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Sunday, August 17, 2014

FUN-MAZA-MASTI मामी की गदराई गांड-8

FUN-MAZA-MASTI

 मामी की गदराई गांड-8

 “ क्यूँ तू थोड़ी ही है मेरे काबू में ?”

“तो क्या, दिन रात आपके बारे में तो सोचता रहता हूँ, में तो गुलाम हूँ आपका.”

“अच्छा अच्छा, बाते मत बना, ऐसा होता तो में बुलाते ही मुझे मिलने आ जाता”

“बहोत जी करता है मामी, पर क्या करू? खैर जाने दीजिये में आपका नंबर देता हूँ मेरे दोस्त को, मुरलीधर नाम है उस्सका, उस्सका नंबर भी आपको sms करता हूँ.”

“ठीक है, दोपहर को करने को कहना उस्से फ़ोन, तभी में अकेली होती हूँ घर में”

“जी मामी, अभी देता हूँ उस्से आपका नंबर, शायद वो अभी कॉल करेगा, तो अब रखू फ़ोन?”

“ठीक है, करते रहना फ़ोन”

“बिलकुल मामी, खयाल रखना अपना bye”

“अच्छा”

मैंने फ़ोन कट करके मुरलीधर को कॉल किया और उस्से मामी का नंबर दिया, और उस्से मामी को फ़ोन करने को कहा और मामीसे जो भी बातचीत हो उस्से रिकॉर्ड करके मुझे भेजने के लिए भी कह दिया. अब में उस्सके रिकार्डेड कॉल का ही इन्तेजार कर रहा था, उनमे क्या क्या बात होगी ये सोचकर ही मुझे बहोत उत्तेजना हो रही थी. मेरी खानदानी मामी किसी अंजान आदमी से गंदी गंदी बाते कर रही होगी अभी ये सोचकर ही मेरा दिल जोर जोरोसे धड़क रहा था. करीब एक घंटे बाद उस्सने मुझे वो रिकार्डेड फाइल भेजी. ऑफिस hours ख़त्म होने के बाद मैंने घर जाकर वो रिकॉर्डिंग ओपन की.. करीब 50 मिनिट तक उनकी बातचीत हुयी थी. मैंने एक सिगरेट जलायी और प्ले बटन दबाया..........................

“हेलो sss”

“हेलो, राहुलने आपका नंबर दिया मुझे, आप उस्सकी मामी हो ना?”

“हां, में उस्सकी मामीही हूँ”

“नमस्ते मामीजी, क्या बताया था उस्सने में कॉल करूँगा?”

“हाँ, बताया था”

“अच्छा, मेरा नाम मुरलीधर है, क्या आपका नाम जान सकता हूँ?”

“जी, विजया है मेरा नाम”

“बहोत ही प्यारा नाम है आपका विजया जी”

मुरली की सासे जोर से चलने आवाज आ रही थी. मामीसे बात करते वक़्त वो मूठ मार रहा था. मामिजिका का आवाज भी घुगरा था.

“जी, शुक्रिया”

“विजयाजी वैसे तो औरत को उस्सकी उम्र नहीं पूछनी चाहिए, फिर भी मेरी गुस्ताखी माफ़ करके आपकी उम्र क्या है बतायेंगी मुझे?”

“कोई बात नहीं जी, ४५ उम्र है मेरी”

“काफी जवान हो आप तो फिर, और फोटो में तो आप ४० की ही लगती हो”

“जवान तो नहीं रही में. मेरे लड़की के २ बच्चे है, दादी हूँ में”

“हाँ बताया था राहुल ने मुझे , लेकिन लगता नहीं आप दादी भी हो सकती हो,आप तो २-३ साल उम्र वाले बच्चोंकी माँ लगती हो”

“हा हा हा, सच में?”

“हाँ, सच कह रहा हूँ”

“लेकिन आप ने मेरा चेहरा थोड़ी ही देखा है?”

“हाँ देखा न मेने, अभी दिखाया राहुल ने मुझे”

“अच्छा, तो में फीर भी आपको जवान लगती हूँ?

“हाँ आप तो दुनिया की सबसे सुन्दर स्त्री हो”

“कुछ भी”

“सच में”

“हम्म “

“अच्छा, क्या में आपको विजया पुकार सकता हूँ?”

“ठीक है, कोई दिक्कत नहीं”

“क्या कर रही थी तुम मेरा फोन आने से पहले?”

“कुछ नहीं, ऐसे ही लेटी थी टीवी देखते देखते”

“अच्छा, दिनभर अकेली ही होती हो क्या घर में तुम?”

“हाँ, दोपहर पती आते है मेरे खाना खाने , बाकी के वक़्त अकेली ही होती हूँ”

“हम्म.. तो तुम सच में मिलोगी मुझे, में तुम्हारे गाव आया तो?”

“हाँ, क्यूँ नहीं”

“में बहोत बेकरार हूँ तुमसे मिलने के लिए विजया, बहोत दिन से कह रहा था में राहुल से की तुमसे बात करे”

“हाँ, राहुल ने बताया मुझे”

“तो बताओ मुझे, मिलके क्या करेंगे हम?”

“आप क्या चाहते हो?”

“में तो तुम्हे अपने गोद में बिठाना चाहता हूँ! बेठोगी मेरे गोद में?”

“हम्म”

“क्या हुआ, शरमा गयी क्या?”

“नहीं”

“तुम्हे पसंत नहीं ऐसी बाते?”

“ऐसा नहीं है, पहले कभी अंजान आदमी से बाते नहीं की”

“शरमा ओ मत विजया, खुल के बात करो, तुम्हे भी मजा आएगा बाते करने में, और जब मिलेंगे तब और भी मजे करेंगे.”

“जी”

“तो बताओ, बेठोगी मेरे गोद में?”

“हाँ”

“आह, और क्या करेंगे हम?”

“आपको क्या क्या पसंत है, आप ही बता दीजिये”

“पहले तो तुम्हे अपनी गोद में बिठाके तुम्हारे गदराये नितंब को प्यार से सहलाउंगा, तुम्हारा नितंब बहोत ही चोडा और उभरा हुआ है विजया, बहोत ही रसीला लगता है,जब से देखा है तबसे दीवाना हूँ में तुम्हारा.”

“ह्म्म्म, आपको गांड ज्यादा पसंत आती है क्या.”

“हाँ, तुम्हारी तो बहोत बड़ी है. मुहे तो बहोत पसंत है तुम्हारी गांड, साइज़ क्या है तुम्हारी गांड का?”

“आप ही आकर गिन लीजियेगा”

“वो तो में गिनूंगा, लेकिन बताओ ना, किस साइज़ की निकर लगती है तुम्हे, पहेनती हो ना निकर?”

“हाँ पहेनती हूँ, ११० cm साइज़ की लगती है मुझे”

“म्मम्मम्म, 44” मतलब, काफी मोटी है तुम्हारी गांड, मजा आएगा नंगी गांड देखकर तेरी, २४ घंटे पहेनती हो निकर या कभी कभी”

“कभी कभी निकालती हूँ, नहीं तो हमेशा होती है”

“अच्छा”

“तो कब आ रहे है आप?”

“वो प्लान करेंगे राहुल के साथ, तुम्हारा पती होगा ना, तो तुम्हारे घर में तो नहीं कर सकते, तुम्हे ही किसी होटल में आना पड़ेगा. वही होटल में कमरा लेकर मजे करेंगे.”

“लेकिन में तो गाव में रेहती हूँ, इधर होटल नहीं होते.”

“हम्म, तो क्या करे?”

“देखते है, राहुल कोई प्लान कर लेगा”

“हाँ उससे बात करता हूँ में, और बताओ”

“क्या?”

“मजा आ रहा है तुम्हे बात करके?”

“जी”

“पहले कभी की है ऐसी बाते किसीसे तुमने?”

“जी नहीं”

“अच्छा”

“में भी पहली बार कर रहा हूँ”

“अच्छा”

“अभी क्या पहना है तुमने?”

“साड़ी”

“घर में होती हो तो नायटी नहीं पहेनती?”

“नहीं हमेशा साड़ी ही पहेनती हूँ, छोटा गाव है ना”

“हम्म, निकर पहनी है अभी?”

“हाँ”

“कोनसा कलर है?”

“गुलाबी”

“अच्छा, कोटन की?”

“हम्म”

“प्लेन कलर है या डिज़ाइन है?”

“सफ़ेद और गुलाबी रेषाए है आढी”

“अच्छा अच्छा”

“satin की है क्या तुम्हारे पास निकर?”

“जी नहीं, सिर्फ कॉटन की है”

“क्यूँ तुम्हारा पती कभी नहीं चाहता तुम्हे satin के निकर में देखने के लिए?”

“नहीं”

“अच्छा”

“थोड़ी देर में कॉल करेंगे आप?”

“क्यूँ कुछ काम है क्या?”

“जी बाथरूम जाना था”

“सु-सु करनी है ?”

“हाँ “

“तो करो ना, फोन बंद करने की क्या जरूरत है”

“ठीक है, में आती हूँ फिर”

“फोन अपने पास ही रखना”

“क्यूँ?”

“मुझे सुननी है आवाज”

“आपको पसंद है ये सब?”

“हाँ बहोत, मुझे पसंद है औरतों की सु-सु करते वक़्त बजने वाली सिटी”

“ठीक है”
.
.
.
“बाथरूम में करती हो या टॉयलेट में?”

“बाथरूम में”

“पोहोच गयी बाथरूम में?”

“हाँ”

“तो पास में ही रखो फोन”

“जी”

फिर पुरे ४५ सेकेंड मामी के सु सु की आवाज आ रही थी.. मेरी मामी तो बिलकुल मजे ले रही थी मुरली के साथ बात करते करते..

“हेलो”

“हो गयी?”

“जी हाँ”

“अच्छा”

“आ रही थी आवाज?”

“हाँ, जोर से बजती है अभीभी तुम्हारी सिटी”

“हा हा हा”

“सच में.”

“ह्म्म्म, आप क्या करते है?”

“मेरी इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकाने है चेन्नई में”

“अच्छा”

“हाँ,”

“आपके बच्चे कितने है?”

“२ बेटे है, एक १८ का और एक २० का ”

“अभी फिर दुकान में हो आप?”

“नहीं, तुमसे बात करनी थी इसीलिए घर आया था, नंगा होकर बात करनी थी”

“इश, तो क्या आप नंगे हो अभी?”

“हाँ”

“बीवी नहीं है?”

“नहीं वो जॉब करती है”

“अच्छा”

“काश तुम्हे अभी मेरे गोद में ले सकता”

“लीजिये ना, किसने रोका है? हा हा हा”

“लूँगा लूँगा जल्दीही, तो बताओ, मेरा चूसोगी तुम?”

“जी नहीं, मुझे अच्छा नहीं लगता”

मामी झूठ कह रही थी, सुबह ही उन्होंने महेश का चूसा था, शायद चिढ़ा रही थी वो मुरली को.

“क्यूँ? कभी चूसा नहीं अपने पती का?”

“ छी ,नहीं, उन्हें अच्छा नहीं लगता..”

“अरे मजा आता है चूसने में औरतों को”

“उस्समे क्या मजा है?”

“मिलने के बाद मेरा चूसो तब पता लगेगा तुम्हे”

“ठीक है”

“तो चुसोगी ना?”

“देखते है”

“देखो में बहोत दूर आ रहा हूँ तुम्हे मिलने के लिए, मुझे पूरा मजा लेना है,तुम्हे चाहिए तो पैसे लेना”

“जी? कितना दे सकते हो मुझे?”

“तुम्हे कितना चाहिए?”

“में पूछ रही हूँ आपसे”

“२०००”

“बस? उतने में तो रांड आती है, वो तो आपको वहा भी मिलेगी, इतनी दूर क्यों आ रहे आप फिर?”

“मुझे घरेलु शादीशुदा औरत चाहिए”

“अच्छा, तो फिर इतने में थोड़ी ही शादीशुदा इज्जतदार औरत मिलेगी?”

“तुम जितना कहोगी उतना दूंगा, मुझे बस मजा देना होगा तुम्हे, मुझे खुश किया तो रानी बना कर रखूँगा”

“हा हा हा , में शादी शुदा हूँ, बच्चे है मेरे, में कैसे आपकी रानी बन सकती हूँ?”

“ह्म्म्म, तो एक बार ही मिलोगी क्या?”

“आपको मजा आया तो कभीभी आइये”

“देखते है फिर”

“तो फिर रखू फोन?”

“क्यूँ जल्दी क्या है?”

“मेरे पती आने का टाइम होगया है”

“अच्छा, फिर कब कॉल करू?”

“अभी मन भरा नहीं?”

“नहीं”

“ठीक है, आप कॉल करियेगा, फ्री हुयी तो उठाऊंगी”

“ठीक है”

“अच्छा, रखती हूँ फोन फिर”

मेरे मामी का ये रूप देखकर में तो जोर जोर से मूठ मार रहा था जैसे ही रिकॉर्डिंग खत्म हुयी मेरा गिर गया. इतना मजा मुझे पहेली बार मिला था मूठ मारकर.मुझे कुछ एहसास ही नहीं हो रहा था, मैंने मेरा पानी उषर ही खड़े खड़े फर्श पे छोड़ दिया, बाथरूम तक जाने का वक़्त ही नहीं मिला मुझे”
मैंने मामी को फोन लगाया..

“हेलोsss”

“हाँ मामीजी बात हुयी आपकी मुरलीधर से?”

“हाँ”

“कैसा लगा आपको वो?”

“बडी गंदी गंदी बाते कर रहा था”

“अच्छा, आपको अच्छा नहीं लगा?”

“नहीं वो बात नहीं”

“फिर?”

“तू भी ना ....”

“ हा हा हा.. तो आपको भी अच्छी लगी लगती है उस्सकी बाते”

“हट बेशरम, मामी को चिढाता है?”

“क्या बाते हुयी बताइए ना”

“नहीं, बताने लायक नहीं है”

“आप भी ना, अब मुझसे क्या शर्माना?

“हट बदमाश, मामी हूँ तुम्हारी में”

“तो क्या हुआ? मेरी प्यारी, किंकी मामी हो आप”

“तू बड़ा शैतान है, कुछ भी बोलते हो”

“अच्छा अच्छा , घुस्सा मत हो”

“क्या कर रहा है तू?”

“आप ही को याद कर रहा था अभी”

“मतलब मेरा नाम लेके हिला रहा था..”

“तो आप भी सिख गयी गंदी बाते करना उस्ससे?”

“बदमाश”

“हा हा हा”

“तो आगे क्या करना है? कैसे मिलु में मुरलीधर से?”

“क्यूँ इतनी कलसी है उस्से मिलने की?”

