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Friday, December 19, 2014

FUN-MAZA-MASTI जेठ जी के अहसान --10

FUN-MAZA-MASTI

 जेठ जी के अहसान --10
        
 शाम को मैंने दीपक को बता दिया कि कल भैया दस दिनों के लिए आने वाले हैं , इसलिए वो और जेठ जी बिलकुल स्वाभाविक व्यवहार करें ताकि उनको जरा भी शक न हो कि हमारे आपस में क्या सम्बन्ध हैं ! हमने एक साथ ही डिनर किया और डिनर टेबल पर ही जेठ जी ने बात साफ़ कर दी कि जब हम तीनों जानते हैं कि हमारे आपस में शारीरिक सम्बन्ध हैं , तो तीनो एक साथ क्यों नहीं सोते ! जेठ जी ने मुझे पहले ही बता दिया था कि दीपक को ज्यादा से ज्यादा उत्तेजित रखने के लिए ये जरुरी है ! रात में हम तीनों ने खाना खाने से पहले शराब ले ली थी ! मैंने तो दो ही पैग लिए थे पर दीपक ने चार और जेठ जी ने तो छह पैग लगा लिए थे !हम तीनो एक ही बेडरूम में आ गए थे , दीपक ने हल्का म्यूजिक लगा दिया था ,और हम दोनों एक दूसरे कि बाँहों में हल्का हल्का डांस करने लगे ! भैया बेड पर आकर बैठ गए थे , और हमारा डांस देख रहे थे ! डांस करते करते मैं बहुत उत्तेजित हो रही थी , बीच बीच में जब दीपक जब आगोश में लेकर चुम्मी लेते थे तो जांघों में खड़े लौड़े का अहसास होता था !शराब के नशे में मैं भूल चुकी थी कि जेठ जी भी इसी कमरे में है ,और दीपक को मैंने जेठ जी के सामने कभी चूमा नहीं था ,और न ही कभी उसकी बाँहों में आई थी ! माहौल गरम होता गया और मेरी साड़ी , ब्लाउज और पेटीकोट भी उत्तर गयी ! सिर्फ ब्रा और पैंटी में ऐसे लग रहा था जैसे मैं कैबरे कर रही हूँ ! डांस करते करते दीपक ने मुझे जेठ जी के ऊपर धक्का दे दिया, मैं सीधा जेठ जी कि गोद में गिरी ! जेठ जी ने मुझे बाँहों में ले लिया और किस करने लगे , एक हाथ से उन्होंने मेरी चूची थम ली और एक हाथ से मुझे सहारा दे रखा था !दीपक भी अब बेड पर आ गए थे और मेरी ब्रा खोलकर अलग कर दी ! जेठ जी ने मुझे अपने गोद में बिठा रखा था , चुम भी रहे थे और एक चूची भी दबा रहे थे ! दूसरी चूची पे दीपक ने अपना मुंह लगा दिया और छोटे बच्चे कि तरह चूसने लगा !मैं पिघली जा रही थी , चूत से रस कि धार निकल रही थी , पैंटी का गीलापन भैया ने महसूस किया और एक हाथ मेरी पैंटी में घुसेड़ दी और मेरी चूत को ऊँगली से कुरेदने लगे ! अब मेरे लिए मुश्किल हो रहा था , मुझे हर हाल में लण्ड चाहिए था, मैं छटपटाने लगी ! जेठ जी समझ गए कि मैं तैयार हूँ , वो थोड़ा फ़ैल गए और मुझे अपने पूरे बदन पर फैला लिया ,मेरी गांड के नीचे उनका लण्ड था जो अब धीरे धीरे गरम हो रहा था ! उन्होंने दीपक को मेरे ऊपर आकर चोदने को कहा ! दीपक मेरे ऊपर लेट गए और लण्ड को मेरी चूत में डाल दिया ! बहुत हल्का सा अहसास हुआ कि मेरे चूत में कुछ गया है , वो धक्का मारने लगे , अब जेठ जी मेरी गांड और चूत के बीच की जगह को सहलाने लगे ! दीपक शायद इस तरह की चुदाई को झेल नहीं पाये और बीस तीस धक्कों के बाद ही निढाल हो गए ! दीपक अब मेरे ऊपर से उठकर अलग लेटकर आगे का तमाशा देखने लगे ! जेठ जी ने अपना अंडरवियर उतारा और उसी पोजीशन में लण्ड घुसा दिया और चोदने लगे ! मेरी चुदाई अब सही तरीके से हो रही थी और चूत में शांति आ गई थी !
भैया ने करीब दस मिनट तक चोदकर मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर मुझे चोदने लगे ! उनको ज्यादा नशा हो रहा था और वो चोदते चोदते मुझे गाली भी देने लगे थे , बहनचोद ....तेरी बहन की चूत में मेरा लण्ड , आज मैं तेरी माँ चोद दूंगा ! मुझे बहुत मज़ा आ रहा था , दीपक भी अब थोड़ा उत्तेजित होने लगे थे ! मैंने इशारे में दीपक को अपना लण्ड मेरे मुंह के पास लाने को कहा ! दीपक के पास आते ही मैंने उसका लण्ड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी , लण्ड खड़ा होने लगा ! उधर जेठ जी पूरे जोश में थे और अपनी पूरी ताक़त से मुझे चोदे जा रहे थे ! दीपक का लण्ड अब पूरी तरह से खड़ा हो गया था , और जेठ जी पानी छोड़ने की तयारी में थे ! अचानक जेठ जी का गरम गरम लव मैंने अपनी चूत में महसूस किया ! लगभग सात आठ बार अपना लण्ड निचोड़ कर जेठ जी लुढक गए ! मैंने दीपक को अपने ऊपर बुला लिया ! एक घंटे के अंदर दीपक दूसरी बार मुझे चोद रहे थे , अब लण्ड भी मोटा और सख्त लग रहा था ! चूत के अंदर दीपक का लण्ड मैं अच्छे से महसूस कर रही थी ! अपने बड़े भाई के वीर्य के बीच ही दीपक का लण्ड मेरी चूत में फिसल फिसल के जा रहा था ! इस बार दीपक काफी लम्बी चुदाई कर रहे थे , शायद पहली बार ! दीपक का लण्ड झरने का नाम नहीं ले रहा था , जेठ जी देख देख कर खुश हो रहे थे , बीच बीच में बोल पड़ते थे , फाड़ दे बहनचोद की चूत ...आज बता दे साली को की हम भाइयों की लण्ड में कितना दम है ! दीपक जोश को बर्दाश्त नहीं कर पाये और मेरी चूत में पिचकारी छोड़ दी ! बीच में मैं और दोनों भाई मेरे दोनों तरफ मेरी एक एक चूची को सहलाते हुए सो गए , और मैं भी बिना कुछ पोछे , दोनों भाइयों का पानी अपने चूत में समेटे सो गई !



 सुबह जल्दी उठकर घर का काम निबटाया और घर को ठीक से साफ़ सुथरा कर लिया ताकि राहुल भैया को जरा भी शक न हो ! राहुल की शादी मेरी शादी के थोड़े दिनों बाद ही हो गई थी !शादी के बाद राहुल पहली बार मुझसे मिलने आ रहे थे ! राहुल के आते ही मैं उनसे लिपट गई , मेरी आँखों में आंसू आ गए थे !दुबला पतला राहुल अब हट्ठे कट्ठे नज़र आ रहे थे !काफी बॉडी बना ली थी राहुल ने ! मेरे पीछे मेरे जेठ जी भी आ गए थे और राहुल का स्वागत किया ! मैं दरवाज़ा बंद कर वापस मुड़ी, राहुल और जेठ जी आगे आगे चल रहे थे , एक मिनट के लिए मैं चौंक गयी ,क्यूंकि दोनों की डील डॉल , सेहत एक जैसी लग रही थी , अगर कपड़ों का फर्क नहीं होता तो बताना मुश्किल था की राहुल कौन है और जेठ जी कौन ? दीपक दफ्तर चले गए थे , हमने खाना खाने के बाद गप्प मरने में इतना मशगूल हो गए की शाम होने का पता ही न चला ! आज जेठ जी को गावँ वापस जाना था , पर राहुल भैया ने जिद कर के उनको आज के लिए रोक लिया ! दोनों बहुत घुल मिल गए थे और एकसाथ ताश भी खेल रहे थे ! रात को डिनर के बाद मैं और दीपक अपने बैडरूम में आ गए थे ! भैया और दीपक का बेड भी अगल बगल के दो कमरों में लगा दिया गया था ! जब मैंने दोनों को गुड नाईट बोलने आई तो उनके बीच जबर्दश्त ताश की बाज़ी लगी थी ! जेठ जी और मैंने ये निर्णय कर लिया था कि जब तक राहुल यहाँ है , हम दिन रात दूरी बना कर चलेंगे , और किसी भी तरह कि छेड़ छाड़ और इशराबाज़ी नहीं करेंगे !
अपने बेड रूम में आकर मैंने अपना गाउन उतारा और दीपक के पास आ गयी , दीपक मुझे बाँहों में लेकर चूमने लगे ! दीपक के हाथ मेरी चूचियों को हौले हौले दबा रहे थे ! दीपक और जेठ जी में ये फर्क था कि जहाँ दीपक हौले हौले चूचियाँ दबाते थे , जेठ जी चूचियों को बेदर्दी से मसल देते थे , और घुंडियों को भी मसल मसल कर लाल कर देते थे ! ब्रा उतारकर दीपक ने मेरी एक चूची चूसना शुरू कर दिया ,अपने हाथों से वो मेरी गांड भी सहला रहे थे ! मैंने भी दीपक की अंडरवियर उतार कर लण्ड को हाथ में ले लिया था , और मसलने लगी थी ! दीपक पूरे तनाव में आ गए थे ! दीपक ने कहा , डार्लिंग जल्दी से एक राउंड कर लो , फिर सो जायेंगे जल्दी , भैया की सुबह की ट्रैन है , जल्दी उठना पड़ेगा ! मैंने भी हाँ में सर हिलाया और दीपक को लिटा कर उसपर सवार हो गई ! मैं ज्यादा उत्तेजित अभी थी नहीं ,इसलिए दीपक का लौड़ा भी मुझे सख्त लग रहा था ! हलके हलके सरका कर पूरा लण्ड मैंने अपने चूत में लिया और धक्के मारने लगी !मुझे अभी एक जबर्दश्त चुदाई की जरुरत थी , पर मेरा मनपसंद लण्ड जो मेरी प्यास बुझा सकता था , राहुल भैया के साथ ताश में लगा था ! थोड़ी देर के लिए मैं राहुल को कोसने लगी की क्यों वो इन्ही दिनों में दिल्ली आया ! दीपक पूरा मस्त गए थे और मुझे पकड़ कर जोर जोर से चोदने की कोशिश कर रहे थे, साथ ही मेरी चूचियों से भी खेल रहे थे ! दीपक के साथ अब चुदाई लम्बी होती जा रही थी और मैं मस्त हो रही थी ! मेरी चूत से पानी की फुहारें भी निकली थी एक बार , बहुत अच्छा लगा था की अब दीपक भी मेरा पानी निकाल सकते हैं ! हमारा खेल अब स्पीड पकड़ चूका था , मै अब जोर जोर से धक्के लगाने लगी थी, दीपक भी आह... उह... कर रहे थे , दीपक को मस्ती में देख मैं पूरी मस्ती में आ गई थी , अब मैं जम कर चुदाई की उम्मीद में कस के छह सात शॉट लगाये की दीपक का नलका पानी छोड़ गया ! अभी मैं संभलती की लाइट चली गई , मैं प्यासी दीपक से लिपट गई ! दीपक का लण्ड सिकुड़ के चूत से बाहर आ गया था , और वो अलग हट कर निढाल लेट गए थे ! मैं भी बिज़ली के इंतज़ार में छत घूर रही थी , बदन में आग लगी थी लेकिन आग बुझाने का कोई इंतज़ाम नहीं था ! अगर राहुल नहीं होते तो मैं दौड़ कर जेठ जी के लण्ड से अपनी प्यास बुझा लेती लेकिन लोकलाज ने मुझे बाँध रखा था !
करीब एक घंटा बीतने के बाद भी लाइट नहीं आई थी ! मैं चूत में ऊँगली कर कर के थक गई थी , पर तन की ज्वाला और भड़क गई थी ! मैं अजीब उलझन में थी , दीपक खर्राटे ले रहे थे और मैं आँखें फाड़ के जगी हुई थी ! जेठ जी की बहुत जरुरत महसूस हो रही थी , अब तक तो वो सो भी गए होंगे , कल सुबह उन्हें निकलना था ! मैं खुद को रोक न सकी ,और नाईट गाउन डाल कर आहिस्ते से जेठ जी के कमरे में आ गई ! बिलकुल घना अँधेरा था , जेठ जी शायद सो गए थे ! मैं आहिस्ते से उनके पलंग पर उनके कंधे के पास बैठ गई ,और झुक कर उनके होंठों को अपने होंठों से बंद कर लिया ! जेठ जी हरबड़ा गए थे , उठने की कोशिश करने लगे , पर मैंने दवाब देकर उन्हें लिटा लिया ! उनके मुंह से अपने होंठ हटा कर अपना हाथ रख दिया और उनके कान में बोली ," भैया , जरा भी शोर मत करना , चुपके से मेरी प्यास बुझा दो ! जरा आहिस्ता , कहीं दूसरे कमरे में भैया न सुन लें !" अब मैं भैया का लण्ड पजामे के ऊपर से सहलाने लगी , लण्ड तुरंत अकड़ कर खड़ा हो गया !पजामे को सरका कर मैं नीचे किया और लण्ड पर बैठ गई , मस्ताई हुई चूत सटाक से लण्ड को लील गई , और मैं धक्के लगाने लगी ! भैया का एक हाथ मैंने चूची पर रख दिया और दूसरे में अपनी उँगलियाँ फंसा कर जोर लगा कर भैया को चोदने लगी ! भइया की नींद शायद अभी टूटी नहीं थी , चूची भी बस दीपक की तरह सहला रहे थे और नीचे से धक्का भी नहीं लगा रहे थे ! मैंने अपनी चुदाई जारी राखी और सटा सट लण्ड चूत में सरकने लगी ! आज भैया का लण्ड बहुत कड़क लग रहा था, मेरी चुदाई ने उन्हें पागल बना रखा था , पर दूसरे कमरे में राहुल के होने के डर से वो खुल के चोद नहीं पा रहे थे ! मैं अब पूरे मस्ती में थी , भैया को कलेजे से चिपका कर धक्के लगाते हुए उनके कान में फुसफुसाने लगी , भैया ..फाड़ दो मेरी चूत ...क्या मस्त लण्ड है भैया आपका .... और चोदो भैया ...अपने वीर्य से मेरी चूत भर दो भैया .... आह भैया ...बस भैया..., मैं झरी भैया ....! भैया का फौवारा छूट गया और मैं रस से सरोबार हो गई ! हम दोनों पसीने से लथपथ थे और चूत में भैया के लण्ड के पानी का सैलाब था ! मैंने जल्दी जल्दी अपनी नाईट ड्रेस से चूत और लण्ड को पोछा और भैया को गुड नाईट किस करके कमरे में लौट गई !
सुबह जल्दी उठकर चाय लेकर आई , भैया और दीपक ड्राइंग रूम में ही बैठे थे ! राहुल की चाय लेकर जब मैं उसके कमरे में जाने लगी तो भैया ने कहा , राहुल मेरे कमरे में सो रहा है ! रात लाइट चली गई थी , सो वो वहीँ सो गया और मैं छत पर खुले आसमान के नीचे सो गया था ! मेरे सर पे तो जैसे बिज़ली टूट पड़ी , तो क्या .. कल मै राहुल भैया से चुद गई.....मेरी हिम्मत चाय लेकर उनके कमरे में जाने की नहीं हुई !



