुम दोनों क्या लग रही हो… वेलकम.. वेलकम.. गर्ल्स!
हम दोनों अन्दर चली गईं और अनिल ने दरवाजा बंद कर दिया।
अनिल बोला- पहले कुछ पेट पूजा हो जाए।
तो हमने भी ‘हाँ’ कहा, क्योंकि वक्त भी खाने का हो चला था।
अनिल ने प्लान भी कुछ ऐसा ही कर रखा था। कुछ पंजाबी और चाइनीज़ के साथ और हमने खाना खाया और खाने के बाद अनिल गीता का हाथ पकड़ कर उठाया और दोनों बाथरूम में चले गए और करीब 5 मिनट बाद अनिल अकेला बाहर निकला।
तो मैंने पूछा- गीता?
तो अनिल ने आँख दबाते हुए मुझसे से बोला- उसे वहीं बाथरूम में छोड़ दिया, उसे कुछ दिक्कत है।
‘ठीक है।’
अब असली मेरी कहानी शुरू हो रही है।
अनिल आते ही मुझे कस कर पकड़ लिया, मेरे होंठ पर अपने होंठ रख दिए, पर मैं क्या करती, मुझे तो कुछ भी मालूम नहीं था।
मुझे तो अनिल ही सब कुछ सिखाएगा बस मैं यह ठान कर आई थी।
अब वो मेरे होंठों को जोरों से चूसने लगा, मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन मैं अपने सारे देवता मना रही थी कि इसके आगे सब कुछ ठीक हो बस।
अब उसने मेरे दोनों दूध पकड़ लिए और कपड़ों के ऊपर से ही ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा।
पर शायद उसे मज़ा नहीं आ रहा था तो उसने मेरी पीठ पर धीरे-धीरे हाथ फेरते-फेरते मेरे कुरते की ज़िप खोल दी।
मुझे थोड़ी शर्म आने लगी तो मैंने अपने दोनों हाथ अपने मुँह पर लगा लिए।
मैं शर्म से पानी-पानी हो रही थी, पर तभी अनिल ने मेरे दोनों कंधों से मेरा कुर्ता कमर तक उतार दिया।
फिर क्या था.. अब तो ऊपर सिर्फ़ ब्रा ही बची थी। वो सिर्फ़ मादक नजरों से मेरा जिस्म देख रहा था और बोल रहा था- क्या माल हो यार..!
मैं तो बस उसके सामने बुत बनकर खड़ी थी।
अब उसने धीरे से मेरी ब्रा भी निकाल दी और मेरे दोनों मम्मों को बारी-बारी चूसने लगा।
मुझे पूरे शरीर में अजीब सी गुदगुदी हो रही थी और वो लगातार चूसे जा रहा था।
अब उसने अपना एक हाथ मेरी चड्डी तक पहुँचा दिया और धीरे-धीरे चड्डी के ऊपर से ही हाथ फेरने लगा।
मैं तो पागल सी हो गई कि यह क्या हो रहा है, पर तभी उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बिस्तर पर ले गया।
मुझे बिस्तर पर लिटा कर उसने मेरे दोनों पैरों को फैला कर मुझे थोड़ा आगे घसीटा और मेरी योनि के आगे सर रखकर बैठ गया।
उसने मेरी योनि में ऊपर से नीचे अपनी जीभ फेरना आरम्भ कर दी। मैं तो पागल हो चुकी थी।
अरे यार… यह क्या हो रहा है और मेरी भी कमर ठीक उसी तरह उठी जा रही थी जैसे कल गीता की कमर उठी जा रही थी।
मुझे बहुत ज़्यादा गुदगुदी हो रही थी पर तभी अनिल उठा और अपनी पैंट उतारी और अपना हथियार बाहर निकाला और मेरे मुँह के सामने रख कर मेरे सामने देखने लगा।
अब मैं सोच रही थी अब क्या करूँ, पर मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था कि मुँह में लूँ या ना लूँ।
पर तभी मुझे लगा कि चलो एक बार ट्राई करते हैं.. अच्छा लगा तो ठीक है वरना मना कर दूँगी।
मैंने उसका हथियार हाथ में पकड़ा, पर यह क्या… मेरे हाथ कांप रहे थे।
थोड़ा डर लगता है यार और मैंने धीरे से मुँह में डाला.. पर ये क्या मुझे तो उल्टी आने लगी और मैंने बाहर निकाल कर उल्टी करने लगी।
तो अनिल बोला- मज़ा नहीं आया?
