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Friday, November 22, 2013

FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--8

FUN-MAZA-MASTI

 एक अजीब सा उन्माद--8

 कामया जब से कांता के घर से आई थी, उसके दिमाग़ में उथल पुथल मची हुई थी.
क्या यह वाक्य में नॅचुरल है अपने बेटे के बारे में ऐसा सोचना, उसे तो पता चल चुका है की जब फोन आया था में उसके पापा से चुद रही थी, तो क्या वो भी ????


नहीं नहीं मेरा बेटा ऐसा नहीं है, पर अब वो जवान हो चक्का है, शादी करने लायक है, हाँ आज उसके डेड जैसे ही आते हैं उसकी शादी की बात शुरू करूँगी. कहीं वो इधर उधर मुँह तो नहीं मार रहा, जवान खून है कुछ पता नहीं, कहीं कोई उन्च नीच ना हो जाए. अब तो उसकी शादी जल्दी ही करनी होगी, वह तो बस अपनी डॉक्टरी में लगे रहते हैं, उन्हे होश ही कहाँ है कुछ, की बेटा कितना जवान हो चुका है.


कामया रात के खाने की तायारी करती है और अपने रूम में लेट जाती है , आज उसकी बेटी देर से आने वाली थी, और पति महोदेय तो आखरी मरीज तक देख के आएँगे.

कांता और उसके पति बचपन के दोस्त हैं पर दोनो के व्यवहार में ज़मीन आसमान का अंतर है. दोनो एक ही डिपार्टमेंट में काम करते हैं पर कांता के पति बहुत आगे निकल चुके हैं. अब वो डिपार्टमेंट के हेड हैं. यही चीज़ राजेश और राजीव में भी दिखाई दे रही है, इतनी अच्छी नौकरी को लात मार के राजेश ने अपना एक वजूद बना लिया है और उसका बेटा सब कुछ आते हुए नौकरी तक ही सीमित है. ऐसा क्यूँ हो रहा है ? जिंदगी में पहली बार कामया इन बातों को सोच रही थी, वरना अब तक तो उसके हिसाब से सब कुछ सही चल रहा था. यकायक ऐसे विचार क्यूँ उसके दिमाग़ में आ रहे थे. क्या इस बात का कल रात की राजीव के बारे में उसकी सोच का कुछ लेना देना है ?

आज कामया अपने आप से एक लड़ाई लड़ रही थी. ऐसी लड़ाई का हल एक दिन में तो निकलता नहीं, देखते हैं आगे क्या होता है,

तब तक ज़रा जॉर्डन घूम के आते हैं.


 शाम हो चुकी थी, राजेश बार से बाहर निकलता है, अपने ग्रूप को खोजता है तो पता चलता है की आज का डिन्नर एक स्पेशॅलिटी रेस्टोरेंट में है जहाँ आरेबिक डिन्नर सर्व किया जाने वाला था . राजेश काउंटर से एक मेसेज पेड्रो को भिजवाता है और उनकी टेबल भी यहाँ रिज़र्व कर्वादेता है.

पेड्रो की फॅमिली डीटेल्स :
रोसअल्बा ( पेड्रो की बीवी) : 45 साल, 38-28-38 देखने में 35 साल , इसके नाम का मतलब है रोज़ ऑफ डॉन.
कोसिमा ( पेड्रो की बड़ी बेटी) : 28 साल , 36-26-36 , इसके नाम का मतलब है ब्यूटी
फीओरे ( पेड्रो की छोटी बेटी) : 26 साल , 36-24-36 , इसके नाम का मतलब है फूल.
तीनो देखने में बहने ही लगती हैं , और तीनो अगर डॉक्टर ना होती तो मॉदेलिंग दुनिया में तहलका मचती होती.

क्या लंच के टाइम चड़ा हुआ राजेश का जादू इन टीन तितलियों पर शाम तक असर रखता है या नहीं , ये तो इनके डिन्नर टेबल पर आने के बाद ही पता चलेगा.


आज शायद या तो राजेश के ग्रह अच्छे नहीं थे या फिर मीनाक्षी के ग्रह कुछ अच्छे थे. आज राजेश को कोई इल्म नहीं होता पर उसका एक बहुत ही बड़ा दुश्मन खड़ा हो जाता है, सबसे प्यार करने वाला इंसान अंजाने में एक दुश्मन के ज्नम का कारण बन जाता है. खैर ये तो वक़्त ही बातायगा, क्यूंकी वक़्त के पेट में क्या छुपा है ये तो ना आप जानते हैं ना मैं. मैं तो बस वोही बता रहा हूँ जो मेरे सामने गुजर रहा है. आप सोच रहे होंगे की कौन हूँ मैं, भाई में कुछ भी नहीं बस आपका अदना सा सेवक हूँ , मुझे समय कहते हैं, इंग्लीश में लोग मुझे टाइम कहके बुलाते हैं. मेरे पेट में क्या क्या छुपा हुआ है मैं खुद भी नहीं जानता. मैं तो बस यही बता सकता हूँ जो मैं अपने सामने होते हुए देखता हूँ या फिर अपने मेमोरी कार्ड को प्ले कर के आपके बीते हुए शनों के बारे में बता सकता हूँ.

अरे बाप रे , यह टीन तितलियाँ तो मेरा भी भेजा खराब कर गयीं. नहीं समझे, वाक्य में नहीं समझे , शुक्र है भगवान का , आप अपनी भूद्धि का कम इस्तेमाल करते हैं.

वरना मेरी तो लग गई थी ना ……. नहीं.
देखो भाई मुझे तो अपनी हुसंपरी कामया की बहुत याद आ रही है, मैं तो चला……

 नेहा सोने जा चुकी थी और कामया अपने पति के साथ अपने कमरे में चली जाती है.

वह फ्रेश हो कर कपड़े बदल कर आती है , उसने एक छोटी लिंगरी पहनी हुई थी जो सिर्फ़ उसकी पेंटी तक मुश्किल से आ रही थी, ब्रा उसे पहनी नही थी, इसीलिए उसके उरोज़ अभिनव को सॉफ सॉफ दिख रहे थे, छरहरा बदन मासल टाँगे, उफ्फन्ते हुए उरोज़, गुलाबी लीप ग्लॉस, तीर कमान की तरहा तन्नी भोहेन, अभिनव की वाट लगाने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा थी, कामया के इस रूप को देख उसका लंड सलामी के लिए खड़ा हो गया.

आज कामया फुल मस्ती के मूड में थी, आज की रात तो वह कहर ढा रही थी. अभिनव को शादी के बाद के दिन याद आ गये जब कामया रोज़ किसी ना किसी अप्सरा का रूप धारण कर उसे स्वर्गलोक ले जाया करती थी.

बहुत सालों के बाद आज वह कामया को इस रूप में देख रहा था.

“ क्या बात है दिलरुबा आज तो पूरी तरह कत्ल करने का इरादा है” अभिनव कामया को अपनी बाहों में खींच लेता है.

“ कत्ल तो आपने हमे कब का कर रखा है” कामया उसके सीने से चिपकती हुई उसके होंठों के पास अपनी गरम साँसे छोड़ने लगती है. जैसे ही अभिनव कामया के होंठों पर अपने होंठ रखने लगता है, कामया चटक कर दूर हो जाती है.



“ उन हुन्न्न्न्हुन्न्न इतनी जल्दी नहीं , रात को अपने शबाब पर तो आने दो” वह बेड के साइड बोर्ड से वाइन की एक बॉटल निकाल लेती है.

“ उफफफफ्फ़ तेरी ये अदा तो हमे कहीं का ना छोड़ेगी”

कामया वाइन का एक घूँट ले कर अभिनव के पास आती है और उसके होंठों को चूमते हुए वाइन उसके मुहन में डाल देती है. अभिनव वाइन दुबारा कामया के मुँह में डाल देता है दोनो एक दूसरे के होंठों को चूमे हुए खाते हुए वाइन एक दूसरे के मुँह में डालते रहते हैं जब तक धीरे धीरे वाइन उनके गलों को थोड़ा थोड़ा तर नहीं कर देती. कामया की इस अदा से अभिनव और भी तड़प उठता है और कामया के बदन को अपनी भुझाओं में कस के बींच लेता है. कामया के सकत उरोज़ उसकी छाती में धँस रहे थे, वह अपने एक हाथ को कामया के नितंबो तक ले जाता है और मसालते हुए अपने लंड की तरफ दबा देता है. उसका लंड इतना सकत हो चुका था की कपड़ों के बावजूद कामया की चूत में घुसने लगता है. कामया की सिसकी छूट जाती है और वह फिर अभिनव से खुद को आज़ाद कर लेती है.

कमरे के दूसरे कोने में जा कर वह कुछ वाइन अपने बदन पर गिरा लेती है और कातिल निगाहों से अभिनव को देखने लगती है, उसके उरोज़ वाइन से भीग चुके थे और थोड़ी वाइन उसकी चूत तक पहुँच चुकी थी, पदर्शी लिंगेरी में छुपा वाइन से भीगा हुआ बदन कमरे के तापमान को और बड़ा देता है. अभिनव अपने कपड़े फटाफट उत्तर फेंकता है और भाग कर कामया के बदन को अपनी बाहों में ले कर चूमे और चूसने लगता है, लिंगेरी के साथ ही वह कामया के उरोज़ को अपने मुँह में भरने की कोशिश करता है और वाइन के साथ साथ उसके उरोज़ का रस पीते हुए उन्हे बुरी तरहा से दबोचने लगता है. कामया की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगती हैं.


आह आह सी सी सी अफ उूुुउउफफफफफफफ्फ़ अहह आआआआअहह ओह
माआआआआआआ ऊऊऊऊऊऊ आह आह हन हन और ज़ोर से चूसो , और ज़ोर से अहह हााआअँ उूुुुउउफफफफफफफ्फ़

कामया की सिसकियाँ अभिनव की उत्तेजना को और बढ़का देती हैं और वह कामया की लिंगेरी उतार फेंकता है.

कामया फिर उस से दूर हो जाती है और एक बड़ा से घूँट पी कर वाइन अपनी पेंटी पर डालती है,उसकी पेंटी और चूत वाइन से सराबोर हो जाती हैं और कुछ वाइन उसकी जांघों तक एक धार बनके बहने लगती है.

अभिनव एक भूखे कुत्ते की तरह कामया पर झपट्टा है और उसकी जाँघो से वाइन चाटते हुए उसकी पेंटी तक पहुँच जाता है और फॅट से पेंटी समेत उसकी चूत को अपने मुँह में भर कर वाइन चूसने लगता है , वाइन के साथ साथ कामया की चूत का रस भी उसके मुँह में घुलने लगता है, दोनो का मिलाजुला कॉकटेल उसका नशा और बड़ाने लगता है और कामया की सिसकियाँ और भी तेज़ हो जाती हैं.

जब वाइन का असर पेंटी से ख़तम हो जाता है तो वह उसे उतार फेंकता है और कामया की चूत में अपनी जीब घुसा कर चोदने लगता है, कामया से अब बर्दाश्त नहीं होता और वह बिस्तर पर लूड़क जाती है.

अभिनव उठता है और अपने लंड को वाइन से भिगो लेता है, दोनो अब 69 में आ जाते हैं, कामया अभिनव का लंड चूसने लगती है साथ साथ वाइन का मज़ा लेती रहती है और अभिनव उसकी चूत को जीब से चोद्ते हुए उसके बहते रस को पीता रहता है.


दोनो से ही अब बर्दाश्त नहीं होता और दोनो का लावा फूट पड़ता है. एक दूसरे के कामरस को दोनो भूखे जानवरों की तरहा पीते रहते हैं. और एक दूसरे के साथ निढाल हो जाते हैं और अपनी साँसे दुरुस्त करने लगते हैं.

कामया अभिनव का लंड चूस कर फिर खड़ा कर देती है और पीठ के बल लेट कर अपनी टाँगे उपर उठा कर चुदाई की पोज़िशन में आ जाती है.

अभिनव उसकी टॅंगो को अपने कंधों पर चड़ा कर अपने लंड को कामया की चूत पर घिसने लगता है और एक ही झटके में अपना 7 इंच लंबा लंड उसकी चूत में डाल देता है.

झटके के साथ डालने पर लंड कामया की चूत की दीवारों को खुरछता हुआ अंदर पहुच जाता है और कामया की चीख निकल जाती है.

हाआआआआऐययईईईईईईईईई म्*म्म्मममममममाआआआआआआ आआअरर्र्र्र्र्ररराआाम्म्म्मम सस्स्स्स्स्स्सीईईईईई
अभिनव पर तो आज भूत सवार हो चूक्का था वह धका धक धका धक कामया की चूत पेलने लगता है.

कामया सिसकियाँ लेते हुए आनंद से अपनी आँखे बंद कर लेती है और उसे एक झटका लगता है, आँखे बंद करते ही उसे राजीव नज़र आता है और वह चोंक कर आँखे खोल लेती है, अभिनव आज उसकी जम कर चुदाई कर रहा था , कामया चीखती रहती है आँहे भरती रहती है जब सह्न नहीं होता तो उसकी आँखे अपने आप फिर बंद हो जाती है और उसे फिर राजीव का चेहरा नज़र आता है, वह अपने आप को रोक नहीं पाती और राजीव से चुदाई का मज़ा महसूस करने लगती है और उसकी उत्तेजना चरम सीमा पर पहुँच जाती है.

अपनी चूत में लगातार अंदर बाहर होता हुआ लंड अब उसे बड़ा लगने लगता है वह राजीव को एक बहुत लंबे लंड का मालिक सम्ज्ते हुए अपनी चुदाई के परम चर्म पर पहुँच जाती है उसकी सिसकियाँ चीखो में बदल जाती हैं और उसका जिस्म अकड़ने लगता है, और एक आयययययययईईईईईई चीख मार कर वह हवा में उड़ने लगती है और चूत से नदियाँ बहने लगती हैं. अभिनव भी अपने चर्म पर पहुँच जाता है और कामया की चूत को अपने वीर्य से भर देता है और थक कर कामया के उप्पर गिर पड़ता है. आज दोनो को बहुत ही भयंकर ओर्गसम हुआ था , जिस्मो से जान ख़तम हो गई थी और दोनो स्वर्गिक सुख को भोगते हुए नींद के आगोश में चले जाते हैं.

भाई ये तो सो गये , चलें ज़रा वो तितलियाँ क्या कर रही हैं जा के देखते हैं.

 रेस्टोरेंट में एक साइड पेर बफे लगा हुआ था , सिरी टेबल्स रौंद टेबल्स थी और बीच में एक डांस फ्लोर था.

बहुत ही धीमी आवाज़ में नशीला से म्यूज़िक बाज रहा था. हर टेबल पर जाम से जाम टकराए जा रहे थे, रोज़अल्बा खड़ी होती है और राजेश को डांस के लिए इन्वाइट करती है. एक हाथ में उसके हाथ को थाम कर और दूसरे को उसकी कमर पे रख कर राजेश उसके साथ डांस करने लगता है. दोनो बेटियों के चेहरे जलन के मारे लाल सुर्ख हो जाते हैं, उनकी मा उनसे आगे निकल जयगी यह दोनो ने सपने में भी नहीं सोचा था. राजेश और रोज़अल्बा के जिस्म एक दूसरे से सट्टे जा रहे थे और दोनो के जिस्म बखूबी डांस की धुन पर थिरक रहे थे, उनको देख कर कुछ और जोड़े डांस फ्लोर पर उत्तर गये,रोज़ अल्बा डांस करते करते राजेश को किस करने लगती है, जो कोसिमा से सह्न नहीं होता और वो डॅन्स फ्लोर पर पहुच कर अपनी मा का कंधा टेप करती है और राजेश को डांस के लिए माँग लेती है. थोड़ा हिचकिचा कर रोज़अल्बा अपनी टेबल पर आ कर बैठ जाती है और अपनी बेटी को राजेश के साथ एक पॅशनेट डांस करते हुए देखने लगती है. कोसिमा ने अपनी दोनो बाँहे राजेश के गले में डाली हुई थी और राजेश के दोनो हाथों ने उसकी कमर को थाम रखा था. कोसिमा राजेश को डांस करते हुए स्मूच करने लगती है, और राजेश के हाथ उसके बदन पर थिरकने लगते हैं.

आधे घंटे तक डांस करने के बाद दोनो टेबल पर आ जाते हैं और फीओरे हसरत भरी निगाओं से राजेश को देखने लगती है.

पेड्रो एक चेम्पेन की बॉटल और माँगा लेता है और सभी जाम से जाम टकराने लगते हैं. 2 पेग पीने के बाद पेड्रो अपनी बीवी को डांस फ्लोर पे ले जाता है और फीओरे राजेश के साथ डांस फ्लोर पर आ जाती है. कोसिमा अपना पेग पीती हुई इनको डांस करते हुए देख रही थी. चुकी वह टेबल पर अकेली रह गयी थी तो साथ वाली टेबल पर बैठे हुए एक शेख की हिम्मत बॅडती है और वह कोसिमा को अपने साथ आने का ऑफर करता है. कोसिमा उसे शालीनता से मना कर देती है. शेख को इस में अपनी बेइज़ती महसूस होती है और वह कोसिमा का हाथ पकड़ लेता है, कोसिमा अपना हाथ छुड़ाती है और फिर बड़े ही भोलेपन से मना करती है. शेख से अब और बरदाश्त नहीं होता और वह जेब से एक 10000 डॉलर की ग्डी निकल कर कोसिमा के सामने रख देता है, यह देख कोसिमा की आँखों में खून उत्तर आता है. डांस करते हुए राजेश सब देख रहा था , अब उसे रहा नहीं जाता और वह पछे से आकर शेख के कंधे पर थाप करता है, जैसे ही शेख उसकी तरफ घूमता है, कोसिमा भाग कर अपनी बहन की तरफ डांस फ्लोर पर चली जाती है उसकी आँखों में आँसू थे.

