Thursday, May 9, 2013

चम्पा चाची और महुआ-3


चम्पा चाची और महुआ-3

अब चाची को भी जोश आ गया उन्होंने नहले पर दहला मारा- "ठीक है सहेली जी जब मिलोगी तो विस्तार से बता दूँगी पर फ़ोन पर तो बक्श दो। हाँ खूब याद दिलाया इस हादसे के बाद अशोक ने बताया कि तू अभी तक उसका आधा भी…… ।"
महुआ-"मैं क्या करूँ चाची आपने मुझे बचपन से देखा है जानती ही हैं, कहाँ मैं नन्हीं सी जान और कहाँ अशोक। अभी आपने भी मानाकि वो बहुत……।"
चाची-"इसका इलाज हो सकता है बेटी। मेरे गांव के एक चाचा वैद्य हैं। चन्दू चाचा, वो इसका इलाज करते हैं, दरअसल मेरा हाल भी तेरे जैसा ही था मैंने भी उन्हीं से इलाज कराया, ये उनके इलाज का ही प्रताप है कि मैं कल का हादसा निबटा पाई।"
ये कहते हुए चाची ने शैतानी से मुस्कुरा कर अशोक की ओर देखते हुए उसका लण्ड मरोड़ दिया।
फ़िर आगे कहा –"मैंने अशोक से भी बात कर ली है, वो तैयार है। ले तू खुद ही बात कर ले।"
अशोक-" महुआ! मैं बहुत शर्मिन्दा हूँ पर रात में इसके अलावा और कोई चारा नजर नही आया।"
महुआ–"छोड़ यार! वैसे अब तबियत कैसी है। चाची ने मुझे वख्त की नजाकत बतायी थी मैं समझती हूँ और हाँ! ये बताओ ये इलाज का क्या किस्सा है? "
 –"ये इलाज भी लगभग उतना ही असामाजिक और शर्मिन्दगी भरा है जितना कि कल का हादसा। पर मेरे तेरे और चाची के बीच शर्माने को अब कुछ बचा तो है नहीं।"
अशोक ने चाची की चूचियों पर अपना सीना रगड़ते हुए जवाब दिया।
महुआ–"अगर तुम्हें मंजूर है तो मुझे कोई एतराज नहीं। वैसे भी ठीक होना तो मैं भी चाहती हूँ शर्मा के पूरी जिन्दगी तकलीफ़ झेलने से तो अच्छा है कि एक बार शर्मिन्दगी उठा के बाकी की जिन्दगी आराम से बितायें।"
अशोक –"तब तो मेरे ख्याल से इससे पहले कि कोई और हादसा हो हमें ये इलाज करा लेना चाहिये। अगर तुम्हें एतराज ना हो तो मेरी तरफ़ से पूरी छूट है। चाची तुम्हें ठीक से समझा देंगी ।"
कहकर अशोक ने चाची के पेटीकोट को पकड़ कर नीचे खींच दिया। अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थीं।
चाची ने अशोक की लुंगी खीच के उसे भी अपने स्तर का कर लिया और नंगधड़ंग उससे लिपटते हुए बोलीं –"मैं चन्दू चाचा को भेज रही हूँ विश्वास रख सब ठीक हो जायेगा, बस तू दिल लगा के मेहनत से उनसे इलाज करवाना। करीब हफ़्ते भर का इलाज चलेगा। अशोक के सामने तुझे झिझक आयेगी और वैसे भी जितने दिन तेरा इलाज चलेगा उतने दिन तुझे अशोक से दूर रहना होगा तो तू उसका ख्याल न रख पायेगी सो उसे मैं तबतक यहीं रोक लेती हूँ।"
महुआ ने फ़िर छेड़ा –"ओह तो जितने दिन मेरा इलाज यहाँ चलेगा उतने दिन अशोक का वहाँ चलेगा। वाह चाची! तुम्हारे तो मजे हो गये, मस्ती करो।"
