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Saturday, March 14, 2015

FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --6

 FUN-MAZA-MASTI

 माँ बेटे की अगन --6

 सुबह सरला बिस्तर पर नही थी वो विजय के बापू के पास थी दो दीन गुजर गये उस रात बिस्तर मे विजय सरला के पास आया उसका तना हुआ गन्ना साडी मे सरला के पपिते जैसे मोटे चुत्तरो के बीच चुभने लगा सरला की कच्ची निंद तुट गई
सरला- विजय ये तु क्या कर रहा है छोड मुझे
विजय- प्यार कर रहां हू मेरी प्यारी मां को
सरला- विजय बेटा ये वक्त नही है ईन बातों का घर पे तेरे बापू बिमार पडे है और तुझे ये सब करने का सुझ रहा है छी छी छोड मुझे
विजय- बापू के बारे मे मुझे भी बुरा लग रहा है मां, पर कब तक तु चिंता मे लगी रहेगी, आज रात मुझे तेरी जरूरत है ।
सरला- विजय वो मेरे पती है
विजय- तो ये गले का मंगलसूञ, भुल गई में तेरा कौन हूं। आज तेरे ईस पती की तुझे सेवा करनी है , बापू की चिंता छोड दे तेरा नया पती तेरा साथ बीस्तर पर लेटा है।
सरला कुछ न बोली विजय सरला को बाहों मे लपेटने लगा
विजय उसके उपर चढ गया उसने सरला बाल खींच दिये और सरला के होट विजय के सामने आये। सरला के होंठ थरथराने लगे। विजय अपना आपा खो बैठा । उसने सरला को जखड लिया।
उसने उसके होंठ सरला के कांपते गरम होठो से भीडा दीये । दो दीन से शान्त पडी सरला के बदन की अगन फीर भड़क उठी । विजय के हाथ सरला के स्तनों को मसल रहे थे। उसने एक-एक करके ब्लाऊज के हुक खोल दीये सरला के दोनो टरबूज जैसे स्तन खुली हवा मे आझाद हो गये दोनो चुचियों के काले अंगूर दो तरफ मुह कीये थे मानो जैसे विजय से नाराज हो दो दीन मिलने ना आये हो ईस लिए । विजय की अगन बढने लगी।
विजय सिर्फ लूंगी मे था उसने झट से लूंगी उतार डाली और नंगा हो गया। उसका मोटा और तगड़ा लण्ड सरला की चूत पर निशाना कीये तना था । विजय ने अब सरला का ब्लाऊज उतार डाला और सरला की साडी की गाठ खोल कर अलग कर दी । पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और पेटीकोट निकाल दीया । हमेशा की तरह सरला की चुत अंदर नंगी थी। उसका गन्ने जैसा लण्ड गरम लोहा हए
सीधा खड़ा तन्ना रहा था।
सरला बदन के प्यास के मारे अपने होंट काट रही थी वो चिल्ला-चिल्ला कर कहना चाहती थी विजय बेटा मुझे चोद पर हालात के मारे मजबूर थी । दोनो का पसीना पानी की तरह
बह रहा था।
सरला का नंगा जिस्म विजय की बाहों में कैद था । होंट से होंट और विजय के पहाडी छाती से सरला के मोटे मुलायम नरम स्तन चिपके हुए थे । दोनो के बदन मिलन की मांग कर रहे थे। दोनो जिस्म अब बदन की आग में जल रहे थे। विजय ने सरला की टांगे फैलाई । सरला की चूत के होंट खुल गये थे....। विजय लंड सरला की खुली हुई दरार और चुत के चिरे पर रगडने लगा ।सरला की चूत गीली हो चुकी थी।
सरला- आहहहह हा हहहहह ममममम
विजय- उमममम हह रानी मुझे पता है तू बडी प्यासी है पर तू मजबूरी में कह नही सकती पर में हूं ना मैने तुझे सच्चा प्यार कीया है। बस तू अब मुझे अपना सब कुछ मान ले । भुल जा तेरा अतित । मै तुझे मेरी रानी बनाके रखूंगा।
सरला आंखे बंद कीये कुछ नही बोली बस बेबसी मे आंसू बहाने लगी
विजय ने सरला की बांहे फैलाई और उसकी हथेली अपनी हथेली मै कैद करली और खड़ा लण्ड चुत की दरार में घुस पड़ा, गरम मोटे और लम्बे लण्ड का अहसास सरला को चुत मे होने
लगा। विजय झटके लगाने लगा
सरला- आह आह हहहहह ममममममां ममममां आ आ सससससस आ आ उमुहहह
विजय- हहह आहहह हहहह
सरला को दर्द हो रहा था पर बाहर आवाज ना जाए ईस लिये वो अपना मुंह दबाये झटके सह रही थी ।
कुछ ही समय में विजय का लम्बा लण्ड चुत में पूरा जड़ तक जाने लगा था।



विजय- मजा ले जान रो मत तुने आजतक मेरी बदन की प्यास बुझाई है में तेरी आगे की जिंन्दगी मे खुशीया

भर दुंगा, मै तुझे शहर ले जाउंगा वहां हम पती-पत्नी की जिन्दगी जियेंगे । अब तो हस दे मेरी जान ।

सरला कुछ देर बाद मुस्कुराई और उसने विजय के होंट पे होंट टीकाए और चुमने लगी ।

शायद वो भी विजय की रखेल बनके जीना नही चाहती थी वो फीर एक सुहागन की जिन्दगी जीना चाहती थी ।

विजय आनन्द से भर उठा । .... उसके धक्के तेजी पकड़ने लगे। सरला मदहोश होती जा रही थी।

विजय कमर उठा कर वो सरला की चुत को सटासट पेल रहा था। अचानक ईस घमासान चुदाई मे

तड-तड कर सरला की चुडीयां तुटने लगी और बीखरने लगी

दोनो जिस्म वासना में लिपटे हुए थे ।

विजय के झटके सरला को चरम सीमा पर ले जा रहे थे....

सरला की चूत विजय के लण्ड को गहराई तक ले रही थी....गहरी चुदाई से उसकी चुत अन्दर तनी जा रही थी ।

विजय भी अब चरम सीमा पर पहुंचने लगा था। उसके धक्के बढ़ गए.... सरला का जिस्म भी अब उत्तेजना की

सीमा को पार करने लगा। सरला चूतड़ उछल उछल कर उसका साथ बराबरी से दे रही थी। सरलाने साडी मुंह मे

भर ली थी और चिल्ला रही थी । उसके धक्के बेतहाशा तेज होते गये ।

सरला झड़ने लगी.... उसके धक्के चलते रहे और वो झड़ती रही ।

विजय- आह्ह्ह्ह् आ.... मां निकला रे मेरा....

विजय अकड गया और उसके लण्ड ने अपनी पिचकारी छोड़ दी। अपना पूरा जोर लगा कर उसने सरला की चूत

को अपना रस भरने लगा। और विजय निढाल हो कर सरला के ऊपर ही लेट गया। और उसके होट चुमने लगा

सरला तो बेहोश ही पडी थी ।

फिर विजय सरला से लिपट कर ही सो गया।

दोनो की आंख लग गई और फीर सुबह हो गई नये दीन की नई सुबह कुछ नया मोड सरला के जीवन मे ले आई

थी।


खिडकी से आती पहली कीरन से सरला की निंद तूटी विजय का पैर सरला की गुदाज नंगी जांघो पे था और हाथ

उसके एक चुची को थामे था । सरला यह देख मुस्कुराई

सरला- पगला कही का रात तो रात निंद मे भी मुझपर अपना हक जता रहा है । कीतना प्यार करता है मुझे

सरला विजय के माथे पर चुमती हुई नंगी खडी हूई उसने साडी बदन से लपेट ली और कमरे से बाहर लडखडाती

निकल पडी । सरला नहा के विजय के बापू के कमरे मे आई उसे अजीब लगा पास जाके देखा तो उनकी सासें

बंद थी सरला ना रोई ना उदास हुई कल रात के बाद वो इस सब के लिए मानसिक रूप से तैयार थी । वो विजय

के कमरे मे गई और उसे उठाने लगी

सरला- विजय बेटा, विजय बेटा उठ

विजय जाग गया

विजय- हमममम क्या है

सरला को सामने देख वो उसे बदन पे खिंचने लगा उसे चुमने लगा ।

सरला- अ अ अ ये सब बादमे बेटा तेरे बापू की सासें नही नही चल रही है रे ।

यह सुनकर वो उठ खडा हुआ उसने कपडे पहन लिए ।

और देखने लगा उसके बापू का देहांत हो चुका था । गांव के लोगो मे खबर फैल गई लोग इकठ्ठा हुए । पतीव्रता

सरला दीखावे आंसू बहा रही थी शायद क्युंकी उसे नया चाहने वाला मिल चुका था।

दोपहर तक सारी विधीया पुरी कीये विजय घर लौटा नहाया और घर मे दोनो आझाद पंछी थे वो सरला के आंसू

बहाये सुजी आंखे जब टावल मे उसके सामने खडे विजय से मिली तो वो शरमा गई ।

उसने सरला को बाहों मे भर लिया और चुमने लगा

विजय- हुममम तो आखिर तू मेरी हो ही गई।

सरला विजय के आंखों मे देखती हुई

सरला- विजय बेटा तु मुझे इतना क्यू चाहता है । मुझमे एसा क्या है रे ।

विजय- तू परी है मां , पता है मै तुझे अपनी जवानी से चाहता हूं । बापू के बाहों मे जब भी देखता मुझे जलन

होने लगती थी ।

सरला- चल बदमाश अपनी मां पे डोरे डालता था।

विजय- चलो मैने तो मेरा सीक्रेट बता दीये अब तेरी बारी

सरला- नही नही मुझे नही बताना वो बडा दुखद अतित है मेरा।

विजय- तो मेरे साथ नही बाटेगी तेरा दुख

सरला- वो बात ये है बेटा मै तब सोलाह साल की थी तब एक दीन स्कूल से आते समय गांव के एक लडके ने

मेरे उपर बलात्कार कीया था, पुरे गांव मे यह बात हवा की तरह फैल गई , मेरी तो जिंदगी ही जैसे नरक बन

गई, पर कुछ साल बाद तेरे बापू ने मुझसे मेरे बारे मे यह हकीकत जानते हुए भी शादी की ईसलिए तेरे बापू मेरे

जिंदगी मे इतने अहम है।

विजय- ओह तो ये बात है । कसम से मां अगर वो आदमी आज मुझे मील जाए ना तो उसका लंड काट डालूंगा