शेख राजेश को कबाब में हड्डी ना बनने के लिए कहता है. राजेश उसे प्यार से समझाता है की शरीफ फॅमिली है ऐसी नहीं जैसी वह सोच रहा है. शेख एक और ग्डी जेब से निकालता है और कीमत पूछता है, उसके लिए हर औरत या लड़की रंडी ही होती है, बस कीमत सही लगानी चाहिए. अब राजेश से बर्दाश्त नहीं होता और वह शेख को वॉर्निंग देता है की यहाँ से वो चला जाए वरना अच्छा नहीं होगा. शेख तैश में आ जाता है और गालीगलोज शुरू करदेता है. राजेश भी गरम होजाता है और गाली का जवाब गाली से देता है. बात बहुत ही आगे बदती जा रही थी, शेख का हाथ राजेश पे उठ जाता है, यह देख राजीव भी उछल पड़ता है और बाकी ग्रूप के लोग भी वाहा पहुँच जाते हैं, सभी शेख को घेर लेते हैं और राजीव तो आगे बॅड कर शेख की गर्दन पकड़ लेता है. राजेश उसे दूर करता है और शेख के जबड़े पर एक जोरदार घूँसा जड़ देता है और शेख संभल नहीं पता और उड़ता हुआ नीचे गिर पड़ता है और अरबी में दहाड़ने लगता है , माहॉल बहुत बिगड़ जाता है और कुछ अरबी जो वहाँ थे वो भी शेख की मदद के लिए पहुँच जाते हैं, इतने में ऑर्गनाइज़ होटेल की सेक्यूरिटी फोर्स को बुला लेता है और वह सभी शेख को ज़बरदस्ती पकड़ कर एक कोने में ले जाते हैं और अरबी में बाते करने लगते हैं. राजेश क्यूंकी सरकार का मेहमान था उसकी बेइज़ती सरकार की बेइज़ती थी, शेख को जब ये बात समझ आती है तो उसके हाथ पाँव फूलने लगते हैं, पैसे का सारा नशा उत्तर जात्ता है. उसे सबसे माफी माँगने पर मजबूर किया जाता है और रेस्टोरेंट से बाहर कर दिया जाता है, जाते जाते वह राजेश को ख़ूँख़ार नज़रों से घूरता है और बदले का इशारा करते हुए निकल जाता है. एक अनचाही दुश्मनी की शुरूवात हो चुकी थी.

राजेश फिर से म्यूज़िक शुरू करवाता है और कोसिमा और फीओरे को अपनी बाँहों में भर लेता है. दोनो डर के मारे पसीने में लथपथ थी. राजेश अपने होंठों से उनकी आँखों के आँसू पोंछता है और उनकी करम में गुदगुदी करने लगता है, जिसे वह दोनो शी नहीं पति और खिलखिला कर हंस पड़ती हैं. पेड्रो और रोज़ल्बा जो की गहरे सदमे में थे उनकी आँखों में खुशी के आँसू आ जाते हैं. माहॉल फिर धीरे धीरे बदलने लगता है और डॅन्स फ्लोर पर जोड़े लहराने लगते हैं.

राजेश कोसिमा को अपने बदन से चिपका लेता है और फीओरे को राजीव के साथ डांस करने के लिए कहता है, पहले तो फीओरे मना कर देती है , फिर अनमने मन से मान जाती है. राजेश एक वाइट वाइन का पेग मँगवाता है और डांस करते करते कोसिमा को पिलाने लगताहै और खुद भी पिता है जब थोड़ी सी पेग में बच जाती है तो दोनो पेग को अपने होंठों से थाम लेते हैं और एसे ही नाचने लगते हैं दोनो के होंठों के बीच पेग हवा में लटका हुआ था और दोनो के बदन आपस में चिपके हुए थे, उनका डांस बहुत ही रोमांटिक हो जाता है और दोनो एक दूसरे को बेलेन्स बनाए हुए पेग से पिलाते रहते हैं, कभी राजेश तोड़ा नीचे झुकता तो कभी कोसिमा, इस तरहा यह पेग ख़तम होजाता है तो राजेश एक भरा हुआ पेग फिर वैसे दोनो के होंठों के बीच रख लेता है, कोसिमा के साथ ऐसा डांस किसीने भी नहीं किया था वह रोमांच से भर उठती है . उसी तरहा नाचते नाचते दोनो यह पेग भी ख़तम कर देते हैं. बुफे अब तक सर्व हो चुका था.

म्यूज़िक रोक दिया जाता है और सभी डिन्नर की तरफ बॅड जाते हैं. राजेश टेबल पर बैठने की जगह खड़े हो कर खा रहा था, उसका सारा ग्रूप और पेड्रो की फॅमिली भी उसे घेरे हुए खड़ी थी. मीनाक्षी की नज़रों में तो राजेश आज देवता बन गया था, उसे खुद पर नाज़ हो रहा था की उसने सही इंसान का चयन किया था अपने लिए, वह प्रशंसा की नज़रों से राजेश को देख रही थी, राजेश उसकी तरफ कोई धयान नहीं देता और बाकी सभी लोगों से बातें करता रहता हैं डिन्नर के दौरान.
राजेश का आकर्षण ही कुछ ऐसा था की ये तीनो तितलियाँ उसके आसपास ही मंडरा रही थी. पेड्रो बार बार राजेश की प्रशंसा कर रहा था और बार बार उसका धन्यवाद कर रहा था.

डिन्नर ख़तम होने के बाद पेड्रो राजेश के सारे ग्रूप को ड्रिंक के लिए इन्वाइट करता है. जिस तरीके से राजेश ने शेख को हेंडल किया था वह पूरे रेस्टोरेंट में हर एक की ज़बान पर था और अब तक तो जॉर्डन के सारे शेखों तक ये खबर राजेश के बायो डाटा के साथ पहुँच चुकी थी.

कल की सुबह, ओह, फिर ज़बान फिसलने लगी थी, भाई में कल का आप को आज तो नहीं बता सकता, मेरी वाट लग जाएगी, यह 3 तितलियाँ तो वाक्य में मेरा दिमाग़ खराब कर रही हैं.

डिन्नर ख़तम होते ही सब अपने कमरों की तरफ बॅड जाते हैं, राजीव रुकने की कोशिश करता है पर राजेश आँखों के इशारे से उसे भेज देता है, राजीव को अच्छा तो नहीं लगता पर वह राजेश के सामने ऐसा कोई सीन खड़ा नहीं करना चाहता था और वैसे भी फीओरे ने उसे कोई हिंट नहीं दिया था डांस के दौरान, वह चला जाता है, तीनो एक एक करके राजेश के रूम का नंबर पूछ कर चली जाती हैं. शायद तीनो ही राजेश का अपने तरीके से एकांत में धन्यवाद करना चाहती हैं.

राजेश अपने कमरे में जा कर फ्रेश होता है और केवल एक बॉक्सर पह्न कर मिनी फ्रिड्ज से बियर निकाल कर पीने लगता है.

थोड़ी देर में बेल होती है राजेश दरवाजा खोलता है और सामने रोज़अल्बा को कहर ढाते हुए पता है, वह एक लिंगेरे पहने हुई थी जो अंदर का सब कुछ दिखा रही थी, उसने कोई भी अंगवस्त्रा नहीं पहना था.

इस से पहले की राजेश कुछ बोलता रोज़अल्बा उस से चिपक जाती है और उसे चूमने लगती है, राजेश तो था ही 3 दीनो से भूखा, वह उसे अपनी बाहों में लपेटे हुए घूम जाता है और अपने टांग से दरवाजा बंद कर देता है, ऐसे ही चूमते हुए दोनो राजेश के बिस्तर तक पहुँच जाते हैं और राजेश उसकी लिंगेरे उत्तर फेंकता है और उसके उरोज़ पर टूट पड़ता है.
वाह री आज की भौतिकवाद की दुनिया धन्यवाद देने और लेने के तरीके कितना बदल चुके हैं.

राजेश तो आज एक जंगली जानवर बन चुका था, मुझे आज भी वो दिन याद हैं जब राजेश आज से 6 महीने पहले एक सीधा सदा इंसान हुआ करता था, वह नारी को सिर्फ़ इज़्ज़त की नज़रों से देखता था उसके जिस्म में जैसे वासना नाम की कोई चीज़ ही ना थी, पर आज देखो कैसे भूके शेर की तरहा रोज़ल्बा की एक एक बोटी अलग कर रहा था, वह बड़ी ही निर्मम तरीके से रोज़ल्बा के उरोज़ को निचोड़ रहा था, चूस रहा था काट रहा था, रोज़अल्बा एक बड़ी ही सभरांत महिला थी , आज जो वाक़या रेस्टोरेंट में हुआ था उसने उसके सारे परिवार को हिला के रख दिया था और वह अपने पति की इज़ाज़त से ही राजेश के पास आई उसका शुक्रियादा करने पर राजेश ग़लत समझ बैठा था, जो कपड़े रोज़अल्बा ने पहने थे वो तो उसकी रोज़ रात के साथी थे, उसके लिए युरोपियन सभ्यता के अनुसार वो नॉर्मल थे, पर राजेश उसे इन कपड़ों में देख कर अपने आप को भूल गया था और उसका जानवर बाहर निकल पड़ा.

रोज़अल्बा तो सिर्फ़ राजेश के गालों को चूम रही थी की राजेश उसके होंठों पर टूट पड़ा और उसकी लिंगेरे भी उत्तर फेंका था. रोज़अल्बा का जिस्म अब एक बरफ बन चुका था वह राजेश के हर प्रहार को तड़प्ते हुए झेल रही थी और दूर होने की कोशिश कर रही थी.

जैसे ही राजेश के जिस्म को एक ठंडे जिस्म का ग्यात होता है वह वास्तविकता में पहुँच जाता है, उसके हाथ स्वता ही रुक जाते हैं पर देर हो चुकी थी.

वह झट से रोज़अल्बा के जिस्म से दूर हो जाता है और फटी हुई आँखों से उसे देखने लगता है , उसकी आत्मा तक ग्लानि से भर उठती है, आँखों में आँसू आ जाते हैं, रोज़अल्बा धीरे धीरे उठती है और अपनी लिंगेरे पह्न लेती है.
वह राजेश की तरफ एक प्रशण करती हुई देखने लगती है.

“ ई आआआअम्म्म्मम सोर्र्र्ररययययययी” राजेश काँपते हुए बोलता है और रोज़अल्बा के कदमों में गिर पड़ता है.

“ दा वे यू हॅव ड्रेस्ड ई थॉट योउ वांटेड इट , आई डीप्ली रिग्रेट , प्लीज़ फर्गिव मी, आई आम नोट सच टाइप ऑफ पर्सन, आई नेवेर फोर्स माइसेल्फ ओं एनीवन, प्लीज़ प्लीज़ फर्गिव मी एंड प्लीज़ गो टू युवर रूम.”

अब तक रोज़अल्बा संभल चुकी थी, वह राजेश के सर पर प्यार से हाथ फेरती है, हालाँकि उसका दिमाग़ उसके जिस्म को ठंडा कर देता है पर उसका दिल राजेश के वहशिपान से प्यार करने लगता है, “ डॉन’त फील बेड, यू स्टार्टेड सो फास्ट आई कुड नोट फेथम इट, बुत माइ हार्ट वांट्स यू ऑल दा मोर” वह राजेश को उप्पर उठाती है, “ आई एडमायर यू एंड आई फील फॉर यू- डॉन’त थिंक एनिथिन्ग एंड डॉन’त मेक मी थिंक एनिथिन्ग – जस्ट लव मे दा वे यू वर डूयिंग- अनलीश युवर हॉर्सस- अनलीश युवर पॅशन- टके मी टू दा हाइट्स आई हेव नेवेर बिन टू”

राजेश उसकी आँखों में गौर से देखता है और दोनो के होंठ जुड़ जाते हैं, वह अपने होंठ खोल देती है और राजेश की ज़बान अंदर गुस कर अपना वार करने लगती है, उसके हाथ फिर रोज़अल्बा के मम्मों पर पहुँच जाते है और बड़ी बेदर्दी से उन्हे निचोड़ने लगते हैन.रोzअल्बा की सिसकियाँ शुरू हो जाती हैं,

ईईईईसस्स्स्स्सस्स द्द्द्द्द्द्द्दद्डूऊऊऊिट , मोर मोर हार्डर हार्डर , स्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़्क़ीईईईज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ देम, हार्डर हार्डर एस एस एस टके मी टके मी , उसकी चूत बहने लगती है और वह भी वहशी हो कर राजेश के होंठ काटने लगती है, और अपने हाथों को नीचे ले जा कर राजेश का बॉक्सर उत्तार देती है.

वह राजेश के लंड से खेलने लगती है बींचने, तोड़ने मरोर्ने लगती है, राजेश का पागलपन बदता जाता है, आआआअहह चीखता हुआ वह रोज़अल्बा की लिंगेरी फाड़ते हुए उत्तार फेंकता है.

वह उसके मम्मों पर टूट पड़ता है और उसकी ज़बान एक नुकीला हथ्यार बन कर रोज़अल्बा के निपल्स को घायल करने लगती है.

रोज़अल्बा से और सह्न नहीं होता और वो राजेश को अपने उप्पर खींचती है और अपनी टाँगे पूरी फैला देती है, वह अपने हाथों से अपनी टाँगे और चोडी कर लेती है ताकि उसकी चूत पूरी खुल जाए और राजेश बिना एक पल की देरी के अपना 9 इंच लंबा 3 इंच मॉटा लंड एक ही झटके में रोज़अल्बा के घर्बाश्या तक पेल देता है, रोज़अल्बा के मुँह से एक मरमबेधी चीख निकल पड़ती है , इतना जुंगलीपन उसने अपनी सारी जिंदगी पेड्रो के साथ कभी अनुभव नहीं किया था,

राजेश पागलों की तरहा उसकी चूत को दनादन पेलने लगता है,

रोज़अल्बा की चीखें बुलंद हो जाती हैं, आआआआआआआआआ, उूुुुुुउउफफफफफफफफफ्फ़, सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूऊऊऊऊऊऊव्वववववववव प्प्प्प्प्प्प्प्प्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लीीईआआआसस्स्स्स्स्स्सीईईईई, ईईईईईईईई
गगगगगगगगगगगगगगूऊऊऊऊऊओद्द्द्द्द्द्द्द्द्द्दद्ड सस्स्स्स्स्स्सल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लूऊऊऊऊव्ववववववववव,

पर राजेश पर कोई असर नहीं होता वह तो आज शिकार पर निकला हुआ था , दे दनादन, दे दनादन, फूच फूच फूच फूच रोज़अल्बा की चूत अपना ही राग अलापने लगती है, राजधानी एक्सप्रेस को पीछे छोड़ते हुए राजेश बुलेट ट्रेन की तरहा दोधने लगता है, अंदर बाहर अंदर बाहर उसका लंड रोज़अल्बा की चूत की परखचियाँ उड़ाने लगता है, और रोज़अल्बा की सिसकियाँ पूरे रूम में गूंजने लगती है, वो तो शुक्र है की रूम साउंड प्रूफ था वरना होटल का एक एक शॅक्स उनके रूम के बाहर होता, राजेश बड़ी ही निर्ममता के साथ रोज़अल्बा को चोद रहा था.

उसकी चूत हर 5 मिनिट बाद अपना लावा उगल रही थी, वह स्वर्ग तक पहुँचती, फिर धरातल पर आती और फिर स्वर्ग तक पहुँच जाती, उसकी आत्मा तक जैसे परमानंद लोक तक पहुच कर वापस आ रही थी, जा रही थी, इतनी जबरदस्त चुदाई उसने सपने में भी कभी सोची ना थी , और राजेश था की एंजिन की तरहा नों स्टॉप एक ही स्पीड के साथ लगा हुआ था. वह झटके के साथ अपना लंड बाहर निकलता है और इससे पहले रोज़अल्बा कुछ समझती, वह पूरे ज़ोर शोर के साथ अपना लंड रोज़अल्बा की गांद मे पेल देता है , रोज़अल्बा की गांद फॅट जाती है, वह चीखने और रोने लगती है, उसका जिस्म तड़प उठता है, पर राजेश एक राक्षस की तरहा उसकी चुदाई में मस्त था, भीषण दर्द को सहते हुए चीखते हुए रोज़अल्बा की आँखे आँसू की झड़ी से तकिये को भिगोने लगती है, राजेश कोई रहम नहीं करता और दे दनादन उसकी गांद को चोद्ता रहता है, 10 मिनिट के बाद रोज़अल्बा की गांद राजेश को सहने लायक बन जाती है और उसे आनंद आने लगता है, जिंदगी में पहली बार कोई उसकी गांद मार रहा था और वो भी एक जानवर की तरहा.
उसकी सिसकियाँ निकालने लगती हैं आह आह आह अहह , उउफफफफफफफफ्फ़, एस ईएसस्स्सस्स फास्टर फफफफफफफफफफफ़ाआआअसस्स्स्स्स्स्स्टतेर , एस एस डीपर मोर डीपर , फक मी फक मी फफफफुकक मीईईईईई

दोनो के जिस्म पसीने से लथपथ थे , जो उनके जिस्मो के टकराने पर अपना ही अलग राग अलाप रहे थे.

रोज़अल्बा की चूत और गांद दोनो से पानी बहने लगता है पर राजेश अभी भी लगा हुआ था दे दनादन दे दनादन, अचानक राजेश अपना लंड बाहर निकल लेता है और रोज़अल्बा को डॉगी पोज़िशन में लाकर पीछे से खच कर एक ही बार में अपना लंड उसकी चूत में पेल देता है, रोज़अल्बा फिर एक मरमबेधी चीख मारती है राजेश बेदर्द्दी से फिर उसकी चूत मारने लगता है आज तो शायद कामदेव भी राजेश से हार जाता.

सी सी सी आह आह ह उफ़ उफ़ उफ़ उूुुुउउफफफफ्फ़ ऊऊीीईईईईईईईईईईईई रोज़ल्बा की सिसकियाँ बुलुंद होती रहती है , वह तो भूल ही चुकी थी की कितनी बार झड़ी है, बिस्तर की हालत बता रही थी जो रोज़अल्बा के चूत रस से पूरा भीग चक्का था.

अब राजेश भी अपनी चर्म सीमा पर पहुँचने वाला था और उसके धक्के और भी तेज़ हो गये थे जो रोज़अल्बा से बर्दाश्त नहीं हो रहे थे, उसकी सिसकियाँ चीखों में बदल जाती हैं और राजेश एक हुंकार भर कर उसकी चूत को अपने लावे से भरने लगता है, पिचकारियों पे पिचकारियाँ रोज़अल्बा की चूत को राहत पहुचाने लगती हैं और वह भी अपना बाँध छोड़ देती है, बिस्तर ऐसे लगने लगता है जैसे किसीने गीली चादर ही बिछाई थी.

राजेश रोज़अल्बा की बगल में लूड़क पड़ता है और धोन्क्नि की तरहा चलती हुई अपनी सांसो पर काबू पाने की कोशिश करने लगता है.
रोज़अल्बा भी परमानंद में डूब जाती है और उसकी आँखे बंद हो जाती है.

थोड़ी देर बाद रोज़अल्बा को होश आता है और अपनी स्थिति का बोध होता है, वह राजेश के लंड को चूमती है, सॉफ करती है , उठ कर अपनी लिंगेरी पहती है और लड़खड़ाते हुए अपने कमरे में चली जाती है, राजेश अभी भी हाँफ रहा था, वह ऐसे ही नग्न अपने बिस्तर पर पड़ा रहता है.