चाची के भारी चूतड़ों को हाथों से दबोचते हुए, जवाब अशोक ने दिया –" तुझे ज्यादा ही मस्ती सवार हो रही है ठहर जा, चन्दू चाचा से कह देते हैं वो इलाज के दौरान तेरी मस्ती झाड़ देंगें।"
चाची ने अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा अपनी गुलाबी चूत पर रगड़ते हुए कहा-"बिलकुल ठीक कहा बेटा! यहाँ तो जान पे बनी है इसे मस्ती की सूझ रही है।
महुआ-"हाय! तो क्या इलाज में वो सब भी होता……
अशोक (चाची की चूत पे अपने लण्ड का सुपाड़ा हथौड़े की तरह ठोकते हुए)-"और नहीं तो क्या बिना चाकू लगाये आपरेशन हो जायेगा। पर चन्दू चाचा की गारन्टी है और चाची ने तो आजमाया भी है कि उनके मलहम में वो जादु है कि तुझे तकलीफ़ बिलकुल न होगी।"
महुआ –"हे भगवान! ठीक से सोच लिया है अशोक। तुम्हें बाद में बुरा तो नहीं लगेगा।
अशोक(चाची की हलव्वी चूचियों पे गाल रगड़ते हुए) –"तू जानती है कि मैं कोई दकियानूसी टाइप का आदमी तो हूँ नहीं । फ़िर जो कुछ मैंने किया उसके लिए तूने खुले दिल से मुझे उसके लिए माफ़ कर दिया। तो मेरा भी फ़र्ज बनता है कि मैं खुले दिल और दिमाग के साथ तेरा इलाज कराऊँ ताकि तू मेरे साथ जीवन का सुख भोग सके। सो दिमाग पे जोर डालना छोड़ के जीवन का आनन्द लो इलाज के दौरान जैसे जैसे चन्दू चाचा बतायें वैसे वैसे करना।"
चाची –"ठीक है महुआ बेटी चन्दू चाचा, कल शाम तक पहुंच जायेंगे। अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ। ऊपरवाला चाहेगा तो सब ठीक हो जायेगा। खुश रहो।"
महुआ –"ठीक है चाची प्रणाम।
सुनकर चाची ने फ़ोन काट दिया और अशोक के ऊपर यह कहते हुए झपटीं –
"इस लड़के को एक मिनट भी चैन नहीं है अरे अपने पास पूरा हफ़्ता है एक मिनट शान्ती से फ़ोन तो कर लेने देता। अभी मजा चखाती हूँ।"
कहते हुए चाची ने अपनी लण्ड से रगड़ते रगड़ते लाल हो गई पावरोटी सी चूत के मोटे मोटे होठ बायें हाथ की उँगलियों से फ़ैलाये और दूसरे हाथ से अशोक का लण्ड थाम उसका हथौड़े सा सुपाड़ा चूत के होठों के बीच फ़ँसा लिया।और इतनी जोर का जोर का धक्का मारा कि अशोक की चीख निकल गई।
चाची बोलीं –" चीखने से काम नहीं चलेगा अब तो पूरे एक हफ़्ते चाची तेरे पेट दर्द का इलाज करेगी।"
अशोक मक्कारी से मुस्कुराते हुए बोला–" पर चाची अभी नहाना भी तो है।"
चाची(दोनों के नंगे बदन की तरफ़ इशारा करते हुए) बोलीं –"फ़िर ये सब किसलिए किया, ये आग किसलिए लगा रहा था।"
अशोक –"खुद और आपको नहलाने, और नहाते हुए इस आग को बुझाने के लिए।"
चाची समझ गई कि लड़का उनके भीगते बदन का आनन्द लेते हुए चोदना चाहता है ये सोच उनके भी बदन में अशोक के मर्दाने भीगते शरीर की अपने बदन से लिपटे होने की कल्पना कर सन्सनाहट हुई। अगले ही पल चाची ने अपनी चूत उसके लण्ड से पक से बाहर खींच ली।
चाची कुछ सोच के बोलीं –"ठीक है तो चल नहाने।"
