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Monday, May 19, 2014

FUN-MAZA-MASTI किसी से ना कहना भाग सातवाँ

FUN-MAZA-MASTI

किसी से ना कहना भाग सातवाँ



मैं ; लीना , वामा और सान्या चारों की जिंदगी बड़े मजे से गुज़र रही थी. सान्या तो जैसे एक तरह से हमारे घर की तीसरी सदस्या बन चुकी थी. लीना उससे इतना चाहने लगी थी कि अब सान्या सप्ताह में कभी चार तो कभी पांच दिन हमारे घर हमारे साथ ही सोती. वामा के पति को लगभग हर महीने दो दिन के लिए दूसरे शहर ऑफिस के काम से जाना पड़ता. उन दो दिन के लिए वामा हमारे घर रहने आ जाती. लीना सान्या को भी बुला लेटी. अब दो रातें हम चारों के नाम हो जाती.



एक दिन मैं हमेशा की तरह शनिवार के दिन सान्या के पार्लर उसे लेने के लिए पहुंचा ( हर शनिवार संया को मैं घर ले आता और वो फिर वापस सोमवार की सुबह सीधे अपने पार्लर चली जाती. ) सान्या पार्लर में कोई कस्टमर अटेंड कर रही थी. मैं सामने वाली पान की दुकान पर खडा हो गया. कुछ देर के बाद सान्या बाहर आई. मैंने देखा कि उसके साथ एक महिला और भी थी. दूर से देखने से वो महिला ज्यादा उम्र वाली लग रही थी. मैंने सोचा शायद कोई कस्टमर ही होगी. तभी सान्या ने ईशारा किया और मैं उसके पार्लर की तरफ आ गया. सान्या ने मेरे करीब आकर बोली " ये मेरी दूर के रिश्ते की मौसी है. ये जिस पार्लर में काम करती थी वो बंद हो गया. ये अकेली है. इनकी अभी तक शादी भी नहीं हुई है. मैंने इन्हें सब समझाकर बता दिया है. ये भी आज से हमारे साथ शामिल हो रही है. " मैंने सान्या से कहा " ये क्या पागलों जैसी बात कर रही हो? हम चारों की उमर देखो और तुम्हारी मौसी कि देखो." सान्या बोली " वो भले ही हमसे करीब बारह साल बड़ी है लेकिन जबरदस्त सेक्सी है. वो और मैं जब एक ही पार्लर में काम करती थी तब उन्होंने ही मुझे लेबियाँ सेक्स और थ्रीसम सेक्स करना सिखाया था. लेकिन ये आज तक थ्रीसम सेक्स में कभी शामिल नहीं हुई है. आज तक ल्वेस्बियाँ सेक्स ही किया है."
मैंने अब सान्या की मौसी को करीब से देखा. सान्या ने उनका नाम माल्या बताया था. माल्या बहुत ही सुन्दर लगी. उसके स्तनों के उभार तो देखने के लायक थे. मैंने आज तक इतने बड़े अतन नहीं देखे थे. हम तीनो घर आ गए. लीना सान्या और माल्या से मिलकर बहुत खुश हुई. हम सभी ने चाय नाश्ता किया. इसके बाद सान्या ने माल्या के बारे में सब बताया. अब सात बजे थे. सान्या ने माल्या को अपने करीब लिया और उसकी शर्ट उतार दी. अब वो सिर्फ ब्रा में थी. माल्या का रंग एकदम गोरा गुलाबी था. उसने रोयल ब्लू रंग कि ब्रा पहन रखी थी. उसके स्तन इस रंग में जबरदस्त उभरकर चमक रहे थे. सान्या ने कहा माल्या की कप छतीस डी है. अब सान्या ने माल्या के जींस भी खोल दी. लीना उसकी जंगों को छुआ और माल्या के गालों को चूम लिया. माल्या ने मुझे मुस्कुराकर देखा. मैं माल्या के करीब गया. माल्या के होंठ मेरे सामने थे और उस पर लगा गहरा लाल रंग का लिपस्टिक इतना ज्यादा लगा हुआ था कि होंठ और ज्यादा मोटे लग रहे थे. मैंने धीरे से अपने होंठ माल्या के होंठों पर रख दिए. माल्या ने अपना मुंह खोल दिया. मैंने धीरे से अपने होंठों को माल्या के खुले होंठों के बीच में रख दिए और धीरे धीरे माल्या के होंठों पर लगे लिपस्टिक को चाटने लगा. माल्या के होंठों पर इतनी गहरी लिपस्टिक लगी थी कि मेरे इतने चाटने पर भी वो ख़त्म ही नहीं हो रही थी. तभी लीना ने मुझे हटाया और माल्या के होठों को चूमना शुरू कर दिया. संय मुझे देख हंसने लगी क्यूंकि माल्या के लिपस्टिक का रंग मेरे होंठों पर और होंठों के आसपास की जगह पर फ़ैल गया था. माल्या और लीना ने काफी देर तक फ्रेंच किस किया. मैंने और सान्या ने भी फ्रेंच किस किया. सान्या ने मेरे होंठों के रंग को अपने होंठों पर चूस चूस कर ले लिया.
काफी देर तक हम चारों ने आपस में फ्रेंच किस किया. सान्या ने माल्या के साथ लेस्बियन सेक्स की कई मुद्राएँ की. मैं और लीना बहुत मजे से ये सब देखते रहे. लीना ने अपना दिमाग दौड़ाया और वामा को फोन किया. वामा ने जब माल्या के आने की बात सुनी तो उसने अपने पति से कोई बहाना किया और हमारे घर आ गई. उसने अपने पति से कहा कि लीना आज रात अकेली ही है क्यूंकि मैं बहुत लेट घर आने वाला हूँ. वामा का पति मां गया. वामा के आते ही अब मैं अकेला और मेरे साथ चार चार रसीली हसीनाएं हो गई थी. \
मेरा बेडरूम अब छोटा पड़ गया. लीना ने दभी गद्दे नीचे जमीन पर बिछाकर इसे हम पाँचों के लायक बड़ा बना दिया. सभी ने मुझे सबसे पहले माल्या के साथ सेक्स करने के लिए कहा. सान्या ने मजाक में कहा " आज माल्या की तो सुहागरात है." हम सभी ने अपने अपने कपडे खोल दिए. माल्या लेट गई. मैंने अपने लिंग पर कोंडोम चढ़ा लिया. माल्या का जननांग अभी तक किसी ने नहीं भेदा था फिर भी वो काफी ढीला और बड़ा था. मेरा लिंग बहुत ही आसानी से अन्दर चला गया. माल्या मेरे लिंग के अपने जननांग के अन्दर घुसते ही बहुत खुश हो गई. उसने मेरे साथ फ्रेंच किस किया. कुछ देर के बाद मैंने माल्या को आजाद कर दिया.