“चल में रखती हूँ फोन”

“सॉरी सॉरी मामी, नहीं चिढाऊंगा अब”

“बोल फिर”

“आपको बताता हूँ में १-२ दिन में सोचकर, कैसे और कहा मिलना है”

“ठीक है, जल्दी सोच”

“ठीक है, तो रखू फोन?”

“हाँ”

“bye”

“bye बेटा”











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FUN-MAZA-MASTI मामी की गदराई गांड-7

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 मामी की गदराई गांड-7
 मुतने के बाद मामीजी जब बाहर आयी तभीभी उनकी साड़ी घुटनों तक ही थी. कपडे धोने के कारन पसीना आ रहा था उनको बहोत. उस पसीने में उनका चेहरा बहोत ही मादक दिख रहा था. पोछा और बकेट लेके वो कमरे में आगयी. बकेट पानी से भरा होने के कारन मामीजीकी गांड एक तरफ आगयी थी. बहोत ही सेक्सी लग रही थो वो. बकेट कमरे के कोने में रखके वो पोछा लगाने लगी. महेश की तरफ उनका साईड था. मूतते वक़्त जैसे औरते बैठती है, वैसेही मामीजी बेठी थी और पोछा लगाते हुए पीछे पीछे आ रही थी. जैसे ही वो महेश के सामने आयी उन्होंने अपना मुंह उस्सके सामने कर दिया. उनका पल्लू इकट्ठा होके उनके दोनों मम्मोंके गहरायी से गया था. उसीकारन उनके दोनों साइड से मम्मे दिख रहे थे और बिच की गहरायी भी देख सकता था वो. क्या नजारा था वो. ऐसे ही पोछा लगाते हुए मामीजी की गांड अब महेश की तरफ होगई थी. वैसे ही बेठे बेठे वो आगे जा रही थी दो पैरोंपे. जैसे ही आगे जाती उनके गांड की जो भी हलचल होती वो देख के महेश तो बिलकुल घायल होगया था. एक जगह फर्श पे बहोत सारे दाग पड़े थे. वहा मामीजी जोर जोर से घिस रही थी पोछा. महेश को पता था वो दाग कैसे है. मामीजी के ही नाम से वो जब रोज वो मूठ मारता था तो कभी कभी जोशमे वो रूम में ही झड जाता था. उसीके पानी के वो दाग थे.

“कितने जिद्दी दाग है ये महेश. मिटाए नहीं मिट रहे. क्या गिराया था?” वैसे तो मामीजी को अंदाजा होगया था.

“क्या पता चाचीजी, कुछ खाने वक़्त गिरा होगा.” महेश ने भोला बनकर जवाब दिया.

सारी फर्श पोछने के बाद मामीजी ने एक लम्बी सास ली और पंखेके निचे खडी होगई. अभीभी उनके मम्मे और बिच की गहरायी साफ़ दिख रही थी. उनकी साड़ी भी कमर में खोचने की बजह से उनका साड़ी के अन्दर का बड़ा पेट और भी बड़ा देख रहा था. साड़ी और ब्लोउज के बिच का नंगा पेट भी घायल कर रहा था महेश को. और ऐसे में उन्होंने अपना पल्लू निचे करके हवा लेनी शुरू कर दी. उफ्फ....

“चाचीजी आप तो थक गयी बहोत. पानी लाऊ क्या आपके लिए.”

“नहीं रहने दो.. घर जाती हूँ अब वहा ही पि लुंगी.” ऐसे कहके वो अपने घर चली गयी.

महेश का तो लंड बहोत देर से उंस उंस कर पानी छोड़ रहा था. मामीजी के जाने के बाद झट से उस्सने अन्दर से लॉक किया और अपनी पेंट उतार कर वही मूठ मारने लग गया. १० सेकण्ड भी नहीं लगे उसके पानी गिरने. पानी गिरने के पहले कुछ ही पलोंमे उस्सको एक आईडिया आया. उस्सने अपना सारा गाढ़ा वीर्य अपने हाथोंमें जमा किया और एक गिलास में ले लिया. उसमे उसने पानी मिलाया. अपना लंड भी उसने उसी गिलास में डुबो दिया. लंड पे जो भी वीर्य की बुँदे लटक रही थी वो उस्सने गिलास में धो दिये. और उसी वीर्य भरे पानी में शक्कर नमक और निम्बू डालके निम्बू का शरबत बना दिया. वो छान कर लिया उसमे ताकि जो वीर्य पानी में घुला न हो वो निकल जाये. निम्बू शरबत का और एक गिलास बनाके वो मामीजीके यहाँ गया. मामीजीने उनके यहाँ से लॉक नहीं किया था दरवाजा इसीलिए वो ऐसे ही चला गया. मामीजी हॉल में कुछ रही थी. उसने उनको वो उस्सके वीर्य से बना हुआ शरबत दे दिया.

“अरे वा महेश. बहोत जरूरत थी इस्सकी अभी. बहोत बहोत शुक्रिया” मामीजी बहोत खुश होगयी महेश के ऊपर.

“शुक्रिया किस बात का चाचीजी. आप बहोत थकी हुयी थी इसीलिए बना दिया. पि लीजिये ना. मामीजी ने झट से दो-तिन घूँट पि ले शरबत के..

“वाह महेश, एकदम मस्त बना है शरबत.” ऐसा कहके सारा शरबत मामीजी ने पि लिया. ये देखके महेश मन ही मन सोच रहा था कब इसे अपना कच्चा वीर्य पिला सकूँगा.


“थैंक यू चाचीजी. चाचीजी आप से पूछना था, कल मेरे फ्रेंड का बर्थ डे है, इसीलिए मेरे रूम में हम आज रात पार्टी करे क्या?”

“करो ना महेश, आज तुम्हारे चाचा भी नहीं है. कोई प्रॉब्लम नहीं. लेकिन ज्यादा शोर मचाओगे क्या.?”

“नहीं चाचीजी.”

“बियर वैगरा लाने वाले हो क्या?” मामीजी मुस्कुराकर बोली.

“हाँ, आपको दिक्कत तो नहीं?” महेश ने हौसला पाकर बोला.

“ठीक है मजे करो”

“चाचाजी कहा गए है?”

“उनके दोस्त की बेटी की शादी है कल. वो आजही गए है. में कल सीधा शादी में जाउंगी.”

“ठीक है फिर, बहोत शुक्रिया आपका,”
उस रात को महेशने के २-३ दोस्त बुलाकर बहोत बियर पी ली. चिकन वैगरा भी मंगवाया था. लेकिन सुबह जब उठा तो दोस्त जाने के बाद देखा तो सारा कचरा हो गया था. वो साफसफाई के लिए मामीजी को बुलाने के लिए दरवाजा खटखटाने वाला था की, मामीने ही दरवाजा खोला. मामीजी सजधज के तैयार थी शादी में जाने के लिए.

“अरे महेश, में जा रही हूँ शादी में यही बोलने के लिए आयी थी,”

“पर चाचीजी आज झाड़ू-पोछा नहीं लगाओगी क्या?”

“वापिस आने के बाद कर दूंगी न”

“प्लीज चाचीजी अभी थोडा साफसफाई कर दो , आपके आने तक बदबू मारने लगेगी.”

“अरे बेटा, मुझे फिर से साड़ी बदलने लगेगी”

“प्लीज चाचीजी, इस हालत में पढाई नहीं कर सकूँगा”

“ठीक है महेश, लेकिन तुम हमारे घर जाकर बेठो. में कहती हूँ तब तक अन्दर मत आना.”

“क्यूँ?”
अरे बेटा, मुझे भी जल्दी है, और इस सिल्क सारी में ही पोछा मारू क्या?”
महेश को पता चला, मामीजी सारी उतार कर वैसे ही काम करने वाली थी.

“ठीक है, में जाता हूँ, लेकिन जल्दी करना.” ऐसा कहके महेश उनके घर जाकर बेठा. लेकिन थोड़ी देर बाद उसे याद आया उस्सका मोबाइल वही उस्सके कमरे में रह गया. उस्सने दरवाजा ठकठकाया लेकिन वो खुला ही था. उस्सने बाहर से ही आवाज लगायी.

“चाचीजी मेरा मोबाइल रह गया अन्दर. और आपका भी बज रहा है.”

“ठीक है लेलो. मेरा रहने दो बाद में देखती हूँ.

महेश दरवाजेसे अन्दर गया. दरवाजे के पास में ही उस्सका बाथरूम था . जोकि अभी बंद था. वो धीरे से अन्दर आया. उसने देखा वही बेड पे मामीजी की सिल्क सारी पड़ी थी. साड़ी उठाकर देखा उस्सने तो वही पेटीकोट और ब्लाउज भी था. चड्डी नहीं थी लेकिन और ब्रा भी. इस्सका मतलब मामीजी सिर्फ चड्डी और ब्रा में अन्दर बर्तन धो रही थी. महेश मोबाइल लेकर वही बेठ गया. १० मिनिट बाद बाथरूम का दरवाजा खुला. दरवाजे के बायीं तरफ महेश बेठा था. लेकिन मामीजी बाथरूम से बाहर आकर दाई तरफ देखने लग गयी. उनके घर में जाने वाला दरवाजा खुला देखकर वो उसे बंद करने के लिए उधर मूड गयी. महेश की तरफ उनकी पीठ थी. और वो सिर्फ चड्डी और ब्रा में थी. पिंक कलर की फूल पत्ती वाली कॉटन की चड्डी थी वो. उस्सका साइज़ उसे पता था ११० cm. चड्डी भी थोड़ी निचे खिसक जाने के कारन उनके गांड की दरार ऊपर से दिख रही थी. क्या नजारा था वो. महेश तो पग्लोंकी तरह वो नजारा अपने आंखोमें समां रहा था. साड़ी में जो भी शरीर का भाग खुला रहता है वो काला पड़ गया था मामीजी का. उनके हाथ और पीठ का भाग. बाकी सब गोरा और मुलायम था. बहोत ही खुबसूरत दिख रही थी मामीजी. उनकी वो मोटी गांड, चौड़ी और उभरी हुयी समां नहीं रही थी उनके चड्डी में.
मामीजी दरवाजा बंद करके जैसे ही मुड़ी वो महेश को देखकर चौक गयी.

“अरे महेश, तुम गए नहीं.” ऐसा कहके उन्होंने वही पड़ा टॉवल उठा लिया उर सिर्फ अपने मम्मोंको ढक लिया. उनकी गदरायी जांघे, मोटा पेट, गहरी और गोल नाभी अभीभी महेश को दिख रही थी. वो पागलों की तरह मामीजी को देख रहा था.

“सॉरी चाचीजी, मोबाइल मिल नहीं रहा था, अभी मिला, जा ही रहा था की ...”

“ठीक है बदमाश, चल जा उधर जाके बेठ” मामीजी मुस्कुराकर बोली. बोलते बोलते वो महेश को पास करके बेड की तरफ आगयी. महेशने जाते जाते पीछे मुड़ा तो देखा चाचीजी अपनी चड्डी ऊपर ओढ़ रही थी..
उफ्फ..

“चाचीजी बाथरूम और टॉयलेट भी साफ़ कर देना.”

“ठीक है” मामीजी वैसेही मुड़कर बोली. उनको भी मजा आ रहा था अब.
महेश उनके घर गया तो लेकिन उसने दरवाजा बंद नहीं किया. मामिजिने भी उसे बंद नहीं किया. २ ही मिनट में चाची की पुकार सुनकर वो फिरसे उस्सके रूम में आया. मामीजी अपनी नाक बंद कर बोली..

“अरे कितनी बदबू आ रही है.. कितनी बियर पी रात में? और फिनाईल ख़त्म होगई है. जा हमारे घर से ला." महेश ने झट से जाकर फिनाइल लाया और मामीजी को दे दिया. मामीजी फिनाईल लेकर टॉयलेट में डाला. इंडियन सिटींग का टॉयलेट था वो, इसीलिए उनको झुकना पड़ा. महेश अभीभी पीछे खड़ा था. जैसी ही मामीजी झुकी महेश आंखे फाड़ फाड़ कर उनकी गांड देखने लग गया. उस्सको अब कुछ सूझ नहीं रहा था. उस्सके हाथ पैर गरम होकर कापने लगे थे. मामीजी की चौड़ी गांड झुकने की बजह से और चौड़ी होगई थी. टॉयलेट ब्रश से साफ़ करने बाद वो मुड़कर बाहर आयी..

“उफ्फ, थक गयी.. में तो , जरा पानी तो दो बेटा.”

महेश ने लाया पानी मामीने पी लिया..

“हाय राम, देखो में तुम्हारे सामने वैसे ही बिना कपडोंकी नंगी बेठी हूँ. और तू भी बदमाश इधर ही खड़ा है. चल झाड़ू लगाती हूँ में.”

मामीजी झुक कर झाड़ू लगाने लग गयी. लेकिन इस बार उन्होंने महेश को जाने के लिए नहीं बोला. मामीजी का मुंह झाड़ू लगाते वक़्त उसीके तरफ था.. उनका नेकलेस, मंगलसूत्र और ब्रा में लिपटे मम्मे सारे, लटक रहे थे.


पटापट झाड़ू लगाने के बाद मामीजी अपने कपडे उठाकर जल्दी से अपने कमरे में चली गयी और फिरसे सजधज कर वापिस आगयी में जाती हूँ बोलने के लिए. मामीजी वो सिल्क साड़ी में बहोत ही मादक दिख रही थी. उनका वो बड़ा पेट जो महेश के सामने पूरा नंगा था बहोत ही उत्तेजित कर रहा था महेश को. उनके पीठ की वो गहरायी और फोल्ड्स महेश को सास नहीं लेने दे रहे थे. जैसे ही मामीजी चली गयी. महेशने एक सिगरेट जलाई और नंगा होगया. लैपटॉप पे मामीकी अभी अभी चड्डी में ली फोटो डिस्प्ले करके वो मुठ मारने लगा. इतनी उत्तेजना पहले उसने कभीभी महसूस नहीं की थी.उस्सका लंड फुले नहीं समा रहा था. उस्सका लंड भी आज पानी छोड़ने को तैयार नहीं हो रहा था जल्दी. उसे भी मानो मामीजीके गांड पे ही अपना पानी छोड़ना था. १० – १५ मिनिट होगये तब भी उस्सका पानी नहीं निकला. महेश ने फिर दूसरी सिगरेट जलायी और जोर जोर से मुठ मारने लगा. तभी पीछे मामीजी आके खडी हुयी. उनकी बस छुट गयी थी और उनको भी शादी में जाने का मन नहीं था इसीलिए वो वापिस आगयी थी. जानबूझ के वो कोई आवाज किये बिना ताला खोलके उनके घर आयी थी. उनको देखना था महेश क्या कर रहा है. आज तो सिर्फ चड्डी में ही वो उस्सके सामने बहोत देर तक काम कर रही थी. उस्सका असर कुछ हुआ है क्या उसपर ये जानने के लिए बेताब थी वो. जब वो घर में आयी तो महेश के कमरे का दरवाजा खुला ही था. ज्यादातर मामीजी वो दरवाजा बंद ही नहीं करती थी अब. उस दरवाजे से उन्होंने अन्दर झाका तो देखा महेश पूरा नंगा था. उस्सकी पीठ दरवाजे के तरफ थी.

