FUN-MAZA-MASTI
ट्यूशन का मजा-16
गतांक से आगे..............................
क्रमशः। ...........................
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ट्यूशन का मजा-16
गतांक से आगे..............................
मैडम
ने भी मेरा लंड चूत से निकाला और सर के पास बैठ गयीं. "सर आप शुरू कीजिये,
मन ही मन ये तैयार है, बस शरमा कर ना कर रही है. आखिर लड़का बनी है तो लड़के
जैसे तो मराना ही पड़ेगा." कह कर उन्होंने लीना को पट लिटा दिया. लीना डर से
चिल्लाने लगी. "अनिल .... बचा ना ... प्लीज़ ..... मैं मर जाऊंगी ....मैडम
.... ऐसा मत कीजिये प्लीज़"
"सर, इसका मुंह बंद करना पड़ेगा. लगता है बहुत रोयेगी धोएगी. और ये अनू भी बहुत चपड़ चपड़ कर रहा ... मेरा मतलब ... कर रही है.क्या इस्तेमाल करूं इनका मुंह बंद करने को?’ मैडम बोलीं.
"मैडम, वही इस्तेमाल करेंगे जो करना चाहिये. आखिर हमारे स्टूडेंट हैं, हमारी चरण पूजा करना अपना सौभग्य मानते हैं, इन्हें अपने सर और मैडम की चप्पल कितनी पसंद हैं आपने देखा है ना?"
"सर तो मैं ऐसा करती हूं कि अपनी चप्पल इस अनू के मुंह में दे देती हूं. वो चिल्ला तो नहीं रही है पर मस्ती में है. इसे मजा आयेगा, बड़ी शौकीन है चप्पलों की, कल देखा ना! क्यों अनिल ... मेरा मतलब है अनू रानी? और आप लीना के मुंह में अपनी चप्पल दे दीजिये. आपकी प्यारी शिष्या है और आखिर जब आप उसकी गांड मार रहे हैं तो उसके मुंह में भी आप ही की चप्पल होनी चाहिये"
मैडम ने अपनी एक रबर की चप्पल उठाई और मेरे मुंह पर फ़ेरने लगी. मैं ऐसी मस्ती में था कि मुंह खोल कर मैडम की चप्पल आधी मुंह में भर ली और चूसने लगा. लंड मस्ती में खड़ा था. लीना की गांड मारी जाने की बात सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया था, मालूम था कि आज दीदी की खैर नहीं पर उसकी नरम नरम गांड में सर का महाकाय मूसल देखने को मरा जा रहा था. सर को मालूम था कि मेरे मन में क्या चल रहा है, वे मेरी ओर देखकर मुस्कराये और बोले "लीना, तू क्यों डरती है, अपने भाई को देख, सिर्फ़ गांड मारने के नाम से ही कैसा मस्त हो गया है. एक बार तू मरा लेगी तो फ़िर बाद में खुद ही करवाया करेगी. चल मुंह खोल"
लीना मुंह खोल नहीं रही थी. बस सर के हाथ में की उनकी चप्पल को घबरा कर देख रही थी. मैडम ने उसके गाल दबाकर मुंह खुलवाया और सर ने अपनी चप्पल का पंजा दीदी के मुंह में ठूंस दिया.
"अरे इतना सा? और ठूंसो ना" मैडम बोलीं.
"अरे इतनी कोमल बच्ची .... मेरा मतलब बच्चा है"
"तो क्या हुआ? ठीक से मुंह बंद करो उसका. नहीं तो चिल्लाने लगेगी. आप का मूसल उसे भारी पड़ने वाला है. और लीना, तुझे तो खुश होना चाहिये, ये तो तुझे अपने टीचर का, अपने सर का आशिर्वाद मिला है उनकी चप्पल के रूप में, ठीक से स्वाद ले उसका"
"बात तो सच है" कहकर सर बोले "लीना, और मुंह में ले मेरी चप्पल, और .... और अंदर जाने दे .... मुंह भर जाने दे .. ठहर मैं दिखाता हूं" कहकर सर ने दीदी का सिर पकड़ा और कस के चप्पल उसके मुंह में और ठूंस दी. दीदी का बदन कपकपाने लगा. बेचारी गों गों करने लगी.