और नंगधड़ंग चाची उसका लण्ड पकड़ के कुत्ते के गले के पट्टे की तरह खींचते हुए बाथरूम की तरफ़ चल दीं।

 उधर अगले दिन शाम को चन्दू चाचा अशोक के घर पहुँचे, महुआ ने चन्दू चाचा की तरफ़ देखा चन्दू मजबूत कद काठी का इस उमर में भी तगड़ा मर्द लगता था। इलाज के तरीके की जानकारी होने के कारण उनका मर्दाना जिस्म देख महुआ को झुरझुरी के साथ गुदगुदी सी हुई। महुआ ने उनका स्वागत किया।
महुआ –"आइये चाचाजी, चम्पा चाची ने फ़ोन करके बताया था कि आप आने वाले हैं।"
चन्दू चाचा ने महुआ को ध्यान से देखा। महुआ थोड़ी ठिगनी भरे बदन की गोरी चिट्टी कुछ कुछ गोलमटोल सी लड़की जैसी लगती थी। उसके चूतड़ काफ़ी बड़े बड़े और भारी थिरकते हुए से थे और उसका एक एक स्तन एक एक खरबूजे के बराबर लग रहा था। चन्दू चाचा महुआ को देख ठगे से रह गये। उन्हें ऐसे घूरते देख महुआ शरमा के बोली- बैठिये चाचा मैं चाय लाती हूँ।"
चन्दू चाचा –"नहीं नहीं चाय वाय रहने दे बेटा, हम पहले नहायेंगे फ़िर सीधे रात्रि का भोजन करेंगे क्योंकि शाम ढ़लते ही भोजन करने की हमारी आदत है। और हाँ, वैसे तो चम्पा ने बताया ही होगा कि हम वैद्य हैं और उसने मुझे तुम्हारे इलाज के लिए भेजा है सो समय बर्बाद न करते हुए, तेरा इलाज भी हम आज ही शुरू कर देंगे क्योंकि इस इलाज में हफ़्ते से दो हफ़्ते के बीच का समय लगता है।"

चन्दू चाचा नहा धो के आये और महुआ के साथ रात का खाना खाकर वहीं किचन के बाहर बरामदे मे टहलते हुए अनुभवी चन्दू ने महुआ से उसकी जिस्मानी समस्या के बारे में विस्तार से बात चीत की जिससे महुआ की झिझक कम हो गई और वो चन्दू चाचा से अपनेपन के साथ सहज हो बातचीत करने लगी। ये देख चन्दू चाचा ने अपना कहा- "महुआ बेटी एक लोटे मे गुनगुना पानी ले खाने की मेज के पास चल, इतनी देर में अपना दवाओं वाला बैग लेकर तेरा चेकअप करने वहीं आता हूँ।"
जब गुनगुना पानी ले महुआ खाने की मेज के पास पहुंची तो चाचा वहाँ अपने दवाओं वाले बैग के साथ पहले से ही मौजूद थे। वो अपने साथ महुआ के कमरे से एक तकिया भी उठा लाये थे।
चन्दू चाचा टेबिल के एकतरफ़ तकिया लगाते हुए बोले –"ये पानी तू वो पास वाली छोटी मेज पे रख दे और साड़ी उतार के तू इस मेज पर पेट के बल लेट जा, तो मैं तेरा चेकअप कर लूँ।"
महुआ साड़ी उतारने में झिझकी तो चाचा बोले –"बेटी डाक्टर वैद्य के आगे झिझकने से क्या फ़ायदा।"
महुआ शर्माते झिझकते साड़ी उतार मेज पर पेट के बल(पट होकर) लेट गई।