“अरे महेश क्या कर रहे हो?” मामीजीने उसे पूछा.

महेश के मानो होश ही उड़ गए. उसके हाथ में सिगरेट थी. लैपटॉप पर मामीजी की चड्डी में खिची तस्वीर और पूरा नंगा था वो. जल्दी से उसने लैपटॉप बंद किया और वो पीछे मुड गया. एक हाथ से उसने अपना औजार छुपा लिया और उसने सिगरेट ऐश ट्रे में बुझा दी.

“चाचीजी आप वापिस आगयी? गयी नहीं शादी में.”

“हाँ नहीं गयी. बस छुट गयी मेरी. तू ये क्या कर रहा था बेटा. नंगी औरतोंकी तस्वीर देखके मुठ मारते हो.. मेरी ही गलती है उसमे , है न बेटा. सुबह तेरे सामने में ऐसे ही आधी नंगी होगयी थी और तुझे उत्तेजित कर दिया होगा. देख कितना फुला हुआ है तेरा . आ बेटा तुझे खाली करती हूँ.”

महेश कुछ बोल पता उसके पहले ही मामीने उसे हाथ पकड़ कर बेड पे बिठा दिया. महेश को तो यकीन नहीं आ रहा था जो भी हो रहा है उसपर. मामीजी ने उसे बेड पे बिठाकर खुद उस्सके पैरोंमे बेठ गयी. और उसका हाथ उस्सके औजार से हठा लिया. महेश का लंड मामीजीका हाथ लगते ही और डोलने लग गया और सीधे खड़ा होगया.

“सिगरेट भी पिते हो क्या महेश बेटा. बुरी आदत है बेटा.”

“कभी कभी पिता हूँ चाचीजी. आप को बुरा लग गया हो तो माफ़ करना. लेकिन जब आप को आज सुबह आधा नंगा देखा तब से कुछ सूझ नहीं रहा था. ऐसे वक़्त टेंशन में पिने का मन करता है.” महेश ने भी चालाकी से उन्ही को ही जिम्मेदार बना दिया.

“ठीक है बेटा.कभी कभी पीना ठीक है. तुम आज कल के बच्चे बहोत टेंशन लेते हो. मेरी ही गलती है. तू आराम से बेठ. तेरा टेंशन अभी निकाल देता हूँ तेरे औजार से. हाय राम देख कितना तन गया है.तुझे बहोत दर्द हो रहा होगा न?” ऐसा कह के मामीजीने उसे आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

“ आह चाचीजी धीरे. आह आह...”

“हाँ हाँ बेटा.. ये पूरा सुख गया है तेरा, इसीलिए तुझे दर्द हो रहा होगा. ठहर में इसे गिला करती हूँ” ऐसा कहके मामीजी ने महेश का सूपड़ा मुंह में ले लिया.

महेश तो सातवे आसमान पे पहुच गए.सपने में भी उसने सोचा नहीं था की उस्सके घर की मालकिन उसके पैरोंमें बैठके उसका लंड चूस रही होगी. मामीजी तो एक्सपर्ट जैसे उसका लंड चाट रही थी. उसका सूपड़ा ही सिर्फ उन्होंने अपने मुंह में लिया था. और उसे ही वो लोलीपॉप की तरह चाट रही थी. महेश आराम से बेठा था बेड पर. अब उसने अपने हाथ मामी के सर पे रख दिया और वो उसके बालोंपर हाथ फेरने लगा.

“मैं जब आयी तो तू लैपटॉप पे किसकी फोटो देख रहा था.?”

“किसीकी नहीं चाचीजी” महेश घबराकर बोला.

“शरमा मत महेश बता भी दे” ऐसा कहके महेश का लैपटॉप जो वही पड़ा था उन्होंने खोल दिया. लेकिन लीड ढकने के कारन स्लीप पे चला गया था. महेश की जान में जान आयी. वो तो मामीका ही फोटो देख रहा था उस वक़्त.

“अरे ये बंद होगया है.”

“ठहरो चाचीजी दिखाता हूँ..” ऐसा कहके उसने xossip साईट खोलके सरोजा भाभी और कामिनी की थ्रेड दिखा दी उनको. उसको भी अब मामीजीका रिएक्शन देखना था.

“हाय राम ये कौन है ? कैसी कैसी फोटो डाली है?

“महेश ने सब मामीजी को समझाया कैसे लोग अपनी बीवी की फोटोज डालते है साईट पे, सब रिप्लाई क्या देते है.

“हे भगवान्, क्या जमाना आया है, ऐसे अपनी बिवियोंकी नंगी फोटोज डालता है क्या कोई?”
हाँ चाचीजी मजा आता है जब लोग रिप्लाई देते है, और चेहरा तो छिपाया जाता है न तो कोई पहचान नहीं सकता.”

“तुझे पसंद है क्या ये सरोजा भाभी?”

“हाँ चाचीजी” महेश शरमाकर बोला.

“लडकिया पसंत नहीं आती?”

“ऐसा नहीं है, लेकिन आंटीया ज्यादा पसंत है मुझे आप जैसी” महेश ने धैर्य जुटाकर कहा.

“छट बदमाश, मैं तो कितनी मोटी हूँ. तुम्हारे जैसे जवान लड्कोंको थोड़ी ही मोटी औरते पसंत आएगी?”

“आप कहा मोटी हो चाचीजी, आप तो बहोत सुन्दर हो, पतली औरते और लडकिया लड्कोंको पसंत नहीं आती. देखो इस साईट पे आंटीयो के थ्रेड पे कितने रिप्लाई आते है.”

“मुझे पसंत करेंगे के या इस साईट पे?”

“हाँ चाचीजी, आपको देख कर तो सभी पागल हो जायेंगे. आपकी एक फोटो डाले क्या?”

“पागल होगये हो क्या, किसीने देख लिया तो क़यामत आजायेगी.”

“चेहरा थोड़ी ही दिखायेंगे? और पुरे कपडे में डालते है.. देखो आपको भी मजा आएगा”

“नहीं नहीं डर लगता है, कोई देख न ले.”
 

“ठीक है चाचीजी”

“कितनी देर होगयी तेरा पानी अभी तक गिरा नहीं”

“गिरनेवालाही है चाचीजी, मुंह में लो ना फिरसे”

“हट बदमाश..” ऐसा कहके मामीजी जोरजोरसे हिलाने लगी महेश का..
महेश अब जोरजोरसे आहे भर रहा था..

“आह आह आह!!! चाचीजी, रुको मत.. में गिरनेवाला हूँ..”

दो मिनिट में ही झड गया वो, मामीजी ने वही पड़ा तोलिया उठाकर उस्सकी लंड पे रख दिया, फिर भी थोड़ी बुँदे मामीजिकी साड़ी पे और मुंह पे गिर गयी..

“हाय राम, साड़ी ख़राब होगयी मेरी, में जाती हूँ..” और महेश के कुछ कहनेसे पहले ही मामीजी वहा से चली गयी.

मामीजी चले जाने के बाद महेश वही पड़ा रहा बेड पे..अभी जो कुछ भी हुआ उस्स्पे उस्से यकीन ही नहीं हो रहा था.

उधर मामीजी अपने कमरे में जाकर आईने के सामने खडी होगयी. अपने चेहरे पर महेश की वीर्य की बुँदे देखकर वो बहोत ही गरम होगयी थी. उसी हालत अपनी में अपनी सेल्फी निकालकर उन्होंने मुझे whats app पे भेज दी. मैंने ही उन्हें whats app सिखाया था, अपनी नंगी तस्वीरे भेजने के लिए. लेकिन मामिजीकी ये फोटो देखकर में भी भोचक्का रह गया. मामीजी के गोलमटोल गोरे चेहरे पर वो वीर्य की चमकती बुँदे देखकर मेरा बाबुराव तो डोलने लगा. मैंने उन्हें फ़ोन लगाया.

“मामीजी क्या पिक भेजी है.. माँ कसम अभी आकर आपको चोदने का मन कर रहा है.”

“आ ना बेटा, तेरा ही तो इंतज़ार है, तुझे ही मामीकि याद नहीं आती.”

“क्या करे मामीजी इस कमबख्त पेट के लिए नोकरी तो करनी पड़ेगी, और इतने दूर आपसे थोडीही हमेशा मिलने आ सकता हूँ, खैर आप बताइए, चुद ही गयी क्या आप महेशसे?”

“नहीं बेटा, उस्सका लंड मुझे पसंत नहीं आया, लगा था उस्सका जवान लंड मस्त होगा, लेकिन काले मोटे लंड का मजा नहीं उस्समे.”

“तो फिर किससे चुदी आप?”

“चुदी नहीं बेटा, सिर्फ महेश का हिलाकर गिरा दिया, लम्बी कहानी है, तू आ तब बताती हूँ”

"ठीक है चाचीजी, वैसे आपसे एक बात पूछनीं थी, आप बुरा तो नहीं मानेगी?”

“नहीं मानूंगी बता तो सही.”

“मेरा एक दोस्त है, मैंने आपकी फोटो उस्से दिखाई थी, आपकी फोटो देखकर वो पूरा पागल हो गया है, आपसे मिलने के लिए वो बेकरार है.”

“तुम दोस्तोंसे मेरी बाते करते हो?”

मैंने फिर उनको xossip के बारे में बताया और मेरा वो दोस्त xossip पे कैसे हुआ वो बताया.

“तूने मेरी फोटो डाल दी क्या उस वेबसाईट पर, वो महेश भी इसी के बारे में बात कर रहा था, बेटा ऐसा मत कर किसी ने देख लिया तो तेरी मामी किसी के मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेगी.”

“घबराओ मत मामी, मैंने सबको थोड़ी ही दिखाई है, मैंने तो सिर्फ मेरे दोस्त को प्राइवेट में दिखाई है.वो भी आपका चेहरा नहीं दिखाया. आपकी याद आती रेहती है तो में आपके गदरायी गांड की फोटो शेयर कर चैट करता हूँ उस्ससे. आपकी गदरायी गोलमटोल गोरी गांड देखकर वो तो पागल ही हो गया है.”

“कहा का है वो? और मेरी नंगी फोटो दिखायी क्या उस्से?”

“नहीं नहीं मामी, नंगी नहीं दिखाई, चेन्नई का है वो”

“ठीक है, लेकिन तू पूछना क्या चाहता है?”

“वही उस्सका लंड बहोत मोटा और काला है, आप अभी कह रही थी ना आपको वैसा पसंत है”

“हाँ, अस्लम चाचा का था वैसा, मेरी गोरी जांघो में उनका लंड बहोत ही उद्दीपित करता था मुझे, लेकिन तुम्हे कैसे पता तेरे दोस्त का मोटा और काला है?”

“मैं दो सालोंसे उस्सके साथ आपकी बाते करता हूँ, एक बार उस्सने अपनी फोटो भेजी थी”

“क्या क्या करते हो तुम आज कल के बच्चे! तो तुम क्या उस्ससे चुदवाओगे मुझे?”

“हाँ, आप का मन हो तो, ”

“लेकिन किसी अंजान आदमीसे कैसे भरोसा रखेंगे और वो तो चेन्नई में रहता है, वो इतनी दूर आएगा?”

“उस्सकी आप चिंता मत करो, वो बहोत अमीर है, वो तो आपके लिए पैसे गिनने को भी तैयार है”

“हट बदमाश, में रंडी थोड़ी ही हूँ पैसे लेकर चुदने के लिए”

“बुरा मत मानो मामी, लेकिन वो दे रहा है तो, लेने में हर्ज क्या है?”

“ठीक है, तू देख ले, मैं भी अब ४५ की होगयी, तेरे मामा को तो मुझमे इंटरेस्ट नहीं, में तो कब तक अपना मन मारती रहू, जिंदगी में खाना और चुदना यही सत्य है, बाकि सब झूठ”

“वाह मामी क्या बात की है, मैं उस्सको आपका नंबर देता हूँ, आप जान पहचान कर लेना, ताकि जब मिलोगी आप उस्से तो आपको कोई दिक्कत नहीं होगी”

“ठीक है, लेकिन उस्सकी उमर तो बता”

“४८ है”

“अच्छा? मुझे लगा तुम्हारे उम्र का है.”

“क्यूँ मामी? आपको जवान लड़का चाहिए था क्या?”

“हट, बदमाश मामीको चिढाता है”

“हा हा हा, मैं तो युही मजाक कर रहा था. लेकिन आप महेश को ऐसा ही छोड़ देगी क्या? आपको देखकर तो बड़े बड़े बेकाबू हो जाते है, आपने तो उस्सको अब आपकी लत भी लगा दी , दया करना उस्सपर नहीं तो आपको फसा देगा पीछे लगकर ,औरत की लत आदमी को पागल बना देती है.”

“हाँ, वो तो अब यही है, उस्से भी मजा दूंगी में, और प्यार से काबू में रखूंगी उस्सकी चिंता नहीं मुझे”

“हाँ आपका कोई हाथ नहीं धर सकता लड़कों को काबू रखने में.”






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Tuesday, April 22, 2014

FUN-MAZA-MASTI मामी की गदराई गांड-6

FUN-MAZA-MASTI

 मामी की गदराई गांड-6
 महेश ने अपनी ‘अपाचे RTR’ बाइक निकाली, बाइक की सिट वैसे ही छोटी थी और मामीजी के गांड के सामने वो और भी छोटी लग रही थी. मामीजी महेश के कंधोंका सहारा लेकर उसके पीछे बैठ गयी. जैसे ही मामीजी बैठी उनकी गदरायी गांड का स्पर्श महेश के पीठ को हो रहा था. महेश तो मन ही मन मामीजी को नंगा कर उनके मोटी गांड के साथ खेलने भी लग गया होगा. रास्ता भी बहोत पथरीला था खेत जाने वाला उसी बजह से मामीजी के चुचे भी उछल उछल कर महेश के पीठ पर रगड़ रहे the. मामीजी भी चालाकी से उसी एंगल में बेठी थी जिससे उनके चुचे महेश के पीठ पर रगड़ सके. खेत में पहोचने के बाद मामीजी ने मोटर शुरू कर दी, गन्ने को पानी छोड़ने के लिए. खेत में ज्यादा काम नहीं था. इसीलिए मामीजी महेश को खेत दिखाने लग गयी. खेत के बीचोबीच कुवा था. कुवे को देखकर महेश बोला,
“चाचीजी आपने बताया नहीं आपके खेत में कुवा भी है , बताया होता तो में कपडे लाता, इस गर्मी में कूवे में तेरने में मजा आ जाता.”

