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Thursday, October 30, 2014

FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--20

 FUN-MAZA-MASTI
 छोटी बहन के साथ--20

 मैंने उसको पूरी तरह से उठने ना दिया और उसको जल्दी से पकड कर झुकाया तो वो अपने चारों हाथ-पैर के सहारे वहीं झुक गई और मैं अब उसके ऊपर चढ गया। पीछे से जब मैंने उसकी खुली हुई चूत में अपना लन्ड घुसाया तो वो सिसकार रोक न सकी। मैं अब मस्त हो कर रूमी को चोद रहा था। उसकी पीठ पर झुक कर मैं उसके बडे-बड़े गेन्दों को भी सहला रहा था। उसका पति संदीपन बगल में बैठ कर सब देख रहा था। विभा भी चुप-चाप हम दोनों की चुदाई देख रही थी। वो चरम-सुख पा कर अब थोडा शान्त होने लगी थी और मैं अभी भी जोश में था तो उसने अपने को मेरे नीचे से निकाल लिया और फ़िर मुझे लिटा कर मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने अपने हाथ से मेरा लन्ड पकड कर अपनी चूत में घुसाया और फ़िर ऊछल-ऊछल कर मुझे चोदने लगी। इस तरह से मुझे उसके गेंदों का ऊछाल देखने का भरपूर मौका मिल रहा था। तभी संदीपन ने कहा, "रूमी लेट जाओ, मैं आता हूँ अब"। रूमी अपने चूत में मेरा लन्ड फ़ँसाए हुए हीं मेरे ऊपर लेट गई। उसकी चुचियाँ मेरे सीने से लगी थी। अब संदीपन फ़टाक से ्कमर के नीचे नंगा हो कर आया और उसकी गाँड़ चाटने लगा। हम दोनों को अब थोडा आराम करने का मौका मिल गया था सो हम जोर-जोर से साँस लेने लगे थे। जल्दी हीं संदीपन उठा और उसकी गाँड़ में अपना लन्ड डाल दिया फ़िर उसने ऊअप्र से धक्के लगाने शुरु किए। अब रूमी की चूत में मेरा लन्ड था और उसकी गाँड में उसके पति का। हम दोनों के लन्ड उसकी दोनों छेदों की चुदाई करने लगे थे। बेचारी अब कभी-कभी दर्द से कराह देती थी। मैं भी अपने लन्ड पर संदीपन के लन्ड का दबाव महसूस कर लेता था जब वो धक्का देता। हम दोनों के लन्ड के बीच रूमी के बदन की एक पतली झील्ली ही तो थी। संदीपन जल्द हीं उसकी गाँड में झड गया और हट गया। तब मैंने रूमी तो पलट कर सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर से उसकी चुदाई करने लगा। मैं अब उसको चुमते हुए चोद रहा था। वो अब तक दो बार झड़ कर थक कर निढ़ाल हो गई थी और अपना बदन बिल्कुल ढीला छोड दिया था जैसे बेजान हो गई हो। मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर चढा लिया और फ़िर उसकी चूचियों को जोर-जोर से मसल्ते हुए तेज धक्के लगाने शुरु कर दिए। चुचियों के मसलने से वो दर्द से बिलबिला गई थी पर मैं अब झडने के कागार पर था सो रुकने का नाम नहीं ले रहा था... घच्च घच्च घच्च घच्च थप-थप-थप... और मैं झड गया। मेरा सारा माल उसकी चूत में भर गया था। मैं अब उसके ऊपर से हटा तो वो बेचारी दर्द से कराहते हुए पलट गई और एक-दो बार अपने जाँघ सिकोड कर थोड़ा तसल्ली की। फ़िर उसने अपने हाथों से आँसू पोंछते हुए कहा, "कितना जोर से दबा दिए थे मेरी छाती को, लगा कि प्राण निकल जाएगा... छीः"। मैंने उसको सौरी बोला, और अब जब होश में आकर सब तरफ़ देखा तो पाया कि एक और जोडा पास में खडा हो कर हम सब को देख रहा है। उस जोडे के लडके ने मेरे और संदीपन से हाथ मिलाया और लडकी रूमी और विभा से गला मिली। फ़िर वो लोग चले गए। उस समय अब सिर्फ़ हम सब ही बचे थे। मैंने घड़ी देखी तो पौने आठ बज गया था। विभा को अब यहाँ चोदने का समय नहीं था और मैं भी थक गया था। रूमी अपना कपडा पहन चुकी थी। सो हम सब एक-दूसरे से विदा ले कर अपने-अपने रास्ते निकल गए।


 बाहर ही खाना खा कर हम होटल आ गए। विभा कपडे बदलते हुए रूमी के बारे में बात कर रही थी कि कैसी गंदी थी वो। मैंने कहा, "मस्त थी... गंदी मत कहो उसको"। वो मुझे देख कर मुँह बिचकाई और चुप हो गई। आज मैं भी थक गया था और विभा भी सो तय हुआ कि आज का कसर कल निकालेंगे। वो समझ गयी कि अब कल तक के लिए वोह बच गयी है। सो थोडा निश्चिन्त हुई और बिस्तर पर सोने के लिए आई और मेरी गोदी में सिमट गई। मैंने प्यार से जब उसका माथा चूमा तब वो बोली, "भैया, आप भी बहुत गन्दे हैं... कैसे आप रूमा को चोद रहे थे? क्या सोच कर उसको ऐसे खुले में हम सब के सामने चोदे?" मैंने भी उसको प्यार से सहलाते हुए कहा, "देखो बहना... यह लन्ड और चूत के रिश्ते में कोई चीज नहीं होती है। जब उसका पति खुद बोला उसको चोदने के लिए तो मैं क्यों न कहता। वैसे भी रूमा जवान थी... माल थी... और चुदाने को तैयार भी थी"। अब वो बोली, "मतलब... अगर कल को कोई आया और बोला कि वो मेरे साथ ... करेगा, तब आप उसको भी हाँ कह देंगे?" मैं उसका इरादा समझ गया और बोला, "अरे नहीं मेरी रानी बहना..., तू तो स्पेशल है मेरे लिए। कोई साला आँख भी उठाया तो उसका आँख निकाल देंगे..." मैंने उसको पुचकारा तो उसको तसल्ली हुई और फ़िर वो अपना चेहरा मेरे सीने से चिपका दी। मैंने अब उसको चिढाने के लिए कहा, "तुम्हारी प्यारी चूत तो सिर्फ़ मेरे लिए है बहना रानी... अभी तो उसको कम से कम साल भर चोदुँगा फ़िर एक साला हस्बैंड ला दुँगा जिससे फ़िर खुले-आम चुदाना"। वो सब समझी और बोली, "जैसे आप तो अभी सब छुप के कर रहे हैं... जब से किशनगंज से निकले हैं तब से लगातार मुझे बीवी बनाए हुए हैं... आपको शर्म नहीं आती, कैसे सब को कह देते हैं कि मैं आपकी बीवी हूँ और कितायदारे के यहाँ कैसे बोल दिए कि आप बिना शादी किए मुझे साथ लाए हैं और मेरे घरवाले साथ भेजे हैं... छी:"। मैंने हँसते हुए कहा, "अरे तो मजा आया ना... कैसे सब तुमको मौड समझ कर बीहेव कर रहे थे"। वो मुंह बनाते हुए बोली, "सब मुझे बेशर्म समझ रहे होंगे... कैसी लडकी है बिना शादी किए एक लडके के साथ घुम रही है और इसके घर वाले भी वैसे हीं बेशर्म है जो इसको ऐसे भेज देते हैं"। मैंने कहा, "अरे तो फ़िर इसमें गलत क्या है... बेशर्म तो तुम हो ही... अपने भैया से चुदाती हो, और तुम्हारे घर वाले ही सब साले ठरकी हैं हीं, तुम्हारी बहन ट्रेन में अपने भैया से चुदाती है और तुम दो महीना भाई का लन्ड चुसके मजा लेने के बाद एक होटल में भाई से चुदवाने में मजा लेती हो... अब तो सिर्फ़ तुम्हारा रंडी बनना बाकी है... बोल न मेरी बहना, बनेगी एक टौप की रंडी"। वो मेरा आशय समझ गई, और फ़िर मेरी नजर से नजर मिलाकर बोली, "अब क्या बचा है, इतना दिन से अपना इज्जत बचा कर रखे हुए थे, पर आप न मुझे फ़ँसा हीं लिए", और मेरे होठ चूम ली। मैंने भी उसको चूमा और कहा, "अभी रंडी कहाँ बनी हो मेरी जान... उसके लिए तुमको बेशर्म हो कर सब के सामने चुदाना होगा... तब जा कर रंडी की डीग्री मिलेगी मेरी बहना को... बोल न विभा, कब रंडी बनेगी?" वो चुप रही तो मैंने कहा, "कल से शुरुआत कर दो तो किशनगन्ज लौटने से पहले रंडी की डीग्री मिल जाएगी तुमको, अभी कुछ समय तो हमलोग पुरी में हैं हीं, और यहाँ मौका भी है"। वो करवट बदलते हुए बोली, "अब सोइए, आप अपनी मनमानी किए बिना छोडिएगा थोडे न... कल मेरा काँन्ख का बाल साफ़ कर दीजिएगा, स्लीवलेस पहनने में कैसा गन्दा लगता है, कल अंकल की नजर बार-बार मेरे काँख की तरफ़ जाती थी, जब मैं अपना हाथ उठा कर बाल चेहरे से हटाती थी, अब कल नाश्ते में सुबह उनके घर ही जाना है और और आप सब कपड़ा हीं मेरा स्लीवलेस रखवा दिए हैं।" मैंने भी उसकी पीटः से चिपकते हुए कहा, "अरे तो बढीया है न उस बुढे की लाईफ़ में थोडा रंग तो आया"। फ़िर हम वैसे ही चिपक कर सो गए।

 अब बस हम दोनों भाई-बहन और अंकल घर पर थे। मैंने मौका ठीक समझा तो कहा, "अंकल अगर आप बूरा न माने तो एक बात कहूँ..."। मैं और विभा अंकल के सामने एक ही सोफ़ा पर बैठे हुए थे। जब अंकल ने मुझे प्रश्नवाचक नजरों से देखा तो मैंने बेशर्म की तरह कह दिया, "रात में तो हम लोग थक कर सो गए थे, फ़िर सुबह मौका मिला नहीं और कुछ दिन में हम लौट भी जाएंगे... तो क्या करीब आधा घन्टा हम दोनों अकेले एक कमरे में जा सकते हैं"... कहते हुए मैंने विभा की कमर के गिर्द अपने हाथ लपेट दिया। अंकल समझ कर मुस्कुराए और फ़िर कहा, "ठीक है, पर आंटी के आने के पहले बाहर आ जाना..."। मैंने कहा, "बस घडी देख कर आधा घन्टा से ज्यादा नहीं लगेगा"। वो मुस्कुराते हुए हमे अपने बेडरूम में ले गए और बोला, "इस कमरे से बाथरूम अटैच है तो सुविधा होगी बाद के लिए"। मैंने थैन्क-यू कहा और फ़िर विभा को कमरे में खींच लिया। मैंने दरवाजा वैसे हीं छोड दिया, पर अंकल थोडा सज्जन थे, वो टीवी खोल कर बैठ गए। विभा ने दरवाजे की तरफ़ इशारा किया तो मैंने कहा, "चल आ जल्दी से ऐसी ही न रंडी-गिरी की डीग्री मिलेगा तुमको", और फ़टाफ़ट उसके कपडे उतार दिए। मेरा लन्ड तो कमरे में घुसते समय हीं लहराने लगा था सो मैंने उसको अंकल की बिस्तर पर लिटा कर उसकी झाँटों वाले चूत चाटने लगा, जल्दी हीं उसके मुँह से सिसकी निकलने लगी थी। मैंने फ़िर उसको सीधा लिटा कर चोदना शुरु कर दिया। थप्प-थप्प की आवाज होने लगी थी और मेरे धक्कों पर कभी-कभी विभा के मुँह से कराह निकल जाती... मुझे पक्का भरोसा था कि अंकल को हमारी चुदाई की आवाज सुनाई दे रही होगी। करीब ८ मिनट की धक्कमपेल चुदाई के बाद मैं उसकी चूत के भीतर हीं झड गया और मेरा सब माल उसकी बूर से बह निकला। मैंने अब अपने रुमाल से उसकी चूत पोछी, पर कुछ माल उसकी बूर में भीत्र ही रह गया। फ़िर जब हम कपडे पहनने लगे तो मैंने कहा, "ऐसे हीं बिना पैन्टी के ही जीन्स पहन लो, पैन्टी गन्दा हो जाएगा... अभी जब खडा हो कर चलोगी तो मेरा कुछ पानी तो तुम्हारे बूर से रिसेगा हीं बाहर"। विभा भी मेरा बात मान ली और फ़िर जीन्स सीधे पहन कर अपने पैन्टी को अपने जीन्स की जेब में ठुँस लिया। जब वो उठी तो मैंने देखा कि उसकी बूर का रज और मेरा वीर्य उस बिस्तर पर थोड़ा स लग गया था और करीब एक ईंच व्यास का गीला दाग बना दिया था। फ़िर हम बाहर आ गए, कुल करीब ३८ मिनट हमने लिया था।