 मैं बहुत ज्यादा परेशान थी रात की बात को लेकर ! जिस्म की भूख ने मुझे भैया और जेठ जी के फर्क को भी पहचानने का मौका नहीं दिया ! दोनों की चुदाई का तरीका और अहसास अलग था ,लेकिन अपनी प्यास बुझाने के चक्कर में मैं फर्क नहीं कर पायी !राहुल को हमेशा मैंने भाई की नज़र से ही देखा था , ज़िन्दगी में ये दिन भी देखने पड़ेंगे , कभी सोचा नहीं था ! मैं चुदाई के समय की बातें याद करके शर्म से मरी जा रही थी ,क्योंकि मैंने भैया को कुछ बोलने या बचने का मौका ही नहीं दिया था ! मुझे याद आ रहा था की कैसे जब मैंने पहली बार उनके होंठों को चूमा था तो उन्होंने हटने की कोशिश की थी , पर मैंने उन्हें अपनी बात बताने या बचने का मौका ही नहीं दिया था !
मेरे होश उड़े हुए थे , जेठ जी समझ रहे थे की मुझे उनके गावँ जाने का दुःख है , इसलिए वो भी थोड़े उदास थे ! जब राहुल बाथरूम में थे ,तब मौका देखकर मैंने जेठ जी से लिपटकर उनको विदाई किस दी ! जेठ जी ने वादा किया की वो जल्द वापस आएंगे,और मुझे ढेर सारा प्यार करेंगे !मेरे लिए ये असंभव था की मैं दीपक या जेठ जी को रात की घटना के बारे बताती ! नास्ते के टेबल पर भी मैं राहुल भैया से नज़रें चुराती रही , लेकिन राहुल भैया कल की तरह ही सबसे हँस बोल रहे थे जैसे कुछ हुआ ही न हो ! एक दो बार उन्होंने मुझसे बिलकुल नार्मल तरीके से बात भी की , मैंने सर हिलाकर जवाब दे दिया था !
जेठ जी और दीपक दोनों स्टेशन के लिए निकल लिए , वहीँ से दीपक को ऑफिस के लिए निकलना था ! दोनों के जाते ही राहुल भैया ने मुझे चाय लाने को कहा और ये भी कहा की अपने लिए भी बना लेना , साथ बैठकर बातें करेंगे ! चाय लेकर मैं सर झुका कर ड्राइंग रूम में आ गई , राहुल भैया सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहे थे ! मैंने चाय टेबल पर रख दी , राहुल भैया ने मुझे अपने पास सोफे पर बैठने का इशारा किया ! राहुल भैया के चेहरे या बातों से ये पता ही नहीं चल रहा था की कल कुछ हुआ भी है , पर मेरी सूरत देखकर कोई भी बता सकता था कि किसी ने जबरदस्ती मेरी चूत मारी है ! मैं थर थर काँप रही थी, चाय कि प्याली भी हिल रही थी ! दो मिनट तक हम चुप चाप बैठे रहे ,फिर राहुल ने स्थिति को थोड़ा हल्का करते हुए बातचीत शुरू की ....
राहुल : और सोनिया , पूरे दिन क्या करती हो , दीपक के जाने के बाद !
मैं : कुछ नहीं , बस घर के काम रहते है , उसी में लगी रहती हूँ !
राहुल : सच पूछो सोनिया तो मैं तुमको खुश देखकर बहुत खुश हूँ ! कितने अच्छे लोग हैं तुम्हारी ज़िन्दगी में ! सबको इतनी ख़ुशी नसीब नहीं होती है !
मैं : जी ... सो तो है .....( मेरी फट रही थी,की राहुल क्या कहना चाह रहे है)
राहुल : मैंने कभी सोचा भी नहीं था की मेरी छोटी सी गुड़िआ जैसी बहन इतनी बड़ी हो जाएगी !
मैं : मतलब ?
राहुल : मतलब की घर का सारा काम कितनी अच्छी तरह कर लेती हो !
मैं : हाँ ...धीरे धीरे सब सीख लिया है , बस हो जाता है !
राहुल : सोनिया , एक बात पूछूं , बुरा न मानो तो ...!
मैं : पूछिये न , आपसे क्यों बुरा मानूंगी ( अब मेरी जान अटक गई थी, कि अब कल की बात होगी )
राहुल : जहाँ तक मुझे लगता है , तुम्हारे ससुराल में वारिस कि सख्त जरुरत है , अभी तक तुमने कोई खुशखबरी क्यों नहीं दी !
(मैं समझ गई थी कि राहुल अब धीरे धीरे उसी बात पर आ रहे हैं, मुझमें भी अब हिम्मत आ रही थी , राहुल ने बातों में उलझाकर मुझे काफी हद तक नार्मल कर दिया था ! मैंने सोच लिया था कि राहुल से कुछ भी नहीं छुपाऊँगी और ये भी बता दूंगी कि हमारे बीच जो भी हुआ , सब धोखे में हो गया ! )
मैं : देखिये भैया , मैंने आपसे ऐसी बातें कभी नहीं की, पर अभी बताये बिना नहीं रह सकती !
राहुल : अरे बताओ न , भाई हूँ तुम्हारा , हमें एक दूसरे की मदद ज़िन्दगी भर करनी है !
मैं : दरअसल दीपक का इलाज़ चल रहा है ,उनमें पापा बनने की क्षमता नहीं है ! गावँ में मेरी सास मुझे दोषी मान रही है , और दीपक की दूसरी शादी करना चाहती है ! मैं और दीपक एक दूसरे से अलग कभी नहीं हो सकते , इसलिए दीपक ने जेठ जी को मजबूर किया की वो उसकी जगह लें ! ये सब पिछले 15 दिनों में घटी है , दीपक अभी 10 दिनों बाद अमेरिका से लौटे हैं , यहाँ सिर्फ मैं और जेठ जी थे !(कहते कहते मैं फूट फूट कर रोने लगी )
राहुल : अरे रोते नहीं हैं , मेरी प्यारी बहन ! जितनी अच्छी तुम हो , तुम्हारे पति और जेठ उससे भी अच्छे है !मुझे बहुत ख़ुशी हुई कि इतने समझदार लोगों के साथ तुम हो !( राहुल ने मुझे अपने सीने से लगा लिया !मैं अब भी सुबक रही थी !)
मैं : (रोते रोते राहुल कि आँखों में देखा) कल जो भी हुआ भैया , इसी धोखे में हो गया ! मैं मरना चाहती हूँ भैया , मुझसे इतना बड़ा पाप हो गया !
राहुल : पागल हो गई है तू , कोई पाप नहीं हुआ !अगर मरना ही है तो पहले मुझे मार दे , मैं भी तो शामिल था इसमें ! (भैया मुझे सहलाते रहे , चुप कराते रहे , पर मैं चुप नहीं हो पा रही थी )
मैं : नहीं भैया , आप नहीं सिर्फ मेरा दोष है !मैं कभी अपने आप को माफ़ नहीं कर सकती ! मैं कैसे इस पाप का प्रायश्चित करुँगी !( मैं लगातार रोये जा रही थी , भैया भी भावुक हो रहे थे )
राहुल : सच पूछो बहन , तो मुझे कल कि बात का जरा भी अफ़सोस नहीं है ! कल जो कुछ भी हुआ वैसा मेरी ज़िन्दगी में पहली बार हुआ ! आज मैं इतना संतुष्ट महसूस कर रहा हूँ कि बता नहीं सकता !
मैं : तो क्या भाभी के साथ आप खुश नहीं हैं !
राहुल : (भैया के आँखों में आंसू थे ) नहीं बहन ! वो हमेशा लड़ती झगड़ती रहती है , मुश्किल से हम अभी तक चार पांच बार ही एक साथ सोये हैं , वो भी बस मामूली सा ही हुआ है हमारे बीच ! अनजाने में तुमने मुझे ज़िन्दगी का वो सुख दे दिया जिसका मैं सिर्फ सपना ही देख सकता हूँ !
मैं : भैया , मुझे ख़ुशी है कि आप को कुछ तो मिला , लेकिन भैया है तो ये पाप ही !
राहुल : नहीं बहन , ऐसा नहीं है ! भाई बहन का रिश्ता बहुत पवित्र होता है और जवाबदेही भरा भी ! एक दूसरे के सुख दुःख में साथ देना फ़र्ज़ है दोनों का ! तुम जिस स्थिति से गुजर रही हो , अगर तुम्हारे जेठ जी कि जगह मुझे कहा गया होता तो मैं ख़ुशी से तैयार होता ! आखिर तुम्हारे जेठ जी भी तो भाई ही हैं तुम्हारे , पर तुम उनको कितना चाहती हो , ये तुम्हारी बातों से मुझे कल रात पता चली !( मैं अब शर्म से झुक गई थी , मैंने कितना कुछ बोल दिया था जोश में )
मैं : लेकिन भैया .............!
राहुल : लेकिन वेकिन छोड़ यार , किस्मत ने मिलाया है हमें इस रूप में तो मज़े लेते हैं ! वैसे तो कभी भी और किसी को भी मैंने ये बात न बताई , न ही बताता ; पर तुमको आज बता देता हूँ !
मैं : कौन सी बात भैया ? ( मैंने बहुत ध्यान से भैया को देखते हुए कहा )
राहुल : देखो सोनिया , तू बचपन से ही मुझे बहुत अच्छी लगती है ! मैं बहुत शर्मीला हूँ तू तो जानती है ! मैं छुप कर तुम्हें कपडे बदलते और नहाते देखता था ! तुम तो इतना ख्याल रखती थी अपना कि बंद बाथरूम में नहाते समय भी कपडे पहन के नहाती थी ! सिर्फ एक दो बार ही मैं तुम्हारे ब्रैस्ट देख पाया था ! तुम्हारे बाएं उभार के ऊपर जो तिल है , वो सोच सोच के मैंने जाने कितनी बार अपने आप को संतुष्ट किया है !
मैं : क्या .....( मेरे लिए ये दूसरा बड़ा झटका था ! भैया बचपन से ही मुझे देखकर उत्तेजित होते थे और मेरी चूची पर के तिल को याद कर मुठ मारते हैं, मेरी तो जुबान ही बंद हो गई ,भैया कि बातें सुनकर!)
भैया ने अब मेरा चेहरा अपने हाथों में ले लिया था , पहले गौर से देखा , किस किया और बोले , मुझे स्वीकार कर लो बहन , मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकता , कम से कम कुछ दिन का सुख दे दो , मैं तुमसे भीख मांगता हूँ ! जो मदद तुम्हारे जेठ जी कर रहें हैं,वो मुझसे भी ले लो , किसी न किसी का तो ठहर ही जायेगा तुमको ! मेरे पास जवाब नहीं था इन बातों का , मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और सब कुछ भाग्य भरोसे छोड़ दिया ! भैया ने मुझे चूमना शुरू कर दिया था , उनके हाथ मैं अपने ब्लाउज के अंदर ब्रा के हुक के ऊपर फिसलता महसूस कर रही थी !भैया का एक हाथ मेरी चूचियों से खेल रहा था , मानो किसी के बचपन कि मुराद जवानी में पूरी हुई हो ! ब्लाउज अलग करते हुए भैया की ऑंखें मेरी चूची के तिल को ढूंढ रही थी ! ब्रा के हटते ही भैया कि आँखें चमक उठी , पहला चुम्बन तिल का ही था ! भैया मानो पागल से हो गए थे , बेतहाशा चूमते जा रहे थे , कभी बायीं चूची , कभी दायी चूची , कभी गाल , कभी कान , कभी होंठ , रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे ! मैं उनकी जल्दबाजी समझ रही थी , इसलिए आहिस्ता आहिस्ता उनको सहला भी रही थी ! भैया के चुम्बनों के बौछार से मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी ! जैसे ही भैया ने मेरी चूची को चूसना शुरू किया , मेरी आह निकल गई , कितना मासूम और सेक्सी स्पर्श था भैया का , जैसे नए नए बच्चे ने दूध पीना शुरू किया हो ! चूची के आसपास उठ रहे तरंगों ने मेरी चूत तक गीली कर दी और मैं ये भूल गई कि मेरा दूध पीने वाला मेरा सगा भाई है, मैंने राहुल का लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और मसलने लगी ! भैया खुश हो गए और जल्दी से अपना पजामा उतार कर लंड पकड़ा दिया !मेरी साड़ी कब की अलग हो चुकी थी , पैंटी मैंने नहीं पहनी थी , भैया ने मेरी पेटीकोट कि डोरी खीचकर मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया ! अब हम खड़े हो गए थे और खड़े खड़े ही एक दूसरे से चिपक कर एक दूसरे को रगड़ रहे थे ! फिर भैया ने मुझे गोद में उठा लिया और मेरे बेडरूम में आकर मुझे बिस्तर पर लिटा दिया ! भैया ने कहा , बहन मैं अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ , एक बार तुम्हारे अंदर पानी छोड़ देता हूँ , फिर दूसरी बार में तुम करना ! मैं समझ गई थी कि भैया शायद छूटने वाले हैं , अपने बहन कि गर्मी वो झेल नहीं पा रहे है और वो भी तब जब पहली बार सही से चोदने का मौका मिल रहा हो !
भैया ने मेरी चूत के मुंह पर लंड को रखा , और दबाया पर लंड फिसल गया ! तगड़ा लंड था भैया का भी , जेठ जी के बराबर ही था , लेकिन पूरा जवान होने कि वजह से दम ख़म वाला था ! जैसे तैसे भैया ने लंड को अंदर किया , मैं बहुत दर्द अनुभव कर रही थी ! भैया ने मेरे ऊपर पूरा लेटते हुए , मुझे आगोश में बांधते हुए , मुंह को पूरी तरह से मेरे मुंह के साथ बंद कर लिया , और मेरी चूत में धक्का मारने लगे ! थोड़े से धक्के के बाद लंड और चूत के रिसते हुए लसलसे पानी ने फिसलन बना दी और लंड सटा सट जाने लगा ! शायद भैया ने थोड़ा कंट्रोल कर लिया था , या जवान लंड का कमाल था, भैया ने पानी छोड़ने से पहले दस मिनट तक मेरी चूत खूब बजाई ! जो मजा जेठ जी एक घंटे की चुदाई में देते थे , भाई ने दस मिनट में मुझे हिला दिया था ! भैया ने जैसे ही पानी छोड़ा, मैं भी खूब झड़ी !हम आपस में एकदम से घुस गए जैसे कभी निकलेंगे ही नहीं ! करीब बीस मिनट तक हम यूँ ही लेटे रहे और सोते रहे, जब मेरे मोबाइल की आवाज़ ने हमें उठा दिया ! दूसरे तरफ दीपक थे , जो बता रहे थे कि आज रात वो एक हफ्ते के लिए ऑफिस के टूर पर जा रहे हैं, सामान पैक करने को कह रहे थे ! भैया की मुस्कराहट बता रही थी कि उनकी लाटरी खुल गई है , अब एक हफ्ते तक आराम से अपनी बहन कि चूत मारते रहें , कोई देखने या रोकने वाला नहीं होगा !