, और बापू के तो जितने अहसान मानू कम है अगर वो तुझसे शादी ना करते तो आज मुझे इतनी सुंदर मां और

बीवी ना मिलती और अपनी मां के साथ ईलू-ईलू और मां के जवानी के मजे ना मिलते। थैक्यू बापू , आप की

इस अमानत को मै हमेशा खुश रखूंगा ।

सरला- चल हट बेशरम कहीका

विजय- तेरे लिए तो मैने सारी शरम छोड दी है बस अब तेरी सारी शरम दूर करनी है।

सरला- तू बडा गरम है रे शहर मे जरूर कोई ना कोई होगी तेरी गरमी दूर करने वाली है ना।

विजय- तेरी कसम कोई नही है पर अब होगी रोज रात मेरी गरमी दूर करने वाली ।

सरला – अच्छा वो भला कौन

विजय- देखो तो पुछ एसे रही है जैसे कुछ पता ही नही की मेरा इशारा कीसकी ओर है।

सरला शरम के मारे लाल हो गई पर वो विजय के मन की बात परखने नाटक करने लगी





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Saturday, October 11, 2014

FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --5

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 माँ बेटे की अगन --5

 फिर सरला की ओर देखते हुए विजय बोला-“…तु भी ना मजाक नही समझती. अरे तू तो मेरी जान है तू पहली
औरत है इसे पुरा अंदर ले पाती है, चिल्ला जितना मन करे मेरी लंड की रानी”।

सरला- हां हां इइइइइ पुरा अंदर लेती हूं ईससससस लिये मां को कुतिया समझ कर चोदता है ।

विजय- अरे राणी तुझे मजा नही आता मेरी कुतिया बन कर चुदने में, देख देख कैसी नई दुल्हन की तरह शरमा

रही है।

सरला- बेटा ततततुही तो मेरा आखरी सहारा है तुझे खुश रखने के लिये में सब कुछ सह लूंगी ,ईईईई मररर

गईईईईई रररररे ।

विजय अब खचा-खच धक्के मार रहा था। कमरे में सरला की सिसकारीयां और पच-पच फच-फच की आवज

गुंज रही थी।

सरला-“हाये बीटवा, जोरसे…। और जोर से चोद मेरे लाडले……हाये सीएएएएएए,,,”

विजय-“हां रे मेरी रखेल , तेरी तो आज फाड ही दुन्गा…। महीनों की खुजली है ना तेरी चुत में !!?…ले

कुतीया…ले मेरा लौडा…आहहह कितना पानी छोडती है !!?…….चिनाल”

सरला ने मुत मुतके सारी चद्दर गिली करदी सरला की पेशाब की गंध विजय को पागल कर रही थी वो जोश मे

आकर उसकी तुफानी चुदाई करने लगा।

सरला -“हाये .आज तो तू कुछ ज्यादा ही जोश में है रे…। मेरा जिस्म ईतना पसंद है तुझे । हाय, फाड दे बेटा

बडी तडपी हूं रे,,”

विजय-“हाय मां, मजा आ गया… तेरे बदन रेशम सा मुलायम है की तुझे दीनभर नंगी गोद मे लेकर बैठने का

मन करता है । तुने इतने महीनो बाद तेरी ऐसी मख्खन जैसी चुत के मजे करवाये है, की बस…लंड लोहा हो

गया है…ऐसा हाये मजा आ रहा है ना मां सीईईईईईईहयेएएएए,,,”

सरला- हाय इइइइइ तू तो बावला हो गया है रे कैसी बाते करता है । मै ईतनी सुंदर थोडी हूं ।

विजय- अरे तेरी नंगी तस्वीरे दोस्तो को दीखाउंगा ना तो वो पागल हो जाऐंगे तुझे चोदने के लिए मुझे मुंह मांगी

रक्कम दे देंगे हा ।

सरला- कैसा कमिना है रे तू, मतलब पैसे के लिए तू मुझे अपने दोस्तों को बेच देगा

विजय- पागल कुत्ता काटा है मुझे तु तो मेरा पर्सनल माल है , वो तो तुझे बताने के लिये कह रहा हूं तू भी ना

सरला सामने वाले आईने मे देख रही थी, कैसे वो अपनी गांड हवा में उछाल कर विजय का लंड अपनी चुत में

खा रही थी, और विजय भी गांड उठा-उठा कर उसकी चुत में धक्के दे रहा था। मन ही मन सोच रही थी की,

जबसे दोनों का चुदाई का सिलसिला शूरू हुआ है उसके जिस्म मे ये कैसी अगन लगी है जो विजय के बदन से

बदन रगडे बीना मिटती ही नही, विजय का पाणी चुत मे लिए बीना आग बुझती ही नही।

सरला- हाय उइइइइइइइ मां ससससससससस आहहहहहहहह

करीब पंद्रह मीनट की चुदाई के बाद सरला ने पानी छोड दिया, और बदन अकडा कर विजय की छाती से लिपट

गई। विजय अभी भी झडा नही था, वो महीनो बाद अपना पानी आज सरला की बुर में ही छोडना चाहता था।

कुछ देर वो सरला पे लेटा रहा अपनी सांसो को स्थिर करने के बाद। फीर धक्के देना शूरू कर दीये उसकी सांसे

अभी भी तेज चल रही थी। सरला को तो होश ही नही था। आंखे मुन्दे, टांगे फैलाये, बेहोश पडी थी। शाम तक

खुब मस्ती दोनो ने की । सरला दो बार चुदी पुरा बीस्तर सरला के मुत से गीला हुआ था । सरला होश आने पर

पास मे लेटे विजय को चुमते नंगे बदन पे साडी लपेटे रसोई मे गई सरला थोडा थक चुकी थी मगर उसकी आंखो

में रात का इन्तजार था। विजय भी थक चुका था, इसलिये घोडे बेच कर सो गया।

विजय और सरला की कामक्रीडा दो दीन तक चलती रही। विजय और सरला के लिये, जैसे महीनों बाद खुशीयों

की मस्ती की बहार आ गई थी। विजयने सरला को दो दीनो मे खुब जम के भोग लगाया। पर तिसरे दीन

अस्पताल से विजय के बापू की हालत बहोत नाजूक होने का फोन आया दोनो के मस्ती पर अचानक से ब्रेक लग गया।



घडी मे ११-५५ बज चुके थे सुरज की कीरने अपनी तपीश बरसाने लगी थी । विजय सरला को अपनी गोद मे
बीठाये उसके रसिले होटों का रसपान कर रहा था। सरला के लाख मना करने पर भी विजय सरला को अपने

बाजूओं मे जखडे उसके लाल रसिले होटों से निकलती खुशबू वाले पान की मीठास चख रहा था। सरला भी

अपनी शहद सी मीठी लार विजय के मुंह मे छोड रही थी वो साडी उपर कीये पैर फैलाये उसके तन्नाये लंड पे

बैठी थी निचे विजय का लंड सरला के चुत के छेद को चुम रहा था । कामवासना से रोमांचित सरला की चुत लंड

के सुपडे को चुत से रीस रहे पाणी से गीला कर रही थी । सरला की दोनो चुंचिया चोली मे पसिने से तरबतर

विजय की नंगी छाती से चिपकी हुई थी । दोनो के हवस का बांध कीसी भी समय तुट सकता था पर शायद

समय को कुछ और मंजूर था । तभी दोनो के बीच की दूरी बढाने विजय का फोन बज पडा फोन की बेल जोर-

जोर से बजने लगी । और विजय की बाहें खुल गई और अपने होंट विजय के होंटों से छुडाते सरला रसोई मे दौड

पडी ।

विजय- हलो कौन ।

हरीया- अरे विजय बेटा, हम हरीया काका बोल रहा हूं जिले के असपताल से।

हरीया जिले के अस्पताल मे झाडू-पोछा लगाने का काम करता था जिसकी पहचान विजय से विजय के बापू को

अस्पताल मे दाखिल कराने के बाद हूई थी।

विजय- हा हा हरीया काका बोलीये।

हरीया- अरे बीटवा तेरे बापू की तबीयत सूबह से बहोत बीगड गई है तुझे तुरंत डाक्टर साहब ने असपताल

बुलाया है।

विजय- क्या बात कर रहे हो काका ठीक है, ठीक है मै तुरंत निकलता हूं।

विजय हडबडाते कपडे पहनने लगता है ।

विजय को गडबडी मे देख सरला बडी घबरा जाती है , और पुछती है।

सरला- क क क्या हूआ विजय कीसका फोन था।

विजय- मां बापू की हालत बहोत बीगड गई है में अस्पताल जा रहा हूं ।

सरला को तो जैसे झटका लगता है । उसकी कुछ दीनों की खुशी अचानक उससे दूर हो जाती है सरला माथे पर

हाथ लगाए सदमे में वही बैठ जाती है । विजय घर से निकलता है और जैसे-तैसे जिले के अस्पताल पोहोचता

है।

उसे वार्ड के बाहर हरीया झाडू लगाते दीखता है।

विजय- हरीया काका क्या हूआ बापू को

हरीया- बेटा सुबह से तबीयत खराब है, तेरे बापू की ।

विजय उसके बापू के खटीये के पास आता है वो देखता है उसके बापू के आधे बदन को लकवा मार चुका था वहा

डॉक्टर बैठ के चेकअप कर रहा था।

विजय- डॉक्टर साब

डॉक्टर- विजय जरा बाहर आयेंगे

डॉक्टर विजय को लेकर बाहर कॉरीडोर मे आता है

डॉक्टर- विजयजी देखिये आपके लिये एक बुरी खबर है। मुझे नही लगता आपके पिताजी अब और दीन देख

पायेंगें ।

विजय को जो खबर सुनने की आशंका थी वही हुआ । पर उसे इस बात पर क्या प्रतिक्रीया देना चाहीये इस

दुवीधा मे वो था।

विजय- ड डॉक्टर साब पर क्या सच मे कोई गुंजाईश नही है बापू के ईस हाल से बाहर निकलने की ।

डॉक्टर ने खिडकी से विजय के बापू के ओर ईशारा कीया ।

डॉक्टर- विजयजी आप आपके पिताजी को आज जीस हालत मे देख रहे है, उसे हम मेडीकल भाषा मे क्रीटीकल

कंडीशन कहते है। आप चाहें तो कीसी और अस्पताल मे ईनका ईलाज करवा सकते है । पर मेरी राय माने तो