रोज़अल्बा जाते वक़्त अपने आनंद में खोई हुई थी और दरवाजा पूरा बंद ना करके सिर्फ़ बेड कर चली जाती है, जब वह अपने कमरे में पहुचती है तो पेड्रो नग्न अपने लंड पर हाथ रखे हुए सोया हुआ था. रोज़अल्बा इतनी तक चुकी थी की दूसरी चुदाई की हिम्मत उसमे नहीं थी, वह चुपचाप पेड्रो की बगल में लेट जाती है और राजेश के कामरस को धीरे धीरे अपनी चूत से बाहर निकलता हुआ महसूस करनी लगती है, शादी के बाद आज पहिली बार वह किसी गेर मर्द से चुदवा कर आई थी , उसका जोड़ जोड़ टूट रहा था और वह धीरे धीरे नींद के आगोश में चली जाती है.


रोज़अल्बा के जाने के बाद कुछ ही देर में कोसिमा वहाँ पहुचती है जैसे ही वह दरवाजे पे हाथ रखती है, वह खुल जाता है


, कोसिमा दरवाजा बंद करदेटी है और राजेश को नग्न पाती है, वह अपने सारे कपड़े उत्तार देती है और धीरे से राजेश के साथ लेट जाती है उसकी नज़रें राजेश के लंबे लंड पर ही गड़ी रहती है, इतना लंबा, एक दर सा उसकी आँखों में आ जाता है पर उसकी चूत कुलबुलाने लगती है और अपना रस छोड़ने लगती है, वह धीरे धीरे राजेश के लंड को पकड़ उसे प्यार से चाटने लगती है , साथ ही साथ वह राजेश की झांतो को भी चाटने लगती है जो उसकी मा के कम रस से भरी हुई थी.


अब तो मैं भी बहुत गरम हो चुका हूँ , थोड़ा बाहर घूम के आता हूँ, तब तक कोसिमा राजेश का लंड खड़ा करती है, अरे हान मैं तो इन तितलियों का चक्कर में रति के अवतार को तो भूल ही गया था, नहीं समझे अरे वही अपनी इंदु, ढेंखे तो सही आज की रात उसका दिल क्या कह रहा है, जिस आग को कांता ने हवा देदी है वह कहाँ तक पहुची है.



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FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--7

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 एक अजीब सा उन्माद--7
 कांता नहा धो कर तयार हो जाती है और ड्रॉयिंग रूम में जा कर बैठ जाती है. वह एक गहरी सोच में डूब जाती है, उसकी आँखों से आँसू बहने लगते हैं. पता नहीं इंदु क्या सोचेगी मेरे बारे में. अपनी ममता के हाथो मजबूर हो कर यह मेने क्या कर दिया?. क्या इंदु के दिल में उसके लिए वोही इज़्ज़त होगी या नहीं?. क्या वह अपनी बेटी से नज़रें मिला पाएगी या नहीं?. कितने जतन से उसने कितना त्याग कर के प्यार, भरोसे, और एक आदर की इमारत बनाई थी. आज उसे सब कुछ ढेहता हुआ महसूस हो रहा था.

इन्ही विचारों में खोई हुई उसे पता ही ना चला के कब इंदु नहा धो कर तयार हो गई और चाय बना के ले आई, आज इंदु का चेरा खिला हुआ था, आँखों मे शर्म और हया की लाली थी.

बहुत ही सकुचाते हुए वह अपनी मा को आवाज़ देती है “ मा चाय”

कांता अपनी सोचों के बवंडर से वापिस आती है और इंदु की तरफ देखती है.
उसकी आँखों में अब भी आँसू थे. भरे हुए गले से “ बेटी हो सके तो मुझे माफ़ कर दे, मेरे बारे में कुछ ग़लत ना सोचना”

इंदु “ मा यह तुम क्या कह रही हो, और रो क्यूँ रही हो”

काँटा : “ बेटी आज सुबह जो कुछ भी हुआ …. वो वो….

इंदु : शरमाते हुए- “ कुछ मत सोचो मा, तुमने कुछ बुरा नहीं किया, मेरे लिए तो तुम अब और भी ज़्यादा पूजनीय हो गई हो” “ चलो चाय पियो और मुझे अपने कॉलेज की और बाते बताओ” इंदु बातों का रुख़ मोड़ती है ताकि उसकी मा अपनी ग्लानि से बाहर निकल सके.

“ बताओ ना मा, मेने आज की सब अपायंट्मेंट्स कॅन्सल कर दी हैं, आज में सारा दिन तुम्हारे साथ रहूंगी” इंदु चेहरे पे नटखटपान लाते हुए बोलती है.

कांता एक सकूँ की साँस लेती है, उसके दिल का गुबार हल्का हो जाता है , चेहरे पे हसी आ जाती है और वह अपनी बेटी को गले लगा कर अपनी ममता लुटाने लग जाती है.


इधर कामया जब सो कर उठती है तो अपने पति को साथ में सोया हुआ देखती है. उसे रात में राजीव का कॉल याद आ जाता है और चेहरा शर्म से लाल हो जाता है.

“ है राम, राजीव क्या सोच रहा होगा, उसके माता पिता संभोग में लिप्त थे जब उसने फोन किया, कैसे उसे फेस करूँगी जब वो वापिस आएगा- सिर्फ़ हेलो की आवाज़ सुनते ही वो ताड़ गया था और फटा फॅट बोल कर फोन काट दिया” कामया को रात की अपनी चुदाई याद आ जाती है , किस तरहा राजीव के फोन आने के बाद वह और भी उत्तेजित हो गई थी, किस तरहा उसकी चूत ने ढेरों पानी बहाया था, उसका पति भी उसके ओर्गसम की तीव्रता से हैरान हो गया था. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था.

यह क्या उसकी चूत गीली होने लगी, हे राम यह मुझे क्या हो रहा है. वह अपने पे कंट्रोल करती है और बाथरूम में घुस जाती है.

त्यार हो कर कामया अपने पति को उठाती है और किचन में चली जाती है, तब तक नेहा भी नीचे आ जाती है.

कामया : गुड मॉर्निंग बेटा , नींद तो अच्छी आई.

नेहा : गुड मॉर्निंग मों. चाय तयार हो गई?

कामया : हान बेटा बस थोड़ी देर में, तू चल में अभी लेकर आई, और हान तेरे चहेते भाई का फोन आया था रात को, ठीक ठाक है आज दुपहर में फोन करेगा.

नेहा : भाई, का फोन आया था ! उसने मुझे क्यूँ नहीं किया, भूल गया है मुझे.

कामया : नहीं बेटा, रात बहुत हो गई थी और तब तक तू सो गई होगी. कल ही उसे सिम कार्ड मिला है .

नेहा : छोड़ूँगी नहीं, वापिस तो आने दो.अच्छा मा जल्दी चाय दो मुझे आज जल्दी तयार हो कर कॉलेज जाना है.


ज़रा जॉर्डन में देखते हैं क्या हो रहा है.


 यहाँ जॉर्डन में सुबह सब तयार हो चुके थे और ब्रेकफास्ट टेबल पर बैठे हुए थे. आज राजेश के ग्रूप को डेड सी जाना था, वह चाहता तो प्रोफ गेरहार्ड का प्रोग्राम अपने प्रोग्राम की तरहा बदल देता पर उसे ऐसा नहीं किया.

वह अपने और केथ के बीच में अब गॅप लाना चाहता था. राजेश अपने ग्रूप के साथ बैठा हुआ ब्रेकफास्ट कर रहा था उसे जोक्स सुना सुना कर सबको हसा रहा था, पर मीनाक्षी के चेहरे पर कोई हसी नहीं थी, उसका चेरा बुझा हुआ था, सॉफ पता चल रहा था की रात को वो बहुत रोई थी, उसने मेकप में अपने चेहरे को बहुत खुशनुमा बनाए की भरसक कोशिश करी थी पर सफल नहीं हो पाई. सारा ग्रूप उसे देख रहा था एक दो ने पूछा भी तो उसने टाल दिया.

ब्रेकफास्ट करने के बाद राजेश प्रफ़ गेरहार्ड की टेबल की तरफ चला गया. केथ की मा उसे दिल खोल कर गले मिली और उसके कानो में हल्के से “ थॅंक्स” बोल दिया” अपनी बेटी की चाल देख कर उसे पता चल गया था की राजेश अपने प्रॉमिस पर खरा उतरा था. राजेश की इज़्ज़त अब केथ की मा के दिल में बहुत ही ज़यादा बॅड गई थी, केथ की तो नज़रें राजेश से हट ही नहीं रही थी. राजीव भी राजेश का अनुसरण करते हुए वहाँ पहुच गया था और उसने सब को विश किया. सब ने उसके विश का जवाब दिया, वह जूली को देख रहा था जो उसे कोई भाव नहीं दे रही थी. उसके लिए तो राजीव एक हॅमबर्गर की तरहा ही था, कल जब भूख लगी थी तो खा लिया. इस से ज़यादा राजीव का कोई वजूद नही था जूली की आँखों में. राजीव के लिए जूली का उसे अवाय्ड करना काफ़ी प्रशणात्मक था, उसके चेहरे पर हैरानी सॉफ झल्क रही थी.
इधर केथ उठ कर राजेश के गले लग जाती है और अपनी फॅमिली के सामने ही स्मूच करने लगती है “ विल मिस यू ए लॉट , डू कॉल मी वेनेवर यू आर फ्री” केथ उसके कानो में बोलती है.

उनका गाइड आ गया था और प्रोफ गेरहार्ड खड़े हो जाते हैं. राजेश सबसे हाथ मिलता है और विदाई लेता है. प्रोफ गेरहार्ड उसे गले लगा लेते हैं और अपने घर इन्वाइट करते हैं. जूली भी जाते वक़्त राजेश के गले लग जाती है, उसे अपनी बहन की पसंद पर नाज़ था. एक भावभीनी विदाई के साथ वो लोग चले जाते हैं.
राजेश का ग्रूप भी इधर चलने को तयार था. वह लोग अपनी कोच में बैठ जाते हैं. डेड सी तक का सफ़र 2 घंटे में ख़तम हो गया. इनका अरेंज्मेंट एक बहुत ही आचे 5* होटल में हुआ था जो बिल्कुल डेड सी के किनारे था और उसका एक प्राइवेट बीच था.

सब लोग अपने अपने कमरे में जा कर अपना अपना समान संभालते हैं, राजेश स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम पह्न कर नीचे आ जाता है और बीच की तरफ चल देता है. डेड सी का पानी बहुत ही नमकीन और तेल जैसा था, इसमे कोई जीव जन्तु पल नहीं सकता था इसीलिए इससे डेड सी कहते हैं. सामने देखो तो इज़्रेल और पॅलेस्टीन के झंडे सॉफ दिख रहे थे . डेड सी का पानी बहुत ही मेडिसिनल इंपॉर्टेन्स रखता था और इसमें नहाने से काफ़ी स्किन की बीमारियाँ दूर हो जाती हैं.

राजेश समुद्रा में जा कर पानी की स्ताः पर तैरने लगता है. जी हान जिससे तैरना नहीं भी आता वो इस पानी में फ्लोट ही करेगा डूबेगा नहीं.

दो रातों से राजेश ने बहुत धैर्य रखा हुआ था आज उसे अपने शिकार की तलाश थी.

चलिए ज़रा कांता के पास चलते हैं .

 राजेश अपने कमरे में बिस्तर पर लेट जाता है और कुछ यादों में खो जाता है, यह याद्देन वही हैं जिनकी वजह से राजेश ने इतनी पीनी शुरू कर दी थी. उसके साथ कुछ ऐसा हुआ था जिसने उसके वजूद को हिला कर रखा हुआ था और वह पी पी कर अपने आप को सज़ा देता था. पीते पीते वह टेंकर बन चुका था पर यह याद्देन उसका पीछा नहीं छोड़ती थी, ऐसा क्या हुआ था उसके साथ यह सिर्फ़ वही जानता था और किसी को इसके बारे में भनक तक नहीं थी. उसका दिल उदास रहता था पर वह हमेशा अपने चेहरे पे हँसी रखता था, उसके दिल का यह दर्द उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था.

लंच का टाइम हो जाता है और राजीव उसे बुलाने चला आता है, वह पहले भी आया था पर तब तक राजेश वहाँ से गायब हो चुका था, रूम की बेल सुनके राजेश अपनी यादों से वापिस आटा हैं, बाथरूम जा कर अपना फेस वॉश करता है और चेहरे पर फिर वही मनमोहक हँसी लेकर दरवाजा खोलता है, सामने राजीव खड़ा था.

“ अबे कहाँ गायब हो जाता है तू, चल नीचे सभी तेरा लंच के लिए इंतेज़ार कर रहे हैं. “
राजेश कुछ नहीं बोलता और रूम बंद कर राजीव के साथ चला जाता है.
राजेश जब नीचे पहुँचता है तो मज़े से खिल उठता है वो दोनो फुलझड़ियाँ अपने परिवार के साथ इन्ही की साथ वाली टेबल पेर बैठी हुई थी.

राजेश इस तरहा बैठता है की उसकी पीठ उनकी तरफ होती है. सभी आपस में हसी मज़ाक कर रहे थे, मीनाक्षी अपनी गर्दन नीचे करे राजेश को छुपी निगाहों से देखती रहती है. उसका चेहरा अभी भी सुबह की तरहा उदास था.

राजेश बाते करते हुए , चलो यार लोगों आज तुम्हें एक रोमॅंटिक इटॅलियन गाना सुनता हूँ , सभी तालियाँ बजा कर उसका स्वागत करते हैं. ग्रूप में से एक बोलता है, गुरु गाने के बाद उसका मतलब भी समझा देना. यह गाना बहुत ही पुराना रोमॅंटिक गाना था जो शायद आज की इटॅलियन पीडी जानती तक ना थी.

राजेश एक प्रोफेशनल सिंगर की तरहा गाने लगता है, वह अपनी आवाज़ इतनी रखता है के उसके पीछे बैठ हुई फॅमिली आसानी से सुन ले.


 गाना ख़तम होता है तो वो फॅमिली इस गाने की धुन में खो जाती है और जिस तरन्नुम से राजेश यह गाना गाता है उसके ग्रूप के साथ साथ वह फॅमिली भी तालियाँ बजाने लगती है.

उन लड़कियों का पिता उठ कर राजेश के पास आता है और आज की दोपहर को हसीन बनाना के लिए उसे दिल से धन्यवाद करता है और लंच के लिए अपनी टेबल पर इन्वाइट करता है.

 कांता और इंदु लंच कर रहे होते हैं की कामया का फोन आता है.

कांता : हाइ मेरी बन्नो , कैसे याद किया.

कामया : यार तुझसे बहुत ज़रूरी बात करनी है.

कांता : तो कर ना मेरी जान किसने रोका है.

कामया : अरे फोन पर नहीं ,कब मिल सकती है.

कांता : कोई और पटा लिया है क्या, लगता है जीजू से दिल भर गया. ( कांता जान भुझ कर इंदु के सामने ऐसी बाते कर रही थी)

कामया : पागल है क्या, कुछ भी बोल देती है. कब मिल रही है.

कांता : यार में अपने नये पार्ट्नर के साथ लंच कर रही हूँ. 1 घंटे के बाद घर पर ही हूँगी.

कामया : कयययययययययाआआआअ ! नया पार्ट्नर !!!!!!! यह क्या बक रही है.

काँटा : यार वो तो कान्फरेन्स पे चले गये, अब में क्या करती , सो नया पार्ट्नर बना लिया.

कामया : शर्म नहीं आती , इस उम्र में ऐसे हरकत कर रही है, तोबा तोबा

कांता : अरे मेरी जान इसमें शर्म की क्या बात है, तू तो रोज़ मज़े ले रही है और में यहाँ क्या दीवारें देखा करूँ, अभी भी जवान हूँ ,कमसिन बदन है, जब कसक उठती है तो बर्दाश्त नहीं होती.

कामया : हे भगवान , क्या हो गया है तुझको, बचे जवान हो चुके हैं शादी करने लायक और तुउुुुउउ

कांता : खिलखिला कर हस्ते हुए, “अरी बन्नो परेशान मत हो, में तो मज़ाक कर रही थी- चल मिलते हैं फिर बातें करेंगे, बहुत दिन हो गये तुझसे मिले हुए” और कांता फोन काट देती है

इंदु हैरानी से अपनी मा को देखने लगती है, कांता उसे आँख मरते हुए

कांता : क्यूँ तू मेरी नयी पार्ट्नर नहीं बन गई , अब तो तू मेरी बेटी भी है और दोस्त भी.

इंदु के चेरे पर हसी आ जाती है और थोड़ी शर्म भी

काँटा : हाए क्या कहने तेरी इस शर्म के, काश में लड़का होती.

इंदु : झेंपते हुए “ माआआअ प्लीज़ “

कांता : यार कैसी दोस्त है तू , थोड़ा मज़ाक भी नहीं सह्न कर सकती.

इंदु : अच्छ बाबा सॉरी सॉरी.

कांता : ह्म्*म्म्म यह हुई ना बात.चल जल्दी लंच ख़तम कर, तेरी कामया आंटी आने वाली है.

इंदु : कामया आंटी, इतने दीनो बाद, सब ठीक तो है.

कांता : भाई उसे कुछ परेशानी है, देखते हैं क्या बात है.

इधर जॉर्डन में राजेश अपनी टेबल से उठ कर इटॅलियन फॅमिली के पास जा कर बैठ जाता है. दो शक्स उसे घूर रहे होते हैं राजीव और मीनाक्षी. दोनो के चेहरे पे गुस्सा और जलन सॉफ सॉफ दिख रही थी.

लड़कियाँ तो कयामत थी हीं, उनकी मा भी किसी शोले से कम ना थी. तीन तीन हसिनाओं के बीच राजेश कृष्ण कन्हिया से कम नहीं लग रहा था क्यूंकी उसका व्यक्तितिव अपने होस्ट से कहीं अधिक करिज़मॅटिक था. राजेश को उनके साथ हंस बोलता देख कर राजीव की तो झांटें ब्राउन हो गई थी. कामदेव का अवतार राजेश तीनो पर ही अपना जादू चला रहा था, तीन तीन चूत एक साथ गीली हो रही थी और पेड्रो उस फॅमिली का हेड भी उसके जादू से नहीं बचा था. वह अपनी बीवी को देखे ही जा रहा था , आज तो उसकी बीवी की ज़रूर शामत आने वाली थी. राजेश का गाना था ही बहुत रोमॅंटिक असर तो होता ही.