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FUN-MAZA-MASTI जेठ जी के अहसान --9

FUN-MAZA-MASTI
  
 जेठ जी के अहसान --9


दीपक को घर देखकर मैं उससे ख़ुशी से लिपट गई , पीछे जेठ जी खड़े मुस्करा रहे थे ! अब मैं बहुत उलझन में आ गई थी , दो दो पति मेरे सामने थे , किससे किस तरह पेश आऊँ कि दूसरे को बुरा न लगे ! पूरा दिन दीपक के साथ अमेरिका कि बातें और गिफ्ट देखने में बीत गया ! दीपक को अमेरिका और दिल्ली के समय के फर्क के कारण नींद सी आ रही थी , इसलिए शाम को हमने जल्दी जल्दी खाना खाया और सोने का कार्यक्रम बनाने लगे ! दीपक जिद कर रहे थे कि मैं जेठ जी के साथ सो जाऊं, पर मैंने मना कर दिया ,और दीपक के साथ ही सोने की ठान ली ! दीपक की अमेरिका से लायी हुई नायलॉन की नाइटी पहन कर मैं बिस्तर पर लेट गई ! आज दीपक के साथ चुदाई करने का मेरा बड़ा मन कर रहा था !दीपक सोने का बहाना बना रहे थे और मैं उनको चूमते जा रही थी ! दीपक ने आश्चर्य से मेरी तरफ देखा, क्योंकि पहले कभी मैंने पहल नहीं की थी !दीपक ने भी मेरे चुम्मियों का जवाब देना शुरू कर दिया ! बीच बीच में मेरे हनीमून के बारे पूछ लेते थे , मैंने मुस्करा के कह दिया की आपके साथ जो हनीमून था वो ज्यादा अच्छा था ! मैं नहीं चाहती थी कि वो हीन भावना के शिकार हों !फिर मुझे जेठ जी का भी कहा याद आया कि अगर दीपक में कॉन्फिडेंस लाया जाय, तो वो बेहतर सेक्स कर सकता है !
दीपक ने आगे बढ़कर मेरी चूची थाम ली, मैं ब्रा और पैंटी उतार के आई थी !चूची हाथ में लेते ही दीपक बोल पड़े , कितनी मुलायम हो गई है न तुम्हारे ब्रैस्ट इन दस दिनों में , अच्छा लग रहा है !समझ तो मैं भी गई थी कि दीपक मेरी चुचिओं को ढीला बता रहे थे , और होता भी क्यों न ; जेठ जी ने भी तो दिन रात चूचियों रगड़ रगड़ कर इसको ढीला कर दिया था ! चूमते चूसते मैंने एक हाथ से दीपक का लौड़ा पकड़ लिया , दीपक को बिजली का झटका सा लगा ! मैं भी जेठ जी का लण्ड पकड़ते पकड़ते अब बेशरम हो गई थी , और लण्ड पकड़ना तो बहुत आसान लगता था ! दीपक के लौड़े में एकदम से हरकत हुई थी , और वो सर उठा के खड़ा हो गया ! पहले मैंने दीपक को नंगा किया ,फिर अपनी नाइटी उतार फेंकी !दीपक को मैंने नीचे लिटा दिया , और उसको ऊपर से नीचे तक चूमने लगी ! दीपक के लौड़े से चिपचिपाहट आने लगी थी, मेरे बदन कि गर्मी को वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था !दीपक को चूमते चूमते मैं उसका लण्ड मुंह में लेने ही वाली थी, कि रुक गई ,क्योकि मुझे पता था कि इतना डोज़ वो बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे , और पानी निकाल बैठेंगे !हालाँकि मुझे ऐसा बार बार लग रहा था कि दीपक चाहते हैं कि मैं उसका लौड़ा अपने मुंह में लूँ ! अब मैं दीपक के होंठ , कान , छाती ,गर्दन को चूमने और चूसने लगी थी ! अब मैं जानती थी कि कहाँ चूमने से कितना मज़ा आता है , जेठ जी ने चोद चोद के मुझे एक्सपर्ट बना दिया था ! दीपक के ऊपर आते हुए मैं पूरी तरह से उसके ऊपर लेट गई थी , उसका लण्ड अभी तक झड़ा नहीं था और मेरे पेट के निचले हिस्से से रगड़ खा रहा था ! शादी के दिन से आज तक मैं कभी दीपक के ऊपर लेटकर कभी इस तरह का प्यार नहीं किया था ! मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं एक अनाड़ी को चुदाई सीखा रही हूँ ! मैंने दीपक के लौड़े पर बैठते हुए आहिस्ता से दीपक का लण्ड अपने चूत में सड़का लिया ! मैं गीली तो थी ही , और जेठ जी कि कृपा से रास्ते भी अब चौड़े हो गए थे ; जहाँ तक लण्ड जा सकता था ,एक ही बार में बिना कोशिश के घुस गया ! सच बोलूं तो मुझे ऐसा लगा कि जेठ जी ने ऊँगली की हो !लेकिन मैंने दीपक के लौड़े को अपने चूत में जाते ही एक चीख निकली ,जैसे मुझे बहुत दर्द हो रहा हो ! आज पहली बार मैं दीपक के ऊपर थी , और उसके लौड़े को अपने चूत में अंदर बाहर कर रही थी , जो पहले कभी नहीं हुआ ! दीपक ने पहले एक दो बार मुझसे ऊपर आने को कहा था ,पर मैं शर्मा के मना कर देती थी !दीपक के लिए सब कुछ नया अनुभव था,उत्तेजित भी बहुत ज्यादा लग रहे थे , पर ताज़्ज़ुब की बात ये थी की वो अभी तक स्खलित नहीं हुए थे !उनका ये जोश देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था , चूत से ज्यादा मज़ा उनको खुश देखकर आ रहा था ! दीपक ने अब मेरी कमर पकड़ ली थी ,और नीचे से धक्का देने की कोशिश कर रहे थे ! लेकिन वो खुलकर धक्का नहीं दे पा रहे थे , शायद झड़ जाने का डर लग रहा था !मैं भी बहुत बचा बचा कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी , और उसको ज्यादा से ज्यादा देर तक पानी निकालने से रोकना चाहती थी ! आज से कभी मैंने दीपक को इंतने ज्यादा समय तक चोदते अनुभव नहीं किया था, मेरे लिए ये बिलकुल नया अनुभव था ! मैंने जेठ जी की मेहरबानी का मन ही मन शुक्रिया अदा किया की उनके कारण मेरी चुदाई की मस्ती कई गुना बढ़ गई थी , नहीं तो शरमोशरम पूरी ज़िन्दगी बिना चुदे ही बीत जाती ! दिमाग में ये भी आता था की काश जेठ जी ने एक साल पहले ही मुझे चोद दिया होता , तो मैं एक साल पहले से मज़े ले रही होती ! दीपक मेरी पहली पसंद थे , अगर उनकी जिद न होती तो जेठ जी को मैं कभी पास फटकने नहीं देती , पर अब दोनों मुझे अच्छे लग रहे थे ! धक्के लगाते लगाते मैं सोच रही थी की जेठ जी को बुरा तो नहीं लगा होगा की मैं दीपक के साथ सोने चली आई ! दीपक अब हांफने लगे थे, हालाँकि चोद मैं रही थी पर उनमे जल्दी थकने की दिक्कत भी थी ! अब मैंने स्पीड बढ़ा दिया , दीपक को अच्छे से चूसने लगी ! दीपक अब पागलों जैसी हरकत करने लगे थे , कुछ बुदबुदा रहे थे , लेकिन स्पष्ट नहीं सुन पा रही थी ! मुझे लगा की शायद जोश में कुछ गन्दी बातें बोल रहें हैं,जो हमने पहले कभी एक दूसरे के सामने नहीं बोला ! मेरे मुंह से अचानक निकाल गया , जोर से दीपक , बहुत मज़ा आ रहा है , तुम्हारा लौड़ा बहुत हार्ड लग रहा है मेरी चूत में ,और चोदो ...और चोदो दीपक ! जोश में मैं शायद ज्यादा बोल गई , दीपक का गरम पानी अपने चूत में महसूस किया मैंने ! दीपक की पहुँच बहुत कम दूर तक ही थी ,क्योंकि जेठ जी ने अब टारगेट दूर कर दिया था ! जहाँ तक जेठ जी का लण्ड पहुँच जाता था , वहां तक तो किसी दूसरे का पहुंचना मुश्किल था , पर आज दीपक ने अपने जीवन की सबसे लम्बी दुरी नापी थी , और निढाल हो गए थे ! पानी छोड़ते ही दीपक का लौड़ा सिकुड़ गया था ,और फिसलकर मेरी चूत से बाहर आ गया था ! थोड़ा सा गरम पानी अब ठंढा होकर , उसकी जांघों पर गिरा था , जो मैंने अपनी नाइटी से पोछ दी ! दीपक के साथ ही बगल में मैं भी लेट गई ! आग तो भड़क उठी थी , पर दीपक के दमकल में उतना दम नहीं था की मेरी आग बुझा सके ! मैं छत की तरफ देख कर, सोचने लगी की अब क्या करूँ , आग कैसे बुझाऊँ ! एक ही उपाय था जेठ जी का, जो साथ वाले कमरे में लण्ड पकड़ कर बैठे होंगे , पिछले बारह दिनों में पहली बार मेरी चूत के बगैर उनको सोने के लिए जाना पड़ा था !मैं इसी उलझन में डूबी थी कि दीपक के खर्राटों से मेरा ध्यान भंग हो गया ! यात्रा की थकावट और ज़िन्दगी की सबसे मस्त चुदाई के कारण वो नींद में भी बहुत शांत और खुश लग रहे थे ! ऐसी चुदाई किसी को भी मिले तो सो के जागा आदमी फिर से सो जाए , और ये तो हर तरह से थक गए थे ! मैंने दीपक के ऊपर चादर डाला , और शर्म लिहाज़ को छोड़ , अपने चूत की प्यास बुझाने अपने दूसरे पति ,अपने जेठ जी के कमरे की तरफ चल पड़ी !


मैं लड़खड़ाते क़दमों से बिना किसी कपडे में जेठ जी के रूम में पहुंची ! जेठ का का रूम बंद नहीं था , हलकी रौशनी में वो बिस्तर पर आँख बंद किये चादर के अंदर लेटे थे ! लण्ड के पास की जगह ऊपर नीचे हो रही थी , हरकतों से लग रहा था कि शायद वो मुठ मर रहें हैं ! मैं बिना किसी आवाज़ किये उनके पास पहुंची . वो मेरा ही नाम बुदबुदा रहे थे और मुठ मार रहे थे ! मेरा जोश और भी दुगना हो गया था ! भैया मुझे पिछले १२ दिनों से दिन रात चोद रहे थे , आज एक रात मैं नहीं मिली तो मेरे नाम पर मुठ मार रहे हैं ! मैं जेठ जी को इतनी पसंद आई , मुझे पता नहीं था , लेकिन मैं उनके इस व्यवहार से बहुत खुश थी ! मैंने आहिस्ता से जेठ जी कि चादर खींच ली, जेठ जी बिलकुल नंगे लेटे थे , और हाथ में लण्ड लेकर ऊपर नीचे कर रहे थे ! मेरे चादर खींचते ही , उन्होंने अपनी आँखें खोल दी ! मुझे देखकर आश्चर्य और उलझन वाली नजर से देखने लगे ! मैंने बिना कोई समय गवाए उनके ऊपर आ गई और अपने आप को उनके लण्ड के ऊपर बिठा लिया ! तमतमाया लण्ड थोड़ी कठिनाई से मेरी चूत के अंदर घुसने लगा ! आज लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा था , फंस फंस के अंदर जा रहा था ! आज हमें चूमा चाटी, गरम होने और लण्ड खड़ा करने कि जरुरत नहीं थी , क्यूंकि मैं पहले से ही दीपक से चुदकर बुरी तरीके से गीली होकर आ रही थी , और भैया ने मुठ मारकर लण्ड को पूरे मस्त कर के बैठे थे ! हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई और चुदाई ज्यादा शुरू हो गई ! भैया ने नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए और लण्ड को उस मोकाम तक पहुँचाया जहाँ दीपक की पहुँच नहीं थी !सटा सट लण्ड गीली चूत के अंदर बाहर जा रहा था ! भैया को तो जैसे कोई बिछड़ी हुई चीज़ मिल गयी हो , ताबड़तोड़ शॉट लगा रहे थे ! जेठ जी ने करीब बीस मिनट तक मुझे घुड़सवारी कराइ , फिर मुझे बिस्तर पर घोड़ी बना दिया ! लण्ड को चूत के मुहाने रखकर सटाक से अंदर किया और घोडा दौड़ाने लगे ! मुझे लग रहा था की वाकई मैं किसी रेस में हिस्सा ले रही हूँ , सटाक ..सटाक..सटाक , जेठ जी का लण्ड मेरी चूत में दौड़ा चला जा रहा था , बीच बीच में मेरी गाँड को दोनों तरफ से थपकी दे रहे थे , जैसे घोड़े को चाबुक लगा रहे हों !भैया ने अब मेरी दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया था ,और बहुत बेदर्दी से मसल रहे थे और अपनी ओर खीच रहे थे ! जेठ जी जिस तरह से मेरी चूचियाँ मसल रहे थे , अगर १० दिन पहले मसला होता तो मैं चीख पड़ती , लेकिन अब तो मन करता था की और जोर से मसलें ! मज़ा आ जाता था जब वो दोनों घुंडियों को मसलते थे !मैं पूरी तरह से अब जेठ जी की गुलाम हो गई थी ! मर्द अगर सही ढंग से औरत को चोदे , तो औरत कभी भी मर्द को आँख नहीं दिखा सकती है ! चुदाई में जो मज़ा है , वो दुनिया में और किसी चीज़ में नहीं ! अगर कोई मुझे भैया की रखैल भी कहे तो मुझे परवाह नहीं , जो सुख भैया से मिल रहा था , वो कहीं और से नहीं मिला !
अब मेरी टाँगें जवाब दे रही थी , मैं गिरने की हालत में थी , भैया का लण्ड एक दो बार फिसला , तो भैया ने मुझे पूरी तरह लेटने को कहा , पर अपना लण्ड नहीं निकला ! अब भैया मेरे ऊपर लेटे थे , और चूत में लण्ड पेल रहे थे ! दूर से कोई देखता तो लगता की गाँड मार रहे हैं !मेरी चूत के नीचे तकिया था जो अब पूरा गीला हो रहा था , जिससे मेरी जाँघों में लसलसाहट सी होने लगी थी !जेठ जी का लण्ड आज रुकने का नाम नहीं ले रहा था, बाहर अंदर इतनी तेजी से हो रहा था कि कमरा फच्च फच्च की आवाज़ से गूँज रहा था ! मेरी साँसे अब उखाड़ने लगी थी , ऊपर से भैया का बोझ ! जेठ जी का हाथ मेरी दोनों चुचिओं को अपने कब्जे में कर रखा था , और चूत में लण्ड सरपट दौड़ रहा था ! मेरी गांड पर बार बार भैया का झटका लग रहा था जिससे मेरी गुन्दाज़ गोल गोल गाँड उछल जाती थी , जिसकी थिरकन अगले चोट तक रहती थी !मुझे लगा शायद भैया मेरी गाँड भी मारेंगे, लेकिन चूत की ठुकाई ज्यादा हो जाने के कारण भैया अब छूटने वाले थे ! मैं तो दो तीन बार झड़ कर तकिये को पूरी तरह गीला कर चुकी थी ,भैया ने भी मेरी चूत में पानी की बौछाड़ कर दी ! आज भैया कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रहे थे , पांच छह झटकों में उन्होंने अपने लण्ड की एक एक बून्द मेरी चूत में निचोड़ी और मेरे ऊपर निढाल हो गए ! मैं भी काफी देर तक यूँ ही लेटी रही, लेकिन भैया का बोझ सह नहीं पा रही थी ,इसलिए कसमसा रही थी ! भैया समझ गए , पुच्च से लण्ड बाहर निकाला और मेरे बगल में लेट गए !मैंने भी पलट कर अपने आप को सीधा किया और एक टांग को भैया के टांग पर रखकर अपनी साँसों पर काबू करने लगी ! ज्यादा देर तक मैं नहीं रुक सकती थी , मुझे वापस दीपक के साथ वापस अपने बिस्तर पर जाना था !भैया को मैंने खूब चूमा ,फिर बोली ,"भैया जा रही हूँ" ! भैया ने मुंह से कुछ नहीं बोला , बस मुस्करा कर प्यार से मेरी चुम्मियों का जवाब दिया और इशारे से जाने को बोला ! मैंने चादर में अपने चूत से बह रहे पानी को पोछा, और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी ! मैं चौंक गई ये देखकर की भैया के रूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था,जबकि मुझे अच्छी तरह याद था की मैंने इसे अच्छी तरह लगाया था , क्योंकि मैं नहीं चाहती थी, कि दीपक के कमरे तक आवाज़ पहुंचे ! दरवाज़े से बाहर निकलते ही मुझे अपने पैरों में गीलापन लगा , झुक कर देखा तो ,वीर्य जैसी बूँदें थी ! अपने कमरे में आकर देखा दीपक हलकी हलकी खर्राटे ले रहे हैं ! मैंने अपने बिस्तर पर रखे नाइटी को उठा कर पहन लिया, अंदर तो कुछ पहना था नहीं , पेट के पास गीलापन महसूस हुआ, सूंघ कर देखा तो वीर्य जैसी ही खुशबू थी ! मैं आश्चर्य में पड़ गई ,दीपक और जेठ जी के अलावा यहाँ कोई भी नहीं है !मैं और जेठ जी करीब दो घंटे से चुदाई कर रहे थे , और मैं अच्छी तरह से खुद को पोछ कर आई थी जेठ जी के कमरे से ! अगर ये गीलापन मेरे और दीपक कि चुदाई का होता तो अब तक सूख चुका होता ! तो क्या दरवाज़े पर और मेरी नाइटी पर दीपक का ताज़ा वीर्य था ! कहीं दीपक ने दरवाज़े पर खड़े होकर मेरे और जेठजी कि चुदाई को तो नहीं देखा ? और फिर दीपक हमारी चुदाई को देखकर मुठ तो नहीं मार रहे थे ! छोटा भाई अपनी बीवी की चुदाई अपने बड़े भाई के साथ देखकर मुठ मारे, ये बात मुझे हज़म नहीं हो रही थी ! एक अजीब सी सिहरन मेरे पूरे बदन में फ़ैल गई , मैं सोच में डूब गई कि अब आगे क्या होने कि संभावना हो सकती है ! जेठ जी को दो दिन के बाद गावं वापस लौटना है , पता नहीं मेरी किस्मत में अब आगे क्या लिखा है !