ईन्हे आप आखरी दीनों मे अपने साथ आपके घर ले जाईये ।

तभी एक वार्डबॉय भागता डॉक्टर के पास आता है।

वार्डबॉय- डॉक्टर जल्दी चलीये वो वार्ड-बी मे पेशंट नं ९ की हालत बेहत नाजूक है।

डॉक्टर तुरंत वहां से चल पडता है । विजय मायूसी मे वही खडा रहकर सोच मे पड जाता है।



विजय के पास हरीया आता है।
हरीया- क्या कहां डाकटर ने विजय बेटा।

विजय- अब कुछ नही हो सकता काका । बापू के अब कुछ दीन बचे हैं ।

हरीया- अब क्या करे बेटा सब नसीब का खेल है ।

कुछ देर बाद विजयने उसके बापू का डीस्चार्ज लेकर अस्पताल की वैन से घर ले आया।

सरला घर मे बडे सदमे में बैठी थी गांव के कुछ लोग अस्पताल की वैन देखते दौडते चले आये उन्होने विजय

को विजय के बापू को घर लाने मे मदत की । लोग घर के बाहर खडे हुए एक दुसरे से विजय के बापू के हालत

के बारे मे बाते करने लगे सरला विजय के बापू की हालत देख फूट-फूट के रोने लगी । कुछ देर बाद लोग वहां से
चले गये।

सरला अभी भी रो रही थी । विजय सरला के पास बैठे उसे चुप करने की कोशीश करने लगा पर वो रोती रही

विजय ने उसे कुछ देर बाद वहां से उठाकर रसोई के पास ले गया । सरला विजय के कंधे पर सर रखे रोती रही

उसने रोते हुए पुछा।

सरला- क्या तेरे बापू को विजय , डाकटर ने क्या कहां बताना वो ठीक तो हो जाएंगे ना ।

विजय- मां तु चिंता मत कर मैं हू ना ।

सरला- बता ना तेरे बापू कब ठीक होंगे।

विजय ने सरला को बाहों मे भर लिया

विजय- मां बापू अब ज्यादा दीन जी नही पायेंगे

सरला फीर रोने लगी ।

सरला- ये सब मेरे वजह से हुआ है, मैने तेरे साथ पाप कीया उसिकी सजा मुझे मिल रही है।

विजय- तु कैसी बहकी-बहकी बातें कर रही है मां एसा कुछ नही है बापू तो कब के बीमार थे ।

सरला चुप रही।

सरला उठ कर अपने पती के पास गई और वही बैठी रही कुछ खाए ना पिये शाम तक रोती रही विजय के बापू के आधे

बदन मे लखवा मार गया था तो वो पुरे बिस्तर पर लेटे रहते।

रात होने लगी विजय उसके बापू की हालत देखे पूरा उदास हो चुका था वो बचपन की अपने पीता के साथ गुजारी

हर बातें याद करने लगा वो यादों मे खो गया उसके बंद आखों से कुछ आंसू झलके उसने आंखे खोली तो पास मे

बैठी सरला का पल्लू जमिन पर गीरा पडा था और उसके मोटे-मोटे टरबूज पसिने से भीगे चमक रहे थे उसके

आंसू मुह से बहते हुए उसके चोली मे चुचिंयो के बीच खाई मे कीसी झरने की तरह बहते जा रहे थे। सरला

सुधबुध खोये अपने पती की देखभाल कर रही थी। पर उसके पीछे देख रहा उसका बेटा विजय की उदासी पल मे

गायब हो गई और हवस जाग चुकी थी। विजय सरला के पास गया और उसने सिधा अपने दोनो हाथ उसकी

मांसल चुचियों पे रखे और वो उसे उठाने लगा सरला की चुचिंया पुरी दब गई पर उसे इसका कुछ अंदाजा नही

था।

विजय- चल मां, चल कुछ खाले चल।

सरला- नही छोड मुझे

विजय उसे रसोई ले आया सरला वहां कोने मे बैठ गई

विजय ने सरला के लिए थाली परोसी और सरला को अपनी जांघ पर बीठाया और उसे अपने हाथों से खाना

खिलाने लगा सरला चुपचाप कुछ खाना खाने लगी।

विजय- अरे मेरी रानी कुछ खाएगी नही तो कैसे चलेगा ।

सरला ने बडी देर बाद चुप्पी तोडी

सरला- तुने कुछ खाया की नही

विजय- मेरी जान वहां रोती उदास भुकी रहेगी तो क्या मुझे मजा आएगा । आज जबतक तु मुझे नही खिलाएगी

में भुका ही रहूंगा। सरला की आंखे पनिया गई उसने भी विजय को खिलाना शूरू कीया।

खाना खाने के बाद विजय ने सरला को गोद मे उठाया और कमरे मे ले गया और उसे चुमना शूरू कीया रो –रो

कर सरला की आंखे सुज चुक थी बाल बीखरे थे वो विजय का विरोध करने की हालत मे नही थी।

विजय को भी इस बात का अहसास हुआ तो वो भी उसे बीस्तर पर लेटी छोड वहां से हट गया ।

कुछ देर बाद वो उसके पास सोने चला आया ।





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FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --4

 FUN-MAZA-MASTI
 माँ बेटे की अगन --4

 शाम को विजय अपने बाप को अस्पताल से घर लेकर आया । सरला बनावटी खूषी जाहीर करने लगी पर मन मे

भीतर बडी उदास थी उसकी खूशी कुछ दीन की ही रही उसका तन मन पूरा विजय का हो चुका था । रात मे

सरला विजय के बापू के पास बैठे उसकी सेवा कर रही थी । सरला रातभर जागती रही तडपती रही वहा दुसरे

कमरे मे विजय की भी यही हालत थी । दुसरे दीन विजय सरला को जाते जाते बाप से छुपते-छुपाते रसोई मे

बाहों मे भरकर चुम सका

सरला की आंखे नम थी वो बोली

सरला- अजी जल्दी आना वापीस, आपके बीना यहा रहा नही जाएगा

विजय- अरे मेरी परी रो मत, मुझे भी रहा नही जाएगा तेरे बीना।

दील पे पथ्थर रखे सुबह की ट्रेन से विजय शहर की ओर चल पडा

शहर मे दुसरे दीन शनिवार को विजय का फोन बज पडा विजयने फोन उठाया

विजय- हॅलो कमला हा बोलो।

कमला- कैसे हो विजय बाबू बहोत दीन हुए हमारी याद नही आई आपको कोई दुसरी मिल गई क्या

विजय- नही कमलाबाई वैसी बात नही है गांव गया था कल ही लौटा हूं

कमला- तभी सोचू दो शनिवार गुजर गये बाबूजी को कमला की याद नही आई आज शनिवार है आज आपकी

ईतने दीन की सारी भडास उतार दूंगी। आ जाईए दोपहर को कमला आपके लिए चुत खोल कर बैठी है। रातभर

मस्ती करेंगे।

विजय- नही कमला मै नही आ सकता

कमला- अरे क्यू मेरे सरकार आपकी ईस रखेल का कुछ तो खयाल कीजीए

विजय- अरे कमलाबाई डाक्टर ने मुझे कुछ दीन आराम करने को कहा है।

और विजयने कमला का फोन काट दीया, कमला वही औरत थी जीसकेपास विजय शनिवार को मजे करने जाता

था पर सरला को चोदने के बाद उसके सामने कीसी दुसरी औरत का खयाल तक नही आता था।

दीन गुजरते गये तीन महीने हो गये विजय और सरला रोज रात अपनी अगन मे जलते रहे दोनो बदन हवस की

आग मे जल रहे थे । एक दीन विजय हवस के मारे कमलाबाई के पास निकलने जा रहा था तभी अचानक

विजय का मोबईल बज उठा। सरला गांव के फोन बुथ से विजय को फोन करने लगी।

विजय - हॅलो

सरला – विजय बेटा जल्दी गांव आजा तेरे बापू को फीर एकबार दील का दौरा पडा है ।

विजय – तू चिंता मत कर मै तुरंत ट्रेन पकड कर गांव आ जाता हूं।

और उसने फोन रख दीया

असल मे सरला के मन मे लड्डू फूटने लगे क्यू के उसे महीनो से तडपती प्यास मिटाने विजय को बुलाने का

मौका मीला था। शहर मे विजय के कदम भी कमला के पास जाने से रूके बस एक रात की बात थी कल वो

उसकी प्यारी रखेल को गोद मे लेके खेलने वाला था।

दुसरे दीन सुबह सरला ने विजय के नाम का सिंदूर अपने मांग मे भर दीया

दोपहर विजय घर पहूंचा दबे पाव घर मे दाखिल हुआ उसने दरवाजा बंद कीया रसोई मे सरला गाना गुनगुनाती

खाना बना रही थी, विजय गुपचुप उसके पिछे गया और उसने दोनो हाथ सरला के चुचों पे रख दीये और कस के

उसे अपने ओर खिंच लिया सरला चिंखी बडी खबराई उसने तुरंत मुड के देखा विजय को देख कर बोली

सरला- हाय मेरी मां मजाक की भी हद होती है तूने तो मुझे डरा ही दीया।

विजय- हाय मेरी जान जब तक मै हूं तुझे कीस बात का डर।

उसकी चुचींया जोर जोर से उपर निचे हो रही थी गांड की दरार मे विजय का मोटा लौडा उसे महसूस हो रहा था ।

वो सरला का हाथ पकड़ कर सीधे कमरे में ले गया और उसके

दोनों मस्त मस्त गोल मटोल चुचिंयो को अपने दोनों हाथो में पकड़ कर मसलते हुए सरला से बोला 


विजय - “ मेरी जान बहुत महीने हो गए है चुदाई किये, चल मां फटाफट कपडे खोल के नंगी होजा, आज रूका
नही जाता, आज तेरी तबियत से तूफानी चुदाई करूँगा मेरा लंड बहुत तड़प रहा है तेरी मखमली रसदार चूत के

लिए ”

सरला अपना एक हाथ आगे बढ़ा उसके तने लंड को पकड़ हलके हाथो से सहलाते हुए बोली

सरला- अरे बेटा, मेरे पागल आशिक तडपी तो मै भी हर रात हूं तेरे लिए

पर अभी कुछ खालो खाना तय्यार है भुक लगी होगी ना बाद में हम मस्त चुदाई करेंगे जी भर के चोदते रहना

मेरे लाडले..