"अब ठीक है" कहकर सर ने उसका मुश्कें बंधा बदन नीचे रखा और दीदी के चूतड़ों में मुंह डाल दिया. "क्या खजाना है मैडम, कब से सोच रहा था कि कब इसका भोग लगाने का मौका मिलेगा." और दीदी के चूतड़ों को चूमने और चाटने लगे. बीच बीच में दीदी की गांड का छेद चूसने लगते.
"आप ने चूमा और चूसा तो था सर कई बार" मैडम उनको देखते हुए बोलीं.
"अरे हां पर आज उनमें घुसने का मौका मिल रहा है. मैडम वो मख्खन ले आइये, सिर्फ़ तेल से काम नहीं चलेगा"
"सर, इसका मुंह बंद करना पड़ेगा. लगता है बहुत रोयेगी धोएगी. और ये अनू भी बहुत चपड़ चपड़ कर रहा ... मेरा मतलब ... कर रही है.क्या इस्तेमाल करूं इनका मुंह बंद करने को?’ मैडम बोलीं.
"मैडम, वही इस्तेमाल करेंगे जो करना चाहिये. आखिर हमारे स्टूडेंट हैं, हमारी चरण पूजा करना अपना सौभग्य मानते हैं, इन्हें अपने सर और मैडम की चप्पल कितनी पसंद हैं आपने देखा है ना?"
"सर तो मैं ऐसा करती हूं कि अपनी चप्पल इस अनू के मुंह में दे देती हूं. वो चिल्ला तो नहीं रही है पर मस्ती में है. इसे मजा आयेगा, बड़ी शौकीन है चप्पलों की, कल देखा ना! क्यों अनिल ... मेरा मतलब है अनू रानी? और आप लीना के मुंह में अपनी चप्पल दे दीजिये. आपकी प्यारी शिष्या है और आखिर जब आप उसकी गांड मार रहे हैं तो उसके मुंह में भी आप ही की चप्पल होनी चाहिये"
मैडम ने अपनी एक रबर की चप्पल उठाई और मेरे मुंह पर फ़ेरने लगी. मैं ऐसी मस्ती में था कि मुंह खोल कर मैडम की चप्पल आधी मुंह में भर ली और चूसने लगा. लंड मस्ती में खड़ा था. लीना की गांड मारी जाने की बात सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया था, मालूम था कि आज दीदी की खैर नहीं पर उसकी नरम नरम गांड में सर का महाकाय मूसल देखने को मरा जा रहा था. सर को मालूम था कि मेरे मन में क्या चल रहा है, वे मेरी ओर देखकर मुस्कराये और बोले "लीना, तू क्यों डरती है, अपने भाई को देख, सिर्फ़ गांड मारने के नाम से ही कैसा मस्त हो गया है. एक बार तू मरा लेगी तो फ़िर बाद में खुद ही करवाया करेगी. चल मुंह खोल"
लीना मुंह खोल नहीं रही थी. बस सर के हाथ में की उनकी चप्पल को घबरा कर देख रही थी. मैडम ने उसके गाल दबाकर मुंह खुलवाया और सर ने अपनी चप्पल का पंजा दीदी के मुंह में ठूंस दिया.
"अरे इतना सा? और ठूंसो ना" मैडम बोलीं.
"अरे इतनी कोमल बच्ची .... मेरा मतलब बच्चा है"
"तो क्या हुआ? ठीक से मुंह बंद करो उसका. नहीं तो चिल्लाने लगेगी. आप का मूसल उसे भारी पड़ने वाला है. और लीना, तुझे तो खुश होना चाहिये, ये तो तुझे अपने टीचर का, अपने सर का आशिर्वाद मिला है उनकी चप्पल के रूप में, ठीक से स्वाद ले उसका"
"बात तो सच है" कहकर सर बोले "लीना, और मुंह में ले मेरी चप्पल, और .... और अंदर जाने दे .... मुंह भर जाने दे .. ठहर मैं दिखाता हूं" कहकर सर ने दीदी का सिर पकड़ा और कस के चप्पल उसके मुंह में और ठूंस दी. दीदी का बदन कपकपाने लगा. बेचारी गों गों करने लगी.
"अब ठीक है" कहकर सर ने उसका मुश्कें बंधा बदन नीचे रखा और दीदी के चूतड़ों में मुंह डाल दिया. "क्या खजाना है मैडम, कब से सोच रहा था कि कब इसका भोग लगाने का मौका मिलेगा." और दीदी के चूतड़ों को चूमने और चाटने लगे. बीच बीच में दीदी की गांड का छेद चूसने लगते.