चन्दू चाचा ने पहले उसके कमर कूल्हों के आस पास दबाया टटोला पूछा कि दर्द तो नहीं होता। महुआ ने इन्कार में सिर हिलाया तो चन्दू चाचा ने उसका पेटीकोट ऊपर की तरफ़ उलट दिया और उसके शानदार गोरे सुडोल संगमरमरी गुदाज भारी भारी चूतड़ों पर दबाया, टटोला और वही सवाल किया कि दर्द तो नहीं होता। महुआ ने फ़िर इन्कार में सिर हिलाया तो उसे पलट जाने को बोला अब महुआ के निचले धड़ की खूबसूरती उनके सामने थी। संगमरमरी गुदाज गोरी मांसल सुडौल पिन्डलियाँ, शानदार सुडोल संगमरमरी गुदाज भारी भारी चूतड़ों और केले के तने जैसी रेश्मी चिकनी मोटी मोटी जांघों के बीच दूध सी सफ़ेद पावरोटी सी फ़ूली हुई चूत, जिसपे थोड़ी सी रेश्मी काली झाँटें। चन्दू चाचा ने पहले उसके पेट कमर नाभी के आसपास दबाया टटोला फ़िर उसकी नाभी में उंगली डाल के घुमाया तो महुआ की सिसकी निकल गई। इस छुआ छेड़ी से वैसे भी उसका जिस्म कुछ कुछ उत्तेजित हो रहा था। सिसकी सुन चन्दू चाचा ने ऐसे सिर हिलाया जैसे समस्या उनकी समझ में आ रही है। वो तेजी से उसके पैरों की तरफ़ आये और बोले –" अब समझा, महुआ बेटी! जरा पैरों को मोड़ नीचे की तरफ़ इतना खिसक आ कि तेरा धड़ तो मेज पे रहे पर पैर मेज पर सिर्फ़ टिके हों और जरूरत पड़ने पर उन्हें नीचे लटका के जमीन पर टेक सके।
महुआ ने वैसा ही किया चन्दू चाचा ने दोनों हाथों की उंगलियों से पहले उसकी रेश्मी झांटे हटाईं और फ़िर चूत की फ़ाँके खोल उसमें उंगली डाल कर बोले जब दर्द हो बताना, जैसे ही महुआ ने सिसकी ली चाचा ने अपनी उंगली बाहर खींच ली और बोले –"चिन्ता की कोई बात नहीं तू बिलकुल ठीक हो जायेगी, पर पूरा एक हफ़्ता लगेगा इसलिए इलाज अभी तुरन्त शुरू करना ठीक होगा।"   इतनी देर तक एकान्त मकान में चंदू चाचा के मर्दाने हाथों की छुआ छेड़ से उत्तेजित महुआ सोचने समझने की स्थिति में नहीं थी, वैसे भी पति की रजामन्दी के बाद सोचने समझने को बचा ही क्या था सो महुआ बोली –"ठीक है चाचा।"
चन्दू चाचा ने एक तौलिया महुआ के चूतड़ों के नीचे लगा कर गुनगुने पानी से उसकी रेशमी झाँटें गीली की फ़िर अपने बैग से दाढ़ी बनाने की क्रीम निकाल उनपर लगाई और उस्तरा निकाल फ़टाफ़ट झाँटें साफ़कर दीं। महुआ के पूछने पर उन्होंने बताया कि झाँटें न होने पर मलहम जल्दी और ज्यादा असर करता है। अब चन्दू चाचा ने चूतड़ों के नीचे से तौलिया बाहर निकाला फ़िर उसी से चूत और उसके आसपास का गीला इलाका पोंछपाछ के सुखा दिया। अब महुआ की बिना झाँटों की चूत सच में दूध सी सफ़ेद और पावरोटी की तरह फ़ूली हुई लग रही थी।
चाचा ने अपना मलहम निकाला और महुआ की चूत की फ़ाँके अपने बायें हाथ के अंगूठे और पहली उंगली से खोल अपने दूसरे हाथ की उंगली अंगूठे से उसमें धीरे धीरे मलहम लगाने लगे।
पहले से ही उत्तेजित महुआ को अपनी चूत में कुछ गरम गरम सा लगा फ़िर धीरे धीरे गर्मी के साथ कुछ गुदगुदाहट भरी खुजली बढ़ने लगी जोकि चुदास में बदल गई। जैसे जैसे चन्दू चाचा चूत में मलहम रगड़ रहे थे वैसे वैसे चूत की गर्मी और चुदास बढ़ती जा रही थी। महुआ के मुँह से सिस्कियाँ फ़ूट रही थी और उसकी दोनों टांगे हवा में उठ फ़ैलती जा रही थी। चाचा के मलहम उंगलियो के कमाल से थोड़ी ही देर में महुआ ने अपनी टांगे हवा मे फैला दी और सिस्कारी ले के तड़पते हुए चिल्लाई-