विजय – अरे मेरी बुलबुल पेट की भुक से कही ज्यादा बदन की भुक लगी है मुझे पहले वो मीटा दे।

विजयने पैंट की चैन खोली और अपना खड़ा लंड सरला के हाथ में दीया

सरला उसके लंड को अपनी साडी के ऊपर से ही अपनी चूत में लगया

विजय ने सरला को कस के लंड पे खिंच लिया और उसकी गांड मसलने लगा विजयने सरला की गांड की दरार

में साडी के उपर से उन्गली चलाते हुए, उसके गाल पर दांत गडा उसकी एक चुचीं पकडी और कस के मसलना

शुरू कीया।

सरला- “आह बेटा आआआअ उईईई क्या कर रहा है धीरे ना”

विजय- हममममम प्यार कर रहा हू मां

सरला- हाय माई रे तेरा प्यार तो बहोत कडक और बेरहम है रे

विजय ने सरला को बिस्तर पर पटक दिया। दोनो एक दुसरे से गुत्थम-गुत्था हो कर बिस्तर पर लुढकने लगे।

विजय होठों को चुसते हुए कभी गाल कटता कभी गरदन पर चुम्म लेता। विजय सरला की चुची को पुरी ताकत

से मसल रहा था। चुत्तड दबोच कर गांड की दरार में साडी के उपर से ऐसे उन्गली कर रहा था, जैसे पुरी साडी

उसके गांड के छेद मे घुसा देगा।

सरला के मुंह से “आ हा अह,,,,,,,,उईईईईईइ, हाय .." निकल रहा था. फिर विजय ने जल्दी से सरला को पुरा

नंगा कर दिया।

विजय का आठ इंच लंबा लंड देख । सरला ने लपक कर अपने हाथो में थाम लिया,

सरला- हाय रे मेरा छोटू तुझे देखने मेरी आंखे तरस गई थी रे

और मसलने लगी। विजय ने दो उंगलियोको थुक लगाई और सरला के फुली हुई चुत मे डाली और अंदर बाहर

करने लगा

विजय -“छोटू भी तो तेरी मुनिया से मिलने तडप रहा था।"

सरला बैठ कर सुपाडे की चमडी हटा, जीभ फिराने लगी,

सरला ने विजय का लंड पकड हिलाते हुए कहा,

सरला-“हाय मेरी कीस्मत कीतनी अच्छी है !?, मां देख रही है तू उपर से मेरे बेटे का लंड,,,,एकदम घोडे के जैसा है

ना,,,,,ऐसा पुरे गांव में किसी का नही, बापू का भी नही था ना मेरे पती का,,,,,,,।"

और फिर से चुसने लगी। विजय सरला की बीना बालो वाली चुत देख रहा था, सरला दीखावी शरमाने लगी ।

विजय ने सरला की चुत अपनी मुठ्ठी मे भरली और थपथपाने लगा,

विजय-“शरमाती क्यों है मां ? आराम से चुस,,,,,,,आज तो बडी सुन्दर लग रही है तेरी चुत,,,,,,,,,।”

सरला ने शरमा कर गरदन झुका ली। उसे बचपन का घर मे दौडता नंगा १इंच की लूली वाला विजय याद आ रहा

था तब का विजय और आज का विजय में उसे जमीन आसमान का अन्तर नजर आया। तब विजय को सरला

उसकी छोटी लूली हीला-हीला कर सू-सू करवाती थी. और आज विजय उसका ८इंच मोटा लंड सरला की चुत मे

डालकर उसको मुतने पर मजबूर कर देता है, और आज सरला विजय को अपना सबकुछ सौप चुकी थी । वो

इसलिये क्योंकी. आज वो उसे अपना पती मान चुकी थी।

विजय सरला की चुंची दबाते कहने लगा

विजय- “अरे मां, अब तैयार हो जा तेरे तडपने के दीन खत्म हुए, हमारी शादी तो हो ही गई है. बापू के बाद

हमारा गौना हो होगा फीर तू मेरे साथ शहर जायेगी, तो फिर रोज मजे करेगी ,,,,,,,”

सरला- “धत् बेशरम कही का,,,,,,,,,,”

विजय-“शहर से तेरे लिए नई साडी भी लाया हु,,,,,,,,,,,,वो हमारे सुहागरात के दिन पहनना,,,,,,,,”


 कह कर अपने पास खींच कर, उसकी चुचीं को मसलने लगा। सरला शरमा कर विजय के बाहों मे सीमट गई।
विजय ने हाथ से पकड कर उसका चेहरा उपर उठाते हुए कहा,

विजय-“मां एक चुम्मा दे ना,,,,,,,,बडे नशीले लग रहे है तेरे होंट.”

सरला- ये भी कोई पुछने वाली बात है। खुद ही ले ले।

और विजय उसके होठों से अपने होंठ सटा कर चुसने लगा। सरला की आंखे मुंद गई। विजय ने उसके होटों को

चुसते हुए, उसकी चुंची को पकड लिया और खुब जोर जोर से दबाने लगा सरला एकदम से छटपटा गई।

सरला-“उईईईइ मां, सीईई,,,,,,,”

उसकी लटकती हुई चुंची को पकड दबाते हुए विजय बोला,

विजय-“देखो ,अब कैसे शरमा रही है ?,,,,,,,,पहले तो तडप रही थी, अब कुछ करने नही दे रही,,,,,,,,,”

सरला-“जालिम कही का ईतना प्यार करेगा तो शर्म तो आयेगी ना”

विजय-“जीस औरत को आप चाहते हो उसे बेशरम हो कर प्यार करने मे क्या बुराई है भला,,,,,,,,”

सरला- “हाय मेरे मालिक बुराई तेरे प्यार में नही, तेरे ईस सांड जैसे लंड में है,,,,,,,इसे देख कर मेरी मुनिया

डर जाती है.”

विजय ने एक चुंची को हल्के से थाम लिया।

विजय- “हाय क्या रसिली चुंची है, पके हुए आम की तरह !!,,,,,मुंह में डाल कर पिने लायक,,,,,,”

और चुंची पर अपना मुंह टीकाया, जीभ निकाल कर निप्पल को छेडते हुए चारों तरफ घुमाने लगा। सरला सिहर

उठी।

सिसकते हुए सरला के मुंह से निकला, “उईई मां ससस,,,,,,”

विजय ने उसका हाथ पकड कर लंड पर रख दिया, और उसके होठों को चुमते बोला,

विजय- “ले पकड और जी भर के प्यार कर अपने छोटू को,,,,,,,,ये शहर मे तेरे मुलायम हाथ के लिए तरस

रहा था.”

विजय दोनो चुचियों को बारी बारी से चुसने लगा। बडा मजा आ रहा था उसको महीनो बाद दो नंगे जीस्म आग

मिटाने एक दुसरे को चिपके थे।

कुछ देर बाद उसने सरला को अपनी गोद में खींच लिया, और अपने लंड पर उसको बैठा लिया.

विजय-“आओ रानी, छोटू को मुनिया के साथ मस्ती करवा दे,,,,,,,,मुनिया को डर कैसा,,,,,,,,रोज खेलेगी तो आदत

पड जाएगी मुनिया को”

विजय का खडा लंड सरला की गांड में चुभने लगा। विजय ठीक गांड की दरार के बीच में लंड रगड रहा था

सरला- “हाय मेरे मालिक, मुनिया भी छोटू के लिए तरसती थी बस शरमाती है, बडा सताता है छोटू उसको”

विजय-“आज शरम मीटा देता हूं मुनिया की बस छोटू से मिल तो ले रस छोडने लगेगी”

विजय तो जन्नत में था. जोश मे विजयने दोनो चुचियों को मसल-मसल कर लाल कर दी। चुंची मसलवा कर

सरला एकदम गरम हो गई. अपने हाथ से अपनी चुत को रगडने लगी। विजय ने देखा तो मुस्कुराया

बोला,-“देखो तो. मां बेटे के लंड के लिए कैसे गरमा गई है,,,,,,,,,,आज तो बडे मजे करेगी।”

सरला शरमा कर. “धत् बदमाश,,,,,,,तू भी तो तेरी इस मां को तडपते छोड शहर गया था,,,,,,,,इतने महीनो

बाद मीली हूं मेरे आशिक बेटे से तो क्या गरम नही होउंगी”

सरला बहुत खुल चुकी थी, चुदाई की अब बिनधास्त बातें करती थी।

विजय- “माफ करदो मेरी जान अब ये गलती नही करूंगा ”

विजय ने अपना फनफनाता हुआ लंड उसकी चुत से सटा, जोर का धक्का मरा. एक ही झटके में कच से पुरा

लंड उतार दिया।

सरला कराह उठी-“हाये मां,मर गई रे, एक ही बार में पुरा …!!… सीएएएएए,,,”

विजय-“चल झुटी साली. कीतना नाटक करती है? आज तक तीस बार चोद चुका होउंगा अब तक अभी भी तेरे

को दर्द होता है …??”

सरला-“हाये बेटा, तेरा गन्ने जैसा बडा है दर्द तो होगा ही ना कोई लौंडीया होती तो मर ही जाती…!।”




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FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --3

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 माँ बेटे की अगन --3

 पर उसे उसका अतित याद आता और वो उदास हो जाती। पर उसने ठान ली अब वो विजय को जो चाहीये वो
देगी वो भी उसके प्यार मे पागल हो रही थी वो उसने विजय को अपना पती मानना शूरू कीया आखिर वजह से

उसने अपनी बनीयान उतार कर सिर्फ लूंगी मे सोया था । सरला अपने कमरे मे सोने जा रही थी उसकी नजर

विजय के पहलवानी शरीर पर पडी तो उसे उस रात की याद आने लगी वो कमरे मे आकर बिस्तर पर लेट गई

गरमी के मारे पसिना हो रही थी उसकी नजर रस्सी पे टंगी विजय ने दी हुई नाईटी पर पडी वो मंद मुस्कुराई

खडी हुई और उसने अपनी साडी निकाल फेंकी और एक-एक कर चोली के हुक खोले उसके मोटे मोटे टरबूज

लटकने लगे फीर उसने पेटीकोट का नाडा खोला और पेटीकोट निचे सरकाया और सरला पुरी नंगी हो गई इतनी

सुंदर के कोई परी हो वो नंगी चलते हुए नाईटी को पहनने रस्सी की ओर चली हर कदम पर उसके मांसल चुत्तर

थिरक रहे थे । उसकी चुंचिया तो मानो झुला झुल रही थी दांये बांये डोल रही थी । उसने नाईटी पहनी उसका

गदराया बदन मुश्कील से उसमे समाया । और वो बिस्तर पर लेट गई उसने आंखे बंद की तो सामने विजय का

कसरती बदन उसे दीखने लगा । उसने अपना हाथ चुचिंयो पर घुमाया तो उस रात के मिलन की सारी यादे ताजा

हो गई सरला अपने होंट दातों से काटते वो स्वर्ग के पल याद करने लगी । सरला मे हवस जाग उठी अब उससे

रहा नही गया उसने आंखे खोली बाल पुरे बिखरे हुए थे । वो बिस्तर से उठी दबे पाव चलकर विजय के कमरे मे

आ गई बडे प्यार से विजय को देखने लगी कुछ देर बाद वो विजय के पास पीठ करके उससे चिपक कर सो गई

उसने विजय का एक हाथ लेकर अपने चुचिं पर रख दीया और दबाने लगी विजय कच्ची निंद मे था उसे हाथ पे

नरम नरम महसूस होने लगा उसके लूंगी मे लंड तंबू बनाने लगा सरला को ये महसूस होते ही सरला ने अपनी

गांड लंड पर घिसना शूरू की विजय हडबडाते निंद से जाग गया और सरला को अपने पास देख कर चौंक पडा

उसने पुछा

विजय- मम म मां तू सोई नही अब तक.

