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Sunday, May 10, 2015

FUN-MAZA-MASTI पापा प्लीज........32

FUN-MAZA-MASTI

 पापा प्लीज........32

"आप दोनों लड़ क्यों गए थे.." सुनैना खाने के कौर मुंह में डालती हुई बोली जिसे सुन रूपा-तमाचा एक दूसरे की ओर ताकने लग गए... दोनों असमंजस में पड़ गए... सच बताने से तो रहे...

"कोई ऽ खास बात नहीं थी... बस थोड़ी ज्यादती हो गई थी..."तमाचा चुप्पी तोड़ते हुए बोला... रूपा तमाचे की ओर आँखें तरेर दी पर तमाचे बेफिक्री से नजरअंदाज कर दिया...

सुनैना,"कैसी ज्यादती..."

तमाचा,"मैडम जी, पहले खाना तो खा लीजिए...बकवास के लिए तो पूरी रात अपनी है..." तमाचा रोमांटिक सुरों में सुनैना की आँखों में झाँकते हुए बोला...

रूपा बातों में उलझाते देख तमाचे को थोड़ी सपोर्ट करती हुई बोली,"पूरी रातऽ..?"

"हाँ...इत्ती मस्त शाली हैं तो पूरी रात सेवा भगत तो करनी ही होगी ना..."तमाचा ने ऐसे आराम से कह दिया मानों वो सुनैना को पहले से अच्छी तरह जानता हो...

उसकी बात पर रूपा और सुनैना हँसे बिना ना रह सकी... सुनैना हँसती हुई बोली,"ओ हैलो, सपने यहाँ वहाँ मत देखा कीजिए नहीं तो कहीं पैंट गीली हुई ना तो घर जाना भी दुर्लभ हो जाएगा..."

तमाचा सुनैना की सीधी वार के निशाने को सोच चौंक सा गया... वो ऐसे जवाब की उम्मीद भी नहीं किया था... वह ठिठक कर रूपा जो बस हँसने में मशगूल थी, के साथ हँस दिया...

"ओए हीरो हीरालाल, खुद को इतना साना मत समझा कर... यहाँ हर एक बाप होता है... समझा क्या? चल अब बिल दे..." रूपा खाना खा चुकी थी और वो हाथ मुंह साफ करती हुई तमाचे को आर्डर सी देती बोली...

तमाचा मुस्काता हुआ उठा और बिल अदा किया वो भी सीना फुला के... उसके मन में ये ऐसी डिनर आज तक कभी नहीं आई थी... रूपा जैसी लड़की तमाचे के संग... समय की चाल होती है ये सब...

तीनों बाहर निकले तो रोशनी तो जगनगा रही थी पर थोड़ा नजर ऊपर किए तो गुप्प अंधेरा और ढ़ेर सारी आँखमिचौली खेलते तारे... रूपा समय देखी तो आठ बज रहे थे... तुरंत गणित के जोड़ घटाव कर तसल्ली कर ली कि घर नौ बजे तक पहुँच ही जाउंगी... पापा नौ बजे के बाद ही आते हैं...

बाहर आते ही तमाचा बोला,"रूपा, दो मिनट वेट करोगी... मैं बस यूँ गया और यूँ आया..."

रूपा अचरज भरी निगाहों से पहले तो चारों तरफ नजर दौड़ाई कि कोई है तो नहीं ना जिससे ये मिलने जा रहा है और फिर पूछी,"आसपास बाथरूम तो है नहीं तो जाओगे कहाँ...ऐसे बीच सड़क पर पैंट तो नहीं ना....?"

तमाचा ये सुनते ही दांत पीसते हुए रूपा की तरफ लपका पर तब तक रूपा हिहीयाती सुनैना के चक्कर काट हंसने लगी... सुनैना मुंह बंद करने की कोशिश कर रही थी पर उसकी हँस रूक ही नहीं रही थी...

तमाचा चाहता तो आसानी से जल्दी तो नहीं पर पकड़ जरूर सकता था पर वो रूकतासा बोला,"कमीनी, सिगरेट पीने की इच्छा हो रही है... वो लेने जा रहा हूँ और वैसे तुम जान लो मेरी अंदरूनी ताकत इतनी कमजोर नहीं कि दिखने बोलने भर से जरूरत आ पड़ेगी..."

रूपा तमाचे की बात सुन थोड़ी शर्मा सी गई पर जाहिर नहीं होने दी... पता नहीं क्यों? खुद तो बेशर्मों की तरह बिना पलक झपकाए बोल दी और जब सुनने की पड़ी तो लाल टमाटर बन गई...

रूपा,"चल जा जा, हम दोनों के लिए भी दो ब्लैक क़श लेते आना..."

तमाचा ब्लैक क़श सुनते ही ऐसे चौंका मानों सोते हुए आदमी के शरीर पर पानी की कुछ बूँद छिड़क गई हो... वो अपनी दोनों हैडलाइड गोल गोल करता बस देखे जा रहा था,मुंह खुला का खुला रह गया; और फिर हल्के से बोला,"तुम भी सिगरेट पीती हो...?"

सुनैना,"क्यों, उस मोहर मोहर लगी होती है कि सिर्फ मर्दों के लिए.. " सुनैना दो कदम आगे बढ़ तमाचे के बिल्कुल समीप जा तीखे लब्जों में सवाल की...इतनी देर से तमाचे की खुली मुंह को अब आराम मिला... सुनैना की बात सुनते ही...चप्प... मुंह बंद...

वो चुपचाप मुड़ा और खुद से बड़बड़ाता सरपट भाग खड़ा हुआ और कुछेक मिनटों में ही दो सिगरेट रूपा के सामने लिए खड़ा था...

रूपा होंठों को गोल करती, जीभ से गालों को करती, हल्की सर को हिलाती जैसे किसी मधुर संगीत पर शरीर में थिरकन पैदा हो जाती है और मुस्काती हुई दोनों सिगरेट उठा ली...

तमाचा की तो बस बीमारी सी लग गई थी, मुँहतक्का की... टुकुर टुकुर रूपा को बस देखे जा रहा था... वो ये सोच ही नहीं पा रहा था कि ये रूपा है या कोई और...

तब तक रूपा स्कूटी निकाल उस जम्प सी लगाती पीं पीं करने लगी... तमाचा हड़बड़ाता अपनी बाइक की तरफ भागा और चंद सेकेंड में वो रूपा के बगल में आ पहुँचा...

"शाली सुनैना जी, कुछ तो सेवा का मौका दीजिए... आप मेरे साथ..." तमाचा विनम्रता से ऑफर किया... जिसे रूपा बीच में काटती हुई बोली,"बस बस, नौटंकी मत कर... तू भी क्या याद करेगा..."

रूपा सुनैना की ओर देखी तो सुनैना मुस्कुराती तमाचे की बाईक की शोभा बढ़ाने बढ़ गई... तमाचे सुनैना की ओर देख मुस्काता हुआ रूपा से बोला,"रूपा, तुम तो मेरी आदत जानती हो ना कि खाने के बाद..."

अचानक रूपा को पिछले दिन की किस वाली बात याद आ गई और वो हलकट सी सूरत बना ली... फिर अचानक से बोल पड़ी,"जुगाड़ दे दी हूँ, लेना तेरा काम..." रूपा की बात पर तमाचा मुस्कुरा के सुनैना की ओर देख "ओके" बोल चलने का इशारा किया...

सुनैना कुछ समझ नहीं पाई... बस दोनों को देखती रह गई... स्कूटी वाली तो अपने तरीके से ही स्कूटी चलाएगी... इस वजह से तमाचा को बीच बीच में अचानक सी ब्रेक लगानी पड़ती तो सुनैना चढ़ सी जाती तमाचा...

तमाचा ऐसे मौके पर चूकता भला... वोढीठ की तरह बोला,"मैडम जी, ऐसे चढ़िएगा तो आपका ये जो फुलौना है ना बूम्म कर जाएगा..."

सुनैना तमाचे की पीठ पर एक चपत लगाती हुई बोली,"गॉड गिफ्टेड है, नहीं होगी बूम्म...आप बस थोड़ा ध्यान से चलाइए..."

"अब आपकी रूपा जी ऐसी चलाएगी तो मैं क्या कर सकता..." तमाचा रूपा की तरफ इशारा कर दिया... सुनैना भी देख रही थी कि रूपा की वजह से ही ब्रेक लेनी पड़ रही है...