तो मैंने कहा- नहीं।
‘चलो कोई बात नहीं।’
अब वो मेरी दोनों टाँगों के बीच बैठ गया और एक कातिल नज़र से मेरी योनि को देखे जा रहा था.. जैसे खा जाएगा।
अब वो मेरे ऊपर आ गया और मुझे कान में कहा- देखो शुरूआत में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़ा भी दूँगा।
यह कह कर वह अपना लिंग मेरे योनि मुख पर रखकर थोड़ा-थोड़ा अन्दर घुसेड़ने की कोशिश करने लगा और दो-तीन धक्कों में आधा लिंग अन्दर चला गया।
मेरी तो साँसें रुकी हुई थीं क्योंकि अभी तक तो दर्द ही हो रहा था।
अब वो अपना पूरा का पूरा हथियार अन्दर ठोक चुका था, वो लंड को आगे-पीछे करने लगा और कुछ ही धक्कों के बाद मुझे थोड़ा दर्द कम हो रहा था और मज़ा भी आने लगा था।
करीब दस मिनट की धकापेल ही हुई होगी कि गीता बाहर आ गई और बोली- हय.. मैं मर जावां.. क्या बात है.. पूजा कैसा चल रहा है।
वो बिस्तर के पास आकर अपने कपड़े उतारने लगी और मैं तो बस सब कुछ सिर्फ देख रही थी कि अब क्या होगा।
तो गीता बोली- अब बस भी करो पूजा.. अब मेरा नम्बर भी लगना है।
वो अश्लील हँसी हँसने लगी और अब अनिल जोरों से धक्के लगाने लगा था।
करीब 15-20 मिनट की पूरी धकापेल के बाद साँस रुक गई शरीर जैसे थम गया और बहुत जोरों से मेरा शरीर अकड़ गया। इसी के साथ मैं स्खलित हो गई और पसीने से लथपथ हो गई, पर अनिल तो अभी भी लगा हुआ था।
मुझे लगने लगा कि वो मुझे छोड़ेगा नहीं.. पर तभी वो भी पसीने-पसीने हो चुका था और अब उसने अपना लिंग मेरी योनि से बाहर खींचा और मेरे पेट के ऊपर उसने अपना सारा माल निकाल दिया।
मुझे फिर से गंदा महसूस हो रहा था, तो मैं उठ कर बाथरूम में चली गई।
मैं हाथ-मुँह धोकर बाहर आई तो गीता तो काम में लग चुकी थी वो अनिल का लिंग हाथ में पकड़ कर उसे जगाने की कोशिश कर रही थी।
मैं वहीं बैठ गई और उन दोनों को देखने लगी।
उन दोनों ने मेरे ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया और कुछ ही देर में बाद अनिल का लिंग कड़क हो गया और दोनों ने जम कर चुदाई की और फिर मैं भी उनकी इस चुदाई में शामिल हो गई।
हम तीनों ने करीब 4 घंटों में 3 बार चुदाई की और वास्तव में मुझे बहुत मज़ा आया।









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FUN-MAZA-MASTI मस्ती भरी चुदाई --2

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 मस्ती भरी चुदाई --2


 
गीता ने सपाट शब्दों में कहा- तू एक काम कर, उस लौंडे को कल दोपहर दो बजे यहाँ मेरे घर पर ले आना, क्योंकि कल दोपहर के बाद मैं घर पर अकेली ही हूँ।
अब मुझे थोड़ी शांति महसूस हुई कि चलो कुछ तो सूझा, पर मुझे क्या मालूम था कल तो मेरा आज से भी बुरा हाल होने वाला था।
अब उसे बुलाने की बारी थी वो ठीक दो बजे गीता के घर पर आ भी गया, पर मैं तो घबराहट से मरी जा रही थी कि ये गीता क्या करने वाली है पर इसके बाद जो हुआ वो तो मैंने सोचा भी नहीं था।
वो दोनों, गीता और वो लड़का गीता के कमरे में चले गए और मैं बाहर खड़ी देखती रही कि ये सब क्या हो रहा है।
तभी गीता बाहर आई और मुझसे कहा- अब तुम जाओ.. अन्दर क्या हुआ वो मैं तुम्हें बाद में बताती हूँ.. ओके!