"आप ने चूमा और चूसा तो था सर कई बार" मैडम उनको देखते हुए बोलीं.
"अरे हां पर आज उनमें घुसने का मौका मिल रहा है. मैडम वो मख्खन ले आइये, सिर्फ़ तेल से काम नहीं चलेगा"
मैडम
जाकर किचन से कटोरी भर मख्खन ले आईं. फ़िर खुद ही सर के लंड और दीदी की गांड
में लगाने लगीं. बोलीं. "सर आज आपका घोड़े जैसा हो गया है. चलो अच्छा हुआ
कि आप को मन की मुराद मिलने वाली है. मन भर के गांड मारने मिलेगी अब से."
फ़िर मेरी ओर मुड़ कर बोलीं "अनिल, पता है कि ये पहले मेरी मारा करते थे. अब
तुम लोग आ गये हो तो मेरी गांड की तो जान छूटी कम से कम. वैसे तुमको मजा
आता है ये मुझे मालूम है"
"अरे लड़कों को मजा आयेगा ही. बस लड़कियां रोती हैं. वैसे ये लड़की है बहुत गरम, एक दो बार में सीख लेगी. बस आज की बात है. समझी लीना? आज सहन कर ले, फ़िर जब खुद मरवाने लगेगी तो मैं मुंह में चप्पल देना भी बंद कर दूंगा. पर आज तो मुंह में रहेगी तेरे, वैसे स्वाद ले उसका, तुझे अच्छा लगेगा, तेरे भाई की तो पसंद की चीज है" सर बोले.
"सर ... सर मैं लूंगा सर आपकी चप्पल मुंह में मराते समय, बहुत मजा आता है सर ... और मैडम की भी" मैं कहना चाहता था पर मैडम की चप्पल मुंह में थी इसलिये चुप रहा.
"चलिये सर, अपना काम कीजिये, आपकी शिष्या तैयार है" मैडम ने हाथ पोछे और बाजू में हो गयीं और मेरा लंड अपनी चूंचियों के बीच लेकर रगड़ने लगीं.
"मैडम, भर दिया ना अंदर तक? बेचारी को ज्यादा तकलीफ़ हो ये मैं नाहीं चाहता" चौधरी सर बोले.
मैडम खिलखिला उठीं "मैं अच्छा तरह जानती हूं आप्को क्या चाहिये. चलिये अब मारिये, और मैंने अंदर तक भर दिया है मख्खन, पेट तक घुसेंगे तो भी सट से चला जायेगा"
सर दीदी के बदन के दोनों ओर घुटने जमा कर बैठते हुए बोले "मैडम, आप आयेंगी यहां जरा? मुझे मदद कीजिये"
"क्या हुआ सर, बांधा तो है आपके खिलौने को. कोई तकलीफ़ नहीं होगी, आखिर जरा सी तो बच्ची है"
"हां पर बड़ी हिल डुल रही है, छूटने की कोशिश कर रही है, जरा इसे पकड़िये"
मैडम ने कस के लीना की कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से उसका सिर नीचे बिस्तर में दबा दिया. "मारिये सर अब. मन लगाकर मारिये, ये कहीं नहीं जायेगी अभी"
सर ने लीना के चूतड़ खोले और उसके जरा से छेद में अपना सेब जैसा सुपाड़ा फ़ंसा दिया. फ़िर पेलने लगे. दीदी का बदन कपकपाने लगा.
"आज आपका सुपाड़ा नहीं फ़िसला सर? पिछली बार उस लड़की ... क्या नाम था उसका .... वो बड़ी सेक्सी बदमाश लड़की थी बॉब कट वाली? ... हां .... रीता ... आपका बार बार फ़िसल जाता था, आधा घंटा लग गया था उसकी लेने में." मैडम बोलीं.
"अरे उसे बांधा नहीं था ना, आप ने सिर्फ़ मुंह पकड़ा था. आज इंतजाम अच्छा है. जल्दी पेल दूंगा" सर दीदी की गांड में अपना लंड पेलते हुए बोले.