सुनैना तभी से पुनः तमाचे पर लद गई... वो इस बार पीछे ना खिसकी, बल्कि अपने हाथ आगे ले जा तमाचे के सीने पर जमा दी...

सुनैना,"अब नहीं ना फटेगी...?"

तमाचा तो हवा में उड़ने लगा... वो अपनी खुशी बयां नहीं कर पा रहा था... पहली मुलाकात और इतनी मस्ती... सुनैना की ठुड्डी तमाचे के कंधों पर जा अटकी थी... तमाचा अनुमान लगा रहा था कि साइज क्या है?

तमाचा सोचता हुआ पूछ ही लिया,"३४" साइज?"

सुनैना अपनी साइज के बारे में सुन शर्माई और हाथों को जोर से जकड़ती हुई तमाचे में समाने की कोशिश करती हुई कान में फुसफुसाती हुई बोली,"३४सी..."

"मस्त है...!" तमाचा मुस्काता हुआ बोला... दोनों ऐसी ही मस्ती भरी बातें करते चले जा रहे थे... कुछ ही देर बाद रूपा रूक गई... तमाचा भी बगल में रूका और पूछा क्या हुआ?

जवाब में रूपा जगह दिखा दी... घर पहुँच गई थी... गली के मोड़ पर थी... तमाचा ओह करता हुआ बोला,"इतनी जल्दी कैसे पहुँच गए..."

तब तक सुनैना तमाचे सी बाइक से उतर रूपा की स्कूटी पर बैठ गई...तमाचा कुछ बोलता उससे पहले रूपा बोल पड़ी,"तेरी गलती है... नहीं लिया तो मैं क्या करूँ...बाय!"

और रूपा तेजी से चल पड़ी... तमाचा पीछे से एक बार आवाज भी दिया पर कोई फायदा नहीं... अगर तमाचा चलता भी पीछे तो तब तक रूपा घर पहुँच चुकी होती... अफसोस करता बेचारा यू-टर्न कर लिया...

रूपा और सुनैना घर पहुंची तो मम्मी बोली,"रूपा, डिम्पल बुलाई है सुनैना को..."

रूपा,"ओके मॉम, और मामाजी कहाँ गए..."

मम्मी,"डिम्पल ले गई खाना खिलाने..."

सुनैना,"रूपा, आ रहीहूँ जीजी से मिल के..."

रूपा,"मैं भी चल रही हूँ..." कहती हुई अपने रूम में गई...सुनैना भी साथ चली आई... अंदर आई तो रूपा बेड पर पसरती फोन निकालती बोली,"भाभी को चिढ़ाती हूँ पहले..."

सुनैना मुस्काती बगल में बैठ गई... फोन लग चुकी थी पर रिसीव नहीं हो रही थी... काफी रिंग होने के बाद फोन रिसीव हुई पर कोई उत्तर नहीं...

रूपा,"हैलो...हैल्ल्ल्लो....भाभी..."

"आहहऽ हाँ....रूपाऽ बोलोऽ ईस्स्स्स..."कई बार हैलो के बाद डिम्पल भाभी लड़खड़ाती हुई बोली... जिसे सुनते ही रूपा चौंक सी गई...

रूपा,"क्या हुआ भाभी, आप ठीक तो हैं ना और कहाँ हो अभी...?"

"हम्म्म...हाँ मैं ठीक हूँ रूपाऽ...ऊफ्फ...घर ही हूँ..." डिम्पल भाभी नॉर्मल होने की कोशिश कर रही थी पर हो नहीं पा रही थी...

"ओके, दो मिनट में पहुँच रही हूँ...बाय.."रूपा के दिमाग में पता नहीं क्या घुस गई और ज्यादा देर ना लगाती हुई सुनैना से चलने बोल बाहर की तरफ रूख कर ली...

"रूपा, दो मिनट...मैं थोड़ी फ्रेश होती हूँ..."सुनैना अचानक रूपा से बोली और हड़बड़ाती बाथरूम में घुस गई... रूपा कुछ समझ नहीं पाई... जब बाथरूम की हड़बड़ी थी तो तब से बैठी क्यों थी...

रूपा बूत सी वहीं खड़ी बाथरूम की तरफ बस देखती रह गई... वो ऐसे जा नहीं सकती थी... सुनैना कोई पाँच मिनट बाद बाहर निकली और रूपा से चलने बोली... रूपा बस मुंडी हिला पीछे हो ली...

रूपा की चोल दिमाग सोचती ही रही कि आखिर ऐसे सुनैना क्यों की? आखिर दोनों डिम्पल भाभी के घर तक पहुँच गई... डिम्पल भाभी गेट खोली और सामने सुनैना से चिपक कर गले लगा ली...

रूपा पीछे खड़ी डिम्पल भाभी को गौर से देखने लगी... और डिम्पल भाभी के खुले बाल, तुरंत पोंछी हुई पसीने वाली चेहरे जो अभी भी बता रही थी ये पूरे पसीने से लथपथ थी...

डिम्पल भाभी सुनैना से अलग होती हुई रूपा से बोली,"हैलो मिस आर. क्या हुआ जो ऐसे बुत बनी खड़ी है... सिर्फ मिलने के लिए इसे बुलाई हूँ...जाते वक्त लेती जाना इसे..."

डिम्पल भाभी की बात सुनते ही रूपा झेंप सी गई और हंसती हुई उन दोनों की हंसी में शामिल हो गई... अंदर आये ही रूपा नजर दौड़ाई बेडरूम की ओर जैसे कोई चीज ढ़ूंढ़ रही हो...

रूपा,"भाभी, मामाजी कहाँ गए? मम्मी बोली कि..."

डिम्पल,"बाथरूम गए हैं..."

रूपा हल्की मुस्कुरा दी पर उसके मन में ढ़ेरों सीन खुद ब खुद उभरती जा रही थी... उधर दोनों बहने अंतिम मुलाकात के बाद से फ्लैशबैक ले चुकी थी...

रूपा कुछ देर बाद उठी और बोली,"भाभी, बात खत्म हो जाए तो इसे पास कर देना मेरे रूम में ...मम्मी की थोड़ी हेल्प कर आ रही हूँ..." डिम्पल भाभी "ओके "कह रूपा को जाने की इजाजत दे दी...

रूपा चल तो दी पर अंदर बेचैनी और बढ़ती जा रही थी... वो जैसे जैसे अपने रूम की ओर बढ़ी जा रही थी, उसके पांव और जड़वत होते जा रहे थे... अपने घर के पास पहुँच रूपा आगे चल नहीं पाई और अगले ही क्षण पलटी और पलक झपकते वापस डिम्पल भाभी के घर के पास...

रूपा अंदर तो नहीं जा सकती थी...वो तुरंत ही जुगाड़ ढूँढ़ ली... घर और बाउंड्री के बीच हल्की गैप जो रहती है., वो उसी से गुजरती डिम्पल भाभी के बेडरूम तक पहुँच गई... इसके अंदर रूपा बस खड़ी रह सकती थी...

वो स्टैचू बन कान अंदर बेडरूम में कर ली... पर अभी किसी तरह की आवाज नहीं आ रही थी... वो इंतजार करने लगी... वो समझ तो गई ही थी कि कुछ गड़बड़ है पर अब वो बस कॉन्फार्म होना चाहती थी...



कुछ ही पल में अंदर हलचल हुई... रूपा चौकन्ना होती कान सटा दी...थोड़ी हड़बड़ी के बाद रूपा को कुछ आवाजें सुनाई पड़ने लगी...

सुनैना,"दीदी, जब आप बिजी थी तो फोन रिसीव क्यों की..? वो तो शुक्र है कि मैं बहाने से देर कर दी नहीं तो पता नहीं क्या होता?" रूपा सुनैना पर दांत पीस कर रह गई...

डिम्पल,"ही..ही... जब तुम थी तो मुझे क्या दिक्कत होती भला..."

सुनैना,"हाँ..हाँ... समझ गई खुदगर्ज कहीं की... खुद लंबे लम्बे घोंट रही थी और मैं वहां टेंशन से मरी जा रही थी..."सुनैना गुस्से से बोली... तभी रूपा के कानों में मामाजी की आवाज पड़ी...

मामाजी,"आह मेरी रानी,झगड़ा क्यों करती हो... अभी तो पूरी रात पड़ी है... लो तुम भी घोंट लो... देखो पूरी तरह साफ कर आया हूँ..."

