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Monday, August 6, 2018

Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-5

Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-5



कुछ देर बाद मुझे लगा कि मेरे लण्ड से लावा निकलने वाला है तो मैंने प्रिया की चुदाई और तेज कर दी।
इधर प्रिया की चूत भी पानी छोड़ने वाली थी, प्रिया भी बोल रही थी- भाई, मेरा भी होने वाला है… और तेज और तेज आआह… आआ… आआऐईईईइ आआअह्ह ह्हह…
और इसके साथ साथ प्रिया ने अपनी चूत में मेरा लण्ड जकड़ लिया और अपनी चूत से पानी छोड़ने लगी, और वो मुझसे ऐसे चिपक गई जैसे दीवार पर छिपकली।
जैसे ही प्रिया की चूत के पानी ने मेरे लण्ड को नहलाया तो मुझसे भी नहीं रहा गया तो मेरे लण्ड अपना सारा लावा उसकी चूत की गहराई में छोड़ दिया।
‘आआअह्ह ह्ह…’ मैं प्रिया की चूत पर जब तक धक्के लगाता रहा जब तक मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में खाली ना हो गया।
फिर मैं भी उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों को अपने लबों में दबा कर चूसने लगा।
कुछ देर हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर मैंने प्रिया से पूछा- तुमको कैसा लगा?
तो बोली- बहुत मज़ा आया भाई, अगर मुझे पहले पता होता कि इस खेल में इतना मज़ा आता है तो मैं रात को ही आपसे चुद गई होती।
मैंने प्रिया को कहा- चोद तो मैं तुझे रात को ही देता पर रात को घर में सब थे इसलिए तुझे मैंने रात को छोड़ दिया था।
प्रिया ने मुझसे कहा- भाई, अब जल्दी से उठो, सबके आने का समय हो रहा है।
मैंने टाइम देखा तो प्रिया सही कह रही थी, इसलिए मैं उठा और फिर प्रिया को उठाने के लिए अपना हाथ दिया तो प्रिया मेरा हाथ पकड़ कर उठ गई।
उठते ही उसने बिस्तर पर देख तो कुछ खून के धब्बे देखे तो उसने पूछा- भाई, ये क्या है?
तो मैंने उसको बताया- जब कोई लड़की पहली बार चुदती है तो उसकी चूत से कुछ खून निकलता है, पर अब कोई फ़िक्र की बात नहीं है, अब तुम कली से फ़ूल बन गई हो।
मैंने और प्रिया ने देखा कि उसकी चूत से मेरा वीर्य और प्रिया का कामरस और खून तीनों मिक्स हो कर निकल रहा था।
यह देख कर हम दोनों ही मुस्कुरा दिए।
फिर प्रिया की चूत को मैंने अपने रूमाल से साफ़ किया और अपने लण्ड को भी साफ़ किया, फिर मैंने अपने कपड़े पहने और प्रिया ने वो कपड़े न पहन कर सूट सलवार पहने।
उस बिस्तर को प्रिया ने छुपाकर रख दिया जो की हमारी प्रेमलीला की गवाही दे रहा था।
कुछ देर बाद पारुल और मुकेश भी आ गए, प्रिया को कुछ चलने में दिक्कत हो रही थी पर उसने यह महसूस नहीं होने दिया कि उसको कोई दिक्कत है।
मैं उन दोनों के आने से पहले ही टी वी चला कर बैठ गया था और प्रिया खाना गर्म कर रही थी जब वो दोनों आये।
फिर हम चारों ने मिलकर खाना खाया, खाना खाने के बाद प्रिया बर्तन साफ़ करने के लिए नीचे चली गई और पारुल अपनी बुक निकाल कर पढ़ने बैठ गई और साथ में मुकेश को भी पढ़ने के लिए अपने पास बैठा लिया।
मैं भी टीवी बंद करके नीचे प्रिया के पास रसोई में पहुँच गया, प्रिया रसोई में खड़ी होकर सिंक में बर्तन धो रही थी।
मैंने उससे पीछे से पकड़ लिया और उसके बूब्स को दबाने लगा तो प्रिया ने चौंकते हुए पीछे देखा, तो पीछे मैं खड़ा था।
उसने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा– भाई, अभी कुछ मत करो, मुझे बूब्स में और नीचे दर्द हो रहा है और फिर मम्मी भी आने वाली हैं। अब जो भी करना हो रात को करना, मैं रात को बिल्कुल भी मना नहीं करुँगी।
मुझे भी लगा कि प्रिया सही कह रही है, अगर लड़की की पहली बार चुदाई हुई है तो उसको कुछ समय तक दर्द तो रहता ही है और उसकी चूत सूज भी जाती है।
उस वक़्त सिर्फ मैंने प्रिया के सेब जैसे गाल पर एक चुम्बन किया और उसके पीछे से हट गया और उससे बोला- अगर तुमको ज्यादा तकलीफ हो रही है तो मैं मदद कर देता हूँ काम करवाने में।
इस पर प्रिया हंसती हुई बोली- रहने दो मेरे सजना, मैं खुद कर लूँगी और यह दर्द तो बहुत मीठा मीठा सा है, इस दर्द में भी मुझे मज़ा आ रहा है।
अभी हम बात कर ही रहे थे कि तभी मामी भी आ गई, मैं तो उससे अलग ही था तो कोई ऐसे बात नहीं हुई जिससे उनको जरा सा भी शक होता कि दाल में कुछ काला है।
मामी के आते ही प्रिया ने उनको खाना लगा कर दिया।
मामी खाना कहते हुए मुझसे बात कर रही थी, कुछ घर की तो कुछ बाहर की, बस ऐसे ही समय निकलता चला गया।
शाम को सात बजे तक मामा जी भी आ गए, मामाजी के आने के कुछ देर बाद ही फिर से बारिश शुरू हो गई।
आज की बारिश कल की बारिश से बहुत तेज थी, बारिश के साथ साथ हवा भी चल रही थी जिसके कारण आज शाम को ठण्ड भी क्यों ज्यादा ही हो गई थी।
रात को खाना खाने के बाद मामी ने प्रिया को बोला- आज ठण्ड ज्यादा ही हो गई है, तुम बेड के अन्दर से रजाई निकाल लेना, नहीं तो रात में ठण्ड लगेगी।
प्रिया ने कहा- ठीक है मम्मी, हम रजाई निकाल लेंगे।
इसके बाद मामा और मामी हमें जल्दी सोने के लिए बोल कर अपने कमरे में आज कुछ ज्यादा ही जल्दी अन्दर चले गए।
फिर हम चारों भी ऊपर के रूम में आ गए।
तब तक बारिश भी थम चुकी थी पर हवा अभी भी चल रही थी जिसके कारण हम सभी को ठण्ड भी लग रही थी, इसलिए सबसे पहले प्रिया ने बेड से दो ही रजाई निकाली और हम चारों उन दोनों रजाई में बैठ कर बातें करने लगे क्योंकि अभी 9:30 ही बजे थे।
मुकेश और पारुल एक रजाई में बैठे थे और प्रिया और मैं दूसरी रजाई में।
मेरी जाँघ प्रिया की जाँघ से सटी हुई थी पर न तो प्रिया ने कुछ हरकत रजाई के अन्दर की और न ही मैंने क्योंकि अभी लाईट जल रही थी और हम नहीं चाहते थे कि ऐसी कोई हरकत उन दोनों की नजर में आये जिससे उन्हें कोई भी शक हो।
कुछ देर बात करने के बाद पारुल ने कहा भी- चलो भाई आज अन्ताक्षरी खेलते हैं।
तो मुकेश भी बोल पड़ा- हाँ दीदी, मैं भी खेलूँगा।
फिर सबकी सहमति से हम चारो अन्ताक्षरी खेलने लगे।
हमें अन्ताक्षरी खेलते हुए रात के 10:30 बज चुके थे और ठण्ड भी बहुत हो रही थी इसलिए मुकेश और पारुल अपनी रजाई में लेट चुके थे।
मुकेश और पारुल एक रजाई में बेड के एक कोने में लेट हुए थे, प्रिया भी अब लेटने की तैयारी में थी जो अब तक मेरे साथ रजाई में बैठी थी।
प्रिया ने लेटते हुए मुझसे कहा- भाई, लाईट बंद कर दो, कहीं ऐसा न हो कि हम सो जाएँ और लाईट जलती रहे।
मैं उठा और कमरे की लाईट बंद कर दी, अब कमरे में इतना अँधेरा हो चुका था कि हमें एक दूसरे के चेहरे भी नजर नहीं आ रहे थे।
तब तक प्रिया भी लेट चुकी थी और उसका मुँह पारुल की तरफ था क्योंकि वो करवट लेकर लेटी हुई थी।
मैं फिर से प्रिया की रजाई में घुस गया, जैसे ही मैं रजाई के अन्दर बैठा तो मेरा हाथ प्रिया के चूतड़ से छू गया।
मुझे कुछ अजीब सा लगा तो मैंने उसके चूतड़ को सही से हाथ फेर कर देखा तो पता चला कि प्रिया ने सलवार उतार दी थी, वो नीचे से पूरी नंगी थी।
हम अब भी चारों अन्ताक्षरी खेल रहे थे और मैं बैठा हुआ प्रिया की नंगी चूत को सहला रहा था।
कुछ ही देर में प्रिया की चूत गीली हो गई।
फिर मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली डाल दी और उसकी चूत को अपनी उंगली से ही चोदने लगा।
कुछ देर बाद प्रिया ने मुझसे कहा- भाई आप भी लेट जाओ।
प्रिया के कहने पर मैं भी उसी रजाई में लेट गया, उसकी गांड अब भी मेरी तरफ थी, तो मैं भी करवट ले कर लेट गया।
मेरा लण्ड प्रिया की गांड से छू रहा था और मैं अपने एक हाथ से प्रिया की चूची दबा रहा था।
प्रिया के बदन पर अभी कमीज बाकी था जिसके कारण मैं उसकी चूची को सही से पकड़ नहीं पा रहा था इसलिए मैंने प्रिया के कमीज को ऊपर की ओर खींचते हुए इशारा किया कि वो अपना कमीज भी उतार दे।
मेरी यह बात प्रिया आसानी से मान गई और वो थोड़ा ऊपर हुई और रजाई के अन्दर ही अपना सूट उतरने लगी।
उसके सूट उतारने मैं मैंने भी उसकी मदद की और कुछ ही पलों बाद उसका कमीज उतर गया।
अँधेरा इतना था कि उसके कमीज उतारने का किसी को कुछ भी पता नहीं चला।
अब प्रिया पूरी नंगी मेरे साथ लेटी थी।
कुछ देर बाद मेरा लण्ड भी पूरी तरह से खड़ा हो गया और अब शायद प्रिया की गांड में चुभ रहा था इसलिए तो प्रिया ने अपना एक हाथ पीछे की ओर किया और मेरे लोअर को पकड़ कर नीचे करने लगी।
हम अभी तक अन्ताक्षरी ही खेल रहे थे और उन दोनों को यह नहीं पता था कि हम अन्ताक्षरी के साथ साथ कुछ और भी खेल रहे हैं।
रजाई के अन्दर की हलचल को वो देख नहीं सकते थे क्योंकि पूरे कमरे में अँधेरा जो था।
मैंने भी प्रिया की मन की बात को समझते हुए अपना लोअर और अपनी टी शर्ट पूरी तरह से निकाल दी।
अब प्रिया और मैं पूरी तरह से नंगे थे।
फिर मैंने अपने हाथ से अपना खड़ा लण्ड प्रिया की चूत से सटा दिया और उसके मम्मे दबाते हुए हम ऐसे ही लेटे हुए हम अन्ताक्षरी खलते रहे थे।
मेरा लण्ड प्रिया की चूत से सटा हुआ था इसलिए प्रिया की चूत और भी गीली हो गई, उसकी चूत से इतना पानी निकला कि मेरा लण्ड भी उसकी चूत के पानी से गीला हो गया।
जब मुझे अपने लण्ड पर गीलेपन का एहसास हुआ तो मैंने उसकी चूची जरा जोर से दबा दी।
जैसे ही मैंने प्रिया की चूची जोर से दबाई, तो वो कुछ ऊपर की तरफ उछल पड़ी पर अपने मुंह से जरा भी आवाज नहीं निकाली और उसी वक़्त मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी नीचे वाली बगल में डाल दिया।
फिर जैसे ही वो नीचे हुई तो मैंने उसकी दूसरी चूची भी पकड ली।
अब मेरे दोनों हाथो में प्रिया के मम्मे थे और उनको मैं धीरे धीरे दबा रहा था।
इधर प्रिया ने अपनी गांड ओर भी पीछे की ओर कर दी और अपना एक हाथ अपनी चूत के नीचे लाकर मेरे लण्ड को पकड़ा ही था।
तभी पारुल ने कहा- मुकेश तो सो गया है तो हम तीनों ही अन्ताक्षरी खेलते हैं क्योंकि मुझे अभी नींद नहीं आ रही।
पारुल की आवाज सुनकर प्रिया ने मेरा लण्ड नहीं छोड़ा बल्कि जो वो कर रही थी वो करते करते रुक जरुर गई थी।
पारुल की बात सुनकर प्रिया ने भी कहा- मुझे भी नींद आ रही है तो तुम दोनों ही खेल लो और इतना कह कर प्रिया ने अपना मुंह भी रजाई में छुपा लिया।
मैंने प्रिया के चूचे दबाते हुए पारुल से कहा- कोई बात नहीं, इनको सोने दो, हम दोनों ही खेलते हैं।
फिर पारुल और मैं अन्ताक्षरी खेलने लगे और रजाई के अन्दर प्रिया अपना काम करने लगी।
प्रिया ने मेरा लण्ड अपनी चूत के छेद पर लगाया और फिर खुद ही अपनी गांड पीछे की ओर कर दी जिससे मेरे लण्ड का टोपा उसकी चूत में घुस गया और वो कुछ पल के लिए रुक गई, फिर प्रिया ने अपना हाथ पीछे ले जाकर मेरे नंगे चूतड़ पर हाथ से इशारा किया की पूरा लण्ड चूत में पेल दो।
प्रिया का इशारा मेरी समझ में आ गया था तो मैंने उसके चूचे को दोनों हाथ से दबाते हुए नीचे अपना लण्ड प्रिया की चूत पर दबा दिया।
मेरा लण्ड अभी आधा ही गया था कि प्रिया ने फिर से मुझे मेरे चूतड़ को पकड़ कर रुकने का इशारा किया तो मैं रुक गया और उसके चूचे दबाते हुए उसकी पीठ पर चुम्बन करने लगा।
तभी पारुल ने अपना गाना ख़त्म किया और बोली- भाई, ‘य’ से गाना है।
मैं प्रिया के मम्मे मसलते हुए गाना सोच रहा था, अभी कुछ ही देर हुई थी कि प्रिया ने फिर इशारा किया कि अब डालो, तभी मुझे भी गाना याद आ गया।
‘याहूऊऊऊऊऊऊऊ’ इतना कहते ही मैंने प्रिया की दोनों चूची को मसलते हुए एक जोर का घक्का उसकी चूत पर मारा और फिर गाना गाने लगा।
मेरा पूरा लण्ड प्रिया की चूत की गहराई में जाकर खो गया था।
प्रिया के मुंह से बस ‘ऊऊह्ह्ह्हूऊऊऊऊ’ की ही आवाज निकल पाई थी क्योंकि उसने अपना मुंह अपने एक हाथ दबा लिया था और जो आवाज निकली भी थी तो वो इतनी तेज नहीं थी कि पारुल उसको सुन सके।
मेरा गाना ख़त्म होने के बाद पारुल मेरे दिए हुए शब्द से गाना सोचने लगी और मैं प्रिया के बूब्स दबाता हुआ उसकी पीठ और गर्दन पर किस कर रहा था।
हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे, न तो प्रिया ने ही अपनी चूत हिलाई और न ही मैंने अपना लण्ड।
बस चूत में लण्ड डाले दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेटे रहे।
कुछ देर बाद पारुल भी गाना सोचते सोचते वो भी सो गई।
जब काफी देर हो गई तो मैंने प्रिया के बूब्स दबाते हुए पारुल को आवाज दी- पारुल ! पारुल ! पारुल सो गई क्या?
पर पारुल ने कोई जवाब नहीं दिया वो सो चुकी थी।
प्रिया ने मुझसे धीरे से कहा– मेरे सजना, पारुल सो गई है।
यह तो मुझे भी पता चल चुका था इसलिए मैंने पीछे से ही अपने लण्ड को बाहर खींचा और कई धक्के उसकी चूत पर मार दिए।
प्रिया के मुंह से सिसकारियाँ निकल रही थी पर बहुत धीरे धीरे।
फिर मैंने उसकी चूत से अपना लण्ड निकाला और उसको अपनी ओर घुमा लिया।
अब हमारे चेहरे एक दूसरे के सामने थे।
मैंने प्रिया को अपनी बांहों के आगोश में लेते हुए उसके लबों को चूमने लगा और प्रिया नीचे मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
फिर कुछ देर बाद मैं थोड़ा सा नीचे की ओर सरक गया अब प्रिया के मम्मे मेरे मुंह के सामने थे, मैं उसकी एक चूची को अपने मुंह में लेकर उसके चूसने लगा और दूसरे हाथ से उसकी दूसरी चूची को मसल रहा था।
मैं प्रिया की चूची बदल बदल कर चूस और पी रहा था, कभी कभी तो मैं उसकी चूची के निप्पल को अपने दांतों से काट लेता।
बड़ा ही मज़ा आ रहा था प्रिया के दूध पीकर।
मेरे ऐसा करने से उसकी और भी ज्यादा हालत खराब हो गई थी वो अब धीरे धीरे ‘ऊऊह्ह्ह्हूऊऊऊऊ आअह्ह्ह्ह’ कर रही थी।
जब प्रिया से नहीं रहा गया तो वो मेरे लण्ड को अपनी चूत में डालने की कोशिश करने लगी पर इस पोजीशन में मेरा लण्ड प्रिया की चूत के अन्दर नहीं जा रहा था तो प्रिया खुद ही मेरे ऊपर चढ़ गई, मैं उसके दोनों पैरों के बीच में लेटा हुआ था और प्रिया घुटने मोड़ कर मेरे लण्ड के ऊपर बैठी थी।
प्रिया ने अपने एक हाथ से मेरे लण्ड को अपनी चूत के छेद पर लगाया और थोड़ा सा नीचे को बैठने लगी।
मेरा लण्ड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर जाने लगा, जब मेरे लण्ड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया तो वो मेरे ऊपर लेट सी गई और उसने मेरे होंठ को अपने होंठ में दबाकर के जोर का धक्का मेरे लण्ड पर दे मारा।
‘ऊऊईईईईम्म्म्माआआआ!’
मेरा लण्ड उसकी चूत में पूरा समा गया, प्रिया की आवाज मेरे और उसके मुंह के अन्दर ही घुट कर रह गई।
प्रिया की चूची मेरे छाती पर दबी ही थी और मेरे दोनों हाथ उसके चूतड़ को सहला रहे थे।
प्रिया कुछ देर ऐसे ही मेरे ऊपर लेटी रही और फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी।
मैं उसकी जीभ को चूसने लगा और वो अपनी चूची मेरी छाती पर रगड़ने लगी।
कुछ देर बाद उसने अपनी गांड उठाकर मेरे लण्ड पर मारने लगी, एक तो हम दोनों के बदन में आग लगी हुई थी ओर ऊपर से हमारे ऊपर रजाई थी।
रजाई के अन्दर इतनी गर्मी हो गई थी कि हम दोनों को पसीने आ गए।
फ़िर मैं उसकी चूची अपने मुंह में डालकर पीने लगा और साथ ही मैंने उसके चूतड़ को अपने दोनों हाथों से कुछ ऊपर किये और फिर नीचे से उसकी चूत में लण्ड पेलने लगा।
मैं लगातार उसके बूब्स को चूसे जा रहा था और साथ ही मैं उसकी चूत पर नीचे से धक्के लगाये जा रहा था।
कमरे में हमारी चुदाई का मधुर संगीत गूंज रहा था, प्रिया की चूत से इतना पानी निकल रहा था कि जब भी मेरा लण्ड उसकी चूत में अन्दर बाहर होता तो फच फच फच फच की आवाज आती।
हमारी चुदाई के मधुर संगीत को कोई सुनने वाला नहीं था क्योंकि पारुल और मुकेश तो सोये हुए थे।
कुछ देर बाद ही प्रिया मेरे ऊपर लेटे लेटे थक गई तो उसने में कान में धीरे से कहा- भाई, मुझे नीचे लेकर चोदो।
प्रिया मेरे ऊपर से उतर कर नीचे बेड पर लेट गई उसके नीचे लेटते ही मैं उसके पैरों के बीच आया और पहले उसकी चूत को किस किया फिर उसकी चूत को चाटने लगा, अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा कर अन्दर बाहर करने लगा।
कुछ देर ऐसे ही चूत चाटने के बाद मैं प्रिया के मुंह की तरफ आया और अपने हाथ से अपना लण्ड उसके होंठों पर रख दिया।
प्रिया ने अपना मुंह खोल कर मेरा लण्ड अपने मुंह में ले लिया, मेरे लण्ड के सुपाड़े को अपने होंठों में दबा कर उसको चूसने लगी। मेरा लण्ड चूसते हुए वो अपनी जीभ से मेरे लण्ड के सुपाड़े के छेद को कुरेदने लगी, उसके ऐसा करने से मुझे अपार आनन्द आ रहा था।
मेरा लण्ड प्रिया ने चूस चूस कर अपने थूक से तर कर दिया।
जब मेरा लण्ड प्रिया के थूक से तर हो गया तो मैं फिर से प्रिया के पैरों के बीच आ गया और उसके पैरों को चौड़ा करके अपना लण्ड उसकी चूत पर लगा कर एक जोरदार धक्का उसकी चूत पर दे मारा।
‘ऊऊऊईईम्म्म्माआआअ…’ वो धीरे से चीखी मेरा लण्ड पूरा उसकी चूत में उतर गया।
फिर मैंने उसकी चूची को पकड़ा और जोर जोर से धक्के मारने लगा।
हर धक्के पर उसके मुंह से ‘अऊऊआअय्य्य’ करके आवाज आती।
प्रिया चुदते हुए मेरी कमर को सहलाती तो कभी मेरे चूतड़ों को।
कुछ देर बाद ही मुझे लगा कि मेरा होने वाला है तो मैंने प्रिया को कहा- जान, मेरा होने वाला है।
तो प्रिया भी बोल पड़ी- भाई रुकना नहीं, रुकना नहीं मेरा भी होने वालाआआआआअ है!
और इतना कहते ही उसने मुझे जकड़ लिया, उसकी चूत से काम रस बह निकला जो मेरे लण्ड को तर कर रहा था।
मेरा भी अब होने की कगार पर था, मैंने आठ दस धक्के उसकी चूत पर कस कस के मारे और फिर मेरे लण्ड ने भी प्रिया की चूत में लावा उगल दिया, हम दोनों ही झड़ चुके थे।
मैं प्रिया के ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा जब तक मेरे लण्ड सिकुड़ कर उसकी चूत से बाहर न आ गया।
फिर प्रिया ने मुझे अपने ऊपर से हटने को कहा तो मैं उसके ऊपर से हट कर साइड में लेट गया।
वो उठी और बाथरूम में अपनी चूत को साफ़ करके फिर से मेरे पास आकर लेट गई।
मैंने प्रिया को बोला- कर लिया अपनी चूत को साफ़?
तो वो बोली- हाँ भाई!
तो मैंने कहा- मेरा लण्ड कौन साफ़ करेगा?
तो उसने कहा- सॉरी भाई, मैं भूल गई।
इतना कहने के बाद वो मेरे लण्ड के पास गई और फिर मेरे लण्ड को अपने हाथ में पकड़ा और उसको अपनी जुबान से चाट चाट कर साफ़ कर दिया।
मेरा लण्ड साफ़ करने के बाद वो फिर से मेरे पहलू में आकर लेट गई।
प्रिया नंगी ही बाथरूम गई थी जिसकी वजह से उसको ठण्ड लग रही थी, वो मुझसे लिपट कर लेटी हुई थी, वो अब भी कांप रही थी तो उसको मैंने अपने आगोश में पूरी तरह ले लिया।
कुछ देर बाद मेरे शरीर की गर्मी मिलने के कारण उसका बदन भी गर्म हो गया था।
कुछ देर बाद प्रिया ने कहा- भाई, चलो अब कपड़े पहन लेते हैं नहीं तो मुझे आपके आगोश में पड़े हुए बहुत जल्द ही नींद आ जायेगी।
मैंने प्रिया के लबों को चूमते हुए कहा- मेरा मन तेरे साथ नंगे सोने का है।
तो प्रिया ने मुझे समझाते हुए कहा- मेरे सजना, मेरे बलम… मेरी बात मान जाओ, जिद नहीं करते, अगर किसी ने हमको इस हालत में देख लिया तो बहुत मुश्किल हो जायेगी। जब घर में कोई नहीं होगा, तब तुम जो कहोगे, मैं वो सब करुँगी पर अभी खुद भी कपड़े पहन लो और मुझे भी पहने दो।
प्रिया की बात तो सही थी, इसलिए मैंने उसको कुछ नहीं कहा और चुपचाप अपने कपड़े पहन लिए और प्रिया भी सूट सलवार पहन कर मुझसे चिपक कर लेट गई और मुझसे पूछा- भाई, आप मुझसे नाराज तो नहीं हो न?
तो मैंने कहा- नहीं जान, मैं तुमसे नाराज नहीं हूँ।
और इतना कह कर हम दोनों एक दूसरे की कोली भर कर सोने की कोशिश करने लगे।

