Thursday, September 27, 2012

सेक्सी कहानियाँ जीजा जी से चुदवाया--38

हिंदी सेक्सी कहानियाँ

जीजा जी से चुदवाया--38
गतांक से आगे.......................
में उस दिन गाँव नहीं गई थी जीजाजी की ख़ुशी के लिए रुक गई थी जीजाजी ने
जबरदस्त चुदाई का राउंड खेल लिया था जिसमे में दो बार झड चुकी थी पर
जीजाजी का झंडा अभी ऊँचा ही था और मुझे पता था जब तक वो नीचे नहीं होगा
मेरी चूत की ठुकाई रुकनी नहीं थी और में भी इसके लिए मानसिक रूप से तेयार
थी क्यूंकि मुझे पता था की मेरी सविंदा वाली नौकरी रही नहीं थी और मुझे
और जीजाजी को ऐसा मौका फिर मिलना नहीं था इसलिए में और वो इस मौके को
पूरा अन्जोय करना चाहते थे ! में लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी और जीजाजी
को तृप्त नजरो से देख रही थी की जिन्होंने स्त्री को जो चाहिए वो अतुलनीय
सुख दिया था !जीजाजी भी गहरी सांसे ले रहे थे पर चूँकि उनका माल नहीं
निकला था इसलिए वे मेरे जितनी थके नहीं थे में थोड़ी देर बाद बिना कपड़ों
के ही बाथरूम में गई जीजाजी की नज़रे मेरे पीछे मटकते कूल्हों पर ही टिकी
थी जो मुझे बिना पीछे देखे हुए भी महसूस हो रही थी एक तो जब औरत जब चलती
हे तब उसके कुल्हे बड़े उत्तेजक ढंग से हिलते हे और जब आदमी का पानी नहीं
निकला हुआ हो और लंड खड़ा हो तो इनकी मार दुगुनी हो जाती हे और यही हुआ
जीजाजी के मुह से मादक आह निकल गई ! और में अपने स्त्रीत्व के गुमान से
और इतरा गई और ज्यादा मादक चल चल के बाथरूम में गुस गई !

बाथरूम में मेने अपनी ठुकाई से सूजी और लाल हुई मुनिया को अच्छी तरह पानी
से धोया हालाँकि जब उसे अन्दर से धो रही थी तो हलकी सी टीस महसूस हुई पर
उस टीस में ही मेरे बदन के मादक तार झनझना उठे !में अच्छी तरह से बाथरूम
करके धोके आई तो देखा जीजाजी अपने मोबाइल का केमरा चालू करके पलंग पर
बेठे बेठे ही मेरी फिल्म बना रहे हे में हडबडा गई और बोली क्या करते हो
इसे बंद करो और उस तरफ गई की कोई टावल या कोई कपडा मिल जाये जिससे में
अपना नंगा बदन ढक लू पर मुझे कुछ नहीं मिला जीजाजी भी नंगे ही बेठे थे एक
हाथ से मोबाइल से फिल्म बना रहे थे और एक हाथ उनका लंड पर घूम रहा था में
इस स्थिति की कल्पना नहीं कर सकती थी इसलिए कुछ हडबडा रही थी कुछ चिल्ला
रही थी और कुछ हंस भी रही थी मेरे दूर जाने पर भी मुझे पता था की जीजाजी
झूम कर के फिल्म बना रहे थे इसलिए में दौड़ के सीधे उनकी तरफ ही गई और
उनके मोबाइल के पीछे आ गई तो जीजाजी ने भी हँसते हँसते केमरा बंद कर दिया
मेने कहा आपने फिल्म क्यूँ बनाई वो बोले तुम्हे दिखने के लिए की तुम नंगी
कितनी सेक्सी और खुबसूरत लगती हो और ऐसा कह कर उन्होंने वो फिल्म प्ले कर
दी मेने भी उसमे देखा वास्तव में कितनी बेकार लग रही हु बिलकुल नंगी
हड्बदाती हुई बदहवास सी और भागती हुई जिसमे मेरे स्तन उछल रहे हे मेरी
डरी डरी आवाज़ मेने कहा बेकार हे इसे अभी डिलीट करो जीजाजी ने भी उसी समय
डिलीट कर दी ! मेने शंकित स्वर में पूछा आपके पास और कोई मेरी फिल्म या
ऐसी फोटो तो नहीं हे जीजाजी ने मेने कभी ली ही नहीं आज ही ली हे और उसे
हटा दिया हे मुझे पता हे किसी के हाथ लग जाये तो तेरे और मेरे परिवार में
तूफान आ जाये और अगर में लेता तो तुझे दिखा कर क्यों लेता में भी उनके
चेहरे पर देखते देखते सुनती रही मुझे उनकी बातें निर्दोष लगी और में फिर
से तनाव मुक्त हो कर उनके पास बेठ गई!


