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Thursday, March 20, 2014

FUN-MAZA-MASTI नटखट बिजली और भोला अरुण

FUN-MAZA-MASTI

नटखट बिजली और भोला अरुण

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी लेकर हाजिर हू
 एक बार अरुण नाम का एक बिहारी लड़का था उसकी उमर 16 बरस थी जब से 16 वर्ष का हुआ ….वो हर सुबह जब भी जागता था उसकी अंडरवेर गीली होती थी उसे समझ नही आता था कि उसकी अंडरवेर मे बारिश कहाँ से होती है ऑर वो भी इतनी चिकनी वो अक्सर सोचता कि “यह बात मे किससे पुच्छू? एक दिन उसे विचार आया कि उसकी बड़ी बहन बिजली जो उसकी बहुत करीब है क्यूँ ना वो उससे पुछले.?”

मा ऑर बापू से पूछने मे उसे शरम आती थी क्यूंकी यह बात उसके लंड से जुड़ी थी वो यह सोचकर सो गया कि अगर कल सुबह उसे चिकनी वर्षा के सुराग मिलेंगे तो वो जल्दी अपनी बड़ी बहन बिजली को यह बात बताएगा अगली सुबह फिर वोही ससूरी चिकनी बारिश ने उसके अंडरवेर को गीला किया उसका 8 इंच काला लंबा लंड उस मे नहा चुका था उसने सोचा कि वो तुरंत अपनी बहन बिजली के कमरे मे जाए ऑर उसे अपना हाल बताए ऑर फट से वो अपनी उसी हालत मे बिजली के उपर वाले कमरे घुस गया पर बिजली सो रही थी उसका गदराया जवान बदन मोहक अंदाज़ मे बिस्तर पर लेटा हुआ था.

उसकी घाघरी घुटनो के उपर चली गयी थी ऑर उसके गोरे गोरे पैर पर सूरज की धूप गिर रही थी अरुण ने कहा… “बिजली उठ…बिजली उठ बिजली सेक्सी अंदाज़ मे बोली…. “सोने दे ना बचुआ….” रात भर जागी हूँ अरुण फिर से बोला..”अरे बिजली उठ उठ भुतनि की ऑर ज़ोर से उसने बिजली की गांद पे थप्पड़ मारा बिजली को अपनी गोल गोल कोमल गांद पर जलन महसूस हुई…. अरुण ने बेहद ज़ोर से उसे गांद पर मारा था बिजली काँप कर उठी ओर गुस्से मे अरुण का मूह नोचने लगी….ऑर उसे मारने लगी अरुण ने कहा “अरे डायन मुझे तुझसे काम है.

एक गंभीर समस्या है बिजली शांत हुई छोटे भाई को चिंता मे देख … वो खुद टेन्षन मे होगई बिजली ने पूछा “अरे बोल बचुआ… का हुआ तोका? अरुण शरमा गया अरुण बोला “अब का बताए तुमका दीदी” बिजली बोली “अरे बोलना हमार प्यारा बचुआ… का बात है…”अरुण ने कहा “पहले हम दरवाज़ा तनिक बंद करले”बिजली बोली “अच्छा बाबा कर लो….”दरवाज़ा अरुण ने बंद किया.. ऑर बिजली के पास आकर बैठ गया बिजली बोली “अब बोल बचुआ का बात है… अपनी बहन से छुपाएगा” अरुण ने बोला … “मुझे बोलना नही कुछ बताना है तोका”

बिजली नेर्वस हो गई…ऑर पूछी “का बताने तोका.?”अरुण ने कहा “पहले बोलो कि हसोगि नही….”बिजली गुस्साई गई ऑर वो बोली “अरे बोल वरना देती हुन्न कान के नीचे बता का बात है? “जो दिखाना है दिखा” अरुण झट से उसके बिस्तर पर खड़ा हो गया…अरुण ने अपनी धोती उतारना शुरू किया…ये देख बिजली को तो करेंट महसूस होने लगा…वो सोच मे पड़ गयी… कि “इह ससुरा सुबह सुबह हमे का दिखाना चाहता है.?” अरुण ने फॅट से धोती निकाल दी…ऑर अपने चौड़े काले अंडरवेर मे खड़ा हुई गया…बिजली ने पूछा “इह का कर रहा है तू… नंगा काहे हो रहा है?”

अरुण ने कहा कि बहेनिया .. “वोही तो बात है बिजली बोली “का बात है…. बताना” ऑर अरुण ने फॅट से अपनी अंडरवेर उतार दी….हाए भवानी…. का लंड था…इतना लंबा लंड..अपने छोटे भाई अरुण का 8 इंच लंबा भयानक लंड देख बिजली तो दंग रह गई उसका छोटा भाई अब छोटा नही रहा बहुत बड़ा हुई गवा है बिजली असमंजस मे पड़ गई… “चाटना तो चाहती हूँ… पर का इह ससुरा यही चाटने देगा  क्या.?बिजली पूछी “अरे बता अब का बात है उसने कहा कि “बहेनिया तनिक नज़दीक आके देखो…उहह हे भवानी … इह का… हम नज़दीक से देखे.

बिजली खुशी खुशी मन मे मुस्काने लगी….वो आगे बढ़ी… तो का देखती है….. “वीर्य तो पहले ही बह चुका है”…..धुत ससुरा! सब कुछ चिकना देख .. जानकर बिजली समझ गयी…उसके भाई को स्वप्न दोष हुआ है बिजली का पहला बाय्फ्र्न्ड लखनवा जिसने उसका कुँवारापन तोड़ा था उसको भी ये सब होता था… बिजली को ठोकने के पहले बिजली बोली…. “तो का हुआ मेरे भोले भैया?”अरुण बोला… “अरे बहेनिया इह देखो नज़ाने रात को हमे इह का हो जाता है हर सुबह हमे इह चिकना चिकना पानी सॉफ करना पड़ता है..”

नटखट बिजली अपने भाई की भोली सूरत देख कर हस पड़ी और बोली “तोह्का मे सॉफ कर दूँ….. तोका सॉफ करना ना हो तो”अरुण बोला “आप काहे सॉफ करोगी….?”सफाई प्रोबलम नही बहेनिया इह ससुरा चिकना पानी आता कैसे है बिजली हसी ऑर ज़ोर ज़ोर से हसी….ऑर बोली….” हमरे पियारे नटखत भैया तुम बड़े तो हो गये हो… पर बड़े नही हुए….””बिजली की बात अरुण को समझ ना आई….वो बोला “का कह रही हो बहेनिया.?”हमसे मज़ाक ना करो…”

ज़रा हमारे लंड की हालत देखो…”“ चिकने रस मे फसा पड़ा है.“ ऑर आप हस रही हो….” डायन हो तुम डायन” बिजली बोली….” कोई बात नही मोरे भैया …. आज रात तुम हमरे संग हमरे कमरे मे सोना…. हम गारंटी देती हुन्न्ं… तुम्हार इह प्रोबलम का सारा सल्यूशन चूस चूस के निकाल देंगे हम  भोला अरुण बोला “सच बहेनिया तुम हमरा प्रोबलम सॉल्व करोगी का बिजली बोली… “हाँ…….तू भरोसा रख हम पर”अरुण बोला “तो अभी करो ना… सॉल्व हमार प्रोबलम” बिजली बोली “ अभी घर मे मा बाबा जाग रहे है…. इह प्रोबलम सॉल्व करते हुए… तुम ज़ोर ज़ोर से आहें भरोगे…. ऑर वो सुन जाएँगे….

तो दूसरी बहुत प्रोबलम हो जाएगी…”अरुण घबरा गया…वो नही जानता था कि ये प्राब्लम कैसे सॉल्व होगा ओर बोला बहेनिया “इह मे हामका दर्द तो नही होगा नाअ?” बिजली नटखट अंदाज़ मे बोली….” तुम्हे पता भी नही चलेगा ऑर सब कुछ  फट फट निकल आवेगा….. तुंरा प्रोबलम” अरुण बोला “ठीक है….आज रात हम तुमरे संग सोएंगे….”बिजली अच्छी बहन थी पर एक नंबर की हवस्खोर थी लंड चूसना उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी थी.

उसका भोस हमेशा गीला रहता था… उसे चुदवाना ऑर लंड चूसना बहुत पसंद था….अपने इस एक इंचीहॉल मे उसने 8 लड़को के लंड चूसे थे…. 4 से ठुकवाया था… अपने भाई के साथ ये सब करना… तो पर्मनींटमजा आएगा… “क्यूंकी स्कूल तो गर्मियो मे बंद होता है बिजली बोली… “हम तुमरि मदद करेंगे हमरे भैया…. पर आजसे कह देना माइ को… हम बिजली दीदी के साथ ही सोएंगे अरुण बोला “ हान्न्न”

रात हुई… अरुण फट से अपनी बहेनिया के रूम मे घुस आया…कमरे मे चाँदनी रात की हल्की रोशनी आ रही थी …..उस वखत बिजली कुछ कर रही थी…. अपने पैरो के बीच मे….उसका हाथ अपने घाघरे के अंदर था….अरुण ने कहा “का कर रही हो दीदी? बिजली चौंक कर बोली….” का तू साप की तरह अंदर आ गया ससुरे… तनिक आवाज़ तो दे बिजली ने अपनी घाघरि नीची की ऑर बोली… “दरवाज़ा बंद करके….आजा मेरे पास…”अरुण ने जैसा अपनी बहन ने कहा वैसे किया भोला अरुण नही जानता था कि उसकी बहन उसका योन शोषण करने वाली है….

वो तो अपनी बहन को देवी समझ रहा था…. देवी….. जो उसकी मुश्किले हॉल करेंगी…बिजली बोली “अब आजा जल्दी बिस्तेर पर….ऑर खोल अपनी धोती… ऑर निकाल दे अपना वीआइपी…..तेरा इलाज़ शुरू करना होगा…..अरुण घबराते हुए अपनी धोती ओर अंडरवेर निकाल कर लेट गया कमरे मे अंधेरा बहुत था…कुछ नज़र नही आ रहा था भगवान जाने बिजली का करने वाली है…?” ये सोच कर अरुण घबराने लगा “का होने वाला था उसके साथ….” अचानक बिजली का कोमल हाथ अरुण को अपने लंड पे मेसूस हुआ….

अरुण बोला “बिजली दीदी का कर रही हो हमे डर लग रहा है…..”बिजली गुस्से से बोली “चुप ससुरे थोड़ा मर्द बन …. आज तुझे मर्द बना के छोड़ूँगी….”ये सुनके अरुण नेरवसा गया…नज़ाने कितना दर्द होगा इह ऑपरेशन वा मे…अरुण घबरा गया उसका लंड ढीला हो गया….. ऑर खड़ा होने का नाम ना लिया ऐसी हालत मे एक्सपीरियेन्स्ड बिजली ने फिर अपना कमाल दिखाने की सोची अब तक 56 बार बिजली अलग अलग प्रकार के लंड चूस चुकी थी…. उसकी लिस्ट मे गाओं के 8 लड़के शामिल थे

तो अब तो वो बड़ी एक्सपीरियेन्स हो गई थी… मान लो.. एक नंबर की हवस्खोर थी बिजली…बिल्कुल हवस खोर…उसकी भोली प्यारी शकल के पीछे एक बहुत नटखट शरारती बिजली छुपी थी….. जिसे अपना घाघरा उँचा करना बहुत पसंद था बिजली की हवस जाग उठी…उसने अपने भाई का लंड बड़ी जोरो से पकड़ा…अरुण चिल्लाया “बिजली.”ऑर तभी बिजली अरुण के लंड के पास झुक गई….ऑर फिर अरुण ने अपने लंड को एक गरम जगह पे जाते महसूस किया सब कुछ बहुत अछा ऑर गरम ऑर गीला था ह्म्म मा कसम मज़ा आ रहा था” अरुण के लंड को ससूरी बिजली चाट रही थी.

अरुण को इतना मज़ा पहले कभी नही आया…..”अहाआ हाा…” अरुण आवाज़े निकालने लगा अरुण सोच रहा था “इह ऑपरेशनवा मे तो मज़ा ही मज़ा है!”पर पता नही आगे का होगा…..”बिजली ज़ोर ज़ोर से अपने भाई अरुण का लंड चूसने लगी… ऑर हवस की देवी बन गयी ओर अपना जादू भोले अरुण के लंड पे दिखाने लगी इस सब से अरुण का लंड बहुत कड़क हुई गवा अरुण का लंड अपने पूरे भीमकाय आकार मे आगया इससे बिजली ऑर भी पागला गई गाओं के सभी छोरो मे उसका भाई का सब से बड़ा था ये सोच कर हवस की मारी बिजली बावली हो गई ओर अपनी पूरी गरम जवानी से अरुण का लंड चूसने लगी.

चुसते चूस्ते गले तक उके भाई का लंड यह रांडी चूस लेती थी…“ चूस… चूस.. चूवस” अरुण आहें भरने लगा इतना अछा आजतक महसूस ना हुआ था उसको बिजली हवस मे बावली हो गई थी उसने अरुण के लंड को बड़ी बेदर्दी से चूसना शुरू किया उपर से नीचे तक नीचे से उपर तक अपने गरम गीले मूह मे अरुण का लंड लेने लगी लंड को चारों ओर से चाट ती रहती उसकी हवस भरी ज़ुबान ओर फिर गदराई सी बिजली अरुण के लंड का मूह चाटने लगी.