 अंकल हमे देख कर मुस्कुराए और कहा, "तुम दोनों का चेहरा देख कर लगता है बहुत मेहनत करना हुआ है जल्दी के चक्कर में", फ़िर विभा को देखते हुए बोले, "इसका तो चेहरा लाल भभूका हो गया है जल्दी से पाने से चेहरा धो लो, वर्ना आंटी को सब समझ में आ जाएगा ऐसा चेहरा देख कर"। विभा तुरंत डायनिंग टेबूल के पास के वाश-बेसीन पर चली गई। हम दोनों मर्द एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराए। अंकल ने मुझे देख कर कहा, "बधाई हो.... मेरे बिस्तर पर लाल दाग तो नहीं लगा दिया"। मैंने कहा, "अरे नहीं अंकल, पहले से भी मेरे साथ सो रही है, ऐसी नहीं है... नहीं तो ऐसे शान्ति से सब होता कि रोना-चीखना भी होता"। मेरी बात सुनकर वो बुढा ठहाका लगा कर हँस पडा। विभा की कमर पर नजर गडाए हुए वो कहा, "इसकी पैन्ट कहाँ गई गुड्डू जी, कहीं बिना पैन्ट उतारे भीतर तो नहीं उसको ठेल दिए...", अब फ़िर से हम दोनों का जोरदार ठहाका लगा। मैंने कहा, "नहीं, उसकी जेब में है.... अभी पहनती तो गन्दा हो जाता न, सब भीतर ही था जब हम हटे थे"। वो समझ गया और बोला, "बहुत गजब का है वो पैन्ट भी"। तभी विभा अपना चेहरा तौलिया से पोछती हुई वहाँ आई तो मैंने उसको कहा, "डार्लिंग डीयर... जरा अपना पैन्टी अंकल को दिखाओ न, बेचारे के टाईम में ऐसा तो होता नहीं था"। विभा तो शर्म से लाल हो गई पर उसने बिना हिचके अपने जेब से उस छोटी सी लाल पैन्टी को जेब से निकाल कर अंकल के हाथ में दे दिया और उस ठरकी बुढे ने उस पन्टी को ऊलट-पुलट कर खुब प्यार से देखा और फ़िर कहा, "हमारी ऐसी किस्मत कहाँ थी कि ऐसी को लडकी की कमर से उतारते..., कभी फ़ोटो में भी किसी को ऐसी चीज में नहीं देखा"। मैंने तब कहा, "डार्लिंग एक बार अंकल को जल्दी से पहन कर दिखा ही दो, बेचारे को इतनी कीमत तो देनी ही चाहिए, आखिर हम उनका बिस्तर इस्तेमाल किए हैं"। विभा को अपना झाँट को ले कर कन्फ़्युजन था, पर मैंने अंकल को कह दिया, "अंकल असल में बेचारी अपना बाल साफ़ की नहीं है सो ऐसा खुले में पहनना चाह नहीं रही है, वो तो कमर पर ऐसी डोरी दिखाने के फ़ैशन के चक्कर में पहन ली थी"। अंकल को जब मौका मिल रहा था यह सब देखने का तो बोले, "अरे तो कोई बात नहीं है, मुझे तो यह पैन्ट देखना है कि कैसी लगती है बाकी चीज थोदे न देखना है"। उनकी मुस्कुराहट सब कह रही थी तो मैंने विभा को इशारा किया और वो अंकल के हाथ से पैन्टी ले कर फ़िर से कमरे की तरफ़ मुडी तो मैंने कहा, "इस पैन्टी को पहनने के लिए कहीं जाने की क्या जरुरत है, यही पहन लो... वैसे भी जैसे अंकल ने नोटीस किया ऐसे ही आंटी भी तुम्हें बिना पन्टी के देख कर बेचारे अंकल का जीना हराम कर देगी"। हम दोनों हँस पडे और विभा समझ गई कि मेरी इच्छा है कि वो वहीं हमारे सामने पैन्टी पहने। उसने फ़ट से अपने जीन्स की बट्न को खोल कर उसको उतार दिया और उसकी झांटों भरी चूत हम दोनों के सामने थी। मैं खुश था कि विभा मेरा कहा मान कर बेशर्म की तरह मेरा सहयोग कर रही थी। अंकल ने अपनी जेब से रुमाल निकाल कर कहा, "पोछ कर साफ़ कर लो फ़िर पहनना...", विभा भी आराम से अंकल के रुमाल सफ़ेद रुमाल में अपनी चूत को पोछी और फ़िर अपने फ़ाँक को थोडा खोल कर भी साफ़ किया। रुमाल पर उसकी चूत का गीला पन अपना दाग बना दिया था। फ़िर उसने पैन्टी पहन ली। अंकल की नजर लगातार सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी बूर पर थी। विभा ने फ़िर जीन्स पहन लिया तब जा कर अंकल को होश आया। वो अब आराम से बैठे और कहा, "थैन्क यू", उनकी साँस गर्म हो गई थी और वो रुमाल को ले कर अपने जेब में रख लिए। मैंने कहा, "अब यह रुमाल तो शायद नहीं धुलेगा..."। अंकल ने भी हँसते हुए कहा, "सही कह रहे हैं गुड्डू जी आप, अब यह बिल्कुल नहीं धुलेगा... आज जो हुआ वह रोज थोडे न होता है जिन्दगी में। यह आज का यादगार रहेगा"। हम हम दोनों हँस पडे और विभा मुस्कुरा दी। फ़िर हम बातें करने लगे। करीब १० मिनट बाद आंटी आ गयी और हम सब नाशता-वाश्ता करके करीब ११.३० में अंकल के साथ हीं उनकी गाड़ी से निकले, वो हमें होटल में ड्रौप करते हुए औफ़िस चले गये। विभा रूम में पहुंच कर नकली नाराजगी दिखा रही थी कि मैंने क्यों ऐसा व्यवहार किया था अंकल के सामने। फ़िर उसने कहा कि अब वो सोएगी, तो मैंने भी उसको परेशान नही किया और सोने दिया। वो बेड पर सो गई और मैंने टीवी खोल लिया। फ़िर आधे घन्टे बाद मैं भी अलग बिस्तर पर सो गया।

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FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--19

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 छोटी बहन के साथ--19

 फ़िर विभा ऊठ कर अपने कपडे पहनने लगी। जब वो बिस्तर से नीचे उतर कर खडी थी तब उसकी नजर बिस्तर पर गई और जहाँ लेट कर उसने अपनी सील तुडवाई थी वहाँ उसके कुँवारेपन का सुबूत, उसकी बूर से निकले खून का एक छोटा सा धब्बा बना हुआ था। उस लाल धब्बे को देखते हुए वो बोली, "भैया... आप बहुत गन्दे हैं, मुझे फ़ँसा कर मेरी इज्जत लूट लिए"। उसके चेहरे से दुख कम शरारत ज्यादा दिख रहा था सो मैंने कहा, "तो क्या हुआ..., आज न कल तुम्हारी इज्जत तो लूटती हीं, कोई बाहर का लौन्डा मेरे घर की इज्जत लूटे उससे तो अच्छा है कि मैंने तेरी इज्जत लूट ली, और फ़िर मैं भी तो तेरे लिए हीं बहनचोद बन गया"। विभा अब मुझे याद दिलाई, "आप तो भैया पहले से बहनचोद बने हुए थे, मैं तो एक ऐसी बहन थी जो आपको पवित्र रखे हुए थी... पर आपने मुझे भी बहका कर मेरे साथ भी कर लिया"। वो अब मुस्कुरा रही थी, तो मैंने कहा... "और अपनी प्यारी बहन को उसकी जवानी का मजा भी तो दिया... तुम्को मजा नहीं आया क्या?" वो अब खुल कर हँसते हुए बोली, "दर्द से मेरा को प्राण निकल रहा था और आप थे कि मुझे अपने नीचे दबा कर अपना जिद पूरा कर लिए। आपको दया नहीं आई... अपने बहन को ऐसे दबाते हुए?" मैंने अब कहा, "सौरी यार... पर लडकी को पहली बार अगर ऐसे नहीं दबाया तो वो पक्का नीचे से फ़िसल कर निकल जाएगी। अब दर्द नहीं होगा... सिर्फ़ मजा आएगा। चलो अब हम लोग थोडा घुम आते हैं फ़िर रात में जम कर चुदाई किया जाएगा एक-दूसरे का"। इसके बाद हम दोनों कमरे से निकल कर बाजार की तरफ़ घुमने चले गए। विभा की चाल थोडी धीमी हो गई थी, बेचारी अभी-अभी ताजा पहली बात चुदी थी। मैंने उसको सिर्फ़ एक घुटनों तक का फ़्रौक पहनने को कहा था। और वो भी मेरी बात मान कर सिर्फ़ एक फ़्रौक, बिना किसी ब्रा-पैन्टी के पहन कर मेरे साथ बाजार घुमने निकल गई थी। एक बार चुदा कर विभा भी थोडा खुल गई थी। मैंने उससे पूछा, "विभा अच्छा लगा चुदा कर...?" वो भड़क गई, "हट्ट... ऐसे सडक पर बात कर रहे हैं, कोई सुनागे तब?" मैंने कहा, "कोई नहीं सुनेगा... कौन हमारे आस-पास है...?"

 फ़िर एक रिक्शा ले कर हम समुद्र की तरफ़ चल दिए। करीब ६ बज रहा था और अंधेरा होना शुरु हुआ था। समुद्र किनारे अब कम लोग थे... ज्यादातर नई जोड़ियाँ थी और सब हाथों में हाथ डाल बैठे थे और ठन्डी हवा का मजा ले रहे थे। कुछ छोकड़े चिप्स, शंख वगैरह बेच रहे थे। एक तरफ़ एक बडी सी झोपडी थी, जहाँ चाय बीक रहा था और हम उसी तरफ़ बढे... फ़िर जब हम उस झोपडे से आगे उसके पीछे की तरफ़ बढ़े तो एक लडका हमारे पास आया और बोला, "उधर नहीं जाना है... जाने का पैसा लगेगा"। हमें कुछ समझ नहीं आया, तो मैंने पूछा कि ऐसा क्यों भाई? तब उसने बताया, "ऊधर जोड़ा लोग प्यार करता है, ऊधर जाने का पैसा लगता है हम लोग उधर सब को नहीं जाने देते हैं"। उस छोखडे को अपनी बहन पर नजर घुमाते देख मैं सब समझ गया और फ़िर बोला, "कितना?" वो बोला, "२००", जो मैंने फ़ट से दे दिया। अब वो बोला, "आठ बजे तक वापस आ जाना, हम लोग दुकान बन्द करके चले जाएंगे फ़िर पुलिस-उलिस का चक्कर खुद समझना"। मैं अनजाने ही एक मस्त मौका पा खुश हो गया था। मैंने विभा का हाथ अपने हाथ में लिया और फ़िर झोपडी के पीछे की तरफ़ चला गया। सामने बालू पर ४ जोड़ा पडा हुआ था। दो चुदाई शुरु कर चुके थे, जबकि दो अभी चुम्मा-चाटी में लगे थे। रोशनी कम हो चुकी थी, सो १० फ़ीट दूर से चेहरा दिख नहीं रहा था। चुद्वा रही लडकियाँ मस्ती से कराह रही थी। मैं भी उन्हीं लोगों की तरह बालू पर बैठ गया और विभा जो आँख फाड़े सब देख रही थी, उसको बैठने को कहा।

 विभा समझ गई थी कि अब उसको भी मैं चोदुंगा सो वो बैठते हुए बोली, "भैया... यहाँ पर अएसे सब के सामने मैं नहीं करवाऊँगी"। मैंने उसको पकडते हुए कहा, "चुम्मा-चाटी में क्या हर्ज है... वो सब तो करोगी न", और मैंने उसको अपने से चिपटाते हुए चुमने लगा। वो शुरु में हिचकी फ़िर साथ देने लगी। मेरे लिए उसका ऐसे जल्दी से सहयोग करना एक शुभ संकेत था। मैंने देखा कि अब तीसरे जोड़े भी चुदाई की तैयारी करने लगे थे और उसकी लड़की बालू पर लेट गई थी। मैंने विभा से ध्यान हटा कर उनकी तरफ़ किया। एक और जोडा अब चुदाई में लग गया था और हम दोनों भाई-बहन सब देख रहे थे।

तभी मैंने देखा कि एक और जोडा जो वहीं बैठा चुम्मा-चाटी में लगा था, उसमें से लडका हमारी तरफ़ आया। विभा सकुचा कर मेरे से अलग हो कर बैठ गई। मैं भी थोडा घबडाया कि यह लडका अपनी माल को छोड कर क्यों आ रहा है। उसने हमारे पास आ कर हमें नमस्कार किया। वो २७-२८ साल का सांवला, दुबला-पतला लडका था। उसने अपना परिचय दिया कि उसका नाम संदीपन है, विशाखापट्टन में हीं बैंक में काम करता है और वो अपने बीवी, रुमी, के साथ पुरी घुमने आया है। उसने फ़िर हमसे हमारा परिचय पूछा तो मैंने अपने को पटना का रहने वाला, विभा को अपनी पत्नी बताया और कहा कि हमलोग भी यहाँ घुमने आए हैं। फ़िर उसने अपने आने का उद्देश्य बताया और फ़िर एक अजीब प्रस्ताव रखा। उसने कहा कि वो चाहता है कि वो अपनी बीवी को चुदते हुए देखे। वो दोनों यहाँ पिछले दो दिन से आ रहे हैं और यहाँ जोड़ों को चुदाई करते देखते हैं। अब उसका मन था कि वो अपनी बीवी को ऐसे ही देखे सो आज वो यहाँ किसी ऐसे जोड़े के लिए इंतजार में बैठा था जो शक्ल-सूरत से थोडा उत्तर-भारतीय लगे औए जिससे फ़िर उन दोनों के मुलाकात की संभवना न के बराबर हो। उसने जब मुझसे यहा कहा कि वो चाहता है कि मैं उसकी बीवी को चोदूँ तो मेरा दिमाग झन्ना गया। मैंने एक नजर विभा पर डाली तो वो बोला, "ओफ़-कोर्स... अगर भाभी जी परमिशन दें तब..."। विभा का चेहरा देखने लायक था। मुझे यह एक ऐसा मौका दिखा जो शायद मेरे जीवन में फ़िर न आए सो मैंने विभा से पूछा, "क्या बोलती हो?" पर वो तो चुप रही फ़िर सोंच कर बोली, "मुझे नहीं करना ऐसा कुछ..."। संदीपन तुरंत बोला, "नहीं.. नहीं भाभी जी, आप गलत समझ रही हैं... आपको कुछ नहीं करना बस मैं चाहता हूँ कि आपके मिस्टर एक बार रूमी के साथ सेक्स करें और मैं बैठ कर देखूँ। प्लीज भाभी जी, बस १५-२० मिनट लगेगा ज्यादा से ज्यादा"। वो चुप रही और नजर नीचे कर ली तो मैंने संदीपन से पूछा, "आपने अपनी वाईफ़ से पूछा है इस बार में, वो तैयार होंगी"। वो अब बोला, "हाँ... यहाँ से होटल जा कर हम जब सेक्स करते हैं तो खुब मजा आता, और जब बाद में मैंने उसको अपना इरादा बताया तो वो तुरंत रेडी हो गई"।


 मैंने एक नजर अब उसकी बीवी पर डाली जो हम सब से करीब १० फ़ीट दूर बैठी थी और हमारी तरफ़ देख रही थी। दुबली-पतली से लम्बी लडकी दिखी वो, गहरे रंग का सलवार-सूट पहने... रोशनी कम होने से नाक-नक्श इतनी दूर से साफ़-साफ़ नहीं दिखे पर लगी ठीक-ठाक। मैंने हाँ कह दिया और मेरा जवाब सुनते हीं वो रूमी तो इशारा किया और वो तुरंत उठ कर हमारी तरफ़ आ गई। उसने अपनी बीवी से हमारा परिचय कराया और फ़िर अपनी भाषा में उसको कुछ बताया जो मैं समझ नहीं सका। उसकी बीवी ने अपना दुपट्टा उतार कर उसको दिया और वो उस दुपट्टे को वहीं बालू पर बिछा दिया। जब रूमी उस दुपट्टे पर बैठने लगी तो मैंने कहा, "आप तैयार हैं इसके लिए भाभी जी?" तो उसने मुस्कुराते हुए अपना सर हाँ में हिलाया। रूमी बहुत दुबली थी, करीब ५’७" लम्बी जिस वजह से और ज्यादा दुबली लग रही थी। उसकी चुचियाँ बहुत बडी थी उसकी बदन की चौडाई के हिसाब से। ३६ साईज की पर ब्रा का कप सबसे लार्ज उसको फ़िट होता होगा। विभा थोडा से करीब २ फ़ीट पीछे खिसक गई थी जब दुपट्टा बालू पर बिछाया गया था। संदीपन उसी दुपट्टे पर बैठ गया था। मैंने विभा को गाल पर हल्के से चुम्मा लिया और फ़िर उस दुपट्टे पर रूमी के पास आया। उसने अपनी बाँहें फ़ैलाई और मैंने भी जवाब में उसको अपने सीने से लगा कर उसके होठ चुमने लगा। वो खुब मस्त हो कर मेरे चुम्बन का जवाब दे रही थी। मैंने अब उसकी चुचियों पर अपने हाथ फ़ेरने शुरु किए तो वो मस्त हो कर और जोर-जोर से चुमने लगी। मैंने अब उसको अपने बदन से अलग किया और फ़िर उसके पीठ पर अपने हाथ ले जा कर कुर्ते का हुक खोलने लगा। छः हुक खुलने के बाद उसका कमर की चमड़ी मेरे हाथ से सटी। मैंने उसके कुर्ते को उसके बदन से अलग कर दिया। रूमी की बडी-बडी चुचियाँ सफ़ेद ब्रा में शान से सर उठाए खडी थी। मैंने उसके सपाट पेट पर हाथ फ़ेरते हुए अपने हाथ को उसके सलवार की डोरी को खोजा तो पाया कि उसकी सलवार में डोरी नहीं था बल्कि एलास्टीक था। मैंने उसकी सलवार को नीचे सरारा और उसने अपनी चुतड ऊपर उठा कर मुझे सहयोग किया। अगले कुछ पलों के बाद दुबली-पतली लम्बी रूमी चाँदनी रात में अपनी नंगी चूत के साथ मेरे सामने बैठी थी। उसने कोई पैन्टी नहीं पहना हुआ था।