जीजाजी ने अपनी बाँहों में भर के मुझे सुला लिया पर में अभी भी उनके
मोबाइल को डरी डरी नज़रों से देख रही थी और बोली पहले इसे स्विच ऑफ करो वो
हंसने लगे और मोबाइल को स्विच ऑफ कर मुझे दे दिया वेसे भी उस मोबाइल से
वे सिर्फ इंटरनेट चलाते थे या मुझे सेक्सी फिल्मे दिखाते थे उनके बात
करने का तो अलग ही मोबाइल था इसलिए उन्होंने उसे स्विच ऑफ कर मुझे दे
दिया मेने भी उसे पलंग की दराज में रख दिया में वास्तव में उनके फिल्म
बनाने के बाद कुछ डर सी गई थी इसलिए वे मुझे भयमुक्त करना चाहते थे ताकि
सेक्स में उनका साथ में बिना किसी झिझक दे सकू ! अब में बिलकुल निश्चिन्त
थी और उनकी बांहों में समाये जा रही थी वे मुझे जितना चिपका सकते थे
चिपका रहे थे वे मेरे बालों पर हाथ फेर कर मेरी जुल्फों को पीछे कर रहे
थे मेरे गलों पर हाथ फेर रहे थे मेरे कंधे और पीठ पर भी हाथ गुम रहे थे
और उनके मुह से हवा में ही मेरे लिए चुम्बन उछल रहे थे हालाँकि मेरे शरीर
का कोई भी भले ही उनके होटों से टच रहे या नहीं चुम्बन लगातार उनके मुह
से निकल रहे थे मुझे पता हे जब आदमी ओरत पर बहुत ज्यादा खुश होता हे तब
ऐसा ही होता हे में भी अपनी तरफ से उनके सीने में गालों पे कभी कभी
चुम्बन झड रही थी और उनके इन प्रयासों से में फिर से गरम हो रही थी !

जीजाजी के हाथ मेरे पुरे बदन पर फिर रहे थे मेरी भी सांसे भरी हो गई थी
जीजाजी ने मेरे हाथ को अपने लंड पर टिका दिया था वह बहुत ही गरम और
विकराल रूप में था ऐसा लग रहा था की कोई गर्म लोहे की राड हो मेरे भी चूत
से सुरसुरी छुट रही थी अब जीजाजी ने अपने लंड से मेरा हाथ हटा लिया था और
वे धीरे धीरे नीचे सरक रहे थे मुझे पता था अब वे मेरी अच्छी तरह से धोई
हुई चूत को चाटेंगे मुझे पता हे की जीजाजी को मेरी चूत चाटना बहुत ही
पसंद हे मुझे भी उनसे चूत चटवाना अच्छा लगता हे में पहली बार जब उन्होंने
मेरी जबरदस्ती चूत चाटी थी तो में उनपे फ़िदा हो गई थी और मेरा सारा
संघर्स ख़त्म हो गया था ! तब से मुझे उनसे चूत चटवाने की कल्पना से ही
आनंद आने लगता हे! और जीजाजी नीचे खिसकते खिसकते आनंद द्वार तक पहुँच गए
थे उनके होटों का किसी गर्म भट्टी की तरह भाप छोड़ती मेरी चूत ने उनके
होटों का स्वागत किया ! उनकी नुकीली जीभ मेरी इन्तजार करती चूत के अन्दर
गुश गई थी और मेरे मुह से एक ख़ुशी की किलकारी सी निकल गई थी!