आ……..” अरुण जान्नत मे पहुँच गया था उकी बहेनिया कुछ जबरजस्‍ट ऑपरेशन वा कर रही थी….अरुण को बदर्श्त नही हो सकता था अब…. हवस्खोर बिजली अपना जलवा दिखाने लगी पूरे जोरों से… ऑर ऐसा चूसी जैसे कल ना हो….अरुण ऑर सहन नही कर सका ऑर…ऑर…ऑर…..अचानक धाय से उसके प्रेम की पिचकारियाँ बहने लगी…. ऑर अरुण को चिकनी वर्षा का ज्ञान हुआ… कि यह वर्षा कैसे होती है…. यह वर्षा क्या होती है….. ओह यह वर्षा कितने मज़े देती है…… “अहह” हवस्खोर बिजली… एक बूँद गवाने वाली नही थी…

वीर्य का स्वाद उसे बहुत पसंद था वो ऑर जोरो से चूसने लगी… अपने हाथ से उसका लंड मसल्ति रही….अरुण चिल्लाते रहा मज़े से आहे भरने लगा…… “अहह…बिजली…………मज़ा आ रहााआअ हाईईईईई अहह” इतना मज़्ज़ा…. मज़ा ही मज़ा……. आ रहा था इतना मज़ा कभी नही आया बिजली……” अरुण बोला बिजली ऑर चूसो” ऑर चूसो” बस इह कहना बाकी था बिजली को…अपने भाई को चिल्लाते सुन…ओर वो भी चूसने के लिए बोलते सुन

बिजली हवस मे बावली हो गई ऐसा चूसी उसके लंड को कि अरुण के प्यार की पिचकारियाँ ज़ोर ज़ोर से उसके मूह मे छूटने लगी, अरुण चिल्लाते रहा … ओर वो हवस्खोर चूस्ति रही… एको बूँद नीचे टपकने ना दी ओर फिर रात के अंधेरे मे इस बहन ने अपने भोले भाई का योन शोषण कर डाला ऑर उसको एक ऐसे गलियारे मे लेगई… जहाँ वो भेन्चोद बनने वाला था इस हवस की हवस्खोर की प्यास बुझी नही थी अरुण के लंड को पिचकारिया छोड़ने के बाद भी वो उसे छोड़ नही रही थी.

बल्कि उससे ऑर चूसे जा रही थी….इनएक्सपीरियन्स्ड अरुण अपनी हवस्खोर बहन के क़यामति मुख मैथुन को बर्दाश्त नही कर सकता था… इसलिए जल्द ही… पिचकारिया छोड़ दी…अरुण को अपने लंड मे दर्द होने लगा…पर फिर भी हवस मे बावली उसकी बहन बिजली चूस्ति रही…चूस्ते चूस्ते अरुण का लंड फिरसे खड़ा हुई गया आफ्टर ऑल हमारा अरुण भी बिहारी जात था वो तय्यार था अपनी हवस की बावली बहन बिजली के लिए नेक्स्ट राउंड ईज़ आन बेबी! अरुण के लंड को लंबा होता देख हवस की बावली बिजली खुस हो गई और वो सोची इतने लंबे लंड को अंदर लेना ही होगा

अपनी घाघरि के बीच मे उसने कहा…”अरुण एक सेशनवा ऑपरेशन का ख़तम हुआ…अभी दूसरा सेशनवा है हवस्खोर बिजली अपनी गंदी प्लॅनिंग मे माहिर थी उसने अपने भोले भाई से कहा चल अब उठ के मुझ पे लेट जा…मारे उपर” अरुण ने बड़ी बहन की आग्या का पालन किया ऑर वो अपने नंगे बदन को अपनी बहन के उपर लेटा दिया वो भोलेपन मे पूछा अरे बिजली अब का करना होगा….”बिजली ने अपनी घाघरि उँची की…

उँची करते करते अपने पेट तक ले आई….ऑर नीचे से पूरी नंगी हो गई…इह देख अरुण घबरा गया अरे इह का बिजली……. तू नंगी काहे हो रही है अरुण बोला बिजली बोली “ज़रूरी है…”बार बार मूह मे मैं चिकनी वर्षा नही झेल सकती…. अभी कही ऑर इह चिकना पानी निकालना होगा…हमरे पैरो के बीच मे जो कोना है वहाँ पर अरुण को अपनी मददगार बहन पर दया आ गयी…ऑर वो बोला “हाँ बहेनिया…. इस चिकनी वर्षा से हम भी दुखी है…. आप बोलो अब हम इह चिकनी वर्षा कहाँ करे.?”

बिजली का गंदा हवस भरा प्लान कामयाब हुआ भोला अरुण अब अपनी हवस की बावली बिजली बहेनिया को ठोकने के लिए तय्यार था बिजली ने अरुण का पृथ्वी मिज़ाइल जितना लंबा लंड अपने हाथो मे लिया ऑर अपने फट भोसे की तरफ बढ़ाने लगी. प्रेग्नेन्सी की चिंता किस कमिनि को थी… वो सोचने लगी…. आज तो बस ठुकवाना है हामका ऑर अरुण का भीमकाय लंड अपनी बहन के फटे भोसडे के बाहर खड़ा था अपना पहला हमला बोलने के लिए तय्यार था सिपाही ऑर फिर बिजली बोली “झटका दे मेरी तरफ…. जोरों से अरुण ने झटका दिया… पर धीरे से.

उसका लंड का मूह अंदर घुस गया…पर इस हवस की बावली बिजली के लिए ये कुछ नही था वो गुस्से मे बोली…” अरे हरम्खोर जोरों से..इतना ख़ाता है…… दम लगा” अरुण बोला “बिजली तोहरा कोना कितना छोटा है…. तोह्का दर्द होगा” बिजली बोली” ससुरे दर्द मुझे होगा ना तू झटका दे….”झटका दे” जल्दी दे….” हवस की बावली बिजली बस चुदवाना चाहती थी…. चोदो मुझे चोदो मुझे…. एक बार नही बार बार चोदो… ये हवस्खोर की अंतर आत्मा चिल्ला रही थी..

अरुण ने जोरों से झटका दिया…इस बार का झटका बड़ी जोरो से लगा हवस की बावली बिजली को इतना लंबा लंड पहले कभी नसीब नही हुआ था ये तो बस कमाल था…… कमाल फटे भोस को मिज़ाइल की तरह चीरता हुआ… अरुण का भीमकाय लंड अंदर घुसता गया… हवास्खोर बिजली अपने भाई के बड़े लंड को अपने भीतर महसूस कर… पागला गई…. इतना बड़ा लंड…. बहुत बड़ा…. जय भवानी…. बहुत बड़ा है… 50 बार चुदवा चुकी बिजली भी चिल्लाई…. “हााअ हाा हााअ…” अरुण का भीमकाय लंड अपना कमाल दिखा रहा था

यह बिहारी जात अपने पहले चोद काम का आनन्द लेने लगा ऑर अपने बहन को ठोकने लगा…. झटका… झटका … झटके पे झटका लगाते रहा… ताड़ ताड़ अपनी बहन की गांद मारते रहा मारने मे उसे मज़ा आने लगा उका लंड धाय धाय से बिजली के भोस को चीरता रहा….. बिजली बावली हो गई ओर आहें भरने लगी… अहग्ग….. आआआ…….. आआअहहाअ…. ससुरे तू बहुत बड़ा है……बहुत अछा है” मारते मारते अरुण अपनी बहेनिया के भोस को गीला होता महसूस करने लगा…यह हवास्खोर अभी चरमसिमा पानेवाली… है..

बिजली ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी…इतना बड़ा लंड उसके फटे भोस के लिए भी काफ़ी भयानक था अरुण अपने झटके तेज़ करता गया… ऑर बिजली ऑर चिल्लाति गई….अरुण को भी अब अपने लंड पे मज़ा आने लगा….ऑर वो अपने झटके तेज करने लगा…. बिजली ने अपना सीना पहली बार उसके भाई के सामने खोल दिया ऑर उसके गजरारे बड़े बड़े गोल गोल स्तन बाहर आ गये… बिजली के स्तन पूरे गाओं को झटके देते थे….. ऑर आज वो अरुण के सामने खुल गये….. गाओं के सबसे अच्छे बड़े ऑर गोल गोल स्तन अपनी आँखों के सामने देख अरुण पागला गया…. अगर अरुण के पास लंड था तो बिजली के पास बोल्ट था….

दोनो भाई बहन एक दम ज़ालिम सेक्सी थे…. झटको के कारण बिजली के स्तन बड़े जोरों से झूम रहे थे… डोल रहे थे ये देख अरुण को हवस चढ़ गयी…. भोला अरुण बस  अपनी हवस्खोर बहन को चोदने लगा… फ़स्तूम फास्ट…. ऑर झुक कर उसके गजरारे स्तन चूसने लगा….. ऑर पूरा मर्द बनने लगा बिजली चिल्लाई… ज़ोर से चिल्लाई…. अपने स्तनो को चुटकियाँ भी भरने लगी…….. “चोद मुझे अरुण …चोद मुझे…. फाड़ डाल मेरा भोस…हाआँ चोद अरुण….. बस चोदो…अहहा अहग”ओर चिल्लाति रही….

मा कसम बहुत मज़ा आ रहा था….दोनो ही अपनी चरम सीमा पर थे….ऑर कुछ क्षणों मे पाप की नदी एक भाई से उसकी हवस्खोर बहन के भोस मे जाने वाली थी दोनो चिल्लाए… मज़े मे चिल्लाए… जब चरम सीमा महसूस होने लगी….एक दूजे को अपनी बाहों मे जकड़के वो दोनो..पकड़ते व्हुए दोनो…ठोकते रहे… जोरों से ठोकने लगे…. ढाय ढाए ठोकने लगे तभी ढाए ढाए से अरुण की पिचकारियाँ अपनी बहन बिजली के फटे भोस मे जाने लगी….ऑर हवस की बावली बिजली…अरुण के ठोकने का परम आनंद लेते हुए..

अपने प्रेम के रस की पिचकारियाँ छोड़ने लगी….दोनो सब कुछ गीला करने लगे….ऑर बस एक दूजे को बाहों मे जाकड़ के ठोकते रहे….. ढाए ढाए से ठोकते रहे…अरुण लंबे लंबे झटके लगाने लगा….. हहाा भवानी…मा कसम इतना मज़ा पहले कभी नही आया…सब कुछ गीला था अब…प्रेम रस चारों ओर था
सब कुछ गीला बिजली सेक्सी आवाज़ों से चिल्ला रही थी…”हााआ अहहाअ ह्म्‍म्म्मममम”
अपने भाई के कयामती लंड के मज़े लेती गई…. ऑर ठुकवाटे गई एमेम आआआआआआ…चोद्द्द्दूओन मुझे अरुण ह्म्म्म”

वातावरण मे बस आनंद ही आनंद था…बहुत सारा आनद…बहुत सारा…आनंद अरुण तो बस बावला हो गया… ऑर जंगली शेर की तरह बिजली को ठोकने लगा ऑर मज़े लेते गया……अरुण ऑर बिजली अपने समागम की परम सीमा मे थे…. ऑर परम आनंद ले रहे थे…पाप की पिचकारियाँ छूट रही थी….दोनो ओर से…..दोनो ही अपने तन बदन मे बिजली सा सुख पा रहे थे… ऑर ज़ोर ज़ोर से आहें भर रहे थे..ऑर बस एक दूजे को ठोके जा रहे थे….. झटके पे झटका लगते जा रहे थे ऑर फिर सब समाप्त हुआ थका हारा अरुण अपनी हवस्खोर बहन के नंगे बदन पर गिर गया…

बिजली के बड़े गजरारे गोरे गोरे स्तन अरुण की चौड़ी छाती से दब गये कुछ देर बाद अरुण खड़ा हुआ ऑर बिस्तर देख बोला “बहेनिया यह करने से तो सब कुछ गंदा हो गया…सब कुछ……कुछ सॉफ कहाँ हुआ… आप हमसे झूट बोली….आपने कहा था कि आप हमरी चिकनी वर्षा का पिरोब्लम सॉल्व करेगी…. पर आपने खुद ही हम पर चिकनी वर्षा कर दी…. ऑर वो भी अपनी खुदकी” बिजली देख मुस्कने लगी….
अरुण भी मुस्कराने लगा…..दोनो की नज़रों मे शरारत थी… अरुण बोला “पर माँ कसम मज़ा आया … क्या हम यह ऑपरेशन रोज़ कर सकते है?” बिजली खुशी से बोली….” हाँ रोज़ रोज़ लगातार….आज से हर रात…पर सिर्फ़ मेरे साथ”
तो दोस्तो कैसी लगी ये कहानी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा


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Wednesday, March 19, 2014

FUN-MAZA-MASTI अनोखी रात

FUN-MAZA-MASTI


अनोखी रात

प्रेषक : आशु
बात आज से 2 साल पहले की हे उस वक्त मे मुल्तान मे एक कम्पनी मे जॉब करता था. मुझे कंपनी के काम से मुल्तान से बहवालनगर जाना था। मे घर से सुबह 8am पर निकला ताकि जल्दी वापस आ जाऊ. लेकिन वापसी पर देर हो गयी ओर मे रात को 9pm पर बहवालनगर से मुल्तान के लिय निकला।  रास्ते मे एक जगह
हमारी कार चलती चलती रुक गयी. उस को चेक किया तो पता चला के फेन बेल्ट टूट गई हे. उस वक्त रात के 11बजे थे। अब मे सोच रहा था कि रात यहीं सडक पर गुज़ारनी पड़ेगी।  कुछ देर के बाद मुझे एक गाड़ी की लाइट नज़र आई तो कुछ उमीद होई के अब मसला हल हो जायगा।  जब कुछ क़रीब होई तो पता चला के कोई ट्रॅक्टर आ रहा हे. ट्रॅक्टर वाला मेरी पास आ कर रुक गया ओर पूछने लगा साहब जी किया हुवा।
मेने बताया के मेरी गाड़ी का फेनबेल्ट टूट गया हे इस पर उसने मुझे ऑफर कीया के मे उस के घर पर रात गुजारु ओर सुबह गाड़ी ठीक करवा कर मुल्तान चला जायूं. मेरे पास इसके सिवा कोई रास्ता नही था. उसने मेंरी गाड़ी अपने ट्रॅक्टर के साथ जोड़ दी ओर मुझे अपने घर ले गया जो रोड के साथ एक गाव मे था। उसका नाम नॉवज़ था उसने घर मे अपनी माँ को आवाज़ दी. माँ एक मेहमान आया हे एक रूम से उसकी माँ निकली तो नॉवज़ ने कहा माँ खाने का बंदोबस्त कर उसकी माँ की उम्र 40 से 42 के दरम्यान होगी। सेहतमंद जिस्म ओर खूब बड़े बड़े मम्मे उसकी कुरती मे से नज़र आ रही थे. ब्रा  दिलकश नज़ारा दे रही थी। उस की माँ ने खाना गर्म किया. हम दोनो ने खाना खाया उसके बाद नॉवज़ ने मुझे एक लूँगी ओर कुर्ता दिया. ओर कहा के आप सो जायेगा क्युकी मे खेतो मे पानी देने जा रहा हूँ ओर सुबह आऊंगा.
मे दुसरे रूम में गया लुंगी ओर कुर्ता पहन कर लेट गया ओर उसकी माँ के बारे मे सोचने लगा के क्या   चीज हे मोटी गांड ओर बरी बरी मम्मी मे उसको चोदने के बारे मे सोच कर ही मेरा लंड खड़ा हो गया. ओर मे अपने लंड को हाथ मे लेकर मसल रहा था. की अचानक उसकी माँ आ गयी ओर बोली के अगर पेशाब करना हो तो घर से बाहर चले जाना क्युकी गाव मे घर मे बाथरूम नही होते। मेने कहा हाँ जाना हे उसकी माँ जिसका नाम अनवरी था. उसने अब ब्लॅक कलर की लूँगी ओर कुर्ता पहना हुवा था. जिसमे से उसकी गांड ओर खूबसूरत लग रही थी। मुझे घर से बाहर ले गयी काफ़ी दुर जाने के बाद उसने मुझे  एक तरफ़ जाने का इसारा किया के पेशाब उधर कर लूँ. मेंरा लंड उसकी गांड देख कर ही बेक़ाबू हो गया था.  मे जब पेशाब कर के आया तो वो मेरे आगे चल रही थी ओर उस की गांड देख कर मेरा लंड झटके  ले रहा था. तबी अचानक मेरा पेर फिसल गया ओर मे पीछे से उसके साथ जाकर लग गया ओर मेरा लंड उसकी लुंगी के उपर से उसकी गांड से टकरा गया. ओर मेने उसको गिरने से बचाने के लिय पकड़  लिया ओर मेरा हाथ उसके नरम नर्म मुम्मू से टकरा गये।
उसने भी मेरे अकडे हुय लंड को अपनी गांड मे महसूस कर लिया. मे डर रहा था के पता नही अब किया  होगा खैर हम लोग घर आ गये उसने कहा के आप का लंड हर वक्त खड़ा रहता हे. मेने कहा नही कोई खास चीज़ देख लेतो खड़ा हो जाता हे. अनवरी बोली क्या खास चीज़ देख ली… मेने उसकी गांड पर हाथ लगाया ओर बोला इसको देख कर इस पर वो बोली तुम्हारे लंड को गांड चाहिय या चूत .. मेने कहा दोंनो इस पर उसने अपनी लुंगी खोली ओर मेरी लुंगी मे हाथ डाल कर मेरा लंड अपनी गांड के साथ लगा लिया ओर मे लंड को अपनी गांड से रगड़ने लगी। अब मुझसे बर्दास्त नही हो रहा था ओर मेने पीछे से अपना लंड उसकी गांड मे टीका कर पकड लिया ओर उसके चुचीयो को दबाने लगा।
उफफफफफफफफ्फ़ हा…अ क्या टाइट मम्मे थे. इस उम्र मे उसके निप्पल तनी हुई थी.  उसने ब्रा नही पहनी होई थी. मेने उसका कुर्ता उतारा ओर उसके बोबे को दबाने लगा ओर उसका जिस्म आग की तरह गर्म हो रहा था ओर सिसकारियाँ ले रही थी।
हू मरी आ.. फ्.. आई तो उसके खूबसूरत चुची देख कर मे उसके निप्पल चुसने को बेचेन होने लगा. उसने एक हाथ से अपना मम्मे को पकडा ओर मेरे मुह मे डाल कर बोली ले चुस इसको आज ताज़ा दूध पी…  ओर मेने किसी भूखे बच्चे की तरह उसका निप्पल लेकर चुसने लगा. हाआआआआ किया मीठा मीठा मज़ा था. उसकी एक चूची मेरे मुह मे थी ओर दुसरा मेरे हाथ मे था. जिसकी वजह से वो बेक़ाबू हो रही थी ओर मुझसे अपना चूची खूब चुसवा रही थी। हाआअ चुऊऊऊस ओर जोर जोर से चुसो आज काफ़ी सालो के बाद इसको कोई चूस रहा हे. हा.. मज़्ज़ाआ.. अब मेने भी अपनी लुंगी ओर कुर्ता उतार दिया। उसने मेरा लंड हाथ मे पकडा तो खुशी से पागल हो गयी. मेरा 8इंच. का मोटा ओर सेहतमंद लंड उसने फॉरन अपने मुह मे डाल लिया ओर मेरी लंड को चुसने लगी ओर मे तो किसी ओर दुनिया मे पहुच गया ।
उफफफफफफफफ्फ़ हा..आअ.. ओर तेज़ चुस मेरे लंड को हा..आअ ओर पुरा अपने मुह मे ले वो मेरा लंड इस तरह चुस रही थी पता नही कब की भूखी हे. मेने उसको खड़ा किया ओर उसकी टांगो को खोला  ओर नीचे बैठ कर उसकी लाजवाब चूत का नज़ारा करने लगा. उसकी उभरी हुई मोटी चूत जो लंड लेने के लिय बेकरार थी ओर गीली हो रही थी ओर गर्म होकर डबल रोटी हो रही थी. मेने अपनी ज़बान से उसकी चाटने लगा ओर अपनी ज़बान उसकी नर्म ओर गर्म चूत मे डाल दी ओर हाआआ.. म्म्म्म म ओर वो मेरे सर को अपने हाथो से अपनी चूत पर दबाने लगी ओर पागल होकर हाआआआआ चुऊवस मेरी चूत को इसका सारा रस पी ले हाअ उफफफफफफफफफफ्फ़ चुऊवस ओर उसकी चूत ने सारा पानी मेरी मुह मे निकाल दिया। फिर मे खड़ा हुआ ओर अपनी ज़बान उसके मुह मे डाल दी ओर वो भी अपनी चूत  के पानी का मज़ा मेरी ज़बान चुस कर लेने लगी मेने उसकी ज़बान चूसी ओर खुब एक दुसरे को चुमा चाटा। अब वो पैर खोल कर लेट गई ओर कहने लगी पहले अपना लंड मेरी चूत मे डाल मे उसके उपर आया उसके पैर खोले ओर अपना 8इंच. का लंड उसकी चूत के अंदर किया ओर एक ही धक्का लगाया ओर मेरा 4इंच. लंड उसकी चूत के अंदर था ओर वो मझे मे सिसकारियाँ ले रही थी। उसने अपनी दोनो पैर  मेरी कमर के साथ लपेट लिये थे ओर उसकी चूत ओर खुल गई ओर मेने थोडा सा ओर पुश किया ओर मेरा पूरा लंड उसकी गरम चूत मे उसकी बच्चेदानी को टच करने लगा ओर उसके मुह से हााआआ उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ मेरी चूत मार पूरा लंड मेरी चूत मे डाल।
चोद ओर जोर जोर से चोद आज छोड़ना नही मेरी चूत को हाआआआआआआआआअ मेरी जान तेरा लंड मेरी चूत को पसंद किया हे. चुऊऊऊऊओद इसको आज इसकी गर्मी अपनी लंड से निकल दे फाड़ दे मेरी चूत को हााआआ उफफफफफफफफफफफ्फ़ हााआआ मज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ा ओर वो अपनी चूत को उपर नीचे करने लगी ओर मेरा लंड उसकी चूत मे अंदर बाहर होने लगा हाआआआआआआअ मुझे तो ऐसा लग रहा था के आज इसकी चूत मेरे लंड को खा जायगी। 15 मिनिट तक उसकी जम के चुदाई  की अब मुझे उसकी गांड मारनी थी. मेने उसको घोडी बनाया उसके गोल गोल चूतड पर किस किया  ओर उसकी गांड के सुराख को सहलाया. वो कहने लगी कि अभी गांड नही मारो मे तेल लेकर आती हूँ..  तेल लेकर आई ओर मेने उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड के सुराख पर तेल लगाया ओर अपना लंड उसके सुराख पर रख कर आराम से धक्का दिया अभी मेरा लंड 2इंच. अंदर गया.  वो दर्द से चीख पडी  ओर कहने लगी पहली दफ़ा गांड मरवा रही हूँ आराम से।
मेने आहिस्ता आहिस्ता अपना पुरा लंड उसकी गांड मे घुसा दिया ओर जब मेरा मोटा ओर गर्म लंड उसकी गांड मे अंदर बाहर होने लगा तो उसको भी मज़ा आने लगा ओर वो भी अपनी गांड से दबा दबा कर मेरे लंड से अपनी गांड मरवा रही थी। ओर जोर जोर से अपनी चूतड आगे पीछे कर रही थी. हााआअ उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ म्म्म्म मममज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ा अब उसकी टाइट गांड ने मेरी लंड को पकड लिया था ओर मेने पीछे से उसके बोब्स पकडे ओर उसके उपर चढ़ कर ज़ोर दार धक्के  लगाये ओर उसकी गांड मे फ्री हो गया हाआआआआआआ ओर थकान से निढाल होकर मे उसके ऊपर  लेट गया। उसकी गांड ओर चूत मारने के बाद मुझे पेशाब आ रहा था. उसने कपडे पहने ओर मेने भी हम लोग बाहर गये ओर दोनो ने एक दूसरे के सामने बैठ कर पेशाब किया।
मैंने किसी औरत को फर्स्ट टाइम पेशाब करते देखा ओर क्या नजारा था. दोस्तो केसी लगी आपको मेरी यह कहानी. आपके कॉमेंट्स का वेट करूँगा.