मैंने भी कहा- ओके..।
पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो दोनों पिछले एक घंटे से अन्दर कर क्या रहे हैं, पर मैंने सोचा जो भी करें मुझे क्या.. यह सोचकर मैं वहाँ से निकल आई।
अब अपने घर जा ही रही थी कि मुझे भी एक ख्याल आया कि ये क्या हो रहा है मुझे जानना तो चाहिए।
आजकल किसी पर सीधे-सीधे तो भरोसा नहीं कर सकते।
मैंने सोचा कि वापिस जाकर चुपके से देखती हूँ कि आख़िर मुझे बाहर निकल कर ये दोनों कर क्या रहे हैं?
मैं गीता के घर के अन्दर नहीं गई, क्योंकि मुझे लगा शायद मैं पकड़ी जाऊँ.. तो इसलिए मैं गीता के घर के पीछे वाली खिड़की से अन्दर झांकने गई।
बाप रे बाप.. वो दोनों क्या बताऊँ यार.. वो दोनों नंगे-पुँगे एक-दूसरे के सामने खड़े थे।
तब मुझे समझ में आया कि मुझे क्यों वहाँ से निकाला गया।
पर तभी गीता अपने घुटनों के बल बैठ गई।
मैं तो यह सब हैरत भरी नजरों से देख रही थी कि आख़िर ये हो क्या रहा है।
तभी गीता ने उस लड़के का लिंग पकड़ कर मुँह में ले लिया।
मुझे तो देख कर अजीब सी घिन आने लगी।
साला पूरा दिन वो इससे मूतता है और वो उसे ही मुँह में ले रही है।
तभी गीता उसका लिंग अपने मुँह में आगे-पीछे करने लगी।
वो लड़का जोरों से ‘आहें’ भर रहा था और उसका पूरा शरीर भी हिल रहा था।
मैं अभी भी कुछ समझ नहीं पा रही थी कि तभी गीता उठी।
अब उसकी बारी थी गीता बिस्तर पर लेट गई, उसने अपनी दोनों टाँगो को फैला लिया, वो गीता की दोनों टाँगों के बीच में अपना सर डालकर कुछ कर रहा था।
तकरीबन दो मिनट हुए होंगे कि गीता एकदम से कमर के हिस्से को उछालने लगी, पता नहीं उसे क्या हो रहा था।
तभी वो बोली- अब बस करो अनिल मुझसे अब नहीं रहा जाता.. अब मेरा काम ही तमाम कर ही डालो।
तभी वो उठा और अपना लिंग उसने गीता की योनि के मुहाने पर रखा।
गीता बोली- पहले थोड़ा धीरे करना अनिल।
तो उसने ‘ओके’ बोला और शुरू हो गया।
अभी तो आधा लिंग ही अन्दर गया होगा कि गीता चिल्लाने लगी- प्लीज़ निकालो इसे, बहुत दर्द हो रहा है।
तो उसने लिंग बाहर निकाल कर पूछा- क्यों क्या हुआ?
तो गीता बोली- तुम्हारा लिंग बहुत मोटा है और बहुत तकलीफ़ हो रही है।
तभी अनिल बोला- ओके ओके.. अब तकलीफ नहीं होगी।
अब अनिल ने फिर से लिंग को निशाने पर लगाया और अब वो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, फिर उसने अपने हथियार का दाखिला करवा दिया।
अब क्या था गीता कुछ बोलना तो चाह रही थी, पर बोल नहीं पा रही थी।
बस बड़ी-बड़ी आँखें करके अनिल को देख रही थी, पर तभी फिर अनिल ताबड़तोड़ शुरू हो गया उसने एक धक्का लगाया और गीता का चेहरा देखने लायक था जैसे किसी ने उसकी योनि में चाकू घुसेड़ दिया हो।
तभी अनिल ने अपनी गति बढ़ाई और ज़ोर-ज़ोर से वो तो शुरू हो गया और अब तो गीता की आँखों में से आँसू निकल रहे थे और बोल रही थी- जल्दी करो.. अनिल मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
मैं अपने मन में कह रही थी कि जो भी हो रहा है, सही हो रहा है क्योंकि उसने मुझे उल्लू बनाया था।
दोनों ने करीब आधे घंटे तक ये सब किया।
अब मैं भी खड़े-खड़े थक गई थी तो मैं भी अब निकलने की सोच कर वहाँ से चली आई।
ठीक है जो भी हुआ उसमें मुझे क्या.. मुझे वैसे तो कुछ हुआ नहीं था, पर थोड़ा-थोड़ा मन हो रहा था क्योंकि मुझे वो कल वाला किस्सा याद आ रहा था कि कैसे उसने मेरे साथ यही सब किया।
मेरा तो पहली बार था और मुझे तो कुछ मालूम भी नहीं था इस बारे में पर मन इसलिए हो रहा था क्योंकि इस सब में जो शुरूआत के पाँच मिनट के बाद जो मज़ा आया, वो थोड़ा आनन्ददायक था।
इसलिए गीता का कांड देखकर अब मुझे भी मेरे तनमन में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी।
अब मैं अभी घर पहुँची ही थी कि गीता का कॉल आया- मेरी अनिल से सब बात हो चुकी है.. अब तुझे सोचना है कि आगे क्या करना है?