सरला- अरे बेटा निंद तो तूने मेरी चुराई है । मुझसे प्यार करता है ना और मुझे तडपता छोड गया ।

विजय- पर मां तू तो नाराज थी ना मुझसे

सरला- विजय जिगर के तुकडे से मै कीतने दीन नाराज रह सकती थी भला और अब तो तू विजय पती है भूल

गया तुझे तो विजय गुस्सा मीटाना चाहीये था। चल अब मुझसे रहा नही जा रहा जल्दी शूरू कर ।

विजय- क्या मां

सरला- बदमाश अपनी मां से ही पुछता है उस रात तूने क्या कीया था विजय साथ ।

विजयने सरला को कसते हुए उसकी नाईटी चुत तक उपर की और अपनी उंगली उसके चुत मे डाली सरला की

चुत पानी छोड रही थी विजय समझ गया सरला बहोत गरम हो चुकी है ।

विजय- अच्छा चुदाई, अरे मां तू खूद ही बोलना ,अजी मेरी चुदाई करीये ना.. ।

सरला- चल हट बेशरम मुझे शरम आती है ।

विजय- प्लीज प्लीज मां एक बार मुझसे कैसी शरम ।

सरला- अअअजी मेरी चुदाई करीये ना..

सरला ने शरमसे अपना चेहरा छुपा लिया ।

विजय सरला की गांड की दरार मे लंड दबाने लगा।

विजय- मां एक बात बता तूझे प्यार से ईतनी नफरत क्यू है

सरला- उसके लिए विजय अतित जिम्मेदार है ,छोड ना वो बात बादमे बताउंगी।

विजय बिस्तर पर बैठ गया

विजय- वाह मां तूने मेरी दी हुई नाईटी पहनी है, तू ईसमे बिल्कूल आईटम लगती है मां , ईसी नाईटी के वजह

से तेरी जवानी मुझे पता चली ।

सरला- चल हट झूटा कैसी गंदी गंदी बाते करता है , शहर मे जाकर तू बिल्कूल बिगड गया है।

विजय- अरे तेरी कसम मां कभी ये नाईटी दीन मे मत पहना कर अगर गांव वालो ने देख लिया ना तो घर पर

लाईन लग जाएगी ।

सरला- हाय हाय कैसी गंदी बाते करता है

विजयने सरला की नाईटी को उसके बदन से अलग कीया तो सरला का नंगा बदन विजय के सामने था सरला के

चुच्चे देख के विजय को बड़ा मजा आ रहा था, और विजय ने एक चुचके को पकड़ लिया और उसके निप्पल पे

जीभ फेरने लगा और सरला एक दम सिसकिय भरने लगी आह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म इसससस करने लगी |


 विजय फिर उसके उस निप्पल को पूरा मुह में भर लिया और मुह के अंदर हि जिभ फेरने लगा और दूसरे को
मसलने लगा |

सरला एक दम से मस्त हो चुकी थी और उसका जिस्म एक दम गर्म हो चूका था जो की विजय को भी साफ़

साफ़ महसूस हो रहा था, सरला ने सारी शरम छोड दी थी वो अपने बेटे के साथ पुरी तरह से खुल उठी थी और

करती भी क्या हवस की अगन मे जल रही थी वो | विजय करीब दस मिनट उसके निप्पल और चुच्चो को इसी

तरह चूसता रहा और फिर निचे की तरफ सरक गया सरला आंखे बंद कर सिस्का रही थी | विजय उसकी चुत

के दाने को दात से काटने लगा सरला दर्द के मारे आहहहह करे होंट कांट रही थी | विजय को उसकी चुत से

मस्त बदाम के तेल की और पेशाब की मंद मंद खुशबू आ रही थी जिसे सुंग के विजय ने पुछा |

विजय- आह ह ह ह मां क्या मस्त बदाम के तेल की खूशबू आ रही है तेरी चुत से बता ना मां कैसे ।

सरला- छी गंदा कही का , वो तो मै नहाने के बाद लगाती हूं उससे हम औरतो का वो हीस्सा मुलायम और गोरा

रहता है इसलिए।

विजय- वाह क्या बात है मां फीर कलसे मै तेरी चुत पे तेल लगाया करूंगा बल्की तेरा पूरा बदन मालिश करता

रहूंगा ताकी तेरा बदन रेशम की तरह मुलायम रहे।

विजय तो एक दम मस्त हो गया था उसकी उस महक से और विजय जोश में उसकी चुत को उपर से ही काटने

लग गया | सरला एक-दम से कस कस के सिसकिय भरने लगी और धीरे धीरे उसकी सिसकिय कराहने में

बदलने लग गयी| पती अस्पताल मे बीमार पडा था और यहा घरमे मां की हवस की सिस्कारीया आधी रात मे

घर मे गुंज रही थी । सरला जैसे अपना अतित भुल गई थी वो अपने नये आशिक बेटे के साथ नई कामुक

जिंन्दगी की शूरूवात कर रही थी।

पाँच मिनट तक विजय उसकी चुत के अंगूर जितने दाने को वेसे ही काटा और फिर विजय उसकी टांगो को खोल

के उसकी चुत को चाटने लग गया | सरला इस बार तो एक दम से पागल हो गयी चुत का दाना सुजन से फूल

कर लाल हुआ था अब विजय चुत के गुलाबी होटों को चुस रहा था सरला विजय के सर को पकड़ के अपने चुत

पर दबाने लगी | बिच बिच मे सरला विजय के बालो को भी नोचती रहती और बोल रही थी की आहहह बेटे

खालो अपनी मां की चुत को बहुत सताती है ये मुझे जबसे तेरे लंड से चुदी है तितली की तरह फुदकती रहती है

। उफ्फ्फ कितना मजा आ रहा है और कस कस के चाटो इसे अह्ह्ह म्मम्मम्म इस इस इस एस्स्स्स | विजय

ने उसकी चुत की पंखुडियो को खोल के उसकी चुत के लाल छेद के उपर जीभ घुमाने लगा तो उसकी चुत ने एक

दम से पानी छोड़ दिए वो विजय के मुह पे आने लगा |

पानी निकलते ही सरला को पता चल गया की विजय के मुह पे गिरा है तो सरला ने विजय से कहा माफ कर दे

बेटा रहा ही नही गया| विजय ने कहा माफी काहे की मां बडा नमकीन है पानी तेरा और फिर उसकी चुत को फिर

से चाटने लग गया | विजय ने उसकी चुत को चाट चाट के पूरा साफ़ कर दिया | साफ़ होने के बाद वो वो सरला

को बोला

विजय- चल ये ले मां अब तेरी बारी, ले तेरे जवान बच्चे का लंड मुह मे।

सरला- छी छी ना बाबा मै ये गंदा काम नही करूंगी।

विजय- अच्छा जी और मैने जो तेरी चाटी वो ,कुछ बहाने नही चलेंगे भुल गई मै तेरा पती हूं मेरी बात तो तुझे

माननी ही पडेगी हां।

विजय उठा और फिर उसके मुह के पास अपना लंड ले गया सरला पहले उपर उपर से मुह लगाने लगी फीर

विजय ने लंड उसके मुह मे घुसेड दीया फीर सरला विजय के लंड को चाट चाट के पूरा गीला कर दी | विजय का

लंड अब पूरी तरह गीला हो चूका था उसने सरला के होटों को चुसा और सरला की जिभ चुसी और विजय ने झट

से उसके टांगो को दोनों तरफ फैला दिया और उसकी चुत पे लंड रख के रगड़ने लग गया |

सरला एक-दम मस्त हो रही थी और पागलो की तरह अपने चुच्चो को दबा रही थी |

सरला कहने लगी

सरला- बेटे और मत तड़पाओ अपनी मां को जल्दी से डाल दो अंदर में और नही रुक

सकती तेरे लंड के लिए | और रुकी तो में मर जाउंगी जल्दी से अंदर डाल दो अपने लंड को ।

सरला उस वक्त तो विजय के सामने जैसे भीक मांग रही थी उसके लंड के लिए |

विजय ने सरला को और नही तडपाया क्योकी वो भी दो दीन तडप रहा था और विजय ने चुत के अंदर लंड पेल

दिया | सरला एक दम से चिक्ख उठी उईईईईइ मांआअअ

उईईईईइ आआआआआआ आआआआआआ आआआआआआ उईईईईइ उईईईईइ उईईईईइ

आआआआआआ माँ विजय मर गयी ईईईई रे |


 विजय को ऐसी चिखों की आदत पड चुकी थी वो बेरहमी से लंड पेलता रहा और सरला के चुचो को चूसता रहा |
सरला दर्द के मारे चिंख रही थी उसके आंखो से आंसू बह रहे थे वो बिस्तर पर हाथ पटक रही थी उसकी चुडीया

खनक रही थी और हर धक्के के साथ पायल बज रही थी वो अपने नाखून विजय के पीठ मे गाढ रही थी फीर

कुछ देर बाद धीरे धरे वो शांत हुई तो विजय उठा और तेजी से लंड को अंदर बाहर करने लगा | वो अब भी अपने

नाखून से विजय के पीठ को नोच रही थी और सर को दोनों तरफ घुमा रही थी बार बार पर वो विजय को विरोध

नही कर रही थी, विजय अब भी तेजी से लंड को अंदर बाहर कर रहा था और कुछ देर बाद ही उसका दर्द मस्ती

में बदल गया अब सरला पूरी तरह से विजय के लंड का मजा ले रही थी | सरला ने विजय कमर को पकड़

लिया और विजय को अपनी तरफ खिचने लगी थी, कुछ देर के बाद सरला ने तो अपनी टांगो को हटा के विजय