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FUN-MAZA-MASTI भाभी और बहन

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भाभी और बहन

प्रेषक : रूपेन
में रूपेन मुम्बई से. मे मूझे यकीन है की मेरी यह स्टोरी सबको पसंद आयेगी. ओके, अब में स्टोरी पर आता हूँ. मुझे एक भाभी सेक्स करने के लिए लेकर गई थी उसको मेने एक बार तो चोद दिया था ओर दूसरी बार चोद रहा था की भाभी की छोटी बहन जिसकी उम्र 16 साल होगी ओर 11वी क्लास मे थी वो स्कूल की जल्दी छुट्टी
होने से घर आ गई ओर सीधी उसकी बड़ी बहन यानी भाभी के बेडरूम मे ही आ गई जब वो आई तो मेरा पूरा 8″इंच लम्बा लंड भाभी की चूत में घुसा हुआ था यह देख कर वो एकदम बेडरूम से बाहर चली गई ओर फिर हम हमारा काम ख़त्म करके बाहर आये तो वो स्कूल यूनिफॉर्म मे बाहर थी तो उसने भाभी को पूछा की यह कौन है तो उसने जवाब दिया की यह लव करने की मशीन हे ओर फिर पूछा की तुम क्या कर रही थी तो वो बोली की जवानी का मज़ा लूट रही थी जो तुम्हारे जीजा नही दे सकते इसने मूझे जवानी का सही मज़ा दिया है ओर तुम चाहती हो तो तुम भी मज़ा कर सकती हो मूझे कोई प्राब्लम नही यह सुनकर उसकी आँखे भी चमक गई ओर कहने लगी की मे भी कब से एक लंड तलाश रही थी क्योकी मे तुम्हारे बेडरूम मे से सेक्सी मूवी की सीडी ला कर देखा करती हूँ ओर मेरी चूत मे उंगली किया करती हूँ ओर अब उंगली से बोर हो चुकी हूँ  मूझे भी एक बड़ा लंड चाहिये ओर मेरे पास आई ओर मेरे पेंट पर से मेरे लंड को हाथ लगाया ओर कहा की चलो अब मूझे मज़ा दो पर भाभी ने कहा की आज नही आज तेरे जीजा का आने का वक़्त हो गया है कल तू स्कूल से जल्दी आ जाना मे इसको बुला लूँगी ओर वो मान गई फिर भाभी ने मेरी आँख पर पट्टी बांधी ओर मूझे जहाँ से कार मे बिठाया वहाँ आकर छोड़ गई.
अगले दिन ठीक उसी वक़्त मे वहाँ जाकर खड़ा रहा ओर फिर भाभी आई ओर मुझे पट्टी बाँध कर उसके घर पर ले गई ओर मे अंदर जाकर बेठा तो मूझे उसकी बहन दिखाई नही दी तो भाभी बोली की वो आ जायेगी एक बार मूझे चोद लो ओर फिर हमने गेम शुरू किया ओर भाभी को करीबन 25 मिनिट तक चोदने के बाद मेरा निकलने वाला था तो भाभी ने कहा की बाहर निकालो तो मैने अपना लंड बाहर निकाला ओर भाभी के ऊपर अपना वीर्य छोड़ दिया यहाँ मेरा वीर्य छूटा ओर वहाँ उसकी बहन की आ गई. मेरा लव देखकर वो हमारे पास आई ओर बोली की यह क्या हे तो भाभी ने कहा की यह लव की मलाई है ओर बहुत टेस्टी होती है जब तुम करोगी तब भी निकलेगी ओर भाभी बेड पर वैसे ही लेटी रही ओर मेरे पास उसकी बहन आई ओर कहा की चलो आज मूझे जवानी का पहली बार मज़ा दो ओर मेरा लंड पकड़ लिया ओर कहा की मे तुम्हारा लंड अपने मुहँ मे लूँगी सेक्सी मूवी की तरह ओर इसको चुसूगी ओर देखूँगी की चूसने से क्या होता है ओर मेरा लंड अपने मुहँ मे लेकर चूसने लगी वो बहुत ही मजेदार वक़्त था की दोनो बहनों को साथ मे चोदने का मूझे मोका मिला था एक तो अभी जवान थी ओर मूझे जवान चूत मिल रही थी.
अभी वो स्कूल ड्रेस मे ही थी ओर वो जब बेठ कर मेरा लंड चूस रही थी तब उसका स्कर्ट ऊपर हो गया था ओर उसके स्कर्ट मे से उसकी पेंटी दिख रही थी अब  मैने उसके बूब्स को सहलाना शुरू किया ओर साथ साथ उसकी पेंटी पर भी हाथ फेरना शुरू किया उसको भी मज़ा आ रहा था ओर हम दोनो को भाभी देख रही थी. थोड़ी देर मेरा लंड चूसने के बाद मे उसके मुहँ मे ही झड़ गया ओर सारा वीर्य उसके मुहँ मे ही निकाल दिया ओर मेरे सारे वीर्य से उसका मुहँ भर गया तभी भाभी ने कहा की तुम इसको पी जाओ बड़ा मज़ा आयेगा तो वो सारा वीर्य पी गई ओर कहा की यह बहुत टेस्टी हे फिर उसको मैने उठाया ओर स्कर्ट खोल दिया अब वो पेंटी में थी फिर मेने पेंटी भी उतार दी उसकी चूत देख कर मे हेरान हो गया वो बहुत ही पिंक थी ओर अभी उसके बाल भी बहुत कम थे. उसके गोल्डन  कलर के बाल से उसकी पिंक चूत ओर भी सेक्सी लग रही थी. फिर उसको मैने भाभी के बाजू मे लेटा दिया ओर उसकी चूत को चाटने लगा ओर वो भी अब आआआआआ…उहह करने लगी ओर कहा की ओर चूसो यह मूझे बहुत परेशान  करती है सारा दिन किसी लड़के को देखकर मचलती है आज तुम इसका मचलना शान्त कर दो.
मे इसको उंगली डाल कर भी शान्त कर चुकी हूँ आज तुम मूझे चोद कर इसको शान्त कर दो ओर वो मचलने लगी थोड़ी देर तक चूसने के बाद उसकी चूत मे से पानी निकलना शुरू हो गया ओर अब उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी फिर मैने सोचा की यही सही वक़्त है अंदर डालने का तो मे तुरन्त उठा ओर लंड उसकी चूत पर टीका दिया ओर अभी थोड़ा ही लंड डाला था की वो चीखने लगी ओर कहने लगी की बहुत दर्द हो रहा है तुम अपना लंड बाहर निकालो मूझे नही पता था की लंड लेने से इतना दर्द होता हे तुम निकालो ओर मूझे धक्का दे दिया तभी भाभी आई ओर कहने लगी की पहली बार होगा फिर मज़ा आयेगा पर वो एक ना मानी तो भाभी ने मूझे कहा की चलो तुम दूर हो जाओ इसको मत चोदो इसको नही चुदवाना है यह कहकर मूझे थोड़ा दूर ले गई ओर कहा की मे उसको पकड़ती हूँ ओर मे इशारा करूं तब तू पूरी ताक़त से घुसा देना मे उसका मुहँ बंद कर दूँगी ओर भाभी उसके पास गई ओर अपनी छोटी बहन के बड़े बड़े बूब्स चूसने लगी ओर किस करने लगी अब वो उसके पेट पर बेठ चुकी थी ओर उसकी टाइट चूत मेरे सामने थी पर वो मूझे नही देख पा रही थी.
मे अपना लंड पकड़ के खड़ा था तभी मूझे भाभी ने इशारा किया की हमला कर दो ओर मे सीधा उसके पास गया ओर उसकी टांगों को फेला कर एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया ओर अंदर से ब्लड निकलना शुरू हो गया उसका मुहँ भाभी ने अपने मुहँ से बंद किया था वरना वो सारे मोहल्ला इकट्टा कर देती अब उसकी आँखो से आँसू निकल रहे थे ओर सारी बेडशीट बल्ड से खराब हो चुकी थी फिर मे धीरे धीरे हिलने लगा ओर 15 मिनिट के बाद झड़ गया ओर अपना लंड बाहर निकाला तो उसने कहा की मुझे मज़ा तो नही आया पर दर्द बहुत हुआ अब मे कभी नहीं चुदवाऊँगी पर भाभी ने कहा की कोई बात नही अगली बार चुदवाना अब तुमको मज़ा आयेगा फिर मूझे कहा की मे इसकी चूत में रोज उंगली डाल कर इसकी चूत को ढीला कर दूँगी उसके बाद इसको चोदना तब तक मूझे चोदते रहना ओर यह यहाँ खड़ी खड़ी हमको देखा करेगी.
फिर भाभी को मैने एक बार ओर चोदा फिर भाभी ने मूझे कहा की हमारी एक पड़ोसी है. उसको भी अपनी गेम मे शामिल करना है तो मेने कहा की क्यो नही. पर मूझे तो उसकी बहन बहुत पसंद आ गई थी क्योकी उसकी इतनी टाइट चूत थी और मेने आज तक टाइट चूत नही चोदी थी ओर मन कर रहा था की ओर उसको एक बार चोद के जाऊँ पर भाभी ने मना किया की उसकी चूत फट गई है ओर अभी भी थोड़ा थोड़ा ब्लडिंग हो रही है. इसलिये तुम थोड़े दिन रुक जाओ फिर मे तुम्हारा इंतज़ाम कर दूँगी वहाँ तक मे ओर मेरी पड़ोसी से काम चलाओं. बोलो दोस्तो कैसी लगी मेरी स्टोरी?
धन्यवाद








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FUN-MAZA-MASTI मेरे बॉस

FUN-MAZA-MASTI


मेरे बॉस

प्रेषक : रोमा
  सभी पाठकों को मेरा नमस्कार। मैं रोमा हूं इससे पहले आपके पास
अपनी कहानियां लेकर आ चुकी हूं। जैसा कि आपको पता हैं मैं पढाई कर रही
हूं, और इन दिनों मैं पढाई के साथ एक पार्ट टाइम जॉब भी कर रही हूं मेरी