लंच ख़तम होते ही पेड्रो ने चांपैगने की बॉटल मंगा ली , वह आज की दोपहर को सेलेब्रेट करना चाहता था . पेड्रो का एक्सपोर्ट का बिज़्नेस था , उसकी बीवी और उसकी बेटियाँ तीनो ही डॉक्टर थे. कर लो बात, एक डॉक्टर से पीछा अभी छूटा ही था की तीन और गले पड़ने वाली थी.

राजीव उनको ही घुरे जा रहा था, अचानक उसे याद आता है की उसे घर फोन करना था. रात को तो बात कर ही नहीं सका था. और उसकी आँखो के सामने उसकी मा की खूबसूरत देह लहरानी लगती है. “सला यह मुझे हो क्या रहा है” सोचते हुए वह उठ कर रेस्टोरेंट के एक कोने में चला जाता है.

बहुत सोच कर वह अपनी मा को नहीं नेहा को फोन करता है.

लंच टाइम अभी ख़तम ही हुआ था , एक पीरियड खाली था, नेहा अपनी सहेलियों के साथ हसी मज़ाक कर रही थी की उसका फोन बज उठता है, कोई अटपटा सा नंबर होता है , फिर उसे धयान आता है की भाई का फोन हो सकता है.

नेहा : सीधा गुस्से में फोन उठाते ही शुरू हो जाती है, “ अब आई मेरी याद, ज़रूर वहाँ लड़कियों के पीछे ही रहते होगे, और ये पीनी कब से शुरू कर दी”

राजीव : “ अरे ओ हिट्लर , बड़े भाई से ऐसे बातें करते हैं क्या, तुझे समझाया तो था की नेटवर्क नहीं मिल रहा था और लोकल सिम कार्ड भी कल रात को बहुत देर से मिला था.”

नेहा : तो कल फोन क्यूँ नहीं किया. मैं कितनी परेशान हो रही थी, कुछ एहसास भी है.

राजीव : मेरी स्वीट डॉल ऐसे नाराज़ नहीं होते, मेरी प्राब्लम तो समझ.

नेहा : चलो फोन की बात तो छोड़ो, पर यह बताओ अपने पीनी कब से शुरू कर दी और क्यूँ पीते हो

राजीव : अरे किसने कहा तुझसे की मेने पीनी शुरू कर दी, दिमाग़ तो सही है ना तेरा.
नेहा : जाओ भाई, मुझसे झूठ मत बोलो, उस दिन सॉफ सॉफ पता चल रहा था की अपने पी रखी है, क्यूँ कर रहे हो ऐसा.

राजीव : देख स्वीट्यू, अब हम बहुत बड़े हो चुके हैं और जिस ट्रेड में मैं काम करता हूँ , कभी कभी पीनी पड़ जाती है, पर में बहुत ही कम पिता हूँ. ( वह नेहा से और झूठ नहीं बोलना चाहता था)

नेहा : भाई छोड़ दो पीना और ऐसी पार्टी में मत जाया करो, और भी लोग तो हैं तुम्हारे ट्रेड में जो बिल्कुल नहीं पीते. यह ट्रेड का बहाना मत दो.

राजीव : अच्छा छोड़ इन बातों को और यह बता घर में सब कैसे हैं, मोम, डेड

नेहा : सब अच्छे हैं, पर आपके बिना सुना सुना लगता है, कब आ रहे हो.

राजीव : बस 3 दिन और, फिर बंदा अपनी गुड़िया की सेवा में हाज़िर हो जाएगा, बता तेरे लिए क्या .लाउन

नेहा : कुछ नहीं भाई, बस आप जल्दी आजाओ.

राजीव : अच्छा चल में रखता हूँ, मा को बोल देना मेरा फोन आया था और यहाँ सब ठीक है. बाइ

नेहा : बाइ, कल फोन ज़रूर करना. ( भाई से बात करने के बाद उसका चेरा खिल उठा था)

राजीव अपना मोबाइल जेब में डालता है और एक गहरी साँस ले कर अपने ग्रूप के पास चला जाता है. सब लोग लंच कब का ख़तम कर चुके थे और उठने की तयारि में थे. ऑर्गनाइज़र ने वहाँ उनको शाम की आक्टिविटीस के बारे में बताया और सारा ग्रूप फिर इधर उधर भिखर गया. मीनाक्षी वहाँ से एक नयी टेबल पर जा बैठती है और बियर माँगा कर पीने लगती है, उसकी नज़रें राजेश पर ही टिकी हुई थी.

राजेश अभी भी इटॅलियन फॅमिली के साथ लगा हुआ था और शेम्पेन के दौर चल रहे थे. राजीव इधर उधर देखता है और वह भी मीनाक्षी के पास चला जाता है “ क्या में जोइन कर सकता हूँ”

मीनाक्षी कुछ ना बोल कर उसे बैठने का इशारा करती है. राजीव उसके सामने बैठ जाता है और अपने लिए बियर मंगवा लेता है. मींकशी बहुत चुप थी वह कोई बात नहीं कर रही थी. राजीव को बहुत ऑक्वर्ड फील होता है और वह इस चुप्पी को तोड़ता है. “ क्या बात है मीनाक्षी काफ़ी टाइम से देख रहा हूँ तुम बहुत उदास रहती हो, जब पहली बार मिले थे इस ग्रूप को जाय्न करने पे तो तुम एक खिले हुए फूल की तरहा चहक्ती थी, ऐसा क्या हो गया, सब ठीक तो है ना घर पे.”

मीनाक्षी चुप रहती है, कोई जवाब नहीं देती.

राजीव : “ देखो अगर मैं तुम्हे डिस्टर्ब कर रहा हूँ तो मैं चला जाता हूँ”
मीनाक्षी : सर नीचे झुकाए हुए “ नहीं सब ठीक है , बस मन उदास रहता है ” उसकी नज़रें राजेश को कनखियों से देख रही थी.

राजीव को कुछ शक तो पहले से ही था, जब वह उसकी नज़रों का पीछा करता है तो उसका शक यकीन में बदल जाता है, एक और हसीना राजेश की आग में खुद को बर्बाद कर रही थी, उसे मीनाक्षी पर तरस आता है.

राजीव : मीनाक्षी यह अंगूर खट्टे ही नहीं दुर्लभ भी हैं, अपनी सोच को बदलो और खुद को बर्बाद ना करो, जिंदगी जीने के लिए है, तू नहीं और सही और नहीं और सही.

मीनाक्षी गम से भारी आँखों से उसे देखते हुए अपना बियर का गॅलास्स उठाती है और एक ही झटके में खाली कर देती है.

मीनाक्षी : “ बहुत देर हो चुकी है राजीव, अब यह दिल बस में नहीं रहा, उसका मेरे लिए इतना रूखापन मुझसे सह्न नहीं हो रहा.”

“वाह रे उप्परवाले एक और बलि चॅड गयी” सोचते हुए राजीव गहरी साँस लेता है और मीनाक्षी का हाथ थाम लेता है.

मीनाक्षी कुछ नहीं बोलती बस खाली आँखो से राजीव को देखती है और अपना हाथ छुड़ा लेती है, वह एक और बियर मंगवा लेती है.

राजीव : मीना वह मेरे बचपन का दोस्त है, मैं उसे बहुत अच्छी तरहा जानता हूँ, उसने जब इस ट्रेड में कदम लिया था तभी एक कसम खाई थी की वह ट्रेड की किसी भी लड़की की तरफ आँख उठा कर नहीं देखेगा, इसीलिए देखो वो आज कहाँ पहुँच चुका है. हम दोनो ने साथ साथ नौकरी श्रु करी थी, मैं आज भी नौकरी कर रहा हूँ और वो एक हस्ती बन चुका है, मेरे जैसे कितने उसके लिए काम कर रहे हैं. यह जो तुम उसे खिलखिलाता हुआ देख रही हो ना, सब दिखावा है, वह अपना दर्द अपने अंदर ही रखता है, मुझे भी नहीं बताता. बड़ी खूबी से अपने आँसू छुपा लेता है, किसी को भनक तक नहीं पड़ती की अंदर से वह कितना दुखी है और क्यूँ है. पिछले 6 महीनो में वह बहुत बदल चुका है, पानी की तरहा पीने लगा है और शराब भी उस पर असर नहीं करती, उसके बारे में जब भी सोचता हूँ तो दिल एक डर से भर जाता है, मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा हूँ. वह सबको हसता रहता है अपनी सारी ज़िम्मेदारियाँ बखूबी पूरी करता है. पर अंदर से वो एक खाली बॉटल की तरहा हो चुका है, मुझे डर है कहीं कुछ अनहोनी ना हो जाए.

मीनाक्षी : राजीव के मुहन पर हाथ रख देती है “ नहीं नहीं उसे कुछ भी नहीं होगा, मैं उसे कुछ नहीं होने दूँगी, वो मेरा कितना भी तिरस्कार क्यूँ ना करे में उसके सारे दर्द उस से छीन लूँगी”

राजीव फटी आँखो से मीनाक्षी को देखता रहता है, उसने राजेश की लिए बहुत सी लड़कियों को तड़प्ते हुए देखा है, पर इतना समर्पण किसी में नहीं था. राजीव मीनाक्षी के दिल का हाल बखूबी समझ जाता है और उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं. “ तो मेरी भाभी बनने की कसम खा ही ली है”

मीनाक्षी का चेहरा लाल सुर्ख हो जाता है, शरम के मारे नज़रें नीचे झुका लेती है. राजेश ने उसे एक प्रोफेशनल दोस्त की जगह तो दे ही दी थी, उसके लिए इतना काफ़ी था राजेश की दिल तक पहुँचने के लिए. वह सोच चुकी थी की उसने क्या करना है. उसकी आँखों में अब उदासी नहीं एक दरिड निश्चयए झलक रहा था.

राजीव से यह बदलाव छुपता नहीं और तज़ूब होता है की क्या कोई लड़की इस हद तक भी जाने की सोच सकती है. { क्या ऐसा भी होता है?)

मीनाक्षी बियर का ग्लास उठा कर चियर्स करती है “ टू आवर सक्सेस”

“राजीव तुम मेरा साथ दोगे ना, तुम्हारे साथ के बिना में शायद बहुत अकेली ही पड़ जौंगी”

“ अपने यार के लिए में कुछ भी कर सकता हूँ”

मीनाक्षी के चेहरे पे एक चमक आ जाती है.

“ राजीव कल सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पर में राजेश से कुछ प्रोफेशनल बाते करना चाहती हूँ, वो मूज़े अवाय्ड करेगा, प्लीज़ मेरी मदद करना”

“ क्यों नहीं” चलो इसी खुशी में एक एक बियर और.

“ अरे में इतना नहीं पीती भाई पहले ही 2 बियर हो चुकी हैं चॅड जाएगी मुझे और तमाशा खड़ा हो जाएगा”

“ अरे इस देवर की खातिर एक और प्लीज़ , कुछ नहीं होगा”

“ बहुत बदमाश हो तुम, अच्छा तुम्हारी खातिर एक ग्लास और ले लूँगी बस, इस से ज़्यादा नहीं”

राजीव दो बोतलें और माँगा लेता है.

“ दो क्यूँ, एक मंगानी थी ना”

“ भाभी जान आप एक ग्लास ही लेना, मैं तो पी सकता हूँ ना”

“ देखो यह भाभी वाबी बोलना बंद करो नहीं तो उठ जवँगी”

“ लो कर लो बात , अब होनेवाली भाभी को भाभी नहीं बोलूं तो क्या बोलूं”

“ प्लीज़ राजीव तंग मत करो”

“ अच्छा बाबा नहीं करता “

दोनो बियर ख़तम करते हैं और मीनाक्षी अपने कमरे में चली जाती है. अब वह उदास नहीं थी, उसके चेहरे पे लाली और खुशी सॉफ सॉफ झलक रही थी, वह तकिये को अपनी बाहों में दबोचते हुए कुछ सोचने लगती और साथ साथ मुस्कुराती रहती है.

इधर राजीव राजेश की तरफ देखता है और फिर इधर उधर टहल कर होटेल का जाएजा लेने लगता है.

राजेश शाम के डिन्नर का टाइम फिक्स कर पेड्रो और उसकी फॅमिली से इज़ाज़त लेता है और बार की तरफ चला जाता है. एक बियर ले कर वह हल्की हल्की चुस्कियाँ लेता है और अपने ख्यालों में खो जाता है.

यहाँ जब तक कांता और इंदु घर पहुँचते हैं , कामया भी लगबग उसी समय पहुँच जाती है.

कांता कामया के गले लगती है और इंदु जब पैरों को छूने लगती है तो कामया उसे रोकते हुए गले से लगा लेती है.

तीनो ड्रॉयिंग रूम में बैठ जाती है.

“मा आप लोग बातें करो में आंटी के लिए कुछ लाती हूँ.”

“ बेटा जा ज़रा 3 कॉफी ले आ”

“ अभी लाई” और इंदु किचन की तरफ चली जाती है.
कामया : यह तू फोन पे क्या बकवास कर रही थी.

कांता : ( एक कुटिल मुस्कान के साथ) क्यूँ भाई, मैं नया पार्ट्नर नहीं ढूंड सकती क्या, किसी का भी खड़ा कर सकती हूँ.

कामया : हो क्या गया है तुझे

कांता : यार जब चूत में खुजली होती है ना , तो बर्दाश्त नहीं होता. तू तो रोज़ लेती रहती है, तेरी खुजली मिटानेवाला तो तेरे साथ है और मेरा इधर उधर कान्फरेन्स पे भागता रहता है. सोच रही हूँ एक और लंड का इंतेज़ाम कर ही लूँ. क्या ख़याल है टेस्ट बदलना चाहेगी क्या.

कामया : साली तू तो पूरी रांड़ हो गई हे, बच्चों पे क्या असर पड़ेगा .

कांता : क्या करूँ यार पेट के साथ साथ चूत की भूख का भी तो ख़याल रखना पड़ता है ना. अभी तुझे थोड़ी देर में अपने नये पार्ट्नर से मिलाती हूँ.

कामया : क्या तूने उसे भी बुला रखा है, इंदु क्या सोचेगी. उसका सामना कर पाएगी तू.

कांता : अरे छोड़ तू देखती जा, अपनी बता क्या बात करनी थी.

कामया : यार वो वो

कांता : अरी बोल ना, नया चोदनेवाला ढूंड लिया क्या?

कामया : कमीनी , कुत्ति क्या क्या भोंक रही है.

कांता : तू बोलेगी नहीं तो मैं और क्या सोचूँ ( आँखे नाचते हुए)
इतने में इंदु कॉफी ले कर आ जाती है और सबको एक एक कप देती है.

कांता : हान बोल अब.

कामया : इंदु बेटा, ज़रा कुछ देर के लिए हमे अकेला छोड़ दो.

कांता : यह कहीं नहीं जाएगी, इसके सामने बोल, अब यह बड़ी हो चुकी है और उस पर डॉक्टर भी है.

कामया : मुझे कुछ पर्सनल बात करनी है.

कांता : तो शर्मा क्यूँ रही है, हो सकता है मुझ से बड़ीया सुझाव इंदु देदे.

कामया : बड़ी असमंजस सथिति में आ गई थी, कुछ सोचते हुए बोलती है, “ कल रात को राजीव का फोन आया था”

कांता : तो क्या उसे कुछ प्राब्लम है, वह तो राजेश के साथ गया हुआ है, उसके होते हुए राजीव को क्या प्राब्लम होगी.

कामया : अब कैसे बताउन.

इंदु : आंटी मुझे बेटी मत समझो एक सैकेटरिस्ट समझ कर , खुल के बोलो.

कामया : शर्म से लाल होती हुई, “ कल जब उसका फोन आया तो तेरे जीजाजी मेरे साथ ……..”

कांता : ओह हो तो बेचारे ने तेरी चुदाई में खलल डाल दिया.

कामया और इंदु दोनो ही हैरानी से इतने खुले शब्दों को कांता के मुँह से सुनते है, दोनो का चेहरा शर्म से और भी लाल हो जाता है.

कांता : ओये डाक्टरणी, तू क्यूँ शर्मा रही , तेरी चुदाई की बाते थोड़ी ना हो रही हैं.

इंदु झेंप जाती है और कामया का मुहन खुल्ला रह जाता है.

कांता : अब बोल भी क्या हुआ था, तू चुद रही थी और उसका फोन आ गया, फिर

कामया : शर्म से दोहरी होते हुए “ मुझे लगता है उसे पता चल गया की उस वक़्त में क्या कर रही थी- उसने जल्दी से बोला की सब ठीक है और फोन काट दिया”

कांता : तो इसमें परेशान होने वाली क्या बात है.

कामया : अरे जब वो वापस आएगा तो उसका सामना कैसे करूँगी.

कांता : जैसे रोज उससे बात करती है, वैसे ही करियो , यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं. लड़का बड़ा है, समझदार है .

कामया : प्राब्लम और भी है, उसके फोन रखने के बाद मुझे हर वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे चुदते हुए देख रहा है. और मेरी उत्तेजना बदती जा रही थी. और जिंदगी में पहली बार मुझे मल्टिपल ओर्गसम हुआ.

अब कामया भी खुल कर बोलने लगी थी.

कांता : ह्म्*म्म्ममम तो अब तुझे राजीव का लंड चाहिए.

( इंदु अपनी मा को इतना खुल के बोलते हुए शर्म से लाल पद जाती )

कामया : पागल तो नहीं हो गई क्या. तू मेरे बारे में ऐसा सोच भी कैसे सकती है.

इंदु : आंटी बुरा मत मानना, मैं डॉक्टर के नाते अब बोल रही हूँ. इस फीलिंग को इन्सेस्ट कहते हैं. अगर आपके दिमाग़ में वो नहीं होता जो मम्मी ने कहा है तो आप को जैसा आपने कहा मल्टिपल ओर्गसम नहीं होता. आपको यह नहीं लगता की राजीव आपको देख रहा है. मा बेटे के अंदर कभी कभी इस टाइप की फीलिंग आ जाती है, यह नॅचुरल है, बस इस को हवा नहीं देनी चाहिए. कभी मा बेटे के बारे में ऐसा सोचती है तो कभी बेटा मा के बारे में. जब राजीव का फोन उस वक़्त आया था आप जिस दुनिया में थी, उस फोन का केरेक्टर आपके सबकॉन्षियस माइंड में आपके साथ जुड़ गया. अगर आप लोग उस वक़्त रुक जाते और अपने संभोग को आगे नहीं बड़ाते तो ऐसा नहीं होता जो आपको फील हुआ.