" इस्स्स्स्स्स्स आहहहहहह चाचा, ये मुझे क्या हो रहा है लग रहा है कि मैं अपने ही जिस्म की गर्मी में जल जाऊँगी, प्लीज़ कुछ कीजिये अब बर्दास्त नही हो रहा।"
चन्दू चाचा –" अभी इन्तजाम करता हूँ बेटा।"
ये कहते हुए चन्दू चाचा अपनी धोती हटा के अपना फ़ौलादी लण्ड निकाला और उसके सुपाड़े पर अपना ढेर सा जादुई मलहम थोप के चूत के मुहाने पर रखा। फ़िर सुपाड़ा लगाये लगाये ही आगे झुक महुआ का ब्लाउज खोला और दोनो हाथों से दोनो बड़े बड़े बेलों को ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए बारी बारी से निपल चूसने लगे। चुदासी चूत की पुत्तियाँ मुँह खोल के लण्ड निगलने लगीं और लण्ड का सुपाड़ा अपने आप चूत में घुसने लगा। मारे मजे के महुआ की आँखें बन्द थी और दोनों टांगे हवा में फ़ैली हुई थीं । जब लण्ड घुसना रुक गया और चाचा ने लण्ड आगे पीछे कर के चुदाई शुरू नहीं की और चूचियाँ दबाते हुए ज़ोर ज़ोर से निपल चूसना जारी रखा तो महुआ ने आँखें खोली हाथ से अपनी चूत मे टटोला और महसूस किया कि सुपाड़े के अलावा करीब आधा इन्च लण्ड और चूत में घुस गया था जब्कि पहले उसकी चूत में अशोक के लण्ड का सुपाड़ा घुसने के बाद आगे बढ़ता ही नहीं था। उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा।  तभी शायद चाचा को भी महसूस हो गया कि लण्ड चूत में आगे जाना रुक गया सो उन्होंने चूचियों से मुँह उठाया और कहा –"अब आगे का इलाज इस मेज पर नहीं हो सकता सो तू मेरी कमर पर पैर लपेट ले और अपनी बाहें मेरे गले मे डाल ले ताकि मैं तुझे उठा के बिस्तर पर ले चलूँ, आगे की कार्यवाही वहीं होगी।"
महुआने वैसा ही किया सोने के कमरे की तरफ़ जाते हुए लगने वाले हिचकोलों से लण्ड चूत में अन्दर को ठोकर मारता था,उन धक्कों की मार से महुआ के मुँह से तरह तरह की आवाजें आ रहीं थी-
"उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ओउुुुुुुुुुउउ ऊऊऊऊओह इस्स्सआःाहहहहहहहहह ऊहोहोूहोो अहहहहह उूुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इस्स्सआःाहहहहहहहहह"
सोने के कमरे में पहुँच चाचा महुआ को लिये लिए ही बिस्तर पर इस प्रकार आहिस्ते से गिरे कि लण्ड बाहर न निकल जाये। चाचा ने महसूस किया कि सुपाड़े के अलावा करीब एक इंच महुआ की चूत के अन्दर चला गया है, पहले दिन को देखते हुए ये बहुत बड़ी कामयाबी है, ये सोच, महुआ के गदराये गोरे गुलाबी नंगे जिस्म के ऊपर झुककर उसकी बड़ी बड़ी चूचियों दबोच उसके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख चूसते हुए उतने ही लण्ड से चोदने लगे। उन्के मुँह से आवाजें आ रही थीं –
"उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह उम्मह हम्मह उह्ह्ह्ह्ह"

उधर महुआ भी चुदाते हुए तरह तरह की आवाजें कर रहीं थी –
"उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ओउुुुुुुुुुउउ ऊऊऊऊओह इस्स्सआःाहहहहहहहहह ऊहोहोूहोो अहहहहह उूुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ इस्स्सआःाहहहहहहहहह"
एक जमाने से अशोक के हलव्वी लण्ड से होने वाले दर्द के डर से महुआ टालमटोल कर करके, चुदने से बचती चली आई थी सो जब आज इतने अरसे से उसकी बिन चुदी चूत चन्दू चाचा के कमाल से चुदासी हो इस तरह चुदने पर ज्यादा देर ठहर नहीं पाई और जल्दी ही झड़ने के करीब पहुँच गई और उसके मुँह से निकला – 
"अहह चाचा लगता है मेरी झड़ जायेगी यहह आज तक इतनी गीली कभी नही हुई चाचा उफफफफफफफइस्स्सआःाहहहउम्म्महह"
ये देख अनुभवी चोदू चन्दू चाचा अपनी स्पीड बढ़ा के बोला-
"शाबाश बेटी झड़ खूब जम के झड़ मैं भी अब अपना झाड़ता हुँ ले शाबाश ले अंदरअहहहहहहहहहहहहहहहहाहोह "
और दोनों झड़ गये । महुआ की चूत में उसे ऐसा लगा जैसे काफ़ी वक्त के प्यासे को पानी मिल गया और माल चूत के अंदर जाते ही उसके मुँह से निकला-
"उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ओउुुुुुुुुुउउ ऊऊऊऊओह"
और इस तरह चन्दू चाचा ने पहले राउण्ड का इलाज खत्म किया। वो महुआ के ऊपर से उतर कर बगल में लेट गये और बोले –"तूने बहुत अच्छी तरह से हर काम मेरे कहे मुताबिक किया। अगर तू ऐसे ही मेरे कहे मुताबिक चलती रही तो मेरे मलहम के कमाल से तू बहुत जल्द अशोक के लायक तैयार हो जायेगी। मेरे मलहम का एक कमाल ये भी है और तेरी चूत कभी ढीली या बुड्ढी नही होगी। तेरी चाची की चूत अभी तक एकदम टाइट और जवान है।"
महुआ ये सोच के मन ही मन मुस्कुराई कि तब तो अशोक को बहुत मजा आ रहा होगा। बिचारे ने जमाने से कोई चूत जम के नही चोदी थी।
ऐसे ही बातें करते दोनों को नींद आ गई।

 जल्दी सो जाने के कारण दूसरे दिन दोनों की नींद जल्दी खुल गई। रोजमर्रा के कामों से निबट के महुआ ने चाय और नाश्ता बनाया, फ़िर दोनों ने ब्रेड अण्डे के साथ जम के नाश्ता किया।
चाचा बैठक मे आकर बैठ गये और महुआ को बुलाया जब महुआ आई तो चाचा बोले –"महुआ बेटी कल के इलाज से तू सुपाड़े के अलावा एक इन्च और लण्ड अपनी चूत में लेने में कामयाब रही इसका मतलब अगर हम दोनों मेहनत करें तो शायद एक हफ़्ते से भी कम में तू अशोक से पूरा लण्ड डलवा के चुदवाने लायक बन सकती है मेरे कहे मुताबिक लगातार इलाज करवाती रहे। यहाँ इस अकेले घर में हम दोनों को और कोई काम तो है नहीं सो क्यों न हमलोग लगातार इलाज मन लगाकर इस काम को जल्द से जल्द खत्म करने की कोशिश करें?"  