रूपा की फ्यूज लगभग उड़ सी गई थी... वो सोच ही नहीं पा रही थी ये क्या हो रहा है..? पहले डिम्पल भाभी, फिर सुनैना... मतलब दोनों मामाजी से फंसी है...

तभी सुनैना जोर से खिलखिलाती हंसती हुई चीख पड़ी... रूपा अनुमान लगा ली थी कि सुनैना सी ये चीख कैसी हो सकती है...शायद मामाजी कस के उसे जकड़े होंगे...

सुनैना,"अउच्च्च्च मामाजी... अभी नहीं... आप अभी अभी तो डिम्पल दी की धुनाई किए हैं..."

मामाजी,"अरे मेरी रानी, तुम लोग जैसी गरमागरम चीज सामने हो तो दस को भी लगातार रौंद सकता हूँ... देख कैसा अकड़ गया..."

रूपा चिहुंकती सी अपनी आँख हल्की दबाती सन्न सी हो गई थी... वो नाक भौं सिकुड़ कर सोच रही थी कि कैसे ये दोनों खुद के मामा से... तभी रूपा को मामाजी की सिसकी सुनाई दी...

मामाजी,"आहहहहहह ईस्स्स्सससस सुनैनाआआआआऽ... शाबाससससऽ ऐसे ही करती रहो...औफ्फ....."

रूपा की हालत खराब... उसके अंदर की चींटी कुलबुलाने लगी... उसके हाथ खुद ब खुद जगह पर पहुँच गई और रगड़न मसलन चालू....

अंदर की गरमागरम बातें सुन रूपा बेचैन सी हो थोड़ी लम्बी हो खिड़की में झाँकी पर कोई सफलता नहीं... वो वापस फिर पीछे देख सुनने में लग गई... कुछ ही देर में मामाजी की सिसकी बंद हुई और थोड़ी हड़बड़ी...

फिर जोर से "घप्प्प" की आवाज के साथ सुनैना की दर्द भरी चीख... रूपा मचल कर रह गई... अंदर कुटाई जो शुरू हो गई थी... सुनैना पल पल आहें भर रही थी... मामाजी उसी की धुन में हुंकारें लगा रहे थे...

थोड़ी देर और रूपा रगड़ती रही और लाइव कमेंटरी सुनती रही... नतीजन कुछ ही देर में मामाजी और सुनैना की जोरदार चीख गूंजी और फिर बिल्कुल शांत... पर रूपा अभी शांत नहीं हुई थी.. वो और तेज हाथ चला रही थी और अंदर ही अंदर चीख रही थी...

तभी रूपा एक झटके के साथ शिथिल पड़ गई... अंदर से आई मामाजी की बात उसे हिला सी गई...

मामाजी,"और डिम्पल, तुम अपनी ननद रूपा से कब सेवा का मौका दिलवा रही हो...?"

डिम्पल भी वहीं थी... वो हँसती हुई बोली,"बहुत जल्द मामाजी, बस एक कदम की और दूरी है...अभी तक तो सब चीजें ढ़ंग से होती आई है... फिर वो आपकी बाँहों में ही रहेगी..."

मामाजी और डिम्पल की बातें रूपा को छलनी सी कर गई... रूपा की आँखें बहनी शुरू हो गई थी...

"दीदी, ये तमाचा कौन है... इसका नाम तो पहले नहीं सुनी थी..."सुनैना हल्की कराहती हुई बोली...

डिम्पल,"वो... वो कनक का दोस्त है...चोदू नम्बर वन... ही..ही..ही... तुम कैसे जानती उसे..?"

सुनैना,"आज रूपा उससे मिली थी..."

डिम्पल,"क्या..?रूपा और उससे... "

सुनैना,"हाँ दीदी, पर रूपा उस पर काफी गुस्सा थी और वो गिड़गिड़ा रहा था सॉरी सॉरी बोल के... बाद में रूपा मान गई तो उसने हम दोनों को डिनर भी करवाया... हम दोनों को यहाँ गली तक छोड़ कर गया है अभी वो..."

डिम्पल भाभी की हँसी एक बार फिर सुनाई पड़ी... रूपा बार बार अपने आँसू पोंछ रही थी पर उसकी आँख तो जिद्द पर थी कि आज नहीं रूकनी...

डिम्पल,"अरे वो भी रूपा का आशिक है... कनक उसे थोड़ा मौका दिलवा दी रूपा से बात करने का तो वो थोड़ा को पूरा करना चाहता है... और रूपा जैसी शरीफ उसे भाव तक नहीं देती... हो सकती है वो कुछ ऊटपटांग बोल दिया होगा जिससे वो गुस्से में थी..."

रूपा अचानक से सर दिवाल पर पटक दी... मैं तमाचे को कितना गलत समझ रही थी कि वो भी होगा मिला पर वो.... वो अब खुद की गलतफहमी पर अफसोस भी कर रही थी... पर खुशी इस बात की भी थी कि वो तमाचे से गुस्सा नहीं थी अब...

अगले ही पल रूपा सारी दुनिया भुला के तमाचे से मदद की सोच ली थी... अब वही था बचा...जो इन दरिंदों वाली नियत से बचा था...

डिम्पल,"सुनैना, कपड़े पहन लो अब... जीजू आने ही वाले हैं..."

सुनैना,"क्या दी, सब दिन आप चढ़वाती ही हो...एक दिन मैं चढ़वा ही ली तो क्या हो जाएगा..." और सुनैना हंस पड़ी...

डिम्पल हंसती हुई बोली,"अरे... मामाजी... सुन रहे हैं ना आप... अब आप ही बताइए कि मैं इसे कब मना की हूँ..."

मामाजी,"हाँ मना तो नहीं की...एक काम करते हैं डिम्पल... आज इसे यहीं सोने दो और तुम मेरे साथ..."

तभी सुनैना भड़कती सी बोली,"मजाक की भी हद होती है... जीजू कभी नहीं तैयार होंगे..."

मामाजी की कुटील हँसी निकल गई और डिम्पल की भी... तभी डिम्पल बोली,"तुम नहीं जानती फिर अपने जीजू को सुनैना...तुम बस हाँ कर दो फिर सारी जिम्मेदारी मेरी..."

सुनैना की बस हल्की हँसी निकल गई डिम्पल की बात पर... पर तभी मामाजी राज की बात कह उसे चौंका दिए....

मामाजी,"डॉर्लिंग सुनैना, एक दफा मैं और तुम्हारे जीजू एक साथ एक लड़की की आगे पीछे धज्जियाँ उड़ा चुके हैं..."

सुनैना ना चाहती हुईपूछ ही ली,"किसकी?"

मामाजी इत्मीनान से बोले,"आपकी प्यारी चहेती दीदी डिम्पल रानी की...पूछ लो!"

ये सुन सुनैना बस क्या कह रह गई... इधर रूपा पर एक और बम आ गिरी... वो अब सहन करने की काबिल नहीं थी... वो हल्की घूमी और वापस बाहर की तरफ निकल ली...

बाहर निकलते ही आँसू पोंछती सर पकड़ी घर की तरफ भागती हुई चल दी..


   

FUN-MAZA-MASTI पापा प्लीज........31

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 पापा प्लीज........31




रूपा काफी देर तक यूँ ही बैठी रही... फिर वो उठी और अपने में जा लेट गई...सो तो नहीं पाई पर जग भी नहीं रही थी...

"रूपाऽ...कितना सोएगी ये लड़की...." मम्मी बडबड़ाती हुई आई...रूपा ने सर घुमा कर मम्मी पर नजर डाली... मम्मी के पीछे कोई और भी थी जिसे रूपा देख नहीं पा रही थी...

रूपा अचरज सी उठती हुई बोली,"नहीं मम्मी, बस लेट रही थी... और तुम्हारे पीछे कौन है जो छुप रही है..."

मम्मी हँसती हुई बोली,"तुमसे मतलब कौन है... तू चुपचाप सोती रह ना... "

रूपा बेड से उठती हुई मम्मी को पकड़ साइड की तो उसकी आँखे खुली रह गई और होंठों को होल करती हुई बोली,"वॉव....सुनैना तुम.... थैंक्स यार..."

रूपा सुनेना की कलाई पकड़ खींचती सी बेड पर बिठा दी और बोलती गई,"कैसी है तू...कब आई... आई तो मुझे क्यों नहीं बुलाई ...मैं आ जाती स्टेशन रिसीव करने... " रूपा नॉनस्टॉप ना जाने बोलती रही और सुनती कुछ नहीं...