कामया : तो अब मैं क्या करूँ, में ऐसा कोई भी ग़लत काम नहीं करना चाहती, मैं नहीं चाहती की राजीव मुझे ग़लत समझे .इंदु : आंटी राजीव मेच्यूर है, अगर उसने ऐसा फील भी किया होगा , की उसने ग़लत टाइम पर आपको फोन कर दिया, तो उसे अपने उपर ग्लानि होगी, वह आपका बेटा है, आपसे बहुत प्यार करता है, आपकी बहुत इज़्ज़त करता है, वह कोई भी ऐसा काम नहीं करेगा जिससे से आप को दुख पहुँचे.

आप इस बात को बिल्कुल अपने दिमाग़ से निकल दीजिए की राजीव क्या सोच रहा होगा. और हान जब आप अंकल के साथ दुबारा हों तो यह बात अपने दिमाग़ में बिल्कुल मत लाना और केवल उनके बारे में ही सोचना.

काँटा : क्यूँ जानेमन हो गई तेरी प्राब्लम सॉल्व. चल अब तुझे अपने नये पार्ट्नर से मिलाती हूँ. यह बैठी तेरे सामने, अब यह मेरी बेटी ही नहीं तेरी तरहा मेरी दोस्त भी है.

इंदु : अच्छा मा में अपने कमरे में जा रही हूँ मुझे कल के कुछ केस स्टडी करने हैं.

कांता : ठीक है बेटी जा अपना काम कर.

इंदु चली जाती है.

कामया : यह तूने क्या किया, इंदु को इन्वॉल्व क्यूँ किया.

कांता : मेरी मजबूरी थी कामया.

कामया : क्या

कांता : कल तेरे घर आती हूँ, आराम से बात करेंगे.

कामया अपने घर चली जाती है और कांता अपनी सोचों में डूब जाती है.

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FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--6

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 एक अजीब सा उन्माद--6
 राजेश को केथ की आँखों में प्यार का अतः समुंदर हिल्लोरे लेता हुआ दिख रहा था. वह केथ को अपनी बाहों में खींच लेता है और उसके होंठों को धीरे धीरे चूसने लगता है. केथ के जिस्म में खुशी वा आनंद की लहर कोंध जाती है, उसका जिस्म बेल की तरहा राजेश से चिपक जाता है. दोनो बड़े प्यार से एक दूसरे के होंठों को चूस्ते रहते हैं, राजेश का लंड तूफान मचाने लगता है, 9 इंच का लंड 90 डिग्री के कोण में आके उसकी पेंट फाड़ने को उतारू हो जाता है. बार मेन को मालूम था की एक बॉटल का ऑर्डर अभी आया ही आया, इसलिए चाहे देर हो रही थी, वह इनकी प्रेमलीला देखता रहता है और मंद मंद मुस्कुराता रहता है, उसके यहाँ अब तक हज़ारों कस्टमर्स आ चुके थे, पेर इतना पॅशनेट लव सीन उसने आज तक नहीं देखा था.

किस करते करते दोनो की आँखे बंद हो जाती हैं, दोनो का दिमाग़ जैसे अपने शेल में चला जाता है और उनका दिल जिस्म को कंट्रोल करने लगता है. केथ के होंठों से निकलती हुई मादक सिसकारियाँ राजेश के मुँह में घुलने लगती हैं जिससे वो अपने अंदर समेटता रहता है.

कुछ देर बाद राजेश किस तोड़ता है और दोनो गहरी साँसे लेने लगते हैं.
राजेश कल की तरहा ही बार मेन से एक वोड्का की बॉटल और कुछ और समान का ऑर्डर देता जिसे वह कुछ देर बाद पिकप करने की लिए बोलता है और केथ का हाथ पकड़ डिन्नर काउंटर की तरफ बॅड जाता है. दोनो अपना अपना डिन्नर करने लगते हैं. एक श्कस केथ को बुरी तरहा घूर रहा था, बस चले तो मार ही डाले, और कोई नहीं वह मीनाक्षी ही थी जिसकी राजेश शुरू से ही उपेक्षा कर रहा था. मीनाक्षी खूबसूरती में रंभा से कम ना थी और राजेश की बेरूख़ी उसे पल पल जला रही थी. राजेश का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए वह उन दोनो के पास जाती है और “ राजेश हमारा कल का प्लान क्या है?” राजेश गुस्से से उसे देखते हुए “ हाउ डू आई नो आस्क दा ऑर्गनाइज़र?”

राजेश अपने डिन्नर की प्लेट वहीं छोड़ते हुए उठ जाता है और बार काउंटर की तरफ चला जाता है, केथ अपना डिन्नर पहले ही ख़तम कर चुकी थी वह भी राजेश के पीछे चली जाती है. राजेश की यह बेरूख़ी मीनाक्षी से सह्न नहीं होती और वो फूट फूट कर रोने लगती है. बार मेन सारा नज़ारा देख रहा होता है, उसे राजेश की किस्मत पर रक्श होता है, क्या इंसान है, लड़कियाँ लाइन लगा कर इसके पीछे पड़ी हैं.

अपना समान बार काउंटर से लेकर राजेश केथ को अपने साथ उसी कल वाली जगह पर ले जाता है. आज कुछ ठंडी ही मनभावक हवा चल रही थी जैसे उसे इन दो प्रेमियों का ही इंतेज़ार हो.

आज राजेश चट्टान पर बैठने की जगह सारा समान वहाँ रख देता है और नीचे रेत पर बैठ जाता है. केथ दो पेग त्यार करती है और एक राजेश को पकड़ा देती है.
दोनो ही चियर्स कर के हल्की हल्की चुस्कियाँ लेते हुए ठंडी हवा का आनंद लेते रहते हैं.


 राजेश की नज़रें जैसे ही उपर आसमान को देखती हैं तो उसे वदिरूम की ख़ासियत का पता चल जाता है, इतने मोटे टिमटिमाते हुए तारे , जैसे हाथ बदाओ और छू लो हर पाँच मिनिट के अंतराल में एक तारा टूट रहा थे , कहते हैं टूटे हुए तारे को देख कर कोई भी विश माँग लो जल्दी पूरी होती है.

वह दो विश माँगता है , एक तो इंदु शादी के लिए हाँ कर दे और दूसरी, दूसरी को वो अपने दिल की गहराइयों में छुपा लेता है.

केथ की साँसे जैसे ही संभलती है वह राजेश के उपर आ जाती है, राजेश का ध्यान भंग होता है और उसे केथ की मौजूदगी का एहसास होता साथ ही वो मज़ा उसके जिस्म में ढोढने लगता है जो केथ ने उसे थोड़ी देर पहले दिया था.
वह पलटी मारता है और केथ को अपने नीचे कर लेता है.

होंठों से चूमते हुए वह केथ की चूत तक पहुँच जाता है और उसके बहते हुए कम रस को चाटने लगता है, स्लुउउउउर्र्र्र्र्र्र्र्रप्प्प्प्प्प्प्प्प , सस्स्स्स्स्सल्ल्ल्ल्ल्लररउप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प, केथ मस्ती में भरने लगती है, राजेश उसकी चूत के होंठों को खोलता है और एके एक कर चूसने लगता, धीरे धीरे वह अपने दाँत भी गाड़ा रहा था. आआआआआअहह, आअहह, आाआईयईईईईईई, उूुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ केथ की सिसकियाँ गूंजने लगती हैं वह इस तड़प और मज़े को सह्न नही कर पाती और अपने जिस्म को उपर की तरफ खींचती राजेश साथ में खींचा जाता है और उसका सकत लंड रेत में घुस्स जाता है, ठंडी ठंडी रेत उसके लंड के चारों तरफ उसे बहुत ही आनंदित कर देती है.

वह केथ की चूत पर भूखे कुत्ते की तरहा टूट पड़ता है, केथ की सिसकारियाँ तेज़ होने लगती है, अरे यह क्या राजेश की कमर भी उपर नीचे होने लगती है, जैसे धरती माँ को चोद रहा हो.

( इन्सेस्ट में अपनी माँ को चोद्ते हुए तो सुना है, यहाँ तो धरती माँ की चुदाई हो रही थी- शायद इन्सेस्ट की प्रकाष्ठा यही है – क्या ऐसा भी होता है?)

केथ अपने चरम पर पहुँचने लगती है, उसकी चूत में बाड़ आ जाती है , कई बाँध एक साथ टूट जाते हैं और वह मल्टिपल ओर्गसम की मार ना सहते हुए बेहोश हो जाती है राजेश उसके कम रस को गाता गत गाता गत पीने लगता , उसकी खुश्बू उसे मदमस्त कर देती है और उसकी कमर तेज़ी से उपर नीचे होने लगती है वह भी जल्दी ही अपने चर्म पर पहुँच अपना लावा धरती माँ में छोड़ देता है, जिसे ठंडी सुखी रेत अपने में सोख लेती है , जैसे उसे इसका ही बरसों से इंतेज़ार था.
दोनो निढाल हो जाते हैं , राजेश अब पलट जाता है और गहरी साँसे लेने लगता है. ऐसा मज़ा उसे कभी नहीं आया था.

इधर दिल्ली में राजेश के फोन के बाद जब इंदु अपनी माँ कांता के गले लगती है तो दोनो के सकत उरोज़ एक दूसरे से टकरा जाते हैं , एक क्रॅंट दोनो के जिस्मो में दोड जाती है, इंदु अपनी बाहों का घेरा अपनी माँ की पीठ के चारों तरफ सकत कर देती है और दोनो के उरोज़ एक दूसरे को चूमने लगते हैं, दोनो ने झीनी सी नाइटी पहनी हुई थी जिसका होना ना होना बराबर था.
इंदु की आँखे बंद हो जाती हैं उसका जिस्म झटके लेने लगता है, कांता समाज जाती है की इंदु को ओर्गसम हो रहा है, वह इंदु के सर पर प्यार से हाथ फेरने लगती है और उसकी गर्दन पर हल्के हल्के चुंबन बरसाने लगती है, वह इंदु से कस के चिपक जाती है और बेटी के आनंद को महसूस करने लगती है, उसकी आँखो में एक चमक आ जाती है, आज उसकी बेटी उसके बहुत ही करीब हो गई हे. दोनो एक दूसरे से चिपके हुए नींद के आगोश में चले जाते हैं.

वहीं मीनाक्षी जिसकी राजेश उपेक्षा कर रहा था, अपना ब्रह्मास्त्र चलाने का निर्णय लेती है, अपनी सारी शर्मो हया को त्याग कर वह राजेश के कमरे में चली जाती है और अपने सभी वस्त्र उतार कर उसके बिस्तर पर लेट जाती है, वह नागिन की तरह बल खाती हुए राजेश की खुश्बू को उसके बिस्तर से सूंगने लगती है, उसका नशा बदता ही रहता है और वह नग्न राजेश का इंतेज़ार करने लगती है, उसे पूरा यकीन था की राजेश उसके योवन की ताप में जल उठेगा और उसके आगोश में आ जायगा.


 सुबह कांता की नीद जल्दी खुल जाती है, वह इंदु को अपनी बाहों में पाती है. इंदु की नाइटी उपर से खिसक गई थी और उसके उरोज़ आधे बाहर झाँक रहे थे. इंदु के उरोज़ कांता को अपनी तरफ खीच रहे थे, वह बड़े प्यार से उनको सहलाने लगी और धीरे धीरे दबाने लगी. इंदु की नीद टूट जाती है और वह अपनी मा को अपने उरोज़ से खेलता हुआ पाती है. वह अपनी आँखे बंद कर लेती है , उसे बहुत शर्म आ रही थी की मा उसके साथ क्या कर रही है, इंदु की उत्तेजना बॅडने लगती है और वह हल्की हल्की सिसकियाँ लेने लगती है. कांता समझ गई की इंदु जाग चुकी है, वह इंदु की सारी शर्म दूर करना चाहती थी, ताकि उसकी बेटी उस से अपने दिल की सारी बातें कर सके . कांता के हाथों का कसाव इंदु के एक उरोज़ पर बॅड जाता है और वह उसके दूसरे उरोज़ की निपल को हल्के हल्के चूसने लगती है.

इंदु का शर्म के मारे बहुत बुरा हाल हो जाता है, वह अपनी मा को कुछ कह नही पाती उसके जिस्म में उत्तेजना बॅडने लगती है, वह अपनी टॅंगो को आपस में रगड़ने लगती , उसकी छूट गीली होने लगती है.

इंदु के 36सी साइज़ के उरोज़ कड़क होने लगते हैं, उसके निपल तन जाते हैं. उसका हाल बहुत बुरा होने लगता है, वह बेचैन होने लगती है, म्*म्म्माआआआअ, उूुुुउउफफफफफफफफफफफफफ्फ़ , माआआआआआअ, हहाआआआऐययईईईईईईईईईईईईईईई, ककक्क्क्यययययययाआआअ ककककककककाआआररर्र्र्ररर र्र्र्र्र्ररराआआआहहिईीई हूऊऊऊ.

कांता इंदु की आँखों में देखती है, “ घबरा मत बेटी सब ठीक हो जाएगा” और फिर दोनो हाथो से दोनो उरोज़ को मसल्ने लगती है, साथ ही इंदु के गालों को चूमने लगती है, इंदु की आँखे लाल सुर्ख हो चुकी थी.

इंदु तेज़ तेज़ आँहे भरने लगती है, उसके जिस्म में आँधी चलने लगती है, सारा जिस्म अकड़ने लगता है, वह जैसे हवा में उड़ने लगी थी और बरसों से रुका हुआ बाँध आज डेह जाता है और इंदु पहली बार ओर्गसम का सुख अनुभव करते हुए एक गहरी नींद के आगोश में चली जाती है.

इस दोरान कांता उसके सर पर प्यार से हाथ फेरती रहती है.
जहाँ कांता एक तरफ दुखी थी, की उसने अपने आपको अपने बच्चों की नज़रों में गिरा दिया था, वहाँ उसे इस बात की खुशी थी की उसने अपनी बेटी का सेक्स से परिचय करवाया था. अब शायद इंदु का रुझान शादी की तरफ हो जाए.

वह इंदु को सोने देती है और खुद नहाने चली जाती है.

 रात अपने पूरे योवन पर आ चुकी थी, ठंड बदती जा रही थी, आनंद की थकान से सोए हुए दो बदन इस ठंड को महसूस करके जाग जाते हैं. ठंड वाक्य में कुछ ज़यादा थी और रेगिस्तान में तो रात को तापमान बहुत गिर जाता है. राजेश और केथ दोनो ही अपने कपड़े पह्न लेते हैं. राजेश आधी बची हुई बॉटल से एक नीट घूँट मारता है और केथ को भी पीला देता है, ताकि जिस्म में कुछ गर्मी आए.
दोनो शिविर की तरफ बॅड जाते हैं, केथ का दिल अभी भरा नही था वह राजेश के साथ उसके कमरे में आ जाती है.

जैसे ही उनकी आँखे कमरे की धीमी रोशनी में देखने को अभ्यस्त होती हैं , तो उन्हे रति का रूप बिस्तर पर सोया दिखता है पल के लिए तो राजेश उस रूप की चकाचोंध में खो जाता है , फिर वह ध्यान से देखता है की मीनाक्षी नग्न उसके बिस्तर की शोभा बड़ा रही है, उसका यह रूप किसी बुड्ढे का लंड भी फौलाद की तरहा खड़ा कर दे. उसे कुछ समझ नहीं आता वह केथ की तरफ देखता है, केथ के चेहरे पर हसी थी, केथ उसे आगे बॅडने का इशारा करती है, वह शुरू से ही मींकशी को नोट कर रही थी, उसे मालूम था की मीनाक्षी भी उसकी तरहा राजेश पर मर मिट्टी है. हालाँकि केथ का दिल थोड़ा दुखी ज़रूर हुआ था.

राजेश केथ को इशारा करता है मीनाक्षी को उठाने के लिए. केथ बड़े प्यार से मीनाक्षी को उठाती है, केथ को अपने सामने देख कर मीनाक्षी थोड़ा घबरा जाती है और उठ कर राजेश को निहारने लगती है.

राजेश गुस्से में मीनाक्षी को कपड़े पहनने के लिए बोलता है और मुँह दूसरी तरफ करके खड़ा हो जाता है.

मीनाक्षी ज़हरीली आँखों से केथ को देखते हुए कपड़े पह्न लेती है और राजेश से जा के चिपक जाती है.

राजेश उसे अपने से दूर कर देता है और बैठने के लिए इशारा करता है. आज वह मीनाक्षी से खुल के बात करना चाहता था और इस पागलपन पर रोक लगाना चाहता था.
मीनाक्षी की आँखों में आँसू थे वह गर्दन नीचे जुका कर बैठ गई.

“ मीनाक्षी यह क्या पागल पन है, अगर कोई और तुम्हे मेरे कमरे में इस तरह देख लेता तो क्या इज़्ज़त रह जाती तुम्हारी, अपने आप को सम्भालो”

“ राजेश में तुम्हे चाहती हूँ और तुम्हारी उपेक्षा मुझ से सह्न नहीं हो रही थी, प्लीज़ मेरा इतना तिरस्कार ना करो, अपने दिल में कहीं एक छोटी जगह मुझे भी देदो”

“ देखो मीनाक्षी तुम एक अच्छी लड़की हो, ट्रेड में तुम्हारा कुछ नाम है, अपनी इज़्ज़त से मत खेलो , और एक बात सुन लो, में ट्रेड में किसी भी लड़की के साथ किसी भी तरहा का संबंध नहीं बनाता, यह मेरा पक्का उसूल है और में इससे किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ूँगा, तुम बेकार में ही मुझ पर अपना टाइम बर्बाद कर रही हो, हम सिर्फ़ एक प्रोफेशनल दोस्त ही रह सकते हैं और कुछ भी नहीं.”

“ मुझे एक मोका तो दो, तुम्हे मुझ से कभी भी कोई परेशानी नहीं होगी”

“ नहीं मीनाक्षी, प्लीज़ अपने कमरे में जाओ और भूल कर भी दुबारा ऐसी हरकत मत करना, वरना में भूल जाउन्गा की तुम एक लड़की हो और मेरा कहर तुम पर टूट पड़ेगा, प्लीज़ ऐसी नौबत ना आने देना. प्लीज़ गो ”

मीनाक्षी अपने टूटे हुए दिल के साथ धीरे धीरे कमरे से बाहर निकल जाती है और फूट फूट कर रोने लगती है. उसके रोने की आवाज़े अंदर कमरे तक आ रही थी. केथ उठती है और बाहर जा कर मीनाक्षी को संभालती है और उसे उसके कमरे तक ले जाती है. मीनाक्षी की हालत देख कर केथ का भी दिल भर आता है और वह उसे चुप करने की कोशिश करती है.