मेरी ख़ुशी की किलकारी कानो में पड़ते ही जीजाजी के होंट व जीभ गति से
मेरी चूत पर घुमने लगे और थोड़ी देर में उनके जबरदस्त तरीके से चाटने और
हल्का हल्का काटने और मुह में भर कर चूसने से मेरी गारंटी ख़तम हो गई
यानि में झड गई पर जीजाजी के चाटने में कोई कमी नहीं आई और थोड़ी देर में
फिर से गर्म हो गई थी जीजाजी को मेरे पहले झड़ने का पता था इसलिए जब में
फिर से गर्म हुई तो उन्होंने अपना मुह हटा लिया और घुटनों के बल बेथ गए
मुझे पता चल गया की अब मेरे चूत की ठुकाई होगी इसलिए मेने भी उन्हें आनंद
और पूरा सहयोग देने के लिए अपनी टंगे ऊपर उठा ली थी जीजाजी ने भी हाथ
लम्बा कर पलंग की दराज से कंडोम निकला और अपने लंड पर चढ़ा लिया! फिर
अपने हाथ से लंड को पकड़ कर मेरे चूत के छेद पर सुपारे को टिकाया और धीरे
से गस्सा लगाया ये ऐसा सावधानी से करते हे ताकि मुझे तकलीफ न हो गलत जगह
शोट लगने से !

उनका सुपाडा मेरी चूत में धंस गया था मेरे मुह से एक मादक आह निकल गई थी
और फिर उन्होंने सही जगह जान कर करार शोट लगाया उनका लोहे जेसा कदा हो
रहा लंड मेरी योनी की दीवारों को धकेलता हुआ आधे से ज्यादा अन्दर घुस गया
था मेने आने वाले धक्के की चोट को सहन करने के लिए अपनी साँस रोक ली थी
जीजाजी ने भी अपने दन्त भींच कर हल्का सा बहार निकला और फिर झड तक पेल
दिया में चिहुंक उठी मेरी चूत काफी देर के बाद चुदाई के लिए एडजस्ट होती
हे ! अभी जीजाजी का लंड फंसता फंसता अन्दर बाहर हो रहा था जीजाजी ने मेरी
टांगे अपने कंधे पर रख कर मुझे चोद रहे थे मेरी पतली कमर मुड़ी हुई थी और
चूत जितना ऊपर हो सकती थी हो गई थी अब उनका लंड झड तक अन्दर जा रहा था जो
मुझे उनका सामान्य लंड भी विशाल लग रहा था थोड़ी देर की धक्कम पेल के बाद
मेरी चूत की दीवारों ने पसीज पसीज कर कुछ चिकना द्रव छोड़ दिया था जिससे
जीजाजी का लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था जीजाजी को भी पता चल गया था
की मेरी चूत एडजस्ट हो गई हे इसलिए उनके धक्को की स्पीड भी बढ़ गई थी और
वे बेरहम हो कर मुझे चोद रहे थे उनके मुह से किसी भेंसे की तरह हांफने की
आवाजे आ रही थी और बिजली की गति से ऊपर नीचे हो रहे थे में भी उन्हें
पूरा सहयोग दे रही थी और मेरे मुह से भी आआआआआआअह
.......ऊऊऊऊऊऊऊऊऊउह.....अरीईईईईईईई.....sssssssssssssssss..........वोंव
मज़ाआआअ आ रहाआआआआ हे ...........ऊऊऊऊऊऊ रे ......! आदि आवजे निकल रही थी
और जीजाजी के भी पानी आने वाला था इसलिए वे भी hhhhhhhhhaaaaa
hhhhhhhhhhaaaaaaaaaa की आवजे निकल रहे थे और मुझे किसी रुई की बोरी तरह
गुन रहे थे जब उनका पानी निकलने वाला होता हे तब वे पूरी तरह बर्बर हो
जाते हे और मेरे भी पानी छुट रहा था मेरे पानी छूटने का टाइम यानि स्खलन
करीब एक दो मिनिट तक chalata हे इसलिए में भी पूरा साथ दे रही थी साथ ही
झटके खा खा के पानी छोड़ रही थी में पूरी तरह skhlit हो चुकी थी पर जीजाजी
का निकलने के लिए झूठ मुठ ही आह उह कर रही थी और वे भी झटके देते झड गए
थे उस vakt उनके हाथ में मेरी बाजु थी और ऐसा लगा की वे उसे दबा के तोड़
देंगे पर पानी छुटते ही वे मेरे ऊपर से हट कर पास में लेट गए और ठंडी
ठंडी सांसे लेने लगे उनके सर और चेहरे पर पसीना चमक रहा था जिसे वे पास
पड़ी लुंगी से पूंछ रहे थे और अपना कंडोम हटा कर उसके मुंह पर गांठ लगा कर
दराज में दाल दिया था !


