Sunday, January 8, 2012

हिंदी सेक्सी कहानियाँ कड़क लण्ड गरम भोसड़ा




हिंदी सेक्सी कहानियाँ
कड़क लण्ड गरम भोसड़ा
लक्ष्मी कंवर
तीन वर्ष से मेरे पड़ोस मे शीला ऑण्टी रहती थी। वो गुजराती थी, भुज की
रहने वाली। आप जानते है ना गुजराती लड़कियां मुझे बहुत सेक्सी लगती है।
बहुत मस्त होती है … चिकनी चिकनी सी, कड़े स्तनों वाली, चुदायी मे बहुत
दिलचस्पी लेने वाली होती है ये। चुदायी मे वास्तव मे इतनी जबरदस्त कि
आपसे चुदा चुदा कर आपको लस्त कर देंगी लेकिन फिर भी तरो ताजा ही नजर
आयेगी, एक बार फिर चुदने के लिये। गुजराती लड़कियो की चूत या गाण्ड भी
इतनी टाईट होती है मर्दो का लण्ड उन्हे चोद कर फिर किसी दूसरी के पास नही
जाता है। सच मे गुजराती लड़कियां हर लड़को की पहली पसन्द होती है।
पहले तो उस पर मेरा ध्यान कभी गया ही नही। पर उसके ऐसे वैसे इशारो से इस
बार मेरा ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो ही गया। अब तो मै भी जवानी की दहलीज
पर कदम रख चुका था। मेरा भी ध्यान अब लड़कियो की ओर आकर्षित होने लगा था।
अनजाने मे ही मेरा लण्ड भी कड़क हो जाता था। ऑण्टी जाने कब से मेरे पर
डोरे डाल रही थी मुझे पता ही नही था। मुझे देख कर मुस्कराना, दिन को मुझे
देखते ही अपने घर बुला लेना। धीरे धीरे वो मुझे वो ऑण्टी बहुत अच्छी लगने
लगी थी। उसके कई कारण थे। एक तो ये कि मुझे बुला कर मेरे सामने वो बिना
कारण ही अपना अंग प्रदर्शन करती थी। जो मेरे दिल को छलनी कर देते थे। वो
हमेशा मेरी तारीफ़ करती रहती थी, जो मुझे बहुत अच्छी लगती थी। मैं उसके घर
का और बाहर का काम भी कर देता था, इस बहाने उसे और भी मौका मिल जाता था
मुझे बुलाने का। उसके मस्त अंगो को जब मै निहारता था तो वो मुझे और
उक्साती थी। तब मेरा लण्ड बुरी तरह से कड़क जाता था। फिर वो मुझ पर तिरछी
नजरो से वार करके मेरी ऐसी हालत बना देती थी कि बस मै उसके ऊपर चढने से
रह जाता था। मेरे दिल की धड़कने वो बढा देती थी। मुझे वो अपनी वासना भरी
हरकतो से पागल सी बना देती थी। जब मै जाने को होता था तो मुझे रोकने का
उसके पास एक राम बाण इलाज था , वो मेरे सामने आईस क्रीम ला कर रख देती
थी, और अपनेऽन्दर तन दिखते नंगे स्तनो को मेरे सामने हिला हिला मुझे
उन्हे निहारने पर मजबूर कर देती थी। मन मे आता कि उन्हे मै दबा डालू।
जी हां, जब से मुझे ये सब समझ आया था मै उसके बुलाने पर मै बिना चड्डी के
पजामा पहन कर जाता था। उसके अंग प्रदर्शन पर जब मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था
तो मै उसे छिपाता नही था। वो बड़े चाव से उसे निहारती थी। वो साली
हरामजाती मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत मे घुसा क्यू नही लेती थी । बस हमे
बहाना नही मिल रहा था कि कैसे शुरूआत की जाये। कैसे चोदी जाये उसकी मस्त
चूत्।
गर्मी की छुट्टियां आरम्भ हो चुकी थी। शीला को अपने मायके जाना था। उसका
घर दूर था। अमृतसर से भुज काफ़ी दूर था। उसने अपने पति को मायके छोड़ कर