दोस्तो, यह थी मेरी और प्रिया की प्रेमलीला… आपको कैसी लगी।


















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Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-4

Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-4



मैंने उससे कहा- वो तो मुझे दिखाई दे रहा है, ख़ैर छोड़ो इस बात को, अब तो वो सब ही करेंगे जो उस मूवी में वो लड़का और लड़की कर रहे थे।
फिर मैंने प्रिया से कहा- उसके लिए तुमको सारे कपड़े उतारने पड़ेंगे, क्या तुम ऐसा कर लोगी?
इस बार प्रिया ने अपने मुंह से बस इतना ही कहा- इतना सब होने के बाद भी आप पूछ रहे हो?
प्रिया की बात सुनकर इधर मेरा लण्ड फिर से अंगड़ाई लेने लगा था और वो धीरे धीरे खड़ा हो रहा था।
प्रिया मेरे लण्ड को अंगड़ाई लेता हुआ बड़े ही गौर से देख रही थी।
मैंने प्रिया को कहा- तुम कोई पुराने चादर ले आओ इस बेड पर बिछाने के लिए क्योंकि तेल के कारण यह साफ़ चादर खराब न हो जाए।
प्रिया कुछ ही पलों में एक पुरानी सी चादर ले आई, वो मैंने बेड के एक कोने में बिछा दी।
मैं ये सब कर तो रहा था पर मेरे मन में एक शंका हो रही थी !
कहीं मामी न आ जाये और हमारा प्रोग्राम अधूरा न रह जाए।
मैंने प्रिया को यह बात बताई- कहीं तेरी मम्मी आ गई तो बहुत बुरा होगा।
मेरी बात सुनकर प्रिया बोली- भाई, मैं एक मिनट में आई !
और इतना कह कर वो नीचे गई, कमरे से मेरा फ़ोन ले आई और वो बोली- मुझे मम्मी का नम्बर मिला कर दो।
तो मैंने उसको उसकी मम्मी का फ़ोन नम्बर मिला कर दे दिया।
कुछ देर बाद मामी ने फ़ोन उठाया तो प्रिया ने कहा- मम्मी आप कितनी देर में आओगी? क्योंकि भाई को खाना दिया था तो वो बोल रहे है जब मामी आ जाएगी तभी खा लूँगा।
प्रिया की बात सुनकर मामी ने दूसरी तरफ से कहा- तू अपने भाई को खाना खिला दे, मुझे यहाँ पर टाईम लग जाएगा। मैं तो 4 बजे तक ही आ पाऊँगी।
प्रिया ने कहा- ठीक है, मैं भाई को खाना खिला दूंगी।
और यह कह कर प्रिया ने फ़ोन काट दिया।
और फिर उसके बाद मुझे सारी बात बताते हुए प्रिया बोली- मम्मी 4 बजे से पहले नहीं आने वाली ! और पारुल और मुकेश भी 2:30 तक ही आयेंगे।
प्रिया की बात सुनकर अब पूरी तरफ पक्का हो गया कि आज प्रिया की चुदाई पक्की है।
मैंने देखा भाई के लण्ड पर अभी भी कुछ बूंदें माल की उनके लण्ड पर रह गई थी। इसलिए मैंने अपनी जीभ निकली और भाई का लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया क्योंकि मैं अपने भाई का माल बर्बाद नहीं होने दे सकती थी।
मैं साजन- उसके बाद मैंने अपना लोअर ठीक किया और प्रिया से बोला– अब ऊपर चलते है क्योंकि हमें बहुत देर हो गई है।
प्रिया- हाँ भाई, ऊपर चलते हैं बहुत देर हो गई हैं। पर एक बात तो बताओ आप मेरी मसाज कब करोगे?
प्रिया ने कहा- वैसे भाई खाने का भी टाइम हो गया है आप कहो तो पहले खाना लगा दूँ?
मैंने कहा- अभी नहीं, भूख भी नहीं लग रही और फिर पहले यह काम ख़त्म कर लेते हैं, कहीं कोई आ गया तो यह भी अधूरा रह जाएगा।
प्रिया ने कहा- सही कह रहे हो भाई आप !
फिर मैंने प्रिया को तेल लाने को कहा तो प्रिया सरसों के तेल की शीशी ले आई।
मैंने प्रिया को कहा- अब तुम अपने कपड़े उतार कर इस चादर पर लेट जाओ।
मेरी बात सुन कर प्रिया अपने कपड़े उतारने लगी पर उससे कपड़े उतर नहीं रहे थे, अब उसको मेरे सामने शर्म आ रही थी उसे अपने कपड़े उतारते हुए।
मैं प्रिया की उलझन को समझ रहा था, और वैसे भी जब लड़की गर्म होती है और सेक्स के अधीन होती है तो उसकी शर्म गायब हो जाती है पर अब प्रिया को फिर से गर्म करना पड़ेगा तभी यह खुल कर मज़े दे पाएगी, इसलिए मैंने उससे कहा- एक काम करो, तुम मेरे मोबाईल में कोई मूवी देखो, तब तक मैं अपने कपड़े चेंज कर लेता हूँ, नहीं तो ये भी तेल में हो जायेंगे।
मैंने अपने फ़ोन में फिर वही फ़ोल्डर ओपन कर के प्रिया को दे दिया फिर मैं उसके सामने ही अपने कपड़े चेंज करने लगा।
मैंने पहले अपनी टी शर्ट उतारी, फिर मैंने अपना बनियान ऊपर दिया, फिर उसके बाद मैंने अपने लोअर भी उतार भी उतार दिया।
मैं प्रिया के सामने बिल्कुल नंगा खड़ा था और प्रिया मुझे एकटक देखे जा रही थी।
मैंने प्रिया से कहा- ऐसे क्या देख रही हो? वो जो तौलिया रखा है वो दे दो।
प्रिया मेरे खड़े होते हुए लण्ड को अपनी प्यासी निगाहों से देखते हुए अपने होठों पर अपनी जीभ फिरा रही थी।
जब प्रिया ने मुझे तौलिया नहीं दिया तो मैं नंगा ही उसके सामने पहुँच गया जैसे ही में उसके करीब पहुँचा तो प्रिया ने मेरा लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया।
मैंने अपने लण्ड को उसके हाथों से छुड़ाते हुए कहा- इसको बाद में पकड़ लेना, पहले मुझे वो तौलिया दो।
तो प्रिया बोली- भाई, आप ऐसे ही अच्छे लग रहे हो, और फिर तौलिया तो आपको उतरना ही पड़ेगा। तो उसे रहने ही दो।
मुझे उसकी बात ठीक लगी।
मैंने प्रिया को देखा, उसकी शर्ट के बटन सारे खुले हुए थे, उसके दोनों बूब्स सही से दिखाई दे रहे थे।
प्रिया के जिस्म पर अभी उसकी शर्ट मौजूद थी और उसका एक पैर दूसरे पैर पर रखा था जिससे उसकी योनि का क्या हाल है यह मुझे नजर नहीं आ रहा था।
प्रिया की गोदी में मेरा फ़ोन रखा हुआ था, मैंने देखा, फ़ोन में उस वक़्त चुदाई का सीन चल रहा था और प्रिया भी अब तक गर्म हो चुकी थी, वो मेरे लण्ड को ऊपर के नीचे अपने हाथ से कर रही थी।
मैंने प्रिया के कंधे पर अपना एक हाथ रखा तो उसका शरीर कांपने लगा।
अब मैं भी ज्यादा देर न करते हुए प्रिया की शर्ट उतारने लगा जिसमें प्रिया ने मेरी मदद की।
जब मैं प्रिया की शर्ट उतार रहा था तो उसने मोबाईल फ़ोन बंद करके एक तरफ रख दिया और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी।
अब प्रिया ऊपर से पूर्ण रूप से नग्न हो चुकी थी, प्रिया के बूब्स मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे।
उसके बूब्स तो पहले से ही सख्त थे पर वो अब और भी सख्त दिखाई दे रहे थे, उसके बूब्स की गुलाबी निप्पल तन चुकी थी।
मैंने अपने दोनों हाथ प्रिया के दोनों बूब्स पर रखते ही प्रिया के मुंह से स्स्स्सीईईईइ की आवाज आई।
उसके बाद मैं उसके बूब्स को सहलाने लगा और उनको हल्का हल्का दबाने भी लगा।
कमरे में प्रिया की आवाज ‘ऊउअन्न्हाह्ह्ह’ और भी ज्यादा होने लगी थी।
प्रिया की चूची पर मेरा हाथ लगते ही मेरा लण्ड भी सलामी देने लगा था और काफी हद तक तन गया था जो प्रिया अभी भी प्रिया के हाथों में था।
कुछ देर ऐसे ही प्रिया के बूब्स दबाता रहा, फिर मैंने प्रिया को उस चादर पर चलने के लिए कहा जो कुछ देर पहले ही प्रिया ने बिछाई थी।
अब प्रिया मेरी हर बात को सहजता से मान रही थी उसने अपनी आँखें खोली और उठ कर उस चादर पर जाकर खड़ी हो गई और मेरी तरफ़ देखने लगी जैसे मुझसे पूछ रही हो की उसको कैसे लेटना है।
मैं प्रिया की मौन भाषा को समझ गया और उसको बोला- रुको, पहले तुम्हारे बचे हुए कपड़े निकाल देता हूँ।
प्रिया मेरी बात सुनकर हल्की सी मुस्कुराई और फिर उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
दोस्तो, मैंने उसकी एक बात नोटिस की वो यह कि अब प्रिया मुझसे बात नहीं कर पा रही थी जैसा वो पहले कर रही थी, बस अपनी आँखों के इशारे से ही मुझे बता देती थी।
मैं भी प्रिया के पास पहुँच गया, उसके चेहरे को देखा तो उसकी आँखें बंद थी।
मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर पर रखे तो उसकी सांसें थोड़ी ओर जोर से चलने लगी।
फिर मैंने प्रिया के स्कर्ट के हुक को खोल दिया और आहिस्ता आहिस्ता उसकी स्कर्ट को नीचे की ओर सरकने लगा।
जैसे जैसे मैं उसकी स्कर्ट को नीचे कर रहा था वैसे वैसे प्रिया की चूत बेपर्दा हो रही थी।
मुझे यह देखकर हैरानी हुई कि अभी कुछ देर पहले तो उसने पेंटी पहनी हुई थी पर अब उसके जिस्म पर पेंटी नहीं थी।
मैंने प्रिया से पूछा- तुमने पेंटी कब उतार दी?
तो प्रिया शर्माते हुए बोली- भाई, जब नीचे मैं मूवी देख रही थी वो मैंने तभी उतार दी थी।
इतना कह कर वो फिर चुप हो गई और मैं उसकी नंगी चूत देख रहा था।
बड़ा ही मस्त नजारा था उस वक़्त, जब उसकी स्कर्ट पूरी नीचे हो गई तो मैंने प्रिया को कहा- अपना पैर उठाओ, स्कर्ट निकालनी है।
जैसे प्रिया ने मेरी आवाज सुनी तो वो जैसे होश में आई हो, उसने मेरी तरफ देखा और फिर अपनी तरफ देखा और जैसे ही उसने अपने आपको देखा तो उसको अहसास हुआ कि वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी है।
तुरन्त ही उसने अपने एक हाथ से अपने वक्ष को ढक लिया और दूसरे हाथ से अपनी योनि को छुपा लिया जबकि एक एक हाथ से बूब्स और योनि को छुपा पाने में असमर्थ हो रही थी।
उसकी आँखें मुझे ही देख रही थी और मैं तो प्रिया के यौवन को निहार रहा था।
मैंने अब बिना कुछ कहे उसके पैर को अपने एक हाथ से पकड़ा और उसको थोड़ा सा ऊपर उठाने लगा।
अब की बार प्रिया ने अपना पैर थोड़ा सा ऊपर किया तो मैंने उसकी स्कर्ट एक पैर से निकाल दी, फिर वैसा ही मैंने उसके दूसरे पैर को ऊपर किया और पूरी स्कर्ट उसके जिस्म से अलग करके एक तरफ रख दी।
अब वो सम्पूर्ण रूप से मेरे सामने नंगी खड़ी थी अपने यौवन के खजाने को छुपाये हुए।
मेरा लण्ड उतेजना के मारे ऊपर नीचे हो रहा था जोकि उसे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था क्योंकि मैं तो पहले से ही नंगा हो चुका था।
जैसे प्रिया ने मेरी आवाज सुनी तो वो जैसे होश में आई हो, उसने मेरी तरफ देखा और फिर अपनी तरफ देखा और जैसे ही उसने अपने आपको देखा तो उसको अहसास हुआ कि वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी है।
तुरन्त ही उसने अपने एक हाथ से अपने वक्ष को ढक लिया और दूसरे हाथ से अपनी योनि को छुपा लिया जबकि एक एक हाथ से बूब्स और योनि को छुपा पाने में असमर्थ हो रही थी।
उसकी आँखें मुझे ही देख रही थी और मैं तो प्रिया के यौवन को निहार रहा था।
मैंने अब बिना कुछ कहे उसके पैर को अपने एक हाथ से पकड़ा और उसको थोड़ा सा ऊपर उठाने लगा।
अब की बार प्रिया ने अपना पैर थोड़ा सा ऊपर किया तो मैंने उसकी स्कर्ट एक पैर से निकाल दी, फिर वैसा ही मैंने उसके दूसरे पैर को ऊपर किया और पूरी स्कर्ट उसके जिस्म से अलग करके एक तरफ रख दी।
अब वो सम्पूर्ण रूप से मेरे सामने नंगी खड़ी थी अपने यौवन के खजाने को छुपाये हुए।
मेरा लण्ड उतेजना के मारे ऊपर नीचे हो रहा था जोकि उसे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था क्योंकि मैं तो पहले से ही नंगा हो चुका था।
मैंने अपना हाथ प्रिया के हाथ पर रख दिया जिस हाथ से उसने अपनी योनि को छुपा रखा था और धीरे धीरे उसके हाथ को सहलाने लगा और फिर मैंने प्रिया का हाथ पकड़ा और उसकी योनि से हटा दिया।
प्रिया ने कोई न नुकुर नहीं की और अपना हाथ अपनी योनि से हटा लिया पर उसने अपनी आँखें जरूर बंद कर ली थी।
अब प्रिया की चूत मेरी आँखों के सामने थी बड़ी ही मस्त लग रही थी योनि के ऊपर हल्के सुनहरी बाल उसकी चूत पर गजब ढा रहे थे।
प्रिया की चूत के दोनों तरफ की पत्ती उभरी हुई थी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसकी चूत से कुछ बूँदें रस की नीचे गिर रही थी और कुछ बूँदें उसकी चूत से निकल कर गिरने वाली थी।
इससे पहले चूत के रस की बूँदें बिस्तर पर गिरती, मैंने अपने मुँह से अपनी जीभ बाहर निकली और प्रिया की चूत पर उस जगह रख दी जहाँ से रस निकल कर बाहर आ रहा था।
मेरी जीभ ने जैसे ही प्रिया की चूत को टच किया ‘स्सस्सस्सीईईईईम्म्माआआआअ’ प्रिया मुंह से सिसकारी निकल गई।
प्रिया की चूत से रस टपकने से पहले ही मैं वो रस चाट गया, बहुत ही अच्छा स्वाद था उसकी चूत के रस का।
फिर मैंने उसकी चूत पर एक लम्बा सा चुम्बन किया।
अब तो प्रिया की हालत ओर भी खराब हो गई थी।
फिर मैं प्रिया की चूत की बीच की लकीर में अपनी जीभ डाल कर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की ओर करने लगा।
प्रिया की टांगों में कम्पन होने लगा था और अब उसकी चूत ओर भी पानी छोड़ने लगी थी जिसे मैं अपनी जुबान से चाट जाता था।
मैंने प्रिया को इशारे से पैरों को और फैलाने के लिए कहा तो उसने तुरन्त ही अपने पैरों को और फैला लिया।
मैं थोड़ा सा नीचे की तरफ हुआ और उसकी चूत में अपनी जीभ डाल कर चूसने लगा।
‘ऊऊऊऊईईईम्म्म्माआआआअ’ प्रिया के मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी और साथ ही उसका एक हाथ मेरे सर पर आ गया और वो मेरे बालों को सहलाने लगी।
इस वक़्त प्रिया बेड पर खड़ी थी और मैं बेड से नीचे जमीन पर खड़ा था।
मैंने भी अपनी पूरी जीभ उसकी चूत में घुसा दी अब तो प्रिया ने मेरे सर के बालों को छोड़ कर अपने दोनों हाथों से अपनी चूची को मसलने लगी।
उस वक़्त प्रिया को बहुत ही आनन्द आ रहा था जिसे वो अपनी सिसकारियों में बयान कर रही थी।
मैं जितना उसकी चूत को छेड़ता, उतना ही वो अपनी चूची को मसलती।
कुछ देर बाद प्रिया झड़ने लगी, उसने मेरा सर अपनी जांघों के बीच दबा लिया, मैं प्रिया की चूत का सारा माल चट कर गया।
जब वो पूरी तरह झड़ गई तो उसने मेरा सर अपनी जांघों से आजाद कर दिया।
अब प्रिया की वो हालत थी की उससे अब खड़ा नहीं हुआ जा रहा था।
फिर मैंने उसको मैंने बेड पर लेटने का इशारा किया और वो मेरा इशारा समझ गई।
वो बेड पर लेट गई।
प्रिया अब मेरे सामने बेड पर पीठ के बल नंगी लेटी हुई थी, उसका सर बेड के किनारे पर था।
प्रिया ने अपनी आँखें बंद की हुई थी और जो मैं अब करने वाला था वो बस अब उसका इंतजार कर रही थी।
मैं प्रिया के सर की तरफ खड़ा था।
फिर मैंने तेल की शीशी उठाई और सबसे पहले मैंने उसकी चूची को पकड़कर उस पर तेल डाला।
