Thursday, May 9, 2013

हिंदी सेक्सी कहानियाँ- माँ-बेटी और रागिनी-3

हिंदी सेक्सी कहानियाँ-
 माँ-बेटी और रागिनी-3


रागिनी तुरन्त मेरे से लिपट गई। आप ऐसा क्यों कहते हैं अंकल , मुझे याद है कि आप ने  मुझे पहली बार कितना ईज्जत दी  थी और मैंने प्रौमिस किया था कि आपके लिए सब करुँगी।"


फ़िर वो रीता को बोली, "आ जाओ कमरे में चलते हैं।"


कमरे में पहुँचते हीं मैंने रागिनी को बाहों में समेट कर चुमना शुरु किया और वो भी मुझे चुम रही थी। मैंने रागिनी को याद कराया कि उन सब को गए काफ़ी समय बीत गया है सो जल्दी-जल्दी कर लेते हैं, तो वो हटी और अपने कपडे  उतारने लगी। मैंने अपने टॉवेल  खोले। मैंने रीता को भी पूरी तरह नंगी होने को कहा.


वो बोली - क्यों?

मैंने कहा - चुदाई देखते समय दुसरे को भी नंगा रहना चाहिए.


बेचारी रीता ने अपने बदन पर के एकलौते वस्त्र पेंटी को उतार दिया और नंगी खडी हो गयी.


रागिने ने रीता को दिखा कर मेरा लन्ड अपने हाथ में लिया और चुसने लगी। रीता सब देख रही थी। मैंने बताया, ऐसे जब लन्ड को चूसा जाता है तो वो कड़ा हो जाता है, जिससे की लड़की की चूत में उसको घुसाने में आसानी होती है। इसके बाद मैंने रागिनी को लिटाकर उसकी क्लीट को सहलाया और फ़िर मसलने लगा। रागिनी पर मस्ती छाने लगी। मैंने रीता को बताया कि ऐसे करने से लड़की को मजा आता है, तुम अपने से भी यह कर सकती हो, जब मन करे। फ़िर मैंने रागिनी की चूत में अपनी ऊँगली घुसा कर उअको बताया कि लड़की कैसे सही तरीके से हस्तमैथुन कर सकती है। मैंने देखा की रीता की चूत से पानी निकल रहा है. यानि इसे मज़ा आ रहा है.   इसके बाद मैंने रागिनी की चूत में अपना लन्ड पेल दिया।


रागिनी के मुँह से  एक आह निकली तो मैंने कहा, "इसी  "आह आह" को न तुम बोल रही थी कि दीदी रो क्यों रही थी...देख लो जब कोई लड़की चुदती है तो उसके मुँह से आह आह और भी कुछ कुछ आवाज निकलने लगती है, जब उनको सेक्स का मजा मिलता है। तुम्हारे मुँह से भी अपने आप निकलेगा जब तुम्हें चोदुँगा।"

यह कहने के बाद मैंने ने जोरदार धक्कम्पेल शुरु कर दिया। हस-हच फ़च-फ़च की आवाज होने लगी थी और मैं अपने लन्ड को एक पिस्टन की तरह रागिनी की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। 


रीता पास में खड़ी हो कर सब देखी, और फ़िर मैं झड़ गया...रागिनी की चूत के भीतर हीं.... रागिनी भी अब शान्त हो गई थी।


मैं उठा और रीता से पूछा, "अब सीख समझ गई सब?"


उसके "जी" कहने पर मैंने कहा, "फ़िर चलो अब मुझे गुरु दक्षिणा दो.."।


रीता मुस्कुराते हुई पूछे, "कैसे...?"


मैंने मुस्कुरा कर कहा, "मेरे लन्ड को चाट कर साफ़ कर दो, बस....."।


और घोर आश्चर्य.....रीता खुशी-खुशी झुकी और मेरे लन्ड को चाटने लगी। रागिनी सब देख रही थी पर चुप थी। मैंने रीता के मुँह में अपना लन्ड घुसा दिया और फ़िर उसका सर पीचे से पकड़ कर उसकी मुँह में लन्ड अंदर-बाहर करने लगा। एक तरह  से अब मैं उस लड़की की मुँह मार रहा था और रीता भी आराम से अपना मुँह मरा रही थी। तभी बाहर से दरवाजा खटखटाने की आवाज आई। सब लोग आ गए थे।


रीता तुरन्त अपनी पेंटी ले कर  किचेन में भाग गई फ़िर वहाँ से आवाज दी, "खोल रही हूँ...रूको जरा।"