मुझे दिखाते हुए उसने अपने जाँघ खोले तो मुझे उसकी चिकनी चूत दिखी। वो मुस्कुराते हुए अपने हाथ को पीछे ले जा कर अपने ब्रा का हुक खुद खोली और ब्रा को बदन से अलग करके अपने चुचियों को दो बार खुब प्यार से सहलाया। मैंने उसको फ़िर से अपनी तरफ़ खींचा और कहा, "मस्त बौडी है मेरी जान...."। मेरी बात सुनकर उसने एक बार मेरी विभा को देखा फ़िर बोला, "आपकी बीवी भी सुन्दर है.... पर ठीक है, सब को दूसरे की बीवी अपनी वाली से अच्छी लगती है। संदीपन से पूछिए तो वो कहेगा कि आपनी बीवी ज्यादा सुन्दर है"। मुझे उम्मीद नहीं थी कि रूमी ऐसे खुल कर मस्त बोलेगी। मुझे तो मजा आ गया। मैंने उसे धीरे से दुपट्टे पर सीधा सुला दिया और उसकी बडी-बड़ी चुचियों पर पिल गया। मैं उन दोनों फ़ुटबौल को अपने दोनों हाथों से मसल रहा था और वो मेरे जोर को देख कर बोली, "धीरे-धीरे.... दर्द होता है"। मैंने उससे पूछा, "इत्ती बड़ी-बडी ऐसे पतले २०" कमर पर ले कर चलती कैसे हो?" उसने कहा, "२० नहीं २३" कमर है मेरी अब... शादी के पहले २२" की थी... अब भगवान जब ऐसा दे दिए हैं तो हमलोग क्या कर सकते हैं"। मैं अब उसकी चुचियों को चुस रहा था और वो सित्कारी भर रही थी। मेरा लन्ड मेरे प्जीन्स में फ़नफ़नाया हुआ था। मैंने जब उसकी चूत को चुसने के लिए अपना मुँह नीचे किया तो वो बोली, "मुझे भी लौलीपौप दीजिए न भाई साहब..."। मैं तुरंत उठा और अपने कपडे झटपट खोल दिए और अपना लन्ड उसके मुँह के सामने कर दिया। वो अब मुझे सीधा लिटा दी और फ़िर मेरे ऊपर ऐसे चढ गई कि उसकी पीठ मेरे चेहरे की तरफ़ हो गई। फ़िर वो झुकी और मेरे लन्ड को अपने मुँह में डाल कर चुसने लगी। उसकी चिकनी चूत अब मेरे चेहरे के सामने थी। काली-पतली लम्बी फ़ाँक देख मैं समझ गया कि वो 69 के चक्कर में हैं सो मैं भी उसकी चूत को चुसने लगा। मैं बीच-बीच में उसकी चूत में अपनी एक ऊँगली घुसा देता था। करीब ३-४ मिनट की चुसाई-चटाई के बाद वो मेरे ऊपर से उठी। वो अब पूरा से गर्म थी। उसकी कराह ने मुझे उसका हाल बता दिया था।  

 
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FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--18

 FUN-MAZA-MASTI
 छोटी बहन के साथ--18

 मैंने विभा को कहा, "बहुत मस्त फ़िल्म थी.... मजा आ गया..., चल मेरी जान अब एक बार चूस कर निकाल दे मेरा पानी भी... तीन-चार दिन बाद तो तेरी बूर चूस कर निकालेगी मेरा पानी..." और मैंने विभा को आँख मारी। वो शर्माते हुए उठी और मेरे लन्ड को मुँह में लेकर चूसने लगी। अब तक वो लन्ड चूसाई में सही तरीके से ट्रेनिंग कर ली थी। अगला पाँच दिन मुझे कुछ टैक्स संबन्धित केस की वजह से वकीलों और दफ़्तरों में गुजरे... सवेरे घर से निकता तो थका हारा ८-९ बजे तक लौटता और फ़िर खा-पी कर सो जाता। विभा की सील तोडनी है, मुझे याद तो था पर मैं फ़्रेश मूड से उसको चोदना चाहता था। वो मेरी कुंवारी भोली-भाली बहन थी जिसको मुझे रंडी बनाना था। संयोग ऐसा हुआ कि जब मैं फ़्री हुआ तो मुझे पुरी जाने का संयोग बन गया। मेरा एक पैतृक मकान पुरी में था जिसके दोनों किरायेदार ने मुझे बुलाया था। चार महिने से मैं गया नहीं था सो किराया भी काफ़ी बाकी हो गया था और मकान में कुछ रिपेयर का भी काम हुआ था जो मुझे देख कर किरायदारों से हिसाब कर लेना था। वहाँ करीब एक सप्ताह लग जाना था। मैं अब इतना इन्तजार नहीं करना चाहता था। मैंने विभा को भी साथ चलने को कहा। वो जाना नहीं चाहती थी तो मैंने कहा, "चलो न साथ में वहीं रहेंगे होटल में... वहाँ तुम मेरी बीवी रहना और हमलोग वहीं सुहागरात मनाएँगे। नये महौल में तुम्हें झिझक-शर्म भी नहीं लगेगा"। मेरे ऐसे समझाने से वो तैयार हो गई। उसके पास वैसे भी कोई चारा था नहीं। मैं लगातार कुछ समय से उस पर चुदाने के लिए दबाब बनाए हुए था। हम पहले बस से पटना आए और फ़िर पटना में हमारे पास समय था करीब ६ घन्टे का। मैंने उसको सम्झा दिया कि अब इस शहर में तो कोई हमलोग को पहचानता नहीं है सो अब वो थोडा खुल कर मेरे साथ घुमे जैसे कोई बीवी अपने नये पति के साथ घुमती है। मैंने उसकी झिझक तोडने के लिए मौर्या कौम्प्लेक्स में उसको साथ ले कर सेक्सी किस्म की ४ ब्रा-पैन्टी खरीदी। दुकान में दो महिलाएँ खरीदारी कर रही थीं और दो सेल्स-गर्ल तथा उस दुकान का मालिक एक बुजुर्ग था। मैंने दो नन्हीं सी बिकनी-टाईप ब्रा-पैन्टी, एक लाल और एक काली खरीदी... और फ़िर कुछ बहुत हीं सेक्सी और हौट अन्डर्गार्मेन्ट्स माँगे।

 वहाँ मौजुद महिलाएँ जो ३५-३६ के आस-पास की थी, एक बार मेरे और विभा पर नजर डाली और फ़िर मुँह फ़ेर लिया। उस सेल्स-गर्ल ने तब एक कार्टून निकाल कर हमदोनों के सामने रख दिया कि यह सब इम्पोर्टेड है, थोड़ा महँगा है पर स्पेशल है। मैन एगौर किया कि वो दोनों महिलाएँ अब हमे कनखियों से देख रही थीं और हमारे बारे में हीं फ़ुसफ़ुसा रही थी। मैंने विभा को इशारा किया तो वो उस कार्टून से कुछ पैकेट निकाली। सब पैन्टी हीं था.... तो मैंने प्रश्नवाचक नजरों से सेल्स-गर्ल को देखा तो वो मुस्कुराते हुए बोली, "ब्रा भी मिल जाएगा... सब के सेट के साथ है, हमलोग उन्हें अलग-अलग रखते हैं... कुछ लोग अकेले हीं खरीदते हैं इन्हें मंहगे होने की वजह से, और कुछ अलग-अलग तरह के सेट बनाते हैं मिक्स-ऐन्ड-मैच करके"। विभा इन नन्ही पैन्टियों को देख कर अचंभित थी। असल में मैं भी पहली बार ऐसी पैन्टी देख रहा था जिसमें कुछ छुपने की गुन्जाईश ही नहीं थी। मैंने एक गुलाबी पैन्टी पसन्द की, जो सिर्फ़ मोटा धागा था जिसमें सामने की तरफ़ एक ईंच का एक टुकड़ा सिला हुआ था जो शायद बूर के ऊपरी भाग को जहाँ लड़कियाँ मसल-सहला कर मस्त होती हैं, बस उसी भाग को ढक सकता था। विभा उसको देख कर धीरे से बोली, "यह क्या चीज हुआ"। सेल्स-गर्ल को तो सामान बेचना था, मेरी हाँ में हाँ मिलाते हुए बोली, "अरे भाभी जी... ये सब आयटम हनीमून कपल्स में बहुत हिट है, फ़िर अगर भैया को पसन्द है तो लेने दीजिए... अब तो यह सब उन्हीं की मर्जी का रहे तो अच्छा है न"। मैंने भी कहा, "सही तो है... एक-आध तो ऐसा अभी होना चाहिए"। विभा बुदबुदाई, "इसको धो कर सुखाना भी एक समस्या है"। सेल्स-गर्ल ने चट से उसको अलग करते हुए पूछा, "इसके साथ की गुलाबी ब्रा दूँ या कोई और गहरे रंग का सेट बना दूँ?" मैंने कहा, "गुलाबी वाले हीं दीजिए, वैसे भी गुलाबी दुनिया की हर लडकी का फ़ेवरेट कलर है"। फ़िर मैंने एक जालीदार थौंग पसन्द किया नीले, पीले और नारंगी रंग का हल्की कढाई किया हुआ और उसके साथ का हीं ब्रा भी लिया। चारों कपड़ों की कुल कीमत ७००० हुआ, जो मैंने दे दिया और फ़िर विभा का हाथ अपने हाथ में ले कर दुकान से बाहर आ गया और एक लीवाईस की दुकान से एक डेनीम की कैप्री और एक लगभग स्लीव-लेस टी-शर्ट खरीदा, फ़िर एक होटल में खाने के बाद हम ट्रेन पकडने स्टेशन आ गए। ट्रेन का इंतजार करते समय मुझे याद आया कि मैंने पहली बार अपनी बहन स्वीटी को एक ट्रेन में हीं चोदा था और वही लम्हा मुझे बहनचोद बनाया था। अब मैं सोच रहा था कि अगर मैंने टिकट एसी३ की जगह एसी१ में लिया होता तो आराम से ट्रेन में हीं उसी रात को विभा की सील तोडता। मैंने स्टेशन पर टिकट अपग्रेड करना चाहा, पर उस ट्रेन में एसी१ था हीं नहीं और एसी२ में अपग्रेड होने से फ़ायदा नहीं था, मुझे पता था कि वहां भी दो और लोग होंगे और विभा जैसी लडकी अपना सील टुडवाते हुए चीखे नहीं हो नहीं सकता है। मुझे पता था कि उसके छुईमुई बने रहने से उसकी बूर बहुत कसी हुई है २० साल की उमर होने के बाद भी। सो मैंने तय किया कि लौटने के समय ट्रेन में बहन को चोदने का काम पूरा कर लुँगा, क्योंकि तब तक विभा होटल के बन्द कमरे में कई बार चुद कर बिना चीखे-चिल्लाए चुदाने लायक बन चुकी होगी। फ़िर ट्रेन आने के बाद हम उस में बैठ कर पुरी की तरफ़ चल दिए।

 रास्ते में हीं मैंने उसको बता दिया कि अब वो मेरी बीवी की तरह बर्ताव करे जिससे सब को लगे कि हम दोनों नया शादी-शुदा जोडा हैं। विभा भी अब समझ गई थी और थोडा खुलने लगी थी। ट्रेन में हम एक नौर्मल जोडे की तरह रहे और फ़िर अगली सुबह करीब ९ बजे पुरी पहुँच गए। इसके बाद हम एक थ्री-स्टार बढिया होटल में रुके, और फ़िर मैं करीब नहा-धो और हल्का नाश्ता वगैरह करके हम करीब ११ बजे अपने किरायेदारों से मिलने चल पडे। मैंने विभा से कहा कि वो अब तो यहाँ एक सेक्सी माल के रूप में अपने को ढाले तो उसने मुझसे पूछा कि वो क्या पहने। मैंने उससे कहा कि वो बिना ब्रा के वही नई वाली कैप्री और टी-शर्ट पहन ले। विभा की लम्बाई, मेरी छोटी बहन स्वीटी जिसे मैं पहले हीं चोद चुका था, उससे कम है पर बदन स्वीटी से ज्यादा भरा हुआ है...उसकी चूच्ची ३६ साईज की है। उसकी चूच्चियाँ टी-शर्ट में कस गई और ब्रा नहीं पहनने से उसके निप्पल दिखने लगे। अब मेरी बहन असल में एक माल दिख रही थी। पुरी वैसे भी एक हनीमून वाली जगह है और वहाँ अक्सर ऐसे जोडे दिख जाते हैं। मेरे साथ जब विभा चल रही थी तब उसकी चूच्ची ऊछल रही थी, और होटल से निकलते समय सब की नजर उसकी ऊछलती चूचियों पर टिक रही थी। मैंने टैक्सी ली और विभा के साथ निकल गया। जल्दी हीं हम अपने मकान पर थे। दो मंजीले मकान के ऊपर वाले हिस्से में एक बुजुर्ग दम्पति रहते थे। साल भर की नौकरी और बची थी। अपनी बेटी की शादी कर चुके थे और अब बेटे की शादी करने वाले थे। नीचे के हिस्से में एक बैंक मैनेजर रहते थे जिनके तीन बच्चे थे, दो लडकियाँ और एक सबसे छोटा लडका। भाभी जी मस्त थी, सो मैं हमेशा नीचे हीं बैठता था और ऊपर वाले किरायेदार को नीचे हीं बुला लेता था। विभा को लेकर जब मैं पहुँचा तो मैंने उसका परिचय अपनी गर्लफ़्रेन्ड की तरह कराया। सब मेरी बहन को गहरी नजर से देख रहे थे कि बिना शादी किए वो मेरे साथ घुम रही है। मैंने कहा, "इसका परिवार बहुत मौड है... सो मैंने जब कहा कि मैं पुरी जा रहा हूँ, ये दोनों भाई-बहन भी साथ में घुमने चले तो इसकी मम्मी ने इसके भाई को रोक लिया कि दोनों बच्चे एक साथ चले जाएँगे तो घर सुना हो जाएगा"। भाभी जी मुस्कुराते हुए बोली, "अरे तो बेटी को घर पर रोक कर बेटा को भेज देते..."। मैंने भी उनके बात को समझते हुए कहा, "हाँ... पर तब मुझे मजा नहीं आता न... मुझे तो विभा के साथ हीं मजा आएगा यहाँ पर...", इस बात पर सब समझ गए और माहौल हँसीवाला बन गया।