तो उस पर मैंने पूछा- आगे क्या करना है से क्या मतलब?
‘उसने तुझे और मुझे एक गेस्ट हाउस में बुलाया है और कहा है कि कम से कम दो घंटे का समय लेकर आना, अब मैं क्या करूँ यार? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ और क्या ना करूँ।’
पर मैंने गीता को बताया- उसे बोल मुझे कल सुबह तक का सोचने का वक़्त चाहिए।
तो गीता बोली- तू रुक.. मैं उससे बात करके फिर फोन करती हूँ ओके…
मैंने कहा- ओके…
रात के 10:30 बज चुके थे, पर पता नहीं क्यूँ मुझे नींद नहीं आ रही थी और अब तक गीता का कॉल भी नहीं आया।
मुझे लगा कि अनिल ने मना कर दिया होगा ऐसा सोचकर मैं तो अब सोने की तैयारी में थी कि तभी किसी ने मेरे कमरे के दरवाजे को बहुत धीरे से खटखटाया।
मुझे लगा मम्मी होगीं, मैंने दरवाजा खोला तो मैं दंग रह गई, वो अनिल था।
मैंने बताया था कि वो हमारे घर पर ही रहता था, पर मैंने सोचा भी नहीं था कि उसकी इतनी हिम्मत होगी कि वो सीधा मेरे कमरे तक पहुँच जाएगा, मैं तो उसे देख कर डर गई।
क्योंकि एक तो मैं छोटी सी स्कर्ट में थी इसलिए मैंने जब डर के मारे दरवाजे को बंद करना चाहा तो उसने धक्का दे दिया।
अब मैं पूरी काँपने लगी कि यह अब दुबारा मेरे साथ वही सब करेगा, पर मैं ग़लत थी क्योंकि उसने ऐसा कुछ किया नहीं और मेरा हाथ पकड़ कर बिस्तर तक ले गया।
वो बोला- डरो मत मैं तुम्हें कुछ नहीं करूँगा.. मैं तो अभी सिर्फ़ बात करने के लिए आया हूँ ओके।
तब मेरी थोड़ी जान में जान आई कि चलो अब कुछ ठीक है और आज कुछ नहीं होने वाला।
तभी उसने पूछा- कल बाथरूम वाला खेल कैसा लगा था?
मैं क्या कहती.. मैं तो भूत बन कर उसे एकटक देख रही थी।
तभी उसने दूसरा सवाल पूछा- तुमने कभी ऐसा कुछ किया था किसी के साथ?
तो मैंने मुंडी हिला कर ‘ना’ का इशारा किया तो वो हँसने लगा।
मैंने पूछा- हँस क्यों रहे हो?
तो अनिल बोला- मैंने तो अंजाने में ही तुम्हारी ओपनिंग कर दी, इसलिए।
पर अचानक वो सीरियस हो गया और पूछने लगा- कल का क्या इरादा है?
तो मैंने पूछा- किस बारे में?
तो उसने कहा- गीता ने कुछ नहीं कहा?
