FUN-MAZA-MASTI
ट्यूशन का मजा-14
गतांक से आगे..............................
मैडम ने मुझे अपनी टांगों के बीच लिया और बड़े अधिकार से अपनी बुर मेरे मुंह से लगी दी. "तू भी स्वाद ले ले अनिल. तेरी दीदी को तो खूब चखाया मैंने अपना शहद पर आज उसकी भूख ही नहीं मिट रही है, जानता है क्यों?
मैडम की बुर में जीभ डालकर अंदर बाहर करते मैंने आंखों आंखों में पूछा कि क्यों मैडम! वे बोलीं "जब उसने सर के मूसल को तेरी जरा सी गांड में घुसते देखा तो पागल सी हो गयी. पहले कह रही थी कि मैडम, अनिल मर जायेगा. मैंने उसे समझाया कि अरे अनिल को मजा आयेगा देख. जब बाद में सर ने तेरी तरह तरह से मारी और तू भी मजे से मरवाता रहा तो वो चुप हो गयी. वैसे बता अनिल, दर्द हुआ था न बहुत?"
"हां मैडम, लग रहा था कि आज जरूर फ़ट जायेगी, अस्पताल ले जाना पड़ेगा. पर मैडम, बहुत मजा आया मैडम, क्या लंड है सर का, अंदर घुसता था तो इतनी गुदगुदी करता था कि जैसे .... कि जैसे ..."
"जैसे हमारी औरतों की चूत में होती है लंड लेकर. वैसे सर तेरी गांड के आशिक हो गये हैं. इतना खुश मैंने उन्हें नहीं देखा कभी" कहकर कस के उन्होंने मेरे मुंह पर अपनी चूत लगायी और पानी छोड़ दिया.
पानी पी कर मैं बोला "मैडम .... अब मैं आप को चोदूं?"
मैडम मेरे लंड को पकड़कर बोलीं "अरे ये फ़िर सिर उठाने लगा? सच में जवाब नहीं तुम दोनों भाई बहन का, क्या रसीले बच्चे हो तुम लोग! पर नहीं अनिल, आज नहीं, अभी सर का तेरे साथ का लेसन खतम नहीं हुआ है. मैं तो बस लीना की तकलीफ़ दूर करने आयी थी. देखो सर क्या हचक हचक कर चोद रहे हैं तेरी बहन को. वो ठंडी होने को है देख"
सर कस के दीदी को चोद रहे थे, अंदर तक लंड पेल रहे थे. दीदी अपने हाथों से उनके पीठ को नोंच रही थी. फ़िर दीदी चीखी और लस्त हो गयी. पर सर ने उसे नहीं छोड़ा. मेरी ओर मुड़कर बोले "अनिल, यहां ध्यान दो, ये आसन ध्यान से देखो" उन्होंने दीदी के पैर मोड़कर उसकी टांगें दीदी के सिर के इर्द गिर्द कर दीं और फ़िर उसे चोदने लगे.
"देखा? ऐसे मोड़ कर मस्त चोदा जा सकता है, फ़िर छेद कोई भी हो, समझे ना? चाहे चूत में डाल दो या गांड में, आसन यही रहता है. और आगे से मस्त चुम्मे ले लेकर प्यार करते हुए गांड भी चोद सकते हैं."
मैं बोला "हां सर"
दीदी कसमसा रही थी "बस सर ... हो गया .... अब नहीं ... प्लीज़ .... छोड़िये ना .... मत कीजिये सर ...... प्लीज़ ...... मैं झड गयी सर.... बस...." पर सर चोदते रहे. "अरे लीना रानी, ऐसे हथियार नहीं डालते. अब चुदा रही हो तो पूरा चुदाओ" दीदी हल्के हल्के चीखने लगी तो सर ने उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया.
पांच मिनिट में दीदी निश्चल होकर लुढ़क गयी. सर ने लंड बाहर निकाला "लो, ये तो गयी काम से. वैसे बड़ी प्यारी बच्ची है, काफ़ी रसिक है, इसकी चूत क्या गीली थी आज, मैडम ये आपकी स्टूडेंट आपसे भी आगे जायेगी " लंड जब दीदी की चूत से निकला, तो दीदी के पानी से गीला था.