"उसकी तो फ़ाड़ भी दी थी आप ने. डाक्टर के यहां ले जाना पड़ा था. अच्छा हुआ कि होस्टल की लड़की थी और डॉक्टर भी पहचान का था. और वो रीता भी मेरे ऊपर फिदा थी इसलिये मैंने किसी तरह मना लिया था, नहीं तो जरूर बड़ा लफ़ड़ा होता था सर" मैडम की बात सुनकर मैं अपनी कमर उचकाने लगा, लंड और तन गया. मैडम देखकर हंस कर बोलीं "ये अनिल देखो कैसा बदमाश है, दीदी की गांड फ़टने की बात सुनकर ही मजा आ गया इसको"
"अरे मैडम, ये मरवा चुका है ना, इसे मालूम है इसका मजा. वैसे आज ऐसा नहीं होगा. फ़ाड़ूंगा नहीं, आखिर इतनी प्यारी बच्ची है, आखिर साल भर मारनी है इसकी. हां मजे ले लेकर सारे दिन मारूंगा आज" कहकर सर ने और लंड पेला और सुपाड़ा आधा दीदी के गुदा में धंस गया. दीदी छटपटाने लगी. शायद चिल्लाने की कोशिश कर रही थी पर मुंह से बस हल्का सा ’गों’ गों’ निकल रहा था.
सर रुक गये. थोड़ा सा सुपाड़ा बाहर खींचा और फ़िर थोड़ा अंदर किया. "क्या सर छोकरी को तड़पा रहे हैं आप. मैंने वो टी वी पे देखा था, एक शेर हिरन के बच्चे का ऐसा ही शिकार कर रहा था" मैडम सर को चूम कर बोलीं.
"हां मैडम, इसीमें तो आधा मजा है. इतना टाइट पकड़ा है इस छोकरी की गांड ने मुझे कि लगता है मखमली शिकंजा है. धीरे धीरे इसका छेद चौड़ा करूंगा और फ़िर अंदर डालूंगा" सर बोले और दीदी के चूतड़ मसलने लगे. कई बार उन्होंने आधा सुपाड़ा दीदी की गांड में फ़ंसाया और फ़िर अंदर बाहर करके फ़िर निकाल लिया. दीदी बस धीरे धीरे सिसक रही थी.
"अरे लड़कों को मजा आयेगा ही. बस लड़कियां रोती हैं. वैसे ये लड़की है बहुत गरम, एक दो बार में सीख लेगी. बस आज की बात है. समझी लीना? आज सहन कर ले, फ़िर जब खुद मरवाने लगेगी तो मैं मुंह में चप्पल देना भी बंद कर दूंगा. पर आज तो मुंह में रहेगी तेरे, वैसे स्वाद ले उसका, तुझे अच्छा लगेगा, तेरे भाई की तो पसंद की चीज है" सर बोले.
"सर ... सर मैं लूंगा सर आपकी चप्पल मुंह में मराते समय, बहुत मजा आता है सर ... और मैडम की भी" मैं कहना चाहता था पर मैडम की चप्पल मुंह में थी इसलिये चुप रहा.
"चलिये सर, अपना काम कीजिये, आपकी शिष्या तैयार है" मैडम ने हाथ पोछे और बाजू में हो गयीं और मेरा लंड अपनी चूंचियों के बीच लेकर रगड़ने लगीं.
"मैडम, भर दिया ना अंदर तक? बेचारी को ज्यादा तकलीफ़ हो ये मैं नाहीं चाहता" चौधरी सर बोले.
मैडम खिलखिला उठीं "मैं अच्छा तरह जानती हूं आप्को क्या चाहिये. चलिये अब मारिये, और मैंने अंदर तक भर दिया है मख्खन, पेट तक घुसेंगे तो भी सट से चला जायेगा"
सर दीदी के बदन के दोनों ओर घुटने जमा कर बैठते हुए बोले "मैडम, आप आयेंगी यहां जरा? मुझे मदद कीजिये"
"क्या हुआ सर, बांधा तो है आपके खिलौने को. कोई तकलीफ़ नहीं होगी, आखिर जरा सी तो बच्ची है"
"हां पर बड़ी हिल डुल रही है, छूटने की कोशिश कर रही है, जरा इसे पकड़िये"
मैडम ने कस के लीना की कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से उसका सिर नीचे बिस्तर में दबा दिया. "मारिये सर अब. मन लगाकर मारिये, ये कहीं नहीं जायेगी अभी"
सर ने लीना के चूतड़ खोले और उसके जरा से छेद में अपना सेब जैसा सुपाड़ा फ़ंसा दिया. फ़िर पेलने लगे. दीदी का बदन कपकपाने लगा.
