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Sunday, June 10, 2012

सेक्सी कहानियाँ मा बेटे के सेक्स की कहानी--2

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

मा बेटे के सेक्स की कहानी--2

गतान्क से आगे................
सावधान........... ये कहानी समाज के नियमो के खिलाफ है क्योंकि हमारा
समाज मा बेटे और भाई बहन के रिश्ते को सबसे पवित्र रिश्ता मानता है अतः
जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने से अरुचि होती हो वह ये कहानी
ना पढ़े क्योंकि ये कहानी एक मा बेटे के सेक्स की कहानी है
लेकिन उसकी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी. अगली ही रात को चांग ने सोने के समय जान
बुझ कर अपना अंडरवियर पूरी तरह खोल दिया और एक हाथ लंड पर रख सो गया.
सुबह बसंती उठी तो देखती है कि उसका बेटा लंड पर हाथ रख कर सोया हुआ है.
उसने चांग को कुछ नही कहा और वो कमरे को साफ़ सुथरा करने लगी. उसने चांग
के लिए चाय बनाई और चांग को जगाया. चांग उठा तो अपने आप को नंगा पाया ,.
चांग थोडा झिझकते हुए कहा - पता नहीं रात में अंडरवियर कैसे खुल गया था.
बसंती - तो क्या हुआ? यहाँ कौन दुसरा है? मै क्या तुझे नंगा नहीं देखी
हूँ? माँ के सामने इतनी शर्म कैसी?
चांग - वो तो मेरे बचपन में ना देखी हो. अब बात दूसरी है.
बसंती - पहले और अब में क्या फर्क है ? यही ना अब थोडा बड़ा हो गया है और
थोडा बाल हो गया है , और क्या? अब मेरा बेटा जवान हो गया है. लेकिन माँ
के सामने शर्माने की जरुरत नहीं.

चांग समझ गया कि माँ को उसके नंगे सोने पर कोई आपत्ति नहीं है. अगले दिन
रविवार है. शाम को चांग ने आधा किलो मांस लाया और माँ ने उसे बनाया .
दोनों ने ही बड़े ही प्रेम से मांस और भात खाया. बसंती अब पूरी तरह से
चांग की अधीन हो चुकी थी. बसंती अपने झीनी गाउन को पहन कर बिस्तर पर आ
गयी. चांग वहां तौलिया लपेटे लेटा हुआ था. चांग ने अपनी जेब से सिगरेट
निकाला और माँ से माचिस लाने को कहा. बसंती ने चुप- चाप माचिस ला कर दे
दिया. चांग ने माँ के सामने ही सिगरेट सुलगाई और पीने लगा. बसंती ने कुछ
नही कहा क्यों कि उसके विचार से सिगरेट पीने वाले लोग आमिर लोग होते हैं.

चांग - माँ, तू सिगरेट पीयेगी?
बसंती - नहीं रे .
चांग - अरे पी ले, मांस भात खाने के बाद सिगरेट पीने से खाना जल्दी पचता
है. कहते हुए अपनी सिगरेट माँ को दे दिया. और खुद दुसरा सिगरेट जला दिया.
बसंती ने सिगरेट से ज्यों ही कश लगाया वो खांसने लगी.

चांग ने कहा - आराम से माँ. धीरे धीर पी. पहले सिर्फ मुह में ले. धुंआ
अन्दर मत ले. बसंती ने वैसा ही किया. 3 -4 कश के बाद वो सिगरेट पीने जान
गयी. आज वो बहुत खुश थी. उसका गोरा बदन उसके काले झीने गाउन से साफ़ झलक
रहा था.

चांग - कैसा लग रहा है माँ?
बसंती - कुछ पता नहीं चल रहा है. लेकिन धुआं छोड़ने में अच्छा लगता है.

चांग हंसने लगा. कुछ दिन यूँ ही और गुजर गए. बसंती अपने बेटे से धीरे
धीरे खुलने लगी थी. चांग भी अब रोज़ सुबह नंगा ही पाया जाता था. चांग ने
अब शर्माना सचमुच छोड़ दिया था. चांग ने अपनी माँ को ब्यूटी पार्लर ले जा
कर मेक अप और हेयर डाई भी करवा दिया था. उसने अपनी का के मेक-अप के लिए
लिपस्टिक, पाउडर क्रीम आदि भी लेता आया था. बसंती दिन ब दिन और भी
खुबसूरत होती जा रही थी.