मैं दो कदम में नल पर पहुँच गया एक तौलिया को लपेट कर। रागिनी कपड़े पहनने लगी। दरवाजा खुला तो सब सामान्य था। मैं नास्ते के बाद घुमने निकल गया। मैंने रागिनी और रीता को साथ ले लिया क्योंकि रूबी और रीना पहले हीं दो घन्टे के करीब चल कर थक गए थे। 


उस दिन मैंने तय किया कि अब एक बार रीना को सब के सामने चोदा जाए, और फ़िर इस जुगाड़ में मैंने रागिनी और रीता को भी अपने साथ मिला लिया। रागिनी ने मुझे इसमें सहयोग का वचन दिया।

घर लौटने के बाद मैंने दोपहर के खाने के समय कहा, "बिन्दा, अभी खाने के बाद दो घन्टे आराम करके रीना को फ़िर से चोदुँगा, अभी जाने में दो दिन है तो इस में 4-5 बार रीना को चोद कर उसको फ़िट कर देना है ताकि शहर जाकर समय न बेकार हो, और वो जल्दी से जल्दी कमाई कर सके।



रागिनी भी बोली, "हाँ अंकल, उसकी गाँड़ भी  तो मारनी है आपको, क्या पता पहला कस्टमर हीं गाँडू मिल गया तो...."।


बिन्दा चुप थी, और थोड़ा परेशान भी कि वहाँ उसकी दोनों छोटियाँ भी थीं। रीता अब बोली, "दीदी, अब तो तुम्हारे मजे रहेंगे, खुब पैसा मिलेगा तुम्हें।"


मैं बोला, "हाँ एक रात का कम से कम 5000 तो जरुर मिलेगा रीना का रेट। सप्ताह में 5 दिन भी गई तो 25000 हर सप्ताह, या क्या पता कुछ ज्यादा भी।" 

अब पहली बार रूबी कुछ प्रभावित हो कर बोली, "वाह .....5 दिन काम का महिने का 1 लाख....यह तो बेजोड़ काम है...हैं न माँ..."। 


मैंने कहा, "हाँ पर उसके लिए मर्द को खुश करने आना चाहिए, तभी इसके बाद टिप भी मिलेगा। यही सब तो रीना को अभी सीखना है शहर जाने से पहले।" 
बिन्दा चुप चाप वहाँ से ऊठ गई, मैं उसके जाते जाते उसको सुना दिया, "आज जब दोपहर में तुम्हारी दीदी चुदेगी, तब तुम भी रहना साथ में सीखना....साल-दो साल बाद तो तुम्को भी जाना हीं है, पैसा कमाने।"


दोपहर करीब 3 बजे मैंने रीना को अपने कमरे में पुकारा। रागिनी और रीता मेरे साथ थीं। दो बार आवाज देने के बाद रीना आ गई, तो मैंने रूबी को पुकारा, "रूबी आ जाओ देख लो सब, अभी शुरु नहीं हुआ है जल्दी आओ..." और कहते हुए मैंने रीना के कपड़े उतारने शुरु कर दिए। जब रूबी रूम में घुसी उस समय मैं रीना की पैन्टी उसकी जाँघों से नीचे सरार रहा था। रूबी पहली बार ऐसे यह सब देख रही थी, सो वो भौंचक रह गई। रीना ने नजर नीचे कर लीं, तब रागिनी ने रूबी को अपने पास बिठा लिया और मुझसे बोली, अंकल आज इसकी एक बार गाँड़ मार दीजिए न पहले, अगर दर्द होगा भी तो बाद में जब उसको चोदिएगा तो उस मजे में सब भूल जाएगी।" 