"आज आपका सुपाड़ा नहीं फ़िसला सर? पिछली बार उस लड़की ... क्या नाम था उसका .... वो बड़ी सेक्सी बदमाश लड़की थी बॉब कट वाली? ... हां .... रीता ... आपका बार बार फ़िसल जाता था, आधा घंटा लग गया था उसकी लेने में." मैडम बोलीं.
"अरे उसे बांधा नहीं था ना, आप ने सिर्फ़ मुंह पकड़ा था. आज इंतजाम अच्छा है. जल्दी पेल दूंगा" सर दीदी की गांड में अपना लंड पेलते हुए बोले.
"उसकी तो फ़ाड़ भी दी थी आप ने. डाक्टर के यहां ले जाना पड़ा था. अच्छा हुआ कि होस्टल की लड़की थी और डॉक्टर भी पहचान का था. और वो रीता भी मेरे ऊपर फिदा थी इसलिये मैंने किसी तरह मना लिया था, नहीं तो जरूर बड़ा लफ़ड़ा होता था सर" मैडम की बात सुनकर मैं अपनी कमर उचकाने लगा, लंड और तन गया. मैडम देखकर हंस कर बोलीं "ये अनिल देखो कैसा बदमाश है, दीदी की गांड फ़टने की बात सुनकर ही मजा आ गया इसको"
"अरे मैडम, ये मरवा चुका है ना, इसे मालूम है इसका मजा. वैसे आज ऐसा नहीं होगा. फ़ाड़ूंगा नहीं, आखिर इतनी प्यारी बच्ची है, आखिर साल भर मारनी है इसकी. हां मजे ले लेकर सारे दिन मारूंगा आज" कहकर सर ने और लंड पेला और सुपाड़ा आधा दीदी के गुदा में धंस गया. दीदी छटपटाने लगी. शायद चिल्लाने की कोशिश कर रही थी पर मुंह से बस हल्का सा ’गों’ गों’ निकल रहा था.
सर रुक गये. थोड़ा सा सुपाड़ा बाहर खींचा और फ़िर थोड़ा अंदर किया. "क्या सर छोकरी को तड़पा रहे हैं आप. मैंने वो टी वी पे देखा था, एक शेर हिरन के बच्चे का ऐसा ही शिकार कर रहा था" मैडम सर को चूम कर बोलीं.
"हां मैडम, इसीमें तो आधा मजा है. इतना टाइट पकड़ा है इस छोकरी की गांड ने मुझे कि लगता है मखमली शिकंजा है. धीरे धीरे इसका छेद चौड़ा करूंगा और फ़िर अंदर डालूंगा" सर बोले और दीदी के चूतड़ मसलने लगे. कई बार उन्होंने आधा सुपाड़ा दीदी की गांड में फ़ंसाया और फ़िर अंदर बाहर करके फ़िर निकाल लिया. दीदी बस धीरे धीरे सिसक रही थी.
थोड़ी
देर खेलने के बाद सर ने फ़िर जोर लगाया और पक्क से अपना सुपाड़ा दीदी की गांड
के अंदर कर दिया. दीदी जोर से तड़पी और उठने की कोशिश करने लगी. मैडम ने
उसे दबोचे रखा. सर मस्ती में आकर मैडम को जोर से चूमने लगे "ओह मैडम ... ओह
... आपकी यह स्टुडेंट तो ..... गुड़िया है .... रबड़ की गुड़िया .... मजा आ
गया मैडम"
मैडम सर के चूतड़ दबा कर बोलीं "अब पूरा डाल दीजिये सर, जड़ तक, मैं देखना चाहती हूं कि क्या होता है, वैसे ये लड़की ले नहीं पायेगी आपका लंबा डंडा, इसके मुंह से निकल आयेगा देखियेगा"
सर ने जोर लगाया और लंड दीदी की गांड में घुसने लगा. इस बार सर नहीं रुके और पेलते रहे. अचानक कच्च से उनका आधा लंड दीदी के चूतड़ों को चौड़ा करता हुआ अंदर घुस गया. दीदी अब बुरी तरह से तड़प रही थी और उसके बदन में झटके पड़ रहे थे.
"ये हुई ना बात, ओह सर ... ले लिया इस जवान कन्या ने, मुझे नहीं लेगा था कि ले पायेगी" मैडम अपनी बुर को घिसते हुए बोलीं.