एक रात चांग ने सिगरेट पीते हुए अपनी माँ को सिगरेट दिया. बसंती भी
सिगरेट के काश ले रही थी. बसंती काला वाला झीने कपडे वाला पारदर्शी गाउन
पहन रखा था. उसका गोरा बदन उसके काले झीने गाउन से साफ़ झलक रहा था.
चांग - माँ एक बात कहूँ.
बसंती - हाँ बोल.
चांग - तू रोज़ गाउन पहन के क्यों सोती है? क्या तेरे पास ब्रा और पेंटी नहीं हैं?
बसंती - हाँ हैं, लेकिन तेरे सामने पहनने में शर्म आती है.
चांग - जब मै तेरे सामने नही शर्माता तो तू मेरे सामने क्यों शर्माती हो?
इसमें शर्माने की क्या बात है? कभी कभी वो पहन कर भी सोना चाहिए. ताकि
पुरे शरीर को हवा लग सके. दिल्ली में शरीर में हवा लगाना बहुत जरुरी है
नहीं तो यहाँ के वातावरण में इतना अधिक प्रदुषण है कि बदन पर खुजली हो
जायेंगे. देखती हो मै तो यूँ ही बिना कपडे के सो जाता हूँ.
बसंती - तो अभी पहन लूँ?
चांग - हाँ बिलकूल.

बसंती अन्दर गयी और अपना गाउन उतार कर एक पुरानी ब्रा पहन कर बाहर आ गयी.
पुरानी पेंटी तो उसने पहले ही पहन रखी थी. बसंती को ब्रा और पेंटी में
देख चांग का माथा खराब हो गया. वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि उसकी माँ
इतनी जवान है. उसका लंड खड़ा हो गया. उसके तौलिया में उसका लंड खड़ा हो रहा
था लेकिन उसने अपने लंड को छुपाने की जरुरत नहीं समझी.

वो बोला - हाँ , अब थोड़ी हवा लगेगी. तेरे पास नयी ब्रा और पेंटी नहीं है?
बसंती - नहीं. यही है जो गाँव के हाट में मिलता था.
चांग - अच्छा कोई बात नहीं, मै कल ला दूंगा.

बसंती ने लाईट ऑफ कर दिया, लेकिन चांग की आँखों में नींद कहाँ? थोड़ी देर
में जब उसे यकीं हो गया कि माँ सो गयी है तो उसने अपना तौलिया निकाला और
अपने खड़े लंड को मसलने लगा. माँ के चूत और चूची को याद कर कर के उसने
बिस्तर पर ही मुठ मार दिया. सारा माल उसके बदन पर एवं बिस्तर पर जा गिरा.
एक बार मुठ मारने से भी चांग का जी शांत नहीं हुआ. 10 मिनट के बाद उसने
फिर से मुठ मारा. इस बार मुठ मारने के बाद उसे गहरी नींद आ गयी. और वो
बेसुध हो कर सो गया. सुबह होने पर बसंती ने देखा कि चांग रोज़ की तरह
नंगा सोया है और आज उसके बदन एवं बिस्तर पर माल भी गिरा है. उसे ये
पहचानने में देर नहीं हुई कि ये चांग का वीर्य है. वो समझ गयी कि रात में
उसने मुठ मारा होगा. लेकिन वो जरा भी बुरा नहीं मानी. वो समझती है कि
लड़का जवान है, एवं समझदार है इसलिए वो जो करता है वो सही है. वो कपडे
पहन कर चांग के लिए चाय बनाने चली गयी. तभी चांग भी उठ गया. वो उठ कर
बैठा ही था कि उसकी माँ चाय लेकर आ गयी. चांग अभी तक नंगा ही था.

बसंती ने कहा - देख तो, तुने तुने क्या किया? जा कर बाथरूम में अपना बदन
साफ़ कर ले. मै बिछावन साफ़ कर लुंगी.