सुनैना जोर से हँसती हुई बोली,"स्टॉप रूपा, साँस तो ले लो फिर सब बातें बता रही हूँ...ही...ही..ही.."

"हाँ हाँ...बेचारी इतनी दूर से आई हैं तो बातों से ही पेट भर दो... आते ही तुम्हें ही खोजती आई है..." मम्मी बीच में बोल पड़ी...

रूपा,"टेंशन क्यों लेती हो मॉम, आज सुनैना के साथ मैं बाहर खाने जा रही हूँ...आप बस चाय पिला दो...प्लीज.."

मम्मी,"ओके..ओके... जो तेरी मर्जी कर..." कहती हुई मम्मी बाहर निकल गई...

मम्मी के बाहर निकलते ही सुनैना बोली,"ये सोने का समय है क्या जो तुम सो रही थी..."

रूपा,"नहीं, बस यूँ ही लेटी थी...और सुना, होने वाले से मिल ली..."

सुनैना,"नो...तुम्हारे बगैर कैसे मिल सकती..."

रूपा मुस्कुराती हुई बोली,"अच्छा, फिर तो मैडम रिस्क है इसमें..."

सुनैना हैरान सी हो बोली,"कैसी रिस्क..?"

रूपा,"वो क्या है ना कि मैं थोड़ी लोभी व्यक्तिव की हूँ... अगर मुझे पसंद आ गए तो तेरी तो वाट लग जाएगी...हीहीही..."

सुनैना,"अच्छा तो मुझे उल्लू समझ रही है क्या? मैं भी तेरे वाले को उड़ा सकती हूँ...समझी क्या?"

रूपा,"नो प्रॉब्लम, उड़ा लेना... ही..ही..ही..."
सुनैना भी हंस पड़ी साथ में...

तभी मम्मी चाय लेती हुई आ गई और चाय सुनैना को देती बोली,"आपके मामा जी चीनी वाली चाय नहीं पीते हैं क्या.."

सुनैना,"नहीं मम्मी जी, वो उन्हें सुगर प्रॉब्लम है..."

मम्मी सुनैना की बात सुन हामी भर दी... तभी रूपा बोली,"ऐसा क्यूँ..."

मम्मी,"क्या मतलब? प्रॉब्लम है तो कैसे पी सकते...डॉक्टर मना किए होंगे... वैसे भी बिना चीनी वाली चाय बना रही उनके लिए..."

मम्मी बोल कर वापस चल दी तो पीछे से रूपा बोली,"मम्मी, अंकल जी को सुगर से प्रॉब्लम है तो बिना शक्कर वाली कैसे पी सकते.."

मम्मी रूपा की बात सुन पलटती हुई सवाल की,"..तुम डॉक्टर हो क्या?"

रूपा,"हाँ... आप अपने होंठों वाली सुगर मिला देंगी तो कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी उन्हें...ही...बी...ही..."

"शैतान की नानी, रूक...बताती हूँ..."कहती हुई मम्मी रूपा की ओर थप्पड़ उठाती बढ़ी तो रूपा "सॉरी..सॉरी..मम्मी...ही..ही..."कहती हुई दूसरी तरफ भाग गई... सुनैना रूपा की बात सुन बेड पर ही लोट पोट सी हो गई....

एक दो राउण्ड चेयर टेबल के इर्द गिर्द घूमने के बाद जब रूपा पकड़ नहीं आई तो मम्मी तीखी आवाज में बोली,"कब तक भागोगी... जब पकड़ी जाएगी तो बताऊंगी..."

रूपा,"समधी साहब लगेंगे तो थोड़ी दे दी तो क्या हो जाएगा मॉम..."

"फिर बोली...रूक..."मम्मी एक बार फिर दौड़ी तो रूपा भागती सी बोली,"चाय उबल जाएगी मम्मी..."

"ओह...आती हूँ फिर पूछती हूँ.. "मम्मी रूक कर गेट से बाहर निकल सरपट किचन की तरफ निकल गई... मम्मी के बाहर जाते देख रूपा पीछे से बोली,"मम्मी, लिपस्टिक डीप रेड वाली यूज करना...ही..ही..ही..."

सुनैना की तो हँसते हँसते पेट फूल रही थी... वो कुछ कहना चाह रही थी पर हँसी रूकती तो ना कह पाती...

"ओड मैडम,चाय पी लो..ठंडी हो रही है.. मम्मी के साथ ये सब चलती रहती है..."रूपा अपनी चाय पकड़ती हुई बोली तो सुनैना भी रूक रूक चाय पीने लगी...

चाय खत्म होते ही बाथरूम फ्रेश होने "अभी आई.." कह घुस गई... सुनैना वहीं इधर उधर देखने लगी... अचानक से सुनैना को फोन की रिंग सुनाई देने लगी... जल्द ही फोन सुनैना के हाथों में थी...

सुनैना Unknown नम्बर देख रूपा को आवाज दी,"रूपा ,फोन है?"

रूपा,"किसका है.." अंदर से ही रूपा बोली... सुनैना,"पता नहीं, नया नम्बर है.." रूपा अंदर से ही बोली,"रहने दे ,आ रही हूँ..."

सुनैना रूपा के इस जवाब से चौंक सी गई और तरह तरह की शंका नाचने लगी उसके दिमाग में...वो अचानक से मुस्कुराई और फोन रिसीव कर कान में सटा ली...


"प्लीज रूपा,मेरी बात समझने की कोशिश करो...सिर्फ एक बार तुमसे मिलना चाहता हूँ... मेरी बात से तुम्हें तकलीफ जरूर हुई होगी पर जहाँ तक मेरा यकीं है कि वो यही चाहता है..."फोन रिसीव होते ही तमाचा बोलने लगा....

सुनैना की आँखे चमक उठी कि फोन गलत नहीं लगी पर ये है कौन... वो अगर कुछ बोलती तो आवाज सुन वो कहीं पूछ बैठता कि कौन हो या फिर फोन काट देता...सुनैना कुछ सोच बस "हम्म्म्म "कर रह गई...

तमाता इस आवाज से रूपा की हामी समझ खुशी से बोला,"थैंक्स रूपा...मैं बस तुम्हारी गली के बाहर कॉफी सेन्टर पर हूँ...प्लीज कम..."

सुनैना तेजी से "ओके.."बोली और फोन काट दी... सुनैना के अंदर ढ़ेरों सवाल पैदा हो रही थी... वो बस रूपा का वेट कर रही थी कि कब निकलेगी और उससे इन्क्वायरी की जाए...

कुछ ही देर में रूपा गुनगुनाती हुई बाहर निकली... सुनैना सवालिसा नजरों से एकटक बस उसे ही देखी जा रही थी... रूपा सुनैना को ऐसे देख पूछ ली,"क्या हुआ..?"

सुनैना हल्की मुस्कान लेती बोली,"कॉफी सेन्टर पर कोई इंतजार कर रहा है..."

रूपा शॉक सी हो गई और बोली,"क्या...? फोन रिसीव की थी तुम...?"

सुनैना,"करनी पड़ी... कई बार कट कर दी तो वो बार बार कर रहा था तो रिसीव की..."

रूपा सुनैना की बात सुन फोन चेक करने लगी... रूपा के चेहरे पर नम्बर देख गुस्से की रेखा साफ झलकने लगी...सुनैना रूपा को गुस्से में देख बोली,"तुम नहीं चाहती कि मैं आऊं तो मैं नहीं आऊंगी..."

रूपा सुनैना की बात सुन फोन रखती बोली,"मुझे इससे मिलने की कोई जरूरत नहीं...भांड़ में जाए..." सुनैना चौंक सी गई रूपा की बात से...

रूपा को गुस्से में देख सुनैना समझाने की कोशिश में बोली,"क्या रूपा, नाराजगी है तो एक बार मिल लो सब ठीक हो जाएगा...क्योंकि जितना परेशान था वो शायद मना ही लेगा....और प्यार में तो झगड़े होते रहते हैं..."

रूपा सुनते ही जबरदस्ती हँसी हँस बोली,"प्यार...और इससे... ही..ही...ही... शाला ये दुश्मन के भी काबिल नहीं है..."

सुनैना,"..तो फिर कौन था..."

रूपा,"कनक का फ्रेंड है...चल छोड़ इसे, जल्दी से फ्रेश हो जा... बाहर चलते हैं घूमने...आते वक्त खाना भी खा लेंगे..."