दोनों चूचियों पर तेल डालने के बाद मैंने तेल की शीशी एक तरफ़ रख दी और अपने हाथों से उसकी चूची पर तेल मसलने लगा।
जब दोनों चूची पूरी तेल में हो गई तो मैंने अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों के बीच में रखे और अपने दोनों हाथ उसके बदन पर रगड़ते हुए नीचे की ओर लाने लगा फिर उसके मम्मों के नीचे से होता हुआ उसकी बगल तक हाथ ले गया फिर अपने दोनों हाथ फिर से ऊपर लाया।
अब मेरे हाथों ने प्रिया के बूब्स को इस तरह से पकड़कर ऊपर उठाये हुए थे कि उसके दोनों बूब्स आपस में मिल गए और फिर हाथ ऊपर ले जाकर एक एक उसकी चूची के ऊपर से लाता हुआ उनको दबा देता।
उसकी चूचियों की अपने दोनों हाथों से इसी तरह से मालिश करने लगा मैं।
प्रिया के बूब्स को मैं कभी कभी बड़ी ही बेदर्दी से मसल देता जिसके कारण प्रिया की मस्ती से डूबी हुई ऊऊऊउईईईईईई सिसकारियाँ निकल जाती।
पूरे कमरे में प्रिया की सिसकारियाँ गूंज रही थी।
फिर मैं उसकी दोनों चूचियों के निप्पल पकड़ कर उसको मसलने लगा।
अब तो प्रिया की और भी हालत और भी ख़राब हो गई थी इसलिए तो वो ‘स्स्स्सीईईईईइ’ करते हुए अपने ही दांतों से अपने होंठ काटने लगी थी।
प्रिया के होंठ और भी गुलाबी और भी सेक्सी हो गए थे।
मैंने भी अपने होठों पर अपनी जीभ फिराई और उसके बूब्स को पूरी ताकत से मसलते हुए मैं थोड़ा सा नीचे की ओर झुका, अपने होंठ प्रिया के होंठों पर रख कर उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा।
प्रिया भी मेरा पूरा पूरा सहयोग कर रही थी।
कभी मैं उसके होंठों को चूसता तो कभी वो मेरे होंठों को चूसती और साथ-साथ मैं उसकी चूचियों को भी मसल रहा था।
प्रिया को पूर्ण नग्न करके उसके रसीले होंठों को चूसने का मज़ा ही कुछ अलग था।
प्रिया का तो शायद लाइफ इस तरह का पहला चुम्बन था इसलिए मुझसे ज्यादा मज़ा तो उसको आ रहा होगा।
मैं प्रिया को दोहरा मज़ा दे रहा था किस का और बूब्स के मर्दन का भी।
कुछ देर बाद जब मैं प्रिया से अलग हुआ तो प्रिया के होंठ ऐसे हो गए थे जैसे कि अभी उनमें से खून निकल पड़ेगा।
फिर मैंने प्रिया के पेट पर तेल डाला और उसकी मालिश करने लगा, उसका नाजुक पेट और उसकी गहरी नाभि बड़ी ही मनमोहक लग रही थी।
फिर मैंने अपना हाथ पेट से नीचे ले जाकर उसकी चूत की उभरी हुई पत्तियों की मालिश करने लगा।
मालिश करते हुए मैं अपनी उंगली प्रिया की चूत के अन्दर कर दिया करता जिससे वो उछल पड़ती थी।
प्रिया की चूत फिर से गीली हो चुकी थी, उसकी चूत से रह रहकर पानी निकल रहा था।
कुछ देर मैं ऐसा ही करता रहा, और फिर मैंने उसको पलटने के लिए कहा तो वो पलट कर लेट गई।
उसके लेटने के बाद मैंने कुछ तेल उसकी कमर और गांड के उभरे हुए चूतड़ों और उनकी दरार में डाल दिया।
इससे आगे मेरे हाथ नहीं जा सकते थे, यह बात प्रिया भांप गई और वो खुद ही आगे की ओर सरक गई।
अब उसकी गर्दन बेड से बाहर की ओर निकली हुई थी।
उसके बाद मैंने अपने दोनों हाथ उसके नंगे जिस्म पर रखे और तेल को उसके बदन पर फैलाने लगा।
अब मेरे हाथ उसकी गांड पर से होते हुए चूत पर भी पहुँच रहे थे और उसके चूतड़ों की मालिश करता हुआ मैं प्रिया की चूत भी सहला देता था।
प्रिया का मुंह अब मेरे लण्ड के बहुत ही करीब था तो उसने भी अब अपने हाथों को हरकत दी और उसने अपने एक हाथ से मेरी कमर को पकड़ कर, दूसरे हाथ से मेरा लण्ड धीरे धीरे अपने हाथों से सहलाने लगी।
मेरा लण्ड तो पहले से ही खड़ा हुआ मचल रहा था।
मैंने प्रिया को देखा और उसने मुझे देखा और नजरें मिलते ही वो मुस्कुरा दी और फिर थोड़ा सा आगे की ओर आ गई मेरे लण्ड के और करीब।
उसके ऐसा करने से मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था इसलिए मैं भी अपने दोनों हाथों से प्रिया की कमर को कसकर मसलने लगा, फिर कुछ देर बाद ही प्रिया मेरे लण्ड का टोपा खोलकर उसको अपने नाजुक होंठों के बीच रखकर उसको चूसने लगी।
अब तो मेरी भी हालत और भी खराब होने लगी तो मैं भी प्रिया की गांड के ऊपर अपने हाथ फिराता हुआ उसकी चूत को छेड़ने लगा।
अब प्रिया और मैं दोनों ही मदहोशी के आलम में खोते जा रहे थे, मैं खड़ा था और प्रिया उलटी पेट के बल लेट कर मेरा लण्ड चूस रही थी।
प्रिया की चूत तो इतना पानी छोड़ रही थी मानो वो मूत रही हो और मुझे भी अब लगने वाला था कि मैं कहीं इसके मुंह में ही न झड़ जाऊँ।
इसलिए मैंने उसकी मालिश रोक दी।
मेरे रुकते ही प्रिया ने मेरा लण्ड अपने मुंह से निकाला और मुझसे पूछने लगी- क्या हुआ भाई? आप रुक क्यों गए? बहुत मज़ा आ रहा था।
इतनी देर बाद उसके मुख से ये शब्द निकले जो अभी तक चुप थी।
मैंने प्रिया को कहा- अब टाइम बहुत हो गया है, कहीं ऐसा न हो कोई आ जाये और फिर…?
इतना कह कर मैं चुप हो गया प्रिया ने घड़ी की तरफ देखा और कहने लगी- भाई, अभी तो मम्मी और पारुल को आने में टाइम है।
उसकी आवाज में वासना साफ़ साफ़ झलक रही थी।
मैंने कहा- वो तो ठीक है पर मुझे इतनी ही मालिश आती है, और वो मैंने कर दी। पर तुमसे एक बात पूछूँ?
तो वो बोली- आप बाद में पूछना, पहले आप मेरी मालिश पूरी करो।
तो मैं बोला- हो तो गई, अब क्या बचा है?
तो उसने मेरा लण्ड अपने हाथ में जो अभी तक पकड़ा हुआ था, उसको दबाते हुए बोली- अभी इससे तो आपने कुछ किया ही नहीं।
मैं– मैं कुछ समझा नहीं?
जबकि मैं सब समझ चुका था।
प्रिया– भाई, आपने मेरी इसकी (अपनी चूत पर हाथ रखते हुए बोली) तो मालिश की ही नहीं, अपने इससे (मेरे लण्ड को दबा कर) करो न भाई!
मैं– यह तुमको कैसे पता कि चूत की मालिश लण्ड से होती है।
प्रिया शर्माते हुए- भाई इतना सब कुछ होने के बाद और वो वीडियो देखने के बाद मुझे सब पता चल गया है। भाई, क्यों तड़पा रहे हो अपनी इस छोटी बहन को, पहले इसमें अपना लिंग डाल कर मेरी योनि की भी मालिश कर दो।
कंट्रोल तो मुझसे भी नहीं हो रहा था तो अब मैं भी देर न करते हुए बेड के ऊपर आ गया।
तब तक प्रिया भी सीधी लेट चुकी थी, मैंने प्रिया की चूत पर हाथ फेरा तो प्रिया बोली- भाई, अब जल्दी करो न, पता नहीं मेरी इसमें क्या हो रहा है।
मैंने प्रिया को समझाते हुए बोला- तुमको पता है कि इसको योनि के आलावा और क्या कहते हैं?
तो उसने कहा- हाँ भाई।
मैंने कहा- तो बताओ फिर क्या है ये?
मैंने उसकी चूत में एक उंगली डालते हुए कहा तो वो उछल गई ‘आआह्ह्ह्ह्ह भाई… इसको चूत भी आआह्ह्ह और बुर भी कहते हैं और आपके लिंग को ऊऊम्म्म्म्म लण्ड, लौड़ा कहते हैं।’
प्रिया इतनी उत्तेजित हो गई थी कि अब उसको यह लग रहा था कि कहीं इन बातों में समय न बीत जाए और उसकी चुदाई ही न हो पाए।
मैं भी मौके की नजाकत को समझते हुए प्रिया की दोनों टांगों के बीच आ गया और अपना लण्ड उस नाजुक चूत पर रगड़ने लगा और कहने लगा- जब मैं अपना लण्ड तेरी चूत में डालूँगा तो तुझे थोड़ा दर्द होगा और यह दर्द पहली बार सब को होता है।
प्रिया– भाई, आप डालो न… कुछ भी नहीं होगा ! जो होगा वो मैं सहन कर लूँगी, बस आप डाल दो।
प्रिया को मेरा लण्ड अपनी चूत में लेने की इतनी जल्दी थी कि इतना कहने बाद वो खुद ही अपनी गांड उठा कर अपनी चूत मेरे लण्ड पर दबाने लगी।
फिर क्या था ! मैंने भी अपना लण्ड प्रिया की चूत के छेद पर लगाते हुए उसकी कमर को पकड़ कर एक झटका उसकी चूत पर मारा।
‘आआईई म्म्माआआआआअ मरर गैईईईईईईईई…’ उसकी मुंह से चीख निकल गई मेरे लण्ड उसकी चूत को चीरते हुए उसकी चूत में जाने लगा।पर अभी प्रिया की चूत में मेरे लण्ड का टोपा प्रिया ही अन्दर घुसा था।
प्रिया की चीखे सुनने वाला पूरे घर में नहीं था इसलिए मैं निश्चिंत था।
प्रिया– भाई, धीरे से करो आआआऐईईईईईइ… न बहुत दर्द होता है।
मैं– मैंने तो पहले ही कहा था, तू ही कह रही थी डालो डालो, अब डाल दिया तो कह रही हो धीरे डालो।
प्रिया– हाँ भाई, पर धीरे से करो न !
मैं– ठीक है धीरे धीरे ही करूँगा अब।
मैंने धीरे से अपना लण्ड उसकी चूत में हल्का सा सरका दिया तो वो बोली- हाँ भाई, ऐसे ही करो, ऐसा करने से दर्द कुछ कम होता है।
पर मैं सोच रहा था कि अगर मैं ऐसे ही करता रहा तो हमारी चुदाई पूरी भी नहीं हो सकेगी और जिस हिसाब से यह करने के लिए कह रही है उस हिसाब से तो बहुत टाइम लग जाएगा।
इसलिए मैंने कुछ और ही सोच लिया पर इसके बारे में मैंने प्रिया को नहीं बताया और फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूची पकड़ी और बहुत तेज धक्का प्रिया की चूत पर दे मारा।
‘आआआऐईईईईइ म्मम्मा गईईईईईईईस्सस्सस…’ प्रिया की चीखें पूरे घर में गूंजने लगी।
मैंने भी उसकी चीखों को दबाने की कोशिश भी नहीं की क्योंकि मुझे पता था घर में कोई नहीं है, और मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था उसको चीखते चिल्लाते हुए देखकर।
मेरा आधा लण्ड प्रिया की चूत में समां गया था।
प्रिया को बहुत तेज दर्द हो रहा था और वो मुझे अपने दोनों हाथों से पीछे की ओर धकेल रही थी जिससे मेरा लण्ड उसकी चूत से निकल जाए पर मैंने भी उसको कस कर पकड़ा हुआ था नहीं तो मेरा लण्ड उसकी चूत से निकल गया होता।
वो अभी भी सिसक रही थी पर मैंने उसकी भी परवाह न करते हुए उसके कंधों को अपने दोनों हाथो से मजबूती से पकड़ा और फिर एक धक्का और उसकी चूत पर दे मारा।
‘आऐईईईइ आआऐईईईईईइ माआआअ मार्र्रर्र्र गआआआईईईईईईईइ…’
अबकी बार धक्का इतना तेज था कि वो बेड से कुछ ऊपर उछल गई, अगर मैंने उसको मजबूती से न पकड़ा होता तो यक़ीनन वो अब तक भाग गई होती, पर मैंने उसको हिलने तक नहीं दिया।
प्रिया मुझे बार-बार अपने से अलग करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही थी, प्रिया की चूत से खून निकल कर बाहर आ गया था और अबकी बार उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।
प्रिया की सील को मैंने आज तोड़ ही दिया, जिसके कारण मैं तो बहुत खुश था पर इस वक्त प्रिया की हालत बहुत ख़राब हो रही थी।
प्रिया मुझे बहुत कुछ कह रही थी- आप को बोला था, आराम से करो पर तुम तो ऐसा कर रहे हो? आआईईईईईईईईइ जैसे मैं कहीं भागी जा रही थी।
और वो अपनी टांगों से मुझे हटाने की भरपूर कोशिश कर रही थी।
मैं उसके ऊपर लगभग लेट गया और उसके आँसू को अपने हाथ से साफ़ करते हुए बोला- सॉरी यार… पर मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और फिर टाइम भी ज्यादा नहीं था।
मैंने प्रिया से कहा- तुम्हें जो दर्द होना था, वो हो गया, अब तुमको भी कुछ देर बाद मज़ा आएगा।
तो प्रिया तुनक कर बोली- अच्छा ठीक है, पर अभी कुछ देर के लिए अपना लण्ड मेरी योनि से बाहर निकाल लो, बहुत दर्द कर रहा है।
मैंने प्रिया को बातों में लगाये रखा और साथ साथ ही उसकी चूचियों को भी सहलाता रहा पर उसकी चूत से अपना लण्ड बाहर नहीं निकाला।
कुछ देर बाद शायद प्रिया को दर्द में आराम हो गया था इसलिए वो अपनी गांड को बार बार हिला रही थी।
जैसे ही मुझे इस बात का एहसास हुआ तो मैंने भी अपना लण्ड चूत से बस इतना ही बाहर निकाला की चूत के अन्दर बस मेरे लण्ड का ही टोपा ही रहे।
क्योंकि पूरा लण्ड तो अभी तक प्रिया की चूत में गया ही नहीं था, कुछ लण्ड बाहर ही रह गया था इसलिए मैंने सोचा कि लण्ड बाहर निकाल कर फिर पूरा लण्ड डाल दूंगा उसकी चूत में।
बस फिर क्या था, जिस गति मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला था, फिर वापस उसी गति से डाल दिया चूत में !
मैं उसके ऊपर लगभग लेट गया और उसके आँसू को अपने हाथ से साफ़ करते हुए बोला- सॉरी यार… पर मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और फिर टाइम भी ज्यादा नहीं था।
मैंने प्रिया से कहा- तुम्हें जो दर्द होना था, वो हो गया, अब तुमको भी कुछ देर बाद मज़ा आएगा।
तो प्रिया तुनक कर बोली- अच्छा ठीक है, पर अभी कुछ देर के लिए अपना लण्ड मेरी योनि से बाहर निकाल लो, बहुत दर्द कर रहा है।
मैंने प्रिया को बातों में लगाये रखा और साथ साथ ही उसकी चूचियों को भी सहलाता रहा पर उसकी चूत से अपना लण्ड बाहर नहीं निकाला।
कुछ देर बाद शायद प्रिया को दर्द में आराम हो गया था इसलिए वो अपनी गांड को बार बार हिला रही थी।
जैसे ही मुझे इस बात का एहसास हुआ तो मैंने भी अपना लण्ड चूत से बस इतना ही बाहर निकाला की चूत के अन्दर बस मेरे लण्ड का ही टोपा ही रहे।
क्योंकि पूरा लण्ड तो अभी तक प्रिया की चूत में गया ही नहीं था, कुछ लण्ड बाहर ही रह गया था इसलिए मैंने सोचा कि लण्ड बाहर निकाल कर फिर पूरा लण्ड डाल दूंगा उसकी चूत में।
बस फिर क्या था, जिस गति मैंने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाला था, फिर वापस उसी गति से डाल दिया चूत में !
‘ऊऊऊऊईईईम्म्म्माआआअ माआआआअ ग्ग्गाआऐईई…’ वो फिर से चीख पड़ी पर अब उसकी चीखो में दर्द के साथ-साथ आनन्द की भी झलक थी।
मैंने उसके होंठों को चूमते हुए कहा- अब कैसा लग रहा है तुमको?
तो वो बोली- भाई, दर्द तो अभी भी हो रहा है पर अब मज़ा भी आ रहा है, करते जाओ।
फिर वो मस्ती में चूर होकर बड़बड़ाने लगी- और लगाओ जोर से धक्का… आज से मैं आपकी हूँ… आज से तुम मेरे साजन भाई हो और मैं आपकी सजनी बहना।
मैंने भी उसकी चूत से अपना लण्ड खींचते हुए फिर से उसकी चूत में लण्ड पलते हुए कहा– हाँ मेरी सजनी बहना। अब तो मैं जब भी आऊँगा यहाँ पर तो मुझसे चुदाई तो करवओगी न?
तो प्रिया बोली– हाँ मेरे साजन भाई, आपका जब मन हो चोद लेना अपनी सजनी बहना को।
प्रिया की बातें सुनते सुनते मुझे और जोश आ गया और फिर मैं पूरी ताकत से उसकी चुदाई करने लगा।
वो मेरे हर धक्के पर चीख उठती- आआआऐईईईईइह य्यूऊओआआआ’
और वो हर धक्के पर कहती- भाई और जोर से…
तो मैं और जोर लगा कर उसकी चूत पर धक्का मारता।