राजेश का मूड ऑफ हो जाता है वह बाकी बची हुई वोड्का नीट ही पी जाता है और बिस्तर पर लूड़क जाता है.
केथ मीनाक्षी के कमरे से वापिस आती है और राजेश को इस तरहा पड़ा हुआ देख मन मसोस कर अपने कमरे में चली जाती है.


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FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--5

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 एक अजीब सा उन्माद--5
 राजेश अपने ग्रूप को केथ और जूली के बारे में बता है और केथ के डॉक्टर होने का फ़ायदा उठा कर उसे अपने ग्रूप में शामिल कर लेता है. सभी खुश थे के उन्हे जब ज़रूरत पड़े तो एक डॉक्टर उनके बीच में है. पर एक शक्स को यह पसंद नहीं आता. मीनाक्षी जो चेन्नई से आई हुई थी वह राजेश को अपनी तरफ खींचने की भरपूर कोशिश कर रही थी, राजेश का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था की लड़कियाँ उसपर मर मिटने लगती थी, राजीव भी कुछ कम नहीं था पर राजेश के सामने हमेशा फीका पॅड जाता था. राजेश ने एक कसम खा रखी थी की वह अपने ट्रेड और अपने ऑफीस में काम करने वाली लड़कियों को हाथ तक नहीं लगाएगा. ट्रॅवेल ट्रेड बहुत ही छोटा है और बात आग की तरहा रातो रात फैल जाती है. उसे अपनी प्रतिष्ठा का बहुत ही ज़्यादा ख्याल था. मीनाक्षी की चाहत वह भलीभाँति समज गया था पर वह हमेशा उस से दूरी बनाए रखता था. इधर मीनाक्षी ने भी शायद कसम खा रखी थी की राजेश को जॉर्डन छोड़ने से पहले अपनी ज़ुल्फोन में क़ैद कर लेगी.

सब लोग चल पड़ते हैं , और करीब एक घंटे के बाद अपने गंतव्य पर पहुँच जाते हैं, वहाँ यह लोग कुछ होटेल्स का इंस्पेक्षण करते हैं. केथ और जूली के लिए यह एक नया ही अनुभव था और उन्हे इसमें मज़ा आने लगा था, वह बिल्कुल भी बोर नहीं हुई.

अब आती है बारी पेत्रा के सब से ज़्यादा महत्वपूर्ण स्थान को घूमने की.
सारा ग्रूप वहाँ की तरफ चल पड़ता है, शुरूवात सिक़ से होती है एक 3 KM लंबी गर्दन के माफ़िक़ बल ख़ाता हुआ रास्ता, जो हज़ारों साल पहले निबेटियंस ने बसाया था. लाल और मृत सागर के बीच बसा ये शहर अपने आप में उस वक़्त के प्रगतिशील लोगों की एक ना मिटनेवाली पहचान था. सारे रास्ते उन्हे छोटी छोटी गुफ़ाएँ नज़र आइए जो धरातल से कोई 3-4 फ्ट उपर थी.

जूली फोटो खिचने के बहाने राजीव को एक एसी ही गुफा में ले चल पड़ती है और वह लोग ग्रूप से अलग हो जाते हैं. गुफा में पहुँच कर देखा तो पता लगा के वहाँ 2 लोग ही आसानी से अंदर लेट सकते हैं, पर यहाँ गंदगी बहुत थी, सालों से कभी सफाई नहीं हुई थी और एक अजीब सी दुर्गांघ वहाँ विद्यमान थी.

जूली राजीव को अपने तरफ खींचती है और उसे किस करने लगती है. राजीव की तो लॉटरी खुल गयी, एक अति सुंदर हसीना जो उसने खाब में भी नहीं देखी थी उसके पहलू में आ गयी थी. उसे अपने किस्मत पर रश्क होने लगा , दोनो एक होंठ आपस में जुड़े जैसे एक युध का एलान कर रहे थे और उनकी ज़ुबानें तलवारों की तरहा एक दूसरे पर वार कर रही थी. दोनो सारी दुनियाँ भूल कर अपने इस चुंबन की आत्मीयता में खो गये , जैसे मुँह द्वारा एक दूसरे के शरीर में प्रवेश करना चाहते हों.

राजीव ने इतना पेशनेट किस का अपनी जिंदगी में कभी तस्सवुर नहीं किया था. दोनो के शरीर दो बेलों की तरहा आपस में लिपट गये थे. दोनो के शरीरों का तापमान बादने लगा , दोनो पसीने में लथपथ हो रहे थे, साँस लेना भारी होता जा रहा था, पर दोनों में से कोई भी इस किस को तोड़ने को तयार नहीं था.

आनंद के अधिकारेक के कारण राजीव का वजूद पिघलता जा रहा था, वह पिघल कर जूली में सामना चाहता था, करीब आधे घंटे तक यह किस चला जब बर्दाश्त करने की सीमा की भी अति हो गयी तब तड़फते हुए दोनो अलग हुए और गहरी साँसे लेने लगे.
जब साँसे थोड़ी दुरुस्त हुई तो राजीव ने जूली को अपनी बाहों में समाते हुए कहा “ यू मेड माई लाइफ टुडे, हॅव नेवेर बिन किस्ड बाइ सच ए ब्यूटिफुल गर्ल सो पॅशनेट्ली” जूली स्माइल करती हुई “ देट वाज़ नथिंग लॉट मोर इस गॉना कम”

दोनों फिर एक दूसरे को किस करने लगते हैं और राजीव के हाथ अपने आप हे जूली के बूब्स को दबाने लगते हैं, जूली आँहे भरने लगती है, उसकी चूत से कामरस बहने लगता है, वह तड़फ़ उठती है और राजीव से अलग हो जाती है.
“ वी डॉन’त हॅव टाइम, सो होल्ड युवर गन्स टिल द नाइट”

दोनो एक दूसरे की आँखों में देखते हैं और फिर एक किस करते हैं और गुफा से बाहर निकल नीचे आ जाते हैं और ग्रूप की तरफ चले जाते हैं.

गाइड ने ग्रूप को एक जगह रोका हुआ था और कुछ समझा रहा था, यह दोनों भी तेज तेज चलते हुए वहाँ तक पहुँच जाते हैं. राजेश और केथ उनकी तरफ देखते हैं और उनके चेहरों पर एक कुटिल मुस्कान आ जाती है, जूली और राजीव दोनो थोड़े झेंप जाते हैं.

शाम तक सभी लोग वापस वाडी रूम पहुँच जाते हैं. केथ और जूली के माता पिता पहले ही पहुँचे हुए थे और बार काउंटर पर बैठ हल्की हल्की चुस्कियाँ ले कर अपनी थकान मिटा रहे थे.

जूली राजीव को कुछ इशारा कर अपने कमरे की तरफ बॅड जाती, बाकी लोग भी फ्रेश होने के लिए अपने अपने कमरों की तरफ बॅड जाते हैं.


जब तक यह लोग फ्रेश हो कर शाम के महोल को और भी रंगीन बनाते हैं, तब तक देखते हैं की वहाँ दिल्ली में क्या हो रहा है. वहाँ तो रात हो चुकी है


 राजीव और जूली के जाने के बाद,राजेश केथ को खाने के काउंटर पर ले जाता है. केथ तो सोच रही थी की राजेश कल की तरहा उसे सीधे या तो अपने कमरे में लेजाएगा या फिर कल रात की तरहा रेगिस्तान की गोद में ले जाएगा.

इनके उठने से पहले केथ की माँ वहाँ पहुँचती है, उसे बखूबी मालूम था की जूली वर्जिन नहीं रही, पर केथ को ले कर उसके बहुत अरमान थे और राजेश उसे बहुत पसंद आ चुका था, वह राजेश को अपने भावी दामाद के रूप में देखने लगी थी, वह चाहती थी की उसकी राजदुलारी केथ की वर्जिनिटी सलामत रहे, और एक सच्चे रिश्ते की शुरूवात हो. आज सारे दिन वह अपने पति से इसी बात पर चर्चा कर रही थी. राजेश को नहीं मालूम था की प्रोफ गेरहार्ड उसके पिता से फोन पर बात कर चुके थे, बाते प्रोफेशनल थी पर बातों से परिवार का जाएजा लिया जा सकता था.

प्रोफ गेरहार्ड एक बहुत ही खुले दिल के इंसान थे उनके लिए उनकी बेटियों की खुशी सर्वोपरि थी. पर युरोप के खुलेपन का असर अपनी बेटियों पर पड़ते हुए नहीं रोक पाए. उन्हे इस बात की तस्सली थी की कम से कम केथ तो उनके आचरों का अनुसरण करती है.

केथ की माँ की आँखों में छुपी हुई विनती राजेश पहचान जाता है और आँखो ही आँखो में केथ की माँ को तस्सली दे देता है की केथ का कौमरिया उसके हाथों भंग नहीं होगा. हालाँकि कल रात के बाद केथ की माँ को यह तस्सली हो चुकी थी , पर माँ तो आख़िर माँ है. केथ की माँ अपने छुपे हुए आँसू को रोक कर राजेश के गाल पर किस करती है, एक पल के लिए राजेश को लगता है जैसे उसकी मा कांता ही उसके गालों का चुंबन ले रही है, एक सकूँ सा पहुँचता उसके दिलो दिमाग़ पर, उसकी आँखे भी आँसू से भर जाती है और वह केथ की माँ के गले लग जाता है.

क़ेथ की माँ को और भी तस्सली हो जाती है, उसकी आँखे खुशी के आँसू छलकाने लगती हैं. केथ अपनी माँ के आँसू को देख कर हैरान हो जाती है, उसे कुछ भी समझ में नहीं आता, वह परेशान हो जाती है, एक तरफ से उसे तस्सली होती है की उसके परिवार ने राजेश को एक अच्छे इंसान की तरहा मंजूर कर लिया है. वह यही तो चाहती थी के राजेश हमेशा के लिए उसका हो जाए.

राजेश के कानो में ख़तरे की घंटी बजने लगती है. उसे अपने दोस्तों की बाते याद आने लगती हैं जर्मन लड़की से बच के रहना, बिल्कुल मीठी छुरी होती हैं , जैसे ही शादी होती है, धीरे धीरे मीथापन गायब होजाता है, केवल छुरी बन के रह जाती हैं और नौकरों की तरहाः कम करवाती हैं, बेचारा हिन्दुस्तानी हज़्बेंड अपने संस्कारों की वजह से बीवी के हुकुम का पालन करता रहता है. ( कहानी के अंदर एक सवाल खड़ा होता है – क्या ऐसा भी होता है?)

हालाँकि प्रोफ गेरहार्ड और उनकी पत्नी से मिलने के बाद उसे यह फॅमिली बहुत अच्छी लगती है, पर उनकी आँखों में जो शादी के खाब देख रहा था उस से उसे बहुत डर लगने लगा था, अब वह केथ से दूर होना चाहता था.

अपनी माँ के जाने के बाद केथ राजेश को अपनी स्वप्निल आँखों से देखती है, उसकी आँखों में वासना नहीं केवल प्यार ही प्यार होता है, एक अंभुज प्यास जो आत्मा की गहरैइिओं से उत्तर रही होती है , जो अपने प्यारे के वजूद में खुद के वजूद का समागम करने को आतुर थी.

आज केथ दुनियाँ के सारे बंधनों को तोड़ कर राजेश को हमेशा के लिए अपना बनाने को आतुर थी. वह शर्म के पर्दों को बहुत ही मुश्किल से परे करती है और राजेश के लबों को चूमने लगती है. राजेश कोई रेस्पॉन्स नहीं देता और किस को ब्रेक कर ड्रिंक का ऑर्डर दे देता है, वह नीट ही पी जाता है.

केथ हैरान हो जाती है, उसे राजेश का बिहेवियर कुछ समझ नहीं आता, उसका दिल जैसे टूट सा जाता है, आँखे आँसू से भर जाती है.







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FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--4

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 एक अजीब सा उन्माद--4
 राजीव की नींद खुलती है और सामने राजेश को एक कुर्सी पर उंघते हुए देखता है. यह साला यहाँ क्या कर रहा है, उसे रात की घटना का कोई आभास नहीं था.
वह राजेश को उठता है, “अबे यहाँ कुर्सी पे क्यूँ सो रहा है”

राजेश उठता है और राजीव की तरफ गहरी नज़रों से देखता है. “ बहनचोद रात को क्या हुआ था तुझे, साले पता भी है कहाँ से उठा के लाया हूँ तुझे”

राजीव हैरानी से उसे देखता है, उसे रात की सारी बाते याद आने लगती हैं, वह धम से बिस्तर पर बैठ जाता है.

“ अब बताएगा भी, रात को क्या हुआ था?”

राजीव असल बात छुपाते हुए, “कुछ नहीं यार तुझ पर बहुत गुस्सा चड़ा हुआ था , तू तो साले मस्ती करने चला गया और मैं यहाँ सॅड्टा रहा, सारी बॉटल एक बार में नीट पी गया और शायद बाहर जा कर बेहोश हो गया.”

राजेश तीखी नज़रों से उसे देखता है, उसे पूरा यकीन था राजीव कुछ छुपा रहा है, कोई तो बात है वरना “ मुझे बचाले” नहीं बोलता. वह राजीव पर कोई दबाव नहीं डालता और रूम सर्विस को 2 कॉफी का ऑर्डर दे देता है.

“देख मैं तेरा दोस्त हूँ, अभी नहीं बताना चाहता तो बाद में बता दियो- अपनी हालत सुधार और त्यार होज़ा- जब तक कॉफी आती है मैं भी त्यार हो कर आता हूँ ” राजेश अपने कमरे की तरफ चला जाता है और राजीव कल की घटना के बारे में सोचता हुआ बाथरूम चला जाता है.

केथ की माँ अपने बच्चों को उठाने उनके रूम में जाती है,
“ मॉर्गन मेइन लीएबलिंगे” ( मॉर्निंग माई डार्लिंग्स)

“ मॉर्गन मोम “ कहते हुए केथ उठ जाती है और जूलियान्ना को भी उठा देती है.

आज इन्होने पेत्रा घूमने जाना था, दोनो बाथरूम में एक साथ घुस जाती हैं .
जब तक राजीव त्यार होता राजेश त्यार हो कर वहाँ पहुँच गया, तब तक कॉफी भी आ गयी थी. दोनो कॉफी पीते हैं, राजेश राजीव को ही गौर से देख रहा था,
राजीव अपनी नज़रें बचाते हुए “ चल यार सारा ग्रूप ब्रेकफास्ट के लिए जमा हो गया होगा.” राजेश कुछ नहीं बोलता और उसके साथ चल देता है.

रेस्टोरेंट में पहुँच कर दोनो अपने ग्रूप की तरफ जाते हैं और अभिवादन करते हैं, आज इनका प्रोग्राम भी पेत्रा जाने का था. वहाँ ये पहले कुछ होटेल इनस्पेक्ट करते और फिर सिक़ की तरफ जाते जो खजाने का द्वार था. ( आज के जमाने का वंडर्स ऑफ वर्ल्ड में से एक).
सब लोग ब्रेकफास्ट शुरू कर देते हैं, राजेश उनसे माफी माँग कर राजीव को अपने साथ लेता है और प्रोफ गेरहार्ड की टेबल की तरफ चला जाता है.

“ मॉर्गन लीएबे लोइटे” ( मॉर्निंग लव्ली पीपल)
“ शोएने मॉर्गन” कहते हुए केथ की माँ उठ कर राजीव को गले लगा लेती है.
केथ राजेश को बड़ी प्यारी नज़रों से देख रही थी, जुल्लियान्ना यह नोट कर लेती है और केथ को कोहनी मारती है. केथ शर्मा कर नज़रें झुका लेती है.

जूलियान्ना भी गौर से राजेश और राजीव को देखने लगती है, उसे दोनो काफ़ी अच्छे लगते हैं, केथ का इंटेरेस्ट राजेश में नोट कर वह राजीव पर ज़्यादा ध्यान देती है.
केथ की माँ जुल्लियाना का इंट्रो देती है और राजेश और राजीव का. जुल्लियान्ना दोनो से हाथ मिलती है और राजीव का हाथ कुछ ज़्यादा दबा देती है.

“कॉल मे जूली” कहते हुए वह अपनी सीट पर बैठ जाती है,

राजेश प्रोफ गेरहार्ड के साथ बैठ जाता है और केथ उठ कर उसके साथ बैठ जाती है, राजीव के लिए जूली के साथ वाली सीट बचती है और वह उसपे बैठ जाता है.

जूली के लिए प्यार और सेक्स में काफ़ी फरक था, सेक्स को वो एक ज़रूरत समझती थी, किसी हॅमबर्गर की तरह, जब भूख लगी फटा फॅट खा लिया और आगे बॅड गये.

सभी ब्रेकफास्ट शुरू कर देते हैं. ब्रेकफास्ट करते हुए केथ राजेश के साथ चिपकी रहती है, वह राजीव को छेड़ने के मूड में आ गई थी और राजीव से पूछती है “ हाउ आर यू टुडे यंग मेन – होप एव्रिथिन्ग इस ओके”

राजीव झेंप जाता है, उसे समझ में आजाता है कल रात केथ भी राजेश के साथ थी और उसने उसकी वो हालत देख ली थी.

राजेश इशारों से केथ को चुप होने के लिए बोलता है.

“ओह ,आई एम फाइन गॉट इनटॉक्सिकेटेड येस्टरडे” राजीव सकुचते हुए बोलता है.
“ नो प्राब्लम एट ऑल, वी आर यंग एंड हॅव दा राइट टू बिकम इनटॉक्सिकेटेड” जूली राजीव का साथ देते हुए बोलती है.
जूली की बात सुन कर राजीव को चैन मिलता है और वह प्यार से उसकी तरफ देखता है.

राजेश और केथ आँखों ही आँखों में एक दूसरे को इशारा करते हैं.

सभी लोग बाते करते हुए ब्रेकफास्ट ख़तम करते हैं. तब तक प्रोफ गेरहार्ड को हॅंडल करने वाला गाइड भी वहाँ पहुँच जाता है.

क्योंकि सब को पेत्रा ही जाना था तो राजेश एक प्लान बनाता है, जिससे वह इनलोगो के साथ भी रहे और अपने ग्रूप के साथ भी, ग्रूप की रुटीन फॉलो करना उसकी मजबूरी थी,क्योंकि वो सरकारी मेहमान बन के आया हुआ था.

वह गाइड को प्रोफ. गेरहार्ड और उनकी वाइफ को ले जाने के लिए बोलता है , केथ और जूली उसके साथ पेत्रा पहुँच जाएगे. किसी को आपत्ति नहीं होती, क्योंकि राजेश अब तक अपना विश्वास उन लोगों पर जमा चुका था और यह दोनो भी इनके साथ ही रहना चाहती थी.