“तो क्या हुआ, तेर लो ना, तेरने के बाद थोड़ी देर धुप में खड़े रहो अपने आप सुख जाओगे , तोलिया भी नहीं लगेगा अंग पोछने के लिए, जाओ तेर लो”

सिर्फ अंडरवियर में वो भी मामीजीकेही अंडरवियर में मामीजीकेही सामने तेरने का सोचकर महेश का लंड तो चौड़ा होगया. झट से उसने अपने कपडे उतारे और सिर्फ मामीजी की पैंटी में मामीजी के सामने खड़ा होगया. लेडीज पैंटी होने के बजह से उसका लंड समा नहीं रहा था उसमे. इसीलिए झट से उसने अपनी पीठ मामीजी की तरफ कर कुवेकी सीडिया उतर कर पानी में उतर गया. मामीजी भी उसका जवान बदन देखकर कामोत्तेजक हो रही थी. मामीजी ऊपर बैठके उसे ही देख रही थी. महेश आराम से तेर रहा था, लेकिन मामीजी की पैंटी थोड़ी बड़ी साइज़ की होने की बजह से तेरते तेरते पानी के बहाव से निकल गयी. उस वक़्त महेश मामीजी को इम्प्रेस करने के लिए उल्टा तेर रहा था. पैंटी निकल ने की बजह से उसका लंड खुला पड़ गया. ६” का ही था उसका लंड लेकिन बहोत मोटा था. उसका लंड देखकर तो मामीजी का पानी ही निकल गया. महेश ने झट से पैंटी ऊपर खीच कर अपने लंड ढक लिया और मामीजी की तरफ देखा. मामीजी उसे ही देखकर मुस्कुरा रही थी. महेश भी शरमाकर हंसने लग गया. जो कुछ हुआ वो सोचकर उसका लंड और भी फुरफुराकर पैंटी के बाहर आने की कोशिश करने लग गया. इसीलिए उसने तेरना निपटाकर ऊपर आकर धुप में खड़ा होगया. लेकिन १०-१५ मिनिट बाद उसका बदन तो सुख गया लेकिन पैंटी तो गीली ही थी. इसीलिए वो उसपर ही पैंट पहनने लग गया. लेकिन मामीजी ने उसे मना कर दिया.
“अरे कहा गीली पैंटी पे कपडे पहें रहे हो”

“क्या करे फिर चाचीजी, पहले ही देर हो गयी है, और भूक भी लग गयी है”

“लेकिन गीली पैंटी मत पहेनो, में देती हूँ तुम्हे और एक पैंटी मेरी “

“कहा से दोगी?”

“उधर देखो, में अपनी पहेनी हुयी उतार कर देती हूँ” मामीजी ने आराम से कह दिया. लेकिन ये सुनकर महेश का मुंह खुला का खुला ही रह गया.

“ठीक है”

महेश ने अपना मुंह पलटा भी नहीं था तब तक मामीजी ने ही पलटकर अपनी पैंटी निकाल दी. मामीजी की गोरी गोरी जांघे देखकर महेश तो पागल हो गया. मामीने अपनी पैंटी निकाल तो दी लेकिन निकालने के बाद उनको पता चला उनका पानी निकलने की बजह से वो गीली हो गयी है.

वो गीली चड्डी देखके मामीजी शर्मा गयी लेकिन बिना कुछ कहे उन्होंने वो चड्डी महेश को सोप दी. महेश ने भी भोला बनकर उनसे कह दिया की चाचीजी ये इतनी गीली कैसे होगयी है.. मामीजी तो गोरी चिट्टी होगयी और उसे डाट के वैसे ही पेहेनेने के लिए कह दिया..
“ऐसे कैसे पेहनू? तौलिया भी नहीं ये ढकने केलिए.. चाचीजी आप जरा मुडिये और देखिये कोई आ तो नहीं रहा में यहाँ पेड़ के पीछे जाके चड्डी पहनता हूँ..”
“हाँ हाँ जल्दी कर, कोई नहीं आता इधर, और गिली पेंटी मिट्टी में मत रख मुझे दे सुखाने के लिये रख देती हुं”
मामी जैसे हि मुडी उसने गिली चड्डी उतार के मामी को देदी और दुसरी पेहेन ली और कपडे पेहेन के वो तय्यार होगया.
“चाचीजी अब क्या करे, चले क्या घर?”
“ठेहरो थोडी देर इतनी भी क्या जल्दी है. घर जाके भी क्या करना है, अंदर चलके देखते है गन्ने में पानी उधर आता है क्या नही?” मामी ने बोला.
महेश ने भी हा बोला. मन हि मन उसे गन्ने के खेत में चुदाई कि कथाये जो उसने नेट पे पढी थी याद आने लगी. लेकीन मामी जैसी इतनी मोटी गांड वाली मादक औरत चोदने मिलेगी इसका यकीन नही था.
मामी आगे आगे चल रही थी गन्ने में. बहोत हि कम जगह थी जाने के लिये. महेश उनके पीछे उनकी गदरायी गांड घुरते हुये पीछे आ रहा था. महेश को अब कंट्रोल नही हो रहा था और जगह भी कम होने के कारन वो मामी से सटे हुये हि चल रहा था.


जैसे हि चान्स मिलता मामी के गांड को वो टच करता था. थोडा अंदर जाने बाद उधर थोडी जगह थी जहा गन्ना नही लगाया हुआ था. वहा दोनो बेठ गये.
बहोत गर्मी थी उस दिन और इतना चलने के बजह से मामी को पसीना आ रहा था, मामी के चेहरे पे पसीने के बुंद चमक रही थी. बहोत हि मादक दिख रही थी मामीजी. महेश का जि करता तो वो वही मामीको दबोच सकता था. लेकीन वो डर रहा था. और मामी के मन में क्या चल रहा है ये भी देखना चाहता था.
मामी ने साड़ी अपने घुटनों तक ली थी और पैर फैलाके बेठी थी और अपने पल्लू से वो हवा लेकर गर्मी हटाने की कोशिश कर रही थी. उनके गोरे गोरे पैर बहोत ही सुंदर दिख रहे थे. पल्लू आगे पीछे करने की बजह से उनके मम्मों के बीच की गहराई पागल कर देने वाली थी..
“कितनी गर्मी है आज. बहोत धुप भी है. मेरे बजह से तुम्हे इस धुप में आना पड़ा न मेरे राजा बेटा?”
मामी बहोत ही प्यार से बाते करती थी सबसे. इतना मीठा बोलती की सबको उनसे बहोत लगाव था. और ऊपर से उनकी वो गांड उफ्फ, सब लोग उनकी बहोत ही इज्जत करते थे. अपनी मीठी बोली से सबका मन जित लेती थी मामीजी.
“नहीं नहीं चाचीजी, उसमे तकलीफ कैसी. घर में पड़े पड़े भी क्या करने वाला था? सो ही जाता.”
“तो इधर सो जाओ थोड़ी देर. आजा रे मेरा राजा बेटा सो जाओ मेरे पैरों पे सर रखो “
ऐसा कह के मामीने उसका सर अपने जांघो पे रख दिया.
हाए.. महेश को तो उसके नसीब पे यकीन ही नहीं आ रहा था.. इतनी उनके मुलायम सॉफ्ट तो उसकी गद्दी भी नहीं थी जितनी मामीजी की जांघे थी.


महेश थोडा सा शर्मा रहा था , लेकिन मामीजी के गद्देदार जान्घोका मजा भी ले रहा था.
“बेटा मुझे वो लैपटॉप कब सिखाओगे. दिन भर तो उसपे ही बेठे रहते हो. मुझे भी सिखाओ. और बताओ इतना क्या करते हो लैपटॉप पर?”
“कुछ नहीं चाचीजी, ऐसे प्रोजेक्ट का काम होता है वही करता रहता हूँ”
“कोनसा प्रोजेक्ट, लडकिया देखने का?” मामी ने उसके सर पे प्यार से टपली मारकर पूछा.
“नहीं नहीं चाचीजी, कुछ भी क्या”
बाते करते करते महेश एक साइड पे होगया. अब उसका मुंह मामीजी के गोल मटोल पेट की तरफ था. उसके गाल को मामीजी के चूत की गर्मी साड़ी के ऊपर से भी महसूस हो रही थी.
“तो क्या तेरे उमर के बेटे तो वही करते है. सुना है इन्टरनेट क्या जो होता है उसपे “वैसे” फिल्मे भी होती है” सच है क्या?”
“पता नहीं चाचीजी, क्यूँ?”
“अब भोला मत बात. तुम्हे नहीं पता क्या? तुम्हारे पास है न इन्टरनेट?”
“हाँ”
“ऐसे ही मजाक कर रही थी. तुम नहीं देखोगे तो क्या इस उमर में देखूंगी क्या?”
“आप की कहा उमर हुयी है चाचीजी?”
“तो क्या में भी देखू क्या? दिखाओगे मुझे?”
“आप चाहती है तो दिखाऊंगा, उसमे क्या बड़ी बात है”
“मतलब तुम्हे पता है, “वैसी” फिल्मे होती है” ऐसा कहके मामीजी हसने लगी और महेश के कंधो पर हाथ रखकर उसे उठने के लिए कह दिया.
“चलो चलो अब चलते है.”
महेश जब उठ गया तो मामीजी भी खड़ी होगयी. खड़े होते वक़्त उनका पल्लू पूरा गिर गया, और उनकी साड़ी भी ढीली होगयी थी. वो नजारा देखकर तो महेश का लंड दस गुना होगया.


मन ही मन महेश ने उनका पेटीकोट निकाल कर उनके च्युत को चाटना भी शुरू कर दिया था. लेकिन एक संस्कारी लड़के की तरह उसने अपना मुंह मोड़ लिया जब मामी अपनी साड़ी पेहेनने लगी. मन ही मन वो खुदको कोसता रहा अपने इस अच्छे बर्ताव के लिए पर अभीभी वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. क्या पता मामीको सिर्फ उस्सको सताने में ही मजा आता हो? और सेक्स जैसी भावना उनके मन में न हो?
साड़ी पेहेनके मामी तैयार हो गयी. उनको तैयार देखकर महेश आगे चलने लगा. लेकिन मामी ने उसे रोक लिया.

“अरे बेटा २ मिनिट ठहरो मुझे “बाथरूम” लग गयी है.”

“ठीक है चाचीजी, में आगे जाके रूकता हूँ’

“नहीं नहीं, इधर ही मुंह मोडलो, अकेले आने में डर लगेगा मुझे इस घने गन्ने में.”

महेशने अपना मुंह मोड़ लिया. कुछ चन्द पलोमे उसको इस दुनिया की सबसे मधुर सिटी सुनाई दी. मामीजी की मूतते वक़्त बहोत ही मधुर सिटी बज रही थी. महेश को वो मधुर आवाज जहा से आ रहा था उधर देखे बिना रहा नहीं गया. उस्सने मूड के अपनी सासे थमायेमामीजी की तरफ देखा. लेकिन उसके किस्मत में अभीभी इंतज़ार लिखा था. मामीजी ने एक पवित्र भारतीय नारी की तरह अपने कुल्लोंको अपनी साड़ी दोनों हाथ में लेकर उस्से फैलाके ढक लिया था. उसको तो सिर्फ मामीके सिटी से ही काम चलाना पड़ा. पूरा आधा मिनट मुतने के बाद मामीजी खड़ी हुयी. महेश ने झट से अपना मुंह फेर लिया, और मामीजी को आगे चलने के लिए कह दिया. जैसे ही मामीजी आगे हुयी उसने पीछे मुड़कर मामीजी जहा मुतने बेठी थी वहा देखा. वहा अंडे के आकार इतनी आधे फूट की जमीन गीली होगयी थी मामीजी के मूत से. सौ मीटर आगे जाने के बाद उसने बड़ी चालाखी से मामीको रोककर अपनी बाइक की चाबी ढूँढने का नाटक किया और चाबी भूल जाने के बहाने से वो मामीको वही छोड़कर वो दोनों जहा बेठे थे उधर आगया. उधर आते ही उसने पहले अपने घुटनों के बल बैठकर मामीजी ने जहा अपना मूत डाला था उस मिट्टी की खुशबु ली. इतनी मादक खुशबू उस्सने आज पहली बार ली थी. मिट्टी सुखी थी इस्सलिये मामीजी का मूत जल्दी से सोख लिया गया था. लेकिन वहा गन्नों के कुछ सूखे पत्ते भी गिरे थे जिसपर मामीजी के मूत के कुछ बुँदे गिरी थी. उस बूंदों को देखकर उसके सिने में अजीब सी हलचल मच गयी. उसका दिल जोर जोर से धड़कने लगा. और उसने वैसे ही झुककर अपने जुबान से वो बुँदे चाट ली. उन बूंदों की वो चटपटी से स्वाद से उसकी धड़कन और तेज होने लगी. मामीजी के आने की आहत सुनकर उसने जल्दी से अपने आप पर काबू पा लिया और उठकर चल दिया.


मामीजी रास्ते में ही मिली उसे. उन्होंने चाबी मिली क्या पूछा तो उसने बता दिया की मिल गयी. दोनों गन्नोंके बीच से बाहर आगए और बाइक के पास आगये. तभी मामीजी को याद आगया की उन्होंने जो चड्डी महेश ने तैरते वक़्त पेहेनी थी वो सुखोने के लिए कुवे के पास रखी है. महेश को उन्होंने वो चड्डी जाकर लाने केलिए कह दिया. महेश ने वो चड्डी लायी. मामीने उसे पूछा,
“सुख गयी है क्या?”
“नहीं चाचीजी थोड़ी गीली है अभीभी”
“अब क्या करे, ये रखने के लिए कुछ भी नहीं है हमारे पास ऐसे थोडेही ले जा सकते है हाथ में?”
“तो क्या करे?”
“ठहर इधर ही, में झट से इसे पहेनकर आती हूँ.” मामीने बोला.
“लेकिन चाचीजी गीली कैसे पहनोगी?”
“थोडेही देर की बात है, घर जाते ही निकाल दूंगी ना.. तू ठहर यही. देख कोई आता है क्या. नहीं तो में चड्डी पेहेन रही हुंगी और कोई मजदूर आजायेगा. में पेड़ के पीछे जाती हूँ”
मामीजी ने पेड़ भी बहोत बड़ा ढूंढ लिया चड्डी पेहेनते वक़्त छुपने केलिए. महेश को एक झलक भी दिख नहीं पायी. अब तो उस्से घर जाने की बहोत ही आस लगी थी. उसका उसका लंड फुरफुराकर बहोत ही मोटा होगया था. हाथ लगाने की देरी थी बस की उसका गाढ़ा पानी कमसे कम 5 फूट दुरी तक उछल जाता.