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Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-3

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प्रिया को देखते ही मुझे रात का वो सीन याद आ गया और मेरे चेहरे पर मुस्कान आई गई।
जब प्रिया नाश्ता बेड पर रख रही थी तो मैंने प्रिया से कहा- ये दोनों भी उठ गए है इनके लिए भी नाश्ता ले आती!
पर मेरी बात का प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया और वो वापस जाने लगी तो मैंने उसको कहा- प्रिया क्या हो गया तुमको? तबियत तो ठीक है न।
मैं उसको यह दर्शाना चाह रहा था कि मुझे रात की घटना के बारे में कुछ नहीं पता।
और मेरी थोड़ी सी कोशिश के बाद उसको विश्वास हो गया कि मुझे रात की बात का कुछ भी नहीं पता, तब जाकर वो नार्मल हुई।
प्रिया- जब मैं साजन भाई के सामने गई तो साजन भाई से नजर नहीं मिलाई जा रही थी। पर भाई की बात से मुझे लगा कि भाई को रात के बारे में कुछ नहीं पता… इसलिए मैं भी अब नार्मल हो गई थी।
फिर मैंने पारुल और मुकेश को भी नाश्ता करवाया, उसके बाद मैंने भाई से पूछा- आपको कहीं जाना तो नहीं है, मम्मी पूछ रही थी तो साजन भाई ने कहा नहीं आज तो मुझे कहीं नहीं जाना।
इतना सुनकर मैं वापस रसोई में मम्मी का हाथ बंटाने आ गई और मम्मी को भी बता दिया कि आज भाई को कही नहीं जाना।
कुछ देर बाद पापा भी अपने ऑफिस निकल गए।
हमें घर का काम खत्म करते करते मुझे 11 बज गए थे और 11:30 पर हमारा घर का सारा काम ख़त्म हो चुका था।
दोपहर में 12 बजे मम्मी ने मुझसे कहा- मैं पड़ोस में जा रही हूँ, 2-3 घंटे में आ जाऊँगी, खाना मैंने बना दिया है, जब भूख लगे खा लेना और अपने भाई को भी खिला देना।
मैंने कहा- ठीक है मम्मी !
और फिर मम्मी तैयार होकर पड़ोस में चली गई।
साजन भाई, पारुल और मुकेश टी वी देख रहे थे।
मुझे रात की बात याद आई और मैं सोचने लगी कि यह अच्छा हुआ, मम्मी पड़ोस में चली गई। आज मैं कोशिश करती हूँ कि किसी तरह से मैं भाई को अपने साथ सेक्स करने के लिए तैयार कर सकूँ। क्योंकि रात को भाई का चूसने के बाद मेरे अन्दर चुदाई का कीड़ा जोर मार रहा था और मैं अभी चाहती थी कि भाई भी मेरी योनि को चूसे, खा जाए और जम कर मेरी चुदाई करे, जब तक भाई यहाँ रहे तब तक हम मौज मस्ती कर सकें।
बस फिर क्या था भाई को रिझाने के लिए मैंने अपने कपड़े चेंज कर लिए।
दिन में इतनी ठंड तो थी नहीं, क्योंकि ठंड अभी रात को ही होती थी, दिन में मौसम नोर्मल ही था अभी, इसलिए मैंने शर्ट और स्कर्ट पहन ली पर शर्ट के नीचे ब्रा नहीं पहनी और स्कर्ट के नीचे गुलाबी रंग की पेंटी जरूर पहन ली थी।
जो स्कर्ट मैंने पहनी थी वो बहुत ही शार्ट थी जिसमें मेरी गोरी टाँगें और आधी से ज्यादा मेरी जांघें दिखाई दे रही थी, और स्कर्ट ने तो बस मेरी पेंटी ही छुपा रखी थी बाकी सब तो ओपन ही था।
ब्रा न पहनने के कारण शर्ट में मेरे बूब्स का आकर सही से नजर आ रहा था।
जब मैं तैयार होकर आईने के सामने आई तो आज मैं खुद को ही बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी।
आईने में देखते हुए मैंने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए, शर्ट के दो बटन खुलते ही मेरे बूब्स दिखाई देने लगे।
अब मैं और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी, अब मुझे पूरा यकींन हो गया था कि साजन भाई मेरी मस्त मस्त, गोल गोल चूचियों को देखकर मुझ पर जरूर फ़िदा हो जायेंगे।
शर्ट के नीचे ब्रा तो थी नहीं और ऊपर के दो बटन भी खुले हुए थे, तो मुझे ऐसा लग रहा था कि हवा भी मेरी चूचियों को छेड़ती हुई महसूस हो रही थी।
मैं अपने कपड़े बदल कर भाई के पास पहुँची, जिस कमरे में साजन भाई और मेरे भाई बहन तीनों टी वी देख रहे थे। मैं भी वहीं साजन भाई के सामने कुर्सी पर बैठ गई।
मुकेश और पारुल टी वी के नजदीक आगे की तरफ बैठे थे, अगर मैं कोई भी हरकत करती तो उन दोनों को पता नहीं चल पाता।
मुकेश और पारुल दोनों ही बड़े ध्यान से टी वी देख रहे थे, पर जैसे ही मैं कुर्सी पर बैठी तो साजन भाई का ध्यान मेरी तरफ गया और वो मुझे एकटक देखने लगे और बस देखते ही जा रहे थे।
मेरे इस बदले हुए रूप को शायद ही उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
कभी वो मेरे चेहरे को देखते तो कभी वो मेरे बूब्स देख रहे थे जो कि दो बटन खुले होने के कारण कुछ ही ज्यादा बाहर को आ गए थे।
भाई का ध्यान अब मेरे बूब्स में ही अटका हुआ था इसलिए मैंने अपनी सोची समझी हुई दूसरी चाल भी चल दी मतलब यह कि मैंने अपने दोनों पैरो इस तरफ से खोले कि उनको यह महसूस ही न हो कि मैं ये सब जान बूझकर कर रही हूँ।
जैसे ही मैंने अपने दोनों पैर खोले तो साजन भाई की नज़र मेरे बूब्स से होते हुए मेरी टांगों के बीच गई। वहाँ पर उनकी नजर गुलाबी पेंटी से ढकी हुई मेरी अनछुई चूत पर गई।
मेरी गुलाबी पेंटी में मेरी चूत का उभरा हुआ भाग साफ़ साफ़ साजन भाई को दिखाई दे रहा था।
एक पल को तो साजन भाई पलके झपकाना ही भूल गए थे।
मैं साजन- पारुल, मुकेश और मैं कमरे में बैठ हुए टी वी पर फ़िल्म देख रहे थे तभी मेरी नज़र कमरे में आती हुई प्रिया पर पड़ी।
तो उससे देखता का देखता ही रह गया… क्या मस्त और सेक्सी लगी रही थी और उसने आज कपड़े भी बहुत सेक्सी ही पहने थे।
उसने शर्ट और मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी।
जब प्रिया कमरे में चलती हुई आई तो उसके बूब्स हवा में उछल रहे थे और प्रिया के शर्ट के दो बटन भी खुले हुए थे जिससे चलते हुए उसके बूब्स बाहर को आ जाते थे।
जो स्कर्ट प्रिया ने पहनी हुई थी वो बस उसके चूतड़ और योनि को ही छुपाये हुई थी।
उसकी चिकनी जाँघ देखकर मेरा लिंग अंगड़ाई लेने लगा था। मुझे उसका यह रूप देखकर अंदाजा हो गया था कि यह क्या चाह रही है।
मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कि रात प्रिया ने मेरा लण्ड चूसा और अब ये सब देखने को मिल रहा है।
आज मुझे लगा कि प्रिया की चूत का मेरे लण्ड से संगम होकर ही रहेगा।
प्रिया कमरे में आकर साइड में रखी हुई कुर्सी पर मेरे सामने बैठ गई, फ़िल्म पारुल और मुकेश की पसंद की आ रही थी कि पारुल और मुकेश ने प्रिया की तरफ ध्यान ही नहीं दिया पर मेरा ध्यान अब टी वी में कहाँ था, अब तो बस मुझे प्रिया ही नजर आ रही थी।
कुर्सी पर बैठ कर वो टी वी देखने लगी और मैं उसके बूब्स को देख रहा था। शर्ट के ऊपर प्रिया के बूब्स की निप्पल मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी, कुछ देर बाद प्रिया ने अपने पैरों को खोल कर चौड़ा कर लिया।
जैसे ही प्रिया ने अपने पैरों को खोला तो उसकी गुलाबी रंग की कच्छी नजर आने लगी और उस कच्छी से झांकती हुई उसकी चूत के भी दर्शन हो रहे थे जिसे देखकर मेरा लण्ड अंगड़ाई लेने लगा।
कुछ देर बाद ही मेरा लण्ड पूरी तरफ तन कर खड़ा हो गया।
मुझे तो लग रहा था कि प्रिया ये सब जान बूझकर कर रही है।
मैं अपना लण्ड अपने एक हाथ से मसल रहा था और उसकी चूत को अपनी आँखों से ही चोदने की भरपूर कोशिश कर रहा था।
प्रिया मुझे चोर निगाहों से देख रही थी, मेरे लण्ड का तो बहुत बुरा हाल हो गया था।
मैं अपना लण्ड मसलते हुए प्रिया को देख रहा था तो वो थोड़ा सा नीचे की तरफ कुछ इस तरफ से झुकी की उसकी पूरी चूची मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे गई और जब वो ऊपर की तरफ उठी तो मेरी और प्रिया की नजरें आपस में मिली।
मुझसे नजरें मिलते ही वो मुस्कुरा दी और बदले में, मैं भी अपना लण्ड मसलते हुए मुस्कुरा दिया।प्रिया- साजन भाई ने नहाने के बाद वही लोअर पहना हुआ था जो उन्होंने रात को सोते समय पहना था और शायद उन्होंने अब भी लोअर के नीचे भी कुछ नहीं पहना था इसलिए तो मुझे उनके लोअर में उनका लण्ड अंगड़ाई लेता हुआ दिखा दे रहा था।
मैं भाई को चोर नजर से देख रही थी भाई बड़ी बेदर्दी से अपना लण्ड मसल रहे थे और मैं ये देखकर मन ही मन खुश होते हुए सोच रही थी कि अब मंजिल दूर नहीं है।
मैं साजन भाई को तड़पाने के लिए कुर्सी पर कुछ इस तरह से झुकी के उनको मेरी चूची पूरी नजर आ जाए साजन भाई को अपनी चूची दिखने के बाद मैंने एक नजर उनकी तरह देखा तो मैं भाई को देखकर मुस्कुरा दी। साजन भाई मेरी चूत और चूची को देखते हुए अपना लण्ड मसल रहे थे।
मैं- लण्ड मसलते हुए जब मुझे काफी देर हो गई और मुझे लगने लगा कि अगर में ऐसे ही मसलता रहूँगा तो मैं झड़ जाऊँगा और मेरा लोअर भी खराब हो जाएगा। मैं किसी से कुछ भी बिना बोले बाहर निकल आया और नीचे जाने लगा, मामा मामी के बाथरूम में मुठ मारने के लिए…
मैं अभी नीचे पहुंचकर मामा मामी के रूम में घुसने ही वाला था।
प्रिया- भाई को पता नहीं अचानक क्या हुआ वो बिना कुछ बोले बाहर निकल गए।
साजन भाई के कमरे से निकलते ही मैं भी उठकर उनके पीछे कमरे से बाहर निकल आई।
मैंने देखा भाई कमरे से निकल कर नीचे जा रहे है, मैं भी उनके पीछे पीछे हो ली।
भाई मेरे आगे आगे चल रहे थे और मैं उनके पीछे पीछे।
साजन भाई मम्मी पापा के रूम के अन्दर जा रहे थे कि तभी मैंने साजन भाई को आवाज लगाई।
तब तक भाई रूम के अन्दर घुस चुके थे, मेरी आवाज सुनकर वो रुक गए और उन्होंने पलट कर मेरी तरफ देखा तो भाई अभी भी अपने हाथ से अपने लण्ड को मसल रहे थे।
मैं भाई के करीब पहुंची तो उन्होंने अपना हाथ लण्ड से हटा लिया पर भाई का लण्ड खड़ा हुआ मुझे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था।
भाई मेरी शर्ट के अन्दर से बाहर की ओर निकलते हुए बूब्स देखने लगे।
भाई की आँखों में मुझे कुछ अजीब सा ही नशा नज़र आ रहा था।
मैं साजन- जब प्रिया ने मुझे पीछे से आवाज दी तो मैं समझ गया कि यह लड़की मुझसे चुदना चाह रही है इसलिए तो ये सब ड्रामा कर रही है।
मैंने भी अब सोच लिया कि इससे साफ़ साफ़ बात कर ही लूँ।
इसलिए जब वो मेरे नजदीक आई तो मैंने उसकी चूची को घूरते हुए पूछा- क्या बात है प्रिया?
प्रिया- भाई आप मुझे मसाज वाली वीडियो दिखने वाले थे वो कब दिखाओगे? और क्या आप मेरी मसाज भी कर दोगे?
मैं साजन- अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था मन तो कर रहा था अभी चोद दूँ, पर ऊपर मुकेश और पारुल थे इसलिए मैंने प्रिया को अभी चोदने का विचार छोड़ दिया पर मेरा लण्ड भी बहुत जोर मार रहा था इसलिए मैं उसकी खुली हुई एक चूची पर अपना हाथ रखते हुए बोला- प्रिया बस मसाज ही करवानी है या कुछ और भी?
इतना कह कर मैं चुप हो गया और हल्के हल्के हाथ से उसकी चूची दबाने लगा।
जैसे ही मैंने प्रिया के बूब्स को छुआ तो मुझे एक अलग ही आनन्द आया उसकी नर्म और मुलायम पर सख्त चूची को दबाने में मुझे मज़ा ही आ गया और मेरा लण्ड लोअर में ठुमके मारने लगा।
प्रिया- भाई का हाथ मेरे बूब्स पर पड़ा तो मैं सिहर गई, मेरा बदन कांपने लगा।
साजन भाई के हाथों में पता नहीं क्या जादू था कि मैं उनके और भी करीब आ गई पर जैसे ही मैं साजन भाई के और करीब गई तो उन्होंने मेरी चूची जोर से दबा दी जिस कारण मेरी हल्की सी चीख निकल गई।
पर वो इतनी भी तेज नहीं थी जोकि पारुल और मुकेश को सुनाई दे।
जोर से चूची दबाने से मेरी चूची में हल्का सा दर्द हुआ तो मुझे होश आया और मैं भाई को बोली- साजन भाई, आप यह क्या कर रहे हो?
मैं- तुझे पता है कि मैं क्या कर रहा हूँ पर तुमने अभी तक नहीं बताया जो मैंने पूछा था।
प्रिया- मुझे क्या पता है साजन भाई? और मैं तो बस आपसे मसाज की ही बात कर रही हूँ।
इतना कह कर मैं नीचे भाई के लण्ड को देखने लगी जो बार बार ऊपर नीचे हो रहा था।
मैंने भाई का हाथ अपनी चूची पर से हाथ नहीं हटाया क्योंकि मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।
मैं- अच्छा बस मसाज की बात कर रही थी। तो ये क्या है?