मुझे उसका यह आईडिया पसन्द आया। उसको इस तरह के दर्द और मजे का पूरा अनुभव था। सो मैंने जब रीना को झुकाया तो वो बिदक गई, कि वो अपने पिछवाड़े में नहीं घुसवाएगी। मैं और रागिनी उसको बहुत समझाए पर वो नहीं मानी तो रागिनी बोली, "ठीक है तुम देखो कि मैं कैसे गाँड़ मरवाती हूँ अंकल से, इसके बाद तुम भी मराना। अगर शहर में रंडी बनना है तो यह सब तो रोज का काम होगा तुम्हारा।" कहते हुए वो फ़टाक से नंगी हो कर झुक  गई। मैंने उसकी गाँड़ की छेद पर थुका और फ़िर अपनी ऊँगली से उसकी गाँड़ को खोलने लगा। थुक और मेरे प्रयास ने उसकी गाँड़ को जल्दी हीं ढ़ीला कर दिया। तब एक बार भरपूर थुक को अपने लन्ड पर लगा कर मैंने अपने टन्टनाए हुए लन्ड को उसकी गाँड़ में दबा दिया। रागिनी तो एक्स्पर्ट थी, सो जल्द हीं अपने मस्ल्स को ढीला करते हुए मेरा पूरा लन्ड 8" अपने गाँड़ के भीतर घुसवा ली। रूबी और रागिनी का मुँह यह सब देख कर आश्चर्य से खुला हुआ था। 8-10 धक्के हीं दिए थे मैंने कि रागिनी एक झटके से अपने गाँड़ को आजाद कर ली और फ़िर रीना को पकड़ कर कहा कि अब आओ और गाँड़ मरवाओ।

रीना भी सकुचाते हुए झुक  गई, और एक बार फ़िर मैं थुक के साथ उसकी गाँड़ पे ऊँगली घुमाने लगा। रागिनी भी कभी उसकी चूत सहालाती तो कभी अपने चूत से निकल रहे गिलेपने से तो कभी अपने थुक से उसकी गाँड़ को गीला करने में लग गयी थी। जब मुझे लगा कि अब रीना की गाँड़ को मेरे उँगली की आदत पर गई है तो मैं ने उसकी गाँड़ में अपना एक फ़िर दुसरा उँगली घुसा दिया। दर्द तो हुआ था पर रीना बर्दास्त कर ली। इसके बाद उसके रजामन्दी से मैं उपर उठा और अपले लन्ड को उसकी गाँड़ की गुलाबी छेद पर टिका कर दबाना शुरु किया। रागिनी लगातार उसकी चूत में ऊँगली कर रही थी ताकि मजे के चक्कर में उसको दर्द का पता न चले, और मैं उसकी कमर को अपने अनुभवी हाथों में जकड़ कर उसकी कुँवारी गाँड़ का उद्घाटन करने में लगा हुआ था। जल्द हीं मैं उसकी गाँड़ मार रहा था। अब मैंने रूबी और रीता को देखा, दोनों अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से अपनी दीदी की गाँड़ मराई देख रही थी। करीब 7-8 मिनट के बाद मैं उसकी गाँड़ में हीं झड़ गया और जब लन्ड बाहर निकला तो उसकी गाँड़ से सफ़ेद माल बह चला उसकी चूत्त की तरफ़....तभी बिना समय गवाँए, मैंने अपना लन्ड उसकी चूत में ठाँस दिया। लन्ड अपने साथ मेरा सफ़ेद माल भी भीतर ले कर चला गया।


रूबी अब बोली, "अरे ऐसे तो दीदी को बच्चा हो जाएगा..." 

मैने जोश में भरकर कहा, "होने दो...होने दो....होने दो....और हर होने दो के साथ हुम्म्म्म्म करते हुए अपना लन्ड जोर से भीतर पेल देता। बेचारी की अब चुदाई शुरु थी, जबकि वो चक्कर में थी कि गाँड़ मरवा कर आराम करेगी।


वो थक कर कराह उठी....पर लड़की को चोदते हुए अगर दया दिखाया गया तो वो कभी ऐसे न चुदेगी, यह बात मुझे पता थी। सो मैं अब उसके बदन को मसल कर ऐसे चोद रहा था जैसे मैं उसके बदन से अपना सारा पैसा वसूल कर रहा होऊँ। रीना कराह रही थी....और मैं उसकी कराह की आवाज के साथ ताल मिला कर उसकी चूत पेल रहा था। मेरा लन्ड दूसरी बार झड़ गया, उसकी चूत के भीतर हीं। इसके बाद मैं भी थक कर निढ़ाल हो एक तरह लेट गया। रागिनी झुक कर मेरे लन्ड को चूस चाट कर साफ़ करने लगी।


मैने उस रात रीना को अपने पास ही सुलाया और रात मे एक बार फ़िर चोदा, पर इस बार प्यार से, और इस बार उसको मजा भी खुब आया। वो इस बार पहली बार मुझे लगा कि सहयोग की और ठीक से बेझिझक चुदी। सुबह जब हुम जगे तो सब पहले से जाग गए थे। रीना कमरे से बाहर जाने लगी तो मैंने उसको पास खींच लिया और चुमने लगा।