जॉब की टाइमिंग शाम 5 से 8 की होती हैं, और यहां मुझे ज्यादा काम भी नही
करना होता है। यहां मैं कम्पनी के अकाउंट को चेक करके डेली की आय व्यय को
अकाउंट में उतारती हूं। यहां मेरे एक बॉस है जो मुझे बेहद पसंद करते है।
मुझे यहां काम में लगने से लेकर अब तक वे सभी कामों में मेरी काफी मदद
करते हैं, और काम से मेरी छुट्टी होने के बाद वे अक्सर मुझे अपने पास
बुला लेते, और मुझसे मेरे घर के बारे में बात करने लगते। छुट्टी के बाद
घर पहुंचने की जल्दी रहने के बावजूद उनका बास होना, और मुझे हर काम में
सहयोग देने की वजह से मैं उनके पास रूककर बात करने के उनके आग्रह को टाल
नहीं पाती। काम के बाद उनके पास रूकने का सिलसिला अब धीरे-धीरे करके और बढने लगा।
लिहाजा आफिस से मेरे छूटने का समय 8 बजे का था, जो अब बढते हुए 10 बजे तक
हो गया था। देर से घर पहुंचने पर एक दिन मेरी मां ने डांट लगाई, व कल से
काम पर न जाने का फरमान सुनाया। तब मैने मां से कही कि आज बास से बात
करके आपको बताती हूं। दूसरे दिन मैं जल्दी ही अपने आफिस पहुंची आज मैने
सलवार सूट न पहनकर स्कर्ट और शार्ट पहनी थी , और यहां अपने काम में न
लगकर सीधा बास के चेंबर में पहुंची। मुझे देखते ही बॉस ने चेंबर में बैठे
दूसरे लोगों का काम जल्दी से पूरा किया, जिनका काम नहीं हुआ उन्हे बाहर
बैठने को कहकर बास ने मुझसे कहा हां रोमा बोलो क्या बात हैं। मैं बॉस के
पास गई और बोली बॉस मुझे यहां से छूटने और घर पहुंचने में रोज रात के 10
बज रहे हैं। इससे मेरे घर वाले काफी नाराज हो रहे हैं और उन्होने मुझसे
यह सर्विस छोडने कहा हैं। सो आज मैने अपना रेजिगनेशन लेटर लिखा हैं और यह
आपको देकर अब भारी मन से यह सर्विस छोड रही हूं।
  यह सुनते ही मेरे बॉस  जिनका नाम वीरेन्द्र मेहता हैं, एकदम चौंक गए और
अपने सामने बिछी कुर्सी पर मुझे बैठने कहा। मैं कुर्सी पर बैठी। वह बोले
इस बारे में तुम्हे क्या कहना हैं ? मैं बोली कुछ बोल नहीं पा रही हूं
इसलिए तो अपना इस्तीफा दी हूं सर। मैने घर वालों से भी कहा हैं कि अभी
कुछ दिन की ही बात हैं फिर ठीक टाइम हो जाएगा, पर मेरी बात भी नहीं मानी
गई। मेरी बात सुनते ही वीरेन्द्र खुशी से उछल पडे और बोले या?तुम भी
इसमें मेरा साथ दोगी ना। मैं बोली बिल्कुल सर। अब वो बोले तुम मुझे सर ना
कहकर सीधे मेरे नाम से बुलाया करो। मैं लिहाज वश बोली जी सर। फिर सर… यह
बोलकर वीरेन्द्र अपनी चेयर से उठकर मेरे पास पहुंच गए। उन्हे आता देख
लिहाजवश मैं भी खडी हुई, पर उन्होने मुझे बैठाए रखने के लिए मेरे कंधे पर
अपना हाथ रखकर कंधा दबाया, इससे मैं पूरी न बैठकर थोडा झुक गई। वीरेन्द्र
बोले अपनी दूसरी बात होती रहेगी,पर पहले तुम सर्विस पर रोज आती रहो इसके
बारे में सोचना हैं, यह बोलकर वीरेन्द्र ने मेरे कंधे से अपना हाथ निचे
कर मेरे बूब्स पर रख दिया। उनका हाथ मेरे बूब्स पर लगते ही मेरे शरीर में
झुरझुरी सी उठी।
 वीरेन्द्र ने अपना हाथ मेरे बूब्स से हटाए और मेरे बाजू में रखी
कान्फेंस चेयर को मेरे और पास खिंचकर उस पर बैठ गए। मैं उन्हे अपने इतने
करीब बैठे देखकर घबरा रही थी। मेरे चेहरे का रंग भी उडा हुआ था। वे मेरी
यह हालत देख कर बोले क्या हुआ रोमा, तुम आज मेरे साथ बैठकर कैसा रिएक्ट
कर रही हो, तुम्हारी तबियत तो ठीक हैं ना। मैं बोली जी सर आप यहां मेरे
इतने पास बैठे हैं ना इस कारण मैं घबरा गई हूं। वीरेन्द्र ने कहा इसके
अलावा तो और कोई बात नहीं हैं ना। मैं बोली नहीं। तुम मेरे साथ बैठने से
इतना घबरा रही हो जैसे मैं तुम्हारे उपर ही चढ गया हूं। देखो रोमा मेरा
तुमसे अलग ही लगाव हैं, इसलिए तुम्हे बता रहा हूं कि काम्पीटिशन के इस
दौर में तुम्हे बहुत फारवर्ड होना पडेगा। एसे किसी के साथ बैठने से
झिझकीं या हाथ लगने से कांप उठोगी तो आगे कैसे बढोगी। मैं बोली जी…।
वीरेन्द्र ने कहा तुम्हे अब तो मेरे साथ बैठने से कोई परेशानी तो नहीं हो
रही है ना? मैं थोडा नर्वस फील कर रही थी, सो अपने हाथ से शर्ट की उपरी
बटन पर घुमाने लगी। वीरेन्द्र बोले बी फ्रेंक बेबी, डोन्ट नर्वस डाउन। यह
कहते हुए वे बोले अच्छा चलो अब अपन कुछ खुल के बातें करें,जिससे तुम्हारी
झिझक मिटे।
 मैने हां में गर्दन हिलाई। वे बोले पहले तुम सैक्स कर चुकी हो या नहीं।
मैं अब तक तीन बार अपनी चूत में लौडा ले चुकी थी, इसलिए अभी इस प्रश्न पर
चुप थी। वीरेन्द्र बोले देखो एकदम सही-सही बोलो। मैं बोली जी हां मैं
सैक्स कर चुकी हूं। वीरेन्द्र पूछे कितनी बार? और किससे? मैं बताई एक बार
एक लडके से। वीरेन्द्र बोले गुड यानि सैक्स को तुमने भी अपने फ्यूचर का
सवाल न बनाकर शरीर की जरूरत के हिसाब से यूस किया ना। मैं अपनी गर्दन
निचे किए बैठी थी। उन्होने मेरे हाथ को पकडा, और बेहद संजीदगी के साथ
बोले क्या मुझे भी तुम्हारे साथ सैक्स करने का मौका मिल सकता हैं? अब मैं
नारी सुलभ शरम का भाव दिखाते हुए अपना सिर झुकाए बैठी रही। वीरेन्द्र के
हाथ मेरे बूब्स के निप्प्ल को सहला रहे थे। बॉस के साथ चुदाई के ख्याल ने
ही मुझे रोमांचित कर दिया था। मैने स्कर्ट शार्ट पहनी थी। वीरेन्द्र का
एक हाथ मेरे निप्प्ल पर थे, दूसरे हाथ से उन्होने मेरे दोनो पैरों को अलग
किया, और मेरी चूत की ओर हाथ बढाया। मुझे अच्छा तो लग रहा था, पर कोई आ न
जाए इस डर से मैने पिछे घूमकर मेन डोर की ओर देखा तो वीरेन्द्र बोले अभी
बस हाथ लगा रहा हूं असली प्यार बाकी हैं। सो मैं पैर फैला दी ताकि वो
मेरी चूत को छू लें।
  उसने हाथ बढाकर मेरे स्कर्ट के अन्दर से मेरी पैन्टी के उपर से चूत को
सहलाया, फिर पैन्टी को किनारे से हटाकर मेरी चूत की दोनो फाकों पर हाथ
घुमने लगे।अभी दो दिन पहले ही मैने अपने झांटों को हेयर रिमुवर से साफ
किया था।सो चूत एकदम क्लीन तो नही, पर साफ थी। अब मुझे अपनी चूत में लौडा
लेने की इच्छा तेजी से सिर उठाने लगी। सो मेरा हाथ खुद ब खुद वीरेन्द्र
की पैन्ट की ओर बढा और पैन्ट के उपर से ही उनके लौडे को टटोलने लगा। उनका
लंड भी तनकर फुफकारने लगा। तभी अचानक उनका इंटरकाम बजने लगा। उन्होने
जल्दी से मेरी चूत से हाथ हटाकर रिसीवर उठाया और रिशेप्स्निस्ट की बात
सुनकर कहा कि ठीक हैं पांच मिनट में भेज दो। अब वह इधर की कुर्सी ठीक
करके अपनी चेयर पर आए और बोले कि रोमा आज तुम घर से ड्यूटी के लिए अपने
टाइम पर पहुंचो, मैं भी छुट्टी लेता हूं। सिविल लाइन में मेरा एक घर अभी
खाली पडा हैं अपन उसमें ही चलते हैं।
 मैं उठकर एक नजर खुद पर फिराई ड्रेस ठीक की, और बाहर की ओर चल पडी। घर
आकर मैने मां से झूठ कहा कि आज बास नहीं मिले सो आज ड्यूटी जाना पडेगा,
कल से कुछ और देखूंगी। मेरी बात से मां संतुष्ट हुई। तीन बजे ही
वीरेन्द्र का फोन मेरे मोबाइल पर आया कि शाम को तुम आफिस न आकर सिविल
लाइन पहुंचो, हम वहां की कैन्टीन में मिलेंगे। आज आफिस का लास्ट दिन हैं
यह बोलकर मैने घर से स्कूटी ली और निकली। सिविल लाइन मेरे घर से पास पडता
हैं वहां की कैन्टीन में वीरेन्द्र मिले, और मुझे साथ लेकर अपने घर
पहुंचे। यह घर अभी खाली था, पर वहां किसी के रहने के पूरे इंतजाम थे।
वीरेन्द्र बोले रोमा इस घर में हम दोनो अकेले हैं और जब दो लोग ही हैं तो
फिर कपडे की क्या जरूरत हैं ना। यह बोलकर वे पास आए और मुझे अपनी बाहों
में ले लिए। मैं तो इस मौके का इंतजार कर ही रही थी। वीरेन्द्र ने मेरा
चेहरा उठाया और होठ पर अपने होंठ लगा दिए। पहले मेरे होंठो को अच्छे से
चूसने के बाद अब अपनी जीभ से मेरी जीभ और फिर मुंह के अंदर घुमाए। साथ ही
उन्होने मेरे स्कर्ट की चेन व हुक खोलकर उसे उतारे और मेरी शर्ट की एक-एक
कर सारी बटन खोल दिए। अब मैं ब्रा व पैन्टी में थी। मुझे भी उनके किस
लेने की स्टाइल अच्छी लग रही थी सो मैं उन्हे पूरा सहयोग दे रही थी।
उन्होने मेरे ब्रा का हुक खोला व ब्रा उतारकर वहीं निचे डाल दिया।
उन्होने होठ से निचे मेरी ठोडी को चूमा फिर उनका मुंह मेरे निप्पल पर आ
गया। एक निप्पल को मुंह में रखकर दूसरे स्तन पर उन्होने हल्का सा दबाव
बढाया, और हाथ को चारों ओर घूमाते हुए निप्पल को प्रेस करने लगे।
 पहले एक तरफ के निप्पल को चूसने के बाद फिर दूसरे निप्पल को मुंह में
रखा। इसके बाद उन्होने दोनो निप्पल के बीच से चूसकर वे निचे सरके। वे
मेरे पेट में पैन्टी के उपर जीभ मारते हुए पैन्टी के दोनो किनारे को पकड
कर उसे निचे किए। अब मैं नंगी हो चुकी थी। एक पैर उठाकर मैने पैन्टी को
अलग की, व उन्हे मेरी चूत का स्वाद मिल सके इसलिए टांग को फैलाकर एडी
उठाकर खडी हो गई। वीरेन्द्र की जीभ मेरी चूत को उपर फिर निचे उसके होल
में अंदर कर कर रहे थे। मैं भी पूरी तरह से गर्म हो गई थी,और चूत से पानी
भी निकल रहा था,जिसे वे टेस्ट लेकर साफ किए जा रहे थे। मेरी चूत को अब
लंड की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी। उत्तेजना में मैने वीरेन्द्र के सिर
के बाल पकड रखी थी। उत्तेजना में इन्हे खिंचती भी जा रही थी। कुछ ही देर
में वीरेन्द्र ने उठते हुए कहा अब बेड पर चलते हैं। यह बोलकर वे अंदर
बढे। मैं भी वहां बिखरे अपने कपडों को समेटकर भीतर बेडरूम में गई। फिर
वहीं किनारे में रखी कुर्सी पर पूरे कपडे रखी। भीतर वीरेन्द्र अपने शर्ट
व पैन्ट उतारकर बनियाइन- अंडरवियर में थे।
 मैने उनसे कहा यहां नंगे रहने का नियम सिर्फ मेरे लिए ही हैं क्या, आप
कपडे नहीं उतारेंगे ? अब तक वीरेन्द्र मेरे पास आकर फिर चूमना शुरू कर
दिया। मेरी चूत की डिमांड बढने लगी, सो मैने उनके अंडरवियर को हटाकर तंबू
बना रहे लौडे को पकडी। तब तक वीरेन्द्र ने अपनी अंडरवियर को भी निचे कर
दिया। अब मैं उनका लंड देखी। यह लंड जादा मोटा तो नहीं था, पर मजबूत दिख
रहा था। इनका सुपाडा गुलाबी रंग का था, मानो किसी गोरे आदमी ने गुलाबी
कलर की टोपी पहनी हो। वीरेन्द्र ने पूछा कैसा लगा। मैं बोली बहुत अच्छा।
वीरेन्द्र बोला तो इसे प्यार नहीं करोगी? मैं उनके लंड पर हाथ रखकर पिछे
आई, और पलंग पर बैठकर उनके लंड को पहले चूमी, फिर मुंह के अंदर डाल ली।
थोडी देर चूसने के बाद मैने लंड बाहर की और पलंग पर आकर लेट गई।
वीरेन्द्र समझ गए थे कि मैं गर्म हो गई हूं। सो मेरे लेटते ही वे मेरी
चूत को चाटने लगे। होल में जीभ डालकर अंदर बाहर करने से मुझे लगा कि एसा
ही चला तो मै जल्द ही झड जाउंगी। सो मैने उन्हे बोला कि जल्दी चोदो ना।
चूत चाटते हुए वीरेन्द्र उपर आए और मेरे होठों को पकडे। अब उन्होने अपने
लौडे को चूत के होल में लगाया और हल्का सा झटका देकर अंदर किया। दर्द से
मैं कराही। फिर उन्होने हल्का सा रूक कर तगडा झटका मारा, और मेरी चूत में
अपना पूरा लंड घुसेड दिया। दर्द के कारण मैं थोडी देर रूकी, पर अब मुझे
अच्छा लग रहा था। सो मैने भी निचे से झटके लगाना शुरू कर दी। चुदाई का यह
दौर जल्दी ही पूरा हो गया। पर मानना पडेगा वीरेन्द्र को जिन्होने मुझे
ज्यादा इधर उधर होने देने के बदले फिर से नए दौर का खेल शुरू कर दिया।
दूसरी ट्रीप के बाद ही मुझे चैन मिला। मेरे भीतर की ज्वाला ठंडी होने के
बाद मैने वीरेन्द्र से कहा तो मेरा इस्तीफा स्वीकार हो जाएगा ना सर, तो
वे बोले हफ्ते में एक दिन हम एसे मिल लिया करेंगे बस। आफिस में रोज देर
भी नहीं होगी, और कल ही तुम्हारे प्रमोशन का लेटर भी तुम्हे मिल जाएगा।
पर हफ्ते में एक दिन मुझसे यूं ही मिला करोगी यह वादा करो। प्रमोशन की
बात सुनकर मैं खुश हो गई। यानि अब मुझे बढी हुई सेलरी के साथ बास का लंड
भी हर हफ्ते मिलेगा… वाह वाह। मैं बास से चिपक गई, ताकि उनका मूड बने और
हम फिर से एक बार चुदाई कर सकें।
तो ये थी दोस्तों मेरी कहानी उमीद करती हु की आप लोगो
को पसंद आई होगी आप लोगो को केसी लगी बताइएग जरुर
रोमा


हजारों कहानियाँ हैं फन मज़ा मस्ती पर !
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FUN-MAZA-MASTI बचपन