आने को कहा। उसने ऑफ़िस का बहाना बना कर मना कर दिया और कहा कि राजू को ले
जाओ। तुम्हारा तो वो खास है ना… तुम्हारा ध्यान भी रखेगा। शीला को तो
मौका मिल गया और वो मेरे पापा से आज्ञा लेने आ गयी। छुट्टियो के कारण
मेरे पापा ने भी हां कह दी। मेरे साथ इतना लम्बा सफ़र ! मजा आ जायेगा।
कहीं तो, कभी तो मौका मिल ही जायेगा।
शीला बहुत खुश थी, मुझे घर बुला कर उसने मुझे बताया। मैं भी बहुत खुश
हुआ। जाने का प्रोग्राम बनने लगा। घर पर आ कर मेरा तो सोच सोच कर लण्ड
जोर मारने लगा। देखना साली को चोद कर रहूंगा। ब तो उसने जैसे ही अपने
बोबे मेरे सामने हिलाये उसे मसक कर रख दूंगा। निश्चित समय पर हम ट्रैन से
रवाना हो गये। ट्रैन में बहुत भीड़ थी… गोल्डन टेम्पल रात को लगभग साढे नौ
बजे रवाना होती थी। ए सी मे हमे बहुत आराम था। ट्रैन रवाना हो गयी थी।
मेरा मन सामने लेटी शीला को देख देख कर बेचैन हो रहा था। वो मुझे देख कर
बार बार मजबूरी की हंसी दे रही थी। साली को उसकी बर्थ पर ही चोद दू… फिर
सर झटक कर मैने अपना ध्यान दूसरी ओर लगा दिया।
सवेरे नींद खुली तो हम देहली मे थे।ऽअगे का दिन भर सफ़र मे बीता… मैं नीचे
शीला से चिपक कर बैठा था। दिन को वो मुझ पर नीद मे गिर गिर जाती थी। तब
मुझे उसे यहां वहां छूने का समय मिल जाता था। चुपके से उसके मम्मे पर
अपनी अंगुली दबा देता था। उसे मालूम होता था पर वो कुछ नहीं कहती थी। रात
होते होते हम वड़ोदरा पहुंच गये थे। यहां से भुज के अगले दिन रात्री कि
ट्रैन थी। हम दोनो किसी होटल मे चले गये।
रात के बारह बजने वाली थी। कमरा अच्छा था… मैने जाते ही तोलिया लपेट लिया
और स्नान की तैयारी करने लगा। तभी मुझे लगा कि शीला भी स्नान करना चाहती
है। वो भी एक तोलिया ले कर बाथ रूम मे घुस गयी। उसे सोच सोच कर मेरा लण्ड
बार बार खड़ा हो रहा था। मै बस उसे मसल कर उसे शान्त कर रहा था। वो स्नान
करके बाहर आ गयी। मैने भी जल्दी से स्नान कर लिया। मैने देखा कि शीला ने
अपना ढीला सा पजामा पहन लिया था और ऊपर एक ढीला सा टॉप डाल लिया था। मै
उसका ये सेक्सी रूप देखता ही रह गया।
मै उसकी ओर एकटक देखता ही रह गया। मेरे कदम अनजाने में ही उसकी ओर बढ
चले। वो मेरा इरादा भांप गयी थी। मुझे देख कर उसके चेहरे पर शर्म की
लालिमा झलकने लगी थी। मेरा लण्ड कड़क होकर फ़ूला नही समा रहा था। उसकी
निगाहे बराबर मेरे लण्ड पर जमी हुयी थी। मैं उसके बिलकुल समीप आ गया।
"नहा कर शीला जी आप बहुत अच्छी लग रही हो"
"सच, राजू … तुम भी मुझे बहुत अच्छे लगते हो" उसने भी शर्मा कर मुझे उकसाया
अनजाने मे मेरे हाथ शीला के चेहरे पर आ गये। मै झुक कर उसके अधरों के
नजदीक आ गया। उसने अपनी आंखे बद कर ली। शायद उसके दिल की तमन्ना भी यही
थी। उसके नरम, कोमल पत्तियों जैसे लब को मेरे लबो ने थाम लिया। उसके हाथ
मेरी पीठ पर कस गये। हम दोनो एक दूसरे से चिपक गये। मेरा खड़ा लण्ड उसकी
चूत के आसपास प्रहार करने लगा। नरम होंठो पर चुम्बन बरसने लगे।
"बस करो, राजू … अब चलो सो जाओ" वो अपने होंठ पोछते हुये बोली। सो कैसे
जाऊ, मेरे लण्ड का होगा ?