महुआ –"ठीक कहा चाचाजी। मैं भी जल्द से जल्द अशोक के लायक बन के उसे दिखाना चाहती हूँ।
चन्दू चाचा –"तो ऐसा कर ये साड़ी खराब करने के बजाय अगर स्कर्ट ब्लाउज हो तो साड़ी उतार के स्कर्ट ब्लाउज पहन ले। 
उधर महुआ स्कर्ट ब्लाउज पहनने गई इधर चन्दू चाचा ने अपना मलहम का डिब्बा बैग से निकाल के महुआ की चूत के इलाज की पूरी तैयारी कर ली। चन्दू चाचा ने स्कर्ट ब्लाउज पहने महुआ को आते देखा। स्कर्ट ब्लाउज में उसके बड़े बड़े खरबूजे जैसे स्तन और भारी चूतड़ थिरक रहे थे ।
चन्दू चाचा ने हाथ पकड़कर उसे अपनी गोद में खींच लिया। उनकी गोद में बैठते ही महुआ ने चन्दू चाचा का लण्ड अपनी स्कर्ट में गड़ता महसूस किया। उसने अपने चूतड़ थोड़े से उठाये और चन्दू चाचा की धोती हटा के उनका लण्ड नंगा किया और अपनी स्कर्ट ऊपर कर चन्दू चाचा का लण्ड अपने गुदाज चूतड़ों मे दबा कर बैठ गई
चन्दू चाचा ने उसका ब्लाउज खोलते हुए कहा- वाह बेटी ऐसे ही हिम्मत किये जा।
बटन खुलते ही महुआ ने ब्लाउज उतार दिया । चन्दू चाचा उसके खरबूजे सहलाने दबाने और निपल मसलने लगे। कुछ ही देर में महुआ के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। अचानक महुआ ऊठी और चन्दूचाचा की तरफ़ मुँह घुमाकर उनकी गोद में दोनों तरफ़ पैर कर बैठ गई । चन्दू चाचा ने देखा महुआ की चूचियाँ उनके मसलने दबाने से लाल पड़ गई हैं। अब महुआ की चूत चन्दूचाचा के लण्ड पर लम्बाई मे लेट सी गई। महुआ ने अपने एक स्तन का निपल चन्दूचाचा के मुँह में ठूँसते हुए सिसकारी भरते हुए कहा कहा –" स्स्स्स्ससी इलाज शुरू करो न चाचा।"
चन्दू चाचा –"अभी लो बेटा।"

कहकर चन्दू चाचा ने अपना मलहम निकाला और महुआ की चूत की फ़ाँके खोल फ़ाँकों के बीच थोप दिया फ़िर अपने लण्ड के सुपाड़े पर भी मलहम थोपा और उसे महुआ के हाथ में पकड़ा दिया और अपने दोनों हाथों से उसकी बड़ी बड़ी खरबूजे जैसी चूचियाँ थाम सहलाने, दबाने, उनपर मुँह मारने निपल चूसने चुभलाने में मस्त हो गये। उनकी हरकतों से उत्तेजित महुआ ने उनका लण्ड अपने हाथ में ले अपनी चूत के मुहाने पर रखा और सिसकारियाँ भरते हुए अपनी चूत का दबाव लण्ड पर डाला। पक से सुपाड़ा चूत में घुस गया । मारे मजे के महुआ और चन्दू चाचा दोनों के मुँह से एक साथ निकला –
"उम्म्म्म्म्म्म्म्ह"
उसी समय चाचा चन्दू चाचा ने हपक के उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर मुँह मारा । दरअसल चाचा को महुआ की बड़ी बड़ी खरबूजे जैसी चूचियों में ज्यादा ही मजा आ रहा था इसीलिए उनकी सहलाने, दबाने, उनपर मुँह मारने निपल चूसने चुभलाने की रफ़्तार में तेजी आती जा रही थी। जैसे जैसे उनकी रफ़्तार बढ़ रही थी वैसे वैसे महुआ भी अपनी चूत का दबाव लण्ड पर बढ़ा रही थी और उसकी चूत मलहम के कमाल से रबड़ की तरह फ़ैलते हुए चन्दू चाचा का लण्ड अपने अन्दर समा रही थी। जब लण्ड अन्दर घुसना बन्द हो गया तो महुआ ने नीचे झुक कर देखा आज, कल के मुकाबले एक इंच ज्यादा लण्ड चूत में घुसा था इस कामयाबी से खुश हो चुदासी महुआ अपनी कमर चला के चाचा के लण्ड से चुदवाने लगी।