मैं और लीना खड़े होकर एक दूसरे को फ्रेंच किस कर रहे थे कि तभी माल्या मेरे पीछे आकर मुझे जकड़कर खड़ी हो गई. उसके बड़े बड़े स्तनों का गुदगुदा दबाव मुझे मचलाने लगा. तभी सान्या मेरी बायीं तरफ और वामा मेरी दायीं तरफ आकर एकदम सटकर खड़ी हो गई. अब मैं चारों के बीच में था. मुझे सभी तरफ से स्तनों का गुदगुदा दबाव बहुत अच्छा लग रहा था. मैं सब की तरफ एक एक कर घुमा और चारों के साथ एक लंबा और बहुत ही गीला फ्रेंच किस किया. इससे मेरी हालत बहुत ही अजीब हो गई. मुझे लगने लगा जैसे मेरा लिंग बहने लगेगा. मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला.
मैं कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गया. माल्या ने तीनों को अपने साथ लिया और लेस्बियन सेक्स में लग गई. माल्या ने वामा के साथ और सान्या ने लीना के साथ जोड़ी बनाई. अब इन सभी चुम्बनों के साथ साथ अपने स्तनों को आपस में मिलाकर दबाना ; अपने जीभ से दूसरे की जीभ से मिलाकर चूमना , एक दूसरे की गरदन पर लंबा चुम्बन देना और ना जाने कितने ही इस तरह के क्रिया-कलाप शुरू हुए कि मैं दंग रह गया. मैं सोचने लगा कि किसी ने सच ही कहा है कि दो अय्रतों को आपस में सेक्स करते देखना सबसे गरम और सेक्सी नजारा होता है. मैं तो चार चार को एक साथ देख रहा था. करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक चारों की लेस्बियन लीला चलती रही. चार नाजुक ; मुलायम और चिकने बदन आपस में मिलते रहे और मुझे ललचाते रहे.
फिर माल्या ने मुझे भी शामिल कर लिया. अब लगभग वही सब क्रियाएं फिर से होने लगी. काफी देर तक यह चलता रहा. मैंने अब एक एक को अपने पास सुलाने का तय किया. सबसे पहले आज की मुख्य मेहमान माल्या की बारी थी. दस मिनट के भीतर मैंने माल्या के जननांग को पूरी तरह से लाल कर दिया और आखिर में गीला कर दिया. इसके बाद सान्या , फिर वामा और आखिर में लीना. यह सब होते होते रात के आठ बज गए. सब थक गए थे. सभी नहाए ; थोडा आराम किया और फिर सभी ने एक साथ खाना खाया और सुस्ताने लगे.
कुछ देर के आराम के बाद हम फिर से आपस में लिपटने लगे थे. वे चार थी और मैं अकेला. कितनी बार एक एक को सेटिस्फाई करूँ मेरी ताकत के बाहर था. चारों भूखी शेरनीयों की तरह मुझे रह रहकर दबोच रही थी. मैं जैसे ही एक को संभालता कि दूसरी आकर मुझे पकड़ लेती. मैं लगातार एक एक को संभालते संभालते थक सा गया. मैं लेट गया. मेरे लेटते ही चारों मुझ पर झपट पड़ी. चारों में मुझे जगह जगह चूम चूमकर गीला कर दिया. मैं छटपटाने लगा. अब लीना ने एक एक कर सभी को फिर से मेरे चुना. मैंने सभी के जननांगों को अपने लिंग से तरबतर किया.
माल्या हम सब से मिलकर बहुत ही खुश हुई. वो बार बार लगातार किसी ना किसी के साथ चुम्बनों का दौर जारी रखे हुए थी. मैंने माल्या के होंठों के रस को पी पीकर करीब करीब ख़त्म ही कर दिया.
वामा को सवेरा होते ही अपने घर जाना था जबकि बाकी सब रुकने वाली थी. वामा के कहने पर मैंने वामा को दुबारा बिस्तर पर लिया और उसके जननांग में मेरा लिंग फंसा दिया. वामा को जोर जोर से झटके अपने लिंग से दिए और फिर आखिर में अपने लिंग से उसके जननांग में तेज धार मारी. वामा निहाल हो गई. अब सभी थक गए थे. सभी सो गए. सवेरा होते ही वामा घर चली गई. माल्या और सान्या ठहर गई.
रविवार के दिन सान्या का पार्लर करीब ग्यारह बजे खुलता था. इसलिए मैंने माल्या और सान्या के साथ एक और दौर सेक्स का किया. लीना काफी थक गई थी इसलिए वो शामिल नहीं हुई. सान्या और माल्या दोनों हमारे यहीं नहाकर तैयार होकर अपने पार्लर चली गई. इसके बाद मैं और लीना सारे दिन बिस्तर में रहे. शाम होते होते मेरा बदन ऐसा दुखना शुरू हुआ कि मैं चार बजे सोया तो सोमवार को सवेरे पांच बजे उठा.
इसी तरह का एक दौर इस दिन के ठीक एक महीने बाद हुआ. उस दिन भी वामा ने कोई बहाना किया और हमारे साथ शामिल हो गई. मगर इसके बाद वामा को मौका नहीं मिल पाया. वामा के पति को कुछ शक हो गया कि वामा का किसी के साथ चाकर है. उसका शक हम पर नहीं हुआ था किसी और पर हुआ था. हम बाल बाल बच गए थे. लेकिन मैं लीना , सान्या और माल्या के साथ हर सप्ताह सेक्स कर ही रहा था. लीना की आदत अब ऐसी हो गई थी कि अब वो मेरे साथ अकेली नहीं सो सकती थी. इसलिए कभी सान्या तो कभी माल्या को बुलवा ही लेती. अब यह होने लगा कि सप्ताह में करीब पांच दिन हम तीन जने सोते.

माल्या के आने के बाद संया का पार्लर बहुत अच्छा चलने लगा था. इसलिए माल्या अब हमेशा के लिए सान्या के साथ ही रहने का फैसला कर चुकी थी. सब कुछ अच्छा चल रहा था. हम सभी बहुत खुश थे. हमें पता नहीं था कि हमारी ख़ुशी और भी बढ़ जायेगी. इतनी ज्यादा ख़ुशी कि किसी को कभी विश्वास नहीं होगा.
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FUN-MAZA-MASTI किसी ने ना कहना : भाग छठवां