कमर पे बंद दिया और अपने हाथो से और पेरो से विजय को कसने लगी और फिर एक दम उसने विजय के

हाथ को दात से काटा और उसके मुह से आहहहह निकल पडी और वो अचानक से ढीली पड गयी |

विजय को सरला के चुत मे अचानक तेज गरम फव्वारा अपने लंड पे महसूस हुआ वो समझ गया की सरला

झड गयी और फिर सरला चुपचाप पडी रही और विजय उसे हमच-हमच के पेलता रहा सरला का पानी चुत से

रीस रहा था विजय के लंड को चिपका था सफेद गाढा चिक लंड और चुत को चिपका था | विजय ने सरला की

घमासान चुदाई चालू रखी वो उसके होट चुसने लगा उसकी जिभ मुह मे लेकर चुसने लगा कुछ देर बाद वो फिर

से मस्त होने लगी और फिर से वो कराहने लगी और इस बार वो अपनी कमर उठा उठा के विजय से चुद रही थी

विजय उसको २० मिनीट तक हमच-हमच के पेला होगा और उसके बाद विजय को लगा की वो झड़ने वाला हैँ

तभी सरला बोली

सरला-बेटा हाय मे झडने वाली हूं

विजय- में भी आ रहा हूँ मेरी जान छोडदू अंदर

तो सरला ने कुछ भी जवाब नही दीया तो विजयने कस कस के पेलना शुरू कर दिया और दोनों एक साथ झड

गए और विजयने अपना सारा माल उसकी चुत में ही छोड़ दिया |जब वो झड रही थी तो उसके पूरे नाख़ून

विजय पीठ पे गडे हुए थे | धीरे धीरे सरला की पकड़ ढीली होने लगी और दोनों एक दूसरे से लिपट के सो गए |

आधे घंटे बाद विजय ने सरला को उठाया और बोला

विजय-मां तुने मेरे पूछने पर कुछ कहा नही तो मेरा पाणी अंदर ही छूट गया |

फिर सरला हसी और बोली

सरला- ये भी कोई पुछने की बात है , तू मेरा पती है मै कैसे तुझे मना करती

विजय हस पडा और फिर सरला विजय को चूमने लगी और उसे बिलग के सो गयी |

सूबह सरला नंगे पडे विजय के पास नहा कर आई और विजय के बालों मे हाथ घुमाते बडी सुरीली आवाज से

कहने लगी

सरला- अजी सुनो, अजी सुनोना मेरी बात कब तक सोते रहेंगे उठीये ना, तेल नही लगाएंगे

विजयने ये सुन कर विजय ने आंखे खोली और वो चौंक गया सरला सिर्फ साडी लपेटे खुले बाल मे विजय के

पास बैठी थी वो झट से बिस्तर पे बैठ गया और तेल की शीशी से तेल हाथ पे ले लिया सरला ने अपनी साडी

पेट तक उपर उठाई खिडकी से आते रोशनी मे सरला की बीना बालों वाली गोरी मुलायम चुत चमक रही थी उसे

देख कर विजय के मुह मे पाणी आ गया वो अपना हाथ लेकर सरला के चुत पर तेल मलने लगा कुछ देर बाद

उसने सरला को अपनी तरफ खिचा सरला अपने आप छुडाती हुई बोली

सरला- अ अ अ अभी नही पहले नहा लिजीए चाय नाश्ता कर लिजिये फीर दीन पडा है हमारे पास

सरला दरवाजे की तरफ जा कर मुडी और बोली

सरला- अजी हां और दोपहर को सिंदूर की डीबीया लेते आईयेगा जरूर।

विजय हस पडा वो भी हसते शरमाते चली गई।

दोपहर को विजय जिले मे जाकर सिंदूर की डीबीया और नई साडी और मंगलसूञ ले आया

और सरला ने पूराना मंगलसूञ निकाल कर अलमारी मे रख दीया विजय ने घर आने पर सरला की मांग मे

सिंदूर भर दीया और मंगलसूञ पहनाया और फीर दोनो चुदाई करने लगे ।

इस तरह अगले दो दीन दोनो की दीन रात चुदाई चलती रही और तिसरे दिन दोपहर को अस्पताल से उसके बापू

के डीस्चार्ज का फोन आया ये बात उसने सरला को बताई, पती के लिये तडपने वाली सरला के चेहरे पर यह

खबर सून कर खूशी नही उदासी थी । क्यू के जो खूशी उसका पती सालो नही दे पाया वो विजय पीछले हफ्ते भर

से दे रहा था। और कुछ घंटो बाद विजय के ऑफीस से भी काम पे लौटने का फोन आया।




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FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --2

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 माँ बेटे की अगन --2

 विजय ने सरला के पेटीकोट के उपर से ही चुत पे हाथ रखा और सरला के जांघो के बीच हाथ घुसा

दिया, और मेरी चुत को मुठ्ठी मे भरके दबोचने लगा ।

विजय ने सरला के ब्लाउज के हूक फटाफट खोलने लगा और उसका आखरी एक हूक तोडते हूए सरला के

खरबूज जैसे मोटे नरम चुंचीया फडफडाती हूई बाहर आ गई विजय भेडीये की तरह सरला के नरम नरम चुंचीया

को मुंह मे भर के पके हूए आम की तरह चुस रहा था । चुंचीयो पे काली घुंडीया चुसते हूए दातोंसे चबा रहा था ।

सरला ना चाहते हुए भी दर्द के मारे सी सी सी करके सिस्काने लगी। सरला का दर्द विजय उसकी चुंचीया चुमते

हूए देख रहा था । उसे लगा सरला चुदाई को तडप रही है ।

विजय ने एकदम से पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया, पेटीकोट का नाडा खिंचते ही पेटीकोट सरला के मुलायम मोटी

जांघो से सरकती पैरो तक नीचे गीर गई, सरला का चेहरा लाज से मजबूरी से लाल हो गया मै वो अपने बेटे के

सामने नंगी खडी थी। विजय ने अपने दोनो हाथों से सरला की मखमली मोटी मुलायम टाँगें दबोचली और सरला

के चुत्तड बेरहमीसे मसलने लगा अपने नाखून गढाने लगा सरला की लाज उसकी आब्रू उसका सगा बेटा लूट

रहा था वो खूले आंखो से ये सब देखे नही सकती थी और इसलिये उसने आंखे बंद करली आंखे बंद कीये दांतो

से होट दबाये विजय के बालों मे उंगलीया सहलाने लगी विजय मजे लूट रहा था पर सरला की हालत नही समझ

पा रहा था उसे लग रहा था सरला भी मजे ले रही है। जब विजय का हाथ सरला की चुत के दाने पर गया तो

सरला के बदन मे बीजली दौड गई वो उछल पड़ी शायद विजय को पता नही था पर सालों बाद सरला के नंगे

जिस्म पर मर्द का हाथ लगा था,विजय ने सरला के चुत के होट फैलाये और चुत की १ इंच लटकती फांके मुंह मे

भर ली और जोर जोर से चुसने लगा, सरला का चुत का अंगूर दाना मुंह मे खिंचने लगा सरला दर्द के मारे

आहहह..... उईईईई......सससससस करती सिस्कारीया जोर जोर से भरने लगी बंद कमरे के खामोशी में

सिस्कारीयो की आंवाजे गुंज रही थी ।

विजय ने तुरंत सरला को कसकर उसके रसिले होंठ चूसने शुरु किये, बोला- मां लगता है बापू के साथ बहोत

मजे कीये है तुने !

सरला बेचारी चुपचाप अपने अतित को याद करके उदास हो गई,विजय ने खडे होकर अपना तना हुआ मोटा

काला लौड़ा हाथ से मलने लगा सरला के हाथ मे रख दीया, सरला हैरान रह गई बिल्कुल काले गन्ने की तरह था

वो, सरला मजबूरी मे उसे हाथ मे लेकर दो बार उपर निचे करने लगी । विजय ने लौडा सरला के गुलाबी

मुलायम गालों पे रगडना शूरू कीया सरला बेचारी आंखे बद करके विजय की हरकते सह रही थी।

विजय बोला- चल मां, पकड़ ईसे और सहला ! इसको मुँह में लेगी बडा मजा आएगा ?

विजयने लौडे का सुपरा सरला के होंटो पे फेरना शूरू कीया । सरला बेचारी अपना मुंह हटाने की कोशीश कर रही

थी

विजय ने सोचा चलो ठीक है जल्द ही सिख जाएगी ।

विजय बोला- चल चल मां, जल्दी लेट जा नीचे !

विजयने सरला को नीचे लिटा कर सरला के टांगों के बीच में आया और झटके उसने सरला की मखमली गुदाज

टांगे फैला ली, विजय ने सरला की टाँगे अपने कन्धों पर रखवा कर अपने लौड़े के टोपे को चुत के चीरे पर

घिसने लगा । सरला अपने होंट काटने लगी ।

विजय ने लंड का सुपारा सरला की मोटी पावरोटी सी चुत के फांको को फैला कर चुत के छेद मे जोर का झटका

मारा, उसका लंड सरला की चुत को फैलाता हुआ अपनी जगह बनाता हुआ सांप की तरह अन्दर घुस गया।

सरला तो पागल हूई जा रही थी चिल्ला रही थी

आआआआआआहहहहहहहहह मर गई रे मोरी मईय्या ! फट गई मेरी ! हायययययय बचाले भगवान कीतना

बडा है उममममममममम हहहह आ आ आ !

विजय- अरे मां आज तेरी सालों की खुजली मिटा कर रहूंगा, तुझे स्वर्ग की सैर कराऊँगा, तू बसे मजे ले !

सरला-हाय मां, मर गई रे आआआ फट गई मेरी चुततततत, रहम कर विजय धिरे कर आहहहहह !

सरला ने भी अपनी लाज छोडदी आखिर अब बचा ही क्या था वो दर्द से जोर जोर से चिल्ला रही थी, मानो दोनो

प्रेमी हो और चुदाई के मजे ले रहे हो,

विजय ने देखते ही पूरा लंड सरला की चुत में उतार दिया और जोर-जोर से झटके लगाने लगा, लंड सरला की

बच्चे दानी से टकरा रहा था।


सरला हाय-हाय करती रोती बिलगती झटके सहन कर रही थी, और कुछ देर बाद सरला के चुत्तड
उठने लगे, उससे विजय का हौसला बढ रहा था। सरला ना

चाहती हुए भी दो बार झड चुकी थी और बेहोश पडी थी

विजय भी सरला को चुमता चाटता झडने वाला था विजयने लंड बाहर निकाल कर सरला की मांग मे लंड का

गाढा सफेद पाणी छोड दीया ।

विजय को अब सरला को घर की पालतू रंडी बनाने का रास्ता मिल गया था !