 हम लोग करीब दो घन्टे वहाँ रहे और फ़िर करीब ३ बजे होटल आ गए। होटल लौटते समय तक विभा को ऐसे अपने को सब की आँख का तारा बनते हुए देख कर अच्छा लगने लगा था और अब वो भी मजे से अपनी चूची ऊछाल कर चल रही थी। कमरे में आने के बाद... मैंने उसको कहा, "अब सील तुडवा लो फ़िर हम लोग मजा लेंगे।" उसने कहा, "अगर कोई होटल का आदमी हीं किसी काम से आ गया तब..., रात में करेंगे तो ठीक रहेगा"। मैंने उसको समझाया, "कोई नहीं आएगा... होटल का सब जानता है कि जवान लडका-लडकी जब कमरे में हो तो क्या होता है, वो बिना हमारे बुलाए यहाँ नहीं आएँगे। अगर कुछ होगा तो रुम के फ़ोन पर बात करेंगे।" मैंने उसको अपने तरफ़ खींच कर उसको चुमने लगा फ़िर कहा, "और अगर कोई आ गया तो अच्छा है... कोई गवाह तो होगा कि मेरी बहन विभा अब कुँवारी नहीं बची..."। विभा का चेहरा शर्म से लाल हो गया मेरी इस बात को सुनकर। मैं अब विहा को अपनी गोदी में बिठा कर चुमने लगा था और वो भी अब साथ में मुझे चुम्मा दे रही थी। मैंने उसकी टी-शर्ट के ऊपर से हीं उसकी मस्त गोल चुचियों को सहलाना शुरु कर दिया था और वो अब जोर-जोर से मुझे चुम्मा लेने लगी थी। अपने हाथ नीचे सरकाते हुए मैं ने उसकी कैप्री के बटन खोल दिए और उसकी चेन को सरार दिया जिससे उसकी कैप्री इतना ढीला हो गई कि मैं अपना हाथ भीतर घुसा सकूँ। उसकी झाँटों को सहलाते हुए मैं ने उसकी बूर की फ़ाँक को छुआ और वो सिहर उठी। मैंने अब उसको अपने से अलग किया और फ़िर पहले खुद नंगा हो गया। विभा सामने बैठ कर देखती रही। फ़िर मैंने उसके कपडे उतार दिए। दोनों भाई-बहन अब मादरजात नंगे हो गए थे और फ़िर मैंने उसका हाथ पकडा और बिस्तर पर ले आया। मैं अब जल्दी से जल्दी उसकी सील तोड लेना चाहता था। वैसे भी उसकी बूर का रोँआँ-रोंआँ मेरा देखा हुआ था। मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर चढने की तैयारी करने लगा। कुँवारे लडकी तो सिर्फ़ चुदाई की बात के अनुमान से हीं गीली हुई जा रही थी। विभा ने थोडा घबड़ाते हुए पूछा, "बहुत दर्द होगा न भैया...?" मैंने प्यार से उसका होठ चुमा और कहा, "हट पगली... कोई दर्द नहीं होगा। इस दर्द से डरोगी तो माँ कैसे बनोगी? हर लडकी को माँ तो बनना ही होता है और बच्चा पैदा करने में जितना दर्द होता है उसकी तुलना में आज वाला दर्द कुछ नहीं है। सबसे बडी बात कि जब लडकी को लंड से चोदा जाता है तो पुरुष-प्रधान समाज की वजह से लगता है कि मर्द ही लडकी का शरीर भोग लिया है... असल में लडकी हीं मर्द को भोगती है। अंत में मेरा सारा वीर्य जो मेरे शरीर में बनता है अंत में आज तुम्हारे शरीर में चला जाएगा। तुम तो चाहो तो एक साथ ८-१० लडके को ठन्डा कर सकती हो, पर लड़का एक साथ ३-४ या ज्यादा-से-ज्यादा ५ लड़की को चोदते-चोदते टन्न बोल जाएगा।" विभा सब बात सुन कर बोली, "मेरी तो एक के डर से हालत पंचर है... पर अब कोई गुन्जाईश बाकी नहीं है अब तो आप बिना मेरे में घुसे मानिएगा नहीं... आ जाइए" कहते हुए वो खुद अपना जाँघ खोल दी और उसकी झाँटों के झुरमुट से उसकी चूत की फ़ाँक चमकने लगी।

 मैं अब उसके ऊपर आ गया और फ़िर खुब आराम से उसके बदन को अपने बदन से दाब कर झकड लिया। वो मुझे इस तरह से दबा कर पकडते देख बोली, "ऐसे क्यों जकड़ रहे हैं भैया... मैं अब भाग थोडे रही हूँ, थोडा साँस लेने लायक तो रहने दीजिए भैया"। मैंने उसके छाती पर अपने दबाव को कम करते हुए कहा, "अब तो ठीक है...", वो कुछ बोली नहीं तो मैंने उसको कहा, "अपने हाथ से मेरे लन्ड को अपनी छेद पर लगाओ न बहन"। वो थोडा झिझकते हुए वैसा की पर अपनी आँख बन्द कर ली। मैंने कहा, "आँख खोल कर भरपूर नजर से देखो मेरा चेहरा.... अब जब मैं तुम्हारे में घुसाऊँगा तो तुमको देखना चाहिए कि किसका लन्ड तुमको चोद रहा है। आज हीं नहीं, जब भी कभी किसी से चुदो तो जब उसका लौडा बूर की भीतर घुस रहा हो तो जरुर उस मर्द की आँख में आँख डाल कर देखो। लड़की का यह अधिकार है कि वो जाने कि कब कौन उसको चोद रहा है"। वो आँख खोल ली और नजर मिलाई तो मैंने अपना लन्ड उसकी बूर में घुसाना शुरु कर दिया। सुपाडा के भीतर घुसते ही उसको दर्द महसूस होना शुरु हुआ तो वो अपना बदन ऊमेठने लगी ताकि मेरे नीचे से निकल सके, पर तभी मैंने उसको एक क्षण के लिए कस के दबाया और जब तक वो कुछ समझे, मैंने अपना लन्ड एक झटके से उसकी कच्ची कुँवारी बूर में पेल दिया। वो दर्द से बिलबिलाई पर ऐसी बच्ची भी न थी कि अपनी पहली चुदाई बरदास्त न कर सकती, सो एक घुटी हुई सी चीख उसके मुँह से निकली पर वो जब तक कुछ समझे मैंने पहले धक्के के तुरंत बात एक लगातार अपने लन्ड को बाह्र खींच कर दो और करारे धक्के उसकी बूर में लगा दिए जिससे कि उसकी बूर की झिल्ली अच्छी तरह से फ़ट गई और तब मैंने देखा कि उसकी आँखों के कोर से दो-दो बुँद आँसू बह निकले। उसकी ऐसी दशा देख मुझे दया आ गई और मैं ने अपने लन्ड को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया और प्यार से उसके होठ चुमने लगा। उसने भी रोते हुए कहा, "इसी के लिए न भैया आप इतना दिन से बेचैन थे, देख लीजिए आज आपसे हीं अपना पहली बार करवाई हूँ", कहते हुए उसने मुँह एक तरफ़ फ़ेर कर एक जोर की हिचकी ली और फ़फ़क कर रोने लगी। मैंने उसको पुचकारते हुए कहा, "तुम्हें अफ़सोस होगा तो मुझे बहुत पाप लगेगा, प्लीज तुम रोओ मत... तुम मेरी बहन हो"। वो तब अचानक मेरी तरफ़ मुडी और फ़िर बोली, "अब छोडिए यह सब बात... अब ठीक से मुझे कर दीजिए कि पता चले कितना मजा है इस काम में कि दुनिया का सब लोग इसी के चक्कर में है"। अब वो फ़िर से मेरी तरफ़ घुमी और मेरे से चिपकी। मैंने अब सब ठीक देख कर एक बार फ़िर से उसको अपने बाँहों के घेरे में ले कर, फ़िर से अपने को सही तरीके से उअस्के ऊपर करके अपने हाथ से उसकी सील टुटी बूर में अपना लन्ड घुसा दिया और फ़िर हल्के-हल्के चोदने लगा। जल्दी हीं उसके भीतर भी जवानी की आग झड़की और वो भी मेरे धक्के से ताल मिला कर अपने कमर ऊछालने लगी। कमरा में अब हच्च-हच्च... फ़च्च फ़च्च की आवाज गुँज रही थी। वो भी अब आह ओह करने लगी थी और मैं उसके जैसी छुईमुई लडकी के मुँह से निकल रहे ऐसे आवाज को सुन कर जोश में आने लगा था। जल्दी हीं मैंने उसकी जोरदार चुदाई शुरु कर दी और वो अब कराह उठी और फ़िर थोडा शान्त हो गई। मैं समझ गया कि उसको चरम सुख मिल गया है... अब मैंने १०-१२ और तेज धक्के लगाए कि मेरे लन्ड से भी पिचकारी छुटने लगी। बिना कुछ सोंचे मैंने अपनी बहन की ताजा-ताज चुदी हुई बूर के भीतर अपना सारा माल ऊडेल दिया। और उसके बदन पर निडः़आल सा पड गया। कुछ सेकेन्ड हम दोनों ऐसे ही शान्त पडे रहे और फ़िर जब मैंने अपना लन्ड बाहर खींचा को "पक" की आवाज हुई और मेरा सफ़ेद माल उसकी बूर से बाहर बह के उसकी गाँड़ की तरफ़ फ़ैलने लगा। मैंने एक बार फ़िर से उसको चुमा और बोला, "बधाई हो विभा डीयर,... अब तुम एक जवान लड़की बन गई हो, पहले जवान बच्ची थी, अब असल "माल" बन गई हो... बधाई हो"। मेरी बात सुनकर वो लजा गई और बोली, "सब आपका किया हुआ है"।

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FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--17

 FUN-MAZA-MASTI
 छोटी बहन के साथ--17

 विभा से समीना का दर्द बर्दास्त नहीं हुआ तो वो मुझसे बोली, "भैया... ये दोनों उस बेचारी का जान ले लेंगे"। उसकी आवाज रूआँसी हो गई थी। मैंने उसको समझाया, "धत्त पगली..., देखो चुप-चाप... सीखो यह सब..."। तभी बेचारी को तकलीफ़ में देख कर सगीर उसके ऊपर से उतर गया और तब समीना भी हड़बडाते हुए अब्दुल के लन्ड के ऊपर से उठी और जोर-जोर से साँस खींच कर अपने को थोडा आराम में किया और फ़िर जब वो अच्छा महसूस करने लगी तब अब्दुल ने उसको एक बार फ़िर से अपने सीने से चिपटा कर उसको चूमने लगा और अपने लन्ड को उसकी बूर की फ़ाँक पर रगडने लगा। समीना समझ गई कि उसको अभी और चुदाना होगा, सो वो भी अपने कमर को उपर उठाई जिससे कि अब्दुल आराम से अपने लन्ड को उसकी बूर में घुसा दिया। अब अब्दुल के ऊपर लेट कर समीना अब्दुल को चोदने लगी। तभी एक बार फ़िर से सगीर समीना की गाँड को सहलाने लगा और समीना एक बार सर सर घुमा कर सगीर को देखी...। इसके बाद सगीर ने उसकी खुली हुई गाँड में अपना लन्ड घुसा दिया। सगीर और अब्दुल एक बार फ़िर उसकी जवानी लूटने लगे थे। पर लगातार धक्का लगते रहने से दोनों समीना की दोनों छेद के भीतर हीं झडे और जब दोनों ने अपना-अपना लन्ड बाहर निकाला तो समीना पसीने से लतपथ अपने गाँड और बूर में मर्दाना रस भरे हुए बिस्तर पर निढाल सी पड गई। रूही और शफ़ा भी पास में लेटी समीना की ऐसी चुदाई देख रही थी। उन दोनों की बूर भी सफ़ेद रस से सराबोर थी। समीना ने अपना हाथ उन दोनों की तरफ़ बढाया तो उन दोनों से उसका हाथ थाम लिया... लगा तीनों एक दूसरे को सांत्वना दे रही हैं। तभी मासीमा ने सब लडकियों से कहा, "अब चलो तुम लोग, नहा-धो कर कुछ खा कर आराम कर लो... अब रात में एक बार फ़िर से एक-एक के साथ सो लेना... कल से काम पर लगा दुँगी तुम सब को"। फ़िर सब लडकियाँ यह सुन कर उठी, और अपने कपडे समेटने लगी। तभी मासीमा को नसरीन और जुबैदा का विरोध याद आया और उसने फ़रमान जारी किया, "केवल तुम दोनों बहन यहाँ रुकोगी और सब से बारी-बारी से चुदोगी फ़िर खाना मिलेगा... साली तुम दोनों बहनों को रंडी नहीं बनना था न... सो अब देखो कि कैसे तुम दोनों को महारानी बनाती हूँ"। उसने नसरीन की साडी उठा कर उससे दो पट्टी फ़ाडी और फ़िर फ़रीद को देते हुए बोली, "दोनों बहन की आँख पर पट्टी बाँध कर चोदो लगातार जब तक साली की अकड नहीं खत्म होती है। पता भी न चले दोनों को कि कब कौन चोद रहा है हरामजादी को... मुझे थप्पड़ मारती है कुतिया" कहते हुए उसने नसरीन को एक थप्पड़ लगा दिया और बाकी लडकियों को ले कर चली गई।

 दोनों बहन अब गिडगिडाने लगी थी, जब तक सब साथ थी कुछ हिम्मत भी था... अब तो दोनों नंगी पाँच मुस्टन्डों से घिरी थी और सब हँसते हुए अपना लन्ड हिला रहे थे। फ़रीद जो उन सब का लीडर था उसने कैमरा को एक स्टैन्ड पर फ़िक्स कर दिया और दोनों को बाकियों ने बिस्तर पर ला पटका। दोनों का सर बीच बिस्तर पर था और पैर एक-दुसरे से ऊलटी दिशा में बिस्तर से नीचे लटक रहा था। फ़रीद और सगीर दोनों की तरफ़ पट्टी ले कर बढे और दोनों आने वाले समय को याद कर के जोर-जोर से रो पडी। जुबैदा तो थोडा शान्त भी थी... जो हो रहा था होने दे रही थी, पर उसकी बडी बहन नसरीन अपने सर झटक रही थी जिससे उसकी आँख पर पट्टी बाँधने के लिए सगीर को सज्जाद की मदद लेनी पडी। दोनों अब फ़ूट-फ़ूट कर रो रही थीं और उन सब को अल्लाह का वास्ता दे रही थी।। मेरी बहन विभा की आँखों में आँसू भर आए... बेचारी मेरी तरफ़ देख कर बोली, "बहुत दर्दनाक है... कैसे कसाई जैसा इन दोनों को सब मिल कर पकडे हुए हैं। बेचारी दोनों को ये लोग अल्लाह के नाम पर भी नहीं छोड रहे..."। मैंने कहा, "बंग्लादेश जैसे गरीब जगह में मुस्लिम लडकी इतने उम्र तक कुँवारी बची यही अल्लाह की कृपा समझो... मुसलमान के लिए लडकी एक खेत है, जिसको कोई भी मर्द जब और जैसे चाहे जोत सकता है। उनके यहाँ लडकी के लिए यही शब्द का प्रयोग है... अब दोनों खेत को जोतने की तैयारी हो रही है... देखो और मजे लो"। अब वो सीधे मुझसे बोली, "आप भी तो एक लडका हैं... आप ऐसे किसी लडकी को कर सकते हैं?" मैंने उसको ऊसकाते हुए कहा, "क्यों नहीं... अभी कहोगी तो तुम्हारा खेत जोत देंगे... मेरा लन्ड तो तुम्हारे लिए कब से बेचैन है... तुम तो जानती हो कि हमको बहन चोदने में ज्यादा मजा आता है... आ जाओ एक बार इस लन्ड पर खुद से चढ जाओ... छोडों पीरीयड सीरीयड का चक्कर..."। उसने अब थोडा मुस्कुराते हुए अपना नजर फ़िर से फ़िल्म की तरफ़ कर लिया.. जहाँ मासूम अपने ९" के लन्ड को करीब ६" तक जुबैदा की चूत में घुसा कर उसको चोद रहा था और उसे समझा रहा था कि वो उसके भीतर आधा हीं घुसाया है, जबकि उसकी बड़ी बहन को पलट कर उसकी कसी हुई गाँड पर अब्दुल अपना लन्ड दबा रहा था और वो दर्द से बिलबिला रही थी। सगीर उसकी चुतड़ को फ़ैलाए हुए था और सज्जाद उसके बदन को बिस्तर पर दबा कर स्थिर किए हुए था। विभा यह देख कर बोली, "ओह राम.... बेचारी को कम से कम जैसे उसकी छेद को खोले थे वैसे खोल कर घुसाते... कैसे छटपटा रही है... ओह बेचारी"। मैंने कहा, "उसका सजा मिल रहा है थप्पड़ चलाने का..."। नसरीन बार-बार अपना पैर बिस्तर पर पटक रही थी और किसी तरह से नीचे से बच निकलने की फ़िराक में थी, पर उसको तीन मुस्टन्डे पकड कर बिस्तर पर दबाए हुए थे और एक मादरचोद उसकी गाँड़ में लन्ड घुसाने पर भिरा हुआ था। बहुत कशमकश के बाद अब्दुल अपना सुपाडा भीतर घुसा दिया... नसरीन जोर-जोर से चीख रही थी और कभी अल्लाह की दुहाई देती तो कभी अपने माँ-बाप को बचाने के लिए पुकारती। अब सगीर ने उसका चुतड छोड दिया और उसकी चूचियों के नीचे अपना हाथ घुसा कर उसकी चूचियों को पकड़ लिया। अब्दुल अब उसकी गाँड मारने लगा था और फ़िर वो पूछा, "बोल... अब भी कुछ कमी है तुम्हारे रंडी होने में... तो वो भी पूरा कर दूँ? हरामजादी... अब इसी छेद से तुम्हारे बाप को जो पैसा दिया है वो वसूल होगा साली। तुम दोनों बहन को तो वही माँ-बाप भेजा है इस चकलाघर पर रंडी बनने के लिए। अभी बात कराता हूँ तुमको तेरे बाप से", और उसने सगीर को ईशारा किया।