वो बोली, "ओह अब सुबह में ऐसे नहीं कैसा गंदा महक रहा है बदन...पसीना से।"


मैंने कहा, "अब मर्द के बदन की गन्ध की आदत डालो, बाजार में सब नहा धो कर नहीं आएँगे चोदने तुम्हें...और तुम भी तो महक रही हो, पर मुझे तो बुरा नहीं लग रहा....मैं तो अभी तुम्हारी चूत भी चाटूँगा और गाँड भी।"


फ़िर उसके देखते देखते मैं उसकी चूत चुसने चाटने लगा और वो भी गर्म होने लगी। जल्द हीं उसकी आह आह कमरे में गुंजने लगी, और शायद आवाज बाहर भी गयी, क्योंकि तभी बिन्दा बोली, "उठ गई तो बेटी तो जल्दी से नहा धो लो और तैयार हो जाओ आज बाजार जा कर सब जरुरत का सामान ले आओ, कल तुमको रागिनी के साथ शहर जाना है, याद है ना।"


रीना बोली-"हाँ माँ, पर अब ये मुझे छोड़े तब ना...इतना गन्दा हैं कि मेरा बदन चाट रहे हैं।"


मैंने जोर से कहा, "बदन नहीं बिन्दा, आपकी बेटी की चूत चाट रहा हूँ....आप चाय बनवा कर यहीं दे दीजिए....तब तक मैं एक बार इसको चोद लूँ जल्दी से।" यह कह कर मैंने रीना को सीधा लिटा कर उसके घुटने मोड़ कर जाँघों को खोल दिया। और अपना लन्ड भीतर गाड़ कर उसकी चुदाई शुरु कर दी। आह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह का बाजार गर्म था। और  जैसे हीं मैं उसकी चूत में हीं झड़ा...घोर आश्चर्य......बिन्दा खुद चाय ले कर आ गई।


बिन्दा यह देख कर मुस्कुराई...तो मैंने अपना लन्ड पूरा बाहर खींच लिया...पक्क की आवाज हुई और रीना की चूत से मेरा सफ़ेदा बह निकला। 

बिन्दा यह देख कर बोली, "अरे इस तरह इसके भीतर निकालिएगा तब तो यह बर्बाद हो जाएगी" .  वो जल्दी-जल्दी अपने साड़ी के आँचल से उसकी चूत साफ़ करने लगी। रीना भी उठ बैठी तो बिन्दा उसकी चूत की फ़ाँक को खोल कर पोछी। मैं बिना कुछ बोले बाहर निकल गया हाथ में चाय ले कर, और थोड़ी देर में रीना और बिन्दा भी आ गई। फ़िर हम लोग सब जल्दी-जल्दे तैयार हुए। आज बिन्दा ने अपने हाथ से सारा खाना बनाना तय किया और रीना और रागिनी को मेरे साथ बाजार जा कर सामान सब खरीद देने को कहा। हमें अगले दिन वहाँ से निकलना था और मैंने तय किया कि आज की रात को रीना की चुदाई जरा पहले से शुरु कर दुँगा, क्योंकि आज मैं उसको वियाग्रा खा कर सबके सामने चोदने वाला था। अब जबकि बिन्दा सुबह अपनी बेटी की चूत से मेरे सफ़ेदा को साफ़ कर हीं ली थी तो मैं पक्का था कि आज के शो में वो एक दर्शक जरुर बनेगी। मैंने बाजार में हीं रीना को इसका ईशारा कर दिया था कि आज की रात मैं उसको रंडियों को जैसे चोदा जाता है वैसे चोदुँगा।


मैंने उससे कहा, "रीना बेटी, आज की रात तुम्हारी स्पेशल है। आज मैं तुम्हें सब के सामने एक रंडी को जैसे हम मर्द चोदते हैं वैसे चोदुँगा। अभी तक मैं तुम्हें अपनी बेटी की तरह से चोद रहा था और तुम्हें भी मजा मिले इसका ख्याल रख रहा था, पर आज की रात मैं तुम्हारे मजे की बात भूल कर केवल एक मर्द बन कर एक जवान लड़की के बदन को भोगुँगा तो तुम इस बात के लिए तैयार रहना। शहर में लोगों को तुम्हारे खुशी का ख्याल नहीं रहेगा। उन्हें तो सिर्फ़ तुम्हारे बदन से अपना पैसा वसूल करना रहेगा। करीब 2 बजे हम लोग घर आए और फ़िर खाना खा कर आराम करने लगे। 