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किसी ने ना कहना : भाग छठवां

वामा और उसका पति अब हमारे शहर में रहने के लिए आ गए. वामा ने अपने पति को समझा बुझाकर हमारे गहर से केवल दो मिनट के रास्ते पर अपना घर ले लिया. जो घर उन्होंने पसंद किया था उसमे थोड़ी साफ़-सफाई का काम बाकी था. इसलिए वे दोनों करीब चार दिनों के लिए हमारे घर रुक गए.
रात का समय था. मैं देर रात पानी पीने के लिए रसोई में पानी लेने के लिए गया हुआ था. मैं जैसे ही वापस लौटने को हुआ कि चनक पीछे से वामा ने मुझे पकड़ लिया. मैंने उसे आँखों ही आँखों में दानाता लेकिन वामा पर कोई असर नहीं हुआ. वो मुझे पीछे से धीरे धीरे दबाने लगी. तभी किसी कमरे में कोई आहट हुई और वामा अपने कमरे में भाग गई.
अगले ही दिन वामा के पति सवेरे बहुत जल्दी  ऑफिस चले गए क्यूंकि उनका एम् डी आ रहा था. लीना नहाने गई हुई थी. मैं नहाकर आया ही था और कपडे पहन रहा था. वामा ने आकर मुझे कपडे पहनने से रोक लिया और मुझे लेकर बिस्तर में घुस गई. उसने जल्दी से अपना पेटीकोट उठाया और मेरे लिंग को हाथ से पकड़कर अपने जननांग में घुसा दिया. मेरे पास और कोई चारा नहीं था. मैंने वामा की ईच्छा पूरी करनी शुरू कर दी. करीब पांच मिनट ही हुए होंगे कि लीना की आवाज आई. " जानेमन; बस आ रही हूँ. नाश्ता तैयार दो मिनट में तैयार हो जाएगा." वामा लीना की आवाज सुनकर मुझसे अलग हुई और अपने कमरे में चली गई.
वामा अपने नए घर में रहने चली गई. लेकिन लगभग रोजाना वो लीना से मिलने आने लगी. करीब एक सप्ताह के बाद हर बार की तरह सान्या लीना के बुलावे पर घर आई हुई थी. वो लीना के वेक्सिंग कर रही थी. लीना केवल ब्रा और पैंटी में थी. तभी वामा आ गई. सान्या ने दरवाजा खोला. जैसे ही सान्या और वामा ने एक दूजे को देखा तो दोनों ही चौंक गई. वामा थोडा डरी लेकिन सान्या ने वामा क एक तरफ लिया और बाहर बालकनी में ही रोक लिया. सान्या ने वामा को सारी बात बता दी. यहाँ तक कि मेरे , लीना और सान्या के बीच के थ्रीसम सेक्स की भी. वामा सारी बात सुनकर पहले तो चौंकी और फिर बहुत ही खुश हो गई.  वामा और सान्या ने आपस में कुछ बात की और फिर दोनों भीतर आ गई. लीना वामा को देखकर बहुत खुश हुई. वामा ने बताया कि अभी अभी उसकी सान्या से बात हुई है और सान्या पहली बार में ही बहुत अच्छी दोस्त बन गई है. सान्या ने लीना की वेक्सिंग के बाद उसका फेसियल किया. सान्या ने फिर वामा के मसाज किया. वामा भी अब ब्रा और पैंटी में आ गई. लीना तो पहले से ही ब्रा और पैंटी में थी. मसाज क्रेट वक्त सान्या ने भी अपने अन्य कपडे उतार दिए. अब तीनों ही ब्रा और पैंटी में रह गई थी.
सान्या ने वामा के वेक्सिंग की. इसके बाद जब लीना अपने हाथ मुंह धोने बाथरूम में गई तो सान्या ने वामा से कहा " फिर कभी उस दिन वाला थ्रीसम सेक्स करें क्या?"  वामा बोली " तुम मुझे कह देना , मैं हरदम तैयार रहूंगी." सांय ने वामा को चूमा और बोली " बहुत मजा आयेगा. वो बहुत ही मीठा है. " वामा ने सान्या को वापस चूमा और बोली " मैं उसे कई बार चख चुकी हूँ. हर बार मीठा लगा है वो. तुम मौके की तलाश में रहना और मौका मिलते ही मुझे खबर कर देना. ये मेरा फोन नंबर लेलो." वामा और सान्या फ्रेंच किस करने लगी . तभी लीना बाथरूम से बाहर निकल आई. लीना ने उन दोनों को इस हालत में देखा तो उसकी साँसें तेज चलने लगी. उसने उन दोनों को छुपकर काफी देर तक देखा.
अब वामा और लीना दनों सान्या से एक साथ वेक्सिंग वगैरह करवाने लगी. सान्या उन दोनों को अक्सर चुपके से कभी चूम लेती तो कभी उनसे लिपट जाती. धीरे धीरे इन तीनों के बीच दोस्ती काफी आगे तक बढ़ गई थी.
एक बार मैं अपने किसी दोस्त से मिलने के लिए निकल ही रहा था कि वामा आ गई. उसने मुझे बाजार में कहीं छोड़ने के लिए कह दिया. मैं उस अपने स्कूटर पर लेकर चल निकला. वामा ने मुझे सान्या के ब्यूटी पार्लर के सामने स्कूटर रुकवाया औए बोली " चलो अन्दर चलते हैं. सान्या हमारा इंतज़ार कर रही है." मैं और वामा अन्दर आ गए. सान्या तैयार थी. उसने सामने का मेन दरवाजा बंद कर दिया जिससे ऐसा लगे कि पार्लर बंद है. उसने पिछला दरवाजा खोला और हम अन्दर बंद हो गए. मैंने वामा और सांय के साथ दो घंटों तक सेक्स किया. जब मैं वापस वामा को लेकर रवाना होने लगा तो वामा ने कहा "  एक बार तुम मेरे और लीना के साथ भी थ्रीसम करो ना." मैंने वामा को डांट लगाईं और बोला " तुम्हें हमारा रिश्ता पता है ना> फिर ऐसी बात क्यूँ कर रही हो." सान्या ने कहा " लीना को मैं तैयार कर रही हूँ धीरे धीरे. एक बार मैं इन दोनों को आपस में बिस्तर मेमिलवा दूँ फिर आप भी शामिल हो जाना. लीना मैडम बिलकुल बुरा नहीं मानेगी. अब वो सेक्स को बहुत जोश से लेती है." मैं परेशान हो उठा कि ये कैसी मुसीबत होती जा रही है.
थोड़े दिन शान्ति से बीते. एक दिन ऐसा हुआ कि वामा के पति को टूर पर जाना पड़ा. वामा दो दिन के लिए हमारे यहाँ आ गई. बस यहीं से ऐसा दौर शुरू हुआ कि अब क्या बताऊँ.
वामा का पति जिस रात को टूर पर गया , वो वापस तीसरी रात के बाद आनेवाला था. अगले ही दिन सान्या घर आ गई. जब शाम को मैं ऑफिस से लौटा तो सान्या को देखकर हैरान हो गया. वो ज्यादातर दोपहर में आती थी. लीना ने कहा " इसे दोपहर में काफी काम था इसलिए मैंने और वामा ने इसे अभी बुला लिया. हमने खाना बाहर से मंगवा लिया है. तुम नहा लो तब तक हम हमारा काम कर लेटे हैं. तुम भी मसाज करवा लेना. सान्या से हमने कह दिया है कि वो खाना हमारे साथ खाकर ही आराम से घर जाए.
मैं नहाने चला गया. मैं जैसे ही नहाकर वापस आया तो मैंने देखा कि वामा और लीना दोनों एक ही पलंग पर केवल ब्रा और पैंटी में लेटी हुई है और सान्या उन दोनों के बारी बारी से मसाज कर रही है.  सान्या ने मुझे भी वहीँ सोफे पर लेट जाने को कहा. सान्या ने अब मेरे भी मसाज किया. बीच बीच में सान्या लीना और वामा के साथ साथ मुझे भी लीना से छुपकर चूमने लगी. मुझे लगा कि आज माहौल शायद बहुत गरम होने वाला है.  तभी मैं देखा कि सान्या ने लीना को चूमा  और फिर लीना के सामने पहली बार वामा के होंठों को चूमने लगी. लीना थोडा उत्तेजित हो गई. मौका देखकर वामा ने लीना का एक हाथ पकड़ा और अपने सीने पर रख लिया और अपना एक स्तन दबवाने लगी. लीना को यह अच्छा लगा. उसने वामा के स्तन को लगातार दबाना शुरू कर दिया. सान्या अब भी वामा को चूमे जा रही थी.
यह उत्तेजना अब धीरे धीरे बढ़ रही थी. सान्या ने अब लीना को चूमना शुरू किया.  वामा ने लीना के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया. अब तीनों ही आपस में बहुत करीब आ गई थी. लीना और मेरी नजरें मिली तो लीना ने मुझे अपनी तरफ आने का ईशारा किया. हब मैं उसके करीब गया तो उसने मुझे झुकने को कहा. मेरे झुकते ही उसने मुझे होंठों पर चूम लिया. मैं भी उसे होंठों पर चूम लिया.
तभी सान्या ने मुझे लीना पर झुका दिया और लीना ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया. सान्या और वामा ने मिलकर मेरे सभी कपडे उतार दिए.
अब मैं अकेला और तीन तीन जवानीयाँ मेरे सामने मुझे बुला रही थी. मैंने लीना के साथ सेक्स सबसे पहले करना शुरू किया. सान्या और वामा हम दोनों को उत्तेजित करने के लिए हमें चूम रही थी. तभी सान्या ने वामा के स्तनों से अपने स्तन टच कर दिए उअर दोनों उन्हें आपस में एक दूसरे की तरफ दबाने लगी. मुझसे यह देखा नहीं गया. मेरे अन्दर जोर की बिजलीयाँ चमकने लगी. मैंने अपना लिंग लीना के अन्दर से निकाला और लीना को भी उन दोनों के साथ मिला दिया. अब तीनों ही अपने अपने स्तनों को हाथ से पकड़कर एक दूसरे की तरफ दबा रही थी. मैंने उन सभी को गालों पर चूमा. सान्या ने मुझे बिस्तर पर लिटाया. इसके बाद सांय और वामा दोनों ने अपने को बाहोंमे भर लिया. अब दोनों एक दूसरे को होंठों पर चूमने लगी. मेरे लिंग पर कोंदों लगा हुआ था. सान्या और वामा दोनों आपस में लिपटी हुई मेरे ऊपर आकर धीरे से बैठ गई. सान्या ने मेरा लिंग वामा के अन्दर डाल दिया. लिंग तुरंत अन्दर चला गया. अब सान्या और वामा दोनों आपस में एक दूसरे के होंठों को चूमती हुई ऊपर नीचे बैठने उठने लगी. इससे मेरा लिंग वामा के अन्दर बाहर होने लगा.
अब मैंने मेरा लिंग सान्या के अन्दर डाल दिया. ये एक बिलकुल ही नया तरीका था और सभी को खूब अच्छा लगा.
इस जोड़ी के बाद सान्या और लीना को लेकर मैंने इसे दोहराया औ फिर आखिर में लीना और वामा को लेकर भी इसे दोहराया. इस तरह से करने के बाद हम चारों में उत्तेजना इतनी बढ़ गई कि इससे पहले कि हम कुछ और करते सान्या बेकाबू हो गई. मैंने तुरंत सान्या के जननांग में अपना लिंग डाला और तुरंत एक जोर की धार उसमे छोड़ दी. इसी तरह से मैंने थोडा थोडा रूककर लीना और वामा को भी शांत किया.
रात को खाने के बाद एक बार फिर ये दौर शुरू हुआ. सारी रात यह दौर चला.
आज वामा को हमारे शहर में आये एक साल हो चुका है. हम चारों हर महीने एक मौका ऐसा निकाल ही लेटे हैं जब हम चारों एक साथ सेक्स कर सकें. मैं लीना और सान्या तो हर दूसरे सप्ताह करते ही हैं. कभी लीना और मैं वामा को लेकर थोडा समय मिल जाता है. हम चारों जिन्दगी का भरपूर मजा लूट रहे हैं.
इस कड़ी के सातवें भाग में आपको एक और जबरदस्त केरेक्टर की एंट्री से मुंह में पानी आ जाए ऐसा पढने को मिलेगा. बस थोडा इंतज़ार करें.




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FUN-MAZA-MASTI किसी से ना कहना : भाग पांचवा

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 किसी से ना कहना : भाग पांचवा