 सगीर उठ कर एक फ़ोन से दो-तीन बार की कोशिश के बाद उसके बाप को फ़ोन लगाया और उसको गाली देते हुए बोला, "साले हरामी, अपनी बेटी को समझा के नहीं भेजा है यहाँ... हरामजादी कुतिया यहाँ नौटंकी कर रही है। साले अगर वो हमलोग का पैसा नहीं वसूल करवाई तो आ कर साले तेरी गाँड फ़ाड देंगे.... लो साले समझाओ अपनी बेटी को..." और उसने रोती हुई नसरीन के कान में फ़ोन सटा दिया, "ले बात कर अपने बाप से... बहुत पुकार रही है... बोलो आ कर बचा ले अब तुमको"। नसरीन रोती रही फ़िर जब उसको लगा कि फ़ोन सच में कान से लगा हैं तो रो-रो कर बोलने लगी, "अब्बू.... हमें बचा लो, यहाँ से ले जाओ... यहाँ हमलोग को बहुत दर्द दे रहे हैं सब मिल कर.... ..... ....... ..... हाँ पाँच लोग हैं... हम दोनों बहन का आँख भी बांध दिए हैं.... ..... ..... हम दोनों बहुत कोशिश किए पर अपनी... नहीं बचा सके। सब जबर्दस्ती हम दोनों से .... कर लिए। अभी भी मेरे ऊपर चढे हुए हैं.... बाप रीईईए.... बहुत दर्द हो रहा है।... .... जुबैदा भी इसी बिस्तर पर है.... वो भी रो रही है। आँख बँधा हुआ है सो मुझे नहीं पता कि उसके साथ क्या हो रहा है.... .... ..... .... .... नहीं वो तो पहले हो गया... अब दुबारा मुझे और जुबैदा को पकड़ लिए हैं... अभी मुझे पलट कर चढे हुए हैं... ... बहुत दर्द हो रहा है... आअह्ह्ह.... ओह्ह्ह माँआआअ.... नहीं... उसमें नहीं... ... उसमें का दर्द तो कम हो गया है अब.... अभी दुसरी जगह पर कर रहे हैं.... हाँ घुसाए हुए हैं.... बोल रहे हैं कि हम दोनों को अब जोर यही करना होगा..... हाँ अभी उनकी हेड जो है बोल गई है कि आज रात में भी हम लोग को इन्हीं लोग के साथ सोना होगा और कल से पैसा मिलेगा.... ओह अब्बू... आपको पता है कि... यहाँ क्या होगा.... या अल्लाह... छीः ... तो आपको सिर्फ़ पैसा चाहिए.... इसीलिए हमको यहाँ भेजे.... पर अब्बू... हमलोग तो रोज - रोज यह दर्द सह कर मर जाएँगे.... नहीं पीछे से जो अभी हो रहा है वो तो बहुत ज्यादा है.... और ये लोग पाँच हैं अभी... इसके बाद चार और मेरे से ... .... करेंगे। नहीं अब्बू आप उनको बोल दीजिए कि धीरे और प्यार से करें.... बाप रे... आह... .....आह..."। और वो फ़ुट-फ़ुट कर रोने लगी। अब सगीर ने बात करना शुरु कर दिया और साफ़-साफ़ कहा, "हाँ... दोनों शुरु से नौटंकी कर रही थी... हम सब को थप्पड़ मारा तो सजा मिली है... हाँ अभी उसकी गाँड मारी जा रही है... चूत की सील तो कब का खुल गई... हाँ अभी हम सब मिल कर दोनों बहन को पूरा से रगड़एंगे.... नहीं नहीं हमारे यहाँ कोई रियायत नहीं होती है... प्यार से वो चुदी है साली कि हम उसको प्यार से चोदें.... चुप रह साले... अब भेज दुँगा एक वीडीयो साले तुम्हारे पार भी बेटियों की... देख लेना मादरचोद... कैसे बनी तेरी बेटियाँ रंडी... हाँ कल से रुपए कमाने लगेगी.... ठीक है, ठीक है... कल बात करवा दुँगा।" और उसने फ़ोन काट दिया... और फ़िर करीब १०-१२ सेकेण्ड बाद फ़िल्म खत्म हो गई।


 मैंने विभा को कहा, "बहुत मस्त फ़िल्म थी.... मजा आ गया..., चल मेरी जान अब एक बार चूस कर निकाल दे मेरा पानी भी... तीन-चार दिन बाद तो तेरी बूर चूस कर निकालेगी मेरा पानी..." और मैंने विभा को आँख मारी। वो शर्माते हुए उठी और मेरे लन्ड को मुँह में लेकर चूसने लगी। अब तक वो लन्ड चूसाई में सही तरीके से ट्रेनिंग कर ली थी। अगला पाँच दिन मुझे कुछ टैक्स संबन्धित केस की वजह से वकीलों और दफ़्तरों में गुजरे... सवेरे घर से निकता तो थका हारा ८-९ बजे तक लौटता और फ़िर खा-पी कर सो जाता। विभा की सील तोडनी है, मुझे याद तो था पर मैं फ़्रेश मूड से उसको चोदना चाहता था। वो मेरी कुंवारी भोली-भाली बहन थी जिसको मुझे रंडी बनाना था। संयोग ऐसा हुआ कि जब मैं फ़्री हुआ तो मुझे पुरी जाने का संयोग बन गया। मेरा एक पैतृक मकान पुरी में था जिसके दोनों किरायेदार ने मुझे बुलाया था। चार महिने से मैं गया नहीं था सो किराया भी काफ़ी बाकी हो गया था और मकान में कुछ रिपेयर का भी काम हुआ था जो मुझे देख कर किरायदारों से हिसाब कर लेना था। वहाँ करीब एक सप्ताह लग जाना था। मैं अब इतना इन्तजार नहीं करना चाहता था। मैंने विभा को भी साथ चलने को कहा। वो जाना नहीं चाहती थी तो मैंने कहा, "चलो न साथ में वहीं रहेंगे होटल में... वहाँ तुम मेरी बीवी रहना और हमलोग वहीं सुहागरात मनाएँगे। नये महौल में तुम्हें झिझक-शर्म भी नहीं लगेगा"। मेरे ऐसे समझाने से वो तैयार हो गई। उसके पास वैसे भी कोई चारा था नहीं। मैं लगातार कुछ समय से उस पर चुदाने के लिए दबाब बनाए हुए था। हम पहले बस से पटना आए और फ़िर पटना में हमारे पास समय था करीब ६ घन्टे का। मैंने उसको सम्झा दिया कि अब इस शहर में तो कोई हमलोग को पहचानता नहीं है सो अब वो थोडा खुल कर मेरे साथ घुमे जैसे कोई बीवी अपने नये पति के साथ घुमती है। मैंने उसकी झिझक तोडने के लिए मौर्या कौम्प्लेक्स में उसको साथ ले कर सेक्सी किस्म की ४ ब्रा-पैन्टी खरीदी। दुकान में दो महिलाएँ खरीदारी कर रही थीं और दो सेल्स-गर्ल तथा उस दुकान का मालिक एक बुजुर्ग था। मैंने दो नन्हीं सी बिकनी-टाईप ब्रा-पैन्टी, एक लाल और एक काली खरीदी... और फ़िर कुछ बहुत हीं सेक्सी और हौट अन्डर्गार्मेन्ट्स माँगे।




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FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--16

 FUN-MAZA-MASTI
 छोटी बहन के साथ--16

 इतनी चुदाई देख-देख कर जवान लडकियाँ वैसे भी गीली हो जाती है, और अब तो शफ़ा के मुँह से कराह निकल गई। बेचारी का झाँट करीब १/२" का था, लगता था कि वो करीब महीने भर पहले साफ़ की हो, या शायद कैंची से काटती होगी। सज्जाद अब खुब प्यार से रूही को सहलाते हुए नंगी करने लगा। अब्दुल ने समीना को पास खींचा और फ़िर उसके एक हाथ में अपना खडा लंड पकड़ा दिया। समीना ईशारा समझ गई और उसके लन्ड को सहलाने लगी। तब अब्दुल ने उसके होठ चुम कर कहा कि वो उसका लन्ड थोडा चूस दे। समीना बिना देरी के तुरंत वहीं जमीन पर बैठ कर अब्दुल का लन्ड चूसने लगी। मासीमा ने कहा, "फ़रीद... तीनों की फ़ोटो आ रही है फ़िल्म में कि नहीं?" तब फ़रीद बोला, "अब्दुल तुम भी बिस्तर पर हीं चले जाओ... वहाँ रोशनी बढ़या है फ़ोटो खुब साफ़ आता है"। अब्दुल, यह सुन कर समीना के साथ बिस्तर पर चला गया। अब वो बिस्तर पर सीधा लेट गया था और समीना उसके बगल में बैठ कर उसका लन्ड मुँह में ले कर चूस रही थी। मासूम अभी भी शफ़ा की चूत को चूस रहा था और सज्जाद रूही को नंगा करके अपनी से चिपका कर चूम रहा था। तभी फ़रीद कैमरा ले कर एक तरफ़ घुमा और इस बार पहली बार समीना की चिकनी फ़ूली हुई बूर जो पीछे से एकदम किसी बछिया की बूर लग रही थी दिखी। फ़रीद ने कोल्ज-अप में समीना की चिकनी चूत दिखाई और फ़िर घुमते हुए, कैमरा रूही पर फ़ोकस किया। सज्जाद अब उसको बिस्तर पर लिटा दिया था और उसके झाँटों से खेल रहा था। फ़िर उसने रूही की बूर की फ़ाँक खोली तब फ़रीद ने कैमरे में उसकी बूर के कुँवारा होने का सबूत वो गुलाबी झिल्ली दिखी जिसमे उसके पीरीयड के लिए एक छोटा सा छेद था। सज्जाद अब रूही के साथ ६९ करने लगा। रूही भी थोडा हिचकते हुए ही... पर जैसे तैसे साथ दे रही थी। शफ़ा अब लगातार चूत चूसाई से बेचैन हो कर हाथ-पैर पटकने लगी थी। मासूम ने जब देखा कि माल अब पूरा गर्म हो गया है तब वो उसकी चूत से हटा और फ़िर शफ़ा के जाँघों को पुरा फ़ैला कर बिस्तर पर दबाया। शफ़ा एक दुबली-पतली लडकी थी और उसके बदन में लोच भी खुब था, सो उसका जाँघ पूरा खुल गया। मासूम उसके बदन के ऊपर पसर गया और शफ़ा उसके नीचे दब गई। मासूम ने इसके बाद अपने दोनों हाथों को शफ़ा बगल से, काँख के नीचे से निकल कर उसके चेहरे को सहलाने लगा और फ़िर उसके होठ चूमने लगा।

 भगवान हर लडकी को चुदाने की अक्ल जरुर दे देता है। शफ़ा बिना किसी ईशारे के खुद हीं अपने पैरों को मासूम की कमर के इर्द-गिर्द लपेट दी। मासूम भी अब अपने जाँघो से शफ़ा के दोनों जाँघो को एक तरह से दबा लिया था। दोनों की जोडी बहुत सही थी। दोनों लम्बे थे। मासूम करीब ५’१०" का था तो शफ़ा भी करीब ५’८" की थी। इस तरह से शफ़ा की कमर भी मासूम की कमर के लगभग साथ हीं थी। जब मासूम ने शफ़ा को पूरी तरह से अपनी जकड में ले लिया तो अपना कमर ह्ल्के से ऊपर उठा कर अपने लन्ड को शफ़ा की बूर की छेद पर लगाने की कोशिश करने लगा। तीन-चार बार में जब ठीक से नहीं लगा तो वो शफ़ा से बोला, "तुम्हारा हाथ खाली है... एक बार अपने हाथ से पकड़ कर मेरा लन्ड ठीक से अपने छेद पर लगाओ न..."। शफ़ा पर इतनी ज्यादा गर्मी चढी हुई थी कि उसको पता भी नहीं चला कि वो क्या करने जा रही है। उसने अपने हाथ से मासूम का लन्ड पकडा और अपने छेद पर लगा दिया। मासूम को भी पता चला गया और उसने शफ़ा को चुमते हुए अपना कमर नीचे दबाना शुरु किया। जल्दी हीं दर्द महसूस करके शफ़ा कसमसाने लगी। पर मासूम ने उसको इतने जबर्दस्त तरीके से अपने जकड में लिए हुए था कि बेचारी हल्के से हिलने से ज्यादा कुछ कर नहीं पा रही थी। फ़िर भी मासूम ने उसको सहुलियत देते हुए अपने को रोक लिया। शफ़ा अब फ़िर से शान्त हो कर उसके चुमब्न का जवाब अपने चुम्मा से देने लगी थी। मासूम भी उसके कनपटी के बाले को सहलाते हुए चुमता रहा और फ़िर जब शफ़ा को सब कुछ ठीक लग रहा था कि एक झटके से उसकी बूर की सील तोड दी। बेचारी जोर से छटपटाई... और मासूम अब उसके छाती के ऊपर से हटा और शफ़ा की चीख कमरे में गुँज गई... "ओह्ह्ह माँ......."। दूसरे धक्के से जब मासूम अपने लन्ड को पूरा भीतर ठेल दिया तो उस धक्के से साथ अपनी माँ को एक बार फ़िर याद करते हुए शफ़ा की चीख और जोर से निकली, "माँ.... गो..........माँ........."। वो मासूम को ऊठते देख कर अपने को उसकी गिरफ़्त से आजाद करने की कोशिश की पर उसको कहाँ पता था कि मासूम अपना ९" का लन्ड पूरा भीतर ठेले हुए है और अब वो उसकी कमर को अपने हाथों की जकड में ले कर उसके निचले बदन को अपने झाँघों की जोर से बिस्तर से दबा कर रखे हुए था। बेचारी अपने ऊपरी बदन को हिला-हिला कर छटपटाहट जाहिर कर रही थी और मासूम उसकी पेड़ू को हाथों से दाब कर झाँटों को अपने दोनों हाथ के अंगुठों से सहला रहा था। फ़िर जब उसने उसकी टीट के दाने को सहलाया तो वो मस्ती से तड़फ़ड़ा गई और थोड़ा शान्त हुई। मासूम अब अपनी बूर से अपना लन्ड करीब ६" बाहर खींचा और फ़िर झटके से पूरा भीतर घुसा दिया। अब वो पास में बैठी हुई रूही को देख कर बोला, "देख लो.... लडकी के चूत में कितना गहराई है... पूरा भीतर घुसा हुआ है कि नहीं... तुमको यही लम्बा लग रहा था, मादरचोद।" शफ़ा के आँख से आँसू बह निकला... पर वो अपनी सील तुडवा कर अब थोड़ा शान्त हो गई थी और मासूम अब अपना कमर चला-चला कर उसकी चुदाई शुरु कर दिया था।