"हां बहुत प्यारी बच्ची है, वैसे तुम्हारा स्टूडेंट भी कम नहीं है. लीना को ले जाऊं या यहीं रहने दूं? और चोदेंगे क्या इसे बाद में? " मैडम उठते हुए बोलीं.
"मैडम, अब कहां ले जायेंगी इसे? आप को उठा कर ले जाना पड़ेगा. इसे यहीं सोने दो बाजू में, आप इसका भोग लगाओ और मुझे अनिल का लेसन पूरा करने दो. आओ अनिल, यहां लेटो बेटे" सर मुझे पास खींचते हुए बोले.
मैडम जब मुझे झड़ाकर मेरा वीर्य खतम करके उठीं तो हंस के बोलीं "ये लड़का तो आपकी चप्पलों का भी आशिक हो गया है लगता है. वैसे ठीक भी है, आप का शिष्य है, आपकी चरण पूजा करेगा तो आशिर्वाद ही पायेगा"
हम सब दस मिनिट ऐसे ही पड़े रहे. फ़िर मैडम बोलीं "चलो, शाम हो गयी, अब तुम लोग जाओ. सोमवार को आना ऐसे ही. खास खेल है. और नानी को बता देना कि सर दो घंटे की एक्सट्रा क्लास लेने वाले हैं"
दीदी अब तक होश में आ गयी थी. बहुत थकी हुई लग रही थी. मैडम ने हम दोनों के लिये शरबत बनाया. उसे पीकर दीदी जरा संभली. हमने कपड़े पहने और चलने लगे. मैं और दीदी दोनों पैर फ़ुतरा कर चल रहे थे. सर बोले "ये लो दो रुपये, रिक्षा से चले जाओ, ऐसे जाओगे तो लोग देख कर कहेंगे कि क्या हो गया. आज आराम करना. परसों एक और अच्छा मजेदार लेसन देंगे तुम लोगों को. मैडम आज कुछ शॉपिंग करने वाली हैं तुम लोगों के लिये"
घर पहूंच कर मैंने दीदी से कहा "दीदी, तू तो एकदम चुदक्कड़ हो गयी है, कैसे चुदवा रही थी सर से!"
दीदी बोली "तू कम था क्या, क्या गांड मरायी सर से? सच बता. दुखा क्या? तेरी गांड में जब वो मूसल घुस रहा था तो मुझे लगा कि अब फ़टी तेरी. पर अनिल, देख कर बहुत मजा आया, गांड में लंड घुसने का नजारा अलग ही होता है, तुझे मजा आया क्या? वैसे हालत खराब थी तेरी"
"हां दीदी, बहुत दुखा. पर दीदी, गांड मराने का मजा और ही है. तू मरायेगी क्या?"
"नहीं बाबा" दीदी कान पर हाथ रखकर बोली "मेरे लिये ये चूत चुदना काफ़ी है. तू ही लिया कर गांड में. सर का लंड कितना अच्छा है ना अनिल? मेरा तो मन ही नहीं भरता, लगता है चौबीसों घंटे चुदवाती रहूं. मैडम कितनी नसीब वाली हैं अनिल, उनको सर का लंड रोज मिलता है. वैसे वो तुझको लड़की और मुझे लड़का बनाने के बारे में क्या बोल रही थीं मैडम?"
"पता नहीं दीदी. परसों पता चल ही जायेगा."
उस रात जल्दी खाना खाकर हम सो गये, बहुत थके थे. नानी भी बोली "हां सो जाओ बच्चो. कितना थक गये हो आज, तुम्हारी सूरत पर से दिखता है. सर और मैडम बहुत पढ़ाते हैं लगता है. बेचारे इतनी मेहनत करते हैं. भगवान उन्हें लंबी उमर दे"
क्रमशः। ...........................
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ट्यूशन का मजा-14
गतांक से आगे..............................