"शीला जी बस एक चीज़ और ?"
"क्या ?… आह … अब तू तो …उह्ह"
मैने उसके उन्नत उरोजो के उभार पर एक ललचायी दृष्टि डाली और मेरे हाथो के
मध्य वो तड़प उठे। ढीले टॉप मे उसके उभार मेरे हाथो को एक सुहाना आनन्द दे
रहे थे। मै उन्हे सहलाने लगा… कभी कभी दबा भी देता था । फिर उसने मेरा
हाथ धीरे से हटा दिया और मेरे बालो को सहला कर नोच लिया।
"अब सो जाओ, कोई देख लेगा तो वो क्या सोचेगा?" उसने मुझे अपनी ओर बुलाने
का बहाना किया।
"कौन देखेगा … यहां तो बस आप है और मै हू !" उसकी बात को समझते हुये मैने कहा
मैने एक बार शीला को प्यार से पलट दिया और उसके मोहक चूतड़ अपने हाथो मे
ले लिये। उसे धीरे धीरे सहला कर दबाने लगा। बहुत लचीले गोले थे। उसके मुख
से बराबर सी सी निकलती जा रही थी। बहुत आनन्द आ रहा था उसके मोहक चूतड़ो
को सहलाने और दबाने मे। उसने कोई विरोध नही किया, उसके मस्त चूतड़ो को
दबाने पर्। पूरे जोर से मै उसे उठा उठा कर मसलने लगा। उसकी सिसकिया उसके
आनन्द का परिचायक थी। वासना भरी आहे मेरे दिल को भी उसे चोदने के लिये
लालायित करने लगी थी। जवानी की आग हम दोनो को जलाये जा रही थी। मेरा
तोलिया खुल कर नीचे टपक गया था। मेरा तड़पता लण्ड उसकी दरारो को टटोलने
लगा। आगे की लाईन साफ़ थी। मुझे पता चल गया कि उसे भी चुदायी की लगी है।
उसकी चूत भी फ़ड़कने लगी है। यानि चुदायी हो कर रहेगी … मेरा दिल खुशी से
नाच उठा।
"अरे राजू, ये क्या, तुम्हारा तौलिया …"
अभी रुको… बहुत मजा आ रहा है आपके ये बड़े बड़े गोले मसलने मे…"
"अरे हट शरीर कही का… चलो बस … बहुत मन की कर ली … अब सो जाओ ना"
"हां चलो, कैसे सोना है, तुम्हारे ऊपर या तुम्हारे नीचे…"
"अब देख पिटेगा , समझ गया ना…" मुझे दूर धक्का दे कर वो खुद बिस्तर पर
धम्म से गिर गयी। मैने कपड़े पहनने की भी आवश्यकता नही समझी ! आप जानते है
ना मौन स्वीकृती लक्षणम ! मै डबल बेड पर दूसरी ओर लेट गया। इस खेल खेल मे
रात्री के एक बज गये थे … पर मन तो वासना से कुलबुला रहा था। रात्री की
जीरो वॉट का बल्ब जलते रहने दिया था। मैने देखा कि शीला धीरे धीरे मेरी
ओर सरकती आ रही थी। मुझे कनखियो से देखती और फिर मेरी ओर खिसक आती।
"शीला जी, शर्माओ मत, आ जाओ ना मेरे पास"
"नही जी… अब सो जाओ ना" उसने फिर से एक प्यार भरी झिड़की दी
"शीला जी, इतनी भरी जवान लड़की मेरे साथ आप लेटी है … जिसका अंग अंग को
छूने के लिये मै तड़प रहा हू, नींद कैसे आयेगी भला"
"राजू, ना… बस … ना रे … तुम्हारा भी जवान जिस्म है, कड़ा और इतराता हुआ …
उसे थाम कर सो जाओ ना… मेरे राजू" उसकी वासना भरी धीमी आवाज मेरे दिल को