सज्जाद ने अब रूही को बिस्तर पर लेटने को कहा तो वो थोड़ा डरी-सहमी से बिस्तर पर सीधा लेट गई। सज्जाद ने अपने लन्ड पर अपना थुक लगा या और फ़िर उसकी पैरों के बीच में आ गया। रूही अपने पैर खोल कर हवा में की हुई थी। सज्जाद ने अपने हाथ से उसकी बूर की फ़ाँक को खोल कर, अपना लन्ड उस छेद पर सेट किया और फ़िर उसके पैरों को घुटने के पास से पकड़ा। फ़िर एक झटके से उसके पैरों को अपने कमर के चारों तरफ़ लपेटते हुए उसके बदन पर धप्प से गिरा और अपने बदन के वजन से ही अपने लन्ड को गच्च से उसकी कच्ची बूर में पूरा एक बार में पेल दिया। रूही तो इतनी जल्दी यह होगा... का अंदाजा नहीं था। उसकी चीख सबसे दर्दनाक थी। सज्जाद जिस तेजी से उस पर गिरते हुए अपने लन्ड से उसकी सील तोडा था, उसी फ़ुर्ती से वो ऊपर उठा और जब तक वो कुछ समझे तब तक ताबड़-तोड तीन-चार धक्का उसकी नई-नवेली बूर में दना-दन लगा दिया। अपनी वो अपने सील टूटने के दर्द से भी नहीं उबरी थी कि उसकी बूर की चूदाई शुरु हो गई थी। बिस्तर पर एक साथ दोनों लौन्डिया को दोनों हरामी एकदम एक स्पीड में चोद रहे थे। कमरे में उन दोनों लडकियों की सिसकी, चीख और बूर से निकल रही फ़च्च फ़च्च घच्च घच्च, तो कभी कभी उन चोदू हरामियों के जाँघ के उस लडकियों के जाँघों से टकराने पर होने वाली थप-थाप... थप-थाप की आवाज हो रही थी। समीना इन सब से बेखबर लगातार अब्दुल का लन्ड चूसे जा रही थी और अब्दुल साला उसकी गाँड की छेद से खेल रहा था। बीच-बीच में वो अपने थुक को अपने ऊँगली पर लगा कर उसकी गाँड को खोदता था। शुरु में तो समीना थोड़ा चिहुँकती भी थी, पर अब वो इसके एक नए खेल के रूप में ले कर आराम से उसको अपना गाँड से खेलने दे रही थी। ऊधर दोनों लडकियाँ जो चुद रही थीं, अब सब समझ कर शान्त हो कर चुदवाने लगी थी और कभी-कभी मस्ती से कराह देती थी, आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह उम्म्म्म्म....। अब्दुल अब अपने दाहिने हाथ की बीच वाली ऊँगली पूरा का पूरा समीना की गाँड़ में घुसाने लगा था। फ़िर उसने समीना से पूछा, "गाँड में ऊँगली करवाने में मजा आ रहा है...?" समीना ने हाँ में अपना सर हिलाया तो अब्दुल बोला, "अब दूसरा उँगली घुसाते हैं..... तब और मजा मिलेगा जब भीतर में दोनों ऊँगली को चलाऊँगा..."। उसने वैसे हीं थुक के सहारे अपना एक और ऊँगली आधा भीतर घुसा दिया। समीना की वो साथ में तारीफ़ भी करता जा रहा था। समीना भी इस खेल को मजे से खेल रही थी। तब अब्दुल अचानक समीना को अपने लन्ड से हटाया और बोला, "तुम जानवर जैसे बनो, मैं पीछे से तुम पर चढता हूँ"। समीना की गाँड़ खुली हुई दिख रही थी। अब्दुल ने समीना की बूर में अपना लन्ड घुसा कर उसको आराम से चोदना शुरु किया पर वो इसका ख्याल रखे हुए था कि समीना की गाँड़ वैसे हीं खुली रहे। करीब १८-२० बार अंदर-बाहर करने के बाद, अब्दुल ने अपना लन्ड उसकी बूर से निकाल लिया और दो बार ऐसे फ़िसलाया जैसे उसका लन्ड समीना की बूर में घुस नहीं रहा हो। समीना अब बेचैन हो चुकी थी सो बोली, "घुसाओ न भीतर..."।


अब्दुल ने अपने को बिस्तर पर थोडा ऊपर उठाया और फ़िर समीना की कमर को जोर से जकड़ लिया। फ़िर उसने समीना से कहा, "थोडा सब्र करो... अभी घुसाता हूँ... फ़िर तुमको एक अलग मजा आएगा", कहते हुए अब्दुल ने उसकी गाँड की छेद को अपने हाथ से फ़ैलाया और उसके ऊपर अपना लन्ड लगा दिया। समीना बोली, "अब यह कहाँ लगा रहे हो...?" अब्दुल ने प्यार से कहा, "तुम्हारी गाँड में घुसाऊँगा अब... थोडा सब्र रखो... एक अलग मजा मिलेगा तुमको इस बार..."। समीना भी समझ गई और फ़िर आगे आने वाले समय के लिर अपने बदन को टाईट कर ली। अब्दुल अब धीरे-धीरे अपना लन्ड अपने हाथ से पकड कर सीधा रखते हुए उसके गाँड की छेद में दबाने लगा। समीना दर्द महसूस की और उसके मुँह से एक दर्दभरी आआह्ह्ह्ह निकली पर वो अपना बदन बिल्कुल कडा करके रखे हुए थी और अब्दुल ने उसको कहा, "तुम अपना बदन ढीला करो, तब तुम्हारा गाँड़ भी ढीला होगा।" समीना ने वैसा हीं किया और फ़िर अपने सर को नीचे बिस्तर पर टिका दिया। इस तरह से उसकी कमर का हिस्सा ऊपर उठ गया और बाकी बदन नीचे हो गया और अब्दुल अपना आधा लन्ड भीतर घुसाने के बाद अब धीरे-धीरे अपने लन्ड को उसकी गाँड में भीतर-बाहर करने लगा। समीना ने जब महसूस किया कि अब अब्दुल उसकी गाँड मारने लगा है तो वो पूछी, "भीतर चला गया क्या?" अब्दुल बोला, "हाँ.... देख लो अपने हाथ से छू कर.... बहुत मस्त गया है भीतर। फ़िल्म में देखना कितनी अच्छी है तुम्हारी गाँड और कैसे खुल कर घुसवाई है"। फ़िर अब्दुल ने उसकी छोटी-छोटी चुच्चियों को सहलाते हुए उसकी गाँड मारते हुए कहा, "बहुत अच्छी हो तुम..., बहुत पैसा कमाओगी...., एक बार में ग्राहक को फ़ँसा लोगी"। समीना भी अपनी तारीफ़ सुन कर अब खुश हो गई और आराम से बिस्तर पर फ़ैल कर अपना गाँड मरवाने लगी। मासीमा ने जब देखा कि समीना इना किसी झमेले के आराम से अपने गाँड़ में डलवा ली तो वो समीना से खुश हो गई और कहा, "वाह समीना बेटा... तुम बहुत समझदार हो..." फ़िर बाकी लडकियों से कहा, "देख लो... ये भी तुम्हारे साथ हीं गाँव से यहाँ आई है और कैसे आराम से खुशी-खुशी चुदा रही है बिना किसी नखरे के..., उसको कोई परेशानी भी नहीं है। जब यहाँ आ गई हो तो तुम सब भी खुशी-खुशी अपना जवानी लुटाओ और पैसा कमाओ। जवानी का सुख भी इस सब में तुम लोग को मिलता रहेगा। कहीं किसी गरीब से शादी करके क्या मिलता.... दिन भर गुलाम जैसा खटती तब कुछ खाने को मिलता... और शादी के बाद भी तुम बचती थोडे ना... तब भी तो चुदाना हीं होता। किसी बुढ़्ढ़े से शादी हो जाती तो जवानी की आग भी नहीं बुझती। यहाँ तुम्हारी जवानी का पूरा मजा लोग लेंगे और तुमको भी मजा देंगे।" दिन भर में अलग-अलग किस्म का लन्ड से चुदाने का मौका मिलेगा"। वो समीना के पास आ गई और उसकी बूर को अपने हाथ से चोदने लगी जिससे समीना को गजब का मजा मिलने लगा। फ़िर उसने सगीर को ईशारा किया और जब सगीर पास आया तो अब्दुल अपना लन्ड बाहर निकाल कर बिस्तर पर सीधा लेट गया और समीना को अपने ऊपर आने का ईशारा किया और फ़िर समीना को समझाते कहा, "तुम मेरे लन्ड पर बैठ जाओ... अपने गाँड में मेरा लन्ड घुसा कर... अपना पीठ मेरी तरफ़ रखना"। समीना ने वैसा ही किया। तब सगीर समीना को दो-तीन बार चूमा और फ़िर उसके जाँघ को खोल कर उसकी बूर में अपना लन्ड घुसा दिया। समीना की गाँड़ में अब्दुल का लन्ड था और उसकी बूर में सगीर का। दोनों मिल कर अब उसको चोद रहे थे और बेचारी समीना उन दोनों के बीच में पीस रखी थी। उसने अपने बदन को अब पूरी तरह से उन दोनों की दया पर छोड दिया था और दर्द से कराह रही थी और वो दोनों उसके दर्द की परवाह किए बिना उसको रगड़-रगड़ कर चोदे जा रहे थे। जब समीना को बर्दास्त नहीं हुआ तो चीखने लगी... उसकी साँस अब उखड रही थी।




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Saturday, October 11, 2014

FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--15

 FUN-MAZA-MASTI
 छोटी बहन के साथ--15

 मासीमा ने अब सगीर और सज्जाद को आदेश दिया कि अब दोंनो अब जल्दी से दो और लडकियों को निपटाएँ, और तब उसने चारों बची हुई लडकियों में से दो को बिस्तर पर आने को कहा। सहमी हुई लडकियाँ अब एक-दूसरे को देखने लगी। तब मासीमा ने पास जाकर उन्हें समझाते हुए हिम्मत दी और फ़िर दो का बाँह पकड कर पूछा, "क्या नाम है तुम दोनों का?" दोनों ने अपना-अपना नाम सायरा और समीना बताया। दोनों सलवार-कुर्ते में थी। मासीमा ने दोनों को कहा, "जाओ जल्दी से अपना कपडा उतार कर आराम से चुदा लो जल्दी से फ़िर आराम से खाना-वाना खा कर आराम करना।" दोनों बेचारी उन दोनों बहनों का हाल देख कर डरी हुई थी। समीना ने आखिर बोल ही दिया, "बहुत दर्द होता है इसमें अभी एक-दो दिन बाद वो करवा लेगी यह सब।" तब खड़े लन्ड वाले उन दोनों हरामियों ने उनको दबोच लिया और उन्हें बिस्तर की तरफ़ ले गए और रास्ते में हीं उनके दुप्पटे हटा दिए। दोनों ने लगभग साथ साथ हीं उनके बदन से कुर्ती उतारी और फ़िर उनकी समीज भी खोल दी। समीना की छोटी-छोटी चूची चमक उठी पर सायरा जिसकी चूची थोड़ा बडी थी, उसने ब्रा पहन रहा था। अब्दुल ने आगे बढ़ कर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और फ़रीद ने उन दोनों की सलवार की डोरी खींच दी, जिससे उनको चोदने को तैयार सगीर और सज्जाद ने फ़टाक से उनकी सलवार खींच कर उतार दी और अब दोनों के बदन पर मैली सी काली पन्टी दिख रही थी। उन दोनों को बिस्तर पर लिटा कर दोनों मर्द उन पर चढ गए और उनको चूमने लगे, दोनों थोड़ा अनमने तरीके से चुम्बन का जवाब दे रही थी। छोटी चोचियों वाली समीना से सगीर चिपका हुआ था और बड़ी चुचियों वाली सायरा से सज्जाद। दोनों के लन्ड साधारण थे, करीब ६" के। सायरा जो उम्र में समीना से १-२ साल बड़ी होगी, पहले गर्म हुई और अब वो जरा ठीक से चुम्मा-चाटी करने लगी, तब सज्जाद ने उसकी पैन्टी खोल दी और फ़िर उसकी झाँटों से खेलते हुए अपनी ऊँगली उसकी बूर की फ़ाँक पर चलाने लगा। सायरा जल्द हीं गर्म हो कर कसमसाने लगी। अब तक समीना भी गर्म हो कर अपनी जाँघ तो एक दूसरे से रगड़ने लगी थी, और तब सगीर उसके ऊपर से उठा और फ़िर उसकी कमर के पास बैठ कर उसकी पैन्टी को नीचे सरार कर खोल दिया।

समीना की बूर साफ़ और चिकनी थी, लगा जैसे १-२ दिन पहले हीं उसने झाँट साफ़ की हो। काली चिकनी साफ़ बूर देख कर अब्दुल फ़ट से झुका और उसकी बूर का चुम्मा ले लिया, वो गुद्गुदी बर्दास्त न कर सकी और खिल्खिला कर हँसते हुए एक तरफ़ पलट गई। अब्दुल बोला, "आय हाय मेरी जान.... चिकनी चूत.... खुब तैयारी से आई हो यहाँ तुम।" पर सगीर ने उसको सीधा किया और उसकी बूर जो खुब पनिआई हुई थी उसको दो चार बार सहलाने के बाद चुदाई के लिए सेट करने लगा। दोनों मर्दों ने अपने अपने लडकियों को अगल-बगल में सीधा लिटा दिया था और फ़िर उसकी जाँघों को खोल कर उन खुली जाँघों के बीच में बैठ गए थे। दोनों ने लडकियों को ठीक तरीके से अपनी जकड़ में ले लिया और फ़िर अपना लन्ड घुसाना शुरु किया। सगीर का लन्ड पहली बार में हीं फ़ाँक से लग गया, जबकि सज्जाद का लन्ड झाँटॊ की वजह से दो-तीन बार फ़िसल गया। तब मासीमा ने अपने हाथ से उसका लन्ड पकड़ कर सायरा की फ़ाँक से लगा दिया और फ़िर कहा, "चोदो....", और दोनों ने एक झटके में अपना-अपना लन्ड उनकी लड़कियों की बूर में पेल दिया। सायरा की जब सील टूटी तो उसके मुँह से चीख निकल गई, पर समीना ने अपने बूर की सील टूटते समय अपने नीचले होठ को दाँतों से दबा ली और दर्द को बर्दास्त कर ली। सगीर और सज्जाद दोनों अपनी अपनी लडकी को खुब जोर-जोर से मस्त हो कर चोदने लगे। सज्जाद जो बीच-बीच में सायरा की बडी-बडी चूचियों को मसल भी देता था, तब वो जरा चिहुँकती, पर वैसे वो डरी-सहमी सी चुप-चाप शान्ति से लेट कर सज्जाद को अपना बूर चोदने दे रही थी। चेहरे पर कभी-कभार हीं कुछ भाव आता था, वर्ना वह शान्त थी। उसके उलट नन्ही-नन्ही चूचियों वाली समीना खुब मस्त हो गई थी और मजे ले लेकर चुदवा रही थी। सगीर जब-जब उसको चुमता वो भी पलट कर उस चुम्मा का जवाब देती। कभी-कभी मस्त हो कर आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह ऊंह्ह्ह्ह ऊंह्ह्ह्ह्ह भी कर देती। सगीर भी उसके इस सहयोग पर मस्त हो गया था और खुब मजे से आराम-आराम से चोदते हुए अचानक कभी दस-बारह धक्का तेजी से लगा देता और तब समीना जोर-जोर से साँस लेने लगती और सिस्की लगाती। करीब पाँच मिनट बाद सगीर ने अचानक अपना लन्ड उसकी बूर से बाहर खींच लिया। समीना को लगा की सगीर अपना पानी उसकी बूर में निकाल दिया है सो वो अपने हाथ से अपना बूर सहलाई तो उसकी हथेली पर उसके बूर का गीलापन और खून की लाली लग गई।