विजय ने शाम तक सरला के खटीया पे नंगी रखकर कई तरीकों से चोद-चोद के निहाल कर दिया वो बेहोश पडी

रही और विजय सरला की ईज्जत लुटता रहा।
 
सरला दिनभर दर्द के मारे ठीक से काम नही कर पाई। उसे तेज बुखार आ गया , उसे ठीक से चलने मे भी

दीक्कत होने लगी उसकी चुत से सालों बाद की चुदाई से खुन निकल रहा था । रात को बेचारी सरला ने दवाईया

लेकर विजय से बचने के लिए दुसरे कमरे मे अपने आप को कैद कर लिया। विजय सरला की ये हालत देख कर

घबरा गया। दुसरे दिन सुबह विजय सरला को काम मे मदत करने लगा , उसने खामोश नाराज सरला से पुछा

विजय- तबीयत कैसी है मां, बुखार कम हुआ की नही।

सरला खामोश रही उसने विजय के सवाल का कुछ जवाब नही दीया।

विजय- मां ये क्या बात हुई, तू मुझसे बोलती क्यू नही नाराज है मुझसे

सरला खामोश रही ।

विजय- देख तू बोल ना मुझसे अगर तू नही बोलेगी ना तो मै आज ही शहर चला जाऊंगा और कभी तुझसे बात

नही करूंगा।

सरला- पहले गलती करो और बादमे हालचाल पुछो ।

विजय ने सरला को अपनी बाहों मे पकड लिया और उसके होंट चुमने लगा।

विजय- मां क्यू रूठी है मुझसे मेरी क्या गलती है, क्या मै तुझसे प्यार करता हूं ये मेरी गलती है, तो की है मैने

गलती मुझे अपना प्यार ऐसी ही जताना आता है।

सरला ने पुरी ताकद से अपने आप को उससे छुडाया

सरला- अरे क्यो फसाता है, बडी अच्छी तरह से जानती हूं तुम मर्दो का प्यार

सरला ये कह कर वहा से चली गई, विजय बडी सोच मे पड गया की सरला को प्यार से ईतनी नफरत क्यूं थी।

उसकी नजर बाथरूम मे पडे सरला की साडी पर पडी उसपे खून लगा था। वो समझ गया कल की चुदाई से

सरला की चुत फट गई है। सरला अंदर कमरे मे थक कर दर्द के मारे जमिन पर चद्दर पर बैठी थी विजय कमरे

मे घुस गया वो सरला के तरफ बढने लगा सरला डर के मारे पिछे पिछे होने लगी विजय सरला के पास बैठ

गया उसने सरला के पैर फैलाये सरला रोने लगी।

सरला- छोड दे बेटा भगवान के लिए मुझे छोड दे

विजय- अरे डर मत मां कुछ नही करूंगा

उसने उसकी साडी कमर तक उठाई सरला की छीली हुई लाल चमडी फटी हुई चुत विजय के सामने थी विजयने

जेब से बोरोलिन क्रीम निकाली उसे उंगली पर लगाके सरला के चुत पर हल्के से लगाया सरला की आंखे फटी

की फटी रह गई उसने क्या सोचा था और क्या हुआ उसकी चुत को बडी राहत मिल रही थी।

विजय- दर्द मैने दीया है ना मां तो दवां भी मुझेही देनी होगी।

सरला की आंख से आंसू निकले वो समझ गई विजय उसे सच्चा प्यार करता है।

और विजय वहां से चला गया। सरला बैठी सोच मे पड गई की वो ये कीस उलझन मे फस गई है । वो अपने

लाडले बेटे से ज्यादा दीन नाराज नही रह सकती। पर उसे कल रात वाली चीज से मना भी नही कर सकती थी

नही तो वो फीर अपनी प्यास बुझाने शहर की रंडीयो के पास चला जाएगा और कीसी बीमारी की शिकार ना हो

जाए । जैसा विजय सोचता था वैसे नही था वो औरत तो थी पर सबसे पहले वो विजय की मां थी। उसकी सबसे

ज्यादा चिंता उसे थी । अब सरला ने ठान ली अगर यही उसके नसिब मे लिखा है तो यही सही जो होगा देखा

जाएगा सरला ने ये मन बना लिया।

सरला ने साडी ठीक की और वो रसोई मे खाना बनाने आई सामने ही बाथरूम था गांव का बाथरूम सिर्फ परदे

वाला विजय बीना परदा डाले नहा रहा था । उसका काला सांप उसके पैरो के बीच रबर की तरह हील डुल रहा था

सरला की नजर उसपे पडी उसने नजर नही हटाई वो प्यार से उसे देखने लगी और उसके गाल शरम से लाल

होगये रात की बात याद करके उसके मुह पे हल्की मुस्कान झलकी ।

दुसरे दीन विजय ने सरला को जिले के अस्पताल से दवाईयां और चेकअप करवाया डाक्टरने विजयसे कहा आप

इनकी देखभाल करीये ईन्हे अकेला ना छोडे इनकी हर जरूरत आपकी ही जिम्मेदारी है । यह सुनकर विजय को

मन ही मन बडी खूशी हो रही थी । दो दीन विजय सरला से दूर रहा रोज सरला की सेवा करता रहा मालिश से

लेकर उसकी चुत को मलहम लगाता पर कभी उसने उसपर जबरदस्ती नही की । सरला का गुस्सा तो पिघल

चुका था अब तो वो विजय के प्यार के लिए तडप रही थी पर उसे जताना नही चाहती थी। आखिर इतने साल

बाद विजय ने उसके जिस्म की आग भडकाई थी ।









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FUN-MAZA-MASTI माँ बेटे की अगन --1

FUN-MAZA-MASTI

 माँ बेटे की अगन --1
 सरला बडी तनाव मे अपने बेटे विजय को फोन लगाके बात करने लगती है।
सरला- हॅलो.....हॅलो विजय बेटा....

विजय- हां हां मां क्या हुआ... मां तु रो क्यू रही है।

सरला- अरे बेटा तेरे बापू को...तेरे बापू को दील का दौर पड गया है रे उन्हे पास के अस्पताल मे भरती कीया है।

तू....तू जल्दी गांव आजा बेटा यहां तेरी बहोत जरूरत है बेटा ।

विजय- हा हा मां मै कल ही सुबह की गाडी पकड कर गांव आ जाऊंगा तू रोना बंद कर । भगवान पे भरोसा रख

बापू को कुछ नही होगा मां। और अपने आप को संभाल मै हू ना मै देख लूंगा वहा आ कर सब कुछ।

सरला- अब तेरा ही सहारा है बेटा जल्दी आ बेटा...

कुछ देर बाद विजय फोन रख देता है । ईधर शहर मे विजय को रातभर ईस खबर से निंद नही आई और गांव मे

सरला का रो रो के बुरा हाल था।

दुसरे दीन सुबह जल्द विजय कानपूर जाने वाली रेल्वे पकड कर दुसरे दीन गांव पहूंचता है।

सरला घर के दरवाजे पेही बेटे को गले लग जाती है । और जोर जोर से रोने लगती है। विजय उसके आंसू पोछता

है।

विजय- अरे मां तू रोना बंद कर मै आ गया हूं ना।

सरला- हाय हाय भगवान.. बेटा डाक्टर ने एक आपरेसन करने बोला है कहा है जल्द आपरेसन करना होगा

तुरंत ५०,००० अस्पताल जमा करने है...

विजय अस्पताल जाकर तुरंत पैसे का बंदोबस्त कर आया को बेटे के आने से सरला को थोडा मानसिक आधार

मिलता है । ऑपरेशन कामयाब रहता है पर कुछ दीन के लिए विजय के पिता को अस्पताल मे रखने को डॉक्टर

कहते है।

ऑपरेशन के कामयाबी और पती के हालात मे सुधार को देख सरला को बडी राहत होती है। सारे गांव मे विजय

की तारीफ होती है की बेटे के वजह से बाप की जान बच गई। ईससे सरला खास तौर पे विजय पे खुष हो जाती

है और होगी भी क्यू ना वो गांव की एक सिधीसाधी औरत थी जिसके लिए उसका सुहाग सबसे बढकर था। वो

घर पे विजय को बडे लाड प्यार करती है उसका गाल चुमती है। उसे विजय भगवान की तरह लगने लगता है।

सरला- हाय बेटा विजय पता नही आज तू न होता तो क्या होता मेरा और तेरे बापू का।

विजय- अरे मां उसमे क्या बात है मैने तो मेरा फर्ज निभाया है।

दोनो मां बेटे की बांते रातभर चलती रहती है।

दो दीन बीत जाते है। सुबह विजय नहाने घर के पिछे पथ्थर पर बैठ कर अपने कसरती शरीर को साबून लगा

लगा के नहाने लगता है नहाने के बाद भीगा खडा हो कर सरला से टावल मांगने लगता है । सरला टावल ले कर

आती है अचानक उसकी नजर सुरज के धूप मे चमकते विजय के कसरती शरीर पर पडती है और वो शरम से

नजर झुकाती है और टावल थमा के निकल जाती है।

गांव मे मनोरंजन का कोई साधन नही था गांव पिछडा था इसलिए दोपहर को विजय बंद कमरे मे अपने

मोबाईल पे गाने सुनता है और बादमे ब्लू-फिल्म देखने लग जाता है विजय का दिमाग जोश से भर जाता है।

दुसरे दीन विजय गाव के पास के शहर जाता है घर के लिए सामान खरीद लाता है साथ ही ना चाहते हुए भी वो

एक चमकीले लाल रंग का नायलोन का नाईट गाऊन सरला के लिए ले आता है।

घर आकर सरला को सामान के साथ वो नाईट गाउन देता है।

सरला- ये क्या लाया बेटा मै इसका क्या करूंगी, मेरी कोई उमर है ये पहनने की। कोई साडी ले आता इससे

अच्छी।

विजय- अरे मां सोते समय तेरी साडी खराब हो जाती होगी ईसलिये लाया हूं।

फिर विजय कमरे मे चला गया, और वो कमरे मे बैठे फीर ब्लू-फिल्म देखने लगा चुदाई के सीन देखते विजय

मदहोश हो रहा था तभी सरला गाऊन पहनकर कमरे मे आ गई

सरला- देख बेटा कैसे लग रही है ये, मुझे तो बडी शरम आ रही है।

और विजय हडबडाके फोन बंद कीया पर सामने जो नजारा था वो देख कर दंग रह गया। गांव की औरते उन्हे ब्रा