"हां मैडम .... ओह मैडम .... मैडम .... मैं झड़ने वाला हूं ..." कहकर सर ने मस्ती में आंखें बंद कर लीं. मैडम ने उनके लंड का बेस को जोर से दबाया और झड़ने से रोक दिया. "अरे सर ... क्या कर रहे हैं आप, इतनी मुश्किल से ये तमन्ना आप की पूरी हुई है, अब ठीक से चोदिये आपकी शिष्या को"
सर एक मिनिट वैसे ही बैठे रहे, फ़िर बोले "धन्यवाद मैडम, आप ने बचा लिया नहीं तो हमेशा मैं आप को कोसता. मैं भी कैसा हूं, अब तक इतने लोगों को चोद चुका हूं फ़िर भी मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ, आप का कैसे शुक्रिया अदा करूं?" और झुक कर मैडम की चूंची चूसने लगे.
मैडम उनके सिर को छाती से चिपटा कर बोलीं "कोई बात नहीं सर, ये माल ही ऐसा है, अब तक की सबसे प्यारी गुड़िया है ये. मुझे तो इसकी चूत के स्वाद से ही मालूम था, पर आप को तो चूत से ज्यादा इसकी गांड में रस था ना! अब मुझे शुक्रिया देना है तो आज बिना झड़े, मन लगाकर, हचक हचक कर, पेल पेल कर, मसल मसल कर इस कन्या के बदन को भोगिये, मुझे सब मिल जायेगा आप की खुशी देखकर"
सर ने एक गहरी सांसे ली और दीदी की गांड में लंड पेलने लगे. ऐसा लग रहा था जैसे कोई मुलायम तरबूज में बड़ी छुरी घुस रही हो. दीदी अब चुपचाप पड़ी थी, शायद बेहोश हो गयी थी. मैडम ने शायद ये भांप लिया. सर को रोक कर बोलीं "रुकिये सर, ये बेचारी तो काम से गयी, इसे क्या मजा आयेगा. आप को और मुझे कोसेगी कि सोते सोते ही पूरा काम कर दिया. जरा होश आने दीजिये, फ़िर डालिये पूरा"
सर का आधा लंड बाहर था. वो बोले "हां मैडम, वैसे भी अब ये अंदर नहीं जा रहा है, जोर लगाना पड़ेगा. बड़ी टाइट म्यान है लीना बेटी की"
"बस यही तो मजे लेने की बात है सर. मैं इसे जगाती हूं, फ़िर इसे भी मजा दीजिये अपने लंड का. टाइट भले हो पर इन चुदैल जवान बदनों के छेद अच्छे गहरे होते हैं, आराम से ले लेते हैं आपका पूरा मूसल, आपने खुद तो देखा है इतनी बार" कहकर मैडम दीदी को चूम चूम कर उसे जगाने लगीं. उसके मुंह पर रुमाल से थोड़ा ठंडा पानी भी लगाया. सर की चप्पल दीदी के चिल्लाने की कोशिश करने की वजह से उसके मुंह से निकल आयी थी.
सर बोले "निकाल दीजिये अब मैडम"
"अरे नहीं, अपने सर की चरण पूजा का ऐसा मौका कहां मिलता है सब स्टूडेंट को. आप पूरा डाल कर मारना शुरू कर दीजिये, तब तक इसे स्वाद लेने दीजिये, देखिये मेरा स्टूडेंट कैसे चबा रहा है मेरी चप्पल! लगता है कि खा ही जायेगा" मैडम मेरी ओर देखकर लाड़ से बोलीं.
"आप की चप्पलें तो हैं ही खूबसूरत मैडम" सर ने कहा.
"आप की भी लीना को अच्छी लग रही होंगी. वैसे ये अच्छा नुस्खा है सर. याद है पहले आप किसी नये स्टूडेंट की मारते थे तो मुंह में कपड़ा ठूंस देते थे. चप्पल ज्यादा मजा देती होगी इनको"
मैडम सर के चूतड़ दबा कर बोलीं "अब पूरा डाल दीजिये सर, जड़ तक, मैं देखना चाहती हूं कि क्या होता है, वैसे ये लड़की ले नहीं पायेगी आपका लंबा डंडा, इसके मुंह से निकल आयेगा देखियेगा"
सर ने जोर लगाया और लंड दीदी की गांड में घुसने लगा. इस बार सर नहीं रुके और पेलते रहे. अचानक कच्च से उनका आधा लंड दीदी के चूतड़ों को चौड़ा करता हुआ अंदर घुस गया. दीदी अब बुरी तरह से तड़प रही थी और उसके बदन में झटके पड़ रहे थे.