 सगीर ने तब तक उसकी कमर को पकड कर उसको पलट दिया और वो भी सगीर के ईशारे को समझ कर उसके साथ सहयोग करते हुए पीठ के बल लेट गई। तब सगीर उसको कहा कि वो अपने हाथ और घुटने के सहारे एक जानवर की तरह झुके और समीना ने वैसे हीं किया। फ़िर सगीर आराम से थोड़ा थुक अपने लन्ड पर लगाया और पीछे से उसकी बूर में लन्ड पेल दिया। समीना एक बार तो थोडा कसमसाई फ़िर बोली, "ऐसे ठीक है... पहले तो मेरा जाँघ दर्द करने लगा था फ़ैला कर रखने से, यही ठीक तरीका है यह सब करने का तभी सब जानवर भी ऐसे हीं करता है।" सगीर ने उसको चोदते हुए बताया, "ऐसे में लड़की ज्यादा आजाद हो जाती है, और कुँवारी लडकी की सील तोडने में ऐसे परेशानी होती है। कुँवारी लडकी को जब नीचे दबा कर चोदा जाता है तब उसके बचने का चाँस नहीं रहता है और तब उसकी सील तोडना भी आसान हो जाता है। इस तरह से चोदने को पूरी दुनिया में कुत्ता-चुदाई कहते हैं" और अब वो जोश में भर कर उसकी कमर को अपने हाथों से लपेट कर तेजी से हुमच कर उसको चोदने लगा। फ़च्च्च फ़च्च्च्च घच्च्च्च्च घच्च्च्च्च्च की आवाज होने लगी थी। इसी बीच में सज्जाद का पानी छूट गया और वो अपना सब माल सायरी की बूर में निकाल कर अलग हट गया। सायरा अब उठी और अपना सलवार पहनने लगी, तब मासीमा ने कहा, "अभी कपडा नहीं पहनो, अभी तुम सब को और चुदवाना है। वैसे भी सब के सामने नंगी रहोगी तो अनजाने मर्दों के सामने नंगा होने में लाज-शर्म नहीं आएगी।" बेचारी यह सब सुन कर चुप-चाप नंगी ही बिस्तर से उतर गई। सगीर अब धक्के लगा-लगा कर थक सा गया था सो वो अब अपना लन्ड फ़िर बाहर निकाल लिया और खुद बिस्तर पर लेट कर समीना को अपने ऊपर चढ़ने का ईशारा किया। समीना भी मजे से उसके कमर की दोनों तरफ़ अपने घुटने टिका कर सगीर का लन्ड अपने हाथ से पकड़ कर अपने बूर में घुसा कर ऊपर-नीचे करने लगी। करीब एक मिनट आराम करने के बाद सगीर ने फ़िर से समीना को सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया, और इस बार लगातार तेजी से धक्के लगाते हुए उसकी बूर में झड गया। समीना के चेहरे से संतुष्टि का भाव झलक रहा था। उसको चुदा कर मजा आया था।

अब्दुल ने उससे पूछा, "और मन है क्या?" समीना जोर-जोर से हाँफ़ रही थी.... बोली, "बहुत थक गई हूँ... बाप रे...ओह।" अब्दुल ने उसको बाहों में भर कर उसको चुमना शुरु किया, तो मासीमा बोली, "रे हरामी, उसको अभी थोडा दम लेने दे... अभी दो और है न बची हुई... उनको नाप कर देखो पहले।" अब्दुल हँसते हुए अब हटा और फ़िर साडी वाली लड़की को अपनी तरफ़ बुलाया। वो भी हिचकते हुए उसकी तरफ़ आई तो अब्दुल ने उसका नाम पूछा, "क्या नाम है मेरी रानी का?" उस लडकी ने अपनी नजर नीचे करते हुए कहा, "शफ़ा"। अब्दुल ने फ़िर कहा, "शफ़ा रानी, कभी खेली हो अपने छेद से?" शफ़ा चुप रही तो वो बोला, "उतारो अपना कपडा तब देखते हैं तुम्हारा क्या हाल है?" तभी कैमरा मैन साला ठरकी सा होकर बोला, "मासीमा.... एक बार मुझको भी मौका दो न... आज तो बहुत सारी आई है एक साथ...।" मासीमा हँसते हुए बोली, "अरे मासूम बेटा, तू तो बचा हीं रह गया, अच्छा कोई बात नहीं है, अभी तो इन सब की गाँड भी मरवानी है।" उसने फ़रीद को ईशारा किया तो उसने कैमरा पकड लिया और वो कैमरा मैन जिसका नाम मासूम था अब सामने खडा हो कर अपना पैन्ट खोलने लगा। मासूम करीब २६-२७ साल का जवान था, खूब गोरा चिट्टा। जल्दी ही वो नंगा हो गया और उसका ९" लम्बा गोरा लन्ड अपने पूरे सबाब पर दिखा। वो अब तक बची हुई लड़की, जिसका नाम रुही था और जो करीब १८ साल की थी, की तरफ़ बढा। रूही की नजर मासूम के उस ९" के लंड पर टिका हुआ था। बेशक, उसका लंड उस कमरे में सबसे बडा था पर वो अन्य लण्डों की तुलना में थोड़ा पतला था। सबसे सही लंड अब्दुल का था, खुब काला, खुब मोटा करीब ७.५" और उभरी हुई नसों से भरा हुआ। अब तक अब्दुल शफ़ा को नंगा करना शुरु कर चुका था, जब मासूम रूही को अपने से चिपटा कर चुमना शुरु किया। दोनों कमरे के दो तरफ़ थे सो मासीमा ने आदेश दिया, "बिस्तर पर आओ ले कर दोनों लडकियों को तब न एक साथ फ़िल्म बनेगा दोनों का"। यह सुन कर दोनों लौंडों ने अपने-अपने माल को अपने से चिपकाए हुए ही बिस्तर पर ले गए और उन्हें अगल-बगल बिठा दिया। शफ़ा की साडी खुल चुकी थी और अब्दुल अब उसके ब्लाऊज के ऊपर से हीं उसकी चुचियों से खेल रहा था।


 मासूम ने रूही से कहा, "जरा मेरा लन्ड अपने मुँह में ले कर चूसो तो दो-चार बार"। रूही उसके लन्ड की लम्बाई से डरी हुई थी। बेचारी सहमते हुए बोली, "तुम्हारा इतना बडा है मेरे में नहीं जाएगा, मुझे छोड दो...प्लीज"। शफ़ा भी नजर घुमा कर उस लम्बे लन्ड को देखी, फ़िर एक नजर उसने डरी हुई रूही पर भी डाली। अब्दुल जो समीना को चोदते समय समझ गया था कि इन सब लडकियों में सबसे ज्यादा मजे ले कर वही चुदी है, सो वो समीना को देखकर बोला, "समीना... तुमको तो चुदवा कर मजा आया न, बताओ इस लडकी को कि कैसा मजा मिलता है किसी मर्द के साथ..."। समीना ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, मजा तो खुब आया था। शुरू में थोड़ा तकलीफ़ हुआ, फ़िर खुब मजा आया।" मासूम ने अब उसको न्योता दिया, "आ कर एक बार, बताओ इस बेवकुफ़ लडकी को... अब यहाँ चाहे तो मजा ले कर चुदाए या बेमजा के चुदाए... पर अब तो इसको यहाँ जब तक रहेगी रोज चुदवाना हीं होगा।" समीना भी बिस्तर के पास आई और रुही को प्यार करते हुए बोली, "कोई परेशानी नहीं होती है, सब आराम-आराम से हो जाता है अपने से..."। मासीमा चुप बैठ कर सब देख रही थी, औए बाकी सब की भी नजर बिस्तर पर हीं थी... बस नसरीन अभी भी बगावती नजरों से कभी मासीमा को तो कभी उन हरामी लौण्डों को देख रही थी। समीना के बार-बार समझाने पर रूही बोली, "लेकिन इसका इतना बडा है, बाकि सब का छोटा था...."। समीना अपना दिमाग लगाई और सगीर के तरफ़ ईशारा करते हुए बोली, "अच्छा... तो तुम इसके साथ कर लो, मैं भी तो इसी के साथ की हूँ, या कोई और जिसका छोटा है उसके साथ कर लो... सब का तो तुम देख हीं रही हो..."। रूही ने एक बार सब की तरफ़ नजर घुमाई और फ़िर सज्जाद की तरफ़ ईशारा किया कि उसके साथ वो करवाएगी। सज्जाद का लन्ड साधारण मुटाई का और ६" के करीब था। मासीमा ने अब सज्जाद को ईशारा किया और साथ में आँख भी मार दी। मासूम बेचारा अपना खडा लन्ड ले कर चिढ़ गया और झुंझुला कर रूही के चेहरे पर थुक दिया, "साली कुतिया.."।
अब्दुल का मन समीना को चोदने का था, सो वो अब नंगी शफ़ा को मासूम की तरफ़ ढकेल कर कहा, "यार तुम इस लौण्डिया का सील तोड लो"। अब शफ़ा के चेहरे पर डर छा गया और वो बिदकी, पर मासूम ने उसको धक्के दे कर बिस्तर पर चित कर दिया और फ़िर उसकी झाँटों भरी बूर से अपना चेहरा चिपका दिया।





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FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--14

 FUN-MAZA-MASTI छोटी बहन के साथ--14

 पहले वाले मर्द ने, जो सबमें उम्र-दराज और शायद लीडर था, आगे बढ़ कर दीवार की तरफ़ मुँह करके खडी हुई जुबैदा को बालों से पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचा। बेचारी को उम्मीद नहीं थी कि ऐसा कुछ होगा, सो वो दर्द से चीखी और अपने हाथों को अपनी चुचियों से हटा कर अपने बालों पर ले गई और फ़िर दर्द से बचने के लिए लडखडाते हुए उसके छाती से लग गई। मादरचोद कैमरा वाला, अब घुम कर उसके सामने आ गया था और उसकी छोटी-छोटी चुची के क्लोज-अप लेने लगा था। जुबैदा सांवली लड़की थी और उसकी छाती पर गहरे बूरे रंग का निप्पल था। बिल्कुल सपाट पेट और एक छोटी सी नाभी। फ़ीगर के नाम पर होगा करीब ३२-२२-३२ जैसा कुछ, पाँच फ़ीट दो ईंच के करीब लम्बी थी। उसके काँख के घुंघराले काले बाल अब खुब साफ़ दिख रहे थे, जब उसका हाथ उसके सर पर उसकी चोटी को संभालने में लगा हुआ था। उस मर्द ने उसको लगभग घसीटते हुए बिस्तर पर लाया और फ़िर एक जोर के धक्के से उसको बिस्तर पर गिरा कर उसकी टांगों को पकड़ कर उसको सीधा पलट दिया। जुबैदा अपने टांगों को झटक रही थी, जिससे की वो उसकी गिरफ़्त से छूट सके। पर वो सब मर्द तो ऐसी कई कलियों को रंडी बना चुके थे, सो वो बेचारी कहाँ से छूट पाती। उसको बिस्तर पर तड़फ़डाते हुए देख कर अब उन दोनों ने भी उसकी बहन नसरीन को उठा कर वहीं उसी बिस्तर पर पटक दिया। वो दोनों बहने अब पूरी तरह से घबडा गई थी और अब चुप हो कर दोनों एक दुसरे से चिपक गई। उन मर्दों ने उन दोनों को खुब गालियाँ दी और फ़िर सब एक तरफ़ हो कर अपने कपडे उतारने लगे। दोनों बहन सब समझ कर चुप-चाप उनको देख रही थी। अब वो दोनों उनसे गिड़गिडाने लगी थी कि वो सब उन दोनों को जाने दें। वो दोंनो अब उनको कभी अपना भाई कहती तो कभी अपना बाप।

 उनकी बातों को सुन कर उस लीडर ने कहा, "इस सब से कुछ नहीं होगा, हमलोग तो जमाने से यही सब करते आए हैं। निकाह करके तो मैं ही अपनी बीवी को धंधे में लाया, जो इस कोठे की पहली रंडी बनी। फ़िर तो उसने कई को इधर-ऊधर से ला कर धंधे में लगाया।" जुबैदा ने अब एक अंतिम बार अलग हट कर उसके पैर पकड़ कर बोली, "आप तो मेरे अब्बू जैसे हैं, प्लीज आप मुझे जाने दीजिए"। उसने उसको दूर ठेलते हुए कहा, "हट साली, तुम्हारा अब्बू तो तुमको बेच कर कही दारू पी रहा होगा, और मुझे कह रही है कि छोड़ दूँ। जो पैसा तुम लोग के बाप को मिला है, वो तुम्हारे छेद से हीं तो अब हमलोग निकालेंगे। ज्यादा हल्ला की तो सड़क पर ले जाकर कुत्ता से चुदा देंगे, खैर चाहती है तो चुपचाप खड़ी हो कर खुद से अपना पैन्ट खोल नहीं तो मादरचोद, तुम्हारे फ़्राक की तरह तुम्हारा पैन्ट भी फ़ाड़ देंगे और जब तक तू कमाएगी नहीं कुछ पहनने को नहीं रहेगा तुम्हारे पास, नंगी हीं पड़े रहना यहाँ कुतिया के जैसे।" बाकी दोनों मर्दों ने भी कुछ ऐसी ही बात नसरीन से कही जो अब अपने बदन पर के बचे हुए कपड़े को खुब जोर से पकड़ कर सिमट कर बिस्तर पर बैठी थी। तीनों अब नंगे हो कर अपना-अपना लन्ड हिला-हिला कर कड़ा कर रहे थे जिससे की वो भीतर घुस सके। उन दोनों को शान्त बैठे देख कर उस लीडर ने फ़िर से धमकी दी कि वो दोनों अपने हाथ से नंगी हो जाए, वर्ना फ़िर हमेशा के लिए नंगा रहना होगा। इस बार की धमकी के बाद जुबैदा चुपचाप उठी और बिस्तर से उतर कर खड़ी हो कर अपना जंघिया नीचे सरार दी। उसकी बूर पर करीब आधा-पौना ईन्च के कोमल मुलायम काले-काले सबाल थे, जो अभी घुंघराले झाँट बनने शुरु हुए थे। वो लीडर खुश हो कर नसरीन से बोला, "देखो, तुम्हारी बहन कितना समझदार है... तुम भी आराम से हम लोग से सहयोग करके चुदा लो, नहीं तो समझ लेना... मार-मार कर चोदेंगे लगातार हरामजादी।"