सुनैना कुछ बोलना चाह रही थी पर बोली नहीं... बोलती क्यों बाहर तो जा ही रही है... वो उठ के चुपचाप बाथरूम में फ्रेश होने घुस गई...

कुछ ही देर में दोनों स्कूटी से सड़क पर थी... तमाचा बाहर खड़ा बस बगुले की तरह नजर गड़ाए था... उसने रूपा को निकलते देखा पर रोक नहीं सका... वजह थी सुनैना... वो समझ नहीं पाया कि कौन है ये...

वो बस तेजी से बाइक तक गया और रूपा के पीछे हो लिया... कुछ ही पलों में रूपा को अहसास हो गई कि कोई ठीक उसके पीछे है...वो गुस्से से जल भुन गई...

तभी सुनैना चहकती सी बोली,"रूपा,गोलगप्पे.." रूपा नजर दौड़ाई तो उसकी भी मुस्कान निकल गई और स्कूटी गोलगप्पे वाले के ठीक समीप स्वत: रूक गई...

तड़तड़ सुनैना उतरी और गोलगप्पे वाले को बोली,"भैया झटपट से शुरू हो जाओ...रूपा जल्दी आ..."

रूपा स्कूटी खड़ी कर हँसती हुई बोली,"अरे भैया जी भाग नहीं रहे हैं जो इतनी उतावली हो रही है...क्यों भैया जी..."

बेचारा गोलगप्पे वाला क्या बोलता ,बस हाँ में मुंडी डुला दिया...और दोनों के हाथ प्लेट थमा दिया... पीछे से तमाचा भी तब तक आ पहुँचा और गोलगप्पे वाले को इशारा कर दिया कि मैं भी हूँ...

गोलगप्पे वाला मुस्कुरा पड़ा... उसके साथ तो ये नियम था कि कोई लड़की आए तो उसके पीछे दो चार तो यूँ ही आ जाते हैं...वो एक और प्लेट तमाचे को थमा दिया और लगा पानी भरने गोलगप्पे में...

तमाचा की नजर रूपा के चेहरे पर ही टिकी थी... रूपा ना चाहते भी एक दो बार तमाचे से नजर टकरा ही ली...वो बस गुस्से को पीने की कोशिश कर रही थी...पर कब तक..?

आखिर रूपा बरस ही पड़ी... रूपा भड़कती सी बोली,"ऐ मिस्टर, मैं तुमसे कोई बात नहीं करना चाहती...चुपचाप खिसक लो नहीं तो..."

रूपा की तीखी आवाज सुनते ही सब के सब अचंभित... सुनैना तुरंत समझ गई कि ये वही फोन वाला है...जबकि गोलगप्पे वाला की तो फटने सी लग गई...

तमाचा आँख मींचते हुए अपने पर काबू किया और बोला,"बस पाँच मिनट रूपा... उसके बाद मैं चला जाउंगा और आगे तेरी मर्जी..."

रूपा कुछ बोलती बीच में सुनैना बोल पड़ी,"दे दे पाँच मिनट...करना वही जो तुम्हें ठीक लगे..." रूपा सुनैना की बात सुन सोचती हुई हामी भर दी और बोली,"ओके... तुम गोलगप्पे खाओ... मैं आ रही हूँ..." सुनैना हामी भर दी...

रूपा टिमटिमाती पैर पटकती सुनैना से कुछ कदम हट खड़ी हो गई... तमाचा भी पीछे पीछे रूपा के निकट पहुँचा तो रूपा बोली,"भौंकना शुरू कर..." तमाचे की तो जल गई...

तमाचा,"शाली मुझसे प्रॉब्लम क्या है तुझे...कल तक तो ठीक थी और अचानक से क्या हो गया..?"

रूपा,"शाले मुँह संभाल के बात कर...और सिर्फ पाँच मिनट...याद रख.."

तमाचा पाँच मिनट सुन मुंह बंद कर लिया और रूपा की तरफ देख बोला,"होटल M जानती हो ?" रूपा ये प्रश्न सुन आँख तरेरनी लगी कि यहाँ कौन नहीं जानता होटल M...

तमाता आहे बोला,"जानती ही होगी...ओके... आज वहाँ मैंने कनक और तुम्हारी डिम्पल भाभी को देखा था... वो भी आर.जे. के साथ... और..."

रूपा बीच में तुनकती हुई बोली,"शाले मैं शक्ल से उल्लू लगती हूँ क्या..?"

तमाचा अचरज में पड़ गया...फिर हल्के से बोला,"..मतलब?"


रूपा,"नौटंकी किसी और को दिखाना...शाले तुम सब मिले हुए हो... तुम क्या हो मैं अच्छी तरह जानती हूँ और ये इमोशनली ब्लैकमेल कर मुझे पाने की भूल सपने में भी मत करना..."

तमाचा ये सुनते ही आग बबूला सा होता बोला,"स्टॉप रूपा... किसी भी चीज की एक लिमीट होती है... और तुम हो कि..."

रूपा,"ओह...तो मैं लिमीट पार कर गई... और तुम सब मिल कर क्या कर रहे हो मेरे साथ... इतना ही शौक है तो अपनी मां बहन के साथ खेलो ना गेम... खूब मजे देगी.."

रूपा की बात सुन तमाता का दिमाग सुन्न रह गया और वो एक तड़के से झन्नाटेदार थप्पड़ रूपा के गालों की तरफ दौड़ा दिया... रूपा की चीख थप्पड़ पड़ने से पहले ही निकल गई और चीख सुन तमाचे के हाथ गालों के ठीक पहले रूक गई...

रूपा सुबकने लगी थी डर से... तमाचा हाथ झटक के खींचा और बालों को सहलाता अंदर उबल रही गुस्से को शांत करने लगा... दोनों खामोश थे... बस खुद पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे...

कुछ पलों के बाद खामोशी टूटी... तमाचा,"सॉरी रूपा...तुम हमसे इतनी नाराज क्यों हो सब समझ में आ गया... शायद कनक के बारे में तुम भी जान गई हो और तुम समझ रही हो कि ये सब मुझे भी मालूम है और शायद मैं भी शामिल हूँ..."

रूपा सिसकना छोड़ तमाचे की बात सुनने लगी... तमाचा आगे बोला,"तो तुम गलत हो रूपा... रूपा मैं लड़कियों के पीछे जरूर रहता पर सिर्फ उसी के जिसकी रजामंदी हो... जो ना चाहती उसे तो मैं देखता भी नहीं और कॉलेज में तुम देखती भी हो... पर ये सब... मर जाऊंगा पर ऐसा घिनौना खेल कभी नहीं खेल सकता..."

तमाचा,"कई लड़कियाँ तो ऐसी भी है जिसे मैं जो कहूँगा वो हंसती हुई कर लेगी पर नहीं... पर इससे हमें क्या मिलेगा? आज कुछ पैसे मिल जाएंगे और बाद में जिंदगी भर बददुआ जिसकी लाइफ बर्बाद हो जाएगी उससे..."

तमाचा की बात रूपा अब एकटक सुने जा रही थी चुपचाप... तमाचा,"अब भी विश्वास नहीं है तो कोई बात नहीं...मैं जा रहा हूँ... तुम बस किसी तरह इन सब के झांसे में मत आना... और मेरा विश्वास है कि तुम इसे हैंडल कर लोगी...फिर भी अगर मेरी जरूरत पड़ी तो बेझिझक याद कर लेना...चलता हूँ...बॉय.."

तमाचा हारा सा मुड़ा और सीधा अपने बाइक की तरफ चल दिया... रूपा ठिठकी सी खड़ी देखती रही... कुछ ही पलों में तमाचा की बाइक दूर निकल चुकी थी... तभी सुनैना रूपा को झकझोर कर होश में लाई...

रूपा,"अ..ह...हाँ... खा ली तुम..."

सुनैना,"हाँ, चलो अब तुम भी खा लो..." सुनैना रूपा को परेशान देख कुछ पूछी नहीं... वो बस रूपा को नॉर्मल करने की सोच रही थी... रूपा वापस गोलगप्पे की तरफ आई और दो चार खाई और बस कर दी...

रूपा के दिमाग में बस तमाचे की बात घूम रही थी...वो पैसे निकाली और गोलगप्पे वाले को दी... अचानक से रूपा एक बार फिर चिल्ला पड़ी...

रूपा,"ओए, खाई इतनी सी और पैसे लिए ढ़ेर सारी..."

"मैडम, दस का वो आपका दोस्त था ना वो खा के चला गया..."गोलगप्पे वाले इत्मीनान से समझा दिया...