रात की बात सोचते सोचते कब नींद आ गई , पता नहीं चला की क्या दीपक ने मुझे जेठ जी के साथ चुदाई करते देखा था ! मैं सुबह उठकर चाय लेकर भैया के पास गई , भैया जाग चुके थे ! मैंने रात की बात भैया को बताई , भैया सोच में पड़ गए , कहा कि मैं देखता हूँ !उसके बाद चाय के साथ मैंने दीपक को उठाया , मुस्कराते हुए उठते हुए उसने मुझे बाँहों में लेकर किस किया और और अपने ऊपर खींच लिया ! मैं दीपक के ऊपर लेटी थी और हम दोनों किस कर रहे थे , धीरे धीरे मैंने अपने चूत के ऊपर दीपक के लौड़े को अनुभव किया जो अब खड़ा हो रहा था ! दीपक में अचानक आये बदलाव से मैं खुश थी , पहले ऐसा नहीं होता था , एक बार चुदाई के बाद हम हफ्ते तक दूर ही रहते थे ! अभी चुदाई का वक़्त नहीं था, दीपक को दफ़्तर भी जाना था , और अधूरी चुदाई के बाद मुझे चैन नहीं आता , सो मैंने दूर होना ही ठीक समझा और दीपक को जोरदार किस के साथ अलग होकर घर के काम में लग गई ! भैया और दीपक अपनी अपनी चाय लेकर गार्डन में बैठ कर बातें करने लगे ! पता नहीं दोनों क्या बातें कर रहे थे , मेरे वहां जाते ही बात बदल देते थे !
दीपक के दफ्तर जाते ही मैं जेठ जी के कमरे में आ गई , वो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे ! बिस्तर पर उनकी बाँहों में घुस कर मैंने चुम्मियों कि बौछार कर दी ! थोड़ी देर कि चुम्मा चाटी के बाद हम बातें करने लगे ! भैया के हाथ मेरी ब्लाउज के अंदर घुसे हुए थे और मेरी चूचियों से खेल रहे थे !
भैया : तुम्हारा शक सही था ,वो दीपक ही था !
मैं : क्या ? मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी , दीपक ने मुझे जेठ जी के साथ चुदाई करते हुए देखा था !
भैया : देखो , उसके अंदर अब बहुत चेंज आ रहा है , वो जल्दी ठीक हो जायेगा ! एक घंटे के अंदर उसने दो बार अपने लण्ड से पानी निकाला, इसका मतलब है कि वो अब शारीरिक रूप से बिलकुल फिट है , सिर्फ तुम साथ दो तो वो बिलकुल नार्मल हो जायेगा !
मैं : वो कैसे ? मैं क्या कर सकती हूँ ? आप बताइये , दीपक के लिए तो मैं जान भी दे सकती हूँ !
भैया : देखो , तुमको किसी और से चुदते देखकर उसमे बहुत उत्तेजना आ जाती है , और उसको मज़ा आता है ! अब हमें करना ये है कि उसके सामने चुदाई करनी है , और जहाँ तक हो सके उसको भी अपनी चुदाई में शामिल करना है !
मैं : ये कैसे हो सकता है , मैं ये नहीं कर सकती !
भैया : देखो सोनी , मेरी उम्र अब ढल रही है , और मैं यहाँ रहता भी नहीं ! तुम्हें अब चुदाई कि आदत पड़ गई है , अपना पति ही ठीक कर लो,नहीं तो इधर उधर मुंह मारोगी !
मैं सोच में डूब गई, क्या मैं ऐसा कर पाउंगी ? अकेले अकेले तो मैं दोनों भाई से चुदवा लेती हूँ पर क्या इकट्ठे चुदवा पाउंगी ! पर मैंने सोच लिया कि चाहे जो हो जाये अब मुझे अपने पति को ठीक करना है ! बातों बातों में भैया मेरी ब्लाउज उतार चुके थे , और साड़ी भी ! पैन्टी और ब्रा मैंने पहनी नहीं थी , सिर्फ पेटीकोट में रह गई ! भैया पेटीकोट उठा कर मेरी चूत में मुंह मारने लगे ! पहले से गीली चूत को चाट चाट के साफ़ किया और चूत कि परतें खोल खोल के जीभ को अमृत पान कराने लगे ! चूत चाटते हुए भी वो मेरी चूचियों को मसलना नहीं भूले थे , और लगातार मसल मसल कर चूचियों को लाल कर दिया था ! मैं भैया के लंडपान को तरस रही थी , भैया ने मेरी इच्छा समझते हुए 69 कि मुद्रा ली और लण्ड मेरे मुंह में ठूंस दिया ! उधर भैया मेरे चूत को चाट और चूस रहे थे और मैं लण्ड को मुंह में ऊपर नीचे कर रही थी !कभी उनके पूरे बदन को सहलाती और कभी उनके गोलियों को सहलाती और मुंह में भी लेती ! एक बार में एक गोली मुंह में मुस्किल से आती थी , मैं गोलियों को चाट चाट कर साफ़ कर रही थी ! कमरे में पुच्छ पुच्छ कि आवाज़ गूंज रही थी , हम बिलकुल मस्त हो गए थे ! हमें आधे घंटे से ऊपर हो गया था लण्ड और चूत चूसते चुसवाते ! अब भैया लेट गए और मुझे लण्ड पर बैठने को कहा !मैं धीरे धीरे लण्ड को चूत के अंदर लेती रही और भैया भी हल्का हल्का धक्का लगाकर चूत को अंदर तक हिला दिया ! हलके धक्के से शुरुआत हुई , मैंने भैया को चोदना शुरू कर दिया !थोड़ी ही देर में लण्ड चूत में बिना किसी रुकावट के सटा सट जाने लगा ! मैंने स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी , भैया चुप चाप लेट कर मेरी चुचियो को मसल रहे थे और घुंडियों को भी बेदर्दी से मसल रहे थे !लगातार चोदते हुए और अपनी स्पीड बढ़ाते बढ़ाते मेरा जोश अब जवाब दे रहा था और मैं हांफने लगी थी ! तभी बिस्तर के कोने में रखा मेरा मोबाइल बज उठा ! हम डिस्टर्ब नहीं होना चाहते थे इसलिए भैया के लण्ड पर धक्का लगाते लगाते , कॉल काटने के लिए मैंने मोबाइल उठाया ! नाम देखते ही मेरे होश उड़ गए , मेरे बड़े भाई राहुल का फ़ोन आ रहा था लंदन से ! मैंने जेठ जी को बताया , भैया ने फ़ोन उठाने को कहा ! मैंने अब धक्का लगाना बंद कर दिया था , और फ़ोन उठा कर हेलो कहा ! जेठ जी ने नीचे से धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया !
राहुल :कैसो हो सोनिया बहन ?
मैं : ठीक हूँ , आप कैसे हैं , कैसे फ़ोन किया इतने दिनों बाद ?
राहुल : मैं ठीक हूँ , तुम हांफ क्यों रही हो ?
मैं : वो ..वो...सीढ़ियां चढ़ रही हूँ , लिफ्ट ख़राब है !
राहुल : अच्छा , एक खुशखबरी है , मैं कल दस दिनों के लिए दिल्ली आ रहा हूँ ,कंपनी का काम है !
मैं : अरे वाह ये तो बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी दी आपने, मज़ा आ जायेगा, भाभी को भी ल रहें हैं ना !
राहुल : नहीं बहन , ऑफिस का टूर है ! चलो फिर आ के बात करते हैं , बाय !
मैं : बाय राहुल !
मुझे बड़ा अजीब लग रहा था भाई से बात करते करते ! कैसे बताती कि जेठ जी से चुद रही हूँ , इसलिए हांफ रही हूँ ! जेठ जी ने हमारी बातों के दौरान भी मेरी चूत में धक्के लगाने जारी रखे , और मुझे मसलते भी रहे !मुझे उलझन में देख जेठ जी ने मुझे अपने ऊपर झुका लिया और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगे ! मैं भी अपने भाई को भूल कर , पति के भाई के साथ चुदाई में डूब गई ! अब हमारे बीच कम्पटीशन चल रहा था ! भैया दो धक्के लगाते तो मैं वापस दो धक्के लगाती ! भैया तीन तो मैं तीन वापस करती ! ताल से ताल मिला मिला कर चुदाई को हमने संगीतमय बना दिया था ! हम दोनों ही थक चुके थे , भैया की पकड़ से लग रहा था कि अब वो छूटने वालें हैं , मैं भी चुदाई करते करते ठीक से भइया के ऊपर लेट गई ! भाई ने अपने को पूरा कंट्रोल किया और मुझको बाँहों में जकड़ते जकड़ते उलट गए ! अब मैं नीचे थी और वो ऊपर थे ! उसके बाद तो भैया अपना पूरा जोर लगाकर लण्ड 100 कि स्पीड में भगा दिया , बिना किसी ब्रेक के ! आज लगता था कि भैया मेरी गांड के रास्ते लण्ड बहार निकाल देंगे , क्योंकि वो चोद तो मेरी चूत रहे थे और दर्द गांड में होने लगी थी ! सटा सट लण्ड पेलते हुए जेठ जी ने एक झटका लिया और उनके लण्ड ने मेरी चूत में उलटी कर दी !गरम वीर्य के धार बच्चेदानी तक पहुँच रही थी , मैं भी इस चुदाई कि आखिरी पिचकारी भैया के लण्ड पर मार कर जवाब दे रही थी !चूत के अंदर भारीपन आ रहा था , भैया ने लबालब भर दिया था, मेरी चूत को अपने वीर्य से ! हममें अब बात करने या कुछ और करने की ताक़त नहीं बची थी ! भैया ने सात आठ बार झटके देकर अपने लण्ड से वीर्य की एक एक बूँद निचोड़ दी और हम दोनों निढाल होकर एक दूसरे कि बाँहों में सो गए !