मैडम ने मुझे अपनी टांगों के बीच लिया और बड़े अधिकार से अपनी बुर मेरे मुंह से लगी दी. "तू भी स्वाद ले ले अनिल. तेरी दीदी को तो खूब चखाया मैंने अपना शहद पर आज उसकी भूख ही नहीं मिट रही है, जानता है क्यों?
मैडम की बुर में जीभ डालकर अंदर बाहर करते मैंने आंखों आंखों में पूछा कि क्यों मैडम! वे बोलीं "जब उसने सर के मूसल को तेरी जरा सी गांड में घुसते देखा तो पागल सी हो गयी. पहले कह रही थी कि मैडम, अनिल मर जायेगा. मैंने उसे समझाया कि अरे अनिल को मजा आयेगा देख. जब बाद में सर ने तेरी तरह तरह से मारी और तू भी मजे से मरवाता रहा तो वो चुप हो गयी. वैसे बता अनिल, दर्द हुआ था न बहुत?"
"हां मैडम, लग रहा था कि आज जरूर फ़ट जायेगी, अस्पताल ले जाना पड़ेगा. पर मैडम, बहुत मजा आया मैडम, क्या लंड है सर का, अंदर घुसता था तो इतनी गुदगुदी करता था कि जैसे .... कि जैसे ..."
"जैसे हमारी औरतों की चूत में होती है लंड लेकर. वैसे सर तेरी गांड के आशिक हो गये हैं. इतना खुश मैंने उन्हें नहीं देखा कभी" कहकर कस के उन्होंने मेरे मुंह पर अपनी चूत लगायी और पानी छोड़ दिया.
पानी पी कर मैं बोला "मैडम .... अब मैं आप को चोदूं?"
मैडम मेरे लंड को पकड़कर बोलीं "अरे ये फ़िर सिर उठाने लगा? सच में जवाब नहीं तुम दोनों भाई बहन का, क्या रसीले बच्चे हो तुम लोग! पर नहीं अनिल, आज नहीं, अभी सर का तेरे साथ का लेसन खतम नहीं हुआ है. मैं तो बस लीना की तकलीफ़ दूर करने आयी थी. देखो सर क्या हचक हचक कर चोद रहे हैं तेरी बहन को. वो ठंडी होने को है देख"
सर कस के दीदी को चोद रहे थे, अंदर तक लंड पेल रहे थे. दीदी अपने हाथों से उनके पीठ को नोंच रही थी. फ़िर दीदी चीखी और लस्त हो गयी. पर सर ने उसे नहीं छोड़ा. मेरी ओर मुड़कर बोले "अनिल, यहां ध्यान दो, ये आसन ध्यान से देखो" उन्होंने दीदी के पैर मोड़कर उसकी टांगें दीदी के सिर के इर्द गिर्द कर दीं और फ़िर उसे चोदने लगे.
"देखा? ऐसे मोड़ कर मस्त चोदा जा सकता है, फ़िर छेद कोई भी हो, समझे ना? चाहे चूत में डाल दो या गांड में, आसन यही रहता है. और आगे से मस्त चुम्मे ले लेकर प्यार करते हुए गांड भी चोद सकते हैं."
मैं बोला "हां सर"
दीदी कसमसा रही थी "बस सर ... हो गया .... अब नहीं ... प्लीज़ .... छोड़िये ना .... मत कीजिये सर ...... प्लीज़ ...... मैं झड गयी सर.... बस...." पर सर चोदते रहे. "अरे लीना रानी, ऐसे हथियार नहीं डालते. अब चुदा रही हो तो पूरा चुदाओ" दीदी हल्के हल्के चीखने लगी तो सर ने उसका मुंह अपने मुंह से बंद कर दिया.
पांच मिनिट में दीदी निश्चल होकर लुढ़क गयी. सर ने लंड बाहर निकाला "लो, ये तो गयी काम से. वैसे बड़ी प्यारी बच्ची है, काफ़ी रसिक है, इसकी चूत क्या गीली थी आज, मैडम ये आपकी स्टूडेंट आपसे भी आगे जायेगी " लंड जब दीदी की चूत से निकला, तो दीदी के पानी से गीला था.