जीजाजी का और मेरा दूसरा राउंड पूरा हो गया था और अब हम दोनों ही कुछ हद
तक शांत थे मेने भी मेक्सी पहन ली थी और जीजाजी ने भी लुंगी लपेट ली थी !
में अब टीवी देख रही थी और जीजाजी अपने मोबाईल पर किसी से बाते कर रहे थे
कभी उस से मोबाईल में इंटरनेट चला कर कुछ फोटो देख रहे थे!
मेने सोचा सही रहा जो शाम को ५ बजे ही खाना खा लिया पेट न तो भरा हुआ लग
रहा था और न ही खाली !
रात के करीब ९ -९.३० बज चुके थे अब तक मेरे पास भी मेरे बेटे का फोन आ
गया था और मेने उसे कहा था की सुबह जल्दी ही में उसके पास पहुँच जाउंगी
वो कुछ रुवांसा सा हो गया था पर मेने काम का हवाला दिया और जल्द आने और
उसकी मन पसंद चीज गिफ्ट में देने का वादा कर उसे कुछ खुश कर दिया!
अब सब काम से फारिग होने के बाद मेने जीजाजी को सुबह जल्दी उठने का कह कर
सो जाने को कहा चूँकि अब तक उनकी की चुदाई को करीब एक घंटा हो गया था
इसलिए मुझे पता था अब वे फिर चुदाई करेंगे सुबह तो हमारे पास समय नहीं
रहेगा इसलिए में उन्हें पूरी तरह संतुस्ट कर देना चाहती थी साथ ही में भी
इस होटल के आखिरी आनंद का मज़ा लेना चाहती थी !
इसलिए जब मेने उन्हें सोने का कहा तो वो अपने मोबाईल को छोड़ कर मेरे हाथ
से रिमोट लेकर टीवी बंद किया और बाथरूम के पास की लाईट को छोड़ कर साडी
लाईट ऑफ की और पलंग पर आकर सोते सोते मुझे भी अपनी बाँहों में लेकर लेट
गए!

में जीजाजी के साथ होटल में थी सुबह जल्दी गाँव जाना था और मेरा उनके साथ
ये होटल की आखिरी रात थी {अब तक तो} हमने दो-तीन जबरदस्त चुदाई के राउंड
कर लिए थे और आखिरी चुदाई जो करीब ९ बजे की थी अब १० बज रहे थे यानि पूरा
एक घंटा हो गया था और मेरी मुनिया आज की इस आखिरी चुदाई के इन्तजार में
मच मच कर रही थी अब तक जीजाजी का लंड भी आराम कर के फिर से अन्दर गुश कर
धीएंगा मस्ती करने के लिए बेकरार हो गया था इसलिए जब मेने उन्हें सो जाने
या इशारे में चुदाई शुरू करने को कहा तो उन्होंने बिस्तर पर लेटते लेटते
मुझे अपनी बाँहों में भर लिया था और अपने सीने से चिपका लिया था में भी
उनसे बेल की तरह लिपट गई थी ! जीजाजी ने कास कर मुझे अपनी बाँहों में
भींचा जेसे वे अब मुझे कभी भी अपने से अलग नहीं करेंगे पर उनके जोश से
मेरी हड्डिया कड कड़ा उठी और मेरी साँस भी मेरे सीने में फंसने लगी !
शुक्र था की जीजाजी ने ये भांप कर मुझे छोड़ दिया पर उनके पंजे ने मेरा एक
स्तन दबोच लिया था!