तो मैंने कहा- हाँ.. कहा तो है, पर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।
तो अनिल बोला- इसमें सोचना कैसा? देखो मेरे पास बहुत ज्ञान है और मैं उसमें से थोड़ा तुम्हें देना चाहता हूँ.. अगर तुम्हें अच्छा लगे तो और अगर तुम्हें मेरा विश्वास ना हो तो तुम मेरे बारे में गीता से पूछ सकती हो क्योंकि अब गीता तुमसे ज़्यादा मुझे जान चुकी है।
पर उसे क्या मालूम था कि मैं भी सब कुछ जानती हूँ कि गीता और तुम्हारे बीच क्या-क्या हुआ था।
इसके साथ ही मुझे कुछ-कुछ हो भी रहा था कि क्यों न इसके साथ ‘वो’ सब फिर से करूँ।
फिर भी मैं थोड़ा अंजान बन कर अनिल से बोली- देखो जब तुमने कल मेरे साथ जो किया उसके बाद मुझे बहुत सारा खून निकला और मैं इसीलिए डर रही हूँ।
तो उस पर अनिल बोला- मेरी पूजा डार्लिंग.. वो तो पहली बार था इसलिए.. और अब ऐसा कुछ नहीं अब तो सिर्फ़ मज़े करो और क्या।
तो मैंने कहा- क्या सच्ची?
तो उसने हाथ आगे बढ़ा कर ‘प्रोमिस’ किया।
‘अब अगर तुम्हें दर्द हुआ तो तुम जो चाहो वो सज़ा दे सकती हो।’
करीब एक घंटे की अनिल की मिन्नतों के बाद मैंने ‘हाँ’ कहा।











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FUN-MAZA-MASTI मस्ती भरी चुदाई --1

FUN-MAZA-MASTI

 मस्ती भरी चुदाई --1


मैं पूजा राठौर गुजरात से हूँ, उम्र 24 साल है और मेरी हाइट 5’10” है। मेरा रंग गोरा है और मैं दिखने में बहुत ही आकर्षक हूँ। जब मेरी पहली यौन सम्बन्धी घटना शुरू हुई तब मैं 12वीं क्लास में थी। उन दिनों दीवाली की छुट्टियाँ चल रही थीं।
दीवाली से कुछ दिन पहले मेरी मम्मा के रिश्तेदार का एक लड़का हमारे घर आया, उसे कुछ काम था।
क्या काम था वो मुझे मालूम नहीं, पर न ज़ाने क्यों मुझे उस लड़के को देख कर अजीब सा लग रहा था, पर फिर भी मैंने कुछ भी गंभीरता से नहीं लिया।
ऐसे ही 2-3 दिन बीत गए, मेरे मन में उस लड़के के बारे में कोई विचार भी नहीं था, लेकिन कुछ ऐसा हुआ जो मैं कभी सोच भी नहीं सकती।
हुआ यूँ कि सुबह 9.30 बजे होंगे, पापा निकल गए थे, मम्मा बाजार गई थीं और मैं छुट्टियों की वजह से देर से उठी थी, तो अभी तो टूथब्रश ले कर इधर-उधर चक्कर लगा रही थी।
तभी मेरी नज़र उस लड़के के कमरे की तरफ गई।
कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला था और वो कुछ कर रहा था, जैसे वो कमरे में दौड़ रहा हो।
तो मुझे लगा कि यह क्या हो रहा है, तो मैं देखने चली गई।
दरवाजा खोलते ही वो एकदम से मेरी तरफ एकटक देखने लगा।
मैंने देखा वो कसरत कर रहा था, मुझे उसकी बॉडी मस्त लगी, पर मैं तब तो बच्ची सी ही थी, लेकिन मैंने मजाक में बोला- क्या बॉडी है यार..!
और मैं वहाँ से चली आई।
अब असली कहानी शुरू होती है। अब तक दस बज चुके थे और मम्मा भी एक घंटे में आ सकती थीं। तो मैं नहाने के लिए बाथरूम में पहुँची, अभी मैंने कपड़े उतार कर पानी को छूने ही जा रही थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई।
मैंने पूछा- कौन?