"हां बहुत प्यारी बच्ची है, वैसे तुम्हारा स्टूडेंट भी कम नहीं है. लीना को ले जाऊं या यहीं रहने दूं? और चोदेंगे क्या इसे बाद में? " मैडम उठते हुए बोलीं.
"मैडम, अब कहां ले जायेंगी इसे? आप को उठा कर ले जाना पड़ेगा. इसे यहीं सोने दो बाजू में, आप इसका भोग लगाओ और मुझे अनिल का लेसन पूरा करने दो. आओ अनिल, यहां लेटो बेटे" सर मुझे पास खींचते हुए बोले.
मैं
दीदी के बाजू में पेट के बल लेटने लगा तो सर बोले "अरे वो आसन तो हो गया,
अब सामने वाला, बिलकुल जैसे तेरी दीदी को चोदा ना, वैसे. इसलिये तो तुझे
देखने को कहा था मूरख, भूल गया? सीधा लेटो. तू भूल जायेगा कि तेरी गांड मार
रहा हूं, तुझे भी यही लगेगा कि तेरी चूत चोद रहा हूं. ये अपने पैर मोड़ो
बेटे, और ऊपर ... उठा लो ऊपर ... और ऊपर .... अपने सिर तक .... हां अब ठीक
है"
मैंने टांगें उठाईं. सर ने उन्हें मोड कर मेरे टखने मेरे कानों के इर्द गिर्द जमा दिये. कमर दुख रही थी. "अब इन्हें पकड़ो और मुझे अपना काम करने दो" कहकर सर मेरे सामने बैठ गये और लंड मेरी पूरी खुली गांड पर रखकर पेलने लगे. पक्क से लंड आधा अंदर गया. मैंने सिर्फ़ जरा सा सी सी किया, और कुछ नहीं बोला.
"शाबास बेटे, अब तू पूरा तैयार हो गया है, देखा जरा सा भी नहीं चिल्लाया मेरा लंड लेने में. कमर दुखती है क्या ऐसे टांगें मोड़ कर?"
"हां सर" मैंने कबूल किया.
"पहली बार है ना! आदत हो जायेगी. ये आसन बड़ा अच्छा है कमर के लिये, योगासन जैसा ही है. तेरी कमर लड़कियों से ज्यादा लचीली हो जायेगी देखना. अब ये ले पूरा ...." कहकर उन्होंने सधा हुआ जोर लगाया और लंड जड़ तक मेरे चूतड़ों के बीच उतार दिया. एक दो बार वैसे ही उन्होंने लंड अंदर बाहर किया और फ़िर सामने से मेरे ऊपर लेट गये.
"हाय ... सर ...कितना प्यार लग रहा है अनिल इसी हालत में, इसके बाल लंबे कर दो तो कोई कहेगा नहीं इस हाल में कि लड़का है. अनिल, अपनी टांगों से सर के बदन को पकड़ ले बेटे" मैडम लस्त पड़ी दीदी की टांगों को फ़ैलाकर उनके बीच अपना मुंह डालते हुए बोलीं.
मैंने थोड़ा ऊपर उठकर सर की पीठ को बांहों में भींच लिया और अपने पैर उनकी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिये. बहुत अच्छा लग रहा था सर के सुडौल बदन से ऐसे आगे से चिपटकर. मेरा लंड उनके पेट और मेरे पेट के बीच दब गया था.
सर ने प्यार से मुझे चूमा और चोदने लगे. "अच्छा लग रहा है अनिल? या तुझे अनू कहूं. अनिल, थोड़ी देर को समझ ले कि तू लड़की है और चूत चुदा रही है" फ़िर मेरे गाल और आंखें चूमने लगे. वे मुझे हौले हौले चोद रहे थे, बस दो तीन इंच लंड बाहर निकालते और फ़िर अंदर पेलते.