रूपा दांत पीसती हुई बोली,"खाया वो और पैसे भरूँगी मैं... रूक.. अभी बताती हूँ..." रूपा के तेवर देख सुनैना बीच में आ गई और बोली,"छोड़ ना रूपा, जाने दे..."

"ऐसे कैसे जाने दूँ.. अभी शाले को दो चार सुनाती हूँ फिर देखना..."रूपा रूक तो गईपर तुरंत फोन निकाल तमाचे को फोन घुमा दी...

रूपा,"ओ भिखारी, जब खाने का इतना ही शौक है तो जेब में पैसे ले कर चला कर...समझा ना..."रूपा फोन रिसीव होते ही बरस पड़ी...

तमाचा,"ओ शिट... सॉरी यार... मैं अभी आया...प्लीज... गलती से चला आया..."

रूपा,"रहने दे, मैं दे दी..."

तमाचा,"थैंक्स यार..."

रूपा,"थैंक्स...? शाले चुपचाप मेरे पैसे पहुँचाओ रेस्टोरेंट में... मैं वहीं डिनर करने जा रही हूँ..." और फोन कट... रूपा फोन रखी और सुनैना के साथ रेस्टोरेंट पहुँच गई...

तब तक तमाचा भी आ गया था... वो रूपा के पास पहुँच बोला,"वो सॉरी रूपा, गलती से मैं निकल गया था...कितने देने हैं?"

रूपा हल्की मुस्काई और बोली,"कितने तो नहीं पूछी...एक काम करो... तुम खा के निकले तो हम पे की और अब हम दोनों खाएंगे तो तुम पे कर देना...हिसाब बराबर.."

तमाचा ये सुनते रही हँसे बिना ना रह सका...वो अंदर चलने का इशारा कर बोला,"श्योर,ऐसे मौके रोज थोड़े ही आएंगे..." साथ ही इस बात की भी खुशी थी कि आखिर रूपा समझ तो गई कि मैं उनमें शामिल नहीं हूँ...

रूपा और सुनैना ये सुन हंसती हुई टेबल तक पहुँच गई और आर्डर करती हुई तमाचे से बोली,"तुम भी खाओगे..?"

"ना, तुम्हारी क्यूट शक्ल देख अपना पेट भर लूँगा...बात करती है..." तमाचा चिढ़ता सा बोला और हँस पड़ा... आर्डर के बाद तमाचे के अंदर काफी देर से फूल रही एक बात फट ही गई...

तमाचा,"ये कौन हैं? पहले कभी देखा नहीं..."

रूपा तमाचे की बात सुन सुनैना की तरफ देख हंसी और आहिस्ते से अगल बगल देखती बोली,"तेरी भाषा में सुपर टंच रसदार मालऽ"

रूपा की ये बात सुनते ही तमाचे के साथ सुनैना भी शॉक रह गई... तमाचा तुरंत ही संभला और सुनैना की तरफ देख रूपा से बोला,"ओर तुम्हारी भाषा में..?"

रूपा,"शाली.." ये सुनते ही तमाचा चौंक पड़ा,"..क्या?"

रूपा,"क्या यार, बड़े भैया की शाली हैं तो मेरी भी शाली हुई ना..." तमाचे समझ "ओ.." कर हामी भरा तब तक सुनैना अपना हाथ आगे तमाचे की ओर बढ़ाती बोली,"सुनैना... "

तमाचे तुरंत हाथ मिलाता बोला,"मस्त शाली हो..." तमाचे की बात सुन रूपा खड़ी हुई और तमाचे से बोली,"उठो..."

तमाचा सन्न...अब क्या हो गया इसे... वो समझने की कोशिश करता उठा तो रूपा बाहर निकलने के लिए इशारा कर दी... सुनैना भी कुछ समझ नहीं पाई कि क्या हो गया इसे... हाथ ही तो मिलाई हूँ...

रूपा भी तब तक बाहर निकली और तमाचे के पास आ बोली,"मजे लेने वाली चीज है तो जा कर बगल में बैठो और मजे लो... ही..ही..ही..."

तमाचा माथा पीट लिया और सुनैना मुंह छिपा कर हंसने लगी "अजीब नौटंकी है ये रूपा..." सोच कर... तब तक तमाचा जम्प लगाता सुनैना के बगल में सट के "हाय.."करता बैठ गया और रूपा सामने...

खाना भी तब तक आ गया और तीनों मस्ती में डिनर करने लगे...
 

Thursday, April 16, 2015

FUN-MAZA-MASTI पापा प्लीज........30

FUN-MAZA-MASTI

 पापा प्लीज........30


 तमाचा उधर आर.जे. का नम्बर डायल करने लगा... फोन लगते ही तमाचा नमस्कार कर निवेदन पूर्वक बातचीत करना शुरू किया... पर आर.जे. इतना बुद्धू तो था नहीं... आर.जे. नमस्कार का जवाब दे पूछा,"जी आप कौन..."

तमाचा,"जी मैं...मैं... वो यहीं का हूँ... दरअसल मुझे आपसे कुछ काम था..."

आर.जे.,"जी कहिए, कैसा विवाद है...?"

तमाचा,"विवाद....आपका मतलब झगड़ा... नहीं नहीं... मेरा किसी से झगड़ा नहीं हुआ है..."

आर.जे. थोड़ा रूका फिर आश्चर्य लब्जों से बोला,"तो जमीन-वमीन का मामला है क्या भाइयों में..."

तमाचा अफसोस सा हो बोला,"अरे नहीं सर, मैं अपने बाप एकलौता हूँ तो कैसे हो सकता है... दरअसल मुझे कुछ और काम था..."

आर.जे. ये सुनते ही सख्त लब्जों में बोला,"तो आप बेवजह वकील को क्यों परेशान कर रहे हैं जब कोई लफड़ा ही नहीं हुआ..."

तमाता वकील सुनते ही सन्न रह गया... शाला पेशे से वकील है... तमाचा आर.जे. के तीखे शब्द सुन गुस्सा से भर गया... वो अपने ऊपर कोई गुस्सा करे वो हद से बढ़ने नहीं देता था पर आज सुनने के बाद भी खून का घूंट पी कर रह गया...

तमाचा लंबी सांस छोड़ा और आँख मींचते हुए बोला,"मेरा काम ये है सर कि मुझे ना..."

आर.जे.,"क्या मुझे मुझे लगा रखे हैं...जल्दी बोलिए... मुझे कोर्ट में क्लाइंट इंतजार कर रहे हैं..."

तमाचा,"मुझे एक लड़की चाहिए आज..." तमाचा बोलते के साथ ही चुप हो गया और आर.जे. के जवाब का इंतजार करने लगा...

आर.जे.,"क्या....?"

तमाचा,"जी...मुझे लड़की चाहिए वो भी एकदम मस्त आइटम... पैसे चाहे जितना..."

तमाचा अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाया कि आर.जे. बोला,"बदतमीज मुंह संभाल के बात कर...क्या समझ रखा है मुझे..."

तमाचा गाली सुन थोड़ा सकपका सा गया... एक ख्याल उसके जेहन में अब आया कि क्या ये सच आर.जे. है कि कोई और... वो थोड़ा रूकता हुआ बोला,"जी आप आर.जे. ही बोल रहे हैं ना..."

आर.जे.,"कौन आर.जे., काहे का आर.जे.... मैं वकील मो. रियाज खान बोल रहा हूँ...समझे... अब भी समझ में नहीं आया तो कोर्ट आजा और मिल ले... पता नहीं कितने बदतमीज लोग हो..."

और खट की आवाज तमाचे की कान में गूंज पड़ी...फोन कट चुकी थी... तमाचा के तन बदन में करंट लग गई थी... वो एकटक फोन को निहारे जा रहा था... उसका शरीर तो गुस्से से तमतमाने लगा... 

उसने अपनी बाइक निकाली और घनघनाते हुए सड़क पर रेस लगा दिया...अब वो कहाँ जा रहा था ये उसे खुद भी मालूम नहीं..

उधर रूपा बार बार घड़ी देख रही थी... वो अपने रूम में थी पर मन डिम्पल भाभी पर टिकी थी... वो बेचैन सी हो बाहर निकली और बाहर बरामदे तक आ गई...वहीं कुर्सी पर बैठ डिम्पल भाभी का इंतजार करने लगी...