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Saturday, November 22, 2014

FUN-MAZA-MASTI जेठ जी के अहसान --8

FUN-MAZA-MASTI

 जेठ जी के अहसान --8                              

 दीपक के अमेरिका से वापस आने में अब सिर्फ दो दिन रह गए थे , पिछले दस दिन की चुदाई में जेठ जी ने मेरी चूत अच्छी तरह खोल कर रख दी थी ! अब तो आराम से उनका मूसल लण्ड मेरी चूत में तैर जाता था , दर्द का अहसास भी अब दो मिनट का ही रह गया था, उसके बाद तो मज़ा ही मज़ा आता था ! आज सुबह घर का काम निबटने के बाद मैं जेठ जी से बातें कर रही थी , चाय की चुस्की के साथ , गावं की बातों का दौर चल पड़ा !
मैं : भैया , आपके बारे ये सुना है की आप की देख रेख में हमेशा नार्मल डिलीवरी होती है बच्चे की !
भैया : देखो सोनी , आज कल के लड़के ठीक से सेक्स नहीं कर पाते ! कम उम्र में ही फ़ास्ट फ़ूड , ब्लू फिल्म , मुठ मारना और कई गलत चीज़ों के कारण उनके लण्ड में उतना दम नहीं रह जाता ! औरत की चूत कुंवारेपन में बिलकुल टाइट होती है , जो असली मर्द चोद चोद के ढीला करता है ! या यूँ कहो की रास्ता चौड़ी करता है , क्योंकि उसी रस्ते से बच्चे को बाहर आना होता है ! अब अगर रास्ता ही पतला रह जाय तो इतना बड़ा बच्चा कैसे बाहर निकलेगा , इसलिए उसको पेट काटकर निकाल लिया जाता है !
मैं : अच्छा , मतलब आप सिर्फ अपना वीर्य ही अंदर नहीं डालते ,चूत का रास्ता भी बनाते हैं ! तो क्या आपने गावँ की सभी औरतों को कई बार चोदा है !
भैया : सबको नहीं , पर ज्यादातर को ! लेकिन जिसने भी मुझसे अपनी चूत चौड़ी नहीं करवाई , उसको ऑपरेशन करवाना पड़ा ! अब तो सभी लगातार आती है, अपनी अपनी चौड़ी कराने! हफ्ते में एक या दो बार भी मुझसे चुद जाये , तो बच्चा नार्मल ही होता है !
मैं : क्या बात है भैया , जब भी आपका मन करता होगा , आप बुला लेते होंगे !
भैया : नहीं ऐसी बात नहीं , मैं बस बता देता हूँ की अगली डोज़ कब लेनी है , पर मैंने कभी किसी को भी अपने इच्छा से नहीं बुलाया ! और फिर घर पर दो नर्सें भी तो है , उनका भी ख्याल रखना पड़ता है मुझे , आखिर वो भी इसी सुख के लिए मेरे साथ जुडी हुई हैं !
मैं : भैया , आपमें इतनी ताक़त कहाँ से आती है ? मैं थक जाती हूँ पर आप नहीं थकते !
भैया : मैं अपने शरीर का पूरा ध्यान रखता हूँ , पौष्टिक भोजन , वर्जिश और बादाम के तेल से मालिश करता हूँ !
मैं : लेकिन भैया यहाँ तो आपने कभी मालिश नहीं की ! आइये आज मैं आपकी मालिश करती हूँ !
भैया : ठीक है , फिर तेल लेकर आ जाओ !
मैं तेल लेने घर में चली गई ! भैया ने छत पर पड़े गद्दे को ठीक किया , एक पुरानी चादर डाल दी और पूरे नंगे होकर लेट गए !मैंने भी अपनी ब्रा और पैन्टी उत्तर दी और भइया के पीठ पर बैठ के , बादाम का तेल चुपड़ के अपने नाजुक हाथों से तेल लगाकर मालिश करने लगी ! थोड़ी देर बाद भैया पलट गए और मैं उनके लण्ड पर बैठ गई,और छाती और पैर वगैरह पर तेल लगाकर मालिश कर दी ! अब लण्ड की बारी थी , मैं भैया के पेट पर उनकी तरफ पीठ करके बैठ गई , लण्ड पर बहुत सारा तेल डालकर उसको मालिश करने लगी , अब भैया हरकत में आ रहे थे ! वो दीवार के सहारे आधे बैठे और आधे लेटे मुद्रा में थे ! भैया ने भी थोड़ा तेल लेकर मेरे पीठ पर लगाया , और पूरे पीठ और चूची तक सहलाने लगे ! मुझे अपने तरफ घुमा कर मुझे चूमने लगे , मुंह में जीभ डालकर चूसने लगे ! मैं समझ गई चुदाई होने ही वाली है !भैया बार बार तेल लेकर मेरे पीठ से ऊँगली को फिसलकर मेरे गाँड के छेद तक ले जाते और बचा हुआ तेल गाँड में घुसा देते और ऊँगली से अंदर तक पहुंचाते! मुझे उनके इरादे ठीक नहीं लग रहे थे , बड़ा अजीब सा लग रहा था ! चूमने चूसने की होड़ सी लग गई थी , मेरे और भैया के बीच , कोई एक दूसरे से पीछे नहीं रहना चाहता था , मैं गाँड उचका कर उनको चूमती और वो तेल से डूबी ऊँगली मेरी गाँड में घुसा देते ! एक हाथ से मेरी चूचियों का मसलना भी जारी था , अब भैया जोर की भी मसल देते थे ! पिछले दस दिनों में चूचियाँ भी साइज़ में बड़ी और थोड़ी ढीली हो गई थी ! मेरी चूत से लीकेज चालू था , चूमा चाटी के बीच ही भैया के लण्ड ने मेरी चूत में प्रवेश कर लिया था , मेरा मन थोड़ा हल्का हुआ , पर गाँड का डर अभी गया नहीं था क्योंकि भैया बार बार ऊँगली तेल में डुबोते थे और गाँड में घुसा देते थे ! गाँड का दर्द बढ़ गया था , भैया ने शायद ऊँगली बदल दी थी , छोटी ऊँगली की जगह अब मोटी वाली ऊँगली अंदर बाहर हो रही थी ! मुझे ऐसा लग रहा था की मेरी चूत कोई और लण्ड से चोदी जा रही है , और गाँड किसी और लण्ड से मारी जा रही है !
भैया को जल्दी नहीं होती थी चूत चोदने में, आराम से मेरी चूत चोदे जा रहे थे और गाँड में ऊँगली भी लगातार हो रही थी ! मैं भैया के ऊपर लेटी थी, थकावट सी होने लगी और मैं उनके सीने से चिपकने लगी ! अब भैया अपने दोनों हाथों से मेरी गाँड थामे थे ,और अपने लण्ड के ऊपर नीचे कर रहे थे , साथ में उनकी ऊँगली भी मेरी गाँड में आ जा रही थी ! मैं अब उनसे चिपक सी गयी थी अपने ऊपर वाले हिस्से से , भैया का लण्ड आराम से अंदर बाहर हो रहा था ! तेल की चिकनाहट से लण्ड बिलकुल आसानी से आ जा रहा था , भैया बीच बीच में लण्ड पूरा बाहर निकलते और दुबारा घुसा देते !
सब कुछ बड़े आराम से चल रहा था , की एकाएक भैया ने अपना लण्ड निकला , बहुत सारा तेल लण्ड पर डाला और ऊँगली को मेरे गाँड से निकाल कर , अपने लण्ड को गाँड में डाल दिया ! जेठ जी का सुपाड़ा अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गई , सुपाड़ा ने मेरी गाँड निश्चित रूप से फाड़ दी होगी , मुझे ऐसा ही लग रहा था ! इतना तेल डालने के बाद भी गाँड में लण्ड फंस गया था , मेरे नाख़ून भैया के पीठ में चुभे होंगे , इतनी ज़ोर से मैंने दर्द सहा था ! लण्ड को हिलता डुलता न देख भैया थोड़ी देर के लिए शांत हो गए , और मेरे होंठों को चूसने लगे ! थोड़ी देर बाद दर्द थोड़ा काम होने लगा , और लण्ड की पकड़ थोड़ी ढीली सी लगी, यानी मेरी गाँड ने अब समझौता कर लिया था ,नए मेहमान से ! भैया मुझे गोद में लेकर उठ गए, थोड़ी चहलकदमी की , और वापस बिस्तर पर आ गए ! ये मेरी सोच से बाहर था की गाँड में लण्ड डालकर कोई टहल भी सकता है ! गद्दे पर मुझे डालकर , भैया ऊपर आ गए ! मैंने झुक कर देखा अभी आधा से ज्यादा लण्ड बाहर था , भैया से रिक्वेस्ट भी की कि फिर कभी , पर भैया ने अनसुनी कर दी ! भैया ने अब बचा हुआ तेल अपने लण्ड के ऊपर डाला , बिलकुल मेरे गाँड के जड़ में ! मैं तेल को अपने गाँड में रिसता महसूस कर रही थी ,और लण्ड भी धीरे धीरे अंदर जा रहा था ! भैया ने मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी , धीरे धीरे अब आराम आने लगा था ! मेरे लिए चूत से ज्यादा दर्द गाँड मराने में हुआ था , अब मैं हर तरह से जेठ जी से चुद गई थी , जेठ जी ने चूत का सील तोड़ने के बाद अब गाँड पर भी अपनी मुहर लगा दी थी ! करीब दस मिनट तक गाँड मारने के बाद जेठ जी ने लण्ड निकल लिया और वापस चूत को दिखाया ! चूत ने बड़े प्यार से पुच्छ कि आवाज़ के साथ लण्ड का स्वागत किया ! अब तो हमारे बीच होड़ लग गई ! मैं भी गाँड का दर्द भूलकर चूत उछालने लगी ! घपा घप लण्ड अंदर बाहर हो रहा था और हम दोनों ही एक साथ पुरे जोर से कांपे और अपना अपना पानी चूत में जमा करने लगे ! इस लाजवाब चुदाई और गाँड मराई के बाद हम निढाल होकर गिर पड़े !




 आज दोपहर को दीपक अमेरिका से वापस आ रहे थे ! सुबह जल्दी उठकर मैंने घर का सारा काम निबटाया ! भैया के वीर्य से लथपथ चादर और कपडे धुलने के लिए मशीन में लगा दिया ! रात की चुदाई से अभी तक बदन दुःख रहा था ! मैं सोच सोच कर दुखी हुई जा रही थी ,कि अब दीपक के घर में रहते भैया से कैसे चुद पाउंगी, और फिर भैया को गावं भी तो वापस जाना था ! कैसे सामना करुँगी मैं दीपक का , दो दो मर्द एक साथ एक ही घर में एक ही औरत के साथ कैसे निभा पाएंगे ! मुझे शर्म भी बहुत आ रही थी क्योंकि भैया ने दीपक की याद मुझे भुला सी दी थी ! मैं भैया के साथ चुदाई में इतना खो जाती थी कि दीपक का जब जिक्र होता था , तभी याद आते थे ! मैं रात में किसके साथ सोउंगी , इसकी उलझन सब से ज्यादा हो रही थी ! भैया के लिए चाय लेकर मैं उनको जगाने आ गई , भैया ने चाय टेबल पर रखकर मुझे बिस्तर पर खींच लिया !पहले तो जम कर चुम्मी ली और चूचियाँ दबाई , और फिर मुझे अपनी गोद में बिठाकर चाय पीने लगे ! मुंह में चाय की आखिरी चुस्की भरकर,भैया ने मेरे मुंह में डाल दी,और मुझे बेतहाशा चूमने लगे ! शायद उनको भी लग रहा था कि अब कुछ पता नहीं कब हो चुदाई ! भैया ने जब होंठ अलग किये तो मैंने पूछा कि अब क्या होगा ? अब हम कैसे चुदाई कर पाएंगे ? मैं आपके बगैर नहीं रह सकती , मेरी आँखें डबडबा गई ! भैया ने मेरे आंसू चूम लिए और बोले ," देखो मेरी जान , अलग तो मैं भी नहीं रह सकता ,हमें दीपक के आदेश का इंतज़ार करना पड़ेगा ! वैसे भी दीपक ने हमें जुदा होने के लिए थोड़े ही न मिलाया है !" मैं जेठ जी के आगोश में खो गई ! जेठ जी चुदाई को उतावले हो रहे थे , पर मैंने हाथ मुंह धोने को कह दिया और वापस काम में जुट गई !मेरी ब्रा जेठ जी उतार चुके थे , सिर्फ पैन्टी में मैं घर के काम निबटा रही थी ! जेठ जी ने बाथरूम से आवाज़ दी ,और तौलिया लाने को कहा ! बाथरूम का दरवाज़ा खुला था , मैं अंदर तौलिया देने चली गई , जेठ जी नंगे होकर पूरा लण्ड खड़ा कर के नहा रहे थे , मुझे पकड़ के अपनी बाँहों में खींच लिया ! मेरे कुछ बोलने से पहले ही जेठ जी ने अपने हाथ मेरे बदन पे फिसलने शुरू कर दिए ! शावर का पानी हम पर बरस रहा था ,और जेठ जी का लण्ड पुरे जोश के साथ मेरे पेट से रगड़ खा रहा था ! मेरी चूचियों को वो जोर जोर से मसल रहे थे , मानो अपने उँगलियों के दाग छुड़ा रहे हों ! होंठ से होंठ ऐसे चिपक गए थे कि जैसे अब अलग होंगे ही नहीं! मैं भी पूरी मस्ती में आ गई थी , जेठ जी का साथ दिल खोल के दे रही थी !जेठ जी ने मुझे अब बेशर्म कर दिया था , बातों के साथ साथ अब मेरी हरकतें भी सेक्सी हो गई थी ! जेठ जी का लण्ड तो मैं पकड़ के ही रखती थी ! इन बारह दिनों में ज्यादातर समय तो जेठ जी का लण्ड मेरी चूत में ही रहा था , जब बाहर भी होता था, तो मैं उनसे चिपकी ही होती थी!
जेठ जी अब बहुत बेताब लग रहे थे , मुझे दीवार की तरफ घुमा के थोड़ा झुकाया , और लण्ड को चूत में सरका दिया, अंदर से तो चूत गीली ही थी , पानी से भीगा लण्ड लसफसाते हुए अंदर चूत दीवार को रगड़ते हुए छलाँगें मारने लगा ! मैं दीवार पर हाथ रखकर अपने आप को सम्हालने कि कोशिश कर रही थी ! जेठ जी ने एक हाथ से मेरी कमर सम्हाल राखी थी और दूसरे हाथ से चूचियों को मसल रहे थे ! ऊपर से शावर का पानी गिर रहा था ,और चूत से रस टपक रहा था और बाथरूम के फर्श को चिकना कर रहा था ! भैया पूरे जोश के साथ चोद रहे थे , लगता था कि आज अगले एक हफ्ते की कसर निकाल लेंगे !भैया ने करीब आधे घंटे तक मुझे उलट पलट के जम के चोदा ! चुदाई का तूफान अब थमता सा दिख रहा था , भैया ने मुझे अपनी बाँहों में जकड लिया और रस की पिचकारी से मेरी चूत की दीवारों की पुताई करने लगे ! हम दोनों ही दो मिनट तक ऐसे ही साँसों पर काबू करते रहे ,फिर अच्छी तरह से चूत और लण्ड की सफाई कर के बाथरूम से बाहर आ गए ! मैंने बैडरूम में आकर भैया के हाथों ब्रा, पैन्टी, पेटीकोट और साडी पहनी ,और हल्का मेकअप भी कर लिया ! भैया भी अब पजामा कुर्ता में तैयार हो गए थे ! बैडरूम और घर को पूरा ठीक ठाक करने के बाद जैसे ही हम ड्राइंग रूम में आकर बैठे , हमारी कॉल बेल बज उठी.