घर पोहोचते हि उसने पेहले बाथरूम में जाके मूठ मारी. मामीजी ने उसे खाने के लिये उनके घर हि बुलाया था, इसीलिये वो जल्दी से तयार होकर मामीजी के यः गया. मामीजी खाना बना रही थी. उधर महेश उनके पीछे बेठ गया. जैसे हि मामीजी रोटी बेलने लगती उनकी गांड डोलने लगती. महेश आराम से मामीजी को एन्जोय कर था. कर इधर उधर की बाते कर रहा. महेश को एक कामवाली बाई चाहिये थी झाडू पोछा लगाने , बर्तन मांजने, खाना बनाने के लिये. इसीलिये उसने मामीजी को कोई बाई है क्या पूछा.
“ अरे बेटा, इस छोटे गाव मे मुश्कील से हि बाई मिलती है. तुम देख रहे हो, हमारी बाई ही कितनी बार नहीं आती. फिर भी में पूछती हूँ. लेकिन वो पैसे ज्यादा लेगी.”
“कितना लेगी वो?”
“सभी काम करने है तो हजार तो लेगी.”
“बाप रे इतना? इतना तो मेरा बजेट नहीं है. देखो पाचसो में तयार हुयी तो.”
“नहीं बेटा, इतने कम दाम में वो नहीं काम करेगी”
“ठीक है चाची, कोई मिली तो देख लेना, परीक्षा नजदीक आ रही है न, इसीलिए चाहिए थी कामवाली बाई, नहीं तो उन्ही कामो में टाइम जाया होता है.”
“ऐसी बात है क्या, तो बेटा में ही सारे काम करदिया करुँगी तुम्हारा.”
“नहीं नहीं चाचीजी, रहने दीजिये. उतना भी ज्यादा काम नहीं होता.”
“अरे बेटा, ऐसे ही थोडा काम करुँगी, कामके पैसे लुंगी तुमसे ठीक है.”
“मजाक कर रही हो क्या चाचीजी”
“अरे बेटा मजाक नहीं कर रही ही, सच में बोल रही हूँ”
“आपके घर के सारे काम कामवाली करती है, और आप सच में सारे काम कर देगी मेरा?”
“हाँ बेटा, जो भी कामवाली बाई करती है, वो सब करवा लेना मुझसे. मुझे ही कामवाली बाई समझ, ठीक है, लेकिन मुझे तनखा कितनी दोगे ? मामीने ने हसकर पूछा.
“में तो पाचसो ही दे सकता हूँ”
“ठीक है बेटा. रोज सुबह आ जाया करुँगी में.”
“थैंक यू , चाचीजी आपने मेरा बड़ा काम करदिया”
“हाँ बेटा , लेकिन किसी को पता नहीं चलने देना के में तुम्हारे यहाँ कामवाली बनी हुयी हूँ. नहीं तो प्रॉब्लम हो जाएगी”
“ठीक है चाचीजी. ये बात मेरे और आपके बिच ही रहेगी.”
महेश को तो अभी क्या हुआ उसपर यकीन ही नहीं आ रहा था. उस्सकी घर मालकीन उस्सके घर कामवाली बनने वाली थी कलसे. 


अगले दिन सुबह ११ बजे अपना काम निपटाकर मामीजी महेश के रूम गयी. महेश वही xossip पे नंगी मोटी आंटिया देख रहा था. उस्सका लंड तना था, मामीजी ने जब दरवाजा खटखटाया जो की उन्हीके घर खुलता था तो उस्सने लैपटॉप बंद करके दरवाजा खोला. मामीजी अन्दर आके बोली..
“लो बेटा आगयी में , बताओ क्या काम करना है?”
“कपडे धोने है चाचीजी , बहोत दिनसे मैंने धोये ही नहीं है.”
“ओहो अभी मैंने हमारे घर पे कपडे धोये वाशिंग मशीन पे तेरे भी धो देती”
महेश के प्लान पे तो ये बात सुनकर पानी ही फिर गया, उसे लगा था की ज्यादातर औरते जैसे साड़ी घुतानोंतक उठाके हाथसे कपडे धोती है वैसे ही मामीजी धोएंगी लेकिन वाशिंग मशीन की बात उस्सने ध्यान में ही नहीं ली थी. रातभर वो मामीजीकी गदराये जान्घोंके देखने मिलेंगे ये सोचकर सोया ही नहीं था. लेकिन उस्सने बात सँभालने के लिए कहा..
“ मशीन पे हाथ जैसी सफाई कहा मिलती है लेकिन चाचीजी.”
“बिलकुल मिलती है बेटा. बहोत अच्छी मशीन है हमारी. मैं तो नए कपडे भी उसीमे धोती हूँ.”
धत तेरी की.. अब महेश कुछ बहाना ढूंढ रहा था तभी उस्सकी खुशकिस्मती से लाइट ही चली गयी.
“हाय राम, लाइट को भी अभी जाना था” मामीने नाराजीसे कहा.
“लोड शेडिंग है न चाचीजी मंगलवार को ११ बजेही जाती है, अब तो ४ घंटे नहीं आएगी” महेश ने मन ही मन मुस्कुराकर कहा. रोज तो वो लोड शेडिंग के नाम से हजारो गलिया देता था लेकिन आज तो बहोत ही खुश होगया लोड शेडिंग की बजह से.
“हाँ वो तो है, दिखाओ कपडे किधर है.”
महेश ने पुरा कपड़ोंका ढेर लगा दिया मामीजीके सामने..
“उफ्फ .. इतने सारे कपडे ? मेरी कमर तोडके रखेगा तू”
“रहने दीजिये चाचीजी.. कोई कामवाली देख लूँगा में.. आप कहा करेंगी ये सब”
“ वैसी बात नहीं है.. चलो धो देती हूँ में. वैसे भी लाइट भी नहीं है. घर पे बेठे बेठे बोर हो जाउंगी.”
“ठीक है, आप कपडे भिगो दीजिये, भीगने तक झाड़ू-पोछा लगा दीजियेगा.”
“हाँ:” कहके मामीजी सारे कपडे उठाके बाथरूम में चली गयी. महेश भी उनके पीछे ही दरवाजे पे खड़ा था. मामीजीने अपनी सारी सिर्फ दो पैरों में थमा ली और वाशिंग पावडर बकेट में लिए पानी में डाला और कपडे भिगोने वो झुक गयी. महेश ममिजीके पीछे ही खड़ा था. मामीजी की फैली हुयी गांड देखकर उस्सकी मानो सास ही रुक गयी. xossip पे माल आंटिया देखकर पहलेसे ही वो मूड में था.. उसपर ये नजारा.. किसी बहाने अन्दर जाके उसे मामीजी की गांड सहलाने की बहोत इच्छा हो रही थी.. लेकिन उसने खुद को रोक लिया. अब तो ये रोज का नजारा था. पहले दिन ही वो कुछ गलत हरकत करके काम बिगड़ना नहीं चाहता था..
मामीजी कपडे भिगोके बाहर आगयी और झाड़ू मारने लगी. महेश बेड पे बेठ गया और अपना लैपटॉप गोद में लेकर फिरसे आंटिया देखने लगा. मामीजी झुक कर झाड़ू लगा रही थी. महेश के सामने उस्सकी गांड थी. उसी पोज़ में मामीजी की नंगी फोटो अगर xossip पे पोस्ट की तो उसे पता था उस्सका थ्रेड खुप धमाका मचाता ऐसे मन में सोच रहा था. और उस्समे कोई दोहराय नहीं था. मामीजी तो सभी आंटी प्रेमियोकेलिये अप्सरा ही थी. बिलकुल मोटी गांड, बड़े बड़े चुचे, पीठ की गहराई.. उफ्फ.. क़यामत थी मामीजी..
“ बेटा पैर ऊपर लो , बेड के निचे झाड़ू लगाती हूँ”
मामीजी की बात सुनकर महेश ने पैर तो ऊपर लिए लेकिन वही बेड के किनारे पे बेठा रहा वो. मामीजी उसीके सामने बेठ गयी और बेड के निचे से झाड़ू लगाने लगी. हैरत की बात तो ये थी उन्होंने सहारे क लिए महेश के पैर पे ही हाथ रख दिए..आह.. उस्सके हाथ तो मुलायम नहीं थे लेकिन बहोत मजा आया महेश को. झाड़ू लगाने के बाद मामीजी बाथरूम की तरफ निकल पड़ी कपडे धोने के लिए. लेकिन महेश ने उनसे पोछा भी लगाने को कहा..
“ चाचीजी पोछा भी मारिये .. बहोत दिनोंसे नहीं मारा है. बहोत गन्दी होगई है फर्श.”
“हाँ लगाती हूँ.. पहले कपडे धोती हूँ”
ऐसा कहके मामीजी बाथरूम में चली गयी. महेश को पता नहीं चल रहा था की वो मामीजी कपडे धोते वक़्त उनके सामने खड़ा कैसे रहे. उस्सको पता था मामीजी घुटनोंतक पैर दिखाती है कपडे धोते वक़्त. लेकिन मामीजी ही ने उसे आवाज लगायी, ब्रश और साबुन कहा है पूछने के लिए. ब्रश और साबुन दोनों ही बहार थे इसीलिए उसे मोका मिल गया बाथरूम में जाने के लिए. जैसे ही उस्सने ब्रश और साबुन दिया मामीजने अपनी साड़ी ऊपर उठा ली और बेठ गयी. मामीजीके गोरे गोरे पैर देखकर तो वो तिलमला रहा था. उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसीलिए वो जाने लगा था लेकिन मामीजीने उसी वक़्त अपनी सारी और ऊपर ली, अब मामीजी की थोड़ी जांघे और जब घुटने मोड़ने के बाद जो दरार दिखती है वो दरार दिखने लगी. बहोत ही मुलायम थी मामीजी की जांघे, और ऊपर से उसे रुकने के लिए कह दिया..
“रुको न महेश, बाते करो मुझसे, जल्दी काम होजायेगा मेरा.”
महेशने सोचा होगा की शायद आज ही काम बन जाये और ये हसीन आंटी आज ही बिस्तर में लेने के लिए मिल जाये. लेकिन अब भी उसे यकीन नहीं था. और पराये गाव में, परायी औरत के साथ वो भी शादीशुदा कुछ करने में उसे डर लग रहा था. लेकिन मामीजी के flirting को अब वो भी एन्जॉय कर रहा था. हालत लेकिन उस्सकी बहोत बुरी होगई थी. मामीजी ने पटापट २० मिनिट में ही कपडे धो दिए. मामीजी को उठते देख वो भी बेड पे आके बेठ गया. लेकिन मामीजीने बाहर आने के बजह दरवाजा बंद कर लिया. नल से आते पानी की आवाज सुनकर से अंदाजा होगया की मामीजी मुतने बेठी है.       




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FUN-MAZA-MASTI मामी की गदराई गांड-5

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 मामी की गदराई गांड-5
 “हेलो मामी, आज कैसे याद किया आपने ?”

“तुम्हारीही तो याद आती है बेटा सुबह शाम. मुझे नहीं आयी तो मेरी ये मुनिया याद दिलाती है.. आजाओ जल्दी यहाँ और मेरी इस मुनिया की प्यास बुझा जाओ..”

“हाँ मामीजी, मुझे भी आपकी रसभरी मुनिया और गदरायी गांड सोने नहीं देती. क्या करे अब काम छोडके तो आ नहीं सकते..”

“बहोत आग हो रही है बेटा, देखो आ सको तो”

“में समझ सकता हूँ मामी, मेरे हाथ भी आपके मोटे मोटे चुतड सहलाने केलिए बेकाबू हो जा रहे है, लेकिन थोड़े दिन आ नहीं सकता, तब तक मामाजी से ही अपनी मुनिया आग बुझवालो”

“उनसे होता तो क्या परेशानी थी.. साड़ी ऊपर कर के दो-चार बार आगे पीछे किया नहीं की झड जाते है.. वो क्या बुझाएँगे मेरी प्यास. अस्लम चाचा जाने के बाद बुरा हाल हो गया है..”

“कोई और पकड्लो अब, में तो हर वक़्त आ नहीं सकता इतने दूर.., आपने नए घर में रहने जाने के बाद किरायेदार रखे थे ना कॉलेज के लड़के? उनमे से कोई पकड्लो, या सभी को ही ;-) क्यूँ मामीजी?”

“छट बदमाश, अभी एक ही लड़का रहता है.. और वो भी अभी बच्चा है.. उसे थोड़ी ही पसंद आएगी मोटी, 44 साल की तेरी मामी?”

“क्या बात कर रही हो मामी? अपना गुनगान सुनना चाहती हो क्या मुझसे, जो ऐसे बात कर रही हो? मुझे पूरा यकीन है वो लड़का आपकी गांड को मन ही मन सामने लाकर दिन में बहोत बार मूठ मारता होगा.. आपकी गांड है ही ऐसी.. देखके ही हालत ख़राब हो जाती है, और अभी वो 22 साल का होगा.. इस उम्र में तो आप जैसी ही औरते पसंद होती है लड्कोंको.”

“देखती हूँ, अब किसीसे तो प्यास बुझानी पड़ेगी”

“देखो, मुझे पक्का यकीन है वो लड़का आपके चूतडों के पीछे पागल होगा”

“ठीक है, देखते है..”

“हाँ. और मुझे बताना मत भूलना क्या क्या हुआ वो. और बताओ क्या चल रहा है? क्या कर रही हो आप?”

“तुम बताओ तुम क्या कर रहे हो?”

“में तो आपका फ़ोन आया देखकर ही नंगा होकर मूठ मारने लगता हूँ आपसे बात करते करते”

“हाय मेरा भांजा.. में भी अभी बिना कपडोंके हूँ” मामीजी शरमाकर बोली.

“सच्ची? निकर भी नहीं पेहेनी आपने?”

“नहीं”

“आह, मामी आपने तो मेरा तना हुआ लंड और तना कर दिया”

“आजाओ मेरे पास, तुम्हारे लंड को खाली करने में तुम्हारी मदत करतो हूँ”

“बहोत दिल करता है मामी, लेकिन फिर कभी.”