तो वो बोला- मैं।
‘क्या काम है.. मैं नहा रही हूँ.. बाद में बात करना।’
तो उस पर उसने बोला- शेव करते समय मेरे हाथ में ब्लेड लग गया है, खून बंद नहीं हो रहा है इसलिए डिटोल चाहिए।
मैंने बोला- मैं जल्दी से नहा लेती हूँ, तुम दो मिनट ठहर जाओ।
तो वो भड़क गया और चिल्लाने लगा।
मैं तो डर गई कि चोट ज़्यादा होगी, तभी तो इतना जल्दी में होगा।
तो मैंने तौलिया लपेटा और दरवाजा खोल दिया।
वो अन्दर आया उसके हाथ से खून टपक रहा था, तो मुझे लगा यह सच ही तो बोल रहा है।
लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई।
डिटोल लेकर जब वो जा रहा था तो मैंने पीछे से दरवाजे को बन्द करने के लिए हाथ लगाया।
तो वो बोला- रुक.. थोड़ा मुझे काम है।
अब मुझे डर लगा, एक तो मैं उसे जानती नहीं थी।
वो हाथ साफ करके वापस आया और हाथ में पट्टी बंधी थी, बोला- ये बाँध दो।
मैंने बाँध दी।
मुझे लगा अब बात खत्म हुई, अब यह जाए तो नहा लूँ।
लेकिन जाते-जाते वो फिर पलट कर रुका।
मैंने जो तौलिया लपेटा हुआ था, वो उसने खींच लिया।
मैं तो डर गई कि यह क्या हो गया।
मैं पूरी तरह से नंगी खड़ी थी और कांप रही थी क्योंकि पहले मेरे साथ ऐसा कुछ कभी हुआ ही नहीं था।
अब मैं ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी, तो वो बोला- सॉरी.. मैं तो मजाक कर रहा था।
मैं दरवाजे की ओर बढ़कर दरवाजा बंद करने ही वाली थी कि उसने दरवाजे को ज़ोर से धक्का दिया।
पीछे मैं थी तो मैं गिर गई, मैं फिर रोने लगी।
तो वो लड़का बाथरूम में घुस गया और मेरे शरीर में यहाँ-वहाँ सब जगह खेलने लगा।
तो ज़्यादा ज़ोर से रोने लगी, पर इस बार वो कुछ बोला नहीं.. बस जेब में हाथ डाला, रुमाल निकाला और मेरे मुँह पर बाँध दिया।
अभी तो मैं सोच रही थी कि यह सब हो क्या रहा है, इतने में उसने हेयर आयल की बोतल ली और ढेर सारा तेल मेरी योनि पर लगा दिया और कसके मेरे दोनों पैर पकड़ कर बोला- अब तुम्हें मज़ा आएगा।
मैं तो बस रोए जा रही थी, तभी उसने अपना लिंग बाहर निकाला।
मैंने देखा तो डर गई, उसका लिंग कितना काला और लम्बा सा, मोटा सा था, लेकिन मुझे मालूम ही नहीं था कि ये क्या हो रहा है।
तभी उसने लिंग को मेरी योनि के ऊपर-ऊपर घिसने लगा।
अब मैं पूरी तरह से डर गई कि अब कुछ ग़लत होने वाला है। वो धीरे से अपने लिंग को योनि में प्रवेश कराने की कोशिश करने लगा।
अभी लिंग आधा इंच ही अन्दर गया होगा कि मेरी चीख निकल गई, पर मुँह पर तो रुमाल बँधा था।
तभी उसने थोड़ा धक्का लगाया और उसका आधा लिंग घुस गया। अब तो मुझे लग रहा था कि किसी ने गरम मोटा सरिया लेकर मेरी योनि में घुसेड़ दिया हो।
मैं और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी पर वो तो रुकने वाला ही नहीं था।
अब उसने अपनी पूरी ताक़त से झटका मारा और पूरा लिंग पेल दिया और मेरी साँस गले में अटक गई कि आज तो मैं मर गई।
यह सब अचानक हो रहा था तो मैं कुछ समझ ही नहीं पा रही थी।
तभी उसने जोर से धकाधक चालू कर दी।
मेरी तो फटी पड़ी थी कि मेरे साथ यह क्या हो रहा है।
पर तभी पाँच मिनट बाद मुझे भी मजा आने लगा और वो तो अभी भी धकापेल में लगा हुआ था, लेकिन एक-डेढ़ मिनट के बाद न ज़ाने क्या हुआ मेरे शरीर में सब रुक सा गया और एक अजीब सा फव्वारा मेरी योनि के अन्दर छूट पड़ा।
पूरा शरीर पसीना-पसीना हो गया।
अब उसकी बारी थी करीब दो मिनट बाद वो लंबी-लंबी साँसें भरने लगा।
तो मुझे लगा यह क्या हो रहा है, पर तभी उसने लिंग बाहर निकाल कर मेरे पेट के ऊपर रखा।
उसी वक्त तुरंत ही उसके लिंग में से कुछ सफेद रंग का क्रीम जैसा कुछ निकला।
मुझे तो वो देखकर उल्टी आ रही थी, लेकिन मुझे अभी भी कुछ पता नहीं चल रहा था लेकिन मेरे शरीर में एक अजीब सा सुकून था।
कौन सा सुकून था वो नहीं पता, लेकिन मेरे लिए यह अनुभव कुछ अजीब सा था।
मुझे उस समय यह नहीं मालूम था कि यह अच्छा है या ग़लत, मुझे कुछ नहीं मालूम था।
फिर वो उठा और चला गया और मैं कुछ देर पड़ी रही और फिर नहाने लगी।
मैं नहा कर बाहर निकली तो वो अभी भी स्नानकक्ष के दरवाजे पर ही खड़ा था।
मेरे निकलते ही उसने पूछा- मज़ा आया?