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FUN-MAZA-MASTI जेठ जी के अहसान --7

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 जेठ जी के अहसान --7                     

चेहरे पर धूप का अहसास हुआ , तो नींद खुली ! हम दोनों अस्त व्यस्त हालत में बिस्तर पर थे !बिस्तर की हालत बता रही थी की कल रात यहाँ घमासान चुदाई का आयोजन था ! सबसे पहले मैंने चादर से अपने चूत और आसपास के वीर्य के थक्कों को पोछा , फिर वही चादर भैया के लण्ड के ऊपर डाल दी , क्योंकि लण्ड पर नज़र पड़ते ही मुझे खुजली होने लगी थी ! अपनी नाईट ड्रेस पहनकर मैंने आसपास बिखरे हुए खाने पीने का सामान को समेटा और किचन चाय बनाने चली गई ! नौकरानी को छुट्टी दे रखी थी , इसलिए घर का काम खुद ही निबटाना था ! चाय लेकर आई तो भैया उठ चुके थे , और अपना लण्ड और आसपास लगे वीर्य और चूत के पानी के मिक्स को हटा रहे थे !भैया के साथ मैं भी बैठ गई , भैया ने चाय बगल में रखकर मुझे अपनी तरफ खींचा और एक लम्बा सा गुड मॉर्निंग किस किया , चूचियों को भी प्यार किया ! मैंने उनको आगे बढ़ने से रोक दिया ,क्यूंकि घर का काम निबटाना जरुरी था ! हर चुदाई में चादर और जिस किसी कपडे से हम चुदाई के बाद अपना ढेर सारा वीर्य पोछते थे , उनको धोना जरुरी था , नौकरानी से मैं नहीं धुलवाना चाहती थी !चाय पीकर मैं घर के काम में जुट गई !
जेठ जी फ्रेश होकर वापस गार्डन में ही आकर बैठ गए ! मैं भी नहा धोकर , नास्ता लेकर गार्डन में आ गई !हमने आराम से नास्ता किया , मैंने ब्रा और पॅंटी पहन रखी थी , और जेठ जी सिर्फ अंडरवियर में थे ! हलकी गुनगुनी धूप , बादल से आँख मिचोली कर रही थी, लगता था थोड़ी देर में बारिश होगी !हम बातें करने लगे, मुझे कल की अधूरी बातें याद आ रही थी ! मैंने पूछा .....
मैं : भैया आप चंपा के साथ चुदाई को कैसे राज़ी हुए ?
भैया : दीपक को जब पता चला कि कमल बाप बनने के काबिल नहीं है , तो वो मुझसे जिद करने लगा कि मैं जैसे भी हो , चंपा को गर्भवती बनाऊ ! मैंने दीपक को खुद इसके लिए राज़ी किया , पर जब वो भी नाकामयाब रहा तो , मैं मुश्किल में पड़ गया !
मैं : इसका मतलब कि दीपक ने चंपा के साथ सेक्स किया था !
भैया : कोशिश की थी पर जब वो एक साल में तुम्हारी सील नहीं तोड़ पाया , तो उसकी क्या तोड़ता , बाहर ही पानी निकल जाता होगा !
मैं : चलो जो भी हो , मेरा मन अब हल्का हो जायेगा , मै आपसे रिश्ता बनाकर खुद को दोषी मानती थी पर अब हिसाब बराबर !आगे क्या हुआ भैया ?
भैया : चंपा मेरे छोटे भाई बेस्ट फ्रेंड कमल की पत्नी थी , इस नाते वो मेरे छोटे भाई की पत्नी जैसा ही थी , इसी वज़ह से मैंने उसका चेक अप भी नहीं किया था ! एक दिन अचानक रात को कमल का फ़ोन आया की चंपा के पेट में बहुत दर्द हो रहा है ! मैं दवा बताकर टालने वाला था कि दीपक का फ़ोन आया कि कमल चंपा को लेकर क्लिनिक आ रहा है , आप देख लीजिये ! एक डाक्टर के नाते भी मेरा फ़र्ज़ था , मैं क्लिनिक आ गया ! चंपा को देखकर मैं हैरान हो गया , इतनी सुन्दर थी वो ! एक मिनट के लिए तो मेरा ईमान डोल गया , ऐसी औरत मैंने सपने में भी नहीं सोची या देखी थी !गोरी चिट्टी , सुडौल , किसी महान चित्रकार कि रचना कि तरह नाक नक्श , किसी का भी ईमान डोल जाये उसको देखकर !
मैं : हाँ , सो तो है भैया , वो आज भी किसी को भी पागल कर सकती हैं , मैं तो उसके सामने कुछ भी नहीं !
भैया : मैं उससे पूछने लगा दर्द की बारे, वो शर्मीली बिलकुल नहीं थी , उसने बताया की कमल ने धोखे से आपसे सम्बन्ध बनाने के लिए मुझे यहाँ तक ले के आया है ! मैं गुस्से से कमल को डांटने बाहर निकला, तो देखा दरवाज़ा बाहर से बंद था ! कमल और दीपक दोनों के मोबाइल बंद थे , यानि उन्होंने मेरे साथ साज़िश की थी ! मैं किसी और को आवाज़ देता तो मेरे बदनामी से ज्यादा चंपा की बदनामी हो जाती ! चंपा रोने लगी थी , मैं उसको चुप कराने लगा , उसने मेरे पैर पकड़ लिए , बोली भाई साहब , आप बस मुझे एक बार माँ बना दीजिये, इस रिश्ते से जो भी पाप होगा ,वो मैं भगवान से कहूँगी की मुझे सजा दे ! मैंने उसको कंधे से पकड़ कर उठाया , और उसके चेहरे को अपने हाथ में ले लिया !उसके होंठ काँप रहे थे , थर्राते होठों पर मैंने अपनी मुहर लगा दी , और चुदाई कर डाली !
मैं : ऐसे नहीं भैया , कैसे चुदाई की पूरी बात बताइये
(मैं अंदर से पूरी गीली हो गई थी , भैया की बातें सुनकर ! भैया भी गरम हो गए थे , चंपा से पहली चुदाई उनको याद आ गई थी , मैं जेठ जी का लण्ड अंडरवियर से बाहर निकाल कर सहला रही थी , जो अब तनता जा रहा था ! वो भी अपने दोनों हाथों को मेरी ब्रा के ऊपर से मेरी चूचियाँ मसल रहे थे, मानो मेरी नहीं चंपा की चूची मसल रहें हों !)
भैया : ठीक है सुनो ! मैंने चंपा को पेसेंट वाले बेड पर लिटा दिया , और खुद भी लेट गया ! उसकी छाती से आँचल हटा दिया , और उभारों पे हाथ फिराने लगा ! कांपते हाथों से ब्लाउज का एक एक हुक खोलकर जैसे ही ब्लाउज हटाया , बिना ब्रा की चूचियाँ तन कर खड़ी थी ! मेरी जीभ लगते ही जैसे चंपा को करंट लगा हो , कांपने लगी ! मैंने प्यार से उसके चूची को चूसने लगा , जितनी बार मैं उसकी घुंडी को मुंह में दांत से काटता,वो सीत्कार मारती , पांच मिनट में ही वो बुरी तरह चुदाई के लिए तड़पने लगी थी ! ब्लाउज को पूरा उतारकर मैंने उसकी साड़ी भी उतार दी ! पेटीकोट को उठकर मैंने उसकी चूत देखी ,एकदम मक्खन ! चंपा की जितनी सुन्दर उसकी सूरत है, उसकी चूत और चूची उससे भी खूबसूरत है ! बिलकुल पाव सी फूली हुई चूत मेरे सामने थी , अनचुदी ! दो दो जवान लड़कों ने कोशिश की पर वो उसकी सील नहीं तोड़ पाये ! मैंने चूत चाटना शुरू किया और चंपा ने सीत्कार मारना ! मैंने उसके मुंह पर एक हाथ रख दिया , कि बाहर आवाज़ न जा पाये ! उसकी चूत बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही थी , चुदने को बेक़रार थी ! चूत कि फड़फड़ाहट गज़ब की थी, ऐसी गुलाबी चूत मैंने आज तक नहीं देखी ! मैंने जल्दी से अपना पजामा नीचे किया , लण्ड को निशाने पर लगाया , उसको पूरी तरह आगोश में लेते हुए , मुंह से उसका मुंह बंद किया , और लण्ड सरका दिया चंपा की चूत में ! कुंवारी लड़की के लिए बहुत मुश्किल था बर्दाश्त करना , पर चंपा हिम्मतवाली थी , दर्द बर्दाश्त करने की पूरी कोशिश कर रही थी !मैं धीरे धीरे चोदने लगा !
चंपा की चूत में लण्ड जाने की बात सुनकर मुझे ध्यान आया कि भैया ने मेरी चूत में भी लण्ड उतार दिया था ! भैया की बातों में मुझे पता भी न चला की उन्होंने कब मेरी ब्रा पैंटी उतार दी , कब उन्होंने अपना अंडरवियर उतारा और कब लण्ड घुसेड़ दी ! अब भैया अपने धक्कों से मुझे बता रहे थे कि कैसे चंपा कि चुदाई की ! बहुत जबर्दश्त चोद रहे थे जेठ जी , लगता है आज भी चंपा की चुदाई उनके दिलो दिमाग पर ताज़ा है ! इतने तेज धक्के मेरी चूत में ,पहले उन्होंने नहीं मारे थे ! लगता था फट जाएगी चूत ! दिन के उजाले में खुली छत पर अपने सगे छोटे भाई बीवी की चूत मारते हुए भैया वहशी लग रहे थे !हलकी बूंदा बन्दी भी शुरू हो गई थी ! जीभ हाथ और लण्ड के बहुत मंझे कलाकार थे जेठ जी , पूरे धुन में मेरी चूत की धुनाई कर रहे थे, होठों की चुसाई और चूचियों को पिलपिला बना रहे थे ! मेरी हालत ख़राब हो रही थी , चंपा के चक्कर में अपनी चूत का भोंसड़ा करवा बैठी थी !भैया की स्पीड बढ़ती जा रही थी , मेरा धैर्य जवाब दे गया , चूत से पानी की बौछाड़ होने लगी , भैया का लण्ड भी मेरे चूत के गरमागरम पानी में पिघल गया , और चूत के अंदर बाढ़ आ गया , बाहर बारिश भी तेज हो गयी थी ! गज़ब का माहौल था , चूत में गरम पानी और बदन पर बरसात का ठंडा पानी ! हम दोनों में किसी में भी हिम्मत नहीं थी की उठ पाएं, बस भीगते रहे भिगोते रहे ! चंपा की चुदाई की शुरुआत तो भैया ने बातों से की , पर मुझे चोद कर आगे की कहानी लाइव दिखाई ! जब तक बारिश हुई , हम एक दूसरे में घुसे हुए लेटे रहे ! जांघों के रस्ते वीर्य बारिश के पानी में बहता जा रहा था और हम बेसुध पड़े थे !


बारिश ख़त्म हो गई थी , अब हम वापस कमरे में आ गए थे !शाम को फिल्म देखने का प्रोग्राम बना , मैंने प्योर सिल्क की क्रीम कलर की साड़ी पहनी थी , साथ में साटन के ब्रा , ब्लाउज और पेटीकोट भी पहन लिया था , जेठ जी ने पैंटी पहनने से मना कर दिया था ! मुझे सजा हुआ देखकर जेठ जी गरम हो गए थे ! मैंने जब साडी पहनी भी नहीं थी , तो बाँहों में भर कर पूरा लिपस्टिक चाट गए थे , ब्लाउज भी चूची दबाने के कारण मसक गई थी ! दुबारा मेक अप ठीक करके , ऑटो लेकर पहले हमने मॉल में घूमने का मज़ा लिया , जेठ जी ने दवा की दुकान से कुछ दवा वगैरह खरीदी , और हम सिनेमा हॉल में आ गए ! कोई इंग्लिश पिक्चर थी , बहुत कम लोग ही थे, जो इधर उधर बिखर कर बैठे थे ! हम जहाँ बैठे थे वहां से दूर दूर तक कोई नहीं था , हमें देखनेवाला ! अँधेरा होते ही जेठ जी ने मेरी गर्दन के ऊपर से एक हाथ रखकर मेरी एक चूची थाम ली , और हलके हलके दबाने लगे ! मैंने भी अपना एक हाथ उनके लण्ड के ऊपर रख दिया ,और पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी ! जेठ जी अब तनाव में आ रहे थे , उन्होंने धीरे से अपनी पैंट खोलकर, अंडरवियर के साथ नीचे कर दिया ! अब लण्ड जोश में था , ताव मार रहा था, मेरे हाथ के स्पर्श से बहुत खुश हो रहा था !मेरे हाथ जेठ जी का लण्ड ऊपर नीचे कर रहे थे , और जेठ जी मेरी ब्लाउज के हुक खोलकर ब्रा के ऊपर से गोलाई नाप रहे थे !बीच बीच में हमारा ध्यान पिक्चर की तरफ भी चला जाता था , जब भी कोई सेक्स सीन चल रहा होता था ! भैया ने मेरी गर्दन घुमा कर किस करना शुरू कर दिया, मैं थोड़ा नीचे की तरफ खिसक गई , की दूर से भी किसी की नज़र हम पर न पड़े ! भैया अब एक हाथ से मेरी साडी के ऊपर से ही मेरी चूत टटोलने लगे थे , मैं अब उत्तेजित हो गई थी ! मैंने साडी पेटीकोट के साथ घुटनो से ऊपर उठा लिया , अब सिर्फ मेरी गाँड के नीचे साड़ी और पेटीकोट था , ऊपर का हिस्सा, जो अब नंगा था , जेठ जी के हाथों के हवाले हो गया था ! जेठ जी अब मेरी चूत का मसाज कर रहे थे , बीच बीच में उनकी ऊँगली चूत के अंदर भी चली जाती थी , मेरे मुंह से अब सी ..सी की आवाज़ आने लगी थी ! जेठ जी की ये खास बात थी कि एक ही समय उनकी ऊँगली ,हाथ , मुंह , जबान सब एक साथ पूरे परफेक्शन के साथ अलग अलग काम करती थी , और ऐसा लगता था कि सब अलग अलग आदमी कर रहे हैं ! हमारे गद्देदार सोफे जैसी कुर्सियों के बीच का आर्म रेस्ट ऊपर उठने वाला था , इसलिए अब हमें पूरी जगह मिल गयी थी ! ब्रा खुलने कि वज़ह से मेरी चूचियाँ लटक गयी थी , मैंने अब झुककर जेठ जी लण्ड मुंह में ले लिया , और जीभ को सुपाड़े पर फिराने लगी ! जेठ जी को मेरी इस तरह कि पहल बहुत अच्छी लगती थी , एकदम मस्त हो गए थे ! उनके हाथ मेरी चूची से दब गए थे , लेकिन उन्होंने अपना कार्यक्रम जारी रखा ! मै चाहती थी कि जेठ जी जल्दी से पानी छोड़ दें ,और मैं आज़ाद हो जाऊं , क्योकि इस तरह हॉल के अंदर मुझे ठीक नहीं लग रहा था ये सब ! कभी भी किसी के भी आने का डर था , और मैं ऐसी स्थिति से बचना चाहती थी , पर जेठ जी को ना नहीं कर सकती थी, इसलिए उनके हर एक्शन का पालन कर रही थी !मैं हाथ से जेठ जी के लण्ड ऊपर नीचे भी कर रही थी और चूस भी रही थी मुंह से ,जीभ से चाट भी रही थी ! मैंने हर तरह से कोशिश की,कि भैया का पानी निकल जाए ,लेकिन लण्ड झड़ने को राज़ी नहीं था ! मेरी चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी , मैं कमज़ोर भी महसूस कर रही थी !
भैया ने अब मुझे खड़ा कर दिया , मैंने सामने अपने साड़ी से अपनी नंगी चूचियों को ढक लिया था, उन्होंने मुझे अपने गोद में बिठाते हुए अपना लण्ड मेरी चूत में सरका दिया ! मेरी चूत बीच में ही फंस गयी थी , लण्ड आधा ही अंदर जा सका था ! मैंने आगे झुकते हुए , अगली सीट के ऊपर अपने हाथ टिका दिए थे ! भैया मुझे कमर से पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगे , थोड़ी कोशिश के बाद मेरी चूत खुल गई और लण्ड अंदर बाहर होने लगा ! जेठ जी ने मुझे लण्ड पर उठने बैठने के लिए कहा और खुद मेरी चूचियों को दोनों हाथों से मसलने लगे ! हमेशा कि तरह , मेरे चूची कि घुंडी को अपने दो उँगलियों के बीच फंसा कर निचोड़ रहे थे ! मैं सटासट लण्ड अंदर ले रही थी , जैसे ही स्पीड कम होती , भैया चूची और घुंडी को बेदर्दी से मसल देते थे, और मैं अपनी रफ़्तार बढ़ा देती थी ! अब भैया के लण्ड का तनाव अचानक बढ़ गया था , चूची पर दवाब भी बढ़ा लग रहा था ! मैंने सर उठा कर परदे पर देखा , तो फिल्म में एक बूढ़ा सा आदमी एक बहुत ही खूबसूरत कमसिन कली कि चुदाई में लगा हुआ था ! यानी भैया चूत मेरी फाड़ रहे थे , पर ख्यालों में उस कमसिन कली को चोद रहे थे ! मर्दों में दूसरी औरत को चोदने की कितनी ललक होती है , एक हफ्ते भी नहीं हुए हैं मेरी सील तोड़े , पर अभी भी दूसरे की चाहत में लगे हैं ! मैं तो ये कहती हूँ कि औरत को अपने पति से असली चुदाई के मज़े लेने हों तो उसको इधर उधर भी मुंह मार लेने दे , ख्यालों में कोई और होगी पर चूत तो अपनी मस्त चुदेगी ! मैंने सोच लिया था कि ना ही दीपक को और ना ही जेठ जी को किसी के पास जाने से रोकूंगी ! सौ से ज्यादा चूतों का रस पीकर , जेठ जी का लण्ड अभी भी तगड़ा और औरतों को गुलाम बनाने वाला है ; ये तभी हो पाया जब उन्हें अलग अलग किस्म कि चूत की खुराक हमेशा मिलती रही ! पति का लण्ड तगड़ा रहे तो और क्या चाहिए औरत को !
जेठ जी धकाधक लण्ड पेले जा रहे थे , मेरी और जेठ जी की नज़र स्क्रीन पर ही टिकी थी , जेठ जी तो मानो उसी को चोद रहे थे , मेरी चूत मारने के बहाने ! फिल्म में बूढ़ा कांपता सा दिखा और लगा की अब जैसे पानी छोड़ने वाला है , मैंने भी अपनी चूत में गरम गरम वीर्य का अनुभव किया , मेरी चूत का पानी भी छूट रहा था ! भैया थोड़ी थोड़ी देर में झटके लगाकर अपना लण्ड मेरी चूत में निचोड़ दिया ,और प्यार से लण्ड बाहर निकाल लिया !लण्ड के बाहर निकलते ही लगा की अंदर से मोटे पानी की धार निकाल रही हो , वीर्य फर्श पर गिर कर फ़ैल गया , छींटे मेरे पाओं पर भी पड़े ! मैं दो मिनट तक वैसे ही खड़ी रही , चूत से रस को टपक जाने दिया , फिर अपनी सीट से आगे जाकर पेटीकोट से चूत पोछने लगी ! जेठ जी भी अब अलग हटकर पैंट पहन रहे थे ! अच्छे से साफकर मैंने अपनी ब्रा और ब्लाउज में अपनी चूचियों को भी सेट कर लिया और एक बार हॉल को ठीक से देखा ! लोग कम हो गए थे , जो थे वो भी दूर दूर अलग अलग बैठे थे , सब के सब ,लग रहा था की अपना अपना पानी निकालने में लगे थे ! हॉल में रुकने का अब मन नहीं कर रहा था , पूरी पेटीकोट गीली होकर टांगों से चिपक रही थी , लसर फसर पेटीकोट में अपने टांगों को सम्हालते हुए मैं और जेठ जी हॉल से बाहर आ गए ! बाहर ही डिनर करके , घर आकर एक दूसरे से चिपककर सो गए , भैया सोते सोते भी अपना लण्ड मेरी चूत में डालना नहीं भूले ! अब मुझे भी बिना अपनी चूत में जेठ जी का लण्ड डाले नींद कहाँ आती थी !