चन्दू चाचा –"शाबाश बेटा इसी तरह मेहनत किये जा, तू जितनी मेहनत करेगी, उतनी ही जल्दी तुझे कामयाबी मिलेगी और अशोक को ताज्जुब से भरी खुशी होगी और वो तेरा दीवाना हो जायेगा।"
अगले पाँच दिन चन्दू चाचा और महुआ ने चुदाई की माँ चोद के रख दी। चाहे बिस्तर में हों, बैठक में, रसोई में या बाथरूम में जरा सी फ़ुरसत होते ही चन्दू चाचा महुआ को इशारा करते और दोनों मलहम लगा के शुरू हो जाते पाँचवें दिन शाम को दोनों इसी तरह कुर्सी पर बैठे चुदाई कर रहे थे और कि अचानक महुआ चन्दू चाचा का पूरा लण्ड लेने में कामयाब हो गई वो खुशी से किलकारी भर उठी बस फ़िर क्या था चन्दू चाचा ने उसे गोद में उठाया और ले जा के बिस्तर पर पटक दिया और बोले –"शाबाश बेटा आज तू पूरी औरत बन गई अब सीख मर्द औरत की असली चुदाई, तेरा आखरी पाठ।"
ये कह चन्दू चाचा ने महुआ की हवा में फ़ैली दोनों टांगे उठाकर अपने कंध़ों पर रख लीं
अपने फ़ौलादी लण्ड का सुपाड़ा उसकी अधचुदी बुरी तरह से भीगी चूत के मुहाने पर रखा और एक ही धक्के में पूरा लण्ड ठाँस दिया और धुँआधार चुदाई करने लगा। महुआ को आज पहली बार पूरे लण्ड से चुदाने का मजा मिल रहा था सो वो अपने मुँह से तरह तरह की आवाजें निकालते हुए चूतड़ उछाल उछाल के चुदा रही थी। जिस तरह महुआ चूतड़ उछाल रही थी उसे देख चन्दू चाचा बोले-
"शाबाश बेटी अब मुझे पूरा भरोसा हो गया कि तू अशोक को खुशकर वैद्यराज चुदाईआचार्य चोदू चन्द चौबे चाचा उर्फ़ चोदू वैद्य का नाम  ऊँचा करेगी।" 
चन्दू चाचा भी आज पाँच दिनों से मन मार कर आधे अधूरे लण्ड से चुदाई कर कर के बौखलाये थे सो आज पूरी चूत मिलने पर धुँआधार चोद रहे थे।  दोनों की ठोकरों की ताकत और जिस्म टकराने की फ़ट फ़ट की आवाज बढ़ती जा रही थी आधे घण्टे की धुँआधार चुदाई के बाद अचानक महुआ के मुँह से निकला – 
" अहह और जोर से चोदू चाचा जल्दी जल्दी ठोक मेरी चूत, वरना झड़ने वाली है चाचा उफफफफफफफइस्स्सआःाहहहउम्म्महह"
चन्दू चाचा –" ले अंदर और ले मैं भी अहहहहहहहहहहहहहहहहाहोह "
और दोनों झड़ गये। साँसों पे काबू पाने के बाद महुआ ने चाची को फ़ोन मिलाया।





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..............raj.....................

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