इतना कहकर मैंने उसके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथ से पकड़ा और उसको दिखने लगा।
प्रिया- भाई वो वो वो मुझे याद नहीं रहा शर्ट के बटन लगाना।
भाई अब मेरे दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथो से दबा रहे थे।
मैं साजन- मुझे पता है कि तुम झूठ बोल रही हो।
मैंने भी बात को ज्यादा न बढ़ाते हुए उसको साफ़ साफ़ कह दिया क्योंकि अब मेरे लण्ड में उतेजना के कारण बहुत दर्द हो रहा था।
‘प्रिया, मुझे पता है तुमने रात को मेरे साथ क्या क्या किया था तो फिर अब ये सब ड्रामा किस लिए?’
इतना कह कर मैंने उसके दोनों बूब्स को छोड़ कर उसकी पतली कमर पकड़ ली और उसको अपने बदन से चिपका लिया।
प्रिया- जैसे ही भाई ने कहा कि मुझे सब पता है तो मुझे बहुत शरम आई और मैंने अपनी नजरें झुका ली।
फिर भाई ने मुझे अपने बदन से चिपका लिया तो भाई का लण्ड ठीक मेरी चूत सामने आ गया भाई का लण्ड मेरी चूत पर रगड़ता हुआ ऊपर नीचे हो रहा था।
जिस कारण मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी मेरी साँसें तेज होने की वजह से मेरे बूब्स साजन भाई के सीने को रगड़ रहे थे।
मैंने अपनी नजरों को नीचे किये हुए ही धीरे से बोला– भाई जब आपको रात को ही पता चल गया था और आप जाग गए थे तो आपने मुझे क्यों नहीं बताया?
मैं साजन-
प्रिया का चेहरा अपने के हाथ से ऊपर उठाते हुए बोला– प्रिया, मेरी जान !
इतना कह कर मैं उसके होंठ चूमने लगा और प्रिया के नीचे वाले होंठों का रस पीने लगा, तो प्रिया भी मेरा साथ देने लगी और वो भी मेरा ऊपर का होंठ चूसने लगी।
कुछ देर उसके गुलाबी होंठों का रस पीने के बाद मैं प्रिया से बोला– पहले इसका कुछ इलाज कर!
यह कहते हुए उसका एक हाथ पकड़ा और अपने लण्ड पर रख दिया।
और फिर कहा- बहुत देर से मेरा लण्ड खड़ा हुआ है इसलिए इसमें दर्द भी बहुत हो रहा है।
प्रिया- भाई ने अपना लण्ड मेरे हाथ में पकड़ा दिया तो अब कुछ कहने को बचा ही नहीं था।
साजन भाई का लण्ड मेरे हाथ में आते ही भाई का लण्ड और भी सख्त हो गया था।
अब मुझे पता था कि आगे क्या करना है मैंने भाई को मम्मी पापा के बेड पर बैठने का इशारा किया तो भाई मेरा इशारा समझ गए और बेड पर पैर लटका कर बैठ गए।
मैंने साजन भाई के लोअर को अपने हाथो से खोलकर नीचे कर दिया।
अब उनका लण्ड लोअर से बाहर आ गया क्योंकि उन्होंने नीचे तो कुछ पहना ही नहीं था।
मैंने साजन भाई को एक नजर देखा और फिर मैं उनकी टांगों के बीच नीचे घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई।
मैं साजन- प्रिया ने मेरे लण्ड को अपने कोमल हाथ में लिया और मेरे लण्ड हिलाने लगी, मुझे उस वक़्त बहुत मज़ा आ रहा था।
फिर प्रिया ने मेरे लण्ड के ऊपर की खाल नीचे कर के मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और फिर उसको चूसने लगी। उस वक़्त मुझे नशा सा होने लगा था।
मुझे लगा कि मैं आकाश में सैर कर रहा था मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं ब्यान नहीं कर सकता था।
प्रिया ने अपने एक हाथ से मेरे लण्ड को पकड रखा था और दूसरा हाथ मेरी जाँघ पर रखा हुआ था।
प्रिया- मैं अपनी आँखें बंद किये हुए भाई का लण्ड चूस रही थी तो भाई का हाथ मेरे सर पर आया और मेरे सर के बाल को सहलाने लगे, भाई का हाथ मेरे सर पर आया तो मैंने अपनी आँखे खोली और उनका लण्ड चूसते हुए ही भाई को देखा तो उन्होंने अपनी आँखें बंद की हुई थी।
मैंने भाई का लण्ड एक ही बार चूसा था रात में, ओर अब यह दूसरी बार चूस रही थी पर एक बार के चूसने से ही मुझे भाई के लण्ड का स्वाद मुझे इतना भाया कि मन करता है कि बस चूसती ही रहूँ।
मैं भाई के लण्ड का सुपारा बहुत जोर से चूस रही थी और अपने एक हाथ से भाई का लण्ड सहला भी रही थी।
मैंने देखा भाई का लण्ड चूसने से वो मेरे थूक से पूरा गीला हो चुका था, तभी मुझे कुछ याद आया तो भाई का लण्ड मैंने अपने मुंह से निकाला तो भाई ने आँखें खोल कर मुझे देखा।
मैं साजन- क्या हुआ प्रिया? मेरा होने वाला था और जल्दी से चूसो कही कोई आ न जाए।
प्रिया- कोई नहीं आएगा भाई ! पारुल और मुकेश तो टी वी देख रहे हैं… पहले मुझे बताओ तो कि जब आपको रात को ही पता चल गया था और आप जाग गए थे तो आपने मुझे क्यों नहीं बताया, क्यों मुझे तड़पाते रहे अब तक?
मैं- ठीक है बाबा, बताता हूँ, तुम लण्ड चूसती रहो ! मेरा होने वाला है ! पर एक बात का ध्यान रखना तुम अपने होंठो से ही मेरे लण्ड को चूसो क्योंकि तुम्हारे दांत मेरे लण्ड को लगते हैं तो मुझे दर्द होता है।
प्रिया मुस्कुराती हुई- ठीक है भाई !
और फिर भाई के लण्ड को मुठ मारते हुए अपने गुलाबी होंठ भाई के लण्ड पर रखकर उसका टोपा चूसने लगी।
मैं साजन- जब रात को तुमने मेरे लण्ड को छुआ और उसको चूसा तो मैं तभी जाग गया था। अगर उस वक़्त तुमको पता चल जाता कि मैं जाग रहा हूँ तो तुम वो सब नहीं करती जो तुमने रात को किया और जो अब तुम कर रही हो। और फिर जो मज़ा तुमको रात आया वो तुमको कभी नहीं आता !
और एक बात और है, अगर उस वक़्त मैं बता देता कि मैं जाग रहा हूँ तो शायद ही हम एक दूसरे के साथ खुल पाते… आआअह्ह्ह… बस ऐसे ही चूसती रहो।
वैसे रात तुमको मज़ा तो बहुत आया होगा।
प्रिया ने भाई का लण्ड अपने मुंह से निकलते हुए कहा- हाँ भाई, आप सच कह रहे हो, शायद ही हम इतनी जल्दी आपस में खुल पाते।
मैं साजन- अरे अरे… बाहर क्यों निकाल दिया… मेरा होने ही वाला था… चूसो मेरी बहना जल्दी से…
इतना सुनकर प्रिया फिर से मेरा लण्ड चूसने लगी और अपने हाथ से मेरा लण्ड भी हिलती जा रही थी।
कुछ ही देर बाद मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने प्रिया से पूछा- मेरा निकलने वाला है।
तो उसने इशारे से कहा- निकाल दो मेरे मुंह में ही !
और फिर ‘आआअह्ह्हा आआआआअ’ मेरे लण्ड से पानी निकलने लगा।
तभी मैंने प्रिया का सर अपने लण्ड पर दबा दिया जिस की वजह से मेरा आधे से ज्यादा लण्ड प्रिया के गले में उतर गया और तब तक दबाये रखा जब तक कि पूरा लण्ड खाली न हो गया।
प्रिया- जब भाई ने मेरा सर अपने लण्ड पर दबाया तो वो मेरे हलक में आ गया और तभी भाई के लण्ड से पानी निकल कर मेरे गले के अन्दर आने लगा जब भाई का लण्ड खाली हो गया तो भाई के हाथ का दबाव मेरे सर पर कम हुआ तो मैंने भाई का लण्ड अपने मुंह से निकाला और अपनी साँसों को नियंत्रण करती हुई बोली– भाई मारने का इरादा है क्या आज तुम्हारा?
मेरी बात सुनकर बस भाई मुस्कुरा दिए और बोले कुछ नहीं।
फिर मैंने देखा भाई के लण्ड पर अभी भी कुछ बूंदें माल की उनके लण्ड पर रह गई थी। इसलिए मैंने अपनी जीभ निकली और भाई का लण्ड चाट चाट कर साफ़ कर दिया क्योंकि मैं अपने भाई का माल बर्बाद नहीं होने दे सकती थी।
मैं साजन- उसके बाद मैंने अपना लोअर ठीक किया और प्रिया से बोला– अब ऊपर चलते है क्योंकि हमें बहुत देर हो गई है।
प्रिया- हाँ भाई, ऊपर चलते हैं बहुत देर हो गई हैं। पर एक बात तो बताओ आप मेरी मसाज कब करोगे?
और मैं हँसते हुए- प्रिया, पहली बात तो यह है कि मुझे मसाज करनी नहीं आती, वो मैंने तुमसे झूठ बोला था।
प्रिया- कोई बात नहीं भाई, आप कोशिश करके देखना, मैं आपसे मसाज करवाना चाहती हूँ… चाहे आपको आती हो या न आती हो और मुझे वो मसाज वाली मूवी भी देखनी है, वो कब दिखाओगे आप?
मैं- ठीक है जब घर में कोई नहीं होगा तब मैं मूवी भी दिखा दूँगा और मसाज भी कर दूँगा क्योंकि तुमको पता है इन सब में टाइम ज्यादा ही लगता है।
प्रिया- भाई आप मुझे वो वीडियो दिखा दो ! मैं यही इसी कमरे में देख लेती हूँ। बाकी का काम जब कर देना जब घर पर कोई न हो और आप पारुल और मुकेश के साथ ऊपर ही बैठ जाओ तो उन दोनों को लगेगा मैं नीचे कुछ काम कर रही हूँ।
मेरी बात सुनकर भाई ने अपना मोबाईल फ़ोन निकला और मुझे वही फ़ोल्डर खोल कर मेरे हाथ में मोबाईल पकड़ते हुए कहा कि इसमें बहुत सारी वीडियो हैं, जो तुमको अच्छी लगेगी।
मैंने फ़ोन हाथ में पकड़ा और उसमें मसाज वाली मूवी खोजने लगी।
तब तक भाई ऊपर पारुल और मुकेश के पास जा चुके थे।
मैं बहुत खुश थी जो मैंने सोचा था बिलकुल वैसे ही हो रहा था।
मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था भाई इतनी जल्दी मान जायेंगे और जो अभी हमने किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा।
सच में भाई का लण्ड बहुत ही दमदार है।
फिर मैं मसाज वाली मूवी देखने लगी।
अब आगे की स्टोरी जो कुछ भी हमारे बीच हुआ वो साजन भाई आपको बतायेंगे।
मैं- प्रिया को नीचे छोड़ने के बाद मैं ऊपर उस रूम में गया जहाँ पारूल और मुकेश टी वी देख रहे थे, जैसे ही में रूम के पास पहुँचा तो मुझे पारुल की आवाज सुनाई दी।
वो कह रही थी कि मैं अभी कुछ देर में आ रही हूँ जब तक मैं रूम के अन्दर पहुँच गया था वो किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी।
मैंने पारुल से पूछा तो उसने बताया कि उसकी सहली का फ़ोन है और उसको मुझसे कुछ हेल्प चाहिए, इसलिए वो मुझे बुला रही है और इतना कह कर वो तैयार होने लगी।
जब वो तैयार हो गई तो पारुल ने मुझसे पूछा- भाई प्रिया दीदी कहाँ है?
तो मैंने उसको बता दिया कि वो नीचे कमरे में है, शायद कोई काम कर रही है।
मेरी बात सुनकर पारुल ने उसी कमरे से आवाज लगाई- दीदी… प्रिया दीदी !
कई बार पुकारने पर प्रिया ने नीचे से आवाज दी- एक मिनट… अभी आ रही हूँ।
और कुछ देर बाद ही प्रिया ऊपर रूम में आ गई।
प्रिया के आते ही पारुल ने प्रिया को बताया की उसकी सहेली ने उसको बुलाया है तो वो वहाँ पर जा रही है और मम्मी के आने से पहले वापस आ जाएगी।
प्रिया ने कहा- ठीक है, अभी 12:40 हुए हैं, मम्मी दोपहर 3 बजे तक आ जाएगी तो तुम 2:30 बजे तक वापस आ जाना, और हाँ एक काम ओर करना ! मुकेश को भी अपने साथ ले जाना। अगर यह यहाँ रहा तो भाई को परेशान करेगा और मुझे अभी बहुत सारा घर का काम करना है।
पारुल ने कहा- ठीक है दीदी, मैं मुकेश को साथ ले जाती हूँ !
और फिर पारुल ने मुकेश को अपने साथ चलने के लिए कहा तो वो भी तैयार होने लगा।
प्रिया ने मेरे करीब आकर मेरी आँखों में झांकते हुए कहा- मैंने ठीक किया न भाई !
इतना कह कर वो मुस्कुरा दी और मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।
प्रिया की आँखों में एक अजीब सी चमक दिखाई दे रही थी। उसकी आँखें वासना के कारण और भी नशीली हो गई थी।
यह सब उन मूवी का कमाल था जो अभी वो देखकर आई थी।
कुछ देर के बाद ही पारुल और मुकेश चले गए अब हम दोनों को छोड़कर यहाँ और कोई भी नहीं था।
मैं बेड पर बैठा टी वी देख रहा था।
पारुल और मुकेश के जाने के बाद प्रिया घर का मुख्य दरवाजा बंद करके मेरे पास बेड पर मेरे बहुत करीब ही बैठ गई।
वो लगातार मुझे ही देखे जा रही थी।
जब मुझे उसका आभास हुआ तो मैंने उसकी तरफ देखा।
वो मुझे देख कर मुस्कुरा दी, बदले में मैं भी उसको देखकर मुस्कुरा दिया।
फिर मैंने प्रिया से कहा- तुमने वो वीडियो देख लिए जो तुम देखने के लिए कह रही थी?
प्रिया ने कहा- हाँ भाई, वो मैंने देख ली पर वो खाली मसाज की वीडियो नहीं थी उसमें तो वो और भी कुछ कर रहे थे।
मैंने उससे कहा- तुमको कैसी लगी?
तो उसने कहा- बहुत अच्छी लगी पर उसको देखकर मुझे भी कुछ अजीब-अजीब सा हो रहा था। आपके मोबाईल में और भी वीडियो हैं पर पारुल ने बुला लिया नहीं तो वो सभी वीडियो में देख लेती।
मैंने प्रिया से कहा- अब देख लो… अब तो यहाँ कोई नहीं है तेरे और मेरे सिवा।
उसी वक़्त जैसे प्रिया को कुछ याद आया और वो बोली- भाई, अब तो घर में कोई नहीं है, आप मेरी मसाज कर दो न जैसे उस वीडियो में वो लड़का कर रहा था !
मैं प्रिया से बोला- प्रिया बस मसाज ही करनी है न या वो सब भी करवाओगी जो वो लड़का उस लड़की के साथ कर रहा था?
तो वो बोली- हाँ भाई, पूरी मसाज करनी है !
और वो कुछ शरमा कर बोली- जो वो सब कर रहा था, वो भी।