मैं कुछ नहीं बोली और दौड़ कर अपने कमरे में चली गई और सोचने लगी कि ये सब किसी को बताऊँ कि नहीं..
पर तभी एक ख्याल आया कि मेरी बात का विश्वास कौन करेगा?
क्योंकि मुझे पता है ऐसे क़िस्सों में ज़्यादा बदनामी लड़की की ही होती है। लड़कों की इमेज में कोई फ़र्क नहीं पड़ता।
लेकिन फिर मेरे दिमाग़ मे मुझे एक तरकीब आई।
मेरी एक सहेली है गीता जिसके कई लड़कों से चक्कर चल रहे हैं, तो क्यूँ ना उससे पूछा जाए कि क्या किया जाए।
मैं घर से निकल कर गीता के घर चली गई, गीता अपने कमरे में कम्प्यूटर पर कुछ कर रही थी।
मुझे देख कर वो थोड़ी चौंकी- हाय पूजा.. कैसी हो.. क्या बात है आज तो तुम्हें हमारी याद आ गई, ऐसा क्या हो गया?
तो मैंने कहा- पहले दरवाजा बंद कर लो।
फिर मैंने उसे सारी बात बताई।
उस पर वो हँसने लगी।
मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी यहाँ लगी पड़ी है और ये साली हँस रही है।
मैं रोने लगी.. वो और जोरों से हँसने लगी।
अब मैं उठी और बोली- मैंने तेरे से फ़िज़ूल में यह बात कह दी.. मैं चलती हूँ।
पर तभी उसने मेरा हाथ पकड़ कर बोला- ए लड़की.. तेरा यह पहली बार था इसलिए तुझे अजीब लग रहा होगा.. मेरे लिए तो ये कुछ नहीं है। अच्छा चल में तेरी थोड़ी मदद कर देती हूँ।
यह कह कर उसने अपने कम्प्यूटर पर एक फिल्म चलाई और बोली- तू यह देख, मैं अभी तेरे लिए चाय बना कर लाती हूँ।
वो चली गई।
यह एक अँग्रेज़ी फिल्म थी और कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि तभी एक मर्द और एक औरत कपड़े उतारने लगे तो मैं डर गई कि कहीं गीता की मम्मा आ गई तो?
मैंने कम्प्यूटर बंद कर दिया पाँच मिनट बाद वो आई, आते ही बोली- यह क्यूँ बंद कर दिया?
तो मैं बोली- तू ऐसी फ़िल्में देखती है.. बोलूँ क्या आंटी को?
तो उसने कहा- मेरी जान यह तो कुछ नहीं है.. इससे सिर्फ़ ज्ञान बढ़ता है।
तो मैंने कहा- ऐसे ज्ञान बढ़ता है?
तो वो बोली- हाँ..
अब मैं सीधे उसके ऊपर चढ़ कर बोली- साली, तू मेरी मदद करेगी या नहीं?
तो उसने सपाट शब्दों में कहा- तू एक काम कर, उस लौंडे को कल दोपहर दो बजे यहाँ मेरे घर पर ले आना, क्योंकि कल दोपहर के बाद मैं घर पर अकेली ही हूँ।
अब मुझे थोड़ी शांति महसूस हुई कि चलो कुछ तो सूझा, पर मुझे क्या मालूम था कल तो मेरा आज से भी बुरा हाल होने वाला था।











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