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FUN-MAZA-MASTI जेठ जी के अहसान --6

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 जेठ जी के अहसान --6  


सुबह नींद देर से खुली , बदन में दर्द था पर हैंगओवर नहीं हुआ था ! भैया अभी भी नींद में थे , कुछ बड़बड़ा रहे थे , और चूसो , और चाटो मेरा लण्ड मेरी सोनी , मेरी रानी !यानी भैया नींद में भी मेरे साथ ही लगे थे , क्या ताक़त थी इस मर्द में , दिन में दो बार लम्बी लम्बी चुदाई के बाद भी , नींद में भी चुदाई में ही लगे थे ! रात को जहाँ तक मुझे याद था , मैं नीचे और भैया ऊपर थे , लेकिन सुबह मैं ऊपर थी ! भैया का लण्ड अभी भी चूत में ही था ! आज कुछ टाइट लग रहा था , मेरे हिलाने डुलाने पर भी निकला नहीं , शायद नींद में मुझसे अपना लण्ड चुसवा रहे थे, और लण्ड को सोने या जागने से मतलब नहीं था ! बहुत कोशिश के बाद मैंने चूत से लण्ड को निकाला , पूरा कीचड़ हो गया था , पहले अपना साफ़ किया और फिर भैया का लण्ड साफ़ किया !बिस्तर पर भी भैया और मेरा पानी जो अब बहुत गाढ़ा हो चूका था,फ़ैल गया था, शायद चूत में रहने के कारण सूख नहीं पाया था ! जल्दी से फ्रेश होकर चाय बनाने किचन में आ गयी , सोचा भैया को चाय के साथ उठाऊंगी ! भैया का हुकुम था की कपडे नहीं पहनने हैं ,इसलिए नंगी ही चाय बनाने लगी ! अभी पानी उबलने को ही था , की पीछे से भैया के लण्ड का स्पर्श मेरी गाँड को हुआ , पूरा सख्त था ! फिर एक हाथ में मेरी चूची लेकर दूसरे हाथ से मेरी कमर और बदन सहलाने लगे ! मैं एकदम से गनगना उठी ! सर को थोड़ा पीछे कर भैया को चूमने लगी ! भैया अब रुकने वाले नहीं ,ये सोचकर मैंने गैस बंद कर दी , अब पानी की जगह मैं उबल रही थी ! भैया वैसे तो 45 साल के थे , पर जोश 20 साल के लड़को की तरह था , हरदम चोदने को तैयार ! लण्ड की हालत देख कर मैं समझ गयी की अब मुझे चुदने से कोई रोक नहीं सकता !भैया का चूमना चाटना चालू था , मेरे बदन को चाट चाट कर इतना गीला कर दिया कि नहाने कि जरुरत नहीं रह गयी थी ! मैं अब ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी , टांगों में कमजोरी सी आ रही थी ! भैया ने मुझे पलट दिया और मुझे किचन के स्लैब पर बिठा दिया ! मेरे पूरे चेहरे को चूमने लगे , और बीच बीच में मेरे होंठ भी चूस लेते थे ! मुंह का सारा रस चूस लेने के बाद जेठ जी ने मेरी चूचियो को चूमना और मसलना शुरू कर दिया ! पहले कभी मेरी चूची ने इतना सुख मुझे नहीं दिया , जितना जेठ जी ने पिछले तीन चार दिनों में दे दिया था ! जब वो होठों से मेरे चूचक से दूध पीने कि कोशिश करते तो पूरे बदन में आग सी लग जाती थी ! मेरी गोरी गोरी चूचियाँ अब लाल हो चुकी थी , घुंडी भी कड़ी हो गई थी !भैया ने जोश में कई बार दांत से भी काट लिया था , जिससे निशान पड़ गए थे ! भैया का लण्ड मेरी चूत और जांघों के बीच रगड़ खा रहा था , लण्ड से लसलसा सा पदार्थ मेरी जाँघों पे फिसलन पैदा कर रहा था !मेरी चूत भी अब पूरी तरह गीली थी ! भैया ने धीरे धीरे नीचे आते हुए मेरी चूत और जांघों को भी चाटने लगे ! थोड़ी देर तक चाटने के बाद , मुझे एक स्टूल पर बिठा दिया , और अपना एक पैर किचन के स्लैब के ऊपर ऐसे रखा कि उनका लण्ड ठीक मेरे मुंह पे था ! मैं इशारा समझ गई और , हाथ से लण्ड को पकड़ कर सुपाड़े को मुंह में भर लिया ! मुंह के अंदर जीभ चाटने का काम करने लगे , फिर मैंने लण्ड को मुंह में आगे पीछे करना शुरू कर दिया ! जीभ से भैया के लण्ड को चाटने लगी , अब मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था , लण्ड चाटना ! भैया जोश से भरते जा रहे थे , मेरे मुंह को चोदना शुरू कर दिया ! मेरे मुंह में अपने लण्ड रखकर मेरे चेहरे को दोनों हाथों में ले लिया और मुंह में ही पेलना शुरू कर दिया , ये एक और नया अनुभव था , अच्छा भी लग रहा था ! भैया का लण्ड अब बढ़ता ही जा रहा था , मेरे मुंह को दर्द होना शुरू हो गया , मेरी सांस बीच बीच में रुक जाती थी ! लण्ड कि मोटाई इतनी थी कि पूरा मुंह भर गया था , और भैया लण्ड भी गले तक उतार देते थे , अब मैं छटपटाने सी लगी थी , लगा कि अब सांस ही रुक जायेगी ! मैंने सहारे के लिए उनकी जांघें पकड़ रखी थी , मैंने उसपर नाख़ून चुभो दी , भैया को तब जा कर अहसास हुआ कि मुझे परेशानी है ! अब भैया ने मुझे वापस स्लैब पर बिठा दिया , मेरे दोनों टाँग फैलाये , और लण्ड चूत पे टिका के दवाब डाला ! मेरी चूत तो पहले से ही तैयार थी , रास्ता मिलते ही लण्ड थोड़ा अंदर घुस गया ! भैया लण्ड को आगे पीछे कर के मुझे चोदने लगे !पहले चौथाई लण्ड से थोड़ी देर तक चोदते रहे, फिर मुझे थोड़ा आराम मिलते ही आधे लण्ड से चोदने लगे ! भैया कि चुदाई में एक लय होती थी, जैसे कोई साधा हुआ सुर छेड़ रहे हों , पहले धीरे धीरे , फिर रफ़्तार बढ़ाते बढ़ाते , अंत में तेज और तेज , बहुत तेज ! मेरी चूत भी अब जेठ जी के लण्ड को अच्छे से जान गई थी , जैसे ही वो रास्ता मांगते , ये और फ़ैल कर स्वागत करती थी !अब जेठ जी का लण्ड पूरा अंदर बाहर हो रहा था , मुझे दर्द तो बहुत हो रहा था , पर चुदाई के मज़े के आगे सब भूल जाती थी ! लण्ड सटासट अंदर बाहर हो रहा था , पर जेठ जी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे ! फिर अचानक से रुके , लण्ड बाहर निकला ! लण्ड मेरे चूत का रस पीकर तेल लगाये पहलवान कि तरह लग रहा था, इतना बड़ा और मोटा था कि अगर मैं अभी चुद नहीं रही होती तो , डर से मर जाती ! भैया ने मुझे फर्श पर खड़ा कर उल्टा किया , और मुझे स्लैब पर झुका दिया ! मैंने डर रही थी कि कहीं गाँड न मार ले , पर उन्होंने मेरे चूतड़ को चौड़ा कर के चूत के छेद में लण्ड डाल दिया , सरसराता हुआ लण्ड अंदर फिसल गया ! उन्होंने मुझे पीछे से पकड़ रखा था , उन्होंने दोनों हाथ से मेरे दोनों चूचियों को सम्हाल लिया था , और जोर जोर से दबा रहे थे ! मैंने अपना मुंह थोड़ा सा पीछे कर लिया था और एक दूसरे को चुम रहे थे, और चूस रहे थे !फच्च फच्च कि आवाज़ से पूरा किचन गूँज रहा था ! जेठ जी का लण्ड अपने पूरे जोश में अंदर बाहर हो रहा था , हर बार बाहर निकलते समय दो चार बूँद मेरी चूत से टपक कर फर्श पर गिर जाती थी , मैंने दोनों टांग फैला रखे थे , इसलिए फिसलने से बची हुई थी ! जेठ जी का जोश देख कर लग रहा था कि आज लगता है मेरी चूची उखाड़ लेंगे !अभी तक इतना सम्हालकर मैंने अपनी चूची रखी थी , जेठ जी ने मसल मसल कर ढीले कर दिए थे ! अब भैया कि साँसें उखड रही थी , लगता था छूटने वाले हैं ! मैं तो सातवें आसमान पर थी , इस पोजीशन में कभी नहीं चुदी थी , बहुत अच्छा लग रहा था ! किचन को मैं खाना बनाने का जगह समझती थी , पर जिस स्लैब पर रखे चूल्हे पर मैं रोटी सेंकती थी , भैया ने मेरी चूत की आंच पर लण्ड सेक रहे थे ! अब भूचाल आने ही वाला था ! जोर की गड़गड़ाहट की आवाज़ आई और लगा अंदर बादल फट गया है और सैलाब आ गया है ! शायद इतना वीर्य मेरी चूत में पहली बार गया है ! ओवरफ्लो हो रहा था , चूत से रस लगातार टपक रहा था ! मैं स्लैब पर लेट सी गयी , जेठ जी भी मेरे ऊपर ही लेट कर अपनी साँसों पर काबू पा रहे थे , निढाल हो गए थे !मैंने अपना चूतड़ हिला कर जेठ जी को जगाया , उन्होंने धीरे से अपना लण्ड बाहर खींचना शुरू किया , लण्ड को हिलाते डुलाते लण्ड को बाहर खीच लिया ! छप छप की आवाज़ के साथ ढेर सारा वीर्य मेरे चूत के पानी के साथ नीचे गिरे और फर्श पर फ़ैल गए ! चूत से बाहर सारा रस मेरी जांघों पर से होते हुए मेरे पैर को भिगो रहे थे !भैया का लण्ड भी रस से सराबोर था ! वैसी ही हालत में हम दोनों एक दूसरे को सहारा देकर बैडरूम में आ गए , लण्ड और चूत की सफाई की और बिस्तर पर निढाल हो गए ! किचन से लेकर बैडरूम तक वीर्य की बूंदें टपक टपक कर निशान लगा रही थी ! हमारा हनीमून इतना जबरदस्त होगा , मैंने नहीं सोचा था ! अभी आठ दिन और बचे है दीपक के आने में , पता नहीं क्या होना है आगे ! इतने घमासान के बाद आराम करना जरुरी था , हम दोनों ही अपनी अपनी दुनियां में खो गए ! 