कुछ देर मैं पड़ा पड़ा चुपचाप गांड चुदवाता रहा. फ़िर कमर का दर्द कम हुआ और मेरी गांड ऐसी खिल उठी जैसे मस्ती में पागल कोई चूत. गांड के अंदर मुझे बड़ी मीठी मीठी कसक हो रही थी. जब सर का सुपाड़ा मेरी गांड की नली को घिसता तो मेरी नस नस में सिहरन दौड़ उठती. मेरा लंड भी मस्ती में था, बहुत मीठी मीठी चुभन हो रही थी. मुझे लगा कि लड़कियों के क्लिट में कुछ ऐसा ही लगता होगा.
सर पर मुझे खूब प्यार आने लगा वैसा ही जैसे किसी लड़की को अपने आशिक से चुदवाने में आता होगा. मैंने उन्हें जम के अपनी बांहों में भींचा और बेतहाशा उन्हें चूमने लगा "सर .... मेरे अच्छे सर .... बहुत अच्छा लग रहा है सर..... चोदिये ना .... कस के चोदिये ना .... फ़ाड दीजिये मेरी गां .... चूत .... मेरी चूत को ढीला कर दीजिये सर ..... ओह सर ... आप अब जो कहेंगे मैं ... करूंगा सर .... आप .... आप मेरे भगवान हैं सर ....सर मैं आप को बहुत प्यार करता हूं सर .... सर .... आप को मैं अच्छा लगता हूं ना सर" और कमर उछाल उछाल कर मैं अपनी गांड में सर के लंड को जितना हो सकता है उतना लेने की कोशिश करने लगा.
सर मुझे चूम कर मेरी गांड में लंड पेलते हुए बोले "हां अनू रानी, मैं तुझे प्यार करता हूं. बहुत प्यारी है तू. तूने मुझे बहुत सुख दिया है. अब आगे देखना कि किस तरह से मैं तुझे और तेरी दीदी को चोदूंगा."
मैंने टांगें उठाईं. सर ने उन्हें मोड कर मेरे टखने मेरे कानों के इर्द गिर्द जमा दिये. कमर दुख रही थी. "अब इन्हें पकड़ो और मुझे अपना काम करने दो" कहकर सर मेरे सामने बैठ गये और लंड मेरी पूरी खुली गांड पर रखकर पेलने लगे. पक्क से लंड आधा अंदर गया. मैंने सिर्फ़ जरा सा सी सी किया, और कुछ नहीं बोला.
"शाबास बेटे, अब तू पूरा तैयार हो गया है, देखा जरा सा भी नहीं चिल्लाया मेरा लंड लेने में. कमर दुखती है क्या ऐसे टांगें मोड़ कर?"
"हां सर" मैंने कबूल किया.
"पहली बार है ना! आदत हो जायेगी. ये आसन बड़ा अच्छा है कमर के लिये, योगासन जैसा ही है. तेरी कमर लड़कियों से ज्यादा लचीली हो जायेगी देखना. अब ये ले पूरा ...." कहकर उन्होंने सधा हुआ जोर लगाया और लंड जड़ तक मेरे चूतड़ों के बीच उतार दिया. एक दो बार वैसे ही उन्होंने लंड अंदर बाहर किया और फ़िर सामने से मेरे ऊपर लेट गये.
"हाय ... सर ...कितना प्यार लग रहा है अनिल इसी हालत में, इसके बाल लंबे कर दो तो कोई कहेगा नहीं इस हाल में कि लड़का है. अनिल, अपनी टांगों से सर के बदन को पकड़ ले बेटे" मैडम लस्त पड़ी दीदी की टांगों को फ़ैलाकर उनके बीच अपना मुंह डालते हुए बोलीं.
मैंने थोड़ा ऊपर उठकर सर की पीठ को बांहों में भींच लिया और अपने पैर उनकी कमर के इर्द गिर्द लपेट लिये. बहुत अच्छा लग रहा था सर के सुडौल बदन से ऐसे आगे से चिपटकर. मेरा लंड उनके पेट और मेरे पेट के बीच दब गया था.
सर ने प्यार से मुझे चूमा और चोदने लगे. "अच्छा लग रहा है अनिल? या तुझे अनू कहूं. अनिल, थोड़ी देर को समझ ले कि तू लड़की है और चूत चुदा रही है" फ़िर मेरे गाल और आंखें चूमने लगे. वे मुझे हौले हौले चोद रहे थे, बस दो तीन इंच लंड बाहर निकालते और फ़िर अंदर पेलते.