तभी अचानक से उनके कानों में जोर से कू की आवाज पड़ी... जिससे रूपा उछल पड़ी और पीछे मुड़ कर देखी कि कौन है... सामने कनक जोर से हँसी जा रही थी...

कनक हँसती हुई बोली,"क्यो महारानी, रोहन साहब की याद में इतनी डूब गई मैं आ के कब से बगल में खड़ी हूँ, मालूम है कुछ?"

रूपा लजाती मुस्काती नजरें झेंपी और आहें भर खुद को नॉर्मल करती हुई बोली,"ऐसी कोई बात नहीं है कनक... बैठो... अचानक से कैसे आ गई..."

कनक बैठती हुई बोली,"मत बता... मैं पापा के लिए लंच ले गई थी... आज सुबह सुबह मम्मी पापा में जबरदस्त फाइट हुई थी और पापा बिना खाए ऑफिस चले गए थे..."

कनक की बात सुन रूपा हँसती हुई बोली,"फाइट ...क्यों?" 

कनक,"अरे बात कुछ नहीं थी... ये सब चलती रहती है...शाम में फिर सब ठीक ठाक ही रहेगी... अच्छा छोड़ उन बातों को... ये बता कुछ मालूम पड़ी कि वो क्लिप किसकी थी..."

रूपा,"नहीं यार... और तमाचा से बात हुई क्या?" रूपा मायूसी सी बोली...

कनक,"नहीं पर वो आज आर.जे. से बात जरूर करेगा और सारी बात हमें जरूर बताएगा... क्योंकि कुत्ते के पेट में कोई बात पचती नहीं है..."

रूपा हल्की मुस्कान बिखेरती हुई बोली,"हम्म्म्म..." रूपा हामी भरती हुई बोली... तभी रूपा की नजर सामने आ रही डिम्पल भाभी पर पड़ी... रूपा की नजर तुरंत गेट की तरफ गई पर वहाँ कोई नहीं था... वो फिर से डिम्पल भाभी की तरफ देखने लगी...

कनक की नजर भी रूपा की नजरों की दिशा में घूम गई और सामने डिम्पल को देख कनक जोर से बोले,"नमस्ते भाभी जी..." तेज स्वर से रूपा की तंद्रा भंग हुई और अचकचा सी गई...

डिम्पल भाभी तब तक पास पहुँच चुकी थी और नमस्ते करती बोली,"क्या बात है कनक... आज अचानक ऐसे..."

कनक,"हाँ भाभी बस मिलने की इच्छा हुई तो बस चली आई..."

"बिल्कुल सही... "डिम्पल भाभी कहती हुई रूपा की तरफ देखी तो रूपा अभी भी गेट की ओर ही नजर टिकाए थी कि भाभी बोली कोई आएगा पर अभी तक वो आया क्यों नहीं है...

डिम्पल रूपा की हालत समझ मुस्कुराती हुई बोली,"क्या हुआ रूपा? किसी का इंतजार कर रही हो..." रूपा भाभी की बात सुनते ही सकपकाती नजरें भाभी की तरफ कर ली...

और कनक भला ऐसे में चूकती कैसे..? कनक खिलखिला के बोल पड़ी,"हाँ रूपा, तुम तो कह रही थी कि दो बजे तक आएगा तो मिलवा दूँगी...अब अगले दिन दो बजे आएगा क्या..?"

रूपा मुश्किल में फंस लड़खड़ाती मुस्कुराती शब्दों से बोली,"कनक ,तू बाज नहीं आएगी शैतानी से क्या? भाभी , मैं तो बस ये सोच रही थी कि आप इस वक्त कहाँ जा सकती हो.."


रूपा के ऐसे सवाल सुनते ही डिन्पल भाभी चौक सी गई... वो उम्मीद नहीं की थी क्योंकि सुबह ही तो बताई थी कि कहाँ जाने वाली है और अब फिर पूछ रही है वो भी कनक के सामने... 

डिम्पल भाभी थोड़ी हिचकिचाई और बोली,"अच्छा तो उल्टी वार मुझ पर ही...हें... शीला है ना वो...."

डिम्पल इतनी ही बात बोली थी कि रूपा बीच में रोकती बड़बड़ाने लगी,"समझ गई...समझ गई... वो शीला जिन्हें अगर एक सुई भी लेनी हो तो दस दुकान पर जरूर ट्राई करती हैं और जब आप उनके साथ शॉपिंग जा रही हैं तो अभी भी काफी देर हो चुकी है... प्लीज भाभी... जल्दी जाइए...नहीं तो...."

रूपा बात खत्म करते ही जोर से हँस पड़ी साथ में कनक और डिम्पल भी हँसे बिना ना रह सकी... डिम्पल भाभी हंसी रोकती बोली,"ठीक है रूपा, मैं निकलती हूँ... कनक तुम अभी रूकेगी ना..."

कनक,"नहीं भाभी, मम्मी जल्दी आने बोली थी और मैं यहाँ आकर बैठ गई हूँ... मैं भी निकल जाऊँगी..."

डिम्पल,"ओके...अगर चलेगी तो चलो कुछ देर तक साथ तो रहेंगे..." डिम्पल भाभी की बात सुन कनक उठी और रूपा की तरफ देख बोल पड़ी,"बाय रूपा,शाम में कॉल करती हूँ..."

रूपा डिम्पल भाभी को यूँ अकेली जाती देख मायूस सी हो गई थी... मन ही मन गाली भी दे रही थी कि वापस आओ पहले, फिर आपकी खबर लेती हूँ... रूपा एक बार फिर गेट की तरफ नजर करती मायूसी से कनक को बॉय बोली...

डिम्पल भाभी और कनक दोनों चल दी गेट की तरफ... रूपा कुर्सी से उठ देखी जा रही थी... अचानक से रूपा को एक जोर की बिजली चमक गई...

डिम्पल भाभी गेट से बाहर निकलने से पहले वापस रूपा की तरफ मुड़ी और कनक की तरफ इशारा करती अपनी एक आँख दबा दी... रूपा की तो होश उड़ गई... वो वापस धम्म से कुर्सी पर जा गिरी...

रूपा यकीन नहीं कर पा रही थी कनक भी इनमें शामिल है और वो उसके साथ नाटक कर रही थी अभी तक... रूपा सब समझ चुकी थी आखिर डिम्पल भाभी को सारी बातें मालूम कैसे पड़ती थी...

और सीमा भाभी भी एक ही झटके में चारों खाने चित्त क्यों हो गई थी... रूपा ये सब सोचते सोचते शून्य में चली गई थी... वो बिना हिले डुले अब तक गेट की तरफ ही निहारे जा रही थी...

उधर तमाचा अपनी बाइक से लहराता बस बढ़ा जा रहा था... उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था... अगर मामला सीधे उससे होता तो कब तक निपटा चुका होता पर वो बेबस था...

अचानक उसकी बाइक की ब्रेक खुद ब खुद लग गई... बाइक रूकते ही तमाचा आश्चर्य से बाइक को निहारता हुआ बोला,"शाला, बिना लगाए ब्रेक कैसे लग गया..." फिर वो आसपास देखा तो वो फिर चौंक गया... वो ठीक कोर्ट परिसर के बाहर था...

तमाचा,"शाला जब ऊपर वाला यही चाहता है तो यही सही..." और उसने बाइक कोर्ट परिसर में दाखिल कर दिया... उसने बाइक पार्क की और कोर्ट की तरफ चल दिया... 

तमाचा वहीं एक फाइल की बंडल ले जा रहे वकील के पाल पहुंचा और पूछा,"सर, यहाँ कोई मो0 रियाज खान वकील हैं.."

उस वकील ने बिना रूके तमाचे की ओर देखा और पूछा,"कैसा केस है..? मैं बड़े से बड़े केस हैंडल कर ...."

तमाचा उसकी वकीली भाषा सुनते ही उसे बीच में रोकते हुए बोला,"नहीं नहीं सर, दरअसल पापा उनसे एक फाइल लेने भेजे हैं और मैं उन्हें पहचानता ही नहीं हूँ इसलिए..."

उस वकील ने यमाचे की बात सुनते ही आँख गुरेरते हुए बोला,"मेन गेट के ठीक सामने दाएँ उसका ऑफिस है..." और वो तेजी से खुद से बड़बड़ाता तमाचे से दूर निकल गया...

तमाचा वहीं से पलटी मारी और धड़धड़ाता रियाज खान के ऑफिस जा पहुँचा... वहाँ मौजूद चपरासी से पूछा तो वो बोला,"सर अभी अभी किसी क्लाइंट से मिलने गए हैं...एक घंटे बाद आकर मिल लेना..."