जैसे चीर रही थी।
"तो आओ, मेरे पास आ जाओ … साथ साथ ही सो जाते है, मेरे लण्ड की आग को
महसूस करो" मेरे जवान जिस्म मे शोले भड़क उठे। मैं खिसक कर उसके पास आ गया
और धीरे से उससे चिपक गया।
"आप तो पूरे नंगे हो … कैसा कैसा लग रहा है … आह्ह्ह" उसकी तड़पती आवाज आयी।
"आप भी नंगे हो जाओ, कौन देखने वाला है"
"तुम जो हो ना …" उसने भी मुझे पकड़ लिया था
मेरे हाथो ने उसका नाड़ा खींच दिया। शीला ने अपना पजामा पकड़ लिया और मुस्करा उठी
"नहीं रे … ओह्… ना… ना रे…" वो सिसक सी पड़ी
अब शीला के हाथ मेरे बालो को पकड़ कर खींच रहे थे। मुझे बालो को खींचने से
बहुत मजा आ रहा था।
"अब बस करो ना … चलो सो जाओ" उसने चोदने के लिये फिर एक इशारा किया
"ओ के ! गुड नाईट्…" मैने अपनी आंखे बन्द कर ली। मुझे मालूम था उसे भी
लण्ड चाहिये था। उसने धीरे से अपना पजामा नीचे उतार दिया और टॉप को ऊपर
से खींच कर उतार दिया।
"ऐ … गुड नाईट्… स्वीट ड्रीम्स" यह कह कर वो उठ कर मेरे ऊपर आकर लेट गयी।
"बहुत सताते हो राजू…" उसने तड़पते हुये अपने शरीर का भर मेरे ऊपर डाल
दिया और मेरे बालो को एक बार फिर से खींचते हुये मुझे चूमने लगी।
"मेरे रज्जू, देखो नीचे कैसी आग लग गयी है … कुछ करो ना प्लीज" उसने मुझे
खुले तौर पर चोदने के लिये कह दिया। उसकी कमर मेरे लण्ड को दबाये जा रही
थी। मैने शीला के मस्त चूतड़ो को एक बार जोर से दबाया और अपने कड़े लण्ड को
इधर उधर हिला कर रास्ता दिखा दिया। जाने कब से मेरा प्यासा लण्ड इसकी बाट
जोह रहा था। जैसे जैसे लण्ड भीतर घुसता चला गया… मेरे लण्ड को एक मीठा सी
गुदगुदी लगने लगी। शीला तड़प उठी।
"ओह्ह्… येह्ह्ह्ह … उफ़्फ़्फ़ … कितना मजा आ रहा है … पूरा डाल दे मेरे
यारां…" उसके मुख से खुशी की किलकारिया निकल पड़ी।
"शीला जी आपकी फ़ुद्दी कितनी गरम है…"
"और जी आपका ये मस्त लौड़ा … कितना कड़क है … अब बस कुछ मत बोल … लग जा काम पर"
"शीला जी आज तो आपकी मस्त चुदायी करूंगा…"
"ऐ… चुप भी हो जा … मेरे रज्जू"
उसने मुझे अपने से चिपका लिया। हम दोनो धीरे धीरे लण्ड और चूत की रगड़ायी
करने लगे थे। ऊपर नीचे होकर चुदायी का अनोखा आनन्द ले रहे थे। वो भी
तन्मयता से अपने दांत भीच कर चूत को आगे पीछे करके आनन्द ले रही थी। लण्ड
और चूत को घिसने का मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। मेरे सुपाड़े और डण्डे को
चूत बार बार रगड़ने से जैसे मन मे चिन्गारियां निकल रही थी। मै असीम आनन्द
मे भर कर जीवन की प्रथम चुदायी कर रहा था। उसकी कमर चुदायी मे ऊपर नीचे