कुछ देर मैं पड़ा पड़ा चुपचाप गांड चुदवाता रहा. फ़िर कमर का दर्द कम हुआ और मेरी गांड ऐसी खिल उठी जैसे मस्ती में पागल कोई चूत. गांड के अंदर मुझे बड़ी मीठी मीठी कसक हो रही थी. जब सर का सुपाड़ा मेरी गांड की नली को घिसता तो मेरी नस नस में सिहरन दौड़ उठती. मेरा लंड भी मस्ती में था, बहुत मीठी मीठी चुभन हो रही थी. मुझे लगा कि लड़कियों के क्लिट में कुछ ऐसा ही लगता होगा.
सर पर मुझे खूब प्यार आने लगा वैसा ही जैसे किसी लड़की को अपने आशिक से चुदवाने में आता होगा. मैंने उन्हें जम के अपनी बांहों में भींचा और बेतहाशा उन्हें चूमने लगा "सर .... मेरे अच्छे सर .... बहुत अच्छा लग रहा है सर..... चोदिये ना .... कस के चोदिये ना .... फ़ाड दीजिये मेरी गां .... चूत .... मेरी चूत को ढीला कर दीजिये सर ..... ओह सर ... आप अब जो कहेंगे मैं ... करूंगा सर .... आप .... आप मेरे भगवान हैं सर ....सर मैं आप को बहुत प्यार करता हूं सर .... सर .... आप को मैं अच्छा लगता हूं ना सर" और कमर उछाल उछाल कर मैं अपनी गांड में सर के लंड को जितना हो सकता है उतना लेने की कोशिश करने लगा.
सर मुझे चूम कर मेरी गांड में लंड पेलते हुए बोले "हां अनू रानी, मैं तुझे प्यार करता हूं. बहुत प्यारी है तू. तूने मुझे बहुत सुख दिया है. अब आगे देखना कि किस तरह से मैं तुझे और तेरी दीदी को चोदूंगा."
सर ने
मुझे खूब देर चोदा. हचक हचक कर धक्के लगाये और मेरी कमर करीब करीब तोड़ दी.
मैडम दीदी की बुर चूसती रहीं और अपनी बुर में उंगली करके हमारी रति देख कर
मजा लेती रहीं. बीच बीच में मेरे गाल सहला कर शाबासी देती जातीं "बहुत
अच्छा चुदा रहा .... सॉरी सर.... चुदा रही है तू अनू बेटी."
फ़िर बोलीं "सर ... कल एक खेल करते हैं. अनिल को लड़की और लीना को लड़का बनाते हैं. अरे पर कल तो रविवार है"
"हम लोग आ जायेंगे मैडम" मैंने और लीना ने एक आवाज में कहा.
"नहीं, आराम करो जरा. आराम करोगे तो सोमवार को और मजा आयेगा."
सर मेरी गांड में लंड पेलते हुए बोले "बहुत .... अच्छा .... खयाल .... है .... मैडम. आप तैयारी कर लीजियेगा. वो आपकी .... पैडेड ब्रा .... है .... ना ... वो निकाल ... कर रखिये .... और बालों का ... वो क्या ..... करेंगीं मैडम"
"आप फ़िकर मत कीजिये सर ... मैं विग ले आऊंगी आज शाम को. वो डिल्डो तो है ना जो हम रोज यूज़ करते हैं?" मैडम ने पूछा.
"हां .... यहीं .... रखा है .... इन तीन .... दिनों में .... जरूरत ... ही नहीं .... पड़ी .... देखिये .... ये बच्चे .... इतने होशियार .... निकले ...... ओह .... ओह .... अनू रानी .... अनिल राजा ..." और चौधरी सर भलभला कर झड़ गये. मैं कमर चलाता रहा क्योंकि मेरा लंड पागल सा हो गया था.