FUN-MAZA-MASTI


बचपन 

प्रेषक : सूरज
हाय दोस्तो आपका और टाइम ख़राब करने के बजाये  स्टोरी की तरफ आता हूँ यह उस वक़्त की बात हे जब मैं 18 साल का था और मुझ पर सेक्स का फुल जोश था. मेंरे घर मैरी कजिन नेहा और उसकी माँ और बडा भाई रहने के लिये आये हुये थे. एक दिन जब मेंरी माँ और नेहा की माँ और भाई कुछ खरीदारी के लिये जाने लगे तो
नेहा की माँ मेंरे पास आई और कहने लगी नेहा की तबीयत कुछ ठीक नही हे उसे जुखाम हो रही हैं तुम उसका ख्याल रखना हम उसे घर पर छोड़ कर जा रहे हैं मैने कहाँ आप बिल्कुल फ़िक्र ना करे मैं देख लूँगा नेहा की उम्र उस वक़्त 18 साल थी मगर उसकी उठान बिल्कुल 22 या 23 साल की लड़की की तरह थी मैने घर वालो के जाने के बाद अपने कंप्यूटर पर एक ब्लू फिल्म की सी.डी लगा ली और देखने लगा थोडी देर के बाद मेंरे रूम की घन्टी बजी तो मैने सी.डी बंद करके दरवाज़ा खोला तो देखा नेहा दरवाज़े पर खडी थी वो कहने लगी मुझे अकेले मैं डर लग रहा है मैं आपके पास बैठ जाऊं मैने कहाँ हाँ क्यो नही आ जाओ. वो मेंरे बेड पर आकर बैठ गई उसने फ्रोक पहन रखा था और नीचे सिर्फ़ चड्डी पहन रखी थी मैं उसे देखता ही रह गया.
थोडी देर तक इधर उधर की बाते करने के बाद वो कहने लगी मुझे बाथरूम जाना हे मैने कहा हाँ चली जाओ वो तुरन्त बाथरूम की तरफ भागी मगर रास्ते ही मैं उसे एम.सी आ गई और उसकी चड्डी और फिरोक गंदी हो गई बाथरूम मैं जाकर उसने अपनी फिरोक और चड्डी को धोया और फिर मुझे आवाज़ देकर. कहने लगी मेंरे कपड़े गंदे हो गये हैं प्लीज़ आप मुझे दुसरे कपड़े ला दो मैरे रूम से मैने कहाँ इसमें शर्माने वाली क्या बात हे तुम बाहर आ जाओ और खुद ही ले लो मगर वो नही आई तब मै उसके कमरे में जाकर एक फिरोक और चड्डी लाया जब मैं अपने रूम मैं आया तो देखा वो मेंरे कमरे मैं नंगी खडी होकर मैरे कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रही थी मैने कहाँ यह क्या कर रही हो तो कहने लगी की आप भी तो देख रहे थे. जब मैने देखा की वो खुद राज़ी है तो मैने कहाँ तुमको अच्छी लगती है तो कहने लगी हाँ मगर मैने आज तक किसी लड़के को नंगा नही देखा मैने कहाँ तुम्हारी यह इच्छा मैं पूरी कर देता हूँ और फिर मैने उसे अपनी गोद मैं नंगा ही बैठा लिया और हम दोनों ब्लू फिल्म देखने लगे फिल्म देखते हुये मेंरा भी लंड तन गया और मैने आहिस्ता आहिस्ता उसके बोबो और चूत पर हाथ फैरना शुरु कर दिया उसे मज़ा आने लगा कुछ देर बाद जब वो पूरी तरह से गरम हो गई तब उसने मेंरी कमीज़ और पैंट उतार दी और मैने भी अपनी चड्डी उतार कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया वो उसे घूर कर  देखने लगी और कहने लगी यह क्या चीज है और यह किस काम आती है मैने कहा यह इस सुराख (छेद की तरफ इशारा करके) मैं जाती हे और फिर बहुत मज़ा आता है तो वो कहने लगी यह सुराख तो बहुत छोटा है इसमें यह कैसे जाता होगा मैने कहाँ अभी बताता हूँ और फिर मैने उसे अपनी गोद मैं बिठा कर अपना लंड उसकी चूत के सुराख पर रखा और कहाँ अब आहिस्ता से इस पर बैठ जाओ वो कहने लगी मुझे तकलीफ़ हो रही है.
मैने कहाँ थोडी देर होगा फिर मज़ा आयेगा मगर. उसे ज़्यादा दर्द हो रहा था तो मैने टेबल से ऑयल की बोतल उठाई और अपने लंड और उसकी चूत पर अच्छी तरह से लगाया और एक चॉकलेट का पैकेट खोल कर उसे खाने के लिये दिया और कहाँ इसे आराम से खाओ मैं तुम्हारा मज़ा बड़ाता हूँ और फिर उसे नीचे लिटाकर उसकी चूत मैं अपना लंड डाल कर एक झटका दिया मेरा 4 इंच के लंड का 1 इंच हिस्सा उसकी चूत मैं चला गया मैने जब उसका चेहरा देखा तो उसे ज़्यादा दर्द नही हुआ तो मैने आहिस्ता से अपना लंड और अंदर डालना शुरु कर दिया. अब मेंरा लंड 3  इंच तक अंदर चला गया था. नेहा ने चोकलेट खा ली थी और अब उसे दर्द हो रहा था और वो मुझसे अपना लंड बाहर निकालने के लिये कहने लगी मैने आहिस्ता आहिस्ता लंड को अंदर बाहर करना शुरु कर दिया.
कुछ देर के बाद उसे भी मज़ा आने लगा अब मैने उसके होठों पर किस करना शुरु कर दिया और अपने होठों से अच्छी तरह उसके होंठ मिलाते हुये और चुमते हुये एक जोरदार झटका मारा तो मेंरा पूरा लंड उसकी चूत मैं चला गया उसके मुहँ से भयानक चीख निकली जो मेंरे होठों की वजह से अंदर ही दब गई वो बुरी तरह से तड़पने लगी उसकी चूत की सील टूट चुकी थी और खून आ रहा था मैने कुछ देर तक अपना लंड उसी स्टाइल मैं रखा और उसे किस करने के साथ साथ उसके बोबे भी दबाता रहा कुछ देर बाद जब उसे भी मज़ा आने लगा तब मैने अपना लंड आगे पीछे करना शुरु कर दिया तक़रीबन 10 मिनिट के बाद उसकी चूत से गरम गरम पानी निकल आया और वो ठंडी पड गई मगर मैं अभी झड़ा नही था मैने उसे जोर जोर से चोदना शुरु कर दिया वो कहने लगी मुझे बाथरूम जाना है मुझे पेशाब आ रही है मैने कहाँ यहीं कर दो तो वो कुछ देर तक सहन करती रही और फिर उसने पेशाब नीचे ही कर दी. मगर मैने उसे छोड़ा नही और चोदता रहा और फिर कुछ देर के बाद मैं भी झड़ गया और फिर मैने उसको पेट के बल लेटाकर उसकी गांड का छेद देखा जो की एम.सी की वजह से काफ़ी गंदा हो गया था मगर उसका साइज़ काफ़ी बड़ा था मैने अपना लंड जो की अब फिर से चुदाई के लिये तैयार था उसे उसकी गांड के होल मैं डालना शुरु कर दिया नेहा कहने लगी यह आप क्या कर रहे हो मुझे पोटी भी आ रही है और तकलीफ़ भी हो रही है मैने कहाँ यहाँ डालने से तुम्हारी पोटी आना बंद हो जायेगी और फिर अपने लंड को आहिस्ता से उसके सुराख मैं डाल कर धक्का मारा तो मेंरा लंड 1 इंच अंदर चला गया.
उसकी गांड में एम.सी की वजह से काफ़ी चिकनाहट थी और मेंरा लंड आराम से अन्दर जा रहा था मैने यह देख कर अपना लंड आहिस्ता आहिस्ता पूरा उसकी गांड मैं डाल दिया और अब आहिस्ता आहिस्ता उसकी गांड मारने लगा मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और अब नेहा को भी मज़ा आ रहा था मैने आहिस्ता आहिस्ता रफ़्तार तेज करते हुये उसकी गांड मारना चालू रखा तक़रीबन 15 मिनिट के बाद उसकी चूत  ने दोबारा पानी छोड़ दिया अब में पूरे मजे ले रहा था और उसे खूब जोर जोर से धक्के लगा रहा था और फिर कुछ देर के बाद में भी झड़ गया और अपना सारा वीर्य उसकी गांड के अंदर ही डाल दिया और अपना लंड उसकी गांड में ही डला रहने दिया और उसके बराबर में ही लेट गया कुछ देर बाद जब लंड सूकड कर छोटा हो गया तब मैने उसे गोद में उठाया और बाथरूम में ले जाकर उसे भी नहलाया और खुद भी नहाया और फिर बाहर फर्श को साफ़ किया और उसे दूध और शहद पीने को दिया और खुद भी पीया. तो दोस्तों यह थी मेरी जवानी की कहानी अब भी नेहा जब हमारे घर आती है मुझसे ज़रूर चुदवाती है और अब तो उसके 3 बच्चे भी हैं जो बिल्कुल नेहा के मेरे हैं क्योकि उसके पति का लंड बहुत  छोटा है और ज़्यादा खड़ा भी नही होता. धन्यवाद






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FUN-MAZA-MASTI मुहं बोली बहिन

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मुहं बोली बहिन

प्रेषक : अमित शर्मा
हेलो दोस्तों.. मेरा नाम अमित शर्मा है. मेरी उम्र ३० वर्ष है. मै एक सोफ्टवेयर इंजीनियर हूँ. और बंगलौर में रहता हूँ . मेरा दोस्तों में सर्किल बहुत बड़ा है. अब में अपनी कहानी पर आता हूँ. एक दिन एक लड़की ने कॉल किया. उसका नाम आकांशा था. उसने कहाँ होल्लो भेया. और उसने रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने को कहा..वह
वही आसपास फ्लेट के एक होस्टल मै रहती थी.
वह मेरी मुहँ बोली बहिन थी. बाहर हम दोनों एक साथ रहते थे. और मूवी देखते थे. इस सप्ताह मेरी मुहँ बोली बहिन ने मेरे फ्लेट पर आने को कहा. वह दुसरे दिन मेरे फ्लेट पर आयी. और उसने अपने हाथो से गारमा गरम खाना बनाया और दोनों ने साथ-साथ खाना खाया. फिर टी.वी देखा.
हम दोनों अक्सर साथ में रहा करते थे. वह फिर चार दिन बाद आयी और स्वादिस्ट खाना बनाकर लायी थी. लेकिन अचानक बरसात शुरू हो गई और वह भीग गई. फिर उसने दरवाजे की बेल बजाई मैने गेट खोला और उसे अंदर आने को कहा.. मैने उसे देखा की वह पूरी तरह भीग चुकी थी..
मैने उसके हाथ से टिफिन लिया और टेबल रख दिया. लेकिन मेरे मन में उसके लिए कोई गंदी सोंच नहीं थी.. मैने उसे एक टावल दिया और कहा की रूम में चली जा और खुद को सूखा ले.. उसके कपड़े  भीग चुके थे तो मैने उससे कहा की इन्हे प्रेस (आइरन) से सूखा ले रूम में..
वो अंदर चली गई और मैं बाहर बेड रूम में टीवी देख रहा था.. 5-10 मिनट बाद उसने मुझे आवाज़ दी और मैं अंदर रूम में गया.. उसने टावल लपेटा हुआ था और अपना गीला टॉप बेड पर पडा था.. उसे ऐसा देख कर मैं थोड़ा हैरान रह गया..
उसने मुझसे कहा की प्रेस चालू नहीं हो रही ज़रा देखना.. मैं देखने लग गया और वो मेरे पीछे खड़ी थी.. मैने प्लग ठीक कर दिया और जब पीछे मुड़ा तो देख कर हैरान रह गया.. मैने देखा की टावल नीचे गिरा हुआ था और उसकी ब्रा का एक हिस्सा भी नीचे था.. मैने उसे देखा पर उसे कोई फ़र्क नई पड़ा..
10-15 सेकंड बाद उसने अपना टावल उठाया और आगे लगा लिया.. क्या फिटनेस वाले फिगर थे. उसकी साईज 34-30-36 उसके आधे बोब्स ब्रा में से दिख रहे थे.. ऐसा द्रश्य देख कर मेरा दिमाग ख़राब हो गया. मैं तुरंत बाहर चला गया और उसने दरवाज़ा बंद कर लिया..
मैं यह सोच-सोच कर पागल हो रा था.. मेरा 7 इंच का लंड टाइट हो गया था.. मैं उसे नंगा देखना चाहता था तो में उसे खिड़की से देखने लग गया.. मैने देखा की वो सिर्फ़ पेंटी में खड़ी थी. और अपने सारे कपड़े उतार कर प्रेस से सूखा रही थी.. उसके बड़े-बड़े बोब्स और गांड देख कर मैं पागल सा हो गया..
मेरा लंड पजामें के अंदर बिल्कुल टाइट खड़ा हो गया था. और मैं उसे सहला रहा था.. फिर उसने अपनी पेंट को थोड़ा सा नीचे किया. और अपनी चिकनी गांड को टावल से सॉफ कर लिया.. अब मुझसे रहा नही जा रहा था.. मैने सोच लिया था की आज में अपनी बहिन को चोद कर ही रहूँगा..
मैं धीरे से गेट के पास गया और पुश किया.. लेकिन वो अंदर से बंद था.. मैने बड़ी हिम्मत कर के हल्का सा नॉक किया.. अंदर से आवाज़ आई की क्या हुआ और मै धीरे से बोला की मुझे कुछ लेना है.. उसने गेट खोला तो उसने सिर्फ़ टावल लिया हुआ था.. और टावल के अंदर सिर्फ़ पेंटी थी..
मैं अंदर चला गया और कहा की कोई सहायता चाहिए क्या.. उसकी आँखों में भी तरक दिख रही थी.. उसने कहा की टॅल्कम पाउडर है क्या..मैने कहा की है और उसे निकल कर दे दिया.. मैने उससे पूछा की मैं लगा दूं…..वो शर्मा गई और कुछ नहीं बोली..
मैं समझ गया था की आज लड़की चुद कर ही जाएगी.. मैने पाउडर का बॉक्स अपने हाथ में ले लिया और उसे बेड पर लेटने को कहा..वो शरमाते हुए उल्टी लेट गई.. उसने सिर्फ़ पिंक कलर की पेंटी पहनी हुई थी.. मैं उसकी गांड और नंगी कमर को देख रहा था.. मैने उसकी कमर पर पाउडर लगाया और धीरे – धीरे पेंटी के अंदर हाथ डाल दिया..
उसने कुछ नही कहा… उसकी गांड को दबाया और पेंटी थोड़ी सी नीचे कर दी.. फिर मैने भी पाजामें से अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसे सीधा लेटने को कहा.. वो शरमाते हुए सीधा हो गई.. उसके टाइट बोब्स मेरे सामने थे.. उसकी नज़र मेरे लंड पर पडी और कहने लगी वाह!! कितना मोटा लंड हैं. सच में मैने पहले कभी नहीं देखा इतना बड़ा और जो चट्टान जेसा सख्त हैं. आह आज तों मजा आ जायगा. आज सारी प्यास बुझ जायगी..
फिर मैने उसके बोबे को दबाया और चूची मसलने लग गया.. उसने भी मेरा लंड पकड़ लिया और सीधा मूहँ में ले लिया,, मुझे बडा सेक्सी फील हो रा था.. मैने भी उसकी पेंटी उतार दी और खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया.. 69 की पोज़िशन में मैं उसकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लंड..
उसकी चूत पर थोड़े से बाल थे और बिल्कुल टाइट थी.. मैने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक बार ज़ोर से मारा.. उसे दर्द होने लगा और वह रोने लग गयी.. मैने उसके मूहँ को अपने मूहँ से बंद कर लिया और उसे चाटने लग गया..
उसे अच्छा फील होने लगा था.. मैने देखा की उसकी चूत में से ब्लड आ रा हैं. फिर मैने थोड़ी सी रुई ली और उस की चूत को पूरी तरह सॉफ कर दिया और फिर चालू हो गया.. लेकिन कुछ देर बाद मेरा लंड और उसकी चूत खून से लाल हो गई.
अब दोनों को और मजा आने लगा. फिर मैने अपनी प्रतिक्रया और तेज कर दी. फिर वह आह…ओ..आह…आई….धीरे करो में मर जाऊँगी. इतने में वह फुल जोश मै आ गयी. और उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया. और कहने लगी जल्दी – जल्दी करो ना जानू.
मेरे झड़ने का समय आ गया था. और उसका भी समय अब दूर नहीं था.और जोर से अन्दर डालते डालते मेरा पानी उसकी चूत में ही निकल गया.. फिर अपना लंड बाहर निकाला और सॉफ कर लिया.. लेकिन अभी उसका झड़ना शेष रह गया था.
फिर उसने अपनी चूत में उंगली डाली और जोर-जोर से अन्दर घुमाने लग गयी. इतने में पानी निकालने लग गया.. वह दुखी हुई कही कुछ ना हो जाये. उसकी परेशानी खत्म हुई जब मैने उसे बाजार से पिल्स (दवाई) ला कर दी.. हमने खूब आनंद लिया.. उसके बाद मैने उसे फिर करीब 20 बार चोदा.. अब मैं अपने घर आ गया हूँ और वो भी अपने घर चली गई है अंबाला.. मै इन दिनों को हमेशा याद रखूँगा.
……….आपका……. दोस्त……अमित…..