चांग बिना कपडे पहने ही बाथरूम गया. और अपने बदन पर से अपना वीर्य धो पोछ
कर वापस आया तब उसने तौलिया लपेटा. तब तक बसंती ने वीर्य लगे बिछवान को
हटा कर नए बिछावन को बिछा दिया.

उस दिन रविवार था. चांग बाज़ार गया और अपनी माँ के लिए बिलकुल छोटी सी
ब्रा और पेंटी खरीद कर लाया. ब्रा और पेंटी भी ऐसी कि सिर्फ नाम के कपडे
थे उसपर. पूरी तरह जालीदार ब्रा और पेंटी लाया. शाम में उसने अपनी माँ को
वो ब्रा और पेंटी दिए और रात में उसे पहनने को बोला. रात को खाना खाने के
बाद चांग ने सिगरेट सुलगाई और उधर उसकी माँ ने नयी ब्रा और पेंटी पहनी.
उसे पहनना और ना पहनना दोनों बराबर था. क्यों कि उसके चूत और चूची का
पूरा दर्शन हो रहा था. लेकिन बसंती ने सोचा जब उसके बेटे ने ये पहनने को
कहा है तो उसे तो पहनना ही पड़ेगा. उसे भी अब चांग से कोई शर्म नही रह गयी
थी. पेंटी तो इंतनी छोटी थी कि चूत के बाल बिलकुल बाहर थे. सिर्फ चूत एक
जालीदार कपडे से किसी तरह ढकी हुई थी. ब्रा का भी वही हाल था. सिर्फ निपल
को जालीदार कपडे ने कवर किया हुआ था लेकिन जालीदार कपड़ा से सब कुछ दिख
रहा था. उसे पहन कर वो चांग के सामने आयी. चांग को तो सिगरेट का धुंआ
निगलना मुश्किल हो रहा था. सिर्फ बोला - अच्छी है.

बसंती ने कहा - कुछ छोटी है. फिर उसने अपनी चूत के बाल की तरफ इशारा किया
और कहा - देख न बाल भी नहीं ढका रहें हैं.
चांग - ओह, तो क्या हो गया. यहाँ मेरे सिवा और कौन है? इसमें शर्म की
क्या बात है. खैर ! मेरे शेविंग बॉक्स से रेजर ले कर नीचे वाले बाल बना
लो.
बसंती - मुझे नही आते हैं शेविंग करना. मुझे डर लगता है.
चांग - इसमें डरने की क्या बात है?
बसंती - कहीं कट जाए तो?
चांग - देख माँ, इसमें कुछ भी नहीं है. अच्छा , ला मै ही बना देता हूँ.
बसंती - हाँ, ठीक है.
.
बसंती ने उसका शेविग बॉक्स में से रेजर निकाला और चांग को थमा दिया. चांग
ने उसके चूत के बाल पर हाथ घसा और उसे धीरे धीरे रेज़र से साफ़ किया.
उसका लंड तौलिया के अन्दर तम्बू के तरह खड़ा था. किसी तरह उसने अपने हाथ
से चूत के बाल साफ़ किया. फिर उसने उसने अपनी माँ को सिगरेट दिया और खुद
भी पीने लगा. वो लगातार अपनी माँ के चूची और चूत को ही देख रहा था और
अपने तौलिये के ऊपर लंड को सहला रहा था.
चांग ने कहा - अब ठीक है. चूत के बाल साफ़ करने के बाद तू एकदम सेक्सी लगती है रे.

बसंती ने हँसते हुए कहा - चल हट बदमाश, सोने दे मुझे. खुद भी सो जा. कल
तुझे कारखाना भी जाना है ना.
चांग ने अपना तौलिया खोला और खड़े लंड को सहलाते हुए कहा - देख ना माँ,
तुझे देख कर मेरा लंड भी खडा हो गया है.
बसंती ने कहा - वो तो तेरा रोज ही खड़ा होता है. रोज की तरह आज भी मुठ मार ले.
चांग ने हँसते हुए कहा - ठीक है. लेकिन आज तेरे सामने मुठ मारने का मन कर रहा है.
बसंती ने कहा - ठीक है. आजा बिस्तर पर लेट जा और मेरे सामने मुठ मार ले.
मै भी तो जरा देखूं कि मेरा जवान बेटा कैसे मुठ मारता है?