रीना अपनी माँ और बहनों के पास थी और रागिनी मेरे पास। हम दोनों अब आगे की बात पर विचार कर रहे थे। मैंने कहा भी कि अब अगले एक सप्ताह तक मुझे काम से छुट्टी नहीं मिलेगी सो आज रात मैं अपना कोटा पूरा कर लुँगा तब रागिनी बोली हाँ और नहीं तो क्या...अब वहाँ जाने के बाद सूरी तो रीना की लगातार बूकिंग कर देगा, जब उसको पता चलेगा कि यह शहर सिर्फ़ कौल-गर्ल बनने आई है। एक तरह से ठीक हीं है आज रात में रीना को जरा जम कर चोद दीजिए कि उसको सब पता चल जाए कि वहाँ हम लोग क्या-क्या झेलते हैं अपने बदन पर।" 


मैंने आज शाम की चाय के समय हीं सब को कह दिया कि आज रात में मैं रीना को बिल्कुल जैसे एक रंडी को कस्टमर चोदता है वैसे से चोदुँगा और आप सब वहाँ देखिएगा और रागिनी मेरे रूम में रीना को वैसे हीं लाएगी जैसे रीना को दलाल लोग मर्दों की रुम तक छोड़ कर आएँगे। सबसे पहले सबसे छोटी बहन रीता की मुँह से निकला "वाह ... मजा आएगा आज तो",


फ़िर मैंने बिन्दा को कहा, "अपनी बेटी की पहली दुकानदारी पर वहाँ रहोगी तो उसका हौसला रहेगा...अगर साथ में घरवालें हों तो।" उसके चेहरे से लगा कि अब वो भी अपना सिद्धान्त वगैरह भूल कर, "जो हो रहा है अच्छा हो रहा है", समझ कर सब स्वीकार करने लगी है। उन सब के आश्वस्त चेहरों के देख मैं मन हीं मन खुश हुआ...आजकल मेरी चाँदी है, अब एक बार फ़िर मैं एक माँ के सामने उसकी बेटी को चोदने वाला था...और ऐसी चुदाई के बारे में सोच-सोच कर हीं लन्ड पलटी खाने लगा था। मैंने करीब 8 बजे खाना खाया हल्का सा और रीना को भी हल्का खाना खाने को कहा। फ़िर करीब 9 बजे मैंने वियाग्रा की एक गोली खा ली, रागिनी मुझे वियाग्रा खाते देख मुस्कुराई...वो समझ गई थी कि आज कम से कम 7-8 घन्टे का शो मैं जरुर दिखाने वाला हूँ उसकी मौसी और मौसेरी बहनों को। 

करीब पौने दस बजे मैंने रीना को आवाज लगाई जो अपनी बहनों के साथ अपना सामान पैक कर रही थी। जल्द हीं जब सब समेट कर वो आई तो मैंने उसी को जाकर सब को बुला लाने को कहा और फ़िर खुद सब के लिए नीचे जमीन पर हीं दरी बिछाने लगा। कमरे में एक तरफ़ मैंने बेड को बिछा दिया था। करीब दस मिनट में सब आ गए, सबसे बिस्तर से लगे दरी पर बैठ गए तब रागिनी अपने साथ रीना को लाई।