इतनी देर में मेने मेक्सी डाल ली थी पर उन्होंने उसे फुर्ती से मेरे सर
के ऊपर से निकल दी थी और इस काम में उन्हें एक मिनिट भी नहीं लगा अगर में
उसे उतारती तो भी इतना जल्दी नहीं उतार पाती नीचे वेसे भी मेने कुछ नहीं
पहना था अब कम्बल में में बिलकुल नग्न थी जीजाजी की अंडरवीयर भी आगे से
फुल गई थी शायद मेरे गोरे नंगे चिकने बदन पर हाथ फेर कर वो भी उत्तेजित
हो गए थे अब उनके हट यहाँ वहा घूम रहे थे खासकर मेरे स्तनों और मेरी
मुनिया पर उनकी अंगुलियाँ बार बार मेरी सूजी हुई मुनिया के दरवाजों को
छेड़ रही थी और जो चूत की पलके आड़े आ रही थी उन्हें अँगुलियों से हटा रहे
थे और एक अंगुली अपने थूक से गीली कर के उसे मेरे क्लिट पर घिस रहे थे जो
की उत्तेजना में काफी सूज चूका था में सोचती इसे क्या आनंद आता हे की ये
बड़ा हो जाता हे लिंग के साथ घर्सन करने के लिए ! जीजाजी की अंगुली उसके
ऊपर और कभी थोड़ी अन्दर जा रही थी में उत्तेजना में बुरी तरह कसमसा रही थी
अपने पेरो के पंजो को आपस माँ रगड़ रही थी कभी जीजाजी के बालों भरी
पिंडलियों पर घिस रही थी में सोच रही थी जीजाजी जल्दी से कुछ करते कतु
नहीं पर जीजाजी तो आराम से खाने वालो से में हे उन्हें कोई फरक नहीं पद
रहा था आखिर मेने अपना हाथ उनके लंड की तरफ बढाया जीजाजी ने अपनी चड्डी
एक पैर से निकल कर अपने लंड को निरावृत कर दिया और उसे मेरे हाथ में
पकड़ने की सहूलियत दी वो फुफकारे मार रहा था और ये देख कर मेरी चूत में
सुरसुरी तेज हो गई थी में चाह रही थी जीजाजी अब मेरी चूत में दो
अंगुलियाँ डाले और अन्दर गहरे तक डाले मेने उन्हें ये शर्मा कर कह भी
दिया "थोड़ी उंडी घालो और दोय घालो मजो आवे" और सिसकारी भर कर मेने अपनी
गांड उचका भी दी जीजाजी भी अब दो अंगुलिय तेज तेज अन्दर बाहर कर रहे थे
में भी सिस्कारिया भर रही थी और अपनी चूत को उचका उचका कर जितना अन्दर ले
सकती ले रही थी मेरे मुह से अब चीखों जेसी आवाज़े निकल रही थी कमरा वेसे
भी sound प्रूफ था और में hhhhhhhhhhhh ऊऊऊऊऊ aaaaaaaaahhhhhhhhhh
arrrrrrrrrrrrrrre मज़ा आवे रे ओ कई चूत ने मजो आवे कितोक पानी निकले ला
इमू आआआआआ थोडा और जोर सु रघ्दो मारा चीना पर भी थूक लगा कर आंगली फेरो
aaaaaaaaa अब निकले रे ओह्ह्ह्हह्ह्हह्ह म्हारे तो निकल गो में अपनी
उत्तेजना में उनके लंड को पकडे पकडे कस कर मुट्ठिया मार रही थी पर मेरे
पानी निकलते ही में शांत हो गई जीजाजी ने भी मेरे पानी से गीली हुई
अंगुलिय निकली और बोले ले देख तेरा पानी मेने शर्मा के अपना मुह कम्बल
में छुपा लिया और बोली धत्त कितनी गंदे हो कहा कहा हाथ डाल देते हो चलो
धो कर आओ और मेने अपना मुह छुपा लिया !

चूँकि मेरी उत्तेजना शांत हो गई थी इसलिए में वहा से उठकर बाथरूम की तरफ
चली गई और पेसाब कर अपनी मुनिया को अच्छी तरह धोकर आई ! मेरी मुनिया कई
बार की पिटाई से लाल हो चुकी थी पर मुझे पता था अभी इसकी पिटाई और होनी
थी जब तक जीजाजी नहीं थक जाते या उनका डंडा सलामी देने बंद नहीं कर दे और
अभी तो वो तन के खड़ा था ही इसलिए ये चांस नहीं था पर में कभी अपने जीजाजी
और अपने पति को निराश नहीं करती भले ही में कितनी ही दुःख पालू उन्हें मन
नहीं करती ! में बाथरूम से वापिस आई तब जीजाजी बाथरूम की तरफ गए अभी वे
सिर्फ बनियान पहने हुए थे उनका डंडा बेचारा झटके खाता खाता कुछ मुरझा गया
था पर अर्ध उत्तेजित था वे भी बाथरूम में पेशाब कर के आये थे तब तक में
कम्बल में घुस के सो गई थी अब मुझे कुछ नींद आने लगी थी जीजाजी भी कम्बल
में घुस के मेरे पीछे चिपक गए थे और अपने ठन्डे हाथ मेरे सत्न पर घुमाने
लगे में अचानक ठन्डे हाथों के स्पर्श से सिहर गई और जो हलकी नींद आ रही
थी वो भी उड़ गई अब फिर से उनके सामने अपना मुह कर अपना मुह उनके गालों पर
रख कर चुम्बन देने लगी!