मैं और लीना शादी के बाद सेक्स का पूरा पूरा मजा लेकर जी रहे थे. लीना अपने शरीर का पूरा ध्यान रखती थी. वो हर दो-तीन सप्ताह के बाद ब्यूटी पार्लर जाती और अपने शरीर को चिकना करवाकर आती. एक दिन वो ब्यूटी पार्लर गई .वो अपने साथ पर्स ले जाना भूल गई. उसने मुझे वहां से फोन किया. मैं रुपये लेकर पार्लर पहुंचा. जैसे ही मैंने पार्लर के काउंटर पर रूपये देने के लिए रखे तो सामने उसी लड़की को देखा जो मेरी शादी के दिन मेरे और वामा के साथ सेक्स में शामिल हुई थी. मैं पसीने पसीने हो गया. तभी लीना बाहर आ गई. उस लड़की ने मुझे बाय कहा और मुस्कुराने लगी.
उस दिन तो मैं घर लौट आया लेकिन मन में यह डर घर कर गया कि कहीं यह लड़की लीना को कुछ बता ना दे. हर समय मेरा मन इस अनजाने दर से घबराने लग गाय थ।
रविवार का दिन थ। मै और लीना नाश्ता कर रहे थे कि डोर बेल बजी। लीना ने दरवाजा खोला मैने देखा कि ब्यूटी पार्लर वाली लडकी थी। मै पसीने पसीने हो गया। वो लडकी मुस्कुराते हुए लीना के साथ भीतर आ गई. लीना ने मुझसे कहा " मेरी और सान्या की अच्छी दोस्ती हो गई है. संया ने कहा है कि अब वो घर आकर ही सब कर देगी और मुझे इसके ब्यूटी पार्लर नहीं जाना पडेगा." मैं समझ गया कि सान्या कोई गुल जरुर खिलाएगी. मैं सिर्फ हंस कर रह गया. सान्या चाय पीते पीते मुझे लगातार देखकर मुस्कुरा रही थी.
करीब एक सप्ताह के बाद शाम को जब मैं घर लौटा तो दरवाजा सान्या ने खोला. मैं चौंक गया. सान्या बोली " लीना मैडम का वेक्सिंग का काम चल रहा है. वे अन्दर लेटी हुई है." मैं चुपचाप अपने कमरे में आ गया. कुछ देर के बाद लीना ने मुझे आवाज दी और मैं बेडरूम में गया. लीना केवल ब्रा और पैंटी में लेटी हुई थी और सान्या लीना का मसाज कर रही थी. लीना ने मुझे देखा और बोली " तुम भी मसाज करवा लो. सान्या बहुत अच्छा करती है." मैंने मना किया. सान्या ने आँख मारकर मुझे ईशारा किया. मैं समझ गया कि वो मुझे धमकी दे रही है. सान्या ने मेरी कपडे उतारने में मदद की.
मैं केवल अंडर वेअर में बिस्तर पर लेट गया. सान्या मेरा मसाज करने लगी. सान्या ने मसाज करने से पहले अपना कुर्तिदार टॉप खोल दिया. उसने अन्दर एक स्लीव लेस टॉप पहना हुआ था जिसका गला काफी नीचे तक खुला हुआ था. सान्या ने मसाज शुरू किया. वो बहुत नीचे झुक कर मसाज कर रही थी. इससे उसके सीने के उभार मुझे छु रहे थे.  सान्या ने मेरे कान में धीमी आवाज में पुछा " उस दिन वो लड़की कौन थी?" मैंने आँख दिखाई और छुप रहने का ईशारा किया. सान्या ने अब लीना के चेहरे पर मसाज कर फेसियल उतरा और कहा " आप अपना चेहरा धो आइये." लीना जैसे ही बाथरूम में गई सान्या ने मेरे होंठ चूमे और मेरे ऊपर लेट गई.  सान्या ने अपने सीने से मुझे दबाया और बोली " एक दिन लीना के साथ उस दिन की तरह हम तीनों करें क्या?" मैंने गुस्से से कहा " बिलकुल भी मत कहना. ऐसा सोचना  भी मत." सान्या ने एक बार फिर मेरे होंठ चूमे और वापस खड़ी होकर मसाज करने लग गई.
मेरी चिंता अब बढती जा रही थी. लीना इन सब से बेखबर थी. करीब एक महीने के बाद सान्या एक बार फिर रविवार के दिन घर आई. लीना की उसने वेक्सिंग की और फिर उसे फेसियल लगाया. सान्या ने आज लीना की आँखों पर ककड़ी के टुकड़े रख दिए. लीना पलंग पर लेट गई. मैं बाहर ड्राइंग रूम में था. सान्या आई और मेरे गोद में बैठ गई. उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया. मैंने भी अपनी मजबूरी देखते हुए सान्या को चूम लिया. मैंने सान्या के साथ एक लंबा फ्रेंच किस भी किया. तभी सान्या उठाकर लीना के पास चली गई. मैंने राहत महसूस की.
एक दिन इसी तरह शनिवार के दिन सान्या घर आई हुई थी. मेरी शनिवार को आधी छुट्टी रहती है. मैं जब घर पहुंचा तो सान्या लीना को सोप मसाज दे रही थी. मैं चौंक गया. मेरे दिमाग में तुरंत आया कि सान्या ने शुरुवात कर दी है. सान्या केवल ब्रा और पैंटी में थी और लीना ने केवल पैंटी पहन रखी थी. लीना के पूरे बदन पर ढेर सारा साबुन का झाग था. उस वक्त सान्या लीना के स्तनों को झाग के साथ मसल रही थी और लीना बहुत आनंद के साथ यह सब करवा रही थी. सान्या ने जैसे ही मुझे देखा उसने आँख मारी और लीना के स्तनों को मसलते मसलते अचानक उन्हें अपने होंठों से थोडा सा चूम लिया. लीना ने एक बहुत ही मीठी आवाज निकाली. सान्या ने एक बार फिर लींना के स्तनों को चूम लिया.  लीना मचल गई. सान्या ने लीना की इस हालत का फायदा उठाया और लीना के पास लेट गई और उसे बाहों में भर लिया. लीना ने आन्ल्खें खोली. सान्या बोली " मैडम ; आप लेटी रहिये. मैं एक अलग तरह का मसाज कर रही हूँ."  लीना लेटी रही. सान्या ने अब लीना के जिस्म पर खुद को लिटा लिया और एक मर्द की तरह उसे दबाने लगी. लीना को शायद बहुत ही मजा आया. उसने भी सान्या को गालों पर चूम लिया. अब लीना ने भी सान्या के चुम्बनों का जवाब उसी तरह से देना शुरू किया. मैंने ईशारे से सान्या को नहीं करने के लिए कहा लेकिन सान्या लगातार मुझे आँख मार मारकर मुस्कुरा रही थी. मैं खिड़की की आड़ से उन दोनों को देख रहा था.
लीना ने सान्या से पानी पिलाने के लिए कहा. सान्या रसोई में गई. मैं तुरंत लीना के पास आया और बोला " लीनु; ये क्या करवा रही हो तुम? चलो उठो. उस लड़की के साथ इस तरह से मत लेटो. ये लडकीयाँ अच्छी नहीं होती है." लीना ने अचानक मुझे चूमा और बोली " जानेमन; बड़ा मजा आ रहा है मुझे. सान्या बहुत मस्ती करवा रही है. अब तुम ही बताओ केवल चार सौ रुपयों में इस शहर में ये सब मसाज कौन करके देता है और साथ में वेक्सिंग और फेसियल भी. बहुत सस्ता है. मैं तो कहती हूँ तुम भी सोप मसाज करवा लो. फ्रेश हो जाओगे. आज वैसे भी शनिवार है. हमें सारी रात जागना भी तो है. " मैं समझ गया कि सान्या का दांव सफल हो गया है. अब वो कभी भी मुझे साथ लेकर थ्रीसम सेक्स कर लेगी और मस्ती में उसके मुंह से वामा वाली बात भी निकल जायेगी.