 इंदु अपने क्लिनिक पर पहुँचती तो देखती है के पूजा उसका वेट कर रही थी.
इंदु अपने कॅबिन में चली जाती है और पूजा को अंदर बुलाती है.

“कैसी हो पूजा आज कैसे आना हुआ तुम तो बिल्कुल ठीक हो गई थी.”

“क्या बताओं इंदु दीदी, मेरी तो जान आफ़त में पड़ी हुई है”

“क्या हुआ?”

“ वो दीदी वो …..“

“ अरे शरमाओ नहीं, जब तक तुम खुल कर बताॉगी नहीं तो मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर पाउन्गि”

“ दीदी वो वो मेरे पिछवाड़े में बहुत दर्द है, हॅगने में भी बहुत मुश्किल होती है”

“ अच्छा! चलो वहाँ रूम में जाकर यह गाउन पहनलो और अपने सभी कपड़े उत्तार देना, फिर वहीं बेड पर लेट जाना, मैं अभी आती हूँ.”

इंदु जब इनस्पेक्षन रूम में पहुँचती है तो देखती है की पूजा नंगी हो कर शीशे में अपने आप को निहार रही है, उसके 34सी के मुममे इंदु को अपनी तरफ खींच रहे थे. इंदु अपने आप को संभालती है और खंखारती है, पूजा का ध्यान टूटता है और वो जल्दी से गाउन पह्न कर पेट के बाल बेड पर लेट जाती है, उसकी आँखे शर्म से झुकी हुई थी.

इंदु उसका गाउन उपर करती है और उसके सुडोल नितंभो की खूबसूरती को निहारने लगती है, उसने कितनी ही लड़कियों और औरतो को नग्न देखा था, पर पूजा में कुछ खास बात थी. कसा हुआ बदन, गोरा रंग, बलखाती कमर किसी का भी इम्मान नष्ट कर दे.
इंदु उसके चूतदों को फैला कर देखती है तो हैरान हो जाती है, उसकी गांद बुरी तरहा फटी हुई थी. वह कुछ देर चेकअप कर अपने हाथ धोती है और पूजा को कपड़े बदल कर वापस आने की लिए बोलती है.

इंदु अपने सीट पर जा कर बैठ जाती है और पूजा के बारे में सोचने लगती है. इतनी बुरी तरहा से फटी हुई गांद उसने पहली बार देखी थी. वह उसकी वजह के बारे में सोचने लगती है.

पूजा इंदु के सामने आकर बैठ जाती है.

“कैसे हुआ यह” इंदु पूछती है.
“ दीदी वो उन्हे गांद मारने का बहुत शोक है, 4 दिन से लगातार रोज रात को मेरी गांद मार रहे हैं”

“ क्या ! तुम रोकती नहीं अपने पति को, यह भी कोई जगह है “

“ अरे दीदी जब 8” लंबा 3” मोटा अंदर जाता है तो खलबली मचा देता , उस वक़्त में सारा दर्द भूल जाती हूँ, पर अब जब दर्द बहुत ही बॅड गया तो आप के पास आना पड़ा, अब तो मुझे भी गंद मरवाने में बहुत मज़ा आता है.”

“ यह क्या बहुदगी है, क्या ऐसा भी होता है?”

“ अरे दीदी जब आपकी शादी होगी तब आपको पता चलेगा, फिर पूछूंगी, क्योंकि ब/फ तो आपने कोई बनाया ही नहीं है”

“ इसीलिए तो शादी नहीं कर रही हूँ- पता नहीं लोगो को गांद मरने में क्या मज़ा आता है”

“ अरे दीदी एक बार मरवा कर देखो, ना बार बार मरवाने का दिल न करे तो मेरा नाम बदल देना”

“ चुप बेशरम”

“यह दवाइयाँ लिख रही हूँ टाइम टाइम पर खाना और हान यह ट्यूब रोज़ दिन में 4 बार लगाना”

“ वैसे एक बात बताओ चुदाई करते वक़्त तुम कोई चिकनाई नहीं इस्तेमाल करती, उसे तुम्हें काफ़ी आराम मिलता”

“नहीं दीदी इस बात का तो ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, वो तो मेरी चूत के रस से लंड भिगो कर अंदर डाल देते हैं.”

“ बहुत ही वाहियात हो तुम लोग- खैर, अब 1 महीने के लिए गंद मराना बिल्कुल बंद”

“ एक महीना!!!!!!!!!!! तब तक मेरा क्या होगा!!!!”

“ क्या !!!! इतनी बुरी तरहा तुम्हारी फटी हुई है , तुम जानती भी हो, इसके क्या क्या कॉंप्लिकेशन्स हो सकते हैं, अगर तुमने मेरा कहा नहीं मानना तो मेरे पास आने की कोई ज़रूरत नहीं”

“ हाए दीदी जल्दी ठीक करदो ना”

“ कम से कम 3 हफ्ते तो बिल्कुल नहीं – उसके बाद देख कर बताती हूँ, और हान हर हफ्ते आकर चेक ज़रूर करवाना”

“ ठीक है दीदी” पूजा अपनी फीस दे कर चली जाती है.

एक असिस्टेंट रखने से इंदु को बहुत आराम मिल गया था, वह कॉंप्लिकेटेड केसेस ही देखा करती थी अब.

पूजा के जाने के बाद वह फ्री हो गई थी. बैठे बैठे वह पूजा के बारे में सोचने लगती है और उसका शरीर गरम होने लगता है, उसकी पेंटी गीली होने लगती है. उसे बड़ी हैरानी होती है. यह उसके साथ क्या हो रहा है. इंदु ने बहुत सारे ऐसे केसेस डील किए थे जिनमे लड़कियों को शादी के बाद बहुत प्रताड़ित किया गया था, उनका एमोशनल ब्रेक डाउन हो गया था. इसीलिए उसे शादी से नफ़रत हो रही थी. वरना उसका सुडोल जिस्म अपनी माँगे रोज़ उससे करता था जिससे वो दबाती चली आ रही थी. क्यूंकी उसके पिता की समाज में बहुत इज़्ज़त थी, वह कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती थी, जिससे परिवार पर कोई लांछन लगे , बहुत से सीनियर डॉक्टर्स और उसके साथ के कॉलीग्स अभी भी उसके पीछे पड़े हुए थे, पर वह किसी को घांस नहीं डालती थी. उसने अपने आप को इतना बिज़ी कर रखा था की शाम तक थक के चूर हो जाती थी और घर पहुँचने पर खाना खा कर उसे केवल बिस्तर दिखाई देता था.
अपने शरीर की माँग , मा बाप के आज सुबह शादी का ज़ोर , वह इन्ही बातों में खो जाती है.

यहाँ नेहा अपने कॉलेज पहुँचती है और क्लास में चली जाती है, वह हमेशा ज्योति के पास ही बैठती थी जो उसकी खास सहेली थी. नेहा कुछ कम खूबसूरत नहीं थी, अपने आप में एक आटम बॉम्ब थी, ज्योति उसे देखते ही

“ ही सेक्सी क्या हाल है कुछ उदास सी लग रही है”

“ कुछ नहीं यार वो भाई का अभी तक फोन नहीं आया इसलिए चिंता हो रही है”

“ फोन नहीं आया , या कुछ और बात है, कहीं भाई का लंड तो नहीं ले रखा जिसकी तुझे बहुत याद आ रही है”

“ मारूँगी , साली कुछ भी बकने लग जाती है”

‘ यार तू कोई ब/फ तो बनाती नहीं, तो यही लगता है, की भाई से ही काम चला रही है”

“ कामिनी शरम कर, अपने भाई के साथ कभी ऐसा कुछ होता है, मैं कोई ऐसा काम नहीं करना चाहती जिससे पापा को कोई तकलीफ़ हो, और आज के ब/फ का कोई भरोसा नहीं, देखती नहीं कितने केसेस सामने आरहे हैं, में किसी ब/फ व/फ के चक्कर में नहीं पड़ने वाली”
“ देखते हैं बन्नो कितनी देर तक अपने इस हुस्न को बचाए रखती है “

तभी क्लास में प्रोफ दाखिल होते हैं और एकदम सभी चुप हो जाते हैं.





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FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--3

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 एक अजीब सा उन्माद--3
 नेहा गुस्से में मोबाइल ज़मीन पर पटक देती है और आँखो में आँसू भरे बिस्तर पर लेट जाती. वह राजीव की लाडली थी , दिन में एक बार अगर राजीव से बात ना हो तो उसे कुछ होने लगता है. भाई को क्या हो गया है, उसने पीनी शुरू कर दी है.अब उसे क्या पता राजीव और राजेश तो ना जाने कब से पी रहे थे. पर दोनो के परिवार में यह किसी को नहीं पता था.

नेहा म्*म्बस के फर्स्ट प्रोफेशनल में थी, मा, बाप और भाई की लाडली घर में चल पहल मचा कर रक्ती थी. इंदु दीदी से कल बात करूँगी सोचते सोचते उसकी आँखों में नींद भर जाती है .

इंदु राजेश की बड़ी बहन थी. वह एक कामयाब डॉक्टर बन चुकी थी, उसने गयने और साइकाइयेट्री दोनो में महारत हस्सिल कर रखी थी. वह राजेश से 4 साल बड़ी थी. अभी उसकी शादी नहीं हुई थी. राजेश ने ज़बरदस्ती उसकी नोकरी छुड़वाइ थी और एक शानदार क्लिनिक खोल कर दिया था. इंदु क्लिनिक में ही बिज़ी रहती थी.

चलिए ज़रा देखते हैं हमारे राजीव साब का क्या हाल है.

राजेश और केथ कॉफी पीते हुए राजीव की बाते कर रहे थे. केथ हाल ही में डॉक्टर बनी थी, वह राजीव का चेकप करती है और उसके सेहरे पे हसी आ जाती है.
केथ :" हे ही इस नॉर्मल, न्थिन्ग तो वरी, लेट हिम स्लीप” और राजीव को कम्बल ओडा देती है. “ हे विल बी पर्फेक्ट्ली नॉर्मल इन मॉर्निंग लेट’स गो तो युवर रूम.” केथ अपनी नशीली आँखों से राजेश को देखते हुए कहती है, उसकी आँखों में वासना हिलोरे ले रही थी. वह राजेश की बाहों में समाना चाहती थी.

राजेश के दिल में राजीव के शब्द अभी भी गूँज रहे थे “ मुझे बचाले” ऐसा अचानक क्या हो गया वह सोच सोच कर परेशान हो रहा था. केथ का कथन सुन कर इस बात की तो तस्सली हो गयी थी की शारीरिक कोई बीमारी नहीं है.

केथ राजेश को उठाने के लिए खींचती है, राजेश उसका हाथ झटक देता है.वह बखूबी समजता है की केथ क्या चाहती है, पर इस वक़्त उसे सिवाए अपने दोस्त के कुछ नज़र नहीं आता.

वह केथ को किस करता है और उसे अपने कमरे में जाने के लिए बोलता है.
“ प्लीज़ गो आंड स्लीप, ई आम डिस्टर्ब्ड एट मोमेंट”

केथ उसे देखती रह जाती है, क्या दोस्तों में इतना प्यार होता है, उसके जीवन में ऐसा कोई दोस्त आज तक नहीं आया था. उसे राजेश और भी अच्छा लगने लगता है और वह उसे गुड नाइट बोल कर अपने कमरे में चली जाती है.

केथ अपने कमरे में पहुँचती है और बिस्तर पर अपनी बड़ी बहन जूलियान्ना को गहरी नींद में सोए हुए पाती है. दोनो बहनो की आपस में कुछ ज़्यादा नहीं बनती थी. जूलियान्ना एक फॅशन डिज़ाइनर थी और केथ एक डॉक्टर , दोनो के सोचने के तरीके में ज़मीन आसमान का अंतर था.

केथ रिज़र्व्ड टाइप की लड़की थी, वह तो राजेश का कातिलाना जादू उस पर चॅड गया था, वरना वह लड़को से दूर रहती थी. और जूलियान्ना एक बिंदास लड़की थी, वह जिंदगी को खुल कर जीना चाहती थी. हालाँकि दोनो ही अभी वर्जिन थी. केथ बिस्तर पर लेट जाती है और राजेश के बारे में सोचते हुए सो जाती है.


 नेहा रोज की तरहा जल्दी उठ जाती है, नहा धो कर वह योगा करने लगती है, इसलिए उसका शरीर सही जगह पे सही वजन लिए हुए था. 34-24-34.
एक घंटे की एक्सर्साइज़ के बाद वह किचन जाती है और घर में सबके लिए चाए बनाती है. तब तक उसकी मान कामया भी किचन आ जाती है.

“गुड मॉर्निंग माइ स्वीट डॉल” नेहा के सर पर प्यार से हाथ फेरती है.

“ वेरी गुड मॉर्निंग मोम, डेड उठ गये” हान बेटा बस तेरे हाथों की चाए का इंतज़ार कर रहे हैं. अब तो मेरे हाथों का बना हुआ उन्हे कुछ अच्छा नहीं लगता.

“ क्या मोम सुबह सुबह मेरी टांग क्यूँ खींच रही हो- लीजिए चाए तयार हो गई है, आप चल्लिये में अभी आती हूँ”

माँ के जाते ही उसे इंदु को फोन करना याद आता है, वह मोबाइल लेने अपने कमरे की तरफ भागती है, पेर बेचारा मोबाइल तो शहीद हुआ पड़ा था.
मोबाइल के भिखरे हुए पार्ट्स उठा कर वह जोड़ने लगती है. इतना नुकसान नहीं हुआ था, केवल एक छोटा सा क्रॅक आ गया था, मोबाइल ठीक हालत में जुड़ गया और चालू हो गया.

वह इंदु को फोन लगाती है .
तरीन तरीन तरीन तरीन इंदु अपनी एक्सर्साइज़ बीच में छोड़ कर फोन उठती है.
नेहा का फोन इतनी सुबह, सब कुछ खेरियत से तो है.

“ हेलो माइ स्वीट डॉल , क्या बात है इतनी सुबह मेरी याद कैसे आ गयी”

“ दीदी वो वो राजीव भाई के बारे में बात करनी थी”

“ राजीव के बारे में, वह तो जॉर्डन गया हुआ है, सब कुछ ठीक तो है ना, तू ऐसे उदास स्वर में क्यूँ बोल रही है”

“ दीदी भाई लगता है बिगड़ गया है, 2 दिन हो गये एक फोन तक नहीं किया, कल रात मेने फोन किया तो नेटवर्क का बहाना बनाने लगे, उनकी आवाज़ से लग रहा था जैसे वह उस वक़्त शराब पी रहे हों, मुझे बहुत घबराहट हो रही है”

“ अरे कुछ नहीं होता, राजेश का भी अभी तक कोई फोन नहीं आया. दोनो साथ साथ हैं तू चिंता मत कर, ज़रूर कोई जेन्यूवन प्राब्लम होगी, मैं थोड़ी देर में राजेश को फोन करती हूँ, तू घबरा मत, ऐसे छोटी छोटी बातों से परेशान नहीं होते”

“ अच्छा दीदी, मैं आप के फोन का वेट करूँगी” और नेहा अपने माता पिता के कमरे की तरफ बॅड जाती है.

“ अरे कहाँ रह गई थी” नेहा के पिता ड्र. अभिनव ठुकराल बोलते हैं.

“ कुछ नहीं पापा वो इंदु दीदी को फोन कर रही थी”

“इतनी सुबह, सब ठीक तक तो है ना”

“ पापा भाई का अभी तक कोई फोन नहीं आया, मेने कल रात को फोन करने की कोशिश करी पर कुछ बात नहीं हो पाई, इंदु दीदी से पता कर रही थी वहाँ सब ठीक तो है, पर उनकी भी राजेश भाई से कोई बात नहीं हुई है अभी तक, वह राजेश भैया को फोन करेंगी फिर मुझे फोन करेगी”

“अरे कुछ नहीं होता, नेटवर्क प्राब्लम होगी, आजाएगा तेरे चहेते का फोन, चल चाए पी”
सब सुबह की चाए का लुत्फ़ उठाने लगते हैं.
चाए पी कर नेहा के पिता उठ जाते हैं. “ अच्छा भाई ज़रा नाश्ता जल्दी बना दो, मैं त्यार होने जा रहा हूँ, आज हॉस्पिटल जल्दी जाना है”

“ नेहा तू भी त्यार हो जा मैं नाश्ता बनाती हूँ” कहते हुए कामया किचन की तरफ चली जाती है और नेहा भी अपने कमरे की तरफ बॅड जाती है. घर में बहुत नौकर चाकर थे पर नेहा के पिता को नाश्ता हमेशा कामया के हाथो से बना ही चाहिए था. कहते हैं सारा दिन बहुत अच्छा गुज़रता है, बाकी दिन कुछ भी ख़ालो कोई फरक नहीं पड़ता.

इधर इंदु भी नेहा से बात करने के बाद थोड़ी देर तक अपनी एक्सर्साइज़ करती है फिर अपने कपड़े ले कर बाथरूम में घुस जाती है. अपने कपड़े उतार कर वह फुल लेंग्थ मिरर में अपने आप को निहार ती है. 36-24-36 , क़िस्सी बुड्ढे का भी खड़ा कर दे. अपने मम्मो पर हाथ फेरते हुए हल्की हल्की स्माइल करती है, उसे अपने जिस्म पर बहुत नाज़ था. वह नहा धो कर त्यार होती है और नीचे अपने माता पिता के पास चली जाती है.

इंदु राजेश को फोन करने का बहुत ट्राइ करती है पर कनेक्शन नहीं मिलता. हार कर वह झुनझूला जाती है. भाड़ में जाए अपने आप फोन करेगा सोचते हुए वह एक कमरे के बाहर नॉक करती है “ मोम मैं आ जाउन”

“आजा बेटा आजा, मैं तेरी चाए लेकर उपर ही आने वाली थी”

इंदु अंदर एंटर करती है और अपनी माँ को देखती है, कोई नहीं कह सकता की वह 47 साल की है, अभी भी 30 से ज़्यादा की नहीं लगती, खूबसूरती में कांता (38-26-38) इंदु से कहीं कम ना थी, दोनो को देख कर कोई भी उन्हे माँ बेटी नहीं बोलेगा, दोनो बहने ही लगती थी.

“ आओ ड्र साहिबा आओ, हम नाचीज़ों का कुछ तो आप को ख़याल आया”

“ हे, डेड , वॉट’स दिस?” वह अपने पिता के पास बैठते हुए बोलती है.