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मैंने फिर से भाई के तरफ देखा और मुस्कुराते हुए इयरफोन को फ़ोन में लगा कर उनमें से एक वीडियो चला दी।
वो फ़िल्म एक परिवार की थी, उसमें नीचे फर्श पर बिस्तर लगा हुआ था।
एक लड़की भागती हुई आई और बिस्तर पर उलटी होकर लेट गई।
वो लड़की बहुत खूबसूरत थी, उसकी उम्र कोई ज्यादा नहीं होगी।
उस लड़की के लेटते ही एक लड़की और आई और वो भी उसके बगल में लेट गई।
दूसरी लड़की उस लड़की से बड़ी थी, उसकी उम्र 19-20 साल की थी, यानि की मेरी ही उम्र की थी वो लड़की।
वो दोनों बहने थी और वो बिस्तर पर मस्ती करने लगी।
तभी उनकी मम्मी आ गई और वो शांत हो कर लेट गई।
फिर उन तीनों ने अपनी अपनी चादर ओढ़ ली।
उनके चादर ओढ़ते ही एक लड़का और आया और वो कहने लगा- मोम, मैं कहाँ पर सोऊँ?
वैसे वो सब अंग्रेजी बोल रहे थे पर मैं आप को हिंदी में बता रही हूँ।
तो छोटी वाली लड़की बोली- भाई, आप मेरे पास यहाँ लेट जाओ।
और वो अपने भाई के लिए जगह बनाते हुए सरक गई।
फिर उसके बाद उसके भाई ने कमरे की लाईट बंद कर दी, अपनी छोटी बहन के साथ उसकी चादर ओढ़ कर लेट गया।
वो लड़की अपने भाई के साथ लेट कर बहुत खुश थी।
कुछ देर बाद वो सब सो गये।
उसकी बड़ी बहन ने अपनी मम्मी की तरफ करवट ले ली।
बड़ी बहन के करवट लेते ही छोटी वाली ने अपनी आँखें खोली और एक नजर अपनी मोम और बहन की तरफ़ देखा और अपने भाई के कान में कुछ धीरे से कहा।
उसकी बात सुनकर उसने भी आँख खोल ली, उसके आँख खोलते ही वो लड़की करवट ले कर लेट गई अब उसके चूतड़ उसके भाई के सामने थे।
उस लड़की का भाई उठा और चादर नीचे कर दी, फिर उसका भाई थोड़ा सा उठा और उसका पजामा अपने हाथ से नीचे कर दिया।
और वो लड़की भी अपना पजामा नीचे करवाने में अपने भाई की मदद करने लगी।
अब उस लड़की के गोरे गोरे चूतड़ नग्न हो चुके थे।
उस लड़की ने सफ़ेद रंग की पेंटी पहन रखी थी फिर उसके भाई ने अपना एक हाथ अपनी बहन के बूब्स पर रख दिया और अपनी बहन से चिपक गया और अपना लंड अपनी छोटी बहन की टांगों के बीच फंसाकर आगे पीछे होने लगा।
कुछ देर ऐसे ही आगे पीछे होता रहा, फिर वो अपनी बहन की कमीज को खोलने लगा।
कमीज को खोलने के बाद उसके भाई ने उसके बूब्स पर अपना हाथ रख दिया।
उस लड़की ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी।
उस लड़की के बूब्स ज्यादा बड़े नहीं थे पर इतने छोटे भी नहीं थे कि उनको दबाया न जा सके।
फिर उसका भाई अपनी बहन के बूब्स को सहलाने और दबाने लगा, फिर उसके भाई ने अपनी बहन के बूब्स की निप्पल को अपने हाथ से सहलाने लगा।
मैं वो वीडियो देखते हुए मन ही मन सोचने लगी कि यह वीडियो तो सगे भाई बहन की है, मैंने सोचा कि क्या भाई बहन भी सेक्स कर सकते हैं।
फिर मेरे मन में ख्याल आया कि जब इस वीडियो में भाई बहन को सेक्स करते हुए दिखाया है तो यह सच ही होगा कि भाई बहन भी सेक्स कर सकते हैं।
मैं वो फ़िल्म देखते हुए बहुत अधिक उतेजित हो चुकी थी, मेरी चूत से हल्का हल्का पानी निकल रहा था।
यह फ़िल्म देखकर मेरी चूत बहने लगी थी।
अब मेरा मन भी साजन भाई के साथ सेक्स करने का होने लगा और बस यही सोच कर मैं भाई के और नजदीक आ गई।
अब भाई को देखने का मेरा नजरिया ही बदल चुका था।
साजन भाई मेरे शरीर की गर्मी पाकर मुझसे और चिपक गए थे और अब उनका एक हाथ मेरे पेट पर था।
मेरी साँसें कुछ तेज हो गई थी मैं फिर से वो फ़िल्म देखने लगी।
वो लड़का अपनी बहन की चूची की निप्पल सहला रहा था और वो लड़की अपनी आँखे बंद किये हुए अपनी चूची मसलवाने का मज़ा ले रही थी।
फिर कुछ देर बाद उसके भाई ने जैसे ही उसकी दूसरी चूची को पकड़ना चाहा कि तभी उसकी बड़ी बहन हिलने लगी तो उसके भाई ने अपनी बहन के ऊपर से अपना हाथ हटा लिया और आँखे बंद करके चुपचाप लेट गया।
फिर कुछ देर बाद फिर से अपनी बहन की चूची से खेलने लगा फिर उसने अपना पजामा घुटनों से नीचे कर दिया अब लड़का नीचे से पूरा नंगा था।
उस लड़की ने अपने चूतड़ अपने भाई की तरफ और भी ज्यादा कर दिए और उसका भाई उसके दोनों टांगों के बीच में अपनी बहन की चूत पर पेंटी के ऊपर अपना लंड रगड़ने लगा।
उसकी बहन ने अभी भी पेंटी पहनी हुई थी और उसका भाई उसकी पेंटी के ऊपर से अपना लंड रगड़ते हुए अपनी बहन के मम्मों से खेल रहा था।
फिर उसने अपनी बहन को उल्टा लेटने का इशारा की तो वो थोड़ा सा उल्टा होकर लेट गई अब उस लड़की के चूतड़ ऊपर की तरफ थे।
इधर मेरा भी बहुत बुरा हाल हो चुका था, मैं बहुत अधिक उतेजित हो चुकी थी।
मैं साजन भाई से और भी ज्यादा चिपक गई और फिर मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोला और अपनी चड्डी को नीचे करके अपनी चूत को सहलाते हुए फ़िल्म देखने लगी।
फिर उस लड़के ने अपना लंड अपने हाथ में लिया और उसको हिलाने लगा, अपना लंड हिलाते हिलाते अपनी बहन की गांड पर मारने लगा।
फिर कुछ देर बाद उसने अपनी बहन की चड्डी को अपने हाथ से पकड़ा और थोड़ा ऊपर किया और उसमें अपना लंड डाल दिया।
अब उस लड़के का लंड उसकी बहन के ऊपर इस तरह था कि चड्डी और लंड से प्लस का निशान बन रहा था।
फिर वो अपना लंड अपनी बहन की गोरी गोरी गांड पर आगे पीछे करने लगा।
कुछ देर बाद उसने अपना लंड अपनी बहन की चड्डी से निकला और उसकी गांड पर अपना लंड रख कर अपने हाथों से हिलाने लगा कि तभी उसकी मॉम हिली तो उनको लगा कि शायद करवट बदल कर सो जाएगी पर उनका ऐसा सोचना गलत था।
उसकी मॉम जाग गई थी पर उसकी मॉम का मुंह दूसरी तरफ था तो वो उनको नहीं देख पाई।
उसकी मॉम उठी तो उस लड़के ने जल्दी से अपने और अपनी बहन के नंगे जिस्म के ऊपर चादर डाल ली।
उनकी मॉम उठकर दूसरे कमरे में चली गई।
कुछ देर तक वो ऐसे ही लेटे रहे, जब उनको पूरा विश्वास हो गया कि मॉम अब नहीं आएगी, शायद वो उनके पापा के पास सोने चली गई थी।
उस लड़के ने अपनी बहन का पजामा और उसकी चड्डी निकल दी।
फिर उसने अपना भी पजामा भी पूरी तरफ से निकल दिया।
अब वो भाई बहन नीचे से पूरे नंगे थे।
फिर वो लड़का अपनी बहन के पैरों की तरफ अपना सर कर के लेट गया। अब उस लड़के का सर उसकी बहन की चूत के पास था और उसकी बहन के होंठो के सामने उसके भाई का लंड।
उस लड़के ने अपनी बहन के एक पैर को थोड़ा ऊपर उठाया और अपनी बहन की चूत से मुंह लगा दिया, चूत को चाटने लगा।
दूसरी तरफ उसकी बहन ने अपने भाई का लंड अपने हाथ में पकड़ा और अपने मुंह में घुसा कर चूसने लगी।
हाय… ये क्या कर रहे हैं…
मैं अपने मन ही मन में बोली क्योंकि ये सब मेरे लिए बिलकुल नया था जो मैं देख रही थी।
मुझे नहीं पता था कि लंड और चूत को चूसा भी जाता है।
मेरी चूत में खुजली सी होने लगी।
मैंने अपने साजन भाई को देखा तो वो सो रहे थे।
मुझसे अब बैठा नहीं जा रहा था, इसलिए मैं भी भाई के साथ लेट गई।
फिर मैंने अपना एक पैर मोड़ा जो की भाई के साथ लगा हुआ था और अपना घुटना भाई के लंड पर बहुत ही धीरे से रख दिया।
हाय रे… मुझे कितना मज़ा आया जब मेरा घुटना भाई के लंड से टच हुआ तो… ऐसा एहसास मुझे आज तक नहीं हुआ था।
मुझे ये सब करते हुए मज़ा भी बहुत आ रहा था, डर भी लग रहा था कि कहीं साजन भाई जाग न जाये।
इधर उस वीडियो में वो दोनों एक दूसरे के लंड और चूत चूसे जा रहे थे कि तभी उनकी बड़ी बहन जाग गई और जैसे ही उसने आँख खोली तो देखा उसके भाई बहन एक दूसरे का लंड और चूत चूस रहे हैं।
उनकी बड़ी बहन उन दोनों को बहुत ध्यान से देख रही थी कि कैसे उसकी छोटी बहन अपने भाई का पूरा लंड अपने मुंह के अन्दर लेकर चूस रही थी।
उन दोनों को इस तरह देखकर वो भी गर्म हो गई और अपने पजामे के ऊपर से अपनी चूत को मसलने लगी और उनको देखती रही। फिर वो अपने पजामे के अन्दर हाथ डाल कर अपनी चूत को सहलाने लगी और अपने एक हाथ से अपनी टी–शर्ट ऊपर कर के अपने बूब्स को मसलने लगी।
उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी।
दूसरी तरफ उसकी छोटी बहन भाई का लंड पकड़ कर जोर से हिलाते हुए लंड चूस रही थी और उसका भाई छोटी बहन की चूत में अपनी जीभ डाल डालकर कस कर चूस रहा था।
उसकी गांड की थिरकन से पता चलता था कि उसको बहुत मज़ा आ रहा है।
कुछ ही देर बाद बड़ी बहन को लगा जैसे उसके बहन और भाई दोनों ही झड़ने वाले हैं तो उसने अपने कपड़े सही किये और मुंह घुमा कर लेट गई।
वो दोनों भाई बहन एक दूसरे के लंड और चूत को बहुत तेजी से चूस हुए दोनों ही एक दूसरे के मुंह में अपना अपना पानी छोड़ दिया। फिर लड़की ने अपने भाई का लंड अपने मुंह से निकला और अपने हाथ की हथेली को अपने मुंह के पास लाकर अपने मुंह से अपने भाई का वीर्य निकालने लगी।
जब उसकी हथेली पर उसके भाई का वीर्य पूरा निकल गया तो फिर उसे अपनी जीभ से चाट चाट कर उसको खाने लगी और कुछ ही देर में उससे अपने भाई का पूरा वीर्य अपनी हथेली से साफ़ कर दिया।
इसके बाद मुझसे और आगे नहीं देखा गया मेरा मन बुरी तरह विचलित हो रहा था।
मैंने अपने भाई का फ़ोन बंद किया और लेट कर सोचने लगी कि क्या वास्तव में लंड चूसने में और चूत में डलवाने में इतना मज़ा आता है?
क्योंकि मैंने अब तक किसी के साथ ये सब नहीं किया था और न ही किसी नौजवान का लंड देखा था।
अब मेरा मन भी लंड को देखने और उसको छूने का और उसको अपने मुंह में लेकर चूसने का बहुत मन कर रहा था।
अभी मैं यह सब सोच ही रही थी कि अचानक साजन भाई ने मेरी तरफ़ करवट ली और उनका एक हाथ मेरे वक्ष के ऊपर आ गया।
भाई का लंड भी मेरे पैर की गर्मी से तन कर खड़ा हो गया था।
तभी मुझे भाई का ख्याल आया कि क्यों न साजन भाई का ही लंड छू कर और चूसकर देखा जाए।
भाई का लंड भी तो ऐसा ही होगा जैसा कि इस वीडियो में था।
जब इस फ़िल्म में भाई बहन सेक्स कर सकते हैं तो रियल लाइफ में भी तो होता ही होगा क्योंकि फ़िल्म में भी तो वही दिखाते हैं जो रियल लाइफ में हो रहा होता है !
क्यों न भाई को ही राजी कर लूँ !
अगर भाई राजी हो गए तो किसी को पता भी नहीं चलेगा और मेरे मन की इच्छा भी पूरी हो जायेगी।
मेरे मन में ये बातें आते ही मन ख़ुशी से झूम उठा।
फिर क्या था, भाई का हाथ अपनी चूची से आराम से हटाया इतनी आराम से कि वो जागे नहीं।
फिर मैंने भाई का कम्बल उनके लंड के ऊपर से उठाया तो उनका खड़ा लंड उनके लोअर में दिख रहा था।
वो तो लोअर के ऊपर से ही बहुत बड़ा लग रहा था।
मैंने अपने हाथ भाई के लोअर की तरफ बढ़ाये तो मुझे घबराहट होने लगी, मेरे हाथ कांपने लगे, पर लंड को देखने की इच्छा को मैं दबा नहीं पाई और मैंने धीरे से लोअर खोल दिया।
लोअर खुलते ही मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने कोई किला फ़तह कर लिया हो।
मैं कुछ देर रुक गई मेरी दिल की धड़कन मुझे साफ़ सुनाई दे रही थी।
कुछ देर रुकने के बाद मैंने भाई का लोअर को ढीला किया और नीचे की तरफ सरका दिया पर लोअर तो लंड में अटक गया।
मैंने उसको सही से पकड़ा और फिर लोअर को नीचे कर दिया, अब भाई का लंड मेरी आँखों के सामने था।
परन्तु लोअर अभी ऊपर से ही हटा था नीचे से अभी भी दबा हुआ था मैंने भी उसको निकलने की कोशिश नहीं की।
भाई ने लोअर के नीचे कुछ नहीं पहना था।
फिर मैंने भाई का फ़ोन उठाया और उसकी टार्च ऑन कर दी।
अब मैं भाई का लंड आराम से सही से देख रही थी।
जैसे ही मैंने टार्च भाई के लंड के ऊपर की, हाय राम ! भाई का लंड तो तना हुआ उनके पेट से लगा हुआ था।
भाई का खड़ा हुआ लंड मुझे बहुत प्यारा और सुन्दर लग रहा था।
भाई का लंड जितना मैंने सोचा था वो तो उससे भी बड़ा और मोटा था भाई का लंड 6.5 इंच का था।
मैं काफी देर तक अपने भाई का लंड देखती रही, फिर मैंने भाई के लंड को छूने के लिए हाथ बढ़ाया पर मेरा ध्यान भाई के चेहरे पर था, कहीं वो जाग न जाए।
और फिर मैंने अपने कांपते हाथ से भाई का लंड धीरे से पकड़ लिया।
भाई का लंड बहुत ही गर्म था।
मेरी सांसें तेजी से चलने लगी, मेरे बूब्स तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे।
भाई का लंड हाथ में आते ही मुझे लगा जैसे मुझे कोई खजाना मिल गया हो।
कुछ देर मैंने भाई का लंड ऐसे ही पकड़े रखा, मेरे हाथ की गर्मी से भाई का लंड और भी कठोर हो गया था, वो इतना सख्त हो गया कि भाई के लंड के टोपे की खाल खुलकर नीचे की ओर हो गई थी।
अब लंड का ऊपरी भाग गुलाबी दिखाई दे रहा था जो मुझे लाल लाल सेब की याद दिला रहा था।
लंड का गुलाबी भाग देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया, मन तो कर रहा था कि जल्दी से भाई का लंड मुंह में लेकर चूस लूँ पर मैं कोई जल्द बाजी नहीं करना चाहती थी।
अगर मैं ऐसा करती तो भाई के उठने का डर था।
फिर मैं भाई के लंड को ऊपर नीचे करने लगी बहुत प्यार से!
मुझ ये सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी चूत से पानी झरने की तरह चू रहा था।
मेरे होंठ सूखने लगे थे।
अब मुझसे ओर सब्र नहीं हो रहा था, बस मन कर रहा था कि अब भाई का लंड मुंह में ले ही लूँ।
इसलिए मैं उठी और भाई के पैरों की तरफ़ सर रख कर लेट गई और मैंने भाई को और अपने आपको कम्बल से ढक लिया।
मैंने अँधेरे में भाई का लंड टटोला।
जैसे ही मेरे हाथ में भाई का लंड आया तो मेरी धड़कन बहुत तेज हो गई और मेरे हाथ कांपने लगे पर मुझे कोई होश नहीं था, मुझे तो बस लंड चाहिये था, जो अब मेरे हाथ में था।
फिर मैं थोड़ा सा नीचे हुई, अब साजन भाई का लंड मेरे मुंह के सामने था।
मैंने धीरे से अपना मुंह खोला और भाई के लंड की तरफ थोड़ा और सरक गई।
फिर मैंने अपने साजन भाई का लंड अपने मुंह में ले लिया।
अभी सिर्फ मुंह में लंड का सुपारा ही गया था पर मुझे लग रहा था कि मैंने उनका पूरा लंड मुंह में ले लिया।
भाई का लंड बहुत ही ज्यादा गर्म लग रहा था।
कुछ देर मैंने भाई के लंड का सुपारा अपने होंठों में दबाये रखा, फिर मैंने लंड के सुपारे पर अपनी जीभ चलाई तो मुझे लंड का स्वाद कुछ अजीब सा लगा।
भाई के लंड का स्वाद मुझसे बहुत ही अच्छा लगा।
लंड का स्वाद जैसा भी था पर सच कहूँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
और फिर यह मेरे साजन भाई का लंड था।
मैंने हाथ से टटोल कर देखा तो अभी भाई का लंड पूरा ही बाहर है। मैंने तो बस लंड का एक भाग ही मुंह में लिया था।
मैं साजन भाई का लंड अपनी जीभ से ऐसे चाट रही थी जैसे कोई बच्चा सोफ्टी के ऊपर की आइसक्रीम चाट रहा हो।
मैं साजन:
मुझे सोते हुए अभी कुछ ही देर हुई थी कि अचानक मुझे मेरे लंड पर किसी का हाथ महसूस हुआ।
आप सभी को तो पता ही है कि चाहे लड़का हो या लड़की ! उसके नाजुक अंग पर कोई भी हाथ लगाये तो वो जाग जाता है, इस तरह मैं भी जाग गया था।
जब मैंने महसूस किया कि कोई मेरे लण्ड को छू रहा है तो मैंने अपनी आँख धीरे से खोली तो देखा प्रिया ही मेरे लण्ड को छू रही है।
मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैंने उसको कुछ नहीं कहा।
मुझे यह देखकर कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि शायद उसने, वो जो मैं देख रहा था, वही वीडियो प्रिया ने देख ली थी।
वैसे तो प्रिया जवान थी तो उसका बहकना लाजमी भी था और फिर मेरे तो मज़े ही आ गए जो बैठे बिठाये एक नई चूत का इंतजाम हो गया।
मैंने भी ऐसा कुछ नहीं किया जिससे उसको पता चल जाये कि मैं जाग रहा हूँ।
मैंने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली और ऐसे ही लेटे हुए मज़ा लेता रहा।
प्रिया के शब्दों में:
मैंने भाई का लण्ड मुंह में लिए हुए ही अपनी सलवार और चड्डी को अपने पैरो से पूरी तरह से निकाल दिया जो कुछ देर पहले मेरे पैरों में फंसी हुई थी।
फिर अपने एक हाथ से अपनी गीली चूत को सहलाने लगी।
भाई का लण्ड अब भी मेरे मुंह में था और मैं उनके लण्ड का सुपारा चूस रही थी और एक हाथ से अपनी चूत सहला रही थी।
मदहोशी का यह आलम था कि मुझे कुछ भी याद नहीं रहा और मैं अपने भाई के लण्ड को कुछ ज्यादा ही जोर से चूस लगी।
साजन- प्रिया को लण्ड चूसना तो आता नहीं था और न ही उसने पहले कभी किसी का लण्ड चूसा था पर वो जिस तरह से भी मेरा लण्ड चूस रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
प्रिया के दांत मेर लण्ड को बार बार लग रहे थे, जब वो लण्ड चूस रही थी।
मुझे हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था, कई बार तो मेरे मुख से चीख निकलते निकलते रह गई क्योंकि अब प्रिया बहुत जोर से मेरा लण्ड चूस रही थी और उसके दांत मेरे लण्ड पर बहुत लग रहे थे।
पर मैं सब कुछ सहन करता रहा।
इसलिए उसको मैंने कुछ नहीं कहा और न ही कुछ ऐसा किया जिससे उसको यह लगे कि मैं जाग रहा हूँ।
प्रिया- कुछ देर बाद ही मुझे मेरी चूत में ऐसा लगा कि जैसे मुझे पेशाब आने वाला है पर उस टाइम मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं भाई का लण्ड भी चूसना नहीं छोड़ सकती थी और न ही अपनी चूत को सहलाना।
कुछ देर बाद ही मुझे लगा कि मेरा पेशाब निकल रहा है और मैं जोर जोर से अपनी चूत को रगड़ने लगी और भाई का लण्ड भी जोर जोर से चूसने लगी कि तभी भाई के लण्ड से कुछ निकल कर मेरे मुंह में आ गया।
मेरी समझ में आ गया कि यह भाई का पानी है जैसे उस वीडियो में दिखाया था।
मैंने भी वैसा ही किया और मैं भाई का सारा माल पी गई।
साजन भाई के लण्ड से निकला हुआ पानी मुझे कुछ हल्का सा नमकीन और खट्टा लगा जो मुझे बहुत पसंद आया और साजन भाई के लण्ड का पानी मुझे इतना अच्छा लगा कि मन करता था कि यह लण्ड हमेशा के लिए मेरा ही हो जाए और जब जी करे उसका पानी पी लूँ।
मुझे भी लगा मेरा पेशाब निकल रहा है पर उसमें मज़ा मुझ बहुत आ रहा था, ऐसा मज़ा मुझे अपनी जिन्दगी में कभी नहीं आया।
आनन्द के मारे मेरी आँखें बंद हो चुकी थी।
जब मेरा पूरा पानी निकल गया तो देखा वो मेरा पेशाब नहीं था।
मुझे समझ आ गया कि यह मेरा माल है जो मेरी ही अपनी चूत का है इसलिए ये इतना गाढ़ा निकला।
अब मैं पूरी तरफ शान्त हो चुकी थी।
भाई को देखा तो वो अभी भी सो रहे थे।
मैंने भाई का लोअर सही से ऊपर कर दिया कि उनको कुछ भी पता न चल सके।
फिर मैंने अपनी सलवार भी पहन कर लेट गई भाई के साथ चिपक कर।
उसके बाद कब मुझे नींद आ गई मुझे कुछ पता नहीं।
सुबह को मैं अपने टाइम से थोड़ा लेट ही उठी थी पर मैं एकदम तरोताजा लग रही थी।
मुझे रात की बात याद आई तो मुझे अब कुछ अजीब सा लगा और सोचने लगी कि अगर भाई जाग जाते तो क्या होता?
फिर वो क्या सोचते मेरे बारे में, पर शुक्र था कि वो नहीं उठे थे।
अब तो मेरी साजन भाई के सामने जाने की हिम्मत भी नहीं हो रही थी।
जबकि वो अभी भी सो ही रहे थे।
मैं नहा धोकर रसोई में गई तो देखा कि मम्मी नाश्ता बना रही हैं।
मुझे आता देख मम्मी मुझसे बोली- क्या बात है आज तू इतना लेट उठी?
तो मैंने मम्मी से कहा- मम्मी आज रविवार है और आज कहीं जाना भी नहीं है, बस इसी वजह से लेट उठी।
मेरी बात सुनकर मम्मी चुप हो गई।
सुबह के आठ बज चुके थे, मम्मी ने नाश्ता बना लिया था तो मम्मी ने कहा- जा पहले अपने भाई को नाश्ता दे आ ! वो उठ गया होगा। जा जल्दी से दे आ ! ऐसा न हो उसको कहीं जाना हो और वो बिना नाश्ता करे बैगर ही चला जाए।
मम्मी ने एक प्लेट में नाश्ता और चाय दे दी।
मेरी साजन भाई के सामने जाने की हिम्मत तो हो ही नहीं रही थी और न ही मैं मम्मी को मना कर सकती थी !
वो पूछती तो मैं क्या जवाब देती?
इसलिए मज़बूरी में मुझे जाना पड़ा।
मैं साजन- प्रिया के जाने के बाद मेरी आँख खुली तो देखा प्रिया जा चुकी थी पर पारुल और मुकेश अभी भी सो रहे थे।
मैंने उन दोनों को उठाया और मैं नहाने चला गया।
मैं अभी नहा धोकर मैं बाथरूम से बाहर आया और कपड़े पहने ही थे कि प्रिया मेरे लिए नाश्ता लेकर आ रही थी।
उसने अपनी नज़र नीचे कर रखी थी।