जीजाजी के हाथ मेरे स्तन पीठ कुलहो पर घूम रहे थे जब कभी वो मेरे छोटे
छोटे कुल्हे जोश से दबा देते तो में चिहुंक जाती फिर वे भी उन्हें सहला
कर मुझे सांत्वना दे देते कभी उनका हाथ मेरी मुनिया पर भी पहुँच जाता पर
मेरे पैर मिले होने के कारन एक रेखा से ज्यादा उनके नहीं मिलता पर में
उनकी सहायता करने के लिए दोनों टांगो में जगह कर उन्हें ज्यादा जगह
पहुँचने की आज़ादी दे देती मेरा हाथ भी उनके पेट के आस पास कुछ धुंध रहा
था और उनका खूंटा फिर से हाथ में आ गया था वो फिर से फुफकारे मार रहा था
उसके आगे मुझे कुछ गिला सा लग रहा था शायद वो प्री कम छोड़ रहा था !
जीजाजी भी मेरी कमर को पकड़ कर मुझे ऊँचा खिसका रहे थे और खुद नीचे खिसक
रहे थे यानि उनका फेवरिट कम चूत चाटने की काम करना और उस काम में तो
उन्हें मन कर ही नहीं सकती थी मुझे भी वो बहुत अच्छा लगता था इसलिए तो
में उसे अच्छी तरह धोकर आई थी ! जीजाजी जल्दी ही अपने गंतव्य पर पहुँच गए
थे उनकी जीभ का मेरी चूत ने कंप कर स्वागत किया और उनकी जीभ मेरी चूत की
गहराइयों की सैर कर रही थी और में भी अपने कुल्हे उचका कर और अपनी टंगे
जितना चोडी हो सकती उतनी कर के उन्हें अन्दर तक जाने में सहायता कर रही
थी !

कुछ मेरी चूत के पानी और कुछ जीजाजी का मुह खुला होने कारन लार गिरने से
मेरी चूत चिकनी हो गई थी और मेरी चूत ने जीजाजी की जीभ होटों की मेहनत के
आगे हर कर पानी छोड़ दिया था मेने उन्हें दूर धकेल कर अपनी टांगे सिकोड़ ली
थी और अपनी आँखे बंद कर अपनी उखड़ी सांसो के साथ इस अतुलित आनंद के मजे
लेने लगी जीजाजी मेरा इशारा समझ गए की अभी मुझे अपना आनंद लेना हे इसलिए
वे भी बाथरूम में कुल्ला करने चले गए उन्हें पता था मेरी चूत के लगा हुआ
मुह में अपने मुह के पास आने नहीं दूंगी इसलिए वो कुल्ले कर के आये तब तक
में आँखे बंद कर के अपना पानी छुटने का आनंद ले रही थी उनके आने की आहट आ
गई तो में भी अपनी सिकुड़ी टांगे खोल कर सीधा लेट गई थी में कम्बल के
बहार नंगी लेती हुई थी पर शर्म से मेरी आँखे बंद थी ! जीजाजी ने भी अब
देर करना उचित नहीं समझा और मेरी टांगो को घुटनों के पास मोड़ कर मेरी
तन्घो के बीच में घुटनों के बल बेठ गए मेने आने वाले दर्द का दम साध कर
इन्तजार किया क्यूंकि मेरी सूजी हुई चूत में एक बार जब उनके लंड का
सुपाडा घुसेगा तो हलका दर्द होगा ही! और उनका गर्म सुपाडा मेरी चूत के
मुहाने पर लग गया था जीजाजी लैंड को हाथ में पकडे हुए थे वे गलत जगह शोट
लगा कर मेरे दर्द को बढ़ाना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने हाथ से पकड़ कर
हल्का सा दबाव दिया मेरी सूजी हुई चूत की पलकों को खदेड़ता हुआ उनका लंड
अन्दर धंस गया मेरे मुह से एक मादक करह निकल गई ..आआआआआअ.
...ह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह ...अर्र्रर्र्र्रर्रे uhhhhhhhhhhh .....! जीजाजी के
मुह से भी एक ख़ुशी की किलकारी सी निकली ह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
...ह्ह्ह्हहह्ह्ह्ह उनका लंड भी बाहर झटके खा खा कर काफी परेशां था फिर
जीजाजी ने एक और जबरदस्त झटका मारा और उनका पूरा लंड मेरे अन्दर गुश गया
था में भी उनके लैंड की अपनी बच्चे दानी पर ठोकर लगने के अहसास से ही
कराह उठी थी उनकी टॉप के दोनों पहिये मेरी गांड से टकरा रहे थे मुझे पता
चल गया की उनका लंड मेरी चूत में झड तक पहुँच गया हे !