“अच्छा”

“अच्छा , तो फिर रात को बात करेंगे, उस लडके के साथ बात बनी तो बता देना. बाय”

“बाय बेटा, रात को करती हूँ कॉल”


मन हि मन अपने तक़दीर को कोसते मैने फोन रख दिया. इतने साल जिसके नाम पे मूठ मारी वो मेरी मामी जब चाहे तब अपनी मोटी टांगे फैलाने केलीये तैय्यार थी, लेकीन हम अलग अलग शहर में रहते थे इसलिये रोज रोज ये मुमकिन नही था.. मुझे उस किरायेदार लडके (जिसका नाम महेश है.) पे बहोत जलन हो रही थी.. साले से मेरी मामी खुद हि अपनी च्युत चुसवाने के लिये बेताब थी. साले कि किस्मत में आज सुनेहरा पान जुडने वाला था..पर में भी मामी से उनकी चुदाई कि कहानी सुनने के लिये बेताब था.

रात को मामीने कॉल करके दोपेहर क्या हुआ वो बताया...

मेरे मामाने हाल में हि नया घर बनाया था. वैसे तो घर में वो और मामीजी हि रहते थे लेकीन उन्होने घर तो बडा बनाया था. घर में कुल छः कमरे थे, उसमे से दो उन्होने किराये पे दिये थे. अभी वहा सिर्फ महेश ही रेहता था. मामाजीने घर बनाते वक़्त वो दो कमरे किराये पे देने है ये नही सोचा था. वो दो कमरे भी मुख्य घर का हि हिस्सा थे. इसीलिये दोनो कमरो में कभीभी आ जा सकते थे जब वो दो कमरे किराये पे नही होते. उस दो कमरे में से एक लिविंग रूम थी जिसका दरवाजा मामिजीके घर के लिविंग रूम में खुलता था और दुसरा कमरा किचेन था जिसका दरवाजा ठीक मामीजी के बेडरूम के सामने खुलता था.

जबसे महेश किरायेदार बनके आया था उस दोनो कमरे के दरवाजे जो मामीजी के घर में खुलते थे वो सिर्फ सिटकनी लगाकर बंद किये हुये थे. महेश इंजिनीअरिंग कॉलेज का छात्र था. एक महिने पेहले हि वो किरायेदार बनके आया था मामीजी के घर. सुबह कॉलेज कर के दोपहर २ बजे तक वो घर आ जाता था. मामीजी भी दिनभर अकेली हि होती थी. जब पिने का पानी भरना हो या इसी किसी कारन से मामीजी और महेश कि मुलाकात होती थी. लेकिन अब तो साले की किस्मत ही खुलनेवाली थी. साले की मुलाकात तो अब रोज मामीजी के मुनिया और गांड से ही होनेवाली थी.

उस दोपहेर जब महेश कॉलेज से वापस आया तो मामीजी उसका इंतेजारही कर रही थी. थोडी देर बाद उन्होने दरवाजा खटखटाया..

“क्या बात है चाचीजी?”

“बेटा तुम्हारे बाथरूम में पानी आ रहा है क्या?, न जाने हमारे बाथरूम के नल को क्या होगया है. टंकी में तो पानी है ऊपर , लेकिन नल से नहीं आ रहा है.”

“क्या पता क्या हुआ है चाचीजी, मेरे यहाँ तो है पानी.”

“थोड़े बर्तन मांजने थे मुझे, यहाँ ही मांजने आ जाती हूँ फिर ”

“ठीक है चाची, लेकिन आप क्यूँ कर रही ये सब, बाई नहीं आयी क्या?”

“आयी तो थी, लेकिन पानी नहीं था इस्सलिये वापस गयी, अब क्या करे मुझे ही करना पड़ेगा सब. आती हूँ में बर्तन लेकर. लेकिन बेटा तुम्हे कुछ डिस्टर्ब नहीं होगा ना पढाई में?”

वैसे तो मामीजीने ही उपर का वाल्व बंद किया था जिससे उनके बाथरूम में पानी आता था.

“नहीं नहीं चाची, अभी कहा पढाई करूँगा में, आप आजाइए.”

मामीजी फिर बर्तन लेकर आगयी महेश के बाथरूम में.. और जैसे हर एक भारतीय आंटी बर्तन या कपडे धोने से पहले अपनी साड़ी घुटनोंके ऊपर लेकर दोनों टांगो के बीच लेकर बेठती है वैसे बेठ गयी.. महेश अभीभी उधर ही था. पेहली बार वो मामीजी की गोरी गोरी टांगे देख रहा था. लेकिन शायद उसे ऐसे उधर खड़ा रहना ठीक नहीं लगा इस्सिलिये वो जाने लगा. तभी मामीने अपनी साड़ी थोड़ी और ऊपर ली और जो वो दरवाजे तरफ अपनी साइड कर के बैठी थी वो उस तरफ मुंह कर के बेठ गयी. और महेश को कहा,

“कुछ काम नहीं है तो ठहरो ना महेश, मेरा भी काम जल्दी होगा बाते करते करते.”

मामीजी सिर्फ टटोल रही थी महेश को. अगर उसके मन में मामीजी को चोदना होता तो वो रूक जाता.
मामीजी जब अपनी साड़ी थोड़ी और ऊपर करके घूम रही थी तभी महेश को और “अन्दर” तक दिख गया था. मामीजी की फूल-पत्ती वाली चड्डी गुलाबी चड्डी देखकर महेश भी उधर ही रूक कर यहा-वहा की बाते करने लगा. मामीजी काम करते वक़्त महेश की तरफ नहीं देख रही थी. बीच में सिर्फ एक ही बार देखा था. उसीमे ही उनको पता चल गया था की महेश उनकी मोटी टांगो पर ही नजर जुटाके देख रहा है. महेश की हालत भी बुरी होगयी थी. मामीजी की वो गदरायी टांगे देखकर उसके बर्म्युडा का तो तम्बू बन चूका था. लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकता था. उसे तो मामीजी के मन में क्या चल रहा है पता नहीं था. मामीजी काम होने के बाद बर्तन किचन में रख कर वापस आकर फिर महेश के बाथरूम में चली गयी और दरवाजा बंद कर दिया. महेश बाहर ही खड़ा था अभी तक. एक-दो सेकंड्स में ही पानी छोड़ने की आवाज आगयी उस्सको. उस्से झट से पता चल गया ये तो मामीजी के मुतने की आवाज है. वैसे तो मामीजी मूतते वक़्त पानी का नल खुला रखती ताकि उनके मुतने की आवाज बाहर तक ना जाये. लेकिन आज तो मामीने एक ही दिन में महेश को सिड्यूस करने की ठान ली थी शायद.


“थैंक यू मेरे राजा बेटा, बहोत बड़ा काम होगया मेरा तुम्हारे बजह से” मामीजी बाहर आकर बोली.

“कोई बात नहीं चाचीजी”

“ये क्या नया लैपटॉप ले लिया क्या?”

“हाँ चाचीजी, इन्टरनेट के सिवा काम चलता नहीं ना अब इस्सलिये लेना पड़ा.”

“बेटा, मुझे भी सिखादो इन्टरनेट क्या होता है वो..”

“जरूर चाचीजी एक-दो दिन में ही कनेक्शन मिल जायेगा, आपको भी बता दूंगा तब”

“ठीक है बेटा, में अब जाकर आराम करती हूँ, तुम आजाना चाय पिने मेरे यहाँ ही.”

“नहीं नहीं चाचीजी, आप क्यूँ तक्कल्लुफ़ कर रही है.”

“बड़ोंका का केहना मानते है, आजाना श्याम को”

“ठीक है चाचीजी.”

साला मन ही मन मामीजी की मोटी गांड सूंघ रहा था और ऊपर से बहोत ही संस्कारी होने का ढोंग कर रहा था.
जैसे ही मामीजी वहा से चली गयी महेश झट से दरवाजा बंद कर के बाथरूम में घुस गया मूठ मारने के लिए. मामीजी भी अपने डाइनिंग रूम में खडी रह के वो क्या कर रहा है इस्सका अंदाजा ले रही थी. जैसे ही उन्हें बाथरूम के दरवाजा बंद होने की आवाज आयी वो मुस्कुराके अपने काम में जुट गयी. मामीजी ने उसकेलिए एक सरप्राइज रखा था बाथरूम में.


मामीजी की गदरायी टांगे और मोटी मोटी जांघे देखके महेश का सामान तो तन गया था. उसे मूठ मारके खाली करने वो बाथरूम में घुस गया..sms करने के बहाने उसने छुप छुप के मामीजी नंगे पैरों की तस्वीरे ली थी मोबाइल पे. उनको देखके वो अपने लंड को हिलाने ही लगा था की उसकी नजर बाथरूम में जो खिड़की थी उधर चली गयी. मामीजीने मूतते वक़्त अपनी निकर उतारी थी और जाते वक़्त पेहनी ही नहीं थी. उधर ही बाथरूम खिड़की पे फोल्ड करके रखी थी. महेश को अपनी आँखोंपे भरोसाही नहीं हो रहा था. वो मामीजी की निकर देखके उसका लंड अब और भी ज्यादा फूल गया. इतनी उत्तेजना उसने अपने लंड में कभीभी महसूस नहीं की थी. उसने उस निकर का टैग देखा. ११० cm की थी वो निकर. क्रोच पे कोई दाग नहीं देखकर थोड़ी नाराजी हुयी उसको. बहोत ही साफसुतरी थी मामीजी की निकर. बहोत मन हो गया था उसे अपना माल मामीजीके निकर में छोड़ने का,लेकिन उसने अपने आपको रोक लिया. मूठ मारके जब बाहर आया महेश तो वो सोच में पड गया. अभी १ घंटे में जो कुछ भी हुआ वो देखकर उस्से हैरानी हो रही थी. और मन ही मन वो मामीजी को चोदने के सपने भी देखने लग गया था. मामीजी की पिछेसे उस्सने कुछ तस्वीरे ली थी. साड़ी में लिपटी उनकी गांड देखकर उसका लंड फिरसे फुद्फुदाने लग गया था. एक घंटे में उस्सने फिरसे दो-तिन बार मामीजी को मन ही मन नंगा कर उनके नाम पे मूठ मारी. पाच बजे उसने मामीजी के घर में खुलने वाला दरवाजा खोला. मामीजीने उनके तरफ से सिटकनी नहीं लगायी थी दरवाजे को इस्सलिये वो खुल गया. मामीजी सामने ही झाड़ू लगा रही थी. महेशकी तरफ पीठ थी उनकी और वो पूरी ९० डिग्री में झुकी थी. मामीजी की फैली हुयी गांड का नजारा देखकर महेश का लंड फिरसे नाचने लग गया. महेश की आहट सुनकर मामीजी ने पलट के देखा उसे,

“आओ महेश बेटा, तुम्हे ही बुलानेवाली थी झाड़ू लगाके में.”

“अच्छा.. चाचाजी नहीं आते क्या चाय पिने शाम को?”

“नहीं आते. सुबह जो जाते है वो दुकान पर तो रात में ८ बजे ही आते घर. दोपहर सिर्फ खाना खाने आजाते है. दिनभर में अकेली ही होती हूँ. हमे भी २-३ महीने ही होगये है यहाँ रहने आकर. मेरे भी ज्यादा पहेचान नहि है किसीसे यहाँ. इस्सलिये तुम्हे बुला लिया चाय पे. रोज आजाया करो, क्या?”

महेश को तो क्या चाहिए था. रोज मामीजी की साड़ी में लिपटी ही सही गांड देखने के लिए वो तो कुछ भी कर सकता था. चाय पिने आना तो मामूली बात थी.

“ठीक है चाचीजी. मुझे भी रोज घर की चाय पिने मिल जाएगी आप की बजह से”

“वो भी है. आओ किचन में बेठो. झट से में झाड़ू लगाती हूँ और गरमा गरम चाय बनती हूँ. किचन में ही झाड़ू लगाना रह गया है मेरा.”

मामीजी के गांड के तस्वीरे निकालने के लिए महेशने अपना मोबाइल निकाला और किचेन में जो खुर्ची रखी थी उसपे बेठ गया. मामीजी भी किचेन में झाड़ू लगाने आगयी. महेश की तरफ मुंह करके झाड़ू लगाना छोडके मामीजी ने जान बुझकर अपनी मोटी गांड की थी उसके तरफ. मामीजीके फैली हुयी गांड को देखकर अब महेश से रहा नहीं जा रहा था..


महेश को अपनी साडी में लीपटी गांड दिखाकर मामीजी चाय बनाने लगी. पानी उबालने रखकर वो चाय पत्ती और शक्कर लेने, जहा महेश बैठा था वहा आयी. महेश के पीछे हि शेल्फ था उसमे मामीजीने जान बुझकर शक्कर और चाय पत्ती रखी थी. वो लेते हुये वो बिलकुल चीपकी हुयी थी महेशसे. उनकी उभरी हुयी गांड सिर्फ 3-4 इंच हि दूर थी महेश के हाथोंसे. उसे तो उन मोटे मोटे चुतडोंको सहलाने का बहोत मन कर रहा था. उसका लंड तो बहोत हि तडप रहा था अब. चाय पत्ती , शक्कर डालकर मामीजी महेश कि तरफ गांड करके किचन टेबल साफ करने लगी. जैसे हि मामीजी के हाथ चलते मामीजी के मोटे चुतड पीछे से डोलने लगते. महेश का तो बहोत बुरा हाल हो रहा था. कब इस कुतीया कि कुतीया बनाकर गांड चोदने मिलेगी यही सोच रहा होगा वो मनमे. मामीजी को भी उसके हालत का पता उसका का बीच में हि उभरा हुआ तंबू देखकर लग गया था. मामीजी भी नंगा होकर महेश के जैसे जवान लडके के बाहोमे समा जाने के लिये बेताब थी. महेश का उभरा हुआ तना लंड देखने के लिये बेसब्र हो रही थी.

चाय पीकर महेश अपने रूम में चला गया. रूम में जाते हि पेहले उसने मामीजी के फोटो देखकर मूठ मारना शुरू कर दिया. इस बार उसने अपना सारा पानी गिर जाने के बाद अपना लंड मामीजी की निकर से साफ़ कर दिया. मामीजी की निकर अभीभी उधर ही थी. थोड़ी देर बाद मामीजी फिर से महेश के रूम का दरवाजा खटखटाया.

“बेटा जबतक हमारे बाथरूम में पानी नहीं आता तुम्हारा दरवाजा खुला ही रखो, ठीक है?” जैसे ही महेशने दरवाजा खोला, मामीने उसे पूछा.

“कोई बात नहीं चाचीजी. खुला ही रखता हूँ दरवाजा.”

“थैंक यू बेटा. में फ्रेश होकर आती हूँ फिर” ऐसा कहके मामीजी महेश के बाथरूम में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया.