किचन में की गई चुदाई के बाद मुझमे उठने की भी हिम्मत नहीं थी ! दोपहर में हमने सुबह वाली चाय पी , जेठ जी मुझे गोद में बिठाकर टीवी देखते रहे ! हमने इतना सो लिया था , की अब सोने का मन नहीं था ! माँ और दीपक का भी फ़ोन आया था ! भैया बस हलकी फुलकी छेड़ छाड़ करते रहे , कभी बदन सहलाते और कभी चूची दबा देते ! शाम होने पर भैया ने कहा कि आज बाहर ही बिस्तर लगाते हैं , मैंने कहा ठीक है ! हमारे छत के बगीचे के फूलों के बीच एक बड़ा सा चबूतरा बना था , जिसपर भैया ने गद्दे बिछा दिए ! एक छोटी टेबल लगा कर शराब भी रख दी थी ! खाने के कई सारे आइटम मैंने मंगवा लिया था ! मैंने हल्का सा म्यूजिक चला दिया था , पोर्टेबल सेट पर ! चांदनी रात में माहौल बहुल रोमांटिक हो गया था !भैया चबूतरे के साथ लगी दीवार पर तकिया लगा के बैठे थे , मैं भी उनकी गोद में आकर बैठ गई ! अब हम आधे लेटे और आधे बैठे थे ! पहला पैग लेकर हमने धीरे धीरे पीना शुरू कर दिया , चांदनी रात का मज़ा कई गुना बढ़ गया था ! भैया बीच बीच में मेरे बदन पर हाथ फेर लेते थे ! मैंने साटन की नाईट ड्रेस पहन रखी थी , क्यूंकि खाने की डिलीवरी मैंने ली थी , पर अंदर कुछ नहीं पहना था ! भैया ने सिर्फ अंडरवियर पहना था, और उनका एक हाथ मेरी चूची पर और दूसरा पैग थामे हुआ था ! भैया और मैं अब बातों बातों में काफी खुल गए थे और काफी हंसी मज़ाक भी कर लेते थे ! मैंने कहा की भैया , अब हम पति पत्नी है , क्या आपको बुरा लगता है , जब मैं आपको अभी भी भैया कहकर बुलाती हूँ ! भैया बोले , नहीं , तुम मुझे जैसे बुलाती हो वैसे ही बुलाया करो! हमारा नया रिश्ता सिर्फ हम तीन लोगों को ही पता है, और किसी को पता चलना भी नहीं चाहिए ; कुछ और बोलोगी , तो कभी भी भांडा फ़ूट सकता है ! और सच तो ये है की जब हम सेक्स करते हैं ,तो तुम्हारे मुंह से भैया सुनकर बहुत मज़ा आता है ! मैं बोल पड़ी , हाँ भैया , सच में मुझे भी ऐसा लगता है कि आपको अच्छा लगता है , इसलिए मैं जान बूझ कर भी कई बार आपको भैया बोलती हूँ ! भैया फिर बोले " सेक्स के समय हमपर बातों का बहुत असर होता है , कल तुम बहुत खुल कर बात कर रही थी ,मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि पति पत्नी जब सेक्स करते हैं तो उन्हें वेश्या जैसा व्यवहार करना चाहिए , इससे दोनों पूरे जोश में रहते हैं " ! मैंने कहा "पता नहीं भैया , मैं कुछ बहक गई थी ,इसलिए पता नहीं क्या क्या बोल गई !" भैया बोले , " नहीं याद है तो मैं याद दिला सकता हूँ "! मैं चौंक गयी ,"वो कैसे" ! भैया ने मोबाइल की रिकॉर्डिंग मुझे सुना दी, जो उन्होंने चुपके से कल रात रिकॉर्ड कर लिया था ! अपने मुंह से चूत , लण्ड, और चोदो भैया , जैसे शब्द सुनकर मैं शर्म से मर गई ! भैया ने जोर का किस लेते हुए कहा , कि तुम ऐसे ही बोला करो, बहुत अच्छा लगता है !
अब मैं दूसरा पैग ले रही थी , भैया तीन खत्म कर चुके थे , नशा आने लगा था ! मेरे मन में अचानक चंपा का ख्याल आया , मैंने पुछा , भैया आपने चंपा को कैसे पटाया ! भैया बोले पहले वादा करो जो तुम्हारे जबान पर शब्द आना चाहता है , वही बोलोगी , कोई पर्दा नहीं होना चाहिए हमारे बीच में ; खुल कर बोलोगी तो खुल कर जवाब दूंगा , खूब मज़ा आएगा ! मैंने दुबारा बोला, " आपने चंपा को कैसे चो ..चोदा" ! ये हुई न बात , देखो मेरी जान , गावं में किसी को भी मैंने पटा कर नहीं चोदा , लोग खुद मुझसे चुदने का रिक्वेस्ट करते है , चंपा का तो तुम देख ही चुकी हो ! मेरा माथा ठनक गया , और मुंह से निकल गया , 'यानी गावं में औरों को भी चोदा है आपने' ! देखो डार्लिंग , तुमको बताया है न कि हमारा पूरा गावं और आस पास के गावं के सभी लोग यानि डेढ़ सौ के करीब लोग उस फैक्ट्री में काम करने कि वज़ह से नामर्द हो गए हैं , और मेरे इलाज़ में हैं ! लेकिन लगभग हर घर में बच्चे हैं , जो मेरी कोशिश से ही हुए हैं !जेठ जी अपनी मर्दानगी का बखान करते जा रहे थे और मैं गरम हो रही थी , सोच सोच कर रोमांचित हो रही थी कि जो लण्ड मुझे माँ बनाने जा रहा है , वो पहले डेढ़ सौ कुंवारी चूत से बच्चे पैदा करवा चुका है ! मेरे मुंह से निकल गया , मतलब आप डेढ़ सौ कि चूत मार चुके हैं ! भैया बोले , नहीं , सबकी नहीं चोदी, पर ज्यादातर को माँ मैंने ही बनाया !
भैया ने पांचवां पैग बना लिया और मेरे लिए तीसरा , अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था , मैं भैया का लण्ड सहलाने लगी थी , और जेठ जी का लण्ड भी हरकत में आने लगा था और उनका हाथ मेरी चूचियों को लगातार मसल रहे थे !
जेठ जी ने बताया कि शुरू में जब उन्हें पता चला के गाँव के नए शादी शुदा बाप नहीं बन पा रहे हैं , तो मुझे बहुत ताज्जुब हुआ , जो मेरे पास इलाज़ के लिए आये , सबमें एक ही बीमारी थी , कोई भी बाप बनने के काबिल नहीं था , और ज्यादातर बहुएँ कुंवारी ही थी ! सबसे पहले मैंने अपने पड़ोस के लखन भाई कि मदद की क्योंकि बच्चा न होने की वजह से उसने आत्महत्या करने की कोशिश की थी ! मैंने उसे उसकी प्रॉब्लम समझायी और कहा कि अपनी बीवी गुलाबो को किसी से चुदवा ले , लेकिन गावं में तो कोई था भी नहीं , और लखन थोड़ा संकोची था ,इसलिए उसने मुझे ही कहा कि मैं जबरदस्ती उसकी बीवी गुलाबो को माँ बनाऊ नहीं तो वो आत्महत्या कर लेगा ! गुलाबो की जांच के समय मैं समझ गया था कि वो पूरी खेली खाई है , और मइके से पूरी चुद के आई है ! इसके बाद भी मेरे लिए गुलाबो को चोदने के लिए राज़ी करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था ! मैंने हिम्मत करके लखन की बीवी गुलाबो को पहले धमकाया और फिर समझाया , कि वो मुझे पता है कि वो पहले से ही खूब चुदी हुई है , और ये बात मैं उसके सास ससुर को बता दूंगा क्योकि लखन तो चुदाई के काबिल ही नहीं है ! गुलाबो बहुत डर गई और मुझसे चुदने को तैयार हो गई ! उसे मैंने रोज़ रोज़ अपने क्लिनिक पर बुलाता और चुदाई करता ! चुदाई के दौरान ही मैंने उसको धमकाया तो उसने सच उगल दिया कि उसका सगा भाई ही उसको रोज़ चोदता था,इसलिए उसकी चूत चौड़ी हो गई , और इसी वज़ह से वो चुदने को तैयार हो गई ! गुलाबो के माँ बनते ही गाँव और आस पास के गाँव में ये बात फ़ैल गई , कि मेरे इलाज़ के कारण ही वो माँ बनी है !फिर तो इलाज़ कराने वालों कि लाइन लग गई ! मैंने गुलाबो को अपने यहाँ नौकरी पर रख ली , क्योंकि गाँव में लोग, मेरे मर्द होने के कारण अपनी बहु बेटियों का इलाज़ कराने में हिचकिचाते थे ! गुलाबो ने औरतों को समझाने में मदद की, और मैं गाँव के मर्दों को समझाता था !
इन सब बातों के बीच ही मेरी हालत ख़राब हो गई थी, चूत से पानी लगातार बह रहा था ; मैं भैया का लण्ड मुंह में रखकर चूस रही थी !क्या किस्मत लेकर आये थे मेरे जेठ जी , रोज़ नया माल , ज्यादातर कुंवारी और औरतें खुद चलके आती थी की मुझे चोदो ! यहाँ तक की मेरे पति दीपक ने आठ महीने तक खुशामद किया कि मेरी बीवी को माँ बनाओ ! जेठ जी के लण्ड का भी शायद यही राज़ था , अलग अलग किस्म की टाइट चूत ढीली कर कर के फौलाद बन गया था , नहीं तो ऐसी चुदाई संभव ही नहीं है , एक साधारण आदमी से ! मुझे आज अपनी किस्मत पर नाज़ हो रहा था, कि मुझे जेठ जी का लण्ड आसानी से मिल गया था, खामखाह एक साल बिन चुदे बिता दिए ! आज मेरा मन चुदाई की बातों में इतना मस्त हो गया था, कि मैं जेठ जी के लण्ड पर थूक डाल डाल के लण्ड चूस रही थी ! जेठ जी पूरी मस्ती में आह आह कर रहे थे, मेरा ये नया रूप उनको दीवाना कर गया था ! आज मैं पागल हो गई थी , वो तो जेठ जी ही ने मेरी सील तोड़ी थी , नहीं तो वो मुझे बदचलन ही समझते ! भैया का लण्ड मूसल हो गया था, मैंने हलके से भैया की टाँग खींचकर उनको सीधा लेटने को कहा ! जेठ जी तो जैसे पागल हो गए , मैंने पैर की उँगलियों से उनको चूमना शुरू किया और ऊपर की तरफ बढ़ी ! जांघ के एक एक कोने को चूमा चाटा , और लण्ड को जीभ से मसाज देने लगी ! जेठ जी के लिए ये बहुत ज्यादा था , शायद गाँव की औरतें इतना फॉरवर्ड नहीं थी ! मैं चंपा से भी ज्यादा उनको उत्तेजित करना चाहती थी ! उनके टट्टों को मुंह में लेकर गुलगुलाने लगी ! मुस्किल से एक गोली एक बार में मुंह में आ पाती थी ! लण्ड की पूरी चुसाई होते होते जेठ जी अब अधीर हो गए थे , चूत की तलाश कर रहे थे ! लण्ड से आगे बढ़कर , पेट ,नाभि से होते होते मैं उनके छाती पे छोटे छोटे चूची वाली जगह पे आ गई थी ! इस बीच जेठ जी ने अपना लण्ड मेरी चूत पे टिकाकर सुपाड़ा मेरे चूत में प्रवेश करा दिया था ! आज मैं इतनी गीली हो गई थी कि मुझे किसी भी तरह के फिसलन कि जरुरत नहीं थी , लण्ड सटाक से अंदर जा रहा था ! मैंने भैया के चूची वाले एरिया को चाटना और चूमना शुरू कर दिया ! जेठ जी ने ही मेरी चूची कि शेप बिगड़ी थी , चूमकर और चूसकर, मैं अब सब भैया से सीख गई थी और आज मैंने भी सोच लिया था कि उनकी चूची फुला के रहूंगी ! वैसे उनकी छाती उभरी हुई थी , और जैसे मैंने जवान होने के क्रम में अपनी छाती का उभार शुरुआती दौर में देखा था , कुछ वैसा ही जेठ जी का भी था ! शायद जेठ जी को पहली बार किसी ने वहां छेड़ा था , वो पागलों कि तरह मेरी चूत में लण्ड पेले जा रहे थे , आज की तरह आराम से मैंने पहले कभी नहीं चुदवाया था , और न ही इतनी ज्यादा उत्तेजित हुई थी कभी ! भैया के चूची कि घुंडी को दांत लगाते ही जैसे भैया पागल हो गए हों , मेरे मुंह को अपने मुंह से चिपका के , जीभ अंदर डाल के ताबड़तोड़ चूसने लगे , साथ ही लण्ड को टॉप गियर में डाल दिया ! भैया अब मेरी गाँड को दोनों हाथ से पकड़ कर अपने लण्ड पर मेरी चूत को पटक रहे थे और अचानक भैया ने अपनी एक ऊँगली मेरी गाँड में घुसा दी ! फच.. फच.. फच.. की आवाज़ साथ में बज़ रहे म्यूजिक के साथ ताल मिला रहा था, मेरी चूत में जेठ जी लण्ड अंदर बाहर हो रहा था और गाँड में ऊँगली ! भैया को आज मैंने दीवाना बना दिया था , बदल बरसने को ही था ! मस्त चांदनी रात में खुले छत पर नंगे बदन, एक नाजायज़ रिश्ता मज़बूती के साथ चोदने -चुदने में लगा हुआ था , अपने से आधे उम्र की औरत के साथ ! ऐसी चुदाई की कल्पना ही की जा सकती है , जो आज मेरे हिस्से आई थी ! आज मैं भी चुदाई में अनाड़ी होते हुए भी , एक असली मर्द को ,जो सौ से ज्यादा कुंवारी औरतों को गर्भवती बना चुका था , चुदाई के खेल में पागल बनाने में कामयाब हो गई थी ! अब मैं भी उनको चूस रही थी, चूम रही थी , वो ढीले पड़ते जा रहे थे , लण्ड अपनी दौड़ के आखिरी पड़ाव पर था ! एकाएक भैया तड़पे और बौछार कर दी वीर्य की मेरे चूत में !मैं तो बार बार झड़ी थी , एक आखिरी बार भी झड़ गई वीर्य के धार के चूत की दीवारों पर पड़ने के कारण ! भैया शांत होते जा रहे थे , पर मैं उनको लगातार चूमती चूसती जा रही थी , जब तक वो ठंढे न पड़ गए ! भैया का गाढ़ा लण्ड का पानी पूरी रात मेरी जाँघों और भैया की जांघो को फेविकोल की तरह चिपकने वाला था , पर परवाह किसे थी 





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