मैंने अब सान्या को अलग तरह से पटाने की सोची. लीना थोड़ी देर के बाद नहाने के लिए चली गई. मैंने सान्या को दबोच लिया. सान्या केवल ब्रा और पैंटी में ही थी. सान्या खुश हो गई. मैं और सान्या बिस्तर पर आ गए. मैंने तुरंत सान्या की पैंटी नीचे की और अपने हाफ पैंट में से अपना लिंग निकालकर सान्या के जननांग में धकेल दिया. सान्या कराह उठी. मैंने जल्दी जल्दी सान्या को जोर जोर से ढेर सारे झटके दिए. सान्या को बहुत मजा आया. मैंने सान्या से कहा " हम लगातार मिलेंगे लेकिन उस दिन वाली बात तुम लीना से बिलकुल मत कहना. तुम्हें अलग से मैं खुश करता रहूंगा." सान्य ने मुझे जोर से चूमा और बोली " तुम बहुत अच्छे और मीठे हो. मैं तुम्हारी बात मानूंगी. बस तुम ऐसे ही मिलते रहना. मैं मैडम को इसी तरह से मस्त कर कर के एक दिन थ्रीसम में शामिल कर ही लुंगी. बस फिर उस दिन वाली बात हमेशा हमेशा के लिए दफ़न हो जायेगी. " मैं बहुत खुश हो गया. तभी बाथरूम का दरवाजा खुल गया. सान्या ने अपनी पैंटी पहनी और मेरी पीठ पर मसाज करने लग गई. लीना ये देखकर खुश हो गई.
अब सान्या लगभग हर दसवें दिन आने लगी और लीना भी उसे जल्दी जल्दी बुलाने लगी. अब यह होने लगा कि जब भी सान्या लीना के लिए घर आती लीना जब जब नहाने जाती तब तब मैं और सान्या जो भी समय होता हम दोनों हमबिस्तर हो जाते. यह सिलसिला लगातार चलने लगा.
एक दिन सान्या लीना की वेक्सिंग कर रही थी. सान्या ने लीना से कहा " मैडम; आपने कभी सूना है या पढ़ा है कि एक मर्द और दो औरतों के बीच का सेक्स बहुत मजेदार होता है. कामसूत्र में भी यह बात लिखी गई है." लीना एक छोटे शहर से थी और  एक मध्यमवर्गीय घर से; इसलिए इस तरह की किताबें उसने ना के बराबर पढ़ी थी. उसने ना में सर हिलाया. सान्या ने कहा " ये बहुत ही उतेजना वाला होता है. एक बार इसकी आदत पड़ जाए तो फिर हर समय बहार ही बहार होती है." लीना ने पूछा " क्या तुम कोई किताब दे सकती हो जिसमे ऐसी कोई कहानी या किसा है." सान्या ने हाँ कहा और  दुरे ही दिन एक इंग्लिश मैगजीन लाकर उसे दे दी. लीना उसे पढ़कर और उसकी तस्वीरें देखकर पागल सी हो गई. उसने सान्या से फोन पर बात की और कहा कि उसे बहुत अच्छा लगा है. सान्या ने लीना को और ऐसी ढेर सारी मेग्जीनें लाकर दे दी.
रात को जब मैं बेडरूम में आया तो लीना वही मैगजीन देख रही थी. मैं उन मैगजीनों को देखते हे सब समझ गया कि ये सारा सान्या का किया हुआ है. लीना बड़े ही उत्साह से मुझे दिखाने लगी. मैंने उसे कुछ नहीं कहा केवल उसके साथ साथ देखता रहा और फिर हम दोनों एक दूसरे में खो गए.
दो दिन के बाद आखिर लीना ने मुझसे रात को उस वक्त कहा जब मेरे लिंग ने उसके जननांग को पूरी तरह से काबू में किया हुआ था " जानेमन; अगर हम दोनों के अलावा एक और औरत आ जाए तो हम दोनों को बहुत मजा आयेगा. मुझे सान्या की किताबें बहुत उत्तेजित कर गई है. अगर वो ही हमारे साथ आ जाए तो! हम उसे जानते हैं. अच्छी और मजेदार लड़की है. हम दोनों से खुली हुई भी है. सच कहती हूँ बहुत मजा आयेगा. बस अब तुम हाँ कह दो." इतना कहकर लीना ने मेरे होंठ सी दिए और उन्हें चूसने लगी. मैंने भी सोचा कि इससे सान्या की जुबान भी खामोश हो जायेगी और वामा वाला किस्सा भी हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. मैं हाँ कह दिया.
अगले ही दिन सान्या आ गई. उस दिन शनिवार था. लीना ने मेरे आने से पहले सान्या के साथ मिलकर सारी तैय्यारी कर ली. मैं जब नहाकर बाथरूम से बाहर आया तो बेडरूम में दोनों अपने सभी कपडे उतार कर बैठ हुई थी.  मुझे देखते ही दोनों मुस्कुरा दी. मैंने अपना तौलिया उतरा और दोनों के साथ मिल गया. सान्या और लीना को मैंने लगातार चूमा और फिर इसके बाद सान्या जिन मैगजीनों को लेकर आई थी; उन मैगजीनों से हम तीनों ने तस्वीरों जैसी सेक्स पोजीशंस की . इसके बाद मैंने लीना के साथ सेक्स किया. लीना ने सान्या को भी मेरे नीचे लेटने को कहा. मैंने सान्या के साथ भी सेक्स कर लिया.
अब हर शनिवार की रात थ्रीसम सेक्स की रात होने लगी. लीना भी अब काफी कामुक हो गई थी. उसके सेक्सुअल व्यवहार में बहुत बदलाव आ गया था और हरदम उत्तेजित रहने लग गई. मुझे भी अब बहुत मजा और मस्ती आने लगी थी. अब तो सान्या कभी भी आ जाती. कई बार तो सप्ताह में तीन तीन बार ये होने लगा. इस तरह से हम तीनों ने पूरे सात महीने निकाल लिए.
एक दिन लीना के पास वामा का फोन आया कि वो अपने पीटीआई के सात दो दिनों के लिए हमारे यहाँ आ रही है. उसके पति का हमारे ही शहर में किसी कंपनी में इंटरव्यू है. रात तो जब यह बात लीना ने मुझे बताई तो मेरी तो सांस ही रुक गई. लगातार एक के बाद एक नई नई मुसीबत. अगर वामा के पति की इसी शहर में नौकरी पक्की हो गई तो मैं तो बरबाद ही हो गया समझो.
तय कार्यक्रम के अनुसार वामा और उसका पति पहुँच गए. मैं वामा को देख एक तरह से पागल हो गया. वामा अब और भी ज्यादा निखर गई थी. उसका अंग अंग जैसे खुद ही कह रहा हो कि देखो हर जगह रस ही रस छलक रहा है. आओ पिलो. वामा भी सबकी नजर बचाकर मुझे देखकर मुस्कुरा दी.
रात को खाना खाने के बाद हम चारों आपस में बातें करने लग गए. वामा लगातार सभी से नजरें बचाकर मुझे देखती और मुझसे नजरें मिलते ही एक शरारत भरी मुस्कान से मुझे हिला देती.
सवेरे मैं वामा के पति को लेकर रवाना हो गया. वामा और लीना ने पूरे दिन खूब गप्पें लड़ाई. वामा ने लीना को बहुत ही प्रभावित कर दिया. वैसे भी लीना बहुत भोली-भली है इसलिए बहुत जल्दी वामा से प्रभावित होकर उससे घुलमिल गई. वामा ने लीना को अपने पति के साथ के सेक्स के कई किस्से सूना डाले. लीना ने भी उसे ऐसे ही कई किस्से सुनाये. दोनों शाम तक बहुत ही खुल गई.
वामा का पति देर शाम को लौटा और उसने बताया कि उसका सेलेक्शन हो गया है और एक बार कल से ही उसे ड्यूटी ज्वाइन करी होगी. वामा और लीना यह खबर सुन  खुही से चिल्ला पड़ी. मैंने भी बहुत खुश हुआ कि लीं को एक अच्छी सहेली मिल गई है. लेकिन दूसरे ही पल यह ख्याल आया कि वामा का फिर से आना जाना शुरू हो जाएगा और मेरे लिए सान्या के अलावा एक और मुसीबत खड़ी हो जायेगी. मैं अपने कमरे में था. वामा अचानक मेरे कमरे में आई और बोली " देखो' हमारा मिलना फिर से होने लगेगा. खूब मजा आयेगा. अब तो हम दोनों को कोई नहीं रोक सकेगा." यह कहकर वो वापस चली गई. मेरी ख़ुशी अब एक बहुत बड़ी चिंता में बदल गई. अब मुझे ये पक्का विश्वास हो गया कि लीना को अब मेरे और वामा के बारे में सब कुछ पता चल ही जाएगा.
आगे क्या हुआ आप छठवें भाग का इंतज़ार करें.