अंदर जाते पहले मामीजीने अपने निकर का मुआयना किया और उनको झट से पता चल गया महेश ने अपना पानी उनके निकर में छोड़ा था. मामीजीने खुश होकर वो निकर पेहेन ली, उससे पहले दोपहर की तरह नल बिना खोले ही उन्होंने मूत लिया.
महेश बाहर ही खड़ा रह के मामीजी मूती तो उसकी आवाज सुनने के लिए बेताब हुए जा रहा था. मामीजी ने भी उसे नाराज नहीं किया था.

अगले दिन सन्डे था और मामाजी काम के सिलसिले में शहर जाने वाले थे. इसीलिए उन्होंने मामीजी को खेत में जाके आने के लिए कह दिया. मामीजी को ये अच्छा मोका था महेश से नजदिकिया बढ़ाने के लिए. वैसे तो मामीजी बहोत स्वीट है लेकिन उनका दिमाग पानी से भी तेज चलता था. वो ये मोका हाथ से नहीं निकल देना चाहती थी. अगले दिन सुबह मामाजी चले जाने के बाद मामीजी महेश के बाथरूम में ही नहाने चली गयी. और कल की तरह अपनी निकर महेश को तडपाने के लिए उधर ही रख दी.


नहाने के बाद उन्होंने महेश को पूछा. “ बेटा, आज चाचाजी शहर गए हुए है, इसीलिए मुझे खेत में जाना पड़ेगा. गन्ना लगाया है ना, पानी छोड़ने जाना पड़ता है. मेरे साथ आओगे क्या? आधे घंटे में वापिस आ जायेंगे.” महेश थोड़े ही मना करने वाला था. वो झट से तैय्यार हो गया.

“जरूर चाचीजी , झट से नहा लेता हूँ में और फिर चलेंगे”

बाथरूम में आज फिर से मामीजी की चड्डी देखके महेश को मामीजी के इरादों का थोडा बहुत अंदाजा होने लगा, लेकिन उसने ‘अपना इतना नसीब कहा के इस कुतिया को चोदने मिल जाये’ ये सोचकर उसने अपने आप पर यकीन नहीं किया. लेकिन अब बहोत ही तड़प रहा था वो मामीजी की गांड को याद करके. उसी चक्कर में मामीजी की निकर की बहोत बार सूंघ ली उसने. एकदम से उसके मन में एक कामोत्तेजक खयाल आया. नहाने के बाद उसने मामीजी की ही चड्डी पेहेन ली. मामीजी की ही चड्डी पहेन के उनके साथ ही रहने का खयाल उसे बहोत उत्तेजना दे रहा था. घर आने के बाद जल्दी निकालकर रख दूंगा ये सोचकर उसने मामीजी की ही चड्डी पहेनली और तौलिया लपेटकर बाहर आगया.थोड़ी ढीली हो रही थी लेकिन कुछ प्रॉब्लम नहीं था.मामीजी बाहर ही उसके रूम में बेठी थी उसकी राह देखे. वो जल्दी से दुसरे कमरे में जाके कपडे पहनने के लिए. जैसे ही उसने तोलिया निकाला मामीजी “जल्दी करो बेटा, जल्दी जाकर जल्दी वापिस आते है” ऐसा कहते कहते उसके पीछे आगयी. और क्या महेश तो सास लेना ही जैसे भूल गया. सिर्फ चड्डी पे वो मामीजी के सामने खड़ा था और वो चड्डी भी मामीजी की ही थी. मामीजी ये देखके हसने लग गयी. “बेटा ये क्या, ये तुम्हारी अंडरवियर नहीं है, गलती से मेरी पहेनली क्या?” महेश तो शर्मसार हो गया. “हाँ चाचीजी, शायद दूसरी पेहेन ली मेने. में जल्दी से मेरी पेहेन के आता हूँ.”

“अब कहा चले, पहले ही देर हो गयी है, अब रहने दो पहेन ली है तो, कोई बात नहीं”

महेश को तो खुद पे यकीं नहीं हो रहा था मामीजी की बात को सुनके. वो वैसा ही खड़ा रहा वह पर..

“अब क्या सोच रहे हो, जल्दी से पेंट पहनो नहीं तो अंडरवियर फिसल जाएगी.” मामीजी मुस्कुराकर बोली.

महेश भी मुस्कुराकर तय्यार होगया.
 
 
 
 










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FUN-MAZA-MASTI मामी की गदराई गांड-4

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 मामी की गदराई गांड-4
 ढाबे का सीन ख़तम होने के बाद दोनों फिर टेम्पो में आगये।लेकिन चाचा का मन ड्राइविंग करने का नहीं था।उनका तो मामी के ऊपर राइडिंग करने का दिल कर रहा था। ढाबे के पास ही थोड़ी सुनसान जगह चाचा ने टेम्पो पार्क करा हुआ था।मामी भी बियर की बजह से अलग ही एहसास कर रही थी।ऐसे में दोनों टेम्पो में पीछे चढ़ गए और चाचा ने पडदा भी पैक कर दिया जो टेम्पो के पीछे होता है। बाहर से थोड़ी रौशनी अंदर आ रही थी पूनम की रात होने की बजहसे। चाचा अब मामी को देखके बहोत ही उत्तेजित हो रहे थे। उन्होंने उनको अपनी मजबूत बाहोमे जखड के उनको किस करने की कोशिश करने लगे।लेकिन मामी अब उनकी "सदसद्विवेकबुद्धि" जागृत होने की बजहसे थोडा नखरा कर रही थी। लेकिन अब चाचा भी मानने वाले नहीं थी। उन्होंने उनके साड़ी के प्लेट्स में हाथ डालके सारी प्लेट्स निकाल दी और मामी को गोल गोल घुमाके पूरी साड़ी उतार दी उनके कमर से।अब सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी मामी अपना बदन झाकने की बुरी तरह कोशिश कर रही थी। चाचा ने अब अपने सारे कपडे उतार के नंगे हो कर मामीको पीछे से अपने बाहोमे जखड लिया। अब उनका तना हुआ लंड मामी के पेटीकोट में लपटे डेरेदार गांडको घूर रहा था।मामीको पता चल गया अब क्या होने वाला है, लेकिन वो ऐसा होगा उनको अंदाजा नहीं था। मामी चाचा का बड़ा और चौड़ा लंड अपने चूत में लेने के लिए तैयार थी लेकिन उन्हें अब घर पोहोचना था जल्दी, वरना सारी गड़बड़ हो जाती और किये कराये पर पानी फेर जाता,ये सोचकर वो डर रही थी(उनको unprotected सेक्स भी नहीं करना था चाचा जैसे ड्राईवर के साथ)। मामी ने जल्दी ही मन में कुछ सोचकर हालात पे काबू पा लिया। वो मुस्कराकर बोली ....
"हाय राम!क्या फुल गया है आपका लंड, जी करता है इसे ऐसे ही खा जाऊं"
"खा जाओ ना भाभी जी, वही तो कह रहे है हम भी"
मामी को एक ही रास्ता नजर आ रहा था अब उनको उनकी चुदाई करने से रोकने का, उनका जल्द ही पानी निकाल देना और मुस्कराकर प्यार से यहाँ से निकलने के लिए उन्हें मजबूर करना।
उधर चाँद की रौशनी की बजह से मामीका का जो भी अंग दिख रहा था वो चमक रहा था। और चाचा की हालत बुरी कर रहा था। मामी भी अब मुंह चाचा की तरफ कर के उनके बाहोमे समां गयी. उनके पीठ को एक हाथ से सहलाते हुए वो उनके लंड को
दुसरे हाथ से मसलने लगी। उनका सर चाचा के छाती पे टिका हुआ था।धीरे धीरे अब मामी चाचा के निप्पल पर अपनी जबान की टिप से सर्किल बनाने लग गयी। थोडा निचे उतरकर उनके बड़े पेट को चूमने लगी। चाचा के नाभि में अपनी जुबान को अंदर बाहर करने लगी। और धीरे धीरे वो चाचा के बड़े लंड की तरफ बढ़ने लगी।मामी को आते देखकर ही चाचा का लंड उंस भरने लगा। लेकिन मामीजीने लंड को बाईपास ही कर दिया। वो उनके लंड के निचले गोटियों को कुसल कर चाचा के गांड की तरफ बढ़ गयी। चाचा के गांड में मामीने अपना मुंह छुपा लिया और उनके दरार में अपनी नाक रगड़ ली। ये देखके चाचा तो बहोत नरम पड़ गए और मामीके गुलाम बनने ही बाकी रह गए। थोड़ी देर चाचा के गांड से खेलकर वो फिरसे आगे आके अपने घुटनों के बल चाचा के पैरों में बैठ गयी और लंड को अपने हाथोंसे मसलने लग गयी। सुबह की मस्ती सब उतर गयी थी चाचा के लंड की।सुबह जिसने आधा घंटे मुश्किल से बाद अपना पानी छोडा था,अभी वो दस मिनट में ही मामी के काबू आगया और धीरे धीरे, उंस उंस कर अपना पानी छोड़ने लगा। मामीने वो पूरा चाचा के लंड से निकला गाढ़ा वीर्य अपने मुंह पे फैला दिया। अपने वीर्य से लतपत मामी को देखके चाचा तो अब ख़ुशी से पागल होने ही बाकी रह गए थे।

"उफ़ भाभिजान इतना सुकून किसीने भी नहीं दिया था जितना आपने दिया है इस लंड को मेरे, आपका तो शुक्रिया अदा करना चाहिए मुझे"

"कुछ मत करिए भाईजान ,सिर्फ मुझे जल्दी घर छोड़ दीजिये,अब तो में आपकी ही हूँ,जी चाहे तब इस मेरी गांड को मसल देना, आपकी ही रंडी बन कर रहूंगी में,लेकिन इधर नहीं। हमारे ही घर, इनके और मेरे बेड पे आप मेरे बदन को देखे ऐसी तमन्ना है मेरी"

मामी सब झूठ ही बोल रही थी। लेकिन यहाँ से निकलने के लिए कुछ तो करना था नहीं तो चाचा उधर ही गांड मार देते मामी की।

चाचा भी मान गए अब, और वो भी सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को काटना नहीं चाहते थे। और वैसे भी 4 फीट पे दुरी पर ही तो रहती है ये रांड ऐसे सोचते हुए उन्होंने आज के दिन केलिए आखरी बार, ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी मामी को अपने बाहोमे थमा लिया और पेटीकोट के ऊपर से ही मामीकि गांड के दरार में अपना हाथ घुसा दिया। मामीने पैंटी पहनी हुयी थी इस्सलिये पूरा हाथ अंदर नहीं जा पाया। मामीने भी इस बात पर मुस्कराकर चाचा के निप्पल को काट दिया और चाचा के नंगे गांड के दरार में जो बहोत सारे बाल थे, उन्हें खीच लिया।चाचा जोर से चिल्लाये लेकिन वो भी फिर हँसते मामी को देखकर हंसने लग गए।


करीब ९ बज गए रात को मामी को मायके पोहोचने।२ दिन वहा रहके वापस वो आगई अपने ससुराल।अस्लम चाचा भी आगये ३ दिन बाद।उनकी बीबी बच्चे अभीभी नहीं आये थे वापिस।चाचा ने मामीको बता दिया था वो कब आने वाले थे।मामी अब अस्लम चाचा का बड़ा लंड अपने चूत में लेने के सपने देख रही थी। लेकिन कहा और कैसे ये बड़ा मुश्किल सवाल था।टेम्पो में ही चुद लिया होता तो बेहतर होता ऐसा अब उनको लगने लगा था। वैसे तो सुबह ६ बजे मामा खेत में जाते तो वो ८ बजे ही वापिस आ जाते थे।उसवक्त वो चाचा से चुद सकती थी लेकिन उसमे भी खतरा था। मेरे दुसरे मामा पास में ही रहते थे,उनके बच्चे मामीजी के पास आ जाया करते थे।मामी की देवरानिया भी आ जाती थी।जितना आसान लग रहा था वो अब उतना ही मुश्किल बन गया था।चाचा भी इस बात को समझ रहे थे, और जब उनके बीबी बच्चे भी आगये तो वो भी रिस्क लेने से डरने लग गए। लेकिन दोनों एक दुसरे को चिढाते रहते।दोनों के घर के दरवाजे आमने-सामने ही थे और जैसे की मैंने बताया है उनमे सिर्फ ४-६ फीट की दुरी थी।और गाव में तो कोई दरवाजा बंद नहीं करता।दिनभर खुला ही रहता है।इस्सलिये जब भी दरवाजे पे मामी आ जाती चाचा उनको अपना तना हुआ लंड दिखा देते। मामी भी कभी कभी अपनी साड़ी ऊपर कर के अपनी मोटी और गोरी जांघे दिखा देती। कभी कभी तो अपनी पैंटी में लिपटी मोटी गांड भी दिखा देती। इन्शाल्ला कहके चाचा मामी के गांड को मसल कर आते।

ऐसे ही २ महीने गुजर गए।अस्लम चाचा उसमेसे बहोतसे दिन बाहर ही थे। मामी के चूत की प्यासभी अब बढती जा रही थी। वैसे तो मामा आज भी मामी से प्यार करते थे और रात को दोनों एक साथ ही सोते थे।लेकिन मामा को अब नया खिलौना मिल गया था और शादी के २५ साल बाद कितना चोदेंगे मामी को ये भी सवाल था।रात को जब मामी पास आजाती तो १-२ झटके लगाके दूर हो जाते थे और मामीसे ही अपना लंड चुसवा के सो जाते। अब मामीने ठान ही लिया कुछ भी हो अस्लम चाचासे जरूर चुदेंगी।और उनको वो मोका मिल गया।
उस दिन चाचा के घर कोई नहीं था,चाचा भी एक ही दिन पहले आगये थे। जैसे ही मामाजी सुबह ६ बजे खेत जाने निकले मामी जल्दी से तैय्यार होके अस्लम चाचा के घर चली गयी.दरवाजा बंद था इसीलिए मामीने जोरसे खटखटाया, अंदर से अस्लम चाचा आवाज की आई,

"कौन है "

"मैं हूँ भाईसाब"

"२ मिनिट भाभीजी नहा रहा हूँ"

"हाय राम उसमे क्या? जल्दी खोल दीजिये कोई देख लेगा"

चाचा वैसे ही नंगे भागकर आगये दरवाजा खोलने।मामी जल्दी सी अंदर चली गयी और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया अंदर से .

"अब क्यूँ तना हुआ है आपका भाईसाब? किसे याद कर रहे थे?"

"आप ही को तो कर रहा था भाभिजान, कितने दिन होगये अभी तक प्यासा रखा है हमें, कब मेहरबान होगी हम पे?"

"अब इंतज़ार ख़तम भाईसाब, अब तो मुझे भी नहीं रहा जा रहा, जल्दी से आपके इस मोटे लंड से मेरी चूत कि प्यास बुझा दो"

"हाय मेरी रानी, आज तो बड़े मूड में लग रही हो?"