सर ने लंड मेरी गांड से निकाला और प्यार से मेरे मुंह में दे दिया "ले अनू रानी .... ऐश कर ... मेहनत का फ़ल चख"
मैडम ने मेरी गांड के छेद पर उंगली फ़िरायी "सर, आप ने तो इसकी गुफ़ा बना दी एक दिन में"
"छेद हो जायेगा फ़िर छोटा मैडम, आखिर जवान लड़का है" सर लेट कर सुस्ताते हुए बोले.
मैडम मेरे लंड को सहलाती हुई बोलीं. "इसे देखिये सर, है जरा सा और नुन्नी भर है पर ये कैसे कसमसा रहा है जैसे मजा आ रहा हो, क्यों रे अनिल, अच्छा लगता है?"
"हां मैडम, बहुत मीठा लग रहा है लंड में" मैं मैडम का हाथ पकड़कर अपने लंड पर और जोर से घिसने की कोशिश करते हुए बोला.
"मैडम. ऐसा होता है .... जब ज्यादा गांड मार ली जाये तो ऐसा ही होता है, लंड खड़ा नहीं होता पर मजा बहुत आता है. माल मिलेगा इसमें से. आप का मूड है या मैं चूस लूं"
पर मैडम कहां छोड़ने वाली थीं. झट से मेरी नुन्नी मुंह में ली और चूस डाली. मुझे इतना मजा आ रहा था कि समझ में नहीं आया क्या करूं. नजर सर की चप्पल पर पड़ी तो बिना सोचे समझे हाथ बड़ाकर चप्पल उठा ली और मुंह में ले कर चूसने चाटने लगा. सर प्यार से देखकर मुस्कराते रहे. अपने हाथ में उन्होंने अपनी दूसरी चप्पल ले ली और मेरे गालों और आंखों पर फ़ेरने लगे.
फ़िर बोलीं "सर ... कल एक खेल करते हैं. अनिल को लड़की और लीना को लड़का बनाते हैं. अरे पर कल तो रविवार है"
"हम लोग आ जायेंगे मैडम" मैंने और लीना ने एक आवाज में कहा.
"नहीं, आराम करो जरा. आराम करोगे तो सोमवार को और मजा आयेगा."
सर मेरी गांड में लंड पेलते हुए बोले "बहुत .... अच्छा .... खयाल .... है .... मैडम. आप तैयारी कर लीजियेगा. वो आपकी .... पैडेड ब्रा .... है .... ना ... वो निकाल ... कर रखिये .... और बालों का ... वो क्या ..... करेंगीं मैडम"
"आप फ़िकर मत कीजिये सर ... मैं विग ले आऊंगी आज शाम को. वो डिल्डो तो है ना जो हम रोज यूज़ करते हैं?" मैडम ने पूछा.
"हां .... यहीं .... रखा है .... इन तीन .... दिनों में .... जरूरत ... ही नहीं .... पड़ी .... देखिये .... ये बच्चे .... इतने होशियार .... निकले ...... ओह .... ओह .... अनू रानी .... अनिल राजा ..." और चौधरी सर भलभला कर झड़ गये. मैं कमर चलाता रहा क्योंकि मेरा लंड पागल सा हो गया था.
सर ने लंड मेरी गांड से निकाला और प्यार से मेरे मुंह में दे दिया "ले अनू रानी .... ऐश कर ... मेहनत का फ़ल चख"
मैडम ने मेरी गांड के छेद पर उंगली फ़िरायी "सर, आप ने तो इसकी गुफ़ा बना दी एक दिन में"
"छेद हो जायेगा फ़िर छोटा मैडम, आखिर जवान लड़का है" सर लेट कर सुस्ताते हुए बोले.
मैडम मेरे लंड को सहलाती हुई बोलीं. "इसे देखिये सर, है जरा सा और नुन्नी भर है पर ये कैसे कसमसा रहा है जैसे मजा आ रहा हो, क्यों रे अनिल, अच्छा लगता है?"
"हां मैडम, बहुत मीठा लग रहा है लंड में" मैं मैडम का हाथ पकड़कर अपने लंड पर और जोर से घिसने की कोशिश करते हुए बोला.