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Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-1

Kamukta Stories-कहीं भाई जाग न जाए-1




यह बात आज से करीब एक साल पहले की है, मुझे ऑफिस के काम से 15 दिनों के लिए मथुरा जाना था और सारा खर्चा कम्पनी ही दे रही थी।
यह बात आकर मैंने अपने घर में बताई तो मेरी मम्मी ने कहा- वहाँ तो तेरे मामा भी रहते हैं। मैं उसको फ़ोन करके कह दूंगी और तू वहीं उनके पास रह लेना।
मैंने मम्मी से पूछा- कौन से मामा रहते हैं मथुरा में?
तो मम्मी ने बताया- वो नवीन मामा जो पहले मेरठ में रहते थे, पर अब वो मथुरा चले गए हैं।
‘नवीन मामा!’ मैंने चौकते हुए कहा- अब वो मथुरा में रहते हैं? मेरठ तो मैं कई बार जा चुका हूँ पर मथुरा का मुझे पता ही नहीं था ! चलो यह भी अच्छा हुआ, अब तो मैं उसके यहाँ ही रहूँगा।
अगले दिन ही मुझे मथुरा के लिए निकलना था इसलिए मैंने अपना सामन रात में ही पैक कर लिया था और फिर अगले दिन मैं मथुरा के लिए रवाना हो गया।