"ये हुई ना बात, ओह सर ... ले लिया इस जवान कन्या ने, मुझे नहीं लेगा था कि ले पायेगी" मैडम अपनी बुर को घिसते हुए बोलीं.
"हां मैडम .... ओह मैडम .... मैडम .... मैं झड़ने वाला हूं ..." कहकर सर ने मस्ती में आंखें बंद कर लीं. मैडम ने उनके लंड का बेस को जोर से दबाया और झड़ने से रोक दिया. "अरे सर ... क्या कर रहे हैं आप, इतनी मुश्किल से ये तमन्ना आप की पूरी हुई है, अब ठीक से चोदिये आपकी शिष्या को"
सर एक मिनिट वैसे ही बैठे रहे, फ़िर बोले "धन्यवाद मैडम, आप ने बचा लिया नहीं तो हमेशा मैं आप को कोसता. मैं भी कैसा हूं, अब तक इतने लोगों को चोद चुका हूं फ़िर भी मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ, आप का कैसे शुक्रिया अदा करूं?" और झुक कर मैडम की चूंची चूसने लगे.
मैडम उनके सिर को छाती से चिपटा कर बोलीं "कोई बात नहीं सर, ये माल ही ऐसा है, अब तक की सबसे प्यारी गुड़िया है ये. मुझे तो इसकी चूत के स्वाद से ही मालूम था, पर आप को तो चूत से ज्यादा इसकी गांड में रस था ना! अब मुझे शुक्रिया देना है तो आज बिना झड़े, मन लगाकर, हचक हचक कर, पेल पेल कर, मसल मसल कर इस कन्या के बदन को भोगिये, मुझे सब मिल जायेगा आप की खुशी देखकर"
सर ने एक गहरी सांसे ली और दीदी की गांड में लंड पेलने लगे. ऐसा लग रहा था जैसे कोई मुलायम तरबूज में बड़ी छुरी घुस रही हो. दीदी अब चुपचाप पड़ी थी, शायद बेहोश हो गयी थी. मैडम ने शायद ये भांप लिया. सर को रोक कर बोलीं "रुकिये सर, ये बेचारी तो काम से गयी, इसे क्या मजा आयेगा. आप को और मुझे कोसेगी कि सोते सोते ही पूरा काम कर दिया. जरा होश आने दीजिये, फ़िर डालिये पूरा"
सर का आधा लंड बाहर था. वो बोले "हां मैडम, वैसे भी अब ये अंदर नहीं जा रहा है, जोर लगाना पड़ेगा. बड़ी टाइट म्यान है लीना बेटी की"
"बस यही तो मजे लेने की बात है सर. मैं इसे जगाती हूं, फ़िर इसे भी मजा दीजिये अपने लंड का. टाइट भले हो पर इन चुदैल जवान बदनों के छेद अच्छे गहरे होते हैं, आराम से ले लेते हैं आपका पूरा मूसल, आपने खुद तो देखा है इतनी बार" कहकर मैडम दीदी को चूम चूम कर उसे जगाने लगीं. उसके मुंह पर रुमाल से थोड़ा ठंडा पानी भी लगाया. सर की चप्पल दीदी के चिल्लाने की कोशिश करने की वजह से उसके मुंह से निकल आयी थी.
सर बोले "निकाल दीजिये अब मैडम"
"अरे नहीं, अपने सर की चरण पूजा का ऐसा मौका कहां मिलता है सब स्टूडेंट को. आप पूरा डाल कर मारना शुरू कर दीजिये, तब तक इसे स्वाद लेने दीजिये, देखिये मेरा स्टूडेंट कैसे चबा रहा है मेरी चप्पल! लगता है कि खा ही जायेगा" मैडम मेरी ओर देखकर लाड़ से बोलीं.
"आप की चप्पलें तो हैं ही खूबसूरत मैडम" सर ने कहा.
"आप की भी लीना को अच्छी लग रही होंगी. वैसे ये अच्छा नुस्खा है सर. याद है पहले आप किसी नये स्टूडेंट की मारते थे तो मुंह में कपड़ा ठूंस देते थे. चप्पल ज्यादा मजा देती होगी इनको"
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