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FUN-MAZA-MASTI माँ का दूध

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माँ का दूध

प्रेषक : गुमनाम
मेरी उम्र करीब 45 साल है. मेरी शादी हो चुकी है और दो बच्चे भी हैं. मैं वैसे तो भोपाल का रहने वाला हूँ। मैं एक प्राइवेट कंपनी में ऊँचे पद पर हूँ. बात उन दिनों की है जब मेरी कंपनी ने मुझे पुणे ऑफीस सेट अप करने के लिए भेजा था। यह करीब दो साल पहले हुआ. दिसम्बर का महीना था और बच्चो के स्कूल शुरू थे. इसलिये
मैं अपनी फैमिली साथ नहीं ले जा सका। पुणे में मुझे कंपनी से एक बड़ा सा मकान मिला था जिसमे मैं पूरी तरह अकेला रहता था. तभी एक दोस्त के रेफरेन्स से एक यंग कपल मुझसे मिलने आये. वो दोनों करीब 25-27 साल के थे. उनका एक तीन महीने का बेबी था. लड़का कहीं नौकरी करता था. उन्हे कुछ महीनों के लिये एक रहने की जगह चाहिये थी. मेरे दोस्त का ख्याल था की मैं अपने मकान का एक हिस्सा उन्हे किराये से दे दूँ. इससे मकान का मेंटेनेन्स होता रहेगा, मुझे कंपनी भी मिल जायेगी और इस कपल की मदद भी हो जायेगी. मुझे वो दोनों भले लगे और मैं तैयार हो गया। पहले ही दिन मैने नोटीस किया की उसकी पत्नी ने बड़ी टाइट जीन्स और टी-शर्ट पहन रखी हैं. वो दिखने में कोई ख़ास सुंदर नहीं थी पर उसका दुबला पतला बदन था और जिस पर काफ़ी उभार वाले बड़े स्तन थे. पहले ही दिन से मैं उन पर से नज़रें हटा नहीं पा रहा था। मैने सोचा शायद अब भी अपने बच्चे को दूध पीला रही है. मेरा ख्याल सही निकला. वो जब भी मुझसे मिलती मेरी नज़र उसके भरपुर स्तन पर जाये बगैर नहीं मानती थी। यह शायद उसने भी नोटीस किया था. कुछ ही दिनों मे हम लोग काफ़ी घुल मिल गये. मैं घर के अपने हिस्से की भी चाबी उस लड़की के पास छोड़ जाता था ताकि जब कांमवाली आये तो वो उससे घर साफ करवा ले. वे अभी खुद का घर लेने ही वाले थे इसलिये उनके पास कुछ फर्निचर नहीं था।
मैने लड़की से कहा वो दिन भर अकेली रहती है, चाहे तो वो मेरा टीवी देख सकती है ओर अपना सामान मेरे फ्रिज में भी रख सकती है. उसने तुरंत ही मान लिया. इस तरह उसका घर में आना जाना बना रहता और मैं उसके स्तनों को भी देख पाता. कभी कभी जब वो ब्रा नहीं पहनी होती तो मुझे उसके बड़े बड़े निपल्स का भी एहसास हो जाता। एक दिन की बात है, दफ़्तर में कोई ख़ास काम नहीं होने से मैं दोपहर को अचानक ही घर पहुँच गया. घर का दरवाज़ा खुला था और अंदर से टीवी की आवाज़ आ रही थी. मैं जैसे ही अंदर दाखिल हुआ मैने देखा आरती (जो उस लड़की का नाम था), सोफे पर बैठी थी और अपने बेबी को दूध पीला रही थी. उस दिन भी उसने सिर्फ़ एक शर्ट ही पहना था. सामने के आधे बटन खुले थे. अंदर ब्रा भी नहीं थी. उसका एक स्तन तो करीब पूरा ही दिखाई दे रहा था।
वो मुझे देखकर थोड़ा हड़बड़ा गयी पर बेचारी के पास तन ढकने को कोई कपड़ा नहीं था. वो बेबी को डिस्टर्ब भी नहीं करना चाहती थी इसलिये कुछ ना कर सकी. मैने भी उसे इशारे से कहा कोई बात नहीं और में दूसरे सोफे पर बैठ टीवी देखने लगा. हम लोग इधर उधर की बात करते रहे पर हर कुछ पलों के बाद मेरी नज़र उसके स्तनों पर ज़रूर जाती. वो यह जानती थी पर कुछ देर बाद वो इस बात से खुली हुई होती दिखी। तभी मैने देखा की उसके ढके हुए स्तन से भी दूध टपक रहा है और उसका शर्ट धीरे धीरे गीला हो रहा है. इस वजह से उसके शर्ट का कपड़ा भी गीला हो चला था और अंदर से दूसरे स्तन के भी दर्शन हो रहे थे. मैं जानता था की ऐसा होता है पर मैने नादान बनते हुये उससे पूछा, “अरे आपका शर्ट तो पूरा भीगा जा रहा है, क्या हुआ?”  वो थोड़ा शरमाई और बोली, ” भाई साहब, क्या करूँ मुझे दूध इतना होता है की टपकता रहता है.” उसने कहा की यह एक समस्या है. इससे उसे बड़ा दर्द भी होता है और यदि हाथ से पंप करके निकाले तो भी बहुत तकलीफ़ होती है।
मैने थोड़ा शरारत भरे अंदाज़ में कहा, “इसमें क्या समस्या है, राजेश (उसका पति) से कहो तुम्हारी मदद करे.” वो बोली वो ऐसा नहीं करते. उन्हे मेरा दूध ज़रा भी पसंद नहीं और स्तनों से दूध निकलना भी पसंद नहीं. मैने फिर कहा की ये आश्चर्य की बात है. ऐसा कौनसा मर्द है जो यह करना नहीं चाहेगा। अब हम दोनों में बड़ी फ्री बातें हो रही थी. वो बोली राजेश तो ऐसे ही हैं. अब मेरे अंदर का शैतान जाग गया था. मैने सोचा थोड़ी पहल कर के देखते हैं, शायद कुछ बात आगे बढ़े. मैं थोड़ा चुटकी लेते हुये और थोड़ा ठंडी आह भरते हुये बोला, “है, काश मैं आपकी मदद कर पाता.”मुझे लगा शायद ज़्यादा बोल गया और वो कहीं नाराज़ ना हो जाये पर आरती मुस्कुराई और बोली, “आप करेंगे मेरी मदद?” मैने कहा क्यों नहीं।
वो बोली, “तो ठीक है.” अब तक उसका बेबी सो चुका था. उसने धीरे से बेबी को स्तन से अलग किया जिससे वो पूरा मुझे दिखाई देने लगा पर उसने छिपाने का कोई प्रयत्न नहीं किया. बेबी को अंदर एक पलंग पर सुला कर वो वापस आई और मेरे सामने खड़ी हो गयी. अपने खुले स्तन को पकड़ कर कहा की इसे तो बेबी ने खाली कर दिया, और दुसरे को पकड़ती हुई बोली की देखो यह तो पत्थर हुआ जा रहा है. इसके लिये आप क्या  करेंगे। मैने कहा, मैं तो सिर्फ़ इसे चुस कर ही खाली कर सकता हूँ. वो बोली, “मेरा भी यही इरादा है.” वो थोड़ा सा झुकी और अपना शर्ट दुसरे स्तन से हल्का सा सरका लिया. उसका भरपूर स्तन और उठा हुआ निप्पल मेरे चेहरे के सामने लटक रहा था। मैंने जैसे ही होंठ खोले वो आगे बढ़ी और अपना निप्पल मेरे मुहँ में दे दिया।
मैं हल्के हल्के उसे चुसने लगा. उसमे से पतला और हल्का सा मीठा दूध निकल रहा था जो मैं गुटक जा रहा था. मैने सपने में भी नहीं सोचा था की बात यहा तक बढ़ेगी और वो भी इतनी जल्दी और आसानी से. अब मैने थोड़ा ज़ोर से चूसना शुरू किया. उसके स्तन में वाकई बहुत दूध था।
हर सास के साथ एक बड़ा सा घुट मेरे मुहँ में आता और मैं उसे पी जाता. इस बीच मेरा लंड मेरे कपड़ों के अंदर तन कर खड़ा हो गया. मैने देखा की उसकी भी साँसे तेज़ हो गयी हैं. अब वो सोफे पर मेरे बाजू बैठी थी और मैं उसका स्तन चूसे जा रहा था. मुझे पता भी नहीं चला की कब मेरा हाथ उसके दूसरे स्तन पर चला गया। मैं एक स्तन को चूस रहा था और दूसरे को हल्के हल्के मसल रहा था. उसने मुझे रोका नहीं. इसके पहले में अपनी पत्नी को छोड़ किसी औरत के इतना करीब नहीं आया था. और एक जवान जिस्म को छुये तो बीस साल गुज़र चुके थे. उसके स्तन बड़े होने के बावजुद काफ़ी उभरे हुये थे. और बदन पर तो क़यामत ही करते थे। धीरे से मैने उसका शर्ट उतार फेंका. नीचे वो पजामा पहने हुई थी. मेरे हाथ अब उसके पूरे बदन पर चल रहे थे और वो भी सिसकियाँ ले रही थी. अब बात सिर्फ़ ज़्यादा दूध खाली करने की नहीं रही थी. ये वो भी समझ रही थी पर अपने आप को और मुझे रोक नहीं पा रही थी। मैने आहिस्ता से उसका पजामा और पेंटी दोनो उतार दिये. अब वो पूरी तरह से नग्न थी. उसके हाथ मेरे कधों पर थे. और मैं बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को चूसता और मसलता जा रहा था।
मेरे हाथ अब उसकी चूत की ओर चले. बालों के बीच से जब मेरी उंगलियाँ उसकी चूत की फांकों तक पहुँची तो मुझे पता चला वो पूरी तरह गीली हो चुकी थी. उसने तीन महीने पहले ही बच्चे को जन्म दिया था. अभी तक उसकी चूत काफ़ी ढीली और बड़ी थी। मेरी उंगलियाँ आसानी से अंदर चली गयी. मैं जान गया की वो चुदने के लिये पूरी तरह से तैयार है. मैं भी आपे से बाहर ही था।
पता नहीं कैसे और कब मैं भी अपने कपड़ों से आज़ाद हो गया. अब आरती का हाथ मेरे लंड को ढूंढता हुआ आया और उसे पकड़ लिया. मेरे बदन में तो जैसे आग लग गयी. किसी दुसरी महिला को चोदने का ख्याल मेरे मन में तो बहुत बार आया पर यह पहला ही मौका था जब वो सच हो रहा था। अब उसके स्तन तो क्या मैं सारे बदन को चूम रहा था और वो भी मुझसे लिपटी जा रही थी. शायद बड़े दिनो से प्यासी थी. क्या पता बच्चे के जन्म के बाद शायद पति से चुदी ही नहीं. वो अपनी चूत उठा उठा कर मुझसे आने को कह रही थी। मेरे लंड को पकड़ कर चूत की तरफ खींच रही थी. हम दोनो अपने होश खो चुके थे. मैने आरती को सोफे पर लिटाया और उसके पैरों के बीच आ गया. वो अब अभी मेरा लंड पकड़े हुये थी. उसने ही लंड को चूत के उपर पर रख दिया और उपर नीचे करने लगी।
इससे लंड उसकी चूत के रस में हो गया. हमारे होठ आपस मे मिल चुके थे. मैं उसकी जीभ को चूस रहा था. हम दोनो पसीने से तर थे. एक हल्के से झटके से मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर समा गया. इतनी गर्म ओर गीली चूत का मेरा पहला अनुभव था. मेरे बदन में जैसे आग लग गयी. अब मैने उसे चोदना शुरू किया. पहले हल्के हल्के फिर ज़रा ज़ोर से. आरती के मुहँ से सिवाय ऊ और आ के कोई शब्द नहीं निकल रहा था. उसकी आँखें बंद थी. मैं जानता था वो लंड का पूरा आनंद ले रही है।
इस बीच वो दो बार झड़ी पर चुदवाना बंद नहीं किया. चूत उठा उठा कर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी. उसके दोनों स्तनों से फिर दूध की बूँदें टपक रही थी. मैं भी उसके जवान बदन को बेतहाशा चोदे जा रहा था. शायद मेरा लंड इतना मोटा ओर टाइट कभी नहीं हुआ था। एक तो दूसरे की पत्नी उपर से जवान,  मेरी उम्र के आदमी को और क्या चाहिए?  मैं जानता था की अब मैं झड़ने के करीब हूँ.  मैने ज़ोरों से उसकी चूत मारनी शुरू कर दी. जैसे ही वो तीसरी बार झड़ी मैने भी अपने वीर्य से उसकी गर्म चूत भर दी. गर्म गर्म वीर्य के न जाने कितने फव्वारे उसकी चूत में खाली हो गये। मुझे लगा जैसे मैं मर जाऊँगा. हम दोनो एक दूसरे की बाहों में गिर गये. थोड़ी देर बाद जब होश आया तो दोनो डरे हुये थे।
आरती तो रोने लगी पर मैने उसे समझाया जो हुआ वो हुआ अब इसे किसी से कहना नहीं. हमने कपड़े पहने और वो बेबी को लेकर अपने कमरे में चली गयी. वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. इसके बाद तो मैं कई बार उसके स्तन खाली करने में उसकी मदद की. और जब मौका मिलता हम चोद भी लेते. कुछ महीने बाद उसके स्तन तो सुख गये पर हमारी चुदाई बंद नहीं हुई। राजेश और आरती अपने घर चले गये और मेरी भी फैमिली ने मुझे जॉइन कर लिया पर हम हमेशा  कॉंटेक्ट मे रहे. हर कुछ हफ्तों में, हम पुणे के बाहर कोई रिसोर्ट में एक कमरा बुक करके मिलते हैं और चोदने का आनंद उठाते हैं।
धन्यवाद