मम्मी ने नवीन मामा को फ़ोन करके बता दिया था कि मैं मथुरा आ रहा हूँ। इसलिए नवीन मामा मुझे लेने मथुरा बस स्टैंड पहुँच गए।
मामा मुझे देख कर बहुत खुश हुए और मुझे लेकर अपने घर पहुँचे तो लगभग रात हो चुकी थी।
अब मैं आपको अपने नवीन मामा और उनके परिवार के बारे में बता दूँ, नवीन मामा हमारे सगे मामा तो नहीं थे पर सगे से कम भी नहीं हैं।
नवीन मामा ने हमें कभी इस बात का भी एहसास नहीं होने दिया की वो हमारे सगे मामा नहीं है। नवीन मामा के घर में उनको मिला कर कुल पांच सदस्य थे। मामा, मामी और उनके तीन बच्चे जिसमे से दो लड़की थी और एक लड़का।
नवीन मामा की उम्र यही कोई पैंतालीस साल के आस पास थी और वो एक अच्छी कम्पनी में सुपरवाइजर थे जिसकी वजह से वो कभी कभी रात को घर नहीं आते थे और कभी कभी तो रविवार को भी जाना पड़ता था।
मामी की उम्र यही कोई अड़तीस साल के करीब थी पर उनको देख कर कोई यह नहीं कह सकता था की उनके तीन बच्चे होंगे।
दरअसल मामा और मामी की शादी कम उम्र में ही हो गई थी और वो मामा से करीब सात साल छोटी थी।
मामी का नाम शालिनी था, शालिनी मामी बहुत ही चंचल शोख हसीना थी वो हमेशा ख़ुश रहती और सभी को खुश रखने में विश्वास रखती थी।
शालिनी मामी बहुत ही खूबसूरत है और हाईट करीब 5’ 5” थी, मामी का लम्बा चेहरा, गोरा बदन, न ज्यादा पतली और न ही ज्यादा मोटी बस जो एक औरत में जो खूबी होनी चाहिए उन में वो सब था।
मामी के शरीर का आकर 36-28-36 है अब तो आप समझ ही गए होगे वो दिखने में कैसी लगती होगी।
मामी के तीनों बच्चो में सबसे बड़ी प्रिया है, उसकी उम्र यही कोई उन्नीस से बीस साल के आस पास ही थी।
प्रिया अपनी मम्मी की ही तरफ खूबसूरत है, वो भी बहुत गोरी है, हाईट करीब 5’2″ और उसके शरीर का आकार 30-24-32 ही रहा होगा।
प्रिया से एक दो साल छोटी पारुल थी और वो भी अपनी मम्मी और बहन के जितनी ही सुन्दर थी। पारुल के चूचे अभी छोटे थे जैसे कच्चा अमरुद पर उसकी गांड उसकी मम्मी के बराबर ही थी 36 के आकार की, इस कारण वो और भी मस्त दिखाई देती थी।
प्रिया और पारुल से छोटा उनका भाई मुकेश था जो अभी बारह-तेरह साल का ही था।
मैं जब मामा मामी के घर मेरठ आखरी बार गया था जब ये दोनों बहनें छोटी थी जिसकी वजह से मेरा ध्यान कभी उनकी तरह नहीं गया था।
अब प्रिया का बदन यौवन के फलों से भरा हुआ था और दूसरी का भरने वाला था।
वैसे तो मैंने अब भी उसको उस नजर से नहीं देखा था, मैं अब भी वही पाक साफ़ नजर से देख रहा था।
पर जो सामने हो उसको अनदेखा भी तो नहीं कर सकता था।
जब मैं मामा के घर पहुँचा तो सब बहुत खुश हुए और कहने लगे- बड़े दिनों बाद हमारी याद आई है।
मैंने कहा- ऐसी बात नहीं है… एक तो जॉब के कारण टाइम ही नहीं मिलता और दूसरा आप लोगों का मुझे पता भी नहीं था कि आप शिफ्ट हो गए हो अब मैं आ गया हूँ तो आपकी नाराजगी दूर करके ही जाऊँगा क्योंकि मैं यहाँ कम से कम 15 दिनों रहूंगा।
मेरी बात सुनकर सभी लोग बहुत खुश हो गए।
मामी ने कहा- तुम नहा धो लो, थकान उतर जाएगी… तब तक मैं खाना लगाती हूँ।
फिर मैंने नहा धोकर सबके साथ खाना खाया, खाना खाने के बाद वो तीनों ऊपर बने हुए रूम में चले गए और मैं कुछ देर मामा मामी से बात करने लगा।
हमें बात करते हुए दस से ऊपर का वक़्त हो गया था तो मामी ने कहा- तुम्हारा बिस्तर उन तीनों के साथ लगा दिया है। क्योंकि मुझे पता है कि वो तीनों तुमको आज नहीं छोड़ने वाले और तुमको सोने भी नहीं देगे क्योंकि उन तीनो के सबसे चहेते भाई जो हो।
मैं भी मामी की बात सुनकर मुस्कुरा दिया।
मामा का घर दो मंजिल था और वो तीनों भाई बहन दूसरी मंजिल के कमरे में सोते थे, दूसरी मंजिल पर दो कमरे बने हुए थे। उन्हीं दो कमरों में से वो एक कमरे में सोते थे, हर कमरे में अटेच बाथरूम भी थे।
मामा और मामी अब भी एक साथ ही सोते नीचे के कमरे में सोते थे।
मैं मामा मामी को नीचे छोड़कर ऊपर उनके कमरे में पहुँचा ही था कि बाहर बारिश होने लगी।
बाहर बारिश हो रही है, यह बात उन तीनों को भी पता चल गई थी।
मुझे कमरे के अन्दर आता देख मुकेश बोल पड़ा- भाई तो बारिश भी साथ लाये हैं !
इस बात पर हम चारों ही हँसने लगे।
मैंने कमरे को ध्यान से देखा, वह कमरा बहुत बड़ा था, उसमें एक डबल बेड बिछा हुआ था और साथ ही मेरी चारपाई बेड से कुछ दुरी पर बिछाई हुई थी।
वो तीनों भाई बहन एक साथ बेड पर ही सोते थे।
मैं अपनी चारपाई पर बैठकर उन तीनों से बात करने लगा।
बातें करते करते हमें ठण्ड सी लगने लगी थी एक तो पहले से ही हल्की ठण्ड पड़ रही थी और ऊपर से बारिश भी होने लगी थी।
प्रिया ने ओढ़ने के लिए एक बड़ा सा कम्बल निकल कर प्रिया ने मुझसे कहा- भाई, आप भी यहीं पर आ जाओ।
ठंड तो मुझे भी लग रही थी इसलिए मैं उन तीनों के बेड आ गया, फिर हम चारों ने उस बड़े से कम्बल को ओढ़ लिया और हम बातचीत करने लगे।
बात करते हुए हमें 12 से ऊपर का टाइम हो गया था, उनको नींद आने लगी थी।
मैं बेड से उठकर अपनी चारपाई पर जाने लगा तो मुकेश ने कहा- भाई आप यहीं पर हमारे साथ ही सो जाओ न।
मैं उस मासूम मुकेश की बात को टाल नहीं सका और मैंने मुकेश से कहा- ठीक है पर पहले मैं अपने कपड़े चेंज कर लूँ।
और यह कह कर मैंने अपने बैग से अपना लोअर और टी शर्ट निकाला और बाथरूम में घुस गया।
मैं अपने कपड़े चेंज करने लगा।
यहाँ पर मैं आप सभी को बता दूँ कि मैं रात को सोते समय अंडरवियर नहीं पहनता, इसलिए मैंने अपना अंडरवियर उतर कर लोअर पहन लिया।
फिर मैं मुकेश के साथ उसी बेड पर लेट गया जिस बेड पर वो तीनों भाई बहन सो रहे थे।
बेड के एक कोने पर मैं फिर मुकेश और फिर उसके बाद प्रिया और बेड के दूसरे कोने पर पारुल सो रही थी।
आप सभी को तो पता ही होगा कि नई जगह आने पर नींद इतनी जल्दी नहीं आती और यही मेरे साथ भी हुआ।
मुझे नींद नहीं आ रही थी और बारिश भी रुकने का नाम नहीं ले रही थी इसलिए मैंने अपना फ़ोन निकला और फ़ोन में इयरफोन लगाकर मैं पुराने गाने सुनने लगा।
रात का एक बज रहा था पर मेरी आँखों से नींद कोसों दूर थी, अभी मैं गाने सुन ही रहा था कि मुकेश उठा और पेशाब करने चला गया। पेशाब करके जब वो वापस आया तो मुझसे बोला- भाई, आप मेरी जगह लेट जाओ और मैं आप की जगह लेट जाता हूँ क्योंकि मुझे बेड के कोने पर ही नींद आती है।
मैंने मुकेश से कहा- ठीक है, सो जाओ यहाँ पर !
और फिर मैं मुकेश की जगह और मुकेश मेरी जगह लेट गया।
अब मैं और प्रिया बीच में लेटे हुए थे और मुकेश और पारुल बेड के दोनों कोने पर।
कुछ देर बाद मुकेश को भी नींद आ गई सब सो चुके थे बस मैं ही जाग रहा था।
मौसम बहुत ही सुहाना और ठण्डा हो रहा था, बारिश की बूंदों की आवाज मुझसे साफ़ सुनाई दे रही थी।
मौसम ठण्डा होने के कारण प्रिया सुकड़ी हुई सो रही थी, जैसे ही मैं उसके करीब लेटा, मेरा शरीर उसके बदन सट गया था।
प्रिया के शरीर की गर्माहट मुझे बहुत अच्छी लग रही थी और अब शायद मेरे बदन की गर्माहट पाकर प्रिया की ठण्ड भी दूर हो गई थी। ख़ैर छोड़ो इस बात को !
कुछ देर बाद मैं पुराने गाने सुन–सुन कर बोर हो गया तो मैंने अपने फ़ोन में ब्लू फ़िल्म लगा कर देखने लगा।
उस फ़िल्म में एक लड़का एक लड़की की मसाज करता है और उस लड़के के बदन पर मात्र एक अंडरवियर था और वो लड़की पूरी नंगी थी।
लड़का उसके सर के पास खड़ा था। फिर वो लड़की पेट के बल लेट गई और वो लड़का उसकी पीठ की मालिश करने लगा।
फिर कुछ देर बाद उस लड़की ने लड़के का अंडरवियर नीचे खिसका दिया और अपने हाथ से उस लड़के का लंड सहलाने लगी कि तभी अचानक…!!
मेरे कान से मेरा एक इयरफोन निकलकर प्रिया के सर के बालो में गिर गया।
मुझे यह नहीं पता था कि वो इयरफोन प्रिया के सर के ऊपर उसके कान के नजदीक ही गिरा है।
मैं तो बस उस वीडियो में इतना खोया हुआ था कि मुझे होश ही नहीं रहा यह देखने का कि इयरफोन कहाँ गिया है।
मेरा लंड तनकर कुतब मीनार हो चुका था और मेरा एक हाथ अपने लंड पर पहुँच गया था और मैं धीरे धीरे अपने लंड को सहला रहा था।
अब कुछ अंश प्रिया के शब्दों में:
मैं सो रही थी कि अचानक मेरे कान के पास कुछ आवाज आने लगी तो मेरी नींद खुल गई।
मेरी आँखे बंद थी और मैं उस आवाज को सुनने की कोशिश कर रही थी जो मेरे कान के ऊपर से ही आ रही थी।
आवाज सुनकर मुझे कुछ ऐसा लगा कि जैसे कोई कुछ चूस रहा है।
जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने धीरे से अपनी आँख खोली तो देखा कि भाई अभी तक जाग रहे हैं।
भाई अपने फ़ोन में कुछ देख रहे थे, मैंने उनके फ़ोन की तरफ देखा तो उसमे मुझे वो वीडियो दिखाई दी जो भाई अपने मोबाईल में देख रहे थे।
उस वीडियो में एक नंगी लड़की लेटी हुई है और एक लड़का उसकी कमर की मालिश कर रहा था और वो लड़की उसका लिंग मुंह में डाल कर चूस रही थी।
मैंने महसूस किया कि भाई का इयरफोन मेरे कान के पास गिरा हुआ है जिससे वो आवाज आ रही थी।
तब मेरी समझ में आया कि वो आवाज क्या है।
भाई ने फ़ोन कुछ ऐसे पकड़ा हुआ था कि मुझे देखने में बहुत दिक्कत हो रही थी इसलिए अपना एक पैर भाई के पैर पर और अपना एक हाथ उनकी पेट पर रख दिया।
यह काम मैंने इतनी सफाई से किया था कि भाई को लगे कि मैं गहरी नींद में सो रही हूँ।
मेरी इस हरकत से भाई भी डर गए थे पर जब उन्होंने मुझे सोता देखा तो उनको लगा कि मैं गहरी नींद में हूँ और फिर भाई अपने फ़ोन में उस वीडियो को देखने लगे जो अब मैं भी देखना चाहती थी।
कुछ देर ऐसे ही अपनी आँखे बंद करके मैं भाई के साथ चिपक कर लेटी रही और कुछ देर बाद मैंने अपनी आँखें थोड़ी सी खोली तो मुझे भाई के मोबाईल पर अब साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था और मुझे देखने में भी कोई परेशानी नहीं हो रही थी।
फिर मैंने भाई के फ़ोन में देखा वो लड़का उस लड़की की योनि को चाट रहा था और उस लड़की की योनि के अन्दर अपनी जीभ डाल कर अन्दर बाहर कर रहा था।
यह नज़ारा देखकर मुझे भी न जाने क्या होने लगा और मेरी साँसें जोर से चलने लगी थी।
एक तो भाई के बदन की गर्मी ने मेरा बुरा हाल किये हुए थी और ऊपर से मेरे शरीर में अचानक इतनी गर्मी आ गई थी कि मेरा शरीर तपने लगा था।
और न चाहते हुए भी मेरा हाथ मेरी योनि पर आ गया।
जैसे ही मेरा हाथ मेरी योनि पर आया तो कम्बल में कुछ तो हलचल होती ही और वो भाई ने महसूस कर ली।
भाई को पता चल गया था कि शायद मैं जाग रही हूँ, इस बात का एहसास मुझे भी हो गया था इसलिए मैं खुद ही उठने लगी, उनके कुछ कहने से पहले ही जैसे ही मैं उठने को हुई तो भाई का ध्यान मेरी तरफ गया और झट से उन्होंने अपना फ़ोन बंद कर दिया और मेरी तरफ देखने लगे।
मैंने अनजान बनते हुए और अपनी आँख मलते हुए भाई से कहा- भाई, आप अभी तक सोये नहीं और आप यह क्या देख रहे थे?
अब पुनः साजन के शब्दों में:
मैं- घबराते हुए कुछ नहीं, कुछ भी तो नहीं बस ऐसे ही।
प्रिया- भाई, मैं तो सो गई थी पर पहले तो आपका इयरफोन मेरे कान के पास गिर गया और उसकी आवाज सुनकर मेरी नींद खुल गई।
मैंने अपने आपको बहुत मन ही मन में बहुत कोसा पर जो हो चुका था तो क्या कर सकता था।
मैंने प्रिया को सॉरी बोला और कहा- मेरी वजह से तेरी नींद खुल गई… चल अब सो जा, मुझे भी नींद बहुत आ रही है।
तो प्रिया बोली- भाई, अब मुझे इतनी जल्दी नींद नहीं आएगी। अच्छा भाई यह तो बताओ आप देख क्या रहे थे?
मैंने उससे कहा- कुछ खास नहीं, बस ऐसे ही तूने कुछ देखा क्या?
प्रिया ने कहा- हाँ भाई, कुछ कुछ नजर आया पर समझ कुछ नहीं आया।
मैं अभी समझने की कोशिश ही कर रहा था कि प्रिया ने क्या देखा होगा और क्या नहीं।
प्रिया फिर से बोली- बताओ न भाई, आप क्या देख रहे थे।
मैंने बात को गोल करते हुए कहा- कुछ नहीं, बस मैं तो मसाज करना सीख रहा था कि मसाज कैसे होती है उसमें वही बताया हुआ है, इसलिए मैं वो वीडियो देख रहा था।
प्रिया बोली- भाई, मुझे भी दिखाओ न मैं भी तो देखू कैसे मसाज करते हैं।
मैंने प्रिया को बोला- अब सो जाओ, रात बहुत हो गई है, फिर कभी दिखा दूंगा।
प्रिया बोली- दिखा दोगे न बाद में?
मैंने कहा- हाँ दिखा दूंगा, अब तो सोने दे मुझे !
और इतना कह कर मैं प्रिया से अपनी जान छुटा कर सो गया।
अब प्रिया के शब्दों में:
भाई के लेटते ही मैं भी भाई की बगल में लेट गई पर अब एक बार मेरी नींद खुलने के कारण अब मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं बिस्तर पर करवट बदलती रही।
मुझे भाई पर बहुत गुस्सा आ रहा था, भाई तो सो गए मुझे जगा कर।
15-20 मिनट से ज्यादा हो गए, फिर भी मुझे नींद नहीं आई।
बारिश अब तक थम चुकी थी, मौसम और ठंडा हो चुका था और भाई लगभग मुझसे चिपके हुए थे ठण्ड की वजह से।
मुझे अपनी जांघों पर कुछ चुभता हुआ महसूस हो रहा था पर मैंने उसको नजरंदाज कर दिया।
मुझे नींद तो आ नहीं रही थी तो सोचा क्यों न भाई के फ़ोन में वही मसाज वाली वीडियो देख लूँ जो मैं पूरी नहीं देख पाई।
पर मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं भाई जाग न जाए।
इसलिए मैंने भाई को आवाज दी !
भाई ! भाई !
मेरे आवाज देने से भाई नहीं उठे तो मुझे पूरा विश्वास हो गया था कि भाई गहरी नींद में सो रहे हैं।
तब जाकर मैंने भाई का मोबाइल उनके तकिये के नीचे से निकला और वो वीडियो खोजने लगी।
और जल्द ही मुझे भाई के फ़ोन में वो वीडियो फोल्डर मिल गया।
जैसे ही मैंने उस फोल्डर को ओपन किया तो मेरे हाथ कांपने लगे और मेरे हाथ से फ़ोन गिरते गिरते बचा।
उस फोल्डर में बहुत सारी वीडियो थी और वो सारी वीडियो ब्लू फ़िल्म की थी।
मैंने एक नजर भाई की तरह देखा तो वो सो रहे थे।
मैंने ऐसी वीडियो पहले कभी नहीं देखी थी, बस अपनी सहेलियों से इसके बारे में सुना जरूर था।
अब मेरे मन में उन वीडियो को देखने की जिज्ञासा होने लगी।
मैंने अपने भाई के फ़ोन का इयरफोन भी तकिये के नीचे से निकाल लिया और दीवार के साथ लग कर बैठ गई मेरे हिलने से भाई भी हिले तो मैं भाई की तरफ़ देखने लगी, वो गहरी नींद में सो रहे थे।
उनका एक हाथ मेरी जाँघ पर आ गया था और उनके हाथ का अंगूठा मेरी योनि के ऊपर था। भाई की गर्म सांसें मुझे अपनी जाँघ पर महसूस हो रही थी।












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