थोड़ी देर तक जीजाजी ने लम्बी लम्बी सांसे ली अब तक उनके लंड को मेरी चूत
की दीवारों ने भी कबूल कर लिया था और फिर उनका लंड अन्दर ठुमकने लगा और
मेरी चूत ने भी उसे दबा कर उसका स्वागत किया थोड़ी देर उनके लंड के ठुमकने
और मेरी चूत के भींच कर फिर उसे छोड़ देने का खेल चलता रहा फिर धीरे धीरे
उनका पिस्टन कुछ ऊपर उठा और फिर से मेरी मांसल चूत में धंस गया फिर उठा
और फिर धंस गया अब तक चूत की दीवारों ने रो रो कर लंड को काफी चिकना कर
दिया था इसलिए अब उसे वो भी झाकड़ कर साथ ऊपर नहीं उठा रही थी और उसे
आराम से ऊपर नीचे जाने और आने दे रही थी इस छुट का लंड भी भरपूर फायदा
उठा रहा था वो पूरा बाहर जाकर फिर पूरा सर्र से अन्दर आ रहा था कमरे फच
फच खप खप की आवाज़े घुंज रही थी उनकी जंघे मेरी जन्घो से टकरा कर सट सट
की अलग ही आवाज़े कर रही थी मेरी चूत में फिर से खुजली होनी शुरू हो गई
थी में हेरान थी की कोई नहीं छेड़ने वाला मिला तो इस मुई चूत में साल भर
भी कभी खुजली नहीं होती और आज जब कोई चोदने वाला हे एक रात में ६-७ बार
पानी निकल जाता हे क्या प्रकर्ति हे अब उनका डंडा पुरे जोर शोर से मेरी
चूत की पिटाई कर रहा था और इसका चूत उलटे मज़े ले रही थी में अपनी टांगे
जितना ऊपर कर सकती थी कर ली थी उनके हाथ मेरी टांगो के नीचे से मेरे कंधे
की तरफ थे में बिलकुल योगा की स्थिति में थी और मेरे स्तन भी बहुत बड़े
हो गए थे में चाह रही थी जीजाजी इन्हें कास कर दबाये और मेने उन्हें ये
कह भी दिया में ज्यादातर अपने स्तन नहीं दब्वती थी इसलिए उन्हें सुखद
आशचर्य हुआ उन्होंने उन्हें पकड़ कर कुछ धक्के लगाये पर उनकी और मेरी
लम्बाई में अंतर होने के कारन ज्यादा देर संभव नहीं हुआ और उन्होंने मेरे
स्तन हाथो से छोड़ दिए ओए मेरे फिर से कंधे पकड़ लिए थोड़ी देर के लिए
उन्होंने मेरे स्तन अपने मुह में भरे कुछ देर स्तन की गुंडी को मुह में
दबाया पर उनकी सीज छोटी होने और लगातार धक्के मारने की वजह से वो भी थोड़ी
देर ही संभव हुआ और उनके लगातार नीचे झुका होने की वजह से उनकी गर्दन में
दर्द होने लगा और वे फिर से इन सब बातो को छोड़ कर तूफानी स्पीड से धक्के
मारने लगे!
क्रमशः.......................

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