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FUN-MAZA-MASTI मौसी के साथ

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मौसी के साथ 

प्रेषक : गुमनाम
दोस्तो कैसे हैं आप हमारे दूर के रिश्ते मैं जिसे हम मौसी कहते हैं हमारे शहर मैं रहने आई. और वो शादी शुदा नहीं है. उसकी उम्र 36 है, वो बहुत ही सेक्सी हे और मेरे चाचा चाची के साथ उनके घर रहने लगी.  एक दिन मे किसी काम से उनके घर दोपहर को 2 बजे गया था।  मैं जब वहा पहूँचा तो उन्होने ही दरवाजा खोला, कुछ
हाफती सी लग रही थी उस वक़्त. उन्होने मुझे अंदर बेठाया और बोली की चाचा और चाची तो घर पर नही है दिल्ली गये है और कल तक वापस आयेगे.  मैने कहा ठीक है मैं बाद मैं आ जाऊँगा,  उन्होने कहा की जल्दी क्या है बाहर काफ़ी गर्मी है कुछ ठंडा पी जाओ।
फिर वो हम दोनो के लिये ठंडा बना कर ले आई  उस वक़्त वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी और उन्होने ड्रेस भी कुछ ऐसी पहन रखी थी की उनके 50% बोब्स बाहर निकलने को बेताब हो रहे थे.  मैने कुछ हिम्मत करके उनसे पूछा की आप दरवाजा खोलते वक़्त हाँफ क्यो रही थी, तो वो घबरा सी गयी। मुझे लगा की कुछ तो गड़बड़ है. उन्होने कहा की कोई ख़ास बात नही कुछ काम कर रही थी इसलिये.
तभी मैने उनसे कहा की मुझे बाथरूम जाना है, और इससे पहले वो कुछ कहती मे बाथरूम की तरफ रवाना हो गया,  जैसे ही बाथरूम मैं घुसा मेरा दिमाग़ खराब हो गया और लंड खड़ा हो गया। वहा लंबे लंबे बेगन पड़े थे, और पास ही मे उनकी पेंटी और ब्रा पड़ी थी,  मे समझ गया की उन्होने ग्राउन के नीचे कुछ नही पहन रखा है। मैं बाहर आया तो वो मुझे अजीब सी नज़रों से देख रही थी, मैने कहा की मोसी घबराओ मत मुझे आपके हाफने का कारण समझ मैं आ गया है और जाकर उनको अपने हाथों मे उठा लिया और लिप्स पर किस करने लगा. वो पहले से ही गर्म थी उस वक़्त और ज्यादा हो गयी, उसके बाद हम बेडरूम मैं चले गये. वहाँ वो बोली की कुछ देर रूको मे तैयार हो जाती हूँ.  मैने कहा केसे तैयार हो जाओगी तब वो बोली की मेरी शादी तो हुई नहीं.., ना ही सुहागरात कम से कम सुहागदिन तो अच्छी तरह मना लूँ,
मैने कहा ठीक है,, फिर वो ड्रेसिंग रूम मैं चली गयी, और जब 15 मिनिट बाद वो बाहर आई तो किसी अप्सरा के जैसे लग रही थी,  मैने बाहर निकलते ही उनको बाहों मे भर लिया और चूमने लगा, उन्होने कहा कोई जल्दी नही है हम आराम से अपना सुहाग दिन मनायेगे। करीब आधे घंटे तक हम एक दूसरे के कपड़े खोलते हुये किस्सिंग करते रहे, उसके बाद मैंने उनकी चूत को देखा जो अब तक फूल कर संतरे की फाँक की जैसे हो गयी थी,, और मेरा लंड अपनी लेंथ से ज्यादा बड़ा लग रहा था,  तभी मैं उनकी चूत को चाटने लगा और वो मस्त होती गयी। इसलिये  मैं अपने लंड और वो अपनी चूत की प्यास नही रोक सके. वो बोली मैं ही तुम्हारी वाइफ बन जाती हूँ और मुझे अपनी वाइफ समझो और मेरे साथ सब कुछ करो उन्होने मुझे किस करना शुरू कर दिया. मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी।
उनको मैने खीच के बेड पे लेटा दिया और उनकी चूत को किस करने लगा. 10 मिनिट तक मे उसको चूमता रहा। फिर उनके बोब्स को मुहँ मैं लेकर चूसने लगा,  मे उसे चूसता ही रहा थोड़ी देर बाद मैने जब उनकी चूत की तरफ देखा तो वो गीली हो चुकी थी. और मोसी सिसकारी मार कर कह रही थी की तुम मुझे पहले क्यो नही मिले, पहले क्यो नही आये, मैं इस दिन के लिये कब से तरस रही थी,  आज मुझे पूरी औरत बना दो बस… वो सिसकारी मार रही थी।
फिर मैने उनसे कहा की अब मेरा लंड अपने मुहँ मे लो तो बोली नही मैं ऐसे नही कर सकती तो मैने कहा अगर नही कर सकती तो मैं सारा खेल यही खत्म करता हूँ,  तो वो बोली नही फिर उन्होने मेरा लंड अपने हाथ मैं लिया और सहलाने लगी और मुहँ मैं ले लिया,  और चूसने लगी उस मैं भी उनको मज़ा आने लगा और वो करीब 15 मिनिट तक मेरे लंड को चूसती रही, और मेरी हालत खराब होती गयी, जब उन्होने मेरा लंड छोड़ा तो उसमे से पानी बस निकलने वाला था.  वो बोली मज़ा आ गया मैं तो यू ही डर रही थी इस सब मैं हमको काफी समय बीत चुका था और हम दोनो ही बहुत ज्यादा गर्म हो चुके थे की हम दोनो को ए.सी मैं भी पसीने आ रहे थे।
वो मेरे लंड को हाथ मे लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी. थोड़ी देर बाद उन्होने अपनी कमर को उपर उठा लिया और मेरे तने हुये लंड को अपनी जाँघो के बीच लेकर रगड़ने लगी. वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गयी ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड सके। उसकी चूची मेरे मुँह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हे कस कस कर दबा रहा था। अचानक उन्होने अपनी एक चूची मेरे मुँह मे डालते हुये कहा, “चूसो इनको मुँह मे लेकर…” मैने उनकी लेफ्ट चूची मुँह मे भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। थोडी देर के लिए मैने उनकी चूची को मुँह से निकाला कर मोसी को चूमने लगा. उन्होने कहा की अगर तुम मुझे पहले इशारा कर देते तो हम पता नहीं कितनी बार सुहाग दिन और रात मना चुके होते।
खेर अब तो मैं तुम्हारी हूँ ही जब मन करे एक दिन पहले बता देना, और फिर मैने देर ना करते हुये अपना लंड मोसी की चूत मैं डाल दिया जो की अभी भी बड़ी टाइट थी. मैं मेरा लंड धीरे धीरे मोसी की चूत मे अंदर-बाहर करने लगा। फिर उन्होंने स्पीड बडाने को कहा. मैने अपनी स्पीड बडा दी ओर तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। उनको अब पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी. . चूत मे मेरा लंड समाये हुये तेज़ी से उपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था की मे जन्नत पहुँच गया हूँ. जैसे जैसे वो झडने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बडती जा रही थी। उन्होने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड लिया और ज़ोर ज़ोर से हाफने लगी. कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से भरा पडा था. “हाआआं हााआ मीईरए राज्ज्जज्जा, माअर गाययएए रीईए, ललल्ल्ल्ल्ल चोद रे चूत. उईईईईईई मीईईरीईई माआअ, फट गई री, इस सब मे 20 मिनिट निकल चुके थे और अब मेरा निकलने को तैयार था,  तभी वो बोली मैं तो हो गई,  और मैं ज्यादा ज़ोर से धक्के देने लगा. करीब 5 मिनिट के बाद मेरा पानी निकला और उनकी पूरी चूत को भर दिया।  हम दोनो हाफने लगे और एक दूसरे से चिपक गये।  फिर हम दोनो बाथरूम मैं गये और एक साथ नहा लिये और कोक पिया, वो बोली आज तुमने मुझे पूरी औरत बना दिया बोलो मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ,  तब तक मुझे थोड़ा थोड़ा मज़ा वापस आने लगा था।
मैने कहा की मोसी पहले थोड़ा मार्केट घूम आते है फिर बात करेंगे,  उन्होने कहा ठीक है मैं तैयार हो जाती हूँ तुम भी कपड़े पहन लो फिर हम दोनो मार्केट निकल गये वहा उन्होने मेरे लिऐ शोपिंग की, और मुझे कहा की ये तेरा गिफ्ट है. वापस आते हुये उन्होने मुझसे कहा की तुम आज मेरे साथ ही रुक जाओ क्योकी दीदी जीजाजी तो कल आयेगे, और घर पर फोन कर दो… मैने कहा ठीक है मगर मैं अब बियर पीऊँगा…, और आप को भी मेरे साथ पीनी पड़ेगी, वो बोली की मैं नही पीती हूँ.., मैने कहा की आप तो लंड भी नहीं चूसती थी तो वो बोली ठीक है तुम्हारे लिये थोड़ी सी ले लूँगी..।
फिर मैने बियर शॉप से 4 बियर ले ली और घर पर फोन कर दिया की मे आज ऑफीस के काम की वजह से नहीं आ पाऊंगा. अब तक हम दोनो वापस चार्ज हो चुके थे, और एक दूसरे को किस कर रहे थे। फिर मैने बियर की बोतल खोल ली और अपने मुहँ मे भर ली और उनके मुहँ से मुहँ मिला कर अंदर डाल दी,  फिर बोतल उनके मुहँ पर लगा दी,  थोड़ी देर मे ही असर चालू हो गया और वो मुझे चूमने लगी, मुझे भी तब तक नशा हो चुका था तो मैने वही उनको लिटा कर अपना लंड उनकी चूत मैं डाल दिया और दोनो चूचीयों को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा।
साथ मे चूत मे लंड को अंदर और अंदर ले जाने के लिए ज़ोर ज़ोर से झटके लगा रहा था. हम लगबग आधे घंटे तक चूदाई करने के बाद जब मेरा पानी छुटने वाला था. मैने चूचीयों को धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया. मोसी भी थोड़ी देर मे मस्ती मे आ गयी. और उसके हर एक झटके के साथ अपने मुहँ से आवाज़ निकाल रही थी,  थोड़ी देर मे ही हम दोनो एक साथ फ्री हो गये,  मैने अपना पूरा वीर्य उनकी चूत मैं डाल दिया।
2 घंटे बाद हम दोनो फिर तैयार थे और आप तो जानते ही हैं की फिर क्या हुआ होगा, इसके बाद हमको जब भी मोका मिला अपना काम करते रहे। धन्यवाद






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