रागिनी एकदम सूरी के अंदाज में बोली, "लीजिए सर जी, एक दम नया माल है। आपके लिए हीं इसको बुलाया है सर जी, पहाड़न की बेटी है...खुब मजा देगी। रात भर चोदिएगा तब भी सुबह कड़क हीं मिलेगी। अभी तो इसकी चूचियाँ भी नहीं खिली हैं देखिए कैसी कसक रही है"....कह कर उसने रीना की बायीं चूची को जोर से दबा दिया। वहाँ बैठी सभी लोग रागिनी की ऐसी  भाषा सुन कर सन्न थे और उसकी अदाकारी का फ़ैन हो रहा था। फ़िर उसने रीना को मेरी तरफ़ ठेल दिया जिसे मैंने बिना देर किए अपनी तरफ़ खींचा। वियाग्रा खाए करीब एक घन्टा हो गया था सो मेरा लन्ड लगभग टन्टनाया हुआ था। बिना देर किए मैंने रीना के बदन से कपड़े उतारने शुरु कर दिए। पहले दुपट्टा, फ़िर कुर्ती इसके बाद सलवार....। रीना को ऐसी उम्मीद न थी सो मेरी फ़ुर्ती पर वो हैरान थी, और बिना देर किए मैंने उसकी पैन्टी नीचे सरार दी और जब तक वो समझे मैंने उस पैन्टी को उसके ताँगों से निकाल दिया और एक धक्के के साथ उसे नीवे बिछे बिछावन पर लिटा दिया। उसकी दोनों टाँगों को घुटने के पास से पकड़कर खोल दिया और फ़िर उसकी चूत में अपना टनटनाया हुआ लन्ड घुसा कर चोदने लगा। बेचारी सही से गीली भी नहीं हुई थी और उसको मेरे लन्ड पर लगे मेरे थुक के सहारे हीं अपनी चूत मरानी पड़ी सो वो कराह उठी। पर लौन्डिया नया-नया जवान हुई थी सो 5-6 धक्के के बाद हीं गीली होने लगी और मेरा लन्ड अब खुश हो कर मस्ती करने लगा। रीना की माँ और उसकी दोनों बहने वहीं बैठ कर सब देख रही थी। करीब 10 मिनट तक लगातार कभी धीरे तो कभी जोर से मैं उसको चोदा और फ़िर उसकी चूत में झड़ गया। किसी को इसका अंदाजा न था, पर जब मैंने अपना लन्ड बाहर खींचा तो रीना की चूत में से मेरा सफ़ेद माल बह चला।
 

मैंने बिना देरी किए रीना के मुँह में अपना लन्ड घुसा दिया जो ईशारा था उसके लिए, जिसको समझ कर वो मेरे लन्ड को चुस-चाट कर साफ़ की तो मैंने उसको पलट दिया और फ़िर उसकी गाँड़ मारने लगा। उस दिन लगातार चार बार मैं झड़ा, दो बार उसकी चूत में और एक-एक बार उसकी गाँड़ और मुँह में। इसके बाद मैंने पानी माँगा। बेचारी रीना थक कर  चूर थी और वो मुँह से न बोल कर ईशारे से अपने लिए भी पानी माँगी। 

बिन्दा हमारे लिए पानी लेने चली गई तो मैंने ईशारा किया और रीता मेरे पास आ कर मेरे लन्ड को चुसने लगी। बिन्दा जब पानी ले कर आई तो यह देख सन्न रह गई कि उसकी सबसे लाडली और छोटी बेटी अपने से 31-32 साल बड़े एक मर्द का लन्ड चूस रही है, वो भी उस मर्द का जो उसकी माँ के साथ अभी-अभी उसके सामने उसकी बड़ी बहन को चोदा था। वो गुस्से से भर कर रीता को मेरे ऊपर से हटाई तो रागिनी मेरे सामने बैठ कर लन्ड चूसने लगी और जैसे हीं बिन्दा ने एक थप्पड़ रीता को लगाया रुँआसी हो कर बोल पड़ी, "ये सब देख कर मन हो गया अजीब तो मैं क्या करूँ, तुम तो अंकल से चुदा ली और दीदी को भी चुदा दी और मुझे जो मन में हो रहा है उसका क्या? एक बार अंकल का छू ली तो कौन सा पाप कर दी, कुछ समय के बाद मुझे भी तो ऐसे हीं चुदाना होगा तो आज क्यों नहीं?" 

अब रीना तो मैं अगले दौर के लिए खींच लिया था और रागिनी उन माँ-बेटी में सुलह कराने के ख्याल से बोली, "रीता अभी तुम छोटी हो, अभी कुछ और बड़ी हो जाओ फ़िर तो यह सब जिन्दगी भी करना हींहै} अभी से उतावली होगी तो तुम्हारा समय से पहले हीं ढ़ीला हो जाएगा फ़िर किसी को मजा नहीं आएगा न तुमको और न हीं जो तुमको चोदेगा उसको। अभी तो ठीक से झाँट भी नहीं निकला है तुमको।"

मैंने कहा - देखिये बिंदा जी. आज मैंने वियग्रा खाया है. मेरा लंड अभी शांत नही होगा. आपकी रीना तो अभी ही पस्त हो गयी है. अब मै किसे चोदुं?


बिंदा ने कहा - आप मुझे चोद लीजिये.


मैंने कहा - आईये , कपडे उतार कर आ कर नीचे लेट जाईये.



--
..............raj.....................

No comments:

Raj-Sharma-Stories.com

Raj-Sharma-Stories.com

erotic_art_and_fentency Headline Animator