"हाँ, अब जल्दी से नंगा करके मुझे मेरी चूत को ठंडा कर दो"

ऐसे कहके मामी लिपट गयी चाचा के शरीर को। मामी उनके छाती पे अपना मुंह मसल रही थी। थोडा निचे जाके उन्होंने अस्लम चाचा का लंड अपने हाथ में लिया और उसे घूरने लग गयी।

"दिन पे दिन और ही मोटा लगने लगता है आपका ये लंड, क्या राज है?

"आप ही के हाथोंका जादू है भाभिजान, जैसे आपके नाजुक हाथ इसे प्यार से दुलारते है तो फूल जाता है "
मामी मुस्कुराने लग गयी,

"आपको जो लेके रखने को कहा था वो है न?"

"हाँ, भाभीजी आपने कहा था वोही फ्लेवर लाया हूँ, स्ट्रोबेरी"

मामी मुस्कुराके बोली,
"ठीक है, अब जल्दी से पहनो, देखते है कैसा स्वाद होता है, अभी तक मेने कभी लिया नहीं है, टीवी पे दिखा रहते है ऐड ,ये तो कभी लाते नहीं, इसीलिए आप ही को बोल दिया"

मामी बहोत ही शातिर थी, उन्हें पता था चाचा कंडोम नहीं पहनेंगे इस्सलिये मामीने उन्हें फ्लेवर्ड कंडोम का स्वाद चखना है मुझे, प्लीज लेक रखना ऐसा कहके मना लिया था।
चाचा ने जल्दी से कंडोम पेहेन लिया, और मामी स्ट्रोबेरी का स्वाद लेने लग गयी। चूस चूसके मामीने अब बहोत खड़ा कर दिया था चाचा का लंड। चाचा अब जोर जोर से सास ले रहे थे। अब उन्होंने मामी को रोककर उनको खड़ा कर दिया और घूट्नोंपे बैठ के मामीके बडेसे साड़ी में लपटे पेट में अपना मुंह छुपा लिया। फिर धीरे धीरे वो मामी की साड़ी को उतर ने लगे।मामी गोल गोल घूमके अपनी साड़ी उतरने में चाचा की मदद कर रही थी। अब मामी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी।

"चड्डी पहेनी है क्या भाभीजी आपने?" मामीके नंगे पेट पर हाथ फेरते हुए चाचा मामीके कान में पूछ रहे थे।

"पेटीकोट उतार कर, आप ही देख लीजिये " ऐसा कहके मामीने शरमाकर अपना मुंह छुपा लिया हाथोंसे।


चाचा ने पेटीकोट का नाडा खोल दिया। पेटीकोट मामी के कमर से उतर कर उनके पैरोमे गिर गया। मामीने निकर पहनी थी।अस्लम चाचाने मामीजीकोही निकर निकलने को कहा।मामीने धीरे धीरे अपनी फुलपत्ती वाली निकर निकाल दी।चाचा थोड़े दूर खड़े होक मामीजिके नंगे बदन का दीदार कर रहे थे और मामीजी सामने खड़ी थी शरमाकर। मामीका पेट बड़ा होने के कारन चाचा को अभीभी मामीकी मुनिया नहीं दिख रही थी ठीक तरहसे। उनको झुक कर मामीके मुनियाके दर्शन करने पड़े। मामीजी ने मुनिया के ऊपर के बाल नहीं निकाले थे बहोत दिनोंसे। मामीका गोरा बदन और बिच में त्रिकोणीय आकर का बालों का गुच्छा देखकर चाचा आह भर रहे थे।वैसे तो मामीजी मोटी थी, ('देवदास' फिल्म में शाहरुख़ खान के माँ का काम करने वाली स्मिता जयकर जैसे दिखती है मामीजी) लेकिन ज्यादातर मोटी औरतों की मुनिया बड़ी और लम्बी होती है वैसे मामी की नहीं थी।उनके मुनिया की लम्बाई कम थी। अस्लम चाचाने अब मामीके मुनिया के बाल हटाकर , उनके मुनिया के होठोंपे अपने होंठ रख दिए।अपनी जुबान से चाचाने मामिजीके मुनिया की दरार चाट ली। जैसे ही उन्होंने मामीजी के 'मदनमणी' (क्लिटोरिस) को मसल डाला मामीजी बहोत उत्तेजित होने लगी।जैसे ही चाचा मामीजीके मदनमणि को मसलते मामीके मुंह से किलकारी निकल जाती और वो "आई ग ... मेले मी" चिल्लाते अपने हाथोंसे चाचा के सिर को अपनी मुनिया पे दबाने लगती थी।मामीजी एक नए रोमांच और आनंद में डुब गयी थी। बहोत दिनोंसे इतना परमानन्द उन्हें मिल रहा था। उसी आनंद में मामीजी की सुसु की धार निकल गयी। मामीजी सुसु की धार सीधे चाचा के मुंह पर से छाती पर उतर कर बह रह थी। पूरा आधा मिनिट मामीका पानी निकल रहा था लेकिन रुक नही रहा था। अब मामीने ही शरमाकर उसे रोक लिया अपनी मुनिया और गांड को सुकोड़कर।लेकिन चाचाजी अभीभी मामीजी के मदनमणि को मसल रहे थे। मामीजी को अब खड़ा रहना मुश्किल हो रहा था, चाचा को रोककर वो वही जमीं पे पड़ी चटाई पे लेट गयी। चाचा फिरसे मामीजी के पैर फैलाकर मुनिया को चूसने लग गए। मामीजी अपने मोटे और गदराये जांघोसे चाचा का सर दबोच रही थी।अब पानी रोकना बहोत मुश्किल हो रहा था मामीजी को, वो जोर जोर से सिसकारिया ले रही थी। थोड़ी ही देर में मामी का बांध फुट गया और मामीने चाचा के बलोंको खीचकर उनका सर हटाकर अपनी धार छोड़ दी। पुरे दो फूट ऊँची उड़ रही थी मामीजी की सुसु। चाचा की आंखे फटी की फटी रह गयी वो नजारा देखकर। मामीको इतना आनंद कभी नहीं मिला था सुसु करते वक़्त। अब बड़े चैन से मामी लेटी थी। चाचा का बड़ा लंड अपने मुनिया में लेने के लिए बेक़रार हो रही थी। लेकिन चाचा को मामीके मुनिया से ज्यादा मामीके गांड में दिलचस्पी थी।
"भाभिजान अब पेट के बल सो जाओ, आपकी गांड तो देख लूँ जरा"
मामीजी जैसे ही पेट बल सो गयी मामीके गदरायी गांड के दर्शन होगये।


मामीजी की वो गोरी,गोल और गदरायी गांड देखकर चाचा की आंखे चमक रही थी।
"ला इल्लाह इल्लल्लाह!!!!!!!!! माशाल्लाह भाभिजान क्या तराशी हुयी है गांड आपकी। मानो संगमरमर में ही बनायीं हुयी हो। हाथो और घुटनों के बल हो जाओ भाभिजान, डॉगी पोजीशन में थोड़ी फैलाओ अपनी गांड को"
मामी डॉगी पोजीशन में होकर चाचा के सामने उन्होंने अपना खजाना खोल दिया। मामी की गांड बहोत ही टाइट थी,थोड़ी भी ढीली नहीं पड़ी थी। चाचाने ने अपनी नाक मामीजी के फैली हुयी गांड के दरार डाल कर सूंघ ली।
"क्या कर रहे हो भाईसाब, गन्दी होती है वो जगह"
"प्यार में कुछ गन्दा नहीं होता मेरी जान, और ये तो जन्नत है, कितनी खुशबूदार है आपकी गांड, वाह"
चाचाने मामीकी गांड सूंघकर अपनी जबान से वो उसे चाटने भी लग गए।
अब चाचाने अंदर से शहद की बोतल लायी और थोडा शहद मामीजी के गांड के दरार में डाल दिया। और मामीजी के गांड के गालोंपर भी शहद से मसाज कर दी। और धीरे धीरे सारा शहद चाट चाट कर ख़त्म कर दिया।
मामीजी को अब डर लग रहा था कही चाचा उनकी गांड न मार दे। चाचा भी उसी मूड में थे। मामीजी का होल बड़ा ही टाइट था, मजा आ जाता मामीजी की गांड मारने चाचाको।
"भाभिजान बहोत दिल कर रहा है आपकी गांड में घुस जाने का , देखो कैसा फुरफुरा रहा है मेरा लंड तुम्हारी गांड में घुसने के लिए।'
"नहीं नहीं भाईजान, ऐसा मत करो, फट जाएगी मेरी"
"थोडा धीरज रखना भाभिजान, थोडा दर्द होगा लेकिन बाद में मजे लोगी"
"बाद में, आज नहीं, फाड़ डालोगे क्या मेरी?'
चाचा भी अब मान गए, और मामीजी चिल्लाने लगती तो बड़ा प्रॉब्लम हो जाता ये सोचकर
"ठीक है भाभिजान अब थोडा चूस लो मेरे लैंड को"
मामीने चाचा के लंड के उपरसे कंडोम निकल दिया, चाचा का लंड कंडोम के चिकनाई युक्त फ्लूइड से गिला होगया था। उसका स्वाद स्ट्रोबेरी का था, मामीने पूरा चाट कर उसे साफ़ कर दिया। चाचाने अब थोडा शहद उसपर दाल दिया और थोडा अपने छाती पे भी। मामीजी ने उसे भी चाटकर साफ़ कर दिया।


“भाईजान जल्दी से मेरी मुनिया की प्यास बुझा दो, अब रहा नहीं जाता, और बहोत देर भी हो रही है”
“हाँ हाँ भाभिजान, लेकिन गांड नहीं मारने दी आपने आपकी, तो इस्सकी सजा मिलेगी आपको”
“क्या सजा देनेवाले हो?”
चाचा एक खुर्ची पे बैठ गए, “पेट के बल मेरी जांघोपे सो जाओ, बताता हूँ”
मामीने वैसा ही किया जैसा अस्लम चाचा ने कहा था.. जैसे ही मामीजी चाचा के जांघो पे सो गयी, चाचा ने मामीजी की गांड को सहलाते सहलाते अपने हाथोंसे जोरसे एक थप्पड़ मार दिया.. चाचा मामीजी को spank करने वाले थे..
“क्या कर रहे हो? कितना जोर से मारा” मामीजी शिकायत तो कर रही थी लेकिन मुस्कुराते हुए.. उनको भी मजा आ रहा था.. ऐसे ही थोड़ी देर तक मार मार के चाचा ने मामी की गांड पूरी लाल कर दी. जैसे ही मामी चिल्लाती चाचा और जोर से मारने लगते. मामीको दर्द तो हो रहा था लेकिन उसका मजा भी आ रहा था उनको.
"अब बस भी करो भाईजान , बेठने लायक तो छोड़ दो मेरे चुतड"
"है ही इतने मस्त तुम्हारे चुतड, बहोत स्प्यांक करने का दिल करता है. जब तुम वहा सामने झुकती हो रंगोली बनाने के लिए, हाय अल्लाह, वहिपे तुम्हारे इन चूतडोंपे एक जोरसे मारने का दिल करता है. आज तो मेरे सामने नंगी खड़ी हो, थोड़ी ही ऐसे छोडूंगा?"
"ठीक है, लेकिन जरा धीरे से मारना"
"हाँ मेरी रंडी धीरे से मारता हूँ"
"ये क्या बात हुयी, गाली दे रहे हो क्या?"
"गाली किस बात की, तुमने ही कहा था रंडी बनोगी मेरी, इस्सलिये प्यार से कहा,अब आ जाओ रानी,मेरे ऊपर
चढ़ जाओ तुम्हारी प्यास बुझाते है ”
चाचा निचे लेटने की ही देरी थी के मामी झट से लेटे हुए चाचा के पेट पे बैठ गयी और पीछे सरक कर उनका मोटा लंड ठीक से अपने च्युत में डाल दिया, उससे पहले उन्होंने उनके लंड का अपने हाथोंसे मसाज करके उसके ऊपर नया कंडोम चढ़ा दिया, और जोर जोर से ऊपर निचे करने लग गयी. चाचा कभी उनके बड़े बड़े चुचोंको मसल रहे थे तो कभी उनके चूतडों को.. झड़ने से पहले चाचा ने अपना लंड बाहर निकाला और उसके उपरसे कंडोम निकालकर, मामी को निचे लिटाके उन्होंने अपने कम से मामी को नहा डाला.. मामीजी के च्युत की प्यास भी अब बुझ गयी थी. दोनों अब एक दुसरे के पास लेटे लेटे सास भरने लगे. मामीजी को सिर्फ चाचा से चुदने का मतलब था. उनका बड़ा लंड देखते ही वो पागल हो गयी थी.उनसे किस करने में जरा भी दिलचस्पी नहीं थी उनको, लेकिन चाचा को ऐसा माल थोड़े ही मिलने वाला था. वो पुरे मजा ले रहे थे मामी के गदराये बदन का. लेटे लेटे ही चाचाने अपना मुंह मामीके पास ले लिया और अपने "मावा और गुटखा" की बू आने वाले मुंह से मामी को किस करने लगे.. मामीजी कुछ कर भी नहीं सकती थी.. चाचा ने तो मामी का खाना ही नहीं उनके पुरे बदन को झूठा करके छोड़ा था..
अब बहोत देर हो गयी थी, बाहर गली में भी आवाजाही बढ़ने कगी थी लोगोंकी, इसीलिए मामी जब जाने लगी तो चाचा ने छोड़ दिया उनको.
मामीजी साडी पहनके दरवाजे से निकल ही रही थी के चाचा ने उन्हें रोक लिया..
"भाभिजान आपकी निकर निकालके दे जाओ मुझे "
"अरे लेकिन निकर लेके क्या करोगे?"
"मुझे नहीं पता आप मुझे कब फिरसे मिलोगी इस तरह,आपकी निशानी होगी वो निकर "
मामीने शरमाकर अपनी साड़ी ऊपर करके निकर उतर के चाचा को देदी..
"ये लेलो,लेकिन मुझे दूसरी लाकर देनि पड़ेगी, ठीक है ?"
"हाँ भाभी, आपके लिए बहोत बढ़िया निकर लाऊंगा लेकिन मेरे हाथोंसे पेहेननी पड़ेगी आपको, मंजूर है?"
जवाब देने से पहले ही मामीजी मुस्कुराकर वह से निकल गयी..

आगे भी एक दो बार अस्लम चाचा से चुदी थी मामी लेकिन बाद में बाहर घर होने के बाद उनका मिलना कम
होगया और अस्लम चाचा भी दुसरे गाव चले गए रहने के लिए..
 
 
 
 










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