बसंती और चांग बिस्तर पर लेट गए. चांग ने बिस्तर पर अपनी माँ के बगल में
लेटे लेटे ही मुठ मारना शुरू कर दिया. बसंती अपने बेटे को मुठ मारते हुए
देख रही थी. पांच मिनट मुठ मारने के बाद चांग के लंड ने माल निकालने का
सिग्नल दे दिया. वो जोर से आवाज़ करने लगा.उसने झट से अपनी माँ को एक हाथ
से लपेटा और अपने लंड को उसके पेट पर दाब कर सारा माल बसंती के पेट पर
निकाल दिया. ये सब इतना जल्दी में हुआ कि बसंती को संभलने का मौक़ा भी नही
मिला. जब तक वो संभलती और समझती तन तक चांग का माल उसके पेट पर निकलना
शुरू हो गया था. बसंती भी अपने बेटे को मना नही करना चाहती थी. उसने आराम
से अपने शरीर पर अपने बेटे को अपना माल निकालने दिया. थोड़ी देर में चांग
का माल की खुशबु रूम में फ़ैल गयी. बसंती का पेंटी भी चांग के माल से गीला
हो गया. थोड़ी देर में चांग शांत हो गया. और अपनी माँ के बदन पर से हट
गया. लेकिन थोड़ी ही देर में उसने अपनी माँ के शरीर को अच्छी तरह दबा कर
देख चुका था. बसंती भी गर्म हो चुकी थी. उसने भी अपने पुरे कपडे उतारे और
बिस्तर पर ही मुठ मारने लगी. उसने भी अपना माल निकाल कर शांत होने पर
नींद मारी. सुबह होने पर बसंती ने आराम से बिछावन को हटाया और नया बिछावन
बिछा दिया.

अगली रात को लाईट ऑफ कर दोनों बिस्तर पर लेट गए. बसंती ने चांग के
पसंदीदा ब्रा और पेंटी पहन रखी थी. आज चांग अपनी माँ का इम्तहान लेना
चाहता था. उसने अपनी टांग को पीछे से अपनी माँ की जांघ पर रखा. उसकी माँ
उसकी तरफ पीठ कर के लेती थी. बसंती ने अपने नंगी जांघ पर चांग के टांग का
कोई प्रतिरोध नहीं किया. चांग की हिम्मत और बढी. वो अपनी टांगो से अपनी
माँ के चिकने जाँघों को घसने लगा. उसका लंड खडा हो रहा था. उसने एक हाथ
को माँ के पेट पर रखा. बसंती ने कुछ नही कहा. चांग धीरे धीरे बसंती में
पीछे से सट गया. उसने धीरे धीरे अपना हाथ अपनी माँ के पेंटी में डाला और
उसके गांड को घसने लगा . धीरे धीरे उसने अपनी माँ के पेंटी को नीचे की
तरफ सरकाने लगा.

पहले तो बसंती आसानी से अपनी पेंटी खोलना नही चाहती थी मगर चांग ने कहा -
माँ ये पेंटी खोल ना. आज तू भी पूरी तरह से पूरी तरह से नंगी सोएगी.
बसंती भी यही चाहती थी. उसने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर किया जिस से कि चांग
ने उसके पेंटी को उसके कमर से नीचे सरका दिया और पूरी तरह से खोल दिया.
अब बसंती सिर्फ ब्रा पहने हुए थी. चांग ने उसके ब्रा के हुक को पीछे से
खोल दिया और बसंती ने ब्रा को अपने शरीर से अलग कर दिया. अब वो दोनों
बिलकूल ही नंगे थे. चांग ने अपनी माँ को पीछे से पकड़ कर अपने लंड को अपनी
माँ के गांड में सटाने लगा. उसका तना हुआ लंड बसंती की गांड में चुभने
लगा. बसंती को मज़ा आ रहा था. उसकी भी साँसे गरम होने लगी थी. जब बसंती ने
कोई प्रतिरोध नही किया तो चांग ने अपनी माँ के बदन पर हाथ फेरना चालु कर
दिया. उसने अपना एक हाथ बसंती की चूची पर रख उसे दबाने लगा.
क्रमशः.....................

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