चल कर मेरा पूरा सहयोग कर रही थी। कसी हुयी चूत , फिर मेरा मस्ताना लण्ड
अब उसकी चूत मे तेजी से चलने लगा था। ए सी मे भी मुझे पसीना आने लगा था।
उसकी चूंचिया कड़ी हो चुकी थी, उन्हे दबाने मे भी बहुत आनन्द आने लगा था।
शीला की सीत्कारे तेज हो गयी थी। तभी उसने मुझे कस कर जकड़ लिया।
"भेन दी फ़ुद्दी … आह्ह्ह्… सीऽऽऽऽ … मेनू तो … इह्ह्ह्ह्ह राजू…… गयी मै तो…"
"नही… अभी नहीं … रुको तो … मै भी आया …"
"हाऽऽऽऽऽय रे … मेरे राजू … ओह्ह्ह्ह … मेरा तो निकल गया"
शीला झड़ने लगी … तभी मेरे लण्ड ने जोश भर कर एक फ़ुफ़कार भरी और लण्ड के
बाहर निकलते ही लावा जैसे बह निकला। तेजी से पिचकारी निकल पड़ी। मै आनन्द
से दोहरा हो गया। वीर्य छोड़ने मे कितना आनन्द आ रहा था। सफ़र की थकान और
फिर ये चुदायी … शीला झड़ने के बाद गहरी नींद मे सो गयी।

सवेरे मेरी नींद करीब नौ बजे खुली। शीला स्नान आदि से निवृत हो कर टीवी
पर समाचार देख रही थी। मुझे देखते ही उसने टीवी बन्द कर दिया और नाश्ता
मंगवा लिया।
"राजू, तूने किसी ओर को चोदा है क्या ? तेरा मुन्ड तो छिला हुआ था"
"शीला जी की कसम, ये सब आपका ही किया हुआ है"
"चल हट … मैने क्या किया?"
"रात को मै बिस्तर मे आपको याद करके मे उल्टा हो कर लण्ड को अपने चूतड़ो
से दबा दबा बिस्तर पर माल निकाल देता था ? पता है एक बार मेरी चमड़ी अपने
आप चिर गयी, खून भी निकला। चार पांच दिन तक तो मैने इसे छुआ तक नही। पर
आपकी आंख मिचौली मेरे लण्ड मे बार बार उफ़ान भर देती थी। पांचवे दिन तो
मेरा ये हाल था कि जैसे ही मुझे देख कर आप मुस्करायी, मैने अपना लण्ड दबा
लिया… और बाप रे… ढेर सारा माल निकल पड़ा … सारे पजामे को तर दिया"
"मेरे राजू, ये सब मेरे कारण हुआ … मुझे कितना अच्छा लग रहा है ये सुन कर
… तुम्हारे इस वीर मुन्ना ने मेरी याद मे खूब पानी निकाला है… है ना। आजा
मेरे बोबे से लग जा … इसे चूस कर मेरी जान निकाल दे।"
मैं धीरे से शीला को लेकर फिर से बिस्तर पर लेट गया और फिर एक बार हम
दोनो एक तन और एक मन हो गये।
शाम को शीला ने अपना मन पसन्द गुजराती भोजन किया। और हमने करीब रात्री के
नौ बजे होटल छोड़ दिया। ठीक साढे नौ बजे भुज एक्सप्रेस आ गयी। सामने ही ए
सी का डब्बा रुका। सवेरे आठ बजते बजते ट्रैन भुज पहुच चुकी थी। हम दोनो
टू सीटर पर बैठ कर घर की ओर चल पड़े। शीला मुझे रास्ते भर शहर के बारे मे
बताती रही।
"देखो वो रहा हमारा घर…" उसने एक पुरानी सी बड़ी हवेली की ओर इशारा किया।
मै चकित था उसका इतना बड़ा घर देख कर। उसकी हवेली के ज्यादातर कमरे तो
बन्द थे। मुझे और शीला के लिये पास पास ही कमरे खोल दिये थे। शीला तो