“ अरे जब से तेरे भाई ने तुझे क्लिनिक बना कर दिया है तू तो वहाँ की हो कर रह गई है”

“ तो आप को क्यूँ जलन हो रही है डेड, कब से कह रहे हैं हॉस्पिटल की नौकरी छोड़ दो और अपनी प्रॅक्टीस करो- भाई फटा फॅट आपके क्लिनिक का इंतेज़ाम कर देगा और तब तक आप मेरे क्लिनिक पर बैठिए, बहुत जगह है वहाँ पर आपका एक अलग सेक्शन खोलने के लिए”

“ नहीं बेटा बस 2 साल ही तो रह गये हैं रिटाइर होने में, उसके बाद ही कुछ सोचेंगे. तू सुना तेरी प्रॅक्टीस कैसे चल रही है.”

“ बहुत बाड़िया डेड, पेशेंट्स कुछ ज़्यादा ही आने लगे हैं तो मेने एक असिस्टेंट डॉक्टर को रख लिया है”

“ अच्छी बात है- बस अब तेरे हाथ जल्दी पीले कर दूं तो मॅन को शांति आजाएगी”

“ नो डेड कोई शादी वादी नहीं, मुझे कोई शादी नहीं करनी अभी में रिसर्च कर रही हूँ”

कांता : “ बेटा रिसर्च तो शादी के बाद भी हो सकती है, तेरे पापा ने कितनी रिसर्च की है और फिर शादी कोई एक दिन में थोड़े होजती है – टाइम लगता है अच्छा लड़का और खानदान ढूँडने में”

इंदु : चुप करो मोम सुबह सुबह मेरा मूड मत ऑफ करो. ( इंदु को शादी करने से डर लगता था, जब से डॉक्टर बनी है शादी के बाद सताए हुए इतने पेशेंट्स देखे हैं की शादी नाम से उसे नफ़रत हो गई थी. )



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FUN-MAZA-MASTI एक अजीब सा उन्माद--2

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 एक अजीब सा उन्माद--2
 केथ राजेश को झकझोर देती है, वह किसी पुतले की तरहा चट्टान से फिसल जाता है और रेत पर ढेर हो जाता है. केथ चीख पड़ती है, जल्दी से अपनी पेंटी उतरती है और राजेश की तरफ एक छलाँग लगा देती है. चट्टान कोई ज़्यादा उँची नहीं थी मात्रा 2’ की ही उँचाईए थी.

केथ राजेश की तरफ लपकती है जो तड़प रहा होता है. साला दिमाग़ में ओमलेट बन गयी थी, एक तरफ लंड की पुकार और दूसरी तरफ उसके इम्मान की पुकार , दोनो के बीच घनचकर बन कर वो शीतल पॅड जाता है, आँखों से आँसू बहने लगते है, यह तड़प उस से सह्न नहीं हो पा रही थी, वह उठना चाहता था पर सारे अंग जैसे जवाब दे गये थे.

केथ उसकी तरफ़ लपकती है उसके सर को अपनी गोद में रख लेती है, उसे कुछ समझ में नहीं आता, राजेश को यकायक क्या हो गया है, वह उसके आँसुओं को चाट ने लगती है, धीरे धीरे वह राजेश के निपल्स की तरफ बॅड जाती है और ऐसे चूसने लगती है जैसे किसे भूखे बचे को माँ बहुत देर बाद अपना दूध पिलाने लगती है. राजेश की तड़प और भी ज़्यादा बॅड ने लगती है,वह काँप उठता है इतना संवेदन उसने कभी भी किसी के साथ महसूस नहीं किया था.

केथ उसकी नाभि चूमते हुए उसके लंड की तरफ बॅड जाती है, एक पल के लिए उसके विकराल रूप को देख कर सहम जाती है पर दिल और चूत दोनो के हाथों मजबूर हो कर राजेश के लंड को चूमने लगती है और उसके सूपाड़े को मूँह में ले लेती है. राजेश एक भयंकर् चीख मारता है जो वादियों में खो जाती है, उसकी बर्दाश्त करने की सहनशक्ति जैसे पल पल धराशाही होने लगती है , वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगता है, ऐसा अंतरदवंद उसने कभी नहीं झेला था, उसका शरीर एक एक फुट उपर उछलने लगता है, वह केथ को रोकने की भरपूर कोशिश करता है पर हाथों में तो जान ही नहीं बची थी.

केथ पूरी ताक़त लगा कर उसके उपर झुक जाती है और उसके लंड को गले की गहराइयों तक लेने लगती है, उसे साँस लेने में बहुत ही दिक्कत हो रही थी, पर उसका वजूद जैसे केवल राजेश को भरपूर आनंद देना चाहता था, वह अपनी तकलीफ़ भूल कर राजेश के लंड को एक पागल की तरहा चूसने लगती है.

उसका एक हाथ राजेश के अंडकोशून से खेल रहा था जो पल पल उसके लंड के साथ चिपकते जा रहे थे, एक लावा उनमे से फूटने के लिए तत्पर हो रहा था.
लंड से उठती हुई उमंगे और तड़प दिमाग़ से जीत जाती हैं , एक ज्वालामुखी दो जगह अपना सर उठाने लगता है उसके अंडकोशून में और उसके दिमाग़ में, वह घबरा जाता है, इतना आनंद उसने कभी भी तस्सवुर नहीं किया था.

केथ अपनी ही लगन में मस्त थी, उसका चेहरा जलते हुए कोले से भी ज़्यादा लाल हो रहा था, उसकी आँखों से निरंतर आँसू बह रहे थे. उसकी साँसे फूल रही थी एक जुनून सा उस पर चड़ा हुआ था, उसकी मेहनत रंग लाती है और राजेश का उफनता हुआ ज्वालामुखी एक ज़ोरदार गगन भेदी चीख के साथ फॅट पड़ता है और उसके वीर्य की बोचारें केथ के गले में उतरने लगती हैं.

केथ घबरा जाती है पर लंड मुँह से बाहर नहीं निकालती , राजेश तड़प तड़प के उसके मुँह को भर ने लगता है, केथ का मुँह फूलता रहता है, वह हिम्मत नहीं हारती अपने होंठ राजेश के लंड पर और सख़्त कर देती है, थोड़ी ही देर में ऐसा लगता है जैसे केथ के मुहन में किसी ने दो बड़े रसगुल्ले भर दिए हों.
इतना भयंकर डिसचार्ज राजेश ने अपनी जिंदगी में कभी नहीं किया था. केथ धीरे धीरे मुँह में जमा हुए कामरस को पीने लगती है, वाकई में जैसे रसगुल्ले का आनंद उठा रही हो. केथ ने अपनी जिंदगी में पहली बार ब्लोजॉब करी थी, और राजेश की हालत को देख कर सॉफ पता चल रहा था की उसने तमाम रंडियों को मीलों पीछे छोड़ दिया था.

राजेश अपने अतुलनीय ओर्गसम के आनंद को महसूस करते हुए डेह जाता है, वहीं केथ उसके बगल में गिर कर अपनी सांसो को संभालने लगती है. उसके चेहरे पर अपार खुशी विद्यमान हो रही थी, जैसे ओलिंपिक ढोढ़ में गोल्ड मेडल जीत लिया हो.

इधर राजेश भी थोड़ा संभलता है, जो अकथनीय मज़ा उसे केथ ने दिया था वह उस से भी ज़्यादा केथ को देना चाहता था.

राजेश उठता है और केथ को एक गहरा स्मूच देने लगता है, उसके होंठों को ऐसे चूसने लगता है जैसे मिशरी चूस रहा हो, केथ मज़े के आनंद में डूबने लगती है. राजेश साथ साथ उसके उरोजोन को मसल रहा था, थोड़ी देर बाद वह अपना सारा ध्यान केथ के उरोजोन पर केंद्रित कर देता है...............


 राजेश कभी उसके एक निपल को चूस्ता तो कभी दूसरे को, केथ की सिसकियाँ वादी में गूंजने लगी अयाया आहह उूुुुउउफफफफफ्फ़ सक मी सक मी सक मे हार्डर, राजेश उसके दोनो उरोंजों को साथ दबा कर दोनो निपल्स को मुँह में भर लेता है और दोनो को ही हल्के हल्के काटने लगता है, केथ यह वार सह नही पाती उसके पूरे शरीर में आतिशबाजियाँ छूटने लगती हैं, उसकी चूत से कामरस अवीरल बहने लगता है.

राजेश नीचे की तरफ बॅडता है उसकी नाभि को चूमते हुए उसकी चूत पर पहुँच जाता है, एक कमसिन नाज़ुक चूत जैसे संतरे की फाँक को एक हल्का से चीरा बीच में दिया गया हो, वह उसे अपने मुँह में भर लेता है और अपनी ज़ुबान से छेड़ने लगता है उसकी ज़ुबान पत्थर जैसे सकत हो जाती है जिससे वो धीरे धीरे उसकी चूत में घुसा देता है, एक दर्द की लहर केथ के शरीर में गूँज उठती है, वह तड़प कर उपने शरीर को उठा कर कमान का रूप ले लेती है…आइइईईईई, ,

राजेश जीब से उसे चोदने लगता है, उसका लंड झड़ने के बाद भी ढीला नहीं हुआ था, एक सकत लोहे की रोड की तरहा उफ्फन्ने लगता है, राजेश उसे अभ और तेज़ी से चोदने लगता है, केथ की सिसकियाँ बॅडती जाती हैं , उसकी चूत लाल सुर्ख हो जाती है, आँखे बंद हो जाती हैं, शरीर तपने लगा , एक भाप ज़मीन से उठने लगती है, उसका शरीर इतना गरम हो जाता है जो नीचे बिछी ठंडी रेत में समाए हुए कुछ पानी के कन्नों को भाप में बदल देता है, सारा रेगिस्तान आनंदायिक सिसकियों से गूँज रहा था. वह अपनी कमर बहुत ज़ोर ज़ोर से राजेश के मुँह पर मरने लगती है, नदियों का समस्व जैसे बाँध तोड़ने को आतुर था, एक जोरदार चीख के साथ यह बाँध टूट जाता है और राजेश का मुँह कामरस से भर जाता है, वह उसे गलपप्प गलपप्प्प्प्प करते हुए पीता रहता है, पर यह बहाव कोई छोटा बहाव नहीं था, बाँध पे बाँध टूटता रहता है, राजेश समज जाता है की केथ को मल्टिपल ओर्गसम हुआ है, केथ इस अनुभव में खो जाती है, उसका शरीर शीतल पॅड जाता है.

राजेश ने इतना कामरस कभी नहीं पिया था, साला लगता है सुबह का ब्रेकफास्ट अभी हो गया था.

राजेश उठ के बैठ जाता है और केथ को उसके जीवन के पहले मल्टिपल ओर्गसम को एंजाय करने देता है, वह उसकी बगल में लेट जाता है और अपनी साँसे दुरुस्त करने लगता है. केथ तो आनंद की अधिकारेक के कारण बेहोश हो गई थी.
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चलिए जबतक यह दोनो खुद को संभालते हैं ज़रा राजीव का हाल भी देख लेते हैं.

राजेश को बार काउंटर पर छोड़ कर राजीव अपने कमरे में पहुँच जाता है, उसे राजेश पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था, मन ही मन वह राजेश को बहुत गालियाँ दे रहा था, इतने में उसका मोबाइल बज उठता है.
बेह्न्चोद इस वक्त किस की मा मार गयी जो मुझे इतनी रात को फोन कर रहा है, सोचते हुए जेब से मोबाइल निकलता है,स्क्रीन पर झलकते हुए नाम को देख कर होंठो पे स्माइल आ जाती है, फोन नेहा का था, उसकी छोटी बहन.

राजीव : हेलो गुड्डिया अभी तक सोई नहीं, क्या बात है इस वक्त इतनी रात को फोन कर रही है.

नेहा : रोते हुए, भाई तुम बहुत गंदे हो, जबसे गये हो एक बार भी फोन नहीं किया, में तब से आपके फोन का इंतेज़ार कर रही हूँ. राजेश भाई का भी फोन नहीं आया, आप दोनो को मेरी कोई चिंता नहीं कोई मुझसे प्यार नहीं करता, मैं ही पागलों की तरह आप लोगों के पीछे पड़ी रहती हूँ…. ( उस से बोला नहीं जा रहा था, वह ज़ोर ज़ोर से फोन पर रोने लगती है)

राजीव : सॉरी, सॉरी, सॉरी, यार रो मत पहले मेरी बात तो सुन ले

नेहा : क्या सुंनू, कितनी पी है, ज़बान लड़खड़ा रही है, शरम नहीं आती, घर से दूर होते ही पीने लग गये, फोन क्यूँ नहीं किया.

राजीव : पीईईईईई, अरे किसने पीईईईई है, कुछ नहीं पिया, रो मत , सुन , यहाँ नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहा है, बहुत बार फोन मिलाने की कोशिश करी, कनेक्ट होने से पहले ही नेटवर्क गायब हो जाता है, काम का भी बहुत नुकसान हो रहा है, किसी से बात नहीं कर पा रहा हूँ. कल लोकल सिम कार्ड मिल जाएगा, सबसे पहले तुझे फोन करूँगा.

नेहा : ( गुस्से में चिल्लाते हुए) मैं ही मिली थी बेवकूफ़ बनाना को, अब कैसे बात हो रही है……………….आवाज़ आनी बंद हो जाती है, नेटवर्क गायब हो जाता है.

राजीव परेशन हो जाता है , मोबाइल नेटवर्क वालों को गालियाँ देने लगता है, दो दिन से लगातार ट्राइ कर रहा था पर नेटवर्क नहीं मिल रहा था, नेहा कल उसकी सही क्लास लेगी, पर दूसरी तरफ उसकी रूह को एक सकूँ मिल गया था. वह नेहा से बहुत प्यार करता था, उसकी जान थी वो, एक ही प्यारी सी छोटी बहन, ममता की भारी हुई. राजेश पर चड़ा हुआ गुस्सा उसके दिमाग़ से गायब हो गया था, और नेहा की प्यारी छवि लहराने लगी थी. बिस्तर पेर लेट कर वह सोने की कोशिश करता है , आँखे बंद करता है तो नेहा नज़र आने लगती है.

वह घबरा जाता है और उठ जाता है, यह क्या, नेहा का यह रूप उसे क्यों नज़र आया. जॉर्डन आने से पहले ग़लती से उसे नेहा के उरूंजों की एक हल्की सी क्षण भर के लिए झलक मिल गयी थी, जिसे उसने ध्यान तक नहीं दिया था.

अब इस वक़्त उसे नेहा के (34सी ) उरोज़ सॉफ सॉफ नज़र आने लगे थे. उसका गला सुख जाता है, वह चारों तरफ नज़र दोडाता है, उसका जिस्म पसीने से भीग गया था, वह थर थर काँपने लगता है, ये क्या था, उसे कुछ समज नहीं आता.
वह अपने आप को कोसने लगता है, बिस्तर के पास पड़ी हुई ब्लॅक लेबल की बोतल उठाता है और एक ही साँस में खाली कर जाता है, उसका सीना बुरी तरह से जलने लगा था.

आँखे बंद करते ही उसे फिर वोही नेहा का तिलस्सिमि रूप दिखता है, हड़बड़ा कर आँखे खोलता है और राजेश के कमरे की तरफ भागता है, राजेश उसे कहीं नज़र नहीं आता, उसे इतना पसीना आ रहा था की कपड़े तक चूने लग गये थे, उसके चेहरे पर एक डर सॉफ सॉफ दिख रहा था. वह बाहर निकलता है और बार काउंटर की तरफ जाता है, वहाँ तो एक वीरना उसे नज़र आता है.

यह राजेश कहाँ गायब हो गया, कमरे में जाने से उसे डर लगता है, वह सोना नहीं चाहता था, उसे इस वक़्त राजेश की बहुत सख़्त ज़रूरत महसूस हो रही थी, उसका एक ही दोस्त था- राजेश.

कहाँ गया साला केसानोवा, ज़रूर केथ के कमरे में होगा. केथ के कमरे की तरफ जाने की उसकी हिमात नहीं होती. क्या करूँ? कहाँ जाउन? उसका दिमाग़ फटने लगता है. राजेश , राजेश , राजेश चिल्ला, चिल्ला कर उसे पुकारता है. राजेश वहाँ होता तो जवाब देता.

उफफफफफफ्फ़ हे भगवान क्या करूँ कहाँ जाउन, वह ज़मीन पर गिर कर रेत पे अपना सर पटकने लगता है. कहाँ है यार तू………..नस्सों में दर्द और नशे की अधिकता के कारण वह बेहोश हो जाता है.

कहते हैं, अगर दोस्ती सच्ची हो तो दिल की आवाज़ दिल तक पहुँच जात है, चाहे लाखों मीलों की दूरी क्यूँ ना हो. ऐसा ही कुछ होता है…

केथ के साथ लेटे हुए राजेश को अजीब से बेचैनी महसूस होने लगती है. उसे कुछ समज नहीं आता यह क्या हो रहा है, लंड में से तनाव एक दम गायब हो जाता है.

वह अपने साथ सोई हुई केथ को उठाता है और घड़ी देखता है, वह नहीं चाहता था की केथ के माता पिता उसे कमरे से गायब पाएँ. दोनो कपड़े पहनते है और शिविर की तरफ बॅड जाते हैं. वहाँ पहुँच कर वह राजीव को ज़मीन पर बेहोश पता है. उसे कुछ समज नहीं आता. केथ अपने कमरे की तरफ भागती है कपड़े चेंज करने के लिए.

राजीव, राजीव …… वह उसके गाल थपथपता है, कोई असर नहीं होता, उसे बार काउंटर पर पानी की एक बॉटल दिखती है, वह भाग कर उसे उठाता है और राजीव के सर व चेहरे पर छिड़कने लगता है.

कुछ ही देर में राजीव कुछ कुन्मूनाता है……..राजेश की साँस में साँस आती है. तब तक केथ भी कपड़े बदल कर पहुँच चुकी थी.
राजीव हल्की सी आँखें खोलता है और राजेश को सामने पाता है, उसे केवल एक झलक ही दिख रही थी.

"मुझे बचाले " फुसफुसता हुआ वह आँखे मूंद लेता है. राजेश उसे उठा कर उसके कमरे में ले जाता है और बिस्तर पर लिटा देता है. वह उसके पास ही एक कुर्सी पर बैठ जाता है और केथ को अपने कमरे में जाकर सोने का इशारा करता है.

केथ का दिल उसे छोड़ के जाने को बिल्कुल नहीं करता, वह रूम में कॉफी मेकर तलाश करती है और दो कप कॉफी के बना कर एक राजेश को देती है. राजेश उसकी आँखों में देखते हुए कॉफी ले लेता है, इस वक़्त उसे कॉफी की सकत ज़रूरत थी.





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