मैंने अब विभा को देखा जो टकटकी लगाए फ़िल्म देख रही थी। मैंनें कहा, "विभा, देख लो.... अगर तुम भी हमसे आराम से नहीं चुदवाई तो जैसे यह लड़की चुदेगी वैसे हीं तुमको भी किसी दिन पटक कर हम चोद देंगे। जमाने से मेरे "खड़े लन्ड पर धोखा" दे रही हो तुम।" विभा मेरी तरफ़ एक नजर देखी और फ़िर वो बोली, जिसको सुनने की आस मैं जमाने स एपाले हुए था, "ठीक है, इस बार जब पीरियड खत्म होगा तो एक बार कर लीजिएगा, पर उसके बाद नहीं..."। मैं यह सुन कर उछल पडा और उसको बाहों में भर कर बोल पडा, ’जिओ मेरी जान.... आज तुम कहो तो तुम्हारा रेड सिग्नल तोड़ कर अपना लन्ड तुम्हारी बूर के भीतर पार्क कर दुँगा।" विभा ने शर्माते हुए धत्त... किया और फ़िर मुझे अपने से दूर करते हुए फ़िल्म देखने लगी। जुबैदा ने आत्मसमर्पण कर दिया था और अब उस लीडर के कहे अनुसार, उसका लन्ड चूसने लगी थी। तभी दरवाजा खटखटाया गया और मासीमा के खोलने पर एक २२-२४ साल लडका सबके लिए चाय ले कर आया। सब चाय पीने लगे, पर मासीमा में उन दोनों लड़कियों को चाय देने से मना कर दिया, कि जब तक वो दोनों अब चुदेगी नहीं तब तक कुछ नहीं मिलेगा। जुबैदा को अब बारी-बारी से तीनों के लन्ड चुसने का आदेश हुआ था और वो बेचारी नंगी जमीन पर घुटनों के बल बैठ कर एक-एक कर तीनों के लन्ड चूस रही थी जो अब खुब फ़नफ़ना गया था। मासीमा चाय खत्म करके उठी और जुबैदा के चेहरे को सहलाते हुए प्यार से बोली, "यह तो बहुत अच्छी है रे... सब बात मानती है, इसको प्यार से चोदना तुम सब हरामी लोग", फ़िर उसने उस छोकरे से जो चाय ले कर आया था बोली, ’तू खोल उसकी चूत अब्दुल.... तेरे साथ इसकी जोड़ी ठीक रहेगी, इस सब हरामियों की बेटी की उम्र की यह यह सब, औए देखो साले लोग कैसे अपना खडा किए हुए हैं इस बेचारी के भीतर घुसाने के लिए", और उन तीनों को बोली कि जल्दी से उस वाली को जोर से पेलो और फ़िर बाद में इन बाकी चार का भी सील खोलना है तुम सब को। अब्दुल ने जब सुना कि उसको जुबैदा को चोदना है तो वो तुरन्त से अपनी चाय गटक कर अपना टी-शर्ट और जीन्स खोल्ने लगा और तब मासीमा जुबैदा से बोली, "बेटी, तुम जाओ और अब्दुल का कपडा उतारो और फ़िर उसके साथ चुदाओ पहले.... फ़िर नहा धो कर खाना खा लेना। तुम बेकार में अपनी बहन के चक्कर में लात खाओगी अगर खुशी-खुशी नहीं चुदाओगी। अब्दुल जवान है, तुम्हारे साथ उसका जोड़ा ठीक बैठेगा... और वो खुब प्यार से चोदेगा तुमको... ये तीनों हरामजादे तो तुम्हारे जैसी बच्ची को रगड़ कर रख देंगे, चार दिन तक खडा नहीं हो पाओगी ठीक से।" जुबैदा का तो यह सब सुन कर चेहरा सफ़ेद पड गया और वो धीरे से ऊठ कर अब्दुल के पास चली गई।


अब्दुल उसको अपने से चिपका लिया और उसके कमर से अपने हाथ उपर की तरफ़ सरारने लगा था। नसरीन अपनी बहन को ऐसे अब्दुल के पास जाते देख कर अपनी बहन को भी गाली देने लगी थी, कि तभी मासीमा का एक जोर का थप्पड उसकी गाल पर पडा और तीनों मुस्टन्डे उसकी पर झपटे। दो ने उसको बदोच लिया और एक उसका कपड़ा खोलने लगा। तब मासीमा चीखी, "फ़ाड़ साली कुतिया का कपडा फ़रीद, साली का बूर खून से लाल कर दो हरामजादी का। फ़रीद ने तब ताकत लगा कर उसका साया नीचे से पकड़ कर जोर लगा कर चर्रर्रर्रर्रर्रर्र से फ़ाड दिया और नसरीन की नंगी टांगों का दीदार सब को होने लगा था। नसरीन चीख रही थी, गाली दे रही थी.... पर उन सब ने उसके बदन से साया के फ़टे टुकड़ों को खींच-खींच कर हटाने लगे थे। साया ऊअपर नसरीन की कमर में डोरी से कस कर बंधा हुआ था सो उन सब के हर झटके से उसके कमर की डोरी भी जोर से उसकी कमर को दबाती और अब वो उस दर्द से अपने को बचाने के लिए अपना हाथ चुचियों से हटा कर बार-बार कमर पर साया की डोरी पर ले जाती थी, पर सब तरफ़ से तीनों उसका साया नोच रहे थे और वो अकेली अपने को साये से खींच रहे डोरी के दर्द से बचाने में नाकाम थी। जल्द हीं उस डोरी से तीन-चार छोटे-छोटे कपडे के टुकडे हीं लटक रहे थे। नसरीन अब लगातार रो रही थी और गिडगिडा रही थी। अब वो अपने हथेलियों से अपनी लाज को ढकने की नाकाम से कोशिश कर रही थी। तभी फ़रीद ने खुब ताकत से उसके हाथों को उसकी चूत से हटा दिया और सब को अब आराम से उसकी अनचुदी झाँटों से भरी चूत के दर्शन होने लगे। कैमरामैन ने आराम से उसका क्लोज-अप दिखाया। करीब ३-४ ईंच का झाँटों का जंगल था उसकी बूर के चारों तरफ़। तब मासीमा आगे बढ़ी और उसकी बूर की फ़ाँक को अपने हाथों से खोल दी जिससे की उसकी बूर की लाली कैमरे में कैद हो सके और फ़िर उसने और जोर लगा कर उसकी फ़ंक को जैसे चीड दिया और तब उसकी कुँवारेपन का सबूत लाल झिल्ली जिसमें एक नन्हा सा छेद था, अब चमक कर सामने दिखने लगा। मासीमा ने अपनी एक ऊँगली उसकी उस झिल्ली पर लगा कर उसको दाबा तो नसरीन दर्द से चीख उठी और उसने एक लात मासीमा के बाँह पर लगा दिया।

मासीमा वहाँ से गाली देते हुए हटी और उन सब को आदेश दिया, "फ़ाड़ दो साली का बूर...."। फ़रीद अब उन दोनों को बोला कि वो अब उसको स्थिर करें जिससे वो अपना लन्ड नसरीन की बूर में घुसा सके। तभी कमरे में एक चीख गुंजी, और तब कैमरा घुमा तो दिखा कि अब्दुल अब जुबैदा के भीतर अपना घुसा रहा था। उसका सुपाडा भीतर चला गया था, अब वो अपने को स्थिर रखे हुए था और जुबैदा के थकने के इंतजार में था। उसने जुबैदा को जमीन पर हीं अपने बाहों और टाँगों की मदद से लगभग पूरी तरह से दबोच लिया था। जुबैदा और उसके सीने पर अपने हाथ से धक्का लगा कर उसको अपने ऊपर से उठाने की कोशिश कर रही थी, पर नाकाम थी। जवान अब्दुल की उस मस्त गिरफ़्त से छुटना उसके जैसी नादान कली के बस में नहीं था। मासीमा ने उन तीनों को रुकने का आदेश दिया और अब उन दोनों के पास में बैठ गई और फ़िर जुबैदा के सर को सहलाते हुए, उसको पुचकारने लगी..., "बेटा, अब हल्का सा दर्द होना रानी, फ़िर सब ठीक हो जाएगा... तुम तो बहादूर हो, बस एक सेकेन्ड और बर्दास्त करो।" जुबैदा का ध्यान अब मासीमा की तरफ़ चला गया था, और तभी मासीमा नें अब्दुल को ईशारा किया और उस हरामी ने जुबैदा के बालों को अपने दोनों हाथों से दोनों तरफ़ से जोर से पकड़ लिया और फ़िर एक झटके में अपना लन्ड उसकी कसी हुई बूर में ठेल दिया। जुबैदा जोर से चिल्लाई...., छ्टपटाई..., अप अब्दुल ने अपने लन्ड झटके से भीतर ठेलने के बाद अपने कमर से उसकी कमर को दाब दिया था कि वो हिल भी ना सके। बालों को जोर से जकडे था जिससे वो अगर अपना सर जरा भी हिलाती तो बाल खींचने से दर्द होता। बेचारी की आँखों से मोटे-मोटे आँसू बह निकले, वो अब बेबसी में दो-चार बार कसमसा कर निढाल हो कर शान्त हो गई और हिचकी ले-ले कर रोने लगी। करीब १८-२० सेकेन्ड वैसे हीं अब्दुल उसको दाबे रहा, और फ़िर जब देखा कि अब जुबैदा इतनी टूट चूकी है कि अब कोई विरोध नहीं करेगी तब, उसन अपना गिरफ़्त थोड़ा ढ़ीला किया और उसके बाल छोड कर अपने हाथों के सहारे धीरे से उसके बदन से ऊपर उठा। फ़िर खुब प्यार से जुबैदा के होठ पर अपने होठ रख कर चुमने लगा। जुबैदा रोए जा रही थी और अब्दुल उसके होठ को चुमते जा रहा था, और जब जुबैदा थोड़ा और शान्त हुई तब उसने अपने कमर को उठाया जिससे उसका लन्ड अब बाहर निकलने लगा, क्लोज-अप में उसकी बूर की सील टुटने की गवाही में लन्ड पर लिथडा हुआ लाल-लाल थोड़ा सा खून दिखा। करीब आधा लन्ड बाहर खींच कर अब्दुल ने फ़िर से जोर के धक्के के साथ भीतर पेल दिया और इसबार फ़िर जुबैदा दर्द महसूस की पर अब वो परिस्थिति समझ गई थी सो बस सिसक कर रह गई। अब्दुल अब आराम से उसकी चुदाई करने लगा और वो बेचारी रोते हुए अपनी चुदाई करवा रही थी। पास में खडी बाकी चार लडकियों पर अब कैमरा घुमा तो सब ने सर नीचे झुका लिया, वो सब शान्त हो कर डरी-सहमी जुबैदा की चुदाई देख रही थीं। करीब ४०-५० धक्के खुब आराम-आराम से लगाने के बाद अब्दुल ने उसकी कमर को जकड़ कर तेजी से कुछ और धक्के लगाए और फ़िर उसकी बूर के भीतर हीं झड गया और जब उसने अपना लन्ड बाहर निकाला तो जुबैदा की ताजा चुदी हुई बूर से सफ़ेद-सफ़ेद सा माल निकल कर उसकी गाँड़ की फ़ाँक की तरफ़ बह निकला।


मासीमा ने अब अब्दुल को कहा, "छोड अब उसको, थोडी देर बाद उसकी गाँड़ भी मार देना, पता नहीं कल कौन सा कस्टमर आएगा इसके लिए... सो इसको सब पता तो रहे कि क्या कैसे होगा इसके बेदन के साथ और उसको क्या-क्या बर्दास्त करना है। चल अब आ और इस हरामजादी को ठीक कर.... इन साले बुढ़ों से कुछ नहीं होगा।" कैमरा अब फ़िर से बिस्तर पर था जहाँ नसरीन अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और दो लोग उसको कंधे और बाहों से पकड कर, और एक फ़रीद उसकी टांगों को पकड़ कर बिस्तर पर लिटाने की कोशिश कर रहे थे पर अभी तक नाकाम थे। नसरीन ने अब तक उन सब को अपने पर पूरी तरह से काबू नहीं करने दिया था। कई थप्पड उसने खाए पर वो जी-जान लगा कर विरोध कर रही थी। असल में जब जुबैदा की चुदाई हो रही थी तब तो सब वही देखने में मशगुल थे, शायद इसलिए कि तब नसरीन की विडियो नहीं बन पाती। २२ साल के जवान अब्दुल का लन्ड अभी भी सही था, वो जुबैदा की बूर से निकले अपने गीले लन्ड को हिलाया और आराम से बिस्तर पर चढ कर एक झटके से नसरीन की बडी-बड़ी झाँटों को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया। वो दर्द से बिलबिला गई। उसने नसरीन को, उसकी झांटों के भरोसे हीं काबू में करके, अपना कमर बिस्तर पर स्थिर करने के लिए मजबूर कर दिया। फ़िर अचानक उसने लपक कर उसकी एक चूची अपनी मुट्ठी में पकड कर जोर से दबाई, तो नसरीन फ़िर से दर्द से चीख पडी। अब्दुल ने अपने एक हाथ की मुठ्ठी में नसरीन की चूच्ची और दूसरे हाथ की मुठ्ठी में उसकी झाँट पकड ली थी और जब तब वह इस दोनों मुठ्ठियों के मदद से उसको दर्द से बिल्बिलाने के लिए मजबूर कर रहा था। जहाँ वो जरा भी विरोध करती वो उसकी झाँट को जोर से खींचता और बेचारी चीख कर शान्त हो जाती। जल्दी हीं वो समझ गई कि अब उसका कोई जोर नहीं चलेगा तब वो मजबूरी में रोने लगी और फ़िर फ़रीद ने उसकी जाँघ को फ़ैला दिया और अपने घुटनों के बल उसको चोदने के लिए बैठ गया। नसरीन अब उससे दया के लिए गिडगिड़ाने लगी। पर फ़रीद ने अपने हथेली पर खुब सारा थुक निकाला और फ़िर उसकी बूर की फ़ाँक खोल कर उसकी बूर में उस थुक को ल्गा दिया, फ़िर एक बार अपना थुक निकाल कर इस बार अपने खडे लन्ड पर लगा कर उसकी दोनों जाँघों को अपने कन्धे पर टिका कर अपना लन्ड उसकी बूर की खुली फ़ाँक पर लगाया, तब अब्दुल ने नसरीन के झाँट छोडे और उसकी दूसरी चूच्ची को भी अपने दूसरे हाथ से जकड़ लिया, और उसी समय फ़रीद धीरे-धीरे उसकी बूर में अपना लन्ड दबाने लगा। जल्दी ही उसकी झिल्ली पर जब लन्ड का दबाब पडा तो वो दर्द से बिलबिलाई पर उससे ज्यादा दर्द अब्दुल ने उसकी चूच्चियों को मसल कर दिया और बेचारी चीखती रह गई और उसको शायद पता भी नहीं चला कि कब उसकी बूर की सील टूट गई और कब फ़रीद का पूरा लन्ड भीतर घुस गया। फ़रीद बिना देरी के अब लगातार उसको चोदने लगा था और तब अब्दुल ने उसकी चूचियों को आजाद किया। अब वो भी मजबूर हो कर रो-रो कर अपनी बूर चुदा रही थी। करीब ७-८ मिनट की चुदाई के बाद फ़रीद ने उसकी बूर में अपना माल निकाल दिया और फ़िर हाँफ़ते हुए उसके ऊपर से हट गया। नसरीन भी रोते हुए ऊठी और अपनी बहन के पास जा कर उसके गले लग कर फ़फ़क कर रो पडी।  

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