अधिक समय मेरे साथ ही रहा करती थी। यहां पर हमे कायदे से रहना पड़ता था।
गुजराती महौल था… मुझे सभी अपने भाई की तरह समझने लगे थे।
रात को शीला चुपके से मेरे कमरे मे आ गयी। उसकी आंखे वासना से भीगी हुयी
थी। उसकी हालत देखते ही मेरा लण्ड भी खड़ा होने लगा। उसने आते ही कमरे की
बत्ती बुझा दी और मेरे से लिपट गयी।
"बड़ी तेज खुजली हो रही है राजू, मेरी चोद दे जल्दी … पानी निकाल दे यारां"
"ऐसी भी क्या चुदने की बेताबी … शीला जी आपकी तो आज गाण्ड बजाने का मन
है, क्या मस्त गोल गोल है"
"अरे बजा देना बाद मे पहले मेरी चूत तो मार दे"
वो नीचे कारपेट पर ही अपनी सलवार खोल कर लेट गयी। उसने अपना कुर्ता ऊपर कर लिया।
मैने जल्दी से अपना पजामा उतार लिया और धीरे से जाकर उसके ऊपर लेट गया।
जैसे ही चूत मे लण्ड घुसा उसने एक ठण्डी आह के साथ गहरी सांस भरी।
"आह्ह्ह्… मर गयी रे … राजू, तुझे आज ही मै अपनी मोटी गाण्ड का मजा
दूंगी… पर मेरी चूत तो देख चुदने के लिये मरी जा रही है… ले भचाभच चोद दे
इसे…"
वो बहुत ही हीट मे थी। उसे अब एक जबरदस्त चुदायी चाहिये थी। मैने उसे जोर
जोर से चोदना आरम्भ कर दिया। वो मस्त हो कर चुदती रही। वो बहुत ही चुदासी
थी सो जल्दी ही उफ़ान मे आ गयी। कुछ देर मे चुद कर वो झड़ भी गयी। मै बिना
झड़े उसे देखता ही रह गया। वो शांत हो चुकी थी। मेरा लण्ड अभी भी जोर मार
रहा था।
"मजा आ गया राजू … चल अब तेरी बारी है मेरी गाण्ड मार दे …"
मै नीचे दरी पर ही उससे लिपट गया। उसकी पीठ से चिपक कर मैने अपना लण्ड का
सुपाड़ा उसकी गाण्ड के छेद से चिपका दिया। फिर दोनो के मुख से एक मीठी सी
दर्द भरी हल्की चीख निकल गयी। मेरा लण्ड उसकी मस्त गाण्ड मे फ़ंस चुका था।
मै जोर लगा कर लण्ड को और भीतर उतारने लगा।
"मेरे राजू, ओह … लगा दे मस्त जोर … चोद से साली मस्त मोटी गाण्ड को …"
मैं उसकी पीठ से चिपका उसकी गाण्ड को चोदने लगा था। मेरा ये पहला अवसर था
कि मैने किसी औरत की गाण्ड चोदी थी। मुझे ये गाण्ड मरायी बहुत पसन्द आयी।
हौले हौले से उसकी गाण्ड चोदते हुये आखिर मै शहीद हो ही गया। उसकी कसी
हुयी और टाईट गाण्ड मे मेरा माल जल्दी ही निकाल दिया था।
पूरी गर्मी की छुट्ट्यों मे मै शीला के साथ शरीफ़ो की रहते हुये बितायी।
इस दौरान मैने द्वारका, भेंट द्वारका, सोमनाथ का मंदिर और डियू भी घूम
लिया। शीला और मैने इस छुट्टियो मे चुदायी का मनमोहक रस भी बहुत लिया…
ऐसा लगने लगा था कि काश वो जिन्दगी भर के लिये मेरी हो जाये और ऐसे ही
सुहाने दिन हमे नसीब हो…





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