पहनने की आदत नही होती सरला की दोनो पपीते जैसी बडी चुंचिया नाईट गाउन मे नंगी थी उसकी मनुके

जितनी बडी घुंडीया चमकते गाउन मे अपनी जगह दीखा रही थी। मोटे मोटे चुत्तड तो नाईट गाउन को चिपके

हूए थे पुरे गोल गोल जरा भी हीलने पर थिरक रहे थे।


 वो कीसी मोडेल की तरह विजय के सामने सिर छुकाए खडी थी विजय घुरे ही जा रहा था। उसे कुछ सुज
ही नही रहा था। वो पागलो की तरह उसे भुके भेडीये के नजर से उसके गोरे बदन को लार टपकाये देख

रहा था ।

सरला- अरे बेटा बताना कैसे लग रही है ये ना..नायटी ।

विजय अपने होश संभालता है ।

विजय- हा ह... वाह मां तू तो कमाल की सुंदर लग रही है। बिल्कूल नई दुल्हन की तरह।

सरला- चल हट बेशरम कुछ भी कहता है । मै नही पहनने वाली ये मुझे बडा अजिब लगता है इसमे ।

विजय- अरे मां मै तेरे लिए ईतने प्यार से लाया हूं और तू ऐसी बात कर रही है ।

सरला- ठीक है बेटा बस तेरे लिए ये रात मे पहनूंगी खूष।

नाईट गाऊन का गला काफ़ी नीचे तक था, और वह सरला के साईज से कम थी इसकारण सरला का साडी मे

छुपा हुआ सुंदर बदन खिल उठा था उसके मादक गोल भरे हुए अंग नाईटी मे ऊभर के आ रहे थे। ये सब नजारा

देख विजय को शहर की रंडीया जिन्हे वो चोदता था वो उसके मां की खुबसुरती के सामने फीकी दीखने लगी ।

सरला तो वहा से जा चुकी थी पर उसके बदन को याद करके उसका लंड झटके मारने लगा। विजय के दीमाग मे

सरला के बारे मे गंदे खयाल आने लगे । रात को विजय अपनी सोई हुई मां को निंद मे अपना बदन मसलते हुए

देख लिया वो बुरी तरह से पसिना हो रही थी ।विजय भांप गया यह उसके मां की अगन है पर सरला बडी ही

संस्कारी पतीव्रता औरत थी इसलिए वो इस अगन को दबाकर रखती थी । अब तो विजय को बुरी तरह से सरला

को चोदने की चाहत होने लगी ।

वो बस मौके की तलाश मे था दो दीन विजय को निंद नही आई । सुबह विजय के काम से फोन आया तो विजय

छुट्टी और बढाई ताकी वो सरला को फांस ने की योजना बना सके । पर उसी दीन अस्पताल से उसके बापू के

हालत सुधरने के बारे मे फोन आया। पर उसे ईस खबर से खास खुषी नही हुई । विजय दोपहर खटीया पे पडे हुए

सोच रहा था तो सरला कमरे मे आ गई और विजय के पास बैठ गई वो विजय पे बडी खुष थी विजय विजय का

सर अपने नरम जांघो पर रख दीया ।

सरला- बेटा बडी सोच मे पडा हुआ है क्या हुआ।

विजय- अरे मां शहर से फोन आया था काम पे बुलाया था।

सरला के चेहरे पर उदासी छा गई।

विजय- अरे मां उदास क्यो होती है मैने छुट्टी बढा दी है।

सरला- सच बेटा... पर तुझे भी तो शहर जाना जरूरी होगा ना ।

विजय- अरे मै मेरी प्यारी मां को थोडीना ऐसे परेशानी मे छोडकर जा सकता हूं ।

सरला- चल बडा आया मुझसे प्यार करने वाला झुटा।

विजय- सच मां तु मुझे बहोत प्यारी लगती है , तुझे भी मै प्यारा लगता हूं ना मां।

विजय ने सरला का हांथ हांथ मे ले लिया।

सरला- अरे तु तो मेरे कलेजे का तुकडा है रे , मै तेरे लिए कुछ भी कर सकती हूं ।

विजय- सच ना मां तो मेरी एक बात मानेगी। मना तो नही करेगी।

सरला- अरे मेरे लाल तू मेरे लिए सबकुछ है तेरी कसम, मै नही मना करूंगी ।

विजय ने उठ के दरवाजा बंद कर दीया और आके खटीया पे सरला के बगल मे बैठ गया

विजय- ठीक है पर मुझे नही लगता तू मुझे वो दे पाएगी

सरला- अरे पर बता तो सही।

विजय- मां मुझे तुम्हे प्यार से चुमना है ।

सरला आगे बढी और विजय अपना गाल आगे बढाया

सरला- इतनी सी बात ले चुमले।

विजय ने अपनी उंगली उसके होंटो पर रखी

विजय- यहां नही यहां ।

सरला- क्या बात कर रहा है बेटा मै तेरी मां हूं हम एसे नही चुम सकते ।

विजय ने उसकी एक नही सुनी और उसका मुंह हाथो मे भरकर उसके होंट चुमने लगा ।

सरला ने जैसे तैसे खुदको उससे अलग कीया और चुप चाप सिर निचे कीये बैठी रही ।

 विजय- चल मां अब मुझे तेरे होंट चुमने है।
सरला नाराजी के आवांज मे बोली

सरला- और अभी जो तुने कीया वो

विजय- अरे मां वो नही वो होंट जो तुने यहां छुपाके रखे है।

और विजय अपना मुंह सरला के जांघो के बिच रगडने लगा। सरला ने जैसे तैसे उसका सिर जांघो से हटाया।

सरला- विजय ये क्या पागलपन लगा रखा है।

तभी विजय ने सरला को पकडने को हाथ लपका तो सरला उससे बचके दरवाजे के पास भागने लगी तो विजय

उसे कसके चबोच लिया और उसकी जांघो के बीच हाथ मलने लगा।

विजय- अरे मां तू समझती क्यो नही मै तुझे बेतहा चाहता हूं

विजय सरला को खटीया पे पटका, और अपनी हाफ पेंट निचे सरकाई उसका ८ ईंच लंबा काला दंडा सांप की तरह

फन निकाले सरला को देख रहा था । सरलाने डरकर अपने हाथोंसे मुंह ढक लिया।

विजय- अरे मां ये क्या तू एसा करेगी तो कैसे चलेगा । कब तक तू एसी सती-सावीत्री बनी रहेगी । कभी तो

तुझे मेरे पास आना ही पडेगा मुझे पता है तू बडी प्यासी है । आ मां पास आ शरमा मत, देख तुने मेरी कसम

ली है वर्ना मै मर जाउंगा।

ये कहते ही सरला ने अपना हांथ विजय के मुंह पर रख दीया

सरला- ना ना बेटा ऐसी बात नही करते, तू ही तो मेरा सहारा है बेटा , पर ये दुष्कर्म मत कर ये पाप है, मै तेरी

मां हूं रे कोई अजनबी औरत नही। मां और बेटा ये नही कर सकते बात को समझ मेरे लाल।

विजय पे हवस का भूत सवार था । विजय उसका हांथ पकड कर अपने लंड पर रख दीया । और मसलने लगा,

विजय सरला को मनाने के लिए झुट बोलना शुरू कीया।

विजय- अरे मां तू कौनसे जमाने मे रह रही है । शहर मे ये सब आम बात है, मेरा दोस्त अजय और उसकी मां

तो रोज रात चुदाई करते है। और तु ईतनी सुंदर है क्यू जवानी बरबाद करती है मजे ले इसके।

ये सब सुनकर सरला को झटकासा लगा और वो चुप हो गई।

विजयने पास मे एक सिंदूर की डीबीया रखि थी उसमे से सिंदूर लिया सरला ने बहोत विरोध कीया पर विजय ने

सरला के मांग मे सिंदूर भर दीया सरला रोने लगी ।

विजय- ले अब तो तू मेरी हो गई है, और आज से मै तेरा सुहाग हूं । अब तुझे मेरी प्यास बुझानी ही होगी ।

सरला सुधबुध खोई रो रही थी। बाल बिखरे हुए थे बालों मे सिंदूर फैला हुआ था।

विजय को सरला की हालत देखी नही गई । विजय सरला को पास ले कर उसके आंसू चाटने लगा

विजय- मां माफ कर दे मुझे , मुझे ऐसा नही करना चाहीये था पर क्या करू शहर मे मुझे औरतो का नशा लग

गया है। मुझे हफ्ते मे कमसे कम एक बार औरत ना मिले तो मै पागल हो जाता हूं। पता नही मैने कीतने पैसे

लुटाये उन रंडीयो पर, देख मां तू रोना बंद कर दे नही तो मै हमेशा हमेशा के लिए तुझसे दूर चला जाऊंगा।

ये सुन कर सरला दहल गई । उसके आंसू थम गये । विजय उठ कर पेंट पहन कर दरवाजे के पास जाने लगा,

तो सरला ऊठ खडी हुई वो बोली।

सरला- रूक जा विजय।

सरला ने खडी हो कर साडी का पल्लू गिरा दीया और साडी की गांठ खोल दी और साडी को निकाल करके बाजू मे

फेंक दीया। और सिर छुकाए खडी रही । विजय को तो यकीन ही नही हो रहा था की उसकी पुराने रीवाजो वाली मां

बेटे से चुदाई को मान गई थी चाहे वो मजबूरी मे ही क्यू ना । सरला की मोटी मोटी गोरी चुचिंयो पर पल्लू नही

था जैसे तैसे वो ब्लाऊज मे कैद थी उनके वजन की वजहसे ब्लाऊज निचे सरका था । उपर से थोडी देर पहली

खिंच-तान मे उसका पेटीकोट सरक के उसके मोट गठीले मांसल चुत्तडो तक निचे आ गया था। उससे आगे से

उसके चुत के झांटे थोडे दीख रहे थे । बदन की ये नुमाईश देख कर विजय का माथा ठनका उसके अंदर का

भेडीया जाग गया था। पर संयम बरते हुए विजय सरला को कहा

विजय- मां तुम पर कोई जबरदस्ती नही है।

सरला- बस तू वो शहर वाली गंदी आदत छोड दे।

विजय ने झटसे सरला को बाँहों में ले लिया और सरला को पागलो के तरह चूमने चाटने लगा ।

विजय- मां तेरी कसम तेरे सिवाय कीसी औरत को देखूंगा तक नही।


हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !
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