तमाचा हैरान सा बोला,"पर अभी तो यहीं आने बोले थे फोन पर..."

इतना सुनते ही चपरासी खींझता बोला,"क्या सर, जब बोल रहा हूँ अभी अभी निकले हैं और कुछ देर पहले तक यहीं थे तो समझते क्यों नहीं...जाइए अब, मुझे काफी काम है..."

तमाचा उसकी बात समझ बाहर की तरफ निकलने लगा पर उसके अंदर अजीब सी खलबली मची थी...अंदर की शक्ति उसे बार बार मिलने के लिए आतुर हो रही थी...

तमाचा पुन: रूका और पूछा,"वे किधर निकले हैं...मैं उधर ही मिल लूँगा..."

चपरासी ये सुन गुस्से से बड़बड़ाता बाहर आया और बोला,"उधर गए हैं और उनका गाड़ी नम्बर #### है..जाओ मिल लेना..."

तमाचा बिना कुछ जवाब दिए तेजी से निकला और अपना बाइक निकाल उस दिशा में दौड़ा दिया... वो आगे जा रही हरेक गाड़ी की नम्बर प्लेट देखे जा रहा था...

कुछ ही देर में वो गाड़ी तमाचे को नजर आ गई... वो अपनी गति बढ़ा गाड़ी की ओर तेजी से बढ़ने लगा... कुछ ही देर में तमाचा कुछ फासले दूर ही था कि उसके अंदर मुस्कान तैर गई...

गाड़ी में तमाचे को दो लड़की नजर आई... तमाचा कुटील मुस्कान बिखेरता खुद से बोला,"चल बेटा वकील, तू सिर्फ वकील ही है या लड़कियों के दलाल भी..."

अब वो थोड़ा और पीछे हो लिया और इतनी दूरी पर था कि उसे बस गाड़ी सामने रहे हर वक्त...





कोई दस मिनट बाद शहर के छोर पर स्थित एक 5-स्टार होटल M के परिसर में घुस गई... होटल की पार्किंग काफी बड़ी थी... तमाचा भी अपनी बाइक अंदर कर लिया और झटपट पार्क कर साइड हो उस गाड़ी को पार्क होता देखने लगा...

गाड़ी रूकते ही वकील उतरा और साथ में दोनों लड़की भी... दूरी ज्यादा थी तो वो किसी को पहचान नहीं पा रहा था... तभी वो तीनों होटल के मेन गेट की तरफ बढ़ गए...

तमाचा भी मेन गेट के पास ही था... उसके दिमाग में तुरंत ये आइडिया आया कि क्यों ना पहले तीनों को पहचान लें... फिर बाद में लड़की से ही पूछ लेंगे कि वो आर.जे. ही है या कौन है? 

वो उन तीनों का वेट करने लगा... वे जितने नजदीक आते तमाचे के चेहरे की रंग भी उसी अनुपात में उड़ने लग गई... और कुछ ही पल में तमाचा घुटने के बल सर पर हाथ रख नीचे बैठ गया...

तमाचा की बत्ती गुल हो गई थी... कनक इस आर.जे. के साथ ही धंधा करती है और मुझे उल्लू बना रही थी कि ये गलत है...वो गलत है... तमाचा वहीं पड़े पड़े ना जाने कितनी गालियाँ बोल डाला...

"ओ हैल्लो, यहाँ क्या कर रहे हो... ये बैठने की जगह है क्या..?" एक तेज आवाज तमाचे के कान में पड़ी तो वो आवाज की तरफ मुड़ा...सामने सिक्योरिटी उसे ही कह रहा था...

तमाचा झट से उठा और बोला,"नहीं, फीता बाँध रहा था... " और वो मेन गेट की ओर नजर किए बाइक की तरफ बढ़ने लगा... होटल के अंदर क्या है ये बाहर से कैसे मालूम पड़ती... और वो ऐसे अंदर जाना नहीं चाहता था... कहीं गलती से भी कनक की नजर...

वो बाइक निकाला और होटल के ठीक सामने एक कॉफी हाउस में जा बैठा... उसकी नजर होटल के गेट पर ही थी...तमाचा कुछ सोच नहीं पा रहा था कि क्या करे... कभी कभी तो वो सोचता कि जो होगा देखा जाएगा...जाते हैं कनक के सामने ही...

कुछ ही देर में वो वकील तमाचा को नजर आया... वो चौंकता हुआ उठ के देखने लगा... उसके साथ दो और लोग थे जो उससे बात कर रहा था... तमाचा समझ गया कि यही दोनों उन दोनों की बजाएगा...

और फिर वकील उन दोनों से विदा ले निकल गया और वो दोनों वापस होटल में... तमाचा परेशान जरूर था पर होटल के अंदर होने वाले दृश्य को याद कर उत्तेजित भी हो गया... वकील अपनी कार से वापस चला गया...

तमाचा अचानक से फोन निकाला और रूपा के नम्बर पर फोन करने लगा... कई रिंग हो चुकी पर रूपा फोन रिसीव नहीं कर रही थी... कैसे रिसीव होती रूपा भी तो जख्मी ही थी तो फोन बज रही है या नहीं उसे क्या पता?

आखिर फोन रिसीव हुई और रूपा की हैलो तमाचे के कान में पड़ी... तमाचा तेजी से बोला,"रूपा, कॉफी पिएगी..?"

रूपा मायूस बुझी सी आवाजों में बोली,"सॉरी यार, मेरी मूड ठीक नहीं है...बाद में बात करना..."

तमाचा,"ऐ रूपा, मेरी बात तो सुनो... कुछ जरूरी काम है इसलिए बुला रहा हूँ..."

रूपा जरूरी काम सुन कुछ सोचने सी लग गई...रूपा के दिमाग में ढ़ेरो सवाल जवाब उभरने लगे... कहीं तमाचा भी कनक की तरह ही मुझसे छिपा रहा है और मौका मिलते ही कोई फायदा ना उठा ले...

रूपा की चुप्पा पर तमाचा हैरान सा बोला,"प्लीज रूपा, मैं सीरीयस कह रहा हूँ... अभी मैं जो कुछ देखा हूँ वो मैं सोच भी नहीं सकता..."

रूपा तमाचे की बात सुन थोड़ी सोच में पड़ गई...क्या देख सकता है..? कहीं भाभी और कनक पुलिस के... नहीं ...नहीं... तो फिर... रूपा सोची जा रही थी...भाभी कह रही थी कि वे सब तो पुलिस को यूँ रखते हैं जेब में...

अचानक रूपा सर को झटकी और साँस लेती हुई बोली,"देखो, तुम क्या देखे,नहीं देखे...उससे मुझे कोई मतलब नहीं है और ना मतलब रखना चाहती... अब फोन रखो और अपना टेंशन खुद सुलझाओ...गुड बॉय..."

फोन रूपा काटने के लिए हटा भी नहीं सकी कि तमाचा बोल पड़ा,"रूपा, वो सब तुम्हें ब्लैकमेल करना चाहते हैं...प्लीज मेरी बात समझो..."

रूपा तमाचे की बात सुन थम सी गई... उसे अपने कानों पर यकीं नहीं हो रही थी... रूपा कुछ बोल नहीं पा रही थी... तमाचा रूपा की इस चुप्पी पर अफसोस सा बोला,"रूपा..."

पर रूपा कोई जवाब दिए बिना फोन काट दी... तमाचा आँख मींचता सा टेबल पर जोर से हाथ दे मारा... वहाँ मौजूद सब उसे ही देखने लगे... तमाचा स्थिति को देख तुरंत सॉरी बोल वहाँ से निकल गया... 

रूपा फोन रखते ही फूट फूट कर रोने लगी... ये सब क्या हो रहा है...? वो सोच सोच के पागल सी हुई जा रही थी... जितनी देर हो सकी रोती रही फिर वो अपने कमरे में घुस तकिए में मुंह छिपा सुबकती हुई सो गई...

तमाचा वहाँ से निकल सीधा एक पार्क में जा पहुँचा... एकांत जगह देख वो लेट गया और सारा वाक्या याद करने लगा... तमाचा आगे की वाक्या पर जब नजर डाला तो सिहर सा गया... रूपा जैसी लड़की के साथ अगर ये घिनौना खेल खेलने में ये सब सफल हो गए तो भारी गड़बड़ हो जाएगी... 

Raj-Sharma-Stories.com

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