"मैडम. ऐसा होता है .... जब ज्यादा गांड मार ली जाये तो ऐसा ही होता है, लंड खड़ा नहीं होता पर मजा बहुत आता है. माल मिलेगा इसमें से. आप का मूड है या मैं चूस लूं"
पर मैडम कहां छोड़ने वाली थीं. झट से मेरी नुन्नी मुंह में ली और चूस डाली. मुझे इतना मजा आ रहा था कि समझ में नहीं आया क्या करूं. नजर सर की चप्पल पर पड़ी तो बिना सोचे समझे हाथ बड़ाकर चप्पल उठा ली और मुंह में ले कर चूसने चाटने लगा. सर प्यार से देखकर मुस्कराते रहे. अपने हाथ में उन्होंने अपनी दूसरी चप्पल ले ली और मेरे गालों और आंखों पर फ़ेरने लगे.
मैडम जब मुझे झड़ाकर मेरा वीर्य खतम करके उठीं तो हंस के बोलीं "ये लड़का तो आपकी चप्पलों का भी आशिक हो गया है लगता है. वैसे ठीक भी है, आप का शिष्य है, आपकी चरण पूजा करेगा तो आशिर्वाद ही पायेगा"
हम सब दस मिनिट ऐसे ही पड़े रहे. फ़िर मैडम बोलीं "चलो, शाम हो गयी, अब तुम लोग जाओ. सोमवार को आना ऐसे ही. खास खेल है. और नानी को बता देना कि सर दो घंटे की एक्सट्रा क्लास लेने वाले हैं"
दीदी अब तक होश में आ गयी थी. बहुत थकी हुई लग रही थी. मैडम ने हम दोनों के लिये शरबत बनाया. उसे पीकर दीदी जरा संभली. हमने कपड़े पहने और चलने लगे. मैं और दीदी दोनों पैर फ़ुतरा कर चल रहे थे. सर बोले "ये लो दो रुपये, रिक्षा से चले जाओ, ऐसे जाओगे तो लोग देख कर कहेंगे कि क्या हो गया. आज आराम करना. परसों एक और अच्छा मजेदार लेसन देंगे तुम लोगों को. मैडम आज कुछ शॉपिंग करने वाली हैं तुम लोगों के लिये"
घर पहूंच कर मैंने दीदी से कहा "दीदी, तू तो एकदम चुदक्कड़ हो गयी है, कैसे चुदवा रही थी सर से!"
दीदी बोली "तू कम था क्या, क्या गांड मरायी सर से? सच बता. दुखा क्या? तेरी गांड में जब वो मूसल घुस रहा था तो मुझे लगा कि अब फ़टी तेरी. पर अनिल, देख कर बहुत मजा आया, गांड में लंड घुसने का नजारा अलग ही होता है, तुझे मजा आया क्या? वैसे हालत खराब थी तेरी"
"हां दीदी, बहुत दुखा. पर दीदी, गांड मराने का मजा और ही है. तू मरायेगी क्या?"
"नहीं बाबा" दीदी कान पर हाथ रखकर बोली "मेरे लिये ये चूत चुदना काफ़ी है. तू ही लिया कर गांड में. सर का लंड कितना अच्छा है ना अनिल? मेरा तो मन ही नहीं भरता, लगता है चौबीसों घंटे चुदवाती रहूं. मैडम कितनी नसीब वाली हैं अनिल, उनको सर का लंड रोज मिलता है. वैसे वो तुझको लड़की और मुझे लड़का बनाने के बारे में क्या बोल रही थीं मैडम?"
"पता नहीं दीदी. परसों पता चल ही जायेगा."
उस रात जल्दी खाना खाकर हम सो गये, बहुत थके थे. नानी भी बोली "हां सो जाओ बच्चो. कितना थक गये हो आज, तुम्हारी सूरत पर से दिखता है. सर और मैडम बहुत पढ़ाते हैं लगता है. बेचारे इतनी मेहनत करते हैं. भगवान उन्हें लंबी उमर दे"
क्रमशः। ...........................
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