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FUN-MAZA-MASTI किसी से ना कहना : भाग तीसरा

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 किसी से ना कहना : भाग तीसरा

वामा की शादी हुई उन दिनों मैं एम् बी ए के ट्रिप पर यूरोप गया हुआ था. लौटने पर मुझे वामा की शादी की खबर मिली. मेरी किस्मत साथ दे रही थी . मुझे वामा के ससुराल के शहर में जाने का मौका मिला. मैं अपना काम निपटाकर वामा के घर पहुँच गया. वामा मुझे देखकर हैरान हो गई. उसने मुझे अपने पति से मिलवाया. उसके पति ने मुझसे रात को वहीँ रुके के लिए कहा दिया और मेरा सामान उठाकर अन्दर कमरे में रख दिया. वामा कुछ परेशान हो उठी. मैं उसकी परेशानी समझ गया. मैंने बहुत ना कहा लेकिन वामा के पति नहीं माने. मुझे मजबूरन रुकना पड़ा. खाना खाने के बाद हम बातें करने बैठ गए. वामा पूरे समय खामोश रही. मैं समझ गया कि वामा को अब अपने किये पर पछतावा हो रहा है.
मैं एक अलग कमरे में सो गया. रात के करीब दो बजे फोन की घंटी बजी. मेरी भी आँख खुल गई. पता चला कि वामा के पति जिस फेक्टरी में इन-चार्ज हैं वहां कोई दुर्घटना हुई है और उन्हें उसी वक्त जाना पड़ रहा है. वामा के पति चले गए. मैंने मौका देख वामा से कहा " मैं तुम्हारी परेशानी समझ गया हूँ हम दोनों के हित में यही है कि हम उन मुलाकातों को भूल जाएँ." वामा ने मेरी तरफ देखा और बोली " बात वो नहीं है जो तुम समझ रहे हो. मैं बहुत खुश हूँ इनके साथ. लेकिन आज तक मैं उन मुलाकातों को भुला नहीं पाई हूँ. ना ही तुम को भूल सकी हूँ. मैं जानती हूँ हमने सब गलत काम किया. हमारा रिश्ता क्या था और हमने क्या कर दिया. लेकिन कभी कभी ऐसा हो जाता है. तुम आज भी मेरे उतने ही करीब हो जितने उन दिनों थे. ये पागलपन ही सही ; हवस ही सही लेकिन मुझे इसमें कोई गलत नहीं लगता. आज भी देखो किस तरह से हमें मौका मिला है." मैं चौंक गया. वामा ने फिर वैसी ही मुस्कराहट मेरी तरफ फेंक दी. मैं कुछ देर तक सोचा लेकिन मुझसे रहा नहीं गया. वामा आगे आई और मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया. वामा शादी के बाद थोडा निखर गई थी. वामा मझे लेकर अपने बेडरूम में आ गई. अगले ही पल हम दोनों एक बार फिर निर्वस्त्र हो चुके थे. आज वामा ने मुझे चूम चूमकर पागल कर दिया. कुछ ही देर में फोन के घंटी बजी. मैं वामा के ऊपर लेटा हुआ था. वामा मेर्नीचे दबी थी. वामा ने फोन उठाया. उसक पति ने उसे कहा कि वो एक निकल रहा है और आधे घंटे में पहुँच जाएगा. वामा ने मुझे जोर से चूमा और बोली " ये हमेशा हम आधे घंटे या एक घंटे की समय सीमा में ही क्यूँ मिलते हैं. वो आधे घंटे में पहुँच जायेंगे, जल्दी करो." मैंने बिना कोंडोम ही वामा के जननांग में अपना लिंग घुसेड दिया. वामा ने मुझे मना किया और कोंडोम लगा दिया. लगातार जोर लगाकर हम दोनों ने अपने को थका लिया. अब वामा ने मेरे होंठों को इतने जोर से चूसा कि मेरे लिंग से बहुत ही तेज धारा निकली और वामा के जननांग में एक सैलाब आ गया. हम दोनों ने बहुत कम समय में बहुत मजा ले लिया था. हमने कपडे पहने और मैं अपने कमरे में आकर सो गया.
सवेरे एक और मौका मिलता दिखाई दिया. वामा के पति दस बजते ही ऑफिस चला गया. मेरी ट्रेन दो घंटा देर हो गई. मैं वामा के घर पर ही रुक गया. वामा बहुत खुश हो गई. मैं और वामा एक बार फिर आपस में नंगे होकर लिपटे हुए थे. इस बार वामा की इच्छा पूरी हुई. मैंने लगातार पूरे दो घंटों तक वामा के जननांग को इतनी जोर से भेदा कि उसके आसपास गहरे लाली छा गई. वामा पूरी तरह से थककर पलंग पर लेती हुई थी. वो मुस्कुरा रही थी लेकिन उसके शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी. मैंने एक कोंडोम वामा से लिया और उसे अपने लिंग पर चढाते हुए वामा के ऊपर चढ़ गया. वामा का जननांग जैसे मेरे लिंग का ही इंतजार कर रहा था. मेरा लिंग एक सेकंड में उसमे घुस गया. लिंग के घुसते ही मेरे लिंग ने जैसे बौछार कर दी. वामा जोर से सिसकी और मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाकर मी मुंह में ढेर सारा लार का पानी छोड़ गई. उसके ठन्डे लार के पानी ने मुझे नशे में कर दिया. मैंने उसे चूमा और हम अलग हो गए.
जब मैं रवाना हुआ तो वामा बोली " आज ये तय रहा कि हम हमारा ये रिश्ता जारी रखेंगे. जब भी मौका मिलेगा हम यह सब करते रहेंगे. किसी से ना कहना."
------- ये किस्सा अगली मुलाकात के बाद ख़त्म हो गया. कैसे ख़त्म हुआ मैं आपको चोथे भाग में बताऊंगा.








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FUN-MAZA-MASTI किसी से ना कहना : भाग दुसरा

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 किसी से ना कहना : भाग दुसरा

मामाजी के लड़के की शादी के लिए हम ननिहाल आ गए थे. हमारा ननिहाल एक बड़ी हवेली जैसा है. दुमंजिला लेकिन करीब बीस कमरे. हम सभी अलग अलग कमरों में ठहरे थे. वामा और मैं एक दूजे को देख बहुत खुश हो गए. लेकिन मौसी लाटर हम्म दोनों पर नजर रखे हुए थी.
पहली रात थी. सभी खाना खाने के बाद एक साथ बैठे गप्पें लड़ा रहे थे. हम सभी बच्चे एक अलग बड़े कमरे में थे. तभी वामा ने मुझे इशारा किया. हम दोनों कमरे के बाहर आ गए. हमने देखा कि मौसी गप्पों में व्यस्त है. हम छत पर आ आगये. गुप्प अँधेरा था. हम दोनों आपस में लिपट गए और लगे एक दूजे को चूमने चाटने. एक दूजे के होंठों का रस पीकर हम दोनों को बहुत ही अच्छा लग रहा था. तभी जोर की आवाजों ने हमें अलग होने पर मजबूर किया. सभी सोने जा रहे थे. हम भी अपने अपने कमरे में चले गए.
अगले दिन दोपहर को लडकी वालों के यहाँ कोई फंक्शन था. औरतें सभी वहां गई हुई थी. मैं घर पर ही था. दोपहर को रीब तीन बजे वामा लौट आई. उसने मुझे ढूँढा और हम दोनों एक खाली कमरे में आ गए. वामा ने कहा " केवल आधा घंटा है. वे लोग आधे घंटे में पहुँच जायेंगे. चलो जल्दी करो." मैंने और वामा ने अपने सिर्फ नीचे के कपडे उतारे. वामा ने मुझे कोंडोम थमा दिया. मैंने तुरंत कोंडोम लगाया लेकिन मेरा लिंग अभी कड़क और बड़ा नहीं हुआ था. वामा ने नीचे झुककर मेरे लिंग को चूमना शुरू किया. केवल दस सेकंड में वो एकदम कड़क और लंबा होकर खड़ा हो गया. मैंने कोंडोम चढ़ाया. वामा नेखड़े खड़े ही अपनी एक टांग ऊपर उठाकर मेरे हाथ में दे दी. मैंने उसकी टांग को और ऊंचा उठा दिया. अब उसका जननांग खुलकर चौड़ा हो गया था. मैंने अपना लिंग उसमे डाल दिया. हम दोनों खड़े खड़े सेक्स करने लगे. बीच बीच में थोडा रुकते और फिर करने लग जाते. तभी हमें लगा जैसे सभी औरतें लौट आई है. मैंने जोर लगाना शुरू किया. वामा ने मुझे होंठों पर जोर से चूमना शुरू किया. ताभिमेरे लिंग ने वामा के जननांग में कोंडोम में ढेर सारी मलाई छोड़ दी. वामा और मैं दोनों मदहोशी से एक दूजे को चूमने लगे. फिर किसी के आने के डर से अलग अलग हो आये. हमने अपने अपने कपडे पहने और बाहर आ गए. किसी को भी पता नहीं चल पाया. रात को हमने बहुत कोशिश की लेकिन मौसी की पैनी निगाहों ने हम दोनों को पास भी नहीं आने दिया.
रात के करीब दो बजे थे. मेरी आँख खुली. मैं अपने कमरे से निकलकर उस तरफ चला गया जिधर वामा का कमरा था. मैंने उस कमरे में छुपकर झाँका. थोड़ी रौशनी थी इसलिए मैं वामा को देख सका. वामा ने करवट बदली. अब वामा मरे बिलकुल सीध में आ चुकी थी. मैंने एक कंकर उसे मारा. निशाना सही लगा. वामा की आँख खुल गई. उसने देखा. मैं अँधेरे में था इसलिए वो मुझे नहीं देख पाई. लेकिन उसे कुछ शक हुआ मगर वो उठी नहीं. मैंने दूसरा कंकर मारा. इस बार वामा उठकर बैठ गई. उसने इधर उधर देखा और बाहर आई. इसके बाहर आते हीमैन उसके सामने आ गया. वो मुझे देखते ही मुझसे चिपक गई. मैंने पूछा " मौसी कहाँ सो रही है?" वामा ने कहा " मम्मी; दूसरे कमरे में है. किसी को कोई हक़ नहीं होगा लेकिन हम जायेंगे कहाँ?" मैंने कुछ सोचा और बोला " छत पर चलते हैं. कोई नहीं है वहां पर. " मैंने वामा का हाथ पकड़ा और छत पर आ गया. एक कोने में हम दोनों चले गए. सर्दीयों के दिन थे इसलिए मैंने वहीँ रखी एक रजाई ले ली और दोनों उसमे घुस गए. कुछ ही देर में आपस में चिपकने के कारण गरमाहट आ गई. वामा ने मुझे चूमा और बोली " तुमने तो बहुत ही अच्छा आइडिया निकाला यार. कल की एक रात और है. हम कल भी यहीं आ जायेंगे." हमने जल्दी जल्दी अपने कपडे उतार दिए. कमी यह हो गई कि हमारे पास कोंडोम नहीं था. वामा ने फिर भी मेरे लिंग को अपने जननांग में घुसा लिया. मैं और वामा अब पूरा मजा ले रहे थे. मैं रुक रुक कर वामा के जननांग में अपना लिंग दाता और निकालता. इस तरह से करते करते एक घंटे से भी ज्यादा का वक्त हो गया. मुझे और वामा दोनों को ही अब यह डर लगने लगा था कि कहीं मेरे लिंग से कुछ निकलकर वामा के जननांग में घुस ना जाये. वामा ने मुझे लिंग बाहर निकलने को कहा. वामा ने रजाई को फाड़कर रुई निकाल ली और अपने जननांग पर लगा दी. मैंने लिंग को उससे छुआ दिया. अब फिर से मैं अपने लिंग से वामा के जननांग के आसपास की जगह में मस्ती करने लगा. इस मस्ती ने रंग दिखाया और कुछ ही देर के बाद मेरा लिंग बहने लगा. वामा के जननांग ली जगह भीग गई. उस ठंडक से वामा तड़प उठी और हमने एक दूजे को तड़प तड़पकर चूमना शुरू कर दिया. हम दोनों ने इसी भीगी हुई हालत में काफी देर तक मजा किया. वामा लगातार मुझे जगह जगह चूमे जा रही थी. हमें समाया का पता ही नहीं चल पाया. हम आपस में पूरी तह से चिपके हुए थे और रजाई में दुबके हुए थे इसलिए बाहर का कुछ पता नहीं चल पा रहा था. अचानक जब इस चिपका-चिपकी में रजाई थोडा हटी तो हमने देखा कि दूर आसमान में थोडा थोडा नीलापन दिखाई दे रहा था. हम समझ गए कि दिन निकलने वाला है. हम दोनों ने आखिरी कुछ किस किये और साफ़ सफाई कर अपने अपने कमरे में आकर सो गए.
सवेरे के बाद जब जब मैं और वामा आमे सामने आये तब तब हमारे चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी. मौसी को हम पर शक हो गया. वो अब वामा को अपने साथ साथ हिराहने को कह रही थी. मैं और वामा दोनों ही अब समझ गए कि अब आपस में मिलना मुश्किल है.
रात को बारात चल दी. वामा ने बहुत ही सुन्दर ड्रेस पहनी थी और बहुत अच्छा मेक-अप किया था. वो मुझे बार बार ललचा रही थी. उसके होंठों का लाल लिपस्टिक मुझे दावत दे रहा था. मौसी बरार वामा के साथ ही चल रही थी. फेरे हो रहे थे. सभी जहाँ हवन चल रहा था वहीँ बैठे शादी की विधियां देख रहे थे. अचनाक्वामा ने मुझे ईशारा किया. मैं उसके पीछे पीछे चल दिया. मौसी देख नहीं पाई. शादी वाले हाल के बाहर कार पार्किंग का एरिया सुनसान था. मैनौर वामा एक कार के पीछे चले गए. वामा ने अपने होंठ मेरी तरफ बढाए और बोली " मिठाई खाओगे." मैंने वामा का निमंत्रण स्वीकार और उसके होंठों को अपने होंठों से चूस लिया. हम दोनों पागलों की तरह से एक दूजे को होंठों पर चूमने लगे. कुछ ही देर में वामा के होंठों का सारा रंग गायब हो गया. हम दोनों वापस हाल में लौट आये.
मौसी की नजर वामा पर पड़ी. वामा के होंठों के उड़े हुए लिपस्टिक के रंग से मौसी का चेहरा तमतमा उठा. उसने वामा का हाथ पकड़ा और उसे एक तरफ ले गई. मैं दूर से दोनों को देखने लगा. वामा ने मौसी को कुछ समझाया. लेकिन मौसी कुछ नहीं मां रही थी. मैं डर गया. वामा ने ने आखिर में गुए से मुसी से अपना हाथ छुड़ाया और सभी के साथ आकर बैठ गई. उसका चेहरा उतर गया था. मौसी ने अब मेरी तरफ गुस्से से देखा. मैंने अपना चेहरा स्थिर रखा और दूसरी तरफ घुमा लिया. मौसी काफी देर तक मेरी तरफ देखती रही.
शादी संपन्न हो गई. हम सभी घर लौट आये. दोपहर को खाना था. मौसी वामा के आसपास ही घुमती रही. इसी तरह से शाम हो गई. वामा के चेहरे से लग रहा था कि वो मुझसे मिलना चाह रही है. मैं परेशान हो उठा. रात को नौ बजे हमें वापस लौटना था. मैं अब कोशिश करने लगा कि वामा से कैसे मिलूं. मेरी मम्मी सब से मिल रही थी. मौसी भी वहीँ खड़ी थी. मैंने दूर से देखा और वामा ऊपर छत पर दिखाई दी. मैं दौड़ता हुआ छत पर चला गया. छत पर वामा अकेली ही खड़ी थी. मैंने वामा को अपनी बाहों में भर लिया. हम दोनों ने एक दूसरे को खूब चूमा. वामा ने मेरे होंठों पर अपने होंठों से चुम्बन दिया. एक लम्बा फ्रेंच किस लिया. हम आपस में मिलने का वडा कर जुदा हो गए.
इसके बाद लेकिन हम दोनों कभी नहीं मिल पाए हैं. वामा की शादी हो चुकी है. आज केवल यादें है.
कभी कभी जवानी में ऐसा हो जाता है कि हम कोई पागलपन जैसी भूल या गलती कर बैठते हैं.
------- आप चौंकीए मत. मैं और वामा वामा कि शादी के तीन साल बाद मिल चुके हाँ. कैसे मिले ? कहाँ मिले ? क्या किया ? कितना साथ रहा ? तीसरे और आखिर भाग में बताऊंगा.










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FUN-MAZA-MASTI किसी से ना कहना भाग - पहला

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 किसी से ना कहना भाग - पहला

मैं उन दिनों बी एस सी प्रथम वर्ष में था. पंद्रह अगस्त के समय छुट्टियां पड़ी. मैं अपनी मौसी के यहाँ चला गया. मौसी के एक ही लड़की थी. वामा. वामा मेरे से चार साल बड़ी थी. मौसी और मौसा जिस दिन मैं पहुंचा उसके अगले दिन एक शादी में जानेवाले थे. मैंने देखा कि वामा लगातार मुझे छेड़े जा रही थी. मैं जितना बचता वो उतना ही ज्यादा छेडती. वो कभी मेरे गालों पर चिकोटी काटती तो कभी मुझे गुदगुदी कर देती. मैं उसके इस शरारत से परेशान हो गया. अगले दिन मौसा और मौसी सवेरे ही शादी के लिए चले गए. वे अगले दिन सवेरे ही लौटने वाले थे. मैं और वामा अकेले रह गए.
वामा अपने कमरे में थी और मैं बाहर टी वी देख रहा था. कुछ देर के बाद मैंने देखा कि वामा बहुत ही कम लम्बाई का हाफ पैंट और ऊपर एक स्पोर्ट्स ब्रा पहनकर आई. वो फ्रूट क्रीम खा रही थी. वो मेरे सामने सोए पर बैठ गई. मुझे उसका व्यवहार सही नहीं लग रहा था. वामा लगातार मुझे देखकर मुस्कुराए जा रही थी. मैं डर रहा था. अब वामा ने अपनी टांगें सेन्ट्रल टेबल पर रख दी और मेरे सामने ही फैला दी. उसकी टांगें बहुत गोरी थी और चिकनी थी. वो ऐसे चमक रही थी जैसे उन पर बहुत सारा तेल लगा था. मैं उन्हें देखने लगा. वामा को शायद अपनी जीत का अहसास हुआ. वो उठी और मेरे पास कर मेरे ही सोफे की सीट पर बैठ गई. मैं अपने में सिमटा तो वो मेरे से एकदम सट कर बैठ गई. अब इसके बाद उसने मुझे कसकर पकड़ लिया. मैं छुड़ाने की कोशिश करने लगा. उसने कहा " छुडाने की कोशिश मत करो मैं चिल्लाने लगूंगी. पड़ोस में सभी को पता चल जाएगा कि तुम मुझे तंग कर रहे हो.." मैं घबरा गया. वामा ने अब मुझे यहाँ वहां चूमने लगी. उसने मेरी शर्ट के बटन खोलकर उसे दूर फेंक दिया. इसके बाद उसने जबरदस्ती मेरी पैंट भी उतार दी. मैं अन्दर कमरे में जाने लगा तो वो मुझसे लिपट गई. उसने मुझसे लिपटे लिपटे ही अपनी हाफ पैंट उतार दी और अपना सारा भार मुझ पर डाल दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि मैं कमरे की फर्श पर गिर गया. इस पर भी वामा ने मुझे नहीं छोड़ा बल्कि उसकी पकड़ और भी मजबूत हो गई. मैंने अपने मन में सोचा कि मैं चाहे कुछ भी करूँ वामा मुझे छोड़ेगी नहीं. अगर मैं मना भी कर दूँ तो वामा धमकी देकर मुझसे हर काम करवा लेगी. मैंने ये फैसला किया कि हर हालत मैं जब मौत लिखी है तो मौत से ही दोस्ती कर लेता हूँ. मैंने अचानक वामा के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. वामा ने आश्चर्य से मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा. मैं भी मुस्कुरा दिया. वामा ने अपने होंठों से मेरे होंठों का रस खींचना शुरू किया. मैंने भी उसी तरह से जवाब दिया. वामा खुश हो गई. अब हम दोनों ही आपस में चुम्बनों की बौछार कर भीगने लगे. थोड़ी देर के बाद वामा मेरे ऊपर लेट गई और मुझे दबाते हुए ऊपर नीचे हिलने लगी. मैंने भी वामा को कसकर पकड़ लिया और लगा उसे चूमने और चाटने. वामा को खूब मजा आने लगा. उसने फिर खद को नीचे करते हुए मुझे खुद के ऊपर लेटने के लिए कहा. हम दोनों ने अपनी जगहें बदल बदलकर काफी देर तक मजा लिया.
वामा ने फिर मेरा अंडर वेअर निकाला और खुद भी नंगी हो गई. उसने मेरे लिंग को अपने हाथों से सहलाना और धीरे धीरे मसलना शुरू किया. मुझे बहुत अच्छा लगा. मैं वामा को लगातार गालों और होंठों पर चूमे जा रहा था. वामा ने मुझे अपनी ऊंगली अपने जननांग में डालने के लिए कहा. मैंने धीरे से अपनी ऊंगली उसके जननांग में डाल दी. मुझे बहुत ही गीलापन लगा. मेरी ऊंगली अन्दर बाहर होने लगी. वामा अजीब तरह की आवाजें निकालकर मजे लेने लगी. कुछ देर के बाद हम दोनों आपस में लिपट गए और मैंने अपना लिंग वामा की जाँघों के बीच डाल दिया. वामा ने अपनी जांघें पूरे जोर से दबा दी. हम दोनों को बहुत मज़ा आने लगा. वामा ने मुझे आजाद किया और रसोई में चली गई.
वामा जब रसोई से लौटकर आई तो उसके हाथ में बर्फ की ट्रे थी. उसने एक बर्फ का टुकडा अपने मुंह में लिया और उसे आधा बाहर रखकर मेरे गालों पर फेरने लगी. मुझे ठंडा बर्फ अच्छा लगा,. वामा ने फिर वो बर्फ का टुकडा मेरे मुह में डालकर छोड़ दिया. अब मैंने भी वामा के सारे जिस्म पर बर्फ के टुकड़े को फेरा. में आखिर में अपने मुंह में दूसरा बर्फ का बड़ा टुकडा लिया और वामा के गुप्तांग पर रखकर अपने मुंह से दबा दिया. वामा के मुंह से जोर के सिसकी निकल गई. मैंने काफी देर तक ऐसा ही किया. वामा लगातार तड़पती रही और मेरे मुंह को अपने गुप्तांग की तरफ जोर से दबाती रही.
मैंने अब सभी बर्फ के टुकड़े लेकर हम दोनों के जिस्मों के बीच में फंसा लिए और आपस में लिपटकर कसमसाने लगे. हम दोनों बैठे हुए थे इसलिए सभी टुकड़े नीचे की ताखिसक गए और सारा पानी हम दोनों के गुप्तांगों की तरफ चला जा रहा था. तभी मेरे लिंग में से कुछ निकलना शुरू हुआ और वामा के गुप्तांग से टकराने लगा. वामा ने मुझे अपने से कसकर लिपटा लिया और लेट गई. हम दोनों की साँसे तेज चलने लगी. हम दोनों अब शांत हो गए. हम दोनों काफी देर तक युहीं सोये रहे.
दोपहर हो गई थी. वामा ने फोन कर एक होटल से खाना मंगवा लिया. हम दोनों ने खाना खाया. वामा कुछ देर के लिए सो गई. शायद वो थक गई थी. मैं कुछ राहत महसूस करने लगा.
करीब तीन बजे वामा उठ गई. मैं सोया हुआ था वो आकर मेरे पास आकर लेट गई. इससे पहले कि मेरी आँख खुलती वो मेरे होंठों को अपने होंठों में दबा चुकी थी. एक बार फिर उसपर नशा छा गया था. नशा मेरा भी अभी तक उतरा नहीं था. मैंने भी उसी गर्मजोशी से जवाब दिया. वामा ने फिर अपने और मेरे सभी कपडे उतार दिए. इस बार वामा ज्यादा जोश से मुझ पर पिल पड़ी. ऐसा लग रहा था जैसे वो पागल हो गई हो. मैंने उसे बहुत रोकने की कोशिश की तो वो बोली " मम्मी आज रात को सात बजे की बस से ही आ रही है. इसलिए समय बहुत कम है." मैं उसकी जल्दबाजी समझ गया. हम दोनों ही अब अब ऐसे आपस में उलझे कि कोई देखे तो ये समझे कि आज के बाद शायद हम ना मिलनेवाले हों. हम दोनों ने एक दूजे के जिस्म का कोई भी हिस्सा नहीं छोड़ा जो हमारे चुम्बनों से गीला ना हो गया हो. पूरे दो घंटों तक हम दोनों ने एक दूजे को इसी तरह से चूमते चाटते बिताया. इसके बाद वामा ने तकिये के नीचे से एक कोंडोम निकाला और मुझे अपने लिंग पर चढाने को कहा. वामा ने मेरी मदद की. अब धीरे से वामा ने मेरे लिंग को अपने हाथों में लिया और लगी अपने जननांग में ठूंसने. वामा ने बताया कि उसके लिए ये पहला मौका है जब उसने किसी के गुप्तांग को छुआ है और अपने अन्दर लिया है. वो इससे पहले दो लड़कों के साथ गालों तक चुम्बन कर चुकी है और बाहों में ले चुकी है. लेकिन मेरे साथ ही उसने सारा खेल खेला है. मैंभी अपनी तरफ से जोर लगाना जारी रखा. तीन चार बार जोर करने से मेरा लिंग वामा के जननांग में थोडा घुस गया. वामा ने अपनी दोनों टांगें बैठे बैठे ही और फैला दी. मैंने भी बैठे बैठे ही जोर लगाकर जितनी दूर संभव हुआ अपने लिंग को उसके जननांग में घुसाता चला गया. वामा का जननांग थोड़ी देर के बाद अन्दर से मलाईदार लगने लगा. वामा मुझे बेतहाशा चूमने लगी. वो बार बार अपने मुंह में शक्कर के दाने डालती और मेरे मुंह में छोड़ देती. मैं भी अब यही करने लगा. कुछ ही देर में यह हुआ कि हम दोनों के मुंह से निकली बे-हिसाब लार ने हम दोनों के पूरे मुंह को गीला और चिपचिपा कर गया हम दोनों फिर भी एक दूसरे के मुंह को लगातार चूमे जा रहे थे. हम दोनों ने घडी देखी. छः बज चुके थे. वामा ने ढेर सारी शक्कर अपने मुंह में घोली और मेरे मुंह में शक्कर का घोल छोड़ते हुए अपने होंठों से मेरे होंठों को सी दिया. हम दोनों के अन्दर एक सरसराहट दौड़ गई. तभी मेरे लिंग में तेज हलचल होनी शुरू हो गई. मैंने वामा को जोर से अपनी तरफ खींचा और उसे अपने सीने से लिपटा लिया. अब मैं और वामा धीरे से संभलकर बिस्तर पर लेट गए. लेकिन हम दोनों के मुंह चिपके हुए थे और मेरा लिंग उसके अन्दर फंसा हुआ था. अब वामा के जननांग में भी कुछ हलचल हुई. तभी मेरे लिंग से एक तेज धारा छूट गई और कोंडोम के भरने से वो फ़ैल गया. वामा ने और जोर से मुझे लिपटा लिया. हमारी साँसें भर गई. हम दोनों की पकड़ कुछ ढीली हुई. हमारे होंठों की जकड भी कम हुई इस जकड के कम होने से हम दोनों के मुंह से ढेर सारी चाशनी बाहर निकलकर हमारे जिस्म में हम दोनों के सीने पर फ़ैल गई. वामा और मैंने अपने अपने सीने को आपस में रगड़ना शुरू किया.
घडी में साढे छह बज गए थे. हम दोनों बाथरूम में दौड़े और नहाकर अपने कपडे बदल लिए. सात बजते ही मौसा और मौसी लौट आये. इस भाग दौड़ में हम बिस्तर को ठीक करते वक्त कोंडोम का खाली पैक हटाना भूल गए. मौसी ने उसे देख लिया. उन्हें हम पर शक हो गया. रात को मौसी ने वामा को अपने कमरे में सुलाया और मैं मौसा के कमरे में सोया. अगले दिन सारा समय मौसी हम दोनों को अलग अलग रखने की कोशिश करती रही. शाम को मुझे वापस बस पकडनी थी. मैं और वामा मिलने के लिए तड़प रहे थे. जब मैं रवाना हुआ तो वामा पहले ही दरवाजे से बाहर आकर सीढीयों में छुपकर खड़ी हो गई. मैं जैसे ही उतरा वामा ने मुझे बाहों में भार लिया. हम दोनों ने एक बहुत ही लम्बा और गीला फ्रेंच किस किया और जल्दी मिलने का वादा कर अलग हो गए. वामा ने मुझसे कहा " किसी से ना कहना." मैं हाँ कहा बस स्टैंड की तरफ चल पडा.
हम अगली मुलाकात का इंतज़ार करते रहे लेकिन मौका नहीं मिला. पूरे एक साल बाद मौका मिला. मेरे मामा के लड़के की शादी तय हुई. हम सभी पूरे तीन दिन एक साथ हमारे ननिहाल में रहने वाले थे. मैं और वामा ने उन तीन दिनों में मौसी से बचाकर कैसे अपनी अपनी प्यास बुझाई ये आपको दूसरे भाग में बताऊँगा. फिलहाल तो यह पढ़िए और गीले हो जाइए.




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